पर्यटन का सुनहरा त्रिकोण है उड़ीसा में

उड़ीसा में पर्यटन की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण स्थल हैं भुवनेश्वर, पुरी और कोणार्क। इन्हीं जगहों के लिए यहां सबसे अधिक पर्यटक आते हैं और ये तीनों जगहें एक-दूसरे से बमुश्किल 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। इसे उड़ीसा में पर्यटन का सुनहला त्रिकोण कहा जा सकता है। यहां स्थित पवित्र मंदिरों और सागर की हलचलों की एक झलक पाने के लिए ही दूर-दूर से लोग आते हैं। उड़ीसा की राजधानी होने से भुवनेश्वर देश के सभी प्रमुख शहरों से हवाई, सड़क व रेल तीनों मार्गो से जुड़ा है और हर मार्ग पर नियमित सेवाएं भी हैं। ठहरने के लिए यहां अच्छे होटल तो हैं ही, चाहें तो आप उड़ीसा पर्यटन विकास निगम के पंथ निवास में भी ठहर सकते हैं। यहां आप भव्य मंदिर, पहाड़ काटकर बनाई गई गुफाएं, प्राणि उद्यान व प्लांट रिसोर्स सेंटर देख सकते हैं। उड़ीसा के अतीत को करीब से देखना चाहें तो पुरी या कोणार्क भी जा सकते हैं।


भुवनेश्वर: साक्षी इतिहास का


उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर इतिहास की कई निर्णायक घटनाओं की साक्षी रही है। 261 ई.पू. में कलिंग युद्ध व ईस्वी सदी के शुरू में चेदि शासक खारावेला के आने तक कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है यह। ऐतिहासिक स्मारक तो यहां बेशुमार हैं ही, मंदिर भी खूब हैं और इसीलिए इसे मंदिरों का शहर भी कहा जाता है। कुछ खास मंदिर ऐसे हैं जहां प्रायः यहां आने वाले सभी पर्यटक और श्रद्धालु जाते ही हैं।


लिंगराज मंदिर: यह यहां के सबसे महत्वपूर्ण मदिरों में एक है। 180 फुट ऊंचे शिखर वाला यह मंदिर पूरब में पुरातत्व व वास्तुशिल्प के सर्वोत्तम उदाहरणों में एक है। 520 फुट लंबाई व 465 फुट चैड़ाई वाले विस्तृत क्षेत्रफल में स्थित कई छोटे-छोटे मंदिरों के बीच इसकी गरिमामयी उपस्थिति अलग तरह का बोध देती है। 11वीं सदी में बने इन मंदिरों का निर्माण ययाति केसरी और उनके उत्तराधिकारियों ने करवाया था।


मुक्तेश्वर मंदिर: 34 फुट ऊंचाई वाले इस मंदिर की गिनती भारत के सर्वाधिक सुंदर मंदिरों में की जाती है। 10वीं-11वीं सदी में बने इस मंदिर का तोरण बहुत सुंदर है। इसमें आकर्षण के बड़े कारण आठ व दस भुजाओं वाले नटराज हैं।


राजारानी मंदिर: 11वीं सदी में बना राजारानी मंदिर कलात्मक वैभव के लिए प्रसिद्ध है। इसमें किसी देवता की प्रतिष्ठा नहीं है, पर स्थापत्य की दुर्लभ खासियतें देखी जा सकती हैं। यह इसलिए भी अनूठा है कि यहां नटराज के स्त्री स्वरूप को दर्शाया गया है। यहां कई और दर्शनीय मंदिर भी हैं। इनमें छठवीं से 15वीं सदी के बीच बने शिशिरेश्वर, शत्रुघ्नेश्वर, वैताल, परशुरामेश्वर, स्वर्णजलेश्वर, ब्रह्मेश्वर, अनंत वासुदेव, केदारेश्वर, भास्करेश्वर व मेघेश्वर प्रमुख हैं।


खंडगिरि व उदयगिरि: खंडगिरि व उदयगिरि के जुड़वां पहाड़ों को काटकर बनाई गई गुफाएं भी यहां की आकर्षक चीजों में हैं। दूसरी सदी ई.पू. में बनी ये गुफाएं जैन मठ रही हैं। इनमें दुमंजिली रानी गुंफा खास तौर से दर्शनीय है। इसमें बहुत सुंदर आकृतियां उकेरी गई हैं। हाथीगुंफा में मौजूद शिलालेख चेदि शासक खारावेला के शासनकाल पर प्रकाश डालती है।


नंदन कानन: करीब 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला यह प्राणि उद्यान वन्य पशुओं और पक्षियों के लिए उपयुक्त अभयारण्य के रूप में बनाया गया है। शहर से सिर्फ आठ किलोमीटर दूर स्थित नंदन कानन में कई तरह के वन्य पशु, पक्षियां व सरीसृप हैं। यहां एक वानस्पतिक उद्यान और झील भी है। दुर्लभ सफेद बाघ यहां देखे जा सकते हैं। यहां झील में बोटिंग करने या रोपवे कार में बैठकर पशुओं को विचरते देखने का लुत्फ लेने के लिए प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं।


रीजनल प्लांट रिसोर्स सेंटर: पौध संरक्षण के इस केंद्र में गुलाब की कई प्रजातियां हैं। भारत में गुलाब की अधिकतम किस्मों के संरक्षण का यह सबसे बड़ा केंद्र है। एशिया में कैक्टस का सबसे बड़ा संग्रह भी यहीं है। पौधों व पर्यावरण में रुचि रखने वालों के लिए यह अनिवार्य जगह है।


धौलीः भुवनेश्वर से पुरी के मार्ग पर मात्र दस किलोमीटर दूर धौली भारतीय इतिहास की धारा को ही बदल देने वाले कलिंग युद्ध का साक्षी रहा है। यह युद्ध यहां 261 ई.पू. में हुआ था। इसके बाद ही सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी। बौद्ध धर्म को विदेशों में ले जाने का श्रेय उन्हें ही जाता है। इस पहाड़ी पर जापान के सहयोग से एक शांति स्तूप भी बनाया गया है।


पुरी: बंगाल की खाड़ी के पूर्वी तट पर बसे इस शहर के हिस्से में दुनिया के सबसे सुंदर समुद्रतटों में से एक है। लाखों लोग हर साल यहां समुद्रतट का आनंद लेने ही आते हैं। भुवनेश्वर से मात्र 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुरी हिंदुओं के चार पवित्रतम तीर्थो में से एक है। भगवान जगन्नाथ का मंदिर यहीं है। बारहवीं सदी में निर्मित 192 फुट ऊंचे शिखर वाला यह मंदिर उडिया वास्तु शिल्प के सर्वोत्तम नमूनों में एक है। जुलाई के महीने में इस मंदिर से शुरू होने वाले रथयात्रा उत्सव में हर साल लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। लाखों लोग मिलकर पारंपरिक रूप से सुसज्जित तीन रथों को खींचते हैं। इनमें एक रथ पर भगवान जगन्नाथ स्वयं सवार होते हैं, दूसरे पर उनके बड़े भाई बलभद्र और तीसरे पर बहन सुभद्रा बैठी होती हैं। रथों को जगन्नाथ मंदिर से खींच कर तीन किलोमीटर दूर गुडीचा मंदिर ले जाते हैं, जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है। दस दिन बाद उनकी वापसी यात्रा होती है।


जगन्नाथ मंदिर के अलावा यहां आकर्षण का बड़ा कारण समुद्रतट भी है। समुद्री रेत की कला में रुचि रखने वालों की भारी भीड़ यहां प्रायः देखी जाती है। समुद्र की लहर को देखने का भी अलग आनंद है। खरीदारी के शौकीनों के लिए भी यहां बहुत कुछ है। रघुराजपुर व पिपिली गांवों के लोकशिल्पकारों की बनाई कलाकृतियां और एप्लीक आर्ट के नमूने प्रायः सभी पर्यटक यादगार के तौर पर अपने साथ ले जाते हैं।


कोणार्क: सुप्रसिद्ध कला इतिहासकार चार्ल्स फैब्री की टिप्पणी है, अगर यूरोप के लोगों ने पहले कोणार्क के बारे में जाना होता और आगरा के ताजमहल के बारे में वे बाद में जानते तो निश्चित रूप से उनके मन में पहला स्थान कोणार्क का ही होता और ताजमहल का स्थान दूसरा होता। तेरहवीं सदी में बनाए गए इस मंदिर को पत्थरों पर उकेरी गई कविता कहना गलत नहीं होगा। कोणार्क भारतीय स्थापत्य की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियों में एक है। इसके मुख्य मंदिर का निर्माण भगवान सूर्य के रथ के रूप में किया गया है, जिसमें 12 पहिए हैं। दस फुट ऊंचे इस रथ को सात घोड़े खींचते हैं। वस्तुतः यह ऋग्वेद की एक ऋचा का मूर्त रूप है। इसके पुराने मुख्य मंदिर का एक भाग मुखशाला अभी भी अपने पुराने रूप में मौजूद है। विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्य इस मंदिर का निर्माण 13वीं सदी में नरसिंह देव ने करवाया था। बाद में लंबे अरसे तक यह उपेक्षा का शिकार रहा। 


ब्रिटिश शासन के दौरान यहां घूमने आई एक गवर्नर की पत्नी ने गवर्नर से इसके संरक्षण का अनुरोध किया। इसके बाद मंदिर के संरक्षण का कार्य शुरू हुआ। वैज्ञानिक रूप से इसके संरक्षण का कार्य सन 1901 में शुरू हुआ। कोणार्क का सूर्यमंदिर इस अर्थ में भी अनूठा है कि शिलाओं पर कल्पना को मूर्त रूप देने का उत्कर्ष यहीं देखा जा सकता है। इससे अलग एक निर्माण है नटमंदिर। इस वर्गाकार भवन की छत पिरामिड जैसी है, जिस पर तमाम अनूठी कलाकृतियां बनी हैं। 865 फुट लंबे और 540 फुट चैड़े क्षेत्रफल में बने इस भवन के साथ कुछ छोटे-छोटे और भी भवन हैं। इसके तीन तरफ गेट हैं और यह कुल मिलाकर ओडिसी नृत्य का विहंगम दृश्य प्रस्तुत करता है। इसकी दीवारों पर ओडिसी नृत्य की मुद्राओं का गरिमापूर्ण अंकन किया गया है। नर्तकों के साथ संगीतज्ञ भी वाद्ययंत्रों के साथ दर्शाए गए हैं।


मंदिर से जुड़ा एक संग्रहालय भी है, जिसमें तमाम मंदिरों के अवशेषों को अच्छी तरह संभाल कर रखा गया है। चंद्रभागा बीच के नाम से मशहूर कोणार्क का समुद्रतट भी बहुत सुंदर है। शाम के समय यहां से मंदिर को देखना एक अलग ही अनुभव होता है। पर्यटन विभाग की ओर से हर साल 1 से 5 दिसंबर तक कोणार्क उत्सव का आयोजन किया जाता है। सूर्य मंदिर के पृष्ठभाग में होने वाले शास्त्रीय नृत्य देख कर ऐसा लगता है जैसे मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई छवियां मुक्ताकाशी मंच पर नृत्य करने लगी हों। मंदिर से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर मौजूद चंद्रभागा समुद्रतट देश के सुंदरतम समुद्रतटों में से एक है। समुद्र के किनारे-किनारे बनी सड़क पर यहां से पुरी तक जाना भी अपने-आपमें एक अनूठा अनुभव हो सकता है।



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दिल्ली में इन जगहों का लुत्फ उठाने के लिए पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे

दिल्ली देश की राजधानी है और पर्यटक इसे देश का दिल मानते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि दिल्ली में खाने...पीने से लेकर घूमने तक के लिए कई बेहतरीन जगहें मौजूद हैं। इतना ही नहीं, यहां पर हर तरह के व्यक्ति के लिए घूमने और देखने के लिए कुछ ना कुछ है। आमतौर पर जब आप कहीं घूमने जाते हैं तो आपको पैसे खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन अगर आप दिल्ली में हैं तो आपको इसकी भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। जी हां, दिल्ली की ऐसी कई बेहतरीन जगहें हैं, जो पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र हैं, लेकिन यहां पर घूमने के लिए आपको पैसे खर्च करने की कोई जरूरत नहीं है। तो चलिए जानते हैं ऐसी ही कुछ बेहतरीन जगहों के बारे में...


घूमें जामा मस्जिद

जामा मस्जिद, जिसे मस्जिद ई जहान नुमा के नाम से भी जाना जाता है, भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। यह मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा बनाया गया था और इसका उद्घाटन इमाम सैयद अब्दुल गफूर शाह बुखारी ने किया था। यहाँ तीन विशाल मुख्य द्वार हैं जो सभी चालीस मीटर ऊँचे हैं और निर्माण में सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर की पट्टियों के साथ मस्जिद के काम को खूबसूरती से दिखाया गया है। मस्जिद के यहाँ एक विशाल प्रांगण भी है। यह आंगन इतना विशाल है कि यहां लगभग 25,000 उपासक बैठ सकते हैं और यह 408 वर्ग फीट की जगह घेरता है। इस मस्जिद के आंगन में घूमना एक अद्भुत एहसास होता है।


हजरत निजामुद्दीन दरगाह में कव्वाली संगीत

हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह में कव्वाली संगीत दिल्ली में मुफ्त में दिल्ली में करने के लिए चीजों का अनुभव करना चाहिए। यहां कव्वाली का प्रदर्शन पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर सकता है। यह शो हर दिन होता है। कुछ अद्भुत सूफी गीत जैसे भर दो झोली मेरी, कुन फाया कुन, छप तिलक सब छेनी, अज रंग है और कई अन्य यहां प्ले किए जाते हैं और इस तरह यहां एक सम्मोहित करने वाला वातावरण बनता है। निज़ामुद्दीन औलिया के वंशज, जिन्हें निज़ामी ब्रदर्स के नाम से भी जाना जाता है, इस स्थान पर वास्तविकता के साथ...साथ प्रामाणिकता की भावना भी लाते हैं। नियाज़मी ब्रदर्स का परिवार सात सौ से अधिक वर्षों से इस स्थान पर गा रहा है।


लोधी गार्डन

दिल्ली का लोधी गार्डन, दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध आकर्षणों में से एक है। यह स्थान सभी फोटोग्राफी प्रेमियों, वास्तुकला प्रेमियों और उन सभी लोगों के लिए घूमने के लिए एक शानदार जगह है जो कुछ नया अनुभव करना चाहते हैं। यह स्थान सप्ताह के सभी दिनों में पर्यटकों के लिए खुला रहता है और दरवाजे सुबह 6 से शाम 7 बजे तक खोले जाते हैं। ताजा वातावरण और इस जगह में अद्भुत वास्तुकला के कारण लोधी उद्यान इस जगह पर आने वाले पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध है। यह भी एक तथ्य है कि सैय्यद और लोधी वंश के शासक यहां दफन थे। यह जगह यहां पुराने वाटर टैंक की वजह से भी बेहद खूबसूरत है। लोधी गार्डन में भी बहुत सारी चीजें हैं जो यहां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। खान मार्केट लोधी मार्केट के बहुत करीब स्थित है और यहाँ से बहुत सारी चीज़ें खरीदी जा सकती हैं। 





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पहाड़ों पर मोटरसाइकिल चलाने का भी है अलग मजा

चेहरे से टकराती, बालों को सहलाती तेज हवा, कभी तेज चढ़ाई, कभी तीखी ढलान, बल खाती सड़क, गहरे मोड़, चारों ओर हरियाली, पौधों की सुगंध किसी का भी मन मोहने में सक्षम है। यही वह आकर्षण है जिसमें बंधे लोग बार-बार पहाड़ों की ओर मोटरसाइकिलें लेकर निकल पड़ते हैं।


मोटरसाइकिल की सवारी में वैसे तो रोमांच ही रोमांच है, परंतु पहाड़ों पर मोटरसाइकिल चलाने का मजा ही कुछ और है। यह अलग बात है कि जिस कार्य में जितना अधिक रोमांच होता है, खतरे भी उतने ही अधिक होते हैं। आजकल मोटरसाइकिल अपनी निर्माण गुणवत्ता के चलते काफी विश्वसनीय होने लगी है।बाजार में हर व्यक्ति की जरूरत के अनुरूप मोटरसाइकिलें हैं। 100 सीसी से लेकर 350 सीसी तक मोटरसाइकिलें आम हैं और विशेष मोटरसाइकिलें विदेश से मंगाना भी कठिन नहीं। पहाड़ों पर ले जाने लायक मोटरसाइकिल शक्तिशाली व पूरे संतुलन वाली होनी चाहिए, भले ही उसकी गति ज्यादा न हो।


संतुलन है जरूरी

ऐसी यात्रा से पूर्व कुछ तैयारियां भी करनी होती हैं, जिससे विपरीत हालात बनने पर उनसे आसानी से निबटा जा सके। पहाड़ की यात्रा में संतुलन सबसे जरूरी है। ऐसी बाइक जिसका वजन आगे-पीछे 60ः40 में हो, बेहतर है। टायर की चैड़ाई वाहन के रोड ग्रिप (सड़क पर पकड़) को तय करती है। बेहतर रोड ग्रिप के लिए चैड़ा टायर सही होता है। गाड़ी का टूपिन अधिक ताकतवर होना जरूरी नहीं, पर उससे शक्ति कम आरपीएम पर मिल सके तो ठीक होता है। ऐसी बाइक पहाड़ों पर अधिक उपयोगी होती है, जिसके दूसरे व तीसरे गियर में न सिर्फ पर्याप्त शक्ति हो, बल्कि उन्हें बार-बार बदलने की जरूरत न पड़े। यद्यपि जब रोमांचक यात्रा पर हों तो ईधन खपत खास महत्व नहीं रखता, पर सुदूर पहाड़ी क्षेत्र में कम ईधन खपत वाली बाइक आपको चिंतामुक्त रखेगी।


