"सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही" : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के तीखे बोल

नई दिल्‍ली : 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari), जिनके सीधे सपाट अंदाज में बात कहने के अंदाज ने संभवत: उन्‍हें बीजेपी की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्‍था में स्‍थान से वंचित किया है, ने एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. गडकरी ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही है और यह एक समस्‍या है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, "आप चमत्‍कार कर सकते हैं...और ऐसा करने की क्षमता है. मेरा मानना है कि भारतीय बुनियादी संरचना का भविष्‍य उज्‍ज्‍वल है. हमें अच्छी तकनीक, अच्छे नवाचार, अच्छे शोध और सफल प्रथाओं को  दुनिया और देश में स्वीकार करने की जरूरत है. हमारे पास वैकल्पिक मटेरियल होना चाहिए ताकि हम क्‍वालिटी से समझौता किए बिना लागत कम कर सकें. समय निर्माण में सबसे अहम चीज है. समय सबसे बड़ी पूंजी है. सबसे बड़ी समस्‍या यह है कि सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही है. 

एसोसिएशन ऑफ कंसल्टिंग सिविल इंजीनियर मुंबई की ओर से आयोजित कार्यक्रम NATCON 2022 को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीकी या संसाधनों से अधिक महत्‍वपूर्ण समय है. गडकरी के इन शब्‍दों और पीएम नरेंद्र मोदी की कुछ दिनों पहले किए गए उस कमेंट में विभिन्‍नता देखने में आई है जिसमें पीएम ने "अमृत काल" या स्‍वर्ण युग के बड़े मील के पत्‍थरों को पार करने में सरकार की कामयाबी का जिक्र किया था. 

हालांकि बीजेपी के नेताओं का कहना है कि गडकरी के यह शब्‍द किसी सरकार विशेष के लिए नहीं बल्कि सामान्‍य तौर पर सरकारों के लिए कहे गए हैं.गौरतलब है कि वर्ष 2024 के आम चुनाव सहित आने वाले चुनावों को ध्‍यान में रखते हुए पिछले सप्‍ताह  बीजेपी संसदीय बोर्ड का नए सिरे से गठन किया गया है, इसमें गडकरी को स्‍थान नहीं दिया गया है.गडकरी का इस महत्‍वपूर्ण समिति से बाहर होना आश्‍चर्यजनक है. वे नरेंद्र मोदी कैबिनेट के वरिष्‍ठ मंत्री हैं, वे बीजेपी अध्‍यक्ष की जिम्‍मेदारी भी संभाल चुके हैं. आमतौर पर पार्टी, अपने पूर्व अध्‍यक्ष को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करती है. एक अन्‍य अहम बात यह है कि गडकरी, बीजेपी की वैचारिक संस्‍था राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS)के करीबी हैं.  

बता दें, कुछ समय पहले नागपुर में एक कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा था कि उनका अकसर राजनीति छोड़ने का मन करता है क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि जिंदगी में करने के लिए बहुत कुछ है. समाजसेवी गिरीश गांधी को सम्‍मानित करने के लिए आयोजित समारोह में गडकरी ने कहा था, "कई बार मुझे लगता है कि मुझे राजनीति छोड़ देनी चाहिए. राजनीति के अलावा भी जिंदगी में करने के लिए बहुत कुछ है." केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री गडकरी ने कहा कि उनका मानना है कि राजनीति, सामाजिक बदलाव के लिए है लेकिन अब यह सत्‍ता में बने रहने का जरिया अधिक बन गई है. 

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नालंदा के एक अस्पताल में शवों के लिए स्ट्रेचर भी मयस्सर नहीं

नालंदा : 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र नालंदा के एक अस्पताल में बुनियादी सुविधा भी मयस्सर नहीं हो रहा है. हालात इतने दयनीय है कि परिजनों को लाश को अपने हाथों पर उठाकर ले जाना पड़ता है. हैरानी की बात तो यह है कि नालंदा का यह एकमात्र आईएसओ प्रमाणित अस्पताल है औऱ इस अस्पताल में शवों को इधर –उधर ले जाने के लिए स्ट्रेचर भी उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं.
पिछले दिनों सबेरे सबेरे नदी में एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई. घटना के संबंध में मृतक के परिजन ने बताया कि युवक शौच के लिए खेत गया था. उसी दौरान नदी में पैर फिसल जाने के कारण डूबने से उसकी मौत हो गई. मौत के बाद पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल भेज दिया, मगर सदर अस्पताल में मानवता को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई.
पुलिस के द्वारा शव को निजी वाहन के द्वारा पोस्टमार्टम के लिए भेज तो दिया गया मगर पोस्टमार्टम कक्ष से करीब दो सौ मीटर पहले ही गाड़ी को रोक दिया गया था. वहां से मृतक के भाई और बहनोई खुद हाथो पर शव को उठाकर पोस्टमार्टम रूम तक ले गए. वहां मौजूद सिपाही और अस्पताल के कुछ कर्मी ने कोई मदद नहीं की.
मृतक के भाई ने कहा कि स्ट्रेचर न मिलने की वजह से उनलोगों को परेशानी उठानी पड़ी. इश मुद्दे पर अस्पताल के अधिकारी ने बोलने से इंकार कर दिया.  
स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था ऐसी है कि लोगों को स्ट्रैचर जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पा रही है. 

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बिलकिस बानो केस में सजा सुनाने वाले पूर्व जज ने दोषियों की रिहाई पर उठाए सवाल

बॉम्‍बे हाईकोर्ट के जज के पद से रिटायर हुए जस्टिस यूडी साल्‍वी ने कहा, "जिसने भी यह फैसला लिया, उसे इस पर पुनर्विचार करना चाहिए

मुंबई : : 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और उसके परिवार के सात सदस्‍यों की हत्‍या के 11 दोषियों को रिहा नहीं किया जाना चाहिए था. 14 साल पहले इन लोगों दोषी ठहराने वाले जज ने यह बात कही है. उन्‍होंने एक विचारधारा के लोगों की ओर से दोषियों के मिठाई और फूलमालाओं से स्‍वागत की भी आलोचना की. बॉम्‍बे हाईकोर्ट के जज के पद से रिटायर हुए जस्टिस यूडी साल्‍वी ने कहा, "जिसमें भी यह फैसला लिया, उसे इस पर पुनर्विचार करना चाहिए. मैं बस इतना ही कह सकता हूं." उन्‍होंने कहा, "यह मामला हर प्रक्रिया से गुजरा और हम सभी जानते हैं कि इन 11 दोषियों को तमाम सबूतों के बाद उम्रकैद की सजा मिली थी. अब सरकार ने बाद में क्‍या सोचा, यह एक सवाल है.

जस्टिस साल्‍वी ने कहा, "सरकार के पास 'माफी' देने की शक्ति है लेकिन कोई भी निर्णय लेने के पहले उसे हर पहलू पर सोचना चाहिए अन्‍यथा यह सही नहीं है. मैं नहीं जानता कि उन्‍होंने इस प्रक्रिया को अपनाया है या नहीं. "उन्‍होंने कहा, "क्‍या उन्‍होंने उस जज से पूछा जिसके अधीन केस सुना गया? मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने इस बारे में कुछ नहीं सुना. इस केस की सीबीआई द्वारा जांच की गई. ऐसे मामलों में राज्‍य सरकार को केंद्र सरकार से भी सलाह लेने की जरूरत होती है. क्‍या उन्‍होंने ऐसा किया? मुझे कोई जानकारी नहीं है. यदि उन्‍होंने किया तो केंद्र सरकार ने क्‍या कहा?"

जज ने रिहाई के बाद दोषियों के सत्‍ताधारी बीजेपी की ओर से जुड़े ग्रुप द्वारा मिठाई और फूलमालाओं से स्‍वागत की भी आलोचना की. उन्‍होंने बीजेपी के एक विधायक के इस बयान की भी आलोचना कि ये लोग अच्‍छे संस्‍कार वाले ब्राह्मण थे. जस्टिस साल्‍वी ने कहा, "इन 11 दोषियों का स्‍वागत करना सही नहीं है. कुछ लोग सोचते हैं कि यह हिंदुत्‍व का हिस्‍सा है या उन्‍होंने हिंदू के तौर पर ऐसा किया. यह गलत है...कुछ कह रहे हैं कि वे ब्राह्माण हैं, यह कहना सही नहीं है.

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सपना चौधरी की गिरफ्तारी का वारंट जारी

लखनऊ। डांस का कार्यक्रम रद्द करने व टिकट का पैसा भी वापस नहीं करने के एक मामले में गैरहाजिर रहने पर अदालत ने मशहूर डांसर सपना चौधरी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। एसीजेएम शांतनु त्यागी ने मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को नियत की है। 10 मई को इस मामले में अभियुक्ता सपना चौधरी ने आत्मसमर्पण किया था व अंतरिम जमानत की गुहार लगाई थी। अदालत ने अंतरिम जमानत मंजूर कर लिया था। फिर आठ जून को सपना चौधरी की नियमित जमानत अर्जी भी सर्शत मंजूर हुई थी। सोमवार को इस मामले में सपना समेत अन्य अभियुक्तों पर आरोप तय करने के मसले पर सुनवसपना की तरफ से हाजिरी माफी की अर्जी भी नहीं दी गई, जबकि अन्य अभियुक्तों की ओर से हाजिरी माफी की अर्जी दी गई थी। एक मई, 2019 को इस मामले में सपना चौधरी के खिलाफ किसी व्यक्ति के विश्वास का हनन व धोखाधड़ी करने के मामले में आरोप पत्र दाखिल हुआ था। वहीं, 20 जनवरी, 2019 को इस कार्यक्रम के आयोजक जुनैद अहमद, इवाद अली, अमित पांडेय व रत्नाकर उपाध्याय के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था   

ये है मामला : उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 13 अक्टूबर, 2018 को स्मृति उपवन में दोपहर तीन बजे से रात्रि 10 बजे तक सपना समेत अन्य कलाकारों का कार्यक्रम था। इसके लिए प्रति व्यक्ति तीन सौ रुपये में आनलाइन व आफलाइन टिकट बेचा गया था। इस कार्यक्रम को देखने के लिए हजारों टिकट धारक मौजूद थे, लेकिन रात 10 बजे तक सपना चौधरी नहीं आईं। इसपर लोगों ने हंगामा कर दिया। इसके बाद टिकट धारकों का पैसा भी वापस नहीं किया गया। 14 अक्टूबर, 2018 को इस मामले की नामजद एफआइआर दारोगा फिरोज खान ने थाना आशियाना में दर्ज कराई थी।



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ओडिशा समेत देश के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति चिंताजनक, हिमाचल में बारिश से 32 की मौत

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार को लगातार तीसरे दिन भारी बारिश जारी रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अभी भी कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। पिछले एक-दो दिन से देश के कई अन्य राज्यों में भी बारिश का दौर जारी है। भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में 32 लोगों की मौत हो गई है। 

 भारी बारिश के चलते ओडिशा में सोमवार को सैकड़ों गांव पानी में डूबे रहे। इस बीच मध्य प्रदेश के भोपाल और जबलपुर समेत कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश के चलते सोमवार को स्कूल बंद कर दिए गए।

मौसम विभाग के अनुसार बारिश का दौर एमपी, हिमाचल, ओडिशा समेत कई राज्यों में जारी है। इसके चलते कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है।ओडिशा में बाढ़ से लगभग आठ लाख लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। बारिश से बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हुई है। सड़क के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। राज्य ने अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 120,000 लोगों को निकाला है। हालांकि, उत्तरी जिलों में बाढ़ की स्थिति सबसे खराब बनी हुई है, क्योंकि सुबरनेखा नदी में निचले इलाकों में पानी भर गया है और 100 से अधिक गांवों में डूब गए हैं। 

बालासोर और मयूरभंज जिलों के अधिकारियों ने निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर निकासी अभियान शुरू किया है। सुवर्णरेखा और बैतरनी में पानी कई स्थानों पर खतरे के निशान को पार कर गया है। सुवर्णरेखा नदी के अलावा, बालासोर जिला भी बुढाबलंग और जलाका नदी के बाढ़ के पानी से प्रभावित है।

बालासोर के जिला कलेक्टर दत्तात्रेय भाऊसाहेब शिंदे ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि बालासोर जिले के 83 ग्राम पंचायतों के लगभग 156 गाँव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। प्रशासन ने सोमवार दोपहर तक 40,000 लोगों को निकाला है और उन्हें 227 अस्थायी आश्रयों में रखा गया है। लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से निकाले जाने की प्रक्रिया अभी भी चल रही है। इसके साथ ही आईएमडी ने मंगलवार को उत्तरी ओडिशा के जिलों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की है।

हिमाचल प्रदेश में 32 हुई मरने वालों की संख्या, 12 घायल 

हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात से अचानक आई बाढ़ और बारिश के कारण हुए भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। लापता हुए छह लोगों का अब भी पता नहीं चल पाया है। इस आपदा में 12 लोग घायल हो गए हैं। मंडी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित है। इसके बाद कांगड़ा और चंबा जिला हैं।

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नीतीश कैबिनेट में विभागों का बंटवारा- तेजस्‍वी को मिला स्‍वास्‍थ्‍य, तेज प्रताप बने वन व पर्यावरण मंत्री

पटना: बिहार की महागठबंधन सरकार  का मंत्रिमंडल विस्तार मंगलवार को राजभवन में संपन्‍न हुआ। इसके लिए 31 मंत्रियों की लिस्ट देर रात ही फाइनल  हो चुकी थी। मंगलवार को लिस्‍ट में शामिल मंत्रियों ने समूहों में शपथ ली। शपथ लेने वाले मंत्रियों में लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव शामिल हैं। शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची में उपेंद्र कुशवाहा का नाम नहीं था। शपथ ग्रहण के बाद मंत्रियों में विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया है। तेज प्रताप यादव वन व पर्यावरण मंत्री बनाए गए हैं। महागठबंधन की पिछली सरकार में तेज प्रताप के पास रहा स्‍वास्‍थ्‍य विभाग इस बार उपमुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी यादव के पास है। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (VM Nitish Kumar) ने गृह विभाग अपने पास रखा है। शपथ लेने वाले 31 मंत्रियों में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के 11, राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के 16, कांग्रेस (Congress) के दो तथा हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (HAM) के एक मंत्री का फार्मूला बनाया गया। एक निर्दलीय को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई। छूट गए कई बड़े चेहरों को अगले मंत्रिमंडल विस्‍तार में जगह दी जानी है। 

नीतीश के पास है गृह विभाग, आरजेडी से स्‍पीकर

शपथ ग्रहण के पहले आरजेडी व जेडीयू के बीच गृह विभाग को लेकर फंसा पेच सुलझा लिया गया। हमेशा की तरह गृह विभाग मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पास ही रखा है। नीतीश कुमार को गृह के अलावा सामान्‍य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन तथा वैसे सभी विभाग, जाे किसी को आवंटित नहीं हैं, मिले हैं।बदले में आरजेडी के खाते में विधानसभा अध्‍यक्ष का पद गया है। सूत्र बताते हैं कि अवध बिहारी चौधरी महागठबंधन सरकार में विधानसभा अध्‍यक्ष बनाए जाएंगे। बताया जा रहा है कि आरजेडी के चंद्रशेखर शिक्षा मंत्री बनाए गए हैं। 

तेज प्रताप को वन-पर्यावरण, तेजस्‍वी को स्‍वास्‍थ्‍य

मंत्रिमंडल में आरजेडी कोटे से लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री बनाया जाने की बात की जा रही थी, लेकिन उन्‍हें वन व पर्यावरण मंत्री बनाया गया है। महागठबंधन की पिछली सरकार में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग तेज प्रताप के पास था, जो इस बार तेजस्‍वी के पास गया है। तेजस्‍वी यादव को स्‍वास्‍थ्‍य, पथ निर्माण, नगर विकास तथा ग्रामीण कार्य के चार विभाग दिए गए हैं।

शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों को मिले ये विभाग

राष्‍ट्रीय जनता दल

  1. तेज प्रताप यादव: वन-पर्यावरण
  2. आलोक मेहता : राजस्‍व एवं भूमि सुधार
  3. अनिता देवी: पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग कल्‍याण
  4. सुरेंद्र यादव: सहकारिता
  5. चंद्रशेखर: शिक्षा
  6. ललित यादव: लोक स्‍वास्‍थ्‍य अभियंत्रण
  7. जीतेंद्र राय: कला-संस्‍कृति व युवा
  8. रामानंद यादव: खान एवं भूतत्‍व
  9. सुधाकर सिंह: कृषि
  10. सर्वजीत कुमार: पर्यटन
  11. सुरेंद्र राम: श्रम संसाधन
  12. शमीम अहमद: गन्‍ना उद्योग
  13. शहनवाज: बापदा प्रबंधन
  14. इसरायल मंसूरी: सूचना-प्रावैधिकी
  15. कार्तिक सिंह: विधि मंत्री
  16. समीर महासेठ: उद्योग

जनता दल यूनाइटेड: 

  1. विजय चौधरी: वित्‍त, वाणिज्‍य एवं संसदीय कार्य
  2. बिजेंद्र यादव: ऊर्जा, योजना
  3. अशोक चौधरी: भवन निर्माण
  4. श्रवण कुमार: ग्रामीण विकास
  5. संजय झा: जल संसाधन, सूचना व जनसंपर्क
  6. मदन सहनी: समाज कल्‍याण
  7. शीला कुमारी: परिवहन
  8. लेशी सिंह: खाद्य व उपभोक्‍ता संरक्षण
  9. जमा खान: अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण
  10. जयंत राज: लघु जल संसाधन
  11. सुनील कुमार: निबंधन, उत्‍पाद व मद्य निषेध
  12. कांग्रेस:
    1. मुरारी प्रसाद गौतम: पंचायती राज
    2. अफाक आलम: पशु एवं मत्‍स्‍य संसाधन
  13. हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा:

    1. संतोष कुमार सुमन: अनुसूचित जाति व जनजाति कल्‍याण
  14. निर्दलीय:

    1. सुमित कुमार सिंह: विज्ञान एवं प्रावैधिकी


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मुसीबत में की मदद

एक बार मैं अपनी मम्मी के साथ लोकल ट्रेन से यात्रा कर रहा था। ट्रेन में काफी भीड़ थी, लेकिन किसी तरह एक बोगी में दरवाजे के पास ही सीट मिल गई। तभी मैंने देखा कि एक गरीब लड़का टोकरी में केले लेकर मेरी बोगी की तरफ आ रहा है। अचानक ट्रेन चल दी और उसने दौड़कर सबसे पहले अपनी टोकरी मेरी बोगी के दरवाजे पर रख दी। लेकिन ट्रेन स्पीड पकड़ चुकी और सामने टोकरी होने की वजह से केले बेचने वाला लड़का मेरी बोगी में चढ़ नहीं पाया। वह शायद किसी और बोगी में चढ़ गया था।

 

उसकी केले से भरी टोकरी दरवाजे के पास ही पड़ी थी। इस बीच मेरी बोगी का एक लड़का बिना मालिक के टोकरी देख, उसमें से केले निकालकर खाने लगा। वह ऐसे खुश होकर जल्दी-जल्दी केले खा रहा था, जैसे उसकी लॉटरी लग गई हो। उसको देख उसके कई और दोस्त केलों पर टूट पड़े। ट्रेन के अगले स्टॉपेज पर रुकते-रुकते वे लोग टोकरी के आठ-दस दर्जन केले चट कर चुके थे। इसके बाद वे वहां से हट गए। ट्रेन रुकने पर टोकरी का मालिक लड़का दौड़कर मेरी बोगी में आया।

 

अपनी टोकरी की हालत देख वह सन्न रह गया और फूट-फूट कर रोने लगा। वह किसी पर इल्जाम भी नहीं लगा सकता था, क्योंकि उसने किसी को केले खाते नहीं देखा था। ट्रेन चल चुकी थी। वह

 

बेहद गरीब लड़का था और इतना नुकसान उसके लए बड़ी बात थी, शायद इसीलिए रो रहा था। मुझे उस पर काफी तरस आया। उन लड़कों पर गुस्सा भी आ रहा था, जिन्होंने उसके केले खाए थे। मेरे दिमाग

 

में ख्याल आया कि क्यों न केले बेचने वाले लड़के की मदद की जाए। मैंने मम्मी से यह बात बताई और उनसे दस रुपये मांगे तो वे पहले तो थोड़ा हिचकीं, लेकिन फिर उन्होंने पैसे दे दिए। मैंने और यात्रियों को

 

यह बात बताई और सबको इसके लिए राजी करने की कोशिश की कि गरीब लड़के की मदद करनी चाहिए। किसी ने दस रुपये दिए तो किसी ने बीस, यहां तक कि केले खाने वाले लड़कों में से भी कुछ ने

 

शर्मिंदा होकर दस-दस के नोट निकाल दिए।

 

मेरे पास कुल मिलाकर दो सौ रुपये जमा हो गए थे। मैंने जाकर उस गरीब लड़के को दिए तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। उसने मुझे बहुत धन्यवाद दिया। मम्मी सहित अन्य सभी यात्रियों ने मुझे शाबाशी दी। सच है दोस्तो, मुसीबत में फंसे व्यक्ति की मदद करने की खुशी ही अलग होती है...

