पुराने वाहन बेचने के लिए एनओसी की जरूरत को लेकर सीएससी, एनसीआरबी में करार

नई दिल्ली: पुराने वाहनों की बिक्री-खरीद के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) अब पूरे भारत में चार लाख से अधिक सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) से उपलब्ध होंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के तहत एक एसपीवी सीएससी ने इस सेवा को पूरे भारत में उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के साथ करार किया है। यह सेवा नागरिकों को निकटतम सीएससी से एनओसी प्राप्त करने में मदद करेगी। एनसीआरबी ने राज्य सरकारों से डिजिटल सेवा पोर्टल के साथ सीसीटीएनएस सेवाओं को एकीकृत करने का अनुरोध किया है, ताकि इन्हें सीएससी के नेटवर्क के माध्यम से नागरिकों के लिए वितरित और सुलभ बनाया जा सके। सीएससी उनके द्वारा संचालित समुदाय में इन सेवाओं के बारे में जागरूकता भी पैदा करेगा।


सीएससी एसपीवी के प्रबंध निदेशक डॉ. दिनेश त्यागी ने कहा, व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपयोग के लिए पूर्व स्वामित्व वाले वाहनों के लिए एक बढ़ता हुआ बाजार है। गतिशीलता वाणिज्यिक और उद्यमशीलता गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सीएससी का हमारा व्यापक नेटवर्क इस मांग का लाभ उठा सकता है और वाहन मालिकों को एनओसी प्रदान कर सकता है। नागरिक, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, इस साझेदारी से लाभान्वित हो सकते हैं, क्योंकि उन्हें एनसीआरबी कार्यालयों का दौरा करने के लिए लंबी दूरी की यात्रा नहीं करनी पड़ती है और वे अपने निकटतम सीएससी से एनओसी प्राप्त कर सकते हैं।


नागरिकों को इस सेवा का विस्तार करने के लिए, सीएससी डिजिटल सेवा पोर्टल अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) से संबंधित होगा। सीएससी वीएलई इस सेवा की वाहन मिलान सुविधा का उपयोग वाहन विवरण खोजने और पंजीकरण संख्या, चेसिस नंबर और इंजन नंबर प्रदान करके एनओसी उत्पन्न करने के लिए करेंगे।


वाहन एनओसी नागरिकों को पुरानी खरीद के लिए जाने से पहले वाहन की स्थिति का पता लगाने की अनुमति देगा। एनओसी प्रमाणपत्र से पता चलता है कि बिक्री के लिए वाहन किसी कारण से पुलिस रिकॉर्ड में है या नहीं।


स्वामित्व के हस्तांतरण से पहले आरटीओ द्वारा अनिवार्य रूप से एक एनओसी भी आवश्यक है। इस साझेदारी के साथ, नागरिक अपने निकटतम सीएससी पर जा सकते हैं और आरटीओ द्वारा आवश्यक एनओसी को आसानी से जनरेट और डाउनलोड कर सकते हैं।




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पांच दिनों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर

नई दिल्ली : अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में उबाल के बीच सोमवार को घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पांच दिनों के बाद टिकाव रहा। रविवार को लगातार पांचवें दिन 35-35 पैसे प्रति लीटर की बढोतरी की गयी थी जिसके बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल 96.32 रुपये प्रति लीटर के सर्वकालिक रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। मुंबई में पेट्रोल 113.46 रुपये और डीजल 104.38 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पेट्रोल सबसे महंगा 116.26 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 105.64 रुपये प्रति लीटर पर, पटना में पेट्रोल 111.24 रुपये और डीजल 102.93 रुपये प्रति लीटर, बेंगलुरू में पेट्रोल 111.34 रुपये और डीजल 102.23 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। राँची में पेट्रोल के साथ ही डीजल भी शतक लगा चुका है। अब दोनों की कीमतों में मात्र 26 पैसे का अंतर रह गया है। पेट्रोल 101.89 रुपये और डीजल 101.63 रूपये प्रति लीटर पर है। दिल्ली एनसीआर के नोएडा में पेट्रोल 104.76 रुपये और डीजल 96.47 रुपये प्रति लीटर पर है। अभी देश के अधिकांश प्रमुख बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर को पार कर चुकी है और डीजल भी शतक लगाने की ओर बढ़ रहा है। इस महीने में अब तक 25 दिनों में से 19 दिन इन दोनों की कीमतों में बढोतरी हुयी है। इस महीने में अब तक पेट्रोल 5.95 रुपये प्रति लीटर और डीजल 6.55 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को सिंगापुर कच्चे तेल में कारोबार तेजी के साथ शुरू हुआ। ब्रेंट क्रूड तीन वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड 0.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ 86.24 डॉलर प्रति बैरल पर और अमेरिकी क्रूड 1.03 प्रतिशत चढ़कर अक्टूबर 2014 के बाद के सात वर्ष के उच्चतम स्तर 84.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल 96.32 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। पेट्रोल-डीजल के मूल्यों की रोजाना समीक्षा होती है और उसके आधार पर हर दिन सुबह छह बजे से नई कीमतें लागू की जाती हैं।


देश के चार बड़े महानगरों में आज पेट्रोल और डीजल के दाम इस प्रकार रहे:


शहर का नाम--पेट्रोल (रुपये/लीटर)--(डीजल रुपये/लीटर)


दिल्ली----- 107.59------ 96.32

मुंबई------113.46------ 104.38

चेन्नई-----104.52 ------100.59

कोलकाता----108.11-------99.43




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रिलायंस का हरित ऊर्जा कारोबार ले रहा है आकार, कर-पूर्व लाभ में 10% योगदान देगा: रिपोर्ट

नई दिल्ली : मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. (आरआईएल) ने अपने हरित ऊर्जा कारोबार को आकार देने के लिए सौर, बैटरी और हाइड्रोजन क्षेत्र में निवेश की खातिर कई भागीदारियां की हैं। इनका अगले पांच साल में कंपनी के पूर्व-कर लाभ में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान रह सकता है। एक रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है।


गौरतलब है कि कंपनी ने आरईसी, नेक्सवेफ, स्टर्लिंग एंड विल्सन, स्टिसाल और अंबरी के साथ 1.2 अरब डॉलर की कुल लागत वाली साझेदारियों की घोषणा की है।


ब्रोकरेज कंपनी बर्नस्टीन ने एक रिपोर्ट में कहा है, "इन निवेश के साथ रिलायंस ने सौर, बैटरी और हाइड्रोजन के माध्यम से पूरी तरह से एकीकृत एंड-टू-एंड नवीकरणीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण शुरू करने के लिए विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी संबंधी पोर्टफोलियो हासिल कर लिया है।"


इसमें कहा गया, "रिलायंस अधिग्रहण की गयी प्रौद्योगिकियों का व्यावसायीकरण करेगी और भारत में विनिर्माण संयंत्र स्थापित करेगी।"


साथ ही कहा गया कि उम्मीद है कि रिलायंस स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए ईंधन सेल और प्रमुख सामग्री जैसी प्रौद्योगिकी में निवेश करना जारी रखेगी।


रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा अनुमान है कि नवीन ऊर्जा कारोबार वित्त वर्ष 2025-26 तक आरआईएल के ईबीआईटीडीए (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई) में करीब 10 प्रतिशत योगदान देगा।






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भारत बांड ईटीएफ से दिसंबर तक 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है सरकार

नई दिल्ली : सरकार भारत बांड ईटीएफ की अगली किस्त दिसंबर तक ला सकती है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।


अधिकारी ने बताया कि सरकार भारत बांड ईटीएफ से दिसंबर तक 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है। इस राशि का इस्तेमाल केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसई) की वृद्धि की योजना में किया जाएगा।


अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की कोष की जरूरत का आकलन किया जा रहा है और एक्सचेंज ट्रेडेड कोष (ईटीएफ) की तीसरी किस्त को चालू कैलेंडर वर्ष के अंत से पहले पेश किया जाएगा।


उन्होंने कहा, ''अभी हम इस राशि को अंतिम रूप दे रहे हैं। लेकिन यह 10,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी।''


भारत बांड ईटीएफ एक एक्सचेंज ट्रेडेड कोष है जो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बांड में निवेश करता है। ईटीएफ फिलहाल सिर्फ 'एएए' रेटिंग वाले बांड में निवेश करता है।


ईटीएफ के जरिये जुटाई गई राशि का इस्तेमाल सीपीएसई या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कर्ज जुटाने की योजना में होता है। इससे उनकी पूंजीगत व्यय की जरूरत को भी पूरा किया जाता है।




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पेट्रोल, डीजल की कीमतें में बढ़ोतरी जारी

नई दिल्ली : पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा और ईंधन की कीमतों में एक बार फिर 35 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ देश भर में इनके दाम अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए।


सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 105.14 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 111.09 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।


मुंबई में डीजल अब 101.78 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है, जबकि दिल्ली में इसके लिए 93.87 रुपये देने पड़ रहे हैं।


पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 35 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी का यह लगातार दूसरा दिन है। इससे पहले 12 और 13 अक्टूबर को दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था।


देश के ज्यादातर हिस्सों में पेट्रोल की कीमत पहले से ही 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर है, जबकि डीजल की दरें मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और बिहार सहित एक दर्जन राज्यों में 100 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर गई हैं।


स्थानीय करों और मालभाड़े के आधार पर विभिन्न राज्यों के बीच कीमतें अलग-अलग होती हैं।

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मैंने अपने ट्रैक्टर को सीएनजी वाहन में बदल लिया है : गडकरी

इंदौर : कच्चे तेल और ईंधन गैसों के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए देश में जैव ईंधन के उत्पादन की रफ्तार बढ़ाने पर जोर देते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को कहा कि उन्होंने खुद पहल करते हुए अपने ट्रैक्टर को सीएनजी वाहन में बदल लिया है।


गडकरी, प्रसंस्करणकर्ताओं के संगठन सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के इंदौर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सोयाबीन सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंस से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, "खुद मैंने अपने (डीजल चालित) ट्रैक्टर को सीएनजी से चलने वाले वाहन में बदल दिया है। कच्चे तेल और ईंधन गैसों के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए हमें सोयाबीन, गेहूं, धान, कपास आदि फसलों के खेतों की पराली (फसल अपशिष्ट) से बायो-सीएनजी और बायो-एलएनजी सरीखे जैव ईंधनों के उत्पादन को बढ़ावा देना चाहिए। इससे किसानों को खेती से अतिरिक्त आमदनी भी होगी।"


सड़क परिवहन मंत्री ने यह बात ऐसे वक्त कही है जब कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दामों में उछाल से देश में पेट्रोलियम ईंधनों के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं जिससे आम आदमी पर महंगाई का बोझ बढ़ गया है। गडकरी ने यह भी बताया कि फिलहाल भारत अपनी जरूरत का 65 प्रतिशत खाद्य तेल आयात कर रहा है और देश को इस आयात पर हर साल एक लाख 40 हजार करोड़ रुपये का खर्च करने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "इस आयात के कारण एक ओर देश के उपभोक्ता बाजार में खाद्य तेलों के भाव ज्यादा हैं, तो दूसरी ओर तिलहन उगाने वाले घरेलू किसानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है।"


गडकरी ने जोर देकर कहा कि खाद्य तेल उत्पादन में भारत की आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल करने के लिए देश में सरसों के जीन संवर्धित (जीएम) बीजों की तर्ज पर सोयाबीन के जीएम बीजों के विकास की दिशा में आगे बढ़ा जाना चाहिए क्योंकि सोयाबीन के मौजूदा बीजों में अलग-अलग कमियां हैं। उन्होंने कहा, "(सोयाबीन के जीएम बीजों को लेकर) मेरी प्रधानमंत्री से भी चर्चा हुई है और मुझे पता है कि देश में कई लोग खाद्य फसलों के जीएम बीजों का विरोध करते हैं। लेकिन हम दूसरे देशों से उस सोयाबीन तेल के आयात को नहीं रोक पाते, जो जीएम सोयाबीन से ही निकाला जाता है।"


केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि खासकर आदिवासी इलाकों में कुपोषण दूर करने के लिए सोया खली (सोयाबीन का तेल निकाल लेने के बाद बचने वाला पदार्थ) से खाद्य उत्पाद बनाने पर विस्तृत अनुसंधान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "हमारे देश में कई इलाकों में प्रोटीन की कमी से कुपोषण के कारण आदिवासी समुदाय के हजारों लोगों की मृत्यु हो रही है। सोया खली में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है।" गडकरी ने भारत के कृषि वैज्ञानिकों से अपील की कि वे सोयाबीन की प्रति एकड़ उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए इस तिलहन फसल के शीर्ष वैश्विक उत्पादकों-अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना के साथ बीज विकास के साझा विकास कार्यक्रम शुरू करने की कोशिश करें।




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देश में थर्मल पॉवर प्लांट में कोयले की कमी आई है, जिसकी वजह से बिजली उत्पादन कम हुआ है : सत्येंद्र जैन

नई दिल्ली : दिल्ली की केजरीवाल सरकार के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि देश में थर्मल पॉवर प्लांट में कोयले की कमी आई है। जिसकी वजह से बिजली उत्पादन कम हुआ है। दिल्ली में कोयले से बिजली उत्पादन नहीं होता है। दूसरे राज्यों के पॉवर प्लांट से दिल्ली में अधिकतम बिजली आपूर्ति की जाती है।‌ केंद्र सरकार से दिल्ली सरकार अपील करती है कि रेलवे वैगन का इंतजाम किया जाए और जल्द से जल्द कोयले को पावर प्लांट तक पहुंचाया जाए। दिल्ली सरकार कोशिश कर रही है कि किसी भी तरह बिजली खरीद कर पर्याप्त आपूर्ति की जाए।


देश में चल रहे कोयला संकट के मद्देनज़र दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने शनिवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की है। इस बैठक में बिजली विभाग के अधिकारियों और सभी ऊर्जा कंपनियों को बुलाया गया। इस दौरान सत्येंद्र जैन ने कहा कि पूरे देश में कोयले से चलने वाले पॉवर प्लांट में कोयले की कमी आई है। जिसकी वजह से बिजली उत्पादन बेहद कम हो गया है।


उन्होंने कहा कि देश में बिजली की मांग काफी कम है। इसके बाद भी पॉवर प्लांट बिजली का उचित उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। दिल्ली में कोयले से बिजली का उत्पादन नहीं किया जाता है। दिल्ली के बाहर स्थित पॉवर प्लांट से दिल्ली में अधिकतम बिजली आपूर्ति की जाती है। ज्यादातर बिजली केंद्र सरकार के एनटीपीसी से खरीदी जाती है, जहां कोयले का भंडार कम से कम एक महीने का रखना होता है, जो घट कर एक दिन का ही रह गया है। इसके अलावा ज्यादातर पावर प्लांट अपनी 100 फीसद क्षमता पर नहीं चल रहे हैं।


सत्येंद्र जैन ने कहा कि केंद्र सरकार से दिल्ली सरकार अपील करती है कि रेलवे वैगन का इंतजाम किया जाए और जल्द से जल्द कोयले को इन पॉवर प्लांट तक पहुंचाया जाए और कम से कम एक महीने का भंडार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही देश के सभी पॉवर प्लांट को उनकी 100 फीसद क्षमता पर चलाया जाए।


उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में तीन पॉवर प्लांट हैं। इनसे जितनी बिजली का उत्पादन हो सकेगा, दिल्ली सरकार द्वारा उतना उत्पादन किया जाएगा, चाहे वो किसी भी दर पर हो। दिल्ली सरकार कोशिश कर रही है कि किसी भी तरह और किसी भी दर पर बिजली खरीद कर दिल्ली में बिजली आपूर्ति को पूरा किया जाए।



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कोयले की कमी की वजह से कम क्षमता पर परिचालन कर रहे हैं पंजाब के बिजली संयंत्र, कटौती शुरू

चंडीगढ़ : पंजाब में ताप बिजली संयंत्रों में कोयले की भारी कमी के कारण बिजली कंपनी पीएसपीसीएल को उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है और राज्य में कई स्थानों पर बारी-बारी से बिजली कटौती की जा रही है।


पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि कोयले की कमी के कारण कोयला संचालित बिजली संयंत्र कम क्षमता पर परिचालन कर रहे हैं।


पीएसपीसीएल के अधिकारी ने कहा कि बिजली की स्थिति गंभीर हो गई है। राज्य में बिजली संयंत्रों के पास अब पांच दिन तक का कोयला भंडार बचा है।


उन्होंने कहा कि कोयला बचाने के लिए संयंत्रों का परिचालन पूरी क्षमता पर नहीं किया जा रहा है।


वर्तमान में राज्य में बिजली की मांग लगभग 9,000 मेगावॉट है।


अधिकारियों ने बताया कि कृषि क्षेत्र से बिजली की मांग के अलावा दिन का ऊंचा तापमान भी राज्य में बिजली की जरूरतों को बढ़ा रहा है।


हालांकि, पीएसपीसीएल के अधिकारियों ने न्यूनतम बिजली कटौती का दावा किया, लेकिन राज्य में कई स्थानों पर दो-तीन घंटे तक बिजली कटौती की खबरें हैं।



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यूपी में बने लकड़ी तथा जूट के उत्पादों की विदेश में बढ़ी मांग

लखनऊ : सूबे में पारंपरिक उद्योगों के जरिए निर्यात को बढ़ावा देने को लेकर यूपी सरकार की पहल का असर हुआ है। इसके चलते कोरोना महामारी के बावजूद लकड़ी, सिल्क, जूट और इनसे बने उत्पादों का अमेरिका तथा यूरोप के देशों में निर्यात बढ़ा है। उक्त देशों में यूपी के लखनऊ, कानपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, वाराणसी, भदोही और गोरखपुर सहित कई जिलों में लकड़ी, जूट, सिल्क से बनाए गए उत्पाद तथा कालीन आदि की मांग में इजाफा हुआ है।


बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष अप्रैल और मई माह में 744.15 करोड़ रुपए के कालीन, 72.87 करोड़ के कॉटन एवं सिल्क, 328,60 करोड़ रुपए के टेक्सटाइल और लकड़ी तथा लकड़ी से बने खिलौनों, फोटोफ्रेम तथा अन्य कलाकृतियों का 433.81 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ है जो वर्ष 2020 में हुए निर्यात से अधिक है। निर्यात के कारोबार में हुए इस इजाफे से उक्त जिलों में लकड़ी, सिल्क, जूट, कालीन तथा टेक्सटाइल के कारोबार को लाभ हुआ है।


अधिकारियों के अनुसार, निर्यात को बढ़ावा देने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले प्रोत्साहन के चलते ही इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल एवं मई में राज्य से 21,500.85 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ है। जो पिछले वर्ष के मुकाबले 152.67 फीसदी अधिक है। केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों से हुए निर्यात के जारी किए गए लैटेस्ट आंकड़ों में यह खुलासा किया गया है।


केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों से हुए निर्यात के जारी किए गए इन नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अप्रैल -मई में राज्य से 21,500.85 करोड़ रुपए का सामान निर्यात किया गया। जबकि बीते वर्ष अप्रैल-मई में 8511.34 करोड़ रुपए का सामान निर्यात किया गया था।


इन्ही आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष लकड़ी तथा जूट से बने उत्पाद और रेशम से बनी साड़ी, भदोही में बनी कालीन, दरी के अलावा टेक्सटाइल फैब्रिक, ओवन फैब्रिक, मैन्मेद स्टेपल फैब्रिक, फुटवियर, ग्लासवेयर, आयरन, स्टील, एल्युमिनियम, चावल, चीनी, दूध, आटा, प्लास्टिक उत्पाद, सिल्क, कृत्रिम फूल आदि का विदेशों से खूब निर्यात किया गया। अमेरिका और यूरोप जैसे देशों के साथ ही नेपाल, बंगालदेश और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों ने कोरोना काल के दौरान यूपी से बड़ी संख्या में ओडीओपी उत्पाद मंगवाए।


राज्य सरकार के अनुसार, इस वर्ष अप्रैल-मई में 43.51 करोड़ रुपए के कॉटन के कपड़े, 29.36 करोड़ रुपए के सिल्क उत्पाद, 744.15 करोड़ रुपए के कालीन का निर्यात किया गया। इसी प्रकार 742.47 करोड़ रुपए के फुटवियर का निर्यात किया गया, जबकि बीते साल 147.04 करोड़ रुपए का निर्यात किया गया था। इसी प्रकार इस वर्ष अप्रैल-मई में 310.77 करोड़ रुपए के ग्लासवेयर का निर्यात किया गया, जबकि बीते साल 39.99 करोड़ रुपए का निर्यात किया हुआ था। इसी प्रकार इस वर्ष 120.83 करोड़ रुपए के खिलौनों का निर्यात किया गया, जबकि बीते साल 26.19 करोड़ रुपए का निर्यात किया हुआ था। इसी तरह इस वर्ष 744.15 करोड़ रुपए के कालीन और टेक्सटाइल फैब्रिक का निर्यात किया गया, जबकि बीते साल 247.63 करोड़ रुपए का निर्यात किया हुआ था। लेदर से बने पर्स, बेल्ट, बैग तथा अन्य उत्पादों का निर्यात इस वर्ष 493.80 करोड़ रुपए का हुआ, जबकि बीते वर्ष 79.21 करोड़ रुपए के ही लेदर से बने उत्पादों का निर्यात हुआ था।


अब तो ताजे आम, अंगूर के साथ ताजे प्याज व सब्जियों के अलावा मूंगफली, प्रसंस्कृत फल, जूस व मेवे का निर्यात भी यूपी से हो रहा है। फलों व सब्जियों के बीज, खीरे, फूल की भी मांग बढ़ी है। पहली बार जामुन का निर्यात हुआ है।


प्रदेश सरकार द्वारा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए प्रयासों के चलते ही लकड़ी एवं जूट से बने उत्पादों के अलावा चावल, खिलौने, दवाई, कालीन, सिल्क, उर्वरक, मछली उत्पाद, चीनी और कृत्रिम फूल जैसे सामानों के विदेशों से खूब आर्डर मिले। जिसके चलते अब यूपी निर्यात के मामले में देश में अपने छठवें स्थान पर है। अब प्रदेश सरकार इस स्थान से ऊपर पहुंचने की मंशा रखती हैं। इस कारण दस देशों के राजदूतों के माध्यम से निर्यात को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही हर जिले में ओवरसीज ट्रेड प्रमोशन और फैसिलिटेशन सेन्टर बनाने का फैसला किया हैं। 




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फिर बढ़े वाहन ईंधन के दाम, दिल्ली में पेट्रोल, डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर

नई दिल्ली : पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शनिवार को फिर वृद्धि हुई। इससे देश में वाहन ईंधन के दाम नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं।


पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के अनुसार, शनिवार को पेट्रोल का दाम 25 पैसे लीटर और बढ़ाया गया है। वहीं डीजल कीमतों में 30 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हुई है।


इससे दिल्ली में पेट्रोल 102.14 रुपये प्रति लीटर के अपने सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गया है। मुंबई में यह 108.19 रुपये प्रति लीटर है।


दिल्ली में डीजल भी 90.47 रुपये प्रति लीटर की नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। मुंबई में डीजल 98.16 रुपये प्रति लीटर है।


स्थानीय करों की वजह से विभिन्न राज्यों में वाहन ईंधन कीमतों में भिन्नता होती है।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने की वजह से देश में वाहन ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। पिछले कुछ दिन में भारत द्वारा आयातित कच्चे तेल का औसत दाम 78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इस सप्ताह पेट्रोल कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी हुई है। इसे देश के कई प्रमुख शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार निकल गया है।


इसी तरह नौ दिन में डीजल के दाम सात बार बढ़ाए गए हैं। इससे मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना के कई शहरों में डीजल 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक के दाम पर बिक रहा है।


सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों....इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने 24 सितंबर से वाहन ईंधन कीमतों में फिर से संशोधन का सिलसिला शुरू किया है। 24 सितंबर से सात बार में डीजल 1.85 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल एक रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है।


जुलाई और अगस्त में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम घटने के बाद दिल्ली में पेट्रोल 65 पैसे प्रति लीटर और डीजल 1.25 रुपये प्रति लीटर सस्ता हुआ था।








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शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे गिरकर 74.36 पर पहुंचा

मुंबई :  घरेलू शेयर बाजारों में नरमी के बीच बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार के दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे गिरकर 74.36 पर पहुंच गया।


अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर रुख के साथ 74.28 पर खुला, तथा शुरुआती कारोबार में और गिरकर 74.36 पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 22 पैसे की गिरावट को दर्शाता है।


रुपया पिछले सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 74.14 पर बंद हुआ था।


इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.05 प्रतिशत गिरकर 94.29 पर पहुंच गया।


विदेशी संस्थागत निवेशक बुधवार को पूंजी बाजार में शुद्ध विक्रेता थे और शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार उन्होंने 1,896.02 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।


घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर, 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 49.18 अंक या 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,364.09 पर कारोबार कर रहा था। व्यापक एनएसई निफ्टी 20.85 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,690.45 पर कारोबार कर रहा था।


वहीं वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.34 प्रतिशत गिरकर 78.37 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। 






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तेल के ऊंचे दाम : लाभ व संकट


वर्ष 2015 में विश्व बाजार में तेल के दाम उछल रहे थे और 111 अमरीकी डालर प्रति बैरल के स्तर पर थे। इसके बाद 2020 में कोविड संकट के दौरान इनमें भारी गिरावट आई और दाम केवल 23 डालर प्रति बैरल रह गए। वर्तमान में पुनः इसमें कुछ वृद्धि हुई है और ये मूल्य आज 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गए हैं। इसी अवधि में देश के घरेलू बाजार में पेट्रोल के दाम की चाल बिल्कुल अलग रही है। 2015 में घरेलू बाजार में पेट्रोल के दाम 70 रुपए प्रति लीटर थे। जब 2020 में विश्व बाजार में तेल के दाम घटकर 23 डालर प्रति बैरल हो गए थे, उस समय हमारे बाजार में तेल के दाम घटे नहीं, बल्कि 70 रुपए प्रति लीटर के लगभग ही बने रहे। कारण यह कि जैसे-जैसे विश्व बाजार में तेल के दाम में गिरावट आई, उसी के समानांतर हमारी केंद्र सरकार ने तेल पर वसूल की जाने वाली एक्साइज ड्यूटी एवं राज्य सरकारों ने तेल पर वसूल किए जाने वाले सेल टैक्स में वृद्धि की। नतीजा यह हुआ कि विश्व बाजार में जितने दाम में गिरावट आई, उतना ही घरेलू टैक्स में वृद्धि हुई और बाजार में पेट्रोल का दाम 70 रुपए प्रति लीटर पर ही टिका रहा। इसके बाद इस वर्ष 2021 में विश्व बाजार में तेल के दाम पुनः बढ़े हैं और जैसा कि ऊपर बताया गया है, वर्तमान में ये 76 डालर प्रति बैरल पर आ गए हैं। लेकिन इस समय घरेलू दाम स्थिर नहीं रहे। विश्व बाजार में तेल के दाम के समानांतर घरेलू बाजार में पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं।


2020 के 70 रुपए से बढ़कर आज ये दिल्ली में 102 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। इस वर्ष में जैसे-जैसे विश्व बाजार में ईंधन तेल के दाम बढ़े, उस समय हमारी सरकार ने तेल पर वसूल किए जाने वाले टैक्स में कटौती नहीं की है और घरेलू बाजार में तेल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। केंद्र सरकार मालामाल हो रही है। वर्ष 2015 में केंद्र सरकार को तेल से 72 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिला था जो वर्तमान वर्ष में 300 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान है। यानी 2015 और आज की तुलना करें तो विश्व बाजार में तेल के दाम उस समय के 111 डालर से घट कर वर्तमान में 76 डालर रह गया है, लेकिन केंद्र सरकार का राजस्व 72 हजार करोड़ से बढ़कर 300 हजार करोड़ हो गया है। बिल्कुल स्पष्ट है कि सरकार ने वर्तमान में ईंधन तेल पर भारी टैक्स वसूल किया है। तेल के ऊंचे दाम का एक विशेष प्रभाव यह है कि महंगाई में वृद्धि होती है। पेट्रोल के साथ डीजल के दाम बढ़ते हैं जिससे माल की ढुलाई महंगी हो जाती है और बाजार में प्रत्येक माल महंगा हो जाता है। लेकिन केयर रेटिंग के अनुसार पेट्रोल के दाम का हमारे थोक मूल्य सूचकांक में 1.6 प्रतिशत का हिस्सा होता है और डीजल का 3.1 प्रतिशत का।


 यानी पेट्रोल के दाम में 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई तो थोक मूल्य सूचकांक में केवल 1.6 प्रतिशत की वृद्धि होगी। वर्तमान में पेट्रोल के दाम में 2015 की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, 70 रुपए से बढ़ कर यह 102 रुपए हो गए हैं। इस वृद्धि से थोक मूल्य सूचकांक में मात्र 0.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई होगी, ऐसा माना जा सकता है। डीजल के दाम में जो 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, उसका हमारे थोक मूल्य सूचकांक में प्रभाव 1.5 प्रतिशत माना जा सकता है। दोनों का सम्मिलित प्रभाव मात्र 2.5 प्रतिशत माना जा सकता है। तुलना में 2015 से 2021 के बीच में महंगाई इससे कहीं ज्यादा बढ़ी है। इससे स्पष्ट है कि महंगाई पर पेट्रोल के दाम में वृद्धि का प्रभाव कम और अन्य कारकों का प्रभाव ज्यादा है। इसलिए हम कह सकते हैं कि पेट्रोल के दाम में वृद्धि का महंगाई पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। पेट्रोल के दाम में वृद्धि का दूसरा संभावित प्रभाव मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों पर पड़ सकता है। लेकिन अपने देश में अधिकतर मैन्युफैक्चरिंग उद्योग बिजली से चलते हैं जिसका दाम बीते कुछ वर्षों में लगातार गिर रहा है। इसलिए उद्योगों पर भी पेट्रोल के बढ़े दाम का नकारात्मक प्रभाव नहीं दिखता है। पेट्रोल के दाम में वृद्धि का एक लाभ यह है कि हमारी आर्थिक संप्रभुता की रक्षा होती है। हम अपनी खपत का 85 प्रतिशत पेट्रोल आयात करते हैं जिससे कि हमारी अर्थव्यवस्था आयातों पर निर्भर हो जाती है। किसी भी वैश्विक संकट के समय हम दबाव में आ सकते हैं। जब घरेलू बाजार में पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं तो लोग ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों का उपयोग ज्यादा करते हैं, जैसे बस से यात्रा ज्यादा करना चाहेंगे जिसमें ईंधन की खपत कम होती है, अथवा बिजली की कार अथवा मेट्रो का उपयोग करेंगे।


इसलिए तेल के दाम बढ़ने से देश में पेट्रोल की खपत कम होगी। हमारी आयातों पर निर्भरता कम होगी और हमारी आर्थिक संप्रभुता की रक्षा होगी। तेल के ऊंचे दाम का दूसरा लाभप्रद प्रभाव पर्यावरण का है। तेल के जलने से कार्बन डाईआक्साइड का भारी मात्रा में उत्सर्जन होता है, फलस्वरूप धरती का तापमान बढ़ रहा है। बाढ़ आदि प्राकृतिक प्रकोप बढ़ रहे हैं। इसलिए तेल के ऊंचे मूल्य मूल रूप से देश के लिए लाभप्रद हैं। लेकिन संकट यह दिखता है कि तेल के ऊंचे मूल्य से वसूल किए गए राजस्व का उपयोग सरकार अपनी खपत को पोषित करने के लिए कर रही है। वर्तमान वर्ष 2021-22 में सरकार के पूंजी खर्च में 115 हजार करोड़ की वृद्धि हुई, जबकि पूंजी की बिक्री से 142 हजार करोड़ की प्राप्ति का अनुमान है। यानी तेल से अर्जित अतिरिक्त आय का उपयोग पूंजी खर्चों को बढ़ाने में नहीं किया गया है। इसी क्रम में जनकल्याण योजनाओं में भी खर्च में वृद्धि नहीं हुई है। उदाहरणतः मनरेगा में 34 प्रतिशत की कटौती हुई है और प्रधानमंत्री किसान योजना में 10 हजार करोड़ की कटौती हुई है। इससे स्पष्ट है कि तेल से अर्जित अतिरिक्त राजस्व का उपयोग सरकार अपने कर्मियों को वेतन देने अथवा अन्य खपत में कर रही है जो कि अनुचित है। अतः सही नीति यह है कि तेल दामों में वृद्धि की जाए। मेरे अनुमान से यदि और भी वृद्धि की जाए तो भी सही होगा, लेकिन शर्त यह है कि उससे अर्जित रकम का उपयोग नए निवेश के लिए किया जाए, न कि सरकार की खपत को पोषित करने में।


