साठ साल से अधिक आयु वालों को एहतियाती खुराक के लिए चिकित्सक के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं : केन्द्र

नई दिल्ली : केंद्र ने मंगलवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को कोविड -19 टीके की एहतियाती खुराक (तीसरी खुराक) लगाते समय चिकित्सक से प्राप्त कोई प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने या सौंपने की आवश्यकता नहीं होगी।


ऐसे व्यक्तियों से अपेक्षा की जाती है कि वे एहतियाती खुराक या तीसरी खुराक लेने का निर्णय लेने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह लें।


राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे पत्र में, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि चुनाव वाले राज्यों में चुनाव ड्यूटी पर तैनात किए जाने वाले कर्मियों को अग्रिम पंक्ति के कर्मियों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।


भूषण ने कहा कि एहतियाती खुराक (प्रीकॉशन डोज) के लिए ऐसे लाभार्थियों की पात्रता दूसरी खुराक के लेने की तारीख पर आधारित होगी, जैसा कि कोविन प्रणाली में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि एहतियाती खुराक दूसरी खुराक लेने की तारीख से नौ महीने या 39 सप्ताह पूरे होने पर ली जा सकती है।


उन्होंने बताया कि कोविन एहतियाती खुराक के लिए पात्र सभी लोगों को संदेश भेजेगा, जो डिजिटल टीकाकरण प्रमाणपत्रों में दिखाई देगा।


भूषण ने मंगलवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक कार्यशाला की अध्यक्षता की, जिसमें 15-18 आयु वर्ग के लिए टीकाकरण और स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कर्मियों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को एहतियाती तीसरी खुराक दिये जाने के संबंध में समीक्षा की गई।


उन्होंने कहा कि 15-18 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों को केवल कोवैक्सीन दी जानी है और टीके की अतिरिक्त खुराक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगले कुछ दिनों में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ कोवैक्सीन की आपूर्ति का कार्यक्रम साझा करेगी।


भूषण ने कहा कि संभावित लाभार्थी या तो एक जनवरी से कोविन पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं या तीन जनवरी से टीकाकरण शुरू होने पर केन्द्र में जाकर पंजीकरण करा सकते हैं। जिनका जन्म 2007 या उससे पहले हुआ है, वही लोग इस श्रेणी के तहत टीकाकरण के लिए पात्र होंगे।


स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, टीकाकरण के संबंध में सभी स्थापित प्रोटोकॉल का पालन 15-18 वर्ष आयु वर्ग के लिए किया जाना है। वे 28 दिनों के बाद ही दूसरी खुराक के लिए पात्र होंगे।


भूषण ने एक पत्र में कहा, सभी नागरिक अपनी आयु की स्थिति के बावजूद सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर मुफ्त कोविड -19 टीकाकरण के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि जो भुगतान करने की क्षमता रखते हैं वे निजी अस्पतालों के टीकाकरण केंद्रों में जाकर भी टीका लगवा सकते हैं।


उन्होंने कहा कि निजी केंद्र पर प्रत्येक टीके के लिए पहले घोषित मूल्य लाभार्थियों के इन समूहों के लिए लागू रहेगा।


ऐसे सभी स्वास्थ्यकर्मी और अग्रिम पंक्ति के कर्मी, जो किसी भी कारण से वर्तमान में कोविन पर नागरिकों के रूप में पंजीकृत हैं और 60 वर्ष से कम आयु के हैं, उन्हें एहतियाती खुराक का लाभ उठाने के लिए उचित रूप से एचसीडब्ल्यू / एफएलडब्ल्यू को अपना दर्जा प्राप्त करना होगा। हालांकि, ऐसा करने के लिए उन्हें निर्धारित प्रारूप में रोजगार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।


ये दिशा-निर्देश तीन जनवरी से लागू होंगे और समय-समय पर इनकी समीक्षा की जाएगी।





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चुनाव ड्यूटी पर तैनात किये जाने वाले कर्मी होंगे कोविड टीके की एहतियाती खुराक के हकदार :सरकार

नई दिल्ली : देश के पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव ड्यूटी पर तैनात किये जाने वाले कर्मियों को अग्रिम पंक्ति की श्रेणी में शामिल किया जाएगा और वे कोविड-19 की एहतियाती खुराक के हकदार होंगे। यह निर्णय पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव समय पर कराए जाने के बढ़ते संकेतों के बीच लिया गया है।


निर्वाचन आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में विधानसभा चुनावों के लिए अगले महीने की शुरूआत में तारीखों की घोषणा करने की संभावना है।


स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे पत्र में मंगलवार को कहा कि चुनावी राज्यों में चुनाव ड्यूटी पर तैनात किये जाने वाले कर्मियों को अग्रिम पंक्ति के कर्मियों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।


पत्र में कहा गया है, ‘‘एहतियात के तौर पर, जिन स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों ने दोनों खुराक लगवा ली है, उन्हें 10 जनवरी 2022 से कोविड-19 टीके की एक और खुराक दी जाएगी। ’’


इसमें कहा गया है, ‘‘इस एहतियाती खुराक के लिये प्राथमिकता और अनुक्रम दूसरी खुराक लगने की तारीख से नौ महीने पूरे होने पर आधारित होगा।’’


निर्वाचन आयोग ने भूषण के साथ सोमवार पांच चुनावी राज्यों में कोविड-19 स्थिति का जायजा लिया था।






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कोवोवैक्स को मंजूरी से भारत, गरीब देशों के टीकाकरण को मजबूती मिलेगी: एसआईआई

नयी दिल्ली :  प्रमुख वैक्सीन कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 के टीके 'कोवोवैक्स' को मंजूरी मिलने से पूरे भारत के साथ ही टीकाकरण की रफ्तार तेज होगी।


एसआईआई के सीईओ अदर पूनावाला ने एक बयान में कहा, ''डीसीजीआई द्वारा कोवोवैक्स को मिली मंजूरी से भारत और निम्न तथा मध्यम आय वर्ग के देशों में टीकाकरण के हमारे प्रयासों में मजबूती आएगी। हमें गर्व है कि 90 प्रतिशत असर के साथ हम अत्यधिक प्रभावी प्रोटीन आधारित कोविड-19 वैक्सीन मुहैया करा रहे हैं।''


भारत की कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को व्यापक करते हुए केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने एसआईआई के कोविड-19 रोधी टीके 'कोवोवैक्स' और बायोलॉजिकल ई कम्पनी के टीके 'कोर्बेवैक्स' को कुछ शर्तों के साथ आपात स्थिति में उपयोग की अनुमति दे दी है।


केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोविड-19 संबंधी विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) द्वारा 'कोवोवैक्स' और 'कोर्बेवैक्स' को कुछ शर्तों के साथ आपात स्थिति में उपयोग की अनुमति देने की सिफारिश किए जाने के एक दिन बाद यह घोषणा की।


मांडविया ने ट्वीट किया, ''मुबारक हो भारत। कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करते हुए, केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने एक दिन में तीन स्वीकृति दी हैं... कोवोवैक्स, कोर्बेवैक्स टीके और दवा 'मोलनुपिराविर' को कुछ शर्तों के साथ आपात स्थिति में उपयोग की अनुमति दे दी है।''


इस मंजूरी के साथ, देश में आपात स्थिति में उपयोग होने वाले कोविड-19 रोधी टीकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है।


उन्होंने कहा कि कोवोवैक्स का निर्माण पुणे के 'सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया' में ही किया जाएगा।








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टीका खरीद पर 19,675 करोड़ रुपये खर्च

नई दिल्ली :  केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निशुल्क आपूर्ति के लिए टीका खरीद पर 19,675 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने केंद्रीय बजट 2021-22 में टीकाकरण के लिए 35,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। सामाजिक कार्यकर्ता अमित गुप्ता के आरटीआई आवेदन पर मिले जवाब में कहा गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निशुल्क आपूर्ति के लिए कोरोना रोधी टीका खरीद पर 20 दिसंबर तक 19,675.46 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की कोविड-19 टीकाकरण शाखा ने कहा कि एक मई से 20 दिसंबर के बीच सरकारी कोविड टीकाकरण केंद्रों पर टीके की 117.56 करोड़ खुराक जबकि निजी टीकाकरण केंद्रों पर करीब 4.18 करोड़ खुराक दी गईं।




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भारत सरकार बूस्टर खुराक देना कब आरंभ करेगी: राहुल गांधी

नई दिल्ली : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि देश की बड़ी आबादी का अब तक टीकाकरण नहीं हुआ है और सरकार को बताना चाहिए कि लोगों को बूस्टर खुराक (टीके की तीसरी खुराक) देना कब शुरू किया जाएगा।


उन्होंने टीकाकरण के आंकड़ों का एक चार्ट साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘‘बहुतायत आबादी का अब तक टीकाकरण नहीं हुआ है। सरकार बूस्टर खुराक देना कब शुरू करेगी?’’


कांग्रेस नेता ने जो चार्ट साझा किया उसमें कहा गया है कि टीकाकरण की मौजूदा गति से 31 दिसंबर, 2021 तक देश की 42 प्रतिशत आबादी का ही टीकाकरण हो सकेगा और इस वर्ष के खत्म होने तक 60 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इस साल के आखिरी सप्ताह में प्रतिदिन 6.1 करोड़ खुराक देनी पड़ेगी।


इसमें यह भी दर्शाया गया है कि पिछले एक सप्ताह के दौरान प्रतिदिन औसतन 58 लाख खुराक दी गई। 





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अमेरिकी अदालत ने कर्मचारियों के लिए टीका लगवाने की अनिवार्यता वाले आदेश को दी मंजूरी

वाशिंगटन :  अमेरिका की एक संघीय अपीलीय अदालत ने निजी नियोक्ताओं के लिए अपने कर्मचारियों को कोविड-19 रोधी टीके की खुराक देने की अनिवार्यता वाले राष्ट्रपति जो बाइडन के आदेश को शुक्रवार को मंजूरी दे दी।


टीका लगवाने की अनिवार्यता वाला यह आदेश उन कंपनियों पर लागू होगा जिनमें 100 या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं और इसके दायरे में करीब 8.4 करोड़ कामगार आएंगे। टीके की पूरी तरह खुराक न लेने वाले कर्मचारियों को मास्क पहनना होगा और कोरोना वायरस के लिए साप्ताहिक जांच करानी होगी। बाहर या केवल घर से काम करने वाले कर्मचारियों के लिए इसमें छूट होगी।


छठी यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स की समिति ने एक के मुकाबले दो मतों से एक अलग अदालत के संघीय न्यायाधीश के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें देशभर में इस आदेश को लागू करने पर रोक लगायी गयी थी।


अमेरिका के ‘ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन’ (ओएसएचए) का यह फैसला चार जनवरी से लागू होना था। शुक्रवार को आए आदेश के साथ अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अब यह फैसला कब से लागू होगा।


न्यायाधीश जूलिया स्मिथ गिबॉन्स ने बहुमत से दिए अपने फैसले में कहा, ‘‘वायरस को विनियमित करने के लिए ओएसएचए को स्पष्ट अधिकार दिया जाता है। ओएसएचए के पास अनिवार्य रूप से ऐसे संक्रामक रोगों को विनियमित करने का अधिकार है जो कार्य स्थल के लिए अलग नहीं हैं।’’






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राज्यों के पास कोविड-19 रोधी टीकों की 16.42 करोड़ से अधिक खुराकें उपलब्ध : केन्द्र

नई दिल्ली : देश के विभिन्न राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के पास अभी कोविड-19 रोधी टीकों की 16.42 करोड़ से अधिक खुराकें मौजूद हैं।


केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।


मंत्रालय ने कहा कि राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के पास कोविड-19 रोधी टीकों की 16.42 करोड़ से अधिक खुराकें अब भी उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल किया जाना बाकी है। इन्हें 141.80 करोड़ से अधिक खुराकें मुहैया कराई जा चुकी हैं।


मंत्रालय ने कहा कि केन्द्र पूरे देश में कोविड-19 टीकाकरण की गति को तेज करने तथा इसके दायरे का विस्तार करने को लेकर प्रतिबद्ध है।


मंत्रालय ने कहा कि टीके की अधिक खुराकों की उपलब्धता के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टीकाकरण अभियान को तेज किया गया है। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टीके की उपलब्धता के बारे में नियमित रूप से सूचित किया जाता है ताकि उनके द्वारा बेहतर योजना बनाई जा सके और टीका आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित किया जा सके।


गौरतलब है कि देश में चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत केन्द्र सरकार विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नि:शुल्क टीके उपलब्ध कराकर उन्हें सहयोग कर रही है।


मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 टीकाकरण मुहिम के सार्वभौमीकरण के तहत केन्द्र सरकार देश में टीका निर्माताओं द्वारा बनाए जा रहे 75 प्रतिशत टीके खरीदकर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नि:शुल्क टीके उपलब्ध करा रही है। 

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सीरम इंस्टीट्यूट छह महीने में बच्चों के लिए कोविड-19 का टीका लाएगा :पूनावाला

नई दिल्ली : सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की अगले छह महीने में बच्चों के लिए कोविड-19 का टीका लाने की योजना है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने मंगलवार को यह जानकारी दी।


पूनावाला ने एक उद्योग सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए कहा कि ‘कोवोवैक्स’ टीके का परीक्षण चल रहा है और यह तीन साल और उससे अधिक की आयु के बच्चों को हर तरह से सुरक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि परीक्षण के शानदार आंकड़े देखने को मिले हैं।


उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त आंकड़ें हैं कि टीका काम करेगा और बच्चों को संक्रामक रोग से बचाएगा।


वर्तमान में कोविशील्ड और कोविड के अन्य टीकों को 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए मंजूरी प्राप्त है।


पूनावाला ने कहा, ‘‘हमने बच्चों में ज्यादा गंभीर रोग नहीं देखा है। सौभाग्य से बच्चों के लिए दहशत नहीं है। हालांकि, हम बच्चों के लिए छह महीने में एक टीका लेकर आएंगे, उम्मीद है कि यह तीन साल और उससे अधिक आयु के बच्चों के लिए होगा। ’’


उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि भारत में दो कंपनियां हैं जिन्हें लाइसेंस प्राप्त है और उनके टीके जल्द उपलब्ध होंगे।


उन्होंने कहा, ‘‘यदि आपको लगता है कि आपको अपने बच्चे का टीकाकरण करना चाहिए तो इसके लिए सरकार की घोषणा का इंतजार करें...। ’’


पूनावाला ने कहा कि कोविड के ओमीक्रोन स्वरूप के बारे में अब तक कुछ नहीं कहा जा सकता कि यह बच्चों को कैसे प्रभावित करेगा। 




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एस्ट्राजेनेका, फाइजर टीकों के साथ अन्य टीकों के मिश्रण से मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया : अध्ययन

