नॉएडा प्राधिकरण के 26 अफसर दोषी -उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान ने दर्ज कराया मुकदमा

नोएडा जाने आलम (जानू चौधरी)। नोएडा की सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट हाउसिंग सोसायटी में अवैध ट्विन टावर मामले से जुड़ी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण के 26 अफसरों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इनमें से 20 अधिकारी रिटायर व दो की मौत हो चुकी है। केवल चार अधिकारी ही प्राधिकरण में काम कर रहे हैं। अब इस मामले में उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान ने रिपोर्ट दर्ज कराया है।

 जानकारी अनुसार सुपरटेक एमरॉल्ड मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी ने अपनी जांच में 26 अधिकारियों की संलिप्तता पाई है। यूपी के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर संजीव मित्तल की अध्यक्षता वाली एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस मामले में चार सेवारत अधिकारियों में एक को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। शेष तीन को निलंबित करके उन पर विभागीय जांच शुरू हो गई है। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इन सारे 26 अधिकारियों ने यूपी औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम और अपार्टमेंट प्रमोशन आफ कंस्ट्रक्शन ओनरशिप एंड मेनिटनेंस एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। नोएडा प्राधिकरण और सुपरटेक बिल्डर के संलिप्तत में पाए गए अधिकारियों पर न्यायालय में मुकदमा चलाया जाएगा।

एसआईटी ने की इन रिटायर अफसरों के खिलाफ एक्शन की सिफारिश

सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी तत्कालीन सीईओ सरदार मोहिंदर सिंह, पूर्व सीईओ एसके द्विवेदी, तत्कालीन अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी आरपी अरोड़ा, पूर्व अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन बाथम, तत्कालीन विशेष कार्याधिकारी यशपाल सिंह, तत्कालीन आर्किटेक्ट एंड टाउन प्लानर एके मिश्रा,तत्कालीन सीनियर टाउन प्लानर राजपाल कौशिक, तत्कालीन चीफ आर्किटेक्ट त्रिभुवन सिंह, ग्रुप हाउसिंग डिपार्टमेंट के तत्कालीन डीजीएम शैलेंद्र कैरे, तत्कालीन प्लानिंग इंजीनियर बाबू राम, प्लानिंग डिपार्टमेंट के तत्कालीन प्लानिंग असिस्टेंट टीएन पटेल, चीफ आर्किटेक्ट वीए देवपुजारी, पूर्व एसोसिएट आर्किटेक्ट एनके कपूर, पूर्व सहायक वास्तुविद प्रवीण श्रीवास्तव, नोएडा प्राधिकरण के लीगल डिपार्टमेंट में लॉ ऑफिसर ज्ञान चंद्र, लॉ एडवाइजर राजेश कुमार, महाप्रबंधक विपिन गौड़, महाप्रबंधक एमसी त्यागी, फाइनेंस कंट्रोलर एससी सिंह, तत्कालीन सहायक नगर नियोजक ऋतुराज व्यास, तत्कालीन प्लानिंग असिटेंट अनीता, तत्कालीन प्लानिंग असिस्टेंट मुकेश गोयल, नोएडा प्राधिकरण में कार्यरत सहायक नगर नियोजक विमला सिंह समेत सुपरटेक निदेशकों के खिलाफ एक्शन करने की सिफारिश की है। 

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कुम्हारी व माटीकला के कामगार ले सकते हैं 10 लाख तक का ऋण

कुशीनगर : उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में कुम्हारी व माटीकला के कामगारों के जीवन स्तर को स्वालंबी बनाने व ऊंचा अठाने के उद्देश्य से उ0 प्र0 सरकार द्वारा माटीकला बोर्ड का गठन किया गया है ! जिसके तहत इच्छुक कामगार विभिन्न प्रकार के मिट्टी के वर्तन बनाने,मूर्ति बनाने और बेचने हेतु धनराशि 50 हजार से लेकर 10 लाख तक का ऋण राष्ट्रीयकृत बैंकों के माध्यम से ले सकते है। योजना के तहत बैंक से प्राप्त ऋण में लाभार्थी को 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान लगाना होता है तथा ऋण स्वीकृत/वितरण के उपरान्त लाभार्थी के खाते में पूंजीगत मद पर 25 प्रतिशत अनुदान विभाग से देय होता है ! जो तीन वर्ष बाद ऋण खाते में कार्य करते रहने एवं बैंक के देय किस्तो को समय से जमा करते रहने की दशा में समायोजित किया जाता है। 


जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ए0के0 पाल ने बताया कि योजाना के तहत ऋण/स्वरोजगार हेतु माटीकाला के कामगार इच्छुक लाभार्थी अपना आवेदन दिनांक 25.09.2021 तक जिला ग्रामोद्योग अधिकारी कार्यालय ग्राम नरकटिया बुजुर्ग सपहां रोड कसया,नवल एकेडमी के ठीक सामने आवेदन पत्र प्राप्त कर दें, ताकि लाभार्थी चयन की कार्यवाही पुर्ण कर पात्र कामगारों का ऋण आवेदन पत्र ऋण हेतु बैंकों को अग्रसारित किया जा सके। फार्म के साथ फोटो,निवास,जाति,आधार कार्ड व शैक्षिक योग्यता आवशयक है।





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कुशीनगर में बिजली घर में बिजली गिरने 18 हजार विद्युत उपभोक्ताओं के समक्ष बिजली का संकट गहराया

कुशीनगर : उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में पडरौना नगर के कठकुइयां रोड स्थित पडरौना विद्युत उपकेंद्र में लगे दस एमबीए के मुख्य ट्रांसफॉर्मर पर बिजली गिर गई। इस वजह से विद्युत उपकेंद्र से आपूर्ति होने वाले सात फीडरों के करीब 18 हजार उपभोक्ताओं के समक्ष बिजली का संकट गहरा गया है। हालांकि बिजली निगम के अधिकारियों ने लोगों की सहूलियत के लिए लगे दूसरे ट्रांसफॉर्मर से रोटेशन के आधार पर बिजली आपूर्ति की है। उपभोक्ताओं को उमसभरी गर्मी से परेशान होना पड़ रहा है।हालांकि पडरौना नगर के रामकोला रोड स्थित मोहल्ले में दोपहर से ही बिजली नहीं आई। एक्सईएन का कहना है कि अभी मंगलवार की शाम तक बिजली आपूर्ति शुरू हो पाने की संभावना है। कठकुइयां रोड स्थित विद्युत उपकेंद्र में लगे दस-दस एमबीए के दो ट्रांसफॉर्मर से विद्युत केंद्र से जुड़े पडरौना टाउन एक, टाउन दो, जिला उद्योग, परसौनी कला, दुदही, उपकेंद्र कैंपस और पांडेय देवरिया समेत सात फीडरों के करीब 18 हजार उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जाती है।


 रविवार को दिन के करीब तीन बजे विद्युत केंद्र पर लगे दस एमबीए के ट्रांसफॉर्मर पर बिजली गिर गई। इस वजह से शहर के आधे से अधिक उपभोक्ताओं की आपूर्ति गुल हो गई। उमसभरी गर्मी से परेशान लोगों को राहत दिलाने के लिए बिजली निगम ने रोस्टर के हिसाब से दूसरे ट्रांसफॉर्मर से उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई। लेकिन पहले की अपेक्षा लोगों को कम बिजली आपूर्ति मिलने से परेशानी बढ़ गई है। बिजली नहीं होने पर उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए लोग छत पर टहल कर या हाथ का पंखा झलकर गर्मी से राहत पाने की जुगाड़ में लगे रहे। बिजली नहीं होने पर सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और मरीजों को उठानी पड़ रही है। पडरौना नगर में सुबह पांच बजे से दस बजे, दोपहर 12 बजे से तीन बजे और शाम पांच बजे से रात दस बजे तक पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से नगर पालिका की तरफ से बिजली आपूर्ति के समय में भी कटौती की जा रही है, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बिजली कटौती से सबसे अधिक परेशानी नगर के व्यापारियों को उठानी पड़ रही है। शहर के व्यवसायी जेनरेटर चलाकर किसी तरह कार्य निपटाने में लगे रहे। इसके अलावा रामकोला रोड स्थित अंबेडकर नगर मोहल्ले में भी दोपहर से ही बिजली गुल रही, जिससे लोगों को परेशानियों से जूझना पड़ा।


इस संबंध में सुनील चंद्र श्रीवास्तव, एक्सईएन विद्युत ने बताया कि उपकेंद्र पर बिजली गिरने से दस एमबीए का एक ट्रांसफॉर्मर खराब हो गया है। इस कारण उपभोक्ताओं को बिजली समस्याओं से परेशान होना पड़ रहा है। नया ट्रांसफॉर्मर मंगाने के लिए उच्चाधिकारियों से संपर्क स्थापित किया गया है। लोगों की सहूलियत को देखते हुए दूसरे ट्रांसफॉर्मर से रोस्टर बनाकर बिजली आपूर्ति की जा रही है। मंगलवार की शाम तक बिजली आपूर्ति शुरू हो पाने की संभावना है। 







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आजादी के 75 वा वर्षगांठ के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी श्री अनुज सिंह ने ध्वजारोहण कर जनपद वासियों को बधाई दी

आजादी के 75 वा वर्षगांठ के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी श्री अनुज सिंह ने ध्वजारोहण कर जनपद वासियों को बधाई दी◻️◻️◻️