-भरत झुनझुनवाला-

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भारत ने 150 से अधिक प्राचीन वस्तुएं लौटाने के लिए अमेरिका का आभार जताया

नई दिल्ली : भारत सरकार ने 150 से अधिक प्राचीन कलाकृतियां लौटने में ‘उत्कृष्ट समर्थन’ के लिए न्यूयॉर्क जिला अटॉर्नी कार्यालय को धन्यवाद दिया है और बेशकीमती प्राचीन कलाकृतियों की वापसी के माध्यम से भारत-अमेरिका के लोगों के बीच संबंधों और सांस्कृतिक समझ को बढ़ाने के लिए इसकी भूमिका की सराहना की है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिका ने भारत को 157 कलाकृतियां और प्राचीन वस्तुएं सौंपी, जिन्हें मोदी भारत वापस लाए। मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडन, दोनों ने चोरी, अवैध व्यापार और सांस्कृतिक वस्तुओं की तस्करी से निपटने के प्रयासों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।


एक आधिकारिक बयान में शनिवार को कहा गया कि लगभग आधी कलाकृतियां (71) सांस्कृतिक हैं, जबकि अन्य आधी में हिंदू धर्म (60), बौद्ध धर्म (16) और जैन धर्म (9) से संबंधित लघु मूर्तियां हैं।


भारत को प्राचीन कलाकृतियां एवं वस्तुएं सौंपे जाने के लिए मोदी ने अमेरिका की सराहना की।


भारत के महावाणिज्य दूतावास की ओर से रविवार को ट्वीट किया गया, ‘‘भारत सरकार की ओर से न्यूयॉर्क के जिला अटॉर्नी कार्यालय और उनके दल को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने भारत को प्राचीन वस्तुएं लौटने में शानदार समर्थन दिया।’’


इन 157 प्राचीन वस्तुओं में 12वीं सदी की नटराज की कांस्य मूर्ती भी शामिल है।






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अमेरिकी डॉलर की कमी से श्रीलंका के खाद्य आयातक बुरी तरह प्रभावित

कोलोंबो : श्रीलंका में अमेरिकी डॉलर की भारी किल्लत के बीच आयातकों को अपने आयात बिलों का भुगतान करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और इसके कारण आवश्यक खाद्य पदार्थों के 1,000 से अधिक कंटेनर कोलंबो बंदरगाह पर फंस गए हैं।


हाल के हफ़्तों में श्रीलंका की स्थानीय मुद्रा में भारी गिरावट दर्ज की गई है और कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक बाजार की उच्च कीमतों से अधिकांश आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू गई हैं। सरकार ने जमाखोरी के लिए व्यापारियों को जिम्मेदार ठहराया है।


श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने 31 अगस्त को देश की मुद्रा के मूल्य में भारी गिरावट के कारण खाद्य कीमतों में वृद्धि के बाद बढ़ती मुद्रास्फीति को रोकने के लिए आर्थिक आपातकाल की घोषणा की थी।


वही खाद्य आयातकों ने कहा कि उन्होंने समाधान खोजने के लिए इस सप्ताह की शुरुआत में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के साथ बातचीत की थी।


खाद्य आयातकों ने चेतावनी दी कि इस स्थिति के कारण खाद्य पदार्थों और रसोई गैस की भारी कमी होगी। साथ ही आयातकों ने कहा है कि स्थानीय बैंकों में अपर्याप्त अमेरिकी डॉलर के कारण, वे कोलंबो बंदरगाह पर अपने माल को निकालने में असमर्थ हैं।


उपभोक्ता मामलों के मंत्री बंडुला गुणवर्धने ने कहा कि दूध, भोजन, गैस, गेहूं का आटा और सीमेंट की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी से जीवन यापन की लागत बढ़ने की आशंका है।






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पेट्रोल और डीजल में 16 वें दिन कोई बदलाव नहीं

नई दिल्ली : अमेरिका के तेल भंडार में गिरावट आने के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कल तेल की कीमतों में आयी तेजी के बीच बुधवार को दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार 17 वें दिन टिकाव बना रहा।


गत पांच सितंबर को इन दोनों की कीमतों में 15-15 पैसे प्रति लीटर की कमी की गयी थी। दिल्ली में आज इंडियन ऑयल के पंप पर पेट्रोल जहां 101.19 रुपये प्रति लीटर पर औैर डीजल 88.62 रुपये प्रति लीटर पर रहा।

तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल 101.19 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 88.62 रुपये प्रति लीटर पर रहा।


अमेरिका के तेल भंडार मे गिरावट आने के आंकड़़े जारी होेने के बाद कल कच्चे तेल में तेजी देखी गयी। अमेरिकी बाजार में कल ब्रेंट क्रूड 0.44 डॉलर बढ़कर 74.36 डॉलर प्रति बैरल पर और अमेरिकी क्रूड 1.27 डॉलर बढ़कर 70.56 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।


पेट्रोल-डीजल के मूल्यों की रोजाना समीक्षा होती है और उसके आधार पर हर दिन सुबह छह बजे से नई कीमतें लागू की जाती हैं।


देश के चार बड़े महानगरों में आज पेट्रोल और डीजल के दाम इस प्रकार रहे:

शहर का नाम--पेट्रोल (रुपये/लीटर)--(डीजल रुपये/लीटर)

दिल्ली----- 101.34------ 88.77

मुंबई------107.26------ 96.19

चेन्नई------98.96 --------93.26

कोलकाता----101.62-------91.71





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रिकाॅर्ड बनाने वाले शेयर बाजार पर रह सकता है दबाव

मुंबई :  सार्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे शेयर बाजार के अगले सप्ताह वैश्विक कारकों से दबाव में रहने का अनुमान जताया जा रहा है, जिसके मद्देनजर निवेशकों विशेषकर छोटे निवेशकों को सतर्कता बरतते हुये निवेश करने की सलाह दी गयी है। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 60 हजार अंक की ओर बढ़ते हुये बीते सप्ताह 59737.32 अंक के सार्वकालिक रिकाॅर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद लिवाली के बल पर 710.82 अंकों की साप्ताहिक बढ़त के साथ 59015.89 अंक पर रहा। इसी तरह से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी अब तक के रिकाॅर्ड स्तर 17792.95 अंक पर पहुंचने में सफल रहा था और सप्ताहांत पर 215.90 अंक चढ़कर 17585.15 अंक पर रहा। बीएसई में दिग्गज कंपनियों की तरह ही छोटी और मझौली कंपनियों में भी लिवाली का जोर रहा, जिससे मिडकैप 341.17 अंक बढ़कर 25046.48 अंक पर और स्मॉलकैप 361.69 अंक उठकर 28006.79 अंक पर रहा।

विश्लेषकों का कहना है कि अगले सप्ताह घरेलू स्तर पर कोई विशेष कारक नहीं दिख रहा है, जिससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव दिख सके लेकिन वैश्विक स्तर पर ऐसे कई कारक बन रहे हैं जिनका शेयर बाजार पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि अगला सप्ताह शेयर बाजार के लिए बहुत ही नाजुक हो सकता है क्योंकि सेंसेक्स 60 हजारी होने के लिए बेताब दिख रहा है। जिस तरह से बीते सप्ताह सेंसेक्स 59737 अंक के स्तर को छू चुका है उससे तो स्पष्ट है कि यह किसी भी समय 60 हजारी हो सकता है लेकिन वैश्विक स्तर पर होने वाले घटनाक्रम पर नजर रखना आवश्यक है।

विश्लेषकों का कहना है कि अगले सप्ताह एफओएमसी की बैठक 21 और 22 सितंबर को होने वाली है और उसके निर्णय का असर बाजार पर दिख सकता है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बॉन्ड पर चर्चा करने और बैंक ऑफ जापान के 22 सितंबर को मौद्रिक नीति जारी करने का असर भी बाजार पर दिख सकता है। इसके साथ ही बाजार के अब तक सार्वकालिक स्तर पर होने से विदेशी निवेशकों के मुनाफा काटने की आशंका भी बन रही है, जिससे घरेलू स्तर पर बाजार में करेक्शन दिख सकता है। इसके मद्देनजर छोटे निवेशकों विशेषकर खुदरा निवेशकाें को सतर्क रहने की जरूरत है। 



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दिल्ली-जयपुर इलेक्ट्रिक हाईवे के लिए एक विदेशी कंपनी से बातचीत: गडकरी

नयी दिल्ली :  केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उनका मंत्रालय दिल्ली से जयपुर तक इलेक्ट्रिक हाइवे के निर्माण के लिए एक विदेशी कंपनी से बातचीत कर रहा है।


गडकरी ने राजस्थान के दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक रेलवे इंजन की तरह बसों और ट्रकों को भी बिजली से चलाया जाएगा।


उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली से जयपुर तक इलेक्ट्रिक हाईवे बनाना मेरा सपना है। यह अभी भी एक प्रस्तावित परियोजना है। हम एक विदेशी कंपनी के साथ चर्चा कर रहे हैं।’’


गडकरी ने कहा कि एक परिवहन मंत्री के रूप में, उन्होंने देश में पेट्रोल और डीजल के उपयोग को खत्म करने का संकल्प लिया है।


गडकरी ने बृहस्पतिवार को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की प्रगति की समीक्षा की, जिसके चालू होने पर सड़क मार्ग से राष्ट्रीय राजधानी और वित्तीय केंद्र के बीच का सफर 24 घंटे की जगह 12 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है।


आठ लेन का यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात से होकर गुजरेगा।






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अपना ने टाइगर ग्लोबल, अन्य से 10 करोड़ डॉलर जुटाए

नई दिल्ली : ऑनलाइन रोजगार मंच अपना ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने टाइगर ग्लोबल की अगुवाई में करीब 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 734.7 करोड़ रुपये) जुटाए हैं।


कंपनी ने एक बयान में कहा कि श्रृंखला ‘सी’ दौर में आउल वेंचर्स, इनसाइट पार्टनर्स, सिकोइया कैपिटल इंडिया, मावेरिक वेंचर्स और जीएसवी वेंचर्स ने भागीदारी की। इस दौरान कंपनी का मूल्यांकन 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।


इस साल जून में अपना ने इनसाइट पार्टनर्स, टाइगर ग्लोबल, सिकोइया कैपिटल इंडिया और अन्य से सात करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 513 करोड़ रुपये) जुटाए थे। अपना 2019 में अपनी स्थापना से अब तक निवेशकों से 19 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक राशि जुटा चुकी है।





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अनाज, सब्जियों के दाम घटने से अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 5.3 प्रतिशत पर

नई दिल्ली :  अनाज और सब्जियों सहित खाद्य उत्पादों के दाम घटने से खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में मामूली घटकर 5.3 प्रतिशत रह गई। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। हालांकि, खाद्य तेल के दाम में इस दौरान वृद्धि दर्ज की गई।


यह लगातार तीसरा महीना है जबकि खुदरा मुद्रास्फीति नीचे आई है और रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर के दायरे में बनी हुई है।


उपभोक्ता मूल्यू सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इससे पिछले महीने जुलाई में 5.59 प्रतिशत थी। वहीं एक साल पहले अगस्त में यह 6.69 प्रतिशत पर थी।


राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति अगस्त में 3.11 प्रतिशत रही जो कि इससे पिछले महीने जुलाई में 3.96 प्रतिशत थी वहीं अगस्त, 2020 में यह 9.05 प्रतिशत के उच्चस्तर पर थी।


खुदरा मुद्रास्फीति मई में बढ़कर 6.3 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई थी। अप्रैल में यह 4.23 प्रतिशत थी। उसके बाद से यह लगातार नीचे आ रही है। जून में खुदरा मुद्रास्फीति 6.26 प्रतिशत तथा जुलाई में 5.59 प्रतिशत रही।


रिजर्व बैंक ने अगस्त में अपनी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों को यथावत रखा था। केंद्रीय बैंक अपनी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पर निर्णय के लिए मुख्य रूप से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पर गौर करता है।


सरकार ने केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया है।


एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, सब्जियों और अनाज एवं उत्पादों के दाम में क्रमश: 11.68 प्रतिशत और 1.42 प्रतिशत घट गई। लेकिन 'तेल एवं वसा' खंड में मूल्यवृद्धि एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 33 प्रतिशत रही।


त्योहारी मौसम के दौरान खाद्य तेलों की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने हाल में पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेलों पर मूल सीमा शुल्क घटा दिया है। उद्योग का मानना है कि इससे तेलों के खुदरा दाम चार से पांच रुपये प्रति लीटर घट जाएंगे।


हालांकि, उपभोक्ताओं की जेब पर 'ईंधन और प्रकाश' खंड अब भी भारी बना हुआ है। इस खंड में मुद्रास्फीति 12.95 प्रतिशत रही।


डीबीएस सिंगापुर की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि मुद्रास्फीति में गिरावट अनुकूल आधार प्रभाव तथा खाद्य वस्तुओं के दाम घटने की वजह से आई है। उन्होंने कहा कि तेल एवं वसा को छोड़कर अन्य उप खंडों की मुद्रास्फीति घटी है।


रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के 5.7 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है। केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि दूसरी तिमाही में यह 5.9 प्रतिशत, तीसरी में 5.3 प्रतिशत और चौथी में 5.8 प्रतिशत रहेगी। वहीं, अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति के 5.1 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया गया।


कोटक महिंद्रा बैंक की वरिष्ठ उपाध्यक्ष उपासना भारद्वाज ने कहा कि मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के अनुमान की तुलना में अधिक अनुकूल और कम रहेगी।


उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति के नरम रहने से नीति निर्माताओं को राहत मिलेगी और नीति के सामान्यीकरण की ओर से धीमी रफ्तार से चलने के लिए ज्यादा गुंजाइश होगी।









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सीएनजी और पीएनजी को लेकर जनता को लग सकता है महंगाई का झटका

नई दिल्ली : दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में सीएनजी और पीएनजी (पाइप वाली रसोई गैस) के दाम अक्टूबर में 10-11 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा निर्धारित गैस के दाम करीब 76 प्रतिशत बढऩे वाले हैं, जिसका असर सीएनजी और पीएनजी की कीमतों पर भी पड़ेगा। सरकार गैस अधिशेष वाले देशों की दरों का इस्तेमाल करती है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) जैसी कंपनियों को नामांकन के आधार पर दिए गए क्षेत्रों के लिए प्राकृतिक गैस की कीमतों की सरकार प्रत्येक छह माह में समीक्षा करती है। अगली समीक्षा एक अक्टूबर को होनी है।  


ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि एक अक्टूबर, 2021 से 31 मार्च, 2022 तक एपीएम या प्रशासित दर बढ़कर 3.15 डॉलर प्रति इकाई (एमएमटीटीयू) हो जाएगी। यह अभी 1.79 डॉलर प्रति इकाई है। इसके अलावा गहरे पानी वाले क्षेत्रों मसलन....रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी पीएलसी के केजी-डी6 क्षेत्र से गैस की दर 7.4 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो जाएगी। प्राकृतिक गैस एक कच्चा माल है जिसे वाहनों में इस्तेमाल के लिए सीएनजी और रसोई में इस्तेमाल के लिए पीएनजी में बदला जाता है।  