सर्विसिंग करा लें

आप जो बाइक ले जाना चाहें उसकी सर्विसिंग जरूर करा लें, भले ही वह ठीक चल रही हो। पहाड़ी रास्ते प्रायः बारिश या भूस्खलन के चलते खराब होते रहते हैं। अतः मोटरसाइकिल के नट-वोल्ट की जांच ठीक से कर लें। मोटरसाइकिल में सबसे बड़ी समस्या पंक्चर की होती है। अतः इसकी व्यवस्था जरूरी है। आपको छोटी-मोटी गड़बड़ी ठीक करना, पहिया खोलना, टयूब निकालना, पंक्चर लगाना आना चाहिए। वैसे अब पहाड़ों में लोगों की आवाजाही बढ़ने से जगह-जगह पंक्चर ठीक करने वाले भी मिलने लगे हैं, परंतु बीच राह में आप ही अपने मददगार होंगे। यात्रा के दौरान अपनी मोटरसाइकिल को प्रतिदिन सुबह टायरों में हवा, सभी नट-वोल्ट, इंजन ऑयल तथा स्टार्टिग हेतु जांचना चाहिए।


सामान बांधते समय भी मोटरसाइकिल के संतुलन का पूरा ध्यान रखना चाहिए। स्पेयर्स में प्लग, स्टार्टिग क्वायल, क्लच वायर, ब्रेक वायर, पंचर किट, फुट पंप, हेडलाइट बल्ब, चेन लिंक, क्लच तथा ब्रेकलीवर, रबर पाइप और स्पेयर टयब्स आदि जरूर रखें। टूल्स में प्लग ओपनर, स्क्रू ड्राइवर, रिंच, टायर ओपनर लीवर्स, प्लास, फोल्डिंग हैमर, स्टार्टिग क्वायल खोलने लगाने के औजार, वाल्व ओपनर, एक छोटी व शक्तिशाली टॉर्च भी रखें।


सामान कम रखें

मोटरसाइकिल यात्रा में सामान कम से कम होना चाहिए। फिर भी जैकेट, विंडचीटर, जींस, मौसम के अनुरूप जूते, मोटे मोजे, ग्लव्स, मफलर, धूप का चश्मा, छोटे बैग्स, हैवरसैक वाटर बॉटल जरूर रखें। सामान को बांधने के लिए सूती रस्सी का प्रयोग करें और उसे पॉलीथिन से ढक कर रखें।


लगातार न चलें

पहाड़ों पर कभी भी लगातार लंबी दूरी तय न करें। बीच-बीच में रुकना साइटसीइंग के साथ एकरसता तोड़ने तथा थकान से बचने हेतु भी जरूरी हैं। पहाड़ पर कभी भी तेज गति से बाइक नहीं चलानी चाहिए। अंधेरा होने पर पहाड़ों पर नहीं चलना चाहिए। यात्रा में दूरी के हिसाब से पहले से योजना बना कर एक दिन में तय हो सकने वाली दूरी का लक्ष्य रखना चाहिए। साथ ही ठहरने के स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए।


क्षेत्र की जानकारी जरूरी

यात्रा पर निकलने से पहले आप जिस क्षेत्र में जा रहे हैं वहां के वातावरण, रास्ते, सड़कें, रुकने के स्थान, दर्शनीय स्थल, विशेषताएं, जाने का सही समय आदि सभी जरूरी जानकारियों से लैस हो लें।






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सबसे आकर्षक और बेहद खूबसूरत होती हैं इन जगहों की शाम

सुबह और शाम दिन के दो ऐसे प्रहर होते हैं, जब हमें जिंदगी के प्रति एक अलग सा लगाव महसूस होता है। हम में से कई लोग अपनी शाम पहाड़ो के बीच तो कोई नदी किनारे बीताना पसंद करता हैं। हममें से ज्यादातर लोग इन पलों को सुकून से प्रकृति के बीच महसूस करना चाहते हैं। आइए, आज उन चुनिंदा जगहों के बारे में जानते हैं, जहां की शाम बेइंतहा खूबसूरत होती है। हैं कुछ ऐसी जगहों के बारे में जहां पर आप अपनी शाम बीता सकते हैं और वाकइ में इन जगहों की शाम का नाज़ारा काफी सुंदर और देखने लायक होता हैं। तो आई जानते हैं इन जगहों के बारे में –

 

बनारस – वाराणसी शहर में लोग आध्यात्मिक उपचार की तलाश में आते हैं और गंगा यहां सबसे सुंदर अनुभव प्रदान करती है। गंगा नदी के किनारे बैठे उगते सूरज का नजारा आपको गदगद कर देगा। अगर आप सुबह जल्दी उठ सकते हैं तो नाव की सवारी भी कर सकते हैं। वैसे वाराणसी को महाकाल की नगरी भी कहा जाता है। यहां विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित है।

 

राधानगर बीच, अंडमान – अंडमान में स्थित हैवलॉक द्वीप की शाम बहुत ही खूबसूरत होती है। यह सनसेट प्वाइंट प्राकृतिक सौंदर्य के कारण दुनियाभर में लोकप्रिय है। हैवलॉक द्वीप हनीमून के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है। पूरे एशिया में सबसे बेस्ट सनसेट प्वाइंट माना जाता है। यहां पर जाने का सही समय अक्टूबर से अप्रेल के बीच का हैं।


टाइगर हिल – यह सूर्योदय देखने के लिए सबसे अच्छे स्थानों में से एक है। दार्जिलिंग आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण रहता है। टाइगर हिल राजसी माउंट कंचनजंगा, और प्रतिष्ठित माउंट एवरेस्ट के मनोहारी दृश्य भी दिखाती है। अपनी शाम को यादगार बनाने के लिए यहां से अच्छी जगह और कोई नहीं हैं। दार्जलिंग जाने वाले पर्यटकों के लिए यह एक बहुत बड़ा आकर्षण हैं। 


नंदी हिल्स – यहां पर आप वादियों के बीच लाल रंग के आसमान का लुत्फ उठा सकते हैं। अगर आपको एकांत पसंद करने वाले व्यक्ति हैं तो यह जगह आपके लिए एकदम सही हैँ। अगर आप यहां जाना चाहते हैं तो आप उसके लिए अक्टूबर से जून में जा सकते हैं। 


उमियम लेक  –  भारत के उत्तर पूर्व में स्थित यह झील सबसे शानदार स्थानों में से एक है। यह शिलांग से लगभग 15 किमी दूर स्थित है। जैसे ही सूरज उगता है और पहली किरणें झील के पानी को छूती हैं, आपको एहसास होगा कि आप किसी और दुनिया में आ गए हों।






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पाकिस्तान में भी हैं घूमने लायक खूबसूरत जगहें

मुल्क पाकिस्तान का नाम जेहन में आते ही हम सभी एक ऐसे भूभाग के बारे में सोचने लगते हैं जहां कुछ भी शांत-शांत सा नहीं है। चंद लोगों के कारण दहशत और खौफ की धरती बन चुके पाकिस्तान में भी ऐसी काफी सारी खूबसूरत जगहें हैं जहां पर जाकर आपको जन्नत जैसे खूबसूरत नजारे दिख सकते हैं। हम अपनी खबर में पाकिस्तान की जिन जगहों का जिक्र करने जा रहे हैं वो वाकई में बेहत खूबसूरत हैं। जरूर देखें और जानें पाकिस्तान की इन खूबसूरत जगहों के बारे में। 


सुक्कुर

सुक्कुर पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त का तीसरा सबसे बड़ा नगर है। यह सिन्धु नदी के पश्चिमी किनारे पर है। इसके चारों ओर ऐतेहासिक संरचनाए और फेमस संतो के कब्रें बनी हुई है। साथ ही यहां पर अधिक मात्रा में आपको आकर्षित करनें वाली मस्जिद बनी हुई है।


थार मरुस्थल

भारत के उत्तरपश्चिम में तथा पाकिस्तान के दक्षिणपूर्व में है। यह मरुस्थल बहुत ही लम्बा और चैड़ा है। यहां के जीव, पेड़-पौधे दूसरें देशों से बिल्कुल अलग है। यह घूमनें की बहुत खूबसूरत जगह है।


मोहन जोदड़ो

इसका सिंध भाषा में मतलब होता है मुर्दो का टीला। इस दुनिया का सबसे पुराना नियोजित और उत्कृष्ट शहर माना जाता है। यह पाकिस्तान का सबसे बडा शहर कराडी से 580 किमी दूर है। इस घाटी का इतिहास 5000 हजार साल पुराना है।


मुल्तान

मुल्तान पाकिस्तान के पंजाब सूबे में एक शहर है। यह पाकिस्तान का छठा सबसे बड़ा शहर है। यह शहर पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्म शहर है जिसे संतों का शहर कहा जाता है। यह शहर सूफी और का है जो इस्लाम धर्म का प्रचार करते है।


लाहौर

पाकिस्तान के प्रांत पंजाब की राजधानी है और कराची के बाद यह दूसरा सबसे बडा आबादी वाला शहर है। इसे पाकिस्तान का दिल नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस शहर का पाकिस्तानी इतिहास, संस्कृति एवं शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहां पर हर साल पर भारी मात्रा में पर्यटक आते है।


ग्वादर

पाकिस्तान के बाद क्वेटा के बाद बलूचिस्तान प्रांत का दूसरा सबसे बडा शहर है। यह एक समुद्र तट है जो तेजी के साथ विकसित हो रहा है। इस शहर में अधिक मात्रा में पर्वत भी है। आने वाले समय में इस शहर बंदरगाह के साथ व्यापार का केन्द्र होगा।


भुरबन

पाकिस्तान के मुरी की झिका गली से 20 मिनट की दूरी में भुरबन है। पर्यटको को आकर्षित करनें की सबसे बडी वजह है यहा की प्राकृतिक सुंदरता और 10 किमा में फैला हुआ गोल्प कोर्स। यहां पर आपको ठहरनें के लिए होटल भी मिल जाएगें।


शोगरन

समुद्र तल से 2400 मीटर की ऊंचाई में है शोगरन। यह जगह हनीमून और अपनी वीकेंड बीतानें के लिए सबसे अच्छी जगह है। यह कघन घाटी का सबसे ऊंचा पर्वत है। साथ ही मल्का-ए-पर्वत की छाया सैफ-उल-मलूक झील पर एक जादुई प्रभाव पैदा करता है। इस झील का पानी ताजा और सफेद है।


 




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कोंकण में मानसून पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा, राज्य को सिनेमा हब बनाएंगे : आदित्य ठाकरे

मुंबई : महाराष्ट्र के पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार कोंकण क्षेत्र में मानसून पर्यटन को बढ़ावा देने और राज्य को सिनेमा हब के तौर पर विकसित करने के लिए काम कर रही है।


ठाकरे ने 27 सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व पर्यटन दिवस से पहले शनिवार को पत्रकारों से कहा कि महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार पर्यटन स्थल के तौर पर राज्य को लेकर ''रोमांच पैदा'' करने पर काम कर रही है।


उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बावजूद निजी क्षेत्र की भागीदारी और रुचि उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि यात्रा पाबंदियां तब तक रहेंगी जब तक कोविड-19 रहेगा।


ठाकरे ने कहा, ''लेकिन ध्यान इस बात पर रहेगा कि अब हम क्या कर सकते हैं। जिन पर्यटकों ने टीके की दूसरी खुराक ले ली है, उनका राज्य में स्वागत है। हम घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय पर्यटकों के आने की उम्मीद कर रहे हैं।''


मंत्री ने कहा कि उनके विभाग का ध्यान इस बात पर है कि पर्यटन क्षेत्र के योगदान को राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कैसे बढ़ाया जाए और स्थानीय रोजगार को कैसे बढ़ावा दिया जाए।


उन्होंने कहा, ''हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटक पहली बार भारत में आने के बाद पांच से छह दिन मुंबई के आसपास और राज्य के अन्य हिस्सों में ठहरें।''


ठाकरे ने कहा कि हालांकि वह पूरे महाराष्ट्र को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने के पक्ष में हैं लेकिन यह कोंकण क्षेत्र में मानसून के दौरान पर्यटकों को बारिश का आनंद उठाने के लिए आकर्षित करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि कोंकण क्षेत्र में स्थित सिंधुदुर्ग के चिपी हवाईअड्डे का अगले महीने उद्घाटन किया जाएगा जिससे इलाके में पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।


उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटकों के लिए एक हब बनाने और प्रसिद्ध पटकथाओं, फिल्मों और संबंधित तस्वीरों का भंडार विकसित करने के लिए हिंदी तथा मराठी सिनेमा के अहम निर्माताओं के संपर्क में है। उन्होंने कहा, ''सरकार फिल्म सिटीज के विकास पर काम कर रही है। नेटफ्लिक्स (ओटीटी मंच) ने मुंबई में अपना प्रोडक्शन और पोस्ट-प्रोडक्शन केंद्र बनाया है।''


मुंबई में अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल विकसित करने के बाद क्रूज पर्यटन के प्रचार पर ठाकरे ने कहा कि उन्हें इस पर काम करने की आवश्यकता है कि क्रूज पर्यटक मुंबई आने पर क्या सुविधाएं चाहेंगे।






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हनीमून कपल्स के लिए बेस्ट डेस्टीनेशन है भारत की ये जगहें

शादी के रीति-रिवाज और भाग दौड़ भरे माहौल से फ्री होने के बाद शादीशुदा जोड़े के लिए कुछ देर आराम भरे पल बिताना बेहद जरुरी है। यही वह समय है जब पति-पत्नि एक दूसरे के साथ अपना क्वालिटी टाइम स्पेंड करते हैं। यह पल जीवन में सुखद और मीठी यादें बनाने के लिए बहुत जरुरी होता है। यदि आपकी भी नई-नई शादी हुई है और आप हनीमून प्लान कर रहें हैं तो आज हम आपके लिए भारत के कुछ मशहूर हनीमून डिस्टीनेशंस लेकर आएं हैं। यह जगहें न केवल खूबसूरत नजारों के लिए फेमस हैं बल्कि आपके बजट के भी बिल्कुल अनुकूल हैं।


गोवा: कप्लस द्वारा पहले नंबर पर पसंद किया जाने वाला हनीमून डेस्टीनेशन गोवा है। शांतमयी पल बिताने के लिए आपको गोवा में शानदार मौसम, बीच और खास नाइट लाइफ एंजॉय करने को मिलेगी। गोवा के खूबसूरत और शानदार बीचेस की लिस्ट बहुत लंबी है जिनमें कैलेंगुट बीच, अंजुना बीच, बागा बीच, बागाटोर बीच, सिंकेरियन बीच, पालोलेम बीच और मीरामार बीच शामिल हैं।


मनाली: गोवा के बाद शादीशुदा जोड़ों द्वारा मनाली बहुत पसंद किया जाता है। चारों तरफ हरियाली, खूबसूरत बगीचे, बादलों को टच करते पहाड़ और झरनों की झनकाती आवाज आपको इस जगह का दीवाना बना देंगे। कुल्लु में स्थित मनाली के नजारे सर्दियों में और भी खूबसूरत होते हैं। इस दौरान यहां के पहाड़ पूरी तरह बर्फ से ढके रहते हैं।


दार्जलिंग: ऊंची-ऊंची पहाडियों की शान दार्जलिंग को विश्वभर में 'क्वीन ऑफ हिल्स' के नाम से जाना जाता है। दार्जलिंग के चाय-बगान देखने लोग दूर-दूर से यहां आते हैं। एक समय था जब दार्जलिंग अपने मसालों के लिए बहुत फेमस हुआ करता था। अब यहां ज्यादातर चाय की खेती की जाती है। पश्चिम बंगाल के इस शानदार हिल स्टेशन की खूबसूरती सिर्फ इसके चाय बागान नहीं है बल्कि यहां के सुंदर पहाड़, देवदार के जंगल, प्राकृतिक सुंदरता, कल-कल करते झरने सबका मन मोह लेते हैं।


श्रीनगर: श्रीनगर शुरु से ही हनीमून कपलस के लिए आइडियल डेस्टिनेशन रहा है। यह शहर अपनी खूबसूरत झीलों और हाउसबोट के लिए दुनिया भर में फेमस है। यहां की डल झील पर तैरती खूबसूरत नावों का आनंद लेने लोग दूर-दूर से आते हैं। श्रीनगर की इस फेमस झील पर आपको सुबह-शाम रौनक ही रौनक देखने को मिलेगी। सूरज डूबने के बाद हाउसबोट की जगमगाती लाइटें, इस झील की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती है। 





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दक्षिण भारत का टूर प्लान कर रहे हैं, तो ज़रूर करें इन 5 भव्य मंदिरों के दर्शन


भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है और सिर्फ उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत में भी एक से बढ़कर एक सुंदर और भव्य मंदिर है। इन आलीशान मंदिरों को देखकर यकीनन आप भी हैरान रह जाएंगे। प्राचीन संस्कृति को सहेजे इन भव्य मंदिरों में से कई को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया गया है। साउथ इंडिया का टूर प्लान कर रहे हैं तो इन विशाल मंदिरों के दर्शन ज़रूर करें।

 

तिरुपति बालाजी मंदिर

आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित यह मंदिर किसी परिचय का मोहताज नहीं है। यह देश के सबसे मशहूर तीर्थ स्थलों में से क है। यह स्वामी वेंकेटेश्वर मंदिर तिरुपति पहाड़ की सातवीं चोटी पर स्थित है। मुख्य मंदिर में भगवान वैंकटेश्वर की प्रतिमा है। मंदिर परिसर में कई खूबसूरत द्वार, मंडपम और छोटे मंदिर बने हैं। इस मंदिर की गिनती देश के सबसे अमीर मंदिरों में होती है और यहां के भगवान वेंकटेश्वर पर लोगों की अपार श्रद्धा है। तभी तो हर दिन करीब 50000 लोग मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।


श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर

यह दक्षिण भारत के लोकप्रिय मंदिरों में से एक है और यह हिन्दू भगवान रंगनाथम को समर्पित है। यह मन्दिर तमिलनाडू के तिरुचिरापल्ली शहर के श्रीरंगम नामक द्वीप पर स्थित है। 156 एकड़ में फैला यह मंदिर बहुत भव्य है। यह कावेरी नदी के तट पर स्थित है और भू-लोक का वैकुंठ भी कहा जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित 108 दिव्य दशमों में से एक है। मंदिर के गर्भगृह के ऊपर की संरचना में सोने का इस्तेमाल हुआ है। यहां आकर आपके मन को असीम शांति मिलेगी।

 

