पित्त और कफ विकारों का घरेलू उपचार है गूलर

मोरासी परिवारी का सदस्य गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है। इसका वनस्पतिक नाम फीकुस ग्लोमेराता रौक्सबुर्ग है। यह सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है। यह नदी−नालों के किनारे एवं दलदली स्थानों पर उगता है। उत्तर प्रदेश के मैदानों में यह अपने आप ही उग आता है।

 

इसके भालाकार पत्ते 10 से सत्रह सेमी लंबे होते हैं जो जनवरी से अप्रैल तक निकलते हैं। इसकी छाल का रंग लाल−घूसर होता है। फल गोल, गुच्छों में लगते हैं। फल मार्च से जून तक आते हैं। कच्चा फल छोटा हरा होता है पकने पर फल मीठे, मुलायम तथा छोटे−छोटे दानों से युक्त होता है। इसका फल देखने में अंजीर के फल जैसा लगता है। इसके तने से क्षीर निकलता है।

 

आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार गूलर का कच्चा फल कसैला एवं दाहनाशक है। पका हुआ गूलर रुचिकारक, मीठा, शीतल, पित्तशामक, तृषाशामक, श्रमहर, कब्ज मिटाने वाला तथा पौष्टिक है। इसकी जड़ में रक्तस्राव रोकने तथा जलन शांत करने का गुण है। गूलर के कच्चे फलों की सब्जी बनाई जाती है तथा पके फल खाए जाते हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर या अन्य प्रकार से उपयोग किया जाता है।

 

गूलर के नियमित सेवन से शरीर में पित्त एवं कफ का संतुलन बना रहता है। इसलिए पित्त एवं कफ विकार नहीं होते। साथ ही इससे उदरस्थ अग्नि एवं दाह भी शांत होते हैं। पित्त रोगों में इसके पत्तों के चूर्ण का शहद के साथ सेवन भी फायदेमंद होता है।

 

गूलर की छाल ग्राही है, रक्तस्राव को बंद करती है। साथ ही यह मधुमेह में भी लाभप्रद है। गूलर के कोमल−ताजा पत्तों का रस शहद में मिलाकर पीने से भी मधुमेह में राहत मिलती है। इससे पेशाब में शर्करा की मात्रा भी कम हो जाती है। गूलर के तने को दूध बवासीर एवं दस्तों के लिए श्रेष्ठ दवा है। खूनी बवासीर के रोगी को गूलर के ताजा पत्तों का रस पिलाना चाहिए। इसके नियमित सेवन से त्वचा का रंग भी निखरने लगता है।

 

हाथ−पैरों की त्वचा फटने या बिवाई फटने पर गूलर के तने के दूध का लेप करने से आराम मिलता है, पीड़ा से छुटकारा मिलता है। गूलर से स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी अनियमितताएं भी दूर होती हैं। स्त्रियों में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर इसकी छाल के काढ़े का सेवन करना चाहिए। इससे अत्याधिक बहाव रुक जाता है। ऐसा होने पर गूलर के पके हुए फलों के रस में खांड या शहद मिलाकर पीना भी लाभदायक होता है। विभिन्न योनि विकारों में भी गूलर काफी फायदेमंद होता है। योनि विकारों में योनि प्रक्षालन के लिए गूलर की छाल के काढ़े का प्रयोग करना बहुत फायदेमंद होता है।

 

मुंह के छाले हों तो गूलर के पत्तों या छाल का काढ़ा मुंह में भरकर कुछ देर रखना चाहिए। इससे फायदा होता है। इससे दांत हिलने तथा मसूढ़ों से खून आने जैसी व्याधियों का निदान भी हो जाता है। यह क्रिया लगभग दो सप्ताह तक प्रतिदिन नियमित रूप से करें।

 

आग से या अन्य किसी प्रकार से जल जाने पर प्रभावित स्थान पर गूलर की छाल को लेप करने से जलन शांत हो जाती है। इससे खून का बहना भी बंद हो जाता है। पके हुए गूलर के शरबत में शक्कर, खांड या शहद मिलाकर सेवन करने से गर्मियों में पैदा होने वाली जलन तथा तृषा शांत होती है।

 

नेत्र विकारों जैसे आंखें लाल होना, आंखों में पानी आना, जलन होना आदि के उपचार में भी गूलर उपयोगी है। इसके लिए गूलर के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे साफ और महीन कपड़े से छान लें। ठंडा होने पर इसकी दो−दो बूंद दिन में तीन बार आंखों में डालें। इससे नेत्र ज्योति भी बढ़ती है। नकसीर फूटती हो तो ताजा एवं पके हुए गूलर के लगभग 25 मिली लीटर रस में गुड़ या शहद मिलाकर सेवन करने या नकसीर फूटना बंद हो जाती है।

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इस उम्र में शरीर कई बीमारियों का घर

मैं मानती हूं कि मेरी इस उम्र में शरीर कई बीमारियों का घर बन जाता है परन्तु मेरी ज्ञानेन्द्रियों के साथ इन दिनों एक विशेष प्रकार की समस्या होती जा रही है। मैं लोगों को बताती हूं मगर वे यकीन नहीं करते। वे कहते हैं कि ऐसा भी कभी हो सकता है कि शरीर में आई इतनी बड़ी खराबी क्या कुछ देर बाद ठीक हो जाए और कुछ देर बाद फिर वैसी ही हो जाए।

 

मगर यह सच है कि साल के कुछ महीनों में मैं गूंगी तथा बहरी हो जाती हूं। ऐसा तब ही होता है जब मैं अपने बड़े बेटे रणबीर के पास शहर में जाकर रहती हूं। और जैसे ही मैं छह महीने बाद गांव में अपने छोटे बेटे बलबीर के पास आती हूं तो मेरी सुनने व बोलने की सारी शक्तियां लौट आती हैं और मैं सामान्य इनसान की तरह हो जाती हूं।

 

जब मैं शहर में बड़े बेटे के पास होती हूं तो छोटी बहू का फोन हर रोज आता है और वह मुझे गांव आने के लिए कहती रहती है। उसे मुझसे कोई खास लगाव नहीं है। उसकी नजर तो मेरी बीस हजार रुपए की मासिक पेंशन तथा मेरी बैंक में रखी एफडी पर रहती है। मेरे पास जो सोना है उसे यह खटका रहता है कि कहीं झांसे में आकर मैं बड़ी बहू को न दे दूं।

 

मेरे पास बहुत सारे जीवन के अनुभव, बातें व अनगिनत किस्से हैं मगर मेरे इतने बड़े कुनबे में किसी के पास समय नहीं है कि कुछ देर मेरे पास बैठकर मेरी कोई सलाह या अनुभव की बात सुने। ये सब लोग मेरे लिए अजनबी बन चुके हैं। शहर में तो मुझे पूरा दिन चुप होकर बैठना पड़ता है। जैसे आर्मी में किसी दूसरी यूनिट से आए सिपाही की हालत नए यूनिट में होती है, कोई उससे बात नहीं करता, वैसे ही शहर के घर में मेरे साथ बुरा व्यवहार होता है। सारा दिन मैं अपने मुंह, कान, दिमाग और आंखें बन्द करके पड़ी रहती हूं।

 

शहर में हर तरह आसमान को छूते कंकरीट के जंगल सरीखे फ्लैट ही फ्लैट खड़े हैं। बेटे रणबीर का गुलमोहर सोसायटी में चार कमरों वाला फ्लैट है। वे मुझे सात गुणा सात फुट का अन्दर वाला छोटा-सा सुनसान, अंधेरा और बेरौनक-सा कमरा देते हैं जिसमें बामुश्किल एक बेड आ सकता है। इस कमरे में बाहर की दुनिया से जोडऩे वाली केवल एक छोटी-सी खिड़की है जहां से इस गुलमोहर सोसायटी का मुख्य बड़ा पार्क नजर आता है। वहां से देखकर मैं छह महीने का समय काटती हूं।

 

यहां समय काटना ही सबसे बड़ी समस्या है मेरे लिए। मैं टी वी वाले कमरे में नहीं जा सकती, मेहमान वाले लिविंग रूम में मेरी जाने की मनाही है। मैं बाहर के गैलरी वाले बरामदे में उठ, बैठ या टहल नहीं सकती क्योंकि ऐसा यहां कोई नहीं करता। छत पर तो जाने का सवाल ही नहीं उठता। अब मेरे में इतना दमखम कहां है। सब के सब अन्दर से कुंडी लगाकर रखते हैं, जैसे जेल में बन्द कैदी हों। मजाल है किसी को किसी की शक्ल नजर आ जाए।

 

मुझे समय पर भोजन मिलता है। कोई यह नहीं पूछता कि मुझे क्या खाना अच्छा लगता है। रसोई वाली जो कुछ बनाकर मेरे सम्मुख रखती है, मैं वह खा लेती हूं। मैं उससे बात करूं तो उसके पास भी समय नहीं है मुझसे सिर खपाने का। वह मुझ पर झल्ला पड़ती है। जब मेरे अपने ही मुझसे कोई बात करके राजी नहीं तो फिर वह तो बेगाना जीव है। मेरे पास एक पुराना -सा रेडियो है। कभी-कभार उसके पुराने घिसे हुए बटन मरोड़ती हूं तो उसमे से घर्र-घर्र की कुछ गाने जैसी आवाज आती है। कभी मुझे अच्छी लगती है तो कुछ देर सुन लेती हूं। आज का शोर वाला संगीत सहन कर पाना मेरे बूते की बात नहीं है।

 

यहां की कालकोठरी में मेरे लिए एक सुखद समय सिर्फ वही होता है जब इस सोसायटी के ये पत्थरदिल इनसान होली का त्योहार मनाते हैं। उस दिन पता नहीं कैसे ये तालाबन्द दिलों वाले लोग झुण्ड के झुण्ड बाहर खुले पार्क में नमूदार होते हैं और बनावटी चेहरे से खोखली हंसी हंसते हैं।

 

सुना था कि सांप सारी सर्दियों में अपने बिल में रहकर समय काट देता है और गर्मी आने पर बाहर आकर अपनी केंचुली छोड़ता है। वैसे ही ये हर वक्त घर के अन्दर दुबके रहने वाले लोग अपनी केंचुली उतारकर होली के दिन खुले में जश्न मनाते हैं।

 

उस दिन मै पूरा दिन खिड़की से चिपकी यह अद्भुत नजारा देखती रहती हूं। ये लोग अपने खोल से बाहर आते हैं मगर इनकी सारी खुशी व हुड़दंग नकली और खोखला दिखता है। अपने घर में ये किसी का आना सहन नहीं करते क्योंकि इनके कीमती कालीन तथा सोफे खराब हो सकते हैं। होली के दिन न ही ये अपने घर में कोई मीठी गुजिया, चाट पापड़ी या पकोड़े आदि बनाते हें। सारा ताम झाम बाहर होटल से मंगवाया जाता है-वो बेकार सी नूडल, पिज्जा व डोखला वगैरा।

 

ऐसा ही आयोजन ये लोग नए साल के आगमन पर भी करते हैं। दो सौ के लगभग लोग पार्क में जमा होते हैं। स्टेज पर पता नहीं किस तरह का गाना-बजाना होता है, शोर-शराबा अधिक सुनाई देता है। सात-आठ स्थान पर आग जलाते हैं, शराब पीते हैं और वहीं नूडल, पीजा और पेस्टरी आदि से पेट भरते हैं। साल की शुभकामनाएं देकर अपने-अपने दड़बों में घुस जाते हैं और फिर अगले साल ही मिलते हैं।

 

मुझ जैसे बूढ़ों का ऐसे आयोजनों में जाना वर्जित है। हम न तो अन्य बूढ़ों से मिल सकते हैं और न ही किसी अन्य पीढ़ी के लोगों से। हर कोई बूढ़ा इतनी अलग-अलग जगह टंगा हुआ है, कोई पन्द्रहवीं मंजिल पर है तो कोई आठवीं पर। नई पीढ़ी तो अंग्रेजी में ही गिटपिट करती है और उनके मां-बाप भी उन जैसे ही हो गए हैं मानो सब के सब किसी दूसरे देश के बाशिन्दे हों।

 

तभी तो मेरे साथ यही समस्या आ जाती है जिस का बयान मैंने कहानी के शुरू में किया था। मैं सब कुछ देख सकती हूं, सब कुछ महसूस कर सकती हूं मगर मैं न तो सुन सकती हूं और न ही बोल सकती हूं। बोलूं तो क्या बोलूं, किस से बोलूं और किस जुबान में बोलूं, सब कुछ अनजाना और अबूझ है चारों तरफ।

 

मैंने अपना सारा जीवन गांव में ही काटा है। मेहनत से बच्चों को पढ़ाया। जब तक मेरे पति जिन्दा थे, सब कुछ ठीक था मगर अब मेरी उम्र पिचासी से ज्यादा हो गई है। अब घर की कमान मेरे हाथ में नहीं है। अब मैं कमजोर हूं, चलने फिरने में असमर्थ हूं और दूसरों पर पूरी तरह से निर्भर हूं। अब मैं एक प्रकार से सब पर बोझ बन गई हूं।

 

अन्य बुजुर्गों के बनिस्पत मेरे पास अपना कहने को थोड़ा सोना है, बैक में पैसा है और मासिक पेंशन है जिसकी गर्ज ये अपने लोग भी मुझे थोड़ा-बहुत पूछते हैं। अगर मैं आर्थिक रूप से पूरी तरह उन पर आश्रित होती तो अब तक कब की भुगत गई होती। कौन महंगे अस्पतालों में मेरा इलाज करवाता।

 

अब भी मेरे लिए सुकून की बात है कि जब मैं गांव में अपने छोटे लड़के बलबीर के पास होती हूं तो मुझे बहुत कम दिक्कतें पेश आती हैं। मेरी कई सहेलियां आकर मेरे पास बैठती हैं, मुझे अपने साथ ले जाती हैं, गपशप होती है, हंसी ठिठोली होती है। इससे मेरा समय अच्छा गुजरता है। घर के लोगों की उपेक्षा भरी बातें दिमागमें नहीं घुमड़तीं।

 

समय के साथ-साथ मेरी दोनों बहुओं में खींचतान बढ़ती जा रही है कि कौन मुझे ज्यादा देर तक अपने साथ रखेगी। मुझ से कोई खास लेना-देना नहीं है उन्हें। उन्हें मेरे पास बैंक में रखे नोटों से सरोकार है या मेरी पेंशन की चिन्ता है। मैं जहां रहती हूं पेंशन उन्हें ही देती हूं। तभी तो दोनों बहुओं में एक अलिखित समझौता हो चुका है कि छह महीने मैं एक के पास रहूंगी और छह महीने के बाद दूसरी बहू के पास। एक दिन ज्यादा नहीं हो सकता इस हिसाब- किताब में। पिछले कई सालों में मेरा यही सफर है रोलिंग स्टोन की तरह-इधर से उधर। मेरी मर्जी कोई नहीं पूछता कि मैं क्या चाहती हूं। मैं भी मुंह बन्द करके यह सारा तमाशा देखती रहती हूं।

 

छोटा-सा पौधा होता तो आसानी से कोई भी मुझे उखाड़कर इधर से उधर रोप लेता। मगर मैं तो पूरा वृक्ष बन चुकी हूं। शहर जाती हूं तो मेरी कई जड़ें गांव में ही रह जाती हैं। वहां के कंकरीट के जंगल में पुराने तो क्या, नए पौधे नहीं पनप पाते। वहां के पत्थर घरों में इनसान नहीं, रोबोट सरीखे मशीनी मानव रहते हैं जो दिन-रात चूहा दौड़ में ही रहते हैं। तभी तो मैं वहां जाकर सूखने लगती हूं, कुम्हला जाती हूं और अपनी मौत आने से पहले ही मर-मर कर दिन काटती हूं। और उधर गांव में कृष्णा, कमला, जानकी और मेरी अन्य सहेलियां हैं। तभी तो मेरी आवाज छह महीने कुन्द हो जाती है। गांव आकर मैं खुलकर बोलती हूं, प्यार भरी नजरों से दुनिया को देखती हूं, अपनों की आवाजें सुनती हूं। जो मैं कहती हूं, वे सुनते हैं। और मैं जीवंत हां उठती हूं।

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रेड कैटेगरी यूनिट के खरीदार ने 50 लाख रुपये जुर्माना हटाने की अपील की

नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रेड कैटेगरी यूनिट की संपत्ति खरीदने वाले एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि उसे 50 लाख रुपये की पर्यावरणीय कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन जब तक दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति मामले को सत्यापित करने की याचिका पर विचार नहीं करती, तब तक जुर्माना लागू नहीं किया जाएगा।

 

एनजीटी अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता तारा देवी ने कहा कि उनके खिलाफ आदेश का पालन किया जा रहा है और इससे वह दुखी हैं। याचिका के अनुसार, उसने संपत्ति के मालिक से 2009 में संपत्ति खरीदी थी, जहां वीनस डाइंग वर्क्‍स एक किरायेदार के रूप में काम कर रहा था। अपीलकर्ता द्वारा संपत्ति की खरीद के बाद इकाई ने काम करना बंद कर दिया। फिर भी, संपत्ति को अक्टूबर 2018 में सील कर दिया गया था।

 

24 फरवरी को पारित एनजीटी के आदेश में कहा गया है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के 5 जुलाई, 2020 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई है, जिसमें दिल्ली में वीनस डाइंग वर्क्‍स, हैदरपुर के खिलाफ 50 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि इकाई गैर-अनुरूप क्षेत्र में रेड श्रेणी की गतिविधि में लगी हुई थी। कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया।

 

एनजीटी के आदेश में कहा गया है, हमने इस मामले पर विचार किया है। जहां तक सीलिंग का संबंध है, एसडीएम के आदेश के खिलाफ ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील सुनवाई योग्य नहीं है। हम उस पहलू पर विचार नहीं कर रहे हैं, बल्कि इस तरह के मामले पर एक उपयुक्त मंच के समक्ष विचार किया जा रहा है। यहां तक कि मुआवजे के मुद्दे पर विचार नहीं किया जा सकता, क्योंकि अपीलकर्ता के खिलाफ कोई आदेश नहीं है। हालांकि, स्पष्टीकरण के माध्यम से अपीलकर्ता के खिलाफ आक्षेपित आदेश तब तक लागू नहीं किया जा सकता है, जब तक कि डीपीसीसी अपीलकर्ता के इस रुख को नहीं देखता कि उसे कथित कानून का उल्लंघन करने वाला - वीनस डाइंग वर्क्‍स से कोई सरोकार नहीं है, जिसके खिलाफ आक्षेपित आदेश पारित किया गया है। तदनुसार, मामले का निस्तारण कर दिया गया है।

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सलाद पार्लर में बनाये कैरियर, शुरू करे अपना होम बिजनेस

नई दिल्ली:  लोगो में सलाद के रूप में सब्जियों को नया रंग और आकार देकर मसालों के साथ स्वादिष्ट बना कर खाने का ट्रेड बहुत देखा जाता है। आप इस क्षेत्र में अपना कैरियर बना सकते है, और अपना होम बिजनेस शुरू कर सकते है। सलाद पार्लर सलाद डेकोरेशन में कैरियर बनाने के लिए कोई विशेष शैक्षिणिके योग्यता की जरूरत नहीं है। आप हाउस वाइफ हैं और चीजों को बेहतर तरीके से सर्व करने की कला में माहिर हैं तो सलाद डेकोरेशन या सलाद काविंग आपके लिए आय का नया साधन बन सकता है। 

 

यहां क्रिएटिविटी दिखाने के भरपूर मौके हैं। सबसे पहले जरूरत के मुताकि कुछ हेल्पर रखें, जो आपके बताए गए काम करेंगे। स्कूल कॉलेजों की कैंटीनों, कैटरर्सव आसपास के ऑफिसों की कैंटीनोंसे संपर्क करें, उन्हें सलाद के सैंपल दें व अलग अलग सलादों के दाम बताएं।यदि आपका सलाद पौष्टिक, स्वच्छ व समय पर उपलब्ध होगा तो आपको ऑर्डर जरूर मिलेगा। यदि आपको बडी मात्रा में ऑर्डर मिलने लगे तो हेल्परों की संख्या बढा दें। पैकिंग की कीमत सलाद डेकोरेशन में कैरियर बेस्ट है। 

 

इसके लिए पैकिंग की कीमत, आनेजाने में लगने वाला किराया, सब्जियां खरीदने काखर्च आदि मिलाकर उसमें से कम से कम मात्रा में अपना मुनाफा मिलाकर सलाद के डब्बे के दाम निश्चित कर लें। 

 

ध्यान रखने योग्य बातें:- सलाद में ऐसी सामग्रियों का यूज करें, जो रंगबिरंगी हों। अमूूमन सलाद में हरे, लाल और पीले रंग की सामग्रियों का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। सलाद की पौष्टिकता और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें। सलाद डेकोरेशन के लिएकुछ अनोखे और नए आइडिया पर विचार करें।

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बिकनी पहन योगा करती दिखीं एक्ट्रेस मल्लिका शेरावत

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की मशहुर अभिनेत्री मल्लिका शेरावत अपने ग्लैमरस लुक के जानी जाती है। सोशल मीडिया में उनकी कई तस्वीरें वायरल होती रहती है। उनकी फैंस भी उनकी तस्वीरों को खूब पसंद करते है। हाल ही में उनकी एक वीडियो जमकर वायरल हो रही है। इस वीडियो में वह बिकिनी में योगा करती दिखाई दे रही हैं। अपने इस वीडियो को मल्लिका शेरावत ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है।

 

वीडियो में वह प्रिटेंड बिकिनी पहने दिखाई दे रही हैं। वह वीडियो में योगा कर रही हैं। अपने इस वीडियो को शेयर करते हुए मल्लिका शेरावत खास कैप्शन भी लिखा है। उन्होंने कैप्शन में लिखा, ‘योग पोजिसन के साथ मंडे ब्लूज को हराएं, आगे झुकना मेरा पसंदीदा पोज है क्योंकि यह सब मानसिक विश्राम, शांति और आनंद को बढ़ावा देते हैं।’

