BBC डॉक्यूमेंट्री बैन के खिलाफ SC में सुनवाई आज

नई दिल्ली: PM मोदी पर बनी BBC डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ पर लगे बैन को हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। डॉक्यूमेंट्री पर रोक लगाए जाने के खिलाफ महुआ मोइत्रा, प्रशांत भूषण और एडवोकेट एमएल शर्मा ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि BBC की डॉक्यूमेंट्री पर बैन लगाने का सरकार का फैसला मनमाना और असंवैधानिक है।

याचिकाकर्ता का दावा- डॉक्यूमेंट्री दंगों की जांच में मददगार
याचिका में दावा किया गया है कि 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' नामक डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों और उनमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच की गई है। जब दंगे भड़के थे, तब PM मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री थे। याचिका में यह भी कहा गया है कि डॉक्यूमेंट्री में दंगे रोकने में नाकामयाब रहे जिम्मेदारों से जुड़े कई फैक्ट्स हैं। हालांकि, सच्चाई सामने आने के डर से इसे सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के नियम 16 के तहत बैन किया गया है। रिकॉर्ड किए गए फैक्ट्स भी सबूत हैं और इन्हें पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे न्याय नहीं मिला है।

दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की मांग की गई
याचिका में गुजरात दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच की भी मांग की गई है। एमएल शर्मा ने कहा है कि BBC डॉक्यूमेंट्री के दोनों एपिसोड और BBC के रिकॉर्ड किए गए सभी ओरिजनल फैक्ट्स की जांच करें। साथ ही गुजरात दंगों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह से जिम्मेदार या शामिल आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 146, 302, 376, 425 और 120-बी और के तहत उचित कार्रवाई करें।

याचिका लगाने पर कानून मंत्री बोले- ये लोग SC का समय बर्बाद करते हैं
कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका को लेकर सोमवार को ट्वीट किया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि देश में जहां हजारों आम नागरिक न्याय के लिए इंतजार और तारीखों की मांग कर रहे हैं। ऐसे समय में कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट का कीमती समय बर्बाद करते हैं।

BBC ने चीनी कंपनी हुवेई से पैसा लेकर बनाई डॉक्यूमेंट्री
BJP से राज्यसभा सांसद और सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने BBC पर चीनी कंपनी से पैसा लेकर भारत विरोधी डॉक्यूमेंट्री बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा- BBC को चीनी कंपनी हुवेई ने मोदी की छवि खराब करने के लिए पैसा दिया है। अब BBC चीनी एजेंडे को ही आगे बढ़ा रहा है। महेश जेठमलानी दिवंगत एडवोकेट राम जेठमलानी के बेटे हैं। उन्होंने ट्वीट करके कहा- BBC इतना भारत विरोधी क्यों है? BBC का भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने का एक लंबा इतिहास रहा है। 2021 में बिना जम्मू-कश्मीर के भारत का नक्शा BBC ने जारी किया था। बाद में उसने भारत सरकार से माफी मांगी थी और नक्शे को सही किया था।

इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 24 जनवरी को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में बवाल हुआ था। दरअसल, यूनिवर्सिटी को खबर लगी कि छात्र संघ के ऑफिस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की जा रही है तो वहां की बिजली और इंटनेट काट दिया गया।

इसके बाद भी छात्र नहीं माने और उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को मोबाइल पर डाउनलोड करने का क्यूआर कोड शेयर किया। विवाद इतना बढ़ गया कि डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर देर रात पथराव किया गया। पथराव किसने किया, यह पता नहीं चल पाया है। हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए।

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उपराष्ट्रपति-कानून मंत्री के खिलाफ बॉम्बे HC में PIL दाखिल

बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में PIL दाखिल की है। याचिका में दावा किया गया है कि धनखड़ और रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को कम किया है। ऐसे में दोनों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोका जाए।

याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट यह भी घोषित करे कि दोनों के बयानों में भारत के संविधान के प्रति अविश्वास दिखता है, जिसके चलते वे संवैधानिक पदों पर रहने के योग्य नहीं हैं। बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अहमद आबिदी की ओर से यह याचिका कोर्ट में दाखिल की गई है। जल्द ही हाई कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगी।

सिस्टम पर सवाल उठा चुके हैं कानून मंत्री
दरअसल, किरेन रिजिजू कई बार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने सीजेआई को लेटर लिखकर कॉलेजियम में सरकार का प्रतिनिधि शामिल करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और जनता के प्रति जवाबदेही भी तय होगी।

किरण रिजिजू ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि कॉलेजियम सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। उन्होंने कहा था कि हाईकोर्ट में भी जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

उपराष्ट्रपति ने SC के फैसले पर दिया था बयान
वहीं, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1973 के ऐतिहासिक फैसले पर सवाल उठाए थे। इसके साथ ही दिसंबर 2022 में धनखड़ ने NJAC अधिनियम रद्द होने पर उसे लोगों के जनादेश की अवहेलना कहा था। फैसले में कोर्ट की टिप्पणी पर धनखड़ ने कहा था कि “क्या हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं” इस सवाल का जवाब देना मुश्किल होगा। 


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RBI ने बैंकों से पूछा-अडाणी ग्रुप को कितना कर्ज दिया

नई दिल्ली: अडाणी ग्रुप पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को लेकर गुरुवार को संसद में जमकर हंगामा हुआ। पूरे विपक्ष ने अडाणी ग्रुप के वित्तीय लेनदेन की जांच संसदीय पैनल (JPC) या सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से कराने की मांग की। इस मुद्दे पर हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा को कार्यवाही शुरू होते ही पहले दोपहर 2 बजे तक और फिर अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

इधर, RBI ने सभी बैंकों से अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को दिए कर्ज की जानकारी मांगी है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि RBI के अफसरों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी है। वहीं, शेयर मार्केट में भी अडाणी ग्रुप के शेयर्स में 10% तक की गिरावट देखी गई।

अडाणी खुद सामने आए, VIDEO मैसेज में FPO रद्द करने की बात कही
बुधवार देर रात अडाणी ग्रुप ने 20 हजार करोड़ रुपए के फुली सबस्क्राइब्ड FPO को रद्द कर इन्वेस्टर्स का पैसा लौटाने की बात कही थी। बुधवार को अडाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 26.70% गिरकर 2179.75 पर बंद हुआ था। इस गिरावट को ही FPO वापस लेने की वजह माना जा रहा है।

गौतम अडाणी ने FPO रद्द करने के बाद एक वीडियो मैसेज दिया। इसमें इन्वेस्टर्स का शुक्रिया अदा किया। कहा, 'पिछले हफ्ते स्टॉक में हुए उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी के बिजनेस और उसके मैनेजमेंट में आपका भरोसा हमारे लिए आश्वासन देने वाला है। मेरे लिए मेरे निवेशकों का हित सर्वोपरि है। बाकी सब कुछ सेकेंडरी है। इसलिए निवेशकों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए हमने FPO वापस ले लिया है। बोर्ड ने महसूस किया कि FPO के साथ आगे बढ़ना नैतिक रूप से सही नहीं होगा।'

13 विपक्षी पार्टियों ने कहा- हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर संसद में चर्चा हो

अडाणी ग्रुप पर हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों को लेकर कांग्रेस, TMC, आम आदमी पार्टी, सपा, DMK, जनता दल और लेफ्ट समेत 13 विपक्षी पार्टियों ने मीटिंग की। यह बैठक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चैंबर में हुई। इनमें से 9 पार्टियों ने राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लोगों की मेहनत का पैसा बर्बाद हो रहा है। लोगों का विश्वास बैंक और LIC से उठ जाएगा। कुछ कंपनियों के शेयर लगातार गिरते जा रहे हैं। सभी पार्टियों के नेताओं ने मिलकर एक फैसला लिया है कि आर्थिक दृष्टि से देश में जो घटनाएं हो रही हैं उसे सदन में उठाना है, इसलिए हमने एक नोटिस दिया था। हम इस नोटिस पर चर्चा चाहते थे, लेकिन जब भी हम नोटिस देते हैं तो उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है।

इस मामले से जुड़े अपडेट्स...

  • AAP सांसद संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने गौतम अडाणी का पासपोर्ट जब्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी, ED और CBI को एक लेटर लिखा है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया तो वह भी कई बिजनेसमैन की तरह देश से भाग जाएंगे और देश के करोड़ों लोगों के पास कुछ भी नहीं बचेगा।
  • पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा- अपने कुछ नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए भाजपा बैंक और LIC के पैसे का इस्तेमाल कर रही है।
  • शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा- पूरा विपक्ष दोनों सदनों में हिंडनबर्ग रिपोर्ट और अडाणी के स्टॉक क्रैश होने का मुद्दा उठाएगा।

  • अडाणी ग्रुप ने कहा, भविष्य में होने वाले किसी फाइनेंशियल लॉस से इन्वेस्टर्स को बचाने के लिए बोर्ड ने तय किया है कि इस FPO के साथ आगे नहीं बढ़ेंगे। हम अपने लोगों को रिफंड देने के लिए अपने बुक रनिंग लीड मैनेजर्स (BRLM) के साथ काम कर रहे हैं। हमारी बैलेंस शीट इस समय बहुत मजबूत है। हमारा कैश फ्लो और एसेट सिक्योर है। साथ ही कर्ज चुकाने का हमारा रिकॉर्ड सही रहा है।

    हमारे इस फैसले से हमारे मौजूदा ऑपरेशंस और भविष्य की हमारी योजनाओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हम लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएशन पर फोकस रखना जारी रखेंगे और हमारी ग्रोथ आंतरिक संसाधनों से मैनेज की जाएगी। जैसे ही बाजार स्थिर होगा हमारी कैपिटल मार्केट स्ट्रैटजी का रिव्यू करेंगे। हमें पूरा भरोसा है कि हमें आपका सहयोग मिलता रहेगा। हम पर भरोसा रखने के लिए धन्यवाद।'

    3,112 से 3,276 रुपए था FPO का प्राइस बैंड
    अडाणी ग्रुप का 20,000 करोड़ का FPO 27 जनवरी को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था और 31 जनवरी को बंद हुआ। इसका प्राइस बैंड 3,112-3,276 रुपए प्रति शेयर रखा गया था। कंपनी इन पैसों से मौजूदा कर्ज को कम करने के साथ एक्सपैंशन के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाना चाहती थी।

    FPO क्या होता है?
    FPO यानी फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर। यह कंपनी के लिए पैसे जुटाने का एक तरीका है। जो कंपनी पहले से शेयर मार्केट में लिस्टेड होती है वो निवेशकों के लिए नए शेयर ऑफर करती है। ये शेयर बाजार में मौजूद शेयरों से अलग होते हैं। ज्यादातर ये शेयर प्रमोटर्स जारी करते हैं। FPO का इस्तेमाल कंपनी के इक्विटी बेस में बदलाव करने के लिए होता है।

    IPO और FPO में अंतर क्या है?
    कंपनियां अपने विस्तार के लिए IPO या FPO का इस्तेमाल करती हैं। इनीशियल पब्लिक ऑफर यानी IPO के जरिए कंपनी पहली बार बाजार में अपने शेयर्स उतारती है। जबकि FPO में अतिरिक्त शेयर्स को बाजार में लाया जाता है।

  • हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद पिछले 2 ट्रेडिंग सेशन में अडाणी ग्रुप के स्टॉक्स के इन्वेस्टर्स को भारी नुकसान हुआ है। देश का सबसे बड़ा इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर 'लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया' (LIC) भी उन प्रभावित इन्वेस्टर्स में से एक है। अडाणी ग्रुप के शेयरों में LIC का 24 जनवरी को टोटल इन्वेस्टमेंट 81,268 करोड़ रुपए था, जो 27 जनवरी को गिरकर 62,621 करोड़ रुपए रह गया है। इस हिसाब से LIC को 2 ट्रेडिंग सेशन में करीब 18,646 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

  • बजट के बाद शेयर बाजार फीका, अडाणी एंटरप्राइजेज 26% टूटा

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (1 फरवरी) को बजट पेश किया। ऐसे में बाजार की नजर सरकार की घोषणाओं पर रही। अडाणी ग्रुप के शेयर दबाव में रहे। अडाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 26.70% गिरकर 2,179.75 पर बंद हुआ।
  • गौतम अडाणी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को भारत पर साजिश के तहत हमला बताया है। ग्रुप ने 413 पन्नों का जवाब जारी किया। इसमें लिखा है कि अडाणी समूह पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। ग्रुप ने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट का असल मकसद अमेरिकी कंपनियों के आर्थिक फायदे के लिए नया बाजार तैयार करना है।  
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2 सीटों पर चुनाव लड़ने से रोकने वाली याचिका खारिज

नई दिल्ली: लोकसभा या विधानसभा में कोई उम्मीदवार एक साथ 2 सीटों पर चुनाव न लड़ सके, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 33 (7) की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मसले पर कानून बनाना संसद का काम है।

यह मामला CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच में लिस्टेड हुआ था। जनहित याचिका अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी।

कोर्ट ने कहा- विकल्प देना संसद पर निर्भर
याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा था कि आयोग का यह प्रावधान मनमाना है। क्योंकि उम्मीदवारों को दोनों सीटों से चुनाव जीतने की स्थिति में एक सीट छोड़नी पड़ती है। इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ाता है।

हालांकि सुनवाई के दौरान CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जब आप दो सीटों से चुनाव लड़ते हैं तो आपको पता नहीं होता कि आप दोनों सीटों से चुने जाएंगे... इसमें गलत क्या है? यह राजनीतिक लोकतंत्र है।

इस पर एडवोकेट एस गोपाल ने कहा कि हमने 2 महीने पहले बड़ी बेंच में यह तर्क दिया था लेकिन तब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था।

बेंच ने कहा कि किसी उम्मीदवार को एक से ज्यादा सीट पर चुनाव लड़ने की परमिशन देना लीगल पॉलिसी है। आखिर में यह संसद पर निर्भर होता है कि वो राजनीतिक लोकतंत्र को इस तरह का विकल्प देना चाहता है या नहीं।

कब-कब बदला चुनावी उम्मीदवारों के लिए नियम
1996 से पहले तक नेता तीन सीटों से चुनाव लड़ सकता था। रिप्रजेन्टेशन ऑफ द पीपुल एक्ट (1951) में संशोधन के बाद यह तय हुआ कि कोई भी उम्मीदवार दो से अधिक सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सकता।

1975 में 32 साल के अटल बिहारी वाजपेयी ने यूपी की तीन सीटों बलरामपुर, मथुरा, लखनऊ से चुनाव लड़ा। सिर्फ बलरामपुर से जीते। मथुरा में तो उनकी ही जमानत जब्त हो गई थी।

1977 में इंदिरा गांधी अपनी सीट रायबरेली से हार गई थीं। 1980 में इंदिरा दो सीटों रायबरेली (यूपी) और मेडक (अब तेलंगाना में) से उतरीं। दोनों सीटों से जीतीं।

एक नेता, एक सीट : चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से सेक्शन 33 (7) में संशोधन की सिफारिश की थी ताकि एक नेता, एक सीट पर ही लड़े।

एक सीट पर चुनाव का खर्च यूं समझिए: 2014 के लोकसभा चुनाव में 543 सीटों पर आयोग ने 3,426 करोड़ रुपए खर्च किए थे। यानी एक सीट पर 6.30 करोड़। अगर कोई नेता दोनों सीटों पर चुनाव जीतता है, तो उसे एक सीट छोड़नी होगी। यानी उस सीट पर उपचुनाव में दोबारा इतना ही पैसा खर्च होगा।

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राहुल ने लाल चौक में तिरंगा फहराया

श्रीनगर:  भारत जोड़ो यात्रा के दौरान रविवार को श्रीनगर के लाल चौक में राहुल गांधी ने तिरंगा फहराया। इससे पहले उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर राष्ट्रगीत गाया। राहुल के साथ उनकी बहन प्रियंका गांधी और कांग्रेस नेता जयराम रमेश मौजद रहे। राहुल तिरंगा फहराने के दौरान भारी तादाद में पुलिस बल तैनात रही। तिरंगा फहराने से पहले ही पूरे इलाके को बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया। आसपास की सभी दुकानें बंद करवा दी गईं।

राहुल गांधी के अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती के शामिल होने की जानकारी है। पंथा चौक से अवामी नेशनल कांफ्रेंस के प्रेसिडेंट मुजफ्फर शाह भी यात्रा में शामिल हुए हैं। आज श्रीनगर के चेश्मा शाही रोड पर यात्रा का हाल्ट होगा और शाम 5:30 बजे राहुल प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

30 जनवरी को राहुल गांधी श्रीनगर के एमए रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय में तिरंगा फहराएंगे और इसके साथ ही यात्रा खत्म हो जाएगी। इसके बाद यहां एसके स्टेडियम में एक जनसभा आयोजित होगी, जिसके लिए 23 विपक्षी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया है।

यात्रा में शामिल हुईं महबूबा मुफ्ती
कांग्रेस की यात्रा में शनिवार को PDP चीफ महबूबा मुफ्ती अपनी बेटी इल्तिजा मुफ्ती के साथ शामिल हुईं। राहुल के साथ उनकी बहन प्रियंका गांधी भी नजर आईं। यात्रा के दौरान राहुल ने पुलवामा में 2019 में बम विस्फोट में शहीद हुए CRPF के 40 जवानों को श्रद्धांजलि दी। 

राहुल की सुरक्षा में चूक को लेकर खड़गे ने शाह को चिट्ठी लिखी
दो दिन पहले शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में राहुल गांधी के सुरक्षा घेरे में कई लोग घुस आए थे। राहुल की सुरक्षा में हुई इस चूक को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 27 जनवरी को गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी। खड़गे ने गृह मंत्री से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की अपील की। साथ ही यात्रा में शामिल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की थी। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने चिट्ठी में क्या लिखा...
खड़गे ने चिट्ठी में लिखा, 'मैं आपको यह चिट्ठी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सुरक्षा में हुई चूक के बारे में लिख रहा हूं। इसके बारे में आपको भी पता होगा। सुरक्षा अधिकारियों की सलाह के बाद शुक्रवार को यात्रा रोक दी गई थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने यात्रा के खत्म होने तक उसे सुरक्षा देने का भरोसा दिया है। मैं उनके इस बयान का स्वागत करता हूं।

इस यात्रा में हर दिन कई लोग शामिल होते हैं। इसीलिए हम कह नहीं सकते कि पूरे दिन में यात्रा में कितने लोग शामिल होंगे। अगले दो दिन यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। वहीं, 30 जनवरी को श्रीनगर में यात्रा खत्म होगी, यहां कई दलों ने नेता भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में अगर आप व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखें और अधिकारियों को सलाह दें तो मैं हमेशा आपका आभारी रहूंगा।'

राहुल के सुरक्षा घेरे में घुस गए थे लोग
शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड में एंट्री के सिर्फ एक किलोमीटर बाद ही राहुल गांधी की सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई थी। यहां राहुल के सुरक्षा घेरे में कई लोग घुस आए थे। इसके बाद पुलिस राहुल गांधी और उमर अब्दुल्ला को गाड़ी में बैठाकर अनंतनाग ले गई थी। अनंतनाग में राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था- यात्रा के दौरान पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई। टनल से निकलने के बाद पुलिसकर्मी नहीं दिखे। मेरे सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि हम और नहीं चल सकते। मुझे अपनी यात्रा रोकनी पड़ी। बाकी लोग यात्रा कर रहे थे। 

सुरक्षा में चूक के बाद तीन बड़े बयान

  • राहुल गांधी: भीड़ को काबू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि हम यात्रा कर सकते। मेरी सुरक्षा में लगे लोगों की सलाह को दरकिनार करना मेरे लिए मुश्किल था।
  • मल्लिकार्जुन खड़गे: राहुल गांधी की सुरक्षा में चूक परेशान करने वाली है। भारत पहले ही दो PM और कई नेताओं को खो चुका है। हम यात्रियों के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग करते हैं।
  • जम्मू-कश्मीर के अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह आरके गोयल: सरकार सुरक्षा के प्रति गंभीर है। भारत जोड़ो यात्रा के लिए सबसे अच्छी और संभव सुरक्षा की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं।
  • केसी वेणुगोपाल ने कहा था- 15 मिनट से कोई सुरक्षा अधिकारी नहीं है
    राहुल गांधी की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पर निशाना साधा। वेणुगोपाल ने सुरक्षा में सेंध के लिए पुलिस अधिकारियों और CRPF के जवानों को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था कि पिछले 15 मिनट से यात्रा के साथ कोई भी सुरक्षा अधिकारी नहीं थे, ये गंभीर चूक है। राहुल और अन्य कार्यकर्ता बिना सुरक्षा के यात्रा में आगे नहीं बढ़ सकते हैं।
  • 30 जनवरी को श्रीनगर में खत्म होगी यात्रा
    भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी। इसने गुरुवार रात को पंजाब से जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया। 30 जनवरी को राहुल गांधी श्रीनगर के कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इसके साथ ही यात्रा समाप्त हो जाएगी। इस दिन रैली में समान विचारधारा वाली पार्टियों के नेता और प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे।
  • जम्मू में कठुआ जिले के हीरानगर से कड़ी सुरक्षा के बीच भारत जोड़ो यात्रा 22 जनवरी को फिर से शुरू हुई। शनिवार (21 जनवरी) को ब्रेक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हीरानगर से सुबह 7 बजे यात्रा रवाना हुई। शनिवार को नरवाल में हुए ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों ने सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है। NIA की टीम जांच के लिए पहुंच गई है। उधर, LG मनोज सिन्हा ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है।
  • जम्मू कश्मीर के रामबन में जोरदार बारिश के बाद भारत जोड़ो यात्रा रद्द कर दी गई थी। लैंडस्लाइड और भारी बारिश के कारण कई सड़कें ब्लॉक हो गईं। इसी वजह से यात्रा का दूसरा चरण रद्द कर दिया गया। मामले की जानकारी कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर दी थी।
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त्रिपुरा में भाजपा ने 6 विधायकों के टिकट काटे

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को भाजपा ने कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी कर दी। पहले चरण में 48 कैंडिडेट्स के नाम की घोषणा की है। पार्टी ने 6 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है। भाजपा ने राज्य से पहली बार 11 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक के भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया गया है। वह धनपत सीट से प्रतिमा चुनाव लड़ेंगी।

वहीं, कांग्रेस ने भी त्रिपुरा चुनाव के लिए 17 सीटों पर कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी की है। पार्टी ने अगरतला से फिर से सुदीप रॉय बर्मन को ही मैदान में उतारा है। CM माणिक साहा को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने टाउन बार्दोवाली सीट से आशीष कुमार साहा को टिकट दिया है।

भाजपा जल्द ही अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की घोषणा करेगी
भाजपा ने जिन 6 विधायकों के नाम काटे हैं, उनके नाम विम्मी मजूमदार, सुभाष चंद्र दास, अरुण चंद्र भौमिक, वीरेंद्र किशोर देव बर्मन, परिमल देबबर्मा और विप्लव कुमार हैं। पार्टी संबित पात्रा ने अनिल बलूनी के साथ मिलकर पहले चरण की लिस्ट जारी की है। जल्दी ही अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 20 सीटों के लिए भी घोषणा की जाएगी। शुक्रवार को CPIM छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मोबोशर अली कैलाशहर विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे।

त्रिपुरा विधानसभा: सीटें- 60, बहुमत- 31

राज्य में 2018 में 59 सीटों पर चुनाव हुए थे। BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। उसे 35 सीटें मिली थीं। भाजपा ने लेफ्ट के 25 साल के गढ़ को ध्वस्त कर दिया था। पहले बिप्लब देव CM बनाए गए थे, लेकिन मई 2022 में माणिक साहा को मुख्यमंत्री बना दिया गया। आगामी चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए CPM और कांग्रेस ने हाथ मिला लिया है। एक और बड़ी पार्टी ममता बनर्जी की TMC भी है, जो भाजपा को टक्कर दे सकती है।


