उपराष्ट्रपति-कानून मंत्री के खिलाफ बॉम्बे HC में PIL दाखिल

बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में PIL दाखिल की है। याचिका में दावा किया गया है कि धनखड़ और रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को कम किया है। ऐसे में दोनों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोका जाए।

याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट यह भी घोषित करे कि दोनों के बयानों में भारत के संविधान के प्रति अविश्वास दिखता है, जिसके चलते वे संवैधानिक पदों पर रहने के योग्य नहीं हैं। बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अहमद आबिदी की ओर से यह याचिका कोर्ट में दाखिल की गई है। जल्द ही हाई कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगी।

सिस्टम पर सवाल उठा चुके हैं कानून मंत्री
दरअसल, किरेन रिजिजू कई बार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने सीजेआई को लेटर लिखकर कॉलेजियम में सरकार का प्रतिनिधि शामिल करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और जनता के प्रति जवाबदेही भी तय होगी।

किरण रिजिजू ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि कॉलेजियम सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। उन्होंने कहा था कि हाईकोर्ट में भी जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

उपराष्ट्रपति ने SC के फैसले पर दिया था बयान
वहीं, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1973 के ऐतिहासिक फैसले पर सवाल उठाए थे। इसके साथ ही दिसंबर 2022 में धनखड़ ने NJAC अधिनियम रद्द होने पर उसे लोगों के जनादेश की अवहेलना कहा था। फैसले में कोर्ट की टिप्पणी पर धनखड़ ने कहा था कि “क्या हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं” इस सवाल का जवाब देना मुश्किल होगा। 


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RBI ने बैंकों से पूछा-अडाणी ग्रुप को कितना कर्ज दिया

नई दिल्ली: अडाणी ग्रुप पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को लेकर गुरुवार को संसद में जमकर हंगामा हुआ। पूरे विपक्ष ने अडाणी ग्रुप के वित्तीय लेनदेन की जांच संसदीय पैनल (JPC) या सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से कराने की मांग की। इस मुद्दे पर हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा को कार्यवाही शुरू होते ही पहले दोपहर 2 बजे तक और फिर अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

इधर, RBI ने सभी बैंकों से अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को दिए कर्ज की जानकारी मांगी है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि RBI के अफसरों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी है। वहीं, शेयर मार्केट में भी अडाणी ग्रुप के शेयर्स में 10% तक की गिरावट देखी गई।

अडाणी खुद सामने आए, VIDEO मैसेज में FPO रद्द करने की बात कही
बुधवार देर रात अडाणी ग्रुप ने 20 हजार करोड़ रुपए के फुली सबस्क्राइब्ड FPO को रद्द कर इन्वेस्टर्स का पैसा लौटाने की बात कही थी। बुधवार को अडाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 26.70% गिरकर 2179.75 पर बंद हुआ था। इस गिरावट को ही FPO वापस लेने की वजह माना जा रहा है।

गौतम अडाणी ने FPO रद्द करने के बाद एक वीडियो मैसेज दिया। इसमें इन्वेस्टर्स का शुक्रिया अदा किया। कहा, 'पिछले हफ्ते स्टॉक में हुए उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी के बिजनेस और उसके मैनेजमेंट में आपका भरोसा हमारे लिए आश्वासन देने वाला है। मेरे लिए मेरे निवेशकों का हित सर्वोपरि है। बाकी सब कुछ सेकेंडरी है। इसलिए निवेशकों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए हमने FPO वापस ले लिया है। बोर्ड ने महसूस किया कि FPO के साथ आगे बढ़ना नैतिक रूप से सही नहीं होगा।'

13 विपक्षी पार्टियों ने कहा- हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर संसद में चर्चा हो

अडाणी ग्रुप पर हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों को लेकर कांग्रेस, TMC, आम आदमी पार्टी, सपा, DMK, जनता दल और लेफ्ट समेत 13 विपक्षी पार्टियों ने मीटिंग की। यह बैठक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चैंबर में हुई। इनमें से 9 पार्टियों ने राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लोगों की मेहनत का पैसा बर्बाद हो रहा है। लोगों का विश्वास बैंक और LIC से उठ जाएगा। कुछ कंपनियों के शेयर लगातार गिरते जा रहे हैं। सभी पार्टियों के नेताओं ने मिलकर एक फैसला लिया है कि आर्थिक दृष्टि से देश में जो घटनाएं हो रही हैं उसे सदन में उठाना है, इसलिए हमने एक नोटिस दिया था। हम इस नोटिस पर चर्चा चाहते थे, लेकिन जब भी हम नोटिस देते हैं तो उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है।

इस मामले से जुड़े अपडेट्स...

  • AAP सांसद संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने गौतम अडाणी का पासपोर्ट जब्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी, ED और CBI को एक लेटर लिखा है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया तो वह भी कई बिजनेसमैन की तरह देश से भाग जाएंगे और देश के करोड़ों लोगों के पास कुछ भी नहीं बचेगा।
  • पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा- अपने कुछ नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए भाजपा बैंक और LIC के पैसे का इस्तेमाल कर रही है।
  • शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा- पूरा विपक्ष दोनों सदनों में हिंडनबर्ग रिपोर्ट और अडाणी के स्टॉक क्रैश होने का मुद्दा उठाएगा।

  • अडाणी ग्रुप ने कहा, भविष्य में होने वाले किसी फाइनेंशियल लॉस से इन्वेस्टर्स को बचाने के लिए बोर्ड ने तय किया है कि इस FPO के साथ आगे नहीं बढ़ेंगे। हम अपने लोगों को रिफंड देने के लिए अपने बुक रनिंग लीड मैनेजर्स (BRLM) के साथ काम कर रहे हैं। हमारी बैलेंस शीट इस समय बहुत मजबूत है। हमारा कैश फ्लो और एसेट सिक्योर है। साथ ही कर्ज चुकाने का हमारा रिकॉर्ड सही रहा है।

    हमारे इस फैसले से हमारे मौजूदा ऑपरेशंस और भविष्य की हमारी योजनाओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हम लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएशन पर फोकस रखना जारी रखेंगे और हमारी ग्रोथ आंतरिक संसाधनों से मैनेज की जाएगी। जैसे ही बाजार स्थिर होगा हमारी कैपिटल मार्केट स्ट्रैटजी का रिव्यू करेंगे। हमें पूरा भरोसा है कि हमें आपका सहयोग मिलता रहेगा। हम पर भरोसा रखने के लिए धन्यवाद।'

    3,112 से 3,276 रुपए था FPO का प्राइस बैंड
    अडाणी ग्रुप का 20,000 करोड़ का FPO 27 जनवरी को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था और 31 जनवरी को बंद हुआ। इसका प्राइस बैंड 3,112-3,276 रुपए प्रति शेयर रखा गया था। कंपनी इन पैसों से मौजूदा कर्ज को कम करने के साथ एक्सपैंशन के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाना चाहती थी।

    FPO क्या होता है?
    FPO यानी फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर। यह कंपनी के लिए पैसे जुटाने का एक तरीका है। जो कंपनी पहले से शेयर मार्केट में लिस्टेड होती है वो निवेशकों के लिए नए शेयर ऑफर करती है। ये शेयर बाजार में मौजूद शेयरों से अलग होते हैं। ज्यादातर ये शेयर प्रमोटर्स जारी करते हैं। FPO का इस्तेमाल कंपनी के इक्विटी बेस में बदलाव करने के लिए होता है।

    IPO और FPO में अंतर क्या है?
    कंपनियां अपने विस्तार के लिए IPO या FPO का इस्तेमाल करती हैं। इनीशियल पब्लिक ऑफर यानी IPO के जरिए कंपनी पहली बार बाजार में अपने शेयर्स उतारती है। जबकि FPO में अतिरिक्त शेयर्स को बाजार में लाया जाता है।

  • हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद पिछले 2 ट्रेडिंग सेशन में अडाणी ग्रुप के स्टॉक्स के इन्वेस्टर्स को भारी नुकसान हुआ है। देश का सबसे बड़ा इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर 'लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया' (LIC) भी उन प्रभावित इन्वेस्टर्स में से एक है। अडाणी ग्रुप के शेयरों में LIC का 24 जनवरी को टोटल इन्वेस्टमेंट 81,268 करोड़ रुपए था, जो 27 जनवरी को गिरकर 62,621 करोड़ रुपए रह गया है। इस हिसाब से LIC को 2 ट्रेडिंग सेशन में करीब 18,646 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

  • बजट के बाद शेयर बाजार फीका, अडाणी एंटरप्राइजेज 26% टूटा

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (1 फरवरी) को बजट पेश किया। ऐसे में बाजार की नजर सरकार की घोषणाओं पर रही। अडाणी ग्रुप के शेयर दबाव में रहे। अडाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 26.70% गिरकर 2,179.75 पर बंद हुआ।
  • गौतम अडाणी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को भारत पर साजिश के तहत हमला बताया है। ग्रुप ने 413 पन्नों का जवाब जारी किया। इसमें लिखा है कि अडाणी समूह पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। ग्रुप ने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट का असल मकसद अमेरिकी कंपनियों के आर्थिक फायदे के लिए नया बाजार तैयार करना है।  
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राहुल ने लाल चौक में तिरंगा फहराया

श्रीनगर:  भारत जोड़ो यात्रा के दौरान रविवार को श्रीनगर के लाल चौक में राहुल गांधी ने तिरंगा फहराया। इससे पहले उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर राष्ट्रगीत गाया। राहुल के साथ उनकी बहन प्रियंका गांधी और कांग्रेस नेता जयराम रमेश मौजद रहे। राहुल तिरंगा फहराने के दौरान भारी तादाद में पुलिस बल तैनात रही। तिरंगा फहराने से पहले ही पूरे इलाके को बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया। आसपास की सभी दुकानें बंद करवा दी गईं।

राहुल गांधी के अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती के शामिल होने की जानकारी है। पंथा चौक से अवामी नेशनल कांफ्रेंस के प्रेसिडेंट मुजफ्फर शाह भी यात्रा में शामिल हुए हैं। आज श्रीनगर के चेश्मा शाही रोड पर यात्रा का हाल्ट होगा और शाम 5:30 बजे राहुल प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

30 जनवरी को राहुल गांधी श्रीनगर के एमए रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय में तिरंगा फहराएंगे और इसके साथ ही यात्रा खत्म हो जाएगी। इसके बाद यहां एसके स्टेडियम में एक जनसभा आयोजित होगी, जिसके लिए 23 विपक्षी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया है।

यात्रा में शामिल हुईं महबूबा मुफ्ती
कांग्रेस की यात्रा में शनिवार को PDP चीफ महबूबा मुफ्ती अपनी बेटी इल्तिजा मुफ्ती के साथ शामिल हुईं। राहुल के साथ उनकी बहन प्रियंका गांधी भी नजर आईं। यात्रा के दौरान राहुल ने पुलवामा में 2019 में बम विस्फोट में शहीद हुए CRPF के 40 जवानों को श्रद्धांजलि दी। 

राहुल की सुरक्षा में चूक को लेकर खड़गे ने शाह को चिट्ठी लिखी
दो दिन पहले शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में राहुल गांधी के सुरक्षा घेरे में कई लोग घुस आए थे। राहुल की सुरक्षा में हुई इस चूक को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 27 जनवरी को गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी। खड़गे ने गृह मंत्री से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की अपील की। साथ ही यात्रा में शामिल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की थी। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने चिट्ठी में क्या लिखा...
खड़गे ने चिट्ठी में लिखा, 'मैं आपको यह चिट्ठी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सुरक्षा में हुई चूक के बारे में लिख रहा हूं। इसके बारे में आपको भी पता होगा। सुरक्षा अधिकारियों की सलाह के बाद शुक्रवार को यात्रा रोक दी गई थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने यात्रा के खत्म होने तक उसे सुरक्षा देने का भरोसा दिया है। मैं उनके इस बयान का स्वागत करता हूं।

इस यात्रा में हर दिन कई लोग शामिल होते हैं। इसीलिए हम कह नहीं सकते कि पूरे दिन में यात्रा में कितने लोग शामिल होंगे। अगले दो दिन यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। वहीं, 30 जनवरी को श्रीनगर में यात्रा खत्म होगी, यहां कई दलों ने नेता भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में अगर आप व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखें और अधिकारियों को सलाह दें तो मैं हमेशा आपका आभारी रहूंगा।'

राहुल के सुरक्षा घेरे में घुस गए थे लोग
शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड में एंट्री के सिर्फ एक किलोमीटर बाद ही राहुल गांधी की सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई थी। यहां राहुल के सुरक्षा घेरे में कई लोग घुस आए थे। इसके बाद पुलिस राहुल गांधी और उमर अब्दुल्ला को गाड़ी में बैठाकर अनंतनाग ले गई थी। अनंतनाग में राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था- यात्रा के दौरान पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई। टनल से निकलने के बाद पुलिसकर्मी नहीं दिखे। मेरे सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि हम और नहीं चल सकते। मुझे अपनी यात्रा रोकनी पड़ी। बाकी लोग यात्रा कर रहे थे। 

सुरक्षा में चूक के बाद तीन बड़े बयान

  • राहुल गांधी: भीड़ को काबू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि हम यात्रा कर सकते। मेरी सुरक्षा में लगे लोगों की सलाह को दरकिनार करना मेरे लिए मुश्किल था।
  • मल्लिकार्जुन खड़गे: राहुल गांधी की सुरक्षा में चूक परेशान करने वाली है। भारत पहले ही दो PM और कई नेताओं को खो चुका है। हम यात्रियों के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग करते हैं।
  • जम्मू-कश्मीर के अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह आरके गोयल: सरकार सुरक्षा के प्रति गंभीर है। भारत जोड़ो यात्रा के लिए सबसे अच्छी और संभव सुरक्षा की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं।
  • केसी वेणुगोपाल ने कहा था- 15 मिनट से कोई सुरक्षा अधिकारी नहीं है
    राहुल गांधी की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पर निशाना साधा। वेणुगोपाल ने सुरक्षा में सेंध के लिए पुलिस अधिकारियों और CRPF के जवानों को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था कि पिछले 15 मिनट से यात्रा के साथ कोई भी सुरक्षा अधिकारी नहीं थे, ये गंभीर चूक है। राहुल और अन्य कार्यकर्ता बिना सुरक्षा के यात्रा में आगे नहीं बढ़ सकते हैं।
  • 30 जनवरी को श्रीनगर में खत्म होगी यात्रा
    भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी। इसने गुरुवार रात को पंजाब से जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया। 30 जनवरी को राहुल गांधी श्रीनगर के कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इसके साथ ही यात्रा समाप्त हो जाएगी। इस दिन रैली में समान विचारधारा वाली पार्टियों के नेता और प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे।
  • जम्मू में कठुआ जिले के हीरानगर से कड़ी सुरक्षा के बीच भारत जोड़ो यात्रा 22 जनवरी को फिर से शुरू हुई। शनिवार (21 जनवरी) को ब्रेक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हीरानगर से सुबह 7 बजे यात्रा रवाना हुई। शनिवार को नरवाल में हुए ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों ने सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है। NIA की टीम जांच के लिए पहुंच गई है। उधर, LG मनोज सिन्हा ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है।
  • जम्मू कश्मीर के रामबन में जोरदार बारिश के बाद भारत जोड़ो यात्रा रद्द कर दी गई थी। लैंडस्लाइड और भारी बारिश के कारण कई सड़कें ब्लॉक हो गईं। इसी वजह से यात्रा का दूसरा चरण रद्द कर दिया गया। मामले की जानकारी कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर दी थी।
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त्रिपुरा में भाजपा ने 6 विधायकों के टिकट काटे

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को भाजपा ने कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी कर दी। पहले चरण में 48 कैंडिडेट्स के नाम की घोषणा की है। पार्टी ने 6 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है। भाजपा ने राज्य से पहली बार 11 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक के भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया गया है। वह धनपत सीट से प्रतिमा चुनाव लड़ेंगी।

वहीं, कांग्रेस ने भी त्रिपुरा चुनाव के लिए 17 सीटों पर कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी की है। पार्टी ने अगरतला से फिर से सुदीप रॉय बर्मन को ही मैदान में उतारा है। CM माणिक साहा को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने टाउन बार्दोवाली सीट से आशीष कुमार साहा को टिकट दिया है।

भाजपा जल्द ही अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की घोषणा करेगी
भाजपा ने जिन 6 विधायकों के नाम काटे हैं, उनके नाम विम्मी मजूमदार, सुभाष चंद्र दास, अरुण चंद्र भौमिक, वीरेंद्र किशोर देव बर्मन, परिमल देबबर्मा और विप्लव कुमार हैं। पार्टी संबित पात्रा ने अनिल बलूनी के साथ मिलकर पहले चरण की लिस्ट जारी की है। जल्दी ही अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 20 सीटों के लिए भी घोषणा की जाएगी। शुक्रवार को CPIM छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मोबोशर अली कैलाशहर विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे।

त्रिपुरा विधानसभा: सीटें- 60, बहुमत- 31

राज्य में 2018 में 59 सीटों पर चुनाव हुए थे। BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। उसे 35 सीटें मिली थीं। भाजपा ने लेफ्ट के 25 साल के गढ़ को ध्वस्त कर दिया था। पहले बिप्लब देव CM बनाए गए थे, लेकिन मई 2022 में माणिक साहा को मुख्यमंत्री बना दिया गया। आगामी चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए CPM और कांग्रेस ने हाथ मिला लिया है। एक और बड़ी पार्टी ममता बनर्जी की TMC भी है, जो भाजपा को टक्कर दे सकती है।


चुनाव तारीखों का ऐलान से पहले BJP-कांग्रेस में झड़प हुई थी
त्रिपुरा में BJP और कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़प विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के करीब आधे घंटे बाद त्रिपुरा के मजलिसपुर में BJP और कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़प हुई। इसमें कई लोग घायल हो गए। झड़प में कांग्रेस नेता डॉ. अजय कुमार घायल हो गए। झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे डॉ अजय कुमार अभी त्रिपुरा, नगालैंड और सिक्किम के प्रदेश प्रभारी हैं। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।

3 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान एक साथ हुआ
चुनाव आयोग ने 17 जनवरी को त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। त्रिपुरा में 16 फरवरी को मतदान होगा। मेघालय और नगालैंड में 27 फरवरी को वोटिंग होगी। सभी राज्यों के नतीजों का ऐलान 2 मार्च को होगा। इन चुनावों की एक दिलचस्प बात यह है कि तीनों राज्यों में बहुमत का आंकड़ा 31 है।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि तीनों राज्यों में महिला वोटरों की भागीदारी ज्यादा है और यहां चुनावी हिंसा भी ज्यादा नहीं होती। हम यहां पर निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रतिबद्ध हैं।


दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में PM ने कहा कि अगले लोकसभा चुनाव में सिर्फ 400 दिन बचे हैं। ऐसे में पार्टी पदाधिकारियों और हर एक कार्यकर्ता को एक-एक वोटर से मिलने उनके दरवाजे तक जाना चाहिए। बैठक ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के एक्सटेंशन पर मुहर लगा दी। नड्‌डा का कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ा दिया गया है। नड्‌डा का मौजूदा कार्यकाल 20 जनवरी को खत्म हो रहा था। अब वे लोकसभा चुनाव तक पार्टी की कमान संभालेंगे। नीचे ग्राफिक में भाजपा के गठन से लेकर अब तक बने अध्यक्षों का ब्योरा दिया गया है
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सुखोई और मिराज एयरक्राफ्ट टकराकर क्रैश

शनिवार सुबह 10 से 10.30 बजे के बीच बड़ा हादसा हुआ। एयरफोर्स के दो फाइटर प्लेन सुखोई-30 और मिराज-2000 एयरक्राफ्ट आपस में टकराकर क्रैश हो गए। मिराज में एक और सुखोई में दो पायलट सवार थे। इनमें से एक पायलट की मौत हो गई है। हालांकि, एयरफोर्स ने मौत की पुष्टि नहीं की है। अभी यह साफ नहीं है कि यह पायलट किस एयरक्राफ्ट का था। एयरफोर्स ने बताया कि दोनों ने रूटीन ट्रेनिंग के लिए उड़ान भरी थी।

मिली अब तक की जानकारी के मुताबिक टकराने के बाद दोनों विमानों के दो अलग-अलग जगहों पर गिरने की आशंका है। एक प्लेन मध्यप्रदेश के मुरैना के पहाड़गढ़ में और दूसरे के राजस्थान के भरतपुर के पिंगोरा में गिरने की बात कही जा रही है।

मिली सूचना के मुताबिक, मुरैना में मिराज और भरतपुर में सुखोई गिरा है। पहले मुरैना में सुखोई और भरतपुर में मिराज गिरने की बात कही जा रही थी। हादसे में क्रैश हुए दोनों फाइटर जेट ने ग्वालियर एयरबेस से उड़ान भरी थी। 

