‘हिंदू-मुस्लिम’ करना घातक होगा

हिंदू-मुस्लिम रिश्तों को लेकर सदा से ही भारत में आपसी भाईचारे और साझा विरासत का वातावरण रहा है। हां, लगभग 5-10 प्रतिशत तो हमेशा ही फसाद पर उतारू रहते हैं दोनों ओर, मगर आम तौर से गंगा-जमुनी तहज़ीब का ही अनुसरण करते चले आ रहे हैं, भारत के सभी निवासी, चाहे वे किसी भी धर्म के अनुयायी हों। कर्नाटक में जिस प्रकार से मंदिरों के निकट मुस्लिम दुकानदारों से सामान लेने के विरुद्ध वहां बैनर या पोस्टर लगाए गए हैं, उससे आपसी समभाव व सद्भाव पर कुप्रभाव पड़ सकता है। इस प्रकार की विघटनकारी बातों से बचने की आवश्यकता है। दक्षिण भारत के शिमोगा से एक विचलित करने वाली खबर आई है कि वहां के मंदिरों के कंप्लेक्स के बाहर कोई भी मुस्लिम अपनी किसी भी प्रकार की दुकान नहीं चलाएगा। इसका कारण बताया गया कि ये लोग बीफ का सेवन करते हैं। यह ठीक है कि बीफ के खाने से परहेज़ करना चाहिए मुस्लिमों को, क्योंकि गाय को हिंदू धर्म में माता के स्थान पर मान-सम्मान दिया गया है। जिस प्रकार से उडुपि, दक्षिण कन्नड़, टुमकुर, हासन, चिकमंग्लूर, दुर्गापुरामेशवरी आदि के मंदिरों के कैंपस में मुस्लिम पूजा सामग्री से लेकर अन्य नाना प्रकार का सामान बेचते थे, उससे न केवल इन मुस्लिम दुकानदारों के घर चलते थे बल्कि इस से अंतरधर्म सद्भावना व समभावना का सुखद प्रचार भी होता था। इन स्थानों पर बड़े-बड़े पोस्टर व बैनर लगा दिए गए हैं कि मुस्लिम दुकानदार से सौदा नहीं लिया जाए। इस प्रकार के बैनर न केवल अनैतिक व गैर कानूनी हैं बल्कि मानवता विरोधी भी हैं।

 

न जाने कब भारत में यह दूषित हिंदू-मुस्लिम मानसिकता की समाप्ति होगी। यदि भारत को विश्व गुरु और 5 ट्रिलियन अर्थ व्यवस्था बनना है तो हिंदू-मुस्लिम के मकडज़ाल से बाहर निकलना होगा और केवल और केवल भारत कार्ड खेलना होगा, न कि हिंदू-मुस्लिम ‘खेला होबे’! हां, एक सोचने वाली बात यह है कि आखिर यह कांड शिमोगा से ही क्यों शुरू हुआ! इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि इसी स्थान से हिजाब का अज़ाब शुरू हुआ था और 96 में से 6 छात्राओं ने बावजूद स्कूल से यह उसूल जारी होने पर कि हिजाब अन्यथा कोई और कोई धार्मिक पहनावा पहनने की अनुमति नहीं, फिर भी कक्षा की इन 6 छात्राओं ने इस बात की जि़द पकड़ ली कि वे हिजाब पहनकर ही कक्षा में आएंगी। वास्तव में उनको चंद कट्टरवादियों ने धमका दिया कि हिजाब नहीं तो किताब नहीं! एक समाज में जब एक तबक़ा जि़द पकड़ उद्दंड हो जाता है तो दूसरा तबका भी उसी रास्ते पर चल पड़ता है। 

 

इसी हिंदू-मुस्लिम पचड़े को लेकर लेखक की एक बार सरसंघचालक मोहन भागवत जी से बात हो रही थी तो उनका मत था कि अधिकतर मुस्लिम संस्कारी, राष्ट्रवादी व शांतिमय हैं, मगर कुछ स्वयंभू मुस्लिम नेता उन पर ढक्कन कस देते हैं जिसके कारण शाहीन बाग़ और हिजाब जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं और एक सुदृढ़ समाज को बांटने के प्रयास होते हैं। भागवत के विचार में मुस्लिम और हिंदू अलग हैं ही नहीं, भले ही उनका धर्म भिन्न हो, मगर डीएनए तो एक ही है। इसमें उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुस्लिमों के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती क्योंकि भारत को प्रगति के इस मुकाम तक लाने में मुसलमानों का बड़ा योगदान है। साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम उनकी संतान की माफिक हैं और उनके साथ वे बराबरी का सुलूक करना चाहते हैं। इस तरह दुकानदारी व दुकानदारों के मामले में हिंदू-मुस्लिम करना भारत के लिए घातक होगा। इससे बचा जाना चाहिए।

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‘कश्मीर फाइल्स’ व भारतीय सिनेमा

साहित्य समाज का दर्पण माना जाता है। भारतीय सिनेमा भी अपने शास्त्रीय युग में साहित्य के समकक्ष रहा है। ऐसी कई फिल्में हैं जिन्हें देखते समय श्रेष्ठ साहित्य वाचन सा आनंद प्राप्त होता है। हाल ही में ‘कश्मीर फाइल्स’ रिलीज हुई जिस पर प्रधानमंत्री जी की मुहर भी लग गई। फिल्म रिलीज के बाद परस्पर विरोधाभासी प्रतिक्रिया सामने आईं। प्रश्न कश्मीर से विस्थापित हुए पंडितों के द्वारा झेली गई त्रासदी, उस वक्त की परिस्थिति, राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर उठाए गए। पीडि़तों की संख्या और फिल्म में जो घटनाएं दिखाई गईं उनकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता पर सवाल उठे। सच तो यह है कि मानवीय पीड़ा का एहसास किसी एक के द्वारा भी किया गया हो, तो वो तहजीबी विरासत पर लगा बदनुमा दाग ही है, लेकिन किसी घटना को विरूपित करके प्रस्तुत करना भी उतनी ही बड़ी तहजीबी त्रासदी है। खासकर तब, जबकि इरादे में ईमानदारी न हो। इस फिल्म के पक्षधर भले ही यह न कह रहे हों, मगर उनका अव्यक्त भाव लोकमानस समझ रहा है। यह संप्रेषित हो रहा है कि जवाबी हिंसा जायज है, बहुसंख्या खतरे में है। उसके समक्ष रोटी, कपड़ा, मकान, रोजगार से ज्यादा बुलंद सवाल अपने को बचाने का है।

 

पिछले दिनों की गई पत्थरबाजी पर किसी बहुसंख्यक को शर्मिन्दा होने की जरूरत नहीं है। सवाल यह भी है कि कश्मीरी विस्थापित पंडित न होकर बहुजन समाज के होते, तो क्या प्रभुत्व संपन्न शहरी अभिजात्य वर्ग की चेतना इतनी ही आहत होती? शायद नहीं। फरीदाबाद, ऊना, हाथरस आदि सैकड़ों-हजारों घटनाएं जब घटीं तो इस वर्ग ने दूसरी तरफ नजर फेरना उचित समझा। कोरोना लॉकडाउन में पैदल लौटते समूहों को, जिनमें अधिकांश बहुजन थे, आदतन अशिष्ट करार दिया गया। उसी के बाद मौलिक हक से पहले मौलिक कत्र्तव्य पालन की बहस छेड़ी गई। प्रभुत्व संपन्न वर्ग को बहुजन पर होते अत्याचार पर कन्नी काटते हुए देखते समय पूछने को जी चाहता है कि क्या बहुजन हिंदू नहीं हैं? यदि नहीं हैं तो फिर धर्मांतरण का बवाल खड़ा क्यों किया जाए? प्रभुत्व संपन्नता यह मानती है कि उन पर अत्याचार का उनको वैसा नैसर्गिक हक है, जैसा मनुस्मृति में दर्ज है। कुछ साल पहले भिंड (मध्य प्रदेश) में जातिगत हिंसा में करीब छह दलित नौजवान प्रभुत्व संपन्न वर्ग की गोली का शिकार हुए थे। यदि तमाम ऐसी घटनाओं पर ‘बहुजन फाइल्स’ बने, तो उस पर क्या प्रतिक्रिया होगी? माननीय प्रधानमंत्री जी मुहर लगाएंगे?

 

शायद उनके संगठन फिल्म निर्माता, कलाकारों को देशद्रोही घोषित कर देंगे। ‘कश्मीर फाइल्स’ पर प्रतिक्रिया स्वरूप जब राजस्थान के एक युवक ने दलित अत्याचार का प्रश्न उठाया, तो उस पर सभी दक्षिणपंथी सोशल मीडिया के जरिए टूट पड़े। देश की आबादी में मात्र आठ फीसदी आदिवासी हैं, लेकिन वे 57 फीसदी विस्थापन झेलते हैं और तब प्रभुत्व संपन्नता उसे विकास के लिए जरूरी करार देती है। आदिवासी जब प्रतिरोध करते हैं, तो जाहिल, विकास विरोधी कहलाते हैं। इसका यह कतई मतलब नहीं कि कश्मीरी पंडितों का विस्थापन, उन पर हुए अत्याचार कोई मानवीय त्रासदी नहीं है। किसी एक भी इनसान को विस्थापन और अत्याचार झेलना पड़े तो वह मानवता मात्र पर लगा कलंक है। बहरहाल, ‘कश्मीर फाइल्स’ के बाद अब फिल्मों में अपवाद स्वरूप भी नेकनीयत मुस्लिम को दिखाने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी। बिना किसी आत्मबोध के उन्हें गलत ठहराया जा सकेगा। तो क्या यह आज के समाज की सोच है या ऐसा समाज बनाने के लिए वातावरण निर्माण किया जा रहा है?

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क्या भारत में दो टाइम ज़ोन होने चाहिये?

साल 2002 से संसद के हर सत्र में बार-बार दोहराया गय सवाल है; क्या भारत में दो समय क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव है और इसे लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? सबसे पहले ये सवाल मार्च 2002 में उठाया गया था, उस वर्ष के अगस्त में प्रश्न को प्रभावी ढंग से सुलझा लिया गया था। उस वर्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा गठित एक 'उच्च स्तरीय समिति' ने इस मुद्दे का अध्ययन किया था और निष्कर्ष निकाला था कि कई ज़ोन 'कठिनाइयों' का कारण बन सकते हैं जो "एयरलाइंस, रेलवे, रेडियो, टेलीविज़न" और टेलीफोन सेवाएं” के सुचारू कामकाज को बाधित करेंगे। इसलिए एकीकृत समय के साथ जारी रखना सबसे अच्छा था।

 

भारत पूर्व से पश्चिम तक लगभग 3000 किमी तक फैला हुआ है। देश के पूर्वी और पश्चिमी छोरों के बीच लगभग 28 डिग्री देशांतर है जिसके परिणामस्वरूप पश्चिमी और पूर्वी बिंदु के बीच लगभग दो घंटे का अंतर होता है। भारतीय मानक समय (उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में 82.5′ ई देशांतर के आधार पर गणना की गई), अधिकांश भारतीयों को प्रभावित नहीं करता है, सिवाय उन लोगों को छोड़कर जो पूर्वोत्तर क्षेत्र में रहते हैं जहां सूरज गर्मियों में सुबह 4 बजे के आसपास उगता है, और शाम 4 बजे से पहले सर्दियों में अंधेरा हो जाता है। इसलिए, पूर्वोत्तर क्षेत्र ने लंबे समय से उनके जीवन और उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर एकल समय क्षेत्र के प्रभाव के बारे में शिकायत की है।

 

हाल ही में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल), जो भारतीय मानक समय (आईएसटी) को बनाए रखती है, ने भारत में दो समय क्षेत्रों और दो आईएसटी का सुझाव देते हुए एक शोध प्रकाशित किया: अधिकांश भारत के लिए आईएसटी-I और आईएसटी- II के लिए उत्तर-पूर्वी क्षेत्र - एक घंटे के अंतर से अलग। दो समय क्षेत्रों की मांग इसलिए बढ़ी क्योंकि उत्तरपूर्वी भारत और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अपने भूगोल के कारण, देश के बाकी हिस्सों की तुलना में जल्दी सूर्योदय और सूर्यास्त देखते हैं।

 

लेकिन घड़ियां इसके लिए जिम्मेदार नहीं थीं और आधिकारिक काम के घंटे हर जगह समान थे, सुबह के समय मूल्यवान काम के घंटे खराब होने और इन क्षेत्रों में शाम के घंटों में अनावश्यक बिजली की खपत हुई इसलिए, व्यापक रूप से प्रचलित यू.एस. के पांच समय क्षेत्र और रूस के 11 के आधार पर भारत में भी कई टाइम जोन लागू करने की बात सामने आई। मगर विशेषज्ञ समिति ने, कई समय क्षेत्रों का समर्थन नहीं करते हुए, सिफारिश की कि पूर्वी राज्यों में काम के समय को एक घंटे आगे बढ़ाया जाए, ताकि सुबह के घंटों का "लाभदायक उपयोग" किया जा सके और इसमें संबंधित अधिकारियों द्वारा इस संबंध में केवल प्रशासनिक निर्देश शामिल होंगे।

 

लेकिन दो समय क्षेत्रों के लाभ अपनी जगह है हम उनको नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते; इससे कार्यबल के बीच और ऊर्जा की खपत में अधिक दक्षता आएगी। ऊर्जा की खपत में कमी से भारत के कार्बन फुटप्रिंट में काफी कमी आएगी, जिससे जलवायु परिवर्तन से लड़ने के भारत के संकल्प को बढ़ावा मिलेगा। प्राकृतिक चक्रों के अनुसार दो अलग-अलग समय क्षेत्र होने से आर्थिक लाभ होते हैं क्योंकि लोग बेहतर काम करने और बेहतर योजना बनाने में सक्षम होंगे। कई सामाजिक नीतिगत उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है जैसे सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और महिलाओं की सुरक्षा में सुधार करना।

 

दूसरी तरफ दो समय क्षेत्र होने की समस्या को देखे तो दो टाइम जोन होने से रेल हादसों की संभावना बढ़ जाएगी। रेलवे सिग्नल पूरी तरह से स्वचालित नहीं हैं, और कई मार्गों में सिंगल ट्रैक हैं। समय क्षेत्र के प्रत्येक क्रॉसिंग के साथ घड़ियों को रीसेट करना। दो समय क्षेत्र होने पर कार्यालय समय के बीच ओवरलैप कम हो जाता है। बैंकों, उद्योगों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को नए समय क्षेत्रों में समायोजन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। दो जोन की डिवाइडिंग लाइन को चिह्नित करने में दिक्कत होगी। दो समय क्षेत्रों के प्रतिकूल राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं क्योंकि भारत धर्म, जाति, नस्ल, भाषा आदि के आधार पर विभाजित होने के अलावा, अब समय क्षेत्र की तर्ज पर विभाजित हो जाएगा।

 

भारतीय समय क्षेत्र के संबंध में सभी पहलुओं पर नए सिरे से विचार करने के लिए परामर्श की प्रक्रिया शुरू करना समय की मांग है। आईएसटी को आधे घंटे आगे सेट करने के कुछ शोधकर्ताओं के प्रस्ताव की जांच की जा सकती है और बहस की जा सकती है। इसका मतलब होगा कि आईएसटी को 82.5 डिग्री पूर्व से 90 डिग्री पूर्व में आगे बढ़ाना, जो पश्चिम बंगाल-असम सीमा के साथ एक देशांतर पर होगा, असम की मांग को पूरा करने में किसी तरह से मदद करेगा और उत्तर-पश्चिमी भारत से संबंधित असुविधाओं के बारे में संभावित शिकायतों से बचने में मदद करेगा। यदि अलग मानक समय की व्यवस्था से मानव श्रम का उचित प्रबंधन और बड़ी मात्रा में बिजली की बचत की जा सकती है तो इस संबंध में विचार किये जाने की आवश्यकता है।

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मुसीबत में की मदद

एक बार मैं अपनी मम्मी के साथ लोकल ट्रेन से यात्रा कर रहा था। ट्रेन में काफी भीड़ थी, लेकिन किसी तरह एक बोगी में दरवाजे के पास ही सीट मिल गई। तभी मैंने देखा कि एक गरीब लड़का टोकरी में केले लेकर मेरी बोगी की तरफ आ रहा है। अचानक ट्रेन चल दी और उसने दौड़कर सबसे पहले अपनी टोकरी मेरी बोगी के दरवाजे पर रख दी। लेकिन ट्रेन स्पीड पकड़ चुकी और सामने टोकरी होने की वजह से केले बेचने वाला लड़का मेरी बोगी में चढ़ नहीं पाया। वह शायद किसी और बोगी में चढ़ गया था।

 

उसकी केले से भरी टोकरी दरवाजे के पास ही पड़ी थी। इस बीच मेरी बोगी का एक लड़का बिना मालिक के टोकरी देख, उसमें से केले निकालकर खाने लगा। वह ऐसे खुश होकर जल्दी-जल्दी केले खा रहा था, जैसे उसकी लॉटरी लग गई हो। उसको देख उसके कई और दोस्त केलों पर टूट पड़े। ट्रेन के अगले स्टॉपेज पर रुकते-रुकते वे लोग टोकरी के आठ-दस दर्जन केले चट कर चुके थे। इसके बाद वे वहां से हट गए। ट्रेन रुकने पर टोकरी का मालिक लड़का दौड़कर मेरी बोगी में आया।

 

अपनी टोकरी की हालत देख वह सन्न रह गया और फूट-फूट कर रोने लगा। वह किसी पर इल्जाम भी नहीं लगा सकता था, क्योंकि उसने किसी को केले खाते नहीं देखा था। ट्रेन चल चुकी थी। वह

 

बेहद गरीब लड़का था और इतना नुकसान उसके लए बड़ी बात थी, शायद इसीलिए रो रहा था। मुझे उस पर काफी तरस आया। उन लड़कों पर गुस्सा भी आ रहा था, जिन्होंने उसके केले खाए थे। मेरे दिमाग

 

में ख्याल आया कि क्यों न केले बेचने वाले लड़के की मदद की जाए। मैंने मम्मी से यह बात बताई और उनसे दस रुपये मांगे तो वे पहले तो थोड़ा हिचकीं, लेकिन फिर उन्होंने पैसे दे दिए। मैंने और यात्रियों को

 

यह बात बताई और सबको इसके लिए राजी करने की कोशिश की कि गरीब लड़के की मदद करनी चाहिए। किसी ने दस रुपये दिए तो किसी ने बीस, यहां तक कि केले खाने वाले लड़कों में से भी कुछ ने

 

शर्मिंदा होकर दस-दस के नोट निकाल दिए।

 

मेरे पास कुल मिलाकर दो सौ रुपये जमा हो गए थे। मैंने जाकर उस गरीब लड़के को दिए तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। उसने मुझे बहुत धन्यवाद दिया। मम्मी सहित अन्य सभी यात्रियों ने मुझे शाबाशी दी। सच है दोस्तो, मुसीबत में फंसे व्यक्ति की मदद करने की खुशी ही अलग होती है...