पद्मानभस्वामी मंदिर 

भगवान विष्णु का यह मशहूर मंदिर केरल के तिरुअनन्तपुरम में स्थित है और हिन्दू के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि सबसे पहले इस स्थान से विष्णु भगवान की प्रतिमा प्राप्त हुई थी, जिसके बाद उसी जगह पर मंदिर बनवाया गया। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। इस मंदिर के एक ओर खूबसूरत समुद्री किनारे तो दूसरी ओर सुंदर पहाड़ियां है, जो उसकी खूबसूरती और लोकप्रियता और बढ़ा देते हैं।

 

नटराजा मंदिर

भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर तमिलनाडु के चिदंबरम शहर में स्थित है। पूरे देश से लोग यहां भगवान शिव के नटराज रूप के दर्शनों के लिए आते हैं। इस मंदिर में प्रवेश के लिए मूर्तियों तथा अनेक प्रकार की चित्रकारी वाले भव्य गोपुरम बने हैं, जो नौ मंजिले हैं। मंदिर की नक्काशी देखकर आप हैरान रह जाएंगे। यह मंदिर देश के पांच पवित्र शिव मंदिरों में से एक है। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह 40 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। 


मीनाक्षी अम्मन मंदिर

माता पार्वती को समर्पित यह मंदिर तमिलनाडू के मदुरै शहर में स्थित है। यह प्राचीन और भव्य मंदिर भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि मंदिर का मुख्य गर्भगृह 3500 साल से भी अधिक पुराना है। इस विशाल मंदिर का स्थापत्य एवं वास्तु बहुत दिलचस्प है।



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ये हैं दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं

एशिया महाद्वीप विश्व की सबसे प्रमुख पर्वत श्रृखलाओं में से एक है। दुनिया का सबसे ऊंचा और बर्फीला पर्वत हिमालय इसी द्वीप में स्थित है। यदि आप भी माउंट क्लाइबिंग करने का शौंक रखते हैं तो आज हम आपके लिए विश्व के कुछ ऐसे पर्वतों की सूची लेकर आए हैं , जहां जाकर आप खुद को सच में किस्मत वाला इंसान समझेंगे।


सबसे पहले बात करते हैं हिमालय पर्वत के बारे में...हिमालय पर्वतमाला भारत के राज्यों जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश तक फैली हुई है। आप यूं भी कह सकते हैं कि ये सब राज्य हिमालय की गोद में बसते हैं। इन सब के अलावा उत्तरी पाकिस्तान, उत्तरी अफगानिस्तान, तिब्बत, नेपाल और भूटान जैसे देशों से बी हिमालय गुजरता है। इसी में विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट तथा दूसरी सबसे ऊंची चोटी 'के-2' भी स्थित है। एशिया की अन्य पर्वत श्रृंखलाओं में पामीर पर्वत, हिंदूकुश पर्वत, एल्बुर्ज पर्वत और अरानकामयोमा पर्वत भी शामिल हैं।


ऑस्ट्रेलिया द ग्रेट: अब बात करते हैं भारत से बाहर ऑस्ट्रेलिया में स्थित ग्रेट डिवाइडिंग रेंज, यूराल और माउंट अगस्टस जैसी प्रमुख पहाड़ियों की। इनमें ग्रेट डिवाइडिंग रेंज खास पहाड़ी है जो ऑस्ट्रेलिया में पूर्वी तट से दक्षिण तक फैली हुई है। ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची पहाड़ी माउंट कोसजि ओको है जो 2228 मीटर ऊंची है और न्यू साउथ वेल्स में हैं।


अफ्रीका की पहाड़ियां: अफ्रीका में एटलस पहाड़ियां, इथोपियन हाईलैंड्स, ग्रेट रिफ्ट वैली और होगार पहाड़ियां खास हैं। इनमें एटलस पहाड़ियों की सबसे ऊंची चोटी माऊंट तौबकल है जो पश्चिमी मोरक्को में हैं और 4167 मीटर ऊंची है। इथोपियन हाईलैंड्स सोमालिया, इरीट्रिया और इथोपियन हाईलैंड्स भी यहीं स्थित है।


दक्षिण अमेरिका महाद्वीप: दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तटीय मैदानी पट्टी के साथ पूर्व में पर्वतों और पहाड़ियों की एक लंबी श्रृंखला है। यह संसार की सबसे लंबी एंडीज पर्वतमाला है। महाद्वीप के उत्तर में कैरेबियन सागर से शुरु होकर महाद्वीप के दक्षिणी छोर तक फैले इस महाद्वीप की लंबाई 7250 कि.मी. है। हिमालय पर्वत के बाद संसार की सबसे ऊंची पर्वतमाला इसे ही माना जाता है। एंडीज का सबसे ऊंचा शिखर अकांकगुआ है। इक्वाडोर में स्थित कोटोपेक्सी संसार का सबसे ऊंचाई पर पाया जाने वाला सक्रिय ज्वालामुखी है।


उत्तरी अमेरिका के महाद्वीप: उत्तर अमेरिका महाद्वीप में रॉकीज सबसे लंबी पर्वत श्रृंखला है। इसके अलावा कोस्ट रेंज, कैस्केड रेंज, सिएरा नेवादा, अलास्का रेंज, सिएरा माद्रे आदि प्रमुख पर्वत हैं। माउंट मैकिंले इसके सबसे ऊंची चोटी है।


अंटार्कटिका: वैसे तो अंटार्कटिका हमेशा बर्फ से ठका रहता है पर वहां भी बहुत से पहाड़ पाए जाते हैं। इनमें हडसन, एलैग्जैंडर तथा ओहियो तथा ग्रैब्रो पहाड़ियां खास है। अंटार्कटिका की सबसे ऊंची पहाड़ी विनसन मासिफ है जो 4897 मीटार ऊंची है। 

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कभी अकेले घूमने का प्लान बनाएं तो इन बातों का रखे विशेष ध्यान

घूमना फिरना सभी को पसंद होता है। कई लोग परिवार या दोस्तों संग घूमना पसंद करते हैं तो कई अकेले। वैसे देखा जाए तो अकेले घूमने फिरने का भी अपना अलग मजा है। हम खुद की मर्जी के मालिक होने के साथ-साथ जो चाहें वही कर सकते हैं। मगर हंसी-खुशी के अलावा अकेले घूमने जाते वक्त कुछ खास बातों का ध्यान रखना भी जरुरी होता है।


आखिर क्यों होता है सोलो ट्रिप मजेदार?


अधिक से अधिक मिलता है सीखने को - सोलो ट्रिप में हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। असल में जब हमारे साथ कोई होता है तो चाहते हुए भी हम कई चीजों को सीख नहीं पाते। हमारा आधे से ज्यादा ध्यान उस व्यक्ति की बातों और ध्यान रखने में चला जाता है।


खुद को जानने का सबसे सही मौका - इतनी भागदौड़ भरी जिंदगी में कहीं न कहीं हम खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते। सोलो ट्रेवलिंग के दौरान हमें खुद को गहराई से जानने का आसानी से मौका मिल जाता है।


काफी हद तक आपकी जेब हल्की होने से बच जाती है - सोलो ट्रिप पर जाने में पैसे भी काफी हद तक बच जाते हैं। न तो खाने पीने का अधिक खर्चा और न ही होटल में ठहरने का। चलिए ये तो बात हुई सोलो ट्रिप के फन की, अब बात करते हैं सोलो ट्रिप के दौरान ध्यान में रखने वाली कुछ खास बातें...


सोलो ट्रिप पर जाने से पहले जान लें कुछ खास बातें...


स्थान के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए - जब भी अकेले घूमने जाएं तो उस स्थान के बारे में पूरी जानकारी जरुर ले लें। जैसे कि उस जगह के मौसम, वहां की भाषा और सबसे महत्वपूर्ण बात उस स्थान पर सबसे सुंदर देखने लायक जगह। बस या ट्रेन में जाते वक्त उस स्थान के इतिहास को बारे में जानना भी न भूलें। महिला होने के नाते वहां की स्फ्टी के बारे में आपको सबसे पहले ध्यान देना चाहिए। सफर पर निकलने से पहले वहां रहने वाले स्थान के बारे में अपने घरवालों को पूरी जानकारी देकर जाएं।


खुद की तैयारी के वक्त रखें इन बातों का ध्यान - घर से निकलते वक्त अपनी की हुई तैयारी के बारे में अपने दोस्त या पेरेट्स के साथ एक बार जरुर डिस्कस कर ले। सबसे जरुरी बात जो बैग आप अपने साथ लेकर जा रही हैं वह बैग वॉटर प्रूफ होना जरुरी है। अपने साथ कैश रखने की बजाए क्रेडिट कार्ड या फिर सिर्फ डेबिट कार्ड रखें। अपने साथ अपना आधार कार्ड या फिर कोई भी ID Proof ले जाना न भूलें। आजकल हर होटल चैक इन करवाने से पहले आपका आधार कार्ड जरुर मांगता है। अगर आप बस या फिर ट्रेन में जा रहे हैं तो रिर्जवेशन करवाना कभी न भूलें।




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परफेक्ट हनीमून डेस्टिनेशन है सैंटा मोनिका

कहते हैं जोड़ियां आसमान में बनती हैं लेकिन शादियां जमीन पर होती हैं। शादी के बाद जोड़ियां जो सबसे अहम काम करती हैं, वह हनीमून है। हनीमून सभी जोड़ियों के लिए सबसे पहला और बड़ा क्षण होता है। हनीमून सभी जोड़ियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसी कारण हनीमून डेस्टीनेशन का चयन भी उतना ही अहम हो जाता है।

 

एक परफेक्ट हनीमून डेस्टिनेशन का चयन काफी चुनौतीपूर्ण काम होता है। इसके लिए तैयारियां और शोध काफी पहले से शुरू कर दिया जाता है। हर किसी के लिए परफेक्ट हनीमून डेस्टिनेशन की अपनी परिभाषा होती है। देश और विदेश में हजारों हनीमून डेस्टिनेशंस हैं और इनमें सैंटा मोनिका का काफी महत्वपूर्ण स्थान है। इसका कारण यह है कि यहां कुछ ऐसी चीजें हैं, जो इसे खास लिस्ट में शामिल करती हैं।

 

सैंटा मोनिका दुनिया भर के न्यूली मैरेड कपल्स के लिए परफेक्ट हनीमून डेस्टिनेशन रहा है। अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत के लॉस एंजेलिस काउंटी में स्थित यह एक बीचफ्रंट शहर है। हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक सैंटा मोनिका आते हैं और इनमें से बहुत बड़ी तादाद न्यूली मैरेड कपल्स की होती है।

 

सैंटा मोनिका ट्रेवल एंड टूरिज्म विभाग की आधिकारिक वेबसाइट-सैंटामोनिका डॉट कॉम पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में 87 लाख (8.7 मिलियन) लोगों ने सैंटा मोनिका का दौरा किया। इनमें से 42 लाख (4.2 मिलियन) लोग अमेरिका के बाहर से इस खूबसूरत शहर में पहुंचे। इन पर्यटकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था में 1.96 अरब डालर की आमद हुई तथा 13350 हजार रोजगार पैदा हुए।

 

तो ऐसा क्या है जो सैंटा मोनिका को दुनिया भर में एक पसंदीदा हनीमून डेस्टीनेशन बनाता है?

 

सैंटा मोनिका दुनिया भर के बेहतरीन शहरों में से एक लॉस एंजेलिस के पास स्थित है और यही कारण है कि हनीमून कपल्स इसे अपना बेस बनाना पसंद करते हैं। यहां खान-पान से लेकर मौसम तक हर चीज रोमांटिक माहौल पैदा करता है। इसके इतर रोमांस के लिए लॉस एंजेलिस के सभी प्रमुख अट्रेक्शंस मसलन हालीवुड, बेवलीर् हिल्स, डिज्नीलैंड, यूनिवर्सल स्टुडियोज इत्यादि, यहां से एक घंटे की ड्राइव पर हैं।

 

ऐसा नहीं है कि सैंटा मोनिका में मनोरंजन, रोमांच या रोमांस के लिए उपयुक्त माहौल नहीं है। अगर आप शांति से अपने जीवनसंगिनी के साथ सुकून भरा पल बिताना चाहते हैं तो सैंटा मोनिका के रेजार्ट्स, होटल्स, बीचेज और कंट्रीसाइड आपको इसके लिए उपयुक्त माहौल देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।


रोमांटिक डाइनिंग : 


खानपान के मामले में सैंटा मोनिका का कोई जवाब नहीं है। यहां रोमांटिक डाइनिंग के लिए एक से बढ़कर एक अवार्ड विनिंग रेस्तरां हैं, जो आपके स्वाद, पेट और रोमांटिसिज्म का पूरा ख्याल रखते हैं। इनमें रफाएल लुनेटा द्वारा संचालित जिराफ रेस्टोरेंट काफी लोकप्रिय है। स्थानीय सर्फर लुनेटा का यह रेस्तरां फ्रेंच इंस्पायर्ड डिशेज के लिए मशहूर है और यहां का सीटिंग एरेंजमेंट शानदार है।

 

इसी तरह -द लाबस्टर- एक बेहतरीन रेस्तरां है, जो अमेरिकन सीफुड के लिए मशहूर है। इस रेस्तरां के अंदर से पैसिफिक ओशन का शानदार नजारा दिखता है। यहां से साउदर्न कैलिफोर्निया का सनसेट देखना अपने आपमें बेहद रोमांटिक अनुभव होता है। इसके बाद बेहतरीन रेस्तरां की लिस्ट में मेलिस का नाम आता है जो लॉस एंजेलिस काउंटी के सबसे बेहतरीन रेस्तरां में से एक हैं। यहां का खाना लजीज होता है और यहां का एम्बिएंस बेहतरीन है जो आपकी हनीमून को यादगार बनाता है।

 

लक्जरी होटल्स : 


सैंटा मोनिका में ठहरने के लिए एक से बढ़कर एक होटल हैं। अगर आप बीचफ्रंट एलिगेंस चाहते हैं तो कासा डेल मार और शटर्स आन द बीच होटलों का रुख करें। ये होटल्स पैसिफिक ओशन और सैंटा मोनिका पीयर के करीब स्थित हैं। इसके अलावा अगर आप चिक बुटीक चाहते हैं तो फिर आपको वायसराय सैंटा मोनिका होटल में रुकना चाहिए। यह एक शानदार लक्जरी होटल है। अगर आपको इटीमेट हाइडवे की तलाश है तो वायसराय -सैंटा मोनिका ओसेनिया का रुख करें। पैसिफिक ओशन के किनारे बसे इस होटल में कमाल की लक्जरी और सुकून है, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।


कपल एक्टीविटीज : 

 

सैंटा मोनिका में कपल्स के लिए भी काफी एक्जीविटीज हैं। लोकल स्पा में कपल मसाज का आनंद यहां लिया जा सकता है। इसके लिए सी वेलनेस स्पा और ओशन स्पा एंड फिटनेस बेहतरीन डेस्टीनेशन हो सकते हैं। ओशन स्पा एंड फिटनेस को 2010 में रीडर्स च्वाइस अवाडर्स में बेस्ट होटल स्पा का अवार्ड मिल चुक है।

 

इसके अलावा सैंटा मोनिका में कपल्स पैरी बीच कैफे द्वारा प्रदान किए जाने वाले बीच बटलर सर्विस का आनंद ले सकते हैं। आप यहां अपनी स्वीटहार्ट के साथ बीच पर रीलैक्स करने के साथ-साथ बटलर सेट का आनंद ले सकते हैं। आपको एक वाकी-टाकी दिया जाएगा, जिससे आप चीजें आर्डर करेंगे और बटलर आपको हर चीज डिलिवर करेगा।

 

सैंटा मोनिका में बाइक रेंटल्स का भी आनंद लिया जा सकता है। यह आपको साउदर्न कैलोफोर्निया के कोस्टलाइन को एक्सप्लोर करने का मौका देगा। इसके अलावा मालिबू वाइनेरीज का दौरा कपल्स के लिए यादगार हो सकता है। आप इन वाइनेरीज में वाइन टेस्ट करते हुए रोमांटिक हो सकते हैं। साथ ही सैंटा मोनिका पीयर पर सोलर पावर्ड फेरीज व्हील पर सनसेट राइड का आनंद लिया जा सकता है।

 

सैंटा मोनिका आपको शापिंग की अनंत सम्भावनाएं देता है। आप चाहें जो ब्रांड चाहते हैं, वह आपको यहां मिल जाएगा। इसके अलावा अगर आपको यूनीक कैलीफोर्निया स्टाइल बुटीक की तलाश है या फिर यहां के कंट्रीसाइड में पैदा होने वाले ताजे फलों की चाह है तो आपके लिए कई आप्शंस मौजूद हैं।


कॉकटेल और सनसेट व्यू : 

 

होटल सांग्रीला का सुइट 700 एक ओपन एअर रूफटाप बार और लाउंज है और यहां बैठकर आप हालीवुड स्टाइल में कॉकटेल्स की चुस्कियां ले सकते हैं। यहां के एक्सक्लूसिव हाइडवे ब्लेंड्स काफी फेमस हैं। इसके अलावा पेंटहाउस एट हंटले तथा सोनोमा वाइन गार्डन कंटेम्पोरेरी क्यूजीन और काकटेल्स के लिए काफी फेमस हैं। सैंटा मोनिका के तट पर ताजा व ठंडी हवाओं के बीच आप फायरसाइड हैंगआउट का मजा लेते हुए आप अपनी जिंदगी के सबसे शानदार लम्हों को और लाजवाब बना सकते हैं।

 

सुकून भरा जीवन : 


सैंटा मोनिका ट्रेवल एंड टूरिज्म विभाग के मुताबिक सैंटा मोनिका आने वाले 83 फीसदी लोग कार या वाहन का उपयोग नहीं करते। एसे में दुनिया की भागम-भाग से दूर हाथ में हाथ लिए एक दूसरे को जानने तथा पहचानने के लिए सैंटा मोनिका से बेहतर हनीमून डेस्टिनेशन और क्या हो सकता है। यही कारण है कि नेशनल ज्योग्राफिक (नेवरहुड्स डाट डिस्कवरलासएंजेलिस डॉट कॉम) ने सैंटा मोनिका को दुनिया के टाप-10 रोमांटिक बीच सिटीज में शुमार किया है।


सैंटा मोनिका ने जीते हैं कई टूरिज्म पुरस्कार :


