ईरान के राष्ट्रपति रईसी की हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का हेलीकॉप्टर क्रैश में निधन हो गया है. हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हुए ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी, विदेश मंत्री और अन्य लोगों के शव दुर्घटनास्थल से मिलने की भी पुष्टि हो चुकी है. राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी 63 वर्ष के थे. ईरानी राष्ट्रपति के निधन पर पीएम मोदी ने भी दुख जताया. पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा," ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के निधन से गहरा दुख और सदमा लगा है. भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. उनके परिवार और ईरान के लोगों के प्रति संवेदना. दुख की इस घड़ी में भारत ईरान के साथ खड़ा है."

क्रैश हेलीकॉप्टर का मलबा मिला

ईरान में बचाव दल को उस हेलीकॉप्टर का मलबा मिल गया है जो रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. हेलीकॉप्टर में राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान के अलावा सात अन्य लोग सवार थे. इससे पहले ईरानी रेड क्रिसेंट के प्रमुख पीर-हुसैन कुलिवंद ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर बताया था कि कई घंटों की खोज के बाद आपात सेवा की टीम अब भी क्रैश वाली जगह से दो किलोमीटर दूर है. हालांकि उन्होंने हेलीकॉप्टर को देख लिया है और उसकी पहचान कर ली है.

अजरबैजान के पहाड़ी इलाके में लापता हुआ था हेलिकॉप्टर

राष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर रविवार को ईरान के उत्तर पश्चिमी प्रांत ईस्ट अजरबैजान के पहाड़ी इलाके में लापता हो गया था. इसके बाद से ही हेलीकॉप्टर की तलाश जारी थी. इससे पहले, ईरानी मंत्रिमंडल ने रविवार शाम एक आपात बैठक की. सरकारी समाचार एजेंसी इरना की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के प्रथम उप राष्ट्रपति मोहम्मद मुखबर ने इसकी अध्यक्षता की. जानकारी के मुताबिक ये हादसा ऐसी जगह हुआ, जहां घना जंगल और पहाड़ी है.

ईरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई ने आपात बैठक की

ईरान सरकार ने तलाश के लिए 40 टीमें बनाई गई. ईरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई ने आपात बैठक की. साथ ही रिवोल्यूशनरी गार्ड को अलर्ट पर रखा गया. आपको बता दें कि कुर्द इलाक़ों में पिछले साल हुए सरकार विरोधी आंदोलन हुए थे. जो बेल 212 हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ वो अमेरिका में बना था. बेल 212 हेलीकॉप्टर में ईरानी राष्ट्रपति सवार थे. बेल 212 दो ब्लेड वाला मध्यम आकार वाला हेलीकॉप्टर है. इसमें पायलट समेत 15 लोग सवार हो सकते हैं.

हेलिकॉप्टर में कौन-कौन था सवार?

राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी

विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान

पूर्वी अज़रबैजान के गवर्नर मलिक रहमती

धर्मगुरू अयातुल्ला अल हाशिम

पायलट, को-पायलट, क्रू चीफ

हेड ऑफ सिक्योरिटी, बॉडीगार्ड 

हादसे का कारण अभी तक मालूम नहीं

सरकारी टीवी ने पूर्वी अजरबैजान प्रांत में हुए इस हादसे का कोई कारण अभी नहीं बताया है. बताया गया कि इस हादसे में रईसी के साथ जिन लोगों के शव मिले हैं, उनमें ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीराब्दुल्लाहियन (60) भी शामिल हैं. सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए' की खबर के अनुसार, रईसी के साथ ईरान के विदेश मंत्री अमीराब्दुल्लाहियन, ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत के गवर्नर एवं अन्य अधिकारी और अंगरक्षक भी यात्रा कर रहे थे.

ड्रोन फुटेज में जंगल में लगी आग दिखीं

तुर्किये के प्राधिकारियों ने सोमवार की सुबह ड्रोन से ली एक फुटेज जारी की जिसमें जंगल में आग लगी दिखायी दी. उन्होंने इसके ‘‘हेलीकॉप्टर का मलबा होने का संदेह'' जताया. उन्होंने एक दुर्गम पहाड़ी पर अजरबैजान-ईरान सीमा से करीब 20 किलोमीटर दक्षिण में यह आग लगी होने की जानकारी दी. आईआरएनए द्वारा सोमवार को सुबह जारी फुटेज में दुर्घटनास्थल को पहाड़ी इलाके में एक दुर्गम घाटी बताया गया.