 

(अमन कुमार, सरिस्ताबाद, पटना)

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प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ी कहानियां साझा करने वाला पोर्टल शुरू

नई दिल्ली, 26 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी प्रेरक कहानियों को एकसाथ पेश करने के लिए एक पोर्टल ‘मोदीस्टोरी डॉट इन’ का शुभारंभ किया गया है। मोदी के दशकों लंबे जीवन सफर में उनके संपर्क में आये लोगों के अनुभवों के आधार पर इन कहानियों को तैयार किया गया है।

 

प्रधानमंत्री के एक सहयात्री के हवाले से पोर्टल ने ट्वीट किया कि, ‘‘पोर्टल ‘मोदी स्टोरी’ की घोषणा एक स्वयंसेवी पहल है, जिसके तहत नरेंद्र मोदी के जीवन से जुड़े रोचक कहानियों को एक साथ लाया जायेगा।’’ पोर्टल की ओर से यह भी ट्वीट किया गया कि इस पोर्टल का उद्घाटन महात्मा गांधी की पोती सुमित्रा गांधी कुलकर्णी ने किया।

 

इस वेबसाइट पर पंजाब से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता मनोरंजन कालिया ने मोदी से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। मोदी ने पार्टी पदाधिकारी के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा के शुरुआती दिनों में इस राज्य में काम किया था। इसके अलावा गुजरात के वडनगर में प्रधानमंत्री के स्कूल के प्रधानाध्यापक रासबिहारी मानियार और शारदा प्रजापति ने भी मोदी से जुड़े अनुभवों को साझा किया। मोदी 1990 के दशक में अपने दौरों के दौरान प्रजापति के आवास में अक्सर ठहरा करते थे।

 

इस पोर्टल पर ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंदन ने भी मोदी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं। कालिया ने चुनाव प्रचार मुहिम के दौरान मोदी की बेहतरीन समझ का जिक्र किया और प्रचार के दौरान बच्चों को वितरित करने के लिए टॉफी रखने की प्रधानमंत्री की सलाह के बारे में बताया। मानियार ने कहा कि मोदी देश के सशस्त्र बलों के लिए गहरी भावनाएं रखते हैं और युवा छात्र के रूप में वह एक सैनिक स्कूल का आवेदन प्रपत्र लेकर उनके पास आए थे।

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अखिलेश और मायावती ने दी योगी सरकार को बधाई

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बधाई दी है। दोनो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने योगी सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन और जनता की सेवा करने की सलाह भी दी है। योगी सरकार के शुक्रवार को संपन्न शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किये जाने के बावजूद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी,महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव,बसपा अध्यक्ष मायावती नहीं पहुंचे थे। हालांकि अखिलेश और मायावती ने ट्विटर के जरिये नई सरकार को बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित की हैं। सुश्री मायावती ने शनिवार को ट्वीट किया, “यूपी में नई भाजपा सरकार के गठन की बधाई तथा यह सरकार संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों एवं आदर्शों के साथ कार्य करे।” इससे पहले श्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया था, “नई सरकार को कि वो सपा के बनाए स्टेडियम में शपथ ले रही है। शपथ सिर्फ़ सरकार बनाने की नहीं, जनता की सच्ची सेवा की भी लेनी चाहिए।” लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में योगी सरकार के 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा,केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह,रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अलावा 12 राज्यों के मुख्यमंत्री एवं पांच राज्यों के उपमुख्यमंत्री शामिल हुये थे।

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अखिलेश को सपा विधायक दल का नेता चुना गया

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव को विधानसभा में पार्टी के विधायक दल और विधानमंडल दल का नेता चुना गया है। यहां स्थित सपा मुख्यालय में शनिवार को हुयी पार्टी विधायक दल की बैठक में अखिलेश को सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से नेता चुन लिया। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने विधायक दल की बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में अखिलेश को सर्वसम्मति से पार्टी के विधानमंडल दल का नेता भी चुना गया। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में सपा के 111 विधायक जीते हैं। इस प्रकार विधानसभा में दूसरा सबसे बड़ा दल होने के नाते सपा मुख्य विपक्षी पार्टी होगी। ऐसे में अखिलेश का नेता प्रतिपक्ष बनना लगभग तय है। विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश ने आजमगढ़ से लोकसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया था। उत्तम ने बताया कि सपा के वरिष्ठ विधायक अवधेश प्रसाद ने अखिलेश को विधायक दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा और विधायक आलम बदी ने उसका समर्थन किया। इसके अलावा विधायक लालजी वर्मा ने अखिलेश को विधानमंडल दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा। सपा के चुनाव चिन्ह पर विधायक बने प्रसपा नेता शिवपाल सिंह यादव को बैठक में नहीं बुलाये जाने के बारे में उत्तम ने कहा कि आज केवल सपा के विधायकों को बुलाया गया था। बैठक में सहयोगी दलों के किसी विधायक को नहीं बुलाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया, “सहयोगी दलों के जो विधायक सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीते उन्हें और सहयोगी दलाें के विधायकाें की बैठक 28 मार्च को बुलायी गयी है, चाहे वे शिवपाल यादव हों, पल्लवी पटेल या ओपी राजभर हों, सब को 28 मार्च को बुलाया जाएगा।”

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लगातार दूसरी बार जनादेश हासिल करने वाले पहले मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश के चुनावी इतिहास में चार दशक बाद योगी आदित्यनाथ ने नया अध्याय जोड़ा है। इस अवधि में वह लगातार दूसरी बार जनादेश हासिल करने वाले पहले मुख्यमंत्री है। चुनावी समर में लोकप्रियता या समीकरण के बल पर एक बार सफलता मिल सकती है। लेकिन दूसरी बार की सफलता नेतृत्व की नेकनीयत व विश्वसनीयता पर आधारित होती है। तब नेतृत्व के यह दो गुण कारक बन जाते हैं। इस कारण चालीस वर्षों के दौरान किसी मुख्यमंत्री को दोबारा जनादेश नहीं मिला।

 

योगी आदित्यनाथ अपनी नेकनीयत व विश्वसनीयता को कायम रखने में सफल रहे। केंद्र में नरेंद्र मोदी को भी इस आधार पर सफलता मिलती रही है। गुजरात के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी यह विशेषता कायम रखी। इस लिहाज से नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ एक ही धरातल पर है। दोनों परिवारवाद की राजनीति से दूर हैं। समाज सेवा में पूरी निष्ठा व ईमानदारी से समर्पित रहते हैं।

 

विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोरोना की तीसरी लहर को लेकर संशय था। उस समय योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार की जगह कोरोना आपदा प्रबंधन को वरीयता दी। जनपदों की यात्रा कर रहे थे। सभी जगह कोरोना चिकित्सा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे। आपदा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था के बाद ही उन्होंने चुनाव प्रचार की तरफ ध्यान दिया। इसी प्रकार चुनाव परिणाम आने के बाद वह जन कल्याण कार्यों में सक्रिय हो गए। उन्होंने बारह से चौदह वर्ष आयु के बच्चों के वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान के सुचारू संचालन हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया।

 

कोरोना आपदा प्रबंधन में योगी मॉडल की प्रशंसा दुनिया में रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसकी सराहना की थी। इस पूरी अवधि में योगी आदित्यनाथ ने कई बार प्रदेश की यात्राएं की थी। वह अनवरत प्रबंधन का जायजा लेते रहे। वैक्सिनेशन के संबन्ध में भी केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया गया। योगी आदित्यनाथ वैक्सिनेशन केंद्रों में पहुंच कर लोगों का उत्साह वर्धन करते रहे। इसके चलते उत्तर प्रदेश ने वैक्सिनेशन का रिकार्ड कायम कर दिया। यह यात्रा अगले चरण के रूप में जारी है।

 

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सर्वाधिक टेस्ट व सर्वाधिक वैक्सीनेशन करने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। राज्य में अब तक करीब तीस करोड़ वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। प्रदेश में वैक्सीन की पहली डोज के शत प्रतिशत से अधिक के लक्ष्य को प्राप्त किया जा चुका है। अब तक एक सौ तीन प्रतिशत से ऊपर वैक्सीन की प्रथम डोज पूरे प्रदेश में उपलब्ध करवाई जा चुकी है। सेकेण्ड डोज भी प्रदेश में बयासी प्रतिशत से अधिक लोगों ने ले ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बारह से चौदह आयु वर्ग के बच्चों के कोविड टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय में किया।

 

बारह से चौदह साल के बच्चों को प्रदेश के तीन सौ केन्द्रों में यह वैक्सीन उपलब्ध करवाई जा रही है। सभी के लिए प्रर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देश में चले भारत के कोरोना प्रबन्धन की दुनिया में सराहना हुई है। यहां तक कि अन्य देशों में भी भारत के कोरोना प्रबंधन मॉडल को अपनाया गया है। कोरोना के खिलाफ लागू किए गये फोर टी फॉर्मूले के तहत ट्रेस, टेस्ट, ट्रीट और टीका, इन सभी में उत्तर प्रदेश अग्रणी है।

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धोखाधड़ी मामले में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और अन्य के खिलाफ वारंट

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की एक अदालत ने बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और अन्य के खिलाफ वर्ष 2019 के धोखाधड़ी के एक मामले में शनिवार को वारंट जारी किया। उन पर नोटिस के बावजूद अदालत में पेश नहीं होने का आरोप है।

 

जिले के शिवपुरी निवासी इवेंट मैनेजर प्रमोद शर्मा ने 22 फरवरी 2019 को कटघर थाने में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा, अभिषेक सिन्हा, एडगर साकिया, मालविका पंजाबी और घुमिल ठक्कर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि वादी ने दिल्ली में आयोजित एक अवार्ड शो में सोनाक्षी सिन्हा को बुलाने के लिए अनुबंध किया था। उन्होंने सारी रकम अदा कर दी थी, लेकिन वह कार्यक्रम में नहीं पहुंचीं।

 

प्रमोद शर्मा के मुताबिक, उन्होंने सारा भुगतान एक्ससीड एंटरटेनमेंट के मालिक अभिषेक सिन्हा के जरिए सोनाक्षी सिन्हा को किया था। कुल 29.92 लाख रुपये का पेमेंट किश्तों में किया गया था, लेकिन अभिनेत्री सोनाक्षी इस कार्यक्रम में नहीं आईं थीं। मामले में प्रमोद शर्मा ने अदालत की शरण ली थी। अदालत ने मुरादाबाद के कटघर थाना पुलिस को सोनाक्षी सिन्हा और उनके साथियों के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।

 

आरोपितों के खिलाफ 20 मई 2020 को चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी गई थी। पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने में लगभग 455 दिन लग गए थे। वहीं अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और अन्य लोगों ने हाई कोर्ट की शरण ली, जो लंबित है। सोनाक्षी सिन्हा और अन्य आरोपितों को जिले के सीजेएम कोर्ट ने पेश होने के लिए कई बार नोटिस जारी किया, लेकिन वह और उनके साथी पेश नहीं हुए। इसके चलते शनिवार को अदालत ने सोनाक्षी और अन्य लोगों के खिलाफ वारंट जारी किया।

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गुजरात में अपने ही नेताओं पर बरसे राहुल, बोले- एसी में बैठने वाले 'कौरवों' की सूची बनाएं

द्वारका/नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को गुजरात में अपनी पार्टी के नेताओं से पार्टी में मौजूद उन ''कौरवों'' की एक सूची तैयार करने के लिए कहा, जो सिर्फ ''अपने एसी कार्यालयों में बैठकर बातों के अलावा कुछ नहीं करते और दूसरों को परेशान करने में लगे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अंतत: भाजपा में चले जाते हैं। गांधी ने केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि उसके पास केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पुलिस और गुंडे हैं, लेकिन अंत में केवल सत्य मायने रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात ''भाजपा की राजनीति'' के कारण त्रस्त है।

 

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के पास राज्य में अगला विधानसभा चुनाव जीतने का एक अवसर है, लेकिन पार्टी लोगों को यह स्पष्ट दृष्टिकोण देने में विफल है कि सत्ता में आने के बाद वह क्या करने का इरादा रखती है। गांधी ने गुजरात कांग्रेस द्वारा आयोजित चिंतन शिविर के दूसरे दिन यहां पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। चिंतन शिविर का आयोजन इस साल दिसंबर में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार करने पर चर्चा के लिए किया गया है। कार्यक्रम स्थल पर आने से पहले, उन्होंने यहां द्वारकाधीश मंदिर पहुंचकर भगवान कृष्ण की पूजा की।

 

कांग्रेस नेता ने कहा, “उनके पास सीबीआई, ईडी, मीडिया, पुलिस, गुंडे और हर दिन के लिये नए-नए परिधान हैं। लेकिन वे चीजें बिल्कुल भी मायने नहीं रखतीं। गुजरात हमें सिखाता है कि सत्य क्या है। गांधी जी को देखिए। क्या उनके पास कभी अच्छे कपड़े थे, ईडी या सीबीआई थी? नहीं, क्योंकि सत्य सदैव साधारण होता है।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझना चाहिए कि वे पहले ही गुजरात विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। आप इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। गुजरात के लोग आपको बड़ी उम्मीदों से देख रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस को जितना नुकसान पहुंचाया है, उससे ज्यादा गुजरात के लोगों को पहुंचाया है।”

 

कांग्रेस के पुनरुद्धार और यहां आगामी चुनाव जीतने के लिए एक साहसिक दृष्टिकोण साझा करते हुए, गांधी ने उन नेताओं से छुटकारा पाने का सुझाव दिया जो ''वातानुकूलित कमरों में बैठते हैं और दूसरों को परेशान करते हैं।'' उन्होंने कहा, ''(लोगों तक दृष्टिकोण पहुंचाने को लेकर) असमंजस क्यों है? क्योंकि हमारे पास दो तरह के नेता हैं। एक वे जो जमीन पर रहते हैं और लड़ाई लड़ते है। दूसरे वे जो अपने एसी कार्यालयों में बैठे रहते हैं और बात करने व भाषण देने के अलावा कुछ नहीं करते। ऐसे नेताओं की सूची तैयार करें जो दूसरों को परेशान करते हैं। वे कौरव हैं। भाजपा उन्हें अपने पाले में ले जाएगी।''

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि गुजरात में अगले चुनाव में ''भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए'' उन्हें केवल पांच सक्षम नेताओं की जरूरत है। साल 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले गुजरात के अपने दौरे को याद करते हुए गांधी ने कहा कि स्थानीय नेतृत्व को शुरुआत में चुनाव में बहुत सीटें जीतने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की राज्य इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे कहा था कि कांग्रेस 182 में से केवल 40-45 सीटें जीतेगी।

 

राहुल ने कहा कहा, ''लेकिन अंत में हम चुनाव जीतने से सिर्फ सात सीटों से पीछे रह गए। मैं इस बार भी यही स्थिति देख रहा हूं। मैं आपको बता रहा हूं कि आप पहले ही यह चुनाव जीत चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा हमेशा ''गुजरात मॉडल'' का दावा करती है, लेकिन राज्य में कोविड-19 के कारण लगभग तीन लाख लोगों की जान चली गई और अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर व वेंटिलेटर की कमी के कारण लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।

 

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा, ''गुजरात भाजपा की राजनीति के कारण त्रस्त है। बेरोजगारी यहां एक प्रमुख मुद्दा है। छोटे व्यवसायों को कभी सबसे बड़ी ताकत के तौर पर गुजरात की रीढ़ माना जाता था। लेकिन प्रधानमंभी मोदी ने जीएसटी, नोटबंदी और महामारी के दौरान अपने कार्यों से इन्हें नष्ट कर दिया।'' उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अवसर है और लोग पार्टी को एक विकल्प के रूप में देखते हैं। पार्टी लोगों के सामने यह स्पष्ट दृष्टिकोण देने में विफल रही है कि ''कांग्रेस सत्ता में आने पर क्या करेगी, हम कैसे काम करेंगे और कौन से नेता करेंगे।''

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सीएम जयराम ठाकुर बोले, यूक्रेन से आने वालों को घर तक फ्री में पहुंचाएगी हिमाचल सरकार

शिमला। यूक्रेन से स्वदेश लौटने वाले सभी हिमाचल के छात्रों व लोगों को हिमाचल सरकार मुफ्त में घर पहुंचाएगी। इसके लिए दिल्ली स्थित आवासीय आयुक्त कार्यालय की ओर से व्यवस्था की जाएगी। यह जानकारी विधानसभा में सीएम जयराम ठाकुर ने दी। उन्होंने कहा कि इसके लिए एचआरटीसी और एचपीटीडीसी की बसों का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूक्रेन से दो हवाई जहाज हिमाचल के युवाओं को लेकर दिल्ली पहुंचने वाले हैं। इन हवाई जहाजों में दूसरे राज्यों के लोग भी शामिल हैं। सरकार के पास यूक्रेन में कितने छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, यह आंकड़ा उपलब्ध नहीं हैं। अभी तक 130 युवाओं की जानकारी उपलब्ध है। 

