उप्र में कोविड वैक्सीनेशन 09 करोड़ 97 लाख के पार

लखनऊ : विगत 24 घंटे में हुई 02 लाख 15 हजार 209 सैम्पल की टेस्टिंग में 14 नए मरीजों की पुष्टि हुई। इसी अवधि में 26 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। प्रदेश में अब तक 16 लाख 86 हजार 694 प्रदेशवासी कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर स्वस्थ हो चुके हैं।


यह जानकारी अपर मुख्य सचिव 'सूचना' नवनीत सहगल ने शनिवार को दी। बताया कि विगत दिवस हुई कोविड टेस्टिंग में 67 ज़िलों में संक्रमण का कोई भी नया केस नहीं मिला। वर्तमान में 177 कोरोना संक्रमितों का उपचार हो रहा है।


कोविड टीकाकरण के लिए प्रदेश की 54.12 प्रतिशत आबादी ने टीके की पहली डोज प्राप्त कर ली है। अब तक 8 करोड़ 14 लाख लोगों को टीके की पहली डोज लगाई जा चुकी है। इसी प्रकार, 01 करोड़ 82 लाख लोगों ने टीके की दोनों खुराक ले ली है।


प्रदेश में कुल कोविड वैक्सीनेशन 09 करोड़ 97 लाख से अधिक हो चुका है। यह किसी एक राज्य में हुआ सर्वाधिक टीकाकरण है।


उन्होंने बताया कि प्रदेश के 30 जिलों में कोविड का एक भी एक्टिव केस नहीं है। अब तक 07 करोड़ 75 लाख 81 हजार 133 सैम्पल की कोविड जांच की जा चुकी है। यह देश के किसी एक राज्य में हुई सर्वाधिक टेस्टिंग है। औसतन हर दिन सवा दो लाख से ढाई लाख तक टेस्ट हो रहें हैं, जबकि पॉजिटिविटी दर 0.01 फीसदी से भी कम हो गई है और रिकवरी दर 98.7 फीसदी है।


कोविड की अद्यतन स्थिति के अनुसार प्रदेश के 30 जनपदों (अमेठी, अमरोहा, औरैया, अयोध्या, आजमगढ़, बागपत, बलिया, बांदा, बहराइच, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गोंडा, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई, हाथरस, कानपुर देहात, कासगंज, महोबा, मीरजापुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, रामपुर, संतकबीरनगर, शाहजहांपुर, शामली, श्रावस्ती, सीतापुर और सोनभद्र) में कोविड का एक भी मरीज शेष नहीं है। यह जनपद आज कोविड संक्रमण से मुक्त हैं।



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दिव्यांगों, चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को घर पर टीका लगाया जाएगा : सरकार

नई दिल्ली :  सरकार ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि दिव्यांग लोगों तथा चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को उनके घर पर ही कोविड-19 का टीका लगाया जाएगा।


स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश में कोविड-19 की दूसरी लहर अब भी जारी है, भले ही रोजाना नए मामलों में कमी आ रही है।


बहरहाल, उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते सामने आए संक्रमण के कुल मामलों का 62.73 फीसदी अकेले केरल में दर्ज हुए थे। केरल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक लाख से अधिक है।


अधिकारियों ने कहा कि देश में 33 जिलों में फिलहाल संक्रमण दर 10 फीसदी से अधिक है, जबकि 23 जिलों में संक्रमण दर पांच से 10 फीसदी के बीच हैं।


उन्होंने कहा कि आगामी त्योहारों के लिए कोविड-19 दिशानिर्देशों के तहत निरूद्ध क्षेत्रों और पांच फीसदी से अधिक संक्रमण दर वाले जिलों में भीड़भाड़ से बचना होगा।


टीकाकरण अभियान के बारे में उन्होंने कहा कि देश की करीब 66 फीसदी आबादी को टीके की कम से कम एक खुराक दी गई है और 23 फीसदी आबादी का पूरी तरह टीकाकरण हो गया है।


टीकाकरण अभियान में तेजी लाने की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि दिव्यांगों एवं चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को उनके घर पर ही टीका लगाया जाएगा।





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बच्चों का टीका

कोरोना की तीसरी लहर की आहट के बीच देश में 12-18 साल के बच्चों का वैक्सीनेशन अगले महीने शुरू हो जाएगा। कैडिला हेल्थकेयर अगले महीने बच्चों की वैक्सीन जायकोव-डी लॉन्च कर देगी। इसके इमरजेंसी यूज के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने पिछले महीने मंजूरी दे दी थी। जायडस कैडिला अक्टूबर से हर महीने एक करोड़ डोज बनाना शुरू कर देगी। दूसरी तरफ भारत बायोटेक भी बच्चों पर कोवैक्सिन का तीसरे फेज का ट्रायल पूरा कर चुकी है। कंपनी ने कहा है कि वह अगले हफ्ते थर्ड फेज के डेटा डीजीसीआई को सौंप देगी। अभी थर्ड फेज के डेटा का एनालिसिस किया जा रहा है। वहीं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी 2 से 12 साल की उम्र के बच्चों पर कोवावैक्स का दूसरे-तीसरे फेज का ट्रायल कर रही है। कोविड-19 वैक्सीनेशन पर सरकार को सलाह देने वाली कमेटी ने पिछले महीने राय दी थी कि शुरुआत में 12 साल से ज्यादा उम्र के उन बच्चों का वैक्सीनेशन किया जाए, जिन्हें गंभीर बीमारियां हैं। कमेटी का कहना था कि देश में 40 करोड़ बच्चे हैं और सभी का वैक्सीनेशन शुरू किया जाता है तो पहले से चल रहे 18+ के वैक्सीनेशन पर असर पड़ेगा। कमेटी के चेयरमैन एनके अरोड़ा ने कहा था कि पूरी तरह से स्वस्थ बच्चों को वैक्सीनेशन के लिए अभी इंतजार करना होगा। कमेटी की सलाह के मुताबिक पहले उन बच्चों का वैक्सीनेशन किया जाएगा जो किडनी ट्रांसप्लांट, जन्म से कैंसर या हार्ट संबंधी बीमारी के शिकार हैं। दूसरी लहर में जैसी तबाही हुई, उसका सबक यही है कि पूरी आबादी को टीका जल्द से जल्द लग जाए। इस बात पर लगातार गौर करने की जरूरत है कि दूसरी लहर में रोजाना संक्रमण और मौतों के आंकड़ों ने सारे रिकार्ड तोड़ डाले। महामारी का खतरा अभी जस का तस है। फिलहाल बस संक्रमण की दर ही घटी है। दूसरी लहर में भी बच्चों के काफी मामले देखने को मिले। लेकिन गंभीर स्थिति वाले मामलों की संख्या कम रही। फिर, देशी-विदेशी विशेषज्ञों ने यह कह कर चिंता बढ़ा दी कि अक्टूबर-नवंबर तक तीसरी लहर भी आ सकती है। और यह बच्चों के लिए खतरनाक होगी। जाहिर है, बच्चों को बचाना अब पहली प्राथमिकता हो गई है। इसलिए ज्यादातर राज्यों ने अभी से ऐसे इंतजाम शुरू कर दिए हैं कि अगर तीसरी लहर में बच्चे संक्रमण की चपेट में आते हैं तो उन्हें तत्काल इलाज मिल सके। बच्चों का मामला ज्यादा ही संवेदनशील है। दो से छह साल तक के बच्चे तो अपनी तकलीफ बयां भी नहीं कर पाते। परीक्षणों और इलाज की जटिल प्रक्रियाओं के दौर से गुजरना बच्चों के लिए कितना पीड़ादायक होता होगा, यह कल्पना से परे है। बच्चों पर महामारी का खतरा इसलिए भी बना हुआ है कि अगर घर में किसी एक या उससे ज्यादा सदस्य संक्रमण से ग्रस्त हो जाएं तो बच्चों को इसकी जद में आते देर नहीं लगती। दूसरी लहर में ऐसे मामले देखे भी गए। जाहिर है, अगर बच्चों को टीका लगा होगा तो काफी हद तक बचाव रहेगा। कोरोना के फिर से बढ़ते मामलों ने नींद उड़ा दी है। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात तो यह है कि महामारी से निपटने में जिस केरल राज्य को एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा था, वहीं आज हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। पिछले कुछ दिनों से केरल में संक्रमण के रोजाना तीस हजार से ज्यादा मामले मिलना गंभीर स्थिति का संकेत है। इससे तो लग रहा है कि राज्य में महामारी ने फिर से पैर पसार लिए हैं। हालांकि महाराष्ट्र, मिजोरम, तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे राज्यों में भी स्थिति कोई अच्छी नहीं है। महाराष्ट्र में तो रोजाना संक्रमितों की संख्या पांच हजार के आसपास चल रही है। इसलिए महामारी को जरा भी हल्के में लिया गया तो फिर से गंभीर संकट में पडऩे में जरा देर नहीं लगने वाली। हकीकत तो यह है कि दूसरी लहर गई नहीं है। तीसरी का खतरा सामने है। विशेषज्ञ चेता रहे हैं कि अक्टूबर में तीसरी लहर जोरों पर होगी और रोजाना संक्रमितों का आंकड़ा तीन-साढ़े लाख तक पहुंच जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। केरल, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर राज्यों की अभी जो स्थिति है, उससे तो लगता है कि लोगों की बेरोकटोक आवाजाही देश में तीसरी लहर का कारण आसानी से बन सकती है। इसके अलावा बाजारों में भीड़ से लेकर जन आशीर्वाद यात्रा जैसे राजनीतिक आयोजनों तक में कोरोना व्यवहार के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। ऐसे में संक्रमण को फैलने से कौन रोक पाएगा?


सिद्वार्थ शंकर-




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दिल्ली में अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 1.64 करोड़ से अधिक खुराक दी गई

नई दिल्ली : दिल्ली में कोरोना वारयस संक्रमण से निपटने के प्रयासों के तहत सोमवार को 2.10 लाख लोगों को कोविड-19 रोधी टीके लगाए गए, जिनमें से 1.11 लाख लोगों को पहली खुराक दी गई।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 16 जनवरी को टीकाकरण आरंभ होने के बाद से शहर में 1.64 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। करीब 49.98 लाख लोगों को दोनों खुराक दे दी गई हैं।


दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, शहर में मंगलवार सुबह तक टीके की करीब नौ लाख खुराक बची थी, जिनमें से 1.22 लाख 'कोवैक्सीन' और 7.72 लाख 'कोविशील्ड' की खुराक थी।


बुलेटिन में बताया गया कि ये खुराक चार दिन तक चलेंगी। शहर में 1,234 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें रोजाना करीब 3.10 लाख लोगों को टीका लगाया जा सकता है।







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परीक्षणों से पता चला है कि कोविड टीके 5 से 11 साल के बच्चों के लिये सुरक्षित: फाइजर, बायोएनटेक

नई दिल्ली : वैश्विक दवा कंपनियों फाइजर और बायोएनटेक एसई ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 टीकों के परीक्षण के नतीजों से पता चला है कि ये पांच से 11 साल की उम्र के बच्चों के लिये सुरक्षित है और उनमें मजबूत एंटीबॉडी पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि वे जल्द से जल्द नियामक मंजूरी लेने की योजना बना रही हैं।


कंपनियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि पांच से 11 साल की उम्र के बच्चों को 21 दिन के अंतराल पर 10 माइक्रोग्राम की दो खुराकें दी गईं। 12 साल या उससे अधिक आयु के बच्चों को 30 माइक्रोग्राम मात्रा की खुराक दी जाती है।


बयान में कहा गया है, ''पांच से 11 साल के बच्चों पर टीका सुरक्षित साबित हुआ। उनके शरीर पर इसका अच्छा असर हुआ और उनमें मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया पैदा हुई। ''


बयान में कहा गया है कि कंपनियां इन आंकड़ों को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए), यूरोपीय दवा एजेंसी (ईएमए) और अन्य नियामकों के पास जल्द से जल्द जमा करने की योजना बना रही हैं।






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कोविड टीकाकरण को लेकर दिए गए ‘गैरजिम्मेदाराना’ बयानों के लिए विपक्ष को आत्मचिंतन करना चाहिए: नड्डा

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने केंद्र सरकार द्वारा कोविड-19 के खिलाफ चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान को दुनिया का सबसे ‘‘बड़ा और तेज’’ अभियान करार देते हुए सोमवार को कहा कि इसके बारे में ‘‘गैरजिम्मेदाराना’’बयान देने के लिए विपक्ष को ‘‘आत्मिचंतन’’ करना चाहिए।


नड्डा ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थित एक टीकाकरण केंद्र का दौरा किया और इस अभियान को ‘‘सफल’’ बनाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया की टीम, स्वास्थ्य राज्य मंत्रियों, चिकित्सा समुदाय सहित इससे जुड़े सभी लोगों का धन्यवाद दिया।


नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 71वें जन्मदिन पर 2.5 करोड़ से अधिक टीकों की खुराक दी गई जो एक विश्व रिकार्ड है।


उन्होंने कहा यह साबित करता है कि यह अभियान विश्व का ‘‘सबसे बड़ा और तेज’’ अभियान है।


उन्होंने कहा, ‘‘17 सितंबर को हुए 2.5 करोड़ टीकाकरण किए जाने पर विपक्षी दलों की चुप्पी पर और पिछले एक साल में इस अभियान के दौरान दिए गए गैरजिम्मेदाराना और हास्यास्पद बयानों के लिए उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्हें सोचना चाहिए कि ऐसा करके उन्होंने समाज पर किस प्रकार की छाप छोड़ी है और लोकतंत्र में उनकी क्या भूमिका रही है।’’


इस साल शुरु हुए टीकाकरण अभियान के बाद नड्डा ने आज दूसरी बार एम्स का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने टीकाकरण केंद्र पर लोगों के साथ ही नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से संवाद भी किया। टीकाकरण अभियान को सफल बनलाने के लिए उन्होंने सभी का धन्यवाद किया।


नड्डा का एम्स दौरा प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर भाजपा की ओर से आरंभ किए गए ‘‘सेवा और समर्पण’’ अभियान का हिस्सा है।





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आशा है कि और दिनों में भी टीकों की दो करोड़ से अधिक खुराक दी जाएगी : राहुल

नई दिल्ली : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर देश में ढाई करोड़ से अधिक टीके लगाये जाने को लेकर शनिवार को कहा कि कोरोना रोधी टीकाकरण की इसी गति की जरूरत है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी रोजाना टीकों की दो करोड़ से अधिक खुराक दी जाएगी।


उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘आशा करता हूं कि और दिनों में भी रोजाना टीकों की 2.1 करोड़ खुराक दी जाएगी। हमारे देश को इसी गति की जरूरत है।’’


उल्लेखनीय है कि भारत ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर टीकाकरण अभियान को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए कोविड-19 टीके की 2.50 करोड़ से अधिक खुराक देकर एक रिकॉर्ड बनाया।


को-विन पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक दी गई कुल खुराक शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे 79.33 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई। विभिन्न खबरों के अनुसार इससे पहले दैनिक खुराक का रिकॉर्ड चीन ने बनाया था, जहां जून में 2.47 करोड़ टीके लगाए गए थे।



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राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड-19 टीके की 76.11 करोड़ से अधिक खुराक मुहैया कराई गईं: केंद्र

नई दिल्ली : राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अब तक कोविड-19 टीके की 76.11 करोड़ से अधिक खुराक उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।


मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा 1.65 करोड़ से अधिक खुराक और दी जानी हैं। उसने बताया कि राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 5.33 करोड़ से अधिक खुराक बची हैं।


मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत केंद्र राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 के टीके नि:शुल्क उपलब्ध करा कर उनकी मदद कर रहा है।





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उपराष्ट्रपति नायडू ने भारत में 75 करोड़ कोविड टीके लगाए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की

नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भारत में कोरोना वायरस के टीके की 75 करोड़ खुराक दिये जा चुकने पर मंगलवार को प्रसन्नता व्यक्त की और लोगों से संकोच छोड़ने तथा टीका लगवाने का आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि देश ने सोमवार को कोविड-19 टीके की 75 करोड़ खुराक देने का मील का पत्थर पार कर लिया। को-विन पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को शाम सात बजे तक 71 लाख से अधिक खुराकें दी गईं। उपराष्ट्रपति सचिवालय ने नायडू के हवाले से ट्वीट किया, "यह जानकर प्रसन्नता हुई कि हमने कोविड-19 टीके की 75 करोड़ खुराक देने का मील का पत्थर पार कर लिया है जबकि राष्ट्र हमारी स्वतंत्रता के 75वें वर्ष का जश्न मना रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारियों, सरकारी अधिकारियों और अन्य सभी लोगों की उनके असाधारण प्रयासों के लिए मैं प्रशंसा करता हूं।" उपराष्ट्रपति ने लोगों से संदेह और झिझक दूर करके टीका लगवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश सभी पात्र लोगों को टीका लगाने के लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर अग्रसर है।






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योगी सरकार की मंशा के अनुरुप हो कोरोना वैक्सीनेशन : विधायक

कानपुर : वैश्विक महामारी कोरोना से पूरी दुनिया जूझ रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता से भारत जल्द ही स्थितियों को संभाल सका। वर्तमान में कोरोना वैक्सीनेशन तेजी से किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिया है कि वैक्सीनेशन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाये। वैक्सीन लगवाने वालों को परेशान न किया जाए। ऐसे में योगी सरकार की मंशा के अनुरुप ही वैक्सीनेशन हो। यह बातें गुरुवार को वैक्सीनेशन का निरीक्षण करने पहुंचे विधायक सुरेन्द्र मैथानी ने कही।


गोविंद नगर विधानसभा के विधायक सुरेंद्र मैथानी ने अपने स्वयं द्वारा गोद लिए हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुजैनी में आकस्मिक पहुंचकर वैक्सीनेशन के कार्यक्रम को चेक किया। पब्लिक से कठिनाई को पूछा तो 27 महिला/पुरुष मिलाकर ऐसे लोग मिले, जिनका स्लॉट बुक नहीं हुआ था। ऑफलाइन में उनको वैक्सीनेशन कराया। विधायक ने नर्सिंग स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने बहुत ही अच्छी व्यवस्था से लोगों को संतुष्ट करते हुए वैक्सीन लगाने का काम किया है।


विधायक ने कहा कि दिव्यांगों, महिलाओं,बच्चों और बुजुर्गों को कोई कठिनाई ना हो। सभी को पीने का ठंडा पानी मिले। बैठने के लिए कुर्सी मिले और उनके नंबर(क्रम)आने की सही जानकारी उनको प्राप्त हो। जिससे योगी के इस कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले श्रेणी के लोगों में ठीक प्रकार से व्यवस्था सुनिश्चित हो। अस्पताल में साफ सफाई एवं वैक्सीन लगने के स्थल तथा वैक्सीन को रखने की व्यवस्था और अन्य रजिस्टर आदि, जिसमें जनता के नाम अंकित होते हैं उन्हें भी चेक करके पूरे अस्पताल का विधायक ने निरीक्षण करके सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित किया।





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टीकाकरण में उत्तर प्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में कोरोना रोधी टीकाकरण का आंकड़ा छह करोड़, छह लाख के पार हो चुका है। 05 करोड़ 11लाख से अधिक नागरिकों ने कोरोना से बचाव के लिए टीके की कम से कम एक खुराक प्राप्त कर ली है। 95 लाख 84 हजार से ज्यादा लोगों ने टीके की दोनों डोज प्राप्त कर ली है। यह देश के किसी एक राज्य में हुआ सर्वाधिक टीकाकरण है।


अपर मुख्य सचिव ‘सूचना’ नवनीत सहगल ने बुधवार को बताया कि कोविड की ताजा स्थिति के मुताबिक प्रदेश के 17 जनपदों में एक्टिव केस शून्य हैं। जनपद अलीगढ़, अमेठी, बदायूं, बलिया, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, हमीरपुर, हरदोई, हाथरस, कासगंज, कौशांबी, महोबा, संतकबीरनगर, शामली और श्रावस्ती में आज कोविड का एक भी मरीज शेष नहीं है। यह जनपद आज कोविड संक्रमण से मुक्त हैं।


विगत 24 घंटे में हुई टेस्टिंग में 53 जिलों में संक्रमण का एक भी नया केस नहीं पाया गया, जबकि मात्र 22 जनपदों में इकाई अंक में मरीज पाए गए। वर्तमान में प्रदेश में एक्टिव कोविड केस की संख्या 419 है। अब तक 06 करोड़ 97 लाख 503 कोविड सैम्पल की जांच की जा चुकी है।


सहगल के अनुसार विगत 24 घंटे में 02 लाख 32 हजार 727 कोविड सैम्पल की जांच की गई और 35 नए मरीजों की पुष्टि हुई। इसी अवधि में 34 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। अब तक 16 लाख 85 हजार 819 प्रदेशवासी कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर स्वस्थ हो चुके हैं। प्रदेश में कोरोना की रिकवरी दर 98.6 प्रतिशत है। विगत दिवस दैनिक पॉजिटिविटी दर 0.01 प्रतिशत रही।





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गुरुग्राम 21 लाख कोरोनारोधी टीके लगाने वाला प्रदेश का अव्वल जिला

गुरुग्राम : अब कोरोनारोधी टीके लगाने का अभियान तेजी से चल रहा है। टीकाकरण की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग टीम ने छह दिन में 1,09691 लोगों को टीके लगाए। इसी के साथ प्रदेश में गुरुग्राम 21 लाख कोरोनारोधी टीके लगाने वाला पहला जिला बन गया है।


मंगलवार को 123 केंद्रों पर अभियान चलाया और 20,649 लोगों को टीका लगाया गया। 11,644 लोगों को पहला और 9,005 लोगों को दूसरा टीका लगाया। स्वास्थ्य विभाग टीम ने विदेश जाने वाले 25 लोगों दूसरा टीका लगाया गया और 100 लोगों को रूस की स्पुतनिक-वी वैक्सीन का पहला व 45 लोगों को दूसरा टीका लगा। डीएमआरसी के हुडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन परिसर में बने केंद्र में 61 लोगों को टीका लगाया। टीकाकरण अभियान के नोडल अधिकारी व उप सिविल सर्जन डा. एमपी सिंह ने कहा कि जिले में 21,10,225 टीके लगाए जा चुके हैं। हम गांवों में भी शहर के बराबर टीकाकरण केंद्र बना रहे हैं ताकि सभी का जल्द से जल्द टीकाकरण किया जा सके। यह सही है कि केंद्रों पर हर रोज अधिक लोग टीका लगवाने पहुंच रहे हैं। मेरी लोगों से अपील है कि स्वास्थ्य विभाग टीम के साथ सभी अपना सहयोग बनाए रखें। सभी का टीकाकरण किया जाएगा।


-डा. विरेंद्र यादव, सिविल सर्जन



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अमेरिका आठ महीने में बूस्टर खुराक लेने की करेगा सिफारिश: सूत्र

वाशिंगटन : अमेरिका में कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप के तेजी से फैलने के मद्देनजर इस संक्रमण से लंबे समय तक बचाव सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी विशेषज्ञ सभी अमेरिकियों को कोविड-19 टीके की दूसरी खुराक लेने के आठ महीने बाद बूस्टर खुराक देने की सिफारिश कर सकते हैं।


संघीय स्वास्थ्य अधिकारी इस बात पर सक्रियता से विचार कर रहे हैं कि क्या इन सर्दियों में लोगों को अतिरिक्त खुराक दिए जाने की आवश्यकता होगी या नहीं। वे अमेरिका में संक्रमितों की संख्या और इजराइल जैसे अन्य देशों में हालात पर नजर रख रहे हैं, जहां शुरुआती अध्ययन में संकेत मिला है कि जनवरी में टीकाकरण करा चुके लोगों में गंभीर संक्रमण के खिलाफ टीके की बचाव क्षमता में कमी आई है।


इस मामले की जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि अमेरिका में बूस्टर संबंधी सिफारिश को लेकर इस सप्ताह घोषणा किए जाने की संभावना है।


खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा टीकों को मंजूरी दिए जाने के बाद ही खुराक व्यापक रूप से दी जाएंगी। फाइजर के टीके के लिए इस संबंध में आगामी सप्ताहों में कदम उठाए जा सकते हैं।


अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने पिछले सप्ताह सिफारिश की थी कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को कोविड-19 की ‘बूस्टर’ खुराक दी जानी चाहिए।


राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक डॉ. फ्रांसिस कोलिन्स ने रविवार को कहा कि अमेरिका अगले दो सप्ताह में फैसला कर सकता है कि क्या अमेरिकियों को इन सर्दियों में कोरोना वायरस रोधी बूस्टर खुराक देनी है या नहीं। देश में सबसे पहले स्वास्थ्य सेवा कर्मियों और बुजुर्ग अमेरिकियों को यह खुराक दिए जाने की संभावना है।






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भारत को दुनिया में अपने सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम पर गर्व है : मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत को दुनिया में अपने सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम पर गर्व है और 54 करोड़ से अधिक लोग पहले ही कोविड-19 के टीके लगवा चुके हैं।


प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कोविड-19 महामारी के खिलाफ देश की जंग का जिक्र किया और वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, पराचिकित्साकर्मियों आदि की सराहना ही।


उन्होंने देश में टीका निर्माण से जुड़े लोगों की भी प्रशंसा की और कहा कि उनके प्रयासों के कारण भारत को टीकों के लिये दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।


उन्होंने कहा, ‘‘हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा है। देश में 54 करोड़ से अधिक लोग पहले ही टीके लगवा चुके हैं।’’


मोदी ने कहा कि अगर भारत ने अपना खुद का टीका विकसित नहीं किया होता, तो बाहर से होने वाली उसकी आपूर्ति अनिश्चित रहती।


मोदी ने कहा, ‘‘हमारे देश के सामने और विश् व में पूरी मानव जाति के समक्ष कोरोना का ये कालखंड बहुत बड़ी चुनौती के रूप में आया है। भारतवासियों ने इसके साथ इस लड़ाई को बहुत संयम, बहुत धैर्य से लड़ा है। इस लड़ाई में हमारे सामने अनेक चुनौतियां थीं। देशवासियों ने हर क्षेत्र में असाधारण गति से काम किया है। यह हमारे वैज्ञानिकों और हमारे उद्यमियों के सामर्थ्य का ही नतीजा है कि आज हमें टीकों के लिये किसी और देश के सामने निर्भर होने की जरूरत नहीं है। पलभर के लिये सोचिए अगर भारत के पास अपनी वैक् सीन नहीं होती तो क् या होता? हमें पोलियो की वैक्सीन पाने में कितना वक्त लग गया?’’


उन्होंने कहा, ‘‘इतने बड़े संकट के समय जब पूरी दुनिया में महामारी फैली हो, हमें टीका हासिल करना मुश्किल था। भारत को टीका मिलता या नहीं भी मिल सकता था और अगर उसे टीका मिलता भी तो इसके समय पर मिलने की कोई निश्चितता नहीं थी।’’


प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविन जैसी ऑनलाइन प्रणाली और डिजिटल सर्टिफिकेट देने की व् यवस् था आज दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही है।


उन्होंने कहा कि हालांकि यह सच है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में कोविड-19 से कम लोग संक्रमित हुए हैं और अन्य देशों की आबादी की तुलना में भारत अधिक लोगों को वायरल बीमारी से मरने से बचाने में कामयाब रहा है, लेकिन यह खुद को बधाई देने की बात नहीं है।


उन्होंने कहा, ‘‘यह ऐसा कुछ नहीं जिस पर गर्व किया जाए। हम इन प्रशंसाओं पर आराम से नहीं रह सकते। यह कहना कि कोई चुनौती नहीं है, हमारे अपने विकास के मार्ग में एक प्रतिबंधात्मक विचार बन जाएगा।’’


उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के अमीर देशों की तुलना में हमारी प्रणाली अपर्याप्त हैं, हमारे पास वह नहीं है जो अमीर देशों के पास है। इसके अलावा, हमारे पास अन्य देशों की तुलना में अधिक आबादी है। हमारी जीवनशैली भी अलग है। हमारे सभी प्रयासों के बावजूद हम कई लोगों को नहीं बचा सके। इतने बच्चे अनाथ हो गए। यह असहनीय दर्द हमेशा बना रहेगा।’’


उन्होंने वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, पराचिकित्सा कर्मियों की कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में उनकी भूमिका के लिये सराहना की। उन्होंने कहा, “कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के दौरान हमारे चिकित्सक, नर्सें, पराचिकित्सा कर्मी, टीका बनाने में लगे वैज्ञानिक, सफाई कर्मचारी तथा सार्वजनिक सेवा में जुटे लोग वंदन के अधिकारी हैं।”


उन्होंने कहा कि देश के हर गरीब व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का अभियान भी तेजी से चल रहा है। इसके लिए, चिकित्सा शिक्षा में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में चिकित्सा सीटों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि हुई है।


मोदी ने कहा कि रोकथाम, स्वास्थ्य देखभाल पर समान ध्यान दिया गया है और आयुष्मान भारत योजना के तहत हर गांव को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं।


उन्होंने कहा कि जन औषधि योजना के माध्यम से गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।


उन्होंने कहा, ‘‘अब तक 75,000 से अधिक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र स्थापित किए गए हैं। ब्लॉक स्तर पर भी, आधुनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के तहत विशेष रूप से अच्छे अस्पतालों और आधुनिक प्रयोगशालाओं के नेटवर्क स्थापित किये जा रहे हैं। बहुत जल्द, देश के हजारों अस्पताल होंगे, उनके अपने ऑक्सीजन प्लांट होंगे।’’


उन्होंने कहा कि बुनियादी जरूरतों की चिंता के साथ-साथ दलितों, पिछड़े वर्गों, आदिवासियों और सामान्य वर्ग के गरीब वर्गों के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में चिकित्सा शिक्षा में अखिल भारतीय कोटे में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है।


महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों के लिये मुफ्त राशन के प्रावधान के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसने दुनिया को चौंका दिया है और इसके बारे में बात की जा रही है।


उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने महामारी के दौरान लगातार महीनों तक 80 करोड़ देशवासियों को मुफ्त अनाज देकर गरीब घरों में चूल्हा जलाये रखा है, यह न केवल दुनिया के लिए आश्चर्य बल्कि चर्चा का विषय भी है।’’


मोदी ने गांवों और शहरों के बीच की खाई को पाटने के लिए कदम उठाने का भी आह्वान किया।


उन्होंने लक्षित लाभार्थियों के बीच आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का 100 प्रतिशत कवरेज हासिल करने पर जोर दिया।


