BBC डॉक्यूमेंट्री बैन के खिलाफ SC में सुनवाई आज

नई दिल्ली: PM मोदी पर बनी BBC डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ पर लगे बैन को हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। डॉक्यूमेंट्री पर रोक लगाए जाने के खिलाफ महुआ मोइत्रा, प्रशांत भूषण और एडवोकेट एमएल शर्मा ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि BBC की डॉक्यूमेंट्री पर बैन लगाने का सरकार का फैसला मनमाना और असंवैधानिक है।

याचिकाकर्ता का दावा- डॉक्यूमेंट्री दंगों की जांच में मददगार
याचिका में दावा किया गया है कि 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' नामक डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों और उनमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच की गई है। जब दंगे भड़के थे, तब PM मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री थे। याचिका में यह भी कहा गया है कि डॉक्यूमेंट्री में दंगे रोकने में नाकामयाब रहे जिम्मेदारों से जुड़े कई फैक्ट्स हैं। हालांकि, सच्चाई सामने आने के डर से इसे सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के नियम 16 के तहत बैन किया गया है। रिकॉर्ड किए गए फैक्ट्स भी सबूत हैं और इन्हें पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे न्याय नहीं मिला है।

दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की मांग की गई
याचिका में गुजरात दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच की भी मांग की गई है। एमएल शर्मा ने कहा है कि BBC डॉक्यूमेंट्री के दोनों एपिसोड और BBC के रिकॉर्ड किए गए सभी ओरिजनल फैक्ट्स की जांच करें। साथ ही गुजरात दंगों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह से जिम्मेदार या शामिल आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 146, 302, 376, 425 और 120-बी और के तहत उचित कार्रवाई करें।

याचिका लगाने पर कानून मंत्री बोले- ये लोग SC का समय बर्बाद करते हैं
कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका को लेकर सोमवार को ट्वीट किया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि देश में जहां हजारों आम नागरिक न्याय के लिए इंतजार और तारीखों की मांग कर रहे हैं। ऐसे समय में कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट का कीमती समय बर्बाद करते हैं।

BBC ने चीनी कंपनी हुवेई से पैसा लेकर बनाई डॉक्यूमेंट्री
BJP से राज्यसभा सांसद और सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने BBC पर चीनी कंपनी से पैसा लेकर भारत विरोधी डॉक्यूमेंट्री बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा- BBC को चीनी कंपनी हुवेई ने मोदी की छवि खराब करने के लिए पैसा दिया है। अब BBC चीनी एजेंडे को ही आगे बढ़ा रहा है। महेश जेठमलानी दिवंगत एडवोकेट राम जेठमलानी के बेटे हैं। उन्होंने ट्वीट करके कहा- BBC इतना भारत विरोधी क्यों है? BBC का भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने का एक लंबा इतिहास रहा है। 2021 में बिना जम्मू-कश्मीर के भारत का नक्शा BBC ने जारी किया था। बाद में उसने भारत सरकार से माफी मांगी थी और नक्शे को सही किया था।

इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 24 जनवरी को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में बवाल हुआ था। दरअसल, यूनिवर्सिटी को खबर लगी कि छात्र संघ के ऑफिस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की जा रही है तो वहां की बिजली और इंटनेट काट दिया गया।

इसके बाद भी छात्र नहीं माने और उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को मोबाइल पर डाउनलोड करने का क्यूआर कोड शेयर किया। विवाद इतना बढ़ गया कि डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर देर रात पथराव किया गया। पथराव किसने किया, यह पता नहीं चल पाया है। हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए।

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उपराष्ट्रपति-कानून मंत्री के खिलाफ बॉम्बे HC में PIL दाखिल

बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में PIL दाखिल की है। याचिका में दावा किया गया है कि धनखड़ और रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को कम किया है। ऐसे में दोनों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोका जाए।

याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट यह भी घोषित करे कि दोनों के बयानों में भारत के संविधान के प्रति अविश्वास दिखता है, जिसके चलते वे संवैधानिक पदों पर रहने के योग्य नहीं हैं। बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अहमद आबिदी की ओर से यह याचिका कोर्ट में दाखिल की गई है। जल्द ही हाई कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगी।

सिस्टम पर सवाल उठा चुके हैं कानून मंत्री
दरअसल, किरेन रिजिजू कई बार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने सीजेआई को लेटर लिखकर कॉलेजियम में सरकार का प्रतिनिधि शामिल करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और जनता के प्रति जवाबदेही भी तय होगी।

किरण रिजिजू ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि कॉलेजियम सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है। उन्होंने कहा था कि हाईकोर्ट में भी जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

उपराष्ट्रपति ने SC के फैसले पर दिया था बयान
वहीं, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1973 के ऐतिहासिक फैसले पर सवाल उठाए थे। इसके साथ ही दिसंबर 2022 में धनखड़ ने NJAC अधिनियम रद्द होने पर उसे लोगों के जनादेश की अवहेलना कहा था। फैसले में कोर्ट की टिप्पणी पर धनखड़ ने कहा था कि “क्या हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं” इस सवाल का जवाब देना मुश्किल होगा। 


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RBI ने बैंकों से पूछा-अडाणी ग्रुप को कितना कर्ज दिया

नई दिल्ली: अडाणी ग्रुप पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को लेकर गुरुवार को संसद में जमकर हंगामा हुआ। पूरे विपक्ष ने अडाणी ग्रुप के वित्तीय लेनदेन की जांच संसदीय पैनल (JPC) या सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से कराने की मांग की। इस मुद्दे पर हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा को कार्यवाही शुरू होते ही पहले दोपहर 2 बजे तक और फिर अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

इधर, RBI ने सभी बैंकों से अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को दिए कर्ज की जानकारी मांगी है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि RBI के अफसरों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी है। वहीं, शेयर मार्केट में भी अडाणी ग्रुप के शेयर्स में 10% तक की गिरावट देखी गई।

अडाणी खुद सामने आए, VIDEO मैसेज में FPO रद्द करने की बात कही
बुधवार देर रात अडाणी ग्रुप ने 20 हजार करोड़ रुपए के फुली सबस्क्राइब्ड FPO को रद्द कर इन्वेस्टर्स का पैसा लौटाने की बात कही थी। बुधवार को अडाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 26.70% गिरकर 2179.75 पर बंद हुआ था। इस गिरावट को ही FPO वापस लेने की वजह माना जा रहा है।

गौतम अडाणी ने FPO रद्द करने के बाद एक वीडियो मैसेज दिया। इसमें इन्वेस्टर्स का शुक्रिया अदा किया। कहा, 'पिछले हफ्ते स्टॉक में हुए उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी के बिजनेस और उसके मैनेजमेंट में आपका भरोसा हमारे लिए आश्वासन देने वाला है। मेरे लिए मेरे निवेशकों का हित सर्वोपरि है। बाकी सब कुछ सेकेंडरी है। इसलिए निवेशकों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए हमने FPO वापस ले लिया है। बोर्ड ने महसूस किया कि FPO के साथ आगे बढ़ना नैतिक रूप से सही नहीं होगा।'

13 विपक्षी पार्टियों ने कहा- हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर संसद में चर्चा हो

अडाणी ग्रुप पर हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों को लेकर कांग्रेस, TMC, आम आदमी पार्टी, सपा, DMK, जनता दल और लेफ्ट समेत 13 विपक्षी पार्टियों ने मीटिंग की। यह बैठक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चैंबर में हुई। इनमें से 9 पार्टियों ने राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लोगों की मेहनत का पैसा बर्बाद हो रहा है। लोगों का विश्वास बैंक और LIC से उठ जाएगा। कुछ कंपनियों के शेयर लगातार गिरते जा रहे हैं। सभी पार्टियों के नेताओं ने मिलकर एक फैसला लिया है कि आर्थिक दृष्टि से देश में जो घटनाएं हो रही हैं उसे सदन में उठाना है, इसलिए हमने एक नोटिस दिया था। हम इस नोटिस पर चर्चा चाहते थे, लेकिन जब भी हम नोटिस देते हैं तो उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है।

इस मामले से जुड़े अपडेट्स...

  • AAP सांसद संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने गौतम अडाणी का पासपोर्ट जब्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी, ED और CBI को एक लेटर लिखा है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया तो वह भी कई बिजनेसमैन की तरह देश से भाग जाएंगे और देश के करोड़ों लोगों के पास कुछ भी नहीं बचेगा।
  • पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा- अपने कुछ नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए भाजपा बैंक और LIC के पैसे का इस्तेमाल कर रही है।
  • शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा- पूरा विपक्ष दोनों सदनों में हिंडनबर्ग रिपोर्ट और अडाणी के स्टॉक क्रैश होने का मुद्दा उठाएगा।

  • अडाणी ग्रुप ने कहा, भविष्य में होने वाले किसी फाइनेंशियल लॉस से इन्वेस्टर्स को बचाने के लिए बोर्ड ने तय किया है कि इस FPO के साथ आगे नहीं बढ़ेंगे। हम अपने लोगों को रिफंड देने के लिए अपने बुक रनिंग लीड मैनेजर्स (BRLM) के साथ काम कर रहे हैं। हमारी बैलेंस शीट इस समय बहुत मजबूत है। हमारा कैश फ्लो और एसेट सिक्योर है। साथ ही कर्ज चुकाने का हमारा रिकॉर्ड सही रहा है।

    हमारे इस फैसले से हमारे मौजूदा ऑपरेशंस और भविष्य की हमारी योजनाओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हम लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएशन पर फोकस रखना जारी रखेंगे और हमारी ग्रोथ आंतरिक संसाधनों से मैनेज की जाएगी। जैसे ही बाजार स्थिर होगा हमारी कैपिटल मार्केट स्ट्रैटजी का रिव्यू करेंगे। हमें पूरा भरोसा है कि हमें आपका सहयोग मिलता रहेगा। हम पर भरोसा रखने के लिए धन्यवाद।'

    3,112 से 3,276 रुपए था FPO का प्राइस बैंड
    अडाणी ग्रुप का 20,000 करोड़ का FPO 27 जनवरी को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था और 31 जनवरी को बंद हुआ। इसका प्राइस बैंड 3,112-3,276 रुपए प्रति शेयर रखा गया था। कंपनी इन पैसों से मौजूदा कर्ज को कम करने के साथ एक्सपैंशन के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाना चाहती थी।

    FPO क्या होता है?
    FPO यानी फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर। यह कंपनी के लिए पैसे जुटाने का एक तरीका है। जो कंपनी पहले से शेयर मार्केट में लिस्टेड होती है वो निवेशकों के लिए नए शेयर ऑफर करती है। ये शेयर बाजार में मौजूद शेयरों से अलग होते हैं। ज्यादातर ये शेयर प्रमोटर्स जारी करते हैं। FPO का इस्तेमाल कंपनी के इक्विटी बेस में बदलाव करने के लिए होता है।

    IPO और FPO में अंतर क्या है?
    कंपनियां अपने विस्तार के लिए IPO या FPO का इस्तेमाल करती हैं। इनीशियल पब्लिक ऑफर यानी IPO के जरिए कंपनी पहली बार बाजार में अपने शेयर्स उतारती है। जबकि FPO में अतिरिक्त शेयर्स को बाजार में लाया जाता है।

  • हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद पिछले 2 ट्रेडिंग सेशन में अडाणी ग्रुप के स्टॉक्स के इन्वेस्टर्स को भारी नुकसान हुआ है। देश का सबसे बड़ा इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर 'लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया' (LIC) भी उन प्रभावित इन्वेस्टर्स में से एक है। अडाणी ग्रुप के शेयरों में LIC का 24 जनवरी को टोटल इन्वेस्टमेंट 81,268 करोड़ रुपए था, जो 27 जनवरी को गिरकर 62,621 करोड़ रुपए रह गया है। इस हिसाब से LIC को 2 ट्रेडिंग सेशन में करीब 18,646 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

  • बजट के बाद शेयर बाजार फीका, अडाणी एंटरप्राइजेज 26% टूटा

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (1 फरवरी) को बजट पेश किया। ऐसे में बाजार की नजर सरकार की घोषणाओं पर रही। अडाणी ग्रुप के शेयर दबाव में रहे। अडाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 26.70% गिरकर 2,179.75 पर बंद हुआ।
  • गौतम अडाणी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को भारत पर साजिश के तहत हमला बताया है। ग्रुप ने 413 पन्नों का जवाब जारी किया। इसमें लिखा है कि अडाणी समूह पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। ग्रुप ने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट का असल मकसद अमेरिकी कंपनियों के आर्थिक फायदे के लिए नया बाजार तैयार करना है।  
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2 सीटों पर चुनाव लड़ने से रोकने वाली याचिका खारिज

नई दिल्ली: लोकसभा या विधानसभा में कोई उम्मीदवार एक साथ 2 सीटों पर चुनाव न लड़ सके, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 33 (7) की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मसले पर कानून बनाना संसद का काम है।

यह मामला CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच में लिस्टेड हुआ था। जनहित याचिका अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी।

कोर्ट ने कहा- विकल्प देना संसद पर निर्भर
याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा था कि आयोग का यह प्रावधान मनमाना है। क्योंकि उम्मीदवारों को दोनों सीटों से चुनाव जीतने की स्थिति में एक सीट छोड़नी पड़ती है। इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ाता है।

हालांकि सुनवाई के दौरान CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जब आप दो सीटों से चुनाव लड़ते हैं तो आपको पता नहीं होता कि आप दोनों सीटों से चुने जाएंगे... इसमें गलत क्या है? यह राजनीतिक लोकतंत्र है।

इस पर एडवोकेट एस गोपाल ने कहा कि हमने 2 महीने पहले बड़ी बेंच में यह तर्क दिया था लेकिन तब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था।

बेंच ने कहा कि किसी उम्मीदवार को एक से ज्यादा सीट पर चुनाव लड़ने की परमिशन देना लीगल पॉलिसी है। आखिर में यह संसद पर निर्भर होता है कि वो राजनीतिक लोकतंत्र को इस तरह का विकल्प देना चाहता है या नहीं।

कब-कब बदला चुनावी उम्मीदवारों के लिए नियम
1996 से पहले तक नेता तीन सीटों से चुनाव लड़ सकता था। रिप्रजेन्टेशन ऑफ द पीपुल एक्ट (1951) में संशोधन के बाद यह तय हुआ कि कोई भी उम्मीदवार दो से अधिक सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सकता।

1975 में 32 साल के अटल बिहारी वाजपेयी ने यूपी की तीन सीटों बलरामपुर, मथुरा, लखनऊ से चुनाव लड़ा। सिर्फ बलरामपुर से जीते। मथुरा में तो उनकी ही जमानत जब्त हो गई थी।

1977 में इंदिरा गांधी अपनी सीट रायबरेली से हार गई थीं। 1980 में इंदिरा दो सीटों रायबरेली (यूपी) और मेडक (अब तेलंगाना में) से उतरीं। दोनों सीटों से जीतीं।

एक नेता, एक सीट : चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से सेक्शन 33 (7) में संशोधन की सिफारिश की थी ताकि एक नेता, एक सीट पर ही लड़े।

एक सीट पर चुनाव का खर्च यूं समझिए: 2014 के लोकसभा चुनाव में 543 सीटों पर आयोग ने 3,426 करोड़ रुपए खर्च किए थे। यानी एक सीट पर 6.30 करोड़। अगर कोई नेता दोनों सीटों पर चुनाव जीतता है, तो उसे एक सीट छोड़नी होगी। यानी उस सीट पर उपचुनाव में दोबारा इतना ही पैसा खर्च होगा।

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राहुल ने लाल चौक में तिरंगा फहराया

श्रीनगर:  भारत जोड़ो यात्रा के दौरान रविवार को श्रीनगर के लाल चौक में राहुल गांधी ने तिरंगा फहराया। इससे पहले उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर राष्ट्रगीत गाया। राहुल के साथ उनकी बहन प्रियंका गांधी और कांग्रेस नेता जयराम रमेश मौजद रहे। राहुल तिरंगा फहराने के दौरान भारी तादाद में पुलिस बल तैनात रही। तिरंगा फहराने से पहले ही पूरे इलाके को बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया। आसपास की सभी दुकानें बंद करवा दी गईं।

राहुल गांधी के अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती के शामिल होने की जानकारी है। पंथा चौक से अवामी नेशनल कांफ्रेंस के प्रेसिडेंट मुजफ्फर शाह भी यात्रा में शामिल हुए हैं। आज श्रीनगर के चेश्मा शाही रोड पर यात्रा का हाल्ट होगा और शाम 5:30 बजे राहुल प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

30 जनवरी को राहुल गांधी श्रीनगर के एमए रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय में तिरंगा फहराएंगे और इसके साथ ही यात्रा खत्म हो जाएगी। इसके बाद यहां एसके स्टेडियम में एक जनसभा आयोजित होगी, जिसके लिए 23 विपक्षी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया है।

यात्रा में शामिल हुईं महबूबा मुफ्ती
कांग्रेस की यात्रा में शनिवार को PDP चीफ महबूबा मुफ्ती अपनी बेटी इल्तिजा मुफ्ती के साथ शामिल हुईं। राहुल के साथ उनकी बहन प्रियंका गांधी भी नजर आईं। यात्रा के दौरान राहुल ने पुलवामा में 2019 में बम विस्फोट में शहीद हुए CRPF के 40 जवानों को श्रद्धांजलि दी। 