लंदन : एस्ट्राजेनेका या फाइजर टीकों की पहली खुराक के बाद दूसरी खुराक के रूप में मॉडर्ना या नोवावैक्स का टीका लगवाने से कोविड-19 के खिलाफ मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है। यह बात लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में कही गई है।


ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं के नेतृत्व में एक टीम ने पाया कि 1,070 प्रतिभागियों के अध्ययन में कोई सुरक्षा चिंता नहीं उत्पन्न नहीं हुई।


अध्ययन में यह बात सामने आई कि एस्ट्राजेनेका या फाइजर टीकों की पहली खुराक के बाद दूसरी खुराक के रूप में मॉडर्ना या नोवावैक्स का टीका लगवाने से मजबूत प्रतिरोधक प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है जो कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में और मददगार हो सकती है।


विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर मैथ्यू स्नेप ने कहा, "इस तरह के अध्ययनों के लिए धन्यवाद, अब हमें एक और पूरी तस्वीर मिल रही है कि एक ही टीका कार्यक्रम में अलग-अलग कोविड -19 रोधी टीकों को एक साथ कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।"


उल्लेखनीय है कि भारत में ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका टीके का इस्तेमाल कोविशील्ड के नाम से किया जा रहा है।




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महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्य सचिव ने टीकाकरण अभियान शुरू होने के महीनों बाद ली टीके की पहली खुराक

मुंबई : देश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान शुरू होने के 10 महीने बाद महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्य सचिव देवाशीष चक्रवर्ती ने टीके की पहली खुराक ली है। एक चिकित्सा अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।


बृहस्पतिवार को 59 वर्षीय वरिष्ठ अधिकारी ने यहां टीके की खुराक ली। चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि चक्रवर्ती ने टीकाकरण अभियान शुरू होने के महीनों बाद टीके की खुराक लेने का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें टीके की खुराक से परहेज नहीं था, लेकिन यह उनका व्यक्तिगत निर्णय था कि वह जब चाहें टीके की खुराक लें।


चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि आईएएस अधिकारी ने मुख्य रूप से विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के मद्देनजर टीका लिया है, जो 22 दिसंबर से शुरू होने वाला है। टीकाकरण विधानसभा सत्र में हिस्सा लेने के लिए अनिवार्य है।

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ओमीक्रोन: टीकों के मूल्यांकन, बूस्टर खुराक के लिए अधिक अनुसंधान की संसदीय पैनल की सिफारिश

नई दिल्ली : कोविड-19 के नये स्वरूप ‘ओमीक्रोन’ पर बढ़ती चिंताओं के बीच संसदीय समिति ने कोविड-रोधी टीकों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किये जाने तथा कोरोना के नये स्वरूप पर काबू पाने के लिए बूस्टर खुराक की आवश्यकता की जांच के लिए अधिक अनुसंधान करने की सिफारिश की है।


स्वास्थ्य पर संसदीय स्थायी समिति ने शुक्रवार को पेश अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि ‘इम्यूनोस्केप’ तंत्र विकसित कर रहे नए स्वरूप से गंभीरता से निपटा जाना चाहिए।


कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान हुई जानमाल की क्षति के मद्देनजर समिति ने कहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सार्स-कोव-2 के प्रसार पर अंकुश लगाने या रोकने के लिए किए गए उपाय पूरी तरह से अपर्याप्त साबित हुए हैं। समिति ने स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, बिस्तरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा ऑक्सीजन सिलेंडर और आवश्यक दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है।


तीसरी लहर के खतरे के मद्देनजर सरकार को इस समय का इस्तेमाल सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में करना चाहिए।


समिति ने पाया कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परीक्षण सुविधाओं में सुधार की सख्त आवश्यकता है। इसने राज्यों में वीआरडीएल के साथ पीएचसी/सीएचसी के बीच समन्वय स्थापित करने की भी सिफारिश की है।


पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘‘समिति का मानना है कि महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए संभावित संक्रामक लोगों का समय पर पता लगाना और उन्हें अलग-थलग करना बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए निदान संबंधी परीक्षण के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।’’


इसके अलावा, समिति ने अपनी अन्य सिफारिशों में सरकार को अधिक टीकों को मंजूरी देना, वैक्सीन उत्पादन में तेजी लाना, वितरण क्षमता बढ़ाने और टीकाकरण दर में वृद्धि के साथ इस कार्यक्रम को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाना शामिल है।


समिति ने कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर पहली लहर के चरम के लगभग छह महीने बाद आई, लेकिन भारत का जांच संबधी बुनियादी ढांचा “बेहद कमजोर और अत्यधिक अपर्याप्त” रहा।


समिति ने महामारी की तैयारियों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के वास्ते आवंटित 64,179.55 करोड़ रुपये के इस्तेमाल के संबंध में 'कार्य योजना' से भी अवगत कराने की मांग की है।








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कोरोना की बूस्टर खुराक, बच्चों को टीके लगाने पर स्थिति स्पष्ट करे सरकार : कांग्रेस

नई दिल्ली : कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को सरकार पर कोविड महामारी से निपटने के कार्य को जरूरी प्राथमिकता नहीं देने का आरोप लगाया और यह स्पष्ट करने की मांग की कि महामारी के दौरान कितने लोगों की मौत हुई, कितने परिवारों की मदद की गई तथा 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कब से टीके लगने शुरू होंगे, साथ ही कोविड टीके की बूस्टर या तीसरी खुराक को लेकर उसकी क्या नीति है ?


लोकसभा में नियम 193 के तहत ‘कोविड से उत्पन्न स्थिति’ पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस सदस्य गौरव गोगोई ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने बच्चों, बूढ़ों सहित समाज के हर वर्ग के लोगों को प्रभावित किया है और इसका असर देश की 130 करोड़ आबादी पर देखा जा सकता है।


उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी पर सदन में चर्चा के लिये सरकार को जिस प्रकार की प्राथमिकता दिखानी चाहिए थी, वह नहीं दिखायी गई।


उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण लॉकडाउन के दौरान घरों में बच्चों एवं महिलाओं के शोषण की खबरें आई हैं। इसके कारण 3,620 बच्चों के अनाथ होने तथा 26 हजार बच्चों के माता या पिता में से कम से कम एक को खोने की रिपोर्ट सामने आई है।


गोगोई ने सवाल किया कि ऐसे कितने बच्चों और महिलाओं ने सरकार से हेल्पलाइन पर सम्पर्क किया तथा सरकार ऐसे कितने लोगों तक पहुंची तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय सहित अन्य विभागों ने कितने दिव्यांगों की मदद की ?


उन्होंने सरकार से जानना चाहा, ‘‘ निजी क्षेत्र ने कितने लोगों को कोविड रोधी टीके लगाए। बूस्टर खुराक को लेकर सरकार का क्या रूख और नीति है? 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कब तक टीका लगना शुरू होगा?’’


कांग्रेस सदस्य ने आरोप लगाया, ‘‘जिस समय सरकार को लोगों से सहानुभूति दिखानी चाहिए थी, उस समय सत्ता पक्ष एक व्यक्ति की छवि बचाने में लगा हुआ है।’’


गोगोई ने कहा कि ऐसे समय में जब सरकार को लोगों से सतर्क रहने की गुजारिश करनी चाहिए, उस समय सरकार के लोग प्रधानमंत्री की तारीफ करने में लगे हैं।


उन्होंने कहा कि इजराइल, अमेरिका जैसे देशों में 80 प्रतिशत लोगों को टीके की दो खुराक लगा चुकी है, लेकिन वहां भी खतरा है।


उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के समय लोगों को सरकारी अस्पतालों में बिस्तर, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर आदि नहीं मिल रहे थे और विदेशों से वेंटिलेटर मंगाने पड़े थे...ऐसे में सरकार की क्या तैयारी थी ?


कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी ने समय-समय पर महामारी से सतर्कता, टीके एवं अन्य विषयों पर सरकार को सावधान करने का प्रयास किया लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया।


इस दौरान सदन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उपस्थित थीं। गोगोई ने कहा कि आज बेरोजगार बढ़ गया है, व्यापार पर गंभीर असर पड़ा, लोगों की आमदनी घटी लेकिन महामारी के बाद सरकार ने ईंधन एवं अन्य चीजों की कीमतों को बढ़ाने का काम किया। गोगोई ने कहा कि सरकार के पास सेंट्रल विस्टा के लिये पैसे हैं लेकिन गरीबों के लिये पैसे नहीं हैं। 




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अमेरिका में सीडीसी ने 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को बूस्टर खुराक लेने की सिफारिश की

वाशिंगटन : कोरोना वायरस के नए स्वरूप ‘ओमीक्रोन’ के मामले कई देशों में मिलने के बाद अमेरिका में रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने सभी वयस्कों के लिए कोविड-19 टीके की बूस्टर खुराक की सोमवार को सिफारिश की।


एजेंसी ने पहले सभी वयस्कों के लिए बूस्टर खुराक को मंजूरी दी थी लेकिन 50 साल या 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों या फिर दीर्घकालिक देखभाल में रह रहे लोगों को ही यह खुराक लगाने की सिफारिश की थी।


सीडीसी के निदेशक डॉक्टर रोचेल वालेंस्की ने कहा कि नया दिशानिर्देश ओमीक्रोन स्वरूप के सामने आने के मद्देनजर जारी किया गया है, जिसके मामले अब तक अमेरिका में नहीं मिले हैं लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यहां भी मामले सामने आ सकते हैं।


उन्होंने एक बयान में कहा कि 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को बूस्टर (अतिरिक्त) खुराक, फाइजर या मॉडर्ना की खुराक लेने के छह महीने बाद लेनी चाहिए और जॉनसन एंड जॉनसन टीके की खुराक लेने के दो महीने बाद लेनी चाहिए।





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मीनाक्षी लेखी ने नई दिल्ली में कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण अभियान का उद्घाटन किया

नई दिल्ली : केन्द्रीय विदेश और संस्कृति राज्य मंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने गेट नंबर 1, प्रस्तावित गेट नंबर 2 कार्यालय भवन, श्री माधव राव सिंधिया मार्ग, नई दिल्ली में सेंट्रल विस्टा मजदूरों के लिए एक और मुफ्त कोविड-19 टीकाकरण शिविर का उद्घाटन किया। उन्होंने इससे पहले 24 नवंबर, 2021 को ’हर घर दस्तक अभियान’ के तहत स्वामी शिव नारायण मंदिर बीआर कैंप, रेस कोर्स क्लब, नई दिल्ली में टीकाकरण अभियान का उद्घाटन किया था।


श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने साइट का दौरा किया और लाभार्थियों से बातचीत की। उन्होंने कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में टीकाकरण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मजदूरों का टीकाकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि सेंट्रल विस्टा हमारी सरकार के लिए एक ड्रीम प्रोजेक्ट है और इसमें कोविड से संबंधित प्रतिबंधों के कारण किसी भी देरी का सामना नहीं करना चाहिए। समाज के सबसे निचले तबके की जरूरतों को पूरा करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन पर हम सभी “हर घर दस्तक अभियान” के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी क्षमता अनुसार सब कुछ करें ताकि हमारे निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति को पूरी तरह से टीका लगाया जाए।


श्रीमती लेखी ने उस समय को याद किया जब महामारी चरम पर थी और उन्होंने केन्द्र सरकार, डॉक्टरों, कोरोना योद्धाओं और अन्य लोगों के प्रयासों की सराहना की जिन्होंने बुरे समय में लोगों की मदद की। उन्होंने कहा कि जब हम लोगों की मदद कर रहे थे तो कुछ अन्य लोग प्रवासी दैनिक ग्रामीणों को वापस भेजकर सरकार के खिलाफ साजिश रच रहे थे। हम सभी को यह याद रखना चाहिए और पता होना चाहिए कि असली हीरो कौन हैं। उन्होंने राशन और अन्य सुविधाओं के साथ सभी की मदद करने के लिए केंद्र सरकार की योजना की सराहना की, जिससे 80 करोड़ से अधिक लोगों को मदद मिली। उन्होंने कहा कि यह हमारे राष्ट्र की ताकत है और हमें चुनौतीपूर्ण समय को हराने के लिए मिलकर काम करना होगा। घर-घर टीकाकरण एक महत्वपूर्ण कदम है और लोगों को आने वाले बुरे समय से बचने के लिए इसमें भाग लेना चाहिए। प्रत्येक नागरिक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके प्रियजनों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है, ताकि फिर से वही स्थिति उत्पन्न न हो।


टीकाकरण शिविर का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ’हर घर दस्तक अभियान’ के अनुरूप है। अभियान का उद्देश्य टीकाकरण अभियान को दूर-दराज के क्षेत्रों में ले जाना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति टीकाकरण अभ्यास में पीछे न रहे।




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वायरस पर वार : प्रदेश में सबसे अधिक गुरुग्राम के लोगों ने कोरोनारोधी टीका लगवाया

गुरुग्राम : कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई अभी जारी है। इससे लोगों को सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग सभी को कोरोना रोधी वैक्सीन लगाने पर जोर दे रहा है। जिले में पात्र आबादी से भी ज्यादा लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लगाकर विभाग 125 फीसदी और दूसरी डोज लगाने का 85 फीसदी लक्ष्य हासिल कर चुका है। जो पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा है। जिले में अभी तक कोरोना रोधी वैक्सीन की पहली और दूसरी को मिलाकर 37 लाख 81 हजार 602 डोज लगाई जा चुकी हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग ने दिसंबर अंत तक सभी पात्र लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगाने का लक्ष्य रखा हुआ है।


स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 18 वर्ष से ऊपर आयु के 18 लाख 03 हजार 656 लोग हैं, जो कोरोना रोधी वैक्सीन लगवाने के लिए पात्र हैं। देश में कोरोना को मात देने के लिए इसी साल 16 जनवरी से सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरूआत हुई थी। इस अभियान को धीरे-धीरे मजबूत करते हुए जिले में स्वास्थ्य विभाग अब तक 37 लाख से भी ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगा चुका है। इनमें जिले के पात्र लोगों के अलावा दिल्ली-एनसीआर के लोग भी शामिल हैं। जिन्होंने जिले में आकर वैक्सीन लगवाई है।


रिकॉर्ड के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग जिले में अभी तक 22 लाख 43 हजार 935 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लगा चुका है। जबकि पात्र लोगों में से 85 फीसदी को यानी 15 लाख 37 हजार 667 लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज भी लगा दी गई है। जिन लोगों की दूसरी डोज लंबित है, उनसे संपर्क करके भी विभाग समय रहते दूसरी डोज लगवाने के लिए प्रेरित कर रहा है। वहीं दिसंबर तक तय समय सीमा में सभी को दूसरी डोज लगाने के लिए विभाग की ओर से डोर-टू-डोर वैक्सीनेशन अभियान भी चलाया जा रहा है।


