जलवायु परिवर्तन समझौते व वर्तमान स्थिति

नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से पैदा हुए खतरों से दुनिया परिचित हो चुकी है। आज यह कोई वैज्ञानिक भविष्यवाणी मात्र न रह कर एक सचाई के रूप में विभिन्न प्राकृतिक दुर्घटनाओं के रूप में सामने आ रही है। बाढ़, सूखा, समुद्री तूफान, अंधड़, बेमौसमी बर्फबारी, ग्लेशियर पिघलने के कारण आसन्न जल संकट जैसे कितने ही बदलाव दृष्टिगोचर हो रहे हैं। समुद्री तटों से लगते इलाके और देश बढ़ते समुद्र तल के कारण डूबने के खतरे में घिर सकते हैं। इन खतरों के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र संघ लगातार पहल कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन इस दिशा में आधारभूत सम्मेलन है। 1992 में इस सम्मेलन के निष्कर्षों पर 197 देशों ने हस्ताक्षर किए और 21 मार्च 1994 से इस समझौते को लागू माना गया। इस समझौते की मूल बात यह है कि इसके द्वारा यह माना गया कि जलवायु परिवर्तन एक समस्या है और इसके समाधान के लिए कुछ किया जाना चाहिए, जिसका मूल कारक हरित प्रभाव गैसें हैं जो वैश्विक तापमान वृद्धि का कारण हैं। और ये गैसें ऊर्जा उत्पादन के लिए मुख्यतः कोयला या खनिज तेल जलाने के कारण पैदा हो रही हैं और वातावरण में जमा हो रही हैं।

 

इसी वृद्धि से जलवायु परिवर्तन हो रहा है। इस समझौते द्वारा विभिन्न पक्षों से यह अपेक्षा की गई कि वे हरित-प्रभाव गैसों के मानव-जनित उत्सर्जन को इस सीमा के भीतर नियंत्रित करेंगे जिससे जलवायु तंत्र पर खतरनाक प्रभाव न पड़ें। इस लक्ष्य की घोषणा हो ताकि एक शुरुआत हो और आगे चल कर विस्तृत, विशिष्ट समझौते किए जा सकें। इसमें जलवायु के संदर्भ में सांझी किंतु जिम्मेदारियों के संदर्भ में अलग-अलग जिम्मेदारियों की संकल्पना की गई, जिसका अर्थ यह है कि विकासशील देशों से यह उम्मीद की जाती है कि वे जलवायु परिवर्तन रोकने में योगदान करेंगे, किंतु विकसित देश जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए पहलकदमी करेंगे क्योंकि ये देश ऐतिहासिक रूप से पहले ही बहुत ज्यादा हरित-प्रभाव गैसों का उत्सर्जन कर चुके हैं। विकासशील देशों में खासकर और वैश्विक स्तर पर आमतौर पर टिकाऊ आर्थिक विकास पर बल देने की बात की गई। इस दिशा में विकासशील देशों की उपलब्धि व प्रदर्शन को विकसित देशों द्वारा तकनीक हस्तांतरण और आर्थिक सहायता से जोड़ा गया। इस समझौते में सभी देशों द्वारा हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन की मात्रा की घोषणा करने और विकसित देशों द्वारा हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन को कम करने से संबंधित नीतियों की घोषणा करने की भी अपेक्षा की गई। इसके बाद लगातार सम्मेलन होते रहे जिन्हें संबंधित पक्ष सम्मेलन कहा गया। इन सम्मेलनों में क्योटो सम्मेलन पहला महत्त्वपूर्ण सम्मेलन है जहां क्योटो प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर हुए। इस प्रोटोकॉल द्वारा पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन के आशयों को लागू करने के लिए नियम बनाए गए। रूस द्वारा मान्यता देने के बाद 2005 में इसे लागू माना गया, किंतु एक हरित गैसों के उत्सर्जक बड़े देश अमेरिका ने इस प्रोटोकॉल को मान्यता नहीं दी क्योंकि विकासशील देश होने के कारण पहले दर्जे के हरित गैस उत्सर्जक चीन और तीसरे दर्जे के उत्सर्जक भारत पर कोई नियंत्रण इस प्रोटोकॉल में नहीं सुझाए गए थे।

 

 जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन में यह अपेक्षा की गई थी कि जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया को उस स्तर के भीतर रोकना होगा जिससे परिस्थिति तंत्र स्वयं को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढाल सके, और टिकाऊ विकास और कृषि उत्पादन पर घातक प्रभाव न पड़े। इस प्रोटोकॉल में 37 औद्योगिक देशों के लिए उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य निर्धारित किए गए। 1990 के स्तर से 5 फीसदी उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य रखा गया। अमेरिका ने इसे भेदभावपूर्ण मानते हुए इसे मान्यता नहीं दी। अन्य 184 देशों ने इसे मान्यता दे दी। विकासशील देशों के लिए कोई लक्ष्य इस तर्क पर निर्धारित नहीं किया गया कि जिन विकसित देशों ने जलवायु को पहले ही अधिक नुकसान पहुंचाया है, उन्हें पहल करनी चाहिए। उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य की पूर्ति न करने पर आर्थिक दंड का भी प्रावधान किया गया। पेरिस समझौता इस कड़ी में सबसे महत्त्वपूर्ण है। इसमें सभी देशों को अपने-अपने उत्सर्जन स्तर में कमी करने के वादे दायर करने का प्रावधान है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान कहा गया है। हर 5 वर्ष में इसका पुनरावलोकन व आकलन करने की वैश्विक स्तर पर व्यवस्था है। यह समझौता 2015 में किया गया। इसमें तापमान वृद्धि को औद्योगिक क्रांति के समय के तापमान से 2 डिग्री सेंटीग्रेड के नीचे रोकने का लक्ष्य रखा गया है। कोशिश यह करनी है कि तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड से कम पर ही रुक जाए। वैश्विक स्तर पर नेट जीरो उत्सर्जन स्तर 2050 तक हासिल करना है। नेट जीरो उत्सर्जन का अर्थ है कि हरित प्रभाव गैसों का उत्सर्जन उतना ही होगा जितनी मात्रा में हरित प्रभाव गैसों का उत्सर्जन कुछ अन्य गतिविधियों द्वारा घटा लिया गया है। इसे जलवायु तटस्थ या कार्बन तटस्थ स्थिति भी कहा गया है। देशों ने अपने लक्ष्य स्वयं निर्धारित किए हैं, फिर भी ट्रम्प प्रशासन के अंतर्गत अमेरिका ने समझौते से किनारा कर लिया था। हालांकि अब जो बाइडेन प्रशासन ने फिर समझौते को मान्यता दे दी है।

 

 पेरिस समझौता आर्थिक, तकनीकी और क्षमता निर्माण के लिए ढांचा बनाने की व्यवस्था करता है ताकि  समझौते की पूर्ति के लिए जरूरतमंद देशों को सहायता दी जा सके। इसी कड़ी में जलवायु परिवर्तन से संबंधित पक्षों का 26वां सम्मेलन ग्लास्गो में 31 अक्तूबर से 12 नवंबर 2021 तक संपन्न हुआ। इसमें मुख्य चार लक्ष्यों पर निर्णय लिए गए : 1. न्यूनीकरण, इसमें हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन को 2030 तक नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करके कम करने के वादे किए गए। 2. अनुकूलन : इसके तहत जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के प्रयासों को बढ़ावा देने का निर्णय हुआ। 3. आर्थिक सहयोग : विकसित देशों ने हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए विकासशील देशों को आर्थिक सहायता देने के लिए 2023 तक 100 बिलियन डालर फंड इकट्ठा करने की दिशा में प्रगति की है। 4. सहयोग : सरकारों के बीच स्वच्छ हरित ऊर्जा, विद्युत चालित वाहन, जहाजरानी, शून्य उत्सर्जन स्टील निर्माण, हाइड्रोजन फ्यूल   आदि क्षेत्रों में तकनीकी और आर्थिक सहयोग द्वारा जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने पर सहमति बनी है। इस समय गैस उत्सर्जन मामले में चीन पहले, अमेरिका दूसरे तथा भारत तीसरे स्थान पर बना हुआ है। ये तीनों देश कितनी गंभीरता से इस मुद्दे को लेते हैं उसी पर बहुत हद तक जलवायु परिवर्तन त्रासदी से निपटने के प्रयासों की सफलता निर्भर होगी।

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दिल्ली में पारा गिरा, वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में

नई दिल्ली : दिल्लीवासियों की शनिवार सुबह की शुरुआत सर्द मौसम के साथ हुई और न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी।


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज किया गया। सुबह नौ बजे एक्यूआई 412 दर्ज किया गया।


शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच 'मध्यम', 201 और 300 के बीच 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब' तथा 401 और 500 'गंभीर' माना जाता है।


मौसम विभाग ने बताया कि शहर में आसमान मुख्यत: साफ रहने और अधिकतम तापमान 23 डिग्री से. तक पहुंचने का अनुमान है। सापेक्षिक आर्द्रता का स्तर सुबह साढ़े आठ बजे 95 प्रतिशत है।


शुक्रवार दोपहर चार बजे शहर का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 415 था। बृहस्पतिवार को यह 423, बुधवार को 407 और मंगलवार को 402 था।




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कश्मीर घाटी में अधिकतर स्थानों पर न्यूनतम तापमान गिरा

श्रीनगर : कश्मीर में अधिकतर स्थानों पर शुक्रवार की रात न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जबकि मौसम विभाग ने रविवार से अगले दो दिनों तक केंद्र शासित प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि काजीगुंड को छोड़कर शुक्रवार रात को समूची घाटी में न्यूनतम तापमान गिरा। शुक्रवार रात को श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 1.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि बृहस्पतिवार की रात को यह 2.4 डिग्री सेल्सियस था। घाटी के काजीगुंड में न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो बृहस्पतिवार रात से एक डिग्री ज्यादा है। दक्षिण कश्मीर के निकटवर्ती कोकेरनाग में न्यूनतम तापमान शून्य से एक डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में पारा शून्य से नीचे 0.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि बृहस्पतिवार रात को यहां तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस था। वार्षिक अमरनाथ यात्रा के आधार शिविर के रूप में कार्य करन वाले पहलगाम का न्यूनतम तापमान शून्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो बृहस्पतिवार रात शून्य से 1.3 डिग्री सेल्सियस नीचे था। गुलमर्ग में तापमान बृहस्पतिवार रात के शून्य से 5.1 डिग्री सेल्सियस के मुकाबले शुक्रवार रात को शून्य से 6.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। यह जम्मू कश्मीर में सबसे ठंडा स्थान रहा।






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कोलकाता समेत बंगाल के अन्य इलाकों में ठंड बढ़ी, दार्जिलिंग में न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस

कोलकाता : उत्तर भारत के अन्य इलाकों की तरह पश्चिम बंगाल में भी ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। राजधानी कोलकाता समेत राज्य के अन्य हिस्सों में न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट देखी जा रही है।


कोलकाता में सोमवार को न्यूनतम तापमान 11.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि दार्जिलिंग में पारा 3.5 डिग्री सेल्सियस पर आ गया।


मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों में कोलकाता में दिन और रात के तापमान में गिरावट देखी जा सकती है।


कोलकाता का अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस नीचे 22.8 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान भी सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस नीचे 11.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


पश्चिम बंगाल के मैदानी इलाकों में श्रीनिकेतन सबसे ठंडा इलाका रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


मौसम विभाग के मुताबिक कलिम्पोंग में न्यूनतम तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस, पुरुलिया (7.5), पानागढ़ (7.6), कलाईकुंडा (7.5), सिलीगुड़ी (8.6), वर्धमान (8.6), कूचबिहार (9.3) और दीघा में न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।






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दिल्ली में मौसम की अब तक की सबसे सर्द सुबह

नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार की सुबह मौसम का अब तक का सबसे कम 8.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बताया कि यह औसत से एक डिग्री कम रहा।


शहर में सुबह आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 रहा, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। पड़ोस के फरीदाबाद में (266), गाजियाबाद (262), ग्रेटर नोएडा (224), गुड़गांव (288) और नोएडा (254) में भी खराब श्रेणी में वायु गुणवत्ता दर्ज की गई।


शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 से 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच 'मध्यम', 201 से 300 के बीच 'खराब', 301 से 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी में माना जाता है।


शहर में शुक्रवार को 24 घंटे का औसत एक्यूआई 314 दर्ज किया गया। इससे पहले दिल्ली में मौसम का सबसे कम तापमान बृहस्पतिवार को दर्ज किया गया था,तब तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस था।


मौसम विभाग ने दिन में हल्की धुंध छाए रहने और अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान व्यक्त किया है। सुबह साढ़े आठ बजे हवा में नमी का स्तर 87 प्रतिशत दर्ज किया गया।


आईएमडी के मुताबिक शुक्रवार को अधिकतम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।





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राजस्थान में सर्दी ने जोर पकड़ा, न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री तक गिरा

जयपुर : राजस्थान के अनेक हिस्सों में सर्दी ने जोर पकड़ लिया है और सर्द हवाओं से आम जनजीवन प्रभावित होने लगा है। बीती रात चुरू में न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस रहा।


मौसम विभाग के अनुसार बुधवार रात सीकर में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री जबकि पिलानी, अलवर, हनुमानगढ़, नागौर और भीलवाड़ा में क्रमश: 6.4, 6.6, 6.7, 6.9 और 7.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


अन्य जगहों पर रात का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।


विभाग के अनुसार आगामी 48 घंटों के दौरान राज्य के अनेक हिस्सों में सर्दी जारी रहेगी।



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नासिक शहर में 24 घंटे में दिसंबर महीने की सर्वाधिक बारिश दर्ज की गई

नासिक (महाराष्ट्र) : महाराष्ट्र के नासिक शहर में 24 घंटे में दिसंबर महीने की सर्वाधिक बारिश दर्ज की गई।


मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, एक दिसंबर को शहर और जिले के कुछ हिस्सों में बेमौसम बारिश हुई, जो बुधवार तथा बृहस्पतिवार की दरमियानी रात भी जारी रही।


मौसम विज्ञान विभाग के सूत्रों ने बताया कि शहर में बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे से 24 घंटे में 63.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसने दिसंबर महीने में 24 घंटे में हुई बारिश के अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। इससे पहले, 16 दिसंबर 1967 को 24 घंटे में 31 मिलीमीटर बारिश हुई थी।


जिले में इस मौसम में अब तक 176 मिलीमीटर बारिश हुई है। शहर के अलावा इगतपुरी, त्र्यंबकेश्वर, डिंडोरी, पेठ, निफड़, सिन्नार, चंदवाड़, देवला, नंदगांव, येओला, बगलान, कलवां और सुरगना सहित जिले के अन्य हिस्सों में भी बारिश हुई।





