अखिलेश और मायावती ने दी योगी सरकार को बधाई

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बधाई दी है। दोनो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने योगी सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन और जनता की सेवा करने की सलाह भी दी है। योगी सरकार के शुक्रवार को संपन्न शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किये जाने के बावजूद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी,महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव,बसपा अध्यक्ष मायावती नहीं पहुंचे थे। हालांकि अखिलेश और मायावती ने ट्विटर के जरिये नई सरकार को बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित की हैं। सुश्री मायावती ने शनिवार को ट्वीट किया, “यूपी में नई भाजपा सरकार के गठन की बधाई तथा यह सरकार संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों एवं आदर्शों के साथ कार्य करे।” इससे पहले श्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया था, “नई सरकार को कि वो सपा के बनाए स्टेडियम में शपथ ले रही है। शपथ सिर्फ़ सरकार बनाने की नहीं, जनता की सच्ची सेवा की भी लेनी चाहिए।” लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में योगी सरकार के 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा,केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह,रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अलावा 12 राज्यों के मुख्यमंत्री एवं पांच राज्यों के उपमुख्यमंत्री शामिल हुये थे।

...

अखिलेश को सपा विधायक दल का नेता चुना गया

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव को विधानसभा में पार्टी के विधायक दल और विधानमंडल दल का नेता चुना गया है। यहां स्थित सपा मुख्यालय में शनिवार को हुयी पार्टी विधायक दल की बैठक में अखिलेश को सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से नेता चुन लिया। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने विधायक दल की बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में अखिलेश को सर्वसम्मति से पार्टी के विधानमंडल दल का नेता भी चुना गया। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में सपा के 111 विधायक जीते हैं। इस प्रकार विधानसभा में दूसरा सबसे बड़ा दल होने के नाते सपा मुख्य विपक्षी पार्टी होगी। ऐसे में अखिलेश का नेता प्रतिपक्ष बनना लगभग तय है। विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश ने आजमगढ़ से लोकसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया था। उत्तम ने बताया कि सपा के वरिष्ठ विधायक अवधेश प्रसाद ने अखिलेश को विधायक दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा और विधायक आलम बदी ने उसका समर्थन किया। इसके अलावा विधायक लालजी वर्मा ने अखिलेश को विधानमंडल दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा। सपा के चुनाव चिन्ह पर विधायक बने प्रसपा नेता शिवपाल सिंह यादव को बैठक में नहीं बुलाये जाने के बारे में उत्तम ने कहा कि आज केवल सपा के विधायकों को बुलाया गया था। बैठक में सहयोगी दलों के किसी विधायक को नहीं बुलाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया, “सहयोगी दलों के जो विधायक सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीते उन्हें और सहयोगी दलाें के विधायकाें की बैठक 28 मार्च को बुलायी गयी है, चाहे वे शिवपाल यादव हों, पल्लवी पटेल या ओपी राजभर हों, सब को 28 मार्च को बुलाया जाएगा।”

...

लगातार दूसरी बार जनादेश हासिल करने वाले पहले मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश के चुनावी इतिहास में चार दशक बाद योगी आदित्यनाथ ने नया अध्याय जोड़ा है। इस अवधि में वह लगातार दूसरी बार जनादेश हासिल करने वाले पहले मुख्यमंत्री है। चुनावी समर में लोकप्रियता या समीकरण के बल पर एक बार सफलता मिल सकती है। लेकिन दूसरी बार की सफलता नेतृत्व की नेकनीयत व विश्वसनीयता पर आधारित होती है। तब नेतृत्व के यह दो गुण कारक बन जाते हैं। इस कारण चालीस वर्षों के दौरान किसी मुख्यमंत्री को दोबारा जनादेश नहीं मिला।

 

योगी आदित्यनाथ अपनी नेकनीयत व विश्वसनीयता को कायम रखने में सफल रहे। केंद्र में नरेंद्र मोदी को भी इस आधार पर सफलता मिलती रही है। गुजरात के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी यह विशेषता कायम रखी। इस लिहाज से नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ एक ही धरातल पर है। दोनों परिवारवाद की राजनीति से दूर हैं। समाज सेवा में पूरी निष्ठा व ईमानदारी से समर्पित रहते हैं।

 

विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोरोना की तीसरी लहर को लेकर संशय था। उस समय योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार की जगह कोरोना आपदा प्रबंधन को वरीयता दी। जनपदों की यात्रा कर रहे थे। सभी जगह कोरोना चिकित्सा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे। आपदा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था के बाद ही उन्होंने चुनाव प्रचार की तरफ ध्यान दिया। इसी प्रकार चुनाव परिणाम आने के बाद वह जन कल्याण कार्यों में सक्रिय हो गए। उन्होंने बारह से चौदह वर्ष आयु के बच्चों के वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान के सुचारू संचालन हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया।

 

कोरोना आपदा प्रबंधन में योगी मॉडल की प्रशंसा दुनिया में रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसकी सराहना की थी। इस पूरी अवधि में योगी आदित्यनाथ ने कई बार प्रदेश की यात्राएं की थी। वह अनवरत प्रबंधन का जायजा लेते रहे। वैक्सिनेशन के संबन्ध में भी केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया गया। योगी आदित्यनाथ वैक्सिनेशन केंद्रों में पहुंच कर लोगों का उत्साह वर्धन करते रहे। इसके चलते उत्तर प्रदेश ने वैक्सिनेशन का रिकार्ड कायम कर दिया। यह यात्रा अगले चरण के रूप में जारी है।

 

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सर्वाधिक टेस्ट व सर्वाधिक वैक्सीनेशन करने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। राज्य में अब तक करीब तीस करोड़ वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। प्रदेश में वैक्सीन की पहली डोज के शत प्रतिशत से अधिक के लक्ष्य को प्राप्त किया जा चुका है। अब तक एक सौ तीन प्रतिशत से ऊपर वैक्सीन की प्रथम डोज पूरे प्रदेश में उपलब्ध करवाई जा चुकी है। सेकेण्ड डोज भी प्रदेश में बयासी प्रतिशत से अधिक लोगों ने ले ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बारह से चौदह आयु वर्ग के बच्चों के कोविड टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय में किया।

 

बारह से चौदह साल के बच्चों को प्रदेश के तीन सौ केन्द्रों में यह वैक्सीन उपलब्ध करवाई जा रही है। सभी के लिए प्रर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देश में चले भारत के कोरोना प्रबन्धन की दुनिया में सराहना हुई है। यहां तक कि अन्य देशों में भी भारत के कोरोना प्रबंधन मॉडल को अपनाया गया है। कोरोना के खिलाफ लागू किए गये फोर टी फॉर्मूले के तहत ट्रेस, टेस्ट, ट्रीट और टीका, इन सभी में उत्तर प्रदेश अग्रणी है।

...

चुनाव आयोग का एलान: राज्यसभा की 13 सीटों पर 31 मार्च को होगा चुनाव, छह राज्यों से चुने जाएंगे सांसद

नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद अब निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा के 13 सीटों के लिए चुनाव का एलान कर दिया है। यह चुनाव 31 मार्च को होगा। इसमें छह राज्यों से सांसद चुने जाएंगे। इनमें से पांच पंजाब से, तीन केरल से, दो असम से और एक-एक हिमाचल, त्रिपुरा और नगालैंड से होगा। जिन सांसदों की जगह पर चुनाव होगा वे सभी 2 से 9 अप्रैल के बीच रिटायर हो रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने उन सभी सांसदों का नाम भी जारी किया है जिनका कि कार्यकाल पूरा हो गया है। असम से रानी नाराहा और रिपुण बोरा, हिमाचल प्रदेश से आनंद शर्मा, केरल से ए के एंटनी, एमवी श्रेयम्स कुमार और सोमाप्रसाद के, नगालैंड से केजी केन्ये, त्रिपुरा से झरना दास और पंजाब से सुखदेव सिंह, प्रताप सिंह बाजवा, श्वेत मलिक, नरेश गुजराल और शमशेर सिंह दुलो शामिल हैं।

...

सरकार ने मेडिकल की पढ़ाई करने वालों के लिए लिया है बड़ा फैसला : पीएम मोदी

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जनऔषधि दिवस के मौके पर उन्‍होंने कहा कि जन औषधि केद्रों पर आठ सौ करोड़ रुपये की दवाएं बिकी हैं। उन्‍होंने कहा कि इसके तहत सरकार मध्‍यम वर्ग के लोगों की जेब का धन बचाकर उन्‍हें फायदा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इन केंद्र पर अब तक 21 करोड़ सैनेट्री नेपकींस बिक चुके हैं। ये एक रुपये में यहां से लिए जा सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में कोरोना रोधी वैक्‍सीन के लिए लोगों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। लेकिन भारत ने इसको सभी को फ्री में लगाने का फैसला किया। इस पर अब तक सरकार ने तीस हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकार ने फैसला किया है कि आधे निजी मेडिकल कालेज में अब सरकारी मेडिकल कालेज के बराबर ही फीस लगेगी। सरकार की कोशिश है कि हर जिले में एक बड़ा अस्‍पताल हो। सरकार ने कई दवाओं की कीमत को बेहद कम किया है। जन औषधि केंद्रों के मालिकों से बात कर रहे हैं। इस दौरान उन्‍होंने बिहार की महिला से बात कर उनसे इस बारे में जानकारी हासिल की। महिला ने बताया कि जन औषधि केंद्र से मिली दवाओं के चलते उन्‍हें काफी फायदा हो रहा है। ये सस्‍ती होने के साथ-साथ गुणवत्‍ता में भी अच्‍छी है। पीएम मोदी ने कहा कि मध्‍यम वर्ग की आमदनी का बड़ा हिस्‍सा दवाओं पर खर्च होता है। यदि दवाएं सस्‍ती हों तो सभी का लाभ होगा। इसलिए मध्‍यम वर्ग इसको आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। ओडिशा के सुरेश ने बताया कि उन्‍हें भी इससे काफी फायदा हुआ है। हर माह दवाओं पर खर्च होने वाला करीब दो से ढाई हजार रुपया अब बच जाता है। पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि वो ऐसी दवाओं के बारे में बताएंं जो दवाएं उन्‍हें जन औषधि केंद्र पर नहीं मिलती हैं। इसके जवाब में उन्‍होंने बताया कि ऐसी कोई दवाई नहीं है जो वहां पर नहीं मिलती हैं। कर्नाटक की बबीता से भी पीएम मोदी ने पूछा कि उन्‍हें इससे कैसे लाभ मिला। बबीता ने बताया कि वो इस योजना और इसके केंद्रों का लोगों के बीच जागरुक करती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वो सोशल मीडिया के जरिए इसका अधिक से अधिक प्रचार कर सकती हैं। गुजरात की उर्वशी से भी उन्‍होंने इसके लाभ के बारे में जानकारी हासिल की। इस मौके पर पीएम ने उनसे कहा कि वो पीएम आवास योजना का लाभ उठाने वालों के पास जाकर इस योजना के लिए उन्‍हें जागरुक करें। छत्‍तीसगढ़ के डाक्‍टर शैलेश की पीएम मोदी ने तारीफ की वो इस दिशा में काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मनसुख मांडविया समेत अन्‍य लोग भी शामिल हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में मांडविया ने कहा कि देश में मिलने वाली जेनेरिक दवाओं की कीमत 50-80 फीसद तक कम है और इनकी गुणवत्‍ता विश्‍व स्‍तर की है। पीएमओ से दी गई जानकारी के मुताबिक इस इवेंट को जन औषधि जन उपयोगी का नाम दिया गया है। इससे पहले किए गए अपने ट्वीट में पीएम मोदी ने इसको जन औषधि को मेडिसिन रिवोल्‍यूशन बताया था। आपको बता दें कि पूरे देश में एक मार्च से जन औषधि सप्‍ताह मनाया गया है। इस दौरान लोगों को इस बारे में जानकारी के साथ उनके बीच इसकी जागरुकता को बढ़ाने का भी काम किया गया है। जन औषधि परियोजना के तहत इसमें लोगों को जेनेरिक दवाओं के इस्‍तेमाल और इनके फायदे बताए गए। इस दौरान कई दूसरे इवेंट भी चलाए गए जिसमें जन औषधि संकल्‍प यात्रा, मैत्री शक्ति सम्‍मान, जन औषधि बाल मित्र, जन औ‍षधि जन जागरण अभियान, आओ जन औषधि मित्र बनाएं और जन औषधि जन आरोग्‍य मेला भी शामिल है। पीएम मोदी की दूर्गामी सोच पर आगे बढ़ते हुए इन दवाओं को न सिर्फ सस्‍ता किया गया है बल्कि लोगों तक इनकी पहुंच बनाने की भी पूरी कोशिश की गई है। पूरे देश में आज जन औषधि केंद्र के करीब 8600 स्‍टोर्स खुले हुए हैं जहां पर ये दवाएं आसानी से और सस्‍ती कीमत पर खरीदी जा सकती हैं। इसमें देश के लगभग हर जिले को शामिल किया गया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की शुरुआत पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को की थी।इस योजना के तहत सरकार द्वारा उच्च गुणमवत्ता वाली जैनरिक दवाईयों के दाम बाजार मूल्य से कम कर इन्‍हें बेचा जाता है। इसके लिए सरकार ने जन औषधि स्टोर। सरकार की योजना इनके स्‍टोर्स अगले कुछ समय में बढ़ाकर दस हजार करने की है, जिससे ये हर जन को आसानी से हासिल हो सकें।

...

मतगणना से तीन दिन पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की अमित शाह से मुलाकात

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव की मतगणना से तीन दिन पहले पूर्व सीएम एवं पंजाब लोक कांग्रेस के प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह सोमवार को अचानक गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे। मतगणना से पहले हुई इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है। राज्य में मतगणना 10 मार्च को होनी है। चुनाव में पार्टी कितनी सीटें जीत सकती है इस बारे में पूछे जाने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह पंडित नहीं है। वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो भविष्यवाणी कर सकें। कैप्टन ने कहा कि उनकी मेरी पार्टी सहित भाजपा गठबंधन ने बेहतर किया है। देखते हैं क्या होता है। बता दें, कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी पंजाब में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ी है। राज्य में शिअद से अलग होने के बाद भाजपा सर्वाधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा जब शिअद के साथ गठबंधन में थी तो उसके हिस्से में 23 सीटें आती थी, लेकिन इस बार पार्टी ने 73 सीटों पर चुनाव लड़ा। अमित शाह से मुलाकात के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि अभी चुनाव परिणाम नहीं आए हैं। वह अमित शाह से मिलने आए थे। उनकी मुलाकात सामान्य थी। इस मुलाकात में पंजाब को लेकर चर्चा की गई। विस्तृत चर्चा चुनाव परिणाम आने के बाद की जाएगी। कैप्टन ने कहा कि इस मुलाकात में चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। इस दौरान पंजाब के हितों को लेकर चर्चा हुई है।

...

मतगणना के दौरान सत्ताधारी दल 'अनुचित' तरीकों का इस्तेमाल कर सकता है : टिकैत

मुजफ्फरनगर (उप्र)। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में 10 मार्च को होने वाली मतगणना के दौरान सत्तारूढ़ दल 'अनुचित' तरीकों का इस्तेमाल कर मतगणना को प्रभावित कर सकता है।

 

बीकेयू नेता ने यहां नवीन मंडी इलाके का दौरा करने के बाद कहा कि 10 मार्च को होने वाली मतगणना के दौरान सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर सकती है। नवीन मंडी वह क्षेत्र है, जहां मतदान के बाद ईवीएम रखी जा रही हैं।

 

इस बीच, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त चुनाव अधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि वोटों की गिनती कड़ी सुरक्षा और चुनाव आयोग के निर्देश के तहत निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से की जाएगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पहले चरण में मुजफ्फरनगर, बुढाना, पिरकाजी, खतोली, मुरापुर और चरथवाल समेत छह विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी को मतदान हुआ था।

...

ऐसे उम्मीदवार चुनें, जिनके डीएनए में सेवा का भाव हो : शाह

जौनपुर। गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मतदाताओं से ऐसे उम्मीदवारों को चुनने का आग्रह किया, जिनके ‘डीएनए में सेवा का भाव’ हो।

 

मल्हनी विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, “इस बार बाहुबलियों को मत जिताएं, बल्कि ऐसे उम्मीदवारों को विजयी बनाएं, जिसके डीएनए में सेवा का भाव हो और जो छीनना नहीं, बल्कि देना जानते हों।”

 

उन्होंने कहा कि एक या दो माफिया जो अभी भी जेल से बाहर हैं, उन्हें दस मार्च को भाजपा के दोबारा सत्ता में आने के बाद सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

 

मल्हनी विधानसभा सीट पर भाजपा के पूर्व सांसद केपी सिंह का मुकाबला जदयू के पूर्व सांसद एवं बाहुबली नेता धनजंय सिंह से है।

 

शाह ने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले जब मैं उत्तर प्रदेश की जनता से वोट मांगने आया था, तब भाजपा ने वादा किया था कि पांच साल में प्रदेश माफिया मुक्त हो जाएगा।

 

उन्होंने कहा, “आज अतीक अहमद, आजम खां और मुख्तार अंसारी जेल के अंदर हैं। एक या दो जेल से बाहर हैं। आप दस मार्च को कमल (भाजपा का चुनाव चिन्ह) खिलाएं और उसके बाद वे भी जेल में होंगे।”

 

गृहमंत्री ने दावा किया कि यूपी में भाजपा ने पिछले पांच वर्षों में अपराधियों को राजनीति से हटाने का काम किया है, जिससे राजनीति का अपराधीकरण समाप्त हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि यूपी में पहले के मुकाबले आपराधिक घटनाओं में कमी आई है और प्रदेश अपराध मुक्त बनने की राह पर आगे बढ़ा है।

 

शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2,000 करोड़ रुपये की भूमि को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया है और इस मुक्त भूमि पर गरीबों के लिए मकान बन रहे हैं।

 

सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “कोविड टीका आने के बाद अखिलेश ने कहा था कि मोदी वैक्सीन को नहीं लगवाना चाहिए, लेकिन उन्होंने खुद टीका लगवाया। जो नेता लोगों की जान की परवाह किए बिना राजनीतिक ‘खिचड़ी’ पकाने में लिप्त हैं, उन्हें एक पल के लिए भी सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है।”

 

प्रतिद्वंद्वी दलों पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा, “सपा-बसपा केवल गरीबों के बारे में बातें करती हैं, लेकिन मोदी और योगी ने उन्हें मजबूत बनाने का काम किया है। पूरे पूर्वांचल को सड़क मार्ग से जोड़ने और यूपी में एक्सप्रेसवे का जाल बिछाने का काम किया गया है।”

 

गृहमंत्री ने यह भी कहा कि मल्हनी और यूपी को गुंडों और बाहुबलियों द्वारा विकसित नहीं किया जा सकता है, भाजपा उम्मीदवार केपी सिंह मल्हानी का विकास कर सकते हैं।

 

जौनपुर में सातवें चरण के तहत सात मार्च को मतदान होना है।

...

