गोरखपुर सीट के लिए बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को पन्ना प्रमुख नियुक्त किया

गोरखपुर : उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गोरखपुर विधानसभा सीट के लिए गोरखनाथ क्षेत्र में बूथ संख्या 246 के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पन्ना प्रमुख नियुक्त किया है।


पन्ना प्रमुख एक पार्टी कार्यकर्ता/नेता हैं, जिन्हें एक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची का एक पृष्ठ दिया जाता है और उनसे पृष्ठ में नामित सभी मतदाताओं से संपर्क करने की उम्मीद की जाती है।


पार्टी ने गोरखपुर शहर की शहरी और ग्रामीण (आंशिक) विधानसभा सीटों के 13,800 बूथों पर 13,100 पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति की है।


गोरखपुर सदर विधानसभा सीट के बूथ संख्या 350 के लिए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और सांसद शिव प्रताप शुक्ला और विधायक डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल को भी पन्ना प्रमुख नियुक्त किया गया है।


नगर भाजपा अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा, पार्टी पदाधिकारियों और सरकार में बैठे लोगों को भी पन्ना प्रमुख बनाया गया है। इस प्रणाली का प्रयोग पहली बार गुजरात विधानसभा चुनाव में किया गया था और परिणाम अच्छे रहे थे। उसके बाद, पन्ना प्रमुख प्रणाली का उपयोग किया गया है। कई अन्य राज्यों में और वहां भी पार्टी को सफलता मिली।


पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि पन्ना प्रमुख के रूप में योगी आदित्यनाथ की नियुक्ति ने संकेत दिया कि भाजपा में हर कोई अनिवार्य रूप से एक पार्टी कार्यकर्ता है और वरिष्ठ पद पर रहने का मतलब यह नहीं है कि वह अन्य कार्यकर्ताओं से ऊपर था।



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देवरिया में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा 60 फीसदी वोट हमारा : केशव मौर्या

देवरिया : उत्तर प्रदेश में देवरिया के पथरदेवा में आज प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा,बसपा और कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 60 फीसदी वोट हमारा है तथा 2022 में एक बार भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार बनेगी।


श्री मौर्य ने सपा,बसपा और कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि इनके राज में भ्रष्टाचार और अपराध बढ़ते रहे हैं।जबकि भाजपा के शासन काल में भ्रष्टाचार और अपराधों पर लगाम लगाकर सुशासन का राज कायम किया गया है। सरकार किसानों की दशा सुधारने के लिये काम कर रही है।उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में किसान नहीं बल्कि सपा बसपा कांग्रेस के लोग हैं। उन्होंने कहा कि अगर देश में मोदी सरकार नहीं होती,तो प्रदेश में हम ऐसा विकास नहीं कर पाते।


श्री मौर्य ने कहा कि 2014 से जनता ने भाजपा की विजय यात्रा निकाल रही है। हमारी सरकार विकास को नया आयाम देने के लिए कटिबद्ध है तथा इसके साथ ही लोगों के जीवन स्तर को सुधारने का लक्ष्य है।उन्होंने जनता का आह्वान करते हुए कहा कि चुनाव आ गया है, विपक्षी गुमराह करने का प्रयास करेंगे।लेकिन प्रदेश की जनता गुमराह होने वाली नहीं है और वो एक बार फिर 2022 में भाजपा की सरकार बनायेगी।


उन्होंने दावा करते हुए कहा कि कम से कम 25 साल तक सपा-बसपा की सरकार वापस नहीं आने वाली। इस दौरान उन्होंने ने अफसरों को हिदायत देते हुए कहा कि अधिकारी एक बात ध्यान से सुन ले भाजपा के कार्यकर्ता जनहित की बातों को सुनने में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए।नहीं तो ऐसे अधिकारियों को देखना हमें आता है। 






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भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक सोमवार को; चुनाव, किसानों के प्रदर्शन पर चर्चा की संभावना

नयी दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सोमवार को बैठक होगी, जिसमें पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से लेकर किसानों के आंदोलन तथा कोविड-19 महामारी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।


भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में पार्टी प्रवक्ताओं के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाने वाले सभी नेता शामिल होंगे।


यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कोविड महामारी के कारण काफी अंतराल के बाद हो रही है तथा अगले महीने ही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी होनी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के प्रचार अभियान पर बैठक में व्यापक चर्चा होगी।


उन्होंने कहा कि तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन, लखीमपुर खीरी हिंसा और सिंघू बॉर्डर पर दलित समुदाय के एक व्यक्ति की हत्या पर भी बैठक में चर्चा हो सकती है।


विपक्ष ने लखीमपुर खीरी में हुयी हिंसा को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा पर खासा दबाव बनाने का प्रयास किया है। बैठक में कोरोना वायरस के खिलाफ चल रहे टीकाकरण अभियान पर भी चर्चा होने की संभावना है।




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महाराष्ट्र में पूर्व कांग्रेस विधायक कांती कोली का निधन

ठाणे : महाराष्ट्र के ठाणे से कांग्रेस के पूर्व विधायक कांती कोली का लंबी बीमारी के बाद यहां उनके आवास पर निधन हो गया। उनके परिवार के सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।


उन्होंने बताया कि कोली ने बृहस्पतिवार रात को अंतिम श्वांस ली। वह 75 वर्ष के थे।


कोली पूर्व में ठाणे नगर परिषद में पार्षद निर्वाचित हुए थे। इस पद पर एक कार्यकाल के बाद वह 1980 और 1990 के बीच दो बार ठाणे विधानसभा सीट से विधायक रहे। वह अखिल भारतीय कोली समाज, नई दिल्ली की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष भी रहे।


सूत्रों ने बताया कि उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे और अन्य सदस्य हैं।







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कांग्रेस में नई हलचल- माजरा क्या है?

कांग्रेस के संकट पर चर्चा अब उबाऊ हो चला है, यह बहुत लम्बे समय से चला आ रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उनका यह संकट गहराता ही गया है. 2019 में राहुल गाँधी के इस्तीफ़ा के बाद से तो यह संकट ही दिशाहीन सा लगने लगा है. लेकिन इधर कांग्रेस पार्टी में घटी दो घटनाएं ध्यान खीचने वाली है, एक पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन और दूसरा कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी का पार्टी में शामिल होना. 


कांग्रेस पार्टी के लिए कैप्टेन अमरिंदर सिंह सरीखे नेता को मुख्यमंत्री पद से हटाना और कन्हैया, जिग्नेश जैसे ठोस विचारधारा वाले युवा नेताओं को पार्टी में शामिल करना कोई मामूली फैसला नहीं है. तो क्या इसे पार्टी पर राहुल और प्रियंका गांधी के नेतृत्व को स्थापित करने और उनके हिसाब के नयी कांग्रेस पार्टी गढ़ने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है? अगर ऐसा है तो कांग्रेस अपने इस अंतहीन से लगने वाले सकंट को एक मुकाम मिलने की उम्मीद कर सकती है. 


आज कांग्रेस पार्टी दोहरे संकट से गुजर रही है जो कि अंदरूनी और बाहरी दोनों हैं लेकिन अंदरूनी संकट ज्यादा गहरा है जिसके चलते पार्टी एक राजनीतिक संगठन के तौर पर काम नहीं कर पा रही है. पार्टी में लम्बे समय से चल रही पीढ़ीगत बदलाव की प्रक्रिया फंसी हुई है जिससे पार्टी के बैचैन युवा नेताओं में भगदड़ मची हुई है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के मुताबिक 2014 से 2021 के दौरान कांग्रेस पार्टी के करीब 399 नेता पार्टी छोड़ चुके हैं जिसमें 177 सांसद और विधायक शामिल हैं. दूसरी तरफ पुरानी पीढ़ी के नेता राहुल गाँधी के रास्ते का रोड़ा बने हुए हैं जिन्हें फिलहाल जी-23 समूह के रूप में जाना जा रहा है.


2019 की हार के बाद अपना इस्तीफ़ा देते समय राहुल गाँधी ने कांग्रेस नेताओं से जवाबदेही लेने, पार्टी के पुनर्गठन के लिये कठोर फ़ैसले लेने और गैर गांधी अध्यक्ष चुनने की बात कही थी. लेकिन इनमें से कुछ नहीं हो सका उलटे सबकुछ पहले से अधिक पेचीदा हो गया है. फिलहाल सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष हैं और राहुल गाँधी बिना कोई जिम्मेदारी लिये हुये पार्टी के सबसे बड़े और प्रभावशाली नेता बने हुये हैं. पार्टी में विचारधारा को लेकर भी भ्रम की स्थिति है. पार्टी नर्म हिन्दुतत्व व धर्मनिरपेक्षता/उदारवाद के बीच झूल रही है.


कांग्रेस के लिए बाहरी चुनौती के तौर पर मोदी-शाह की भाजपा और संघ परिवार तो पहले से ही हैं लेकिन अब कई क्षेत्रीय पार्टियां भी कांग्रेस के इस कमजोरी को अपने लिए एक मौके के तौर पर देख रही है, खासकर ममता बनर्जी की टीएमसी यानी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी जो कांग्रेस की जमीन पर अपने अखिल भारतीय मंसूबों के साकार होने की उम्मीद कर रही है. आम आदमी पार्टी तो पहले भी इस तरह के मंसूबे दिखाती रही है लेकिन इस बार ममता बनर्जी बहुत ही गंभीरता और योजनाबद्ध तरीके से इस दिशा में आगे बढ़ते हुए दिखाई पड़ रही हैं. इस काम में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उनके सारथी के रूप में दिखलाई पड़ रहे हैं. पिछले कुछ महीनों मेंटीएमसी असम, गोवा और मेघालय के कई कांग्रेस नेताओं को अपने खेमे में शामिल करने में कामयाब रही है. 


कांग्रेस भी इन सबसे अनजान नहीं है,पिछले दिनों कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा है कि वो कांग्रेस का स्थान लेकर खुद का “ममता” कांग्रेस बनाना चाहती हैं इसीलिए वे विभिन्न राज्यों के कांग्रेस नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर रही हैं. अधीर रंजन चौधरी द्वारा इस काम के लिए प्रशांत किशोर की संस्था आईपीएसी और टीएमसी के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगाया गया है. गौरतलब है कि पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी छोड़ कर तृणमूल में शामिल हुए गोवा कांग्रेस वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिन्हो फेलेरो ने बयान दिया था कि वे प्रशांत किशोर की सलाह पर टीएमसी में शामिल हुये हैं.


भारतीय राजनीति में अधिकतर समय विपक्ष मजबूत नहीं रहा है लेकिन मौजूदा समय की तरह कभी इतना निष्प्रभावी भी नहीं रहा है. इसमें कांग्रेस के कमजोरी की बड़ी भूमिका है. वैसे भी आज के दौर में विचारधारा के तौर पर भाजपा और संघ परिवार को असली चुनौती कांग्रेस और लेफ्ट से ही है. इस मामले में अन्य क्षेत्रीय पार्टियाँ भाजपा को कोई चुनौती पेश नहीं करती है. इसलिए आज कांग्रेस का संकट भारतीय राजनीति के विपक्ष का संकट बन गया है. 


आज विपक्ष के रूप में कांग्रेस का मुकाबला एक ऐसे दल से है जो विचारधारा के आधार पर अपनी राजनीति करती है.भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार अपने विचारधारा के आधार पर नया भारत गढ़ने में व्यस्त हैं. आजादी की विरासत और पिछले 75 वर्षों के दौरान प्रमुख सत्ताधारी दल होने के नाते कांग्रेस ने अपने हिसाब से भारत को गढ़ा था. अब उसके पास भाजपा के हिन्दुतात्वादी राष्ट्रवाद के मुकाबले कोई कार्यक्रम या खाका नजर नहीं आ रहा है. इसलिए कांग्रेस को अगर मुकाबले में वापस आना है तो उसे संगठन और विचारधारा दोनों स्तर पर काम करना होगा. उसे अपने जड़ों की तरफ लौटना होगा और आजादी के आन्दोलन के दौरान जिन मूल्यों और विचारों की विरासत उसे मिली थी उन्हें अपने एजेंडे में लाना होगा, उग्र और एकांकी राष्ट्रवाद के मुकाबले समावेशी और बहुलतावादी राष्ट्रवाद की अवधारणा को पेश करना होगा तभी जाकर वह अपनी खोई हुई जमीन दोबारा हासिल कर सकती है.


दूसरा बड़ा संकट लीडरशिप का है तमाम कोशिशों के बावजूद राहुल गाँधी पार्टी में अपना वर्चस्व स्थापित नहीं कर पाए हैं. पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के बाद भी आज पार्टी के सारे फैसले वही ले रहे हैं. साथ ही वे देश के “इकलौते” विपक्ष के नेता के तौर पर अकेले ही मोदी सरकार को घेरने की कोशिश करते रहते हैं. उनके इस कवायद में उनका पार्टी संगठन नदारद नजर आता है. जी-23 समूह के नेता राहुल गांधी के बिना किसी पद के इसी ऑथोरिटी पर सवाल उठा रहे हैं जिसे गैर-वाजिब भी नहीं कहा जा सकता है.


प्रशांत किशोर का इरादा भले ही कुछ भी रहा हो लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी को लेकर उनके द्वारा किये गये ट्वीट से असहमत नहीं हुआ जा सकता है जिसमें उन्होंने लिखा था कि ‘जो लोग लखीमपुर खीरी की घटना को पुरानी पार्टी के पुनर्जीवित करने के तौर पर देख रहे हैं, उन्हें बड़ी निराशा ही हाथ लगनी है क्योंकि पार्टी की बड़ी समस्याओं और संरचनात्मक कमजोरियों का कोई तात्कालिक समाधान नहीं है.’ अगर कांग्रेस अपने संकट को एक मुकाम देना चाहती है तो सबसे पहले उसे अपने तीन अंदरूनी संकटों विचारधारा, लीडरशिप और सांगठनिक बिखराव को हल करना होगा. 


-जावेद अनीस-



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वेणुगोपाल और रावत के साथ सिद्धू की बैठक शुरू

नई दिल्ली : कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू बृहस्पतिवार को पहली बार यहां पार्टी मुख्यालय पहुंचे और उन्होंने संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल तथा पंजाब प्रभारी हरीश रावत से मुलाकात की।


सिद्धू शाम करीब साढ़े छह बजे 24 अकबर रोड़ पहुंचे, हालांकि उन्होंने इस्तीफा वापस लेने की संभावना अथवा पत्रकारों के किसी अन्य सवाल का जवाब नहीं दिया।


सूत्रों के मुताबिक, वेणुगोपाल के कार्यालय में यह बैठक चल रही है।


उल्लेखनीय है कि सिद्धू ने 28 सितंबर को कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में सिद्धू ने कहा था कि वह पार्टी की सेवा करना जारी रखेंगे।


उन्होंने पत्र में लिखा था, ‘‘किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व में गिरावट समझौते से शुरू होती है, मैं पंजाब के भविष्य और पंजाब के कल्याण के एजेंडे को लेकर कोई समझौता नहीं कर सकता हूं।’’


कांग्रेस आलाकमान ने अब तक सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।


सूत्रों का कहना है कि बृहस्पतिवार की बैठक के बाद कुछ बिंदुओं पर सहमति बन सकती है।


पिछले दिनों कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस दौरान यह भी चर्चा थी कि सिद्धू मुख्यमंत्री चन्नी की कार्यशैली को लेकर भी खुश नहीं हैं, हालांकि कांग्रेस के सूत्र इससे इनकार करते हैं।


कांग्रेस सूत्रों ने यह भी बताया कि फिलहाल सिद्धू के दिल्ली दौरे के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से उनकी मुलाकात का कोई कार्यक्रम तय नहीं है।





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कांग्रेस के शासनकाल में हुई सभी भर्तियों की जांच हो: भाजपा

जयपुर : राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की मौजूदा कांग्रेस सरकार के शासनकाल में हुई सभी भर्तियों की जांच करवाने की मांग की है।


भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि राजस्थान में जब से कांग्रेस पार्टी की सरकार आई है तब से लेकर अब तक जितनी भी भर्तियां हुई है, वह सभी अब संदेह के घेरे में आती दिखाई दे रही हैं।


शर्मा के अनुसार, हाल ही में हुई राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) में कथित गड़बड़ियों की जांच विशेष कार्यबल एसओजी द्वारा की जा रही है। शर्मा के अनुसार, इस जांच के बाद अब एक-एक कर पर्तें खुलती दिखाई दे रही हैं।


उन्होंने कहा, '' भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि राजस्थान में कांग्रेस के शासनकाल के दौरान जो भर्तियां हुई है उन सारी भर्तियों की जांच हो। इसके साथ ही भाजपा चाहती है कि मुख्यमंत्री लाखों युवाओं से माफी मांगें और शिक्षा मंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए तत्काल इस्तीफा दें।''


उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने 26 सितंबर को आयोजित रीट परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियों और अनियमितताओं में शामिल एक आरएएस और दो आरपीएस अधिकारियों, शिक्षा विभाग के 14 कर्मियों और तीन अन्य पुलिस कर्मियों को निलंबित किया है। इस परीक्षा के पेपर लीक होने के मामले में गिरफ्तारियां भी हुई हैं।





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कांग्रेस में सुलह के संकेत : राहुल, गुलाम नबी आजाद एक साथ नजर आए

नई दिल्ली :  कांग्रेस नेता राहुल गांधी और गुलाम नबी आजाद पार्टी के दो कार्यक्रमों में एक साथ नजर आए। दोनों नेता पहले बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की फोटो प्रदर्शनी में और दूसरा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक के दौरान एकसाथ नजर आए थे।