मोदी ने कहा, ‘‘देश का हर गरीब आयुष्मान भारत से लेकर उज्ज्वला के महत्व को जानता है। आज सरकारी योजनाओं की गति बढ़ गई है और ये योजनाएं वांछित लक्ष्यों को प्राप्त कर रही हैं। हमने पहले की तुलना में बहुत तेजी से प्रगति की है, लेकिन यह यहीं समाप्त नहीं होता है। हमें संपूर्णता प्राप्त करनी है।’’


प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सभी गांवों में सड़कें हों, सभी घरों में बैंक खाते हों, सभी लाभार्थियों के पास आयुष्मान भारत कार्ड हों और सभी पात्र व्यक्तियों को उज्ज्वला योजना का लाभ मिले और उनके पास गैस कनेक्शन हों। हमें हर पात्र व्यक्ति को सरकार की बीमा, पेंशन और आवास योजनाओं के साथ जोड़ना होगा। हमें शत-प्रतिशत उपलब्धि की मानसिकता के साथ आगे बढ़ना है।’’





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टीकाकरण में लैंगिक अंतर खत्म हो : महिला आयोग

नई दिल्ली :  राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने कोविड-19 टीकाकरण में लैंगिक अंतर पर चिंता जताया है। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि टीकाकरण अभियान में महिलाओं की भागीदारी कम न रह जाए। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में एनसीडब्ल्यू ने एक खबर का उल्लेख किया जिसमें महिलाओं को कोविड रोधी टीके अपेक्षाकृत कम संख्या में लगाए जाने का दावा किया गया है। आयोग ने कहा, पुरुषों और महिलाओं के बीच टीकाकरण कवरेज में अंतर आयोग के लिए चिंता का विषय है। इसलिए अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर टीकाकरण में लैंगिक अंतर कम करने के लिए कदम उठाने को कहा है। यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि टीकाकरण अभियान में महिलाएं पीछे न रह जाएं।






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मेलबर्न ने लॉकडाउन बढ़ाया, सिडनी में टीका लगवा चुके लोगों को मिल सकती है पाबंदियों से छूट

कैनबरा : ऑस्ट्रेलिया के दूसरे सबसे बड़े शहर मेलबर्न ने कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए बुधवार को लॉकडाउन की अवधि बढ़ा दी जबकि सिडनी में डेल्टा स्वरूप के फैलने के बावजूद प्राधिकारियों ने कहा कि वे उन निवासियों को पाबंदियों में छूट देने पर विचार कर रहे हैं जिन्होंने टीका लगवा लिया है।


ऑस्ट्रेलियाई शहरों में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लगाए गए जो सफल रहे। लेकिन अत्यधिक संक्रामक डेल्टा स्वरूप देश में नयी चुनौतियां पैदा कर रहा है जहां टीकाकरण की दर कम है।


विक्टोरिया राज्य की सरकार ने बुधवार को कहा कि मेलबर्न का छठा लॉकडाउन 19 अगस्त के अंत तक दूसरे हफ्ते के लिए बढ़ाया जाएगा। शहर में 24 घंटे के दौरान संक्रमण के 20 नए मामले आए हैं।


विक्टोरिया के प्रमुख डेनियल एंड्रयूज ने कहा, ‘‘यह बहुत चुनौतीपूर्ण है। मैं जानता हूं कि प्रत्येक विक्टोरिया निवासी चाहेंगे कि उनके काम चलते रहें, वे आजादी चाहेंगे जो डेल्टा स्वरूप के कारण संभव नहीं है। अगर हम गतिविधियां खोलने की अनुमति देते हैं तो मामले उतने ही बढ़ जाएंगे जितने कि अभी सिडनी में हैं।’’


ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े शहर सिडनी में बुधवार को संक्रमण के 344 नए मामले आए। संक्रमण के सबसे अधिक 356 मामले मंगलवार को सामने आए थे। रातभर में कोविड-19 के दो मरीजों की मौत हो गयी।


सिडनी में 26 जून को लगाए गए लॉकडाउन की अवधि 28 अगस्त को खत्म होनी है लेकिन संक्रमण के प्रसार पर काबू पाने की उम्मीदें फीकी पड़ रही हैं।


बहरहाल, न्यू साउथ वेल्स की प्रमुख ग्लेडी बेरेजिकलियान ने कहा कि सितंबर से 50 लाख की आबादी वाले शहर के कुछ हिस्सों में उन निवासियों को पाबंदियों से छूट मिल सकती है जिन्होंने टीका लगवा लिया है।






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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड-19 रोधी टीके की दूसरी खुराक ली

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कोविड-19 रोधी टीके की दूसरी खुराक ली और सभी लोगों से टीका लगवाने की अपील की।


योगी ने इसकी जानकारी देते हुए ट्वीट किया, '' आज स्वदेशी कोविड-19 रोधी टीके की दूसरी खुराक लेकर मन प्रफुल्लित है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में टीके का यह 'सुरक्षा कवच' सभी नागरिकों को मुफ्त प्रदान किया जा रहा है।''


उन्होंने जनता से टीके लगवाने की अपील करते हुए कहा, '' आप सभी लोग भी अपना क्रम आने पर अवश्य लगवाएं 'टीका जीत का' । तभी कोरोना हारेगा, भारत जीतेगा।''


इससे पहले, मुख्यमंत्री ने गत पांच अप्रैल को कोविड-19 रोधी टीके की पहली खुराक ली थी। 






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देश में कोविड टीकाकरण का आंकड़ा 47 करोड़ से अधिक

नई दिल्ली : देश में कोरोना महामारी पर नियंत्रण के उपायों के तहत कोविड-19 के टीकाकरण का आंकड़ा 47 करोड़ से अधिक हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि रविवार सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 55 लाख 71 हजार 565 सत्रों में कोविड-19 वैक्सीन के 47 करोड़ 02 लाख 98 हजार 596 डोज लाभार्थियों को दिये जा चुके हैं। पिछले 24 घंटों में वैक्सीन के 60 लाख 15 हजार 842 डोज दिये गये हैं। बयान में कहा गया है कि टीकाकरण अभियान के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मुफ्त में कोविड के टीके उपलब्ध करा रही है।



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बच्चों की वैक्सीन

बच्चों के टीकाकरण को लेकर पिछले कुछ दिनों में कई तरह की खबरें आईं। कहा गया कि सितंबर माह से बच्चों को टीका लगना शुरू हो जाएगा। मगर स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने अगस्त माह से ही बच्चों को टीका लगाने की बात कही है। अगर यह सही है तो इसे उत्साहवद्र्धक तो माना जाना चाहिए। कोरोना की तीसरी लहर सिर पर है, विशेषज्ञ लाख कहें कि बच्चों को इससे फर्क नहीं पड़ेगा, पर बीमारी का जो स्वरूप है, उसने माता-पिता की चिंता बढ़ा रखी है। पूरी दुनिया यह मान चुकी है कि कोरोना से सिर्फ वैक्सीन ही बचा सकती है, दूसरे देशों में तो बच्चों को टीका लगना शुरू भी हो चुका है। सिर्फ भारत ही अब तक पीछे था। स्वास्थ्य मंत्री अब कह रहे हैं कि अगस्त माह में बच्चों का टीका मिल जाएगा तो इसे सकारात्मक ही लेना होगा। 


बच्चों के टीके को लेकर व्यापक स्तर पर सावधानी की जरूरत भी होगी। जाहिर है केंद्र सरकार इस पैमाने पर ध्यान दे रही होगी। कोरोना के दैनिक आंकड़े कम होने के बाद एक बार फिर बढऩे लगे हैं। खुद स्वास्थ्य मंत्रालय लोगों को चेतावनी दे रहा है। सरकार बराबर कह रही है कि पाबंदियां हटने का मतलब कोरोना खत्म नहीं माना जाए। पाबंदियां खत्म होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए कि अब कोई खतरा नहीं रह गया है। बल्कि तीसरी लहर कब दस्तक दे दे, कोई नहीं जानता। वैसे इसका अनुमान अगस्त से अक्टूबर के बीच का है। इसे देखते हुए खतरा अब ज्यादा बड़ा है। अगर लोगों की भीड़ अचानक बढऩे लगी तो फिर से कहीं नया जोखिम न खड़ा हो जाए। दरअसल आशंकाओं के पीछे कई कारण हैं। दुनिया के कई शहरों में देखा जा चुका है कि पाबंदियां हटाने के बाद लोग एकदम से निकल पड़े और फिर अगली लहर ने हमला बोल दिया। ब्रिटेन सबसे बड़ा उदाहरण है। कई महीनों के लॉकडाउन के बाद ब्रिटेन में लगने लगा था कि संक्रमण की लहर कमजोर पड़ चुकी है। इसलिए पाबंदियां पूरी तरह से हटा ली गई थीं।


 मेट्रो, बसें पहले की तरह ही शुरू कर दी गईं। इससे भीड़ बढ़ती गई। इसका नतीजा यह हुआ कि कोरोना का नया रूप सामने आ गया और तेजी से फैल गया। न सिर्फ ब्रिटेन में बल्कि वहां से दुनिया के कई देशों में पहुंच गया। ब्रिटेन के इस सबक को हमें भूलना नहीं चाहिए। भारत में चौथा सीरो सर्वे एक बात और बता रहा है। वह यह कि हमारे यहां अभी भी 40 करोड़ लोगों में प्रतिरोधी क्षमता विकसित नहीं हुई है। इन लोगों को संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा है। 40 करोड़ की आबादी कम नहीं होती। फिर विषाणु के नए-नए रूप जिस तेजी से मिल रहे हैं, वह और बड़ा खतरा है। इसलिए इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती कैसे भी करके लोगों को संक्रमण से बचाने की है। कामधंधों के मद्देनजर बेशक पाबंदियां हटाना जरूरी है। स्कूल खुलना भी जरूरी है। लोग महामारी की मानसिक पीड़ा भी भुगत चुके हैं। पर साथ ही जो बात सबसे ज्यादा चिंता पैदा करती है, वह लोगों के लापरवाह बर्ताव को लेकर है। बाहर निकलते समय मास्क नहीं लगाना गंभीर समस्या बनता जा रहा है। ऐसे में घरों में बैठे बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा है। लोग दिनभर लापरवाही से बाहर घूमकर घरों में जाते हैं तो संक्रमण साथ ले जाते हैं। 18 साल से ऊपर के लोगों को तो वैक्सीन गंभीर संक्रमण से बचा लेगी, मगर जो बच्चे बिना वैक्सीन के घरों में हैं, उन पर संकट तो बढ़ेगा ही। कहने को पुलिस मास्क नहीं पहनने वालों पर जुमार्ना भी लगाती है। फिर भी लोग बेपरवाह हैं। 


जहां तक टीकाकरण का सवाल है तो भारत की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। टीकाकरण का आंकड़ा भले चवालीस करोड़ पहुंच रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि देश में दस फीसद वयस्कों को भी टीके की दोनों खुराकें नहीं लगी हैं। एक खुराक लेने वाले वयस्कों का आंकड़ा अभी भी कुल आबादी का सिर्फ एक तिहाई ही है। ज्यादातर राज्यों में टीकाकरण सुस्त पड़ा है। राजधानी दिल्ली में ही इन दिनों कोविशील्ड टीके की पहली खुराक देने का काम बंद है। ऐसे में रास्ता एक ही है और वह यह कि हम खुद ही अपना बचाव करें। बेवजह बाहर न निकलें और कोविड व्यवहार के नियमों का सख्ती से पालन करने की आदत डाल लें। यही संक्रमण की लहरों से बचाएगा। बच्चों का मामला ज्यादा ही संवेदनशील है। दो से छह साल तक के बच्चे तो अपनी तकलीफ बयां भी नहीं कर पाते। परीक्षणों और इलाज की जटिल प्रक्रियाओं के दौर से गुजरना बच्चों के लिए कितना पीड़ादायक होता होगा, यह कल्पना से परे है। बच्चों पर महामारी का खतरा इसलिए भी बना हुआ है कि अगर घर में किसी एक या उससे ज्यादा सदस्य संक्रमण से ग्रस्त हो जाएं तो बच्चों को इसकी जद में आते देर नहीं लगती। दूसरी लहर में ऐसे मामले देखे भी गए। जाहिर है, अगर बच्चों को टीका लगा होगा तो काफी हद तक बचाव रहेगा। लेकिन यहां पर भी एक मुश्किल यह है कि भारत अभी टीकों की कमी से जूझ रहा है। कंपनियां एकदम से मांग पूरी कर पाने की स्थिति में हैं नहीं। फिर जैसे बड़ों के लिए प्राथमिकता समूह तय किए गए, उस तरह बच्चों में तो कोई समूह नहीं बनाया जा सकता। बारह से अठारह साल के किशोरों की संख्या चौदह से पंद्रह करोड़ के बीच बैठती है। यानी बच्चों के लिए अलग से तीस करोड़ टीके और चाहिए। इसलिए दो से अठारह साल के बच्चों के लिए पर्याप्त टीकों का उत्पादन जरूरी है। वरना टीके के लिए लोग आज जैसे धक्के खा रहे हैं, तब लोग अपने बच्चों को लेकर परेशान होते दिखेंगे।


-सिद्वार्थ शंकर-






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टीकों की वैश्विक असमानता को दूर करने के लिए एक प्रभावी तंत्र की जरूरत : भारत

संयुक्त राष्ट्र : कोविड-19 टीकों की वैश्विक असमानता को दूर करने के लिए एक प्रभावी तंत्र की जरूरत पर जोर देते हुए भारत ने कहा कि वायरस के स्वरूप में और बदलाव को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान की आवश्यकता है और वैश्विक समुदाय के साथ अपना ‘कोविन’ मंच साझा करने की पेशकश की। फ्रांस की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बंद कमरे में कोविड-19 स्थिति पर प्रस्ताव 2565 पर सोमवार को चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरूमूर्ति ने ट्विटर पर बताया कि सुरक्षा परिषद में कोविड-19 पर चर्चा में उन्होंने कहा कि टीके की वैश्विक असमानता को दूर करने के लिए एक प्रभावी तंत्र और वायरस के स्वरूप में और बदलाव को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान की जरूरत है। उन्होंने कहा कि टीके को लेकर लोगों की गलतफहमियों को दूर करने के लिए तथ्यों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, साथ में भारत ने कोविन मंच की पेशकश भी की। उन्हेांने बताया कि कोविड रोधी टीकाकरण के लिए कोविन भारत का प्रौद्योगिकी मंच है। इस महीने के शुरू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कोविन को एक खुले साधन के तौर पर तैयार किया जा रहा है ताकि यह सभी देशों के लिए उपलब्ध हो। मोदी ने कहा कि भारत महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपनी विशेषज्ञता और स्रोतों को वैश्विक समुदाय के साथ साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस साल फरवरी में सुरक्षा परिषद ने कोविड-19 प्रस्ताव को अपनाया था। इसमें सशस्त्र संघर्ष स्थितियों, संघर्ष के बाद के हालात और जटिल मानवीय आपात स्थितियों में कोविड-19 टीकों तक समान और किफायती पहुंच के लिए राष्ट्रीय और बहुपक्षीय दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया गया है। संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि निकोलस डे रिविरे ने ट्विटर पर कहा कि प्रस्ताव 2532 को अपनाने के एक साल के बाद सुरक्षा परिषद ने कोविड स्थिति पर बैठक की। प्रस्ताव 2532 को जुलाई 2020 में सुरक्षा परिषद ने स्वीकार किया था, जिसमें दुनिया भर में कोविड-19 के विनाशकारी प्रभाव पर चिंता जताई गई थी, खासकर उन देशों में जहां सशस्त्र संघर्ष की वजह से तबाही मची है या वे मानवीय संकट से जूझ रहे हैं। साथ में तत्काल दुश्मनी को खत्म करने की मांग की गई थी। फ्रांसीसी राजदूत ने कहा कि कुछ प्रगति हुई है लेकिन यह इतनी नहीं है जिस पर संतोष किया जा सके। 