रिपोर्ट कहती है, ‘‘एपीएम गैस कीमतों में बढ़ोतरी शहर गैस वितरण (सीजीडी) कंपनियों के लिए चुनौती होगी। इसका आशय है कि उनके लिए सीएनजी और पाइप वाली प्राकृतिक गैस की लागत बढ़ेगी। एपीएम गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में सीएनजी का वितरण करने वाली कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लि. (आईजीएल) को अगले एक साल के दौरान कीमतों में भारी-भरकम बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। कुछ इसी तरह का कदम मुंबई में सीएनजी की आपूॢत करने वाली एमजीएल को भी उठाना पड़ेगा।’’ रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर गैस वितरण कंपनियों को कीमतों में 10-11 प्रतिशत की बढ़ोतरी करनी होगी।’’  


अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुख के अनुरूप अप्रैल, 2022 से सितंबर, 2022 के दौरान एपीएम गैस का दाम बढ़कर 5.93 डॉलर प्रति इकाई हो जाएगा। अक्टूबर, 2022 से मार्च, 2023 तक यह 7.65 डॉलर प्रति इकाई होगा। इसका मतलब है कि अप्रैल, 2022 में सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में 22-23 प्रतिशत की वृद्धि होगी। अक्टूबर, 2022 में दाम 11 से 12 प्रतिशत और बढ़ेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि एपीएम गैस मूल्य में बढ़ोतरी की वजह से अक्टूबर, 2021 से अक्टूबर, 2022 के दौरान एमजीएल और आईजीएल को कीमतों में 49 से 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी करनी होगी।  



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बासमती धान के मामले में एमपी को मिली बड़ी कामयाबी, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश-जीआइ टैग पर पुनर्विचार करे मद्रास हाईकोर्ट

भोपाल : प्रदेश में बासमती धान की खेती तो बरसों से होती है पर इसे बतौर बासमती धान मान्यता नहीं है। इसे हासिल करने के लिए शिवराज सरकार पिछले कार्यकाल से संघर्ष करती आ रही है, जिसे अब बड़ी सफलता मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए आदेश दिया है कि मद्रास हाईकोर्ट फिर भौगोलिक संकेतक (जीआइटी टैग) पंजीयन मामले में सुनवाई करे। प्रदेश सरकार के तर्कों को ध्यान में रखकर निर्णय ले।


प्रदेश के 13 जिलों में परंपरागत रूप से बासमती धान की खेती होती है लेकिन जीआइ टैग नहीं होने की वजह से इसे बासमती धान की मान्यता नहीं मिली है। इससे किसानों को बासमती धान की खेती करने पर भी उचित मूल्य नहीं मिला। इसके मद्देनजर शिवराज सरकार ने पिछले कार्यालय में जीआइ टैग के लिए आवेदन किया था। शुरुआत में मध्य प्रदेश के पक्ष में निर्णय आया था जिसे लेकर कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।


इसमें प्रदेश के पक्ष को खारिज कर दिया गया था, जिसके खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत दलीलों को स्वीकार करते हुए मद्रास हाईकोर्ट को इस मामले में फिर से सुनवाई करने के आदेश दिए हैं।


इन जिलों में होगी है बासमती धान

मुरैना, भिंड, ग्वालियर, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, होशंगाबाद, जबलपुर और नरसिंहपुर।


छह सौ पेज में रिकॉर्ड किया था प्रस्तुत

सरकार ने प्रदेश में बासमती धान की खेती और उसके विक्रय से जुड़े कारोबार के प्रमाण छह सौ पेज में प्रस्तुत किए थे। इसमें बताया गया था कि पांच मंडियों में वर्ष 2014-15 से फरवरी 2017 तक प्रदेश की उत्पादित बासमती पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के प्रसंस्करणकर्ताओं और निर्यातकों ने 80 लाख क्विंटल बासमती धान की खरीद की। आठ हजार ट्रकों से इसका परिवहन हुआ। प्रदेश में जितनी बासमती धान होती है उसमें से लगभग पचास प्रतिशत की खरीद अन्य राज्यों के ख्याति प्राप्त निर्यातक करते हैं। देश के कुल निर्यात में मध्य प्रदेश के किसानों की भागीदारी लगभग 15 प्रतिशत है।


मंडीदीप से अमेरिका, इंग्लैंड में होता है निर्यात

केंद्र सरकार की डीजीसीआइएस वेबसाइट पर मध्य प्रदेश के मंडीदीप कंटेनर डिपो से लगातार बासमती धान के निर्यात की जानकारी दी गई है। 2010-11 से 2017-18 तक प्रतिवर्ष बासमती चावल का निर्याज हुआ है। वर्ष 2016-17 में मंडीदीप से 44 हजार 218 टन बासमती चावल का निर्यात किया गया।


केंद्र सरकार ने दिया ब्रीडर सीड

केंद्र सरकार अप्रैल 1999 से वर्ष 2016 तक प्रदेश को लगातार बासमती का ब्रीडर सीड आवंटित करती रही है। 34 हजार 700 क्विंटल बीज शासकीय और अर्द्धशासकीय एजेंसियों के माध्यम से विक्रय किया गया। प्रदेश के किसानों ने शपथ पत्र दिए कि उनके पूर्वज 70 वर्ष से भी अधिक समय से बासमती की खेती करते आ रहे हैं।


ग्वालियर इस्टेट की रिपोर्ट में बासमती धान का उल्लेख

प्रदेश में बासमती धान की पारंपरिक खेती के प्रमाण दस्तावेजों में मिलते हैं। ग्वालियर इस्टेट की कृषि विभाग की वार्षि रिपोर्ट 1944-45 में स्पष्ट लिखा है कि बासमती प्रजाति की धान ने अच्छा परिणाम दिया। इंडियन इंस्टीट्यूट आफ रिसर्च हैदराबाद ने प्रतिवर्ष चावल की खेती के लिए कराए जाने वाले सर्वे के आधार प्रकाशित होने वाली पुस्तक में मध्य प्रदेश में बासमती की खेती का उल्लेख किया है।




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श्रीलंका में विदेशी मुद्रा भंडार का गंभीर संकट : वित्त मंत्री

कोलंबो : श्रीलंका गंभीर विदेशी मुद्रा संकट का सामना कर रहा है। वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे ने मंगलवार को संसद को यह जानकारी दी।


बासिल राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के छोटे भाई हैं।


श्रीलंका काफी हद तक पर्यटन और चाय के निर्यात पर निर्भर है। कोरोना वायरस महामारी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।


राजपक्षे ने कहा कि बाहरी संकट के अलावा घरेलू मोर्चे पर भी संकट है। देश का राजस्व घट रहा है जबकि खर्च लगातार बढ़ रहा है।


वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमारा देश गंभीर विदेशी मुद्रा संकट का सामना कर रहा है। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि देश का शुद्ध विदेशी मुद्रा भंडार ‘शून्य’ के पास है।’’


उन्होंने कहा कि कोविड-19 की वजह से इस साल सरकार का राजस्व अनुमान से 1,500 से 1,600 अरब रुपये घट गया है।


श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पयर्टन और चाय जैसी फसलों के निर्यात पर निर्भर करती है। महामारी की वजह से लागू यात्रा अंकुशों ने देश के पर्यटन क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। 






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टेलीग्राम ने वर्जन 8.0 अपडेट के साथ लाइव स्ट्रीम फीचर किया लॉन्च

नई दिल्ली : एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम ने अपने वर्जन 8.0 अपडेट के साथ असीमित दर्शकों के ग्रुप और चैनलों के लिए लाइव स्ट्रीम की शुरूआत की है।


अपडेट ने मीडिया से कैप्शन हटाने और अग्रेषित करते समय प्रेषक के नाम छिपाने,चैट सूची में वापस जाए बिना अपठित चैनल पर आसानी से स्विच करने और नए एनिमेटेड इमोजी के साथ एक बेहतर स्टिकर पैनल के विकल्प पेश किए हैं।


लाइव स्ट्रीम सुविधा असीमित दर्शकों का समर्थन करने के साथ-साथ उन्हें प्रसारण में शामिल होने की अनुमति देता है।


यूजर्स प्रेषक का नाम छिपा सकते हैं। मीडिया संदेशों पर कैप्शन छिपा सकते हैं, उन संदेशों को अचयनित कर सकते हैं जिन्हें वे भेजना नहीं चाहते हैं, और यहां तक कि अगर उन्होंने गलत चैट को टैप किया है तो प्राप्तकर्ता को भी बदल सकते हैं।


यूजर्स के पास अब चैट सूची में वापस आए बिना चैनलों के माध्यम से स्क्रॉल कर सकते है।


यदि चैट सूची को फोल्डर या सेव चैट के साथ व्यवस्थित किया गया है, तो एप यूजर्स द्वारा सेट की गई संरचना का पालन करेगा।


ऐप अब स्टिकर पैनल में हाल ही में प्रयुक्त के ऊपर ट्रेंडिंग स्टिकर्स दिखाता है।


यूजर्स भविष्य के लिए एक पैक सहेज सकते हैं और ऐप में अब स्टिकर सुझावों के लिए प्रीव्यू हैं।






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रिलायंस और बैंकिंग शेयरों में लिवाली से सेंसेक्स हुआ 58 हजार के पार

मुंबई : बैंकिंग समूह और देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में हुयी लिवाली के बल पर सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को शेयर बाजार नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया और इस दौरान लिवाली के बल पर बीएसई का सेंसेक्स 58 हजार अंक के स्तर को पहली बार पार करते हुये 58115.69 अंक पर पहुंच गया। इस दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 17300 अंक के स्तर को पार करते हुये 17311.95 अंक के अब तक के सर्वकालिक उच्चतम सतर पर पहुंच गया। सेंसेक्स लिवाली के बल पर 131 अंकों की बढ़त के साथ 57983.45 अंक पर खुला। शुरूआती कारोबार में ही यह 58115.69 अंक के अब तक रिकार्ड स्तर पर पहुंचा। हालांकि इसी दौरान बिकवाली शुरू हो गयी जिससे यह 57836.33 अंक के निचले स्तर तक उतरा। अभी यह 89.87 अंकों की बढ़त के साथ 57942.41 अंक पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी लिवाली के बल पर 28 अंकाें की बढ़त के साथ 17262.45 अंक पर खुला। शुरूआती कारोबार में ही यह 17311.95 अंक के उच्चतम स्तर तक चढ़ा लेकिन बिकवाली के दबाव में यह 17230.20 अंक के निचले स्तर तक फिसला। अभी यह 25.10 अंक चढ़कर 17259.25 अंक पर कारोबार कर रहा है। 




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मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संघ रुड़की एआरटीओ का धरना जारी

आज दिनांक 19 2021 को मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संघ रुड़की एआरटीओ का धरना जारी रहा आज कार्य पूर्ण रूप से बंद है और कल भी रहेगा यह घोषणा शैलेंद्र सिंह बिष्ट और संजय तिवारी के द्वारा कार्यालय एआरटीओ बेलड़ा में की गई उसके बाद शैलेंद्र मिश्र और संजय तिवारी ने कहां कि यह हड़ताल हमारी इस वजह से है कि हमारे प्रमोशन में कुछ त्रुटि सरकार की ओर से रह गई है जिस कारण हमारे प्रमोशन डेढ़ साल से अटके हुए हैं उत्तराखंड सरकार इस और कोई ध्यान नहीं दे रही है इस कारण कर्मचारियों को यह कदम उठाना पड़ा है इस पर संजय तिवारी ने बोलते हुए कहां की हम लोग उत्तराखंड बनाने में अपनी जान की बाजी लगाकर उत्तराखंड बनाया जिसका प्रभाव उत्तराखंड वालों पर कुछ नहीं पड़ रहा है हमें यह लड़ाई किसी स्तर तक भी लड़नी पड़ी तो लड़ेंगे धरना जारी रहेगा अगली रणनीति उपरोक्त कार्यालय द्वारा जारी की जाएगी इसमें और मिनिस्टीरियल कर्मचारी भी साथ आने वाले हैं यह घोषणा सभी कर्मचारियों के द्वारा की गई पूरा कॉम बंद पड़ा है जनता पूरी तरह से परेशान है किसी को टैक्स जमा करवाना है किसी को लाइसेंस बनवाना है किसी को रजिस्ट्रेशन करवाना है सभी काम बंद है इस प्रकार से गवर्नमेंट का रेवेन्यू भी कम हो रहा है जल्दी ही इस पर सरकार द्वारा अंकुश नहीं लगाया गया तो सभी यूनियन सामने आ जाएगी

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सोना 100 रुपये टूटा, चांदी 134 रुपये कमजोर

नई दिल्ली : रुपये के मूल्य में सुधार के बीच मंगलवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 100 रुपये घटकर 46,272 रुपये प्रति दस ग्राम रह गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी।


इससे पिछले कारोबारी सत्र में सोना 46,372 रुपये प्रति दस ग्राम पर बंद हुआ था।


चांदी की कीमत भी 134 रुपये घटकर 62,639 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 62,773 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।


घरेलू शेयर बाजारों में तेजी को देखते हुए विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार के आरंभिक कारोबार में ही रुपया चार पैसे बढ़कर 73.25 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया था।


अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना तेजी के साथ 1,815 डॉलर प्रति औंस पर बोला गया। वहीं चांदी 24.16 डॉलर प्रति औंस पर लगभग अपरिवर्तित रही।




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सेब के दाम गिरने पर एक मंच पर पहली बार एकजुट 17 बागवान संगठनों ने भरी हुंकार

शिमला : हिमाचल प्रदेश में सेब की फसल के रेट गिरने से पैदा हुए संकट के बीच प्रदेश के 17 बागवान संगठनों ने एक बैनर के तले इकट्ठा होकर मांगों को लेकर हुंकार भरी है। सोमवार को राजधानी शिमला के कालीबाड़ी हाल में संयुक्त किसान मंच बनाकर एकत्रित हुए प्रदेश के कोने-कोने से आए सेब बागवानों ने दाम गिरने की समस्या को सुलझाने के लिए विचार साझा किए। 


इस सम्मेलन में सभी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े बागवान आए। उन्होंने व्यापारियों, कारपोरेट घरानों आदि की धोखाधड़ी के अलावा सरकार की उदासीनता पर भी निशाना साधा। सम्मेलन में माकपा विधायक राकेश सिंघा और शिमला ग्रामीण के कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह भी मौजूद हुए। संयुक्त किसान मंच ने विधायकों को मंच पर बैठाने के बजाय सभागार में अग्रिम पंक्ति में सेब बागवानों के बीच में ही बैठाया, जिससे इस सम्मेलन के गैर राजनीतिक होने का संदेश दिया जा सके। 


जुब्बल कोटखाई से भाजपा से टिकट की दावेदार नीलम सरईक भी मौजूद रहीं। भाजपा से जुड़े बागवान नेता हरीश चौहान, माकपा नेता संजय चौहान समेत कई गणमान्य लोग मौजूद हुए। ज्यादातर बागवान नेताओं ने सेब के रेट में गिरावट को एक साजिश करार दिया। किसानों और बागवानों ने कारपोरेट घरानों की ओर से की जा रही लूट को बंद करने और अन्य फसलों के न्यूनतम मूल्य को कानूनी रूप से लागू करने की सरकार से मांग उठाई। 


यह पहला मौका रहा कि 17 किसानों-बागवानों के संघ ने एक साथ सेब के गिरते दामों को लेकर सेब खरीद कंपनियों की मनमानी के खिलाफ एक सुर में विरोध किया है। संवाद में मौजूद रहे इन लोगों ने एक सुर में प्रदेश सरकार से जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की मांग की, वहीं सरकारी एजेंसियों एचपीएमसी और हिम फेड के माध्यम से सेब की खरीद सुनिश्चित करने की मांग उठाई। 


मिलकर प्रभावी ढंग से अपनी मांग उठा सकेंगे किसान बागवान : हरीश चौहान

संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि सेब के दाम गिरने के बाद एक मंच पर एकत्र हुए बागवान इस समस्या के समाधान और भविष्य के लिए इसका स्थायी समाधान करने पर चर्चा के लिए एकत्र हुए हैं। संवाद में दो विधायक भी शामिल हुए हैं। हर राजनीतिक दल से जुड़े बागवान भी इसमें आए हैं। सभी की एक ही मांग है कि सेब के न्यूनतम मूल्य की गारंटी हो। 


