'किसान आंदोलन को चुनाव तक टालना चाहती है सरकार'

 ट्रैक्टर मार्च से पहले भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने किसानों पर किए जा रहे शक्ति प्रदर्शन की भी आलोचना की. राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार की पॉलिसी है कि इस आंदोलन को चुनाव तक आगे ले जाओ, ताकि चुनाव के बहाने इसे दबा दिया जाए. पंजाब सरकार को किसान और भारत सरकार दोनों से डर है. किसान की हालत खराब है. किसान की जमीन को लूटा जा रहा है,

राकेश टिकैत ने आगे कहा कि भूमि अघिग्रहण के नाम पर किसानों की जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है. सबका विरोध करने का अपना तरीका है. हमलोग ट्रैक्टर मार्च निकालकर एक नए तरीके का विरोध प्रर्दशन कर रहे हैं. चंडीगढ़ में हम लोगों की बैठक हुई है. जल्द आगे की रणनीति तय करेंगे.

 सदस्यीय कमेटी का किया गया है गठन

किसान नेता राकेश टिकैत ने बताया कि हम संयुक्त मोर्चा की बैठक के लिए चंडीगढ़ गए थे. हमने 6 सदस्यीय कमेटी बनाई है. इसका गठन उन सभी किसान संगठनों से बातचीत करने के लिए किया गया है जो संयुक्त मोर्चा से अलग हैं. अगर कोई भी संगठन संयुक्त मोर्चा में शामिल होना चाहता है तो वह समिति से बातचीत कर सकता है. जल्द ही आंदोलन को लेकर कोई बड़ा फैसला होगा.

यूपी गेट बॉर्डर पर जुटने का है प्लान

बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा के कई दलों ने आज हाइवे पर ट्रैक्टर मार्च निकालने का आह्वान कर रखा है. इस प्रदर्शन के लिए भारतीय किसान यूनियन कई दिनों से तैयारी कर रहा है. किसान संगठन हरिद्वार से लेकर गाजीपुर बॉर्डर (यूपी गेट) तक ट्रैक्टरों की श्रृंखला बनाएंगे. यह ट्रैक्टर मार्च सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक निकलेगा. बीकेयू के राकेश टिकैत मुज्जफरनगर से आंदोलन की शुरुआत करेंगे. इसके बाद वह मेरठ होते हुए दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर पहुंचेंगे. इसके अलावा हरियाणा-पंजाब के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसान WTO का पुतला जलाएंगे.


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खिनौरी और शंभू बॉर्डर पर किसानों का कैंडल मार्च

किसान आंदोलन का आज बारहवां दिन है। किसानों ने दिल्ली कूच का फैसला 29 फरवरी तक टाल दिया है। इसे लेकर किसानों में थोड़ी निराशा भी दिख रही है। सीमाओं पर भीड़ महज तीन सौ से चार सौ तक के बीच में सिमट कर रह गई है।

वहीं किसानों ने बीते दिन बैठक में आगामी दिनों का प्लान तैयार किया। प्लान के अंतर्गत किसान बठिंडा के युवक शुभकरन सिंह की मौत को लेकर आज खनौरी और शंभू बॉर्डर पर कैंडल मार्च करेंगे।

सीमाओं पर होगा कैंडल मार्च: सरवन सिंह पंढेर

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि शंभू और खनौरी में मोर्चों का यह 12वां दिन है। कल किसान मजदूर मोर्चा और एसकेएम (गैर-राजनीतिक) ने फैसला किया कि आज शाम को दोनों सीमाओं पर एक कैंडल मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद 25 फरवरी को हम दोनों सीमाओं पर एक सम्मेलन करेंगे क्योंकि 26 फरवरी को फिर से डब्ल्यूटीओ पर चर्चा होगी।

उन्होंने कहा कि उस दिन सुबह डब्ल्यूटीओ, कॉरपोरेट घरानों और सरकारों की अर्थियां निकाली और जलाई जाएगी। दोपहर में, दोनों सीमाओं पर 20 फीट से अधिक ऊंचे पुतले जलाए जाएंगे। 27 फरवरी को, किसान मजदूर मोर्चा, एसकेएम (गैर-राजनीतिक) देश भर के अपने सभी नेताओं की एक बैठक करेगा। आगामी 28 फरवरी को, दोनों फोरम बैठेंगे और चर्चा करेंगे। 29 फरवरी को अगले कदम पर फैसला लिया जाएगा।