सैंटा मोनिका एक वर्ल्ड क्लास हॉलीडे डेस्टिनेशन है। दुनिया भर में इसकी खूबसूरती और पयार्वरण प्रेम को सराहती है और यही कारण है कि साल 2018 में इसे अहम पर्यटन पुरस्कार प्राप्त हुए। वर्ल्ड टूरिज्म अवार्ड्स के तहत सैंटा मोनिका को 'नॉर्थ अमेरिकाज लीडिंग बीच डेस्टीनेशन' पुरस्कार मिला और इसके अलावा ट्रेवल वीकली मेगेलान अवार्ड्स में सैंटा मोनिका को 'इको फ्रेंडली ग्रीन डेस्टीनेशन' अवार्ड दिया गया। 


तो अगर आप अपने हनीमून के लिए कोई स्वच्छ आबो-हवा के साथ-साथ रोमांटिक और सुरक्षित जगह खोज रहे हैं तो सैंटा मोनिका आपके लिए उपयुक्त चयन हो सकता है। 

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खूबसूरत वादियों का शहर है नैनीताल

उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसा नैनीताल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। यहां की खूबसूरत झीलें और साफ पानी यहां के माहौल को और भी खूबसूरत बना देता है। दोस्तों के साथ घूमने-फिरने का छोटा सा प्लान बनाना हो या हनीमून का, सबसे पहले नैनीताल का नाम ही जेहन में आता है। नैनीताल के झील का पानी बेहद साफ है और इसमें तीनों ओर के पहाड़ों और पेड़ों की परछाई साफ दिखती है।


किलवरी: 2528 मीटर की ऊंचाई पर दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी है और इसे किलवरी कहते हैं। यह पिकनिक मनाने के लिए शानदार जगह है। किलवरी से ऐसी दिखती है नैनीताल की खूबसूरती।


खुर्पाताल: नैनीताल के पास ही खुर्पाताल भी है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती किसी को भी मोहित कर देती है। सुंदर झील और आसपास मकान और होटल इस खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं।


नीम करोली बाबा: नीम करोली बाबा का यह आश्रम आधुनिक जमाने का धाम है। यहां पर मुख्य तौर पर बजरंगबली की पूजा होती है। इस जगह का नाम कैची यहां सड़क पर दो बड़े जबरदस्त हेयरपिन बैंड (मोड़) के नाम पर पड़ा है। कैची नैनीताल से सिर्फ 17 किमी दूर भुवाली से आगे अल्मोड़ा रोड पर है।


गिरिजा मंदिर: रामनगर से करीब 12 किमी दूर कॉर्बेट जंगल में कोसी नदी के बीच उभरे एक पहाड़ की चोटी पर माता गर्जिया (गिरिजा) का मंदिर है। गर्जिया मंदिर में वैसे तो सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर यहां मेला लगता है तो खूब धूम मचती है।




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सैंकड़ों साल से अडिग खड़े भारत के खूबसूरत किलों को जाने....

यह पूरी दुनिया जानती है कि भारत पुराने किलों और स्मारकों के लिए फेमस है। भारत के पुराने किले यहां के गौरवशाली इतिहास की गाथओं के बारे में बताते हैं। यूनेस्को वल्र्ड हेरिटेज में भारत का वल्र्ड फेमस लाल किला और आगरा का किला शामिल है। इन दो फेसम किलों के अलावा भी भारत में इतने सारे किले हैं, जो देश की विरासत और समृद्धि को दर्शाते हैं। इनमें हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं और फोटो शूट करते हैं। आज हम आपको भारत के कुछ ऐसे किलों के बारे में बता रहे हैं जो देश की धरोहर में शामिल हैं। सबसे पहले देखिए भारत के उस किले को जो पांच सौ साल से भी ज्यादा पुराना हो चुका है, लेकिन अडिग है....


जैसलमेर किला, राजस्थान

सुनहरे पत्थरों से बना जैसलमेर किला राजस्थान के जैसलमेर शहर में स्थित है। इस किले को देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं। इस जगह जाकर आप अपने आपको इतिहास से जुड़ा हुआ महसूस करेंगे। इस जगह की सुंदरता देखते ही बनती है। किले की हर एक दीवार इतिहास को बयान करती है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक यह दुनिया का सबसे बड़े किलों में एक है। इसे रावल जैसवाल ने बनवाया था। थार रेगिस्तान के बीचोंबीच इस किले को बनवाया गया था। जैसलमेर किले को सोनार किले के नाम से भी जाना जाता है। गोल्डन किला शहर से 76 किमी दूर त्रिकुटा पहाड़ी पर त्रिकोण आकार में बनाया गया है।


इस किले को भारत का दूसरा सबसे पुराना किला माना जाता है। किले में सबसे ज्यादा आकर्षक जैन मंदिर, रॉयल पैलेस और बड़े दरवाजे हैं। बाहरी लोगों को नहीं पता, जैसलमेर रेगिस्तान का शहर है जो त्रिकुटा पहाड़ी, हवेलियों, और झीलों के लिए फेमस है। इतिहास देखें तो पता चलता है कि जैसलमेर का किला 1156 ई. में निर्मित हुआ था। रावल जैसल द्वारा बना यह किला 80 मीटर ऊंची त्रिकूट पहाड़ी पर है। अगर इसके हिस्सों के बारे में आप देखना चाहते हैं तो सुन लीजिए यह इनता विशाल है कि इसमें बारह सौ घर हैं और ये तीस फुट ऊंची प्राचीरों से घिरा हुआ है। 30 फीट ऊंची दीवार वाले इस किले में 99 प्राचीर हैं, जिनमें से 92 का निर्माण 1633 और 1647 के बीच कराया गया था और चार विशाल प्रवेश द्वार हैं। इन प्रवेश द्वारों के नाम गणेश पोल, सूरज पोल, अक्षय पोल और हवा पोल हैं। किले के अंदर और भी अनेक सुंदर हवेलियां भी हैं। 


चित्तौड़गढ़ किला, राजस्थान

हैरान मत होईएगा जनाब, राजस्थान का ही नाम सुनकर! आपको बता दें कि राजस्थान राजाओं की भूमि है और किलों के मामले में इससे बेहतर उदाहरण दूसरा नजर नहीं आता। अब ये देखो मेवाड़ का चित्तौडगढ... इसे किलों का शहर कहा जाता है। यहां पर आपको भारत के सबसे पुराने और आकर्षक किले देखने के मिलेंगे। उन्हीं किलों में से एक चित्तौड़ का किला है। यह किला बेराच नदी के किनारे बनाया गया है। नदी के किनारे स्थित होने के कारण इसे पानी का किला भी कहा जाता है, क्योंकि इस किले में 84 पानी की जगहें हैं, जिनमें से 24 आज के समय में सही स्थिति में हैं। यह किला महाराणा प्रताप की बहादुरी की गवाही देता है। राजस्थान में राजपूत फेस्टिवल मनाया जाता है, जिसे जौहर मेला नाम से जाना जाता है। चित्तौडगढ़ के किले में दो फेमस जलाशय हैं, जो विजय स्तंभ और राणा कुंभा के नाम से प्रसिद्ध हैं। इस किले के अलावा यहां पर आपको अम्बर किला, जयगढ़ किला और तारागढ़ किला है, जिन्हें देखने के लिए पर्यटकों का तांता लगा रहता है। पिक्स देख अंदाजा खुद ही लगा सकते हैं।


मेहरानगढ़ किला, राजस्थान

जोधपुर शहर में अगर कुछ देखना है तो इसे देखना न भूलें, चूंकि यह यहीं स्थित है। यह 500 साल से भी ज्यादा पुराना और सबसे बड़ा किला है। यह किला काफी ऊंचाई पर स्थित है। इसे राव जोधा द्वारा बनवाया गया था। इस किले में सात गेट हैं। प्रत्येक गेट राजा के किसी युद्ध में जीतने पर स्मारक के रूप में बनवाया गया था। इस किले में जायापॉल गेट राजा मानसिंह ने बनवाया था। किले के अंदर मोती महल, शीश महल जैसे भवनों को बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया है। चामुंडा देवी का मंदिर और म्यूजियम इस किले के अंदर ही हैं। इस किले का म्यूजियम राजस्थान का सबसे अच्छा म्यूजियम माना जाता है। राजस्थान को रॉयल पैलेस कई कारणों से कहा जाता है। यह टूरिस्ट्स को सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाला राज्य है। राजस्थान अपने किलों के अलावा थार रेगिस्तान, खूबसूरत झीलें, नेशनल पार्क और एक रॉयल लाइफ स्टाइल के लिए भी फेसम है। 


लाल किला, दिल्ली

लाल किला के बारे में वैसे तो आप भी भलीभांत जानते होंगे, लेकिन खास बातें हमसे समझ लीजिए। भारत का सबसे आकर्षक और फेमस किलों में लाल किला का नाम आता है। यह किला दिल्ली में स्थित है। इसे मुगल शासक शाहजहां ने बनवाया था। इस किले की दीवारें लाल पत्थर की हैं। यही वजह है कि इसे लाल किला नाम से जाना जाता है। इस किले के अंदर देखने लायक कई चीजें हैं। मोती मस्जिद, दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास देखने के लिए काफी लोग रोज ही आते हैं। यह किला यमुना नदी के किनारे है। इस किले में आपको पुरातात्विक म्यूजियम और युद्ध से जुड़ी जानकारी देने वाला म्यूजियम भी बनाया गया है। यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण धरोहरों में से एक है, जहां से देश के प्रधानमंत्री देश के लोगों को संदेश देते है औैर स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराते हैं। कल ही मोदी ने फहराया था, आपने जोरदार भाषण भी सुना होगा। 


श्रीरंगपट्टनम किला, कर्नाटक

बहुत कम लोगों को पता है कि कर्नाटक की पवित्र नदी कावेरी के निकट श्रीरंगपट्टनम किला स्थित है। श्रीरंगपट्टनम किला और टीपू सुल्तान का किला कर्नाटक राज्य के प्रमुख स्मारकों में से एक है। इन किलों के अलावा यहां पर जुम्मा मस्जिद, दारिया दौलत गार्जन, श्रीरंगपट्टनम पक्षी संग्राहलय और टीपू सुल्तान म्यूजियम टूरिस्ट्स के आकर्षण के केंद्र हैं। इस किले को देखे बिना कर्नाटक की यात्रा बेकार है। कर्नाटक में बेलगाम का किला भी फेमस है। यह कर्नाटक के पुराने और भव्य किलों में से एक है। 


ग्वालियर का किला

यह किया राणा मानसिंह तोमर ने मध्य प्रदेश में बनवाया था। यह किला ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। इस किले के आकर्षण का केंद्र सास-बहू मंदिर और गुजारी महल है। इसमें मंदिर और म्यूजियम भी है। यह राजसी स्मारक भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। इस किले के महत्व को याद रखने के लिए इस पर डाक टिकट भी जारी किया गया है। यह मध्य प्रदेश के सबसे पसंदीदा टूरिस्ट प्लेसेस में से एक है।


गोलकोंडा किला, हैदराबाद

प्रदेश के हैदराबाद शहर में काकतिया राजा ने इसे बनवाया था। यह किला अपने समृद्ध इतिहास और राजसी भव्य संरचना के लिए जाना जाता है। गोलकुंडा कोल्लूर झील के पास हीरे की खान के लिए भी फेमस है। इस किले को हैदराबाद के सात आश्चर्य के रूप में जाना जाता है। इस किले के अलावा यहां पर आपको चारमीनार, बिरला मंदिर, रामोजी फिल्म सिटी, हुसैन सागर, सालारजंग म्यूजियम और मक्का मस्जिद जैसी कई दर्शनीय जगहें हैं। 


कांगड़ा किला, हिमाचल 

कांगड़ा का मतलब घाटी में बाणगंगा और माझी नदियों के संगम पर। कांगड़ा के शाही परिवार ने इस किले का निर्माण किया था। यह किला दुनिया के सबसे पुराने किलो में से एक है। यह हिमालय का सबसे बड़ा किला और इंडिया का सबसे पुराना किला है। इस किले में वज्रेश्वरी मंदिर है, जिसका काफी महत्व है। किलों और मंदिरों के अलावा हिमाचल अपनी खूबसूरती के लिए भी फेमस है। कांगड़ा शहर की खूबसूरती देखने के लिए आप सड़क रास्ते से यात्रा करें। हिमाचल की काफी सारी इमारतें धर्मशाला के पास भी हैं।


पन्हाला किला, महाराष्ट्र 

महाराष्ट्र में कोल्हापुर के पास सहयाद्री पर्वत में इस किले को बनाया गया है। यह किला मराठा शासकों की याद दिलाता है। महाराष्ट्र में ज्यादातर किले शिवाजी के समय में बनाए गए थे। महाराष्ट्र के पुनडार किला, बहादुरगढ़ किला, अहमदगढ़ किला और रत्नगढ़ किले में आप ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। ये किले ट्रैकिंग के लिए बेहद फेमस हैं। महाराष्ट्र का मुरुद जिला जंजीरा और खूबसूरत बीच के लिए फेमस है। यहां घूमने का उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च है। इस समय यहां का मौसम सुखद होता है। जनवरी-फरवरी में भी यहां की सकूनता का अहसास ले सकते हैं, 


लाल किला, आगरा 

आपमें से कुछ लोग सोच रहे होंगे कि लाल किला तो हम देख चुके, लेकिन वह किला दिल्ली का था और ये उत्तर प्रदेश के ताज महल से 2 किमी की दूरी पर आगरा में बनाया गया है। इस किले को सिकंदर लोधी ने रहने के लिए बनवाया था। इस किले को यूनेस्को विरासत में दर्जा हासिल है। यह यमुना नदी के किनारे बनाया गया है। उत्तर प्रदेश के बेस्ट टूरिस्ट प्लेस में आगरा का यह लाल किला आता है। इस किले के अलावा झांसी किला अपनी कलाकारी के लिए फेमस है। झांसी का किला महारानी लक्ष्मीबाई का किला है। महारानी लक्ष्मी बाई ने अंग्रेजों से लोहा लिया था, वे परम शहीदों में से एक थीं, भारत की मर्दानीं वीर।




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स्ट्रेस कम करना है तो जाएं खंडाला

रोजाना ऑफिस जाओ और काम करो एक ही रूटीन आपकी लाइफ को बोरिंग बना देता है। तो अपनी लाइफ को थोड़ा स्पाइस अप करने और उसमें एक्साइटमेंट भरने के लिए जाएं छुट्टियों पर। घूमें हरी-भरी वादियों में और भूल जाइए अपना सारा स्ट्रेस। हम आपको ले चलते हैं महाराष्ट्र... महाराष्ट्र का खंडाला। ये महाराष्ट्र का बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। 625 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस जगह पर पहाड़ों से गिरता झरना मन को सुकून देता है।


खंडाला बेहद छोटा सा हिल स्टेशन है पर इस छोटी सी जगह में इतना सौंदर्य बिखरा है कि इस जगह को बार-बार देखने का मन करता है। यह जगह मुंबई की भीड़-भाड़ से करीब 101 किलोमीटर दूर है। यहां के खूबसूरत पहाड़ आपकी थकान को पल भर में गायब कर देंगे और कुछ ही देर में मन को शांति मिलने लगती है। मानसून के समय खंडाला की खूबसूरत अपने पूरे उफान पर होती है जिससे यहां पहुंचे लोगों विस्मृत हुए बगैर नहीं रह पाते। बारिश के दौरान चारों ओर पसरी हरियाली को देखने यहां बड़ी संख्या में सैलानियों का झुंड पहुंच जाता है।


शानदार आकर्षण और विस्मयकारी दृश्य:- सह्याद्री पर्वत श्रृंखला की पहाड़ियों और घाटियों में आराम से बसे इस छुट्टी के स्थान में पूरे साल भर आनंददायक मौसम होता है। शानदार प्राकृतिक परिदृश्य से सुशोभित खंडाला अपनी घास की पहाड़ियों, उज्जवल घाटियों, सुंदर झीलों और सुखद जलप्रपातों के लुभावने दृश्यों के द्वारा अपने पर्यटकों को प्रभावित करता है। पर्यटकों के आकर्षण के कुछ स्थानों के अंतर्गत अमृतांजन पॉइंट, ड्यूक्स नोज, रेवुड पार्क और भुशी बांध आते हैं। प्रचुर प्राकृतिक वैभव के अलावा यह हिल स्टेशन अपने गुफा मंदिरों के लिए भी प्रसिद्द है, जो ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी के हैं।


ये गुफा मंदिर बौद्ध स्थापत्यकला का प्रतिनिधित्व करते हैं और और अतीत में हिनायाना संप्रदाय की उपस्थिति का प्रमाण हैं। प्रकृति प्रेमियों और उत्साहियों के लिए सुरम्य घाटियों में चलना एक रहस्यमयी आकर्षण है जो इस स्थान की विशेषता है। खंडाला को प्रचुर प्राकृतिक सुंदरता भेंट स्वरुप मिली है और मानसून का समय इस प्राकृतिक चमत्कार को देखने के लए सबसे अच्छा समय है जब यह अपनी चरम सीमा पर होता है। चारों ओर सब कुछ सघन, हरा और ताजा दिखाई देता है जो आपमें एक मादक भावना उत्पन्न करता है। अक्टूबर से मई तक का समय खंडाला घूमने के लिए उपयुक्त है। इस खूबसूरत पहाड़ी इलाके का सबसे अच्छा लाभ ट्रैकिंग के माध्यम से लिया जाता है। चाहे आप शौकीन यात्री हैं या अनुभवी है, पहाड़ों और चट्टानों के ऊपर तक पहुंचने के लिए एक पगडंडी का चुनाव करें और नीचे घाटी को देखें। ड्यूक्स नोज पॉइंट और कार्ला पहाड़ियां रॉक क्लाइम्बिंग के दो लोकप्रिय स्थानों में से हैं।


पर्यटन के अंतर्गत अनेक आमोद:- प्रमोद आते हैं और यह देश के उन दिलचस्प क्षेत्रों में से एक है जहां भव्य प्राकृतिक सुंदरता है। लोहगढ़ किले का अर्थ है लोहे का किला और इसे कैदियों को रखने के लिए बनाया गया था। खंडाला के पास एक अन्य पर्यटन स्थल कुने प्रपात है जो 100 मीटर की ऊंचाई से गिरता है। यह चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। आप राजामची किला देखना नही भूल सकते जो एक प्रतिष्ठित पर्यटन स्थल है और चारों ओर से सदाबहार घाटियों और उद्यानों से घिरा हुआ है। प्रचुर प्राकृतिक सुंदरता से भरे हुए खंडाला के पर्यटन स्थल वास्तव में अद्भुत हैं।