चुनाव तारीखों का ऐलान से पहले BJP-कांग्रेस में झड़प हुई थी
त्रिपुरा में BJP और कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़प विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के करीब आधे घंटे बाद त्रिपुरा के मजलिसपुर में BJP और कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़प हुई। इसमें कई लोग घायल हो गए। झड़प में कांग्रेस नेता डॉ. अजय कुमार घायल हो गए। झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे डॉ अजय कुमार अभी त्रिपुरा, नगालैंड और सिक्किम के प्रदेश प्रभारी हैं। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।

3 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान एक साथ हुआ
चुनाव आयोग ने 17 जनवरी को त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। त्रिपुरा में 16 फरवरी को मतदान होगा। मेघालय और नगालैंड में 27 फरवरी को वोटिंग होगी। सभी राज्यों के नतीजों का ऐलान 2 मार्च को होगा। इन चुनावों की एक दिलचस्प बात यह है कि तीनों राज्यों में बहुमत का आंकड़ा 31 है।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि तीनों राज्यों में महिला वोटरों की भागीदारी ज्यादा है और यहां चुनावी हिंसा भी ज्यादा नहीं होती। हम यहां पर निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रतिबद्ध हैं।


दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में PM ने कहा कि अगले लोकसभा चुनाव में सिर्फ 400 दिन बचे हैं। ऐसे में पार्टी पदाधिकारियों और हर एक कार्यकर्ता को एक-एक वोटर से मिलने उनके दरवाजे तक जाना चाहिए। बैठक ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के एक्सटेंशन पर मुहर लगा दी। नड्‌डा का कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ा दिया गया है। नड्‌डा का मौजूदा कार्यकाल 20 जनवरी को खत्म हो रहा था। अब वे लोकसभा चुनाव तक पार्टी की कमान संभालेंगे। नीचे ग्राफिक में भाजपा के गठन से लेकर अब तक बने अध्यक्षों का ब्योरा दिया गया है
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दिग्विजय के बाद राशिद अल्वी बोले-सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो दिखाओ

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राशिद अल्वी भी दिग्विजय सिंह के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने सरकार से सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो जारी करने की मांग की है। अल्वी ने कहा कि हमें सेना पर गर्व है, लेकिन सरकार पर भरोसा नहीं। सर्जिकल स्ट्राइक पर BJP नेताओं के बयानों में असमानता है। सरकार कहती है कि हमारे पास सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो है तो उसे जारी क्यों नहीं कर देती।

उन्होंने दिग्विजय सिंह का समर्थन करते हुए पूछा- दिग्विजय ने क्या गलत कहा? बस सरकार से वीडियो जारी करने की मांग की थी। DSP देविंदर सिंह का कुछ अता-पता नहीं है। जिसकी पुलवामा हमले में आतंकियों की मदद करने का आरोप था। यह बड़ा खेल है, इसमें मत पड़िए.. वो खेल तो पता चले कि क्या खेल है। वो मालूम तो हो कि उसकी जमानत कैसे हो गई।

आर्मी पर भरोसा, लेकिन सरकार पर नहीं
अल्वी ने कहा कि सेना हमारा गौरव है और हमें सेना पर पूरा भरोसा है। लेकिन हमें देश की सरकार पर भरोसा नहीं है। अमित शाह कहते हैं कि हमनें सर्जिकल स्ट्राइक में 250-300 आतंकियों को मारा। सुषमा स्वराज ने कहा था कि हमने ऐसी जगह को निशाना बनाया, जहां कोई मारा न जाए। जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक में भारत में 400 आतंकियों को ढेर किया है। ये सभी भाजपा के नेता हैं और इनके बयानों में असमानता है। ऐसे में लोगों को शक तो होगा ही। दूसरी ओर सरकार कह रही है कि हमारे पास सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो है। अगर सरकार के पास वीडियो है तो उसे जारी कर लोगों का शक दूर क्यों नहीं कर देती।

अगर सरकार के पास सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो नहीं है तो उसे अपनी गलती मान लेनी चाहिए। साथ ही यह झूठ बोलने के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।

दिग्विजय के बयान पर राहुल के रुख को लेकर राशिद ने कहा कि मुझे नहीं पता कि राहुल गांधी ने क्या कहा। हालांकि पार्टी का बयान उसे माना जाता है जो पार्टी के प्रवक्ता देता है। हर राजनीतिक दल में नेताओं को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है।

बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिग्विजय सिंह के बयान को बेहूदा बताया था। उन्होंने कहा कि अगर सेना कुछ करती है तो उस पर सबूत देने की जरूरत नहीं। ये दिग्विजय जी की निजी राय है। मैं इससे सहमत नहीं हूं।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने 23 जनवरी को सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाया। उन्होंने जम्मू में कहा कि सरकार ने अब तक सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत नहीं दिया है। केंद्र सरकार सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में बात करती है कि हमने इतने लोग मार गिराए हैं, लेकिन सबूत कुछ नहीं है।

दिग्विजय ने सर्जिकल स्ट्राइक के अलावा 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले को लेकर भी प्रधानमंत्री को घेरा। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पुलवामा हमले के वक्त CRPF अफसरों ने कहा था कि जवानों को एयरक्राफ्ट से मूवमेंट कराया जाए, पर प्रधानमंत्री नहीं माने।

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राहुल ने आज यात्रा कैंसिल की; खड़गे ने कहा- हम पहले भी दो PM खो चुके

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड में एंट्री के सिर्फ एक किलोमीटर बाद ही राहुल गांधी की सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई। यहां राहुल के सुरक्षा घेरे में कई लोग घुस आए थे। इसके बाद पुलिस राहुल गांधी और उमर अब्दुल्ला को गाड़ी में बैठाकर अनंतनाग ले गई। अनंतनाग में राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज यात्रा के दौरान पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई। टनल से निकलने के बाद पुलिसकर्मी नहीं दिखे। मेरे सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि हम और नहीं चल सकते। मुझे अपनी यात्रा रोकनी पड़ी। बाकी लोग यात्रा कर रहे थे।

राहुल ने कहा- भीड़ को काबू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि हम यात्रा कर सकते। मेरी सुरक्षा में लगे लोगों की सलाह को दरकिनार करना मेरे लिए मुश्किल था। इधर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट किया- भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जम्मू-कश्मीर में राहुल गांधी की सुरक्षा में चूक परेशान करने वाली है। भारत पहले ही दो PM और कई नेताओं को खो चुका है। हम यात्रियों के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग करते हैं।

केसी वेणुगोपाल बोले- 15 मिनट से कोई सुरक्षा अधिकारी नहीं है
राहुल गांधी की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने नाराजगी जताई। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पर निशाना साधा। वेणुगोपाल ने सुरक्षा में सेंध के लिए पुलिस अधिकारियों और CRPF के जवानों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 15 मिनट से यात्रा के साथ कोई भी सुरक्षा अधिकारी नहीं थे, ये गंभीर चूक है। राहुल और अन्य कार्यकर्ता बिना सुरक्षा के यात्रा में आगे नहीं बढ़ सकते हैं।

हम सब कोऑर्डिनेशन के हिसाब से कर रहे हैं
वेणुगोपाल ने कहा, 'कल तक जम्मू में सब कुछ ठीक था, लेकिन अब क्या हुआ। वो सारे पुलिस अधिकारी कहां थे, यहां मौके पर कोई नहीं था, यह बड़ा मामला है। हमारी पार्टी के नेताओं ने गर्वनर और पुलिस अधिकारियों के साथ एक महीने पहले ही बैठक की थी। हमने गुरुवार शाम तक इस बारे में कोई शिकायत नहीं की थी। अब हम इस तरह से आगे नहीं जा सकते क्योंकि इस एरिया में कोई भी आता-जाता है।

सुरक्षा बलों को भी इस एरिया के बारे में पता है। यात्रा सिर्फ 2-3 दिन के लिए है। सुरक्षा में हुई इस चूक के लिए सिक्योरिटी फोर्सेस को जवाब देना पड़ेगा। कल उन्होंने हमें इसी रूट के बारे में बताया था, हम सब कोऑर्डिनेशन के हिसाब से कर रहे हैं। हमारी टीम बाजार के रास्ते से जाना चाहती थी, लेकिन सुरक्षाबलों ने कहा कि उधर से मत जाइए तो हम नहीं गए।'

30 जनवरी को श्रीनगर में खत्म होगी यात्रा
भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी। इसने गुरुवार रात को पंजाब से जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया। 30 जनवरी को राहुल गांधी श्रीनगर के कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इसके साथ ही यात्रा समाप्त हो जाएगी।

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जम्मू में कड़ी सुरक्षा के बीच भारत जोड़ो यात्रा शुरू, ब्लास्ट के बाद अलर्ट जारी

जम्मू में कठुआ जिले के हीरानगर से कड़ी सुरक्षा के बीच भारत जोड़ो यात्रा 22 जनवरी को फिर से शुरू हुई। शनिवार (21 जनवरी) को ब्रेक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हीरानगर से सुबह 7 बजे यात्रा रवाना हुई। शनिवार को नरवाल में हुए ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों ने सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है। NIA की टीम जांच के लिए पहुंच गई है। उधर, LG मनोज सिन्हा ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। पढ़ें पूरी खबर...

जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से भारत जोड़ो यात्रा रद्द, अब 27 जनवरी से होगी शुरू

जम्मू कश्मीर के रामबन में जोरदार बारिश के बाद भारत जोड़ो यात्रा रद्द कर दी गई थी। लैंडस्लाइड और भारी बारिश के कारण कई सड़कें ब्लॉक हो गईं। इसी वजह से यात्रा का दूसरा चरण रद्द कर दिया गया। मामले की जानकारी कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर दी थी।
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BBC डॉक्यूमेंट्री पर दिल्ली यूनिवर्सिटी में हंगामा

नई दिल्ली: गुजरात दंगों पर बनी BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ की स्क्रीनिंग को लेकर शुक्रवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों और पुलिस में ठन गई। छात्रों का कहना था कि वे यह डॉक्यूमेंट्री देखना चाहते हैं, जबकि पुलिस उन्हें देखने नहीं दे रही है। वहीं, पुलिस का कहना है कि इस डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लिहाजा इसकी स्क्रीनिंग की इजाजत नहीं दी जा सकती।

पुलिस ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की आर्ट्स फैकल्टी के पास धारा 144 लागू है। यहां भीड़ जमा होने की इजाजत नहीं दी जा सकती। हंगामे के बाद कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया है। एक दिन पहले गुरुवार को हैदराबाद यूनिवर्सिटी में इसी डॉक्यूमेंट्री को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच विवाद हो चुका है।

डॉक्यूमेंट्री के विरोध में कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग
हैदराबाद में SFI ने 400 से अधिक छात्रों को विवादित डॉक्यूमेंट्री दिखाई। जवाब में RSS की स्टूडेंट्स विंग और ABVP कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी कैंपस में 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म की स्क्रीनिंग की। SFI ने डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग से जुड़ी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इसके कैप्शन में लिखा कि ABVP के कार्यकर्ताओं ने हंगामा करने की कोशिश की, लेकिन हमने उन्हें कामयाब नहीं होने दिया। 

ABVP का आरोप- प्रशासन ने डॉक्यूमेंट्री दिखाने की अनुमति दी
इस मामले में ABVP कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कैंपस में BBC की डॉक्यूमेंट्री दिखाने की अनुमति देने का आरोप लगाया। इसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी मेन गेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने हमें कैंपस में 'द कश्मीर फाइल्स' की स्क्रीनिंग करने से रोकने का प्रयास किया।

जब हम फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए जरूरी इक्विपमेंट लेकर कैंपस में दाखिल हो रहे थे, तो सिक्योरिटी गार्ड्स ने हमें रोकने की कोशिश की। जब हमने विरोध किया तो गार्ड्स ने हमारे साथ मारपीट की। समझ नहीं आता जब सरकार ने BBC की डॉक्यूमेंट्री पर बैन लगा दिया है तो कैंपस में उसे दिखाने की इजाजत कैसे दी गई।

यूनिवर्सिटी ने छात्रों की काउंसलिंग कराई
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार देवेश निगम ने इस मसले पर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए कैंपस में और फिल्मों की स्क्रीनिंग को रोक दिया गया है। कानून व्यवस्था के मुद्दे को देखते हुए डीन-स्टूडेंट्स वेलफेयर ने छात्रों के ग्रुप की काउंसलिंग कराई है। जबकि स्टूडेंट्स का कहना है कि वे अपने तय कार्यक्रमों के अनुसार ही काम करेंगे। 

इससे पहले 21 जनवरी को भी स्टूडेंट्स के एक ग्रुप ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के कैंपस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रखी थी। छात्रों ने इसके लिए न यूनिवर्सिटी प्रशासन को सूचना दी और न ही इजाजत ली थी। मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने एक्शन लिया। 

इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 24 जनवरी को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में भी विवाद हुआ। JNU में छात्र डॉक्यूमेंट्री न देख पाएं इसलिए प्रशासन ने बिजली गुल कर दी और इंटरनेट कनेक्शन भी काट दिया।

इसके बाद भी छात्र नहीं माने और उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को मोबाइल पर डाउनलोड करने का क्यूआर कोड शेयर किया। विवाद इतना बढ़ गया कि डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर देर रात पथराव किया गया। पथराव किसने किया, यह पता नहीं चल पाया है। हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए।

जामिया में विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर अब तक 7 छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया गया है। इन पर माहौल खराब करने के प्रयास का आरोप है। SFI ने छात्रों की रिहाई तक स्क्रीनिंग टाल दी है। यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर की शिकायत पर इन्हें हिरासत में लिया गया है।

जामिया की वाइस चांसलर नजमा अख्तर ने बताया कि विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर छात्र संगठन SFI यूनिवर्सिटी कैंपस का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहा है। हम ऐसी किसी भी काम की अनुमति नहीं देंगे। छात्रों की किसी भी गैरजरूरी हरकत पर कार्रवाई होगी।

पुडुचेरी विश्वविद्यालय में बुधवार (25 जनवरी) को PM मोदी पर BBC की डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। इसके बाद छात्रों के दो संगठनों के बीच झड़प हो गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बिजली और वाईफाई को ठप कर दिया था, फिर छात्रों के एक गुट ने फोन और लैपटॉप पर डॉक्यूमेंट्री देखी। 

पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) के स्टूडेंट सेंटर में 25 जनवरी को विवादित डॉक्यूमेंट्री चलाने पर हंगामा हुआ। NSUI ने यह डॉक्यूमेंट्री चलाई। जिसे देखने कई स्टूडेंट्स जुट गए। इतने में यूनिवर्सिटी अथॉरिटी को इसकी भनक लग गई और प्रोजेक्टर पर चलाई गई इस डॉक्यूमेंट्री को तुरंत बंद करवा दिया गया। इससे पहले लगभग आधी डॉक्यूमेंट्री चल चुकी थी

26 जनवरी: गणतंत्र दिवस पर केरल कांग्रेस ने डॉक्यूमेंट्री दिखाई
केरल कांग्रेस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) यह स्क्रीनिंग तिरुवनंतपुरम में शंकुमुघम बीच पर की। पार्टी ने कहा- ज्यादा से ज्यादा लोगों को यह डॉक्यूमेंट्री दिखाई जा सके इसलिए बीच पर इसकी स्क्रीनिंग की गई है।

अपनी रिलीज के साथ ही यह डॉक्यूमेंट्री विवादों में घिर गई थी। इसमें 2002 में गुजरात में हुए दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका होने का दावा किया गया था। भारत सरकार ने इसे BBC का प्रोपेगैंडा बताया था। डॉक्यूमेंट्री का पहला पार्ट 17 जनवरी को जारी हुआ था, जिसे यूट्यूब पर ब्लॉक कर दिया गया था। वहीं, सरकार ने ट्विटर और अन्य साइट्स पर भी इसे डॉक्यूमेंट्री की शेयरिंग पर रोक लगा दी थी।

17 जनवरी को डॉक्यूमेंट्री का पहला एपिसोड टेलिकास्ट हुआ
BBC ने 17 जनवरी को गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री द मोदी क्वेश्चन का पहला एपिसोड यूट्यूब पर रिलीज किया। दूसरा एपिसोड 24 जनवरी को रिलीज होना था। इससे पहले ही केंद्र सरकार ने पहले एपिसोड को यूट्यूब से हटा दिया। भारत सरकार ने डॉक्यूमेंट्री को प्रधानमंत्री मोदी और देश के खिलाफ प्रोपेगैंडा बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हम नहीं जानते कि डॉक्‍यूमेंट्री के पीछे क्या एजेंडा है, लेकिन यह निष्पक्ष नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दुष्‍प्रचार है। 

भारत में चल रहे BBC डॉक्यूमेंट्री पर विवाद में अमेरिका ने 48 घंटे में अपना स्टैंड बदल दिया। उसने प्रेस की स्वतंत्रता का हवाला देकर BBC डॉक्यूमेंट्री का साथ देने की कोशिश की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने को प्रेस की स्वतंत्रता का मामला बताया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में फ्रीडम ऑफ स्पीच के महत्व को हाइलाइट्स करने का यह सही समय है और ऐसा भारत में भी लागू होता है।

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केंद्रीय बजट 2023-24 की तैयारी पूरी

नई दिल्ली: 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2023-24 पेश होने वाला है। इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है। बजट से संबंधित डॉक्यूमेंट्स की प्रिंटिग शुरू होने के साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में पारंपरिक हलवा सेरेमनी गुरुवार (26 जनवरी) को मनाई गई। इस मौके पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री डॉ भागवत किशनराव कराड, पंकज चौधरी और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

क्या है हलवा सेरेमनी?
बजट को अंतिम रूप देने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा बनाया जाता है। यह रस्म लंबे समय से चली आ रही है। शुभ काम की शुरुआत मीठे से करना हलवा सेरेमनी की प्रमुख वजह है।

दो साल से नहीं मनाई जा रही थी हलवा सेरेमनी
साल 2021 और 2022 में कोव‍िड-19 महामारी के कारण इस रस्‍म को नहीं न‍िभाया गया था। इसकी जगह कोर कर्मचारियों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मिठाई दी गई थी। ये वो कर्मचारी हैं जो बजट के बनाने की प्रक्रिया में शामिल रहते हैं और इन्हें एक तरह से नजरबंद रखा जाता है। केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा संसद में बजट पेश करने के बाद ही ये अधिकारी और कर्मचारी अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों के संपर्क में आते हैं। इसका मकसद बजट को गोपनीय रखना होता है।

बजट होता क्या है?
जिस तरह से हमें अपने घर को चलाने के लिए एक बजट की जरूरत होती है, उसी तरह से देश को चलाने के लिए भी बजट की जरूरत पड़ती है। हम अपने घर का जो बजट बनाते हैं, वो आमतौर पर महीनेभर का होता है। इसमें हम हिसाब-किताब लगाते हैं कि इस महीने हमने कितना खर्च किया और कितना कमाया। इसी तरह से देश का बजट भी होता है। इसमें सालभर के खर्च और कमाई का लेखा-जोखा होता है।

बजट की पूरी प्रोसेस

1. सबसे पहले वित्त मंत्रालय एक सर्कुलर जारी कर सभी मंत्रालयों, राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, स्वायत्त संस्थाओं को नए साल के लिए एस्टीमेट बनाने के लिए कहता है। उन्हें नए साल के लिए अनुमान देने के अलावा पिछले साल की खर्च और आमदनी का ब्योरा भी देना होता है।

2. एस्टीमेट मिलने के बाद केंद्र सरकार के आला अफसर उसकी पड़ताल करते हैं। इस पर संबंधित मंत्रालयों और व्यय विभाग के अधिकारियों की गहन चर्चा होती है। इसके बाद आंकड़ों को सिफारिशों के साथ वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाता है।

3. वित्त मंत्रालय सभी सिफारिशों पर गौर करने के बाद विभागों को उनके खर्च के लिए राजस्व का आवंटन करता है। राजस्व और आर्थिक मामलों का विभाग हालात को गहराई से समझने के लिए किसानों और छोटे कारोबारियों के प्रतिनिधियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों से संपर्क करता है।

4. प्री बजट मीटिंग में वित्त मंत्री संबंधित पक्षों के प्रस्ताव और मांगों को जानने के लिए उनसे मिलते हैं। इनमें राज्यों के प्रतिनिधि, बैंकर, कृषि विज्ञानी, अर्थशास्त्री और कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। प्री-बजट मीटिंग खत्म होने के बाद वित्त मंत्री सभी मांगों पर अंतिम फैसला लेते हैं। बजट को अंतिम रूप दिए जाने से पहले वित्त मंत्री प्रधानमंत्री से भी बात करते हैं।

5. बजट पेश होने से कुछ दिन पहले हलवा सेरेमनी होती है। एक बड़ी सी कड़ाई में तैयार किया जाने वाला हलवा वित्त मंत्रालय के स्टाफ में बांटा जाता है। इसी के साथ बजट की छपाई प्रक्रिया शुरू होती है। प्रक्रिया में लगे अधिकारी और सपोर्ट स्टाफ बजट पेश होने तक मंत्रालय में ही रहते हैं। इस वित्त वर्ष के बजट की प्रिंटिंग नहीं हुई और संसद सदस्यों को उसकी सॉफ्ट कॉपी दी गई।

6. वित्त मंत्री आम बजट को लोकसभा में पेश करते हैं। 2016 तक फरवरी के अंतिम दिन पेश होता था। 2017 से यह हर साल 1 फरवरी को पेश होने लगा। इस साल पहली बार बजट के सभी दस्तावेज Union Budget मोबाइल पर उपलब्ध कराए गए।


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गणतंत्र दिवस पर मोदी नई संसद बनाने वाले मजदूरों से मिले,

नई दिल्ली : 74वें गणतंत्र दिवस की परेड में 23 से ज्यादा झांकियां दिखाई गईं। वहीं,सेनाओं के स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान नारी शक्ति की तस्वीर दिखी। डेयर डेविल्स ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया और फ्लाई पास्ट में राफेल गरजे। परेड खत्म होने के बाद मोदी सबसे पहले नए संसद भवन बनाने वाले मजदूरों से मिले।

मोदी राजस्थान की बंधेज पगड़ी में नजर आए। यह पीले और केसरिया रंग की थी। मोदी ने पिछली बार गणतंत्र दिवस पर कुर्ता-पायजामा पहना था। तब उनके गले में मणिपुर का पारंपरिक लेंग्यान गमछा था। इसके अलावा, उत्तराखंड की टोपी पहनी थी, जिस पर ब्रह्मकमल बना था। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत भी ऐसी ही टोपी पहनते थे।

2 घंटे 28 मिनट चली परेड को फोटोज में देखिए...