गुजरात में अपने ही नेताओं पर बरसे राहुल, बोले- एसी में बैठने वाले 'कौरवों' की सूची बनाएं

द्वारका/नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को गुजरात में अपनी पार्टी के नेताओं से पार्टी में मौजूद उन ''कौरवों'' की एक सूची तैयार करने के लिए कहा, जो सिर्फ ''अपने एसी कार्यालयों में बैठकर बातों के अलावा कुछ नहीं करते और दूसरों को परेशान करने में लगे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अंतत: भाजपा में चले जाते हैं। गांधी ने केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि उसके पास केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पुलिस और गुंडे हैं, लेकिन अंत में केवल सत्य मायने रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात ''भाजपा की राजनीति'' के कारण त्रस्त है।

 

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के पास राज्य में अगला विधानसभा चुनाव जीतने का एक अवसर है, लेकिन पार्टी लोगों को यह स्पष्ट दृष्टिकोण देने में विफल है कि सत्ता में आने के बाद वह क्या करने का इरादा रखती है। गांधी ने गुजरात कांग्रेस द्वारा आयोजित चिंतन शिविर के दूसरे दिन यहां पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। चिंतन शिविर का आयोजन इस साल दिसंबर में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार करने पर चर्चा के लिए किया गया है। कार्यक्रम स्थल पर आने से पहले, उन्होंने यहां द्वारकाधीश मंदिर पहुंचकर भगवान कृष्ण की पूजा की।

 

कांग्रेस नेता ने कहा, “उनके पास सीबीआई, ईडी, मीडिया, पुलिस, गुंडे और हर दिन के लिये नए-नए परिधान हैं। लेकिन वे चीजें बिल्कुल भी मायने नहीं रखतीं। गुजरात हमें सिखाता है कि सत्य क्या है। गांधी जी को देखिए। क्या उनके पास कभी अच्छे कपड़े थे, ईडी या सीबीआई थी? नहीं, क्योंकि सत्य सदैव साधारण होता है।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझना चाहिए कि वे पहले ही गुजरात विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। आप इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। गुजरात के लोग आपको बड़ी उम्मीदों से देख रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस को जितना नुकसान पहुंचाया है, उससे ज्यादा गुजरात के लोगों को पहुंचाया है।”

 

कांग्रेस के पुनरुद्धार और यहां आगामी चुनाव जीतने के लिए एक साहसिक दृष्टिकोण साझा करते हुए, गांधी ने उन नेताओं से छुटकारा पाने का सुझाव दिया जो ''वातानुकूलित कमरों में बैठते हैं और दूसरों को परेशान करते हैं।'' उन्होंने कहा, ''(लोगों तक दृष्टिकोण पहुंचाने को लेकर) असमंजस क्यों है? क्योंकि हमारे पास दो तरह के नेता हैं। एक वे जो जमीन पर रहते हैं और लड़ाई लड़ते है। दूसरे वे जो अपने एसी कार्यालयों में बैठे रहते हैं और बात करने व भाषण देने के अलावा कुछ नहीं करते। ऐसे नेताओं की सूची तैयार करें जो दूसरों को परेशान करते हैं। वे कौरव हैं। भाजपा उन्हें अपने पाले में ले जाएगी।''

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि गुजरात में अगले चुनाव में ''भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए'' उन्हें केवल पांच सक्षम नेताओं की जरूरत है। साल 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले गुजरात के अपने दौरे को याद करते हुए गांधी ने कहा कि स्थानीय नेतृत्व को शुरुआत में चुनाव में बहुत सीटें जीतने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की राज्य इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे कहा था कि कांग्रेस 182 में से केवल 40-45 सीटें जीतेगी।

 

राहुल ने कहा कहा, ''लेकिन अंत में हम चुनाव जीतने से सिर्फ सात सीटों से पीछे रह गए। मैं इस बार भी यही स्थिति देख रहा हूं। मैं आपको बता रहा हूं कि आप पहले ही यह चुनाव जीत चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा हमेशा ''गुजरात मॉडल'' का दावा करती है, लेकिन राज्य में कोविड-19 के कारण लगभग तीन लाख लोगों की जान चली गई और अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर व वेंटिलेटर की कमी के कारण लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।

 

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा, ''गुजरात भाजपा की राजनीति के कारण त्रस्त है। बेरोजगारी यहां एक प्रमुख मुद्दा है। छोटे व्यवसायों को कभी सबसे बड़ी ताकत के तौर पर गुजरात की रीढ़ माना जाता था। लेकिन प्रधानमंभी मोदी ने जीएसटी, नोटबंदी और महामारी के दौरान अपने कार्यों से इन्हें नष्ट कर दिया।'' उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अवसर है और लोग पार्टी को एक विकल्प के रूप में देखते हैं। पार्टी लोगों के सामने यह स्पष्ट दृष्टिकोण देने में विफल रही है कि ''कांग्रेस सत्ता में आने पर क्या करेगी, हम कैसे काम करेंगे और कौन से नेता करेंगे।''

...

प्रियंका बोलीं- पीएम को यूक्रेन में युद्ध की जानकारी है,लेकिन यूपी में आवारा पशुओं की समस्या के बारे में नहीं

अमेठी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण के लिए आज शाम यानी 25 फरवरी को 12 जनपदों की 61 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार थम जाएगा। सभी राजनीतिक दलों के सियासी दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी है। पांचवें चरण में अमेठी, रायबरेली, सुल्तानपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, बाराबंकी, अयोध्या, बहराईच समेत कई अन्य महत्वपूर्ण सीटें हैं। इसके लिए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी अमेठी पहुंचे। जगदीशपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने आवारा पशुओं की समस्या को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साथा। प्रियंका गांधी ने कहा, ''पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें आवारा पशुओं की समस्या के बारे में नहीं पता, 5 साल से क्या कर रहे थे? उन्हें यूक्रेन में युद्ध की जानकारी है, उन्हें कोविड के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की खांसी के बारे में पता था, लेकिन उन्हें किसानों की इस समस्या का पता नहीं था?'' प्रियंका ने कहा, आप (जनता) अपनी परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार हैं। आप भटक जाते हैं और आंखें बंद करके वोट करते हैं। आपका वोट एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, बुद्धिमानी से चुनें क्योंकि आपको अगले 5 वर्षों तक पछताना पड़ सकता है। यह आपके विकास का समय है। प्रियंका ने पूछा, इन 5 सालों में कितनों को रोजगार मिला है?, इन्होंने जो जानबूझकर 12 लाख सरकारी पदों को खाली रखा है उसे हम सबसे पहले भरेंगे। इसकी हमने पूरी लिस्ट बनाई हुई है। इसके अलावा हम 8 लाख नए रोज़गार देंगे। राहुल गांधी ने कहा कि भारत के रोजगार क्षेत्र की रीढ़ को पीएम नरेंद्र मोदी और उनके दोस्तों ने तोड़ा है। आप देखेंगे कि आने वाले समय में इस देश के युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा, आप जितना चाहें, उन्हें पढ़ाएं। कोविड के दौरान किसी ने मेरी नहीं सुनी, लेकिन आपने गंगा में शव देखे। राहुल ने कहा कि जब वे (भाजपा) कहते हैं कि हमारे 70 वर्षों में कुछ नहीं हुआ, तो उनका वास्तव में मतलब था कि इन 70 वर्षों में अंबानी, अडानी के लिए कुछ नहीं हुआ। याद रखें, भारत के सबसे बड़े अरबपति रोजगार नहीं देते, छोटे दुकानदार, व्यापारी और किसान करते हैं।

...

बहू बेटी की सुरक्षा करना योगी क्या जाने : जया

कौशांबी। यूपी के सिरथू में चुनाव प्रचार कर रही समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जोरदार निशाना साधा है। उन्‍होंने कहा,’ये भूल जाते हैं कि आपके जो मुख्यमंत्री (योगी) हैं, उन्होंने तो परिवार को त्याग दिया है। वे परिवार के बारे में क्या जानते हैं? वे क्या जानते हैं बहू, बेटी क्या होती हैं? ये लोग झूठ के सिवाय कुछ नहीं बोलते हैं। मुंबई की भाषा में इन्हें फेकूचंद कहते हैं। सिर्फ फेकते रहते हैं, लेकिन काम कुछ नहीं करते हैं।

 

जया ने कहा कि मैं 15 साल पार्लियामेंट में रहीं हूं, इन्होंने झूठ के सिवाय कुछ नहीं कहा है। जब ये सत्ता में है और जब ये सत्ता में नहीं थे, इन्होंने कभी भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक शब्द भी नहीं बोला है। इसके साथ कहा कि मुझे लगता है कि समय बदल रहा है। लोगों को देखो, उनका उत्साह, आप माहौल के बारे में बता पाएंगे। वे महिला सुरक्षा के बारे में बात करते हैं लेकिन झूठ के अलावा कुछ नहीं जानते। आप पिछले 5 वर्षों में यूपी में महिलाओं पर अत्याचार के बारे में जानते हैं, नहीं यह कहने की जरूरत है।

 

जया बच्चन ने सिराथू में कहा कि मेरा जन्म एमपी में एक बंगाली परिवार में हुआ था और यूपी में शादी हुई थी। मेरी बेटी ने एक पंजाबी से शादी की और बेटे ने एक दक्षिण भारतीय से शादी की है। हमारे परिवार में जातिवाद या क्षेत्रवाद जैसा कुछ नहीं है। ‘गंगा किनारे का छोरा’ हमेशा गंगा का रहेगा। वह मुंबई के समुद्र का नहीं हो सकता है। इसके साथ जया ने खुद को यूपी की बड़ी बहू बताते हुए कहा कि अपने भैया का भी लाज रख लीजिएगा। उन्होंने अमिताभ बच्‍चन का नाम लिए बिना कहा, ‘गंगा किनारे वाला जो छोरा है उसकी लाज तो आपको रखनी होगी।

...

परिवारवादी सपा बसपा नहीं बल्कि राष्ट्रवादी भाजपा है यूपी की पसंद : शाह

कौशांबी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में परिवादवाद,जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी (सपा),बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस का सफाया तय है और राष्ट्रवाद,विकास और सुशासन की पर्याय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मौजूदा विधानसभा चुनाव में 300 से अधिक सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाने को तैयार है।

सिराथू विधानसभा क्षेत्र में स्थित सौरई पशु बाजार मैदान में आयोजित चुनावी सभा में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के लिए वोट की अपील करते हुये श्री शाह ने कहा कि विधानसभा के चार चरण के चुनाव में सपा बसपा का सूपड़ा साफ हो गया है। भाजपा 300 से अधिक सीट जीतकर दोबारा प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है। उन्होने कहा कि सपा परिवार वादी,जातिवाद एवं तुष्टिकरण को बढ़ावा देने वाली पार्टी है।

उन्होंने कहा कि 2017 के पहले सपा शासनकाल में उत्तर प्रदेश में माफिया बाहुबलियों का बोलबाला था लेकिन भाजपा की सरकार बनते ही अतीक अहमद, आजम खां, मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं को जेल के अंदर भेज दिया गया। उन्होंने लोगों से सवाल किया कि क्या यदि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनी तो क्या यह माफिया जेल के अंदर रहेंगे। उन्होंने कहा योगी सरकार बनते ही चुन-चुन कर माफियाओं, गुंडों को जेल भेजने का काम किया गया। इनके कब्जे से दो हजार करोड़ कीमत की कब्जा की गई गरीबों की जमीन खाली कराकर गरीबों के लिए मकान बनाने का काम शुरू किया गया।

शाह ने कहा अखिलेश यादव एक जाति की पार्टी है जबकि दूसरे एक धर्म के लोग उनके साथ सहयोगी है। सपा के कार्यकाल में चुनिंदा जिलों को छोड़ कर बिजली के दर्शन दुर्लभ थे वहीं भाजपा के शासनकाल में गांव के लोगों को भी बिजली मिल रही हैं। योगी सरकार ने एक लाख 41 हजार गरीब परिवारों के घर में मुफ्त में बिजली के कनेक्शन देने का काम किया।

उन्होंने कहा कि सपा का मतलब है स से संपत्ति और प का अर्थ है परिवारवाद। समाजवादी पार्टी संपति जुटाने वाली पार्टी है। कन्नौज में इत्र व्यवसायी के यहां छापा मारकर करोड़ों रुपए नकदी जब्त की गई। व्यवसाई का रिश्ता समाजवादी पार्टी से था। भाजपा गरीबों का कल्याण करने वाली पार्टी है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देन है कि 130 करोड़ लोगों को कोरोना का टीका लगाकर सुरक्षित करने का काम किया गया। देश में 80 करोड़ों लोगों को एवं उत्तर प्रदेश में 15 करोड़ों लोगों को 2 साल तक मुफ्त में राशन देने का काम भारतीय जनता पार्टी कर रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश एवं देश की सीमाएं सुरक्षित है। कांग्रेस के हुकूमत के 10 वर्षों में सपा बसपा कांग्रेस का सहयोग करती रही। आतंकवादी जवानों का सर काट कर ले जाते थे । नरेंद्र मोदी के शासनकाल में आतंकियों ने पुलवामा में सैनिकों पर हमला किया तो सेना ने पाकिस्तान के अंदर घुस कर आतंकियों को ढेर करने का काम किया है। अब किसी भी देश में जरूरत नहीं है कि वह हमारे देश की ओर आंख उठा कर देख सके ऐसे करने की हिमाकत किया तो उनका सिर धड़ से अलग करने का काम किया जाएगा ।

उन्होंने कहा कि विपक्षी कश्मीर के संबंध में कहते थे कि 370 धारा समाप्त हुई तो खून की नदियां बहेगी लेकिन 370 धारा समाप्त हो गई क्या कुछ हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के गरीब मजदूर, पिछड़े, दलितों का कल्याण भाजपा से ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले 5 वर्षों में भाजपा ने पांच एक्सप्रेसवे 10 शहरों में मेट्रो,17000 करोड और से नई सड़कें शिक्षा के क्षेत्र में 10 इंटरनेशनल विश्वविद्यालय सहित 40 मेडिकल कॉलेज 76 नर्सिंग कॉलेज बनाने का काम किया गया है।

 शाह ने कहा 2013 में जब वह भाजपा से उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे, सड़कें गड्ढों में तब्दील थी। अब प्रदेश में मजबूत चमचमाती हुई सड़के हैं। भाजपा, निषाद पार्टी एवं अपना दल गठबंधन मजबूत है। केशव प्रसाद मौर्य पिछड़ा वर्ग के बड़े चेहरे हैं सिराथू सीट उत्तर प्रदेश में सबसे अलग विधानसभा सीट है यहां आप विधायक नहीं बल्कि डिप्टी सीएम बनाने जा रहे हैं।

...

उत्तराखंड : भाजपा के सामने सरकार को बरकरार रखने की चुनौती, कांग्रेस वापसी की कोशिश में

नई दिल्ली। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है। राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में सोमवार यानी 14 फरवरी को मतदान होना है। इस चुनाव में जहां भाजपा के सामने अपनी सरकार को बरकरार रखने की चुनौती है वहीं कांग्रेस राज्य की सत्ता में वापसी की पुरजोर कोशिश कर रही है। राज्य के गठन के बाद से ही प्रदेश में हर चुनाव में सत्ता बदलती रही है और इसलिए कांग्रेस को इस बार अपनी जीत का भरोसा है जबकि भाजपा लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाने का दावा कर रही है। इस चुनाव में एक तरफ भाजपा है जो अपने वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सामने रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के सहारे चुनाव लड़ रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस है जिसने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा साफ तौर पर तो नहीं की है कि लेकिन यह माना जा रहा है कि कांग्रेस की तरफ से हरीश रावत ही यह चुनाव लड़ रहे हैं और लड़ा भी रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की तरफ से लगातार सुनाई दे रहे विरोध के सुरों के बीच उत्तराखंड का यह चुनाव कांग्रेस आलाकमान और गांधी परिवार के लिए प्रतिष्ठा का विषय भी बन गया है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती 30 प्रतिशत के उस वोट के अंतर को पार कर भाजपा को हराना है , जिसके सहारे भाजपा ने 2019 के लोक सभा चुनाव में राज्य की सभी 5 सीटों पर कब्जा जमा लिया था। दरअसल 2014 के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच लगातार बढ़ता जा रहा मतों का अंतर कांग्रेस के लिए एक बड़ी चिंता का सबब है और इसका समाधान ढूंढे बिना राज्य में भाजपा को हराना मुमकिन नहीं है। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मत प्रतिशत और सीट को लेकर बहुत ज्यादा अंतर नहीं था। 2012 में कांग्रेस ने 33.79 प्रतिशत मतों के साथ 32 सीटों पर जीत हासिल की थी और भाजपा को 33.13 प्रतिशत मतों के साथ 31 सीटों पर जीत मिली थी। उस समय कांग्रेस ने अन्य दलों के साथ मिलकर राज्य में सरकार का गठन कर लिया था। लेकिन इसके बाद से मत प्रतिशत और सीट , दोनों ही मामलों में कांग्रेस लगातार भाजपा से पिछड़ती जा रही है। 2014 के लोक सभा चुनाव में 56 प्रतिशत के लगभग मत पाकर भाजपा ने राज्य की सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में कांग्रेस का मत प्रतिशत थोड़ा बढ़कर 34.4 प्रतिशत तक पहुंचा था लेकिन उसे एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो पाई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में 46.51 प्रतिशत मतों के साथ भाजपा ने राज्य की 70 में से 56 सीटों पर जीत हासिल कर कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। इस चुनाव में 33.49 प्रतिशत मतों के साथ कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ 11 सीटें ही आ पाई थी। 2019 के लोक सभा चुनाव में दोनों दलों के बीच मतों का यह अंतर और ज्यादा बढ़ गया। इस चुनाव में 61.66 प्रतिशत मत पाकर भाजपा ने एक बार फिर से राज्य की सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया वहीं कांग्रेस का मत प्रतिशत घट कर 31.73 प्रतिशत ही रह गया। यानि 2019 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच मत प्रतिशत का अंतर बढ़कर 30 प्रतिशत के लगभग पहुंच गया। हालांकि यह बात भी सही है कि लोक सभा और राज्य विधानसभा चुनाव का गणित काफी अलग होता है लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस के लिए 30 प्रतिशत मतों का यह अंतर पाटे बिना राज्य में सरकार बनाना संभव नहीं है। इन दोनों दलों की निगाहें आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पर भी लगी हुई है। आप इन दोनों दलों में से किसके वोट बैंक में ज्यादा सेंध लगा पाता और बसपा अपनी पुरानी ताकत फिर से हासिल कर पाती है या नहीं , इस पर भी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का नतीजा काफी निर्भर होने जा रहा है।

...

