जस्टिस यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लिया गया, दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

 आवास पर नकदी मिलने के मामले में जांच का सामना कर रहे दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायिक कार्य वापस ले लिया है।

सुप्रीम कोर्ट प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा के विरुद्ध उच्च स्तरीय जांच का आदेश देते हुए उन्हें न्यायिक कार्य वापस लेने का दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को आदेश दिया था।

आरोपों की जांच के लिए सीजेआई ने गठित की समिति

जस्टिस वर्मा पर आगे की कार्रवाई दूसरे चरण की जांच से तय होगी। सीजेआई ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर आरोपों की जांच के लिए 3 सदस्यीय पैनल गठित किया। वहीं, जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर मिले कैश के मामले पर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने बैठक बुलाई है।

सूखे पत्तों के बीच मिले 500-500 रुपये के जले नोटों के टुकड़े

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में बेहिसाब नकदी मिलने के मामले में रोज नई-नई जानकारी सामने आ रही हैं। रविवार को तुगलक रोड स्थित उनके सरकारी आवास के बाहर 500-500 रुपये के कई जले हुए नोट पाए गए। ये नोट सूखे पत्तों के बीच मिले हैं।

माना जा रहा है कि 14 मार्च की रात आग लगने की घटना के बाद स्टोर रूम की सफाई करने के बाद में एनडीएमसी के सफाईकर्मियों द्वारा नोटों को कूड़े के साथ आवास के बाहर फेंक दिया गया हो। इन नोटों को स्थानीय तुगलक रोड थाना पुलिस ने जब्त नहीं किया है। जले नोट अभी भी आवास के बाहर ही सूखे पत्तों के बीच पड़े हुए हैं।

डीएफएस प्रमुख के आवास पर पहुंची जांच समिति

रविवार को जांच समिति के दो सदस्य दिल्ली में दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के डायरेक्टर अतुल गर्ग के आवास पर पहुंचे। कुछ घंटे बाद वे लोग चले गए। माना जा रहा है कि गर्ग से पूछताछ की गई व कुछ अहम दस्तावेज हासिल किए। हालांकि, अतुल गर्ग ने पूछताछ से इनकार किया है।

नोटों के बंडल मिलने से न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर सवाल-आप

दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के यहां करोड़ों रुपये के नोटों के बंडल मिलने पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि जज के यहां नोटों के बंडल नहीं जल रहे हैं, बल्कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता जल रही है।

न्यायपालिका हर तरह के फैसले लेने के लिए स्वतंत्रता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में कई फैसले सवालों के घेरे में आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संभव है कि उसके पीछे रुपये का लेनदेन और भ्रष्टाचार हो।कहा कि हमने संसद में इसकी चर्चा कराने की मांग की है।