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आज देश भर में किसान बनाएंगे 'काला दिवस'

आंदोलन के बीच एक बार फिर से किसान भड़क गए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने शंभू बॉर्डर पर हुई किसान की मौत पर आक्रोश जताते हुए आज यानी 23 जनवरी को देश में काला दिवस बनाने का एलान किया है। वहीं  भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आने वाली 26 फरवरी को देश भर में ट्रैक्टर रैली निकालने की भी घोषणा की है।

14 मार्च को रामलीला मैदान में होगी महापंचायत

संयुक्त किसान मोर्चा ने 23 फरवरी को काला दिवस मनाने का फैसला लिया। इस दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, हरियाणा के मुख्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर और गृह मंत्री अनिल विज के पुतले फूंके जाएंगे। वहीं आने वाली 14 मार्च को किसान दिल्ली के रामलीला मैदान में महापंचायत आयोजित करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे लेकर छह सदस्यीय कॉर्डिनेटिंग कमेटी का गठन किया है।

बॉर्डर पर हुई थी किसान की मौत

बीते दिन शंभू बॉर्डर पर पंजाब के बठिंडा के रहने वाले किसान शुभकरण सिंह की मौत हो गई थी। जिसके बाद किसान संगठन आक्रोशित हैं। पंजाब में आज जगह-जगह लोगों ने सड़कें जाम कर विरोध प्रदर्शन जताया। बीते कल किसान संगठनों को केंद्र की ओर से बैठक का पांचवां निमंत्रण दिया गया। जिसके बाद किसान संगठनों ने अपना प्रदर्शन दो दिनों के लिए टाल दिया।




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नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले ध्यान दें, किसान आंदोलन के चलते जगह-जगह लग रहा जाम

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सहित विभिन्न मांगों को लेकर किसानों ने आज पंजाब-हरियाणा से दिल्ली कूच करने का एलान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के नेता और सदस्य मंगलवार सुबह से ही शंभू और खनौरी बॉर्डर पर रणनीति बनाने में जुट गए हैं। 

वहीं किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए गाजीपुर, चिल्ला और भोपुरा बार्डर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यहां पर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए हैं।

यातायात प्रतिबंधों के चलते दिल्ली के बॉडरों पर जगह-जगह जाम की स्थिति देखी जा रही है। वहीं नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद की दिल्ली से लगी सीमाओं पर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वहीं कई जगहों पर भीषण जाम की स्थिति बन गई है। 

दिल्ली गुरुग्राम एक्सप्रेस वे लगा जाम

दिल्ली में किसानों के कूच को लेकर दिल्ली के रजोकरी बॉर्डर से साउथ सिटी चौक तक दिल्ली गुरुग्राम एक्सप्रेस वे पर लंबा जाम लग गया है। भोपुरा बार्डर पर पुलिस ने बैरिकेड लगाने के साथ ही अवरोध के रूप में ट्रक सड़क पर खड़े करवा दिए हैं। दिल्ली गुरुग्राम एक्सप्रेस वे पर सिर्फ जाम ही जाम नजर आ रहा है। वाहनों की लंबी कतारें दिख रही है। 

रजोकरी बॉर्डर पर लगी भीषण जाम

किसानों के दिल्ली कोच को लेकर दिल्ली पुलिस ने रजोकरी बार्डर पर बेरिकेडिंग से वाहनों की रफ्तार कम होने से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस वे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। सिरहौल बार्डर से दिल्ली बार्डर में प्रवेश करने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। किसानों को रोकने के लिए गुरुग्राम पुलिस भी सतर्क नजर आई बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है वाहन चालकों के आई कार्ड देखकर ही वाहनों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