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कश्मीर में लोगों को ठंड से थोड़ी राहत

श्रीनगर : कश्मीर में लोगों को ठंड से थोड़ी राहत मिली है लेकिन घाटी में पारा जमाव बिंदु से नीचे रहा। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।


अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर में बुधवार रात तापमान शून्य से 1.8 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जबकि मंगलवार रात यह शून्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा था। श्रीनगर में मंगलवार को इस सर्द ऋतु का सबसे न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।


अधिकारियों ने बताया कि वार्षिक अमरनाथ यात्रा के आधार शिविर पहलगाम में तापमान शून्य 4.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पलहे पहलगाम में तापमान शून्य से 5.2 डिग्री सेल्सियस नीचे था।


उत्तरी कश्मीर में बारामूला जिले के गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान शून्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में तापमान शून्य से 3.3 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा।


काजीगुंड में तापमान शून्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस नीचे, जबकि कोकेरनाग में न्यूनतम तापमान शून्य से 1.4 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि मौसम तीन दिसंबर तक शुष्क बना रहेगा।


अधिकारियों ने बताया कि घाटी में सप्ताहांत में कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के दस्तक देने का अनुमान है। बूंदाबांदी से घाटी में शुष्क मौसम खत्म होगा।


गौरतलब है कि कश्मीर में 40 दिन का 'चिल्लई कलां' का दौर 21 दिसंबर से शुरू होगा। इस दौरान क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ती है।




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देश में इस साल नवंबर में पांच वर्षों में सर्वाधिक बारिश हुई :मौसम विभाग

नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को बताया कि देश में नवंबर महीने में 645 बार भारी बारिश हुई और 168 बार बहुत भारी बारिश हुई, जो पिछले पांच वर्षों में इस महीने में सर्वाधिक है।


इस महीने में 11 बार अत्यधिक भारी बारिश (204.4 मिमी से अधिक) हुई, जो पिछले साल के आंकड़े के बराबर है।


आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार देश में नवंबर महीने में 645 बार भारी बारिश (64.5 मिमी से 115.5 मिमी) और 168 बार भारी बारिश (115.6 मिमी से 204.5 मिमी) बारिश हुई, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है।


प्रायद्वीपीय भारत में अत्यंत भारी बारिश से लेकर बहुत भारी बारिश हुई, जिसकी वजह से आंध्र प्रदेश में 44, तमिलनाडु में 16 और कर्नाटक में 15 और केरल में तीन लोगों की मौत हो गई।


मौसम विभाग ने बताया कि नवंबर में सामान्य बारिश 30.5 मिमी की तुलना में 56.5 मिमी बारिश हुई, यानी 85.4 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई। प्रायद्वीपीय भारत में 160 प्रतिशत ज्यादा बारिश (232.7 मिमी) हुई।






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पश्चिमी विक्षोभ से राजस्थान के कई इलाकों मे बारिश का अनुमान

जयपुर : पश्चिमी विक्षोभ के असर से राजस्थान के कई इलाकों में आगामी दो-तीन दिन में मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार दक्षिणी अंडमान सागर में आगामी 12 घंटों में कम दबाव के क्षेत्र के बनने की संभावना है।


साथ ही राज्य में एक दिसंबर से पश्चिमी विक्षोभ के भी सक्रिय होने की संभावना है।


केंद्र के अनुसार इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से एक दिसंबर को राजस्थान के जोधपुर,कोटा, उदयपुर संभाग में हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा होने की संभावना है। वहीं दो दिसंबर को राज्य के जोधपुर,कोटा, जयपुर, उदयपुर व अजमेर संभाग के जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा तथा उदयपुर संभाग में एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा भी होने की संभावना है।


इसी तरह तीन दिसंबर को भी राज्य के कई हिस्सों कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है जबकि चार दिसंबर को एक बार पुनः राज्य में मौसम शुष्क होने की संभावना जताई गई है।


वहीं, बीती सोमवार रात के न्यूनतम तापमान की बात की जाए तो यह चुरू में 6.0 डिग्री सेल्सियस, सीकर में 6.6 डिग्री, पिलानी में 7.6 डिग्री, संगरिया में 7.1 डिग्री व अलवर में 8.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।





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कर्नाटक में बारिश से तबाही: 24 लोगों की मौत, 5 लाख हेक्टेयर फसल नष्ट

बेंगलुरु :  कर्नाटक में सितंबर से अब तक भारी बारिश से संबंधित त्रासदियों के कारण 24 लोगों की जान चली गई। बारिश से राज्य में पांच लाख हेक्टेयर कृषि फसलों को भी नुकसान हुआ है।


राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगातार बारिश से हुए नुकसान की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की अध्यक्षता में उनके गृह कार्यालय कृष्णा में रविवार शाम हुई बैठक से ये कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए।


सूत्रों के अनुसार, नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि 658 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और 8,495 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। इससे 191 पशुओं की मौत भी हुई है।


लगभग 5 लाख हेक्टेयर कृषि फसल नष्ट हो गई है और बागवानी फसल के नुकसान का आकलन 30,114 हेक्टेयर में किया गया है। राज्य में लगातार हो रही बारिश से 2,203 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है।


165 पुल भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि विभिन्न जिलों में 1,225 स्कूल भवन, 39 सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) भवन भी बारिश से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1,674 बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए और 278 ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं।


बेंगलुरु शहरी, बेंगलुरु ग्रामीण, तुमकुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, रामनगर, हासन जिलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।


राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) के तहत जिलों में जिला आयुक्तों के पास 689 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री बोम्मई ने जरूरत पड़ने पर और धनराशि आवंटित करने का आश्वासन दिया है।


सभी स्तरों पर कृषि विभाग के अधिकारियों को फसल नुकसान का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। अगस्त और सितंबर में लगातार बारिश के कारण 3.43 लाख हेक्टेयर में फसल प्रभावित हुई थी, जिससे 1.5 लाख किसान प्रभावित हुए और उनके लिए 130 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। 79,000 किसानों का मुआवजा लंबित है और मुख्यमंत्री बोम्मई ने उनके देय मुआवजे को मंजूरी देने के लिए 79 करोड़ रुपये जारी करने के निर्देश दिए हैं।


मकान खोने वालों के लिए राहत की पहली किस्त के रूप में एक-एक लाख रुपये तत्काल जारी करने की कार्रवाई की गई है। बीमा कंपनियों द्वारा फसल हानि बीमा राशि के शीघ्र वितरण के लिए अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में बारिश के तुरंत बाद सड़क मरम्मत कार्य शुरू करने के आदेश दिए गए।


सिंचाई टंकियों की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर करने का भी सुझाव दिया गया। सरकार ने गड्ढों को भरने के लिए बीबीएमपी सीमा में प्रत्येक क्षेत्र के लिए 25 लाख रुपये जारी करने का भी निर्णय लिया है। बीबीएमपी सीमा में नुकसान की वार्डवार रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।


होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा बल की टीमें बचाव और राहत कार्य में जुट गई हैं। बैठक में जरूरत पड़ने पर अधिकारियों को अपनी ताकत बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

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सर्दियों में सिर्फ स्किन नहीं बालों का भी रखें खास ख्याल

सर्दियों का मौसम आ गया है और इस मौसम में आपके स्किन को एक्सट्रा केयर की जरूरत होती है क्योंकि सर्दी का मौसम स्किन के लिए बिलकुल अच्छा नहीं होता। सर्दी में चलने वाली सूखी हवा हमारे स्किन से मॉइश्चर यानी नमी को खींच लेती है और अगर इस ओर ध्यान न दिया जाए तो ड्राई स्किन की वजह से स्किन फटने लगती है और कभी कभार तो ब्लीडिंग तक हो सकती है। लेकिन सर्दियों में सिर्फ स्किन ही नहीं बल्कि बाल भी ड्राई हो जाते हैं जिस वजह से उनका भी खास ख्याल रखने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि आखिर कैसे आप इस कोल्ड वेदर के साइड इफेक्ट्स से अपने बालों को बचा सकते हैं...


बालों को कंडिशन करें

सर्दी के मौसम में स्किन के साथ-साथ बालों का भी मॉइश्चर छिन जाता है जिस वजह से वे ड्राई और फ्लैकी यानी पपड़ीदार हो जाते हैं। लिहाजा यह बेहद जरूरी है कि आप किसी अच्छे डीप-कंडिशनिंग सीरम या बाम का बालों पर इस्तेमाल करें। इससे बालों का खोया मॉइश्चर लौट आएगा। साथ ही इस वेदर में बालों में बहुत ज्यादा शैंपू भी यूज न करें। हर बार बाल धोने के बाद कंडिशनर जरूर लगाएं। इससे बालों में शाइन आएगी और बाल टूटेंगे नहीं।


हेयर ड्रायर यूज करने से बचें

सर्दी के मौसम में बालों को सुखाने के लिए हेयर ड्रायर यूज न करें। बाल नैचरली सूखें इसी में आपका फायदा है। अगर इमरजेंसी में कभी हेयर ड्रायर इस्तेमाल करना भी पड़े तो बालों को बहुत ज्यादा ड्राई न करें वरना बालों को नुकसान हो होगा ही वे बहुत ज्यादा फ्रिजी यानी उलझने भी लगेंगे। ड्रायर को कूल मोड पर सेट करें और जेंटली बालों पर इसका इस्तेमाल करें।


बालों को सुखाकर ही बाहर निकलें

सर्दी के मौसम में जहां तक संभव हो गीले बालों में घर से बाहर न निकलें। हमेशा बालों को पूरी तरह से सुखाकर ही घर से बाहर निकलें। ऐसा करने से न सिर्फ आप सर्दी और ठंड लगने से बच जाएंगी बल्कि आपके बाल भी ड्राई और कमजोर नहीं होंगे। साथ ही साथ हीट स्टाइलिंग टूल इस्तेमाल करने से पहले बालों में हीट स्प्रे या लीव-इन कंडिशनर जरूर लगाएं। ऐसा करने से आपके बाल हाइड्रेटेड, सॉफ्ट और शाइनी रहेंगे।


बालों को प्रोटेक्ट करें

सर्दी के मौसम में स्वेटर, जैकेट पहनने के साथ-साथ बालों को भी प्रोटेक्शन की जरूरत होती है। लिहाजा हैट या स्कार्फ का इस्तेमाल करें। मौसम में अचानक होने वाले बदलाव से बालों को काफी नुकसान हो सकता है। 






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दिल्ली में कोहरा हुआ और घना, इस मौसम का सबसे खराब एक्यूआई दर्ज किया गया

नई दिल्ली : दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आंखों में जलन पैदा करने वाला कोहरा शुक्रवार को और घना हो गया तथा कई जगहों पर दृश्यता 200 मीटर रही। राजधानी में नवंबर की शुरुआत से ही प्रदूषण के स्तर में वृद्धि देखने को मिल रही है।


चार हजार से अधिक खेतों में पराली जलाए जाने के कारण दिल्ली के प्रदूषण में शुक्रवार को इसका योगदान 35 प्रतिशत रहा और अपराह्न चार बजे तक 24 घंटे के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्तर 471 दर्ज किए जाने में पराली जलाए जाने का अहम योगदान रहा। यह इस मौसम में एक्यूआई का सबसे खराब स्तर है। एक्यूआई बृहस्पतिवार को 411 था।


दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के एक विश्लेषण के अनुसार, हर साल एक नवंबर से 15 नवंबर के बीच दिल्ली में लोगों को बेहद दूषित हवा में सांस लेनी पड़ती है। फरीदाबाद (460), गाजियाबाद (486), ग्रेटर नोएडा (478), गुरुग्राम (448) और नोएडा (488) में भी अपराह्न चार बजे गंभीर वायु गुणवत्ता दर्ज की गई।


शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को “अच्छा”, 51 से 100 के बीच में “संतोषजनक”, 101 से 200 के बीच “मध्यम”, 201 से 300 तक “खराब”, 301 से 400 के बीच में “बेहद खराब” तथा 401 से 500 के बीच “गंभीर” माना जाता है।


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कारक कण पीएम 2.5 की मात्रा का 24 घंटे का औसत रात में 300 का आंकड़ा पार कर गया और इसकी मात्रा शुक्रवार को अपराह्न चार बजे 381 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। पीएम 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सुरक्षित सीमा से लगभग छह गुना अधिक रही।


पीएम 10 का स्तर 577 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ (जीआरएपी) के अनुसार, 48 घंटे या इससे ज्यादा अवधि के दौरान, पीएम 2.5 का स्तर 300 माइक्रोग्राम से अधिक और पीएम 10 का स्तर 500 माइक्रोग्राम से अधिक होने पर वायु गुणवत्ता को आपातकालीन श्रेणी में माना जाता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में सुबह मध्यम स्तर का कोहरा छाया था और ठंड थी।


दिल्ली में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और हवा की गति कम होने के चलते प्रदूषण कारक तत्वों की मात्रा अधिक रही।


एक अधिकारी ने कहा, “इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सफदरजंग हवाई अड्डे पर कोहरे के कारण दृश्यता 200-500 मीटर रही। आर्द्रता अधिक होने की वजह से शुक्रवार को कोहरा और घना हो गया।”


हरित थिंक टैंक विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने बुधवार को कहा था कि यह कोहरा जन स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति है और यह स्थिति पिछले चार साल में सबसे लंबी अवधि हो सकती है।


उसने कहा था कि अपेक्षाकृत तेज हवाओं की स्थानीय परिस्थितियों के बावजूद इस साल कोहरे की लंबी अवधि का कारण शहर में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की कमी हो सकती है।


उसने एक अन्य रिपोर्ट में बताया कि 24 अक्टूबर से आठ नवंबर तक इस साल सर्दियों के शुरुआती चरण में दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों का योगदान 50 प्रतिशत रहा है।


पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान एजेंसी ‘सफर’ ने बताया कि दिल्ली में पीएम 2.5 उत्पन्न करने में पराली जलाए जाने का योगदान चार नवंबर से लगातार कम से कम 25 प्रतिशत दर्ज किया किया जा रहा है। 



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कानपुर में स्मॉग के साथ बढ़ रही विसिबिलिटी : मौसम वैज्ञानिक

कानपुर : कानपुर शहर में स्मॉग तीव्रता से बढ़ रही है और पिछले 17 सालों में एक खतरानाक स्थिति पैदा हो गई है जिससे स्वास्थ्य आपात स्थिति के रूप में जाना जा रहा है।