सुबह 10:20 बजे:

PM मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के लिए शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने वहां रखी किताब में मैसेज भी लिखा।
PM मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के लिए शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने वहां रखी किताब में मैसेज भी लिखा।

सुबह 10:25 बजे:

गणतंत्र दिवस समारोह में PM मोदी (बाएं), चीफ गेस्ट मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी (बीच में) और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (दाएं)।
गणतंत्र दिवस समारोह में PM मोदी (बाएं), चीफ गेस्ट मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी (बीच में) और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (दाएं)।

सुबह 10:30 बजे:

परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेताओं ने परेड की शुरुआत की, इसके बाद सेना और सशस्त्र बलों की टुकड़ियों ने मार्च किया।
परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेताओं ने परेड की शुरुआत की, इसके बाद सेना और सशस्त्र बलों की टुकड़ियों ने मार्च किया।

सुबह 11 बजे:

वायु रक्षा प्रणाली की 512 लाइट एडी मिसाइल रेजिमेंट की लेफ्टिनेंट चेतना शर्मा ने परेड में अपने ग्रुप को लीड किया।
वायु रक्षा प्रणाली की 512 लाइट एडी मिसाइल रेजिमेंट की लेफ्टिनेंट चेतना शर्मा ने परेड में अपने ग्रुप को लीड किया।

सुबह 11:20 बजे:

गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल BSF की ऊंट रेजिमेंट। यह ट्रुप रेगिस्तानी इलाकों में पेट्रोलिंग और निगरानी करता है।
गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल BSF की ऊंट रेजिमेंट। यह ट्रुप रेगिस्तानी इलाकों में पेट्रोलिंग और निगरानी करता है।

सुबह 11:30 बजे:

उत्तराखंड ने कर्तव्य पथ पर दिखाई अपनी झांकी में कॉर्बेट नेशनल पार्क और अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम को दिखाया।
उत्तराखंड ने कर्तव्य पथ पर दिखाई अपनी झांकी में कॉर्बेट नेशनल पार्क और अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम को दिखाया।

सुबह 11:40 बजे:

परेड में उत्तर प्रदेश ने अपनी झांकी में अयोध्या में तीन दिन तक मनाया जाने वाला दीपोत्सव दिखाया।
परेड में उत्तर प्रदेश ने अपनी झांकी में अयोध्या में तीन दिन तक मनाया जाने वाला दीपोत्सव दिखाया।

दोपहर 12 बजे:

परेड में कर्तव्य पथ पर सेना के 33 डेयर डेविल्स ने 9 मोटरसाइकिल पर 'मानव पिरामिड' बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
परेड में कर्तव्य पथ पर सेना के 33 डेयर डेविल्स ने 9 मोटरसाइकिल पर 'मानव पिरामिड' बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

दोपहर 12;10 बजे:

वायुसेना के लड़ाकू हेलिकॉप्टर्स ने कर्तव्य पथ पर फ्लाय पास्ट में हिस्सा लिया। इनमें अमेरिका से लिए गए अपाचे चॉपर भी शामिल थे।
वायुसेना के लड़ाकू हेलिकॉप्टर्स ने कर्तव्य पथ पर फ्लाय पास्ट में हिस्सा लिया। इनमें अमेरिका से लिए गए अपाचे चॉपर भी शामिल थे।

दोपहर 12:15 बजे:

कर्तव्य पथ पर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर राष्ट्रगान के साथ गणतंत्र दिवस 2023 परेड का समापन हुआ।
कर्तव्य पथ पर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर राष्ट्रगान के साथ गणतंत्र दिवस 2023 परेड का समापन हुआ।

दोपहर 12:20 बजे:

परेड खत्म होने के बाद PM मोदी ने मौजूद लोगों का अभिवादन किया, वे गाड़ी से उतरकर बैरिकेड्स तक गए।
परेड खत्म होने के बाद PM मोदी ने मौजूद लोगों का अभिवादन किया, वे गाड़ी से उतरकर बैरिकेड्स तक गए।
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गांधी 6.5, नेहरू 9, सावरकर 15 साल जेल में रहे; 170 साल बाद भारत ने दिखाया आईना

साल 1911 की बात है। अंडमान के सेल्यूलर जेल में विनायक दामोदर सावरकर नाम के एक क्रांतिकारी को लाया गया। उस छोटी-सी कोठरी में रहने के दौरान कई वर्षों तक सावरकर को भनक तक नहीं लगी कि इसी जेल में उनके सगे भाई भी बंद हैं। जेल को बनाया ही कुछ इस तरह से गया था कि कैदी एक-दूसरे से बिल्कुल अनजान रहें।

टापू के बीचोंबीच एक टॉवर था। उससे लगी कोठरियों की तीन मंजिला 7 कतारें बनाई गई थीं। ये साइकिल के पहिए की तरह हैं। जैसे साइकिल के बीचों-बीच के गोल चक्कर से तीलियां निकलकर बिना जुड़े बड़े गोल रिम से जुड़ती हैं। इसी तरह ये इमारत भी बनाई गई थी। 15 गुना 8 फीट की इन कोठरियों में तीन मीटर की ऊंचाई पर एक रोशनदान था, जो समुद्र की ओर खुलता था। जहां से भागने का मतलब था-सिर्फ मौत।

‘नेहरू परिवार की ख़ानदानी जेल’, जहां तीन पीढ़ियां रहीं

1884 में एक और जेल इलाहाबाद के नैनी में खुली। इसे नेहरू परिवार की ख़ानदानी जेल कहते हैं। कई बार मजाक में ऐसा कहा जाता है कि नेहरू परिवार ने आनंद भवन से ज्यादा वक्त इस जेल में गुजारा। मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित, इंदिरा गांधी और उनके पति फिरोज गांधी भी इस जेल में बंद रहे। पांच बार इस जेल में सजा काट चुके नेहरू ने इंदिरा गांधी को यहीं से चिट्ठियां लिखीं जो बाद में मशहूर किताब ‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’ की शक्ल में आईं।

आज गणतंत्र दिवस के इस मौके पर हम परतंत्र भारत की उन इमारतों के बारे में बात कर रहे हैं जिनमें हजारों कहानियां दफ़न हैं। ये वो जेलें थीं, जिनमें आजादी के आंदोलन के दौरान गांधी, नेहरू और सावरकर बंद रहे। हम यह भी जानेंगे कि किस तरह ईस्ट इंडिया कंपनी ने किलों और घरों को जेल में तब्दील कर दिया, किस तरह आगरा में देश की पहली सेंट्रल जेल खुली और किस तरह 170 साल बाद विजय माल्या मामले ने ब्रिटेन और उसकी जेल नीति को भारत ने आईना दिखाया।

शोले फिल्म का एक मशहूर डायलॉग है; जिसमें जेलर बने असरानी शान से कहते हैं - ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’

फिल्म के इस डायलॉग का मतलब यह था कि अंग्रजों को जेल बनाने और लोगों को उसमें बंद करने के काम में उस्ताद समझा जाता था।

भारत आते ही अंग्रेजों ने खोलीं सैकड़ों जेल

1784 में ईस्ट इंडिया कंपनी को ब्रिटिश राजशाही से भारत में राज करने का अधिकार मिला। जिसके बाद अपनी हुकूमत को बनाए रखने और किसी भी तरह के विद्रोह को दबाने के लिए कंपनी ने बड़े पैमाने पर जेलों का निर्माण शुरू किया। कुछ नई जेल बनाई गईं तो कुछ पुराने किलों और हवेलियों को जेल में तब्दील कर दिया गया। अंग्रेजी हुकूमत के इस शुरुआती दौर में ही देश में 143 सिविल जेल, 75 क्रिमिनल जेल और 68 मिक्स जेल खुल चुकी थीं।

ऐसी जगह जो अपने आप में थी जेल, जहां से कैदी भाग ही नहीं सकते थे

भारत आने के बाद से ही अंग्रेज बड़ी-बड़ी जेल बनाने लगे। एक समय ऐसा आया जब देश की सारी जेलें भर गईं। ऐसे में अंग्रेजों को नए और बड़ी जेल की जरूरत महसूस हुई।

1789 में अंग्रेजों ने पहली बार अंडमान में कैदियों की बस्ती बसाने की कोशिश की थी। अंडमान कोलकाता से 1400 किलोमीटर दूर समुद्री टापुओं का एक समूह था, लेकिन मुश्किल मौसम और दुश्मन देशों के आक्रमण के चलते अंग्रेजों का ये सपना पूरा न हो सका।

1857 में भारतीय बैरकों में बड़े पैमाने पर विद्रोह हुए। जिसके चलते अंग्रजों ने साल भर के भीतर ही 1858 में कैदियों का पहला जत्था अंडमान भेज दिया। खास बात यह थी कि तब तक पूरे अंडमान द्वीप पर जेल की एक ईंट भी नहीं पड़ी थी। अंग्रेज अधिकारियों ने तंबुओं में शरण ली और कैदियों को खुले जंगलों में छोड़ दिया गया। वहां से उनके भागने की कोई संभावना नहीं थी।

ऐसी जेल जो कैदियों ने खुद अपने लिए बनाई, बर्मा से आईं ईंटें

शुरुआत में कैदियों ने बारिश और जंगली कीड़ों से बचने के लिए टहनियों और पत्तों के सहारे अपने लिए झोपड़ियां बनाईं, लेकिन समुद्री हवाएं अक्सर इन झोपड़ियों को उड़ा ले जातीं और कैदियों को खुले में रहना पड़ता। जिसके चलते बड़े पैमाने पर कैदी बीमार होकर मरने लगे।

कैदियों के आने के 38 साल बाद 1896 में अंग्रजों ने अंडमान में जेल की बिल्डिंग बनाने का फैसला किया। इसके लिए बर्मा से ईंटें मंगवाई गईं। कैदियों ने खुद अपने लिए जेल बनाई। इस तरह 5 लाख रुपए में 1906 में अंडमान की प्रसिद्ध सेल्यूलर जेल बनकर तैयार हुई।

सेल शब्द से आया सेल्यूलर जेल, कई कमरों की बैरक

जेल की भाषा में एकांत कमरे को सेल कहा जाता है। अंडमान में बनी जेल की खासियत यह थी कि इसमें हर कैदी के लिए एक छोटा सा सेल बना था। जिसके चलते इसे ‘सेल्यूलर जेल’ नाम दिया गया।

जेल को एक सेंटर से निकले 7 कतारों में इस तरह बनाया गया था कि कैदियों को बाहर कुछ नजर न आए और वो बिल्कुल अकेले रहें।

आगरा में खुली देश की पहली सेंट्रल जेल

ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने कारोबारी विरोधियों को पकड़ने और जुर्माना लेने के लिए सैकड़ों छोटी-बड़ी जेलें खोल रखी थीं, लेकिन ये जेल मौजूदा जेलों की तरह ऊंची चारदीवारी वाली नहीं होती थीं। कहीं किसी कमरे को तो कहीं पुरानी इमारत को जेल बना दिया गया था।

1835 में लॉर्ड मैकॉले ने सिफारिश की कि भारत में जेलों की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नई और बड़ी जेल खोलने की जरूरत है। इस कमेटी की सिफारिश के बाद 1848 में आगरा में देश की पहली सेंट्रल जेल खोली गई।

1837 में तत्कालीन मद्रास में भी अंग्रेजों मे एक बड़ी जेल खोली। यह अंग्रेजी शासनकाल की शुरुआती नियोजित जेलों में से एक थी। 1855 में इसे सेंट्रल जेल का दर्जा दिया गया। 16,496 रुपए की लागत से बनी इस जेल में कालेपानी की सजा पाए कैदियों को रखा जाता था। जिन्हें बाद में अंडमान या बर्मा के मांडले जेल में भेज दिया जाता।

नैनी जेल में अंग्रेज क्रांतिकारी भी बंद किए गए

इलाहाबाद आजादी के आंदोलन का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। जिसे देखते हुए अंग्रेजों ने साल 1884 में यहां 3000 की क्षमता वाली सेंट्रल जेल बनाई। इस जेल को क्रांतिकारियों का दूसरा घर माना जाता था। यहां ज्यादातर राजनीतिक कैदियों को रखा जाता।

नैनी जेल का इतिहास काफी रोचक है। यहां भारतीय स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले अंग्रेज कैदियों को भी रखा गया था।

एलसी लैडली, पीएच हॉल्डन, डगलैस्टर, आईआर डायमंड, जॉर्ज हेरॉल्ड और बेंजामिन फ्रांसिस पर भारतीय क्रांतिकारियों के साथ मिलकर ‘वंदे मातरम्’ गाने और स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने का आरोप था। सभी को इसी जेल में बंद किया गया। नैनी जेल में आज भी इन अंग्रेज क्रांतिकारियों के नाम लिखे हुए हैं।

17 फीट की दीवार फांदकर जेल से भागे थे जेपी

‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान हजारीबाग सेंट्रल जेल में जयप्रकाश नारायण को बंद किया गया था। इस समय तक महात्मा गांधी और नेहरू जैसे सभी प्रमुख नेता गिरफ्तार हो चुके थे। ऐसे में जेल में बंद जेपी और साथियों ने बाहर निकलकर आंदोलन को नेतृत्व देने की ठानी।

9 नवंबर, 1942 दिवाली की रात थी। जेपी और उनके 5 साथियों ने 56 धोतियों के सहारे 17 फीट ऊंची दीवार को फांदकर फरार हो गए। अंग्रेजों को 9 घंटे बाद जब इसकी खबर मिली, जेपी और उनके साथी हजारीबाग से काफी दूर निकल चुुके थे। जिसके बाद अंग्रेजों ने जेपी को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया।

मौजूदा वक्त में ऐतिहासिक जेल की इस इमारत में एक गर्ल्स स्कूल चल रहा है। जेपी के ही नाम पर एक जेल उससे हटकर बनाई गई है।

सिराजुद्दौला ने 14 फीट के कमरे में बंद किए 146 अंग्रेज, सिर्फ 23 जिंदा बचे

भारत में बड़ी-बड़ी जेल बनाकर क्रांतिकारियों को बंद करने वाले अंग्रेजों के साथ भी जेल की एक दुखद घटना जुड़ी है। बात तब की है, जब अंग्रेज भारत में व्यापारी बनकर आए थे। एक बार बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला अंग्रेजों से किसी बात पर खफा हो गए।

सन् 1756 में सिराजुद्दौला ने पकड़ में आए 146 अंग्रेजों को सजा देने की ठानी। तब आज की तरह आधुनिक जेल और बैरक तो नहीं थी। ऐसे में नवाब के सिपाहियों ने सभी अंग्रेजों को 14 फीट के कमरे में बंद कर दिया। इसमें महिलाएं भी शामिल थीं। छोटे से कमरे को रात भर बंद रखने के बाद जब सुबह उसे खोला गया तो सिर्फ 23 अंग्रेज जिंदा, लेकिन बेहोश मिले। बाकी सभी की दम घुटने से मौत हो चुकी थी।

गांधीजी के लिए महल को जेल में तब्दील कर दिया गया

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधीजी को कुल 13 बार गिरफ्तार किया गया। उन्हें दूसरी किसी जेल में आम कैदियों की तरह रखना संभव नहीं था; दूसरी ओर अंग्रेज यह भी नहीं चाहते थे कि जेल में गांधीजी दूसरे सत्याग्रहियों से मिलकर उन्हें प्रभावित करें। इसके लिए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान गांधीजी को गिरफ्तार कर पुणे के आगा खां पैलेस में बंद कर दिया गया।

कहने को तो ये 6.5 एकड़ में फैला एक शानदार महल था, लेकिन इसे चारों ओर से घेर कर जेल में तब्दील कर दिया गया। किसी को बिना अनुमति अंदर या बाहर आने की इजाजत नहीं होती। इस महल जेल में गांधीजी के साथ कस्तूरबा गांधी को भी रखा गया था। इसी जेल में गांधी के दो प्रियजनों की मृत्यु हुई। कस्तूरबा गांधी और बापू के सहयोगी महादेव देसाई की। अब इस महल जेल को म्यूजियम में बदल दिया गया है। यहां कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई की समाधि है।

जब विजय माल्या ने जेल बनाने में मास्टर अंग्रेजों को दिखाया आईना

भारत के बैंकों से हजारों करोड़ रुपए लेकर फरार हुए कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए CBI लंबे समय से कोशिश कर रही है। ब्रिटिश कोर्ट में तमाम दलीलों के चूक जाने के बाद विजय माल्या ने कहा कि भारत के जेलों की स्थिति बहुत दयनीय है, अगर उसे वहां रखा गया तो इससे उसके मानवाधिकार का हनन होगा। इसके जवाब में CBI ने ब्रिटिश कोर्ट से कहा कि भारत की ज्यादातर जेलें ब्रिटिश हुकूमत की ही बनाई हुई हैं। ब्रिटिश कोर्ट या विजय माल्या के पास इसका कोई जवाब नहीं था।

जेल में ही लिखा गया स्वतंत्रता समर का इतिहास

आजादी के आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों के पास इतना वक्त नहीं रहता था कि वो किताबें लिखें। ऐसे में जब वे जेल में डाल दिए जाते तो किताबों और पत्रों की मदद से आजादी की अलख जगाते। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लगभग सभी महत्वपूर्ण किताबें जेलों में ही लिखी गईं। महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, भगत सिंह जैसे सेनानियों ने जेल में रहने के दौरान किताबें लिखीं। मात्र 2 साल जेल में रहने के दौरान भगत सिंह ने 4 किताबें लिखीं। उनकी आखिरी किताब फांसी से कुछ दिन पहले ही पूरी हुई।

आपने ब्रिटिश जेलों की कहानी जान ली। साथ ही अंग्रेजी क्रूरता के किस्सों को भी जाना, जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ जेलों में हुआ। ब्रिटिश दौर के कई जेल अब संग्रहालय में तब्दील हो चुके हैं, कुछ को अस्पताल तो कुछ को स्कूल भी बना दिया गया। पर ज्यादातर जेलें आज भी उसी रूप में काम कर रही हैं। अंग्रेजों के जमाने के जेलरों के दिन भले लद गए, पर अंग्रेजों के जमाने की जेलें आज भी कायम हैं।

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क्यों हुआ संविधान पर साइन के लिए 2 महीने इंतजार

भारतीय गणतंत्र में संविधान ही सर्वोच्च है। इसके बावजूद संविधान पर उंगली उठाने वाले भी कम नहीं हैं। सबसे ताजा वाकया जुलाई, 2022 का है। केरल के एक मंत्री ने संविधान को लोकतंत्र विरोधी बता दिया तो बवाल मच गया।

लेकिन संविधान पर इस तरह के सवाल और विवाद कोई नए नहीं हैं, बल्कि संविधान बनते समय भी ड्राफ्टिंग कमेटी (जिसके चेयरमैन डॉ. भीमराव अंबेडकर थे) के काम और उनकी सोच पर खुद इसे बनाने वाली कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली के मेंबर्स भी सवाल उठा चुके हैं।

क्या आप जानते हैं कि संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू क्यों माना जाता है, जबकि इसकी प्रस्तावना के मुताबिक ही कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली ने इसे 26 नवंबर, 1949 को पारित कर दिया था?

क्या आप जानते हैं क्यों कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली के ही सदस्य ने कहा था कि ये संविधान लोकतंत्र और संघीय ढांचे को बढ़ावा देने के बजाय इसे खत्म करता है।

क्या आप जानते हैं कि कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली को आखिर चुना किसने था? उनके चुनाव में वोट देने वाले कौन थे?

संविधान की प्रस्तावना की आखिरी लाइन में लिखा है कि कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली ने 26 नवंबर, 1949 को संविधान का ड्राफ्ट पारित कर दिया था।

पारित होने का मतलब ये कि संविधान बनकर तैयार था और असैंबली के सभी सदस्यों को स्वीकार था। अब सिर्फ हस्ताक्षर होने बाकी थे।

सिर्फ हस्ताक्षर के लिए दो महीने बाद की तारीख 24 जनवरी, 1950 तय की गई। 24 जनवरी को ही हस्ताक्षर भी हो गए, मगर संविधान के अमल में आने की तारीख 26 जनवरी, 1950 तय की गई।

दरअसल, 19 दिसंबर, 1929 को कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी। इसके बाद 26 जनवरी, 1930 को जनता के सामने इसकी घोषणा की गई थी।

लोगों से अपील की गई थी कि हर साल 26 जनवरी, को बतौर स्वतंत्रता दिवस मनाया जाए। इसके बाद हर साल देश में कई जगह 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाया भी जाता था।

कुछ लोगों का मानना है कि इस तारीख को यादगार बनाए रखने के लिए ही संविधान पारित हो जाने के बावजूद इसे लागू करने के लिए दो महीने का इंतजार किया गया।

दो महीने के इस इंतजार का सच जानने के लिए हमने कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली के सत्रों के दौरान हुई मेंबर्स के बीच हुई बहस को खंगाला। तथ्य वाकई चौंकाने वाले हैं…

22 जनवरी, 1947 को पहली बार कॉन्स्टिट्युएंट असेंबली में हुआ था 26 जनवरी की तारीख का जिक्र

9 दिसंबर, 1946 से देश का अपना संविधान बनाने के लिए गठित कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली का पहला सेशन शुरू हुआ था। दिसंबर, 1946 के सेशन में ही सभा के लक्ष्य और उद्देश्य को लेकर पंडित जवाहर लाल नेहरू एक प्रस्ताव लाए थे। इस प्रस्ताव में भारत को स्वतंत्र किए जाने का भी जिक्र था।

इसके बाद देश का घटनाक्रम भी तेजी से बदला और ब्रिटिश पार्लियामेंट में 18 जुलाई, 1947 को इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट के पारित होने के बाद 15 अगस्त को भारत की आजादी की घोषणा कर दी गई।

26 जनवरी की तारीख को लेकर चर्चा कई बार हुई…कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं लाया गया

कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली के सत्रों में कई बार इस बात का जिक्र आया कि भले ही स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त हो, लेकिन संविधान को पारित करने की तारीख 26 जनवरी रखी जाए और इसे बतौर गणतंत्र दिवस मनाया जाए।

जुलाई 1949 के बाद से होने वाले सत्रों में इस बात पर ज्यादा जोर दिया जाने लगा कि संविधान के अमल लाए जाने की तारीख तय की जाए और ये 26 जनवरी हो।

आर्टिकल 314 पर में एक वाक्यांश का इस्तेमाल किया गया था ‘...the date of the commencement of this constitution…’ इसी में इस तारीख के तौर पर 26 जनवरी, 1950 का जिक्र किया गया था।

हालांकि इस बात पर कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं लाया गया। बाद के सत्रों में हुई चर्चाओं में यह बात आम सहमति में आ गई कि 26 जनवरी को ही संविधान के अमल में आने की घोषणा की जाएगी।

26 जनवरी की तारीख पर सभा में नहीं था कोई विवाद…हिंदी अनुवाद के लिए भी समय चाहिए था

संविधान के अमल में आने की घोषणा 26 जनवरी, 1950 को ही की जाए, इस बात पर कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली में कोई विवाद नहीं था।

शुरुआती सत्रों से ही सभी सदस्यों ने ये इच्छा जताई थी कि जब भी संविधान बनकर तैयार हो, इसे 26 जनवरी को ही लागू किया जाए।

एक सदस्य ने तो संविधान की प्रस्तावना में भी इसे पारित करने की तारीख के तौर पर 26 जनवरी का जिक्र किए जाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि इसे स्वीकार नहीं किया गया।

इस वजह से भी 26 नवंबर, 1949 को पारित होने के बाद हस्ताक्षर और राष्ट्रपति के चुनाव के लिए 24 जनवरी, 1950 की तारीख तय की गई।

दूसरा विवाद…

संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के काम पर उठे थे कई बार सवाल…‘ड्रिफ्टिंग कमेटी’ तक कहा गया

जुलाई, 2022 में केरल के एक मंत्री ने संविधान की आलोचना करते हुए बयान दिया था, जिस पर काफी विवाद भी खड़ा हो गया था।

लेकिन इस संविधान पर सबसे ज्यादा सवाल इसे बनाने वाली कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली ने ही उठाए थे। संविधान की ड्राफ्टिंग के दौरान इसमें संशोधन के कुल 7635 प्रस्ताव लाए गए थे। इसमें से 2473 संशोधन स्वीकार भी किए गए।

असैंबली के सदस्य नजीरुद्दीन अहमद ने ड्राफ्टिंग कमेटी के कामकाज पर इतने सवाल उठाए थे कि 25 नवंबर, 1949 को संविधान का ड्राफ्ट पेश करते समय ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ. भीमराव अंबेडकर ने खासतौर पर उनका जिक्र किया था।

सदस्य के. हनुमंतिया ने 17 नवंबर, 1949 को कहा था कि वे संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के काम की तारीफ नहीं कर सकते क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जो भावना संविधान को लेकर थी, वो इसमें नहीं दिखती।

