पंजाब, यूपी चुनाव से पहले वापस हो सकता है कृषि कानून : अखिलेश

लखनऊ : समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आशंका व्यक्त की है कि मोदी सरकार आगामी पंजाब और उत्तर प्रदेश चुनावों के मद्देनजर कृषि कानूनों को वापस ले सकती है और बाद में चुनाव खत्म होने के बाद उन्हें नए सिरे से लागू कर सकती है।


भाजपा पर केवल कॉरपोरेटों की सेवा करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार उन उद्योगपतियों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने कृषि कानूनों के कारण पहले से ही साइलो और अन्य बुनियादी ढांचे की स्थापना की है।


अखिलेश ने एक अनौपचारिक बातचीत में संवाददाताओं से कहा, हो सकता है, मैं आज कह रहा हूं आपसे की पंजाब के चुनाव को देखते हुए, उत्तर प्रदेश के चुनाव को देखते हुए, हो सकता है किसानों के कानून रद्द कर दिए जाएंगे और फिर चुनाव के बाद नया कानून फिर आ जाएगा।


उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार चुनाव के बाद कृषि कानूनों को नए सिरे से लागू करेगी क्योंकि यह उन कॉरपोरेट्स की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने कृषि कानून लागू होने के बाद आवश्यक बुनियादी ढांचे की स्थापना पर पहले ही पैसा खर्च कर दिया है।


अखिलेश ने आगे कहा कि सरकार जल्द ही कुशीनगर में हाल ही में उद्घाटन किए गए हवाई अड्डे को बेच सकती है और कहा कि वह मुख्य रूप से रोजगार में आरक्षण जैसे लाभों से वंचित करने के लिए सब कुछ बेच रही है जो एक निजी संस्था द्वारा परियोजना के अधिग्रहण के बाद लागू नहीं होगा।


उन्होंने कहा कि कुशीनगर हवाईअड्डा परियोजना की परिकल्पना उनकी सरकार ने की थी और इसके निर्माण के लिए बजट में 260 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।






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उत्तर प्रदेश चुनाव: कांग्रेस ने 10 लाख रुपये तक का सरकारी इलाज मुफ्त कराने का वादा किया

लखनऊ :  कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपने सात वादे सार्वजनिक करने के कुछ दिन बाद सोमवार को ऐलान किया कि राज्य में पार्टी की सरकार बनने पर लोगों का किसी भी बीमारी का 10 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त कराया जाएगा।


प्रियंका ने एक ट्वीट में कहा, "सस्ते व अच्छे इलाज के लिए घोषणापत्र समिति की सहमति से उप्र कांग्रेस ने निर्णय लिया है कि सरकार बनने पर, कोई भी हो बीमारी, मुफ्त होगा 10 लाख रूपये तक का इलाज सरकारी।"


उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान और इस वक्त राज्य में जगह-जगह से आ रहीं बुखार फैलने की खबरों को लेकर सरकारी व्यवस्थाओं पर निशाना साधते हुए इसी ट्वीट में कहा "कोरोना काल में और अभी प्रदेश में फैले बुखार में सरकारी उपेक्षा के चलते उप्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की जर्जर हालत सबने देखी।"


इससे पहले, कांग्रेस के सत्ता में आने पर छात्राओं को स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक स्कूटी देने का वादा किया गया था। पिछली 23 अक्टूबर को प्रियंका ने बाराबंकी जिले से प्रतिज्ञा यात्राओं को हरी झंडी दिखाई थी।


इस मौके पर पार्टी ने 20 लाख लोगों को नौकरी देने, बिजली का बिल आधा करने और कोविड-19 महामारी के दौरान वित्तीय संकट से गुजर रहे परिवारों को 25-25 हजार रुपए की सहायता देने का ऐलान किया था।


पार्टी प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने की भी घोषणा कर चुकी है।








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कांग्रेस ने असम के मुख्यमंत्री पर चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाया

गुवाहाटी : कांग्रेस ने रविवार को चुनाव आयोग के पास एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें दावा किया गया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 30 अक्टूबर को पांच विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले नई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा कर आचार संहिता का खुले तौर पर उल्लंघन किया है।


चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने रविवार को कहा कि वे आरोपों की जांच कर रहे हैं।


कांग्रेस के राज्य के मुख्य प्रवक्ता बोबीता शर्मा ने कहा कि राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी नितिन खाड़े को एक ज्ञापन सौंपा गया था और पार्टी के पास कई वीडियो सबूत हैं जो सरमा की नई घोषणाओं को दिखाते हैं।


कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने सीईओ को लिखे पत्र में कहा कि सरमा ने मरियानी के 40 चाय बागानों के लिए कई नई घोषणाएं की हैं, प्रत्येक बगीचे के लिए 1 करोड़ रुपये के पैकेज के साथ, इस प्रकार 40 करोड़ रुपये जुटाने का वादा किया है।


उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रत्येक चाय बागान को जल जीवन मिशन में शामिल करने, बागानों में 10 नए हाई स्कूल, महिला चाय श्रमिकों के स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता और चाय बागानों के आकस्मिक मजदूरों को मनरेगा योजना में शामिल करने का भी वादा किया।


शिकायत में कहा गया है कि सरमा ने थावरा विधानसभा सीट पर एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए निर्वाचन क्षेत्र में नदियों पर दो पुल बनाने की भी घोषणा की।


बोरा ने अपने पत्र में कहा, मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि यदि कोई मौजूदा विपक्षी विधायक भाजपा में शामिल होता है तो वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में 2,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं देंगे। यह भारत के संविधान के सिद्धांतों का एक चौंकाने वाला उल्लंघन है। हर विधायक, चाहे वह सत्ता में हो या विपक्ष में, अपना विकास कोष पाने का हकदार है।


गोसाईगांव, तामुलपुर, मरियानी, थौरा और भवानीपुर में 30 अक्टूबर को उपचुनाव होगा। ये सीटें इसलिए खाली हुईं, क्योंकि युनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के दो मौजूदा विधायकों का कोविड से निधन हो गया था, जबकि कांग्रेस के दो और ऑल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के एक विधायक विधानसभा की सदस्यता छोड़ने के बाद सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए थे।






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गोरखपुर सीट के लिए बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को पन्ना प्रमुख नियुक्त किया

गोरखपुर : उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गोरखपुर विधानसभा सीट के लिए गोरखनाथ क्षेत्र में बूथ संख्या 246 के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पन्ना प्रमुख नियुक्त किया है।


पन्ना प्रमुख एक पार्टी कार्यकर्ता/नेता हैं, जिन्हें एक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची का एक पृष्ठ दिया जाता है और उनसे पृष्ठ में नामित सभी मतदाताओं से संपर्क करने की उम्मीद की जाती है।


पार्टी ने गोरखपुर शहर की शहरी और ग्रामीण (आंशिक) विधानसभा सीटों के 13,800 बूथों पर 13,100 पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति की है।


गोरखपुर सदर विधानसभा सीट के बूथ संख्या 350 के लिए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और सांसद शिव प्रताप शुक्ला और विधायक डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल को भी पन्ना प्रमुख नियुक्त किया गया है।


नगर भाजपा अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा, पार्टी पदाधिकारियों और सरकार में बैठे लोगों को भी पन्ना प्रमुख बनाया गया है। इस प्रणाली का प्रयोग पहली बार गुजरात विधानसभा चुनाव में किया गया था और परिणाम अच्छे रहे थे। उसके बाद, पन्ना प्रमुख प्रणाली का उपयोग किया गया है। कई अन्य राज्यों में और वहां भी पार्टी को सफलता मिली।


पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि पन्ना प्रमुख के रूप में योगी आदित्यनाथ की नियुक्ति ने संकेत दिया कि भाजपा में हर कोई अनिवार्य रूप से एक पार्टी कार्यकर्ता है और वरिष्ठ पद पर रहने का मतलब यह नहीं है कि वह अन्य कार्यकर्ताओं से ऊपर था।



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देवरिया में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा 60 फीसदी वोट हमारा : केशव मौर्या

देवरिया : उत्तर प्रदेश में देवरिया के पथरदेवा में आज प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा,बसपा और कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 60 फीसदी वोट हमारा है तथा 2022 में एक बार भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार बनेगी।


श्री मौर्य ने सपा,बसपा और कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि इनके राज में भ्रष्टाचार और अपराध बढ़ते रहे हैं।जबकि भाजपा के शासन काल में भ्रष्टाचार और अपराधों पर लगाम लगाकर सुशासन का राज कायम किया गया है। सरकार किसानों की दशा सुधारने के लिये काम कर रही है।उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में किसान नहीं बल्कि सपा बसपा कांग्रेस के लोग हैं। उन्होंने कहा कि अगर देश में मोदी सरकार नहीं होती,तो प्रदेश में हम ऐसा विकास नहीं कर पाते।


श्री मौर्य ने कहा कि 2014 से जनता ने भाजपा की विजय यात्रा निकाल रही है। हमारी सरकार विकास को नया आयाम देने के लिए कटिबद्ध है तथा इसके साथ ही लोगों के जीवन स्तर को सुधारने का लक्ष्य है।उन्होंने जनता का आह्वान करते हुए कहा कि चुनाव आ गया है, विपक्षी गुमराह करने का प्रयास करेंगे।लेकिन प्रदेश की जनता गुमराह होने वाली नहीं है और वो एक बार फिर 2022 में भाजपा की सरकार बनायेगी।


उन्होंने दावा करते हुए कहा कि कम से कम 25 साल तक सपा-बसपा की सरकार वापस नहीं आने वाली। इस दौरान उन्होंने ने अफसरों को हिदायत देते हुए कहा कि अधिकारी एक बात ध्यान से सुन ले भाजपा के कार्यकर्ता जनहित की बातों को सुनने में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए।नहीं तो ऐसे अधिकारियों को देखना हमें आता है। 






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मप्र के उपचुनाव में बाबा की एंट्री

भोपाल : मध्यप्रदेश में धीरे-धीरे उपचुनाव का रंग गहराने लगा है। एक तरफ जहां नेताओं के दौरे बढ़़ रहे हैं, सभाएं हो रही हैं और एक दूसरे पर हमले किए जाने का दौर जारी हैं तो अब चुनाव प्रचार में बाबाओं की भी एंट्री शुरू हो गई है।


राज्य की सियासत में वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान नामदेव दास त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा ने कांग्रेस का झंडा थामा था और उन्होंने कमलनाथ और कांग्रेस के समर्थन में खूब प्रचार भी किया था। कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद कंप्यूटर बाबा को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल गया था, मगर सत्ता में हुए बदलाव के बाद उनके बुरे दिन शुरू हो गए। जहां उनके इंदौर स्थित आलीशान आश्रम को जमींदोज कर दिया गया था, वही बाबा को जेल की हवा भी दिखाना पड़ी थी। यह बात अलग है कि बाबा का इससे पहले भाजपा के शासन में भी जलवा रहा है।


राज्य में हुए 28 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में भी कंप्यूटर बाबा ने कांग्रेस के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया था। अब एक बार फिर राज्य में तीन विधानसभा क्षेत्रों पृथ्वीपुर, जोबट व रैगांव के अलावा खंडवा संसदीय क्षेत्र में उप चुनाव हो रहे हैं, तो कंप्यूटर बाबा की प्रचार में एंट्री हो गई है।


खंडवा संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने पहुंचे कंप्यूटर बाबा का कहना है कि नवरात्रि जैसा त्यौहार होने के बावजूद वे अपने अनुष्ठानों को छोड़कर उप-चुनाव में प्रचार करने के लिए निकले हैं। ऐसा इसलिए कहीं यह झूठे और पापी लोग आम लोगों को बरगला न दें, जरुरी इस बात की है कि कमलनाथ जैसे नेता को आगे आएं इसीलिए हम प्रचार के लिए निकले।


वहीं दूसरी ओर भाजपा के प्रवक्ता उमेश शर्मा ने बाबा के प्रचार करने पर तंज करता है। भाजपा के मुताबिक यह वही बाबा हैं जिन्होंने कांग्रेस को जिताने के लिए मिर्ची यज्ञ कराया था मगर उसकी मिर्ची कांग्रेस को ही लगी थी। दिग्विजय सिंह जैसे नेता की फजीहत हो गई और उनको लोकसभा चुनाव में प्रज्ञा ठाकुर से हार मिली थी।

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5 चुनावी राज्यों में राहुल गांधी के काम से 40 प्रतिशत से अधिक लोग संतुष्ट नहीं

नई दिल्ली : चुनावी राज्यों गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 40 फीसदी से अधिक लोग कांग्रेस नेता राहुल गांधी के काम से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। एबीपी-सीवोटर-आईएएनएस स्टेट ऑफ स्टेट्स 2021 ट्रैकर से यह जानकारी मिली है।


सर्वे के मुताबिक कुल मिलाकर 40.5 फीसदी लोग राहुल गांधी की कार्यशैली से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं, जबकि 18.5 फीसदी लोग काफी संतुष्ट हैं। आंकड़ों से यह भी पता चला कि 20.2 प्रतिशत कुछ हद तक संतुष्ट हैं, जबकि 21 प्रतिशत ने पता नहीं/कह नहीं सकते श्रेणी को चुना है।


सर्वेक्षण के लिए नमूना आकार 98,121 था जिसमें पांच चुनावी राज्यों में 690 विधानसभा सीटों को शामिल किया गया था। यह सर्वे 4 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच किया गया था।


पंजाब में, जहां कांग्रेस सत्ताधारी पार्टी है, 53.1 फीसदी लोग राहुल गांधी के प्रदर्शन से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। केवल 6.7 प्रतिशत लोग राहुल गांधी के प्रदर्शन से बहुत संतुष्ट हैं, जबकि 18.9 प्रतिशत लोग कुछ हद तक संतुष्ट हैं। यहां सैंपल साइज 18,642 था।


उत्तराखंड में, 54.1 प्रतिशत लोग, जो सभी चुनावी राज्यों में सबसे अधिक हैं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की कार्यशैली से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं, जबकि 14.7 प्रतिशत बहुत अधिक संतुष्ट हैं। राज्य के लिए सैंपल साइज 13,975 था।


मणिपुर में, 27.4 प्रतिशत लोग राहुल गांधी के काम से बहुत संतुष्ट हैं, 21.5 प्रतिशत लोग कुछ हद तक संतुष्ट हैं, जबकि 42.1 प्रतिशत लोग बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं।


उत्तर प्रदेश में कुल 46.2 प्रतिशत लोगों ने कांग्रेस नेता के लिए बिल्कुल संतुष्ट नहीं श्रेणी को चुना, जबकि 13.3 प्रतिशत ने कहा कि वे बहुत संतुष्ट हैं। राज्य के लिए सैंपल साइज 50,936 था।


गोवा में, 16.1 प्रतिशत कांग्रेस नेता की कार्यशैली से काफी संतुष्ट हैं, जबकि 23.2 प्रतिशत ने कुछ हद तक संतुष्ट श्रेणी को चुना है। यह सर्वे 13,048 लोगों पर किया गया था।

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव के लिए ममता करेंगी टीएमसी के प्रचार अभियान का नेतृत्व

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी राज्य की चार विधानसभा सीटों पर 30 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों में शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि अभिनेत्री से सांसद बनी नुसरत जहां और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़ टीएमसी में शामिल हुए बाबुल सुप्रियो के नाम सूची में नहीं हैं।


वहीं, भाजपा के प्रचारकों की सूची में प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं के नाम हैं।


टीएमसी की सूची में अभिनेता-सांसद देव और मिमी चक्रवर्ती, लोकप्रिय गायिका-विधायक अदिति मुंशी, फिल्म निर्माता-विधायक राज चक्रवर्ती, अभिनेत्री से तृणमूल कांग्रेस की राज्य युवा शाखा की प्रमुख बनीं सयानी घोष के अलावा वरिष्ठ नेता सुब्रत मुखर्जी, फरहाद हाकिम, सौगत रॉय और अरूप बिस्वास के नाम शामिल हैं।


गौरतलब है कि नुसरत जहां, जिन्होंने मार्च-अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए सक्रिय रूप से प्रचार किया था, और हाल ही में संपन्न भवानीपुर उपचुनाव से पहले पार्टी में शामिल हुए और "भाजपा की उनकी पुरानी दोस्त प्रियंका टिबरेवाल के खिलाफ प्रचार करने की शर्मिंदगी से बचाने" का अनुरोध करने वाले सुप्रियो के नाम टीएमसी सूची में शामिल नहीं हैं।


भाजपा के प्रचारकों की सूची में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, बिहार से सांसद गिरिराज सिंह के नाम राज्य के बाहर के दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं।


विधानसभा चुनावों के लिए पश्चिम बंगाल के बाहर से कई प्रचारकों को शामिल करने वाली भाजपा अपने प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेन्दु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री और उत्तर बंगाल के सांसद जॉन बारला और निसिथ प्रमाणिक, मतुआ समुदाय के मंत्री-सांसद शांतनु ठाकुर सहित अन्य स्थानीय नेताओं पर भी भरोसा कर रही है।


भाजपा के प्रचारकों की सूची में फैशन डिजाइनर और विधायक अग्निमित्र पॉल के अलावा पार्टी के सेलिब्रिटी चेहरे - अभिनेत्री से राज्यसभा सदस्य बनीं रूपा गांगुली और अभिनेत्री-सांसद लॉकेट चटर्जी भी शामिल हैं।








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राजस्थान में भाजपा की निगाहें उन सीटों पर, जहां कभी जीत नहीं मिली

नई दिल्ली :  भाजपा की राजस्थान इकाई उन सीटों पर अपने संगठन को मजबूत कर रही है, जिन पर भगवा पार्टी अब तक कभी नहीं जीत पाई है।


ऐसी करीब 19 सीटें हैं और हाल ही में राज्य इकाई के अपने दो दिवसीय चिंतन बैठक में भाजपा ने इन सीटों पर विशेष ध्यान देने का फैसला किया है।


पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि राज्य में कई बार सत्ता में रही भाजपा ने कभी इन सीटों पर जीत हासिल नहीं की और इसलिए यह फैसला किया है कि राज्य में 2023 के उत्तरार्ध में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी के दौरान इन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


साल 2018 में हुए पिछले विधानसभा चुनावों में, भाजपा कांग्रेस से हार गई थी। 200 सदस्यीय राज्य विधानसभा में इस समय कांग्रेस के 106 सदस्य हैं, जबकि भाजपा के 71 हैं और दो सीटें खाली हैं।


पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि इन 19 विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।


उन्होंने कहा, हम अगले राज्य चुनावों में इन सीटों को जीतने के लिए काम कर रहे हैं। इन सीटों में विधानसभा की कुल ताकत का लगभग 10 प्रतिशत शामिल है। इन निर्वाचन क्षेत्रों को जीतकर, हम अपनी पार्टी को एक नए क्षेत्र में विस्तारित करने में सक्षम होंगे।


पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने दावा किया कि इन सीटों को जीतने से न केवल विधानसभा में पार्टी की संख्या बढ़ेगी, बल्कि मौजूदा सीटों के किसी भी संभावित नुकसान को संतुलित करने और साथ ही साथ विपक्षी दलों को कमजोर करने में मदद मिलेगी।


पता चला है कि भाजपा की राज्य इकाई जल्द ही इन 19 विधानसभा क्षेत्रों के लिए विशिष्ट योजना को अंतिम रूप देगी, जिसमें वहां के स्थानीय नेतृत्व को तैयार करना भी शामिल है।


पार्टी के एक नेता ने कहा, किसी भी चुनाव को जीतने के लिए पहला मानदंड जमीन पर मजबूत संगठनात्मक ढांचे की मौजूदगी और दूसरा मजबूत स्थानीय नेतृत्व की मौजूदगी है। हम इन विधानसभा क्षेत्रों में दोनों मुद्दों को हल करने की योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं।


भाजपा नेतृत्व का मानना है कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ मजबूत सत्ता विरोधी लहर है और इन सीटों को जीतकर पार्टी अगला विधानसभा चुनाव ऐतिहासिक जनादेश से जीत सकती है।





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बिहार विधानसभा उपचुनाव में राजद, कांग्रेस में फंसा पेंच

पटना : बिहार में दो विधानसभा क्षेत्रों कुशेश्वरस्थान और तारापुर में होने वाले उपचुनाव को लेकर विपक्षी दलों के महागठंधन के दो प्रमुख घटक दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। दोनों विधानसभा क्षेत्रों से राजद ने अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी है, जबकि कांग्रेस ने कुशेश्वरस्थान पर अपना दावा ठोंका दिया है।


इतना ही नहीं कांग्रेस ने कुशेश्वरस्थान की ग्राउंड रिपोर्ट जानने के लिए एक कमेटी गठित कर दी है।


इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 30 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे, जबकि दो नवंबर को परिणाम घोषित होगा। प्रत्याशी आठ अक्टूबर तक नामांकन का पर्चा दाखिल कर सकते हैं।


कुशेश्वरस्थान और तारापुर विधानसभा क्षेत्र से पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में जदयू के प्रत्याशी विजयी हुए थे। कुशेश्वरस्थान से विधायक शशिभूषण हजारी तथा तारापुर के विधायक मेवालाल चौधरी के निधन के बाद दोनों सीटों पर उपचुनाव हो रहा है।


पिछले विधानसभा चुनाव में परिणाम की बात करें तो कुशेश्वरस्थान से जदयू के प्रत्याशी हजारी ने कांग्रेस के प्रत्याशी अशोक कुमार को करीब सात हजार मतों से पराजित किया था जबकि तारापुर में जदयू के प्रत्याशी मेवालाल चैधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजद के दिव्या प्रकाश को 72225 मतों से पराजित किया था।


कांग्रेस पिछले चुनाव के आधार पर ही कुशेश्वरस्थान सीट पर अपना दावा ठोंक रही है। कांग्रेस ने कुशेश्वरस्थान में अपने उम्मीदवार के चयन के लिए एक कमेटी भी बना दी है। कमेटी 2 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को सौंप देगी।


बिहार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष समीर सिंह ने कहा कि पार्टी हर चुनाव से पहले इस तरह का सर्वे कराती है। पांच सदस्यीय कमेटी भी उपचुनाव को लेकर पार्टी की स्थिति का आकलन करेगी और अपनी रिपोर्ट अध्यक्ष को सौंपेगी।


इधर, राजद दोनो सीटों पर दावा ठोंक रही है। राजद के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव कहते हैं कि राजद ने रूप्ष्ट तौर पर कहा है कि हम दोनों सीटो ंपर चुनाव लडेंगे, महागठबंधन भी दोनों सीटों पर चुनाव लडेगी। नेतृत्व फैसला करेगा कि कौन सीट किसके हिस्से जाएगा।


उन्होंने कहा कि राजद महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी।


राजद के प्रवक्ता हालांकि नेतृत्व के फैसला करने की बात कहकर महागठबंधन में सीटों को लेकर किसी तरह के विवाद नहीं होने के संकेत भले ही दे रहे हों, लेकिन कांग्रेस के तेवर साफ बता रहे हैं कि कांग्रेस किसी भी हाल में कुशेश्वरस्थान की सीट को छोड़ने के मूड में नहीं है।


इधर, राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह कहते हैं कि दोनों सीटों पर प्रत्याशी राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद तय करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राजद के आलाकमान के बीच संवाद चल रहा है। उन्होंने कहा कि राजद दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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बंगाल उपचुनाव में बारिश खड़ी कर सकती है मुश्किलें, कुछ इलाकों में येलो अलर्ट जारी

कोलकाता : उत्तरी कोलकाता के अहिरीटोला में बुधवार को एक इमारत के गिरने से एक बच्चे और उसकी मां समेत छह लोग अंदर फंस गए। शहर में आधी रात से लगातार हो रही बारिश के कारण यह हादसा हुआ है। गुरुवार को भवानीपुर समेत तीन विधानसभा उपचुनाव कराने की तैयारी में जुटे प्रशासन के लिए यह एक चिंता की बात है।


मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में शहर और उसके आसपास के जिलों में और बारिश होने का अनुमान लगाया है।


उत्तरी कोलकाता के अहिरीटोला में बुधवार सुबह एक जर्जर इमारत के गिरने से एक बच्चे और उसकी मां समेत छह लोग फंस गए। फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और दो लोगों को बचाया, लेकिन चार और लोगों के अंदर होने की आशंका है। बाकी लोगों को बचाने के लिए आपदा प्रबंधन टीम कड़ी मेहनत कर रही है।


अग्निशमन और आपातकालीन सेवा राज्य मंत्री सुजीत बसु मौके पर पहुंचे और व्यक्तिगत रूप से बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए, बसु ने कहा, दो लोगों को बचा लिया गया है, लेकिन कुछ और लोग हैं जो अंदर फंसे हुए हैं। हमें पहले उन्हें बचाने और अस्पताल भेजने की जरूरत है।


इस बीच, आधीरात से तेज हवा के साथ लगातार बारिश ने शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी भर दिया है, जिससे लोगों को काम पर जाने के लिए एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।


कॉलेज स्ट्रीट से मुक्ताराम बाबू स्ट्रीट, थंथानिया, शुक्रिया स्ट्रीट, गिरीश पार्क, शोभाबाजार, उल्टाडांगा, उत्तरी कोलकाता में पतिपुकुर अंडरपास और बेहाला, हरिदेबपुर, जादवपुर, तरताला, तिलजला, नेताजी नगर, पाक सर्कस, गार्डनपारा सहित शहर के अधिकांश हिस्से दक्षिण कोलकाता का इलाका पानी में डूब गया। लोगों को अपने कार्यस्थलों तक पहुंचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।


मौसम विभाग के अनुसार, एक अच्छी तरह से चिह्न्ति निम्न दबाव का क्षेत्र अब गंगीय पश्चिम बंगाल के मध्य भाग पर स्थित है, जिसके बाद पुरुलिया, बांकुरा, बीरभूम, मुर्शिदाबाद, नदिया के कुछ हिस्सों में तेज हवा के साथ बारिश या गरज के साथ बौछारें जारी रहने की संभावना है। अगले दो से तीन दिनों के लिए पश्चिम बंगाल के पूर्व और पश्चिम बर्दवान, कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, झारग्राम और मालदा जिले में बारिश होने की संभावना है।


हालांकि, मौसम विभाग ने कहा है कि गुरुवार को कोलकाता में भारी बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन बर्दवान, पुरुलिया, बांकुरा, 24 परगना, हावड़ा और हुगली सहित दो जिलों में भारी बारिश के लिए पहले ही येलो अलर्ट जारी कर दिया है।


इन जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। जो 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ऊपर उठ सकती है। मछुआरों को अगले दो से तीन दिनों तक समुद्र में न जाने को कहा गया है।


मौसम की स्थिति को लेकर प्रशासन चिंतित है क्योंकि गुरुवार (30 सितंबर) को भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपचुनाव होने हैं।


लगातार हो रही बारिश के कारण दक्षिण बंगाल के जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।


राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, चुनाव नजदीक है और इसलिए हम जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। राज्य प्रशासन किसी भी तरह की स्थिति के लिए तैयार है।






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भाजपा गोवा में वास्तविक मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है : शिवेसना

मुंबई : गोवा में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना ने राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि वह राज्य के वास्तविक मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है, जहां कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण पर्यटन प्रभावित हुआ है और अर्थव्यवस्था का बुरा हाल है।


शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के सम्पादकीय में आरोप लगाया कि गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ''सरकार आपके द्वार पर'' पहल शुरू की है जिसके तहत वह '' झूठ और गलत जानकारी फैला रहे हैं।''


सम्पादकीय में कहा गया कि राज्य बेरोजगारी, मादक पदार्थ की समस्या का सामना कर रहा है और कोविड-19 के कारण पर्यटन प्रभावित है तथा अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। वहीं, उत्तरी गोवा जिले में कलंगुट बीच पर पिछले महीने संदिग्ध परिस्थितियों में एक महिला की मौत का मामला भी अभी तक सुलझा नहीं था।


मराठी समाचार पत्र में कहा गया कि भाजपा के नेता दिवंगत मनोहर पर्रिकर ने कैसीनो व्यवसाय का विरोध करके गोवा में पार्टी को बढ़ने में मदद की अब, अपतटीय कैसीनो राज्य सरकार को भारी रकम देते हैं और अगर गोवा इस पैसे पर चलेगा तो यह '' हिंदुत्व का अपमान '' होगा।


सम्पादकीय में कहा गया, '' क्या गोवा के राजनेता राज्य के समक्ष पेश वास्तविक चुनौतियों से अवगत हैं?'' अगर गोवा के लोग सोचते हैं कि भाजपा हिंदुओं की रक्षक है... तो यह गलत है।


मराठी समाचार पत्र में कहा गया कि गोवा में भाजपा के विधायकों की सूची देखें तो, कोई भी कह सकता है कि हिंदूत्व उनके लिए केवल एक ''मुखौटा'' है। गो हत्या को प्रतिबंधित करने के लिए देश में कानून है लेकिन गोवा में कोई ''जितना भी चाहे उतना गो मांस ले सकता है। अगर यह यह दोगलापन नहीं तो और क्या है?''


सम्पादकीय में कहा गया कि गोवा 450 वर्षों तक पुर्तगाली शासन के अधीन था और वर्तमान शासक उनके उत्तराधिकारियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। '' राज्य में जो हो रहा है क्या उसे कोई खत्म नहीं करना चाहता?''


शिवसेना ने कहा कि 2017 गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 17 सीटें (40 सदस्यीय सदन में) जीत कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन, उसने सरकार बनाने का दावा करने में देरी की और भाजपा ने बहुमत हासिल कर लिया। अब, कांग्रेस चार विधायकों तक सिमट गई है, और ''यह नैतिक राजनीति नहीं है।''


मराठी दैनिक समाचारपत्र में कहा गया कि अगर भाजपा ने अपने दम पर 20 से 25 सीटें जीती होतीं तो यह काबिले तारीफ होता। लोगों में राज्य सरकार के खिलाफ काफी गुस्सा है।




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पुडुचेरी से भाजपा को पहली राज्यसभा सीट मिलना पार्टी के प्रत्येक सदस्य के लिए गर्व की बात : मोदी

नई दिल्ली : पुडुचेरी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राज्यसभा का पहला सदस्य मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि यह पार्टी के प्रत्येक सदस्य के लिए अत्यंत गर्व की बात है।


उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों- सर्वानंद सोनोवाल और एल मुरुगन को क्रमश: असम और मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने पर बधाई भी दी।


मोदी ने एक ट्वीट में कहा, “यह प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता के लिए बहुत गर्व की बात है कि हमारी पार्टी को श्री एस सेल्वागनबथी जी के रूप में पुडुचेरी से पहला राज्यसभा सांसद मिला है। पुडुचेरी के लोगों ने हम पर जो भरोसा जताया है, उसके आगे हम नतमस्तक हैं। हम पुडुचेरी की प्रगति के लिए काम करते रहेंगे।”


उन्होंने कहा, “मेरे मंत्रिमंडलीय सहयोगी श्री सर्वानंद सोनोवाल जी और राज्य मंत्री श्री मुरुगन जी को क्रमशः असम और मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने जाने पर बधाई। मुझे विश्वास है कि वे संसदीय कार्यवाहियों को समृद्ध करेंगे और जनता की भलाई के हमारे एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे।”


केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एआईएनआरसी-भाजपा गठबंधन सत्ता में है।





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ओडिशा में पंचायत चुनाव नतीजों की घोषणा एक ही तारीख पर होगी

भुवनेश्वर : ओडिशा सरकार ने ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के लिए सुचारू रूप से चुनाव कराने के वास्ते नियमों में संशोधन किया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।


संशोधित नियमों के अनुसार, मतगणना राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई तारीख पर होगी। इससे पहले मतगणना चुनाव के दिन ही होती थी।


पंचायत राज एवं पेयजल विभाग द्वारा इस संबंध में जारी एक गजट अधिसूचना में कहा गया है कि ओडिशा ग्राम पंचायत चुनाव (संशोधित) नियम 2021, ओडिशा पंचायत समिति चुनाव (संशोधन) नियम 2021 और ओडिशा जिला परिषद चुनाव (संशोधित) नियम, 2021 तय कर दिए गए हैं।


नियमों में बदलाव के कारण मतगणना अलग-अलग तारीखों पर होगी। राज्यभर में सभी स्थानों पर चुनाव पूरे होने पर एक दिन में सभी नतीजों की घोषणा की जा सकती है।


अधिसूचना में कहा गया है, ''चुनाव खत्म होने के बाद पीठासीन अधिकारी उम्मीदवारों या उनके चुनावी एजेंटों की मौजूदगी में बैलट बॉक्स और वोटिंग मशीन को सील करेंगे, सभी पत्रों का अलग बंडल बनाएंगे और उसी दिन निर्वाचन अधिकारी को उसे सौंपेंगे, जिसके बाद चुनाव अधिकारी उम्मीदवारों या उनके एजेंट की मौजूदगी में मतगणना शुरू करेंगे, जो मतगणना केंद्र पर मौजूद रह सकते हैं।''


सूत्रों ने बताया कि पंचायत चुनाव 2022 की शुरुआत में होने की संभावना है।



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क्या किसान आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ”वोट की चोट“ कर पायेंगे?