राहुल की सुरक्षा में चूक को लेकर खड़गे ने शाह को चिट्ठी लिखी
दो दिन पहले शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में राहुल गांधी के सुरक्षा घेरे में कई लोग घुस आए थे। राहुल की सुरक्षा में हुई इस चूक को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 27 जनवरी को गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी। खड़गे ने गृह मंत्री से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की अपील की। साथ ही यात्रा में शामिल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की थी। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने चिट्ठी में क्या लिखा...
खड़गे ने चिट्ठी में लिखा, 'मैं आपको यह चिट्ठी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सुरक्षा में हुई चूक के बारे में लिख रहा हूं। इसके बारे में आपको भी पता होगा। सुरक्षा अधिकारियों की सलाह के बाद शुक्रवार को यात्रा रोक दी गई थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने यात्रा के खत्म होने तक उसे सुरक्षा देने का भरोसा दिया है। मैं उनके इस बयान का स्वागत करता हूं।

इस यात्रा में हर दिन कई लोग शामिल होते हैं। इसीलिए हम कह नहीं सकते कि पूरे दिन में यात्रा में कितने लोग शामिल होंगे। अगले दो दिन यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। वहीं, 30 जनवरी को श्रीनगर में यात्रा खत्म होगी, यहां कई दलों ने नेता भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में अगर आप व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखें और अधिकारियों को सलाह दें तो मैं हमेशा आपका आभारी रहूंगा।'

राहुल के सुरक्षा घेरे में घुस गए थे लोग
शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड में एंट्री के सिर्फ एक किलोमीटर बाद ही राहुल गांधी की सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई थी। यहां राहुल के सुरक्षा घेरे में कई लोग घुस आए थे। इसके बाद पुलिस राहुल गांधी और उमर अब्दुल्ला को गाड़ी में बैठाकर अनंतनाग ले गई थी। अनंतनाग में राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था- यात्रा के दौरान पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई। टनल से निकलने के बाद पुलिसकर्मी नहीं दिखे। मेरे सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि हम और नहीं चल सकते। मुझे अपनी यात्रा रोकनी पड़ी। बाकी लोग यात्रा कर रहे थे। 

सुरक्षा में चूक के बाद तीन बड़े बयान

  • राहुल गांधी: भीड़ को काबू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि हम यात्रा कर सकते। मेरी सुरक्षा में लगे लोगों की सलाह को दरकिनार करना मेरे लिए मुश्किल था।
  • मल्लिकार्जुन खड़गे: राहुल गांधी की सुरक्षा में चूक परेशान करने वाली है। भारत पहले ही दो PM और कई नेताओं को खो चुका है। हम यात्रियों के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग करते हैं।
  • जम्मू-कश्मीर के अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह आरके गोयल: सरकार सुरक्षा के प्रति गंभीर है। भारत जोड़ो यात्रा के लिए सबसे अच्छी और संभव सुरक्षा की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं।
  • केसी वेणुगोपाल ने कहा था- 15 मिनट से कोई सुरक्षा अधिकारी नहीं है
    राहुल गांधी की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पर निशाना साधा। वेणुगोपाल ने सुरक्षा में सेंध के लिए पुलिस अधिकारियों और CRPF के जवानों को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था कि पिछले 15 मिनट से यात्रा के साथ कोई भी सुरक्षा अधिकारी नहीं थे, ये गंभीर चूक है। राहुल और अन्य कार्यकर्ता बिना सुरक्षा के यात्रा में आगे नहीं बढ़ सकते हैं।
  • 30 जनवरी को श्रीनगर में खत्म होगी यात्रा
    भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी। इसने गुरुवार रात को पंजाब से जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया। 30 जनवरी को राहुल गांधी श्रीनगर के कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इसके साथ ही यात्रा समाप्त हो जाएगी। इस दिन रैली में समान विचारधारा वाली पार्टियों के नेता और प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे।
  • जम्मू में कठुआ जिले के हीरानगर से कड़ी सुरक्षा के बीच भारत जोड़ो यात्रा 22 जनवरी को फिर से शुरू हुई। शनिवार (21 जनवरी) को ब्रेक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हीरानगर से सुबह 7 बजे यात्रा रवाना हुई। शनिवार को नरवाल में हुए ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों ने सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है। NIA की टीम जांच के लिए पहुंच गई है। उधर, LG मनोज सिन्हा ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है।
  • जम्मू कश्मीर के रामबन में जोरदार बारिश के बाद भारत जोड़ो यात्रा रद्द कर दी गई थी। लैंडस्लाइड और भारी बारिश के कारण कई सड़कें ब्लॉक हो गईं। इसी वजह से यात्रा का दूसरा चरण रद्द कर दिया गया। मामले की जानकारी कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर दी थी।
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त्रिपुरा में भाजपा ने 6 विधायकों के टिकट काटे

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को भाजपा ने कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी कर दी। पहले चरण में 48 कैंडिडेट्स के नाम की घोषणा की है। पार्टी ने 6 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है। भाजपा ने राज्य से पहली बार 11 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक के भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया गया है। वह धनपत सीट से प्रतिमा चुनाव लड़ेंगी।

वहीं, कांग्रेस ने भी त्रिपुरा चुनाव के लिए 17 सीटों पर कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी की है। पार्टी ने अगरतला से फिर से सुदीप रॉय बर्मन को ही मैदान में उतारा है। CM माणिक साहा को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने टाउन बार्दोवाली सीट से आशीष कुमार साहा को टिकट दिया है।

भाजपा जल्द ही अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की घोषणा करेगी
भाजपा ने जिन 6 विधायकों के नाम काटे हैं, उनके नाम विम्मी मजूमदार, सुभाष चंद्र दास, अरुण चंद्र भौमिक, वीरेंद्र किशोर देव बर्मन, परिमल देबबर्मा और विप्लव कुमार हैं। पार्टी संबित पात्रा ने अनिल बलूनी के साथ मिलकर पहले चरण की लिस्ट जारी की है। जल्दी ही अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 20 सीटों के लिए भी घोषणा की जाएगी। शुक्रवार को CPIM छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मोबोशर अली कैलाशहर विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे।

त्रिपुरा विधानसभा: सीटें- 60, बहुमत- 31

राज्य में 2018 में 59 सीटों पर चुनाव हुए थे। BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। उसे 35 सीटें मिली थीं। भाजपा ने लेफ्ट के 25 साल के गढ़ को ध्वस्त कर दिया था। पहले बिप्लब देव CM बनाए गए थे, लेकिन मई 2022 में माणिक साहा को मुख्यमंत्री बना दिया गया। आगामी चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए CPM और कांग्रेस ने हाथ मिला लिया है। एक और बड़ी पार्टी ममता बनर्जी की TMC भी है, जो भाजपा को टक्कर दे सकती है।


चुनाव तारीखों का ऐलान से पहले BJP-कांग्रेस में झड़प हुई थी
त्रिपुरा में BJP और कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़प विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के करीब आधे घंटे बाद त्रिपुरा के मजलिसपुर में BJP और कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़प हुई। इसमें कई लोग घायल हो गए। झड़प में कांग्रेस नेता डॉ. अजय कुमार घायल हो गए। झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे डॉ अजय कुमार अभी त्रिपुरा, नगालैंड और सिक्किम के प्रदेश प्रभारी हैं। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।

3 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान एक साथ हुआ
चुनाव आयोग ने 17 जनवरी को त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। त्रिपुरा में 16 फरवरी को मतदान होगा। मेघालय और नगालैंड में 27 फरवरी को वोटिंग होगी। सभी राज्यों के नतीजों का ऐलान 2 मार्च को होगा। इन चुनावों की एक दिलचस्प बात यह है कि तीनों राज्यों में बहुमत का आंकड़ा 31 है।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि तीनों राज्यों में महिला वोटरों की भागीदारी ज्यादा है और यहां चुनावी हिंसा भी ज्यादा नहीं होती। हम यहां पर निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रतिबद्ध हैं।


दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में PM ने कहा कि अगले लोकसभा चुनाव में सिर्फ 400 दिन बचे हैं। ऐसे में पार्टी पदाधिकारियों और हर एक कार्यकर्ता को एक-एक वोटर से मिलने उनके दरवाजे तक जाना चाहिए। बैठक ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के एक्सटेंशन पर मुहर लगा दी। नड्‌डा का कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ा दिया गया है। नड्‌डा का मौजूदा कार्यकाल 20 जनवरी को खत्म हो रहा था। अब वे लोकसभा चुनाव तक पार्टी की कमान संभालेंगे। नीचे ग्राफिक में भाजपा के गठन से लेकर अब तक बने अध्यक्षों का ब्योरा दिया गया है
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जैकलीन-नोरा के बाद चाहत खन्ना को फंसाना चाहता था सुकेश

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में ठग सुकेश के साथ फंसी टीवी एक्ट्रेस चाहत खन्ना ने हाल ही में कई खुलासे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सुकेश ने उन्हें धोखे से जेल में मिलने बुलाया था। तब उसने खुद का परिचय तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के भतीजे के रूप में दिया था। जेल में ही शादी के लिए प्रपोज भी किया था।

इवेंट के नाम पर मुझे तिहाड़ जेल ले जाया गया

चाहत ने कहा, 'मैं 18 मई, 2018 को दिल्ली गई थी। मुंबई एयरपोर्ट पर मैं एक महिला एंजल खान से मिली, जिसने कहा कि वो मेरे साथ इवेंट में जाएगी। जब हम दिल्ली में उतरे तो हमने स्कूल जाने के लिए एक कार ली। थोड़ी देर बाद हम अचानक रुक गए और उसने कहा कि हमें कार बदलनी होगी, क्योंकि इसे स्कूल के अंदर नहीं जाने दिया जाएगा। हम फिर एक ग्रे इनोवा में चले गए और कुछ सेकेंड्स के भीतर मुझे एहसास हुआ कि हम तिहाड़ जेल के बाहर हैं। जब मैंने उससे इस बारे में पूछा, तो उसने कहा कि हमें जेल के रास्ते स्कूल में जाना है।'

मुझे पता था कि मैं फंस गई हूं
चाहत का कहना है कि ये महसूस करने के बाद कि मैं तिहाड़ में हूं, मैंने चिल्लाना शुरू कर दिया और कार को रोकने के लिए कहा, लेकिन एंजल मुझे शांत करती रही और इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, मैं तिहाड़ जेल के अंदर थी।

इस बारे में आगे बात करते हुए चाहत ने कहा, 'मुझे पता था कि मैं फंस गई हूं और मैं अपने दो बच्चों के बारे में सोचकर घबरा गई, जो मेरे पेरेंट्स के साथ मुंबई में थे। कार से उतरते ही हमें एक कमरे में ले जाया गया। मुझे याद है कि कमरा लैपटॉप, घड़ियों और महंगी लग्जरी चीजों से भरा हुआ था। वहां पर दुनिया भर के ब्रांडेड बैग थे। उस छोटे से कमरे में सब कुछ भरा हुआ था।'

सुकेश ने अपना परिचय जे. जयललिता के भतीजे के रूप में किया था
कमरे में चाहत का परिचय एक ऐसे व्यक्ति से हुआ जो खुद को शेखर रेड्डी कहता था। इस बारे में बात करते हुए चाहत ने कहा, 'उसने एक फैंसी शर्ट के साथ, सोने की चेन पहन रखी थी। उन्होंने खुद को एक फेमस साउथ टीवी चैनल के मालिक और जे. जयललिता के भतीजे के रूप में पेश किया था। उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव के दौरान EVM से छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जेल में उन्हें VIP ट्रीटमेंट दिया जा रहा था। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वो मेरे बहुत बड़े फैन हैं और उन्होंने मेरा टीवी शो "बड़े अच्छे लगते हैं" देख रखा है और मुझसे मिलना चाहते हैं।

सुकेश ने चाहत को जेल में किया था प्रपोज
चाहत ने आगे बताया, 'मैंने उससे कहा तुमने मुझे यहां क्यों बुलाया है? मैं अपने 6 महीने के बच्चे को घर पर छोड़कर ये सोचकर आई हूं कि यहां पर एक इवेंट है। फिर, इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, वो घुटने के बल बैठ गया और कहने लगा कि वो मुझसे शादी करना चाहता है। मैंने उस पर चिल्लाते हुए कहा- मैं शादीशुदा हूं और मेरे दो बच्चे हैं लेकिन उसने कहा कि मेरे पति मेरे लिए सही आदमी नहीं हैं और वो मेरे बच्चों का पिता बनेगा। मैं इतनी डर गई कि मैं रोने लगी।'

एंजल ने मुझे 'शगुन' के रूप में लगभग 2 लाख रुपए दिए थे
चाहत कहती हैं, 'वहां से निकलने के बाद मैं और एंजल सीधे एयरपोर्ट गए और रास्ते में, एंजल ने मुझे 'शगुन' के रूप में लगभग 2 लाख रुपए दिए। इसके साथ ही उसने मुझे ये भी कहा वो वास्तव में मुझे पसंद करता है। उस समय मैं चुप रही क्योंकि मैं घर वापस जाना चाहती थी। फिर उसने मुझे अपनी वर्साचे की घड़ी उतार कर दे दी, जो उसने पहनी हुई थी।

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सुखोई और मिराज एयरक्राफ्ट टकराकर क्रैश

शनिवार सुबह 10 से 10.30 बजे के बीच बड़ा हादसा हुआ। एयरफोर्स के दो फाइटर प्लेन सुखोई-30 और मिराज-2000 एयरक्राफ्ट आपस में टकराकर क्रैश हो गए। मिराज में एक और सुखोई में दो पायलट सवार थे। इनमें से एक पायलट की मौत हो गई है। हालांकि, एयरफोर्स ने मौत की पुष्टि नहीं की है। अभी यह साफ नहीं है कि यह पायलट किस एयरक्राफ्ट का था। एयरफोर्स ने बताया कि दोनों ने रूटीन ट्रेनिंग के लिए उड़ान भरी थी।

मिली अब तक की जानकारी के मुताबिक टकराने के बाद दोनों विमानों के दो अलग-अलग जगहों पर गिरने की आशंका है। एक प्लेन मध्यप्रदेश के मुरैना के पहाड़गढ़ में और दूसरे के राजस्थान के भरतपुर के पिंगोरा में गिरने की बात कही जा रही है।

मिली सूचना के मुताबिक, मुरैना में मिराज और भरतपुर में सुखोई गिरा है। पहले मुरैना में सुखोई और भरतपुर में मिराज गिरने की बात कही जा रही थी। हादसे में क्रैश हुए दोनों फाइटर जेट ने ग्वालियर एयरबेस से उड़ान भरी थी। 

मुरैना कलेक्टर ने कहा- दो पायलट को बचा लिया
मुरैना एसपी आशुतोष बागरी ने बताया कि ‘ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन से वायुसेना के दो विमानों के टेक ऑफ करने की जानकारी मिली थी। इनमें से एक पहाड़गढ़ में क्रैश हुआ है। हम दूसरे विमान की सर्चिंग कर रहे हैं।’
इधर, मुरैना कलेक्टर अंकित अस्थाना का दावा है कि दो पायलट को बचा लिया गया है। के पास उनकी तस्वीरें भी आ रही हैं। लेकिन मौके से मिली तस्वीरों में कुछ ऐसी भी हैं, जिनसे किसी के मौत की भी आशंका जताई जा रही है।

भरतपुर के डीएसपी बोले- सुबह 10 से सवा 10 बजे जानकारी मिली थी
राजस्थान में भरतपुर के डीएसपी अजय शर्मा ने बताया कि ‘हमें सुबह 10 से सवा 10 बजे के करीब प्लेन क्रैश होने की सूचना मिली थी। मौके पर आने पर पता चला कि यह एयर फोर्स का फाइटर जेट है। हालांकि, मलबे को देखकर अभी यह पता नहीं चल पाया है कि यह कौन सा फाइटर प्लेन है। अभी तक इसके पायलट के बारे में भी जानकारी नहीं मिल पाई है।

पहाड़गढ़ में हादसे की जगह से एक पायलट का एक हाथ मिला
मुरैना में गिरे सुखोई में सवार दोनों पायलट घायल हैं। उन्हें ग्वालियर में भर्ती कराया गया है। मुरैना के पहाड़गढ़ में हादसे की जगह से एक पायलट का एक हाथ भी मिला है। आशंका है कि यह हाथ भरतपुर में गिरे मिराज एयरक्रॉफ्ट के पायलट का हो सकता है। मुरैना एसपी आशुतोष बागरी ने भास्कर को बताया कि- ‘ह्यूमन बॉडी का यह पार्ट किसका है, इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकता।

हादसे जुड़े बड़े अपडेट्स

  • भरतपुर में एयरफोर्स की टीम पहुंच गई है। घटनास्थल से कोई भी पायलट नहीं मिला है। ऐसा कहा जा रहा है कि पायलट प्लेन एजेक्ट कर गए होंगे। इनकी तलाश जारी है।
  • मुरैना और भरतपुर दोनों जगहों के घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जुटी है। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एयरफोर्स चीफ से बात की है। साथ ही मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है।
  • पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भरतपुर में फाइटर प्लेन क्रैश होने के बाद इसके पुर्जे करीब एक बीघा एरिया में बिखर गए। जहां प्लेन का एक बड़ा हिस्सा गिरा है, वहां करीब 7 फीट गहरा गड्‌ढा हो गया है। इसे खोद कर पाट्‌र्स बाहर निकाले जा रहे हैं।
  • आसमान में ही आग लग गई थी
    ग्रामीणों के मुताबिक, प्लेन में आसमान में ही आग लग गई थी और देखते ही देखते जलता हुआ फाइटर जेट गिर गया। घटनास्थल के नजदीक ही रेलवे स्टेशन भी है।