कांग्रेस ने पंजाब चुनावों के प्रबंधन के लिए वरिष्ठों पर दांव लगाया

नई दिल्ली। कांग्रेस पंजाब में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है, क्योंकि उसके लिए आम आदमी पार्टी (आप) सबसे प्रमुख खतरे के रूप में उभर रही है। इसके बाद शिरोमणी अकाली दल और भाजपा-पीएलसी से पार्टी को चुनौती मिल रही है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चुनावों की निगरानी के लिए और राज्य में अंतिम मिनट की गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए उतारा गया है। पार्टी प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र का सूक्ष्म प्रबंधन करने की कोशिश कर रही है, जहां 20 फरवरी को मतदान होना है। कांग्रेस ने पंजाब के लिए एआईसीसी प्रभारी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के अलावा, राज्य में जाट और प्रवासी मतदाताओं की देखभाल के लिए राजीव शुक्ला और दीपेंद्र सिंह हुड्डा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में खड़ा किया है। कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा, कांग्रेस सत्ता में लौटने के लिए तैयार है क्योंकि पंजाब के लोगों ने विकास के पहियों को चलाने के लिए वोट देने का फैसला किया है। कांग्रेस पंजाब की नब्ज और ताने-बाने को जानता है। इसकी रणनीति, घोषणा पत्र के प्रारूपण, उम्मीदवार चयन से लेकर अभियान प्रबंधन तक, जमीन पर ध्यान देकर की गई है। भाजपा, आप और शिअद दौड़ में बहुत पीछे हैं। 10 मार्च को पंजाब में बल्ले बल्ले कांग्रेस होगी। हालांकि सूत्रों ने कहा कि शेरगिल चुनाव प्रचार से दूरी बना रहे हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी के भीतर किसी भी तरह की दरार से इनकार किया है। उत्तर प्रदेश के एक ब्राह्मण होने के नाते शुक्ला लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे शहरी केंद्रों में प्रवासी हिंदू वोटों को मजबूत करने की कोशिश करेंगे, जबकि हुड्डा को जाट वोट हासिल करने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि कांग्रेस ने आनंदपुर साहिब के सांसद मनीष तिवारी को स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर कर दिया है, लेकिन वह पंजाब से पार्टी के एकमात्र हिंदू सांसद होने के बावजूद राज्य में पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। शनिवार को, उन्होंने गढ़शंकर से कांग्रेस उम्मीदवार अमरप्रीत लल्ली के समर्थन में एक जनसभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने पार्टी नेता अंबिका सोनी पर हमला किया, जिन्होंने राज्य में एक सिख मुख्यमंत्री की वकालत करते हुए कहा, पंजाब में कोई हिंदू-सिख विभाजन नहीं है। जो कोई भी इस कृत्रिम विभाजन को बनाने की कोशिश करता है वह आईएसआई एजेंट है। कांग्रेस ने दलित मतदाताओं को लुभाने के लिए मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुना है, जो राज्य की आबादी का 32 प्रतिशत हैं। 25 जनवरी को सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाली पेशे से डॉक्टर चन्नी की पत्नी कमलजीत कौर अब चन्नी को सीट बरकरार रखने में मदद करने के लिए चमकौर साहिब में सड़कों पर उतर रही हैं। 20 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश करने वाले चन्नी ने पिछले साल 19 सितंबर को अमरिंदर सिंह की जगह मुख्यमंत्री का पद संभाला था।

...

हिजाब विवाद पर बोले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश के चुनाव प्रचार में कानपुर पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हिजाब विवाद पर भाजपा पर तंज कसते हुए कहा है कि साम्प्रदायिकता में बीजेपी की मास्टरी है। उत्तरप्रदेश चुनाव के दूसरे चरण के दौरान कानपुर में डोर टू डोर कैंपेन करने पहुंचे भूपेश बघेल ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कर्नाटक में हुए हिजाब विवाद पर कहा कि जिन्होंने इसकी शुरूआत की है उन्हें अंजाम का पता नहीं है। इस मुद्दे पर कॉलेज के प्राचार्य को बच्चियों के पालको को बुला कर बात की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अब योगी और मोदी के जाने का समय हो चुका है। वहीं, उत्तरप्रदेश चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर कहा, कांग्रेस पार्टी निश्चित रूप से अच्छा प्रदर्शन करेगी। दूसरी पार्टियां धर्म और जाति के आधार पर वोट मांग रही हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी आम जनता के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। बघेल ने कहा, कांग्रेस का मुख्य मुद्दा है किसानों को दाम मिले, बेरोजगारों को काम मिले और महिलाओं को सम्मान मिले। प्रियंका गांधी के लड़की हूं लड़ सकती हूं इस नारे से महिलाओं में आत्मविश्वास आया है और इस बार परिवर्तन अवश्य होगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल के उपचुनाव हारते ही केंद्र की भाजपा सरकार ने पेट्रोल, डीजल की कीमतों में कमी की। महंगाई अगर कम करना है तो भाजपा को हराना ही होगा। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए 7 चरणों में चुनाव होंगे। उत्तर प्रदेश में पहले चरण के लिए 11 फरवरी को मतदान हुए थे। जबकि 14 फरवरी को दूसरे चरण का मतदान है। इसके बाद 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को कराया जाएगा। जबकि प्रदेश में मतगणना 10 मार्च को कराई जाएगी।

...

सुबह 6 से रात 10 बजे तक प्रचार करने की छूट

नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार को चुनाव प्रचार के संबंध में नई गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक पदयात्रा पर लगी रोक हटा ली गई है। प्रचार के समय को भी दो घंटे तक बढ़ा दिया गया है। राजनीतिक दल और उम्मीदवार सभी मौजूदा निर्देशों का पालन करते हुए सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक प्रचार कर सकते हैं। 

चुनाव अभियान की समय सीमा में ढील देते हुए आयोग ने जगह की क्षमता के आधार पर रैलियों की भी इजाजत दे दी है। आयोग ने देश भर के साथ-साथ मतदान वाले राज्यों में कोरोना के मामलों में "काफी कमी" का हवाला देते हुए कोविड प्रतिबंध हटाए हैं। आयोग ने एक बयान में राजनीतिक दलों के लिए ढील की घोषणा करते हुए कहा, "केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से प्राप्त जानकारी के अनुसार, COVID की जमीनी स्थिति में काफी सुधार हुआ है और देश में मामले तेजी से घट रहे हैं।

चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव अभियान अब सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के बजाय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच चलाया जा सकता है। जिला अधिकारियों द्वारा अनुमत सीमित संख्या में व्यक्तियों के साथ पदयात्रा को भी अनुमति दी गई है। आयोग ने प्रतिबंधों को हटाते हुए "चुनावों में अधिक से अधिक भागीदारी के लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की आवश्यकता" को भी रेखांकित किया।

कोविड-19 मामलों में वृद्धि का हवाला देते हुए, चुनाव निकाय ने 8 जनवरी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के लिए मतदान कार्यक्रम की घोषणा करते हुए फिजिकल रैलियों, रोड शो और पदयात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया था।


...

कई मंत्रियों समेत 623 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत राज्य के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों के लिये मतदान बृहस्पतिवार सुबह सात बजे शुरू हो गया।

 

निर्वाचन आयोग कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक पहले चरण के चुनाव के लिए मतदान कार्य कोविड प्रोटोकॉल के तहत सुबह सात बजे शुरू हो गया जो शाम छह बजे तक चलेगा। मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

 

इस चरण में शामली, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा तथा आगरा जिलों में मतदान हो रहा है।

 

पहले चरण का चुनाव जाट बहुल क्षेत्र में हो रहा है। इस चरण में प्रदेश सरकार के मंत्रियों श्रीकांत शर्मा, सुरेश राणा, संदीप सिंह, कपिल देव अग्रवाल, अतुल गर्ग और चौधरी लक्ष्मी नारायण समेत कुल 623 उम्मीदवारों के सियासी भाग्य का फैसला होगा। इनमें 73 महिला प्रत्याशी भी शामिल हैं।

 

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष, सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने के लिये व्यापक इंतजाम एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है। कोविड-19 के मद्देनजर मतदान केंद्रों पर थर्मल स्कैनर, सैनीटाइजर, ग्लव्स, फेस मास्क, फेस शील्ड, पीपीई किट, साबुन, पानी की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था की गई है।

 

उन्होंने बताया कि पहले चरण में होने वाले मतदान में 2.28 करोड़ योग्य मतदाता हैं। इनमें 1.24 करोड़ पुरूष, 1.04 करोड़ महिला तथा 1448 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। मतदान पर सतर्क दृष्टि रखने के लिए 48 सामान्य प्रेक्षक, आठ पुलिस प्रेक्षक तथा 19 व्यय प्रेक्षक भी तैनात किये गये हैं। इसके अतिरिक्त 2175 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 284 जोनल मजिस्ट्रेट, 368 स्टैटिक मजिस्ट्रेट तथा 2718 माइक्रो ऑब्जर्वर भी तैनात किये गये हैं।

 

उन्होंने बताया कि मतदाता पहचान पत्र नहीं होने पर आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस समेत 12 विकल्पों का इस्तेमाल कर वोट डाला जा सकेगा।

 

वर्ष 2017 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहले चरण की 58 में से 53 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को दो-दो सीटें मिली थी। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल का भी एक प्रत्याशी जीता था।

...

प्रियंका की अपील: उप्र के मतदाता वोट की ताकत का इस्तेमाल करें

नई दिल्ली। कांग्रेस की महासचिव एवं प्रदेश में पार्टी की चुनाव प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान शुरू होने पर मतदाताओं से राज्य के बेहतर भविष्य के लिए अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल करने की अपील की।

श्रीमती वाड्रा ने ट्वीट कर कहा, “पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरे प्यारे बहनों-भाइयों, वोट की ताकत का इस्तेमाल अपने मुद्दों और प्रदेश के बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए करिए। यूपी कांग्रेस के मेरे सभी साथियों, कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों को शुभकामनाएँ- आपको गर्व होना चाहिए कि 30 साल बाद हम सभी सीटों पर अपनी ताक़त से लड़ रहे हैं।”

उन्होंने कर्मयोग दर्शन से जुड़े गीता के एक श्लोक का भी उल्लेख करते हुए कहा, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भू मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।”

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पहले चरण के लिए 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर आज सुबह सात बजे से मतदान प्रारंभ हो गया। इस चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और हाथरस जिलों की 58 विधान सभा सीटों के 2.28 करोड़ मतदाता 73 महिला उम्मीदवारों सहित कुल 623 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करने के लिए 25,880 मतदान स्थलों पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

...

प्रधानमंत्री ने मतदाताओं से बढ़-चढ़कर मतदान करने का अनुरोध किया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तहत बृहस्पतिवार को हो रहे पहले चरण के मतदान में मतदाताओं से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का अनुरोध किया।

 

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आज पहले चरण की वोटिंग है। सभी मतदाताओं से मेरा आग्रह है कि वे कोविड नियमों का पालन करते हुए लोकतंत्र के इस पावन पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। याद रखना है- पहले मतदान, फिर जलपान।’’

 

उत्तर प्रदेश में सात चरणों में होने वाले मतदान का आज पहला चरण आरंभ हो गया। इस चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इनमें शामली, मेरठ, हापुड, मुजफ्फरनगर, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ, आगरा, गौतमबुद्ध नगर और मथुरा जिले की सीटें शामिल हैं।

...

राहुल गांधी ने मतदाताओं से कहा, देश को हर डर से आजाद करो, वोट करो

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को लोगों से घरों से निकलकर मतदान करने और देश को हर तरह के भय से मुक्त करने का आह्वान किया।

 

आज सुबह राज्य के पश्चिमी भाग के 11 जिलों में 58 विधानसभा सीटों पर मतदान प्रारंभ हुआ।

 

गांधी ने ट्वीट किया, “देश को हर डर से आजाद करो। बाहर आओ, वोट करो।”

 

बृहस्पतिवार को शामली, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा में मतदान हो रहा है। 

...

उप्र में राजनीतिक दल उभरते वोट बैंक से जुड़ने की कोशिश कर रहे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ने के साथ इस चुनावी मौसम में हिंदी पट्टी में राजनीतिक दलों के महिलाओं की भूमिका को देखने के तरीके में थोड़ा बदलाव आया है।

 

उत्तर प्रदेश में खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही कांग्रेस महिलाओं को अपने वोट बैंक के रूप में जोड़ने के लिए प्रयोग कर रही है और उसने महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट देने की घोषणा की है।

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने महिलाओं को अपनी पार्टी के संभावित वोट बैंक के रूप में देखने के साथ ही व्यवस्था या अत्याचार के खिलाफ अपनी व्यक्तिगत लड़ाई लड़ने वाली आम महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। महिलाओं को 40 फीसद टिकट देने की घोषणा करने वाली कांग्रेस ने भले ही इस मामले (महिलाओं को टिकट देने) में बढ़त बना ली हो लेकिन अन् य दल भी उप्र में बदलते राजनीति माहौल के प्रति अधिक सतर्क हो गए हैं।

 

कांग्रेस की सूची में जहां अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सदफ जफर का नाम शामिल है जिन्हें दिसंबर 2019 में लखनऊ में नागरिकता विरोधी कानून का विरोध करने के दौरान गिरफ्तार किया गया था, वहीं उन्नाव में पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के दुष्कर्म की शिकार पीड़िता की मां को भी कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिसंबर को प्रयागराज में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के बैंक खातों में 1,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए थे, जिससे लगभग 16 लाख महिलाओं को लाभ हुआ। विशेष रूप से जमीनी स्तर पर महिलाओं को आवश्यक कौशल, प्रोत्साहन और संसाधन प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना चलाई गई। इस कार्यक्रम में दो लाख से अधिक महिलाओं की भागीदारी देखी गई थी।

 

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी महिला केंद्रित मुद्दों पर अधिक जोर दे रही हैं। कांग्रेस ने एक अलग घोषणापत्र भी जारी किया है जिसमें महिलाओं के लिए कई प्रमुख वादे किए गए हैं। हाल ही में आलोचकों का मुकाबला करने के लिए बॉलीवुड की फिल्म 'दीवार' के उस संवाद ' मेरे पास मां है' की तर्ज पर कांग्रेस ने जनाधार खोने के आरोपों का यह कहते हुए जवाब दिया कि ''मेरे पास बहन है।'' निर्वाचन आयोग कार्यालय के अनुसार, मतदाता सूची के संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं के नामांकन से लिंग अनुपात में 11 अंकों का सुधार हुआ है जो एक नवंबर, 2021 को 1000 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 857 से बढ़कर पांच दिसंबर को 868 हो गया। आयोग ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची जारी की जिसमें 8.04 करोड़ पुरुष मतदाता (8,04,52,736) और 6.98 करोड़ से अधिक महिला मतदाता (6,98,22,416) हैं। आयोग ने राज्य में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के वास्ते इसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक कार्यक्रम भी शुरू किया है।

 

समाजवादी पार्टी जिसने नई टैग लाइन "नई हवा है, नया सपना है" को अपनाया है, ने हाल ही में अपने उस एम-वाई (मुस्लिम-यादव) फॉर्मूले को नया अर्थ देने की कोशिश की है, जिसने इसे उत्तर प्रदेश में सत्ता में पहुंचा दिया था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में कहा था, "नई सपा में, एम-वाई का मतलब महिला और युवा है। हम अब बड़े परिप्रेक्ष्य में मुद्दों को देख रहे हैं और जातिवाद से बंधे नहीं हैं।"

 

हालांकि बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के महिला होने के बावजूद इस पार्टी ने महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कभी अलग अभियान पर जोर नहीं दिया और यह पार्टी अपने सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर ही ध् यान केंद्रित कर रही है। इसी सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले से 2007 में बसपा ने उप्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।

 

कांग्रेस की महिला उम्मीदवारों की सूची में समाज के एक खाास तबके को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जैसे शाहजहांपुर की एक आशा कार्यकर्ता पूनम पांडे, जिन्हें उनके मानदेय में वृद्धि की मांग करते हुए कथित रूप से पीटा गया था। लखीमपुर खीरी में मोहम्मदी सीट से रितु सिंह जो एक पूर्व सपा कार्यकर्ता थीं और उन्हें पंचायत चुनाव में नामांकन दाखिल करने से रोकने के लिए उनके साथ मारपीट की घटना हुई थी। हस्तिनापुर (अनुसूचित जाति-आरक्षित) की कांग्रेस उम् मीदवार 26 वर्षीय अर्चना गौतम एक अभिनेत्री और मॉडल हैं और बिकरू मामले में मुठभेड़ में मारे गए एक आरोपी की पत्नी खुशी दुबे की बहन नेहा तिवारी कानपुर के कल्याणपुर से कांग्रेस की उम् मीदवार हैं।

 

समाजवादी पार्टी ने अमेठी से पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की पत्नी महाराजी देवी को मैदान में उतारा है। एक विशेष अदालत ने 2017 में बलात्कार के एक मामले में गायत्री प्रजापति और दो अन्य लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। छात्र कार्यकर्ता पूजा शुक्ला, जिन्होंने जून 2017 में मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने के बाद योगी आदित्यनाथ को काला झंडा दिखाया था, को लखनऊ उत्तर से सपा ने उम् मीदवार बनाया है।

 

वहीं, भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आईं विधायक अदिति सिंह को उनकी रायबरेली सदर सीट से टिकट दिया है। अदिति सिंह ने हाल ही में खुद को 'बिना बाप की बेटी' बताया था और पंजाब में अपने पति अंगद सिंह को कांग्रेस का टिकट न मिलने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

 

पिछले चुनाव में, उत्तर प्रदेश विधानसभा में रिकॉर्ड 40 महिला उम्मीदवारों ने जगह बनाई थी, जो 403 सदस्यीय सदन में महिला सदस्यों का अब तक का सबसे अधिक अनुपात है। उस समय सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने एक साथ 96 महिलाओं को मैदान में उतारा था, जिनमें से भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) से सबसे अधिक 35 महिला प्रतिनिधि विधायक बनी थीं। इसके बाद बसपा और कांग्रेस से दो-दो महिलाओं को जीत मिली थी और समाजवादी पार्टी से एक महिला उम्मीदवार विजयी हुई थीं। वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव में 35 महिलाएं चुनी गई थीं जो कि उस समय का रिकॉर्ड था।

...

बसपा नेता स्टिंग में 300 करोड़ रुपए लेकर भाजपा को 50 सीट देने पर हामी भरते नजर नज़र आया

उत्तर प्रदेश : यूपी में पहले चरण की वोटिंग को महज दो दिन बचे हैं। टिकट, डील, मुद्दे, समीकरण, सियासत के हथकंडे सब सेट हो चुके हैं, पर जनता जिसे वोट देने को तैयार है, उन्हें टिकट कैसे मिलता है? टिकट का रेट क्या है? पार्टियां टिकट की डील कैसे करती हैं। इसके पीछे की हकीकत इस स्टिंग में कैद है। इसमें बसपा कोऑर्डिनेटर शम्सुद्दीन राइन 300 करोड़ रुपए लेकर भाजपा को 50 सीट देने पर हामी भरते नजर आ रहे हैं। राइन खुद बता रहे हैं कि उनकी पार्टी में एक टिकट का रेट ढाई से तीन करोड़ रुपए है  


स्टिंग पढ़ने और देखने से पहले उसकी एक नजीर और सच्चाई जानिए-

बात इसी 16 जनवरी की है। कानपुर में लखनऊ नंबर की एक स्कार्पियो से पुलिस ने 50 लाख रुपए बरामद किए। गाड़ी आमीन राइन चला रहा था। आमीन उरई का रहने वाला है। जांच में पता चला कि आमीन बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर शम्सुद्दीन राइन का रिश्तेदार है। ये वही शम्सुद्दीन हैं, जिनका स्टिंग किया गया है।


इस सबसे पहले शम्सुद्दीन राइन को जानिए राइन फिलहाल बसपा के टॉप-4 नेताओं में से एक हैं। उनके बारे में ये कहा जाता है कि शम्सुद्दीन इस वक्त बसपा में उसी नंबर दो की हैसियत में हैं, जिस पर कभी नसीमुद्दीन सिद्दीकी हुआ करते थे। नसीमुद्दीन के साथ छोड़ने के बाद मायावती ने 2020 में शम्सुद्दीन को उत्तर प्रदेश के 5 मंडलों का मुख्य सेक्टर प्रभारी के साथ ही उत्तराखंड के स्टेट कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी सौंपी थी।


इन्हीं शम्सुद्दीन का ये स्टिंग है. जिसमें बसपा में टिकट के रेट, डील, स्कैंडल, सिंडिकेट और साजिश का खुलासा हुआ है।


अब पूरा स्टिंग पढ़ें.. 