आजादी के इस अवसर पर बोलते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि भारतीय संविधान में महात्मा गांधी द्वारा 41 बान प्रकाशित है जिसका अर्थ है कोई भी कार्य करें तो समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति लाभान्वित हो ऐसा कार्य किया जाये जिससे आमजन प्रभावित हो। हम अपने कार्यों में इसका परिपालन करें। आजादी की इस वर्षगांठ पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को अक्षुण्य बनाए रखने में हम अपना योगदान दें। अंग्रेजों की सरकार में किसान और मजदूर सबसे ज्यादा परेशान था। 15 अगस्त 1947 को उनको सही मायने में आजादी मिली संविधान में सर्जित पद के अनुरूप ही अधिकारी नियुक्त होते हैं। आम जनमानस की सेवा ही सच्ची देश की सेवा है हम अपने कार्य के प्रति ईमानदार रहें। भारतीय इतिहास सबसे पुराना है हमारी संस्कृति शुरू से ही मजबूत रही है कोलो निज्म  भारतीय संस्कृति जाति धर्म से ऊपर है। हम और आप समाज के जागरुक व्यक्ति हैं हमारे समाज के बिखराव को रोकने हेतु ईमानदार लोगों की जरूरत है। हम आज यह प्रण करें कि समाज को कुछ अच्छे कार्य प्रदान करने हैं। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने ग्रामीण युवाओं के लिए अकादमी की स्थापना करने हेतु वहां पर उपस्थित रिटायर्ड कर्नल से सहयोग लेते हुए कहा कि समाज के उत्थान हेतु प्रण ले की जनपद के लोग समृद्ध हो। कोविड-19 से बचाव हेतु जिला अधिकारी ने कहा कि आज आम जनमानस को जागरूक करने की जरूरत है जब तक सभी लोग पूरी तरह टीकाकृत नहीं हो जाते कोविड-19 से सुरक्षा नहीं हो पाएगी। हमें कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए अपने सभी कार्य करने हैं। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी ने सभागार में उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों  को बधाई देते हुए कहा कि हमें भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए मार्गदर्शन में ही कार्य करना है। हम सब मिलजुल कर टीम भाव से कार्य करें। अपर जिला अधिकारी ने भी कहा कि 75 वें स्वतंत्रता दिवस पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के द्वारा जो सपने देखे गए थे हमें उन्हें साकार करना है। उन महापुरुषों के विचार से प्रेरणा और आधुनिक तकनीक से तालमेल करते हुए चलना है। आपसी सद्भाव से कार्य करें जो भी जिस भूमिका में कार्य कर रहा है मानवी संवेदना को ध्यान में रखते हुए अपने कार्यों के साथ-साथ त्याग भी करें। त्याग बहुत आवश्यक है चाहे वह शिक्षा से जुड़ा हो चाहे स्वास्थ्य से जनमानस की संविद्धि करने हेतु हमें कार्य करना है। इस अवसर पर एसडीएम विशाल यादव , एसडीएम पंकज सक्सेना और समाजसेवी एस के कौशिक ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने उत्कृष्ट कार्य करने हेतु प्रशंसा पत्र दिए इनमें नायाब तहसीलदार पुष्पानकर देव को गंगा एक्सप्रेसवे में अच्छा कार्य करने हेतु पुरस्कृत किया। ईडीएम मनोज, मुकेश ट्रेजरी को भी प्रशंसा पत्र दिए और संजीव अमीन चंद्रप्रकाश, श्यामलाल, असलम नेपाल, सुलेमान, मांगेराम तथा ग्राम पंचायत अधिकारी शिवम पांडे संगीता चौधरी स्वच्छता सैनिटाइजेशन हेतु मुकेश शर्मा ओमवीर सिंह, जाकर अली को तथा मुख्य विकास अधिकारी के वरिष्ठ सहायक सुनील कुमार, भिशेष  कुमार, देवेंद्र सिंह, शाहिद राणा को भी प्रशंसा पत्र दिए गए। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी उदय सिंह , अपर जिलाधिकारी जयनाथ यादव, उप जिलाधिकारी विशाल यादव, उप जिलाधिकारी पंकज सक्सेना सहित सभी जनपद स्तरीय अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे l रंजना शर्मा जिला सूचना अधिकारी हापुड़।

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ट्विटर ने कोरोना को देखते हुए भारत में 6 नए उपभोक्ता रूझानों की घोषणा की

नई दिल्ली : ट्विटर ने गुरुवार को महामारी के बीच भारत में अपने प्लेटफॉर्म पर हो रही लाखों बातचीत से छह प्रमुख उपभोक्ता रूझानों का खुलासा किया, जो ब्रांड और विपणक को प्रासंगिकता और तेजी से अपनाने के द्वारा स्थायी उपभोक्ता संबंधों को बढ़ावा देने में मदद करेगा।


ट्विटर ट्रेंड्स रिपोर्ट 2021 के अनुसार, भारत में बातचीत पर हावी होने वाले छह रुझान हैं - वेलबीइंग, क्रिएटर कल्चर, एवरीडे वंडर, वन प्लैनेट, टेक लाइफ और माई आइडेंटिटी।


इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए, ट्विटर ने जनवरी 2020-जून 2021 के लाखों ट्वीट्स का अध्ययन किया और उनकी तुलना पिछले 18 महीनों के ट्वीट्स से की ताकि यह पता चल सके कि भारत में ट्विटर पर लोग क्या बातचीत कर रहे थे।


कंपनी ने कहा कि ये छह रुझान ब्रांडों को उपभोक्ताओं के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।


ट्वीट इंडिया में मार्केटिंग प्रमुख प्रीता अथरे ने कहा एफएफ द्वारा प्रसारित देखा जा रहा है, इस बात को संशोधित किया जा रहा है, एक जलवायु में परिवर्तन हो रहा है। इस बारे में जानकारी के लिए इस स्थिति के बारे में जानकारी में भी शामिल हैं।


उदाहरण के लिए, कल्याण छत्र के भीतर, उभरने वाली शीर्ष तीन उप-प्रवृत्तियां स्वयं की देखभाल (प्लस88 प्रतिशत), स्वास्थ्य और फिटनेस (प्लस103 प्रतिशत), और मानसिक स्वास्थ्य मामले (प्लस150 प्रतिशत) हैं।


रिपोर्ट में कहा गया है कि, हैशटैग सेल्फलाव, हैशटैग लाव योरसेल्फ, हैशटैग गुड हेल्थ और हैशटैग मेन्टल हील दा मेटर इन बातचीत में उपयोग किए जाने वाले कुछ लोकप्रिय हैशटैग हैं। ब्रांड्स को इस बातचीत में ईमानदारी के साथ संपर्क करना चाहिए। अपने ²ष्टिकोण साझा करना चाहिए और हमेशा लोगों को बेहतर होने के लिए कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए ।


एवरीडे वंडर के तहत इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ अन्य लोकप्रिय हैशटैग न्यूमरोलॉजी, हैशटैग कॉन्शियसनेस, हैशटैग आध्यात्मिक रूप से, हैशटैग मेडिटेशन हैं।


भारत में कंटेंट, क्रिएटर्स और उभरती क्रिएटर इकोनॉमी के बारे में बातचीत में 78 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।


ट्विटर ने कहा,जैसा कि महामारी लोगों को घर पर रखना जारी रखती है, प्रौद्योगिकी के आसपास बातचीत और हमारे जीवन पर इसका प्रभाव बढ़ रहा है। ब्रांड लोगों को यह दिखा कर कल्पना करने और अनुकूलित करने में मदद कर सकते हैं कि कैसे उनके नए उत्पाद और सेवाएं जीवन को आसान बनाते हैं। 





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मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में हुई जनपद हापुड़ के सभी विकास खंडों सभी ग्राम पंचायत क्षेत्रों की जल गुणवत्ता जांच एवं मॉनिटरिंग हेतु बैठक l

आज विकास भवन के सभागार में मुख्य विकास अधिकारी उदय सिंह जिला विकास अधिकारी के साथ जल गुणवत्ता जांच एवं मॉनिटरिंग हेतु एफटीके तथा h2s वायल्स वितरण करने हेतु बैठक कर रहे थे बैठक अधीक्षण अभियंता जल निगम ने मुख्य विकास अधिकारी को अवगत कराया कि ग्रामों में फील्ड टेस्ट कीट एवं h2s वायल्स का शीघ्र वितरण एवं प्रत्येक गांव से 5 महिलाओं एस एच  जी आशा एएनएम आंगनबाड़ी कार्यकत्री अध्यापिका और तीन अन्य कार्यकर्ता जिनमें ग्राम प्रधान डब्ल्यू एस सी सदस्य प्राइमरी अथवा प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य विज्ञान छात्रों में से कोई तीन  जो सक्रिय हो फील्ड टेस्ट किट यूजर के रूप में नामित करते हुए डब्लू एमआईएस पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा जिला विकास अधिकारी जिला विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी जल गुणवत्ता परीक्षण हेतु फील्डस्तर के कार्मिकों जो ग्राम पंचायत की पांच पांच महिलाएं और 3 सक्रिय कार्यकर्ता को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा बैठक में एक्शन जल निगम ने बताया कि जल गुणवत्ता के सर्विलेंस हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर फील्ड टेस्ट किट एवं प्रयोगशालाओं के माध्यम से कराए गए जल गुणवत्ता जांच के मॉनिटरिंग हेतु  जल गुणवत्ता कंट्रोल रूम की स्थापना भी की जाएगी मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि खंड विकास अधिकारी से प्राप्त की गई जल जांच रिपोर्ट को भारत सरकार के आई एम आई एस जेजेएम पर दर्ज कराया जाएगा और दोषी पाए गए जल स्त्रोत के नमूनों की प्रयोगशाला में जांच हेतु इकट्ठा करने का कार्य और पाए गए दूषित पेयजल स्रोत की रोकथाम हेतु विस्तृत कार्य योजना बनाकर दूषित पेयजल स्रोत की समस्या का निराकरण किया जाएगा l जल गुणवत्ता परीक्षा हेतु ग्राम पंचायत जिम्मेदार होंगे साथ ही दीवार लेखन द्वारा जल गुणवत्ता  परिणाम भी अंकित किए जाएंगे बैठक में जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे l रंजना शर्मा जिला सूचना अधिकारी हापुड़ l

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हर रिफिल के समय वितरक चुन सकेंगे रसोई गैस उपभोक्ता

नयी दिल्ली : रसोई गैस उपभोक्ता अब अपने वितरक के अलावा उसी कंपनी के दूसरे वितरक से भी सिलिंडर रिफिल करा सकेंगे। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आज बताया कि जल्द ही चंडीगढ़, कोयम्बटूर, गुड़गांव, पुणे और रांची के उपभोक्ताओं को प्रयोग के आधार पर यह सुविधा दी जायेगी। अपने सिलिंडर के लिए रिफिल बुक कराते समय उपभोक्ता को उनके क्षेत्र में सेवा देने वाले सभी वितरकों के विकल्प दिये जायेंगे। उनमें से उसे यह तय करना होगा कि वह किस वितरक से रसोई गैस सिलिंडर का रिफिल लेना चाहता है। ग्राहक को उसी तेल विपणन कंपनी के वितरकों का विकल्प मिलेगा जिससे उसने एलपीजी कनेक्शन लिया है। इंडेन के उपभोक्ताओं को इंडेन के वितरकों में से ही एक को चुनना होगा। भारत गैस के उपभोक्ता भारत गैस और एचपी गैस के उपभोक्ता एचपी गैस के वितरकों में से ही एक का चयन कर सकते हैं। एलपीजी कनेक्शन पोर्टेबिलिटी की सुविधा पहले ही दी जा चुकी है जिसके तहत ग्राहक अपना कनेक्शन एक कंपनी से दूसरी कंपनी में स्थानांतरित करा सकते हैं। मई में 55,759 ग्राहकों ने इसका लाभ उठाया।