किसानों-बागवानों को एकजुट करने की पहल अच्छी : नीलम सरईक

भाजपा नेत्री और बागवान नीलम सरईक ने कहा कि किसानों-बागवानों को एक मंच पर लाने की पहल अच्छी है। हम सरकार के खिलाफ नहीं हैं, मगर इस संवाद में किसानों-बागवानों के सुझावों पर मूल्य निर्धारण को ठोस नीति की मांग रहेगी। मंडी में जो रेट कम हुए हैं, उसके लिए किसी एक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, इसमें हम बागवानों की भी कमियां हो सकती हैं। इसमें किस तरह सुधार हो कि अच्छे दाम मिलें, इस पर विचार कर आगे बढ़ना होगा। 


सरकार की सेब सीजन के लिए व्यवस्थाओं में रही कमी : यशवंत छाजटा 

बड़े बागवानों में गिने जाने वाले जिला शिमला कांग्रेस अध्यक्ष यशवंत छाजटा ने कहा कि सेब के रेट में इस बार आई गिरावट के लिए सरकार की प्लानिंग में खामियां रही हैं। समय से रेट निर्धारण पर निर्णय नहीं लिया, ठोस नीति नहीं बनाई गई। गिरते दामों में सरकार के साथ कंपनियों की सांठगांठ से भी इंकार नहीं किया जा सकता। सरकार ऐसी व्यवस्था करे कि रेट सरकार तय करे, कंपनी नहीं। 


बागवानी को बचाने के लिए मिलकर बढ़ना होगा आगे : विजय राजटा 

किसान बागवान संघर्ष मंच नारकंडा से जुडे़ विजय राजटा ने कहा कि किसान को इस बार मंडी में अपने सेब को पिछले वर्ष के मुकाबले आधे दाम मिल रहे हैं। यह सेब खरीद कंपनियों की मनमानी और सरकार के इस पर कोई नियंत्रण न होने का नतीजा है, जिससे किसान को लागत भी नहीं मिल रही। इसके लिए सभी को एकजुट होकर एमआईएस के तहत सेब खरीद की व्यवस्था की मांग उठानी होगी। 


इस बार गंभीर हो गई सेब के रेट गिरने की समस्या : रोहित चौहान 

किसान सभा से जुडे़ जुब्बल के युवा बागवान और किसान सभा के सदस्य रोहित चौहान का कहना है कि पिछले तीन से चार सालों से सेब के रेट गिराए जाते रहे हैं, मगर इस बार रेट इतने गिरे हैं कि समस्या गंभीर हो गई। सरकार को न्यूनतम मूल्य तय करने के साथ भविष्य में इसका स्थायी समाधान करने के लिए सीए स्टोर खोलने के साथ मंडियों की व्यवस्थाओं को सुधारने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। 


ग्रेड के हिसाब से तय करे सरकार सेब का रेट : ईशित भैहक

कोटगढ़ के युवा बागवान ईशित भैहक का कहना है कि सरकार स्वयं रेट तय करे। मार्केट पर लगातार निगरानी रखकर कंपनियों को कारोबार की अनुमति देने की व्यवस्था करे। इससे ही बागवानों के हित और करोड़ों की सेब आर्थिकी सुरक्षित रह सकेगी। इसके लिए सरकार को हितधारकों और बागवानों से सुझाव लेकर भविष्य के लिए ठोस नीति बनानी होगी। 




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एफपीआई ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजारों में 986 करोड़ रुपये डाले

नई दिल्ली : विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजारों में मात्र 986 करोड़ रुपये डाले हैं। भारतीय शेयरों को लेकर वैश्विक निवेशकों का रुख सतर्कता वाला बना हुआ है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने दो से 27 अगस्त के दौरान शेयरों में 986 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस दौरान ऋण या बांड बाजार में उनका निवेश 13,494 करोड़ रुपये रहा। इस तरह भारतीय बाजारों में उनका शुद्ध निवेश 14,480 करोड़ रुपये रहा। जुलाई में एफपीआई ने 7,273 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक (प्रबंधक, शोध) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने जब से मौद्रिक नीति रुख को उम्मीद से पहले सख्त करने का संकेत दिया है, भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी निवेशकों का प्रवाह उत्साहजनक नहीं है।'' उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के पुनरोद्धार, विभिन्न राज्यों में लॉकडाउन में ढील, कारोबारी गतिवधियां खुलने, टीकाकरण तेज होने और बाजारों के अपने सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंचने के बावजूद भारतीय शेयर बाजारों को लेकर एफपीआई का रुख सतर्कता वाला है। कोटक सेक्योरिटीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष (इक्विटी तकनीकी शोध) श्रीकान्त चौहान ने कहा कि भारत को छोड़कर अन्य सभी उभरते बाजारों के प्रति एफपीआई का रुख उत्साहजनक रहा। इस दौरान ताइवान के बाजार को 18.4 करोड़ डॉलर, दक्षिण कोरिया को 16.6 करोड़ डॉलर, इंडोनेशिया को 12.5 करोड़ डॉलर और फिलिपीन को 2.3 करोड़ डॉलर का निवेश मिला।






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भारत में स्वदेशी पोत निर्माण का हब बनने की असीम संभावना है : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली :  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि देश में स्वदेशी पोत निर्माण का हब बनने की ''असीम संभावना'' है। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र घरेलू उद्योग को विश्व स्तरीय बनाने में मदद के लिए कई नीतियां लाया है। भारतीय तटरक्षक बल के पोत (आईसीजीएस) 'विग्रह' को यहां नौसेना के बेड़े में शामिल करने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में सिंह ने कहा कि अगले दो वर्षों में दुनियाभर में सुरक्षा पर खर्च दो लाख दस हजार करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा। 'विग्रह' सात अपतटीय गश्ती जहाजों में आखिरी जहाज है। उन्होंने कहा, ''ज्यादातर देशों का पूरे एक साल के लिए भी इस स्तर का बजट नहीं है। अगले पांच वर्षों में इसके कई गुना तक बढ़ने की संभावना है। ऐसी स्थिति में आज हमारे पास अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करने, नीतियों का फायदा उठाने और देश को स्वदेशी जहाज निर्माण का हब बनाने की ओर बढ़ने की असीम संभावना है।'' रक्षा मंत्री ने कहा, ''मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि इन संभावनाओं पर विचार करते हुए सरकार ने विश्व स्तर पर पहचान बनाने के लिए पहले ही ऐसी नीतियां बनायी है जो हमारे घरेलू उद्योग को मदद करती हैं चाहे वह सार्वजनिक क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र की संस्था हो।'' आईसीजीएस विग्रह पर उन्होंने कहा, ''इसके डिजाइन से लेकर विकास तक यह जलपोत पूरी तरह स्वदेशी है।'' उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा के इतिहास में पहली बार निजी क्षेत्र की कंपनी लार्सन एंड टूब्रो के साथ एक या दो नहीं बल्कि सात जहाजों के लिए करार हुआ है। सिंह ने कहा, ''सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 2015 में इस समझौते पर हस्ताक्षर के सात वर्षों के भीतर आज इन सभी सात जहाजों को शामिल करने की प्रक्रिया पूरी हो गयी है।'' रक्षा विभाग ने एक बयान में कहा कि 98 मीटर लंबे जहाज में 11 अधिकारी और 110 नौसैनिकों के सवार होने की क्षमता है तथा इसे लार्सन एंड टूब्रो शिप बिल्डिंग लिमिटेड ने बनाया है। यह उन्नत तकनीकी रडार, नौवहन और संचार उपकरणों, सेंसर से लैस है। आईसीजीएस विग्रह दोहरे इंजन वाले एक हेलीकॉप्टर और चार तेज गति वाली नौकाओं का भार उठा सकता है। जहाज समुद्र में तेल बिखरने से निपटने के लिए प्रदूषण नियंत्रण उपकरण का भार भी उठा सकता है। यह जहाज 40/60 बोफोर्स गन से लैस है। सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे, तटरक्षक बल के महानिदेशक के. नटराजन और तमिलनाडु के उद्योग मंत्री थंगम थेन्नारासू ने कार्यक्रम में भाग लिया।





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मूडीज ने एजीईएल के प्रस्तावित डॉलर पत्र को बीए3 रेटिंग दी

नई दिल्ली : मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस ने अडाणी ग्रीन एनर्जी के प्रस्तावित अमेरिकी डॉलर प्रवर प्रत्याभूत पत्र को बीए3 रेटिंग दी है। मूडीज की रेटिंग के पैमाने के अनुसार बीए रेटिंग को पर्याप्त जोखिम के अधीन माना जाता है। मूडीज ने एक बयान में कहा कि उसने अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) द्वारा जारी किए जाने वाले प्रस्तावित अमेरिकी डॉलर प्रवर प्रत्याभूत पत्र को बीए3 रेटिंग दी है। एजीईएल मुख्य रूप से यूएसडी पत्रों से मिली धनराशि का इस्तेमाल अपनी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहायक कंपनियों द्वारा अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए करेगी। मूडीज के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ साख अधिकारी अभिषेक त्यागी ने कहा कि एजीईएल के प्रस्तावित पत्रों को दी गई बीए3 रेटिंग कंपनी के पूर्वानुमानित नकदी प्रवाह को दर्शाती है, जो दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) द्वारा समर्थित है। एजीईएल के ऋण प्रोफाइल को इसके शेयरधारकों-अडाणी समूह और टोटल एनर्जी का समर्थन प्राप्त है।



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गन्ने के एफआरपी में वृद्धि पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के मुकाबले अपर्याप्त : टिकैत

नई दिल्ली : भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने मिलों द्वारा गन्ना किसानों को दिए जाने वाले न्यूनतम मूल्य में वृद्धि को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के मद्देनजर ''अपर्याप्त'' बताया। मिलों को, गन्ना किसानों को प्रति क्विंटल पांच रुपये अधिक देना होगा।केंद्र सरकार ने बुधवार को 2021-22 के नये विपणन सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी (एफआरपी) मूल्य पांच रुपये बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। हालांकि, इसके साथ ही सरकार ने चीनी के बिक्री मूल्य में तत्काल बढ़ोतरी से इनकार किया है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बुधवार को हुई बैठक में 2021-22 के विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य बढ़ाने का फैसला किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे किसानों के हित में लिया गया ''महत्वपूर्ण'' फैसला बताया और कहा कि इससे चीनी मिल से जुड़े श्रमिकों को भी लाभ होगा।बुधवार की शाम को यहां पत्रकारों से बातचीत में टिकैत ने कहा, ''गन्ने के एफआरपी में यह वृद्धि किसानों को स्वीकार्य नहीं है क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के मुकाबले यह अपर्याप्त है।''उन्होंने मांग की कि गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य पेट्रोल, डीजल और उन अन्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के अनुरूप होना चाहिए जो किसान फसल उगाने में इस्तेमाल करते हैं।खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि केंद्र के फैसले से पांच करोड़ गन्ना किसान और उन पर निर्भर लोगों को फायदा होगा। साथ ही चीनी मिलों और संबंधित गतिविधियों में शामिल करीब पांच लाख कामगारों को भी लाभ होगा।








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केन्द्र ने गन्ने का मूल्य 290 रु प्रति क्विंटल किया

नई दिल्ली : सरकार ने अक्टूबर, 2021 से शुरू होने वाले अगले विपणन सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी (एफआरपी) मूल्य पांच रुपये बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 2021-22 के विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य बढ़ाने का फैसला किया गया। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि इस फैसले का फायदा पांच करोड़ से ज्यादा गन्ना किसानों और उनके आश्रितों को मिलेगा। साथ ही इस फैसले का सकारात्मक असर चीनी मिलों और उससे जुड़े हुई कार्यों में लगे पांच लाख श्रमिकों पर भी देखने को मिलेगा।

उन्होंने कहा, “ केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद गन्ने के एफआरपी में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 2013-14 के दौरान देश में गन्ने का एफआरपी 210 रुपए प्रति क्विंटल होता था जो अब बढ़कर 290 रुपे प्रति क्विंटल हो गया है। सात वर्ष में गन्ने के एफआरपी में 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ”

श्री गोयल ने कहा कि चीनी वर्ष 2019-20 में गन्ना किसानों को 76000 करोड़ रुपये भुगतान करना था और उसमें अधिकतर भुगतान हो गया है, केवल 142 करोड़ रुपए का भुगतान ही बचा है।

उन्होंने कहा कि चालू चीनी वर्ष 2020-21 के दौरान गन्ना किसानों को 91000 करोड़ रुपए का भुगतान होना था जिसमें से 86000 करोड़ रुपए का भुगतान हो चुका है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “ 290 रुपए प्रति क्विंटल का भाव उन गन्ना किसानों को मिलेगा जिनके गन्ने से चीनी की रिकवरी की दर 10 प्रतिशत होगी, जिन गन्ना किसानों के गन्ने से चीनी की रिकवरी 9.5 प्रतिशत या इससे कम रहेगी उन्हें 275 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिलेगा। ”

उल्लेखनीय है कि हर साल गन्ना पेराई सत्र शुरू होने से पहले केंद्र सरकार एफआरपी की घोषणा करती है। मिलों को यह न्यूनतम मूल्य गन्ना उत्पादकों को देना होता है।





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पेट्रोल डीजल में कोई बदलाव नहीं

नई दिल्ली : अंतर्रष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों के तेजी के बावजूद बुधवार को घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें यथावत रही। मंगलवार को इन दोनों की कीमतों में 15-15 पैसे प्रति लीटर की कमी की गयी थी। आज दिल्ली में आज इंडियन ऑयल के पंप पर पेट्रोल जहां 101.49 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 88.92 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रहा। तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार, आज दिल्ली में पेट्रोल 101.49 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 88.92 रुपये प्रति लीटर पर रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुनिया भर में कोविड-19 के मामलों में फिर से वृध्दि होने के बावजूद कल कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़ने लगी है। कल कारोबार की समाप्ति के समय ब्रेंट क्रूड 2.48 डॉलर प्रति बैरल चढ़ कर 71.05 डॉलर प्रति बैरल पर और डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 2.08 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 67.54 डॉलर पर बंद हुआ था। पेट्रोल-डीजल के मूल्यों की रोजाना समीक्षा होती है और उसके आधार पर हर दिन सुबह छह बजे से नई कीमतें लागू की जाती हैं।


देश के चार बड़े महानगरों में आज पेट्रोल और डीजल के दाम इस प्रकार रहे :


शहर का नाम--पेट्रोल (रुपये/लीटर)--(डीजल रुपये/लीटर)

दिल्ली----- 101.94------ 88.92

मुंबई------107.52------ 96.48

चेन्नई------99.20 --------93.52

कोलकाता----101.82-------91.98



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यूलर मोटर्स को ई-कॉमर्स कंपनियों से 2,500 इकाइयों का ऑर्डर मिला

नई दिल्ली : इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता यूलर मोटर्स ने सोमवार को कहा कि उसे बिगबास्केट और उड़ान सहित कई ई-कॉमर्स कंपनियों से अपने आगामी इलेक्ट्रिक तिपहिया मालवाहक वाहन की कुल 2,500 इकाइयों का ऑर्डर मिला है।


इसमें शहर के अंदर डिलीवरी के लिए हाइपरलोकल और बिजनेस टू बिजनेस (बी2बी) डिलीवरी कंपनियों के ऑर्डर भी शामिल हैं।


यूलर मोटर्स ने एक बयान में कहा कि कंपनियां अपने कारोबार को नया रूप देने और मजबूत करने के लिए दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में उसके ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) तैनात करेंगी।


इन वाहनों की डिलीवरी अगले छह से आठ महीने में कर दी जाएगी।


यूलर मोटर्स के संस्थापक और सीईओ सौरव कुमार ने कहा, "हम बाजार में पेश किए जाने से पहले ऑर्डर की बुकिंग देखकर खुश हैं, इससे हमारे ग्राहकों के विश्वास और हमारे उत्पाद के मजबूत प्रदर्शन और मूल्य प्रस्ताव का पता चलता है।"


उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली की यह कंपनी अगली तिमाही में त्योहारी सीजन के दौरान अपना पहला तिपहिया मालवाहक वाहन पेश करेगी।





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सेंसेक्स 226 अंक चढ़ा, निफ्टी 16,500 अंक के पास

मुंबई : टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), एचसीएल टेक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में लाभ के बीच सोमवार को सेंसेक्स 226 अंक चढ़ गया। वैश्विक बाजारों के सकारात्मक रुख से भी बाजार को मजबूती मिली।


बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स दिन में कारोबार के दौरान 450 अंक तक ऊपर गया। अंत में यह 226.47 अंक या 0.41 प्रतिशत की बढ़त के साथ 55,555.79 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 45.95 अंक या 0.28 प्रतिशत के लाभ से 16,496.45 अंक पर बंद हुआ।


सेंसेक्स की कंपनियों में एचसीएल टेक का शेयर सबसे अधिक चार प्रतिशत चढ़ गया। टीसीएस, बजाज फिनसर्व, नेस्ले इंडिया, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस तथा टेक महिंद्रा के शेयर भी लाभ में रहे।


वहीं दूसरी ओर महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज ऑटो, अल्ट्राटेक सीमेंट तथा पावरग्रिड के शेयरों में गिरावट आई।


रिलायंस सिक्योरिटीज के रणनीति प्रमुख विनोद मोदी ने कहा, ‘‘मजबूत शुरुआत के बावजूद आज घरेलू शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव रहा। वैश्विक बाजारों के मजबूत संकेतों से बाजार को कुछ समर्थन मिला। आईटी शेयरों में लाभ से बाजार धारणा बेहतर हुई।’’


अन्य एशियाई बाजारों में चीन का शंघाई कम्पोजिट, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कॉस्पी लाभ में रहे। दोपहर के कारोबार में यूरोपीय बाजार लाभ में थे।


इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट कच्चा तेल 2.95 प्रतिशत के उछाल से 66.66 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। 




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हाजिर मांग के कारण कच्चातेल वायदा कीमतों में तेजी

नई दिल्ली : मजबूत हाजिर मांग के कारण कारोबारियों ने अपने सौदों के आकार को बढ़ाया जिससे वायदा कारोबार में सोमवार को कच्चा तेल की कीमत 105 रुपये की तेजी के साथ 4,745 रुपये प्रति बैरल हो गयी।


मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में कच्चातेल के सितंबर माह में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 105 रुपये अथवा 2.26 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,745 रुपये प्रति बैरल हो गई जिसमें 6,622 लॉट के लिए कारोबार हुआ।


बाजार विश्लेषकों ने कहा कि कारोबारियों द्वारा अपने सौदों का आकार बढ़ाने के कारण वायदा कारोबार में कच्चातेल कीमतों में तेजी आई।


वैश्विक स्तर पर, न्यूयॉर्क में वेस्ट टैक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल का दाम 2.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 63.81 डालर प्रति बैरल हो गया। जबकि, वैश्विक मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड का दाम 2.73 प्रतिशत घटकर 66.96 डालर प्रति बैरल रह गया।




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कृषि उत्पादों के निर्यात ने बनाई विश्वव्यापी पहचान

कोरोना के कारण ठप अर्थव्यवस्था में खेती किसानी ने ऑक्सीजन का काम किया है। लाख विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अन्नदाता ने देश में अन्न धन के भण्डार भर कर बड़ा सहारा दिया है। लंबे लॉकडाउन के कारण उद्योग-धंधों में आए ठहराव के बावजूद खेती किसानी ने उत्तरोत्तर प्रगति की है। अन्नदाता की मेहनत का ही परिणाम है कि देश आज कृषि निर्यात के क्षेत्र में दुनिया के दस शीर्ष निर्यातक देशों की सूची में शामिल हो गया है। साल 2020-21 के दौरान कृषि निर्यात के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। वर्ष 2020(21 में कृषि क्षेत्र से समग्र निर्यात 41.25 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।


देश से पहली बार कलस्टरों से निर्यात को प्रोत्साहित किया गया है। कलस्टर आधारित यह एप्रोच भविष्य के लिए शुभ संकेत माना जा सकता है। देश में विकसित कलस्टरों में से बनारस से ताजा सब्जियां, चंदौली से काला चावल का निर्यात किया गया है। नागपुर के संतरे, लखनऊ से आम, अनंतपुर से केले आदि लंदन, दुबई व अन्य स्थानों पर निर्यात किए गए हैं। मसालों के निर्यात में देश अग्रणी रहता ही आया है। भारत से अनाज के साथ ही मोटे अनाज के निर्यात क्षेत्र में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इससे यह साफ हो जाना चाहिए कि देश के कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान के साथ ही वैश्विक मांग भी देखी जा रही है। देखा जाए तो अब दुनिया के देशों में भारत तेजी से प्रमुख कृषि उत्पाद निर्यातक देश बनता जा रहा है।


62 की लड़ाई और देश में अन्न संकट को कभी भुलाया नहीं जा सकता। समूचे देश ने एक दिन यानी सोमवार को व्रत करने की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आह्वान पर की। इस तरह का दुनिया में संभवतः पहला उदाहरण होगा जब अन्न संकट के कारण समूचे देश में एक दिन के व्रत का संकल्प किया गया हो। पुरानी पीढ़ी के कुछ लोग तो आज भी सोमवार का व्रत लाल बहादुर शास्त्री के आह्वान पर कर रहे हैं। यही वह भारत है जब प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी को भी विदेशों के आगे अन्न के लिए हाथ फैलाना पड़ा। अमेरिका से जिस तरह का सड़ा-गला अनाज आता था वह उस पीढ़ी की यादों में समाया हुआ है। पर जिस तरह से योजनाबद्ध तरीके से देश में अनाज उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए गए उसके परिणाम सामने हैं। हालांकि अब समय की मांग को देखते हुए जैविक खेती पर जोर दिया जा रहा है। हालिया सालों में दलहन का उत्पादन बढ़ाने का अभियान चलाया गया तो अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए 11 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक के निवेश की घोषणा की है।


आज हमारे देश से अमेरिका, चाइना, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमिरात, वियतनाम, इंडोनेशिया, नेपाल, ईरान और मलेशिया आदि में निर्यात हो रहा है। आलोच्य साल में इंडोनेशिया को निर्यात में अधिक बढ़ोतरी हुई है। अनाजों के साथ ही गैर बासमती चावल, बाजरा, मक्का आदि मोटे अनाज के निर्यात में भी दो कदम आगे ही बढ़ रहे हैं। दलहन में आयात पर निर्भरता कम हो रही है तो अब तिलहन में देश का आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ गए हैं। आज भले ही हम कृषि निर्यात में आगे बढ़ रहे हैं पर खेती किसानी के क्षेत्र में बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है तो अत्यधिक कीटनाशकों का उपयोग के दुष्प्रभाव छिपे हुए नहीं है।


अब देश सतर्क है। जैविक खेती की और ध्यान गया है। इन सबके बावजूद कुछ दीर्घकालीन सुधार समय की मांग है। फसलोत्तर गतिविधियों में सुधार की बहुत अधिक आवश्यकता है। इसका बड़ा कारण है कि फसल तैयार होने के बाद कटाई से लेकर गोदाम तक आने के बीच बहुत अधिक मात्रा में खाद्यान्नों का नुकसान हो जाता है। फसलोत्तर गतिविधियों में वेल्यू एडेड के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देश में बागवानी फसलों के रखरखाव व विपणन के लिए देशव्यापी कोल्ड स्टोरेज चैन विकसित करने की आवश्यकता है तो देश में वातानुकूलित कंटेनरों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाने हैं। जिस तरह से फूड पार्क विकसित करने की घोषणाएं हो रही है, घोषणा की तुलना में धरातल पर अभी अधिक कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में इन दीर्घकालीन सुधारों पर ध्यान दिया जाता है तो वह दिन दूर नहीं जब कृषि निर्यात के क्षेत्र में और भी अधिक तेजी से देश आगे बढ़ सके।


पोस्ट कोरोना परिदृश्य भी देश की खेती किसानी के पक्ष में है और इसका बड़ा कारण दुनिया के देशों में चीन के प्रति आक्रोश है। दुनिया के देश कोरोना के चलते चीन को विलेन समझने लगे है। इन बदली परिस्थितियों का लाभ उठाने के लिए भी सरकार और अन्नदाता को आगे आना होगा। यह साफ हो जाना चाहिए कि कोरोना के इस दौर में अभी आने वाले दो तीन सालों तक उद्योगों को संभलने में समय लगेगा, ऐसे में खेती किसानी सबसे बड़ा संभावनाओं वाला क्षेत्र हो गया है। इसलिए अन्नदाता के सहयोग के लिए सभी नीति नियंताओं को मिलकर कार्ययोजना बनानी होगी ताकि किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो सके। खेती किसानी से अन्नदाता गौरवान्वित महसूस कर सके। इसलिए भले ही हम निर्यात में दस प्रमुख देशों में शुमार हो गए हों पर अभी रुकना नहीं आगे बढ़ना है और इसके लिए तात्कालिक प्रयासों के स्थान पर लंबी अवधि की योजना बनानी होगी।


-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा-







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पेट्रोल, डीजल की कीमतों में शनिवार को कोई बदलाव नहीं

नई दिल्ली : कीमतों में लगातार तीन दिनों तक कटौती के बाद, देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शनिवार को कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस हिसाब से राष्ट्रीय राजधानी में डीजल 89.27 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। मंगलवार को डीजल की कीमत 89.87 रुपये प्रति लीटर थी, लेकिन बुधवार और शुक्रवार के बीच लगातार 20 पैसे कटौती करने से मूल्य में कमी आई है। डीजल के विपरीत, ओएमसी द्वारा पिछले 35 दिनों से पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और दिल्ली में ईंधन की कीमत 101.84 रुपये प्रति लीटर है। देश भर में भी शनिवार को ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ।


वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर ब्रेंट कच्चे तेल का अक्टूबर अनुबंध 66.72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ऑटो ईंधन के पंप की कीमतें 18 जुलाई से स्थिर थीं। चालू वित्त वर्ष में ईंधन की कीमतों में 41 दिनों के लिए वृद्धि के बाद ऑटो ईंधन की कीमत में लंबा ठहराव आया था।




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चीनी मिलों पर किसानों का 8909 करोड़ रुपये बकाया

नई दिल्ली : चीनी के निर्यात और गन्ने से एथनॉल बनाने में बढ़ोतरी से किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान में तेजी आई है इसके बावजूद किसानों का चीनी मिलों पर 8,909 करोड़ रुपये का बकाया है। वर्तमान चीनी सत्र 2020-21 में चीनी मिलों ने लगभग 90,872 करोड़ रूपये के गन्ने की खरीद की गई जो अभी तक का रिकॉर्ड है। इसमें से लगभग 81,963 करोड़ रुपये के गन्ना बकाये का किसानों को भुगतान कर दिया गया और 16 अगस्त तक किसानों का चीनी मिलों पर 8,909 करोड़ रूपये का बकाया है। पिछले चीनी सत्र 2019-20 में लगभग 75,845 करोड़ रूपये के देय गन्ना बकाये में से 75,703 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया और सिर्फ 142 करोड़ रूपये का बकाया लंबित है।


खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के अनुसार सरकार गन्ना किसानों के गन्ना बकाये का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने और कृषि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अतिरिक्त चीनी के निर्यात और चीनी को एथनॉल में परिवर्तित करने को प्रोत्साहन देने के लिए सक्रियता के साथ कदम उठा रही है। पिछले कुछ वर्षों में देश में चीनी का उत्पादन घरेलू खपत से ज्यादा रहा है। केन्द्र सरकार चीनी मिलों को सरप्लस चीनी को एथनॉल में परिवर्तित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और चीनी के निर्यात को सहज बनाने के लिए चीनी मिलों को वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराया है जिससे उनकी लिक्विडिटी की स्थिति में सुधार हो और उन्हें गन्ना किसानों के गन्ना मूल्य के समयबद्ध भुगतान में सक्षम बनाया जा सके।


पिछले तीन सत्रों 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में क्रमशः लगभग 6.2 लाख टन (एलएमटी), 38 एलएमटी और 59.60 एलएमटी चीनी का निर्यात किया गया। वर्तमान चीनी सत्र 2020-21 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान सरकार ने चीनी के 60 एलएमटी निर्यात को सुगम बनाने के लिए 6,000 रुपये प्रति टन की दर से सहायता उपलब्ध करा रही है। कुल 60 एलएमटी के निर्यात लक्ष्य की तुलना में लगभग 70 एलएमटी के अनुबंधों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं । चीनी मिलों से 60 एलएमटी से ज्यादा चीनी का उठान हो चुका है और 16 अगस्त तक 55 एलएमटी से ज्यादा का निर्यात हो चुका है।


कुछ चीनी मिलों ने आगामी चीनी सत्र 2021-22 में निर्यात के लिए अग्रिम अनुबंधों पर हस्ताक्षर भी किए हैं। चीनी के निर्यात से मांग-आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने और चीनी की घरेलू एक्स-मिल कीमतों को स्थिर रखने में सहायता मिली है।





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दो कोरियाई कंपनी करेंगी 433 करोड़ का निवेश, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

 नोएडा :   कोरियाई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को ग्रेटर नोएडा निवेश के लिए पसंद आ रहा है। दो और बड़ी कोरियाई कंपनियों ने यहां उद्योग लगाने के लिए जमीन खरीदी है। ये कंपनियां करीब 433 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। इससे 3570 युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। प्राधिकरण क्षेत्र में अब तक पांच कोरियाई कंपनियों को यहां करीब 3.51 लाख वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है। ये इकाइयां जल्द शुरू होंगी। इन कंपनियों से करीब 1154 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 8706 युवाओं को रोजगार मिल सकेगा।


उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण लगातार प्रयास कर रहा है। आवेदन के 30 दिन के भीतर उद्योगों के लिए जमीन आवंटित कर दी जाती है। इसी पहल का नतीजा है कि कोरियाई कंपनियां ग्रेटर नोएडा में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए आ रही हैं। तीन बड़ी कंपनियां यहां पहले ही जमीन ले चुकी हैं। इनमें सैमक्वांग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स, केएच वैटेक इंडिया और सेनेटेक इंडिया शामिल हैं। इन कंपनियों ने अपनी ईकाई स्थापित करने का काम शुरू कर दिया है। दो और बड़ी कंपनियां ड्रीमटेक और स्टेरिऑन ने भी जमीन खरीदी है। इनको हाल ही में जमीन आवंटित कर दी गई है। दोनों कंपनियां सेक्टर ईकोटेक-10 में अपनी इकाई लगाएंगी। दोनों कंपनियां करीब 433 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी और 3570 युवाओं को रोजगार देंगी।


कंपनियों के प्रतिनिधि एसीईओ से मिले : कुछ और कोरियाई कंपनियों ने ग्रेटर नोएडा में जमीन लेने की इच्छा जताई है। सोमवार को कुछ कोरियाई कंपनियों के प्रतिनिधि ग्रेटर नोएडा केक एसीईओ दीपचंद्र से मिले। अपनी तरफ से सुझाव भी दिए। इन सुझावों पर ग्रेटर नोएडा ने अमल करने का आश्वासन दिया है। बैठक में प्राधिकरण के ओएसडी शिव प्रताप शुक्ला, प्रबंधक उद्योग मयंक श्रीवास्तव, वरिष्ठ प्रबंधक कपिल देव सिंह आदि मौजूद थे।


कंपनी का नाम सेक्टर निवेश रोजगार


सैमक्ववांग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स ईकोटेक-10 440 करोड़ 4000