कुछ अतिरिक्त विवरण:- खंडाला में सैर के लिए साल भर मौसम आदर्श रहता है। अधिकांश समय यहां का मौसम गर्म और सत्कार शील होता है। हालांकि यहां घूमने के लिए शीत ऋतु सबसे उत्तम है। यहां का शांत और लोभ्य मौसम इस स्थान पर छुट्टी के आनंद को बढ़ा देता है। निश्चिंत रहिये, यहां ट्रेकिंग करने का अनुभव आपको जिंदगी भर याद रहेगा। चाहे आप मितव्ययी हों या अतिव्ययी हों, खंडाला अपने शानदार दृश्यों और वातावरण के कारण अपने सभी आगंतुकों को मोहित करने में सफल हुआ है।


अपने विभिन्न व्यंजनों के लिए प्रसिद्द खंडाला में हॉट केक मिलती हैं। खंडाला तक हवाई यात्रा, रास्ते और रेल के द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। मुंबई और पुणे के बीच की प्रमुख कड़ी, मुंबई-पुणे राजमार्ग खंडाला से गुजरता है। आसपास के शहरों से इसकी पहुंच इसे लंबी पैदल यात्रा और आराम के लिए एक आकर्षक स्थान बनाती है। खंडाला महाराष्ट्र के सभी प्रमुख शहरों से रेल, रास्ते और हवाई मार्ग के द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। पुणे हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है यद्यपि अनेक इंटर सिटी ट्रेन उपलब्ध हैं जो महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों को खंडाला से जोड़ती हैं। शांति के कुछ पल प्राप्त करने के लिए यह छोटा और प्यारा हिल स्टेशन उपयुक्त है। 


ट्रेकिंग के लिए है खास:- प्रकृति की अविश्वसनीय सुंदरता से अटा पड़ा खंडाला ट्रेकिंग के लिए भी मशहूर है। यहां स्थित ड्यूक नोज और कार्ला की पहाड़ियां दो लोकप्रिय रॉक क्लाइम्बिंग स्थल हैं। खंडाला में कई ट्रैकिंग ट्रायल हैं। खंडाला उन लोगों के लिए बेहद रोमाचंक जगह है, जो साहसिक कार्य करने में रूचि रखते हैं।


कैसे पहुंचे खंडाला:- मुंबई से सड़क मार्ग द्वारा खंडाला 99 किलोमीटर जबकि ट्रेन से इसकी दूरी 123 किलोमीटर है।


मुंबई से पुणे जाते समय कार एवं रेल मार्ग द्वारा खंडाला प्रथम तथा लोनावला द्वितीय पड़ाव पड़ते हैं। दोनों नगरों में पांच किलोमीटर की दूरी है इसलिए कोशिश करें और जब भी खंडाला जाने का कार्यक्रम बनाएं लोनावाला साथ ही घूमें।


खंडाला से नजदीकी हवाई अड्डा पुणे है। यहां उतर कर टैक्सी के जरिए खंडाला पहुंचे। खंडाला मुंबई और पुणे के बीचों बीच बसा है इसलिए आप अगर मुंबई के एयरपोर्ट पर भी आते हैं तो वहां से सीधे खंडाला पहुंच सकते हैं।





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लांगकवी के स्काई ब्रिज का मजा

मलेशिया बहुत खूबसूरत है और वहां के प्रा-तिक सौंदर्य में विविधता भी है। भारतीयों को वहां जाना खासा पसंद रहा है। अब मलेशिया में एक और जगह भारतीयों को लुभाने के लिए तैयार है-लांगकवी। वहां जाने वाले भारतीय सैलानियों की संख्या में इजाफा भी हो रहा है। लांगकवी एक खूबसूरत द्वीप है। वहां जाने वाले भारतीयों में शॉपिंग करने वालों और प्रा-तिक खूबसूरती निहारने वालों की तो संख्या खासी है ही, उनकी संख्या भी है जो कारोबारी मीटिंग वहां करना मुनासिब समझते हैं।


भारतीयों की संख्या में इजाफा होने की ही वजह से वहां का टूरिस्ट विभाग सेवा क्षेत्र में लगे लोगों- टैक्सी ड्राइवरों, रेस्तरां ऑपरेटरों, शॉपिंग सेंटर कर्मचारियों, आदि के लिए खास हिंदी के कोर्स चला रहा है ताकि वे भारतीय सैलानियों की खिदमत बखूबी कर सकें। भारतीयों के लिए खास टूरिस्ट पैकेज भी लाए जा रहे हैं। इस जगह की पसंद इतनी है कि भारत के एक धनकुबेर ने हाल ही में अपनी शादी तक के लिए इसे चुन लिया था।


99 द्वीपों का समूह:- लांगकवी दरअसल अंडमान समुद्र में 99 द्वीपों का एक समूह है। जब समुद्र का पानी उतार पर होता है तो पांच और द्वीप सतह पर आ जाते हैं। यहां के बीच पेनांग के बीचों से होड़ लेते हैं। लांगकवी की केबल कार और यहां का स्काई ब्रिज बेहद अनूठे हैं। स्काई ब्रिज समुद्र तल से 700 मीटर ऊपर है। 125 मीटर लंबा यह पैदल पुल आसमान में तैरता सा है। पुल की चैड़ाई 1.8 मीटर है और दो जगहों पर साढ़े तीन मीटर से ज्यादा चैड़े तिकोनाकार प्लेटफार्म हैं जहां बैठकर सुस्ताया और आासपास का नजारा लिया जा सकता है। जहां पुल है और जहां का नजारा उस पुल से मिलता है, दोनों ही अद्भुत है। मलेशिया की यात्रा में यह न छोड़ने वाला अनुभव होगा।



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मानसून का मजा लेना है तो जाएं चांदीपुर बीच...

मानसून की ठंडी हवाएं हों और अगर आप इस हवा का मजा लेने किसी स्पेशल जगह जाने का मन बना रहे हैं तो जाएं चांदीपुर बीच। मटमैला आसमान, मंद हवा, टप-टप बारिश की बूंदें और समुद्र का किनारा आपका दिन बनाने के लिए काफी है। यह भारत के सर्वोत्तम समुद्र तटों में से एक है जो ओडिशा के समुद्री तट पर पुरी और कोलकाता के बीच पड़ने वाले बालासोर से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।


यहां खूबसूरत ताड़ के पेड़ तो हैं ही, सफेद बालू के टीले भी हैं, जहां आपको हाइड एंड सीक गेम खेलने में काफी मजा आएगा। चांदीपुर बीच दुनिया के कुछ उन चुनिंदा समुद्री तटों में शामिल है, जो लो टाइड की वजह से हर दिन पांच किलोमीटर पीछे जाता है। दूर-दूर तक फैले समुद्री रेत पर आप टहल सकते हैं, समुद्र की लहरों से खेल सकते हैं और चाहें तो समुद्र से निकलते खूबसूरत सी शेल्स को एकत्र कर सकते हैं। जब यहां समुद्र दोबारा चढ़ता है तो जीप में बैठकर समुद्र के आगे-आगे भागना कभी नहीं भूलने वाला अनुभव है।


क्या देखें....


सिमिलीपल नेशनल पार्क:- यह पार्क बारीपदा से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. चांदीपुर से एक दिन के ट्रिप पर यहां घूमा जा सकता है। यह पार्क बाघों के लिए जाना जाता है। इनके अलावा, चीते, हाथी, सांभर, भौंकने वाले और चित्तीदार हिरन, मगरमच्छ और सरीसृप भी देखे जा सकते हैं।


इस पार्क में चिड़ियों की लगभग 231 प्रजातियां और पेड़-पौधों की लगभग 1076 प्रजातियां हैं, जिसमें ऑर्किड की 94 किस्में हैं। एनएच-6 (जो कोलकाता से आती है) पर स्थित जाशीपुर और एनएच- 5 पर स्थित लुलंग यहां के दो एंट्री प्वाइंट्स हैं। बाच्चुरी चारा यहां का बेहतर स्थान है, जहां से जंगली हाथी देखे जा सकते हैं। हालांकि बाघों की दहाड़ सुनने का सबसे सुंदर स्थान चाहाला की पहाड़ियां हैं।


देवकुंड:- बालासोर से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवकुंड में मनोहारी झरनों की श्रृंखला देखी जा सकती है। यह सिमिलीपल नेशनल पार्क के बाहरी घेरे पर स्थित है।


पंचलिंगेर:- बारीपदा से 85 और बालासोर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है- पंचलिंगेर. यहां शिव का प्राचीन मंदिर है। यहां भगवान शिव के पांच लिंग स्थापित हैं, जो प्रतिदिन प्राकृतिक झरने से धुलते हैं। ये झरनें इन लिंगों के ऊपर से बहते हैं।


यह स्थान वरदांत देवगिरि पहाड़ियों की श्रृंखला के मध्य में स्थित है, जो सघन हरियाली और खूबसूरत वादियों के कारण प्रसिद्ध है। बालासोर से 90 किलोमीटर और चंदनेर से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित तालासरी और चैमुख भी बहुत ही खूबसूरत अनदेखे बीच हैं और वे पर्यटकों की कल्पनाओं को सच करते हैं।


इसके अलावा, आप यहां सती अनुसुइया आश्रम भी जा सकते हैं, जो यहां से 16 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह आश्रम मंदाकिनी नदी के किनारे है। यहां सती अनुसुइया ने सीता माता को सतीत्व के महत्व को बताया था। यहां राम जानकी रघुवीर मंदिर और संकटमोचन हनुमान मंदिर, जो जानकी कुंड के पास स्थित है, के दर्शन कर सकते हैं। यहां प्राकृतिक अजूबे के तौर पर गुप्त और गोदावरी नामक दो गुफाएं हैं जिनमें से एक संकरी और दूसरी विस्तृत बने हुए हैं। माना जाता है कि यहां श्रीराम और लक्ष्मण ने बैठक की थी।


कब जायें:- मानसून यहां के वातावरण का बिल्कुल अलग ही अहसास कराता है। हालांकि यहां आने के लिए बेहतर महीने सितम्बर से मार्च हैं।


कैसे पहुंचें हवाई मार्ग:- यहां का नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर है जो 294 किमी दूर है. यहां से कोलकाता 206 किमी दूर है। चांदीपुर से चालीस किलोमीटर दूर प्रकृति की गोद में खूबसूरत नीलगिरि स्थित है। नीलगिरि हिल्स ट्रैकिंग के लिए बेहतर स्थान है। साथ ही यहां कुलदिहा एलीफेंट सेंचुरी भी देख सकते हैं।


रेल मार्ग:- यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन बालासोर है, जो 16 किमी दूर है. बालासोर, कोलकाता-चेन्नई मुख्यलाइन पर स्थित है। यह सभी बड़े शहरों से जुड़ा है. यहां से आप टैक्सी या ऑटो किराये पर लेकर चांदीपुर पहुंच सकते हैं।


सड़क मार्ग:- एनएच-5 पर स्थित चांदीपुर बालासोर से 16 किमी दूर है. बालासोर से भुवनेर 214 किमी और बालासोर से कोलकाता 298 किमी की दूरी पर है।





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अगर हिमाचल जाएं तो इन 3 जगहों पर जरूर घूमकर आएं, जानें-इनकी विशेषताएं

हिमाचल प्रदेश देवों की नगरी के नाम से दुनियाभर में प्रसिद्ध है। पहाड़ों के इस प्रदेश में चार धाम हैं, जिनका नाम क्रमशः बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री हैं। इन्हें चारधाम के नाम से भी पुकारा जाता है। इसके साथ ही यहां की घाटियां और बगीचों की क्यारियां देखने लायक हैं। जबकि इस प्रदेश में कई ऐसी जगह भी हैं जो अपनी रहस्यों के लिए जानी जाती हैं। अगर आपको नहीं पता है तो आइए जानते हैं-


बिजली महादेव मंदिर, कुल्लू


यह मंदिर कुल्लू में अवस्थित है। इस मंदिर में शिवलिंग स्थापित है। इस बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में यह शिवलिंग आकाशीय बिजली के गिरने से कई बार विखंडित हो चुका है। हालांकि, मंदिर के पुजारी इन्हें सत्तू और मक्खन की मदद से जोड़ देते हैं। यह मंदिर कुल्लू से 13 किलोमीटर दूर है।


रक्षम गांव, किन्नौर


किन्नौर जिले में बसे इस गांव में केवल 800 लोग रहते हैं। ये सभी लोग बनजारे हैं। इस गांव में दो मंदिर हैं। एक काली मां का मंदिर है। जबकि दूसरा भगवान शिव का मंदिर है। इस गांव में महिलाएं जीविकोपार्जन के लिए खेतों में काम करती हैं। जबकि पुरुष गायों और भेड़ों का पालन पोषण करते हैं। अगर आप कुछ नया अनुभव करना चाहते हैं तो इस जगह की एक बार जरूर यात्रा करें।


चांशल दर्रे, शिमला


कुछ साल पहले चांशल के बारे में लोगों को कोई जानकारी नहीं थी। अब जबकि यात्रा का आवागमन हो गया है तो लोग चांशल घूमने के लिए जाते हैं। फ़िलहाल इस जगह पर एक अतिथि गृह है। इसलिए रात में आप चांशल में रुक नहीं सकते हैं। इसके लिए आपको पहले से बुकिंग करानी होगी। इस दर्रे के नजदीक डोडरा और क्वार गांव हैं। ये आदिवासियों का गांव हैं। इस जगह पर आप रात्रि विश्राम कर सकते हैं।






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सौंदर्य और शौर्य के देश फ्रांस व इटली

युरोप के प्रमुख देशों की जब गिनती की जाती है तो उनमें फ्रांस और इटली का नाम पहली पंक्ति में आता है। इन दोनों देशों की खासियत यह है कि ये अपनी पारंपरिक विरासत के मामले में जितने समृद्ध और उसे सहेजने में जितने सतर्क हैं, आधुनिकता के ध्वजवाहक के रूप में भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यह कहना गलत न होगा कि आधुनिकता की अवधारणा ही अपने मूल रूप में फ्रांस की देन है। फ्रांस को प्रेम व रोमांस के लिए जाना जाता है तो इटली शौर्य व वीरता के लिए प्रसिद्ध है। इतिहासप्रसिद्ध योद्धा जूलियस सीजर इटली में ही पैदा हुआ था।


प्रेम व सौंदर्य की भूमि फ्रांस

लोगों के दिलों में प्यार की चिनगारी भड़काने और प्रेम की फुहारों से तन-मन को भिगो देने वाला शहर है-पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस को दुनिया का सबसे रोमांटिक शहर माना जाता है। प्रेम की बुझती हुई लौ को फिरसे जलाने या प्यार के सागर में बहुत गहरे डूब जाने के लिए सारी दुनिया से प्रेमी जोड़े यहां आते हैं और बहुत सी मीठी यादें साथ ले जाते हैं। साइन नदी के किनारे बसा पेरिस महान शासक लुई 14वें व नेपोलियन बोनापार्ट, पेंटर वान गॉग, रेमाम्ब्रां तथा मोनालिसा की चित्रकृति बनाने वाले लियोनार्दो दा विंशी की जन्मभूमि है।


आइफेल टॉवर

पेरिस का पर्याय है आइफेल टॉवर, जिसे देखने हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। 300 मीटर ऊंचा यह टॉवर 1889 में बनकर पूरा हुआ और अपने निर्माता आर्किटेक्ट गस्टैव आइफेल के नाम पर इसका नामकरण हुआ। इस टॉवर की जितनी प्रशंसा हुई उतनी ही आलोचना भी। इसके आलोचकों का मानना था कि यह बहुत जल्द गिर जाएगा, पर अपने आलोचकों का मुंह बंद कराकर यह तीन मंजिला टॉवर आज भी शान से खड़ा है। इसकी पहली मंजिल 57 मीटर, दूसरी 115 मीटर तथा तीसरी 256 मीटर पर है। 320 मीटर पर इसका एरियल है जहां से पूरे पेरिस की सुंदर झलक मिल सकती है। यहां लगी लाइटें रात में इस टॉवर की सुंदरता को दोगुना कर देती हैं।  पेरिस प्राचीन संग्रहालयों, इमारतों व चर्चो की भूमि भी है। इतिहास के महत्वपूर्ण पन्नों को संजोए ये इमारतें हर पर्यटक के मन में अपना इतिहास जानने की उत्सुकता पैदा करती हैं। नेपोलियन की एक शानदार जीत के प्रतीक के रूप में बनाया गया आर्क द ट्रायम्फ 1936 में तैयार हुआ था। यह विजय का प्रतीक लुई फिलिप के शासनकाल में बना। इस आर्क की खासियत इसके चारों ओर बनी पेंटिंग हैं। फ्रांस के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का आकर्षक चित्रण इन पेंटिंगों में है। यह इमारत वास्तुकला की भी नायाब मिसाल है, जिस पर फ्रांस का राष्ट्रीय ध्वज हमेशा फहराता रहता है।


नॉत्र दाम संग्रहालय

नॉत्र दाम पेरिस के सबसे पुराने व समृद्ध संग्रहालयों में से एक है। गोथिक स्टाइल में बना यह संग्रहालय ग्लास से बनी खूबसूरत खिड़की व दरवाजों के लिए मशहूर है। 1160 में इसका निर्माण शुरू हुआ और 1345 में यह बन कर तैयार हुआ। इस दौरान फ्रांस में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई, जिनमें कुछ त्रासदियां भी थीं। इसीलिए यह कई वर्षो तक अशुभ माना जाता रहा। बाद में नेपोलियन ने यहीं खुद को सम्राट घोषित किया और यह इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण घटना है।