 

बंकर में रह रहे 120 भारतीय छात्र : यूक्रेन में फंसे सुंदरनगर के महादेव निवासी रोहित ने बताया कि वीनीतिशिया यूनिवर्सिटी में उनको बंकर में रहने को कहा है। लगभग 120 भारतीय उनके बंकर में है। सुबह खाना होस्टल रूम में बनाने के बाद वापस बंकर में आ जाते हैं। यूनिवर्सिटी दो सप्ताह के लिए बंद कर दी है। जिस एजेंसी के माध्यम से वह आए हैं, उनका एजेंट भी हमारे साथ है, लेकिन उनको कब निकाला जाना है, इसके बारे में कुछ नहीं बताया गया है। करीब 400 किलोमीटर सफर के बाद वह रोमानिया पहुंचेंगे, लेकिन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है।

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यूक्रेन के विदेश मंत्री ने जयशंकर को फोन किया, स्थिति पर चर्चा की

नई दिल्ली जाने आलम (जानू चौधरी)। यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में महत्वपूर्ण मतदान से पहले इस पूर्वी यूरोपीय देश के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से फोन पर बात की और यूक्रेन की वर्तमान स्थिति को लेकर अपना आकलन साझा किया।

 

जयशंकर ने कहा कि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत समाधान के लिए कूटनीति और बातचीत का समर्थन करता है।

 

विदेश मंत्री जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा का कॉल आया । उन्होंने वर्तमान स्थिति को लेकर अपना आकलन साझा किया । ’’

 

जयशंकर ने कहा, ‘‘ मैंने इस बात पर जोर दिया कि भारत समाधान निकालने के लिए कूटनीति और बातचीत का समर्थन करता है ।’’

 

उन्होंने कहा कि छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की स्थिति के बारे में चर्चा की तथा सुरक्षित निकासी में उनके सहयोग की सराहना की ।

 

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियान एवं पूर्वी यूरोपीय देश में स्थिति बिगड़ने को लेकर शुक्रवार की शाम को मसौदा प्रस्ताव पेश किया जाना निर्धारित है। समझा जाता है कि मसौदा प्रस्ताव में यूक्रेन के खिलाफ रूस के सैन्य अभियान की कड़ी निंदा की जाएगी।

 

इधर, यूक्रेन में बिगड़ती स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से टेलीफोन पर बातचीत की थी और हिंसा को समाप्त करने तथा सभी पक्षों से राजनयिक बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की थी ।

 

वहीं, यूक्रेन संकट पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने बृहस्पतिवार को कहा था, ‘‘मुझे बताया गया है कि इसमें काफी बदलाव होगा। हम इस पर अपना रुख रखने से पहले इसके आकार लेने का इंतजार करेंगे।’’

 

उन्होंने कहा था, ‘‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य होने के नाते और ऐसा देश होने के नाते, जिसका उस क्षेत्र में काफी कुछ दांव पर लगा है, जिसके अनेक नागरिक संवेदनशील क्षेत्रों में हैं, हम सभी संबंधित पक्षों के निकट संपर्क में हैं।’’

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बिरला ने यूक्रेन में फंसे छात्रों के लिए शुरू की हेल्पलाइन

नई दिल्ली जाने आलम (जानू चौधरी)। यूक्रेन में फंसे स्टूडेंट्स की मदद के लिए कोटा समेत प्रदेश और देश पूरी तरह सक्रिय हो गया है. इसी कड़ी में अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का नाम भी जुड़ गया है. खबर के मुताबिक, यूक्रेन में फंसे छात्रों के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का कैंप कार्यालय सक्रिय हो गया है. ओम बिरला ने इन छात्रों के लिए हेल्पलाइन सेंटर बनवाया है. इस हेल्पलाइन सेंटर के नंबर जारी करने के बाद कोटा और राजस्थान के छात्रों को घर वापस लाने को लिए उनकी डिटेल मांगी गई है. साथ ही, राजस्थान के अलावा देश के विभिन्न राज्यों के यूक्रेन में फंसे स्टूडेंट्स की घर वापसी के लिए उनकी डिटेल मांगी गई हैं. फिलहाल, यह कैंप कार्यालय भारतीय दूतावास और इन छात्रों के बीच कड़ी का भी काम कर रहा है. कोटा के शक्तिनगर स्थित कैंप कार्यालय से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के कार्यालय के यूक्रेन संकट के बीच पूरी ताकत से काम कर रहा है. आपको बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर अमेरिका भारत से बात करेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार को कहा कि रूसी सैन्य अभियान के बाद गहराए यूक्रेन संकट पर वह भारत के साथ विचार-विमर्श करेंगे. दरअसल, यूक्रेन संकट पर व्हाइट हाउस में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया था. इस दौरान जब राष्ट्रपति से पूछा गया कि क्या भारत रूसी हमले पर अमेरिका के साथ पूरी तरह खड़ा है? तो इसके जवाब में उन्होंने विचार-विमर्श की बात कही है. गौरतलब है कि रूस की सेना द्वारा यूक्रेन पर मिसाइल से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया है. इसे हमले से यूक्रेन पढ़ाई करने गए हजारों भारतीय बच्चों की जान संकट में आ गई है. हमले के बाद यूक्रेन को नो फ्लाई जोन घोषित कर दिया गया है. इसे वहां फंसे सभी बच्चों की मदद के रास्ते बंद हो गए हैं.

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परिवारवादी सपा बसपा नहीं बल्कि राष्ट्रवादी भाजपा है यूपी की पसंद : शाह

कौशांबी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में परिवादवाद,जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी (सपा),बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस का सफाया तय है और राष्ट्रवाद,विकास और सुशासन की पर्याय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मौजूदा विधानसभा चुनाव में 300 से अधिक सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाने को तैयार है।

सिराथू विधानसभा क्षेत्र में स्थित सौरई पशु बाजार मैदान में आयोजित चुनावी सभा में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के लिए वोट की अपील करते हुये श्री शाह ने कहा कि विधानसभा के चार चरण के चुनाव में सपा बसपा का सूपड़ा साफ हो गया है। भाजपा 300 से अधिक सीट जीतकर दोबारा प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है। उन्होने कहा कि सपा परिवार वादी,जातिवाद एवं तुष्टिकरण को बढ़ावा देने वाली पार्टी है।

उन्होंने कहा कि 2017 के पहले सपा शासनकाल में उत्तर प्रदेश में माफिया बाहुबलियों का बोलबाला था लेकिन भाजपा की सरकार बनते ही अतीक अहमद, आजम खां, मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं को जेल के अंदर भेज दिया गया। उन्होंने लोगों से सवाल किया कि क्या यदि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनी तो क्या यह माफिया जेल के अंदर रहेंगे। उन्होंने कहा योगी सरकार बनते ही चुन-चुन कर माफियाओं, गुंडों को जेल भेजने का काम किया गया। इनके कब्जे से दो हजार करोड़ कीमत की कब्जा की गई गरीबों की जमीन खाली कराकर गरीबों के लिए मकान बनाने का काम शुरू किया गया।

शाह ने कहा अखिलेश यादव एक जाति की पार्टी है जबकि दूसरे एक धर्म के लोग उनके साथ सहयोगी है। सपा के कार्यकाल में चुनिंदा जिलों को छोड़ कर बिजली के दर्शन दुर्लभ थे वहीं भाजपा के शासनकाल में गांव के लोगों को भी बिजली मिल रही हैं। योगी सरकार ने एक लाख 41 हजार गरीब परिवारों के घर में मुफ्त में बिजली के कनेक्शन देने का काम किया।

उन्होंने कहा कि सपा का मतलब है स से संपत्ति और प का अर्थ है परिवारवाद। समाजवादी पार्टी संपति जुटाने वाली पार्टी है। कन्नौज में इत्र व्यवसायी के यहां छापा मारकर करोड़ों रुपए नकदी जब्त की गई। व्यवसाई का रिश्ता समाजवादी पार्टी से था। भाजपा गरीबों का कल्याण करने वाली पार्टी है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देन है कि 130 करोड़ लोगों को कोरोना का टीका लगाकर सुरक्षित करने का काम किया गया। देश में 80 करोड़ों लोगों को एवं उत्तर प्रदेश में 15 करोड़ों लोगों को 2 साल तक मुफ्त में राशन देने का काम भारतीय जनता पार्टी कर रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश एवं देश की सीमाएं सुरक्षित है। कांग्रेस के हुकूमत के 10 वर्षों में सपा बसपा कांग्रेस का सहयोग करती रही। आतंकवादी जवानों का सर काट कर ले जाते थे । नरेंद्र मोदी के शासनकाल में आतंकियों ने पुलवामा में सैनिकों पर हमला किया तो सेना ने पाकिस्तान के अंदर घुस कर आतंकियों को ढेर करने का काम किया है। अब किसी भी देश में जरूरत नहीं है कि वह हमारे देश की ओर आंख उठा कर देख सके ऐसे करने की हिमाकत किया तो उनका सिर धड़ से अलग करने का काम किया जाएगा ।

उन्होंने कहा कि विपक्षी कश्मीर के संबंध में कहते थे कि 370 धारा समाप्त हुई तो खून की नदियां बहेगी लेकिन 370 धारा समाप्त हो गई क्या कुछ हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के गरीब मजदूर, पिछड़े, दलितों का कल्याण भाजपा से ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले 5 वर्षों में भाजपा ने पांच एक्सप्रेसवे 10 शहरों में मेट्रो,17000 करोड और से नई सड़कें शिक्षा के क्षेत्र में 10 इंटरनेशनल विश्वविद्यालय सहित 40 मेडिकल कॉलेज 76 नर्सिंग कॉलेज बनाने का काम किया गया है।

 शाह ने कहा 2013 में जब वह भाजपा से उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे, सड़कें गड्ढों में तब्दील थी। अब प्रदेश में मजबूत चमचमाती हुई सड़के हैं। भाजपा, निषाद पार्टी एवं अपना दल गठबंधन मजबूत है। केशव प्रसाद मौर्य पिछड़ा वर्ग के बड़े चेहरे हैं सिराथू सीट उत्तर प्रदेश में सबसे अलग विधानसभा सीट है यहां आप विधायक नहीं बल्कि डिप्टी सीएम बनाने जा रहे हैं।

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हत्या के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू से जवाब मांगा (अपडेट)

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने करीब साढ़े तीन दशक पुराने एक अपराधिक मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से सजा का दायरा बढ़ाने की अर्जी पर शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से पूछा आखिर उन्हें अधिक गंभीर श्रेणी के अपराध के लिए दंडित क्यों नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उनकी सजा बढ़ायी जा सके। न्यायालय ने श्री सिद्धू को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने एक पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद श्री सिद्धू को जवाब दाखिल करने की अनुमति दी। पीड़ित पक्ष की अर्जी पीठ ने श्री सिद्धू से जवाब दाखिल करने को कहा है कि आखिर उन्हें अधिक गंभीर श्रेणी के अपराध के लिए दंडित क्यों नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उनकी सजा में वृद्धि की जा सके।

सर्वोच्च अदालत न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर (सेवानिवृत्त) द्वारा लिखित अपने 15 मई 2018 के फैसले से संबंधित एक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस फैसले में श्री सिद्धू पर सिर्फ 1000 रुपये जुर्माना किया गया था।

शीर्ष अदालत ने केवल सजा के बिंदु 11 सितंबर 2018 पर श्री सिद्धू को नोटिस जारी किया था। उन्होंने अपने जवाब में अदालत से नरमी बरतने की गुहार लगाते हुए कहा है कि वह उसे पूर्व के सार्वजनिक जीवन में आदर्श व्यवहार को आधार मानते हुए उसे जेल की सजा न दें।

शीर्ष अदालत द्वारा श्री सिद्धू को दिए गए आर्थिक दंड को नाकाफी सजा मानते हुए पीड़ित गुरनाम सिंह के पुत्र ने इस साल पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

पीड़ित पक्ष की ओर से पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान एक आवेदन कर सजा का दायरा बढ़ाने की गुहार लगाई गई। पुनर्विचार याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए सिद्धार्थ लूथरा ने मौत का कारक श्री सिद्धू एवं अन्य के साथ हुए झगड़े को बताते हुए सजा का दायरा गैर इरादतन हत्या की श्रेणी की सजा तक बढ़ाने की गुहार लगाई। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि पीड़ित को एक जोरदार झटका दिया गया था जिसके बाद उसकी मौत हुई। मौत का कारण सिर्फ हृदय गति रुकना मानना सही नहीं है।

पूर्व क्रिकेटर सिद्धू का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने लूथरा की दलीलों का जोरदार विरोध किया। श्री चिदंबरम ने कहा कि पूरे मामले पर फिर से विचार करना न्याय संगत नहीं होगा।

पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद श्री सिद्धू को पीड़ित पक्ष की ओर से दायर नई अर्जी पर अपना जवाब दाखिल करने का समय देते हुए अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने तीन फरवरी को श्री चिदंबरम की गुहार पर पुनर्विचार याचिका की सुनवाई 25 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी थी।

पंजाब में 1988 में सड़क पर हुए झगड़े के दौरान श्री सिद्धू द्वारा कथित रूप से मुक्का मारे जाने से 65 वर्षीय गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया गया था। इस मामले में शीर्ष न्यायालय ने 15 मई 2018 के अपना फैसला दिया था। इसमें श्री सिद्धू को झगड़े में शामिल होने का दोषी मानते हुए सजा के तौर पर 1000 रुपए का जुर्माना किया गया था।

मृतक के पुत्र ने अदालत के इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत का 2018 यह फैसला 'रिछपाल सिंह मीणा बनाम घासी' (2014) के मामले में पिछले फैसले पर विचार करने में विफल रहा। उक्त मामले में, शीर्ष अदालत ने कानून के सवाल पर विचार किया, और "इस विचार का था कि जब किसी इंसान की मृत्यु होती है, तो यह या तो गैर इरादतन हत्या (हत्या के बराबर या नहीं) हो सकती है या गैर इरादतन हत्या हो सकती है। आगे यह माना गया कि "जीवन को प्रभावित करने वाले अपराध" "चोट के अपराध" से अलग हैं और यदि चोट का परिणाम मृत्यु, इरादा या अनजाने में होता है, तो अपराध जीवन को प्रभावित करने वाले अपराध की श्रेणी में आएगा।

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संकीर्णता व दोहरेपन का शिकार प्रवासी मुद्दा

भारतीय संविधान देश के किसी भी राज्य अथवा किसी भी केंद्र शासित प्रदेश के किसी भी नागरिक को देश के किसी भी राज्य अथवा किसी भी केंद्र शासित प्रदेश में जाकर रोज़गार,सेवा अथवा व्यवसाय करने का पूरा अधिकार देता है। परन्तु इसके बावजूद समय समय पर कुछ विशिष्टजन विशेषकर ज़िम्मेदार नेतागण ऐसी भाषा बोलने लगते हैं जिससे न केवल प्रवासी लोगों के मन में अपनी सुरक्षा के प्रति भय उत्पन्न होता है बल्कि इससे हमारी राष्ट्रीय एकता पर भी गहरा आघात लगता है। प्रायः उत्तर प्रदेश,बिहार,मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,बंगाल,राजस्थान व उत्तरांचल के लोग ही रोज़गार की तलाश में अथवा नौकरी या व्यवसाय की ख़ातिर देश के विभिन्न हिस्सों में आते जाते रहते हैं। इनमें भी विशेषकर उत्तर प्रदेश व बिहार जैसे देश के दो सबसे बड़े राज्यों के छात्र,कामगार,श्रमिक ख़ास तौर पर मुंबई,दिल्ली,पंजाब व हरियाण जैसे राज्यों में बहुतायत में जाते हैं।इसका मुख्य कारण जहाँ इन राज्यों का जनसँख्या घनत्व है वहीँ अशिक्षा व बेरोज़गारी भी इन राज्यों की बड़ी समस्या है। इत्तेफ़ाक़ से यही देश के ऐसे दो बड़े राज्य भी हैं जो हमेशा ही देश को सबसे अधिक संख्या में नौकरशाह मुहैय्या करवाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में भी प्रायः इन्हीं राज्यों का वर्चस्व रहा है। अनेक महापुरुष व राजनेता इन्हीं दो राज्यों के रहे हैं। कितने सौभाग्यशाली है उत्तर प्रदेश व बिहार जैसे राज्य की धरती कि यह भगवान राम,कृष्ण,सीता,गुरु गोविन्द सिंह,संत रविदास,महात्मा बुद्ध,कबीर,तुलसी व कई अन्य महापुरुषों की यह जन्म व कर्मस्थली भी रही है।

 

परन्तु कितने दुःख का विषय है कि इन्हीं राज्यों के लोग समय समय पर कुछ संकीर्ण क्षेत्रीय मानसिकता रखने वाले नेताओं की संकीर्ण सोच व तंग नज़री का शिकार होने लगते हैं। और कभी कभी तो ऐसा भी देखा गया है कि यदि अपराधी प्रवृति के किसी प्रवासी ने कहीं कोई अपराध अथवा दुष्कर्म कर दिया तो स्थानीय लोग उसका ग़ुस्सा पूरे प्रवासी समाज पर उतारने पर आमादा हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर सितंबर 2018 में गुजरात राज्य के साबरकांठा में एक मासूम बच्ची के साथ एक मज़दूर ने बलात्कार किया था। बलात्कार का आरोपी बिहार का रहने वाला था। इस घटना के बाद गुजरात के कई शहरों में उत्तर भारत के लोगों के विरुद्ध न केवल  विरोध-प्रदर्शन हुये बल्कि कई जगह उनके विरुद्ध स्थानीय लोगों की भीड़ हिंसक भी हो गयी।  हिंसा पर उतारू भीड़ का कहना था कि यूपी और बिहार के लोग शहर से चले जाएं वरना उन्हें मार दिया जाएगा। वे कहते सुने जा रहे थे कि 'बाहरी लोग राज्य छोड़ दें' साथ ही यह भी कि 'गुजराती लोगों को बचाया जाना चाहिए'। इस हिंसा के बाद डरे सहमे उत्तर भारतीयों ने अपने-अपने राज्य-घर-गांवों की ओर बड़ी संख्या में पलायन करना शुरू कर दिया था। उत्तर भारत के बेगुनाह लोगों पर हुए इस हमले के बाद बिहार व उत्तर प्रदेश के लोगों ने कई जगह प्रदर्शन किया था तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध पोस्टर लगाये थे जिसमें लिखा था - ‘गुजराती नरेंद्र मोदी बनारस छोड़ो’।

 

इन दिनों पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के उत्तर भारतीयों के बारे में दिये गये एक बयान को लेकर भाजपा विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया। चन्नी ने कहा था कि - प्रियंका पंजाबियों की बहू है। यूपी ,बिहार, दिल्ली के लोगों को यहां राज नहीं करने देना। यूपी के भइयों को पंजाब में फटकने नहीं देना है। बाद में भले ही चन्नी यह सफ़ाई देते रहे कि उनका आशय आम आदमी पार्टी के नेताओं से था,परन्तु तब तक राजनीति के महाचतुर खिलाड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चन्नी के यू पी बिहार वाले बयान को गुरु गोविन्द सिंह व संत रविदास के अपमान से जोड़ चुके थे। परन्तु जब गुजरात,कश्मीर और महाराष्ट्र से इन्हीं भगवान राम,कृष्ण,सीता,गुरु गोविन्द सिंह, संत रविदास,महात्मा बुद्ध,कबीर व तुलसी के राज्यों के लोग मारे-पीटे-दुत्कारे व भगाये जा रहे थे और यही यू पी बिहार के कथित हितैषी उन राज्यों की सत्ता के साथ खड़े थे,उस समय यह भगवान राम,कृष्ण,सीता,गुरु गोविन्द सिंह, संत रविदास का अपमान नहीं था? जब इन्हीं राज्यों के लोग कोरोना काल में अपने परिवार,बच्चों व वृद्ध बीमार जनों के साथ हज़ारों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे थे तब  क्या वह संत रविदास व गुरु गोविन्द सिंह का अपमान नहीं था ?