एक किसान परिवार से संबंध होने के नाते मैंने 70 के दशक से उत्तर भारत के किसान आन्दोलनों और किसान राजनीति को बहुत करीब से देखने और समझने की कोशिश की है। इस दौरान चौधरी चरण सिंह और चौधरी देवीलाल जैसे बड़े नेता होते थे जो किसान राजनीति करते थे। 80 के दशक में चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत बड़े किसान नेता थे। उनके नेतृत्व में वर्ष 1987 में दिल्ली के वोट क्लब पर किसानों व्दारा दिया गया धरना आज तक चर्चा में रहता है। तत्समयचौधरी चरण सिंह और चौधरी देवीलाल जैसे बड़े राजनेताओं के कारण संसद के अंदर और चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत जैसे किसान नेताओं के कारण संसद के बाहर किसान और किसानी हमेशा बड़ा मुद्दा होता था। उन दिनों खेती से जुड़ी जो भी किसान जातियां थी, उन जातियों के किसान अपनी जाति के रूप में नहीं अपितु किसान के नाम से अपनी पहचान बनाते थे।


90 के दशक से किसान राजनीति के हालात बदल गये। इस दौरान जैसे ही मण्डल और मंदिर की राजनीति परवान चढ़ी, त्यों ही किसान जाति और धर्म में बटकर किसान के रूप में अपनी सशक्त पहचान को खोते चले गये। भाजपा जैसी साम्प्रदायिक पार्टी ने जहां मंदिर के नाम पर धर्म का कार्ड खुलकर खेला वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय के नाम से बनी सपा, राजद, जदयू, बसपा जैसी पाटियों ने जातियों के नाम से राजनीति करने में कोई कोताही नही बरती। कुछ समय बाद भाजपा ने धर्म के साथ-साथ जातियों की भी महीन राजनीति प्रारम्भ कर दी। ऐसा होने से किसानों ने किसान के रूप में अपनी पहचान खो दी और धर्म और जाति के आधार पर बटते चले गये। पिछले एक दशक से भाजपा ने जातियों को लेकर बहुत महीन राजनीति की है। ऐसा होने से गैर यादव ज्यादातर किसान जातियां भाजपा के साथ हो हो गई जिससे सामाजिक न्याय के नाम से राजनीति करने वाली तमाम पार्टियां आज हाशिए पर आ गई हैं।


जैसा कि सर्वविदित है कि दिल्ली के 3 बॉर्डरों पर किसान विगत 9 माह से धरने पर बैठे हैं। किसानों की मांग है कि केन्द्र सरकार किसानों के हित के विरुद्ध लाये गये 3 कानूनों को रद्द करे जिन्हें किसान काले कानून कहते हैं। इसके साथ ही किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनन गारन्टी भी चाहते हैं। इन मांगों को लेकर लगभग 40 किसान संगठन विगत 9 माह से आन्दोंलनरत हैं। विगत कई माहों से वे जगह-जगह किसान महापंचायतें भी कर रहे हैं। अभी तक ज्यादातर किसान महापंचायत पंजाब, हरियाणा ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक ही सीमित रही हैं। ऐसा नहीं है कि इन प्रदेशों के बाहर किसान महापंचायत नहीं हो रही हैं लेकिन वो इतनी प्रभावशाली नहीं रही जितनी इन 3 प्रदेशों में रही हैं। ये सभी पंचायते संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वाधान में हुई हैं।इसी 5 सितम्बर को उत्तर प्रदेश के मुजफरनगर में एक बहुत बड़ी किसान महापंचायत हुई जिसमें किसान नेताओं के व्दारा 5-10 लाख किसानों के शामिल होने का दावा किया गया है। हालांकि मीडिया में किसानों की संख्या पर मतभेद है लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि यह अभी तक की सबसे बड़ी किसान रैली हो सकती है। रैली में किसान नेताओं के व्दारा अपनी मांगों को मनवाने के लिए पुरजोर आवाज उठाने के साथ-साथ भाजपा पर ”वोट की चोट“ देने का भी आव्हान किया गया है। किसानों व्दारा ऐसी ही महापंचायतें उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी करने की बात कही गई है। आगामी कुछ माह में प्रदेश के हर हिस्से में ऐसी अनेक महापंचायतें होने जा रही हैं। इन पंचायतों में भी ठीक-ठाक संख्या में किसानों के भाग लेने की उम्मीद है। यहां एक बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि क्या इन महापंचायतों में आने वाली भीड़ आगामी उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव में भाजपा के वोट पर भी प्रभावी चोट कर सकेगी? आज की तारीख में कहना मुश्किल है। भाजपा जिस तरह से जाति की महीन राजनीति करती है उससे तो यही लगता है कि जब विधान सभा चुनाव होंगे तो भाजपा अपने उम्मीदवारों की जातियों की गोटी इस तरह से फेंटेगी कि किसान एकता कायम नहीं रह सकेगी और किसान अपनी-अपनी जातियों में बटकर अपने जाति उम्मीदवारों को वोट डालेंगे। किसान आन्दोंलन में प्रमुख तौर से शामिल जाट जाति के उम्मीदवारों के सामने जाट समाज के अतिरिक्त अन्य जातियों को गोलबंद करेगी जैसा की उसने हरियाणा प्रदेश में किया है। कुछ प्रभावशाली जाट समाज के नेताओं को भी टिकट देकर भाजपा अपना मकसद हल करेगी।


गौरतलब है कि किसी भी आन्दोंलन के 3 चरण होते हैं। पहला गोलबंदी, दूसरा राजनैतिक प्रभाव और तीसरा इसे वोट में तब्दील करना। आज की तारीख में किसान नेता किसानों की गोलबंदी करने में तो सफल हो गये हैं लेकिन यह गोलबंदी राजनैतिक रूप से कितनी प्रभावी होगी और चुनाव के समय क्या यह वोट में तब्दील होगी, इसमें मुझे संदेह है। उत्तर प्रदेश का चुनाव अभी 5-6 माह दूर है। मुझे लगता है कि कुछ समय बाद उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार गन्ना किसानों का बकाया भुगतान, जो लगभग 12 से 14 हजार करोड़ है, का अधिकतर भुगतान कर देगी। आगामी कुछ दिनों में ही गन्ने का रेट भी बढ़ाये जाने की सम्भावना है। अगर ऐसा होता है तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बहुसंख्यक गन्ना किसानों को भाजपा अपने पक्ष में करने में कमयाब हो सकती है। मुझे तो यह भी लगता है कि आगामी महापंचायतों में जुड़ने वाली भीड़ का आंकलन करने के बाद केन्द्र सरकार आन्दोंलनरत किसानोंकी मांगों का भी समाधान कर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो किसान आन्दोंलन स्वयं समाप्त हो जायेगा और भाजपा अपना राजनैतिक मकसद हासिल कर लेगी। यहां यह भी गौरतलब है कि आज किसानों के बीच न तो चौधरी चरण सिंह और चौधरी देवीलाल जैसे कद्दावर नेता हैं और ना ही राकेश टिकैत अपने पिता महेन्द्र सिंह टिकैत जैसे वसूल वाले हैं। राकेश टिकैत की पूर्व में भाजपा नेताओं से नजदीकी जगजाहिर है। आज की किसान राजनीति कल चुनाव के पूर्व कौनसी करवट ले ले, इसका अंदाजा लगाना बहुत कठिन है। उम्मीद की जाना चाहिए कि किसान नेता चुनाव तक एकजुट रह कर भाजपा को उत्तर प्रदेश में ही नहीं अपितु अन्य प्रदेशों में भी हरायेंगे लेकिन मुझे लगता है कि चुनाव के समय भाजपा की ”नोट की चोट“ किसानों के ”वोट की चोट“पर भारी पड़ सकती है ! 


-आजाद सिंह डबास-





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कैप्टन की विदाई

कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब की कुर्सी छोडऩे के लिए मजबूर करना यकायक नहीं था। इसकी पटकथा तो एक साल पहले ही तैयार हो चुकी थी। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस हाईकमान की चुनौती बन चुके थे। वो जब कांग्रेस के प्रधान बने तो हाईकमान की नहीं सुनी। जब मुख्यमंत्री रहे तो पंजाब में संगठन को दरकिनार कर दिया। इसके बाद ही कांग्रेस हाईकमान ने हरीश रावत को इसका जरिया बनाया। रावत पंजाब आए और कैप्टन के सबसे बड़े मुखर विरोधी नवजोत सिद्धू को फिर सक्रिय राजनीति में लेकर आए। उनका पंजाब में कांग्रेस प्रधान बनाने का रास्ता तैयार किया। इसी वजह से कैप्टन को अपमानित होकर पंजाब के सीएम की कुर्सी छोडऩी पड़ी। 2017 में जब पंजाब में कांग्रेस सरकार बनी तो नवजोत सिद्धू स्थानीय निकाय मंत्री बनाए गए। सिद्धू ने जिस अंदाज में मंत्रालय चलाया, उसने कैप्टन के लिए मुश्किल खड़ी कर दी। नतीजा, कैप्टन ने कैबिनेट में बदलाव कर दिया। सिद्धू को स्थानीय निकाय से हटा बिजली मंत्री बना दिया। सिद्धू नाराज हो गए और सियासी वनवास पर चले गए। सिद्धू सिर्फ सोशल मीडिया पर ही एक्टिव रहे। कांग्रेस ने हरीश रावत को पंजाब का प्रभारी बनाया। वो पंजाब आए और कैप्टन के बाद पटियाला जाकर सिद्धू से मिले। वहां सिद्धू को संदेश मिल गया कि कैप्टन को निपटाने के लिए हाईकमान उनके साथ है। बाहर आकर उन्होंने सिद्धू को कांग्रेस का भविष्य बता दिया। इसके बाद सिद्धू तेजी से एक्टिव होते गए। उन्होंने नशा, बेअदबी, महंगी बिजली समझौते के मुद्दे पर कैप्टन को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस हाईकमान कैप्टन की छुट्टी के मूड़ में था। जरूरत थी तो एक ऐसे कांग्रेसी की, जो कैप्टन के सियासी कद को टक्कर दे सके। इसके लिए सिद्धू बढिय़ा विकल्प मिल गए। हाईकमान ने सुनील जाखड़ की विदाई की तैयारी कर ली। अभी पंजाब प्रधान को लेकर मंथन जारी ही था कि रावत ने कह दिया कि सिद्धू अगले पंजाब प्रधान होंगे। कैप्टन के लिए यही बड़ा संकेत था लेकिन वो समझ नहीं पाए। कांग्रेस हाईकमान से स्पष्ट संदेश था तो सिद्धू ग्रुप ने बगावत शुरू कर दी। दो बार विधायक दिल्ली गए। कांग्रेस ने खडग़े कमेटी बना दी। कैप्टन की भी पेशी होती गई लेकिन वो अड़े रहे। इसके बाद बगावत हुई तो हाईकमान ने मंत्रियों पर कोई कार्रवाई नहीं की। कैप्टन इसे समझ न सके और इसके बाद गुपचुप लेटर निकलवा विधायक दल बैठक बुलाने को कह दिया गया। अंत में उन्हें अपमानजनक विदाई लेनी पड़ी। मुख्यमंत्री बनने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में अपने हिसाब से काम किया। संगठन में रहे तो हाईकमान के आदेश नहीं सुने। कैप्टन अक्सर बॉर्डर स्टेट की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा लेकर दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह से मिलते रहे। कांग्रेस हाईकमान ने इसे फ्रेंडशिप माना। हाल ही में अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग के नवीनीकरण का राहुल गांधी ने कड़ा विरोध किया। इसके उलट कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि सब कुछ ठीक बना है। ऐसा पहली बार नहीं है, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भी कैप्टन हमेशा केंद्र के साथ रहे। 2017 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन के नेतृत्व में कांग्रेस को 70 से ज्यादा सीटों पर जीत मिली। लिहाजा पार्टी सत्ता में आई। 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कैप्टन की सिद्धू से अनबन हो गई और उसके बाद धीरे-धीरे सिद्धू ने कैप्टन से नाराज धड़े के साथ मिलकर अंतत: उनका इस्तीफा करवा ही दिया। विधानसभा चुनाव से 6 महीने पहले कैप्टन का सीएम पद से इस्तीफा देने से किसे कितना फायदा या नुकसान होगा, यह 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।


-सिद्वार्थ शंकर-





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यूपी चुनाव और कसौटी पर हिंदुत्व मॉडल

देश की राजनीति की दिशा तय करने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के लिए छह महीनों से भी कम समय बचा है। लेकिन अगले साल होने वाले इन चुनावों के नतीजे भाजपा और संघ की भी राजनैतिक दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं। साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के हिसाब से सबसे संवेदनशील इस राज्य के जनादेश के आधार पर इस बात का अनुमान आसानी से लगाया जा सकेगा कि भाजपा के कोर मतदाताओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रखर हिन्दुत्व ज्यादा पसंद आ रहा है या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपेक्षाकृत नरम हिन्दुत्व।


राष्ट्रीय राजनीति में नरेंद्र मोदी के उभार से पहले भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों में घिरी कांग्रेस सरकार जनता की नजरों से बुरी तरह उतर चुकी थी। इसके अलावा हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा गढ़ने और साम्प्रदायिक हिंसा बिल जैसे प्रयासों के कारण बहुसंख्यक हिन्दू समाज कांग्रेस से खासा नाराज था। इसके बाद 2013 के मुजफ्फर नगर दंगों के दौरान उत्तर प्रदेश की सपा सरकार की पक्षपातपूर्ण कार्रवाइयों से हिन्दू समाज बुरी तरह आहत हुआ। कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों से नाराजगी तथा नरेंद्र मोदी की हिन्दुत्ववादी छवि के कारण बहुसंख्यक हिन्दू मतदाता एक बार फिर ज्यादा मजबूती से भाजपा के खेमे में आ गए। नतीजतन देश के अधिकांश राज्यों में भाजपा की सरकारें बन गईं।


लेकिन विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों के नतीजों से एक बात साफ दिख रही है कि मतदाताओं का जितना समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हासिल है उतना क्षेत्रीय नेतृत्व को नहीं। इसीलिए भाजपा को लोकसभा चुनाव में मिले वोट उसके व्यापक जनाधार वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिले वोटों की तुलना में भी 10 से 20 प्रतिशत तक ज्यादा होते हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा को लोकसभा चुनाव के मुकाबले तकरीबन 12 प्रतिशत कम वोट मिले। उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों के आंकड़े बताते हैं कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में 41.3 प्रतिशत और 49.56 प्रतिशत वोट हासिल करने वाली भाजपा 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में 39.67 प्रतिशत वोट हासिल कर सकी।


हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में भाजपा और संघ के मुख्य एजेण्डा से जुड़े मुद्दों को लेकर कदम नहीं बढ़ाया लेकिन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पहली बार सीमा पार करके सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक करके देश की सामरिक नीतियों में बदलाव का स्पष्ट संदेश पाकिस्तान और दुनिया को दिया। इसके अलावा खुद को धर्मनिरपेक्ष साबित करने के लिए उन्होंने कोई अनावश्यक अतिरिक्त प्रयास भी नहीं किए। इसीलिए नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पहले के मुकाबले बढ़ गई। लोकसभा चुनाव 2019 में पहले के मुकाबले ज्यादा सीटें जीत कर सत्ता में पहुंचे मोदी ने सरकार बनने के बाद चंद महीनों के भीतर ही धारा 370 को निष्प्रभावी करते हुए धारा 35ए को समाप्त कर दिया, धार्मिक प्रताड़ना का शिकार गैर मुस्लिमो को भारत की नागरिकता प्रदान करने के लिए नागरिकता संशोधन कानून बना दिया। कट्टरपंथियों और शरीयत की परवाह किए बिना मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के खिलाफ कानून बना दिया।


प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी की कार्यशैली में लोग स्पष्ट अन्तर महसूस कर रहे हैं। सीएए के खिलाफ होने वाले शाहीन बाग जैसे प्रदर्शन या किसान आंदोलन के नाम पर लाल किला पर अराजकता करने वालों के खिलाफ मोदी सरकार कार्रवाई से बचती रही और न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा करती रही जबकि योगी सरकार ने सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए आन्दोलनकारियों की सम्पत्ति तक कुर्क करवा दी। किसान नेता जुबानी जमा खर्च तो करते रहे लेकिन लखनऊ बॉर्डर पर दिल्ली बार्डर जैसी अराजकता फैलाने की हिम्मत नहीं जुटा सके।


योगी सरकार ने भारत माता को डायन कहने वाले आजम खां के पूरे परिवार को जेल में ठूंस दिया। योगी सरकार ने वैचारिक और राजनैतिक विरोधी हों या शत्रु उन्हें उनकी ही भाषा में जवाब दिया है। माफिया डॉन मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और विकास दुबे जैसे लोगों पर बिना भेदभाव के कार्रवाई की गई। आलोचनाओं को दरकिनार कर इलाहाबाद, फैजाबाद के नाम बदलकर सनातन संस्कृति के अनुरूप प्रयागराज और अयोध्या कर दिया।


इस तरह इस बार के विधानसभा चुनाव में विरोधियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देने वाला प्रखर हिन्दुत्व होगा। यदि विधानसभा चुनावों में भाजपा लोकसभा चुनावों के मुकाबले अधिक मत हासिल कर लेती है या विधानसभा चुनावों के मुकाबले 10 प्रतिशत के अन्तर में उल्लेखनीय कमी कर लेती है तो पूरी संभावना है कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की नीतियों में परिवर्तन होगा।



-विकास सक्सेना-

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)





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6 महीने में 1 लाख बेरोजगारों को मिलेगी सरकारी नौकरी, उत्तराखंड चुनाव के लिए अरविंद केजरीवाल ने खेला दांव

नई दिल्ली : आगामी दिनों में देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले है। ऐसे में इन राज्यों को साधने के लिए राजनीतिक पार्टियां जुट गई है। उत्तराखंड भी इन्हीं चुनावी राज्यों में शामिल है। इस राज्य के लिए आम आदमी ने एक बड़ा ऐलान किया है। दिल्ली के सीएम और आप पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सरकार बनने के बाद उत्तराखंड के सभी बेरोजगारों के लिए रोजगार मुहैया कराया जाएगा। जब तक उस बेरोजगार को रोजगार नहीं मिलता तब तक हर परिवार से एक युवा को 5,000 रुपए महीना दिया जाएगा।


केजरीवाल ने कहा है कि हमारी सरकार बनने के 6 महीने के अंदर 1 लाख सरकारी नौकरियां तैयार की जाएगी, उत्तराखंड के बच्चों के लिए एक जॉब पोर्टल बनाया जाएगा और यहां के लोगों के लिए रोज़गार और पलायन मंत्रालय बनाया जाएगा।


उन्होने कहा कि अगर हमारी सरकार यहां बनेगी तो 300 यूनिट मुफ़्त बिजली दी जाएगी और पुराने बिजली के बिल माफ़ किया जाएगा तथा 24 घंटे बिजली दी जाएगी। मैं जो कहता हूं वो करता हूं। हमने कहा मुफ़्त बिजली देंगे..तो देंगे।






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कैलिफोर्निया के गवर्नर को हटाने के लिए हुए चुनाव के बाद गैविन न्यूसम पद पर बरकरार

सैक्रोमेंटो (अमेरिका) : कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम को उनके कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व ही पद से हटाने के लिए कराए गए चुनाव में डेमोक्रेटिक नेता न्यूसम विजयी रहे। इसी के साथ न्यूसम अमेरिका के इतिहास में मंगलवार को ऐसे दूसरे गवर्नर बन गए, जो कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व पद से हटाने के लिए कराए गए चुनाव में विजयी रहे हैं। इस जीत के साथ ही न्यूसम डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में अहम नेता बनकर सामने आए हैं और उन्हें अमेरिका में भविष्य में राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रिट पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना प्रबल हो गई है। न्यूसम ने इस मतदान को कोरोना वायरस वैश्विक महामारी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विचारधारा के खिलाफ अपनी पार्टी के मूल्यों के लिए राष्ट्रीय लड़ाई के तौर पर पेश किया था। इस चुनाव में न्यूसम की जीत का अर्थ है कि देश में सबसे अधिक आबादी वाले इस राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार रहेगी और यह आव्रजन, जलवायु परिवर्तिन और असमानता जैसे मामलों पर पार्टी की प्रगतिशील नीतियों की प्रयोगशाला के तौर पर काम करेगा।


मतदान से पहले देश के राष्ट्रपति जो बाइडन ने लोगों से अपील की थी कि वे कोविड-19 के मद्देनजर कड़े प्रतिबंध लागू करने और टीकाकरण की आवश्यकता संबंधी डेमोक्रेटिक पार्टी के दृष्टिकोण का समर्थन करें और देश को दिखा दें कि ‘‘नेतृत्व मायने रखता है, विज्ञान मायने रखता है’’।


यह मतदान इस बात की भी परीक्षा था कि क्या डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी दक्षिणपंथी राजनीति का विरोध डेमोक्रेट और निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए अब भी एक प्रेरक शक्ति है। मतदान से पहले न्यूसम ने कहा, ‘‘हमने डोनाल्ड ट्रंप को तो हरा दिया है, लेकिन हमने उनकी विचारधारा को नहीं हराया है। ट्रंप की विचारधारा इस देश में अब भी जीवित है।’’


इस मतदान के दौरान मतदाताओं से दो प्रश्न पूछे गए थे: क्या न्यूसम को पद की जिम्मेदारी से हटाया जाना चाहिए और यदि हां, तो उनकी जगह किसे यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए? 