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ब्राजील ने आपातकाल में कोवैक्सीन के इस्तेमाल का अनुरोध किया खारिज

हैदराबाद : भारत बायोटेक के कोविड-19 टीके 'कोवैक्सीन' के प्रस्तावित क्लिनिकल ट्रायल को निलंबित किए जाने के बाद ब्राजील ने आपातकाल में इस टीके के इस्तेमाल को अनुमति देने का अनुरोध ठुकरा दिया है।


टीका निर्माता कंपनी ने ब्राजील में अपने साझेदारों के साथ करार रद्द कर दिया था, जिसके बाद दक्षिण अफ्रीकी देश ने यह फैसला किया। ब्राजील की राष्ट्रीय स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी 'अन्विसा' की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, इसके कॉलेजिएट बोर्ड ने ''कोवैक्सीन टीके के प्रायोगिक आधार पर आपातकालीन उपयोग को अस्थायी रूप से अधिकृत करने संबंधी प्रक्रिया को बंद करने का'' शनिवार को सर्वसम्मति से निर्णय लिया।


इससे पहले, अन्विसा ने कोवैक्सीन का क्लीनिकल परीक्षण निलंबित कर दिया था। दक्षिण अमेरिकी देश के स्वास्थ्य नियामक ने बताया था कि वहां उसके साझेदार के साथ कंपनी का समझौता समाप्त किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।


अन्विसा ने कहा, ''भारतीय कंपनी भारत बायोटेक लिमिटेड इंटरनेशनल ने सूचित किया कि अब नेसेसिदेद कंपनी ब्राजील में भारत बायोटेक का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत नहीं है, जिसके बाद यह फैसला किया गया।''


ब्राजील की कंपनी नेसेसिदेद ने कोवैक्सीन के आपालकाल में इस्तेमाल को अधिकृत करने का अनुरोध किया था, जिसे अन्विसा ने ठुकरा दिया। भारत बायोटेक ने ब्राजीलियाई बाजार के लिए अपने कोविड-19 रोधी टीके कोवैक्सीन को लेकर प्रेसिसा मेडिकामेन्टोस एंड एन्विक्सिया फार्मास्युटिकल्स एलएलसी के साथ हुए समझौता ज्ञापन को रद्द करने की 23 जुलाई को घोषणा की थी।


ब्राजील सरकार के साथ टीकों की दो करोड़ खुराक की आपूर्ति के सौदे के विवादों में आने और ब्राजील में प्राधिकारियों द्वारा जांच शुरू करने के बाद यह समझौता खत्म किया गया। भारत बायोटेक ने 26 फरवरी को कहा था कि उसने 2021 की दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान कोवैक्सीन की दो करोड़ खुराकों की आपूर्ति करने के लिए ब्राजील सरकार के साथ एक समझौता किया है। भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद ब्राजील सरकार ने कोवैक्सीन का ऑर्डर अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया है।


भारत बायोटेक ने अपने ब्राजीलियाई साझेदारों के साथ समझौता समाप्त किए जाने की घोषणा करते हुए कहा था कि भारत बायोटेक कोवैक्सीन के लिए नियामक संबंधी मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए ब्राजीलियाई दवा नियामक संस्था अन्विसा के साथ काम करती रहेगी।








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अमेरिका में टीकाकरण के बाद भी मास्क पहनने की सलाह

वाशिंगटन : व्हाइट हाउस के मुख्य चिकित्सा सलाहकार एंथनी फौसी ने रविवार को कहा कि यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन अपने कोविड दिशानिर्देशों में संशोधन कर रहा है ताकि पूरी तरह से टीका लगाए गए लोगों को भी सार्वजनिक रूप से मास्क पहनने की सलाह दी जा सके। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, फौसी ने सीएनएन को बताया कि उन्होंने दिशानिर्देशों में बदलाव के बारे में बातचीत में हिस्सा लिया है, जिसे उन्होंने सक्रिय विचार के तहत बताया है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानीय क्षेत्र जहां संक्रमण दर बढ़ रही है, पहले से ही लोगों से टीकाकरण की स्थिति की परवाह किए बिना सार्वजनिक रूप से मास्क पहनने का आग्रह कर रहे हैं। संयुक्त राज्य भर में गैर-टीकाकृत लोगों के बीच कोविड मामले, मृत्यु और अस्पताल में भर्ती होना जारी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कम टीकाकरण दरों और तेजी से डेल्टा वेरिएंट में हालिया उछाल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।






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टीके की 3.09 करोड़ से अधिक खुराकें मौजूद हैं राज्यों, निजी अस्पतालों के पास

नई दिल्ली : केन्द्रीय स्वाथ्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास कोरोना वायरस संक्रमण रोधी टीके की 3.09 करोड़ से अधिक खुराकें हैं, जो इस्तेमाल नहीं हुई हैं।


मंत्रालय ने बताया कि अब तक सभी माध्यमों से 45.37 करोड़ से अधिक खुराकें राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को मुहैया कराई गई हैं और 59,39,010 अन्य खुराकें दी जाने वाली हैं। अब तक कुल 42,28,59,270 खुराकों की खपत हो चुकी है, जिनमें इस्तेमाल हुई और बर्बाद गई दोनों ही खुराके शामिल हैं।


गौरतलब है कि देश में 21 जून से नया टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। 




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राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, निजी अस्पतालों के पास 3.20 करोड़ से अधिक टीके उपलब्ध : केंद्र

नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बताया कि राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास अभी 3.20 करोड़ से अधिक कोविड-19 रोधी टीके उपलब्ध हैं। मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के हवाले से बताया कि राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को अभी तक सभी माध्यमों से कुल 43,79,78,900 टीके मिल चुके हैं और 7,00,000 टीके दिए जाने हैं। अभी तक बर्बाद हो चुके टीकों समेत कुल 40,59,77,410 टीकों की खपत हो चुकी है। मंत्रालय ने बताया कि राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास 3.20 करोड़ से अधिक (3,20,01,490) टीके उपलब्ध हैं। उसने कहा कि केंद्र सरकार टीकाकरण की गति बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कोविड-19 टीकाकरण का नया चरण 21 जून 2021 से शुरू हुआ था। देशव्यापी अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 रोधी निशुल्क टीके उपलब्ध करा रही है।




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यूपी में झांसी के दो गावों में सौ फीसदी टीकाकरण

झांसी : उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के दो गांवों में शत प्रतिशत टीकाकरण किया जा चुका है। यहां के मोठ तहसील के खैरेला गांव में 18 साल से ऊपर के सभी 310 लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगाई जा चुकी है। इसके पहले यहीं के नोटा गांव में सौ प्रतिशत टीकाकरण हो चुका है। झांसी जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार विकासखंड मोठ के ग्राम पंचायत खरैला में इस समय 86 परिवार रहते हैं। गांव की जनसंख्या 568 हैं, जिसमें 18 से ऊपर के युवाओं की जनसंख्या 310 है। खरैला में कोविड टीकाकरण के जरिए 310 ग्रामवासियों को कोरोना के बचाव के लिए प्रथम वैक्सीन लगाई जा चुकी है। बताया गया कि 18 से 44 वर्ष के 205 और 45 से अधिक आयु के 105 लोगों का कोरोना वैक्सीनेशन का कार्य किया जा चुका है। इसमें 147 महिलाएं और 163 पुरुष थे। ऐसे में ये गांव भी 100 प्रतिशत कोरोना टीकाकरण कराने के मामले में झांसी में अग्रणी पंचायत बन गया है। बता दें कि सबसे पहले बंगरा ब्लॉक के नोटा गांव को जिले में ये उपलब्धि हासिल हुई। झांसी के डीएम आंद्रा वामसी ने बताया, यह एक बड़ी उपलब्धि है कि ग्राम पंचायत को प्राप्त टीके की एक भी खुराक बर्बाद नहीं हुई। शुरू में ग्रामीणों के मन में वैक्सीनेशन को लेकर भ्रम था। लेकिन बाद में लोगों को समझाने और प्रचार प्रसार के बाद जागरूकता आयी है। इस गांव में 18 साल से ऊपर हर आयु वर्ग का कोविड वैक्सीनेशन 100 फीसदी कर लिया गया। गांव के सभी 2,447 ग्रामीणों को कोविड वैक्सीनेशन की पहली डोज लग गई है। उन्होंने बताया कि झांसी के बांगरा ब्लॉक का नोटा गांव में टीकाकरण के जरिए 2447 ग्रामवासियों को पहली डोज दी जा जा चुकी है। वैक्सीन लगवाने वालों में 18 से 44 आयु वर्ग के 1,457 एवं 44 वर्ष से अधिक आयु के 990 लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई। इसमें 966 महिलाएं और 1,481 पुरुष शामिल हैं। नोटा में 773 परिवार रहते हैं। गांव की कुल जनसंख्या 4523 हैं जसिमें 18 से ऊपर के युवाओं की कुल जनसंख्या 2713 है। डीएम ने बताया कि सौ फीसद टीकाकरण में निगरानी समिति, आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकतार्ओं, अन्य स्वयंसेवी संगठनों और ग्रामीणों की अहम भूमिका रही। जिन्होंने टीकाकरण के लिए अपना साहस और इच्छा दिखाई और 100 फीसदी गांववालों का वैक्सीनेशन किया। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने ग्राम निगरानी समिति का गठन किया। जन जागरूकता फैलाकर ग्रामीणों के भय को दूर करने के लिए कार्यक्रम चलाए। प्रशासन ने इन जागरूकता कार्यक्रमों को चलाने के लिए एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और अन्य स्वयंसेवी संगठनों को भी शामिल किया।





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वैक्सीन की कमी के चलते ऑनलाइन केंद्र बंद किए गए

गाजियाबाद : जिले में वैक्सीन की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऑनलाइन केंद्र बंद कर दिए गए हैं। इसमें 18 से 44 साल तक की उम्र के लोगों के लिए बुकिंग स्लॉट कम कर दिए गए हैं। इसी के चलते केंद्रों पर लक्ष्य से 20 से 30 फीसदी कम वैक्सीन मिल रही हैं, जिस कारण लोगों को बिना वैक्सीन के वापस लौटना पड़ रहा है।


कोरोना वैक्सीन की किल्लत जिले में पिछले 20 दिनों से देखने को मिल रही है। जहां जिले में 120 टीकाकरण केंद्र तैयार किए गए थे, वहीं अब केवल 40 से 50 ही केंद्र सक्रीय रह गए हैं। इसमें भी वैक्सीन की उपलब्धता के कारण दस से 15 केंद्र बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नजदीकि केंद्र बंद हो जाने के कारण लोगों को अन्य दूसरे केंद्रों पर वैक्सीन के लिए जाना पड़ता है, जहां वैक्सीन की कमी और निर्धारित स्लॉट की वैक्सीन होने के कारण लोगों को बिना टीका लगवाए ही वापस लौटना पड़ता है। 


दरअसल मंडल स्तर से ही जिले को वैक्सीन कम मात्रा में भेजी जा रही है। ये हाल गाजियाबाद ही नहीं अन्य जिलों में भी चल रहा है। वैक्सीन की कमी को देखते हुए अधिकांश लोग ऑनलाइन स्लॉट बुक करने में जुटे रहते हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोविन एप पर बुकिंग की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया गया है। अधिकांश केंद्रों पर बुकिंग बंद कर दी गई है। 


वहीं कुछ केंद्रों पर केवल 60 से अधिक उम्र के लोगों का स्लॉट उपलब्ध रहता है। 18 से 44 साल तक की उम्र के लोगों के लिए परेशानी अधिक हो गई है, इस वर्ग के लोग बिना ऑनलाइन बुकिंग के वैक्सीन नहीं लगवा सकते हैं। वहीं विभाग की ओर से इस वर्ग के लिए ऑनलाइन बुकिंग के दस केंद्र बंद कर दिए गए हैं, जिससे लोग बुकिंग न कर सकें और केंद्रों पर भीड़ जमा न हो। इसी के चलते अधिकांश केंद्रों पर अब केवल 45 से अधिक लोगों को ही वैक्सीन लग रही है, जिन केंद्रों पर 18 से 44 आयु वर्ग के लिए बुकिंग हो रही है। वहां अन्य वर्ग के लिए बुकिंग नहीं हो रही।


नई खुराक पर लगाई लगाम : वैक्सीन के बचाव के लिए पहली खुराक वालों के लिए ऑनलाइन बुकिंग के लिए केवल तीन केंद्रों पर बुकिंग की जा रही है। इसमें जिला संयुक्त अस्पताल, जिला महिला अस्पताल और भोजपुर पीएचसी हैं। अन्य सभी केंद्रों पर दूसरी खुराक के लिए बुकिंग की जा रही है। वैक्सीन के लिए मारामारी कम रहे। इसलिए अभी पहली खुराक के लिए ऑनलाइन बुकिंग रोक दी गई हैं।


नोडल अधिकारी (कोविड टीकाकरण) डॉ. जीपी माथुरिया ने कहा कि जिले में वैक्सीन की अभी कमी चल रही है। इसलिए केंद्र कम किए गए हैं। वैक्सीन की पर्याप्त मात्रा मिलने पर बुकिंग और केंद्र बढ़ा दिए जाएंगे।

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बिना टीका वाले सबसे ज्यादा बच्चे भारत में : यूनिसेफ

नई दिल्ली : दुनिया भर में कोविड-19 महामारी के बीच यूनिसेफ ने कहा कि ऐसे बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा भारत में है जिन्हें कोई टीके नहीं लगा है। इसके साथ ही इनकी संख्या बढ़कर 35 लाख हो गयी है और 2019 की अपेक्षा इस संख्या में 14 लाख की वृद्धि हुई है।


संयुक्‍त राष्‍ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने एक बयान में कहा कि भारत में 2020 में 30 लाख से अधिक बच्चे ऐसे थे जिन्हें कोई टीका नहीं लगा। इसमें कहा गया है कि पिछले दस वर्षों में किसी भी नियमित टीकाकरण में विफलता के मामले में दक्षिण एशिया सबसे ऊपर रहा और 2020 में ऐसे बच्चों की संख्या करीब 44 लाख थी।


बयान के अनुसार ऐसे 30 लाख से अधिक बच्चे भारत में थे जिन्हें कोई खुराक नहीं मिली थी। यूनिसेफ ने कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि दुनिया के कुल मामलों में से 62 प्रतिशत सिर्फ 10 देशों में है जिनमें बच्चों को कोई टीका नहीं मिला या उन्हें विभिन्न टीकों की पूरी खुराक नहीं मिली।


बच्चों के वैश्विक निकाय ने कहा कि भारत कोविड-19 से भी काफी प्रभावित रहा है। उसने कहा कि भारत में असुरक्षित बच्चों की संख्या 35 लाख थी जो दुनिया में सबसे ज्यादा थी। 2019 में ऐसे असुरक्षित बच्चों की संख्या 21 लाख थी। असुरक्षित बच्चे वे हैं जिन्हें कोई टीका नहीं लगा है या जिन्हें विभिन्न टीकों की सभी खुराकें नहीं मिली हैं। बयान में कहा गया है कि 2020 में पाकिस्तान में 13 लाख असुरक्षित बच्चे थे।