लॉस एंजिल्स, बीजिंग, दिल्ली, तेहरान आदि के वायुमंडलीय प्रदूषण का स्तर विलोमन है जो कि प्रदूषण को जमीन के करीब तेजी से बढ़ा रहा है। कानपुर स्मॉग के कारण विसिबिलिटी खराब हो रही है और बच्चों को घर के अंदर रहने की प्राथमिकता दी जाती हैं, क्योंकि यह मनुष्यों के लिए बेहद जहरीला है और गंभीर बीमारी का कारण हो सकता है, यहां तक कि मृत्यु का कारण भी हो सकता है। यह बातें सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डा. एसएन सुनील पाण्डेय ने कही।


चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा. एसएन सुनील पाण्डेय ने बताया कि स्मॉग (धुआं) दो शब्दों अर्थात धुंए (स्मॉग) और कोहरे (फॉग) से मिलकर बना है, जिसे फॉग या धुंध में धुंए या कालिख कणों के मिले होने से भी जाना जाता है या धूल और जल वाष्प के साथ विभिन्न गैसों का मिश्रण जो कोहरे में मौजूद होता है जिसकी वजह से सांस लेना भी मुश्किल हो, इस रूप में भी वर्णित है। यह एक पीला या काला कोहरा होता है जो वायु प्रदूषण के एक मिश्रण से बना है, जिसमें मुख्य रूप से नाइट्रोजन आक्साइड, सल्फर आक्साइड और कुछ अन्य कार्बनिक यौगिक होते हैं जो कि सूर्य के प्रकाश के साथ गठबंधन कर ओजोन का निर्माण करते हैं।


बताया कि हम कह सकते हैं कि स्मॉग विशुद्ध रूप से वायु प्रदूषण के कारण होता है। जब ईंधन जलता हैं, वायुमंडलीय प्रदूषण या गैसें हवा में मौजूद सूरज की रोशनी और वातावरण में इसकी गर्मी के साथ प्रतिक्रिया करती हैं, जिससे स्मॉग बनती है। वीओसी, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड के बीच जटिल रासायनिक प्रतिक्रियाओं की वजह से भी बनती है, जिन्हें अग्रगामी के रूप में भी जाना जाता है।


ऐसा वातावरण जहां हवा में ओजोन, हाइड्रोजन तथा दुसरे कार्बनिक परोक्साइड्रस हो, वहां फोटो केमिकल स्मॉग का होना देखा गया है। जब वातावरण में पाए जाने वाले नाइट्रोजन सूर्य के प्रकाश में हाइड्रोकार्बन (ये मोटर साइकिलों तथा गाडियों के धुएं में होते है।) से क्रिया करते है, तब यह विशेष स्मॉग पैदा होते हैं। परोक्सी बेजॉयल नाइट्रेट जो कि प्रदेषित वातावरण में आमतौर पर होते है ही आंखों में जलन एवं आंसू लाते हैं। बताया कि किसी भी कारण से जब वातावरण में ओजोन बनने लगे तो फोटो केमिकल स्मोग की सम्भावना बढ़ने लगती है। जब एक घंटे में 0.15 पीपीएम (एक लाख पर एक भाग से अधिक) ओजोन या कोई अन्य ऑक्सीकारक बनता है, तो यह माना जाना चाहिए कि अब इस वातावरण में फोटो केमिकल स्मोग होने की सम्भावना लगभग निश्चित है।


नाइट्रोजन के ऑक्साइड सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में स्मॉग के बनने में खास योगदान देते हैं। गाडियों में धुंए में पाए जाने वाले हाइड्रोकार्बनों की जब वातावरण की ओजोन से क्रिया होती है तब भी स्मॉग बनता है। वातावरण में सामान्यतया प्रदूषित होकर दोनों की तरह की हाइड्रोजन सल्फाइड तथा सल्फर डाइऑक्साइड गैसें आ जाती है। अगर ये वातावरण की सहन करने की सीमा को पार करती है , तो उनके परिणाम बहुत गंभीर होते है। अम्ल वर्षा , विभिन्न वस्तुओं का क्षरण , दृष्टि में अचानक कमी तथा स्वास्थ्य के लिए दुसरे कई गंभीर खतरे , इन्ही गैसों की देन है। ऐसा वातावरण जो पहले से प्रदूषित हो तथा यदि संयोग से वहां स्मोग भी हो, तो सल्फर डाइऑक्साइड एवं हाइड्रोजन सल्फाइड के असर बहुत तीव्र होते है। बहुत अधिक असर होने पर आसपास के पेड़ पौधों पर भी इनका असर होने लगता है।



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बदलते मौसम में वायरल रोगों से बचना है तो करें ये योगासन

बदलते मौसम में वायरल इंफेक्शन और वायरल रोगों का खतरा बढ़ जाता है। सर्दी, जुकाम, बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द जैसी परेशानियां इस दौरान आम होती हैं। इससे बचाव के लिए आप साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं और खाने-पीने का ध्यान रखते हैं। इन बीमारियों का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है, जिनका इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है। इसलिए अगर आप ऐसे योगासनों का अभ्यास करते हैं, जिनसे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, तो आप इन वायरल रोगों और संक्रमण से बच सकते हैं। आइए आपको बताते हैं ऐसे ही योगासन, जो आपकी इम्यूनिटी बेहतर करते हैं।


सर्वांगासन: सर्वांगासन की खास बात ये है कि इसे करने से आपके शरीर के सभी अंगों को फायदा मिलता है, इसी लिए इसका नाम सर्वांगासन है। इस आसन का नियमित अभ्यास आपकी इम्यूनिटी बढ़ाता है और आपको रोगों से दूर रखता है। बच्चों और युवाओं के लिए भी ये आसन बहुत फायदेमंद है क्योंकि इससे शरीर का विकास बेहतर होता है और हार्मोन्स का बैलेंस बना रहता है। इसके अलावा इससे आपकी पाचन शक्ति ठीक रहती है और रक्त का शुद्धिकरण होता है।


कैसे करें सर्वांगासन: पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को एक साथ मिला लें और हाथों को शरीर की सीध में रखें। अब धीरे से पैरों को बिना मोडे ऊपर की तरफ उठाएं। जैसे-जैसे पैर ऊपर की तरफ उठाएंगे, वैसे-वैसे कमर को भी ऊपर की तरफ उठाएं। कोशिश करें कि पैर और पीठ इतने ऊपर उठ जाएं कि 90 डिग्री का कोण बन जाए। फिर धीरे-धीरे पहले की मुद्रा में आ जाएं। आप पीठ और कमर को उठाने के लिए हाथों का सहारा ले सकते हैं लेकिन कोहनियां जमीन से ही टिकी होनी चाहिए और चेहरा आसमान की ओर रहना चाहिए


मत्स्यासन: मत्यासन का अभ्यास भी आपको वायरल रोगों और इंफेक्शन से दूर रखता है। मत्स्यासन पेट और रीढ़ की हड्डी संबंधित सभी रोगों में बहुत फायदेमंद आसन माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से आपके फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इसके साथ ही आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है, जिसके कारण हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस आपको आसानी से बीमार नहीं बना पाते हैं। साथ ही यह आसन मेटाबॉलिज्म के लिए अच्छा माना जाता है।


कैसे करें मत्स्यासन: स्वच्छ वातावरण में समतल जमीन पर आसन बिछाकर सुखासन में बैठ जाएं। कुछ देर सांस को सामान्य करने के बाद पद्मासन लगा लें।हाथों का सहारा लेकर पीठ को पीछे की ओर धीरे-धीरे लाते हुए पीठ के बल लेट जाएं। पैरों के अंगूठों को पकड़कर उन्हें थोड़ा अपनी तरफ लाएं और पद्मासन को ठीक करते हुए घुटनों को जमीन पर अच्छी तरह से टिका दें। सांस भरें और पीठ, कंधों को ऊपर उठा गर्दन को पीछे की तरफ ले जाएं। सिर के भाग को जमीन पर टिका दें। पैरों के अंगूठों को पकड़ लें और सांस को सामान्य रखते हुए यथाशक्ति रोकने के बाद पद्मासन खोल लें। कुछ देर शवासन में लेटने के बाद पूर्व स्थिति में आ जाएं।


नाड़ी शोधन प्राणायाम: नाड़ी शोधन प्राणायाम पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। जैसा कि इसका नाम है, ये प्राणायां नाड़ी का शोधन करता है। इस आसन के अभ्यास से रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है और वायरल संक्रमण या रोगों के विषाणु आप पर असर नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा ये प्राणायाम मन को शांत और केंद्रित करता है। ये प्राणायाम श्वसन प्रणाली व रक्त-प्रवाह तंत्र से सम्बंधित समस्याओं से मुक्ति देता है।


कैसे करें नाड़ी शोधन प्राणायाम: सबसे पहले किसी भी सुखासन में बैठकर कमर को सीधा करें और आंखें बंद कर लें। दाएं हाथ के अंगूठे से दायीं नासिका बंद कर पूरी श्वास बाहर निकालें। अब बायीं नासिका से श्वास भरें और तीसरी अंगुली से बायीं नासिका को भी बंद कर लें। जितनी देर स्वाभाविक स्थिति में रोक सकते हैं, रोकें। फिर दायां अंगूठा हटाकर श्वास को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। फिर दायीं नासिका से गर्दन उठाकर श्वास को रोकें, फिर बायीं से धीरे से निकाल दें।




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मुल्लापेरियार बांध के द्वार खोले गए, इडुक्की जलाशय के लिए रेड अलर्ट जारी

इडुक्की (केरल) : केरल में तमिलनाडु द्वारा संचालित मुल्लापेरियार बांध के द्वार शुक्रवार को सुबह खोल दिए। बांध में जल स्तर 138 फुट के पार चले जाने के बाद उसके द्वार खोले गए।


यहां केरल सरकार के अधिकारियों ने बताया कि तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों ने सुबह करीब साढ़े सात बजे 126 साल पुराने बांध के तीसरे और चौथे द्वार को 0.30 मीटर तक खोल दिया है। उन्होंने बताया कि सुबह से बांध के इन दो द्वारों से 538.16 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। मुल्लापेरियार बांध में सुबह नौ बजे जल स्तर 138.80 फुट था।


दोनों राज्यों के अधिकारियों के अलावा केरल के राजस्व मंत्री के. राजन और जल संसाधन मंत्री रोशी ऑगस्टिन बांध के द्वार खोले जाने के दौरान मौजूद थे। पत्रकारों से बातचीत में राजन ने कहा कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि सरकार ने लोगों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं। बहरहाल, उन्होंने लोगों से सतर्क रहने का अनुरोध किया। सरकार ने भी सोशल मीडिया पर डर का माहौल पैदा करने वालों के खिलाफ आगाह किया है।


मुल्लापेरियार बांध के द्वार खोले जाने और डूब वाले इलाकों में अधिक बारिश के अनुमान के मद्देनजर सरकार ने इडुक्की जलाशय के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया है। ऑगस्टिन ने कहा कि इडुक्की जलाशय में मुल्लापेरियार बांध से छोड़े जा रहे पानी के भराव की पर्याप्त क्षमता है।


उन्होंने कहा कि चिंता करने और लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इडुक्की में जल भराव क्षमता 70.5 टीएमसी है। मुल्लापेरियार बांध के डूब वाले इलाके में रह रहे लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है।


अधिकारियों के अनुसार, दो फुट तक बाढ़ आने से प्रभावित होने वाले 350 परिवारों के कुल 1,079 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।


मुल्लापेरियार बांध का निर्माण केरल के इडुक्की जिले में पेरियार नदी पर 1895 में किया गया था और तमिलनाडु सरकार अपनी सिंचाई और बिजली उत्पादन की जरूरतों के लिए इसका संचालन करती है। केरल सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए नया बांध बनाने पर जोर दे रहा है लेकिन तमिलनाडु इसके खिलाफ है और उसका कहना है कि मौजूदा बांध मजबूत है।






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दिल्ली में न्यूनतम तापमान रहा सामान्य से कम

नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी में बृहस्पतिवार को सुबह मौसम सर्द रहने के साथ ही न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम, 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दिन में आसमान साफ रहने और अधिकतम तापमान के 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। सुबह साढ़े आठ बजे हवा में आर्द्रता का स्तर 78 प्रतिशत दर्ज किया गया।


मौसम विभाग के अनुसार, हिमालय से आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण आने वाले दिनों में सुबह और रात के समय तापमान के और कम होने का अनुमान है। दिल्ली में बुधवार को न्यूनततम तापमान 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।


केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली में सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 264 रहा। एक्यूआई बुधवार को 232, मंगलवार को 139, सोमवार को 82 और रविवार को 160 दर्ज किया गया था।


एक्यूआई को शून्य और 50 के बीच 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच 'मध्यम', 201 और 300 के बीच 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 और 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी में माना जाता है।


‘सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च’ (सफर) ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता आने वाले दिनों में और खराब हो सकती है। उत्तर भारत में पराली जलाए जाने के कारण दिल्ली में पीएम2.5 प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है। पराली जलने से निकले धुएं के कारण बुधवार को प्रदूषण के स्तर में 16 प्रतिशत वृद्धि हुई थी।





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यूपी में बारिश से फसल बर्बाद, सदमे से किसान की मौत

रामपुर (उत्तर प्रदेश) : बेमौसम बरसात ने कई लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। यूपी के रामपुर में 60 वर्षीय रईस खान अपने खेतों को देखने गए थे। खेत में अपनी 10 बीघा जमीन में पूरी तरह से पानी में डूबी धान की फसल को देखकर वो हैरान रह गए।


इस नुकसान को देखकर खान बेहोश हो गये और खेत में ही उनकी मौत हो गई।


उनके परिवार को बाद में उनका शव खेत में मिला।


खान के चचेरे भाई ने कहा कि वह हृदय रोगी थे और धान के सीजन में गंभीर तनाव से जूझ रहे थे। लगातार हो रही बारिश से क्षेत्र के कई किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई है।


अधिकारियों ने कहा कि किसानों को होने वाले कुल नुकसान का अभी भी आकलन किया जा रहा है।


दूसरी ओर, शाहबाद के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) संजय तोमर ने कहा, परिवार ने हमें उनकी मौत के बारे में सूचित नहीं किया है। अगर वे हमसे संपर्क करते हैं, तो हम उनकी सहायता के लिए उचित कदम उठाएंगे। हमें स्थानीय ग्रामीणों से घटना के बारे में पता चला है।


इस बीच, शाहबाद तहसीलदार, दिनेश कुमार ने कहा, हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उन्होंने कोई ऋण ले रखा था। यदि उनका परिवार पोस्टमार्टम और अन्य औपचारिकताओं का पालन करता है, तब उन्हें संबंधित सरकारी योजना के तहत कुछ वित्तीय सहायता मिल सकती है।