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दिग्विजय के बाद राशिद अल्वी बोले-सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो दिखाओ

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राशिद अल्वी भी दिग्विजय सिंह के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने सरकार से सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो जारी करने की मांग की है। अल्वी ने कहा कि हमें सेना पर गर्व है, लेकिन सरकार पर भरोसा नहीं। सर्जिकल स्ट्राइक पर BJP नेताओं के बयानों में असमानता है। सरकार कहती है कि हमारे पास सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो है तो उसे जारी क्यों नहीं कर देती।

उन्होंने दिग्विजय सिंह का समर्थन करते हुए पूछा- दिग्विजय ने क्या गलत कहा? बस सरकार से वीडियो जारी करने की मांग की थी। DSP देविंदर सिंह का कुछ अता-पता नहीं है। जिसकी पुलवामा हमले में आतंकियों की मदद करने का आरोप था। यह बड़ा खेल है, इसमें मत पड़िए.. वो खेल तो पता चले कि क्या खेल है। वो मालूम तो हो कि उसकी जमानत कैसे हो गई।

आर्मी पर भरोसा, लेकिन सरकार पर नहीं
अल्वी ने कहा कि सेना हमारा गौरव है और हमें सेना पर पूरा भरोसा है। लेकिन हमें देश की सरकार पर भरोसा नहीं है। अमित शाह कहते हैं कि हमनें सर्जिकल स्ट्राइक में 250-300 आतंकियों को मारा। सुषमा स्वराज ने कहा था कि हमने ऐसी जगह को निशाना बनाया, जहां कोई मारा न जाए। जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक में भारत में 400 आतंकियों को ढेर किया है। ये सभी भाजपा के नेता हैं और इनके बयानों में असमानता है। ऐसे में लोगों को शक तो होगा ही। दूसरी ओर सरकार कह रही है कि हमारे पास सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो है। अगर सरकार के पास वीडियो है तो उसे जारी कर लोगों का शक दूर क्यों नहीं कर देती।

अगर सरकार के पास सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो नहीं है तो उसे अपनी गलती मान लेनी चाहिए। साथ ही यह झूठ बोलने के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।

दिग्विजय के बयान पर राहुल के रुख को लेकर राशिद ने कहा कि मुझे नहीं पता कि राहुल गांधी ने क्या कहा। हालांकि पार्टी का बयान उसे माना जाता है जो पार्टी के प्रवक्ता देता है। हर राजनीतिक दल में नेताओं को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है।

बता दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिग्विजय सिंह के बयान को बेहूदा बताया था। उन्होंने कहा कि अगर सेना कुछ करती है तो उस पर सबूत देने की जरूरत नहीं। ये दिग्विजय जी की निजी राय है। मैं इससे सहमत नहीं हूं।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने 23 जनवरी को सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाया। उन्होंने जम्मू में कहा कि सरकार ने अब तक सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत नहीं दिया है। केंद्र सरकार सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में बात करती है कि हमने इतने लोग मार गिराए हैं, लेकिन सबूत कुछ नहीं है।

दिग्विजय ने सर्जिकल स्ट्राइक के अलावा 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले को लेकर भी प्रधानमंत्री को घेरा। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पुलवामा हमले के वक्त CRPF अफसरों ने कहा था कि जवानों को एयरक्राफ्ट से मूवमेंट कराया जाए, पर प्रधानमंत्री नहीं माने।

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कंपनियों पर कर्ज की रिपोर्ट के बाद अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयर्स में गिरावट

नई दिल्ली: कंपनियों पर कर्ज की रिपोर्ट के बाद अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयर्स में गिरावट का दौर जारी है। अडाणी टोटल गैस और अडाणी ट्रांसमिशन के शेयर्स में 20-20% की गिरावट आई है। गिरावट का ये दौर तब शुरू हुआ, जब फोरेंसिक फाइनेंशियल रिसर्च फर्म हिंडेनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अडाणी ग्रुप पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया। अडाणी ग्रुप पर इसका बड़ा असर पड़ा है।

अडाणी की नेटवर्थ बुधवार से अब तक यानी 3 दिन में 10% से ज्यादा कम हो गई है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक अडाणी को 1.32 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। अडाणी की कंपनियों की मार्केट कैप भी कम हुई है, जिसके चलते निवेशकों को 2.75 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

अमेरिकी रिपोर्ट में ग्रुप पर गंभीर आरोप, इसमें मनी लॉन्ड्रिंग भी
फोरेंसिक फाइनेंशियल रिसर्च फर्म हिंडेनबर्ग ने बुधवार को जारी रिपोर्ट में बताया कि अडाणी ग्रुप की सभी 7 प्रमुख लिस्टेड कंपनियों पर काफी ज्यादा कर्ज है। ग्रुप की सभी कंपनियों के शेयर 85% से ज्यादा ओवरवैल्यूड भी हैं। अडाणी ग्रुप ने शेयरों में हेरफेर की। अकाउंटिंग में धोखाधड़ी की गई है। अडाणी ग्रुप कई दशकों से मार्केट मैनिपुलेशन, अकाउंटिंग फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग कर रहा है।

इस रिपोर्ट के अडाणी ग्रुप पर 3 बड़े इम्पैक्ट

1. टोटल नेटवर्थ अब 96.6 बिलियन डॉलर, यानी 7.88 लाख करोड़ रुपए रह गई है।

2. अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड का 20,000 करोड़ रुपए का फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) शुक्रवार को खुला। प्राइस बैंड 3 हजार 112 से 3 हजार 276 रुपए प्रति शेयर तय हुआ। पर आज गिरावट के चलते अडाणी एंटरप्राइजेज का शेयर ही 2 हजार 768 रुपए पर आ गया। यानी 18% गिरावट आ गई।

3. फोर्ब्स की अमीरों की लिस्ट में अडाणी ग्रुप के मालिक गौतम अडाणी चौथे नंबर से खिसकर 7वें पर आ गए हैं। 25 जनवरी को उनकी नेटवर्थ 9.20 लाख करोड़ थी, जो शुक्रवार को 7.88 लाख करोड़ रुपए पर आ गई।

जानिए अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयर्स में कितनी गिरावट
कंपनीआज गिरावटबीते 5 दिनों में गिरावट
अडाणी पोर्ट्स-15.24%-22.84%
अडाणी विल्मर-5.00%-7.05%
अडाणी पावर-5.00%-9.80%
अडाणी टोटल गैस-20.00%23.28%
अडाणी ग्रीन एनर्जी-20.00%-24.97%
अडानी इंटरप्राइजेज-18.31%-20.14%
अंबुजा सीमेंट-16.63%-26.41%
ACC-12.27%-20.46%
NDTV-4.99%-11.36%

बुधवार को भी रही थी बड़ी गिरावट
बुधवार को अडाणी ट्रांसमिशन 8.08%, अडाणी पोर्ट्स 6.13%, अडाणी विल्मर 4.99%, अडाणी पावर 4.95%, अडाणी टोटल गैस 3.90%, अडाणी ग्रीन एनर्जी 2.34% और अडाणी एंटरप्राइजेज 1.07% गिरकर बंद हुआ। अडाणी ग्रुप द्वारा हाल ही में खरीदी गई कंपनियों अंबुजा सीमेंट 6.96%, ACC 7.14% और NDTV का शेयर 5.00% गिरा।

अडाणी ग्रुप के CFO जुगशिंदर सिंह ने आरोपों को बताया बकवास
हालांकि अडाणी ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) जुगशिंदर सिंह ने इस रिपोर्ट को बकवास बताया है। उन्होंने रिपोर्ट को फैक्टलेस बताते हुए कहा कि जो आरोप लगाए गए हैं, वे बेबुनियाद हैं। यह रिपोर्ट दुर्भावना से प्रेरित है। हिंडनबर्ग रिसर्च ने हमसे संपर्क करने या मैट्रिक्स को वेरिफाई करने की कोशिश नहीं की। यह रिपोर्ट गलत सूचनाओं से भरी है।

हिंडनबर्ग फर्म के खिलाफ अडाणी ग्रुप ले सकता है लीगल एक्शन
अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग के खिलाफ शेयर बिक्री को नुकसान पहुंचाने के मामले में अडाणी ग्रुप लीगल एक्शन लेने का विचार कर रहा है। लीगल एक्शन को लेकर हिंडनबर्ग ने कहा कि वह पूरी तरह से अपनी रिपोर्ट के साथ खड़ा है और अडाणी ग्रुप द्वारा किसी भी कानूनी कार्रवाई का स्वागत करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि अगर अडाणी गंभीर हैं, तो उन्हें अमेरिका में भी मुकदमा दायर करना चाहिए, जहां हम काम करते हैं। हमारे पास कानूनी प्रक्रिया में मांगे जाने वाले दस्तावेजों की एक लंबी लिस्ट है।

SEBI कर रही रिपोर्ट की जांच
रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) अब अदानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है। इतना ही नहीं SEBI ने 'अदानी-होल्सिम डील' में इस्तेमाल SPV का ब्यौरा मांगा है। सेबी ने पिछले एक साल में अडाणी ग्रुप की ओर से की गई सभी डील्स की जांच तेज कर दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लिस्टेड स्पेस में अडाणी ग्रुप की ओर से जितने भी ट्रांजैक्शन हुए हैं, सेबी उन सभी ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है और जांच को पहले से तेज कर दिया है।

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राहुल ने आज यात्रा कैंसिल की; खड़गे ने कहा- हम पहले भी दो PM खो चुके

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड में एंट्री के सिर्फ एक किलोमीटर बाद ही राहुल गांधी की सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई। यहां राहुल के सुरक्षा घेरे में कई लोग घुस आए थे। इसके बाद पुलिस राहुल गांधी और उमर अब्दुल्ला को गाड़ी में बैठाकर अनंतनाग ले गई। अनंतनाग में राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज यात्रा के दौरान पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई। टनल से निकलने के बाद पुलिसकर्मी नहीं दिखे। मेरे सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि हम और नहीं चल सकते। मुझे अपनी यात्रा रोकनी पड़ी। बाकी लोग यात्रा कर रहे थे।

राहुल ने कहा- भीड़ को काबू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि हम यात्रा कर सकते। मेरी सुरक्षा में लगे लोगों की सलाह को दरकिनार करना मेरे लिए मुश्किल था। इधर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट किया- भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जम्मू-कश्मीर में राहुल गांधी की सुरक्षा में चूक परेशान करने वाली है। भारत पहले ही दो PM और कई नेताओं को खो चुका है। हम यात्रियों के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग करते हैं।

केसी वेणुगोपाल बोले- 15 मिनट से कोई सुरक्षा अधिकारी नहीं है
राहुल गांधी की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने नाराजगी जताई। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पर निशाना साधा। वेणुगोपाल ने सुरक्षा में सेंध के लिए पुलिस अधिकारियों और CRPF के जवानों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 15 मिनट से यात्रा के साथ कोई भी सुरक्षा अधिकारी नहीं थे, ये गंभीर चूक है। राहुल और अन्य कार्यकर्ता बिना सुरक्षा के यात्रा में आगे नहीं बढ़ सकते हैं।

हम सब कोऑर्डिनेशन के हिसाब से कर रहे हैं
वेणुगोपाल ने कहा, 'कल तक जम्मू में सब कुछ ठीक था, लेकिन अब क्या हुआ। वो सारे पुलिस अधिकारी कहां थे, यहां मौके पर कोई नहीं था, यह बड़ा मामला है। हमारी पार्टी के नेताओं ने गर्वनर और पुलिस अधिकारियों के साथ एक महीने पहले ही बैठक की थी। हमने गुरुवार शाम तक इस बारे में कोई शिकायत नहीं की थी। अब हम इस तरह से आगे नहीं जा सकते क्योंकि इस एरिया में कोई भी आता-जाता है।

सुरक्षा बलों को भी इस एरिया के बारे में पता है। यात्रा सिर्फ 2-3 दिन के लिए है। सुरक्षा में हुई इस चूक के लिए सिक्योरिटी फोर्सेस को जवाब देना पड़ेगा। कल उन्होंने हमें इसी रूट के बारे में बताया था, हम सब कोऑर्डिनेशन के हिसाब से कर रहे हैं। हमारी टीम बाजार के रास्ते से जाना चाहती थी, लेकिन सुरक्षाबलों ने कहा कि उधर से मत जाइए तो हम नहीं गए।'

30 जनवरी को श्रीनगर में खत्म होगी यात्रा
भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी। इसने गुरुवार रात को पंजाब से जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया। 30 जनवरी को राहुल गांधी श्रीनगर के कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इसके साथ ही यात्रा समाप्त हो जाएगी।

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जम्मू में कड़ी सुरक्षा के बीच भारत जोड़ो यात्रा शुरू, ब्लास्ट के बाद अलर्ट जारी

जम्मू में कठुआ जिले के हीरानगर से कड़ी सुरक्षा के बीच भारत जोड़ो यात्रा 22 जनवरी को फिर से शुरू हुई। शनिवार (21 जनवरी) को ब्रेक के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हीरानगर से सुबह 7 बजे यात्रा रवाना हुई। शनिवार को नरवाल में हुए ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों ने सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है। NIA की टीम जांच के लिए पहुंच गई है। उधर, LG मनोज सिन्हा ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। पढ़ें पूरी खबर...

जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से भारत जोड़ो यात्रा रद्द, अब 27 जनवरी से होगी शुरू

जम्मू कश्मीर के रामबन में जोरदार बारिश के बाद भारत जोड़ो यात्रा रद्द कर दी गई थी। लैंडस्लाइड और भारी बारिश के कारण कई सड़कें ब्लॉक हो गईं। इसी वजह से यात्रा का दूसरा चरण रद्द कर दिया गया। मामले की जानकारी कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर दी थी।
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BBC डॉक्यूमेंट्री पर दिल्ली यूनिवर्सिटी में हंगामा

नई दिल्ली: गुजरात दंगों पर बनी BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ की स्क्रीनिंग को लेकर शुक्रवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों और पुलिस में ठन गई। छात्रों का कहना था कि वे यह डॉक्यूमेंट्री देखना चाहते हैं, जबकि पुलिस उन्हें देखने नहीं दे रही है। वहीं, पुलिस का कहना है कि इस डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लिहाजा इसकी स्क्रीनिंग की इजाजत नहीं दी जा सकती।

पुलिस ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की आर्ट्स फैकल्टी के पास धारा 144 लागू है। यहां भीड़ जमा होने की इजाजत नहीं दी जा सकती। हंगामे के बाद कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया है। एक दिन पहले गुरुवार को हैदराबाद यूनिवर्सिटी में इसी डॉक्यूमेंट्री को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच विवाद हो चुका है।

डॉक्यूमेंट्री के विरोध में कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग
हैदराबाद में SFI ने 400 से अधिक छात्रों को विवादित डॉक्यूमेंट्री दिखाई। जवाब में RSS की स्टूडेंट्स विंग और ABVP कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी कैंपस में 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म की स्क्रीनिंग की। SFI ने डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग से जुड़ी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इसके कैप्शन में लिखा कि ABVP के कार्यकर्ताओं ने हंगामा करने की कोशिश की, लेकिन हमने उन्हें कामयाब नहीं होने दिया। 

ABVP का आरोप- प्रशासन ने डॉक्यूमेंट्री दिखाने की अनुमति दी
इस मामले में ABVP कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कैंपस में BBC की डॉक्यूमेंट्री दिखाने की अनुमति देने का आरोप लगाया। इसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी मेन गेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने हमें कैंपस में 'द कश्मीर फाइल्स' की स्क्रीनिंग करने से रोकने का प्रयास किया।

जब हम फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए जरूरी इक्विपमेंट लेकर कैंपस में दाखिल हो रहे थे, तो सिक्योरिटी गार्ड्स ने हमें रोकने की कोशिश की। जब हमने विरोध किया तो गार्ड्स ने हमारे साथ मारपीट की। समझ नहीं आता जब सरकार ने BBC की डॉक्यूमेंट्री पर बैन लगा दिया है तो कैंपस में उसे दिखाने की इजाजत कैसे दी गई।

यूनिवर्सिटी ने छात्रों की काउंसलिंग कराई
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार देवेश निगम ने इस मसले पर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए कैंपस में और फिल्मों की स्क्रीनिंग को रोक दिया गया है। कानून व्यवस्था के मुद्दे को देखते हुए डीन-स्टूडेंट्स वेलफेयर ने छात्रों के ग्रुप की काउंसलिंग कराई है। जबकि स्टूडेंट्स का कहना है कि वे अपने तय कार्यक्रमों के अनुसार ही काम करेंगे। 

इससे पहले 21 जनवरी को भी स्टूडेंट्स के एक ग्रुप ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के कैंपस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रखी थी। छात्रों ने इसके लिए न यूनिवर्सिटी प्रशासन को सूचना दी और न ही इजाजत ली थी। मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने एक्शन लिया। 

इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 24 जनवरी को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में भी विवाद हुआ। JNU में छात्र डॉक्यूमेंट्री न देख पाएं इसलिए प्रशासन ने बिजली गुल कर दी और इंटरनेट कनेक्शन भी काट दिया।