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भाजपा ने किये पांच राज्यों के लिए चुनाव प्रभारी नियुक्त

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी प्रभारियों की सूची जारी कर दी है। भाजपा महासचिव अरुण सिंह की ओर से बुधवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पार्टी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने 2022 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए केंद्रीय मंत्री धमेंद्र प्रधान को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, अर्जुन राम मेघवाल और शोभा करंदलाजे, अन्नपूर्णा देवी, सांसद सरोज पांडे, सांसद विवेक ठाकुर और हरियाणा सरकार में पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को सह प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश चुनाव के मद्देनजर संगठन प्रभारियों की भी नियुक्ति की गयी है। इनमें अरविंद मेनन, संजीव चौरसिया, संजय भाटिया, सत्या कुमार, सुधीर गुप्ता और सुनील ओझा शामिल हैं। पंजाब के लिए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रभारी जबकि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, मीनाक्षी लेखी और सांसद विनोद चावड़ा को सह प्रभारी बनाया गया है। वहीं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी उत्तराखंड के प्रभारी नियुक्त किए गए हैं जबकि सांसद लॉकेट चटर्जी और पार्टी प्रवक्ता सरदार आर पी सिंह सह प्रभारी होंगे। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव मणिपुर का चुनाव प्रभार देखेंगे तथा केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक और असम सरकार में मंत्री अशोक सिंघल सह प्रभारी होंगे। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को गोवा का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में वर्ष 2022 के फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। अभी इन पांच राज्यों में से चार में भाजपा की सरकार है, जबकि पंजाब में कांग्रेस की सरकार है।






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भवानीपुर उपचुनाव में ममता बनर्जी के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार नहीं उतारेगी

कोलकाता : भवानीपुर उपचुनाव में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारने का वादा करने के एक दिन बाद कांग्रेस ने मंगलवार को अपने रुख पर यू-टर्न ले लिया और कहा कि पार्टी तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो के खिलाफ किसी को खड़ा नहीं करेगी।


राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने बहरामपुर में संवाददाताओं से कहा कि एआईसीसी के निर्देश के अनुसार, कांग्रेस 30 सितंबर को होने वाले उपचुनाव से पहले न तो बनर्जी के खिलाफ कोई उम्मीदवार उतारेगी और न ही उनके खिलाफ प्रचार करेगी।


चौधरी ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा था कि कांग्रेस भबनीपुर में बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगी, उनका दावा था कि पीसीसी के अधिकांश सदस्य इस तरह के फैसले के पक्ष में हैं।


एआईसीसी के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, माकपा नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा, "हम एक उम्मीदवार को मैदान में उतारेंगे क्योंकि टीएमसी और भाजपा के खिलाफ एक विकल्प की जरूरत है। हम कांग्रेस को अपना फैसला बदलने के लिए नहीं कह सकते।





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आंदोलन का चुनावी अंदाज

किसानों के नाम पर आंदोलन की शुरुआत शाहीनबाग अंदाज में हुई थी। उसकी तरह ही असत्य पर आधारित अभियान चलाया जा रहा है। सीएए ने नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान किया गया था। जबकि आंदोलन इस बात कर किया गया कि सरकार वर्ग विशेष की नागरिकता छीन लेगी लेकिन कुछ ही समय में ऐसा कहने वाले बेनकाब हुए। इसी प्रकार किसानों के नाम पर चल रहा आन्दोलन भी बड़े झूठ पर आधारित है। सीएए विरोध की तर्ज पर कहा जा रहा है कि कृषि कानूनों से किसानों की जमीन छीन ली जाएगी। वास्तविकता यह कि पुरानी व्यवस्था में किसान अपनी जमीन बेचने को विवश हो रहे थे क्योंकि कृषि में लाभ कम हो रहा था। इसका फायदा पूंजीपति उठा रहे थे। नए कृषि कानूनों से किसानों को विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। इनको भी स्वीकार करने की बाध्यता नहीं है। किसानों को अधिकार प्रदान किये गए।


देश में अस्सी प्रतिशत से अधिक किसान छोटी जोत वाले हैं। आंदोलन के नेताओं को इनकी कोई चिंता नहीं है। आंदोलन का स्वरूप अभिजात्य वर्गीय है। ऐसा आंदोलन नौ महीने क्या नौ वर्ष तक चल सकता है। आंदोलन के नेता कृषि कानूनों का काला बता रहे हैं। लेकिन उनके पास इस बात का जवाब नहीं है कि इसमें काला क्या है, वह कह रहे है कि किसानों की जमीन छीन ली जाएगी लेकिन उनके पास इसका जवाब नहीं कि किस प्रकार किसानों की जमीन छीन ली जाएगी। कॉन्ट्रैक्ट कृषि तो पहले से चल रही है। किसानों को इसका लाभ मिल रहा है। ऐसा करने वाले किसी भी किसान की जमीन नहीं छीनी गई।


आंदोलन के नेता कह रहे है कि कृषि मंडी समाप्त हो जाएगी। जबकि वर्तमान सरकार ने कृषि मंडियों को आधुनिक बनाया है। कृषि मंडियों से खरीद के रिकार्ड कायम हुए हैं। आंदोलन के नेता कह रहे है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा। लेकिन वर्तमान सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में अब तक कि सर्वाधिक वृद्धि की है।


जाहिर है कि यह आंदोलन भी सीएए की तरह विशुद्ध राजनीतिक है। इससे किसानों का कोई लेना देना नहीं है। इसमें किसान हित का कोई विचार समाहित नहीं है। सीएए विरोधी आंदोलन जल्दी समाप्त हो गया। लेकिन इस आंदोलन में किसान शब्द जुड़ा है। इसका लाभ मिल रहा है। इसी नाम के कारण सरकार ने बारह बार इनसे वार्ता की। संचार माध्यम में भी किसान आंदोलन नाम चलता है। जबकि वास्तविक किसान इससे पूरी तरह अलग है। उन्हें कृषि कानूनों में कोई खराबी दिखाई नहीं दे रही है। आंदोलन के नेता और उनका समर्थन करने वाले राजनीतिक दल अपनी जवाबदेही से बच रहे हैं। किसी ने यह नहीं बताया कि वह पुरानी व्यवस्था को बचाने हेतु इतना बेकरार क्यों है। इसका क्या निहितार्थ निकाला जाए, क्या उनके पास पुरानी व्यवस्था की अच्छाइयां बताने के लिए कुछ नहीं है।


किसी ने यह नहीं कहा कि पुरानी व्यवस्था में किसान खुशहाल थे इसलिए वे सुधारों का विरोध कर रहे हैं। जबकि सुधार तथ्यों पर आधारित है। इसका विरोध कल्पनाओं पर आधारित है। मात्र कल्पना के आधार पर आंदोलन चलाया जा रहा है। सरकार के विरोध में विपक्ष ने अपने हितों का भी ध्यान नहीं रखा। सत्ता पक्ष ने उनको बिचौलियों के बचाव हेतु परेशान बताया। क्योंकि विधेयकों के माध्यम से बिचौलियों को ही दूर किया गया। मंडियां समाप्त नहीं होंगी, न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रहेगा, किसानों को अपनी मर्जी से उपज बेचने का अधिकार मिला। ऐसे में विरोध का कोई औचित्य या आधार ही नहीं था। विरोध में सर्वाधिक मुखर दलों को सत्ता में रहने का अवसर मिलता रहा है।


कांग्रेस आज भी कई प्रदेशों की सत्ता में है। नरेंद्र मोदी सरकार के ठीक पहले कांग्रेस की केंद्र में सरकार थी। ऐसी सभी पार्टियों को तो किसान हित पर बोलने का अधिकार ही नहीं है। दस वर्षों में एक बार किसानों की कर्ज माफी मात्र से कोई किसान हितैषी नहीं हो जाता। आज हंगामा करने वाली पार्टियां स्वयं जवाबदेह हैं। उनको बताना चाहिए कि पुरानी व्यवस्था के माध्यम से उन्होंने किसानों को कितना लाभान्वित किया था। उन्हें बताना चाहिए कि क्या उस व्यवस्था में बिचौलिओं की भूमिका नहीं थी। क्या सभी किसानों की उपज मंडी में खरीद ली जाती थी।


स्वामीनाथन समिति का गठन यूपीए सरकार ने किया था। उसकी सिफारिशों पर मोदी सरकार अमल कर रही है। कुछ दिन पहले कांग्रेस सवाल करती थी कि स्वामीनाथन रिपोर्ट कब लागू होगी। सरकार अमल कर रही है तो हंगामा किया जा रहा है। यह दोहरा आचरण कांग्रेस के लिए हानिकारक है। जाहिर है कि विपक्ष पिछली व्यवस्था के लाभ बताने की स्थिति में नहीं है।


भाषण और बयान चल रही है,किसानों के हित की दुहाई दी जा रही है,लेकिन कोई यह नहीं बता रहा है कि अब तक चल रही व्यवस्था में किसानों को क्या लाभ मिल रहा था, कोई यह नहीं बता रहा है कि कितने प्रतिशत कृषि उत्पाद की खरीद मंडियों में होती थी। कोई यह नहीं बता रहा है कि पिछली व्यवस्था में बिचौलियों की क्या भूमिका थी। कोई यह नहीं बता रहा है कि कृषि उपज का वास्तविक मुनाफा किसान की जगह कौन उठा रहा था। विपक्ष इन सबका जवाब देता तो स्थिति स्पष्ट होती। कहा जा रहा है कि किसान बर्बाद हो जाएंगे, बड़ी कम्पनियां उनके खेतों पर कब्जा कर लेंगी, अंग्रेजों की तरह उनसे नील का उत्पादन कराएंगी, खेत बर्बाद हो जाएंगे आदि।


पुरानी व्यवस्था में अनेक कमियां थी। इसमें किसानों पर ही बन्धन थे, वही परेशान होते थे। इस व्यवस्था में वे लोग लाभ उठा रहे थे, जो किसान नहीं थे। वह किसानों की तरह मेहनत नहीं करते थे, उन्हें फसल पर मौसम की मार से कोई लेना देना नहीं था। ऐसे में इस आंदोलन से किसका लाभ हो सकता है। आंदोलन किसके बचाव हेतु चल रहा है। इसमें किसानों का हित नजरअंदाज किया जा रहा है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो पुरानी व्यवस्था में लाभ उठाने वालों के गिरोह का उल्लेख किया है। कहा कि देश में अब तक उपज और बिक्री के बीच में ताकतवर गिरोह पैदा हो गए थे। यह किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे। जबकि इस कानून के आने से किसान अपनी मर्जी और फसल दोनों के मालिक होंगे। उन्होंने देश के किसानों को आश्वस्त किया कि देश में न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म होगा ना ही कृषि मंडियां समाप्त होंगी।


कांग्रेस किसानों को भ्रमित कर रही है। कांग्रेस ने शुरू से ही देश के किसानों को कानून के नाम पर अनेक बंधनों से जकड़ रखा है। आज तक किसानों के हित में कोई फैसला नहीं लिया। आज जब कृषि सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं तो किसानों को गुमराह किया जा रहा है। देश में एमएसपी अनवरत जारी है। फसल मंडियां अपनी जगह यथावत है। लेकिन कांग्रेस पार्टी किसानों को यह कह कर गुमराह कर रही है कि एमएसपी खत्म हो जाएगी। मंडियों को खत्म कर दिया जाएगा। सरकार ने किसानों को अधिकार के लिए ऐतिहासिक कानून बनाये हैं। यह कृषि सुधार इक्कीसवीं सदी के भारत की जरूरत है।


-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)









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यूपी के चुनाव में एक बार फिर ब्राह्मण कार्ड, विकास दुबे की पत्नी को यूपी चुनाव में लड़ने के लिए संपर्क

लखनऊ : बिकरू हत्याकांड के एक साल बाद, जिसमें जुलाई 2020 में गैंगस्टर विकास दुबे और उसके लोगों द्वारा कथित तौर पर आठ पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, यह घटना अब उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण राजनीति बदल रही है।


सूत्रों के मुताबिक, कुछ राजनीतिक दल आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दिवंगत विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे मिले हैं।


दुबे परिवार के एक सदस्य ने बताया कि दो दलों के नेताओं ने प्रस्ताव के साथ ऋचा से संपर्क किया है।


परिवार के सदस्य ने कहा, नेताओं ने कहा कि यही एकमात्र तरीका है जिससे वह परिवार की पीड़ा का बदला ले सकती हैं और अपने दो बच्चों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकती हैं। इन पार्टियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनके कार्यकर्ता उनके अभिमान का ध्यान रखेंगे।


उन्होंने कहा कि ऋचा ने अभी तक राजनीति में आने का मन नहीं बनाया है।


संयोग से, ऋचा ने 2015 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जिला पंचायत चुनाव लड़ा चुकी। हालांकि, बिकरू नरसंहार के बाद, समाजवादी पार्टी ने इस बात से इनकार किया कि ऋचा उनकी सदस्य रही है।


बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने अपने प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलनों (ब्राह्मण सम्मेलनों को पढ़ें) में बार-बार कहा है कि बिकरू मामले में निर्दोष ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया था।


हालांकि मिश्रा ने विकास दुबे पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने अपने संदेश को रेखांकित करने के लिए बिकरू नाबालिग विधवा खुशी दुबे का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से जेल में बंद खुशी को बसपा कानूनी सहायता देगी।


खुशी 16 साल की थी जब उसने एक अन्य बिकरू आरोपी अमर दुबे से शादी की। शादी के तीन दिन बाद बिकरू हत्याकांड हुआ और उसके बाद पुलिस मुठभेड़ में अमर दुबे मारा गया।


आप सांसद संजय सिंह ने कहा, खुशी के साथ किया गया व्यवहार अनुचित था। पुलिस ने उसके खिलाफ आरोपों को सूचीबद्ध नहीं किया है,फिर भी उसे जमानत से वंचित किया।


एक कांग्रेस नेता ने कहा,पुलिस के पास सभी छह मुठभेड़ों के लिए एक ही स्क्रिप्ट थी। हम आरोपियों का समर्थन नहीं करते हैं लेकिन उन्हें गोली मारने के बजाय गिरफ्तार किया जाना चाहिए और अदालत में मुकदमा चलाया जाना चाहिए था। कई गैर-ब्राह्मण माफिया हैं जो खुले घूम रहे हैं। और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है।

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सर्वेक्षण में गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में भाजपा की जीत की भविष्यवाणी

नई दिल्ली : एबीपी-सीवोटर-आईएएनएस बैटल फॉर द स्टेट्स के अनुमानों के अनुसार, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भाजपा अगले साल तीन राज्यों में चुनाव होने पर आराम से सत्ता बरकरार रखेगी।


सर्वे के मुताबिक, 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में बीजेपी को 22 से 26 सीटें, कांग्रेस को 3 से 7 सीटें, जबकि आप को 4 से 8 सीटें मिलने की संभावना है। बीजेपी के 39.4 फीसदी वोट शेयर के साथ चुनाव जीतने की संभावना है। इसके बाद आप को 22.2 फीसदी और कांग्रेस को 15.4 फीसदी वोट मिलने की संभावना है।


70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में, सर्वेक्षण में भाजपा को 48 सीटें, कांग्रेस को 23, जबकि आप को 4 सीटें जीतने का अनुमान है।


दोनों राष्ट्रीय दलों के वोट शेयर में गिरावट की संभावना है। केवल आप को वोट प्रतिशत में लाभ होने की संभावना है।


कांग्रेस को 32.6 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है। 2017 की तुलना में 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की जा सकती है। बीजेपी को 43.1 फीसदी, 3.4 फीसदी की गिरावट, जबकि आप को वोट शेयर में 14 फीसदी का फायदा होगा।


60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भाजपा को 36, कांग्रेस को 22, एनपीएफ को 6 और अन्य को 4 सीटें मिलने की संभावना है।


वोट शेयर के मामले में, बीजेपी को 40.5 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। 2017 की तुलना में 4.2 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की जा सकती है, जबकि कांग्रेस के वोट शेयर में मामूली गिरावट के साथ वोट शेयर 34.5 प्रतिशत होने का अनुमान है।







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मिशन 2022 फतह के लिए भाजपा ने बूथों पर तैनात किया कार्यकर्ताओं की फौज

वाराणसी : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मिशन 2022 फतह के लिए बूथ की मजबूती पर खासा ध्यान देने के साथ होमवर्क शुरू कर दिया है। प्रदेश में प्रचंड बहुमत से दोबारा सरकार बनाने के लिए पार्टी के शीर्ष से लेकर सेक्टर और बूथ के पदाधिकारी भी चुनावी तैयारियों को गति देने के लिए बैठकों के साथ बूथ पर भी लगातार सक्रिय हैं। पदाधिकारी 'एक बूथ पर 20 यूथ' कार्य योजना को अमलीजामा पहना रहे हैं। वाराणसी में सभी मंडलों के सभी बूथ पर बूथ अध्यक्षों एवं 20 कार्यकर्ताओं की नियुक्ति पूर्ण कर ली गई है।


