दिल्ली-UP में गर्मी का सितम, बिहार-राजस्थान में लू का अलर्ट

देश में कही बारिश तो कही लू का प्रकोप है. मौसम में बदलाव तो नजर आ रहा है, लेकिन भीषण गर्मी का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है. देश की राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई है. इसके बाबजूद लोगों को गर्मी से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. ऐसा ही हाल देश के कई राज्यों का है. मौसम विभाग ने आज भीषण लू चलने का अलर्ट जारी किया है. साथ ही लोगों को घर में रहने की सलाह दी है.

मौसम विभाग के मुताबिक, आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, जम्मू, हिमाचल और छत्तीसगढ़ में भीषण लू चलने की संभावना है. ऐसे में विभाग ने बच्चे और बूढों को घरों में रहने की सलाह दी है. उत्तर प्रदेश में अगले तीन दिन तक ओरेंज अलर्ट जारी किया गया है. प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश के आसार बताए गए हैं. वहीं, कई इलाके अभी लू के प्रकोप की जद में रहेंगे. प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी अंचल में तेज धूल भरी आंधी में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है.

फिर से जोर पकड़ेगी गर्मी

बीते दो दिनों से दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी से लोगों को राहत मिली. अब फिर से गर्मी अपने प्रचंड रूप में आने वाली है. मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार यानी आज से गर्मी फिर से जोर पकड़ने वाली है, तापमान में बढ़ोत्तरी रहेगी. बुधवार को दिल्ली का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. अगले तीन दिन तक दिन में लू चलेगी, रात में चलने वाली हवाओं से जरुर राहत मिल सकती है.

इन राज्यों में भी गर्मी का कहर

मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जगहों पर तापमान अभी भी 43 डिग्री या इससे ऊपर बना हुआ है. इन स्थानों पर दिन में जहां तामपान अधिक होने से लोगों को गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, रात में हवाएं ठंडी होने से राहत मिल रही है. उधर, झारखंड के उत्तर-पूर्वी, मध्य तथा दक्षिणी हिस्सों में आज तेज हवाओं और गरज के साथ बारिश के आसार हैं. कुछ इलाकों में बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है.

बिहार में मौसम सुहाना

बिहार के कई हिस्सों में बारिश की संभावना है. राजधानी पटना समेत कई इलाकों में मौसम सुहाना बना रहेगा. राज्य के अलग-अलग्ब हिस्सों में मध्यम स्तर की बारिश देखने को मिल सकती है. केरल में मानसून ने दस्तक दे दी है. दिल्ली में 27 जून तक मानसून आने की उम्मीद है. वहीं, शुरूआती जुलाई में पूरे देश में मानसून छा जाएगा, जिसके बाद भीषण गर्मी से लोगों को निजात मिलेगी.


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नोएडा सेक्टर 100 की लोटस बुलेवार्ड सोसाइटी में AC ब्लास्ट, कई फ्लैट्स में लगी आग

नोएडा सेक्टर 100 की लोटस बुलेवार्ड सोसाइटी में आग लग गई है. एसी में ब्लास्ट होने से पूरा फ्लैट आग की चपेट मे आ गया. सोसाइटी के लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है. आस-पास के फ्लैटों में रहने वाले लोग अपना फ्लैट छोड़कर नीचे आ गए हैं. कई और फ्लैट भी आग की चपेट में आने की संभावना है. मौके पर पांच दमकल विभाग की गाड़ी पहुंची है. आग को लगभग काबू में कल लिया गया है.

नोएडा के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) प्रदीप कुमार ने बताया, 'पांच दमकल गाड़ियां घटनास्थल पर भेजी गईं. सोसायटी में अग्निशमन प्रणालियां काम कर रही थीं और हमारे पहुंचने से पहले ही आग बुझा दी गई थी. आग स्प्लिट एसी में विस्फोट के कारण लगी थी. किसी के घायल होने या हताहत होने की खबर नहीं है.'

इससे पहले मून लाइट होटल में 18 मई को शाम पांच बजे आग लगने के बाद दम घुटने से सेक्टर-46 निवासी पलक प्रसाद की मौत हो गई थी जो कि पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट थी. वह अपने 26 वर्षीय साथी के साथ होटल में रुकी हुई थीं, वह भी इस घटना में घायल हो गया था.


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ये चुनाव पार्टी नहीं, प्रत्याशियों का होगा

 शुक्रवार (20 अक्टूबर) को कांग्रेस तो शनिवार (21 अक्टूबर) को बीजेपी के कार्यकर्ताओं की नाराजगी के ढेर सारे वीडियो के बीच अंतिम सत्य यही है कि दोनों पार्टियों ने अपने-अपने महारथी मध्य प्रदेश विधानसभा 2023 के चुनावी समर में उतारकर चुनाव लड़ने के आदेश दे दिए हैं. दो पार्टी की सत्ता वाले मध्य प्रदेश की खूबी यही है कि बीजेपी कांग्रेस के बीच कुछ चुनाव छोड़ दिए जाएंं तो अधिकतर चुनावों में बड़ा करीबी मुकाबला होता है. इस बार भी यही लग रहा है.

बीजेपी और कांग्रेस की सूचियों को देखा जाए तो हैदर अली आतिश का यही शेर याद आता है- 'बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का, जो चीरा तो इक कतरा-ए-खूं न निकला.' चुनाव के पहले दोनों पार्टियों ने बड़े-बड़े दावे किए थे टिकट बांटने के दावों के. हर विधानसभा का बड़ा सर्वे होगा, एक खास क्राइटेरिया होगा, जिसमें उम्र का खयाल रखा जाएगा, प्रदेश में युवा वोटर बड़ी संख्या में हैं, उम्मीदवारों में युवाओं को जगह दी जाएगी, पार्टी छोड़कर गए लोगों को जगह नहीं दी जाएगी, हार के अंतर का ख्याल रखकर ही टिकट बांटे जाएंगे, युवाओं, ओबीसी और महिलाओं का खास ध्यान होगा, मगर दोनों पार्टियों की सूचियों में किसी भी खास पैमाने का ध्यान नहीं रखकर सिर्फ जिताऊ उम्मीदवार पर ही फोकस किया है, भले ही वो कितना बुजुर्ग और कितनी ही बार पार्टी की रीति-नीति छोड़कर भागा हो.