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LPG सिलेंडर के रेट में बड़ी कटौती, अब इतने में मिलेगी 19 Kilo वाली रसोई गैस

नई दिल्‍ली:  LPG कमर्शियल सिलेंडर के रेट 1 जून 2021 को बदल गए। इनमें 122 रुपए प्रति सिलेंडर की कटौती हुई है। हालांकि बिना सब्सिडी वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस फैसले से जनता ने राहत की सांस ली है। यह कटौती आज से प्रभावी हो गई है। अब 19 Kilo Ka Cylinder 1473.50 रुपए में मिलेगा। जबकि पहले इसकी कीमत 1595.50 रुपए थी।

क्‍या है राज्‍यों में कीमत

बता दें कि LPG के दाम राज्‍य दर राज्‍य बदलते रहते हैं। दिल्‍ली में इसके दाम 1473.50 रुपए हो गए हैं। जबकि मुंबई में 1422.50 रुपए हैं। वहीं Kolkata में 1544.50 रुपए और चेन्‍नै में 1603 रुपए प्रति 19 किलो सिलेंडर हैं।

मई में भी नहीं बदले थे दाम

Subsidy वाले सिलेंडर के दाम में मई में भी कोई बदलाव नहीं हुआ था। हालांकि अप्रैल में 10 रुपये की कटौती की गई थी। आज दिल्ली में LPG सिलेंडर का दाम 809 रुपये है। दिल्ली में इस साल जनवरी में LPG सिलेंडर का दाम 694 रुपये था, जिसे फरवरी में बढ़ाकर 719 रुपये प्रति सिलेंडर किया गया। 15 फरवरी को दाम बढ़ाकर 769 रुपये कर दिए गए। इसके बाद 25 फरवरी को LPG सिलेंडर के दाम 794 रुपये हो गए। मार्च में LPG सिलेंडर के प्राइस को 819 रुपये कर दिया गया।

Petrol-Diesel Ke rate

Petrol-Diesel Ke rate में मंगलवार को फिर आग लगी। दिल्ली में जहां डीजल 23 पैसे प्रति लीटर बढ़ गया, वहीं पेट्रोल के दाम (Petrol Price) भी 27 पैसे प्रति लीटर बढ़े हैं। इससे मंगलवार को दिल्ली में पेट्रोल 94.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया और डीजल भी 85.38 रुपये प्रति लीटर पर जा पहुंचा। एक दिन पहले देशभर में अलग-अलग शहरों में पेट्रोल के दाम में 25-31 पैसे प्रति लीटर जबकि डीज़ल के दाम में 25-29 पैसे प्रति लीटर तक का इजाफा हुआ था।

6 बजे बदलते हैं भाव

Petrol-Diesel की कीमतें रोज सुबह 6 बजे तय होती हैं। इनके दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और दूसरी खर्चे जोड़ने के बाद यह दोगुने के करीब पहुंच जाते हैं। विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या हैं, इस आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है।

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गृह और जल कर का जुर्माना एवं ब्याज माफ करे सरकार : अखिलेश यादव

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कोवि-19 की स्थिति के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी की सरकार से गृह और जल कर में किसी भी तरह के जुर्माने एवं बकाये पर ब्याज माफ करने का शनिवार को अनुरोध किया। सपा अध्यक्ष ने शनिवार को एक ट्वीट में कहा, “ कोरोना वायरस से शहरों में जनता के रोज़गार, नौकरी और कारोबार पर जिस तरह आर्थिक मार पड़ी है, उसे देखते हुए भाजपा सरकार से आग्रह है कि गृह कर एवं जल कर के बिलों में किसी भी प्रकार के जुर्माने एवं बकाया पर ब्याज माफ़ करे।” यादव ने कहा कि आर्थिक तंगी के इस समय में इस कदम से निम्न तथा मध्यम वर्ग को बहुत राहत मिलेगी।

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15 फीसद टैक्स बढ़ाने का विरोध

गाजियाबाद :  नगर निगम द्वारा 15 फीसद संपत्ति कर बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में सबसे ज्यादा भार कमर्शियल करदाताओं पर पड़ेगा। लाकडाउन के कारण पिछले साल भी व्यापार पर असर पड़ा था और इस साल भी बीते एक माह से ज्यादातर दुकानें और प्रतिष्ठान बंद पड़े हैं। यही वजह है कि एक साथ 15 फीसद संपत्ति कर बढ़ाने का विरोध हो रहा है। पार्षदों के साथ ही व्यापारी भी नगर निगम अधिकारियों से हाउस टैक्स न बढ़ाने की मांग की है। 


कुल करदाता - 3.64 लाख


कमर्शियल भवन - 26,220


कमर्शियल भवनों पर लगने वाला संपत्ति कर- पांच हजार से 15 लाख सालाना मोहननगर जोन


कुल भवन - 76,832


आवासीय भवन - 70,417


गैर आवासीय भवन - 6,415 कविनगर जोन


कुल भवन- 50,025 भवन


आवासीय भवन - 47140


गैर आवासीय भवन - 2885 विजयनगर जोन


कुल भवन- 47,499 भवन


आवासीय भवन- 44,179


गैर आवासीय भवन - 3, 320 सिटी जोन


कुल भवन- 68,929


आवासीय भवन - 61,799


गैर आवासीय भवन - 7,130 वसुंधरा जोन


कुल भवन - 1,21,409


आवासीय भवन - 1,14, 939


गैर आवासीय भवन - 6,470 एक जून से जारी होंगे बिल :


एक जून से हाउस टैक्स के बिल पांचों जोन से जारी होने लगेंगे। करीब ढाई लाख करदाता ऐसे हैं जिनका हाउस टैक्स ढाई हजार से तीन हजार रुपये आता है। एक साथ 15 फीसद हाउस टैक्स बढ़ने से करदाताओं को भी परेशानी होगी। इसलिए बढ़ा रहे हाउस टैक्स:


मुख्य कर निर्धारण अधिकारी संजीव सिन्हा का कहना है कि 2018 से संपत्ति कर नहीं बढ़ाया गया है। सदन में पूर्व में प्रस्ताव पास हुआ था, जिसमें दो साल पर 10 फीसद हाउस टैक्स बढ़ाया जाना तय हुआ है। इस वजह से इस बार एक साथ 15 फीसद हाउस टैक्स बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। परिचर्चा नगर निगम के 15 फीसदी गृहकर बढ़ाने के फैसले का पार्षद विरोध कर रहे हैं। इस समय टैक्स नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। कई लोगों के रोजगार चले गए हैं, व्यापार ठप हैं। इस समय नगर निगम को लोगों की मदद के लिए खड़े होना चाहिए।


- मनोज चौधरी, पार्षद लोगों के पास पैसा है नहीं, व्यापार बंद हैं। हाउस टैक्स बढ़ाने का इस समय निर्णय लेना व्यापारियों के साथ ही जनता पर दोहरी मार है। ऐसा नहीं होना चाहिए।


- प्रदीप गुप्ता, संयोजक, व्यापारी एकता समिति सदन के निर्णय के आधार पर ही 15 फीसदी हाउस टैक्स बढ़ाया जा रहा है। करदाता समय पर बिल जमा कर छूट का लाभ उठा सकते हैं।


- आशा शर्मा, महापौर




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पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के लिए पथ प्रदर्शक है नारदीय दृष्टि

आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है, क्योंकि भारत ही विश्व को सही दिशा और दशा देने की क्षमता रखता है। ऐसे में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ होने के कारण मीडिया जगत की भूमिका और अधिक बढ़ जाती है कि विश्व के समक्ष अपने राष्ट्र की कैसी तस्वीर प्रस्तुत की जाए। भारत हमेशा से ही ज्ञान आराधक राष्ट्र रहा है। भारत की ज्ञान परंपरा औरों से विशेष इसलिए है क्योंकि यह केवल हमारे बाहर मौजूद लौकिक (मटेरियल) ज्ञान को ही महत्वपूर्ण नहीं मानती बल्कि आत्म-चिंतन द्वारा प्राप्त भीतर के ज्ञान को भी समान महत्व देती है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व इन दोनों ही प्रकार के ज्ञान को कड़ी साधना से अर्जित कर ग्रंथों के रूप में मानव समाज के लिए प्रस्तुत किया। आज चाहे योग की बात हो, विज्ञान की या फिर गणित की, पूरी दुनिया ने भारतीय ज्ञान से कुछ न कुछ लिया है। इस प्रकार हम एक श्रेष्ठ ज्ञान परंपरा के उत्तराधिकारी हैं। 


ऐसे में नारद जयंती का दिन भारतीय पत्रकारिता में निहित मूल्यों के मूल्यांकन व आगे की राह तय करने का दिन है। महर्षि नारद मुनि पत्रकारों के प्रेरणास्रोत हैं। महर्षि नारद मुनि देव व दानव सभी के मध्य सूचनाओं का आदान-प्रदान बिना किसी स्वार्थ के लोकहित को ध्यान में रखकर किया करते थे। आज भी पत्रकारों को उनके पदचिन्हों पर चलकर मूल्य आधारित व शुद्ध पत्रकारिता निर्भयता के साथ करनी चाहिए। मीडिया से समाज की बहुत अपेक्षाएं रहती हैं इसलिए मीडिया पर भारी नैतिक दबाव भी रहता है, जिसे पूरा करने का प्रयास मीडिया करता ही है। भारत में सदैव लोकहित में संवाद करना यही मीडिया की परंपरा रही है।