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बारिश ने फुलाई किसानों की सांसें, धान फसल को हुआ नुकसान

ग्रेटर नोएडा : धान की फसल करने वाले किसानों को इस बार अच्छे उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन रविवार को बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। तेज हवा के साथ हुई बारिश से धान की फसल खेतों में गिर गई है। अगेती फसल की खेती करने वाले किसानों को खासा नुकसान हुआ है। दरअसल 15 अक्टूबर से धान की कटाई का काम शुरू हो जाता है। हालांकि अगेती फसलों में किसान अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही कटाई शुरू कर देते हैं। जिले में धान की फसल बड़े स्तर पर की जाती है। इन दिनों किसान धान की कटाई के कार्य में जुटे थे। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार धान का अच्छा उत्पादन होगा, लेकिन बारिश उनके लिए आफत बनकर बरसी। शहर में जगह-जगह जलभराव से ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण व जिला प्रशासन के इंतजामों की एक बार फिर पोल खोलकर रख दी। शहर में ग्रामीण अंचलों से लेकर सेक्टर व सोसायटी के समीप शहरवासियों को जलभराव का सामना करना पड़ा। सुबह से ही काले बादल छाए रहे। सुबह से ही तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। देर शाम को ही काले बादल छाए रहे। करीब एक बजे काले बादल ऐसे छाए कि दिन में ही अंधेरा छा गया। कृषि विभाग 70 से 80 एमएम बारिश होने का दावा कर रहा है। 


तेज हवा के साथ बारिश में कई स्थानों पर पेड़ व बिजली, स्ट्रीट लाइट के खंभे गिर गए। मुख्य सड़कों पर पेड़ गिरने के बाद वाहन चालकों को आवागमन में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। 130 मीटर, सूरजपुर, के साथ -साथ ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कई स्थानों पर पेड़ गिरने की सूचना है। तेज हवा ने शहर में कई स्थानों पर पेड़ों को धराशायी कर दिया। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के साथ-साथ जेवर, बिलासपुर व दनकौर व दादरी के गांवों में करीब छह से सात घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रही।


जेवर क्षेत्र में किसानों को धान की फसल को खासा नुकसान हुआ है। गांव चौरोली निवासी किसान प्रदीप कुमार ने बताया कि खेतों में धान की कटाई चल रही है। कई बीघे फसल कट चुकी है। धान के काले पड़ने की संभावना है। किसान वीर नारायण ने बताया कि खेतों में कई कई फीट पानी भर गया है। धान फसल को भारी नुकसान की आशंका है। नगर पंचायत क्षेत्र में भी सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। नालियां जाम होने से जगह-जगह रास्तों में पानी भर गया है। बारिश बंद हो जाने के बाद भी शहर की सड़कें कई घंटों बाद तक जलमग्न रही। 





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केरल में भारी बारिश : प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री विजयन से बातचीत की

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में भारी बारिश और भूस्खलन के मद्देनजर स्थिति को लेकर रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन से बातचीत की।


इस बीच, मध्य केरल के दो जिलों के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण आयी भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 18 हो गयी है।


प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, "केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन से बातचीत की और केरल में भारी बारिश तथा भूस्खलन के मद्देनजर स्थिति पर विचार-विमर्श किया। अधिकारी घायलों और प्रभावितों की सहायता के लिए काम कर रहे हैं।"


मोदी ने कहा, ‘‘मैं सभी के सुरक्षित रहने और उनकी भलाई के लिए प्रार्थना करता हूं।" उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, "यह दुखद है कि केरल में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण कुछ लोगों की मृत्यु हो गयी। मेरी संवदेनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।’’


केरल के राजस्व मंत्री के राजन ने कहा कि बचावकर्मियों ने शनिवार को इडुक्की और कोट्टयम जिलों में विभिन्न स्थानों पर हुए भूस्खलन के मलबे से 15 शव बरामद किए हैं।


रविवार को तीन और शव मिलने से मृतकों की संख्या बढ़कर 18 हो गयी है।



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केरल में भारी बारिश के कारण मकान ढहने से दो बच्चियों की मौत

मलाप्पुरम (केरल) : केरल में कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच मंगलवार तड़के करीपुर के समीप एक मकान ढहने से दो बच्चियों की मौत हो गई।


पुलिस ने बताया कि मकान ढहने से छह महीने की बच्ची और उसकी आठ साल की बहन की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि यह मकान मुंडोट्टुपडम के समीप माथमकुलम में था। यह मकान हादसे का शिकार हुईं बच्चियों के दादा का था।


स्थानीय सूत्रों ने बताया कि पास स्थित एक निर्माणाधीन मकान बारिश की वजह से तड़के चार बजकर 30 मिनट पर पीड़ितों के मकान पर गिर गया। बच्चों को कोझिकोड चिकित्सा कॉलेज ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।


केरल में सोमवार से भारी बारिश जारी है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में मंगलवार को भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने बताया कि पूर्व-मध्य अरब सागर के ऊपर चक्रवात बना है और इसके अगले तीन दिनों तक बने रहने की संभावना है, जिसके कारण केरल में 11 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक भारी बारिश का अनुमान है।






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उत्तर पश्चिमी हवाओं से दिन का बढ़ रहा तापमान

कानपुर : चार महीने बारिश के दिन अब जा चुके हैं और मानसून की वापसी से दिन रात के तापमान में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। दिन के तापमान में जहां बढ़ोत्तरी हो रही है तो वहीं रात के में सर्द हवाएं चल रही हैं। इसके साथ ही उत्तरी पश्चिमी हवाओं से भी दिन का तापमान बढ़ रहा हे।


चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ एसएन सुनील पांडेय ने रविवार को बताया कि दक्षिण पश्चिम मानसून वापसी की ओर है। इसके साफ संकेत दिख रहे हैं, क्योंकि दिन का तापमान बढ़ रहा है और रात का तापमान घट रहा है। इसके चलते कानपुर में भी मौसम में बदलाव नजर आने लगा है, रात में हल्की ठंड तो दिन चिलचिलाती धूप लोगों को परेशान कर रही है।


बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून आधिकारिक तौर पर 30 सितम्बर को समाप्त हो गया। हालांकि, पिछले वर्षों के विपरीत, दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक तिथि समाप्त होने के बाद भी मानसून की विदाई नहीं हुई थी। अब मानसून की वापसी के लिए मौसम की स्थिति अनुकूल बनी हुई है। वर्तमान में मानसून वापसी रेखा राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर और गुजरात के भुज से होकर गुजर रही है।


मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि आमतौर पर जब मानसून पीछे हटता है, तो साफ आसमान की स्थिति के साथ-साथ हवा के पैटर्न में बदलाव होता है। यह बदलाव अब पूरी तरह से दिखने लगा है। आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश में आसमान पूरी तरह से साफ हो जाएगा। बताया कि रविवार को अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सापेक्षिक आर्द्रता सुबह की 92 फीसद और दोपहर की 49 फीसद रही। हवाओं की दिशाएं उत्तर पश्चिम रहीं, जिनकी रफ्तार 3.3 किमी प्रति घंटा रही।




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मराठवाडा के तीन जिलों में बाढ़ के बाद मांजरा बांध के 12 द्वार बंद

औरंगाबाद : महाराष्ट्र के मराठवाडा क्षेत्र में भारी बारिश से जलस्तर बढ़ने के कारण मांजरा बांध से पानी छोड़े जाने से बीड, लातूर और उस्मानाबाद जिलों के कुछ गांवों में बाढ़ आने के बाद बुधवार तड़के बांध के 12 द्वार बंद कर दिए गए।


सिंचाई विभाग द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, सुबह चार बजे बांध के कुल 18 द्वारों में 12 द्वार बंद करने से जलाशय से छोड़े जाने वाली पानी की मात्रा कम होकर 18,747 क्यूबिक मीटर प्रति सेंकड रह गयी है जबकि मंगलवार को यह 70,845 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड थी।


सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अभी बांध के छह द्वार पानी छोड़े जाने के लिए खुले हैं।


अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि पिछले दो दिनों में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़ और बिजली गिरने से कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है। मराठवाड़ा क्षेत्र बारिश का सबसे अधिक प्रकोप झेल रहा है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने 560 से अधिक लोगों को बचाया है।


उन्होंने बताया कि 200 से अधिक मवेशियों की मौत हो गयी या वे बह गए और मूसलाधार बारिश में कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए।


भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को मराठवाड़ा के कुछ स्थानों पर अगले 24 घंटों में ''अत्यधिक भारी बारिश'' का अनुमान जताया।


मध्य महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के तहत आठ जिले औरंगाबाद, लातूर, उस्मानाबाद, परभणी, नांदेड, बीड, जालना और हिंगोली आते हैं।

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बंगाल उपचुनाव में बारिश खड़ी कर सकती है मुश्किलें, कुछ इलाकों में येलो अलर्ट जारी

कोलकाता : उत्तरी कोलकाता के अहिरीटोला में बुधवार को एक इमारत के गिरने से एक बच्चे और उसकी मां समेत छह लोग अंदर फंस गए। शहर में आधी रात से लगातार हो रही बारिश के कारण यह हादसा हुआ है। गुरुवार को भवानीपुर समेत तीन विधानसभा उपचुनाव कराने की तैयारी में जुटे प्रशासन के लिए यह एक चिंता की बात है।


मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में शहर और उसके आसपास के जिलों में और बारिश होने का अनुमान लगाया है।


उत्तरी कोलकाता के अहिरीटोला में बुधवार सुबह एक जर्जर इमारत के गिरने से एक बच्चे और उसकी मां समेत छह लोग फंस गए। फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और दो लोगों को बचाया, लेकिन चार और लोगों के अंदर होने की आशंका है। बाकी लोगों को बचाने के लिए आपदा प्रबंधन टीम कड़ी मेहनत कर रही है।


अग्निशमन और आपातकालीन सेवा राज्य मंत्री सुजीत बसु मौके पर पहुंचे और व्यक्तिगत रूप से बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए, बसु ने कहा, दो लोगों को बचा लिया गया है, लेकिन कुछ और लोग हैं जो अंदर फंसे हुए हैं। हमें पहले उन्हें बचाने और अस्पताल भेजने की जरूरत है।


इस बीच, आधीरात से तेज हवा के साथ लगातार बारिश ने शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी भर दिया है, जिससे लोगों को काम पर जाने के लिए एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।


कॉलेज स्ट्रीट से मुक्ताराम बाबू स्ट्रीट, थंथानिया, शुक्रिया स्ट्रीट, गिरीश पार्क, शोभाबाजार, उल्टाडांगा, उत्तरी कोलकाता में पतिपुकुर अंडरपास और बेहाला, हरिदेबपुर, जादवपुर, तरताला, तिलजला, नेताजी नगर, पाक सर्कस, गार्डनपारा सहित शहर के अधिकांश हिस्से दक्षिण कोलकाता का इलाका पानी में डूब गया। लोगों को अपने कार्यस्थलों तक पहुंचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।


मौसम विभाग के अनुसार, एक अच्छी तरह से चिह्न्ति निम्न दबाव का क्षेत्र अब गंगीय पश्चिम बंगाल के मध्य भाग पर स्थित है, जिसके बाद पुरुलिया, बांकुरा, बीरभूम, मुर्शिदाबाद, नदिया के कुछ हिस्सों में तेज हवा के साथ बारिश या गरज के साथ बौछारें जारी रहने की संभावना है। अगले दो से तीन दिनों के लिए पश्चिम बंगाल के पूर्व और पश्चिम बर्दवान, कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, झारग्राम और मालदा जिले में बारिश होने की संभावना है।


हालांकि, मौसम विभाग ने कहा है कि गुरुवार को कोलकाता में भारी बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन बर्दवान, पुरुलिया, बांकुरा, 24 परगना, हावड़ा और हुगली सहित दो जिलों में भारी बारिश के लिए पहले ही येलो अलर्ट जारी कर दिया है।


इन जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। जो 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ऊपर उठ सकती है। मछुआरों को अगले दो से तीन दिनों तक समुद्र में न जाने को कहा गया है।


मौसम की स्थिति को लेकर प्रशासन चिंतित है क्योंकि गुरुवार (30 सितंबर) को भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपचुनाव होने हैं।


लगातार हो रही बारिश के कारण दक्षिण बंगाल के जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।


राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, चुनाव नजदीक है और इसलिए हम जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। राज्य प्रशासन किसी भी तरह की स्थिति के लिए तैयार है।






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भारी बारिश के कारण किन्नौर, शिमला में भूस्खलन

शिमला : हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण किन्नौर और शिमला जिले में भूस्खलन हुआ। राज्य आपदा प्रबंधन के निदेशक सुदेश कुमार मोख्ता ने शुक्रवार को बताया कि बृहस्पतिवार की शाम भूस्खलन के बाद किन्नौर जिले के पुवारी से काजा तक राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहा। उन्होंने बताया कि शिमला में भी बृहस्पतिवार की शाम भूस्खलन के कारण होमगार्ड कार्यालय के पास एक सड़क बंद रही, वहां से मलबा हटाने का काम जारी है। अधिकारी ने बताया कि बिलासपुर में नैना देवी में 180.6 मिमी और सोलन के कंडाघाट में 65.2 मिमी बारिश हुई। शुक्रवार को सुबह साढ़े नौ बजे तक पिछले 24 घंटे में शिमला में 54.6 मिमी बारिश हुई।







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बारिश से फसलों के नुकसान का आकलन करवाएगी सरकार

चंडीगढ़ : हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री जे पी दलाल ने कहा कि सरकार ने वर्तमान में हो रही बारिश के कारण किसानों की फसलों का खराबा आंकने के लिए स्पेशल गिरदावरी करवाने के निर्देश दिए है ताकि गिरदावरी का कार्य जल्द से जल्द पूरा कर किसानों को समय पर मुआवजा दिया जा सके।


कृषि मंत्री गुरुवार को चंडीगढ़ में अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बागवानी बीमा देश की पहली योजना है, जो किसानों, बागवानी एवं सब्जियों की फसलों को बीमित करेगी। उन्होंने कहा कि हिमचाल प्रदेश में केवल सेब के किसानों के लिए बीमा योजना लागू है।


इस योजना के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आभार जताया। उन्होंने कहा कि किसान हितैषी सरकार किसानों के लिए निर्णय लेने में कोई संकोच नहीं करती और किसानों को जोखिम फ्री करने और युवाओं को मधुमक्खी पालन, शहद, मशरुम, दुध की प्रोसेसिंग, मछली पालन आदि व्यवसाय से जोड़ने का कार्य कर रही है।