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कोलकाता में दुर्गा पूजा की तैयारी शुरू, सभी संबंधित लोगों को तीन माह के भीतर लगेंगे टीके

कोलकाता : कोलकाता में सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियां सुनश्चित करेंगी कि अनुष्ठान और अन्य संबंधित कार्यों में शामिल सभी लोगों को अगले तीन महीने के भीतर कोवड-19 रोधी टीके लग जाएं। 'फोरम फॉर दुर्गोत्सव' के अधिकारी पार्थ घोष ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि पूजा समितियां ये सुनिश्चित करेंगी कि पंडालों में आ रहे सभी लोग मास्क पहनें और सामाजिक दूरी बनाए रखें। उन्होंने कहा, ''हमारे सदस्यों और स्थानीय लोगों से लेकर पंडालों में बार-बार आने वाले कारीगरों, पुजारियों, ढाकी और बिजली मिस्त्रियों तक सभी को अगले तीन महीनों में कोविड-19 रोधी टीके लगवाने होंगे। हम उम्मीद कर रहे हैं कि सभी को दोनों खुराक मिल जाएंगी, लेकिन पूजा से दो-तीन दिन पहले गांवों से आने वाले ढाकी (पारंपरिक ढोलकिया) के लिए, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें कम से कम एक खुराक लगा दी जाए।'' 'फोरम फॉर दुर्गोत्सव' कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में 550 सामुदायिक दुर्गा पूजा का प्रमुख संगठन है। उसने उत्सव के आयोजन के समय कोविड-19 सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। पंडालों का निर्माण इस तरह से किया जाएगा कि दिशा-निर्देशों के तहत श्रद्धालु दूर से ही मूर्तियों को देख सकें और निकट न जाएं। उन्होंने कहा, ''पुष्पांजलि' के लिए कटे हुए फल चढ़ाने की अनुमति नहीं होगी और अनुष्ठान के दौरान शारीरिक दूरी बनाए रखनी होगी।'' सरकार को जो दिशानिर्देश प्रस्तुत किए जाएंगे, वे पिछले साल कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित नियमों से मिलते-जुलते हैं, जिसने पंडालों में लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके साथ ही, शहर में दुर्गा पूजा समितियां ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित करने पर भी ध्यान केन्द्रित कर रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोग घर से ही कलाकृतियों को देख सकें। उत्सव इस साल 12 अक्टूबर को महा सप्तमी पर शुरू होगा और 15 अक्टूबर विजय दशमी तक चलेगा।




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कोरोना मरीजों की बढती संख्या के पीछे फर्जी टीकाकरण?

कोरोना महामारी से बचाव हेतु शासन ने टीकाकरण अनिवार्य कर दिया है। राशन से लेकर अन्य सुविधायें पाने के लिए भी टीकाकरण का प्रमाण पत्र आवश्यक है। जागरूकता लाने के नाम पर भारी धनराशि खर्च की जा रही है। सुविधाओं से वंचित होने का खतरा और कोरोना के बढते मरीजों की संख्या के डर से टीकाकरण केन्द्रों पर सुबह से ही लम्बी लम्बी लाइनें लगने लगीं है। मगर कर्मचारियों की लापरवाही और टीके की कमी ने अफरातफरी का माहौल बना दिया है। हजारों लोगों की लाइन में केवल सैकडों लोगों को ही टीका लग पा रहा है। बाकी लोग मायूस को कर लौट रहे हैं। प्रभावशाली लोगों को बिना लाइन के ही टीके लग जाते हैं। ऐसे में आये दिन झगडे हो रहे हैं।


 एक ओर टीकों की किल्लत और दूसरी ओर सिफारिशी फोन लगवाने वालों की निरंतर बढती संख्या ने अभियान की व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह अंकित कर दिये हैं। केन्द्रों पर डियूटी करने के लिए निर्धारित कर्मचारी भी अपनी मनमर्जी से पहुंचते हैं। इस लेटलतीफी से भी केन्द्रों पर सुबह से इंतजार कर रहे लोगों में आक्रोश पनपने लगता है। उत्तरदायी अधिकारियों व्दारा आम आवाम का फोन न उठाना, तो एक आम बात है। एप के माध्यम से स्लाट बुक करवाने वालों के लिए केन्द्रों पर कोई अतिरिक्त काउण्टर नहीं होने से उन्हें भी बिना स्लाट बुक करने वालों की भीड में ही जद्दोजेहद करना पडती है। देश के अधिकांश केन्द्रों में ऐसी ही स्थिति है। साइबर युग में स्वयं को अग्रणीय दिखाने के लिए टीकाकरण हेतु एप लांच किया गया है परन्तु केन्द्रों पर एप का औचित्य हाशिये पर पहुंच गया है। इसके अलावा एक बेहद खतरनाक स्थिति की सूचनायें मिल रहीं है जिसमें अनेक गांवों के कोटेदारों, पंचायत सचिवों और स्वास्थकर्मियों को संयुक्त रूप से आरोपों के घेरे में लिया जा रहा है। 


जब से नि:शुल्क राशन सहित अन्य सुविधाओं के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया है, तब से राशन वितरण करने और अन्य सुविधायें उपलब्ध कराने वालों की अतिरिक्त आय पर विराम लग गया है। गांव के ज्यादातर लोग टीका नहीं लगवाना चाहते है और राशन सहित सभी सुुविधायें लेना चाहते है। ऐसे में अनेक कोटेदारों, पंचायत सचिवों तथा स्वास्थकर्मियों नेे एक सुनिश्चित योजना बनाकर आंकडों की बाजीगरी दिखाना शुरू कर दी। इसके पीछे अनेक कारण हैं। कोटोदारों  की  अतिरिक्त आय पर विराम लग गया, पंचायत सचिवों और स्वास्थकर्मियों पर तेजी से टीकाकरण करने का आधिकारिक दवाव है। दूसरी ओर गांवों में लोग टीका लगवाने के लिए तैयार हो ही नहीं रहे हैं। लोगों के इस उपेक्षात्मक रवैये के पीछे संचार माध्यमों से टीके के प्रतिकूल प्रभावों का प्रचार काम कर रहा है। ऐसे में आरोप है कि अनेक कोटेदारों, पंचायत सचिवों और स्वस्थकर्मियों ने फर्जी आंकडे तैयार करने हेतु संयुक्त रूप से एक योजना बनाई।


 कोटेदार ने गांव के लोगों को मोबाइल सहित पंचायत भवन में बुला, सचिव और स्वास्थकर्मी ने हितग्राही के मोबाइल सहित अन्य दस्तावेजों से औपचारिकतायें पूरी की और संयुक्त रूप से एक राय होकर टीका लगाये बिना ही टीकाकरण के आंकडे तैयार कर लिये गये। इस पूरी प्रक्रिया में बचे टीकों को निजी अस्पतालों में बेचना की भी चर्चा भी सामने आ रही है क्यों कि एडवांस टीकाकरण हेतु अतिरक्ति डोज लगवाने पर भी संचार माध्यमों पर खासा जोर दिया जा रहा है। ऐसे में यदि फर्जी टीकाकरण प्रमाणपत्र वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है तो टीका की प्रमाणिकता पर हंगामा मचाने वाले गला फाडने लगते है। इस तरह की निरंतर मिलने वाली सूचनाओं से चिन्ता के बादल मडराने लगते हैं। कोरोना के मिलने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा होने के पीछे यह भी एक महात्वपूर्ण कारक हो सकता है परन्तु अभी तक ऐसी जांच पध्दति विकसित नहीं हुई है जो यह बता सके कि अमुक व्यक्ति को वास्तव में टीका लगा है या नहीं। फर्जी टीकाकरण जैसे कारकों के पीछे उत्तरदायी लोगों की मानसिकता है जो शासकीय दायित्वों की कागजी पूर्ति हेतु नित नये हथकंडे अपनातेे है। देश के प्रशासनिक व्यवस्था में लगे लोगों की मानसिकता बदले बिना कोई भी योजना, अभियान या कार्यक्रम धरातल पर सफल नहीं हो सकता। कागजी आंकडों से तो शतप्रतिशत सफलता ही अंकित होती रही है और हो भी रही है। 


इसी कारण आम आवाम भी सरकार को एक अलग दृष्टिकोण से देखती है। वर्तमान समय में सरकार का स्थाई कर्मचारी या अधिकारी होना, सुरक्षित भविष्य की गारंटी है भले ही दायित्वों की पूर्ति की जाये या न की जाये। कर्तव्यों को निर्वहन हो या न हो। देश में किसी को भी सरकारी नौकरी से निष्कासित कर पाना सहज नहीं है। कोर्ट, अपील, मानवाधिकार, अल्पसंख्यक आयोग, महिला आयोग जैसी अनेक संस्थाओं की पेचैंदगी भरी प्रक्रिया लागू होने से सरकारी सेवक स्वयं को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस करता है। कार्यकाल के दौरान मनमाने आचरण करने वाले सेवा निवृत्ति के बाद भी एक मुस्त भारी धनराशि और जीवन भर निरंतर पेंशन राशि के हकदार होते हैं। जब कि प्राइवेट नौकरी, व्यापार या खेती करने वाले जीवन के अंतिम समय तक जीवकोपार्जन के लिए संर्घष करते रहते हैं, भले ही शरीर में सामर्थ हो या नहो। वर्तमान समय में सरकारी नौकरी किसी भगवान के वरदान से कम नहीं है। यही कारण है कि दूर दराज के गांवों में टीकाकरण के स्थल निरीक्षण हेतु नियुक्त अधिकारी अपने वातानुकूलित कमरों में बैठकर ही धरातली कर्मचारियों की आख्या पर प्रमाणिकता की मुहर लगा देते हैं। कागजी आंकडे तैयार करने में माहिर प्रशासनिक अधिकारी दैनिक आख्या में अपने-अपने क्षेत्र की कीर्तिमानी उपलब्धियों पर एक दूसरे की पीठ ठोक रहे हैं। ऐसे में कोरोना के बढ रहे मरीजों के पीछे फर्जी टीकाकरण की संभावना बलवती हो रही हैं। इस यक्ष प्रश्न को सुलझाये बिना वास्तविक स्थिति तक पहुंचना बेहद कठिन होगा। इस सप्ताह बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।




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मानसून सत्र में कोविड प्रोटोकॉल का पालन होगा, 323 सांसदों का पूर्ण टीकाकरण हुआ : ओम बिरला

नई दिल्ली : कोरोना वायरस महामारी के बीच संसद का मानसून सत्र इस महीने से शुरू होने जा रहा है। संसद का मानसूत्र सत्र 19 जुलाई से 13 अगस्त तक होगा। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने आज इसकी जानकारी दी। अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि इस दौरान 19 कार्यदिवस होंगे। आमतौर पर संसद का मानसून सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह से शुरू होता है और स्वतंत्रता दिवस से पहले समाप्त होता था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सभी सदस्यों और मीडिया को कोविड नियमों के अनुसार अनुमति दी जाएगी। आरटीपीसीआर टेस्ट अनिवार्य नहीं है। लेकिन हम उन लोगों से टेस्ट कराने का अनुरोध करेंगे जिन्होंने अभी टीकाकरण नहीं कराया है। उन्‍होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान संसद के तीन सेशन हुए हैं, जिसमें बड़ी संख्‍या में सांसदों ने शिरकत की। संसद के बजट सेशन के दौरान 167 फीसदी प्रोडक्टिविटी रही जो अपने आप में रिकॉर्ड है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि, इस बार का मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों का समय सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। उन्होंने बताया कि, 311 सांसदों ने दोनों डोज ले लिए हैं। वहीं, 23 सांसद कोरोना होने के कारण वैक्सीन नहीं ले पाए हैं। 18 जुलाई को सदन के सभी फ्लोर लीडर की बैठक होगी, ताकि सत्र चलाने पर चर्चा हो सके। नए मंत्रिमंडल गठन की वजह से कई समितियों में स्थान रिक्त हुए हैं। उनका पुनर्गठन किया जाएगा। बिरला ने बताया कि नए संसद भवन का निर्माण कार्य अक्‍टूबर 2021 में पूरा हो जाएगा। उन्‍होंने कहा कि नए संसद भवन का निर्माण कार्य अक्टूबर 2021 में पूरा होने की संभावना है। हम अपने टारगेट से 10 दिन पीछे चल रहे हैं, जल्दी ही इसे कवर कर लेंगे। स्‍पीकर ने कहा कि 2022 में संसद का सत्र नई बिल्डिंग में चलेगा। मानसून सत्र में इस बार विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा। कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग भी एक बार फिर संसद में गूंज सकती है। टीकाकरण की धीमी रफ्तार और दूसरी लहर के दौरान सरकार की नाकामी भी शामिल है।



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राज्यों, निजी अस्पतालों के पास 1.70 करोड़ से अधिक टीके उपलब्ध : केंद्र

नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों के पास बचे हुए और इस्तेमाल नहीं हुए 1.70 करोड़ से अधिक टीके उपलब्ध हैं। मंत्रालय ने बताया कि राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को सभी स्रोतों से अभी तक 38.18 करोड़ से अधिक टीके उपलब्ध कराए गए हैं तथा 23,80,080 और टीके उपलब्ध कराए जाने हैं। इनमें से बर्बाद हो चुके टीकों समेत कुल 36,48,77,756 टीकों की खपत हुई है। कोविड-19 टीकाकरण का नया चरण 21 जून से शुरू हुआ था।



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राज्यों, निजी अस्पतालों के पास कोविड-19 टीके की 1.66 करोड़ से ज्यादा खुराक उपलब्ध : केंद्र

नई दिल्ली :  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि राज्यों, केंद्र शासित क्षेत्रों और निजी अस्पतालों के पास लोगों को देने के लिये 1.66 करोड़ से ज्यादा टीके की खुराक उपलब्ध हैं।


मंत्रालय ने कहा कि अब तक सभी संसाधनों के जरिए राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को टीके की 37.07 करोड़ से ज्यादा खुराक उपलब्ध कराई जा चुकी हैं तथा 23,80,000 और खुराकें पहुंचाई जा रही हैं। मंत्रालय ने कहा कि इनमें से व्यर्थ हुई मात्रा समेत कुल खपत 3,54,06,0197 खुराक का है।


केंद्र देश भर में कोविड-19 टीकाकरण की रफ्तार तेज करने और दायरा बढ़ाने के लिये प्रतिबद्ध है।


कोविड 19 टीकाकरण का नया चरण 21 जून को शुरू हुआ था। 



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कोवैक्सीन की क्षमता का अंतिम आकलन पूरा हुआ, डेल्टा स्वरूप के खिलाफ 65.2 प्रतिशत प्रभावी

हैदराबाद : भारत बायोटेक की कोवैक्सीन कोविड-19 के लक्षण वाले मामलों के खिलाफ 77.8 प्रतिशत और नये डेल्टा स्वरूप के खिलाफ 65.2 प्रतिशत प्रभावी है। कंपनी ने शनिवार को बताया कि उसने तीसरे चरण के परीक्षणों में कोवैक्सीन की क्षमता का अंतिम आकलन पूरा कर लिया है।