शनिवार को होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक (सीडब्ल्यूसी) से पहले यह पर्फेक्ट पिक्च र पार्टी के लिए राहत का संकेत है। आजाद ने सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने के लिए अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा था।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ असंतुष्ट समूह से बात कर रहे हैं और प्रियंका भी भूपिंदर हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा को लखीमपुर खीरी हिंसा के विरोध में शामिल करके जी -23 तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। वह अपनी रैली के लिए जूनियर हुड्डा को वाराणसी भी ले गईं।


कांग्रेस पिछले साल अगस्त 2020 से आंतरिक दरार से घिरी हुई है, जब सोनिया गांधी को प्रभावी नेतृत्व के लिए एक पत्र लिखा गया था। पिछले महीने गुलाम नबी आजाद ने फिर सोनिया गांधी को सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने के लिए पत्र लिखा था और अब कांग्रेस आलाकमान ने 16 अक्टूबर को बैठक बुलाई है।


पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने हाल ही में कहा था, हमारी पार्टी में कोई अध्यक्ष नहीं है, इसलिए हमें नहीं पता कि सभी निर्णय कौन ले रहा है। हम इसे जानते हैं, फिर भी हम नहीं जानते, मेरे एक वरिष्ठ सहयोगी ने सीडब्ल्यूसी की तत्काल बैठक बुलाने के लिए अंतरिम अध्यक्ष को पत्र लिखा है या लिखने वाला हैं ताकि बातचीत शुरू की जा सके।


लेकिन लखीमपुर खीरी कांड के बाद जी-23 नेताओं के रूख में नरमी आई है। जी-23 में से एक आनंद शर्मा गांधी परिवार की प्रशंसा करते रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका की मारे गए किसानों के परिवार के साथ साहसिक रूप से एकजुटता दिखाने के लिए सराहना की है।




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भारत में पहले कभी इतनी निर्णायक सरकार नहीं रही: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में सहभागिता निभाने की आकांक्षा रखने वाले उद्योगों के संगठन ‘इंडियन स्पेस एसोसिएशन’ (आईएसपीए) की शुरुआत करते हुए सोमवार को अपनी सरकार की सुधार संबंधी प्रतिबद्धताओं को रेखांकित किया और कहा कि देश में कभी इतनी निर्णायक सरकार नहीं रही।


मोदी ने नुकसान में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की एयरलाइन एअर इंडिया का निजीकरण करने में सरकार की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उसकी प्रतिबद्धता और गंभीरता को दर्शाता है।


उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बारे में सरकार की नीति यह है कि जिन क्षेत्रों में उसकी आवश्यकता नहीं है, उन्हें निजी उपक्रमों के लिए खोला जाना चाहिए।


प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष से लेकर रक्षा तक अनेक क्षेत्रों के द्वार निजी उद्योगों के लिए खोले जाने का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने राष्ट्रीय हित तथा विभिन्न हितधारकों की आवश्यकता को ध्यान में रखा है।


उन्होंने कहा कि भारत में इतने बड़े स्तर पर सुधार दिख रहे हैं क्योंकि उसका दृष्टिकोण स्पष्ट है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने का है।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिनके पास अंतरिक्ष क्षेत्र में ‘एंड टू एंड’ (एक सिरे से दूसरे सिरे तक निर्बाध आपूर्ति वाली) प्रौद्योगिकी है। उन्होंने कहा कि सरकार साझेदार के रूप में उद्योगों, युवा नवोन्मेषकों और स्टार्ट-अप की मदद कर रही है और करती रहेगी।


उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के लिए सरकार के प्रयास चार स्तंभों पर आधारित हैं, जिनमें निजी क्षेत्र को नवोन्मेषिता की स्वतंत्रता देना, सरकार की सामर्थ्य प्रदान करने की भूमिका निभाना, युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना तथा क्षेत्र की कल्पना आम आदमी के विकास में सहायता प्रदान करने वाले स्रोत के रूप में करना शामिल हैं।


सरकार ने कहा कि आईएसपीए में सरकार और उसकी एजेंसियों समेत भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के सभी पक्षों की सहभागिता रहेगी।


उसने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए संगठन भारत को आत्मनिर्भर, प्रौद्योगिकी के लिहाज से उन्नत तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में नेतृत्व करने वाला बनाने में मदद करेगा।


आईएसपीए के संस्थापक सदस्यों में लार्सन एंड टूब्रो, नेल्को (टाटा समूह), वनवेब, भारती एयरटेल, मैपमाईइंडिया, वालचंदनगर इंडस्ट्रीज और अनंत टेक्नोलॉजी लिमिटेड शामिल हैं।


इसके अन्य प्रमुख सदस्यों में गॉदरेज, ह्यूजेस इंडिया, अजिस्ता-बीएसटी एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड, बीईएल, सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स और मैक्सर इंडिया शामिल हैं।






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नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा देने के बाद भाजपा में शामिल हुए देवेंद्र राणा, सुरजीत सलाथिया

नई दिल्ली : नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा देने के एक दिन बाद पार्टी की जम्मू इकाई के पूर्व प्रमुख देवेंद्र राणा पार्टी नेता सुरजीत सिंह सलाथिया के साथ सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।


राणा और सलाथिया ने केंद्रीय मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान, हरदीप सिंह पुरी तथा जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में यहां भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ली।


केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के छोटे भाई और पूर्व विधायक राणा जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के राजनीतिक सलाहकार रह चुके हैं।


जम्मू कश्मीर के लिए भाजपा के प्रभारी महासचिव तरुण चुग और पार्टी की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रवींद्र रैना ने दोनों नेताओं का पार्टी में स्वागत किया।


राणा अनेक राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी संगठनों की संयुक्त घोषणा के रूप में ‘जम्मू घोषणापत्र’ जारी किये जाने की वकालत करते रहे हैं, जिसमें मुख्य रूप से जम्मू क्षेत्र के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने और पूरे जम्मू कश्मीर के लिए यह दर्जा बहाल नहीं करने की मांग शामिल है।


केंद्र सरकार ने 2019 में जम्मू कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे को समाप्त कर दिया था और उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया था।



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यूपी भाजपा अध्यक्ष ने अजय मिश्रा को लखनऊ तलब किया

लखनऊ : उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी को लखनऊ तलब किया है।


मिश्रा को सोमवार शाम तक सिंह से मिलने के लिए कहा गया है।


लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर की घटना के बाद मिश्रा ने अब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से मुलाकात नहीं की है। आरोप है कि उनके बेटे आशीष मिश्रा ने कथित तौर पर अपनी एसयूवी के साथ चार किसानों सहित नौ लोगों को कुचल दिया था।


सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आलाकमान इस घटना को लेकर और इसके संबंध में खेद नहीं व्यक्त करने को लेकर केंद्रीय मंत्री से नाराज है।


भाजपा के एक सूत्र ने कहा, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय मिश्रा टेनी से बात करना चाहते हैं और फिर पार्टी आलाकमान को इस बारे में बताना चाहते हैं।


गौरतलब है कि रविवार शाम पार्टी की एक बैठक के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा था , नेता होने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी फॉर्च्यूनर से किसी को भी कुचल सकते हैं।






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छत्तीसगढ़ में भूपेश ही बने रहेंगे मुख्यमंत्री : ताम्रध्वज

रायपुर : छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर रस्साकशी के बीच कहा हैं कि..अभी भूपेश बघेल मुख्यमंत्री हैं,और वहीं इस पद पर बने रहेंगे..। लगभग तीन वर्ष पूर्व विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस को बहुमत मिलने पर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर चुके श्री साहू ने कल पेन्ड्रा में पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर में कहा कि छत्तीसगढ़ में जो एक बार मुख्यमंत्री बन गया,वहीं पूरे समय रहता हैं।हर राज्य की अलग अलग परिस्थिति होती है,कहीं चार माह में मुख्यमंत्री हट जाता हैं और कहीं 15 वर्ष तक नही हटता। मुख्यमंत्री श्री बघेल एवं स्वास्थ्य मंत्री टी.एस.सिंहदेव के बीच ढ़ाई ढ़ाई वर्ष के मुख्यमंत्री के पद को लेकर चल रही रस्साकशी में श्री साहू पहले मंत्री है,जिसने खुलकर श्री बघेल के मुख्यमंत्री बने रहने का बयान दिया हैं।दो मंत्री श्री रविन्द्र चौबे एवं श्री अमरजीत भगत श्री बघेल के साथ खुलकर खड़े हैं,पर उन्होने उनके पद पर बने ही रहने का कोई बयान नही दिया है।श्री साहू के बयान को राजनीतिक गलियारे में इसलिए अहम माना जा रहा है,और आश्चर्य भी व्यक्त किया जा रहा हैं कि उनके भी दो के विवाद में तीसरे का फायदा होने की नीति के तहत अपने पक्ष में लाबिंग करने की खबरें आती रही है। श्री साहू ने कवर्धा में हुई घटनाओं एवं उसके बाद कर्फ्यू लागू करने की परिस्थिति के लिए संघ एवं भाजपा को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इन दोनों ने शान्तिप्रिय कवर्धा के माहौल को बिगाड़ने का प्रयास किया।उन्होने कहा कि पुलिस ने जिन 70 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज किया है उनमें कवर्धा का एक भी नही है।उन्होने कहा कि इंडा लगाने के दो व्यक्तियों के विवाद को कैसे दो समुदायों के विवाद का रूप लिया,इसके लिए जिम्मेदार लोगो पर कड़ी कार्यवाई होंगी। 





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भाजपा के नेता और खरबपति मित्रों के अलावा हर वर्ग असुरक्षित : प्रियंका गांधी

वाराणसी :  केन्द्र सरकार पर निजीकरण की आड़ में सरकारी संपत्तियों को बेचने का आरोप लगाते हुये कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के कार्यकाल में सत्तारूढ़ दल के नेता, मंत्री और उनके चंद खरबपति मित्रों के अलावा कोई भी सुरक्षित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में किसान न्याय रैली को संबोधित करते हुये श्रीमती वाड्रा ने रविवार को कहा कि देश में बेरोजगारी चरम पर है। कोरोना काल में छोटे व्यापारी और किसान तबाह हो चुके हैं जबकि प्रधानमंत्री के खरबपति मित्र हर रोज करोड़ों रूपये कमा रहे है। बड़ी संख्या में छोटे व्यापारियों को अपने काम बंद करने पडे। सरकार की तरफ से उन्हे कोई राहत सरकार नहीं मिली। 


उन्हे जीएसटी और नोटबंदी के तौर पर सिर्फ प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार निजीकरण के नाम पर रेलवे, हवाई जहाज, हवाई अड्डे, पीएसयू समेत तमाम सरकारी और अर्धसरकारी प्रतिष्ठान अपने खरबपति मित्रों को बेच रही है। पिछले दिनो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 16 हजार करोड़ रूपये खर्च कर अपने लिये दो हवाई जहाज खरीदे जबकि एयर इंडिया को महज 18 हजार करोड़ में अपने दोस्त को बेच दिया। इस देश में किसान त्रस्त है, निषाद त्रस्त है, महिला त्रस्त है। मीडिया में बहुत आता है कि हम सुरक्षित है। क्या सच्चाई नहीं दिख रही है। इस देश में दो तरह के लोग सुरक्षित है, एक भाजपा का नेता और मंत्री और दूसरे उसके खरबपति मित्र। यहां किसी धर्म जाति के व्यक्ति सुरक्षित नहीं है। मजदूर, मल्लाह, गरीब, दलित अल्पसंख्यक और महिलाये सुरक्षित नहीं है। यह देश नष्ट हो रहा है। इस बात को पहचानिये। कांग्रेस महासचिव ने अपील करते हुये कहा “ सच्चाई से लोग क्यों डर रहे हैं। समय आ गया है। चुनाव की बात नहीं है। यह भाजपा का नहीं जनता का देश है। इस देश को जनता बचायेगी। जागरूक नहीं बनेंगे और राजनीति में उलझे रहेंगे तो न खुद को बचा पायेंगे और न ही देश बचा पायेंगे। जो किसान को आंदोलनकारी और आतंकवादी कहते है उनको न्याय देने के लिये मजबूर कीजिये। कांग्रेसी किसी से नहीं डरते है। हमे जेल में डालिये मारिये मगर हम तक नहीं हटेंगे जब तक लखीमपुर खीरी मामले में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री इस्तीफा नहीं देते। हम हिलेंगे नही डटे रहेंगे। हमारी पार्टी ने आजादी की लडाई लडी है। हमे कोई रोक नहीं सकता।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से किसी को न्याय की उम्मीद नहीं है। सोनभद्र में 13 आदिवासियों के नरसंहार का मामला हो, हाथरस की घटना हो या लखीमपुर का मामला।


 योगी सरकार ने पीड़ित पक्ष की सुनने की बजाय पुलिस और दबंगो का पक्ष लिया है। कोरोना के समय जनता त्रस्त थी जबकि सरकार आक्रामक हो गयी थी। आक्सीजन के लिये लोगो की मदद करने की बजाय उनको पीटा जा रहा था। श्रीमती वाड्रा ने कहा कि लखीमपुर खीरी में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे ने छह किसानो को कुचल दिया। पुलिस उस पर कार्रवाई करने के बजाय निमंत्रण दे रही है कि आइये हमसे बात कीजिये। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बचाव कर रहे है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के लिये लखनऊ आये लेकिन उन्हे दो घंटे का सफर तय कर लखीमपुर जाने की फुर्सत नही थी। उन्हे पता होना चाहिये कि यह आजादी देश ने किसानो के दम पर हासिल की है। इस देश को किसानो ने सींचा है। किसान के बेटे सीमाओं पर हमारी रक्षा कर रहे है। यह देश एक आस्था है उम्मीद है। इसी उम्मीद ने देश को आजादी दी। उन्होंने कहा कि वह लखीमपुर में मारे गये किसानो और पत्रकार के परिवार से मिली। वह सभी न्याय की उम्मीद छोड चुके है। मारे गये एक किसान का बेटा सीमा सुरक्षा बल में है। दूसरे किसान के तमाम भाई बहन सेना में है। पत्रकार रमन कश्यप के परिजनो ने बताया कि उसे जीप से इसलिये कुचला गया क्योंकि वह घटना का वीडियो बना रहा था। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि अगर न्याय दिलाने में मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, विधायक, सांसद, मंत्री सभी पीठ मोड ले तो आम आदमी किसके पास मदद के लिये जायेगा।


 पिछले नौ दस महीने से किसान दिल्ली बार्डर पर आंदोलन कर रहे है। इस दौरान 600 से अधिक किसान शहीद हो चुके है। वह सरकार के तीन नये कृषि कानून का विरोध कर रहे है। वह जानते है कि इन कानून से लागू होने से उनकी फसल, आमदनी प्रधानमंत्री के खरबपति मित्रों के पास जाने वाली हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल हिमाचल प्रदेश में सबसे 88 रूपये बिका था जबकि इस साल 72 रूपये में खरीदा जा रहा है। किसानों की लागत बढ गयी है। फसल की कीमत तय करने का फैसला खरबपति कर रहे है। यह स्थिति पूरे देश में होगी। आपकी खेती आपकी फसल खींची जायेगी। कांग्रेसी नेता ने कहा कि गृह राज्यमंत्री ने कहते है कि किसानो को दो मिनट में सबक सिखा दूंग। दुनिया के कोने कोने तक घूमने वाले पीएम अपने घर से मात्र दस किमी की दूरी पर किसानो से बात करने दिल्ली बार्डर तक नहीं जा सकते। खुद को गंगा पुत्र कहने वाले प्रधानमंत्री ने देश के करोड़ो अन्नदाता गंगा मईया के पुत्रों का अपमान किया है। किसान तमाम परेशानियों से जूझ रहा है। आवारा पशुओं की समस्या से निपटने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। बिजली के दाम लगातार बढ रहे है। बिजली नहीं मिल रही पर बिजली के बिल बढ रहे है। प्रदेश का हर परिवार त्रस्त है। यूरिया, खाद महंगा है। खेती के उपकरणों परजीएसटी लगा दी है। पेट्रोल के दाम 100 रूपये, रसोई गैस 1000 रूपये और डीजल की कीमते 90 रूपये प्रति लीटर पार कर चुकी है। 23 करोड लोग गरीब रेखा के नीचे चले गये है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी चरम पर है। जहां जाओ बेरोजगार मिलते है। लखनऊ की बस्ती में गयी। योगी ने सफाई कर्मचारियों के प्रति अपशब्द कहे। वाल्मीकि मंदिर में झाडू लगाने के बाद घर घर गयी। एक घर से दूसरे घर गयी। हर घर ने बताया कि किसी के बेटे ने एमए तो किसी ने बीए किया था मगर किसी के पास रोजगार नहीं था। कर्मचारियों का वेतन महीनो से ही बढाया गय था। जनता परेशान है। श्रीमती वाड्रा ने अपील करते हुये कहा कि कांग्रेस के साथ खडा होकर परिवर्तन लाईये। अपने प्रदेश को बदलिये। वह तब तक नहीं रूकेंगी जब तक प्रदेश में परिवर्तन नहीं होता। इससे पहले श्रीमती वाड्रा ने काशी विश्वनाथ और मां दुर्गा मंदिर के दर्शन किये और अपने उदबोधन की शुरूआत मां की स्तुति से की और समाप्ति जय माता दी के उदघोष से की। उन्होंने कहा कि वह नवरात्र का व्रत कर रही है। 





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लोकतंत्र बचाने के लिए गंभीर हैं प्रधानमंत्री, तो अजय मिश्रा को 24 घंटों में बर्खास्त करें: कांग्रेस

नई दिल्ली : कांग्रेस ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले को लेकर शनिवार को कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए गंभीर हैं तो उन्हें आरोपी आशीष मिश्रा के पिता अजय मिश्रा को गृह राज्य मंत्री के पद से 24 घंटों के भीतर बर्खास्त करना चाहिए।


पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस समय ‘राजधर्म’ का पालन करना चाहिए।


उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘गोरखपुर से लखीमपुर तक के सफर से स्पष्ट है कि भाजपा का शासन शक्तिशाली व्यक्तियों के सामने झुक जाता है...इस समय न सिर्फ मोदी जी, बल्कि उत्तर प्रद्रेश के मुख्यमंत्री को भी राजधर्म याद आना चाहिए और उसका पालन करना चाहिए।’’


कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘‘सुना है कि गृह राज्य मंत्री के पुत्र की गिरफ्तारी हुई है। उच्चतम न्यायालय ने कल सवाल किया था कि धारा 302 के सभी आरोपियों के साथ ऐसे ही व्यवहार किया जाता है। ऐसी स्थिति क्यों आई कि न्यायालय को यह टिप्पणी करनी पड़ी?’’


