गर्मी से एक हफ्ते में 577 हज यात्रियों की मौत

सऊदी अरब के मक्का में गर्मी के कारण 12 जून से 19 जून के बीच 577 हज यात्रियों की मौत हुई है। पिछले साल यह आंकड़ा 240 था। 17 जून को मक्का की ग्रैंड मस्जिद में तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वालों में 323 नागरिक मिस्र के और 60 जॉर्डन के हैं। इसके अलावा ईरान, इंडोनेशिया और सेनेगल के हज यात्रियों की भी मौत हुई है। इनमें कोई भारतीय है या नहीं यह साफ नहीं हो पाया है। सऊदी के 2 डिप्लोमैट्स ने AFP को बताया कि ज्यादातर मौतें गर्मी की वजह से बीमार पड़ने के चलते हुई हैं।

सऊदी में 2 हजार हज यात्रियों का इलाज जारी

मिस्र के विदेश मंत्री ने मंगलवार को कहा कि वे सऊदी के अधिकारियों के साथ मिलकर लापता लोगों को खोजने के लिए ऑपरेशन चला रहे हैं। सऊदी अरब ने बताया कि गर्मी की वजह से बीमार हुए करीब 2 हजार हज यात्रियों का इलाज किया जा रहा है।

17 जून को मक्का की ग्रैंड मस्जिद में तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। सऊदी अरब के अधिकारियों के मुताबिक, मक्का में जलवायु परिवर्तन का गहरा असर हो रहा है। यहां हर 10 साल में औसत तापमान 0.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ रहा है।

पिछले साल 240 लोगों ने दम तोड़ा था

इससे पहले पिछले साल हज पर गए 240 हज यात्रियों की मौत हुई थी। इनमें से ज्यादातर इंडोनेशिया के थे। सऊदी ने सभी यात्रियों को छाते इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इसके अलावा उन्हें लगातार पानी पीने और धूप से बचने के लिए कहा जा रहा है।

हालांकि, माउंट अराफात की इबादत के साथ हज के ज्यादातर रिवाज दिन में किए जाते हैं। इसके लिए हज यात्रियों को लंबे समय तक बाहर धूप में रहना पड़ता है। हज यात्रियों ने बताया कि हज के दौरान अक्सर उन्हें सड़क के किनारे बीमार यात्री नजर आते हैं। कई लोगों की मौत हो चुकी होती है। हज के रास्ते पर लगातार एंबुलेंस का जमावड़ा लगा रहता है।

बिना वीजा भी हज करने पहुंचते हैं हज यात्री

इस साल करीब 18 लाख हज यात्री हज के लिए पहुंचे हैं। इनमें से 16 लाख लोग दूसरे देशों के हैं। हर साल हज पर जाने वाले हजारों यात्री ऐसे होते हैं, जिनके पास इसके लिए वीजा नहीं होता है। पैसों की कमी की वजह से इस तरह के यात्री गलत तरीकों से मक्का पहुंचते हैं।

सऊदी डिप्लोमैट्स ने न्यूज एजेंसी AFP को बताया कि मरने वालों में मिस्र के यात्रियों की तादाद इसीलिए ज्यादा है, क्योंकि इनमें कई ऐसे हैं जिन्होंने हज के लिए रजिस्टर नहीं कराया था। इस महीने की शुरुआत में सऊदी ने बिना रजिस्ट्रेशन वाले हजारों हज यात्रियों को मक्का से हटाया था।

हज को होस्ट करना सऊदी अरब के शाही परिवार के लिए सम्मान की बात है। सऊदी किंग को 2 पवित्र मस्जिदों का संरक्षक भी कहा जाता है।

हज क्या है...

इस्लाम धर्म में 5 फर्ज में से एक फर्ज हज है। मान्यताओं के मुताबिक, हर मुस्लिम व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार इस फर्ज को पूरा करना होता है। BBC न्यूज के मुताबिक साल 628 में पैगंबर मोहम्मद ने अपने 1400 शिष्यों के साथ एक यात्रा शुरू की थी। ये इस्लाम की पहली तीर्थयात्रा बनी और इसी यात्रा में पैगंबर इब्राहिम की धार्मिक परंपरा को फिर से स्थापित किया गया। इसी को हज कहा जाता है।

हर साल दुनियाभर के मुस्लिम सऊदी अरब के मक्का में हज के लिए पहुंचते हैं। हज में पांच दिन लगते हैं और ये ईद उल अजहा या बकरीद के साथ पूरी होती है। सऊदी अरब हर देश के हिसाब से हज का कोटा तैयार करता है।

इनमें इंडोनेशिया का कोटा सबसे ज्यादा है। इसके बाद पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, नाइजीरिया का नंबर आता है। इसके अलावा ईरान, तुर्किये, मिस्र, इथियोपिया समेत कई देशों से हज यात्री आते हैं। हज यात्री पहले सऊदी अरब के जेद्दाह शहर पहुंचते हैं। वहां से वो बस के जरिए मक्का शहर जाते हैं।

हज के 5 चरण होते हैं...