गांधी जी का कहना था कि लोकतंत्र की असली ताकत सत्ता के विकेंद्रीकरण में है। यानी पंचायत स्तर पर ज्यादा से ज्यादा ताकत दी जानी चाहिए। लेकिन ये संविधान ज्यादा ताकत दिल्ली को देता है।

के. हनुमंतिया ने ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्यों की भी आलोचना की थी। उनका कहना था कि ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्यों में कई लोग बहुत काबिल हैं। लेकिन फिर भी स्वतंत्रता संग्राम के बारे में उनके विचार, आंदोलन के नेताओं से मेल नहीं खाते हैं।

उनका कहना था कि ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य कानूनी मामलों के जानकार हैं, लेकिन ये उन्हीं कानूनों के जानकार हैं जो आजादी से पहले अंग्रेजों ने बनाए थे। हमारा संविधान बनाने के लिए सिर्फ ये काबिलियत काफी नहीं है।

तीसरा विवाद…

कॉन्स्टिट्युएंट असेंबली के चुनाव पर ही लोगों ने उठाए सवाल…ये जनता की चुनी हुई सभा नहीं थी

संविधान बनाने के लिए कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली के गठन की प्रक्रिया लॉर्ड माउंटबेटेन के समय में शुरू हुई थी। इसका चुनाव 1946 में हुआ था।

इस प्रक्रिया में भारत की जनता की भागीदारी नहीं थी। उस समय कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली में 389 सीटें तय की गई थीं। इनमें से 292 राज्यों के प्रतिनिधि थे, 93 प्रतिनिधि रियासतों के थे और 4 सदस्य दिल्ली, अजमेर-मेरवाड़ा, कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान के चीफ कमिश्नर की ओर से थे।

इनका चुनाव राज्यों की प्रोविंशियल असैंबली के सदस्यों को करना था। राज्यों की प्रोविंशियल असैंबली के सदस्य भी जनता के चुने हुए प्रतिनिधि नहीं थे। बल्कि इन्हें भी सरकार ने नियुक्त किया था।

यही नहीं, संविधान के निर्माण में भी आम जनता से कोई राय नहीं ली गई थी। आज संसद में कोई बिल लाने से पहले सरकार उसे सार्वजनिक मंच पर रख जनता और स्टेक होल्डर्स से उनकी राय मांगती है।

संविधान निर्माण के दौरान जनता से राय लेने का कोई प्रावधान था ही नहीं। राजीव धवन कहते हैं कि कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली ने जैसा भी संविधान बनाया, जनता के सामने उसे स्वीकार करने के अलावा कोई और ऑप्शन ही नहीं था।

आज भी कई जानकार ये जरूर मानते हैं कि संविधान के ड्राफ्ट में उन लोगों का प्रभाव ज्यादा रहा था जो मुख्य रूप से ब्रिटिशकाल के कानूनों की बारीकियों को ही समझते थे। यही वजह है कि हमारे संविधान ने कई देशों के संविधान से चीजें ली जरूर हैं, मगर उस पर सबसे ज्यादा प्रभाव ब्रिटिश कॉन्स्टिट्यूशन का ही दिखता है।

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"सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही" : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के तीखे बोल

नई दिल्‍ली : 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari), जिनके सीधे सपाट अंदाज में बात कहने के अंदाज ने संभवत: उन्‍हें बीजेपी की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्‍था में स्‍थान से वंचित किया है, ने एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. गडकरी ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही है और यह एक समस्‍या है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, "आप चमत्‍कार कर सकते हैं...और ऐसा करने की क्षमता है. मेरा मानना है कि भारतीय बुनियादी संरचना का भविष्‍य उज्‍ज्‍वल है. हमें अच्छी तकनीक, अच्छे नवाचार, अच्छे शोध और सफल प्रथाओं को  दुनिया और देश में स्वीकार करने की जरूरत है. हमारे पास वैकल्पिक मटेरियल होना चाहिए ताकि हम क्‍वालिटी से समझौता किए बिना लागत कम कर सकें. समय निर्माण में सबसे अहम चीज है. समय सबसे बड़ी पूंजी है. सबसे बड़ी समस्‍या यह है कि सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही है. 

एसोसिएशन ऑफ कंसल्टिंग सिविल इंजीनियर मुंबई की ओर से आयोजित कार्यक्रम NATCON 2022 को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीकी या संसाधनों से अधिक महत्‍वपूर्ण समय है. गडकरी के इन शब्‍दों और पीएम नरेंद्र मोदी की कुछ दिनों पहले किए गए उस कमेंट में विभिन्‍नता देखने में आई है जिसमें पीएम ने "अमृत काल" या स्‍वर्ण युग के बड़े मील के पत्‍थरों को पार करने में सरकार की कामयाबी का जिक्र किया था. 

हालांकि बीजेपी के नेताओं का कहना है कि गडकरी के यह शब्‍द किसी सरकार विशेष के लिए नहीं बल्कि सामान्‍य तौर पर सरकारों के लिए कहे गए हैं.गौरतलब है कि वर्ष 2024 के आम चुनाव सहित आने वाले चुनावों को ध्‍यान में रखते हुए पिछले सप्‍ताह  बीजेपी संसदीय बोर्ड का नए सिरे से गठन किया गया है, इसमें गडकरी को स्‍थान नहीं दिया गया है.गडकरी का इस महत्‍वपूर्ण समिति से बाहर होना आश्‍चर्यजनक है. वे नरेंद्र मोदी कैबिनेट के वरिष्‍ठ मंत्री हैं, वे बीजेपी अध्‍यक्ष की जिम्‍मेदारी भी संभाल चुके हैं. आमतौर पर पार्टी, अपने पूर्व अध्‍यक्ष को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करती है. एक अन्‍य अहम बात यह है कि गडकरी, बीजेपी की वैचारिक संस्‍था राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS)के करीबी हैं.  

बता दें, कुछ समय पहले नागपुर में एक कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा था कि उनका अकसर राजनीति छोड़ने का मन करता है क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि जिंदगी में करने के लिए बहुत कुछ है. समाजसेवी गिरीश गांधी को सम्‍मानित करने के लिए आयोजित समारोह में गडकरी ने कहा था, "कई बार मुझे लगता है कि मुझे राजनीति छोड़ देनी चाहिए. राजनीति के अलावा भी जिंदगी में करने के लिए बहुत कुछ है." केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री गडकरी ने कहा कि उनका मानना है कि राजनीति, सामाजिक बदलाव के लिए है लेकिन अब यह सत्‍ता में बने रहने का जरिया अधिक बन गई है. 

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बिलकिस बानो केस में सजा सुनाने वाले पूर्व जज ने दोषियों की रिहाई पर उठाए सवाल

बॉम्‍बे हाईकोर्ट के जज के पद से रिटायर हुए जस्टिस यूडी साल्‍वी ने कहा, "जिसने भी यह फैसला लिया, उसे इस पर पुनर्विचार करना चाहिए

मुंबई : : 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और उसके परिवार के सात सदस्‍यों की हत्‍या के 11 दोषियों को रिहा नहीं किया जाना चाहिए था. 14 साल पहले इन लोगों दोषी ठहराने वाले जज ने यह बात कही है. उन्‍होंने एक विचारधारा के लोगों की ओर से दोषियों के मिठाई और फूलमालाओं से स्‍वागत की भी आलोचना की. बॉम्‍बे हाईकोर्ट के जज के पद से रिटायर हुए जस्टिस यूडी साल्‍वी ने कहा, "जिसमें भी यह फैसला लिया, उसे इस पर पुनर्विचार करना चाहिए. मैं बस इतना ही कह सकता हूं." उन्‍होंने कहा, "यह मामला हर प्रक्रिया से गुजरा और हम सभी जानते हैं कि इन 11 दोषियों को तमाम सबूतों के बाद उम्रकैद की सजा मिली थी. अब सरकार ने बाद में क्‍या सोचा, यह एक सवाल है.

जस्टिस साल्‍वी ने कहा, "सरकार के पास 'माफी' देने की शक्ति है लेकिन कोई भी निर्णय लेने के पहले उसे हर पहलू पर सोचना चाहिए अन्‍यथा यह सही नहीं है. मैं नहीं जानता कि उन्‍होंने इस प्रक्रिया को अपनाया है या नहीं. "उन्‍होंने कहा, "क्‍या उन्‍होंने उस जज से पूछा जिसके अधीन केस सुना गया? मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने इस बारे में कुछ नहीं सुना. इस केस की सीबीआई द्वारा जांच की गई. ऐसे मामलों में राज्‍य सरकार को केंद्र सरकार से भी सलाह लेने की जरूरत होती है. क्‍या उन्‍होंने ऐसा किया? मुझे कोई जानकारी नहीं है. यदि उन्‍होंने किया तो केंद्र सरकार ने क्‍या कहा?"

जज ने रिहाई के बाद दोषियों के सत्‍ताधारी बीजेपी की ओर से जुड़े ग्रुप द्वारा मिठाई और फूलमालाओं से स्‍वागत की भी आलोचना की. उन्‍होंने बीजेपी के एक विधायक के इस बयान की भी आलोचना कि ये लोग अच्‍छे संस्‍कार वाले ब्राह्मण थे. जस्टिस साल्‍वी ने कहा, "इन 11 दोषियों का स्‍वागत करना सही नहीं है. कुछ लोग सोचते हैं कि यह हिंदुत्‍व का हिस्‍सा है या उन्‍होंने हिंदू के तौर पर ऐसा किया. यह गलत है...कुछ कह रहे हैं कि वे ब्राह्माण हैं, यह कहना सही नहीं है.

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नीतीश कैबिनेट में विभागों का बंटवारा- तेजस्‍वी को मिला स्‍वास्‍थ्‍य, तेज प्रताप बने वन व पर्यावरण मंत्री

पटना: बिहार की महागठबंधन सरकार  का मंत्रिमंडल विस्तार मंगलवार को राजभवन में संपन्‍न हुआ। इसके लिए 31 मंत्रियों की लिस्ट देर रात ही फाइनल  हो चुकी थी। मंगलवार को लिस्‍ट में शामिल मंत्रियों ने समूहों में शपथ ली। शपथ लेने वाले मंत्रियों में लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव शामिल हैं। शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची में उपेंद्र कुशवाहा का नाम नहीं था। शपथ ग्रहण के बाद मंत्रियों में विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया है। तेज प्रताप यादव वन व पर्यावरण मंत्री बनाए गए हैं। महागठबंधन की पिछली सरकार में तेज प्रताप के पास रहा स्‍वास्‍थ्‍य विभाग इस बार उपमुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी यादव के पास है। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (VM Nitish Kumar) ने गृह विभाग अपने पास रखा है। शपथ लेने वाले 31 मंत्रियों में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के 11, राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के 16, कांग्रेस (Congress) के दो तथा हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (HAM) के एक मंत्री का फार्मूला बनाया गया। एक निर्दलीय को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई। छूट गए कई बड़े चेहरों को अगले मंत्रिमंडल विस्‍तार में जगह दी जानी है। 

नीतीश के पास है गृह विभाग, आरजेडी से स्‍पीकर

शपथ ग्रहण के पहले आरजेडी व जेडीयू के बीच गृह विभाग को लेकर फंसा पेच सुलझा लिया गया। हमेशा की तरह गृह विभाग मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पास ही रखा है। नीतीश कुमार को गृह के अलावा सामान्‍य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन तथा वैसे सभी विभाग, जाे किसी को आवंटित नहीं हैं, मिले हैं।बदले में आरजेडी के खाते में विधानसभा अध्‍यक्ष का पद गया है। सूत्र बताते हैं कि अवध बिहारी चौधरी महागठबंधन सरकार में विधानसभा अध्‍यक्ष बनाए जाएंगे। बताया जा रहा है कि आरजेडी के चंद्रशेखर शिक्षा मंत्री बनाए गए हैं। 

तेज प्रताप को वन-पर्यावरण, तेजस्‍वी को स्‍वास्‍थ्‍य

मंत्रिमंडल में आरजेडी कोटे से लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री बनाया जाने की बात की जा रही थी, लेकिन उन्‍हें वन व पर्यावरण मंत्री बनाया गया है। महागठबंधन की पिछली सरकार में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग तेज प्रताप के पास था, जो इस बार तेजस्‍वी के पास गया है। तेजस्‍वी यादव को स्‍वास्‍थ्‍य, पथ निर्माण, नगर विकास तथा ग्रामीण कार्य के चार विभाग दिए गए हैं।

शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों को मिले ये विभाग

राष्‍ट्रीय जनता दल

  1. तेज प्रताप यादव: वन-पर्यावरण
  2. आलोक मेहता : राजस्‍व एवं भूमि सुधार
  3. अनिता देवी: पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग कल्‍याण
  4. सुरेंद्र यादव: सहकारिता
  5. चंद्रशेखर: शिक्षा
  6. ललित यादव: लोक स्‍वास्‍थ्‍य अभियंत्रण
  7. जीतेंद्र राय: कला-संस्‍कृति व युवा
  8. रामानंद यादव: खान एवं भूतत्‍व
  9. सुधाकर सिंह: कृषि
  10. सर्वजीत कुमार: पर्यटन
  11. सुरेंद्र राम: श्रम संसाधन
  12. शमीम अहमद: गन्‍ना उद्योग
  13. शहनवाज: बापदा प्रबंधन
  14. इसरायल मंसूरी: सूचना-प्रावैधिकी
  15. कार्तिक सिंह: विधि मंत्री
  16. समीर महासेठ: उद्योग

जनता दल यूनाइटेड: 

  1. विजय चौधरी: वित्‍त, वाणिज्‍य एवं संसदीय कार्य
  2. बिजेंद्र यादव: ऊर्जा, योजना
  3. अशोक चौधरी: भवन निर्माण
  4. श्रवण कुमार: ग्रामीण विकास
  5. संजय झा: जल संसाधन, सूचना व जनसंपर्क
  6. मदन सहनी: समाज कल्‍याण
  7. शीला कुमारी: परिवहन
  8. लेशी सिंह: खाद्य व उपभोक्‍ता संरक्षण
  9. जमा खान: अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण
  10. जयंत राज: लघु जल संसाधन
  11. सुनील कुमार: निबंधन, उत्‍पाद व मद्य निषेध
  12. कांग्रेस:
    1. मुरारी प्रसाद गौतम: पंचायती राज
    2. अफाक आलम: पशु एवं मत्‍स्‍य संसाधन
  13. हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा:

    1. संतोष कुमार सुमन: अनुसूचित जाति व जनजाति कल्‍याण
  14. निर्दलीय:

    1. सुमित कुमार सिंह: विज्ञान एवं प्रावैधिकी


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UP में खुले रहेंगे स्कूल-कालेज-बाजार व सभी आफिस, उत्साह से मनेगा आजादी का अमृत महोत्सव

लखनऊ। आजादी के अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) के तहत स्वतंत्रता दिवस (Independence day) इस वर्ष विशेष उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय पर्व में जनभागीदारी बढ़ाते हुए स्वतंत्रता सप्ताह और हर घर तिरंगा जैसे कार्यक्रम (Har ghar Tiranga Abhiyan) आयोजित किए गए हैं। इसके साथ ही सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय किया है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस पर अवकाश नहीं रहेगा, बल्कि हर जगह इसे उत्साहपूर्वक मनाया जाएगा। 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पिछले दिनों निर्देश दिए थे स्वतंत्रता दिवस पर राज्य में कोई भी स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, सरकारी या गैर सरकारी दफ्तर, बाजार, माल व कारखाने आदि बंद नहीं रहेंगे। इसके लिए ही पिछले दिनों मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की ओर से शासनादेश जारी किया जा चुका है।

सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यूपी में  11 से 17 अगस्त तक स्वतंत्रता दिवस सप्ताह मनाया जा रहा है। निर्देश दिए गए हैं कि इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सभी स्कूल-कॉलेजों और संस्थानों पर सफाई का कार्यक्रम आयोजित होगा। सभी घरों और सरकारी, गैर सरकारी दफ्तरों और संस्थानों में सार्वजनिक स्थलों पर तिरंगा फहराया जाएगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता दिवस को लेकर प्रदेश के लोगों से अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए कहा है। जिसका असर भी दिख रहा है। हर घर तिरंगा अभियान में लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। सीएम योगी की ओर से प्रदेश में 4.5 करोड़ तिरंगे फहराने का लक्ष्य तय किया गया है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रदेश के हजारों स्वयं सहायता समूह, गैर सरकारी संगठन, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम इकाइयां दिन और रात एक किये हुए हैं। स्थिति यह है कि यूपी इस लक्ष्य से भी ज्यादा छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान से लोगों को जोड़ने की जरूरत है। इसके साथ ही युवाओं के लिए सेल्फी विद तिरंगा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की सेल्फी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया जाना चाहिए।


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राहुल का महंगाई को लेकर सरकार पर तंज

नई दिल्ली, 26 मार्च। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महंगाई को लेकर दो पंक्ति की कविता में सरकार पर शनिवार को तीखा तंज करते हुए कहा कि वह अपने लिए खुशहाली का महल बनाने में जुटी है और जनता महंगाई की मार से त्रस्त है। श्री गांधी ने ट्वीट किया "राजा करे महल की तैयारी, प्रजा बेचारी महंगाई की मारी।" इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के कुछ ट्वीट को उद्धृत किया है जिनमें कहा गया है कि पेट्रोल डीजल की कीमतें आउट ऑफ कंट्रोल हो गई हैं और पांच दिन में इनकी दर 3.20 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है जबकि घरेलू सिलेंडर गैस की कीमत 50 रुपये तक महँगी हो गई है।

 

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अखिलेश को सपा विधायक दल का नेता चुना गया

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव को विधानसभा में पार्टी के विधायक दल और विधानमंडल दल का नेता चुना गया है। यहां स्थित सपा मुख्यालय में शनिवार को हुयी पार्टी विधायक दल की बैठक में अखिलेश को सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से नेता चुन लिया। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने विधायक दल की बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में अखिलेश को सर्वसम्मति से पार्टी के विधानमंडल दल का नेता भी चुना गया। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में सपा के 111 विधायक जीते हैं। इस प्रकार विधानसभा में दूसरा सबसे बड़ा दल होने के नाते सपा मुख्य विपक्षी पार्टी होगी। ऐसे में अखिलेश का नेता प्रतिपक्ष बनना लगभग तय है। विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश ने आजमगढ़ से लोकसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया था। उत्तम ने बताया कि सपा के वरिष्ठ विधायक अवधेश प्रसाद ने अखिलेश को विधायक दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा और विधायक आलम बदी ने उसका समर्थन किया। इसके अलावा विधायक लालजी वर्मा ने अखिलेश को विधानमंडल दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा। सपा के चुनाव चिन्ह पर विधायक बने प्रसपा नेता शिवपाल सिंह यादव को बैठक में नहीं बुलाये जाने के बारे में उत्तम ने कहा कि आज केवल सपा के विधायकों को बुलाया गया था। बैठक में सहयोगी दलों के किसी विधायक को नहीं बुलाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया, “सहयोगी दलों के जो विधायक सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीते उन्हें और सहयोगी दलाें के विधायकाें की बैठक 28 मार्च को बुलायी गयी है, चाहे वे शिवपाल यादव हों, पल्लवी पटेल या ओपी राजभर हों, सब को 28 मार्च को बुलाया जाएगा।”

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हिजाब विवाद सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट का निश्चित तारीख देने से इनकार (अपडेट)

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 'हिजाब' के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए कोई निश्चित तारीख तय करने से गुरुवार को इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत द्वारा शीघ्र सुनवाई के लिए किसी निश्चित तारीख पर सूचीबद्ध करने की गुहार ठुकरा दी।

श्री कामत ने कर्नाटक में 28 मार्च से आयोजित होने वाली परीक्षाओं( जिसमें याचिकाकर्ता भी शामिल है) का उल्लेख करते हुए उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली कुछ छात्राओं की याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।

श्री कामत द्वारा 'विशेष उल्लेख' के दौरान परीक्षा की तारीख का जिक्र करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "इसका परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक संवेदनशील मामला है।"

मुख्य न्यायाधीश ने 16 मार्च को तत्काल सुनवाई करने की मांग संबंधी गुहार के मद्देनजर इस मामले पर होली के बाद विचार करने का संकेत दिया था।

वरिष्ठ वकील संजय हेगडे ने इस मामले को अति आवश्यक बताते हुए 16 मार्च को विशेष उल्लेख के दौरान तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी।

स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक जारी रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद ही उसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी। इसके बाद कई याचिकाएं दायर की गईं।

याचिकाकर्ताओं में शामिल निबा नाज़ ने उच्च न्यायालय के फैसले को अधिवक्ता अनस तनवीर के माध्यम से शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

याचिकाकर्ता ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम-1983 और इसके तहत बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए अपनी याचिका में दावा किया है कि विद्यार्थियों के लिए किसी भी तरह से अनिवार्य वर्दी का प्रावधान नहीं है।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था, "हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वर्दी का निर्धारण संवैधानिक है और विद्यार्थी इस पर आपत्ति नहीं कर सकते।"

अदालत में दायर याचिका में कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा पारित पांच फरवरी 2022 के आदेश की वैधता पर सवाल सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि यह निर्देश "धार्मिक अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से इस्लामी आस्था के हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला अनुयायियों का उपहास कर उन पर एक प्रकार से हमला करने के अप्रत्यक्ष इरादे से जारी किया गया था।"

याचिका में कहा गया है कि हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अंतरात्मा के अधिकार के तहत संरक्षित है।

याचिकाकर्ताओं ने विभिन्न तर्कों के माध्यम से उच्च न्यायालय के फैसले को कानून के खिलाफ बताते हुए उसे चुनौती दी।

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लगातार दूसरी बार जनादेश हासिल करने वाले पहले मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश के चुनावी इतिहास में चार दशक बाद योगी आदित्यनाथ ने नया अध्याय जोड़ा है। इस अवधि में वह लगातार दूसरी बार जनादेश हासिल करने वाले पहले मुख्यमंत्री है। चुनावी समर में लोकप्रियता या समीकरण के बल पर एक बार सफलता मिल सकती है। लेकिन दूसरी बार की सफलता नेतृत्व की नेकनीयत व विश्वसनीयता पर आधारित होती है। तब नेतृत्व के यह दो गुण कारक बन जाते हैं। इस कारण चालीस वर्षों के दौरान किसी मुख्यमंत्री को दोबारा जनादेश नहीं मिला।

 

योगी आदित्यनाथ अपनी नेकनीयत व विश्वसनीयता को कायम रखने में सफल रहे। केंद्र में नरेंद्र मोदी को भी इस आधार पर सफलता मिलती रही है। गुजरात के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी यह विशेषता कायम रखी। इस लिहाज से नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ एक ही धरातल पर है। दोनों परिवारवाद की राजनीति से दूर हैं। समाज सेवा में पूरी निष्ठा व ईमानदारी से समर्पित रहते हैं।

 

विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोरोना की तीसरी लहर को लेकर संशय था। उस समय योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार की जगह कोरोना आपदा प्रबंधन को वरीयता दी। जनपदों की यात्रा कर रहे थे। सभी जगह कोरोना चिकित्सा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे। आपदा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था के बाद ही उन्होंने चुनाव प्रचार की तरफ ध्यान दिया। इसी प्रकार चुनाव परिणाम आने के बाद वह जन कल्याण कार्यों में सक्रिय हो गए। उन्होंने बारह से चौदह वर्ष आयु के बच्चों के वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान के सुचारू संचालन हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया।

 

कोरोना आपदा प्रबंधन में योगी मॉडल की प्रशंसा दुनिया में रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसकी सराहना की थी। इस पूरी अवधि में योगी आदित्यनाथ ने कई बार प्रदेश की यात्राएं की थी। वह अनवरत प्रबंधन का जायजा लेते रहे। वैक्सिनेशन के संबन्ध में भी केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया गया। योगी आदित्यनाथ वैक्सिनेशन केंद्रों में पहुंच कर लोगों का उत्साह वर्धन करते रहे। इसके चलते उत्तर प्रदेश ने वैक्सिनेशन का रिकार्ड कायम कर दिया। यह यात्रा अगले चरण के रूप में जारी है।