उन्होंने कहा, ‘‘गृह राज्य मंत्री अपने पद पर बने हुए है। कांग्रेस की सरकार के समय किसी पर आरोप लगा, बाद में भले न साबित हुआ, लेकिन हमने इस्तीफा लिया। हमारी मांग है कि अजय को बर्खास्त किया जाए।’’


खेड़ा ने जोर देकर कहा, ‘‘अगर प्रधानमंत्री लोकतंत्र की रक्षा करने में गंभीर हैं और खुद को सक्षम मानते हैं तो अगले 24 घंटों में गृह राज्य मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए या उनको बर्खास्त किया जाना चाहिए।’’


गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया क्षेत्र में गत रविवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध करने के दौरान हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।




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5 चुनावी राज्यों में राहुल गांधी के काम से 40 प्रतिशत से अधिक लोग संतुष्ट नहीं

नई दिल्ली : चुनावी राज्यों गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 40 फीसदी से अधिक लोग कांग्रेस नेता राहुल गांधी के काम से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। एबीपी-सीवोटर-आईएएनएस स्टेट ऑफ स्टेट्स 2021 ट्रैकर से यह जानकारी मिली है।


सर्वे के मुताबिक कुल मिलाकर 40.5 फीसदी लोग राहुल गांधी की कार्यशैली से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं, जबकि 18.5 फीसदी लोग काफी संतुष्ट हैं। आंकड़ों से यह भी पता चला कि 20.2 प्रतिशत कुछ हद तक संतुष्ट हैं, जबकि 21 प्रतिशत ने पता नहीं/कह नहीं सकते श्रेणी को चुना है।


सर्वेक्षण के लिए नमूना आकार 98,121 था जिसमें पांच चुनावी राज्यों में 690 विधानसभा सीटों को शामिल किया गया था। यह सर्वे 4 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच किया गया था।


पंजाब में, जहां कांग्रेस सत्ताधारी पार्टी है, 53.1 फीसदी लोग राहुल गांधी के प्रदर्शन से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। केवल 6.7 प्रतिशत लोग राहुल गांधी के प्रदर्शन से बहुत संतुष्ट हैं, जबकि 18.9 प्रतिशत लोग कुछ हद तक संतुष्ट हैं। यहां सैंपल साइज 18,642 था।


उत्तराखंड में, 54.1 प्रतिशत लोग, जो सभी चुनावी राज्यों में सबसे अधिक हैं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की कार्यशैली से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं, जबकि 14.7 प्रतिशत बहुत अधिक संतुष्ट हैं। राज्य के लिए सैंपल साइज 13,975 था।


मणिपुर में, 27.4 प्रतिशत लोग राहुल गांधी के काम से बहुत संतुष्ट हैं, 21.5 प्रतिशत लोग कुछ हद तक संतुष्ट हैं, जबकि 42.1 प्रतिशत लोग बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं।


उत्तर प्रदेश में कुल 46.2 प्रतिशत लोगों ने कांग्रेस नेता के लिए बिल्कुल संतुष्ट नहीं श्रेणी को चुना, जबकि 13.3 प्रतिशत ने कहा कि वे बहुत संतुष्ट हैं। राज्य के लिए सैंपल साइज 50,936 था।


गोवा में, 16.1 प्रतिशत कांग्रेस नेता की कार्यशैली से काफी संतुष्ट हैं, जबकि 23.2 प्रतिशत ने कुछ हद तक संतुष्ट श्रेणी को चुना है। यह सर्वे 13,048 लोगों पर किया गया था।

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव के लिए ममता करेंगी टीएमसी के प्रचार अभियान का नेतृत्व

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी राज्य की चार विधानसभा सीटों पर 30 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों में शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि अभिनेत्री से सांसद बनी नुसरत जहां और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़ टीएमसी में शामिल हुए बाबुल सुप्रियो के नाम सूची में नहीं हैं।


वहीं, भाजपा के प्रचारकों की सूची में प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं के नाम हैं।


टीएमसी की सूची में अभिनेता-सांसद देव और मिमी चक्रवर्ती, लोकप्रिय गायिका-विधायक अदिति मुंशी, फिल्म निर्माता-विधायक राज चक्रवर्ती, अभिनेत्री से तृणमूल कांग्रेस की राज्य युवा शाखा की प्रमुख बनीं सयानी घोष के अलावा वरिष्ठ नेता सुब्रत मुखर्जी, फरहाद हाकिम, सौगत रॉय और अरूप बिस्वास के नाम शामिल हैं।


गौरतलब है कि नुसरत जहां, जिन्होंने मार्च-अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए सक्रिय रूप से प्रचार किया था, और हाल ही में संपन्न भवानीपुर उपचुनाव से पहले पार्टी में शामिल हुए और "भाजपा की उनकी पुरानी दोस्त प्रियंका टिबरेवाल के खिलाफ प्रचार करने की शर्मिंदगी से बचाने" का अनुरोध करने वाले सुप्रियो के नाम टीएमसी सूची में शामिल नहीं हैं।


भाजपा के प्रचारकों की सूची में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, बिहार से सांसद गिरिराज सिंह के नाम राज्य के बाहर के दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं।


विधानसभा चुनावों के लिए पश्चिम बंगाल के बाहर से कई प्रचारकों को शामिल करने वाली भाजपा अपने प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेन्दु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री और उत्तर बंगाल के सांसद जॉन बारला और निसिथ प्रमाणिक, मतुआ समुदाय के मंत्री-सांसद शांतनु ठाकुर सहित अन्य स्थानीय नेताओं पर भी भरोसा कर रही है।


भाजपा के प्रचारकों की सूची में फैशन डिजाइनर और विधायक अग्निमित्र पॉल के अलावा पार्टी के सेलिब्रिटी चेहरे - अभिनेत्री से राज्यसभा सदस्य बनीं रूपा गांगुली और अभिनेत्री-सांसद लॉकेट चटर्जी भी शामिल हैं।








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शिवपाल ने अखिलेश को दी चेतावनी, कहा- लड़ाई के लिए तैयार हूं

लखनऊ :  प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया (पीएसपीएल) के प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने आखिरकार अपने भतीजे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से कोई भी उम्मीद छोड़ दी है। उन्होंने कहा बस हो गया, अब मैं लड़ाई के लिए तैयार हूं। मैं जवाब का (अखिलेश से) इंतजार करते-करते थक गया हूं।


उन्होंने कहा, 12 अक्टूबर से मैं वृंदावन से सामाजिक परिवर्तन यात्रा निकालूंगा, जो भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि है।


दिलचस्प बात यह है कि अखिलेश उसी दिन अपनी समाजवादी विजय यात्रा भी शुरू कर रहे हैं।


एक सवाल के जवाब में शिवपाल ने कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उनके कॉल और संदेशों का जवाब नहीं दे रहे हैं।


उन्होंने कहा, पांडवों ने केवल पांच गांव मांगे थे और कौरवों को पूरा राज्य दे दिया था। इसी तरह, मैंने सिर्फ सम्मान मांगा था लेकिन कुछ लोग इसके लिए तैयार नहीं हैं।


शिवपाल ने कहा, मैंने बहुत कुछ हासिल किया है, मैं मंत्री भी रहा हूं और अब मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बन गया हूं। मैंने 22 नवंबर, 2020 को यहां तक कह दिया था कि अगर इच्छा रही तो हम चुनाव भी नहीं लड़ेंगे। यहां तक कि आज मैंने उन्हें (अखिलेश) फोन और मैसेज किया था कि बीजेपी को हराने के लिए बात करना जरूरी है, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।


उन्होंने आगे कहा, बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए सभी को एकजुट होने की जरूरत है।


उन्होंने कहा, हालांकि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) नहीं चाहते थे कि मैं सपा छोड़ दूं, लेकिन मैं सपा से अलग हो गया। मैंने पहले भी कहा था कि अगर सभी एकजुट हो गए तो अखिलेश मुख्यमंत्री बनेंगे।


सूत्रों के मुताबिक शिवपाल अब राज्य में अन्य छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन का विकल्प चुनेंगे।




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कांग्रेस में नेहरू गाँधी परिवार का कोई विकल्प नहीं


स्वतंत्र भारत में जिन साम्प्रदायिक व विघटनवादी शक्तियों को कांग्रेस ने लगभग पचास वर्षों तक सत्ता के क़रीब आने का अवसर नहीं दिया वह भले ही कांग्रेस-मुक्त भारत की अवधारणा अपने दिल में लिये बैठे हों परन्तु हक़ीक़त तो यही है कि समयानुसार कांग्रेस पार्टी भी नए कलेवर,नए तेवर व नए नेतृत्व के साथ उभरती नज़र आ रही है। निश्चित रूप से इसी दौरान कांग्रेस कुछ ऐसे स्वार्थी नेताओं की वजह से आंतरिक उथल पुथल के दौर से भी गुज़र रही है जो सत्ता के भूखे होने के साथ साथ सिद्धांत व विचार विहीन भी हैं। परन्तु इसका अर्थ यह भी नहीं कि कांग्रेस इन चंद सत्ता लोभियों के पार्टी छोड़ने से समाप्त हो जायेगी। ब्रह्मानंद रेड्डी,देवराज अर्स जैसे कई विभाजन देखने व अनेकानेक दिग्गज नेताओं के किसी न किसी कारणवश पार्टी छोड़ने के बावजूद आज भी पार्टी देश के सबसे बड़े विपक्षी दल के रूप में क़ायम है। और इसका श्रेय सिर्फ़ और सिर्फ़ नेहरू-गाँधी परिवार को ही जाता है। 2014 में कांग्रेस कैसे सत्ता से बाहर हुई, कैसे पचास वर्षों तक दर्जनों हिंदूवादी संगठनों द्वारा हिंदुत्ववाद के विस्तार व धर्म-जागरण के नाम पर देश में साम्प्रदायिकता का प्रचार प्रसार कर,देश में ध्रुवीकरण की राजनीति कर तथा झूठ के रथ पर सवार होकर अन्ना आंदोलन के कंधे पर बैठकर, सत्ता हासिल की गयी यह पूरा देश देख रहा है।


इन परिस्थितियों में कांग्रेस नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता का प्रदर्शन करना चाहिए,अपने नेतृत्व पर विश्वास रखना चाहिये,संगठन का विस्तार करना चाहिए और देश को साम्प्रदायिक ताक़तों के चंगुल से मुक्त कराने के लिये समान विचार वाले संगठनों व नेताओं से तालमेल बनाना चाहिये। बजाये इसके कई राज्यों में सत्ता संघर्ष छिड़ा दिखाई दे रहा है। अनेक सिद्धांत व विचार विहीन तथाकथित कांग्रेसी नेता सत्ता की लालच में उसी दल में जा पहुंचे हैं जहां से कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया गया है। ऐसे तमाम दलबदलुओं को कुछ न कुछ 'लॉलीपॉप' दिया भी जा चुका है। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से पार्टी में ही कुछ ऐसे नेता अभी भी असंतुष्ट दिखाई दे रहे हैं जिनका अपना न तो कोई जनाधार है और सही मायने में तो ऐसे ही नेता पार्टी को कमज़ोर करने के ज़िम्मेदार भी हैं। इन 'असंतुष्टों' में कोई एक भी ऐसा नेता नहीं जो वर्तमान सरकार और उसकी जनविरोधी नीतियों का पूरी ताक़त के साथ विरोध करता दिखाई दे रहा हो। केवल नेहरू-गाँधी परिवार विशेषकर राहुल गांधी व प्रियंका गाँधी ही हैं जो हर उस जगह पहुँचती दिखाई दे रही हैं जहाँ लोग दुःख-पीड़ा या सरकार के दमनात्मक रवैय्ये से दुखी व परेशान हैं। सत्ता को उसके चुनावी वादों की याद भी केवल राहुल व प्रियंका गाँधी करवा रहे हैं।


बड़े आश्चर्य की बात है कि इन बातों का आंकलन वामपंथी युवा नेता कन्हैया कुमार व जिग्नेश मिवानी जैसे युवा नेता तो कर रहे हैं परन्तु कांग्रेस में रहने वाले नेता इस बात को या तो समझ नहीं पा रहे या समझना नहीं चाह रहे। वामपंथी परिवेश में पला बढ़ा एक युवा नेता तो महसूस कर रहा है कि संविधान,लोकतंत्र तथा देश की रक्षा के लिये तथा गाँधी,अंबेडकर व भगत सिंह के सपनों के भारत के निर्माण के लिये कांग्रेस का शक्तिशाली होना ज़रूरी है परन्तु कांग्रेस में पले-बढ़े व सवार्थवश पार्टी में आयातित कुछ कांग्रेस नेताओं को उनका अहंकार,स्वार्थ,दंभ व अहम ही खाये जा रहा है। कांग्रेस के कमज़ोर होने के बावजूद जो लोग राहुल गाँधी के एक आक्रामक विपक्षी नेता के तेवरों से प्रभावित होकर तथा यह जानकर कि सत्ता की ऐश परस्ती व सुविधाओं से अभी कांग्रेस काफ़ी दूर है,उसके बावजूद कांग्रेस का दामन थाम रहे हैं वे कांग्रेस के हितैषी हैं या वह लोग जो दशकों तक सत्ता की मलाई खाने के बावजूद कांग्रेस के मात्र सात वर्षों के केंद्रीय सत्ता से बाहर रहने से घबरा कर अपनी सुविधानुसार उस दल में जा रहे हैं या जाने की फ़िराक़ में हैं जो सैद्धांतिक व वैचारिक रूप से कांग्रेस विरोधी है ?


रहा सवाल कांग्रेस में 'जी हुज़ूरी ' व ख़ुशामद परस्ती संस्कृति का तो यह विडंबना हमारे देश के सभी राजनैतिक दलों,संस्थाओं व संस्थानों की है। इसी संस्कृति को पहचानकर व इसका लाभ उठाकर अंग्रेज़ों ने हम पर हुकूमत की। सही को सही और ग़लत को ग़लत कहने का साहस हर एक व्यक्ति नहीं कर पाता। वर्तमान सत्ता के शीर्ष को ही देख लीजिये। पूरे मंत्रिमंडल से लेकर प्रशासन तक तथा बड़े बड़े मीडिया घराने तक एक ही व्यक्ति के समक्ष 'जी हुज़ूरी ' या ख़ुशामद परस्ती ही नहीं बल्कि 'साष्टांग दंडवत ' की मुद्रा में हैं। हमारे यहाँ तो पल भर में नेताओं को देवी-देवताओं का रूप तक दे दिया जाता है। उनके मंदिर तक बना दिये जाते हैं। इस मानसिक प्रवृति पर शीघ्र क़ाबू नहीं पाया जा सकता। निश्चित रूप से इस चाटुकार संस्कृति ने कांग्रेस को भी नुक़सान पहुँचाया है।


याद कीजिये 1987 में जब विश्वनाथ प्रताप सिंह के विरुद्ध कांग्रेस ने इलाहबाद उपचुनाव में सुनील शास्त्री जैसे कमज़ोर उम्मीदवार को प्रत्याशी बनाया था उस समय पार्टी की 'वर्तमान असंतुष्ट लॉबी' के इन्हीं नेताओं ने सुनील शास्त्री को प्रत्याशी बनाने की सलाह राजीव गाँधी को दी थी। अन्यथा यदि इलाहाबाद की जनता व पार्टी कार्यकर्ताओं की मांग पर अमिताभ बच्चन को ही विश्वनाथ प्रताप सिंह की कथित बोफ़ोर्स रिश्वत कांड के झूठे आरोपों की चुनौती स्वीकार करने के लिये उपचुनाव में उतारा गया होता तो कांग्रेस को आज यह दिन न देखने पड़ते। बड़ा आश्चर्य है कि नेहरू-गाँधी के चित्र व उनके नाम की बैसाखी के सहारे जिन लोगों ने विधायक,सांसद,मंत्री व मुख्यमंत्री पदों तक का सफ़र तय किया वही लोग आज सिर्फ़ इसलिये इस परिवार व इनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि पार्टी सत्ता से दूर है ?