पहली डोज लगाने वाले प्रदेश के टॉप तीन जिलों में गुरुग्राम के अलावा फरीदाबाद और अंबाला भी शामिल है। फरीदाबाद में 107 फीसदी और अंबाला में 104 फीसदी लोगों को पहली डोज लग चुकी है। इसी तरह दूसरी डोज लगाने वाले टॉप तीन शहरों में गुरुग्राम के साथ अंबाला और चरखीदादरी का नाम शामिल है। अंबाला में 75 फीसदी लोगों को और चरखी दादरी में 73 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगाई जा चुकी है।


मंगलवार को सरकारी और निजी को मिलाकर कुल 142 केंद्रों पर लोगों को कोरोना रोधी वैक्सीन लगाई गई। इन केंद्रों पर मंगलवार को कुल 13 हजार 531 लोगों ने टीका लगवाया। जिनमें से 3394 लोगों को पहली डोज और 10137 लोगों को दूसरी डोज लगी। कुल लोगों में से 12 हजार 566 लोगों को टीका जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाया गया। जबकि 965 लोगों ने निजी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर वैक्सीन लगवाई। मंगलवार को टीका लगवाने वालों में 12068 लोग 18 से 44 वर्ष की आयु के बीच के शामिल रहे। इनके अलावा 45 वर्ष व इससे ऊपर आयु के 1451 लोगों ने भी मंगलवार को टीका लगवाया। टीका लगवाने वालों में छह स्वास्थ्य कर्मी और छह फ्रंटलाइन वर्कर भी शामिल रहे।


कोरोना रोधी वैक्सीन लगाने के मामले में जिला प्रदेश में आगे चल रहा है। विभाग का प्रयास ज्यादा से ज्यादा लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन लगाने का है। लोगों से अपील है, जिनकी पहली डोज का कार्यकाल पूरा हो चुका है, वह समय रहते अपनी दूसरी डोज भी लगवा लें।


-डॉ. वीरेंद्र यादव, सिविल सर्जन





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मांडविया ने कम टीकाकरण वाले राज्यों से आक्रामक मुहिम शुरू करने की अपील की

नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मणिपुर, मेघालय, नगालैंड और पुडुचेरी से सोमवार को अपील की कि वे कोविड-19 टीकाकरण की गति बढ़ाने के लिए आक्रामक मुहिम शुरू करें और वयस्कों का पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करें।


मणिपुर, मेघालय, नगालैंड और पुडुचेरी में टीकाकरण की गति अपेक्षाकृत धीमी है।


स्वास्थ्य विभाग ने एक बयान में बताया कि मांडविया ने दोहराया कि टीकाकरण कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में सबसे शक्तिशाली हथियार है। उन्होंने इन राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेश से अपील की कि वे टीकाकरण के लिए पात्र लोगों को टीका लगवाने के लिए प्ररित करने के लिए गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ), धार्मिक संगठनों, धार्मिक नेताओं, समुदाय को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाले लोगों और अन्य साझेदारों समेत सभी हितधारकों की मदद लें।


उन्होंने मणिपुर, मेघालय, नगालैंड और पुडुचेरी के स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों की डिजिटल बैठक में कहा, ‘‘हम कोविड-19 टीकाकरण के अंतिम चरण में है। आइए, टीकाकरण की गति और व्यापकता बढ़ाकर आक्रामक मुहिम शुरू करें, ताकि पूर्ण कोविड-19 टीकाकरण सुनिश्चित हो सके।’’


मांडविया ने मणिपुर, मेघालय, नगालैंड और पुडुचेरी में कोविड टीकाकरण की स्थिति और ‘हर घर दस्तक’ मुहिम की समीक्षा करने के लिए इस बैठक की अध्यक्षता की।


बयान में बताया गया कि भारत में 82 प्रतिशत पात्र लोगों को टीके की पहली खुराक और 43 प्रतिशत लोगों को दूसरी खुराक लगाई जा चुकी, जबकि पुडुचेरी (66 प्रतिशत लोगों की पहली खुराक और 39 प्रतिशत लोगों को दूसरी खुराक), नागालैंड (49 प्रतिशत लोगों की पहली खुराक और 36 प्रतिशत को दूसरी खुराक), मेघालय (57 प्रतिशत को पहली खुराक और 38 प्रतिशत को दूसरी खुराक) और मणिपुर (54 प्रतिशत को पहली खुराक और 36 प्रतिशत को दूसरी खुराक) टीके की पहली और दूसरी खुराक देने के मामले में राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे हैं।


उन्होंने कहा, ‘‘आइए हम मिलकर सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र नागरिक देश में कोविड-19 टीके के 'सुरक्षा कवच' के बिना न रह जाए और इसे लेकर लोगों के बीच झिझक, गलत सूचना, अंधविश्वास आदि की समस्याएं दूर हो सकें।’’


मांडविया ने कहा, ‘‘मैंने अरुणाचल प्रदेश के अपने हालिया दौरे में ‘पूर्ण रूप से टीकाकरण करा चुका घर’ के स्टिकर का इस्तेमाल होते देखा। अन्य राज्य भी इसी प्रकार की नवोन्मेषी रणनीतियां अपना सकते हैं।’’


मांडविया ने राज्यों को जिलावार विस्तृत योजना तैयार करने, पर्याप्त संख्या में दल तैनात करने और खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों की दैनिक प्रगति की नियमित रूप से समीक्षा करने को कहा।






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कोरोना वैक्सीनेषन में आखिर नूंह जिला प्रदेष में सबसे फिसड्डी क्यों?


नूंह : पिछड़ा जिला का कलंक अभी नूंह जिला के माथे से मिटा भी नहीं है अब कोरोना वैक्सीनेषन के मामले में जहां देष के 50 जिलों की सुचि में नूंह जिला का नाम आया है वहीं प्रदेष में सबसे नीचे पायदान पर है। आखिर इसके जिम्मेदार कौन हैं


हर पिछडेपन की सूचति में आखिर मेवात का नाम ही क्यों आता है। इस बात पर यहां के राजनेता, धार्मिक लोग और समाजिक संगठन कभी गौर वे फिक्र किया है। जबकि जम्मू कष्मीर मुस्लिम बहुल्य राज्य वैक्सीनेषन डोज लेने में 100 फीसदी पर है जबकि नूंह जिला में पहली डोज 36 फीसदी तो दूसरी जोड मात्र 8 फीसदी ही लोगों को लग सकी है। देष में सबसे कम वैक्सीनेषन के मामले पर देष के प्रधानमंत्री अधिकारियों से बात कर अपनी चिंता भी जता चुके हैं।


नूंह जिला में करीब 80 फीसदी मुस्लिम आबादी है। जिले में 18 आयु से अधिक के 10 लाख 9532 लोगों को वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज लगनी है। जबकि नूंह जिला में बुधवार तक तीन लाख 68 हजार 719 लोगों का पहले तथा 84497 लोगों को दूसरी डोज दी गई है। जिले में जहां अभी 6 लाख 40 हजार 813 लोगों को पहली डोज लगनी बाकी है तथा जिन लोगों का पहली डोज लगने का समय पूरी हो गया और जिन्होने अभी तक दूसरी डोज नहीं लगवाई उनकी संख्या 64319 है। यानि नूंह जिला में दोनो डोज केवल तीन लाख 4400 लोगों को लग सकी है। जिले में 36 फीसदी पहली और दूसरी डोज 8 फीसदी के बाद प्रदेष के सबसे नीचे पायदान पर खडा है। वहीं गुरूग्राम में 122 फीसदी पहली तथा78 फीसदी दूसरी डोज के पर प्रदेष में अव्वल स्थान पर है।


क्या कहते हैं सीएमओ


नूंह जिला के सिविल सर्जन डाक्टर सुरेद्र यादव ने माना की जिलो में पहली 36 तो दूसरी मात्र 8 फीसदी ही लोगों को कोरोना वैक्सीन लग सकी है। उन्होने कहा अब तक जितने लोगों को पहली और दूसरी कोरोना वैक्सीन की डोज लगी है। उनमें केवल हलका बुखार के अलावा को अन्य लक्ष्ण नहीं मिले है और ने ही कोई आदमी ज्यादा बिमार हुआ है। लोग बेवजह अफवाह फैलाकर इस अतर्राष्ट्रीय मुहिम में बाधा बन रहे हैं। उन्होने कहा कोरोना टीका के लगवाने से कोई नुकसान नहीं हैं बल्कि इंसान स्वंम और दूसरे सुरक्षित रह सकते हैं।


कोरोना वैक्सीनेषन बढ़ाने राजनेता, धार्मिक गुरूआंे का आगे आना होगा

  मेवात बहुल्य मुस्लिम इलाका हैं यहां के अधिकतर लोग राजनेता और उलेमाओं की बातों पर अमल करते हैं। जब तक नूंह जिला के राजनेता और उलेमा गांव-गांव जाकर लोगों को प्रेरित करते लोगों में जो अफवाह फैली हुई है उससे निकाला नहीं जा कसेगा।


क्या कहते हैं राजनेता

हरियाणा विधानसभा में प्रतिक्ष के उपनेता एंव नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद का कहना है कि उसने अपने कार्यकर्ताओं और उलेमाओं के साथ कोराना टीका लगवाने का कई बार मुहिम चलाई है। वह खुद परिवार के साथ दोनो टीके लगवा चुका है। सभी लोगों को टीका लगवाना चाहिए।


क्या कहते हैं जमीयत उलमा के अध्यक्ष

जमीयत उलेमा हिंद की नोर्थ जॉन हरियाणा, चंदीगढ, पंजाब और हिमाचल प्रदेष के अध्यक्ष मोलाना याहया करीमी का कहना है कि इसलाम धर्म के आखरी पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब ने बिमारी का इलाज कराने और ताउन यानि फैलने वाली बिमारी से बचना बताया है यानि अगर हम कोरोना से बचाव के टीके लगवाते हैं तो ये मुहम्मद साहब की सुन्नत पर अमल होगा। इसलिए लोगों को जल्द से जल्द दोनो टीके लगवाने चाहिएं क्योंकि वह खुद भी दोनो टीके लगवा चुके हैं।


यूनुस अलवी

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कोविड-19 टीकों के क्लीनिकल ट्रायल पर डेटा के खुलासे के अनुरोध वाली अर्जी पर सुनवायी 29 नवंबर को

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि उस याचिका पर सुनवाई वह 29 नवंबर को करेगा जिसमें कोविड-19 के टीकों के क्लीनिकल ट्रायल के साथ-साथ टीकाकरण के बाद के प्रतिकूल मामलों पर डेटा के खुलासे के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।


शीर्ष अदालत ने इससे पहले गत अगस्त में केंद्र, भारत बायोटेक, एसआईआई और अन्य को उस याचिका पर जवाब मांगा था जिसमें प्रतिकूल मामलों के संबंध में टीकाकरण के बाद के आंकड़ों का खुलासा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।


चूंकि न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति ए एस ओका की पीठ, जो मामले की सुनवाई करने वाली थी, दिन की लिए उठने वाली थी, याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने याचिका का उल्लेख किया और सुनवाई के लिए कोई तारीख देने का आग्रह किया। उन्होंने दावा किया कि किसी के टीका नहीं लगाने पर सरकार द्वारा जारी किए जा रहे जबरदस्ती टीकाकरण के आदेश के कारण लोग नौकरी खो रहे हैं।


सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका कड़ा विरोध किया और कहा कि याचिकाकर्ता एक ऐसा आदेश चाहते है कि टीके नहीं लगाए जाने चाहिए। हालांकि, भूषण ने कहा कि ऐसा नहीं है और वह ऐसा बिल्कुल नहीं कह रहे हैं।


मेहता ने कहा कि उन्हें जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय चाहिए और कहा, ‘‘देश को उस रास्ते पर चलने दिया जाए जिस पर वह जाना चाहता है।’’ मेहता ने कहा, ‘‘मैं अपना जवाब दाखिल करूंगा और इसके लिए समय चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम नहीं जानते कि वह (भूषण) इस मामले में किसके हित का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।’’


भूषण ने कहा कि तीन महीने बीत चुके हैं और उन्होंने डॉ. जैकब पुलियेल की याचिका पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है, जो टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के पूर्व सदस्य हैं और प्रतिकूल मामलों के संबंध में टीकाकरण के बाद के आंकड़ों का खुलासा करने के निर्देश का अनुरोध किया है।


उन्होंने पहले कहा था कि यह कोई टीका-विरोधी याचिका नहीं है और इस मुद्दे पर पारदर्शिता की आवश्यकता है क्योंकि डेटा के खुलासे से सभी संदेह दूर हो जाएंगे।


भूषण ने यह स्पष्ट करते हुए कि याचिकाकर्ता चल रहे टीकाकरण को रोकने का अनुरोध नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि याचिका में जबरन टीकाकरण आदेश जारी किए जाने का मुद्दा उठाया गया है जैसे कि अगर किसी को टीका नहीं लगाया गया है तो यात्रा पर कुछ तरह की रोक लगाना।


शीर्ष अदालत ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) सहित केंद्र और अन्य को नोटिस जारी करके चार सप्ताह के भीतर याचिका पर उनके जवाब मांगे थे। 



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कोविड टीकाकरण पहुंचा 108 करोड़ के करीब

नई दिल्ली : देश में कोविड टीकाकरण का दायरा लगातार बढ़ रहा है और आज शाम तक इसके 108 करोड़ की संख्या को पार कर जाने की संभावना है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को यहां बताया कि पिछले 24 घंटों में देश में 20 लाख 75 हजार 942 कोविड टीके लगाये गये है। आज सुबह सात बजे तक 107 करोड 92 लाख 19 हजार 546 कोविड टीके लगाये जा चुके है। मंत्रालय के अनुसार 12,509 कोविड रोगी पिछले 24 घंटों में स्वस्थ हो चुके हैं। अभी तक देश में तीन करोड़ 37 लाख 37 हजार 468 लोग कोविड संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। स्वस्थ होने की दर 98.23 प्रतिशत है । पिछले घंटे में कोविड संक्रमण के 10,929 नए मामले सामने आए हैं । देश में इस समय एक लाख 46 हजार 950 कोविड रोगियों का चल रहा है, जो 255 दिनों में सबसे कम है। संक्रमण दर 0.43 प्रतिशत है। देश भर में पिछले 24 घंटों में कुल 8,10,783 परीक्षण किए गए। अब तक 61,39,65,751 परीक्षण किये गये हैं।








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अमेरिका ने 5 से 11 वर्ष के बच्चों को कोविड-19 रोधी टीका लगाने की मंजूरी दी

वाशिंगटन : अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने ‘फाइज़र’ के कोविड-19 रोधी टीके की बच्चों के मुताबिक तैयार खुराक 5 से 11 वर्ष के बच्चों को देने की मंगलवार को अनुमति दे दी।


खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने 5 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों को टीके की खुराक देने की अनुमति पहले ही दे दी थी। यह खुराक वयस्कों और किशोरों को दी जाने वाली खुराक की एक तिहाई है। लेकिन एफडीए द्वारा स्वीकृत टीके किसे दिए जाएं इसकी औपचारिक अनुशंसा रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र (सीडीसी) करता है।