ईरान ने पिछले महीने ही इजराइल पर किया था ड्रोन हमला

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब रईसी और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने पिछले महीने इजराइल पर एक जबरदस्त ड्रोन और मिसाइल हमला किया था. इसके अलावा ईरान का यूरेनियम संवर्धन भी हथियार बनाने के लिए आवश्यक स्तर के करीब पहुंच गया है. इसकी वजह से देश और पश्चिमी देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है. तेहरान ने यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को बम ले जाने वाले ड्रोन की आपूर्ति भी की और पूरे क्षेत्र में सशस्त्र मिलीशिया समूहों को भी भेजा.


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ईरान ने जब्त किए जहाज से रिहा किए 5 भारतीय

ईरान ने 13 अप्रैल को जब्त किए जहाज MSC एरीज पर सवार 5 भारतीय को रिहा कर दिया है। ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास ने गुरुवार को बताया कि सभी लोग भारत के लिए रवाना हो गए हैं। उन्होंने ईरान अधिकारियों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

दरअसल, इजराइल पर हमले से पहले ईरान ने भारत आ रहे पुर्तगाल के झंडे वाले एक जहाज को ओमान की खाड़ी में होर्मुज पास से जब्त किया था। इस पर 25 क्रू मेंबर मौजूद थे जिनमें 17 भारतीय और दो पाकिस्तानी थे। यह शिप इजराइली अरबपति की एक कंपनी का था। बचे हुए 11 सदस्य अब भी ईरान की कैद में हैं। इससे पहले 18 अप्रैल को एक भारतीय महिला कैडेट एन टेसा जोसेफ को रिहा किया गया था।

भारत ने अब तक क्या किया?

भारत के विदेश मंत्रालय ने जोसेफ की रिहाई पर कहा था कि सरकार शिप पर मौजूद बाकी 16 भारतीयों के संपर्क में हैं। क्रू के सारे सदस्य स्वस्थ हैं और भारत में अपने परिवारों के साथ बातचीत कर चुके हैं। इन लोगों की घर वापसी के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत की जा रही है।

डिप्लोमेटिक चैनल्स के जरिए भारत का विदेश मंत्रालय लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है। जहाज पर फंसे बचे हुए भारतीयों को छुड़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले 14 अप्रैल को विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया था कि इस मामले को लेकर उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बात की है। इसके बाद भारतीय दूतावास से जुड़े अधिकारियों को क्रू में शामिल भारतीय नागरिकों से मिलने की इजाजत मिल गई थी।

18 अप्रैल को ईरान से भारत लौटी महिला क्रू सदस्य ने बताया कि उन्हें ईरान में किसी चीज की दिक्कत नहीं हो रही है। वहां के अधिकारी उनसे अच्छा बर्ताव कर रहे हैं। उन्हें खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं थी। वे अपनी मेस में मर्जी से खाना पका सकते थे। वहीं इससे एक दिन पहले 17 अप्रैल को 2 पाकिस्तानी क्रू सदस्यों को रिहा कर दिया गया था।

शिप UAE से रवाना होकर भारत आ रहा था

13 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत आ रहे इजराइली अरबपति की कंपनी के एक जहाज MCS एरीज को ईरान की सेना ने कब्जे में ले लिया था। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडो UAE से रवाना हुए जहाज पर हेलिकॉप्टर से उतरे थे।

ईरान ने आरोप लगाया था कि शिप बिना इजाजत उनके इलाके से गुजर रहा था। इस घटना के बाद ईरान और इजराइल के बीच तनाव और बढ़ गया था। घटना के अगले दिन 14 अप्रैल को ईरान ने इजराइल पर हमला कर दिया था।

होर्मुज पास से गुजरता है दुनिया का 20% तेल

ईरान ने जिस होर्मुज पास में जहाज पर कब्जा किया है, वहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। ईरानी सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने 2023 में दावा किया था कि ईरान ने होर्मुज पास में कई सौ बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें तैनात की हैं। जो एक के बाद एक लगातार कई टारगेट पर हमला कर सकती हैं।