प्रभावकारिता का आकलन दर्शाता है कि कोवैक्सीन गंभीर लक्षण संबंधी कोविड-19 मामलों के खिलाफ 93.4 प्रतिशत प्रभावी है जबकि सुरक्षा विश्लेषण दिखाते हैं कि सामने आईं प्रतिकूल घटनाएं बिलकुल वैसी ही थीं जैसी प्रयोगों में दी जाने वाली अहानिकारक दवाओं (प्लेसीबो) को देने पर देखने को मिलती हैं जहां 12 प्रतिशत प्रतिभागियों में आम दुष्प्रभाव देखने को मिले और 0.5 प्रतिशत से भी कम लोगों में गंभीर दुष्प्रभाव दिखे।


शहर स्थित टीका निर्माता की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि प्रभाव संबंधी आंकड़ों में सामने आया कि बिना लक्षण वाले कोविड-19 के खिलाफ यह 63.6 प्रतिशत सुरक्षा देता है।


टीके के तीसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षण भारत के 25 स्थानों पर किए गए जिनमें दूसरी खुराक लेने के कम से कम दो सप्ताह बाद सामने आए 130 लाक्षणिक कोविड-19 मामलों का स्थिति आधारित विश्लेषण किया गया।


यह टीका भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और पुणे की राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है।


भारत बायोटेक के प्रमुख एवं प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने कहा, “ भारत में अब तक के सबसे बड़े कोविड टीकों के परीक्षण के परिणामस्वरूप कोवैक्सीन की सफल सुरक्षा और प्रभावोत्पादकता संबंधी सूचनाएं भारत एवं विकासशील देशों की नवोन्मेष और नये उत्पाद विकास के प्रति ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को स्थापित करती हैं।’’


उन्होंने कहा,‘‘ हमें यह कहते हुए गर्व है कि भारत का नवोन्मेष अब वैश्विक आबादी को सुरक्षित करने के लिए उपलब्ध होगा।’’


आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि प्रभावी सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) के तहत आईसीएमआर और बीबीआईएल द्वारा विकसित कोवैक्सीन ने भारत के अब तक के सबसे बड़े तीसरे चरण के कोविड क्लिनिकल परीक्षणों में 77.8 प्रतिशत कुल प्रभावित दर्शाई है।”


उन्होंने कहा कि कोवैक्सीन न सिर्फ भारतीय नागरिकों को लाभ देगी बल्कि घातक सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ वैश्विक समुदाय को भी सुरक्षित करेगी।


भार्गव ने कहा, “मुझे यह देखकर भी प्रसन्नता है कि कोवैक्सीन सार्स-सीओवी-2 के सभी स्वरूपों के खिलाफ अच्छे से काम करता है।”





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2021 में सबका हो टीकाकरण तो कम से कम 2022 तो खुशनुमा होगा!

केंद्र सरकार का दावा है कि साल 2021 के दिसंबर तक देश के सभी 100 करोड़ नौजवानों को कोविड-19 की वैक्सीन मिल जाएगी. यानी सभी 100 करोड़ लोगों का पूरी तरह टीकाकरण करने के लिए 200 करोड़ वैक्सीन की ज़रूरत सरकार दिसंबर तक पूरा करने का दावा कर रही है। साथ ही भारत के वैक्‍सीनेशन कार्यक्रम की रफ्तार को लेकर पीएम नरेंद्र मोदीने एक ट्वीट किया है. अपने ट्वीट में उन्‍होंने लिखा, 'भारत का टीकाकरण अभियान गति पकड़ रहा है, उन सभी को बधाई जो इसमें जुटे हैं. हमारी प्राथमिकता सभी के लिए वैक्‍सीन और सभी के लिए मुफ्त वैक्‍सीन को ले।यह कदम सराहनीय है कि केन्द्र सरकार ने देश के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष हाल ही में कोरोना टीकाकरण का जो ब्यौरा रखा है उसके अनुसार इस वर्ष के अन्त तक 200 करोड़ वैक्सीन उपलब्ध हो जायेगी जिससे 18 वर्ष से ऊपर के सभी 94 करोड़ लोगों के टीका लग जायेगा। इससे यह स्पष्ट है कि वैक्सीन उत्पादन व इसकी उपलब्धता का पक्का खाका केन्द्र ने तैयार कर लिया है। इससे यह भी भ्रम साफ होना चाहिए कि भारत के पास वैक्सीन की कमी का कोई डर है। केन्द्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी अदालत में वचन दिया है कि 31 जुलाई तक 51.6 करोड़ वैक्सीन उपलब्ध हो जायेंगी जबकि शेष साल के अन्त तक प्राप्त हो जायेगी। यदि सरकार वैक्सीनों की सप्लाई इस गति से प्राप्त करने में सफल हो जाती है तो कोई कारण नहीं है कि भारत के प्रत्येक वयस्क नागरिक का चालू वर्ष के भीतर-भीतर टीकाकरण न हो सके। सरकार ने एक शपथ पत्र दाखिल कर सर्वोच्च न्यायालय को यह वचन दिया है। अभी तक 27 करोड़ के लगभग लोगों का टीकाकरण हो चुका है जिनमें से साढ़े पांच करोड़ को दो बार वैक्सीन लगी है। भारत की आबादी 139 करोड़ को देखते हुए ये आंकड़े कम लग सकते हैं मगर इसके साथ यह भी सत्य है कि सीमित वैक्सीन उत्पादन क्षमता को देखते हुए इन्हें कम करके भी नहीं आंका जा सकता।


भारत सरकार ने अब टीकाकरण का जो खाका सर्वोच्च न्यायालय के सामने रखा है उसके अनुसार अगस्त से दिसम्बर तक 135 करोड़ वैक्सीन इनकी पांच उत्पादक कम्पनियों से प्राप्त की जायेगी। इनमें 50 करोड़ कोविशील्ड, 40 करोड़ कोवैक्सीन, 30 करोड़ बायो ई., 10 करोड़ स्पूतनिक व 5 करोड़ जायडस कैडिला होंगी। इन आंकड़ों से तो लगता है कि भारत कोरोना की संभावित तीसरी लहर के आने से पहले अपने 75 प्रतिशत वयस्कों को वैक्सीन लगा देगा। वैज्ञानिकों का मत है कि अक्टूबर महीने में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। दुनिया जानती है कि कोरोना का मुकाबला करने का एक ही तरीका है कि सभी नागरिकों को टीका लगाया जाये। बेशक यह कार्य हम और जल्दी तथा ज्यादा संजीदगी दिखाते हुए कर सकते थे, बशर्ते हमने वैक्सीन प्राप्त करने में देरी न की होती। मगर इसके साथ यह भी हमें समझना चाहिए कि कोरोना संक्रमण से दुनिया को छुटकारा दिलाने में भारत की महती भूमिका रही है।


हमारा देश ही एक मात्र ऐसा देश है जहाँ कोविशील्ड वैक्सीन का उत्पादन सर्वाधिक हो रहा है और उसके बाद कोवैक्सीन का उत्पादन भी अब गति पकड़ रहा है। दुनिया के अन्य देशों में वैक्सीन उत्पादन की क्षमता बहुत कम है। कोरोना की दूसरी लहर का मुकाबला करने के लिए भारत से ही अधिकतम वैक्सीनों का निर्यात हुआ परन्तु यह भी सत्य है कि भारत ने मानवीयता के आधार पर दुनिया के अन्य देशों की मदद की। भारत के मुकाबले इन देशों की आबादी बहुत कम है अतः भारत की सदाशयता की वजह से मानव जाति का कल्याण हुआ। बेशक शुरू में भारत की वैक्सीन नीति में बहुत खामियां थीं जो सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद दुरुस्त हुईं। मसलन 18 वर्ष से ऊपर 44 वर्ष तक के लोगों के वैक्सीन लगाने का जिम्मा राज्य सरकारों को दे दिया गया था और इसके लिए वैक्सीन खरीदने की जिम्मेदारी भी उन पर डाल दी गई थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने गैर तार्किक और बेहूदा करार दिया था। इसके बाद ही केन्द्र सरकार ने सभी वयस्कों के मुफ्त टीका लगाने की घोषणा की और वैक्सीन की घरेलू उत्पादन वृद्धि व खरीद नीति को सरल बनाया। अब कोविशील्ड व कोवैक्सीन बनाने वाली कम्पनियों को अपनी उत्पादन क्षमता में विस्तार करने की छूट इस प्रकार दी गई है कि भारत को कम से कम वैक्सीन आयात करने की जरूरत पड़े। इसके बावजूद सरकार अन्य विदेशी वैक्सीन कम्पनियों से भी बात कर रही है जिससे जरूरत पड़ने पर उनकी वैक्सीनों का इस्तेमाल भी भारत में हो सके।


भारत सरकार ने 25 प्रतिशत वैक्सीन खरीद का अधिकार निजी क्षेत्र के चिकित्सा तन्त्र को भी दिया है। हालांकि सरकार के इस फैसले की भी राजनैतिक क्षेत्रों में कड़ी आलोचना हुई है मगर भारत की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए निजी क्षेत्र को इजाजत देने में कोई हर्ज भी नजर नहीं आता है। जिन लोगों की आर्थिक क्षमता कुछ धन खर्च करके वैक्सीन लगवाने की है उनके लिए यह सुविधा है, वैसे यह आवश्यक नहीं है, अगर धनाढ्य लोग भी सरकारी केन्द्रों पर मुफ्त वैक्सीन लगवाना चाहें तो उनका स्वागत है। यह समाजवादी नीति ही है, इसमें बहुत ज्यादा तर्क की गुंजाइश इसलिए नहीं बचती है क्योंकि आजादी के बाद यह देश हवाई जहाज में सफर करने वाले लोगों से मिट्टी का तेल प्रयोग करने वाली गरीब जनता को उसे सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की कीमत वसूलता रहा है लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि सरकार ने कोरोना काल में फौज समेत सरकारी कर्मचारियों के मंहगाई भत्ते व अन्य कुछ मदों में कटौती करके साढ़े 37 हजार करोड़ की प्रप्ति की और वैक्सीन लगाने के लिए बजट में 36 हजार करोड़ का प्रावधान किया तो जनता को क्या दिया? लेकिन यह पिछले सौ साल का सबसे बड़ा संकट है इसलिए सरकार को कुछ मोहलत देनी होगी मगर इतनी भी नहीं कि लोगों के काम-धंधे चौपट हो जाने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की सीधी वित्तीय मदद भी न मिले परन्तु फिलहाल प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा करना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और इसके लिए वैक्सीन ही अन्तिम औजार है।ये बड़ी चिंता की बात थी, क्योंकि नेचुरल के साथ टीकाजनित इम्युनिटी आने के लिए भी एक बड़ी आबादी को कम समय में टीका लगाने की दरकार होती है। इन तरीकों से जब हम संक्रमण की चेन तोड़ते हैं तभी हमारी आर्थिक गतिविधियां सुचारु रूप से चल पाती हैं। इसकी बड़ी वजह है कि तब हम लाकडाउन जैसे हथियार का सहारा लिए बिना ही संक्रमण की रफ्तार को थाम सकते हैं। लिहाजा हमें अपनी टीकाकरण नीति में सुधार की जरूरत महसूस हुई और हम कर भी रहे हैं । अतः वैक्सीन फर्स्ट। अब यह तो कहना ही पड़ेगा कि 2021 में सबका हो टीकाकरण तो कम से कम 2022 तो खुशनुमा होगा ।


-अशोक भाटिया-

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राहुल ने टीके उपलब्ध नहीं होने का दावा किया, हर्षवर्धन का पलटवार

नई दिल्ली : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में कोविड-19 रोधी टीकों की कथित कमी का हवाला देते हुए शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि जुलाई का महीना आ गया है, लेकिन टीके नहीं आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता हर्षवर्धन ने उन पर पलटवार करते हुए कहा कि अहंकार और अज्ञानता के वायरस का कोई टीका नहीं है। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘जुलाई का महीना आ गया है, वैक्सीन नहीं आयीं।’’


हर्षवर्धन ने उन पर पलटवार करते हुए ट्वीट किया, ‘‘ अभी कल ही मैंने जुलाई के लिए टीके की उपलब्धता को लेकर तथ्य सामने रखे थे। राहुल गांधी जी की समस्या क्या है? क्या वह समझते नहीं हैं? अहंकार और अज्ञानता के वायरस का कोई टीका नहीं है। कांग्रेस को अपने नेतृत्व में आमूल-चूल बदलाव के बारे में विचार करने की जरूरत है।’’


दरअसल, कांग्रेस का दावा है कि सरकार ने इस साल दिसंबर तक देश के सभी वयस्क नागरिकों को टीका लगाने का जो लक्ष्य रखा है उसे पूरा करने के लिए उचित संख्या में टीकाकरण नहीं हो रहा है क्योंकि टीके की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है।


दूसरी तरफ, बृहस्पतिवार को सुबह सात बजे प्रकाशित स्वास्थ्य मंत्रालय के टीकाकरण आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत कल तक टीके की 33.57 करोड़ खुराकें लगाई जा चुकी थीं। 








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वैक्सीन लगवाते हुए मलाइका ने दिखाया अपना बोल्ड लुक

मुंबई : देश में वैक्सीनेशन ने रफ्तार पकड़ी है। 18 से ज्यादा उम्र के सभी लोगों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। बॉलीवुड के सितारे भी वैक्सीन की डोज लेने टीकाकरण सेंटर पहुंच रहे हैं। वहीं अपने आउटफिट्स को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाली एक्ट्रेस मलाइका अरोरा वैक्सीन की सेंकड डोज लेने के बाद ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई। दरअसल वैक्सीन लगवाते हुए उनका बेहद बोल्ड अंदाज सोशल मीडिया में धमाल मचा रहा है।


बता दें, मलाइका अरोरा ने वैक्सीन की दूसरी डोज लगवा लिया है। वैक्सीनेशन के बाद मलाइका ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी। इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर कर कहा कि मैं न केवल अपने लिए बल्कि आपके लिए भी सुरक्षित रहूंगी। पूरी तरह से वैक्सीनेशन। मैं हर फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए आभारी हूं, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। इतने अद्भुत कार्य के लिए आप सभी का धन्यवाद।’


वहीं मलाइका की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आते ही वायरल हो गई हैं। वहीं अब यूजर्स मलाइका को जमकर खरी खोटी सुना रहे हैं। एक यूजर ने यह कहकर चुटकी ली 'इधर भी चालू हो गई।' एक ने लिखा 'अब फिवर आएगा पेरासिटामोल ले लो'। इस तरह कई कमेंट्स कर यूजर्स एक्ट्रेस मलाइका को ट्रोल कर रहे हैं।


पोस्ट वीडियो और तस्वीरों में स्वस्थ्य कर्मी उन्हें वैक्सीन लगाती दिख रही हैं। ब्लैक जॉगर्स और क्रॉप्ड जैकेट पहनी मलाइका ग्रे कलर का मास्क लगाई दिखाई दी। वहीं उनका बोल्ड अंदाज सोशल मीडिया यूजर्स को रास नहीं आ रहा है।




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कोलकाता में फर्जी कोविड टीका शिविर मामले में दो और गिरफ्तार

कोलकाता :  कोलकाता में फर्जी कोविड टीकाकरण शिविर मामले में दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।


उन्होंने बताया कि इन नई गिरफ्तारियों के साथ, कोलकाता पुलिस इस मामले में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है जिनमें फर्जी आईएएस अधिकारी देबांजन देब भी शामिल है जो शहर में फर्जी कोविड टीकाकरण शिविरों के आयोजन का मास्टरमाइंड था।