कश्मीर से कन्याकुमारी तक कोई ऐसा कांग्रेस नेता नहीं जो अपने चुनाव क्षेत्र में नेहरू-गाँधी परिवार के सदस्यों के चित्र अपने चुनावी बैनर्स व पोस्टर्स में छपवाये बिना चुनाव लड़ता हो। इस परिवार ने स्वतंत्र संग्राम के समय व स्वतंत्र भारत में भी देश के लिये जो खोया है उसका मुक़ाबला कोई भी कांग्रेस नेता या उसका घराना नहीं कर सकता। आज भी देश के किसी भी राज्य में शहर से गांवों तक में जो आकर्षण इस परिवार के नेताओं के प्रति है वह किसी नेता में नहीं। अपनी सुविधापूर्ण ज़िन्दिगी को त्याग कर पार्टी को मज़बूत करने के लिये राहुल व प्रियंका गाँधी द्वारा जितनी मेहनत व मशक़्क़त की जा रही है वह देश देख रहा है। देश को यदि कांग्रेस से कोई उम्मीद दिखाई दे रही है तो वह राहुल व प्रियंका के युवा नेतृत्व में ही नज़र आ रही है। कहना ग़लत नहीं होगा कि कांग्रेस में नेहरू गाँधी परिवार का कोई विकल्प मौजूद नहीं है।





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दो हिस्सों में बंटी लोजपा

दो गुटों में बंटी लोक जनशक्ति पार्टी को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। चुनाव आयोग ने लोकजनशक्ति पार्टी के दोनों गुटों को अलग-अलग पार्टी के तौर पर मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने पुराना नाम और चुनाव चिह्न भी खत्म कर दिया है।आयोग ने चिराग पासवान के नेतृत्व वाले गुट को पार्टी का नया नाम लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) दिया है और चुनाव चिह्न हेलीकॉप्टर आवंटित किया है। वहीं, उनके चाचा पशुपति पारस को राष्ट्रीय जनशक्ति पार्टी और सिलाई मशीन चुनाव चिह्न प्रदान किया गया है। एलजेपी के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी में दो गुट हो गया था। राम विलास के बेटे चिराग पासवान अकेले पड़ गए थे। वहीं, बाकी सांसद उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के साथ चले गए थे। पार्टी के सिंबल को लेकर चाचा-भतीजा के बीच लगातार तनातनी का माहौल बना हुआ था। दोनों नेताओं की ओर से पार्टी के चिह्न हो लेकर दावा किया जा रहा था। लगातार इसको लेकर सियासत हो रही थी। पछले सप्ताह चुनाव आयोग ने लोजपा का चुनाव चिह्न जब्त कर लिया था। चाचा-भतीजा ने चुनाव आयोग से पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न जारी करने की मांग की थी। चुनाव आयोग ने दोनों नेताओं को पार्टी का नाम और चिह्न अलॉट कर दिया है। चिराग पासवान ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर इस मामले में पशुपति पारस गुट पर आरोप लगाया था कि पशुपति पारस का गुट जानबूझकर नामों और सिंबल का तीन विकल्प देने में देरी कर रहा है ताकि आयोग फैसला नहीं कर सके। चिराग ने आरोप लगाया था कि आयोग की ओर से फैसले में हो रही देरी से उनकी चुनावी तैयारियों पर भी असर पड़ रहा है। चिराग पासवान बिहार विधानसभा की दो सीटों पर 30 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में अपने उम्मीदवार उतारना चाहते हैं। कुशेश्वरस्थान और तारापुर की सीट पर चिराग प्रत्याशी उतारेंगे।


पासवान के निधन के बाद छोटे भाई पशुपति कुमार पारस ने चार अन्य सांसदों की मदद से अपने भतीजे चिराग पासवान के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किया, तो लोगों को हैरानी हुई थी। आखिकार, पासवान खानदान की मिसाल सियासत में पारिवारिक एकता बनाए रखने के कारण वर्षों से दी जाती रही। बिहार में इसकी पहचान ऐसे कुनबे के रूप में रही, जो अच्छे और बुरे वक्त में साथ रहा है। इसलिए इस चट्टानी एकता के टूटने से लोगों का हैरान होना लाजिमी था। एकता की इस डोर को रामविलास थामे रहे, वरना उनके जीवित रहते बगावत की नींव पड़ चुकी थी। रामविलास के कद के बराबर न तो चिराग थे और न ही पशुपति। लिहाजा साथ बने रहना दोनों की मजबूरी थी, मगर हसरतें जब-तब हिलारें मारती रहीं। पासवान ने हमेशा पार्टी से ज्यादा परिवार को अहमियत दी। परिवार से बाहर के नेता दल में आते और जाते रहे, लेकिन भाई-भतीजावाद के आरोपों से इतर, उनका आपसी प्यार उनकी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं पर हमेशा भारी पड़ा। अब सब कुछ बदल गया है। चाचा पारस और भतीजे चिराग के बीच वर्चस्व की लड़ाई के कारण लोजपा दो टुकड़ों में टूट गई है। इस विभाजन से सबसे ज्यादा खुशी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को होगी। सियासी हलकों में चर्चा है कि लोजपा में जारी पारिवारिक जंग के पीछे उन्हीं का हाथ है। पिछले नवंबर में बिहार विधानसभा चुनावों में चिराग ने जनता दल-यू के सभी प्रत्याशियों के खिलाफ लोजपा के उम्मीदवार खड़े किए, जिससे नीतीश को करीब 35 सीटों का नुकसान झेलना पड़ा। साथ ही, भाजपा के साथ गठबंधन में उनकी हैसियत बड़े भाई से घटकर छोटे भाई की हो गई। नीतीश और जदयू के अन्य नेता सिर्फ इसलिए चिराग से खफा नहीं कि उन्होंने उनके खिलाफ बिहार चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे, बल्कि इसलिए भी कि उन्होंने नीतीश पर सीधा प्रहार किया। जो भी हो आज लोजपा जहां है, वह रामविलास की देन है। अगला चुनाव पशुपति और चिराग का राजनीतिक भविष्य तय करेगा।


-सिद्वार्थ शंकर-





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मैं नहीं जानता ओवैसी को : अबू आजमी

ग्रेटर नोएडा। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र से विधायक अबू आजमी ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश की जनता के सामने समाजवादी पार्टी ही एकमात्र विकल्प के रूप में बची है। भाजपा सरकार से जनता त्रस्त हो चुकी है। आने वाले 2022 विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा की ही सरकार बनेगी। उन्होंने दावा किया कि यूपी में सपा को 352 सीटें मिलेंगी। जब उनसे एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी के बारे में पूछा गया तो बोले, मैं तो ऐसे किसी इंसान को जानता भी नहीं हूं।

 समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र से विधायक और वरिष्ठ सपा नेता अबू आजमी ने रविवार से उत्तर प्रदेश में परिवर्तन यात्रा शुरू की है। ग्रेटर नोएडा में सपा नेता संजीव त्यागी के आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अबू आजमी ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में किसान, युवा, व्यापारी और नौकरीपेशा सहित सभी वर्ग बीजेपी सरकार से परेशान हैं। सरकार की गलत नीतियों के कारण महंगाई अपने चरम पर है। जो लोग महंगाई कम करने का वादा करके सत्ता में आए थे, उन्हें अब महंगाई नहीं दिखाई दे रही है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता ने गलती करके भारत जनता पार्टी को चुना था। अब मुझे भरोसा है कि प्रदेश की जनता आने वाले चुनाव में अपनी भूमि सुधार करने वाली है। जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने वाले हैं, और उन्होंने दावा किया है कि वह योगी आदित्यनाथ को हराकर रहेंगे। इस पर अबू आसिम आजमी ने असदुद्दीन ओवैसी का नाम लिए बिना कहा, मैं तो ऐसे किसी नाम के इंसान को जानता ही नहीं हूं। आप लोगों को ही पता होगा वह कौन हैं। कुछ लोग मुसलमानों के ठेकेदार बन गए हैं। दरअसल, वह भाजपा को जिताने के लिए मैदान में उतरते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान दूसरे राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम आपने देखे ही होंगे। वह लोग योगी आदित्यनाथ को हटाने नहीं आ रहे हैं, बल्कि उनका मकसद भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर जिताना है। यह बात बच्चा बच्चा जान गया है। 

अबू असीम आजमी ने चुटकी लेते हुए कहा कि जब आंधी चलती है तो ऐसे खरपतवार उड़ जाया करते हैं। उन्होंने कहा कि वह मुंबई से उत्तर प्रदेश में प्रचार के लिए निकले हैं। उन्होंने दावा किया कि इस बार सपा विधानसभा चुनाव में 352 सीटें जीतेगी। यह संख्या बढ़ भी सकती है। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार से प्रदेश की जनता तंग आ चुकी है। उसके सामने सिर्फ सपा ही एकमात्र विकल्प बचा है। यही कारण है कि 2022 में प्रदेश में होने वाले चुनावों में सपा बहुमत से जीतेगी और सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का एक्शन प्लान दोहरा है। एक तरफ लव जिहाद के नाम पर मुसलमानों को जेलों में डाला जा रहा है। धर्मांतरण के फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। दूसरी ओर मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ अनर्गल बयान देने वालों पर बीजेपी सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। ऐसे बयान देने वाले लोग देश और समाज को तोड़ने का काम कर रहे हैं, फिर भी सरकार चुप है। इससे सरकार की मंशा साफ समझी जा सकती है। केवल मुसलमानों को निशाना बनाकर सरकार काम कर रही है। देश में और उत्तर प्रदेश में एसी सरकार की जरूरत है, जो संविधान को मानती है। जो दिलों को जोड़ने का काम करे। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार केवल दिलों को तोड़ने का काम कर रही है।

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प्रियंका गांधी व दीपेंद्र हुड्डा की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेसियों ने किया प्रदर्शन

नोएडा। कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा व सांसद दीपेंद्र हुड्डा को लखीमपुर खीरी जाते समय गिरफ्तार किए जाने के विरोध में कांग्रेसियों ने आज सेक्टर-19 स्थित सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन किया। कांग्रेसियों ने दोनों नेताओं की रिहाई तथा लखीमपुर कांड के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस कमेटी नोएडा महानगर के अध्यक्ष शहाबुद्दीन व युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम नागर के नेतृत्व में कार्यकर्ता आज सुबह सेक्टर-19 स्थित सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। कांग्रेसियों ने श्रीमती प्रियंका गांधी व दीपेंद्र हुड्डा की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन किया। कांग्रेसियों का कहना था कि किसानों से मिलने जा रही श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा व सांसद दीपेंद्र हुड्डा को गिरफ्तार कर प्रदेश सरकार ने अपनी हिटलर शाही मानसिकता का परिचय दिया है। इस मौके पर पवन शर्मा, अनिल यादव, पूर्व महानगर अध्यक्ष कृपाराम शर्मा, राजेंद्र अवाना, फिरेसिंह नागर, लियाकत चौधरी, रामकुमार तंवर,ललिता अवाना, सत्येंद्र शर्मा,यतेंद्र शर्मा सहित अन्य कांग्रेसी मौजूद थे।

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सत्ता के नशे में चूर हिंदू संगठन के नेताओं के साथ सैकड़ो लोगो की भीड़ ने चर्च पर किया हमला - तोड़फोड़ के साथ लोगो से की मारपीट - एक दर्जन हुए घायल - पुलिस बल तैनात



रूडकी की सिविल लाइन कोतवाली क्षेत्र के सोलानी पुरम में आज सैकड़ो लोगो की भीड़ ने एक चर्च पर हमला करते हुए जबरदस्त तोड़फोड़ कर दी है और चर्च के लोगों के मोबाइल फोंन चर्च का पैसा वे लोगों के पर्स एक छीन कर ले गए इतना ही नहीं चर्च में प्रार्थना कर रहे लोगो के साथ मारपीट भी की गई है जिसमे करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए है जिनको उपचार के लिए सिविल अस्पताल भिजवा दिया गया है जिसमें से एक की हालत गंभीर सिविल अस्पताल से किया हायर सेंटर देहरादून रेफर चर्च के लोगो का आरोप है की तोड़फोड़ करने वाली भीड़ वन्दे मातरम् और जय श्रीराम के नारे लगा रही थी फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है 


बता दे की आज सुबह करीब दस बजे सैकड़ो लोगो की भीड़ ने अचानक ही सोलानी पुरम में एक चर्च पर हमला कर दिया इस हमले में भीड़ ने चर्च का ज्यादातर सामान तोड़ दिया है चर्च के लोगो का आरोप है की प्रार्थना कर रहे लोगो के साथ मारपीट भी की गई है जिसमे करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए है जिन्हें उपचार के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है आरोप है की चर्च पर हमला करने वाले लोग हिंदूवादी नारे लगा रहे थे और मारपीट करते हुए उन्होंने महिलाओं और बुजुर्गो को भी नहीं बख्शा है चर्च पर हमला करने के बाद भीड़ मौके से फरार हो गई है फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है वही चर्च के लोगों को कहना है कि हम कोई धर्म परिवर्तन नहीं करवा रहे थे हम तो हर सप्ताह संडे चर्च मैं अपने परमेश्वर की दुआ आराधना कर रहे थे लेकिन हिंदू संगठनों को यह बहाना अच्छा मिला हुआ है कि धर्म परिवर्तन के नाम पर मारपीट करें कोई भी धर्म हिंसा नहीं सिखाता लेकिन इन जैसे लोगों ने हिंदू धर्म को भी बदनाम किया हुआ है वहीं दूसरी ओर रुड़की एसपी अजय डोभाल ने कहा मामले की जांच कर आरोपियों के ऊपर मुकदमा दायर किया जाएगा

* रुड़की से संदीप पोहिवाल  के साथ सपना चौहान की रिपोर्ट*

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दिल्ली पुलिस की अस्थाना से उम्मीद

नई दिल्ली: अरविन्द गोस्वामी: टास्कमास्टर कहे जाने वाले राकेश अस्थाना एक बार फिर से सुर्ख़ियों में हैं। अस्थाना का पूरा सर्विस रिकॉर्ड शानदार रहा है। तमाम विवादों और उनकी उपलब्धियों का जिक्र करना यहाँ हमारा मकसद नहीं है।  उनके बारे में मीडिया और सोशल मीडिया पर मौजूद है। अजय राज शर्मा का आपको याद होगा 1990 का समय, दिल्ली पुलिस के इतिहास में पहली बार किसी बाहर के आई पी एस अफसर को कानून में बदलाव कर पुलिस कमिश्नर बनाया गया. राजधानी में अपराध चरम पर था। जरूरत थी एक दबंग अफसर की। उत्तर प्रदेश काडर के अजय राज शर्मा चम्बल के डकैतों पर नकेल कस कर अपना लोहा मनवा चुके थे।

अस्थाना की नियुक्ति के दौर में भी दिल्ली पुलिस की चुनौतियां किसी से छुपी नहीं हैं।  माजूदा समय में अस्थाना का कद पूर्व में किसी भी कमिश्नर से कहीं ज्यादा बड़ा है उनकी राजनैतिक पहुँच और काम करने का स्टाइल हम सब जानते हैं। शायद इसी के चलते वह टास्कमास्टर कहलाये। दिल्ली की कानून व्यवस्था के परे खुद दिल्ली पुलिस की भी अस्थाना से उम्मीदें बेहद बड़ी हुई है। वजह है लम्बे समय से लटकी पड़ी वेतन सम्बन्धी मांग। दिल्ली पुलिस के अंदरूनी हलकों की मानें तो अस्थाना की हैसियत माजूदा समय में ऐसी है कि वह इस मामले को आसानी से सुलझा सकते हैं। दिल्ली में सब इंस्पेक्टर जो कि अफसर के तौर पर एंट्री पोस्ट मानी जाती है का शुरुआती ग्रेड पे 4200 रूपए है।  जो कि पी जी टी   टीचर और नर्सों को मिलने वाले वेतन से भी कम है। इनका शुरुआती ग्रेड पे 4600 रुपए है।  मजे की बात तो यह है कि किसी समय दिल्ली पुलिस का हिस्सा रही सी बी आई में भी शुरुआती ग्रेड पे 4600 रुपए है। हालाँकि किसी समय दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर को भी 4600 का ग्रेड पे मिलता था जिसे बाद में डाउनग्रेड कर 4200  रुपए कर दिया गया जो कि समझ से परे था वेतन  और भत्तों की यह असमानताएं दूसरी जगहों पर भी देखने को मिल जाती है। ऐसा नहीं है कि इस मामले को सुलझाने के  ईमानदार प्रयास पहले नहीं हुए  लेकिन पुलिस की इमेज और समय समय पर उठते विवादों के बीच यह कोशिशें फाइलों के बीच धूल खाती दम तोड़ती रहीं।  

राजधानी की कानून व्यवस्था में जुटी दिल्ली पुलिस के लिए यह संक्रमण काल है। दिल्ली दंगे ,किसान आंदोलन और लगातार आतंकी हमलों के अलर्ट केसाये  बीच दिल्ली पुलिस को मॉरल बूस्टर की जरूरत है। हालाँकि अस्थाना की नियुक्ति अपने आप में एक बड़ा सन्देश है। ऐसे में दिल्ली पुलिस की बढ़ी हुई उम्मीदों पर अगर अस्थाना कुछ कर गए तो पुलिस बल के लिए निस्चय यह एक बूस्टर डोज़ का काम करेगी। और टास्कमास्टर के लिए यह कोई बड़ा टास्क है भी नहीं। 

Edit By Janu choudhary

 

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अमित शाह से 'करीबी' अमरिंदर सिंह की धर्मनिरपेक्ष छवि पर सवाल खड़ा करती है:हरीश रावत

देहरादून/चंडीगढ़ : कांग्रेस महा सचिव और पंजाब में पार्टी मामलों के प्रभारी हरीश रावत ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि वह पंजाब की बहुमत की सरकार को गिराने की कोशिश न करें। साथ ही आरोप लगाया कि अमरिंदर सिंह की अमित शाह जैसे भाजपा नेताओं के साथ ''करीबी'' उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि पर सवाल खड़ा करती है।


उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की बातचीत आगे बढ़ी है।


देहरादून में एक संवाददाता सम्मेलन में रावत ने कहा कि चन्नी दलित मुख्यमंत्री हैं और सभी पार्टियों को उनका सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा, “लेकिन मैं भाजपा की केंद्र सरकार को चेतावनी देता हूं कि पंजाब की बहुमत की सरकार को गिराने की कोशिश न करें।”


रावत ने यह चेतावनी ऐसे समय में दी है जब पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। हालांकि, सिंह ने कहा था कि मुलाकात के दौरान उन्होंने गृह मंत्री से किसानों के आंदोलन के बारे में चर्चा की थी।


उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपने सहयोगियों व पार्टी नेतृत्व द्वारा बार-बार याद दिलाने के बावजूद बेअदबी मामले समेत कई अहम मुद्दों पर अपना वादा पूरा करने में नाकाम रहे।