सीमाओं पर अलर्ट, वाहनों की हो रही है जांच

गाजियाबाद के किसानों के दिल्ली कूच को लेकर सीमाओं पर हाई अलर्ट है। यूपी गेट पर राष्ट्रीय राजमार्ग-9 की अप डाउन लेन पूरी तरह से बंद कर दी गई है। कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी गई है। खाली हिस्सों में गहरी खाई खोद दी गई है। फ्लाईओवर के ऊपर भी बैरिकेडिंग है। वाहनों को एक-एक लेन से दिल्ली में प्रवेश दिया जा रहा है। इसकी वजह से वाहनों की रफ्तार धीमी है। राष्ट्रीय राजमार्ग नौ और दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे की दिल्ली जाने वाली लेन पर फ्लाईओवर के ऊपर वाहन रेंग रहे हैं। महाराजपुर, ज्ञानी बार्डर और भोपुरा पर भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है।

फरीदाबाद से लगती सीमाओं पर भी बैरिकेडिंग

किसानों के दिल्ली कुछ करने की घोषणा को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। पुलिस गांव मोहना में धरने पर बैठे किसानों पर विशेष नजर रखे हुए हैं। तिगांव के एसीपी राजेश लोहान पूरे पुलिस बल के साथ मौजपुर टोल प्लाजा पर तैनात रहेंगे। मौके पर मोहना तहसील के नायब तहसीलदार ओम दत्त शर्मा बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात रहेंगे। यदि किसानों ने कोई कदम उठाया तो मौके पर एसडीएम त्रिलोक चंद पहुंचेंगे।

नोएडा के किसान भी दिल्ली कूच की तैयारी में

नोएडा के अधिकांश किसान संगठन दिल्ली कूच करने के लिए एक मंच पर आ गए हैं। किसान संयुक्त मोर्चा के बैनर तले यह आंदोलन किया जा रहा है। इससे पहले मंगलवार को किसानों को मनाने के लिए नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ लोकेश एम व जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजय खत्री की अगुआई में एक बैठक की गई थी।


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धुआं-धुआं हुआ शंभू बॉर्डर, पुलिस ने किसानों पर दागे आंसू गैस के गोले

हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर किसानों के दिल्ली कूच की घोषणा के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है। किसानों को रोकने के पुलिस की तरफ से आंशू गैस के गोल दागे गए हैं। दिल्ली जानें के लिए आग बढ़ रहे किसानों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोल दागे गए हैं। आंसू गैस के गोलों से शंभू बॉर्डर धुआं धुआं हो गया है। ड्रोन की मदद से पुलिस आंसू गैस के गोलों को दाग रही है। इसी बीच केंद्रीय कृषि मंत्री किसानों को एक बार फिर से बातचीत का न्योता दिया है। अर्जुन मुंडा ने किसानों से आगे न बढ़ने की अपील की है।

हाईकोर्ट पहुंची सरकार

किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा हरियाणा की खट्टर सरकार फिर हाईकोर्ट पहुंची है। शंभू और खनौरी बॉर्डर पर बड़ी संख्या में मोडिफाई किए ट्रैक्टरों और ट्रालियों को इकट्ठा न होने की गुहार लगाई गई है। सरकार ने कहा कि यह कानून व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है, पंजाब सरकार इस पर कार्रवाई करे और इन्हें वहीं रोका जाए। हालांकि हाईकोर्ट ने इस पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है।

पूरी तैयारी के साथ पहुंचे किसानदिल्ली कूच को लेकर किसानों ने पूरी तैयारी कर ली है। पुलिस के बैरिकेड्स तोड़ने के लिए शंभू बॉर्डर पर कई किसान फोकलेन व बुलडोजर लेकर पहुंच गए हैं। उधर किसानों के ऐलान से पुलिस व अर्धसैनिक बल के जवानों की धड़कन भी बढ़ रही है। ड्यूटी पर तैनात एक सब इंस्पेक्टर कौशल कुमार का निधन हो गया। बेशक उनकी ओर से किसानों को रोकने के लिए पुख्ता बंदोबस्तों का दावा किया जा रहा है। लेकिन बॉर्डर पर किसानों की बढ़ती संख्या उनके लिए बड़ी चुनौती बन रही है।