समय- 17 दिसंबर 2021 ,वक्त- रात के 9 बजे ,जगह- दारुल सफा, MLA रेस्ट हाउस लखनऊ


गोपालदास (स्वतंत्र पत्रकार): आपसे मैं अकेले में 5 मिनट बात करना चाहता हूं। मैं भाजपा के लिए लाइजनिंग का काम करता हूं और उन दो-तीन लोगों में से हूं, जो ऐसा करते हैं। बसपा से 50 सीटों की व्यवस्था करानी है।


शम्सुद्दीन (बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर)- कहां से?


गोपालदास- आपके यहां से। फंडिंग की जरूरत होगी, तो हो जाएगी। जैसा आप बताएंगे, वैसा कर लेंगे।


शम्सुद्दीन- कौन से मंडल के लिए?


गोपालदास- कहीं से भी। हमको बस 50 सीट चाहिए। आपके यहां जो व्यवस्था होगी, वह मैं कर दूंगा। 2-3 करोड़ हर सीट के लिए मिल जाएगा।


शम्सुद्दीन- आप हमारे पास कैसे आ गए।


गोपालदास- देखिए, आपके कैंडिडेट जीत नहीं पाएंगे। चुनाव चिन्ह आपका ही रहेगा। कैंडिडेट हमारे रहेंगे।


शम्सुद्दीन- अच्छा-अच्छा।


गोपालदास- हमारे पास 300 करोड़ का फंड है।


शम्सुद्दीन- बरेली और लखनऊ में चाहते हैं? कौन-कौन सी कमिश्नरी में?


गोपालदास- कोई भी सीट हो। आप अपनी सीट के नाम बस बता दीजिए। कैंडिडेट हम बताएंगे।


शम्सुद्दीन- अभी जितनी लाइन दूसरों के यहां लगी है, उतनी ही लाइन हमारे यहां भी है। फोन पर भी हैं।


गोपालदास- फोन पर ही हैं, फंड नहीं है, आपके पास।


शम्सुद्दीन- मिश्रा जी के पास भी गए थे?


गोपालदास- नहीं, हमारे दूसरे साथी गए थे।


शम्सुद्दीन- आपको मेरा कॉन्टैक्ट किसने दिया।


गोपालदास- सोर्स नहीं बताऊंगा।


शम्सुद्दीन- तो ये बात कैसे होगी?


गोपालदास- वो तो मैं करा दूंगा, जैसा आपके यहां सिस्टम है। नॉमिनेशन खत्म होने के साथ ही पूरा पैसा मिल जाएगा, ताकि टिकट कटने का डर न रहे। उन्हें बगैर योगी की सरकार चाहिए।


शम्सुद्दीन- नहीं, नहीं, वो नहीं होगा। तो योगी को हटाना चाहते हैं ये।


गोपालदास- हां, उन्हें माइनस योगी सरकार चाहिए। इसीलिए आपकी मदद चाहिए। 100 करोड़ एडवांस रहेगा। बाकी नामांकन के बाद।


शम्सुद्दीन- 50 सीटों के लिए 300 करोड़ रहेगा।


गोपालदास- हां, 300 करोड़ का बजट है। इसमें हम भी आप से लेंगे। आपका भी फायदा होगा।


शम्सुद्दीन- सामाजिक स्तर क्या होगा?


गोपालदास- ब्राह्मण, मुसलमान, यादव, कुर्मी रहेंगे। भाजपा के अलावा पैसा किसी के पास है नहीं।


शम्सुद्दीन- नहीं, बात आपकी सही है। अच्छा आपका रोल क्या होगा?


गोपालदास- मैं आपको कैंडिडेट की लिस्ट दूंगा, पैसा दूंगा। जब ये 50 जीत जाएंगे तो हमारा-आपका रोल अलग होगा।


शम्सुद्दीन- मैं समझ गया।


गोपालदास- लिस्ट आप देंगे। कैंडिडेट हमारे होंगे। पार्टी आपकी होगी। आपके दोनों हाथ में लड्‌डू होगा।


शम्सुद्दीन- जीतने के बाद तो हमारे साथ ही रहेंगे। अच्छा उन्हें लंगड़ी सरकार चाहिए। ये बात तो हम समझ रहे हैं कि वो सेकेंड लाइन चाहते ही नहीं। योगी का नाम तो शाह के आगे हो रहा है।


गोपालदास- इसीलिए, हम चाहते हैं कि आप 50 लोगों के टिकट की व्यवस्था करवा दीजिए। पैसे की व्यवस्था हम करवा देंगे। प्रति कैंडिडेट 4 करोड़ यानी 200 करोड़ हो जाएगा। फिर 100 करोड़ आपको मिल जाएगा। मुझे पता है कि आपके यहां रेट क्या है।


शम्सुद्दीन- ढाई से तीन में है, लेकिन आप 50 सीट का 300 करोड़ बता रहे हैं।


गोपालदास- 100 करोड़ आपका है। मैं तो उनका सेवक हूं, आपके हिस्से से ही मैं भी अपना 10 करोड़ ले लूंगा।


शम्सुद्दीन- देखिए, एक तो हर विधानसभा में हमारे 50 हजार वोट फिक्स हैं।


गोपालदास- वो हम जानते हैं, इसलिए तो दमदार नाम आपको देंगे। हमें सपा का वोट काटना है।


शम्सुद्दीन- देखिए, मैं आपको सोचकर बताता हूं।


गोपालदास- आगे आप तरक्की कर सकते हैं। राज्यसभा भी जा सकते हैं।


शम्सुद्दीन- देखिए, आपका कुछ न कुछ तो लिंक होगा ही, तभी तो हमारे पास आए।


गोपालदास- तो कल हम आपके साथ एक बार फिर बैठते हैं, आप रहेंगे न?


शम्सुद्दीन- हां, यहीं रहूंगा।


गोपालदास- आप एक बार चिंतन कर लीजिए।


शम्सुद्दीन- ठीक है। मैं 21 साल की उम्र से पार्टी के लिए काम कर रहा हूं। और आज 28-30 साल हो गए।


शम्सुद्दीन राइन (लाल घेरे में)। बसपा में वे मायावती के करीबी लोगों में शामिल हैं।

शम्सुद्दीन राइन (लाल घेरे में)। बसपा में वे मायावती के करीबी लोगों में शामिल हैं।

स्टिंग का दूसरा दिन...


शम्सुद्दीन ने पत्रकार गोपालदास को सीधे बेडरूम में बैठाकर बातचीत की...


गोपालदास- फंड आकर रखा है, आप बोलेंगे, फट से कार्यक्रम हो जाएगा। मुझे भी कुछ रुपए मिल जाएंगे।


शम्सुद्दीन- मैं यही चाहता हूं, थोड़ा मुझे एक रात का वक्त दीजिए। मैं कल जाऊंगा दिल्ली। मुझे परसों दिल्ली में मिल लीजिए। बहुत अच्छा रहेगा। एयरपोर्ट पर मिल जाऊंगा। आप कहां रहते हैं?


गोपालदास- मैं होटल में रहता हूं। अशोका में रहता हूं? तीन साल से।


शम्सुद्दीन- मैं थोड़ा सोचता हूं कि वो कौन-कौन सी सीट है, वो चाहते क्या हैं?


गोपालदास- वोट कटवाना और सपा को हराना है।


शम्सुद्दीन- आप मेरी बैठक किसके साथ करवाएंगे।


गोपालदास- संघ के हैं, गौरीशंकर जी, उन्हीं से मिलवाऊंगा, सारा लेन-देन वही करते हैं।


शम्सुद्दीन- राज्य की एलआईयू क्या कह रही है?


गोपालदास- गठजोड़ सरकार बनेगी। इसीलिए तो आपको ये दे रहे हैं।


शम्सुद्दीन- मैं समझ गया, लेकिन योगी जी को रोककर तो सरकार हम भी बना सकते हैं।


गोपालदास- हां, ये तो है ही। फिर आपका भी रोल होगा।


शम्सुद्दीन- मैं तो रोल वाला ही हूं। नहीं, कल छोड़कर परसों रात में हम बैठेंगे। हम देखते हैं। अच्छा हमारी सरकार बन जाए तो बुराई क्या है।


गोपालदास- आपको चारों तरफ से फायदा है, कुछ भी हो सकता है चुनाव के बाद।


शम्सुद्दीन- नहीं ठीक है। पर ये रकम सियासत के लिए बहुत छोटी है। बहनजी से बात करेंगे।


गोपालदास- बहनजी से बात करने पर हमारा-आपका वजूद खत्म हो जाएगा।


शम्सुद्दीन- हूं.... करते हैं परसों।


गोपालदास- ब्राह्मण बीजेपी से बहुत नाराज हैं। आपको सर्वे दे दूंगा।


शम्सुद्दीन- चलो फिर हम करते हैं भाई साहब। आज हम 10.55 पर दिल्ली जा रहे हैं। परसों शाम को नहीं, तो नरसो सवेरे हो जाएगा। बिल्कुल बात करते हैं।


बसपा में टिकट बिक्री को लेकर 2 जनवरी को गोपालदास बसपा के एक और कोऑर्डिनेटर नौशाद अली से मिलने दोपहर में उनके घर डालीगंज पहुंचे। नौशाद कहीं निकलने वाले थे।


गोपालदास- मैं एक जरूरी काम से आया हूं। बीजेपी का काम देखता हूं। हमे आपसे थोड़ी मदद चाहिए। 50 सीटों की। आप सबका जो हिसाब-किताब मैं कर दूंगा।


नौशाद- आप कहां से।


गोपालदास- दिल्ली से। भाजपा के लिए लाइजनिंग का काम करता हूं।


नौशाद- कैसे क्या करते हैं।


गोपालदास- बस, लाइजनिंग से सीट दिलवा देते हैं।


नौशाद- ये काम मैं नहीं कर पाऊंगा। मुझसे नहीं हो पाएगा।


नौशाद अली भी बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर हैं। वे लखनऊ में ही रहते हैं।

नौशाद अली भी बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर हैं। वे लखनऊ में ही रहते हैं।

शम्सुद्दीन बोले- कोई वीडियो को साबित कर देगा तो मैं जिंदगीभर उसकी गुलामी करूंगा


इस वीडियो को लेकर भास्कर ने शम्सुद्दीन राइन से बात कर उनका पक्ष जाना। शम्सुद्दीन का कहना है कि मुझे नहीं मालूम है कि वीडियो क्या है। मेरे पास पचासों लोग आते हैं। कौन क्या कर रहा है और कह रहा है, क्या बना रहा है, मैं नहीं जानता हूं। न ही इस तरह का मेरा कोई विजुअल है।


हमारे परिवार और रिश्तेदार बिजनेस करते हैं, कोई कहीं से पकड़ा जाता है, तो वो उसका मसला है। और वैसे भी वो आयकर विभाग की कार्रवाई है।

...

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने राज्य के सांसदों से मुलाकात की

नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने अगले महीने राज्य का बजट पेश करने से पहले, सोमवार को यहां राज्य के सांसदों से मुलाकात की और उनके साथ कई मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में विभिन्न दलों के सांसद- राज्यसभा और लोकसभा के 27 सदस्य शामिल हुए।

 

बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्यमंत्री भगवंत खुबा और केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर भी मौजूद रहे।

 

बैठक से पहले बोम्मई ने कहा, “हम सांसदों के साथ राज्य और केंद्र के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।” बैठक के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री केंद्रीय वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बिजली मंत्री आर के सिंह से भेंट कर सकते हैं।

...

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव : मुबारकपुर सीट से भी चुनाव लड़ेंगे अखिलेश

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव मैनपुरी की करहल के साथ-साथ आजमगढ़ के मुबारकपुर विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ेंगे।

 

सपा द्वारा सोमवार को जारी प्रत्याशियों की सूची में अखिलेश को आजमगढ़ के मुबारकपुर सीट से भी उम्मीदवार बताया गया है।

 

अखिलेश फिलहाल आजमगढ़ लोकसभा सीट से सांसद हैं।

 

गौरतलब है कि सपा अध्यक्ष मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से पहले ही अपना नामांकनपत्र दाखिल कर चुके हैं।

 

करहल सीट के लिए मतदान 20 फरवरी को तीसरे चरण में होना है जबकि मुबारकपुर में सातवें और अंतिम चरण में सात मार्च को वोट पड़ेंगे।

...

निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रचार के लिए रोडशो, वाहन रैलियों पर प्रतिबंध बढ़ाया

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने रविवार को रोड शो, 'पद यात्रा', साइकिल और वाहन रैलियों पर प्रतिबंध को बढ़ा दिया, लेकिन कोविड-19 मामलों में कमी का हवाला देते हुए चुनावों के लिए बंद और खुले स्थानों पर प्रचार कार्यक्रमों के लिए नई छूट प्रदान की।

 

नई छूट मिलने के बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में राजनीतिक दलों को बड़े चुनाव प्रचार कार्यक्रमों का आयोजन करने में मदद मिलेगी।

 

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिये 10 फरवरी को मतदान होगा। इसके लिये आठ फरवरी की शाम प्रचार अभियान थम जाएगा।

 

आयोग ने राज्यों के मुख्य सचिवों, उसके पर्यवेक्षकों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के आधार पर भौतिक प्रचार कार्यक्रमों को आयोजित करने की अनुमति प्रदान कर दी। आयोग ने एक बयान में कहा कि ''खुले में सभा, बंद भवनों में सभा तथा रैलियों के संबंध में प्रतिबंधों में और ढील दी गई है, लेकिन बंद सभागारों की 50 प्रतिशत क्षमता और खुले मैदान की 30 प्रतिशत क्षमता के बराबर लोग ही इनमें शामिल हो सकेंगे।''

 

इसके अलावा, घर-घर जाकर प्रचार करने के लिए अधिकतम 20 लोगों की सीमा पहले की तरह ही लागू रहेगी। प्रचार पर रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक प्रतिबंध लागू रहेगा।

 

देश में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गोवा, मणिपुर और पंजाब में विधानसभा चुनाव होना है।

...

आस्था से सरोकार न रखने वालों को अब सपने में याद आने लगे हैं भगवान कृष्ण : मोदी

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सपा को 'नकली समाजवादी' करार देते हुए रविवार को कहा कि जनता की आस्था से कोई सरोकार न रखने वाले इन लोगों को भाजपा को अपार समर्थन देख अब सपने में भगवान कृष्ण की याद आने लगी है।

 

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान कोविड—19 महामारी के कारण सरकार के कार्यों में व्यवधान पड़ा। फिर से बहुमत मिलने पर योगी आदित्यनाथ की सरकार और भी तेजी से काम करके इन दो सालों के दौरान हुए नुकसान से निकालकर उत्तर प्रदेश को आगे ले जाएगी।

 

मोदी ने मथुरा, बुलंदशहर और आगरा के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित 'जन चौपाल' को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पार्टी पर तीखे प्रहार किये और कहा ''चुनाव देखकर कृष्ण भक्ति का चोला ओढ़ने वाले लोग जब सरकार में थे तो वृंदावन, बरसाना, गोवर्धन और नंदगांव को वे भूल ही गए थे। आज भाजपा को अपार समर्थन देख इन लोगों को अब सपने में भगवान कृष्ण की याद आने लगी है।''

 

गौरतलब है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा था कि भगवान कृष्ण रोजाना उनके सपने में आकर कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने जा रही है।

 

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया, ''जो पहले सरकार में थे उन्हें ना तो आप लोगों की आस्था से मतलब रहा है और ना ही आपकी जरूरतों से। उनका सिर्फ एक ही एजेंडा रहा है, उत्तर प्रदेश को लूटो। उन्हें बस सरकार बनाने से मतलब रहा है, इसीलिए आज वह मुख्यमंत्री योगी जी और भाजपा सरकार को पानी पी-पीकर कोस रहे हैं। उप्र का इन लोगों ने जो हाल बना दिया था, वह इन नकली समाजवादियों के कर्मों का कच्चा चिट्ठा है।''

 

मोदी ने कहा ''अगर कोरोना महामारी का संकट नहीं आया होता तो पिछले दो साल में योगी जी कई काम कर चुके होते, लेकिन इन दो साल कठिनाइयों से गुजारने पड़े। सरकार की शक्तियों को भी लोगों की जान बचाने में लगाना पड़ा। नहीं तो जिस तरीके से 2017 से योगी जी ने काम का मामला उठाया था, अगर दो साल में यह रुकावट ना आई होती तो आज उत्तर प्रदेश कहां से कहां पहुंच गया होता, लेकिन मुझे विश्वास है कि उत्तर प्रदेश के लोग आने वाले पांच साल के लिए भरपूर बहुमत देंगे और योगी जी भी इतनी ताकत से दौड़ेंगे कि जो दो साल बीमारी के कारण तकलीफ आई है, उससे आगे निकालकर उप्र को ले जाएंगे।''

 

मोदी ने आरोप लगाया, ''पिछली सरकारों के शासनकाल में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे राजमार्गों पर गाड़ी रोककर लूटपाट करते थे और हाईवे पर ही महिला और बेटियों के साथ क्या होता था यह बुलंदशहर के लोग अच्छी तरह से जानते हैं। तब उत्तर प्रदेश में घरों दुकानों पर अवैध कब्जे होना आम बात थी। लोग अपना घर छोड़कर पलायन को मजबूर होते थे। आगरा के दंगों में आरोपियों के सिर पर किसका हाथ था यह आप भली-भांति जानते हैं।''

 

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारें भय फैलाने में जुटी थी जबकि भाजपा भविष्य का निर्माण कर रही है। यही फर्क है भाजपा की सरकार और पिछली सरकारों में, इसलिए आज उत्तर प्रदेश में बहन बेटियां खुले दिल से कह रही हैं 'पहले हमें घर से निकलने में लगता था डर, अब भाजपा राज में अपराधी कांपे थर-थर।'

 

उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश के लोगों ने दो टूक कह दिया है कि धन-दौलत, बाहुबल, जातिवाद, परिवारवाद और संप्रदायवाद के दम पर भले ही कुछ लोग कितनी ही राजनीति कर लें, लेकिन वह जनता का प्यार नहीं पा सकते। जनता का आशीर्वाद तो उसे ही मिलेगा जो सच्चे अर्थ में प्रदेश के लोगों की सेवा करेगा, इसलिए जनता ने तय कर दिया है कि इस बार भी चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा विकास का ही है।''

 

मोदी ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने दिखा दिया है कि अगर उत्तर प्रदेश का विकास कोई कर सकता है तो वह सिर्फ भाजपा ही है, इसलिए पिछले कई महीनों से उत्तर प्रदेश के लोग यह ठान कर बैठे हैं कि कमल का बटन फिर दबाना है और भाजपा को ही जिताना है।

 

उन्होंने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तथा आयुष्मान योजना समेत अपनी सरकार की तमाम योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इससे उत्तर प्रदेश के करोड़ों नागरिकों को सीधा लाभ मिल रहा है।

 

प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए मोदी ने सपा पर एक बार फिर निशाना साधा और कहा, ''गरीबों के घरों को लेकर नकली समाजवादियों का क्या रवैया रहा है यह मैं आपको जरूर याद दिलाउंगा। आगरा, मथुरा और बुलंदशहर के नगरीय क्षेत्रों में पिछली सरकार ने 8000 घर भी नहीं बनवाए थे, मगर पिछले पांच सालों में योगी जी की सरकार ने इन क्षेत्रों में करीब 85000 घर बनाकर गरीबों को दिए हैं।''

 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की भलाई के लिए 'नकली समाजवादियों' और उनके साथियों का सत्ता से दूर रहना बहुत आवश्यक है। वे आज भी किसानों से झूठे वादे कर रहे हैं। गन्ना किसानों को झूठी बातें बताकर उकसाने का प्रयास कर रहे हैं। किसान भूले नहीं हैं कि सत्ता में रहकर इन लोगों ने क्या-क्या किया था। कैसे गन्ना किसानों को भुगतान के नाम पर रुला दिया था। भाजपा सरकार ने पिछले पांच साल में गन्ना किसानों का डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया है, जो पहले की सरकारों में 10 साल में हुए भुगतान से भी कहीं ज्यादा है। यूपी के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा मिले, इसके लिए भी टेक्नोलॉजी की ज्यादा से ज्यादा मदद ली जा रही है।

...

