यूपी में बारिश से फसल बर्बाद, सदमे से किसान की मौत

रामपुर (उत्तर प्रदेश) : बेमौसम बरसात ने कई लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। यूपी के रामपुर में 60 वर्षीय रईस खान अपने खेतों को देखने गए थे। खेत में अपनी 10 बीघा जमीन में पूरी तरह से पानी में डूबी धान की फसल को देखकर वो हैरान रह गए।


इस नुकसान को देखकर खान बेहोश हो गये और खेत में ही उनकी मौत हो गई।


उनके परिवार को बाद में उनका शव खेत में मिला।


खान के चचेरे भाई ने कहा कि वह हृदय रोगी थे और धान के सीजन में गंभीर तनाव से जूझ रहे थे। लगातार हो रही बारिश से क्षेत्र के कई किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई है।


अधिकारियों ने कहा कि किसानों को होने वाले कुल नुकसान का अभी भी आकलन किया जा रहा है।


दूसरी ओर, शाहबाद के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) संजय तोमर ने कहा, परिवार ने हमें उनकी मौत के बारे में सूचित नहीं किया है। अगर वे हमसे संपर्क करते हैं, तो हम उनकी सहायता के लिए उचित कदम उठाएंगे। हमें स्थानीय ग्रामीणों से घटना के बारे में पता चला है।


इस बीच, शाहबाद तहसीलदार, दिनेश कुमार ने कहा, हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उन्होंने कोई ऋण ले रखा था। यदि उनका परिवार पोस्टमार्टम और अन्य औपचारिकताओं का पालन करता है, तब उन्हें संबंधित सरकारी योजना के तहत कुछ वित्तीय सहायता मिल सकती है।





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बारिश ने फुलाई किसानों की सांसें, धान फसल को हुआ नुकसान

ग्रेटर नोएडा : धान की फसल करने वाले किसानों को इस बार अच्छे उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन रविवार को बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। तेज हवा के साथ हुई बारिश से धान की फसल खेतों में गिर गई है। अगेती फसल की खेती करने वाले किसानों को खासा नुकसान हुआ है। दरअसल 15 अक्टूबर से धान की कटाई का काम शुरू हो जाता है। हालांकि अगेती फसलों में किसान अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही कटाई शुरू कर देते हैं। जिले में धान की फसल बड़े स्तर पर की जाती है। इन दिनों किसान धान की कटाई के कार्य में जुटे थे। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार धान का अच्छा उत्पादन होगा, लेकिन बारिश उनके लिए आफत बनकर बरसी। शहर में जगह-जगह जलभराव से ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण व जिला प्रशासन के इंतजामों की एक बार फिर पोल खोलकर रख दी। शहर में ग्रामीण अंचलों से लेकर सेक्टर व सोसायटी के समीप शहरवासियों को जलभराव का सामना करना पड़ा। सुबह से ही काले बादल छाए रहे। सुबह से ही तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। देर शाम को ही काले बादल छाए रहे। करीब एक बजे काले बादल ऐसे छाए कि दिन में ही अंधेरा छा गया। कृषि विभाग 70 से 80 एमएम बारिश होने का दावा कर रहा है। 


तेज हवा के साथ बारिश में कई स्थानों पर पेड़ व बिजली, स्ट्रीट लाइट के खंभे गिर गए। मुख्य सड़कों पर पेड़ गिरने के बाद वाहन चालकों को आवागमन में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। 130 मीटर, सूरजपुर, के साथ -साथ ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कई स्थानों पर पेड़ गिरने की सूचना है। तेज हवा ने शहर में कई स्थानों पर पेड़ों को धराशायी कर दिया। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के साथ-साथ जेवर, बिलासपुर व दनकौर व दादरी के गांवों में करीब छह से सात घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रही।


जेवर क्षेत्र में किसानों को धान की फसल को खासा नुकसान हुआ है। गांव चौरोली निवासी किसान प्रदीप कुमार ने बताया कि खेतों में धान की कटाई चल रही है। कई बीघे फसल कट चुकी है। धान के काले पड़ने की संभावना है। किसान वीर नारायण ने बताया कि खेतों में कई कई फीट पानी भर गया है। धान फसल को भारी नुकसान की आशंका है। नगर पंचायत क्षेत्र में भी सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। नालियां जाम होने से जगह-जगह रास्तों में पानी भर गया है। बारिश बंद हो जाने के बाद भी शहर की सड़कें कई घंटों बाद तक जलमग्न रही। 





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केरल में भारी बारिश : प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री विजयन से बातचीत की

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में भारी बारिश और भूस्खलन के मद्देनजर स्थिति को लेकर रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन से बातचीत की।


इस बीच, मध्य केरल के दो जिलों के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण आयी भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 18 हो गयी है।


प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, "केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन से बातचीत की और केरल में भारी बारिश तथा भूस्खलन के मद्देनजर स्थिति पर विचार-विमर्श किया। अधिकारी घायलों और प्रभावितों की सहायता के लिए काम कर रहे हैं।"


मोदी ने कहा, ‘‘मैं सभी के सुरक्षित रहने और उनकी भलाई के लिए प्रार्थना करता हूं।" उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, "यह दुखद है कि केरल में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण कुछ लोगों की मृत्यु हो गयी। मेरी संवदेनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।’’


केरल के राजस्व मंत्री के राजन ने कहा कि बचावकर्मियों ने शनिवार को इडुक्की और कोट्टयम जिलों में विभिन्न स्थानों पर हुए भूस्खलन के मलबे से 15 शव बरामद किए हैं।


रविवार को तीन और शव मिलने से मृतकों की संख्या बढ़कर 18 हो गयी है।



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केरल में भारी बारिश के कारण मकान ढहने से दो बच्चियों की मौत

मलाप्पुरम (केरल) : केरल में कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच मंगलवार तड़के करीपुर के समीप एक मकान ढहने से दो बच्चियों की मौत हो गई।


पुलिस ने बताया कि मकान ढहने से छह महीने की बच्ची और उसकी आठ साल की बहन की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि यह मकान मुंडोट्टुपडम के समीप माथमकुलम में था। यह मकान हादसे का शिकार हुईं बच्चियों के दादा का था।


स्थानीय सूत्रों ने बताया कि पास स्थित एक निर्माणाधीन मकान बारिश की वजह से तड़के चार बजकर 30 मिनट पर पीड़ितों के मकान पर गिर गया। बच्चों को कोझिकोड चिकित्सा कॉलेज ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।


केरल में सोमवार से भारी बारिश जारी है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में मंगलवार को भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने बताया कि पूर्व-मध्य अरब सागर के ऊपर चक्रवात बना है और इसके अगले तीन दिनों तक बने रहने की संभावना है, जिसके कारण केरल में 11 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक भारी बारिश का अनुमान है।






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उत्तर पश्चिमी हवाओं से दिन का बढ़ रहा तापमान

कानपुर : चार महीने बारिश के दिन अब जा चुके हैं और मानसून की वापसी से दिन रात के तापमान में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। दिन के तापमान में जहां बढ़ोत्तरी हो रही है तो वहीं रात के में सर्द हवाएं चल रही हैं। इसके साथ ही उत्तरी पश्चिमी हवाओं से भी दिन का तापमान बढ़ रहा हे।


चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ एसएन सुनील पांडेय ने रविवार को बताया कि दक्षिण पश्चिम मानसून वापसी की ओर है। इसके साफ संकेत दिख रहे हैं, क्योंकि दिन का तापमान बढ़ रहा है और रात का तापमान घट रहा है। इसके चलते कानपुर में भी मौसम में बदलाव नजर आने लगा है, रात में हल्की ठंड तो दिन चिलचिलाती धूप लोगों को परेशान कर रही है।


बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून आधिकारिक तौर पर 30 सितम्बर को समाप्त हो गया। हालांकि, पिछले वर्षों के विपरीत, दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक तिथि समाप्त होने के बाद भी मानसून की विदाई नहीं हुई थी। अब मानसून की वापसी के लिए मौसम की स्थिति अनुकूल बनी हुई है। वर्तमान में मानसून वापसी रेखा राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर और गुजरात के भुज से होकर गुजर रही है।


मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि आमतौर पर जब मानसून पीछे हटता है, तो साफ आसमान की स्थिति के साथ-साथ हवा के पैटर्न में बदलाव होता है। यह बदलाव अब पूरी तरह से दिखने लगा है। आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश में आसमान पूरी तरह से साफ हो जाएगा। बताया कि रविवार को अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सापेक्षिक आर्द्रता सुबह की 92 फीसद और दोपहर की 49 फीसद रही। हवाओं की दिशाएं उत्तर पश्चिम रहीं, जिनकी रफ्तार 3.3 किमी प्रति घंटा रही।




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मराठवाडा के तीन जिलों में बाढ़ के बाद मांजरा बांध के 12 द्वार बंद

औरंगाबाद : महाराष्ट्र के मराठवाडा क्षेत्र में भारी बारिश से जलस्तर बढ़ने के कारण मांजरा बांध से पानी छोड़े जाने से बीड, लातूर और उस्मानाबाद जिलों के कुछ गांवों में बाढ़ आने के बाद बुधवार तड़के बांध के 12 द्वार बंद कर दिए गए।


सिंचाई विभाग द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, सुबह चार बजे बांध के कुल 18 द्वारों में 12 द्वार बंद करने से जलाशय से छोड़े जाने वाली पानी की मात्रा कम होकर 18,747 क्यूबिक मीटर प्रति सेंकड रह गयी है जबकि मंगलवार को यह 70,845 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड थी।


सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अभी बांध के छह द्वार पानी छोड़े जाने के लिए खुले हैं।


अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि पिछले दो दिनों में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़ और बिजली गिरने से कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है। मराठवाड़ा क्षेत्र बारिश का सबसे अधिक प्रकोप झेल रहा है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने 560 से अधिक लोगों को बचाया है।


उन्होंने बताया कि 200 से अधिक मवेशियों की मौत हो गयी या वे बह गए और मूसलाधार बारिश में कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए।


भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को मराठवाड़ा के कुछ स्थानों पर अगले 24 घंटों में ''अत्यधिक भारी बारिश'' का अनुमान जताया।


मध्य महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के तहत आठ जिले औरंगाबाद, लातूर, उस्मानाबाद, परभणी, नांदेड, बीड, जालना और हिंगोली आते हैं।

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बंगाल उपचुनाव में बारिश खड़ी कर सकती है मुश्किलें, कुछ इलाकों में येलो अलर्ट जारी

कोलकाता : उत्तरी कोलकाता के अहिरीटोला में बुधवार को एक इमारत के गिरने से एक बच्चे और उसकी मां समेत छह लोग अंदर फंस गए। शहर में आधी रात से लगातार हो रही बारिश के कारण यह हादसा हुआ है। गुरुवार को भवानीपुर समेत तीन विधानसभा उपचुनाव कराने की तैयारी में जुटे प्रशासन के लिए यह एक चिंता की बात है।


मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में शहर और उसके आसपास के जिलों में और बारिश होने का अनुमान लगाया है।


उत्तरी कोलकाता के अहिरीटोला में बुधवार सुबह एक जर्जर इमारत के गिरने से एक बच्चे और उसकी मां समेत छह लोग फंस गए। फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और दो लोगों को बचाया, लेकिन चार और लोगों के अंदर होने की आशंका है। बाकी लोगों को बचाने के लिए आपदा प्रबंधन टीम कड़ी मेहनत कर रही है।


अग्निशमन और आपातकालीन सेवा राज्य मंत्री सुजीत बसु मौके पर पहुंचे और व्यक्तिगत रूप से बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए, बसु ने कहा, दो लोगों को बचा लिया गया है, लेकिन कुछ और लोग हैं जो अंदर फंसे हुए हैं। हमें पहले उन्हें बचाने और अस्पताल भेजने की जरूरत है।


इस बीच, आधीरात से तेज हवा के साथ लगातार बारिश ने शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी भर दिया है, जिससे लोगों को काम पर जाने के लिए एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।


कॉलेज स्ट्रीट से मुक्ताराम बाबू स्ट्रीट, थंथानिया, शुक्रिया स्ट्रीट, गिरीश पार्क, शोभाबाजार, उल्टाडांगा, उत्तरी कोलकाता में पतिपुकुर अंडरपास और बेहाला, हरिदेबपुर, जादवपुर, तरताला, तिलजला, नेताजी नगर, पाक सर्कस, गार्डनपारा सहित शहर के अधिकांश हिस्से दक्षिण कोलकाता का इलाका पानी में डूब गया। लोगों को अपने कार्यस्थलों तक पहुंचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।


मौसम विभाग के अनुसार, एक अच्छी तरह से चिह्न्ति निम्न दबाव का क्षेत्र अब गंगीय पश्चिम बंगाल के मध्य भाग पर स्थित है, जिसके बाद पुरुलिया, बांकुरा, बीरभूम, मुर्शिदाबाद, नदिया के कुछ हिस्सों में तेज हवा के साथ बारिश या गरज के साथ बौछारें जारी रहने की संभावना है। अगले दो से तीन दिनों के लिए पश्चिम बंगाल के पूर्व और पश्चिम बर्दवान, कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, झारग्राम और मालदा जिले में बारिश होने की संभावना है।


हालांकि, मौसम विभाग ने कहा है कि गुरुवार को कोलकाता में भारी बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन बर्दवान, पुरुलिया, बांकुरा, 24 परगना, हावड़ा और हुगली सहित दो जिलों में भारी बारिश के लिए पहले ही येलो अलर्ट जारी कर दिया है।


इन जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। जो 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ऊपर उठ सकती है। मछुआरों को अगले दो से तीन दिनों तक समुद्र में न जाने को कहा गया है।


मौसम की स्थिति को लेकर प्रशासन चिंतित है क्योंकि गुरुवार (30 सितंबर) को भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपचुनाव होने हैं।


लगातार हो रही बारिश के कारण दक्षिण बंगाल के जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है।


राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, चुनाव नजदीक है और इसलिए हम जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। राज्य प्रशासन किसी भी तरह की स्थिति के लिए तैयार है।






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भारी बारिश के कारण किन्नौर, शिमला में भूस्खलन

शिमला : हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण किन्नौर और शिमला जिले में भूस्खलन हुआ। राज्य आपदा प्रबंधन के निदेशक सुदेश कुमार मोख्ता ने शुक्रवार को बताया कि बृहस्पतिवार की शाम भूस्खलन के बाद किन्नौर जिले के पुवारी से काजा तक राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहा। उन्होंने बताया कि शिमला में भी बृहस्पतिवार की शाम भूस्खलन के कारण होमगार्ड कार्यालय के पास एक सड़क बंद रही, वहां से मलबा हटाने का काम जारी है। अधिकारी ने बताया कि बिलासपुर में नैना देवी में 180.6 मिमी और सोलन के कंडाघाट में 65.2 मिमी बारिश हुई। शुक्रवार को सुबह साढ़े नौ बजे तक पिछले 24 घंटे में शिमला में 54.6 मिमी बारिश हुई।