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केंद्र सरकार चार और फसलों पर MSP देने को तैयार

फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी के मुद्दे पर रविवार को चंडीगढ़ में किसान नेताओं और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच हुई चौथे दौर की बैठक में केंद्र सरकार चार और फसलों पर एमएसपी देने को तैयार हो गई। केंद्र सरकार की ओर से धान और गेहूं के अलावा मसूर, उड़द, मक्की और कपास की फसल पर भी एमएसपी देने का प्रस्ताव पेश किया गया, लेकिन इसके लिए किसानों को भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) और भारतीय कपास निगम (सीसीआई) से पांच साल का करार करना होगा।

केंद्र के इस प्रस्ताव पर बैठक में मौजूद किसान नेताओं ने कहा कि वह सभी संगठनों से बात कर सोमवार को इस पर अंतिम फैसला बताएंगे। करीब पांच घंटे चली बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पत्रकारों को बताया कि चौथे दौर की बातचीत बेहद सकारात्मक रही है।

पंजाब और हरियाणा में घटते भूजल स्तर को बचाने के लिए फसलों का विविधीकरण जरूरी है। इसके मद्देनजर सरकार ने आगे बढ़कर यह प्रस्ताव दिया है और ज्यादातर किसानों ने सैद्धांतिक तौर पर सहमति व्यक्त की है।

इसी बीच बैठक में मौजूद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाहर आकर पत्रकारों को बताया कि फसलों का विविधीकरण बेहद जरूरी है, बशर्ते सरकार वैकल्पिक फसलों पर एमएसपी की गारंटी दे। इसके बाद अन्य फसलों को भी इसके अंर्तगत लाया जा सकता है। हम केंद्र के इस प्रस्ताव पर किसान संगठनों के जवाब का इंतजार करेंगे।

इससे पहले, इस वार्ता में किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि एमएसपी की कानूनी गारंटी के लिए केंद्र अध्यादेश लेकर लाए। वह इससे कम किसी बात पर नहीं मानेंगे। करीब दो घंटे देरी से शुरू हुई बैठक में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, पीयूष गोयल और नित्यानंद राय के साथ पंजाब के सीएम भगवंत मान और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां भी शामिल हुए।

बैठक से पहले भी किसान नेता सरवण पंधेर और जगजीत डल्लेवाल ने कहा कि एमएसपी की गारंटी पर अध्यादेश से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है। खबर लिखे जाने तक बैठक जारी थी। इसी बीच, केंद्र सरकार ने हरियाणा से सटे पंजाब के सात जिलों पटियाला, एसएएस नगर, बठिंडा, मुक्तसर साहिब, मानसा, संगरूर और फतेहगढ़ साहिब में इंटरनेट पर पाबंदी 24 फरवरी तक बढ़ा दी है।

इससे पहले 12 से 16 फरवरी तक तीन जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद की गई थीं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय मंत्रियों से चंडीगढ़ में 15 फरवरी को हुई बैठक में इंटरनेट बंद होने का मुद्दा उठाया था। वहीं, हरियाणा ने भी अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा जिलों में मोबाइल इंटरनेट और बल्क एसएमएस सेवाएं बंद कर दी हैं।

इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने लुधियाना में बैठक कर 20 से 22 फरवरी तक टोल प्लाजा फ्री करवाने का निर्णय लिया। रविवार को भी कई जिलों में टोल प्लाजा फ्री करवाए गए। लुधियाना में हुई बैठक में 37 किसान जत्थेबंदियों ने हिस्सा लिया है।

मान ने कहा- मैंने की पंजाब के फायदे की बात

बैठक के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि किसानों के साथ पांच घंटे तक चर्चा चली। मैंने पंजाब के फायदे के बारे में बात की। हमने दालों की खरीद पर एमएसपी की गारंटी मांगी थी जिस पर आज चर्चा हुई।

किसान नेता बोले...