मुरैना कलेक्टर ने कहा- दो पायलट को बचा लिया
मुरैना एसपी आशुतोष बागरी ने बताया कि ‘ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन से वायुसेना के दो विमानों के टेक ऑफ करने की जानकारी मिली थी। इनमें से एक पहाड़गढ़ में क्रैश हुआ है। हम दूसरे विमान की सर्चिंग कर रहे हैं।’
इधर, मुरैना कलेक्टर अंकित अस्थाना का दावा है कि दो पायलट को बचा लिया गया है। के पास उनकी तस्वीरें भी आ रही हैं। लेकिन मौके से मिली तस्वीरों में कुछ ऐसी भी हैं, जिनसे किसी के मौत की भी आशंका जताई जा रही है।

भरतपुर के डीएसपी बोले- सुबह 10 से सवा 10 बजे जानकारी मिली थी
राजस्थान में भरतपुर के डीएसपी अजय शर्मा ने बताया कि ‘हमें सुबह 10 से सवा 10 बजे के करीब प्लेन क्रैश होने की सूचना मिली थी। मौके पर आने पर पता चला कि यह एयर फोर्स का फाइटर जेट है। हालांकि, मलबे को देखकर अभी यह पता नहीं चल पाया है कि यह कौन सा फाइटर प्लेन है। अभी तक इसके पायलट के बारे में भी जानकारी नहीं मिल पाई है।

पहाड़गढ़ में हादसे की जगह से एक पायलट का एक हाथ मिला
मुरैना में गिरे सुखोई में सवार दोनों पायलट घायल हैं। उन्हें ग्वालियर में भर्ती कराया गया है। मुरैना के पहाड़गढ़ में हादसे की जगह से एक पायलट का एक हाथ भी मिला है। आशंका है कि यह हाथ भरतपुर में गिरे मिराज एयरक्रॉफ्ट के पायलट का हो सकता है। मुरैना एसपी आशुतोष बागरी ने भास्कर को बताया कि- ‘ह्यूमन बॉडी का यह पार्ट किसका है, इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकता।

हादसे जुड़े बड़े अपडेट्स

  • भरतपुर में एयरफोर्स की टीम पहुंच गई है। घटनास्थल से कोई भी पायलट नहीं मिला है। ऐसा कहा जा रहा है कि पायलट प्लेन एजेक्ट कर गए होंगे। इनकी तलाश जारी है।
  • मुरैना और भरतपुर दोनों जगहों के घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जुटी है। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एयरफोर्स चीफ से बात की है। साथ ही मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है।
  • पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भरतपुर में फाइटर प्लेन क्रैश होने के बाद इसके पुर्जे करीब एक बीघा एरिया में बिखर गए। जहां प्लेन का एक बड़ा हिस्सा गिरा है, वहां करीब 7 फीट गहरा गड्‌ढा हो गया है। इसे खोद कर पाट्‌र्स बाहर निकाले जा रहे हैं।
  • आसमान में ही आग लग गई थी
    ग्रामीणों के मुताबिक, प्लेन में आसमान में ही आग लग गई थी और देखते ही देखते जलता हुआ फाइटर जेट गिर गया। घटनास्थल के नजदीक ही रेलवे स्टेशन भी है।

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दिग्विजय के बाद राशिद अल्वी बोले-सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो दिखाओ

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राशिद अल्वी भी दिग्विजय सिंह के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने सरकार से सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो जारी करने की मांग की है। अल्वी ने कहा कि हमें सेना पर गर्व है, लेकिन सरकार पर भरोसा नहीं। सर्जिकल स्ट्राइक पर BJP नेताओं के बयानों में असमानता है। सरकार कहती है कि हमारे पास सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो है तो उसे जारी क्यों नहीं कर देती।

उन्होंने दिग्विजय सिंह का समर्थन करते हुए पूछा- दिग्विजय ने क्या गलत कहा? बस सरकार से वीडियो जारी करने की मांग की थी। DSP देविंदर सिंह का कुछ अता-पता नहीं है। जिसकी पुलवामा हमले में आतंकियों की मदद करने का आरोप था। यह बड़ा खेल है, इसमें मत पड़िए.. वो खेल तो पता चले कि क्या खेल है। वो मालूम तो हो कि उसकी जमानत कैसे हो गई।

आर्मी पर भरोसा, लेकिन सरकार पर नहीं
अल्वी ने कहा कि सेना हमारा गौरव है और हमें सेना पर पूरा भरोसा है। लेकिन हमें देश की सरकार पर भरोसा नहीं है। अमित शाह कहते हैं कि हमनें सर्जिकल स्ट्राइक में 250-300 आतंकियों को मारा। सुषमा स्वराज ने कहा था कि हमने ऐसी जगह को निशाना बनाया, जहां कोई मारा न जाए। जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक में भारत में 400 आतंकियों को ढेर किया है। ये सभी भाजपा के नेता हैं और इनके बयानों में असमानता है। ऐसे में लोगों को शक तो होगा ही। दूसरी ओर सरकार कह रही है कि हमारे पास सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो है। अगर सरकार के पास वीडियो है तो उसे जारी कर लोगों का शक दूर क्यों नहीं कर देती।

अगर सरकार के पास सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो नहीं है तो उसे अपनी गलती मान लेनी चाहिए। साथ ही यह झूठ बोलने के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।

दिग्विजय के बयान पर राहुल के रुख को लेकर राशिद ने कहा कि मुझे नहीं पता कि राहुल गांधी ने क्या कहा। हालांकि पार्टी का बयान उसे माना जाता है जो पार्टी के प्रवक्ता देता है। हर राजनीतिक दल में नेताओं को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है।

बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिग्विजय सिंह के बयान को बेहूदा बताया था। उन्होंने कहा कि अगर सेना कुछ करती है तो उस पर सबूत देने की जरूरत नहीं। ये दिग्विजय जी की निजी राय है। मैं इससे सहमत नहीं हूं।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने 23 जनवरी को सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाया। उन्होंने जम्मू में कहा कि सरकार ने अब तक सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत नहीं दिया है। केंद्र सरकार सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में बात करती है कि हमने इतने लोग मार गिराए हैं, लेकिन सबूत कुछ नहीं है।

दिग्विजय ने सर्जिकल स्ट्राइक के अलावा 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले को लेकर भी प्रधानमंत्री को घेरा। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पुलवामा हमले के वक्त CRPF अफसरों ने कहा था कि जवानों को एयरक्राफ्ट से मूवमेंट कराया जाए, पर प्रधानमंत्री नहीं माने।

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BBC डॉक्यूमेंट्री पर दिल्ली यूनिवर्सिटी में हंगामा

नई दिल्ली: गुजरात दंगों पर बनी BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ की स्क्रीनिंग को लेकर शुक्रवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों और पुलिस में ठन गई। छात्रों का कहना था कि वे यह डॉक्यूमेंट्री देखना चाहते हैं, जबकि पुलिस उन्हें देखने नहीं दे रही है। वहीं, पुलिस का कहना है कि इस डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लिहाजा इसकी स्क्रीनिंग की इजाजत नहीं दी जा सकती।

पुलिस ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की आर्ट्स फैकल्टी के पास धारा 144 लागू है। यहां भीड़ जमा होने की इजाजत नहीं दी जा सकती। हंगामे के बाद कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया है। एक दिन पहले गुरुवार को हैदराबाद यूनिवर्सिटी में इसी डॉक्यूमेंट्री को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच विवाद हो चुका है।

डॉक्यूमेंट्री के विरोध में कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग
हैदराबाद में SFI ने 400 से अधिक छात्रों को विवादित डॉक्यूमेंट्री दिखाई। जवाब में RSS की स्टूडेंट्स विंग और ABVP कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी कैंपस में 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म की स्क्रीनिंग की। SFI ने डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग से जुड़ी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इसके कैप्शन में लिखा कि ABVP के कार्यकर्ताओं ने हंगामा करने की कोशिश की, लेकिन हमने उन्हें कामयाब नहीं होने दिया। 

ABVP का आरोप- प्रशासन ने डॉक्यूमेंट्री दिखाने की अनुमति दी
इस मामले में ABVP कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कैंपस में BBC की डॉक्यूमेंट्री दिखाने की अनुमति देने का आरोप लगाया। इसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी मेन गेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने हमें कैंपस में 'द कश्मीर फाइल्स' की स्क्रीनिंग करने से रोकने का प्रयास किया।

जब हम फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए जरूरी इक्विपमेंट लेकर कैंपस में दाखिल हो रहे थे, तो सिक्योरिटी गार्ड्स ने हमें रोकने की कोशिश की। जब हमने विरोध किया तो गार्ड्स ने हमारे साथ मारपीट की। समझ नहीं आता जब सरकार ने BBC की डॉक्यूमेंट्री पर बैन लगा दिया है तो कैंपस में उसे दिखाने की इजाजत कैसे दी गई।

यूनिवर्सिटी ने छात्रों की काउंसलिंग कराई
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार देवेश निगम ने इस मसले पर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए कैंपस में और फिल्मों की स्क्रीनिंग को रोक दिया गया है। कानून व्यवस्था के मुद्दे को देखते हुए डीन-स्टूडेंट्स वेलफेयर ने छात्रों के ग्रुप की काउंसलिंग कराई है। जबकि स्टूडेंट्स का कहना है कि वे अपने तय कार्यक्रमों के अनुसार ही काम करेंगे। 

इससे पहले 21 जनवरी को भी स्टूडेंट्स के एक ग्रुप ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के कैंपस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रखी थी। छात्रों ने इसके लिए न यूनिवर्सिटी प्रशासन को सूचना दी और न ही इजाजत ली थी। मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने एक्शन लिया। 

इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 24 जनवरी को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में भी विवाद हुआ। JNU में छात्र डॉक्यूमेंट्री न देख पाएं इसलिए प्रशासन ने बिजली गुल कर दी और इंटरनेट कनेक्शन भी काट दिया।

इसके बाद भी छात्र नहीं माने और उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को मोबाइल पर डाउनलोड करने का क्यूआर कोड शेयर किया। विवाद इतना बढ़ गया कि डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर देर रात पथराव किया गया। पथराव किसने किया, यह पता नहीं चल पाया है। हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए।

जामिया में विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर अब तक 7 छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया गया है। इन पर माहौल खराब करने के प्रयास का आरोप है। SFI ने छात्रों की रिहाई तक स्क्रीनिंग टाल दी है। यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर की शिकायत पर इन्हें हिरासत में लिया गया है।

जामिया की वाइस चांसलर नजमा अख्तर ने बताया कि विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर छात्र संगठन SFI यूनिवर्सिटी कैंपस का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहा है। हम ऐसी किसी भी काम की अनुमति नहीं देंगे। छात्रों की किसी भी गैरजरूरी हरकत पर कार्रवाई होगी।

पुडुचेरी विश्वविद्यालय में बुधवार (25 जनवरी) को PM मोदी पर BBC की डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। इसके बाद छात्रों के दो संगठनों के बीच झड़प हो गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बिजली और वाईफाई को ठप कर दिया था, फिर छात्रों के एक गुट ने फोन और लैपटॉप पर डॉक्यूमेंट्री देखी। 

पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) के स्टूडेंट सेंटर में 25 जनवरी को विवादित डॉक्यूमेंट्री चलाने पर हंगामा हुआ। NSUI ने यह डॉक्यूमेंट्री चलाई। जिसे देखने कई स्टूडेंट्स जुट गए। इतने में यूनिवर्सिटी अथॉरिटी को इसकी भनक लग गई और प्रोजेक्टर पर चलाई गई इस डॉक्यूमेंट्री को तुरंत बंद करवा दिया गया। इससे पहले लगभग आधी डॉक्यूमेंट्री चल चुकी थी

26 जनवरी: गणतंत्र दिवस पर केरल कांग्रेस ने डॉक्यूमेंट्री दिखाई
केरल कांग्रेस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) यह स्क्रीनिंग तिरुवनंतपुरम में शंकुमुघम बीच पर की। पार्टी ने कहा- ज्यादा से ज्यादा लोगों को यह डॉक्यूमेंट्री दिखाई जा सके इसलिए बीच पर इसकी स्क्रीनिंग की गई है।

अपनी रिलीज के साथ ही यह डॉक्यूमेंट्री विवादों में घिर गई थी। इसमें 2002 में गुजरात में हुए दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका होने का दावा किया गया था। भारत सरकार ने इसे BBC का प्रोपेगैंडा बताया था। डॉक्यूमेंट्री का पहला पार्ट 17 जनवरी को जारी हुआ था, जिसे यूट्यूब पर ब्लॉक कर दिया गया था। वहीं, सरकार ने ट्विटर और अन्य साइट्स पर भी इसे डॉक्यूमेंट्री की शेयरिंग पर रोक लगा दी थी।

17 जनवरी को डॉक्यूमेंट्री का पहला एपिसोड टेलिकास्ट हुआ
BBC ने 17 जनवरी को गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री द मोदी क्वेश्चन का पहला एपिसोड यूट्यूब पर रिलीज किया। दूसरा एपिसोड 24 जनवरी को रिलीज होना था। इससे पहले ही केंद्र सरकार ने पहले एपिसोड को यूट्यूब से हटा दिया। भारत सरकार ने डॉक्यूमेंट्री को प्रधानमंत्री मोदी और देश के खिलाफ प्रोपेगैंडा बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हम नहीं जानते कि डॉक्‍यूमेंट्री के पीछे क्या एजेंडा है, लेकिन यह निष्पक्ष नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दुष्‍प्रचार है। 

भारत में चल रहे BBC डॉक्यूमेंट्री पर विवाद में अमेरिका ने 48 घंटे में अपना स्टैंड बदल दिया। उसने प्रेस की स्वतंत्रता का हवाला देकर BBC डॉक्यूमेंट्री का साथ देने की कोशिश की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने को प्रेस की स्वतंत्रता का मामला बताया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में फ्रीडम ऑफ स्पीच के महत्व को हाइलाइट्स करने का यह सही समय है और ऐसा भारत में भी लागू होता है।

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बाबर आजम बने ICC क्रिकेटर ऑफ द ईयर

पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम साल 2022 के ICC मेंस क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुने गए हैं। इसके अलावा उन्होंने वनडे क्रिकेटर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड भी जीता है। इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स मेंस टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर चुने गए हैं। एक दिन पहले टी-20 मेंस क्रिकेटर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड भारत के सूर्यकुमार यादव ने जीता था।

लगातार दूसरे साल मेंस क्रिकेटर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को मिला है। पिछले साल तेज गेंदबाज शाहीन शाह अफरीदी ने बाजी मारी थी। मेंस क्रिकेटर ऑफ द ईयर को सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी दी जाती है।

दावेदारों में कोई भारतीय नहीं
ICC क्रिकेटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड के दावेदारों में कोई भारतीय क्रिकेटर नहीं था। इसमें पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम के अलावा इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स, न्यूजीलैंड के टेस्ट कप्तान टिम साउदी और जिम्बाब्वे के सिकंदर रजा के नाम थे।

अब जानते हैं इस अवॉर्ड के बारे में
2004 में शुरू हुए ICC के सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड को वेस्टइंडीज के दिग्गज सर गारफील्ड सोबर्स के नाम पर दिया जाता है। क्रिकेट जगत के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर में से एक सोबर्स ने 1954 में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। विंडीज के लिए 93 टेस्ट में उन्होंने 8032 रन बनाए। इनमें 26 शतक और 30 अर्धशतक आए। इस दौरान उन्होंने 235 विकेट भी लिए। 

किस आधार पर मिलता है अवॉर्ड?
ICC हर साल सभी फॉर्मेट में साल के बेस्ट क्रिकेटर्स को सम्मानित करता है। इनमें विमेंस और मेंस क्रिकेट के 9 अलग-अलग अवॉर्ड शामिल होते हैं। सभी कैटेगरी में 4 प्लेयर्स को नॉमिनेट किया जाता है। ICC की वेबसाइट पर इन चारों में से बेस्ट प्लेयर्स को वोट करने के लिए पोल रहता है।

वहीं, ICC के अवॉर्ड पैनल में क्रिकेट के मशहूर लेखक, दुनियाभर के ब्रॉडकास्टर्स और दिग्गज क्रिकेटर शामिल रहते हैं। आखिर में फैन पोल के पॉइंट्स और अवॉर्ड पैनल की राय के आधार पर क्रिकेटर ऑफ द ईयर के अवॉर्ड दिए जाते हैं। आमतौर पर अवॉर्ड पैनल में शामिल एक्सपर्ट्स के नाम जारी नहीं किए जाते।

लगातार दूसरी बार वनडे क्रिकेटर ऑफ ईयर बने बाबर
बाबर आजम लगातार दूसरी बार वनडे के क्रिकेटर ऑफ ईयर बने हैं। वे साल 2021 के वनडे क्रिकेटर ऑफ ईयर भी थे। वे टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और एबी डिविलियर्स के क्लब में शामिल हो गए हैं।

बाबर से पहले ये धोनी, कोहली और डिविलियर्स लगातार दो बार वनडे क्रिकेटर ऑफ ईयर बन चुके हैं। धोनी को 2008 और 2009 में लगातार दो बार ICC वनडे प्लेयर ऑफ द ईयर चुना गया था। जबकि एबी डिविलियर्स 2014 और 2016 में इस अवॉर्ड से नवाजे गए थे। वहीं, विराट कोहली को 2017 और 2018 में लगातार दो बार यह अवॉर्ड मिला था।

बेन स्टोक्स टेस्ट क्रिकेटर ऑफ ईयर
इंग्लिश कप्तान बेन स्टोक्स टेस्ट प्लेयर ऑफ ईयर चुने गए हैं। इस अवॉर्ड के दावेदारों की सूची में स्टोक्स के अलावा जॉनी बेयरस्टो , उस्मान ख्वाजा और कगिसो रबाडा शामिल थे।

एक दिन पहले सूर्या टी-20 के क्रिकेटर ऑफ द ईयर बने
एक दिन पहले बुधवार को भारतीय बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव ICC मेंस टी-20 प्लेयर ऑफ ईयर बने थे। वे यह मुकाम हासिल करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं।

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दुनिया की पहली कोविड नेजल वैक्सीन लॉन्च

नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया और साइंस-टेक्नोलॉजी मिनिस्टर जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को दुनिया की पहली इंट्रानेजल कोविड-19 वैक्सीन iNCOVACC को लॉन्च किया। कोवैक्सिन बनाने वाली हैदराबाद की भारत बायोटेक ने इसे वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन (WUSM) के साथ मिलकर बनाया है। नाक से ली जाने वाली इस वैक्सीन को बूस्टर डोज के तौर पर लगाया जा सकेगा।

भारत सरकार ने 23 दिसंबर को इस वैक्सीन की मंजूरी दी थी। सबसे पहले नेजल वैक्सीन को प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके लिए लोगों को पैसे देने होंगे। दिसंबर में भारत बायोटेक ने घोषणा की थी कि यह वैक्सीन सरकारी अस्पतालों में 325 रुपए में लगवाई जा सकेगी। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में इसके लिए 800 रुपए चुकाने होंगे। इस वैक्सीन के लिए Cowin पोर्टल से ही बुकिंग होगी।

नेजल वैक्सीन सामान्य स्प्रे की तरह ले सकेंगे
फिलहाल हमें मांसपेशियों में इंजेक्शन के जरिए वैक्सीन लगाई जा रही है। इस वैक्सीन को इंट्रामस्कुलर वैक्सीन कहते हैं। नेजल वैक्सीन वो होती है जिसे नाक के जरिए दिया जाता है। क्योंकि ये नाक के जरिए दी जाती है इसलिए इसे इंट्रानेजल वैक्सीन कहा जाता है। यानी इसे इंजेक्शन से देने की जरूरत नहीं है और न ही ओरल वैक्सीन की तरह ये पिलाई जाती है। यह एक तरह से नेजल स्प्रे जैसी है।

प्राइमरी और बूस्टर के तौर पर दी जा सकेगी
इंट्रानेजल वैक्सीन को कोवैक्सिन और कोवीशील्ड जैसी वैक्सीन्स लेने वालों को बूस्टर डोज के तौर पर दिया जाएगा। हालांकि इसे प्राइमरी वैक्सीन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत बायोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन डॉ. कृष्णा एल्ला ने कुछ समय पहले कहा था कि पोलियो की तरह इस वैक्सीन की भी 4 ड्रॉप्स काफी हैं। दोनों नॉस्ट्रिल्स में दो-दो ड्रॉप्स डाली जाएंगी।

नेजल वैक्सीन सामान्य स्प्रे की तरह ले सकेंगे
फिलहाल हमें मांसपेशियों में इंजेक्शन के जरिए वैक्सीन लगाई जा रही है। इस वैक्सीन को इंट्रामस्कुलर वैक्सीन कहते हैं। नेजल वैक्सीन वो होती है जिसे नाक के जरिए दिया जाता है। क्योंकि ये नाक के जरिए दी जाती है इसलिए इसे इंट्रानेजल वैक्सीन कहा जाता है। यानी इसे इंजेक्शन से देने की जरूरत नहीं है और न ही ओरल वैक्सीन की तरह ये पिलाई जाती है। यह एक तरह से नेजल स्प्रे जैसी है।

प्राइमरी और बूस्टर के तौर पर दी जा सकेगी
इंट्रानेजल वैक्सीन को कोवैक्सिन और कोवीशील्ड जैसी वैक्सीन्स लेने वालों को बूस्टर डोज के तौर पर दिया जाएगा। हालांकि इसे प्राइमरी वैक्सीन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत बायोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन डॉ. कृष्णा एल्ला ने कुछ समय पहले कहा था कि पोलियो की तरह इस वैक्सीन की भी 4 ड्रॉप्स काफी हैं। दोनों नॉस्ट्रिल्स में दो-दो ड्रॉप्स डाली जाएंगी।

नेजल वैक्सीन को एक पंप के जरिए नाक में भेजा जाता है। एक डोज में इसकी कुछ बूंदें ही देने की जरूरत होती है।
नेजल वैक्सीन को एक पंप के जरिए नाक में भेजा जाता है। एक डोज में इसकी कुछ बूंदें ही देने की जरूरत होती है।

इन्फेक्शन-ट्रांसमिशन ब्लॉक करेगी नेजल वैक्सीन
इस नेजल वैक्सीन का नाम iNCOVACC रखा गया है। पहले इसका नाम BBV154 था। इसकी खास बात यह है कि शरीर में जाते ही यह कोरोना के इन्फेक्शन और ट्रांसमिशन दोनों को ब्लॉक करती है। इस वैक्सीन को इंजेक्शन से नहीं दिया जाता, इसलिए इन्फेक्शन का खतरा नहीं है। इसे देने वाले हेल्थकेयर वर्कर्स को भी खास ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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गणतंत्र दिवस पर मोदी नई संसद बनाने वाले मजदूरों से मिले,

नई दिल्ली : 74वें गणतंत्र दिवस की परेड में 23 से ज्यादा झांकियां दिखाई गईं। वहीं,सेनाओं के स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान नारी शक्ति की तस्वीर दिखी। डेयर डेविल्स ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया और फ्लाई पास्ट में राफेल गरजे। परेड खत्म होने के बाद मोदी सबसे पहले नए संसद भवन बनाने वाले मजदूरों से मिले।

मोदी राजस्थान की बंधेज पगड़ी में नजर आए। यह पीले और केसरिया रंग की थी। मोदी ने पिछली बार गणतंत्र दिवस पर कुर्ता-पायजामा पहना था। तब उनके गले में मणिपुर का पारंपरिक लेंग्यान गमछा था। इसके अलावा, उत्तराखंड की टोपी पहनी थी, जिस पर ब्रह्मकमल बना था। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत भी ऐसी ही टोपी पहनते थे।

2 घंटे 28 मिनट चली परेड को फोटोज में देखिए...