पार्टी के स्थानीय सेक्टर प्रभारी अशोक पांडेय ने बुधवार को बताया कि 26 अगस्त से 31 अगस्त तक व्यापक अभियान चलाकर सभी बूथ समितियों का सत्यापन कर लिया गया है। प्रत्येक बूथ पर 05 मोटरसाइकिल वाले कार्यकर्ता एवं 05 स्मार्ट फोन वाले कार्यकर्ता की भी नियुक्ती कर ली गई है।


अशोक पांडेय ने बताया कि प्रत्येक 4 या 5 बूथ पर सेक्टर संयोजक एवं एक सेक्टर प्रभारी की नियुक्ति की गई है। बूथ सत्यापन के क्रम में बूथ सत्यापन अधिकारी पार्षद रोहित मौर्य ने राजर्षि मण्डल के बूथ संख्या 63,64 ,65 और 66 का सत्यापन सेक्टर संयोजक रूपेश वर्मा के आवास पर किया। बूथ सत्यापन के समय सेक्टर प्रभारी अशोक कुमार पांडेय, बूथ अध्यक्ष गुरु प्रसाद, धर्मराज, राजेश मौर्य अनिल मौर्य उपस्थित रहे।


प्रदेश भर में बूथ सत्यापन अभियान का समापन : भाजपा काशी क्षेत्र अध्यक्ष महेशचंद श्रीवास्तव के अनुसार पूरे प्रदेश भर में पार्टी की ओर से बीते 25 अगस्त से चल रहा बूथ सत्यापन अभियान 31 अगस्त को समाप्त हो गया। अंतिम दिन खुद उन्होंने शहर उत्तरी विधान सभा के शक्ति केंद्र (सेक्टर) नदेसर ए के कुल छह बूथों का सत्यापन किया। महेशचंद श्रीवास्तव ने बताया कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मजबूत बूथ संरचना की है। कार्यकर्ताओं के मजबूत इरादे विपक्ष के झूठ, फरेब को ध्वस्त कर चुनाव में कमल खिलायेंगे।




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पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए अंतिम चरण का मतदान जारी

जयपुर : राजस्थान के छह जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए तीसरे और अंतिम चरण का मतदान बुधवार को रहा है जिसके तहत सुबह 10 बजे तक 13.64 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदान सुबह 7.30 बजे से शुरू हुआ और सुबह 10 बजे तक 13.64 प्रतिशत मतदान हुआ। आयोग के अनुसार, मतदान शाम 5.30 बजे तक चलेगा और कुल मिलाकर 25 लाख से अधिक मतदाता वोट डाल सकेंगे।उल्लेखनीय है कि जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, सवाईमाधोपुर, दौसा और सिरोही जिले की 25 पंचायत समितियों के 507 सदस्यों और उनसे संबंधित जिला परिषद सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान करवाया जा रहा है। 507 पंचायत समिति सदस्यों के लिए 1772 उम्मीदवारों ने दावेदारी पेश की, जबकि सात उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन लिया गया है। 





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यूपी की सभी 403 सीटों पर लड़ेगी आप, कोई गठबंधन नहीं

लखनऊ : आम आदमी पार्टी (आप) ने आगामी यूपी विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।


पार्टी ने घोषणा की है कि वह 2022 के राज्य चुनाव में सभी 403 सीटों के लिए अपने उम्मीदवार उतारेगी।


आप के उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे बूथ स्तर पर होने वाले चुनाव की तैयारियों में शामिल हों, ताकि आने वाले चुनाव पूरी ताकत से लड़ सकें।


सिंह ने कहा कि आने वाले दिनों में राज्य के सभी 403 निर्वाचन क्षेत्रों में आप की तिरंगा संकल्प यात्रा निकाली जाएगी।


संजय सिंह ने कहा, इसके माध्यम से हम लोगों को बताना चाहते हैं कि असली राष्ट्रवाद क्या है। हमारा राष्ट्रवाद है कि हर गरीब बच्चे को पढ़ने के लिए बेहतर स्कूल मिले। दिल्ली की तरह उत्तर प्रदेश में भी बेहतर स्कूलों का सपना पूरा होना चाहिए। जैसे दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक, हर गांव में बेहतर अस्पताल या क्लीनिक हों। गरीबों के घरों में 300 यूनिट बिजली मुफ्त में मिलनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि आप का राष्ट्रवाद है कि वे उत्तर प्रदेश के लोगों को अच्छा स्वास्थ्य और शिक्षा देंगे।


उन्होंने कहा, हमारी श्मशान बनाने वाली विचारधारा नहीं है। भाजपा ने कोविड-19 महामारी के दौरान हर गांव में श्मशान घाट बनाए। 2017 में उन्होंने कहा था कि वे ऐसा करेंगे।


राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के तहत उत्तर प्रदेश में तिरंगे के गौरव को ठेस पहुंचाने वाली कई घटनाएं हुई हैं।


उन्होंने राज्य में घोटाले की अनुमति देने के लिए भाजपा की भी आलोचना की।


उन्होंने कहा, चाहे ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन सिलेंडर और थमार्मीटर जैसे चिकित्सा उपकरणों की खरीद हो या राम मंदिर के लिए जमीन की खरीद हो या जल जीवन मिशन में घोटाला, राज्य सरकार के पास हमारे सवालों का कोई जवाब नहीं है।


आप नेता संजय सिंह ने मंगलवार को हुई बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश में पार्टी के हाल ही में संपन्न सदस्यता अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि एक महीने के अंदर उत्तर प्रदेश से करीब एक करोड़ नए सदस्य पार्टी में शामिल हुए हैं।


उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरूआत में चुनाव होने हैं।




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आप अयोध्या, लखनऊ, नोएडा में तिरंगा यात्रा निकालेगी

नयी दिल्ली : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले, आम आदमी पार्टी (आप) भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष को मनाने लिए अयोध्या, लखनऊ और नोएडा में तिरंगा यात्रा निकालेगी।


पार्टी के सूत्रों ने बताया कि अयोध्या में यात्रा राम मंदिर में कुछ देर रुकेगी। यात्रा मध्य सितंबर में निकाली जानी है।


आप नेता संजय सिंह ने कहा है कि आप रविवार को आगरा में और एक सितंबर को नोएडा में तिरंगा यात्रा निकालेगी।


इन यात्राओं में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शामिल होंगे। पार्टी नेताओं ने कहा कि देश आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है और इस यात्रा का उद्देश्य लोगों को जातिवाद और भ्रष्टाचार की राजनीति के खिलाफ एकजुट करना है।


उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। आप ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में चुनाव लड़ने की घोषणा की है।




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अमेरिका में मजबूत चुनावी कानूनों की मांग को लेकर मताधिकार कार्यकर्ताओं ने की रैली

वाशिंगटन : अमेरिका में हजारों मताधिकार कार्यकर्ताओं ने उन संघीय कानूनों में बदलाव की मांग को लेकर शनिवार को देशभर में रैलियां की, जिससे रिपब्लिक पार्टी के नियंत्रण वाले कुछ राज्यों में मतदान पाबंदियां हट सकती हैं।


कई कार्यकर्ता मताधिकार नियमों पर लड़ाई को इस युग के नागरिक अधिकार मुद्दे के तौर पर देखते हैं। अमेरिकी संसद में दो चुनावी विधेयकों के पारित होने में गतिरोध के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ गयी है। इन विधेयकों को लेकर संसद में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकंस के बीच मतभेद है।


दर्जनों शहरों में हुई रैलियों का मकसद डेमोक्रेट्स पर दबाव बढ़ाना है कि वे प्रक्रियागत नियमों में बदलाव करें जिससे विपक्षी पार्टी के वोटों के बिना ही यह विधेयक पारित हो सके। साथ ही इन रैलियों का उद्देश्य राष्ट्रपति जो बाइडन को इस मुद्दे पर और पुरजोर वकालत करने के लिए मनाना भी था।


ट्वीटर पर पोस्ट एक वीडियो में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कांग्रेस से इस विधेयक को पारित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि टेक्सास, फ्लोरिडा तथा अन्य राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी को खदेड़ने के लिए इन विधेयकों की आवश्यकता है।





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जनता की कमाई कम और बीजेपी को दान सभी पार्टीयों से ज्यादा

नई दिल्ली : जाने आलम (जानू चौधरी)  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भाजपा को मिलने वाले चंदे में बढ़ोतरी से जुड़ी रिपोर्ट को लेकर निशाना साधा और सवाल किया कि भाजपा की आय 50 प्रतिशत बढ़ गई, लेकिन क्या जनता की आमदनी बढ़ी। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा की आय 50 प्रतिशत तक बढ़ गई।

एडीआर की नयी रिपोर्ट

के अनुसार एडीआर द्वारा सूचना का अधिकार के तहत दायर आवेदन के जवाब में साझा किये गए एसबीआई के आंकड़े के अनुसार विभिन्न राजनीतिक दलों ने 2019-20 में 3,429.56 करोड़ रूपये के चुनावी बांड भुनाये हैं जिसमें चार राष्ट्रीय दलों…भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को 87.29 प्रतिशत राशि प्राप्त हुई है।’’ एडीआर के अनुसार, ‘‘वित्त वर्ष 2019-20 में राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों ने 3441.32 करोड़ रूपये का चुनावी बांड घोषित किया ।

राजनीतिक दलों द्वारा घोषित चुनावी बांड और भुनाये गए बांड में अंतर इन दलों द्वारा आडिट रिपोर्ट की सूचना देने के तौर तरीकों के कारण हो सकता है।’’ एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सात राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राकांपा, बसपा, भाकपा, माकपा ने पूरे भारत से आय के रूप में 4758.20 करोड़ रूपये की आय अर्जित की। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में चार राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राकांपा ने अपनी कुल आय में चुनावी बांड के जरिये दान के रूप में 62.92 प्रतिशत राशि अर्थात 2993.82 करोड़ रूपये प्राप्त किये। भाजपा ने चुनावी बांड के जरिये दान के रूप में 2555 करोड़ रूपये, कांग्रेस ने 317.86 करोड़ रूपये, तृणमूल कांग्रेस ने 100.46 करोड़ रूपये तथा राकांपा ने 20.50 करोड़ रूपये प्राप्त किये।

एडीआर की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल में भारतीय जनता पार्टी को सबसे अधिक चंदा प्राप्त हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न राजनीतिक दलों ने 2019-20 में 3,429.56 करोड़ रूपये के चुनावी बांड भुनाये हैं जिसमें चार दलों… भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 87.29 प्रतिशत राशि प्राप्त हुई है। कांग्रेस पार्टी ने रिपोर्ट के आधार पर बीजेपी पर हमला बोला है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में भाजपा ने 3623.28 करोड़ रूपये के कुल आय की घोषणा की लेकिन पार्टी ने 45.57 प्रतिशत अर्थात 1651.02 करोड़ रूपये ही खर्च किया। इसमें कहा गया है कि कांग्रेस पार्टी इस वित्त वर्ष में कुल आय 682.21 करोड़ रूपये रहा और उसने 998.15 करोड़ रूपये खर्च किए । इस तरह से कांग्रेस पार्टी ने आय से 46.31 प्रतिशत अधिक खर्च किया। तृणमूल कांग्रेस ने वित्त वर्ष 2019-20 में 143.67 करोड़ रूपये आय अर्जित की और 107.27 करोड़ रूपये खर्च किये जो कुल आय का 74.67 प्रतिशत है।


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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा तंज, कहा-बिहार बंगाल से खतरनाक होगा यूपी का चुनाव

लखनऊ : सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंहगाई, बेरोजगारी जैसे मुददों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। कहा, यूपी का चुनाव बिहार और पश्‍च‍िम बंगाल से भी खतरनाक होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनावों की शुरूआत हो चुकी है। बिहार-बंगाल से ज्यादा उत्तर प्रदेश के चुनाव खतरनाक होंगे। समाजवादी सरकार बनेगी तभी गरीबों, किसानों, नौजवानों का कल्याण होगा। वह बीकेटी इंटर कॉलेज में समाजवादी चिंतक भगवती सिंह की 89वीं जयंती के उपलक्ष्य में उनकी प्रतिमा का अनावरण कर रहे थे। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने विद्युत उत्पादन बढ़ाने का कोई काम नहीं किया। यहां मीटर तेज चलता है। बिजली का बिल बढ़कर आता है। भाजपाई समाजवादी पार्टी के घोषणा-पत्र में बिजली बिल कम किए जाने की बात की आशंका में डरे हुए हैं। बिजली के करेंट का झटका भाजपा को लगना जरूरी है। राष्ट्रीय संपित्तयों के निजीकरण पर अखिलेश यादव ने कहा कि जो संस्थाएं हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं उन्हें बेचा जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करने आई थी एक कानून के बाद वह सरकार बन गई जिसे हटाने के लिये लाखों लाखों लोगों ने जान दी तब देश आजाद हुआ। सोचो जब कंपनी सरकार बन सकती है। यहां पूरी सरकार कंपनी बनी जा रही है सरकार नहीं बचेगी। जो कानून पास किये जा रहे हैं, जब कंपनियां देश चलायेंगी तो हो सकता है हम लोगों को एक और लड़ाई लड़नी पड़े। कहा, कोरोना काल में ऐसा लॉकडाउन किया कि लोगों की नौकरी, रोजगार, व्यापार खत्म हो गया। बेरोजगारी बढ़ गयी। कोरोना से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गयी। कहा, मरीजों को अस्पतालों में बेड, दवा और इलाज नहीं मिला। आक्सीजन के लिए भटकना पड़ा। दो साल में शिक्षा व्यवस्था चौपट है। आनलाइन पढ़ाई पटरी पर नहीं है। समाजवादी सरकार होती तो हर घर में लैपटाप पहुंचता। 






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राजनीतिक दलों ने 2019-20 में 3,429.56 करोड़ रूपये के चुनावी बांड भुनाये : एडीआर

नई दिल्ली : विभिन्न राजनीतिक दलों ने 2019-20 में 3,429.56 करोड़ रूपये के चुनावी बांड भुनाये हैं जिसमें चार दलों... भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 87.29 प्रतिशत राशि प्राप्त हुई है। चुनाव अधिकारों से जुड़ी संस्था एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में भाजपा ने 3623.28 करोड़ रूपये के कुल आय की घोषणा की लेकिन पार्टी ने 45.57 प्रतिशत अर्थात 1651.02 करोड़ रूपये ही खर्च किया। इसमें कहा गया है कि कांग्रेस पार्टी इस वित्त वर्ष में कुल आय 682.21 करोड़ रूपये रहा और उसने 998.15 करोड़ रूपये खर्च किए। इस तरह से कांग्रेस पार्टी ने आय से 46.31 प्रतिशत अधिक खर्च किया। तृणमूल कांग्रेस ने वित्त वर्ष 2019-20 में 143.67 करोड़ रूपये आय अर्जित की और 107.27 करोड़ रूपये खर्च किये जो कुल आय का 74.67 प्रतिशत है। एडीआर की नई रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘एडीआर द्वारा सूचना का अधिकार के तहत दायर आवेदन के जवाब में साझा किये गए एसबीआई के आंकड़े के अनुसार विभिन्न राजनीतिक दलों ने 2019-20 में 3,429.56 करोड़ रूपये के चुनावी बांड भुनाये हैं जिसमें चार राष्ट्रीय दलों...भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को 87.29 प्रतिशत राशि प्राप्त हुई है।’’ एडीआर के अनुसार, ‘‘वित्त वर्ष 2019-20 में राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों ने 3441.32 करोड़ रूपये का चुनावी बांड घोषित किया । राजनीतिक दलों द्वारा घोषित चुनावी बांड और भुनाये गए बांड में अंतर इन दलों द्वारा आडिट रिपोर्ट की सूचना देने के तौर तरीकों के कारण हो सकता है।’’ एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सात राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राकांपा, बसपा, भाकपा, माकपा ने पूरे भारत से आय के रूप में 4758.20 करोड़ रूपये की आय अर्जित की। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में चार राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राकांपा ने अपनी कुल आय में चुनावी बांड के जरिये दान के रूप में 62.92 प्रतिशत राशि अर्थात 2993.82 करोड़ रूपये प्राप्त किये। भाजपा ने चुनावी बांड के जरिये दान के रूप में 2555 करोड़ रूपये, कांग्रेस ने 317.86 करोड़ रूपये, तृणमूल कांग्रेस ने 100.46 करोड़ रूपये तथा राकांपा ने 20.50 करोड़ रूपये प्राप्त किये।





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चुनाव आते ही अरविंद केजरीवाल को याद आ जाती है यमुना की सफाई : आदेश गुप्ता

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने केजरीवाल सरकार पर झूठे वायदें और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब-जब दिल्ली में चुनाव नजदीक आते हैं तो केजरीवाल और उनके मंत्रियों को यमुना सफाई की याद आती है और चुनाव बीतने के बाद सफाई का काम उनके बाकी झूठे वादों की तरह जुमला साबित हो जाता है। 


उन्होंने कहा कि साल 2015 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पांच साल के भीतर यमुना नदी को साफ करने का वादा दिल्लीवालों से किया था। केजरीवाल ने अपने कैबिनेट सहयोगियों और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर यमुना आरती में भाग लेते हुए कुदेशिया घाट से दिल्लीवालों को स्वच्छ यमुना का सपना दिखाया था आज भी स्वच्छ यमुना का सपना जहरीले झाग से भरा हुआ है और राजधानी की सड़कों पर बाढ़ का मंजर आए दिन देखने को मिलता है। 


श्री गुप्ता ने कहा कि यहां तक कि डीपीसीसी ने यमुना के प्रदूषित होने का मुख्य कारण बिना शोधन वाला अपशिष्ट जल और सीईटीपी से निकलने वाले गंदे पानी की खराब गुणवत्ता तथा सीवेज जल शोधन संयंत्र को मुख्य कारण बताया है। उन्होंने कहा कि यमुना सफाई को लेकर मनीष सिसोदिया ने साल 2021-22 के बजट में 2,074 करोड़ रुपये का प्रावधान भी तय कर दिया है, लेकिन उस बजट का उपयोग अभी तक धरातल पर होता हुआ नहीं दिख रहा है। यमुना के बढ़ते हुए प्रदूषण स्तर और अपनी सरकार की नाकामी और धीमी गति से कार्य करने पर स्वयं मुख्यमंत्री केजरीवाल परियोजना के प्रगति को लेकर अप्रैल 2021 में अपने ही लोगों पर खासी नाराजगी जता चुके हैं। 


आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने साल 2018-21 के दौरान यानि सिर्फ 3 सालों में दरियागंज के डॉ. सेन नाले की सफाई पर ही 200 करोड़ रुपये का खर्च दिखाया है, लेकिन वास्तविकता देखते ही बनती है। इस जगह यमुना गंदे नाले का एक रुप ले चुकी है और इसमें इतनी गंदगी है कि पास खड़े होना भी मुश्किल हो जाता है। कोरोनाकाल में वर्ष 2020-2021 मे केजरीवाल सरकार ने 152 करोड़ रुपये यमुना की सफाई में खर्च दिखाया है जिससे साफ है कि यह सब सफेद झूठ है क्योंकि यमुना नदी की स्थिति पहले से बदतर हुई है।    



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सिरसा एवं कालका ने सभी सिख वोटर्स का आभार प्रकट किया

नई दिल्ली : सः मनजिन्दर सिंह सिरसा अध्यक्ष दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी, सः हरमीत सिंह कालका महासचिव एवं अध्यक्ष शिरोमणी अकाली दल दिल्ली इकाई ने दिल्ली के सभी सिख वोटर्स खासकर महिलाओं का आभार प्रकट किया जिन्होंने आज अपने व्यस्तम समय में से समय निकालकर वोट डाले।


सः सिरसा एवं सः कालका ने कहा त्यौहार के बावजूद संगत में खासा उत्साह देखा गया। संगत ने हमारे 2 वर्षों के कार्यकाल को देखा और परखा है जिसके दम पर हमें पूर्ण विश्वास है कि संगत एक बार फिर से हमें सेवा का मौका अवश्य देगी। उन्होंने कहा चुनावों के परिणाम आते ही हम सबसे पहले बाला साहिब अस्पताल संगत के सर्पुद करेंगे जिसमें बेहतर इलाज मरीजों का हो सकेगा इसके साथ ही अन्य जो वायदे हमने संगत के साथ किये हैं उसे पूरा किया जायेगा।


सः सिरसा और सः कालका ने कहा विरोधियों दलों के लड़ने झगड़ने के मंसूबो को नाकामयाब करते हुए हमारे सभी उम्मीदवारों ने शान्तिपूर्वक चुनावों में भाग लिया। उन्होंने चुनावों के दौरान पुख्ता प्रबन्ध ना करवाने के लिए प्रशासन और गुरुद्वारा चुनाव से नाराजगी जताई।



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अगले लोकसभा चुनाव के लिए एकजुट हो विपक्ष, व्यवस्थित ढंग से योजना बने : सोनिया

नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को विपक्षी दलों से 2024 के लोकसभा के चुनाव के लिए एकजुट होने आह्वान किया और कहा कि देश के संवैधानिक प्रावधानों और स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों में विश्वास रखने वाली सरकार के गठन के लिए विपक्ष की पार्टियों को अपनी विवशताओं से ऊपर उठना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस समय विपक्षी दलों की एकजुटता राष्ट्रहित की मांग है और कांग्रेस अपनी ओर से कोई कमी नहीं रखेगी।


सोनिया ने कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दलों के नेताओं की डिजिटल बैठक में संसद के हालिया मानसून सत्र के दौरान दिखी विपक्षी एकजुटता का उल्लेख किया और कहा, ‘‘मुझे भरोसा है कि यह विपक्षी एकजुटता संसद के आगे के सत्रों में भी बनी रहेगी। परंतु व्यापक राजनीतिक लड़ाई संसद से बाहर लड़ी जानी है।’’


कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर (हमारा) लक्ष्य 2024 का लोकसभा चुनाव है। हमें देश को एक ऐसी सरकार देने के उद्देश्य के साथ व्यवस्थिति ढंग से योजना बनाने की शुरुआत करनी है कि जो स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों और संविधान के सिद्धांतों एवं प्रावधानों में विश्वास करती हो।’’


उन्होंने विपक्षी दलों का आह्वान किया, ‘‘ यह एक चुनौती है, लेकिन हम साथ मिलकर इससे पार पा सकते हैं और अवश्य पाएंगे क्योंकि मिलकर काम करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। हम सभी की अपनी मजबूरियां हैं, लेकिन अब समय आ गया है जब राष्ट्र हित यह मांग करता है कि हम इन विवशताओं से ऊपर उठें।’’


सोनिया कहा, ‘‘देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ अपने व्यक्तिगत और सामूहिक संकल्प पर फिर जोर देने का सबसे उचित अवसर है। मैं यह कहूंगी कि कांग्रेस की तरफ से कोई कमी नहीं रहेगी।’’


उन्होंने विपक्षी नेताओं से कहा, ‘‘आप लोगों को याद होगा कि हमने 12 मई, 2021 को प्रधानमंत्री को टीकाकरण रणनीति और तीन किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त अनाज देने के बारे में संयुक्त रूप से पत्र लिखा था। हम लोगों के दखल के बाद टीकों की खरीद की व्यवस्था में कुछ बदलाव किये गए। यह कहना अब जरूरी नहीं है कि किसी दूसरे ने श्रेय लिया। कोई बात नहीं, इससे देश का फायदा हुआ।’’ उन्होंने विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री को लिखे गये कई और पत्रों का भी उल्लेख किया।


सोनिया ने कहा, ‘‘मैं समझती हूं कि शरद पवार जी भी इस बात को उनके (प्रधानमंत्री) संज्ञान में लाये हैं कि कैसे गृह मंत्री की अगुवाई में नया सहकारिता मंत्रालय राज्य सरकारों के संवैधानिक अधिकार और जिम्मेदारियों में सीधा दखल है। ममता बनर्जी जी और उद्धव ठाकरे जी ने भी गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ टीकों की आपूर्ति् में भेदभाव का मुद्दा उठाया है।’’


उनके मुताबिक, ‘‘कांग्रेस की ओर से मैंने भी कई मौकों पर लोगों के जीवन पर असर डालने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा।’’


उन्होंने संसद के मानसून सत्र में कार्यवाही बाधित होने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ओबीसी संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए सभी विपक्षी दलों ने समर्थन किया, हालांकि यह विधेयक सरकार की ‘गलतियों’और उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के कारण लाया गया था।





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ओवैसी मुस्लिम समाज को डराने का काम कर रहे हैं: आशु मलिक

उत्तर प्रदेश नोएडा: जानेआलम (जानू चौधरी): समाजवादी लोग बापू महात्मा गाँधी के बताए गए मार्ग पर चलने और मानने वाले लोग हैं। हमने ओवैसी द्वारा संसद में की गई तकरीरों को सुना और समझा है ओवैसी साहब बापू से नही बल्कि नाथूराम गोडसे से बहुत प्यार करते है, क्योंकि जो व्यक्ति बापू के बताए गए अहिंसा के रास्ते पर नही चल सकता वो बापू का नही, गोडसे को ही मानने वाला हो सकता है।

ओवैसी जनता के बीच अपने जहरीले भाषणों से यहाँ उत्तर प्रदेश की जनता के दिलों में नफरत भरने भाईचारा ख़त्म करने आए है, और मैं यह मानता हूँ जो व्यक्ति हिन्दू मुस्लिम के दिल में नफ़रत भरने व एक दूसरे का दुश्मन बनाने का काम करे वह गोडसे का ही समर्थक हो सकता है, बापू के बताए गए रास्ते पर चलने वाला कभी नही हो सकता। लेकिन अब यहाँ की जनता अच्छे से समझती है कि एक दूसरे से लड़कर किसी का भला नही होने वाला, देश नफरत से नही प्यार से चलता है।
 
 

नेताजी को धरती पुत्र की उपाधि देने वाले यही किसान हैंइसलिए पार्टी हमेशा किसानों से साथ खड़ी है
आज देश की जनता को नफरत की नही बल्कि रोजगार की जरुरत है समाजवादी पार्टी के लोग हर जरूरतमंद का दर्द अच्छे से समझते है ,इस लिए समाजवादी पार्टी की सरकार में हुए काम और जनता को सरकारी लाभ मिलना ही समाजवादी पार्टी की सरकार की उपलब्धि रही है इसीलिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से प्रदेश का युवा, बुजुर्ग, किसान बड़ी तादाद  में जुड़ा हुआ है, किसान आंदोलन का समर्थन समाजवादी पार्टी ने चुपके से नही, बल्कि खुलकर किया है और माननीय मुलायम सिंह यादव जी को धरती पुत्र की उपाधि इन्ही किसानों ने दी थी इसलिए समाजवादी पार्टी किसानों के साथ कभी गलत नही होने देगी।  


कांग्रेस ने देश के मुसलमानों को हमेशा अँधेरे में रखा, कांग्रेस का सपना हम दो हमारे दो” को बीजेपी ने पूरा किया
कांग्रेस ने देश के मुसलमानों को हमेशा अँधेरे में रखा है, जैसे कांग्रेस सरकार ने न्यायधीश राजेंद्र सच्चर की देखरेख में एक समिति का गठन किया था किसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मुसलमानों की आर्थिक स्तिथि दलितों से भी बत्तर है। हम समझ रहे थे शायद इस रिपोर्ट के बाद कांग्रेस मुसलमानों और दलितों के हालात सुधारने के लिए कोई कदम उठाएगी लेकिन ऐसा नही हुआ, और मुसलमानों को उनकी बदहाली को याद दिलाकर सभी राजनितिक दल लाभ उठाने लगे।



लेकिन मेरा मानना यह है कि देश में मुसलमानों के साथ साथ दलितों की भी आर्थिक स्थिति ठीक क्यों नही होनी चाहिए। कांग्रेस बीजेपी और ओवैसी मिलकर ही मुसलमानों को बाटने की राजनीति करते है, हमें याद है कांग्रेस का वह कार्यकाल जिसमें ,हम दो हमारे दो, का नारा, और आज उत्तर प्रदेश की बीजेपी ने उस नारे को कानून बनाकर पूरा कर दिया है।

   
स्वर्गीय कांशीराम द्वारा की गई टिप्णी मुसलमान कभी नही भूल सकता

बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम द्वारा बाबरी मस्जिद पर विवादित टिप्णी को मुसलमान कभी नही भूल सकता, जिन्होंने बाबरी मस्जिद की जगह शौचालय बनाने का प्रस्ताव दिया था। बहन कुमारी मायावती ने मुस्लिम नेताओं के जरिए मुसलमानों का हमेशा वोटबैंक के तोर पर स्तेमाल किया है जिसमें नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे बड़े कद वाले नेता भी शामिल हैं। मुझे नही लगता अब मुसलमान किसी के बहकावे में आकर चुनाव में बटने का काम नही करेगा, बल्कि एकजुट होकर समाजवादी पार्टी साथ खड़ा होगा।
 
 
पांच सौ गरीब लड़कियों की शादी कराने के बाद मसीहा बनकर उभरे आशु मलिक
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आजकल के युवा जो भविष्य में राजनेता बनना चाहते है वह आशु मालिक की कामयाबी व शोहरत का हवाला देते है कि पॉलिटिक्स हो तो आशु मलिक  जैसी हो जिसमे दुआ,ताक़त शोहरत मिलती है। जैसे हाशिमपुरा के दंगा पीड़ितों की समाजवादी पार्टी की उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मदद करवाई, और दादरी बीफ कांड में अखलाक  के परिवार की मदद के लिए भी कमान आशु मलिक  ने ही संभाली थी। और तकरीबन  पांच सौ लड़कियों की शादी करवाकर सबका दिल जीत लिया है।  
  
आपको बता दें आशु मलिक  का राजनितिक सफ़र ज्यादा लम्बा नही रहा मात्र चार या पांचवर्षों  में उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा  प्राप्त कर लिया था, और फिर समाजवादी पार्टी की सरकार का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पार्टी आलाकमान की नजदीकियों के चलते विधान परिषद सदस्य के तौर पर आशु मलिक  के राजनीतिक सफ़र को छ वर्षों के लिए सेफ  कर दिया गया था, हालांकि  एमएलसी कार्यकाल पूरा होने के बाद मालिक की जगह वरिष्ठ नेता अहमद  हसन साहब को एमएलसी बना दिया गया जिसमें बताया जाता है आशुमलिक  की सहमती भी शामिल थी।
2010 में जब अखिलेश यादव की चुनावी परीक्षा चल रही थी तब आशु मलिक अखिलेश यादव के साथ कदम से कदम मिलाकर  रात दिन समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने का प्लान कर रहे थे। रानीतिक सफ़र के यह दो साल आशु मलिक के लिए बहुत अहम माने जाते है ,2012 में फुल बहुमत की समाजवादी पार्टी की सरकार बनी और मलिक  का राजयोग शुरू हो गया था लेकिन मलिक के बढ़ते कद को देखकर कुछ पुराने दिग्गज नेता पार्टी में विरोध जताने लगे जिसके कारण मलिक  को सरकार की शरुआत में पद तो नही मिला, लेकिन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से नजदीकियाँ ही आशु मालिक की पॉवर थी जिससे जनता के काम करवाने और अधिकारीयों से तालमेल का दौर जारी रहा, तक़रीबन दो वर्ष बाद मलिक को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त हुआ था।

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शाह और नड्डा से मिले योगी, यूपी में चुनावी तैयारियों पर की चर्चा

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उत्तरी राज्य में भाजपा की चुनावी तैयारियों पर चर्चा की, जहां अगले साल चुनाव होने हैं।


शाह के सरकारी आवास पर हुई बैठक में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह और राज्य इकाई के महासचिव सुनील बंसल भी मौजूद थे।


बैठक तीन घंटे से अधिक समय तक चली।


सूत्रों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की चुनावी तैयारियां बैठक का मुख्य एजेंडा था।


सूत्रों ने कहा, शाह, नड्डा, आदित्यनाथ और अन्य ने भाजपा की चुनावी तैयारियों और चुनाव तक पार्टी के आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की।


सूत्रों ने आगे कहा कि बैठक में समाज के सभी वर्गो तक पहुंचने की भाजपा की रणनीति पर भी चर्चा की गई।


सूत्रों ने कहा, हर जाति और समुदाय को जीतने की योजना चर्चा का हिस्सा थी क्योंकि पार्टी सभी का समर्थन हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।


यह भी पता चला है कि चल रही जन आशीर्वाद यात्रा पर जनता की प्रतिक्रिया पर भी चर्चा हुई।


अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पिछले महीने उत्तर प्रदेश के सात नेताओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त मंत्रियों में अपना दल की अनुप्रिया पटेल को छोड़कर सभी भाजपा से हैं।


जून के बाद से आदित्यनाथ की दिल्ली की यह तीसरी यात्रा थी। उत्तर प्रदेश में बदलाव की अटकलों के बीच, आदित्यनाथ ने पहले दो दिनों के लिए राष्ट्रीय राजधानी का दौरा किया था और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, नड्डा और शाह से मुलाकात की थी।


पिछले महीने संसद के मानसून सत्र के दौरान यूपी के सीएम नड्डा के साथ राज्य के सांसदों के साथ बैठक में मौजूद थे।




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नड्डा आज उत्तराखंड में लेंगे चुनावी तैयारियों का जायजा

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जेपी नड्डा पार्टी की चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, अपने दौरे के दौरान भाजपा अध्यक्ष करीब एक दर्जन बैठकें करेंगे। नड्डा सुबह करीब साढ़े दस बजे देहरादून पहुंचेंगे। पार्टी के एक नेता ने कहा, देहरादून पहुंचने के बाद नड्डा भानियावाला, चिद्दारवाला, नेपाली फार्म और रायवाला इलाकों का दौरा करेंगे। दोपहर में नड्डा हरिद्वार पहुंचेंगे, जहां सभी बैठकें होंगी। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, नड्डा जी उत्तराखंड में अपने संगठनात्मक प्रवास की शुरूआत करेंगे और वह विभिन्न पार्टी कार्यक्रमों में भाग लेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे। वह विभिन्न समूहों में राज्य के नेताओं के साथ बातचीत करेंगे और उनसे फीडबैक लेंगे।


पार्टी के एक नेता ने कहा, नड्डा जी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जमीन पर वास्तविक स्थिति को समझने के लिए सांसदों, विधायकों, मंत्रियों, राज्य पदाधिकारियों, कोर कमेटी और विभिन्न मोर्चा (विंगों) के साथ पार्टी की तैयारी पर अलग से बैठक और चर्चा करेंगे।


उत्तराखंड के अपने दौरे के दौरान नड्डा जिला अध्यक्षों और स्थानीय निकायों के निर्वाचित सदस्यों और धर्मगुरुओं से मुलाकात करेंगे।


पार्टी नेताओं का दावा है कि नड्डा के उत्तराखंड दौरे से भाजपा राज्य में चुनावी मोड में आ जाएगी। एक छोटा राज्य होने के बावजूद, उत्तराखंड सत्तारूढ़ भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भगवा पार्टी ने चार महीने में दो मुख्यमंत्री बदले हैं।


मार्च में भाजपा ने त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह तीरथ सिंह रावत को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया था। जुलाई में, तीरथ सिंह को हटाकर पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया गया।


नड्डा पहले ही गोवा और उत्तर प्रदेश का दौरा कर चुके हैं, जहां अगले साल की शुरूआत में उत्तराखंड, पंजाब और मणिपुर के साथ विधानसभा चुनाव होने हैं। पिछले महीने भाजपा और आरएसएस के बीच दो दिवसीय समन्वय बैठक हुई थी। जुलाई में, नड्डा को पहाड़ी राज्य का दौरा करना था, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया था।







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यूपी में बीजेपी बड़े पैमाने पर मुस्लिम वोटरों को रिझाएगी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की निगाहें अब एक ऐसे लक्ष्य पर टिकी हैं, जिसे कई लोग असंभव मानते हैं। भाजपा अब हर विधानसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक वोटों के एक वर्ग को जीतने के लिए सचेत प्रयास करेगी। पार्टी 44,000 सदस्यों को बाहर भेजेगी जो मुस्लिम परिवारों से मिलेंगे और बात करेंगे और उन्हें मोदी और योगी सरकारों द्वारा उनके लिए किए जा रहे कल्याण कार्यों से अवगत कराएंगे। पार्टी ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 5,000 वोटों को लक्षित करने की योजना बनाई है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए अल्पसंख्यक वोट हासिल करने के लिए अपने सदस्यों को प्रशिक्षण देगा। पार्टी प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 50 मजबूत कार्यकर्ताओं की भी पहचान करेगी। उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा और आसपास की गलियों से 100 वोटों को लक्षित करने के लिए कहा जाएगा। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने कहा कि हमने पिछले चुनावों का विश्लेषण किया। लगभग 20 प्रतिशत विधानसभा सीटें 5,000 मतों के अंतर से हार गई थी। यहां तक कि बंगाल में भी, हमने कम अंतर से काफी सीटें गंवाई हैं। उन्होंने कहा कि मोर्चा ने उत्तर प्रदेश में 50 सीटों की पहचान की है जहां 60 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है और उनके समुदाय के लिए टिकट सुरक्षित करने की योजना है।


भाजपा के मुस्लिम कार्यकतार्ओं का मनोबल बढ़ाने के लिए पार्टी का नारा है, जो चुनाव लड़ेगा वही आगे बढ़ेगा। सिद्दीकी ने कहा कि हमारे प्रयासों में हमारा समर्थन करना हमारे समुदाय की जिम्मेदारी है। हम पार्टी से अधिक प्रतिनिधित्व की आकांक्षा रखते हैं लेकिन यह सुनिश्चित करना हमारे समुदाय की जिम्मेदारी है। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को एक भी टिकट नहीं दिया था। हालांकि सिद्दीकी ने कहा कि इस चुनाव में चीजें बदलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि हमें टिकट नहीं मिलता क्योंकि हमारे पास ऐसे उम्मीदवार नहीं हैं जो चुनाव जीत सकें। हमें मुस्लिम सीटों से लड़ना चाहिए। हम समुदाय से जुड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा में मुसलमानों की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है क्योंकि इसके संस्थापक सदस्यों में से एक सिकंदर बख्त थे। हमारा समुदाय इन तथ्यों को नहीं जानता है। अगर हम भाजपा के दुश्मन हैं, तो ऐसा क्यों है कि भाजपा हमारे लिए भी काम कर रही है?