बैठक खत्म होने के बाद किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि हम अपने मंचों और विशेषज्ञों के साथ सरकार के प्रस्ताव (एमएसपी पर) पर चर्चा करेंगे और फिर एक निष्कर्ष पर पहुंचेंगे। हमारा मार्च तब तक जारी रहेगा जब तक मांगें पूरी नहीं होती। कई अन्य मांगों पर बातचीत की जरूरत है। 

पंजाब किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि हम अगले दो दिनों में सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे। सरकार अन्य मांगों पर भी विचार करेगी। अगर कोई नतीजा नहीं निकला तो 21 फरवरी को 'दिल्ली चलो' मार्च जारी रखेंगे। 

हरियाणा : महापंचायत में बड़ी लड़ाई का एलान

ब्रह्मसरोवर पर हुई हरियाणा के किसान नेताओं, खापों और अन्य संगठनों की बैठक में फैसला लिया है कि यदि केंद्रीय मंत्रियों के साथ पंजाब के किसान संगठनों की वार्ता असफल रही तो हरियाणा के किसान संगठन और खाप पंचायतें आंदोलन में शामिल होंगी। आंदोलन में दिल्ली के किसानों का भी साथ लेंगे। भाकियू (चढ़ूनी) ने ब्रह्मसरोवर पर बुलाई महापंचायत में तय किया कि हरियाणा की ओर से गुरनाम सिंह चढूनी आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। इसके अलावा दिल्ली की खापों और किसानों के साथ आंदोलन की रणनीति धनखड़ खाप के प्रधान डॉ. ओमप्रकाश धनखड़ की अगुवाई में चार सदस्यीय कमेटी बनाएगी।

एक और किसान की हार्ट अटैक से मौत

किसान आंदोलन के दौरान रविवार को एक और किसान की हार्ट अटैक से मौत हो गई। संगरूर के खनौरी बॉर्डर पर बैठे कांगथला (पटियाला) के किसान मंजीत सिंह को सिविल अस्पताल में ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। इससे पहले गुरदासपुर के बटाला के एक किसान और हरियाण के सुरक्षाकर्मी की भी आंदोलन के दौरान मौत हो गई थी। किसानों ने आरोप लगाया था कि आंसू गैस के धुएं से तबीयत खराब होने के कारण किसान की जान गई।

किसानों से पहले केंद्रीय मंत्रियों ने सीएम मान से की अलग बैठक

किसान नेताओं से पहले केंद्रीय मंत्रियों से ने होटल हयात में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, पंजाब के मुख्य सचिव अनुराग वर्मा और डीजीपी गौरव यादव के साथ अलग से बैठक की। इस बैठक में किसानों के मुद्दों के अलावा राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चर्चा हुई।


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किसान आंदोलन का चौथा दिन

किसानों का एमएसपी, कर्ज माफी समेत कई मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। इन मांगों को लेकर किसानों की केंद्रीय मंत्रियों के साथ तीन बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला...शंभू बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं और अब रविवार तक किसान (Kisan Andolan) दिल्ली की तरफ नहीं बढ़ेंगे. वहीं, हरियाणा के अंबाला में शंभू बॉर्डर (Shambu Border) पर एक किसान की मौत हुई है. किसान को हार्ट अटैक आया और फिर अस्पताल में इलाज के दौरान किसान की मौत हो गई है.



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पश्चिमी यूपी में भी दिखेगा 'ग्रामीण भारत बंद' का असर

संयुक्त किसान मोर्चा ने कल शुक्रवार (16 फरवरी) को ग्रामीण भारत बंद का एलान किया है. इस बंद का पश्चिमी यूपी में भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है. भारतीय किसान यूनियन ने भी इस ग्रामीण बंद को लेकर अपनी तैयारी कर ली है. किसानों से भी आह्वान कर लिया गया है कि बंद को सफल बनाने में पूरी ताकत लगा दें. ग्रामीण भारत बंद करके संयुक्त किसान मोर्चा बीजेपी सरकार को एक बड़ा संदेश देना चाहती है. इसलिए भारतीय किसान यूनियन ने अपने तमाम कार्यकर्ताओं को बंद को सफल बनाने के काम में लगा दिया है.