ईरान ही नहीं बल्कि अमेरिका ने भी तेजी से इस इलाके में सैनिकों और हथियारों की तैनाती की थी। अमेरिका ने अपना A-10 थंडरबोल्ट 2 वॉरप्लेन, F-16 और F-35 फाइटर जेट तैनात किए हैं। इसके अलावा अमेरिका के कई युद्धपोत भी इस इलाके में मौजूद हैं।



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उत्तर कोरिया में पसरा मातम, रात 2 बजे देश की न्यूज एजेंसी को देनी पड़ी जानकारी

उत्तर कोरिया में इस समय शोक की लहर है। दरअसल, देश के दिग्गज नेता किम की नाम की मंगलवार को 94 साल में निधन हो गया। उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) को आधी रात में इसकी जानकारी देनी पड़ी।

एजेंसी ने बताया कि देश के नेता किम जोंग उन ने मंगलवार देर रात 2 बजे राजधानी प्योंगयांग में किम की नाम को श्रद्धांजलि दी और परिवार के सदस्यों के प्रति संवेदना व्यक्त किया।

कौन थे किम की नाम?

बता दें कि किम की नाम, सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले उत्तर कोरियाई अधिकारियों में से एक, नेता थे। इन्होंने देश के नेताओं की सभी तीन पीढ़ियों को उनकी राजनीतिक वैधता को मजबूत करने और वंशवादी राज्य के लिए प्रचार तंत्र का नेतृत्व करने के लिए सेवा प्रदान की।

रात के 2 बजे उत्तर कोरिया के नेता पहुंचे 

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने रात 2 बजे किम की अर्थी के दर्शन किए। वह उत्तर कोरिया के एक अनुभवी नेता थे, जो अंत तक देश के प्रति असीम रूप से वफादार रहे।  वह वफादार अधिकारियों के एक मुख्य समूह का हिस्सा थे, जिन्होंने किम की तीन पीढ़ियों को बनाए रखने के लिए काम किया था। 

तीन पीढ़ियों की संभाली जिम्मेदारी

किम उन बहुत कम उत्तर कोरियाई अधिकारियों में से एक थे जिन्होंने दक्षिण का दौरा किया था। उन्होंने 2009 में राष्ट्रपति किम डे-जंग की मृत्यु के बाद एक अंतिम संस्कार प्रतिनिधिमंडल का भी नेतृत्व किया था। दक्षिण कोरियाई सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वह 1985 में राज्य के संस्थापक किम इल सुंग के शासन के दौरान प्रमुख बने और 2017 में सेवानिवृत्त हुए। वह विशेष रूप से वर्तमान नेता के पिता किम जोंग-इल के करीबी थे, जिनकी 2011 में मृत्यु हो गई थी। माना जाता है कि वह उनके 'शराब पीने वाले दोस्तों में से एक थे।'


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ईरान के बाद अब इराक पर मिसाइल अटैक, दो सैन्य अड्डे तबाह

इराक के सैन्य अड्डों पर आज जबरदस्त हवाई हमले हुए हैं। ये हमले बगदाद के दक्षिण में बाबिल प्रांत में आधी रात को एक अज्ञात विमान द्वारा किए गए, जिसमें दो इराकी सैन्य ठिकानों पर बमबारी की गई। हवाई हमले ड्रोन के जरिए किए गए और दो ठिकानों को निशाना बनाया गया। 

जानकारी के अनुसार, ये हमले इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) की ओर से इस्तेमाल किए गए सैन्य अड्डे पर हुए। इन हमलों में तीन लोग घायल भी हुए हैं।

गोला-बारूद का गोदाम तबाह

सूत्रों के अनुसार, इराकी अर्धसैनिक हश्द शाबी बल बाबिल प्रांत के उत्तरी भाग में ये हमला हुआ। हमले में दों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें में एक हश्द शाबी बलों का गोला-बारूद का गोदाम तबाह हो गया और दूसरा हमला टैंक मुख्यालय पर हुआ।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के हवाले से सूत्र ने कहा कि बगदाद से लगभग 30 किमी दक्षिण-पूर्व में मडेन इलाके में विस्फोटों की आवाज सुनी गई, लेकिन विस्फोटों के बारे में पुख्ता जानकारी अभी नहीं है।

अमेरिका और इजरायल का हमले से इनकार

इराक पर हमले को लेकर अमेरिका और इजरायल दोनों ने इनकार किया है। दोनों देशों ने कहा कि इसमें उनका कोई हाथ नहीं है। इससे पहले अमेरिका ने ही ऐन-अल-असद हवाई अड्डे पर एक हमले को नाकाम किया था। यहां अमेरिका और अन्य देशों के सैन्य बल मौजूद हैं।