केएच वैटेक इंडिया ईकोटेक-6 247 करोड़ 786


सेनेटेक इंडिया ईकोटेक-1 एक्सटेंशन 34 करोड़ 350


ड्रीमटेक इंडिया ईकोटेक-10 193 करोड़ 2570


स्टेरिऑन इंडिया ईकोटेक -10 240 करोड़ 1000




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चीन को मात देने की तैयारी, दीपावली पर मिट्टी के हुनरमंदों का लखनऊ में दिखेगा जलवा

लखनऊ :  चीन को मात देने के लिए इस बार तैयारी काफी तेज है। दीपावली के तीन दिन पहले इस बार भी नवाबों के शहर (लखनऊ) में मिट्टी में जान डालने वाले हुनरमंद कारीगरों का जलवा दिखेगा। इस दौरान प्रदेश के 150 से अधिक कारीगर अपने मिट्टी के उत्पादों की पूरी रेंज के साथ मौजूद रहेंगे। इनमें सभी जिलों का प्रतिनिधित्व रहेगा।


इस बार की दीपावली को खास और स्वदेशी बनाने के लिए इस प्रदर्शनी में लक्ष्मी-गणेश की बेहद खूबसूरत मूर्तियां, डिजाइनर दीयों के अलावा और भी बहुत कुछ उपलब्ध रहेगा। आपके नाते उन कारीगरों की भी दीपावली पिछली बार की तरह खास हो सकती है।


प्रदर्शनी में माटीकला उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के साथ माटीकला / पॉटरी विकास योजना के तहत टेराकोटा-पॉटरी विधा पर तीन दिवसीय तकनीकी सेमिनार भी आयोजित होंगे। इनमें शीर्ष संस्थाओं के नामचीन विशेषज्ञ दूरदराज से आए कारीगरों को उनकी विधा की तकनीकी पहलुओं की जानकारी देगें। इससे उनको अंतरराष्ट्रीय बाजार के मानकों के अनुसार प्रतियोगी दामों पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनाने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त आत्मनिर्भर भारत मुहिम के तहत दीपावली के अवसर पर प्रदेश के हर जिले में स्थानीय प्रशासन की मदद से वहां तीन दिवसीय माटीकला अस्थायी बिक्री केंद्र लगवाकर सभी माटीकला कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए कारीगरों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।


मालूम हो कि पिछले साल भी दीपावली के अवसर पर लखनऊ के डालीबाग स्थित खादी भवन में पहली बार इस तरह की प्रदर्शनी आयोजित की गई थी। लखनऊ के लोगों ने इनके उत्पादों को हाथों-हाथ लिया था। रही-सही कसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरी कर दी थी। प्रदर्शनी के अंतिम दिन उन्होंने सभी कारीगरों को कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर बुलाया। वहां न केवल उनके हुनर की तारीफ की, बल्कि उनका बचा हुआ माल मुंहमांगे दाम पर खरीदकर उनकी दीपावली को खास बना दिया।


अपर मुख्य सचिव खादी नवनीत सहगल ने बताया, स्थानीय हुनर का संरक्षण और संवर्धन मुख्यमंत्री की मंशा है। एक जिला-एक उत्पाद, विश्वकर्मा श्रम सम्मान जैसी योजनाओं का भी यही मकसद है। मिट्टी को जीवंत करने वाले कारीगरों को संरक्षण एवं संवर्धन देने के लिए उनकी पहल पर प्रदेश में पहली बार माटीकला बोर्ड का गठन किया गया। इसके तहत इससे जुड़े कारीगरों को ट्रेनिंग से लेकर बाजार तक कि सुविधा मुहैया कराई जा रही है। दीपावली पर आयोजित होने वाली प्रदर्शनी का भी यही उद्देश्य है।




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अर्थव्यवस्था पकड़ने लगी है रफ्तार, उद्योगों को बढ़ानी होगी जोखिम उठाने की क्षमता: मोदी

नई दिल्ली :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि देश की अर्थव्यवस्था एक बार फिर से रफ्तार पकड़ने लगी है ऐसे में उद्योगों को अपनी जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।


उद्योग मंडल सीआईआई की सालाना बैठक को वीडियो कांफ्रेन्स के जरिये संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार मजबूरी में सुधारों को नहीं बढ़ा रही है बल्कि मजबूती और विश्वास के साथ सुधारों को आगे बढ़ा रही है और राष्ट्र हित में कोई भी जोखिम उठाने को तैयार है।


उन्होंने कहा, ''हमने कड़े निर्णय किये हैं। महामारी के दौरान भी सुधार जारी रहे। सरकार विवशता के कारण नहीं बल्कि मजबूती और विश्वास के साथ सुधारों को आगे बढ़ा रही है।''


प्रधानमंत्री ने उद्योग को हर संभव मदद का आश्वासन देते हुए कहा कि पिछले कुछ साल में किये गये सुधारों से देश में रिकार्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आ रहा है।


उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का बहुत बड़ा दायित्व, भारतीय उद्योगों पर है। उन्होंने उद्योग से कहा कि भारत के विकास और क्षमता को लेकर जो भरोसे का माहौल बना है, उन्हें उसका पूरा लाभ उठाना चाहिये।


मोदी ने कहा कि बीते वर्षों में सरकार की सोच, रुख और काम करने के तरीके समेत विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। ''आज का नया भारत, नई दुनिया के साथ चलने के लिए तैयार है।''


उन्होंने कहा, ''जो भारत कभी विदेशी निवेश को लेकर आशंकित था, आज वो हर प्रकार के निवेश का स्वागत कर रहा है। जिस भारत की कर से जुड़ी नीतियों से कभी निवेशकों में निराशा फैल जाती थी, आज उसी भारत में दुनिया का सबसे प्रतिस्पर्धी कंपनी कर और बिना आमना-सामना वाली कर प्रणाली (फेसलेस टैक्स सिस्टम) भी है।''


उन्होंने कहा कि जहां सालों साल तक श्रमिकों को, उद्योगों को सैकड़ों कानूनों के जाल में उलझाए रखा गया, वहीं आज दर्जनों श्रम कानून चार श्रम संहिताओं में समाहित हो चुके हैं। जहां कभी कृषि को सिर्फ गुजारे का माध्यम माना जाता था, वहीं अब कृषि में ऐतिहासिक सुधारों के जरिए भारतीय किसानों को देश-विदेश के बाजार से सीधे जोड़ने का प्रयास हो रहा है।


प्रधानमंत्री ने कहा, ''इन्हीं सब प्रयासों का नतीजा है कि आज भारत में रिकार्ड एफडीआई भी आ रहा है और एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) में भी नए रिकार्ड बन रहे हैं। आज देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है।''


उन्होंने कहा, ''एक समय था जब हमें लगता था कि जो कुछ भी विदेशी है, वही बेहतर है। इस मनोविज्ञान का परिणाम क्या हुआ, ये आप जैसे उद्योग के दिग्गज भलीभांति समझते हैं। हमारे अपने ब्रांड भी, जो हमने सालों की मेहनत के बाद खड़े किए थे, उनको विदेशी नामों से ही प्रचारित किया जाता था।''


''लेकिन आज स्थिति तेजी से बदल रही है। आज देशवासियों की भावना, भारत में बने उत्पादों के साथ है। कंपनी भारतीय हो, ये जरूरी नहीं, लेकिन आज हर भारतीय, भारत में बने उत्पादों को अपनाना चाहता है।''


उन्होंने कहा ''देश में हर क्षेत्र में भरोसा बढ़ रहा है। इसी प्रकार का आत्मविश्वास आज भारत के स्टार्टअप में है। आज यूनिकार्न नए भारत की पहचान भी बन रहे हैं। सात-आठ साल पहले भारत में 3-4 यूनिकार्न रहे होंगे। आज भारत में करीब-करीब 60 यूनिकार्न हैं। इनमें से 21 यूनिकार्न तो बीते कुछ महीनों में ही बने हैं।''


यूनिकार्न से आशय एक अरब डॉलर के मूल्यांकन वाले स्टार्टअप से है।


मोदी ने कहा, ''निवेशकों की तरफ से भी भारतीय स्टार्टअप के लिये शानदार प्रतिक्रियाएं देखने को मिली है। स्टार्टअप की रिकार्ड सूचीबद्धता भारतीय कंपनियों और भारतीय बाजार के लिए एक नए युग की शुरुआत है। यह बताता है कि भारत में वृद्धि के असाधारण अवसर और गुंजाइश उपलब्ध हैं।''


संसद के मानसून सत्र के दौरान उठाये गये कदमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस दौरान फैक्टरिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक और जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम संशोधन विधेयक जैसे विधेयकों को पारित किया गया है। ये उपाय सरकार के प्रयासों को समर्थन देंगे।


उन्होंने कहा कि अतीत की गलतियों को सुधारते हुए सरकार ने पूर्व तिथि से कर लगाने का प्रावधान समाप्त कर दिया। इससे सरकार और उद्योग के बीच भरोसा बढ़ेगा।


प्रधानमंत्री ने कहा, ''देश में वो सरकार है जो राष्ट्र हित में बड़े से बड़ा जोखिम उठाने के लिए तैयार है... जीएसटी इतने साल तक अटका रहा क्योंकि जो पूर्व की सरकारें थीं वह राजनीतिक जोखिम लेने का साहस नहीं दिखा पायी... हमने ना सिर्फ जीएसटी (माल एवं सेवा) लागू किया बल्कि आज हम रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह भी देख रहे हैं।







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बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया ने बैन किए तीन लाख से ज्यादा अकाउंट्स

नई दिल्ली : भारत में पबजी मोबाइल (पबजी) का नया वर्जन कहे जा रहा बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया काफी पॉप्युलर हो रहा है। बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया ने किसी न किसी रूप में लाभ हासिल करने के लिए गैर कानूनी प्रोग्राम का उपयोग करने के लिए 336,000 से अधिक खिलाड़ियों को बैन कर दिया है। क्राफ्टन ने गेम की आधिकारिक वेबसाइट पर डेवलेपमेंट को साझा किया और कहा कि उसने 30 जुलाई और 5 अगस्त के बीच मामलों की जांच की है।


चीटिंग की कोशिश कर रहे थे प्लेयर्स


क्राफ्टन ने आधिकारिक वेबसाइट पर साझा किया कि बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया में 336,736 खातों को अवैध कार्यक्रमों का उपयोग करने के लिए बैन कर दिया गया है। कंपनी ने बताया है कि लाखों प्लेयर्स गेम में फायदा पाने और जीतने के लिए अलग-अलग तरीके के प्रोग्राम्स इस्तेमाल कर रहे थे। इन प्लेयर्स को अकाउंट को हमेशा के लिए बैन कर दिया गया है। कंपनी ने 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच इस तरह के मामलों की जांच की और गेम डिवेलपर क्राफ्टॉन ने आधिकारिक वेबसाइट पर इस बारे में जानकारी दी। ऐसे प्लेयर्स को बैन किया जाता है, जिससे बाकियों के गेमप्ले पर असर ना पड़े। 


दोबारा गेम नहीं खेल पाएंगे बैन अकाउंट्स


क्राफ्टॉन ने बताया है कि 336,736 बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया अकाउंट्स पर अवैध प्रोग्राम्स का इस्तेमाल करने के चलते बैन लगा दिया गया है। इन अकाउंट्स पर परमानेंट बैन लगाया गया है, यानी कि कुछ वक्त बीतने के बाद ये दोबारा गेमिंग शुरू नहीं कर पाएंगे। गेम डिवेलपर ने बताया कि इस तरह की रिपोर्ट्स की जांच इसके सिक्योरिटी सिस्टम और कम्युनिटी मॉनीटरिंग के जरिए की गई। कंपनी ऐसे यूजर्स को गेम के बीच में भी बैन कर सकती है। 


50एम डाउनलोड्स रिवॉर्ड दे रही है कंपनी


पिछले सप्ताह गेम डिवेलपर क्राफ्टॉन ने बताया था कि गूगल प्ले स्टोर पर गेम के पांच करोड़ डाउनलोड्स पूरे होने के साथ ही यूजर्स को 50एम डाउनलोड्स रिवॉर्ड्स दिए जाएंगे। गेम के डाउनलोड्स का आंकड़ा 4.8 करोड़ यूजर्स पार कर चुका है, जो इस रिवॉर्ड प्रोग्राम का फेज-1 था। प्लेयर्स को तीन सप्लाई कूपन क्रेट स्क्रैप दी जा रही हैं, जो इवेंट्स सेक्शन में जाकर कलेक्ट की जा सकती हैं। 


आईफोन यूजर्स के लिए जल्द आएगा गेम


करीब एक महीने का वक्त बीतने के बावजूद बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया गेम आईओएस प्लेटफॉर्म के लिए लॉन्च नहीं किया गया है। हालांकि, कंपनी ने पिछले सप्ताह इस गेम का आईओएस लॉन्च टीज किया है। आईफोन और आईपैड यूजर्स जल्द यह गेम ऐपल ऐप स्टोर से डाउनलोड कर पाएंगे लेकिन इसकी रिलीज डेट अब तक कन्फर्म नहीं हुई है। बता दें, ऐपल डिवाइसेज में भी एंड्रॉयड वर्जन जैसा ही गेमप्ले यूजर्स को मिलेगा। 


ये गलतियां कीं तो बैन हो सकते हैं आप


अगर आपने गूगल प्ले स्टोर के बजाय किसी थर्ड पार्टी वेबसाइट से गेम डाउनलोड किया है, तो आप पर बैन लग सकता है। इसके अलावा गेम का मॉडिफाइड वर्जन इंस्टॉल करना और एक्सट्रा फीचर्स के साथ गेमिंग करना भारी पड़ सकता है। ध्यान रहे, मोबाइल पर गेमिंग के लिए आप किसी थर्ड पार्टी टूल की मदद ना लें क्योंकि कंपनी इन्हें सपोर्ट नहीं करती। गेम में किसी यूजर पर शक होने पर आप उसे रिपोर्ट भी कर सकते हैं।


बीजीएमआई खेलते वक्त न करना ऐसी गलती


1. खेल में किसी भी चीटिंग टूल का इस्तेमाल करना। 


2. गेम में लॉग-इन करने के लिए किसी भी थर्ड पार्टी प्रोग्राम का इस्तेमाल करना।


3. गेम खेलने के लिए एक अनऑफिशियल गेम क्लाइंट का उपयोग करना। 


4. गेम के दौरान गैरकानूनी जानकारी या वेबसाइट का प्रचार करना। 


5. दूसरी टीम के खिलाड़ियों से सांठगांठ करना।



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रेडी-टू-कुक इडली, डोसा, दलिया मिक्स पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा : एएआर

नयी दिल्ली : चूर्ण के रूप में बिकने वाले रेडी टू कुक डोसा, इडली, दलिया मिक्स जैसी खाद्य वस्तुओं आदि पर 18 प्रतिशत का माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लगेगा। हालांकि, बैटर के रूप में बेची जाने वाली खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी की दर पांच प्रतिशत हो। अग्रिम निर्णय प्राधिकरण (एएआर) ने यह व्यवस्था दी है।


कृष्णा भवन फूड्स एंड स्वीट्स ने एएआर की तमिलनाडु पीठ में एक याचिका दी थी जिसमें किसी ब्रांड नाम के तहत बेचे जाने वाले बाजरा, ज्वार, रागी और मल्टीग्रेन दलिया मिक्स जैसे 49 उत्पादों पर लागू जीएसटी दर को लेकर फैसला सुनाने की अपील की गयी थी। एएआर ने कहा कि कंपनी द्वारा बेचे जाने वाले उत्पाद चूर्ण के रूप में बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थ हैं।


एएआर ने कहा, "डोसा मिक्स और इडली मिक्स को पैक करके मिक्स के रूप में बेचा जाता है जिसे पानी/उबला हुआ पानी/दही के साथ मिलाकर घोल बनाया जाता है और जो उत्पाद बेचा जाता है वह चूर्ण होता है, बैटर नहीं। वे सभी 49 उत्पाद जिनके लिए फैसला सुनाने की मांग गयी है, सीटीएच 2106 के तहत वर्गीकृत हैं और उनपर लागू होने वाली दर नौ प्रतिशत केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) और नौ प्रतिशत राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) है।



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गूगल का सिलिकॉन वैली में एक विशाल हार्डवेयर आर एंड डी हब बनाने की योजना