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बारिश से फसलों के नुकसान का आकलन करवाएगी सरकार

चंडीगढ़ : हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री जे पी दलाल ने कहा कि सरकार ने वर्तमान में हो रही बारिश के कारण किसानों की फसलों का खराबा आंकने के लिए स्पेशल गिरदावरी करवाने के निर्देश दिए है ताकि गिरदावरी का कार्य जल्द से जल्द पूरा कर किसानों को समय पर मुआवजा दिया जा सके।


कृषि मंत्री गुरुवार को चंडीगढ़ में अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बागवानी बीमा देश की पहली योजना है, जो किसानों, बागवानी एवं सब्जियों की फसलों को बीमित करेगी। उन्होंने कहा कि हिमचाल प्रदेश में केवल सेब के किसानों के लिए बीमा योजना लागू है।


इस योजना के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आभार जताया। उन्होंने कहा कि किसान हितैषी सरकार किसानों के लिए निर्णय लेने में कोई संकोच नहीं करती और किसानों को जोखिम फ्री करने और युवाओं को मधुमक्खी पालन, शहद, मशरुम, दुध की प्रोसेसिंग, मछली पालन आदि व्यवसाय से जोड़ने का कार्य कर रही है।


उन्होंने कहा कि प्रदेश में 8 से 10 प्रतिशत क्षेत्र बागवानी का आता है जिन किसानों के लिए कोई बीमा योजना नहीं थी। इस बीमा योजना में 21 फलों, सब्जियों एवं मसाला फसलों का शामिल किया गया है। बागवानी किसानों को विभिन्न कारकों के कारण भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता था। यह योजना फसलों में अचानक बीमारी फैलने, कीटों के संक्रमण, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, सूखा, पाला आदि से होने वाले नुकसान से किसान की भरपाई करेगी।


दलाल ने बताया कि बागवानी का उद्देश्य किसानों को उच्च जोखिम वाली बागवानी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत किसानों को सब्जी एवं मसाला फसलों के 30,000 रुपये और फल वाली फसलों के 40,000 रुपये का बीमा किया गया। इसमें किसानों को केवल 2.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होगा, जिसमें 750 रुपये और 1000 रुपये ही अदा करने होंगे।


कृषि मंत्री ने बताया कि मुआवजा सर्वेक्षण और नुकसान दावे को 25 से 50, 75 और 100 प्रतिशत चार श्रेणियों में बांटा गया है। किसानों को मेरी फसल मेरा ब्योरा (एमएफएमबी) पोर्टल पर अपनी फसल और क्षेत्र का पंजीकरण करना होगा। इसके बाद सर्वे करके मुआवजे का लाभ दिया जाएगा।


दलाल ने कहा कि प्रदेश में शीघ्र ही अढाई से तीन हजार किसानों को मच्छली पालन व्यवसाय से जोड़ा जाएगा। इससे 7-8 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा पोल्ट्री फार्म, चारे के ब्लाॅक आदि खोलने पर भी युवाओं को सबसिडी प्रदान की जा रही है। दलाल ने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना, फसल अवशेष प्रबंधन, स्वॉयल हेल्थ कार्ड, तालाब सिंचाई योजना, खाद्य सुरक्षा योजना, बायोगैस गौशाला योजना, फव्वारा सिंचाई जैसी योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। इन योजनाओं का किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।






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मौसम विभाग ने बुधवार को दिल्ली में बेहद खराब मौसम की चेतावनी जारी की

नई दिल्ली : मौसम विभाग ने बुधवार को दिल्ली में जलभराव और यातायात बाधित होने की आशंका के साथ बेहद खराब मौसम की चेतावनी जारी की है।


दिल्ली में मंगलवार का दिन गर्म रहा। हालांकि, राष्ट्रीय राजधानी के कुछ हिस्सों में अपराह्न में बारिश हुई, जिससे कुछ इलाकों में जलभराव और यातायात बाधित हो गया।


राष्ट्रीय राजधानी के लिए आधिकारिक आँकड़े प्रदान करने वाली सफदरजंग वेधशाला ने शाम 5.30 बजे तक 3.6 मिमी बारिश दर्ज की। लोधी रोड, रिज क्षेत्र, नोएडा और पीतमपुरा में सुबह 8.30 से शाम 5.30 बजे के बीच क्रमश: 1 मिमी, 17.6 मिमी, 2 मिमी और 7 मिमी बारिश दर्ज की गई।


मुंडका अंडरपास पर जलजमाव के कारण रोहतक रोड पर भीषण जाम लग गया। यात्रियों को मध्य दिल्ली और लुटियंस दिल्ली में भी यातायात जाम का सामना करना पड़ा।


अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 25.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


आर्द्रता का स्तर 89 प्रतिशत से 55 प्रतिशत के बीच रहा।


भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार के लिए "ऑरेंज" अलर्ट और बृहस्पतिवार, शनिवार और रविवार के लिए "येलो" अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार के लिए, इसने "ग्रीन" अलर्ट जारी किया है।





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कोलकाता में भारी बारिश, जनजीवन प्रभावित

कोलकाता : कोलकाता और आसपास के जिलों में सोमवार तड़के हुई मूसलाधार बारिश से सप्ताह के पहले कार्य दिवस पर जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग ने कम से कम एक दिन और बारिश होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है।


देर रात एक से सुबह सात बजे तक शहर के विभिन्न स्थानों पर 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे कई महत्वपूर्ण मार्ग और निचले इलाके घुटने तक पानी में डूब गए।


एक अधिकारी ने बताया कि कोलकाता नगर निगम के ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों द्वारा धापा में 136 मिमी, कालीघाट में 115 मिमी और बालीगंज में 109 मिमी बारिश दर्ज की गई।


मौसम विभाग ने कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के ज्यादातर जिलों में मंगलवार सुबह तक और तेज बारिश या गरज के साथ बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया है।


मौसम विभाग के क्षेत्रीय निदेशक जीके दास ने कहा, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम से गंगीय पश्चिम बंगाल तक चक्रवाती परिसंचरण की गति और मजबूत नमी के कारण, कोलकाता और उससे सटे उत्तर और दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली और पुरबी मेदिनीपुर में भारी बारिश हो रही है।


मौसम विभाग के 24 घंटे के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह साढ़े आठ बजे तक कोलकाता में 142 मिमी बारिश हुई जो पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा है।


मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे की अवधि के दौरान जिन अन्य स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई, उनमें दक्षिण 24 परगना में कैनिंग (113 मिमी), साल्ट लेक (112.8 मिमी) और कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में दम दम (95 मिमी) शामिल हैं।


सुबह से सड़कों पर कम वाहन थे, लेकिन जलमग्न मार्ग के कारण बहुत धीमी गति से चल रहे थे जिसकी वजह से ट्रैफिक जाम हो गया।


काम पर जाने की कोशिश कर रहे लोगों को सार्वजनिक परिवहन प्राप्त करने में मुश्किल हो रही थी क्योंकि मूसलाधार बारिश के कारण बसों और टैक्सियों की संख्या बहुत कम थी।



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दिल्ली में फिर बन रहे बारिश के आसार, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट

नई दिल्ली :  दिल्ली-एनसीआर में रविवार को मौसम साफ है। सुबह में मौसम खुशनुमा है।  मौसम विभाग के अनुसार रविवार को आकाश में बादल छाए रहेंगे लेकिन बारिश होने की उम्मीद नहीं है। सोमवार को कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है। मंगलवार से शुक्रवार के बीच एक बार फिर अच्छी बारिश हो सकती है। इस वजह से मौसम विभाग ने 21 से 24 सितंबर तक येलो अलर्ट जारी किया है। 


मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को दिन में न्यूनतम और अधिकतम तापमान क्रमश: 26 डिग्री सेल्सियस और 34.4 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।


शनिवार को नही हुई बारिश


इससे पहले शनिवार को हल्के बादल छाए रहे लेकिन बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रहा। शाम साढ़े पांच बजे सापेक्षिक आर्द्रता 73 फीसदी रही। शुक्रवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम 23.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस तरह तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हुई।


मौसम विभाग ने बताया कि रविवार को भी तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। इस वजह से अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस वजह से उमस भरी गर्मी महसूस की जा सकती है। हालांकि गर्मी से राहत दो दिन बाद मिलने की संभावना है।


बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले दिनों हुई झमाझम बारिश से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली थी वहीं जलजमाव और रोड जाम से मुश्किलें भी बढ़ गई थी। जगह-जगह जलभराव की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।रिकार्ड तोड़ बारिश लोगों के घरों और दुकानों में भी घुस गया था। कई जगहों पर पेड़ गिरने व सड़कों पर गड्डे होने की भी जानकारी सामने आयी थी।



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अगले दो दिन भारिश की संभावना, जिला प्रशासन ने जारी किया अलर्ट, गाइडलाइन जारी

गाजियाबाद : अगले दो दिन जनपद में भारी बारिश होने की संभावना है। इसको लेकर जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। इस दौरान किसी भी परेशानी पर मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि दैनिक वर्षा पूर्वामान के अनुसार जनपद में अगले दो दिनों भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इसको लेकर जनपद वासियों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वह बहुत जरूरी होने पर ही घर से निकले। जलभराव की स्थिति में ज्यादा सावधानी बरते। किसी भी परेशानी पर दिए हए हेल्पलाइन नंबर पर तत्काल सूचना दें।


ये जारी की गई गाइडलाइन


बिजली के खंभों के आसपास भरने पानी में जाने से बचे।


बिजली खंभे व ट्रांसफार्मर को स्थिर करने के लिए लगाए गए तारों को न छूए।


बिजली तार टूटने या फिर लटकने पर विद्युत निगम के 9193320115 पर सूचना दे।


सड़क पर जलभराव से निकलने से बचे या फिर सतर्कता से निकले। 


बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकले। 


भीड़-भाड़ वाले ट्रैफिक जाम वाले क्षेत्रों में जाने से बचे।


इस दौरान निर्माण कार्य न कराएं या फिर पूरी सावधानी से कराएं। 


हेल्पलाइन नंबर


जलभराव, गंदगी, पेड गिरने, जर्जरभवन की शिकायत- 8187016890


विद्युत ब्रेडडाउन के लिए- 1912


किसी भी अन्य समस्या के लिए इंटीग्रेटिड कंट्रोल रूम- 0120-2829040, 9910426674, 8826797248





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छत्तीसगढ़ में अब तक 1030.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

रायपुर : राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बनाए राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष द्वारा संकलित जानकारी के मुताबिक 1 जून से अब तक राज्य में 1030.2 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में 1 जून से आज 17 सितम्बर तक रिकार्ड की गई वर्षा के अनुसार कोरबा जिले में सर्वाधिक 1428.9 मिमी और कबीरधाम जिले में सबसे कम 809.5 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी है।


राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक जून से अब तक सरगुजा में 889.3 मिमी, सूरजपुर में 1211.5 मिमी, बलरामपुर में 986 मिमी, जशपुर में 1019.2 मिमी, कोरिया में 969.3 मिमी, रायपुर में 892.2 मिमी, बलौदाबाजार में 939.4 मिमी, गरियाबंद में 1000.5 मिमी, महासमुंद में 869.7 मिमी, धमतरी में 963.6 मिमी, बिलासपुर में 1034.3 मिमी, मुंगेली में 1004.1 मिमी, रायगढ़ में 887.8 मिमी, जांजगीर चांपा में 1033.2 मिमी, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 1314.2 दुर्ग में 973.1 मिमी, राजनांदगांव में 900.3 मिमी, बालोद में 853.9 मिमी, बेमेतरा में 1121.8 मिमी, बस्तर में 1025.1 मिमी, कोण्डागांव में 1000.8 मिमी, कांकेर में 967.6 मिमी, नारायणपुर में 1172.8 मिमी, दंतेवाड़ा में 1101 मिमी, सुकमा में 1337.9 मिमी, और बीजापुर में 1138.2 मिमी औसत वर्षा रिकार्ड की गई।



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इस मौसम में 1964 के बाद सबसे ज्यादा बारिश, अभी और वर्षा का अनुमान

नई दिल्ली : भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल बेहतर मॉनसून के कारण दिल्ली में बृहस्पतिवार को दोपहर तक 1159.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो 1964 के बाद से सबसे अधिक और अब तक की तीसरी सर्वाधिक बारिश है। साथ ही, दिल्ली में सितंबर में हुई बारिश ने 400 मिमी के निशान को पार कर लिया है। बृहस्पतिवार दोपहर तक हुई 403 मिमी बारिश सितंबर 1944 में 417.3 मिमी के बाद से इस महीने में हुई सबसे अधिक वर्षा है।


ये आंकड़े बदल सकते हैं क्योंकि आज दिन भर और बारिश होने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्षा ऋतु के जाते-जाते यह दिल्ली में दूसरी सबसे ज्यादा मॉनसून की बारिश हो सकती है। सामान्य तौर पर, दिल्ली में मॉनसून के मौसम में 653.6 मिलीमीटर बारिश होती है। पिछले साल राजधानी में 648.9 मिली बारिश हुई थी। एक जून को जब मॉनसून शुरू होता है, तब से 15 सितंबर के बीच शहर में सामान्य तौर पर 614.3 मिमी बारिश होती है। दिल्ली से मॉनसून 25 सितंबर तक लौटता है।


आईएमडी के मुताबिक, शहर के लिए आधिकारिक मानी जाने वाली सफदरजंग वेधशाला का कहना है कि शहर में बृहस्पतिवार को दोपहर तक इस मौसम की 1159.4 मिमी बारिश हो चुकी है। 1975 में 1,155.6 मिमी और 1964 में 1190.9 मिमी बारिश हुई थी। अब तक की सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 1933 में हुई 1,420.3 मिमी वर्षा का है। इससे पहले, सुबह मौसम विभाग ने दिल्ली में दिन में मध्यम बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। शुक्रवार को हल्की बारिश की संभावना है।


एक निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा, "23-24 सितंबर तक बारिश बीच-बीच में होती रहेगी, जिसका मतलब है कि मॉनसून समाप्त होने तक, दिल्ली के नाम अब तक दूसरा सबसे ज्यादा बारिश वाला मॉनसून दर्ज हो सकता है।'


पिछले दो दशकों में यह केवल तीसरी बार है जब दिल्ली में मॉनसून की बारिश ने 1000 मिमी के निशान को पार किया है। दिल्ली में 2011, 2012, 2013, 2014 और 2015 में क्रमश: 636 मिमी, 544 मिमी, 876 मिमी, 370.8 मिमी और 505.5 मिमी वर्षा हुई। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार 2016 में 524.7 मिमी; 2017 में 641.3 मिमी; 2018 में 762.6 मिमी; 2019 में 404.3 मिमी और 2020 में 576.5 मिमी बारिश दर्ज की गई।





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अत्यंत आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकले : जिलाधिकारी