पंजाब में कांग्रेस सीएम पद के चेहरे की घोषणा से पहले सिद्धू ने कहा: राहुल का फैसला स्वीकार्य

चंडीगढ़। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पंजाब में पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा किये जाने से पहले प्रदेश कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने रविवार को कहा कि हर कोई उनके निर्णय को स्वीकार करेगा।

 

गांधी रविवार को लुधियाना का दौरा कर डिजिटल माध्यम से रैली को संबोधित करेंगे। साथ ही वह पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा करेंगे।

 

सिद्धू ने ट्वीट किया, "बिना फ़ैसले के कुछ भी बड़ा हासिल नहीं हुआ... पंजाब को स्पष्टता देने आए हमारे अग्रणी नेता राहुल जी का हार्दिक स्वागत... सभी उनके फ़ैसले का पालन करेंगे!!!"

 

सिद्धू और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के मुख्य दावेदार हैं। दोनों ने गांधी को आश्वासन दिया है कि वे पार्टी के फैसले को स्वीकार करेंगे।

...

हरीश रावत की विकृत तस्वीर पोस्ट करने के लिए उत्तराखंड भाजपा को निर्वाचान आयोग का नोटिस

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड भाजपा को आदर्श चुनाव आचार संहिता के कथित उल्लंघन के लिए नोटिस जारी किया है और पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता हरीश रावत की एक विकृत तस्वीर ट्वीट करने के लिए 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा है। तस्वीर में रावत को एक मौलवी के रूप में दिखाया गया है।

 

कांग्रेस ने शुक्रवार को इस संबंध में निर्वाचन आयोग से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उत्तराखंड भाजपा ने तीन फरवरी को रात 9 बजकर 34 मिनट पर रावत की एक विकृत तस्वीर ट्वीट की थी, जिसमें उन्हें एक विशेष समुदाय के व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया था।

 

आयोग ने पांच फरवरी को भेजे गए नोटिस में कहा, "आयोग ने इस मामले पर सावधानीपूर्वक विचार किया है और यह माना जाता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), उत्तराखंड ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-123 में आचार संहिता के 'सामान्य आचरण' वाले हिस्से में निर्धारित खंड (I) और (2) तथा भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 153(ए) की उप-धारा (आई)(ए) का उल्लंघन कर ऐसे बयान दिए हैं जो भड़काऊ हैं और इसे गंभीरता से लिया जाता है। इससे भावनाओं के भड़कने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका रहती है, जिससे चुनाव प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।''

 

आयोग ने यह भी कहा, "इसलिए, अब आयोग उत्तराखंड भाजपा को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर श्री हरीश रावत की विकृत तस्वीर डालने के एआईसीसी के आरोप पर अपना रुख स्पष्ट करने का अवसर देता है।''

 

निर्वाचन आयोग ने कहा कि स्पष्टीकरण इस नोटिस की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर आयोग के पास पहुंच जाना चाहिए, ऐसा नहीं करने पर आयोग इस मामले में उत्तराखंड भाजपा को आगे संदर्भित किए बिना उचित निर्णय लेगा।

...

धारा 370 हटाने पर अखिलेश ने मेरे सामने कहा था कि खून की नदियां बहेंगी : अमित शाह

अलीगढ़ (उप्र)। केंद्रीय गृह मंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को विपक्षी दलों खासतौर से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर धारा 370 हटाये जाने का विरोध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यादव ने कहा था कि खून की नदियां बहेंगी। शाह ने कहा कि लेकिन किसी में एक कंकड़ चलाने की भी हिम्मत नहीं हुई।

 

अलीगढ़ के अतरौली विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कल् याण सिंह के पौत्र, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री व भाजपा उम्मीदवार संदीप सिंह के समर्थन में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने यह बात कही।

 

अपने संबोधन में शाह ने कहा,‘‘ आपने दोबारा प्रधानमंत्री बनाया तो नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर से धारा 370 को हटा दिया। ये (विपक्षी) लोग विरोध करते थे, अखिलेश विरोध करते थे, उनमें (अखिलेश) अतरौली आने की हिम्मत नहीं। उन्होंने मेरे सामने कहा था कि 'खून की नदियां बहेंगी'। अरे, अखिलेश बाबू खून की नदियां छोड़ो, कंकड़ चलाने की भी किसी की हिम्मत नहीं हुई, नरेंद्र मोदी ने देश को सुरक्षित करने का काम किया।’’

 

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने सपा, बसपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा ''ये लोग पारदर्शिता से शासन नहीं कर सकते, भ्रष्टाचार मुक्त शासन नहीं दे सकते, भ्रष्टाचार मुक्त शासन केवल और केवल नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ही दे सकती है।''

 

अमित शाह ने कहा कि 2014, 2017 और 2019 का चुनाव उत्तर प्रदेश की किस्मत बदलने का चुनाव रहा है और सपा और बसपा की जातिवादी सरकारें कभी राज्य का भला नहीं कर पाएंगी।

 

शाह ने मतदाताओं को आगाह किया कि अगर राज्य में माफियाओं का राज आया तो प्रधानमंत्री मोदी अलीगढ़ में जो ‘डिफेंस कॉरिडोर’ लेकर आए हैं, जिसमें करोड़ों का निवेश होना है, वहां कोई निवेश करने नहीं आएगा।

 

उल्लेखनीय है कि पहले चरण में दस फरवरी को अतरौली में मतदान होना है और इस क्षेत्र का कई बार कल्याण सिंह प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

 

शाह ने कल्याण सिंह के साथ अपने रिश् तों की याद करते हुए कहा,‘‘ 2013 में मुझे उप्र का प्रभारी बनाकर भेजा गया, तब लखनऊ, बनारस के अलावा कहीं गया नहीं था, इतना बड़ा प्रदेश, 80 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी थी, तब तितर-बितर संगठन था और मैं बहुत पशोपेश में था कि क् या होगा, कैसे करेंगे मगर मैंने बाबूजी (कल्याण सिंह) से समय मांगा तो उन्होंने समय दिया, घर पर भोजन के लिए बुलाया और पिता की तरह उन्होंने उंगली पकड़कर उत्तर प्रदेश की राजनीति का पाठ सिखाया और उन्हीं की नींव पर आज तीन सरकारें बनीं।’’

 

कल् याण सिंह के पौत्र को भारी बहुमत से चुनाव जिताने की अपील के साथ ही ब्रज भूमि की जनता से निवेदन करते हुए शाह ने कहा,‘‘आपने 2014 में मोदी को प्रधानमंत्री बनाया, 2017 में भाजपा की सरकार बनाई, 2019 में फिर से मोदी को प्रधानमंत्री बनाया और अब 2022 में हमारे सफल मुख् यमंत्री योगी आदित् यनाथ को एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनाने का काम करें।’’

 

गृह मंत्री ने कोरोना वायरस संक्रमण के वक्त सरकार द्वारा जनता को राहत पहुंचाने के लिए किए गए कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

 

उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी जम कर निशाना साधा। शाह ने कहा कि ''ये राहुल बाबा हैं, उनको मालूम नहीं हैं कि खरीफ में कौन सी फसल होती और रबी में कौन सी फसल होती है, किसी ने उनसे कह दिया कि अलीगढ़ जाओ तो आलू की बात करना किसान खुश हो जाएंगे तो राहुल बाबा ने कहा कि हम यहां आलू की फैक्टरी लगा देंगे। जिसको ये मालूम नहीं कि आलू फैक् टरी में होता या खेत में लगाते हैं, वे भी कहने लगे कि हम किसानों की समस्या का समाधान करेंगे।’’

...

यूपी की अनदेखी पर कांग्रेस ने केन्द्रीय वित्तमंत्री का फूंका पुतला

लखनऊ। कांग्रेस ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन के उस बयान की तीखी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने बजट की आलोचना को 'यूपी टाइप जवाब' बताया है।

 

कांग्रेस पार्टी ने इसे उत्तर प्रदेश का अपमानजनक टिप्पणी बताते हुए इसके जवाब में पूरे उत्तर प्रदेश में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन का पुतला फूंका। कई जिलों में पुतला फूंकने को लेकर पुलिस से कांग्रेस कार्यकर्ताओं की झड़प भी हुई।

 

कांग्रेस पार्टी ने कहा कि वित्तमंत्री का बयान उत्तर प्रदेश के प्रति उनकी मानसिकता को दिखाता है। यही वजह है कि बजट में उत्तर प्रदेश को लेकर कोई विशेष घोषणा नहीं की, कोरोना की विभीषिका ने सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश की आम जनता पर डाला, लेकिन उसके लिए बजट में कोई राहत योजना का न होना निराशाजनक है। कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से उत्तर प्रदेश में बनने वाली 100 शिल्पकलाओं के नमूनों को वित्तमंत्री को भेजेगी, ताकि उन्हें पता चल सके की उत्तर प्रदेश की खासियत उसका शिल्प, गुणवत्ता और कलाकारी है।

 

यूपी कांग्रेस के मीडिया एवं कम्युनिकेशन विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ.पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि वित्तमंत्री ने एक ऐसे प्रदेश का अपमान किया है, जो न केवल अपनी राजनीतिक चेतना के लिए जाना जाता है। बल्कि उसका अपना बौद्धिक इतिहास रहा है। वर्तमान में देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री इसी प्रदेश से हैं, बावजूद इसके उत्तर प्रदेश की बौद्धिकता पर सवाल उठाना राज्य की अस्मिता का अपमान करने जैसा है।

 

कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन उत्तर प्रदेश का अपमान करके राम और कृष्ण की धरती का अपमान कर रही हैं। उनके बयान से जाहिर हुआ है कि अयोध्या और मथुरा का नाम भाजपा के लिए सिर्फ़ राजनीति का मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि वित्तमंत्री तत्काल अपना बयान वापस लें और माफ़ी मांगें।

 

डॉ. पंकज ने कहा कि वित्तमंत्री ने अपने एक बयान से झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, क्रांतिकारी मंगल पांडे से लेकर चंद्रशेखर आज़ाद, अशफ़ाक उल्लाह, रामप्रसाद बिस्मिल तक का अपमान किया है। यही नहीं, उन्होंने ऐसा बयान देकर उत्तर प्रदेश के उस बौद्धिक इतिहास को ललकारा है जो गोरखनाथ, रैदास, कबीर और तुलसीदास जैसे संतों से जुड़ा हुआ है।

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि उस उत्तर प्रदेश का जिसने इस देश को अब तक नौ प्रधानमंत्री दिए हैं। जिनमें पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर से लेकर राजीव गांधी तक शामिल हैं।

 

डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि जब वित्तमंत्री उत्तर प्रदेश का उपहास उड़ा रही थीं तो शायद भूल गईं कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश के वाराणसी से चुनकर संसद में पहुंचे हैं। और उनकी ही पार्टी के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी उत्तर प्रदेश से ही संसद में पहुंचे थे।

...

पडरौना के बजाय फाजिलनगर विधानसभा से टिकट का ऐलान

कुशीनगर। यूपी की सत्‍ता के लिए छिड़ी सियासी जंग में मंत्री पद और भाजपा से इस्‍तीफा देकर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए स्‍वामी प्रसाद मौर्य के पडरौना की बजाए फाजिलनगर से चुनाव लड़ने का ऐलान बुधवार को हुआ। स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने पिछला चुनाव पडरौना से लड़ा और जीता था, फाजिलनगर से टिकट का ऐलान होने के बाद उन्‍होंने एक ट्वीट के जरिए पडरौना के लोगों से विदा ली। स्‍वामी प्रसाद मौर्या ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा- 'पडरौना वासियों के प्यार, स्नेह और आशीर्वाद के लिए बहुत-बहुत बधाई। आप सब का सम्मान एवं स्थान सदैव मेरे दिल में था, दिल में है, दिल में रहेगा।' गौरतलब है कि स्‍वामी प्रसाद मौर्य के पडरौना से बदलकर फाजिलनगर सीट पर जाने की वजह पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह के कांग्रेस छोड़ भाजपा ज्‍वाइन करने को बताया जा रहा है। आरपीएन सिंह पडरौना के राजपरिवार से आते हैं। पडरौना सीट पर उनका काफी प्रभाव बताया जाता है। आरपीएन सिंह इस सीट से 1996, 2002 और 2007 में विधायक रहे हैं। कुर्मी-सैंथवार जाति से आने वाले कुंवर रतनजीत प्रताप नारायण सिंह को राजा साहेब के नाम से भी यहां पुकारा जाता है। पडरौना में कुर्मी वोटों की संख्या काफी है और अपने इलाके के सजातीय वोटों पर उनकी खासी पकड़ मानी जाती है। अटकलें थीं कि पडरौना से बीजेपी आरपीएन सिंह को टिकट देकर स्वामी प्रसाद मौर्य की मुश्किलें बढ़ा सकती है। पडरौना से बीजेपी उम्मीदवार का ऐलान होने से पहले ही स्वामी प्रसाद मौर्य के सीट बदल लेने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी आरपीएन को विधानसभा चुनाव लड़वाती है या उन्हें राज्यसभा भेजा जाएगा। उधर, फाजिलनगर विधानसभा सीट पर चनऊ और कुशवाहा बहुल बताई जाती है। कहा जा रहा है कि यह क्षेत्र जातिगत समीकरणों के लिहाज से स्‍वामी प्रसाद मौर्या के काफी अनुकूल है। बताया जा रहा है कि स्‍वामी प्रसाद मौर्या के फाजिलनगर से चुनाव लड़ने का ऐलान भले बुधवार को हुआ लेकिन उनके समर्थकों ने फाजिलनगर सीट पर तैयारी उसी दिन से शुरू कर दी थी जिस दिन आरपीएन सिंह ने कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा का दामन थामा था। इसकी सबसे बड़ी वजह जातिगत समीकरण बताए जा रहे थे। मौर्या के फाजिलनगर से चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद अब बीजेपी उन्‍हें इस सीट पर घेरने की रणनीति बना रही है। बीजेपी से जुड़े लोगों का कहना है कि इस सीट पर भी स्‍वामी प्रसाद मौर्य की लड़ाई आसान नहीं होगी। पिछले दो बार से यहां बीजेपी का दबदबा रहा है। फाजिलनगर विधानसभा से सीट से बीजेपी ने पुराने नेता और 2012 और 17 में जीते गंगा सिंह कुशवाहा के बेटे सुरेन्द्र सिंह कुशवाहा को टिकट दिया है। गंगा सिंह कुशवाहा जनसंघ के जमाने से ही आरएसएस के करीब रहे। यह विधानसभा कुशवाहा बाहुल्य के रूप में जाने जानी जाती है। परिसीमन के बाद 2012 के विधानसभा सभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर गंगासिंह कुशवाहा सपा के लहर के बावजूद लगभग पांच हजार से चुनाव जीतकर विधानसभा सभा पहुंचे। इसके बाद से यह 2017 में सपा के प्रत्याशी को लगभग 42 हजार मतों से हराकर दोबारा विधानसभा पंहुचे।

...

आजम खान की पत्नी का पर्चा कैंसिल, अब्दुल्ला का मंजूर

लखनऊ:जाने आलम (जानू चौधरी):   रामपुर में आजम खान की पत्नी डॉ. तंजीम फातिमा का पर्चा कैंसिल हो गया है, जबकि अब्दुल्ला आजम खान का पर्चा स्वीकार कर लिया गया है। अब्दुल्ला और तंजीम ने दो दिन पहले स्वार विधानसभा सीट से पर्चा दाखिल किया था। कयास लगाए जा रहे थे कि उम्र को लेकर अब्दुल्ला का पर्चा कैंसिल हो सकता है इसीलिए इसी सीट से उनकी मां डॉ. तंजीम फातिमा ने पर्चा दाखिल किया था। लेकिन शनिवार को तंजीम का पर्चा कैंसिल होने से सपा को झटका लगा है। वहीं, अब्दुल्ला का पर्चा स्वीकार होने पर कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है।

एक ही पार्टी से दाखिल करने पर कैंसिल हुआ पर्चा

बताया जा रहा है कि अब्दुल्ला और डॉ. तंजीम फातिमा ने सपा से पर्चा दाखिल किया था। नियमों के मुताबिक एक ही पार्टी और एक ही सीट से दो प्रत्याशी पर्चा दाखिल नहीं कर सकते। वहीं, डॉ. तंजीम ने कॉलम नंबर--2 खाली छोड़ दिया था। ऐसे में अब्दुल्ला आजम के पर्च को स्वीकार करते हुए डॉ. तंजीम फातिमा का पर्चा कैंसिल कर दिया गया है।

अब्दुल्ला ने पिछले चुनाव की लिखी जन्मतिथि दर्शाई

नामांकन पत्र में अब्दुल्ला आजम ने जन्मतिथि 1990 दर्शाई है। इसके चलते अब वह 31 वर्ष के हैं। इसके पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में भी अब्दुल्ला ने यही जन्मतिथि लिखी थी। बाद में दो जन्म प्रमाणपत्र होने के चलते उनकी विधायकी चली गई थी। वो मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।

जिलाध्यक्ष बोले- विरोधियों के मुंह पर तमाचा

सपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल ने बताया कि अब्दुल्ला आजम का पर्चा मंजूर हो गया है। यह विरोधियों के मुंह पर एक तमाचा है, जो यह मानकर बैठे थे कि अब्दुल्ला आजम का पर्चा जरूर निरस्त होगा। इसके चलते लोग अपने आप को जीता हुआ मान रहे थे। विरोधियों ने मुंह की खाई है।

...