उन्होंने कहा कि प्रदेश में 8 से 10 प्रतिशत क्षेत्र बागवानी का आता है जिन किसानों के लिए कोई बीमा योजना नहीं थी। इस बीमा योजना में 21 फलों, सब्जियों एवं मसाला फसलों का शामिल किया गया है। बागवानी किसानों को विभिन्न कारकों के कारण भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता था। यह योजना फसलों में अचानक बीमारी फैलने, कीटों के संक्रमण, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, सूखा, पाला आदि से होने वाले नुकसान से किसान की भरपाई करेगी।


दलाल ने बताया कि बागवानी का उद्देश्य किसानों को उच्च जोखिम वाली बागवानी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत किसानों को सब्जी एवं मसाला फसलों के 30,000 रुपये और फल वाली फसलों के 40,000 रुपये का बीमा किया गया। इसमें किसानों को केवल 2.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होगा, जिसमें 750 रुपये और 1000 रुपये ही अदा करने होंगे।


कृषि मंत्री ने बताया कि मुआवजा सर्वेक्षण और नुकसान दावे को 25 से 50, 75 और 100 प्रतिशत चार श्रेणियों में बांटा गया है। किसानों को मेरी फसल मेरा ब्योरा (एमएफएमबी) पोर्टल पर अपनी फसल और क्षेत्र का पंजीकरण करना होगा। इसके बाद सर्वे करके मुआवजे का लाभ दिया जाएगा।


दलाल ने कहा कि प्रदेश में शीघ्र ही अढाई से तीन हजार किसानों को मच्छली पालन व्यवसाय से जोड़ा जाएगा। इससे 7-8 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा पोल्ट्री फार्म, चारे के ब्लाॅक आदि खोलने पर भी युवाओं को सबसिडी प्रदान की जा रही है। दलाल ने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना, फसल अवशेष प्रबंधन, स्वॉयल हेल्थ कार्ड, तालाब सिंचाई योजना, खाद्य सुरक्षा योजना, बायोगैस गौशाला योजना, फव्वारा सिंचाई जैसी योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। इन योजनाओं का किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।






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मौसम विभाग ने बुधवार को दिल्ली में बेहद खराब मौसम की चेतावनी जारी की

नई दिल्ली : मौसम विभाग ने बुधवार को दिल्ली में जलभराव और यातायात बाधित होने की आशंका के साथ बेहद खराब मौसम की चेतावनी जारी की है।


दिल्ली में मंगलवार का दिन गर्म रहा। हालांकि, राष्ट्रीय राजधानी के कुछ हिस्सों में अपराह्न में बारिश हुई, जिससे कुछ इलाकों में जलभराव और यातायात बाधित हो गया।


राष्ट्रीय राजधानी के लिए आधिकारिक आँकड़े प्रदान करने वाली सफदरजंग वेधशाला ने शाम 5.30 बजे तक 3.6 मिमी बारिश दर्ज की। लोधी रोड, रिज क्षेत्र, नोएडा और पीतमपुरा में सुबह 8.30 से शाम 5.30 बजे के बीच क्रमश: 1 मिमी, 17.6 मिमी, 2 मिमी और 7 मिमी बारिश दर्ज की गई।


मुंडका अंडरपास पर जलजमाव के कारण रोहतक रोड पर भीषण जाम लग गया। यात्रियों को मध्य दिल्ली और लुटियंस दिल्ली में भी यातायात जाम का सामना करना पड़ा।


अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 25.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


आर्द्रता का स्तर 89 प्रतिशत से 55 प्रतिशत के बीच रहा।


भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार के लिए "ऑरेंज" अलर्ट और बृहस्पतिवार, शनिवार और रविवार के लिए "येलो" अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार के लिए, इसने "ग्रीन" अलर्ट जारी किया है।





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कोलकाता में भारी बारिश, जनजीवन प्रभावित

कोलकाता : कोलकाता और आसपास के जिलों में सोमवार तड़के हुई मूसलाधार बारिश से सप्ताह के पहले कार्य दिवस पर जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग ने कम से कम एक दिन और बारिश होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है।


देर रात एक से सुबह सात बजे तक शहर के विभिन्न स्थानों पर 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे कई महत्वपूर्ण मार्ग और निचले इलाके घुटने तक पानी में डूब गए।


एक अधिकारी ने बताया कि कोलकाता नगर निगम के ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों द्वारा धापा में 136 मिमी, कालीघाट में 115 मिमी और बालीगंज में 109 मिमी बारिश दर्ज की गई।


मौसम विभाग ने कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के ज्यादातर जिलों में मंगलवार सुबह तक और तेज बारिश या गरज के साथ बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया है।


मौसम विभाग के क्षेत्रीय निदेशक जीके दास ने कहा, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम से गंगीय पश्चिम बंगाल तक चक्रवाती परिसंचरण की गति और मजबूत नमी के कारण, कोलकाता और उससे सटे उत्तर और दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली और पुरबी मेदिनीपुर में भारी बारिश हो रही है।


मौसम विभाग के 24 घंटे के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह साढ़े आठ बजे तक कोलकाता में 142 मिमी बारिश हुई जो पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा है।


मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे की अवधि के दौरान जिन अन्य स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई, उनमें दक्षिण 24 परगना में कैनिंग (113 मिमी), साल्ट लेक (112.8 मिमी) और कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में दम दम (95 मिमी) शामिल हैं।


सुबह से सड़कों पर कम वाहन थे, लेकिन जलमग्न मार्ग के कारण बहुत धीमी गति से चल रहे थे जिसकी वजह से ट्रैफिक जाम हो गया।


काम पर जाने की कोशिश कर रहे लोगों को सार्वजनिक परिवहन प्राप्त करने में मुश्किल हो रही थी क्योंकि मूसलाधार बारिश के कारण बसों और टैक्सियों की संख्या बहुत कम थी।



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दिल्ली में फिर बन रहे बारिश के आसार, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट

नई दिल्ली :  दिल्ली-एनसीआर में रविवार को मौसम साफ है। सुबह में मौसम खुशनुमा है।  मौसम विभाग के अनुसार रविवार को आकाश में बादल छाए रहेंगे लेकिन बारिश होने की उम्मीद नहीं है। सोमवार को कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है। मंगलवार से शुक्रवार के बीच एक बार फिर अच्छी बारिश हो सकती है। इस वजह से मौसम विभाग ने 21 से 24 सितंबर तक येलो अलर्ट जारी किया है। 


मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को दिन में न्यूनतम और अधिकतम तापमान क्रमश: 26 डिग्री सेल्सियस और 34.4 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।


शनिवार को नही हुई बारिश


इससे पहले शनिवार को हल्के बादल छाए रहे लेकिन बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रहा। शाम साढ़े पांच बजे सापेक्षिक आर्द्रता 73 फीसदी रही। शुक्रवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम 23.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस तरह तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हुई।


मौसम विभाग ने बताया कि रविवार को भी तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। इस वजह से अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस वजह से उमस भरी गर्मी महसूस की जा सकती है। हालांकि गर्मी से राहत दो दिन बाद मिलने की संभावना है।


बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले दिनों हुई झमाझम बारिश से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली थी वहीं जलजमाव और रोड जाम से मुश्किलें भी बढ़ गई थी। जगह-जगह जलभराव की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।रिकार्ड तोड़ बारिश लोगों के घरों और दुकानों में भी घुस गया था। कई जगहों पर पेड़ गिरने व सड़कों पर गड्डे होने की भी जानकारी सामने आयी थी।



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अगले दो दिन भारिश की संभावना, जिला प्रशासन ने जारी किया अलर्ट, गाइडलाइन जारी

गाजियाबाद : अगले दो दिन जनपद में भारी बारिश होने की संभावना है। इसको लेकर जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। इस दौरान किसी भी परेशानी पर मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि दैनिक वर्षा पूर्वामान के अनुसार जनपद में अगले दो दिनों भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इसको लेकर जनपद वासियों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वह बहुत जरूरी होने पर ही घर से निकले। जलभराव की स्थिति में ज्यादा सावधानी बरते। किसी भी परेशानी पर दिए हए हेल्पलाइन नंबर पर तत्काल सूचना दें।


ये जारी की गई गाइडलाइन


बिजली के खंभों के आसपास भरने पानी में जाने से बचे।


बिजली खंभे व ट्रांसफार्मर को स्थिर करने के लिए लगाए गए तारों को न छूए।


बिजली तार टूटने या फिर लटकने पर विद्युत निगम के 9193320115 पर सूचना दे।


सड़क पर जलभराव से निकलने से बचे या फिर सतर्कता से निकले। 


बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकले। 


भीड़-भाड़ वाले ट्रैफिक जाम वाले क्षेत्रों में जाने से बचे।


इस दौरान निर्माण कार्य न कराएं या फिर पूरी सावधानी से कराएं। 


हेल्पलाइन नंबर


जलभराव, गंदगी, पेड गिरने, जर्जरभवन की शिकायत- 8187016890


विद्युत ब्रेडडाउन के लिए- 1912


किसी भी अन्य समस्या के लिए इंटीग्रेटिड कंट्रोल रूम- 0120-2829040, 9910426674, 8826797248





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छत्तीसगढ़ में अब तक 1030.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

रायपुर : राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बनाए राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष द्वारा संकलित जानकारी के मुताबिक 1 जून से अब तक राज्य में 1030.2 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में 1 जून से आज 17 सितम्बर तक रिकार्ड की गई वर्षा के अनुसार कोरबा जिले में सर्वाधिक 1428.9 मिमी और कबीरधाम जिले में सबसे कम 809.5 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी है।


राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक जून से अब तक सरगुजा में 889.3 मिमी, सूरजपुर में 1211.5 मिमी, बलरामपुर में 986 मिमी, जशपुर में 1019.2 मिमी, कोरिया में 969.3 मिमी, रायपुर में 892.2 मिमी, बलौदाबाजार में 939.4 मिमी, गरियाबंद में 1000.5 मिमी, महासमुंद में 869.7 मिमी, धमतरी में 963.6 मिमी, बिलासपुर में 1034.3 मिमी, मुंगेली में 1004.1 मिमी, रायगढ़ में 887.8 मिमी, जांजगीर चांपा में 1033.2 मिमी, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 1314.2 दुर्ग में 973.1 मिमी, राजनांदगांव में 900.3 मिमी, बालोद में 853.9 मिमी, बेमेतरा में 1121.8 मिमी, बस्तर में 1025.1 मिमी, कोण्डागांव में 1000.8 मिमी, कांकेर में 967.6 मिमी, नारायणपुर में 1172.8 मिमी, दंतेवाड़ा में 1101 मिमी, सुकमा में 1337.9 मिमी, और बीजापुर में 1138.2 मिमी औसत वर्षा रिकार्ड की गई।



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इस मौसम में 1964 के बाद सबसे ज्यादा बारिश, अभी और वर्षा का अनुमान

नई दिल्ली : भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल बेहतर मॉनसून के कारण दिल्ली में बृहस्पतिवार को दोपहर तक 1159.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो 1964 के बाद से सबसे अधिक और अब तक की तीसरी सर्वाधिक बारिश है। साथ ही, दिल्ली में सितंबर में हुई बारिश ने 400 मिमी के निशान को पार कर लिया है। बृहस्पतिवार दोपहर तक हुई 403 मिमी बारिश सितंबर 1944 में 417.3 मिमी के बाद से इस महीने में हुई सबसे अधिक वर्षा है।


ये आंकड़े बदल सकते हैं क्योंकि आज दिन भर और बारिश होने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्षा ऋतु के जाते-जाते यह दिल्ली में दूसरी सबसे ज्यादा मॉनसून की बारिश हो सकती है। सामान्य तौर पर, दिल्ली में मॉनसून के मौसम में 653.6 मिलीमीटर बारिश होती है। पिछले साल राजधानी में 648.9 मिली बारिश हुई थी। एक जून को जब मॉनसून शुरू होता है, तब से 15 सितंबर के बीच शहर में सामान्य तौर पर 614.3 मिमी बारिश होती है। दिल्ली से मॉनसून 25 सितंबर तक लौटता है।


आईएमडी के मुताबिक, शहर के लिए आधिकारिक मानी जाने वाली सफदरजंग वेधशाला का कहना है कि शहर में बृहस्पतिवार को दोपहर तक इस मौसम की 1159.4 मिमी बारिश हो चुकी है। 1975 में 1,155.6 मिमी और 1964 में 1190.9 मिमी बारिश हुई थी। अब तक की सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 1933 में हुई 1,420.3 मिमी वर्षा का है। इससे पहले, सुबह मौसम विभाग ने दिल्ली में दिन में मध्यम बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। शुक्रवार को हल्की बारिश की संभावना है।


एक निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा, "23-24 सितंबर तक बारिश बीच-बीच में होती रहेगी, जिसका मतलब है कि मॉनसून समाप्त होने तक, दिल्ली के नाम अब तक दूसरा सबसे ज्यादा बारिश वाला मॉनसून दर्ज हो सकता है।'


पिछले दो दशकों में यह केवल तीसरी बार है जब दिल्ली में मॉनसून की बारिश ने 1000 मिमी के निशान को पार किया है। दिल्ली में 2011, 2012, 2013, 2014 और 2015 में क्रमश: 636 मिमी, 544 मिमी, 876 मिमी, 370.8 मिमी और 505.5 मिमी वर्षा हुई। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार 2016 में 524.7 मिमी; 2017 में 641.3 मिमी; 2018 में 762.6 मिमी; 2019 में 404.3 मिमी और 2020 में 576.5 मिमी बारिश दर्ज की गई।





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अत्यंत आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकले : जिलाधिकारी

लखनऊ :  लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने गुरूवार को लखनऊवासियों से अपील करते हुए कहा है कि बीती रात से हो रही लगातार भारी वर्षा के कारण अत्यंत आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकले। जिलाधिकारी ने कहा कि लखनऊवासी भीड़भाड़ वाले इलाके और ट्रैफिक जाम वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। खुले सीवर, बिजली के तार, खंभों से बचकर रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या जैसे जलभराव वृक्षपातन होने पर नगर निगम की हेल्पलाइन नंबर 6389300137, 138,139 पर, विद्युत ब्रेकडाउन के लिए हेल्पलाइन नंबर 1912 तथा किसी भी समस्या के लिए इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर के नंबर 4523000 पर समस्या दर्ज कराएं। उन्होंने लखनऊ से संबंधित अधिकारियों पुलिस आयुक्त, नगर आयुक्त, मुख्य अभियंता लेसा, सीईओ कंटोनमेंट बोर्ड को भी आवश्यक निर्देश दिए। 