 

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सर्वाधिक टेस्ट व सर्वाधिक वैक्सीनेशन करने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। राज्य में अब तक करीब तीस करोड़ वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। प्रदेश में वैक्सीन की पहली डोज के शत प्रतिशत से अधिक के लक्ष्य को प्राप्त किया जा चुका है। अब तक एक सौ तीन प्रतिशत से ऊपर वैक्सीन की प्रथम डोज पूरे प्रदेश में उपलब्ध करवाई जा चुकी है। सेकेण्ड डोज भी प्रदेश में बयासी प्रतिशत से अधिक लोगों ने ले ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बारह से चौदह आयु वर्ग के बच्चों के कोविड टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय में किया।

 

बारह से चौदह साल के बच्चों को प्रदेश के तीन सौ केन्द्रों में यह वैक्सीन उपलब्ध करवाई जा रही है। सभी के लिए प्रर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देश में चले भारत के कोरोना प्रबन्धन की दुनिया में सराहना हुई है। यहां तक कि अन्य देशों में भी भारत के कोरोना प्रबंधन मॉडल को अपनाया गया है। कोरोना के खिलाफ लागू किए गये फोर टी फॉर्मूले के तहत ट्रेस, टेस्ट, ट्रीट और टीका, इन सभी में उत्तर प्रदेश अग्रणी है।

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चुनाव आयोग का एलान: राज्यसभा की 13 सीटों पर 31 मार्च को होगा चुनाव, छह राज्यों से चुने जाएंगे सांसद

नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद अब निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा के 13 सीटों के लिए चुनाव का एलान कर दिया है। यह चुनाव 31 मार्च को होगा। इसमें छह राज्यों से सांसद चुने जाएंगे। इनमें से पांच पंजाब से, तीन केरल से, दो असम से और एक-एक हिमाचल, त्रिपुरा और नगालैंड से होगा। जिन सांसदों की जगह पर चुनाव होगा वे सभी 2 से 9 अप्रैल के बीच रिटायर हो रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने उन सभी सांसदों का नाम भी जारी किया है जिनका कि कार्यकाल पूरा हो गया है। असम से रानी नाराहा और रिपुण बोरा, हिमाचल प्रदेश से आनंद शर्मा, केरल से ए के एंटनी, एमवी श्रेयम्स कुमार और सोमाप्रसाद के, नगालैंड से केजी केन्ये, त्रिपुरा से झरना दास और पंजाब से सुखदेव सिंह, प्रताप सिंह बाजवा, श्वेत मलिक, नरेश गुजराल और शमशेर सिंह दुलो शामिल हैं।

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सरकार ने मेडिकल की पढ़ाई करने वालों के लिए लिया है बड़ा फैसला : पीएम मोदी

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जनऔषधि दिवस के मौके पर उन्‍होंने कहा कि जन औषधि केद्रों पर आठ सौ करोड़ रुपये की दवाएं बिकी हैं। उन्‍होंने कहा कि इसके तहत सरकार मध्‍यम वर्ग के लोगों की जेब का धन बचाकर उन्‍हें फायदा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इन केंद्र पर अब तक 21 करोड़ सैनेट्री नेपकींस बिक चुके हैं। ये एक रुपये में यहां से लिए जा सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में कोरोना रोधी वैक्‍सीन के लिए लोगों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। लेकिन भारत ने इसको सभी को फ्री में लगाने का फैसला किया। इस पर अब तक सरकार ने तीस हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकार ने फैसला किया है कि आधे निजी मेडिकल कालेज में अब सरकारी मेडिकल कालेज के बराबर ही फीस लगेगी। सरकार की कोशिश है कि हर जिले में एक बड़ा अस्‍पताल हो। सरकार ने कई दवाओं की कीमत को बेहद कम किया है। जन औषधि केंद्रों के मालिकों से बात कर रहे हैं। इस दौरान उन्‍होंने बिहार की महिला से बात कर उनसे इस बारे में जानकारी हासिल की। महिला ने बताया कि जन औषधि केंद्र से मिली दवाओं के चलते उन्‍हें काफी फायदा हो रहा है। ये सस्‍ती होने के साथ-साथ गुणवत्‍ता में भी अच्‍छी है। पीएम मोदी ने कहा कि मध्‍यम वर्ग की आमदनी का बड़ा हिस्‍सा दवाओं पर खर्च होता है। यदि दवाएं सस्‍ती हों तो सभी का लाभ होगा। इसलिए मध्‍यम वर्ग इसको आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। ओडिशा के सुरेश ने बताया कि उन्‍हें भी इससे काफी फायदा हुआ है। हर माह दवाओं पर खर्च होने वाला करीब दो से ढाई हजार रुपया अब बच जाता है। पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि वो ऐसी दवाओं के बारे में बताएंं जो दवाएं उन्‍हें जन औषधि केंद्र पर नहीं मिलती हैं। इसके जवाब में उन्‍होंने बताया कि ऐसी कोई दवाई नहीं है जो वहां पर नहीं मिलती हैं। कर्नाटक की बबीता से भी पीएम मोदी ने पूछा कि उन्‍हें इससे कैसे लाभ मिला। बबीता ने बताया कि वो इस योजना और इसके केंद्रों का लोगों के बीच जागरुक करती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वो सोशल मीडिया के जरिए इसका अधिक से अधिक प्रचार कर सकती हैं। गुजरात की उर्वशी से भी उन्‍होंने इसके लाभ के बारे में जानकारी हासिल की। इस मौके पर पीएम ने उनसे कहा कि वो पीएम आवास योजना का लाभ उठाने वालों के पास जाकर इस योजना के लिए उन्‍हें जागरुक करें। छत्‍तीसगढ़ के डाक्‍टर शैलेश की पीएम मोदी ने तारीफ की वो इस दिशा में काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मनसुख मांडविया समेत अन्‍य लोग भी शामिल हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में मांडविया ने कहा कि देश में मिलने वाली जेनेरिक दवाओं की कीमत 50-80 फीसद तक कम है और इनकी गुणवत्‍ता विश्‍व स्‍तर की है। पीएमओ से दी गई जानकारी के मुताबिक इस इवेंट को जन औषधि जन उपयोगी का नाम दिया गया है। इससे पहले किए गए अपने ट्वीट में पीएम मोदी ने इसको जन औषधि को मेडिसिन रिवोल्‍यूशन बताया था। आपको बता दें कि पूरे देश में एक मार्च से जन औषधि सप्‍ताह मनाया गया है। इस दौरान लोगों को इस बारे में जानकारी के साथ उनके बीच इसकी जागरुकता को बढ़ाने का भी काम किया गया है। जन औषधि परियोजना के तहत इसमें लोगों को जेनेरिक दवाओं के इस्‍तेमाल और इनके फायदे बताए गए। इस दौरान कई दूसरे इवेंट भी चलाए गए जिसमें जन औषधि संकल्‍प यात्रा, मैत्री शक्ति सम्‍मान, जन औषधि बाल मित्र, जन औ‍षधि जन जागरण अभियान, आओ जन औषधि मित्र बनाएं और जन औषधि जन आरोग्‍य मेला भी शामिल है। पीएम मोदी की दूर्गामी सोच पर आगे बढ़ते हुए इन दवाओं को न सिर्फ सस्‍ता किया गया है बल्कि लोगों तक इनकी पहुंच बनाने की भी पूरी कोशिश की गई है। पूरे देश में आज जन औषधि केंद्र के करीब 8600 स्‍टोर्स खुले हुए हैं जहां पर ये दवाएं आसानी से और सस्‍ती कीमत पर खरीदी जा सकती हैं। इसमें देश के लगभग हर जिले को शामिल किया गया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की शुरुआत पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को की थी।इस योजना के तहत सरकार द्वारा उच्च गुणमवत्ता वाली जैनरिक दवाईयों के दाम बाजार मूल्य से कम कर इन्‍हें बेचा जाता है। इसके लिए सरकार ने जन औषधि स्टोर। सरकार की योजना इनके स्‍टोर्स अगले कुछ समय में बढ़ाकर दस हजार करने की है, जिससे ये हर जन को आसानी से हासिल हो सकें।

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मतगणना से तीन दिन पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की अमित शाह से मुलाकात

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव की मतगणना से तीन दिन पहले पूर्व सीएम एवं पंजाब लोक कांग्रेस के प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह सोमवार को अचानक गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे। मतगणना से पहले हुई इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है। राज्य में मतगणना 10 मार्च को होनी है। चुनाव में पार्टी कितनी सीटें जीत सकती है इस बारे में पूछे जाने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह पंडित नहीं है। वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो भविष्यवाणी कर सकें। कैप्टन ने कहा कि उनकी मेरी पार्टी सहित भाजपा गठबंधन ने बेहतर किया है। देखते हैं क्या होता है। बता दें, कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी पंजाब में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ी है। राज्य में शिअद से अलग होने के बाद भाजपा सर्वाधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा जब शिअद के साथ गठबंधन में थी तो उसके हिस्से में 23 सीटें आती थी, लेकिन इस बार पार्टी ने 73 सीटों पर चुनाव लड़ा। अमित शाह से मुलाकात के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि अभी चुनाव परिणाम नहीं आए हैं। वह अमित शाह से मिलने आए थे। उनकी मुलाकात सामान्य थी। इस मुलाकात में पंजाब को लेकर चर्चा की गई। विस्तृत चर्चा चुनाव परिणाम आने के बाद की जाएगी। कैप्टन ने कहा कि इस मुलाकात में चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। इस दौरान पंजाब के हितों को लेकर चर्चा हुई है।

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मतगणना के दौरान सत्ताधारी दल 'अनुचित' तरीकों का इस्तेमाल कर सकता है : टिकैत

मुजफ्फरनगर (उप्र)। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में 10 मार्च को होने वाली मतगणना के दौरान सत्तारूढ़ दल 'अनुचित' तरीकों का इस्तेमाल कर मतगणना को प्रभावित कर सकता है।

 

बीकेयू नेता ने यहां नवीन मंडी इलाके का दौरा करने के बाद कहा कि 10 मार्च को होने वाली मतगणना के दौरान सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर सकती है। नवीन मंडी वह क्षेत्र है, जहां मतदान के बाद ईवीएम रखी जा रही हैं।

 

इस बीच, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त चुनाव अधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि वोटों की गिनती कड़ी सुरक्षा और चुनाव आयोग के निर्देश के तहत निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से की जाएगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पहले चरण में मुजफ्फरनगर, बुढाना, पिरकाजी, खतोली, मुरापुर और चरथवाल समेत छह विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी को मतदान हुआ था।

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नवाब मलिक मुसलमान होने के कारण दाऊद से जोड़ा जा रहा नाम: पवार

पुणे,। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को कहा कि पार्टी के नेता और राज्य सरकार में मंत्री नवाब मलिक की गिरफ्तारी ‘‘राजनीति से प्रेरित'' है और मुसलमान होने के कारण उनका नाम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जोड़ा जा रहा है। पवार ने मलिक के इस्तीफे की विपक्ष की मांग भी खारिज कर दी। मलिक को दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 23 फरवरी को गिरफ्तार किया था। 

 

राकांपा प्रमुख ने कहा कि मलिक की गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है। उनका नाम दाऊद इब्राहिम से इसलिए जोड़ा जा रहा है क्योंकि वह मुसलमान हैं। मलिक और उनके परिवार के सदस्यों को जानबूझ कर परेशान किया जा रहा है, लेकिन हम इसके खिलाफ लड़ेंगे। राज्य में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी द्वारा मलिक का इस्तीफा मांगे जाने के प्रश्न पर पवार ने कहा कि मलिक और केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे पर अलग-अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि राणे भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। पवार ने कहा कि मुझे याद नहीं आता कि हमारे (कांग्रेस) पूर्व पार्टी कार्यकर्ता नारायण राणे को हाल में गिरफ्तारी के बाद इस्तीफा देना पड़ा हो। 

 

प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) कल पुणे आ रहे हैं। वह इस पर ज्यादा जानकारी दे सकते हैं। राणे के लिए अलग मानदंड और मलिक के लिए अलग मानदंड दिखाता है कि यह राजनीति से प्रेरित है। पवार ने महाराष्ट्र के राज्यपाल बी. एस. कोश्यारी पर भी निशाना साधा। राज्यपाल ने महाराष्ट्र मंत्रीमंडल द्वारा एक वर्ष पहले उन्हें भेजे गए विधान परिषद के 12 सदस्यों के नामों को मंजूरी नहीं दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के पास पी. सी. एलेक्जेंडर जैसे राज्यपाल की विरासत है। मुझे इस पर बात नहीं करनी चाहिए कि वर्तमान राज्यपाल क्या कर रहे हैं। केन्द्र सरकार हर वो काम कर रही है जो वह कर सकती है और महाराष्ट्र इसका ताजा उदाहरण है।

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ऐसे उम्मीदवार चुनें, जिनके डीएनए में सेवा का भाव हो : शाह

जौनपुर। गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मतदाताओं से ऐसे उम्मीदवारों को चुनने का आग्रह किया, जिनके ‘डीएनए में सेवा का भाव’ हो।

 

मल्हनी विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, “इस बार बाहुबलियों को मत जिताएं, बल्कि ऐसे उम्मीदवारों को विजयी बनाएं, जिसके डीएनए में सेवा का भाव हो और जो छीनना नहीं, बल्कि देना जानते हों।”

 

उन्होंने कहा कि एक या दो माफिया जो अभी भी जेल से बाहर हैं, उन्हें दस मार्च को भाजपा के दोबारा सत्ता में आने के बाद सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

 

मल्हनी विधानसभा सीट पर भाजपा के पूर्व सांसद केपी सिंह का मुकाबला जदयू के पूर्व सांसद एवं बाहुबली नेता धनजंय सिंह से है।

 

शाह ने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले जब मैं उत्तर प्रदेश की जनता से वोट मांगने आया था, तब भाजपा ने वादा किया था कि पांच साल में प्रदेश माफिया मुक्त हो जाएगा।

 

उन्होंने कहा, “आज अतीक अहमद, आजम खां और मुख्तार अंसारी जेल के अंदर हैं। एक या दो जेल से बाहर हैं। आप दस मार्च को कमल (भाजपा का चुनाव चिन्ह) खिलाएं और उसके बाद वे भी जेल में होंगे।”

 

गृहमंत्री ने दावा किया कि यूपी में भाजपा ने पिछले पांच वर्षों में अपराधियों को राजनीति से हटाने का काम किया है, जिससे राजनीति का अपराधीकरण समाप्त हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि यूपी में पहले के मुकाबले आपराधिक घटनाओं में कमी आई है और प्रदेश अपराध मुक्त बनने की राह पर आगे बढ़ा है।

 

शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2,000 करोड़ रुपये की भूमि को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया है और इस मुक्त भूमि पर गरीबों के लिए मकान बन रहे हैं।

 

सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “कोविड टीका आने के बाद अखिलेश ने कहा था कि मोदी वैक्सीन को नहीं लगवाना चाहिए, लेकिन उन्होंने खुद टीका लगवाया। जो नेता लोगों की जान की परवाह किए बिना राजनीतिक ‘खिचड़ी’ पकाने में लिप्त हैं, उन्हें एक पल के लिए भी सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है।”

 

प्रतिद्वंद्वी दलों पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा, “सपा-बसपा केवल गरीबों के बारे में बातें करती हैं, लेकिन मोदी और योगी ने उन्हें मजबूत बनाने का काम किया है। पूरे पूर्वांचल को सड़क मार्ग से जोड़ने और यूपी में एक्सप्रेसवे का जाल बिछाने का काम किया गया है।”

 

गृहमंत्री ने यह भी कहा कि मल्हनी और यूपी को गुंडों और बाहुबलियों द्वारा विकसित नहीं किया जा सकता है, भाजपा उम्मीदवार केपी सिंह मल्हानी का विकास कर सकते हैं।

 

जौनपुर में सातवें चरण के तहत सात मार्च को मतदान होना है।

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गुजरात में अपने ही नेताओं पर बरसे राहुल, बोले- एसी में बैठने वाले 'कौरवों' की सूची बनाएं

द्वारका/नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को गुजरात में अपनी पार्टी के नेताओं से पार्टी में मौजूद उन ''कौरवों'' की एक सूची तैयार करने के लिए कहा, जो सिर्फ ''अपने एसी कार्यालयों में बैठकर बातों के अलावा कुछ नहीं करते और दूसरों को परेशान करने में लगे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अंतत: भाजपा में चले जाते हैं। गांधी ने केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि उसके पास केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पुलिस और गुंडे हैं, लेकिन अंत में केवल सत्य मायने रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात ''भाजपा की राजनीति'' के कारण त्रस्त है।

 

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के पास राज्य में अगला विधानसभा चुनाव जीतने का एक अवसर है, लेकिन पार्टी लोगों को यह स्पष्ट दृष्टिकोण देने में विफल है कि सत्ता में आने के बाद वह क्या करने का इरादा रखती है। गांधी ने गुजरात कांग्रेस द्वारा आयोजित चिंतन शिविर के दूसरे दिन यहां पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। चिंतन शिविर का आयोजन इस साल दिसंबर में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार करने पर चर्चा के लिए किया गया है। कार्यक्रम स्थल पर आने से पहले, उन्होंने यहां द्वारकाधीश मंदिर पहुंचकर भगवान कृष्ण की पूजा की।

 

कांग्रेस नेता ने कहा, “उनके पास सीबीआई, ईडी, मीडिया, पुलिस, गुंडे और हर दिन के लिये नए-नए परिधान हैं। लेकिन वे चीजें बिल्कुल भी मायने नहीं रखतीं। गुजरात हमें सिखाता है कि सत्य क्या है। गांधी जी को देखिए। क्या उनके पास कभी अच्छे कपड़े थे, ईडी या सीबीआई थी? नहीं, क्योंकि सत्य सदैव साधारण होता है।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझना चाहिए कि वे पहले ही गुजरात विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। आप इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। गुजरात के लोग आपको बड़ी उम्मीदों से देख रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस को जितना नुकसान पहुंचाया है, उससे ज्यादा गुजरात के लोगों को पहुंचाया है।”

 

कांग्रेस के पुनरुद्धार और यहां आगामी चुनाव जीतने के लिए एक साहसिक दृष्टिकोण साझा करते हुए, गांधी ने उन नेताओं से छुटकारा पाने का सुझाव दिया जो ''वातानुकूलित कमरों में बैठते हैं और दूसरों को परेशान करते हैं।'' उन्होंने कहा, ''(लोगों तक दृष्टिकोण पहुंचाने को लेकर) असमंजस क्यों है? क्योंकि हमारे पास दो तरह के नेता हैं। एक वे जो जमीन पर रहते हैं और लड़ाई लड़ते है। दूसरे वे जो अपने एसी कार्यालयों में बैठे रहते हैं और बात करने व भाषण देने के अलावा कुछ नहीं करते। ऐसे नेताओं की सूची तैयार करें जो दूसरों को परेशान करते हैं। वे कौरव हैं। भाजपा उन्हें अपने पाले में ले जाएगी।''

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि गुजरात में अगले चुनाव में ''भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए'' उन्हें केवल पांच सक्षम नेताओं की जरूरत है। साल 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले गुजरात के अपने दौरे को याद करते हुए गांधी ने कहा कि स्थानीय नेतृत्व को शुरुआत में चुनाव में बहुत सीटें जीतने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की राज्य इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे कहा था कि कांग्रेस 182 में से केवल 40-45 सीटें जीतेगी।

 

राहुल ने कहा कहा, ''लेकिन अंत में हम चुनाव जीतने से सिर्फ सात सीटों से पीछे रह गए। मैं इस बार भी यही स्थिति देख रहा हूं। मैं आपको बता रहा हूं कि आप पहले ही यह चुनाव जीत चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा हमेशा ''गुजरात मॉडल'' का दावा करती है, लेकिन राज्य में कोविड-19 के कारण लगभग तीन लाख लोगों की जान चली गई और अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर व वेंटिलेटर की कमी के कारण लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।

 

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा, ''गुजरात भाजपा की राजनीति के कारण त्रस्त है। बेरोजगारी यहां एक प्रमुख मुद्दा है। छोटे व्यवसायों को कभी सबसे बड़ी ताकत के तौर पर गुजरात की रीढ़ माना जाता था। लेकिन प्रधानमंभी मोदी ने जीएसटी, नोटबंदी और महामारी के दौरान अपने कार्यों से इन्हें नष्ट कर दिया।'' उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अवसर है और लोग पार्टी को एक विकल्प के रूप में देखते हैं। पार्टी लोगों के सामने यह स्पष्ट दृष्टिकोण देने में विफल रही है कि ''कांग्रेस सत्ता में आने पर क्या करेगी, हम कैसे काम करेंगे और कौन से नेता करेंगे।''

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रूस-यूक्रेन संकट: राष्ट्रपति जेलेंस्की ने की पीएम मोदी से बात

नई दिल्ली। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। उन्होंने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट में कहा कि पीएम मोदी को रूस की आक्रामकता को लेकर यूक्रेन के रुख की जानकारी दी। एक लाख से अधिक रूसी आक्रमणकारी हमारे देश में हैं। वो आवासीय भवनों पर अंधाधुंध फायरिंग कर रहे हैं। हमने भारत से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में समर्थन देने का अनुरोध किया है।

 

पीएमओ के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से बात की। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को यूक्रेन में जारी संघर्ष की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने जारी संघर्ष के कारण जान-माल के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त की।

 

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि पीएम मोदी हिंसा की तत्काल समाप्ति और बातचीत के लिए अपने आह्वान को दोहराया और शांति प्रयासों के लिए हर तरह से योगदान करने की भारत की इच्छा व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने यूक्रेन में मौजूद छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत की गहरी चिंता से भी उन्हें (यूक्रेन के राष्ट्रपति) अवगत कराया। उन्होंने भारतीय नागरिकों को तेजी से सुरक्षित निकालने के लिए यूक्रेन के अधिकारियों द्वारा सुविधा प्रदान करने की मांग भी की।

 

भारतीय छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं, दूतावास के संपर्क में रहें: केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूक्रेन में फंसे ढेरों छात्रों और उनके परिजनों को आश्वासन देते हुए कहा कि घबराने की बिल्कुल सभी छात्र दूतावास के संपर्क में बने रहे। केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट किया, मैं भारतीय छात्रों जल्द से जल्द वापस लाने का आश्वासन देता हूं। विदेश मंत्रालय लगातार आवश्यक व्यवस्था कर रहा है। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। छात्र दूतावास के संपर्क में रहें और हर दिशा-निर्देश का पालन करें।

 

वहीं, यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को एडवाइजरी जारी कर अपने नागरिकों से बॉर्डर पोस्ट पर नहीं जाने की अपील की है। दूतावास ने कहा, भारत सरकार के अधिकारियों के साथ पूर्व समन्वय के बिना किसी भी बॉर्डर पोस्ट पर न जाएं। हम भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए पड़ोसी देशों में स्थित अपने दूतावासों के साथ काम कर रहे हैं।

 

भारतीय नागरिकों का स्वागत करेंगे पीयूष गोयल

यूक्रेन से सुरक्षित निकाले गए भारतीय नागरिकों का मुंबई हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल स्वागत करेंगे। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया कि सरकार हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है।

 

भारतीय छात्रों का वीडियो वायरल

इस बीच हंगरी पहुंचने के बाद भारतीय छात्रों ने कहा कि बुडापेस्ट के भारतीय दूतावास ने हमें सीमा पार करने में बहुत मदद की है। हम बहुत खुश हैं और हम अच्छे की उम्मीद करते हैं।

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भड़काऊ भाषण मामले में जितेन्द्र नारायण उर्फ वसीम रिजवी को फिलहाल राहत नहीं