लखनऊ :  लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने गुरूवार को लखनऊवासियों से अपील करते हुए कहा है कि बीती रात से हो रही लगातार भारी वर्षा के कारण अत्यंत आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकले। जिलाधिकारी ने कहा कि लखनऊवासी भीड़भाड़ वाले इलाके और ट्रैफिक जाम वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। खुले सीवर, बिजली के तार, खंभों से बचकर रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या जैसे जलभराव वृक्षपातन होने पर नगर निगम की हेल्पलाइन नंबर 6389300137, 138,139 पर, विद्युत ब्रेकडाउन के लिए हेल्पलाइन नंबर 1912 तथा किसी भी समस्या के लिए इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर के नंबर 4523000 पर समस्या दर्ज कराएं। उन्होंने लखनऊ से संबंधित अधिकारियों पुलिस आयुक्त, नगर आयुक्त, मुख्य अभियंता लेसा, सीईओ कंटोनमेंट बोर्ड को भी आवश्यक निर्देश दिए। 




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दिल्ली में न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस, हल्की बारिश की संभावना

नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके साथ ही हल्की बारिश होने का भी अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, सुबह सापेक्ष आर्द्रता 90 प्रतिशत दर्ज की गई। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को दिल्ली के कुछ हिस्सों में बारिश हुई। सफदरजंग वेधशाला में सोमवार सुबह साढ़े आठ बजे से मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक 3.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। विभाग ने कहा कि आज हल्की बारिश हो सकती है और अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। 

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कानपुर में मौसम ने बदली करवट, तेज हवाओं के बीच बारिश से मौसम हुआ सुहाना

कानपुर : जनपद में कई दिनों से गर्मी से जूझ रहे कानपुर वासियों को मंगलवार को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से मौसम ने करवट बदली। अचानक मौसम में आए बदलाव से जनपद का नजारा बदल सा गया। इस बीच आकाश में छाए बदरा का नजारा देखने लायक था। मौसम विभाग ने भी तेज बारिश के आसार जताए थे।


चन्द्रशेखर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग की ओर से बीते दिनों 10 सितम्बर से 17 सितम्बर के बीच कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। मौसम वैज्ञानी ने आशंका जताई थी कि बारिश के बीच तेज बारिश व आकाशीय बिजली भी गिर सकती है। इसको लेकर लोगों को खासकर ग्रामीण इलाकों के किसानों को बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे न खड़े रहने की सलाह भी जारी की गई थी।


मौसम विभाग के मुताबिक आज तेज धूप के बीच अचानक आकाश में बदरा छा गए और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश के दौरान आसमान से पेड़ों पर गिरती पानी की बूंदें किसी फिल्मी नजारे से कम नहीं थी। इसके साथ ही बारिश ने मिट्टी के सुहानेपन का एहसास कराया। बारिश की बूंदों ने पूरा मौसम बदल दिया।


बारिश के बीच बादलों ने आंख-मिचौली


बारिश के साथ बादलों की आंख-मिचौली देर और घने बादलों के साथ हवाएं चलने लगी। मौसम ठंडा हुआ और आसमान में घुमड़े बादलों व बारिश की फुहारों ने मौसम खुशनुमा हो गया। हालांकि कई दिनों से कानपुर में उमस भरी गर्मी से जनपदवासियों को बेहाल कर रखा था लेकिन आज की बारिश ने राहत पहुंचाई। सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डॉ0 एस एन सुनील पांडेय के मुताबिक, अभी एक-दो दिन बारिश और तेज हवाओं की आंख-मिचौली बनी रहेगी।






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दिल्ली के कई हिस्सों में हल्की बारिश

नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में सोमवार तड़के हल्की बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी।


आईएमडी ने बताया कि न्यूनतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत तापमान से एक डिग्री सेल्सियस अधिक है।


विभाग ने बताया कि सापेक्षिक आर्द्रता 92 फीसदी दर्ज की गई। मौसम कार्यालय ने बताया कि मौसम वैज्ञानिक ने दिन में आसमान में बादल छाए रहने और हल्की बारिश का अनुमान लगाया है। अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा सकता है।


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार सुबह नौ बजकर पांच मिनट पर वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रहा। उल्लेखनीय है कि 0 से 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 से 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच 'मध्यम', 201 से 300 के बीच 'खराब', 301 से 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 से 500 'गंभीर' माना जाता है।




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ओडिशा में भारी बारिश, बाढ़ की चेतावनी जारी

भुवनेश्वर :  ओडिशा में गहरे दबाव का क्षेत्र बनने से सोमवार को भारी बारिश हुई जिसके मद्देनजर अधिकारियों ने बाढ़ की चेतावनी जारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।


भुवनेश्वर में बीते 24 घंटे में, सुबह साढ़े आठ बजे तक, 195 मिमी बारिश हुई जो पिछले 63 वर्षों में सर्वाधिक है। इससे पहले नौ सितंबर 1958 को शहर में 163 मिमी बारिश हुई थी।


उत्तरपश्चिमी बंगाल की खाड़ी पर बना दबाव का क्षेत्र गहरे दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो गया और सोमवार सुबह भद्रक जिले के चांदबली के पास तट को पार कर गया। इसके बाद मौसम विभाग ने 13 जिलों के लिए अलर्ट जारी किए।


मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि दबाव का क्षेत्र अगले 48 घंटों में पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में उत्तर ओड़िशा, उत्तर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकता है।


विभाग ने संबलपुर, देवगढ़, सोनपुर और बारगढ़ के लिए 'रेड' चेतावनी जारी की है जिसका मतलब है कि इन स्थानों पर भारी से बेहद भारी और अत्यधिक भीषण बारिश हो सकती है।


केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है क्योंकि प्रमुख नदियां और उनकी सहायक नदियां लगातार बारिश के कारण उफान पर हैं। इसमें कहा गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान जताया है ऐसे में ओडिशा में बाढ़ के हालात बन सकते हैं।




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पश्चिम उप्र में जोरदार बारिश, जलभराव से लोग परेशान

मेरठ : सितंबर माह के बीच में शनिवार को पश्चिम उप्र के सभी जिलों में जोरदार बारिश होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। इससे शहरों और गांवों में जलभराव से लोग परेशान रहे। कई जगहों पर लोग जलभराव में फंस गए। इस बारिश से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।


मेरठ समेत पश्चिम उप्र के सभी जिलों में शनिवार की सुबह से ही जोरदार बारिश होने लगी। इससे मेरठ, बागपत, शामली, मुजफ्फनगर, सहारनपुर, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बिजनौर आदि जिलों में जलभराव हो गया। शहर से लेकर देहात तक मूसलाधार बारिश होती रही। शाम तक भी बारिश कभी कम तो कभी ज्यादा हुई। इससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मेरठ शहर में मोहल्लों में भारी जलभराव हो गया और लोग अपने घरों में कैद हो गए। ब्रह्मपुरी, जली कोठी, खैर नगर, प्रह्लाद नगर, कंकरखेड़ा, जागृति विहार, लिसाड़ी रोड, जाकिर कॉलोनी आदि मोहल्लों में हालत खराब रही।


व्यापार पर पड़ा बुरा असर

भारी बारिश के कारण शहर के पुराने क्षेत्रों में जलभराव के कारण दुकानें नहीं खुल पाई। इस कारण व्यापार चौपट रहा। दूसरे क्षेत्रों में दुकानों के खुलने के बाद भी ग्राहक नहीं आने से व्यापारी परेशान रहे।


किसानों के चेहरे खिले

भारी बारिश के कारण किसानों के चेहरे खिल उठे। गन्ना, धान, ज्वार की फसलों के लिए बारिश वरदान साबित हुई है। कैली गांव निवासी नितिन त्यागी का कहना कि इस बारिश से फसलों को लाभ होगा, लेकिन आंधी के साथ बारिश होने गन्ना, धान और ज्वार की फसल को नुकसान होने की आशंका है। तेज हवा चलने से फसल जमींदोज हो जाएगी।


कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर के वैज्ञानिक डॉ. संदीप चौधरी का कहना है कि अभी बारिश होने की संभावना बनी हुई है। अगर बारिश कई दिन तक हुई तो फसलों को नुकसान हो सकता है। अभी तक की बारिश से फसल को लाभ पहुंचेगा।




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मानसून से होती तबाही की बढ़ती तीव्रता

देश की राजधानी दिल्ली में 31 अगस्त से ही जोरदार बारिश के कारण अनेक इलाकों में भारी जलभराव के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है और 1 सितम्बर को भी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया। वैसे भी दिल्ली में अक्सर चंद घंटों की मूसलाधार वर्षा में ही सड़कें दरिया बन जाती हैं। दिल्ली-एनसीआर में 31 अगस्त को हुई बारिश ने तो सात वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। 24 घंटे के भीतर राजधानी में 84.1 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जो वर्ष 2013 के बाद से सर्वाधिक है। महाराष्ट्र के मुम्बई सहित औरंगाबाद, जलगांव, कोंकण, मराठवाड़ा से लेकर उत्तर महाराष्ट्र सहित अनेक इलाकों में भी भारी बारिश के कारण कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। राजस्थान में बारिश और आकाशीय बिजली से कुछ लोगों की मौत और कईयों के घायल होने की खबर है। देशभर के अनेक इलाकों में नदियां और जलाशय उफान पर आ गए हैं और मौसम विभाग द्वारा 4 सितम्बर तक देश के कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए कई राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।


इस साल मानसून की शुरूआत से ही देश के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश, बाढ़, बादल फटने, बिजली गिरने और भू-स्खलन से तबाही का सिलसिला अनवरत जारी है। पहाड़ों पर आसमानी आफत टूट रही है तो देश के कई इलाके बाढ़ के कहर से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। कमोवेश हर साल मानसून के दौरान विभिन्न राज्यों में अब इसी प्रकार का नजारा देखा जाने लगा है। अब इसे मानसून की दगाबाजी कहें या पर्यावरण असंतुलन का दुष्परिणाम कि मानूसन से होती तबाही की तीव्रता साल दर साल बढ़ रही है। मानसून का मिजाज इस कदर बदल रहा है कि जहां मानसून के दौरान महीने के अधिकांश दिन अब सूखे निकल जाते हैं, वहीं कुछेक दिनों में ही इतनी बारिश हो जाती है कि लोगों की मुसीबतें कई गुना बढ़ जाती हैं। दरअसल वर्षा के पैटर्न में अब ऐसा बदलाव नजर आने लगा है कि बहुत कम समय में ही बहुत ज्यादा पानी बरस रहा है, जो प्रायः भारी तबाही का कारण बनता है।


हाल ही में पॉट्सडैम इंस्टीच्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के एक अध्ययन में बताया गया है कि भारतीय मानसून की चाल को जलवायु परिवर्तन और ज्यादा गड़बड़ बना रहा है। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार भारत के कई हिस्सों में अत्यधिक बारिश ने जो तबाही मचा रखी है, वह वैश्विक तापमान वृद्धि का दुष्परिणाम है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के मौसम के जिस पैटर्न को कभी सबसे स्थिर माना जाता था, उसमें एक बड़ा परिवर्तन स्पष्ट देखा जा रहा है। जलवायु परिवर्तन से मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं और मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के तापमान में प्रत्येक डिग्री सेल्सियस वृद्धि से मानसूनी वर्षा में करीब पांच फीसदी बढ़ोतरी हो रही है। बादल फटने और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में होती बढ़ोतरी को भी जलवायु परिवर्तन से ही जोड़कर देखा जा रहा है।


एक समय था, जब गांव हो या शहर, हर कहीं बड़े-बड़े तालाब और गहरे-गहरे कुएं होते थे और पानी अपने आप धीरे-धीरे इनमें समा जाता था, जिससे भूजल स्तर भी बढ़ता था लेकिन अब विकास की अंधी दौड़ में तालाबों की जगह ऊंची-ऊंची इमारतों ने ले ली है, शहर कंक्रीट के जंगल बन गए हैं, अधिकांश जगहों पर कुओं को मिट्टी डालकर भर दिया गया है। ‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ पुस्तक के मुताबिक हमारी फितरत कुछ ऐसी हो गई है कि हम मानसून का भरपूर आनंद तो लेना चाहते हैं किन्तु इस मौसम में किसी भी छोटी-बड़ी आपदा के उत्पन्न होने की प्रबल आशंकाओं के बावजूद उससे निपटने की तैयारियां ही नहीं करते। इसीलिए बदइंतजामी और साथ ही प्रकृति के बदले मिजाज के कारण अब प्रतिवर्ष प्रचण्ड गर्मी के बाद बारिश रूपी राहत को देशभर में आफत में बदलते देर नहीं लगती और तब मानसून को लेकर हमारा सारा उत्साह छू-मंतर हो जाता है।


मानसून प्रकृति प्रदत्त ऐसा खुशनुमा मौसम है, भीषण गर्मी झेलने के बाद जिसकी बूंदों का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। यह ऐसा मौसम है, जब प्रकृति हमें भरपूर पानी देती है किन्तु पानी की कमी से बूरी तरह जूझते रहने के बावजूद हम इस पानी सहेजने के कोई कारगर इंतजाम नहीं करते और बारिश का पानी व्यर्थ बहकर समुद्रों में समा जाता है। हालांकि ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ का शोर तो सालभर बहुत सुनते हैं लेकिन ऐसी योजनाएं सिरे कम ही चढ़ती हैं। इन्हीं नाकारा व्यवस्थाओं के चलते चंद घंटों की बारिश में ही दिल्ली, मुम्बई, हैदराबाद, बेंगलुरू जैसे बड़े-बड़े शहरों में भी प्रायः जल-प्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। हल्की सी बारिश क्या हुई, सड़कों पर पानी भर जाता है, गाडि़यां रेंग-रेंगकर चलने लगती हैं, रेल तथा विमान सेवाएं प्रभावित होती हैं, सड़कें धंस जाती हैं, जगह-जगह जलभराव होने से पैदल चलने वालों का बुरा हाल हो जाता है। यह कोई इसी साल की बात नहीं है बल्कि हर साल यही नजारा सामने आता है लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा ऐसे पुख्ता इंतजाम कभी नहीं किए जाते, जिससे बारिश के पानी का संचयन किया जा सके और ऐसी समस्याओं से निजात मिले।