 

अब इसी प्रवासी मुद्दे का दूसरा पहलू भी देखिये। जिस तरह उत्तर भारतीय स्वरोज़गार हेतु देश के संपन्न राज्यों में जाते हैं ठीक उसी तरह पंजाब,हरियाणा,गुजरात,यू पी व बिहार आदि अनेक राज्यों के लोग इसी रोज़गार व व्यवसाय के लिये अथवा शिक्षा ग्रहण करने के लिये अमेरिका-कनाडा जैसे अनेक विकसित देशों में जाते हैं। आज अनेक देशों में उनकी स्थिति ऐसी है कि कोई किसी देश का प्रधानमंत्री है कई विभिन्न देशों में मंत्री,कई जज तो कई सेना व पुलिस में उच्च पदों पर तैनात हैं। कोई सांसद तो कोई वैश्विक स्तर पर उद्योग जगत के शीर्ष पर है। लाखों लोग विदेशों में बड़े बड़े ज़मींदार-किसान बन चुके हैं। यक़ीनन हमारे देश के लोगों को उन प्रवासी भारतीयों पर गर्व है जो विदेशों में रहकर भारत का नाम ऊँचा कर रहे हैं। परन्तु जब बात 2004 में सोनिया गाँधी के प्रधानमंत्री बनने की आई तो यही राष्ट्रवादी 'देशभक्त ' उस समय यह कहते फिर रहे थे कि यदि विदेशी महिला प्रधानमंत्री बनी तो सर मुंडा लेंगे,उल्टी चारपाई पर लेटेंगे,भुने चने खाने लगेंगे आदि। इस तंगनज़री का आख़िर क्या जवाब है ? कल्पना कीजिये कि यदि यही रंग भेद व देशी विदेशी की संकीर्ण सोच भारतीयों के विरुद्ध विदेशों में भी पनपने लगी फिर आख़िर हमारे करोड़ों प्रवासी भारतीयों की क्या स्थिति होगी ?

 

जिस तरह विदेशों में भारतीय प्रवासी अपनी सेवायें देकर अपने अपने देशों के विकास व वहां की व्यवस्था में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं ठीक उसी प्रकार देश के किसी भी राज्य का प्रवासी किसी भी राज्य में श्रम कर अपनी रोज़ी रोटी तो कमाता ही है साथ साथ अपना ख़ून पसीना बहाकर वहां के निर्माण,प्रगति व विकास में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। आम तौर पर किसी भी राज्य के आम लोगों को किसी अन्य राज्यवासी से उसके राज्य अथवा धर्म जाति के आधार पर कोई आपत्ति नहीं होती। आम तौर पर ओछी व संकीर्ण राजनीति करने वाले नेता ही केवल अपना व्यापक जनाधार सिमटता देख इस तरह के संकीर्ण विवादों को जन्म देते हैं। परिणाम स्वरूप कभी कभी विशेषकर चुनावी बेला में प्रवासी मुद्दा संकीर्णता व दोहरेपन का शिकार हो जाता है।

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बैंक ऋण धोखाधड़ी: ईडी ने हैदराबाद की आभूषण कंपनी के प्रवर्तक को गिरफ्तार किया

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 67 करोड़ रुपए की कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन के एक मामले में हैदराबाद की एक आभूषण कंपनी के प्रबंध भागीदार को गिरफ्तार किया है। निदेशालय ने रविवार को यह जानकारी दी।

संजय अग्रवाल को 11 फरवरी को हैदराबाद में एक विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में पेश किया गया और अदालत ने उसे 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अग्रवाल ‘घनश्यामदास जेम्स एंड ज्वेल्स’, हैदराबाद में एक प्रबंध भागीदार है। यह कंपनी सोने का थोक व्यापार करती है।

निदेशालय ने शुल्क-मुक्त निर्यात के लिए निर्धारित सोने का कथित रूप से घरेलू बाजार में व्यापार करने से जुड़े धनशोधन के एक अन्य मामले में भी अग्रवाल को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वह पहले से ही कोलकाता की जेल में बंद है। एजेंसी ने एक बयान में बताया कि ताजा मामला ‘‘ऋण धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें हैदराबाद की भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को 67 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।’’ जांच में पाया गया, ‘‘2010-2011 में, अग्रवाल ने फर्जी और जाली बैंक गारंटी और पीएनबी द्वारा कथित तौर पर जारी किए गए कवर पत्रों को दिखाकर एसबीआई से सोने के बुलियन खरीदे और फिर इन्हें स्थानीय बाजार में विभिन्न आभूषण विक्रेताओं और छोटे कारोबारियों को नकद बेच दिया।’’

इसमें आरोप लगाया गया है कि अग्रवाल ने अपनी पत्नी, भाइयों और अपने कर्मचारियों के नाम पर स्थापित कई अन्य कंपनियों में इस नकद राशि को हस्तांतरित किया। ईडी ने कहा, ‘‘बाद में, सोने पर लिया गया ऋण चुकाया नहीं गया। एसबीआई ने पाया कि बैंक गारंटी और पत्र फर्जी थे। अग्रवाल और उनके भाइयों अजय और विनय ने 17 अगस्त, 2011 को हैदराबाद के एबिड्स में अपने स्टोर पर रखे सोने और आभूषणों के पूरे भंडार को गुप्त रूप से हटा दिया।’’

कंपनी ने स्वर्ण के बदले ऋण के एवज में इस भंडार को पहले ही पीएनबी के पास गिरवी रख दिया गया था। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी अग्रवाल और अन्य के खिलाफ ‘‘उनकी कंपनी द्वारा ऋण के लिए पीएनबी को गिरवी रखे सोने और आभूषणों को धोखाधड़ी करके हटाने और इस तरह पंजाब नेशनल बैंक को 31.97 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए मामला दर्ज किया है।

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कई मंत्रियों समेत 623 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत राज्य के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों के लिये मतदान बृहस्पतिवार सुबह सात बजे शुरू हो गया।

 

निर्वाचन आयोग कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक पहले चरण के चुनाव के लिए मतदान कार्य कोविड प्रोटोकॉल के तहत सुबह सात बजे शुरू हो गया जो शाम छह बजे तक चलेगा। मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

 

इस चरण में शामली, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा तथा आगरा जिलों में मतदान हो रहा है।

 

पहले चरण का चुनाव जाट बहुल क्षेत्र में हो रहा है। इस चरण में प्रदेश सरकार के मंत्रियों श्रीकांत शर्मा, सुरेश राणा, संदीप सिंह, कपिल देव अग्रवाल, अतुल गर्ग और चौधरी लक्ष्मी नारायण समेत कुल 623 उम्मीदवारों के सियासी भाग्य का फैसला होगा। इनमें 73 महिला प्रत्याशी भी शामिल हैं।

 

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष, सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने के लिये व्यापक इंतजाम एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है। कोविड-19 के मद्देनजर मतदान केंद्रों पर थर्मल स्कैनर, सैनीटाइजर, ग्लव्स, फेस मास्क, फेस शील्ड, पीपीई किट, साबुन, पानी की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था की गई है।

 

उन्होंने बताया कि पहले चरण में होने वाले मतदान में 2.28 करोड़ योग्य मतदाता हैं। इनमें 1.24 करोड़ पुरूष, 1.04 करोड़ महिला तथा 1448 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। मतदान पर सतर्क दृष्टि रखने के लिए 48 सामान्य प्रेक्षक, आठ पुलिस प्रेक्षक तथा 19 व्यय प्रेक्षक भी तैनात किये गये हैं। इसके अतिरिक्त 2175 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 284 जोनल मजिस्ट्रेट, 368 स्टैटिक मजिस्ट्रेट तथा 2718 माइक्रो ऑब्जर्वर भी तैनात किये गये हैं।

 

उन्होंने बताया कि मतदाता पहचान पत्र नहीं होने पर आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस समेत 12 विकल्पों का इस्तेमाल कर वोट डाला जा सकेगा।

 

वर्ष 2017 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहले चरण की 58 में से 53 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को दो-दो सीटें मिली थी। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल का भी एक प्रत्याशी जीता था।

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इंटर्नशिप की समय सीमा आगे बढ़ाने की मांग कर रहे एमबीबीएस छात्र सरकार को प्रतिवेदन दें : न्यायालय

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने एक साल के इंटर्नशिप की समय सीमा 31 मई से आगे बढ़ाने की मांग रहे एमबीबीएस छात्रों से मंगलवार को कहा कि वे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को एक प्रतिवेदन दें। नीट-पीजी-2022 परीक्षा में बैठने के लिए अभ्यर्थियों को एक साल का अनिवार्य इंटर्नशिप पूरा करना एक अनिवार्य शर्त है।

 

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि अभ्यर्थियों के सामने आई मुश्किलों पर विचार करते हुए मंत्रालय प्रतिवेदन सौंपे जाने की तारीख से एक हफ्ते के अंदर इस पर फैसला कर सकता है।

 

पीठ ने कहा, चूं‘‘कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे के लिए तथ्यों के साथ-साथ नीतिगत पहलुओं के निर्धारण के कुछ तत्वों की आवश्यकता होती है, (ऐसे में) हमारा विचार है कि याचिकाकर्ताओं को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को एक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति देकर ही न्याय का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।’’

 

पीठ ने कहा, ‘‘हम, इसलिए आग्रह करते हैं कि प्रतिवेदन पर उसके दायर करने के एक सप्ताह के भीतर ही विचार किया जाए।’’ पीठ ने कहा कि वह इस समय मुद्दे पर कोई विचार प्रकट नहीं कर रही है।

 

एमबीबीएस छात्रों की ओर से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि परीक्षा आगे बढ़ा दी गई है लेकिन इस महत्वपूर्ण अर्हता पर विचार किये जाने के जरूरत है।

 

उन्होंने कहा कि अर्हता यह है कि परीक्षा में शामिल हो रहे छात्रों को 31 मई 2022 तक एक साल का अनिवार्य इंटर्नशिप पूरा करना होगा, ताकि वे नीट-पीजी-22 परीक्षा में बैठने के पात्र हो सकें।

 

उन्होंने कहा, ‘‘इस मई 31 की समय सीमा को एक या दो महीने बढ़ाया जा सकता है।’’ उन्होंने आगे कहा कि अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों में इंटर्नशिप के लिए भिन्न-भिन्न कार्यक्रम हैं। कुछ ने मई 2021 में यह कार्यक्रम शुरू किया तो किसी ने जून 2021 और किसी ने जुलाई 2021 में।

 

रोहतगी ने कहा, ‘‘अंतिम लॉट सितम्बर 2021 का हो सकता है।’’ उन्होंने कहा कि मार्च 2022 में परीक्षा होनी थी, जिसे कोविड-19 महामारी के मद्देनजर अब मई 2022 के लिए स्थगित कर दी गयी है। इसलिए इस तिथि को भी एक या दा माह बढ़ाया जा सकता है।

 

पीठ ने कहा कि यह एक नीतिगत निर्णय में हस्तक्षेप करने जैसा होगा क्योंकि इंटर्नशिप शुरू करने के लिए कोई एक तारीख नहीं है।

 

शीर्ष अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा, ‘‘मान लिया कि हम 31 मई की अंतिम तारीख को एक या दो माह बढ़ाते हैं तो भी कोई ऐसा छात्र-समूह हो सकता है कि वह तब भी एक वर्ष के इंटर्नशिप कार्यक्रम को पूरा नहीं कर पाता है। यह नीतिगित निर्णय है। सरकार को अपने प्रतिवेदन पर विचार करने दें।’’

 

न्यायालय ने इस बात का जिक्र किया कि मार्च में आयोजित होने वाले नीट-पीजी-22 कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ा दी गई है।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने राज्य के सांसदों से मुलाकात की

नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने अगले महीने राज्य का बजट पेश करने से पहले, सोमवार को यहां राज्य के सांसदों से मुलाकात की और उनके साथ कई मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में विभिन्न दलों के सांसद- राज्यसभा और लोकसभा के 27 सदस्य शामिल हुए।

 

बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्यमंत्री भगवंत खुबा और केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर भी मौजूद रहे।

 

बैठक से पहले बोम्मई ने कहा, “हम सांसदों के साथ राज्य और केंद्र के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।” बैठक के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री केंद्रीय वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बिजली मंत्री आर के सिंह से भेंट कर सकते हैं।

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दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट पर आंशिक रोक

सहारनपुर। राष्ट्रीय बाल अधिकार सरंक्षण आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन ने दारुल उलूम देवबंद को नोटिस जारी करके वेबसाइट पर आंशिक रूप से रोक लगा दी है। जिलाधिकारी ने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।

 

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दारुल उलूम के फतवों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से वेबसाइट की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। वेबसाइट पर बच्चों को लेकर कुछ ऐसे फतवे मिले जो बाल संरक्षण अधिनियम के मानकों का उल्लंघन करते हैं। ऐसे में प्रशासन ने दारुल उलूम देवबंद को निर्देशित किया कि जब तक वेबसाइट से बच्चों को लेकर जारी सामग्री नहीं हटा ली जाती तब तक के लिए वेबसाइट को आंशिक रूप से रोक लगा दी जाए।

 

राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग को यह शिकायत मिली थी कि दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट पर कुछ ऐसे फतवे मौजूद हैं जो भारतीय दंड संहिता, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और शिक्षा अधिकार नियम 2009 के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं। आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को 10 दिनों भीतर इस मामले की जांच करते हुए कार्रवाई कर रिपोर्ट देने को कहा था। इन्हीं आदेशों के अनुपालन में जिला प्रशासन ने दारुल उलूम देवबंद को नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है कि वेबसाइट पर जितने भी फतवे बाल संरक्षण अधिनियम का विरोध करते हैं, उन्हें वेबसाइट से हटा लिया जाए। जब तक यह सामग्री नहीं हटा ली जाती जब तक वेबसाइट बंद रहेगी।

 

जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि पत्र लिखकर एक व्यक्ति ने दारुल उलूम देवबंद से बच्चों से संबंधित सवाल पूछे थे। जवाब में दारुल उलूम देवबंद की ओर से जो कुछ भी कहा गया वह बाल संरक्षण अधिनियम का हनन करता है। दरअसल दारुल उलूम देवबंद से जो भी व्यक्ति अपने सवाल पूछता है उसका जवाब उसकी फतवा कमेटी देती है और इसी जवाब को फतवा के रूप में भी देखा जाता है। जिलाधिकारी ने बताया कि हमने इस मामले में दारुल उलूम को एक नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में दारुल उलूम की ओर से कहा गया है कि हमने व्यक्तिगत सवाल का जवाब दिया है। यह फतवा नहीं है। अब उनके इस जवाब की भी जांच कराई जा रही है। फिलहाल सवाल के विवादित जवाब वाले लिंक को ब्लॉक करा दिया गया है। पूरी वेबसाइट पर पाबंदी नहीं लगाई है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। अगर जांच में यह बात सामने आती है कि यह जवाब अधिनियम का हनन करता है तो आयोग के निर्देशों के अनुपालन में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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आस्था से सरोकार न रखने वालों को अब सपने में याद आने लगे हैं भगवान कृष्ण : मोदी

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सपा को 'नकली समाजवादी' करार देते हुए रविवार को कहा कि जनता की आस्था से कोई सरोकार न रखने वाले इन लोगों को भाजपा को अपार समर्थन देख अब सपने में भगवान कृष्ण की याद आने लगी है।

 

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान कोविड—19 महामारी के कारण सरकार के कार्यों में व्यवधान पड़ा। फिर से बहुमत मिलने पर योगी आदित्यनाथ की सरकार और भी तेजी से काम करके इन दो सालों के दौरान हुए नुकसान से निकालकर उत्तर प्रदेश को आगे ले जाएगी।

 

मोदी ने मथुरा, बुलंदशहर और आगरा के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित 'जन चौपाल' को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पार्टी पर तीखे प्रहार किये और कहा ''चुनाव देखकर कृष्ण भक्ति का चोला ओढ़ने वाले लोग जब सरकार में थे तो वृंदावन, बरसाना, गोवर्धन और नंदगांव को वे भूल ही गए थे। आज भाजपा को अपार समर्थन देख इन लोगों को अब सपने में भगवान कृष्ण की याद आने लगी है।''

 

गौरतलब है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा था कि भगवान कृष्ण रोजाना उनके सपने में आकर कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने जा रही है।

 

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया, ''जो पहले सरकार में थे उन्हें ना तो आप लोगों की आस्था से मतलब रहा है और ना ही आपकी जरूरतों से। उनका सिर्फ एक ही एजेंडा रहा है, उत्तर प्रदेश को लूटो। उन्हें बस सरकार बनाने से मतलब रहा है, इसीलिए आज वह मुख्यमंत्री योगी जी और भाजपा सरकार को पानी पी-पीकर कोस रहे हैं। उप्र का इन लोगों ने जो हाल बना दिया था, वह इन नकली समाजवादियों के कर्मों का कच्चा चिट्ठा है।''

 

मोदी ने कहा ''अगर कोरोना महामारी का संकट नहीं आया होता तो पिछले दो साल में योगी जी कई काम कर चुके होते, लेकिन इन दो साल कठिनाइयों से गुजारने पड़े। सरकार की शक्तियों को भी लोगों की जान बचाने में लगाना पड़ा। नहीं तो जिस तरीके से 2017 से योगी जी ने काम का मामला उठाया था, अगर दो साल में यह रुकावट ना आई होती तो आज उत्तर प्रदेश कहां से कहां पहुंच गया होता, लेकिन मुझे विश्वास है कि उत्तर प्रदेश के लोग आने वाले पांच साल के लिए भरपूर बहुमत देंगे और योगी जी भी इतनी ताकत से दौड़ेंगे कि जो दो साल बीमारी के कारण तकलीफ आई है, उससे आगे निकालकर उप्र को ले जाएंगे।''

 