संसार के बड़े संग्रहालयों में से एक म्यूजे द लूव्र है, जिसमें रखी गई कलाकृतियों को सात वर्गो में बांटा गया है। लगभग दो शताब्दियों तक फ्रांस का राजसी निवास रहे लूव्र में मिस्त्र, ग्रीस व रोम के साथ ही ओरिएंटल पेंटिंग व स्कल्प्चर के नमूने भी देख सकते हैं। नॉत्र दाम, शाजे लिजे, स्ते चैपल, लोपरा, म्यूजे दोरसे, सेंअर पॉम्पीदू, प्लेस द ला कॉन्कर्ड आदि भी दर्शनीय हैं।


पेरिस के आसपास कई और ऐसी जगहें भी हैं जहां आसानी से जाया जा सकता है। वरसाय फ्रांस के महान शासक लुई चैदहवें का शहर माना जाता है। इस शासक का महल सुंदर कलाकृतियों से सजा है। उस जमाने के अत्यंत शालीन व कारीगरी से युक्त फर्नीचर देखने हों तो यह महल जरूर देखा जाना चाहिए। इस शहर की सुंदरता यहां के फ्रेंच क्लासिकल आर्किटेक्चर में है। फ्रांस के राजाओं और महारानियों के जीवन की अद्भुत झलक यहां मिलती है। पेरिस से करीब एक घंटे का सफर तय कर आप शातो द फाउंटेन ब्लो पहुंच सकते हैं। इसे नेपोलियन ने राजाओं का सच्चा घर कहा है। राजसी परिवारों के शिकार के शौक को पूरा करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता था। 12वीं शताब्दी में इसे बनाया गया और 19वीं शताब्दी तक राजाओं द्वारा इसका विस्तार किया जाता रहा।


सभ्यता का उत्कर्ष रोम

इटली की राजधानी रोम पहुंचते ही वहां मौजूद अवशेषों को देखकर प्राचीन रोमन साम्राज्य का वैभव मूर्तमान होने लगता है। रोम को इटरनल सिटी का दर्जा शायद इसीलिए दिया गया। अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए विख्यात रोम में ही जूलियस सीजर का जन्म भी हुआ था। आसपास के अनेक प्रांतों के बाद उसने रोम को भी जीत लिया और फिर लंबे वक्त तक इस पर शासन किया। रोम के अन्य शासकों में ऑगस्टस, नीरो, क्लॉडियस, टाइटस व कांस्टैनटाइन शामिल हैं। रोम में पियाजा विनिजिया 15वीं शताब्दी में बना एक महल है। इटली की एकता का जश्न मनाने के लिए बनाया गया विक्टर इमैनुयल का स्मारक बहुत दूर से देखा जा सकता है। आर्क ऑफ कॉन्स्टैंटीन और वीया सैक्रा चैथी शताब्दी में बनाए गए। रोम को फव्वारों का शहर भी कहा जाता है। जगह-जगह बने फव्वारे पूरे शहर की शोभा बढ़ाते हैं।


फ्लोरेंस

इटली का एक और छोटा सा शहर है फ्लोरेंस जहां प्राकृतिक सौंदर्य व मानवीय प्रतिभा के संयोग के फलस्वरूप अनेक कलाकृतियां देखने को मिलेंगी। बोबोली गार्डेन सबसे सुंदर बगीचों में से एक है। वेनिस इटली का खूबसूरत शहर है। नहरों के शहर के रूप में विख्यात वेनिस को लोग रोमांस व प्रेम का शहर भी मानते हैं। शहर के बीच से बहती नहरें और इनके किनारों पर बने मकान इसे अपने ढंग का अनोखा शहर बनाते हैं। इन नहरों में चलती नौकाओं में बैठकर वेनिस की गलियों को निकट से देखा जा सकता है। इटली के कुछ अन्य लोकप्रिय शहर हैं मिलान, नेपल्स, सिसली। यहां प्राचीन इतालवी संस्कृति व कला के बहुत से नमूने आप देखकर दंग रह जाएंगे। प्रसिद्ध पेंटर माइकेल एंजेलो की सिस्टीन चैपल की छत पर उल्टे लेटकर बनाई गई बारीक पेंटिंग को देखने दुनिया भर के दर्शक यहां आते हैं। इतनी खूबसूरत पेंटिंग्स आज तक नहीं बनाई गई। 


लीनिंग टॉवर ऑफ पीसा

इटली के शहर पीसा में बनी लीनिंग टॉवर ऑफ पीसा एक आकर्षक इमारत है। इस झुकी हुई इमारत का निर्माण 1173 में शुरू हुआ। यह टॉवर एक ओर झुकी हुई है, जो सचमुच एक करिश्मा है और माना जा रहा है कि यह टॉवर लगातार झुक रही है। इसके झुके होने की वजह असमतल जमीन बताई जाती है। तीन मंजिलें बनाने के बाद इसके नीचे की धरती धीरे-धीरे धंसने लगी, जिससे यह एक ओर झुक गई, पर निर्माण जारी रहा। 1360-70 के बीच इसका निर्माण पूरा हुआ। संसार के इस आश्चर्य को देखने असंख्य दर्शक रोज यहां जुटते हैं।







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पर्यटकों का एक चेहरा यह भी

हिमाचल प्रदेश का प्राकृतिक सौंदर्य अनायास ही सभी का मन मोह लेता है। सर्पीली सड़कें, बलखाती नदियां, पहाड़ों के शिखर से बहते झरने, बर्फीली चोटियां, फल-फूलों से लदे बागीचे, लहलहाती हरियाली, फसलें, शीतल एवं मंद-मंद हवाएं सभी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। प्रति वर्ष लाखों पर्यटक प्रदेश का भ्रमण कर स्वर्गलोक जैसा आनंद लेते हैं। पर्यटन का कारोबार प्रदेश के लोगों का रोजी-रोटी का साधन, रोज़गार तथा सरकार की आर्थिकी का मुख्य स्रोत भी है। देवभूमि में पर्यटन तथा धर्मस्थलों के दर्शन के लिए आने वाले नकली धार्मिक पर्यटक नव दंपतियों ने मानवीय, धार्मिक तथा सामाजिक मूल्यों की धज्जियां उड़ाई हैं। नवरात्रों तथा त्योहारों के समय मंदिरों में गहने तथा सोने की चेन चोरने वाले गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। राष्ट्रीय उच्च मार्गों पर ढाबों तथा होटलों में जिस्मोफरोशी के अवैध कारोबार समय-समय पर सामने आते रहते हैं। लड़ाई-झगड़े, मारधाड़, बदमाशी, मनमर्जी, पुलिस कर्मियों तथा प्रदेश के भोले-भाले तथा निहत्थे लोगों पर बिना किसी वजह के जानलेवा हमले हो चुके हैं।


पेट पालने के लिए छोटा-मोटा काम-धंधा करने वाले लोगों पर नशे में मदमस्त, ग़ैर जि़म्मेदार, अमर्यादित, असंस्कारित पर्यटकों द्वारा मौत का तांडव आम तौर पर देखने को मिलता रहता है। पिछले दिनों मंडी, सोलन, कुल्लू, मनाली तथा चंबा के पर्यटन स्थलों पर घटित कुछ सिरफिरे पर्यटकों द्वारा निहत्थे तथा बेकसूर छोटा-मोटा काम धंधा करने वाले लोगों पर सिर फोड़ने, डंडों  से पीटने, उंगली तथा हाथ काटने की घटनाएं शर्मनाक तथा निंदनीय हैं जो किसी भी मानवीय दृष्टिकोण से स्वीकार नहीं की जा सकती। पर्यटकों का शराब पीकर होटल-ढाबों, चाय की दुकानों, शराब के ठेकों पर तोड़फोड़ तथा चोरी करना कहां तक जायज़ ठहराया जा सकता है? कुल्लू तथा लाहौल-स्पीति को जोड़ने वाली ऐतिहासिक अटल टनल बनने के उपरांत शांत एवं एकांत लाहौल में तो मानों तूफान आ गया हो। आज तक परंपरित रूप से लाहौल के आलू सड़कों के किनारे सुरक्षित रहते थे, लेकिन अब टनल बनने के बाद  आलू की बोरियों के कई ट्रक लुट चुके हैं। इन गैर-जि़म्मेदार लुटेरों तथा हमलावर किस्म के लोगों की बदतमीजि़यां कहां तक सहन की जा सकती हैं? प्रदेश सरकार द्वारा होटल व्यवसायियों तथा पर्यटक स्थलों पर काम धंधा चलाने तथा विपरीत हालात को सामान्य बनाने के लिए कोरोना की बंदिशों से मुक्ति मिलते ही पर्यटकों का जैसे सैलाब आ गया हो। पर्यटकों का बेलगाम हो जाना तथा नागरिक मूल्यों का पतन कई अनसुलझे प्रश्नों को कचोटता है।


 कुछ पर्यटकों द्वारा लड़ाई-झगड़े, मारपीट, गाली-गलौज तथा तलवारबाजी की दुखद घटनाओं को देखते हुए एक सशक्त पर्यटक आचरण संहिता की आवश्यकता है। पुलिस तथा प्रशासन को और अधिक कड़ाई से इन मनचले, बेलगाम पर्यटकों को शालीन व्यवहार का पालन करवाने की आवश्यकता है। इस वर्ग के पर्यटकों को ‘अतिथि देवो भव’ की परिभाषा से स्वागत नहीं, बल्कि सही व्यवहार तथा अनुशासन का पाठ पढ़ाए जाने की आवश्यकता है। प्रदेश के मुख्य प्रवेश द्वारों पर उनको पर्यटन का आनंद लेने के साथ एक पर्यटक अतिथि के रूप में उनकी जि़म्मेदारी, उत्तरदायित्व, नियम संहिता, उन्हें क्या नहीं करना है, पर्यावरण के नियम तथा विभिन्न अपराधों, कानूनी प्रावधानों तथा दंड संहिता के बारे में पर्यटन या पुलिस विभाग द्वारा  मार्गदर्शक पुस्तिका को तैयार कर बांटा जाना चाहिए। पर्यटकों को इस बात का एहसास करवाया जाना आवश्यक है कि हिमाचल की सुंदर एवं पवित्र देवभूमि में उनकी मनमानियों तथा मनमर्जियों के लिए खुली छूट नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते उनकी भी कुछ जिम्मेदारियां हैं। शालीनता एवं उच्च कोटि का व्यवहार मनुष्य की पहचान है। भौतिकवाद तथा धन-संपदा के नशे में यह बेलगाम पर्यटक अपने घर की सीमाओं से बाहर निकलते ही अपनी मर्यादाओं को भूल जाते हैं तथा प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने के बजाय उसे लूटना तथा बर्बाद करना शुरू कर देते हैं। पर्यटन स्थलों, जल प्रपातों तथा सुंदर स्थलों पर गंदगी फैलाना, शराब तथा बीयर की बोतलें तोड़ कर फैंकना विकृत मानवीय मानसिकता का प्रदर्शन है। हिमाचल में आने वाले पर्यटक हमारे अतिथि हैं, परंतु मान-मर्यादाओं को तार-तार कर देने वाले पर्यटक उपद्रवियों तथा हमलावरों से कम भी नहीं। उनसे भी संवेदनशील, मर्यादित तथा प्रेम भाव की आशा रखी जा सकती है।


 पर्यटकों को किसी भी प्रकार के घातक हथियारों को लाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। पर्यटन विभाग, पुलिस विभाग तथा सामान्य प्रशासन को इस दिशा में एक संयुक्त तथा कारगर योजना बनाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी भी व्यक्ति के साथ किसी भी अनहोनी को रोका जा सके। शिष्ट आचरण एवं व्यवहार सभ्य व्यक्ति की पहचान होती है। सभ्य तथा शालीन पर्यटक का तो प्रदेश की धरती पर स्वागत हो सकता है, परंतु गैर-जिम्मेदार, मनचले तथा असभ्य लोगों के लिए तो सख्त तथा मजबूत कानूनी डंडे की आवश्यकता है। प्रदेश के भीतर आने वाले मानसिक प्रदूषण से पीडि़त  बाह्य लोगों का पुलिस तथा प्रशासनिक दृष्टि से कारगर इलाज होना चाहिए। प्रदेश के लोगों को अपरिचित लोगों के संभावित तथा अप्रत्याशित व्यवहार से सचेत रहना चाहिए तथा प्रदेश सरकार द्वारा भी उनकी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। प्रदेश के भीतर किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर इस तरह की खुली छूट नहीं दी जा सकती। ऐसे असभ्य तथा अमर्यादित आचरण से प्रदेश के लोगों में परेशानी एवं असुरक्षा की भावना पैदा होती है, उनके शांत जीवन में खलल पैदा होता है और हमारी सभ्यता तथा पुरातन संस्कृति भी प्रदूषित होती है।




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मदमस्त आबो-हवाओं वाला शहर है नैनीताल

समुद्र तट से 1938 मीटर की ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल सैर-सपाटे के लिये बेहद उम्दा शहर है। यहां की ऊंची-ऊंची पर्वत श्रृंखलायें, लहराते हुये हरे-भरे पेड़ों की चोटियां और ठण्डी आबो-हवा किसी का भी दिल जीतने के लिये काफी है। शहर का दिल कहलायी जाने वाली नैनी झील यहां के आकर्षण का मुख्य केन्द्र है।


त्रि-सरोवर क्षेत्र

पूर्व में त्रि-सरोवर के नाम से नाम से पहचाने जाने वाले इस शहर के बारे में यह कहने में अतिशयोक्ति नहीं होगी कि कुदरत ने इस क्षेत्र को बेशुमार प्राकृतिक सौन्दर्य प्रदान करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। जिसके फलस्वरूप लगभग दस स्क्वायर कि.मी. क्षेत्र में फैले दर्जन भर रमणीक पर्यटन स्थल हैं जो पर्यटकों का मन बरबस ही मोह लेते हैं। इन पर्यटन स्थलों में राजभवन, गोल्फ कोर्स, स्नोव्यू, नयनापीक, टिफिन टाप, केव गार्डन, नैनी झील, नयना देवी मंदिर, हनुमानगढ़ी मंदिर, लैण्ड्स इंड तथा लड़िया कांठा आदि का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।


चायना बार्डर का दर्शन

220 एकड़ में फैले ब्रिटिश शासनकाल में निर्मित राजभवन व इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुन्दरता का कोई जवाब नहीं है। इस क्षेत्र से लगा गोल्फ कोर्स मानो यहां की प्राकृतिक सुन्दरता में चार-चांद लगाता है। यहां के दूसरे नम्बर पर व्यू की चोटी का नाम लिया जा सकता है। व्यू से जहां नैनीताल की नैसर्गिक सुन्दरता का लुत्फ उठाया जा सकता है वहीं विश्र्व के सबसे सुन्दर मनोहारी बर्फ से आच्छादित हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य लिया जा सकता है। व्यू से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित नयनापीक पिकनिक स्पॉट के लिये बेहद उम्दा स्थान है। इस चोटी से चायना बार्डर के दर्शन होते हैं। यह चोटी शहर की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है।


टिफन टाप

शहर की तीसरी प्रमुख चोटी टिफन टाप के नाम से जानी जाती है। बताया जाता है कि डॉर्थीसीट नामक विदेशी महिला लगभग सौ वर्ष पूर्व यहां बैठकर चित्रकारी किया करती थी। डॉर्थीसीट के निधन हो जाने के पश्चात उसकी कब्र टिफिन टाप में बना दी गयी। जिसके दर्शनार्थ हजारों पर्यटक प्रतिवर्ष टिफिन टाप पहुंचते हैं।


नयना देवी मंदिर

चोटियों से नीचे उतरकर नैनीताल के निचले सैरगाहों पर नजर डाली जाये तो छः दर्जन से अधिक वन्य प्राणियों का चिड़ियाघर प्रमुख पर्यटन स्थल है। नैनीताल के पर्यटन स्थलों में धार्मिक आस्था के प्रतिबिम्ब के रूप में स्थापित नयना देवी मंदिर है। लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष इस मंदिर के दर्शनार्थ पहुंचते हैं। धार्मिक पर्यटन स्थलों की श्रृंखला में शहर से तीन कि.मी. की दूरी पर स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सूर्योदय का सुन्दर नजारा भी हनुमानगढ़ी से लिया जा सकता है।


केव गार्डन

कुदरत ने नैनीताल की भौगोलिक सुन्दरता को खूबसूरत बनाने में जहां कोई कमी नहीं की वहीं जमीन के भीतर रहस्यमय गुफायें पैदा कर रोमांचकारी सौन्दर्य भी प्रदान किया है। सूखाताल में स्थित केव गार्डन इसकी एक जीती-जागती मिसाल है। छः गुफाओं का यह केव गार्डन रोमांच का शौक रखने वाले सैलानियों की तमन्नाओं को पूर्ण करता है। नैनीताल का मुख्य आकर्षण केन्द्र नैनी झील है। दिल के आकारनुमा बनी इस खूबसूरत झील में नौकाविहार, पाल नौकायन, पैडिल बोटिंग व कयाकिंग नौकाविहार का भरपूर लुत्फ लिया जा सकता है। सैरगाह के लिये नैनीताल के माल रोड की तो बात ही कुछ और है। पूरे वर्ष भर शाम के वक्त सैकड़ों पर्यटक रोजाना माल रोड में चहलकदमी का आनन्द लेते हैं। तमाम खूबियों को खुद में समेटे नैनीताल की आबो-हवा ही ऐसी है जो देश व विदेश के लाखों पर्यटकों को हर वर्ष नैनीताल खींच लाती है और यहां पहुंचने वाले प्रत्येक सैलानी नैनीताल की खूबसूरती को देख होठों से आह निकाले बिना नहीं रह पाता।






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बारिश के मौसम में क्या लेकर जाए अपने साथ

बारिश के मौसम में यात्रा करने निकलने से पहले अपने बैग में सही सामान व टूल्स रखना बेहद जरूरी है, जिससे आपका सेलफोन और वॉलेट नहीं भीग पाए। अपने साथ जिप लॉक बैग, छाता, मच्छर भगाने वाला और वाटरप्रूफ बैगपैक ले जाएं। वान्डरट्रेल्स (ऑनलाइन प्लेटफॉर्म) के सह-संस्थापक नारायण मेनन के ने बारिश के मौसम में यात्रा के दौरान ले जाई जाने वाली आवश्यक चीजों के बारे में ये जानकारियां दी हैं : 