 

सोशल मीडिया पर मल्लिका शेरावत का यह योग वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। अभिनेत्री के फैंस उनके वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं। साथ ही कमेंट कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने मल्लिका शेरावत के फीगर की जमकर तारीफ की है। बात करें अभिनेत्री के वर्कफ्रंट की तो मल्लिका शेरावत पिछले साल रिलीज हुई वेब सीरीज ‘नकाब’ में नजर आईं थीं। उनकी यह वेब सीरीज एमएक्स प्लेयर पर रिलीज हुई थी।

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युवतियों को पसंद आ रहे स्वच्छता के अत्याधुनिक तरीके, पीरियड में अपना रही हाइजीनिक मेथड

चित्रकूट। जागरूकता आने से माहवारी के दौरान पुराने गंदे कपड़े लगाने का चलन समाप्ति की ओर है। युवतियों को अब इस कठिन वक्त में हाइजीनिक मेथड पसंद आ रहे हैं। एन एफ एच एस-5 का आंकड़ा इसकी गवाही देता है। एनएफएचएस-5 के आंकडें के मुताबिक जिले में वर्ष 2015-16 में, जहां 31 फीसद युवतियां हाइजीनिक मेथड अपना रही थी। वहीं वर्ष 2019 -21 में यह आंकड़ा बढ़कर 55 फीसद पहुंच गया है।

 

आशा संगिनी सरिता शुक्ला ने बुधवार को बताया कि वह समय-समय पर महिलाओं को माहवारी के दौरान साफ सफाई रखने के लिए समझाती रहती हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं को प्रेरित करते हैं कि वह माहवारी के दौरान हाइजीनिक मेथड यानी पैड का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से वह कई प्रकार के संक्रमण से बची रहेंगी। उनके समझाने का युवतियों पर खासा प्रभाव पड़ रहा है।

 

स्त्री रोग विशेषज्ञ व सर्जन डॉ रफीक अंसारी बताते हैं कि योनि में पाया जाने वाला तरल पदार्थ अम्लीय (एसीडिक) होता है जो लगभग सभी प्रकार के संक्रमण को होने से रोकता है। माहवारी के दौरान यह तरल पदार्थ क्षारीय (बेसिक) हो जाता है, इससे संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। स्वच्छता के अभाव में संक्रमण का यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसीलिए इस दौरान साफ सफाई की अतिरिक्त जरूरत होती है।

 

उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में मासिक धर्म की शुरूआत में एक से अधिक बार पैड बदलना चाहिए। ताकि संक्रमण का खतरा बिल्कुल न रहे। पीरियड के दौरान खुजली सहित अन्य किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर उसे छिपाने की गलती न करें। बल्कि डाक्टर से परामर्श लें, अन्यथा की स्थिति में बैक्टीरिया व फंगस से सम्बंधित संक्रमण हो सकता है। साफ सफाई नजर अंदाज करने पर संक्रमण बच्चेदानी में भी पहुंच सकता है। यहां तक स्वच्छता न अपनाने से प्रजनन रोग भी हो सकता है।

 

जिला मुख्यालय में रहने वाली सामाजिक कार्यकर्ता गुड़िया का कहना है कि माहवारी के दौरान साफ सफाई जरूरी है। इसके लिए हाइजीनिक मेथड अपनाएं। उनका कहना है वह खुद इस कठिन समय में पैड इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने अपील किया की महिलाएं माहवारी के दौरान पैड इस्तेमाल करें ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण की संभावना न रहे। 

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महाराष्ट्र, तमिलनाडु और केरल में कोरोना बेकाबू.. देश में बीते 24 घंटे में 2,35,532 नए केस, 871 ने तोड़ा दम

नई दिल्ली। देश में एक दिन में 2,35,532 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4,08,58,241 हो गयी है।

 

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शनिवार सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में पिछले 24 घंटे के दौरान 871 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 4,93,198 हो गयी है।

 

मंत्रालय ने बताया कि उपचाराधीन मरीजों की संख्या 1,01,278 तक कम हो गयी है और अब इस महामारी का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या 20,04,333 हो गयी है जो संक्रमण के कुल मामलों का 4.91 प्रतिशत है जबकि देश में मरीजों के ठीक होने की दर 93.89 प्रतिशत है।

 

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, संक्रमण की दैनिक दर 13.39 प्रतिशत दर्ज की गयी जबकि साप्ताहिक संक्रमण दर 16.89 प्रतिशत दर्ज की गयी। महामारी से ठीक होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 3,83,60,710 हो गयी हैं जबकि मृत्यु दर 1.21 प्रतिशत दर्ज की गयी।

 

अद्यतन आंकड़ों के अनुसार संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 4,08,58,241 हो गयी है। इस बीच राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 165.04 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं।

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डीसीडब्ल्यू का एसबीआई को नोटिस, गर्भवती महिलाओं से संबंधित रोजगार दिशा-निर्देश वापस लेने की मांग

नई दिल्ली। दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को शनिवार को नोटिस जारी कर उन नए दिशा-निर्देशों को वापस लेने की मांग की, जिनके तहत नई भर्ती की स्थिति में तीन महीने से अधिक अवधि की गर्भवती महिला उम्मीदवारों को ‘‘अस्थायी रूप से अयोग्य’’ माना जाएगा और वे प्रसव के बाद चार महीने के भीतर बैंक में काम शुरू कर सकती हैं।

 

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई। डीसीडब्ल्यू प्रमुख स्वाति मालीवाल ने ट्वीट किया, ''ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय स्टेट बैंक ने तीन महीने से अधिक अवधि की गर्भवती महिलाओं की भर्ती को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं और उन्हें 'अस्थायी रूप से अयोग्य' करार दिया है। यह भेदभावपूर्ण और अवैध है। हमने उन्हें नोटिस जारी कर इस महिला विरोधी नियम को वापस लेने की मांग की है।''

 

आयोग ने नोटिस में नए दिशा-निर्देशों की एक प्रति के साथ-साथ इससे पहले लागू समान नियमों की एक प्रति मांगी। इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है।

 

एसबीआई ने नई भर्तियों या पदोन्नत लोगों के लिए अपने नवीनतम मेडिकल फिटनेस दिशानिर्देशों में कहा कि तीन महीने के समय से कम गर्भवती महिला उम्मीदवारों को 'योग्य' माना जाएगा।

 

बैंक द्वारा 31 दिसंबर, 2021 को जारी फिटनेस संबंधित मानकों के अनुसार गर्भावस्था के तीन महीने से अधिक होने की स्थिति में महिला उम्मीदवार को अस्थायी रूप से अयोग्य माना जाएगा और उन्हें बच्चे के जन्म के बाद चार महीने के भीतर काम पर आने की अनुमति दी जा सकती है।

 

इससे पहले, गर्भधारण के छह महीने तक महिला उम्मीदवारों को विभिन्न शर्तों के तहत बैंक में भर्ती किया जाता था।

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ब्लडग्रुप के हिसाब से पीएं चाएं, हर बीमारी को दूर भगाएं

इस विषय पर कई शोध हुए हैं कि किस ब्लड ग्रुप के इंसान को कौन सा खाना और पेय पदार्थ पीना चाहिए। हमारे ब्लड ग्रुप की भूमिका हमारे स्वास्थ्य निर्धारण में अहम होती है। ब्लड ग्रुप के प्रकार के कारण कई लोग कुछ विशेष बिमारी से ग्रसित हो सकते हैं।

 

आपके ब्लड ग्रुप के अनुसार चाय पीने से आप इन खतरों से बच सकते हैं क्यूंकि चाय के कई स्वास्थ्य लाभ हैं इसलिए, हर्बल चाय अलग अलग ब्लड ग्रुप वाले लोगों के लिए काफी लाभदायक हो सकता है। जैसा कि आप जान गए होंगे कि अलग अलग ब्लड ग्रुप में अलग तरह की बीमारियों का खतरा होता है, आपको वही चाय पीनी चाहिए जो आपके ब्लड ग्रुप के अनुसार हो और आपको स्वस्थ रखे। यहां पर कुछ चाय के प्रकार का वर्णन किया गया है जो आपको अपंने ब्लड ग्रुप के अनुसार पीनी चाहिए।

 

ब्लड ग्रुप ए के लिए:- ग्रीन टी, मेरीगोल्ड टी, अजवायन की चाय और चमेली के पौधे की चाय पीनी चाहिए।

 

ब्लड ग्रुप बी:- लेमन बाम टी, तेजपत्ते की चाय, एल्डरबेरी टी, रूइबोस टी, रेड टी और ग्रीन टी पीनी चाहिए।

 

ब्लड ग्रुप एबी:- इन्हें कॉफी का त्याग कर चाय ही पीनी चाहिए। ऐसे लोगों को पुदीने की चाय, करौंदे की चाय, लैवेंडर फूल की चाय, ग्रीन टी और येलो टी पीनी चाहिए।

 

ब्लड ग्रुप ओ:- अदरक वाली चाय, जिनसेंग टी, येरबा मेट टी और ग्रीन टी पीनी चाहिए।

 

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जलवायु परिवर्तन समझौते व वर्तमान स्थिति

नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से पैदा हुए खतरों से दुनिया परिचित हो चुकी है। आज यह कोई वैज्ञानिक भविष्यवाणी मात्र न रह कर एक सचाई के रूप में विभिन्न प्राकृतिक दुर्घटनाओं के रूप में सामने आ रही है। बाढ़, सूखा, समुद्री तूफान, अंधड़, बेमौसमी बर्फबारी, ग्लेशियर पिघलने के कारण आसन्न जल संकट जैसे कितने ही बदलाव दृष्टिगोचर हो रहे हैं। समुद्री तटों से लगते इलाके और देश बढ़ते समुद्र तल के कारण डूबने के खतरे में घिर सकते हैं। इन खतरों के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र संघ लगातार पहल कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन इस दिशा में आधारभूत सम्मेलन है। 1992 में इस सम्मेलन के निष्कर्षों पर 197 देशों ने हस्ताक्षर किए और 21 मार्च 1994 से इस समझौते को लागू माना गया। इस समझौते की मूल बात यह है कि इसके द्वारा यह माना गया कि जलवायु परिवर्तन एक समस्या है और इसके समाधान के लिए कुछ किया जाना चाहिए, जिसका मूल कारक हरित प्रभाव गैसें हैं जो वैश्विक तापमान वृद्धि का कारण हैं। और ये गैसें ऊर्जा उत्पादन के लिए मुख्यतः कोयला या खनिज तेल जलाने के कारण पैदा हो रही हैं और वातावरण में जमा हो रही हैं।

 

इसी वृद्धि से जलवायु परिवर्तन हो रहा है। इस समझौते द्वारा विभिन्न पक्षों से यह अपेक्षा की गई कि वे हरित-प्रभाव गैसों के मानव-जनित उत्सर्जन को इस सीमा के भीतर नियंत्रित करेंगे जिससे जलवायु तंत्र पर खतरनाक प्रभाव न पड़ें। इस लक्ष्य की घोषणा हो ताकि एक शुरुआत हो और आगे चल कर विस्तृत, विशिष्ट समझौते किए जा सकें। इसमें जलवायु के संदर्भ में सांझी किंतु जिम्मेदारियों के संदर्भ में अलग-अलग जिम्मेदारियों की संकल्पना की गई, जिसका अर्थ यह है कि विकासशील देशों से यह उम्मीद की जाती है कि वे जलवायु परिवर्तन रोकने में योगदान करेंगे, किंतु विकसित देश जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए पहलकदमी करेंगे क्योंकि ये देश ऐतिहासिक रूप से पहले ही बहुत ज्यादा हरित-प्रभाव गैसों का उत्सर्जन कर चुके हैं। विकासशील देशों में खासकर और वैश्विक स्तर पर आमतौर पर टिकाऊ आर्थिक विकास पर बल देने की बात की गई। इस दिशा में विकासशील देशों की उपलब्धि व प्रदर्शन को विकसित देशों द्वारा तकनीक हस्तांतरण और आर्थिक सहायता से जोड़ा गया। इस समझौते में सभी देशों द्वारा हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन की मात्रा की घोषणा करने और विकसित देशों द्वारा हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन को कम करने से संबंधित नीतियों की घोषणा करने की भी अपेक्षा की गई। इसके बाद लगातार सम्मेलन होते रहे जिन्हें संबंधित पक्ष सम्मेलन कहा गया। इन सम्मेलनों में क्योटो सम्मेलन पहला महत्त्वपूर्ण सम्मेलन है जहां क्योटो प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर हुए। इस प्रोटोकॉल द्वारा पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन के आशयों को लागू करने के लिए नियम बनाए गए। रूस द्वारा मान्यता देने के बाद 2005 में इसे लागू माना गया, किंतु एक हरित गैसों के उत्सर्जक बड़े देश अमेरिका ने इस प्रोटोकॉल को मान्यता नहीं दी क्योंकि विकासशील देश होने के कारण पहले दर्जे के हरित गैस उत्सर्जक चीन और तीसरे दर्जे के उत्सर्जक भारत पर कोई नियंत्रण इस प्रोटोकॉल में नहीं सुझाए गए थे।

 

 जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन में यह अपेक्षा की गई थी कि जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया को उस स्तर के भीतर रोकना होगा जिससे परिस्थिति तंत्र स्वयं को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढाल सके, और टिकाऊ विकास और कृषि उत्पादन पर घातक प्रभाव न पड़े। इस प्रोटोकॉल में 37 औद्योगिक देशों के लिए उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य निर्धारित किए गए। 1990 के स्तर से 5 फीसदी उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य रखा गया। अमेरिका ने इसे भेदभावपूर्ण मानते हुए इसे मान्यता नहीं दी। अन्य 184 देशों ने इसे मान्यता दे दी। विकासशील देशों के लिए कोई लक्ष्य इस तर्क पर निर्धारित नहीं किया गया कि जिन विकसित देशों ने जलवायु को पहले ही अधिक नुकसान पहुंचाया है, उन्हें पहल करनी चाहिए। उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य की पूर्ति न करने पर आर्थिक दंड का भी प्रावधान किया गया। पेरिस समझौता इस कड़ी में सबसे महत्त्वपूर्ण है। इसमें सभी देशों को अपने-अपने उत्सर्जन स्तर में कमी करने के वादे दायर करने का प्रावधान है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान कहा गया है। हर 5 वर्ष में इसका पुनरावलोकन व आकलन करने की वैश्विक स्तर पर व्यवस्था है। यह समझौता 2015 में किया गया। इसमें तापमान वृद्धि को औद्योगिक क्रांति के समय के तापमान से 2 डिग्री सेंटीग्रेड के नीचे रोकने का लक्ष्य रखा गया है। कोशिश यह करनी है कि तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड से कम पर ही रुक जाए। वैश्विक स्तर पर नेट जीरो उत्सर्जन स्तर 2050 तक हासिल करना है। नेट जीरो उत्सर्जन का अर्थ है कि हरित प्रभाव गैसों का उत्सर्जन उतना ही होगा जितनी मात्रा में हरित प्रभाव गैसों का उत्सर्जन कुछ अन्य गतिविधियों द्वारा घटा लिया गया है। इसे जलवायु तटस्थ या कार्बन तटस्थ स्थिति भी कहा गया है। देशों ने अपने लक्ष्य स्वयं निर्धारित किए हैं, फिर भी ट्रम्प प्रशासन के अंतर्गत अमेरिका ने समझौते से किनारा कर लिया था। हालांकि अब जो बाइडेन प्रशासन ने फिर समझौते को मान्यता दे दी है।

 

 पेरिस समझौता आर्थिक, तकनीकी और क्षमता निर्माण के लिए ढांचा बनाने की व्यवस्था करता है ताकि  समझौते की पूर्ति के लिए जरूरतमंद देशों को सहायता दी जा सके। इसी कड़ी में जलवायु परिवर्तन से संबंधित पक्षों का 26वां सम्मेलन ग्लास्गो में 31 अक्तूबर से 12 नवंबर 2021 तक संपन्न हुआ। इसमें मुख्य चार लक्ष्यों पर निर्णय लिए गए : 1. न्यूनीकरण, इसमें हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन को 2030 तक नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करके कम करने के वादे किए गए। 2. अनुकूलन : इसके तहत जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के प्रयासों को बढ़ावा देने का निर्णय हुआ। 3. आर्थिक सहयोग : विकसित देशों ने हरित प्रभाव गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए विकासशील देशों को आर्थिक सहायता देने के लिए 2023 तक 100 बिलियन डालर फंड इकट्ठा करने की दिशा में प्रगति की है। 4. सहयोग : सरकारों के बीच स्वच्छ हरित ऊर्जा, विद्युत चालित वाहन, जहाजरानी, शून्य उत्सर्जन स्टील निर्माण, हाइड्रोजन फ्यूल   आदि क्षेत्रों में तकनीकी और आर्थिक सहयोग द्वारा जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने पर सहमति बनी है। इस समय गैस उत्सर्जन मामले में चीन पहले, अमेरिका दूसरे तथा भारत तीसरे स्थान पर बना हुआ है। ये तीनों देश कितनी गंभीरता से इस मुद्दे को लेते हैं उसी पर बहुत हद तक जलवायु परिवर्तन त्रासदी से निपटने के प्रयासों की सफलता निर्भर होगी।

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कोराेना के सक्रिय मामले बढ़कर 17 लाख से अधिक हुए

नई दिल्ली। देश में पिछले 24 घंटे में 2.38 लाख से ज्यादा नये मामले सामने आने के बाद सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 17 लाख से अधिक होने के साथ इसकी दर 4.62 फीसदी हो गयी है।

इस बीच सोमवार को देश में 79 लाख 91 हजार 230 कोविड टीके लगाये गये हैं और अब तक एक अरब 58 करोड़ 04 लाख 41 हजार 770 कोविड टीके दिये जा चुके हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार की सुबह जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में देश भर में 16 लाख 49 हजार 143 कोविड परीक्षण किए गये , जिनमें दो लाख 38 हजार 018 लोगों की रिपोर्ट पाॅजिटिव आयी और कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर तीन करोड़ 76 लाख 18 हजार 271 हो गयी है। इसी दौरान 310 और मरीजों की मौत होने के साथ इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 4,86,761 हो गयी है। इसी अवधि में 1,57,421 मरीजों के स्वस्थ होने से कोरोनामुक्त होने वालों की संख्या बढ़कर तीन करोड़ 53 लाख 94 हजार 882 हो गयी हैं।

देश में रिकवरी दर घटकर 94.09 पर आ गयी है वहीं मृत्यु दर मामूली गिरावट के साथ 1.29 रह गयी है।

दूसरी तरफ कोविड के ओमिक्रॉन वैरिएंट से 27 राज्यों में अब तक 8891 व्यक्ति संक्रमित पाये गये हैं।

महाराष्ट्र सक्रिय मामलों के हिसाब से देश में पहले स्थान पर है। पिछले 24 घंटों में यहां सक्रिय मामले 1995 बढ़कर 2,71,097 हो गये हैं जबकि 29092 मरीजों के स्वस्थ होने के साथ ही कोरोनामुक्त होने वालों की संख्या 68,29,992 हो गयी है। वहीं 24 मरीजों की मौत हो गयी तथा इस बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,41,832 हो गयी है।

सक्रिय मामलों में दूसरे स्थान पर कर्नाटक में इनकी संख्या 2,17,326 है। यहां 19,315 सक्रिय मामले बढ़े हैं। राज्य में 7825 मरीजों स्वस्थ हुए हैं जिन्हें मिलाकर 29,91,472 लोग कोरोना को मात दे चुके हैं। वहीं 14 और मरीजों की मौत हुई है तथा अब तक मृतकों की संख्या 38,445 हो गयी है।

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उप्र स्वास्थ्य विभाग कोविड-19 अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए ठीक से तैयार नहीं है: एनजीटी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) कोविड-19 रोगियों के जैव-चिकित्सा अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए ठीक से तैयार नहीं हैं।

 

अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि राज्य के पांच जिलों बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं, पीलीभीत और रामपुर में 876 स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों से कोविड -19 अपशिष्ट संग्रह के लिए केवल एक वाहन है।

 

पीठ ने कहा, ‘‘उनका निगरानी तंत्र अपर्याप्त है। अभिलेखों का अनुरक्षण नियमानुसार नहीं है। जैव-चिकित्सा अपशिष्ट संग्रहण के काम में भी कमी है। अपशिष्ट के संग्रह और निपटारे में शामिल श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हैं।”

 

पीठ ने हाल में पारित आदेश में कहा, ‘‘सामान्य कचरे से जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट का पृथक्करण और उसके वैज्ञानिक निपटान में सुधार की आवश्यकता है।’’

 

अधिकरण ने कहा कि क्योंकि कोविड -19 कचरे सहित जैव-चिकित्सा अपशिष्ट के प्रबंधन और निपटान में पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन में भारी अंतराल हैं, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य को खतरा है। उसने कहा कि स्थिति को ठीक करने के लिए प्रभावी उपाय अपरिहार्य हैं।

 

अधिकरण ने मामले की उचित निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तर पर दो समितियों का गठन किया। पीठ ने कहा, ‘‘राज्य और जिला स्तर की निगरानी समितियां अपनी सहायता के लिए किसी अन्य विशेषज्ञ/एजेंसी की मदद लेने के लिए स्वतंत्र होंगी।’’

 

पीठ ने कहा, ‘‘उक्त समितियां स्थिति में सुधार होने तक पहली बार में दो सप्ताह के भीतर बैठक कर सकती हैं और उसके बाद राज्य समिति महीने में एक बार और जिला समिति एक पखवाड़े में एक बार बैठक कर सकती है।

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24 घंटे में 1.68 लाख नए मरीज; एक दिन में 12 हजार की कमी, दिल्ली में सभी प्राइवेट दफ्तर बंद