PMF से ईरान का कनेक्शन

बता दें कि पीएमएफ एक ईरान समर्थित संगठन है, जिसमें एक लाख से ज्यादा लड़ाके हैं। सीरिया पर इसी संगठन ने कई बार हमले किए हैं और ये अमेरिका और इजरायल को भी कई बार धमकियां दे चुका है।


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Iran के परमाणु केंद्रों वाले शहरों पर मिसाइल हमला

इजरायल की जवाबी कार्रवाई के बाद ईरान दहल उठा है। इजरायल (Israel News) ने आज सुबह अपनी तय रणनीति के अनुसार, ईरान के कई शहरों में मिसाइल अटैक किया। ये धमाके ईरान के न्यूक्लियर प्लांट वाले शहरों में किया गया है। इसी के साथ ईरानी हवाईअड्डे और उसके एयरबेस को निशाना बनाकर भी हमले किए गए हैं। 

इजरायल ने ईरान (Iran Israel Conflict) के इस्फहान शहर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। यहीं ईरान का एक प्रमुख एयरबेस और मिलिट्री रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर भी हैं। आखिर, इजरायल के हमले में ईरान को क्या-क्या नुकसान हुआ और हमले के बाद का क्या नया अपडेट है, आइए जानते हैं...

इजरायल के इस अटैक को ईरान के एक सप्ताह पहले किए गए हमले के बदले के रूप में देखा जा रहा है। 

इजरायल ने ईरान के तीसरे सबसे बड़ी आबादी वाले शहर इस्फहान पर हमला किया है। इसमें ईरान के एयरपोर्ट और सेना के एयरबेस को ड्रोन और मिलाइल से निशाना बनाया गया है।

इजरायल के हमले की सूचना मिलते ही ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया, जिससे इजरायल के कई ड्रोन मार गिराए गए।

दूसरी ओर ईरानी मीडिया का कहना है कि वहां मिसाइल अटैक नहीं हुआ है और कुछ ड्रोन हमलों को भी नाकाम किया गया है।

यूएस फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन डेटाबेस के अनुसार, ईरान ने हमले के बाद तेहरान के इमाम खुमैनी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की सभी उड़ानों को बंद कर दिया है। 

बता दें कि इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने देश पर हुए ईरानी हमले के बाद बदला लेने की कसम खाई थी। इजरायली पीएम ने इसके बाद युद्ध कैबिनेट के साथ बैठक के बाद हमले का स्थान और समय तय किया था। माना जा रहा है कि इसी बैठक में हमले को लेकर पूरी रणनीति बनी थी।

इससे एक हफ्ते पहले ईरान ने इजरायल पर कई मिसाइल और ड्रोन अटैक किए थे। ईरान ने आरोप लगाया था कि इजरायल ने दमिश्क में उसके राजदूतों की हत्या की थी, जिसका उसने बदला लिया है।


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एयर इंडिया ने ईरान के एयरस्पेस से गुजरना किया बंद

मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है, जिसका असर अब हवाई सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया फ्लाइट्स ने शनिवार (13 अप्रैल) को ईरानी एयरस्पेस से गुजरना बंद कर दिया है. ईरान ने इजरायल पर हमले की चेतावनी दी है. सूत्रों ने बताया है कि यूरोप जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट्स ईरानी एयरस्पेस से बचते हुए लंबे रास्ते से अपने डेस्टिनेशन पर जा रही हैं. 

दरअसल, एक अप्रैल को सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरानी वाणिज्य दूतावास पर इजरायली फाइटर जेट्स ने हमला किया था. इसकी वजह से ईरान और इजरायल के बीच तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया. ईरान के मीडिया के अनुसार इजरायली हमले में दो जनरल समेत रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के सात जवान मारे गए थे. ईरान ने उसी वक्त बदले के संकेत दे दिए थे और शुक्रवार (12 अप्रैल) से ही उम्मीद जताई जा रही है कि तेहरान किसी भी वक्त हमला कर सकता है.

रविवार को ईरान कर सकता है हमला!