-अपने पास छाता या रेनकोट रखें। आपके पास वाटरप्रूफ बैग पैक भी जरूर होना चाहिए। 


-हमेशा जिप लॉक बैग साथ रखें। यह वॉलेट और अन्य कीमती वस्तुओं जैसे स्मार्टफोन, कैमरा और लेंस आदि को रखने के लिए उपयोगी साबित होता है और इन्हें भीगने से बचाता है। 


-इस मौसम में जाम नालियों, गंदगी व कीचड़ के कारण मच्छर तेजी से पनपते हैं और मच्छर जनित बीमारियां खूब फैलती हैं, इसलिए अपने पास मच्छर भगाने वाले कॉयल, क्रीम या मच्छरदानी जरूर रखें। 


-अपना पानी ले जाना बेहतर है, अन्यथा सिर्फ उबला हुआ पानी पीएं। भोजन भी हर जगह का नहीं करें। खुले में मिलने वाले भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। 


-अपने बैग में हल्के सिंथेटिक कपड़ों को रखें, जो आसानी से सूख जाते हैं। 


-इस मौसम में फुटवेयर के मामले में फ्लोट और सैंडिंल अच्छा विकल्प हैं। 


ट्रैवल सर्च इंजन इक्जिगो के सीईओ ने इस संबंध में ये सुझाव दिए हैं : 


-बारिश के मौसम में सड़क किनारे बिकने वाले स्नैक्स या खाद्य पदार्थो को खाना हानिकारक हो सकता है। अपने साथ हर्बल टी के सैशे और पैक फूड ले जाएं और जो पानी का बोतल सील नहीं हो, उसका पानी नहीं पीएं। 


-किसी आपात स्थिति के मद्देनजर हमेशा फस्र्ट-एड बॉक्स अपने पास रखें। मानसून में सर्दी-खांसी, जुकाम या बुखार होने की ज्यादा संभावना होती है। 


-अगर किसी नई जगह सैर करने की योजना बनाई है तो यह जरूर पता कर लें कि भारी बारिश होने या किसी अन्य कारण से फंस जाने पर आपको मदद कैसे मिल सकती है। स्थानीय अधिकारियों से आपात स्थिति में संपर्क करने संबंधी जानकारी जरूर जुटा लें। सुरक्षित यात्रा के लिए पहले ही आरक्षण करा लें। 


-बारिश के दिनों में अन्य दिनों की अपेक्षा बिजली जाने की सबसे ज्यादा संभावना होती है, फोन को सक्रिय रखने के लिए अपने साथ पॉवर बैंक नहीं ले जाना भूलें। 


-इस मौसम में अंधेरा जल्द होने की आशंका रहती है, इसलिए अपने पास फ्लैश लाइट या टॉर्च जरूर रखें।


-इलेक्ट्रॉनिक सामानों को सुरक्षित रखने के लिए अपने पास अतिरिक्त प्लास्टिक बैग रखें। ये गीले कपड़ों और खाने-पीने के सामान को रखने में भी इस्तेमाल किए सकते हैं। 





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ऐसे रोमांचक डेस्टिनेशंस की प्लानिंग करें

ऐसे रोमांचक डेस्टिनेशंस की प्लानिंग करें दोस्तो, घूमना लर्निंग का बेहतरीन तरीका माना जाता है।... तो समर वैकेशन में क्यों न ऐसे रोमांचक डेस्टिनेशंस की प्लानिंग करें, जहां देखने जानने को बहुत कुछ हो। काजीरंगा नेशनल पार्क यह नेशनल पार्क एक सींग वाले गैंडे (राइनोसेरोस) के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां पर गैंडे की आबादी सबसे अधिक है। असम में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित इस पार्क में गैंडे के साथ-साथ हाथी, चीता, बाघ, हिरण, डॉल्फिन, सांभर आदि देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं, यहां पर पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियां भी देखने को मिल जाएंगी। हाथी पर बैठकर पार्क की सैर और जंगली जानवरों को करीब से देखने का रोमांच ही कुछ और है। इस पार्क को दिसंबर 1985 में वल्र्ड हेरिटेज साइट के रूप में मान्यता मिली। मानस वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी यह सैंक्चुअरी भी असम में ही स्थित है। इसे वल्र्ड हेरिटेज साइट के साथ-साथ प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व, बायोस्फियर रिजर्व, एलिफैंट रिजर्व आदि भी घोषित किया गया है। यह पार्क अपनी जैव विविधता के लिए मशहूर है। यहां आने के बाद जैव विविधता को करीब से महसूस कर पाएंगे। इस सैंक्चुअरी में एक सींग वाले गैंडे के साथ हिमालयन भालू, बाघ, पिग्मी हॉग आसानी से दिखाई दे जाएंगे। 


इसके अलावा, यह कई लुप्तप्राय जानवरों का घर भी है। पानी में रहने वाले भैंसें भी यहां बड़ी संख्या में दिखाई दे जाएंगे। यहां आने के बाद आप जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकते हैं। इसे दिसंबर 1985 में वल्र्ड हेरिटेज साइट के रूप में मान्यता मिली। केवलादेव नेशनल पार्क अगर पक्षियों को देखना हो, तो केवलादेव नेशनल पार्क (राजस्थान) से बेहतर जगह और क्या हो सकती है। 1982 में भरतपुर बर्ड सैंक्चुअरी को नेशनल पार्क घोषित किया गया। इसका नाम बदलकर केवलादेव घना नेशनल पार्क रखा गया।इस पार्क में पक्षियों की लगभग 364 किस्मों का प्राकृतिक आवास है। इसके अलावा, यहां कछुओं, मछलियों, उभयचरों की कई किस्में पाई जाती हैं। पक्षियों के अलावा, काला हिरन, पायथन, सांभर, हिरण और नीलगाय भी देख सकते हैं। यहां फूलों की भी अलग-अलग किस्में पाई जाती हैं। वेस्टर्न घाट अगर पहाड़ों की सैर पसंद है, तो वेस्टर्न घाट के पहाड़ देख सकते हैं। ये पहाड़ हिमालय के पहाड़ से भी पुराने हैं। करीब 1600 किलोमीटर लंबे वेस्टर्न घाट की रेंज गुजरात से शुरू होकर महाराष्ट्र, कर्नाटक होती हुई गोवा और केरल तक फैली है और कन्याकुमारी इसका अंतिम छोर है। जैव विविधता के लिहाज से यह काफी संपन्न क्षेत्र है। यहां पर प्लांट की 229, मैमल की 31, बर्ड की 15, एम्फिबियन की 43 और रेप्टाइल की 5 प्रजातियां पाई जाती हैं। यह माउंटेन रेंज कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये रेंज मानसून की स्थिति तक को प्रभावित करते हैं। यहां दौडने वाली कोंकण रेलवे में सफर करना एक खूबसूरत एहसास होगा। 2012 में इसे वल्र्ड हेरिटेज साइट के रूप में मान्यता मिली। 


सुंदरबन नेशनल पार्क अगर रॉयल बंगाल टाइगर को करीब से देखना हो, तो पश्चिम बंगाल के दक्षिणी भाग में गंगा नदी के सुंदरबन डेल्टा क्षेत्र में स्थित इस पार्क की सैर कर सकते हैं। सुंदरबन नेशनल पार्क दो प्रमुख नदियों ब्रह्मपुत्र और गंगा से घिरा हुआ है। यह नेशनल पार्क मैंग्रोव जंगल (दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव जंगल) से घिरा है। यहां पर टाइगर के साथ-साथ आपको चीतल, हिरण, जंगली बंदर देखने को मिलेंगे। वर्ष 1987 में इसे वल्र्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिला। नंदा देवी नेशनल पार्क नंदा देवी नेशनल पार्क उत्तराखंड के नंदा देवी पर्वत पर स्थित है। इसी क्षेत्र में वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क भी है। यह अल्पाइन के फूलों और हरे-भरे घास के मैदान के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां लुप्तप्राय जानवर, जैसे-एशियाटिक ब्लैक बियर, स्नो लैपर्ड, ब्राउन बियर और ब्लू शीप भी पाए जाते हैं। आमतौर पर फूलों की यह घाटी जून से लेकर सिंतबर तक खुलती है। नंदा देवी नेशनल पार्क और वैली ऑफ द्ब्रलावर को सम्मिलित रूप से 1988 में वल्र्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क हिमाचल प्रदेश के कुल्लू क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण है। यहां पर भालू, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुए, हिमालयन थार देखे जा सकते हैं। पार्क फूलों की कई प्रजातियों का घर भी है। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कंजर्वेशन एरिया वल्र्ड हेरिटेज साइट की सूची में शामिल है।




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बंदी के दिन भी खुलेंगे ताजमहल और फतेहपुर सीकरी पर नहीं कर सकेंगे पर्यटक दीदार

आगरा : शनिवार और रविवार को साप्ताहिक बंदी के दिनों में भी विश्वदाय स्मारक ताजमहल और फतेहपुर सीकरी खुलेंगे। अफगानिस्तान का हाई डिप्लोमेटिक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को आगरा आ रहा है। यह प्रतिनिधिमंडल शनिवार को तीसरे पहर 3:00 बजे फतेहपुर सीकरी स्मारक का भ्रमण करेगा। वहीं रविवार सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक ताजमहल का दीदार करेगा।


प्रतिनिधिमंडल के आगमन के चलते दो दिन की साप्ताहिक बंदी के दौरान भी दो 2 घंटे के लिए फतेहपुर सीकरी स्मारक और ताजमहल को खोला जाएगा। इस दौरान किसी अन्य पर्यटक को स्मारकों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। 






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अल्लाह के दूत की नगरी ‘मदीना’

इस्लाम धर्म के तीर्थों में पवित्रतम दूसरा स्थान मदीना है। यह पैगंबर के नगर के रूप में पूरी दुनिया में प्रसिध्द है। यह पश्चिमी सऊदी अरब के हिजाज क्षेत्र में स्थित है। जब पैगंबर मुहम्मद द्वारा बुरी धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों का विरोध करने पर तत्कालीन शासकों द्वारा उनको मक्का छोडने पर मजबूर किया गया, तब पैगंबर द्वारा इसी मदीना शहर को अपना ठिकाना बनाया गया। यहीं पर उन्होंने अल्लाह के पवित्र संदेशों को प्रथम बार लोगों तक पहुंचाया। मदीना का पूरा नाम ‘मदीना रसूल अल्लाह’ है। जिसका अर्थ होता हैअल्लाह के दूत की नगरी। इसका छोटा रूप ‘अल मदीना’ है जिसका अर्थ है नगर। मुस्लिम अनुयायी पैगंबर मुहम्मद के साथ हमेशा ‘सल्ला अल्लाहु अलाही वा सल्लम’ जोड़ते हैं। इसलिए इन सभी शब्दों को जोड़कर यह स्थान ‘मदीनात रसूल अल्लाह सल्ला अल्लाहु अलाही वा सल्लम’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका सार यही है कि यह शांति और सुरक्षा की नगरी है।


इस्लाम धर्म के धर्मावलंबियों में मक्का के बाद मदीना दूसरा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। इस्लाम धर्म के अनुसार यह मुसलमानों की प्रथम राजधानी है। इसी नगर में देवदूत जिब्राइल उतरे थे। यह वह नगर है, जहां अल्लाह के दूत पैगंबर हजरत मुहम्मद ने आश्रय लेकर धर्म और समाज में पैदा हुए दोषों और अन्याय के विरोध में अल्लाह के पवित्र उपदेशों को फैलाया। इस प्रकार यहीं से जिहाद या धर्मयुध्द की शुरुआत हुई। मुसलमानों की आस्था यहां से इसलिए भी जुड़ी है कि यहीं पर पैगंबर ने अपने जीवन का अंतिम समय गुजारा और यहीं पर उनका निधन हुआ। यहां पैगंबर की समाधि भी है।


मदीना नगर ईस्वी सन् 622 में मुहम्मद हजरत के इस्लाम धर्म के प्रचार का प्रमुख स्थान रहा। पैगंबर द्वारा मक्का में चलाए गए धार्मिक और सामाजिक बुराइयों के विरोध के बाद शासकों द्वारा उनको प्रताड़ित करने से मक्का छोडने के बाद उनके अनुयायियों द्वारा मुहम्मद पैगंबर को ‘यथरीब’ जो मदीने का पुराना नाम है, में मुखिया बनकर रहने को आमंत्रित किया गया। उन दिनों में मदीना भी अलग गुटों और धर्म में बंटा हुआ था। जिनके बीच आए दिन धार्मिक परंपराओं को लेकर झगड़े और कलह होते थे तब मुहम्मद हजरत ने इस स्थान को अपना घर बनाया और अल्लाह के पवित्र संदेशों और शिक्षाओं को यहां के लोगों तक पहुंचाया। जिससे सभी धर्म और गुटों के लोग आपस में समझौता कर हजरत मुहम्मद और उनके अनुयायियों द्वारा बताए गए इस्लाम धर्म का पालन करने को राजी हो गए। उस वक्त मदीना में यहूदी बड़ी संख्या में रहते थे। इसलिए पैगंबर मुहम्मद के लिए यहूदियों को इस बात के लिए तैयार करना कठिन था कि इस्लाम धर्म ही यहूदी धर्म का वास्तविक रूप है। फिर भी उन्होंने सभी का समर्थन प्राप्त कर मक्का की ओर चढ़ाई की और अंत में इस्लाम धर्म और उसमें विश्वास करने वालों की जीत हुई। 


इसी स्थान से पैगंबर ने मानवता और धर्म पालन के लिए सदैव जगत को एक हो जाने की प्रेरणा दी। उन्होंने मानवीय मूल्यों और आचरण की पवित्रता का महत्व बताया। उन्होंने संदेश दिया कि हर व्यक्ति को जीवन में ईश्वर के प्रति पूरा समर्पण रखकर बुराई से बचना चाहिए और अच्छाई को ही अपनाना चाहिए। पवित्र नगरी मदीना में पैगंबर मुहम्मद की ‘अल-नबवी’ के नाम से प्रसिध्द मस्जिद स्थित है। इस मस्जिद का निर्माण पैगंबर के घर के पास ही किया गया है, जहां उनको दफनाया गया था। इस्लाम धर्म की प्रथम मस्जिद जो ‘मस्जिद अल कूबा’ के नाम से पूरे विश्व में प्रसिध्द है, यहीं स्थित है। इस्लाम धर्म के पहले चार खलीफा ने इस्लामी साम्राय का तेजी से विस्तार किया। बाद के समय में इस्लाम धर्म के प्रमुख केंद्र के रूप में यरूशलेम, दमिश्क शामिल हुए। चैथे खलीफा अली खलीफा की मृत्यु के बाद मदीना से हटकर दमिश्क बना दी गई। समय बीतने के साथ ही मदीना धार्मिक महत्व के साथ ही राजनीतिक महत्व का प्रमुख स्थान हो गया। किंतु पैगंबर हजरत मुहम्मद की धर्म और ईश्वर के प्रति निष्ठा के लिए यह स्थान चिर काल तक याद किया जाएगा।






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पंद्रहवीं सदी के वास्तुशिल्प का अद्भुत उदाहरण है बूंदी किला

राजस्थान के बूंदी जिले का तारागढ़ किले का निर्माण यहां के राजा राववर सिंह ने पंद्रहवीं शताब्दी में करवाया था। 1426 फीट की ऊंचाई पर अरावती की पहाड़ियों में स्थित यह किला आज भी अपनी विशालता से लोगों का ध्यान बरबस खींच लेता है। किले की प्राचीर का निर्माण जयपुर के फौजदार दलेल सिंह ने करवाया था। दुर्ग में चार बडे कुंडल हैं। रहने के लिए सुंदर महल और निवास हैं। 


किले का आकर्षण एक काफी ऊंची बुर्ज है जिसे भीम बुर्ज के नाम से पुकारा जाता है। बुर्ज के नजदीक ही एक छतरी है। इसे भीम राव अनिरुद्ध सिंह के धाभाई देवा ने बनवाया था। इसके अंदर एक किलेधारी का मंदिर है जिसे महाराज राजा उम्मेद सिंह ने बनवाया था। 


यहां एक जगह ऐसी है जहां दो मिनट के लिए आप अपने आप ठिठक जाएंगे। यह जगह है किले की चित्रशाला। उम्मेद महल के नाम से प्रसिद्ध इस भव्य चित्रशाला का निर्माण राव उम्मेद सिंह ने करवाया था। यहां राव उम्मेद सिंह तथा राव बिसन सिंह की तस्वीरें हैं। इस चित्रमहल की विषयवस्तु राग रागनियों, प्रेमाख्यान और राजकीय समारोह, गोवर्धन धारी चीर हरण, राम विवाह, ढोलामारु तथा महामिरातेब हैं। चित्रशाला पर मुगल और मेवाड़ शैली का असर है। यहां हरी पृष्ठभूमि पर सफेद रंग से पुरुष और नारी बने हैं। स्त्री और पुरुष के कपड़ों के रंग लाल, नीले, काले और पीले हैं। पूरे किले में यही एकमात्र भाग है जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने सुरक्षित स्मारक घोषित कर अपने अधीन रखा हुआ है। 


इसी चित्रशाला में एक जगह महाराज उम्मेद सिंह की चरण पादुका रखी हुई है। इस जगह पहले सिंहासन रखा होता था। इसके अलावा किले में पहाडियों से सबसे ऊंचाई पर पहले राजा का घुड़साल हुआ करता था। घुड़साल के अलावा इत्र महल, बादल महल, फूल महल जैसी और भी कई अन्य जगह हैं जो पर्यटकों के आकर्षण के केन्द्र बन सकते हैं लेकिन महाराज के वंशज ने उसे अपनी निजी संपत्ति के तौर पर संरक्षित कर रखा है। यहां विदेशी पर्यटक भी आते हैं मगर उनकी संख्या कम है। 


पहाड़ियों की ऊंचाई पर पुलिस विभाग ने एक वायरलेस स्टेशन भी स्थापित कर रखा है। पहाड़ियों की चढ़ाई कर इस किले के विशाल रूप से वाकिफ होकर अगर आप सुस्ताने के लिए नीचे आएंगे तो आपको एक हेरिटेज होटल मिलेगा। निजी समूहों ने किले के ही एक भाग का नवीकरण कर इसमें कमरे बना दिए हैं। इन कमरों में रुककर आप भी एक दिन राजाओं के जमाने में वापस जा सकते हैं। 





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मॉनसून में घूमने निकलो...