अधिकारी ने बताया, “सोमवार रात की छापेमारी में, हमने नकताला इलाके से देब के रिश्तेदार और शहर के उत्तरी हिस्से से एक और 52 वर्षीय व्यक्ति को पकड़ा। दोनों देब के साथ सक्रिय रूप से शामिल थे।”


उन्होंने बताया कि देब के रिश्तेदार को शुरुआत से ही मालूम था कि वह आईएएस अधिकारी नहीं है और इसके बावजूद, उसने अवैध गतिविधियों में उसकी मदद करना जारी रखा।


उन्होंने बताया, “रिश्तेदार ने यहां तक कि देब के साथ भी धोखाधड़ी की। दूसरा व्यक्ति तालताला इलाके के एक डॉक्टर के साथ जुड़ा हुआ है और वह शिविरों में आने वाले लोगों को कोविड का फर्जी टीका लगवाने में देब की मदद करता था।”


अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि बतौर “आईएएस अधिकारी” देब ने मिलावट वाला पेट्रोल मिलने की सूचना के बाद कस्बा इलाके में अपने कार्यालय के पास एक छापेमारी भी की थी। उन्होंने बताया कि छापेमारी की खबर देब की तस्वीर के साथ एक अखबार में छपी भी थी।


अधिकारी ने बाया, “उसने एक चुनाव भी कराया था जहां उसके कर्मचारियों ने वोट डाले थे। चुनाव के बाद, उसने खुद को विजेता बताया था और वह खबर भी छपवाई थी कि वह पश्चिम बंगाल कर्मचारी संघ चुनावों में विजेता बना है।”


देब को खुद को कोलकाता नगरपालिका का फर्जी संयुक्त आयुक्त बताने और फर्जी टीकाकरण शिविरों को चलाने के आरोप में पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया गया था। उसके तीन सहयोगियों को शनिवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।







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सोनिया ने टीकाकरण की गति को लेकर चिंता जताई, तीसरी लहर की तैयारी और बच्चों की सुरक्षा पर जोर दिया

नई दिल्ली : कांग्रेस अध् यक्ष सोनिया गांधी ने देश में कोरोना रोधी टीकाकरण की गति को लेकर चिंता प्रकट करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि महामारी की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए तीव्रता से तैयारी करने और विशेषकर बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत है। उन्होंने पार्टी महासचिवों और प्रदेश प्रभारियों की डिजिटल बैठक में यह टिप्पणी की।


कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर बताया, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महासचिवों और प्रभारियों की बैठक को संबोधित किया। टीकाकरण की गति को लेकर उन्होंने गहरी चिंता प्रकट की। कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर को लेकर तैयारी करने और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर उन्होंने अधिक जोर दिया।’’


सोनिया गांधी की अगुवाई में चल रही इस बैठक में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जाएगी।


पार्टी सूत्रों ने बताया कि इस डिजिटल बैठक में कांग्रेस के नेता पार्टी के प्रस्तावित संपर्क अभियान पर भी चर्चा करेंगे। इस बैठक में पेट्रोल-डीजल और जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के संदर्भ में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। बैठक में कोविड के मौजूदा हालात और आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा होगी।


इस बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की भी बैठक बुलाई जाएगी। सोनिया गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ यह बैठक संसद के मॉनसून सत्र से पहले बुलाई है। मॉनसून सत्र जुलाई में हो सकता है। कांग्रेस पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के मुद्दे को लेकर पिछले कुछ हफ्तों से सरकार पर लगातार हमले कर रही है।








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भारत में पिछले 24 घंटे में 85 लाख से ज्यादा लोगों ने लगवाया टीका, बना कोरोना वैक्सीनेशन का वर्ल्ड रिकॉर्ड

नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोविड -19 टीकाकरण के लिए संशोधित दिशानिर्देशों के पहले दिन सोमवार को देशभर में टीके की 85.15 लाख से अधिक खुराक दी गईं।गत 16 जनवरी से शुरू हुए टीकाकरण अभियान के बाद से एक दिन में टीके की सबसे अधिक खुराक लगाई गई है।


मोदी ने कहा, ''आज रिकॉर्ड संख्या में हुआ टीकाकरण हर्षित करने वाला है। कोविड-19 से लड़ाई में टीका हमारा सबसे मजबूत हथियार बना हुआ है। जिन लोगों का टीकाकरण हुआ, उन्हें बधाई और अग्रिम पंक्ति के वे सभी कर्मी प्रशंसा के पात्र हैं, जिन्होंने इतने लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की।''


इससे पूर्व दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, ''केंद्र सरकार आज से प्रत्येक भारतीय के लिए 'सभी के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान' शुरू कर रही है। भारत के टीकाकरण अभियान के इस चरण के सबसे बड़े लाभार्थी देश के गरीब, मध्यम वर्ग और युवा होंगे। हम सभी को खुद को टीका लगवाने का संकल्प लेना चाहिए। हम साथ मिलकर कोविड-19 को हराएंगे।'


संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, केंद्र द्वारा मुफ्त में उपलब्ध कराए गए टीके की खुराक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आबादी, बीमारी के प्रसार के स्तर और टीकाकरण की प्रगति आदि मानदंडो के आधार पर आवंटित की जायेगी। टीके की बर्बादी से आवंटन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भारत सरकार देश में स्थित विनिर्माताओं से कोविड रोधी टीकों की 75 प्रतिशत खरीद करेगी।


हालांकि, कई राज्यों द्वारा धनराशि सहित कुछ समस्याओं की शिकायत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ जून को टीका दिशानिर्देशों में संशोधन की घोषणा की थी।संशोधित दिशा-निर्देशों में कहा गया था, ''खरीदे गए टीके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लगातार नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे जैसा कि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत के समय से हो रहा है। ये खुराक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सरकारी टीकाकरण केंद्रों के माध्यम से प्राथमिकता के अनुरूप सभी नागरिकों को नि:शुल्क लगाई जाएंगी।''


इनमें कहा गया था, ''18 साल से अधिक आयु के नागरिकों के आबादी समूह के मामले में राज्य/केंद्रशासित प्रदेश टीका आपूर्ति कार्यक्रम में अपनी खुद की प्राथमिकता तय कर सकते हैं।''इन दिशा-निर्देशों में कहा गया था कि टीका विनिर्माताओं द्वारा उत्पादन और नए टीकों को प्रोत्साहित करने के वास्ते, घरेलू टीका विनिर्माताओं को सीधे निजी अस्पतालों को टीके उपलब्ध कराने का विकल्प भी दिया गया है जो उनके मासिक उत्पादन के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।


इन दिशा-निर्देशों के अनुरूप, राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश बड़े और छोटे निजी अस्पतालों तथा क्षेत्रीय संतुलन के बीच टीकों के समान वितरण के मद्देनजर निजी अस्पतालों की मांग का संग्रह करेंगे। दिशानिर्देशों में कहा गया था कि निजी अस्पतालों के लिए टीका खुराक की कीमत प्रत्येक टीका विनिर्माता द्वारा घोषित की जाएगी, और बाद में किए जाने वाले किसी भी बदलाव के बारे में पहले से ही सूचित कर दिया जाएगा।


संशोधित दिशा-निर्देशों में कहा गया था कि सभी नागरिक नि:शुल्क टीकाकरण के हकदार हैं, चाहे उनकी आय कितनी भी हो, और जो लोग भुगतान करने की क्षमता रखते हैं, उन्हें निजी अस्पतालों के टीकाकरण केंद्रों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इनमें कहा गया था 'लोक कल्याण' की भावना को बढ़ावा देने के लिए, गैर-हस्तांतरणीय इलेक्ट्रॉनिक वाउचर के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसे निजी टीकाकरण केंद्रों पर भुनाया जा सकता है। यह लोगों को निजी टीकाकरण केंद्रों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के टीकाकरण के लिए वित्तीय रूप से मदद करने में सक्षम बनाएगा।






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असम में सोमवार से रोजाना तीन लाख लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य : मुख्यमंत्री

गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि राज्य सरकार ने सोमवार से अगले 10 दिन तक रोजाना तीन लाख लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा है।


असम में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सरमा ने कहा कि अगले एक सप्ताह तक कोई सरकारी कामकाज नहीं होगा और पूरा तंत्र टीकाकरण अभियान में सहयोग करेगा।


उन्होंने सभी हितधारकों से तैयारी की समीक्षा के बाद कहा, ''यह हमारे विस्तारित टीकाकरण अभियान का हिस्सा है। 21 जून से 30 जून तक रोज तीन लाख लोगों को कोविड-19 रोधी टीका लगाने का ध्येय रखा गया है।''


मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि एक जुलाई से सरकारी कार्यालय फिर से खुलेंगे। उन्होंने सभी कर्मचारियों से इस महीने के तक टीका लगवाने का अनुरोध किया।


उन्होंने निजी कंपनियों के कर्मचारियों से भी टीका लगवाने का अनुरोध किया। राज्य सरकार द्वारा अगले महीने से निजी कंपनियों के कार्यालय को शाम पांच बजे तक खोले जाने की अनुमति देने की संभावना है।



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कोरोना टीकाकरण में गौतमबुद्ध नगर प्रदेश में अव्वल

नोएडा : कोरोना के टीकाकरण में गौतमबुद्ध नगर का प्रदेश में पहला नंबर पर है और यहां पर आठ लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इन्हें कोरोना की प्रथम डोज दी जा चुकी है। यह जिले की कुल आबादी का 50 प्रतिशत है।


जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर जिले के लोगों की जागरूकता के चलते यहां पर टीकाकरण तेजी से चल रहा है। टीकाकरण में पूरे प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर पहले नंबर पर है। यहां पर 71 सरकारी केन्द्रों और करीब दस निजी अस्पतालों में वैक्सीनेशन की सुविधा है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर कैम्प लगाकर भी लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है।


जिलाधिकारी ने माना कि पिछले एक सप्ताह से वैक्सीन मिलने में कुछ दिक्कत आ रही थी, जिस कारण टीकाकरण की गति कुछ धीमी रही, लेकिन अब वैक्सीन पर्याप्त संख्या में मिलनी प्रारम्भ हो गई है और 21 जून से स्थिति में और सुधार हो जाएगा।


21 जून से एक केंद्र पर वैक्सीन लगेगी

टीकाकरण के प्रभारी डॉ. नीरज त्यागी ने कहा कि अभी तक जिले में 18 से 45 साल वाली उम्र के लिए अलग और उससे अधिक उम्र वालों के लिए अलग केन्द्र बनाए जा रहे थे। इसमें दोनों की वैक्सीन भी अलग जाती है, लेकिन अब यह व्यवस्था नहीं होगी और 21 जून से एक ही केन्द्र में दोनों का टीकाकरण हो सकेगा और उनके लिए अलग-अलग वैक्सीन भी नहीं भेजनी होगी। इससे राहत रहेगी।


मेट्रो अस्पताल में भी शुरुआत

मेट्रो अस्पताल में भी बुधवार से टीकाकरण प्रारम्भ कर दिया गया है। अब मेट्रो अस्पताल में भी लोगों के द्वारा कोरोना की वैक्सीन लगवाई जा सकेगी। जिलाधिकारी ने कहा कि निजी अस्पतालों के द्वारा अपने यहां पर तो वैक्सीन लगाई जा ही रही है, इसके अलावा वह सोसाइटियों में जाकर कैम्प में भी टीकाकरण कर रहे हैं। इससे अभियान में तेजी आई है। विभिन्न सोसाइटियों और इंडस्ट्रियों में यह टीकाकरण अभियान जारी है।


वैक्सिनेशन मीटर


शहर में टीकाकरण केंद्र


प्राइवेट- 52


सरकारी- 71


टीकों की उपलब्धता


कोवैक्सीन


कोविशिल्ड


हर दिन डोज की आवश्यकता


औसतन: 10000 से 12000


आयु वर्ग के हिसाब से टीके की उपलब्धता


सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी के अनुसार, 18 से 44, 45 से 59 और 60 साल से अधिक उम्र वालों के लिए जिले में टीके की पर्याप्त उपलब्धता है। वर्तमान में 55 फीसदी तक टीका 18 से 44 साल वाले लगवाने पहुंच रहे हैं। 30 प्रतिशत 44 से 59 और 60 साल से अधिक वाले 15 प्रतिशत लोगों को टीका लग रहा है।




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सरकार को 150 रुपये प्रति खुराक टीके देना लंबे समय तक संभव नहीं

हैदराबाद : भारत बायोटेक ने मंगलवार को कहा कि 150 रुपये प्रति खुराक की दर से केंद्र सरकार को कोविड-19 रोधी टीके कोवैक्सीन की आपूर्ति लंबे समय तक नहीं किया जा सकता है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि इसलिए लागत की भरपाई के लिए निजी बाजार में ऊंची कीमत जरूरी है।


कंपनी ने भारत में निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध दूसरे कोविड-19 टीकों की तुलना में कोवैक्सीन की अधिक दर को उचित ठहराया। कहा कि कम मात्रा में इसकी खरीद, वितरण में आने वाली अधिक लागत और खुदरा मुनाफे आदि बुनियादी कारोबारी कारणों से कोवैक्सीन महंगी हो जाती है। कंपनी ने कहा, भारत सरकार को 150 रुपये प्रति खुराक की दर से कोवैक्सीन टीके की आपूर्ति गैर-प्रतिस्पर्धी कीमत है।


निजी अस्पतालों को 10 फीसदी से भी कम हिस्सा : भारत बायोटेक ने कहा, केंद्र के निर्देश के अनुसार कोवैक्सीन के कुल उत्पादन का 10 फीसदी से भी कम हिस्सा निजी अस्पतालों को दिया जाता है जबकि उसका बाकी बहुत बड़ा हिस्सा राज्यों और केंद्र के पास जाता है। ऐसे परिदृश्य में उसे सभी आपूर्ति से कोवैक्सीन पर औसत दाम प्रति खुराक 250 रुपये से भी कम मिलता है। भारत बायोटेक टीके के विकास, क्लीनिकल ट्रायल तथा कोवैक्सीन के लिए निर्माण इकाई स्थापित करने पर अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है। कंपनी टीके उत्पादन में सहयोग के लिए आईसीएमआर और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान को उत्पादों के बिक्री के आधार पर रॉयल्टी भी देगी।


ये हैं कीमतें : भारत बायोटेक फिलहाल केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रति खुराक, राज्य सरकारों को 400 रुपये प्रति खुराक और निजी अस्पतालों को 1200 रुपये प्रति खुराक की दर से कोवैक्सीन की आपूर्ति कर रही है।






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टीके की 50 करोड़ खुराकें काफी नहीं, अमेरिका को और योगदान करना चाहिए : सांसद कृष्णमूर्ति

वाशिंगटन : भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा है कि दुनिया को कोविड-19 रोधी टीके की 50 करोड़ खुराकें दान करना ही काफी नहीं है बल्कि अमेरिका को महामारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में और अधिक योगदान देना चाहिए।


इंग्लैंड में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने से पहले बाइडन ने दुनियाभर में कोविड-19 के खिलाफ जंग में तेजी लाने के लिए बृहस्पतिवार को 50 करोड़ खुराकें दान करने का वादा किया था। बाद में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि जी7 देश अन्य देशों को टीके की कम से कम एक अरब खुराकें देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि अमेरिका वैश्विक टीकाकरण के प्रयासों में मदद के लिए 50 करोड़ खुराकें खरीदेगा जिसमें से 20 करोड़ खुराकें 2021 के अंत तक दी जायेंगी, लेकिन यह काफी नहीं है। यह एक बड़े उद्देश्य में महज एक पहला कदम है और महामारी को खत्म करने के लिए हमें निश्चित रूप से टीकों का उत्पादन बढ़ाना चाहिए तथा लाखों खुराकों की आपूर्ति करनी चाहिए।’’