 

(अमन कुमार, सरिस्ताबाद, पटना)

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लंका दहन के समय एक घर छोड़ दिया था हनुमानजी ने

मेघनाथ ने श्रीहनुमानजी को रावण के सामने लाकर खड़ा कर दिया। हनुमानजी ने देखा कि राक्षसों का राजा रावण बहुत ही ऊंचे सोने के सिंहासन पर बैठा हुआ है। उसके दस मुंह और बीस भुजाएं हैं। उसका रंग एकदम काला है। उसके आसपास बहुत से बलवान योद्धा और मंत्री आदि बैठे हुए हैं। लेकिन रावण के इस प्रताप और वैभव का हनुमानजी पर कोई असर नहीं पड़ा। वह वैसे ही निडर खड़े रहे जैसे सांपों के बीच में गरुड़ खड़े रहते हैं।

 

हनुमानजी को इस प्रकार अपने सामने अत्यन्त निर्भय और निडर खड़े देखकर रावण ने पूछा- बन्दर तू कौन है? किसके बल के सहारे वाटिका के पेड़ों को तुमने नष्ट किया है? राक्षसों को क्यों मारा है? क्या तुझे अपने प्राणों का डर नहीं है? मैं तुम्हें निडर और उद्दण्ड देख रहा हूं। हनुमानजी ने कहा- जो इस संपूर्ण विश्व के, इस संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी हैं, मैं उन्हीं भगवान श्रीरामचंद्रजी का दूत हूं। तुम चोरी से उनकी पत्नी का हरण कर लाये हो। उन्हें वापस कर दो। इसी में तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का कल्याण है। यदि तुम यह जानना चाहते हो कि मैंने अशोवाटिका के फल क्यों खाये, पेड़ आदि क्यों तोड़े, राक्षसों को क्यों मारा तो मेरी बात सुनो। मुझे बहुत जोर की भूख लगी थी इसलिए वाटिका के फल खा लिये। बंदर स्वभाव के कारण कुछ पेड़ टूट गये। अपनी देह सबको प्यारी होती है इसलिए जिन लोगों ने मुझे मारा, मैंने भी उन्हें मारा। इसमें मेरा क्या दोष है? लेकिन इसके बाद भी तुम्हारे पुत्र ने मुझे बांध रखा है।

 

रावण को बहुत ही क्रोध चढ़ आया। उसने राक्षसों को हनुमानजी को मार डालने का आदेश दिया। राक्षस उन्हें मारने दौड़ पड़े। लेकिन तब तक विभीषण ने वहां पहुंच कर रावण को समझाया कि यह तो दूत है। इसका काम अपने स्वामी को संदेश पहुंचाना है। इसका वध करना उचित नहीं होगा। इसे कोई अन्य दंड देना ही ठीक होगा। विभीषण की यह सलाह रावण को पसंद आ गयी। उसने कहा ठीक है बंदरों को अपनी पूंछ से बड़ा प्यार होता है। इसकी पूंछ में कपड़े लपेटकर, तेल डालकर उसमें आग लगा दो। जब यह बिना पूंछ का होकर अपने स्वामी के पास जायेगा तब फिर उसे भी साथ लेकर लौटेगा। यह कहकर वह बड़े जोर से हंसा।

 

रावण का आदेश पाकर राक्षस हनुमानजी की पूंछ में तेल भिगो भिगोकर कपड़े लपेटने लगे। अब तो हनुमानजी ने बड़ा ही मजेदार खेल किया। वह धीरे धीरे अपनी पूंछ को बढ़ाने लगे। ऐसी नौबत आ गयी कि पूरी लंका में तेल, कपड़े और घी बचे ही नहीं। अब राक्षसों ने तुरंत उनकी पूंछ में आग लगा दी। पूंछ में आग लगते ही हनुमानजी तुरंत उछलकर एक ऊंची अटारी पर जा पहुंचे और वहां से चारों ओर कूद कूदकर वह लंका को जलाने लगे। देखते ही देखते पूरी नगरी आग की विकराल लपटों में घिर गयी। सभी राक्षस और राक्षसियां जोर जोर से चिल्लाने लगे। वे सब रावण को कोसने लगे। रावण को भी आग बुझाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। हनुमानजी की सहायता करने के लिए पवन देवता भी जोर जोर से बहने लगे। थोड़ी ही देर में पूरी लंका जलकर नष्ट हो गयी। हनुमानजी ने केवल विभीषण का घर छोड़ दिया और उसे जलाया नहीं।

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पित्त और कफ विकारों का घरेलू उपचार है गूलर

मोरासी परिवारी का सदस्य गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है। इसका वनस्पतिक नाम फीकुस ग्लोमेराता रौक्सबुर्ग है। यह सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है। यह नदी−नालों के किनारे एवं दलदली स्थानों पर उगता है। उत्तर प्रदेश के मैदानों में यह अपने आप ही उग आता है।

 

इसके भालाकार पत्ते 10 से सत्रह सेमी लंबे होते हैं जो जनवरी से अप्रैल तक निकलते हैं। इसकी छाल का रंग लाल−घूसर होता है। फल गोल, गुच्छों में लगते हैं। फल मार्च से जून तक आते हैं। कच्चा फल छोटा हरा होता है पकने पर फल मीठे, मुलायम तथा छोटे−छोटे दानों से युक्त होता है। इसका फल देखने में अंजीर के फल जैसा लगता है। इसके तने से क्षीर निकलता है।

 

आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार गूलर का कच्चा फल कसैला एवं दाहनाशक है। पका हुआ गूलर रुचिकारक, मीठा, शीतल, पित्तशामक, तृषाशामक, श्रमहर, कब्ज मिटाने वाला तथा पौष्टिक है। इसकी जड़ में रक्तस्राव रोकने तथा जलन शांत करने का गुण है। गूलर के कच्चे फलों की सब्जी बनाई जाती है तथा पके फल खाए जाते हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर या अन्य प्रकार से उपयोग किया जाता है।

 

गूलर के नियमित सेवन से शरीर में पित्त एवं कफ का संतुलन बना रहता है। इसलिए पित्त एवं कफ विकार नहीं होते। साथ ही इससे उदरस्थ अग्नि एवं दाह भी शांत होते हैं। पित्त रोगों में इसके पत्तों के चूर्ण का शहद के साथ सेवन भी फायदेमंद होता है।

 

गूलर की छाल ग्राही है, रक्तस्राव को बंद करती है। साथ ही यह मधुमेह में भी लाभप्रद है। गूलर के कोमल−ताजा पत्तों का रस शहद में मिलाकर पीने से भी मधुमेह में राहत मिलती है। इससे पेशाब में शर्करा की मात्रा भी कम हो जाती है। गूलर के तने को दूध बवासीर एवं दस्तों के लिए श्रेष्ठ दवा है। खूनी बवासीर के रोगी को गूलर के ताजा पत्तों का रस पिलाना चाहिए। इसके नियमित सेवन से त्वचा का रंग भी निखरने लगता है।

 

हाथ−पैरों की त्वचा फटने या बिवाई फटने पर गूलर के तने के दूध का लेप करने से आराम मिलता है, पीड़ा से छुटकारा मिलता है। गूलर से स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी अनियमितताएं भी दूर होती हैं। स्त्रियों में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर इसकी छाल के काढ़े का सेवन करना चाहिए। इससे अत्याधिक बहाव रुक जाता है। ऐसा होने पर गूलर के पके हुए फलों के रस में खांड या शहद मिलाकर पीना भी लाभदायक होता है। विभिन्न योनि विकारों में भी गूलर काफी फायदेमंद होता है। योनि विकारों में योनि प्रक्षालन के लिए गूलर की छाल के काढ़े का प्रयोग करना बहुत फायदेमंद होता है।

 

मुंह के छाले हों तो गूलर के पत्तों या छाल का काढ़ा मुंह में भरकर कुछ देर रखना चाहिए। इससे फायदा होता है। इससे दांत हिलने तथा मसूढ़ों से खून आने जैसी व्याधियों का निदान भी हो जाता है। यह क्रिया लगभग दो सप्ताह तक प्रतिदिन नियमित रूप से करें।

 

आग से या अन्य किसी प्रकार से जल जाने पर प्रभावित स्थान पर गूलर की छाल को लेप करने से जलन शांत हो जाती है। इससे खून का बहना भी बंद हो जाता है। पके हुए गूलर के शरबत में शक्कर, खांड या शहद मिलाकर सेवन करने से गर्मियों में पैदा होने वाली जलन तथा तृषा शांत होती है।

 

नेत्र विकारों जैसे आंखें लाल होना, आंखों में पानी आना, जलन होना आदि के उपचार में भी गूलर उपयोगी है। इसके लिए गूलर के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे साफ और महीन कपड़े से छान लें। ठंडा होने पर इसकी दो−दो बूंद दिन में तीन बार आंखों में डालें। इससे नेत्र ज्योति भी बढ़ती है। नकसीर फूटती हो तो ताजा एवं पके हुए गूलर के लगभग 25 मिली लीटर रस में गुड़ या शहद मिलाकर सेवन करने या नकसीर फूटना बंद हो जाती है।

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प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ी कहानियां साझा करने वाला पोर्टल शुरू

नई दिल्ली, 26 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी प्रेरक कहानियों को एकसाथ पेश करने के लिए एक पोर्टल ‘मोदीस्टोरी डॉट इन’ का शुभारंभ किया गया है। मोदी के दशकों लंबे जीवन सफर में उनके संपर्क में आये लोगों के अनुभवों के आधार पर इन कहानियों को तैयार किया गया है।

 

प्रधानमंत्री के एक सहयात्री के हवाले से पोर्टल ने ट्वीट किया कि, ‘‘पोर्टल ‘मोदी स्टोरी’ की घोषणा एक स्वयंसेवी पहल है, जिसके तहत नरेंद्र मोदी के जीवन से जुड़े रोचक कहानियों को एक साथ लाया जायेगा।’’ पोर्टल की ओर से यह भी ट्वीट किया गया कि इस पोर्टल का उद्घाटन महात्मा गांधी की पोती सुमित्रा गांधी कुलकर्णी ने किया।

 

इस वेबसाइट पर पंजाब से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता मनोरंजन कालिया ने मोदी से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। मोदी ने पार्टी पदाधिकारी के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा के शुरुआती दिनों में इस राज्य में काम किया था। इसके अलावा गुजरात के वडनगर में प्रधानमंत्री के स्कूल के प्रधानाध्यापक रासबिहारी मानियार और शारदा प्रजापति ने भी मोदी से जुड़े अनुभवों को साझा किया। मोदी 1990 के दशक में अपने दौरों के दौरान प्रजापति के आवास में अक्सर ठहरा करते थे।

 

इस पोर्टल पर ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंदन ने भी मोदी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं। कालिया ने चुनाव प्रचार मुहिम के दौरान मोदी की बेहतरीन समझ का जिक्र किया और प्रचार के दौरान बच्चों को वितरित करने के लिए टॉफी रखने की प्रधानमंत्री की सलाह के बारे में बताया। मानियार ने कहा कि मोदी देश के सशस्त्र बलों के लिए गहरी भावनाएं रखते हैं और युवा छात्र के रूप में वह एक सैनिक स्कूल का आवेदन प्रपत्र लेकर उनके पास आए थे।

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राहुल का महंगाई को लेकर सरकार पर तंज

नई दिल्ली, 26 मार्च। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महंगाई को लेकर दो पंक्ति की कविता में सरकार पर शनिवार को तीखा तंज करते हुए कहा कि वह अपने लिए खुशहाली का महल बनाने में जुटी है और जनता महंगाई की मार से त्रस्त है। श्री गांधी ने ट्वीट किया "राजा करे महल की तैयारी, प्रजा बेचारी महंगाई की मारी।" इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के कुछ ट्वीट को उद्धृत किया है जिनमें कहा गया है कि पेट्रोल डीजल की कीमतें आउट ऑफ कंट्रोल हो गई हैं और पांच दिन में इनकी दर 3.20 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है जबकि घरेलू सिलेंडर गैस की कीमत 50 रुपये तक महँगी हो गई है।

 

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मंत्रिमंडल की पहली बैठक में मुफ्त राशन योजना को तीन महीने तक बढ़ाने का निर्णय

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शनिवार को मंत्रिमंडल की बैठक में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई मुफ्त राशन योजना को तीन महीने तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

 

मार्च 2022 तक के लिए लागू की गई योजना अब जून तक जारी रहेगी। इसमें 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने का प्रावधान है। इस योजना के तहत अगले तीन और माह तक खाद्यान्न योजना के तहत प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को दाल, नमक, चीनी के साथ खाद्यान्न मिलता रहेगा। योजना मार्च 2022 में खत्म हो रही थी।

 

माना जा रहा है कि इस बार भाजपा की जीत में मुफ्त राशन की इस योजना का जबरदस्त प्रभाव रहा है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के बाद आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की पहली कैबिनेट बैठक शनिवार सुबह यहां लोकभवन में हुई।

 

मुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘कोरोना वायरस महामारी के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के हर नागरिक के लिए ‘प्रधानमंत्री अन्न योजना’ प्रारंभ की थी। इस योजना के अन्तर्गत देश की 80 करोड़ जनता को इसका लाभ मिल रहा है।’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘मार्च-अप्रैल 2020 से लेकर मार्च 2022 तक लगभग 15 महीनों तक इस योजना का लाभ लोगों को प्राप्त हुआ है। 15 करोड़ लोगों को उत्तर प्रदेश में इसका लाभ प्राप्त होता था। राज्य सरकार ने भी उत्तर प्रदेश के अंत्योदय के लाभार्थी और पात्र परिवारों सहित 15 करोड़ लाभार्थियों के लिए यह योजना अपनी ओर से अप्रैल 2020 से आरंभ की थी।’’

 

उन्होंने कहा कि योजना के अन्तर्गत राज्य की 15 करोड़ अंत्योदय जनता को 35 किलोग्राम खाद्यान्न और पात्र परिवारों को पांच-पांच किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त होता है। राज्य सरकार ने इसके साथ ही प्रत्येक परिवार को एक किलोग्राम दाल, एक किलोग्राम रिफाइंड तेल, एक किलोग्राम आयोडीनयुक्त नमक भी उपलब्ध कराया था। इसके साथ ही अंत्योदय परिवारों को राज्य सरकार ने एक किलोग्राम चीनी भी उपलब्ध करायी थी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह योजना मार्च 2022 तक थी। इसलिए मंत्रिमंडल ने शनिवार को निर्णय लिया कि अगले तीन महीनों तक प्रदेश के 15 करोड़ लोगों के लिए यह योजना जारी रहेगी। ‘डबल इंजन की सरकार’ पहले भी जनता के साथ खड़ी रही। महामारी के दौरान निशुल्क इलाज, निशुल्क टीका उपलब्ध कराया गया।’’ संवाददाता सम्मेलन में योगी आदित्यनाथ के साथ उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक तथा कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना एवं स्वतंत्र देव सिंह भी मौजूद थे।

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अखिलेश और मायावती ने दी योगी सरकार को बधाई

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बधाई दी है। दोनो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने योगी सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन और जनता की सेवा करने की सलाह भी दी है। योगी सरकार के शुक्रवार को संपन्न शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किये जाने के बावजूद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी,महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव,बसपा अध्यक्ष मायावती नहीं पहुंचे थे। हालांकि अखिलेश और मायावती ने ट्विटर के जरिये नई सरकार को बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित की हैं। सुश्री मायावती ने शनिवार को ट्वीट किया, “यूपी में नई भाजपा सरकार के गठन की बधाई तथा यह सरकार संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों एवं आदर्शों के साथ कार्य करे।” इससे पहले श्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया था, “नई सरकार को कि वो सपा के बनाए स्टेडियम में शपथ ले रही है। शपथ सिर्फ़ सरकार बनाने की नहीं, जनता की सच्ची सेवा की भी लेनी चाहिए।” लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में योगी सरकार के 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा,केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह,रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अलावा 12 राज्यों के मुख्यमंत्री एवं पांच राज्यों के उपमुख्यमंत्री शामिल हुये थे।

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अखिलेश को सपा विधायक दल का नेता चुना गया