इसके बाद भी छात्र नहीं माने और उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को मोबाइल पर डाउनलोड करने का क्यूआर कोड शेयर किया। विवाद इतना बढ़ गया कि डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर देर रात पथराव किया गया। पथराव किसने किया, यह पता नहीं चल पाया है। हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए।

जामिया में विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर अब तक 7 छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया गया है। इन पर माहौल खराब करने के प्रयास का आरोप है। SFI ने छात्रों की रिहाई तक स्क्रीनिंग टाल दी है। यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर की शिकायत पर इन्हें हिरासत में लिया गया है।

जामिया की वाइस चांसलर नजमा अख्तर ने बताया कि विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर छात्र संगठन SFI यूनिवर्सिटी कैंपस का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहा है। हम ऐसी किसी भी काम की अनुमति नहीं देंगे। छात्रों की किसी भी गैरजरूरी हरकत पर कार्रवाई होगी।

पुडुचेरी विश्वविद्यालय में बुधवार (25 जनवरी) को PM मोदी पर BBC की डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। इसके बाद छात्रों के दो संगठनों के बीच झड़प हो गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बिजली और वाईफाई को ठप कर दिया था, फिर छात्रों के एक गुट ने फोन और लैपटॉप पर डॉक्यूमेंट्री देखी। 

पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) के स्टूडेंट सेंटर में 25 जनवरी को विवादित डॉक्यूमेंट्री चलाने पर हंगामा हुआ। NSUI ने यह डॉक्यूमेंट्री चलाई। जिसे देखने कई स्टूडेंट्स जुट गए। इतने में यूनिवर्सिटी अथॉरिटी को इसकी भनक लग गई और प्रोजेक्टर पर चलाई गई इस डॉक्यूमेंट्री को तुरंत बंद करवा दिया गया। इससे पहले लगभग आधी डॉक्यूमेंट्री चल चुकी थी

26 जनवरी: गणतंत्र दिवस पर केरल कांग्रेस ने डॉक्यूमेंट्री दिखाई
केरल कांग्रेस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) यह स्क्रीनिंग तिरुवनंतपुरम में शंकुमुघम बीच पर की। पार्टी ने कहा- ज्यादा से ज्यादा लोगों को यह डॉक्यूमेंट्री दिखाई जा सके इसलिए बीच पर इसकी स्क्रीनिंग की गई है।

अपनी रिलीज के साथ ही यह डॉक्यूमेंट्री विवादों में घिर गई थी। इसमें 2002 में गुजरात में हुए दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी की भूमिका होने का दावा किया गया था। भारत सरकार ने इसे BBC का प्रोपेगैंडा बताया था। डॉक्यूमेंट्री का पहला पार्ट 17 जनवरी को जारी हुआ था, जिसे यूट्यूब पर ब्लॉक कर दिया गया था। वहीं, सरकार ने ट्विटर और अन्य साइट्स पर भी इसे डॉक्यूमेंट्री की शेयरिंग पर रोक लगा दी थी।

17 जनवरी को डॉक्यूमेंट्री का पहला एपिसोड टेलिकास्ट हुआ
BBC ने 17 जनवरी को गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री द मोदी क्वेश्चन का पहला एपिसोड यूट्यूब पर रिलीज किया। दूसरा एपिसोड 24 जनवरी को रिलीज होना था। इससे पहले ही केंद्र सरकार ने पहले एपिसोड को यूट्यूब से हटा दिया। भारत सरकार ने डॉक्यूमेंट्री को प्रधानमंत्री मोदी और देश के खिलाफ प्रोपेगैंडा बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हम नहीं जानते कि डॉक्‍यूमेंट्री के पीछे क्या एजेंडा है, लेकिन यह निष्पक्ष नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दुष्‍प्रचार है। 

भारत में चल रहे BBC डॉक्यूमेंट्री पर विवाद में अमेरिका ने 48 घंटे में अपना स्टैंड बदल दिया। उसने प्रेस की स्वतंत्रता का हवाला देकर BBC डॉक्यूमेंट्री का साथ देने की कोशिश की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने को प्रेस की स्वतंत्रता का मामला बताया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में फ्रीडम ऑफ स्पीच के महत्व को हाइलाइट्स करने का यह सही समय है और ऐसा भारत में भी लागू होता है।

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केंद्रीय बजट 2023-24 की तैयारी पूरी

नई दिल्ली: 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2023-24 पेश होने वाला है। इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है। बजट से संबंधित डॉक्यूमेंट्स की प्रिंटिग शुरू होने के साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में पारंपरिक हलवा सेरेमनी गुरुवार (26 जनवरी) को मनाई गई। इस मौके पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री डॉ भागवत किशनराव कराड, पंकज चौधरी और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

क्या है हलवा सेरेमनी?
बजट को अंतिम रूप देने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा बनाया जाता है। यह रस्म लंबे समय से चली आ रही है। शुभ काम की शुरुआत मीठे से करना हलवा सेरेमनी की प्रमुख वजह है।

दो साल से नहीं मनाई जा रही थी हलवा सेरेमनी
साल 2021 और 2022 में कोव‍िड-19 महामारी के कारण इस रस्‍म को नहीं न‍िभाया गया था। इसकी जगह कोर कर्मचारियों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मिठाई दी गई थी। ये वो कर्मचारी हैं जो बजट के बनाने की प्रक्रिया में शामिल रहते हैं और इन्हें एक तरह से नजरबंद रखा जाता है। केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा संसद में बजट पेश करने के बाद ही ये अधिकारी और कर्मचारी अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों के संपर्क में आते हैं। इसका मकसद बजट को गोपनीय रखना होता है।

बजट होता क्या है?
जिस तरह से हमें अपने घर को चलाने के लिए एक बजट की जरूरत होती है, उसी तरह से देश को चलाने के लिए भी बजट की जरूरत पड़ती है। हम अपने घर का जो बजट बनाते हैं, वो आमतौर पर महीनेभर का होता है। इसमें हम हिसाब-किताब लगाते हैं कि इस महीने हमने कितना खर्च किया और कितना कमाया। इसी तरह से देश का बजट भी होता है। इसमें सालभर के खर्च और कमाई का लेखा-जोखा होता है।

बजट की पूरी प्रोसेस

1. सबसे पहले वित्त मंत्रालय एक सर्कुलर जारी कर सभी मंत्रालयों, राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, स्वायत्त संस्थाओं को नए साल के लिए एस्टीमेट बनाने के लिए कहता है। उन्हें नए साल के लिए अनुमान देने के अलावा पिछले साल की खर्च और आमदनी का ब्योरा भी देना होता है।

2. एस्टीमेट मिलने के बाद केंद्र सरकार के आला अफसर उसकी पड़ताल करते हैं। इस पर संबंधित मंत्रालयों और व्यय विभाग के अधिकारियों की गहन चर्चा होती है। इसके बाद आंकड़ों को सिफारिशों के साथ वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाता है।

3. वित्त मंत्रालय सभी सिफारिशों पर गौर करने के बाद विभागों को उनके खर्च के लिए राजस्व का आवंटन करता है। राजस्व और आर्थिक मामलों का विभाग हालात को गहराई से समझने के लिए किसानों और छोटे कारोबारियों के प्रतिनिधियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों से संपर्क करता है।

4. प्री बजट मीटिंग में वित्त मंत्री संबंधित पक्षों के प्रस्ताव और मांगों को जानने के लिए उनसे मिलते हैं। इनमें राज्यों के प्रतिनिधि, बैंकर, कृषि विज्ञानी, अर्थशास्त्री और कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। प्री-बजट मीटिंग खत्म होने के बाद वित्त मंत्री सभी मांगों पर अंतिम फैसला लेते हैं। बजट को अंतिम रूप दिए जाने से पहले वित्त मंत्री प्रधानमंत्री से भी बात करते हैं।

5. बजट पेश होने से कुछ दिन पहले हलवा सेरेमनी होती है। एक बड़ी सी कड़ाई में तैयार किया जाने वाला हलवा वित्त मंत्रालय के स्टाफ में बांटा जाता है। इसी के साथ बजट की छपाई प्रक्रिया शुरू होती है। प्रक्रिया में लगे अधिकारी और सपोर्ट स्टाफ बजट पेश होने तक मंत्रालय में ही रहते हैं। इस वित्त वर्ष के बजट की प्रिंटिंग नहीं हुई और संसद सदस्यों को उसकी सॉफ्ट कॉपी दी गई।

6. वित्त मंत्री आम बजट को लोकसभा में पेश करते हैं। 2016 तक फरवरी के अंतिम दिन पेश होता था। 2017 से यह हर साल 1 फरवरी को पेश होने लगा। इस साल पहली बार बजट के सभी दस्तावेज Union Budget मोबाइल पर उपलब्ध कराए गए।


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संविधान में 127 बार बदलाव:फिर भी कॉन्सटिट्यूशन का सार जस का जस, इसे संसद भी चाहे तो नहीं बदल सकती

भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ। तब 73 साल में 127 संविधान संशोधन हो चुके हैं। इतने बदलावों के बाद भी हमारे संविधान का मूल आधार जस का तस है। दरअसल, इसकी वजह यह है कि संविधान में बदलाव के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है। संसद में संविधान को बदलने का हर प्रस्ताव बहस और वोटिंग से गुजरता है, तब उस पर फैसला लिया जाता है।

खास बात यह है कि अगर बहुमत के आधार पर संसद से संविधान में बदलाव कर भी दिया जाए, तो कोर्ट में उसे चैलेंज किया जा सकता है। कोर्ट के पास इसे रिव्यू करने और यह तय करने का अधिकार है कि ऐसे किसी बदलाव से संविधान का मूल ढांचा न बदले। कॉन्स्टीट्यूशन के आर्टिकल 368 में तीन तरह से संविधान संशोधन करने का जिक्र है

संविधान में कितने बदलाव की इजाजत है और किन चीजों को नहीं बदला जा सकता... संविधान और कानून विशेषज्ञों से समझिए...

1. संसद चाहे तो भी मूल संरचना नहीं बदल सकती
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ध्रुव गुप्ता कहते हैं कि किसी भी तरह से संविधान की मूल संरचना को नहीं बदला जा सकता। इसका मतलब लोकतांत्रिक आदर्शों की व्याख्या करने वाले प्रावधानों को किसी संशोधन के जरिए नहीं हटाया जा सकता। दरअसल, संविधान में मूल संरचना साफ तरीके से नहीं लिखी गई है। इसीलिए इन पर कन्फ्यूजन है। सुप्रीम कोर्ट के दो फैसले इसे साफ करते हैं...

  • 1971 में सुप्रीम कोर्ट के 11 जजों की बेंच ने कहा था कि संसद को लोगों के मौलिक अधिकार कम करने की अथॉरिटी नहीं है। आर्टिकल 368 के जरिए तहत संविधान की मूल संरचना नहीं बदली जा सकती। हालांकि, संविधान में 24वें संशोधन के जरिए इसे बदल दिया गया।
  • केरल के धर्मगुरु केशवानंद भारती केस में 13 जजों की पीठ ने बहुमत से फैसला दिया था कि संविधान संशोधन पर इकलौता प्रतिबंध यह है कि इसके जरिए संविधान के मूल ढांचे को क्षति नहीं पहुंचाई जा सकती।

2. संविधान सभा का महत्व मौजूदा संसद से ज्यादा
सुप्रीम कोर्ट का तर्क था कि संविधान सभा का महत्व मौजूदा विधायिका की तुलना में ज्यादा है। इसलिए संसद संविधान के सार तत्व को नहीं बदल सकती। इनमें संविधान की सर्वोच्चता, धर्मनिरपेक्षता, व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा शामिल हैं।

3. लोकतंत्र की मजबूती के लिए संविधान जरूरी
दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान होने के बाद भी इंडियन कॉन्स्टीट्यूशन में आधारभूत ढांचे की साफ परिभाषा नहीं है। न्यायपालिका इसकी व्याख्या करती है, जिस पर कई बार विवाद होता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसे अपवादों के बावजूद संविधान का मूल ढांचा विधायिका यानी संसद को निरंकुश होने से रोकता है और लोकतंत्र को मजबूत करता है।

सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसले जिनसे संविधान के मूल ढांचे को बरकरार रखने और बदलावों की समीक्षा करने के बारे में कहा गया है...

1. इंदिरा गांधी केस: 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल का दोषी मानते हुए उनका निर्वाचन रद्द कर दिया था। कोर्ट ने इसे रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट (Representation of the People Act) के सेक्शन 123(7) का उल्लंघन माना।

इंदिरा सुप्रीम कोर्ट गईं तो अदालत ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को संविधान की आधारभूत अवसंरचना का भाग माना और कहा कि इस मामले की न्यायिक समीक्षा हो सकती है।

2. मिनर्वा मिल केस: 1980 में कर्नाटक की टेक्सटाइल कंपनी मिनर्वा मिल्स बनाम भारत सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट फैसला दिया कि संविधान के आर्टिकल 368 का सेक्शन (4) कानूनन सही नहीं है, क्योंकि इसे ज्यूडिशियल रिव्यू को खत्म करने के लिए पास किया गया था। कोर्ट ने कहा कि रिट दाखिल करने का अधिकार संविधान का आधारभूत लक्षण है। ।

3. एसआर बोम्मई केस: 1988 में कर्नाटक में एसआर बोम्मई की सरकार में से 19 विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी। केंद्र सरकार ने आर्टिकल 356 के तहत बोम्मई की सरकार बर्खास्त कर दी।

इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर केन्द्र राज्य में चुनी हुई सरकार को बर्खास्त करता है, तो कोर्ट इसके कारणों की समीक्षा कर सकता है। किसी राज्य सरकार के बहुमत का फैसला विधानसभा में होना चाहिए, राजभवन में नहीं

अंबेडकर ने भी रिट के अधिकार को संविधान का दिल कहा
संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि लोगों का, लोगों के लिए और लोगों के द्वारा तैयार की गई नियमावली है। इसे ही संविधान की आत्मा कहा जाता है, लेकिन डॉ बीआर अंबेडकर ने रिट दाखिल करने के अधिकार को संविधान का दिल करार दिया। इसे लीगल टर्म में 'संवैधानिक उपचार' कहा जाता है। इसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट आर्टिकल 32 और हाईकोर्ट आर्टिकल 226 के तहत पांच तरह की रिट पर एक्शन लेते हैं।

यहां जिस आर्टिकल 32 की बात हो रही है, उसमें लोगों के मूल अधिकारों के संरक्षण की गारंटी दी गई है। साथ ही यह कहा गया है कि अधिकारों को सुरक्षित रखने का तरीका आसान और छोटा होना चाहिए। हालांकि इसके तहत केवल नागरिकों के मूल अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी दी गई है, कानूनी अधिकार इसमें शामिल नहीं हैं।

संविधान के मूल ढांचे को लेकर कन्फ्यूजन पर जानकार क्या कहते हैं... इसे दो किताबों के रेफरेंस से समझा जा सकता है...