नई दिल्ली : कोरोना महामारी की तीसरी लहर में 11 दिन के अंदर देश में कुल एक्टिव केस की संख्या 1 लाख से बढ़कर 8 लाख के पार हो गई है। सोमवार को लगातार 5वें दिन 1 लाख से ज्यादा मामले सामने आए। हालांकि, सोमवार को रविवार के मुकाबले करीब 12 हजार कम केस मिले। देश में बीते 24 घंटे के दौरान 1 लाख 67 हजार 550 नए मामले मिले हैं। इससे पहले रविवार को 1.79 लाख केस मिले थे। अब देश में कुल 8 लाख 15 हजार 46 एक्टिव केस हैं।

सोमवार को 69,798 लोग ठीक हो गए, जबकि 277 लोगों की मौत हुई है। अच्छी बात ये है कि सबसे ज्यादा चिंताजनक बने महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में भी सोमवार को नए मामलों की संख्या में कमी आई है, लेकिन चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में नए मामले बढ़ना लगातार जारी है।

दिल्ली में सभी प्राइवेट ऑफिस और रेस्टोरेंट-बार बंद करने का आदेश दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) की बैठक में ये फैसला लिया गया। हालांकि, लोगों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी गई है।

CM अरविंद केजरीवाल मंगलवार दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसमें राजधानी में कोरोना के हालात पर समीक्षा की जाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली में सख्ती पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

कोरोना अपडेट्स

  • मुंबई में पिछले 24 घंटे में 120 पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। वहीं, 1 पुलिसकर्मी की मौत हुई है।
  • हरिद्वार जिला प्रशासन ने 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं के स्नान करने पर पाबंदी लगा दी है। हरिद्वार के DM विनय शंकर पांडे ने बताया कि जिले में 14 जनवरी की रात 10 बजे से 15 जनवरी सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लागू रहेगा। इस दौरान हर की पौड़ी इलाके में भी एंट्री बैन रहेगी।
  • हेल्थ मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोविड पॉजिटिविटी रेट अब 10.64% है। वहीं, ओमिक्रॉन केस की कुल संख्या बढ़कर 4,461 हो गई है। इनमें से 1,711 मरीज ठीक हो चुके हैं।
  • देश में सोमवार 10 जनवरी को 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को प्रीकॉशन डोज लगाने की शुरुआत हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने मंगलवार को ट्वीट कर बताया कि बीते दिन 10.30 लाख से ज्यादा लोगों को प्रीकॉशन डोज लगाया जा चुका है।

देश की कई बड़ी हस्तियां संक्रमित

  • फिल्म बाहुबली में कटप्पा के नाम से फेमस हुए साउथ के दिग्गज एक्टर सत्यराज पिछले दिनों कोरोना संक्रमित पाए गए थे। तबीयत बिगड़ने की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
  • केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई की कोविड रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। बोम्मई में कोरोना के बेहद हल्के लक्षण हैं।
  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। तीन दिन पहले CM हाउस के 27 कर्मचारी भी पॉजिटिव मिले थे। पढ़िए पूरी खबर...
  • दिल्ली एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया आइसोलेट हो गए हैं। उनका ड्राइवर कोरोना पॉजिटिव मिला है। वहीं, दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी चिन्मय बिस्वाल समेत 1000 सिपाही कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।

5 सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों के हाल
1. महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे के दौरान नए मामलों में करीब 11 हजार की कमी आई है। राज्य में सोमवार को 33,470 नए केस सामने आए, जबकि रविवार को 44,388 केस मिले थे। सबसे अच्छी खबर महाराष्ट्र में महामारी से उबरने वालों की संख्या दोगुनी हो रही है। रविवार को 15,351 लोगों के मुकाबले सोमवार को 29,671 डिस्चार्ज हुए हैं। इस दौरान 8 लोगों की मौत हुई है। राज्य में अब कुल एक्टिव केस 2,06,046 हो गए हैं। अब तक राज्य में 69.53 लाख लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।

इनमें 66.02 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 1 लाख 41 हजार 647 लोगों की मौत हो गई। राज्य में पॉजिटिविटी रेट भी 22% से घटकर 19.26% हो गया है। मुंबई में कोरोना वायरस की तीसरी लहर को देखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट की मुख्य बेंच ने मंगलवार से दिन में केवल 3 घंटे काम करने का निर्णय लिया है। यह आदेश 28 जनवरी तक लागू रहेगा और इस दौरान केवल बेहद जरूरी केस ही सुने जाएंगे।

2. पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में सोमवार को 19,286 नए केस मिले हैं, जो रविवार को मिले 24,287 मामलों से बेहद कम हैं। बंगाल में इस दौरान 8187 मरीज ठीक हुए हैं, जबकि 16 लोगों की मौत हो गई है। हालांकि, राज्य का पॉजिटिविटी रेट अब भी बढ़ रहा है, जो 34% से बढ़कर 37% पर पहुंच गया है। राज्य में अब तक कुल 17,74,332 केस मिले हैं, जबकि 16.65 लाख लोग रिकवर हो चुके हैं। राज्य में कुल 19,917 लोगों की मौत हो चुकी है3. दिल्ली
दिल्ली में सोमवार को दिल्ली में नए मामलों का आंकड़ा घटकर 20 हजार के नीचे आ गया। पिछले 24 घंटे के दौरान 19,166 नए मामले मिले हैं, जो रविवार को मिले 22,751 नए केस के मुकाबले 16% कम है। आज 17 लोगों की मौत हुई है। इस दौरान 14,076 लोग रिकवर हुए हैं, जिससे कुल एक्टिव केस भी 65,806 से घटकर 60,733 रह गए हैं।

हालांकि नेशनल कैपिटल में पॉजिटिविटी रेट 24% से बढ़कर 25% पर पहुंच गया है, जिसे चिंता की बात माना जा रहा है। अब तक राज्य में कुल 15,68,896 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 14.77 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 25,177 लोगों की मौत हो गई।

4. तमिलनाडु
यहां सोमवार को 24 घंटे के दौरान 13,990 नए मामले सामने आए, जबकि 2547 मरीज ठीक हुए और 11 लोगों की मौत हुई। अब तक राज्य में 28.14 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 27.14 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 36,866 लोगों की मौत हो गई। यहां एक्टिव केस 62,767 हैं। तमिलनाडु में पॉजिटिविटी रेट 10% है।
5. कर्नाटक
यहां सोमवार को 11,698 लोग संक्रमित पाए गए, 1148 लोग ठीक हुए और 4 लोगों की मौत हो गई। अब तक राज्य में 30.63 लाख लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 29.65 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 38,374 लोगों की मौत हो गई। 60,148 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है। कर्नाटक में पॉजिटिविटी रेट 8% है।

9 अन्य प्रमुख राज्यों का हाल
1. राजस्थान
यहां सोमवार को 6,095 लोग संक्रमित पाए गए, जबकि 472 लोग ठीक हुए और 2 लोगों की मौत हो गई। अब तक राज्य में 9.82 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 9.48 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 8,974 लोगों की मौत हो गई। यहां एक्टिव केस 25,088 हैं।

2. मध्य प्रदेश
यहां सोमवार को 2,317 लोग संक्रमित पाए गए और 559 लोग ठीक हुए हैं। यहां एक 22 साल की युवती की मौत हो गई। अब तक राज्य में 8.03 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 7.84 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 10,538 लोगों की मौत हो गई। यहां एक्टिव केस 8,599 हैं।

15 दिसंबर 2021 के बाद से अब तक 10 मौतें रिपोर्ट हो चुकी हैं। 24 घंटे में प्रदेश के चारों बड़े शहरों में कोरोना विस्फोट हुआ है। इंदौर में सबसे ज्यादा 948 नए मरीज मिले हैं। भोपाल में 562 केस मिले। इनमें 39 बच्चे शामिल हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें...

3. उत्तर प्रदेश
यहां सोमवार को 8,311 लोग संक्रमित पाए गए। राज्य में 335 लोग ठीक हुए और 4 मौत दर्ज की गई। अब तक राज्य में 17.45 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 16.88 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 22,932 लोगों की मौत हो गई। राज्य में 33,946 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है।

4. पंजाब
यहां सोमवार को 3,969 लोग संक्रमित पाए गए। 885 लोग ठीक हुए और 8 मरीजों की मौत हो गई। अब तक राज्य में 6.25 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 5.89 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 16,683 लोगों की मौत हो गई। कुल 19,379 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है।

5. हरियाणा
यहां सोमवार को 5,736 लोग संक्रमित पाए गए और 1552 लोग ठीक हुए। यहां 5 लोगों की मौत हुई है। अब तक राज्य में 7.99 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 7.67 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 10,077 लोगों की मौत हो गई। कुल 22,477 का अभी इलाज चल रहा है।

6. गुजरात
यहां सोमवार को 6,097 लोग संक्रमित पाए गए, जबकि 1539 ठीक हुए और 2 लोगों की मौत हुई है। अब तक राज्य में 8.68 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 8.25 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 10,130 लोगों की मौत हो गई। कुल 32,469 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है।

7. छत्तीसगढ़
यहां सोमवार को 4,120 लोग संक्रमित पाए गए। राज्य में 358 लोग ठीक हुए और 4 मरीज की मौत हो गई। अब तक राज्य में 10.27 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 9.94 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 13,619 लोगों की मौत हो गई। कुल 19,222 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है।

8. बिहार
यहां सोमवार को 4,737 लोग संक्रमित पाए गए। राज्य में 691 लोग ठीक हुए और 5 की मौत हो गई। अब तक राज्य में 7.50 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 7.17 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 12,106 लोगों की मौत हो गई। कुल 20,938 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है।

9. झारखंड
यहां सोमवार को 4,482 लोग संक्रमित पाए गए। राज्य में 1789 ठीक हुए और 2 मरीज की मौत हो गई। अब तक राज्य में 3.82 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 3.50 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 5,172 लोगों की मौत हो गई। कुल 26,019 मरीजों का अभी इलाज चल रहा है।

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शीतकालीन ओलंपिक से पहले बीजिंग के करीब तियानजिन में ओमीक्रोन का प्रकोप

बीजिंग, 09 जनवरी (वेब वार्ता)। चीन ने अगले महीने होने वाले बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक से पहले राजधानी के करीब के शहर तियानजिन के एक करोड़ 40 लाख निवासियों के परीक्षण की तैयारी कर ली है क्योंकि वहां कोविड-19 के कई मामले सामने आए हैं जिसमें घातक ओमीक्रोन प्रारूप के भी दो मामले भी शामिल हैं। तियानजिन और बीजिंग के बीच रोजाना हजारों लोग यात्रा करते हैं क्योंकि हाई स्पीड ट्रेन से इन दोनों शहरों के बीच यात्रा करने में बामुश्किल 30 मिनट का समय लगता है। अधिकारियों ने बताया कि 20 लोगों के कोविड-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद तियानजिन ने पूरे शहर में परीक्षण कराने का फैसला किया है। नगर निगम के कोविड-19 रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए बने मुख्यालय ने बताया कि संक्रमण के ये मामले शुक्रवार और शनिवार को जिनान जिले में आए और पता चला है कि इनमें से दो मामले ओमीक्रोन प्रारूप के हैं।

 तियानजिन चीन का पहला शहर था जिसमें दिसंबर के मध्य में ओमीक्रोन के कुछ मामले सामने आए थे लेकिन इसके बाद मामले बढ़ने की कोई जानकारी नहीं मिली। पर्यटकों के बीच लोकप्रिय शियान और कुछ अन्य शहरों में मामलों में इजाफा हुआ था जिसके बाद अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर परीक्षण किए। दो ओमीक्रोन मामलों के अलावा तियानजिन में संक्रमण के अन्य 18 मामले मुख्य रूप से एक डे-केयर सेंटर और प्राथमिक स्कूल के छात्रों और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े हैं।

 स्थानीय अधिकारियों ने इसके बाद एक करोड़ 40 लाख निवासियों का परीक्षण कराने का फैसला किया है जिससे कि संक्रमण को राजधानी बीजिंग में फैलने से रोका जा सके जिसे चार फरवरी से शीतकालीन ओलंपिक की मेजबानी करनी है।

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एनजीटी ने ग्रेटर नोएडा में खुले में सीवेज का पानी बहाने के मामले की जांच के लिए एक समिति बनायी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के 93 गांवों में खुली जमीन, सड़कों,गलियों में सीवेज का पानी बहाने एवं बड़े नालों से ऐसे गंदे पानी के रिसाव के आरोप लगाने वाली एक याचिका पर गौर करने के लिए एक समिति बनायी है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि याचिका में जो आरोप लगाये गए हैं, उससे असंतोषजनक दशा तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों एवं ‘जनविश्वास सिद्धांत’ का उल्लंघन झलकता है। अधिकरण ने कहा कि नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार और संपोषणीय विकास के सिद्धांत को लागू करने में भी प्रशासन विफल रहा है। पीठ ने कहा, ‘‘उपरोक्त के मद्देनजर सीपीसीबी, राज्य पीसीबी, जीएनआईडी (ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण), गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी एवं उत्तर प्रदेश के शहरी विकास सचिव की संयुक्त समिति इस विषय पर गौर करे एवं उपचारात्मक कार्रवाई करे।’’ पीठ ने कहा, ‘‘सीपीसीबी (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) एवं राज्य पीसीबी अनुपालन एवं समन्वय के लिए संयुक्त रूप से नोडल एजेंसी होंगे। समिति दो सप्ताह में बैठक कर सकती है, संबंधित स्थल का दौरा कर सकती है,संबंधित पक्षों के साथ संवाद कर सकती है और उपचारात्मक कार्रवाई हेतु कार्ययोजना बना सकती है।’’

  प्रदीप कुमार एवं अन्य की ओर से दायर की गयी अर्जी पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें ग्रेटर नोएडा के 93 गांवों में खुली जमीन, सड़कों,गलियों में सीवेज का पानी बहाने एवं बड़े नालों से ऐसे गंदे पानी के रिसाव का आरोप लगाया गया है। 

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इम्यूनिटी ओमिक्रॉन से लड़ने में भी धूप आएगी काम; क्या है धूप लेने का सही तरीका?

नई दिल्ली: जहां गर्मियों की धूप हम सबको परेशान कर देती है, वहीं सर्दियों में ये धूप काफी राहत भरी होती है। सर्दियों में धूप सेंकने का मजा कुछ अलग ही होता है , लेकिन आपको बता दें सर्दियों की धूप कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से भी बचने में कारगर है। इस मौसम में न केवल धूप से शरीर को गर्मी मिलती है, बल्कि इससे शरीर में विटामिन-D की कमी भी पूरी होती है। सनलाइट विटामिन-D का नेचुरल और सबसे अच्छा सोर्स है। इसके अलावा ये बॉडी में कैल्शियम और फास्फोरस की कमी को भी पूरा करता है। विटामिन डी शरीर में रेस्टपीरेट्री टेक्ट इंफेक्शन या रेस्पीरेटरी मसल्स को भी नुकसान से बचाती है। कोरोना से लड़ने के लिए शरीर में विटामिन-D सही मात्रा में होना जरूरी है।

विटामिन-D हम सभी के शरीर के लिए बहुत जरूरी है। अगर शरीर में विटामिन-D का लेवल कम हो जाए तो कई बीमारियां हो सकती हैं। भले ही आप इसके फायदे न जानते या समझते हों, लेकिन सर्दियों में धूप सेंकने से आपको कई फायदे मिलते हैं, जिसका शायद आप अंदाजा भी न लगा पाएं।

आज की जरूरत की खबर में जानते हैं सर्दियों में धूप क्यों जरूरी है? साथ ही ये भी जानेंगे कि धूप सेंकने से क्या-क्या फायदे होते हैं और कितने देर धूप लेना फायदेमंद है…

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योगा करने से पहले और बाद में इन बातों का रखें ध्यान

योग संस्कृत शब्द 'यूजी' से बना है। योग शब्द का शाब्दिक अर्थ- जुड़ना या मिलना होता है। योग से सेहत को बेशुमार लाभ पहुंचता है। नियमित योग करने से दिमाग को शांति मिलती है और तनाव कम होता है। लेकिन योग करते समय कुछ बातें ध्यान में रखना बेहद जरूरी होता है। शारीरिक और मानसिक व्यायाम के रूप में योग पूरी दुनिया में जोर-शोर से अपनाया जा रहा है। भारत में प्राचीन काल से लोग योग करते आए हैं। योग के लिए नियम और अनुशासन बेहद जरूरी हैं। नियमित रूप से और सही तरीके से योग करना सेहत के लिए न सिर्फ फायदेमंद होता है बल्कि घातक बीमारियों को खत्म करने में भी मददगार होता है।


कठिन आसान से न करें शुरुआत

हल्के आसन के चयन से योगासन की शुरूआत करनी चाहिए। पहले से प्रैक्टिस के बावजूद भी आसान योगासन शुरूआत करें। बिना शरीर को तैयार किए आप कठिन योग करने लगेंगे तो चोट लगने का डर रहता है।


सही समय

योग सूरज उगने से पहले और सूर्य डूबने के बाद किसी भी समय किया जा सकता है लेकिन दिन के समय योग न करें। योगासन सुबह के समय करने से अधिक लाभ मिलता है। मगर फिर भी अगर आप किसी कारण से सुबह योग नहीं कर पाएं तो शाम या रात को खाना खाने से आधा घंटा पहले भी कर सकते हैं। यह ध्यान रखें कि आपका पेट भरा न हो। इसलिए भोजन करने के 3-4 घंटे बाद और हल्का नाश्ता लेने के 1 घंटे बाद आप योगास करें।


योगासन के दौरान न पीएं ठंडा पानी

योग करते समय बीच में ठंडा पानी पीना आपके लिए खतरनाक हो सकता है। योग के दौरान शारीरिक गतिविधि के बाद शरीर गर्म हो जाता है। ऐसे में ठंडा पानी पीने से सर्दी जुकाम, कफ और एलर्जी की शिकायत हो सकती है। इसलिए योगासन के समय और बाद में नार्मल पानी ही पीएं।


बीमारी में न करें

अगर आपको कोई भी गंभीर समस्या, जोड़ों, कमर, घुटनों में अधिक दर्द है तो योग करने के लिए डॉक्टर से सलाह लें। इसके अलावा योग करने के दौरान बाथरूम नहीं जाना चाहिए बल्कि अपने शरीर का पानी पसीने के जरिए बाहर निकलना चाहिए।


गलत पोज न करें 

इन्स्ट्रक्टर द्वारा बताए अनुसार ही योग करें। गलत आसन करने से कमर दर्द, घुटनों में तकलीफ या मसल्स में खिंचाव हो सकता है। इसके अलावा पीठ, घुटने या मसल्स की प्रॉब्लम हो तो योग करने से पहले ट्रेनर से सलाह जरूर ले।


तुरंत बाद न नहाएं

योगासन करने के तुरंत बाद न नहाएं बल्कि कुछ समय बाद स्नान करें। क्योकि किसी भी व्यायाम या अन्य शारीरिक गतिविधि के बाद शरीर गर्म हो जाता है और आप एकदम से नहाएंगे तो सर्दी-जुकाम, बदन दर्द जैसी तकलीफ हो सकती है। इसलिए योग करने के एक घंटे बाद ही नहाएं।


योगासन के समय ध्यान केंद्रित करना

योगासन करते समय अपने मोबाइल फोन ऑफ कर दें। क्योंकि इसे करते समय आपका ध्यान इधर-उधर नहीं होना चाहिए। इसके अलावा हंसी मजाक का माहौल न बनाए इससे आपसे योग में कोई गलत स्टेप हो सकता है।


योग के लिए एक्सपर्ट से लें सलाह

अक्सर लोग योग  करने के लिए टीवी या कोई किताब पढ़ने लगते हैं लेकिन योग हमेशा किसी एक्सपर्ट की सलाह से ही करना चाहिए। इसके अलावा अगर आप किसी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए योग कर रहें तो भी एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें।




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'थायरायड' को करना है ख़त्म तो करें ये योगासन ...