लाल टोपी के बाद लाल पोटली पर जंग

उत्तर-प्रदेश: जाने आलम:  में विधानसभा चुनाव का रंग दिलचस्प होता जा रहा है। शुक्रवार को अखिलेश और जयंत अपनी साझा रैली में एक लाल पोटली लेकर पहुंचे थे। आज एक बार फिर सपा और रालोद की संयुक्त पीसी का आयोजन किया गया। इस पीसी में भी सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव लाल पोटली लेकर पहुंचे। उन दोनों ने जेब से लाल पोटली निकालकर कहा कि यूपी के विधानसभा चुनाव के साथ ही वे भाजपा को प्रदेश से उखाड़ फेकेंगे।

पोटली पर बीजेपी का निशाना

सपा और RLD की इस लाल पोटली पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि 'अखिलेश बाबू आपकी टोपी से अपराध का बोध होता है और पोटली में भूमाफियाओं, गुंडों और अपराधियों की फेहरिस्त है।'

भाजपा के पोटली में गरीबों का आशीर्वाद है- स्वतंत्र देव सिंह

स्वतंत्र देव ने कहा कि, 'अखिलेश जी, पोटली हमारे पास भी है, लेकिन उसमें आपकी तरह गुंडाराज, दंगाराज, भ्रष्टराज की स्क्रिप्ट नहीं है। गरीब पिछड़े, वंचित, दलितों, किसानों, महिलाओं, नौजवानों के कल्याण के लिए किए गए कामों का हिसाब और उनका आशीर्वाद है।' उन्होंने आगे कहा कि हमने गन्ना किसानों का भुगतान किया, आपने किसानों का अपमान किया।

हम गन्ना किसानों का कर्जा भी चुकाते हैं। डेढ़ लाख करोड़ का भुगतान करते हैं। इन्होंने किसानों को बिजली के लिए तरसाया। ट्यूबवेल के कनेक्शन के लिए भटकाया, गुंडों से जमीनें लुटवाई और किसानों की प्रगति को रुकवाया और हमने किसानों के हित में काम किया है।

हम जन की बात करते हैं वे गन की बात करते हैं

स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि सपा का लक्ष्य माफिया कल्याण है, हमारा लक्ष्य गरीब का कल्याण है। उनके शासन का संकल्प गुंडों का उदय है, हमारा लक्ष्य अंतिम व्यक्ति का उदय है। पंचायत से पार्लियामेंट तक भाजपा पर जनता अपना भरपूर प्यार लुटा रही है, भरपूर विश्वास कायम है। यह विश्वास गरीबों के अनाज का है, उन्नत समाज का है, विकास के आगाज का है। इनके समय में पूरी बत्ती गुल हमारे समय में यूपी सबसे पावरफुल।

...

शाह-योगी समेत भाजपा के कई नेता आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश में

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा शनिवार को एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रहेगा।

 

अमित शाह मुजफ्फरनगर में रहेंगे, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद में जनसंपर्क कर लोगों से फिर से सरकार बनाने की अपील करेंगे। मेरठ में स्मृति ईरानी, बिजनौर में केशव प्रसाद मौर्य, तो संभल और मुरादाबाद में उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा चुनाव प्रचार करेंगे।

 

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शनिवार को उत्तर प्रदेश के प्रवास पर रहेंगे। वह कई संगठनात्मक बैठकें करेंगे। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कार्यकर्ताओं एवं पार्टी पदाधिकारियों से संवाद कर उनका मार्गदर्शन करेंगे।

 

उत्तर प्रदेश भाजपा के सह मीडिया प्रभारी हिमांशु दुबे ने बताया कि शाह सुबह 11 बजे मुजफ्फरनगर पहुचेंगे। वह 11ः15 बजे मुजफ्फरनगर के वृन्दावन गार्डन, भोपा रोड में मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा के प्रभावी मतदाताओं के साथ संवाद करेंगे। इसके पश्चात दोपहर 12ः50 बजे मुजफ्फरनगर के हनुमान चौक से भगत सिंह रोड तक घर-घर जनसम्पर्क करेंगे। अमित शाह दोपहर 2ः10 बजे देवबंद विधानसभा के देवबंद बाजार में जनसम्पर्क करेंगे। इसके पश्चात दोपहर 3ः15 बजे इन्द्रप्रस्थ कॉलेज में सहारनपुर देहात विधानसभा के प्रभावी मतदाताओं के साथ संवाद करेंगे। वहीं शाम 4ः20 बजे सहारनपुर के सोलिटेयर होटल में विधानसभा चुनाव से जुडे़ पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद सहारनपुर न्यू शारदा नगर में जनसम्पर्क करेंगे।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बागपत व गाजियाबाद के प्रवास पर रहेंगे।वह यहां कई संगठनात्मक कार्यक्रमों में सम्मिलित होगें। योगी आदित्यनाथ दोपर 1ः20 बजे बडौ़त, बागपत में घर-घर सम्पर्क करेंगे। इसके पश्चात दोपहर 2ः45 बजे छपरौली, बागपत में प्रभावी मतदाताओं के साथ संवाद करेंगे। वहीं शाम 4ः10 बजे मुरादनगर गाजियाबाद में प्रभावी मतदाताओं के साथ संवाद करेगें।

 

केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी भी शनिवार को उत्तर प्रदेश के प्रवास पर रहेंगी। स्मृति ईरानी दोपहर 12ः00 बजे होटल क्रस्टल, लाल कुर्ती मेरठ में प्रभावी मतदाताओं के साथ बैठक करेंगी। रजमन बाजार में घर-घर पहुंचकर जनसम्पर्क करेंगी। वहीं दोपहर तीन बजे मंगलम सत्संग मंडप, मेरठ में मेरठ दक्षिण विधानसभा के प्रभावी मतदाताओं के साथ बैठक करेंगी और घर-घर जनसम्पर्क करेंगी।

 

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का बिजनौर दौरा रहेगा। मौर्य बिजनौर की नगीना तथा नहटौर विधानसभा क्षेत्रों में प्रभावी मतदाताओं के साथ संवाद करेंगें और घर-घर पहुंचकर जनसम्पर्क करेगें। उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा मुरादाबाद व संभल के प्रवास पर रहेंगे। शर्मा मुरादाबाद और संभल विधानसभा क्षेत्रों के प्रभावी मतदाताओं के साथ बैठक करेंगे। वह इस दौरान घर-घर जाकर जनसम्पर्क भी करेंगे। 

...

पंजाब चुनाव: सिद्धू ने अमृतसर पूर्व से नामांकन पत्र दाखिल किया

अमृतसर। कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने शनिवार को अमृतसर पूर्व से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सिर्फ इसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की चुनौती दी।

 

अमृतसर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के साथ ही शिअद नेता मजीठिया मजीठा सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं, जो वर्तमान में उनके पास है।

 

अमृतसर पूर्व से अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सिद्धू ने कहा, "यदि आप (मजीठिया) में इतना दम है, और लोगों पर विश्वास है तो मजीठा को छोड़कर केवल यहां एक सीट से चुनाव लड़ें। क्या आप में हिम्मत है?"

 

मजीठिया को उनके निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारने वाले अकालियों पर निशाना साधते हुए सिद्धू ने कहा, "वे केवल लूट का खेल खेलने आए हैं। लेकिन इस 'धर्म युद्ध' में वे सफल नहीं होंगे क्योंकि जहां 'धर्म' है वहां जीत है।’’

 

शिअद पर पंजाब को लूटने का आरोप लगाते हुए सिद्धू ने कहा, "यतो धर्मस्ततो जयः (जहां धर्म है वहां जीत है)।"

 

पंजाब विधानसभा की 117 सीटों के लिए 20 फरवरी को मतदान होगा और मतगणना 10 मार्च को होगी।

...

सपा की सत्ता में वापसी का मतलब अपराधियों का सत्तासीन होना होगा: अमित शाह

मुजफ्फरनगर। गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को आगाह किया है कि विधान सभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार बनने का मतलब अपराधियों का सत्ता में आना होगा।

शाह ने शनिवार को भाजपा उम्मीदवारों के लिये चुनाव प्रचार के दौरान प्रभावी मतदाता सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि जब वह उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रभारी बने, उस समय तत्कालीन राज्य सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगे के पीड़ितों को ही आरोपी बना दिया। उन्होंने कहा कि वह इस दर्द को कभी नहीं भूल नहीं सकते। उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों में गुंडे, माफियाओं ने प्रदेश को अपने कब्जे में ले रखा था, हर तरफ लोग असुरक्षित थे लेकिन जब से भाजपा की सरकार बनी प्रदेश के सारे गुंडे, माफिया बाउंड्री पार चले गए हैं।”

शाह ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के दौरान हुये दंगों और पूरे प्रदेश में फैली अराजकता का हवाला देते हुये मतदाताओं को आगाह किया कि सपा की सरकार बनने का साफ मतलब अपराधियों की सरकार बनना है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश में डकैती में 70 फीसदी, लूट में 69 फीसदी, हत्या में 30 फीसदी और अपहरण की घटनाओं में 35 फीसदी की कमी सुनिश्चित की है।

गृह मंत्री ने कहा कि इसके अलावा भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश के शहरों में 24 घंटे और गांवों में 22 घंटे बिजली आपूर्ति को भी सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर ने 2014, 2017 और 2019 में भाजपा की उत्तर प्रदेश में भारी जीत की नींव रखी।

शाह ने भरोसा जताया कि इस बार भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही भाजपा की जीत का अध्याय लिखा जायेगा। उन्होंने कहा, “यही मुजफ्फरनगर है जिसने उत्तर प्रदेश में भाजपा की प्रचंड जीत की नींव रखने की शुरुआत की थी और विपक्ष को धूल चटाई थी।”

पिछली सरकारों पर तंज कसते हुये शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार थी तो एक जाति की बात होती थी, कांग्रेस परिवार की बात करती थी और सपा गुंडों माफियाओं की बात करते थे। अब प्रदेश में सबका साथ और सबका विकास है, हर कोई सुरक्षित है।

...

लुभावने वादों पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक दलों के चुनावों के दौरान कथित तौर पर अव्यावहारिक लोकलुभावन वादे करने के मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को मंगलवार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।

मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए। मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह से पूछा कि याचिका में आखिर सिर्फ दो राजनीतिक दलों के बारे में क्यों जिक्र किया गया है। मुख्य न्यायाधीश ने सिर्फ पंजाब का जिक्र करने पर भी सवाल पूछे।

सिंह ने पीठ के समक्ष कहा कि चुनाव के समय सभी राजनीतिक दलों की ओर से लोकलुभावन वादे किए जाते हैं। उन्होंने कहा था कि अव्यावहारिक वादों का बोझ अखिरकर जनता को ही उठाना पड़ता है। उन्होंने इस याचिका को महत्वपूर्ण बताते हुए केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी करने तथा शीघ्र सुनवाई की गुजारिश की, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर ली।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की खंडपीठ ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी करने का निर्देश के साथ ही कहा कि वह इस मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद करेगी।

उपाध्याय ने विधानसभा चुनावों से पूर्व लोकलुभावन वादों को निष्पक्ष चुनाव की जड़ें हिलाने वाला करार देते हुए इसके खिलाफ शनिवार को एक जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी याचिका में पंजाब विधानसभा चुनाव के संदर्भ में विभिन्न राजनीतिक दलों के लोकलुभावन वादों का जिक्र करते हुए दावा किया है कि सार्वजनिक कोष से मुफ्त उपहारों के तर्कहीन वादों ने मतदाताओं को अनुचित रूप से प्रभावित किया है, लिहाजा उच्चतम न्यायालय इस मामले में चुनाव आयोग को निर्देश दे कि वह संबंधित दलों के चुनाव चिह्न जब्त करें तथा उनका पंजीकरण रद्द कर दे।

उपाध्याय ने अपनी याचिका में राजनीतिक दलों के कथित तर्कहीन वादों को "रिश्वत" और "अनुचित" रूप से प्रभावित करने के समान माना है। याचिका में राजनीतिक दलों के इन कथित तर्कहीन लोकलुभावन वादों को संविधान के अनुच्छेद 14, 162, 266 (3) और 282 का उल्लंघन बताया गया है।

याचिकाकर्ता ने पंजाब के संदर्भ में दावा किया है कि आम आदमी पार्टी के राजनीतिक वादों को पूरा करने के लिए पंजाब सरकार के खजाने से प्रति माह 12,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी, शिरोमणि अकाली दल के सत्ता में आने पर उसके वादे पूरे करने के लिए प्रति माह 25,000 करोड़ रुपये और कांग्रेस के सत्ता में आने पर उसके वादों के लिए 30,000 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी, जबकि सच्चाई यह है कि राज्य में जीएसटी संग्रह केवल 1400 करोड़ है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि सच्चाई यह है कि कर्ज चुकाने के बाद पंजाब सरकार कर्मचारियों- अधिकारियों के वेतन-पेंशन भी नहीं दे पा रही है तो ऐसे में वह मुफ्त उपहार देने के वादे कैसे पूरे करेगी ? याचिकाकर्ता का कहना है कि कड़वा सच यह है कि पंजाब का कर्ज हर साल बढ़ता जा रहा है। राज्य का बकाया कर्ज बढ़कर 77,000 करोड़ रुपये हो गया है। वर्तमान वित्त वर्ष में ही 30,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।

गौरतलब है कि याचिका में किसी अन्य राज्य एवं भाजपा या बाकी राजनीतिक दलों के वादों का जिक्र नहीं किया गया है। मुख्य न्यायाधीश ने इस संबंध में जिक्र नहीं करने पर याचिकाकर्ता से सवाल पूछे थे।

...

मायावती की पहली जनसभा आगरा में होगी दो फरवरी को

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती की पहली जनसभा आगरा में दो फरवरी को होगी। बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुये दो फरवरी को मायावती की जनसभा आगरा में आयोजित की जायेगी। मिश्रा ने ट्वीट कर बताया, “अवगत कराना है कि दिनांक 2 फरवरी 2022 को बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उप्र की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जी आगरा में कोविड नियमों का पालन करते हुए जनसभा को संबोधित करेंगी।” उन्होंने कहा कि जनसभा का समय एवं स्थान तथा आगामी जनसभाओं की सूचना मीडिया को शीघ्र उपलब्ध करायी जायेगी।

...

बसपा को छोड़ बाकी सभी सरकारों ने किया राजनीति का अपराधीकरण : मायावती

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) पर राजनीति का अपराधीकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश को जंगलराज में धकेलने के बाद भी इनकी ‘जुमलेबाजी’ जारी है। इसके जवाब में हालांकि मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर सत्ता में रहते हुए खुद कोई काम किये बिना सिर्फ चुनाव के समय तोहमत जड़ने का आरोप लगाया। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मायावती ने मंगलवार को अपने विरोधी दल भाजपा पर जुमले बाजी करने और सपा पर अराजक तत्वों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। सपा और भाजपा का नाम लिये बिना उन्हाेंने ट्वीटर पर कहा, “बीएसपी को छोड़ सभी पार्टियों की सरकारें राजनीति के अपराधीकरण व अपराध के राजनीतिकरण, कानून के साथ खिलवाड़ तथा अपनी पार्टी के गुण्डों व माफियाओं को संरक्षण आदि से यूपी को जंगलराज में ढकेल इसे गरीब व पिछड़ा बनाए रखकर जनता को त्रस्त करने की दोषी, किन्तु इनकी जुमलेबाजीे जारी।” इसके कुछ समय बाद ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पलटवार कर सपा और बसपा का नाम लिये बिना ही कहा कि विपक्षी दल जब सत्ता में होते हैं तब कोई काम नहीं करते हैं और चुनाव आने पर आरोपों के तीर चलाने लगते हैं। योगी ने ट्वीट कर तंज कसा, “ एक कहावत है, ‘करें न धरें, तरकस पहने फिरें’... पूरे विपक्ष का यही हाल है। सत्ता में रहे तो कुछ करा न धरा, अब चुनाव के समय सब ‘तरकस’ पहने फिर रहे हैं।

...

काम नहीं फिर 'राम' का भरोसा?