सुबह 10:20 बजे:

PM मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के लिए शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने वहां रखी किताब में मैसेज भी लिखा।
PM मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के लिए शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने वहां रखी किताब में मैसेज भी लिखा।

सुबह 10:25 बजे:

गणतंत्र दिवस समारोह में PM मोदी (बाएं), चीफ गेस्ट मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी (बीच में) और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (दाएं)।
गणतंत्र दिवस समारोह में PM मोदी (बाएं), चीफ गेस्ट मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी (बीच में) और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (दाएं)।

सुबह 10:30 बजे:

परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेताओं ने परेड की शुरुआत की, इसके बाद सेना और सशस्त्र बलों की टुकड़ियों ने मार्च किया।
परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेताओं ने परेड की शुरुआत की, इसके बाद सेना और सशस्त्र बलों की टुकड़ियों ने मार्च किया।

सुबह 11 बजे:

वायु रक्षा प्रणाली की 512 लाइट एडी मिसाइल रेजिमेंट की लेफ्टिनेंट चेतना शर्मा ने परेड में अपने ग्रुप को लीड किया।
वायु रक्षा प्रणाली की 512 लाइट एडी मिसाइल रेजिमेंट की लेफ्टिनेंट चेतना शर्मा ने परेड में अपने ग्रुप को लीड किया।

सुबह 11:20 बजे:

गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल BSF की ऊंट रेजिमेंट। यह ट्रुप रेगिस्तानी इलाकों में पेट्रोलिंग और निगरानी करता है।
गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल BSF की ऊंट रेजिमेंट। यह ट्रुप रेगिस्तानी इलाकों में पेट्रोलिंग और निगरानी करता है।

सुबह 11:30 बजे:

उत्तराखंड ने कर्तव्य पथ पर दिखाई अपनी झांकी में कॉर्बेट नेशनल पार्क और अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम को दिखाया।
उत्तराखंड ने कर्तव्य पथ पर दिखाई अपनी झांकी में कॉर्बेट नेशनल पार्क और अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम को दिखाया।

सुबह 11:40 बजे:

परेड में उत्तर प्रदेश ने अपनी झांकी में अयोध्या में तीन दिन तक मनाया जाने वाला दीपोत्सव दिखाया।
परेड में उत्तर प्रदेश ने अपनी झांकी में अयोध्या में तीन दिन तक मनाया जाने वाला दीपोत्सव दिखाया।

दोपहर 12 बजे:

परेड में कर्तव्य पथ पर सेना के 33 डेयर डेविल्स ने 9 मोटरसाइकिल पर 'मानव पिरामिड' बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
परेड में कर्तव्य पथ पर सेना के 33 डेयर डेविल्स ने 9 मोटरसाइकिल पर 'मानव पिरामिड' बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

दोपहर 12;10 बजे:

वायुसेना के लड़ाकू हेलिकॉप्टर्स ने कर्तव्य पथ पर फ्लाय पास्ट में हिस्सा लिया। इनमें अमेरिका से लिए गए अपाचे चॉपर भी शामिल थे।
वायुसेना के लड़ाकू हेलिकॉप्टर्स ने कर्तव्य पथ पर फ्लाय पास्ट में हिस्सा लिया। इनमें अमेरिका से लिए गए अपाचे चॉपर भी शामिल थे।

दोपहर 12:15 बजे:

कर्तव्य पथ पर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर राष्ट्रगान के साथ गणतंत्र दिवस 2023 परेड का समापन हुआ।
कर्तव्य पथ पर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर राष्ट्रगान के साथ गणतंत्र दिवस 2023 परेड का समापन हुआ।

दोपहर 12:20 बजे:

परेड खत्म होने के बाद PM मोदी ने मौजूद लोगों का अभिवादन किया, वे गाड़ी से उतरकर बैरिकेड्स तक गए।
परेड खत्म होने के बाद PM मोदी ने मौजूद लोगों का अभिवादन किया, वे गाड़ी से उतरकर बैरिकेड्स तक गए।
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पाकिस्तान में गलती से मिसाइल दागने के मामले में वायुसेना ने तीन अधिकारियों को किया बर्खास्त

नई दिल्‍ली : 

पाक सीमा में गलती से ब्रह्मोस मिसाइल दागने का मामले में भारतीय वायुसेना के तीन अधिकारियों को बर्खास्‍त कर दिया गया है. सरकार की ओर से मंगलवार को यह जानकारी दी गई.एक अधिकारी ने बताया, "कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने पाया कि दुर्घटनावश ब्रह्मोस मिसाइल दागे जाने की घटना में तीन अधिकारियों ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया. 9 मार्च को ब्रह्मोस फायर किया गया था और मिसाइल पाकिस्तान में गिरी थी." वायुसेना ने एक बयान में कहा, "ब्रह्मोस मिसाइल गलती से 9 मार्च 2022 को दागी गई थी.  इस घटना के लिए जिम्‍मेदारी तय करने सहित मामले की जांच के लिए गठित कोर्ट ऑफ इनक्‍वायरी ने पाया कि मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)का पालन नहीं करते हुए तीन अधिकारी इस एक्‍सीडेंटल फायरिंग में शामिल थे.

इसमें कहा गया है, "इन तीन अधिकारियों को मुख्‍य रूप से घटना के लिए जिम्‍मेदार ठहराया गया. केंद्र सरकार ने तत्‍काल प्रभाव से इनकी सेवाएं समाप्‍त कर दी है. 23 अगस्‍त 2022 को अधिकारियों को बर्खास्‍तगी के आदेश दिए गए हैं. "रक्षा मंत्रालय ने इस घटना को बेहद खेदजनक बताते हुए इसके लिए तकनीकी खराबी को दोषी ठहराया था.पाकिस्‍तान के अनुसार, यह मिसाइल पाकिस्‍तान के हवाई क्षेत्र में 100 किमी अंदर आया. उस समय यह  40 हजार फीट की ऊंचाई पर और ध्‍वनि की गति से तीन गुना रफ्तार हासिल किए गए था.चूंकि इसमें कोई वारहेड नहीं था, इसलिए इसमें कोई विस्‍फोट नहीं हुआ. 

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध 2019 के बाद ऐतिहासिक तौर पर सबसे खराब हैं, जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सैनिक आत्मघाती हमले में मारे गए थे. भारत ने इसके जवाब में पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच आसमान में झगड़ा हुआ था

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"सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही" : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के तीखे बोल

नई दिल्‍ली : 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari), जिनके सीधे सपाट अंदाज में बात कहने के अंदाज ने संभवत: उन्‍हें बीजेपी की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्‍था में स्‍थान से वंचित किया है, ने एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. गडकरी ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही है और यह एक समस्‍या है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, "आप चमत्‍कार कर सकते हैं...और ऐसा करने की क्षमता है. मेरा मानना है कि भारतीय बुनियादी संरचना का भविष्‍य उज्‍ज्‍वल है. हमें अच्छी तकनीक, अच्छे नवाचार, अच्छे शोध और सफल प्रथाओं को  दुनिया और देश में स्वीकार करने की जरूरत है. हमारे पास वैकल्पिक मटेरियल होना चाहिए ताकि हम क्‍वालिटी से समझौता किए बिना लागत कम कर सकें. समय निर्माण में सबसे अहम चीज है. समय सबसे बड़ी पूंजी है. सबसे बड़ी समस्‍या यह है कि सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही है. 

एसोसिएशन ऑफ कंसल्टिंग सिविल इंजीनियर मुंबई की ओर से आयोजित कार्यक्रम NATCON 2022 को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीकी या संसाधनों से अधिक महत्‍वपूर्ण समय है. गडकरी के इन शब्‍दों और पीएम नरेंद्र मोदी की कुछ दिनों पहले किए गए उस कमेंट में विभिन्‍नता देखने में आई है जिसमें पीएम ने "अमृत काल" या स्‍वर्ण युग के बड़े मील के पत्‍थरों को पार करने में सरकार की कामयाबी का जिक्र किया था. 

हालांकि बीजेपी के नेताओं का कहना है कि गडकरी के यह शब्‍द किसी सरकार विशेष के लिए नहीं बल्कि सामान्‍य तौर पर सरकारों के लिए कहे गए हैं.गौरतलब है कि वर्ष 2024 के आम चुनाव सहित आने वाले चुनावों को ध्‍यान में रखते हुए पिछले सप्‍ताह  बीजेपी संसदीय बोर्ड का नए सिरे से गठन किया गया है, इसमें गडकरी को स्‍थान नहीं दिया गया है.गडकरी का इस महत्‍वपूर्ण समिति से बाहर होना आश्‍चर्यजनक है. वे नरेंद्र मोदी कैबिनेट के वरिष्‍ठ मंत्री हैं, वे बीजेपी अध्‍यक्ष की जिम्‍मेदारी भी संभाल चुके हैं. आमतौर पर पार्टी, अपने पूर्व अध्‍यक्ष को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करती है. एक अन्‍य अहम बात यह है कि गडकरी, बीजेपी की वैचारिक संस्‍था राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS)के करीबी हैं.  

बता दें, कुछ समय पहले नागपुर में एक कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा था कि उनका अकसर राजनीति छोड़ने का मन करता है क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि जिंदगी में करने के लिए बहुत कुछ है. समाजसेवी गिरीश गांधी को सम्‍मानित करने के लिए आयोजित समारोह में गडकरी ने कहा था, "कई बार मुझे लगता है कि मुझे राजनीति छोड़ देनी चाहिए. राजनीति के अलावा भी जिंदगी में करने के लिए बहुत कुछ है." केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री गडकरी ने कहा कि उनका मानना है कि राजनीति, सामाजिक बदलाव के लिए है लेकिन अब यह सत्‍ता में बने रहने का जरिया अधिक बन गई है. 

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नालंदा के एक अस्पताल में शवों के लिए स्ट्रेचर भी मयस्सर नहीं

नालंदा : 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र नालंदा के एक अस्पताल में बुनियादी सुविधा भी मयस्सर नहीं हो रहा है. हालात इतने दयनीय है कि परिजनों को लाश को अपने हाथों पर उठाकर ले जाना पड़ता है. हैरानी की बात तो यह है कि नालंदा का यह एकमात्र आईएसओ प्रमाणित अस्पताल है औऱ इस अस्पताल में शवों को इधर –उधर ले जाने के लिए स्ट्रेचर भी उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं.
पिछले दिनों सबेरे सबेरे नदी में एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई. घटना के संबंध में मृतक के परिजन ने बताया कि युवक शौच के लिए खेत गया था. उसी दौरान नदी में पैर फिसल जाने के कारण डूबने से उसकी मौत हो गई. मौत के बाद पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल भेज दिया, मगर सदर अस्पताल में मानवता को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई.
पुलिस के द्वारा शव को निजी वाहन के द्वारा पोस्टमार्टम के लिए भेज तो दिया गया मगर पोस्टमार्टम कक्ष से करीब दो सौ मीटर पहले ही गाड़ी को रोक दिया गया था. वहां से मृतक के भाई और बहनोई खुद हाथो पर शव को उठाकर पोस्टमार्टम रूम तक ले गए. वहां मौजूद सिपाही और अस्पताल के कुछ कर्मी ने कोई मदद नहीं की.
मृतक के भाई ने कहा कि स्ट्रेचर न मिलने की वजह से उनलोगों को परेशानी उठानी पड़ी. इश मुद्दे पर अस्पताल के अधिकारी ने बोलने से इंकार कर दिया.  
स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था ऐसी है कि लोगों को स्ट्रैचर जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पा रही है. 

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शुभमन गिल द्वारा सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ने पर Twitter यूजर्स का कमाल का रिएक्शन

नई दिल्ली: शुभमन गिल (Sachin Tendulkar)  ने अपनी पिछली पांच पारियों में 64, 43, 98*, 82*, 33 खेलने के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पहला शतक लगाया. वेस्टइंडीज के खिलाफ सबीना पार्क में बारिश की वजह से मैच रोकना पड़ा था, तब गिल 98 पर बल्लेबाज कर रहे थे. अंपायरों ने बारिश की वजह से हो रही लगातार रुकावट के कारण भारत की पारी घोषित कर दी. जिसके बाद अपनी अगली सीरीज में गिल जिम्बाब्वे के खिलाफ (ZIM vs IND) पहले वनडे में भी एक शतक की तलाश कर रहे थे लेकिन विपक्षी टीम का स्कोर उतना बड़ा नहीं था कि वो अपनी ये इच्छा पूरी कर पाते. हरारे में उस दिन उन्होंने नाबाद 82 रन बनाए. दूसरे मैच में उन्हें तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया और वहां उन्हें 33 रन की पारी खेली. 

तीसरे और आखिरी वनडे (ZIM vs IND 3rd ODI) में उनके पास आखिरी मौका था सेलेक्टरों को अपने कौशल का एक मजबूत परिचय कराने का. केएल राहुल और शिखर धवन के जल्दी आउट होने के बाद गिल ने एक शानदार पारी खेलकर इस लंबे इंतजार को खत्म किया.

दाएं हाथ के बल्लेबाज ने 97 गेंद पर 130 बनाए, जिसमें 15 चौके और एक छक्का शामिल हैं. गिल की इस शानदार पारी के बदौलत भारत ने मेजबान टीम के सामने के 290 रन का कड़ा टारगेट सेट किया.

इसी के साथ पंजाब के इस बल्लेबाज ने रिकॉर्ड बूक्स में भी अपना नाम दर्ज करा लिया. वो जिम्बाब्वे के खिलाफ एक वनडे मैच में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए. उन्होंने महान सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) का 24 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा. पूर्व दिग्गज बल्लेबाज ने 1998 में बुलावायो में नाबाद 127 रन की पारी खेली थी.



इसी के साथ गिल (22 साल और 348 दिन) जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे में शतक लगाने वाले दूसरे सबसे युवा भारतीय बल्लेबाज भी बन गए. इससे पहले मोहम्मद कैफ (Mohammad Kaif) ने 21 साल 287 दिन की उम्र में ये कारनामा किया था.

गिल के एक्स्ट्रा ऑर्डनरी प्रदर्शन के लिए उनको 'प्लेयर ऑफ द मैच' और सीरीज में सबसे ज्यादा 245 रन बनाने के लिए 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया. ये उनका लगातार दूसरा प्लेयर ऑफ द सीरीज खिताब है. इससे पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में भी दाएं हाथ के बल्लेबाज को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया था.

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बिलकिस बानो केस में सजा सुनाने वाले पूर्व जज ने दोषियों की रिहाई पर उठाए सवाल

बॉम्‍बे हाईकोर्ट के जज के पद से रिटायर हुए जस्टिस यूडी साल्‍वी ने कहा, "जिसने भी यह फैसला लिया, उसे इस पर पुनर्विचार करना चाहिए

मुंबई : : 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और उसके परिवार के सात सदस्‍यों की हत्‍या के 11 दोषियों को रिहा नहीं किया जाना चाहिए था. 14 साल पहले इन लोगों दोषी ठहराने वाले जज ने यह बात कही है. उन्‍होंने एक विचारधारा के लोगों की ओर से दोषियों के मिठाई और फूलमालाओं से स्‍वागत की भी आलोचना की. बॉम्‍बे हाईकोर्ट के जज के पद से रिटायर हुए जस्टिस यूडी साल्‍वी ने कहा, "जिसमें भी यह फैसला लिया, उसे इस पर पुनर्विचार करना चाहिए. मैं बस इतना ही कह सकता हूं." उन्‍होंने कहा, "यह मामला हर प्रक्रिया से गुजरा और हम सभी जानते हैं कि इन 11 दोषियों को तमाम सबूतों के बाद उम्रकैद की सजा मिली थी. अब सरकार ने बाद में क्‍या सोचा, यह एक सवाल है.

जस्टिस साल्‍वी ने कहा, "सरकार के पास 'माफी' देने की शक्ति है लेकिन कोई भी निर्णय लेने के पहले उसे हर पहलू पर सोचना चाहिए अन्‍यथा यह सही नहीं है. मैं नहीं जानता कि उन्‍होंने इस प्रक्रिया को अपनाया है या नहीं. "उन्‍होंने कहा, "क्‍या उन्‍होंने उस जज से पूछा जिसके अधीन केस सुना गया? मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने इस बारे में कुछ नहीं सुना. इस केस की सीबीआई द्वारा जांच की गई. ऐसे मामलों में राज्‍य सरकार को केंद्र सरकार से भी सलाह लेने की जरूरत होती है. क्‍या उन्‍होंने ऐसा किया? मुझे कोई जानकारी नहीं है. यदि उन्‍होंने किया तो केंद्र सरकार ने क्‍या कहा?"

जज ने रिहाई के बाद दोषियों के सत्‍ताधारी बीजेपी की ओर से जुड़े ग्रुप द्वारा मिठाई और फूलमालाओं से स्‍वागत की भी आलोचना की. उन्‍होंने बीजेपी के एक विधायक के इस बयान की भी आलोचना कि ये लोग अच्‍छे संस्‍कार वाले ब्राह्मण थे. जस्टिस साल्‍वी ने कहा, "इन 11 दोषियों का स्‍वागत करना सही नहीं है. कुछ लोग सोचते हैं कि यह हिंदुत्‍व का हिस्‍सा है या उन्‍होंने हिंदू के तौर पर ऐसा किया. यह गलत है...कुछ कह रहे हैं कि वे ब्राह्माण हैं, यह कहना सही नहीं है.