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय से तथाकथित भड़काऊ भाषण मामले में जेल में बंद जितेन्द्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को फिलहाल राहत नहीं मिल पायी है। अदालत ने अब सरकार से सह आरोपी यति नरसिंहानंद के आपराधिक रिकार्ड की जानकारी तलब की है।

 

जितेन्द्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को हरिद्वार पुलिस ने इसी साल 13 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उन पर हरिद्वार धर्म संसद मामले में एक धर्म विशेष के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। वह तभी से जेल में बंद हैं। उन्होंने इसके बाद जमानत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की पीठ में उनके प्रार्थना पत्र पर सुनवाई चल रही है। 

 

शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास है। उनके खिलाफ 30 से अधिक मामले में दर्ज हैं। इनमें संगीन धाराएं भी शामिल हैं। आरोपी की ओर से प्रतिवाद करते हुए कहा गया कि सभी मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं और वह शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे हैं। उनके विरोधियों की ओर से उनके खिलाफ झूठे अभियोग दर्ज किये गये हैं। वह किसी भी मामले में दोषी सिद्ध नहीं हुए हैं। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज मामलों से संबंधित रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा। इसके बाद भी उन्हें जमानत नहीं मिली।

 

23 फरवरी को इस मामले में फिर सुनवाई हुई और आरोपी की ओर से जमानत की मांग करते हुए कहा गया कि इसी मामले में सह आरोपी यति नरसिंहानंद को हरिद्वार की निचली अदालत से जमानत मिल गयी है। इसके बाद अदालत ने सरकार को निर्देश दिए कि सह आरोपी से जुड़े आपराधिक मामलों की जानकारी 4 मार्च तक अदालत में पेश करें।

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सीएम जयराम ठाकुर बोले, यूक्रेन से आने वालों को घर तक फ्री में पहुंचाएगी हिमाचल सरकार

शिमला। यूक्रेन से स्वदेश लौटने वाले सभी हिमाचल के छात्रों व लोगों को हिमाचल सरकार मुफ्त में घर पहुंचाएगी। इसके लिए दिल्ली स्थित आवासीय आयुक्त कार्यालय की ओर से व्यवस्था की जाएगी। यह जानकारी विधानसभा में सीएम जयराम ठाकुर ने दी। उन्होंने कहा कि इसके लिए एचआरटीसी और एचपीटीडीसी की बसों का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूक्रेन से दो हवाई जहाज हिमाचल के युवाओं को लेकर दिल्ली पहुंचने वाले हैं। इन हवाई जहाजों में दूसरे राज्यों के लोग भी शामिल हैं। सरकार के पास यूक्रेन में कितने छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, यह आंकड़ा उपलब्ध नहीं हैं। अभी तक 130 युवाओं की जानकारी उपलब्ध है। 

 

बंकर में रह रहे 120 भारतीय छात्र : यूक्रेन में फंसे सुंदरनगर के महादेव निवासी रोहित ने बताया कि वीनीतिशिया यूनिवर्सिटी में उनको बंकर में रहने को कहा है। लगभग 120 भारतीय उनके बंकर में है। सुबह खाना होस्टल रूम में बनाने के बाद वापस बंकर में आ जाते हैं। यूनिवर्सिटी दो सप्ताह के लिए बंद कर दी है। जिस एजेंसी के माध्यम से वह आए हैं, उनका एजेंट भी हमारे साथ है, लेकिन उनको कब निकाला जाना है, इसके बारे में कुछ नहीं बताया गया है। करीब 400 किलोमीटर सफर के बाद वह रोमानिया पहुंचेंगे, लेकिन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है।

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सांख्यिकी प्रणाली को बेहतर बनाकर जनहित में करेंगे उपयोग : शिवराज

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में सांख्यिकीय प्रणाली के कामकाज के सही मूल्यांकन और नीति निर्माण में डेटा की गुणवत्ता और प्रणाली में सुधार के लिए गठित टॉस्क फोर्स की अनुशंसाओं पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। चौहान आज यहां मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. अमिताभ कुंडू की अध्यक्षता में गठित कुंडू टॉस्क फोर्स (समिति) द्वारा प्रतिवेदन सौंपे जाने पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय प्रणाली को बेहतर बनाकर जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

 

चौहान ने प्रो. अमिताभ कुंडू द्वारा सौंपे गए प्रतिवेदन का लोकार्पण किया। टॉस्क फोर्स द्वारा दी गई रिपोर्ट में राज्य सांख्यिकी आयोग के गठन की अनुशंसा भी शामिल है। यह आयोग इस क्षेत्र में तकनीकी मार्गदर्शन का कार्य करेगा। इस मौके पर वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा, मध्यप्रदेश राज्य नीति एवं योजना आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. सचिन चतुर्वेदी, टॉस्क फोर्स के सदस्य प्रो. गणेश कवाड़िया, अमिताभ पंडा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव जनसंपर्क राघवेन्द्र कुमार सिंह और आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी और टॉस्क फोर्स के संयोजक अभिषेक सिंह उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं के निर्माण और केन्द्र सरकार से धन राशि के आवंटन के लिए प्रामाणिक आंकड़े आवश्यक होते हैं। जीडीपी के आकलन और परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भी ये आंकड़े उपयोगी होते हैं। कुंडू टॉस्क फोर्स का गठन कर इसके आवश्यक अध्ययन और शोध की व्यवस्था की गई। इससे राज्य और जिला स्तर पर वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, नागरिकों और विशेषज्ञों के लिए प्रकाशनों को व्यापक, सुलभ एवं सुपाठ्य बनाने के लिए नए और अभिनव उपाय सुझाना भी आसान होगा।

 

चौहान ने कहा कि गत दो माह में प्रदेश के 10 लाख लोगों को विभिन्न रोजगार से जोड़ने में सफलता मिली है। महिला स्व-सहायता समूह भी अच्छा कार्य कर रहे हैं। कुंडू समिति के प्रतिवेदन में प्रदेश में हुई इस ग्रोथ का भी उल्लेख है। इसके अलावा अन्य अनुशंसाओं में सांख्यिकीय विभाग के कर्मचारियों को सर्वेक्षण, आय अनुमान, सांख्यिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया है। 

 

राज्य में नमूना सर्वेक्षणों की क्षमता और गुणवत्ता में सुधार के लिए नमूना सर्वेक्षणों को डिजाइन और संचालित करने की योजना, राज्य स्तर पर नमूना सर्वेक्षण विंग बनाने की जरूरत का भी उल्लेख है। डेटा प्रबंधन प्रणालियों का आधुनिकीकरण टॉस्क फोर्स के उद्देश्यों में से एक है। उन्होंने कहा कि सही डेटा राज्य के जीडीपी के आकार और आकलन के साथ ही संपूर्ण व्यवस्था को सशक्त बनाने में मदद करेगा। उन्होंने टॉस्क फोर्स को सिर्फ पांच माह की अवधि में प्रतिवेदन तैयार कर सौंपने के लिए धन्यवाद दिया।

 

टॉस्क फोर्स के अध्यक्ष प्रो. अमिताभ कुंडू ने कहा कि जिलों में भ्रमण और विभिन्न बैठकों के बाद प्रतिवेदन तैयार किया गया है। नीति निर्धारण में यह प्रतिवेदन सहयोगी होगा। प्रो. कुंडू ने कहा कि मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अच्छी प्रगति है। मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम जरूरतमंदों के लिए सहारा बन रहे हैं। प्रदेश में सांख्यिकी संकलन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए राज्य सांख्यिकी आयोग के गठन की अनुशंसा की गई है। साथ ही राज्य स्तरीय डाटा रेसेर्वियार की स्थापना की बात भी कही गई है, जिसमें समस्त विभागों के डाटा संकलन का कार्य योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मुख्यालय में हो सके।

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प्रियंका बोलीं- पीएम को यूक्रेन में युद्ध की जानकारी है,लेकिन यूपी में आवारा पशुओं की समस्या के बारे में नहीं

अमेठी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण के लिए आज शाम यानी 25 फरवरी को 12 जनपदों की 61 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार थम जाएगा। सभी राजनीतिक दलों के सियासी दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी है। पांचवें चरण में अमेठी, रायबरेली, सुल्तानपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, बाराबंकी, अयोध्या, बहराईच समेत कई अन्य महत्वपूर्ण सीटें हैं। इसके लिए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी अमेठी पहुंचे। जगदीशपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने आवारा पशुओं की समस्या को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साथा। प्रियंका गांधी ने कहा, ''पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें आवारा पशुओं की समस्या के बारे में नहीं पता, 5 साल से क्या कर रहे थे? उन्हें यूक्रेन में युद्ध की जानकारी है, उन्हें कोविड के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की खांसी के बारे में पता था, लेकिन उन्हें किसानों की इस समस्या का पता नहीं था?'' प्रियंका ने कहा, आप (जनता) अपनी परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार हैं। आप भटक जाते हैं और आंखें बंद करके वोट करते हैं। आपका वोट एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, बुद्धिमानी से चुनें क्योंकि आपको अगले 5 वर्षों तक पछताना पड़ सकता है। यह आपके विकास का समय है। प्रियंका ने पूछा, इन 5 सालों में कितनों को रोजगार मिला है?, इन्होंने जो जानबूझकर 12 लाख सरकारी पदों को खाली रखा है उसे हम सबसे पहले भरेंगे। इसकी हमने पूरी लिस्ट बनाई हुई है। इसके अलावा हम 8 लाख नए रोज़गार देंगे। राहुल गांधी ने कहा कि भारत के रोजगार क्षेत्र की रीढ़ को पीएम नरेंद्र मोदी और उनके दोस्तों ने तोड़ा है। आप देखेंगे कि आने वाले समय में इस देश के युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा, आप जितना चाहें, उन्हें पढ़ाएं। कोविड के दौरान किसी ने मेरी नहीं सुनी, लेकिन आपने गंगा में शव देखे। राहुल ने कहा कि जब वे (भाजपा) कहते हैं कि हमारे 70 वर्षों में कुछ नहीं हुआ, तो उनका वास्तव में मतलब था कि इन 70 वर्षों में अंबानी, अडानी के लिए कुछ नहीं हुआ। याद रखें, भारत के सबसे बड़े अरबपति रोजगार नहीं देते, छोटे दुकानदार, व्यापारी और किसान करते हैं।

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बहू बेटी की सुरक्षा करना योगी क्या जाने : जया

कौशांबी। यूपी के सिरथू में चुनाव प्रचार कर रही समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जोरदार निशाना साधा है। उन्‍होंने कहा,’ये भूल जाते हैं कि आपके जो मुख्यमंत्री (योगी) हैं, उन्होंने तो परिवार को त्याग दिया है। वे परिवार के बारे में क्या जानते हैं? वे क्या जानते हैं बहू, बेटी क्या होती हैं? ये लोग झूठ के सिवाय कुछ नहीं बोलते हैं। मुंबई की भाषा में इन्हें फेकूचंद कहते हैं। सिर्फ फेकते रहते हैं, लेकिन काम कुछ नहीं करते हैं।

 

जया ने कहा कि मैं 15 साल पार्लियामेंट में रहीं हूं, इन्होंने झूठ के सिवाय कुछ नहीं कहा है। जब ये सत्ता में है और जब ये सत्ता में नहीं थे, इन्होंने कभी भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक शब्द भी नहीं बोला है। इसके साथ कहा कि मुझे लगता है कि समय बदल रहा है। लोगों को देखो, उनका उत्साह, आप माहौल के बारे में बता पाएंगे। वे महिला सुरक्षा के बारे में बात करते हैं लेकिन झूठ के अलावा कुछ नहीं जानते। आप पिछले 5 वर्षों में यूपी में महिलाओं पर अत्याचार के बारे में जानते हैं, नहीं यह कहने की जरूरत है।

 

जया बच्चन ने सिराथू में कहा कि मेरा जन्म एमपी में एक बंगाली परिवार में हुआ था और यूपी में शादी हुई थी। मेरी बेटी ने एक पंजाबी से शादी की और बेटे ने एक दक्षिण भारतीय से शादी की है। हमारे परिवार में जातिवाद या क्षेत्रवाद जैसा कुछ नहीं है। ‘गंगा किनारे का छोरा’ हमेशा गंगा का रहेगा। वह मुंबई के समुद्र का नहीं हो सकता है। इसके साथ जया ने खुद को यूपी की बड़ी बहू बताते हुए कहा कि अपने भैया का भी लाज रख लीजिएगा। उन्होंने अमिताभ बच्‍चन का नाम लिए बिना कहा, ‘गंगा किनारे वाला जो छोरा है उसकी लाज तो आपको रखनी होगी।

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परिवारवादी सपा बसपा नहीं बल्कि राष्ट्रवादी भाजपा है यूपी की पसंद : शाह

कौशांबी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में परिवादवाद,जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी (सपा),बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस का सफाया तय है और राष्ट्रवाद,विकास और सुशासन की पर्याय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मौजूदा विधानसभा चुनाव में 300 से अधिक सीटें जीतकर दोबारा सरकार बनाने को तैयार है।

सिराथू विधानसभा क्षेत्र में स्थित सौरई पशु बाजार मैदान में आयोजित चुनावी सभा में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के लिए वोट की अपील करते हुये श्री शाह ने कहा कि विधानसभा के चार चरण के चुनाव में सपा बसपा का सूपड़ा साफ हो गया है। भाजपा 300 से अधिक सीट जीतकर दोबारा प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है। उन्होने कहा कि सपा परिवार वादी,जातिवाद एवं तुष्टिकरण को बढ़ावा देने वाली पार्टी है।

उन्होंने कहा कि 2017 के पहले सपा शासनकाल में उत्तर प्रदेश में माफिया बाहुबलियों का बोलबाला था लेकिन भाजपा की सरकार बनते ही अतीक अहमद, आजम खां, मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं को जेल के अंदर भेज दिया गया। उन्होंने लोगों से सवाल किया कि क्या यदि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनी तो क्या यह माफिया जेल के अंदर रहेंगे। उन्होंने कहा योगी सरकार बनते ही चुन-चुन कर माफियाओं, गुंडों को जेल भेजने का काम किया गया। इनके कब्जे से दो हजार करोड़ कीमत की कब्जा की गई गरीबों की जमीन खाली कराकर गरीबों के लिए मकान बनाने का काम शुरू किया गया।

शाह ने कहा अखिलेश यादव एक जाति की पार्टी है जबकि दूसरे एक धर्म के लोग उनके साथ सहयोगी है। सपा के कार्यकाल में चुनिंदा जिलों को छोड़ कर बिजली के दर्शन दुर्लभ थे वहीं भाजपा के शासनकाल में गांव के लोगों को भी बिजली मिल रही हैं। योगी सरकार ने एक लाख 41 हजार गरीब परिवारों के घर में मुफ्त में बिजली के कनेक्शन देने का काम किया।

उन्होंने कहा कि सपा का मतलब है स से संपत्ति और प का अर्थ है परिवारवाद। समाजवादी पार्टी संपति जुटाने वाली पार्टी है। कन्नौज में इत्र व्यवसायी के यहां छापा मारकर करोड़ों रुपए नकदी जब्त की गई। व्यवसाई का रिश्ता समाजवादी पार्टी से था। भाजपा गरीबों का कल्याण करने वाली पार्टी है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देन है कि 130 करोड़ लोगों को कोरोना का टीका लगाकर सुरक्षित करने का काम किया गया। देश में 80 करोड़ों लोगों को एवं उत्तर प्रदेश में 15 करोड़ों लोगों को 2 साल तक मुफ्त में राशन देने का काम भारतीय जनता पार्टी कर रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश एवं देश की सीमाएं सुरक्षित है। कांग्रेस के हुकूमत के 10 वर्षों में सपा बसपा कांग्रेस का सहयोग करती रही। आतंकवादी जवानों का सर काट कर ले जाते थे । नरेंद्र मोदी के शासनकाल में आतंकियों ने पुलवामा में सैनिकों पर हमला किया तो सेना ने पाकिस्तान के अंदर घुस कर आतंकियों को ढेर करने का काम किया है। अब किसी भी देश में जरूरत नहीं है कि वह हमारे देश की ओर आंख उठा कर देख सके ऐसे करने की हिमाकत किया तो उनका सिर धड़ से अलग करने का काम किया जाएगा ।

उन्होंने कहा कि विपक्षी कश्मीर के संबंध में कहते थे कि 370 धारा समाप्त हुई तो खून की नदियां बहेगी लेकिन 370 धारा समाप्त हो गई क्या कुछ हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के गरीब मजदूर, पिछड़े, दलितों का कल्याण भाजपा से ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले 5 वर्षों में भाजपा ने पांच एक्सप्रेसवे 10 शहरों में मेट्रो,17000 करोड और से नई सड़कें शिक्षा के क्षेत्र में 10 इंटरनेशनल विश्वविद्यालय सहित 40 मेडिकल कॉलेज 76 नर्सिंग कॉलेज बनाने का काम किया गया है।

 शाह ने कहा 2013 में जब वह भाजपा से उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे, सड़कें गड्ढों में तब्दील थी। अब प्रदेश में मजबूत चमचमाती हुई सड़के हैं। भाजपा, निषाद पार्टी एवं अपना दल गठबंधन मजबूत है। केशव प्रसाद मौर्य पिछड़ा वर्ग के बड़े चेहरे हैं सिराथू सीट उत्तर प्रदेश में सबसे अलग विधानसभा सीट है यहां आप विधायक नहीं बल्कि डिप्टी सीएम बनाने जा रहे हैं।

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संकीर्णता व दोहरेपन का शिकार प्रवासी मुद्दा

भारतीय संविधान देश के किसी भी राज्य अथवा किसी भी केंद्र शासित प्रदेश के किसी भी नागरिक को देश के किसी भी राज्य अथवा किसी भी केंद्र शासित प्रदेश में जाकर रोज़गार,सेवा अथवा व्यवसाय करने का पूरा अधिकार देता है। परन्तु इसके बावजूद समय समय पर कुछ विशिष्टजन विशेषकर ज़िम्मेदार नेतागण ऐसी भाषा बोलने लगते हैं जिससे न केवल प्रवासी लोगों के मन में अपनी सुरक्षा के प्रति भय उत्पन्न होता है बल्कि इससे हमारी राष्ट्रीय एकता पर भी गहरा आघात लगता है। प्रायः उत्तर प्रदेश,बिहार,मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,बंगाल,राजस्थान व उत्तरांचल के लोग ही रोज़गार की तलाश में अथवा नौकरी या व्यवसाय की ख़ातिर देश के विभिन्न हिस्सों में आते जाते रहते हैं। इनमें भी विशेषकर उत्तर प्रदेश व बिहार जैसे देश के दो सबसे बड़े राज्यों के छात्र,कामगार,श्रमिक ख़ास तौर पर मुंबई,दिल्ली,पंजाब व हरियाण जैसे राज्यों में बहुतायत में जाते हैं।इसका मुख्य कारण जहाँ इन राज्यों का जनसँख्या घनत्व है वहीँ अशिक्षा व बेरोज़गारी भी इन राज्यों की बड़ी समस्या है। इत्तेफ़ाक़ से यही देश के ऐसे दो बड़े राज्य भी हैं जो हमेशा ही देश को सबसे अधिक संख्या में नौकरशाह मुहैय्या करवाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में भी प्रायः इन्हीं राज्यों का वर्चस्व रहा है। अनेक महापुरुष व राजनेता इन्हीं दो राज्यों के रहे हैं। कितने सौभाग्यशाली है उत्तर प्रदेश व बिहार जैसे राज्य की धरती कि यह भगवान राम,कृष्ण,सीता,गुरु गोविन्द सिंह,संत रविदास,महात्मा बुद्ध,कबीर,तुलसी व कई अन्य महापुरुषों की यह जन्म व कर्मस्थली भी रही है।

 

परन्तु कितने दुःख का विषय है कि इन्हीं राज्यों के लोग समय समय पर कुछ संकीर्ण क्षेत्रीय मानसिकता रखने वाले नेताओं की संकीर्ण सोच व तंग नज़री का शिकार होने लगते हैं। और कभी कभी तो ऐसा भी देखा गया है कि यदि अपराधी प्रवृति के किसी प्रवासी ने कहीं कोई अपराध अथवा दुष्कर्म कर दिया तो स्थानीय लोग उसका ग़ुस्सा पूरे प्रवासी समाज पर उतारने पर आमादा हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर सितंबर 2018 में गुजरात राज्य के साबरकांठा में एक मासूम बच्ची के साथ एक मज़दूर ने बलात्कार किया था। बलात्कार का आरोपी बिहार का रहने वाला था। इस घटना के बाद गुजरात के कई शहरों में उत्तर भारत के लोगों के विरुद्ध न केवल  विरोध-प्रदर्शन हुये बल्कि कई जगह उनके विरुद्ध स्थानीय लोगों की भीड़ हिंसक भी हो गयी।  हिंसा पर उतारू भीड़ का कहना था कि यूपी और बिहार के लोग शहर से चले जाएं वरना उन्हें मार दिया जाएगा। वे कहते सुने जा रहे थे कि 'बाहरी लोग राज्य छोड़ दें' साथ ही यह भी कि 'गुजराती लोगों को बचाया जाना चाहिए'। इस हिंसा के बाद डरे सहमे उत्तर भारतीयों ने अपने-अपने राज्य-घर-गांवों की ओर बड़ी संख्या में पलायन करना शुरू कर दिया था। उत्तर भारत के बेगुनाह लोगों पर हुए इस हमले के बाद बिहार व उत्तर प्रदेश के लोगों ने कई जगह प्रदर्शन किया था तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध पोस्टर लगाये थे जिसमें लिखा था - ‘गुजराती नरेंद्र मोदी बनारस छोड़ो’।

 

इन दिनों पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के उत्तर भारतीयों के बारे में दिये गये एक बयान को लेकर भाजपा विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया। चन्नी ने कहा था कि - प्रियंका पंजाबियों की बहू है। यूपी ,बिहार, दिल्ली के लोगों को यहां राज नहीं करने देना। यूपी के भइयों को पंजाब में फटकने नहीं देना है। बाद में भले ही चन्नी यह सफ़ाई देते रहे कि उनका आशय आम आदमी पार्टी के नेताओं से था,परन्तु तब तक राजनीति के महाचतुर खिलाड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चन्नी के यू पी बिहार वाले बयान को गुरु गोविन्द सिंह व संत रविदास के अपमान से जोड़ चुके थे। परन्तु जब गुजरात,कश्मीर और महाराष्ट्र से इन्हीं भगवान राम,कृष्ण,सीता,गुरु गोविन्द सिंह, संत रविदास,महात्मा बुद्ध,कबीर व तुलसी के राज्यों के लोग मारे-पीटे-दुत्कारे व भगाये जा रहे थे और यही यू पी बिहार के कथित हितैषी उन राज्यों की सत्ता के साथ खड़े थे,उस समय यह भगवान राम,कृष्ण,सीता,गुरु गोविन्द सिंह, संत रविदास का अपमान नहीं था? जब इन्हीं राज्यों के लोग कोरोना काल में अपने परिवार,बच्चों व वृद्ध बीमार जनों के साथ हज़ारों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे थे तब  क्या वह संत रविदास व गुरु गोविन्द सिंह का अपमान नहीं था ?