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव को विधानसभा में पार्टी के विधायक दल और विधानमंडल दल का नेता चुना गया है। यहां स्थित सपा मुख्यालय में शनिवार को हुयी पार्टी विधायक दल की बैठक में अखिलेश को सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से नेता चुन लिया। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने विधायक दल की बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में अखिलेश को सर्वसम्मति से पार्टी के विधानमंडल दल का नेता भी चुना गया। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में सपा के 111 विधायक जीते हैं। इस प्रकार विधानसभा में दूसरा सबसे बड़ा दल होने के नाते सपा मुख्य विपक्षी पार्टी होगी। ऐसे में अखिलेश का नेता प्रतिपक्ष बनना लगभग तय है। विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश ने आजमगढ़ से लोकसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया था। उत्तम ने बताया कि सपा के वरिष्ठ विधायक अवधेश प्रसाद ने अखिलेश को विधायक दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा और विधायक आलम बदी ने उसका समर्थन किया। इसके अलावा विधायक लालजी वर्मा ने अखिलेश को विधानमंडल दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा। सपा के चुनाव चिन्ह पर विधायक बने प्रसपा नेता शिवपाल सिंह यादव को बैठक में नहीं बुलाये जाने के बारे में उत्तम ने कहा कि आज केवल सपा के विधायकों को बुलाया गया था। बैठक में सहयोगी दलों के किसी विधायक को नहीं बुलाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया, “सहयोगी दलों के जो विधायक सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीते उन्हें और सहयोगी दलाें के विधायकाें की बैठक 28 मार्च को बुलायी गयी है, चाहे वे शिवपाल यादव हों, पल्लवी पटेल या ओपी राजभर हों, सब को 28 मार्च को बुलाया जाएगा।”

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हिजाब विवाद सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट का निश्चित तारीख देने से इनकार (अपडेट)

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 'हिजाब' के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए कोई निश्चित तारीख तय करने से गुरुवार को इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत द्वारा शीघ्र सुनवाई के लिए किसी निश्चित तारीख पर सूचीबद्ध करने की गुहार ठुकरा दी।

श्री कामत ने कर्नाटक में 28 मार्च से आयोजित होने वाली परीक्षाओं( जिसमें याचिकाकर्ता भी शामिल है) का उल्लेख करते हुए उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली कुछ छात्राओं की याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।

श्री कामत द्वारा 'विशेष उल्लेख' के दौरान परीक्षा की तारीख का जिक्र करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "इसका परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक संवेदनशील मामला है।"

मुख्य न्यायाधीश ने 16 मार्च को तत्काल सुनवाई करने की मांग संबंधी गुहार के मद्देनजर इस मामले पर होली के बाद विचार करने का संकेत दिया था।

वरिष्ठ वकील संजय हेगडे ने इस मामले को अति आवश्यक बताते हुए 16 मार्च को विशेष उल्लेख के दौरान तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी।

स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक जारी रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद ही उसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी। इसके बाद कई याचिकाएं दायर की गईं।

याचिकाकर्ताओं में शामिल निबा नाज़ ने उच्च न्यायालय के फैसले को अधिवक्ता अनस तनवीर के माध्यम से शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

याचिकाकर्ता ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम-1983 और इसके तहत बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए अपनी याचिका में दावा किया है कि विद्यार्थियों के लिए किसी भी तरह से अनिवार्य वर्दी का प्रावधान नहीं है।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था, "हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वर्दी का निर्धारण संवैधानिक है और विद्यार्थी इस पर आपत्ति नहीं कर सकते।"

अदालत में दायर याचिका में कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा पारित पांच फरवरी 2022 के आदेश की वैधता पर सवाल सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि यह निर्देश "धार्मिक अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से इस्लामी आस्था के हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला अनुयायियों का उपहास कर उन पर एक प्रकार से हमला करने के अप्रत्यक्ष इरादे से जारी किया गया था।"

याचिका में कहा गया है कि हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अंतरात्मा के अधिकार के तहत संरक्षित है।

याचिकाकर्ताओं ने विभिन्न तर्कों के माध्यम से उच्च न्यायालय के फैसले को कानून के खिलाफ बताते हुए उसे चुनौती दी।

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अमीरी, सुख, समृद्धि : अमीरी एक ऐसा मानवाधिकार है

नई दिल्ली: अमीरी एक ऐसा मानवाधिकार है जिसकी चाहत हर किसी को है। इनसान ही नहीं, दुनिया का कोई भी जीव दुख नहीं उठाना चाहता, हम तो फिर इनसान हैं। हम में से कोई भी गरीबी में और अभावों में नहीं जीना चाहता। पैसे से चाहे हर सुख न खरीदा जा सकता हो, पर बहुत से सुख पैसे से खरीदे जा सकते हैं, और यह भी सच है कि धन का अभाव बहुत से दुखों का कारण बन जाता है, यहां तक कि गरीबी कई बार आत्महत्याओं तक का कारण बन जाती है। फिर कौन चाहेगा कि वह अभावों भरा जीवन जिए या फिर जीवन भर दूसरों की कृपा का मोहताज बना रहे? अमीरी एक बुनियादी मानवाधिकार है, पर कोई आपको इसे तश्तरी में पेश नहीं करेगा। इसके लिए स्वयं आपको ही प्रयत्न करना होगा और जोखिम भी उठाना पड़ेगा। अमीरी का अधिकार मांगने से नहीं मिलता, इसे कमाना पड़ता है। भारतीय आम आदमी के अमीर बनने में दो बड़ी अड़चनें हैं। पहली अड़चन है सही ज्ञान का अभाव, और दूसरी अड़चन है गलत अथवा अस्वस्थ नज़रिया। अक्सर हम गरीब लोगों को अमीरों की आलोचना करते हुए या उनका मजाक उड़ाते हुए और यहां तक कि उन पर दया दिखाते हुए पाते हैं। भारतवर्ष मूलतः एक धर्म-परायण देश है और आम आदमी धर्म-भीरू है। धर्म की हमेशा से संतोषी जीवन जीने की सीख रही है। इस सीख की आड़ में हमने आलस्य को अपना लिया और अपनी गलतियां स्वीकार करने के बजाय गरीबी को महिमामंडित करना आरंभ कर दिया। अमीरी से घृणा करके और अमीरों को शोषक मानकर हम प्रगति नहीं कर सकते। अब हम जानते हैं कि नई अर्थव्यवस्था के इस युग में ज्ञान का पूंजी बनाकर धन-संपदा कमाना कोई अजूबा नहीं है। अगर हम सिर्फ इस तथ्य को समझ लें तो हम गरीबी के कारणों का विश्लेषण करके अमीरी की ओर मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं। एक और जानने योग्य तथ्य यह है कि भारतवर्ष एक गरीब देश है, लेकिन यहां सोने की खरीद सबसे ज्य़ादा होती है। शादियों के सीज़न में सोने का भाव तेज़ी से चढ़ जाता है। पिछले कुछ सालों तक शादी का सीज़न बीतने पर सोने का भाव धीरे-धीरे नीचे आ जाता था, लेकिन अब जैसे आम की जगह माज़ा ने ले ली है और हम सर्दियों में भी कोक पीने लग गए हैं, वैसे ही सोना भी बारहमासी हो गया है और इस साल सोने के दाम घटने के बजाय बढ़ते ही नज़र आए।

 

इसके बावजूद सोने की खरीद की रफ्तार में कोई कमी नहीं दिखी। ऐसे में यह जानकर किसे आश्चर्य होगा कि भारतवर्ष में स्वर्ण की मात्रा 20 हज़ार टन तक पहुंच गई है। स्वर्ण की खरीद एक भावनात्मक सवाल बन गया है। जिसके पास जितना सोना होगा, वह उतना ही सुरक्षित महसूस करेगा, खुद को अमीर मानेगा। यह बचत का एक बड़ा साधन है। रुपए का अवमूल्यन हो रहा है, लेकिन सोने का रेट बढ़ रहा है। इसलिए जनता में सोने के प्रति लगाव कम नहीं हो रहा है। समस्या यह है कि हम सोने की जमाखोरी करते हुए अपने धन का दुरुपयोग कर रहे हैं क्योंकि यही धन अगर किसी अन्य बचत अथवा निवेश में लगता तो हमारी आर्थिक अवस्था कहीं ज्य़ादा सबल होती। सच तो यह है कि हम सोने को लेकर सचमुच सो रहे हैं। दरअसल बचत, निवेश और पूंजी निर्माण को लेकर हम अब भी पुरानी अर्थव्यवस्था के हिसाब से चल रहे हैं। बदलते ज़माने की जरूरतों को समझे बिना हम पुरानी आदतों से चिपके हुए हैं। हम बैलगाड़ी पर बैठकर वर्तमान युग की सुपर सोनिक रफ्तार का मुकाबला करना चाह रहे हैं। बहुत से लोग अमीर होते हैं, पर वे अमीर नहीं दिखते, बहुत से लोग गरीब होते हैं पर वे गरीब नहीं दिखते, और बहुत से मध्यवर्गीय लोग वास्तविक अमीरी को जाने बिना अमीर दिखने की कोशिश में जुट जाते हैं और इस कोशिश में अक्सर कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे लोग यदि प्रमोशन हो जाए या ज्यादा बढि़या तनख्वाह वाली नई नौकरी मिल जाए या अपना बिज़नेस अच्छा चल जाए तो आपको विलासिता की वस्तुएं जुटाने और अमीर दिखने के बजाय ऐसे निवेश करने चाहिएं जो आपके लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकें। यहां निवेश से मेरा आशय म्यूचुअल फंड या शेयरों की खरीददारी से नहीं है।

 

यदि आपको इनकी बारीक जानकारी नहीं है तो मैं आपको म्यूचुअल फंड या शेयर बाज़ार में निवेश की सलाह नहीं दूंगा। यह निवेश ऐसे काम में होना चाहिए जहां आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक न हो। ऐसे निवेश के कई तरीके हैं। आप कोई छोटा-सा घर खरीद कर किराए पर उठा सकते हैं, रिक्शा, ऑटो-रिक्शा, कार आदि खरीद कर किराए पर दे सकते हैं। कोई ऐसा व्यवसाय कर सकते हैं जहां आपके कर्मचारी ही सारा काम संभाल लें और आपको उस व्यवसाय से होने वाला लाभ मिलता रहे। पुस्तकें लिख सकते हैं जिसकी रॉयल्टी मिलती रहे, मकान, दुकान या कार्यालय पर मोबाइल कंपनी का टावर लगवा सकते हैं जिसका किराया आता रहे। इससे होने वाली आय पेंशन की तरह है जहां काम भी नहीं करना पड़ता और लगातार आय का साधन भी बन जाता है। यह आपकी समृद्धि ओर छोटा-सा पहला कदम है। धीरे-धीरे योजनाबद्ध ढंग से ऐसे निवेश बढ़ाते रहेंगे तो आपकी अतिरिक्त आय इतनी बढ़ जाएगी कि इस बढ़ी आय से कार, मकान या छुट्टियों पर किए जाने वाले खर्च के लिए आपको बैंक से कर्ज़ नहीं लेना पड़ेगा, कर्ज़ पर ब्याज नहीं देना पड़ेगा और कर्ज़ न चुका पाने का डर भी नहीं सताएगा। इसके बावजूद आपको पैसे की परेशानी से नहीं जूझना पड़ेगा। जब समस्याएं नई हों तो समाधान भी नए होने चाहिएं, पुराने विचारों से चिपके रहकर हम नई समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते।

 

ज़माना नया है, दुनिया बदल गई है और हर पल बदल रही है। हमें अपने आपको नए ज़माने के लिए तैयार करना है। इसके लिए हमें नए विचारों का स्वागत करना होगा, समस्याओं का हल नए सिरे से खोजना होगा और स्वयं को शिक्षित करना होगा। यह परिवर्तन की एक ऐसी मानसिक यात्रा है जिस पर हम खुद ही आगे बढ़ेंगे। हमें यह समझना चाहिए कि परिवर्तन दिमाग से शुरू होते हैं, या यूं कहें कि दिमाग में शुरू होते हैं। हम इक्कीसवीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं और सत्रहवीं सदी की मानसिकता से हम देश का विकास नहीं कर सकते। नई स्थितियों में नई समस्याएं हैं और उनके समाधान भी पुरातनपंथी नहीं हो सकते। यदि हमें गरीबी, अशिक्षा से पार पाना है और देश का विकास करना है तो हमें इस मानसिक यात्रा में भागीदार होना पड़ेगा जहां हम नए विचारों को आत्मसात कर सकें और ज़माने के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। इस योजना पर काम करने से आप सिर्फ अमीर दिखेंगे ही नहीं, सचमुच के अमीर हो जाएंगे। यदि आपको लाटरी से, ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसे किसी शो से, अमीर जीवनसाथी से विवाह से या किसी अमीर रिश्तेदार की विरासत मिलने की उम्मीद नहीं है तो असली अमीरी और स्थायी समृद्धि के लिए आपको इसी योजना पर काम करना चाहिए। स्थायी समृद्धि का यही एक मंत्र है जो विश्वसनीय भी है और अनुकरणीय भी। इसी से अमीरी आएगी, इसी से समृद्धि आएगी और यही सुख का कारण बनेगा।

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चुनाव आयोग का एलान: राज्यसभा की 13 सीटों पर 31 मार्च को होगा चुनाव, छह राज्यों से चुने जाएंगे सांसद

नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद अब निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा के 13 सीटों के लिए चुनाव का एलान कर दिया है। यह चुनाव 31 मार्च को होगा। इसमें छह राज्यों से सांसद चुने जाएंगे। इनमें से पांच पंजाब से, तीन केरल से, दो असम से और एक-एक हिमाचल, त्रिपुरा और नगालैंड से होगा। जिन सांसदों की जगह पर चुनाव होगा वे सभी 2 से 9 अप्रैल के बीच रिटायर हो रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने उन सभी सांसदों का नाम भी जारी किया है जिनका कि कार्यकाल पूरा हो गया है। असम से रानी नाराहा और रिपुण बोरा, हिमाचल प्रदेश से आनंद शर्मा, केरल से ए के एंटनी, एमवी श्रेयम्स कुमार और सोमाप्रसाद के, नगालैंड से केजी केन्ये, त्रिपुरा से झरना दास और पंजाब से सुखदेव सिंह, प्रताप सिंह बाजवा, श्वेत मलिक, नरेश गुजराल और शमशेर सिंह दुलो शामिल हैं।

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सरकार ने मेडिकल की पढ़ाई करने वालों के लिए लिया है बड़ा फैसला : पीएम मोदी

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जनऔषधि दिवस के मौके पर उन्‍होंने कहा कि जन औषधि केद्रों पर आठ सौ करोड़ रुपये की दवाएं बिकी हैं। उन्‍होंने कहा कि इसके तहत सरकार मध्‍यम वर्ग के लोगों की जेब का धन बचाकर उन्‍हें फायदा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इन केंद्र पर अब तक 21 करोड़ सैनेट्री नेपकींस बिक चुके हैं। ये एक रुपये में यहां से लिए जा सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में कोरोना रोधी वैक्‍सीन के लिए लोगों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। लेकिन भारत ने इसको सभी को फ्री में लगाने का फैसला किया। इस पर अब तक सरकार ने तीस हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकार ने फैसला किया है कि आधे निजी मेडिकल कालेज में अब सरकारी मेडिकल कालेज के बराबर ही फीस लगेगी। सरकार की कोशिश है कि हर जिले में एक बड़ा अस्‍पताल हो। सरकार ने कई दवाओं की कीमत को बेहद कम किया है। जन औषधि केंद्रों के मालिकों से बात कर रहे हैं। इस दौरान उन्‍होंने बिहार की महिला से बात कर उनसे इस बारे में जानकारी हासिल की। महिला ने बताया कि जन औषधि केंद्र से मिली दवाओं के चलते उन्‍हें काफी फायदा हो रहा है। ये सस्‍ती होने के साथ-साथ गुणवत्‍ता में भी अच्‍छी है। पीएम मोदी ने कहा कि मध्‍यम वर्ग की आमदनी का बड़ा हिस्‍सा दवाओं पर खर्च होता है। यदि दवाएं सस्‍ती हों तो सभी का लाभ होगा। इसलिए मध्‍यम वर्ग इसको आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। ओडिशा के सुरेश ने बताया कि उन्‍हें भी इससे काफी फायदा हुआ है। हर माह दवाओं पर खर्च होने वाला करीब दो से ढाई हजार रुपया अब बच जाता है। पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि वो ऐसी दवाओं के बारे में बताएंं जो दवाएं उन्‍हें जन औषधि केंद्र पर नहीं मिलती हैं। इसके जवाब में उन्‍होंने बताया कि ऐसी कोई दवाई नहीं है जो वहां पर नहीं मिलती हैं। कर्नाटक की बबीता से भी पीएम मोदी ने पूछा कि उन्‍हें इससे कैसे लाभ मिला। बबीता ने बताया कि वो इस योजना और इसके केंद्रों का लोगों के बीच जागरुक करती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वो सोशल मीडिया के जरिए इसका अधिक से अधिक प्रचार कर सकती हैं। गुजरात की उर्वशी से भी उन्‍होंने इसके लाभ के बारे में जानकारी हासिल की। इस मौके पर पीएम ने उनसे कहा कि वो पीएम आवास योजना का लाभ उठाने वालों के पास जाकर इस योजना के लिए उन्‍हें जागरुक करें। छत्‍तीसगढ़ के डाक्‍टर शैलेश की पीएम मोदी ने तारीफ की वो इस दिशा में काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मनसुख मांडविया समेत अन्‍य लोग भी शामिल हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में मांडविया ने कहा कि देश में मिलने वाली जेनेरिक दवाओं की कीमत 50-80 फीसद तक कम है और इनकी गुणवत्‍ता विश्‍व स्‍तर की है। पीएमओ से दी गई जानकारी के मुताबिक इस इवेंट को जन औषधि जन उपयोगी का नाम दिया गया है। इससे पहले किए गए अपने ट्वीट में पीएम मोदी ने इसको जन औषधि को मेडिसिन रिवोल्‍यूशन बताया था। आपको बता दें कि पूरे देश में एक मार्च से जन औषधि सप्‍ताह मनाया गया है। इस दौरान लोगों को इस बारे में जानकारी के साथ उनके बीच इसकी जागरुकता को बढ़ाने का भी काम किया गया है। जन औषधि परियोजना के तहत इसमें लोगों को जेनेरिक दवाओं के इस्‍तेमाल और इनके फायदे बताए गए। इस दौरान कई दूसरे इवेंट भी चलाए गए जिसमें जन औषधि संकल्‍प यात्रा, मैत्री शक्ति सम्‍मान, जन औषधि बाल मित्र, जन औ‍षधि जन जागरण अभियान, आओ जन औषधि मित्र बनाएं और जन औषधि जन आरोग्‍य मेला भी शामिल है। पीएम मोदी की दूर्गामी सोच पर आगे बढ़ते हुए इन दवाओं को न सिर्फ सस्‍ता किया गया है बल्कि लोगों तक इनकी पहुंच बनाने की भी पूरी कोशिश की गई है। पूरे देश में आज जन औषधि केंद्र के करीब 8600 स्‍टोर्स खुले हुए हैं जहां पर ये दवाएं आसानी से और सस्‍ती कीमत पर खरीदी जा सकती हैं। इसमें देश के लगभग हर जिले को शामिल किया गया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की शुरुआत पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को की थी।इस योजना के तहत सरकार द्वारा उच्च गुणमवत्ता वाली जैनरिक दवाईयों के दाम बाजार मूल्य से कम कर इन्‍हें बेचा जाता है। इसके लिए सरकार ने जन औषधि स्टोर। सरकार की योजना इनके स्‍टोर्स अगले कुछ समय में बढ़ाकर दस हजार करने की है, जिससे ये हर जन को आसानी से हासिल हो सकें।