समाचारों में मुद्दों पर सामूहिक चेतना का प्रचलन बढ़ा है, परन्तु व्यावसायिक पत्रकारिता के कारण वैचारिक पत्रकारिता में कमी आयी है, जो कि युवा शक्ति के लिए शुभ नहीं है। मनोरंजन को प्रमुखता दे कर समाज को दिशा भ्रमित भी किया जा रहा है। पत्रकारिता लोकहित व राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए, यही पत्रकारिता का धर्म भी है। आज देश की जी.डी.पी. तो बढ़ी है परन्तु मानव विकास एवं सामाजिक सरोकार घट रहा है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की विषय वस्तु में सुधार करना तथा जनता के प्रति जवाबदेह बनाना यह आज समय की आवश्यकता व अनिवार्यता है। आज इंटरनेट मीडिया के कारण पत्रकारिता का विस्तार भी हो रहा है। भारत में इंटरनेट मीडिया का एक बड़ा बाज़ार है जिसके कारण इस मीडिया पर परोसा जाने वाला कंटेंट एक बड़े वर्ग को प्रभावित करता है। यह सब ओर अधिक चिंताजनक हो जाता है जब हमें पता है कि डिजिटल मीडिया में विदेशी निवेश की भागीदारी यहां के विचार, आचार व व्यवहार को किस हद तक प्रभावित करती है। ऐसे में भारत केंद्रित पत्रकारिता की सीमाओं को तय करना होगा, ताकि इस बेलगाम होते डिजिटल मीडिया को भी सही दिशा दी जा सके। 


मीडिया का कार्य मुख्यत: सूचना संचार की व्यवस्था करना है़। संचार व्यवस्था के माध्यम बदलने से उसके प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, वेब, सोशल मीडिया आदि अनेक प्रकार हुए हैं। प्राचीन काल में सूचना, संवाद, संचार व्यवस्था मुख्यत: मौखिक ही होती थी और मेले, तीर्थयात्रा, यज्ञादि कार्यक्रमों के निमित्त लोग जब इकट्ठे होते थे तो सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे। देवर्षि नारद भी सतत् सर्वत्र संचार करते हुए अलग-अलग जगह के वर्तमान एवं भूत की सूचनाएं लोगों तक पहुंचाते थे। वे अच्छे भविष्यवेत्ता भी थे। इसलिए भूत और वर्तमान के साथ-साथ कभी-कभी वे भविष्य की सूचनाओं से भी लोगों को अवगत कराते थे। यह कार्य वे निरपेक्ष भाव से लोकहित में एवं धर्म की स्थापना के लिए ही करते थे। एक आदर्श पत्रकार के नाते उनका तीनों लोक (देव, मानव, दानव) में समान सहज संचार था। 


पत्रकारिता में नारदीय दृष्टि मीडिया से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक पथ प्रदर्शक का मार्ग प्रशस्त करती है। क्योंकि हमें पता है कि न्यूज़ में व्यूज का समावेश करने से पत्रकारिता एजेंडे में बदल जाती है, इसलिए पत्रकार केवल समाचार दें और पक्षकार न बनें और समाचार देते समय समाचार की सत्यता की भी जांच करें। समाज भी पत्रकार से अपेक्षा करता है कि वो 'पत्रकार बनें, पक्षकार नहीं'। पत्रकार समाज का दर्पण है। पत्रकार का प्रमुख कार्य समाज की समस्याओं को उजागर करना है। आज के युग में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और प्रासंगिकता बहुत बढ़ गई है क्योंकि पत्रकार समाज की दिशा तय करने की ताकत रखता है। मीडिया ही देश की छवि विश्व के सामने रखता है। मीडिया को निष्पक्ष रहकर कार्य करना चाहिए। पत्रकार अपनी लेखनी से समाज की दशा और दिशा बदलने की ताकत रखता है। प्रत्येक पत्रकार अपनी कलम से किसी न किसी रूप में समाज की सेवा करता है।


नारद मुनि पत्रकारिता के पितामह थे, जिन्होंने समाज में संवाद का कार्य शुरू किया था। नारद के पास श्रुति स्मृति थी। आजादी से पहले और अब की पत्रकारिता में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। आजादी से पहले अधिकतर पत्रकारों, संपादकों ने देश को आजाद करवाने के लिए लेख लिखे। जिस जनून के साथ उन्होंने काम किया उनकी पत्रकारिता रंग लाई और लोगों में जागृति आने के अलावा भारत आजाद भी हुआ लेकिन वर्तमान में कुछ कॉरपोरेट घरानों के हाथ पत्रकारिता का सिस्टम आने के बाद इसमें काफी बदलाव आया है। पत्रकारिता के लिए व्यवसाय करना तो ठीक है, लेकिन व्यवसाय के लिए पत्रकारिता करना उचित नहीं है। आज भी बहुसंख्यक पत्रकारों के लिए पत्रकारिता शौक या रोजी-रोटी का जरिया न होकर स्वप्रेरित कार्य ही है। कोरोना संकट के दौरान जिस प्रकार की भूमिका पत्रकार निभा रहे हैं, वह उसी प्रेरणा व संकल्प के कारण है। आज कोरोना काल की संकट घड़ी में भी पत्रकार अपनी जान हथेली पर रखकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं और देश दुनिया के समाचार हम तक पहुंचा रहे हैं। समाज पत्रकारों का सदैव ऋणी रहेगा। इसलिए पत्रकारिता की पवित्रता एवं विश्वसनीयता सदैव निष्कलंक रहनी चाहिए। 


वैश्विक स्तर पर नारद सही मायनों में लोक संचारक थे। जिनके प्रत्येक संवाद की परिणति लोक कल्याण पर आधारित थी। जो औपचारिक मान्यता न होने पर भी सर्वत्र सूचना प्राप्त व प्रदान करने के लिए स्वीकार्य थे, जिनकी विश्वसनीयता पर कभी कोई संदेह नहीं रहा। इसलिए आज नारद जयंती पर मीडिया में भारत केंद्रित दृष्टि को संकल्पित करने का दिन है। अव्यवस्था, गड़बड़ियों, खामियों को उजागर करने के साथ-साथ सूचना के माध्यम से समाज का प्रबोधन, जागरण करते हुए समाज को ठीक दिशा में ले जाना, समाज की विचार प्रक्रिया को सही दिशा देना यह भी मीडिया का कर्तव्य है। मीडिया को आज अपनी इस भूमिका का निर्वहन करना ही चाहिए। यही समाज व देश की आवश्यकता है और पत्रकारिता में यही नारदीय दृष्टि मीडिया के स्वर्णिम भविष्य को तय भी करेगी। 



-डॉ. पवन सिंह मलिक-

(लेखक जे.सी. बोस विश्वविद्यालय, फरीदाबाद के मीडिया विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं)

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एक जून से लॉकडाउन, दुकान और रेहड़ी बाजार पर व्‍यापारियों ने दिल्‍ली सरकार को भेजे सुझाव

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के चलते राजधानी दिल्‍ली में चल रहे लॉकडाउन को खोलने की मांग उठ रही है। व्‍यापारियों के संगठन ने एक जून से दिल्‍ली के सभी बाजारों को खोलने की मांग की है। कन्‍फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स की ओर से भेजे गए प्रस्‍ताव में दिल्ली के उपराज्‍यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से एक जूल से बाजारों और दुकानों को लॉकडाउन से राहत देने की मांग की गई है।


कैट की ओर से कहा गया कि एक महीने से ज्‍यादा समय से दिल्ली में लॉक डाउन के कारण व्‍यापारी वर्ग वित्‍तीय कठिनाई से गुजरा है। अब जबकि कोरोना के मामले दिल्ली में काफी हद तक काबू में आ गए हैं तो 1 जून से दिल्ली में बाज़ारों को खोला जाना जरूरी है। साथ ही करीब 150 व्‍यापारिक संगठनों ने यह मांग की है कि बाजार में ऑड-ईवन व्‍यवस्‍था लागू करन के बजाय समय सीमा तय कर दी जाए।


दिल्‍ली सरकार को भेजे गए अपने प्‍लान में कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल और दिल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष विपिन आहूजा ने कहा कि दिल्ली में थोक और रिटेल, दो तरह के बाजार हैं। ऐसे में यह किया जा सकता है कि दिल्ली में थोक बाजार सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक और रिटेल बाजार दोपहर 12 बजे से शाम सात बजे तक खोले जाएं। साथ ही अभी एक जूल से सात जून तक दिल्ली में रात्रि 10 बजे से सुबह 5 बजे तक रात्रि कर्फ्यू लगाया जाए।


साथ ही बाज़ारों के अलावा सरकार रेहड़ी पटरी को भी हॉकिंग ज़ोन में या अस्थायी तौर पर सरकारी स्कूलों के खाली पड़े परिसरों में भी लगता सकती है। ताकि ये लोग भी सामाजिक दूरी का पालन करते हुए अपनी रोजी रोटी चला सकें। इन सब के अलावा व्यापारियों के कर्मचारियों के टीकाकरण किया जाना बेहद जरूरी है। जिससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इसके लिए बाज़ारों में टीकाकरण के विशेष कैंप लगाए जाएं। जिसकी व्यवस्था सम्बंधित मार्केट एसोसिएशन करेगी। इसके साथ ही ट्रांस्‍पोर्ट सेवाओं को भी सुचारू किए जाने की जरूरत है ताकि व्‍यापारियों को माल लाने और ले जाने में दिक्‍कतों का सामना न करना पड़े। साथ ही लॉकडाउन खोलने से पहले बाजारों में स्‍वच्‍छता अभियान भी चलाया जाए। एक महीने से बंद रहने के कारण गंदगी भी काफी बढ़ गई है।






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कोरोना से मृत व्यापारियों और पत्रकारों के परिवार को 50 लाख की मदद दी जाए

गाजियाबाद : महानगर उद्योग व्यापार मंडल ने कोरोना महामीरी के शिकार हुए व्यापारियों और अखबारों के कर्मचारियों के लिए आर्थिक सहायता की मांग की है। प्रदेेश के मुख्यमंत्री को इस संबंध में पांच सूत्रीय मांग पत्र भेजा गया है। व्यापार मंडल के महामंत्री अशोक चावला ने बताया कि कोरोना की दूसरी चपेट में काफी व्यापारियों की जान चली गई। व्यापारियों की मौत के बाद उनके परिवार के कमाने वाले भी नहीं रहे। इसी तरह कई अखबारों व मीडिया क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की मौत हो गई। इससे उनके परिवार में भी कमाने वाला नहीं रह गया है। चावला ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मांत्र पत्र भेजा गया है। इसमें जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों की मौत होने पर 50 लाख की आर्थिक मदद, अखबारों के संपादक स्तर के अधिकारी को 50 लाख, संवाददाताओं को 20 लाख और स्ट्रिंगरों की मौत होने पर 10 लाख के आर्थिक सहायता की मांग की गई है। मांग पत्र में लॉकडाउन के बाद एक जून से नियमित बाजार खोलने समेत कई मांग शामिल है।