एक सलाहकार पैनल के सर्वसम्मति से ‘फाइज़र’ के टीके की खुराक 2.8 करोड़ बच्चों को दिए जाने का फैसला करने के कुछ ही घंटों बाद सीडीसी की निदेशक डॉ. रोशेल वेलेंस्की ने उक्त घोषणा की। इस फैसले के साथ ही पहली बार अमेरिका में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कोविड-19 रोधी टीके लग पाएंगे।


वेलेंस्की ने मंगलवार रात को एक बयान में कहा, ‘‘एक मां होने के नाते, मैं सभी अभिभावकों को कहना चाहती हूं कि वे बाल विशेषज्ञों, स्कूल की नर्स या स्थानीय चिकित्सकों से टीके के बारे में और जानकारी लें तथा बच्चों के टीकाकरण के महत्व को समझें।’’


अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसे एक महत्वपूर्ण फैसला बताया।


उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘ इससे अभिभावकों की उनके बच्चों को लेकर कई महीनों से बनी चिंता खत्म हो गई...यह वायरस से निपटने की दिशा में हमारे देश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।’




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कोविड टीकाकरण में 56.91 लाख टीके लगे

नई दिल्ली : देश में पिछले 24 घंटे में 56.91 लाख से अधिक कोविड टीके लगायें गये है। इसके साथ ही कुल टीकाकरण 105.43 करोड़ से अधिक हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज यहां बताया कि पिछले 24 घंटे के दौरान पूरे देश में 56 लाख 91 हजार 175 कोविड टीके लगायें गये हैं। आज सुबह सात बजे तक कुल कोविड टीकाकरण 105 करोड़ 43 लाख 13 हजार 977 हो गया। मंत्रालय ने बताया कि 13, 543 कोविड रोगी पिछले 24 घंटों में स्वस्थ हो गये हैं। कोरोना महामारी के शुरू होने के बाद से अभी तक तीन करोड़ 36 लाख 41 हजार 175 लोग महामारी से उबर चुके हैं। स्वस्थ होने की दर 98.19 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में 14,313 नए कोविड मामले सामने आए हैं। देश में कुल एक लाख 61 हजार 555 कोविड मरीजों का इलाज चल रहा है। संक्रमण दर 0.47 प्रतिशत है।

देशभर में कोविड-19 का परीक्षण जारी है। पिछले 24 घंटों में कुल 11 लाख 76 हजार 850 कोविड परीक्षण किए हैं। अब तक कुल 60 करोड़ 70 लाख 62 हजार 619 कोविड-19 परीक्षण किए गये हैं।



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उप्र में कोविड वैक्सीनेशन 09 करोड़ 97 लाख के पार

लखनऊ : विगत 24 घंटे में हुई 02 लाख 15 हजार 209 सैम्पल की टेस्टिंग में 14 नए मरीजों की पुष्टि हुई। इसी अवधि में 26 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। प्रदेश में अब तक 16 लाख 86 हजार 694 प्रदेशवासी कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर स्वस्थ हो चुके हैं।


यह जानकारी अपर मुख्य सचिव 'सूचना' नवनीत सहगल ने शनिवार को दी। बताया कि विगत दिवस हुई कोविड टेस्टिंग में 67 ज़िलों में संक्रमण का कोई भी नया केस नहीं मिला। वर्तमान में 177 कोरोना संक्रमितों का उपचार हो रहा है।


कोविड टीकाकरण के लिए प्रदेश की 54.12 प्रतिशत आबादी ने टीके की पहली डोज प्राप्त कर ली है। अब तक 8 करोड़ 14 लाख लोगों को टीके की पहली डोज लगाई जा चुकी है। इसी प्रकार, 01 करोड़ 82 लाख लोगों ने टीके की दोनों खुराक ले ली है।


प्रदेश में कुल कोविड वैक्सीनेशन 09 करोड़ 97 लाख से अधिक हो चुका है। यह किसी एक राज्य में हुआ सर्वाधिक टीकाकरण है।


उन्होंने बताया कि प्रदेश के 30 जिलों में कोविड का एक भी एक्टिव केस नहीं है। अब तक 07 करोड़ 75 लाख 81 हजार 133 सैम्पल की कोविड जांच की जा चुकी है। यह देश के किसी एक राज्य में हुई सर्वाधिक टेस्टिंग है। औसतन हर दिन सवा दो लाख से ढाई लाख तक टेस्ट हो रहें हैं, जबकि पॉजिटिविटी दर 0.01 फीसदी से भी कम हो गई है और रिकवरी दर 98.7 फीसदी है।


कोविड की अद्यतन स्थिति के अनुसार प्रदेश के 30 जनपदों (अमेठी, अमरोहा, औरैया, अयोध्या, आजमगढ़, बागपत, बलिया, बांदा, बहराइच, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गोंडा, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई, हाथरस, कानपुर देहात, कासगंज, महोबा, मीरजापुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, रामपुर, संतकबीरनगर, शाहजहांपुर, शामली, श्रावस्ती, सीतापुर और सोनभद्र) में कोविड का एक भी मरीज शेष नहीं है। यह जनपद आज कोविड संक्रमण से मुक्त हैं।



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दिव्यांगों, चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को घर पर टीका लगाया जाएगा : सरकार

नई दिल्ली :  सरकार ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि दिव्यांग लोगों तथा चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को उनके घर पर ही कोविड-19 का टीका लगाया जाएगा।


स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश में कोविड-19 की दूसरी लहर अब भी जारी है, भले ही रोजाना नए मामलों में कमी आ रही है।


बहरहाल, उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते सामने आए संक्रमण के कुल मामलों का 62.73 फीसदी अकेले केरल में दर्ज हुए थे। केरल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक लाख से अधिक है।


अधिकारियों ने कहा कि देश में 33 जिलों में फिलहाल संक्रमण दर 10 फीसदी से अधिक है, जबकि 23 जिलों में संक्रमण दर पांच से 10 फीसदी के बीच हैं।


उन्होंने कहा कि आगामी त्योहारों के लिए कोविड-19 दिशानिर्देशों के तहत निरूद्ध क्षेत्रों और पांच फीसदी से अधिक संक्रमण दर वाले जिलों में भीड़भाड़ से बचना होगा।


टीकाकरण अभियान के बारे में उन्होंने कहा कि देश की करीब 66 फीसदी आबादी को टीके की कम से कम एक खुराक दी गई है और 23 फीसदी आबादी का पूरी तरह टीकाकरण हो गया है।


टीकाकरण अभियान में तेजी लाने की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि दिव्यांगों एवं चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को उनके घर पर ही टीका लगाया जाएगा।





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बच्चों का टीका

कोरोना की तीसरी लहर की आहट के बीच देश में 12-18 साल के बच्चों का वैक्सीनेशन अगले महीने शुरू हो जाएगा। कैडिला हेल्थकेयर अगले महीने बच्चों की वैक्सीन जायकोव-डी लॉन्च कर देगी। इसके इमरजेंसी यूज के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने पिछले महीने मंजूरी दे दी थी। जायडस कैडिला अक्टूबर से हर महीने एक करोड़ डोज बनाना शुरू कर देगी। दूसरी तरफ भारत बायोटेक भी बच्चों पर कोवैक्सिन का तीसरे फेज का ट्रायल पूरा कर चुकी है। कंपनी ने कहा है कि वह अगले हफ्ते थर्ड फेज के डेटा डीजीसीआई को सौंप देगी। अभी थर्ड फेज के डेटा का एनालिसिस किया जा रहा है। वहीं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी 2 से 12 साल की उम्र के बच्चों पर कोवावैक्स का दूसरे-तीसरे फेज का ट्रायल कर रही है। कोविड-19 वैक्सीनेशन पर सरकार को सलाह देने वाली कमेटी ने पिछले महीने राय दी थी कि शुरुआत में 12 साल से ज्यादा उम्र के उन बच्चों का वैक्सीनेशन किया जाए, जिन्हें गंभीर बीमारियां हैं। कमेटी का कहना था कि देश में 40 करोड़ बच्चे हैं और सभी का वैक्सीनेशन शुरू किया जाता है तो पहले से चल रहे 18+ के वैक्सीनेशन पर असर पड़ेगा। कमेटी के चेयरमैन एनके अरोड़ा ने कहा था कि पूरी तरह से स्वस्थ बच्चों को वैक्सीनेशन के लिए अभी इंतजार करना होगा। कमेटी की सलाह के मुताबिक पहले उन बच्चों का वैक्सीनेशन किया जाएगा जो किडनी ट्रांसप्लांट, जन्म से कैंसर या हार्ट संबंधी बीमारी के शिकार हैं। दूसरी लहर में जैसी तबाही हुई, उसका सबक यही है कि पूरी आबादी को टीका जल्द से जल्द लग जाए। इस बात पर लगातार गौर करने की जरूरत है कि दूसरी लहर में रोजाना संक्रमण और मौतों के आंकड़ों ने सारे रिकार्ड तोड़ डाले। महामारी का खतरा अभी जस का तस है। फिलहाल बस संक्रमण की दर ही घटी है। दूसरी लहर में भी बच्चों के काफी मामले देखने को मिले। लेकिन गंभीर स्थिति वाले मामलों की संख्या कम रही। फिर, देशी-विदेशी विशेषज्ञों ने यह कह कर चिंता बढ़ा दी कि अक्टूबर-नवंबर तक तीसरी लहर भी आ सकती है। और यह बच्चों के लिए खतरनाक होगी। जाहिर है, बच्चों को बचाना अब पहली प्राथमिकता हो गई है। इसलिए ज्यादातर राज्यों ने अभी से ऐसे इंतजाम शुरू कर दिए हैं कि अगर तीसरी लहर में बच्चे संक्रमण की चपेट में आते हैं तो उन्हें तत्काल इलाज मिल सके। बच्चों का मामला ज्यादा ही संवेदनशील है। दो से छह साल तक के बच्चे तो अपनी तकलीफ बयां भी नहीं कर पाते। परीक्षणों और इलाज की जटिल प्रक्रियाओं के दौर से गुजरना बच्चों के लिए कितना पीड़ादायक होता होगा, यह कल्पना से परे है। बच्चों पर महामारी का खतरा इसलिए भी बना हुआ है कि अगर घर में किसी एक या उससे ज्यादा सदस्य संक्रमण से ग्रस्त हो जाएं तो बच्चों को इसकी जद में आते देर नहीं लगती। दूसरी लहर में ऐसे मामले देखे भी गए। जाहिर है, अगर बच्चों को टीका लगा होगा तो काफी हद तक बचाव रहेगा। कोरोना के फिर से बढ़ते मामलों ने नींद उड़ा दी है। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात तो यह है कि महामारी से निपटने में जिस केरल राज्य को एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा था, वहीं आज हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। पिछले कुछ दिनों से केरल में संक्रमण के रोजाना तीस हजार से ज्यादा मामले मिलना गंभीर स्थिति का संकेत है। इससे तो लग रहा है कि राज्य में महामारी ने फिर से पैर पसार लिए हैं। हालांकि महाराष्ट्र, मिजोरम, तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे राज्यों में भी स्थिति कोई अच्छी नहीं है। महाराष्ट्र में तो रोजाना संक्रमितों की संख्या पांच हजार के आसपास चल रही है। इसलिए महामारी को जरा भी हल्के में लिया गया तो फिर से गंभीर संकट में पडऩे में जरा देर नहीं लगने वाली। हकीकत तो यह है कि दूसरी लहर गई नहीं है। तीसरी का खतरा सामने है। विशेषज्ञ चेता रहे हैं कि अक्टूबर में तीसरी लहर जोरों पर होगी और रोजाना संक्रमितों का आंकड़ा तीन-साढ़े लाख तक पहुंच जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। केरल, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर राज्यों की अभी जो स्थिति है, उससे तो लगता है कि लोगों की बेरोकटोक आवाजाही देश में तीसरी लहर का कारण आसानी से बन सकती है। इसके अलावा बाजारों में भीड़ से लेकर जन आशीर्वाद यात्रा जैसे राजनीतिक आयोजनों तक में कोरोना व्यवहार के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। ऐसे में संक्रमण को फैलने से कौन रोक पाएगा?


सिद्वार्थ शंकर-




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दिल्ली में अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 1.64 करोड़ से अधिक खुराक दी गई

नई दिल्ली : दिल्ली में कोरोना वारयस संक्रमण से निपटने के प्रयासों के तहत सोमवार को 2.10 लाख लोगों को कोविड-19 रोधी टीके लगाए गए, जिनमें से 1.11 लाख लोगों को पहली खुराक दी गई।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 16 जनवरी को टीकाकरण आरंभ होने के बाद से शहर में 1.64 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। करीब 49.98 लाख लोगों को दोनों खुराक दे दी गई हैं।


दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, शहर में मंगलवार सुबह तक टीके की करीब नौ लाख खुराक बची थी, जिनमें से 1.22 लाख 'कोवैक्सीन' और 7.72 लाख 'कोविशील्ड' की खुराक थी।


बुलेटिन में बताया गया कि ये खुराक चार दिन तक चलेंगी। शहर में 1,234 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें रोजाना करीब 3.10 लाख लोगों को टीका लगाया जा सकता है।







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परीक्षणों से पता चला है कि कोविड टीके 5 से 11 साल के बच्चों के लिये सुरक्षित: फाइजर, बायोएनटेक

नई दिल्ली : वैश्विक दवा कंपनियों फाइजर और बायोएनटेक एसई ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 टीकों के परीक्षण के नतीजों से पता चला है कि ये पांच से 11 साल की उम्र के बच्चों के लिये सुरक्षित है और उनमें मजबूत एंटीबॉडी पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि वे जल्द से जल्द नियामक मंजूरी लेने की योजना बना रही हैं।


कंपनियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि पांच से 11 साल की उम्र के बच्चों को 21 दिन के अंतराल पर 10 माइक्रोग्राम की दो खुराकें दी गईं। 12 साल या उससे अधिक आयु के बच्चों को 30 माइक्रोग्राम मात्रा की खुराक दी जाती है।


बयान में कहा गया है, ''पांच से 11 साल के बच्चों पर टीका सुरक्षित साबित हुआ। उनके शरीर पर इसका अच्छा असर हुआ और उनमें मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया पैदा हुई। ''


बयान में कहा गया है कि कंपनियां इन आंकड़ों को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए), यूरोपीय दवा एजेंसी (ईएमए) और अन्य नियामकों के पास जल्द से जल्द जमा करने की योजना बना रही हैं।






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कोविड टीकाकरण को लेकर दिए गए ‘गैरजिम्मेदाराना’ बयानों के लिए विपक्ष को आत्मचिंतन करना चाहिए: नड्डा

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने केंद्र सरकार द्वारा कोविड-19 के खिलाफ चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान को दुनिया का सबसे ‘‘बड़ा और तेज’’ अभियान करार देते हुए सोमवार को कहा कि इसके बारे में ‘‘गैरजिम्मेदाराना’’बयान देने के लिए विपक्ष को ‘‘आत्मिचंतन’’ करना चाहिए।