ग्रामीण भारत बंद को सफल बनाने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने पूरी ताकत झोंक दी है. यूं तो पूरे देश में तमाम किसान संगठनों ने बंद को लेकर अपनी अपनी बड़ी रणनीति बनाई है. वहीं पश्चिमी यूपी पर भी खास फोकस है. चूंकि पश्चिमी यूपी को गन्ना बेल्ट और शुगर बाउल बोला जाता है. पश्चिमी यूपी के खास तौर से मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, हापुड़, बुलंदशहर सहित तमाम जिलो में ग्रामीण भारत बंद के तहत न तो किसान खेत में जाएंगे और न ही शहर की तरफ रुख करेंगे. ग्रामीण इलाकों के बाजार भी बंद रखने का आह्वान किया गया है. भाकियू ने अलग-अलग प्वाइंट बनाकर सभी को जिम्मेदारी दे दी है कि कोई कसर न रह जाए, बंद को हर हाल में सफल बनाएं.

शहरी इलाकों में भी दिख सकता है बंद का असर 

संयुक्त किसान मोर्चा के ग्रामीण भारत बंद का शहरी इलाकों में भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है. दावा किया जा रहा है कि किसान ना तो शहर जाएंगे और ना खेतों पर. इसकी वजह से हर रोज शहरी क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण कम आएंगे तो बाजारों में भी इसका असर दिख सकता है. क्योंकि कई जिलों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र पास पास हैं और ग्रामीण खरीददारी करने शहर आते हैं और बंद से ये सब प्रभावित होगा.

ग्रामीण भारत बंद होगा सफल- राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि ग्रामीण भारत बंद पूरी तरीके से सफल होगा. संयुक्त किसान मोर्चा ने इस भारत बंद और खासतौर से ग्रामीण भारत बंद का आह्वान किया है. किसानों की समस्याओं और परेशानियों को लेकर सरकार गंभीर नहीं हैं. आंदोलन होंगे और बड़े होंगे और किसान पीछे हटेगा नहीं. पहले ग्रामीण भारत बंद हो जाए उसके बाद अगला फैसला लेंगे. बता दें कि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत बेंगलुरू से लौटते वक्त मेरठ जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के आवास पर पहुंचे थे और फिर वहां से मुजफ्फरनगर के लिए रवाना हो गए. राकेश टिकैत कल शुक्रवार (16 फरवरी) को मुजफ्फरनगर में ही रहकर भारत बंद पर नजर बनाएंगे.


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किसानों के 'दिल्‍ली चलो' मार्च का तीसरा दिन

किसानों के 'दिल्ली चलो' मार्च का आज तीसरा दिन है. एमएसपी पर कानून बनाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली कूच पर निकले किसानों ने हरियाणा सीमा से सटे पंजाब के शंभू बार्डर पर मोर्चा लगा लिया है.  किसान नेताओं ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार से बातचीत तक वे आगे नहीं बढ़ेंगे. भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने बैठक बुलाई है. सरकार और किसानों में चंडीगढ़ में गुरुवार शाम पांच बजे तीसरे दौर की वार्ता होगी. किसानों ने बैठक तक दिल्ली मार्च को रोक दिया है, लेकिन हरियाणा की सीमाओं पर 25 हजार से अधिक किसान जमे हुए हैं. किसान आंदोलन को लेकर अब सरकार किसानों से एक बार फिर बात करेगी. इससे पहले दो बैठकें पहले ही बेनतीजा रह चुकी हैं.

चढूनी ने बुलाई बैठक

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने एक वीडियो जारी कर कहा कि अगर पुलिस प्रशासन का रवैया किसानों के साथ ठीक नहीं हुआ तो किसान के किसी कदम के पीछे प्रदेश सरकार ही जिम्मेदार होगी. ये आपात  बैठक 15 फरवरी को सुबह 11 बजे बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं. बैठक के बाद ले सकते हैं दिल्ली कूच का निर्णय.

सरकार की तरफ से पत्र के जरिये न्योता 

पंजाब किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंधेर और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि गुरुवार की बैठक के लिए उन्हें सरकार की तरफ से पत्र के जरिये न्योता मिला है. वहीं, किसानों के साथ तीसरे दौर की बातचीत से पहले नई दिल्ली में बुधवार को केंद्रीय मंत्रियों की बैठक हुई. इसमें मुंडा के साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कुछ अन्य मंत्री शामिल थे.