मोदी ने आरोप लगाया, ''पिछली सरकारों के शासनकाल में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे राजमार्गों पर गाड़ी रोककर लूटपाट करते थे और हाईवे पर ही महिला और बेटियों के साथ क्या होता था यह बुलंदशहर के लोग अच्छी तरह से जानते हैं। तब उत्तर प्रदेश में घरों दुकानों पर अवैध कब्जे होना आम बात थी। लोग अपना घर छोड़कर पलायन को मजबूर होते थे। आगरा के दंगों में आरोपियों के सिर पर किसका हाथ था यह आप भली-भांति जानते हैं।''

 

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारें भय फैलाने में जुटी थी जबकि भाजपा भविष्य का निर्माण कर रही है। यही फर्क है भाजपा की सरकार और पिछली सरकारों में, इसलिए आज उत्तर प्रदेश में बहन बेटियां खुले दिल से कह रही हैं 'पहले हमें घर से निकलने में लगता था डर, अब भाजपा राज में अपराधी कांपे थर-थर।'

 

उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश के लोगों ने दो टूक कह दिया है कि धन-दौलत, बाहुबल, जातिवाद, परिवारवाद और संप्रदायवाद के दम पर भले ही कुछ लोग कितनी ही राजनीति कर लें, लेकिन वह जनता का प्यार नहीं पा सकते। जनता का आशीर्वाद तो उसे ही मिलेगा जो सच्चे अर्थ में प्रदेश के लोगों की सेवा करेगा, इसलिए जनता ने तय कर दिया है कि इस बार भी चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा विकास का ही है।''

 

मोदी ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने दिखा दिया है कि अगर उत्तर प्रदेश का विकास कोई कर सकता है तो वह सिर्फ भाजपा ही है, इसलिए पिछले कई महीनों से उत्तर प्रदेश के लोग यह ठान कर बैठे हैं कि कमल का बटन फिर दबाना है और भाजपा को ही जिताना है।

 

उन्होंने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तथा आयुष्मान योजना समेत अपनी सरकार की तमाम योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इससे उत्तर प्रदेश के करोड़ों नागरिकों को सीधा लाभ मिल रहा है।

 

प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए मोदी ने सपा पर एक बार फिर निशाना साधा और कहा, ''गरीबों के घरों को लेकर नकली समाजवादियों का क्या रवैया रहा है यह मैं आपको जरूर याद दिलाउंगा। आगरा, मथुरा और बुलंदशहर के नगरीय क्षेत्रों में पिछली सरकार ने 8000 घर भी नहीं बनवाए थे, मगर पिछले पांच सालों में योगी जी की सरकार ने इन क्षेत्रों में करीब 85000 घर बनाकर गरीबों को दिए हैं।''

 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की भलाई के लिए 'नकली समाजवादियों' और उनके साथियों का सत्ता से दूर रहना बहुत आवश्यक है। वे आज भी किसानों से झूठे वादे कर रहे हैं। गन्ना किसानों को झूठी बातें बताकर उकसाने का प्रयास कर रहे हैं। किसान भूले नहीं हैं कि सत्ता में रहकर इन लोगों ने क्या-क्या किया था। कैसे गन्ना किसानों को भुगतान के नाम पर रुला दिया था। भाजपा सरकार ने पिछले पांच साल में गन्ना किसानों का डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया है, जो पहले की सरकारों में 10 साल में हुए भुगतान से भी कहीं ज्यादा है। यूपी के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा मिले, इसके लिए भी टेक्नोलॉजी की ज्यादा से ज्यादा मदद ली जा रही है।

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पंजाब में कांग्रेस सीएम पद के चेहरे की घोषणा से पहले सिद्धू ने कहा: राहुल का फैसला स्वीकार्य

चंडीगढ़। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पंजाब में पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा किये जाने से पहले प्रदेश कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने रविवार को कहा कि हर कोई उनके निर्णय को स्वीकार करेगा।

 

गांधी रविवार को लुधियाना का दौरा कर डिजिटल माध्यम से रैली को संबोधित करेंगे। साथ ही वह पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा करेंगे।

 

सिद्धू ने ट्वीट किया, "बिना फ़ैसले के कुछ भी बड़ा हासिल नहीं हुआ... पंजाब को स्पष्टता देने आए हमारे अग्रणी नेता राहुल जी का हार्दिक स्वागत... सभी उनके फ़ैसले का पालन करेंगे!!!"

 

सिद्धू और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के मुख्य दावेदार हैं। दोनों ने गांधी को आश्वासन दिया है कि वे पार्टी के फैसले को स्वीकार करेंगे।

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हरीश रावत की विकृत तस्वीर पोस्ट करने के लिए उत्तराखंड भाजपा को निर्वाचान आयोग का नोटिस

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड भाजपा को आदर्श चुनाव आचार संहिता के कथित उल्लंघन के लिए नोटिस जारी किया है और पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता हरीश रावत की एक विकृत तस्वीर ट्वीट करने के लिए 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा है। तस्वीर में रावत को एक मौलवी के रूप में दिखाया गया है।

 

कांग्रेस ने शुक्रवार को इस संबंध में निर्वाचन आयोग से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उत्तराखंड भाजपा ने तीन फरवरी को रात 9 बजकर 34 मिनट पर रावत की एक विकृत तस्वीर ट्वीट की थी, जिसमें उन्हें एक विशेष समुदाय के व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया था।

 

आयोग ने पांच फरवरी को भेजे गए नोटिस में कहा, "आयोग ने इस मामले पर सावधानीपूर्वक विचार किया है और यह माना जाता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), उत्तराखंड ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-123 में आचार संहिता के 'सामान्य आचरण' वाले हिस्से में निर्धारित खंड (I) और (2) तथा भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 153(ए) की उप-धारा (आई)(ए) का उल्लंघन कर ऐसे बयान दिए हैं जो भड़काऊ हैं और इसे गंभीरता से लिया जाता है। इससे भावनाओं के भड़कने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका रहती है, जिससे चुनाव प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।''

 

आयोग ने यह भी कहा, "इसलिए, अब आयोग उत्तराखंड भाजपा को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर श्री हरीश रावत की विकृत तस्वीर डालने के एआईसीसी के आरोप पर अपना रुख स्पष्ट करने का अवसर देता है।''

 

निर्वाचन आयोग ने कहा कि स्पष्टीकरण इस नोटिस की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर आयोग के पास पहुंच जाना चाहिए, ऐसा नहीं करने पर आयोग इस मामले में उत्तराखंड भाजपा को आगे संदर्भित किए बिना उचित निर्णय लेगा।

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युवतियों को पसंद आ रहे स्वच्छता के अत्याधुनिक तरीके, पीरियड में अपना रही हाइजीनिक मेथड

चित्रकूट। जागरूकता आने से माहवारी के दौरान पुराने गंदे कपड़े लगाने का चलन समाप्ति की ओर है। युवतियों को अब इस कठिन वक्त में हाइजीनिक मेथड पसंद आ रहे हैं। एन एफ एच एस-5 का आंकड़ा इसकी गवाही देता है। एनएफएचएस-5 के आंकडें के मुताबिक जिले में वर्ष 2015-16 में, जहां 31 फीसद युवतियां हाइजीनिक मेथड अपना रही थी। वहीं वर्ष 2019 -21 में यह आंकड़ा बढ़कर 55 फीसद पहुंच गया है।

 

आशा संगिनी सरिता शुक्ला ने बुधवार को बताया कि वह समय-समय पर महिलाओं को माहवारी के दौरान साफ सफाई रखने के लिए समझाती रहती हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं को प्रेरित करते हैं कि वह माहवारी के दौरान हाइजीनिक मेथड यानी पैड का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से वह कई प्रकार के संक्रमण से बची रहेंगी। उनके समझाने का युवतियों पर खासा प्रभाव पड़ रहा है।

 

स्त्री रोग विशेषज्ञ व सर्जन डॉ रफीक अंसारी बताते हैं कि योनि में पाया जाने वाला तरल पदार्थ अम्लीय (एसीडिक) होता है जो लगभग सभी प्रकार के संक्रमण को होने से रोकता है। माहवारी के दौरान यह तरल पदार्थ क्षारीय (बेसिक) हो जाता है, इससे संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। स्वच्छता के अभाव में संक्रमण का यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसीलिए इस दौरान साफ सफाई की अतिरिक्त जरूरत होती है।

 

उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में मासिक धर्म की शुरूआत में एक से अधिक बार पैड बदलना चाहिए। ताकि संक्रमण का खतरा बिल्कुल न रहे। पीरियड के दौरान खुजली सहित अन्य किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर उसे छिपाने की गलती न करें। बल्कि डाक्टर से परामर्श लें, अन्यथा की स्थिति में बैक्टीरिया व फंगस से सम्बंधित संक्रमण हो सकता है। साफ सफाई नजर अंदाज करने पर संक्रमण बच्चेदानी में भी पहुंच सकता है। यहां तक स्वच्छता न अपनाने से प्रजनन रोग भी हो सकता है।

 

जिला मुख्यालय में रहने वाली सामाजिक कार्यकर्ता गुड़िया का कहना है कि माहवारी के दौरान साफ सफाई जरूरी है। इसके लिए हाइजीनिक मेथड अपनाएं। उनका कहना है वह खुद इस कठिन समय में पैड इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने अपील किया की महिलाएं माहवारी के दौरान पैड इस्तेमाल करें ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण की संभावना न रहे। 

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आजम खान की पत्नी का पर्चा कैंसिल, अब्दुल्ला का मंजूर

लखनऊ:जाने आलम (जानू चौधरी):   रामपुर में आजम खान की पत्नी डॉ. तंजीम फातिमा का पर्चा कैंसिल हो गया है, जबकि अब्दुल्ला आजम खान का पर्चा स्वीकार कर लिया गया है। अब्दुल्ला और तंजीम ने दो दिन पहले स्वार विधानसभा सीट से पर्चा दाखिल किया था। कयास लगाए जा रहे थे कि उम्र को लेकर अब्दुल्ला का पर्चा कैंसिल हो सकता है इसीलिए इसी सीट से उनकी मां डॉ. तंजीम फातिमा ने पर्चा दाखिल किया था। लेकिन शनिवार को तंजीम का पर्चा कैंसिल होने से सपा को झटका लगा है। वहीं, अब्दुल्ला का पर्चा स्वीकार होने पर कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है।

एक ही पार्टी से दाखिल करने पर कैंसिल हुआ पर्चा

बताया जा रहा है कि अब्दुल्ला और डॉ. तंजीम फातिमा ने सपा से पर्चा दाखिल किया था। नियमों के मुताबिक एक ही पार्टी और एक ही सीट से दो प्रत्याशी पर्चा दाखिल नहीं कर सकते। वहीं, डॉ. तंजीम ने कॉलम नंबर--2 खाली छोड़ दिया था। ऐसे में अब्दुल्ला आजम के पर्च को स्वीकार करते हुए डॉ. तंजीम फातिमा का पर्चा कैंसिल कर दिया गया है।

अब्दुल्ला ने पिछले चुनाव की लिखी जन्मतिथि दर्शाई

नामांकन पत्र में अब्दुल्ला आजम ने जन्मतिथि 1990 दर्शाई है। इसके चलते अब वह 31 वर्ष के हैं। इसके पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में भी अब्दुल्ला ने यही जन्मतिथि लिखी थी। बाद में दो जन्म प्रमाणपत्र होने के चलते उनकी विधायकी चली गई थी। वो मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।

जिलाध्यक्ष बोले- विरोधियों के मुंह पर तमाचा

सपा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल ने बताया कि अब्दुल्ला आजम का पर्चा मंजूर हो गया है। यह विरोधियों के मुंह पर एक तमाचा है, जो यह मानकर बैठे थे कि अब्दुल्ला आजम का पर्चा जरूर निरस्त होगा। इसके चलते लोग अपने आप को जीता हुआ मान रहे थे। विरोधियों ने मुंह की खाई है।

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शाह-योगी समेत भाजपा के कई नेता आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश में

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा शनिवार को एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रहेगा।

 

अमित शाह मुजफ्फरनगर में रहेंगे, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद में जनसंपर्क कर लोगों से फिर से सरकार बनाने की अपील करेंगे। मेरठ में स्मृति ईरानी, बिजनौर में केशव प्रसाद मौर्य, तो संभल और मुरादाबाद में उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा चुनाव प्रचार करेंगे।

 

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शनिवार को उत्तर प्रदेश के प्रवास पर रहेंगे। वह कई संगठनात्मक बैठकें करेंगे। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कार्यकर्ताओं एवं पार्टी पदाधिकारियों से संवाद कर उनका मार्गदर्शन करेंगे।

 

उत्तर प्रदेश भाजपा के सह मीडिया प्रभारी हिमांशु दुबे ने बताया कि शाह सुबह 11 बजे मुजफ्फरनगर पहुचेंगे। वह 11ः15 बजे मुजफ्फरनगर के वृन्दावन गार्डन, भोपा रोड में मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा के प्रभावी मतदाताओं के साथ संवाद करेंगे। इसके पश्चात दोपहर 12ः50 बजे मुजफ्फरनगर के हनुमान चौक से भगत सिंह रोड तक घर-घर जनसम्पर्क करेंगे। अमित शाह दोपहर 2ः10 बजे देवबंद विधानसभा के देवबंद बाजार में जनसम्पर्क करेंगे। इसके पश्चात दोपहर 3ः15 बजे इन्द्रप्रस्थ कॉलेज में सहारनपुर देहात विधानसभा के प्रभावी मतदाताओं के साथ संवाद करेंगे। वहीं शाम 4ः20 बजे सहारनपुर के सोलिटेयर होटल में विधानसभा चुनाव से जुडे़ पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद सहारनपुर न्यू शारदा नगर में जनसम्पर्क करेंगे।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बागपत व गाजियाबाद के प्रवास पर रहेंगे।वह यहां कई संगठनात्मक कार्यक्रमों में सम्मिलित होगें। योगी आदित्यनाथ दोपर 1ः20 बजे बडौ़त, बागपत में घर-घर सम्पर्क करेंगे। इसके पश्चात दोपहर 2ः45 बजे छपरौली, बागपत में प्रभावी मतदाताओं के साथ संवाद करेंगे। वहीं शाम 4ः10 बजे मुरादनगर गाजियाबाद में प्रभावी मतदाताओं के साथ संवाद करेगें।

 

केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी भी शनिवार को उत्तर प्रदेश के प्रवास पर रहेंगी। स्मृति ईरानी दोपहर 12ः00 बजे होटल क्रस्टल, लाल कुर्ती मेरठ में प्रभावी मतदाताओं के साथ बैठक करेंगी। रजमन बाजार में घर-घर पहुंचकर जनसम्पर्क करेंगी। वहीं दोपहर तीन बजे मंगलम सत्संग मंडप, मेरठ में मेरठ दक्षिण विधानसभा के प्रभावी मतदाताओं के साथ बैठक करेंगी और घर-घर जनसम्पर्क करेंगी।

 

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का बिजनौर दौरा रहेगा। मौर्य बिजनौर की नगीना तथा नहटौर विधानसभा क्षेत्रों में प्रभावी मतदाताओं के साथ संवाद करेंगें और घर-घर पहुंचकर जनसम्पर्क करेगें। उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा मुरादाबाद व संभल के प्रवास पर रहेंगे। शर्मा मुरादाबाद और संभल विधानसभा क्षेत्रों के प्रभावी मतदाताओं के साथ बैठक करेंगे। वह इस दौरान घर-घर जाकर जनसम्पर्क भी करेंगे। 

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महाराष्ट्र, तमिलनाडु और केरल में कोरोना बेकाबू.. देश में बीते 24 घंटे में 2,35,532 नए केस, 871 ने तोड़ा दम

नई दिल्ली। देश में एक दिन में 2,35,532 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4,08,58,241 हो गयी है।

 

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शनिवार सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में पिछले 24 घंटे के दौरान 871 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 4,93,198 हो गयी है।

 

मंत्रालय ने बताया कि उपचाराधीन मरीजों की संख्या 1,01,278 तक कम हो गयी है और अब इस महामारी का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या 20,04,333 हो गयी है जो संक्रमण के कुल मामलों का 4.91 प्रतिशत है जबकि देश में मरीजों के ठीक होने की दर 93.89 प्रतिशत है।

 

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, संक्रमण की दैनिक दर 13.39 प्रतिशत दर्ज की गयी जबकि साप्ताहिक संक्रमण दर 16.89 प्रतिशत दर्ज की गयी। महामारी से ठीक होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 3,83,60,710 हो गयी हैं जबकि मृत्यु दर 1.21 प्रतिशत दर्ज की गयी।

 

अद्यतन आंकड़ों के अनुसार संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 4,08,58,241 हो गयी है। इस बीच राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 165.04 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं।

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डीसीडब्ल्यू का एसबीआई को नोटिस, गर्भवती महिलाओं से संबंधित रोजगार दिशा-निर्देश वापस लेने की मांग

नई दिल्ली। दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को शनिवार को नोटिस जारी कर उन नए दिशा-निर्देशों को वापस लेने की मांग की, जिनके तहत नई भर्ती की स्थिति में तीन महीने से अधिक अवधि की गर्भवती महिला उम्मीदवारों को ‘‘अस्थायी रूप से अयोग्य’’ माना जाएगा और वे प्रसव के बाद चार महीने के भीतर बैंक में काम शुरू कर सकती हैं।

 

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई। डीसीडब्ल्यू प्रमुख स्वाति मालीवाल ने ट्वीट किया, ''ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय स्टेट बैंक ने तीन महीने से अधिक अवधि की गर्भवती महिलाओं की भर्ती को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं और उन्हें 'अस्थायी रूप से अयोग्य' करार दिया है। यह भेदभावपूर्ण और अवैध है। हमने उन्हें नोटिस जारी कर इस महिला विरोधी नियम को वापस लेने की मांग की है।''

 

आयोग ने नोटिस में नए दिशा-निर्देशों की एक प्रति के साथ-साथ इससे पहले लागू समान नियमों की एक प्रति मांगी। इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है।

 

एसबीआई ने नई भर्तियों या पदोन्नत लोगों के लिए अपने नवीनतम मेडिकल फिटनेस दिशानिर्देशों में कहा कि तीन महीने के समय से कम गर्भवती महिला उम्मीदवारों को 'योग्य' माना जाएगा।

 

बैंक द्वारा 31 दिसंबर, 2021 को जारी फिटनेस संबंधित मानकों के अनुसार गर्भावस्था के तीन महीने से अधिक होने की स्थिति में महिला उम्मीदवार को अस्थायी रूप से अयोग्य माना जाएगा और उन्हें बच्चे के जन्म के बाद चार महीने के भीतर काम पर आने की अनुमति दी जा सकती है।

 

इससे पहले, गर्भधारण के छह महीने तक महिला उम्मीदवारों को विभिन्न शर्तों के तहत बैंक में भर्ती किया जाता था।

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इन पांच एक्सरसाइज से तेज हो जायेगी स्मार्ट फोन की नेट स्पीड

भारत की नयी जेनरेशन के पास कम कम एक स्मार्ट फोन तो है। यह अच्छी बात है। इससे भी अच्छी बात यह है कि हर स्मार्ट फोन में इंटरनेट की सुविधा है और लगभग हर कोई किसी न किसी सोशल प्लेटफॉर्म से जुड़ा हुआ है। लेकिन सिर दर्द यह कि फोन स्मार्ट होने के बावजूद इंटरेनट स्पीड स्मार्ट नहीं है। कहने भर को 3जी, 4जी आ गया है, लेकिन स्पीड 2जी भी नहीं मिल पाती। कारण बहुत से हैं, लेकिन स्मार्ट फोन के इंटरनेट की स्पीड कुछ मामूली एक्सरसाइज करने से बढ़ सकती है। वो कौन-कौन सी एक्सरसाइज हैं हम आपको बता रहे हैं...