नड्डा ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थित एक टीकाकरण केंद्र का दौरा किया और इस अभियान को ‘‘सफल’’ बनाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया की टीम, स्वास्थ्य राज्य मंत्रियों, चिकित्सा समुदाय सहित इससे जुड़े सभी लोगों का धन्यवाद दिया।


नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 71वें जन्मदिन पर 2.5 करोड़ से अधिक टीकों की खुराक दी गई जो एक विश्व रिकार्ड है।


उन्होंने कहा यह साबित करता है कि यह अभियान विश्व का ‘‘सबसे बड़ा और तेज’’ अभियान है।


उन्होंने कहा, ‘‘17 सितंबर को हुए 2.5 करोड़ टीकाकरण किए जाने पर विपक्षी दलों की चुप्पी पर और पिछले एक साल में इस अभियान के दौरान दिए गए गैरजिम्मेदाराना और हास्यास्पद बयानों के लिए उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्हें सोचना चाहिए कि ऐसा करके उन्होंने समाज पर किस प्रकार की छाप छोड़ी है और लोकतंत्र में उनकी क्या भूमिका रही है।’’


इस साल शुरु हुए टीकाकरण अभियान के बाद नड्डा ने आज दूसरी बार एम्स का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने टीकाकरण केंद्र पर लोगों के साथ ही नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से संवाद भी किया। टीकाकरण अभियान को सफल बनलाने के लिए उन्होंने सभी का धन्यवाद किया।


नड्डा का एम्स दौरा प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर भाजपा की ओर से आरंभ किए गए ‘‘सेवा और समर्पण’’ अभियान का हिस्सा है।





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आशा है कि और दिनों में भी टीकों की दो करोड़ से अधिक खुराक दी जाएगी : राहुल

नई दिल्ली : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर देश में ढाई करोड़ से अधिक टीके लगाये जाने को लेकर शनिवार को कहा कि कोरोना रोधी टीकाकरण की इसी गति की जरूरत है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी रोजाना टीकों की दो करोड़ से अधिक खुराक दी जाएगी।


उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘आशा करता हूं कि और दिनों में भी रोजाना टीकों की 2.1 करोड़ खुराक दी जाएगी। हमारे देश को इसी गति की जरूरत है।’’


उल्लेखनीय है कि भारत ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर टीकाकरण अभियान को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए कोविड-19 टीके की 2.50 करोड़ से अधिक खुराक देकर एक रिकॉर्ड बनाया।


को-विन पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक दी गई कुल खुराक शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे 79.33 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई। विभिन्न खबरों के अनुसार इससे पहले दैनिक खुराक का रिकॉर्ड चीन ने बनाया था, जहां जून में 2.47 करोड़ टीके लगाए गए थे।



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राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड-19 टीके की 76.11 करोड़ से अधिक खुराक मुहैया कराई गईं: केंद्र

नई दिल्ली : राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अब तक कोविड-19 टीके की 76.11 करोड़ से अधिक खुराक उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।


मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा 1.65 करोड़ से अधिक खुराक और दी जानी हैं। उसने बताया कि राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 5.33 करोड़ से अधिक खुराक बची हैं।


मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत केंद्र राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 के टीके नि:शुल्क उपलब्ध करा कर उनकी मदद कर रहा है।





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उपराष्ट्रपति नायडू ने भारत में 75 करोड़ कोविड टीके लगाए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की

नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भारत में कोरोना वायरस के टीके की 75 करोड़ खुराक दिये जा चुकने पर मंगलवार को प्रसन्नता व्यक्त की और लोगों से संकोच छोड़ने तथा टीका लगवाने का आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि देश ने सोमवार को कोविड-19 टीके की 75 करोड़ खुराक देने का मील का पत्थर पार कर लिया। को-विन पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को शाम सात बजे तक 71 लाख से अधिक खुराकें दी गईं। उपराष्ट्रपति सचिवालय ने नायडू के हवाले से ट्वीट किया, "यह जानकर प्रसन्नता हुई कि हमने कोविड-19 टीके की 75 करोड़ खुराक देने का मील का पत्थर पार कर लिया है जबकि राष्ट्र हमारी स्वतंत्रता के 75वें वर्ष का जश्न मना रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारियों, सरकारी अधिकारियों और अन्य सभी लोगों की उनके असाधारण प्रयासों के लिए मैं प्रशंसा करता हूं।" उपराष्ट्रपति ने लोगों से संदेह और झिझक दूर करके टीका लगवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश सभी पात्र लोगों को टीका लगाने के लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर अग्रसर है।






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योगी सरकार की मंशा के अनुरुप हो कोरोना वैक्सीनेशन : विधायक

कानपुर : वैश्विक महामारी कोरोना से पूरी दुनिया जूझ रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता से भारत जल्द ही स्थितियों को संभाल सका। वर्तमान में कोरोना वैक्सीनेशन तेजी से किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिया है कि वैक्सीनेशन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाये। वैक्सीन लगवाने वालों को परेशान न किया जाए। ऐसे में योगी सरकार की मंशा के अनुरुप ही वैक्सीनेशन हो। यह बातें गुरुवार को वैक्सीनेशन का निरीक्षण करने पहुंचे विधायक सुरेन्द्र मैथानी ने कही।


गोविंद नगर विधानसभा के विधायक सुरेंद्र मैथानी ने अपने स्वयं द्वारा गोद लिए हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुजैनी में आकस्मिक पहुंचकर वैक्सीनेशन के कार्यक्रम को चेक किया। पब्लिक से कठिनाई को पूछा तो 27 महिला/पुरुष मिलाकर ऐसे लोग मिले, जिनका स्लॉट बुक नहीं हुआ था। ऑफलाइन में उनको वैक्सीनेशन कराया। विधायक ने नर्सिंग स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने बहुत ही अच्छी व्यवस्था से लोगों को संतुष्ट करते हुए वैक्सीन लगाने का काम किया है।


विधायक ने कहा कि दिव्यांगों, महिलाओं,बच्चों और बुजुर्गों को कोई कठिनाई ना हो। सभी को पीने का ठंडा पानी मिले। बैठने के लिए कुर्सी मिले और उनके नंबर(क्रम)आने की सही जानकारी उनको प्राप्त हो। जिससे योगी के इस कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले श्रेणी के लोगों में ठीक प्रकार से व्यवस्था सुनिश्चित हो। अस्पताल में साफ सफाई एवं वैक्सीन लगने के स्थल तथा वैक्सीन को रखने की व्यवस्था और अन्य रजिस्टर आदि, जिसमें जनता के नाम अंकित होते हैं उन्हें भी चेक करके पूरे अस्पताल का विधायक ने निरीक्षण करके सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित किया।





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टीकाकरण में उत्तर प्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में कोरोना रोधी टीकाकरण का आंकड़ा छह करोड़, छह लाख के पार हो चुका है। 05 करोड़ 11लाख से अधिक नागरिकों ने कोरोना से बचाव के लिए टीके की कम से कम एक खुराक प्राप्त कर ली है। 95 लाख 84 हजार से ज्यादा लोगों ने टीके की दोनों डोज प्राप्त कर ली है। यह देश के किसी एक राज्य में हुआ सर्वाधिक टीकाकरण है।


अपर मुख्य सचिव ‘सूचना’ नवनीत सहगल ने बुधवार को बताया कि कोविड की ताजा स्थिति के मुताबिक प्रदेश के 17 जनपदों में एक्टिव केस शून्य हैं। जनपद अलीगढ़, अमेठी, बदायूं, बलिया, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, हमीरपुर, हरदोई, हाथरस, कासगंज, कौशांबी, महोबा, संतकबीरनगर, शामली और श्रावस्ती में आज कोविड का एक भी मरीज शेष नहीं है। यह जनपद आज कोविड संक्रमण से मुक्त हैं।


विगत 24 घंटे में हुई टेस्टिंग में 53 जिलों में संक्रमण का एक भी नया केस नहीं पाया गया, जबकि मात्र 22 जनपदों में इकाई अंक में मरीज पाए गए। वर्तमान में प्रदेश में एक्टिव कोविड केस की संख्या 419 है। अब तक 06 करोड़ 97 लाख 503 कोविड सैम्पल की जांच की जा चुकी है।


सहगल के अनुसार विगत 24 घंटे में 02 लाख 32 हजार 727 कोविड सैम्पल की जांच की गई और 35 नए मरीजों की पुष्टि हुई। इसी अवधि में 34 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। अब तक 16 लाख 85 हजार 819 प्रदेशवासी कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर स्वस्थ हो चुके हैं। प्रदेश में कोरोना की रिकवरी दर 98.6 प्रतिशत है। विगत दिवस दैनिक पॉजिटिविटी दर 0.01 प्रतिशत रही।





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गुरुग्राम 21 लाख कोरोनारोधी टीके लगाने वाला प्रदेश का अव्वल जिला

गुरुग्राम : अब कोरोनारोधी टीके लगाने का अभियान तेजी से चल रहा है। टीकाकरण की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग टीम ने छह दिन में 1,09691 लोगों को टीके लगाए। इसी के साथ प्रदेश में गुरुग्राम 21 लाख कोरोनारोधी टीके लगाने वाला पहला जिला बन गया है।


मंगलवार को 123 केंद्रों पर अभियान चलाया और 20,649 लोगों को टीका लगाया गया। 11,644 लोगों को पहला और 9,005 लोगों को दूसरा टीका लगाया। स्वास्थ्य विभाग टीम ने विदेश जाने वाले 25 लोगों दूसरा टीका लगाया गया और 100 लोगों को रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन का पहला व 45 लोगों को दूसरा टीका लगा। डीएमआरसी के हुडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन परिसर में बने केंद्र में 61 लोगों को टीका लगाया। टीकाकरण अभियान के नोडल अधिकारी व उप सिविल सर्जन डा. एमपी सिंह ने कहा कि जिले में 21,10,225 टीके लगाए जा चुके हैं। हम गांवों में भी शहर के बराबर टीकाकरण केंद्र बना रहे हैं ताकि सभी का जल्द से जल्द टीकाकरण किया जा सके। यह सही है कि केंद्रों पर हर रोज अधिक लोग टीका लगवाने पहुंच रहे हैं। मेरी लोगों से अपील है कि स्वास्थ्य विभाग टीम के साथ सभी अपना सहयोग बनाए रखें। सभी का टीकाकरण किया जाएगा।


-डा. विरेंद्र यादव, सिविल सर्जन



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अमेरिका आठ महीने में बूस्टर खुराक लेने की करेगा सिफारिश: सूत्र

वाशिंगटन : अमेरिका में कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप के तेजी से फैलने के मद्देनजर इस संक्रमण से लंबे समय तक बचाव सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी विशेषज्ञ सभी अमेरिकियों को कोविड-19 टीके की दूसरी खुराक लेने के आठ महीने बाद बूस्टर खुराक देने की सिफारिश कर सकते हैं।


संघीय स्वास्थ्य अधिकारी इस बात पर सक्रियता से विचार कर रहे हैं कि क्या इन सर्दियों में लोगों को अतिरिक्त खुराक दिए जाने की आवश्यकता होगी या नहीं। वे अमेरिका में संक्रमितों की संख्या और इजराइल जैसे अन्य देशों में हालात पर नजर रख रहे हैं, जहां शुरुआती अध्ययन में संकेत मिला है कि जनवरी में टीकाकरण करा चुके लोगों में गंभीर संक्रमण के खिलाफ टीके की बचाव क्षमता में कमी आई है।


इस मामले की जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि अमेरिका में बूस्टर संबंधी सिफारिश को लेकर इस सप्ताह घोषणा किए जाने की संभावना है।


खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा टीकों को मंजूरी दिए जाने के बाद ही खुराक व्यापक रूप से दी जाएंगी। फाइजर के टीके के लिए इस संबंध में आगामी सप्ताहों में कदम उठाए जा सकते हैं।


अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने पिछले सप्ताह सिफारिश की थी कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को कोविड-19 की ‘बूस्टर’ खुराक दी जानी चाहिए।


राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक डॉ. फ्रांसिस कोलिन्स ने रविवार को कहा कि अमेरिका अगले दो सप्ताह में फैसला कर सकता है कि क्या अमेरिकियों को इन सर्दियों में कोरोना वायरस रोधी बूस्टर खुराक देनी है या नहीं। देश में सबसे पहले स्वास्थ्य सेवा कर्मियों और बुजुर्ग अमेरिकियों को यह खुराक दिए जाने की संभावना है।






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भारत को दुनिया में अपने सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम पर गर्व है : मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत को दुनिया में अपने सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम पर गर्व है और 54 करोड़ से अधिक लोग पहले ही कोविड-19 के टीके लगवा चुके हैं।


प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कोविड-19 महामारी के खिलाफ देश की जंग का जिक्र किया और वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, पराचिकित्साकर्मियों आदि की सराहना ही।


उन्होंने देश में टीका निर्माण से जुड़े लोगों की भी प्रशंसा की और कहा कि उनके प्रयासों के कारण भारत को टीकों के लिये दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।


उन्होंने कहा, ‘‘हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा है। देश में 54 करोड़ से अधिक लोग पहले ही टीके लगवा चुके हैं।’’


मोदी ने कहा कि अगर भारत ने अपना खुद का टीका विकसित नहीं किया होता, तो बाहर से होने वाली उसकी आपूर्ति अनिश्चित रहती।


मोदी ने कहा, ‘‘हमारे देश के सामने और विश् व में पूरी मानव जाति के समक्ष कोरोना का ये कालखंड बहुत बड़ी चुनौती के रूप में आया है। भारतवासियों ने इसके साथ इस लड़ाई को बहुत संयम, बहुत धैर्य से लड़ा है। इस लड़ाई में हमारे सामने अनेक चुनौतियां थीं। देशवासियों ने हर क्षेत्र में असाधारण गति से काम किया है। यह हमारे वैज्ञानिकों और हमारे उद्यमियों के सामर्थ्य का ही नतीजा है कि आज हमें टीकों के लिये किसी और देश के सामने निर्भर होने की जरूरत नहीं है। पलभर के लिये सोचिए अगर भारत के पास अपनी वैक् सीन नहीं होती तो क् या होता? हमें पोलियो की वैक्सीन पाने में कितना वक्त लग गया?’’