अमेरिका समेत कई देशों की खुफिया एजेंसियों का कहना है कि ईरान रविवार तक इजरायल पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है. अगर ये हमला हुआ तो इसकी वजह से मिडिल ईस्ट में जबरदस्त जंग छिड़ सकती है. दोनों ही देशों के बीच छद्म युद्ध तो लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब सीधी जंग का खतरा मंडराने लगा है. ऐसा ही तनावपूर्ण माहौल 2020 में भी देखने को मिला था, जब इजरायली हमले में ईरान के टॉप कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी. 

इजरायल को सजा जरूर मिलेगी: अयातुल्लाह अली खामनेई

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई ने इस हफ्ते की शुरुआत में चेतावनी देते हुए कहा था कि इजरायल को सजा जरूर मिलनी चाहिए और उसे मिलेगी. उन्होंने कहा था, "किसी भी देश में वाणिज्य दूतावास और दूतावास कार्यालय उसी देश का हिस्सा होते हैं. जब उन्होंने हमारे दूतावास पर हमला किया, तो इसका मतलब है कि उन्होंने हमारे इलाके पर अटैक किया है." उनके एक एडवाइजर ने यहां तक कह दिया था कि इजरायली दूतावास ज्यादा सुरक्षित नहीं हैं. 

ईरान ने हमला किया तो देंगे जवाब: इजरायल

इजरायली सेना ने कहा है कि इसने अभी तक नागरिकों के लिए ताजा एडवाइजरी जारी नहीं की है, लेकिन वह पूरी तरह से हाई अलर्ट पर है. उसने कई तरह के हालातों के लिए तैयारी की हुई है. गुरुवार को विदेश मंत्री इजरायल कात्ज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फारसी भाषा में ट्वीट किया था. इसमें उन्होंने कहा था, "अगर ईरान अपने इलाके से हमला करता है, तो इजरायल भी जवाबी कार्रवाई करेगा और ईरान पर हमला किया जाएगा."

भारत ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी

वहीं, भारत, फ्रांस, रूस, अमेरिका समेत कई मुल्कों ने अपने नागिरकों से मिडिल ईस्ट के इन दोनों ही देशों की यात्रा करने से बचने को कहा है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, "क्षेत्र में मौजूदा स्थिति के मद्देनजर सभी भारतीयों को सलाह दी जाती है कि अगले नोटिस तक ईरान या इजरायल की यात्रा नहीं करें. वे सभी जो वर्तमान में ईरान या इजरायल में रह रहे हैं, उनसे अनुरोध है कि वे वहां भारतीय दूतावासों से संपर्क करें और अपना पंजीकरण कराएं."


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दुनिया के लिए आफत बन गया चीन का ये अनोखा कीड़ा

भारत का पड़ोसी देश चीन अक्सर अपने कारनामों की वजह से दुनिया में बदनाम होता है. कभी किसी वायरस की वजह से तो कभी अपनी गलत सीमा नीतियों की वजह से. लेकिन इस बार चीन अपने यहां के एक कीड़े की वजह से दुनियाभर में बदनाम हो रहा है. दरअसल, चीन का ये अनोखा कीड़ा पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है. इसके अंदर इतनी शक्ति है कि यह पूरा का पूरा जंगल तबाह कर सकता है.

कौन सा है ये कीड़ा?

हम जिस कीड़े की बात कर रहे हैं. उसे लॉन्ग हॉर्न बीटल कहा जाता है. एक समय तक ये सिर्फ चीन, ताइवान और कोरिया के कुछ हिस्सों में ही पाया जाता था. हालांकि, आज ये दुनिया के कई देशों में पहुंच गया है. ये कीड़ा पेड़ों के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक है. लेकिन अगर ये आपके घर के अंदर पहुंच गया तो वहां मौजूद लकड़ी की हर चीज तबाह कर सकता है.

इसे भगाना मुश्किल है?

इस कीड़े की सबसे खास बात है कि अगर ये किसी पेड़ या पौधे में लग गया तो उसे वहां से हटाना लगभग नामुमकिन है. इसे हटाने का एक ही रास्ता है कि उस टहनी को काट दिया जाए, जिसे इसने अपनी गिरफ्त में ले लिया है. अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, मध्य पूर्व, ऑस्ट्रेलिया, स्‍व‍िटजरलैंड और भारत के कई राज्‍यों में यह कीड़ा आफत मचा रहा है.