 

नेट यूज करने के बाद एंटीवायरस जरूर चलाएं

स्मार्टफोन के इंटरनेट ब्रॉउजर को वायरस का खतरा सबसे अधिक होता है। वायरस सबसे पहले इंटरनेट की स्पीड को कम कर देता हैं। इसलिए दिन में एक बार करें की वायरस स्कैनर से फोन को स्कैन करें।

 

अलर्ट पर ध्यान रखें और एप्स को अपडेट करते रहें

फोन पर आये हुए अपडेट को अनदेखा कर देते है, इस वजह से ब्रॉउजर सही से सपोर्ट नहीं करता और नेट की स्पीड धीमी हो जाती है। अपडेट के जरिए छोटी-छोटी कमियों को दूर कर ब्राउजिंग को बेहतर बनाया जा सकता है।

 

डाउनलोड्स फोल्डर भी स्कैन और क्लीन रखें

इंटरनेट से हम अधिकतर कुछ न कुछ डाउनलोड करते हैं। ऐसे में डाउनलोड फोल्डर भर जाता है और स्पीड कम हो जाती है।

 

इंटरनल स्पेस खाली रखें

स्मार्टफोन प्रयोग के दौरान इंटरनल मैमारी को जितनी खाली रहेगी फोन की परफॉर्मेंस उतनी अच्छी रहेगी। 

 

टैंपररी फाइल्स डिलीट करते रहें

इंटरनेट बूस्टर और एंड्रॉयड ऑप्टिमाइजर जैसे एप्लिकेशंस से टैंपररी फाइल्स को डिलीट करने भी इंटरनेट स्पीड बढ़ जाती है।

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जातीय नेतृत्व के कुचक्र में दलित

नई दिल्ली: राजनेताओं और दलों ने डाॅ. भीमराव अंबेडकर और कथित दलित उत्थान की राजनीति को अपने राजनीतिक हितों का साधन और साध्य बना लेने से ज्यादा कुछ नहीं समझा। अतएव जो दलित एक समय मायावती की बसपा के सेवक थे, वे भाजपा और अब समाजवादी पार्टी के दर पर नतमस्तक हो रहे हैं।

 

इनमें ज्यादातर अति पिछड़े और दलित हैं। कमोबेश इसे ही स्वार्थपरक अवसरवादी राजनीति कहते हैं। साफ है, इनके लिए अंबेडकरवादी दर्शन का आदर्श स्व हित से आगे नहीं बढ़ पाया। मायावती ने भी अंबेडकर के जातिविहीन सामाजिक दर्शन को पूंजी और सामंती वैभव के भोग का पर्याय मान लिया। भविष्य में निर्मित होने वाली इन स्थितियों को शायद अंबेडकर ने 1956 में ही भांप लिया था। गोया, उन्होंने आगरा में भावुक होते हुए कहा था कि 'उन्हें सबसे ज्यादा उम्मीद दलितों में पढ़े-लिखे बौद्धिक वर्ग से थी कि वे समाज को दिशा देंगे लेकिन इस तबके ने हताश ही किया है।'

 

दरअसल अंबेडकर का अंतिम लक्ष्य जाति विहीन समाज की स्थापना थी। जाति टूटती तो स्वाभाविक रूप से समरसता व्याप्त होने लग जाती। लेकिन देश की राजनीति का यह दुर्भाग्यपूर्ण पहलू रहा कि नेता सवर्ण रहे हों या अवर्ण जाति, वर्ग भेद को ही आजादी के समय से सत्तारूढ़ होने का मुख्य हथियार बनाते रहे हैं।

 

आज मायावती को सबसे ज्यादा किसी तात्विक मोह ने कमजोर किया है तो वह है, धन और सत्ता लोलुपता। जबकि अंबेडकर इन आकर्षणों से सर्वथा निर्लिप्त थे। भारत ऐसा भुक्तभोगी देश रहा है कि जब वह सोने की चिड़िया कहा जाता था, तब उसे मुगलों ने लूटा और फिर अंग्रेजों ने। अंग्रेजों ने तो भारत के सामंतों और जमींदारों को इतनी निर्ममता से लूटा कि इंग्लैंड के औद्योगिक विकास की नींव ही भारत की धन-संपदा के बूते रखी गई। यहां के किसान और शिल्पकारों से खेती और वस्तु निर्माण की तकनीकें हथियाईं।

 

भारत के भौगोलिक विस्तार की सीमाएं सिमट जाने का कारण भी पूंजी का निजीकरण और सामंतों की भोग-विलासी जीवन शैली रही है। दुर्भाग्य से स्वतंत्र भारत में भी प्रशासनिक व्यवस्था में यही दुर्गुण समाविष्ट होकर देश को दीमक की तरह चाट रहा है। दलित नेता व अधिकारी भी अधिकार संपन्न होने के बाद उन्हीं कमजोरियों की गिरफ्त में आते गए। इसीलिए अगड़े-पिछड़ों का खेल और दल-बदल की महिमा मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कुटिल मंशा से आगे नहीं बढ़ पाई। यही वजह रही कि उत्तर-प्रदेश जैसे जटिल, धार्मिक व सामाजिक संरचना वाले राज्य में चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती आज चुनावी सरगर्मियों के बीच मौन व उदासीन हैं। यह उनकी राजनीतिक निष्क्रियता की घोषणा तो है ही, कालांतर में नेपथ्य में चले जाने का संकेत भी है। वरना, एक समय ऐसा भी था, जब इस दलित नेत्री से बसपा को अखिल भारतीय बना देने की उम्मीद की जा रही थी और दलितों में यह उम्मीद मायावती ने ही जगाई थी कि संगठन वह शक्ति है, जो प्रजा को राजा बना सकती है।

 

बहुजन समाज पार्टी का वजूद खड़ा करने से पहले कांशीराम ने लंबे समय तक डीएस-4 के माध्यम से दलित हितों के लिए संघर्ष किया था। इसी डीएस-4 का सांगठनिक ढांचा स्थापित करते समय बसपा की बुनियाद पड़ी और समूचे हिंदी क्षेत्र में बसपा के विस्तार की प्रक्रिया आरंभ हुई। कांशीराम के वैचारिक दर्शन में दलित और वंचितों को करिश्माई अंदाज में लुभाने का चुंबकीय तेज था। फलस्वरूप बसपा एक मजबूत दलित संगठन के रूप में स्थापित हुई और उत्तर-प्रदेश में चार बार सरकार बनाई। अन्य प्रदेशों में बसपा के विधायक दल-बदल के खेल में भागीदार बनकर सरकार बनाने में सहायक बने। किसी दल का स्पष्ट बहुमत नहीं होने पर समर्थन का टेका लगाने का काम भी किया। केंद्र में मायावती यही भूमिका अभिनीत करके राज्यसभा सांसद बनती रहीं। इन साधनों के साध्य के लिए मायावती ने सामाजिक अभियांत्रिकी (सोशल इंजीनियरिंग) जैसे बेमेल प्रयोगों का भी सहारा लिया। इन प्रयोगों का दायित्व किसी दलित को सौंपने की बजाय, सनातनी ब्राह्मण सतीष मिश्रा के सुपुर्द किए। मसलन सत्ता प्राप्ति के लिए जातीय समीकरण बिठाने में मायावती पीछे नहीं रहीं।

 

अंबेडकर ने जाति विहीन समाज की पुरजोर पैरवी की थी। लेकिन कर्मचारी राजनीति के माध्यम से जातिगत संगठन बसपा की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले कांशीराम ने अंबेडकर के दर्शन को दरकिनार कर कहा कि 'अपनी-अपनी जातियों को मजबूत करो।' यह नारा न केवल बसपा के लिए प्रेरणास्रोत बना बल्कि मंडलवादी मुलायम सिंह, लालू प्रसाद, शरद यादव और नीतीश कुमार ने भी इसे अपना-अपना, परचम फहराने के लिए सिद्ध मंत्र मान लिया। गोया, इन नेताओं ने अंबेडकर द्वारा स्थापित जाति तोड़ो आंदोलन को जाति सुरक्षा आंदोलन में बदल दिया। इसीलिए मंडल आयोग की पिछड़ी जातियों को आरक्षण की सिफारिशें मान लेने के बाद अब जातिगत जनगणना की बात पुरजोरी से उठाई जा रही है, जिससे संख्या बल के आधार पर जातिगत आरक्षण व्यवस्था सरकारी नौकरियों के साथ-साथ विधायिका में भी की जा सके।

 

सतीश मिश्रा के बसपा में आगमन के बाद सामाजिक अभियांत्रिकी का बेमेल तड़के का सिलसिला तो शुरू हुआ ही, जिन लोगों को मायावती मनुवादी कहकर ललकारा करती थीं, उन्हीं मनुवादियों के कर्मकांड बसपा के मंचों पर सत्ता प्राप्ति के लिए अनिवार्य अनुष्ठान बन गए। चुनावी साभाओं में हवन कुंड बनाए जाने लगे और वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ भगवान परशुराम के सोने-चांदी के फरसे प्रतीक के रूप में मायावती को भेंट किए जाने लगे। 'तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार' का जो नारा ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को बतौर गाली दिया जाता था, 'वह हाथी नहीं गणेश हैं, ब्रह्मा, विष्णु, महेश हैं' के सनातनी संस्कार में बदल गया।

 

मायावती ब्राह्मणों की लाचारी दूर करने के बहाने कहने लगीं, 'ब्राह्मण हशिए पर चले गए हैं, इसलिए उनकी खोई गरिमा लौटाने का काम हम करेंगे।' इस गौरव के पुनर्वास के लिए मायावती ने 2017 में उत्तर-प्रदेश के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री रहते हुए विधानसभा से आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव का टोटका रचकर भारत सरकार को कानून बनाने के लिए भेजा। स्वार्थपूर्ति के लिए किए जाने वाले इन आडंबरों से पता चलता है कि हमारे निर्वाचित जनप्रतिनिधि जिस संविधान के प्रति निष्ठा व अक्षरश: पालन की शपथ लेते हैं, उसे पढ़ने-समझने की आवश्यकता ही अनुभव नहीं करते।

 

यहीं नहीं वे जिस दल के सदस्य होते हैं और उस दल के जिस नेता के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर, उनके गुणगान करने में थकते नहीं हैं, अमूमन उसी व्यक्ति की विचार-प्रक्रिया को पलीता लगाते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में अंबेडकर की चिंता ठीक थी कि 'मेरी चिंता इस बात के अहसास से गहरी हो जाती है कि जातिवाद और पंथवाद के रूप में मौजूद भारत की बुराइयों व कुरीतियों के कारण विभिन्न राजनीतिक दल अस्तित्व में आ सकते हैं।' आज देश में करीब 1400 राजनीतिक दल हैं, जिनका प्रमुख आधार धर्म, जाति और क्षेत्रवाद है।

 

देशभर में दलितों की आबादी 16 प्रतिशत है। पंजाब में 30, पश्चिम बंगाल में 23, उत्तर-प्रदेश में 21 और महाराष्ट्र में 10.5 फीसदी दलित आबादी है। चूंकि अंबेडकर महाराष्ट्र से थे, इसलिए ऐसा माना जाता है कि सबसे ज्यादा दलित चेतना महाराष्ट्र में है। दलित आंदोलनों की भूमि भी महाराष्ट्र रहा है। डाॅ. अंबेडकर ने यहीं रिपब्लिकन ऑफ इंडिया (आरपीआई) राजनीतिक दल का गठन किया था। लेकिन इस पार्टी के अब तक करीब 50 विभाजन हो चुके हैं। इसके कर्ताधर्ता अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर हैं। इसी दल से निकले रामदास अठावले ने अपनी पार्टी आरपीआई-ए गठित की हुई है। उनकी मंशा भाजपा-शिवसेना तो कभी कांग्रेस-एनसीपी को समर्थन देकर सत्ता में बने रहने की रही है। यही पदलोलुपता महाराष्ट्र में दलित वर्ग को सबसे ज्यादा असंगठित किए हुए है।

 

इस नाते मायावती के इस करिश्मे को मानना पड़ेगा कि वे उत्तर-प्रदेश में अपना 22 प्रतिशत वोट 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में स्थिर रखने में सफल रही हैं। हालांकि 2014 में बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाई। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें लगभग इतना ही वोट मिला था। इसी वोट की माया रही कि अगड़े और पिछड़े थैलियां लेकर उनसे बसपा का टिकट लेने की कतार में लगे रहे। किंतु अब यह मिथक टूटने को आतुर दिखाई दे रहा है। इस एक जातीय कुचक्र के टूटने भर से अन्य राजनीतिक दलों का जातिगत कुचक्र भी टूटेगा, ऐसा फिलहाल नहीं लग रहा है। गोया, जातीय गठबंधन के कुचक्र बने रहेंगे।

 

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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कोरोना काल के दौरान देश के 84% परिवारों की कमाई घटी, लेकिन अरबपति 102 से बढ़कर 142 हो गए

नई दिल्ली : जाने आलम (जानू चौधरी ) कोरोना महामारी के दौरान जहां एक ओर देश में गरीबों के सामने खाने-पीने का संकट पैदा हो गया था, तो दूसरी तरफ इस दौरान देश में अरबपति अमीरों की संख्या बढ़ गई है।

गैर सरकारी संगठन ऑक्सफैम इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में जहां भारत में 84 प्रतिशत परिवारों की आय में गिरावट आई, वहीं भारतीय अरबपतियों की संख्या 102 से बढ़कर 142 हो गई।

आज वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2022 का पहला दिन है। इस मौके पर ऑक्सफैम इंडिया की तरफ से वार्षिक असमानता सर्वे जारी किया गया है। इसके अनुसार, कोरोना काल में भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति दोगुनी हो गई। इनकी अमीरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टॉप-10 अमीरों के पास इतनी दौलत है कि वे देश के सभी स्कूलों और कॉलेजों को अगले 25 सालों तक चला सकते हैं।

45% पैसा सिर्फ 10% लोगों के पास
कोरोना के कारण असमानता इतनी बढ़ गई है कि देश के सबसे अमीर 10% लोगों के पास देश की 45% दौलत है। वहीं, देश की 50% गरीब आबादी के पास महज 6% दौलत है।

1% टैक्स से मिल जाएंगे 17.7 लाख एक्स्ट्रा ऑक्सीजन सिलेंडर
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के टॉप 10% अमीर लोगों पर अगर 1% एडिशनल टैक्स लगाया जाए तो उस पैसे से देश को 17.7 लाख एक्स्ट्रा ऑक्सीजन सिलेंडर मिल जाएंगे। वहीं, देश के 98 अमीर परिवारों पर अगर 1% एक्स्ट्रा टैक्स लगाया जाए तो उस पैसे से आयुष्मान भारत प्रोग्राम को अगले सात सालों तक चलाया जा सकता है। आयुष्मान भारत दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम है।

98 अमीर लोगों के पास 55.5 करोड़ गरीब लोगों के बराबर दौलत
इस आर्थिक असमानता रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 142 अरबपतियों की कुल दौलत 719 बिलियन डॉलर, यानी 53 लाख करोड़ रुपए है। 98 सबसे अमीर लोगों के पास 55.5 करोड़ गरीब लोगों के बराबर दौलत है। यह करीब 657 बिलियन डॉलर, यानी 49 लाख करोड़ रुपए होती है। इन 98 परिवारों की कुल दौलत भारत सरकार के टोटल बजट का करीब 41% है।

84 सालों तक रोजाना खर्च कर सकते हैं 7.4 करोड़ रुपए
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के टॉप-10 अमीर रोजाना आधार पर 1 मिलियन डॉलर, यानी 7.4 करोड़ रुपए खर्च करें तो भी उनकी दौलत को खर्च होने में 84 साल लग जाएंगे। वहीं अगर देश के अमीरों पर वेल्थ टैक्स लगाया जाए तो 78.3 बिलियन डॉलर, यानी 5.8 लाख करोड़ रुपए कलेक्ट किए जा सकते हैं। इस पैसे से सरकार का हेल्थ बजट 271% बढ़ सकता है।

कोरोना काल में 28% महिलाओं की नौकरी गई
जेंडर की बात करें तो कोरोना काल में 28% महिलाओं ने अपनी जॉब गंवाई। इससे उनकी कुल कमाई दो तिहाई घट गई। महिलाओं की स्थिति को लेकर कहा गया कि बजट 2021 में सरकार ने मिनिस्ट्री ऑफ वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट पर केवल उतना खर्च किया, जितना भारत के बॉटम-10 करोड़पतियों की कुल संपत्ति का आधा भी नहीं है।

शिक्षा के लिए बजट आवंटन घटा
ऑक्सफैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा के लिए सरकार के बजट आवंटन में 6% की कटौती की गई, जबकि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन कुल केंद्रीय बजट के 1.5% से घटकर 0.6% हो गया।

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योगी का दावा: यह चुनाव 80 बनाम 20 का होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की संभावित घोषणा से पहले कहा कि प्रदेश का यह चुनाव 80 बनाम 20 का होगा जिसमें 80 फीसदी भागीदारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की होगी, शेष 20 प्रतिशत हिस्से में बाकी सभी दल होंगे।

योगी ने यहां दूरदर्शन द्वारा आयोजित डीडी काँक्लेव में कहा कि भाजपा इस बार भी 300 से अधिक सीट जीतेगी। चुनाव में विपक्ष की चुनौती के सवाल पर योगी ने कहा, “2019 में सबसे बड़ा गठबंधन हुआ सपा, बसपा और लोकदल सहित तमाम पार्टियों ने मिलकर लड़ा था, तब सर्वाधिक 64 सीट भाजपा को और इसके बाद दूसरे स्थान पर बसपा को 10 एवं पांच सीट सपा को मिली थी। मैंने तब भी कहा था कि भाजपा 65 सीट जीतेगी।”

उन्होंने कहा कि इस बार सभी विरोधी दल अलग अलग चुनाव लड़ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि भाजपा फिर 300 से अधिक सीट जीतेगी। स्वस्थ लोकतंत्र में कुछ सीटें विपक्ष को भी मिलेंगी और यह होना भी चाहिये।

चुनाव को कठिन परीक्षा बताये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव उन लोगों के लिये कठिन एवं चुनौतीपूर्ण इम्तिहान होता है जो अधूरी तैयारी होने के कारण भयभीत होते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे लिये चुनाव परीक्षा नहीं बल्कि उत्सव है।”