रावत ने आरोप लगाया कि अपनी जिद के कारण सिंह को ऐसा लगने लगा था कि उन्हें विधायकों, मंत्रियों और पार्टी नेतृत्व समेत किसी की सलाह की जरूरत नहीं है।


शाह से सिंह की मुलाकात को लेकर रावत ने कहा, '' अमित शाह और भाजपा के अन्य नेताओं के साथ उनकी करीबी उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि पर संदेह पैदा करती है।''


कांग्रेस नेता ने प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि आमतौर पर पंजाब में ऐसा माना जाता है कि सिंह और बादल (विपक्षी शिअद नेता) अंदरूनी तौर पर एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।


उन्होंने कहा, '' मैंने हमेशा उन्हें विनम्रता से सुझाव दिया कि चुनावी वादे पूरे करें। कम से कम पांच बार मैंने सिंह से चर्चा की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।''


उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बहुत सारे अच्छे कदम उठा रही है जिसमें हर परिवार को 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। इसके अलावा, बालू पर लगा नियंत्रण भी हटाया जाएगा।


उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी और सिद्धू के बीच तनातनी के बारे में पूछे जाने पर कहा कि समस्या का कोई न कोई समाधान निकल आएगा और दोनों नेताओं के बीच बातचीत सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ी है।


रावत ने अमरिंदर सिंह को आगाह किया कि वह भाजपा का मुखौटा न बनें। उन्होंने कहा कि वह कैप्टन के उस बयान से हैरान हैं जिसमें उन्होंने अपने ‘अपमान’ की बात की है। उन्होंने कहा, “अमरिंदर सिंह से उम्मीद थी कि वह चुनौतीपूर्ण समय में कांग्रेस और सोनिया जी को मजबूती देंगे।”


वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि वह 1980 से कांग्रेस से जुड़े हैं और तीन बार पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और दो बार मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने कहा, “अपमान की बात कहने से पहले उन्हें (अमरिंदर सिंह) कांग्रेस के उन नेताओं से तुलना कर लेनी चाहिए थी जिन्हें उनसे काफी कम मिला।”


रावत ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक तब बुलाई गई जब 43 विधायकों ने कैप्टन के खिलाफ बगावती तेवर दिखाने शुरू किए और इस बैठक की सूचना उन्होंने स्वयं अमरिंदर सिंह को दी थी।


उन्होंने आशंका जाहिर करते हुए कहा कि अमरिंदर 'अपमान' संबंधी बयान कहीं किसी दबाव में तो नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कैप्टन को भाजपा के जाल में न फंसने के प्रति आगाह भी किया। हालांकि, यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस अमरिंदर सिंह की वापसी के लिए कोई प्रयास करेगी? रावत ने इस मसले पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।





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पंजाब विकास पार्टी बनाएंगे कैप्टन अमरिंदर सिंह : सूत्र

नई दिल्ली : पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जल्द ही अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान करने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार कैप्टन की नई पार्टी का नाम पंजाब विकास पार्टी होगा।


सूत्रों के अनुसार अपनी नई पार्टी के गठन पर विचार करने के लिए कुछ ही दिनों में कैप्टन अपने करीबी नेताओं की एक बैठक बुलायेंगे जिसमें सिद्दू विरोधी गुट के तमाम नेता शामिल होंगे। कैप्टन पहले भी कह चुके हैं कि पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्दू को हराना उनका पहला लक्ष्य है। ऐसे में उनकी नव गठित पार्टी की ओर से सिद्दू के खिलाफ आगामी विधानसभा चुनाव में एक मजबूत दावेदार को चुनावी मैदान में उतारा जायेगा। इस बीच कैप्टन पंजाब के तमाम किसान नेताओं से भी सम्पर्क साधेंगे। साथ ही कुछ छोटे दलों को भी अपने साथ लाएंगे।


गौरतलब है कि गुरुवार को अमरिंदर सिंह ने कहा था, मैं 52 साल से राजनीति में हूँ, लेकिन उन्होंने मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया। साढ़े दस बजे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मुझसे कहा कि आप इस्तीफा दे दो। मैंने कोई सवाल नहीं पूछा। चार बजे मैं राज्यपाल के पास गया और इस्तीफा दे दिया। अगर 50 साल के बाद भी आप मुझ पर संदेह करेंगे.. मेरी विश्वसनीयता दांव पर है और कोई भरोसा नहीं है, तो ऐसे में पार्टी में रहने का कोई मतलब नहीं है।


अपने इसी बयान के बाद अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का भी ऐलान कर दिया था। हालांकि उन्होंने ये स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस जरूर छोड़ रहे हैं लेकिन बीजेपी में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से उन्हें जिस अपमान का सामना करना पड़ा, उससे वे बेहद आहत हैं।


उल्लेखनीय है कि ये पहली बार नहीं जब कैप्टन ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। कैप्टन साल 1980 में लोकसभा का चुनाव तो कांग्रेस के चुनाव चिन्ह से जीते थे लेकिन साल 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और अकाली दल में चले गए थे। इसके बाद वे 1998 में फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए थे।








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राजस्थान में भाजपा की निगाहें उन सीटों पर, जहां कभी जीत नहीं मिली

नई दिल्ली :  भाजपा की राजस्थान इकाई उन सीटों पर अपने संगठन को मजबूत कर रही है, जिन पर भगवा पार्टी अब तक कभी नहीं जीत पाई है।


ऐसी करीब 19 सीटें हैं और हाल ही में राज्य इकाई के अपने दो दिवसीय चिंतन बैठक में भाजपा ने इन सीटों पर विशेष ध्यान देने का फैसला किया है।


पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि राज्य में कई बार सत्ता में रही भाजपा ने कभी इन सीटों पर जीत हासिल नहीं की और इसलिए यह फैसला किया है कि राज्य में 2023 के उत्तरार्ध में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी के दौरान इन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


साल 2018 में हुए पिछले विधानसभा चुनावों में, भाजपा कांग्रेस से हार गई थी। 200 सदस्यीय राज्य विधानसभा में इस समय कांग्रेस के 106 सदस्य हैं, जबकि भाजपा के 71 हैं और दो सीटें खाली हैं।


पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि इन 19 विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।


उन्होंने कहा, हम अगले राज्य चुनावों में इन सीटों को जीतने के लिए काम कर रहे हैं। इन सीटों में विधानसभा की कुल ताकत का लगभग 10 प्रतिशत शामिल है। इन निर्वाचन क्षेत्रों को जीतकर, हम अपनी पार्टी को एक नए क्षेत्र में विस्तारित करने में सक्षम होंगे।


पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने दावा किया कि इन सीटों को जीतने से न केवल विधानसभा में पार्टी की संख्या बढ़ेगी, बल्कि मौजूदा सीटों के किसी भी संभावित नुकसान को संतुलित करने और साथ ही साथ विपक्षी दलों को कमजोर करने में मदद मिलेगी।


पता चला है कि भाजपा की राज्य इकाई जल्द ही इन 19 विधानसभा क्षेत्रों के लिए विशिष्ट योजना को अंतिम रूप देगी, जिसमें वहां के स्थानीय नेतृत्व को तैयार करना भी शामिल है।


पार्टी के एक नेता ने कहा, किसी भी चुनाव को जीतने के लिए पहला मानदंड जमीन पर मजबूत संगठनात्मक ढांचे की मौजूदगी और दूसरा मजबूत स्थानीय नेतृत्व की मौजूदगी है। हम इन विधानसभा क्षेत्रों में दोनों मुद्दों को हल करने की योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं।


भाजपा नेतृत्व का मानना है कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ मजबूत सत्ता विरोधी लहर है और इन सीटों को जीतकर पार्टी अगला विधानसभा चुनाव ऐतिहासिक जनादेश से जीत सकती है।





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बिहार विधानसभा उपचुनाव में राजद, कांग्रेस में फंसा पेंच

पटना : बिहार में दो विधानसभा क्षेत्रों कुशेश्वरस्थान और तारापुर में होने वाले उपचुनाव को लेकर विपक्षी दलों के महागठंधन के दो प्रमुख घटक दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। दोनों विधानसभा क्षेत्रों से राजद ने अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी है, जबकि कांग्रेस ने कुशेश्वरस्थान पर अपना दावा ठोंका दिया है।


इतना ही नहीं कांग्रेस ने कुशेश्वरस्थान की ग्राउंड रिपोर्ट जानने के लिए एक कमेटी गठित कर दी है।


इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 30 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे, जबकि दो नवंबर को परिणाम घोषित होगा। प्रत्याशी आठ अक्टूबर तक नामांकन का पर्चा दाखिल कर सकते हैं।


कुशेश्वरस्थान और तारापुर विधानसभा क्षेत्र से पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में जदयू के प्रत्याशी विजयी हुए थे। कुशेश्वरस्थान से विधायक शशिभूषण हजारी तथा तारापुर के विधायक मेवालाल चौधरी के निधन के बाद दोनों सीटों पर उपचुनाव हो रहा है।


पिछले विधानसभा चुनाव में परिणाम की बात करें तो कुशेश्वरस्थान से जदयू के प्रत्याशी हजारी ने कांग्रेस के प्रत्याशी अशोक कुमार को करीब सात हजार मतों से पराजित किया था जबकि तारापुर में जदयू के प्रत्याशी मेवालाल चैधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राजद के दिव्या प्रकाश को 72225 मतों से पराजित किया था।


कांग्रेस पिछले चुनाव के आधार पर ही कुशेश्वरस्थान सीट पर अपना दावा ठोंक रही है। कांग्रेस ने कुशेश्वरस्थान में अपने उम्मीदवार के चयन के लिए एक कमेटी भी बना दी है। कमेटी 2 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को सौंप देगी।


बिहार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष समीर सिंह ने कहा कि पार्टी हर चुनाव से पहले इस तरह का सर्वे कराती है। पांच सदस्यीय कमेटी भी उपचुनाव को लेकर पार्टी की स्थिति का आकलन करेगी और अपनी रिपोर्ट अध्यक्ष को सौंपेगी।


इधर, राजद दोनो सीटों पर दावा ठोंक रही है। राजद के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव कहते हैं कि राजद ने रूप्ष्ट तौर पर कहा है कि हम दोनों सीटो ंपर चुनाव लडेंगे, महागठबंधन भी दोनों सीटों पर चुनाव लडेगी। नेतृत्व फैसला करेगा कि कौन सीट किसके हिस्से जाएगा।


उन्होंने कहा कि राजद महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी।


राजद के प्रवक्ता हालांकि नेतृत्व के फैसला करने की बात कहकर महागठबंधन में सीटों को लेकर किसी तरह के विवाद नहीं होने के संकेत भले ही दे रहे हों, लेकिन कांग्रेस के तेवर साफ बता रहे हैं कि कांग्रेस किसी भी हाल में कुशेश्वरस्थान की सीट को छोड़ने के मूड में नहीं है।


इधर, राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह कहते हैं कि दोनों सीटों पर प्रत्याशी राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद तय करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राजद के आलाकमान के बीच संवाद चल रहा है। उन्होंने कहा कि राजद दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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अदालत ने आप कार्यकर्ता को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पार्टी के विधायक को आरोप मुक्त किया

नई दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक शरद चौहान और पांच अन्य को पार्टी की एक कार्यकर्ता को 2016 में आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बृहस्पतिवार को आरोप मुक्त कर दिया।


हालांकि, विशेष न्यायाधीश एम.के. नागपाल ने चौहान के एक सहयोगी रमेश भारद्वाज के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया और कहा कि उन्हें (भारद्वाज को) जिम्मेदार ठहराने के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रथम दृष्टया साक्ष्य हैं।


अदालत द्वारा भारद्वाज को दोषी करार दिये जाने पर अधिकतम 10 साल की कैद की सजा हो सकती है।


भारद्वाज मृतका द्वारा दर्ज कराये गये यौन उत्पीड़न के एक मामले में भी आरोपी है।


शिकायत के मुताबिक मुख्य आरोपी भारद्वाज, चौहान का करीबी सहयोगी था और इसलिए उक्त नेता ने यौन उत्पीड़न के मामले में हमेशा ही उसे बचाया और उसे शरण दी।


हालांकि, अदालत ने कहा, ‘‘अदालत का मानना है कि इस बारे में प्रथम दृष्टया कोई साक्ष्य नहीं है जो यह प्रदर्शित करता हो कि महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने को लेकर भारद्वाज और अन्य सभी आरोपियों के बीच कोई आपराधिक साजिश रची गई थी।’’


आरोप मुक्त किये गये अन्य लोग मोहन लाल वर्मा, संजय, अमित भारद्वाज, रजनीकांत और मुख्तियार सिंह हैं।


अभियोजन के मुताबिक महिला ने उत्तर-पश्चिम दिल्ली के नरेला स्थित अपने घर में जहर खा लिया था और लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। 




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कांग्रेस से इस्तीफा दूंगा, भाजपा में नहीं जाऊंगा : अमरिंदर सिंह

नई दिल्ली : पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अब कांग्रेस में नहीं रहेंगे और पार्टी से इस्तीफा देंगे, लेकिन भाजपा में शामिल नहीं होंगे।


उन्होंने ‘एनडीटीवी’ से बातचीत में यह दावा भी किया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी का ग्राफ बढ़ रहा है, लेकिन कांग्रेस की लोकप्रियता 20 प्रतिशत घट गई है।


गृह मंत्री अमित शाह से बुधवार को मुलाकात करने के बाद उन्होंने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की।


सिंह ने कहा कि पंजाब से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को लेकर उन्होंने डोभाल से मुलाकात की है।


यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा में शामिल होंगे तो उन्होंने कहा, ‘‘मैं भाजपा शामिल नहीं होने जा रहा।’’


उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘फिलहाल मैं कांग्रेस में हूं, लेकिन लंबे समय नहीं रहूंगा। मैंने स्पष्ट किया है कि 52 साल से मैं राजनीति में हूं और लंबे समय से कांग्रेस में हूं। अगर 50 साल के बाद मेरी विश्वसनीयता पर संदेह किया गया, विश्वास नहीं किया गया तो फिर क्या रह गया था। ऐसे में मैंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया।’’


साथ ही, उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस से मैं इस्तीफा दे दूंगा।’’


एक अन्य सवाल के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पिछली बार के सर्वेक्षण में आम आदमी पार्टी आगे बढ़ रही है, कांग्रेस नीचे जा रही है। कांग्रेस की लोकप्रियता में 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। नवजोत सिंह सिद्धू पर लोगों को विश्वास नहीं है।’’


उन्होंने कहा कि पंजाब में नई ताकत आ रही है।


यह पूछे जाने पर कि क्या वह नई पार्टी बनाएंगे तो सिंह ने कहा, ‘‘जब कोई कदम उठाउंगा तो उस बारे में आपको पता चल जाएगा।’’


डोभाल से मुलाकात के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षा चिंताओं को लेकर मैं उनसे मिला हूं। मैं मुख्यमंत्री भले ही नहीं हूं, लेकिन पंजाब तो हमारा है...पहले जैसे हालात न पैदा हों, एनएसए से मुलाकात का यही मकसद था।’’


गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को लेकर सिंह ने कहा, ‘‘ किसान आंदोलन को लेकर एक साल पूरा हो गया। कुछ तो समाधान निकलना चाहिए। मुझे डर है कि इससे पंजाब में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं, यह मैं नहीं चाहता ।’’


उनके मुताबिक, ‘‘मैने गृह मंत्री से कहा है कि किसानों की मांग मानने और फसल विविधिकरण के लिए पंजाब को 25 हजार करोड़ रुपये दिये जाएं।’’


सिद्धू पर एक बार फिर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि वह गंभीर व्यक्ति नहीं हैं और सबको साथ लेकर काम नहीं कर सकते।


मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘वह बेहद शिक्षित व्यक्ति हैं। मेरे साथ मंत्री के तौर पर उन्होंने अच्छा काम किया। यह जरूरी है कि सिद्धू उनको काम करने दें। सिद्धू हावी होना चाहते हैं।’’


उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को ‘जी 23’ की बात सुननी चाहिए।


पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के साथ टकराव के बाद अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके बाद चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया। सिद्धू ने मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। 





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राजस्थान के बसपा विधायक बोले, सदस्यता बचाने के लिए किसी भी पार्टी से हाथ मिलाने को तैयार

जयपुर : 2019 में कांग्रेस में शामिल होने वाले बहुजन समाज पार्टी के चार विधायक दलबदल विरोधी कानून की याचिका पर जवाब देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से नोटिस मिलने के बाद बुधवार रात दिल्ली पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि वे अपनी विधायिका का दर्जा बचाने के लिए किसी भी पार्टी से हाथ मिलाएंगे।


इन विधायकों में राजेंद्र सिंह गुडा, वाजिब अली, संदीप कुमार और लखन सिंह शामिल हैं।


वाजिब अली ने कहा, इस राजनीतिक चुनौती को दिल्ली में सुलझाया जा सकता है और इसलिए हम दिल्ली जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब देने के लिए कानूनी राय लेने के अलावा हम वरिष्ठ नेताओं से मिलेंगे।


इन चार विधायकों के अलावा बसपा के दो अन्य विधायक जोगिंदर सिंह अवाना और दीपचंद खैरिया कांग्रेस में शामिल हुए थे, वे दिल्ली नहीं गए हैं। इन दोनों विधायकों ने बुधवार रात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की और कांग्रेस को अपना समर्थन सुनिश्चित किया।


गौरतलब है कि बसपा ने दलबदल विरोधी कानून के तहत अपने विधायकों के कांग्रेस में विलय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन विधायकों को चार हफ्ते के भीतर अपना अंतिम जवाब देने को कहा था।


बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक राजेंद्र सिंह गुडा ने कहा, सदस्यता बचाने के कानूनी रास्ते तलाशने के लिए हम दिल्ली जा रहे हैं। हमारे तीन साथी पहले से ही दिल्ली में थे। अब हमारे पास कोई घर या जगह नहीं होगी। अब हमारी प्राथमिकता सदस्यता बचाने की है।