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मतगणना से तीन दिन पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की अमित शाह से मुलाकात

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव की मतगणना से तीन दिन पहले पूर्व सीएम एवं पंजाब लोक कांग्रेस के प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह सोमवार को अचानक गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे। मतगणना से पहले हुई इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है। राज्य में मतगणना 10 मार्च को होनी है। चुनाव में पार्टी कितनी सीटें जीत सकती है इस बारे में पूछे जाने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह पंडित नहीं है। वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो भविष्यवाणी कर सकें। कैप्टन ने कहा कि उनकी मेरी पार्टी सहित भाजपा गठबंधन ने बेहतर किया है। देखते हैं क्या होता है। बता दें, कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी पंजाब में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ी है। राज्य में शिअद से अलग होने के बाद भाजपा सर्वाधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा जब शिअद के साथ गठबंधन में थी तो उसके हिस्से में 23 सीटें आती थी, लेकिन इस बार पार्टी ने 73 सीटों पर चुनाव लड़ा। अमित शाह से मुलाकात के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि अभी चुनाव परिणाम नहीं आए हैं। वह अमित शाह से मिलने आए थे। उनकी मुलाकात सामान्य थी। इस मुलाकात में पंजाब को लेकर चर्चा की गई। विस्तृत चर्चा चुनाव परिणाम आने के बाद की जाएगी। कैप्टन ने कहा कि इस मुलाकात में चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। इस दौरान पंजाब के हितों को लेकर चर्चा हुई है।

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मतगणना के दौरान सत्ताधारी दल 'अनुचित' तरीकों का इस्तेमाल कर सकता है : टिकैत

मुजफ्फरनगर (उप्र)। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में 10 मार्च को होने वाली मतगणना के दौरान सत्तारूढ़ दल 'अनुचित' तरीकों का इस्तेमाल कर मतगणना को प्रभावित कर सकता है।

 

बीकेयू नेता ने यहां नवीन मंडी इलाके का दौरा करने के बाद कहा कि 10 मार्च को होने वाली मतगणना के दौरान सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर सकती है। नवीन मंडी वह क्षेत्र है, जहां मतदान के बाद ईवीएम रखी जा रही हैं।

 

इस बीच, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त चुनाव अधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि वोटों की गिनती कड़ी सुरक्षा और चुनाव आयोग के निर्देश के तहत निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से की जाएगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पहले चरण में मुजफ्फरनगर, बुढाना, पिरकाजी, खतोली, मुरापुर और चरथवाल समेत छह विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी को मतदान हुआ था।

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रूस ने लोगों को निकालने के लिए यूक्रेन के दो शहरों में संघर्ष विराम की घोषणा की

लवीव (यूक्रेन), 05 मार्च (वेब वार्ता)। रूस के रक्षा अधिकारियों ने यूक्रेन के दो शहरों में अस्थायी तौर पर संघर्ष विराम की घोषणा की है, ताकि लोगों को वहां से निकाला जा सके। लेकिन एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि शनिवार को उनके इलाके में गोलाबारी जारी रही। रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह दक्षिण पूर्व में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह मारियूपोल और पूर्व में स्थित वोलनोवाखा शहर में लोगों को निकालने के लिए रास्ता देने को सहमत है। हालांकि, इस बयान में यह स्पष्ट नहीं था कि वे मार्ग कब तक खुले रहेंगे। पिछले कई दिनों से मारियूपोल में रूसी सेनाएं गोलाबारी कर रही हैं और बर्फीली सर्दी में वहां फंसे सैकड़ों लोगों के लिए बिजली, फोन, भोजन और पानी का संकट पैदा हो गया है। डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स नामक संस्था ने कहा कि शहर में दवाओं की भी कमी हो गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्थानीय समयानुसार शाम चार बजे तक संघर्ष विराम लागू रहना है और पूर्वाह्न 11 बजे लोगों को निकालने का कार्य शुरू किया गया। मारियूपोल, दोनेत्स्क सैन्य-नागरिक प्रशासन के तहत आता है। दोनेत्स्क प्रशासन के प्रमुख पाव्लो किरिलेंको ने कहा कि मानवीय सहायता गलियारा, शहर से जाफोरिझिया तक होगा, जो कि लगभग 140 किलोमीटर दूर है। मारियूपोल के उप महापौर सेरही ओरलोव ने बाद में बीबीसी को बताया कि रूसी सेना ने मारियूपोल पर गोलाबारी और रॉकेट से हमला करना जारी रखा है। उन्होंने कहा कि इसलिए लोग डरे हुए हैं और वे तीन स्थानों पर पर जा रहे हैं जहां से उन्हें बसों द्वारा निकाला जाएगा।

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नवाब मलिक मुसलमान होने के कारण दाऊद से जोड़ा जा रहा नाम: पवार

पुणे,। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को कहा कि पार्टी के नेता और राज्य सरकार में मंत्री नवाब मलिक की गिरफ्तारी ‘‘राजनीति से प्रेरित'' है और मुसलमान होने के कारण उनका नाम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जोड़ा जा रहा है। पवार ने मलिक के इस्तीफे की विपक्ष की मांग भी खारिज कर दी। मलिक को दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 23 फरवरी को गिरफ्तार किया था। 

 

राकांपा प्रमुख ने कहा कि मलिक की गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है। उनका नाम दाऊद इब्राहिम से इसलिए जोड़ा जा रहा है क्योंकि वह मुसलमान हैं। मलिक और उनके परिवार के सदस्यों को जानबूझ कर परेशान किया जा रहा है, लेकिन हम इसके खिलाफ लड़ेंगे। राज्य में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी द्वारा मलिक का इस्तीफा मांगे जाने के प्रश्न पर पवार ने कहा कि मलिक और केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे पर अलग-अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि राणे भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। पवार ने कहा कि मुझे याद नहीं आता कि हमारे (कांग्रेस) पूर्व पार्टी कार्यकर्ता नारायण राणे को हाल में गिरफ्तारी के बाद इस्तीफा देना पड़ा हो। 

 

प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) कल पुणे आ रहे हैं। वह इस पर ज्यादा जानकारी दे सकते हैं। राणे के लिए अलग मानदंड और मलिक के लिए अलग मानदंड दिखाता है कि यह राजनीति से प्रेरित है। पवार ने महाराष्ट्र के राज्यपाल बी. एस. कोश्यारी पर भी निशाना साधा। राज्यपाल ने महाराष्ट्र मंत्रीमंडल द्वारा एक वर्ष पहले उन्हें भेजे गए विधान परिषद के 12 सदस्यों के नामों को मंजूरी नहीं दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के पास पी. सी. एलेक्जेंडर जैसे राज्यपाल की विरासत है। मुझे इस पर बात नहीं करनी चाहिए कि वर्तमान राज्यपाल क्या कर रहे हैं। केन्द्र सरकार हर वो काम कर रही है जो वह कर सकती है और महाराष्ट्र इसका ताजा उदाहरण है।

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धोखाधड़ी मामले में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और अन्य के खिलाफ वारंट

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की एक अदालत ने बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और अन्य के खिलाफ वर्ष 2019 के धोखाधड़ी के एक मामले में शनिवार को वारंट जारी किया। उन पर नोटिस के बावजूद अदालत में पेश नहीं होने का आरोप है।

 

जिले के शिवपुरी निवासी इवेंट मैनेजर प्रमोद शर्मा ने 22 फरवरी 2019 को कटघर थाने में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा, अभिषेक सिन्हा, एडगर साकिया, मालविका पंजाबी और घुमिल ठक्कर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि वादी ने दिल्ली में आयोजित एक अवार्ड शो में सोनाक्षी सिन्हा को बुलाने के लिए अनुबंध किया था। उन्होंने सारी रकम अदा कर दी थी, लेकिन वह कार्यक्रम में नहीं पहुंचीं।

 

प्रमोद शर्मा के मुताबिक, उन्होंने सारा भुगतान एक्ससीड एंटरटेनमेंट के मालिक अभिषेक सिन्हा के जरिए सोनाक्षी सिन्हा को किया था। कुल 29.92 लाख रुपये का पेमेंट किश्तों में किया गया था, लेकिन अभिनेत्री सोनाक्षी इस कार्यक्रम में नहीं आईं थीं। मामले में प्रमोद शर्मा ने अदालत की शरण ली थी। अदालत ने मुरादाबाद के कटघर थाना पुलिस को सोनाक्षी सिन्हा और उनके साथियों के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।

 

आरोपितों के खिलाफ 20 मई 2020 को चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी गई थी। पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने में लगभग 455 दिन लग गए थे। वहीं अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और अन्य लोगों ने हाई कोर्ट की शरण ली, जो लंबित है। सोनाक्षी सिन्हा और अन्य आरोपितों को जिले के सीजेएम कोर्ट ने पेश होने के लिए कई बार नोटिस जारी किया, लेकिन वह और उनके साथी पेश नहीं हुए। इसके चलते शनिवार को अदालत ने सोनाक्षी और अन्य लोगों के खिलाफ वारंट जारी किया।

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ऐसे उम्मीदवार चुनें, जिनके डीएनए में सेवा का भाव हो : शाह

जौनपुर। गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मतदाताओं से ऐसे उम्मीदवारों को चुनने का आग्रह किया, जिनके ‘डीएनए में सेवा का भाव’ हो।

 

मल्हनी विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, “इस बार बाहुबलियों को मत जिताएं, बल्कि ऐसे उम्मीदवारों को विजयी बनाएं, जिसके डीएनए में सेवा का भाव हो और जो छीनना नहीं, बल्कि देना जानते हों।”

 

उन्होंने कहा कि एक या दो माफिया जो अभी भी जेल से बाहर हैं, उन्हें दस मार्च को भाजपा के दोबारा सत्ता में आने के बाद सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

 

मल्हनी विधानसभा सीट पर भाजपा के पूर्व सांसद केपी सिंह का मुकाबला जदयू के पूर्व सांसद एवं बाहुबली नेता धनजंय सिंह से है।

 

शाह ने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले जब मैं उत्तर प्रदेश की जनता से वोट मांगने आया था, तब भाजपा ने वादा किया था कि पांच साल में प्रदेश माफिया मुक्त हो जाएगा।

 

उन्होंने कहा, “आज अतीक अहमद, आजम खां और मुख्तार अंसारी जेल के अंदर हैं। एक या दो जेल से बाहर हैं। आप दस मार्च को कमल (भाजपा का चुनाव चिन्ह) खिलाएं और उसके बाद वे भी जेल में होंगे।”

 

गृहमंत्री ने दावा किया कि यूपी में भाजपा ने पिछले पांच वर्षों में अपराधियों को राजनीति से हटाने का काम किया है, जिससे राजनीति का अपराधीकरण समाप्त हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि यूपी में पहले के मुकाबले आपराधिक घटनाओं में कमी आई है और प्रदेश अपराध मुक्त बनने की राह पर आगे बढ़ा है।

 

शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2,000 करोड़ रुपये की भूमि को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया है और इस मुक्त भूमि पर गरीबों के लिए मकान बन रहे हैं।

 

सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “कोविड टीका आने के बाद अखिलेश ने कहा था कि मोदी वैक्सीन को नहीं लगवाना चाहिए, लेकिन उन्होंने खुद टीका लगवाया। जो नेता लोगों की जान की परवाह किए बिना राजनीतिक ‘खिचड़ी’ पकाने में लिप्त हैं, उन्हें एक पल के लिए भी सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है।”

 

प्रतिद्वंद्वी दलों पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा, “सपा-बसपा केवल गरीबों के बारे में बातें करती हैं, लेकिन मोदी और योगी ने उन्हें मजबूत बनाने का काम किया है। पूरे पूर्वांचल को सड़क मार्ग से जोड़ने और यूपी में एक्सप्रेसवे का जाल बिछाने का काम किया गया है।”

 

गृहमंत्री ने यह भी कहा कि मल्हनी और यूपी को गुंडों और बाहुबलियों द्वारा विकसित नहीं किया जा सकता है, भाजपा उम्मीदवार केपी सिंह मल्हानी का विकास कर सकते हैं।

 

जौनपुर में सातवें चरण के तहत सात मार्च को मतदान होना है।

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रेड कैटेगरी यूनिट के खरीदार ने 50 लाख रुपये जुर्माना हटाने की अपील की

नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रेड कैटेगरी यूनिट की संपत्ति खरीदने वाले एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि उसे 50 लाख रुपये की पर्यावरणीय कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन जब तक दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति मामले को सत्यापित करने की याचिका पर विचार नहीं करती, तब तक जुर्माना लागू नहीं किया जाएगा।

 

एनजीटी अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता तारा देवी ने कहा कि उनके खिलाफ आदेश का पालन किया जा रहा है और इससे वह दुखी हैं। याचिका के अनुसार, उसने संपत्ति के मालिक से 2009 में संपत्ति खरीदी थी, जहां वीनस डाइंग वर्क्‍स एक किरायेदार के रूप में काम कर रहा था। अपीलकर्ता द्वारा संपत्ति की खरीद के बाद इकाई ने काम करना बंद कर दिया। फिर भी, संपत्ति को अक्टूबर 2018 में सील कर दिया गया था।

 

24 फरवरी को पारित एनजीटी के आदेश में कहा गया है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के 5 जुलाई, 2020 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई है, जिसमें दिल्ली में वीनस डाइंग वर्क्‍स, हैदरपुर के खिलाफ 50 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि इकाई गैर-अनुरूप क्षेत्र में रेड श्रेणी की गतिविधि में लगी हुई थी। कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया।

 

एनजीटी के आदेश में कहा गया है, हमने इस मामले पर विचार किया है। जहां तक सीलिंग का संबंध है, एसडीएम के आदेश के खिलाफ ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील सुनवाई योग्य नहीं है। हम उस पहलू पर विचार नहीं कर रहे हैं, बल्कि इस तरह के मामले पर एक उपयुक्त मंच के समक्ष विचार किया जा रहा है। यहां तक कि मुआवजे के मुद्दे पर विचार नहीं किया जा सकता, क्योंकि अपीलकर्ता के खिलाफ कोई आदेश नहीं है। हालांकि, स्पष्टीकरण के माध्यम से अपीलकर्ता के खिलाफ आक्षेपित आदेश तब तक लागू नहीं किया जा सकता है, जब तक कि डीपीसीसी अपीलकर्ता के इस रुख को नहीं देखता कि उसे कथित कानून का उल्लंघन करने वाला - वीनस डाइंग वर्क्‍स से कोई सरोकार नहीं है, जिसके खिलाफ आक्षेपित आदेश पारित किया गया है। तदनुसार, मामले का निस्तारण कर दिया गया है।

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यूक्रेन से लौटे भारतीयों का एयरपोर्ट पर स्वागत करेंगे दो केंद्रीय मंत्री

नई दिल्ली जाने आलम (जानू चौधरी)। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और वी मुरलीधरन सरकारी चार्टर्ड उड़ानों के जरिये युद्धग्रस्त यूक्रेन से स्वदेश लौट रहे भारतीयों की हवाई अड्डों पर अगवानी करेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि गोयल शनिवार रात मुंबई हवाई अड्डे पर रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट से एयर इंडिया की उड़ान से आने वाले भारतीयों की अगवानी करेंगे, जबकि मुरलीधरन यूक्रेन से स्वदेश लौटने वाले लोगों की अगवानी के लिए दिल्ली एयरपोर्ट जाएंगे।

 

विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने बृहस्पतिवार को बताया था कि यूक्रेन में लगभग 16,000 भारतीयों के फंसे होने का अनुमान है, जिनमें अधिकतर छात्र शामिल हैं। वहीं, कीव स्थित भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को कहा था कि वह रोमानिया और हंगरी के रास्ते निकासी मार्ग स्थापित करने की कोशिशों में जुटा है। अधिकारियों ने बताया कि एयर इंडिया की पहली निकासी उड़ान यूक्रेन में फंसे 219 भारतीयों को लेकर शनिवार दोपहर बुखारेस्ट से मुंबई के लिए रवाना हुई। उन्होंने बताया कि विमानन कंपनी के दूसरे निकासी विमान ने शनिवार सुबह 11.40 बजे उड़ान भरी और इसके भारतीय समयानुसार शाम 6.30 बजे बुखारेस्ट पहुंचने की संभावना है।

 

अधिकारियों के मुताबिक, सड़क मार्ग से यूक्रेन-रोमानिया सीमा पर पहुंचे भारतीय नागरिकों को भारत सरकार के अधिकारियों द्वारा बुखारेस्ट ले जाया गया है, ताकि उन्हें एयर इंडिया की निकासी उड़ानों से स्वदेश भेजा जा सके। उन्होंने बताया कि पहली निकासी उड़ान एआई-1944 ने बुखारेस्ट से भारतीय समयानुसार दोपहर 1.55 बजे उड़ान भरी और इसके रात लगभग नौ बजे मुंबई हवाईअड्डे पर उतरने की उम्मीद है।