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सपना चौधरी की गिरफ्तारी का वारंट जारी

लखनऊ। डांस का कार्यक्रम रद्द करने व टिकट का पैसा भी वापस नहीं करने के एक मामले में गैरहाजिर रहने पर अदालत ने मशहूर डांसर सपना चौधरी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। एसीजेएम शांतनु त्यागी ने मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को नियत की है। 10 मई को इस मामले में अभियुक्ता सपना चौधरी ने आत्मसमर्पण किया था व अंतरिम जमानत की गुहार लगाई थी। अदालत ने अंतरिम जमानत मंजूर कर लिया था। फिर आठ जून को सपना चौधरी की नियमित जमानत अर्जी भी सर्शत मंजूर हुई थी। सोमवार को इस मामले में सपना समेत अन्य अभियुक्तों पर आरोप तय करने के मसले पर सुनवसपना की तरफ से हाजिरी माफी की अर्जी भी नहीं दी गई, जबकि अन्य अभियुक्तों की ओर से हाजिरी माफी की अर्जी दी गई थी। एक मई, 2019 को इस मामले में सपना चौधरी के खिलाफ किसी व्यक्ति के विश्वास का हनन व धोखाधड़ी करने के मामले में आरोप पत्र दाखिल हुआ था। वहीं, 20 जनवरी, 2019 को इस कार्यक्रम के आयोजक जुनैद अहमद, इवाद अली, अमित पांडेय व रत्नाकर उपाध्याय के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था   

ये है मामला : उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 13 अक्टूबर, 2018 को स्मृति उपवन में दोपहर तीन बजे से रात्रि 10 बजे तक सपना समेत अन्य कलाकारों का कार्यक्रम था। इसके लिए प्रति व्यक्ति तीन सौ रुपये में आनलाइन व आफलाइन टिकट बेचा गया था। इस कार्यक्रम को देखने के लिए हजारों टिकट धारक मौजूद थे, लेकिन रात 10 बजे तक सपना चौधरी नहीं आईं। इसपर लोगों ने हंगामा कर दिया। इसके बाद टिकट धारकों का पैसा भी वापस नहीं किया गया। 14 अक्टूबर, 2018 को इस मामले की नामजद एफआइआर दारोगा फिरोज खान ने थाना आशियाना में दर्ज कराई थी।



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ओडिशा समेत देश के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति चिंताजनक, हिमाचल में बारिश से 32 की मौत

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार को लगातार तीसरे दिन भारी बारिश जारी रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अभी भी कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। पिछले एक-दो दिन से देश के कई अन्य राज्यों में भी बारिश का दौर जारी है। भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में 32 लोगों की मौत हो गई है। 

 भारी बारिश के चलते ओडिशा में सोमवार को सैकड़ों गांव पानी में डूबे रहे। इस बीच मध्य प्रदेश के भोपाल और जबलपुर समेत कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश के चलते सोमवार को स्कूल बंद कर दिए गए।

मौसम विभाग के अनुसार बारिश का दौर एमपी, हिमाचल, ओडिशा समेत कई राज्यों में जारी है। इसके चलते कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है।ओडिशा में बाढ़ से लगभग आठ लाख लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। बारिश से बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हुई है। सड़क के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। राज्य ने अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 120,000 लोगों को निकाला है। हालांकि, उत्तरी जिलों में बाढ़ की स्थिति सबसे खराब बनी हुई है, क्योंकि सुबरनेखा नदी में निचले इलाकों में पानी भर गया है और 100 से अधिक गांवों में डूब गए हैं। 

बालासोर और मयूरभंज जिलों के अधिकारियों ने निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर निकासी अभियान शुरू किया है। सुवर्णरेखा और बैतरनी में पानी कई स्थानों पर खतरे के निशान को पार कर गया है। सुवर्णरेखा नदी के अलावा, बालासोर जिला भी बुढाबलंग और जलाका नदी के बाढ़ के पानी से प्रभावित है।

बालासोर के जिला कलेक्टर दत्तात्रेय भाऊसाहेब शिंदे ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि बालासोर जिले के 83 ग्राम पंचायतों के लगभग 156 गाँव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। प्रशासन ने सोमवार दोपहर तक 40,000 लोगों को निकाला है और उन्हें 227 अस्थायी आश्रयों में रखा गया है। लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से निकाले जाने की प्रक्रिया अभी भी चल रही है। इसके साथ ही आईएमडी ने मंगलवार को उत्तरी ओडिशा के जिलों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की है।

हिमाचल प्रदेश में 32 हुई मरने वालों की संख्या, 12 घायल 

हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात से अचानक आई बाढ़ और बारिश के कारण हुए भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। लापता हुए छह लोगों का अब भी पता नहीं चल पाया है। इस आपदा में 12 लोग घायल हो गए हैं। मंडी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित है। इसके बाद कांगड़ा और चंबा जिला हैं।

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नीतीश कैबिनेट में विभागों का बंटवारा- तेजस्‍वी को मिला स्‍वास्‍थ्‍य, तेज प्रताप बने वन व पर्यावरण मंत्री

पटना: बिहार की महागठबंधन सरकार  का मंत्रिमंडल विस्तार मंगलवार को राजभवन में संपन्‍न हुआ। इसके लिए 31 मंत्रियों की लिस्ट देर रात ही फाइनल  हो चुकी थी। मंगलवार को लिस्‍ट में शामिल मंत्रियों ने समूहों में शपथ ली। शपथ लेने वाले मंत्रियों में लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव शामिल हैं। शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची में उपेंद्र कुशवाहा का नाम नहीं था। शपथ ग्रहण के बाद मंत्रियों में विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया है। तेज प्रताप यादव वन व पर्यावरण मंत्री बनाए गए हैं। महागठबंधन की पिछली सरकार में तेज प्रताप के पास रहा स्‍वास्‍थ्‍य विभाग इस बार उपमुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी यादव के पास है। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (VM Nitish Kumar) ने गृह विभाग अपने पास रखा है। शपथ लेने वाले 31 मंत्रियों में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के 11, राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के 16, कांग्रेस (Congress) के दो तथा हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (HAM) के एक मंत्री का फार्मूला बनाया गया। एक निर्दलीय को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई। छूट गए कई बड़े चेहरों को अगले मंत्रिमंडल विस्‍तार में जगह दी जानी है। 

नीतीश के पास है गृह विभाग, आरजेडी से स्‍पीकर

शपथ ग्रहण के पहले आरजेडी व जेडीयू के बीच गृह विभाग को लेकर फंसा पेच सुलझा लिया गया। हमेशा की तरह गृह विभाग मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पास ही रखा है। नीतीश कुमार को गृह के अलावा सामान्‍य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन तथा वैसे सभी विभाग, जाे किसी को आवंटित नहीं हैं, मिले हैं।बदले में आरजेडी के खाते में विधानसभा अध्‍यक्ष का पद गया है। सूत्र बताते हैं कि अवध बिहारी चौधरी महागठबंधन सरकार में विधानसभा अध्‍यक्ष बनाए जाएंगे। बताया जा रहा है कि आरजेडी के चंद्रशेखर शिक्षा मंत्री बनाए गए हैं। 

तेज प्रताप को वन-पर्यावरण, तेजस्‍वी को स्‍वास्‍थ्‍य

मंत्रिमंडल में आरजेडी कोटे से लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री बनाया जाने की बात की जा रही थी, लेकिन उन्‍हें वन व पर्यावरण मंत्री बनाया गया है। महागठबंधन की पिछली सरकार में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग तेज प्रताप के पास था, जो इस बार तेजस्‍वी के पास गया है। तेजस्‍वी यादव को स्‍वास्‍थ्‍य, पथ निर्माण, नगर विकास तथा ग्रामीण कार्य के चार विभाग दिए गए हैं।

शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों को मिले ये विभाग

राष्‍ट्रीय जनता दल

  1. तेज प्रताप यादव: वन-पर्यावरण
  2. आलोक मेहता : राजस्‍व एवं भूमि सुधार
  3. अनिता देवी: पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग कल्‍याण
  4. सुरेंद्र यादव: सहकारिता
  5. चंद्रशेखर: शिक्षा
  6. ललित यादव: लोक स्‍वास्‍थ्‍य अभियंत्रण
  7. जीतेंद्र राय: कला-संस्‍कृति व युवा
  8. रामानंद यादव: खान एवं भूतत्‍व
  9. सुधाकर सिंह: कृषि
  10. सर्वजीत कुमार: पर्यटन
  11. सुरेंद्र राम: श्रम संसाधन
  12. शमीम अहमद: गन्‍ना उद्योग
  13. शहनवाज: बापदा प्रबंधन
  14. इसरायल मंसूरी: सूचना-प्रावैधिकी
  15. कार्तिक सिंह: विधि मंत्री
  16. समीर महासेठ: उद्योग

जनता दल यूनाइटेड: 

  1. विजय चौधरी: वित्‍त, वाणिज्‍य एवं संसदीय कार्य
  2. बिजेंद्र यादव: ऊर्जा, योजना
  3. अशोक चौधरी: भवन निर्माण
  4. श्रवण कुमार: ग्रामीण विकास
  5. संजय झा: जल संसाधन, सूचना व जनसंपर्क
  6. मदन सहनी: समाज कल्‍याण
  7. शीला कुमारी: परिवहन
  8. लेशी सिंह: खाद्य व उपभोक्‍ता संरक्षण
  9. जमा खान: अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण
  10. जयंत राज: लघु जल संसाधन
  11. सुनील कुमार: निबंधन, उत्‍पाद व मद्य निषेध
  12. कांग्रेस:
    1. मुरारी प्रसाद गौतम: पंचायती राज
    2. अफाक आलम: पशु एवं मत्‍स्‍य संसाधन
  13. हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा:

    1. संतोष कुमार सुमन: अनुसूचित जाति व जनजाति कल्‍याण
  14. निर्दलीय:

    1. सुमित कुमार सिंह: विज्ञान एवं प्रावैधिकी


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UP में खुले रहेंगे स्कूल-कालेज-बाजार व सभी आफिस, उत्साह से मनेगा आजादी का अमृत महोत्सव

लखनऊ। आजादी के अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) के तहत स्वतंत्रता दिवस (Independence day) इस वर्ष विशेष उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय पर्व में जनभागीदारी बढ़ाते हुए स्वतंत्रता सप्ताह और हर घर तिरंगा जैसे कार्यक्रम (Har ghar Tiranga Abhiyan) आयोजित किए गए हैं। इसके साथ ही सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय किया है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस पर अवकाश नहीं रहेगा, बल्कि हर जगह इसे उत्साहपूर्वक मनाया जाएगा। 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पिछले दिनों निर्देश दिए थे स्वतंत्रता दिवस पर राज्य में कोई भी स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, सरकारी या गैर सरकारी दफ्तर, बाजार, माल व कारखाने आदि बंद नहीं रहेंगे। इसके लिए ही पिछले दिनों मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की ओर से शासनादेश जारी किया जा चुका है।

सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यूपी में  11 से 17 अगस्त तक स्वतंत्रता दिवस सप्ताह मनाया जा रहा है। निर्देश दिए गए हैं कि इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सभी स्कूल-कॉलेजों और संस्थानों पर सफाई का कार्यक्रम आयोजित होगा। सभी घरों और सरकारी, गैर सरकारी दफ्तरों और संस्थानों में सार्वजनिक स्थलों पर तिरंगा फहराया जाएगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता दिवस को लेकर प्रदेश के लोगों से अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए कहा है। जिसका असर भी दिख रहा है। हर घर तिरंगा अभियान में लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। सीएम योगी की ओर से प्रदेश में 4.5 करोड़ तिरंगे फहराने का लक्ष्य तय किया गया है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रदेश के हजारों स्वयं सहायता समूह, गैर सरकारी संगठन, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम इकाइयां दिन और रात एक किये हुए हैं। स्थिति यह है कि यूपी इस लक्ष्य से भी ज्यादा छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान से लोगों को जोड़ने की जरूरत है। इसके साथ ही युवाओं के लिए सेल्फी विद तिरंगा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की सेल्फी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया जाना चाहिए।


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दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर तक सुरक्षा चाकचौबंद, पंजाब और यूपी आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़

नई दिल्‍ली। स्वतंत्रता दिवस समारोह को निर्विघ्‍न धूमधाम से मनाने के लिए पूरे देश में सुरक्षा के पुख्‍ता इंतजाम किए गए हैं। समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर तक सुरक्षा चाकचौबंद रहेगी। स्‍वतंत्रता दिवस समारोह में कोई बाधा न आए इसके लिए राज्यों में पुलिस तंत्र को सतर्क कर दिया गया है। दिल्ली में जहां प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे उसकी सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस की ओर से 10,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है। 

एक अधिकारी ने कहा कि देश की वित्तीय राजधानी मुंबई की सड़कों पर ड्रोन रोधी प्रणालियों की तैनाती की गई है। महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यही नहीं अधिकारियों को सक्रिय रहने को कहा गया है। सुरक्षा लिहाज से ऑपरेशन ऑल आउट चलाया गया जिसमें होटल, वाहनों और रोड बैरिकेडिंग की जांच शामिल है। हिस्ट्रीशीटर और असामाजिक तत्‍वों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

कश्मीर में मुख्य समारोह शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में होगा। इसकी अध्यक्षता उपराज्यपाल मनोज सिन्हा करेंगे। ड्रोन, स्नाइपर और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को निगरानी के लिए तैनात किया गया है। जम्‍मू-कश्‍मीर में वाहनों की सघन जांच हो रही है। कई जगहों पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों को भारी संख्या में तैनात किया गया है ताकि आतंकवादियों द्वारा समारोह को बाधित करने की किसी भी कोशिश को विफल किया जा सके।

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‘हिंदू-मुस्लिम’ करना घातक होगा

हिंदू-मुस्लिम रिश्तों को लेकर सदा से ही भारत में आपसी भाईचारे और साझा विरासत का वातावरण रहा है। हां, लगभग 5-10 प्रतिशत तो हमेशा ही फसाद पर उतारू रहते हैं दोनों ओर, मगर आम तौर से गंगा-जमुनी तहज़ीब का ही अनुसरण करते चले आ रहे हैं, भारत के सभी निवासी, चाहे वे किसी भी धर्म के अनुयायी हों। कर्नाटक में जिस प्रकार से मंदिरों के निकट मुस्लिम दुकानदारों से सामान लेने के विरुद्ध वहां बैनर या पोस्टर लगाए गए हैं, उससे आपसी समभाव व सद्भाव पर कुप्रभाव पड़ सकता है। इस प्रकार की विघटनकारी बातों से बचने की आवश्यकता है। दक्षिण भारत के शिमोगा से एक विचलित करने वाली खबर आई है कि वहां के मंदिरों के कंप्लेक्स के बाहर कोई भी मुस्लिम अपनी किसी भी प्रकार की दुकान नहीं चलाएगा। इसका कारण बताया गया कि ये लोग बीफ का सेवन करते हैं। यह ठीक है कि बीफ के खाने से परहेज़ करना चाहिए मुस्लिमों को, क्योंकि गाय को हिंदू धर्म में माता के स्थान पर मान-सम्मान दिया गया है। जिस प्रकार से उडुपि, दक्षिण कन्नड़, टुमकुर, हासन, चिकमंग्लूर, दुर्गापुरामेशवरी आदि के मंदिरों के कैंपस में मुस्लिम पूजा सामग्री से लेकर अन्य नाना प्रकार का सामान बेचते थे, उससे न केवल इन मुस्लिम दुकानदारों के घर चलते थे बल्कि इस से अंतरधर्म सद्भावना व समभावना का सुखद प्रचार भी होता था। इन स्थानों पर बड़े-बड़े पोस्टर व बैनर लगा दिए गए हैं कि मुस्लिम दुकानदार से सौदा नहीं लिया जाए। इस प्रकार के बैनर न केवल अनैतिक व गैर कानूनी हैं बल्कि मानवता विरोधी भी हैं।

 

न जाने कब भारत में यह दूषित हिंदू-मुस्लिम मानसिकता की समाप्ति होगी। यदि भारत को विश्व गुरु और 5 ट्रिलियन अर्थ व्यवस्था बनना है तो हिंदू-मुस्लिम के मकडज़ाल से बाहर निकलना होगा और केवल और केवल भारत कार्ड खेलना होगा, न कि हिंदू-मुस्लिम ‘खेला होबे’! हां, एक सोचने वाली बात यह है कि आखिर यह कांड शिमोगा से ही क्यों शुरू हुआ! इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि इसी स्थान से हिजाब का अज़ाब शुरू हुआ था और 96 में से 6 छात्राओं ने बावजूद स्कूल से यह उसूल जारी होने पर कि हिजाब अन्यथा कोई और कोई धार्मिक पहनावा पहनने की अनुमति नहीं, फिर भी कक्षा की इन 6 छात्राओं ने इस बात की जि़द पकड़ ली कि वे हिजाब पहनकर ही कक्षा में आएंगी। वास्तव में उनको चंद कट्टरवादियों ने धमका दिया कि हिजाब नहीं तो किताब नहीं! एक समाज में जब एक तबक़ा जि़द पकड़ उद्दंड हो जाता है तो दूसरा तबका भी उसी रास्ते पर चल पड़ता है। 

 

इसी हिंदू-मुस्लिम पचड़े को लेकर लेखक की एक बार सरसंघचालक मोहन भागवत जी से बात हो रही थी तो उनका मत था कि अधिकतर मुस्लिम संस्कारी, राष्ट्रवादी व शांतिमय हैं, मगर कुछ स्वयंभू मुस्लिम नेता उन पर ढक्कन कस देते हैं जिसके कारण शाहीन बाग़ और हिजाब जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं और एक सुदृढ़ समाज को बांटने के प्रयास होते हैं। भागवत के विचार में मुस्लिम और हिंदू अलग हैं ही नहीं, भले ही उनका धर्म भिन्न हो, मगर डीएनए तो एक ही है। इसमें उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुस्लिमों के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती क्योंकि भारत को प्रगति के इस मुकाम तक लाने में मुसलमानों का बड़ा योगदान है। साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम उनकी संतान की माफिक हैं और उनके साथ वे बराबरी का सुलूक करना चाहते हैं। इस तरह दुकानदारी व दुकानदारों के मामले में हिंदू-मुस्लिम करना भारत के लिए घातक होगा। इससे बचा जाना चाहिए।

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‘कश्मीर फाइल्स’ व भारतीय सिनेमा

साहित्य समाज का दर्पण माना जाता है। भारतीय सिनेमा भी अपने शास्त्रीय युग में साहित्य के समकक्ष रहा है। ऐसी कई फिल्में हैं जिन्हें देखते समय श्रेष्ठ साहित्य वाचन सा आनंद प्राप्त होता है। हाल ही में ‘कश्मीर फाइल्स’ रिलीज हुई जिस पर प्रधानमंत्री जी की मुहर भी लग गई। फिल्म रिलीज के बाद परस्पर विरोधाभासी प्रतिक्रिया सामने आईं। प्रश्न कश्मीर से विस्थापित हुए पंडितों के द्वारा झेली गई त्रासदी, उस वक्त की परिस्थिति, राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर उठाए गए। पीडि़तों की संख्या और फिल्म में जो घटनाएं दिखाई गईं उनकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता पर सवाल उठे। सच तो यह है कि मानवीय पीड़ा का एहसास किसी एक के द्वारा भी किया गया हो, तो वो तहजीबी विरासत पर लगा बदनुमा दाग ही है, लेकिन किसी घटना को विरूपित करके प्रस्तुत करना भी उतनी ही बड़ी तहजीबी त्रासदी है। खासकर तब, जबकि इरादे में ईमानदारी न हो। इस फिल्म के पक्षधर भले ही यह न कह रहे हों, मगर उनका अव्यक्त भाव लोकमानस समझ रहा है। यह संप्रेषित हो रहा है कि जवाबी हिंसा जायज है, बहुसंख्या खतरे में है। उसके समक्ष रोटी, कपड़ा, मकान, रोजगार से ज्यादा बुलंद सवाल अपने को बचाने का है।

 

पिछले दिनों की गई पत्थरबाजी पर किसी बहुसंख्यक को शर्मिन्दा होने की जरूरत नहीं है। सवाल यह भी है कि कश्मीरी विस्थापित पंडित न होकर बहुजन समाज के होते, तो क्या प्रभुत्व संपन्न शहरी अभिजात्य वर्ग की चेतना इतनी ही आहत होती? शायद नहीं। फरीदाबाद, ऊना, हाथरस आदि सैकड़ों-हजारों घटनाएं जब घटीं तो इस वर्ग ने दूसरी तरफ नजर फेरना उचित समझा। कोरोना लॉकडाउन में पैदल लौटते समूहों को, जिनमें अधिकांश बहुजन थे, आदतन अशिष्ट करार दिया गया। उसी के बाद मौलिक हक से पहले मौलिक कत्र्तव्य पालन की बहस छेड़ी गई। प्रभुत्व संपन्न वर्ग को बहुजन पर होते अत्याचार पर कन्नी काटते हुए देखते समय पूछने को जी चाहता है कि क्या बहुजन हिंदू नहीं हैं? यदि नहीं हैं तो फिर धर्मांतरण का बवाल खड़ा क्यों किया जाए? प्रभुत्व संपन्नता यह मानती है कि उन पर अत्याचार का उनको वैसा नैसर्गिक हक है, जैसा मनुस्मृति में दर्ज है। कुछ साल पहले भिंड (मध्य प्रदेश) में जातिगत हिंसा में करीब छह दलित नौजवान प्रभुत्व संपन्न वर्ग की गोली का शिकार हुए थे। यदि तमाम ऐसी घटनाओं पर ‘बहुजन फाइल्स’ बने, तो उस पर क्या प्रतिक्रिया होगी? माननीय प्रधानमंत्री जी मुहर लगाएंगे?