विधायक संदीप यादव और वाजिब अली ने कहा, सदस्यता बचाना हमारी प्राथमिकता है। लोगों ने हमें चुना है और इसलिए हम किसी भी कीमत पर सदस्यता नहीं खोएंगे। मायावती, अमित शाह या राहुल गांधी जो भी हमें समर्थन देंगे, हम अपनी सदस्यता बचाने के लिए उनका ऑफर स्वीकार कर लेंगे।


राजस्थान में कांग्रेस के पास 100 विधायक हैं, और 16 निर्दलीय और 6 बसपा विधायकों का समर्थन है, जिससे यह आंकड़ा 116 तक पहुंचता है। यदि ये छह बाहर जाते हैं, तो भी सरकार सुरक्षित रहेगी। हालांकि, कांग्रेस के खेमे में गुटों के तेज होने और पायलट खेमे द्वारा मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पदोन्नति की मांग के साथ दबाव निश्चित रूप से होगा।





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आलोचनाओं से निपटने के लिए नेताओं की चमड़ी मोटी होनी चाहिए : दिग्विजय सिंह

भोपाल : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने नेताओं को सलाह दी कि अगर वे राजनीति की दुनिया में टिके रहना चाहते हैं, तो उनकी चमड़ी मोटी होनी चाहिए क्योंकि उन्हें अक्सर आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता है।


मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने बुधवार को एक कार्यक्रम में प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार का परोक्ष जिक्र करते हुए कहा कि वह मीडिया को झुकाने के लिए विज्ञापन देने की अपनी नीति को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती है।


सिंह ने कहा, ''जब तक आप मोटी चमड़ी वाले नहीं हैं, तब तक आप राजनीति नहीं कर पाएंगे।''


उन्होंने यह टिप्पणी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा नौकरशाह से राजनेता बने नटवर सिंह (पूर्व केंद्रीय मंत्री) को दिए गए एक संक्षिप्त जवाब को याद करते हुए की। गांधी ने नटवर सिंह से कहा था, ''अब आप राजनीति में कदम रख रहे हैं। इसमें मोटी चमड़ी का होना हमेशा फायदेमंद होता है।''


राज्यसभा सांसद भोपाल के पत्रकारों के एक संगठन 'सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब' के समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल सहित भाजपा के अन्य नेता भी मौजूद थे।


इंदिरा गांधी से जुड़ी घटना बताने के बाद सिंह ने पटेल की ओर देखकर कहा, ''(भाजपा में) अपने साथियों से कहिए कि अगर वे राजनीति में हैं तो उनकी चमड़ी मोटी होनी चाहिए और उनमें आलोचना सहने की क्षमता होनी चाहिए।''


सिंह ने कहा कि देश में इस समय लोगों के बीच नफरत फैलाने का चलन है, जो पत्रकारिता या पत्रकारों के लिए अच्छा नहीं है।


उन्होंने प्रदेश सरकार की विज्ञापन नीति का जिक्र करते हुए कहा, '' इसका इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा रहा है। यदि आप (उनकी खबर) प्रकाशित करते हैं तो आपको विज्ञापन मिलेगा, अन्यथा नहीं... यह सही नीति नहीं है।''


उन्होंने कहा कि जब वह (1993 से 2003 तक) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब चीजें अलग थीं।


सिंह ने कहा, '' यदि पत्रकारिता में सच बोलने का अधिकार नहीं है, कलम में शक्ति नहीं है तो इसका कोई फायदा नहीं है। (मुख्यमंत्री के रुप में) मेरे 10 साल के कार्यकाल में मेरे खिलाफ इतनी आलोचनात्मक बातें छपीं, लेकिन मैंने कभी किसी प्रकाशन का विज्ञापन बंद नहीं किया।''


कांग्रेस नेता ने कहा, '' अगर नेताओं में आलोचना सुनने की क्षमता नहीं है तो उन्हें राजनीति में नहीं आना चाहिए।''


पत्रकारों की नौकरी की स्थिति में सुधार के लिए नेशनल प्रेस कमीशन के गठन की मांग का समर्थन करते हुए सिंह ने कहा कि 'हायर एंड फायर' (भर्ती करो और नौकरी से निकालो) नीति के तहत संविदा नियुक्तियों ने शीर्ष और निचले पायदान के लोगों के वेतन में बड़ा अंतर पैदा कर दिया है।


उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण पत्रकारों को कठिन समय का सामना करना पड़ रहा है।


एक प्रतिष्ठित थिंक टैंक 'सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सिंह ने कहा कि पिछले पांच साल में मीडिया के क्षेत्र में 78 प्रतिशत कार्यबल बेरोजगार हो गया है।


उन्होंने कहा, ''सितंबर 2016 में करीब 10.25 लाख लोग मीडिया क्षेत्र में कार्यरत थे, जबकि अगस्त 2021 में यह संख्या महज 2.25 लाख रह गई।''


वरिष्ठ पत्रकार एन के सिंह ने इस अवसर पर कहा कि इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी के अनुसार प्रकाशन संस्थानों को कोरोना वायरस के कारण 15 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसने कई पत्रकारों को बेरोजगार भी कर दिया है।


सिंह ने कहा कि आजादी के बाद दो प्रेस आयोगों का गठन हुआ और इनकी सिफारिशों पर ही सरकार ने भारतीय प्रेस परिषद और भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक के कार्यालय का गठन किया था। उसके बाद पत्रकारों के लिए वेतन आयोग की स्थापना की गई।


उन्होंने तीसरे प्रेस आयोग के गठन की आवश्यकता का जिक्र करते हुए कहा कि मीडिया में विशेष तौर पर टीवी, वेब और सोशल मीडिया पत्रकारिता के आने के बाद हुए बदलावों को देखते हुए इसका गठन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह मंच पत्रकारों और पत्रकारिता के सामने आ रही समस्याओं के समाधान के लिए जल्द ही इसके गठन की मांग करता है।







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रोजगारी,महंगाई बनेगी भाजपा के खात्मे की वजह: अखिलेश

लखनऊ :  कन्नौज में अपनी जनसभा में उमड़े जनसैलाब से गदगद समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि बेरोजगारी,महंगाई और आवारा पशु जैसे आम आदमी से जुड़े मुद्दे उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विनाश का कारक बनेंगे।

श्री यादव ने गुरूवार को ट्वीट किया “ कन्नौज में उमड़ा जन सैलाब भाजपा के ख़िलाफ़ एकजुट युवाओं, किसानों, शिक्षक-शिक्षामित्रों, महिलाओं, दलितों-पिछडों, मध्यवर्ग, रेहड़ी-पटरीवालों व कारोबारियों का संगठित रूप था।” उन्होने कहा “ बेरोज़गारी-बेकारी; महँगी बिजली, तेल, चीनी, डीज़ल, पेट्रोल व आवारा पशु जैसे मुद्दे भाजपा को ख़त्म कर देंगे। ”गौरतलब है कि बुधवार को गुरसहायगंज में एक जनसभा में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में सरकार बनने पर जनता को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने का वादा किया था। उन्होने केन्द्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों पर आरोप लगाया था कि देश को मुनाफा दे रहे सरकारी संस्थानों को बेचा जा रहा है जिससे देश के लोग गुलामी की तरफ बढ़ रहे हैं। भाजपा सरकार के कार्यकाल में गरीब,किसान और नौजवान सब परेशान है। भाजपा सरकार ने जनता को सिर्फ लोक लुभावन सपने दिखाने का कार्य किया है। किसानों की आय दोगुनी करने के बजाय उन्हें बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। नौजवानों रोजी रोजगार के लिये भटक रहा है।

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सिब्बल ने सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने की मांग की, बोले- हम ‘जी हुजूर 23’ नहीं

नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी की पंजाब इकाई में मचे घमासान और कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को लेकर बुधवार को पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए और कहा कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक बुलाकर इस स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए तथा संगठनात्मक चुनाव कराये जाने चाहिए।


उन्होंने कई नेताओं के पार्टी छोड़ने का उल्लेख करते हुए गांधी परिवार पर इशारों-इशारों में कटाक्ष किया कि ‘‘जो लोग इनके खासमखास थे वो छोड़कर चले गए, लेकिन जिन्हें वे खासमखास नहीं मानते वे आज भी इनके साथ खड़े हैं।’’


सिब्बल ने जोर देकर कहा, ‘‘हम ‘जी हुजूर 23’ नहीं हैं। हम अपनी बात रखते रहेंगे।’’


पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद पैदा हुई स्थिति को लेकर सिब्बल ने कहा कि इस सीमावर्ती राज्य में ऐसी कोई भी स्थिति नहीं होनी चाहिए जिसका पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और सीमापार के दूसरे तत्व फायदा उठा सकें।


पूर्व केंद्रीय मंत्री कापिल सिब्बल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं निजी तौर पर बात कर रहा रहा हूं और उन साथियों की तरफ बोल रहा हूं जिन्होंने पिछले साल अगस्त में पत्र लिखा था। हम अपने नेतत्व की ओर से अध्यक्ष का चुनाव, सीडब्ल्यूसी और केंद्रीय चुनाव समिति के चुनाव कराने से जुड़े कदम उठाए जाने का इंतजार कर रहे हैं।’’


उन्होंने कहा, ‘‘मैं भारी मन से आप लोगों से बात कर रहा हूं। मैं एक ऐसी पार्टी से जुड़ा हूं जिसकी ऐतिहासिक विरासत है और जिसने देश को आजादी दिलाई। मैं अपनी पार्टी को उस स्थिति में नहीं देख सकता जिस स्थिति में पार्टी आज है।’’


उनके मुताबिक, ‘‘देश बड़े संकट का सामना कर रहा है। चीन घुसपैठ कर रहा है। तालिबान के अफगानिस्तान में आने से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हुआ है। करोड़ों लोग गरीबी से घिरे हैं। ऐसे हालात में कांग्रेस इस स्थिति में है, यह दुखद है। यह ऐसा समय है कि हमें इस सरकार के खिलाफ मिलकर लड़ना चाहिए।’’


सिब्बल ने कहा, ‘‘हमारे लोग हमें छोड़कर जा रहे हैं। सुष्मिता (देव) जी चली गईं और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री (लुईजिन्हो) फालेरयो भी चले गए। जितिन प्रसाद चले गए, (ज्योतिरादित्य) सिंधिया चले गए, ललितेश त्रिपाठी चले गए, अभिजीत मुखर्जी भी चले गए। कई अन्य नेता चले गए। सवाल उठता है कि ये लोग क्यों जा रहे हैं? हमें यह खुद सोचना होगा कि शायद हमारी भी कोई गलती रही होगी।’’


उन्होंने कहा, ‘‘इस समय हमारे यहां अध्यक्ष नहीं है। हम जानते भी हैं और नहीं भी जानते हैं कि फैसले कौन कर रहा है।’’


सिब्बल ने कांग्रेस नेतृत्व का आह्वान किया, ‘‘जैसा कि हमारे एक सहयोगी ने पत्र लिखा है कि कांग्रेस कार्य समिति की बैठक तत्काल बुलाई जाए ताकि इस पर चर्चा की जा सके कि पार्टी में क्या हो रहा है।’’


उन्होंने गांधी परिवार पर इशारों-इशारों में तंज कसते हुए कहा, ‘‘ जो लोग इनके खासमखास थे वो तो इन्हें छोड़कर चले गए। जिन्हें ये खासमखास नहीं समझते हैं वे इनके साथ खड़े हैं। यह एक विडंबना है।’’


सिब्बल ने कहा, ‘‘जो कांग्रेसजन चले गए, वो साथ आएं। कांग्रेस ही इस देश के गणराज्य को बचा सकती है क्योंकि मौजूदा सरकार गणतंत्र को कमजोर कर रही है।’’


पंजाब के घटनाक्रम को लेकर उन्होंने कहा, ‘‘सीमावर्ती राज्य है। वहां आईएसआई फायदा उठा सकती है। हम जानते हैं कि सीमापार के तत्व वहां अस्थिरता पैदा कर सकते हैं...कांग्रेस को सुनिश्चित करना है कि सब एकजुट रहे हैं।’’


उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी के भीतर खुलकर चर्चा हो, एक दूसरे के विचार को सुने जाएं। संगठन का ढांचा होना चाहिए। सीडब्ल्यूसी का चुनाव हो।’’


सिब्बल उन 23 प्रमुख नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने पिछले वर्ष कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कांग्रेस में संगठन चुनाव करवाने की मांग की थी। इन नेताओं में पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद भी शामिल थे।



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सिब्बल के आवास के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया

नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल की ओर से पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़ा किये जाने के बाद पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सिब्बल के आवास के बाहर प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ नारेबाजी की।


दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सिब्बल के बयान से कार्यकर्ता आहत हुए और इस वजह से उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया।


सिब्बल के आवास के बाहर पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्ती ले रखी थी जिस पर ‘गेट वेल सून सिब्बल’ (सिब्बल आप जल्द स्वस्थ हों) लिखा हुआ था।


उन्होंने ‘गद्दारों को पार्टी से बाहर निकालो’ के नारे भी लगाए।


कांग्रेस की दिल्ली इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘सिब्बल साहब ने जो बयान दिया है और जिस तरह से हमारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं, उससे कार्यकर्ता बहुत आहत हैं। कार्यकर्ता अपने आप उनके आवास के बाहर पहुंचे और प्रदर्शन किया।’’


सिब्बल ने पार्टी की पंजाब इकाई में मचे घमासान और कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को लेकर बुधवार को पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए और कहा कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक बुलाकर इस स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए तथा संगठनात्मक चुनाव कराये जाने चाहिए।


उन्होंने कई नेताओं के पार्टी छोड़ने का उल्लेख करते हुए गांधी परिवार पर इशारों-इशारों में कटाक्ष किया कि ‘‘जो लोग इनके खासमखास थे वो छोड़कर चले गए, लेकिन जिन्हें वे खासमखास नहीं मानते वे आज भी इनके साथ खड़े हैं।’’


सिब्बल ने जोर देकर कहा, ‘‘हम ‘जी हुजूर 23’ नहीं हैं। हम अपनी बात रखते रहेंगे।’’ 



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आजाद ने सोनिया को पत्र लिख तत्काल सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने का आग्रह किया

नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि पार्टी से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की तत्काल बैठक बुलाई जाए।


सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष आजाद ने पत्र में कहा है कि पार्टी से कई नेताओं के अलग होने के मद्देनजर आंतरिक रूप से चर्चा की जाए।


आजाद उन 23 प्रमुख नेताओं के समूह (ग्रुप 23) में शामिल हैं जिन्होंने पिछले वर्ष कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कांग्रेस में संगठन चुनाव करवाने की मांग की थी। इस समूह के एक नेता जितिन प्रसाद अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं।


आजाद ने सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने की मांग उस वक्त की है जब हाल ही में अमरिंदर सिंह को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुईजिन्हो फालेरयो और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने पार्टी छोड़ दी। 





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अखिलेश: योगी की उपलब्धि, मीडिया प्रचार से ज्यादा कुछ नहीं

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार किया है और कहा कि यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि सरकारी खर्च पर मीडिया की धमा चौकड़ी है।


उन्होंने कहा, इस सरकार ने पोस्टर और होडिर्ंग के माध्यम से झूठा प्रचार करने की कला में महारत हासिल की है। वे प्रचार करने पर पैसा खर्च करते हैं, ताकि जमीनी हकीकत से ध्यान भटकाया जा सके। वे आपको यूएसए का एक भवन और कोलकाता से एक फ्लाईओवर दिखाएंगे और इसे अपना बताएंगे।


यहां एक न्यूज कॉन्क्लेव में बोलते हुए, अखिलेश ने कहा कि उनके होडिर्ंग उनके नेताओं को दमदार बताते हैं, लेकिन वे उन दमदार (पूंछ वाले जानवर) के बारे में कभी बात नहीं करते हैं, जो किसान की फसल को नष्ट कर देते हैं।


उन्होंने यह भी पूछा, क्या वे कभी गोरखपुर के बारे में बात करते हैं, जहां एक व्यापारी को पुलिस द्वारा पीट-पीट कर मार डाला जाता है? या सड़कों पर गड्ढों के बारे में? गंगा की सफाई पर कितना पैसा खर्च किया गया है और यह अभी तक साफ क्यों नहीं है?