उन्होंने कहा, ‘‘इतने बड़े संकट के समय जब पूरी दुनिया में महामारी फैली हो, हमें टीका हासिल करना मुश्किल था। भारत को टीका मिलता या नहीं भी मिल सकता था और अगर उसे टीका मिलता भी तो इसके समय पर मिलने की कोई निश्चितता नहीं थी।’’


प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविन जैसी ऑनलाइन प्रणाली और डिजिटल सर्टिफिकेट देने की व् यवस् था आज दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही है।


उन्होंने कहा कि हालांकि यह सच है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में कोविड-19 से कम लोग संक्रमित हुए हैं और अन्य देशों की आबादी की तुलना में भारत अधिक लोगों को वायरल बीमारी से मरने से बचाने में कामयाब रहा है, लेकिन यह खुद को बधाई देने की बात नहीं है।


उन्होंने कहा, ‘‘यह ऐसा कुछ नहीं जिस पर गर्व किया जाए। हम इन प्रशंसाओं पर आराम से नहीं रह सकते। यह कहना कि कोई चुनौती नहीं है, हमारे अपने विकास के मार्ग में एक प्रतिबंधात्मक विचार बन जाएगा।’’


उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के अमीर देशों की तुलना में हमारी प्रणाली अपर्याप्त हैं, हमारे पास वह नहीं है जो अमीर देशों के पास है। इसके अलावा, हमारे पास अन्य देशों की तुलना में अधिक आबादी है। हमारी जीवनशैली भी अलग है। हमारे सभी प्रयासों के बावजूद हम कई लोगों को नहीं बचा सके। इतने बच्चे अनाथ हो गए। यह असहनीय दर्द हमेशा बना रहेगा।’’


उन्होंने वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, पराचिकित्सा कर्मियों की कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में उनकी भूमिका के लिये सराहना की। उन्होंने कहा, “कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के दौरान हमारे चिकित्सक, नर्सें, पराचिकित्सा कर्मी, टीका बनाने में लगे वैज्ञानिक, सफाई कर्मचारी तथा सार्वजनिक सेवा में जुटे लोग वंदन के अधिकारी हैं।”


उन्होंने कहा कि देश के हर गरीब व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का अभियान भी तेजी से चल रहा है। इसके लिए, चिकित्सा शिक्षा में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में चिकित्सा सीटों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि हुई है।


मोदी ने कहा कि रोकथाम, स्वास्थ्य देखभाल पर समान ध्यान दिया गया है और आयुष्मान भारत योजना के तहत हर गांव को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं।


उन्होंने कहा कि जन औषधि योजना के माध्यम से गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।


उन्होंने कहा, ‘‘अब तक 75,000 से अधिक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित किए गए हैं। ब्लॉक स्तर पर भी, आधुनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के तहत विशेष रूप से अच्छे अस्पतालों और आधुनिक प्रयोगशालाओं के नेटवर्क स्थापित किये जा रहे हैं। बहुत जल्द, देश के हजारों अस्पताल होंगे, उनके अपने ऑक्सीजन प्लांट होंगे।’’


उन्होंने कहा कि बुनियादी जरूरतों की चिंता के साथ-साथ दलितों, पिछड़े वर्गों, आदिवासियों और सामान्य वर्ग के गरीब वर्गों के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में चिकित्सा शिक्षा में अखिल भारतीय कोटे में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है।


महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों के लिये मुफ्त राशन के प्रावधान के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसने दुनिया को चौंका दिया है और इसके बारे में बात की जा रही है।


उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने महामारी के दौरान लगातार महीनों तक 80 करोड़ देशवासियों को मुफ्त अनाज देकर गरीब घरों में चूल्हा जलाये रखा है, यह न केवल दुनिया के लिए आश्चर्य बल्कि चर्चा का विषय भी है।’’


मोदी ने गांवों और शहरों के बीच की खाई को पाटने के लिए कदम उठाने का भी आह्वान किया।


उन्होंने लक्षित लाभार्थियों के बीच आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का 100 प्रतिशत कवरेज हासिल करने पर जोर दिया।


मोदी ने कहा, ‘‘देश का हर गरीब आयुष्मान भारत से लेकर उज्ज्वला के महत्व को जानता है। आज सरकारी योजनाओं की गति बढ़ गई है और ये योजनाएं वांछित लक्ष्यों को प्राप्त कर रही हैं। हमने पहले की तुलना में बहुत तेजी से प्रगति की है, लेकिन यह यहीं समाप्त नहीं होता है। हमें संपूर्णता प्राप्त करनी है।’’


प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सभी गांवों में सड़कें हों, सभी घरों में बैंक खाते हों, सभी लाभार्थियों के पास आयुष्मान भारत कार्ड हों और सभी पात्र व्यक्तियों को उज्ज्वला योजना का लाभ मिले और उनके पास गैस कनेक्शन हों। हमें हर पात्र व्यक्ति को सरकार की बीमा, पेंशन और आवास योजनाओं के साथ जोड़ना होगा। हमें शत-प्रतिशत उपलब्धि की मानसिकता के साथ आगे बढ़ना है।’’





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टीकाकरण में लैंगिक अंतर खत्म हो : महिला आयोग

नई दिल्ली :  राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने कोविड-19 टीकाकरण में लैंगिक अंतर पर चिंता जताया है। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि टीकाकरण अभियान में महिलाओं की भागीदारी कम न रह जाए। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में एनसीडब्ल्यू ने एक खबर का उल्लेख किया जिसमें महिलाओं को कोविड रोधी टीके अपेक्षाकृत कम संख्या में लगाए जाने का दावा किया गया है। आयोग ने कहा, पुरुषों और महिलाओं के बीच टीकाकरण कवरेज में अंतर आयोग के लिए चिंता का विषय है। इसलिए अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर टीकाकरण में लैंगिक अंतर कम करने के लिए कदम उठाने को कहा है। यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि टीकाकरण अभियान में महिलाएं पीछे न रह जाएं।






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मेलबर्न ने लॉकडाउन बढ़ाया, सिडनी में टीका लगवा चुके लोगों को मिल सकती है पाबंदियों से छूट

कैनबरा : ऑस्ट्रेलिया के दूसरे सबसे बड़े शहर मेलबर्न ने कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए बुधवार को लॉकडाउन की अवधि बढ़ा दी जबकि सिडनी में डेल्टा स्वरूप के फैलने के बावजूद प्राधिकारियों ने कहा कि वे उन निवासियों को पाबंदियों में छूट देने पर विचार कर रहे हैं जिन्होंने टीका लगवा लिया है।


ऑस्ट्रेलियाई शहरों में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लगाए गए जो सफल रहे। लेकिन अत्यधिक संक्रामक डेल्टा स्वरूप देश में नयी चुनौतियां पैदा कर रहा है जहां टीकाकरण की दर कम है।


विक्टोरिया राज्य की सरकार ने बुधवार को कहा कि मेलबर्न का छठा लॉकडाउन 19 अगस्त के अंत तक दूसरे हफ्ते के लिए बढ़ाया जाएगा। शहर में 24 घंटे के दौरान संक्रमण के 20 नए मामले आए हैं।


विक्टोरिया के प्रमुख डेनियल एंड्रयूज ने कहा, ‘‘यह बहुत चुनौतीपूर्ण है। मैं जानता हूं कि प्रत्येक विक्टोरिया निवासी चाहेंगे कि उनके काम चलते रहें, वे आजादी चाहेंगे जो डेल्टा स्वरूप के कारण संभव नहीं है। अगर हम गतिविधियां खोलने की अनुमति देते हैं तो मामले उतने ही बढ़ जाएंगे जितने कि अभी सिडनी में हैं।’’


ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े शहर सिडनी में बुधवार को संक्रमण के 344 नए मामले आए। संक्रमण के सबसे अधिक 356 मामले मंगलवार को सामने आए थे। रातभर में कोविड-19 के दो मरीजों की मौत हो गयी।


सिडनी में 26 जून को लगाए गए लॉकडाउन की अवधि 28 अगस्त को खत्म होनी है लेकिन संक्रमण के प्रसार पर काबू पाने की उम्मीदें फीकी पड़ रही हैं।


बहरहाल, न्यू साउथ वेल्स की प्रमुख ग्लेडी बेरेजिकलियान ने कहा कि सितंबर से 50 लाख की आबादी वाले शहर के कुछ हिस्सों में उन निवासियों को पाबंदियों से छूट मिल सकती है जिन्होंने टीका लगवा लिया है।






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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड-19 रोधी टीके की दूसरी खुराक ली

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कोविड-19 रोधी टीके की दूसरी खुराक ली और सभी लोगों से टीका लगवाने की अपील की।


योगी ने इसकी जानकारी देते हुए ट्वीट किया, '' आज स्वदेशी कोविड-19 रोधी टीके की दूसरी खुराक लेकर मन प्रफुल्लित है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में टीके का यह 'सुरक्षा कवच' सभी नागरिकों को मुफ्त प्रदान किया जा रहा है।''


उन्होंने जनता से टीके लगवाने की अपील करते हुए कहा, '' आप सभी लोग भी अपना क्रम आने पर अवश्य लगवाएं 'टीका जीत का' । तभी कोरोना हारेगा, भारत जीतेगा।''


इससे पहले, मुख्यमंत्री ने गत पांच अप्रैल को कोविड-19 रोधी टीके की पहली खुराक ली थी। 






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देश में कोविड टीकाकरण का आंकड़ा 47 करोड़ से अधिक

नई दिल्ली : देश में कोरोना महामारी पर नियंत्रण के उपायों के तहत कोविड-19 के टीकाकरण का आंकड़ा 47 करोड़ से अधिक हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि रविवार सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 55 लाख 71 हजार 565 सत्रों में कोविड-19 वैक्सीन के 47 करोड़ 02 लाख 98 हजार 596 डोज लाभार्थियों को दिये जा चुके हैं। पिछले 24 घंटों में वैक्सीन के 60 लाख 15 हजार 842 डोज दिये गये हैं। बयान में कहा गया है कि टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मुफ्त में कोविड के टीके उपलब्ध करा रही है।



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बच्चों की वैक्सीन

बच्चों के टीकाकरण को लेकर पिछले कुछ दिनों में कई तरह की खबरें आईं। कहा गया कि सितंबर माह से बच्चों को टीका लगना शुरू हो जाएगा। मगर स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने अगस्त माह से ही बच्चों को टीका लगाने की बात कही है। अगर यह सही है तो इसे उत्साहवद्र्धक तो माना जाना चाहिए। कोरोना की तीसरी लहर सिर पर है, विशेषज्ञ लाख कहें कि बच्चों को इससे फर्क नहीं पड़ेगा, पर बीमारी का जो स्वरूप है, उसने माता-पिता की चिंता बढ़ा रखी है। पूरी दुनिया यह मान चुकी है कि कोरोना से सिर्फ वैक्सीन ही बचा सकती है, दूसरे देशों में तो बच्चों को टीका लगना शुरू भी हो चुका है। सिर्फ भारत ही अब तक पीछे था। स्वास्थ्य मंत्री अब कह रहे हैं कि अगस्त माह में बच्चों का टीका मिल जाएगा तो इसे सकारात्मक ही लेना होगा। 


बच्चों के टीके को लेकर व्यापक स्तर पर सावधानी की जरूरत भी होगी। जाहिर है केंद्र सरकार इस पैमाने पर ध्यान दे रही होगी। कोरोना के दैनिक आंकड़े कम होने के बाद एक बार फिर बढऩे लगे हैं। खुद स्वास्थ्य मंत्रालय लोगों को चेतावनी दे रहा है। सरकार बराबर कह रही है कि पाबंदियां हटने का मतलब कोरोना खत्म नहीं माना जाए। पाबंदियां खत्म होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए कि अब कोई खतरा नहीं रह गया है। बल्कि तीसरी लहर कब दस्तक दे दे, कोई नहीं जानता। वैसे इसका अनुमान अगस्त से अक्टूबर के बीच का है। इसे देखते हुए खतरा अब ज्यादा बड़ा है। अगर लोगों की भीड़ अचानक बढऩे लगी तो फिर से कहीं नया जोखिम न खड़ा हो जाए। दरअसल आशंकाओं के पीछे कई कारण हैं। दुनिया के कई शहरों में देखा जा चुका है कि पाबंदियां हटाने के बाद लोग एकदम से निकल पड़े और फिर अगली लहर ने हमला बोल दिया। ब्रिटेन सबसे बड़ा उदाहरण है। कई महीनों के लॉकडाउन के बाद ब्रिटेन में लगने लगा था कि संक्रमण की लहर कमजोर पड़ चुकी है। इसलिए पाबंदियां पूरी तरह से हटा ली गई थीं।


 मेट्रो, बसें पहले की तरह ही शुरू कर दी गईं। इससे भीड़ बढ़ती गई। इसका नतीजा यह हुआ कि कोरोना का नया रूप सामने आ गया और तेजी से फैल गया। न सिर्फ ब्रिटेन में बल्कि वहां से दुनिया के कई देशों में पहुंच गया। ब्रिटेन के इस सबक को हमें भूलना नहीं चाहिए। भारत में चौथा सीरो सर्वे एक बात और बता रहा है। वह यह कि हमारे यहां अभी भी 40 करोड़ लोगों में प्रतिरोधी क्षमता विकसित नहीं हुई है। इन लोगों को संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा है। 40 करोड़ की आबादी कम नहीं होती। फिर विषाणु के नए-नए रूप जिस तेजी से मिल रहे हैं, वह और बड़ा खतरा है। इसलिए इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती कैसे भी करके लोगों को संक्रमण से बचाने की है। कामधंधों के मद्देनजर बेशक पाबंदियां हटाना जरूरी है। स्कूल खुलना भी जरूरी है। लोग महामारी की मानसिक पीड़ा भी भुगत चुके हैं। पर साथ ही जो बात सबसे ज्यादा चिंता पैदा करती है, वह लोगों के लापरवाह बर्ताव को लेकर है। बाहर निकलते समय मास्क नहीं लगाना गंभीर समस्या बनता जा रहा है। ऐसे में घरों में बैठे बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा है। लोग दिनभर लापरवाही से बाहर घूमकर घरों में जाते हैं तो संक्रमण साथ ले जाते हैं। 18 साल से ऊपर के लोगों को तो वैक्सीन गंभीर संक्रमण से बचा लेगी, मगर जो बच्चे बिना वैक्सीन के घरों में हैं, उन पर संकट तो बढ़ेगा ही। कहने को पुलिस मास्क नहीं पहनने वालों पर जुमार्ना भी लगाती है। फिर भी लोग बेपरवाह हैं। 