थायराइड कोई रोग न होकर गर्दन में पाई जाने वाली एक ग्रंथि का नाम है। यह ग्रंथि शरीर में मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। हम जो कुछ भी खाते हैं, यह ग्रंथि उसे ऊर्जा में बदलने का काम करती है। साथ ही ह्रदय, हड्डियों, मांसपेशियों व कोलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित करती है। इसके अलावा, यह ग्रंथि दो तरह के हार्मोन का भी निर्माण करती है। एक है टी3 यानी ट्राईआयोडोथायरोनिन और दूसरा टी4 यानी थायरॉक्सिन है। जब ये दोनों हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, तो वजन बढ़ने या कम होने लगता है, जिसे आम बोलचाल में थायराइड कहा जाता है। थायराइड दो तरह के होते हैं हाइपो थायराइड व हाइपर थायराइड।


सर्वांगासन 


-अपनी पीठ के बल लेट जाएँ। एक साथ, अपने पैरों, कूल्हे और फिर कमर को उठाएँ। सारा भार आपके कन्धों पर आ जाये । अपनी पीठ को अपने हाथों से सहारा दे।


-अपनी कोहनियों को पास में लें आयें। हाथों को पीठ के साथ रखें, कन्धों को सहारा देते रहें। कोहनियों को ज़मीन पर दबाते हुए और हाथों को कमर पर रखते हुए, अपनी कमर और पैरों को सीधा रखें। शरीर का पूरा भार आपके कन्धों व हाथों के ऊपरी हिस्से पर होना चाहिए, न कि आपके सर और गर्दन पर।


-अपने पैरों को सीधा व मज़बूत रखें। अपने पैर कि एड़ी को इस भांति ऊँचा रखें जैसे आप छत को छूना चाहते हो। अपनी पैरों कि उँगलियों को नाक की सीध में लें आयें। अपनी गर्दन पर ध्यान दे, उसको ज़मीन पर न दबाएँ। अपनी गर्दन को मज़बूत रखें और उसकी मासपेशियों को सिकोड़ लें। अपनी छाती को ठोड़ी से लगा लें। यदि गर्दन में तनाव महसूस हो रहा है तो आसन से बहार आ जाएँ।


-लंबी गहरी साँसे लेते रहें और ३०-६० सेकण्ड्स तक आसन में ही रहें।


-आसन से बहार आने के लिए, घुटनो को धीरे से माथे के पास लें कर आयें। हाथों को ज़मीन पर रखें। बिना सर को उठाये धीरे-धीरे कमर को नीचे लें कर आयें। पैरों को ज़मीन पर लें आयें। कम से कम ६० सेकण्ड्स के लिए विश्राम करें।


मत्स्यासन 


-कमर के बल लेट जाएँ और अपने हाथों और पैरों को शरीर के साथ जोड़ लें।


-हाथों को कूल्हों के नीचे रखें, हथेलियां ज़मीन पर रखें। अपनी कोहनियों को एक साथ जोड़ ले।


-सांस अंदर लेते हुए, छाती व सर को उठाएँ।


-अपनी छाती को उठाएं, सर को पीछे कि ओर लें और सर की चोटी को ज़मीन पर लगाएँ।


-सर को ज़मीन पर आराम से छूते हुए, अपनी कोहनियों को ज़ोर से ज़मीन पर दबाएं, सारा भार कोहनियों पर डालें, सर पर नही। अपनी छाती को ऊँचा उठाएं। जंघा और पैरों को ज़मीन पर दबाएँ।


-जब तक हो सके, आसन में रहें, लंबी गहरी सांसें लेते रहें। हर बहार जाती सांस के साथ विश्राम करें।


-सर को ऊपर उठाएँ, छाती को नीचे करते हुए वापस आएं। दोनों हाथों को वापस शरीर के दायें-बायें लगा लें और विश्राम करें।


उष्ट्रासन 


-अपने योग मैट पर घुटने के सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें।


-घुटने कंधो के समानांतर हो तथा पैरों के तलवे आकाश की तरफ हो।


-सांस लेते हुए मेरुदंड को पुरोनितम्ब की ओर खींचे जैसे कि नाभि से खींचा जा रहा है।


-गर्दन पर बिना दबाव डालें तटस्थ बैठे रहें


-इसी स्थिति में कुछ सांसे लेते रहे।


-सांस छोड़ते हुए अपने प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।


-हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं।



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योग के जरिए पाएं धूम्रपान की लत से छुटकारा

दुनियाभर में हर साल 54 लाख लोग तंबाकू सेवन से मर रहे हैं। औसतन हर छह सेकेंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है, जिसमें हर 10वां व्यक्ति वयस्क है। आमतौर पर धूम्रपान की लत के पीछे व्यक्ति की मानसिक स्थिति की बड़ी भूमिका होती है। इससे निकोटिन की लत छुड़ाने वाले विकल्प नाकामयाब हो जाते हैं। प्राण योगा के योग एक्सपर्ट दीपक झा के अनुसार नियमित योग से लत को ही नहीं, शरीर पर दुष्प्रभाव को भी दूर किया जा सकता है।


योग का फायदा

योगासन और श्वास व्यायामों से धूम्रपान का प्रभाव कम होता है, साथ ही फेफड़ों की दशा में सुधार भी होता है। ध्यान और शुद्धि विषाक्त पदार्थों को शरीर से दूर कर कोशिकाओं को उत्साहित करते हैं। प्राणायाम से शरीर चुस्त रहता है, तनाव और चिंता दूर होती है तथा आत्म-विश्वास भी बढ़ता है।


धूम्रपान का असर

सिगरेट के धुएं से निकलने वाला विषाक्त पदार्थ शरीर में प्रवेश कर खून को मोटा बनाता है और धीरे-धीरे एक थक्के के रूप में जम जाता है। रक्त धमनियों को संकरा कर अंगों में ऑक्सीजन युक्त रक्त परिसंचरण की मात्रा को कम कर देता है। यह ब्लड प्रेशर और हृदय की गति पर भी असर डालता है।


ये आसन करें:-


सर्वांगासन

(शोल्डर स्टैंड)ः सर्वांगासन से खून का दौरा बढ़ता है और रक्त की पर्याप्त मात्रा मिलने से मस्तिष्क को पोषण मिलता है। धूम्रपान की लत को नष्ट करने के अलावा यह आसन तनाव व अवसाद दूर कर चित्त शांत करता है। एकाग्रता बढ़ती है।


सेतु बंधासन (ब्रिज मुद्रा)

इस मुद्रा से फेफड़े खुलते हैं और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह नियमित होता है। शरीर के विभिन्न भागों में लचक बढ़ाने के लिए भी यह आसन उपयोगी है। मन को शांत रखने, चिंता, अवसाद और तनाव को कम करने में भी इससे मदद मिलती है। यह आसन हड्डियों व मांसपेशियों को भी मजबूत करता है।


शिशुआसनः यह मुद्रा शरीर को आराम पहुंचाती है तथा तंत्रिका तंत्र को शांत करके तनाव से राहत देती है।


भुजंगासन (कोबरा पोज)ः इस आसन से सीने की मांसपेशियों में फैलाव आता है। रक्त परिसंचरण में सुधार आता है। थकान को दूर करने के साथ-साथ यह आसन सांस की बीमारियों में भी लाभदायक सिद्ध होता है।


प्राणायाम:-


सहज प्राणायामः प्राणायाम धूम्रपान के जरिये शरीर पर पड़ रहे वर्षों के प्रभाव से लड़ने का एक अच्छा तरीका है। यह योग मुद्रा फेफड़ों के लिए फायदेमंद होती है।

भसीदा प्राणायामः यह प्राणायाम रक्त के स्राव में सुधार करता है, तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाता है और साथ ही सिगरेट पीने की लत से लड़ने की ताकत भी देता है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम (नॉस्ट्रिल ब्रीदिंग तकनीक)ः यह प्राणायाम चिंता को कम कर, मन को शांत रखता है और नाड़ियों को संतुलित करता है। नाड़ी शोधन प्राणायाम सांस की समस्याओं के लिए चिकित्सा के तौर पर कार्य करता है और नशा मुक्ति के दुष्प्रभावों का मुकाबला करने में मदद करता है।



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एंजियोप्लास्टी के बाद आबिद अली को दो महीने आराम की सलाह

कराची : पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज आबिद अली को एंजियोप्लास्टी के बाद दो महीने आराम की सलाह दी गई है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इसकी पुष्टि की।


आबिद को कायदे आजम ट्रॉफी के मैच के दौरान बल्लेबाजी करते समय सीने में तेज दर्द उठा था जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहां उनकी एंजियोप्लास्टी हुई और स्टेंट डाले गए। दूसरी बार स्टेंट बृहस्पतिवार को डाला गया।


उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें दो महीने आराम की सलाह दी है जिसके बाद उनकी फिर जांच की जायेगी। पीसीबी ने सोशल मीडिया पर कहा कि उसकी मेडिकल टीम विदेश में ह्र्दयरोग विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। 




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सिरदर्द के हो सकते हैं ये 6 अजीब कारण, यकीन करना थोड़ा मुश्किल है

सिरदर्द बहुत की आम समस्या है। कब, कहां हमें यह परेशानी घेर ले कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन आमतौर पर हम जानते हैं कि आखिर हमारे सिर में दर्द क्यों हो रहा है? जैसे, अगर हम रात को ठीक से नहीं सो पाए, सुबह बहुत जल्दी उठ गए, कई घंटों से कुछ नहीं खाया...ये कुछ ऐसी बाते हैं, जिन्हें हम सब जानते हैं। लेकिन कुछ बातें ऐसी भी हैं, जिन पर हम लोग गौर नहीं करते हैं कि ये भी हमारे सिर में दर्द की वजह बन सकती हैं। आइए, एक नजर डालते हैं...


कई बार कॉफी पीना

ऑफिस में काम करते हुए या दोस्तों को साथ गप्पे मारते हुए, चाय और कॉफी पीना आम बात है। लेकिन इनमें मौजूद कैफीन उस वक्त हमारे लिए सिरदर्द का कारण बन जाता है, जब हम अधिक मात्रा में चाय या कॉफी का सेवन कर लेते हैं।


कई घंटों से पानी ना पीना

अगर आपने लगातार कई घंटों से पानी नहीं पिया है या आप हर रोज शरीर की जरूरत के हिसाब से पानी नहीं पीते हैं तो शरीर में खुस्की हो जाती है। इस कारण भी सिरदर्द की समस्या होती है।


पेट में गैस

कभी-कभी सिर्फ चाय-कॉफी पीते रहने से भी पेट में गैस बन जाती है तो कभी कुछ भी ना खाने के कारण पेट में गैस बनती है। इतना ही नहीं कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जो हमारी बॉडी में गैस बढ़ाने का काम करते हैं। इस गैस के कारण भी सिर में दर्द की समस्या होती है। 


हॉर्मोनल चेंज

महिलाओं में पीएमएस यानी प्रीमेन्स्ट्रुअल सिंप्टम्स और पुरुषों में आईएमएस यानी इरिटेबल मेन्स सिंड्रोम के चलते हर महीने हॉर्मोनल चेज होते हैं। यह बदलाव कई बार अलग-अलग कारणों से सिरदर्द की वजह बन जाता है। 


बैठने का गलत तरीका

अगर हम ऑफिस या कॉलेज में लंबे समय से गलत पॉश्चर में बैठे रहते हैं तो हमारा डायजेशन इफेक्ट होता है और अपच के कारण सिरदर्द की समस्या हो जाती है। या नसों में तनाव के कारण भी सिरदर्द की समस्या हो जाती है।


गैजेट्स का बहुत अधिक उपयोग

घंटों तक लगातार मोबाइल फोन, लैपटॉप या टीवी के साथ वक्त बिताने पर भी सिरदर्द की समस्या हो जाती है। इसलिए अगर आपके सिर में दर्द अक्सर हो जाता है तो सोचने की जरूरत है कि आप अपने साथ क्या गलत कर रहे हैं। 

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कुपोषण से मुक्ति की राह दिखाता 'ओबरी'

रीवा जिले के जवा ब्लाक का सबसे आखिरी गांव है ओबरी। पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित इस आदिवासी बाहुल्य गांव की ज़्यादातर जमीन असिंचित है। बुनियादी सुविधाओं की कमी से घिरे इस गांव की आबादी 860 है।


यहां गांव के लोगों की आजीविका का साधन मुख्य रूप से दिहाड़ी मजदूरी और वनोपज़ संग्रहण है। बच्चों को हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए गांव से 15 किमी दूर ग्राम कोटवा जाना पड़ता है। इस गांव मे सितंबर 2015 में जब दस्तक परियोजना की शुरुआत हुई, तब 0 से 5 वर्ष के 26 बच्चे मध्यम और 14 बच्चे अतिकम वजन के थे। उसके बाद से बाल सेवाओं की नियमित सामुदायिक निगरानी व सहयोग, पोषण खानपान संबंधी जागरूकता और पोषण बाड़ी के निरंतर उपयोग से कुपोषित बच्चों और एनीमिक माताओं की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। इस गांव मे स्थानीय समुदाय ने संस्था विकास संवाद के साथ मिलकर बाल स्वास्थ्य एवं पोषण प्रबंधन की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।


ओबरी में कार्यरत सामुदायिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार कोल बताते हैं कि गांव में बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य में बदलाव लाने के लिए समुदाय को अपने भरोसे में लेना जरूरी था, सो उन्होंने सबसे पहले स्थानीय स्तर पर मनरेगा योजना से रोजगार दिलाने के लिए ग्राम पंचायत बौसड़ के साथ समन्वित प्रयास किए। इसके साथ ही गांव मे दस्तक महिला, युवा और किशोरी समूह के जरिये समुदाय को एकजुट करने की पहल की गयी, जिनकी कुपोषण को कम करने मे अहम भूमिका रही है। महिलाओं और किशोरियों ने कुपोषण के कारणों की पहचान करते हुये गांव मे नियमित आंगनबाड़ी खुलने, बच्चों एवं माताओं को पोषण व टीकाकरण से जोड़ने का काम किया तो स्वयं भी एनीमिया और सही खानपान को लेकर अपने व्यवहार मे बदलाव किया। महिला समूह ने स्थानीय खाद्य सामग्री के उपयोग से स्वादिष्ट व्यंजन बनाने और सामूहिक प्रस्तुतीकरण के छह से अधिक बार आयोजन किए।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शिवकुमारी यादव के अनुसार दस्तक परियोजना से बच्चों के कुपोषण में कमी आयी है और उन्हें समुदाय का भी अपेक्षित सहयोग मिलने लगा है।


कुपोषण के कारणों को समझते हुये समुदाय ने यह भी देखा कि उनके खाद्यान्न का बड़ा हिस्सा खेती से आता है किन्तु असिंचित भूमि होने तथा रासायनिक खादों के बढ़ते उपयोग से चुनौतियां अधिक बढ़ती जा रही हैं। तब दस्तक परियोजना के साथियों ने गांव में जैविक खेती व स्थानीय जल प्रबंधन से जुड़े काम की शुरुआत की। आज ओबरी गांव के 150 परिवारों में पोषणबाड़ी विकसित हुई है, जिससे हरी पत्तेदार सब्जियाँ व पपीता, अमरूद आदि फल भोजन में नियमित रूप से उपभोग किया जाने लगा है।


गांव के दस्तक युवा समूह ने पंचायत एवं कृषि विकास विभाग से समन्वय करके अल्प पोषण से प्रभावित परिवारों को रोजगार व बीज उपलब्ध कराये जाने को समय - समय पर सुनिश्चित किया और जर्जर पड़े कुओं को श्रमदान से सुधार करते हुये लगभग 60 परिवारों के पेयजल समस्या को सुलझाया है। इसके साथ ही गांव मे नदी पर पुल व पक्की सड़क न होने के कारण जननी सुरक्षा की समस्या को लगातार प्रशासन के समक्ष उठाते हुये समस्या हल हुई है। इस सामुदायिक पहल मे जब सभी अपनी भूमिका निभाने लगे तो बच्चे कैसे पीछे रहते, सो दस्तक बाल समूह ओबरी के 15 बच्चों ने भी लगभग 95 पौधे लगाकर अपने आसपास हरियाली को बढ़ाने का प्रयास किया है। ये बच्चे अपने गांव व जंगल से जुड़े जैव विविधता को जानने- समझने की निरंतर कोशिश कर रहे हैं।


दस्तक महिला समूह सदस्य गुलाबकली यादव का कहना है कि - "गांव में जब से दस्तक परियोजना शुरू भइ ही ओकरे बाद से गांव के महिलन अपने-अपने बच्चन के देखभाल, साफ-सफाई अउर खान-पियन के ध्यान बहुत अच्छे से देइ लागे हन जेंहमा से अब गांव में कमजोर बच्चन बहुत कम बचे हैं." संगीता खैरगार का कहना है कि -"गाँव मा जननी एक्सप्रेस, एम्बुलेंस, जरूरत पडै पर समय से आबै लाग ही जेकरे कारण अब बच्चन के जनम अस्पताल मा होई लाग हइ."


गीता खैरगार, सोहागी खैरगार व प्रीतु यादव जैसी किशोरियां अब अपने स्वास्थ्य के बारे मे चर्चा करते हुये संकोच नहीं करतीं। वे बताती हैं कि कुछ साल पहले ऐसा नहीं था। गांव की किशोरियों के मन में विकास और पोषण को लेकर कई तरह की भ्रांतियां रहती थीं। उनको यह नहीं पता था कि उनका वजन कितना होना चाहिए, उनके शरीर में कितना खून होना चाहिए जिसके कारण से जाने-अनजाने उनको बीमारियां अपने चपेट में ले लेती थीं लेकिन अब किशोरियां अपने शारीरिक विकास व खानपान को लेकर काफी जागरूक हुई हैं। इस तरह सुविधाओं से वंचित ओबरी गांव ने स्वयंसेवी संस्था विकास संवाद द्वारा संचालित की जा रही दस्तक परियोजना के सहयोग, समुदाय की सक्रिय सहभागिता तथा प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय से काम करते हुये कई गांवों को कुपोषण के सामुदायिक प्रबंधन की राह दिखाई है।


-रामकुमार विद्यार्थी-

(लेखक पर्यावरण व युवा मुद्दों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता हैं।)

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लालू प्रसाद यादव एम्स-दिल्ली के आपातकालीन विभाग में भर्ती


नई दिल्ली : राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को शुक्रवार को एम्स-दिल्ली के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया। अस्पताल के सूत्रों ने यह जानकारी दी।


बताया जा रहा है कि उन्हें बुखार है।


एक सूत्र ने कहा कि उनकी हालत गंभीर नहीं है और स्थिर है। उनके रक्त के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने का इंतजार है। 




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साइ सेंटर के सही समय पर सुझाव के कारण साइक्लिस्ट रोनाल्डो को दर्द में मिला आराम

नई दिल्ली : शीर्ष भारतीय साइक्लिस्ट एन रोनाल्डो सिंह स्लोवेनिया में अभ्यास के बाद पीठ में दर्द के कारण चल भी नहीं पा रहे थे लेकिन भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के ‘एथलीट वेलनेस सेंटर’ के सही समय पर इलाज के बाद उन्हें दर्द में काफी आराम मिला।


रोनाल्डो सिंह को मंगलवार को पुर्तगाल के एंडिया की यात्रा से पहले नोवा मेस्टो में टीम की ट्रेनिंग के अंतिम दिन पीठ के निचले हिस्से में दर्द शुरू हो गया जो संभवत: कम पानी पीने की वजह से हुआ।


मंगलवार को आधी रात साइ को सूचित करने के कुछ ही मिनट के अंदर ‘एथलीट वेलनेस सेंटर’ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये उनके दर्द को कम करने के लिये मदद मुहैया करा दी।


शीर्ष फिजियोथेरेपिस्ट डा दानिश ने अपनी टीम के साथ कोच आर के शर्मा और रोनाल्डो को ‘टेन्स’ (ट्रांसक्यूटेन्स इलेक्ट्रिकल नर्व स्टिम्युलेशन) मशीन के इस्तेमाल का तरीका बताया।


उन्होंने कुछ व्यायाम (आइसोमेट्रिक) और कुछ दवाईयां भी बतायीं।


साइ विज्ञप्ति के अनुसार करीब 15 मिनट में रोनाल्डो का दर्द आधा हो गया और वह चलने लगे। 






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जल्दी मोटापा घटाना चाहते है तो पिएं लौकी का जूस

अगर आप अपना वजन कम करना चाहते है तो आपको चाहिए कि आप वर्कआउट के साथ खानपान पर विशेष ध्यान दें। अक्सर देखा गया है कि वर्कआउट करने वाले लोगों को जो भी खाने को मिले वह खा लेते है और आपका वजन बढ़ता ही जाता है। लोग ज्यादा काम करने के बाद में कोई न कोई प्रोटीन शेक पी लेते है ताकि उनका स्टैमिना ठीक रहें। 


आज हम आपको बताएंगे कि अगर आप प्रोटीन शेक के रुप में लौकी का जूस पीएं तो उसे आपके शरीर को ज्यादा फायदा होगा, क्योकि लौकी हमारे शरीर के बहुत सी बीमारियों को को दूर करने में हमारी मदद करता है। पेट साफ करने के लिए लौकी को कच्चा खाया जाए तो आपको बहुत ही फायदा होगा।


पौष्टिकता:- लौकी में प्रोटीन, फाइबर, मिनरल, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। दिल के साथ संबंधित बीमारियों को भी यह दूर करती है। इसके सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम किया जा सकता है। लौकी के बीजों का उपयोग कई तरह की दवाईयों में भी किया जाता है। जिनको गुर्दो की कोई तकलीफ हो उनके लिए इसका जूस फायदेमंद होता है। गर्म प्रकृति वालों के लिए लौकी का सेवन ठंडक और पोषण देने वाला एवं अधिक हितकारी है। इसका उपयोग पित्त व कफ को खतम करने के लिए भी किया जाता है।


मोटापा:- अगर आप चाहते है कि आप पर मोटापा न आए तो आपको हर रोज 100 ग्राम लौकी का जूस पीना चाहिए। इस जूस को पीने से पेट घंटो तक भरा रहता है, जिससे आपका मोटापा भी कम होता है। पर अगर यह आपके घर में उगाई गई हो तो ज्यादा रस पीना चाहिए क्योकि बाजार में इन्जेक्शन लगा कर बढाई गई लौकी आपको नुकसान पहुचा सकती है।


इस तरह घर पर बनाए लौकी का जूस...