सैन फ्रांसिस्को : गूगल कथित तौर पर एक ऐसा परिसर बनाने की योजना बना रहा है, जिसमें सिलिकॉन वैली में एक विशाल हार्डवेयर हब होगा। शनिवार को सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मिडपॉइंट नामक कैंपस में 20 फीसदी ऑफिस स्पेस और 80 फीसदी स्पेस मैन्युफैक्च रिंग डिवाइसेज, स्टोरेज, डिस्ट्रीब्यूशन और अन्य उद्देश्यों पर केंद्रित होगा। गूगल ने उत्तरी सैन जोस, कैलिफोर्निया में पांच-बिल्डिंग हार्डवेयर अनुसंधान और विकास केंद्र के लिए 389 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च करके जमीन खरीदी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह तीन औद्योगिक भवनों के बगल में बैठेगा, जो कई नियोजन दस्तावेजों के अनुसार, नेस्ट उत्पादों सहित इसके हार्डवेयर डिवीजन के लिए कुछ संचालन करेंगे। कंपनी के हार्डवेयर प्रमुख रिक ओस्टरलोह ने हाल ही में कहा था कि हार्डवेयर गूगल क्षेत्र में बड़ी धूम मचाने के लिए तैयार है। कंपनी के पास वर्तमान में एक प्रभावशाली हार्डवेयर लाइन-अप है, जिसमें स्मार्ट होम स्पीकर्स नेस्ट, फ्लैगशिप पिक्सेल स्मार्टफोन और पिक्सेलबुक लैपटॉप शामिल हैं। पिछले हफ्ते, गूगल ने घोषणा की है कि उसने अगली पीढ़ी के पिक्सेल 6 स्मार्टफोन को पावर देने के लिए अपनी खुद की कस्टम-निर्मित चिप विकसित की है, जो इस साल के अंत में बाजार में आएगी। टेन्सर ने कहा, एक चिप (एसओसी) पर एआई- सक्षम सिस्टम विशेष रूप से पिक्सेल फोन के लिए विकसित किया गया है। 2016 में, गूगल ने पहला पिक्सेल लॉन्च किया है। गूगल कंपनी ने पहले ही कहा था कि उसका मिडरेंज पिक्सेल 5ए इस साल के अंत में आएगा। अब, एक नई रिपोर्ट बताती है कि स्मार्टफोन के 26 अगस्त को 450 डॉलर में आने की संभावना है। 







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कोविड-19 के चलते ऑटो एक्सपो 2022 स्थगित: सियाम

नई दिल्ली : अगले साल फरवरी में ग्रेटर नोएडा में होने वाले देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल शो - ऑटो एक्सपो को कोविड-19 महामारी के चलते स्थगित कर दिया गया है।


उद्योग निकाय सियाम ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर की आशंका के चलते ऑटो एक्सपो को स्थगित किया गया है।


दो साल में एक बार आयोजित होने वाला यह शो आखिरी बार फरवरी 2020 में हुआ था।


सोसाइटी ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के महानिदेशक राजेश मेनन ने एक बयान में कहा, ''ऑटो एक्सपो जैसे कारोबारी शो में संक्रमण फैलने का जोखिम बहुत अधिक है, क्योंकि इसमें भीड़ बहुत अधिक होती है और सामाजिक दूरी बनाए रखना मुश्किल होगा। इसलिए इसे स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।''


उन्होंने कहा कि ऑटो एक्सपो की अगली तारीख को इस साल के अंत में कोविड की स्थिति को ध्यान में रखते हुए और वैश्विक ऑटो शो के ओआईसीए कैलेंडर के अनुसार अंतिम रूप दिया जाएगा।




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RBI की Digital Currency के ये होंगे फायदे, जानें कैसे कर पाएंगे इसका इस्तेमाल

नई दिल्ली :  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से जिस डिजिटल करेंसी की तैयारी चल रही है, उसकी शुरुआत छोटे मूल्य के लेनदेन से होगी। सूत्रों के मुताबिक शुरुआत से ही छोटे-बड़े सभी प्रकार के ट्रांजेक्शन के लिए डिजिटल करेंसी की इजाजत देने पर Economy में रुपये के स्टॉक में बढ़ोतरी की आशंका रहेगी। शुरुआत में इस डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल की कोई अनिवार्यता नहीं होगी। डिजिटल करेंसी लांच होने से बाद ग्राहक बैंक में जमा अपनी रकम को डिजिटल वालेट में रख सकेंगे। हाल ही में RBI के डिप्टी गवर्नर ने अपनी डिजिटल करेंसी लाने की घोषणा की थी।

RBI का कहना है कि अपनी डिजिटल करेंसी होने से भविष्य में नोट छपाई की लागत भी घटेगी और क्रिप्टो जैसी वर्चुअल करेंसी से अर्थव्यवस्था को खतरा भी नहीं रहेगा। यही वजह है कि भारत के अलावा अमेरिका और चीन जैसे देश के सेंट्रल बैंक भी अपनी डिजिटल करेंसी लाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। डिजिटल करेंसी का एक फायदा यह भी है कि RBI इस पर आसानी से नजर रख सकता है।

ऐसी होगी डिजिटल करेंसी

सूत्रों के मुताबिक डिजिटल करेंसी भी पर्स या वालेट में रखे जाने वाले नोट की तरह होगी। अंतर इतना होगा कि वह डिजिटल वालेट में होगी। अभी क्रिप्टो जैसी डिजिटल या वर्चुअल करेंसी प्रचलन में हैं, लेकिन उसकी कोई सरकारी गारंटी नहीं होती है। उनके मूल्य में लगातार बनी अस्थिरता Economy के लिए भी खतरनाक हो सकती है। लेकिन RBI की तरफ से जारी डिजिटल करेंसी की पूरी जिम्मेदारी RBI की होगी।

नोटों का लेनदेन रहेगा जारी

सूत्रों के मुताबिक ऐसा भी नहीं है कि डिजिटल करेंसी जारी होने के बाद कागज के नोट हटा दिए जाएंगे। ग्राहक बैंकों में नोट जमा और निकासी कर सकेंगे और अपनी राशि को जरूरत के मुताबिक डिजिटल करेंसी में भी बदल सकेंगे। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक बैंकों में जमा राशि डिजिटल रूप में लेने के बाद जमाकर्ता को उस पर ब्याज नहीं मिलेगा।

सरकार को यह फायदा

बैंकिंग विशेषज्ञों के मुताबिक डिजिटल करेंसी जारी करने में RBI को नोट के मुकाबले बहुत कम लागत आएगी। नोटों की छपाई और वितरण का खर्च घटेगा और जाली नोटों की समस्या से मुक्ति मिलेगी। इसे जारी करने के बाद इसके इलेक्ट्रानिक वितरण में भी कोई खर्च नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की डिजिटल करेंसी लेने के बाद छिपाई नहीं जा सकती है। 


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सचिन तेंदुलकर ने इस कंपनी में किया 20 लाख डॉलर का निवेश, जानिए कंपनी से जुड़ी बाकी जानकारी

नई दिल्ली :  भारत के स्टार पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने JetSynthesys कंपनी में 20 लाख डॉलर (करीब 14.8 करोड़ रुपये) का निवेश किया है। डिजिटल मनोरंजन और टेक्नोलॉजी कंपनी जेटसिंथेसिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। कंपनी की ओर से कहा गया कि निवेश के साथ तेंदुलकर के साथ कंपनी के संबंध और मजबूत हुए हैं। जेटसिंथेसिस पुणे की कंपनी है और भारत के अलावा इसके जापान, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, अमेरिका में कार्यालय हैं।

दोनों के बीच पहले से ही डिजिटल क्रिकेट डेस्टिनेशन '100एमबी' और immersive cricket games - 'सचिन सागा क्रिकेट' एवं 'सचिन सागा वीआर' के लिए एक जॉइंट वेंचर है।

इस डील के बाद तेंदुलकर ने कहा, 'जेटसिंथेसिस के साथ मेरे पांच साल पुराने संबंध हैं। हमने सचिन सागा क्रिकेट चैंपियंस से अपना सफर शुरू किया और इसे एक खास वर्चुअल रियलिटी क्रिकेट के अनुभव के साथ मजबूत किया। यह अपनी क्लास में सबसे लोकप्रिय गेम में शामिल है और इसे दो करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया है।'

उन्होंने कहा कि जब यह एसोसिएशन शुरू हुई, तो इसका उद्देश्य दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को एक ऑथेंटिक गेमिंग अनुभव देना था। अब मुझे बताया गया है कि टीम अधिक क्रॉस-श्रेणी के डिजिटल उत्पादों और प्लेटफार्मों को शामिल करने के लिए उस दायरे में विविधता लाने की कोशिश कर रही है।

JetSynthesys के वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राजन नवानी ने कहा कि 100MB के साथ, कंपनी ने सचिन के प्रशंसकों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने का मौका दिया जहां वे उनसे सीधे बातचीत कर सकें।


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जेब्रोनिक्स ने आईटी पेरिफेरल सेगमेंट के लिए ऋतिक रोशन को ब्रांड एंबेसडर बनाया

नई दिल्ली : देशी ऑडियो सिस्टम और लाइफस्टाइल एक्सेसरीज ब्रांड जेब्रोनिक्स ने गुरुवार को घोषणा की कि उसने सुपरस्टार ऋतिक रोशन को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है।


कंपनी ने एक बयान में कहा, महामारी नए तरीके से काम करने का एक नया तरीका लेकर आई है, जिससे दूर और सुचारू रूप से काम करने के लिए घर पर कंप्यूटर स्थापित करने की आवश्यकता और बढ़ रही है।


बयान के अनुसार, आईटी पेरिफेरल्स सेगमेंट ने महामारी के समय जीवन को लेकर एक नए प्रकार का अनुभव लेकर सामने आया है, क्योंकि वर्क फ्रॉम होम को और अधिक मजबूती मिली है।


कंपनी ने कहा कि लोग अपने रिमोट वर्किं ग स्पेस को और अधिक उत्पादक बनाने पर विचार कर रहे हैं, चाहे वह ऑनलाइन शिक्षा हो या पीसी गेमिंग, जिससे एक बार फिर से पेरिफेरल्स श्रेणी में निवेश किया जा सके।


ऋतिक रोशन ने कहा, मुझे जेब्रोनिक्स पर भरोसा है कि वह भारतीय जनता की नब्ज को समझेगा और उनकी मांगों को पूरा करने के लिए कई आईटी उपकरण मुहैया कराएगा।


उन्होंने कहा, हमारे 4 साल के उत्पादक सहयोग के बाद, मैं दुनिया भर में देखे गए तकनीकी बदलाव के अनुरूप संबंधों को मजबूत करने के लिए खुश हूं। जेब्रॉनिक्स प्रीमियम गैजेट्स को किफायती दरों पर जनता के लिए सुलभ बनाने में एक मार्केट लीडर रहा है। एक राजदूत के रूप में ब्रांड को मजबूती से बढ़ते हुए देखना संतोषजनक है।


जेब्रोनिक्स ने कहा कि ऑलवेज अहेड होने के अपने दर्शन के साथ आईटी पेरिफेरल सेगमेंट में और अधिक विश्व स्तरीय उत्पादों को पेश करके अपनी स्थिति को और मजबूत करने की योजना बनाई है, ताकि कारवां को आगे बढ़ाया जा सके और रणनीतिक रूप से ऋतिक के साथ विज्ञापन करके एक मार्केट लीडर के रूप में अपनी स्थिति बढ़ाई जा सके।


जेब्रोनिक्स के निदेशक राजेश दोशी ने कहा, जेब्रोनिक्स के लिए आईटी पेरिफेरल्स व्यवसाय नींव रहा है, 1997 में हमारी स्थापना के दिन से, हम इस उत्पाद श्रेणी में निवेश करना जारी रख रहे हैं क्योंकि पीसी गेमिंग बहुत लोकप्रिय हो गया है और श्रेणी हमारे दिल के बहुत करीब है।


उन्होंने कहा, सुपरस्टार ऋतिक रोशन एक स्टाइल आइकन से कहीं अधिक हैं, उनका एक आकर्षक व्यक्तित्व है और पिछले कुछ वर्षों में उनके साथ काम करने के बाद, हमें लगता है कि स्टाइल, कड़ी मेहनत की बात आती है तो वह हमारे ब्रांड के लिए एकदम सही चेहरा हैं। उनका उत्साह और ऊजार्वान व्यक्तित्व हमारे ब्रांड के साथ पूरी तरह से तालमेल बिठाता है। और हम अपने सहयोग को मजबूत करने और इस महत्वपूर्ण श्रेणी के लिए उन्हें ब्रांड के साथ रखने के लिए बहुत खुश हैं।





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ट्विटर ने कोरोना को देखते हुए भारत में 6 नए उपभोक्ता रूझानों की घोषणा की

नई दिल्ली : ट्विटर ने गुरुवार को महामारी के बीच भारत में अपने प्लेटफॉर्म पर हो रही लाखों बातचीत से छह प्रमुख उपभोक्ता रूझानों का खुलासा किया, जो ब्रांड और विपणक को प्रासंगिकता और तेजी से अपनाने के द्वारा स्थायी उपभोक्ता संबंधों को बढ़ावा देने में मदद करेगा।


ट्विटर ट्रेंड्स रिपोर्ट 2021 के अनुसार, भारत में बातचीत पर हावी होने वाले छह रुझान हैं - वेलबीइंग, क्रिएटर कल्चर, एवरीडे वंडर, वन प्लैनेट, टेक लाइफ और माई आइडेंटिटी।


इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए, ट्विटर ने जनवरी 2020-जून 2021 के लाखों ट्वीट्स का अध्ययन किया और उनकी तुलना पिछले 18 महीनों के ट्वीट्स से की ताकि यह पता चल सके कि भारत में ट्विटर पर लोग क्या बातचीत कर रहे थे।


कंपनी ने कहा कि ये छह रुझान ब्रांडों को उपभोक्ताओं के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।


ट्वीट इंडिया में मार्केटिंग प्रमुख प्रीता अथरे ने कहा एफएफ द्वारा प्रसारित देखा जा रहा है, इस बात को संशोधित किया जा रहा है, एक जलवायु में परिवर्तन हो रहा है। इस बारे में जानकारी के लिए इस स्थिति के बारे में जानकारी में भी शामिल हैं।


उदाहरण के लिए, कल्याण छत्र के भीतर, उभरने वाली शीर्ष तीन उप-प्रवृत्तियां स्वयं की देखभाल (प्लस88 प्रतिशत), स्वास्थ्य और फिटनेस (प्लस103 प्रतिशत), और मानसिक स्वास्थ्य मामले (प्लस150 प्रतिशत) हैं।


रिपोर्ट में कहा गया है कि, हैशटैग सेल्फलाव, हैशटैग लाव योरसेल्फ, हैशटैग गुड हेल्थ और हैशटैग मेन्टल हील दा मेटर इन बातचीत में उपयोग किए जाने वाले कुछ लोकप्रिय हैशटैग हैं। ब्रांड्स को इस बातचीत में ईमानदारी के साथ संपर्क करना चाहिए। अपने ²ष्टिकोण साझा करना चाहिए और हमेशा लोगों को बेहतर होने के लिए कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए ।


एवरीडे वंडर के तहत इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ अन्य लोकप्रिय हैशटैग न्यूमरोलॉजी, हैशटैग कॉन्शियसनेस, हैशटैग आध्यात्मिक रूप से, हैशटैग मेडिटेशन हैं।


भारत में कंटेंट, क्रिएटर्स और उभरती क्रिएटर इकोनॉमी के बारे में बातचीत में 78 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।


ट्विटर ने कहा,जैसा कि महामारी लोगों को घर पर रखना जारी रखती है, प्रौद्योगिकी के आसपास बातचीत और हमारे जीवन पर इसका प्रभाव बढ़ रहा है। ब्रांड लोगों को यह दिखा कर कल्पना करने और अनुकूलित करने में मदद कर सकते हैं कि कैसे उनके नए उत्पाद और सेवाएं जीवन को आसान बनाते हैं। 





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