पहले चर्चा बीजेपी की शनिवार की शाम को आई उस सूची की जिसका लंबे समय से इंतजार हो रहा था. बीजेपी ने शुरुआत की दो सूचियों में जिस प्रकार चौंकाया था उससे लग रहा था कि इस बार पार्टी इस चुनाव को अलग ही स्तर पर ले जा रही है, टिकट वितरण से लेकर प्रचार तक में. पहले जल्दी से हारी सीटों पर उम्मीदवार उतारे फिर सात सांसदों सहित तीन केंद्रीय मंत्रियों को मैदान में उतारा और संदेश दिया कि हर सीट खास है, मगर तीसरी सूची तक मंत्रियों और मुख्यमंत्री का नाम नहीं आने पर लगा कि यहां भी गुजरात तो नहीं दोहराया जाएगा. इस आशंका में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सभाओं में तीखा राग छेड़ा- चुनाव लडूं या नहीं, चला जाऊंगा तो बहुत याद आऊंगा, मैं कैसी सरकार चला रहा हूं वगैरह... इसका असर हुआ तीसरी सूची में, जो 57 नाम आए तो लगा कि मुख्यमंत्री की मर्जी के आगे आलाकमान ने समर्पण कर दिया और तकरीबन सारे विधायक और मंत्रियों को टिकट दे दिए गए.

शनिवार को आई सूची में फिर कुछ नयापन की उम्मीद थी मगर यहां भी ऐसा नहीं हुआ. बानवे प्रत्याशियों की तीसरी सूची में घर बैठ गए बुजुर्ग नेताओं के साथ कई बार पार्टी छोड़कर बाहर गए फिर लौटे लोगों पर पार्टी ने जी भरकर भरोसा बरसाया. नरेंद्र कुशवाहा और राकेश शुक्ला दो बार पार्टी से बाहर जा चुके हैं. जयंत मलैया, नागेंद्र सिंह, बालकिशन पाटीदार, माया सिंह, नारायण कुशवाहा, महेंद्र हार्डिया, दिलीप परिहार सत्तर-बहत्तर से पार के उम्रदराज नेता हैं. एक जानकार का कहना है कि शिवराज भाजपा महाराज भाजपा नहीं, ये डरी भाजपा की सूची है. जीतने के नाम पर सारे तय मानदंड को परे रख दिया गया.

कांग्रेस की शुक्रवार को आई सूची में कमलनाथ के सर्वे को ही सर्वेसर्वा मानने वालों की हवा निकाल दी गई. कांग्रेस की अठासी की सूची देखकर लगा कि कई सीटों पर पार्टी के पास चुनाव लड़ाने के लिए लोग ही नहीं है. जो हैं वो या तो इतने नए हैं कि उनकी कुछ पहचान ही इलाके मे नहीं है और पुराने हैं तो इतने पुराने हैं कि बीस साल पहले दिग्विजय मंत्रिमंडल के साथी रहे है. सुभाष सोजतिया, नरेंद्र नाहटा, राकेश चौधरी, राजकुमार पटेल और हुकुम सिंह कराडा दिग्गी राजा के साथी मंत्री रहे हैं. ये सब फिर चुनाव लड़ रहे हैं. कोई नयापन नहीं.

खैर अब इस चुनाव में प्रत्याशी ही महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं. बीजेपी और कांग्रेस के नाम पर उम्मीदवारों को वोट कम मिलेंगे, ये इलाकों में घूमकर लौटने वाले बता रहे हैं. बीजेपी कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरों पर किसी को कोई आकर्षण नहीं बचा है. फ्री की रेवड़ियां बांटने और आकाशी वायदे करने में दोनों पार्टियां एक दूसरे को पछाड़ रही हैं. इसलिए टिकट वितरण, उसके बाद टिकट विरोध और फिर प्रचार का दौर अब शुरू होने को है, मगर इतना साफ है कि इस बार का चुनाव पार्टी नहीं, प्रत्याशी के नाम पर होगा, इसलिए आलाकमान के दम पर वोट पाने का मंसूबा रखने वाले इस बार निराश होंगे. जीतेगा वही जिसे स्थानीय जनता चाहेगी. इसलिए बस अब तैयार हो जाइए मध्य प्रदेश के महासमर के लिए.


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पहनावे से व्यक्तित्व की पहचान !!

 मुंबई उपभोक्ता जनघोष : हमारे देश में 28 राज्य और राज्य का अपना एक विशेष पोशाक हैं। जैसे "नौवारी" महाराष्ट्र में तो "बनारसी" बनारस में , "मखेला चद्दर" आसाम में तो "कांजीवरम" तमिल नाडु में महिलाओं द्वारा पहनने जाने वाली साड़ी हैं। वैसे ही शर्ट –पैंट , धोती – कुर्ता, पगड़ी , टोपी, सफारी सूट   भारत में पुरुषों के पोशाक हैं । 

 दुनिया मॉडर्नाइज संस्कृति ( Modernised Culture) को अपना रही हैं , भारत के लोगों ने भी इस संस्कृति को अपनाया हैं। शर्ट – पैंट, सूट – सालवार से सीधा जीन्स टॉप और टीशर्ट के ज़माने में हम आ गए हैं। शब्दकोश ( Dictionary) में हर दिन नए शब्द को जोड़ा जा रहा हैं वैसे ही लोग नए संस्कृति को अपना रहे हैं। पर कही न कही यह नए जमाने का पोशाक हमारे संस्कृति को मार रहा हैं या खत्म कर रहा हैं।