 

शायद उनके संगठन फिल्म निर्माता, कलाकारों को देशद्रोही घोषित कर देंगे। ‘कश्मीर फाइल्स’ पर प्रतिक्रिया स्वरूप जब राजस्थान के एक युवक ने दलित अत्याचार का प्रश्न उठाया, तो उस पर सभी दक्षिणपंथी सोशल मीडिया के जरिए टूट पड़े। देश की आबादी में मात्र आठ फीसदी आदिवासी हैं, लेकिन वे 57 फीसदी विस्थापन झेलते हैं और तब प्रभुत्व संपन्नता उसे विकास के लिए जरूरी करार देती है। आदिवासी जब प्रतिरोध करते हैं, तो जाहिल, विकास विरोधी कहलाते हैं। इसका यह कतई मतलब नहीं कि कश्मीरी पंडितों का विस्थापन, उन पर हुए अत्याचार कोई मानवीय त्रासदी नहीं है। किसी एक भी इनसान को विस्थापन और अत्याचार झेलना पड़े तो वह मानवता मात्र पर लगा कलंक है। बहरहाल, ‘कश्मीर फाइल्स’ के बाद अब फिल्मों में अपवाद स्वरूप भी नेकनीयत मुस्लिम को दिखाने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी। बिना किसी आत्मबोध के उन्हें गलत ठहराया जा सकेगा। तो क्या यह आज के समाज की सोच है या ऐसा समाज बनाने के लिए वातावरण निर्माण किया जा रहा है?

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क्या भारत में दो टाइम ज़ोन होने चाहिये?

साल 2002 से संसद के हर सत्र में बार-बार दोहराया गय सवाल है; क्या भारत में दो समय क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव है और इसे लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? सबसे पहले ये सवाल मार्च 2002 में उठाया गया था, उस वर्ष के अगस्त में प्रश्न को प्रभावी ढंग से सुलझा लिया गया था। उस वर्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा गठित एक 'उच्च स्तरीय समिति' ने इस मुद्दे का अध्ययन किया था और निष्कर्ष निकाला था कि कई ज़ोन 'कठिनाइयों' का कारण बन सकते हैं जो "एयरलाइंस, रेलवे, रेडियो, टेलीविज़न" और टेलीफोन सेवाएं” के सुचारू कामकाज को बाधित करेंगे। इसलिए एकीकृत समय के साथ जारी रखना सबसे अच्छा था।

 

भारत पूर्व से पश्चिम तक लगभग 3000 किमी तक फैला हुआ है। देश के पूर्वी और पश्चिमी छोरों के बीच लगभग 28 डिग्री देशांतर है जिसके परिणामस्वरूप पश्चिमी और पूर्वी बिंदु के बीच लगभग दो घंटे का अंतर होता है। भारतीय मानक समय (उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में 82.5′ ई देशांतर के आधार पर गणना की गई), अधिकांश भारतीयों को प्रभावित नहीं करता है, सिवाय उन लोगों को छोड़कर जो पूर्वोत्तर क्षेत्र में रहते हैं जहां सूरज गर्मियों में सुबह 4 बजे के आसपास उगता है, और शाम 4 बजे से पहले सर्दियों में अंधेरा हो जाता है। इसलिए, पूर्वोत्तर क्षेत्र ने लंबे समय से उनके जीवन और उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर एकल समय क्षेत्र के प्रभाव के बारे में शिकायत की है।

 

हाल ही में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल), जो भारतीय मानक समय (आईएसटी) को बनाए रखती है, ने भारत में दो समय क्षेत्रों और दो आईएसटी का सुझाव देते हुए एक शोध प्रकाशित किया: अधिकांश भारत के लिए आईएसटी-I और आईएसटी- II के लिए उत्तर-पूर्वी क्षेत्र - एक घंटे के अंतर से अलग। दो समय क्षेत्रों की मांग इसलिए बढ़ी क्योंकि उत्तरपूर्वी भारत और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अपने भूगोल के कारण, देश के बाकी हिस्सों की तुलना में जल्दी सूर्योदय और सूर्यास्त देखते हैं।

 

लेकिन घड़ियां इसके लिए जिम्मेदार नहीं थीं और आधिकारिक काम के घंटे हर जगह समान थे, सुबह के समय मूल्यवान काम के घंटे खराब होने और इन क्षेत्रों में शाम के घंटों में अनावश्यक बिजली की खपत हुई इसलिए, व्यापक रूप से प्रचलित यू.एस. के पांच समय क्षेत्र और रूस के 11 के आधार पर भारत में भी कई टाइम जोन लागू करने की बात सामने आई। मगर विशेषज्ञ समिति ने, कई समय क्षेत्रों का समर्थन नहीं करते हुए, सिफारिश की कि पूर्वी राज्यों में काम के समय को एक घंटे आगे बढ़ाया जाए, ताकि सुबह के घंटों का "लाभदायक उपयोग" किया जा सके और इसमें संबंधित अधिकारियों द्वारा इस संबंध में केवल प्रशासनिक निर्देश शामिल होंगे।

 

लेकिन दो समय क्षेत्रों के लाभ अपनी जगह है हम उनको नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते; इससे कार्यबल के बीच और ऊर्जा की खपत में अधिक दक्षता आएगी। ऊर्जा की खपत में कमी से भारत के कार्बन फुटप्रिंट में काफी कमी आएगी, जिससे जलवायु परिवर्तन से लड़ने के भारत के संकल्प को बढ़ावा मिलेगा। प्राकृतिक चक्रों के अनुसार दो अलग-अलग समय क्षेत्र होने से आर्थिक लाभ होते हैं क्योंकि लोग बेहतर काम करने और बेहतर योजना बनाने में सक्षम होंगे। कई सामाजिक नीतिगत उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है जैसे सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और महिलाओं की सुरक्षा में सुधार करना।

 

दूसरी तरफ दो समय क्षेत्र होने की समस्या को देखे तो दो टाइम जोन होने से रेल हादसों की संभावना बढ़ जाएगी। रेलवे सिग्नल पूरी तरह से स्वचालित नहीं हैं, और कई मार्गों में सिंगल ट्रैक हैं। समय क्षेत्र के प्रत्येक क्रॉसिंग के साथ घड़ियों को रीसेट करना। दो समय क्षेत्र होने पर कार्यालय समय के बीच ओवरलैप कम हो जाता है। बैंकों, उद्योगों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को नए समय क्षेत्रों में समायोजन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। दो जोन की डिवाइडिंग लाइन को चिह्नित करने में दिक्कत होगी। दो समय क्षेत्रों के प्रतिकूल राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं क्योंकि भारत धर्म, जाति, नस्ल, भाषा आदि के आधार पर विभाजित होने के अलावा, अब समय क्षेत्र की तर्ज पर विभाजित हो जाएगा।

 

भारतीय समय क्षेत्र के संबंध में सभी पहलुओं पर नए सिरे से विचार करने के लिए परामर्श की प्रक्रिया शुरू करना समय की मांग है। आईएसटी को आधे घंटे आगे सेट करने के कुछ शोधकर्ताओं के प्रस्ताव की जांच की जा सकती है और बहस की जा सकती है। इसका मतलब होगा कि आईएसटी को 82.5 डिग्री पूर्व से 90 डिग्री पूर्व में आगे बढ़ाना, जो पश्चिम बंगाल-असम सीमा के साथ एक देशांतर पर होगा, असम की मांग को पूरा करने में किसी तरह से मदद करेगा और उत्तर-पश्चिमी भारत से संबंधित असुविधाओं के बारे में संभावित शिकायतों से बचने में मदद करेगा। यदि अलग मानक समय की व्यवस्था से मानव श्रम का उचित प्रबंधन और बड़ी मात्रा में बिजली की बचत की जा सकती है तो इस संबंध में विचार किये जाने की आवश्यकता है।

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मुसीबत में की मदद

एक बार मैं अपनी मम्मी के साथ लोकल ट्रेन से यात्रा कर रहा था। ट्रेन में काफी भीड़ थी, लेकिन किसी तरह एक बोगी में दरवाजे के पास ही सीट मिल गई। तभी मैंने देखा कि एक गरीब लड़का टोकरी में केले लेकर मेरी बोगी की तरफ आ रहा है। अचानक ट्रेन चल दी और उसने दौड़कर सबसे पहले अपनी टोकरी मेरी बोगी के दरवाजे पर रख दी। लेकिन ट्रेन स्पीड पकड़ चुकी और सामने टोकरी होने की वजह से केले बेचने वाला लड़का मेरी बोगी में चढ़ नहीं पाया। वह शायद किसी और बोगी में चढ़ गया था।

 

उसकी केले से भरी टोकरी दरवाजे के पास ही पड़ी थी। इस बीच मेरी बोगी का एक लड़का बिना मालिक के टोकरी देख, उसमें से केले निकालकर खाने लगा। वह ऐसे खुश होकर जल्दी-जल्दी केले खा रहा था, जैसे उसकी लॉटरी लग गई हो। उसको देख उसके कई और दोस्त केलों पर टूट पड़े। ट्रेन के अगले स्टॉपेज पर रुकते-रुकते वे लोग टोकरी के आठ-दस दर्जन केले चट कर चुके थे। इसके बाद वे वहां से हट गए। ट्रेन रुकने पर टोकरी का मालिक लड़का दौड़कर मेरी बोगी में आया।

 

अपनी टोकरी की हालत देख वह सन्न रह गया और फूट-फूट कर रोने लगा। वह किसी पर इल्जाम भी नहीं लगा सकता था, क्योंकि उसने किसी को केले खाते नहीं देखा था। ट्रेन चल चुकी थी। वह

 

बेहद गरीब लड़का था और इतना नुकसान उसके लए बड़ी बात थी, शायद इसीलिए रो रहा था। मुझे उस पर काफी तरस आया। उन लड़कों पर गुस्सा भी आ रहा था, जिन्होंने उसके केले खाए थे। मेरे दिमाग

 

में ख्याल आया कि क्यों न केले बेचने वाले लड़के की मदद की जाए। मैंने मम्मी से यह बात बताई और उनसे दस रुपये मांगे तो वे पहले तो थोड़ा हिचकीं, लेकिन फिर उन्होंने पैसे दे दिए। मैंने और यात्रियों को

 

यह बात बताई और सबको इसके लिए राजी करने की कोशिश की कि गरीब लड़के की मदद करनी चाहिए। किसी ने दस रुपये दिए तो किसी ने बीस, यहां तक कि केले खाने वाले लड़कों में से भी कुछ ने

 

शर्मिंदा होकर दस-दस के नोट निकाल दिए।

 

मेरे पास कुल मिलाकर दो सौ रुपये जमा हो गए थे। मैंने जाकर उस गरीब लड़के को दिए तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। उसने मुझे बहुत धन्यवाद दिया। मम्मी सहित अन्य सभी यात्रियों ने मुझे शाबाशी दी। सच है दोस्तो, मुसीबत में फंसे व्यक्ति की मदद करने की खुशी ही अलग होती है...

 

(अमन कुमार, सरिस्ताबाद, पटना)

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लंका दहन के समय एक घर छोड़ दिया था हनुमानजी ने

मेघनाथ ने श्रीहनुमानजी को रावण के सामने लाकर खड़ा कर दिया। हनुमानजी ने देखा कि राक्षसों का राजा रावण बहुत ही ऊंचे सोने के सिंहासन पर बैठा हुआ है। उसके दस मुंह और बीस भुजाएं हैं। उसका रंग एकदम काला है। उसके आसपास बहुत से बलवान योद्धा और मंत्री आदि बैठे हुए हैं। लेकिन रावण के इस प्रताप और वैभव का हनुमानजी पर कोई असर नहीं पड़ा। वह वैसे ही निडर खड़े रहे जैसे सांपों के बीच में गरुड़ खड़े रहते हैं।

 

हनुमानजी को इस प्रकार अपने सामने अत्यन्त निर्भय और निडर खड़े देखकर रावण ने पूछा- बन्दर तू कौन है? किसके बल के सहारे वाटिका के पेड़ों को तुमने नष्ट किया है? राक्षसों को क्यों मारा है? क्या तुझे अपने प्राणों का डर नहीं है? मैं तुम्हें निडर और उद्दण्ड देख रहा हूं। हनुमानजी ने कहा- जो इस संपूर्ण विश्व के, इस संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी हैं, मैं उन्हीं भगवान श्रीरामचंद्रजी का दूत हूं। तुम चोरी से उनकी पत्नी का हरण कर लाये हो। उन्हें वापस कर दो। इसी में तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का कल्याण है। यदि तुम यह जानना चाहते हो कि मैंने अशोवाटिका के फल क्यों खाये, पेड़ आदि क्यों तोड़े, राक्षसों को क्यों मारा तो मेरी बात सुनो। मुझे बहुत जोर की भूख लगी थी इसलिए वाटिका के फल खा लिये। बंदर स्वभाव के कारण कुछ पेड़ टूट गये। अपनी देह सबको प्यारी होती है इसलिए जिन लोगों ने मुझे मारा, मैंने भी उन्हें मारा। इसमें मेरा क्या दोष है? लेकिन इसके बाद भी तुम्हारे पुत्र ने मुझे बांध रखा है।

 

रावण को बहुत ही क्रोध चढ़ आया। उसने राक्षसों को हनुमानजी को मार डालने का आदेश दिया। राक्षस उन्हें मारने दौड़ पड़े। लेकिन तब तक विभीषण ने वहां पहुंच कर रावण को समझाया कि यह तो दूत है। इसका काम अपने स्वामी को संदेश पहुंचाना है। इसका वध करना उचित नहीं होगा। इसे कोई अन्य दंड देना ही ठीक होगा। विभीषण की यह सलाह रावण को पसंद आ गयी। उसने कहा ठीक है बंदरों को अपनी पूंछ से बड़ा प्यार होता है। इसकी पूंछ में कपड़े लपेटकर, तेल डालकर उसमें आग लगा दो। जब यह बिना पूंछ का होकर अपने स्वामी के पास जायेगा तब फिर उसे भी साथ लेकर लौटेगा। यह कहकर वह बड़े जोर से हंसा।

 

रावण का आदेश पाकर राक्षस हनुमानजी की पूंछ में तेल भिगो भिगोकर कपड़े लपेटने लगे। अब तो हनुमानजी ने बड़ा ही मजेदार खेल किया। वह धीरे धीरे अपनी पूंछ को बढ़ाने लगे। ऐसी नौबत आ गयी कि पूरी लंका में तेल, कपड़े और घी बचे ही नहीं। अब राक्षसों ने तुरंत उनकी पूंछ में आग लगा दी। पूंछ में आग लगते ही हनुमानजी तुरंत उछलकर एक ऊंची अटारी पर जा पहुंचे और वहां से चारों ओर कूद कूदकर वह लंका को जलाने लगे। देखते ही देखते पूरी नगरी आग की विकराल लपटों में घिर गयी। सभी राक्षस और राक्षसियां जोर जोर से चिल्लाने लगे। वे सब रावण को कोसने लगे। रावण को भी आग बुझाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। हनुमानजी की सहायता करने के लिए पवन देवता भी जोर जोर से बहने लगे। थोड़ी ही देर में पूरी लंका जलकर नष्ट हो गयी। हनुमानजी ने केवल विभीषण का घर छोड़ दिया और उसे जलाया नहीं।

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पित्त और कफ विकारों का घरेलू उपचार है गूलर

मोरासी परिवारी का सदस्य गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है। इसका वनस्पतिक नाम फीकुस ग्लोमेराता रौक्सबुर्ग है। यह सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है। यह नदी−नालों के किनारे एवं दलदली स्थानों पर उगता है। उत्तर प्रदेश के मैदानों में यह अपने आप ही उग आता है।

 

इसके भालाकार पत्ते 10 से सत्रह सेमी लंबे होते हैं जो जनवरी से अप्रैल तक निकलते हैं। इसकी छाल का रंग लाल−घूसर होता है। फल गोल, गुच्छों में लगते हैं। फल मार्च से जून तक आते हैं। कच्चा फल छोटा हरा होता है पकने पर फल मीठे, मुलायम तथा छोटे−छोटे दानों से युक्त होता है। इसका फल देखने में अंजीर के फल जैसा लगता है। इसके तने से क्षीर निकलता है।

 

आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार गूलर का कच्चा फल कसैला एवं दाहनाशक है। पका हुआ गूलर रुचिकारक, मीठा, शीतल, पित्तशामक, तृषाशामक, श्रमहर, कब्ज मिटाने वाला तथा पौष्टिक है। इसकी जड़ में रक्तस्राव रोकने तथा जलन शांत करने का गुण है। गूलर के कच्चे फलों की सब्जी बनाई जाती है तथा पके फल खाए जाते हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर या अन्य प्रकार से उपयोग किया जाता है।

 

गूलर के नियमित सेवन से शरीर में पित्त एवं कफ का संतुलन बना रहता है। इसलिए पित्त एवं कफ विकार नहीं होते। साथ ही इससे उदरस्थ अग्नि एवं दाह भी शांत होते हैं। पित्त रोगों में इसके पत्तों के चूर्ण का शहद के साथ सेवन भी फायदेमंद होता है।

 

गूलर की छाल ग्राही है, रक्तस्राव को बंद करती है। साथ ही यह मधुमेह में भी लाभप्रद है। गूलर के कोमल−ताजा पत्तों का रस शहद में मिलाकर पीने से भी मधुमेह में राहत मिलती है। इससे पेशाब में शर्करा की मात्रा भी कम हो जाती है। गूलर के तने को दूध बवासीर एवं दस्तों के लिए श्रेष्ठ दवा है। खूनी बवासीर के रोगी को गूलर के ताजा पत्तों का रस पिलाना चाहिए। इसके नियमित सेवन से त्वचा का रंग भी निखरने लगता है।

 

हाथ−पैरों की त्वचा फटने या बिवाई फटने पर गूलर के तने के दूध का लेप करने से आराम मिलता है, पीड़ा से छुटकारा मिलता है। गूलर से स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी अनियमितताएं भी दूर होती हैं। स्त्रियों में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर इसकी छाल के काढ़े का सेवन करना चाहिए। इससे अत्याधिक बहाव रुक जाता है। ऐसा होने पर गूलर के पके हुए फलों के रस में खांड या शहद मिलाकर पीना भी लाभदायक होता है। विभिन्न योनि विकारों में भी गूलर काफी फायदेमंद होता है। योनि विकारों में योनि प्रक्षालन के लिए गूलर की छाल के काढ़े का प्रयोग करना बहुत फायदेमंद होता है।

 

मुंह के छाले हों तो गूलर के पत्तों या छाल का काढ़ा मुंह में भरकर कुछ देर रखना चाहिए। इससे फायदा होता है। इससे दांत हिलने तथा मसूढ़ों से खून आने जैसी व्याधियों का निदान भी हो जाता है। यह क्रिया लगभग दो सप्ताह तक प्रतिदिन नियमित रूप से करें।

 

आग से या अन्य किसी प्रकार से जल जाने पर प्रभावित स्थान पर गूलर की छाल को लेप करने से जलन शांत हो जाती है। इससे खून का बहना भी बंद हो जाता है। पके हुए गूलर के शरबत में शक्कर, खांड या शहद मिलाकर सेवन करने से गर्मियों में पैदा होने वाली जलन तथा तृषा शांत होती है।

 

नेत्र विकारों जैसे आंखें लाल होना, आंखों में पानी आना, जलन होना आदि के उपचार में भी गूलर उपयोगी है। इसके लिए गूलर के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे साफ और महीन कपड़े से छान लें। ठंडा होने पर इसकी दो−दो बूंद दिन में तीन बार आंखों में डालें। इससे नेत्र ज्योति भी बढ़ती है। नकसीर फूटती हो तो ताजा एवं पके हुए गूलर के लगभग 25 मिली लीटर रस में गुड़ या शहद मिलाकर सेवन करने या नकसीर फूटना बंद हो जाती है।

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प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ी कहानियां साझा करने वाला पोर्टल शुरू

नई दिल्ली, 26 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी प्रेरक कहानियों को एकसाथ पेश करने के लिए एक पोर्टल ‘मोदीस्टोरी डॉट इन’ का शुभारंभ किया गया है। मोदी के दशकों लंबे जीवन सफर में उनके संपर्क में आये लोगों के अनुभवों के आधार पर इन कहानियों को तैयार किया गया है।

 

प्रधानमंत्री के एक सहयात्री के हवाले से पोर्टल ने ट्वीट किया कि, ‘‘पोर्टल ‘मोदी स्टोरी’ की घोषणा एक स्वयंसेवी पहल है, जिसके तहत नरेंद्र मोदी के जीवन से जुड़े रोचक कहानियों को एक साथ लाया जायेगा।’’ पोर्टल की ओर से यह भी ट्वीट किया गया कि इस पोर्टल का उद्घाटन महात्मा गांधी की पोती सुमित्रा गांधी कुलकर्णी ने किया।

 

इस वेबसाइट पर पंजाब से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता मनोरंजन कालिया ने मोदी से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। मोदी ने पार्टी पदाधिकारी के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा के शुरुआती दिनों में इस राज्य में काम किया था। इसके अलावा गुजरात के वडनगर में प्रधानमंत्री के स्कूल के प्रधानाध्यापक रासबिहारी मानियार और शारदा प्रजापति ने भी मोदी से जुड़े अनुभवों को साझा किया। मोदी 1990 के दशक में अपने दौरों के दौरान प्रजापति के आवास में अक्सर ठहरा करते थे।

 