 

अब इसी प्रवासी मुद्दे का दूसरा पहलू भी देखिये। जिस तरह उत्तर भारतीय स्वरोज़गार हेतु देश के संपन्न राज्यों में जाते हैं ठीक उसी तरह पंजाब,हरियाणा,गुजरात,यू पी व बिहार आदि अनेक राज्यों के लोग इसी रोज़गार व व्यवसाय के लिये अथवा शिक्षा ग्रहण करने के लिये अमेरिका-कनाडा जैसे अनेक विकसित देशों में जाते हैं। आज अनेक देशों में उनकी स्थिति ऐसी है कि कोई किसी देश का प्रधानमंत्री है कई विभिन्न देशों में मंत्री,कई जज तो कई सेना व पुलिस में उच्च पदों पर तैनात हैं। कोई सांसद तो कोई वैश्विक स्तर पर उद्योग जगत के शीर्ष पर है। लाखों लोग विदेशों में बड़े बड़े ज़मींदार-किसान बन चुके हैं। यक़ीनन हमारे देश के लोगों को उन प्रवासी भारतीयों पर गर्व है जो विदेशों में रहकर भारत का नाम ऊँचा कर रहे हैं। परन्तु जब बात 2004 में सोनिया गाँधी के प्रधानमंत्री बनने की आई तो यही राष्ट्रवादी 'देशभक्त ' उस समय यह कहते फिर रहे थे कि यदि विदेशी महिला प्रधानमंत्री बनी तो सर मुंडा लेंगे,उल्टी चारपाई पर लेटेंगे,भुने चने खाने लगेंगे आदि। इस तंगनज़री का आख़िर क्या जवाब है ? कल्पना कीजिये कि यदि यही रंग भेद व देशी विदेशी की संकीर्ण सोच भारतीयों के विरुद्ध विदेशों में भी पनपने लगी फिर आख़िर हमारे करोड़ों प्रवासी भारतीयों की क्या स्थिति होगी ?

 

जिस तरह विदेशों में भारतीय प्रवासी अपनी सेवायें देकर अपने अपने देशों के विकास व वहां की व्यवस्था में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं ठीक उसी प्रकार देश के किसी भी राज्य का प्रवासी किसी भी राज्य में श्रम कर अपनी रोज़ी रोटी तो कमाता ही है साथ साथ अपना ख़ून पसीना बहाकर वहां के निर्माण,प्रगति व विकास में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। आम तौर पर किसी भी राज्य के आम लोगों को किसी अन्य राज्यवासी से उसके राज्य अथवा धर्म जाति के आधार पर कोई आपत्ति नहीं होती। आम तौर पर ओछी व संकीर्ण राजनीति करने वाले नेता ही केवल अपना व्यापक जनाधार सिमटता देख इस तरह के संकीर्ण विवादों को जन्म देते हैं। परिणाम स्वरूप कभी कभी विशेषकर चुनावी बेला में प्रवासी मुद्दा संकीर्णता व दोहरेपन का शिकार हो जाता है।

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योगी के बयान पर प्रियंका गांधी का पलटवार:बोलीं- मैं अपने भाई के लिए जान दे सकती हूं

नई दिल्ली : कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पलटवार किया है। पंजाब के कोटकपुरा में प्रियंका ने कहा, 'मैं अपने भाई के लिए जान दे सकती हूं। मेरा भाई भी मेरे लिए जान दे सकता है तो विवाद कौन सा? उन्होंने भाई राहुल के साथ किसी भी तरह के विवाद को एक सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, योगी जी के मन में विवाद है। लगता है वो शायद उस विवाद की बात कर रहे हैं, जो उनके और मोदी-शाह के बीच हैं।

दरअसल, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 12 फरवरी को ट्वीट कर कहा था कि भाई-बहन के आपसी विवाद और वर्चस्व के कारण कांग्रेस डूब जाएगी। उनके इस बयान पर प्रियंका गांधी ने पलटवार किया है।

टिहरी की जनसभा में कसे थे योगी ने तंज
दरअसल, उत्तराखंड की टिहरी में बीते शनिवार को जनसभा के दौरान सीएम योगी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा था कि कांग्रेस तो पूरे देश के अंदर डूब रही है। जहां थोड़ा वजूद था भी, वहां पर डुबाने के लिए दोनों भाई-बहन पर्याप्त हैं, किसी तीसरे की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने जनता से कहा कि इसलिए क्यों उस डूबते हुए जहाज में बैठोगे। डूबते हुए जहाज में नहीं बैठना चाहिए। उसे उसके हाल पर छोड़ देना चाहिए।

सीएम योगी आदित्यनाथ यही नहीं रुके। उन्होंने इसे लेकर एक ट्वीट भी कर दिया। जिसमें उन्होंने लिखा- भाई-बहन के आपसी विवाद और वर्चस्व के कारण कांग्रेस डूब जाएगी।

प्रियंका गांधी ने यूपी में लड़की हूं, लड़ सकती हूं...जैसा नारा दिया है। उन्होंने चुनाव में प्रत्याशियों में से 40% महिलाओं को टिकट देने का निर्णय लिया था। उन्होंने हाथरस, उन्नाव कांड की पीड़ित महिलाओं को चुनावी टिकट दिया है।

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विवाद पर बोले आरिफ मोहम्मद, कहा- ये मुस्लिम महिलाओं को घर में कैद करने की साजिश

नई दिल्ली: कर्नाटक हिजाब विवाद को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कॉलेज परिसर में हिजाब न पहनने देने को मुस्लिम महिलाएं अपने मौलिक अधिकारों का हनन बता रही हैं। अब इस मामले पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने हिजाब को मुस्लिम महिलाओं को प्रताड़ित करने का तरीका बताया है।

बच्चियों को जमीन में दफना देते थे मुस्लिम
उन्होंने कहा कि अरब देशों में एक समय था, जब लोग बच्चियों के जन्म लेते ही उन्हें जमीन में दफन कर देते थे। फिर इस्लाम ने इसे बंद कर दिया, लेकिन वहां यह मानसिकता आज 21वीं सदी में भी कायम है। पहले उन लोगों ने तीन तलाक का आविष्कार किया, फिर हिजाब और फिर मुस्लिम महिलाओं का प्रताड़ित करते रहने के लिए अन्य तरीके ईजाद कर लिए।

वे नहीं चाहते कि मुस्लिम महिलाएं आगे बढ़ें
आरिफ मोहम्मद ने कहा कि मुझे लगता है कि हिजाब को लेकर जो भी हो रहा है, ये विवाद नहीं है। मुझे यह एक साजिश मालूम होती है, जिसका मकसद मुस्लिम महिलाओं को उनके घरों के भीतर हीकैद करना है। आज मुस्लिम महिलाएं, लड़कों की तुलना में आगे हैं और यह विवाद उन्हें पीछे धकेलने के लिए है। 

देश के कई हिस्सों में शुरू हुए विवाद, लगातार हो रही बयानबाजी
कर्नाटक के उडुपी जिले के एक कॉलेज में मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर आने से रोकने के बाद विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद यह विवाद राज्य के अन्य एरिया में भी फैल गया। हिंदू संगठनों से जुड़े छात्रों ने बदले में भगवा शॉल पहनकर हिजाब वाली छात्राओं को रोकना शुरू कर दिया। इसे लेकर हिंसक तनाव बनने के बाद राज्य सरकार ने सभी तरह के धार्मिक पहचान वाले कपड़े पहनने स्कूल-कॉलेजों में पहनने पर रोक लगा दी। कुछ लोगों ने कर्नाटक सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

इसके बाद देश के कई अन्य राज्यों में भी हिजाब के कारण छात्राओं को कॉलेजों में एंट्री नहीं दिए जाने के विवाद सामने आए हैं। इसे लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार भड़काऊ बयान भी सामने आ रहे हैं। राजनेता भी अपने-अपने तरीके से बयान दे रहे हैं।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्कूल-कॉलेजों में फिलहाल धार्मिक पहचान वाले कपड़े, चाहे वह भगवा शॉल हो या हिजाब, नहीं पहनने का अंतरिम आदेश जारी किया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके बाद से ही देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।


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उत्तराखंड : भाजपा के सामने सरकार को बरकरार रखने की चुनौती, कांग्रेस वापसी की कोशिश में

नई दिल्ली। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है। राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में सोमवार यानी 14 फरवरी को मतदान होना है। इस चुनाव में जहां भाजपा के सामने अपनी सरकार को बरकरार रखने की चुनौती है वहीं कांग्रेस राज्य की सत्ता में वापसी की पुरजोर कोशिश कर रही है। राज्य के गठन के बाद से ही प्रदेश में हर चुनाव में सत्ता बदलती रही है और इसलिए कांग्रेस को इस बार अपनी जीत का भरोसा है जबकि भाजपा लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाने का दावा कर रही है। इस चुनाव में एक तरफ भाजपा है जो अपने वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सामने रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के सहारे चुनाव लड़ रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस है जिसने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा साफ तौर पर तो नहीं की है कि लेकिन यह माना जा रहा है कि कांग्रेस की तरफ से हरीश रावत ही यह चुनाव लड़ रहे हैं और लड़ा भी रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की तरफ से लगातार सुनाई दे रहे विरोध के सुरों के बीच उत्तराखंड का यह चुनाव कांग्रेस आलाकमान और गांधी परिवार के लिए प्रतिष्ठा का विषय भी बन गया है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती 30 प्रतिशत के उस वोट के अंतर को पार कर भाजपा को हराना है , जिसके सहारे भाजपा ने 2019 के लोक सभा चुनाव में राज्य की सभी 5 सीटों पर कब्जा जमा लिया था। दरअसल 2014 के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच लगातार बढ़ता जा रहा मतों का अंतर कांग्रेस के लिए एक बड़ी चिंता का सबब है और इसका समाधान ढूंढे बिना राज्य में भाजपा को हराना मुमकिन नहीं है। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मत प्रतिशत और सीट को लेकर बहुत ज्यादा अंतर नहीं था। 2012 में कांग्रेस ने 33.79 प्रतिशत मतों के साथ 32 सीटों पर जीत हासिल की थी और भाजपा को 33.13 प्रतिशत मतों के साथ 31 सीटों पर जीत मिली थी। उस समय कांग्रेस ने अन्य दलों के साथ मिलकर राज्य में सरकार का गठन कर लिया था। लेकिन इसके बाद से मत प्रतिशत और सीट , दोनों ही मामलों में कांग्रेस लगातार भाजपा से पिछड़ती जा रही है। 2014 के लोक सभा चुनाव में 56 प्रतिशत के लगभग मत पाकर भाजपा ने राज्य की सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में कांग्रेस का मत प्रतिशत थोड़ा बढ़कर 34.4 प्रतिशत तक पहुंचा था लेकिन उसे एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो पाई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में 46.51 प्रतिशत मतों के साथ भाजपा ने राज्य की 70 में से 56 सीटों पर जीत हासिल कर कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। इस चुनाव में 33.49 प्रतिशत मतों के साथ कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ 11 सीटें ही आ पाई थी। 2019 के लोक सभा चुनाव में दोनों दलों के बीच मतों का यह अंतर और ज्यादा बढ़ गया। इस चुनाव में 61.66 प्रतिशत मत पाकर भाजपा ने एक बार फिर से राज्य की सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया वहीं कांग्रेस का मत प्रतिशत घट कर 31.73 प्रतिशत ही रह गया। यानि 2019 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच मत प्रतिशत का अंतर बढ़कर 30 प्रतिशत के लगभग पहुंच गया। हालांकि यह बात भी सही है कि लोक सभा और राज्य विधानसभा चुनाव का गणित काफी अलग होता है लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस के लिए 30 प्रतिशत मतों का यह अंतर पाटे बिना राज्य में सरकार बनाना संभव नहीं है। इन दोनों दलों की निगाहें आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पर भी लगी हुई है। आप इन दोनों दलों में से किसके वोट बैंक में ज्यादा सेंध लगा पाता और बसपा अपनी पुरानी ताकत फिर से हासिल कर पाती है या नहीं , इस पर भी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का नतीजा काफी निर्भर होने जा रहा है।

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कांग्रेस ने पंजाब चुनावों के प्रबंधन के लिए वरिष्ठों पर दांव लगाया

नई दिल्ली। कांग्रेस पंजाब में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है, क्योंकि उसके लिए आम आदमी पार्टी (आप) सबसे प्रमुख खतरे के रूप में उभर रही है। इसके बाद शिरोमणी अकाली दल और भाजपा-पीएलसी से पार्टी को चुनौती मिल रही है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चुनावों की निगरानी के लिए और राज्य में अंतिम मिनट की गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए उतारा गया है। पार्टी प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र का सूक्ष्म प्रबंधन करने की कोशिश कर रही है, जहां 20 फरवरी को मतदान होना है। कांग्रेस ने पंजाब के लिए एआईसीसी प्रभारी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के अलावा, राज्य में जाट और प्रवासी मतदाताओं की देखभाल के लिए राजीव शुक्ला और दीपेंद्र सिंह हुड्डा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में खड़ा किया है। कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा, कांग्रेस सत्ता में लौटने के लिए तैयार है क्योंकि पंजाब के लोगों ने विकास के पहियों को चलाने के लिए वोट देने का फैसला किया है। कांग्रेस पंजाब की नब्ज और ताने-बाने को जानता है। इसकी रणनीति, घोषणा पत्र के प्रारूपण, उम्मीदवार चयन से लेकर अभियान प्रबंधन तक, जमीन पर ध्यान देकर की गई है। भाजपा, आप और शिअद दौड़ में बहुत पीछे हैं। 10 मार्च को पंजाब में बल्ले बल्ले कांग्रेस होगी। हालांकि सूत्रों ने कहा कि शेरगिल चुनाव प्रचार से दूरी बना रहे हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी के भीतर किसी भी तरह की दरार से इनकार किया है। उत्तर प्रदेश के एक ब्राह्मण होने के नाते शुक्ला लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे शहरी केंद्रों में प्रवासी हिंदू वोटों को मजबूत करने की कोशिश करेंगे, जबकि हुड्डा को जाट वोट हासिल करने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि कांग्रेस ने आनंदपुर साहिब के सांसद मनीष तिवारी को स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर कर दिया है, लेकिन वह पंजाब से पार्टी के एकमात्र हिंदू सांसद होने के बावजूद राज्य में पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। शनिवार को, उन्होंने गढ़शंकर से कांग्रेस उम्मीदवार अमरप्रीत लल्ली के समर्थन में एक जनसभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने पार्टी नेता अंबिका सोनी पर हमला किया, जिन्होंने राज्य में एक सिख मुख्यमंत्री की वकालत करते हुए कहा, पंजाब में कोई हिंदू-सिख विभाजन नहीं है। जो कोई भी इस कृत्रिम विभाजन को बनाने की कोशिश करता है वह आईएसआई एजेंट है। कांग्रेस ने दलित मतदाताओं को लुभाने के लिए मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुना है, जो राज्य की आबादी का 32 प्रतिशत हैं। 25 जनवरी को सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाली पेशे से डॉक्टर चन्नी की पत्नी कमलजीत कौर अब चन्नी को सीट बरकरार रखने में मदद करने के लिए चमकौर साहिब में सड़कों पर उतर रही हैं। 20 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश करने वाले चन्नी ने पिछले साल 19 सितंबर को अमरिंदर सिंह की जगह मुख्यमंत्री का पद संभाला था।

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बैंक को चूना लगाने वालों के लिए मोदी सरकार की मुख्य योजना है-लूटो और भागो:कांग्रेस

नई दिल्ली/चंडीगढ़। कांग्रेस ने ऋषि अग्रवाल और अन्य के मालिकाना हक वाली गुजरात स्थित एबीजी शिपयार्ड द्वारा कथित रूप से 28 कंपनियों को चूना लगाये जाने के लिए रविवार को केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सूरजेवाला ने चंडीगढ़ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले 75 साल में भारत की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी मोदी सरकार की निगरानी में हुई है। सात साल में 5,35,000 करोड़ करोड़ की बैंक धोखाधड़ी ने बैंकिंग प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि बैंक धोखाधड़ी के मामलों की जांच में देर मोदी सरकार में शीर्ष पदों पर आसीन लोगों की सांठगांठ और आपसी मिलीभगत के सबूत हैं। सूरजेवाला ने कहा कि गत 75 साल में पहली बार 22,842 करोड़ रुपये की बैंक धाखोधड़ी का मामला सामने आया है। पांच साल तक टालमटोल करके जनता के धन को दिनदहाड़े गबन करने की छूट देने के बाद आखिरकार केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में सात फरवरी को एफआरआई दर्ज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार बैंक के साथ धोखाधड़ी करने वालों के लिए लूटो औैर भागो योजना चला रही है। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी करने वालों की सूची में नीरव मोदी यानी छोटा मोदी, मेहुल चोस्की, नीशल मोदी, ललित मोदी, विजय माल्या, जतिन मेहता, चेतन संदेसरा, नितिन संदेसरा और अन्य क ई नाम हैं, जिनका सत्तारुढ़ पार्टी के साथ करीबी रिश्ता रहा है। ऋषि अग्रवाल और अन्य लोग शहंशाह के नये रत्न हैं। कांग्रेस ने सीबीआई द्वारा इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देर पर सवाल उठाया है। कांग्रेस ने अपने बयान में कहा है, आठ नवंबर 2019 को एसबीआई ने एबीजी शिपयार्ड के ऋषि अग्रवाल और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए सीबीआई में अपनी शिकायत दी। इस धोखाधड़ी और जनता के पैसे के गबन के बावजूद सीबीआई,एसबीआई और मोदी सरकार ने पूरे मामले को लालफीताशाही और आपसी टकराव में उलझा दिया। ये कई साल तक होता रहा और जनता का धन नाली में बहता रहा और धोखेबाज लाभ उठाते रहे। कांग्रेस ने कहा,एक और मजेदार तथ्य यह है कि कैग की रिपोर्ट के बावजूद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने गुजरात के दहेज में एबीजी शिपयार्ड को 50 हेक्टेयर भूमि आवंटित की। दहेज परियोजना को शिपयार्ड कंपनी ने वर्ष 2015 में बंद कर दिया।

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हिजाब विवाद पर बोले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश के चुनाव प्रचार में कानपुर पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हिजाब विवाद पर भाजपा पर तंज कसते हुए कहा है कि साम्प्रदायिकता में बीजेपी की मास्टरी है। उत्तरप्रदेश चुनाव के दूसरे चरण के दौरान कानपुर में डोर टू डोर कैंपेन करने पहुंचे भूपेश बघेल ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कर्नाटक में हुए हिजाब विवाद पर कहा कि जिन्होंने इसकी शुरूआत की है उन्हें अंजाम का पता नहीं है। इस मुद्दे पर कॉलेज के प्राचार्य को बच्चियों के पालको को बुला कर बात की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अब योगी और मोदी के जाने का समय हो चुका है। वहीं, उत्तरप्रदेश चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर कहा, कांग्रेस पार्टी निश्चित रूप से अच्छा प्रदर्शन करेगी। दूसरी पार्टियां धर्म और जाति के आधार पर वोट मांग रही हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी आम जनता के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। बघेल ने कहा, कांग्रेस का मुख्य मुद्दा है किसानों को दाम मिले, बेरोजगारों को काम मिले और महिलाओं को सम्मान मिले। प्रियंका गांधी के लड़की हूं लड़ सकती हूं इस नारे से महिलाओं में आत्मविश्वास आया है और इस बार परिवर्तन अवश्य होगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल के उपचुनाव हारते ही केंद्र की भाजपा सरकार ने पेट्रोल, डीजल की कीमतों में कमी की। महंगाई अगर कम करना है तो भाजपा को हराना ही होगा। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए 7 चरणों में चुनाव होंगे। उत्तर प्रदेश में पहले चरण के लिए 11 फरवरी को मतदान हुए थे। जबकि 14 फरवरी को दूसरे चरण का मतदान है। इसके बाद 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को कराया जाएगा। जबकि प्रदेश में मतगणना 10 मार्च को कराई जाएगी।

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गाजियाबाद तक पहुंचा हिजाब विवाद पुलिस से हुई नोंकझोंक

गाजियाबाद। कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब प्रकरण अब उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद तक पहुंच गया है। रविवार को गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में कुछ मुस्लिम युवतियों ने हिजाब के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस से इन महिलाओं की नोंकझोंक भी हुई। हालांकि, पुलिस ने चेतावनी देते हुए और हल्का बल प्रयोग कर उन्हें मौके से हटा दिया। पुलिस का कहना है कि कोविड काल को देखते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज करेगी।

 

खोड़ा के नवनीत विहार में रविवार दोपहर कुछ मुस्लिम महिलाएं हाथों में 'आई वांट हिजाब' लिखे पोस्टर लेकर सड़क पर उतरीं। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से धारा-144 लगे होने की वजह से प्रदर्शन की अनुमति दिखाने को कहा, लेकिन महिलाओं ने प्रदर्शन की अनुमति दिखाने से मना कर दिया। 

 

इसके बाद पुलिस ने उन युतवियों को प्रदर्शन तत्काल समाप्त करने के लिए कहा तो वह जिद पर अड़ी रहीं। इस दौरान पुलिस से उनकी काफी देर तक बहस होती रही। इसके बाद पुलिस की प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ नोंकझोंक व धक्का-मुक्का हो गई।

 

पुलिस का कहना है कि दोपहर करीब ढाई बजे 15-20 मुस्लिम महिलाएं और युवतियों ने 'आई वांट हिजाब' लिखे पोस्टर लेकर शनि बाजार रोड नवनीत विहार में प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इस दौरान पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए उनके पोस्टर अपने कब्जे में लेने शुरू किए। बाद में प्रदर्शन करने वाली महिलाएं वहां से चली गईं। धक्का-मुक्की में खोड़ा थाना प्रभारी की वर्दी भी फटने की जानकरी मिली है, लेकिन थाना प्रभारी का कहना है कि वर्दी जाली में फंसकर फट गई थी।   

 

खाोड़ा थाना प्रभारी ब्रिजेश कुशवाहा का कहना है कि प्रदर्शन करने वाली युवतियों और महिलाओं के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने भी मौके पर वीडियो बनाया था। इसके अलावा आसपास की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली जा रही है। बगैर अनुमति के प्रदर्शन किया गया है जो कि आचार संहिता व धारा-144 का उल्लंघन है।  

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सुबह 6 से रात 10 बजे तक प्रचार करने की छूट

नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार को चुनाव प्रचार के संबंध में नई गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक पदयात्रा पर लगी रोक हटा ली गई है। प्रचार के समय को भी दो घंटे तक बढ़ा दिया गया है। राजनीतिक दल और उम्मीदवार सभी मौजूदा निर्देशों का पालन करते हुए सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक प्रचार कर सकते हैं। 

चुनाव अभियान की समय सीमा में ढील देते हुए आयोग ने जगह की क्षमता के आधार पर रैलियों की भी इजाजत दे दी है। आयोग ने देश भर के साथ-साथ मतदान वाले राज्यों में कोरोना के मामलों में "काफी कमी" का हवाला देते हुए कोविड प्रतिबंध हटाए हैं। आयोग ने एक बयान में राजनीतिक दलों के लिए ढील की घोषणा करते हुए कहा, "केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से प्राप्त जानकारी के अनुसार, COVID की जमीनी स्थिति में काफी सुधार हुआ है और देश में मामले तेजी से घट रहे हैं।

चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव अभियान अब सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के बजाय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच चलाया जा सकता है। जिला अधिकारियों द्वारा अनुमत सीमित संख्या में व्यक्तियों के साथ पदयात्रा को भी अनुमति दी गई है। आयोग ने प्रतिबंधों को हटाते हुए "चुनावों में अधिक से अधिक भागीदारी के लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की आवश्यकता" को भी रेखांकित किया।

कोविड-19 मामलों में वृद्धि का हवाला देते हुए, चुनाव निकाय ने 8 जनवरी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के लिए मतदान कार्यक्रम की घोषणा करते हुए फिजिकल रैलियों, रोड शो और पदयात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया था।


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कई मंत्रियों समेत 623 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत राज्य के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों के लिये मतदान बृहस्पतिवार सुबह सात बजे शुरू हो गया।

 

निर्वाचन आयोग कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक पहले चरण के चुनाव के लिए मतदान कार्य कोविड प्रोटोकॉल के तहत सुबह सात बजे शुरू हो गया जो शाम छह बजे तक चलेगा। मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

 

इस चरण में शामली, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा तथा आगरा जिलों में मतदान हो रहा है।

 