 मॉडर्नाइज संस्कृति एक ऐसा दौर हैं जहा लोग खुदका छोड़ , एक दूसरे के रहन सहन, तौर तरीके, खान पान और पहनावे की ओर ज्यादा आकर्षित होने लगते हैं। इस ज़माने में एक और नया शब्द हैं जो हर दिन लोग इस्तमाल करते हैं वह हैं " comparison " जिसका अर्थ है "तूलना" । इस दौर में हर कोई एक दूसरे से एक दूसरे की तुलना करते हैं। लोग या भूल चुके हैं की यह एक जीवन हैं और किसी के पास ज्यादा या कम होना कुछ गलत नहीं हैं। 

तुलना की बात छिड़ ही गई हैं तो कोई पैसों से सामने खड़े व्यक्ति को तोलता हैं तो कोई कपड़ो से । हम सब ने वह कहावत तो सुनी होगी " Don't judge the Book by it's cover" , अर्थात "किसी के पहनावे या कपड़े से उसके बुद्धि या चरित्र को आप जान नहीं सकते हैं "। मगर क्या करें ? हम हैं भी तो इंसान ही । किसी के कपड़ो को देख कर उसका मजाक उड़ाते है या उससे साहब बुलाते हैं। हम भूल गए हैं की कपड़ो से किसी का व्यक्तित पहचाना  नहीं जा सकता बल्कि कपड़े अपने अंग को ढकने में काम आता हैं। 

यह सब स्कूल में दिखाने वाली आदत नहीं हैं बल्कि हर एक संस्कृति में सिखाए जानें वाली बात हैं। लोग समझते हैं की व्यक्तित्व ( personality) अच्छे कपड़े पहन कर निखरती हैं,पर अच्छे कपड़े पहन कर अपनी वाणी का उपयोग वह किस प्रकार करते हैं उसका उन्हें अंदाजा भी नहीं होता। हम इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब, आदि (instagram, Facebook, youtube, etc ) का इस्तेमाल २४ घंटो में से तकरीबन १२– १५ घंटे करते हैं। कुछ अच्छी कुछ बुरी ख़बर देखते हैं , और लाईक शेयर करके छोड़ देते हैं। आज कल लोग वीडियो बनाने के लिए कुछ भी वस्तु का उपयोग करता दिखाई देता हैं। उनमें से एक हैं वायरल हुआ वीडियो जहा जानवर को मारा जा रहा हैं और वही दूसरी तरफ कोई गरीब बच्चा मुक्के प्राणी को खाना दे रहा हैं। 

आइए #UJnews के संग इस मॉडर्न संस्कृति में भारत के संस्कृति का रंग भरे और सादगी से व्यक्तित्व को निखारे।

Edit By Priya Singh


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शत्रु से लेकर राप्टर तक...भारत के टॉप-5 ड्रोन

गाजियाबाद में भारतीय वायुसेना के हिंडन एयरबेस पर चल रहे 'भारत ड्रोन शक्ति-2023' कार्यक्रम का आज दूसरा और आखिरी दिन है। इसमें देशभर के 75 से ज्यादा स्टार्टअप अपने-अपने ड्रोन का प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ सालों पहले तक जो ड्रोन सिर्फ शूटिंग के काम आता था, आज वही खेतों में पेस्टीसाइड छिड़कने से लेकर देश की सीमाओं की रक्षा करने में बखूबी जिम्मेदारी निभा रहा है।

यही वजह है कि सरकार साल-2030 तक भारत को ग्लोबल ड्रोन हब बनाने की योजना पर काम कर रही है। वर्तमान में भारत का ड्रोन निर्माण उद्योग कारोबार 100 करोड़ रुपए के आसपास है, जो अगले साल तक 900 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है।

  • हिंडन एयरबेस पर प्रदर्शनी में रखे गए पांच महत्वपूर्ण ड्रोन के बारे में जानते हैं...

राप्टर : 75 किलो लेकर जा सकता है वजनऊंचाई पांच किलोमीटर

 EnerComp कंपनी द्वारा बनाए गए मेड इन इंडिया राप्टर का कुल वजन 150 किलो है। इसमें कुल 16 मोटर और 32 पंख हैं। इसकी पूरी बॉडी कार्बन फाइबर की है और ये अपने साथ 50 से 75 किलो तक वजन ले जा सकता है। ये अधिकतम पांच किलोमीटर की ऊंचाई पर जाकर उड़ सकता है।

एक बार उड़ान भरने के बाद इसको 30 मिनट तक हवा में रखा जा सकता है। इसे खासकर एग्रीकल्चर क्षेत्र में सामान को इधर से उधर पहुंचाने के लिए बनाया गया है। इससे खेतों में उर्वरक का छिड़काव भी किया जा सकता है। आसानी ये रहेगी कि ये मिनटों में पूरे खेत में छिड़काव कर देगा, जिसे करने में किसानों को पूरा दिन लगता है।

शत्रु : कार से भी तेज रफ्तारउड़ सकता है 25 KG एम्युनिशन लेकर

 INVICTUS कंपनी द्वारा तैयार तीन मीटर लंबा और ढाई मीटर चौड़ा ये ड्रोन एक छोटे लड़ाकू विमान की शेप में है। ये 45 मिनट में 162 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। हालांकि एक पॉइंट पर खड़े होकर इसे 8 किलोमीटर के एरिया में संचालित किया जा सकता है। ये ड्रोन खासतौर पर सिक्योरिटी के लिए बनाया गया है। जिस तरह एयरफोर्स के विमानों को प्रेक्टिस के लिए जमीन पर एक दुश्मन टारगेट चाहिए होता है, उसी प्रकार ये 'शत्रु' काम करेगा। ये शत्रु 25 किलो एम्युनिशन भी साथ लेकर जा सकता है।

HA-5020 : दुर्गम इलाकों में सामान पहुंचाने में मुफीद साबित

 भारतीय सेना अभी दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सामान पहुंचाने के लिए खच्चरों का सहयोग लेती है। जहां वाहनों की पहुंच नहीं है, वहां पर सामान पहुंचाने के लिए ही AERO ARC कंपनी ने इस ड्रोन को तैयार किया गया है। ये एक हेलीकॉप्टर की शेप में है, जिसका वजन 40 किलो है। ये ड्रोन 92 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है। मकसद है कि जिस सामान को पहुंचाने में कई दिन लगते हों, उसी काम को ये ड्रोन चंद घंटों में पूरा कर सके।