इस पोर्टल पर ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंदन ने भी मोदी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं। कालिया ने चुनाव प्रचार मुहिम के दौरान मोदी की बेहतरीन समझ का जिक्र किया और प्रचार के दौरान बच्चों को वितरित करने के लिए टॉफी रखने की प्रधानमंत्री की सलाह के बारे में बताया। मानियार ने कहा कि मोदी देश के सशस्त्र बलों के लिए गहरी भावनाएं रखते हैं और युवा छात्र के रूप में वह एक सैनिक स्कूल का आवेदन प्रपत्र लेकर उनके पास आए थे।

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राहुल का महंगाई को लेकर सरकार पर तंज

नई दिल्ली, 26 मार्च। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महंगाई को लेकर दो पंक्ति की कविता में सरकार पर शनिवार को तीखा तंज करते हुए कहा कि वह अपने लिए खुशहाली का महल बनाने में जुटी है और जनता महंगाई की मार से त्रस्त है। श्री गांधी ने ट्वीट किया "राजा करे महल की तैयारी, प्रजा बेचारी महंगाई की मारी।" इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के कुछ ट्वीट को उद्धृत किया है जिनमें कहा गया है कि पेट्रोल डीजल की कीमतें आउट ऑफ कंट्रोल हो गई हैं और पांच दिन में इनकी दर 3.20 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है जबकि घरेलू सिलेंडर गैस की कीमत 50 रुपये तक महँगी हो गई है।

 

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मंत्रिमंडल की पहली बैठक में मुफ्त राशन योजना को तीन महीने तक बढ़ाने का निर्णय

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शनिवार को मंत्रिमंडल की बैठक में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई मुफ्त राशन योजना को तीन महीने तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

 

मार्च 2022 तक के लिए लागू की गई योजना अब जून तक जारी रहेगी। इसमें 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने का प्रावधान है। इस योजना के तहत अगले तीन और माह तक खाद्यान्न योजना के तहत प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को दाल, नमक, चीनी के साथ खाद्यान्न मिलता रहेगा। योजना मार्च 2022 में खत्म हो रही थी।

 

माना जा रहा है कि इस बार भाजपा की जीत में मुफ्त राशन की इस योजना का जबरदस्त प्रभाव रहा है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के बाद आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की पहली कैबिनेट बैठक शनिवार सुबह यहां लोकभवन में हुई।

 

मुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘कोरोना वायरस महामारी के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के हर नागरिक के लिए ‘प्रधानमंत्री अन्न योजना’ प्रारंभ की थी। इस योजना के अन्तर्गत देश की 80 करोड़ जनता को इसका लाभ मिल रहा है।’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘मार्च-अप्रैल 2020 से लेकर मार्च 2022 तक लगभग 15 महीनों तक इस योजना का लाभ लोगों को प्राप्त हुआ है। 15 करोड़ लोगों को उत्तर प्रदेश में इसका लाभ प्राप्त होता था। राज्य सरकार ने भी उत्तर प्रदेश के अंत्योदय के लाभार्थी और पात्र परिवारों सहित 15 करोड़ लाभार्थियों के लिए यह योजना अपनी ओर से अप्रैल 2020 से आरंभ की थी।’’

 

उन्होंने कहा कि योजना के अन्तर्गत राज्य की 15 करोड़ अंत्योदय जनता को 35 किलोग्राम खाद्यान्न और पात्र परिवारों को पांच-पांच किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त होता है। राज्य सरकार ने इसके साथ ही प्रत्येक परिवार को एक किलोग्राम दाल, एक किलोग्राम रिफाइंड तेल, एक किलोग्राम आयोडीनयुक्त नमक भी उपलब्ध कराया था। इसके साथ ही अंत्योदय परिवारों को राज्य सरकार ने एक किलोग्राम चीनी भी उपलब्ध करायी थी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह योजना मार्च 2022 तक थी। इसलिए मंत्रिमंडल ने शनिवार को निर्णय लिया कि अगले तीन महीनों तक प्रदेश के 15 करोड़ लोगों के लिए यह योजना जारी रहेगी। ‘डबल इंजन की सरकार’ पहले भी जनता के साथ खड़ी रही। महामारी के दौरान निशुल्क इलाज, निशुल्क टीका उपलब्ध कराया गया।’’ संवाददाता सम्मेलन में योगी आदित्यनाथ के साथ उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक तथा कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना एवं स्वतंत्र देव सिंह भी मौजूद थे।

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अखिलेश और मायावती ने दी योगी सरकार को बधाई

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बधाई दी है। दोनो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने योगी सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन और जनता की सेवा करने की सलाह भी दी है। योगी सरकार के शुक्रवार को संपन्न शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किये जाने के बावजूद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी,महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव,बसपा अध्यक्ष मायावती नहीं पहुंचे थे। हालांकि अखिलेश और मायावती ने ट्विटर के जरिये नई सरकार को बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित की हैं। सुश्री मायावती ने शनिवार को ट्वीट किया, “यूपी में नई भाजपा सरकार के गठन की बधाई तथा यह सरकार संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों एवं आदर्शों के साथ कार्य करे।” इससे पहले श्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया था, “नई सरकार को कि वो सपा के बनाए स्टेडियम में शपथ ले रही है। शपथ सिर्फ़ सरकार बनाने की नहीं, जनता की सच्ची सेवा की भी लेनी चाहिए।” लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में योगी सरकार के 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा,केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह,रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अलावा 12 राज्यों के मुख्यमंत्री एवं पांच राज्यों के उपमुख्यमंत्री शामिल हुये थे।

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अखिलेश को सपा विधायक दल का नेता चुना गया

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव को विधानसभा में पार्टी के विधायक दल और विधानमंडल दल का नेता चुना गया है। यहां स्थित सपा मुख्यालय में शनिवार को हुयी पार्टी विधायक दल की बैठक में अखिलेश को सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से नेता चुन लिया। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने विधायक दल की बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में अखिलेश को सर्वसम्मति से पार्टी के विधानमंडल दल का नेता भी चुना गया। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में सपा के 111 विधायक जीते हैं। इस प्रकार विधानसभा में दूसरा सबसे बड़ा दल होने के नाते सपा मुख्य विपक्षी पार्टी होगी। ऐसे में अखिलेश का नेता प्रतिपक्ष बनना लगभग तय है। विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश ने आजमगढ़ से लोकसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया था। उत्तम ने बताया कि सपा के वरिष्ठ विधायक अवधेश प्रसाद ने अखिलेश को विधायक दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा और विधायक आलम बदी ने उसका समर्थन किया। इसके अलावा विधायक लालजी वर्मा ने अखिलेश को विधानमंडल दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा। सपा के चुनाव चिन्ह पर विधायक बने प्रसपा नेता शिवपाल सिंह यादव को बैठक में नहीं बुलाये जाने के बारे में उत्तम ने कहा कि आज केवल सपा के विधायकों को बुलाया गया था। बैठक में सहयोगी दलों के किसी विधायक को नहीं बुलाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया, “सहयोगी दलों के जो विधायक सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीते उन्हें और सहयोगी दलाें के विधायकाें की बैठक 28 मार्च को बुलायी गयी है, चाहे वे शिवपाल यादव हों, पल्लवी पटेल या ओपी राजभर हों, सब को 28 मार्च को बुलाया जाएगा।”

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हिजाब विवाद सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट का निश्चित तारीख देने से इनकार (अपडेट)

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 'हिजाब' के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए कोई निश्चित तारीख तय करने से गुरुवार को इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत द्वारा शीघ्र सुनवाई के लिए किसी निश्चित तारीख पर सूचीबद्ध करने की गुहार ठुकरा दी।

श्री कामत ने कर्नाटक में 28 मार्च से आयोजित होने वाली परीक्षाओं( जिसमें याचिकाकर्ता भी शामिल है) का उल्लेख करते हुए उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली कुछ छात्राओं की याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।

श्री कामत द्वारा 'विशेष उल्लेख' के दौरान परीक्षा की तारीख का जिक्र करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "इसका परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक संवेदनशील मामला है।"

मुख्य न्यायाधीश ने 16 मार्च को तत्काल सुनवाई करने की मांग संबंधी गुहार के मद्देनजर इस मामले पर होली के बाद विचार करने का संकेत दिया था।

वरिष्ठ वकील संजय हेगडे ने इस मामले को अति आवश्यक बताते हुए 16 मार्च को विशेष उल्लेख के दौरान तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी।

स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक जारी रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद ही उसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी। इसके बाद कई याचिकाएं दायर की गईं।

याचिकाकर्ताओं में शामिल निबा नाज़ ने उच्च न्यायालय के फैसले को अधिवक्ता अनस तनवीर के माध्यम से शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

याचिकाकर्ता ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम-1983 और इसके तहत बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए अपनी याचिका में दावा किया है कि विद्यार्थियों के लिए किसी भी तरह से अनिवार्य वर्दी का प्रावधान नहीं है।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था, "हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वर्दी का निर्धारण संवैधानिक है और विद्यार्थी इस पर आपत्ति नहीं कर सकते।"

अदालत में दायर याचिका में कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा पारित पांच फरवरी 2022 के आदेश की वैधता पर सवाल सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि यह निर्देश "धार्मिक अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से इस्लामी आस्था के हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला अनुयायियों का उपहास कर उन पर एक प्रकार से हमला करने के अप्रत्यक्ष इरादे से जारी किया गया था।"

याचिका में कहा गया है कि हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अंतरात्मा के अधिकार के तहत संरक्षित है।

याचिकाकर्ताओं ने विभिन्न तर्कों के माध्यम से उच्च न्यायालय के फैसले को कानून के खिलाफ बताते हुए उसे चुनौती दी।

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अमीरी, सुख, समृद्धि : अमीरी एक ऐसा मानवाधिकार है

नई दिल्ली: अमीरी एक ऐसा मानवाधिकार है जिसकी चाहत हर किसी को है। इनसान ही नहीं, दुनिया का कोई भी जीव दुख नहीं उठाना चाहता, हम तो फिर इनसान हैं। हम में से कोई भी गरीबी में और अभावों में नहीं जीना चाहता। पैसे से चाहे हर सुख न खरीदा जा सकता हो, पर बहुत से सुख पैसे से खरीदे जा सकते हैं, और यह भी सच है कि धन का अभाव बहुत से दुखों का कारण बन जाता है, यहां तक कि गरीबी कई बार आत्महत्याओं तक का कारण बन जाती है। फिर कौन चाहेगा कि वह अभावों भरा जीवन जिए या फिर जीवन भर दूसरों की कृपा का मोहताज बना रहे? अमीरी एक बुनियादी मानवाधिकार है, पर कोई आपको इसे तश्तरी में पेश नहीं करेगा। इसके लिए स्वयं आपको ही प्रयत्न करना होगा और जोखिम भी उठाना पड़ेगा। अमीरी का अधिकार मांगने से नहीं मिलता, इसे कमाना पड़ता है। भारतीय आम आदमी के अमीर बनने में दो बड़ी अड़चनें हैं। पहली अड़चन है सही ज्ञान का अभाव, और दूसरी अड़चन है गलत अथवा अस्वस्थ नज़रिया। अक्सर हम गरीब लोगों को अमीरों की आलोचना करते हुए या उनका मजाक उड़ाते हुए और यहां तक कि उन पर दया दिखाते हुए पाते हैं। भारतवर्ष मूलतः एक धर्म-परायण देश है और आम आदमी धर्म-भीरू है। धर्म की हमेशा से संतोषी जीवन जीने की सीख रही है। इस सीख की आड़ में हमने आलस्य को अपना लिया और अपनी गलतियां स्वीकार करने के बजाय गरीबी को महिमामंडित करना आरंभ कर दिया। अमीरी से घृणा करके और अमीरों को शोषक मानकर हम प्रगति नहीं कर सकते। अब हम जानते हैं कि नई अर्थव्यवस्था के इस युग में ज्ञान का पूंजी बनाकर धन-संपदा कमाना कोई अजूबा नहीं है। अगर हम सिर्फ इस तथ्य को समझ लें तो हम गरीबी के कारणों का विश्लेषण करके अमीरी की ओर मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं। एक और जानने योग्य तथ्य यह है कि भारतवर्ष एक गरीब देश है, लेकिन यहां सोने की खरीद सबसे ज्य़ादा होती है। शादियों के सीज़न में सोने का भाव तेज़ी से चढ़ जाता है। पिछले कुछ सालों तक शादी का सीज़न बीतने पर सोने का भाव धीरे-धीरे नीचे आ जाता था, लेकिन अब जैसे आम की जगह माज़ा ने ले ली है और हम सर्दियों में भी कोक पीने लग गए हैं, वैसे ही सोना भी बारहमासी हो गया है और इस साल सोने के दाम घटने के बजाय बढ़ते ही नज़र आए।

 

इसके बावजूद सोने की खरीद की रफ्तार में कोई कमी नहीं दिखी। ऐसे में यह जानकर किसे आश्चर्य होगा कि भारतवर्ष में स्वर्ण की मात्रा 20 हज़ार टन तक पहुंच गई है। स्वर्ण की खरीद एक भावनात्मक सवाल बन गया है। जिसके पास जितना सोना होगा, वह उतना ही सुरक्षित महसूस करेगा, खुद को अमीर मानेगा। यह बचत का एक बड़ा साधन है। रुपए का अवमूल्यन हो रहा है, लेकिन सोने का रेट बढ़ रहा है। इसलिए जनता में सोने के प्रति लगाव कम नहीं हो रहा है। समस्या यह है कि हम सोने की जमाखोरी करते हुए अपने धन का दुरुपयोग कर रहे हैं क्योंकि यही धन अगर किसी अन्य बचत अथवा निवेश में लगता तो हमारी आर्थिक अवस्था कहीं ज्य़ादा सबल होती। सच तो यह है कि हम सोने को लेकर सचमुच सो रहे हैं। दरअसल बचत, निवेश और पूंजी निर्माण को लेकर हम अब भी पुरानी अर्थव्यवस्था के हिसाब से चल रहे हैं। बदलते ज़माने की जरूरतों को समझे बिना हम पुरानी आदतों से चिपके हुए हैं। हम बैलगाड़ी पर बैठकर वर्तमान युग की सुपर सोनिक रफ्तार का मुकाबला करना चाह रहे हैं। बहुत से लोग अमीर होते हैं, पर वे अमीर नहीं दिखते, बहुत से लोग गरीब होते हैं पर वे गरीब नहीं दिखते, और बहुत से मध्यवर्गीय लोग वास्तविक अमीरी को जाने बिना अमीर दिखने की कोशिश में जुट जाते हैं और इस कोशिश में अक्सर कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे लोग यदि प्रमोशन हो जाए या ज्यादा बढि़या तनख्वाह वाली नई नौकरी मिल जाए या अपना बिज़नेस अच्छा चल जाए तो आपको विलासिता की वस्तुएं जुटाने और अमीर दिखने के बजाय ऐसे निवेश करने चाहिएं जो आपके लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकें। यहां निवेश से मेरा आशय म्यूचुअल फंड या शेयरों की खरीददारी से नहीं है।

 

यदि आपको इनकी बारीक जानकारी नहीं है तो मैं आपको म्यूचुअल फंड या शेयर बाज़ार में निवेश की सलाह नहीं दूंगा। यह निवेश ऐसे काम में होना चाहिए जहां आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक न हो। ऐसे निवेश के कई तरीके हैं। आप कोई छोटा-सा घर खरीद कर किराए पर उठा सकते हैं, रिक्शा, ऑटो-रिक्शा, कार आदि खरीद कर किराए पर दे सकते हैं। कोई ऐसा व्यवसाय कर सकते हैं जहां आपके कर्मचारी ही सारा काम संभाल लें और आपको उस व्यवसाय से होने वाला लाभ मिलता रहे। पुस्तकें लिख सकते हैं जिसकी रॉयल्टी मिलती रहे, मकान, दुकान या कार्यालय पर मोबाइल कंपनी का टावर लगवा सकते हैं जिसका किराया आता रहे। इससे होने वाली आय पेंशन की तरह है जहां काम भी नहीं करना पड़ता और लगातार आय का साधन भी बन जाता है। यह आपकी समृद्धि ओर छोटा-सा पहला कदम है। धीरे-धीरे योजनाबद्ध ढंग से ऐसे निवेश बढ़ाते रहेंगे तो आपकी अतिरिक्त आय इतनी बढ़ जाएगी कि इस बढ़ी आय से कार, मकान या छुट्टियों पर किए जाने वाले खर्च के लिए आपको बैंक से कर्ज़ नहीं लेना पड़ेगा, कर्ज़ पर ब्याज नहीं देना पड़ेगा और कर्ज़ न चुका पाने का डर भी नहीं सताएगा। इसके बावजूद आपको पैसे की परेशानी से नहीं जूझना पड़ेगा। जब समस्याएं नई हों तो समाधान भी नए होने चाहिएं, पुराने विचारों से चिपके रहकर हम नई समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते।

 

ज़माना नया है, दुनिया बदल गई है और हर पल बदल रही है। हमें अपने आपको नए ज़माने के लिए तैयार करना है। इसके लिए हमें नए विचारों का स्वागत करना होगा, समस्याओं का हल नए सिरे से खोजना होगा और स्वयं को शिक्षित करना होगा। यह परिवर्तन की एक ऐसी मानसिक यात्रा है जिस पर हम खुद ही आगे बढ़ेंगे। हमें यह समझना चाहिए कि परिवर्तन दिमाग से शुरू होते हैं, या यूं कहें कि दिमाग में शुरू होते हैं। हम इक्कीसवीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं और सत्रहवीं सदी की मानसिकता से हम देश का विकास नहीं कर सकते। नई स्थितियों में नई समस्याएं हैं और उनके समाधान भी पुरातनपंथी नहीं हो सकते। यदि हमें गरीबी, अशिक्षा से पार पाना है और देश का विकास करना है तो हमें इस मानसिक यात्रा में भागीदार होना पड़ेगा जहां हम नए विचारों को आत्मसात कर सकें और ज़माने के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। इस योजना पर काम करने से आप सिर्फ अमीर दिखेंगे ही नहीं, सचमुच के अमीर हो जाएंगे। यदि आपको लाटरी से, ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसे किसी शो से, अमीर जीवनसाथी से विवाह से या किसी अमीर रिश्तेदार की विरासत मिलने की उम्मीद नहीं है तो असली अमीरी और स्थायी समृद्धि के लिए आपको इसी योजना पर काम करना चाहिए। स्थायी समृद्धि का यही एक मंत्र है जो विश्वसनीय भी है और अनुकरणीय भी। इसी से अमीरी आएगी, इसी से समृद्धि आएगी और यही सुख का कारण बनेगा।

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चुनाव आयोग का एलान: राज्यसभा की 13 सीटों पर 31 मार्च को होगा चुनाव, छह राज्यों से चुने जाएंगे सांसद

नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद अब निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा के 13 सीटों के लिए चुनाव का एलान कर दिया है। यह चुनाव 31 मार्च को होगा। इसमें छह राज्यों से सांसद चुने जाएंगे। इनमें से पांच पंजाब से, तीन केरल से, दो असम से और एक-एक हिमाचल, त्रिपुरा और नगालैंड से होगा। जिन सांसदों की जगह पर चुनाव होगा वे सभी 2 से 9 अप्रैल के बीच रिटायर हो रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने उन सभी सांसदों का नाम भी जारी किया है जिनका कि कार्यकाल पूरा हो गया है। असम से रानी नाराहा और रिपुण बोरा, हिमाचल प्रदेश से आनंद शर्मा, केरल से ए के एंटनी, एमवी श्रेयम्स कुमार और सोमाप्रसाद के, नगालैंड से केजी केन्ये, त्रिपुरा से झरना दास और पंजाब से सुखदेव सिंह, प्रताप सिंह बाजवा, श्वेत मलिक, नरेश गुजराल और शमशेर सिंह दुलो शामिल हैं।

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सरकार ने मेडिकल की पढ़ाई करने वालों के लिए लिया है बड़ा फैसला : पीएम मोदी