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कासगंज के किसानों को अनवरत रूप से नहीं मिल रही किसान निधि

कासगंज : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहयोग पहुंचाने के लिए कोरोना काल मैं किसानों को सहयोग देने के लिए सम्मान निधि खातों में अनवरत रूप से नहीं पहुंची है। दो हजार प्रति छमाही मिलने वाली धनराशि को लेकर किसान परेशान हैं। कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद भी उनकी समस्या का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। जिले की प्रत्येक तहसील क्षेत्र मैं स्थित ब्लॉक स्तर पर ऐसे तमाम किसान प्रतिदिन बैंकों एवं संबंधित कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। जिनके खातों में सम्मान निधि की धनराशि अचानक बंद हो गई है। पिछले कई माह से धनराशि का हस्तांतरण नहीं किया जा रहा है। समस्या निस्तारण की दिशा में संबंधित अधिकारी भी किसी तरह की स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहे हैं। इन दिनों कोरोना काल एवं लॉकडाउन के चलते किसान परेशान है। छोटे किसान इस धनराशि से रोजमर्रा के अपने तमाम कार्य करते हैं। धनराशि न प्राप्त होने के कारण किसानों के समक्ष समस्या हो गई है। किसानों को छह माह में दो हजार की धनराशि प्राप्त होती है। जो उनके जीवन यापन में काफी सहयोगी साबित हो रही है। इन दिनों बारिश हो चुकी है। सब्जी की फसल को नुकसान हुआ है। किसानों के माथे पर चिंता के भाव उभर आए हैं। ऐसे में किसानों को आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। सम्मान निधि की धनराशि उनके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। समस्या को लेकर क्या कहते हैं किसान कासगंज विकासखंड क्षेत्र के ग्राम वाकनेर निवासी किसान कंही सिंह का कहना है कि पिछली दो बार से उनके खाते में एक किसान निधि नहीं आई है। दो दिन पहले ही बैंक जाकर खाते का अवलोकन किया है। समस्या उत्पन्न हो रही हैं। किसान राम श्री का कहना है कि उनके पास 15 बीघा कृषि योग्य भूमि है। जिसमें प्रतिवर्ष समय के अनुसार खेती की जाती है। दो हजार सम्मान निधि के मिलते थे, लेकिन तीन बार से धनराशि उपलब्ध नहीं हुई है। कई बार खाते देख आए हैं। कारण जानने के लिए तहसील गए हैं, लेकिन कोई अधिकारी जवाब नहीं दे रहा। सहावर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम सैदपुर का निवासी किसान ओम प्रकाश का कहना है कि उनका दस बीघा का चक है। खेती हो रही है। इन दिनों बारिश में फसल को नुकसान हुआ है। सम्मान निधि दो बार से नहीं आई है। धनराशि मिलने पर घर के अन्य जरूरी काम हो जाते हैं। बैंक गए लेकिन पता नहीं चल सका धनराशि क्यों नहीं आ रही है। इन्हें प्राप्त होती है धनराशि कोरोना काल मे आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों के लिए केंद्र सरकार ने यह योजना लागू की है। योजना के अंतर्गत 25 बीघा से कम खेती वाले किसानों को धन राशि दिए जाने का प्राविधान है। इसका ऑनलाइन आवेदन होता है। लेखपाल से लेकर एसडीएम तक की रिपोर्ट लगने के बाद किसानों को लाभान्वित किया जाता है।





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बिल्डरों की साइट पर लौटने लगे मजदूर

ग्रेटर नोएडा : एक से डेढ़ माह पहले कोरोना के कारण जो श्रमिक घरों को लौट गए थे। वह अब वापस आने लगे हैं। ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में कई बिल्डरों की साइट पर काम शुरू हो गया है।


कोरोना महामारी इस बार गत वर्ष से ज्यादा भयानक रही है, लेकिन राहत की सांस यह रही कि बीमारी का प्रकोप फैलते ही बिल्डरों की साइटों पर काम करने वाले अधिकांश श्रमिक समय रहते घरों को लौट गए, लेकिन मजदूरी करके पेट पालने वाले इन परिवारों के पास रोजगार का दूसरा साधन भी नहीं है। लिहाजा यह श्रमिक अपने काम पर लौटने लगे हैं।


यमुना एक्सप्रेस वे पर ओएसिस कंपनी के चेयरमैन ने बताया कि उनके यहां करीब तीन सौ श्रमिक काम कर रहे हैं। गौर बिल्डर और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के कई बिल्डरों समेत अल्फा कमर्शियल बेल्ट में कमर्शियल प्रोजेक्ट और रीक्रिएशनल ग्रीन सेक्टर में गोदरेज सनलाइट आदि बिल्डरों की साइटों पर भी काम शुरू हो गया है।




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हजार बीघे खेत में लगाई गई तरबूज की फसल हो रही नष्ट, किसान परेशान

बिश्वनाथ : राज्य में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा आए दिन नये-नए दिशा निर्देश जारी किये जा रहे हैं। जिसको लेकर आम नागरिक, दुकानदारों के अलावा किसानों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। बिश्वनाथ जिला शहर से लगभग 40 किमी दूर स्थित असम-अरुणाचल प्रदेश सीमावर्ती इलाके के अंदरूनी गांव सुबाईजार के किसान इन दिनों काफी परेशान हैं। हजारों बीघा जमीन पर लगाई गई तरबूज की फसल पूरी तरह पक कर तैयार हो गयी है लेकिन कोई भी व्यापारी तरबूज खरीदने के लिए गांव में नहीं पहुंच रहा है। इसकी वजह से खेत में ही तरबूज सड़ने लगे हैं। सुबाईजार गांव के दो शिक्षित किसान रंजय रामसियारी और उसके भाई ने कहा कि काफी मेहनत कर हम दोनों भाइयों ने दस बीघा जमीन पर तरबूज की खेती किये थे। लेकिन, कोरोना की वजह से पिछले वर्ष हमें काफी नुकसान हुआ। इस बार भी वही हाल है। हमारे खेत में ही पके हुए तरबूज बर्बाद हो रहे हैं। खरीदने के लिए कोई भी व्यापारी नहीं आ रहा है। गांव के अन्य किसान जो गोभी, मिर्च, टमाटर, स्ट्रॉबेरी, बैर आदि की खेती किये हैं, उनकी भी साग सब्जी और फल खेत में ही बर्बाद हो रहे हैं। स्थानीय किसानों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि सरकार किसानों द्वारा उपजायी गयी साग-सब्जी, फल को बाजार तक ले जाकर बेचने की व्यवस्था करें। ताकि किसानों की आजीविका सुचारू रूप से संचालित हो सके। ऐसा नहीं होने पर किसानों के सामने भूखमरी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी।



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किसानों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : प्रधानमंत्री

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज खाद कीमतों के मुद्दे पर एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। उन्हें खाद कीमतों के विषय पर विस्तृत जानकारी प्रेजेंटेशन के माध्यम से दी गई।

मीटिंग में इस बात चर्चा हुई कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया आदि की बढ़ती कीमतों के कारण खाद की कीमतों में वृद्धि हो रही है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद किसानों को पुरानी दरों पर ही खाद मिलनी चाहिए।

DAP खाद के लिए सब्सिडी 500 रुपये प्रति बैग से, 140% बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति बैग, करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। इस प्रकार, DAP की अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमतों में वृद्धि के बावजूद, इसे 1200 रुपये के पुराने मूल्य पर ही बेचे जाने का निर्णय लिया गया है, साथ ही मूल्य वृद्धि का सारा अतिभार केंद्र सरकार ने उठाने का फैसला किया है। प्रति बोरी सब्सिडी की राशि कभी भी एक बार में इतनी नहीं बढ़ाई गई है।

 

पिछले साल DAP की वास्तविक कीमत 1,700 रुपये प्रति बोरी थी। जिसमें केंद्र सरकार 500 रुपये प्रति बैग की सब्सिडी दे रही थी। इसलिए कंपनियां किसानों को 1200 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से खाद बेच रही थीं।

 

हाल ही में DAP में इस्तेमाल होने वाले फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया आदि की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 60% से 70% तक बढ़ गई हैं। इसी कारणवश, एक DAP बैग की वास्तविक कीमत अब 2400 रुपये है, जिसे खाद कंपनियों द्वारा 500 रुपये की सब्सिडी घटा कर 1900 रुपये में बेचा जाता है। आज के फैसले से किसानों को 1200 रुपये में ही DAP का बैग मिलता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास करेगी कि किसानों को मूल्य वृद्धि का दुष्प्रभाव न भुगतना पड़े।

केंद्र सरकार हर साल रासायनिक खादों पर सब्सिडी पर करीब 80,000 करोड़ रुपये खर्च करती है। DAP में सब्सिडी बढ़ाने के साथ ही खरीफ सीजन में भारत सरकार 14,775 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करेगी|

अक्षय तृतीया के दिन PM-KISAN के तहत किसानों के खाते में 20,667 करोड़ रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर करने के बाद, किसानों के हित में यह दूसरा बड़ा फैसला है।


सरकार द्वारा खाद सब्सिडी बढ़ाने का ऐतिहासिक, किसान-हितैषी निर्णय

DAP खाद पर सब्सिडी 140% बढ़ाई गई 

किसानों को DAP  पर 500 रुपये प्रति बोरी से बढ़कर अब 1200 रुपये प्रति बोरी की सब्सिडी मिलेगी

किसानों को DAP का एक बैग 2400 रुपये के बजाय अब 1200 रुपये में मिलेगा

सरकार इस सब्सिडी हेतु 14,775 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय करेगी

अंतरराष्ट्रीय मूल्य वृद्धि के बावजूद किसानों को पुरानी दरों पर ही खाद मिले: प्रधानमंत्री

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आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को स्थिर और उचित रखा जाए : पीयूष गोयल

नई दिल्ली : जाने आलम (जानू चौधरी) उपभोक्ता मामले,  खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, रेलवे और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज अधिकारियों से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर कड़ी नजर रखने को कहा है। मंत्री ने उपभोक्ता मामलों के विभाग के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि असामान्य रूप से कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए एक बफर (अतिरिक्त संग्रह) बनाने के लिए जरूरी खाद्य वस्तुओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा जाए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि कोई मिल कारोबारी, थोक विक्रेता या खुदरा विक्रेता कोविड की परिस्थिति का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करता है और वह आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी करता है तो राज्यों द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधान लागू किए जाएं।