वर्टिप्लेन एक्स-3 : मेडिकल सामान 1 घंटे में पहुंचाएगा 120 KM दूर

 ये मेड इन इंडिया हाईब्रिड ई-वीटीओएल ड्रोन है, जो हवाई जहाज की शेप में बनाया गया है। इसके नीचे की तरफ एक बॉक्स है, जिसमें अधिकतम तीन किलोग्राम सामान रखा जा सकता है। खासकर मेडिकल फर्स्ट एड, ब्लड पैकेट्स आदि हेल्थ सामान के लिए इसे डिजाइन किया गया है।

इस ड्रोन का कवरेज एरिया 100 किलोमीटर है और इसकी स्पीड 120 किलोमीटर प्रतिघंटा है। शहरों में ब्लड, किडनी अन्य चीजों को समय से ट्रांसप्लांट करने के लिए रोड पर ग्रीन जोन बनाकर वाहन से पहुंचाना पड़ता है। वही काम ये ड्रोन कुछ मिनटों में कर देगा। स्वास्थ्य, रक्षा, समुद्री, हाईपर लोकल और ईकॉमर्स के कार्गों की डिलीवरी भी इससे की जा सकेगी।

MR20 : हैवी लिफ्ट लॉजिस्टिकबैटरी बैकअप 50 मिनट

 Raphe mPhibr प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने इस ड्रोन को हैवी लिफ्ट लॉजिस्टिक के तौर पर बनाया है। इसका बैट्री बैकअप 50 मिनट लगातार उड़ने का है। ये करीब 10 किलोमीटर का एरिया कवर कर सकता है और इसके साथ 35 किलो तक का सामान भेजा जा सकता है। इस ड्रोन में एरिया फेंसिंग कैपेबिल्टी है। मतलब, एक बार लोकेशन सेट करने के बाद ये खुद वहां तक पहुंच जाएगा, जहां आपको सामान पहुंचाना है।

75 से ज्यादा कंपनियां आई हैं प्रोग्राम में

भारत ड्रोन शक्ति-2023 के पहले दिन सोमवार को देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पहुंचे थे। उन्होंने हाइब्रिड ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, गलती निदान के लिए एआई इंजन, फ्लाई-बाय-वायर टेस्टर, स्थिर विद्युत आपूर्ति ट्रॉली, क्यूआर कोड आधारित टूल क्रिब प्रबंधन प्रणाली और आधुनिक शिक्षण सहायक सामग्री जैसी परियोजनाओं की जानकारी ली। वे स्टॉल पर गए और ड्रोन के बारे में तकनीकि जानकारी जुटाई।

ड्रोन शक्ति कार्यक्रम में देशभर की 75 कंपनियां प्रतिभाग कर रही हैं। इन्होंने एयरबेस पर एक बड़े एरिया में एग्जीबिशन लगाई है, जिसमें वे नए-नए तरह के ड्रोन को प्रदर्शित कर रही हैं। इन्हें देखने के लिए तमाम कॉलेजों के स्टूडेंट्स और ड्रोन में रूचि रखने वाले लोग पहुंच रहे हैं।

 आमतौर पर चार तरह के होते हैं ड्रोन

  1. मल्टी-रोटर ड्रोनये आसान और सस्ते उपलब्ध विकल्पों में से एक है। इन ड्रोनों में एक से अधिक मोटर होते हैं। आमतौर पर ट्राइकॉप्टर (3 रोटर), क्वाडकॉप्टर (4 रोटर), हेक्साकॉप्टर (6 रोटर) और ऑक्टाकॉप्टर (8 रोटर। इन ड्रोनों का उपयोग हवाई निरीक्षण और फोटोग्राफी उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
  2. फिक्स्ड-विंग ड्रोनइन ऊर्जा कुशल ड्रोनों में एक कठोर पंख होता है जिसे हवाई जहाज की तरह दिखने और काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस ड्रोन को केवल आगे बढ़ने के लिए ऊर्जा की जरूरत है, न कि खुद को हवा में बनाए रखने के लिए। इन ड्रोनों का उपयोग हवाई मानचित्रण, सर्वेक्षण, कृषि और निर्माण उद्देश्यों में किया जाता है।
  3. सिंगल-रोटर ड्रोनये मजबूत और टिकाऊ ड्रोन हैं और संरचना और डिजाइन में वास्तविक हेलीकॉप्टर जैसे दिखते हैं। इस प्रकार के ड्रोन में केवल एक रोटर होता है जो एक बड़े घूमते हुए पंख जैसा दिखता है, साथ ही दिशा और स्थिरता को नियंत्रित करने के लिए एक टेल रोटर भी होता है। इनका उपयोग भारी पेलोड ले जाने और सर्वेक्षण उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
  4. फिक्स्ड-विंग हाइब्रिड वीटीओएलये भविष्य के ड्रोन फिक्स्ड विंग और रोटर आधारित डिज़ाइन के हाइब्रिड हैं। इसमें स्थिर पंखों से जुड़े रोटर हैं, जो इसे उड़ने, उड़ान भरने और लंबवत रूप से उतरने की अनुमति देते हैं। इन ड्रोनों का उपयोग आमतौर पर डिलीवरी उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

रक्षामंत्री ने स्वास्तिक बनाकर C-295 IAF को सौंपा:हिंडन पर ड्रोन ने बम गिराकर दिखाई शक्ति, 'आतंकियों के ठिकानेकिए नेस्तनाबूद

 गाजियाबाद में एयरफोर्स के हिंडन एयरबेस पर सोमवार को भारत की ड्रोन शक्ति का प्रदर्शन हुआ। देशभर की कंपनियां अपने हाईटेक ड्रोन लेकर पहुंचीं। इस दौरान किसी ड्रोन ने आसमान से ही संदिग्ध चीज को कैप्चर किया तो किसी ड्रोन ने आतंकियों के डमी ठिकानों पर बम गिराकर उसे नेस्तनाबूद किया।

 