1. संविधान अच्छा या बुरा, काम करने वाले तय करते हैं
दि इंडियन कांस्टीट्यूशन के लेखक माधव खोसला ने डॉ बीआर अंबेडकर का हवाला देते हुए लिखा है कि संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, अगर इस पर काम करने वाले लोग खराब होंगे तो यह खराब होगा और संविधान कितना भी खराब क्यों न हो, अगर इसके लिए काम करने वाले लोग अच्छे होंगे तो यह अच्छा होगा।

2. भविष्य की मुश्किलें देखकर संविधान नहीं लिखा गया
दि फाउंडिंग मोमेंट: सोशल जस्टिस इन द कांस्टीट्यूशनल मिरर लिखने वाले राजनीतिक विश्लेषक समीर के दास कई चूकों की तरफ इशारा करते हैं। उन्होंने ग्रेनविल ऑस्टिन के 1966 के 'दि इंडियन कॉस्टीट्यूशन कॉर्नर स्टोन ऑफ ए नेशन' का जिक्र करते कहा है कि संविधान निर्माता भविष्य की जटिलताओं और घटनाओं को नहीं देख पाए।

हालांकि, अपनी किताब में दास ने यह भी कहा है कि संविधान में मौजूद न्याय की तमाम अवधारणाओं में खामियों के बावजूद संविधान की ठीक व्याख्या और अमल से लोकतांत्रिक पतन रोकने में बड़ी मदद मिल सकती है।


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सरकारी नौकरी:इंडियन कोस्ट गार्ड में 255 पदों पर निकली भर्ती

नई दिल्ली: इंडियन कोस्ट गार्ड ने एक भर्ती नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 6 फरवरी से शुरू होगी और 16 फरवरी तक चलेगी। ये अभियान इंडियन कोस्ट गार्ड (Indian Coast Guard) में कुल 255 नाविक (जनरल ड्यूटी और डोमेस्टिक ब्रांच) पद पर भर्ती के लिए चलाया जा रहा है।

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

इस भर्ती के तहत नाविक (जनरल ड्यूटी) पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को मैथ्स और फिजिक्स के साथ 12 वीं कक्षा पास होना चाहिए। जबकि नाविक (डोमेस्टिक ब्रांच) पद के लिए उम्मीदवारों का 12वीं क्लास पास होना जरूरी है।

उम्र सीमा

उम्मीदवारों की उम्र 18 से 22 साल के बीच होनी चाहिए।

अप्लीकेशन फीस

सामान्य वर्ग : 300 रुपये

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति : कोई फीस नहीं देना है।

सैलरी

21,700 रुपये प्रतिमाह।

सिलेक्शन प्रोसेस

उम्मीदवारों का सिलेक्शन स्टेज-1, स्टेज-2, स्टेज-3, स्टेज-4 परीक्षाओं, मेडिकल जांच और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर किया जाएगा।

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दुनिया की पहली कोविड नेजल वैक्सीन लॉन्च

नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया और साइंस-टेक्नोलॉजी मिनिस्टर जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को दुनिया की पहली इंट्रानेजल कोविड-19 वैक्सीन iNCOVACC को लॉन्च किया। कोवैक्सिन बनाने वाली हैदराबाद की भारत बायोटेक ने इसे वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन (WUSM) के साथ मिलकर बनाया है। नाक से ली जाने वाली इस वैक्सीन को बूस्टर डोज के तौर पर लगाया जा सकेगा।

भारत सरकार ने 23 दिसंबर को इस वैक्सीन की मंजूरी दी थी। सबसे पहले नेजल वैक्सीन को प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके लिए लोगों को पैसे देने होंगे। दिसंबर में भारत बायोटेक ने घोषणा की थी कि यह वैक्सीन सरकारी अस्पतालों में 325 रुपए में लगवाई जा सकेगी। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में इसके लिए 800 रुपए चुकाने होंगे। इस वैक्सीन के लिए Cowin पोर्टल से ही बुकिंग होगी।

नेजल वैक्सीन सामान्य स्प्रे की तरह ले सकेंगे
फिलहाल हमें मांसपेशियों में इंजेक्शन के जरिए वैक्सीन लगाई जा रही है। इस वैक्सीन को इंट्रामस्कुलर वैक्सीन कहते हैं। नेजल वैक्सीन वो होती है जिसे नाक के जरिए दिया जाता है। क्योंकि ये नाक के जरिए दी जाती है इसलिए इसे इंट्रानेजल वैक्सीन कहा जाता है। यानी इसे इंजेक्शन से देने की जरूरत नहीं है और न ही ओरल वैक्सीन की तरह ये पिलाई जाती है। यह एक तरह से नेजल स्प्रे जैसी है।

प्राइमरी और बूस्टर के तौर पर दी जा सकेगी
इंट्रानेजल वैक्सीन को कोवैक्सिन और कोवीशील्ड जैसी वैक्सीन्स लेने वालों को बूस्टर डोज के तौर पर दिया जाएगा। हालांकि इसे प्राइमरी वैक्सीन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत बायोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन डॉ. कृष्णा एल्ला ने कुछ समय पहले कहा था कि पोलियो की तरह इस वैक्सीन की भी 4 ड्रॉप्स काफी हैं। दोनों नॉस्ट्रिल्स में दो-दो ड्रॉप्स डाली जाएंगी।

नेजल वैक्सीन सामान्य स्प्रे की तरह ले सकेंगे
फिलहाल हमें मांसपेशियों में इंजेक्शन के जरिए वैक्सीन लगाई जा रही है। इस वैक्सीन को इंट्रामस्कुलर वैक्सीन कहते हैं। नेजल वैक्सीन वो होती है जिसे नाक के जरिए दिया जाता है। क्योंकि ये नाक के जरिए दी जाती है इसलिए इसे इंट्रानेजल वैक्सीन कहा जाता है। यानी इसे इंजेक्शन से देने की जरूरत नहीं है और न ही ओरल वैक्सीन की तरह ये पिलाई जाती है। यह एक तरह से नेजल स्प्रे जैसी है।

प्राइमरी और बूस्टर के तौर पर दी जा सकेगी
इंट्रानेजल वैक्सीन को कोवैक्सिन और कोवीशील्ड जैसी वैक्सीन्स लेने वालों को बूस्टर डोज के तौर पर दिया जाएगा। हालांकि इसे प्राइमरी वैक्सीन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत बायोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन डॉ. कृष्णा एल्ला ने कुछ समय पहले कहा था कि पोलियो की तरह इस वैक्सीन की भी 4 ड्रॉप्स काफी हैं। दोनों नॉस्ट्रिल्स में दो-दो ड्रॉप्स डाली जाएंगी।

नेजल वैक्सीन को एक पंप के जरिए नाक में भेजा जाता है। एक डोज में इसकी कुछ बूंदें ही देने की जरूरत होती है।
नेजल वैक्सीन को एक पंप के जरिए नाक में भेजा जाता है। एक डोज में इसकी कुछ बूंदें ही देने की जरूरत होती है।

इन्फेक्शन-ट्रांसमिशन ब्लॉक करेगी नेजल वैक्सीन
इस नेजल वैक्सीन का नाम iNCOVACC रखा गया है। पहले इसका नाम BBV154 था। इसकी खास बात यह है कि शरीर में जाते ही यह कोरोना के इन्फेक्शन और ट्रांसमिशन दोनों को ब्लॉक करती है। इस वैक्सीन को इंजेक्शन से नहीं दिया जाता, इसलिए इन्फेक्शन का खतरा नहीं है। इसे देने वाले हेल्थकेयर वर्कर्स को भी खास ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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गणतंत्र दिवस पर मोदी नई संसद बनाने वाले मजदूरों से मिले,

नई दिल्ली : 74वें गणतंत्र दिवस की परेड में 23 से ज्यादा झांकियां दिखाई गईं। वहीं,सेनाओं के स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान नारी शक्ति की तस्वीर दिखी। डेयर डेविल्स ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया और फ्लाई पास्ट में राफेल गरजे। परेड खत्म होने के बाद मोदी सबसे पहले नए संसद भवन बनाने वाले मजदूरों से मिले।

मोदी राजस्थान की बंधेज पगड़ी में नजर आए। यह पीले और केसरिया रंग की थी। मोदी ने पिछली बार गणतंत्र दिवस पर कुर्ता-पायजामा पहना था। तब उनके गले में मणिपुर का पारंपरिक लेंग्यान गमछा था। इसके अलावा, उत्तराखंड की टोपी पहनी थी, जिस पर ब्रह्मकमल बना था। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत भी ऐसी ही टोपी पहनते थे।

2 घंटे 28 मिनट चली परेड को फोटोज में देखिए...

सुबह 10:20 बजे:

PM मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के लिए शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने वहां रखी किताब में मैसेज भी लिखा।
PM मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के लिए शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने वहां रखी किताब में मैसेज भी लिखा।

सुबह 10:25 बजे:

गणतंत्र दिवस समारोह में PM मोदी (बाएं), चीफ गेस्ट मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी (बीच में) और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (दाएं)।
गणतंत्र दिवस समारोह में PM मोदी (बाएं), चीफ गेस्ट मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी (बीच में) और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (दाएं)।

सुबह 10:30 बजे:

परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेताओं ने परेड की शुरुआत की, इसके बाद सेना और सशस्त्र बलों की टुकड़ियों ने मार्च किया।
परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेताओं ने परेड की शुरुआत की, इसके बाद सेना और सशस्त्र बलों की टुकड़ियों ने मार्च किया।

सुबह 11 बजे:

वायु रक्षा प्रणाली की 512 लाइट एडी मिसाइल रेजिमेंट की लेफ्टिनेंट चेतना शर्मा ने परेड में अपने ग्रुप को लीड किया।
वायु रक्षा प्रणाली की 512 लाइट एडी मिसाइल रेजिमेंट की लेफ्टिनेंट चेतना शर्मा ने परेड में अपने ग्रुप को लीड किया।

सुबह 11:20 बजे:

गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल BSF की ऊंट रेजिमेंट। यह ट्रुप रेगिस्तानी इलाकों में पेट्रोलिंग और निगरानी करता है।
गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल BSF की ऊंट रेजिमेंट। यह ट्रुप रेगिस्तानी इलाकों में पेट्रोलिंग और निगरानी करता है।

सुबह 11:30 बजे:

उत्तराखंड ने कर्तव्य पथ पर दिखाई अपनी झांकी में कॉर्बेट नेशनल पार्क और अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम को दिखाया।
उत्तराखंड ने कर्तव्य पथ पर दिखाई अपनी झांकी में कॉर्बेट नेशनल पार्क और अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम को दिखाया।

सुबह 11:40 बजे:

परेड में उत्तर प्रदेश ने अपनी झांकी में अयोध्या में तीन दिन तक मनाया जाने वाला दीपोत्सव दिखाया।
परेड में उत्तर प्रदेश ने अपनी झांकी में अयोध्या में तीन दिन तक मनाया जाने वाला दीपोत्सव दिखाया।

दोपहर 12 बजे:

परेड में कर्तव्य पथ पर सेना के 33 डेयर डेविल्स ने 9 मोटरसाइकिल पर 'मानव पिरामिड' बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
परेड में कर्तव्य पथ पर सेना के 33 डेयर डेविल्स ने 9 मोटरसाइकिल पर 'मानव पिरामिड' बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

दोपहर 12;10 बजे:

वायुसेना के लड़ाकू हेलिकॉप्टर्स ने कर्तव्य पथ पर फ्लाय पास्ट में हिस्सा लिया। इनमें अमेरिका से लिए गए अपाचे चॉपर भी शामिल थे।
वायुसेना के लड़ाकू हेलिकॉप्टर्स ने कर्तव्य पथ पर फ्लाय पास्ट में हिस्सा लिया। इनमें अमेरिका से लिए गए अपाचे चॉपर भी शामिल थे।

दोपहर 12:15 बजे:

कर्तव्य पथ पर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर राष्ट्रगान के साथ गणतंत्र दिवस 2023 परेड का समापन हुआ।
कर्तव्य पथ पर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर राष्ट्रगान के साथ गणतंत्र दिवस 2023 परेड का समापन हुआ।

दोपहर 12:20 बजे:

परेड खत्म होने के बाद PM मोदी ने मौजूद लोगों का अभिवादन किया, वे गाड़ी से उतरकर बैरिकेड्स तक गए।
परेड खत्म होने के बाद PM मोदी ने मौजूद लोगों का अभिवादन किया, वे गाड़ी से उतरकर बैरिकेड्स तक गए।
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गांधी 6.5, नेहरू 9, सावरकर 15 साल जेल में रहे; 170 साल बाद भारत ने दिखाया आईना

साल 1911 की बात है। अंडमान के सेल्यूलर जेल में विनायक दामोदर सावरकर नाम के एक क्रांतिकारी को लाया गया। उस छोटी-सी कोठरी में रहने के दौरान कई वर्षों तक सावरकर को भनक तक नहीं लगी कि इसी जेल में उनके सगे भाई भी बंद हैं। जेल को बनाया ही कुछ इस तरह से गया था कि कैदी एक-दूसरे से बिल्कुल अनजान रहें।

टापू के बीचोंबीच एक टॉवर था। उससे लगी कोठरियों की तीन मंजिला 7 कतारें बनाई गई थीं। ये साइकिल के पहिए की तरह हैं। जैसे साइकिल के बीचों-बीच के गोल चक्कर से तीलियां निकलकर बिना जुड़े बड़े गोल रिम से जुड़ती हैं। इसी तरह ये इमारत भी बनाई गई थी। 15 गुना 8 फीट की इन कोठरियों में तीन मीटर की ऊंचाई पर एक रोशनदान था, जो समुद्र की ओर खुलता था। जहां से भागने का मतलब था-सिर्फ मौत।

‘नेहरू परिवार की ख़ानदानी जेल’, जहां तीन पीढ़ियां रहीं

1884 में एक और जेल इलाहाबाद के नैनी में खुली। इसे नेहरू परिवार की ख़ानदानी जेल कहते हैं। कई बार मजाक में ऐसा कहा जाता है कि नेहरू परिवार ने आनंद भवन से ज्यादा वक्त इस जेल में गुजारा। मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित, इंदिरा गांधी और उनके पति फिरोज गांधी भी इस जेल में बंद रहे। पांच बार इस जेल में सजा काट चुके नेहरू ने इंदिरा गांधी को यहीं से चिट्ठियां लिखीं जो बाद में मशहूर किताब ‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’ की शक्ल में आईं।

आज गणतंत्र दिवस के इस मौके पर हम परतंत्र भारत की उन इमारतों के बारे में बात कर रहे हैं जिनमें हजारों कहानियां दफ़न हैं। ये वो जेलें थीं, जिनमें आजादी के आंदोलन के दौरान गांधी, नेहरू और सावरकर बंद रहे। हम यह भी जानेंगे कि किस तरह ईस्ट इंडिया कंपनी ने किलों और घरों को जेल में तब्दील कर दिया, किस तरह आगरा में देश की पहली सेंट्रल जेल खुली और किस तरह 170 साल बाद विजय माल्या मामले ने ब्रिटेन और उसकी जेल नीति को भारत ने आईना दिखाया।

शोले फिल्म का एक मशहूर डायलॉग है; जिसमें जेलर बने असरानी शान से कहते हैं - ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’

फिल्म के इस डायलॉग का मतलब यह था कि अंग्रजों को जेल बनाने और लोगों को उसमें बंद करने के काम में उस्ताद समझा जाता था।

भारत आते ही अंग्रेजों ने खोलीं सैकड़ों जेल

1784 में ईस्ट इंडिया कंपनी को ब्रिटिश राजशाही से भारत में राज करने का अधिकार मिला। जिसके बाद अपनी हुकूमत को बनाए रखने और किसी भी तरह के विद्रोह को दबाने के लिए कंपनी ने बड़े पैमाने पर जेलों का निर्माण शुरू किया। कुछ नई जेल बनाई गईं तो कुछ पुराने किलों और हवेलियों को जेल में तब्दील कर दिया गया। अंग्रेजी हुकूमत के इस शुरुआती दौर में ही देश में 143 सिविल जेल, 75 क्रिमिनल जेल और 68 मिक्स जेल खुल चुकी थीं।

ऐसी जगह जो अपने आप में थी जेल, जहां से कैदी भाग ही नहीं सकते थे

भारत आने के बाद से ही अंग्रेज बड़ी-बड़ी जेल बनाने लगे। एक समय ऐसा आया जब देश की सारी जेलें भर गईं। ऐसे में अंग्रेजों को नए और बड़ी जेल की जरूरत महसूस हुई।

1789 में अंग्रेजों ने पहली बार अंडमान में कैदियों की बस्ती बसाने की कोशिश की थी। अंडमान कोलकाता से 1400 किलोमीटर दूर समुद्री टापुओं का एक समूह था, लेकिन मुश्किल मौसम और दुश्मन देशों के आक्रमण के चलते अंग्रेजों का ये सपना पूरा न हो सका।

1857 में भारतीय बैरकों में बड़े पैमाने पर विद्रोह हुए। जिसके चलते अंग्रजों ने साल भर के भीतर ही 1858 में कैदियों का पहला जत्था अंडमान भेज दिया। खास बात यह थी कि तब तक पूरे अंडमान द्वीप पर जेल की एक ईंट भी नहीं पड़ी थी। अंग्रेज अधिकारियों ने तंबुओं में शरण ली और कैदियों को खुले जंगलों में छोड़ दिया गया। वहां से उनके भागने की कोई संभावना नहीं थी।

ऐसी जेल जो कैदियों ने खुद अपने लिए बनाई, बर्मा से आईं ईंटें

शुरुआत में कैदियों ने बारिश और जंगली कीड़ों से बचने के लिए टहनियों और पत्तों के सहारे अपने लिए झोपड़ियां बनाईं, लेकिन समुद्री हवाएं अक्सर इन झोपड़ियों को उड़ा ले जातीं और कैदियों को खुले में रहना पड़ता। जिसके चलते बड़े पैमाने पर कैदी बीमार होकर मरने लगे।

कैदियों के आने के 38 साल बाद 1896 में अंग्रजों ने अंडमान में जेल की बिल्डिंग बनाने का फैसला किया। इसके लिए बर्मा से ईंटें मंगवाई गईं। कैदियों ने खुद अपने लिए जेल बनाई। इस तरह 5 लाख रुपए में 1906 में अंडमान की प्रसिद्ध सेल्यूलर जेल बनकर तैयार हुई।

सेल शब्द से आया सेल्यूलर जेल, कई कमरों की बैरक

जेल की भाषा में एकांत कमरे को सेल कहा जाता है। अंडमान में बनी जेल की खासियत यह थी कि इसमें हर कैदी के लिए एक छोटा सा सेल बना था। जिसके चलते इसे ‘सेल्यूलर जेल’ नाम दिया गया।

जेल को एक सेंटर से निकले 7 कतारों में इस तरह बनाया गया था कि कैदियों को बाहर कुछ नजर न आए और वो बिल्कुल अकेले रहें।

आगरा में खुली देश की पहली सेंट्रल जेल

ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने कारोबारी विरोधियों को पकड़ने और जुर्माना लेने के लिए सैकड़ों छोटी-बड़ी जेलें खोल रखी थीं, लेकिन ये जेल मौजूदा जेलों की तरह ऊंची चारदीवारी वाली नहीं होती थीं। कहीं किसी कमरे को तो कहीं पुरानी इमारत को जेल बना दिया गया था।

1835 में लॉर्ड मैकॉले ने सिफारिश की कि भारत में जेलों की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नई और बड़ी जेल खोलने की जरूरत है। इस कमेटी की सिफारिश के बाद 1848 में आगरा में देश की पहली सेंट्रल जेल खोली गई।