1. अहराम: हज पर जाने वाले सभी यात्री यहां से एक खास तरह का कपड़ा पहनते हैं, जिसे अहराम कहा जाता है। इसे सिला नहीं जाता। यह एक सफेद रंग का कपड़ा होता है। हज पर जाने वाली महिलाओं को अहराम पहनने की जरूरत नहीं होती।

2. उमरा: मक्का पहुंचकर जायरीन सबसे पहले उमरा करते हैं। उमरा साल में कभी भी किया जा सकता है। हज के दौरान इसे करना अनिवार्य नहीं है।

3. मीना और अराफात का मैदान

हज की शुरुआत इस्लामिक महीने जिल-हिज की 8वीं तारीख से होती है। इस दिन हाजी मक्का से 12 किमी दूर मीना शहर जाते हैं। इसके अगले दिन वे अराफात के मैदान पहुंचते हैं। यहां खड़े होकर हाजी अल्लाह को याद करते हैं। शाम को वे मुजदलफा शहर जाते हैं। दस तारीख की सुबह जायरीन वापस मीना शहर लौटते हैं।

4. जमारात

मीना लौटने के बाद सभी यात्री एक खास जगह पर जाकर शैतान को पत्थर मारते हैं। यह एक सांकेतिक प्रक्रिया है। इसे जमारात कहा जाता है। इसके बाद बकरे या भेड़ की कुर्बानी दी जाती है।

5. ईद-उल-अजहा

हज यात्रा के अंत में यात्री मक्का वापस लौटते हैं और काबा के 7 चक्कर लगाते हैं। इसे तवाफ कहा जाता है। इसी दिन पूरी दुनिया में बकरीद मनाई जाती है। इस्लामिक महीने की 12 तारीख को आखिरी बार तवाफ और दुआ करने के बाद हज की यात्रा पूरी होती है।



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राम जन्मभूमि की सुरक्षा में तैनात एसएसएफ जवान को संद‍िग्‍ध पर‍िस्‍थि‍त‍ियों में लगी गोली, मौत

अयोध्‍या में राम जन्मभूमि परिसर में सुरक्षा में तैनात एसएसएफ जवान की संद‍िग्‍ध पर‍िस्‍थि‍ति‍यों में मौत हो गई। जवान को राम जन्‍मभूम‍ि की सुरक्षा में तैनात था। बताया जा रहा है क‍ि देर रात गोली लगने से घायल हुआ था।  

एसएसएफ जवान को सुरक्षाकर्मियों ने अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे ट्रामा सेंटर रेफर क‍िया गया। ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टर ने एसएसएफ जवान को मृत घोषित कर द‍िया। घटना से राम जन्म भूमि परिसर में हड़कंप मच गया।एसएसएफ जवान अंबेडकरनगर का रहने वाला था। 




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पूजा-पाठ के बाद खोले गए जगन्नाथपुरी के सभी चार द्वार

आज से श्री जगन्नाथ मंदिर के सभी चारों द्वार फिर से खोल दिए गए हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मौजूदगी में द्वार खोले गए हैं। मुख्यमंत्री माझी, दोनों उप-मुख्यमंत्री, मंत्री, भाजपा सांसद सहित अन्य पार्टी नेताओं ने पहले भगवान जगन्नाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और 'मंगल अलाती' रस्म के बाद चारों द्वारों को फिर से खोल दिया गया। उन्होंने मंदिर परिसर की 'परिक्रमा' भी की।

साथ ही मंदिर की मौजूदा सभी जरूरतों के लिए कॉपर्स फंड स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है। ओडिशा की नई भाजपा सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट में ये प्रस्ताव मंजूर किया है।

'मंदिर के द्वार खोलना भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में था'

एक दिन पहले, माझी ने बताया था, ‘राज्य सरकार ने सभी मंत्रियों की उपस्थिति में जगन्नाथ पुरी के सभी चारों द्वार खोलने का फैसला लिया गया है। इससे भक्तों को चारों द्वारों से मंदिर तक पहुंचने को मिलेगा।’ माझी ने आगे कहा कि सभी मंदिरों के द्वार खोलना भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र के वादों में से एक था। द्वार बंद होने के कारण भक्तों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

कोरोना काल से ही मंदिर के द्वार बंद थे

पिछली बीजू जनता दल सरकार ने कोरोना महामारी के बाद से ही मंदिर के चारों द्वार बंद कर दिए थे और श्रद्धालु एक ही द्वार से प्रवेश कर सकते हैं। काफी समय से ही भक्तों की मांग थी कि सभी द्वार खोले जाएं।

मंदिर की देखरेख के लिए 500 करोड़ आवंटित होंगे

माझी ने जानकारी देते हए बताया कि मंदिर के संरक्षण और देखरेख के लिए मंत्रिमंडल ने 500 करोड़ रुपये का एक कोष गठित करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी मंत्री बुधवार रात तीर्थनगरी पुरी में ही रुके थे और चारों द्वार खोलने के समय सभी वहां मंदिर में उपस्थित रहेंगे।

‘धान का MSP बढ़कर 3100 रुपये प्रति कुंतल होगा’

माझी ने कहा कि राज्य सरकार धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर 3100 रुपये प्रति क्विंटल करने के लिए भी कदम उठाएगी और संबंधित विभाग को इसके लिए समाधान निकालने के लिए कहा गया है। इसके अलावा एमएसपी सहित किसानों की समस्याओं से निपटने के लिए एक विशेष नीति "समृद्ध कृषक नीति योजना" बनाई जाएगी।


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अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में लगे खालिस्तानी नारे, भिंडरावाले के पोस्टर भी लहराए

ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) की 40वीं बरसी पर अमृतसर में सिख समुदाय के लोगों ने खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। श्री अकाल तख्त साहिब के बाहर तलवारें भी लहराई गईं। खालिस्तान समर्थन में नारे लगाने के साथ लोगों ने जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर लगे पोस्टर भी लहराए।

ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर श्री अकाल तख्त साहिब पर ऑपरेशन में मारे जाने वाले सिखों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। श्री अखंड पाठ के भोग के बाद आयोजित अरदास में 1984 में उसे समय की सरकार द्वारा करवाए गए ऑपरेशन के लिए कांग्रेस पार्टी की निंदा की गई है।