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केरल में निपाह वायरस को लेकर 4 जिलों में अलर्ट

 

केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस से दो लोगों की मौत के बाद 3 और जिले कन्नूर, वायनाड और मलप्पुरम में अलर्ट जारी किया गया है। यहां के 7 ग्राम पंचायतों को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है। कंटेनमेंट जोन वाले इलाके और अस्पतालों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, कोझिकोड के जिला अधिकारी ने 7 पंचायतों में सभी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, आंगनबाड़ी केंद्र, बैंक और सरकारी संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया है। सुबह 7 से शाम 5 बजे तक सिर्फ दवाइयां और जरूरी चीजों की दुकानें ही खोलने की इजाजत है।

केरल में निपाह वायरस के अब तक 4 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें दो लोगों की मौत हुई है। बुधवार को राज्य सरकार ने विधानसभा में बताया कि पुणे से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की टीम निपाह वायरस की जांच को लेकर आज केरल आएगी। कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में NIV की टीम चमगादड़ों का सर्वे भी करेगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने विधायकोंजिला अधिकारियों के साथ इमरजेंसी मीटिंग की
 इससे पहले केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने मंगलवार की रात इमरजेंसी मीटिंग बुलाई थी। इसमें सभी विधायकों, जन प्रतिनिधियों, जिला कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ निपाह वायरस से निपटने के लिए जरूरी प्रयासों को लेकर चर्चा हुई।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि क्षेत्र में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का काम जारी है। हेल्थ डिपार्टमेंट ने इंडियन काउंसिल और मेडिकल रिसर्च (ICMR) के साथ भी बातचीत की और राज्य के प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों के ट्रीटमेंट के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की उपलब्धता का आश्वासन दिया।

 दो बीमार मरीजों में एक 9 साल बच्चाएक युवक शामिल
 केरल में निपाह से पहली मौत 30 अगस्त और दूसरी मौत 11 सितंबर को हुई थी। स्वास्थ्य मंत्री ने मंगलवार को बताया था कि दोनों मृतकों के सैंपल जांच के लिए पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे गए हैं।

उन्होंने दो और मरीज मिलने की पुष्टि की थी। इनमें एक 9 साल का बच्चा और 24 साल का युवक शामिल है। दोनों का इलाज जारी है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया है।

राज्य में अभी तक निपाह फैलने की घोषणा नहीं
 केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 12 सितंबर को एक पोस्ट कर कहा कि सरकार निपाह वायरस से हुई दो लोगों की मौत पर गंभीर है। जो लोग मृतकों के संपर्क में थे, उनके बारे में पता किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने कोझिकोड में अलर्ट जारी किया है। अभी तक राज्य में आधिकारिक तौर पर निपाह के फैलने की घोषणा नहीं की गई है।

2018 में कोझिकोड और मलप्पुरम में निपाह से 17 की मौत हुई थी
 केरल के कोझिकोड और मलप्पुरम जिले में 2018 में निपाह वायरस से 17 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले निपाह वायरस का मामला 2019 में कोच्चि में सामने आया था। वहीं, 2021 में भी कोझिकोड में निपाह वायरस का एक केस मिला था।

 चमगादड़ और सुअर जैसे जानवरों से फैलता है निपाह वायरस
 निपाह वायरस चमगादड़ और सुअर जैसे जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। इस बीमारी की मरने वालों की दर बहुत ज्यादा है। अब तक इसका कोई ट्रीटमेंट या टीका (इंजेक्शन) उपलब्ध नहीं है। जूनोटिक वायरस उसे कहते हैं, जो जानवरों से इंसानों में या इंसानों से जानवरों में फैलता है।

चमगादड़ से रेबीज और निपाह वायरस भी फैलता है
 टोरंटो हेल्थ साइंस सेंटर की माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. समीरा मुबारेका के मुताबाकि, यह पहली बार नहीं है, जब इंसानों में किसी बीमारी की वजह के रूप में चमगादड़ का नाम आया है। यह कई तरह के वायरस का वाहक है, जो पहले भी साबित हो चुका है। चमगादड़ की कुछ प्रजातियां रेबीज, इबोला और निपाह वायरस की भी वाहक रही हैं।

निपाह वायरस के लक्षण
 एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निपाह वायरस सिर्फ जानवरों से नहीं, बल्कि एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैलता है। WHO की मानें तो निपाह वायरस से संक्रमित होने वाले मरीजों में वायरल फीवर होने के साथ सिरदर्द, उल्टी जैसा लगना, सांस लेने में तकलीफ और चक्कर आने जैसे लक्षण दिखते हैं। अगर ये लक्षण 1-2 हफ्ते तक रहते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

निपाह का पहला मामला 25 साल पहले मलेशिया में मिला था
 WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के मुताबिक, 1998 में मलेशिया के सुंगई निपाह गांव में पहली बार निपाह वायरस का पता चला था। इसी गांव के नाम पर ही इसका नाम निपाह पड़ा। तब सुअर पालने वाले किसान इस वायरस से संक्रमित मिले थे। मलेशिया मामले की रिपोर्ट के मुताबिक, पालतू जानवरों जैसे कुत्ते, बिल्ली, बकरी, घोड़े से भी इंफेक्शन फैलने के मामले सामने आए थे।

मलेशिया में निपाह सामने आने के बाद उसी साल इस वायरस का पता सिंगापुर में भी चला था। इसके बाद 2001 में बांग्लादेश में भी इस वायरस से संक्रमित मरीज मिले। कुछ वक्त बाद बांग्लादेश से जुड़ी भारतीय सीमा के आसपास भी निपाह वायरस के मरीज मिलने लगे।

केरल में निपाह वायरस से दो की मौत:2 और मरीज मिलेकेंद्र ने एक्सपर्ट्स की टीमें भेजीं

केरल के कोझिकोड में दो लोगों की बुखार से मौत के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने मंगलवार (12 सितंबर) को बताया कि केरल में हुई मौतें निपाह से ही हुई हैं। हमने स्थिति का जायजा लेने और इससे निपटने में राज्य सरकार की मदद के लिए एक्सपर्ट्स की एक टीम भेजी है