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दिल्ली हाई कोर्ट का दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी चुनावों पर रोक लगाने से इंकार

नई दिल्ली : परमजीत सिंह सरना की अगुवाई वाले गुट को आज उस समय झटका लगा जब दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी चुनाव पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। इस संबंध में जानकारी देते हुए दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष स. मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि दिल्ली कमेटी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट अदालत को सौंप कर बता दिया है कि सरना गुट के पास भी कॉपियां हैं पर यह जानबुझ कर चुनाव के मार्ग में बाधा बनना चाहते हैं और राजनीति कर रहे हैं क्योंकि इन्होंने चुनावों में अपनी सुनिश्चित हार देख ली है। स. सिरसा ने बताया कि दोनों गुटों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सरना गुट को फटकार लगाई है और कहा है कि वह अदालत को इस्तेमाल कर रहे हैं जिसके बाद सरना गुट अपनी याचिका वापिस लेने के लिए मजबूर हो गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि सरना गुट की पहले अदालत में हार होगी और फिर लोगों की कचहरी में 25 तारीख को हार होगी और सच्चाई जीत की राह पर है। उन्होंने जागो पार्टी के अध्यक्ष स. मनजीत सिंह जी.के द्वारा एक बार फिर से चुनाव रोकने का प्रयास करने की निंदा की है और कहा है कि जी.के ने स्वंय मान लिया है कि वह धर्म के नाम पर राजनीति करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि दूसरी तरफ दिल्ली कमेटी के मामले मे अकाली दल का मुख्य मकसद केवल और केवल गुरु घरों व संगत की सेवा का रहा है और कभी भी राजनीति इसके एजेंडे पर नहीं रही। उनहोंने कहा कि हम लोगों की भलाई के लिए व प्रशासन में सुधार के लिए काम करने में विश्वास रखते हैं और इसी क्रम को लेकर आगे बढ़ रहे हैं और हमारा धर्म के नाम पर राजनीति करने का कई मतलब नहीं है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव व अकाली दल की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष स. हरमीत सिंह कालका ने कहा कि विरोधी दलों के पास संगत के समक्ष रखने के लिए कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है और उन्होंने आने वाले चुनावों में अपनी हार सुनिश्चित देख ली है। संगत एक बार फिर से सेवा हमारी झोली में डालेगी हमें इस बात का पूर्ण विश्वास है।




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प्रियंका के नेतृत्व में लड़ा जाएगा यूपी विधानसभा का चुनाव : सलमान खुर्शीद

कानपुर : उत्तर प्रदेश में कांग्रेस बराबर मजबूत हो रही है और जनता का आर्शीवाद मिल रहा है। प्रदेश की जनता भाजपा सरकार से त्रस्त हो चुकी है और प्रियंका गांधी पर लोगों का विश्वास बढ़ता ही जा रहा है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा यह तो हाईकमान तय करेगा, लेकिन प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा। यह बातें शनिवार को कानपुर पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कही।


पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रेनेत शनिवार को पदाधिकारियों के साथ कमलेश्वरम गेस्ट हाउस में बैठक की। पूर्व विदेश मंत्री व कांग्रेस चुनाव घोषणा पत्र समिति के सदस्य ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बातों ही बातों में स्पष्ट कर दिया कि प्रियंका गांधी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ा जाएगा। 


मुख्यमंत्री के चेहरे पर बचते नजर आये और कहा कि वह हमारा चेहरा हैं, लेकिन इसकी घोषणा समय आने पर वह खुद ही करेंगी। सलमान खुर्शीद की बातों ने काफी हद तक साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस प्रियंका गांधी के नेतृत्व पर चुनाव लड़ेगी। 


इसके साथ ही साथ चुनाव घोषणा पत्र में पांच बड़े मुद्दों पर कांग्रेस चुनाव की तैयारी कर रही है, जिसमें स्वास्थ्य भी एक बड़ा मुद्दा होगा। सलमान खुर्शीद के साथ रोहित चौधरी और पूर्व सांसद राजाराम पाल भी पहुंचे हुए थे। राजाराम पाल ने उन बातों का खंडन किया जो बीते दिनों मीडिया में प्रसारित की गईं कि पूर्व सांसद राजाराम कांग्रेस पार्टी छोड़ सकते हैं। 

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यूपी में ब्राह्मण के बाद अब दलित वोटों के लिए मचा संग्राम

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मिशन-2022 की तैयारियों में जुटे राजनीतिक दलों को अब दलित वोटों को अपने पाले में लाने की चिंता सताने लगी है और इसके लिए वह कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। कोई दलित चेतना यात्रा निकाल रहा है तो कोई आदिवासी दिवस मनाने की तैयारी में है। चाहे सपा, हो, कांग्रेस हो या भाजपा सब दलितों को साधने में लगे हैं। यूपी में ब्राम्हणों के बाद सबसे ज्यादा इसी वोट बैंक के लिए संग्राम छिड़ा हुआ है।


विधानसभा चुनाव के लिए जाति-वर्गों के वोट समेटने का प्रयास कर रही सपा की नजर आदिवासियों पर भी है। सपा अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ की बैठक में जातीय जनगणना कराने की सरकार से मांग के साथ विश्व आदिवासी दिवस सोनभद्र में मनाने का निर्णय लिया गया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने कहा कि जल, जंगल, जमीन से बेदखल हो रहे आदिवासियों को उनके हक सपा की सरकार बनने पर दिलाए जाएंगे। उनके हित में योजनाएं भी बनेंगी।


यूपी की राजनीति बहुत हद तक जातीय समीकरणों पर ही टिकी है। लिहाजा, दलों की रणनीति भी इसी पर है। दलितों का वोट गवां चुकी कांग्रेस को लगता है राज्य में पिछड़ो के वोट के लिए ज्यादा मार हो रही है। इसीलिए उसने दलितों की ओर अपना फोकस करना शुरू कर दिया है। अभी तक दलितों का एकमुस्त वोट मायावती के कब्जे में रहा है, लेकिन 2014 के बाद से इसमें कुछ वर्ग छिटक कर भाजपा की ओर आया है। मायावती की दूसरी लाइन की लीडरशिप ढलान पर देखते हुए कांग्रेस को लगता है कि दलित वर्ग अब माया के झांसे से बाहर आएगा। इसीलिए उसने इस वोट बैंक को अपने पाले पर लाने की जुगत लगानी शुरू की है।


एक अध्ययन के अनुसार राज्य में दलित वोटों की हिस्सेदारी काफी मजबूत है। अगर आंकड़ो पर गौर फरमाएं तो राज्य में तकरीबन 42-45 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) है। उसके बाद 20-21 प्रतिशत दलितों की है। इसी वोट बैंक की बदौलत मायावती ने 2007 में 206 सीटों और 30.43 प्रतिषत वोट के साथ पूर्ण बहुमत से मुख्यमंत्री बनीं और उनकी सोशल इंजीनियरिंग खूब चर्चा भी बटोरी। 2009 में लोकसभा चुनाव हुए और बसपा ने 27.4 प्रतिशत वोट हासिल किए और 21 लोकसभा सीटों पर कब्जा जमाया, लेकिन 2012 में उनकी चमक काम नहीं आ सकी। उनका वोट प्रतिशत भी घटा। 2017 में बसपा का सबसे मजबूत किला दरक गया। 2007 के बाद से मायावती के वोट प्रतिषत में लगातार घटाव आ रहा है। इनके वोट बैंक पर सेंधमारी हो रही है। 2014 के चुनाव में भाजपा ने 80 में से 71 सीट जीतकर इसी वोटबैंक को जबरदस्त झटका दिया था। सबसे बड़ी बात कि सुरक्षित सीटों पर बसपा कमजोर नजर आयी।


राजनीतिक विश्लेषक प्रसून पांडेय कहते हैं, भाजपा ने दलित वोट बैंक पर तगड़ी सेंधमारी की है। यह एक दिन का काम नहीं है। कई वर्षों से इस वोट के लिए आरएसएस की ओर से चलाए जा रहे समाजिक समरसता के जरिए उन्हें कुछ सफलता मिली है। अगर हम गौर से देंखे तो 2014 के बाद से गैरजाटव वोट भाजपा के पाले में जाता दिख रहा है। इस वर्ग के असंतुष्ट वोट को अपने पाले में लाने की भाजपा कोशिश कर रही है।


वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक योगेश मिश्रा कहते हैं, यूपी में कांग्रेस की पूरी रणनीति ठीक नहीं दिख रही है। राहुल गांधी दलित के यहां खाना खाने से क्या उनकों इस वर्ग वोट मिला है। जब इस राज्य में दलितों की सबसे बड़ी नेता मायावती मौजूद है। मुलायम ने अपने वर्ग का आर्थिक और समाजिक परिवर्तन किया। जबकि मायवती ने नहीं किया है। फिर भी दलित उनके साथ है। दलित और यादव वर्ग आपको वोट नहीं करेगा। बांकी वर्ग आपको कैसे वोट करेंगे इसके प्रयास होंने चाहिए। यूपी में चाहे जितने दलित नेता बाहर आए पर कुछ फर्क नहीं पड़ेगा। थोड़ा बहुत फर्क चन्द्रषेखर रावण जरूर कर पाएंगे। क्योंकि वह जमीन पर काम कर रहे हैं। 



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जनता की भाजपा से नाराजगी देखकर लगता है सपा जीतेगी 400 सीटें : अखिलेश

लखनऊ :  समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नाराजगी को देखकर लगता है कि सपा राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव में 400 सीटें जीत लेगी।


सपा अध्यक्ष ने भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी साइकिल यात्रा शुरू करने से पहले संवाददाता सम्मेलन में दावा किया, "सरकार हर मुद्दे पर नाकाम है। अभी तक तो हम 350 बोलते थे लेकिन जिस तरह की नाराजगी जनता के बीच में है, हो सकता है हम 400 सीटें जीत जाएं। आज तो स्थिति ऐसी है कि भाजपा के पास प्रत्याशी कम पड़ जाएंगे। प्रत्याशी टिकट ही नहीं मांगेंगे।"


अखिलेश ने कहा कि पिछले रविवार को मिर्जापुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक रैली में कहा था कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने वर्ष 2017 में जारी पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र का हर वादा पूरा कर दिया है। मगर सच्चाई यह है कि भाजपा ने अभी तक अपना घोषणापत्र खोलकर देखा भी नहीं है।


उन्होंने भाजपा पर राजनीति को जनसेवा नहीं बल्कि कारोबार का जरिया बनाने का आरोप लगाते हुए कहा "भाजपा के लोग 'मेनिफेस्टो' नहीं बल्कि 'मनीफेस्टो' बनाते हैं। इनके लिए राजनीति एक बिजनेस है। भाजपा का धोखा जनता ने देख लिया है। भाजपा की कोई काम करने की संस्कृति नहीं है अगर रही होती तो शायद कुछ काम भी किए होते।"


उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार पर कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों की जान बचाने में पूरी तरह से विफल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी सरकार और प्रशासन ने जनता को धोखा दिया और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई।


अखिलेश ने उत्तर प्रदेश को कुपोषण के मामले में, गंगा में शव बहाने, लाशों पर से कफन उतारने, कोविड-19 महामारी के दौरान दवाओं की कालाबाजारी करने, पंचायत चुनाव में ड्यूटी कराकर शिक्षकों की बलि देने, बेगुनाह लोगों को जेल में डालने, विशेष धर्म और जाति के लोगों पर अत्याचार करने, बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाकर अपनी नाकामी छिपाने और हिरासत में मौत के मामले में नंबर एक राज्य करार देते हुए इसके लिए प्रदेश की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया।






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UP Election: उप्र में मुख्यमंत्री पद के लिए प्रियंका होंगी कांग्रेस का चेहरा, अकेले सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी पार्टी

रायपुर :  कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी राजेश तिवारी ने दावा किया कि प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस का चेहरा होंगी। जनता उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। उनके नेतृत्व में ही अगले साल विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा। पार्टी सभी विधानसभा सीटों पर अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी। जनता के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी प्रियंका को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।

किसी भी पार्टी से गठजोड़ की बात नहीं चल रही, सभी सीटों पर लड़ेगी पार्टी

राजेश तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की तैयारी सभी 403 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की है। प्रदेश में समाजवादी पार्टी या अन्य किसी दल से अभी कोई गठजोड़ की बात नहीं चल रही है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तिवारी ने कहा कि जिस तरह छत्तीसगढ़ में 15 साल सत्ता से बाहर रहने के बाद बूथ स्तर पर मजबूती से सफलता मिली है, उसी तरह उत्तर प्रदेश में भी प्रयोग किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के 100 से ज्यादा नेताओं को छत्तीसगढ़ में दिया जा रहा प्रशिक्षण

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के 100 से ज्यादा पदाधिकारी पिछले तीन दिन से छत्तीसगढ़ में प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन नेताओं को कांग्रेस के इतिहास से लेकर बूथ मैनेजमेंट के बारे में जानकारी दी जा रही है। इनको छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी प्रशिक्षण दिया है। राजेश तिवारी ने बताया कि रायपुर के निरंजन धर्मशाला में मास्टर ट्रेनर को बूथ मैनेजमेंट की जानकारी दी गई। पांच दिवसीय प्रशिक्षण में प्रियंका गांधी भी बुधवार शाम को वर्चुअल रूप से शामिल हुई। इस दौरान प्रियंका ने अब तक के प्रशिक्षण के बारे में जानकारी ली। यह मास्टर ट्रेनर अब उत्तर प्रदेश के जिला, विधानसभा और ब्लाक स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देंगे।

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मेडिकल सीटों में ओबीसी, ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षण उप्र चुनाव में मदद करेगा : भाजपा

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं ने दावा किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को मेडिकल शिक्षा सीटों में आरक्षण देने के केंद्र सरकार के फैसले से पार्टी को पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में मदद मिलेगी। पार्टी यह भी मानते है कि खासकर उत्तर प्रदेश में इससे अधिक लाभ होगा।


केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) योजना में ओबीसी को 27 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया।


भाजपा का मानना है कि इस फैसले से पार्टी को उत्तर प्रदेश में 40 फीसदी ओबीसी वोटबैंक पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिलेगी। भगवा खेमा गैर-यादव ओबीसी पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो राज्य की आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं।


उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पार्टी नेता ने कहा कि इस फैसले से पार्टी को चुनावी राज्यों में ओबीसी और ईडब्ल्यूएस दोनों वर्ग का समर्थन प्राप्त करने में मदद मिलेगी।


उन्होंो कहा,उत्तर प्रदेश में ओबीसी की एक निर्णायक उपस्थिति है और इस निर्णय से पार्टी को नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकारों के अन्य जन-केंद्रित उपायों के साथ-साथ उनका समर्थन हासिल करने में मदद मिलेगी। सबका साथ, सबका विकास के लिए भाजपा की प्रतिबद्धता दिखाई दे रही है।


उन्होंने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश में ओबीसी का सबसे बड़ा वोट शेयर है और वे किसी भी पार्टी के चुनावी भाग्य को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


उन्होंने दावा किया, यादवों को छोड़कर, जिन्हें समाजवादी पार्टी का समर्थक माना जाता है, अन्य सभी ओबीसी समुदाय भाजपा के समर्थन में आएंगे।


पार्टी का मानना है कि गुरुवार को लिए गए फैसले से हर साल करीब 5,550 छात्रों को फायदा होगा।


भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा कि इस फैसले से पार्टी को ओबीसी/ईडब्ल्यूएस वर्ग का समर्थन हासिल करने में मदद मिलेगी, जिसमें सवर्ण और अन्य धर्म भी शामिल हैं।