 

अधिकारियों के अनुसार, दूसरी निकासी उड़ान एआई-1942 के 250 अन्य भारतीय नागरिकों के साथ रविवार सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पहुंचने की संभावना है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्विटर पर बताया कि एआई-1944 ने 219 भारतीय नागरिकों के साथ रोमानिया से उड़ान भर दी है। उन्होंने कहा, “हम यूक्रेन से भारतीय नागरिकों की निकासी के मामले में प्रगति कर रहे हैं। हमारी टीमें 24 घंटे काम कर रही हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहा हूं।”

 

यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए एयर इंडिया शनिवार को बुखारेस्ट और हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के लिए और उड़ानें संचालित करेगी। मालूम हो कि यूक्रेन के हवाई क्षेत्र को 24 फरवरी की सुबह नागरिक विमानों के संचालन के लिए बंद कर दिया गया था। ऐसे में भारतीय नागिरकों को यूक्रेन से वापस लाने के लिए उड़ानें बुखारेस्ट और बुडापेस्ट के रास्ते संचालित की जा रही हैं।

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गुजरात में अपने ही नेताओं पर बरसे राहुल, बोले- एसी में बैठने वाले 'कौरवों' की सूची बनाएं

द्वारका/नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को गुजरात में अपनी पार्टी के नेताओं से पार्टी में मौजूद उन ''कौरवों'' की एक सूची तैयार करने के लिए कहा, जो सिर्फ ''अपने एसी कार्यालयों में बैठकर बातों के अलावा कुछ नहीं करते और दूसरों को परेशान करने में लगे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अंतत: भाजपा में चले जाते हैं। गांधी ने केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि उसके पास केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पुलिस और गुंडे हैं, लेकिन अंत में केवल सत्य मायने रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात ''भाजपा की राजनीति'' के कारण त्रस्त है।

 

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के पास राज्य में अगला विधानसभा चुनाव जीतने का एक अवसर है, लेकिन पार्टी लोगों को यह स्पष्ट दृष्टिकोण देने में विफल है कि सत्ता में आने के बाद वह क्या करने का इरादा रखती है। गांधी ने गुजरात कांग्रेस द्वारा आयोजित चिंतन शिविर के दूसरे दिन यहां पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। चिंतन शिविर का आयोजन इस साल दिसंबर में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार करने पर चर्चा के लिए किया गया है। कार्यक्रम स्थल पर आने से पहले, उन्होंने यहां द्वारकाधीश मंदिर पहुंचकर भगवान कृष्ण की पूजा की।

 

कांग्रेस नेता ने कहा, “उनके पास सीबीआई, ईडी, मीडिया, पुलिस, गुंडे और हर दिन के लिये नए-नए परिधान हैं। लेकिन वे चीजें बिल्कुल भी मायने नहीं रखतीं। गुजरात हमें सिखाता है कि सत्य क्या है। गांधी जी को देखिए। क्या उनके पास कभी अच्छे कपड़े थे, ईडी या सीबीआई थी? नहीं, क्योंकि सत्य सदैव साधारण होता है।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझना चाहिए कि वे पहले ही गुजरात विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। आप इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। गुजरात के लोग आपको बड़ी उम्मीदों से देख रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस को जितना नुकसान पहुंचाया है, उससे ज्यादा गुजरात के लोगों को पहुंचाया है।”

 

कांग्रेस के पुनरुद्धार और यहां आगामी चुनाव जीतने के लिए एक साहसिक दृष्टिकोण साझा करते हुए, गांधी ने उन नेताओं से छुटकारा पाने का सुझाव दिया जो ''वातानुकूलित कमरों में बैठते हैं और दूसरों को परेशान करते हैं।'' उन्होंने कहा, ''(लोगों तक दृष्टिकोण पहुंचाने को लेकर) असमंजस क्यों है? क्योंकि हमारे पास दो तरह के नेता हैं। एक वे जो जमीन पर रहते हैं और लड़ाई लड़ते है। दूसरे वे जो अपने एसी कार्यालयों में बैठे रहते हैं और बात करने व भाषण देने के अलावा कुछ नहीं करते। ऐसे नेताओं की सूची तैयार करें जो दूसरों को परेशान करते हैं। वे कौरव हैं। भाजपा उन्हें अपने पाले में ले जाएगी।''

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि गुजरात में अगले चुनाव में ''भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए'' उन्हें केवल पांच सक्षम नेताओं की जरूरत है। साल 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले गुजरात के अपने दौरे को याद करते हुए गांधी ने कहा कि स्थानीय नेतृत्व को शुरुआत में चुनाव में बहुत सीटें जीतने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की राज्य इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे कहा था कि कांग्रेस 182 में से केवल 40-45 सीटें जीतेगी।

 

राहुल ने कहा कहा, ''लेकिन अंत में हम चुनाव जीतने से सिर्फ सात सीटों से पीछे रह गए। मैं इस बार भी यही स्थिति देख रहा हूं। मैं आपको बता रहा हूं कि आप पहले ही यह चुनाव जीत चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा हमेशा ''गुजरात मॉडल'' का दावा करती है, लेकिन राज्य में कोविड-19 के कारण लगभग तीन लाख लोगों की जान चली गई और अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर व वेंटिलेटर की कमी के कारण लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।

 

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा, ''गुजरात भाजपा की राजनीति के कारण त्रस्त है। बेरोजगारी यहां एक प्रमुख मुद्दा है। छोटे व्यवसायों को कभी सबसे बड़ी ताकत के तौर पर गुजरात की रीढ़ माना जाता था। लेकिन प्रधानमंभी मोदी ने जीएसटी, नोटबंदी और महामारी के दौरान अपने कार्यों से इन्हें नष्ट कर दिया।'' उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अवसर है और लोग पार्टी को एक विकल्प के रूप में देखते हैं। पार्टी लोगों के सामने यह स्पष्ट दृष्टिकोण देने में विफल रही है कि ''कांग्रेस सत्ता में आने पर क्या करेगी, हम कैसे काम करेंगे और कौन से नेता करेंगे।''

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रूस-यूक्रेन संकट: राष्ट्रपति जेलेंस्की ने की पीएम मोदी से बात

नई दिल्ली। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। उन्होंने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट में कहा कि पीएम मोदी को रूस की आक्रामकता को लेकर यूक्रेन के रुख की जानकारी दी। एक लाख से अधिक रूसी आक्रमणकारी हमारे देश में हैं। वो आवासीय भवनों पर अंधाधुंध फायरिंग कर रहे हैं। हमने भारत से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में समर्थन देने का अनुरोध किया है।

 

पीएमओ के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से बात की। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को यूक्रेन में जारी संघर्ष की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने जारी संघर्ष के कारण जान-माल के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त की।

 

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि पीएम मोदी हिंसा की तत्काल समाप्ति और बातचीत के लिए अपने आह्वान को दोहराया और शांति प्रयासों के लिए हर तरह से योगदान करने की भारत की इच्छा व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने यूक्रेन में मौजूद छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत की गहरी चिंता से भी उन्हें (यूक्रेन के राष्ट्रपति) अवगत कराया। उन्होंने भारतीय नागरिकों को तेजी से सुरक्षित निकालने के लिए यूक्रेन के अधिकारियों द्वारा सुविधा प्रदान करने की मांग भी की।

 

भारतीय छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं, दूतावास के संपर्क में रहें: केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूक्रेन में फंसे ढेरों छात्रों और उनके परिजनों को आश्वासन देते हुए कहा कि घबराने की बिल्कुल सभी छात्र दूतावास के संपर्क में बने रहे। केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट किया, मैं भारतीय छात्रों जल्द से जल्द वापस लाने का आश्वासन देता हूं। विदेश मंत्रालय लगातार आवश्यक व्यवस्था कर रहा है। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। छात्र दूतावास के संपर्क में रहें और हर दिशा-निर्देश का पालन करें।

 

वहीं, यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को एडवाइजरी जारी कर अपने नागरिकों से बॉर्डर पोस्ट पर नहीं जाने की अपील की है। दूतावास ने कहा, भारत सरकार के अधिकारियों के साथ पूर्व समन्वय के बिना किसी भी बॉर्डर पोस्ट पर न जाएं। हम भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए पड़ोसी देशों में स्थित अपने दूतावासों के साथ काम कर रहे हैं।

 

भारतीय नागरिकों का स्वागत करेंगे पीयूष गोयल

यूक्रेन से सुरक्षित निकाले गए भारतीय नागरिकों का मुंबई हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल स्वागत करेंगे। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया कि सरकार हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है।

 

भारतीय छात्रों का वीडियो वायरल

इस बीच हंगरी पहुंचने के बाद भारतीय छात्रों ने कहा कि बुडापेस्ट के भारतीय दूतावास ने हमें सीमा पार करने में बहुत मदद की है। हम बहुत खुश हैं और हम अच्छे की उम्मीद करते हैं।

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भड़काऊ भाषण मामले में जितेन्द्र नारायण उर्फ वसीम रिजवी को फिलहाल राहत नहीं

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय से तथाकथित भड़काऊ भाषण मामले में जेल में बंद जितेन्द्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को फिलहाल राहत नहीं मिल पायी है। अदालत ने अब सरकार से सह आरोपी यति नरसिंहानंद के आपराधिक रिकार्ड की जानकारी तलब की है।

 

जितेन्द्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को हरिद्वार पुलिस ने इसी साल 13 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उन पर हरिद्वार धर्म संसद मामले में एक धर्म विशेष के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। वह तभी से जेल में बंद हैं। उन्होंने इसके बाद जमानत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की पीठ में उनके प्रार्थना पत्र पर सुनवाई चल रही है। 

 

शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास है। उनके खिलाफ 30 से अधिक मामले में दर्ज हैं। इनमें संगीन धाराएं भी शामिल हैं। आरोपी की ओर से प्रतिवाद करते हुए कहा गया कि सभी मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं और वह शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे हैं। उनके विरोधियों की ओर से उनके खिलाफ झूठे अभियोग दर्ज किये गये हैं। वह किसी भी मामले में दोषी सिद्ध नहीं हुए हैं। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज मामलों से संबंधित रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा। इसके बाद भी उन्हें जमानत नहीं मिली।

 

23 फरवरी को इस मामले में फिर सुनवाई हुई और आरोपी की ओर से जमानत की मांग करते हुए कहा गया कि इसी मामले में सह आरोपी यति नरसिंहानंद को हरिद्वार की निचली अदालत से जमानत मिल गयी है। इसके बाद अदालत ने सरकार को निर्देश दिए कि सह आरोपी से जुड़े आपराधिक मामलों की जानकारी 4 मार्च तक अदालत में पेश करें।

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सीएम जयराम ठाकुर बोले, यूक्रेन से आने वालों को घर तक फ्री में पहुंचाएगी हिमाचल सरकार

शिमला। यूक्रेन से स्वदेश लौटने वाले सभी हिमाचल के छात्रों व लोगों को हिमाचल सरकार मुफ्त में घर पहुंचाएगी। इसके लिए दिल्ली स्थित आवासीय आयुक्त कार्यालय की ओर से व्यवस्था की जाएगी। यह जानकारी विधानसभा में सीएम जयराम ठाकुर ने दी। उन्होंने कहा कि इसके लिए एचआरटीसी और एचपीटीडीसी की बसों का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूक्रेन से दो हवाई जहाज हिमाचल के युवाओं को लेकर दिल्ली पहुंचने वाले हैं। इन हवाई जहाजों में दूसरे राज्यों के लोग भी शामिल हैं। सरकार के पास यूक्रेन में कितने छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, यह आंकड़ा उपलब्ध नहीं हैं। अभी तक 130 युवाओं की जानकारी उपलब्ध है। 

 

बंकर में रह रहे 120 भारतीय छात्र : यूक्रेन में फंसे सुंदरनगर के महादेव निवासी रोहित ने बताया कि वीनीतिशिया यूनिवर्सिटी में उनको बंकर में रहने को कहा है। लगभग 120 भारतीय उनके बंकर में है। सुबह खाना होस्टल रूम में बनाने के बाद वापस बंकर में आ जाते हैं। यूनिवर्सिटी दो सप्ताह के लिए बंद कर दी है। जिस एजेंसी के माध्यम से वह आए हैं, उनका एजेंट भी हमारे साथ है, लेकिन उनको कब निकाला जाना है, इसके बारे में कुछ नहीं बताया गया है। करीब 400 किलोमीटर सफर के बाद वह रोमानिया पहुंचेंगे, लेकिन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है।

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सांख्यिकी प्रणाली को बेहतर बनाकर जनहित में करेंगे उपयोग : शिवराज

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में सांख्यिकीय प्रणाली के कामकाज के सही मूल्यांकन और नीति निर्माण में डेटा की गुणवत्ता और प्रणाली में सुधार के लिए गठित टॉस्क फोर्स की अनुशंसाओं पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। चौहान आज यहां मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. अमिताभ कुंडू की अध्यक्षता में गठित कुंडू टॉस्क फोर्स (समिति) द्वारा प्रतिवेदन सौंपे जाने पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय प्रणाली को बेहतर बनाकर जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

 

चौहान ने प्रो. अमिताभ कुंडू द्वारा सौंपे गए प्रतिवेदन का लोकार्पण किया। टॉस्क फोर्स द्वारा दी गई रिपोर्ट में राज्य सांख्यिकी आयोग के गठन की अनुशंसा भी शामिल है। यह आयोग इस क्षेत्र में तकनीकी मार्गदर्शन का कार्य करेगा। इस मौके पर वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा, मध्यप्रदेश राज्य नीति एवं योजना आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. सचिन चतुर्वेदी, टॉस्क फोर्स के सदस्य प्रो. गणेश कवाड़िया, अमिताभ पंडा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव जनसंपर्क राघवेन्द्र कुमार सिंह और आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी और टॉस्क फोर्स के संयोजक अभिषेक सिंह उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं के निर्माण और केन्द्र सरकार से धन राशि के आवंटन के लिए प्रामाणिक आंकड़े आवश्यक होते हैं। जीडीपी के आकलन और परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भी ये आंकड़े उपयोगी होते हैं। कुंडू टॉस्क फोर्स का गठन कर इसके आवश्यक अध्ययन और शोध की व्यवस्था की गई। इससे राज्य और जिला स्तर पर वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, नागरिकों और विशेषज्ञों के लिए प्रकाशनों को व्यापक, सुलभ एवं सुपाठ्य बनाने के लिए नए और अभिनव उपाय सुझाना भी आसान होगा।

 

चौहान ने कहा कि गत दो माह में प्रदेश के 10 लाख लोगों को विभिन्न रोजगार से जोड़ने में सफलता मिली है। महिला स्व-सहायता समूह भी अच्छा कार्य कर रहे हैं। कुंडू समिति के प्रतिवेदन में प्रदेश में हुई इस ग्रोथ का भी उल्लेख है। इसके अलावा अन्य अनुशंसाओं में सांख्यिकीय विभाग के कर्मचारियों को सर्वेक्षण, आय अनुमान, सांख्यिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया है। 

 

राज्य में नमूना सर्वेक्षणों की क्षमता और गुणवत्ता में सुधार के लिए नमूना सर्वेक्षणों को डिजाइन और संचालित करने की योजना, राज्य स्तर पर नमूना सर्वेक्षण विंग बनाने की जरूरत का भी उल्लेख है। डेटा प्रबंधन प्रणालियों का आधुनिकीकरण टॉस्क फोर्स के उद्देश्यों में से एक है। उन्होंने कहा कि सही डेटा राज्य के जीडीपी के आकार और आकलन के साथ ही संपूर्ण व्यवस्था को सशक्त बनाने में मदद करेगा। उन्होंने टॉस्क फोर्स को सिर्फ पांच माह की अवधि में प्रतिवेदन तैयार कर सौंपने के लिए धन्यवाद दिया।

 

टॉस्क फोर्स के अध्यक्ष प्रो. अमिताभ कुंडू ने कहा कि जिलों में भ्रमण और विभिन्न बैठकों के बाद प्रतिवेदन तैयार किया गया है। नीति निर्धारण में यह प्रतिवेदन सहयोगी होगा। प्रो. कुंडू ने कहा कि मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अच्छी प्रगति है। मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम जरूरतमंदों के लिए सहारा बन रहे हैं। प्रदेश में सांख्यिकी संकलन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए राज्य सांख्यिकी आयोग के गठन की अनुशंसा की गई है। साथ ही राज्य स्तरीय डाटा रेसेर्वियार की स्थापना की बात भी कही गई है, जिसमें समस्त विभागों के डाटा संकलन का कार्य योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मुख्यालय में हो सके।

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यूक्रेन के विदेश मंत्री ने जयशंकर को फोन किया, स्थिति पर चर्चा की

नई दिल्ली जाने आलम (जानू चौधरी)। यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में महत्वपूर्ण मतदान से पहले इस पूर्वी यूरोपीय देश के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से फोन पर बात की और यूक्रेन की वर्तमान स्थिति को लेकर अपना आकलन साझा किया।

 

जयशंकर ने कहा कि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत समाधान के लिए कूटनीति और बातचीत का समर्थन करता है।

 

विदेश मंत्री जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा का कॉल आया । उन्होंने वर्तमान स्थिति को लेकर अपना आकलन साझा किया । ’’

 

जयशंकर ने कहा, ‘‘ मैंने इस बात पर जोर दिया कि भारत समाधान निकालने के लिए कूटनीति और बातचीत का समर्थन करता है ।’’

 

उन्होंने कहा कि छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की स्थिति के बारे में चर्चा की तथा सुरक्षित निकासी में उनके सहयोग की सराहना की ।

 