 

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बात जब फैशन की हो तो कुछ चीजें सदाबहार

बचपन में आपने घेरदार फ्रॉक जरूर पहनी होगी। बड़े होने पर इस स्टाइल को अपनाने के बारे में कभी सोचा है क्या? फ्रिल्स फिर से फैशन में है। इसे कैसे अपने वॉर्डरोब का हिस्सा बनाएं, बता रहे हैं हम। बात जब फैशन की हो तो कुछ चीजें सदाबहार ही रहती हैं। ये चीजें बार-बार लौटकर आती हैं और लोगों पर अपना जादू चलाती हैं। अब फ्रिल्स को ही लें। फैशन की दुनिया में फ्रिल्स अब फिर से अपना जादू बिखेर रही है। 

 

अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत के जाने-माने नाम मार्क जैकोब्स, सिमोन रोका, विकी मार्टिन से लेकर भारतीय डिजाइनर और बॉलीवुड के कलाकर फिर से फ्रिल्स से अपना स्टाइल स्टेटमेंट बना रहे हैं। कान फिल्म फेस्टिवल में सोनम कपूर की स्टाइलिश फ्रिल साड़ी से लेकर अन्य खास मौकों पर सिलेब्रिटीज के फ्रिल वाले क्रॉप टॉप और गाउन, फैशन की दुनिया में फ्रिल की वापसी की गवाही दे रहे हैं। फैशन एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्रिल बेहद आसानी से ध्यान आकर्षित करने के मामले में उपयोगी है, लेकिन इसे किसी भी आउटफिट में बेहद कम मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आपका लुक ज्यादा स्टाइलिश दिखे। फ्रिल से आप भी स्टाइलिश लुक पा सकती हैं, लेकिन इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातों को जानना भी जरूरी है, ताकि हर नजर आप पर ही जाकर टिके।

 

संतुलन है जरूरी

नजाकत भरा लुक देने में परफेक्ट फ्रिल्स को जब बेहद संतुलित तरीके से किसी भी परिधान पर सजाया जाता है तो यह आपको विक्टोरियन दौर का स्टाइलिश लुक देता है। इसलिए इस खास नियम को याद रखिएगा कि फ्रिल के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। अगर आप फ्रिल की नाजुक लेयर से सजी स्मार्ट शर्ट या गोल गले का टॉप पहन रही हैं तो ध्यान रखें कि ऐसे ही पैटर्न को अपनी स्कर्ट या पैंट में बिल्कुल न दोहराएं। फ्रिल को अपने आउटफिट के केवल एक हिस्से तक ही सीमित रखकर आप अपनी ड्रेस की खूबसूरती बरकरार रख सकती हैं। फ्रिल का इस्तेमाल बॉडी फ्रेम को संतुलित करने के लिए बेहद अच्छी तरह किया जा सकता है। जैसे कि अगर आपका ऊपरी हिस्सा भारी है, तो ड्रेस में नीचे की ओर फ्रिल लगाएं और अगर निचला हिस्सा भारी है तो फ्रिल को टॉप पर लगाना ठीक रहेगा।

 

ऐसे पाएं स्लिम लुक

फ्रिल्स आपकी चैड़ाई को बढ़ाएंगे, इसलिए अगर आप अपनी फिगर को स्लिम दिखाना चाहती हैं, तो लंबाई में सजे फ्रिल्स वाली ड्रेस ही पहनें। यह पहनकर न सिर्फ आप दुबली लगेंगी, बल्कि लंबी भी दिखेंगी। इसके अलावा अगर आपके नेकलाइन या शोल्डर के ऊपर फ्रिल है, तो फिगर की चैड़ाई को कम दिखाने के लिए टॉप को स्कर्ट या पैंट के अंदर डाल लें।

 

बनाएं एक केंद्र बिंदु

अपने लुक को स्टाइलिश बनाए रखने और फैशन में बने रहने के लिए फ्रिल को अपने लुक का केंद्र बिंदु बनाएं। यानी ऊपर या नीचे की फ्रिल के अलावा बाकी सब कुछ सादा और शालीन होना जरूरी है। निचले हिस्से को सादा रखना टॉप के आकर्षण को बढ़ा देगा।

 

ऐसे मिलेगा फॉमर्ल लुक

फॉर्मल लुक के लिए केवल कॉलर या कंधों पर फ्रिल वाला टॉप पहना जा सकता है। इस खूबसूरत टॉप को फॉर्मल ट्राउजर और ओपन-टो हील्स के साथ पहनें। बालों को पीछे बांध कर रखें, ताकि पूरी लुक में अधिक लेयर से बचा जा सके।

 

एक्सेसरीज हों बेहद कम

फ्रिल्स के साथ एक्सेसरीज कम-से-कम ही पहना जाए। खासतौर पर ड्रेस के जिस हिस्से में फ्रिल है, वहां कोई भी एक्सेसरी पहनने से बचें। कंधे के इर्द-गिर्द फ्रिल है, तो लंबे, भारी ईयररिंग्स या नेकपीस पहनने से बचें और अगर बांह पर फ्रिल है तो ब्रेसलेट या रिंग्स न पहनें। साथ में सादा क्लच लिया जा सकता है। फुटवियर में हाई हील शूज पहनें।

 

इन्हें न भूलें

-जरूरी है कि फ्रिल्स आपको व्यवस्थित लुक दें, न कि बेतरतीब दिखाई दें।

-अगर आपकी फिगर भारी है तो ज्यादा फ्रिल वाली ड्रेस से आप और ज्यादा भारी दिखेंगी। अगर फैशन के अनुरूप -फ्रिल पहनना चाहती हैं तो हल्की फ्रिल या पैरों में फ्रिल वाली फुटवियर पहन सकती हैं।

-ज्यादा बड़े फ्रिल्स आपके लुक को बनाने की जगह बिगाड़ देंगे, इसलिए इन्हें सादा और शालीन रखें और ऊंची हील्स पहनें।

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आंखों के नीचे डार्क सर्कल खत्म करने के घरेलू और असरदार उपाय