चुनावी गहमागहमी के वातावरण के बीच पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में भ्रमण करने का अवसर मिला। सरकार द्वारा जिस विकास का ढिंढोरा पीटा जा रहा है उसका तो कहीं दूर तक नाम-ो-निशान नहीं दिखाई दिया। शहरों व क़स्बों में वही टूटी-फूटी गड्ढेदार धूल भरी सड़कें,जगह जगह सड़कों व चौराहों पर लावारिस पशुओं के क़ब्ज़े,जाम पड़े सड़ांध मारते नाले व नालियां,आम लोगों के चेहरों पर छाई मायूसियाँ,युवाओं में अपने कैरियर के प्रति असुरक्षा का भय,मंहगाई से दुखी जनता की पीड़ा,ग़रीबी सब कुछ साफ़ नज़र आता है। परन्तु इन धरातलीय स्थिति के बावजूद इन्हीं सड़कों पर सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रदेश में हज़ारों की संख्या में बड़े से बड़े इश्तेहारी फ़्लेक्स लगवाकर यह दावा किया गया है कि 'सोच ईमानदार-काम दमदार= फिर एक बार -भाजपा सरकार'। यह दावा इश्तेहार के नीचे के हिस्से में छपा है जबकि ऊपरी भाग में लिखा है -फ़र्क़ साफ़ है -तब-राम लला थे टेंट में= अब-भव्य राम मंदिर का निर्माण। 'तब' का अर्थ जब भाजपा सत्ता में नहीं थी और अब का अर्थ है कि भाजपा के शासन में मंदिर का निर्माण हो रहा है। गोया भाजपा अदालती फ़ैसले के बजाये राम मंदिर निर्माण का श्रेय स्वयं लेने को तत्पर है।

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को चूँकि राजनैतिक विश्लेषक इस नज़रिये से भी देख रहे हैं कि यदि बंगाल की तरह उत्तर प्रदेश में भी भाजपा का विजय रथ अवरोधित हो गया तो 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं। लिहाज़ा उत्तर प्रदेश जीतने के लिये ही मतदाताओं विशेषकर धर्म के आधार पर बहुसंख्य मतदाताओं को लुभाने के लिये ही इस तरह के इश्तेहार अभियान चलाये गये हैं। प्रदेश में वाहनों में लाउडस्पीकर पर नारे लगाये जा रहे हैं कि 'अयोध्या तो झांकी है,कशी-मथुरा बाक़ी है।' राजनैतिक विद्वेष भरे इस चुनाव में भाजपा केवल यही श्रेय मात्र नहीं ले रही कि राम मंदिर हमने बनवाया है और यह हमारा दमदार काम है। बल्कि इसके साथ ही वह जनता को इस बात के लिए भी गुमराह कर रही है कि यदि समाजवादी पार्टी सत्ता में आ गयी तो वह मंदिर निर्माण में बाधा खड़ी करेगी। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के जालौन में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जहां अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुये तमाम बातें कहीं वहीं उन्होंने यह भी कहा कि 'विपक्ष राम मंदिर का निर्माण नहीं चाहता'। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव इस इंतज़ार में हैं कि उनकी सरकार बने और राम मंदिर का निर्माण रोक दिया जाए।

 

इसके पहले भी भाजपा की इसी रणनीति के तहत कुछ समय पूर्व सोशल मीडिया पर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के फ़र्ज़ी ट्वीट की एक फ़ोटो वायरल की गयी थी  जिसमें लिखा गया था कि -'उत्तर प्रदेश में अगर हमारी सरकार बनी, तो हम अपने मुस्लिम भाइयों से यह वादा करते हैं कि बाबरी मस्जिद का निर्माण उसी स्थान पर करायेंगे, जहां पर आज राम मंदिर का निर्माण हो रहा है'। जांच करने पर पता चला था कि यह एक फ़र्ज़ी ट्ववीट का स्क्रीन शॉट था जिसे अखिलेश यादव को बदनाम करने के लिये वायरल कराया गया था। जबकि मंदिर निर्माण पर आये अदालती फ़ैसले का अखिलेश यादव ने सम्मान करते हुये यह कहा था कि -'जब राम मंदिर बनेगा तब मैं पत्नी-बच्चों संग दर्शन करूंगा, भगवान विष्णु के जितने अवतार हैं हम सभी को मानते हैं।' इसी प्रकार उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने तो अपने पद व क़द के अनुसार एक और बड़ा बयान यह दे डाला कि-'अखिलेश यादव राम मंदिर पर बुलडोज़र चलाने के लिए सत्ता में आना चाहते हैं।' इतना भड़काऊ,व ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयान देने से साफ़ ज़ाहिर होता है कि इस बार फिर चुनाव काम नहीं बल्कि 'राम' भरोसे ही है। 

 

वैसे भी पिछले पूरे वर्ष भर चले किसान आंदोलन के बाद विशेषकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिस तरह किसानों का भाजपा से मोहभंग हुआ है और इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट-मुस्लिम एकता एक बार फिर से सामने आई है उसे देखकर भी भाजपा के हाथ पांव फूले हुये हैं। और देश के सबसे बड़े व अयोध्या-काशी-मथुरा जैसे प्रमुख तीर्थों के राज्य,उत्तर प्रदेश में ध्रुवीकरण की राजनीति करना भाजपा के लिये पहले भी फ़ायदेमंद ही साबित हुआ है। यही वह राज्य है जहां 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'क़ब्रिस्तान बनाम श्मशान' का 'विराट दर्शन ' प्रस्तुत किया था। और इस बार फिर हिन्दू मुस्लिम व मंदिर मस्जिद के तरह तरह के नये नये 'दर्शन ' पेश किये जा रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे योगी आदित्य नाथ स्वयं कह रहे हैं कि इस बार 'मुक़ाबला अस्सी बनाम बीस है। बीस प्रतिशत से उनका तात्पर्य क्या हो सकता है? इन दिनों भाजपा नेताओं के भाषणों के पसंदीदा शब्द 'अब्बा जान ,जिन्ना,जालीदार टोपी,पाकिस्तान आदि यही सब रह गये हैं। अपने विज्ञापनों में भी सरकार जब अपराधी माफ़िया को समाप्त करने का उल्लेख करती है तो उसे अतीक़ अहमद व मुख़्तार अंसारी जैसे चेहरे ही दिखाई दिये विकास दूबे का नाम नज़र नहीं आया।

 

कहा तो यही जाता है कि असीम (भगवान) को सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता है। जो लोग भगवान अथवा महापुरुषों को धर्म अथवा वर्ग विशेष तक सीमित रखने का प्रयास करते हैं वे दरअसल असीम को सीमित करने की ही चेष्टा करते हैं। राम-मुहम्मद-ईसा-नानक जैसे महापुरुषों को किसी धर्म विशेष की 'संपत्ति ' कैसे माना जा सकता है। परन्तु भाजपा ने तो सीमित क्या बल्कि भगवान राम को इतना ' अति सीमित' कर दिया है कि गोया राम देश के समस्त हिन्दुओं के भी नहीं बल्कि केवल भाजपाई हिन्दुओं के ही आराध्य हैं। और जो दल या नेता भाजपा की विचारधारा से सहमत नहीं या चुनावों में इनका विरोधी है वह इनकी नज़रों में राम विरोधी ही नहीं बल्कि राम द्रोही भी है। चुनावी प्रचार का यह तल्ख़ अंदाज़ फ़िलहाल तो यही बता रहा है कि इस बार भी भाजपा उत्तर प्रदेश में काम नहीं बल्कि फिर 'राम' के ही भरोसे है।

By तनवीर जाफ़री

...

भडक़ाऊ भाषण: पंजाब के पूर्व डीजीपी के खिलाफ मामला दर्ज

चंडीगढ़। पंजाब पुलिस ने भड़काऊ भाषण देने के आरोप में राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू के सलाहकार मोहम्मद मुस्तफा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह मामला संगरूर जिले की मलेरकोटला पुलिस ने दर्ज किया है। मोहम्मद मुस्तफा का कल से एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसमें वह हिंदुओं और आरएसएस के बारे में आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं। यही नहीं मुस्तफा आम आदमी पार्टी को निशाने पर लेते हुए जिला प्रशासन को भी खुलेआम धमकी दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के आधार पर पुलिस ने मोहम्मद मुस्तफा के खिलाफ लोगों को उकसाने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। यह मामला मलेरकोटला थाना प्रभारी कर्मवीर सिंह की शिकायत पर दर्ज किया गया है। एफआईआर में इस बात का जिक्र नहीं है कि चुनाव आयोग के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। कहा जा रहा है कि टीवी चैनलों पर मुस्तफा की वीडियो चलने के बाद आयोग ने पुलिस को तुरंत कार्रवाई के निर्देश जारी किए। अब मोहम्मद मुस्तफा ने कहा है कि उन्होंने हिंदुओं को निशाना नहीं बनाया। उन्होंने कुछ मुस्लिम संगठनों को ही कहा था, जिन्होंने उनके कार्यक्रम में खलल डालने का प्रयास किया।

...

‘5 साल नहीं छोड़ेंगे पार्टी का साथ’, कांग्रेस के 36 प्रत्याशियों ने मंदिर, मस्जिद चर्च में लिया संकल्प

पणजी। गोवा में चुनाव से पहले कांग्रेस ने मतदाताओं को यह सुनिश्चित किया है इस बार साल 2019 की तरह दलबदल जैसी घटनाएं नहीं होंगी। इसके लिए शनिवार को कांग्रेस ने अपने नेताओं के साथ भगवान को साक्षी मानकर संकल्‍प लिया है।

2019 में चुनाव से पहले कांग्रेस के करीब 10 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी और बीजेपी का दामन थाम लिया था। इसके बाद से ही कांग्रेस को विरोध का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में शनिवार को कांग्रेस के 36 प्रत्‍याशियों ने मंदिर, चर्च और मस्जिदों में जाकर संकल्‍प लिया कि इन चुनाव में समय और बाद में वे सभी पार्टी के प्रति ईमानदार रहेंगे।

 पणजी में महालक्ष्मी मंदिर और कोंकणी में बंबोलिम क्रॉस में पुजारियों के साथ हाथ जोड़कर खड़े होकर चुनाव उम्मीदवारों ने दोहराया कि चुनाव जीतने के बाद वे अगले पांच वर्षों तक कांग्रेस पार्टी के साथ रहेंगे।

 उम्मीदवारों ने शपथ लेते हुए कहा, ‘देवी महालक्ष्मी के चरणों में हम सभी 36 लोग शपथ लेते हैं कि हम कांग्रेस पार्टी के प्रति वफादार रहेंगे, जिसने हमें टिकट दिया है। इसी तरह की शपथ उन्हें बम्बोलिम क्रॉस के एक पुजारी ने दिलाई थी। बाद में उनमें से 34 पुरुष उम्मीदवारों ने बेटिम की एक मस्जिद में चादर चढ़ाई थी।

 बता दें कि एडीआर की एक रिपोर्ट के अनुसार गोवा में बीते पांच साल में लगभग 24 विधायकों ने एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थामा है, जो 40 सदस्यीय राज्य विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या का 60 प्रतिशत है। एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस मामले में गोवा ने एक विचित्र रिकॉर्ड कायम किया है, जिसकी भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती।

...

कांग्रेस का ‘युवा घोषणापत्र’: 20 लाख रोजगार देने और ‘नया उत्तर प्रदेश’ बनाने का वादा

नई दिल्ली। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को युवाओं के लिए घोषणापत्र जारी किया जिसमें 20 लाख रोजगार देने, भर्ती प्रक्रिया को दुरूस्त करने और शिक्षा का बजट बढ़ाने समेत कई वादे किए गए हैं।

 

पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने ‘भर्ती विधान: युवा घोषणापत्र’ जारी करने के साथ ही यह भी कहा कि युवाओं के जोश और शक्ति के साथ ‘नया उत्तर प्रदेश’ बनाना है।

 

कांग्रेस ने इस मौके पर ‘मेरा जॉब मुझे मिलेगा...’ नामक गीत भी जारी किया। राहुल गांधी ने कहा, ‘‘यह घोषणापत्र सिर्फ कांग्रेस की आवाज नहीं है। इसे बनाने के लिए उप्र के युवाओं से बात की है। उनके विचार इसमें डाले गए हैं।’’ उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश के युवाओं को एक दृष्टिकोण की जरूरत है और यह दृष्टिकोण उन्हें सिर्फ कांग्रेस पार्टी दे सकती है।

 

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘हम नफरत नहीं फैलाते हैं। हम लोगों को जोड़ने का काम करते हैं। हम युवाओं के जोश और शक्ति के साथ एक नया उत्तर प्रदेश बनाना चाहते हैं।’’

 

कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘भर्ती विधान को बनाने के लिए युवाओं से बात की गई। इसे भर्ती विधान इसलिए कहा गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी समस्या भर्ती की है। युवा योग्य हैं, लेकिन उन्हें नौकरियां नहीं मिलती। बड़ी बड़ी घोषणएं होती हैं, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि रोजगार कैसे दिए जाएंगे।’’

 

उन्होंने कहा कि भर्ती की प्रक्रिया को दुरुस्त किया जाएगा, आरक्षण संबंधी ‘घोटाले’ को रोकने का कड़ा प्रावधान होगा और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ के चुनावों को बहाल किया जाएगा।

 

प्रियंका गांधी ने घोषणा की कि सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश में 20 लाख रोजगार दिए जाएंगे जिनमें 40 प्रतिशत यानी आठ लाख रोजगार महिलाओं को दिए जाएंगे।

 

उनके मुताबिक, 12 लाख नौकरियां सरकार में है जो खाली है और इनके लिए सरकार के पास पैसा भी है तथा आठ लाख रोजगार युवाओं के हुनर एवं उद्यमिता पर आधारित होंगे जिनके लिए सरकार सहयोग देगी।

 

उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस सेवा, संस्कृत के शिक्षक, उर्दू के शिक्षक, आंगनबाड़ी, आशा आदि में खाली सभी पदों को भरा जाएगा। भर्ती प्रक्रिया में नौजवानों का जो भरोसा टूटा है, उसे बहाल करने के लिए सभी परीक्षाओं के फॉर्म के लिए शुल्क माफ होंगे और बस, ट्रेन यात्रा मुफ्त होगी।’’

 

प्रियंका गांधी ने ‘युवा घोषणापत्र’ किए वादों का का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘एक परीक्षा कैलेंडर जारी होगा, जिसमें भर्ती विज्ञापन, परीक्षा, नियुक्ति की तारीखें दर्ज होंगी और इसका उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आरक्षण के घोटाले को रोकने के लिए हर भर्ती के लिए सामाजिक न्याय पर्यवेक्षक होंगे।’’

 

उन्होंने घोषणा की, ‘‘उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा का बजट कम किया है। हमारी सरकार आएगी तो यह बजट बढ़ाया जाएगा और सभी कॉलेज व विश्वविद्यालयों को उन्नत किया जाएगा। अच्छी शिक्षा भविष्य निर्माण के लिए सबसे जरूरी है।’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘युवाओं के रोजगार के लिए नये अवसर प्रदान किये जाएंगे। मल्लाहों और निषादों के लिए विश्वस्तरीय संस्थान बनाया जाएगा जिसमें उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। अति पिछड़े समुदाय के युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए एक फीसदी ब्याज की दर से कर्ज दिया जाएगा।’’

 

कांग्रेस महासचिव ने यह भी कहा, ‘‘प्रदेश के युवाओं को नशे के जाल से निकालने के लिए एक सेंटर खोला जाएगा जो युवाओं की काउंसिलिंग करेगा। इसके अलावा सांस्कृतिक क्षेत्र में युवाओं को बढ़ावा दिया जाए। हम आपके भविष्य की ठोस बात करना चाहते हैं।’’

 

उन्होंने भाजपा और समाजवादी पार्टी का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘आज चुनाव में जाति पर आधारित और सांप्रदायिक प्रचार किया जा रहा है। हम चाहते हैं कि सकारात्मक बातें हों और युवाओं के भविष्य की बातें हों ताकि उनका भविष्य उज्जवल हो सके।’’

 

प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘मैं बार बार कह रही हूं कि हमारी विचारधारा अलग है। हम प्रगति और जनता की भलाई के लिए काम करेंगे। हम ध्रुवीकरण की राजनीति में शामिल नहीं हैं।’’

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सात चरणों में होगा। पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को और सातवें एवं अंतिम चरण का मतदान सात मार्च को होगा। 10 मार्च को नतीजे घोषित होंगे।

...

पुलिस ने कार से बरामद किया 12 लाख रुपये

लखनऊ। विधानसभा चुनाव में काले धन का उपयोग न हो इस पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस कमिश्ररेट विशेष अभियान चला रही है। इसी के तहत देर रात चिनहट थाना पुलिस ने फ्लाइंग स्कॉट टीम के साथ चेकिंग के दौरान कार से 12 लाख रुपये कैश बरामद किया हैं।

 

फ्लाइंग स्कॉट टीम-20 में शामिल मजिस्ट्रेट मनुदेव ने बताया कि बीती रात को स्थानीय पुलिस के साथ देवा रोड नेड़ा मोड़ के पास संदिग्ध वाहनों की तलाशी की जा रही थी। इसी दौरान बाराबंकी की ओर से आ रही लखनऊ नम्बर की एक कार को रोक कर तलाशी ली गई। कार से पुलिस को 12 लाख रुपये कैश बरामद हुआ।

 

कार चालक गाजीपुर निवासी उर्मिल कुमार ने बरामद पैसों का विवरण नहीं दे सका। इस पर टीम ने बरामद रुपये को कब्जे में लेकर मामले की जानकारी आयकर विभाग की टीम को दी। इसके बाद आयकर विभाग ने कार्रवाई करते हुए रकम को सीज कर दी। 

...

यूपी चुनाव प्रचार: गुस्साई भीड़ ने भाजपा विधायक को खदेड़ा

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर जिले के खतौली से एक भाजपा विधायक को उनके ही निर्वाचन क्षेत्र मुजफ्फरनगर के ग्रामीणों ने उस समय खदेड़ दिया, जब वह विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे।

 

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

 

विधायक विक्रम सिंह सैनी बुधवार को यहां एक गांव में बैठक के लिए पहुंचे थे, जब उन्हें नाराज ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा।

 

वीडियो में, ग्रामीणों का एक समूह सैनी के पीछे उनकी कार तक जाता है और उनके अंदर जाते ही लोग चिल्लाने लगते हैं। ग्रामीणों को विधायक के खिलाफ नारे लगाते हुए सुना जा सकता है।

 

वीडियो में विक्रम सैनी गाड़ी में बैठकर लोगों के सामने हाथ जोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद भी कुछ ग्रामीण विधायक की गाड़ी के पास पहुंचते हैं और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल भी करते हैं।

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के पहले चरण की वोटिंग 10 फरवरी को होनी है। वोटिंग से पहले मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए प्रत्याशी गांव-गांव घूम रहे हैं। इसी क्रम में सैनी भी चुनाव प्रचार करने एक गांव पहुंचे थे। इस दौरान कुछ ग्रामीणों ने विधायक को घेर लिया और विरोध करते हुए वापस जाओ के नारे लगाए।

 

विक्रम सैनी भड़काऊ बयान देने के लिए जाने जाते हैं।

 

2019 में उन्होंने भारत में असुरक्षित महसूस करने वालों को धमकी भी दी थी।

 

उससे एक साल पहले उन्होंने कहा था, हमारे देश को हिंदुस्तान कहा जाता है, जिसका अर्थ है हिंदुओं के लिए एक राष्ट्र।

 

वे गायों को मारने वालों के शरीर के अंग तोड़ने की भी धमकी दे चुके हैं।

...

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के लिए उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की, 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को

नई दिल्ली। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बृहस्पतिवार को 41 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की जिसमें 16 महिला उम्मीदवार शामिल हैं।

 

पार्टी की ओर से जारी दूसरी सूची में भी पहली सूची की तरह महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है।

 

इससे पहले पार्टी ने गत 13 जनवरी को 125 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी और उसमें 50 महिलाओं को टिकट दिया गया था।

 

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की पार्टी प्रभारी प्रियंका गांधी वाद्रा ने कुछ महीने पहले ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान की शुरुआत करते हुए घोषणा की थी कि विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को दिये जाएंगे।

 

कांग्रेस की ओर से जारी दूसरी सूची के अनुसार, सहारनपुर नगर से सुखविंदर कौर, चरथावल (मुजफ्फरनगर) से यासमीन राणा, ठाकुरद्वारा (मुरादाबाद) से सलमा आगा अंसारी, बिलारी (मुरादाबाद) से कल्पना सिंह, चंदौसी (संभल) से मिथिलेश, साहिबाबाद (गाजियाबाद) से संगीता त्यागी, मोदी नगर (गाजियाबाद) से नीरज कुमारी प्रजापति और हापुड़ से भावना वाल्मीकि को उम्मीदवार बनाया गया है।

 

इनके अलावा, स्याना विधानसभा सीट (बुलंदशहर) से पूनम पंडित, डिबाई (बुलंदशहर) से सुनीता शर्मा, खैर (अलीगढ़) से मोनिका सूर्यवंशी, इगलास (हाथरस) से प्रीति धनगर, छाता (मथुरा) से पूनम देवी, मांट (मथुरा) से सुमन चौधरी, नवाबगंज (बरेली) से ऊषा गंगवार और अकबरपुर से प्रियंका जायसवाल को टिकट दिया गया है।

 

इन 16 महिला उम्मीदवारों के साथ ही कांग्रेस ने अपनी दूसरी सूची में अलग-अलग वर्गों के लोगों को उम्मीदवार बनाया है।

 

कांग्रेस ने कैराना से हाजी अखलाक, थाना भवन से सत्य श्याम सैनी, बुढाना से देवेंद्र कश्यप, शामली से अयूब जंग, मुजफ्फरनगर से सुबोध शर्मा, पुरकाजी से दीपक कुमार, बागपत से अनिल देव त्यागी, आगरा कैंट से सिकंदर वाल्मीकि और कटरा से मुन्ना सिंह को उम्मीदवार बनाया है।

 

महिलाओं को बड़ी संख्या में टिकट देने के सवाल पर प्रियंका गांधी ने गत बृहस्पतिवार को कहा था, ‘‘हमने महिलाओं की बात शुरू की तो सभी पार्टियां घोषणाएं करने लगीं। भाजपा, सपा, रालोद, बसपा सबने घोषणाएं कीं। हमारी सफलता यही है कि अब महिलाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’’

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सात चरणों में होगा। पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को और सातवें एवं अंतिम चरण का मतदान सात मार्च को होगा। 10 मार्च को नतीजे घोषित होंगे।

...