आप घर पर ही लौकी का जूस बना कर पी सकते है। आप सबसे पहले लौकी को धोकर छाल लें और इसे दो टुकड़ों में काट लें। अब इसे ब्लेंडर में पुदीने की पत्तियां, लौकी के टुकड़े और घिसी अदरक डालकर एकसार होने तक पिसतो रहें। पिसने के बाद इसे छान के इसमें नमक डाल कर पीए। आप इसकी सब्जी भी बना कर खा सकती है। इसमें कैलोरी की मात्रा कम होने के साथ फाइबर भी होता है जो आपकी भीख को कंट्रोल करता है व पेट की समस्यांओं से भी बचाता है। 




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दांत-मसूड़ों के दर्द से छुटकारा पाने में काम आएंगे ये घेरलू उपाय

दांतों और मसूड़ों का दर्द आपको काफी परेशान कर देता है। दांत या मसूड़े में किसी भी तरह की समस्या में दर्द से तो परेशान होते ही हैं, इसके अलावा खाना-पीना भी ठीक से नहीं हो पाता है जिससे परेशानी बढ़ जाती है। आइए, आपको बताते हैं इनसे छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपाय।


नमक पानी

नमक का पानी आपको इनफेक्शन से बचाता है और दांतों के बीच में फंसे खाने को भी निकालने में मदद करता है। इससे सूजन भी खत्म हो जाती है और मसूड़ों में मौजूद बैक्टीरिया भी खत्म होते हैं। गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर उस पानी को कुछ देर मुंह में रखें और कुल्ला कर लें।


लहसुन

लहसुन अपने औषधीय गुणों के कारण जाना जाता है। इसे आमतौर पर सर्दी-जुकाम ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह मुंह के बैक्टीरिया को खत्म करने की भी क्षमता रखता है और पेनकिलर का भी काम करता है। लहसुन की एक कली को पील लें और इस पेस्ट को मसूड़े या दांत पर लगाएं।


लौंग

दांत में दर्द से राहत देने के लिए लौंग भी काफी कारगर है। इसे मुंह में दबाए रखें। दर्द से राहत मिलेगी।


टी बैग्स

चाय में टैनिन नाम का कम्पाउंड होता है जो बैक्टीरिया का खत्म कर सकता है। ऐसे में टी बैग्स भी आपको दांट के दर्द से छुटकारा दिला सकते हैं। टी बैग को गर्म पानी में उबले हुए पानी में डालकर 5 मिनट तक छोड़ दें। इसके बाद इसे निकालें जब थोड़ा ठंडा हो जाए तो उस जगह पर लगाएं जहां दर्द हो रहा है।


तो डेन्टिस्ट से मिलें

दांतों के हल्के दर्द को आप घरेलू उपाय से ठीक कर सकते हैं लेकिन अगर दर्द ज्यादा है तो आपको डेन्टिस्ट से मिलना चाहिए। 




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कब्ज, एसिडिटी और मल त्याग में दर्द की समस्या से तुरंत राहत दिलाता है मलासन

आजकल खान-पान की गड़बड़ी, तनाव और लाइफस्टाइल के कारण लोगों में पेट संबंधी समस्याएं काफी बढ़ गई हैं। एक शोध के मुताबिक शहरों में रहने वाले हर 10 में से 6 व्यक्ति को कब्ज की समस्या है। एसिडिटी, अपच, हार्ट बर्न, कब्ज जैसी समस्याओं से आप भी कभी न कभी परेशान होते हैं। कई लोगों को मल त्याग में बहुत दर्द का सामना करना पड़ता है और घंटों टॉयलेट में बैठे रहने के बाद भी पेट साफ नहीं होता है। इन सभी समस्याओं को मलासन चुटकियों में ठीक करता है। मलासन के अभ्यास से पेट संबंधी सभी बीमारियां दूर होती हैं और मल त्याग के समय आसानी होती है। 


कैसे करें मलासन: मलासन करने के लिए सबसे पहले अपने घुटनों को मोड़कर मल त्‍याग की अवस्‍था में बैठ जाएं। बैठने के बाद अपने दोनों हाथों की बगल को दोनों घुटनों पर टीका दें। अब दोनों हाथो की हथेलियों को मिलाकर नमस्कार मुद्रा बनाएं। अब धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें, आपको कुछ देर इसी अवस्था में बैठना है। अब धीरे-धीरे हांथो को खोलते हुए वापस उठ कर खड़े हो जाए।


हिप्स के जोड़ों को बनाता है लचीला: मलासन हिप के जोड़ों में लचीलापन बनाये रखने में मदद करता है। यह लचीलापन हम सभी को जन्‍म के समय मिलता है, लेकिन उम्र के साथ इसमें कमी आने लगती है। हिप ज्वाइंट्स को इमोशन्स का केंद्र कहा जाता है। इसलिए अगर आपके हिप ज्वाइंट्स मजबूत होंगे, तो आपका अपने इमोशन्स पर कंट्रोल बढ़ेगा।


कब्ज के लिए है रामबाण: मलासन से कब्‍ज सहित पेट की सभी समस्‍याओं से निजात पा सकते हैं। पुरानी कब्ज की परेशानी, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए हम दवाओं का सहारा लेते हैं, जिससे कुछ समय के लिए तो आराम मिल जाता है, लेकिन कुछ समय बाद यह समस्‍याएं हमें घेर लेती है। लेकिन नियमित मलासन को करने से आप कब्‍ज की समस्‍या से छुटकारा पा सकते हैं। मलासन का अर्थ होता है मल त्याग करते समय जिस आसन में हम बैठते है उसे ही मलासन कहते हैं।


मलासन के अन्य लाभ: मलासन को करने से पेट एवं कमर को काफी लाभ होता है। इसे नियमित करने से गैस और कब्ज की परेशानी से छुटकारा मिलता है।कमर, घुटने, मेरुदंड की मांसपेशिया लचीली बनती है। मलासन से घुटनों, जोड़ों, पीठ और पेट का दर्द कम होता है। पेट की चर्बी दूर होती है।




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चीकू खाने हो सकता है कैंसर जैसे गंभीर बीमारी से बचाव

चीकू एक प्रकार का फल है जो आपको हर मौसम में आसानी से मिल जाएगा। यह ऐसा फल होता है कि अगर इसे आप भोजन के बाद खाएगें तो इससे आपको काफी आराम मिलेगा। इसमें 71 प्रतिशत पानी, 1.5 प्रतिशत प्रोटीन, 1.5 प्रतिशत चर्बी और बचा हुई मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है।


चीकू फल में अधिक मात्रा में विटामिन ए और विटामिन सी के साथ-साथ फास्फोरस और लौह भी होता है। इसको खानें से सेहत में कई फायदे मिलते है। जिससे कि आपको कई बीमारियों से निजात मिल सकता है। चीकू एक ऐसा स्वादिष्ट फल है। जिसका सेवन करने से कैंसर जैसी बीमारी के खतरें से बचा जा है। जानिए चीकू खाने से होनें वाले फायदों के बारें में।


-चीकू में अधिक मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है जो आपकी आंखों के लिए काफी फायदेमंद है। इसे खानें से आंखों की समस्या से निजात मिल जाता है।

-चीकू हड्डियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। चीकू में अधिक मात्रा में कैल्शियम फॉस्फोरस और आयरन पाया जाता है जो कि हड्डियों के लिए काफी फायदेमंद है। इसको खानें से हमारें शरीर की हड्डियां मजबूत औ बढती भी है।

-अगर आपको कैसंर जैसी गंभीर बीमारी से बचना है तो चीकू का सेवन करिए। क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट, फाइबर और अन्य पोषक तत्व के साथ-साथ विटामिन ए और सी पाया जाता है। विटामिन ए फेफड़ों और मुंह के कैंसर से बचाता है।

-चीकू गर्भावस्था के दौरान खानें से कई फायद होते है। इससे इस समय खानें से कमजोरी और उल्टी या फिर चक्कर जैसी समस्या उत्पन्न नही होती है। क्योकि इसमें अधिक मात्रा में पोषक तत्व और कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। जिससे यह गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए फायदेमंद है।

-चीकू शरीर को संक्रमण से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। इसमें एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल, पॉलीफेनोलिक एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण यह शरीर में बैक्टीरिया को आने से रोकता है,विटामिन सी हानिकारक मुक्त कण को नष्ट करता है।

-चीकू में हेमोसटाटिक प्रॉपर्टीज के गुण भी पाए जाते हैं यानी कि शरीर में होने वाले रक्त के नुकसान से भी बचाता है। इसी कारण चीकू बवासीर और जख़्म को भी जल्दी ठीक कर देता है, और इसके बीज को पीस कर उसे कीड़े के काटने की जगह पर भी लगाया जा सकता है। जिससे आपको काफी लाभ मिलेगा।

-यह आपकी त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है, क्योंकि चीकू इसमें विटामिन ई पाया जाता है जो आपकी त्वचा को नमी देता है। जिससे त्वचा स्वस्थ और सुंदर हो जाती है। साथ ही यह आपके बालों के लिए काफी फायदेमंद। इसके बीज का तेल सिर की त्वचा को स्वस्थ बनाता है और बालों को बढने में भी मदद करता है। चीकू के बीज को अरंडी के साथ मिलाकर सिर की स्केल्प पर लगाने से बाल चमकदार और डैन्ड्रफ फ्री हो जाते हैं।

-अगर आपको कफ की समस्या है तो चीकू आपके लिए काफी फायदेमंद होगा। चीकू में एक प्रकार का खास तत्व पाए जाते हैं जिनसे श्वसन तंत्र से कफ और बलगम निकालकर यह पुरानी खांसी में राहत देता है। इस प्रकार यह सर्दी और खांसी से बचाता है।

-पथरी के रोगियों के लिए भी चीकू बहुत अच्छा होता है। साथ ही इससे आपका वजन भी काफी फायदेमंद होगा। -यह दिमाग की तंत्रिकाओं को शांत और तनाव को कम करने में मदद करता है।

-चीकू में एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए यह उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोकने में सहायक है क्योंकि यह फ्री रेडिकल्स को समाप्त कर देता है, और यह झुर्रियों को भी कम कर देता है।




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त्वचा और बालों के लिए बेहद लाभकारी है आंवला पाउडर

आंवले का इस्तेमाल लगभग हर घर में किया जाता हैं। लेकिन उसके बहुत से फायदे है जो लोग आज भी नहीं जानते और बाहर के तरीके अपनाते हैं। त्वचा और बालों के लिए आंवले का इस्तेमाल एक राम बाण इलाज हैं। इसमें मौजूद औषधीय गुणों के कारण यह कई तरह की स्किन और बालों की समस्याओं को दूर करने का माद्दा रखता है। 


त्वचा के दाग-धब्बे हटाने के लिए :

1. त्वचा के दाग-धब्बों को हटाने के लिए आप आंवले को स्क्रब बना कर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आधा चम्मच आंवला पाउडर, आधा चम्मच पीसी हुई शक्कर के साथ गुलाब जल को अच्छे से मिलाकर उसे चेहरे पर स्क्रब करें। आप हफ्ते में 3 बार स्क्रब का इस्तेमाल कर सकते हैं। जल्द ही आपको इसके फायदे नज़र आने लगेंगे। 


2. त्वचा के दाग-धब्बों को दूर करने के लिए आंवला का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए आप तीन बड़े चम्मच आंवला पाउडर लेकर उसमें एक चम्मच हल्दी और दो बड़े चम्मच नींबू का रस डालकर मिक्स करें और एक फाइन पेस्ट बनाएं। अब आप इसे अपने चेहरे पर लगाकर 15−20 मिनट के लिए छोड़ दें। अंत में पानी की मदद से स्किन साफ करें। आप सप्ताह में एक बार इस पैक का इस्तेमाल कर सकती हैं।


बालों को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए भी आंवला है लाभकारी:

1. अगर आप डैंड्रफ से परेशान है तो आंवला आपकी जान बचा सकता हैं। आंवले के पाउडर को दही और निम्बू के साथ मिलाकर अच्छे से घोल बना ले। इसके बाद उस घोल को बालों की जड़ में अच्छे से लगा ले। इसे सूखने तक बालों में लगे रहने दे। इसके बाद बालों को पानी से अच्छे से धो ले और बाद में शैम्पू कर ले। 


2. बालों को झड़ने से रोकने के लिए, शाइन और सिल्किनेस बढ़ाने के लिए भी आप आंवले का इस्तेमाल कर सकते हैं। पाउडर को पानी के साथ घोल कर पूरे बालों में लगाएं और सूखने के बाद उसे पानी से धो ले। हफ्ते में एक से दो बार आप ऐसा कर सकते हैं। ऐसा करते रहने से आपके बाल हमेशा स्वस्थ रहेंगे। साथ ही लम्बे समय तक काले भी रहेंगे। 




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गौतमबुद्ध नगर जिले में डेंगू के सात नए मामले

नोएडा (उप्र) :  उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में शुक्रवार को डेंगू के सात नए मामले सामने आए, जिससे डेंगू के मामले बढ़कर 558 हो गए हैं।


मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि बीते 24 घंटे के दौरान सात लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है।


उन्होंने बताया कि डेंगू के 36 मरीजों का अभी अस्पतालों में उपचार चल रहा है।


सीएमओ ने बताया कि जिले में अब तक डेंगू के 558 मरीज पाए गए हैं और


डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से गंभीर है और इसकी रोकथाम तथा मरीजों को समुचित उपचार उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।




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ये योगासन बनातेहैं टांगों की मसल्‍स को मजबूत

उत्कटासन कोर की मांसपेशियों (जांघों और नितंबों) को मजबूत होना बहुत जरूरी है। इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप जिम में घंटों पसीना बहाएं। अगर आप अपनी टांगों की मांसपेशियों को मजबूत बनाना चाहते हैं। तो यहां हम आपको 3 ऐसे योगासनों के बारे में बता रहे हैं जो आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। ये योगासन टांगों की मसल्‍स को मजबूत बनाने के साथ, हिप, टखनों, पेट की मसल्‍स आदि शरीर के कई हिस्‍सों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। 


उत्कटासन : उत्कटासन कोर की मांसपेशियों (जांघों और नितंबों) को मजबूत बनाने और टोन में मदद करता है। सीधे हाथ जोड़कर (नमस्ते में मुद्रा) खड़े हो जाओ। पैरों के पंजे भूमि पर टिके हुए हों तथा एड़ियों के ऊपर नितम्ब टिकाकर बैठ जाइए। दोनों हाथ घुटनों के ऊपर तथा घुटनों को फैलाकर एड़ियों के समानान्तर स्थिर करें। अपने सिर को हल्का आगे मोड़ें। इस मुद्रा में तब तक रहें जब तक आप सहज हो। आसन से बाहर आने के लिए आराम से सीधा खड़ा हो जाएं। 


वृक्षासन : वृक्षासन आपके पेट से वसा को दूर करने के लिए सबसे आसान और आदर्श आसनों में से एक है। साथ ही इस आसन से टांगों की वसा कम होती हैं और शरीर का संतुलन बेहतर है। इसे करने के लिए योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और अपने पैर जोड़ लें। अब अपना दायां पैर, अपनी बाईं जांघ पर रखें। आपके दाएं पैर का अंगूठा नीचे जमीन की तरफ हो और बाएं पैर की उंगलियां सामने की तरफ। ध्‍यान रखें कि आपकी पीछे से गर्दन, रीढ़ की हड्डी की रेखा में सीधी होनी चाहिए।


अर्ध चंद्रासन : अर्ध चंद्रासन भी जांघों और नितंबों की चर्बी को कम करने के लिए बहुत अच्छा है। इसके अलावा अतिरिक्त स्ट्रेच से पेट की चर्बी भी कम होकर आपका शरीर मजबूत बनता है। इसे करने के लिए, शुरू करने के साथ ही अपने पैरों को एक साथ करके  खड़े हो जाये। फिर दाएं हाथ को उपर सीधा कान और सिर से सटा हुआ रखते हुए ही कमर से बाईं ओर झुकते जाएं। जहां तक हो सके बाईं ओर झुके फिर इस अर्ध चंद्र की स्थिति में 30-40 सेकंड तक रहें। वापस आने के लिए धीरे-धीरे पुन: सीधे खड़े हो जाएं। इस आसन को 4 से 5 बार करने से लाभ होगा। 




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पीरियड्स टाइम में क्या खाएं और क्या नहीं, महिलाओं का जानना जरूरी

महिलाओं को महीने के 6-7 दिन पीरियड्स की समस्या से गुजरना पड़ता हैं। पीरियड्स के दौरान अधिकतर महिलाओं को दर्द, चिड़-चिड़ापन और कमजोरी महसूस होती हैं। वहीं अक्सर पीरियड्स आने से पहले महिलाओं की पीठ, पेड़ू या कमर में दर्द होता है, जोकि नैचुरल है। मगर खान-पान में थोड़ी-सी सावधानी बरतकर आप पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियों से छुटकारा पा सकती हैं। चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पीरियड्स के दौरान आपको किन-किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

 

पानी

पीरियड्स के दौरान ठंडे की बजाए गर्म पानी पीएं। दिनभर में कम से कम 1-2 कप चाय या दूध भी पीएं। इस दौरान आप ज्यादा से ज्यादा गर्म चीजों का सेवन करें।


आटे का हलवा

आटे के हलवे में गुड़ डालकर खाएं। इससे पेट अच्छी तरह से साफ हो जाएगा और आपका दर्द भी कम होगा।


गर्म पानी से स्नान

साथ ही नहाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें। वहीं अगर आपको ज्यादा दर्द होता है तो शॉवर लेते समय 1 मग गर्म पानी पेड़ू पर जरूर डालें।


ना करें दवाओं का सेवन

अक्सर महिलाएं दर्द से छुटकारा पाने के लिए दवा का सेवन करती हैं जोकि गलत है। इसकी बजाए आप नैचुरल तरीके इस्तेमाल कर सकती हैं।


तला-भुना से परहेज

पीरियड्स में तला-भुना खाने से इंस्ट्रोजन हॉर्मोन का लेवल बिगड़ जाता है। इससे पेट और कमर दर्द होने की समस्या हो सकती है। साथ ही ठंडी तहसील वाली चीजें, ज्यादा मीठा, रैड मीट, आचार या खट्टी चीजें खाने से भी परहेज करें।


एेलोवेरा जूस

अगर पीरियड्स में ज्यादा दर्द रहता है तो एेलोवेरा जूस में 1 चम्मच शहद अौर पानी मिलाकर पीएं। इससे दर्द, कमोजरी और अधिक ब्लीडिंग से राहत मिलेगी।


तुलसी का काढ़ा

तुलसी भी पीरियड्स में काफी लाभकारी है। पानी में 7-8 तुलसी के पच्चे उबालकर, उसमें 1 चम्मच शहद मिलाए और रोजाना पीए। इससे पीरियड्स की सभी प्रॉबल्म दूर होगी।


गर्म पानी से सेंक

पेट दर्द होने पर गर्म पानी की बोतल या थैली पेट के निचले हिस्से या दर्द वाली जगह पर रखें। इससे गंदगी व रूका रक्त बाहर निकल जाता है और दर्द से तुरंत राहत मिलती है।




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गुड़ को दें चीनी की जगह, मिलेंगे लाजवाब फायदे

चाय के प्रेमी अक्सर तेज मीठे वाली चाय पीना ही पसंद करते हैं। बहुत कम ऐसे लोग होंगे जो कम मीठे वाली चाय पीते हैं। अगर आप भी मीठी चाय पीने के शौकीन हैं तो चीनी की जगह आज ही चाय में गुड़ डालना शुरु कर दें। इससे न केवल चाय का स्वाद बढ़ेगा बल्कि चीनी के सेवन से शरीर को पहुंचने वाले नुकसान से भी आप बच जाएंगे। तो चलिए जानते हैं भला गुड़ किस तरह गुड़, चीनी खाने से बेहतर है...


गुड़ में पाए जाने वाले जरुरी तत्व

चीनी कैमिकल प्रोसेस के जरिए तैयार की जाती है। जिस वजह से इसका ज्यादा सेवन सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में जरुरी है चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें। गुड़ खाने से शरीर को कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन और कॉपर मिलता है। जिससे शरीर को बहुत से फायदे मिलते हैं। 


सर्दियों में फायदेमंद गुड़

सर्दियों में आपका शरीर को गर्म चीजों की जरुरत होती है। ऐसे में गुड़ खाने से आपका शरीर गर्म रहता है।


मजबूत हड्डियां

गुड़ में मौजूद कैल्शियम आपकी हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। छोटे बच्चों को बचपन से ही गुड़ खाने की आदत डालें, इससे उनकी हड्डियों का विकास तेजी से होगा।


प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए फायदेमंद

गुड़ में आयरन, कैल्शियम और फास्फोरस जैसे गुण होते हैं जो शरीर में खून की कमी दूर करने में मददगार रहते हैं। गुड़ खाने से शरीर में रेड ब्‍लड सेल्‍स बनते हैं जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। निरंतर गुड़ के सेवन से गर्भावस्‍था के दौरान बीमारियों और एलर्जी से लड़ने में मदद मिलती है।


नार्मल ब्लड प्रेशर

चीनी के सेवन से जहां आपका ब्लड प्रेशर लेवल बिगड़ता है वहीं गुड़ खाने से शरीर का ब्लड प्रेशर नार्मल होता है।


प्रदूषण से बचाव

अगर आप दिन ऑफिस बैठने की जगह दिन भर सड़कों पर गुजरता है तो आपने अंदर गए प्रदूषण की सफाई करने के लिए रोज 1 टुकड़ा गुड़ खाएं। गुड़ के एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व शरीर में मौजूद सभी तरह के किटाणु और प्रदूषित तत्वों को खत्म करने का काम करते हैं।


पेट के लिए फायदेमंद

गुड़ आपके शरीर के लिए एंटी-ऑक्सीडेंट का काम करता है। इसके रोजाना सेवन से जहरीले पदार्थ आपके शरीर से युरीन के जरिए बाहर निकल जाते हैं। जिससे आप लाइट एंड हेल्दी फील करते हैं। गुड़ खाने से आपको कभी कब्ज की प्रॉबल्म नहीं होती। जिससे आप एक नहीं कई बिमारियों से बचे रहते हैं।


इन सबके साथ-साथ गुड़ खाने से आपका ब्रेन स्ट्रांग होता है, आपकी आंखों की रोशनी लंबे समय तक बरकरार रहती है साथ ही सर्दियों के दौरान होने वाले सर्दी जुकाम से भी आप बचे रहते हैं। 






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बदलते मौसम में वायरल रोगों से बचना है तो करें ये योगासन

बदलते मौसम में वायरल इंफेक्शन और वायरल रोगों का खतरा बढ़ जाता है। सर्दी, जुकाम, बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द जैसी परेशानियां इस दौरान आम होती हैं। इससे बचाव के लिए आप साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं और खाने-पीने का ध्यान रखते हैं। इन बीमारियों का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है, जिनका इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है। इसलिए अगर आप ऐसे योगासनों का अभ्यास करते हैं, जिनसे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, तो आप इन वायरल रोगों और संक्रमण से बच सकते हैं। आइए आपको बताते हैं ऐसे ही योगासन, जो आपकी इम्यूनिटी बेहतर करते हैं।


सर्वांगासन: सर्वांगासन की खास बात ये है कि इसे करने से आपके शरीर के सभी अंगों को फायदा मिलता है, इसी लिए इसका नाम सर्वांगासन है। इस आसन का नियमित अभ्यास आपकी इम्यूनिटी बढ़ाता है और आपको रोगों से दूर रखता है। बच्चों और युवाओं के लिए भी ये आसन बहुत फायदेमंद है क्योंकि इससे शरीर का विकास बेहतर होता है और हार्मोन्स का बैलेंस बना रहता है। इसके अलावा इससे आपकी पाचन शक्ति ठीक रहती है और रक्त का शुद्धिकरण होता है।