डार्क सर्कल पीछे कई कारण हो सकते हैं। जिनमें सोने, हार्मोन्स में परिवर्तन होने, अव्यवस्थित लाइफस्टाल होने या फिर हेरेडेट्री होने की वजह से भी आंखों के नीचे काले घेरे बन जाते हैं। इसके उपायों के लिए बाजार में कई बहुत से ऐसे रासायनिक उत्पाद मौजूद है जो डार्क सर्कल को खत्म करने में कारगर है परंतु सेंसटिव स्क‍िन वाले इन उत्पादों को यूज नहीं कर पाते हैं। ऐसे में इन घरेलू नुस्खों को अपनाकर डार्क सर्कल्स को दूर किया जा सकता है:


1. एक खीरा लें और इसे ब्लेंड कर लें। अब इसके गूदे में एक चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं और पेस्ट बनाने के लिए इसे फिर से ब्लेंड करें। अब इस पेस्ट को डार्क सर्कल पर लगाएं और 15 मिनट के लिए लगा रहने दें। अब पानी से धो लें। 


2. डार्क सर्कल दूर करने के लिए टमाटर सबसे कारगर उपाय है. ये नेचुरल तरीके से आंखों के नीचे के काले घेरे को खत्म करने का काम करताहै. साथ ही इसके इस्तेमाल से त्वचा भी कोमल और फ्रेश बनी रहती है. टमाटर के रस को नींबू की कुछ बूंदों के साथ मिलाकर लगाने से जल्दी फायदा होता है.


3. डार्क सर्कल दूर करने के लिए आलू का भी प्रयोग किया जा सकता है. आलू के रस को भी नींबू की कुछ बूंदों के साथ मिला लें. इस मिश्रण को रूई की सहायता से आंखों के नीचे लगाने से काले घेरे समाप्त हो जाएंगे.


4. ठंडे टी-बैग्स के इस्तेमाल से भी डार्क सर्कल जल्दी समाप्त हो जाते हैं. टी-बैग को कुछ देर पानी में डुबोकर रख दें. उसके बाद इसे फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें. कुछ देर बाद इसे निकालकर आंखों पर रखकर लेट जाएं. 10 मिनट तक रोज ऐसा करने से फायदा होगा.


5. ठंडे दूध के लेप से भी आंखों के नीचे का कालापन दूर हो जाता है. कच्चे दूध को ठंडा होने के लिए रख दें. उसके बाद कॉटन की मदद से उसे आंखों के नीचे लगाएं. ऐसे दिन में दो बार करने से जल्दी फायदा होगा.


6. संतरे के छिलके को धूप में सुखाकर पीस लें. इस पाउडर में थोड़ी सी मात्रा में गुलाब जल मिलाकर लगाने से काले घेरे खत्म हो जाएंगे.


7. दही से काले घेरे कम करने के लिए दो चम्मच दही में दो चम्मच नींबू का रस मिलाएं। अब इस पेस्ट को आंखों के नीचे डार्क सर्कल पर लगाएं और 10-15 मिनट के लिए लगा छोड़ दें। अब पानी से इसे धो लें। बेहतरीन परिणाम के लिए इस पेस्ट को हफ्ते में दो बार लगाएं।



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घर पर करें टोमेटो फेशियल, चेहरे पर आएगा पार्लर जैसा निखार

टमाटर चेहरे के खुले छिद्रों को बंद करने में मदद करता है। इसमें में मौजूद विटामिन-सी चेहरे की चमक को बढ़ाने का काम करता है। टमाटर चेहरे की अशुद्धियों को दूर कर चेहरे की रौनक बढ़ाने में शानदार काम करता है। क्या आप जानते हैं कि आप टमाटर के साथ घर पर ही फेशियल कर सकती हैं? अगर आप घर बैठे ही ब्राइट और फेयर स्किन टोन को पाने के लिए टमाटर फेशियल सबसे सेफ और प्रभावी तरीका है। घर पर 15 मिनट का फेशियल जो आपको पार्लर में किए जाने वाले फेशियल की तुलना में काफी बेहतर परिणाम दे सकता है। टमाटर के उपयोग से आप स्किन को ग्लोइंग बना सकती हैं। जी हां आज हम आपको टमाटर फेशियल के बारे में जानकारी देंगे, जिससे आपके चेहरे की एक नहीं बल्कि अनेकों परेशानियां दूर हो जाएंगी। तो चलिए जानते हैं टमाटर फेशियल करने का तरीका। 

 

क्लीजिंग

फेशियल के पहले स्टेप में हम क्लीजिंग करते हैं इसके लिए हमें टमाटर के गूदे और कच्चे दूध की जरूरत होती है। इन दोनों को एक साथ मिलाएं और अपने पूरे चेहरे और गर्दन पर कॉटन पैड की हेल्प से लगाएं।

 

स्क्रबिंग

फेशियल के दूसरे स्टेप में आपको स्क्रबिंग करना होता है। इसके लिए आधा टमाटर लें और कटे हुए हिस्से पर चीनी डालें। फिर अपने चेहरे पर इस टमाटर और चीनी के स्क्रब से धीरे से मसाज करें। इस स्टेप में आपको बहुत ज्यादा तेज नहीं करना है। नहीं तो चीनी के दाने स्किन को परेशान कर सकते हैं।

 

स्टीमिंग

टमाटर फेशियल के तीसरे स्टेप स्टीमिंग करनी चाहिए। इसके लिए इलेक्ट्रिक फेशियल स्टीमर को लें और इसे लगभग 5 मिनट तक गर्म होने दें। अपने चेहरे को लगभग 5 से 7 मिनट तक स्टीम करें।


मास्क

टमाटर फेशियल के चौथे स्टेप में आपको पैक बनाने के लिए टमाटर का गूदा, चंदन पाउडर और शहद की जरूरत होती है। इन सभी चीजों को एक साथ मिलाएं। फिर इसे अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं और इसे लगभग 15 मिनट तक सूखने दें। अपने चेहरे को नॉर्मल नल के पानी से धोएं और अपने पसंदीदा मॉइस्चराइज़र या एलोवेरा जैल को लगाएं।