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दिल्ली में न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस, हल्की बारिश की संभावना

नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके साथ ही हल्की बारिश होने का भी अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, सुबह सापेक्ष आर्द्रता 90 प्रतिशत दर्ज की गई। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को दिल्ली के कुछ हिस्सों में बारिश हुई। सफदरजंग वेधशाला में सोमवार सुबह साढ़े आठ बजे से मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक 3.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। विभाग ने कहा कि आज हल्की बारिश हो सकती है और अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। 

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कानपुर में मौसम ने बदली करवट, तेज हवाओं के बीच बारिश से मौसम हुआ सुहाना

कानपुर : जनपद में कई दिनों से गर्मी से जूझ रहे कानपुर वासियों को मंगलवार को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से मौसम ने करवट बदली। अचानक मौसम में आए बदलाव से जनपद का नजारा बदल सा गया। इस बीच आकाश में छाए बदरा का नजारा देखने लायक था। मौसम विभाग ने भी तेज बारिश के आसार जताए थे।


चन्द्रशेखर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग की ओर से बीते दिनों 10 सितम्बर से 17 सितम्बर के बीच कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। मौसम वैज्ञानी ने आशंका जताई थी कि बारिश के बीच तेज बारिश व आकाशीय बिजली भी गिर सकती है। इसको लेकर लोगों को खासकर ग्रामीण इलाकों के किसानों को बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे न खड़े रहने की सलाह भी जारी की गई थी।


मौसम विभाग के मुताबिक आज तेज धूप के बीच अचानक आकाश में बदरा छा गए और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश के दौरान आसमान से पेड़ों पर गिरती पानी की बूंदें किसी फिल्मी नजारे से कम नहीं थी। इसके साथ ही बारिश ने मिट्टी के सुहानेपन का एहसास कराया। बारिश की बूंदों ने पूरा मौसम बदल दिया।


बारिश के बीच बादलों ने आंख-मिचौली


बारिश के साथ बादलों की आंख-मिचौली देर और घने बादलों के साथ हवाएं चलने लगी। मौसम ठंडा हुआ और आसमान में घुमड़े बादलों व बारिश की फुहारों ने मौसम खुशनुमा हो गया। हालांकि कई दिनों से कानपुर में उमस भरी गर्मी से जनपदवासियों को बेहाल कर रखा था लेकिन आज की बारिश ने राहत पहुंचाई। सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डॉ0 एस एन सुनील पांडेय के मुताबिक, अभी एक-दो दिन बारिश और तेज हवाओं की आंख-मिचौली बनी रहेगी।






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दिल्ली के कई हिस्सों में हल्की बारिश

नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में सोमवार तड़के हल्की बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी।


आईएमडी ने बताया कि न्यूनतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत तापमान से एक डिग्री सेल्सियस अधिक है।


विभाग ने बताया कि सापेक्षिक आर्द्रता 92 फीसदी दर्ज की गई। मौसम कार्यालय ने बताया कि मौसम वैज्ञानिक ने दिन में आसमान में बादल छाए रहने और हल्की बारिश का अनुमान लगाया है। अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा सकता है।


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार सुबह नौ बजकर पांच मिनट पर वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रहा। उल्लेखनीय है कि 0 से 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 से 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच 'मध्यम', 201 से 300 के बीच 'खराब', 301 से 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 से 500 'गंभीर' माना जाता है।




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ओडिशा में भारी बारिश, बाढ़ की चेतावनी जारी

भुवनेश्वर :  ओडिशा में गहरे दबाव का क्षेत्र बनने से सोमवार को भारी बारिश हुई जिसके मद्देनजर अधिकारियों ने बाढ़ की चेतावनी जारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।


भुवनेश्वर में बीते 24 घंटे में, सुबह साढ़े आठ बजे तक, 195 मिमी बारिश हुई जो पिछले 63 वर्षों में सर्वाधिक है। इससे पहले नौ सितंबर 1958 को शहर में 163 मिमी बारिश हुई थी।


उत्तरपश्चिमी बंगाल की खाड़ी पर बना दबाव का क्षेत्र गहरे दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो गया और सोमवार सुबह भद्रक जिले के चांदबली के पास तट को पार कर गया। इसके बाद मौसम विभाग ने 13 जिलों के लिए अलर्ट जारी किए।


मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि दबाव का क्षेत्र अगले 48 घंटों में पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में उत्तर ओड़िशा, उत्तर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकता है।


विभाग ने संबलपुर, देवगढ़, सोनपुर और बारगढ़ के लिए 'रेड' चेतावनी जारी की है जिसका मतलब है कि इन स्थानों पर भारी से बेहद भारी और अत्यधिक भीषण बारिश हो सकती है।


केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है क्योंकि प्रमुख नदियां और उनकी सहायक नदियां लगातार बारिश के कारण उफान पर हैं। इसमें कहा गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान जताया है ऐसे में ओडिशा में बाढ़ के हालात बन सकते हैं।




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पश्चिम उप्र में जोरदार बारिश, जलभराव से लोग परेशान

मेरठ : सितंबर माह के बीच में शनिवार को पश्चिम उप्र के सभी जिलों में जोरदार बारिश होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। इससे शहरों और गांवों में जलभराव से लोग परेशान रहे। कई जगहों पर लोग जलभराव में फंस गए। इस बारिश से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।


मेरठ समेत पश्चिम उप्र के सभी जिलों में शनिवार की सुबह से ही जोरदार बारिश होने लगी। इससे मेरठ, बागपत, शामली, मुजफ्फनगर, सहारनपुर, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बिजनौर आदि जिलों में जलभराव हो गया। शहर से लेकर देहात तक मूसलाधार बारिश होती रही। शाम तक भी बारिश कभी कम तो कभी ज्यादा हुई। इससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मेरठ शहर में मोहल्लों में भारी जलभराव हो गया और लोग अपने घरों में कैद हो गए। ब्रह्मपुरी, जली कोठी, खैर नगर, प्रह्लाद नगर, कंकरखेड़ा, जागृति विहार, लिसाड़ी रोड, जाकिर कॉलोनी आदि मोहल्लों में हालत खराब रही।


व्यापार पर पड़ा बुरा असर

भारी बारिश के कारण शहर के पुराने क्षेत्रों में जलभराव के कारण दुकानें नहीं खुल पाई। इस कारण व्यापार चौपट रहा। दूसरे क्षेत्रों में दुकानों के खुलने के बाद भी ग्राहक नहीं आने से व्यापारी परेशान रहे।


किसानों के चेहरे खिले

भारी बारिश के कारण किसानों के चेहरे खिल उठे। गन्ना, धान, ज्वार की फसलों के लिए बारिश वरदान साबित हुई है। कैली गांव निवासी नितिन त्यागी का कहना कि इस बारिश से फसलों को लाभ होगा, लेकिन आंधी के साथ बारिश होने गन्ना, धान और ज्वार की फसल को नुकसान होने की आशंका है। तेज हवा चलने से फसल जमींदोज हो जाएगी।


कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर के वैज्ञानिक डॉ. संदीप चौधरी का कहना है कि अभी बारिश होने की संभावना बनी हुई है। अगर बारिश कई दिन तक हुई तो फसलों को नुकसान हो सकता है। अभी तक की बारिश से फसल को लाभ पहुंचेगा।




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मानसून से होती तबाही की बढ़ती तीव्रता

देश की राजधानी दिल्ली में 31 अगस्त से ही जोरदार बारिश के कारण अनेक इलाकों में भारी जलभराव के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है और 1 सितम्बर को भी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया। वैसे भी दिल्ली में अक्सर चंद घंटों की मूसलाधार वर्षा में ही सड़कें दरिया बन जाती हैं। दिल्ली-एनसीआर में 31 अगस्त को हुई बारिश ने तो सात वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। 24 घंटे के भीतर राजधानी में 84.1 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जो वर्ष 2013 के बाद से सर्वाधिक है। महाराष्ट्र के मुम्बई सहित औरंगाबाद, जलगांव, कोंकण, मराठवाड़ा से लेकर उत्तर महाराष्ट्र सहित अनेक इलाकों में भी भारी बारिश के कारण कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। राजस्थान में बारिश और आकाशीय बिजली से कुछ लोगों की मौत और कईयों के घायल होने की खबर है। देशभर के अनेक इलाकों में नदियां और जलाशय उफान पर आ गए हैं और मौसम विभाग द्वारा 4 सितम्बर तक देश के कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए कई राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।


इस साल मानसून की शुरूआत से ही देश के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश, बाढ़, बादल फटने, बिजली गिरने और भू-स्खलन से तबाही का सिलसिला अनवरत जारी है। पहाड़ों पर आसमानी आफत टूट रही है तो देश के कई इलाके बाढ़ के कहर से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। कमोवेश हर साल मानसून के दौरान विभिन्न राज्यों में अब इसी प्रकार का नजारा देखा जाने लगा है। अब इसे मानसून की दगाबाजी कहें या पर्यावरण असंतुलन का दुष्परिणाम कि मानूसन से होती तबाही की तीव्रता साल दर साल बढ़ रही है। मानसून का मिजाज इस कदर बदल रहा है कि जहां मानसून के दौरान महीने के अधिकांश दिन अब सूखे निकल जाते हैं, वहीं कुछेक दिनों में ही इतनी बारिश हो जाती है कि लोगों की मुसीबतें कई गुना बढ़ जाती हैं। दरअसल वर्षा के पैटर्न में अब ऐसा बदलाव नजर आने लगा है कि बहुत कम समय में ही बहुत ज्यादा पानी बरस रहा है, जो प्रायः भारी तबाही का कारण बनता है।


हाल ही में पॉट्सडैम इंस्टीच्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के एक अध्ययन में बताया गया है कि भारतीय मानसून की चाल को जलवायु परिवर्तन और ज्यादा गड़बड़ बना रहा है। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार भारत के कई हिस्सों में अत्यधिक बारिश ने जो तबाही मचा रखी है, वह वैश्विक तापमान वृद्धि का दुष्परिणाम है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के मौसम के जिस पैटर्न को कभी सबसे स्थिर माना जाता था, उसमें एक बड़ा परिवर्तन स्पष्ट देखा जा रहा है। जलवायु परिवर्तन से मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं और मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के तापमान में प्रत्येक डिग्री सेल्सियस वृद्धि से मानसूनी वर्षा में करीब पांच फीसदी बढ़ोतरी हो रही है। बादल फटने और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में होती बढ़ोतरी को भी जलवायु परिवर्तन से ही जोड़कर देखा जा रहा है।


एक समय था, जब गांव हो या शहर, हर कहीं बड़े-बड़े तालाब और गहरे-गहरे कुएं होते थे और पानी अपने आप धीरे-धीरे इनमें समा जाता था, जिससे भूजल स्तर भी बढ़ता था लेकिन अब विकास की अंधी दौड़ में तालाबों की जगह ऊंची-ऊंची इमारतों ने ले ली है, शहर कंक्रीट के जंगल बन गए हैं, अधिकांश जगहों पर कुओं को मिट्टी डालकर भर दिया गया है। ‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ पुस्तक के मुताबिक हमारी फितरत कुछ ऐसी हो गई है कि हम मानसून का भरपूर आनंद तो लेना चाहते हैं किन्तु इस मौसम में किसी भी छोटी-बड़ी आपदा के उत्पन्न होने की प्रबल आशंकाओं के बावजूद उससे निपटने की तैयारियां ही नहीं करते। इसीलिए बदइंतजामी और साथ ही प्रकृति के बदले मिजाज के कारण अब प्रतिवर्ष प्रचण्ड गर्मी के बाद बारिश रूपी राहत को देशभर में आफत में बदलते देर नहीं लगती और तब मानसून को लेकर हमारा सारा उत्साह छू-मंतर हो जाता है।


मानसून प्रकृति प्रदत्त ऐसा खुशनुमा मौसम है, भीषण गर्मी झेलने के बाद जिसकी बूंदों का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। यह ऐसा मौसम है, जब प्रकृति हमें भरपूर पानी देती है किन्तु पानी की कमी से बूरी तरह जूझते रहने के बावजूद हम इस पानी सहेजने के कोई कारगर इंतजाम नहीं करते और बारिश का पानी व्यर्थ बहकर समुद्रों में समा जाता है। हालांकि ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ का शोर तो सालभर बहुत सुनते हैं लेकिन ऐसी योजनाएं सिरे कम ही चढ़ती हैं। इन्हीं नाकारा व्यवस्थाओं के चलते चंद घंटों की बारिश में ही दिल्ली, मुम्बई, हैदराबाद, बेंगलुरू जैसे बड़े-बड़े शहरों में भी प्रायः जल-प्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। हल्की सी बारिश क्या हुई, सड़कों पर पानी भर जाता है, गाडि़यां रेंग-रेंगकर चलने लगती हैं, रेल तथा विमान सेवाएं प्रभावित होती हैं, सड़कें धंस जाती हैं, जगह-जगह जलभराव होने से पैदल चलने वालों का बुरा हाल हो जाता है। यह कोई इसी साल की बात नहीं है बल्कि हर साल यही नजारा सामने आता है लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा ऐसे पुख्ता इंतजाम कभी नहीं किए जाते, जिससे बारिश के पानी का संचयन किया जा सके और ऐसी समस्याओं से निजात मिले।


हमारी व्यवस्था का काला सच यही है कि न कहीं कोई जवाबदेह नजर आता है और न ही कहीं कोई जवाबदेही तय करने वाला तंत्र दिखता है। हर प्राकृतिक आपदा के समक्ष उससे बचाव की हमारी समस्त व्यवस्था ताश के पत्तों की भांति ढ़ह जाती है। ऐसी आपदाओं से बचाव तो दूर की कौड़ी है, हम तो मानसून में सामान्य वर्षा होने पर भी बारिश के पानी की निकासी के मामले में साल दर साल फेल साबित हो रहे हैं। देशभर के लगभग तमाम राज्यों में प्रशासन के पास पर्याप्त बजट के बावजूद प्रतिवर्ष छोटे-बड़े नालों की सफाई का काम मानसून से पहले अधूरा रह जाता है, जिसके चलते ऐसे हालात उत्पन्न होते हैं। अनेक बार ऐसे तथ्य सामने आ चुके हैं, जिनसे पता चलता रहा है कि मानूसन की शुरूआत से पहले ही करोड़ों रुपये का घपला करते हुए केवल कागजों में ही नालों की सफाई का काम पूरा कर दिया जाता है। कई जगहों पर मानसून से पहले नालों की सफाई की भी जाती है तो उस दौरान सैंकड़ों मीट्रिक टन सिल्ट निकालकर उसे नाले के करीब ही छोड़ दिया जाता है, जो तेज बारिश के दौरान दोबारा बहकर नाले में चली जाती है और थोड़ी सी बारिश में ही ये नाले उफनते लगते हैं।