अखिलेश ने कहा कि बीजेपी ने सच की हत्या की है। कमल का फूल झूठ का फूल बन गया है। उनके दावे 100 प्रतिशत हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सब गायब है।


एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब वह सत्ता में लौटेंगे, तो किसानों, बुनकरों और लोगों को सस्ती बिजली देंगे।


साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि मुख्यमंत्री गोरखपुर का विकास क्यों नहीं करते हैं, जहां लोग इस महीने की शुरूआत में जलभराव के कारण नावों का इस्तेमाल कर रहे थे?।


अखिलेश ने कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री की तस्वीर पर भी आपत्ति जताई और कहा, आपको नेताओं की तस्वीर और कहां मिलती है? अमेरिका, यूरोप और अन्य सभी देशों के प्रमाण पत्र पर अपना राष्ट्रीय ध्वज है, लेकिन हमारे यहां प्रधानमंत्री की तस्वीर है। अगर सरकार हमारे राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीर लगाती है, तो मैं भी वैक्सीन लूंगा।


आगामी विधानसभा चुनावों के बारे में बात करते हुए, अखिलेश ने दोहराया कि कांग्रेस और बसपा जैसी बड़ी पार्टियों के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा।


हम छोटे दलों के साथ गठबंधन करेंगे और अपने दम पर एक पूर्ण बहुमत हासिल करेंगे। लोगों ने भाजपा को वोट ना देने का मन बना लिया है, क्योंकि वे कोरोना मौतों, सामूहिक दाह संस्कार, ऑक्सीजन की कमी, प्रवास, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं को याद करते हैं।


उन्होंने कहा कि हवा में बदलाव पहले से ही साफ था। इस साल मेरे जन्मदिन पर कई अधिकारियों ने मुझे शुभकामनाएं दीं।





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पंजाब : नाराज सिद्धू ने राज्य के पुलिस महानिदेशक, महाधिवक्ता की नियुक्ति पर उठाए सवाल

चंडीगढ़ : कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष के पद से अचानक इस्तीफा देने के एक दिन बाद चुप्पी तोड़ते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने पुलिस महानिदेशक और राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्तियों पर बुधवार को सवाल उठाए।


राज्य में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस को एक नए संकट में डालते हुए, सिद्धू ने चरणजीत सिंह चन्नी कैबिनेट के नए मंत्रियों को विभागों के आवंटन के तुरंत बाद मंगलवार को अपना इस्तीफा दे दिया।


सिद्धू ने बुधवार को ट्विटर पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, ''हक़-सच की लड़ाई आखिरी दम तक लड़ता रहूंगा .।'' उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई पंजाब के मुद्दों और राज्य के एजेंडा को लेकर है।


वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी इकबाल प्रीत सिंह सहोता को पंजाब पुलिस के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। सहोता का स्पष्ट तौर पर जिक्र करते हुए, सिद्धू ने कहा, '' जिन्होंने छह साल पहले बादल को क्लीन चिट दी थी...ऐसे लोगों को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी दी गई है....।''


सहोता बेअदबी की घटनाओं की जांच के लिए तत्कालीन अकाली सरकार द्वारा 2015 में गठित एक विशेष जांच दल के प्रमुख थे।


सिद्धू ने ए पी एस देओल की राज्य के नए महाधिवक्ता के रूप में नियुक्ति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, '' जिन लोगों ने 'पक्की जमानत' दिलाई है, वे महाधिवक्ता बनाए गए हैं।''


देओल पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के वकील रह चुके हैं। वह पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी का उनके खिलाफ कई मामलों में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।






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भाजपा गोवा में वास्तविक मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है : शिवेसना

मुंबई : गोवा में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना ने राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि वह राज्य के वास्तविक मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है, जहां कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण पर्यटन प्रभावित हुआ है और अर्थव्यवस्था का बुरा हाल है।


शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के सम्पादकीय में आरोप लगाया कि गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ''सरकार आपके द्वार पर'' पहल शुरू की है जिसके तहत वह '' झूठ और गलत जानकारी फैला रहे हैं।''


सम्पादकीय में कहा गया कि राज्य बेरोजगारी, मादक पदार्थ की समस्या का सामना कर रहा है और कोविड-19 के कारण पर्यटन प्रभावित है तथा अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। वहीं, उत्तरी गोवा जिले में कलंगुट बीच पर पिछले महीने संदिग्ध परिस्थितियों में एक महिला की मौत का मामला भी अभी तक सुलझा नहीं था।


मराठी समाचार पत्र में कहा गया कि भाजपा के नेता दिवंगत मनोहर पर्रिकर ने कैसीनो व्यवसाय का विरोध करके गोवा में पार्टी को बढ़ने में मदद की अब, अपतटीय कैसीनो राज्य सरकार को भारी रकम देते हैं और अगर गोवा इस पैसे पर चलेगा तो यह '' हिंदुत्व का अपमान '' होगा।


सम्पादकीय में कहा गया, '' क्या गोवा के राजनेता राज्य के समक्ष पेश वास्तविक चुनौतियों से अवगत हैं?'' अगर गोवा के लोग सोचते हैं कि भाजपा हिंदुओं की रक्षक है... तो यह गलत है।


मराठी समाचार पत्र में कहा गया कि गोवा में भाजपा के विधायकों की सूची देखें तो, कोई भी कह सकता है कि हिंदूत्व उनके लिए केवल एक ''मुखौटा'' है। गो हत्या को प्रतिबंधित करने के लिए देश में कानून है लेकिन गोवा में कोई ''जितना भी चाहे उतना गो मांस ले सकता है। अगर यह यह दोगलापन नहीं तो और क्या है?''


सम्पादकीय में कहा गया कि गोवा 450 वर्षों तक पुर्तगाली शासन के अधीन था और वर्तमान शासक उनके उत्तराधिकारियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। '' राज्य में जो हो रहा है क्या उसे कोई खत्म नहीं करना चाहता?''


शिवसेना ने कहा कि 2017 गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 17 सीटें (40 सदस्यीय सदन में) जीत कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन, उसने सरकार बनाने का दावा करने में देरी की और भाजपा ने बहुमत हासिल कर लिया। अब, कांग्रेस चार विधायकों तक सिमट गई है, और ''यह नैतिक राजनीति नहीं है।''


मराठी दैनिक समाचारपत्र में कहा गया कि अगर भाजपा ने अपने दम पर 20 से 25 सीटें जीती होतीं तो यह काबिले तारीफ होता। लोगों में राज्य सरकार के खिलाफ काफी गुस्सा है।




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विपक्षी दलों के ‘झूठ व छल’ से उत्तराखंड की पुण्य भूमि को ‘प्रदूषित’ ना होने दें: नड्डा

नई दिल्ली :  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने बुधवार को कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर ‘‘झूठ व छल’’ की राजनीति करने व लुभावने वायदे कर ‘‘गायब’’ हो जाने का आरोप लगाया और उत्तराखंड की जनता का आह्वान किया कि वह ऐसे राजनीतिक दलों से राज्य की पुण्य भूमि को ‘‘प्रदूषित’’ ना होने दें।


वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से उत्तराखंड में भाजपा के सभी शक्ति केंद्र संयोजकों एवं प्रभारियों को संबोधित कर रहे नड्डा ने यह दावा भी किया कि पार्टी ने राज्य में एक विकासपरक और जनकल्याणकारी सरकार दी और आगामी विधानसभा चुनाव में वह अपनी नीतियों, केंद्र व प्रदेश सरकारों के विकास कार्यों और कार्यकर्ताओं के समर्पण के दम पर जीत हासिल करेगी।


उन्होंने कहा, ‘‘आज अन्य दलों के पास मुद्दे खत्म हो गए हैं, इसलिए वह झूठ और छल की राजनीति कर रहे हैं। हमें उनके झूठ व छल से उत्तराखंड की पुण्य भूमि को प्रदूषित नहीं होने देना है। झूठे और लुभावने वायदे और उसके बाद गायब हो जाने वाले लोगों की सच्चाई जनता के बीच लेकर जाना है।’’


उन्होंने दावा किया कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड में ‘‘अभूतपूर्व’’ विकास किया है और उससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को लाभ हुआ है।


उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा, ‘‘हमें इन सारी बातों को जनता के बीच लेकर जाना है। हमें बताना है कि भाजपा ने उत्तराखंड को विकासपरक और जनकल्याणकारी सरकार दी है। आगामी चुनाव में भी पार्टी की नीतियां, केंद्र व प्रदेश सरकारों के विकास कार्य और कार्यकर्ताओं के समर्पण के दम पर हम जीतेंगे और आगे बढ़ेंगे।’’


विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए नड्डा ने आरोप लगाया कि अन्य राजनीतिक दल मानते हैं कि धनबल और बाहुबल से राजनीति संभव है जबकि भाजपा की शक्ति उसके कार्यकताओं में निहित है और इस बात को विरोधी भी मानते हैं कि आज देश में कार्यकर्ता आधारित कोई पार्टी है तो वह भाजपा ही है।


भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच का फर्क बताते हुए नड्डा ने कहा, ‘‘हमें लगातार सफलता मिलती है क्योंकि बाकी सभी राजनीतिक दलों में कार्यकर्ता वयक्तिनिष्ठ हैं जबकि भाजपा के कार्यकर्ता विचारनिष्ठ और कर्तव्यनिष्ठ होते हैं। यही वजह है कि दूसरे राजनीतिक दलों में नेता कमजोर हो गया, पार्टी कमजोर हो गई या परिवार कमजोर हो गया और इसके साथ वह दल भी नीचे चला जाता है।’’


उन्होंने कहा, ‘‘चाहे कांग्रेस हो या वामपंथी दल हों या समाजवादी पार्टी हो या कोई दूसरे क्षेत्रीय दल। यह सब ना जाने कितनी बार टूट चुके हैं। कांग्रेस के न जाने कितने टुकड़े हुए हैं। तृणमूल कांग्रेस हो या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी या फिर वाईएसआर कांग्रेस ... सभी कांग्रेस से टूटकर बने हैं। वामपंथियों का हाल भी और बुरा है। एक दर्जन से ज्यादा पार्टिया टूटकर बनीं हैं। देश में एकमात्र भाजपा ही है, जो दशकों तक विपक्ष में रहने के बावजूद ना ही टूटी और ना ही बिखरी, बल्कि निरंतर शक्तिशाली होती चली गई क्योंकि हम कार्यकर्ता आधारित पार्टी हैं।’’


नड्डा ने कोविड महामारी के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार द्वारा चलाए गए विभिन्न कार्यकमों व अभियानों की आलोचना के लिए विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि ऐसा करके उन्होंने जनता को गुमराह करने की कोशिश की।


उन्होंने कहा, ‘‘टीकाकरण अभियान जब आरंभ हुआ तो विपक्ष ने इसका मजाक उड़ाया, लोगों को गुमराह किया, टीकों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए। देश के नागरिक उनके राजनीतिक प्रपंच से भलीभांति परिचित है और उनकी साजिशों को नाकाम करते हुए उन्होंने टीकाकरण अभियान को दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान बना दिया।’’


तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने किसानों के हित में जितने कदम उठाए, उतने किसी अन्य सरकार ने नहीं उठाए।


उन्होंने कहा, ‘‘मैं चुनौती देता हूं... आप तुलना कीजिए कांग्रेस की सरकारों में और हमारी सरकारों में, और बताइए लोगों को कि किसानों के प्रति समर्पित भाव से किसने काम किया। कांग्रेस बताए कि 10 साल के संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) शासन में उन्होंने किसानों की भलाई के लिए कितने पैसे खर्च किए? ’’


उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 10 साल में एक बार किसानों का कर्ज माफ किया और उसमें भी घोटाले की खबरें सामने आई।


तीन बार रबी और खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने, सॉइल हेल्थ कार्ड, नीम कोटेड यूरिया, फसल बीमा योजना, ई-नाम, किसान चैनल, खाद की प्रति बोरी पर 1,200 रुपये की सब्सिडी का उल्लेख करते हुए नड्डा ने कहा कि जनता यह सब जानती है और वह विपक्ष की साजिश से भी अवगत है।


उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए उनके बहकावे में कोई आने वाला नहीं है।’’







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अमरिंदर ने सिद्धू पर निशाना साधा, ‘अस्थिर व्यक्ति’ करार दिया

नई दिल्ली : पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद मंगलवार को उन पर निशाना साधा और कहा कि वह एक ‘अस्थिर व्यक्ति’ हैं तथा सीमावर्ती राज्य पंजाब के लायक नहीं हैं।


दिल्ली पहुंचे अमरिंदर सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने सिद्धू के संबंध में सोच-समझकर ट्वीट किया है।


इससे पहले उन्होंने ट्वीट किया, "मैंने आपसे कहा था...वह स्थिर व्यक्ति नहीं है और सीमावर्ती राज्य पंजाब के लिए उपयुक्त नहीं हैं।"


अमरिंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके दिल्ली दौरे का मकसद सिर्फ कपूरथला हाउस (आधिकारिक आवास) को खाली करना है और उनकी कोई राजनीतिक मुलाकात या गतिविधि नहीं होनी हैं।


हालांकि, ऐसी खबरें आई थीं कि वह भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं।


यह पूछे जाने पर कि उनकी आगे की क्या भूमिका होगी तो पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बारे में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से सवाल करिये।


उल्लेखनीय है कि सिद्धू ने मंगलवार को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि वह पंजाब के भविष्य को लेकर समझौता नहीं कर सकते। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि वह कांग्रेस के लिए काम करते रहेंगे।






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पंजाब कांग्रेस के अध्‍यक्ष पद से इस्‍तीफा देने के बाद नवजाेत सिंह सिद्धू ने बड़ा बयान दिया

चंडीगढ़ : पंजाब कांग्रेस के अध्‍यक्ष पद से इस्‍तीफा देने के बाद नवजाेत सिंह सिद्धू ने बड़ा बयान दिया है। उन्‍होने एक वीडियो जारी कर कहा कि उनका इस्‍तीफा पंजाब के हितों व नैतिकता के सवाल पर है। मैं इनसे समझौता नहीं करुंगा।

नवजाेत सिं‍ह सिद्धू ने अपने ट्विटर हैंडल पर बुधवार को एक वीडियो डालकर अपने इस्‍तीफे पर अपना पक्ष रखा। सिद्धू ने कहा कि मेरे लिए पद नहीं सिद्धांत और मकसद अहम है। मैं नैतिकता और पंजाब के हितों से समझौता नहीं सकता। 

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जहां झुग्गी वहीं मकान वायदा हुआ हवा हवाई : परमानन्द शर्मा

नई दिल्ली : राम नगर ब्लाक कांग्रेस के अध्यक्ष परमानन्द शर्मा का कहना है दिल्ली सरकार के मुखिया अरविन्द केजरीवाल नें दिल्ली की जनता से जो वायदे किये थे उनमे से ज्यादातर पूरे नहीं हुए हैं। परमानन्द कहते हैं एक प्रमुख वायदा था जहां झुग्गी वहीं मकान। जिसके तहत अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली के 20 लाख झुग्गी झौपड़ी वालों से ’ वायदा करके लगातार तीन बार दिल्ली की सत्ता हासिल की, अब केन्द्र सरकार को ढ़ाल बनाकर दिल्ली के झुग्गीवालों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है, जबकि 80 प्रतिशत जे.जे. कलस्टर दिल्ली सरकार के आधीन दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की जमीन पर बसे हैं। परमानन्द नें कहा कहा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में 16 जून 2021 को हुई समीक्षा बैठक में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के फ्लैट केन्द्र सरकार की योजना पर अरविन्द केजरीवाल ने सहमति दी। उन्होंने कहा गरीब झुग्गी वालों को दिए जाने वाले फ्लैटों को सालाना किराए पर देने की योजना बनाकर भाजपा और आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के गरीब लोगों की 7 वर्षो की उम्मीद के साथ विश्वासघात किया है। परमानन्द शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरु हुए जहां झुग्गी वहीं मकान और राजीव रत्न आवास योजना के तहत बनने वाले फ्लेटों को बनाने में केजरीवाल सरकार की ढुलमुल नीति के तहत भ्रष्टाचार हुआ और तीनों प्रोजेक्टों के काम को पूरा करने में योजना के तहत जानबूझ कर देरी की गई। जबकि कांग्रेस सरकार ने गरीबों के जीवन स्तर में सुधार लाने, उनका विकास करके दिल्ली प्रगति का भागीदार बनाने के लिए उन्हें पक्के मकान देने की योजना बनाई थी। श्री शर्मा कहते हैं इसी तरह कई अन्य वायदे हवा हवाई साबित हें हैं। दिल की जनता को गुमराह कर अब केजरीवाल अन्य चुनावी राज्यों में भी इसी तरह के लुभावनी वायदे कर लोगो को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।





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पुडुचेरी से भाजपा को पहली राज्यसभा सीट मिलना पार्टी के प्रत्येक सदस्य के लिए गर्व की बात : मोदी

नई दिल्ली : पुडुचेरी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राज्यसभा का पहला सदस्य मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि यह पार्टी के प्रत्येक सदस्य के लिए अत्यंत गर्व की बात है।


उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों- सर्वानंद सोनोवाल और एल मुरुगन को क्रमश: असम और मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने पर बधाई भी दी।


मोदी ने एक ट्वीट में कहा, “यह प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता के लिए बहुत गर्व की बात है कि हमारी पार्टी को श्री एस सेल्वागनबथी जी के रूप में पुडुचेरी से पहला राज्यसभा सांसद मिला है। पुडुचेरी के लोगों ने हम पर जो भरोसा जताया है, उसके आगे हम नतमस्तक हैं। हम पुडुचेरी की प्रगति के लिए काम करते रहेंगे।”


उन्होंने कहा, “मेरे मंत्रिमंडलीय सहयोगी श्री सर्वानंद सोनोवाल जी और राज्य मंत्री श्री मुरुगन जी को क्रमशः असम और मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने जाने पर बधाई। मुझे विश्वास है कि वे संसदीय कार्यवाहियों को समृद्ध करेंगे और जनता की भलाई के हमारे एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे।”


केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एआईएनआरसी-भाजपा गठबंधन सत्ता में है।





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ये पॉलिटिक्स है प्यारे


कांग्रेस में अल्पसंख्यकों को मिला साथ


कांग्रेस के अल्पसंख्यक धड़े में चल रही उठापटक के बाद दो गुट बन गए हैं। शुक्रवार रात आरएनटी मार्ग स्थित होटल श्रीमाया में एक गुट ने डिनर पार्टी रखी थी। इसमें वे अल्पसंख्यक पूर्व पार्षद शामिल हुए, जो पूर्व पार्षद शेख अलीम से अलग होकर नया गुट बना रहे हैं। इस गुट को तब और मजबूती मिल गई, जब कुछ दूसरे पूर्व पार्षद और कांग्रेस के पदाधिकारी भी वहां पहुंचे। ऊपरी तौर पर भले ही बताया जा रहा है कि कांग्रेस अल्पसंख्यक नेता एक हैं, लेकिन अंदर ही अंदर दो गुट बन गए हैं। यह बात शनिवार को हुए धरने में रूबीना खान और शेख अलीम के बीच हुए विवाद से साबित भी हो गई।