दूसरे दिन भी किसानों का उपद्रव

किसानों ने बुधवार को दूसरे दिन भी जमकर उपद्रव किया, लेकिन हरियाणा ने अपनी सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया.  इस बीच, भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने पंजाब भर में गुरुवार को दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक रेल ट्रैक जाम करने का ऐलान किया है. पंजाब के विभिन्न जिलों से जुटे किसान मंगलवार दोपहर से ही दिल्ली कूच करने के लिए हरियाणा सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे हैं. पटियाला से सटे शंभू और संगरूर और जींद के बीच स्थित दाता सिंह बॉर्डर पर दूसरे दिन भी किसान उपद्रव करते रहे. दिल्ली कूच के लिए निकले पंजाब के किसानों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव के चलते शंभू और दातासिंह वाला सीमा पर तनाव बना हुआ है.

किसानों पर दागे आंसू गैस के गोले

 उग्र हुए किसानों को कंट्रोल करने के लिए हरियाणा पुलिस ने ड्रोन से आंसू गैस के गोले छोड़े तो किसानों ने पतंग उड़ाकर ड्रोन को गिराने की कोशिश की. किसान आंसू गैस के गोले का असर कम करने के लिए पानी की बौछारें करते रहे.  किसान पानी के टैंकर और स्प्रे टैंक और गीली बोरियां लेकर पहुंचे थे. ड्रोन को गिराने के लिए गुलेल का भी इस्तेमाल किया गया. दाता सिंह बॉर्डर पर पुलिस और किसानों के बीच शाम तक कई बार झड़प हुई. कई किसानों के घायल होने की खबर है. किसानों पर निगरानी के लिए पुलिस ने यहां पांच ड्रोन तैनात किए हैं. 

दिल्ली की सभी सीमाएं सील

किसानों के प्रवेश को देखते हुए पड़ोसी राज्यों से जुड़ी दिल्ली की सभी सीमाएं सील कर दी हैं.  हरियाणा से सटे सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. बुधवार दोपहर में बार्डर पूरी तरह से सील कर दिया गया. यूपी की सीमा से लगे गाजीपुर, चिल्ला, भोपुरा और अप्सरा बॉर्डर पर चेकिंग व बैरिकेडिंग के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी रही.  एनएच-9 की सर्विस लेन बंद कर दी गई हैं. डीएनडी और कालिंदी कुंज बार्डर पर जांच के बाद ही वाहनों को दिल्ली में प्रवेश दिया जा रहा.

रेलवे ट्रैक रहेगा जाम

भाकियू उगराहां के राज्य प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि अपने हक के लिए प्रदर्शन कर रहे किसानों पर सरकार जुल्म कर रही है, जिसके विरोध में आज पंजाब में 4 घंटे रेलवे ट्रैक पर जाम लगाकर प्रदर्शन करेंगे. 

छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी

 इस बीच सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षाएं देने जा रहे छात्रों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है.  इस एडवाइजरी में कहा गया है कि छात्र परीक्षा केंद्र पर वक्त पर पहुंचने के लिए घरों से जल्दी निकलें.  किसानों केमार्च के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में फिलहाल यातायात प्रतिबंध लागू हैं. आज से दसवीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं.



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किसानों के प्रदर्शन से राजधानी दिल्ली जाम

रात्रि विश्राम के बाद किसान दिल्ली कूच करने की जुगत में लगे हैं. पुलिस पूरी तरह से अलर्ट है. देखा जाए तो दिल्ली को सुरक्षित बनाने के लिए बॉर्डर को सील किए गए हैं, दिल्ली पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है. किसानों के दिल्ली चलो मार्च का आज दूसरा दिन है. प्रदर्शनकारियों को काबू में रखने के लिए पुलिस ने किसानों पर सुबह से ही आंसू गैस के गोले दागने शुरु कर दिए हैं.  प्रदर्शन और सुरक्षा के बीच दिल्ली की जनता सड़कों पर फंस गई है. लंबे जाम होने के कारण लोगों को घंटों रोड पर इंतज़ार करना पड़ रहा है.