बारिश के कारण बाढ़, भू-स्खलन जैसी आपदाओं को लेकर हम जी भरकर प्रकृति को तो कोसते हैं किन्तु यह समझने का प्रयास नहीं करते कि मानसून की जो बारिश हमारे लिए प्रकृति का वरदान होनी चाहिए, वही बारिश अब हर साल बड़ी आपदा के रूप में तबाही बनकर क्यों सामने आती है? अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति के लिए जलवायु परिवर्तन के अलावा विकास की विभिन्न परियोजनाओं के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई, नदियों में होता अवैध खनन इत्यादि भी प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं, जिससे मानसून प्रभावित होने के साथ-साथ भू-क्षरण और नदियों द्वारा कटाव की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते तबाही के मामले बढ़ने लगे हैं।


-योगेश कुमार गोयल-








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देश में सितम्बर में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है : आईएमडी

नई दिल्ली :  भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का कहना है कि अगस्त माह के दौरान सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी लेकिन देश में सितम्बर में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बुधवार को बताया कि सितम्बर में मध्य भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। मानसून की कमी अब नौ प्रतिशत रह गई है और सितम्बर के दौरान अच्छी वर्षा होने से इसमें और कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि अगस्त से पहले, जून में भी सात प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। आईएमडी ने महीने के लिए अपने पूर्वानुमान में कहा कि देश में अगस्त में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश हुई, लेकिन सितम्बर में बारिश सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। महापात्र ने यह भी कहा कि उत्तर एवं पूर्वोत्तर भारत तथा दक्षिण भारत के दक्षिणी हिस्सों में सामान्य या उससे कम बारिश होने का अनुमान है।




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गर्मी से मिली राहत मगर जलभराव ने बढ़ा दी आफत

गुरुग्राम : साइबर सिटी में चाहे थोड़ी देर की बारिश हो या झमाझम, सड़कों पर तो पानी भरना ही भरना है। मंगलवार की दोपहर लगभग 25 मिनट की तेज बारिश में भी ऐसा ही दृश्य रहा। शहर के विभिन्न स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गईं। इससे भले ही उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली हो लेकिन जलभराव के कारण लोगों को भारी परेशानी हुई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह बड़े ही शर्म की बात है कि मिलेनियम सिटी के नाम से देश ही नहीं दुनिया भर में ख्याति प्राप्त गुरुग्राम का प्रशासन और जिम्मेदार सरकारी विभाग वर्षा जलनिकासी को लेकर पिछले कई सालों से ठोस व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। जलनिकासी को लेकर पिछले कई सालों से जिला प्रशासन आश्वासन और दावों के अलावा कुछ भी नहीं कर पा रहा है। इससे लोगों में काफी आक्रोश है।


गुरुग्राम निवासियों का कहना है कि अब तो अगस्त भी समाप्त हो गया है। बारिश का मौसम भी अपने अंतिम पड़ाव पर है। अब तो देखने वाली बात है कि अगली बारिश को लेकर कुछ ठोस प्रबंधन किया जाएगा कि नहीं। दोपहर को बारिश शुरू होने से यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा। दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे पर बारिश के दौरान वाहनों की गति धीमी पड़ गई थी। सरहौल बार्डर के पास थोड़ी देर के लिए जाम जैसा दृश्य दिखा। वहीं, शहर की आंतरिक सड़कों पर भी वाहनों की गति पर असर पड़ा। सड़कों पर पानी भरने से भी वाहन चालकों को परेशान होना पड़ा। सेक्टर-15 निवासी दिनेश पाहूजा का कहना है कि हर बार यही होता है कि मानसून आने के कुछ दिन पहले जिला प्रशासन बैठकें करना शुरू करता है। नालों की सफाई की बात होती है। जलभराव को रोकने के लिए टीमों का गठन होता है मगर जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिखाई देता है। इसी प्रकार न्यू कालोनी निवासी सुजीत कालरा का कहना है कि जिस प्रकार से दिल्ली में बारिश हुई है, ऐसा ही यदि गुरुग्राम में हो जाता तो पूरा शहर तालाब बन जाता। इनका कहना है कि प्रदेश सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों पर सख्ती करनी होगी तभी स्थिति में सुधार होगा।


सेक्टर-नौ ए के दीपक भारद्वाज का कहना है कि बारिश अधिक हो गया कम यदि कहीं सबसे अधिक जलभराव होता है तो वह है सेक्टर-नौ ए का क्षेत्र। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी वहां जलभराव की समस्या को खत्म करने के लिए कुछ भी ठोस उपाय नहीं किया जा रहा है। इनका कहना है कि यह प्रशासनिक बदइंतजामी और जानबूझकर लापरवाही के कारण हो रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी बारिश के कारण सड़क पर पानी भरने से दिक्कत हुई।


बारिश के बाद यहां भरा पानी सेक्टर-सात, सेक्टर-सात एक्सटेंशन, न्यू कालोनी, सेक्टर-40, एमजी रोड, सेक्टर-39, झाड़सा, पटेल नगर, न्यू कालोनी, ओल्ड ज्यूडिशियल कांप्लेक्स, सेक्टर-10, सेक्टर-नौ ए, सेक्टर-चार, सेक्टर-37, सेक्टर-15 पार्ट दो, सेक्टर-नौ सेक्टर-नौ ए, साउथ सिटी, कृष्णा कालोनी, सेक्टर-34, सेक्टर-40, सेक्टर-56, सेक्टर-55, गांव खिलोखरा, कन्हेई, लक्ष्मण विहार, सूरत नगर, पटौदी रोड, अशोक विहार, शीतला कालोनी, शीतला माता रोड, प्रेम पुरी, सेक्टर-चार, सेक्टर-पांच, सेक्टर-14 आइडीसी, दौलताबाद सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में। 





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रविवार से झमाझम बारिश के आसार

भोपाल :  मध्य प्रदेश में एक बार फिर से बारिश का दौर शुरू हो गया है। पिछले 36 घंटे से प्रदेश के कई जिलों में जमकर पानी बरसा है। जिससे तापमान में भी गिरावट महसूस की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात शनिवार को कम दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो गया है। मानसून ट्रफ भी ग्वालियर से होकर गुजर रहा है। इन दिनों दो सिस्टम के असर से मानसून सक्रिय हो गया है, जिसके चलते रविवार से पूरे मध्यप्रदेश में बारिश होने की संभावना है।


वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अजय शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार और रविवार को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। इससे मानसून ट्रफ की लाइन सामान्य स्थिति में आ सकती है, अरब सागर से आ रहीं नम हवाओं में मिलने के बाद राज्य में मानसून दस्तक देगा। अनुमान लगाया है कि राज्य में 30 अगस्त को मानसून एक बार फिर सक्रिय होगा और कई जिलों में भारी बारिश भी होगी। मौसम विज्ञानिकों के अनुसार अगले 24 घंटों में राज्य में लगातार बारिश होने की संभावना है। रीवा, ग्वालियर, चंबल, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, होशंगाबाद, जबलपुर और शहडोल संभागों में गरज-चमक के साथ बरसात हो सकती है। वहीं कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना है, जिसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।


रविवार को जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर, भोपाल, होशंगाबाद, उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर एवं चंबल संभागों के जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बौछारें पडऩे की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में दक्षिणी ओडिशा और उत्तर आंध्रप्रदेश तट के बीच कम दबाव का क्षेत्र बना है। इस सिस्टम के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढऩे की संभावना है। मानसून ट्रफ फिरोजपुर, दिल्ली, ग्वालियर, झारसुगड़ा से कम दबाव के क्षेत्र से तब्दील होकर बंगाल की खाड़ी तक बना हुआ है। इन दो सिस्टमों के असर से रविवार से पूरे मप्र में बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।








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नमी वाले मौसम में बालों की देखभाल कैसे करें

मौसम बदलने के साथ वातावरण में नमी बढ़ जाती है जिससे आपके बाल सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। नमी वाले मौसम के कारण आपके बाल उलझे, तैलीय और गंदे दिखने लगते हैं। इस तरह के मौसम में आपको अपने ब्यूटी केयर रुटीन में कुछ बदलाव करने होते हैं। इसलिए आपको अपने बालों की देखभाल करने के लिए कुछ तरीकों को अपनाना होता है, जिससे नमी वाले मौसम में भी आपके बाल स्वस्थ रहें। बालों को उलझने और टूटने से बचाने के लिए आपको नमी वाले मौसम के दौरान किन टिप्स को अपनाना चाहिए। 


नमी वाले मौसम में बालों की देखभाल करने के लिए टिप्स-


अधिक बार बालों को ना धोएं: अधकि बार धोने से आपके बाल रुखे और बेजान हो सकते हैं और रुखे और बेजान बाल अधिक उलझते हैं। इसलिए बालों को अधिक बार ना धोएं। सप्ताह में दो से तीन बार बालों को शैम्पू करें।


सही शैम्पू का उपयोग: नमी वाले मौसम में बालों को स्वस्थ रखने के लिए आपको अपने शैम्पू पर भी ध्यान देना होता है। इसलिए ऐसा शैम्पू चुनें जिस पर स्मूदनिंग’ या ‘स्ट्रेटनिंग’ शैम्पू लिखा हो। ये शैम्पू आपके बालों को कोमल रखते हैं जिससे बाल अधिक उलझते नहीं है।


मॉइश्चराइज: केवल आपकी त्वचा को ही नहीं बल्कि आपके बालों को भी पर्याप्त मॉइश्चराइज की जरुरत होती है। जब आपके बाल रुखे और डिहाइड्रेटेड रहते हैं तो ये अधिक नमी सोखते हैं। इसलिए अपने बालों को सप्ताह में तीन बार कंडीशन करें और बाल धोने से पहले तेल की मालिश करें।


ठंडे पानी से बाल धोएं: नमी वाले मौसम में बालों को स्वस्थ रखने के लिए आपको ध्यान रखना होगा कि आप अपने बालों को धोने के लिए ठंडे पानी का उपयोग करें। ठंडे पानी से बाल धोने से बालों के पोर्स बंद रहते हैं जिससे मॉइश्चर बालों के अंदर बना रहता है। 


हेयर सीरम का इस्तेमाल: बालों को धोने के बाद गीले बालों पर सीरम लगाना ना भूलें। बालों के सिरों पर सीरम लगाएं। ध्यान रखें कि आप सीरम की उतनी ही मात्रा लें जितनी जरुरी है। ज्यादा सीरम लगाने से बाल अधिक तैलीय हो सकते हैं।




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दिल्ली में भारी बारिश से कई इलाकों में जलभराव, कई अंडरपास यातायात के लिए बंद किए गए

नई दिल्ली : दिल्ली में शनिवार सुबह भारी बारिश होने से मिंटो ब्रिज, मूलचंद अंडरपास और आईटीओ समेत अनेक स्थानों पर जलभराव हो गया। जलभराव की वजह से दिल्ली यातायात पुलिस ने कई अंडरपास बंद कर दिए और यात्रियों को ट्विटर के जरिए इस बारे में सूचित किया।


लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों ने कहा कि उसके कर्मी जलभराव की समस्याओं को प्राथमिकता से सुलझा रहे हैं।


यातायात पुलिस ने कई ट्वीट किए जिनमें कहा, ‘‘मिंटो ब्रिज पर जलभराव के कारण यातायात बंद किया गया है, कृपया यहां जाने से बचें।’’


इसमें आगे कहा गया, ‘‘जलभराव के कारण मूलचंद अंडरपास पर यातायात प्रभावित है। आजाद मार्केट अंडरपास को 1.5 फुट जलभराव के कारण बंद किया गया।’’ भारी बारिश के कारण पुल प्रह्लादपुर अंडरपास, लाजपतनगर, जंगपुरा, आईटीओ, प्रगति मैदान, संगम विहार, रोहतक रोड, मंगोलपुरी, किराड़ी और मालवीय नगर में भी सड़कों पर जलभराव की समस्या हुई।


दक्षिण दिल्ली में महरौली-बदरपुर रोड पर जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ। पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने कहा कि विभाग के कर्मी समस्या को सुलझाने में लगे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सुबह के वक्त बहुत तेज बारिश हुई, इसके कारण कई इलाकों में जलभराव हो गया। हमारे कर्मी इसे ठीक करने में जुटे हैं और हम हालात पर नजर रख रहे हैं।’’






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बदलता मौसम बिगाड़ न दे आपकी सेहत, याद रखें ये खास बातें

मौसम बदलने के साथ बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जाता है। गुनगुनी सर्दी की शुरुआत हो गई है, ऐसे में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को बचाव की जरूरत होती है, लेकिन डॉक्टर्स के मुताबिक, सर्दियों के मौसम में ज्यादा से ज्यादा ऑर्थराइटिस, अस्थमा, हार्ट की प्रॉब्लम और टॉन्सिल्स के मरीजों को ज्यादा बचाव की जरूरत होती है। इस मौसम में ड्राई स्किन, सर्दी जुकाम, शरीर में दर्द और हाइपोथर्मिया जैसे बदलाव भी होने लगते हैं। ऐसे में इससे बचाव जरूरी है, आइए जानते हैं कैसे...


सर्दी-जुकाम:- सर्दियों का मौसम आते ही सर्दी जुकाम की समस्या बढ़ जाती है। जिन लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनके लिए यह सबसे बड़ी समस्या हो जाती है।


ऐसे करें बचाव:- इससे बचने के लिए साफ-सफाई का खास ध्यान रखें। यह एक वायरल इंफेक्शन होता है। इसके लिए बार-बार हाथ को साबुन से धोएं ताकि इंफेक्शन से बचे रहें। साथ ही भाप, नमक के पानी के गरारे फायदेमंद होंगे।


अस्थमा की दिक्कत:- सर्दियों में एलर्जी के तत्व कोहरे की वजह से आसपास ही रहते हैं, हवा में उड़ते नहीं हैं। ऐसे में इनसे अस्थमा के मरीजों और बुजुर्गों की तकलीफ बढ़ जाती है।


ऐसे करें बचाव:- इस मौसम में बुजुर्गों व अस्थमा के मरीज धूल-मिट्टी से बचें। तकलीफ बढ़ने पर डॉक्टर को दिखाएं।


हाइपोथर्मिया:- अगर शरीर का ताप 34-35 डिग्री से नीचे चला जाए तो हाइपोथर्मिया की दिक्कत बढ़ जाती है। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं और बीपी भी कम हो जाता है। अगर शरीर का तापमान कम हो जाए तो मौत भी हो सकती है।


ऐसे करें बचाव:- सुबह की तेज ठंड हवाओं से बचें। गर्म चीजों को खाएं।


टॉन्सिल:- सर्दियों में बच्चों में टॉन्सिल की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। इसमें गले में काफी दर्द होता है। खाना खाने में दिक्कत होती है, तेज बुखार भी आ सकता है।


ऐसे करें बचाव:- इससे बचे रहने के लिए इस मौसम में ठंडी चीजें खाने से बचें। गर्म खाने और गुनगुने पानी का प्रयोग करें।


स्किन ड्राइनेस:- सर्दियां शुरू होते ही शरीर में जो पहला बदलाव होता है, वह है स्किन ड्राइनेस। ठंडक बढ़ने और वातावरण में नमी कम होने से इसकी समस्या बढ़ने लगती है। ड्राई स्किन को मॉइश्चर ना किया जाए तो त्वचा में खुजली और लाल चकते होने लगते हैं। त्वचा रूखी होकर फटने लगती है। कई बार फटी त्वचा से खून भी निकलने लगता है।


ऐसे करें बचाव:- नहाने के बाद मॉइश्चराइजर या नारियल तेल लगाएं। साथ ही होठों पर वैसलीन लगाएं।


यह भी जरूरी... 