कैसे करें सर्वांगासन: पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को एक साथ मिला लें और हाथों को शरीर की सीध में रखें। अब धीरे से पैरों को बिना मोडे ऊपर की तरफ उठाएं। जैसे-जैसे पैर ऊपर की तरफ उठाएंगे, वैसे-वैसे कमर को भी ऊपर की तरफ उठाएं। कोशिश करें कि पैर और पीठ इतने ऊपर उठ जाएं कि 90 डिग्री का कोण बन जाए। फिर धीरे-धीरे पहले की मुद्रा में आ जाएं। आप पीठ और कमर को उठाने के लिए हाथों का सहारा ले सकते हैं लेकिन कोहनियां जमीन से ही टिकी होनी चाहिए और चेहरा आसमान की ओर रहना चाहिए


मत्स्यासन: मत्यासन का अभ्यास भी आपको वायरल रोगों और इंफेक्शन से दूर रखता है। मत्स्यासन पेट और रीढ़ की हड्डी संबंधित सभी रोगों में बहुत फायदेमंद आसन माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से आपके फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इसके साथ ही आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है, जिसके कारण हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस आपको आसानी से बीमार नहीं बना पाते हैं। साथ ही यह आसन मेटाबॉलिज्म के लिए अच्छा माना जाता है।


कैसे करें मत्स्यासन: स्वच्छ वातावरण में समतल जमीन पर आसन बिछाकर सुखासन में बैठ जाएं। कुछ देर सांस को सामान्य करने के बाद पद्मासन लगा लें।हाथों का सहारा लेकर पीठ को पीछे की ओर धीरे-धीरे लाते हुए पीठ के बल लेट जाएं। पैरों के अंगूठों को पकड़कर उन्हें थोड़ा अपनी तरफ लाएं और पद्मासन को ठीक करते हुए घुटनों को जमीन पर अच्छी तरह से टिका दें। सांस भरें और पीठ, कंधों को ऊपर उठा गर्दन को पीछे की तरफ ले जाएं। सिर के भाग को जमीन पर टिका दें। पैरों के अंगूठों को पकड़ लें और सांस को सामान्य रखते हुए यथाशक्ति रोकने के बाद पद्मासन खोल लें। कुछ देर शवासन में लेटने के बाद पूर्व स्थिति में आ जाएं।


नाड़ी शोधन प्राणायाम: नाड़ी शोधन प्राणायाम पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। जैसा कि इसका नाम है, ये प्राणायां नाड़ी का शोधन करता है। इस आसन के अभ्यास से रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है और वायरल संक्रमण या रोगों के विषाणु आप पर असर नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा ये प्राणायाम मन को शांत और केंद्रित करता है। ये प्राणायाम श्वसन प्रणाली व रक्त-प्रवाह तंत्र से सम्बंधित समस्याओं से मुक्ति देता है।


कैसे करें नाड़ी शोधन प्राणायाम: सबसे पहले किसी भी सुखासन में बैठकर कमर को सीधा करें और आंखें बंद कर लें। दाएं हाथ के अंगूठे से दायीं नासिका बंद कर पूरी श्वास बाहर निकालें। अब बायीं नासिका से श्वास भरें और तीसरी अंगुली से बायीं नासिका को भी बंद कर लें। जितनी देर स्वाभाविक स्थिति में रोक सकते हैं, रोकें। फिर दायां अंगूठा हटाकर श्वास को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। फिर दायीं नासिका से गर्दन उठाकर श्वास को रोकें, फिर बायीं से धीरे से निकाल दें।




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महिलाओं के लिए हैं ये योगासन, पीसीओडी से मिलेगा छुटकारा

पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम या पीसीओडी एक ऐसी बीमारी है जिसके तहत ओवरी में मल्टीपल सिस्ट हो जाते हैं। ये सीस्ट खास किस्म के तरल पदार्थ की थैलियां होती हैं। सिस्ट होने की असली वजह मासिक धर्म में अनियमतता को बताया जाता है। मासिक धर्म में अनियमतता के कारण ओवरी का साइज बढ़ जाता है नतीजतन एंड्रोजेन और एस्ट्रोजेनिक नामक हारमोन भारी मात्रा में प्रोड्यूस होते हैं। पॉलिसिस्टिक ओवरी नार्मल ओवरी की तुलना में आकार में काफी बड़े होते हैं। इसे स्टीन लिवंथन सिंड्रोम भी कहा जाता है। पीसीओडी के कारण गर्भास्था, मासिक धर्म, डायबिटीज जैसी बीमारी में परेशानियों का इजाफा करता है।


पीसीओडी के लक्षण : पीसीओडी के लक्षण बेहद खतरनाक ढंग से देखे जा सकते हैं। दरअसल इससे महिलाओं के शरीर में बाल बढ़ जाते हैं, स्तन का साइज छोटा हो जाता है, आवाज में फर्क महसूस होने लगता है, वजन बढ़ जाता है, सिर के बाल पतले होने लगते हैं। इतना ही नहीं जो महिलाएं पीसीओडी से पीड़ित होती हैं, उनमें एंग्जाइटी, डिप्रेशन, वजन बढ़ना जैसी समस्या भी देखने को मिलती है। इन दिनों पीसीओडी वयस्क महिलाओं की कम उम्र की युवतियों में देखने को मिल रही है। इसकी असली वजह काम का तनाव, अस्वस्थ खानपान, एंग्जाइटी, डिप्रेशन, व्यायाम न करना है। साथ ही जो युवतियां कम सोती हैं, उन्हें भी पीसीओडी होने का खतरा रहता है। जो महिलाएं अपनी जीवनशैली के कारण पीसीओडी का शिकार हो रही हैं, वे चाहें तो कुछ आसनों की मदद से स्वस्थ जीवन जी सकती हैं। उनमें पीसीओडी का खतरा भी कम हो जाता है। 


कपालभाती : कपालभाती शब्द दो शब्दों को जोड़कर बनाया गया है। एक कपाल यानी माथा और भाती यानी चमकना। माना जाता है कि नियमित व्यायाम करने से चेहरे पर ग्लो आता है और शरीर स्वस्थ रहता है। कपालभाती वास्तव में एक शत क्रिया है। यह एक तरह शरीर की क्लीनिंग प्रक्रिया है जिसकी मदद से शरीर से जहरीले पदार्थों को निकाला जाता है। इसके तहत आपको योगिक आसन में बैठना होता है और फिर पूरी प्रक्रिया सांसों के लेने और छोड़ने पर निर्भर करती है। 


योनि मुद्रा : यह एक ऐसा योगासन है जिसे करते हुए महिला किसी भी रूप में बाहरी दुनिया से जुड़ाव महसूस नहीं करती। इसलिए इसे योनि मुद्रा कहा जाता है। यह हमें अपनी अंदरूनी दुनिया से जोड़ता है इसलिए इसे योनि मुद्रा कहा जाता है। यह गर्भाशय में शिशु के होने का आभास कराता है।


पवनमुक्त आसन : पवनमुक्त आसन हमारे पेट के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी आसन है। साथ ही यह हमारी पाचन क्रिया को भी बेहतर करता है। पवनमुक्त आसन से एब्डोमिनल और पीठ की मसल्स को मजबूती मिलता है साथ ही रक्त संचार का प्रवाह भी बेहतर होता है। 


हलासन : हल एक तरह का जमीन जोतने के लिए इस्तेमाल होने वाला उपकरण है जिसे किसान द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। हलासन को सर्वांगासन के बाद ही किया जाता है जो वास्तव में कंधों से जुड़ा हुआ आसन है। यह आसन भी पीसीओडी में राहत देने में मदद करता है। 


धनुर्सान : यह आसन टेंशन और डिप्रेशन को दूर भगान के लिए किया जाता है। अतः यदि किसी महिला में पीसीओडी के जरा भी लक्ष्ण दिखें या उन्हें जबरदस्त तनाव होता है तो उन्हें यह आसन अवश्य करना चाहिए। इससे पीसीओडी के आशंका में काफी कमी आती है।








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नजरअंदाज न करें कान का दर्द

कान के मध्य में होने वाली सूजन या मध्य कान के संक्रमण को मध्यकर्ण संक्रमण कहते हैं। यह सर्दी और नाक में संक्रमण का बढ़ा हुआ रूप है। बच्चों का बड़ों की अपेक्षा सिर का आयतन व आकार छोटा होता है, जिसके कारण नाक और कान नजदीक होते हैं। इससे बच्चों को सर्दी जल्दी होती है, जिससे कानों में संक्रमण फैल जाता है। हालांकि कान के संक्रमण से बचने के लिए बच्चों को किसी भी प्रकार का टीका नहीं लगाया जाता है।


संक्रमण के प्रकार...


एक्यूट ओटाइटिस मीडिया:- तीन सप्ताह से कम समय में ठीक हो जाए।


क्रॉनिक ओटाइटिस मीडिया:- जो छह सप्ताह से ज्यादा चले और बार-बार कान से तरल या मवाद का स्राव हो।


कान की हड्डी में संक्रमण:- ये लंबे समय तक होता है, जिससे कान की हड्डी में संक्रमण फैल जाता है। इससे कान में सुराख बन जाता है और मवाद बहने लगता है। जो ऑपरेशन के बाद ही ठीक होता है।


पैरेंट्स कैसे रखें खयाल:- बच्चे को सर्दी है तो पैरेंट्स ध्यान दें। अगर सर्दी ज्यादा दिन तक है तो बच्चे को तुरंत चिकित्सक या शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाएं। बिना लापरवाही के पूरे समय बच्चे को निगरानी में रखें। इसके अलावा यदि बच्चे को सुनने में समस्या है तो चिकित्सक से परामर्श लेकर कान की जांच कराएं।


लक्षण...


-सर्दी के बाद कान में दर्द होना


-छोटे बच्चों का दर्द से रात में बार-बार रोना


-लंबे समय तक संक्रमण से परदे में छेद होना, फिर कान का बहना शुरू होना


-बुखार भी हो सकता है।


उपाय...


-बच्चे को सर्दी से बचाएं


-एलर्जी और खान-पान पर विशेष ध्यान दें


-बच्चों को वातावरण के अनुसार रखें


-प्रदूषण, खासतौर पर वायु प्रदूषण से बचाएं


-एलर्जी की दवा दें


-आवश्कतानुसार चिकित्सक से परामर्श लें।



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जोखिम में हर 10वीं गर्भवती महिला की जान, जानें पूरे मामला

अलीगढ़ :  जन्म के बाद नवजात बच्चे को बाहों में पाकर मां की खुशी का ठिकाना नहीं होता। उसकी आंखों की चमक कोई भी महसूस कर सकता है। यह खुशी पाने का अधिकर हर मां को है। लेकिन, कई गर्भवतियों के जीवन में यह पल कभी नहीं आता। बल्कि, उनके जीवन में प्रसव का क्षण बेहद भयावह होता है। जनपद में ही स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो हर 10वीं या 11 वीं गर्भवती महिला उच्च जोखिम में होती है। हालांकि, नियोजित गर्भावस्था व उसका ख्याल रखकर इस जोखिम को कम किया जा सकता है।

जिले में पिछले दिनों प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए शिविर आयोजित किए। इस दौरान 1115 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई। चिंता की बात ये है कि 104 जोखिम वाली गर्भवती महिलाएं पाई गईं। वहीं, 17 उच्च जोखिम वाली पाई गईं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आनंद उपाध्याय ने बताया कि इन शिविरों का उद्देश्य ही ऐसे महिलाओं की पहचान करना था, ताकि समय से उच्च अस्पताल में संदर्भन कर जोखिम को कम किया जा सके। वर्तमान में अधिक से अधिक गर्भवती की जांच कर उच्च खतरे वाली गर्भावस्था की पहचान की जरूरत है। इससे भविष्य में उन्हें किसी अनहोनी से बचाया जा सकेगा।

महिला अस्पताल की सीएमएस डा. रेनू शर्मा ने बताया कि सभी महिलाओं को गर्भावस्था में प्रसव पूर्व देखभाल,प्रसव के दौरान कुशल देखभाल और प्रसव के बाद के कई सप्ताह तक देखभाल और सहायता तक पहुंच की आवश्यकता होती है। सभी प्रसवों में कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा सहायता मिलनी चाहिए, क्योंकि समय पर प्रबंधन और उपचार मिलना मां और बच्चे के लिए जरूरी है। लेकिन, जागरूकता के अभाव में तमाम गर्भवती, प्रसव पूर्व की जांच तक नहीं कराती हैं। ऐसे में पता ही नहीं चल पाता कि उन्हें क्या परेशानी है। उच्च जोखिम के कई कारण हो सकते हैं, जैसे गर्भावस्था के दौरान खून या अन्य पोषक तत्वों की कमी, हाइपरटेंशन, शुगर, एचआइवी, गर्भ में जुड़वा बच्चे होना, पिछला प्रसव सिजेरियन होना या गर्भपात होना, कम या ज्यादा उम्र में गर्भधारण होना आदि।



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डैगू वुखार और वायरल का कहर अव गावो मे मौत का सिलसिला जारी

फिरोजाबाद : फिरोजाबाद जिले में डेंगू बुखार और वायरल शहरी क्षेत्रों में जरूर कम हुआ है किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में बराबर बढ़ता जा रहा है समय पर मरीजों को उचित उपचार ना मिलने के कारण मरीजों की मोत भी हो रही है। फिरोजाबाद जिले में डेंगू बुखार वायरल का प्रकोप करीब 2 महीने से चल रहा है किंतु शासन प्रशासन के काफी प्रयास के बावजूद अभी तक बीमारी पर कंट्रोल नहीं हो पाया है शहरी क्षेत्र में मरीजो की संख्या जरूर कम हुई है मगर ग्रामीण क्षेत्रों में अभी बुखार वायरल के मरीज बराबर निकल रहे हैं किंतु ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीज परेशान है शासन के कड़े निर्देश की बावजूद अनेक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं मरीजों को प्राइवेट डॉक्टरों पर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है मेडिकल कॉलेज मे गुरुवार को कुल मरीजों की संख्या 130 थी जबकि नए मरीज 30 भर्ती किए गए मंगलवार की रात को एक मरीज कुंदन पुत्र सतीश कुमार की इंजेक्शन लगने के बाद पेट फूलने से मौत हो गई मरीज के परिजनों द्वारा काफी हंगामा काटा गया जिनको पुलिस के द्वारा मेडिकल कॉलेज परिसर से बाहर कर दिया गया जबकि परिजन डॉक्टरों पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगा रहे मेडिकल कॉलेज में ऐसे अनेक मामले सामने आए किंतु की कोई सुनवाई नहीं हुई शिकोहाबाद के सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या 162 है गुरुवार को नए 77 मरीज भर्ती किए गए संक्रामक बीमारी का प्रकोप शिकोहाबाद और सिरसागंज क्षेत्र में अधिक होने की वजह से शिकोहाबाद अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है किंतु डॉक्टरों की कमी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जिले में पिछले सप्ताह मरीजों की मौत पर कुछ नियंत्रण हुआ था सोमवार, मंगलवार और बुधवार में क़रीब 15 मरीज़ों क़ी मौत के कारण चिंता बढ़ गई है ग्रामीण क्षेत्रों में सही तरीके से साफ सफाई नहीं होने की शिकायतें भी मिल रही है ।





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पौष्टिकता से भरपूर है अखरोट

अखरोट केवल साधारण खाद्य नहीं है बल्कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सीय दृष्टि से इसे असाधारण भी कहा जा सकता है। अखरोट समूल ही बहुपयोगी है। यदि अखरोट की जड़ें या अंकुर चबाएं तो मृत्यु तक दांत टस से मस नहीं होते। अखरोट की रसीली पत्तियों का रस बहुत स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। आयुर्वेद में अखरोट की पत्तियों का कई तरह से उपयोग किया जाता है। इसकी रसीली पत्तियों को 2 से 3 घंटे तक पानी में उबाल कर जो द्रव निकाला जाता है उसका प्रयोग कहीं चाय के रूप में किया जाता है तो कहीं रूधिर-वाहिकाओं के फैलाव की दवा के रूप में या हाजमा सुधारने के लिये किया जाता है। आंखें आ जाएं तो इसके रसीले पत्तों के द्रव से धोने पर शत-प्रतिशत लाभ पहुंचता है। इससे कुल्ला किया जाए तो मसूड़ों के घाव भर जाते हैं तथा दांत अपनी जगह मजबूत हो जाते हैं। 


अखरोट की पत्तियों का यह रस गाढ़ा हो तो इसका उपयोग एक्जिमा की दवा के रूप में किया जाता है। गठिया तथा आमवात अगर प्रभावी होने लगे तो इस द्रव से नहाना बहुत लाभदायक होता है। धार्मिक अनुष्ठानों में या व्रताहार के रूप में अखरोट बहुत उपयोगी है। व्यंजनों में भी अखरोट की गिरी महत्वपूर्ण समझी जाती है। अखरोट की गिरी का मसालेदार सूप भी बनाया जाता है तथा इसकी कच्ची गिरी का जैम भी बनाया जाता है। बर्फीले प्रांत के रहने वालों के खाद्य या व्यंजनों में अखरोट की बहुत उपयोगिता है। रूस, मंगोलिया या काकेशर और अंटार्कटिक क्षेत्रों में वहां के सैनिक आज भी जब अपनी मुहिमों पर निकलते हैं तो अखरोट की गिरी से बनी मिठाई अपने साथ लेकर चलते हैं जो आटे के संग अंगूर का रस उबाल कर तथा उसमें गिरी डाल कर बनाई जाती है। अखरोट की गिरी का तेल निकालने के बाद जो भाग बचता है वह बेकार नहीं जाता। 


उसका एक हिस्सा पशुओं के चारे और चूजों के दानों में मिलाया जाता है जो स्वादिष्ट तो होता ही है, साथ में स्वास्थयवर्धक भी होता है। हलवे में यदि अखरोट की गिरी का रस मिलाया जाए तो यह स्वादिष्ट तो होगा ही, साथ ही बहुत पौष्टिक भी। अखरोट की पौष्टिक तथा स्वास्थ्यवर्धक गिरी बच्चे, बूढ़ों, डायबिटिज के रोगियों या जिन को दिल का दौरा पड़ चुका हो, अधेड़ उम्र वालों को या दूध पिलाने वाली माताओं आदि के लिये बहुत गुणकारी मानी गयी है। बहरहाल अगर दो, तीन अखरोट रोज खायें तो काफी लाभदायक होते हैं। बहुत भीषण गर्मी में अखरोट नहीं खाना चाहिये। जाड़ों में शहद के साथ यदि अखरोट खाया जाए तो स्वास्थ्यवर्धक रहता है। अखरोट की गिरी में कैलोरी बहुत अधिक होती है जो शरीर के लिये बहुत जरूरी होती है। इसमें वे सब विटामिन होते हैं जिनकी जरूरत शरीर को होती है।




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केजरीवाल सरकार के डेंगू विरोधी महा अभियान ‘10 हफ्ते, 10 बजे, 10 मिनट’ में इस सप्ताह दिल्ली का हर दुकानदार लेगा हिस्सा

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार की तरफ से चलाए जा रहे डेंगू विरोधी महा अभियान ‘10 हफ्ते, 10 बजे, 10 मिनट, हर रविवार डेंगू पर वार’ में इस सप्ताह दिल्ली के सभी दुकानदार हिस्सा लेंगे। दिल्ली के सभी दुकानदार रविवार को सुबह 10 बजे अपनी दुकान या ऑफिस के आसपास इकट्ठे साफ पानी की जांच करेंगे और उसको बदल कर या उसमें पेट्रोल या तेल डाल कर डेंगू के खिलाफ हमला बोलेंगे। साथ ही, सभी दुकानदार अपने परिचितों को कॉल कर अभियान का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करेंगे। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी दुकानदारों से दिल्ली सरकार की तरफ से चलाए जा रहे इस अभियान का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि दिल्ली को डेंगू से बचाने के लिए दिल्ली के हर दुकानदार को अपनी दुकान या ऑफिस के आसपास में देखना है कि पानी इकट्ठा तो नहीं है और अगर है तो उसे उड़ेल दें, बदल दें या उसमें थोड़ा तेल डाल दें।


उल्लेखनीय है कि केजरीवाल सरकार की तरफ से डेंगू के खिलाफ ‘10 हफ्ते, 10 बजे, 10 मिनट, हर रविवार डेंगू पर वार’ महा अभियान चलाया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने इस सप्ताह के अभियान में दिल्ली के हर दुकानदार को शामिल करने का लक्ष्य रखा है। दिल्ली सरकार ने इस बार थीम की टैग लाइन ‘दिल्ली का हर दुकानदार, करेगा डेंगू पर वार’ दी है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली में रह रहे हर दुकानदार से बढ़-चढ़ कर इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की है।


गत वर्षों की तरह, इस बार भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने दिल्ली में डेंगू को खत्म करने के लिए ‘10 हफ्ते, 10 बजे, 10 मिनट, हर रविवार डेंगू पर वार’ महा अभियान शुरू की है। दिल्ली सरकार के सभी मंत्री, विधायक और अधिकारी भी हर रविवार को अभियान में हिस्सा लेकर अपने-अपने घरों में जमा साफ पानी की सफाई करते हैं। साथ ही, दिल्ली सरकार, विभिन्न माध्यमों के जरिए दिल्ली में रह रहे सभी नगारिकों से अभियान के साथ जुड़कर हर सप्ताह अपने घर के कूलर, गमलों आदि का साफ पानी बदलने और आसपास जमा पानी की सफाई करने के लिए जागरूक कर रही है। साथ ही अपील की जा रही है कि हम सभी को मिलकर हर हाल में मच्छरों को पनपने से रोकना है। 10 हफ्तों तक हम सब को ऐसा करना है और डेंगू को हराना है।