आज केंद्रीय मंत्री राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने के प्रावधानों की समीक्षा कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता मामले विभाग 34 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के 157 केंद्रों से कीमतों के बारे में आंकड़े एकत्र करता है। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से सभी 22 आवश्यक वस्तुओं, विशेष रूप से दालों, तिलहन, सब्जियों और दूध की कीमतों की निगरानी करने और किसी भी असामान्य मूल्य वृद्धि के शुरुआती संकेतों पर नजर रखने की उम्मीद की जाती है। ताकि समय पर हस्तक्षेप किया जा सके और उपभोक्ताओं को किफायती कीमतों पर खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सके।

उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव ने भी दो दिन पहले राज्यों के प्रधान सचिवों के साथ बैठक कर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को उचित स्तर पर बनाए रखने की आवश्यकता के बारे में बताया था। उपभोक्ता मामले विभाग ने सभी स्टॉकहोल्डर्स जैसे मिल कारोबारी, ट्रेडर्स, आयातक आदि को भी दालों के स्टॉक की घोषणा करने का निर्देश दिया है और इसे राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों द्वारा सत्यापित कराया जा सकता है।

यदि कोई मिल कारोबारी, थोक विक्रेता या फुटकर विक्रेता कोविड की परिस्थितियों का अनुचित फायदा उठाकर जमाखोरी करता है तो राज्यों द्वारा अनिवार्य वस्तु अधिनियम के प्रावधानों को लागू किया जाए: श्री पीयूष गोयल

 केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री ने राज्यों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को स्थिर और उचित रखने के प्रावधानों की समीक्षा की.



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बंगाल के 14.91 लाख किसानों को पहली बार मिला किसान सम्मान निधि का लाभ

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के किसानों को भी आखिरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिलना शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज देशभर के किसानों के खाते में इस योजना की आठवीं किस्त जारी की। बंगाल के किसानों को पहली बार बंगाल के किसानों को दो हजार रुपये की वित्तीय मदद उनके खाते में सीधे मिली है। बंगाल के 21.79 लाख किसानों में से लगभग 14.91 लाख किसानों को पोर्टल में पंजीकरण कराया था। उन किसानों के एकाउंट में सीधे पहली किस्त 2000 रुपये हस्तांरित किए गए हैं। बंगाल के किसानों को आर्थिक मदद मिलने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किसानों के नाम खुली पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने किसानों के हक की लड़ाई लड़ी है, जिसकी वजह से किसानों को सम्मान निधि का लाभ मिला है। हालांकि ममता ने कहा है कि किसानों को बहुत कम राशि दी गई है। ममता ने पत्र में कहा कि बंगाल के किसानों को बकाया 18000 रुपये मिलने चाहिए थे, लेकिन वह नहीं मिले। वह किसानों के हित के लिए लड़ाई जारी रखेंगी। दरअसल, चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया था कि बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार ने किसानों को वंचित किया है। अब जब राज्य में फिर से ममता बनर्जी की सरकार बनी है, तो भी अपने वादे के अनुसार प्रधानमंत्री ने बंगाल के किसानों को आर्थिक सहायता राशि दी है। ममता ने किसानों को लिखे पत्र में कहा है कि काफी टाल बहाना के बाद पीएम किसान सम्मान निधि की राशि बंगाल के किसानों के लिए केंद्र सरकार ने जारी की है। राज्य सरकार पहले ही किसानों को कृषक बंधु के तहत राशि दे रही है। किसानों को बकाया रुपये दिलाने के लिए लड़ाई जारी रहेगी। राज्य के कृषि मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि बंगाल के किसानों को बकाया नहीं मिला। पीएम अपना वादा पूरा नहीं किये हैं। वह अपना वादा पूरा करने में असफल रहे हैं।





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विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी इस पुस्तक का अध्ययन कर समिति कार्यो को सुगमता और पारदर्शिता से सम्पादित कर सकेगें

 

उत्तर प्रदेश लखनऊ: प्रदेश की सहकारी गन्ना विकास समितियों हेतु निर्गत महत्वपूर्ण आदेशों के संकलन की पुस्तक का ऑन-लाईन विमोचन कार्यक्रम आज गन्ना आयुक्त कार्यालय के सभागार मे सम्पन्न हुआ। विमोचन कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। पुस्तक का विमोचन चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री संजय आर. भूसरेड्डी के कर-कमलों द्वारा किया गया।

   सहकारी गन्ना विकास समितियों हेतु निर्गत महत्वपूर्ण आदेशों के संकलन की पुस्तक” की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए संयुक्त गन्ना आयुक्त (समिति) डा. वी.बी. सिंहने बताया कि 745 पृष्ठ वाली इस पुस्तक मे वर्ष 1955 से 2021 तक के लगभग 200 महत्वपूर्ण विभागीय आदशों का संकलन किया गया है। उन्होने बताया कि इस पुस्तक को तैयार करना अत्यन्त दुरूह कार्य थापरन्तु विभाग के अपर मुख्य सचिवश्री भूसरेड्डी के कुशल निर्देशन एवं प्रेरणा से इस कार्य को सम्पन्न किया जा सका।

 

  सिंह ने यह भी बताया कि गन्ना विकास विभाग नित नये कीर्तिमान रच रहा है और इन्हीं कीर्तिमानों मे एक और अध्याय के रूप मे यह पुस्तक ज्ञान का दीपक साबित होगी। उन्होने यह भी कहा कि इस सकंलन के माध्यम से कार्मिकों से होने वाली वित्तीय अनियमितताओं एवं त्रुटियों पर लगाम लगेगी। श्री सिंह ने विभाग के समस्त कार्मिकों से अपील की कि वह इस संकलन को सहेज कर रखें तथा अध्ययन कर विभाग केे हितधारक पक्षों को सहूलियत पहुचायें।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संजय आर. भूसरेड्डी द्वारा अपने उद्बोधन मे सर्वप्रथम कोराना महामारी से दिवंगत हुए कार्मिकों को श्रद्धांजलि दी गयी तथा विभागीय अधिकारियो और कार्मिकों से अपील की गयी कि वह कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए शासकीय कार्यो का सम्पादन करें। ऑनलाइन पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के अवसर पर समस्त विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्होने इस पुस्तक को कार्मिकों की दिन-रात की मेहनत का प्रतिफल बताया। उन्होनें कहा कि विभागीय अधिकारियो और कार्मिकों द्वारा समिति प्रापर्टी प्रबन्धन हेतु दिन-रात मेहनत कर सहकारी गन्ना समितियों का पुनरुद्धार किया गया है। इस सम्पत्ति की रक्षा और अपने कर्तव्यों का निर्वहन एक ट्रस्टी के रूप मे करेंतथा अपनी संस्था के प्रति आदर का भाव विकसित करे। 

 भूसरेड्डी ने पुस्तक के बारे मे कहा कि कोई भी संस्था अपने उद्देश्यों की पूर्ति तभी कर सकती हैजब उस संस्था का संचालन करने वाले प्रतिनिधि अथवा अधिकारी एवं कर्मचारी निर्धारित व्यवस्थाअधिनियमनियमोंशासनादशों एवं उसके संचालन हेतु उच्च स्तर से प्रसारित महत्वपूर्ण आदेशों एवं निर्देशों से भिज्ञ रहंे। उन्होने कहा कि सहकारी गन्ना समितियों के कार्यो को सुगमता से सम्पादित करने के लिए यह पुस्तक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होने बताया कि यह पुस्तक शीघ्र ही सभी विभागीय कार्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध करा दी जायेगी।

पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम के समापन के समय अपर गन्ना आयुक्त (मुख्यालय) वाई.एस.मलिकद्वारा अपर मुख्य सचिव महोदय को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आभार व्यक्त किया गया। मलिक ने कहा कि इस पुस्तक से शासकीय कार्यो के प्रति विभागीय अधिकारियो एवं कार्मिकों की समझ विकसित होगीजिससे वह पारदर्षिता के साथ त्रुुटिहीन कार्य कर सकेगें। मलिक ने कहा कि यह पुस्तक समिति खण्ड के अधिकारियों और कार्मिकों की लगन एवं निष्ठा तथा दिन-रात की गई मेहनत का प्रतिफल है।

विमोचन कार्यक्रम मे मुख्यालय के अधिकारियों के साथ-साथ विभाग की सभी सह-संस्थाओं के प्रमुखों एवं सभी क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यालय के सभी अधिकारियों द्वारा कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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गाजियाबाद में आज से खुले शराब के ठेके, ग्राहकों की लगी लंबी लाइनें

गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश में बढ़ते कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए कोरोना कर्फ्यू के बीच पुलिस ने शराब की दुकानों को खोलने की इजाजत दे दी है। जिसके चलते शराब की दुकानों में ग्राहकों की लंबी-लंबी लाइन लग गई है। जिले में कोरोना संक्रमण को देखते हुए अभी तक शराब की दुकानों को भी बंद रखा गया था। लेकिन आज गाजियाबाद प्रशासन ने करोना गाइडलाइन का पालन करते हुए सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक शराब के ठेके खोलने के की इजाजत दे दी है। शराब के ठेके खुलने की खबर जैसे ही शराब के शौकीन लोगों को मिली वैसे ही सुबह से शराब के ठेकों के बाहर लंबी लंबी लाइन में लगना शुरू हो गई हैं। सुबह से ही ग्राहकों की लाइन लगी हुई है और उनकी बंपर बिक्री हो रही है। उनके पास पहले से ही काफी स्टॉक मौजूद था। लेकिन भीड़ को देखते हुए मुरादनगर कस्बे में स्थित शराब के ठेकों के बाहर भरी दोपहरी में शराब के शौकीन लोग शराब खरीद रहे हैं। इस दौरान व्यवस्था को बनाने के लिए वहां पर पुलिसकर्मी मौजूद है। जो लाइन में खड़े लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के निर्देश दे रहे हैं। शराब ठेके के कर्मचारी ने बताया कि वह लाइन में लगे लोगों के हाथों को सैनिटाइज कर रहे हैं। उसके बाद ही उनको शराब दी जा रही है।






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राशनकार्ड धारकों को 21 मई के बाद मिलेगा मुफ्त राशन