पिएं ज्यादा पानी:- सर्दियों में लोग पानी कम और चाय, कॉफी ज्यादा पीते हैं, जिससे उन्हें डिहाइड्रेशन होने लगता है। इससे बचने के लिए सूप या जूस पिएं। सब्जियां जैसे पालक, गाजर, बथुआ, मैथी में प्राकृतिक रूप से पानी होता है, इन्हें भी अपने खाने में शामिल करें।


ओवरइटिंग से बचें:- सर्दियों में अक्सर लोग हैवी डाइट लेने लगते हैं। ओवरइटिंग से पाचनतंत्र गड़बड़ा जाता है। ऐसें में इससे बचें। 



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दिल्ली, हरियाणा और यूपी में झमाझम बारिश; जलभराव के चलते कई रास्‍ते बंद

नई दिल्ली : दिल्ली-एनसीआर में मानसूनी बारिश एक बार फिर से शुरू हो चुकी है। रात से ही राजधानी में बिजली कड़कने के साथ ही झमाझम बारिश हो रही है। हालांकि, बीत दिन भी हल्की से मध्यम बारिश पूरे दिन दर्ज हुई थी। मानसून के दोबारा से सक्रिय होने से दिल्लीवासियों को गर्मी से राहत मिली है। दिल्ली में फिलहाल अगले 24 घंटो के लिए आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। फिलहाल कई इलाकों में बारिश रुक गई है, लेकिन बारिश का यह दौर अगले तीन दिनों तक जारी रहेगा। वहीं यूपी, हरियाणा सहित देश के कई राज्यों में भी लगातार बारिश हो रही है।

भारी बारिश के चलते दिल्ली के कई इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई है। जगह-जगह पानी भर गया है, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं यूपी, हरियाणा, पंजाब सहित देश के कई राज्यों के लिए मौसम विभाग की तरफ से अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में भी लगातार बारिश हो रही है।   

दिल्ली  के सफदरजंग में सुबह 5.30 तक दर्ज हुई 73.2 मिमी बारिश

ताजा रिपोर्ट के बात करें तो दिल्ली  के सफदरजंग में सुबह 2.30 से 5.30 बजे के दौरान 73.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इसकी जानकारी दी है।

बता दें कि मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में पहले ही बताया था कि अगस्त खत्म होते-होते दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश होगी। वहीं पहले ही बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए भी येलो और आरेंज अलर्ट जारी किया गया था। 


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बीते 13 वर्षों में चौथी बार इतनी गर्मी झेल रही दिल्ली, दो दिन बाद बदलेगा मौसम

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में मंगलवार को अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री ज्यादा रहा। दिल्ली के मानक मौसम केंद्र सफदरजंग में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीते 13 वर्षों में यह चौथी बार है, जब दिल्ली के लोग अगस्त महीने में इतनी ज्यादा गर्मी झेल रहे हैं।


दिल्ली के ज्यादातर हिस्सों में मंगलवार सुबह से तेज चमकीला सूरज निकला रहा। दिन चढ़ने के साथ ही धूप तीखी और तेज हो गई। दोपहर के समय तो धूप के चलते बाहर निकलना भी मुश्किल लगा। आम तौर पर अगस्त महीने तक तापमान 35 डिग्री से नीचे रहने लगता है। लेकिन इस बार लंबे समय से बारिश नहीं होने के चलते तापमान असामान्य रूप से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।


सफदरजंग मौसम केंद्र में मंगलवार के दिन अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से चार डिग्री ज्यादा है। वहीं न्यूनतम तापमान 28.1 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से एक डिग्री ज्यादा है। यहां नमी का स्तर 83 से 46 फीसदी तक रहा। गर्मी और इतनी ज्यादा नमी के चलते लोगों को भारी उमस का सामना करना पड़ा। दिन भर लोग पसीना पोंछते नजर आए। मौसम विभाग के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक बीते 13 सालों यानी वर्ष 2009 से 2021 तक में यह चौथी बार है, जब अगस्त के महीने में अधिकतम तापमान 38 डिग्री या उससे ऊपर पहुंचा हो। 


स्पोर्ट्स कांप्लेक्स क्षेत्र में सबसे ज्यादा गर्मी

दिल्ली के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स क्षेत्र के लोगों ने मंगलवार के दिन सबसे ज्यादा गर्मी झेली। यहां का अधिकतम तापमान 39.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पीतमपुरा में 38.7, नजफगढ़ में 38.8 और पालम में 38 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। 


गुरुवार से दिखेगा मौसम में बदलाव

दिल्ली के लोगों को बुधवार के दिन भी खासी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। इस दिन भी अधिकतम तापमान 38 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। वहीं गुरुवार से मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। चक्रवाती हवाओं के चलते दिल्ली की तरफ नमी भरी पूर्वी हवाओं का आगमन शुरू होगा, साथ ही अगले तीन दिन तक हल्की और मध्यम बरसात का दौर रहने की संभावना है। इससे लोगों को उमस और गर्मी से खासी राहत मिलेगी।



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दिल्ली में न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री बढ़ा

नई दिल्ली : दिल्ली में सोमवार को न्यूनतम तापमान 27.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से एक डिग्री अधिक था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी।


आईएमडी के मुताबिक अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है। सुबह साढ़े आठ बजे हवा में नमी का स्तर 63 प्रतिशत दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों ने आसमान पर आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान जताया है।


राष्ट्रीय राजधानी में रविवार का दिन गर्म रहा जब अधिकतम तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक था जबकि न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक सुबह आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 121 दर्ज किया गया।


शून्य से 50 के बीच के एक्यूआई को 'अच्छा', 51 से 100 को 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच 'मध्यम', 201 से 300 को 'खराब', 301 से 400 को 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच को 'गंभीर' माना जाता है।





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आंध्र प्रदेश के पूर्व, पश्चिम गोदावरी जिलों में बिजली गिरने की आशंका

अमरावती :  आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एपीएसडीएमए) के आयुक्त के. कन्नबाबू ने मंगलवार को पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी जिलों में 30 जगहों पर आंधी आने की चेतावनी जारी की है।


कन्नाबाबू ने कहा, पूर्वी गोदावरी में राजामहेंद्रवरम ग्रामीण, कादियम, कोथापेटा, आत्रेयपुरम, रावुलापलेम, अलामुरु, मंडपेटा, कपिलेश्वरपुरम, काजुलुरु, तल्लाचेरुवु, कटेरेनिकोना, आई. पोलावरम, ऐनापल्ली, पमारू और रामचंद्रपुरम में इस घटना की संभावना है।


इसी तरह, पश्चिम गोदावरी जिले के नल्लाजरला, ताडेपेलिगुडेम, कोय्यालागुडेम, देवरपल्ली, चागल्लु, निदादावोलु, पेंटापाडु, तनुकु, अंडरराजवरम, पेरावल्ली, इरगावरम, अत्तिली, पेनुमंत्रा, उन्गुतुरु और आसपास के इलाकों में बिजली गिरने की आशंका है।


कन्नबाबू ने कहा, खेतों में काम करने वाले किसानों, खेत मजदूरों, पशुपालकों और चरवाहों को खुले स्थानों पर रहने से बचना चाहिए और सुरक्षित इमारतों में शरण लेनी चाहिए।


मेट ने मंगलवार को उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और दक्षिण तटीय जिलों में कुछ स्थानों पर बिजली गिरने के साथ गरज के साथ बारिश का अनुमान लगाया है।


बुधवार को भी इन्हीं इलाकों में एक-दो जगहों पर ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है।


मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा, आंध्र प्रदेश राज्य में मुख्य रूप से पश्चिमी और दक्षिण पश्चिमी हवाएं चलती हैं।


मंगलवार को गोदावरी जिलों जैसे भीमावरम, चिन्नामीराम, पेद्दामीराम, विसाकोडेरु, पेन्नाडा और कई अन्य स्थानों पर बादल छाए रहे।


पूर्वी गोदावरी में कुछ स्थानों पर बारिश भी हो रही है, जिससे पिछले कुछ दिनों से गर्मी से काफी राहत मिली है।







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मानसून का मजा लेना है तो जाएं चांदीपुर बीच...

मानसून की ठंडी हवाएं हों और अगर आप इस हवा का मजा लेने किसी स्पेशल जगह जाने का मन बना रहे हैं तो जाएं चांदीपुर बीच। मटमैला आसमान, मंद हवा, टप-टप बारिश की बूंदें और समुद्र का किनारा आपका दिन बनाने के लिए काफी है। यह भारत के सर्वोत्तम समुद्र तटों में से एक है जो ओडिशा के समुद्री तट पर पुरी और कोलकाता के बीच पड़ने वाले बालासोर से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।


यहां खूबसूरत ताड़ के पेड़ तो हैं ही, सफेद बालू के टीले भी हैं, जहां आपको हाइड एंड सीक गेम खेलने में काफी मजा आएगा। चांदीपुर बीच दुनिया के कुछ उन चुनिंदा समुद्री तटों में शामिल है, जो लो टाइड की वजह से हर दिन पांच किलोमीटर पीछे जाता है। दूर-दूर तक फैले समुद्री रेत पर आप टहल सकते हैं, समुद्र की लहरों से खेल सकते हैं और चाहें तो समुद्र से निकलते खूबसूरत सी शेल्स को एकत्र कर सकते हैं। जब यहां समुद्र दोबारा चढ़ता है तो जीप में बैठकर समुद्र के आगे-आगे भागना कभी नहीं भूलने वाला अनुभव है।


क्या देखें....


सिमिलीपल नेशनल पार्क:- यह पार्क बारीपदा से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. चांदीपुर से एक दिन के ट्रिप पर यहां घूमा जा सकता है। यह पार्क बाघों के लिए जाना जाता है। इनके अलावा, चीते, हाथी, सांभर, भौंकने वाले और चित्तीदार हिरन, मगरमच्छ और सरीसृप भी देखे जा सकते हैं।


इस पार्क में चिड़ियों की लगभग 231 प्रजातियां और पेड़-पौधों की लगभग 1076 प्रजातियां हैं, जिसमें ऑर्किड की 94 किस्में हैं। एनएच-6 (जो कोलकाता से आती है) पर स्थित जाशीपुर और एनएच- 5 पर स्थित लुलंग यहां के दो एंट्री प्वाइंट्स हैं। बाच्चुरी चारा यहां का बेहतर स्थान है, जहां से जंगली हाथी देखे जा सकते हैं। हालांकि बाघों की दहाड़ सुनने का सबसे सुंदर स्थान चाहाला की पहाड़ियां हैं।


देवकुंड:- बालासोर से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवकुंड में मनोहारी झरनों की श्रृंखला देखी जा सकती है। यह सिमिलीपल नेशनल पार्क के बाहरी घेरे पर स्थित है।


पंचलिंगेर:- बारीपदा से 85 और बालासोर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है- पंचलिंगेर. यहां शिव का प्राचीन मंदिर है। यहां भगवान शिव के पांच लिंग स्थापित हैं, जो प्रतिदिन प्राकृतिक झरने से धुलते हैं। ये झरनें इन लिंगों के ऊपर से बहते हैं।


यह स्थान वरदांत देवगिरि पहाड़ियों की श्रृंखला के मध्य में स्थित है, जो सघन हरियाली और खूबसूरत वादियों के कारण प्रसिद्ध है। बालासोर से 90 किलोमीटर और चंदनेर से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित तालासरी और चैमुख भी बहुत ही खूबसूरत अनदेखे बीच हैं और वे पर्यटकों की कल्पनाओं को सच करते हैं।


इसके अलावा, आप यहां सती अनुसुइया आश्रम भी जा सकते हैं, जो यहां से 16 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह आश्रम मंदाकिनी नदी के किनारे है। यहां सती अनुसुइया ने सीता माता को सतीत्व के महत्व को बताया था। यहां राम जानकी रघुवीर मंदिर और संकटमोचन हनुमान मंदिर, जो जानकी कुंड के पास स्थित है, के दर्शन कर सकते हैं। यहां प्राकृतिक अजूबे के तौर पर गुप्त और गोदावरी नामक दो गुफाएं हैं जिनमें से एक संकरी और दूसरी विस्तृत बने हुए हैं। माना जाता है कि यहां श्रीराम और लक्ष्मण ने बैठक की थी।


कब जायें:- मानसून यहां के वातावरण का बिल्कुल अलग ही अहसास कराता है। हालांकि यहां आने के लिए बेहतर महीने सितम्बर से मार्च हैं।


कैसे पहुंचें हवाई मार्ग:- यहां का नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर है जो 294 किमी दूर है. यहां से कोलकाता 206 किमी दूर है। चांदीपुर से चालीस किलोमीटर दूर प्रकृति की गोद में खूबसूरत नीलगिरि स्थित है। नीलगिरि हिल्स ट्रैकिंग के लिए बेहतर स्थान है। साथ ही यहां कुलदिहा एलीफेंट सेंचुरी भी देख सकते हैं।


रेल मार्ग:- यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन बालासोर है, जो 16 किमी दूर है. बालासोर, कोलकाता-चेन्नई मुख्यलाइन पर स्थित है। यह सभी बड़े शहरों से जुड़ा है. यहां से आप टैक्सी या ऑटो किराये पर लेकर चांदीपुर पहुंच सकते हैं।


सड़क मार्ग:- एनएच-5 पर स्थित चांदीपुर बालासोर से 16 किमी दूर है. बालासोर से भुवनेर 214 किमी और बालासोर से कोलकाता 298 किमी की दूरी पर है।





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