हमारी व्यवस्था का काला सच यही है कि न कहीं कोई जवाबदेह नजर आता है और न ही कहीं कोई जवाबदेही तय करने वाला तंत्र दिखता है। हर प्राकृतिक आपदा के समक्ष उससे बचाव की हमारी समस्त व्यवस्था ताश के पत्तों की भांति ढ़ह जाती है। ऐसी आपदाओं से बचाव तो दूर की कौड़ी है, हम तो मानसून में सामान्य वर्षा होने पर भी बारिश के पानी की निकासी के मामले में साल दर साल फेल साबित हो रहे हैं। देशभर के लगभग तमाम राज्यों में प्रशासन के पास पर्याप्त बजट के बावजूद प्रतिवर्ष छोटे-बड़े नालों की सफाई का काम मानसून से पहले अधूरा रह जाता है, जिसके चलते ऐसे हालात उत्पन्न होते हैं। अनेक बार ऐसे तथ्य सामने आ चुके हैं, जिनसे पता चलता रहा है कि मानूसन की शुरूआत से पहले ही करोड़ों रुपये का घपला करते हुए केवल कागजों में ही नालों की सफाई का काम पूरा कर दिया जाता है। कई जगहों पर मानसून से पहले नालों की सफाई की भी जाती है तो उस दौरान सैंकड़ों मीट्रिक टन सिल्ट निकालकर उसे नाले के करीब ही छोड़ दिया जाता है, जो तेज बारिश के दौरान दोबारा बहकर नाले में चली जाती है और थोड़ी सी बारिश में ही ये नाले उफनते लगते हैं।


बारिश के कारण बाढ़, भू-स्खलन जैसी आपदाओं को लेकर हम जी भरकर प्रकृति को तो कोसते हैं किन्तु यह समझने का प्रयास नहीं करते कि मानसून की जो बारिश हमारे लिए प्रकृति का वरदान होनी चाहिए, वही बारिश अब हर साल बड़ी आपदा के रूप में तबाही बनकर क्यों सामने आती है? अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति के लिए जलवायु परिवर्तन के अलावा विकास की विभिन्न परियोजनाओं के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई, नदियों में होता अवैध खनन इत्यादि भी प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं, जिससे मानसून प्रभावित होने के साथ-साथ भू-क्षरण और नदियों द्वारा कटाव की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते तबाही के मामले बढ़ने लगे हैं।


-योगेश कुमार गोयल-








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देश में सितम्बर में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है : आईएमडी

नई दिल्ली :  भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का कहना है कि अगस्त माह के दौरान सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी लेकिन देश में सितम्बर में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बुधवार को बताया कि सितम्बर में मध्य भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। मानसून की कमी अब नौ प्रतिशत रह गई है और सितम्बर के दौरान अच्छी वर्षा होने से इसमें और कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि अगस्त से पहले, जून में भी सात प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। आईएमडी ने महीने के लिए अपने पूर्वानुमान में कहा कि देश में अगस्त में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश हुई, लेकिन सितम्बर में बारिश सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। महापात्र ने यह भी कहा कि उत्तर एवं पूर्वोत्तर भारत तथा दक्षिण भारत के दक्षिणी हिस्सों में सामान्य या उससे कम बारिश होने का अनुमान है।




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गर्मी से मिली राहत मगर जलभराव ने बढ़ा दी आफत

गुरुग्राम : साइबर सिटी में चाहे थोड़ी देर की बारिश हो या झमाझम, सड़कों पर तो पानी भरना ही भरना है। मंगलवार की दोपहर लगभग 25 मिनट की तेज बारिश में भी ऐसा ही दृश्य रहा। शहर के विभिन्न स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गईं। इससे भले ही उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली हो लेकिन जलभराव के कारण लोगों को भारी परेशानी हुई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह बड़े ही शर्म की बात है कि मिलेनियम सिटी के नाम से देश ही नहीं दुनिया भर में ख्याति प्राप्त गुरुग्राम का प्रशासन और जिम्मेदार सरकारी विभाग वर्षा जलनिकासी को लेकर पिछले कई सालों से ठोस व्यवस्था नहीं कर पाए हैं। जलनिकासी को लेकर पिछले कई सालों से जिला प्रशासन आश्वासन और दावों के अलावा कुछ भी नहीं कर पा रहा है। इससे लोगों में काफी आक्रोश है।


गुरुग्राम निवासियों का कहना है कि अब तो अगस्त भी समाप्त हो गया है। बारिश का मौसम भी अपने अंतिम पड़ाव पर है। अब तो देखने वाली बात है कि अगली बारिश को लेकर कुछ ठोस प्रबंधन किया जाएगा कि नहीं। दोपहर को बारिश शुरू होने से यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा। दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे पर बारिश के दौरान वाहनों की गति धीमी पड़ गई थी। सरहौल बार्डर के पास थोड़ी देर के लिए जाम जैसा दृश्य दिखा। वहीं, शहर की आंतरिक सड़कों पर भी वाहनों की गति पर असर पड़ा। सड़कों पर पानी भरने से भी वाहन चालकों को परेशान होना पड़ा। सेक्टर-15 निवासी दिनेश पाहूजा का कहना है कि हर बार यही होता है कि मानसून आने के कुछ दिन पहले जिला प्रशासन बैठकें करना शुरू करता है। नालों की सफाई की बात होती है। जलभराव को रोकने के लिए टीमों का गठन होता है मगर जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिखाई देता है। इसी प्रकार न्यू कालोनी निवासी सुजीत कालरा का कहना है कि जिस प्रकार से दिल्ली में बारिश हुई है, ऐसा ही यदि गुरुग्राम में हो जाता तो पूरा शहर तालाब बन जाता। इनका कहना है कि प्रदेश सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों पर सख्ती करनी होगी तभी स्थिति में सुधार होगा।


सेक्टर-नौ ए के दीपक भारद्वाज का कहना है कि बारिश अधिक हो गया कम यदि कहीं सबसे अधिक जलभराव होता है तो वह है सेक्टर-नौ ए का क्षेत्र। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी वहां जलभराव की समस्या को खत्म करने के लिए कुछ भी ठोस उपाय नहीं किया जा रहा है। इनका कहना है कि यह प्रशासनिक बदइंतजामी और जानबूझकर लापरवाही के कारण हो रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी बारिश के कारण सड़क पर पानी भरने से दिक्कत हुई।


बारिश के बाद यहां भरा पानी सेक्टर-सात, सेक्टर-सात एक्सटेंशन, न्यू कालोनी, सेक्टर-40, एमजी रोड, सेक्टर-39, झाड़सा, पटेल नगर, न्यू कालोनी, ओल्ड ज्यूडिशियल कांप्लेक्स, सेक्टर-10, सेक्टर-नौ ए, सेक्टर-चार, सेक्टर-37, सेक्टर-15 पार्ट दो, सेक्टर-नौ सेक्टर-नौ ए, साउथ सिटी, कृष्णा कालोनी, सेक्टर-34, सेक्टर-40, सेक्टर-56, सेक्टर-55, गांव खिलोखरा, कन्हेई, लक्ष्मण विहार, सूरत नगर, पटौदी रोड, अशोक विहार, शीतला कालोनी, शीतला माता रोड, प्रेम पुरी, सेक्टर-चार, सेक्टर-पांच, सेक्टर-14 आइडीसी, दौलताबाद सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में। 





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रविवार से झमाझम बारिश के आसार

भोपाल :  मध्य प्रदेश में एक बार फिर से बारिश का दौर शुरू हो गया है। पिछले 36 घंटे से प्रदेश के कई जिलों में जमकर पानी बरसा है। जिससे तापमान में भी गिरावट महसूस की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात शनिवार को कम दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो गया है। मानसून ट्रफ भी ग्वालियर से होकर गुजर रहा है। इन दिनों दो सिस्टम के असर से मानसून सक्रिय हो गया है, जिसके चलते रविवार से पूरे मध्यप्रदेश में बारिश होने की संभावना है।


वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अजय शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार और रविवार को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। इससे मानसून ट्रफ की लाइन सामान्य स्थिति में आ सकती है, अरब सागर से आ रहीं नम हवाओं में मिलने के बाद राज्य में मानसून दस्तक देगा। अनुमान लगाया है कि राज्य में 30 अगस्त को मानसून एक बार फिर सक्रिय होगा और कई जिलों में भारी बारिश भी होगी। मौसम विज्ञानिकों के अनुसार अगले 24 घंटों में राज्य में लगातार बारिश होने की संभावना है। रीवा, ग्वालियर, चंबल, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, होशंगाबाद, जबलपुर और शहडोल संभागों में गरज-चमक के साथ बरसात हो सकती है। वहीं कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना है, जिसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।


रविवार को जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर, भोपाल, होशंगाबाद, उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर एवं चंबल संभागों के जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बौछारें पडऩे की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में दक्षिणी ओडिशा और उत्तर आंध्रप्रदेश तट के बीच कम दबाव का क्षेत्र बना है। इस सिस्टम के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढऩे की संभावना है। मानसून ट्रफ फिरोजपुर, दिल्ली, ग्वालियर, झारसुगड़ा से कम दबाव के क्षेत्र से तब्दील होकर बंगाल की खाड़ी तक बना हुआ है। इन दो सिस्टमों के असर से रविवार से पूरे मप्र में बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।








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नमी वाले मौसम में बालों की देखभाल कैसे करें

मौसम बदलने के साथ वातावरण में नमी बढ़ जाती है जिससे आपके बाल सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। नमी वाले मौसम के कारण आपके बाल उलझे, तैलीय और गंदे दिखने लगते हैं। इस तरह के मौसम में आपको अपने ब्यूटी केयर रुटीन में कुछ बदलाव करने होते हैं। इसलिए आपको अपने बालों की देखभाल करने के लिए कुछ तरीकों को अपनाना होता है, जिससे नमी वाले मौसम में भी आपके बाल स्वस्थ रहें। बालों को उलझने और टूटने से बचाने के लिए आपको नमी वाले मौसम के दौरान किन टिप्स को अपनाना चाहिए। 


नमी वाले मौसम में बालों की देखभाल करने के लिए टिप्स-


अधिक बार बालों को ना धोएं: अधकि बार धोने से आपके बाल रुखे और बेजान हो सकते हैं और रुखे और बेजान बाल अधिक उलझते हैं। इसलिए बालों को अधिक बार ना धोएं। सप्ताह में दो से तीन बार बालों को शैम्पू करें।


सही शैम्पू का उपयोग: नमी वाले मौसम में बालों को स्वस्थ रखने के लिए आपको अपने शैम्पू पर भी ध्यान देना होता है। इसलिए ऐसा शैम्पू चुनें जिस पर स्मूदनिंग’ या ‘स्ट्रेटनिंग’ शैम्पू लिखा हो। ये शैम्पू आपके बालों को कोमल रखते हैं जिससे बाल अधिक उलझते नहीं है।


मॉइश्चराइज: केवल आपकी त्वचा को ही नहीं बल्कि आपके बालों को भी पर्याप्त मॉइश्चराइज की जरुरत होती है। जब आपके बाल रुखे और डिहाइड्रेटेड रहते हैं तो ये अधिक नमी सोखते हैं। इसलिए अपने बालों को सप्ताह में तीन बार कंडीशन करें और बाल धोने से पहले तेल की मालिश करें।


ठंडे पानी से बाल धोएं: नमी वाले मौसम में बालों को स्वस्थ रखने के लिए आपको ध्यान रखना होगा कि आप अपने बालों को धोने के लिए ठंडे पानी का उपयोग करें। ठंडे पानी से बाल धोने से बालों के पोर्स बंद रहते हैं जिससे मॉइश्चर बालों के अंदर बना रहता है। 


हेयर सीरम का इस्तेमाल: बालों को धोने के बाद गीले बालों पर सीरम लगाना ना भूलें। बालों के सिरों पर सीरम लगाएं। ध्यान रखें कि आप सीरम की उतनी ही मात्रा लें जितनी जरुरी है। ज्यादा सीरम लगाने से बाल अधिक तैलीय हो सकते हैं।




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दिल्ली में भारी बारिश से कई इलाकों में जलभराव, कई अंडरपास यातायात के लिए बंद किए गए

नई दिल्ली : दिल्ली में शनिवार सुबह भारी बारिश होने से मिंटो ब्रिज, मूलचंद अंडरपास और आईटीओ समेत अनेक स्थानों पर जलभराव हो गया। जलभराव की वजह से दिल्ली यातायात पुलिस ने कई अंडरपास बंद कर दिए और यात्रियों को ट्विटर के जरिए इस बारे में सूचित किया।


लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों ने कहा कि उसके कर्मी जलभराव की समस्याओं को प्राथमिकता से सुलझा रहे हैं।


यातायात पुलिस ने कई ट्वीट किए जिनमें कहा, ‘‘मिंटो ब्रिज पर जलभराव के कारण यातायात बंद किया गया है, कृपया यहां जाने से बचें।’’


इसमें आगे कहा गया, ‘‘जलभराव के कारण मूलचंद अंडरपास पर यातायात प्रभावित है। आजाद मार्केट अंडरपास को 1.5 फुट जलभराव के कारण बंद किया गया।’’ भारी बारिश के कारण पुल प्रह्लादपुर अंडरपास, लाजपतनगर, जंगपुरा, आईटीओ, प्रगति मैदान, संगम विहार, रोहतक रोड, मंगोलपुरी, किराड़ी और मालवीय नगर में भी सड़कों पर जलभराव की समस्या हुई।


दक्षिण दिल्ली में महरौली-बदरपुर रोड पर जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ। पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने कहा कि विभाग के कर्मी समस्या को सुलझाने में लगे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सुबह के वक्त बहुत तेज बारिश हुई, इसके कारण कई इलाकों में जलभराव हो गया। हमारे कर्मी इसे ठीक करने में जुटे हैं और हम हालात पर नजर रख रहे हैं।’’






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बदलता मौसम बिगाड़ न दे आपकी सेहत, याद रखें ये खास बातें

मौसम बदलने के साथ बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जाता है। गुनगुनी सर्दी की शुरुआत हो गई है, ऐसे में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को बचाव की जरूरत होती है, लेकिन डॉक्टर्स के मुताबिक, सर्दियों के मौसम में ज्यादा से ज्यादा ऑर्थराइटिस, अस्थमा, हार्ट की प्रॉब्लम और टॉन्सिल्स के मरीजों को ज्यादा बचाव की जरूरत होती है। इस मौसम में ड्राई स्किन, सर्दी जुकाम, शरीर में दर्द और हाइपोथर्मिया जैसे बदलाव भी होने लगते हैं। ऐसे में इससे बचाव जरूरी है, आइए जानते हैं कैसे...