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जनऔषधि दिवस के मौके पर उन्‍होंने कहा कि जन औषधि केद्रों पर आठ सौ करोड़ रुपये की दवाएं बिकी हैं। उन्‍होंने कहा कि इसके तहत सरकार मध्‍यम वर्ग के लोगों की जेब का धन बचाकर उन्‍हें फायदा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इन केंद्र पर अब तक 21 करोड़ सैनेट्री नेपकींस बिक चुके हैं। ये एक रुपये में यहां से लिए जा सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में कोरोना रोधी वैक्‍सीन के लिए लोगों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। लेकिन भारत ने इसको सभी को फ्री में लगाने का फैसला किया। इस पर अब तक सरकार ने तीस हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकार ने फैसला किया है कि आधे निजी मेडिकल कालेज में अब सरकारी मेडिकल कालेज के बराबर ही फीस लगेगी। सरकार की कोशिश है कि हर जिले में एक बड़ा अस्‍पताल हो। सरकार ने कई दवाओं की कीमत को बेहद कम किया है। जन औषधि केंद्रों के मालिकों से बात कर रहे हैं। इस दौरान उन्‍होंने बिहार की महिला से बात कर उनसे इस बारे में जानकारी हासिल की। महिला ने बताया कि जन औषधि केंद्र से मिली दवाओं के चलते उन्‍हें काफी फायदा हो रहा है। ये सस्‍ती होने के साथ-साथ गुणवत्‍ता में भी अच्‍छी है। पीएम मोदी ने कहा कि मध्‍यम वर्ग की आमदनी का बड़ा हिस्‍सा दवाओं पर खर्च होता है। यदि दवाएं सस्‍ती हों तो सभी का लाभ होगा। इसलिए मध्‍यम वर्ग इसको आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। ओडिशा के सुरेश ने बताया कि उन्‍हें भी इससे काफी फायदा हुआ है। हर माह दवाओं पर खर्च होने वाला करीब दो से ढाई हजार रुपया अब बच जाता है। पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि वो ऐसी दवाओं के बारे में बताएंं जो दवाएं उन्‍हें जन औषधि केंद्र पर नहीं मिलती हैं। इसके जवाब में उन्‍होंने बताया कि ऐसी कोई दवाई नहीं है जो वहां पर नहीं मिलती हैं। कर्नाटक की बबीता से भी पीएम मोदी ने पूछा कि उन्‍हें इससे कैसे लाभ मिला। बबीता ने बताया कि वो इस योजना और इसके केंद्रों का लोगों के बीच जागरुक करती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वो सोशल मीडिया के जरिए इसका अधिक से अधिक प्रचार कर सकती हैं। गुजरात की उर्वशी से भी उन्‍होंने इसके लाभ के बारे में जानकारी हासिल की। इस मौके पर पीएम ने उनसे कहा कि वो पीएम आवास योजना का लाभ उठाने वालों के पास जाकर इस योजना के लिए उन्‍हें जागरुक करें। छत्‍तीसगढ़ के डाक्‍टर शैलेश की पीएम मोदी ने तारीफ की वो इस दिशा में काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मनसुख मांडविया समेत अन्‍य लोग भी शामिल हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में मांडविया ने कहा कि देश में मिलने वाली जेनेरिक दवाओं की कीमत 50-80 फीसद तक कम है और इनकी गुणवत्‍ता विश्‍व स्‍तर की है। पीएमओ से दी गई जानकारी के मुताबिक इस इवेंट को जन औषधि जन उपयोगी का नाम दिया गया है। इससे पहले किए गए अपने ट्वीट में पीएम मोदी ने इसको जन औषधि को मेडिसिन रिवोल्‍यूशन बताया था। आपको बता दें कि पूरे देश में एक मार्च से जन औषधि सप्‍ताह मनाया गया है। इस दौरान लोगों को इस बारे में जानकारी के साथ उनके बीच इसकी जागरुकता को बढ़ाने का भी काम किया गया है। जन औषधि परियोजना के तहत इसमें लोगों को जेनेरिक दवाओं के इस्‍तेमाल और इनके फायदे बताए गए। इस दौरान कई दूसरे इवेंट भी चलाए गए जिसमें जन औषधि संकल्‍प यात्रा, मैत्री शक्ति सम्‍मान, जन औषधि बाल मित्र, जन औ‍षधि जन जागरण अभियान, आओ जन औषधि मित्र बनाएं और जन औषधि जन आरोग्‍य मेला भी शामिल है। पीएम मोदी की दूर्गामी सोच पर आगे बढ़ते हुए इन दवाओं को न सिर्फ सस्‍ता किया गया है बल्कि लोगों तक इनकी पहुंच बनाने की भी पूरी कोशिश की गई है। पूरे देश में आज जन औषधि केंद्र के करीब 8600 स्‍टोर्स खुले हुए हैं जहां पर ये दवाएं आसानी से और सस्‍ती कीमत पर खरीदी जा सकती हैं। इसमें देश के लगभग हर जिले को शामिल किया गया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की शुरुआत पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को की थी।इस योजना के तहत सरकार द्वारा उच्च गुणमवत्ता वाली जैनरिक दवाईयों के दाम बाजार मूल्य से कम कर इन्‍हें बेचा जाता है। इसके लिए सरकार ने जन औषधि स्टोर। सरकार की योजना इनके स्‍टोर्स अगले कुछ समय में बढ़ाकर दस हजार करने की है, जिससे ये हर जन को आसानी से हासिल हो सकें।

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मतगणना से तीन दिन पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की अमित शाह से मुलाकात

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव की मतगणना से तीन दिन पहले पूर्व सीएम एवं पंजाब लोक कांग्रेस के प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह सोमवार को अचानक गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे। मतगणना से पहले हुई इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है। राज्य में मतगणना 10 मार्च को होनी है। चुनाव में पार्टी कितनी सीटें जीत सकती है इस बारे में पूछे जाने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह पंडित नहीं है। वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो भविष्यवाणी कर सकें। कैप्टन ने कहा कि उनकी मेरी पार्टी सहित भाजपा गठबंधन ने बेहतर किया है। देखते हैं क्या होता है। बता दें, कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी पंजाब में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ी है। राज्य में शिअद से अलग होने के बाद भाजपा सर्वाधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा जब शिअद के साथ गठबंधन में थी तो उसके हिस्से में 23 सीटें आती थी, लेकिन इस बार पार्टी ने 73 सीटों पर चुनाव लड़ा। अमित शाह से मुलाकात के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि अभी चुनाव परिणाम नहीं आए हैं। वह अमित शाह से मिलने आए थे। उनकी मुलाकात सामान्य थी। इस मुलाकात में पंजाब को लेकर चर्चा की गई। विस्तृत चर्चा चुनाव परिणाम आने के बाद की जाएगी। कैप्टन ने कहा कि इस मुलाकात में चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। इस दौरान पंजाब के हितों को लेकर चर्चा हुई है।

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मतगणना के दौरान सत्ताधारी दल 'अनुचित' तरीकों का इस्तेमाल कर सकता है : टिकैत

मुजफ्फरनगर (उप्र)। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में 10 मार्च को होने वाली मतगणना के दौरान सत्तारूढ़ दल 'अनुचित' तरीकों का इस्तेमाल कर मतगणना को प्रभावित कर सकता है।

 

बीकेयू नेता ने यहां नवीन मंडी इलाके का दौरा करने के बाद कहा कि 10 मार्च को होने वाली मतगणना के दौरान सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर सकती है। नवीन मंडी वह क्षेत्र है, जहां मतदान के बाद ईवीएम रखी जा रही हैं।

 

इस बीच, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त चुनाव अधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि वोटों की गिनती कड़ी सुरक्षा और चुनाव आयोग के निर्देश के तहत निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से की जाएगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पहले चरण में मुजफ्फरनगर, बुढाना, पिरकाजी, खतोली, मुरापुर और चरथवाल समेत छह विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी को मतदान हुआ था।

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रूस ने लोगों को निकालने के लिए यूक्रेन के दो शहरों में संघर्ष विराम की घोषणा की

लवीव (यूक्रेन), 05 मार्च (वेब वार्ता)। रूस के रक्षा अधिकारियों ने यूक्रेन के दो शहरों में अस्थायी तौर पर संघर्ष विराम की घोषणा की है, ताकि लोगों को वहां से निकाला जा सके। लेकिन एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि शनिवार को उनके इलाके में गोलाबारी जारी रही। रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह दक्षिण पूर्व में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह मारियूपोल और पूर्व में स्थित वोलनोवाखा शहर में लोगों को निकालने के लिए रास्ता देने को सहमत है। हालांकि, इस बयान में यह स्पष्ट नहीं था कि वे मार्ग कब तक खुले रहेंगे। पिछले कई दिनों से मारियूपोल में रूसी सेनाएं गोलाबारी कर रही हैं और बर्फीली सर्दी में वहां फंसे सैकड़ों लोगों के लिए बिजली, फोन, भोजन और पानी का संकट पैदा हो गया है। डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स नामक संस्था ने कहा कि शहर में दवाओं की भी कमी हो गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्थानीय समयानुसार शाम चार बजे तक संघर्ष विराम लागू रहना है और पूर्वाह्न 11 बजे लोगों को निकालने का कार्य शुरू किया गया। मारियूपोल, दोनेत्स्क सैन्य-नागरिक प्रशासन के तहत आता है। दोनेत्स्क प्रशासन के प्रमुख पाव्लो किरिलेंको ने कहा कि मानवीय सहायता गलियारा, शहर से जाफोरिझिया तक होगा, जो कि लगभग 140 किलोमीटर दूर है। मारियूपोल के उप महापौर सेरही ओरलोव ने बाद में बीबीसी को बताया कि रूसी सेना ने मारियूपोल पर गोलाबारी और रॉकेट से हमला करना जारी रखा है। उन्होंने कहा कि इसलिए लोग डरे हुए हैं और वे तीन स्थानों पर पर जा रहे हैं जहां से उन्हें बसों द्वारा निकाला जाएगा।

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नवाब मलिक मुसलमान होने के कारण दाऊद से जोड़ा जा रहा नाम: पवार

पुणे,। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को कहा कि पार्टी के नेता और राज्य सरकार में मंत्री नवाब मलिक की गिरफ्तारी ‘‘राजनीति से प्रेरित'' है और मुसलमान होने के कारण उनका नाम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जोड़ा जा रहा है। पवार ने मलिक के इस्तीफे की विपक्ष की मांग भी खारिज कर दी। मलिक को दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 23 फरवरी को गिरफ्तार किया था। 

 

राकांपा प्रमुख ने कहा कि मलिक की गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है। उनका नाम दाऊद इब्राहिम से इसलिए जोड़ा जा रहा है क्योंकि वह मुसलमान हैं। मलिक और उनके परिवार के सदस्यों को जानबूझ कर परेशान किया जा रहा है, लेकिन हम इसके खिलाफ लड़ेंगे। राज्य में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी द्वारा मलिक का इस्तीफा मांगे जाने के प्रश्न पर पवार ने कहा कि मलिक और केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे पर अलग-अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि राणे भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। पवार ने कहा कि मुझे याद नहीं आता कि हमारे (कांग्रेस) पूर्व पार्टी कार्यकर्ता नारायण राणे को हाल में गिरफ्तारी के बाद इस्तीफा देना पड़ा हो। 

 

प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) कल पुणे आ रहे हैं। वह इस पर ज्यादा जानकारी दे सकते हैं। राणे के लिए अलग मानदंड और मलिक के लिए अलग मानदंड दिखाता है कि यह राजनीति से प्रेरित है। पवार ने महाराष्ट्र के राज्यपाल बी. एस. कोश्यारी पर भी निशाना साधा। राज्यपाल ने महाराष्ट्र मंत्रीमंडल द्वारा एक वर्ष पहले उन्हें भेजे गए विधान परिषद के 12 सदस्यों के नामों को मंजूरी नहीं दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के पास पी. सी. एलेक्जेंडर जैसे राज्यपाल की विरासत है। मुझे इस पर बात नहीं करनी चाहिए कि वर्तमान राज्यपाल क्या कर रहे हैं। केन्द्र सरकार हर वो काम कर रही है जो वह कर सकती है और महाराष्ट्र इसका ताजा उदाहरण है।

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धोखाधड़ी मामले में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और अन्य के खिलाफ वारंट

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की एक अदालत ने बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और अन्य के खिलाफ वर्ष 2019 के धोखाधड़ी के एक मामले में शनिवार को वारंट जारी किया। उन पर नोटिस के बावजूद अदालत में पेश नहीं होने का आरोप है।

 

जिले के शिवपुरी निवासी इवेंट मैनेजर प्रमोद शर्मा ने 22 फरवरी 2019 को कटघर थाने में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा, अभिषेक सिन्हा, एडगर साकिया, मालविका पंजाबी और घुमिल ठक्कर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि वादी ने दिल्ली में आयोजित एक अवार्ड शो में सोनाक्षी सिन्हा को बुलाने के लिए अनुबंध किया था। उन्होंने सारी रकम अदा कर दी थी, लेकिन वह कार्यक्रम में नहीं पहुंचीं।

 

प्रमोद शर्मा के मुताबिक, उन्होंने सारा भुगतान एक्ससीड एंटरटेनमेंट के मालिक अभिषेक सिन्हा के जरिए सोनाक्षी सिन्हा को किया था। कुल 29.92 लाख रुपये का पेमेंट किश्तों में किया गया था, लेकिन अभिनेत्री सोनाक्षी इस कार्यक्रम में नहीं आईं थीं। मामले में प्रमोद शर्मा ने अदालत की शरण ली थी। अदालत ने मुरादाबाद के कटघर थाना पुलिस को सोनाक्षी सिन्हा और उनके साथियों के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।

 

आरोपितों के खिलाफ 20 मई 2020 को चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी गई थी। पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने में लगभग 455 दिन लग गए थे। वहीं अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और अन्य लोगों ने हाई कोर्ट की शरण ली, जो लंबित है। सोनाक्षी सिन्हा और अन्य आरोपितों को जिले के सीजेएम कोर्ट ने पेश होने के लिए कई बार नोटिस जारी किया, लेकिन वह और उनके साथी पेश नहीं हुए। इसके चलते शनिवार को अदालत ने सोनाक्षी और अन्य लोगों के खिलाफ वारंट जारी किया।

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ऐसे उम्मीदवार चुनें, जिनके डीएनए में सेवा का भाव हो : शाह

जौनपुर। गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मतदाताओं से ऐसे उम्मीदवारों को चुनने का आग्रह किया, जिनके ‘डीएनए में सेवा का भाव’ हो।

 

मल्हनी विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, “इस बार बाहुबलियों को मत जिताएं, बल्कि ऐसे उम्मीदवारों को विजयी बनाएं, जिसके डीएनए में सेवा का भाव हो और जो छीनना नहीं, बल्कि देना जानते हों।”

 

उन्होंने कहा कि एक या दो माफिया जो अभी भी जेल से बाहर हैं, उन्हें दस मार्च को भाजपा के दोबारा सत्ता में आने के बाद सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

 

मल्हनी विधानसभा सीट पर भाजपा के पूर्व सांसद केपी सिंह का मुकाबला जदयू के पूर्व सांसद एवं बाहुबली नेता धनजंय सिंह से है।

 

शाह ने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले जब मैं उत्तर प्रदेश की जनता से वोट मांगने आया था, तब भाजपा ने वादा किया था कि पांच साल में प्रदेश माफिया मुक्त हो जाएगा।

 

उन्होंने कहा, “आज अतीक अहमद, आजम खां और मुख्तार अंसारी जेल के अंदर हैं। एक या दो जेल से बाहर हैं। आप दस मार्च को कमल (भाजपा का चुनाव चिन्ह) खिलाएं और उसके बाद वे भी जेल में होंगे।”

 

गृहमंत्री ने दावा किया कि यूपी में भाजपा ने पिछले पांच वर्षों में अपराधियों को राजनीति से हटाने का काम किया है, जिससे राजनीति का अपराधीकरण समाप्त हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि यूपी में पहले के मुकाबले आपराधिक घटनाओं में कमी आई है और प्रदेश अपराध मुक्त बनने की राह पर आगे बढ़ा है।

 

शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2,000 करोड़ रुपये की भूमि को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया है और इस मुक्त भूमि पर गरीबों के लिए मकान बन रहे हैं।

 

सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “कोविड टीका आने के बाद अखिलेश ने कहा था कि मोदी वैक्सीन को नहीं लगवाना चाहिए, लेकिन उन्होंने खुद टीका लगवाया। जो नेता लोगों की जान की परवाह किए बिना राजनीतिक ‘खिचड़ी’ पकाने में लिप्त हैं, उन्हें एक पल के लिए भी सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है।”

 

प्रतिद्वंद्वी दलों पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा, “सपा-बसपा केवल गरीबों के बारे में बातें करती हैं, लेकिन मोदी और योगी ने उन्हें मजबूत बनाने का काम किया है। पूरे पूर्वांचल को सड़क मार्ग से जोड़ने और यूपी में एक्सप्रेसवे का जाल बिछाने का काम किया गया है।”

 

गृहमंत्री ने यह भी कहा कि मल्हनी और यूपी को गुंडों और बाहुबलियों द्वारा विकसित नहीं किया जा सकता है, भाजपा उम्मीदवार केपी सिंह मल्हानी का विकास कर सकते हैं।

 

जौनपुर में सातवें चरण के तहत सात मार्च को मतदान होना है।

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रेड कैटेगरी यूनिट के खरीदार ने 50 लाख रुपये जुर्माना हटाने की अपील की

नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रेड कैटेगरी यूनिट की संपत्ति खरीदने वाले एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि उसे 50 लाख रुपये की पर्यावरणीय कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन जब तक दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति मामले को सत्यापित करने की याचिका पर विचार नहीं करती, तब तक जुर्माना लागू नहीं किया जाएगा।

 

एनजीटी अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता तारा देवी ने कहा कि उनके खिलाफ आदेश का पालन किया जा रहा है और इससे वह दुखी हैं। याचिका के अनुसार, उसने संपत्ति के मालिक से 2009 में संपत्ति खरीदी थी, जहां वीनस डाइंग वर्क्‍स एक किरायेदार के रूप में काम कर रहा था। अपीलकर्ता द्वारा संपत्ति की खरीद के बाद इकाई ने काम करना बंद कर दिया। फिर भी, संपत्ति को अक्टूबर 2018 में सील कर दिया गया था।

 

24 फरवरी को पारित एनजीटी के आदेश में कहा गया है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के 5 जुलाई, 2020 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई है, जिसमें दिल्ली में वीनस डाइंग वर्क्‍स, हैदरपुर के खिलाफ 50 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि इकाई गैर-अनुरूप क्षेत्र में रेड श्रेणी की गतिविधि में लगी हुई थी। कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया।

 

एनजीटी के आदेश में कहा गया है, हमने इस मामले पर विचार किया है। जहां तक सीलिंग का संबंध है, एसडीएम के आदेश के खिलाफ ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील सुनवाई योग्य नहीं है। हम उस पहलू पर विचार नहीं कर रहे हैं, बल्कि इस तरह के मामले पर एक उपयुक्त मंच के समक्ष विचार किया जा रहा है। यहां तक कि मुआवजे के मुद्दे पर विचार नहीं किया जा सकता, क्योंकि अपीलकर्ता के खिलाफ कोई आदेश नहीं है। हालांकि, स्पष्टीकरण के माध्यम से अपीलकर्ता के खिलाफ आक्षेपित आदेश तब तक लागू नहीं किया जा सकता है, जब तक कि डीपीसीसी अपीलकर्ता के इस रुख को नहीं देखता कि उसे कथित कानून का उल्लंघन करने वाला - वीनस डाइंग वर्क्‍स से कोई सरोकार नहीं है, जिसके खिलाफ आक्षेपित आदेश पारित किया गया है। तदनुसार, मामले का निस्तारण कर दिया गया है।

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यूक्रेन से लौटे भारतीयों का एयरपोर्ट पर स्वागत करेंगे दो केंद्रीय मंत्री

नई दिल्ली जाने आलम (जानू चौधरी)। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और वी मुरलीधरन सरकारी चार्टर्ड उड़ानों के जरिये युद्धग्रस्त यूक्रेन से स्वदेश लौट रहे भारतीयों की हवाई अड्डों पर अगवानी करेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि गोयल शनिवार रात मुंबई हवाई अड्डे पर रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट से एयर इंडिया की उड़ान से आने वाले भारतीयों की अगवानी करेंगे, जबकि मुरलीधरन यूक्रेन से स्वदेश लौटने वाले लोगों की अगवानी के लिए दिल्ली एयरपोर्ट जाएंगे।

 

विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने बृहस्पतिवार को बताया था कि यूक्रेन में लगभग 16,000 भारतीयों के फंसे होने का अनुमान है, जिनमें अधिकतर छात्र शामिल हैं। वहीं, कीव स्थित भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को कहा था कि वह रोमानिया और हंगरी के रास्ते निकासी मार्ग स्थापित करने की कोशिशों में जुटा है। अधिकारियों ने बताया कि एयर इंडिया की पहली निकासी उड़ान यूक्रेन में फंसे 219 भारतीयों को लेकर शनिवार दोपहर बुखारेस्ट से मुंबई के लिए रवाना हुई। उन्होंने बताया कि विमानन कंपनी के दूसरे निकासी विमान ने शनिवार सुबह 11.40 बजे उड़ान भरी और इसके भारतीय समयानुसार शाम 6.30 बजे बुखारेस्ट पहुंचने की संभावना है।

 

अधिकारियों के मुताबिक, सड़क मार्ग से यूक्रेन-रोमानिया सीमा पर पहुंचे भारतीय नागरिकों को भारत सरकार के अधिकारियों द्वारा बुखारेस्ट ले जाया गया है, ताकि उन्हें एयर इंडिया की निकासी उड़ानों से स्वदेश भेजा जा सके। उन्होंने बताया कि पहली निकासी उड़ान एआई-1944 ने बुखारेस्ट से भारतीय समयानुसार दोपहर 1.55 बजे उड़ान भरी और इसके रात लगभग नौ बजे मुंबई हवाईअड्डे पर उतरने की उम्मीद है।

 