वैज्ञानिक भी हैरान

इस कीड़े से वैज्ञानिक भी हैरान हैं. जर्मनी के हैम्बर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर ये कीड़ा आपके घर में घुस जाए तो यह आपका सोफा, डाइनिंग टेबल, कुर्सियां यहां तक खिड़कियां और दरवाजे भी खा सकता है. स्‍व‍िटजरलैंड में तो इस कीड़े की वजह से जंगल का एक पूरा हिस्सा काटना पड़ा था. खासतौर से बांस की लकड़ी को यह कीड़ा सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. दरअसल, लॉन्ग हॉर्न बीटल गोल छेद बनाता है और वहीं अंडे देते हैं. इसके बाद बच्‍चे पैदा करते हैं और फ‍िर तेजी से फैल जाते हैं.


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एक बिल्ली के कारण जापान में जारी हुआ हाई अलर्ट

जापान का एक शहर एक बिल्ली के कारण हाई अलर्ट पर है। बता दें कि वो बिल्ली देर रात में गायब होने से पहले खतरनाक रसायनों के एक टैंक में गिर गई थी।       

हिरोशिमा प्रान्त के फुकुयामा में अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने गश्त बढ़ा दी है और निवासियों को जानवर के पास न जाने की चेतावनी दी है, जिसे आखिरी बार सुरक्षा फुटेज में रविवार को एक प्लेटिंग फैक्ट्री से निकलते हुए देखा गया था।

कैंसर पैदा करने वाले रसायन में गिरी थी बिल्ली

अधिकारियों ने कहा कि सोमवार को एक कार्यकर्ता द्वारा खोजे गए पंजे के निशान से हेक्सावलेंट क्रोमियम की 3 मीटर गहरी टंकी मिली, जो एक कैंसर पैदा करने वाला रसायन है जो छूने या साँस लेने पर चकत्ते और सूजन पैदा कर सकता है।

फुकुयामा सिटी हॉल के एक अधिकारी ने कहा कि आस-पड़ोस की तलाशी के दौरान अभी तक बिल्ली नहीं मिली है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि जानवर जीवित है या नहीं।

नोमुरा मेक्की फुकुयामा फैक्ट्री के प्रबंधक अकिहिरो कोबायाशी ने कहा कि जब कर्मचारी सप्ताहांत के बाद काम पर लौटे तो रासायनिक वैट को ढकने वाली एक शीट आंशिक रूप से फटी हुई पाई गई। उन्होंने कहा, कर्मचारी तब से बिल्ली की तलाश कर रहे हैं।

कोबायाशी ने कहा, फैक्ट्री के कर्मचारी आमतौर पर सुरक्षात्मक कपड़े पहनते हैं और कर्मचारियों के बीच कोई स्वास्थ्य समस्या सामने नहीं आई है।

हेक्सावलेंट क्रोमियम के संपर्क से जा सकती है जान

हेक्सावलेंट क्रोमियम, या क्रोमियम -6, शायद 2000 की फिल्म "एरिन ब्रोकोविच" में जूलिया रॉबर्ट्स अभिनीत कैंसरजन्य रसायन के रूप में जाना जाता है।

वास्तविक जीवन के कानूनी मामले पर आधारित यह नाटकीयता एक उपयोगिता कंपनी के खिलाफ नामधारी कार्यकर्ता की लड़ाई पर केंद्रित है, जिस पर कैलिफोर्निया के ग्रामीण समुदाय में पानी को प्रदूषित करने का आरोप है, जिससे इसके निवासियों में कैंसर का स्तर बढ़ गया और मृत्यु हो गई।

यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, यह पदार्थ आंखों, त्वचा और श्वसन प्रणाली के लिए हानिकारक है।

सीडीसी ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि हेक्सावलेंट क्रोमियम के संपर्क से श्रमिकों को नुकसान हो सकता है।एक्सपोजर का स्तर खुराक, अवधि और किए जा रहे कार्य पर निर्भर करता है।

बिल्ली जल्द ही मर सकती है- विशेषज्ञ

विशेषज्ञों ने इस बात पर संदेह जताया है कि पदार्थ के संपर्क में आने के बाद बिल्ली लंबे समय तक जीवित रह सकेगी या नहीं।

स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट में रासायनिक जोखिम मूल्यांकन में विशेषज्ञता रखने वाली शोधकर्ता लिंडा शेंक ने कहा, भले ही फर त्वचा को तुरंत बड़ी जलन से बचाएगा, बिल्लियां अपने फर को चाटकर साफ करती हैं, संक्षारक घोल को मुंह में ले जाती हैं।