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार ने पांच साल सिर्फ जनहित के काम किये हैं इसलिये उनकी चुनाव में जाने की तैयारी पूरी है। योगी ने इसकी तुलना परीक्षा में जाने वाले विद्यार्थी से करते हुये कहा किो विद्यार्थी साल भर पढ़ाई करते हैं वे परीक्षा के समय घबराते नहीं हैं। परीक्षा में घबराहट उन विद्यार्थियों को होती है जो साल भर क्लास में जाते नहीं है और जिनकी तैयारी अधूरी होती है। उन्होंने कहा, “इसीलिये मैं मानता हूं कि हमारे लिये चुनाव परीक्षा नहीं बल्कि उत्सव है।

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उत्तराखंड के रुड़की में उपभोक्ता जनघोष न्यूज के क्षेत्रिय कार्यालय का शुभारंभ

रुड़की/उत्तराखंड :रुड़की के अशोक नगर ढंढेरा नियर हिमालय पैलेस उपभोक्ता जनघोष न्यूज के क्षेत्रीय कार्यालय का शुभारंभ समाजसेवी श्रीमती सोनिया शर्मा व कांग्रेस नेत्री समाजसेवी रश्मि चौधरी व प्रदेश अध्यक्ष मानवाधिकार संगठन ब्यूरो एडवोकेट नवींन कुमार जैन ने सयुक्त पंडित चेतन शास्त्री द्वारा गणपति बप्पा व नवग्रह पूजन करा कर कार्यलय का उदघाटन रिबन काटकर कराया उदघाटन समय समाजसेविका सोनिया व रश्मि चौधरी ने समाचार प्लस की खुशबू न्यूज संवाददाता सपना चौहान को बधाई देते हुए कहा कि सत्य के मार्ग पर चलकर समाज को स्वच्छ बनाने हेतु सदा जनघोष न्यूज के स्तम्भ को उन्नति की ओर अग्रसर करना हम तुम्हरे उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

इसी क्रम में भाजपा नेता नवींन जैन ने कहा हम सपना जी तुम्हारे साहस की दाद देते हैं कि तुम जिस प्रकार समाज की बुराइयों को दूर करने का प्रयास कर रही हो हम तुम्हारे प्रत्येक जनहित कार्य मे सदा साथ है व रहेंगे बस इसी प्रकार अपने न्यूज प्रोजेक्ट को साफ छवि व ईमानदारी से उन्नति की ओर अग्रसर हो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत कर राष्ट्रदायित्व की पूर्ति करती हुई जीवन व्यतीत करो ईश्वर हमेशा मदद करेंगे। 

वही इस अवसर पर सुमित बिरला,एडवोकेट राकेश. मोहित गिरी, मुकेश गिरी, विशाल बिरला, अंकित गिरी, सोनू गिरी, सुमन, रेखा, महावीर, लविश, मनीष मनीष, विनय राणा, शोभा, सुनीता सौरव नितिन गिरी, रोशनी, सोन, शिवा और मीडिया स्टाफ सुभाष सक्सेना, युवराज, अमर मौर्य उपभोक्ता जन घोष की टीम के नाम आलम, अनुज मिंटू, ज्योति बिष्ट, रिकी, मनोज नागर, पूनम, विनोद चौहान, मून चौहान, मुकेश चौहान, गीता चौहान, सुरेश चौहान आदि व्यक्ति मौजूद रहे।


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हिन्दू महासभा ने की कालीचरण की गिरफ्तारी की निंदा

लखनऊ : अखिल भारत हिन्दू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी ने कालीचरण महाराज की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने की मांग की है। त्रिवेदी ने कहा कि यदि उन्हें जल्द से जल्द रिहा नहीं किया गया तो पार्टी सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होगी।


छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बीते दिनों हुई धर्मसंसद में धर्म गुरु कालीचरण महाराज ने महात्मा गांधी को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की थी। साथ ही उन्होंने गांधी जी की हत्या के लिए नाथूराम गोडसे की सराहना की थी। इस पर विवाद खड़ा होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। रायपुर के पूर्व महापौर प्रमोद दुबे की तहरीर पर यह प्राथमिकी दर्ज की गई थी।


त्रिवेदी ने साफ कहा कि हिन्दू महासभा कालीचरण द्वारा गोडसे को नमन करने का न सिर्फ पूरा समर्थन करती है बल्कि गांधी को लेकर की गयी टिप्पणी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के बंटवारे के मुद्दे पर आज भी देश के अधिकांश लोगों के दिलों में गांधी के प्रति आग धधक रही है। त्रिवेदी ने कहा कि गांधी जी की हत्या के बाद न्यायालय में दिये गये नाथूराम गोडसे के बयानों और उनके भाई गोपाल गोडसे की लिखित पुस्तक गांधी वध क्यों पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रतिबंध लगाकर गांधी हत्या के सच को सामने आने से रोकने का भरकस प्रयास किया, लेकिन अब देश की जनता जाग उठी है और वह वास्तविकता जानना चाहती है। 



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मेरठ में कोविड की रफ्तार तेज, 12 नए मामले

मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ में बीते 24 घंटों में कोविड के 12 नए मामले सामने आए। जिले में बुधवार को तीन साल के बच्चे समेत 12 नए मरीज मिले। इनमें छह पुरुष और छह महिला वर्ग से हैं। अब जनपद में सक्रिय मरीजों की संख्या 31 हो गई है। कोविड के 5097 सैंपलों की जांच में मंगलवार को चार लोग पॉजिटिव मिले थे। इनमें बिजली विभाग के निदेशक, सीए, अधिशासी अभियंता और चपरासी शामिल हैं। वहीं, सोमवार को मिले आठ मरीजों में से चार की जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग ने साझा की है। इनमें दो महिलाएं हैं, जिनमें से एक महिला दुबई से विदेश यात्रा कर कंकरखेड़ा आई है और दूसरी गर्भवती सरधना निवासी है, जबकि दो अन्य मरीज हैं, जो सर्जरी कराने व बुखार होने पर अस्पताल गए थे। इन सभी मरीजों को जिला अस्पताल के करोना वार्ड भर्ती कर इन सभी के सैंपल जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए दिल्ली भेजे जाएंगे। 




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गांगुली की हालत स्थिर

कोलकाता : बीसीसीआई अध्यक्ष और भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की हालत स्थिर है जिन्हें तीन दिन पहले कोरोना संक्रमण के बाद एहतियात के तौर पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वुडलैंड्स अस्पताल की एमडी और सीईओ डॉक्टर रूपाली बसु ने एक बयान में कहा, ‘‘अस्पताल में भर्ती होने के तीसरे दिन बीसीसीआई अध्यक्ष और भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली की हालत स्थिर है। उनका रक्तचाप और ह्र्दयगति स्थिर है और शरीर में आक्सीजन का प्रवाह भी सामान्य है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कल रात उन्हें अच्छी नींद आई। उन्होंने नाश्ता और लंच भी किया। मेडिकल बोर्ड उनकी हालत पर नजर रखे हुए है।’’ गांगुली को इस साल की शुरूआत में दो बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था जब उनकी आपात एंजियोप्लास्टी हुई थी।




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प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की संपत्ति कुर्क की

नई दिल्ली :  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कहा है कि उन्होंने आईपीएस अधिकारी प्रिया दुबे, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) झारखंड और उनके पति संतोष कुमार दुबे, पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की मनी लॉन्ड्रिंग मामले की रोकथाम के तहत 1.46 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति कुर्क कर ली है।


ईडी के एक अधिकारी ने कहा कि शुरूआत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया था। ईडी ने बाद में सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की।


ईडी के एक अधिकारी ने कहा, ईडी ने यह बड़ी कार्रवाई सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दर्ज मामले के आधार पर की है।


ईडी अधिकारी ने कहा कि उन्होंने प्रिया दुबे के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है और उनकी अलग से जांच की जा रही है।


ईडी के एक अधिकारी ने कहा, हमने संतोष कुमार दुबे और प्रिया दुबे और अन्य के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। इन संपत्तियों को 30 लाख रुपये में खरीदा गया था।


जानकारी के मुताबिक, संपत्तियां रांची के अशोकनगर, तीन व्यावसायिक दुकानों और दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में एक फ्लैट की कीमत 72,40,000 रुपये थी।


दंपति के पास रांची में ग्रीन व्यू हाइट में 43.85 लाख रुपये का एक आवासीय फ्लैट भी था।


सीबीआई ने जुलाई 2013 में तत्कालीन आरपीएफ कमांडेंट संतोष कुमार दुबे और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।


संघीय जांच एजेंसी ने प्रिया दुबे और संतोष कुमार दुबे की आय और कमाई के अन्य स्रोतों के बारे में जानकारी एकत्र की। 1998 से 2013 के बीच उनकी आय का विश्लेषण किया गया और उनकी आय के अन्य स्रोतों की भी जांच की गई।


मामले की गहन जांच के बाद संघीय जांच एजेंसी ने पाया कि दंपति ने अपने ज्ञात स्रोतों से 1.57 करोड़ रुपये की आय अर्जित की। जबकि, उनके द्वारा अर्जित संपत्तियों का मूल्य लगभग 2.65 करोड़ रुपये आता है, जो सभी वैध स्रोतों से उनकी आय की तुलना में बहुत अधिक था।


सीबीआई ने पाया था कि दोनों पदाधिकारियों ने अवैध तरीके से 1.48 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की थी।


पीएमएलए के तहत जांच से पता चला है कि संतोष कुमार दुबे ने अपनी, अपनी पत्नी प्रिया दुबे और अपने पिता के नाम (शंकर दयाल दुबे) में 1.46 करोड़ रुपये की विभिन्न अचल संपत्तियां अर्जित की।


सीबीआई की जांच के आधार पर ईडी ने पीएमएलए का मामला भी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


दंपति ने अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को अपनी आय के स्रोत के रूप में दिखाने की कोशिश की थी। ईडी ने कहा कि वे मामले की और जांच कर रहे हैं।

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उप्र विधानसभा चुनाव में होगा इस बार एक घंटे अधिक मतदान : चुनाव आयोग

लखनऊ :  चुनाव आयोग ने कोरोना संकट के फिर से उभरने की वजह से उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में निर्धारित समय से एक घंटा अधिक मतदान कराने सहित अन्य अहम फैसले किये हैं। देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा ने राज्य में चुनावी तैयारियों की तीन दिन तक चली समीक्षा के बाद गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोरोना के खतरे को ध्यान में रखते हुये आयोग ने निर्णय लिया है कि मतदान की अवधि को एक घंटे के लिये बढ़ा दिया जाये।


चंद्रा की अगुवाई में आयोग के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उप्र के तीन दिवसीय समीक्षा दौरे में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के अलावा विभिन्न जांच एजेंसियों सहित निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अन्य पक्षकारों के साथ कई दौर की बैठकों के बाद यह जानकारी दी। आयोग के प्रतिनिधि मंडल में देश के दोनों निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार और डा अनूप चंद्र पांडेय तथा चुनाव आयोग के महासचिव उमेश सिन्हा के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।


चंद्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 14 मई को समाप्त हो रहा है। राज्य में कुल 403 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 317 सामान्य, 84 अनुसूचित जातियों तथा 02 अनुसूचित जनजातियों के लिये आरक्षित विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी सीटों पर विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराये जाने हैं। उन्होंने बताया कि बैठक में शामिल हुये सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने कोरोना प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराते हुये समय से चुनाव संपन्न कराने की मांग की है।


उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के खतरे को ध्यान में रखते हुये आयोग उप्र में स्वतंत्र, निष्पक्ष, प्रलोभन मुक्त और कोरोना सुरक्षित निर्वाचन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। चंद्रा ने कहा कि आयोग का यह प्रयास है कि आगामी चुनाव में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, महिलाओं और नये मतदाताओं सहित सभी मतदाताओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो। इसके लिये विशेष उपाय भी किये गये हैं।


उन्होंने कहा कि इसके तहत सभी मतदान केंद्रों और मतदान कर्मियों के लिये कोविड सुरक्षित प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। साथ कोरोना के खतरे से बचने के लिये इस बार मतदान केन्द्रों की संख्या में 11 हजार से अधिक का इजाफा किया गया है। चंद्रा ने बताया कि कोविड के मद्देनजर सोशल डिस्टेंसिंग मानकों को ध्यान में रखते हुये मतदान केन्द्रों पर भीड़ प्रबंधन के उपाय सुनिश्चित किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इसके तहत उप्र के आगामी चुनाव में 1250 मतदाताओं पर एक मतदान केंद्र बनाने का फैसला किया गया है। अब तक एक मतदान केन्द्र पर अधिकतम 1500 मतदाता होते थे। इस प्रकार राज्य में 1 लाख 74 हजार 351 मतदान स्थल स्थापित किए जायेंगे। यह संख्या पिछले चुनावों से 11,020 अधिक है।


चंद्रा ने बताया कि आगामी चुनाव में कोरोना संकट को देखते हुये आयोग ने केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों के साथ भी विचार विमर्श किया है| इसके आधार पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नये दिशा निर्देश जारी किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा निर्देशों एवं राजनीतिक दलों से परामर्श के आधार पर जल्द ही नये दिशा निर्देश जारी करने का निर्णय किया जाएगा|


उन्होंने कहा कि उप्र विधानसभा चुनाव में तैनात होने वाले सभी मतदान कार्मिकों को कारोना वैक्सीन की दोनों खुराक लेना अनिवार्य किया गया है। चंद्रा ने बताया कि आयोग के सुझाव के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी चुनाव कर्मियों को ‘फ्रंट लाइन वर्कर’ का दर्जा देने के निर्देश जारी कर दिए हैं। जिससे चुनाव कर्मियों का टीकाकरण प्राथमिकता के आधार पर हो सकेगा। साथ ही चुनाव कर्मियों को बूस्टर डोज भी जरूरत के मुताबिक दिया जायेगा।


उप्र की मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के बाद आये बदलावों की जानकारी देते हुये चंद्रा ने बताया कि ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण 2022’ के अन्तर्गत, आगामी 05 जनवरी को संशोधित निर्वाचक नामावली प्रकाशित की जायेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पांच जनवरी के बाद भी मतदाता सूची में नाम जोड़े या हटाये जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक मतदाता सूची में अपना नाम जोड़ने या हटाने के अलावा अन्य संशोधन संबंधी दावे एवं आपत्तियों दर्ज करा सकेंगे।


चंद्रा ने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के आधार पर बताया कि उत्तर प्रदेश में अब तक 52.8 लाख नये मतदाता जुड़ गये हैं। इसके साथ ही राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 15.02 करोड़ हो गयी है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का अन्तिम प्रकाशन होने पर मतदाताओं की संख्या संबंधी वास्तविक आंकड़े स्पष्ट होंगे। संशोधित मतदाता सूची के आधार पर उन्होंने उप्र में मतदाताओं के लैंगिक अनुपात के बारे में बताया कि राज्य में 2017 की अपेक्षा महिला मतदाताओं की संख्या प्रति एक हजार पुरुषों की तुलना में पर 29 की बढ़ोतरी हुयी है। चंद्रा ने कहा कि 2017 में उप्र में एक हजार पुरुष मतदाताओं पर 839 महिला मतदाता थीं। अब यह संख्या बढ़कर 868 हो गयी है।


चंद्रा ने पहली बार मतदाता बन रहे 18 से 19 साल के आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या में भी तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज किये जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नये मतदाताओं को जोड़ने संबंधी आयोग के प्रयासों की बदौलत नये मतदाताओं में 18 से 19 साल के आयुवर्ग के मतदाताओं का प्रतिशत 0.51 से बढ़कर 1.32 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने बताया कि महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुये उप्र में 800 मतदान केन्द्र ऐसे बनाये जायेंगे जिनका संचालन पूरी तरह से महिला चुनाव कर्मियों के हाथ में होगा। चंद्रा ने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 10.64 लाख दिव्यांग मतदाताओं तथा 80 वर्ष से अधिक आयु के 24.03 लाख मतदाताओं को चिन्हित किया गया है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग एवं बुजुर्ग मतदाताओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुये सभी मतदान केंद्र पूरी तरह से दिव्यांग हितैषी बनाये जायेंगे। जिससे कि वे सहजता से मतदान कर सकें। आयाेग दिव्यांग मतदाताओं को मतदान केन्द्र पर व्हील चेयर मुहैया कराने के अलावा उन्हें मतदान के लिये घर से मतदान केन्द्र तक लाने और वापस घर पहुंचाने के लिये पिक एंड ड्रॉप की सुविधा भी दी जायेगी।


चंद्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पहली बार आयोग ने चुनावों में 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग मतदाताओं और कोरोना प्रभावित मतदाताओं को आयोग ने घर बैठे ही ‘पोस्टल बैलेट’ से मतदान करने की सुविधा प्रदान करने की पहल की है। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभिन्न प्रकार की शारीरिक अक्षमता के कारण जो लोग मतदान केन्द्र तक पहुंचने में अक्षम महसूस करेंगे, उन्हें पूरी पारदर्शिता बरतते हुये पोस्टल बैलेट की सुविधा दी जायेगी। चंद्रा ने कहा कि घर बैठे मतदान करने के लिये मतदाताओं को पहले आवेदन करना होगा।


उन्होंने बताया कि कुछ राजनीतिक दलों ने पोस्टल बैलेट की इस सुविधा के बारे में चिंता जाहिर की है। किंतु, उन्हें समूची प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता के बारे में आश्वस्त किया गया है। चंद्रा ने कहा कि पोस्टल बैलेट के आवेदकों की सूची सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा की जायेगी। साथ ही मतदान कर्मी जब पोस्टल बैलेट की प्रक्रिया पूरी कराने के लिये आवेदक के घर जायेंगे, तब आवेदकों के प्रतिनिधि की मौजूदगी में मतदान की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुये प्रक्रिया पूरी की जायेगी और इसकी वीडियोग्राफी की होगी। चंद्रा ने कहा कि मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में स्थापित कम से कम एक लाख मतदान स्थलों पर वेबकास्टिंग की जायेगी| उन्होंने बताया कि राज्य सरकार से आगामी 31 दिसंबर तक आयोग को कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति के पालन की रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। साथ ही सभी संबद्ध एजेंसियों को भी अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मादक द्रव्य एवं नकदी आदि के मुफ्त वितरण की आवाजाही पर प्रभावी रूप से रोक लगाने को कहा गया है। जिससे चुनावी प्रक्रिया को गैरकानूनी गतिविधियों से दूषित होने से बचाया जा सके। 



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तेजस्वी ने नीतीश से पूछा सवाल, सरकार की कमियां कौन दूर करेगा?