सर्दी-जुकाम:- सर्दियों का मौसम आते ही सर्दी जुकाम की समस्या बढ़ जाती है। जिन लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनके लिए यह सबसे बड़ी समस्या हो जाती है।


ऐसे करें बचाव:- इससे बचने के लिए साफ-सफाई का खास ध्यान रखें। यह एक वायरल इंफेक्शन होता है। इसके लिए बार-बार हाथ को साबुन से धोएं ताकि इंफेक्शन से बचे रहें। साथ ही भाप, नमक के पानी के गरारे फायदेमंद होंगे।


अस्थमा की दिक्कत:- सर्दियों में एलर्जी के तत्व कोहरे की वजह से आसपास ही रहते हैं, हवा में उड़ते नहीं हैं। ऐसे में इनसे अस्थमा के मरीजों और बुजुर्गों की तकलीफ बढ़ जाती है।


ऐसे करें बचाव:- इस मौसम में बुजुर्गों व अस्थमा के मरीज धूल-मिट्टी से बचें। तकलीफ बढ़ने पर डॉक्टर को दिखाएं।


हाइपोथर्मिया:- अगर शरीर का ताप 34-35 डिग्री से नीचे चला जाए तो हाइपोथर्मिया की दिक्कत बढ़ जाती है। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं और बीपी भी कम हो जाता है। अगर शरीर का तापमान कम हो जाए तो मौत भी हो सकती है।


ऐसे करें बचाव:- सुबह की तेज ठंड हवाओं से बचें। गर्म चीजों को खाएं।


टॉन्सिल:- सर्दियों में बच्चों में टॉन्सिल की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। इसमें गले में काफी दर्द होता है। खाना खाने में दिक्कत होती है, तेज बुखार भी आ सकता है।


ऐसे करें बचाव:- इससे बचे रहने के लिए इस मौसम में ठंडी चीजें खाने से बचें। गर्म खाने और गुनगुने पानी का प्रयोग करें।


स्किन ड्राइनेस:- सर्दियां शुरू होते ही शरीर में जो पहला बदलाव होता है, वह है स्किन ड्राइनेस। ठंडक बढ़ने और वातावरण में नमी कम होने से इसकी समस्या बढ़ने लगती है। ड्राई स्किन को मॉइश्चर ना किया जाए तो त्वचा में खुजली और लाल चकते होने लगते हैं। त्वचा रूखी होकर फटने लगती है। कई बार फटी त्वचा से खून भी निकलने लगता है।


ऐसे करें बचाव:- नहाने के बाद मॉइश्चराइजर या नारियल तेल लगाएं। साथ ही होठों पर वैसलीन लगाएं।


यह भी जरूरी... 


पिएं ज्यादा पानी:- सर्दियों में लोग पानी कम और चाय, कॉफी ज्यादा पीते हैं, जिससे उन्हें डिहाइड्रेशन होने लगता है। इससे बचने के लिए सूप या जूस पिएं। सब्जियां जैसे पालक, गाजर, बथुआ, मैथी में प्राकृतिक रूप से पानी होता है, इन्हें भी अपने खाने में शामिल करें।


ओवरइटिंग से बचें:- सर्दियों में अक्सर लोग हैवी डाइट लेने लगते हैं। ओवरइटिंग से पाचनतंत्र गड़बड़ा जाता है। ऐसें में इससे बचें। 



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दिल्ली, हरियाणा और यूपी में झमाझम बारिश; जलभराव के चलते कई रास्‍ते बंद

नई दिल्ली : दिल्ली-एनसीआर में मानसूनी बारिश एक बार फिर से शुरू हो चुकी है। रात से ही राजधानी में बिजली कड़कने के साथ ही झमाझम बारिश हो रही है। हालांकि, बीत दिन भी हल्की से मध्यम बारिश पूरे दिन दर्ज हुई थी। मानसून के दोबारा से सक्रिय होने से दिल्लीवासियों को गर्मी से राहत मिली है। दिल्ली में फिलहाल अगले 24 घंटो के लिए आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। फिलहाल कई इलाकों में बारिश रुक गई है, लेकिन बारिश का यह दौर अगले तीन दिनों तक जारी रहेगा। वहीं यूपी, हरियाणा सहित देश के कई राज्यों में भी लगातार बारिश हो रही है।

भारी बारिश के चलते दिल्ली के कई इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई है। जगह-जगह पानी भर गया है, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं यूपी, हरियाणा, पंजाब सहित देश के कई राज्यों के लिए मौसम विभाग की तरफ से अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में भी लगातार बारिश हो रही है।   

दिल्ली  के सफदरजंग में सुबह 5.30 तक दर्ज हुई 73.2 मिमी बारिश

ताजा रिपोर्ट के बात करें तो दिल्ली  के सफदरजंग में सुबह 2.30 से 5.30 बजे के दौरान 73.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इसकी जानकारी दी है।

बता दें कि मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में पहले ही बताया था कि अगस्त खत्म होते-होते दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश होगी। वहीं पहले ही बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए भी येलो और आरेंज अलर्ट जारी किया गया था। 


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बीते 13 वर्षों में चौथी बार इतनी गर्मी झेल रही दिल्ली, दो दिन बाद बदलेगा मौसम

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में मंगलवार को अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री ज्यादा रहा। दिल्ली के मानक मौसम केंद्र सफदरजंग में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीते 13 वर्षों में यह चौथी बार है, जब दिल्ली के लोग अगस्त महीने में इतनी ज्यादा गर्मी झेल रहे हैं।


दिल्ली के ज्यादातर हिस्सों में मंगलवार सुबह से तेज चमकीला सूरज निकला रहा। दिन चढ़ने के साथ ही धूप तीखी और तेज हो गई। दोपहर के समय तो धूप के चलते बाहर निकलना भी मुश्किल लगा। आम तौर पर अगस्त महीने तक तापमान 35 डिग्री से नीचे रहने लगता है। लेकिन इस बार लंबे समय से बारिश नहीं होने के चलते तापमान असामान्य रूप से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।


सफदरजंग मौसम केंद्र में मंगलवार के दिन अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से चार डिग्री ज्यादा है। वहीं न्यूनतम तापमान 28.1 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से एक डिग्री ज्यादा है। यहां नमी का स्तर 83 से 46 फीसदी तक रहा। गर्मी और इतनी ज्यादा नमी के चलते लोगों को भारी उमस का सामना करना पड़ा। दिन भर लोग पसीना पोंछते नजर आए। मौसम विभाग के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक बीते 13 सालों यानी वर्ष 2009 से 2021 तक में यह चौथी बार है, जब अगस्त के महीने में अधिकतम तापमान 38 डिग्री या उससे ऊपर पहुंचा हो। 


स्पोर्ट्स कांप्लेक्स क्षेत्र में सबसे ज्यादा गर्मी

दिल्ली के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स क्षेत्र के लोगों ने मंगलवार के दिन सबसे ज्यादा गर्मी झेली। यहां का अधिकतम तापमान 39.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पीतमपुरा में 38.7, नजफगढ़ में 38.8 और पालम में 38 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। 


गुरुवार से दिखेगा मौसम में बदलाव

दिल्ली के लोगों को बुधवार के दिन भी खासी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। इस दिन भी अधिकतम तापमान 38 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। वहीं गुरुवार से मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। चक्रवाती हवाओं के चलते दिल्ली की तरफ नमी भरी पूर्वी हवाओं का आगमन शुरू होगा, साथ ही अगले तीन दिन तक हल्की और मध्यम बरसात का दौर रहने की संभावना है। इससे लोगों को उमस और गर्मी से खासी राहत मिलेगी।



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दिल्ली में न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री बढ़ा

नई दिल्ली : दिल्ली में सोमवार को न्यूनतम तापमान 27.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से एक डिग्री अधिक था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी।


आईएमडी के मुताबिक अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है। सुबह साढ़े आठ बजे हवा में नमी का स्तर 63 प्रतिशत दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों ने आसमान पर आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान जताया है।


राष्ट्रीय राजधानी में रविवार का दिन गर्म रहा जब अधिकतम तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक था जबकि न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक सुबह आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 121 दर्ज किया गया।


शून्य से 50 के बीच के एक्यूआई को 'अच्छा', 51 से 100 को 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच 'मध्यम', 201 से 300 को 'खराब', 301 से 400 को 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच को 'गंभीर' माना जाता है।





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आंध्र प्रदेश के पूर्व, पश्चिम गोदावरी जिलों में बिजली गिरने की आशंका

अमरावती :  आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एपीएसडीएमए) के आयुक्त के. कन्नबाबू ने मंगलवार को पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी जिलों में 30 जगहों पर आंधी आने की चेतावनी जारी की है।


कन्नाबाबू ने कहा, पूर्वी गोदावरी में राजामहेंद्रवरम ग्रामीण, कादियम, कोथापेटा, आत्रेयपुरम, रावुलापलेम, अलामुरु, मंडपेटा, कपिलेश्वरपुरम, काजुलुरु, तल्लाचेरुवु, कटेरेनिकोना, आई. पोलावरम, ऐनापल्ली, पमारू और रामचंद्रपुरम में इस घटना की संभावना है।


इसी तरह, पश्चिम गोदावरी जिले के नल्लाजरला, ताडेपेलिगुडेम, कोय्यालागुडेम, देवरपल्ली, चागल्लु, निदादावोलु, पेंटापाडु, तनुकु, अंडरराजवरम, पेरावल्ली, इरगावरम, अत्तिली, पेनुमंत्रा, उन्गुतुरु और आसपास के इलाकों में बिजली गिरने की आशंका है।


कन्नबाबू ने कहा, खेतों में काम करने वाले किसानों, खेत मजदूरों, पशुपालकों और चरवाहों को खुले स्थानों पर रहने से बचना चाहिए और सुरक्षित इमारतों में शरण लेनी चाहिए।


मेट ने मंगलवार को उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और दक्षिण तटीय जिलों में कुछ स्थानों पर बिजली गिरने के साथ गरज के साथ बारिश का अनुमान लगाया है।


बुधवार को भी इन्हीं इलाकों में एक-दो जगहों पर ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है।


मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा, आंध्र प्रदेश राज्य में मुख्य रूप से पश्चिमी और दक्षिण पश्चिमी हवाएं चलती हैं।


मंगलवार को गोदावरी जिलों जैसे भीमावरम, चिन्नामीराम, पेद्दामीराम, विसाकोडेरु, पेन्नाडा और कई अन्य स्थानों पर बादल छाए रहे।


पूर्वी गोदावरी में कुछ स्थानों पर बारिश भी हो रही है, जिससे पिछले कुछ दिनों से गर्मी से काफी राहत मिली है।







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मानसून का मजा लेना है तो जाएं चांदीपुर बीच...

मानसून की ठंडी हवाएं हों और अगर आप इस हवा का मजा लेने किसी स्पेशल जगह जाने का मन बना रहे हैं तो जाएं चांदीपुर बीच। मटमैला आसमान, मंद हवा, टप-टप बारिश की बूंदें और समुद्र का किनारा आपका दिन बनाने के लिए काफी है। यह भारत के सर्वोत्तम समुद्र तटों में से एक है जो ओडिशा के समुद्री तट पर पुरी और कोलकाता के बीच पड़ने वाले बालासोर से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।


यहां खूबसूरत ताड़ के पेड़ तो हैं ही, सफेद बालू के टीले भी हैं, जहां आपको हाइड एंड सीक गेम खेलने में काफी मजा आएगा। चांदीपुर बीच दुनिया के कुछ उन चुनिंदा समुद्री तटों में शामिल है, जो लो टाइड की वजह से हर दिन पांच किलोमीटर पीछे जाता है। दूर-दूर तक फैले समुद्री रेत पर आप टहल सकते हैं, समुद्र की लहरों से खेल सकते हैं और चाहें तो समुद्र से निकलते खूबसूरत सी शेल्स को एकत्र कर सकते हैं। जब यहां समुद्र दोबारा चढ़ता है तो जीप में बैठकर समुद्र के आगे-आगे भागना कभी नहीं भूलने वाला अनुभव है।


क्या देखें....


सिमिलीपल नेशनल पार्क:- यह पार्क बारीपदा से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. चांदीपुर से एक दिन के ट्रिप पर यहां घूमा जा सकता है। यह पार्क बाघों के लिए जाना जाता है। इनके अलावा, चीते, हाथी, सांभर, भौंकने वाले और चित्तीदार हिरन, मगरमच्छ और सरीसृप भी देखे जा सकते हैं।


इस पार्क में चिड़ियों की लगभग 231 प्रजातियां और पेड़-पौधों की लगभग 1076 प्रजातियां हैं, जिसमें ऑर्किड की 94 किस्में हैं। एनएच-6 (जो कोलकाता से आती है) पर स्थित जाशीपुर और एनएच- 5 पर स्थित लुलंग यहां के दो एंट्री प्वाइंट्स हैं। बाच्चुरी चारा यहां का बेहतर स्थान है, जहां से जंगली हाथी देखे जा सकते हैं। हालांकि बाघों की दहाड़ सुनने का सबसे सुंदर स्थान चाहाला की पहाड़ियां हैं।


देवकुंड:- बालासोर से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवकुंड में मनोहारी झरनों की श्रृंखला देखी जा सकती है। यह सिमिलीपल नेशनल पार्क के बाहरी घेरे पर स्थित है।


पंचलिंगेर:- बारीपदा से 85 और बालासोर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है- पंचलिंगेर. यहां शिव का प्राचीन मंदिर है। यहां भगवान शिव के पांच लिंग स्थापित हैं, जो प्रतिदिन प्राकृतिक झरने से धुलते हैं। ये झरनें इन लिंगों के ऊपर से बहते हैं।


यह स्थान वरदांत देवगिरि पहाड़ियों की श्रृंखला के मध्य में स्थित है, जो सघन हरियाली और खूबसूरत वादियों के कारण प्रसिद्ध है। बालासोर से 90 किलोमीटर और चंदनेर से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित तालासरी और चैमुख भी बहुत ही खूबसूरत अनदेखे बीच हैं और वे पर्यटकों की कल्पनाओं को सच करते हैं।


इसके अलावा, आप यहां सती अनुसुइया आश्रम भी जा सकते हैं, जो यहां से 16 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह आश्रम मंदाकिनी नदी के किनारे है। यहां सती अनुसुइया ने सीता माता को सतीत्व के महत्व को बताया था। यहां राम जानकी रघुवीर मंदिर और संकटमोचन हनुमान मंदिर, जो जानकी कुंड के पास स्थित है, के दर्शन कर सकते हैं। यहां प्राकृतिक अजूबे के तौर पर गुप्त और गोदावरी नामक दो गुफाएं हैं जिनमें से एक संकरी और दूसरी विस्तृत बने हुए हैं। माना जाता है कि यहां श्रीराम और लक्ष्मण ने बैठक की थी।


कब जायें:- मानसून यहां के वातावरण का बिल्कुल अलग ही अहसास कराता है। हालांकि यहां आने के लिए बेहतर महीने सितम्बर से मार्च हैं।


कैसे पहुंचें हवाई मार्ग:- यहां का नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर है जो 294 किमी दूर है. यहां से कोलकाता 206 किमी दूर है। चांदीपुर से चालीस किलोमीटर दूर प्रकृति की गोद में खूबसूरत नीलगिरि स्थित है। नीलगिरि हिल्स ट्रैकिंग के लिए बेहतर स्थान है। साथ ही यहां कुलदिहा एलीफेंट सेंचुरी भी देख सकते हैं।


रेल मार्ग:- यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन बालासोर है, जो 16 किमी दूर है. बालासोर, कोलकाता-चेन्नई मुख्यलाइन पर स्थित है। यह सभी बड़े शहरों से जुड़ा है. यहां से आप टैक्सी या ऑटो किराये पर लेकर चांदीपुर पहुंच सकते हैं।


सड़क मार्ग:- एनएच-5 पर स्थित चांदीपुर बालासोर से 16 किमी दूर है. बालासोर से भुवनेर 214 किमी और बालासोर से कोलकाता 298 किमी की दूरी पर है।





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अगस्त सितंबर में बारिश के सामान्य से अधिक होने की संभावना है: आईएमडी

नई दिल्ली : भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को कहा कि अगस्त-सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है जो चार महीने के मासूनस का दूसरा उत्तरार्द्ध है।


आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने अगस्त के लिए जारी अनुमान में बताया कि इस महीने में भी मानसून के सामान्य रहने की संभावना है।


उन्होंने कहा कि उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में मानूस की बरसात सामान्य से कम रहने की संभावना है।






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बारिश में सब्जियों के गलने-सड़ने की टेंशन खत्म, इन 7 तरीकों से 15 दिन तक रखें फ्रेश

बारिश का मौसम आते ही सबसे ज्यादा टेंशन सब्जियों के खराब होने की होती है। इस समय कई सब्जियों में कीड़े निकलते हैं, तो पत्तेदार सब्जियां सड़ गल जाती हैं। कितनी भी कोशिश करें 2 या 3 दिन से ज्यादा सब्जियों को फ्रेश नहीं रखा जा सकता है। लेकिन आज हम आपको ऐसे 7 तरीके बताने जा रहे हैं, जिसके जरिए आप बारिश के मौसम में सब्जियों को कम से कम 15 दिन के लिए फ्रेश रख सकते हैं। बस आपको इन टिप्स को फॉलो करना होगा...