अरदास में कहा गया है कि सिख कौम इस घटना को कभी भी नहीं भुला सकती है। सिखों के जख्म सदैव रिसते रहेंगे।

पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

दूसरी तरफ ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी को लेकर श्री हरि मंदिर साहिब से लेकर पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। श्री हरि मंदिर साहिब में सादे कपड़ों में पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए हैं। सुरक्षाबलों की तैनाती के साथ बैरिकेडिंग की गई है। किसी भी अप्रिय घटना पर नजर रखी जाएगी।

ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर कई नेता भी रहे मौजूद

समागम में श्री अकालतख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह , फरीदकोट से सांसद सरबजीत सिंह खालसा, पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान, बलजीत सिंह दादूवाल सहित भारी संख्या में गरम गरमख्याली संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद हैं।

ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर सरबजीत सिंह ने कही ये बात

फरीदकोट से नवनियुक्त सांसद सरबजीत सिंह खालसा ने श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी की रोकथाम के लिए संसद में सख्त कानून बनाए जाने की वकालत की है। ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर श्री अकाल तख्त पर आयोजित समारोह में भाग लेने पहुंचे सरबजीत सिंह ने कहा कि देश के कानून में संशोधित करते हुए बेअदबी करने के आरोपित के खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा 302 के तहत केस दर्ज किया जाना चाहिए।

इसी धारा के तहत आरोपितों के खिलाफ मौत की सजा का प्रावधान होना चाहिए। बकौल सरबजीत, वह इस संदर्भ में संसद में आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को बंदी सिखों की अविलंब रिहाई करनी चाहिए।

अमृतपाल सिंह को सांसद बनने पर दी बधाई

अमृतपाल सिंह को एमपी बनने पर बधाई देते हुए सरबजीत सिंह ने कहा कि अब राज्य सरकार को अमृतपाल की रिहाई के लिए खुद ही पहल कदमी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डिब्रूगढ़ एवं अन्य जेल में नजरबंद बंदी सिखों को भी रिहा किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वह सिख कौम की आवाज बनकर संसद में बंदी सिखों की रिहाई में अन्य पंथक मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद करेंगे। उन्होंने युवाओं से अपने सिर के बाल यानी केशों को कत्ल ना करने की जोरदार अपील भी की है।


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रामलला पर भी गर्मी का असर, पहनाए जा रहे ये वस्त्र, फूल बिछाकर हो रही आरती, लगा रहा ये भोग

उत्तर भारत में पड़ रही प्रचंड गर्मी में रामलला के भी दिनचर्या में बदलाव करते हुए गर्मी में राहत देने वाला खाना और राहत देने वाला वस्त्र पहनाया जा रहा है. उत्तर भारत में इस वक्त नौतपा के कारण तापमान 40 डिग्री के ऊपर लगातार बना हुआ है.  ऐसे में अयोध्या में रामनगरी के मंदिर में विराजमान भगवान की दिनचर्या भी बदल गई है. राम मंदिर में विराजमान बालक राम के राग-भोग में बदलाव कर दिया गया है.

रामलला को भोग में दही और फलों का जूस दिया जा रहा है. उनकी शीतल आरती हो रही है. उन्हें सूती वस्त्र के कपड़े पहनाए जा रहे हैं. अयोध्या में बने राम मंदिर में रामलाल 5 वर्ष के बालक के रूप में विराजमान है. इसलिए उन्हें ठंडी और गर्मी से बचने के लिए विशेष इंतजाम किया जाता है. इस वक्त नौतपा चलने के कारण रामलला को भोग में शीतल व्यंजन दिए जा रहे हैं और उन्हें सूती वस्त्र के कपड़े पहनाए जा रहे हैं. 

लगता है इन फलों का भोग

रामलला की पहले सुबह सिर्फ दीपों से आरती होती थी पर अब प्रचंड गर्मी के चलते चांदी की थाली में चारों तरफ फूल बिछाकर उनकी आरती की जाती है. इसके साथ ही सुबह और शाम के भोग में उन्हें दही दी जाती है. इसके अलावा दोपहर में उन्हें फलों का जूस और लस्सी का भोग लगता है. उनके भोग में मौसमी फल भी शामिल किए जाते हैं.

अयोध्या में प्रभु श्री रामलला का भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण इसी साल जनवरी में हुआ था. भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को हुई है. जिसके बाद यह पहले गर्मी है जो बालक राम को इस बार झेलनी पड़ रही है. इस कारण मंदिर ट्रस्ट ने बालक राम को गर्मी से बचाने के लिए और उन्हें ठंडा रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं.


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आस्था पथ से होकर बाबा के दर्शन को पहुंच रहे भक्त, अब तक एक लाख से अधिक यात्रियों ने नवाया शीश

केदारनाथ धाम में प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल आस्था पथ से होकर यात्री बाबा केदार के मंदिर में दर्शनों को पहुंच रहे हैं। यात्रियों की भारी भीड़ के बावजूद बिना भगदड़ के यात्री आसानी से आस्था पथ से मंदिर तक पहुंच रहे हैं, और बाबा के दर्शन के पश्चात मुख्य मार्ग से वापस लौट रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट

केदारनाथ आपदा वर्ष 2013 के बाद से धाम मे हो रहे पुर्ननिर्माण कार्यो के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत आस्था पथ का निर्माण कार्य शुरू किया गया था, यह आस्था पथ मंदाकिनी नदी के किनारे से होते हुए सीधे मंदिर तक लगभग चार सौ मीटर लंबा मार्ग है।