हर साल डेंगू के सबसे ज्यादा मामले 1 सितंबर से 15 नवंबर के बीच आते हैं। डेंगू का मच्छर केवल साफ पानी में पनपता है। साफ पानी के अंदर डेंगू के अंडे पैदा होते हैं और वो अंडे 8 से 10 दिन के अंदर मच्छर में बदल जाते हैं। अगर हम 8 दिन से पहले उस पानी को बदल दें और उस अंडे को नष्ट कर दें, तो मच्छर पैदा ही नहीं होंगे। यह मच्छर 200 मीटर से ज्यादा नहीं उड़ सकते। अगर आपके घर में डेंगू होता है, तो आप यह मानकर चलें कि मच्छर आसपास ही पैदा हुआ है। लिहाजा, डेंगू को खत्म करने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली में रहने वाले हर व्यक्ति को 10 हफ्तों तक केवल 10-10 मिनट देने की अपील की जा रही है। अगर हर दिल्ली वासी अपने घर और आसपास इकट्ठे साफ पानी की अच्छे से जांच कर लें और यह सुनिश्चित कर लें कि आपके पड़ोसियों ने भी अपने घर में जांच कर ली है, तो डेंगू से सुरक्षित रह सकते हैं।



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गहरी नींद से पाएं प्राकृतिक सौन्दर्य


चेहरे पर प्राकृतिक आभा और आकर्षण के लिए महँगे सौन्दर्य उत्पादों के बजाय एक अच्छी और सुकून भरी नींद बेहद अहम होती है। भरपूर नींद लेने से दिमाग को शान्ति मिलती है, पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है, जिससे आप आंतरिक तौर पर स्वस्थ रहते हैं। इससे बाहरी खूबसूरती निखरने लगती है और आप सुन्दर, सौम्य और आकर्षक दिखने लगती हैं।


क्या आप जानती हैं कि गहरी नींद आपकी खूबसूरती को चार चाँद लगा सकती है। रोजाना 8-9 घण्टे गहरी नींद लेने से शरीर तरोताजा हो जाता है। जब आप गहरी नींद में होती हैं तो आपके शरीर में खून का संचार बढ़ता है, इससे आपके चेहरे की आभा बढ़ जाती है। गहरी नींद से आपके शरीर में कोलेजन का पुनर्निर्माण होता है तथा आपके चेहरे की मांसपेशियों को आराम मिलता है। जब हम नींद में होते हैं तो हमारे तनाव के हार्मोंस (कॉर्टिसॉल) कम हो जाते हैं तथा हमारी नींद के हार्मोंस (मीलाटोनिन) बढ़ जाते हैं। हमारी त्वचा और पूरा शरीर स्वयं का पुनर्निर्माण करता है या हम यह कह सकते हैं कि दिन में हमारी त्वचा को प्रदूषण या सूर्य की किरणों से हुए नुकसान की भरपाई रात की नींद करती है।


रात को पूरी नींद न आने पर आंखों में सूजन आ जाती है क्योंकि तनाव की वजह से कोर्टलिस का स्तर बढ़ जाता है। जिससे आपके शरीर में विद्यमान अम्ल का स्तर बदल जाता है और शरीर में पानी की मात्रा में अधिकता आ जाती है। यही वजह है कि चेहरे या आंखों के नीचे सूजन आ जाती है। जब आप सो रही होती हैं तो त्वचा की नई कोशिकाएं तेजी से विकसित होती हैं, जिससे सुबह उठते ही आपको ताजगी का अहसास होता है तथा आप सुंदर दिखाई देती हैं।


मेरा यह मानना है कि अगर जवान और आकर्षक दिखना चाहती है तो रात को 9 से 11 बजे तक हर हालत में सो जाइए। अपनी त्वचा को झुर्रियों से परे रखने के लिए पीठ के बल सोना सबसे उपयोगी होता है क्योंकि इससे त्वचा पर पड़ने वाले दबाव से क्रीजिंग हो जाती है, जिससे झुर्रियां रोकी जा सकती है। रात की गहरी नींद आपके बालों को काला, लम्बा तथा आकर्षक बनाए रखने में मदद करती है। गहरी नींद शरीर में प्रोटीन के उपयुक्त संश्लेषण के लिए अत्यंत आवश्यक होती है जो कि हार्मोंस को प्रभावित करती है जिससे आपके बालों की वृद्धि तथा चमक प्रभावित होती है।


अक्सर लोगों को यह कहते देख गया है कि आप थके-थके लग रहे हो। यह तब होता है जब हम पर्याप्त नींद नहीं ले पाते जिसकी वजह से चेहरे पर काले धब्बे उभर आते हैं तथा त्वचा अपनी प्राकृतिक आभा खो देती है। रात को पर्याप्त नींद से शरीर में विषैले पदार्थ खत्म हो जाते हैं एवं पुरानी कोशिकाएं हट जाती हैं। उनके स्थान पर नई कोशिकाएं पैदा हो जाती हैं और हम युवा दिखने लगते हैं। पर्याप्त नींद के अभाव में शरीर में रक्त का संचार कम हो जाता है, जिससे त्वचा मुरझाई तथा बेजान लगने लगती है।


बेहतर नींद के लिए प्रतिदिन रात्रि में सोने तथा सुबह उठने का समय नियमित रखें। रात्रि को सोने से पहले चाय, शराब, काफी या तामसिक पदार्थों से परहेड करें क्योंकि इससे मस्तिष्क की शिराएँ उत्तेजित हो जाती हैं जो अच्छी नींद में व्यवधान डालती हैं। हमेशा मध्य रात्रि यानि 11 बजे से पहले नींद ले लें।


पर्याप्त नींद न लेने की वजह से आप थके-थके महसूस कर सकते हैं जिससे आपका मनोबल गिर जाता है तथा आप तनावपूर्ण जीवन जीना शुरु कर देते हैं। एक ताजा अनुसंधान के अनुसार अनिंद्रा की वजह से लोग 10 गुना ज्यादा तनाव में रहते हैं। सोने से पहले अपने चेहरे, गर्दन, पांव को हल्के क्लीजर से धो डालिए। जिससे आपकी त्वचा पर दिनभर में मेकअप, गन्दगी, धूल-मिट्टी को हटाने में मदद मिले। अपनी नाइट क्रीम तथा आई जैल सोने से बीस मिनट पहले जरूर लगा लीजिए ताकि यह त्वचा में समा जाए तथा तकिया खराब ना हो। रात्रि में सोने से आधा घण्टा पहले गुनगुने पानी से नहाने से आपकी मांसपेशिओं और तंत्रिकाओं को आराम मिलता है, जिससे आपको अच्छी नींद आती है।


अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो निंद्रा के अभाव में शरीर में ‘घरेलिन’ तत्व बढ़ जाते हैं। इनकी वजह से भूख बढ़ जाती है और शरीर में फैट बढ़ने से वजन बढ़ना शुरू हो जाता है। यदि आप नियमित रूप में जिम जाती हैं या व्यायाम व योग कर रही हैं तथा इसके बावजूद आपका वजन बढ़ता है तो आप अपनी नींद पर ध्यान दें। रात्रि में सोते समय जल मिश्रित भोजन ग्रहण करें। रात को पानी पीने की जगह पानीयुक्त सब्जियाँ, फलों का सेवन करें। अगर आप रात में पर्याप्त नींद नहीं ले पाएं तो दिन में आधा घण्टा सोने से आपका मूड तरोताजा हो जायेगा और आपकी स्मरण शक्ति और एकाग्रता भी बढ़ेगी।


-शहनाज़ हुसैन-

(लेखिका अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्ति सौन्दर्य विशेषज्ञ हैं।)









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शिक्षा संस्थानों में फिटनेस गतिविधियां हों

शिक्षा संस्थान में विद्यार्थी जीवन से ही अच्छे स्वास्थ्य की नींव रखी जाती है, परंतु क्या हमारे संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए फिटनेस की  सुविधाएं उपलब्ध हैं। पिछले साल मार्च से हम कोरोना महामारी के कारण शिक्षा संस्थानों से दूर हैं। पढ़ाई  ऑनलाइन तो कभी ऑफलाइन हो ही जाती है, मगर फिटनेस के लिए घर पर भी कार्य नहीं हो रहा है। कोरोना के भयानक परिणामों को देखते हुए अब हर नागरिक की फिटनेस का आधार विद्यार्थी जीवन से ही मजबूत बनाना और अधिक जरूरी हो गया है। हवा में जब अधिक धूल-धुआं हो गया है और पृथ्वी पर जैसे-जैसे जीवन जीने की आवश्यक चीजें घटती जा रही हैं, वैसे-वैसे मानव को अब स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा सजग होना पडे़गा। अच्छे स्वास्थ्य की नींव बचपन से लेकर विद्यार्थी जीवन तक पक्की की जाती है। मगर हिमाचल प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में प्रत्येक विद्यार्थी की स्वास्थ्य के लिए न तो सुविधा है और न ही पर्याप्त शिक्षक हैं। विद्यार्थी कितना फिट है, उसके लिए विद्यालय में कोई परीक्षा ही नहीं है। ऐसे में शिक्षा के कर्णधारों  के साथ-साथ अभिभावकों व विद्यालय प्रशासन को इस विषय पर अनिवार्य रूप से सोचना होगा कि हमारी आगामी पीढि़यों की फिटनेस व नैतिकता कैसे उन्नत हो सके। स्वास्थ्य के सिद्धांतों से नैतिकता का गहरा संबंध है। संयम, निरंतरता, निस्वार्थ सोच व ईमानदारी से कार्य निष्पादन हम खेल के मैदान में ही सही ढंग से सीख पाते हैं। किसी भी देश को इतनी क्षति युद्ध या महामारी से नहीं होती है जितनी तबाही नशे के कारण हो सकती है।


आज जब देश के अन्य राज्यों सहित हिमाचल प्रदेश में भी नशा युवा वर्ग पर ही नहीं किशोरों तक चरस, अफीम, स्मैक, नशीली दवाओं तथा दूरसंचार के माध्यमों के दुरुपयोग से शिकंजा कस रहा है, इसलिए विद्यालय व अभिभावकों को इस विषय पर सचेत हो जाना चाहिए। यदि विद्यार्थी  किशोरावस्था में नशे से बच जाता है तो वह फिर युवावस्था आते-आते समझदार हो गया होता है। इसलिए विद्यालय स्तर पर प्राथमिक से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को विभिन्न विधाओं में व्यस्त रखने के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस  की तरफ मोड़ना बेहद जरूरी हो जाता है। विद्यार्थी के विकास के लिए खेलों के माध्यम से फिटनेस कार्यक्रम बहुत जरूरी हो जाते हैं, मगर कुछ विद्यार्थियों द्वारा बनी दो टीमें तो खेलने लग जाती हैं और सारा विद्यालय दर्शक बन जाता है। फिटनेस तो विद्यालय के हर विद्यार्थी को अनिवार्य रूप से चाहिए होती है। विद्यालय स्तर पर हर विद्यार्थी के लिए अभी तक कोई भी कार्यक्रम नहीं है। पिछले कुछ दशकों से हिमाचल प्रदेश के नागरिकों की फिटनेस में बहुत कमी आई है । इसके पीछे का प्रमुख कारण भी विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों के लिए किसी भी प्रकार के फिटनेस कार्यक्रम का न होना है। पढ़ाई की होड़ में हम विद्यार्थियों की फिटनेस को ही भूल गए हैं।


 हिमाचल प्रदेश की अधिकांश आबादी गांव में रहती है। वहां पर सवेरे-शाम  वर्षों पहले से ही विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ कृषि व अन्य घरेलू कार्यों में सहायता करता था। विद्यालय आने-जाने के लिए कई किलोमीटर दिन में पैदल चलना पड़ता था। इसलिए उस समय के विद्यार्थी को किसी भी प्रकार के फिटनेस कार्यक्रम की कोई जरूरत नहीं थी। मगर अब घरेलू कार्यों से विद्यार्थी दूर हो गया है और विद्यार्थी घर के आंगन में बस पर सवार होकर विद्यालय के प्रांगण में उतरता है। पढ़ाई के नाम पर ज्यादा समय खर्च करने के कारण फिटनेस के लिए कोई समय नहीं बचता है। इस कॉलम के माध्यम से पहले भी कई  बार फिटनेस के बारे में सचेत किया जाता रहा है। जब अधिकतर स्कूलों के पास फिटनेस के लिए न तो आधारभूत ढांचा है और न ही कोई कार्यक्रम है तो फिर आज का विद्यार्थी फिटनेस व मनोरंजन के नाम पर दूरसंचार माध्यमों का कमरे में बैठ कर खूब दुरुपयोग कर रहा है। ऐसे में शिक्षा के द्वारा विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास की बात मजाक लगती है। आज के विद्यार्थी को अगर कल का अच्छा नागरिक बनाना है  तो हमें विद्यालय व घर पर उसके लिए सही फिटनेस कार्यक्रम देना होगा। तभी हम सही अर्थों में अपनी अगली पीढ़ी को शिक्षित करेंगे। बचपन से युवावस्था जैसे पढ़ाई का सही समय है, उसी प्रकार शारीरिक विकास का समय भी यही है। इस समय ही हमारे शरीर की रक्त वाहिकाओं के बढ़ने, मांसपेशियों व हड्डियों के मजबूत होने का समय है। इस सब के लिए भी फिटनेस कार्यक्रम अनिवार्य रूप से चाहिए क्योंकि एक उम्र बीत जाने के बाद भी हम इनका विकास नहीं कर सकते हैं।


 बिना फिटनेस कार्यक्रम के आज का विद्यार्थी अच्छा पढ़-लिख कर डॉक्टर, इंजीनियर, मैनेजर व अन्य बड़ा डिग्रीधारक तो बनकर नौकरी तो ले सकता है, मगर क्या वह साठ वर्ष की उम्र तक अपने कार्य का निष्पादन सही तरीके से कर सकता है। आज चालीस वर्ष पार करते ही बुढ़ापा आ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर पर फिटनेस कार्यक्रम की बहुत जरूरत है। अमरीका व यूरोप के विकसित देशों के विद्यालयों में हर विद्यार्थी की सामान्य फिटनेस के लिए वैज्ञानिक आधार पर तैयार किए गए कार्यक्रम के साथ-साथ उचित आहार का भी प्रबंध  होता है। विद्यार्थी की फिटनेस कैसी है, इसके लिए साल में कई बार परीक्षा होती है। हमारे यहां कुछ स्तरीय विद्यालयों में फिटनेस कार्यक्रम तो हैं, मगर शारीरिक क्षमताओं को नापने के लिए कोई परीक्षण नहीं है। इस सबके लिए  विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की सामान्य फिटनेस का मूल्यांकन कर उसमें सुधार के लिए सुझाव देकर सुधार करवाने के लिए ‘फिटनेस मूल्यांकन व सुझाव’ कार्यक्रम की शुरुआत जल्द ही करनी चाहिए। इस कार्यक्रम के अतंर्गत विद्यालय के हर विद्यार्थी का साल में तीन बार विभिन्न शारीरिक क्षमताओं का परीक्षण कर उनका मूल्यांकन किया जाए। पांच दशक पहले भी राष्ट्रीय स्तर से फिटनेस जागरूकता के लिए इस तरह के कार्यक्रम चले थे, मगर शिक्षा राज्य सूची का विषय होने के कारण बाद में धीरे-धीरे खत्म हो गए थे। अब फिर फाइलों में सीबीएसई फिटनेस टैस्टिंग की बात तो कर रही है, मगर धरातल पर तो अभी तक कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। शारीरिक स्वास्थ्य के सिद्धांतों को मद्देनजर रखकर फिटनेस विशेषज्ञों से कार्यक्रम बनवा कर उसे लागू करवाया जाए।


-भूपिंद्र सिंह-



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इन आसान घरेलू उपायों से मिलेगा मियादी बुखार में आराम

टायफायड जिसे मियादी बुखार भी कहा जाता है, आमतौर पर दूषित पानी या भोजन से फैलता है। मियादी बुखार में व्यक्ति को 104 डिग्री तक भी बुखार हो सकता है। गंभीर स्थित हिोने पर अस्पताल में भर्ती भी करवाना पड़ता है। यूं तो टायफाइड होने पर व्यक्ति को डॉक्टरी मदद की जरूरत होती है, लेकिन फिर भी आप कुछ आसान घरेलू उपायों के जरिए स्थिति में काफी हद तक राहत पा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ आसान उपायों के बारे में...


लिक्विड पर करें फोकस

चूंकि टायफाइड में व्यक्ति को तेज बुखार होता है और शरीर का तापमान बढ़ने से व्यक्ति डिहाइडेट हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति को अपने लिक्विड की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। आप पानी के अलावा नारियल पानी, फलों के रस व सूप आदि का सेवन करें। इससे आपको कई तरह के पौष्टिक तत्व भी मिलेंगे। अक्सर टायफाइड होने पर व्यक्ति को दस्त हो जाते हैं। ऐसे में भी पानी की मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता होती है। आप चाहें तो मार्केट में मिलने वाले ओआरएस पैकेट का घोल बनाकर भी पी सकते हैं।


लहसुन

आपको शायद पता ना हो लेकिन लहसुन टायफायड बुखार में बेहद लाभदायी होता है। सबसे पहले तो लहसुन की तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर में पसीना आता है और बुखार कम होता है। इसके अलावा इसमें एंटी−ऑक्सीडेंट्स होते हैं। साथ ही यह आपके प्रतिरक्षा तंत्र को भी बेहतर बनाने का काम करता है। आप इसे कच्चा खा सकते हैं। इससे आपको अधिक लाभ होगा।


तुलसी 

तुलसी में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं और इसलिए लोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होने पर इसका इस्तेमाल करते हैं। टायफाइड में भी यह बेहद कारगर है। इसके लिए आप पानी में तुलसी की कुछ पत्तियां डालकर उबालें और रोगी को यह पानी छानकर पीने के लिए दें।

 

कोल्ड कंप्रेस

टायफाइड में व्यक्ति को तेज बुखार होता है। ऐसे में शरीर का तापमान कम करने के लिए कोल्ड कंप्रेस की मदद लें। इसके लिए आप एक साफ कपड़े को ठंडे पानी में भिगोएं। फिर इसे निचोड़ें और मरीज के माथे पर रखें। इससे उसका तापमान कम हो जाएगा और व्यक्ति को काफी अच्छा महसूस होगा। लेकिन हर थोड़ी देर में कोल्ड कंप्रेस करने से बचें क्योकि कई बार पानी टायफाइड के मरीजों के लिए परेशानी भी खड़ी कर सकता है।



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आम समस्या है फटी एड़ियां

पांव शरीर का आधार माने जाते हैं। पांव पर ही पूरे शरीर का भार होता है तथा पांव ही हमारे शरीर को गतिशील करते हैं। इसीलिए पांव का ख्याल अत्यंत महतवपूर्ण माना जाता है। सर्दियों में फटी एड़ियों की समस्या आम होती है तथा महिलाएं सबसे ज्यादा पीड़ित रहती हैं। मौसम में बदलाव के दौरान भीषण ठण्डी/गर्मी में शरीर में नमी की कमी, विटामिन की कमी, डायबटीज़, थायराईड, शरीर में मोटापे तथा 60 वर्ष से ज्यादा आयु वर्ग के लोगों को फटी एड़ियों की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए यदि आपको फटी एड़ियों की समस्या से लगातार जूझना पड़ रहा है तो यह अनुवांशिक या स्वास्थय कारणों से भी हो सकता है फटी एड़ियों की समस्या सामान्यतः पाँव के प्रति लापरवाही से बढ़ जाती है। हवाई चप्पल या खुले जूतों का प्रयोग करने से भी फटी एड़ियां उभर आती हैं। पाँव की एड़ियों में गहरी दरार पड़ जाने से कई बार असहनीय पीड़ा का सामना भी करना पड़ सकता है। आपके पाँव की त्वचा में अक्सर रूखापन आ जाता है तथा जब रूखापन बढ़ जाता है तो फटी एड़ियों का स्वरूप ले लेता है।


सर्दियों में ठण्डे बर्फीले मौसम की वजह से शरीर में नमी की कमी आ जाती है जिससे पाँव में खून का बहाव प्रभावित होता है । एड़ियों की त्वचा बाकी भागों की बजाय ज्यादा सख्त होती है तथा सर्दियों में नमी की वजह से इसका लचीलाप कम हो जाता है जिससे फटी एड़ियों का स्वरूप बन जाता है। शरीर में नमी की कमी के कारण जीवित कोशिकाएं कठोर हो जाती हैं तथा उसमें एड़ियों के भाग पर मृत कोशिकाएं बढ़ जाती हैं जोकि बाद में फटी एड़ियों का स्वरूप ले लेती हैं। लेकिन आप कुछ प्रकृतिक उपायों से इन फटी एड़ियों से छुटकारा पा सकती हैं। –

अपनी त्वचा में यौवनता तथा ताजगी लाने के लिए अपने पाँव को सप्ताह में एक बार घर में ‘‘फुट ट्रीटमैंट‘‘ जरूर दें। पाँव को गर्म पानी में डुबोने से एड़ियों की त्वचा मुलायम होती है जिससे मृत्क कोशिकाओं को हटाने में मदद मिलती है। प्रतिदिन पाँव तथा एड़ियों की उचित देखभाल सुनिश्चित करने के लिए नहाने से पहले अपने पाँव में शुद्ध बादाम तेल की रोजाना मालिश कीजिए! नहाने के बाद जब पाँव गीले हों तो पाँव पर क्रीम का इस्तेमाल कीजिए जिससे पाँव पर नमी बरकरार रखने में मदद मिलेगी। फुट क्रीम से पाँव की सर्कुलर मोशन में हल्के-हल्के मालिश कीजिए तथा इससे आपके पाँव मुलायम बने रहेंगे जिससे फटी एड़ियों की समस्या नहीं आएगी।


पाँव की समस्याओं के लिए शहद प्रकृतिक उपचार उपचार माना जाता है। शहद में एंटी बैकटीरियल तथा एंटी माइक्रोबियल गुण विद्यमान होते हैं जो कि फटी एड़ियों को साफ करके इनका प्रकृतिक उपचार कर सकते हैं । पांच लीटर गुनमुने पानी में एक कप शहद मिलाकर इसमें 20 मिनट तक पाँव सोख कर रखने से पाँव में कोमलता आती है। आप शहद को ‘‘फुट सक्रब‘‘ या फुट मास्क के तौर पर भी प्रयोग कर सकते हैं।