जहां तक टीकाकरण का सवाल है तो भारत की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। टीकाकरण का आंकड़ा भले चवालीस करोड़ पहुंच रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि देश में दस फीसद वयस्कों को भी टीके की दोनों खुराकें नहीं लगी हैं। एक खुराक लेने वाले वयस्कों का आंकड़ा अभी भी कुल आबादी का सिर्फ एक तिहाई ही है। ज्यादातर राज्यों में टीकाकरण सुस्त पड़ा है। राजधानी दिल्ली में ही इन दिनों कोविशील्ड टीके की पहली खुराक देने का काम बंद है। ऐसे में रास्ता एक ही है और वह यह कि हम खुद ही अपना बचाव करें। बेवजह बाहर न निकलें और कोविड व्यवहार के नियमों का सख्ती से पालन करने की आदत डाल लें। यही संक्रमण की लहरों से बचाएगा। बच्चों का मामला ज्यादा ही संवेदनशील है। दो से छह साल तक के बच्चे तो अपनी तकलीफ बयां भी नहीं कर पाते। परीक्षणों और इलाज की जटिल प्रक्रियाओं के दौर से गुजरना बच्चों के लिए कितना पीड़ादायक होता होगा, यह कल्पना से परे है। बच्चों पर महामारी का खतरा इसलिए भी बना हुआ है कि अगर घर में किसी एक या उससे ज्यादा सदस्य संक्रमण से ग्रस्त हो जाएं तो बच्चों को इसकी जद में आते देर नहीं लगती। दूसरी लहर में ऐसे मामले देखे भी गए। जाहिर है, अगर बच्चों को टीका लगा होगा तो काफी हद तक बचाव रहेगा। लेकिन यहां पर भी एक मुश्किल यह है कि भारत अभी टीकों की कमी से जूझ रहा है। कंपनियां एकदम से मांग पूरी कर पाने की स्थिति में हैं नहीं। फिर जैसे बड़ों के लिए प्राथमिकता समूह तय किए गए, उस तरह बच्चों में तो कोई समूह नहीं बनाया जा सकता। बारह से अठारह साल के किशोरों की संख्या चौदह से पंद्रह करोड़ के बीच बैठती है। यानी बच्चों के लिए अलग से तीस करोड़ टीके और चाहिए। इसलिए दो से अठारह साल के बच्चों के लिए पर्याप्त टीकों का उत्पादन जरूरी है। वरना टीके के लिए लोग आज जैसे धक्के खा रहे हैं, तब लोग अपने बच्चों को लेकर परेशान होते दिखेंगे।


-सिद्वार्थ शंकर-






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टीकों की वैश्विक असमानता को दूर करने के लिए एक प्रभावी तंत्र की जरूरत : भारत

संयुक्त राष्ट्र : कोविड-19 टीकों की वैश्विक असमानता को दूर करने के लिए एक प्रभावी तंत्र की जरूरत पर जोर देते हुए भारत ने कहा कि वायरस के स्वरूप में और बदलाव को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान की आवश्यकता है और वैश्विक समुदाय के साथ अपना ‘कोविन’ मंच साझा करने की पेशकश की। फ्रांस की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बंद कमरे में कोविड-19 स्थिति पर प्रस्ताव 2565 पर सोमवार को चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरूमूर्ति ने ट्विटर पर बताया कि सुरक्षा परिषद में कोविड-19 पर चर्चा में उन्होंने कहा कि टीके की वैश्विक असमानता को दूर करने के लिए एक प्रभावी तंत्र और वायरस के स्वरूप में और बदलाव को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि टीके को लेकर लोगों की गलतफहमियों को दूर करने के लिए तथ्यों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, साथ में भारत ने कोविन मंच की पेशकश भी की। उन्हेांने बताया कि कोविड रोधी टीकाकरण के लिए कोविन भारत का प्रौद्योगिकी मंच है। इस महीने के शुरू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कोविन को एक खुले साधन के तौर पर तैयार किया जा रहा है ताकि यह सभी देशों के लिए उपलब्ध हो। मोदी ने कहा कि भारत महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपनी विशेषज्ञता और स्रोतों को वैश्विक समुदाय के साथ साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस साल फरवरी में सुरक्षा परिषद ने कोविड-19 प्रस्ताव को अपनाया था। इसमें सशस्त्र संघर्ष स्थितियों, संघर्ष के बाद के हालात और जटिल मानवीय आपात स्थितियों में कोविड-19 टीकों तक समान और किफायती पहुंच के लिए राष्ट्रीय और बहुपक्षीय दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया गया है। संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि निकोलस डे रिविरे ने ट्विटर पर कहा कि प्रस्ताव 2532 को अपनाने के एक साल के बाद सुरक्षा परिषद ने कोविड स्थिति पर बैठक की। प्रस्ताव 2532 को जुलाई 2020 में सुरक्षा परिषद ने स्वीकार किया था, जिसमें दुनिया भर में कोविड-19 के विनाशकारी प्रभाव पर चिंता जताई गई थी, खासकर उन देशों में जहां सशस्त्र संघर्ष की वजह से तबाही मची है या वे मानवीय संकट से जूझ रहे हैं। साथ में तत्काल दुश्मनी को खत्म करने की मांग की गई थी। फ्रांसीसी राजदूत ने कहा कि कुछ प्रगति हुई है लेकिन यह इतनी नहीं है जिस पर संतोष किया जा सके। 






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ब्राजील ने आपातकाल में कोवैक्सीन के इस्तेमाल का अनुरोध किया खारिज

हैदराबाद : भारत बायोटेक के कोविड-19 टीके 'कोवैक्सीन' के प्रस्तावित क्लिनिकल ट्रायल को निलंबित किए जाने के बाद ब्राजील ने आपातकाल में इस टीके के इस्तेमाल को अनुमति देने का अनुरोध ठुकरा दिया है।


टीका निर्माता कंपनी ने ब्राजील में अपने साझेदारों के साथ करार रद्द कर दिया था, जिसके बाद दक्षिण अफ्रीकी देश ने यह फैसला किया। ब्राजील की राष्ट्रीय स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी 'अन्विसा' की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, इसके कॉलेजिएट बोर्ड ने ''कोवैक्सीन टीके के प्रायोगिक आधार पर आपातकालीन उपयोग को अस्थायी रूप से अधिकृत करने संबंधी प्रक्रिया को बंद करने का'' शनिवार को सर्वसम्मति से निर्णय लिया।


इससे पहले, अन्विसा ने कोवैक्सीन का क्लीनिकल परीक्षण निलंबित कर दिया था। दक्षिण अमेरिकी देश के स्वास्थ्य नियामक ने बताया था कि वहां उसके साझेदार के साथ कंपनी का समझौता समाप्त किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।


अन्विसा ने कहा, ''भारतीय कंपनी भारत बायोटेक लिमिटेड इंटरनेशनल ने सूचित किया कि अब नेसेसिदेद कंपनी ब्राजील में भारत बायोटेक का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत नहीं है, जिसके बाद यह फैसला किया गया।''


ब्राजील की कंपनी नेसेसिदेद ने कोवैक्सीन के आपालकाल में इस्तेमाल को अधिकृत करने का अनुरोध किया था, जिसे अन्विसा ने ठुकरा दिया। भारत बायोटेक ने ब्राजीलियाई बाजार के लिए अपने कोविड-19 रोधी टीके कोवैक्सीन को लेकर प्रेसिसा मेडिकामेन्टोस एंड एन्विक्सिया फार्मास्युटिकल्स एलएलसी के साथ हुए समझौता ज्ञापन को रद्द करने की 23 जुलाई को घोषणा की थी।


ब्राजील सरकार के साथ टीकों की दो करोड़ खुराक की आपूर्ति के सौदे के विवादों में आने और ब्राजील में प्राधिकारियों द्वारा जांच शुरू करने के बाद यह समझौता खत्म किया गया। भारत बायोटेक ने 26 फरवरी को कहा था कि उसने 2021 की दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान कोवैक्सीन की दो करोड़ खुराकों की आपूर्ति करने के लिए ब्राजील सरकार के साथ एक समझौता किया है। भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद ब्राजील सरकार ने कोवैक्सीन का ऑर्डर अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया है।


भारत बायोटेक ने अपने ब्राजीलियाई साझेदारों के साथ समझौता समाप्त किए जाने की घोषणा करते हुए कहा था कि भारत बायोटेक कोवैक्सीन के लिए नियामक संबंधी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए ब्राजीलियाई दवा नियामक संस्था अन्विसा के साथ काम करती रहेगी।








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अमेरिका में टीकाकरण के बाद भी मास्क पहनने की सलाह

वाशिंगटन : व्हाइट हाउस के मुख्य चिकित्सा सलाहकार एंथनी फौसी ने रविवार को कहा कि यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन अपने कोविड दिशानिर्देशों में संशोधन कर रहा है ताकि पूरी तरह से टीका लगाए गए लोगों को भी सार्वजनिक रूप से मास्क पहनने की सलाह दी जा सके। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, फौसी ने सीएनएन को बताया कि उन्होंने दिशानिर्देशों में बदलाव के बारे में बातचीत में हिस्सा लिया है, जिसे उन्होंने सक्रिय विचार के तहत बताया है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानीय क्षेत्र जहां संक्रमण दर बढ़ रही है, पहले से ही लोगों से टीकाकरण की स्थिति की परवाह किए बिना सार्वजनिक रूप से मास्क पहनने का आग्रह कर रहे हैं। संयुक्त राज्य भर में गैर-टीकाकृत लोगों के बीच कोविड मामले, मृत्यु और अस्पताल में भर्ती होना जारी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कम टीकाकरण दरों और तेजी से डेल्टा वेरिएंट में हालिया उछाल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।






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टीके की 3.09 करोड़ से अधिक खुराकें मौजूद हैं राज्यों, निजी अस्पतालों के पास

नई दिल्ली : केन्द्रीय स्वाथ्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास कोरोना वायरस संक्रमण रोधी टीके की 3.09 करोड़ से अधिक खुराकें हैं, जो इस्तेमाल नहीं हुई हैं।


मंत्रालय ने बताया कि अब तक सभी माध्यमों से 45.37 करोड़ से अधिक खुराकें राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को मुहैया कराई गई हैं और 59,39,010 अन्य खुराकें दी जाने वाली हैं। अब तक कुल 42,28,59,270 खुराकों की खपत हो चुकी है, जिनमें इस्तेमाल हुई और बर्बाद गई दोनों ही खुराके शामिल हैं।


गौरतलब है कि देश में 21 जून से नया टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। 




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राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, निजी अस्पतालों के पास 3.20 करोड़ से अधिक टीके उपलब्ध : केंद्र

नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बताया कि राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास अभी 3.20 करोड़ से अधिक कोविड-19 रोधी टीके उपलब्ध हैं। मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के हवाले से बताया कि राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को अभी तक सभी माध्यमों से कुल 43,79,78,900 टीके मिल चुके हैं और 7,00,000 टीके दिए जाने हैं। अभी तक बर्बाद हो चुके टीकों समेत कुल 40,59,77,410 टीकों की खपत हो चुकी है। मंत्रालय ने बताया कि राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास 3.20 करोड़ से अधिक (3,20,01,490) टीके उपलब्ध हैं। उसने कहा कि केंद्र सरकार टीकाकरण की गति बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोविड-19 टीकाकरण का नया चरण 21 जून 2021 से शुरू हुआ था। देशव्यापी अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 रोधी निशुल्क टीके उपलब्ध करा रही है।




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यूपी में झांसी के दो गावों में सौ फीसदी टीकाकरण

झांसी : उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के दो गांवों में शत प्रतिशत टीकाकरण किया जा चुका है। यहां के मोठ तहसील के खैरेला गांव में 18 साल से ऊपर के सभी 310 लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगाई जा चुकी है। इसके पहले यहीं के नोटा गांव में सौ प्रतिशत टीकाकरण हो चुका है। झांसी जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार विकासखंड मोठ के ग्राम पंचायत खरैला में इस समय 86 परिवार रहते हैं। गांव की जनसंख्या 568 हैं, जिसमें 18 से ऊपर के युवाओं की जनसंख्या 310 है। खरैला में कोविड टीकाकरण के जरिए 310 ग्रामवासियों को कोरोना के बचाव के लिए प्रथम वैक्सीन लगाई जा चुकी है। बताया गया कि 18 से 44 वर्ष के 205 और 45 से अधिक आयु के 105 लोगों का कोरोना वैक्सीनेशन का कार्य किया जा चुका है। इसमें 147 महिलाएं और 163 पुरुष थे। ऐसे में ये गांव भी 100 प्रतिशत कोरोना टीकाकरण कराने के मामले में झांसी में अग्रणी पंचायत बन गया है। बता दें कि सबसे पहले बंगरा ब्लॉक के नोटा गांव को जिले में ये उपलब्धि हासिल हुई। झांसी के डीएम आंद्रा वामसी ने बताया, यह एक बड़ी उपलब्धि है कि ग्राम पंचायत को प्राप्त टीके की एक भी खुराक बर्बाद नहीं हुई। शुरू में ग्रामीणों के मन में वैक्सीनेशन को लेकर भ्रम था। लेकिन बाद में लोगों को समझाने और प्रचार प्रसार के बाद जागरूकता आयी है। इस गांव में 18 साल से ऊपर हर आयु वर्ग का कोविड वैक्सीनेशन 100 फीसदी कर लिया गया। गांव के सभी 2,447 ग्रामीणों को कोविड वैक्सीनेशन की पहली डोज लग गई है। उन्होंने बताया कि झांसी के बांगरा ब्लॉक का नोटा गांव में टीकाकरण के जरिए 2447 ग्रामवासियों को पहली डोज दी जा जा चुकी है। वैक्सीन लगवाने वालों में 18 से 44 आयु वर्ग के 1,457 एवं 44 वर्ष से अधिक आयु के 990 लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई। इसमें 966 महिलाएं और 1,481 पुरुष शामिल हैं। नोटा में 773 परिवार रहते हैं। गांव की कुल जनसंख्या 4523 हैं जसिमें 18 से ऊपर के युवाओं की कुल जनसंख्या 2713 है। डीएम ने बताया कि सौ फीसद टीकाकरण में निगरानी समिति, आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकतार्ओं, अन्य स्वयंसेवी संगठनों और ग्रामीणों की अहम भूमिका रही। जिन्होंने टीकाकरण के लिए अपना साहस और इच्छा दिखाई और 100 फीसदी गांववालों का वैक्सीनेशन किया। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने ग्राम निगरानी समिति का गठन किया। जन जागरूकता फैलाकर ग्रामीणों के भय को दूर करने के लिए कार्यक्रम चलाए। प्रशासन ने इन जागरूकता कार्यक्रमों को चलाने के लिए एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और अन्य स्वयंसेवी संगठनों को भी शामिल किया।





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वैक्सीन की कमी के चलते ऑनलाइन केंद्र बंद किए गए

गाजियाबाद : जिले में वैक्सीन की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऑनलाइन केंद्र बंद कर दिए गए हैं। इसमें 18 से 44 साल तक की उम्र के लोगों के लिए बुकिंग स्लॉट कम कर दिए गए हैं। इसी के चलते केंद्रों पर लक्ष्य से 20 से 30 फीसदी कम वैक्सीन मिल रही हैं, जिस कारण लोगों को बिना वैक्सीन के वापस लौटना पड़ रहा है।