इस बार श्रद्धालु हाट बाजार के पीछे बने सरस्वती नदी पर बने आस्था पथ से होकर सरस्वती व मंदाकिनी नदी के संगम पर पहुंच रहे हैं और यहां से मंदाकिनी नदी से सट कर बने आस्था पथ से होकर मंदिर पहुंच रहे हैं। आस्था पथ पर श्रद्धालुओं के लिए रेन शेल्टर भी बनाया गया है। बारिश में यात्री इन रेन शेल्टर से भीगने से बच रहे हैं।

एक लाख से अधिक यात्री दर्शन को पहुंच चुके

वहीं केदारनाथ धाम में चार दिनों में एक लाख से अधिक यात्री दर्शन को पहुंच चुके हैं। गत वर्ष की बात करें तो चार दिन में नब्बे हजार यात्री दर्शनों को पहुंचे थे। इस बार दस हजार यात्री अधिक पहुंचे हैं और आने वाले दिनों में ओर अधिक यात्री दर्शन को पहुंचेंगे।

बदरी केदार मंदिर समिति के कार्याधिकारी आरसी तिवारी ने बताया कि यात्रियों की संख्या काफी अधिक है। चार दिन में एक लाख से अधिक यात्री दर्शन को पहुंच चुके हैं। यात्री आस्था पथ से होकर मंदिर में पहुंच रहे हैं। बारिश होने पर आस्था पथ में लगे रेन शेल्टर से काफी राहत मिल रही है। धूप व बारिश से यात्री बच रहे हैं।

चमोली, रुद्रप्रयाग व उत्तरकाशी में यात्रा मजिस्ट्रेट तैनात

चारधाम यात्रा के सुव्यवस्थित संचालन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन ने चमोली, रुद्रप्रयाग एवं उत्तरकाशी में एक-एक यात्रा मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी है। इनकी तैनाती के आदेश गढ़वाल आयुक्त के स्तर से जारी किए गए हैं। जिन अधिकारियों को यात्रा मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें प्रतीक जैन (चमोली), अभिषेक त्रिपाठी (उत्तरकाशी) व अंशुल सिंह (रुद्रप्रयाग) शामिल हैं।

इन्हें जिलाधिकारी कार्य का आवंटन करेंगे। आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पांडेय ने बताया कि सुगम और सुरक्षित चारधाम यात्रा के संचालन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सोमवार को उच्च अधिकारियों की एक बैठक हुई, जिसमें कई अहम निर्णय लिए गए।

सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने बताया कि चार धाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए यह भी निर्णय लिया गया कि बुधवार और गुरुवार को यात्रा के लिए पंजीकरण नहीं किए जाएंगे। पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने जानकारी दी कि बैठक में प्रत्येक जिले में सौ-सौ अतिरिक्त होम गार्ड भी दिए जाएंगे, जबकि उत्तरकाशी में एक अतिरिक्त पुलिस क्षेत्राधिकारी की तैनाती की जाएगी। बैठक में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आरके सुधांशु भी उपस्थित थे।

तीर्थयात्रियों की बस खराब, दूसरी बस मंगाई

रुद्रप्रयाग: केदारनाथ धाम के दर्शनों को जा रहे तीर्थयात्रियों की बस खराब होने पर जिला प्रशासन ने तत्काल दूसरी बस उपलब्ध कराई। तथा यात्रियों को सीतापुर तक पहुंचने की व्यवस्था की। केदारनाथ यात्रा में तीर्थयात्रियों को कोई असुविधा एवं परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन की टीमें संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।

सेक्टर अधिकारी अगस्तमुनि कुंड ने बताया कि ऋषिकेश से सीतापुर तीर्थयात्रियों को लेकर जा रही जा रही परिवहन निगम की बस अचानक बांसवाड़ा के पास खराब हो गई। जिसमें उत्तरप्रदेश व अन्य स्थानों के 43 यात्री बस में सवार थे। तीर्थयात्रियों को कोई असुविधा एवं परेशानी न हो तत्काल दूसरी बस की व्यवस्था की गई। तीर्थयात्रियों को उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया।


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चार धाम यात्रा शुरू, केदारनाथ-यमुनोत्री के कपाट खुले

उत्तराखंड की चार धाम यात्रा आज से शुरू हो गई है। केदारनाथ के कपाट सुबह 6:55 बजे और यमुनोत्री के कपाट सुबह 10:29 बजे खोले गए। दोपहर 12:25 बजे गंगोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे। जबकि बद्रीनाथ मंदिर में दर्शन 12 मई से होंगे।

केदारनाथ के कपाट खुलने के बाद CM पुष्कर सिंह धामी अपनी पत्नी के साथ दर्शन के लिए पहुंचे। यहां पहले ही दिन हजारों लोगों की भीड़ के कारण अव्यवस्था देखने को मिली।

इन चारों धामों पर दिन का तापमान 0 से 3 डिग्री दर्ज किया जा रहा है। वहीं, रात में पारा माइनस में पहुंच रहा है। इसके बावजूद केदारनाथ धाम से 16 किमी पहले गौरीकुंड में करीब 10 हजार श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

पिछले साल यह आंकड़ा 7 से 8 हजार के बीच था। यहां करीब 1500 कमरे हैं, जो भरे हुए हैं। रजिस्टर्ड 5,545 खच्चर बुक हो चुके हैं।

हरिद्वार और ऋषिकेश में 15 हजार से ज्यादा यात्री पहुंच चुके हैं। चार धाम यात्रा के लिए अब तक 22.15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं। पिछले साल रिकॉर्ड 55 लाख लोगों ने दर्शन किए थे।

केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजयेंद्र अजय के मुताबिक 9 मई की शाम 4 बजे जब बाबा की पंचमुखी डोली केदारधाम पहुंची, उस वक्त 5 हजार लोग मौजूद थे।

उधर, कल दोपहर 12 बजे मां गंगा की डोली शीत कालीन प्रवास मुखवा से गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई थी। डोली भैरवघाटी रात्रि विश्राम के लिए रुकी थी। आज सुबह 6:30 बजे डोली धाम के लिए फिर रवाना हुई है। यहां कपाट 12:25 बजे खुलेगी।

पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या सीमित, केदारनाथ में रोज 15 हजार ही दर्शन कर पाएंगे

पिछले साल रिकॉर्ड 55 लाख लोग पहुंचने से व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई थीं। इसी से सबक लेते हुए उत्तराखंड पुलिस और पर्यटन विभाग ने पहली बार चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं की प्रतिदिन की संख्या सीमित कर दी है। पिछले साल चारों धामों में रोजाना 60 हजार से अधिक तीर्थयात्री दर्शन के लिए पहुंचे रहे थे।

पर्यटन सचिव सचिन कुर्वे के मुताबिक एक दिन में 15 हजार श्रद्धालु केदारनाथ धाम, 16 हजार लोग बद्रीनाथ धाम, 9 हजार श्रद्धालु यमुनोत्री तो 11 हजार लोग गंगोत्री में दर्शन कर सकेंगे। यानी चारों धाम में रोजाना 51 हजार लोग दर्शन करेंगे। 

सबसे खास- आम दर्शन से 6 घंटे पहले गर्भगृह में जाते हैं मुख्य पुजारी

केदारनाथ धाम के संत अविराम दास महाराज ने बताया कि हर साल पट खुलने से पहले रात 12 बजे मुख्य रावल 5-6 वेदपाठी ब्राह्मणों के साथ मंदिर में प्रवेश करते हैं। मंदिर बाहर से बंद कर दिया जाता है। फिर गर्भगृह में पंचमुखी विगृह से मंत्रों के द्वारा ज्योतिर्लिंग में प्राण पुन: स्थापित किए जाते हैं। गर्भगृह की साफ-सफाई होती है। भगवान की षोडशोपचार पूजा के बाद कपाट आम दर्शन के लिए खोले जाते हैं।

400 डॉक्टर तैनात, इनमें 256 एक्सपर्ट

पहली बार चार धाम यात्रा मार्ग पर 400 से ज्यादा डॉक्टरों की तैनाती। इनमें 256 इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। फिर भी श्रद्धालु यात्रा में कम से कम 7 दिन का प्लान बनाकर आएं, ताकि घटते-बढ़ते तापमान में शरीर ढलता रहे।

उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी में कहा है कि चारों धाम 3 हजार मीटर से ऊपर हैं और पहाड़ों पर रुक-रुककर बर्फबारी हो रही है। इसलिए श्रद्धालु 7 दिन का प्लान बनाकर निकलें।

केदारनाथ तक सुपरफास्ट नेटवर्क

केदारनाथ के पूरे ट्रैक पर 4जी और 5जी नेटवर्क मिलेगा। इसके लिए 4 टावर लगाए हैं। पिछले साल इस ट्रैक पर कुछ ही जगह नेटवर्क मिल पाता था। मंदिर पर वाई-फाई का उपयोग करना हो तो सरकारी पर्ची कटवानी पड़ती थी, लेकिन अब वहां भी सुपरफास्ट नेटवर्क रहेगा।

दो धामों में ऑनलाइन पूजा बुकिंग 30 जून तक

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह के मुताबिक ऑनलाइन पूजा इस बार 30 जून तक ही होगी। इसमें श्रीमदभागवत पाठ के लिए 51 हजार रु. तो महाभिषेक के लिए 12 हजार रु. तय हुए हैं।

इन मंदिरों के भी खुलेंगे कपाट

बदरीनाथ धाम के कपाट 12 मई को सुबह 6 बजे खुलेंगे।

सिखों के पवित्र धाम हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई को खुलेंगे।

द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वरजी के कपाट 20 मई को खुलेंगे।

तृतीय केदार तुंगनाथ जी के कपाट 10 मई को खुलेंगे।

पंच बदरी में प्रसिद्ध भविष्य बद्री के कपाट 12 मई को खुल रहे हैं।

चारधाम यात्रा में पहली बार ले जा सकेंगे चार्टर्ड हेलिकॉप्टर, किराया 1.95 लाख

उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के CEO सी. रविशंकर के मुताबिक पहली बार चारधाम के लिए चार्टर्ड हेलिकॉप्टर सेवा शुरू हो रही है। इसमें 4 लोग एक धाम की यात्रा साढ़े तीन लाख रु. में कर सकते हैं। यदि चारों धाम के लिए चार्टर्ड हेलिकॉप्टर लेते हैं तो प्रति व्यक्ति 1.95 लाख देने होंगे। किराए में आना-जाना, रुकना, खाना शामिल है। हेलिकॉप्टर भी वहीं रहेगा। एक ही दिन में वापसी का रेट 1.05 लाख रु. रहेगा। 


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अयोध्या में आज 3 मिनट तक रामलला का सूर्य तिलक

रामनवमी पर अयोध्या में विराजमान रामलला का सूर्य तिलक होगा। 3 मिनट तक रामलला के मस्तक पर सूर्य किरणें पड़ेंगी। इसके लिए बेंगलुरु की कंपनी ने अष्टधातु के 20 पाइप से यह सिस्टम तैयार किया है। कंपनी ने 1.20 करोड़ का ये सिस्टम मंदिर को डोनेट किया है।