ठंडे पानी में स्टोर करें

गाजर, सेलेरी, सलाद पत्ता और आलू जैसी सब्जियों को जार या ठंडे पानी से भरे कंटेनर में रखा जा सकता है। लेकिन, याद रहें कि सब्जियों की ताजगी बनाए रखने के लिए आप हर दो दिन में पानी बदलते रहें।


विनेगर का प्रयोग करें

बारिश के दिनों में सब्जियों में बहुत सारे बैक्टीरिया और कीड़े निकलते हैं। ऐसे में एक बड़े बर्तन में पानी और थोड़ा सिरका या विनेगर डालें। अब इसमें किसी भी तरह की बेरी, सेब, हरा प्याज, शिमला मिर्च, टमाटर या नाशपाती जैसी सब्जियों को 5 मिनट के लिए डुबाकर रखें। फिर ताजे पानी से धो लें। इस तरह आप इसे लंबे समय तक ताजा रख सकते हैं।


पेपर टॉवल में लपेटें

पेपर टॉवल का उपयोग सब्जियों को फ्रेश रखने के लिए भी बहुत यूजफुल होता है। यह हैक हरी पत्तेदार सब्जी जैसे- पालक, मेथी या अन्य पत्तेदार सब्जियों के लिए सबसे अच्छा काम करता है। बारिश के मौसम में पत्तेदार सब्जियां सबसे जल्दी खराब होती है, इसलिए, इसे पेपर टॉवल में लपेटने से अतिरिक्त नमी को रोकने में मदद मिलती है।


फ्रीजर में करें स्टोर

यदि आपके पास कोई बचे हुए फल या सब्ज़ियां हैं जिन्हें आप लंबे समय तक स्टोर करना चाहते है, तो उन्हें एक एयर टाइट कंटेनर में रखकर डीप फ्रीजर में स्टोर कर सकते हैं। इस तरह, वे सड़ेंगे नहीं और आप उन्हें बाद में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे कि आप आम, लीची या अन्य फलो का पल्प निकालकर इसे फ्रीज कर सकते हैं। इसके अलावा गोभी-गाजर, बींस जैसी सब्जियों का काटकर फ्रीज किया जा सकता है।


जड़ को काटें

कुछ जड़ वाली सब्जियां जैसे शलजम, शतावरी, हरी प्याज जल्दी खराब हो सकती हैं। इन्हें लंबे समय तक बनाए रखने के लिए इनकी जड़ों को काटकर पानी में स्टोर कर लें।


गीले कपड़े में लपेटें

खीरा, शिमला मिर्च, सहजन, बैगन जैसी सब्जियों को ज्यादा दिनों तक ताजा रखने के लिए उन्हें सूती के गीले कपड़े में लपेटकर रखें। इससे सूख जाने पर बीच-बीच में इसपर पानी का छिड़काव करें।


छेद वाले डिब्बे का यूज

धनिया, पुदीना और हरी मिर्च को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए किसी छेद वाले डिब्बे में टिशू पेपर में अच्छी तरह लपेटकर रखें। इससे ये लंबे समय तक ताजा रहती है। याद रहें कि इन सब्जियों को स्टोर करने से पहले इन्हें अच्छे से साफ कर लें।




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दिल्ली एनसीआर में सुबह-सुबह तेज बारिश, इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, जानें

नई दिल्ली :  कई राज्यों में पिछले 24 घंटे से झमाझम बारिश हो रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज सुबह हुई बारिश से एक बार फिर मौसम बदल गया है। राजधानी के कई इलाकों में बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव देखने को मिल रहा है। रविवार होने की वजह से ट्रैफिक जाम की आशंका कम है। उधर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में मौसम विभाग ने आज यानी 01 अगस्त को बारिश की संभावना जताई है। वहीं मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में आज यानि रविवार को भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। देश के पूर्वी हिस्से में मानसून के आगे बढ़ने के साथ पश्चिम बंगाल के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इससे पश्चिम की ओर झारखंड और बिहार की तरफ बढ़ने के आसार हैं। इससे इन राज्यों में रविवार को भारी बारिश होगी।

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में अगले चार दिनों में तेज बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है और अगले तीन दिनों में यहां भारी बारिश होगी। एक से दो अगस्त के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वर्षा के साथ छिटपुट जगहों पर बहुत तेज बारिश हो सकती है। आईएमडी ने कहा कि एक अगस्त को जम्मू-कश्मीर, एक अगस्त को पंजाब में, दो अगस्त तक हिमाचल प्रदेश और चार अगस्त तक उत्तराखंड और हरियाणा में भारी बारिश होगी। आइए जानते हैं आज देश के किन हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। 

दिल्ली-एनसीआर सहित यूपी, हरियाणा, राजस्थान के इन क्षेत्रों में तेज बारिश

देश के कई हिस्सों में आज सुबह से तेज बारिश हो रही है। दिल्ली, एनसीआर (बहादुरगढ़, गुरुग्राम, मानेसर, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, लोनी देहात, हिंडन एएफ स्टेशन, गाजियाबाद, इंदिरापुरम, छपरौला, नोएडा, दादरी) के आसपास के क्षेत्रों में गरज चमक के साथ भारी बारिश हो रही है। इसके अलवा हरियाणा के पानीपत, करनाल, गोहाना, गन्नौर, सोनीपत, रोहतक, चरखी दादरी, मट्टनहेल, झज्जर, कोसली, फरुखनगर, बावल, रेवाड़ी, नूंह, सोहाना, होडल, औरंगाबाद, पलवल व यूपी के मुजफ्फरनगर, शामली, बड़ौत, बागपत, बिजनौर, हस्तिनापुर, खतौली, सकोटी टांडा, मेरठ, मोदीनगर, रामपुर, मुरादाबाद, बिल्लारी, संभल, अमरोहा, गढ़मुक्तेश्वर, सियाना, हापुड़, पिलाखुआ, बहाजोई, अनूपशहर, जहांगीराबाद, शिकारपुर, बुलंदशहर, गुलाटी, खुर्जा, बरसाना, नंदगांव व राजस्थान के कोटपुतली, खैरथल, तिजारा (डीग, अलवर) में बारिश जारी है।


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हिमाचल में बारिश के अचानक आई बाढ़ में चार लोगों की मौत की आशंका, नौ लापता

शिमला : हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ में कम से कम चार लोगों की मौत होने की आशंका है और नौ लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। आपदा प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।


राज्य आपदा प्रबंधन निदेशक सुदेश कुमार मोख्ता ने बताया कि कुल्लू जिले में दो और चम्बा में एक व्यक्ति की मौत होने की आशंका है। लाहौल-स्पीति में एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ लापता हैं।


उन्होंने कहा कि कुल्लू में मणिकरण के पास पार्वती नदी की सहायक नदी ब्रह्मगंगा में अचानक जलस्तर बढ़ने के कारण 25 साल की पूनम और उसका चार वर्षीय बेटा निकुंज बुधवार सुबह लगभग सवा छह बजे उसमें बह गए।


मोख्ता ने बताया कि लाहौल के उदयपुर में मंगलवार रात करीब आठ बजे बादल फटने के कारण अचानक आई बाढ़ में मजदूरों के दो तम्बू और एक निजी जेसीबी मशीन बह गई। इसके कारण एक श्रमिक की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। घायल श्रमिक की पहचान जम्मू-कश्मीर निवासी 19 वर्षीय श्रमिक मोहम्मद अल्ताफ के रूप में की गई है।


उन्होंने बताया कि कम से कम नौ श्रमिक अब भी लापता हैं। अधिकारी ने बताया कि राज्य पुलिस और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के दलों को लापता लोगों की तलाश के लिए भेजा गया, लेकिन पानी के तेज बहाव ने मंगलवार रात तलाश अभियान को बाधित किया। उन्होंने बताया कि तलाश अभियान बुधवार सुबह फिर से शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि चम्बा में भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ में चाणेड तहसील में जेसीबी मशीन का एक सहायक बह गया।


मोख्ता ने बताया कि लाहौल-स्पीति के विभिन्न हिस्सों में कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण कई सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं और लगभग 60 वाहन फंस गए हैं। भूस्खलन के कारण राज्य के कई अन्य हिस्सों में कई सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। उन्होंने बताया कि शिमला शहर के विकास नगर में भूस्खलन में एक कार क्षतिग्रस्त हो गई।


इस बीच, राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश जारी है और शिमला मौसम विज्ञान केंद्र ने रेड अलर्ट जारी किया है।


मोख्ता ने बताया कि इससे पहले मंगलवार को भारी बारिश के कारण भागा नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद लाहौल-स्पीति के दारचा गांव से कई लोगों को बाहर निकाला गया था। दारचा पुलिस जांच चौकी के मुताबिक, भारी बारिश से नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया, जिसके कारण नदी किनारे की तीन दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं।


मोख्ता ने बताया कि निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।







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महाराष्ट्र बारिश : दलाई लामा ने लोगों की मौत पर जताया दुख

धर्मशाला : तिब्बत के आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर बारिश से संबंधित घटनाओं में लोगों के मारे जाने पर दुख जताया और राहत एवं बचाव प्रयासों में दान भी दिया।


महाराष्ट्र के पुणे और कोंकण क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और कुछ इलाकों में भूस्खलनों में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर शनिवार को 112 हो गयी। इनमें से 52 लोगों की मौत अकेले तटीय रायगढ़ जिले में हुई।


एक बयान में कहा गया है कि महाराष्ट्र में बाढ़ के कारण जान-माल के नुकसान और कई लोगों को हो रही दिक्कतों की खबरों पर दलाई लामा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति संवेदनाएं जतायी।


बयान में दलाई लामा के हवाले से कहा गया, ''मैं समझता हूं कि राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकारी मानसून की भीषण बारिश से प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। महाराष्ट्र के लोगों के प्रति एकजुटता जताते हुए मैंने दलाई लामा ट्रस्ट से राहत एवं बचाव प्रयासों में दान देने को कहा है।







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महाराष्ट्र में बारिश का कहर, 129 लोगों की मौत, कई लोगों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका

 मुंबई : महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलधार बारिश राज्य के लोगों पर कहर बनकर टूटी है। इसके चलते पिछले दो दिनों में 129 लोगों को जान गंवानी पड़ी है। 24 घंटों में रायगढ़, रत्नागिरी एवं सतारा में हुई इन घटनाओं में कई लोग अब भी मलबे में दबे हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ के अलावा नौसेना ने भी मोर्चा संभाल रखा है।

महाबलेश्वर में तीन दिनों में रिकार्ड की गई 1500 मिमी. बारिश

महाराष्ट्र के समुद्रतटीय कोंकण, रायगढ़ एवं पश्चिम महाराष्ट्र में पिछले तीन दिनों से मूसलधार बारिश हो रही है। इसी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध पर्यटनस्थल महाबलेश्वर में पिछले तीन दिनों में 1500 मिमी. बारिश रिकार्ड की गई है। भारी बरसात के कारण रत्नागिरी जिले के चिपलूण शहर बड़ा हिस्सा गुरुवार को जलमग्न हुआ दिखा दे रहा था। शुक्रवार को चिपलूण में जलस्तर कम होने के बाद वहां हुए नुकसान की भयावहता दिखाई दी। कई इलाकों में पहाड़ों पर भूस्खलन होने से सौ से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

चिपलूण के कोरोना सेंटर में आक्सीजन न मिलने से आठ मरीजों की गई जान

रायगढ़ के तलई गांव में 38 एवं पोलादपुर में 11 लोगों की भूस्खलन से मृत्यु की खबर है। सतारा जिले के मिरगांव में भूस्खलन से 12 लोगों मारे जाने एवं आंबेघर में एक दर्जन से ज्यादा लोगों के दबे होने की सूचना है। रत्नागिरी के खेड तालुका स्थित धामणंद बौद्धवाड़ी में भी भूस्खलन से 17 लोग मारे गए हैं। इन सभी स्थानों पर बचाव कार्य जारी है। मरनेवालों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। गुरुवार को बाढ़ में डूबे रहे चिपलूण शहर के एक कोरोना सेंटर में आक्सीजन न मिलने से भी आठ लोगों की जान जाने की खबर है। मुंबई के गोवंडी क्षेत्र में एक दोमंजिला घर गिर जाने से चार लोग मारे गए और सात घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।



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बिहार में रेड अलर्ट, तो ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत यहां होगी बारिश

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में इस वक्त भारी बारिश के चलते समस्या पैदा हो गई है। घरों में पानी घुस गया है। महाराष्ट्र के 6 ज्यादा जिलों में बारिश के चलते तबाही मच गई है। वहीं दिल्ली समेत उत्तर भारत में बीते कई दिनों से हुई बारिश के चलते मौसम सामान्य बना हुआ है। मौसम पूर्वानुमान जारी करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने अगले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। विशेषतौर पर बिहार के कई जिलों में 26 से 29 जुलाई तक रेड अलर्ट जारी किया गया है। इसी के साथ, आज मध्य महाराष्ट्र के आसपास के हिस्सों, विदर्भ, मराठवाड़ा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के आसार हैं।

बंगाल की खाड़ी पर लगातार दो निम्न दबाव के क्षेत्र

स्काईमेट का कहना है कि बंगाल की खाड़ी पर लगातार दो निम्न दबाव के क्षेत्र बन रहे हैं। पहला 23 जुलाई और दूसरा 26 जुलाई के आसपास। इससे नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र और बिहार के उत्तरी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। 27 जुलाई को बारिश अपने पीक पर होगी और तेज बारिश का यह सिलसिला 29 जुलाई तक बना रह सकता है। 29 जुलाई के बाद बारिश धीमी तो होगी, लेकिन कुछ-कुछ अंतराल पर बारिश जारी रहने से बाढ़ का पानी जल्द कम होता नहीं दिख रहा।