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फिर से चलाइए फ्रिल्स का जादू

बचपन में आपने घेरदार फ्रॉक जरूर पहनी होगी। बड़े होने पर इस स्टाइल को अपनाने के बारे में कभी सोचा है क्या? फ्रिल्स फिर से फैशन में है। इसे कैसे अपने वॉर्डरोब का हिस्सा बनाएं, बता रही हैं ममता अग्रवालबा त जब फैशन की हो तो कुछ चीजें सदाबहार ही रहती हैं। ये चीजें बार-बार लौटकर आती हैं और लोगों पर अपना जादू चलाती हैं। अब फ्रिल्स को ही लें। फैशन की दुनिया में फ्रिल्स अब फिर से अपना जादू बिखेर रही है। 


अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत के जाने-माने नाम मार्क जैकोब्स, सिमोन रोका, विकी मार्टिन से लेकर भारतीय डिजाइनर और बॉलीवुड के कलाकर फिर से फ्रिल्स से अपना स्टाइल स्टेटमेंट बना रहे हैं। कान फिल्म फेस्टिवल में सोनम कपूर की स्टाइलिश फ्रिल साड़ी से लेकर अन्य खास मौकों पर सिलेब्रिटीज के फ्रिल वाले क्रॉप टॉप और गाउन, फैशन की दुनिया में फ्रिल की वापसी की गवाही दे रहे हैं। फैशन एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्रिल बेहद आसानी से ध्यान आकर्षित करने के मामले में उपयोगी है, लेकिन इसे किसी भी आउटफिट में बेहद कम मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आपका लुक ज्यादा स्टाइलिश दिखे। फ्रिल से आप भी स्टाइलिश लुक पा सकती हैं, लेकिन इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातों को जानना भी जरूरी है, ताकि हर नजर आप पर ही जाकर टिके।


संतुलन है जरूरी

नजाकत भरा लुक देने में परफेक्ट फ्रिल्स को जब बेहद संतुलित तरीके से किसी भी परिधान पर सजाया जाता है तो यह आपको विक्टोरियन दौर का स्टाइलिश लुक देता है। इसलिए इस खास नियम को याद रखिएगा कि फ्रिल के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। अगर आप फ्रिल की नाजुक लेयर से सजी स्मार्ट शर्ट या गोल गले का टॉप पहन रही हैं तो ध्यान रखें कि ऐसे ही पैटर्न को अपनी स्कर्ट या पैंट में बिल्कुल न दोहराएं। फ्रिल को अपने आउटफिट के केवल एक हिस्से तक ही सीमित रखकर आप अपनी ड्रेस की खूबसूरती बरकरार रख सकती हैं। फ्रिल का इस्तेमाल बॉडी फ्रेम को संतुलित करने के लिए बेहद अच्छी तरह किया जा सकता है। जैसे कि अगर आपका ऊपरी हिस्सा भारी है, तो ड्रेस में नीचे की ओर फ्रिल लगाएं और अगर निचला हिस्सा भारी है तो फ्रिल को टॉप पर लगाना ठीक रहेगा।


ऐसे पाएं स्लिम लुक

फ्रिल्स आपकी चैड़ाई को बढ़ाएंगे, इसलिए अगर आप अपनी फिगर को स्लिम दिखाना चाहती हैं, तो लंबाई में सजे फ्रिल्स वाली ड्रेस ही पहनें। यह पहनकर न सिर्फ आप दुबली लगेंगी, बल्कि लंबी भी दिखेंगी। इसके अलावा अगर आपके नेकलाइन या शोल्डर के ऊपर फ्रिल है, तो फिगर की चैड़ाई को कम दिखाने के लिए टॉप को स्कर्ट या पैंट के अंदर डाल लें।


बनाएं एक केंद्र बिंदु

अपने लुक को स्टाइलिश बनाए रखने और फैशन में बने रहने के लिए फ्रिल को अपने लुक का केंद्र बिंदु बनाएं। यानी ऊपर या नीचे की फ्रिल के अलावा बाकी सब कुछ सादा और शालीन होना जरूरी है। निचले हिस्से को सादा रखना टॉप के आकर्षण को बढ़ा देगा।


ऐसे मिलेगा फॉमर्ल लुक

फॉर्मल लुक के लिए केवल कॉलर या कंधों पर फ्रिल वाला टॉप पहना जा सकता है। इस खूबसूरत टॉप को फॉर्मल ट्राउजर और ओपन-टो हील्स के साथ पहनें। बालों को पीछे बांध कर रखें, ताकि पूरी लुक में अधिक लेयर से बचा जा सके।


एक्सेसरीज हों बेहद कम

फ्रिल्स के साथ एक्सेसरीज कम-से-कम ही पहना जाए। खासतौर पर ड्रेस के जिस हिस्से में फ्रिल है, वहां कोई भी एक्सेसरी पहनने से बचें। कंधे के इर्द-गिर्द फ्रिल है, तो लंबे, भारी ईयररिंग्स या नेकपीस पहनने से बचें और अगर बांह पर फ्रिल है तो ब्रेसलेट या रिंग्स न पहनें। साथ में सादा क्लच लिया जा सकता है। फुटवियर में हाई हील शूज पहनें।


इन्हें न भूलें

जरूरी है कि फ्रिल्स आपको व्यवस्थित लुक दें, न कि बेतरतीब दिखाई दें। अगर आपकी फिगर भारी है तो ज्यादा फ्रिल वाली ड्रेस से आप और ज्यादा भारी दिखेंगी। अगर फैशन के अनुरूप फ्रिल पहनना चाहती हैं तो हल्की फ्रिल या पैरों में फ्रिल वाली फुटवियर पहन सकती हैं। ज्यादा बड़े फ्रिल्स आपके लुक को बनाने की जगह बिगाड़ देंगे, इसलिए इन्हें सादा और शालीन रखें और ऊंची हील्स पहनें।

(फैशन एक्सपर्ट राहुल नार्वेकर से बातचीत पर आधारित)





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