उन्होंने कहा, इस फैसले से हमें देश भर में ओबीसी और ईडब्ल्यूएस के बीच और जमीन हासिल करने में मदद मिलेगी और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में आगामी विधानसभा चुनावों में भी चुनावी लाभ मिलेगा।


भाजपा के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लक्ष्मण ने कहा, लंबे समय के बाद, अब हमारे पास मोदी सरकार है जो पिछड़े और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों को उचित आरक्षण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।





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एक ही बैलेट पर होगा चुनाव, चार बनाए जाएंगे बूथ

नोएडा : फोनरवा चुनाव एक बैलेट पेपर पर होगा। इसमें दोनों पैनलों के 21-21 प्रत्याशियों के नाम अलग-अलग कॉलम में अंकित होंगे, ताकि मतदाताओं को मतदान करने में सुविधा हो और मतों की गिनती भी आसानी से हो सके। अब से पहले नौ पदों के लिए नौ बैलेट पेपर होते थे। इस प्रक्रिया के तहत मतदान करने में समय तो लगता ही था, साथ ही मतगणना में भी काफी वक्त लग जाता था। पांच चुनाव अधिकारियों ने आपसी सहमति से चुनाव प्रक्रिया में कुछ सुधार करके व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।


चुनाव अधिकारियों ने गुरुवार को बैलेट पेपर के नमूनों की जांच की, जिसके बाद प्रिंट के लिए बैलेट पेपर भेज दिए गए। शुक्रवार को दस कॉपियों में 250 बैलेट पेपर प्रिंट होंगे। मुख्य चुनाव अधिकारी सेवानिवृत्त कर्नल शशि वैद्य ने बताया कि इस बार तीन के बजाए चार बूथ बनाए जाएंगे, ताकि जल्दी मतदान समाप्त हो सके। तीन मत पेटियों में बैलेट पेपर रखे जाएंगे। मतदान परिसर के अंदर दोनों पैनलों के दो-दो एजेंट होंगे।


मतदान केंद्र में चुनाव अधिकारियों के अलावा किसी को भी आपस में बात करने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने बताया कि चारों बूथों के पास ही चुनाव अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। मतगणना की व्यवस्था को आसान बनाने के लिए गिनती की सीट भी बना दी गई है।


बैलेट पेपर पर इस बार मोहर से मतदान नहीं कराया जाएगा। बॉल पेन से ही सही का चिन्ह लगाकर मतदान कराया जाएगा। मोहर से मतदान के बाद बैलेट पेपर को मोड़ने के दौरान स्याही दूसरे प्रत्याशी के नाम के आगे भी लग जाती थी। ऐसे में असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती थी। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार प्रत्याशियों के नाम बैलेट पेपर पर अंकित होंगे।


चुनाव अधिकारी सेवानिवृत्त कर्नल शशि वैद्य, असीम ठाकुरता, एमएम शर्मा, डीके खरबंदा और वीएस नगरकेटी की देखरेख में चुनाव हो रहा है। पूरी निष्पक्षता के साथ चुनाव कराया जा रहा है। दोनों पैनल के प्रत्याशियों से भी चुनाव अधिकारी नियमित संवाद करने के साथ शांतिपूर्ण चुनाव में सहयोग की अपील भी कर रहे हैं।


निवर्तमान अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा पैनल के प्रत्याशियों की रणनीति सेक्टर-45 के चुनावी कार्यालय से तय हो रही है। यहां पर पवन यादव, जेपी उप्पल और उमाशंकर शर्मा चुनावी रणनीति तय कर रहे हैं। उनकी छह टीम चुनाव प्रचार कर रही है। इसके अलावा एक टीम फोन कर योगेंद्र शर्मा के पक्ष में मतदान करने की गुजारिश कर रही है। वहीं, पूर्व अध्यक्ष एनपी सिंह पैनल के प्रत्याशियों की रणनीति सेक्टर-35 के चुनाव कार्यालय पर तय हो रही है। यहां पर फोनरवा के पूर्व महासचिव एएन धवन और संजीव कुमार चुनावी रणनीति बना रहे हैं। एनपी सिंह की आठ टीम चुनाव प्रचार में लगी हैं।



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प. बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव नौ अगस्त को

नई दिल्ली : राज्यसभा में श्री दिनेश त्रिवेदी के इस्तीफे से रिक्त पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव नौ अगस्त को कराया जायेगा। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को उपचुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जिसके अनुसार 22 जुलाई से 29 जुलाई के बीच नामांकन दाखिल किया जा सकेगा। तीस जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। दो अगस्त को नाम वापस लिये जा सकेंगे। आवश्यक होने पर नौ अगस्त को सुबह नौ बजे से अपराह्न चार बजे तक मत डाले जाएंगे। मतगणना उसी दिन शाम पांच बजे से शुरू होगी। उपचुनाव की प्रक्रिया दस अगस्त तक पूरी की जाएगी।

श्री त्रिवेदी तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर पिछले वर्ष राज्यसभा में निर्वाचित हुए थे तथा इस वर्ष 12 फरवरी को उन्होंने त्यागपत्र दे दिया था और बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये थे। श्री त्रिवेदी का कार्यकाल दो अप्रैल 2026 तक था।

चुनाव आयोग ने इस राज्यसभा उपचुनाव के लिए कोविड संबंधी दिशानिर्देश जारी किये हैं। चुनाव संबंधी गतिविधियों से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिय मास्क पहनना अनिवार्य होगा। चुनावी गतिविधियों वाले सभी परिसरों में थर्मल स्क्रीनिंग के बाद लोगों को प्रवेश दिया जाएगा। सभी स्थानों पर सैनेटाइज़र रखना तथा शारीरिक दूरी का पालन करना अनिवार्य होगा। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को उपचुनाव की प्रक्रिया में कोविड संबंधी दिशानिर्देश के क्रियान्वयन एवं अनुपालन की निगरानी के लिए एक अधिकारी विशेष रूप से तैनात करने को कहा है।





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गाजियाबाद में दिखने लगी यूपी विधानसभा चुनाव की झलक, एक-एक सीट पर दावेदारों की बाढ़

गाजियाबाद :  पंचायत चुनाव में जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई है। जिले के विधायक जहां अपने कार्यकाल में कराए गए कार्यों के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी में हैं वहीं दूसरी ओर उन्हें अपनी ही पार्टी के बीच जोर आजमाइश में लगे दावेदारों से चुनौती मिल रही है। कई दावेदारों ने तो बाकायदा पर्दे के पीछे से चुनावी अभियान का आगाज भी कर दिया है।

चर्चा का केंद्र बने क्षेत्रीय उपाध्यक्ष के होर्डिंग

भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम क्षेत्र के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मयंक गोयल इस समय कोरोना वैक्सीन के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। मयंक ने पिछले दिनों शहर विधानसभा क्षेत्र में स्थित घूकना सेवा नगर स्वास्थ्य केंद्र को गोद लिया है। उन्होंने शहर में करीब 100 से अधिक होर्डिंग लगवाए हैं। केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह के साथ लगे उनके यह होर्डिंग शहर में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। दीवारों पर रंगरोगन करवाने के साथ ही उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर बाकायदा अपने कैंपेन का एलान भी कर दिया है। इस सीट से मौजूदा विधायक उत्तर प्रदेश सरकार में चिकित्सा स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग कोरोना काल से सक्रिय हैं वह तो दावा कर रहे हैं कि इस बार उनकी जीत पहले से भी बड़ी होगी। भाजपा के एक अन्य क्षेत्रीय उपाध्यक्ष केके शुक्ला भी इस बार शहर सीट से मन बनाए हुए हैं।

परिवार बढ़ा रहे अजय शर्मा

भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में अपना परिवार बढ़ा रहे हैं। कोरोना पीड़ित अनाथ बच्चों की मदद के नाम पर पिछले दो माह से सक्रिय अजय शर्मा को लेकर उनकी ही पार्टी में चर्चा है कि वह कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना वाले अंदाज में दौड़ रहे हैं। वर्तमान भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा विधायकी की टिकट के लिए अपनी अध्यक्षी तक को दाव पर लगाने को तैयार हैं। शालीमार गार्डन में महापुरुषों की मूर्तियों के अनावरण के नाम पर वह संगठन के सामने अपनी ताकत भी दिखा चुके हैं। मौजूदा विधायक सुनील शर्मा इन सबसे दूर अपने काम में लगे हुए हैं। साहिबाबाद में लंबे समय से लंबित सरकारी अस्पताल बनने की प्रक्रिया को अपनी उपलब्धि बताते हुए वह अपनी अगली पारी के प्रति आश्वस्त हैं।

मुरादनगर में तेवतिया जोश में

मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा विधायक अजीतपाल त्यागी को उनकी की पार्टी के बृजपाल तेवतिया से चुनौती मिल रही है। मौजूदा जिला पंचायत चुनाव में एक ओर जहां विधायक अजीतपाल के भतीजे और भाभी चुनाव नहीं जीत पाए वहीं दूसरी ओर दो जिला पंचायत सदस्य होने के बावजूद पार्टी ने जो जीत जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर हासिल की है उसमें बृजपाल तेवतिया का बड़ा रोल बताया जा रहा है। तेवतिया वर्ष 2012 के चुनाव में मात्र 2500 वोट से हारे थे। यहीं से पूर्वमंत्री बालेश्वर त्यागी के समर्थक भी पैड बांधकर तैयार बैठे हैं।

मोदीनगर में पुष्पेंद्र के चर्चे

मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा विधायक डॉ. मंजू शिवाच के सामने उनकी ही पार्टी से पूर्व विधायक रामनरेश रावत के छोटे भाई भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य पुष्पेंद्र रावत, पूर्व ब्लाक प्रमुख कृष्णवीर सिंह, पवन सिंघल और सत्येंद्र त्यागी माहौल बनाने में लगे हैं। कोरोना काल में इन नेताओं के पोस्टर शहर में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

लोनी में सबसे अधिक दावेदार

लोनी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर को एक दो नहीं बल्कि आधा दर्जन दावेदारों से चुनौती मिल रही है। यहां नगर पालिका अध्यक्ष रहे मनोज धामा ने चुनावी अभियान शुरू भी कर दिया है। यहां से पूर्व चेयरमैन विनोद बंसल, ओबीसी मोर्चा के प्रदेश मंत्री योगेंद्र मावी, अनिल कसाना, पूर्व विधायक रूप चौधरी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य पृथ्वी सिंह कसाना और पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ प्रमेंद्र जांगड़ा चुनावी तैयारी में लगे हैं।

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अखिलेश यादव की धमकी: पंचायत चुनाव में सीमा लांघने वाले अफसरों की सूची तैयार, सरकार बनते ही कार्रवाई

लखनऊ :  उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के शानदार प्रदर्शन के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पंचायत चुनावों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। रविवार को समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत अखिलेश यादव ने कहा कि पंचायत चुनाव में जनता ने समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया, लेकिन भाजपा सरकार ने पुलिस और गुंडों के बल पर जनादेश का अपमान किया।

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा से अधिक गुंडागर्दी करने वाली पार्टी आज तक नहीं देखी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में गुंडागर्दी का एक्सपेरिमेंट कर उसे पूरे प्रदेश में लागू करते हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर कोरोना से हुई मौतों का आडिट कराएंगे। इसके साथ ही पंचायत चुनाव में सीमा लांघने वाले अधिकारियों की सूची तैयार है, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

संकल्प पत्र पर फोटो नहीं, इसलिए योगी आदित्यनाथ के कूड़ेदान में डाला

सपा मुखिया ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के सदस्य नहीं हैं। भाजपा के संकल्प पत्र पर उनका फोटो नहीं है, इसलिए उसे कूड़ेदान में डाल दिया है। उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा था। आज किसानों की आय कितनी है।

आदित्यनाथ नहीं हैं योगी

अखिलेश ने कहा कि यहां भाजपा सरकार ने पंचायत चुनाव में गुंडागर्दी का नंगनाच किया, उसके बाद खुशी मनाई जा रही है। मिठाई खाई जा रही है। सिर्फ ब्लाक प्रमुख चुनाव जीतने के लिए बहनों के कपड़े तक छीन लिए। जो जनता के दुख पर खुशी मनाए, वह योगी नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री योगी नहीं हैं। उन्हेंं तो सिर्फ जेसीबी और ठोको ही पता है। 

अभी भाजपा नेताओं के लिए नहीं खोले सपा के दरवाजे

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने आगरा के एत्मादपुर से पूर्व बसपा विधायक डा. धर्मपाल सिंह और बसपा से आगरा के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी कुंवरचन्द वकील को पार्टी की सदस्यता दिलाई। कहा कि इनके आने से सपा आगरा और आसपास के जिलों में मजबूत होगी। वहीं एक सवाल के जवाब में बोले कि अभी हमने भाजपा के नेताओं के लिए अपने दरवाजे नहीं खोले हैं। भाजपा में सूची बन चुकी है। टिकट कटने पर वह लोग इधर-उधर भागेंगे। 

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जिला पंचायत के बाद ब्लाक प्रमुख चुनाव में भी BJP का दबदबा, सपा सिमटी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में गांव तथा जिला की सरकार के बाद अब ब्लाक की सरकार का भी गठन हो रहा है। सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी को ब्लाक प्रमुख चुनाव में बम्पर जीत मिली है। शहर की पार्टी मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने अब गांवों में भी अपना दबदबा कायम कर लिया है। भाजपा ने 476 ब्लाक के लिए आज सम्पन्न मतदान मे जोरदार प्रदर्शन किया है।

पश्चिमी से लेकर पूर्वी तथा मध्य उत्तर प्रदेश के साथ बृज क्षेत्र और बुंदेलखंड में भी भाजपा ने ब्लाक प्रमुख चुनाव में अपना परचम लहरा दिया। भाजपा ने ब्लाक प्रमुख के कुल 825 पद में से निर्विरोध निर्वाचित 349 में 334 पद पर पहले ही कब्जा किया है और आज मतदान के बाद भी बाजी अपने हाथ में कर ली है। गोंडा में तो 16 में से 12 ब्लॉकों में प्रमुख पद पर महिलाएं जीतकर आई हैं। इनमें से किसी ने पहली बार सियासत में कदम रखा है तो कोई दूसरी पारी खेलेगा। सिर्फ चार विकासखंडों में पुरुष उम्मीदवार ब्लॉक प्रमुख पद पर आसीन हुए हैं।

लखनऊ की आठ में से सात सीट पर भाजपा जीती, समाजवादी पार्टी साफ

भारतीय जनता पार्टी में लखनऊ की आठ ब्लाक प्रमुख सीट पर आज हुए मतदान में सात पर जीत दर्ज की है। लखनऊ में भाजपा ने चिनहट को छोड़कर अन्य सात ब्लाक प्रमुख सीट पर जीत दर्ज की है। चिनहट में निर्दलीय उम्मीदवार ऊषा यादव ने बाजी मारी। बाकी सात सीट पर भाजपा का परचम लहराया है। लखनऊ मे पहली बार समाजवादी पार्टी का खाता नहीं खुला है। समाजवादी पार्टी के पास आठ में से छह सीट थी। समाजवादी पार्टी पहली बार आठ में से एक भी सीट नही जीत सकी।

कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में भी भाजपा का परचम, 18 में 11 सीट जीती

कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में भी भाजपा का झंडा लहराया। यहां की 18 में से 11 सीट पर भाजपा जीती है। पांच पर निर्दलीय तथा दो सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी जीते हैं।

भाजपा के पीयूष प्रताप सिंह- हरचंदपुर, आशुवेंद्र सिंह- सतांव, हनुमंत प्रताप सिंह-शिवगढ़, अनिल सिंह उर्फ नीलू सिंह- खीरों, अंजू कुशवाहा-सलोन तथा शिवराम रावत-डलमऊ से जीते हैं। निर्दलीय संगीता-छतोह, धर्मेन्दर उर्फ राजीव यादव-राही, सत्यभामा मौर्या-ऊंचाहार, विभा सिंह-सरेनी तथा वैशली सिंह- अमावां ने जीते हैं। यहां से सपा की शिवानी सिंह ने लालगंज व राकेश कुमार ने रोहनिया से जीत दर्ज की है। इससे पहले पांच ब्लाक में जगतपुर, डीह, दीनशाहगौरा, बछरावां व महराजगंज में भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध हुए थे।

जौनपुर में 15 पर भाजपा, चार पर निर्दलीय व दो पर सपा प्रत्याशी जीते

जौनपुर में 21 ब्लाकों के प्रमुख पद के चुनाव का परिणाम घोषित कर दिया गया। इसमें 15 ब्लाकों में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने कब्जा जमाया तो दो पर सपा समर्थित ने जीत दर्ज की। वहीं चार ब्लाकों पर निर्दल का कब्जा हुआ। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।

हरदोई में नौ में से पांच पर भाजपा, तीन निर्दलीय तथा एक सपा ने जीती

हरदोई में शनिवार को ब्लाक प्रमुख पद के लिए मतदान और मतगणना के बाद आए परिणाम में नौ ब्लाकों में से पांच पर भाजपा, तीन पर निर्दलीय तथा एक पर सपा ने जीत दर्ज की। एक निर्दलीय को पूर्व मंत्री अब्दुल मन्नान जीत दिलाई। सुरसा में सपा और हरपालपुर में भाजपा जमानत नहीं बचा पाई। संडीला में भाजपा की आरती जीतीं। बेहंदर में पूर्व मंत्री अब्दुल मन्नान समॢथत लक्ष्मी देवी ने जीत दर्ज की। बिलग्राम में भाजपा प्रत्याशी सतेंद्र कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह जीते। सुरसा में भाजपा के विजय पाल जीते। भरावन में निर्दलीय विनोद सिंह तोमर ने जीत दर्ज की। पिहानी में निर्दलीय कुशी बाजपेई ने जीत दर्ज की। माधौगंज में भाजपा की लौंग श्री जीती। सांडी में भाजपा के अनिल कुमार सिंह जीते। हरपालपुर में सपा के अनोखेलाल ने जीत दर्ज की।

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