1837 में तत्कालीन मद्रास में भी अंग्रेजों मे एक बड़ी जेल खोली। यह अंग्रेजी शासनकाल की शुरुआती नियोजित जेलों में से एक थी। 1855 में इसे सेंट्रल जेल का दर्जा दिया गया। 16,496 रुपए की लागत से बनी इस जेल में कालेपानी की सजा पाए कैदियों को रखा जाता था। जिन्हें बाद में अंडमान या बर्मा के मांडले जेल में भेज दिया जाता।

नैनी जेल में अंग्रेज क्रांतिकारी भी बंद किए गए

इलाहाबाद आजादी के आंदोलन का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। जिसे देखते हुए अंग्रेजों ने साल 1884 में यहां 3000 की क्षमता वाली सेंट्रल जेल बनाई। इस जेल को क्रांतिकारियों का दूसरा घर माना जाता था। यहां ज्यादातर राजनीतिक कैदियों को रखा जाता।

नैनी जेल का इतिहास काफी रोचक है। यहां भारतीय स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले अंग्रेज कैदियों को भी रखा गया था।

एलसी लैडली, पीएच हॉल्डन, डगलैस्टर, आईआर डायमंड, जॉर्ज हेरॉल्ड और बेंजामिन फ्रांसिस पर भारतीय क्रांतिकारियों के साथ मिलकर ‘वंदे मातरम्’ गाने और स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने का आरोप था। सभी को इसी जेल में बंद किया गया। नैनी जेल में आज भी इन अंग्रेज क्रांतिकारियों के नाम लिखे हुए हैं।

17 फीट की दीवार फांदकर जेल से भागे थे जेपी

‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान हजारीबाग सेंट्रल जेल में जयप्रकाश नारायण को बंद किया गया था। इस समय तक महात्मा गांधी और नेहरू जैसे सभी प्रमुख नेता गिरफ्तार हो चुके थे। ऐसे में जेल में बंद जेपी और साथियों ने बाहर निकलकर आंदोलन को नेतृत्व देने की ठानी।

9 नवंबर, 1942 दिवाली की रात थी। जेपी और उनके 5 साथियों ने 56 धोतियों के सहारे 17 फीट ऊंची दीवार को फांदकर फरार हो गए। अंग्रेजों को 9 घंटे बाद जब इसकी खबर मिली, जेपी और उनके साथी हजारीबाग से काफी दूर निकल चुुके थे। जिसके बाद अंग्रेजों ने जेपी को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया।

मौजूदा वक्त में ऐतिहासिक जेल की इस इमारत में एक गर्ल्स स्कूल चल रहा है। जेपी के ही नाम पर एक जेल उससे हटकर बनाई गई है।

सिराजुद्दौला ने 14 फीट के कमरे में बंद किए 146 अंग्रेज, सिर्फ 23 जिंदा बचे

भारत में बड़ी-बड़ी जेल बनाकर क्रांतिकारियों को बंद करने वाले अंग्रेजों के साथ भी जेल की एक दुखद घटना जुड़ी है। बात तब की है, जब अंग्रेज भारत में व्यापारी बनकर आए थे। एक बार बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला अंग्रेजों से किसी बात पर खफा हो गए।

सन् 1756 में सिराजुद्दौला ने पकड़ में आए 146 अंग्रेजों को सजा देने की ठानी। तब आज की तरह आधुनिक जेल और बैरक तो नहीं थी। ऐसे में नवाब के सिपाहियों ने सभी अंग्रेजों को 14 फीट के कमरे में बंद कर दिया। इसमें महिलाएं भी शामिल थीं। छोटे से कमरे को रात भर बंद रखने के बाद जब सुबह उसे खोला गया तो सिर्फ 23 अंग्रेज जिंदा, लेकिन बेहोश मिले। बाकी सभी की दम घुटने से मौत हो चुकी थी।

गांधीजी के लिए महल को जेल में तब्दील कर दिया गया

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधीजी को कुल 13 बार गिरफ्तार किया गया। उन्हें दूसरी किसी जेल में आम कैदियों की तरह रखना संभव नहीं था; दूसरी ओर अंग्रेज यह भी नहीं चाहते थे कि जेल में गांधीजी दूसरे सत्याग्रहियों से मिलकर उन्हें प्रभावित करें। इसके लिए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान गांधीजी को गिरफ्तार कर पुणे के आगा खां पैलेस में बंद कर दिया गया।

कहने को तो ये 6.5 एकड़ में फैला एक शानदार महल था, लेकिन इसे चारों ओर से घेर कर जेल में तब्दील कर दिया गया। किसी को बिना अनुमति अंदर या बाहर आने की इजाजत नहीं होती। इस महल जेल में गांधीजी के साथ कस्तूरबा गांधी को भी रखा गया था। इसी जेल में गांधी के दो प्रियजनों की मृत्यु हुई। कस्तूरबा गांधी और बापू के सहयोगी महादेव देसाई की। अब इस महल जेल को म्यूजियम में बदल दिया गया है। यहां कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई की समाधि है।

जब विजय माल्या ने जेल बनाने में मास्टर अंग्रेजों को दिखाया आईना

भारत के बैंकों से हजारों करोड़ रुपए लेकर फरार हुए कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए CBI लंबे समय से कोशिश कर रही है। ब्रिटिश कोर्ट में तमाम दलीलों के चूक जाने के बाद विजय माल्या ने कहा कि भारत के जेलों की स्थिति बहुत दयनीय है, अगर उसे वहां रखा गया तो इससे उसके मानवाधिकार का हनन होगा। इसके जवाब में CBI ने ब्रिटिश कोर्ट से कहा कि भारत की ज्यादातर जेलें ब्रिटिश हुकूमत की ही बनाई हुई हैं। ब्रिटिश कोर्ट या विजय माल्या के पास इसका कोई जवाब नहीं था।

जेल में ही लिखा गया स्वतंत्रता समर का इतिहास

आजादी के आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों के पास इतना वक्त नहीं रहता था कि वो किताबें लिखें। ऐसे में जब वे जेल में डाल दिए जाते तो किताबों और पत्रों की मदद से आजादी की अलख जगाते। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लगभग सभी महत्वपूर्ण किताबें जेलों में ही लिखी गईं। महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, भगत सिंह जैसे सेनानियों ने जेल में रहने के दौरान किताबें लिखीं। मात्र 2 साल जेल में रहने के दौरान भगत सिंह ने 4 किताबें लिखीं। उनकी आखिरी किताब फांसी से कुछ दिन पहले ही पूरी हुई।

आपने ब्रिटिश जेलों की कहानी जान ली। साथ ही अंग्रेजी क्रूरता के किस्सों को भी जाना, जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ जेलों में हुआ। ब्रिटिश दौर के कई जेल अब संग्रहालय में तब्दील हो चुके हैं, कुछ को अस्पताल तो कुछ को स्कूल भी बना दिया गया। पर ज्यादातर जेलें आज भी उसी रूप में काम कर रही हैं। अंग्रेजों के जमाने के जेलरों के दिन भले लद गए, पर अंग्रेजों के जमाने की जेलें आज भी कायम हैं।

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कंगना रनोट ने की पठान की तारीफ

शाहरुख खान स्टारर फिल्म 'पठान' 25 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ये एक्शन ड्रामा फिल्म ऑडियंस को काफी पसंद आ रही है। यहां तक कि एक्ट्रेस कंगना रनौत ने अपनी अपकमिंग फिल्म 'इमरजेंसी' की रैप-अप पार्टी में बिना शाहरुख का नाम लिए फिल्म की तारीफ की है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वो चाहती हैं कि ये फिल्म निश्चित रूप से काम करे और ऑडियंस इसे खूब पसंद करे।

ऐसी फिल्में चलनी चाहिए

कंगना ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'पठान अच्छा कर रही है। ऐसी फिल्में चलनी चाहिए और मुझे लगता है कि जो हमारे हिंदी सिनेमा वाले पीछे रह गए हैं, हर इंसान अपने लेवल पर कोशिश कर रहा है। मुझे लगता है कि इस तरह की फिल्में चलनी चाहिए।' वहीं अनुपम खेर ने कहा, 'पठान एक बहुत बड़ी फिल्म है, जो बहुत बड़े बजट पर बनी है।


यह सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर है

वहीं फिल्ममेकर करण जौहर ने सोशल मीडिया के जरिए फिल्म की तारीफ करते हुए एक लंबा नोट लिखा और फिल्म को सबसे ब्लॉकबस्टर कहा है। करण ने अपने पोस्ट में लिखा, 'मुझे याद नहीं कि पिछली बार मैंने फिल्मों में इतना मजेदार समय कब बिताया था। यह सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर है। चार्म, करिश्मा, शाहरुख का सुपरस्टारडम, सबसे हॉट, सुंदर और सनसनीखेज रूप से खूबसूरत एजेंट दीपिका पादुकोण; सबसे सेक्सी विलेन जॉन अब्राहम।'


सभी को पठान मुबारक!

करण ने आगे कहा, 'फिल्म में सिद्धार्थ आनंद का शानदार डायरेक्शन दिख रहा है। मुझे अपने BFF आदित्य चोपड़ा पर बहुत गर्व है। लव यू शाहरुख भाई, लव यू आदि! और लव यू बॉलीवुड! हो सकता है कि आपकी बदनामी हुई हो और फिल्म को बायकाट किया गया हो, लेकिन इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि जब आप अपने में आते हैं तो कोई भी आपके रास्ते में नहीं खड़ा हो सकता है! सभी को पठान मुबारक! (कोई स्पॉइलर नहीं, लेकिन फिल्म का सबसे अच्छा सीक्वेंस भाई और भाईजान के साथ है) जब मैंने इसे देखा तब मैं खड़ा हुआ और ताली बजाने लगा।'

ये फिल्म 3 भाषाओं में रिलीज हुई है

फिल्म 'पठान' में शाहरुख-दीपिका एक सोल्जर की भूमिका निभा रहे हैं, जो आतंकी ग्रुप के हमले से देश को बचाएंगे। जॉन अब्राहम विलेन के रोल में हैं, जो भारत पर अटैक करने की प्लानिंग करते हैं। इस फिल्म में डिंपल कपाड़िया और आशुतोष राणा भी अहम रोल में हैं। यह फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगू में रिलीज हुई है।

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SRK की पठान को ब्लॉकबस्टर ओपनिंग

पठान ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन 53 करोड़ की बंपर ओपनिंग की है। वहीं पूरी दुनियाभर में 100 करोड़ से ज्यादा कलेक्शन किया है। पठान शाहरुख खान के फिल्मी करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग हासिल करने वाली फिल्म बन गई है। हालांकि, मेकर्स की तरफ से अभी फिल्म की कमाई के फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं। इससे पहले 2014 में आई उनकी फिल्म हैप्पी न्यू ईयर ने 42.62 करोड़ का फर्स्ट-डे कलेक्शन किया था।

तमाम विवादों और विरोध के बावजूद पठान के कमाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। लगभग 250 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म के पहले दिन के आंकड़े काफी बेहतर हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि दूसरे दिन फिल्म भारत में कमाई का आंकड़ा 100 करोड़ के पार कर लेगी, रविवार तक फिल्म 300 करोड़ के आसपास कमाई कर लेगी। 2014 में आई हैप्पी न्यू ईयर के बाद शाहरुख खान की किसी फिल्म को इतनी बड़ी ओपनिंग मिली है।

विवादों का नहीं पड़ा असर
रिलीज से पहले पठान काफी ज्यादा विवादों में थी। फिल्म के गाने बेशरम रंग को लेकर देश के कई हिस्सों में बवाल मच गया था। विरोध कर रहे लोगों ने गाने में दीपिका की ड्रेस पर आपत्ति जताई थी। फिल्म के रिलीज को भी रोकने की बात की गई थी, लेकिन अब फिल्म रिलीज भी हुई है, साथ ही इसने बॉक्स ऑफिस पर बंपर शुरुआत भी कर दी है। फिल्म दुनियाभर में 8000 स्क्रीन्स पर रिलीज की गई है।

केजीएफ चैप्टर 2 के हिंदी वर्जन से पीछे रह गई पठान
केजीएफ चैप्टर 2 के हिंदी वर्जन से पीछे रह गई पठान पठान ने पहले दिन 53 करोड़ की कमाई कर मूल रूप से हिंदी भाषा में बनने वाली सभी फिल्मों में सबसे बड़ी ओपनिंग हासिल की है। इसने ऋतिक रोशन की फिल्म वार के पहले दिन के कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है।

वार ने रिलीज के पहले दिन 51.6 करोड़ की कमाई की थी। हालांकि पठान, एक छोटे मार्जिन से केजीएफ चैप्टर 2 के हिंदी वर्जन से पीछे रह गई। हालांकि अभी फाइनल डाटा आना बाकी है, हो सकता है कि पठान केजीएफ 2 से भी आगे निकल जाए।

शोज हाउसफुल होने की वजह से बढ़ाने पड़े स्क्रीन्स
ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, पठान वर्ल्डवाइड 8000 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है। हिंदी तमिल और तेलुगु मिलाकर फिल्म 5500 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है वहीं विदेशों में फिल्म को 2500 स्क्रीन्स मिले हैं। शुरुआत में फिल्म 5200 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई थी लेकिन फिल्म के क्रेज को देखते हुए 300 स्क्रीन्स और बढ़ा दिए गए हैं। 

कोविड के दौरान बंद पड़े 25 सिंगल स्क्रीन्स को पठान की रिलीज के साथ ही फिर से खोल दिया गया है। शाहरुख ने खुद अपने सोशल मीडिया के जरिेए इस बात की जानकारी दी। 

देश के कई हिस्सों में फिल्म को लेकर विरोध प्रदर्शन
कल कई जगहों पर पठान की रिलीज के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में फिल्म के पोस्टर फाड़े गए। मध्य प्रदेश के इंदौर में हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के चलते पहला शो रद्द कर दिया गया था।

वहीं भोपाल में भी पठान के खिलाफ कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। मामले को देखते हुए थिएटर्स के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

चार साल बाद शाहरुख की वापसी
शाहरुख खान ने पठान के साथ सिल्वर स्क्रीन पर बतौर लीड चार साल बाद वापसी की है। वो आखिरी बार 2018 में आई फिल्म 'जीरो' में नजर आए थे। बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म फ्लॉप साबित हुई थी।

इन चार सालों में उन्होंने 'ब्रह्मास्त्र', 'लाल सिंह चड्ढा' और 'रॉकेट्री' जैसी फिल्मों में कैमियो किया था लेकिन अब पठान के साथ उन्होंने धमाकेदार वापसी की है। पठान उनकी सबसे बड़ी ओपनिंग हासिल करने वाली फिल्म बन गई है।

RRR ने हासिल की है अब तक की सबसे बेस्ट ओपनिंग
किसी भी भारतीय फिल्म के पहले दिन की कलेक्शन की बात करें तो 'आरआरआर' ने पूरी दुनियाभर में 225.5 करोड़ रुपए बटोरे थे। इस लिस्ट में 'बाहुबली 2' 213 करोड़ के फर्स्ट डे कलेक्शन के साथ दूसरे नंबर पर है।

तीसरे पर यश की फिल्म 'केजीएफ चैप्टर 2' थी जिसने रिलीज के पहले दिन 165.1 करोड़ का ग्लोबल बिजनेस किया था। चौथे और पांचवे पर प्रभास की 'साहो' और रजनीकांत की फिल्म '2.0' है। 

शाहरुख की फिल्म के लिए इतना क्रेज कभी नहीं दिखा:पठान की रिलीज को फेस्टिवल की तरह मना रहे फैंस, थिएटर के अंदर जमकर कर रहे डांस


शाहरुख खान की फिल्म पठान रिलीज हो चुकी है। रिलीज होते ही इस फिल्म के लिए गजब का क्रेज देखने को मिल रहा है। शाहरुख के फैंस देश के कई हिस्सों में पठान की रिलीज को सेलिब्रेट कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई वीडियोज वायरल हो रहे हैं जिसमें फैंस फिल्म के गानों पर थिएटर में ही डांस करते दिखाई दे रहे हैं। 

थिएटर में रिलीज से पहले ऑनलाइन लीक हुई पठान:मध्य प्रदेश-बिहार-यूपी समेत कई राज्यों में विरोध, फर्स्ट शो के बाद 300 स्क्रीन और बढ़ाए

शाहरुख खान की फिल्म पठान बुधवार को देशभर की 5200 स्क्रीन पर रिलीज हुई। कहीं इस फिल्म को सपोर्ट मिल रहा है तो कहीं इसका विरोध चल रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर में हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के चलते पहला शो रद्द कर दिया गया है। वहीं राजधानी भोपाल में भी पठान के खिलाफ सिनेमा हॉल के बाहर विरोध प्रदर्शन जारी है। बिहार और यूपी में कई जगह पठान के पोस्टर फाड़े गए।
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क्यों हुआ संविधान पर साइन के लिए 2 महीने इंतजार

भारतीय गणतंत्र में संविधान ही सर्वोच्च है। इसके बावजूद संविधान पर उंगली उठाने वाले भी कम नहीं हैं। सबसे ताजा वाकया जुलाई, 2022 का है। केरल के एक मंत्री ने संविधान को लोकतंत्र विरोधी बता दिया तो बवाल मच गया।

लेकिन संविधान पर इस तरह के सवाल और विवाद कोई नए नहीं हैं, बल्कि संविधान बनते समय भी ड्राफ्टिंग कमेटी (जिसके चेयरमैन डॉ. भीमराव अंबेडकर थे) के काम और उनकी सोच पर खुद इसे बनाने वाली कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली के मेंबर्स भी सवाल उठा चुके हैं।

क्या आप जानते हैं कि संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू क्यों माना जाता है, जबकि इसकी प्रस्तावना के मुताबिक ही कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली ने इसे 26 नवंबर, 1949 को पारित कर दिया था?