एमजी रोड की ही इतनी चिंता क्यों


कांग्रेस और भाजपा के नेता तथा जनप्रतिनिधि बार-बार बड़ा गणपति से कृष्णपुरा तक बनने वाली सडक़ को लेकर दौरा कर रहे हैं। एक बार संजय शुक्ला घूमे, दो बार सुदर्शन गुप्ता तो तीसरी बार में सांसद शंकर लालवानी को भी याद आई कि उन्हें भी लोगों के बीच जाना चाहिए। उनके साथ स्थानीय नेताओं ने भी दौरा किया। नेताओं की चिंता समझ नहीं आ रही है। वे दर्द दूर करने जा रहे हैं या मरहम लगाने, क्योंकि किसी के भी दौरे के बाद यहां न तो सडक़ की चौड़ाई कम हुई और न ही लोगों को किसी प्रकार की राहत मिली। लोग रोज अपने आशियाने और दुकानें अपने हाथों से तोड़ते हुए नेताओं को कोस रहे हैं।


न खिलाफत की और न ही समर्थन


उमा भारती के समर्थक जबलपुर के शरद अग्रवाल पिछले दिनों इंदौर में थे। उन्हें वीडी शर्मा ने व्यापारिक प्रकोष्ठ का संयोजक बनाया है। वे प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। इंदौर पहुंचे तो सवाल उठा कि उमा भारती के शराबबंदी व ब्यूरोक्रेसी को चप्पलों में रखने वाले बयान से वे कितना इत्तेफाक रखते हैं? लेकिन उन्होंने सवाल टाल दिया। कई बार इस मुद्दे पर बात हुई, पर मजाल है कि उमा के दोनों बयानों पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया दी हो। वे खिलाफत कर न तो उमा को नाराज करना चाहते न ही समर्थन कर संगठन को, क्योंकि अभी तो उन्हें संगठन ने बनाया है और फिर उनकी हां में हां मिलाना ही है।


राजनीतिक आंदोलन मजबूरी है


कांग्रेस नेता राजू भदौरिया पर जिलाबदर की कार्रवाई को लेकर सबसे ज्यादा तकलीफ दो नंबरी कांग्रेसियों को हुई। मोहन सेंगर के भाजपा में जाने के बाद जिस तरह से चिंटू चौकसे दो नंबर में किला लड़ा रहे हैं, उससे उनके दांये हाथ राजू भदौरिया को जिलाबदर करने के मामले में राजनीतिक आंदोलन मजबूरी बन गया है। कल होने वाले इस आंदोलन में ऐतिहासिक भीड़ का दावा किया जा रहा है। शहर कांग्रेस ने भी मदद का भरोसा दिया है, क्योंकि जिस तरह से एक-एक कांग्रेसी पर प्रकरण दर्ज होता जा रहा है, उसने कांग्रेसियों की नींद उड़ाकर रख दी है। इसलिए अब सब ‘हम साथ-साथ हैं’ का दावा कर रहे हैं।


अल्पसंख्यक अध्यक्ष के लिए नए समीकरण


भाजपा में अल्पसंख्यक मोर्चा सबसे ज्यादा चर्चा में है। अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल कई दावेदार रोज दीनदयाल भवन के चक्कर तो लगा रहे हैं, लेकिन उनकी दाल नहीं गल रही है। किसने एनआरसी और सीएए के विरोध में काम किया, इसको लेकर अखबारों की कटिंग और सोशल मीडिया के स्क्रीन शॉट खूब चलाए जा रहे हैं। जो इन आरोपों से बचे हैं वे अपनी सफाई भोपाल तक देकर आ चुके हैं, लेकिन पिछले दिनों दावेदारों को लेकर हुई एक चाय पार्टी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि इसी चाय पार्टी के बहाने पार्टी के एक नेता ने नए समीकरण बना लिए हैं।


अतिक्रमण को लेकर भाजपा नेताओं में ठनी


जिला प्रशासन ने कनाडिय़ा रोड पर जो अतिक्रमण हटाया है, उसको लेकर भाजपा के एक पूर्व पार्षद और पार्षद पति में ठनी हुई थी। एक पूर्व एमआईसी सदस्य भी इस बीच में थे और लगातार बड़े नेताओं के माध्यम से कार्रवाई नहीं होने का दबाव बना रहे थे, लेकिन भाजपा के ही एक पूर्व पार्षद को ये नागवार गुजर रहा था। हालांकि कई बार पार्षद महाशय को साधा भी गया, लेकिन दूसरे नेताओं को तवज्जो मिलती गई तो उनकी नाराजगी संगठन तक भी पहुंचा दी गई और संगठन का साथ मिलने के बाद ये कार्रवाई की गई।


पार्टी से महत्वूपर्ण विधायकों के निजी काम


कांग्रेस के धरने में कांग्रेसी विधायकों का नहीं पहुंचना चर्चा का विषय रहा, जबकि दिल्ली से ही इस धरने में सबको शामिल करने के आदेश हुए थे। जानकारी निकाली गई तो मालूम पड़ा कि शहर के एक विधायक के किसी परम मित्र का जन्मदिन था और वे इसके लिए शहर से बाहर गए हुए थे तो दूसरे गांव के विधायक ने पहले ही कह दिया था कि वे 25 और 28 तारीख के आंदोलन में शामिल नहीं हो पाएंगे। इसका कारण उन्होंने नहीं बताया तो तीसरे विधायक तथा पूर्व मंत्री भी धरने में नहीं पहुंचे। नेताओं और कार्यकर्ताओं में कानाफूसी होने लगी कि एक तरफ तो ये लोग कांग्रेस को मजबूत करने की बात कहते हैं और दूसरी ओर जब मजबूती दिखाने की बात आती है तो गायब हो जाते हैं।


कहा जा रहा है कि गणपति प्रतिमा विसर्जन मामले में निगम अधिकारियों ने जो एक्शन अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ लिया, वह हिंदूवादी नेताओं के डर से लिया, ऊपर से संघ प्रमुख मोहन भागवत भी इंदौर में थे। कार्रवाई नहीं होती तो वे सरकार के निशाने पर आ जाते और फिर किसी बड़े अधिकारी की बलि ही इस मामले को ठंडा कर पाती।


-संजीव मालवीय-






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ईडीएमसी की बैठक में हंगामा, आप-बीजेपी पार्षदों के बीच हाथापाई की नौबत

नई दिल्ली : पूर्वी दिल्ली नगर निगम की बैठक में विपक्षी पार्षदों ने जमकर हंगामा किया. आम आदमी पार्टी और बीजेपी के पार्षदों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई. कोरोना संक्रमण की वजह से लगाए गए प्लास्टिक के शेड को भी तोड़ दिया गया है.


हंगामा बढ़ता देख मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी. दरअसल सदन की कार्यवाही शुरू होते ही आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पार्टी की तरफ से भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया गया, जिसके बाद सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया और देखते ही देखते हंगामा हाथापाई में तब्दील हो गया.


सदन स्थगित करने के बाद मेयर श्याम सुंदर गोयल अपने ऑफिस चले गए, जिसके बाद आम आदमी पार्टी के पार्षद भी मेयर के ऑफिस के बाहर पहुंच गए और धरने पर बैठ गए. इस दौरान नेता विपक्ष मनोज त्यागी ने कहा कि पूर्वी दिल्ली नगर निगम में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से प्रस्ताव रखा गया था, जिस पर चर्चा नहीं हुई.


एक जेई रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया, लेकिन उस अधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई नहीं की गई. उसे निलंबित किया जाना चाहिए, लेकिन सिर्फ उसका तबादला हुआ. चौहान बागर वार्ड में 100 वर्ष पुरानी मंदिर परिसर में रिहायशी इमारत बनाने का नक्शा पास कर दिया गया. जिसमें भी निगम अधिकारी लिप्त हैं. इसके साथ ही आद्योगिक साइट पर रिहाइशी इमारत बन रही है जिस पर बीजेपी शासित निगम मिलीभगत है.



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पूरा देश किसानो के साथ, कृषि कानून वापस लें मोदी: प्रियंका

लखनऊ : नये कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों के भारत बंद का समर्थन करते हुये कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने दावा किया कि उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिये लागू किये गये कृषि कानूनों के विरोध में पूरा देश अन्नदाताओं के साथ खड़ा है। श्रीमती वाड्रा ने सोमवार को ट्वीट किया “ खेत किसान का,मेहनत किसान की, फसल किसान की लेकिन भाजपा सरकार इन पर अपने खरबपति मित्रों का कब्जा जमाने को आतुर है।” उन्होने दावा किया कि पूरा हिंदुस्तान किसानों के साथ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काले क़ानून को वापस लें। गौरतलब है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि कानूनों के विरोध में आज भारत बंद का आवाहन किया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों को छोड़ कर समूचे राज्य में हालांकि बंद का कोई असर नहीं दिख रहा है।

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वोट बैंक को साधने के लिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश में बनाए नए मंत्रीः मयावती

लखनऊ:  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा है कि भाजपा ने जातिगत आधार पर सिर्फ वोट बैंक को साधने के लिए नए मंत्री बनाए हैं।

सुश्री मायावती ने सोमवार को ट्वीट कर कहा कि भाजपा ने कल उत्तर प्रदेश में जातिगत आधार पर वोटों को साधने के लिए जिनको भी मंत्री बनाया है, बेहतर होता कि वे लोग इसे स्वीकार नहीं करते,क्योंकि जब तक वे अपने-अपने मंत्रालय को समझकर कुछ करना भी चाहेंगे, तब तक यहाँ चुनाव आचार संहिता लागू हो जायेगी। उन्होंने कहा, " पिछड़े समाज के विकास तथा उत्थान के लिए अभी तक वर्तमान भाजपा सरकार ने कोई भी ठोस कदम नहीं उठाये हैं, बल्कि इनके हितों में पूर्व की बसपा सरकार ने जो भी कार्य शुरू किये थे, उन्हें भी अधिकांश बन्द कर दिया गया है। इनके इस दोहरे चाल-चरित्र से इन वर्गाें को सावधान रहने की सलाह है। " सुश्री मायावती ने उत्तर प्रदेश की सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा, " भाजपा सरकार पूरे साढ़े चार वर्षों तक यहाँ के किसानों की घोर अनदेखी करती रही व गन्ना का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाया, जिस उपेक्षा की ओर सात सितम्बर को बसपा के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में मेरे द्वारा इंगित किया गया। अब चुनाव से पहले इनको गन्ना किसान की याद आई है, जो इनके स्वार्थ को दर्शाता है।"

उन्होंने कहा, " केन्द्र व उत्तर प्रदेश सरकार की किसान-विरोधी नीतियों से पूरा किसान समाज काफी दुःखी व त्रस्त है, लेकिन अब चुनाव से पहले गन्ना का समर्थन मूल्य को थोड़ा सा बढ़ाना खेती-किसानी की मूल समस्या का सही समाधान नहीं। ऐसे में किसान इनके किसी भी बहकावे में आने वाला नहीं है।"








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उप्र : कृषि कानून के विरोध में आज भारत बंद , विपक्षी दलों का समर्थन, प्रशासन अलर्ट

लखनऊ : कृषि कानून के विरोध में सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत बंद की घोषणा की है। इसे यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने समर्थन दिया है। जबकि बंदी को लेकर उत्तर प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है।


प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल सपा ने ट्वीट के माध्यम से लिखा ,भाजपा सरकार के काले कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित किसानों द्वारा कल बुलाए गए भारत बंद का समाजवादी पार्टी पूर्ण समर्थन करती है। किसान विरोधी काले कानूनों को वापस ले सरकार।


बसपा प्रमुख मायावती ने भी ट्वीट कर आज को होने वाले किसानों के भारत बंद को समर्थन देने का एलान किया।


उन्होंने ट्वीट किया, केंद्र द्वारा जल्दबाजी में बनाए गए तीन कृषि कानूनों से असहमत व दुखी देश के किसान इनकी वापसी की मांग को लेकर लगभग 10 महीने से पूरे देश व खासकर दिल्ली के आसपास के राज्यों में तीव्र आन्दोलित हैं व कल (सोमवार) भारत बंद का आह्वान किया है जिसके शांतिपूर्ण आयोजन को बसपा का समर्थन।


उन्होंने आगे कहा कि साथ ही, केन्द्र सरकार से भी पुन: अपील है कि किसान समाज के प्रति उचित सहानुभूति व संवेदनशीलता दिखाते हुए तीनों विवादित कृषि कानूनों को वापस ले तथा आगे उचित सलाह-मशविरा व इनकी सहमति से नया कानून लाए ताकि इस समस्या का समाधान हो।


एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया, अधिकारियों को कहा गया है कि वह भारत बंद को देखते हुए भ्रमणशील रहें। आमजन को कोई समस्या न हो पाए। जो भी कार्यक्रम हो उसकी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी जरूर कराएं। रेलवे, बस अड्डे पर सतर्कता बरतें। पश्चिमी यूपी के चप्पे चप्पे में कड़ी सुरक्षा रखी जाए। कहीं कोई शांति न बिगड़ने के आदेश दिए हैं।


संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि बंद के दौरान सभी सरकारी और निजी दफ्तर, शिक्षण और अन्य संस्थान, दुकानें, उद्योग और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। बंद से सभी आपात प्रतिष्ठानों, सेवाओं, अस्पतालों, दवा की दुकानों, राहत एवं बचाव कार्य और निजी इमरजेंसी वाले लोगों को बाहर रखा गया है। बंद के दौरान एंबुलेंस और इमरजेंसी सर्विसेज को नहीं रोका जाएगा।


गौरतलब है कि केंद्र सरकार के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले नौ माह से आंदोलन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर की किसान महापंचायत में 27 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया था।




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यूपी में आज होगा मंत्रिमंडल विस्तार, कई मंत्री लेंगे शपथ

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का आज मंत्रिमंडल विस्तार होगा। इसे लेकर राजभवन में हलचल तेज हो गई है। शाम को साढ़े पांच बजे के बाद राजभवन में सभी मंत्रियों को शपथ दिला दी जाएगी।


दरअसल, चार महीने बाद होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार को काफी अहम माना जा रहा है। यह लंबे समय से प्रतीक्षित था।


जून तथा जुलाई में चर्चा ने जोर पकड़ा तो अगस्त के अंतिम हफ्ते में तो मंत्रियो के नाम के साथ ही शपथ लेने की तारीख भी तय होने लगी थी। राज्यपाल के लखनऊ आने के तत्काल बाद ही राजभवन में बैठक होगी। इसके बाद शपथ ग्रहण का समय तय किया जाएगा।


एक ब्राह्मण के अलावा पांच-छह एससी-ओबीसी ही मंत्री बनने की संभावना है। योगी मंत्रिमंडल में एक को कैबिनेट मंत्री तथा जबकि छह-सात को स्वतंत्र प्रभार तथा राज्य मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी।


बता दें कि आठ जुलाई को हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में यूपी को खास तवज्जो दी गई थी, जिसमें जातीय गणित पर साधने का प्रयास किया गया था। यूपी से बनाए गए सात नए मंत्रियों में चार ओबीसी, दो दलित और एक ब्राह्मण समाज के थे। मोदी के कैबिनेट में यूपी का मजबूत प्रतिनिधित्व है। यह पहली बार है जब केंद्रीय कैबिनेट में यूपी से रिकॉर्ड 15 मंत्री बनाए गए हैं।


रविवार को राज्यपाल के लखनऊ आगमन के बाद मनोनीत विधान परिषद सदस्यों की सूची पर भी मुहर लगेगी।


गौरतलब है कि 19 मार्च 2017 को सरकार गठन के बाद 22 अगस्त 2019 को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मंत्रिमंडल विस्तार किया था। उस दौरान मंत्रिमंडल में 56 सदस्य थे। कोरोना के चलते तीन मंत्रियों का निधन हो चुका है। हाल ही में राज्यमंत्री विजय कुमार कश्यप की मौत हुई थी, जबकि कोरोना की पहली लहर में मंत्री चेतन चौहान और मंत्री कमल रानी वरुण नहीं रहीं।


राज्य में कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या 60 तक हो सकती है। अभी 7 मंत्री पद खाली है।





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पंजाब कांग्रेस के कुछ नेताओं ने मंत्रिमंडल में राणा गुरजीत सिंह को शामिल करने का विेरोध किया

चंडीगढ़ : चरणजीत सिंह चन्नी नीत पंजाब सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार से कुछ घंटे पहले राज्य के कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने रविवार को पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को पत्र लिखकर मांग की कि 'दागी' पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।


इन नेताओं का कहना है कि मंत्री पद उनकी (राणा गुरजीत) जगह साफ छवि वाले दलित नेता को दिया जाना चाहिए। इस पत्र की प्रति मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भी भेजी गई है।


सूत्रों ने बताया कि पंजाब मंत्रिमंडल में सात नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है जबकि पांच मंत्री जो अमरिंदर सिंह नीत सरकार का हिस्सा थे, उन्हें संभवत: हटा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि परगट सिंह, राज कुमार वेरका, गुरकीरत सिंह कोटली, संगत सिंह गिलजियान, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, कुलजीत नागरा और राणा गुरजीत सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, नामों की सूची की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।


बालू खनन ठेकों की नीलामी में अनियमितता के आरोपों को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं का सामना करने के बाद राणा गुरजीत सिंह को 2018 में अमरिंदर सिंह के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। तब वह सिंचाई एवं ऊर्जा मंत्री थे।


सिद्धू को भेजे पत्र में इन नेताओं ने कहा है कि राणा गुरजीत सिंह ''दोआबा के भ्रष्ट एवं दागी नेता हैं'' तथा उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।


यह पत्र पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मोहिंदर सिंह कायपी, विधायक नवतेज सिंह चीमा, बलविंदर सिंह धालीवाल, बावा हेनरी, राज कुमार, शाम चौरसी, पवन आदिया और सुखपाल सिंह खैरा ने लिखा है।


खैरा हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आए हैं।




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