पटना : बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव गुरुवार को दिल्ली से पटना पहुंचे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समाज सुधार अभियान को लेकर उन्हें घेरा। राजद नेता ने कहा कि समाज में क्या-क्या बुराइयां हैं, सभी जानते हैं, लेकिन सरकार में जो कमियां हैं, उसे कौन दूर करेगा।


तेजस्वी ने मुख्यमंत्री के शराबबंदी को लेकर दिए जा रहे बयानों को भी हास्यास्पद बताया। दिल्ली से पटना पहुंचने के बाद पटना हवाई अड्डे पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए तेजस्वी ने कहा कि शराबबंदी को लेकर जो ज्ञान मुख्यमंत्री ने दिया वह हास्यास्पद है।


तेजस्वी ने कहा, मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं कि शराब पीने से एड्स होता है। कितना उटपटांग बयान दे रहे हैं। शराबबंदी की जिम्मेदारी पुलिस की है। लेकिन विधानसभा परिसर में शराब की बोतलें मिलती हैं, फिर भी किसी पर कार्रवाई नहीं होती।


तेजस्वी ने कहा कि, मुख्यमंत्री बोल रहे हैं कि मुख्यमंत्री सभी ओर से घिरे हुए हैं, ऐसे में उटपटांग बयान दे रहे हैं।


बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कौन नहीं जानता कि नशा करना, चोरी करना, दहेज लेना बुरी बात है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को समाज की बुराइयां दिख रही हैं, लेकिन सरकार की बुराइयां, कमियां नहीं दिख रही।


उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, समाज में क्या अच्छाई-बुराई है सब लोग जानते हैं। लेकिन सरकार में जो कमियां हैं। बिहार में जो कमियां हैं। जो प्रशासनिक अराजकता है। इसे कौन दुरुस्त करेगा? भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, गरीबी कौन मिटाएगा। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा कौन दिलाएगा।


तेजस्वी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने बिहार में इतना काम कर दिया कि लोगों ने उनकी पार्टी को तीसरे नंबर की पार्टी बना दिया। 






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चेन्नई में अपमान से आहत होकर कॉलेज के छात्र ने की आत्महत्या

चेन्नई : चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में एमए के प्रथम वर्ष के छात्र एम. कुमार ने अपने दोस्तों और परिवार को एक ऑडियो संदेश भेजने के बाद डबल डेकर ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। संदेश में कहा गया कि वह पचियप्पा के कॉलेज के छात्रों द्वारा भिक्षा के रूप में दिया गया जीवन नहीं जीना चाहता था, जो उसका अपमान करते थे।


पुलिस ने कहा कि ट्रेन और बस से यात्रा के दौरान कॉलेजों के छात्रों के बीच नियमित रूप से झड़पें हुईं और हाल ही में, प्रेसीडेंसी कॉलेज, चेन्नई के छात्रों ने अवादी और हिंदू कॉलेज रेलवे स्टेशनों के पास एक रेल रोको का मंचन किया, क्योंकि रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने एक छात्र को ट्रेन में केक काटकर उसका जन्मदिन मनाने के लिए एक यात्री द्वारा चेन खींचने के बाद हिरासत में ले लिया था।


पुलिस के अनुसार, 21 वर्षीय कुमार ने अपने परिवार और दोस्तों को एक ऑडियो संदेश भेजा था, जिसमें कहा गया था कि वह पचियप्पा कॉलेज, चेन्नई के छात्रों द्वारा किए गए अपमान को सहन करने में असमर्थ है और वह प्रतिद्वंद्वी छात्रों द्वारा भिक्षा के रूप में दिया गया जीवन नहीं जीना चाहता था।


उन्होंने अपनी मां और दोस्तों से माफी मांगी और ऑडियो क्लिप एक ट्रेन की गड़गड़ाहट के साथ खत्म हो गई।


मंगलवार दोपहर कक्षाओं में भाग लेकर घर लौटा कुमार ने अपनी मां से कहा कि उसे एक शादी में शामिल होना है और देर से घर वापस आएगा।


शुरूआत में कुमार के परिवार और दोस्तों ने ऑडियो क्लिप को खारिज कर दिया, लेकिन जब वह बुधवार सुबह तक घर नहीं लौटा और तलाशी ली गई, तो पुलिस को उसका शव रेलवे ट्रैक पर मिला।


मामले की जांच कर रही थिरुनिनरावुर पुलिस ने कहा कि कुमार ने थिरुनिनरावुर रेलवे स्टेशन से कुछ मीटर की दूरी पर रात करीब 8.40 बजे डबल डेकर ट्रेन के सामने छलांग लगा दी।


पुलिस ने पचियप्पा के कॉलेज के कुछ छात्रों को हिरासत में लिया है और कुमार की मौत के कारणों की जांच कर रही है। 





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उत्तराखंड रक्षा अभियान की ओवैसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग

देहरादून : उत्तराखंड रक्षा अभियान के संस्थापक दर्शन भारती ने एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ कथित तौर पर हिंदू धर्म के खिलाफ लोगों को भड़काने और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुली धमकी देने के लिए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) जन्मेजय खंडूरी को शिकायत की है।


वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को बुधवार को सौंपे गए एक पत्र में भारती ने हैदराबाद के सांसद पर लोगों को हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काने और उसे मानने वालों को धमकाने का आरोप लगाया। उन्होंने पत्र में कहा, ‘‘उन्होंने (ओवैसी) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुली धमकी दी है और उनकी जान को खतरे में डाला है।’’


भारती ने उस वीडियो क्लिप का उल्लेख किया जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस वीडियो में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष ओवैसी कथित तौर पर यह कहते सुने गए कि जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे और अपने मठ या कहीं और होंगे... तो उन्हें कौन बचाएगा।


भारती ने कहा कि एआईएमआईएम के नेता देश में सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा हैं। ओवैसी के खिलाफ एक मामला दर्ज किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।


उत्तराखंड रक्षा अभियान वही संगठन है जिसने वेब सीरीज ‘तांडव’ के निर्माताओं के खिलाफ भी शिकायत की थी और दारुल उलूम देवबंद के उन दावों पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, जिसमें बद्रीनाथ को बदरुद्दीन की मजार बताया गया था।





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खतरनाक बिल्डिंग में चल रहा दिल्ली का अस्पताल, आतिशी ने पोस्ट किया वीडियो

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी की विधायक आतिशी ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में एमसीडी द्वारा संचालित राजन बाबू इंस्टीट्यूट ऑफ पल्मोनरी मेडिसिन एंड ट्यूबरकुलोसिस अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि मरीजों का इलाज एक ऐसी इमारत में किया जा रहा है जिसे खतरनाक घोषित किया गया है और यह किसी भी दिन गिर सकती है।


आतिशी ने ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, हम सुनते रहे हैं कि भाजपा के नेतृत्व वाली एमसीडी दिल्ली के लोगों को स्वास्थ्य के मोर्चे पर, दवाओं, अच्छे बुनियादी ढांचे और सभी के मामले में विफल कर रही है। लेकिन आज, हमने इस अस्पताल पर एक नजर डाली, जिसका भवन जर्जर है और बावजूद इसके मरीजों का इलाज अंदर किया जा रहा है।


आतिशी को वीडियो में इशारा करते हुए देखा जा सकता है, उन्होंने कहा, एमसीडी ने ही अस्पताल के बाहर लोगों को आगाह करते हुए बोर्ड लगाया है कि यह एक खतरनाक इमारत है प्रवेश न करें। आतिशी ने कहा, ऐसा लगता है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली एमसीडी ने दिल्ली के लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया है। 2017 में, जीटीबी नगर में राजन बाबू इंस्टीट्यूट ऑफ पल्मोनरी मेडिसिन एंड ट्यूबरकुलोसिस को मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया जाना था। इसका निर्माण 1935 में 79 एकड़ के परिसर के साथ किया गया था। अस्पताल उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के अंतर्गत आता है।




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दिल्ली में 46 प्रतिशत नमूनें ‘ओमीक्रोन’ से संक्रमित पाए गए, सामुदायिक स्तर पर फैलाव : जैन

नई दिल्ली : दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोरोना वायरस के नए स्वरूप ‘ओमीक्रोन’ के मामले धीरे-धीरे सामुदायिक स्तर पर फैल रहे हैं और राष्ट्रीय राजधानी में जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजे गए नमूनों में से 46 प्रतिशत में ‘ओमीक्रोन’ की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि क्रमवार प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) के तहत कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं और अतिरिक्त पाबंदियां लगाने के संबंध में निर्णय दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) करेगा।


जैन ने कहा, ‘‘दिल्ली के अस्पतालों में कोविड-19 के 200 मरीज भर्ती हैं। जीनोम अनुक्रमण की हालिया रिपोर्ट में 46 प्रतिशत नमूनों में ‘ओमीक्रोन’ की पुष्टि हुई है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में यात्रा नहीं की थी। इसका मतलब है कि अब ‘ओमीक्रोन’ स्वरूप दिल्ली के अंदर आ चुका है।’’


‘ओमीक्रोन’ के तीसरी लहर का कारण बनने के सवाल पर मंत्री ने कहा, ‘‘अब यह धीरे-धीरे सामुदायिक स्तर पर फैल रहा है। आने वाले दिनों में इसके मामले और बढ़ेंगे।’’ उन्होंने बताया कि दिल्ली के अस्पतालों में कोविड-19 के 200 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से केवल 102 ही शहर के निवासी हैं। वहीं, इनमें से 115 को सीधे हवाई अड्डे से ही अस्पताल ले जाया गया। अस्तपाल में भर्ती 115 लोगों में संक्रमण का कोई लक्षण नहीं हैं और उन्हें एहतियाती तौर पर अस्पताल में रखा गया है। अस्पताल में भर्ती किसी भी व्यक्ति को अभी तक ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी।


दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने बुधवार को कहा था कि कई अंतरराष्ट्रीय यात्री जिनके हवाई अड्डे पर संक्रमित ना होने की पुष्टि हुई थी, वे भी कुछ दिन बाद संक्रमित पाए जा रहे हैं। इस अवधि के दौरान उनके परिवार के सदस्य भी संक्रमित हो रहे हैं।


जैन ने कहा, ‘‘दिल्ली ने शादियों और अंतिम संस्कार पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। स्कूल, जिम और स्पा बंद हैं। दुकाने और मॉल एक दिन छोड़कर एक दिन खुलेंगी ...मेट्रो तथा बसें 50 प्रतिशत क्षमता के साथ चलेगी..सतर्क रहना बेहतर है।’’ उन्होंने कहा,‘‘ डीडीएमए की बैठक में अतिरिक्त पाबंदियां लगाए जाने पर फैसला किया जाएगा।’’


उन्होंने कहा कि अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों ने ‘ओमीक्रोन’ के प्रकोप के दौरान वहां संक्रमण के दैनिका मामलों में वृद्धि हुई है, ‘‘लेकिन अच्छी खबर यह है कि इससे गंभीर संक्रमण नहीं होता है और बहुत कम रोगियों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है।’’


दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने बुधवार को फैसला किया था कि दिल्ली में ‘येलो अलर्ट’ के तहत कोविड-19 से संबंधित लगाए गए प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेंगे और नई पाबंदियों पर निर्णय लेने से पहले अधिकारी कुछ समय के लिए स्थिति की निगरानी करेंगे।


कोरोना वायरस के नए स्वरूप ‘ओमीक्रोन’ के प्रसार के साथ ही संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बीच डीडीएमए ने मंगलवार को दिल्ली में क्रमवार प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) (जीआरएपी) के तहत ‘येलो अलर्ट’ घोषित किया था।


‘येलो’ अलर्ट के तहत रात्रि कर्फ्यू लगाना, स्कूलों तथा कॉलेजों को बंद करना, गैर आवश्यक सामान की दुकानों को सम-विषम आधार पर खोलना तथा मेट्रो ट्रेन और सार्वजनिक परिवहन की बसों में यात्रियों के बैठने की क्षमता आधी करने जैसे उपाय आते हैं।


संक्रमण को प्रकोप बढ़ने पर ‘येलो अलर्ट’ के बाद, ‘एम्बर’, ‘ऑरेंज’ और फिर ‘रेड अलर्ट’ घोषित किए जाता है, जिसमें पाबंदियां और कड़ी होती जाती हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में कोविड-19 के मरीजों के लिए 8,965 बिस्तर (बेड) निर्धारित किए गए हैं, जिनमें से 28 दिसंबर तक 262 यानी 2.92 प्रतिशत ही भरे थे और 97 प्रतिशत खाली थे।




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लंदन से तस्कर को लेकर लौटे डीसीपी ओमिक्रोन से संक्रमित

नई दिल्ली : लंदन से ड्रग्स तस्कर को लेकर दिल्ली लौटे दिल्ली पुलिस के डीसीपी कोविड के नये वर्जन ओमीक्रोन वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। दिल्ली पुलिस में ओमिक्रोन से संक्रमित होने का संभवतः यह पहला मामला है। उनके साथ लंदन से लौटे एसीपी और इंस्पेक्टर को भी आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी कोविड संक्रमण से संबंधित सभी गाइडलाइंस का पालन करने को कहा गया है।


जानकारी के अनुसार, 2018 में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने कुछ ड्रग्स तस्करों को एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। इनके कुछ अन्य साथियों को भी पुलिस ने म्याऊं म्याऊं ड्रग्स और नशीली गोलियों के साथ पकड़ा था। इनसे पूछताछ में पता चला कि उनके गैंग का सरगना लंदन में बैठा हुआ है। उसकी पहचान हरविंदर सिंह उर्फ बलजीत सिंह के रूप में हुई थी।


पुलिस ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट अदालत से जारी करवाया था। भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण के लिए लंदन में संपर्क किया, जिसके बाद फरवरी 2020 को उसे यूके पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वहां से उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी गई थी।


प्रत्यर्पण के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी इंगित प्रताप सिंह, एसीपी राहुल विक्रम और इंस्पेक्टर अनुज कुमार की टीम लंदन गई थी। वहां से आरोपित को लेकर पुलिस टीम 24 दिसंबर को दिल्ली लौटी थी। यहां आने पर उन्हें 14 दिन के होम क्वारन्टीन में रहने को कहा गया था। इस दौरान डीसीपी इंगित प्रताप सिंह को बुखार हुआ।


उन्होंने जब जांच करवाई तो पता चला कि वह कोविड से संक्रमित हैं। इस वायरस की जब जांच की गई तो पता चला कि वह ओमिक्रोन वायरस से संक्रमित हैं। इसके बाद से उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है। उनके साथ लंदन से लौटे आरोपित एवं दोनों अन्य पुलिसकर्मियों को भी आइसोलेट किया गया है। 




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यूपी पुलिस ने आवारा पशुओं को स्कूल में बंद करने के आरोप में 10 लोगों को किया गिरफ्तार

शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) : उत्तर प्रदेश के एक प्राथमिक विद्यालय के अंदर आवारा पशुओं के झुंड को बंद करने के आरोप में दस लोगों को गिरफ्तार किया गया और बाद में रिहा कर दिया गया। किसानों ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस को मवेशियों को छोड़ने से रोकने की कोशिश की। घटना लेहरावर गांव की है, जो जलालाबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मवेशियों की खोज स्कूल के शिक्षकों ने की, जिन्होंने पुलिस को बुलाया।


जलालाबाद के थाना प्रभारी कमल सिंह अपनी टीम के साथ स्कूल पहुंचे और स्कूल परिसर के अंदर 30 आवारा मवेशियों को देखा। उनकी टीम ने गेट खोलने का प्रयास किया तो किसानों ने उन्हें रोकने की कोशिश की और एक वरिष्ठ अधिकारी से आश्वासन की मांग की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और बाद में चेतावनी देकर छोड़ दिया।


एक महिला जो मवेशियों की समस्या का भी विरोध कर रही थी, उसने कहा, हम बस चाहते हैं कि आवारा मवेशियों को हमारे गांव से बाहर रखा जाए क्योंकि वे हमारी फसलों को नष्ट कर रहे हैं, स्थानीय निवासियों पर हमला कर रहे हैं और हमारे जीवन को परेशान कर रहे हैं। हम उन्हें नहीं खिला सकते हैं, सरकार को उनके लिए एक आश्रय गृह स्थापित करना चाहिए। हम इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाना चाहते हैं।


मीडिया को संबोधित करते हुए, कमल सिंह ने कहा, स्कूल लगभग एक घंटे की देरी के बाद खोला गया और उसके बाद अधिकांश छात्र कक्षाओं में उपस्थित हुए। हमने ग्राम पंचायत अधिकारियों से आवारा मवेशियों को किसी भी नजदीकी गौशाला में स्थानांतरित करने का भी अनुरोध किया है।





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पत्नी के प्रेमी ने साथियों संग की थी श्रीराम की हत्या, टेस्‍ट ड्राइव के बहाने लखनऊ से क‍िया था अपहरण

लखनऊ : लोहिया संस्थान से अगवा कर्मचारी श्रीराम की हत्या कर दी गई। हत्या की साजिश के आरोप में पुलिस ने श्रीराम की पत्नी संगीता व उसके प्रेमी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। एसीपी विभूतिखंड अनूप सिंह के मुताबिक संगीता ने अपने प्रेमी अवशिष्ट कुमार से पति को रास्ते से हटाने के लिए कहा था। इसके बाद अवशिष्ट ने अपने साथियों की मदद से घटना को अंजाम दिया।


पुलिस के मुताबिक संगीता का राजकीय पालीटेक्निक जहांगीराबाद में प्रोफेसर अवशिष्ट से पहले से प्रेम प्रसंग था। दोनों अक्सर छिपकर मिलते थे। इस बात की जानकारी श्रीराम को हो गई थी। श्रीराम ने संगीता को इसके लिए टोका था और आए दिन दोनों में विवाद होता था। पति के रोकटोक से परेशान संगीता ने अवशिष्ट से श्रीराम को रास्ते से हटाने के लिए कहा था। इसके बाद अवशिष्ट ने पालीटेक्निक कालेज के पास मछली पालन करने वाले दो परिचितों सुमैया नगर कोतवाली बाराबंकी निवासी सुशील और संतोष से संपर्क किया।


अवशिष्ट ने दोनों को श्रीराम की हत्या के लिए तैयार कर लिया। साजिश के तहत सुशील और संतोष श्रीराम के पास उनकी गाड़ी का खरीदार बनकर पहुंचे। दोनों ने टेस्ट ड्राइव की बात कही और साथ में निकल गए। बीबीडी के पास दोनों ने साजिश के तहत अपनी परिचित महिला कुंती को गाड़ी में बिठा लिया। आरोपितों ने उसे परिवार का सदस्य बताकर गाड़ी पसंद करने के लिए बुलाने की बात कही। श्रीराम को उनकी बातों पर यकीन हो गया। इसके बाद आरोपित उन्हें गाड़ी में घुमाते रहे। अंधेरा होने पर किसान पथ कुर्सी राेड लेकर गए।


पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि इस दौरान अवशिष्ट अपनी कार से पीछे पीछे चल रहा था। नहर के किनारे आरोपितों ने गाड़ी रोकी। तभी अवशिष्ट भी वहां आ गया। इससे पहले कि श्रीराम कुछ समझते सुशील ने तमंचे से उनके सीने में गोली मार दी। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे इंदिरा नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने इंदिरा नहर में गोताखोरों की मदद से शव की खोजबीन की, लेकिन सफलता नहीं मिली। पुलिस का कहना है कि शव की तलाश की जा रही है। हत्या में इस्तेमाल तमंचा पुलिस ने मटियारी से बरामद कर लिया है।




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