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियान एवं पूर्वी यूरोपीय देश में स्थिति बिगड़ने को लेकर शुक्रवार की शाम को मसौदा प्रस्ताव पेश किया जाना निर्धारित है। समझा जाता है कि मसौदा प्रस्ताव में यूक्रेन के खिलाफ रूस के सैन्य अभियान की कड़ी निंदा की जाएगी।

 

इधर, यूक्रेन में बिगड़ती स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से टेलीफोन पर बातचीत की थी और हिंसा को समाप्त करने तथा सभी पक्षों से राजनयिक बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की थी ।

 

वहीं, यूक्रेन संकट पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने बृहस्पतिवार को कहा था, ‘‘मुझे बताया गया है कि इसमें काफी बदलाव होगा। हम इस पर अपना रुख रखने से पहले इसके आकार लेने का इंतजार करेंगे।’’

 

उन्होंने कहा था, ‘‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य होने के नाते और ऐसा देश होने के नाते, जिसका उस क्षेत्र में काफी कुछ दांव पर लगा है, जिसके अनेक नागरिक संवेदनशील क्षेत्रों में हैं, हम सभी संबंधित पक्षों के निकट संपर्क में हैं।’’

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प्रियंका बोलीं- पीएम को यूक्रेन में युद्ध की जानकारी है,लेकिन यूपी में आवारा पशुओं की समस्या के बारे में नहीं

अमेठी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण के लिए आज शाम यानी 25 फरवरी को 12 जनपदों की 61 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार थम जाएगा। सभी राजनीतिक दलों के सियासी दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी है। पांचवें चरण में अमेठी, रायबरेली, सुल्तानपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, बाराबंकी, अयोध्या, बहराईच समेत कई अन्य महत्वपूर्ण सीटें हैं। इसके लिए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी अमेठी पहुंचे। जगदीशपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने आवारा पशुओं की समस्या को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साथा। प्रियंका गांधी ने कहा, ''पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें आवारा पशुओं की समस्या के बारे में नहीं पता, 5 साल से क्या कर रहे थे? उन्हें यूक्रेन में युद्ध की जानकारी है, उन्हें कोविड के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की खांसी के बारे में पता था, लेकिन उन्हें किसानों की इस समस्या का पता नहीं था?'' प्रियंका ने कहा, आप (जनता) अपनी परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार हैं। आप भटक जाते हैं और आंखें बंद करके वोट करते हैं। आपका वोट एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, बुद्धिमानी से चुनें क्योंकि आपको अगले 5 वर्षों तक पछताना पड़ सकता है। यह आपके विकास का समय है। प्रियंका ने पूछा, इन 5 सालों में कितनों को रोजगार मिला है?, इन्होंने जो जानबूझकर 12 लाख सरकारी पदों को खाली रखा है उसे हम सबसे पहले भरेंगे। इसकी हमने पूरी लिस्ट बनाई हुई है। इसके अलावा हम 8 लाख नए रोज़गार देंगे। राहुल गांधी ने कहा कि भारत के रोजगार क्षेत्र की रीढ़ को पीएम नरेंद्र मोदी और उनके दोस्तों ने तोड़ा है। आप देखेंगे कि आने वाले समय में इस देश के युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा, आप जितना चाहें, उन्हें पढ़ाएं। कोविड के दौरान किसी ने मेरी नहीं सुनी, लेकिन आपने गंगा में शव देखे। राहुल ने कहा कि जब वे (भाजपा) कहते हैं कि हमारे 70 वर्षों में कुछ नहीं हुआ, तो उनका वास्तव में मतलब था कि इन 70 वर्षों में अंबानी, अडानी के लिए कुछ नहीं हुआ। याद रखें, भारत के सबसे बड़े अरबपति रोजगार नहीं देते, छोटे दुकानदार, व्यापारी और किसान करते हैं।

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बहू बेटी की सुरक्षा करना योगी क्या जाने : जया

कौशांबी। यूपी के सिरथू में चुनाव प्रचार कर रही समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जोरदार निशाना साधा है। उन्‍होंने कहा,’ये भूल जाते हैं कि आपके जो मुख्यमंत्री (योगी) हैं, उन्होंने तो परिवार को त्याग दिया है। वे परिवार के बारे में क्या जानते हैं? वे क्या जानते हैं बहू, बेटी क्या होती हैं? ये लोग झूठ के सिवाय कुछ नहीं बोलते हैं। मुंबई की भाषा में इन्हें फेकूचंद कहते हैं। सिर्फ फेकते रहते हैं, लेकिन काम कुछ नहीं करते हैं।

 

जया ने कहा कि मैं 15 साल पार्लियामेंट में रहीं हूं, इन्होंने झूठ के सिवाय कुछ नहीं कहा है। जब ये सत्ता में है और जब ये सत्ता में नहीं थे, इन्होंने कभी भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक शब्द भी नहीं बोला है। इसके साथ कहा कि मुझे लगता है कि समय बदल रहा है। लोगों को देखो, उनका उत्साह, आप माहौल के बारे में बता पाएंगे। वे महिला सुरक्षा के बारे में बात करते हैं लेकिन झूठ के अलावा कुछ नहीं जानते। आप पिछले 5 वर्षों में यूपी में महिलाओं पर अत्याचार के बारे में जानते हैं, नहीं यह कहने की जरूरत है।

 

जया बच्चन ने सिराथू में कहा कि मेरा जन्म एमपी में एक बंगाली परिवार में हुआ था और यूपी में शादी हुई थी। मेरी बेटी ने एक पंजाबी से शादी की और बेटे ने एक दक्षिण भारतीय से शादी की है। हमारे परिवार में जातिवाद या क्षेत्रवाद जैसा कुछ नहीं है। ‘गंगा किनारे का छोरा’ हमेशा गंगा का रहेगा। वह मुंबई के समुद्र का नहीं हो सकता है। इसके साथ जया ने खुद को यूपी की बड़ी बहू बताते हुए कहा कि अपने भैया का भी लाज रख लीजिएगा। उन्होंने अमिताभ बच्‍चन का नाम लिए बिना कहा, ‘गंगा किनारे वाला जो छोरा है उसकी लाज तो आपको रखनी होगी।

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बिरला ने यूक्रेन में फंसे छात्रों के लिए शुरू की हेल्पलाइन

नई दिल्ली जाने आलम (जानू चौधरी)। यूक्रेन में फंसे स्टूडेंट्स की मदद के लिए कोटा समेत प्रदेश और देश पूरी तरह सक्रिय हो गया है. इसी कड़ी में अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का नाम भी जुड़ गया है. खबर के मुताबिक, यूक्रेन में फंसे छात्रों के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का कैंप कार्यालय सक्रिय हो गया है. ओम बिरला ने इन छात्रों के लिए हेल्पलाइन सेंटर बनवाया है. इस हेल्पलाइन सेंटर के नंबर जारी करने के बाद कोटा और राजस्थान के छात्रों को घर वापस लाने को लिए उनकी डिटेल मांगी गई है. साथ ही, राजस्थान के अलावा देश के विभिन्न राज्यों के यूक्रेन में फंसे स्टूडेंट्स की घर वापसी के लिए उनकी डिटेल मांगी गई हैं. फिलहाल, यह कैंप कार्यालय भारतीय दूतावास और इन छात्रों के बीच कड़ी का भी काम कर रहा है. कोटा के शक्तिनगर स्थित कैंप कार्यालय से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के कार्यालय के यूक्रेन संकट के बीच पूरी ताकत से काम कर रहा है. आपको बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर अमेरिका भारत से बात करेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार को कहा कि रूसी सैन्य अभियान के बाद गहराए यूक्रेन संकट पर वह भारत के साथ विचार-विमर्श करेंगे. दरअसल, यूक्रेन संकट पर व्हाइट हाउस में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया था. इस दौरान जब राष्ट्रपति से पूछा गया कि क्या भारत रूसी हमले पर अमेरिका के साथ पूरी तरह खड़ा है? तो इसके जवाब में उन्होंने विचार-विमर्श की बात कही है. गौरतलब है कि रूस की सेना द्वारा यूक्रेन पर मिसाइल से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया है. इसे हमले से यूक्रेन पढ़ाई करने गए हजारों भारतीय बच्चों की जान संकट में आ गई है. हमले के बाद यूक्रेन को नो फ्लाई जोन घोषित कर दिया गया है. इसे वहां फंसे सभी बच्चों की मदद के रास्ते बंद हो गए हैं.

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हत्या के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू से जवाब मांगा (अपडेट)

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने करीब साढ़े तीन दशक पुराने एक अपराधिक मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से सजा का दायरा बढ़ाने की अर्जी पर शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से पूछा आखिर उन्हें अधिक गंभीर श्रेणी के अपराध के लिए दंडित क्यों नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उनकी सजा बढ़ायी जा सके। न्यायालय ने श्री सिद्धू को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने एक पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद श्री सिद्धू को जवाब दाखिल करने की अनुमति दी। पीड़ित पक्ष की अर्जी पीठ ने श्री सिद्धू से जवाब दाखिल करने को कहा है कि आखिर उन्हें अधिक गंभीर श्रेणी के अपराध के लिए दंडित क्यों नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उनकी सजा में वृद्धि की जा सके।

सर्वोच्च अदालत न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर (सेवानिवृत्त) द्वारा लिखित अपने 15 मई 2018 के फैसले से संबंधित एक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस फैसले में श्री सिद्धू पर सिर्फ 1000 रुपये जुर्माना किया गया था।

शीर्ष अदालत ने केवल सजा के बिंदु 11 सितंबर 2018 पर श्री सिद्धू को नोटिस जारी किया था। उन्होंने अपने जवाब में अदालत से नरमी बरतने की गुहार लगाते हुए कहा है कि वह उसे पूर्व के सार्वजनिक जीवन में आदर्श व्यवहार को आधार मानते हुए उसे जेल की सजा न दें।

शीर्ष अदालत द्वारा श्री सिद्धू को दिए गए आर्थिक दंड को नाकाफी सजा मानते हुए पीड़ित गुरनाम सिंह के पुत्र ने इस साल पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

पीड़ित पक्ष की ओर से पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान एक आवेदन कर सजा का दायरा बढ़ाने की गुहार लगाई गई। पुनर्विचार याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए सिद्धार्थ लूथरा ने मौत का कारक श्री सिद्धू एवं अन्य के साथ हुए झगड़े को बताते हुए सजा का दायरा गैर इरादतन हत्या की श्रेणी की सजा तक बढ़ाने की गुहार लगाई। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि पीड़ित को एक जोरदार झटका दिया गया था जिसके बाद उसकी मौत हुई। मौत का कारण सिर्फ हृदय गति रुकना मानना सही नहीं है।

पूर्व क्रिकेटर सिद्धू का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने लूथरा की दलीलों का जोरदार विरोध किया। श्री चिदंबरम ने कहा कि पूरे मामले पर फिर से विचार करना न्याय संगत नहीं होगा।

पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद श्री सिद्धू को पीड़ित पक्ष की ओर से दायर नई अर्जी पर अपना जवाब दाखिल करने का समय देते हुए अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने तीन फरवरी को श्री चिदंबरम की गुहार पर पुनर्विचार याचिका की सुनवाई 25 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी थी।

पंजाब में 1988 में सड़क पर हुए झगड़े के दौरान श्री सिद्धू द्वारा कथित रूप से मुक्का मारे जाने से 65 वर्षीय गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया गया था। इस मामले में शीर्ष न्यायालय ने 15 मई 2018 के अपना फैसला दिया था। इसमें श्री सिद्धू को झगड़े में शामिल होने का दोषी मानते हुए सजा के तौर पर 1000 रुपए का जुर्माना किया गया था।

मृतक के पुत्र ने अदालत के इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत का 2018 यह फैसला 'रिछपाल सिंह मीणा बनाम घासी' (2014) के मामले में पिछले फैसले पर विचार करने में विफल रहा। उक्त मामले में, शीर्ष अदालत ने कानून के सवाल पर विचार किया, और "इस विचार का था कि जब किसी इंसान की मृत्यु होती है, तो यह या तो गैर इरादतन हत्या (हत्या के बराबर या नहीं) हो सकती है या गैर इरादतन हत्या हो सकती है। आगे यह माना गया कि "जीवन को प्रभावित करने वाले अपराध" "चोट के अपराध" से अलग हैं और यदि चोट का परिणाम मृत्यु, इरादा या अनजाने में होता है, तो अपराध जीवन को प्रभावित करने वाले अपराध की श्रेणी में आएगा।

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योगी के बयान पर प्रियंका गांधी का पलटवार:बोलीं- मैं अपने भाई के लिए जान दे सकती हूं

नई दिल्ली : कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पलटवार किया है। पंजाब के कोटकपुरा में प्रियंका ने कहा, 'मैं अपने भाई के लिए जान दे सकती हूं। मेरा भाई भी मेरे लिए जान दे सकता है तो विवाद कौन सा? उन्होंने भाई राहुल के साथ किसी भी तरह के विवाद को एक सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, योगी जी के मन में विवाद है। लगता है वो शायद उस विवाद की बात कर रहे हैं, जो उनके और मोदी-शाह के बीच हैं।

दरअसल, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 12 फरवरी को ट्वीट कर कहा था कि भाई-बहन के आपसी विवाद और वर्चस्व के कारण कांग्रेस डूब जाएगी। उनके इस बयान पर प्रियंका गांधी ने पलटवार किया है।

टिहरी की जनसभा में कसे थे योगी ने तंज
दरअसल, उत्तराखंड की टिहरी में बीते शनिवार को जनसभा के दौरान सीएम योगी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा था कि कांग्रेस तो पूरे देश के अंदर डूब रही है। जहां थोड़ा वजूद था भी, वहां पर डुबाने के लिए दोनों भाई-बहन पर्याप्त हैं, किसी तीसरे की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने जनता से कहा कि इसलिए क्यों उस डूबते हुए जहाज में बैठोगे। डूबते हुए जहाज में नहीं बैठना चाहिए। उसे उसके हाल पर छोड़ देना चाहिए।

सीएम योगी आदित्यनाथ यही नहीं रुके। उन्होंने इसे लेकर एक ट्वीट भी कर दिया। जिसमें उन्होंने लिखा- भाई-बहन के आपसी विवाद और वर्चस्व के कारण कांग्रेस डूब जाएगी।

प्रियंका गांधी ने यूपी में लड़की हूं, लड़ सकती हूं...जैसा नारा दिया है। उन्होंने चुनाव में प्रत्याशियों में से 40% महिलाओं को टिकट देने का निर्णय लिया था। उन्होंने हाथरस, उन्नाव कांड की पीड़ित महिलाओं को चुनावी टिकट दिया है।

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विवाद पर बोले आरिफ मोहम्मद, कहा- ये मुस्लिम महिलाओं को घर में कैद करने की साजिश

नई दिल्ली: कर्नाटक हिजाब विवाद को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कॉलेज परिसर में हिजाब न पहनने देने को मुस्लिम महिलाएं अपने मौलिक अधिकारों का हनन बता रही हैं। अब इस मामले पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने हिजाब को मुस्लिम महिलाओं को प्रताड़ित करने का तरीका बताया है।

बच्चियों को जमीन में दफना देते थे मुस्लिम
उन्होंने कहा कि अरब देशों में एक समय था, जब लोग बच्चियों के जन्म लेते ही उन्हें जमीन में दफन कर देते थे। फिर इस्लाम ने इसे बंद कर दिया, लेकिन वहां यह मानसिकता आज 21वीं सदी में भी कायम है। पहले उन लोगों ने तीन तलाक का आविष्कार किया, फिर हिजाब और फिर मुस्लिम महिलाओं का प्रताड़ित करते रहने के लिए अन्य तरीके ईजाद कर लिए।

वे नहीं चाहते कि मुस्लिम महिलाएं आगे बढ़ें
आरिफ मोहम्मद ने कहा कि मुझे लगता है कि हिजाब को लेकर जो भी हो रहा है, ये विवाद नहीं है। मुझे यह एक साजिश मालूम होती है, जिसका मकसद मुस्लिम महिलाओं को उनके घरों के भीतर हीकैद करना है। आज मुस्लिम महिलाएं, लड़कों की तुलना में आगे हैं और यह विवाद उन्हें पीछे धकेलने के लिए है। 

देश के कई हिस्सों में शुरू हुए विवाद, लगातार हो रही बयानबाजी
कर्नाटक के उडुपी जिले के एक कॉलेज में मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर आने से रोकने के बाद विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद यह विवाद राज्य के अन्य एरिया में भी फैल गया। हिंदू संगठनों से जुड़े छात्रों ने बदले में भगवा शॉल पहनकर हिजाब वाली छात्राओं को रोकना शुरू कर दिया। इसे लेकर हिंसक तनाव बनने के बाद राज्य सरकार ने सभी तरह के धार्मिक पहचान वाले कपड़े पहनने स्कूल-कॉलेजों में पहनने पर रोक लगा दी। कुछ लोगों ने कर्नाटक सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

इसके बाद देश के कई अन्य राज्यों में भी हिजाब के कारण छात्राओं को कॉलेजों में एंट्री नहीं दिए जाने के विवाद सामने आए हैं। इसे लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार भड़काऊ बयान भी सामने आ रहे हैं। राजनेता भी अपने-अपने तरीके से बयान दे रहे हैं।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्कूल-कॉलेजों में फिलहाल धार्मिक पहचान वाले कपड़े, चाहे वह भगवा शॉल हो या हिजाब, नहीं पहनने का अंतरिम आदेश जारी किया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके बाद से ही देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।


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उत्तराखंड : भाजपा के सामने सरकार को बरकरार रखने की चुनौती, कांग्रेस वापसी की कोशिश में