मेरा अनुमान है कि बिल्ली दुर्भाग्य से रासायनिक जलन से मर गई है या शीघ्र ही मर जाएगी।


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हिंद महासागर में चीन को जवाब-मॉरिशस में मिलिट्री बेस तैयार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरिशस के PM प्रविंद कुमार जगन्नाथ ने मॉरीशस के अगालेगा द्वीप में 3 किमी के रनवे और सेंट जेम्स जेट्टी सहित 6 प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया।

मुंबई से 3,729 किमी दूर मॉरिशस के उत्तरी अगालेगा द्वीप पर मिलिट्री बेस के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया गया है, इसमें रनवे, जेट्टी, विमान के लिए हैंगर शामिल है।

यहां से भारत-मॉरिशस मिलकर पश्चिमी हिंद महासागर में चीन के सैन्य जहाजों और पनडुब्बियों पर नजर रख सकेंगे।

क्या है भारत का सागर प्रोजेक्ट

भारत को घेरने और हिंद महासागर में अपना दबदबा बढ़ाने के लिए चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर, श्रीलंका के हंबनटोटा से लेकर अफ्रीकी देशों में कई पोर्ट प्रोजेक्ट में पैसा लगाया है। इसके जवाब में भारत सरकार ने 2015 में हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर आल इन द रीजन (सागर प्रोजेक्ट) शुरू किया था।

चिंता: पश्चिमी हिंद महासागर में चीन लगातार अपनी ताकत बढ़ा रहा है

हिंद महासागर में चीन की चालबाजी बढ़ती जा रही है। चीन ने BRI प्रोजेक्ट के नाम पर कई अफ्रीकी देशों के बंदरगाहों पर कब्जा जमाया है। चीन ने जिबूती का डोकालेह, कैन्या के लामू और मोंबासा, तंजानिया के टेंगा और डेर अस सलाम, मोजाम्बिक का बैरा, दक्षिण अफ्रीका के रिचर्ड बे पोर्ट के अलावा मेडागास्कर के सेंट मैरी पोर्ट को लीज पर लिया है। जानकारों का कहना है कि चीन कभी भी इन पोर्ट का सैन्य इस्तेमाल कर सकता है।

तैयारी: चीनी कार्गो शिप, युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर नजर रख सकेगा भारत

ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के थिंक टैंक सैमुअल बेशफील्ड का कहना है कि अगालेगा सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग लाइन पर स्थित है। इसलिए यहां से गुजरने वाले चीन के कार्गों, सैन्य जहाजों और पनडुब्बियों पर नजर रखी जा सकेगी। हिंद महासागर की सुरक्षा में तैनात भारतीय नौसेना के जहाजों को अभी ईंधन लेने के लिए ब्रिटिश-अमेरिकी मिलिट्री बेस डिएगो गार्शिया जाना पड़ता है। इस बेस के बाद हमारी सेना का समय बचेगा।

अफ्रीकी देशों में चीनी बंदरगाहों के मुकाबले के लिए बड़ी सफलता

उत्तरी अगालेगा द्वीप 12 किमी लंबा है और 1.5 किमी चौड़ा है। यहां करीब 300 लोग रहते हैं।

भारत की मदद से 3 किमी लंबा रनवे तैयार किया गया है। हैंगर 180 फीट लंबा और 200 फीट चौड़ा है।

पनडुब्बियों की निगरानी करने वाले भारतीय नौसेना के पी-8आई विमान को तैनात किया जाएगा।

अगालेगा द्वीप स्थित इस बेस के संचालन के लिए भारतीय नौसना के 50 जवानों को तैनात किया जाएगा।


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अमेरिका के कैंसस में फायरिंग, 21 लोगों को गोलियां लगीं

अमेरिका के कैंसस शहर में गुरुवार सुबह एक रैली के दौरान गोलीबारी हुई। एक व्यक्ति की मौत हो गई। 21 लोग घायल हुए। इसमें कई बच्चे हैं। सभी को गोलियां लगी हैं। मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को हिरासत में लिया है। गोलीबारी की वजह सामने नहीं आई है। हालांकि, पुलिस तीनों संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। घटना का एक वीडियो सामने आया है। इसमें दो लोग एक हमलावर को पकड़ते नजर आ रहे हैं।