कोरोना वैक्सीन की किल्लत जिले में पिछले 20 दिनों से देखने को मिल रही है। जहां जिले में 120 टीकाकरण केंद्र तैयार किए गए थे, वहीं अब केवल 40 से 50 ही केंद्र सक्रीय रह गए हैं। इसमें भी वैक्सीन की उपलब्धता के कारण दस से 15 केंद्र बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नजदीकि केंद्र बंद हो जाने के कारण लोगों को अन्य दूसरे केंद्रों पर वैक्सीन के लिए जाना पड़ता है, जहां वैक्सीन की कमी और निर्धारित स्लॉट की वैक्सीन होने के कारण लोगों को बिना टीका लगवाए ही वापस लौटना पड़ता है। 


दरअसल मंडल स्तर से ही जिले को वैक्सीन कम मात्रा में भेजी जा रही है। ये हाल गाजियाबाद ही नहीं अन्य जिलों में भी चल रहा है। वैक्सीन की कमी को देखते हुए अधिकांश लोग ऑनलाइन स्लॉट बुक करने में जुटे रहते हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोविन एप पर बुकिंग की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया गया है। अधिकांश केंद्रों पर बुकिंग बंद कर दी गई है। 


वहीं कुछ केंद्रों पर केवल 60 से अधिक उम्र के लोगों का स्लॉट उपलब्ध रहता है। 18 से 44 साल तक की उम्र के लोगों के लिए परेशानी अधिक हो गई है, इस वर्ग के लोग बिना ऑनलाइन बुकिंग के वैक्सीन नहीं लगवा सकते हैं। वहीं विभाग की ओर से इस वर्ग के लिए ऑनलाइन बुकिंग के दस केंद्र बंद कर दिए गए हैं, जिससे लोग बुकिंग न कर सकें और केंद्रों पर भीड़ जमा न हो। इसी के चलते अधिकांश केंद्रों पर अब केवल 45 से अधिक लोगों को ही वैक्सीन लग रही है, जिन केंद्रों पर 18 से 44 आयु वर्ग के लिए बुकिंग हो रही है। वहां अन्य वर्ग के लिए बुकिंग नहीं हो रही।


नई खुराक पर लगाई लगाम : वैक्सीन के बचाव के लिए पहली खुराक वालों के लिए ऑनलाइन बुकिंग के लिए केवल तीन केंद्रों पर बुकिंग की जा रही है। इसमें जिला संयुक्त अस्पताल, जिला महिला अस्पताल और भोजपुर पीएचसी हैं। अन्य सभी केंद्रों पर दूसरी खुराक के लिए बुकिंग की जा रही है। वैक्सीन के लिए मारामारी कम रहे। इसलिए अभी पहली खुराक के लिए ऑनलाइन बुकिंग रोक दी गई हैं।


नोडल अधिकारी (कोविड टीकाकरण) डॉ. जीपी माथुरिया ने कहा कि जिले में वैक्सीन की अभी कमी चल रही है। इसलिए केंद्र कम किए गए हैं। वैक्सीन की पर्याप्त मात्रा मिलने पर बुकिंग और केंद्र बढ़ा दिए जाएंगे।

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बिना टीका वाले सबसे ज्यादा बच्चे भारत में : यूनिसेफ

नई दिल्ली : दुनिया भर में कोविड-19 महामारी के बीच यूनिसेफ ने कहा कि ऐसे बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा भारत में है जिन्हें कोई टीके नहीं लगा है। इसके साथ ही इनकी संख्या बढ़कर 35 लाख हो गयी है और 2019 की अपेक्षा इस संख्या में 14 लाख की वृद्धि हुई है।


संयुक्‍त राष्‍ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने एक बयान में कहा कि भारत में 2020 में 30 लाख से अधिक बच्चे ऐसे थे जिन्हें कोई टीका नहीं लगा। इसमें कहा गया है कि पिछले दस वर्षों में किसी भी नियमित टीकाकरण में विफलता के मामले में दक्षिण एशिया सबसे ऊपर रहा और 2020 में ऐसे बच्चों की संख्या करीब 44 लाख थी।


बयान के अनुसार ऐसे 30 लाख से अधिक बच्चे भारत में थे जिन्हें कोई खुराक नहीं मिली थी। यूनिसेफ ने कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि दुनिया के कुल मामलों में से 62 प्रतिशत सिर्फ 10 देशों में है जिनमें बच्चों को कोई टीका नहीं मिला या उन्हें विभिन्न टीकों की पूरी खुराक नहीं मिली।


बच्चों के वैश्विक निकाय ने कहा कि भारत कोविड-19 से भी काफी प्रभावित रहा है। उसने कहा कि भारत में असुरक्षित बच्चों की संख्या 35 लाख थी जो दुनिया में सबसे ज्यादा थी। 2019 में ऐसे असुरक्षित बच्चों की संख्या 21 लाख थी। असुरक्षित बच्चे वे हैं जिन्हें कोई टीका नहीं लगा है या जिन्हें विभिन्न टीकों की सभी खुराकें नहीं मिली हैं। बयान में कहा गया है कि 2020 में पाकिस्तान में 13 लाख असुरक्षित बच्चे थे।




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कोलकाता में दुर्गा पूजा की तैयारी शुरू, सभी संबंधित लोगों को तीन माह के भीतर लगेंगे टीके

कोलकाता : कोलकाता में सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियां सुनश्चित करेंगी कि अनुष्ठान और अन्य संबंधित कार्यों में शामिल सभी लोगों को अगले तीन महीने के भीतर कोवड-19 रोधी टीके लग जाएं। 'फोरम फॉर दुर्गोत्सव' के अधिकारी पार्थ घोष ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि पूजा समितियां ये सुनिश्चित करेंगी कि पंडालों में आ रहे सभी लोग मास्क पहनें और सामाजिक दूरी बनाए रखें। उन्होंने कहा, ''हमारे सदस्यों और स्थानीय लोगों से लेकर पंडालों में बार-बार आने वाले कारीगरों, पुजारियों, ढाकी और बिजली मिस्त्रियों तक सभी को अगले तीन महीनों में कोविड-19 रोधी टीके लगवाने होंगे। हम उम्मीद कर रहे हैं कि सभी को दोनों खुराक मिल जाएंगी, लेकिन पूजा से दो-तीन दिन पहले गांवों से आने वाले ढाकी (पारंपरिक ढोलकिया) के लिए, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें कम से कम एक खुराक लगा दी जाए।'' 'फोरम फॉर दुर्गोत्सव' कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में 550 सामुदायिक दुर्गा पूजा का प्रमुख संगठन है। उसने उत्सव के आयोजन के समय कोविड-19 सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। पंडालों का निर्माण इस तरह से किया जाएगा कि दिशा-निर्देशों के तहत श्रद्धालु दूर से ही मूर्तियों को देख सकें और निकट न जाएं। उन्होंने कहा, ''पुष्पांजलि' के लिए कटे हुए फल चढ़ाने की अनुमति नहीं होगी और अनुष्ठान के दौरान शारीरिक दूरी बनाए रखनी होगी।'' सरकार को जो दिशानिर्देश प्रस्तुत किए जाएंगे, वे पिछले साल कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित नियमों से मिलते-जुलते हैं, जिसने पंडालों में लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके साथ ही, शहर में दुर्गा पूजा समितियां ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित करने पर भी ध्यान केन्द्रित कर रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोग घर से ही कलाकृतियों को देख सकें। उत्सव इस साल 12 अक्टूबर को महा सप्तमी पर शुरू होगा और 15 अक्टूबर विजय दशमी तक चलेगा।




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कोरोना मरीजों की बढती संख्या के पीछे फर्जी टीकाकरण?

कोरोना महामारी से बचाव हेतु शासन ने टीकाकरण अनिवार्य कर दिया है। राशन से लेकर अन्य सुविधायें पाने के लिए भी टीकाकरण का प्रमाण पत्र आवश्यक है। जागरूकता लाने के नाम पर भारी धनराशि खर्च की जा रही है। सुविधाओं से वंचित होने का खतरा और कोरोना के बढते मरीजों की संख्या के डर से टीकाकरण केन्द्रों पर सुबह से ही लम्बी लम्बी लाइनें लगने लगीं है। मगर कर्मचारियों की लापरवाही और टीके की कमी ने अफरातफरी का माहौल बना दिया है। हजारों लोगों की लाइन में केवल सैकडों लोगों को ही टीका लग पा रहा है। बाकी लोग मायूस को कर लौट रहे हैं। प्रभावशाली लोगों को बिना लाइन के ही टीके लग जाते हैं। ऐसे में आये दिन झगडे हो रहे हैं।


 एक ओर टीकों की किल्लत और दूसरी ओर सिफारिशी फोन लगवाने वालों की निरंतर बढती संख्या ने अभियान की व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह अंकित कर दिये हैं। केन्द्रों पर डियूटी करने के लिए निर्धारित कर्मचारी भी अपनी मनमर्जी से पहुंचते हैं। इस लेटलतीफी से भी केन्द्रों पर सुबह से इंतजार कर रहे लोगों में आक्रोश पनपने लगता है। उत्तरदायी अधिकारियों व्दारा आम आवाम का फोन न उठाना, तो एक आम बात है। एप के माध्यम से स्लाट बुक करवाने वालों के लिए केन्द्रों पर कोई अतिरिक्त काउण्टर नहीं होने से उन्हें भी बिना स्लाट बुक करने वालों की भीड में ही जद्दोजेहद करना पडती है। देश के अधिकांश केन्द्रों में ऐसी ही स्थिति है। साइबर युग में स्वयं को अग्रणीय दिखाने के लिए टीकाकरण हेतु एप लांच किया गया है परन्तु केन्द्रों पर एप का औचित्य हाशिये पर पहुंच गया है। इसके अलावा एक बेहद खतरनाक स्थिति की सूचनायें मिल रहीं है जिसमें अनेक गांवों के कोटेदारों, पंचायत सचिवों और स्वास्थकर्मियों को संयुक्त रूप से आरोपों के घेरे में लिया जा रहा है। 


जब से नि:शुल्क राशन सहित अन्य सुविधाओं के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया है, तब से राशन वितरण करने और अन्य सुविधायें उपलब्ध कराने वालों की अतिरिक्त आय पर विराम लग गया है। गांव के ज्यादातर लोग टीका नहीं लगवाना चाहते है और राशन सहित सभी सुुविधायें लेना चाहते है। ऐसे में अनेक कोटेदारों, पंचायत सचिवों तथा स्वास्थकर्मियों नेे एक सुनिश्चित योजना बनाकर आंकडों की बाजीगरी दिखाना शुरू कर दी। इसके पीछे अनेक कारण हैं। कोटोदारों  की  अतिरिक्त आय पर विराम लग गया, पंचायत सचिवों और स्वास्थकर्मियों पर तेजी से टीकाकरण करने का आधिकारिक दवाव है। दूसरी ओर गांवों में लोग टीका लगवाने के लिए तैयार हो ही नहीं रहे हैं। लोगों के इस उपेक्षात्मक रवैये के पीछे संचार माध्यमों से टीके के प्रतिकूल प्रभावों का प्रचार काम कर रहा है। ऐसे में आरोप है कि अनेक कोटेदारों, पंचायत सचिवों और स्वस्थकर्मियों ने फर्जी आंकडे तैयार करने हेतु संयुक्त रूप से एक योजना बनाई।


 कोटेदार ने गांव के लोगों को मोबाइल सहित पंचायत भवन में बुला, सचिव और स्वास्थकर्मी ने हितग्राही के मोबाइल सहित अन्य दस्तावेजों से औपचारिकतायें पूरी की और संयुक्त रूप से एक राय होकर टीका लगाये बिना ही टीकाकरण के आंकडे तैयार कर लिये गये। इस पूरी प्रक्रिया में बचे टीकों को निजी अस्पतालों में बेचना की भी चर्चा भी सामने आ रही है क्यों कि एडवांस टीकाकरण हेतु अतिरक्ति डोज लगवाने पर भी संचार माध्यमों पर खासा जोर दिया जा रहा है। ऐसे में यदि फर्जी टीकाकरण प्रमाणपत्र वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है तो टीका की प्रमाणिकता पर हंगामा मचाने वाले गला फाडने लगते है। इस तरह की निरंतर मिलने वाली सूचनाओं से चिन्ता के बादल मडराने लगते हैं। कोरोना के मिलने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा होने के पीछे यह भी एक महात्वपूर्ण कारक हो सकता है परन्तु अभी तक ऐसी जांच पध्दति विकसित नहीं हुई है जो यह बता सके कि अमुक व्यक्ति को वास्तव में टीका लगा है या नहीं। फर्जी टीकाकरण जैसे कारकों के पीछे उत्तरदायी लोगों की मानसिकता है जो शासकीय दायित्वों की कागजी पूर्ति हेतु नित नये हथकंडे अपनातेे है। देश के प्रशासनिक व्यवस्था में लगे लोगों की मानसिकता बदले बिना कोई भी योजना, अभियान या कार्यक्रम धरातल पर सफल नहीं हो सकता। कागजी आंकडों से तो शतप्रतिशत सफलता ही अंकित होती रही है और हो भी रही है। 


इसी कारण आम आवाम भी सरकार को एक अलग दृष्टिकोण से देखती है। वर्तमान समय में सरकार का स्थाई कर्मचारी या अधिकारी होना, सुरक्षित भविष्य की गारंटी है भले ही दायित्वों की पूर्ति की जाये या न की जाये। कर्तव्यों को निर्वहन हो या न हो। देश में किसी को भी सरकारी नौकरी से निष्कासित कर पाना सहज नहीं है। कोर्ट, अपील, मानवाधिकार, अल्पसंख्यक आयोग, महिला आयोग जैसी अनेक संस्थाओं की पेचैंदगी भरी प्रक्रिया लागू होने से सरकारी सेवक स्वयं को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस करता है। कार्यकाल के दौरान मनमाने आचरण करने वाले सेवा निवृत्ति के बाद भी एक मुस्त भारी धनराशि और जीवन भर निरंतर पेंशन राशि के हकदार होते हैं। जब कि प्राइवेट नौकरी, व्यापार या खेती करने वाले जीवन के अंतिम समय तक जीवकोपार्जन के लिए संर्घष करते रहते हैं, भले ही शरीर में सामर्थ हो या नहो। वर्तमान समय में सरकारी नौकरी किसी भगवान के वरदान से कम नहीं है। यही कारण है कि दूर दराज के गांवों में टीकाकरण के स्थल निरीक्षण हेतु नियुक्त अधिकारी अपने वातानुकूलित कमरों में बैठकर ही धरातली कर्मचारियों की आख्या पर प्रमाणिकता की मुहर लगा देते हैं। कागजी आंकडे तैयार करने में माहिर प्रशासनिक अधिकारी दैनिक आख्या में अपने-अपने क्षेत्र की कीर्तिमानी उपलब्धियों पर एक दूसरे की पीठ ठोक रहे हैं। ऐसे में कोरोना के बढ रहे मरीजों के पीछे फर्जी टीकाकरण की संभावना बलवती हो रही हैं। इस यक्ष प्रश्न को सुलझाये बिना वास्तविक स्थिति तक पहुंचना बेहद कठिन होगा। इस सप्ताह बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।




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