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

दिल्ली के कालिंदी कुंज में नोएडा से आ रही गाड़ियों को ट्रैफिक का सामना कर पड़ रहा है. लोगों का कहना है कि उन्हें इस ट्रैफिक में घंटे बिताने पड़ रहे हैं. पिछले कुछ दिनों से रोज यहां ट्रैफिक का सामना करना पड़ रहा है. बाइक चालक फुटपाथ पर बाइक चला कर ट्रैफिक पार करने की कोशिश कर रहे हैं.

सिंधु बार्डर का हाइवे बंद कर दिया गया है. आज किसानों के मूवमेंट को देखते हुए आसपास के गांवों की ओर जाने वाले रास्तों को भी बंद किया जा रहा है. 

सिंधु बार्डर के बंद होने से कोंडली और राई इंडस्ट्रियल इलाके में काम करने वाले करीब 50 हजार से ज्यादा मजदूरों को कई किमी पैदल जाकर काम पर जाना पड़ रहा है. कोंडली और राई औद्योगिक क्षेत्र में करीब 5 हजार से ज्यादा छोटी बड़ी फैक्ट्रियां है, 

दिल्‍ली के सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर भीषण जाम लगा. किसानों के प्रदर्शन के मद्देनजर उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच यूपी गेट के पास एक दीवार बनाई गई है. इसके ऊपर बाड़बंदी की गई है.

किसानों के ‘दिल्ली चलो' मार्च को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर बहुस्तरीय अवरोधक, कंक्रीट के अवरोधक, लोहे की कीलों और कंटेनर की दीवारें लगाकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा, ''हम जो कह रहे हैं वह कोई नई मांग नहीं है. यह सरकार द्वारा हमारे प्रति एक प्रतिबद्धता थी. हमने बार-बार उन प्रतिबद्धताओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया था, लेकिन सरकार ने आज तक कोई गंभीरता नहीं दिखाई.''

मंगलवार को 2020-21 के विरोध प्रदर्शन का फ्लैशबैक देखने को मिला जब किसानों को पंजाब-हरियाणा सीमा पार करने से रोकने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया था.

किसानों का कहना है कि वे लंबी यात्रा के लिए तैयार हैं और उनके पास दिल्ली पहुंचने के लिए पर्याप्त डीजल और छह महीने तक का राशन है.  एक किसान ने एनडीटीवी से कहा कि वे तब तक वापस नहीं लौटेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, भले ही इसमें कई महीने लग जाएं.

किसान मांगों की एक सूची को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकार ने तीन प्रमुख मांगों को छोड़कर उनकी अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया है - एमएसपी पर एक कानून, कृषि ऋण माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश को लागू करना.

सरकार ने मंगलवार को किसान नेताओं से मिलने को कहा था, मगर किसान पक्ष का कहना है कि सरकार समय की बर्बादी कर रही है. मांगों को लेकर सरकार गंभीर नहीं है.

 केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों से बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने किसान नेताओं से आग्रह किया कि वो बातचीत के लिए आएं. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों की मांगें बढ़ती जा रही हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से भी कहा कि आगजनी और हिंसा नहीं करें.

पुलिस ने कंक्रीट ब्लॉकों और टायर डिफ्लेटर के साथ सीमाओं पर बैरिकेडिंग करके दिल्ली की किलेबंदी कर दी है. 

पंजाब-हरियाणा से दिल्ली की ओर कूच कर रहे किसानों को अरविंद केजरीवाल सरकार का साथ मिला है. आंदोलन करने दिल्ली आ रहे किसानों को लेकर केजरीवाल सरकार ने कहा कि किसानों की मांगें जायज हैं और उन्हें जेल में डालना गलत है. इतना ही नहीं, किसान आंदोलन पर दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार के बवाना स्टेडियम को अस्थाई जेल बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

पूरी दिल्ली में एक महीने के लिए सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और सीमा पार वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. पुलिस सभी वाहनों की जांच भी कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रदर्शनकारी शहर में प्रवेश कर सकें.


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