जातीय नेतृत्व के कुचक्र में दलित

नई दिल्ली: राजनेताओं और दलों ने डाॅ. भीमराव अंबेडकर और कथित दलित उत्थान की राजनीति को अपने राजनीतिक हितों का साधन और साध्य बना लेने से ज्यादा कुछ नहीं समझा। अतएव जो दलित एक समय मायावती की बसपा के सेवक थे, वे भाजपा और अब समाजवादी पार्टी के दर पर नतमस्तक हो रहे हैं।

 

इनमें ज्यादातर अति पिछड़े और दलित हैं। कमोबेश इसे ही स्वार्थपरक अवसरवादी राजनीति कहते हैं। साफ है, इनके लिए अंबेडकरवादी दर्शन का आदर्श स्व हित से आगे नहीं बढ़ पाया। मायावती ने भी अंबेडकर के जातिविहीन सामाजिक दर्शन को पूंजी और सामंती वैभव के भोग का पर्याय मान लिया। भविष्य में निर्मित होने वाली इन स्थितियों को शायद अंबेडकर ने 1956 में ही भांप लिया था। गोया, उन्होंने आगरा में भावुक होते हुए कहा था कि 'उन्हें सबसे ज्यादा उम्मीद दलितों में पढ़े-लिखे बौद्धिक वर्ग से थी कि वे समाज को दिशा देंगे लेकिन इस तबके ने हताश ही किया है।'

 

दरअसल अंबेडकर का अंतिम लक्ष्य जाति विहीन समाज की स्थापना थी। जाति टूटती तो स्वाभाविक रूप से समरसता व्याप्त होने लग जाती। लेकिन देश की राजनीति का यह दुर्भाग्यपूर्ण पहलू रहा कि नेता सवर्ण रहे हों या अवर्ण जाति, वर्ग भेद को ही आजादी के समय से सत्तारूढ़ होने का मुख्य हथियार बनाते रहे हैं।

 

आज मायावती को सबसे ज्यादा किसी तात्विक मोह ने कमजोर किया है तो वह है, धन और सत्ता लोलुपता। जबकि अंबेडकर इन आकर्षणों से सर्वथा निर्लिप्त थे। भारत ऐसा भुक्तभोगी देश रहा है कि जब वह सोने की चिड़िया कहा जाता था, तब उसे मुगलों ने लूटा और फिर अंग्रेजों ने। अंग्रेजों ने तो भारत के सामंतों और जमींदारों को इतनी निर्ममता से लूटा कि इंग्लैंड के औद्योगिक विकास की नींव ही भारत की धन-संपदा के बूते रखी गई। यहां के किसान और शिल्पकारों से खेती और वस्तु निर्माण की तकनीकें हथियाईं।

 

भारत के भौगोलिक विस्तार की सीमाएं सिमट जाने का कारण भी पूंजी का निजीकरण और सामंतों की भोग-विलासी जीवन शैली रही है। दुर्भाग्य से स्वतंत्र भारत में भी प्रशासनिक व्यवस्था में यही दुर्गुण समाविष्ट होकर देश को दीमक की तरह चाट रहा है। दलित नेता व अधिकारी भी अधिकार संपन्न होने के बाद उन्हीं कमजोरियों की गिरफ्त में आते गए। इसीलिए अगड़े-पिछड़ों का खेल और दल-बदल की महिमा मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कुटिल मंशा से आगे नहीं बढ़ पाई। यही वजह रही कि उत्तर-प्रदेश जैसे जटिल, धार्मिक व सामाजिक संरचना वाले राज्य में चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती आज चुनावी सरगर्मियों के बीच मौन व उदासीन हैं। यह उनकी राजनीतिक निष्क्रियता की घोषणा तो है ही, कालांतर में नेपथ्य में चले जाने का संकेत भी है। वरना, एक समय ऐसा भी था, जब इस दलित नेत्री से बसपा को अखिल भारतीय बना देने की उम्मीद की जा रही थी और दलितों में यह उम्मीद मायावती ने ही जगाई थी कि संगठन वह शक्ति है, जो प्रजा को राजा बना सकती है।

 

बहुजन समाज पार्टी का वजूद खड़ा करने से पहले कांशीराम ने लंबे समय तक डीएस-4 के माध्यम से दलित हितों के लिए संघर्ष किया था। इसी डीएस-4 का सांगठनिक ढांचा स्थापित करते समय बसपा की बुनियाद पड़ी और समूचे हिंदी क्षेत्र में बसपा के विस्तार की प्रक्रिया आरंभ हुई। कांशीराम के वैचारिक दर्शन में दलित और वंचितों को करिश्माई अंदाज में लुभाने का चुंबकीय तेज था। फलस्वरूप बसपा एक मजबूत दलित संगठन के रूप में स्थापित हुई और उत्तर-प्रदेश में चार बार सरकार बनाई। अन्य प्रदेशों में बसपा के विधायक दल-बदल के खेल में भागीदार बनकर सरकार बनाने में सहायक बने। किसी दल का स्पष्ट बहुमत नहीं होने पर समर्थन का टेका लगाने का काम भी किया। केंद्र में मायावती यही भूमिका अभिनीत करके राज्यसभा सांसद बनती रहीं। इन साधनों के साध्य के लिए मायावती ने सामाजिक अभियांत्रिकी (सोशल इंजीनियरिंग) जैसे बेमेल प्रयोगों का भी सहारा लिया। इन प्रयोगों का दायित्व किसी दलित को सौंपने की बजाय, सनातनी ब्राह्मण सतीष मिश्रा के सुपुर्द किए। मसलन सत्ता प्राप्ति के लिए जातीय समीकरण बिठाने में मायावती पीछे नहीं रहीं।

 

अंबेडकर ने जाति विहीन समाज की पुरजोर पैरवी की थी। लेकिन कर्मचारी राजनीति के माध्यम से जातिगत संगठन बसपा की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले कांशीराम ने अंबेडकर के दर्शन को दरकिनार कर कहा कि 'अपनी-अपनी जातियों को मजबूत करो।' यह नारा न केवल बसपा के लिए प्रेरणास्रोत बना बल्कि मंडलवादी मुलायम सिंह, लालू प्रसाद, शरद यादव और नीतीश कुमार ने भी इसे अपना-अपना, परचम फहराने के लिए सिद्ध मंत्र मान लिया। गोया, इन नेताओं ने अंबेडकर द्वारा स्थापित जाति तोड़ो आंदोलन को जाति सुरक्षा आंदोलन में बदल दिया। इसीलिए मंडल आयोग की पिछड़ी जातियों को आरक्षण की सिफारिशें मान लेने के बाद अब जातिगत जनगणना की बात पुरजोरी से उठाई जा रही है, जिससे संख्या बल के आधार पर जातिगत आरक्षण व्यवस्था सरकारी नौकरियों के साथ-साथ विधायिका में भी की जा सके।

 

सतीश मिश्रा के बसपा में आगमन के बाद सामाजिक अभियांत्रिकी का बेमेल तड़के का सिलसिला तो शुरू हुआ ही, जिन लोगों को मायावती मनुवादी कहकर ललकारा करती थीं, उन्हीं मनुवादियों के कर्मकांड बसपा के मंचों पर सत्ता प्राप्ति के लिए अनिवार्य अनुष्ठान बन गए। चुनावी साभाओं में हवन कुंड बनाए जाने लगे और वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ भगवान परशुराम के सोने-चांदी के फरसे प्रतीक के रूप में मायावती को भेंट किए जाने लगे। 'तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार' का जो नारा ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को बतौर गाली दिया जाता था, 'वह हाथी नहीं गणेश हैं, ब्रह्मा, विष्णु, महेश हैं' के सनातनी संस्कार में बदल गया।

 

मायावती ब्राह्मणों की लाचारी दूर करने के बहाने कहने लगीं, 'ब्राह्मण हशिए पर चले गए हैं, इसलिए उनकी खोई गरिमा लौटाने का काम हम करेंगे।' इस गौरव के पुनर्वास के लिए मायावती ने 2017 में उत्तर-प्रदेश के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री रहते हुए विधानसभा से आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव का टोटका रचकर भारत सरकार को कानून बनाने के लिए भेजा। स्वार्थपूर्ति के लिए किए जाने वाले इन आडंबरों से पता चलता है कि हमारे निर्वाचित जनप्रतिनिधि जिस संविधान के प्रति निष्ठा व अक्षरश: पालन की शपथ लेते हैं, उसे पढ़ने-समझने की आवश्यकता ही अनुभव नहीं करते।

 

यहीं नहीं वे जिस दल के सदस्य होते हैं और उस दल के जिस नेता के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर, उनके गुणगान करने में थकते नहीं हैं, अमूमन उसी व्यक्ति की विचार-प्रक्रिया को पलीता लगाते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में अंबेडकर की चिंता ठीक थी कि 'मेरी चिंता इस बात के अहसास से गहरी हो जाती है कि जातिवाद और पंथवाद के रूप में मौजूद भारत की बुराइयों व कुरीतियों के कारण विभिन्न राजनीतिक दल अस्तित्व में आ सकते हैं।' आज देश में करीब 1400 राजनीतिक दल हैं, जिनका प्रमुख आधार धर्म, जाति और क्षेत्रवाद है।

 

देशभर में दलितों की आबादी 16 प्रतिशत है। पंजाब में 30, पश्चिम बंगाल में 23, उत्तर-प्रदेश में 21 और महाराष्ट्र में 10.5 फीसदी दलित आबादी है। चूंकि अंबेडकर महाराष्ट्र से थे, इसलिए ऐसा माना जाता है कि सबसे ज्यादा दलित चेतना महाराष्ट्र में है। दलित आंदोलनों की भूमि भी महाराष्ट्र रहा है। डाॅ. अंबेडकर ने यहीं रिपब्लिकन ऑफ इंडिया (आरपीआई) राजनीतिक दल का गठन किया था। लेकिन इस पार्टी के अब तक करीब 50 विभाजन हो चुके हैं। इसके कर्ताधर्ता अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर हैं। इसी दल से निकले रामदास अठावले ने अपनी पार्टी आरपीआई-ए गठित की हुई है। उनकी मंशा भाजपा-शिवसेना तो कभी कांग्रेस-एनसीपी को समर्थन देकर सत्ता में बने रहने की रही है। यही पदलोलुपता महाराष्ट्र में दलित वर्ग को सबसे ज्यादा असंगठित किए हुए है।

 

इस नाते मायावती के इस करिश्मे को मानना पड़ेगा कि वे उत्तर-प्रदेश में अपना 22 प्रतिशत वोट 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में स्थिर रखने में सफल रही हैं। हालांकि 2014 में बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाई। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें लगभग इतना ही वोट मिला था। इसी वोट की माया रही कि अगड़े और पिछड़े थैलियां लेकर उनसे बसपा का टिकट लेने की कतार में लगे रहे। किंतु अब यह मिथक टूटने को आतुर दिखाई दे रहा है। इस एक जातीय कुचक्र के टूटने भर से अन्य राजनीतिक दलों का जातिगत कुचक्र भी टूटेगा, ऐसा फिलहाल नहीं लग रहा है। गोया, जातीय गठबंधन के कुचक्र बने रहेंगे।

 

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

...

उम्मीदवारों के अपराधिक रिकॉर्ड मामले पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट सहमत

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों के आपराधिक विवरण सार्वजनिक नहीं करने पर संबंधित राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करने की मांग संबंधी एक जनहित याचिका पर शीघ्र सुनवाई के लिए मंगलवार को सहमत हो गया।

याचिकाकर्ता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं वकील अश्वनी कुमार उपाध्याय ने आज मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष 'विशेष उल्लेख' के तहत से शीघ्र सुनवाई की मांग की, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।

श्री उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने का हवाला देते हुए सोमवार को दायर की गई अपनी याचिका को 'तत्काल सुनवाई योग्य' बताते हुए शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई थी।

याचिकाकर्ता ने बताया, “याचिका में उच्चतम न्यायालय से गुहार लगाई गई है कि न्यायालय निर्वाचन आयोग को यह निर्देश दे कि वह समाजवादी पार्टी (सपा) समेत उन राजनीतिक दलों के पंजीकरण रद्द कर दे, जो चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास का खुलासा नहीं करते हैं।”

श्री उपाध्याय ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कैराना निर्वाचन क्षेत्र से सपा ने नाहिद हसन को चुनावी मैदान में उतारने घोषणा की है। उनका आरोप है कि हसन एक गैंगस्टर है लेकिन सपा ने इस उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड को समाचार पत्र, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में प्रकाशित-प्रसारित नहीं किया, और न ही उसके चयन की वजह बतायी है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में जानकारी नहीं देना उच्चतम न्यायालय के फरवरी 2020 के फैसले के खिलाफ है।

श्री उपाध्याय का कहना है कि अपने फैसले में शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते वक्त राजनीतिक दलों के लिए संबंधित व्यक्ति का अपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करना अनिवार्य है।

...

उप्र चुनाव में रोजगार और शिक्षा ही असली एजेंडे, इन्हीं पर डटे रहें युवा: प्रियंका गांधी

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी और शिक्षा के बजट में कथित कटौती के मुद्दों को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा और कहा कि विधानसभा चुनाव में रोजगार एवं शिक्षा ही असली एजेंडे हैं जिन पर युवाओं को डटे रहना चाहिए।

 

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘उत्तरप्रदेश में पिछले 5 सालों में 16.5 लाख युवाओं की नौकरी छिन गई। 4 करोड़ लोगों ने हताश होकर नौकरी की आशा छोड़ दी। लेकिन योगी आदित्यनाथ जी इस पर न बात करते हैं, न ट्वीट … क्योंकि उन्हें मालूम है कि पर्दा जो उठ गया तो राज खुल जाएगा। युवाओं, आप रोजगार के एजेंडे पर डटे रहना।’’

 

कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी ने दावा किया, ‘‘योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 5 वर्षों में उप्र के शिक्षा बजट में भारी कटौती की। बजट ज्यादा मिलता तो युवाओं को नए विश्वविद्यालय, इंटरनेट, छात्रवृत्तियां, पुस्तकालय और छात्रावास मिलते।’’

 

प्रियंका गांधी ने युवाओं से आह्वान किया, ‘‘युवाओं, यही इस चुनाव का असली एजेंडा है। इस पर सवाल पूछिए तथा जो भटकाए, उसको वोट की ताकत से करारा जवाब दीजिए।’’

 

उत्तर प्रदेश में सात चरणों में विधानसभा चुनाव होना है। पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को और अंतिम चरण का मतदान सात मार्च को है। 10 मार्च को मतगणना होगी।

...

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव : राजनीतिक दलों ने डिजिटल प्रचार की शुरुआत की

नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के साये में अगले महीने पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने रोचक हैशटैग, जोशीली धुन और त्वरित प्रतिक्रिया के साथ डिजिटल दुनिया में अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है।

 

विभिन्न पार्टियों में नारों को गढ़ने वाले और कलाकर लगातार काम कर रहे हैं ताकि पैने अंदाज में मतदाताओं को फेसबुक और यूट्यूब पर संदेश अथवा विरोधी दल को जवाब दिया जा सके।

 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश के लिए प्रचार गीत जारी किया है जो लोकप्रिय श्रीलंकाई गाना ‘मणिके मागे हिथे’ पर आधारित है जिसे योहानी डी सिल्वा ने गाया है।

 

भाजपा के प्रचार गाने के बोल हैं, ‘‘सबकी मन की यह भाषा, यहां दो-दो हैं आशा, यही मोदी, यही योगी, उपयोगी, सहयोगी।’’ इसके साथ ही गाने में राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यों, ‘दंगा मुक्त’पांच साल, बिजली आपूर्ति में सुधार और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को रेखांकित किया गया है।

 

इस गाने को भाजपा और उसके नेताओं ने पिछले सप्ताह अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया।

 

‘‘आयेगी फिर से बीजेपी’ शीर्षक से भी गाना जारी किया गया है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है।

 

समाजवादी पार्टी के पास अपने प्रचार के लिए अलग गाने हैं जिनमें से एक अवधी बोली में गाना है, ‘‘खदेड़ा होइबे’’(बाहर निकाल देंगे) जो राज्य की सत्ता से भाजपा को बाहर करने की बात करता है।

 

गोवा में तृणमूल कांग्रेस ने अपने प्रचार के लिए कोंकणी भाषा में गाना जारी किया है जिसके बोल हैं, ‘‘एइलो दो फुलांछो काल, गोयेछी नवी सकल’’ (दो फूल का युग यहां गोवा की नई सुबह) और इसके जरिये वह मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास कर रही है। गाने में दो फूल का संदर्भ तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न से है।

 

पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर निशाना साधा है जो पद ग्रहण करने के बाद से ‘चुनावी वादे’ कर रहे हैं। आप उन्हें कॉमिक स्ट्रिप में ‘‘ऐलान मंत्री’’ (घोषणा मंत्री) दिखा रही।

 

पंजाब कांग्रेस ने भी अपना कॉमिक स्ट्रिप जारी कर पलटवार किया है और आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ‘‘विज्ञापन भाई’’ के तौर पर दिखाया है साथ ही व्यंग कसा है कि ‘‘खोखले नारे केजरीवाल का काम है चन्नी का नहीं।’’

 

इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह द्वारा बनाई गई नई पार्टी ‘पंजाब लोक कांग्रेस’ को ‘हॉकी स्टिक और गेंद’ बतौर चुनाव चिह्न मिला है, जिसके साथ हैशटैग चलाया जा रहा है ‘‘#बस हुन गोल करना बाकी’’।

 

उत्तराखंड कांग्रेस एक रैंक एक पेंशन (ओआरओपी) पर वीडियो बनाकर भाजपा को निशाने पर ले रही है। इस वीडियों में सैन्य वर्दी में दिख रहे बच्चे यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि पूर्व सैनिकों को अबतक पेंशन योजना का पूरा लाभ नहीं मिला है। यह वीडियो एक ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल के विज्ञापन पर आधारित है।

 

इसपर उत्तराखंड भाजपा ने कहा, ‘‘पूरा देश जानता है कि सैनिकों को किसने ओआरओपी से वंचित किया और किसने सुनिश्चित किया कि उनका हक मिले। आइए देखें कैसे देश की सबसे असत्यवादी पार्टी का झूठ का भंडाफोड़ खुद सैनिक कर रहे हैं।’’

 

पार्टी ने इसके साथ ही वीडियो साझा किया है जिसमें पूर्व सैनिक मोदी को ओआरओपी लागू करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित कर रहे हैं। 

...