65 फीट लंबाई के इस सिस्टम में अष्टधातु के 20 पाइप लगाए गए हैं। हर पाइप की लंबाई करीब 1 मीटर है। इन पाइप को फर्स्ट फ्लोर की सीलिंग से जोड़ते हुए मंदिर के अंदर लाया गया है। गर्म किरणें रामलला के मस्तक पर न पड़े, इसलिए फिल्टर का इस्तेमाल किया गया है।

सूर्य तिलक में लगने वाले पाइप से लेकर मिरर तक, सभी चीजें बेंगलुरु की कंपनी ऑप्टिक्स एंड एलाइड इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (ऑप्टिका) ने तैयार की हैं। सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की (CBRI) ने इसे डिजाइन किया है।

वहीं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स बेंगलुरु (IIA) ने पाइप, मिरर और फिल्टर को फिट किया है। इसकी लागत 1.20 करोड़ रुपए आई है। ऑप्टिका कंपनी के मालिक ने इसके लिए एक भी पैसा नहीं लिया है।

हर साल रामनवमी पर सूर्य किरणें रामलला का अभिषेक करेंगी। साल 2043 तक इसकी टाइमिंग भी बढ़ेगी। 2043 में 2024 की टाइमिंग को रिपीट किया जाएगा।रामनवमी पर अयोध्या में विराजमान रामलला का सूर्य तिलक होगा। 3 मिनट तक रामलला के मस्तक पर सूर्य किरणें पड़ेंगी। इसके लिए बेंगलुरु की कंपनी ने अष्टधातु के 20 पाइप से यह सिस्टम तैयार किया है। कंपनी ने 1.20 करोड़ का ये सिस्टम मंदिर को डोनेट किया है।

65 फीट लंबाई के इस सिस्टम में अष्टधातु के 20 पाइप लगाए गए हैं। हर पाइप की लंबाई करीब 1 मीटर है। इन पाइप को फर्स्ट फ्लोर की सीलिंग से जोड़ते हुए मंदिर के अंदर लाया गया है। गर्म किरणें रामलला के मस्तक पर न पड़े, इसलिए फिल्टर का इस्तेमाल किया गया है।

सूर्य तिलक में लगने वाले पाइप से लेकर मिरर तक, सभी चीजें बेंगलुरु की कंपनी ऑप्टिक्स एंड एलाइड इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (ऑप्टिका) ने तैयार की हैं। सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की (CBRI) ने इसे डिजाइन किया है।

वहीं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स बेंगलुरु (IIA) ने पाइप, मिरर और फिल्टर को फिट किया है। इसकी लागत 1.20 करोड़ रुपए आई है। ऑप्टिका कंपनी के मालिक ने इसके लिए एक भी पैसा नहीं लिया है।

हर साल रामनवमी पर सूर्य किरणें रामलला का अभिषेक करेंगी। साल 2043 तक इसकी टाइमिंग भी बढ़ेगी। 2043 में 2024 की टाइमिंग को रिपीट किया जाएगा।

CBRI के साइंटिस्ट ने नाम न छापने की शर्त पर  बताया कि IIA बेंगलुरु की टीम के साथ मिलकर हमने इसे डिजाइन किया है। इसमें 4 मिरर और 4 लेंस का प्रयोग किया गया है। ये सभी हाई क्वालिटी की क्षमता वाले और बेहद कीमती हैं।

रामलला की मूर्ति का मुंह पूर्व दिशा में है। इसलिए इसे ऐसे लगाया गया है कि इसके ठीक उल्टी दिशा से किरणें मूर्ति की ओर रिफ्लेक्ट हो सकें। मंदिर के फर्स्ट फ्लोर की सीलिंग के ऊपर मिरर सेट किया गया है, जिस पर सूर्य की किरणें पड़ेंगी। वहां इससे जोड़ते हुए पाइप लगाए गए हैं।

हर मोड़ पर एक लेंस, ताकि किरणें आगे रिफ्लेक्ट होती रहें

पाइप को मंदिर की दीवार के पीछे इस तरह से सेट किया गया है कि वह किसी को दिखाई न दें। फिर एपर्चर के सहारे अन्य पाइप को जोड़ते हुए अंदर लाया गया है। हर मोड़ पर एक लेंस और दर्पण लगाया गया है, ताकि सूर्य की किरणें रिफ्लेक्ट होते हुए आगे बढ़ें।

भगवान की प्रतिमा के सामने भी पाइप को इस तरह फिट किया गया है कि वह किसी को दिखे नहीं। पाइप के अंतिम छोर पर भी एक दर्पण और लेंस का इस्तेमाल किया गया है। इनके जरिए ही सूर्य की किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी। इस पूरी डिजाइन में साइंटिफिक रीजन के साथ-साथ धार्मिक मान्यताओं का भी ख्याल रखा गया है।

दरअसल, मंदिर में मौजूद पुजारियों ने हमें बताया था कि लोहे के पाइप से सूर्य की किरणों का आना धार्मिक कारणों से ठीक नहीं था। इसलिए हमारी टीम ने कांच के अलावा, जहां भी अष्टधातु का इस्तेमाल करना था, वहां सिर्फ अष्टधातु का इस्तेमाल किया है।

इसमें अष्टधातु की 1 मीटर लंबाई वाली 20 पाइप का इस्तेमाल हुआ है। पाइप को फर्स्ट फ्लोर की सीलिंग से जोड़ते हुए अंदर लाया गया है। हर पाइप की लंबाई 1 मीटर है। मोटाई 3 MM और डायमीटर एरिया 200 MM का है।