मथुरा : कोरोना काल में सभी राशन कार्ड धारकों को 21 मई के बाद से मुफ्त राशन वितरित किया जाएगा। मई और जून दो माह मुफ्त में राशन देने का शासनादेश जिला आपूर्ति अधिकारी के पास आ चुका है। प्रधानमंत्री गरीण कल्याण योजना के तहत मुफ्त में राशन का वितरण मई के दूसरे चक्र यानि 21 से 25 मई के बीच शुरु होगा।

इस योजना के तहत जिले में 11 लाख से अधिक राशन कार्ड धारकों को मुफ्त में राशन मिलेगा। लगभग 88 हजार अंत्योदय राशन कार्ड धारकों की संख्या है। 10.50 लाख से अधिक पात्र गृहस्थी वाले कार्ड धारकों की संख्या है। प्रति यूनिट पांच किलो राशन वितरित किया जाएगा। दो किलो चावल और तीन किलो गेहूं मिलेगा। जिला आपूर्ति अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि वितरण के लिए राशन आवंटित हो चुका है। कोटेदारों ने राशन का उठान भी शुरु कर दिया है। नियमित राशन 18 मई तक वितरित होगा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योगना के तहत पिछले वर्ष प्रति यूनिट पांच किलो गेहूं और चावल के अलावा प्रत्येक कार्ड धारकों को एक किलो चना देने की व्यवस्था थी, लेकिन इस बार चना का इंतजाम नहीं है। सभी कार्ड धारकोंके गेहूं और चावल वितरित किया जाएगा।






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अपनी कार में स्टाइलिश मॉडिफिकेशन करवाने से पहले जान लें इसके बारे में जरूरी बातें

नई दिल्ली : कार मॉडिफिकेशन का शौक हर किसी को होता है। कार चाहे छोटी हो या बड़ी हो उसे मॉडिफाई करवाने से उसके लुक में काफी बदलाव आ जाता है और इसी बात से आकर्षित होकर लोग अपनी कारों में कई तरह के मॉडिफिकेशन करवाते हैं। मॉडिफिकेशन का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन से हिस्से में बदलाव करवाएंगे और वह कितना बड़ा है। अगर मॉडिफिकेशन में कई दिन लगे या फिर ज्यादा समय लग रहा हो तो उसका खर्च आमतौर पर बढ़ ही जाता है क्योंकि मॉडिफिकेशन करने में आपके वाहन के कई हिस्सों को बदला जाता है। हालांकि मॉडिफिकेशन कई बार आपकी कार को भी नुकसान पहुंचाता है। तो चलिए जानते हैं कौन सा मॉडिफिकेशन आपकी कार के लिए ठीक नहीं होता है। कार सेफ्टी केज ज्यादातर लोग जब एसयूवी खरीदते हैं तो इसके सामने की तरफ एक हैवी मेटल ग्रिल लगवा देते हैं। यह हैवी मेटल ग्रिल इसलिए लगाई जाती है कि कार अगर टकरा जाए तो सामने वाले हिस्से को किसी भी तरह का नुकसान ना हो। आपको बता दें कि इस मॉडिफिकेशन से कार के अगले हिस्से को तो नुकसान से बचाया जा सकता है लेकिन कई बार इससे एक्सीडेंट के दौरान एयर बैग ना खुलने जैसी समस्या पेश आ चुकी है ऐसे में इसे लगवाना खतरे से खाली नहीं होता है। चौड़े अलाय व्हील कार में चौड़े एलॉय व्हील्स लगवाना आजकल काफी ट्रेंडिंग है इससे आपका वाहन काफी सपोर्ट ही नजर आता है लेकिन दिक्कत तब आती है जब इन व्हील्स का वजन ज्यादा हो जाता है और इससे इंजन पर दबाव पड़ने लगता है नतीजतन वाहन माइलेज नहीं देता है और आपको हर महीने फ्यूल पर हजारों रुपए खर्च करने पड़ जाते हैं ऐसे में आपको चौड़े एलॉय व्हील्स से बचना चाहिए। लोकल इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट्स पैसे बचाने के चक्कर में कई बार लोग लोकल इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट्स लग जाते हैं जिनकी वजह से कार के माइलेज पर असर पड़ता है साथ ही इसकी गारंटी वारंटी पर भी असर पड़ता है। यह लोकल पार्ट्स और इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट्स कार की वायरिंग को भी प्रभावित करते हैं ऐसे में इनसे बचना चाहिए। बेस ट्यूब कार में बेस ट्यूब लगाने से म्यूजिक की आवाज काफी भारी हो जाती है लेकिन इससे कार के इंटीरियर और इसके फ्रेम को नुकसान पहुंच सकता है क्योंकि कई बार इसका वाइब्रेशन काफी ज्यादा होता है जिससे इसे नुकसान पहुंच सकता है। ...

Price Hike: महंगी हुई आपकी पसंदीदा बाइक TVS Apache RTR 160 4V, जानिये क्या है नई कीमत!

नई दिल्ली : Price Hike: स्वदेशी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी टीवीएस की लोकप्रिय बाइक TVS Apache RTR 160 4V की कीमत में कंपनी ने वृद्धि की है। यह खबर इस पॉपुलर बाइक के चाहने वालों को थोड़ा निराश,हताश जरूर कर सकती है। लेकिन इसमें भी एक अच्छी बात यह है कि कंपनी ने अपनी इस स्पोर्ट्स बाइक पर सिर्फ 1,250 हजार रुपये की बढ़ोतरी की है। वहीं टीवीएस पहली कंपनी नहीं है जिसने मई के महीने में अपनी बाइक की कीमत में इजाफा करने का फैसला किया है इससे पहले होंडा टू-व्हीलर्स भी अपनी लोकप्रिय बाइक Honda H'ness CB350 के दामों में भी पूरे 3,405 हज़ार रुपये की बढ़ोतरी की थी। इस ऑफ रोडर रेट्रो लुक वाली बाइक की टक्कर Royal Enfield Meteor से होती है। नई कीमत : टीवीएस कंपनी ने अपनी अपाचे आरटीआर 160 4वी अब 1,250 रुपये महंगी हो गई है। बढ़ी कीमतों के बाद अब इसके ड्रम ब्रेक वाले वेरिएंट की दिल्ली एक्स-शोरूम कीमत 108,565 रुपये हो गई है। वहीं, इसके डिस्क ब्रेक वाले वेरिएंट की कीमत 111,615 रुपये हो गई है। गौरतलब है कि युवाओं के बीच टीवीएस कंपनी की अपाचे खासा पॉपुलर है और इसे काफी पसंद किया जाता है। मार्च में हुई लांचिंग : बता दें कि कंपनी ने अपनी 2021 Apache RTR 160 4V को इस साल 2021 मार्च महीने में लॉन्च किया था, जो इसके 2020 मॉडल की तुलना में 3,000 रुपये ज्यादा महंगी थी। बाइक के 2020 के मॉडल से अगर Apache RTR 160 4V के 2021 मॉडल की तुलना की जाए तो वजन में यह बाइक बीते वर्ष वाली बाइक के मुकाबले 2 किलोग्राम हल्की भी है। इसके डिस्क वेरिएंट का वजन 147 किलोग्राम है। वहीं, इसके ड्रम ब्रेक वेरिएंट का वजन 145 किलोग्राम है। अपडेटेड मॉडल में अब नई डुअल-टोन सीट के साथ कार्बन फाइबर पैटर्न भी दिया गया है। इंजन : टीवीएस अपाचे आरटीआर 160 4वी में BS6 कम्प्लायंट वाला 159.7cc सिंगल-सिलिंडर, 4-स्ट्रोक, 4-वाल्व, ऑयल-कूल्ड इंजन दिया गया है। जो 17.4 bhp की मैक्सिमम पावर और 14.73 Nm का पीक टॉर्क जनरेट करने में सक्षम है। यह इंजन 5-स्पीड गियरबॉक्स ट्रांसमिशन से लैस है। बाइक का लुक बेहद ही अग्रेसिव और अट्रैक्टिव है। कंपनी ने इसे खासतौर पर युवाओं को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया है।...

पुलिस के रवैये के खिलाफ पत्रकारों ने दिया ज्ञापन

अजमेर : राजस्थान में अजमेर जिले के नसीराबाद में पत्रकारों से पुलिस के द्वेषतापूर्ण रवैये को लेकर आज पत्रकारों ने उपखंड अधिकारी के समक्ष विरोध दर्ज कराया। नसीराबाद पत्रकार संघ के पत्रकार आज नसीराबाद में उपखंड कार्यालय पहुंचे और उपखंड अधिकारी को नसीराबाद सिटी थाना प्रभारी भंवर सिंह गौड़ के खिलाफ ज्ञापन दिया। पत्रकारों का आरोप है कि भंवर सिंह गौड़ कोरोना महामारी के दौरान पत्रकारों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं तथा समाचार संकलन में भी बाधक बनते हैं, जबकि कोरोना नियमों की गाइडलाइनों में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को इस आपदा के समय में भी पास दिखाकर समाचार संकलन के लिए आवाजाही की अनुमति प्रदान कर रखी है। पत्रकारों ने कहा कि थाना प्रभारी गौड़ द्वेषता पूर्ण रवैया करते हुए पत्रकारों को अभद्रता से व्यवहार करते हैं जिससे नसीराबाद कस्बे के पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों ने बताया कि थाना प्रभारी के खिलाफ उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की गयी है। यदि यहां से भी कोई कार्रवाई नहीं होती है तो फिर नसीराबाद के पत्रकार अगली रणनीति बनाएंगे। ...

बिजली बिलों से संबंधित उपभोक्ताओं को कोई समस्या आती है तो वे टोल फ्री नंबर पर करें संपर्क

कैथल : हरियाणा बिजली वितरण निगमों के बिलिंग सॉफ्टवेयर में आई तकनीकी त्रुटि के कारण 16 अप्रैल 2021 से 26 अप्रैल 2021 की अवधि के दौरान लगभग 1.40 लाख उपभोक्ताओं के स्पॉट बिल गलत बकाया राशि के साथ जारी हो गए थे। इस त्रुटि के कारण कई शहरों में उपभोक्ताओं को पिछले बिलों का भुगतान करने के बावजूद गलत बकाया राशि मिली यद्यपि बिलिंग सिस्टम में उपरोक्त बिल बिल्कुल ठीक बने हैं और जो उपभोक्ता ऑनलाइन या विभाग के काउंटर पर जाकर बिल भरते हैं, वहां दिखाई गई बिल की राशि में बकाया संबंधित कोई त्रुटि नहीं है। यह जानकारी देते हुए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के अधीक्षक अभियंता बीएस रंगा ने बताया इस त्रुटि के कारण उपभोक्ताओं को हुई असुविधा के मद्देनजर बिजली निगमों द्वारा प्रभावित उपभोक्ताओं के बिजली बिल भरने की तारीख को आगे बढ़ाकर नए बिल जारी कर दिए गये हैं। इस संबंध में किसी भी अन्य जानकारी के मामले में उपभोक्ता ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क करने के लिए यूएचबीवीएन के टोल फ्री नंबर 1912, 18001801550 तथा डीएचबीवीएन के टोल फ्री नंबर 18001804334 पर कॉल कर सकते हैं या यूएचबीवीएन के उपभोक्ता व्हाट्सएप नंबर 9815961912 और डीएचबीवीएन के उपभोक्ता व्हाट्सएप नंबर 88139-99708 पर मैसेज कर सकते हैं। हरियाणा के बिजली वितरण निगम अपने उपभोक्ताओं के हितों के प्रति सदैव तत्पर हैं और प्रदेश में निरंतर निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए वचनबद्ध हैं।...