नई दिल्ली। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है। राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में सोमवार यानी 14 फरवरी को मतदान होना है। इस चुनाव में जहां भाजपा के सामने अपनी सरकार को बरकरार रखने की चुनौती है वहीं कांग्रेस राज्य की सत्ता में वापसी की पुरजोर कोशिश कर रही है। राज्य के गठन के बाद से ही प्रदेश में हर चुनाव में सत्ता बदलती रही है और इसलिए कांग्रेस को इस बार अपनी जीत का भरोसा है जबकि भाजपा लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाने का दावा कर रही है। इस चुनाव में एक तरफ भाजपा है जो अपने वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सामने रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के सहारे चुनाव लड़ रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस है जिसने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा साफ तौर पर तो नहीं की है कि लेकिन यह माना जा रहा है कि कांग्रेस की तरफ से हरीश रावत ही यह चुनाव लड़ रहे हैं और लड़ा भी रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की तरफ से लगातार सुनाई दे रहे विरोध के सुरों के बीच उत्तराखंड का यह चुनाव कांग्रेस आलाकमान और गांधी परिवार के लिए प्रतिष्ठा का विषय भी बन गया है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती 30 प्रतिशत के उस वोट के अंतर को पार कर भाजपा को हराना है , जिसके सहारे भाजपा ने 2019 के लोक सभा चुनाव में राज्य की सभी 5 सीटों पर कब्जा जमा लिया था। दरअसल 2014 के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच लगातार बढ़ता जा रहा मतों का अंतर कांग्रेस के लिए एक बड़ी चिंता का सबब है और इसका समाधान ढूंढे बिना राज्य में भाजपा को हराना मुमकिन नहीं है। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मत प्रतिशत और सीट को लेकर बहुत ज्यादा अंतर नहीं था। 2012 में कांग्रेस ने 33.79 प्रतिशत मतों के साथ 32 सीटों पर जीत हासिल की थी और भाजपा को 33.13 प्रतिशत मतों के साथ 31 सीटों पर जीत मिली थी। उस समय कांग्रेस ने अन्य दलों के साथ मिलकर राज्य में सरकार का गठन कर लिया था। लेकिन इसके बाद से मत प्रतिशत और सीट , दोनों ही मामलों में कांग्रेस लगातार भाजपा से पिछड़ती जा रही है। 2014 के लोक सभा चुनाव में 56 प्रतिशत के लगभग मत पाकर भाजपा ने राज्य की सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में कांग्रेस का मत प्रतिशत थोड़ा बढ़कर 34.4 प्रतिशत तक पहुंचा था लेकिन उसे एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो पाई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में 46.51 प्रतिशत मतों के साथ भाजपा ने राज्य की 70 में से 56 सीटों पर जीत हासिल कर कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। इस चुनाव में 33.49 प्रतिशत मतों के साथ कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ 11 सीटें ही आ पाई थी। 2019 के लोक सभा चुनाव में दोनों दलों के बीच मतों का यह अंतर और ज्यादा बढ़ गया। इस चुनाव में 61.66 प्रतिशत मत पाकर भाजपा ने एक बार फिर से राज्य की सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया वहीं कांग्रेस का मत प्रतिशत घट कर 31.73 प्रतिशत ही रह गया। यानि 2019 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच मत प्रतिशत का अंतर बढ़कर 30 प्रतिशत के लगभग पहुंच गया। हालांकि यह बात भी सही है कि लोक सभा और राज्य विधानसभा चुनाव का गणित काफी अलग होता है लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस के लिए 30 प्रतिशत मतों का यह अंतर पाटे बिना राज्य में सरकार बनाना संभव नहीं है। इन दोनों दलों की निगाहें आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पर भी लगी हुई है। आप इन दोनों दलों में से किसके वोट बैंक में ज्यादा सेंध लगा पाता और बसपा अपनी पुरानी ताकत फिर से हासिल कर पाती है या नहीं , इस पर भी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का नतीजा काफी निर्भर होने जा रहा है।

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कांग्रेस ने पंजाब चुनावों के प्रबंधन के लिए वरिष्ठों पर दांव लगाया

नई दिल्ली। कांग्रेस पंजाब में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है, क्योंकि उसके लिए आम आदमी पार्टी (आप) सबसे प्रमुख खतरे के रूप में उभर रही है। इसके बाद शिरोमणी अकाली दल और भाजपा-पीएलसी से पार्टी को चुनौती मिल रही है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चुनावों की निगरानी के लिए और राज्य में अंतिम मिनट की गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए उतारा गया है। पार्टी प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र का सूक्ष्म प्रबंधन करने की कोशिश कर रही है, जहां 20 फरवरी को मतदान होना है। कांग्रेस ने पंजाब के लिए एआईसीसी प्रभारी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के अलावा, राज्य में जाट और प्रवासी मतदाताओं की देखभाल के लिए राजीव शुक्ला और दीपेंद्र सिंह हुड्डा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में खड़ा किया है। कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा, कांग्रेस सत्ता में लौटने के लिए तैयार है क्योंकि पंजाब के लोगों ने विकास के पहियों को चलाने के लिए वोट देने का फैसला किया है। कांग्रेस पंजाब की नब्ज और ताने-बाने को जानता है। इसकी रणनीति, घोषणा पत्र के प्रारूपण, उम्मीदवार चयन से लेकर अभियान प्रबंधन तक, जमीन पर ध्यान देकर की गई है। भाजपा, आप और शिअद दौड़ में बहुत पीछे हैं। 10 मार्च को पंजाब में बल्ले बल्ले कांग्रेस होगी। हालांकि सूत्रों ने कहा कि शेरगिल चुनाव प्रचार से दूरी बना रहे हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी के भीतर किसी भी तरह की दरार से इनकार किया है। उत्तर प्रदेश के एक ब्राह्मण होने के नाते शुक्ला लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे शहरी केंद्रों में प्रवासी हिंदू वोटों को मजबूत करने की कोशिश करेंगे, जबकि हुड्डा को जाट वोट हासिल करने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि कांग्रेस ने आनंदपुर साहिब के सांसद मनीष तिवारी को स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर कर दिया है, लेकिन वह पंजाब से पार्टी के एकमात्र हिंदू सांसद होने के बावजूद राज्य में पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। शनिवार को, उन्होंने गढ़शंकर से कांग्रेस उम्मीदवार अमरप्रीत लल्ली के समर्थन में एक जनसभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने पार्टी नेता अंबिका सोनी पर हमला किया, जिन्होंने राज्य में एक सिख मुख्यमंत्री की वकालत करते हुए कहा, पंजाब में कोई हिंदू-सिख विभाजन नहीं है। जो कोई भी इस कृत्रिम विभाजन को बनाने की कोशिश करता है वह आईएसआई एजेंट है। कांग्रेस ने दलित मतदाताओं को लुभाने के लिए मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुना है, जो राज्य की आबादी का 32 प्रतिशत हैं। 25 जनवरी को सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाली पेशे से डॉक्टर चन्नी की पत्नी कमलजीत कौर अब चन्नी को सीट बरकरार रखने में मदद करने के लिए चमकौर साहिब में सड़कों पर उतर रही हैं। 20 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश करने वाले चन्नी ने पिछले साल 19 सितंबर को अमरिंदर सिंह की जगह मुख्यमंत्री का पद संभाला था।

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बैंक को चूना लगाने वालों के लिए मोदी सरकार की मुख्य योजना है-लूटो और भागो:कांग्रेस

नई दिल्ली/चंडीगढ़। कांग्रेस ने ऋषि अग्रवाल और अन्य के मालिकाना हक वाली गुजरात स्थित एबीजी शिपयार्ड द्वारा कथित रूप से 28 कंपनियों को चूना लगाये जाने के लिए रविवार को केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सूरजेवाला ने चंडीगढ़ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले 75 साल में भारत की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी मोदी सरकार की निगरानी में हुई है। सात साल में 5,35,000 करोड़ करोड़ की बैंक धोखाधड़ी ने बैंकिंग प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि बैंक धोखाधड़ी के मामलों की जांच में देर मोदी सरकार में शीर्ष पदों पर आसीन लोगों की सांठगांठ और आपसी मिलीभगत के सबूत हैं। सूरजेवाला ने कहा कि गत 75 साल में पहली बार 22,842 करोड़ रुपये की बैंक धाखोधड़ी का मामला सामने आया है। पांच साल तक टालमटोल करके जनता के धन को दिनदहाड़े गबन करने की छूट देने के बाद आखिरकार केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में सात फरवरी को एफआरआई दर्ज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार बैंक के साथ धोखाधड़ी करने वालों के लिए लूटो औैर भागो योजना चला रही है। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी करने वालों की सूची में नीरव मोदी यानी छोटा मोदी, मेहुल चोस्की, नीशल मोदी, ललित मोदी, विजय माल्या, जतिन मेहता, चेतन संदेसरा, नितिन संदेसरा और अन्य क ई नाम हैं, जिनका सत्तारुढ़ पार्टी के साथ करीबी रिश्ता रहा है। ऋषि अग्रवाल और अन्य लोग शहंशाह के नये रत्न हैं। कांग्रेस ने सीबीआई द्वारा इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देर पर सवाल उठाया है। कांग्रेस ने अपने बयान में कहा है, आठ नवंबर 2019 को एसबीआई ने एबीजी शिपयार्ड के ऋषि अग्रवाल और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए सीबीआई में अपनी शिकायत दी। इस धोखाधड़ी और जनता के पैसे के गबन के बावजूद सीबीआई,एसबीआई और मोदी सरकार ने पूरे मामले को लालफीताशाही और आपसी टकराव में उलझा दिया। ये कई साल तक होता रहा और जनता का धन नाली में बहता रहा और धोखेबाज लाभ उठाते रहे। कांग्रेस ने कहा,एक और मजेदार तथ्य यह है कि कैग की रिपोर्ट के बावजूद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने गुजरात के दहेज में एबीजी शिपयार्ड को 50 हेक्टेयर भूमि आवंटित की। दहेज परियोजना को शिपयार्ड कंपनी ने वर्ष 2015 में बंद कर दिया।

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हिजाब विवाद पर बोले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश के चुनाव प्रचार में कानपुर पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हिजाब विवाद पर भाजपा पर तंज कसते हुए कहा है कि साम्प्रदायिकता में बीजेपी की मास्टरी है। उत्तरप्रदेश चुनाव के दूसरे चरण के दौरान कानपुर में डोर टू डोर कैंपेन करने पहुंचे भूपेश बघेल ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कर्नाटक में हुए हिजाब विवाद पर कहा कि जिन्होंने इसकी शुरूआत की है उन्हें अंजाम का पता नहीं है। इस मुद्दे पर कॉलेज के प्राचार्य को बच्चियों के पालको को बुला कर बात की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अब योगी और मोदी के जाने का समय हो चुका है। वहीं, उत्तरप्रदेश चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर कहा, कांग्रेस पार्टी निश्चित रूप से अच्छा प्रदर्शन करेगी। दूसरी पार्टियां धर्म और जाति के आधार पर वोट मांग रही हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी आम जनता के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। बघेल ने कहा, कांग्रेस का मुख्य मुद्दा है किसानों को दाम मिले, बेरोजगारों को काम मिले और महिलाओं को सम्मान मिले। प्रियंका गांधी के लड़की हूं लड़ सकती हूं इस नारे से महिलाओं में आत्मविश्वास आया है और इस बार परिवर्तन अवश्य होगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल के उपचुनाव हारते ही केंद्र की भाजपा सरकार ने पेट्रोल, डीजल की कीमतों में कमी की। महंगाई अगर कम करना है तो भाजपा को हराना ही होगा। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए 7 चरणों में चुनाव होंगे। उत्तर प्रदेश में पहले चरण के लिए 11 फरवरी को मतदान हुए थे। जबकि 14 फरवरी को दूसरे चरण का मतदान है। इसके बाद 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को कराया जाएगा। जबकि प्रदेश में मतगणना 10 मार्च को कराई जाएगी।

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दिल्ली में तीर्थयात्रा योजना बहाल करने की तैयारी, द्वारकाधीश के लिए रवाना होगी ट्रन

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की बुजुर्गो के लिए तीर्थयात्रा योजना सोमवार से बहाल होगी और श्रद्धालुओं को लेकर एक ट्रेन गुजरात के द्वारकाधीश जाएगी। कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनजर जनवरी के पहले सप्ताह में यह तीर्थयात्रा योजना रोक दी गयी थी।

दिल्ली सरकार की तीर्थयात्रा विकास समिति के अध्यक्ष कमल बंसल ने बताया कि दिल्ली से 1,000 बुजुर्ग श्रद्धालुओं को लेकर द्वारकाधीश जाने वाली ट्रेन को सोमवार शाम सात बजे सफदरजंग रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखायी जाएगी। रामेश्वरम के लिए एक अन्य ट्रेन 18 फरवरी को रवाना होगी।

कोविड के मामले बढ़ने के बीच जनवरी में मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना रोक दी गयी थी। बंसल ने कहा, ‘‘हम अन्य तीर्थ स्थलों के लिए ट्रेन की घोषणा भी कर सकते हैं, क्योंकि रेलवे हमें ट्रेन की उपलब्धता के बारे में सूचित कर सकता है।’’ उन्होंने कहा कि अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों की मांग रामेश्वरम और द्वारकाधीश के लिए थी। रामेश्वरम के लिए करीब 15,000 और द्वारकाधीश के लिए 7,000 आवेदन लंबित हैं।

बंसल ने कहा, ‘‘हम अपने बुजुर्गों की मांग पर जितना संभव हो सकता है उतनी यात्राओं की व्यवस्था करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह ट्रेन की उपलब्धता पर निर्भर करता है।’’ उन्होंने कहा कि दिल्ली से बुजुर्गों के लिए निशुल्क तीर्थयात्रा की योजना के तहत जनवरी में अलग-अलग तीर्थस्थलों के लिए 11 ट्रेन यात्राओं की योजना बनायी गयी, लेकिन कोरोना वायरस की तीसरी लहर के कारण यह संभव नहीं हुआ।

इस योजना के तहत 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को 15 मार्गों पर तीर्थयात्रा के लिए ले जाया जाता है और इसका पूरा खर्च दिल्ली सरकार उठाती है। सरकार प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक और उसके साथ जाने वाले एक व्यक्ति की यात्रा और उसके ठहरने समेत अन्य खर्च उठाती है। इस योजना के तहत दिल्ली सरकार ने 81.45 करोड़ रुपये दिए हैं जिसमें से 2021-22 में 66.92 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक करीब 38,000 वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना का फायदा मिला है।

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बैंक ऋण धोखाधड़ी: ईडी ने हैदराबाद की आभूषण कंपनी के प्रवर्तक को गिरफ्तार किया

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 67 करोड़ रुपए की कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन के एक मामले में हैदराबाद की एक आभूषण कंपनी के प्रबंध भागीदार को गिरफ्तार किया है। निदेशालय ने रविवार को यह जानकारी दी।

संजय अग्रवाल को 11 फरवरी को हैदराबाद में एक विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में पेश किया गया और अदालत ने उसे 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अग्रवाल ‘घनश्यामदास जेम्स एंड ज्वेल्स’, हैदराबाद में एक प्रबंध भागीदार है। यह कंपनी सोने का थोक व्यापार करती है।

निदेशालय ने शुल्क-मुक्त निर्यात के लिए निर्धारित सोने का कथित रूप से घरेलू बाजार में व्यापार करने से जुड़े धनशोधन के एक अन्य मामले में भी अग्रवाल को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वह पहले से ही कोलकाता की जेल में बंद है। एजेंसी ने एक बयान में बताया कि ताजा मामला ‘‘ऋण धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें हैदराबाद की भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को 67 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।’’ जांच में पाया गया, ‘‘2010-2011 में, अग्रवाल ने फर्जी और जाली बैंक गारंटी और पीएनबी द्वारा कथित तौर पर जारी किए गए कवर पत्रों को दिखाकर एसबीआई से सोने के बुलियन खरीदे और फिर इन्हें स्थानीय बाजार में विभिन्न आभूषण विक्रेताओं और छोटे कारोबारियों को नकद बेच दिया।’’

इसमें आरोप लगाया गया है कि अग्रवाल ने अपनी पत्नी, भाइयों और अपने कर्मचारियों के नाम पर स्थापित कई अन्य कंपनियों में इस नकद राशि को हस्तांतरित किया। ईडी ने कहा, ‘‘बाद में, सोने पर लिया गया ऋण चुकाया नहीं गया। एसबीआई ने पाया कि बैंक गारंटी और पत्र फर्जी थे। अग्रवाल और उनके भाइयों अजय और विनय ने 17 अगस्त, 2011 को हैदराबाद के एबिड्स में अपने स्टोर पर रखे सोने और आभूषणों के पूरे भंडार को गुप्त रूप से हटा दिया।’’

कंपनी ने स्वर्ण के बदले ऋण के एवज में इस भंडार को पहले ही पीएनबी के पास गिरवी रख दिया गया था। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भी अग्रवाल और अन्य के खिलाफ ‘‘उनकी कंपनी द्वारा ऋण के लिए पीएनबी को गिरवी रखे सोने और आभूषणों को धोखाधड़ी करके हटाने और इस तरह पंजाब नेशनल बैंक को 31.97 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए मामला दर्ज किया है।

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गाजियाबाद तक पहुंचा हिजाब विवाद पुलिस से हुई नोंकझोंक

गाजियाबाद। कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब प्रकरण अब उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद तक पहुंच गया है। रविवार को गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में कुछ मुस्लिम युवतियों ने हिजाब के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस से इन महिलाओं की नोंकझोंक भी हुई। हालांकि, पुलिस ने चेतावनी देते हुए और हल्का बल प्रयोग कर उन्हें मौके से हटा दिया। पुलिस का कहना है कि कोविड काल को देखते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज करेगी।

 

खोड़ा के नवनीत विहार में रविवार दोपहर कुछ मुस्लिम महिलाएं हाथों में 'आई वांट हिजाब' लिखे पोस्टर लेकर सड़क पर उतरीं। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से धारा-144 लगे होने की वजह से प्रदर्शन की अनुमति दिखाने को कहा, लेकिन महिलाओं ने प्रदर्शन की अनुमति दिखाने से मना कर दिया। 