अधिकारियों के अनुसार, दूसरी निकासी उड़ान एआई-1942 के 250 अन्य भारतीय नागरिकों के साथ रविवार सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पहुंचने की संभावना है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्विटर पर बताया कि एआई-1944 ने 219 भारतीय नागरिकों के साथ रोमानिया से उड़ान भर दी है। उन्होंने कहा, “हम यूक्रेन से भारतीय नागरिकों की निकासी के मामले में प्रगति कर रहे हैं। हमारी टीमें 24 घंटे काम कर रही हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहा हूं।”

 

यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए एयर इंडिया शनिवार को बुखारेस्ट और हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के लिए और उड़ानें संचालित करेगी। मालूम हो कि यूक्रेन के हवाई क्षेत्र को 24 फरवरी की सुबह नागरिक विमानों के संचालन के लिए बंद कर दिया गया था। ऐसे में भारतीय नागिरकों को यूक्रेन से वापस लाने के लिए उड़ानें बुखारेस्ट और बुडापेस्ट के रास्ते संचालित की जा रही हैं।

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गुजरात में अपने ही नेताओं पर बरसे राहुल, बोले- एसी में बैठने वाले 'कौरवों' की सूची बनाएं

द्वारका/नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को गुजरात में अपनी पार्टी के नेताओं से पार्टी में मौजूद उन ''कौरवों'' की एक सूची तैयार करने के लिए कहा, जो सिर्फ ''अपने एसी कार्यालयों में बैठकर बातों के अलावा कुछ नहीं करते और दूसरों को परेशान करने में लगे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अंतत: भाजपा में चले जाते हैं। गांधी ने केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि उसके पास केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पुलिस और गुंडे हैं, लेकिन अंत में केवल सत्य मायने रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात ''भाजपा की राजनीति'' के कारण त्रस्त है।

 

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के पास राज्य में अगला विधानसभा चुनाव जीतने का एक अवसर है, लेकिन पार्टी लोगों को यह स्पष्ट दृष्टिकोण देने में विफल है कि सत्ता में आने के बाद वह क्या करने का इरादा रखती है। गांधी ने गुजरात कांग्रेस द्वारा आयोजित चिंतन शिविर के दूसरे दिन यहां पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। चिंतन शिविर का आयोजन इस साल दिसंबर में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार करने पर चर्चा के लिए किया गया है। कार्यक्रम स्थल पर आने से पहले, उन्होंने यहां द्वारकाधीश मंदिर पहुंचकर भगवान कृष्ण की पूजा की।

 

कांग्रेस नेता ने कहा, “उनके पास सीबीआई, ईडी, मीडिया, पुलिस, गुंडे और हर दिन के लिये नए-नए परिधान हैं। लेकिन वे चीजें बिल्कुल भी मायने नहीं रखतीं। गुजरात हमें सिखाता है कि सत्य क्या है। गांधी जी को देखिए। क्या उनके पास कभी अच्छे कपड़े थे, ईडी या सीबीआई थी? नहीं, क्योंकि सत्य सदैव साधारण होता है।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझना चाहिए कि वे पहले ही गुजरात विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। आप इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। गुजरात के लोग आपको बड़ी उम्मीदों से देख रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस को जितना नुकसान पहुंचाया है, उससे ज्यादा गुजरात के लोगों को पहुंचाया है।”

 

कांग्रेस के पुनरुद्धार और यहां आगामी चुनाव जीतने के लिए एक साहसिक दृष्टिकोण साझा करते हुए, गांधी ने उन नेताओं से छुटकारा पाने का सुझाव दिया जो ''वातानुकूलित कमरों में बैठते हैं और दूसरों को परेशान करते हैं।'' उन्होंने कहा, ''(लोगों तक दृष्टिकोण पहुंचाने को लेकर) असमंजस क्यों है? क्योंकि हमारे पास दो तरह के नेता हैं। एक वे जो जमीन पर रहते हैं और लड़ाई लड़ते है। दूसरे वे जो अपने एसी कार्यालयों में बैठे रहते हैं और बात करने व भाषण देने के अलावा कुछ नहीं करते। ऐसे नेताओं की सूची तैयार करें जो दूसरों को परेशान करते हैं। वे कौरव हैं। भाजपा उन्हें अपने पाले में ले जाएगी।''

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि गुजरात में अगले चुनाव में ''भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए'' उन्हें केवल पांच सक्षम नेताओं की जरूरत है। साल 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले गुजरात के अपने दौरे को याद करते हुए गांधी ने कहा कि स्थानीय नेतृत्व को शुरुआत में चुनाव में बहुत सीटें जीतने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की राज्य इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे कहा था कि कांग्रेस 182 में से केवल 40-45 सीटें जीतेगी।

 

राहुल ने कहा कहा, ''लेकिन अंत में हम चुनाव जीतने से सिर्फ सात सीटों से पीछे रह गए। मैं इस बार भी यही स्थिति देख रहा हूं। मैं आपको बता रहा हूं कि आप पहले ही यह चुनाव जीत चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा हमेशा ''गुजरात मॉडल'' का दावा करती है, लेकिन राज्य में कोविड-19 के कारण लगभग तीन लाख लोगों की जान चली गई और अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर व वेंटिलेटर की कमी के कारण लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।

 

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा, ''गुजरात भाजपा की राजनीति के कारण त्रस्त है। बेरोजगारी यहां एक प्रमुख मुद्दा है। छोटे व्यवसायों को कभी सबसे बड़ी ताकत के तौर पर गुजरात की रीढ़ माना जाता था। लेकिन प्रधानमंभी मोदी ने जीएसटी, नोटबंदी और महामारी के दौरान अपने कार्यों से इन्हें नष्ट कर दिया।'' उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अवसर है और लोग पार्टी को एक विकल्प के रूप में देखते हैं। पार्टी लोगों के सामने यह स्पष्ट दृष्टिकोण देने में विफल रही है कि ''कांग्रेस सत्ता में आने पर क्या करेगी, हम कैसे काम करेंगे और कौन से नेता करेंगे।''

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रूस-यूक्रेन संकट: राष्ट्रपति जेलेंस्की ने की पीएम मोदी से बात

नई दिल्ली। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। उन्होंने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट में कहा कि पीएम मोदी को रूस की आक्रामकता को लेकर यूक्रेन के रुख की जानकारी दी। एक लाख से अधिक रूसी आक्रमणकारी हमारे देश में हैं। वो आवासीय भवनों पर अंधाधुंध फायरिंग कर रहे हैं। हमने भारत से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में समर्थन देने का अनुरोध किया है।

 

पीएमओ के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से बात की। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को यूक्रेन में जारी संघर्ष की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने जारी संघर्ष के कारण जान-माल के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त की।

 

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि पीएम मोदी हिंसा की तत्काल समाप्ति और बातचीत के लिए अपने आह्वान को दोहराया और शांति प्रयासों के लिए हर तरह से योगदान करने की भारत की इच्छा व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने यूक्रेन में मौजूद छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत की गहरी चिंता से भी उन्हें (यूक्रेन के राष्ट्रपति) अवगत कराया। उन्होंने भारतीय नागरिकों को तेजी से सुरक्षित निकालने के लिए यूक्रेन के अधिकारियों द्वारा सुविधा प्रदान करने की मांग भी की।

 

भारतीय छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं, दूतावास के संपर्क में रहें: केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूक्रेन में फंसे ढेरों छात्रों और उनके परिजनों को आश्वासन देते हुए कहा कि घबराने की बिल्कुल सभी छात्र दूतावास के संपर्क में बने रहे। केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट किया, मैं भारतीय छात्रों जल्द से जल्द वापस लाने का आश्वासन देता हूं। विदेश मंत्रालय लगातार आवश्यक व्यवस्था कर रहा है। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। छात्र दूतावास के संपर्क में रहें और हर दिशा-निर्देश का पालन करें।

 

वहीं, यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को एडवाइजरी जारी कर अपने नागरिकों से बॉर्डर पोस्ट पर नहीं जाने की अपील की है। दूतावास ने कहा, भारत सरकार के अधिकारियों के साथ पूर्व समन्वय के बिना किसी भी बॉर्डर पोस्ट पर न जाएं। हम भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए पड़ोसी देशों में स्थित अपने दूतावासों के साथ काम कर रहे हैं।

 

भारतीय नागरिकों का स्वागत करेंगे पीयूष गोयल

यूक्रेन से सुरक्षित निकाले गए भारतीय नागरिकों का मुंबई हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल स्वागत करेंगे। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया कि सरकार हमारे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है।

 

भारतीय छात्रों का वीडियो वायरल

इस बीच हंगरी पहुंचने के बाद भारतीय छात्रों ने कहा कि बुडापेस्ट के भारतीय दूतावास ने हमें सीमा पार करने में बहुत मदद की है। हम बहुत खुश हैं और हम अच्छे की उम्मीद करते हैं।

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भड़काऊ भाषण मामले में जितेन्द्र नारायण उर्फ वसीम रिजवी को फिलहाल राहत नहीं

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय से तथाकथित भड़काऊ भाषण मामले में जेल में बंद जितेन्द्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को फिलहाल राहत नहीं मिल पायी है। अदालत ने अब सरकार से सह आरोपी यति नरसिंहानंद के आपराधिक रिकार्ड की जानकारी तलब की है।

 

जितेन्द्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को हरिद्वार पुलिस ने इसी साल 13 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उन पर हरिद्वार धर्म संसद मामले में एक धर्म विशेष के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। वह तभी से जेल में बंद हैं। उन्होंने इसके बाद जमानत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की पीठ में उनके प्रार्थना पत्र पर सुनवाई चल रही है। 

 

शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास है। उनके खिलाफ 30 से अधिक मामले में दर्ज हैं। इनमें संगीन धाराएं भी शामिल हैं। आरोपी की ओर से प्रतिवाद करते हुए कहा गया कि सभी मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं और वह शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे हैं। उनके विरोधियों की ओर से उनके खिलाफ झूठे अभियोग दर्ज किये गये हैं। वह किसी भी मामले में दोषी सिद्ध नहीं हुए हैं। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज मामलों से संबंधित रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा। इसके बाद भी उन्हें जमानत नहीं मिली।

 

23 फरवरी को इस मामले में फिर सुनवाई हुई और आरोपी की ओर से जमानत की मांग करते हुए कहा गया कि इसी मामले में सह आरोपी यति नरसिंहानंद को हरिद्वार की निचली अदालत से जमानत मिल गयी है। इसके बाद अदालत ने सरकार को निर्देश दिए कि सह आरोपी से जुड़े आपराधिक मामलों की जानकारी 4 मार्च तक अदालत में पेश करें।

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सीएम जयराम ठाकुर बोले, यूक्रेन से आने वालों को घर तक फ्री में पहुंचाएगी हिमाचल सरकार

शिमला। यूक्रेन से स्वदेश लौटने वाले सभी हिमाचल के छात्रों व लोगों को हिमाचल सरकार मुफ्त में घर पहुंचाएगी। इसके लिए दिल्ली स्थित आवासीय आयुक्त कार्यालय की ओर से व्यवस्था की जाएगी। यह जानकारी विधानसभा में सीएम जयराम ठाकुर ने दी। उन्होंने कहा कि इसके लिए एचआरटीसी और एचपीटीडीसी की बसों का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूक्रेन से दो हवाई जहाज हिमाचल के युवाओं को लेकर दिल्ली पहुंचने वाले हैं। इन हवाई जहाजों में दूसरे राज्यों के लोग भी शामिल हैं। सरकार के पास यूक्रेन में कितने छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, यह आंकड़ा उपलब्ध नहीं हैं। अभी तक 130 युवाओं की जानकारी उपलब्ध है। 

 

बंकर में रह रहे 120 भारतीय छात्र : यूक्रेन में फंसे सुंदरनगर के महादेव निवासी रोहित ने बताया कि वीनीतिशिया यूनिवर्सिटी में उनको बंकर में रहने को कहा है। लगभग 120 भारतीय उनके बंकर में है। सुबह खाना होस्टल रूम में बनाने के बाद वापस बंकर में आ जाते हैं। यूनिवर्सिटी दो सप्ताह के लिए बंद कर दी है। जिस एजेंसी के माध्यम से वह आए हैं, उनका एजेंट भी हमारे साथ है, लेकिन उनको कब निकाला जाना है, इसके बारे में कुछ नहीं बताया गया है। करीब 400 किलोमीटर सफर के बाद वह रोमानिया पहुंचेंगे, लेकिन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं है।

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सांख्यिकी प्रणाली को बेहतर बनाकर जनहित में करेंगे उपयोग : शिवराज

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में सांख्यिकीय प्रणाली के कामकाज के सही मूल्यांकन और नीति निर्माण में डेटा की गुणवत्ता और प्रणाली में सुधार के लिए गठित टॉस्क फोर्स की अनुशंसाओं पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। चौहान आज यहां मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. अमिताभ कुंडू की अध्यक्षता में गठित कुंडू टॉस्क फोर्स (समिति) द्वारा प्रतिवेदन सौंपे जाने पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय प्रणाली को बेहतर बनाकर जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

 

चौहान ने प्रो. अमिताभ कुंडू द्वारा सौंपे गए प्रतिवेदन का लोकार्पण किया। टॉस्क फोर्स द्वारा दी गई रिपोर्ट में राज्य सांख्यिकी आयोग के गठन की अनुशंसा भी शामिल है। यह आयोग इस क्षेत्र में तकनीकी मार्गदर्शन का कार्य करेगा। इस मौके पर वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा, मध्यप्रदेश राज्य नीति एवं योजना आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. सचिन चतुर्वेदी, टॉस्क फोर्स के सदस्य प्रो. गणेश कवाड़िया, अमिताभ पंडा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव जनसंपर्क राघवेन्द्र कुमार सिंह और आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी और टॉस्क फोर्स के संयोजक अभिषेक सिंह उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं के निर्माण और केन्द्र सरकार से धन राशि के आवंटन के लिए प्रामाणिक आंकड़े आवश्यक होते हैं। जीडीपी के आकलन और परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भी ये आंकड़े उपयोगी होते हैं। कुंडू टॉस्क फोर्स का गठन कर इसके आवश्यक अध्ययन और शोध की व्यवस्था की गई। इससे राज्य और जिला स्तर पर वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, नागरिकों और विशेषज्ञों के लिए प्रकाशनों को व्यापक, सुलभ एवं सुपाठ्य बनाने के लिए नए और अभिनव उपाय सुझाना भी आसान होगा।

 

चौहान ने कहा कि गत दो माह में प्रदेश के 10 लाख लोगों को विभिन्न रोजगार से जोड़ने में सफलता मिली है। महिला स्व-सहायता समूह भी अच्छा कार्य कर रहे हैं। कुंडू समिति के प्रतिवेदन में प्रदेश में हुई इस ग्रोथ का भी उल्लेख है। इसके अलावा अन्य अनुशंसाओं में सांख्यिकीय विभाग के कर्मचारियों को सर्वेक्षण, आय अनुमान, सांख्यिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया है। 

 

राज्य में नमूना सर्वेक्षणों की क्षमता और गुणवत्ता में सुधार के लिए नमूना सर्वेक्षणों को डिजाइन और संचालित करने की योजना, राज्य स्तर पर नमूना सर्वेक्षण विंग बनाने की जरूरत का भी उल्लेख है। डेटा प्रबंधन प्रणालियों का आधुनिकीकरण टॉस्क फोर्स के उद्देश्यों में से एक है। उन्होंने कहा कि सही डेटा राज्य के जीडीपी के आकार और आकलन के साथ ही संपूर्ण व्यवस्था को सशक्त बनाने में मदद करेगा। उन्होंने टॉस्क फोर्स को सिर्फ पांच माह की अवधि में प्रतिवेदन तैयार कर सौंपने के लिए धन्यवाद दिया।

 

टॉस्क फोर्स के अध्यक्ष प्रो. अमिताभ कुंडू ने कहा कि जिलों में भ्रमण और विभिन्न बैठकों के बाद प्रतिवेदन तैयार किया गया है। नीति निर्धारण में यह प्रतिवेदन सहयोगी होगा। प्रो. कुंडू ने कहा कि मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अच्छी प्रगति है। मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम जरूरतमंदों के लिए सहारा बन रहे हैं। प्रदेश में सांख्यिकी संकलन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए राज्य सांख्यिकी आयोग के गठन की अनुशंसा की गई है। साथ ही राज्य स्तरीय डाटा रेसेर्वियार की स्थापना की बात भी कही गई है, जिसमें समस्त विभागों के डाटा संकलन का कार्य योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मुख्यालय में हो सके।

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यूक्रेन के विदेश मंत्री ने जयशंकर को फोन किया, स्थिति पर चर्चा की

नई दिल्ली जाने आलम (जानू चौधरी)। यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में महत्वपूर्ण मतदान से पहले इस पूर्वी यूरोपीय देश के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से फोन पर बात की और यूक्रेन की वर्तमान स्थिति को लेकर अपना आकलन साझा किया।

 

जयशंकर ने कहा कि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत समाधान के लिए कूटनीति और बातचीत का समर्थन करता है।

 

विदेश मंत्री जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा का कॉल आया । उन्होंने वर्तमान स्थिति को लेकर अपना आकलन साझा किया । ’’

 

जयशंकर ने कहा, ‘‘ मैंने इस बात पर जोर दिया कि भारत समाधान निकालने के लिए कूटनीति और बातचीत का समर्थन करता है ।’’

 

उन्होंने कहा कि छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की स्थिति के बारे में चर्चा की तथा सुरक्षित निकासी में उनके सहयोग की सराहना की ।

 

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियान एवं पूर्वी यूरोपीय देश में स्थिति बिगड़ने को लेकर शुक्रवार की शाम को मसौदा प्रस्ताव पेश किया जाना निर्धारित है। समझा जाता है कि मसौदा प्रस्ताव में यूक्रेन के खिलाफ रूस के सैन्य अभियान की कड़ी निंदा की जाएगी।

 

इधर, यूक्रेन में बिगड़ती स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से टेलीफोन पर बातचीत की थी और हिंसा को समाप्त करने तथा सभी पक्षों से राजनयिक बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की थी ।

 

वहीं, यूक्रेन संकट पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मसौदा प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने बृहस्पतिवार को कहा था, ‘‘मुझे बताया गया है कि इसमें काफी बदलाव होगा। हम इस पर अपना रुख रखने से पहले इसके आकार लेने का इंतजार करेंगे।’’

 

उन्होंने कहा था, ‘‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य होने के नाते और ऐसा देश होने के नाते, जिसका उस क्षेत्र में काफी कुछ दांव पर लगा है, जिसके अनेक नागरिक संवेदनशील क्षेत्रों में हैं, हम सभी संबंधित पक्षों के निकट संपर्क में हैं।’’

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प्रियंका बोलीं- पीएम को यूक्रेन में युद्ध की जानकारी है,लेकिन यूपी में आवारा पशुओं की समस्या के बारे में नहीं

अमेठी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण के लिए आज शाम यानी 25 फरवरी को 12 जनपदों की 61 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रचार थम जाएगा। सभी राजनीतिक दलों के सियासी दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी है। पांचवें चरण में अमेठी, रायबरेली, सुल्तानपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, बाराबंकी, अयोध्या, बहराईच समेत कई अन्य महत्वपूर्ण सीटें हैं। इसके लिए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी अमेठी पहुंचे। जगदीशपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने आवारा पशुओं की समस्या को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साथा। प्रियंका गांधी ने कहा, ''पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें आवारा पशुओं की समस्या के बारे में नहीं पता, 5 साल से क्या कर रहे थे? उन्हें यूक्रेन में युद्ध की जानकारी है, उन्हें कोविड के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की खांसी के बारे में पता था, लेकिन उन्हें किसानों की इस समस्या का पता नहीं था?'' प्रियंका ने कहा, आप (जनता) अपनी परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार हैं। आप भटक जाते हैं और आंखें बंद करके वोट करते हैं। आपका वोट एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, बुद्धिमानी से चुनें क्योंकि आपको अगले 5 वर्षों तक पछताना पड़ सकता है। यह आपके विकास का समय है। प्रियंका ने पूछा, इन 5 सालों में कितनों को रोजगार मिला है?, इन्होंने जो जानबूझकर 12 लाख सरकारी पदों को खाली रखा है उसे हम सबसे पहले भरेंगे। इसकी हमने पूरी लिस्ट बनाई हुई है। इसके अलावा हम 8 लाख नए रोज़गार देंगे। राहुल गांधी ने कहा कि भारत के रोजगार क्षेत्र की रीढ़ को पीएम नरेंद्र मोदी और उनके दोस्तों ने तोड़ा है। आप देखेंगे कि आने वाले समय में इस देश के युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा, आप जितना चाहें, उन्हें पढ़ाएं। कोविड के दौरान किसी ने मेरी नहीं सुनी, लेकिन आपने गंगा में शव देखे। राहुल ने कहा कि जब वे (भाजपा) कहते हैं कि हमारे 70 वर्षों में कुछ नहीं हुआ, तो उनका वास्तव में मतलब था कि इन 70 वर्षों में अंबानी, अडानी के लिए कुछ नहीं हुआ। याद रखें, भारत के सबसे बड़े अरबपति रोजगार नहीं देते, छोटे दुकानदार, व्यापारी और किसान करते हैं।

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