क्या आप जानते हैं क्यों कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली के ही सदस्य ने कहा था कि ये संविधान लोकतंत्र और संघीय ढांचे को बढ़ावा देने के बजाय इसे खत्म करता है।

क्या आप जानते हैं कि कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली को आखिर चुना किसने था? उनके चुनाव में वोट देने वाले कौन थे?

संविधान की प्रस्तावना की आखिरी लाइन में लिखा है कि कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली ने 26 नवंबर, 1949 को संविधान का ड्राफ्ट पारित कर दिया था।

पारित होने का मतलब ये कि संविधान बनकर तैयार था और असैंबली के सभी सदस्यों को स्वीकार था। अब सिर्फ हस्ताक्षर होने बाकी थे।

सिर्फ हस्ताक्षर के लिए दो महीने बाद की तारीख 24 जनवरी, 1950 तय की गई। 24 जनवरी को ही हस्ताक्षर भी हो गए, मगर संविधान के अमल में आने की तारीख 26 जनवरी, 1950 तय की गई।

दरअसल, 19 दिसंबर, 1929 को कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी। इसके बाद 26 जनवरी, 1930 को जनता के सामने इसकी घोषणा की गई थी।

लोगों से अपील की गई थी कि हर साल 26 जनवरी, को बतौर स्वतंत्रता दिवस मनाया जाए। इसके बाद हर साल देश में कई जगह 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाया भी जाता था।

कुछ लोगों का मानना है कि इस तारीख को यादगार बनाए रखने के लिए ही संविधान पारित हो जाने के बावजूद इसे लागू करने के लिए दो महीने का इंतजार किया गया।

दो महीने के इस इंतजार का सच जानने के लिए हमने कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली के सत्रों के दौरान हुई मेंबर्स के बीच हुई बहस को खंगाला। तथ्य वाकई चौंकाने वाले हैं…

22 जनवरी, 1947 को पहली बार कॉन्स्टिट्युएंट असेंबली में हुआ था 26 जनवरी की तारीख का जिक्र

9 दिसंबर, 1946 से देश का अपना संविधान बनाने के लिए गठित कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली का पहला सेशन शुरू हुआ था। दिसंबर, 1946 के सेशन में ही सभा के लक्ष्य और उद्देश्य को लेकर पंडित जवाहर लाल नेहरू एक प्रस्ताव लाए थे। इस प्रस्ताव में भारत को स्वतंत्र किए जाने का भी जिक्र था।

इसके बाद देश का घटनाक्रम भी तेजी से बदला और ब्रिटिश पार्लियामेंट में 18 जुलाई, 1947 को इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट के पारित होने के बाद 15 अगस्त को भारत की आजादी की घोषणा कर दी गई।

26 जनवरी की तारीख को लेकर चर्चा कई बार हुई…कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं लाया गया

कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली के सत्रों में कई बार इस बात का जिक्र आया कि भले ही स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त हो, लेकिन संविधान को पारित करने की तारीख 26 जनवरी रखी जाए और इसे बतौर गणतंत्र दिवस मनाया जाए।

जुलाई 1949 के बाद से होने वाले सत्रों में इस बात पर ज्यादा जोर दिया जाने लगा कि संविधान के अमल लाए जाने की तारीख तय की जाए और ये 26 जनवरी हो।

आर्टिकल 314 पर में एक वाक्यांश का इस्तेमाल किया गया था ‘...the date of the commencement of this constitution…’ इसी में इस तारीख के तौर पर 26 जनवरी, 1950 का जिक्र किया गया था।

हालांकि इस बात पर कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं लाया गया। बाद के सत्रों में हुई चर्चाओं में यह बात आम सहमति में आ गई कि 26 जनवरी को ही संविधान के अमल में आने की घोषणा की जाएगी।

26 जनवरी की तारीख पर सभा में नहीं था कोई विवाद…हिंदी अनुवाद के लिए भी समय चाहिए था

संविधान के अमल में आने की घोषणा 26 जनवरी, 1950 को ही की जाए, इस बात पर कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली में कोई विवाद नहीं था।

शुरुआती सत्रों से ही सभी सदस्यों ने ये इच्छा जताई थी कि जब भी संविधान बनकर तैयार हो, इसे 26 जनवरी को ही लागू किया जाए।

एक सदस्य ने तो संविधान की प्रस्तावना में भी इसे पारित करने की तारीख के तौर पर 26 जनवरी का जिक्र किए जाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि इसे स्वीकार नहीं किया गया।

इस वजह से भी 26 नवंबर, 1949 को पारित होने के बाद हस्ताक्षर और राष्ट्रपति के चुनाव के लिए 24 जनवरी, 1950 की तारीख तय की गई।

दूसरा विवाद…

संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के काम पर उठे थे कई बार सवाल…‘ड्रिफ्टिंग कमेटी’ तक कहा गया

जुलाई, 2022 में केरल के एक मंत्री ने संविधान की आलोचना करते हुए बयान दिया था, जिस पर काफी विवाद भी खड़ा हो गया था।

लेकिन इस संविधान पर सबसे ज्यादा सवाल इसे बनाने वाली कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली ने ही उठाए थे। संविधान की ड्राफ्टिंग के दौरान इसमें संशोधन के कुल 7635 प्रस्ताव लाए गए थे। इसमें से 2473 संशोधन स्वीकार भी किए गए।

असैंबली के सदस्य नजीरुद्दीन अहमद ने ड्राफ्टिंग कमेटी के कामकाज पर इतने सवाल उठाए थे कि 25 नवंबर, 1949 को संविधान का ड्राफ्ट पेश करते समय ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ. भीमराव अंबेडकर ने खासतौर पर उनका जिक्र किया था।

सदस्य के. हनुमंतिया ने 17 नवंबर, 1949 को कहा था कि वे संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के काम की तारीफ नहीं कर सकते क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जो भावना संविधान को लेकर थी, वो इसमें नहीं दिखती।

गांधी जी का कहना था कि लोकतंत्र की असली ताकत सत्ता के विकेंद्रीकरण में है। यानी पंचायत स्तर पर ज्यादा से ज्यादा ताकत दी जानी चाहिए। लेकिन ये संविधान ज्यादा ताकत दिल्ली को देता है।

के. हनुमंतिया ने ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्यों की भी आलोचना की थी। उनका कहना था कि ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्यों में कई लोग बहुत काबिल हैं। लेकिन फिर भी स्वतंत्रता संग्राम के बारे में उनके विचार, आंदोलन के नेताओं से मेल नहीं खाते हैं।

उनका कहना था कि ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य कानूनी मामलों के जानकार हैं, लेकिन ये उन्हीं कानूनों के जानकार हैं जो आजादी से पहले अंग्रेजों ने बनाए थे। हमारा संविधान बनाने के लिए सिर्फ ये काबिलियत काफी नहीं है।

तीसरा विवाद…

कॉन्स्टिट्युएंट असेंबली के चुनाव पर ही लोगों ने उठाए सवाल…ये जनता की चुनी हुई सभा नहीं थी

संविधान बनाने के लिए कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली के गठन की प्रक्रिया लॉर्ड माउंटबेटेन के समय में शुरू हुई थी। इसका चुनाव 1946 में हुआ था।

इस प्रक्रिया में भारत की जनता की भागीदारी नहीं थी। उस समय कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली में 389 सीटें तय की गई थीं। इनमें से 292 राज्यों के प्रतिनिधि थे, 93 प्रतिनिधि रियासतों के थे और 4 सदस्य दिल्ली, अजमेर-मेरवाड़ा, कुर्ग और ब्रिटिश बलूचिस्तान के चीफ कमिश्नर की ओर से थे।

इनका चुनाव राज्यों की प्रोविंशियल असैंबली के सदस्यों को करना था। राज्यों की प्रोविंशियल असैंबली के सदस्य भी जनता के चुने हुए प्रतिनिधि नहीं थे। बल्कि इन्हें भी सरकार ने नियुक्त किया था।

यही नहीं, संविधान के निर्माण में भी आम जनता से कोई राय नहीं ली गई थी। आज संसद में कोई बिल लाने से पहले सरकार उसे सार्वजनिक मंच पर रख जनता और स्टेक होल्डर्स से उनकी राय मांगती है।

संविधान निर्माण के दौरान जनता से राय लेने का कोई प्रावधान था ही नहीं। राजीव धवन कहते हैं कि कॉन्स्टिट्युएंट असैंबली ने जैसा भी संविधान बनाया, जनता के सामने उसे स्वीकार करने के अलावा कोई और ऑप्शन ही नहीं था।

आज भी कई जानकार ये जरूर मानते हैं कि संविधान के ड्राफ्ट में उन लोगों का प्रभाव ज्यादा रहा था जो मुख्य रूप से ब्रिटिशकाल के कानूनों की बारीकियों को ही समझते थे। यही वजह है कि हमारे संविधान ने कई देशों के संविधान से चीजें ली जरूर हैं, मगर उस पर सबसे ज्यादा प्रभाव ब्रिटिश कॉन्स्टिट्यूशन का ही दिखता है।

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BBC डॉक्यूमेंट्री पर अमेरिका ने बदला स्टैंड

भारत में चल रहे BBC डॉक्यूमेंट्री पर विवाद में अमेरिका ने 48 घंटे में अपना स्टैंड बदल दिया। उसने प्रेस की स्वतंत्रता का हवाला देकर BBC डॉक्यूमेंट्री का साथ देने की कोशिश की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने को प्रेस की स्वतंत्रता का मामला बताया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में फ्रीडम ऑफ स्पीच के महत्व को हाइलाइट्स करने का यह सही समय है और ऐसा भारत में भी लागू होता है।

इससे पहले मंगलवार को डॉक्यूमेंट्री विवाद के सवाल पर प्राइस ने कहा था- दोनों देशों के साझा मूल्य भारत और अमेरिका को दो संपन्न और जीवंत लोकतंत्र बनाते हैं।

अमेरिका ने कहा- हम डेमोक्रेटिक प्रिंसिपल्स को हाइलाइट करते हैं
बुधवार को प्रेस ब्रीफिंग में प्राइस ने कहा कि वॉशिंगटन दुनियाभर में प्रेस की स्वतंत्रता का सपोर्ट करता हैं। हम लगातार डेमोक्रेटिक प्रिंसिपल्स को हाइलाइट करते हैं, जिसमें फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन, धार्मिक विश्वास चुनने की आजादी, ह्यूमन राइट्स की मजबूती शामिल है, जिससे हमारे लोकतंत्र को मजबूती मिलती है। यही एक पॉइंट है, जिससे हम दुनिया भर में अपने रिश्ते बनाते हैं और इसी पॉइंट पर भारत के साथ भी हमारे रिश्ते को मजबूती मिलती है।

भारत में BBC डॉक्यूमेंट्री पर चले रहे विवाद को सिलसिलेवार समझिए...

17 जनवरी को पहला एपिसोड टेलिकास्ट हुआ, अगले दिन सरकार ने हटाया
BBC ने 17 जनवरी को गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री द मोदी क्वेश्चन का पहला एपिसोड यूट्यूब पर रिलीज किया। दूसरा एपिसोड 24 जनवरी को रिलीज होना था। इससे पहले ही केंद्र सरकार ने पहले एपिसोड को यूट्यूब से हटा दिया। भारत सरकार ने डॉक्यूमेंट्री को प्रधानमंत्री मोदी और देश के खिलाफ प्रोपेगैंडा बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हम नहीं जानते कि डॉक्‍यूमेंट्री के पीछे क्या एजेंडा है, लेकिन यह निष्पक्ष नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दुष्‍प्रचार है।

JNU के कुछ स्टूडेंट्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर BBC की प्रतिबंधित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने वाले थे। प्रशासन ने स्टूडेंट्स से डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग न करने की अपील की थी, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे। JNU प्रशासन ने स्टूडेंट्स से कहा था कि इस तरह की एक्टिविटीज यूनिवर्सिटी में शांति और सद्भाव को भंग कर सकती है।

छात्र नहीं माने और मंगलवार रात 9 बजे डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने की योजना बनाई। JNU स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष आइशी घोष ने छात्रों के मोबाइल फोन पर डॉक्यूमेंट्री डाउनलोड करने के लिए QR कोड शेयर किया। इसी पर डॉक्यूमेंट्री दिखाई जा रही थी। इसी दौरान छात्रों पर पथराव किया गया। पथराव किसने किया, यह पता नहीं चल पाया है। अंधेरे का फायदा उठाकर हमलावर भाग गए। इससे पहले यहां छात्र संघ कार्यालय की बिजली और इंटरनेट बंद कर दिया गया, जिसे देर रात बहाल कर दिया गया। आइशी ने 25 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई है।

जामिया यूनिवर्सिटी में पुलिस ने 7 छात्रों को हिरासत में लिया
बुधवार को जामिया मीलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी पहुंच गया। जामिया में विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर अब तक 7 छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन पर माहौल खराब करने के प्रयास का आरोप है। SFI ने छात्रों की रिहाई तक स्क्रीनिंग टाल दी। यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर की शिकायत पर इन्हें हिरासत में लिया गया। जामिया की वाइस चांसलर नजमा अख्तर ने बताया कि विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर छात्र संगठन SFI यूनिवर्सिटी कैंपस का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहा है। हम ऐसी किसी भी काम की अनुमति नहीं देंगे। छात्रों की किसी भी गैरजरूरी हरकत पर कार्रवाई होगी।

पंजाब यूनिविर्सिटी में भी हुई स्क्रीनिंग
बुधवार को पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) में भी स्टूडेंट सेंटर में विवादित डॉक्यूमेंट्री चलाने पर हंगामा हो गया। NSUI ने यह डॉक्यूमेंट्री चलाई। जिसे देखने कई स्टूडेंट्स जुट गए। इतने में यूनिवर्सिटी अथॉरिटी को इसकी भनक लग गई और प्रोजेक्टर पर चलाई गई इस डॉक्यूमेंट्री को तुरंत बंद करवा दिया गया। इससे पहले लगभग आधी डॉक्यूमेंट्री चल चुकी थी। 

राहुल गांधी बोले- सच हमेशा सामने आता है, एंटनी के बेटे ने कहा- इससे देश के लिए खतरा

  • राहुल गांधी ने मंगलवार को डॉक्यूमेंट्री बैन करने को गलत बताया है। राहुल ने कहा कि अगर आपने हमारे शास्त्रों को पढ़ा है, या आपने भगवत गीता या उपनिषदों को पढ़ा है तो आप देख सकते हैं कि सच्चाई हमेशा सामने आती है। आप उसे कैद नहीं कर सकते हैं। आप मीडिया को दबा सकते हैं। आप संस्थानों को कंट्रोल कर सकते हैं, आप CBI, ID और सभी चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन सच तो सच होता है।
  • कांग्रेस नेता अनिल एंटनी ने मंगलवार को कांग्रेस से अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्थानों पर BBC के विचारों को रखने का मतलब देश की संप्रभुता को कमजोर करना है। यह बात ऐसे समय में कही है, जब केरल के कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने BBC डॉक्यूमेंट्री को दिखाने की घोषणा की है। अनिल केरल के पूर्व CM एके एंटनी के बेटे हैं।
  • इससे पहले हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में सोमवार को स्टूडेंट्स के एक समूह ने कैंपस के अंदर डॉक्यूमेंट्री "इंडिया: द मोदी क्वेश्चन" की स्क्रीनिंग की। पुलिस ने कहा कि इस बारे में लिखित शिकायत मिलने पर जांच शुरू की जाएगी।

एके एंटनी के बेटे का कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा
वहीं, BBC की डॉक्यूमेंट्री को बैन करने का समर्थन करने वाले कांग्रेस के नेता एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी ने बुधवार सुबह पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा- कांग्रेस ने मुझसे ट्वीट डिलीट करने को कहा था, लेकिन मैंने इनकार कर दिया। क्या चाटुकारिता ही योग्यता का मापदंड बन गई है। उन्होंने मंगलवार दोपहर 1 बजे ट्वीट कर कहा था कि भारतीय संस्थानों पर BBC के विचारों को रखने का मतलब देश की संप्रभुता को कमजोर करना है।

अनिल एंटनी बोले- ट्वीट के बाद धमकी भरे कॉल आए
कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अनिल एंटनी ने कहा- मैं मानता हूं कि भले ही अंदरूनी तौर पर हमारे बीच कितने भी मतभेद हों, लेकिन हम बाहरी लोगों को उसका फायदा नहीं उठाने दे सकते। हमें एक पॉलिटिकल पार्टी के रूप में विदेशी ताकतों को हमारे मतभेदों का लाभ उठाकर देश में बंटवारा करने की छूट नहीं देनी चाहिए। इसी वजह से मैंने ट्वीट किया था, लेकिन पार्टी की तरफ से उसे डिलीट करने के लिए कहा गया। मेरे ट्वीट के बाद मुझे रातभर धमकी भरे फोन और मैसेज आते रहे। अब मुझे नहीं लगता कि मुझे ऐसे लोगों के साथ काम करना चाहिए। इसीलिए मैंने इस्तीफा दे दिया।

सुप्रीम कोर्ट PM मोदी को क्लीन चिट दे चुका है
गुजरात में 2002 में हुए दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने SIT का गठन किया था। कमेटी ने दंगों में नरेंद्र मोदी का हाथ नहीं पाया था। SIT ने कहा था कि मोदी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले। जून 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने SIT की तरफ से मोदी को मिली क्लीन चिट को सही माना था।

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पाकिस्तान में गलती से मिसाइल दागने के मामले में वायुसेना ने तीन अधिकारियों को किया बर्खास्त

नई दिल्‍ली : 

पाक सीमा में गलती से ब्रह्मोस मिसाइल दागने का मामले में भारतीय वायुसेना के तीन अधिकारियों को बर्खास्‍त कर दिया गया है. सरकार की ओर से मंगलवार को यह जानकारी दी गई.एक अधिकारी ने बताया, "कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने पाया कि दुर्घटनावश ब्रह्मोस मिसाइल दागे जाने की घटना में तीन अधिकारियों ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं किया. 9 मार्च को ब्रह्मोस फायर किया गया था और मिसाइल पाकिस्तान में गिरी थी." वायुसेना ने एक बयान में कहा, "ब्रह्मोस मिसाइल गलती से 9 मार्च 2022 को दागी गई थी.  इस घटना के लिए जिम्‍मेदारी तय करने सहित मामले की जांच के लिए गठित कोर्ट ऑफ इनक्‍वायरी ने पाया कि मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)का पालन नहीं करते हुए तीन अधिकारी इस एक्‍सीडेंटल फायरिंग में शामिल थे.