आपकी रसोई में भी फटी एड़ियों का प्रकृतिक ईलाज उपलब्ध है। नींबू को काटकर इसका आधा भाग लेकर इसे चीनी में मिलाएं तथा इसे अपने एड़ियों पर आहिस्ता-आहिस्ता रगड़ें और बाद में एड़ियों को साफ ताजे पानी से धो लीजिए। इस प्रक्रिया को हफ्ते मे दो बार अपनाने से बेहतर सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।


रात को साने से पहले गर्म पानी में नमक डालकर अपने पैरों को आधा घण्टा तक भीगो कर रखें जिससे आपकी एड़ियों की त्वचा मुलायम हो जाएगी तथा इसके बाद बाथिंग स्पंज से रगड़कर एड़ियों से मृत कोशिकाओं को आहिस्ता-आहिस्ता हटा दीजिए। कभी भी धातू के स्पंज का इस्तेमाल मत कीजिए क्योंकि इससे एड़ियों के घाव गहरे हो सकते हैं। पाँव को धोने के बाद त्वचा पर क्रीम की मालिश कीजिए तांकि त्वचा क्रीम को पूरी तरह सोख ले। नींबू तथा हल्दी के गुणों वाली क्रीम सबसे बेहतर होगी। रात को सोने से पहले फटी एड़ियों को साॅफ्ट काॅटन के कपड़े की पट्टी बांधकर सोने से फट एड़ियों के घाव भरने में मदद मिलेगी। रात में सोने से पहले पाँव पर ‘‘फुटक्रीम‘‘ लगाकर पाँव को काॅटन के कपड़े की पट्टी बांधकर सोने से घाव को प्रकृतिक तरीके से ठीक होने में मदद मिलती है तथा बिस्तर भी खराब नहीं होता।


फटी एड़ियों के लिए नारियल तेल रामबाण की तरह काम करता है। नारियल तेल में विद्यमान एंटी इन्फलेमेटरी तथा एंटी माईक्रोबाईल गुण विद्यमान होते हैं। जिससे त्वचा की नमी बरकरार रखने में मदद मिलती है तथा नारियल तेल को सूखी त्वचा के उपचार के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। नारियल तेल त्वचा में नमी बरकरार रखने के इलावा त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में भी मददगार साबित होता है। नारियल तेल को प्रतिदिन उपयोग में लाने से फटी एड़ियों की समस्या से बचा जा सकता है तथा यह पाँव की बाहरी त्वचा के टिशू को मजबूत करता है, रात को सोने से पहले नारियल तेल से त्वचा की मालिश करने से सुबह आपके पाँव कोमल तथा मुलायम बनकर उभरेंगे। यदि आप फटी एड़ियों की समस्या से जूझ रहे हैं तो दिन में दो बार नारियल तेल से अपने पाँव की मालिश कीजिए।


फटी एड़ियों के उपार में जैतून का तेल काफी प्रभावी माना जाता है। हफ्ते में दो बार जैतून के तेल की ट्रीटमैंट, फटी एड़ियों की समस्या का प्रभावी निदान प्रदान करती है। जैतून के गर्म तेल को काॅटन बाॅल से आहिस्ता-आहिस्ता पाँव में गोलाकार तरीके से लगाने से त्वचा तेल को सोख लेगी। उसके बाद पाँव को काॅटन के कपड़े से बांध लीजिए तथा थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से धो डालिए। रात को सोने से पहले प्रतिदिन जैतून के तेल से पाँव की मालिश करने से आपको बेहतरीन परिणाम मिल सकते हैं।


तिल का तेल फटी एड़ियों के पोषण तथा नमी प्रदान करने में प्रभावी माना जाता है। तिल के तेल में एंटी फंगल गुण होने के अलावा विटामिन, मिनरल तथा न्यूटरीऐंटस विद्यमान होते हैं। अपने पाँव में आहिस्ता-आहिस्ता तिल के तेल की मालिश कीजिए तथा तेल को आहिस्ता-आहिस्ता प्रकृतिक तौर पर पाँव को सोख लेने दीजिए तथा बाद में आप पाँव को सामान्य पानी में धो सकते हैं। तिल का तेल पाँव की त्वचा में कोमलता तथा नमी बरकरार रखता है तथा फटी एड़ियों का प्रकृतिक उपचार माना जाता है।


मौसम के हिसाब से पाँव में जूतों का चयन कीजिए। सर्दियों में हवाई चप्पल, सैंडल आदि के उपयोग से परहेज कीजिए तथा बंद जूतों को प्रयोग में लायें। सर्दियों में काॅटन के मौज़े को प्राथमिकता दें क्योंकि ऊनी या सिंथेटिक्स के मौज़े से पाँव की त्वचा रूखी हो सकती है। सर्दियों में साबून, शैम्पू के प्रयोग को जरूरत से ज्यादा उपयोग में ना लायें तथा विटामिन ई, कैल्शियम, जिंक, ओमेगा-3 आदि से भरपूर डाईट लें।

(लेखिका अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सौंदर्य विशेषज्ञ हैं तथा हर्बल क्वीन के रूप में लोकप्रिय हैं)





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संतरे का छिलका बर्न करता है फैट

विटामिन सी और कई दूसरे पोषक तत्वों से भरपूर संतरा तो वजन कम करने में मददगार है ही, उसका छिलका भी अपने कई गुणों के कारण फैट को बर्न करता है. संतरे के छिलके में विटामिन बी6, कैल्शियम, फॉलेट के अलावा पॉलिफेनॉल्स भी पाया जाता है जो डायबिटीज के साथ अल्जाइमर और मोटापा जैसी दिक्कतों को भी दूर करने में मदद करता है. संतरे के फल की तुलना में उसके छिलके में 4 गुना अधिक फाइबर होता है.


इसलिए इसके सेवन के बाद देर तक भूख नहीं लगती. छिलके में मौजूद विटामिन सी फैट को बर्न करने में मदद करता है. संतरे में कैलरीज की मात्रा बेहद कम होती है. साथ ही संतरे में पानी की मात्रा अधिक होती है. एक संतरे में आमतौर पर करीब 87 प्रतिशत पानी होता है जिससे यह सर्दी के मौसम में आपको हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है. संतरे में मौजूद फाइबर के कारण इसे खाने के बाद पेट भरा हुआ महसूस होता है. पाचन तंत्र भी सही बना रहता है और कब्ज की दिक्कत भी नहीं होती. एक स्टडी के मुताबिक, संतरे में पाया जाने वाला वाटर-साल्यूबल यानि पानी में घुलनशील विटामिन मोटापे से लड़ने और वेट को मैनेज करने में मदद करता है. यह शरीर के फैट बर्निंग प्रोसेस को भी तेज करता है.






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थायराइड भी हो सकता है थकान का कारण

क्या आपके साथ भी एसे होता है कि आप सारा दिन काम करते करते इतना थक जाती है कि आप अपना मनपंसद टी.वी शो भी अच्छी तरह से नहीं देख पाती और घर में हमेशा थका-थका महसूस करती है। घर पर सीढियां चढ़ने के वक्त,कोई भी काम करने के वक्त या बैड से उठने के वक्त भी एसा महसूस होना कि जितनी नींद हमने ली है वो अभी भी पर्याप्त नहीं है। स्वस्थ ऊर्जा का निर्माण स्वास्थ्यवर्द्धक पाचन प्रणाली से शुरू होता है। विटामिन बी की कमी से भी थकान महसूस होती है। हल्की थकान तथा गंभीर थकान में से आप खुद को किसका शिकार महसूस करती हैं और वास्तव में आपके साथ गलत क्या हो रहा है? 


-थकावट महसूस होने के कई कारण हो सकते है। जब भी शरीर में थकावट महसूस हो तो थोड़ा इधर-उधर टहल कर आप अपनी थकावट को दूर कर सकती है। जब आप थकी होती हैं तो आपका मैटाबोलिक रेट कम हो जाता है और आप कम कैलोरीज बर्न करती हैं। इसी कारण आपको थकावट महसूस होती है। कसरत करने से भी आप सारा दिन बेहतर महसूस करेंगी और काम करने के बाद भी थकावट कम महसूस होगी। 


-हमारे शरीर में थकान महसूस होने के कई कारण हो सकते है। कई बार विटामिन्स की कमी होने पर भी हम कोई भी काम करने के बाद थकावट महसूस करते है। आयरन की कमी होने पर भी थकान महसूस होती है। यदि आपको अपनी त्वचा पीली दिखाई दे, अपनी धड़कन तेज महसूस हो और चिड़चिड़ापन महसूस हो तो आयरन से भरपूर डाइट आपको इस समस्या से निजात पाने में सहायक हो सकती है। 


-अपने वातावरण को ताजा बनाए रखें और बोर होने से बचें जब भी आप बोर हो रही हो तो संगीत का लुत्फ उठा सकती है और बोरियत आपके मूड को प्रभावित करती है। 


-आपकी थकावट का कारण थायराइड भी हो सकता है। सुबह के समय थकान थायराइड की कमजोर कार्यप्रणाली का चिन्ह हो सकती है। इसलिए थायराइड की जांच अवश्य करवाएं। 


-भरपूर नींद न लेने की वजह से भी आप सारा दिन थकान महसूस कर सकती है। शरीर के लिए भरपूर नींद लेना भी बहुत जरूरी होता है। इसलिए रात के समय कम से कम 8 घंटे नींद लेना जरूरी है और दिन के समय बीच में कम से कम 20-30 मिनट की नींद जरूर लें। 


-दिन में भारी भोजन करने की बजाय अपने भोजन में साबुत अनाज, ओट्स, अंकुरित खाद्य तथा बहुत सारी सब्जियां तथा फल शामिल करें। 



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स्वास्थ्य के लिए वरदान है प्याज

भारतीय रसोई में प्याज का बड़ा ही महत्व है। बिना प्याज के हमारे यहां रसोई को अधूरा माना जाता है। ऐसी कम ही डिशेज होगी जो प्याज के बनती हैं। प्याज खाने में स्वाद तो बढ़ाता है ही, वही हमारे स्वास्थ्य के लिए भी एक वरदान है। प्याज एक अत्यंत गुणकारी पौधा है जिसमें औषधीय गुण भी पाएं जाते हैं। लाल प्यामज में ढेर सारे पोषक तत्वन होते हैं, जो बड़ी से बड़ी बीमारियों को खत्म करने की शक्तिा रखते हैं। इसके अलावा इसमें ग्लूकोस भी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। हरा प्याज चेहरे की झुर्रियों को दूर करता है। इसे खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके इलावा मसूड़ो में सूजन और दांत में दर्द होने पर प्याज के रस और नमक का मिश्रण लगाने से दर्द में राहत मिलती है।

 

सर्दी-जुखाम

इसमें एंटी-फंगल और एंटीऑक्सीाडेंट गुण पाए जाते हैं। इसे नियमित रूप से खाने से सर्दी-जुखाम और बुखार से राहत मिलेगी। प्याज के रस में मिश्री मिलाकर चाटने से कफ की समस्या से जल्द ही निजात मिलती है।


ब्लतड प्रेशर और दिल के लिए

लाल प्यागज शरीर के खराब कोलेस्ट्रॉणल को निकाल कर हृदय को रोगों से बचाता है। इसे नियमित खाने से हाई ब्लतड प्रेशर मेंटेन रहता है।


कैंसर का इलाज

प्याज कैंसर सेल को बढ़ने से रोकता है। यह प्रोस्टेलट और पेट के कैंसर होने के खतरे को भी कम करता है। खाली पेट रोज सुबह प्याज खाने से पाचन से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं।


गठिया का दर्द और सूजन में आराम

कई बीमारियों की वजह से होने वाले शारीरिक दर्द और सूजन से भी यह राहत दिलाता है। अगर आपको अस्थ मा, एलर्जी या गठिया रोग है तो अभी से ही लाल रंग की प्याभज खाना शुरु कर दें। गठिया में सरसों का तेल व प्याज का रस मिलाकर मालिश करें।


एंटी फंगल

प्याज में एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं। यदि प्याज के बीजों को सिरका में पीसा कर दाद-खाज और खुजली में लगाए तो जल्दी ही आराम मिलता है।


बालों के लिए फायदेमंद

बालों में प्याज का रस लगाने से बाल झड़ना बंद हो जाते हैं और साथ ही बालें की चमक भी बढ़ती है। अगर रूसी की समस्याय है तो आप इसके रस को भी सिर पर लगा सकते हैं।


यूरिन प्रॉब्लम्स

अगर किसी को यूरिन प्रॉब्लम हो और रुक-रुक कर पेशाब आता है तो पेट पर प्याज के रस की हल्की मालिश करनी चाहिए। इसके इलावा दो चम्मच प्याज का रस और गेहूं का आटा लेकर हलुवा बना लीजिए। इसको गर्म करके पेट पर इसका लेप लगाने से पेशाब आना शुरू हो जाता है। पानी में उबालकर पीने से भी पेशाब संबंधित समस्या खत्म हो जाती है।


पथरी की समस्या में लाभ

अगर आपको पथरी की शिकायत है तो प्याज आपके लिए बहुत उपयोगी है। प्याज के रस को चीनी में मिलाकर शरबत बनाकर पीने से पथरी की समस्या से निजात मिलता है। प्याज का रस सुबह खाली पेट पीने से पथरी अपने-आप कटकर बाहर निकल जाती है।

 

इम्यूनिटी पावर बढ़ाए

यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को इतना अधिक बढ़ा देता है कि बीमारियों जल्दी होती ही नहीं। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम बनाए रखता है। हरे प्याज में क्रोमियम होता है। इसीलिए यह डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। यह ब्लडप्रेशर पर नियंत्रण करता है। 


लंबी उम्र के लिए

प्याज खाने से कई शारीरिक बीमारियां नहीं होती हैं। इसके आलावा प्याज कई बीमारियों को दूर भगाता है। इसलिए यह कहा जाता है कि प्याज खाने से उम्र बढती है, क्योंकि इसके सेवन से कोई बीमारी नहीं होती और शरीर स्वस्थ्य रहता है।





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दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया के खिलाफ मुहिम शुरू करेंगे सीएम केजरीवाल

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में बारिश के बाद डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारी से जनता को बचाने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 10 हफ्ते 10 बजे 10 मिनट पर हर रविवार डेंगू पर वार मुहिम की शुरुआत की है. दिल्ली में कई ऐसी कच्ची कॉलोनियां हैं, जहां पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है और पानी की निकासी का कोई रास्ता नहीं है. इसकी वजह से इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को लगता है कि मुख्यमंत्री की महामारी से बचाने की मुहिम कारगर साबित नहीं हो सकती है. इस मुहिम को कारगर साबित करने के लिए सबसे पहले समस्या के समाधान की जरूरत है. गंदे पानी की निकासी का रास्ता निकाला जाए. इलाके में जमा गंदगी को हटाया जाए. तभी कुछ काम हो सकता है.


लोगों ने बताया कि तिमारपुर विधानसभा की वजीराबाद की कच्ची कॉलोनियों में महीनों से गंदगी का अंबार लगा हुआ है. यह हालात आम दिनों में भी देखने को मिलते हैं. यहां खाली पड़े प्लॉटों में पानी भरा हुआ है. लोग अपने घरों से निकलने वाली गंदगी को खाली प्लॉटों में डालते हैं. यहां पर बड़ी संख्या में बहुमंजिला इमारत बनी है. उनमें रहने वाले लोग गंदगी की वजह से घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. 


लोगों का यह भी कहना है कि यहां पर जनप्रतिनिधि भी लोगों की सुध लेने के लिए नहीं आते है. मुख्यमंत्री भले ही लोगों को बचाने के लिए मुहिम की शुरुआत कर रहे हैं, लेकिन हालात देखकर नहीं लगता कि इन कॉलोनियों में यह मुहिम कारगर साबित होगी. यहां के लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता गलियों में घूमते हैं, लेकिन उसके बाद कोई भी नेता जनता की समस्या का समाधान नहीं करता. तिमारपुर की इन कच्ची कॉलोनी के हालात बद से बदतर हैं. दिल्ली में ज्यादातर कच्ची कॉलोनी में रहने वाले लोग इन्ही समस्याओं से जूझ रहे हैं. 


लोगों का कहना है कि तिमारपुर विधानसभा से आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडेय हैं, जो जीतने के बाद दिखाई नहीं दिए. वहीं इलाके की कांग्रेस की निगम पार्षद अमरलता सांगवान है, जो जिले की कांग्रेस महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष भी है. लेकिन कोई भी प्रतिनिधि इस महामारी के दौर में लोगों की सुध नहीं ले रहा है. कोई भी कर्मचारी या जनप्रतिनिधि इलाके में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए दवाई का स्प्रे करने भी नहीं आ रहा है. 




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कब्ज, एसिडिटी और मल त्याग में दर्द की समस्या से तुरंत राहत दिलाता है मलासन

आजकल खान-पान की गड़बड़ी, तनाव और लाइफस्टाइल के कारण लोगों में पेट संबंधी समस्याएं काफी बढ़ गई हैं। एक शोध के मुताबिक शहरों में रहने वाले हर 10 में से 6 व्यक्ति को कब्ज की समस्या है। एसिडिटी, अपच, हार्ट बर्न, कब्ज जैसी समस्याओं से आप भी कभी न कभी परेशान होते हैं। कई लोगों को मल त्याग में बहुत दर्द का सामना करना पड़ता है और घंटों टॉयलेट में बैठे रहने के बाद भी पेट साफ नहीं होता है। इन सभी समस्याओं को मलासन चुटकियों में ठीक करता है। मलासन के अभ्यास से पेट संबंधी सभी बीमारियां दूर होती हैं और मल त्याग के समय आसानी होती है। 


कैसे करें मलासन: मलासन करने के लिए सबसे पहले अपने घुटनों को मोड़कर मल त्‍याग की अवस्‍था में बैठ जाएं। बैठने के बाद अपने दोनों हाथों की बगल को दोनों घुटनों पर टीका दें। अब दोनों हाथो की हथेलियों को मिलाकर नमस्कार मुद्रा बनाएं। अब धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें, आपको कुछ देर इसी अवस्था में बैठना है। अब धीरे-धीरे हांथो को खोलते हुए वापस उठ कर खड़े हो जाए।


हिप्स के जोड़ों को बनाता है लचीला: मलासन हिप के जोड़ों में लचीलापन बनाये रखने में मदद करता है। यह लचीलापन हम सभी को जन्‍म के समय मिलता है, लेकिन उम्र के साथ इसमें कमी आने लगती है। हिप ज्वाइंट्स को इमोशन्स का केंद्र कहा जाता है। इसलिए अगर आपके हिप ज्वाइंट्स मजबूत होंगे, तो आपका अपने इमोशन्स पर कंट्रोल बढ़ेगा।


कब्ज के लिए है रामबाण: मलासन से कब्‍ज सहित पेट की सभी समस्‍याओं से निजात पा सकते हैं। पुरानी कब्ज की परेशानी, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए हम दवाओं का सहारा लेते हैं, जिससे कुछ समय के लिए तो आराम मिल जाता है, लेकिन कुछ समय बाद यह समस्‍याएं हमें घेर लेती है। लेकिन नियमित मलासन को करने से आप कब्‍ज की समस्‍या से छुटकारा पा सकते हैं। मलासन का अर्थ होता है मल त्याग करते समय जिस आसन में हम बैठते है उसे ही मलासन कहते हैं।


मलासन के अन्य लाभ: मलासन को करने से पेट एवं कमर को काफी लाभ होता है। इसे नियमित करने से गैस और कब्ज की परेशानी से छुटकारा मिलता है।कमर, घुटने, मेरुदंड की मांसपेशिया लचीली बनती है। मलासन से घुटनों, जोड़ों, पीठ और पेट का दर्द कम होता है। पेट की चर्बी दूर होती है।




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रैपिड किट से प्रतिदिन औसतन 10 डेंगू मरीज की पुष्टि

नोएडा : रैपिड किट से प्रतिदिन नोएडा-ग्रेनो में औसतन 10 डेंगू मरीजों की पुष्टि हो रही है, लेकिन बिना क्रॉस जांच इन मरीजों में बीमारी की पुष्टि नहीं की जा रही है। बुधवार को जिला अस्पताल में 90 नमूनों की क्रॉस जांच होनी है। इसके बाद आधिकारिक तौर पर मरीजों की संख्या स्पष्ट होगी।


निजी और सरकारी अस्पतालों में एक सप्ताह से प्रतिदिन औसतन 10-12 मरीजों में डेंगू की पुष्टि की जा रही है। रैपिड किट से जांच में पुष्टि के बाद इन मरीजों का इलाज भी शुरू कर दिया गया है। इन मरीजों के नमूने स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए हैं। ताकि क्रॉस जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो सके। जिला अस्पताल में तीन दिन से लगातार एक-दो डेंगू मरीज मिल रहे हैं। इन मरीजों की जांच रैपिड किट से की गई है। जिला मलेरिया विभाग ने अब तक 13 डेंगू मरीजों की पुष्टि की है। इन मरीजों की पुष्टि भी क्रॉस जांच के बाद की गई है। अब तक एलाइजा किट से 101 लोगों की जांच की जा चुकी है। इसमें जिला अस्पताल में 42 और शिशु अस्पताल में 59 मरीजों की जांच हुई है। जिला अस्पताल में रैपिड किट से 974 की जांच हुई है।


जिला मलेरिया अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि नमूनों की क्रॉस जांच के बाद डेंगू मरीजों की सही संख्या स्पष्ट होती है। सभी निजी और सरकारी अस्पतालों से रैपिड किट से जांच के बाद मरीजों के नमूने भी मांगे गए हैं। ताकि क्रॉस जांच कर मरीज में डेंगू बीमारी की स्थिति जानी जा सके।




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