अगर मॉनसून में कहीं घूमने का मन बना रहे हैं, तो आपके पास ऑप्शंस की कमी नही हैं। बेशक इस मौसम में घुमक्कड़ी की यादें आपके जहन में हमेशा ताजा रहेंगी। तो जानते हैं कुछ मॉनसून डेस्टिशेंस के बारे में....


कहां घूमें, कहां नहीं... अक्सर हर सीजन में हम यही सोचते हैं। आखिर किसी अच्छे से डेस्टिनेशन की ट्रिप हमें हमें एक नई एनर्जी देती है। इंडिया में ऐसी तमाम जगहें हैं, जो मॉनसून में किसी जन्नत से कम नहीं होतीं।


मुन्नार में मस्ती

आप मुन्नार में मॉनसून को पूरी तरह इंजॉय कर सकते हैं। यहां आकर एक बार को तो ऐसा लगेगा कि आप अपने ड्रीमवर्ल्ड में आ गए हैं। केरल के इस खास अट्रैक्शन की गिनती एशिया के बेस्ट टूरिज्म डेस्टिनेशंस में होती है। यहां की ग्रीनरी को देखकर आपका मन खुश हो जाएगा। आप यहां इराविकुलम नैशनल पार्क भी घूम सकते हैं। इसके अलावा यहां की टी और स्पाइस प्लांटेशन देशभर में मशहूर है। इसके नजारे निश्चित रूप से आपको सुकून पहुंचाएंगे।


कैसे पहुंचेः यहां का नजदीकी एयरपोर्ट मदुरै है, जो यहां से करीब 140 किमी दूर है। ट्रेन से अलुवा या थेनी तक जा सकते हैं। यहां से मुन्नार पास ही पड़ेगा।


कोडीकनाल कुछ खास

तमिलनाडु के गर्मी से दूर यहां का नजारा बेहद सुकून देने वाला है। यह पलानी हिल्स पर 2, 133 मीटर की हाइट पर है। कोडीकनाल लेक यहां का खास अट्रैक्शन है। इसके अलावा बड़ी-बड़ी पहाड़ियां, स्लोप्स और रॉक्स देखकर भी खूब मजा आता है। बाकी कसर यहां के वॉटरफॉल्स पूरी कर देते हैं। यहां कई सारे ब्रिटिश स्टाइल वाले विला भी देखने को मिलेंगे। दरअसल, 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश और अमेरिकन मिशनरीज को यह जगह बहुत भाती थी, तो वह यहां अक्सर छुट्टियां मनाने चले आते थे। यहां आपको कई यूनीक फ्लावर भी देखने को मिलेंगे जैसे कुरुंजी। हॉर्स राइडिंग, साइकलिंग, हाइकिंग और ट्रैकिंग जैसी ऐक्टिविटीज भी आप इंजॉय कर सकते हैं।


कैसे पहुंचेंः यहां से नजदीकी रेलवे स्टेशन कोडई पड़ेगा जो कोडीकनाल से करीब 80 किमी दूर है। वहीं, नजदीकी एयरपोर्ट मदुरै एयरपोर्ट पड़ेगा जो कोडीकनाल से करीब 100 किमी. दूर है।


करवार की खूबसूरती

कर्नाटक स्थित यह डेस्टिनेशन अपने आप में काफी अनोखा है। यह काली रिवर के पास पोर्ट टाउन है। यहां की बीच पाम ट्रीज से बेहद खूबसूरत लगता है। तब तो मजा और भी बढ़ जाता है जब बड़ी और सुंदर डॉल्फिन्स सी में नजर आती हैं। फ्लोरा और फॉना के मामले में यह एरिया काफी रिच है। यहां आप देवबाघ बीच, ओम बीच ऑयस्टर रॉक लाइटहाउस, बनाना बोट राइड्स, याना केव्स और सादाशिव गढ़ फोर्ट वगैरह जा सकते हैं।


कैसे पहुंचेंः आप बेंगलुरु बाय एयर या ट्रेन जा सकते हैं। यहां से करवार की दूरी करीब 275 किलोमीटर है।





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मॉनसून का मजा लेने के लिए मुंबई के आसपास हैं ये जगहें

मॉनसून में प्रकृति जितनी सुंदर लगती है, उतनी किसी और मौसम में शायद ही लगती है। यही वजह है कि पहली बारिश के साथ ही हर किसी का दिल झूम उठता है। उमड़ते-घुमड़ते बादलों के इस मौसम में हर किसी का दिल सैर-सपाटा करने का करता है। अगर आप मुंबई में रहते हैं तो महाराष्ट्र में ऐसी कई जगहें हैं जहां आप मॉनसून का भरपूर मजा ले सकते हैं। 


तपोला

महाराष्ट्र में मानसून में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है, तपोला। इसे वेस्ट कोस्ट का कश्मीर भी कहा जाता है। यह बेहद खूबसूरत जगह मुंबई से 300 किलोमीटर दूर और पुणे से 150 किलोमीटर दूर है। यह हरा-भरा और खूबसूरत क्षेत्र है जो सुंदर शिवसागर झील के आसपास फैला हुआ है। यह ट्रेकर्स के लिए बेमिसाल है।


भीमशंकर

मॉनसून में छुट्टियों के दौरान घूमने के लिए एक और सुंदर जगह है भीमशंकर है। वैसे तो यह धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है लेकिन इसमें एक वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी, एक शानदार वॉटरफॉल भी है, जो बरसात के मौसम में आकर्षक हो जाता है। आप शिदी घाट से गणेश घाट अडवेंचर ट्रेकिंग का भी मजा ले सकते हैं।


अन्य जगहें

मॉनसून के दौरान मुंबई के आसपास के कुछ और बेहतरीन जगहों में मालशेज घाट शामिल है। यह सहयाद्री पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित, एक शांत हिल स्टेशन है। आप सैर के लिए लोनावाला और खंडाला भी जा सकते हैं। ये अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए काफी प्रसिद्ध हैं। मुलशी बांध भी मुंबई के पास ही है। यहां आप पेड़-पौधे और पक्षियों को देखने का आनंद ले सकते हैं। अगर आप वॉटर स्पोर्ट्स में रुचि रखते हैं, तो कोलाड आपके लिए सबसे अच्छी जगह है। हालांकि तेज बारिश में यहां पहुंचना थोड़ा मुश्किल है। 




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बंजी जम्पिंग के लिए यह जगह हैं बिल्कुल परफेक्ट, एडवेंचर लवर्स यहां ले सकते हैं मजा

कहीं भी घूमने से पहले एडवेंचर लवर्स हमेशा से ही ऐसे प्लेसेज को चुनते हैं, जहां उन्हें एडवेंचर का भरपूर आनन्द मिल सके। बात यदि बंजी जम्पिंग की हो तो इस एक्टिविटी के लिए ज्यादा हाइट को प्रिफरेंस दी जाती है। दुनिया में ऐसे बहुत-से बंजी जम्पिंग के प्लेसेज हैं, जो हाइट और व्यू के लिए लोगों के बीच हिट हैं। वनस्टेप 4वर्ड के अनुसार ये ऐसी जगह है जो बंजी जम्पिंग के लिए पॉपुलर है...


ब्लोक्रेन्स ब्रिज

साउथ अफ्रीका के सिटसिकामा स्थित ब्लोक्रेन्स ब्रिज को भी बंजी जम्पिंग के लिए खासा पसंद किया जाता है। बंजी जम्पिंग के लिए यह ब्रिज बहुत ही मजबूत माना जाता है। यह ब्रिज टूरिस्ट को 708 फीट की ऊंचाई से जम्प लगाने का रोमांच देता है। अपनी बनावट के कारण यह ब्रिज डिफरेंट माना जाता है।

 

द रॉयल गॉर्ज सस्पेंशन ब्रिज

यूएस का स्टेट कोलोराडो भी बंजी जम्पिंग के लिए फेसम है। यहां स्थित द रॉयल गॉर्ज सस्पेंशन ब्रिज दुनिया के सबसे ऊंचे ब्रिज में शुमार है। यहां पर 2003 से 2008 के बीच हुए गो फास्ट गेम के तहत इसे पब्लिक के लिए खोला गया था। लेकिन अब यह गेम नहीं होता, लेकिन यह ब्रिज टूरिस्ट्स के ओपन है। यह अर्कान्सस रिवर के ऊपर स्थित है।

 

मकाऊ टावर से जम्पिंग का एक्साइटमेंट

अक्सर आपने बंजी जम्पिंग का रोमांच हिल स्टेशंस या फिर ब्रिज से देखा होगा, लेकिन लोगों की पसंद को देखते हुए अब टावर से भी बंजी जम्पिंग होने लगी है। इस तरह की बंजी जम्पिंग डिफरेंट अनुभव देती है। चीन का मकाऊ शहर भी ऐसी ही बंजी जम्पिंग के लिए बेहद फे मस है।

 

मकाऊ स्थित मकाऊ टावर पर्यटकों को बंजी जम्पिंग का रोमांचक अनुभव देता है। यह दुनिया का ऐसा सबसे बड़ा टावर है, जो टूरिस्ट्स को बंजी जम्पिंग की सुविधा देता है। यह 764 फीट ऊंचा है। इतनी ऊंचाई से नीचे कूदना अपने आप में शानदार एक्सपीरियंस कहा जा सकता है। यह रिवर के किनारे बना हुआ है। ऐसे में नीचे का नजारा बहुत अच्छा लगता है। यूथ के बीच यह प्लेस काफी पॉपुलर है। हर साल यहां हजारों लोग बंजी जम्पिंग का लुत्फ उठाते हैं।


द कोल्नब्रिन डैम

ऑस्ट्रिया का कोल्नब्रिन डैम पर खास तरह की बंजी जम्पिंग होती है। डैम पर क्रेन की सहायता से बंजी जम्पिंग करवाई जाती है, जो अपने आप में बेहद रोमांचक होता है। डैम के दोनों तरफ पानी के ऊपर बंजी जम्प करवाई जाती है। यहां पर जम्पर्स 541 फीट की ऊंचाई से नीचे कूदते हैं और क्रेन के सहारे झूलने का अनुभव लेते हैं।


द वर्जास्का डैम

स्विट्जरलैंड के तिसीनो स्थित द वर्जास्का डैम बंजी जम्पर्स के बीच काफी पॉपुलर है। इस डैम पर जम्पर्स 700 फीट से भी ज्यादा ऊंचाई से जम्प करने का लुत्फ उठाते हैं। डैम के एक तरफ पानी भरा रहता है और दूसरी तरफ बहते झरनों के बीच जम्प करना बहुत ही शानदार एक्सपीरियंस रहता है। यहां हर साल बहुत बड़ी संख्या में टूरिस्ट्स आते हैं और हाइट से नीचे कूदने का एक्सपीरियंस लेकर जाते हैं। 






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नीलगिरि की पहाड़ियों में बसी है जन्नत, ऐसे जाएं घूमने

पर्यटन के लिहाज से दक्षिण भारत की खूबियां कुछ अलग ही रंगों से सराबोर नजर आती हैं। विशेषकर वहां का प्राकृतिक सौंदर्य हर किसी का मन मोह लेता है। अगर आप ऐसे ही किसी खूबसूरत हिल स्टेशन की यात्रा करना चाहते हैं तो तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक की सामाओं को स्पर्श करते रेड हिल्स के नाम से मशहूर नीलगिरि की पहाड़ियों का रुख कर सकते हैं।


बहुत कुछ है खास


ऊटी से 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है रेड हिल्स। रेड हिल्स में कई सुंदर झीलें हैं, जैसे-एमेराल्ड, एवलांश, अपर भवानी, पार्संस वैली लेक और पोर्तिमुंड। बैंग्लुरु से 310 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस हिल स्टेशन को नीलगिरि के नाम से भी जाना जाता है।


नीलगिरि की वादियों में मीलों तक घने जंगल हैं। यहां की वायु शुद्ध है। यहां भरपूर प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है। मीलों तक फैली पर्वत श्रंखलाएं और हरियाली से भरे रेड हिल्स को यह नाम अंग्रेजों ने इंग्लैंड की एक ऐसी ही जगह की याद में दिया था।


यहां आठ झीलें हैं, जो रेड हिल्स की खूबसूरती में इजाफा करती हैं। रेड हिल्स के तकरीबन 25 किलोमीटर के दायरे में फैली इन सभी झीलों को देखना एक अनोखा अनुभव देता है। जंगलों में पक्षियों की चहचहाट हो सुनना और भी आनंददायक लगता है। इन झीलों में ट्राउट मछलियों का शिकार भी किया जा सकता है।


मुखुर्ती नेशनल पार्क


रेड हिल्स से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नेशनल पार्क पोर्तिमुंड झील के पास है। यहां जाने के लिए वन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। यहां सांभर, हिरण, शेर और दूसरे जंगली जानवरों को देखा जा सकता है। नेशनल पार्क में पहले कई ट्रैकिंग टेल्स और रेट हाऊसिस बने थे। ऐमराल्ड या एवलांश में 1950 में बना हाईड्रोलिक पावर स्टेशन भी देखा जा सकता है।


झीलों का मोहक सौंदर्य


इस क्षेत्र में मौजूद इन सभी आठ झीलों का स्वच्छ जल मन को अद्भुत शांति देता है। एमेराल्ड, एवलांश, अपर भवानी, पार्संस वैली लेक, पोर्तिमुंड वेस्टर्न कैचमेंट में रेड हिल्स के चारों ओर ऊंचे स्थानों पर स्थित हैं। जिन पर अकसर छाए रहने वाले बादल विचित्र आकार के आईने लगते हैं। यहां काफी बारिश होती है, जिनसे ये झीलें हमेशा लबालब भरी रहती हैं।


पार्संस वैली लेक


रेड हिल्स से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह झील ऊटी और उसके आस-पास के गांवों के लिए जल मुहैय्या कराती है। इन रास्तों पर दूर–दूर तक फैली वादियों की गोद में अकेले पैदल चलने का आनंद आप कभी भुला नहीं पाएंगे।


एवलांश


एमेराल्ड से 13 किलोमीटर दूर एवलांश एक ऐसा गांव है, जहां नीलगिरि की सबसे पुरानी जनजातियों में से एक टोडा जनजाति के लोग रहते हैं। एवलांश में तकरीबन 100 वर्ष पुरानी ट्राउट मछली की हैचरी भी है। पार्संस वैली लेक के खुले हुए घास के मैदान और हरे जंगलों का अपना अलग ही आकर्षण है।


एडवेंचरस एक्सपीरियंस


यदि आप अपनी यात्रा को एडवेंचरस बनाना चाहते हैं तो ऐमराल्ड एवलांश लेक के ट्रैक पर घूम-फिर सकते हैं। नीलगिरि में रेड हिल की चोटियों में यह चौथी सबसे लंबी फैली पहाड़ी है। यहां ट्रैकिंग की जा सकती है। ट्रैकिंग करते हुए यहां दूर–दूर तक फैले चाय के बागान का नजारा बेहद मनमोहक नजर आता है। इन्हीं चाय के बागानों से रास्ता निकलकर ऐमराल्ड लेक की तरफ जाता है।


कहां ठहरें


रेड हिल्स में ठहरने के लिए रेड हिल्स नेचर रिसॉर्ट एक ऐसा रिसॉर्ट, जो 7000 फीट ऊंची चोटी पर स्थित है। ऐमराल्ड लेक और उसके पीछे के पहाड़ों पर तकरीबन ढाई एकड़ में फैले चाय बागान इसे अलग खूबसूरती देते हैं। यदि आपको चाय पसंद हो तो आप इस रिजॉर्ट से ऊटी के बागानों की चाय भी खरीद सकते हैं।


कैसे पहुंचें


यहां का निकटतम हवाई अड्डा, कोयंबटूर (116 किमी) है। एयरपोर्ट से तीन घंटे की सड़क यात्रा से आप यहां पहुंच सकते हैं। टैक्सी द्वारा रेड हिल्स तक लगभग 1,800 रुपये, ऊटी से टैक्सी में करीब 450 रुपए लग सकते हैं। यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन भी कोयंबटूर ही है। सड़क मार्ग से बैंगलुरु से एकदम सुबह निकल कर दोपहर तक ऊटी पहुंच सकते हैं। ऊटी से टैक्सी द्वारा आसानी से रेड हिल्स पहुंच सकते हैं।







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ऑफबीट डेस्टिनेशन्‍स में बेस्‍ट है पर्वतों की गोद में बसी 'पब्‍बर वैली'

'पब्‍बर वैली' कुदरत की गोद में बसी बेहद शानदार जगह है। ये भारत की बेस्‍ट ऑफबीट डेस्टिनेशन्‍स में से एक है। यहां हर तरफ देवदार और ओक के पेड़, कल-कल करती नदियां और झरने इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। इसके अलावा यहां के रिजर्व फॉरेस्‍ट और नेचर पार्क देखकर तो कोई भी इस जगह पर फिदा हो जाएगा। तो अगर आप भी किसी ऑफबीट डेस्टिनेशन की तलाश में हैं और कुछ ऐसी जगह ढ़ूढ रहे हैं जहां नेचर के तमाम रंग हों तो यकीन जानिए 'पब्‍बर वैली' आपके लिए बेस्‍ट ऑप्‍शन होगी। 


पब्‍बर वैली न केवल अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है बल्कि यहां के ट्रैक्‍स भी पर्यटकों के रोमांच का केंद्र होते हैं। इनमें गडसरी, जंगलिक, रुपिन पास, रोहरू और खारापत्‍थर ट्रैक्‍स शामिल हैं। इन रास्‍तों पर आपको घरे जंगलों से लेकर यहां की सभ्‍यता और संस्‍कृति के अलावा नदियों-झरनों की खूबसूरती देखने को मिलेगी। 


पब्‍बर में देवदार और ओके के बेहतरीन जंगल हैं, जिन्‍हें देखकर लगता है कि जैसे किसी ने उन्‍हें करीने से सजाया है।हालांकि यह स‍ब कुदरती है। इसके अलावा ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर जमी बर्फ बरबस ही सबका ध्‍यान अपनी ओर खींच लेती है। इस खूबसूरत जगह पर आप कभी भी किसी भी सीजन में जा सकते हैं। बस मॉनसून में जाना अवॉयड करें क्‍योंकि उस दरम्‍यान ट्रैकिंग करना रिस्‍की हो सकता है।




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