 

इसके बाद पुलिस ने उन युतवियों को प्रदर्शन तत्काल समाप्त करने के लिए कहा तो वह जिद पर अड़ी रहीं। इस दौरान पुलिस से उनकी काफी देर तक बहस होती रही। इसके बाद पुलिस की प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ नोंकझोंक व धक्का-मुक्का हो गई।

 

पुलिस का कहना है कि दोपहर करीब ढाई बजे 15-20 मुस्लिम महिलाएं और युवतियों ने 'आई वांट हिजाब' लिखे पोस्टर लेकर शनि बाजार रोड नवनीत विहार में प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इस दौरान पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए उनके पोस्टर अपने कब्जे में लेने शुरू किए। बाद में प्रदर्शन करने वाली महिलाएं वहां से चली गईं। धक्का-मुक्की में खोड़ा थाना प्रभारी की वर्दी भी फटने की जानकरी मिली है, लेकिन थाना प्रभारी का कहना है कि वर्दी जाली में फंसकर फट गई थी।   

 

खाोड़ा थाना प्रभारी ब्रिजेश कुशवाहा का कहना है कि प्रदर्शन करने वाली युवतियों और महिलाओं के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने भी मौके पर वीडियो बनाया था। इसके अलावा आसपास की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली जा रही है। बगैर अनुमति के प्रदर्शन किया गया है जो कि आचार संहिता व धारा-144 का उल्लंघन है।  

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सुबह 6 से रात 10 बजे तक प्रचार करने की छूट

नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार को चुनाव प्रचार के संबंध में नई गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक पदयात्रा पर लगी रोक हटा ली गई है। प्रचार के समय को भी दो घंटे तक बढ़ा दिया गया है। राजनीतिक दल और उम्मीदवार सभी मौजूदा निर्देशों का पालन करते हुए सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक प्रचार कर सकते हैं। 

चुनाव अभियान की समय सीमा में ढील देते हुए आयोग ने जगह की क्षमता के आधार पर रैलियों की भी इजाजत दे दी है। आयोग ने देश भर के साथ-साथ मतदान वाले राज्यों में कोरोना के मामलों में "काफी कमी" का हवाला देते हुए कोविड प्रतिबंध हटाए हैं। आयोग ने एक बयान में राजनीतिक दलों के लिए ढील की घोषणा करते हुए कहा, "केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से प्राप्त जानकारी के अनुसार, COVID की जमीनी स्थिति में काफी सुधार हुआ है और देश में मामले तेजी से घट रहे हैं।

चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव अभियान अब सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के बजाय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच चलाया जा सकता है। जिला अधिकारियों द्वारा अनुमत सीमित संख्या में व्यक्तियों के साथ पदयात्रा को भी अनुमति दी गई है। आयोग ने प्रतिबंधों को हटाते हुए "चुनावों में अधिक से अधिक भागीदारी के लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की आवश्यकता" को भी रेखांकित किया।

कोविड-19 मामलों में वृद्धि का हवाला देते हुए, चुनाव निकाय ने 8 जनवरी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के लिए मतदान कार्यक्रम की घोषणा करते हुए फिजिकल रैलियों, रोड शो और पदयात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया था।


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कई मंत्रियों समेत 623 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत राज्य के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों के लिये मतदान बृहस्पतिवार सुबह सात बजे शुरू हो गया।

 

निर्वाचन आयोग कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक पहले चरण के चुनाव के लिए मतदान कार्य कोविड प्रोटोकॉल के तहत सुबह सात बजे शुरू हो गया जो शाम छह बजे तक चलेगा। मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

 

इस चरण में शामली, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा तथा आगरा जिलों में मतदान हो रहा है।

 

पहले चरण का चुनाव जाट बहुल क्षेत्र में हो रहा है। इस चरण में प्रदेश सरकार के मंत्रियों श्रीकांत शर्मा, सुरेश राणा, संदीप सिंह, कपिल देव अग्रवाल, अतुल गर्ग और चौधरी लक्ष्मी नारायण समेत कुल 623 उम्मीदवारों के सियासी भाग्य का फैसला होगा। इनमें 73 महिला प्रत्याशी भी शामिल हैं।

 

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष, सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने के लिये व्यापक इंतजाम एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है। कोविड-19 के मद्देनजर मतदान केंद्रों पर थर्मल स्कैनर, सैनीटाइजर, ग्लव्स, फेस मास्क, फेस शील्ड, पीपीई किट, साबुन, पानी की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था की गई है।

 

उन्होंने बताया कि पहले चरण में होने वाले मतदान में 2.28 करोड़ योग्य मतदाता हैं। इनमें 1.24 करोड़ पुरूष, 1.04 करोड़ महिला तथा 1448 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। मतदान पर सतर्क दृष्टि रखने के लिए 48 सामान्य प्रेक्षक, आठ पुलिस प्रेक्षक तथा 19 व्यय प्रेक्षक भी तैनात किये गये हैं। इसके अतिरिक्त 2175 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 284 जोनल मजिस्ट्रेट, 368 स्टैटिक मजिस्ट्रेट तथा 2718 माइक्रो ऑब्जर्वर भी तैनात किये गये हैं।

 

उन्होंने बताया कि मतदाता पहचान पत्र नहीं होने पर आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस समेत 12 विकल्पों का इस्तेमाल कर वोट डाला जा सकेगा।

 

वर्ष 2017 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहले चरण की 58 में से 53 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को दो-दो सीटें मिली थी। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल का भी एक प्रत्याशी जीता था।

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प्रियंका की अपील: उप्र के मतदाता वोट की ताकत का इस्तेमाल करें

नई दिल्ली। कांग्रेस की महासचिव एवं प्रदेश में पार्टी की चुनाव प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान शुरू होने पर मतदाताओं से राज्य के बेहतर भविष्य के लिए अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल करने की अपील की।

श्रीमती वाड्रा ने ट्वीट कर कहा, “पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरे प्यारे बहनों-भाइयों, वोट की ताकत का इस्तेमाल अपने मुद्दों और प्रदेश के बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए करिए। यूपी कांग्रेस के मेरे सभी साथियों, कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों को शुभकामनाएँ- आपको गर्व होना चाहिए कि 30 साल बाद हम सभी सीटों पर अपनी ताक़त से लड़ रहे हैं।”

उन्होंने कर्मयोग दर्शन से जुड़े गीता के एक श्लोक का भी उल्लेख करते हुए कहा, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भू मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।”

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पहले चरण के लिए 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर आज सुबह सात बजे से मतदान प्रारंभ हो गया। इस चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और हाथरस जिलों की 58 विधान सभा सीटों के 2.28 करोड़ मतदाता 73 महिला उम्मीदवारों सहित कुल 623 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करने के लिए 25,880 मतदान स्थलों पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

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प्रधानमंत्री ने मतदाताओं से बढ़-चढ़कर मतदान करने का अनुरोध किया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तहत बृहस्पतिवार को हो रहे पहले चरण के मतदान में मतदाताओं से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का अनुरोध किया।

 

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आज पहले चरण की वोटिंग है। सभी मतदाताओं से मेरा आग्रह है कि वे कोविड नियमों का पालन करते हुए लोकतंत्र के इस पावन पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। याद रखना है- पहले मतदान, फिर जलपान।’’

 

उत्तर प्रदेश में सात चरणों में होने वाले मतदान का आज पहला चरण आरंभ हो गया। इस चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इनमें शामली, मेरठ, हापुड, मुजफ्फरनगर, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ, आगरा, गौतमबुद्ध नगर और मथुरा जिले की सीटें शामिल हैं।

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राहुल गांधी ने मतदाताओं से कहा, देश को हर डर से आजाद करो, वोट करो

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को लोगों से घरों से निकलकर मतदान करने और देश को हर तरह के भय से मुक्त करने का आह्वान किया।

 

आज सुबह राज्य के पश्चिमी भाग के 11 जिलों में 58 विधानसभा सीटों पर मतदान प्रारंभ हुआ।

 

गांधी ने ट्वीट किया, “देश को हर डर से आजाद करो। बाहर आओ, वोट करो।”

 

बृहस्पतिवार को शामली, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा में मतदान हो रहा है। 

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उप्र में राजनीतिक दल उभरते वोट बैंक से जुड़ने की कोशिश कर रहे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ने के साथ इस चुनावी मौसम में हिंदी पट्टी में राजनीतिक दलों के महिलाओं की भूमिका को देखने के तरीके में थोड़ा बदलाव आया है।

 

उत्तर प्रदेश में खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही कांग्रेस महिलाओं को अपने वोट बैंक के रूप में जोड़ने के लिए प्रयोग कर रही है और उसने महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट देने की घोषणा की है।

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने महिलाओं को अपनी पार्टी के संभावित वोट बैंक के रूप में देखने के साथ ही व्यवस्था या अत्याचार के खिलाफ अपनी व्यक्तिगत लड़ाई लड़ने वाली आम महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। महिलाओं को 40 फीसद टिकट देने की घोषणा करने वाली कांग्रेस ने भले ही इस मामले (महिलाओं को टिकट देने) में बढ़त बना ली हो लेकिन अन् य दल भी उप्र में बदलते राजनीति माहौल के प्रति अधिक सतर्क हो गए हैं।

 

कांग्रेस की सूची में जहां अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सदफ जफर का नाम शामिल है जिन्हें दिसंबर 2019 में लखनऊ में नागरिकता विरोधी कानून का विरोध करने के दौरान गिरफ्तार किया गया था, वहीं उन्नाव में पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के दुष्कर्म की शिकार पीड़िता की मां को भी कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिसंबर को प्रयागराज में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के बैंक खातों में 1,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए थे, जिससे लगभग 16 लाख महिलाओं को लाभ हुआ। विशेष रूप से जमीनी स्तर पर महिलाओं को आवश्यक कौशल, प्रोत्साहन और संसाधन प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना चलाई गई। इस कार्यक्रम में दो लाख से अधिक महिलाओं की भागीदारी देखी गई थी।

 

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी महिला केंद्रित मुद्दों पर अधिक जोर दे रही हैं। कांग्रेस ने एक अलग घोषणापत्र भी जारी किया है जिसमें महिलाओं के लिए कई प्रमुख वादे किए गए हैं। हाल ही में आलोचकों का मुकाबला करने के लिए बॉलीवुड की फिल्म 'दीवार' के उस संवाद ' मेरे पास मां है' की तर्ज पर कांग्रेस ने जनाधार खोने के आरोपों का यह कहते हुए जवाब दिया कि ''मेरे पास बहन है।'' निर्वाचन आयोग कार्यालय के अनुसार, मतदाता सूची के संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं के नामांकन से लिंग अनुपात में 11 अंकों का सुधार हुआ है जो एक नवंबर, 2021 को 1000 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 857 से बढ़कर पांच दिसंबर को 868 हो गया। आयोग ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची जारी की जिसमें 8.04 करोड़ पुरुष मतदाता (8,04,52,736) और 6.98 करोड़ से अधिक महिला मतदाता (6,98,22,416) हैं। आयोग ने राज्य में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के वास्ते इसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक कार्यक्रम भी शुरू किया है।

 

समाजवादी पार्टी जिसने नई टैग लाइन "नई हवा है, नया सपना है" को अपनाया है, ने हाल ही में अपने उस एम-वाई (मुस्लिम-यादव) फॉर्मूले को नया अर्थ देने की कोशिश की है, जिसने इसे उत्तर प्रदेश में सत्ता में पहुंचा दिया था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में कहा था, "नई सपा में, एम-वाई का मतलब महिला और युवा है। हम अब बड़े परिप्रेक्ष्य में मुद्दों को देख रहे हैं और जातिवाद से बंधे नहीं हैं।"

 

हालांकि बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के महिला होने के बावजूद इस पार्टी ने महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कभी अलग अभियान पर जोर नहीं दिया और यह पार्टी अपने सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर ही ध् यान केंद्रित कर रही है। इसी सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले से 2007 में बसपा ने उप्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।

 

कांग्रेस की महिला उम्मीदवारों की सूची में समाज के एक खाास तबके को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जैसे शाहजहांपुर की एक आशा कार्यकर्ता पूनम पांडे, जिन्हें उनके मानदेय में वृद्धि की मांग करते हुए कथित रूप से पीटा गया था। लखीमपुर खीरी में मोहम्मदी सीट से रितु सिंह जो एक पूर्व सपा कार्यकर्ता थीं और उन्हें पंचायत चुनाव में नामांकन दाखिल करने से रोकने के लिए उनके साथ मारपीट की घटना हुई थी। हस्तिनापुर (अनुसूचित जाति-आरक्षित) की कांग्रेस उम् मीदवार 26 वर्षीय अर्चना गौतम एक अभिनेत्री और मॉडल हैं और बिकरू मामले में मुठभेड़ में मारे गए एक आरोपी की पत्नी खुशी दुबे की बहन नेहा तिवारी कानपुर के कल्याणपुर से कांग्रेस की उम् मीदवार हैं।

 

समाजवादी पार्टी ने अमेठी से पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की पत्नी महाराजी देवी को मैदान में उतारा है। एक विशेष अदालत ने 2017 में बलात्कार के एक मामले में गायत्री प्रजापति और दो अन्य लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। छात्र कार्यकर्ता पूजा शुक्ला, जिन्होंने जून 2017 में मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने के बाद योगी आदित्यनाथ को काला झंडा दिखाया था, को लखनऊ उत्तर से सपा ने उम् मीदवार बनाया है।

 

वहीं, भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आईं विधायक अदिति सिंह को उनकी रायबरेली सदर सीट से टिकट दिया है। अदिति सिंह ने हाल ही में खुद को 'बिना बाप की बेटी' बताया था और पंजाब में अपने पति अंगद सिंह को कांग्रेस का टिकट न मिलने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

 

पिछले चुनाव में, उत्तर प्रदेश विधानसभा में रिकॉर्ड 40 महिला उम्मीदवारों ने जगह बनाई थी, जो 403 सदस्यीय सदन में महिला सदस्यों का अब तक का सबसे अधिक अनुपात है। उस समय सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने एक साथ 96 महिलाओं को मैदान में उतारा था, जिनमें से भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) से सबसे अधिक 35 महिला प्रतिनिधि विधायक बनी थीं। इसके बाद बसपा और कांग्रेस से दो-दो महिलाओं को जीत मिली थी और समाजवादी पार्टी से एक महिला उम्मीदवार विजयी हुई थीं। वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव में 35 महिलाएं चुनी गई थीं जो कि उस समय का रिकॉर्ड था।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने राज्य के सांसदों से मुलाकात की

नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने अगले महीने राज्य का बजट पेश करने से पहले, सोमवार को यहां राज्य के सांसदों से मुलाकात की और उनके साथ कई मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में विभिन्न दलों के सांसद- राज्यसभा और लोकसभा के 27 सदस्य शामिल हुए।

 

बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय रसायन और उर्वरक राज्यमंत्री भगवंत खुबा और केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर भी मौजूद रहे।

 

बैठक से पहले बोम्मई ने कहा, “हम सांसदों के साथ राज्य और केंद्र के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।” बैठक के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री केंद्रीय वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बिजली मंत्री आर के सिंह से भेंट कर सकते हैं।

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दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट पर आंशिक रोक

सहारनपुर। राष्ट्रीय बाल अधिकार सरंक्षण आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन ने दारुल उलूम देवबंद को नोटिस जारी करके वेबसाइट पर आंशिक रूप से रोक लगा दी है। जिलाधिकारी ने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।

 

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दारुल उलूम के फतवों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से वेबसाइट की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। वेबसाइट पर बच्चों को लेकर कुछ ऐसे फतवे मिले जो बाल संरक्षण अधिनियम के मानकों का उल्लंघन करते हैं। ऐसे में प्रशासन ने दारुल उलूम देवबंद को निर्देशित किया कि जब तक वेबसाइट से बच्चों को लेकर जारी सामग्री नहीं हटा ली जाती तब तक के लिए वेबसाइट को आंशिक रूप से रोक लगा दी जाए।

 

राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग को यह शिकायत मिली थी कि दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट पर कुछ ऐसे फतवे मौजूद हैं जो भारतीय दंड संहिता, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और शिक्षा अधिकार नियम 2009 के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं। आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को 10 दिनों भीतर इस मामले की जांच करते हुए कार्रवाई कर रिपोर्ट देने को कहा था। इन्हीं आदेशों के अनुपालन में जिला प्रशासन ने दारुल उलूम देवबंद को नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है कि वेबसाइट पर जितने भी फतवे बाल संरक्षण अधिनियम का विरोध करते हैं, उन्हें वेबसाइट से हटा लिया जाए। जब तक यह सामग्री नहीं हटा ली जाती जब तक वेबसाइट बंद रहेगी।

 

जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि पत्र लिखकर एक व्यक्ति ने दारुल उलूम देवबंद से बच्चों से संबंधित सवाल पूछे थे। जवाब में दारुल उलूम देवबंद की ओर से जो कुछ भी कहा गया वह बाल संरक्षण अधिनियम का हनन करता है। दरअसल दारुल उलूम देवबंद से जो भी व्यक्ति अपने सवाल पूछता है उसका जवाब उसकी फतवा कमेटी देती है और इसी जवाब को फतवा के रूप में भी देखा जाता है। जिलाधिकारी ने बताया कि हमने इस मामले में दारुल उलूम को एक नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में दारुल उलूम की ओर से कहा गया है कि हमने व्यक्तिगत सवाल का जवाब दिया है। यह फतवा नहीं है। अब उनके इस जवाब की भी जांच कराई जा रही है। फिलहाल सवाल के विवादित जवाब वाले लिंक को ब्लॉक करा दिया गया है। पूरी वेबसाइट पर पाबंदी नहीं लगाई है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। अगर जांच में यह बात सामने आती है कि यह जवाब अधिनियम का हनन करता है तो आयोग के निर्देशों के अनुपालन में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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