पहले चरण का चुनाव जाट बहुल क्षेत्र में हो रहा है। इस चरण में प्रदेश सरकार के मंत्रियों श्रीकांत शर्मा, सुरेश राणा, संदीप सिंह, कपिल देव अग्रवाल, अतुल गर्ग और चौधरी लक्ष्मी नारायण समेत कुल 623 उम्मीदवारों के सियासी भाग्य का फैसला होगा। इनमें 73 महिला प्रत्याशी भी शामिल हैं।

 

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष, सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने के लिये व्यापक इंतजाम एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है। कोविड-19 के मद्देनजर मतदान केंद्रों पर थर्मल स्कैनर, सैनीटाइजर, ग्लव्स, फेस मास्क, फेस शील्ड, पीपीई किट, साबुन, पानी की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था की गई है।

 

उन्होंने बताया कि पहले चरण में होने वाले मतदान में 2.28 करोड़ योग्य मतदाता हैं। इनमें 1.24 करोड़ पुरूष, 1.04 करोड़ महिला तथा 1448 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। मतदान पर सतर्क दृष्टि रखने के लिए 48 सामान्य प्रेक्षक, आठ पुलिस प्रेक्षक तथा 19 व्यय प्रेक्षक भी तैनात किये गये हैं। इसके अतिरिक्त 2175 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 284 जोनल मजिस्ट्रेट, 368 स्टैटिक मजिस्ट्रेट तथा 2718 माइक्रो ऑब्जर्वर भी तैनात किये गये हैं।

 

उन्होंने बताया कि मतदाता पहचान पत्र नहीं होने पर आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस समेत 12 विकल्पों का इस्तेमाल कर वोट डाला जा सकेगा।

 

वर्ष 2017 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहले चरण की 58 में से 53 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को दो-दो सीटें मिली थी। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल का भी एक प्रत्याशी जीता था।

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प्रियंका की अपील: उप्र के मतदाता वोट की ताकत का इस्तेमाल करें

नई दिल्ली। कांग्रेस की महासचिव एवं प्रदेश में पार्टी की चुनाव प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान शुरू होने पर मतदाताओं से राज्य के बेहतर भविष्य के लिए अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल करने की अपील की।

श्रीमती वाड्रा ने ट्वीट कर कहा, “पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरे प्यारे बहनों-भाइयों, वोट की ताकत का इस्तेमाल अपने मुद्दों और प्रदेश के बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए करिए। यूपी कांग्रेस के मेरे सभी साथियों, कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों को शुभकामनाएँ- आपको गर्व होना चाहिए कि 30 साल बाद हम सभी सीटों पर अपनी ताक़त से लड़ रहे हैं।”

उन्होंने कर्मयोग दर्शन से जुड़े गीता के एक श्लोक का भी उल्लेख करते हुए कहा, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भू मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।”

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पहले चरण के लिए 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर आज सुबह सात बजे से मतदान प्रारंभ हो गया। इस चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और हाथरस जिलों की 58 विधान सभा सीटों के 2.28 करोड़ मतदाता 73 महिला उम्मीदवारों सहित कुल 623 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करने के लिए 25,880 मतदान स्थलों पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।

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प्रधानमंत्री ने मतदाताओं से बढ़-चढ़कर मतदान करने का अनुरोध किया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तहत बृहस्पतिवार को हो रहे पहले चरण के मतदान में मतदाताओं से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का अनुरोध किया।

 

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आज पहले चरण की वोटिंग है। सभी मतदाताओं से मेरा आग्रह है कि वे कोविड नियमों का पालन करते हुए लोकतंत्र के इस पावन पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। याद रखना है- पहले मतदान, फिर जलपान।’’

 

उत्तर प्रदेश में सात चरणों में होने वाले मतदान का आज पहला चरण आरंभ हो गया। इस चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इनमें शामली, मेरठ, हापुड, मुजफ्फरनगर, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ, आगरा, गौतमबुद्ध नगर और मथुरा जिले की सीटें शामिल हैं।

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राहुल गांधी ने मतदाताओं से कहा, देश को हर डर से आजाद करो, वोट करो

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को लोगों से घरों से निकलकर मतदान करने और देश को हर तरह के भय से मुक्त करने का आह्वान किया।

 

आज सुबह राज्य के पश्चिमी भाग के 11 जिलों में 58 विधानसभा सीटों पर मतदान प्रारंभ हुआ।

 

गांधी ने ट्वीट किया, “देश को हर डर से आजाद करो। बाहर आओ, वोट करो।”

 

बृहस्पतिवार को शामली, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा में मतदान हो रहा है। 

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उप्र में राजनीतिक दल उभरते वोट बैंक से जुड़ने की कोशिश कर रहे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ने के साथ इस चुनावी मौसम में हिंदी पट्टी में राजनीतिक दलों के महिलाओं की भूमिका को देखने के तरीके में थोड़ा बदलाव आया है।

 

उत्तर प्रदेश में खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही कांग्रेस महिलाओं को अपने वोट बैंक के रूप में जोड़ने के लिए प्रयोग कर रही है और उसने महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट देने की घोषणा की है।

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने महिलाओं को अपनी पार्टी के संभावित वोट बैंक के रूप में देखने के साथ ही व्यवस्था या अत्याचार के खिलाफ अपनी व्यक्तिगत लड़ाई लड़ने वाली आम महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। महिलाओं को 40 फीसद टिकट देने की घोषणा करने वाली कांग्रेस ने भले ही इस मामले (महिलाओं को टिकट देने) में बढ़त बना ली हो लेकिन अन् य दल भी उप्र में बदलते राजनीति माहौल के प्रति अधिक सतर्क हो गए हैं।

 

कांग्रेस की सूची में जहां अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सदफ जफर का नाम शामिल है जिन्हें दिसंबर 2019 में लखनऊ में नागरिकता विरोधी कानून का विरोध करने के दौरान गिरफ्तार किया गया था, वहीं उन्नाव में पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के दुष्कर्म की शिकार पीड़िता की मां को भी कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिसंबर को प्रयागराज में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के बैंक खातों में 1,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए थे, जिससे लगभग 16 लाख महिलाओं को लाभ हुआ। विशेष रूप से जमीनी स्तर पर महिलाओं को आवश्यक कौशल, प्रोत्साहन और संसाधन प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना चलाई गई। इस कार्यक्रम में दो लाख से अधिक महिलाओं की भागीदारी देखी गई थी।

 

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी महिला केंद्रित मुद्दों पर अधिक जोर दे रही हैं। कांग्रेस ने एक अलग घोषणापत्र भी जारी किया है जिसमें महिलाओं के लिए कई प्रमुख वादे किए गए हैं। हाल ही में आलोचकों का मुकाबला करने के लिए बॉलीवुड की फिल्म 'दीवार' के उस संवाद ' मेरे पास मां है' की तर्ज पर कांग्रेस ने जनाधार खोने के आरोपों का यह कहते हुए जवाब दिया कि ''मेरे पास बहन है।'' निर्वाचन आयोग कार्यालय के अनुसार, मतदाता सूची के संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं के नामांकन से लिंग अनुपात में 11 अंकों का सुधार हुआ है जो एक नवंबर, 2021 को 1000 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 857 से बढ़कर पांच दिसंबर को 868 हो गया। आयोग ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची जारी की जिसमें 8.04 करोड़ पुरुष मतदाता (8,04,52,736) और 6.98 करोड़ से अधिक महिला मतदाता (6,98,22,416) हैं। आयोग ने राज्य में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के वास्ते इसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक कार्यक्रम भी शुरू किया है।

 

समाजवादी पार्टी जिसने नई टैग लाइन "नई हवा है, नया सपना है" को अपनाया है, ने हाल ही में अपने उस एम-वाई (मुस्लिम-यादव) फॉर्मूले को नया अर्थ देने की कोशिश की है, जिसने इसे उत्तर प्रदेश में सत्ता में पहुंचा दिया था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में कहा था, "नई सपा में, एम-वाई का मतलब महिला और युवा है। हम अब बड़े परिप्रेक्ष्य में मुद्दों को देख रहे हैं और जातिवाद से बंधे नहीं हैं।"

 

हालांकि बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती के महिला होने के बावजूद इस पार्टी ने महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कभी अलग अभियान पर जोर नहीं दिया और यह पार्टी अपने सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर ही ध् यान केंद्रित कर रही है। इसी सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले से 2007 में बसपा ने उप्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।

 

कांग्रेस की महिला उम्मीदवारों की सूची में समाज के एक खाास तबके को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जैसे शाहजहांपुर की एक आशा कार्यकर्ता पूनम पांडे, जिन्हें उनके मानदेय में वृद्धि की मांग करते हुए कथित रूप से पीटा गया था। लखीमपुर खीरी में मोहम्मदी सीट से रितु सिंह जो एक पूर्व सपा कार्यकर्ता थीं और उन्हें पंचायत चुनाव में नामांकन दाखिल करने से रोकने के लिए उनके साथ मारपीट की घटना हुई थी। हस्तिनापुर (अनुसूचित जाति-आरक्षित) की कांग्रेस उम् मीदवार 26 वर्षीय अर्चना गौतम एक अभिनेत्री और मॉडल हैं और बिकरू मामले में मुठभेड़ में मारे गए एक आरोपी की पत्नी खुशी दुबे की बहन नेहा तिवारी कानपुर के कल्याणपुर से कांग्रेस की उम् मीदवार हैं।

 

समाजवादी पार्टी ने अमेठी से पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की पत्नी महाराजी देवी को मैदान में उतारा है। एक विशेष अदालत ने 2017 में बलात्कार के एक मामले में गायत्री प्रजापति और दो अन्य लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। छात्र कार्यकर्ता पूजा शुक्ला, जिन्होंने जून 2017 में मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने के बाद योगी आदित्यनाथ को काला झंडा दिखाया था, को लखनऊ उत्तर से सपा ने उम् मीदवार बनाया है।

 

वहीं, भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आईं विधायक अदिति सिंह को उनकी रायबरेली सदर सीट से टिकट दिया है। अदिति सिंह ने हाल ही में खुद को 'बिना बाप की बेटी' बताया था और पंजाब में अपने पति अंगद सिंह को कांग्रेस का टिकट न मिलने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

 

पिछले चुनाव में, उत्तर प्रदेश विधानसभा में रिकॉर्ड 40 महिला उम्मीदवारों ने जगह बनाई थी, जो 403 सदस्यीय सदन में महिला सदस्यों का अब तक का सबसे अधिक अनुपात है। उस समय सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने एक साथ 96 महिलाओं को मैदान में उतारा था, जिनमें से भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) से सबसे अधिक 35 महिला प्रतिनिधि विधायक बनी थीं। इसके बाद बसपा और कांग्रेस से दो-दो महिलाओं को जीत मिली थी और समाजवादी पार्टी से एक महिला उम्मीदवार विजयी हुई थीं। वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव में 35 महिलाएं चुनी गई थीं जो कि उस समय का रिकॉर्ड था।

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बसपा नेता स्टिंग में 300 करोड़ रुपए लेकर भाजपा को 50 सीट देने पर हामी भरते नजर नज़र आया

उत्तर प्रदेश : यूपी में पहले चरण की वोटिंग को महज दो दिन बचे हैं। टिकट, डील, मुद्दे, समीकरण, सियासत के हथकंडे सब सेट हो चुके हैं, पर जनता जिसे वोट देने को तैयार है, उन्हें टिकट कैसे मिलता है? टिकट का रेट क्या है? पार्टियां टिकट की डील कैसे करती हैं। इसके पीछे की हकीकत इस स्टिंग में कैद है। इसमें बसपा कोऑर्डिनेटर शम्सुद्दीन राइन 300 करोड़ रुपए लेकर भाजपा को 50 सीट देने पर हामी भरते नजर आ रहे हैं। राइन खुद बता रहे हैं कि उनकी पार्टी में एक टिकट का रेट ढाई से तीन करोड़ रुपए है  


स्टिंग पढ़ने और देखने से पहले उसकी एक नजीर और सच्चाई जानिए-

बात इसी 16 जनवरी की है। कानपुर में लखनऊ नंबर की एक स्कार्पियो से पुलिस ने 50 लाख रुपए बरामद किए। गाड़ी आमीन राइन चला रहा था। आमीन उरई का रहने वाला है। जांच में पता चला कि आमीन बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर शम्सुद्दीन राइन का रिश्तेदार है। ये वही शम्सुद्दीन हैं, जिनका स्टिंग किया गया है।


इस सबसे पहले शम्सुद्दीन राइन को जानिए राइन फिलहाल बसपा के टॉप-4 नेताओं में से एक हैं। उनके बारे में ये कहा जाता है कि शम्सुद्दीन इस वक्त बसपा में उसी नंबर दो की हैसियत में हैं, जिस पर कभी नसीमुद्दीन सिद्दीकी हुआ करते थे। नसीमुद्दीन के साथ छोड़ने के बाद मायावती ने 2020 में शम्सुद्दीन को उत्तर प्रदेश के 5 मंडलों का मुख्य सेक्टर प्रभारी के साथ ही उत्तराखंड के स्टेट कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी सौंपी थी।


इन्हीं शम्सुद्दीन का ये स्टिंग है. जिसमें बसपा में टिकट के रेट, डील, स्कैंडल, सिंडिकेट और साजिश का खुलासा हुआ है।


अब पूरा स्टिंग पढ़ें.. 

समय- 17 दिसंबर 2021 ,वक्त- रात के 9 बजे ,जगह- दारुल सफा, MLA रेस्ट हाउस लखनऊ


गोपालदास (स्वतंत्र पत्रकार): आपसे मैं अकेले में 5 मिनट बात करना चाहता हूं। मैं भाजपा के लिए लाइजनिंग का काम करता हूं और उन दो-तीन लोगों में से हूं, जो ऐसा करते हैं। बसपा से 50 सीटों की व्यवस्था करानी है।


शम्सुद्दीन (बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर)- कहां से?


गोपालदास- आपके यहां से। फंडिंग की जरूरत होगी, तो हो जाएगी। जैसा आप बताएंगे, वैसा कर लेंगे।


शम्सुद्दीन- कौन से मंडल के लिए?


गोपालदास- कहीं से भी। हमको बस 50 सीट चाहिए। आपके यहां जो व्यवस्था होगी, वह मैं कर दूंगा। 2-3 करोड़ हर सीट के लिए मिल जाएगा।


शम्सुद्दीन- आप हमारे पास कैसे आ गए।


गोपालदास- देखिए, आपके कैंडिडेट जीत नहीं पाएंगे। चुनाव चिन्ह आपका ही रहेगा। कैंडिडेट हमारे रहेंगे।


शम्सुद्दीन- अच्छा-अच्छा।


गोपालदास- हमारे पास 300 करोड़ का फंड है।


शम्सुद्दीन- बरेली और लखनऊ में चाहते हैं? कौन-कौन सी कमिश्नरी में?


गोपालदास- कोई भी सीट हो। आप अपनी सीट के नाम बस बता दीजिए। कैंडिडेट हम बताएंगे।


शम्सुद्दीन- अभी जितनी लाइन दूसरों के यहां लगी है, उतनी ही लाइन हमारे यहां भी है। फोन पर भी हैं।


गोपालदास- फोन पर ही हैं, फंड नहीं है, आपके पास।


शम्सुद्दीन- मिश्रा जी के पास भी गए थे?


गोपालदास- नहीं, हमारे दूसरे साथी गए थे।


शम्सुद्दीन- आपको मेरा कॉन्टैक्ट किसने दिया।


गोपालदास- सोर्स नहीं बताऊंगा।


शम्सुद्दीन- तो ये बात कैसे होगी?


गोपालदास- वो तो मैं करा दूंगा, जैसा आपके यहां सिस्टम है। नॉमिनेशन खत्म होने के साथ ही पूरा पैसा मिल जाएगा, ताकि टिकट कटने का डर न रहे। उन्हें बगैर योगी की सरकार चाहिए।


शम्सुद्दीन- नहीं, नहीं, वो नहीं होगा। तो योगी को हटाना चाहते हैं ये।


गोपालदास- हां, उन्हें माइनस योगी सरकार चाहिए। इसीलिए आपकी मदद चाहिए। 100 करोड़ एडवांस रहेगा। बाकी नामांकन के बाद।


शम्सुद्दीन- 50 सीटों के लिए 300 करोड़ रहेगा।


गोपालदास- हां, 300 करोड़ का बजट है। इसमें हम भी आप से लेंगे। आपका भी फायदा होगा।


शम्सुद्दीन- सामाजिक स्तर क्या होगा?


गोपालदास- ब्राह्मण, मुसलमान, यादव, कुर्मी रहेंगे। भाजपा के अलावा पैसा किसी के पास है नहीं।


शम्सुद्दीन- नहीं, बात आपकी सही है। अच्छा आपका रोल क्या होगा?


गोपालदास- मैं आपको कैंडिडेट की लिस्ट दूंगा, पैसा दूंगा। जब ये 50 जीत जाएंगे तो हमारा-आपका रोल अलग होगा।


शम्सुद्दीन- मैं समझ गया।


गोपालदास- लिस्ट आप देंगे। कैंडिडेट हमारे होंगे। पार्टी आपकी होगी। आपके दोनों हाथ में लड्‌डू होगा।


शम्सुद्दीन- जीतने के बाद तो हमारे साथ ही रहेंगे। अच्छा उन्हें लंगड़ी सरकार चाहिए। ये बात तो हम समझ रहे हैं कि वो सेकेंड लाइन चाहते ही नहीं। योगी का नाम तो शाह के आगे हो रहा है।


गोपालदास- इसीलिए, हम चाहते हैं कि आप 50 लोगों के टिकट की व्यवस्था करवा दीजिए। पैसे की व्यवस्था हम करवा देंगे। प्रति कैंडिडेट 4 करोड़ यानी 200 करोड़ हो जाएगा। फिर 100 करोड़ आपको मिल जाएगा। मुझे पता है कि आपके यहां रेट क्या है।


शम्सुद्दीन- ढाई से तीन में है, लेकिन आप 50 सीट का 300 करोड़ बता रहे हैं।


गोपालदास- 100 करोड़ आपका है। मैं तो उनका सेवक हूं, आपके हिस्से से ही मैं भी अपना 10 करोड़ ले लूंगा।


शम्सुद्दीन- देखिए, एक तो हर विधानसभा में हमारे 50 हजार वोट फिक्स हैं।


गोपालदास- वो हम जानते हैं, इसलिए तो दमदार नाम आपको देंगे। हमें सपा का वोट काटना है।


शम्सुद्दीन- देखिए, मैं आपको सोचकर बताता हूं।


गोपालदास- आगे आप तरक्की कर सकते हैं। राज्यसभा भी जा सकते हैं।


शम्सुद्दीन- देखिए, आपका कुछ न कुछ तो लिंक होगा ही, तभी तो हमारे पास आए।


गोपालदास- तो कल हम आपके साथ एक बार फिर बैठते हैं, आप रहेंगे न?


शम्सुद्दीन- हां, यहीं रहूंगा।


गोपालदास- आप एक बार चिंतन कर लीजिए।


शम्सुद्दीन- ठीक है। मैं 21 साल की उम्र से पार्टी के लिए काम कर रहा हूं। और आज 28-30 साल हो गए।


शम्सुद्दीन राइन (लाल घेरे में)। बसपा में वे मायावती के करीबी लोगों में शामिल हैं।

शम्सुद्दीन राइन (लाल घेरे में)। बसपा में वे मायावती के करीबी लोगों में शामिल हैं।

स्टिंग का दूसरा दिन...


शम्सुद्दीन ने पत्रकार गोपालदास को सीधे बेडरूम में बैठाकर बातचीत की...


गोपालदास- फंड आकर रखा है, आप बोलेंगे, फट से कार्यक्रम हो जाएगा। मुझे भी कुछ रुपए मिल जाएंगे।


शम्सुद्दीन- मैं यही चाहता हूं, थोड़ा मुझे एक रात का वक्त दीजिए। मैं कल जाऊंगा दिल्ली। मुझे परसों दिल्ली में मिल लीजिए। बहुत अच्छा रहेगा। एयरपोर्ट पर मिल जाऊंगा। आप कहां रहते हैं?


गोपालदास- मैं होटल में रहता हूं। अशोका में रहता हूं? तीन साल से।


शम्सुद्दीन- मैं थोड़ा सोचता हूं कि वो कौन-कौन सी सीट है, वो चाहते क्या हैं?


गोपालदास- वोट कटवाना और सपा को हराना है।


शम्सुद्दीन- आप मेरी बैठक किसके साथ करवाएंगे।


गोपालदास- संघ के हैं, गौरीशंकर जी, उन्हीं से मिलवाऊंगा, सारा लेन-देन वही करते हैं।


शम्सुद्दीन- राज्य की एलआईयू क्या कह रही है?


गोपालदास- गठजोड़ सरकार बनेगी। इसीलिए तो आपको ये दे रहे हैं।


शम्सुद्दीन- मैं समझ गया, लेकिन योगी जी को रोककर तो सरकार हम भी बना सकते हैं।


गोपालदास- हां, ये तो है ही। फिर आपका भी रोल होगा।


शम्सुद्दीन- मैं तो रोल वाला ही हूं। नहीं, कल छोड़कर परसों रात में हम बैठेंगे। हम देखते हैं। अच्छा हमारी सरकार बन जाए तो बुराई क्या है।


गोपालदास- आपको चारों तरफ से फायदा है, कुछ भी हो सकता है चुनाव के बाद।


शम्सुद्दीन- नहीं ठीक है। पर ये रकम सियासत के लिए बहुत छोटी है। बहनजी से बात करेंगे।


गोपालदास- बहनजी से बात करने पर हमारा-आपका वजूद खत्म हो जाएगा।


शम्सुद्दीन- हूं.... करते हैं परसों।


गोपालदास- ब्राह्मण बीजेपी से बहुत नाराज हैं। आपको सर्वे दे दूंगा।


शम्सुद्दीन- चलो फिर हम करते हैं भाई साहब। आज हम 10.55 पर दिल्ली जा रहे हैं। परसों शाम को नहीं, तो नरसो सवेरे हो जाएगा। बिल्कुल बात करते हैं।


बसपा में टिकट बिक्री को लेकर 2 जनवरी को गोपालदास बसपा के एक और कोऑर्डिनेटर नौशाद अली से मिलने दोपहर में उनके घर डालीगंज पहुंचे। नौशाद कहीं निकलने वाले थे।


गोपालदास- मैं एक जरूरी काम से आया हूं। बीजेपी का काम देखता हूं। हमे आपसे थोड़ी मदद चाहिए। 50 सीटों की। आप सबका जो हिसाब-किताब मैं कर दूंगा।


नौशाद- आप कहां से।


गोपालदास- दिल्ली से। भाजपा के लिए लाइजनिंग का काम करता हूं।


नौशाद- कैसे क्या करते हैं।


गोपालदास- बस, लाइजनिंग से सीट दिलवा देते हैं।


नौशाद- ये काम मैं नहीं कर पाऊंगा। मुझसे नहीं हो पाएगा।


नौशाद अली भी बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर हैं। वे लखनऊ में ही रहते हैं।

नौशाद अली भी बसपा के जोनल कोऑर्डिनेटर हैं। वे लखनऊ में ही रहते हैं।

शम्सुद्दीन बोले- कोई वीडियो को साबित कर देगा तो मैं जिंदगीभर उसकी गुलामी करूंगा


इस वीडियो को लेकर भास्कर ने शम्सुद्दीन राइन से बात कर उनका पक्ष जाना। शम्सुद्दीन का कहना है कि मुझे नहीं मालूम है कि वीडियो क्या है। मेरे पास पचासों लोग आते हैं। कौन क्या कर रहा है और कह रहा है, क्या बना रहा है, मैं नहीं जानता हूं। न ही इस तरह का मेरा कोई विजुअल है।


हमारे परिवार और रिश्तेदार बिजनेस करते हैं, कोई कहीं से पकड़ा जाता है, तो वो उसका मसला है। और वैसे भी वो आयकर विभाग की कार्रवाई है।

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