यूपी- उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, केरल, हिमाचल प्रदेश में आज बारिश के आसार

उत्तर प्रदेश, दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, केरल, हिमाचल प्रदेश, असम में आज मध्यम स्तर की बारिश होने का अनुमान है। कुछ जगहों पर कुछ देर के लिए तेज बारिश भी हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) ने भी अगले दो से तीन दिन देश के पूर्वी एवं मध्य हिस्से में भारी बारिश का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने कुछ हिस्सों के लिए अलर्ट भी जारी किया है।




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भ्रष्टाचार व कुप्रबंधन के चलते बारिश में डूबता 'न्यू इंडिया '

भीषण गर्मी से त्राहिमाम कर रहे पश्चिमी उत्तर भारत लोगों  ने मानसून की आमद से निश्चित रूप से काफ़ी राहत महसूस की है। परन्तु मानसून की अभी आमद ही हुई है कि ख़ास तौर पर शहरी क्षेत्रों में जलभराव के दृश्य सामने आने लगे हैं। जिन लोगों का कारोबार लॉक डाउन के भयावह दौर से बाहर निकलने की बमुश्किल कोशिश कर रहा था, अनेकानेक शहरों व बस्तियों यहाँ तक कि नये बसाये गये कथित 'हाई फ़ाई ' सेक्टर्स में भी सड़कों से लेकर घरों तक में पानी भर जाने के चलते एक बार फिर लगभग ठप्प हो गया है। कहीं दुकानों में पानी भरा है तो कहीं जलभराव की वजह से ग्राहक नदारद। कहीं ग्राहक व दुकानदार दोनों ही अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे। कहना ग़लत नहीं होगा कि जितना अधिक विकास कार्य जितना सड़कों पुलों,नालों नालियों आदि का नवनिर्माण व सुधारीकरण का काम दिखाई देता है उतना ही अधिक जलभराव भी बढ़ता जाता है। जनता की तकलीफ़ें भी उतनी ही अधिक बढ़ती जा रही हैं। सरकार की अनेक योजनायें तो साफ़ तौर पर ऐसी दिखाई देती हैं जिन्हें देखकर यही यक़ीन होता है कि इस तरह की योजनायें केवल कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का ही परिणाम हैं। और कुप्रबंधन व भ्रष्टाचार में डूबी ऐसी योनाओं का पूरा नुक़सान निश्चित रूप से केवल जनता को ही भुगतना पड़ता है।


मिसाल के तौर पर टूटी गलियों व सड़कों के निर्माण या उसकी मुरम्मत के नाम पर हर बार गलियों व सड़कों को ऊँचा किया जाता है।  इसका कारण यह है कि पुरानी सड़कों व गलियों  की लंबाई व चौड़ाई तो आम तौर पर बढ़ नहीं सकती और वह पहले जितनी ही रहती है। लिहाज़ा सड़क व गली की मोटाई अर्थात ऊंचाई के नाम पर ही भ्रष्टाचार का सारा खेल व्यवस्था की मिलीभगत से खेला जाता है। यदि सरकार चाहे तो सख़्ती से यह आदेश जारी कर सकती है और स्थाई तौर से यह नियम बना सकती है कि गलियों व सड़कों की मुरम्मत पुरानी गलियों के ऊपरी स्तर को खोद कर की जाये गलियों /सड़कों के पुराने ऊंचाई के स्तर को बरक़रार रखा जाये कई जगह जागरूक नागरिकों ने इकट्ठे होकर अपने मुहल्लों में पुराने स्तर पर ही निर्माण कराया भी है । उन्होंने अपने मुहल्लों की गलियां  ऊँची नहीं होने दीं। परन्तु जो जनता मूक दर्शक बनकर अपने ही घरों के सामने की सड़कों को ऊँचा होते देखती रही आज उनके घरों में मामूली सी बारिश का पानी भी घुस जाता है। जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं उन्होंने तो अपने मकानों को ऊँचा करवा लिया है या तोड़ कर नया ऊँचा मकान बना लिया है और जो बेचारे दो वक़्त की रोटी के लिए जूझ रहे हैं वे हर बारिश में अपनी घरों व अपने घरों के सामने की नालियों गलियों यहां तक कि सीवरेज लाइन के गंदे व दुर्गन्धपूर्ण पानी में डूबा हुआ पाते हैं। घरेलू सामानों की बारिश व जलभराव से क्षति होती है वह अलग,साथ ही बीमारी फैलने की भी पूरी संभावना तो रहती ही है।


इसी तरह तमाम शहरों के मुख्य नाले भी ज़रा सी बारिश में  जल-प्लावन करने लगते हैं। यहाँ तक कि बारिश रुक जाने के बाद भी घंटों तक और थोड़ी अधिक बारिश होने पर तो एक दो दिनों तक लबालब भरे रहते हैं और पानी आगे बढ़ने के बजाये ठहरा रहता है। कई जगह नव निर्मित नाले  टूट फूट जाते हैं उनमें दरारें पड़ जाती हैं। कभी कोई बैंक डूबा रहता है तो कभी सरकारी या निजी कार्यालय। गोया ज़रा सी  बारिश जनता में हाहाकार पैदा कर देती है। ज़ाहिर है इस दुर्व्यवस्था के लिये जनता का तो कोई दोष नहीं? हाँ जनता का दोष इतना ज़रूर है कि शहरों की नालियों व नालों में जिसतरह ग़ैर ज़िम्मेदार लोग प्लास्टिक की बोतलें,पॉलीथिन की थैलियां, यहाँ तक कि मरे हुए जानवर तक फेंक दिया करते हैं उसके चलते भी नालों व  व नालियों का प्रवाह बाधित हो जाता है। तमाम लोगों ने अपने अपने घरों में गाय भैंसें पाल रखी हैं। रिहाइशी इलाक़ों में तमान डेयरियां चलाई जा रही हैं। ऐसे अनेक डेयरी संचालक अपने जानवरों का मल सीधे नालियों में बहाते हैं। जिसकी वजह से पानी की काफ़ी बर्बादी तो होती ही है साथ ही नालियों में गोबर जम जाने से नाली नाले भी अवरुद्ध हो जाते हैं। और बारिश के मौसम में जनता की यही लापरवाहियां स्वयं जनता की परेशानियों का ही सबब बनती हैं।


इस तरह के जल भराव से बचने के लिये निश्चित रूप से जहां जनता पर यह ज़िम्मेदारी है कि वह नालियों व नालों में कूड़े कबाड़ फेंकने व उसे अवरुद्ध करने सभी हरकतों से बाज़ आये वहीं सरकार व संबंधित विभागों तथा योजनाकारों की भी बड़ी ज़िम्मेदारी है कि वह मुहल्लों,कालोनियों,शहरों व क़स्बों से जल निकासी हेतु ऐसी योजनायें बनाये जिससे लोगों के घरों में और गली मुहल्लों में बरसाती जल जमाव बंद हो। सड़कों व गलियों को ऊँचा करने का जो भ्रष्टाचारी तरीक़ा लगभग पूरे देश में अपनाया जा रहा है वह बिल्कुल बंद होना चाहिए। नालों नालियों तथा वर्षा जल निकासी के सभी स्रोतों के निर्माण में उचित व कारगर योजनायें बनानी चाहियें जिससे जनता के हितों को भी ध्यान में रखा जा सके और निर्माण भी स्तरीय अर्थात भ्रष्टाचार मुक्त हो। गलियों व नालों नालियों को ऊँचा कराने जैसी भ्रष्टाचार से डूबी योजनाओं से बाज़ आना चाहिए। जहां कहीं गलियों व सड़कों को ऊँचा करे बिना जल निकासी संभव ही नहीं ऐसे क्षेत्रों को अपवाद समझकर सामान्यतयः यह नियम बनाना चाहिये कि पुरानी सड़कों व  गलियों को खोद कर ही अपने पिछले स्तर तक ही गलियों व सड़कोंतथा नाली नालों की ऊंचाई निर्धारित  जाये। अन्यथा न्यू इण्डिया का ढोल पीटने से कुछ हासिल नहीं होने वाला। जब तक इस भ्रष्टाचार  डूबी इस व्यवस्था में  सुधार नहीं होता तब तक  भ्रष्टाचार व कुप्रबंधन के चलते थोड़ी सी ही बारिश में हमारा  'न्यू इंडिया ' हमेशा यूँही डूबता रहेगा। 


-निर्मल रानी-









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बारिश के मौसम में क्या लेकर जाए अपने साथ

बारिश के मौसम में यात्रा करने निकलने से पहले अपने बैग में सही सामान व टूल्स रखना बेहद जरूरी है, जिससे आपका सेलफोन और वॉलेट नहीं भीग पाए। अपने साथ जिप लॉक बैग, छाता, मच्छर भगाने वाला और वाटरप्रूफ बैगपैक ले जाएं। वान्डरट्रेल्स (ऑनलाइन प्लेटफॉर्म) के सह-संस्थापक नारायण मेनन के ने बारिश के मौसम में यात्रा के दौरान ले जाई जाने वाली आवश्यक चीजों के बारे में ये जानकारियां दी हैं : 


-अपने पास छाता या रेनकोट रखें। आपके पास वाटरप्रूफ बैग पैक भी जरूर होना चाहिए। 


-हमेशा जिप लॉक बैग साथ रखें। यह वॉलेट और अन्य कीमती वस्तुओं जैसे स्मार्टफोन, कैमरा और लेंस आदि को रखने के लिए उपयोगी साबित होता है और इन्हें भीगने से बचाता है। 


-इस मौसम में जाम नालियों, गंदगी व कीचड़ के कारण मच्छर तेजी से पनपते हैं और मच्छर जनित बीमारियां खूब फैलती हैं, इसलिए अपने पास मच्छर भगाने वाले कॉयल, क्रीम या मच्छरदानी जरूर रखें। 


-अपना पानी ले जाना बेहतर है, अन्यथा सिर्फ उबला हुआ पानी पीएं। भोजन भी हर जगह का नहीं करें। खुले में मिलने वाले भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। 


-अपने बैग में हल्के सिंथेटिक कपड़ों को रखें, जो आसानी से सूख जाते हैं। 


-इस मौसम में फुटवेयर के मामले में फ्लोट और सैंडिंल अच्छा विकल्प हैं। 


ट्रैवल सर्च इंजन इक्जिगो के सीईओ ने इस संबंध में ये सुझाव दिए हैं : 


-बारिश के मौसम में सड़क किनारे बिकने वाले स्नैक्स या खाद्य पदार्थो को खाना हानिकारक हो सकता है। अपने साथ हर्बल टी के सैशे और पैक फूड ले जाएं और जो पानी का बोतल सील नहीं हो, उसका पानी नहीं पीएं। 


-किसी आपात स्थिति के मद्देनजर हमेशा फस्र्ट-एड बॉक्स अपने पास रखें। मानसून में सर्दी-खांसी, जुकाम या बुखार होने की ज्यादा संभावना होती है। 


-अगर किसी नई जगह सैर करने की योजना बनाई है तो यह जरूर पता कर लें कि भारी बारिश होने या किसी अन्य कारण से फंस जाने पर आपको मदद कैसे मिल सकती है। स्थानीय अधिकारियों से आपात स्थिति में संपर्क करने संबंधी जानकारी जरूर जुटा लें। सुरक्षित यात्रा के लिए पहले ही आरक्षण करा लें। 


-बारिश के दिनों में अन्य दिनों की अपेक्षा बिजली जाने की सबसे ज्यादा संभावना होती है, फोन को सक्रिय रखने के लिए अपने साथ पॉवर बैंक नहीं ले जाना भूलें। 


-इस मौसम में अंधेरा जल्द होने की आशंका रहती है, इसलिए अपने पास फ्लैश लाइट या टॉर्च जरूर रखें।


-इलेक्ट्रॉनिक सामानों को सुरक्षित रखने के लिए अपने पास अतिरिक्त प्लास्टिक बैग रखें। ये गीले कपड़ों और खाने-पीने के सामान को रखने में भी इस्तेमाल किए सकते हैं। 





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उत्तर भारत में 18-21 जुलाई तक, पश्चिम तटीय क्षेत्रों में 23 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना : आईएमडी

नई दिल्ली : भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उत्तर भारत में 18-21 जुलाई तक और पश्चिमी तटवर्ती क्षेत्रों में 23 जुलाई तक भारी बारिश का अनुमान जताया है। आईएमडी ने कहा कि अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर बिजली चमकने, बादल गरजने के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। मौसम विभाग ने आगाह किया, ''इससे बाहर रहनेवाले लोग और जानवर हताहत हो सकते हैं।''


आईएमडी ने कहा कि पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र (जम्मू कश्मीर, लद्दाख, गिलगित, बाल्तिस्तान और मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) और इससे सटे उत्तर-पश्चिम भारत-पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में 18 से 21 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। इसके बाद इन्हीं क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधि में कमी आएगी।


उत्तराखंड में 18 और 19 जुलाई को तथा उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में कुछ स्थानों पर 19 जुलाई को अत्यधिक वर्षा का अनुमान है। दिल्ली और चंडीगढ़ में 18 और 19 जुलाई को छिटपुट स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा कि पश्चिमी और दक्षिण भारत में भी भारी बारिश होने की संभावना है। अगले पांच-छह दिनों के दौरान पश्चिमी तट और आसपास के क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है। महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होगी।




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मानसून के लिए दिल्ली का इंतजार खत्म, शहर के कई हिस्सों में हुई बारिश

नई दिल्ली : बहुप्रतिक्षित दक्षिण पश्चिम मानसून आखिरकार मंगलवार सुबह दिल्ली पहुंच गया जिससे लोगों को भीषण गर्मी से थोड़ी राहत मिली। मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि मानसून अपने सामान्य समय से 16 दिन की देरी से दिल्ली पहुंचा है। बीते 19 वर्षों में मानसून के आगमन में यह सबसे अधिक विलंब है। 2002 में मानसून 19 जुलाई को दिल्ली पहुंचा था।


आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक के. जेनामणि ने मंगलवार सुबह दक्षिण दिल्ली के कुछ हिस्सों में बारिश होने के बाद पुष्टि करते हुए कहा ‘‘मानसून दिल्ली पहुंच गया है।’’ आईएमडी ने बताया, ‘‘दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (बहादुरगढ़, गुरुग्राम, फरीदाबाद, लोनी देहात, नोएडा, खेकड़ा), गोहाना, सोनीपत, रोहतक (हरियाणा) में और इससे सटे आस पास के अधिकतर स्थानों पर अगले दो घंटे के दौरान गरज के साथ मध्यम तीव्रता की बारिश होगी और 20-40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।’’


पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव माधवन राजीवन ने ट्वीट किया, ‘‘आखिरकार मानसून दिल्ली पहुंच गया। पिछले दो-तीन दिनों से मानसून की परिस्थितियां बनने के बावजूद भारत मौसम विज्ञान विभाग मानसून आगमन की घोषणा के लिए इंतजार कर रहा था। बीते दो दिन में दिल्ली छोड़कर इसके आस पास हर जगह बारिश हुई।’’


आम तौर पर मानसून 27 जून को दिल्ली पहुंच जाता है। आठ जुलाई तक मानसून पूरे देश में छा जाता है। पिछले साल दिल्ली में मानसून 25 जून को पहुंचा था और देश भर में 29 जून को छा गया था। मौसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट वेदर के महेश पालावत ने बताया कि दिल्ली में मानसून अभी कमजोर रहेगा और अगले तीन दिनों में शहर में हल्की-फुल्की बारिश होगी।


उन्होंने कहा कि हिमालय की तलहटी में बनने वाला मानसून का दबाव क्षेत्र गुजरात और बंगाल की खाड़ी में कम दबाव प्रणाली बनने से अब देश के मध्य भाग की ओर बढ़ गया है। उन्होंने बताया, ‘‘दो-तीन दिनों में कम दबाव प्रणाली के खत्म होने के बाद मानसून का दबाव क्षेत्र फिर उत्तर की ओर बढ़ जाएगा जिससे क्षेत्र में बारिश बढ़ेगी।’’


इस साल दिल्ली में मानसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग को पूर्वानुमान में मुश्किल आई। कई पूर्वानुमानों के बाद आईएमडी ने सोमवार को माना, ‘‘मानसून के अनुमान में गणितीय मॉडल की इस तरह की नाकामी दुर्लभ और असामान्य है।’’ आईएमडी ने इससे पहले कहा था कि मानसून तय तिथि से 12 दिन पहले, 15 जून को दिल्ली पहुंचेगा लेकिन हवाओं की स्थिति से इसका आगमन प्रभावित हुआ।


जून के शुरु में मौसम विभाग ने कहा था कि सात जुलाई तक दिल्ली और उत्तर पश्चिम भारत के अन्य हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी। बाद में इसने कहा कि दिल्ली में मानसून की पहली बारिश 10 जुलाई के आसपास होगी।


मौसम विभाग ने शनिवार को एक बार फिर पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए कहा कि अगले 24 घंटों में मानसून राजधानी में पहुंच सकता है। लेकिन रविवार भी बारिश के इंतजार में बीत गया और सोमवार को भी बारिश न के बराबर हुई।


आईएमडी के क्षेत्रीय केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में मानसून 2012 में सात जुलाई और 2006 में नौ जुलाई को पहुंचा था। उन्होंने बताया, ‘‘2002 में दिल्ली में 19 जुलाई को मानसून की पहली बारिश हुई थी। शहर में 1987 में सबसे अधिक देरी से 26 जुलाई को बारिश हुई थी।’’


मध्य दिल्ली अब देश में बारिश की सबसे अधिक कमी वाला जिला है, जहां अमूमन एक जून से मानसून का मौसम शुरू हो जाता है। लेकिन वर्तमान में यहां सामान्य 132 मिमी के मुकाबले केवल 8.5 मिमी बारिश हुई है जो 94 प्रतिशत कम है।


दिल्ली में अब तक सामान्य से 67 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे यह ‘‘बारिश की बहुत अधिक कमी’’ वाले राज्यों की श्रेणी में आ गया है। आईएमडी ने कहा कि वह देश के बाकी हिस्सों में मानसून की प्रगति पर लगातार नजर रख रहा है।






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दिल्ली में न्यूनतम तापमान रहा 30.6 डिग्री सेल्सियस

नई दिल्ली :  भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में बृहस्पतिवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक 30.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


विभाग के अनुसार, हवा में आर्द्रता का स्तर 40 प्रतिशत दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान के 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने और लू चलने का अनुमान है।


केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, सुबह आठ बजकर पांच मिनट पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 151 रहा।


एक्यूआई को शून्य और 50 के बीच 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच 'मध्यम', 201 और 300 के बीच 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 और 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी में माना जाता है।











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जम्मू में बीती रात आंधी-तूफान से भारी तबाही, रात से बिजली गुल-तापमान में गिरावट

जम्मू : शुक्रवार देर रात को शुरू हुई बारिश ने भले ही लोगों को तपती गर्मी से निजात दिलाई है लेकिन बारिश से पहले आंधी-तूफान से जम्मू में बिजली के ढांचे को नुकसान हुआ है। इसकी वजह से शहर में रात भर बिजली गुल रही।

सुबह भी अधिकतर जगह बिजली बहाल नहीं हो पाई है। हालांकि बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मरममत कार्य में जुट गए हैं लेकिन फिर भी शहर में बिहली को पूरी तरह से बहाल करने में आज दोपहर तक का समय लग सकता है।

बीती रात बारिश होने से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। आंधी और तूफान से शहर में जगह-जगह कई पेड़ उखड़े। गवर्नमेंट गांधीनगर अस्पताल के मुख्य मार्ग पर बिजली के खंभों पर पेड़ गिरने से रास्ता और बिजली दोनों बंद हैं। जीजीम साइंस कॉलेज मार्ग पर भी बिजली के खंभे टूटकर गिर गए हैं। रास्ता यातायात के लिए बंद है।

बीती रात को एक ट्रक भी डिवाइडर पर जा चढ़ा। यातायात को बहाल करने में ट्रैफिक पुलिस कर्मी जुटे हैं। शहर के कान्वेंट स्कूल, तालाब तिल्लो, अखनूर सहित अन्य मार्ग भी पेड़ गिर जाने की वजह से बंद थे जिन्हें अब सुबह होते-होते फिर से बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। 

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दिल्ली-एनसीआर में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, इंतजार करा रहा है मानसून

नई दिल्ली : पिछले कई दिनों से दिल्ली/एनसीआर भयानक गर्मी की चपेट में है। ऐसी गर्मी दिल्लीवासियों ने अबतक नहीं झेली होगी। बता दें कि दिल्ली में गर्मी ने 90 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पिछले तीन दिनों से जबरदस्त लू का प्रकोप झेल रही दिल्ली के मंगेशपुर में तापमान 45.2 डिग्री पर पहुंच गया है। वहीं नजफगढ़ में 44 डिग्री और पीतमपुरा में 44.3 डिग्री रहा। जहां एक ओर लोग मानसून का इंतजार कर रहे थे, वैसे में यह टहलते मानसून ने लोगों को काफी परेशान कर दिया है। बार-बार मानसून के देरी से आने की बात कही जा रही है और इस बीच लोग गर्मी में झुलस रहे हैं। रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह ग्लोबल वार्मिंग का असर है। ऐसी गर्मी के बीच मानसून का इंतजार लोग लंबे समय से कर रहे है लेकिन उसमें भी देरी की संभावना जताई जा रही हैं। मानसून सीजन में इस भयंकर गर्मी ने हाहाकार मचा रखा है। दोपहर ही नहीं, रात और सुबह में भी तेज लू की थपेड़ो ने लोगों को परेशान कर रखा है। यही वजह है कि मौसम विभाग ने दिल्ली में हीट वेव की घोषणा की है। वहीं मानसून में देरी से गर्मी का कहर जारी रहने के आसार हैं। दिल्ली में 29 जून की रात का न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि 30 जून को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 31.7 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। यानी एक दिन में 2 डिग्री से ज्यादा का इजाफा हुआ। मौसम वैज्ञानिक भी बताते हैं कि जब न्यूनतम तापमान 30 डिग्री से ऊपर चला जाए तो रात में भी हालात बेहद गर्म और परेशान करने वाले होते हैं। दिल्ली एनसीआर में दिन में भी पारा पिछले 5 दिनों से लगातार 40 डिग्री के ऊपर बना हुआ है। पिछले दो दिनों के लिए दिल्ली में मौसम विभाग ने हीट वेब का येलो अलर्ट भी जारी किया था। बुरी खबर ये है कि अगले 4-5 दिनों के बाद ही दिल्ली में मानसून की बारिश के दस्तक देने की संभावना है। यह कह सकते हैं कि अभी दिल्लीवासियों को बारिश के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।




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अमेरिका, कनाडा में भीषण गर्मी से सैकड़ों लोगों की मौत

सालेम (अमेरिका) :  भीषण गर्मी का सामना कर रहे अमेरिका और कनाडा में एयर कंडीशनर और पंखे के बिना घरों में कई लोग मृत पाए गए और इनमें से कुछ 97 साल की उम्र तक के बुजुर्ग भी शामिल हैं। मौसम विज्ञानियों ने प्रशांत उत्तर पश्चिमी क्षेत्र और पश्चिमी कनाडा में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चेतावनी दी थी।


इस चेतावनी के मद्देनजर अधिकारियों ने कूलिंग केंद्र बनाए, बेघर लोगों को पानी वितरित किया और कई अन्य कदम उठाए। फिर भी शुक्रवार से मंगलवार तक सैकड़ों लोगों के गर्मी की वजह से मारे जाने की आशंका है। उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के अंदरुनी इलाकों और पश्चिमी कनाड़ा में अब भी भयंकर गर्मी की चेतावनी है।


अमेरिका में ओरेगन राज्य की एक नर्सरी में एक प्रवासी मजदूर का शव पाया गया। ओरेगन के मेडिकल परीक्षक ने बृहस्पतिवार को बताया कि अकेले इस राज्य में मृतकों की संख्या 79 पर पहुंच गयी है और ज्यादातर मौत मुल्टनोमा काउंटी में हुई है।


कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया की मुख्य कोरोनर लीजा लैपोइंते ने बताया कि उनके कार्यालय को शुक्रवार और बुधवार दोपहर के बीच कम से कम 486 लोगों की ‘‘अचानक और अप्रत्याशित मौत’’ होने की रिपोर्टें मिली हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इनमें से कितनी मौत गर्मी की वजह से हुई लेकिन गर्मी की वजह से ही ये मौत होने की आशंका है।


वाशिंगटन राज्य प्राधिकारियों ने गर्मी के कारण 20 से अधिक लोगों के मरने की खबर दी है लेकिन यह संख्या बढ़ सकती है।


ओरेगन की मुल्टनोमा काउंटी में मरने वाले लोगों की आयु 67 से 97 वर्ष के बीच है। काउंटी की स्वास्थ्य अधिकारी जेनिफर वाइन्स ने बृहस्पतिवार को एक साक्षात्कार में कहा कि वह मौसम के पूर्वानुमान के बीच लोगों के जान गंवाने को लेकर चिंतित हैं। ओरेगन में बेंड शहर में दो लोगों के शव एक सड़क पर पाए गए जहां दर्जनों बेघर लोग शिविरों में रहते हैं।


मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि प्रशांत उत्तर पश्चिम क्षेत्र में गर्मी बढ़ने की आशंका है। यह क्षेत्र आमतौर पर ठंडा रहने और बारिश के मौसम के लिए जाना जाता है और यहां बहुत कम गर्मी पड़ती है जिससे ज्यादातर लोगों के पास एयर कंडीशनर नहीं हैं।


अमेरिका के सिएटल, पोर्टलैंड तथा कई अन्य शहरों में गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं और कुछ जगहों पर तो पारा 46 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है।





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दिल्ली में गर्मी से लोग बेहाल, मानसून के लिए अभी करना होगा और इंतजार

नई दिल्ली : दिल्ली में गर्मी से लोग बेहाल है। चिलचिलाती धूप और लू के बीच लोगों का घर निकलना मुश्किल हो गया है। बुधवार को दिल्ली में तापमान 43. 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस साल का सबसे अधिक तापमान है। वहीं बुधवार को न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहा।


गुरुवार को न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि मानसून आने में अभी कम से कम एक सप्ताह का समय और लगेगा। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में सफदरजंग में अधिकतम तापमान सामान्य से 7 डिग्री अधिक दर्ज किया गया। 7 जुलाई तक मानसून के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने का अनुमान जताया गया है।


मॉनसून के आने में हो रही देरी को लेकर आईएमडी क्षेत्रीय पूर्वानुमान केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव ने कहा कि आमतौर पर राजधानी में 20 जून तक लू चलती रहती है। इस बार अधिकतम तापमान में वृद्धि के लिए मानसून के आने में देरी को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कोई बारिश नहीं हुई है और उत्तर-पश्चिम भारत के एक बड़े हिस्से में गर्म हवाएं चल रही है। केरल में 2 दिन की देरी से पहुंचने के बाद मॉनसून सामान्य से 7 से 10 दिन पहले पूर्वी, मध्य और आसपास के उत्तर-पश्चिमी भारत को कवर करते हुए देश में आ गया था।


हालांकि मौसम विभाग ने पहले अनुमान जताया था कि मॉनसून 12 दिन पहले यानी 15 जून तक दिल्ली पहुंच सकता है। आमतौर पर 27 जून को मॉनसून दिल्ली पहुंच जाता है और 8 जुलाई तक पूरे देश में आ जाता है। पिछले साल मॉनसून 25 जून को दिल्ली पहुंच गया था और 29 जून तक पूरे देश में आ गया था।





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दिल्ली में जून के अंत तक भी मानसून के पहुंचने की संभावना कम : आईएमडी

नई दिल्ली : दिल्ली में जून के अंत तक भी मानसून आने की संभावना नहीं है और तब तक शहर में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।


भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि बुधवार को सुबह राष्ट्रीय राजधानी में न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो साल के इस समय के लिए सामान्य है। अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।


आईएमडी ने मंगलवार को बताया कि केरल में दो दिन की देरी से पहुंचने के बाद मानूसन पूर्वी, मध्य और उत्तर पश्चिम भारत में सात से दस दिन पहले ही पहुंच गया। हालांकि दिल्ली, राजस्थान के कुछ हिस्सों, हरियाणा और पंजाब समेत देश के बाकी हिस्सों में मानसून के अगले सात दिनों के दौरान पहुंचने की संभावना नहीं है।


आईएमडी के क्षेत्रीय पूर्वानुमान केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में 26 जून के आसपास हल्की बारिश का अनुमान है लेकिन इस क्षेत्र को मानसून की बारिश के लिए और इंतजार करना होगा। मौसम विभाग ने पहले अनुमान जताया था कि दिल्ली में निर्धारित कार्यक्रम से 12 दिन पहले 15 जून तक मानसूनी हवाएं चल सकती है। सामान्य तौर पर मानसून 27 जून तक दिल्ली पहुंचता है और आठ जुलाई तक पूरे देश में पहुंचता है।


एक निजी पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर ने बताया कि पिछले साल 25 जून को दिल्ली में मानसूनी हवाएं चली थीं और 29 जून तक पूरे देश में पहुंच गई थीं। एजेंसी के अधिकारी महेश पालावत ने बताया कि दिल्ली में जून के अंत के आसपास ही मानूसन की बारिश होने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिमी हवाएं उत्तर पश्चिम भारत के बाकी के हिस्सों में कुछ दिनों के लिए मानूसन को पहुंचने से रोक रही हैं। इनके कम से कम एक हफ्ते तक और रहने की उम्मीद है।’’





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