हमलावर को धक्का देकर गिराया फिर पकड़ा

 गोलीबारी से भगदड़ मच जाती है। इस बीच एक आदमी और महिला तेजी से दौड़ते हुए हमलावर को पकड़ते हैं। उसे धक्का देकर गिरा देते हैं और उसे पकड़ लेते हैं। इस दौरान उसकी गन गिर जाती है। इसके बाद एक महिला हमलावर के पास पड़ी बंदूक को उठा लेती है।

ली 3 किलोमीटर लंबी थी

हमलावर को पकड़ने वाले आदमी ने बताया- 'रैली करीब 3 किलोमीटर लंबी थी। हजारों लोग इसमें शामिल थे। मैं हमलावर के पीछे ही था। जैसे ही गोलीबारी हुई लोग यहां-वहां भागने लगे। भीड़ के बीच मुझे हमलावर दिखा। मैंने पीछे से उसे पकड़ने की कोशिश की,लेकिन उस तक नहीं पहुंच पाया। कुछ सेकेंड बाद मैंने उसे धक्का दे दिया। जैसी ही वो गिरा मैंने अपना पूरा बल लगा दिया उसे पकड़ने के लिए। इतने में एक महिला आई और उसने हमलावर के पास पड़ी बंदूक उठा ली।'

2022 में फ्रीडम डे परेड में फायरिंग हुई थी

अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस (4 जुलाई) पर शिकागो में फ्रीडम डे परेड के दौरान गोलीबारी हुई थी। इस मामले में 22 साल के संदिग्ध रॉबर्ट ई क्रीमो III को गिरफ्तार किया गया है। क्रीमो एक रैपर है, वह हमला करने के बाद भागने की फिराक में था।

पुलिस ने शिकागो हाईवे पर लंबी दूरी तक पीछाकर रॉबर्ट को गिरफ्तार किया। इसके बाद उसने खुद को म्यूजिशियन बताया। कल इलेनॉय राज्य के हाईलैंड पार्क की घटना में 6 लोगों की मारे गए थे, जबकि 31 घायल हो गए थे। परेड सुबह 10 बजे शुरू हुई थी, लेकिन फायरिंग होने के 10 मिनट बाद ही रोक दी गई। इसे देखने के लिए सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए थे।

अमेरिका की आबादी 33 करोड़ और यहां 40 करोड़ गन

नागरिकों के बंदूक रखने के मामले में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है। स्विट्जरलैंड के स्मॉल आर्म्स सर्वे यानी SAS की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में मौजूद कुल 85.7 करोड़ सिविलियन गन्स में से अकेले अमेरिका में ही 39.3 करोड़ सिविलयन गन्स मौजूद हैं। दुनिया की आबादी में अमेरिका का हिस्सा 5% है, लेकिन दुनिया की कुल सिविलियन गन्स में से 46% अकेले अमेरिका में हैं।

अक्टूबर 2020 के गैलप सर्वे के मुताबिक, 44% अमेरिकी वयस्क उस घर में रहते हैं, जहां बंदूकें हैं। इनमें से एक तिहाई वयस्कों के पास बंदूकें हैं। 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 63 हजार लाइसेंस्ड गन डीलर थे, जिन्होंने उस साल अमेरिकी नागरिकों को 83 हजार करोड़ रुपए की बंदूकें बेची थीं।

अमेरिका 231 साल बाद भी अपने गन कल्चर को खत्म नहीं कर पाया है। इसकी दो वजहें हैं। पहली- कई अमेरिकी राष्ट्रपति से लेकर वहां के राज्यों के गवर्नर तक इस कल्चर को बनाए रखने की वकालत करते रहे हैं। दूसरी- गन बनाने वाली कंपनियां, यानी गन लॉबी भी इस कल्चर के बने रहने की प्रमुख वजह है।

1791 में संविधान के दूसरे संशोधन के तहत अमेरिका नागरिकों को हथियार रखने और खरीदने का अधिकार दिया गया। अमेरिका में इस कल्चर की शुरुआत तब हुई थी, जब वहां अंग्रेजों का शासन था। उस वक्त वहां परमानेंट सिक्योरिटी फोर्स नहीं थी, इसीलिए लोगों को अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए हथियार रखने का अधिकार दिया गया, लेकिन ये कानून आज भी जारी है।


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