बाइडन ने घोषणा की है कि अमेरिका एक बड़ा कदम उठा रहा है जो कोविड-19 महामारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को अधिक प्रभावी बनायेगा। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका कोविड-19 रोधी टीकों की 50 करोड़ खुराकें फाइजर से खरीदेगा और महामारी के खिलाफ जंग में इन्हें जरूरतमंद 100 देशों को देगा। यह एक ऐतिहासिक कदम है। किसी एक देश द्वारा यह अब तक सबसे अधिक मात्रा में टीकों का दान है।’’


राष्ट्रपति ने कहा कि अगस्त से इन टीकों को जरूरतमंद देशों को भेजा जायेगा। इस साल तक 20 करोड़ खुराकों की आपूर्ति की जायेंगी और 30 करोड़ खुराकें 2022 में दी जायेंगी। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका दुनिया भर में कोविड-19 रोधी टीके की आपूर्ति की वैश्विक पहल कोवैक्स के तहत किसी भी देश से कहीं अधिक योगदान कर रहा है।






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निशुल्क वैक्सीनेशन शिविर शुरू

नोएडा : सेक्टर 51 होशियारपुर गांव के संस्कार स्कूल में गुरुवार से लगातार तीन दिनों के लिए निशुल्क वैक्सीनेशन शिविर शुरू किया गया है। यह संस्कार स्कूल डायमंड क्रॉउन बैंक्विट हॉल के समीप के समीप है। यहां पर 45 वर्ष के अधिक आयु के लोगों को निशुल्क वैक्सीन लगाई जा रही है। वैक्सीन लगवाने के लिए लोगो को अपना आधार कार्ड लाना होगा।








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श्रीलंका ने जापान से एस्ट्राजेनेका के छह लाख टीके देने का किया अनुरोध

कोलंबो :  श्रीलंका ने अपने नागरिकों को कोविड-19 रोधी टीके की दूसरी खुराक लगाने की कोशिश में जापान से एस्ट्राजेनेका के 600,000 टीके देने का अनुरोध किया है। श्रीलंका में एस्ट्राजेनेका टीकों की भारी कमी है क्योंकि इस टीके का उत्पादन भारत में होता है जो खुद ही महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है। इसके कारण टीका निर्माता कंपनी ये टीके द्वीपीय देश को उपलब्ध नहीं करा पाई। राष्ट्रपति कार्यालय ने बुधवार को घोषणा की कि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा से एस्ट्राजेनेका के 600,000 टीके उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार, इस अनुरोध पर सकारात्मक जवाब आया है। श्रीलंका अभी चीन के सिनोफार्म और रूस के स्पूतनिक वी टीकों का इस्तेमाल कर रहा है। श्रीलंका में अप्रैल के बाद से कोरोना वायरस संक्रमण के मामले और मौत की संख्या बढ़ गयी है। देश में 210,000 से अधिक मामले और 1,843 लोगों की मौत हो चुकी है।





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राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के पास अब भी टीके की 1.19 करोड़ से अधिक खुराकें उपलब्ध : केंद्र

नई दिल्ली : राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास अब भी कोविड-19 रोधी टीके की 1.19 करोड़ से अधिक खुराकें उपलब्ध हैं, जिन्हें इस्तेमाल किया जाना बाकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बारे में बताया।


भारत सरकार की ओर से (निशुल्क माध्यम से) और सीधे राज्य खरीद श्रेणी के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अब तक टीके की 24 करोड़ से अधिक खुराकें दी गयी हैं। मंत्रालय ने बताया कि इनमें से बर्बाद हुए टीके समेत कुल 23,47,43,489 खुराकों की खपत हुई है।


मंत्रालय के अनुसार, ‘‘राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास अब भी कोविड-19 रोधी टीके की 1,19,46,925 खुराकें उपलब्ध हैं, जिन्हें इस्तेमाल किया जाना बाकी है।’’







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कोवैक्सिन के कनाडा में अधिकार को भारत बायोटेक को 1.5 करोड़ डॉलर अग्रिम में देगी ओक्यूजेन

हैदराबाद : भारत बायोटेक की कोविड-19 वैक्सीन के लिए अमेरिकी भागीदार ओक्यूजेन इंक कनाडा में इस टीके के अधिकार के विस्तार को भारतीय दवा कंपनी को अग्रिम में 1.5 करोड़ डॉलर का भुगतान करेगी। ओक्यूजेन ने नियामकीय सूचना में कहा कि वह उत्तरी अमेरिकी देश में कोवैक्सिन को वाणिज्यिक रूप से पेश किए जाने के एक माह के अंदर भारत बायोटेक को एक करोड़ डॉलर का और भुगतान और करेगी। भारत बायोटेक ने तीन जून को कहा था कि उसने ओक्यूजेन इंक के साथ अपने करार का विस्तार करने का फैसला किया है। इसके तहत टीके की खुराक का कनाडा में भी वाणिज्यिकरण किया जाएगा। भारतीय कंपनी और ओक्यूजेन के बीच अमेरिकी बाजार में कोवैक्सिन के सह-विकास, आपूर्ति और वाणिज्यिकरण के लिए पक्का करार हुआ था। 



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सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने लगवाई कोरोना वैक्सीन, बेटे अखिलेश यादव ने कहा था बीजेपी का टीका

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के संस्थापक व पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में लगवाई। बीते दिनों उनके पुत्र व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वैक्सीन का विरोध किया था। अखिलेश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि 'मैं कोरोना का टीका नहीं लगवाऊंगा। ये टीका तो भाजपा वालों का है। मैं इस पर कैसे विश्वास कर सकता हूं।' अखिलेश यादव के बयान पर तब इंटरनेट मीडिया पर खूब हंगामा मचा था। अब सपा ने कोरोना वैक्सीन पर यू-टर्न लेते हुए कहा है कि अखिलेश यादव ने कभी भी कोरोना वैक्सीन का विरोध नहीं किया था। भाजपा केवल दुष्प्रचार करती है।

81 वर्ष के मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को मेदांता हॉस्पिटल में वैक्सीन की पहली डोज लगवाई। इस बात की जानकारी समाजवादी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दी गई है। मुलायम सिंह से पहले उनकी बहू अपर्णा यादव ने भी पिछले महीने लखनऊ के लोकबंधु हॉस्पिटल में वैक्सीन लगवाई थी। इस बीच वैक्सीन लगवाते सपा संरक्षक की तस्वीर ट्वीट करते हुए यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने अखिलेश यादव पर तंज भी किया।  

यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट कर स्वदेशी वैक्सीन लगवाने के लिए मुलायम सिंह यादव को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि आपका वैक्सीन लगवाना इस बात का प्रमाण है कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वैक्सीन को लेकर अफवाह फैलाई थी। इसके लिए अखिलेश यादव को माफी मांगनी चाहिए। वहीं, यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी ट्वीट कर कहा कि मुलायम सिंह यादव ने वैक्सीन लगवाकर एक अच्छा संदेश दिया है। आशा करता हूं कि सपा के कार्यकर्ता एवं उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी अपनी पार्टी के संस्थापक से प्रेरणा लेंगे।

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने भी मुलायम सिंह यादव के कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद उनके फोटो के साथ अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है। पार्टी ने कहा कि 'अगर अखिलेश यादव की मानें तो आज समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने 'भाजपा' की वैक्सीन लगवा ली। अब वो भाजपा का प्रचार कर रहे हैं या अपने पुत्र द्वारा फैलाए गए भ्रम को तोड़ रहे हैं... ये आप तय कर लीजिए! हां, वैक्सीन जरूर लगवाइए!

बता दें कि इसी वर्ष जनवरी में सपा अध्यक्ष व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि 'मैं कोरोना का टीका नहीं लगवाऊंगा। ये टीका तो भाजपा वालों का है। मैं इस पर कैसे विश्वास कर सकता हूं। जब हमारी सरकार बनेगी तो सभी को फ्री में टीका लगेगा।' हालांकि, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ही अखिलेश यादव के सुर कोरोना वैक्सीन को लेकर बदल गए थे। वह भाजपा सरकार से सभी लोगों को मुफ्त में वैक्सीन लगवाने की मांग करने लगे थे। 

मई में अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपा की सरकार सभी को फ्री वैक्सीन देने का ऐलान जल्द करे और हवा-हवाई बातें छोड़कर बताए कि वैक्सीन लगाने के लिए सरकार के पास क्या ठोस योजना है और किस तारीख तक यह काम पूरा होगा। उन्होंने ट्विटर पर पहले टीका फिर परीक्षा का अभियान भी चलाया था।

वहीं, सपा ने कोरोना वैक्सीन पर यू-टर्न लेते हुए कहा कि अखिलेश यादव ने कभी भी कोरोना वैक्सीन का विरोध नहीं किया था। सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि वैक्सीन कोई भाजपा ने तो बनाई नहीं है जो इसका विरोध किया जाए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने तो इसे सभी को फ्री में लगाने की सरकार से मांग की थी। साथ ही यह कहा था कि सरकार यह बताए कि गरीबों को कब तक मुफ्त में वैक्सीन लग जाएगी। भाजपा केवल दुष्प्रचार करती है।


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अमेरिकी सांसद और गवर्नर भारत को और कोविड रोधी टीके भेजने के पक्ष में

वाशिंगटन : अमेरिका में अनेक सांसद तथा गर्वनर ने बाइडन प्रशासन से भारत को कोविड रोधी टीकों तथा चिकित्सीय सहायता की आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि वहां पर संकट के कारण विनाशकारी हालात बने हुए हैं तथा इस वैश्विक महामारी से लड़ाई में अपने सहयोगियों की मदद करना अमेरिका की जिम्मेदारी है।


भारत में रविवार को कोविड-19 के 1,14,460 नए मामले सामने आए जो 60 दिन की अवधि में सबसे कम संख्या है। इसके साथ ही दैनिक संक्रमण दर घटकर 5.62 प्रतिशत रह गई। संक्रमण के नए मामलों के साथ देश में महामारी के मामलों की कुल संख्या बढ़कर 2,88,09,339 हो गई।


टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने कहा, ‘‘भारत में विनाशकारी संकट है और ऐसी स्थिति में बाइडन (अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन) से अधिक कार्रवाई की उम्मीद की जाती है। हमारे सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक सहयोगियों में से एक को इस वायरस से लड़ाई में कोविड-19 टीकों तथा चिकित्सा आपूर्ति के रूप में और मदद देने की जरूरत है।’’ साथ ही एबॉट ने ट्वीट कर अमेरिकी नागरिकों से अपील की कि वे उनके साथ मिलकर भारत के लिए प्रार्थना करें।


रिपब्लिक पार्टी से सीनेटर टेड क्रूज ने कहा, ‘‘अमेरिका के लिए भारत एक महत्वपूर्ण मित्र है। बाइडन का टीका साझा करने संबंधी कार्यक्रम दोषपूर्ण है। हमें भारत जैसे हमारे सहयोगियों को प्राथमिकता देनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोविड रोधी टीके उन्हें मिलें, जिन्हें उनकी सख्त जरूरत है।’’


सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी से संबद्ध सीनेटर रॉजर विकर ने कहा कि अमेरिका के लिए यह आवश्यक है कि वह कोरोना वायरस से निबटने में अन्य देशों की मदद करता रहे। उन्होंने कहा, ‘‘भारत जैसे करीबी सहयोगियों को अतिरिक्त टीके भेजना ही सही कदम है।’’


सदन की विदेशी मामलों की समिति के सदस्य माइकल मैककॉल ने ट्वीट किया, ‘‘अत्यंत आवश्यक टीकों और अन्य चिकित्सा आपूर्ति को भारत भेजा जाएगा और इस तरह लंबे समय से साझेदार रहे इस सहयोगी देश को मदद दी जाएगी। यह देखकर खुशी हुई।’’


सदन की सशस्त्र सेवा समिति के अध्यक्ष एडम स्मिथ ने कहा, ‘‘भारत तथा अन्य देशों में कोविड-19 का संकट विनाशकारी रहा है। वहां और टीके तथा चिकित्सा आपूर्ति भेजने की जरूरत अब भी बनी हुई है। कोविड को हराने के लिए हमें इस वायरस से अपने देश में तथा दुनियाभर में लड़ना होगा।’’ स्मिथ ने दूसरे देशों की मदद के लिए बाइडन प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों की सराहना भी की।


भारतवंशी सांसद रो खन्ना ने कहा कि जिस तरह जरूरत के वक्त भारत ने अमेरिका की मदद की, उसी तरह अमेरिका को भी टीके भेजकर भारत की मदद करना चाहिए।




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दिल्‍ली के एम्‍स में कोवैक्‍सीन का बच्‍चों पर ट्रायल आज से शुरू, तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर है खास

नई दिल्‍ली :  देश की राजधानी स्थित अख‍िल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (AIIMS) में सोमवार से बच्‍चों पर कोवैक्‍सीन का ट्रायल शुरू हो रहा है। इस वैक्‍सीन को भारत बायोटेक ने बनाया है। कोवैक्‍सीन के इस बच्‍चों पर होने वाले इस क्‍लीनिकल ट्रायल के लिए डीसीजीआई ने 11 मई को अपनी मंजूरी दी थी। आपको बता दें कि पटना स्थित एम्‍स में इस वैक्‍सीन का क्‍लीनिकल ट्रायल 2 से 18 वर्ष के बच्‍चों के ऊपर 3 जून से शुरू कर दिया है। इसके तहत बच्‍चों की पूरी स्‍क्रीनिंग की जा रही है। उनके पूरी तरह से स्‍वस्‍थ्‍य होने के बाद ही उनको इसकी खुराक दी गई है।

गौरतलब है कि विशेषज्ञ इस बात को लगातार कह रहे हैं कि भारत में कोरोना महामारी की तीसरी लहर आ सकती है। विशेषज्ञों को इस बात की भी आशंका है कि इस लहर में वायरस का सबसे अधिक प्रभाव बच्‍चों पर पड़ सकता है। ऐसे में बच्‍चों के ऊपर हो रहे क्‍लीनिकल ट्रायल को इसकी एक ढाल के तौर पर देखा जा रहा है। दिल्‍ली, पटना के अलावा इस वैक्‍सीन का बच्‍चों पर क्‍लीनिक ट्रायल के लिए नागपुर स्थित मेडिट्रिना इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को भी चुना गया है। पटना की ही बात करें तो कोवैक्‍सीन का ये ट्रायल 12 से 18 वर्ष की उम्र के बच्‍चों पर किया जा रहा है। इसके बाद इसको 6-12 और फिर 2-6 वर्ष के बच्‍चों पर किया जाएगा। 

आपको बता दें कि एक तरफ जहां पर कई देशों ने अलग-अलग आयुवर्ग के बच्‍चों को वैक्‍सीन की खुराक देने को मंजूरी दे दी है वहीं विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का कहना है कि बच्‍चों को वैक्‍सीन देना उसकी प्राथमिकता में शामिल नहीं है। संगठन का कहना है कि वैक्‍सीन की सबसे पहले जिन लोगों जरूरत है उन्‍हें ही ये दी जानी चाहिए। 

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