गर्म किरणों को रोकने के लिए लगाए गए IR फिल्टर

CBRI के साइंटिस्ट ने बताया कि IR फिल्टर ग्लास का इस्तेमाल भी किया गया है, ताकि सूर्य की गर्म किरणें रामलला के मस्तक पर न पड़ें। इस ग्लास से सूरज की किरणों का तापमान 50 फीसदी तक कम हो जाता है। इसमें लगे दर्पण और लेंस की साइज 1 फीट से थोड़ा कम है। कहां कौन सी चीजें लगनी हैं? इसकी फिटिंग IIA बेंगलुरु ने की है।

टेस्टिंग में CBRI रुड़की, IIA बेंगलुरु के अलावा कंपनी के इंजीनियर और कर्मचारी भी लगे हुए हैं। इन तीनों संस्थानों के सहयोग से इस सिस्टम को अंतिम रूप दिया गया है। CBRI के साइंटिस्ट ने बताया कि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली रामनवमी को बेहद खास बनाने के लिए सूर्य तिलक की प्लानिंग की थी।

बेंगलुरु की ऑप्टिका कंपनी से बातचीत के बाद हमने पहले अपने संस्थान में इसकी एक टेस्टिंग की। इसमें हमने भारतीय खगोलीय भौतिकी संस्थान बेंगलुरु (IIA) के वैज्ञानिकों की मदद ली। वहां पर प्रयोग सफल रहा। इसके बाद हमने राम मंदिर में फिटिंग का काम शुरू किया।

2043 तक हर साल बढ़ेगी सूर्य तिलक की टाइमिंग

CBRI के साइंटिस्ट ने बताया कि भारतीय खगोलीय भौतिकी संस्थान बेंगलुरु (IIA) के रिसर्च के मुताबिक, हर साल सूर्य तिलक का टाइम ड्यूरेशन बढ़ता जाएगा। 19 साल तक टाइम कुछ न कुछ बढ़ेगा। उसके बाद फिर से इसी रामनवमी की तरह ही रिपीट होगा। यानी 2024 रामनवमी को सूर्य तिलक जितनी देर का होगा, 19 साल बाद 2043 में उतनी ही देर के लिए सूर्य तिलक होगा। दरअसल, साल दर साल सूर्य ज्यादा देर तक निकलता है। फिर 19 साल बाद पहले की अवस्था में आ जाता है।

अब कोई मेंटेनेंस खर्च नहीं, ऑपरेटिंग आसान

CBRI के साइंटिस्ट ने बताया कि इसमें इस्तेमाल किया गया सारा सामान बहुत महंगा और अच्छी क्वालिटी का है। सालों साल ये खराब नहीं होगा। फिलहाल, इसे स्थायी रूप से लगाया गया है। इसका इस्तेमाल हर रामनवमी पर किया जाएगा। राम मंदिर में अभी निर्माण कार्य चल रहा है। तीसरे फ्लोर का काम खत्म होने के बाद एक बार फिर से इसे वहां शिफ्ट करना होगा।

उस टाइम कुछ सामान बढ़ाने पड़ सकते हैं। जैसे पाइप, मिरर और लेंस। हालांकि इसे हर साल इस्तेमाल करने के लिए कोई बड़ा मैकेनिज्म लगाने की जरूरत नहीं है। उसमें इस हिसाब से सारी चीजें सेट हैं। इसकी ऑपरेटिंग भी आसान है। यही वजह है कि मंदिर के पुजारी स्टाफ बाद में इसे ऑपरेट कर सकेंगे। बाकी कुछ लोगों को ट्रेंड भी किया जाना है।

अब बात सूर्य तिलक की धार्मिक मान्यता की

रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने तुलसीदास की एक चौपाई सुनाई,

''मास दिवस कर दिवस भा मरम न जानइ कोइ। रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन बिधि होइ।''

अर्थात मान्यता है कि जब भगवान राम का जन्म हुआ था, तो भगवान सूर्य इतने खुश हुए कि अपने रथ सहित अयोध्या आए और यहां पूरे एक महीने तक रुक गए। इससे अयोध्या में एक महीने तक रात ही नहीं हुई। यानी एक दिन एक माह के बराबर हो गया।

आचार्य सत्येन्द्र दास कहते हैं, ''भगवान राम सूर्यवंशी कुल के थे। सूर्य उनके कुल में मस्तक पर तिलक के रूप में लगाया जाता था। सूर्य उनके कुल का प्रतीक भी हैं और पूर्वज भी। ऐसे में जब 500 सालों बाद भगवान राम का भव्य मंदिर बना है, तो रामनवमी भी भव्यतम होनी चाहिए। सूर्य तिलक वैज्ञानिक तकनीक से हो रहा है, ये और अच्छा है।

सूर्य तिलक के साथ ही रामलला को सुनाया जाएगा सोहर

राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि सैकड़ों साल के संघर्ष के बाद प्रभु राम का भव्य मंदिर बन कर तैयार हुआ है। भगवान राम सूर्यवंशी थे, तो पूर्वज का आशीर्वाद प्राप्त होना ही चाहिए। इसलिए वैज्ञानिक पद्धति से सूर्य तिलक किया जाएगा। साल भर से इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही थी, ये भगवान राम का आशीर्वाद है कि रामनवमी को उनका सूर्य तिलक होगा।