फसलों को हो रहा नुक्सान , उपभोक्ताओं को चौबीसो घंटे मिले बिजली

हिमाचल प्रदेश: किसानों पर एक तो सूखे की मार पड़ रही है, ऊपर से गेहूं की फसलें लगातार आगजनी की भेंट चढ़ती जा रही हैं। गेहूं की फसलें आखिर किस तरह आए दिन आगजनी की भेंट चढ़ती जा रही हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। बिजली के शार्ट सर्किट की वजह से जलने वाली फसलों के मालिकों को विद्युत विभाग क्या मुआवजा देकर अपनी गलती में सुधार करेगा? हिमाचल प्रदेश में तूफान आने से अगर बिजली गुल हो जाए तो उपभोक्ताओं को घंटों अंधेरे में रहना पड़ता है। हिमाचल प्रदेश विद्युत विभाग की मालिया हालत की वजह से ऐसी किसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोई खास योजना नहीं है। प्रदेश सरकार बेशक पहाड़ की जनता को कम्प्यूटरयुक्त मीटर लगाकर उसके बिल भुगतान पर रियायत देने की बातें कर रही हो, मगर सच्चाई यह है कि विद्युत विभाग के पास कर्मचारियों का अभाव होने से खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ रहा है। यही नहीं, विद्युत विभाग उपभोक्ताओं को अनुमान से बिजली बिल अतिरिक्त थमाकर उनकी मुसीबतें और बढ़ा रहा है। विभाग के पास कर्मचारियों का अभाव होने की वजह से कार्यालयों में बैठकर ही बिजली बिल अनुमान से काटे जा रहे हैं। महीनों बाद समय मिलने के बाद कर्मचारी उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बिजली बिल थमाकर यही उपदेश देते हैं कि आपका पिछला बकाया निकला है। डिजिटल सिस्टम की अगर इस तरह की कार्यप्रणाली है तो बेहद शर्मनाक है जो कि उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन रही है। जनसंख्या अनुसार विद्युत कर्मचारियों की नियुक्ति किया जाना अब समय की मांग है। आलम यह है कि अगर रात के समय बिजली गुल हो जाए तो उपभोक्ताओं को विद्युत विभाग के कार्यालयों में सिवाय दरवाजे पर लटके तालों के कुछ नहीं मिलता है। विभाग के कार्यालय के बाहर किसी शिकायत लॉगबुक का भी मौजूद न होना उसकी कार्यप्रणाली को दर्शाता है। सरकार जनमंचों के माध्यम से जनता की समस्याओं का प्राथमिकता के तौर पर समाधान करवा रही है, मगर विद्युत विभाग की सेवाएं पहाड़ की जनता को चौबीसों घंटे मिले, इसके लिए योजना बनाने की अब जरूरत है। विद्युत विभाग बिजली पोल में बिछाई जाने वाली बिजली की तारों को अधिकतर बिना स्पेसर डाले ही लटका देता है। बिजली की तारों को समय पर न कसने की वजह से वे अक्सर नीचे लटककर रह जाती हैं। ऐसी सूरत में अगर मामूली तूफान भी आए तो यह बिजली की तारें आपस में टकराकर स्पार्किंग पैदा करते ही बिजली ट्रांसफार्मर से फ्यूज को उड़ा देती हैं और बिजली गुल हो जाती है। विद्युत विभाग के कुछेक कर्मचारी इसे प्राकृतिक समस्या का नाम देकर जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियां सही ढंग से नहीं निभा पा रहे हैं। नतीजतन रात भर लोग अंधेरे में ही रहने को मजबूर हुए जा रहे हैं। यही नहीं, पेड़ों की टहनियों के अक्सर बिजली की तारों से टकरा जाने से भी बिजली बाधित हो जाती है। बिजली तारों की मुरम्मत समय पर न होने की ृवजह से भी वे कहीं से भी टूट कर अप्रिय घटनाओं को अंजाम दे सकती हैं। बिजली ट्रांसफार्मर पर भी सुरक्षा के प्रबंध कोई खास नहीं दिखते, जिसके चलते कोई भी अनहोनी घटना घटित हो सकती है। विभाग सप्ताह में एक दिन कभी-कभार बिजली की तारों की मरम्मत कर रहा है। स्टाफ के अभाव के चलते लोगों को खासकर गर्मियों में चौबीस घंटे बिजली की सुविधा पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रही है। अगर बिजली का ट्रांसफार्मर जल जाए तो उसकी रिपेयर करने में ही कई दिन लग जाते हैं। इस बीच विभाग के पास कोई स्थायी तौर पर विकल्प नहीं होता ताकि बिजली सप्लाई चलाई जा सके। बिजली बिलों का समय पर उपभोक्ताओं को न मिलना उनके घरेलू आर्थिक बजट को डगमगा कर रख देता है। विभाग के कर्मचारी अब तो मीटर रीडिंग का आकलन किए बगैर ही अनुमान से बिजली बिल काटना अपनी आदत बना चुके हैं। गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लोगों को बिजली की जरूरत भी कहीं अधिक बढ़ जाती है। चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाने के लिए बिजली चालित पंखों पर ही लोग ज़्यादातर निर्भर करते हैं। अंधेरी रातों में अचानक बिजली का बाधित हो जाना लोगों के लिए बहुत बड़ी परेशानी का सबब बनकर रह जाता है। पहाड़ में प्राकृतिक जल स्रोत बिल्कुल खत्म होने की कगार पर चल रहे हैं। जनता सिर्फ बिजली से चलने वाली जल शक्ति विभाग की स्कीमों पर ही आश्रित हैं। ऐसे में बिजली का बाधित हो जाना आम जनमानस के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनकर रह जाता है। गर्मियों में जहां बिजली लोगों की अत्यधिक जरूरत बन जाती है, वहीं बिजली ट्रांसफार्मर पर लोड का बोझ भी पहले की अपेक्षा कहीं अधिक बढ़ जाता है। इसी वजह से कई बार लोगों के घरों में बिजली के उपकरण लोड बढ़ने और घटने के कारण जलकर रह जाते हैं। विभाग ने क्या कभी इस तरह जलने वाले उपकरणों की जिम्मेदारी लेना गवारा समझा है? बिजली बाधित रहने से जहां लोग समस्याएं झेलते हैं, वहीं इंडस्ट्रीज मालिकों का कामकाज भी ठप होकर रह जाता है। सरकारी विभागों की अहम जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रदेश की जनता को अपनी कुशल कार्यप्रणाली से अवगत करवाएं। पहाड़ के लोग भोले-भाले होने की वजह से विभागों के आला अधिकारी उनकी समस्याओं को जल्द नहीं निपटाना चाहते हैं। प्रदेश सरकार ने अब नए लगने वाले बिजली मीटरों को बगैर एनओसी लिए ही लगाए जाने का सराहनीय फैसला किया है। पहाड़ बिजली उत्पादन का जन्मदाता है जो दूसरे राज्यों को भी सप्लाई दे रहा है। यही एकमात्र कारण है कि अन्य राज्यों की तुलना में हिमाचल प्रदेश में बिजली अभी भी सस्ती दरों पर लोगों को मुहैया करवाई जा रही है। उपभोक्ताओं की भी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे बिजली का अनावश्यक इस्तेमाल न करें और सरकार की मदद करें। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की सरकार विद्युत विभाग में चल रही स्टाफ की कमी को पूरा करने लिए नई भर्ती शुरू करे। विद्युत कर्मचारियों की ड्यूटी तीन शिफ्टों में लेकर जनता को इस समस्या से राहत दिलाई जाए। ...

शिकायतों वाले प्रमुख क्षेत्रों का पता लगाने के लिए सोशल ऑडिट समितियां बनें: संसदीय समिति

नई दिल्ली, 25 मार्च (वेबवार्ता)। सरकार के दो मंत्रालयों के खिलाफ दो लाख से अधिक शिकायतें मिलने और अन्य आठ मंत्रालयों के खिलाफ करीब 50 हजार से एक लाख तक शिकायतें मिलने का संज्ञान लेते हुए संसद की एक समिति ने केंद्र सरकार से सोशल ऑडिट समितियां बनाने को कहा है जो शिकायत वाले प्रमुख क्षेत्रों की पहचान कर प्रणाली को दुरुस्त करेंगी। समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग से सिफारिश की है कि शिकायत निवारण की अधिकतम समयसीमा को तेजी से घटाकर 60 दिन से 45 दिन पर लाया जाए। रिपोर्ट में समिति ने इस बात पर चिंता जताई है कि 2018 से 2020 के दौरान आठ मंत्रालयों और विभागों के खिलाफ 50 हजार से एक लाख शिकायतें मिली हैं, चार मंत्रालयों और विभागों के खिलाफ एक से दो लाख शिकायतें मिली हैं तथा दो मंत्रालयों और विभागों के खिलाफ दो लाख से अधिक शिकायतें मिली हैं। कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय पर विभाग संबंधी स्थायी समिति ने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की अनुदानों की मांगों (2021-22) पर 106वीं रिपोर्ट में कहा, ‘‘समिति विभाग से सिफारिश करती है कि केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों को शिकायत वाले प्रमुख क्षेत्रों को चिह्नित करने और तदनुसार प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए सोशल ऑडिट समितियां गठित करने का निर्देश दिया जाए।’’ भारत सरकार ने शिकायत निवारण के लिए ऑनलाइन प्रणाली के रूप में केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) स्थापित की है। ...