इसका परीक्षण भी एक दिन पहले किया जा चुका है। रामनवमी के दिन पूर्वांचल में शिशु के जन्म पर गाया जाने वाले सोहर भी रामलला को सुनाया जाएगा। सारी तैयारियां फाइनल स्टेज में हैं।

50 क्विंटल फूलों से सजेगा राम मंदिर

श्रीराम श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामजन्म उत्सव की व्यापक तैयारियां की हैं। रामनवमी पर करीब 50 क्विंटल देसी-विदेशी फूलों से राम मंदिर और पूरे परिसर को सजाया जाएगा। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया, राम मंदिर के गर्भ ग्रह के अतिरिक्त सभी पांचों मंडपों रंग मंडप, नृत्य मंडप, गूढ़ी मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप समेत बाहरी दीवारों व शिखर, सीडीओ, परकोट के भागों को फूलों से सजाया जाएगा। इसमें देसी-विदेशी करीब 20 प्रकार से अधिक फूल इस्तेमाल किए जाएंगे।

फूल बेंगलुरु और दिल्ली से मंगाए गए हैं। राम मंदिर के साथ ही कनक भवन और हनुमानगढ़ी को भी फूलों से सजाया जाएगा। रामलला की भव्य पोशाक और दिव्य आभूषण के अलावा पूरे मंदिर और 70 एकड़ परिसर को सुगंधित फूलों से सजाया जाएगा।

हेलिकॉप्टर से बरसाए जाएंगे फूल

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन जिस तरह हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई थी, उसी तरह रामनवमी पर यानी 17 अप्रैल को भी पुष्प वर्षा की जाएगी। इसके लिए भी तैयारी चल रही है। हेलिकॉप्टर से गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा राम भक्तों पर की जाएगी।




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रामलला के सूर्य तिलक का ट्रायल

अयोध्या में शुक्रवार को राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के सूर्य तिलक का सफल ट्रायल किया गया। दर्पण के जरिए भगवान के मस्तक पर सूर्य की किरण डाली गई।

राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने बताया कि वैज्ञानिकों की मौजूदगी में शुक्रवार दोपहर 12 बजे सूर्य तिलक किया गया। इस सूर्य तिलक के एक मिनट 19 सेकेंड के वीडियो में रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास आरती उतार रहे हैं। इसी बीच सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर तिलक करती हैं।

17 अप्रैल को रामनवमी के मौके पर दोपहर ठीक 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया जाएगा।

सूर्य तिलक के ट्रायल का विजुअल...

मुख्य पुजारी बोले- राज जन्म पर एक महीने अयोध्या में रुके थे सूर्य

आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि सूर्य तिलक का दृश्य अद्भुत था। वैज्ञानिकों ने जिस तरह से प्रयास किया, वह बहुत सराहनीय है। त्रेता युग में भी जब प्रभु राम ने जन्म लिया थे तो उस दौरान सूर्य देव 1 महीने तक अयोध्या में रुके थे। त्रेता युग का वह दृश्य अब कलयुग में भी साकार हो रहा है।

CBRI ने बनाया सूर्य तिलक का सिस्टम

IIT रुड़की के सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) ने यह सिस्टम बनाया है। प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक देवदत्त घोष के मुताबिक, यह सूर्य के पथ बदलने के सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें एक रिफ्लेक्टर, 2 दर्पण, 3 लेंस, पीतल पाइप से किरणें मस्तक तक पहुंचाई गईं।

CBRI के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप चौहान ने बताया कि रामनवमी की तारीख चंद्र कैलेंडर से तय होती है। सूर्य तिलक तय समय पर हो, इसीलिए सिस्टम में 19 गियर लगाए गए हैं, जो सेकंड्स में दर्पण और लेंस पर किरणों की चाल बदलेंगे। बेंगलुरु की कंपनी ऑप्टिका ने लेंस और पीतल के पाइप बनाए हैं। प्रोजेक्ट में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स भी शामिल है।.

50 क्विंटल फूलों से सजेगी राम जन्मभूमि, हेलिकॉप्टर से बरसाएंगे फूल

रामनवमी पर करीब 50 क्विंटल फूलों से राम मंदिर और 70 एकड़ में फैले परिसर को सजाया जाएगा। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बतयाा कि देश और विदेश के करीब 20 प्रकार से फूल इस्तेमाल किए जाएंगे।

फूल बेंगलुरु और दिल्ली से मंगाए गए हैं। राम मंदिर के साथ ही कनक भवन और हनुमानगढ़ी को भी फूलों से सजाया जाएगा।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन जिस तरह हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई थी, उसी तरह रामनवमी पर हेलिकॉप्टर से गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा राम भक्तों पर की जाएगी।


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तमिलनाडु के बन्नारी अम्मन मंदिर में कुंडम उत्सव मनाया गया

तमिलनाडु में मनाएं जानेवाले सभी त्योहार अद्भुत होते है और सभी त्योहार भगवान से जुड़े ही होते है। इसी क्रम में तमिलनाडु के बन्नारी अम्मन मंदिर में कुंडम उत्सव मनाया गया। यह मासी महीने के आखिरी मंगलवार को मनाया जाता है जिसमें देवी बन्नारी हैं की पूजा की जाती है। बन्नारी देवी को बारिश की देवी और देवी शक्ति के अवतार के रूप में माना जाता है।

इस उत्सव मने भक्त इसमें भक्त दहकते अंगारों पर चलते हैं। मान्यता है की ऐसे करने से उनकी मन्नतें पूरी होती हैं। अंगारों पर चलने की रस्म सैकड़ों साल पुरानी है। देवी बन्नारी का तमिल,कन्नड़ लोककथाओं में बहुत महत्व है


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