इसमें कहा गया है, "इन तीन अधिकारियों को मुख्‍य रूप से घटना के लिए जिम्‍मेदार ठहराया गया. केंद्र सरकार ने तत्‍काल प्रभाव से इनकी सेवाएं समाप्‍त कर दी है. 23 अगस्‍त 2022 को अधिकारियों को बर्खास्‍तगी के आदेश दिए गए हैं. "रक्षा मंत्रालय ने इस घटना को बेहद खेदजनक बताते हुए इसके लिए तकनीकी खराबी को दोषी ठहराया था.पाकिस्‍तान के अनुसार, यह मिसाइल पाकिस्‍तान के हवाई क्षेत्र में 100 किमी अंदर आया. उस समय यह  40 हजार फीट की ऊंचाई पर और ध्‍वनि की गति से तीन गुना रफ्तार हासिल किए गए था.चूंकि इसमें कोई वारहेड नहीं था, इसलिए इसमें कोई विस्‍फोट नहीं हुआ. 

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध 2019 के बाद ऐतिहासिक तौर पर सबसे खराब हैं, जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सैनिक आत्मघाती हमले में मारे गए थे. भारत ने इसके जवाब में पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच आसमान में झगड़ा हुआ था

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"सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही" : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के तीखे बोल

नई दिल्‍ली : 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari), जिनके सीधे सपाट अंदाज में बात कहने के अंदाज ने संभवत: उन्‍हें बीजेपी की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्‍था में स्‍थान से वंचित किया है, ने एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. गडकरी ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही है और यह एक समस्‍या है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, "आप चमत्‍कार कर सकते हैं...और ऐसा करने की क्षमता है. मेरा मानना है कि भारतीय बुनियादी संरचना का भविष्‍य उज्‍ज्‍वल है. हमें अच्छी तकनीक, अच्छे नवाचार, अच्छे शोध और सफल प्रथाओं को  दुनिया और देश में स्वीकार करने की जरूरत है. हमारे पास वैकल्पिक मटेरियल होना चाहिए ताकि हम क्‍वालिटी से समझौता किए बिना लागत कम कर सकें. समय निर्माण में सबसे अहम चीज है. समय सबसे बड़ी पूंजी है. सबसे बड़ी समस्‍या यह है कि सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही है. 

एसोसिएशन ऑफ कंसल्टिंग सिविल इंजीनियर मुंबई की ओर से आयोजित कार्यक्रम NATCON 2022 को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीकी या संसाधनों से अधिक महत्‍वपूर्ण समय है. गडकरी के इन शब्‍दों और पीएम नरेंद्र मोदी की कुछ दिनों पहले किए गए उस कमेंट में विभिन्‍नता देखने में आई है जिसमें पीएम ने "अमृत काल" या स्‍वर्ण युग के बड़े मील के पत्‍थरों को पार करने में सरकार की कामयाबी का जिक्र किया था. 

हालांकि बीजेपी के नेताओं का कहना है कि गडकरी के यह शब्‍द किसी सरकार विशेष के लिए नहीं बल्कि सामान्‍य तौर पर सरकारों के लिए कहे गए हैं.गौरतलब है कि वर्ष 2024 के आम चुनाव सहित आने वाले चुनावों को ध्‍यान में रखते हुए पिछले सप्‍ताह  बीजेपी संसदीय बोर्ड का नए सिरे से गठन किया गया है, इसमें गडकरी को स्‍थान नहीं दिया गया है.गडकरी का इस महत्‍वपूर्ण समिति से बाहर होना आश्‍चर्यजनक है. वे नरेंद्र मोदी कैबिनेट के वरिष्‍ठ मंत्री हैं, वे बीजेपी अध्‍यक्ष की जिम्‍मेदारी भी संभाल चुके हैं. आमतौर पर पार्टी, अपने पूर्व अध्‍यक्ष को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करती है. एक अन्‍य अहम बात यह है कि गडकरी, बीजेपी की वैचारिक संस्‍था राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS)के करीबी हैं.  

बता दें, कुछ समय पहले नागपुर में एक कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा था कि उनका अकसर राजनीति छोड़ने का मन करता है क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि जिंदगी में करने के लिए बहुत कुछ है. समाजसेवी गिरीश गांधी को सम्‍मानित करने के लिए आयोजित समारोह में गडकरी ने कहा था, "कई बार मुझे लगता है कि मुझे राजनीति छोड़ देनी चाहिए. राजनीति के अलावा भी जिंदगी में करने के लिए बहुत कुछ है." केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री गडकरी ने कहा कि उनका मानना है कि राजनीति, सामाजिक बदलाव के लिए है लेकिन अब यह सत्‍ता में बने रहने का जरिया अधिक बन गई है. 

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आलिया भट्ट ने इंटरव्यू में कह दिया कुछ ऐसा, सोशल मीडिया पर यूजर कहने लगे बायकॉट 'ब्रह्मास्त्र'

नई दिल्ली : 

बॉलीवुड की मुश्किलें कम होने का नाम लेती नजर आ रही हैं. पहले 'लाल सिंह चड्ढा' और 'रक्षा बंधन' को लेकर बायकॉट का ट्रेंड चला तो उसके बाद हाल ही में 'लाइगर' के बायकॉट का ट्रेंड सोशल मीडिया पर आया. लेकिन हाल ही में एक इंटरव्यू में आलिया भट्ट कुछ ऐसा कह गईं कि सोशल मीडिया पर उनकी फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' के बायकॉट का ट्रेंड सामने आने लगा. इस तरह बॉलीवुड जहां बॉक्स ऑफिस पर कोई धूम मचाने में नाकाम रहा है, वहीं सोशल मीडिया पर भी वह गलत वजहों से ट्रेंड कर रहा है. 

'ब्रह्मास्त्र' के बायकॉट का ट्रेंड आलिया भट्ट के एक इंटरव्यू के साथ हुआ. इस इंटरव्यू में आलिया भट्ट से सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर होने वाली ट्रोलिंग के बारे में पूछा गया था. मिड-डे के साथ इंटरव्यू में आलिया भट्ट ने कहा, 'मैं मौखिक रूप से अपना बचाव नहीं कर सकती. अगर आप मुझे पसंद नहीं करते, तो मुझे न देखें. मैं इसमें कुछ नहीं कर सकती.' बस इसके बाद से सोशल मीडिया पर ब्रह्मास्त्र ट्रोल्स के निशाने पर आ गई. 

बता दें कि कुछ समय पहले करीना कपूर ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि फिल्में मत देखो किसी ने तुम्हें मजबूर नहीं किया है. जिसके बाद लाल सिंह चड्ढा का बायकॉट का ट्रेंड खूब चला था. अब आलिया भट्ट ने भी कुछ ऐसा ही कह दिया है. वैसे रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की बिग बजट फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' 9 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. 

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नालंदा के एक अस्पताल में शवों के लिए स्ट्रेचर भी मयस्सर नहीं

नालंदा : 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र नालंदा के एक अस्पताल में बुनियादी सुविधा भी मयस्सर नहीं हो रहा है. हालात इतने दयनीय है कि परिजनों को लाश को अपने हाथों पर उठाकर ले जाना पड़ता है. हैरानी की बात तो यह है कि नालंदा का यह एकमात्र आईएसओ प्रमाणित अस्पताल है औऱ इस अस्पताल में शवों को इधर –उधर ले जाने के लिए स्ट्रेचर भी उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं.
पिछले दिनों सबेरे सबेरे नदी में एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई. घटना के संबंध में मृतक के परिजन ने बताया कि युवक शौच के लिए खेत गया था. उसी दौरान नदी में पैर फिसल जाने के कारण डूबने से उसकी मौत हो गई. मौत के बाद पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल भेज दिया, मगर सदर अस्पताल में मानवता को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई.
पुलिस के द्वारा शव को निजी वाहन के द्वारा पोस्टमार्टम के लिए भेज तो दिया गया मगर पोस्टमार्टम कक्ष से करीब दो सौ मीटर पहले ही गाड़ी को रोक दिया गया था. वहां से मृतक के भाई और बहनोई खुद हाथो पर शव को उठाकर पोस्टमार्टम रूम तक ले गए. वहां मौजूद सिपाही और अस्पताल के कुछ कर्मी ने कोई मदद नहीं की.
मृतक के भाई ने कहा कि स्ट्रेचर न मिलने की वजह से उनलोगों को परेशानी उठानी पड़ी. इश मुद्दे पर अस्पताल के अधिकारी ने बोलने से इंकार कर दिया.  
स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था ऐसी है कि लोगों को स्ट्रैचर जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पा रही है. 

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शुभमन गिल द्वारा सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ने पर Twitter यूजर्स का कमाल का रिएक्शन

नई दिल्ली: शुभमन गिल (Sachin Tendulkar)  ने अपनी पिछली पांच पारियों में 64, 43, 98*, 82*, 33 खेलने के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पहला शतक लगाया. वेस्टइंडीज के खिलाफ सबीना पार्क में बारिश की वजह से मैच रोकना पड़ा था, तब गिल 98 पर बल्लेबाज कर रहे थे. अंपायरों ने बारिश की वजह से हो रही लगातार रुकावट के कारण भारत की पारी घोषित कर दी. जिसके बाद अपनी अगली सीरीज में गिल जिम्बाब्वे के खिलाफ (ZIM vs IND) पहले वनडे में भी एक शतक की तलाश कर रहे थे लेकिन विपक्षी टीम का स्कोर उतना बड़ा नहीं था कि वो अपनी ये इच्छा पूरी कर पाते. हरारे में उस दिन उन्होंने नाबाद 82 रन बनाए. दूसरे मैच में उन्हें तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया और वहां उन्हें 33 रन की पारी खेली. 

तीसरे और आखिरी वनडे (ZIM vs IND 3rd ODI) में उनके पास आखिरी मौका था सेलेक्टरों को अपने कौशल का एक मजबूत परिचय कराने का. केएल राहुल और शिखर धवन के जल्दी आउट होने के बाद गिल ने एक शानदार पारी खेलकर इस लंबे इंतजार को खत्म किया.

दाएं हाथ के बल्लेबाज ने 97 गेंद पर 130 बनाए, जिसमें 15 चौके और एक छक्का शामिल हैं. गिल की इस शानदार पारी के बदौलत भारत ने मेजबान टीम के सामने के 290 रन का कड़ा टारगेट सेट किया.

इसी के साथ पंजाब के इस बल्लेबाज ने रिकॉर्ड बूक्स में भी अपना नाम दर्ज करा लिया. वो जिम्बाब्वे के खिलाफ एक वनडे मैच में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए. उन्होंने महान सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) का 24 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा. पूर्व दिग्गज बल्लेबाज ने 1998 में बुलावायो में नाबाद 127 रन की पारी खेली थी.



इसी के साथ गिल (22 साल और 348 दिन) जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे में शतक लगाने वाले दूसरे सबसे युवा भारतीय बल्लेबाज भी बन गए. इससे पहले मोहम्मद कैफ (Mohammad Kaif) ने 21 साल 287 दिन की उम्र में ये कारनामा किया था.

गिल के एक्स्ट्रा ऑर्डनरी प्रदर्शन के लिए उनको 'प्लेयर ऑफ द मैच' और सीरीज में सबसे ज्यादा 245 रन बनाने के लिए 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया. ये उनका लगातार दूसरा प्लेयर ऑफ द सीरीज खिताब है. इससे पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में भी दाएं हाथ के बल्लेबाज को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया था.

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प्लेटफॉर्म पर सो रही पत्नी को जगाकर चलती ट्रेन के आगे धकेला, महिला की मौत

मुंबई: एक पति ने रेलवे प्लेटफॉर्म पर सो रही अपनी पत्नी को उठाकर चलती ट्रेन के आगे फेंक दिया. जिसके कारण उसकी मौत हो गई. वहीं आरोपी पति मौके से फरार हो गया. ये वारदात मुंबई के वसई रेलवे स्टेशन की है. पुलिस के अनुसार घटना सोमवार सुबह 4 बजे की है. रेलवे स्टेशन में लगे CCTV में ये पूरी घटना कैद हुई है. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक शख्स एक सो रही महिला को आधी नींद से उठा कर प्लेटफॉर्म के किनारे तक ले गया. उसके बाद ट्रेन के आगे उसे धक्का दे दिया. फिर आरोपी प्लेटफॉर्म पर सोए अपने दो बच्चों को उठाकर वहां से भाग गया. 

हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि आरोपी का महिला से क्या संबंध था. लेकिन माना जा रहा है कि वो उसका पति है. घटना पर वसई पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी, महिला और बच्चों के साथ रविवार दोपहर से प्लेटफॉर्म नम्बर पांच पर मौजूद था. सुबह 4 बजे के करीब शख्स ने सो रही महिला को उठाया और उसे अवध एक्सप्रेस के आगे धकेल दिया. जिसके कारण महिला की मौके पर ही मौत हो गई और आरोपी अपने बच्चों के साथ फरार हो गया. पुलिस ने ंमामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश में लग गई है. आसपास के सीसीटीवी की मदद से ये पता लगाने में लगी है कि  आरोपी कहां भागा है. 

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बिलकिस बानो केस में सजा सुनाने वाले पूर्व जज ने दोषियों की रिहाई पर उठाए सवाल

बॉम्‍बे हाईकोर्ट के जज के पद से रिटायर हुए जस्टिस यूडी साल्‍वी ने कहा, "जिसने भी यह फैसला लिया, उसे इस पर पुनर्विचार करना चाहिए

मुंबई : : 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और उसके परिवार के सात सदस्‍यों की हत्‍या के 11 दोषियों को रिहा नहीं किया जाना चाहिए था. 14 साल पहले इन लोगों दोषी ठहराने वाले जज ने यह बात कही है. उन्‍होंने एक विचारधारा के लोगों की ओर से दोषियों के मिठाई और फूलमालाओं से स्‍वागत की भी आलोचना की. बॉम्‍बे हाईकोर्ट के जज के पद से रिटायर हुए जस्टिस यूडी साल्‍वी ने कहा, "जिसमें भी यह फैसला लिया, उसे इस पर पुनर्विचार करना चाहिए. मैं बस इतना ही कह सकता हूं." उन्‍होंने कहा, "यह मामला हर प्रक्रिया से गुजरा और हम सभी जानते हैं कि इन 11 दोषियों को तमाम सबूतों के बाद उम्रकैद की सजा मिली थी. अब सरकार ने बाद में क्‍या सोचा, यह एक सवाल है.

जस्टिस साल्‍वी ने कहा, "सरकार के पास 'माफी' देने की शक्ति है लेकिन कोई भी निर्णय लेने के पहले उसे हर पहलू पर सोचना चाहिए अन्‍यथा यह सही नहीं है. मैं नहीं जानता कि उन्‍होंने इस प्रक्रिया को अपनाया है या नहीं. "उन्‍होंने कहा, "क्‍या उन्‍होंने उस जज से पूछा जिसके अधीन केस सुना गया? मैं आपको बता सकता हूं कि मैंने इस बारे में कुछ नहीं सुना. इस केस की सीबीआई द्वारा जांच की गई. ऐसे मामलों में राज्‍य सरकार को केंद्र सरकार से भी सलाह लेने की जरूरत होती है. क्‍या उन्‍होंने ऐसा किया? मुझे कोई जानकारी नहीं है. यदि उन्‍होंने किया तो केंद्र सरकार ने क्‍या कहा?"

जज ने रिहाई के बाद दोषियों के सत्‍ताधारी बीजेपी की ओर से जुड़े ग्रुप द्वारा मिठाई और फूलमालाओं से स्‍वागत की भी आलोचना की. उन्‍होंने बीजेपी के एक विधायक के इस बयान की भी आलोचना कि ये लोग अच्‍छे संस्‍कार वाले ब्राह्मण थे. जस्टिस साल्‍वी ने कहा, "इन 11 दोषियों का स्‍वागत करना सही नहीं है. कुछ लोग सोचते हैं कि यह हिंदुत्‍व का हिस्‍सा है या उन्‍होंने हिंदू के तौर पर ऐसा किया. यह गलत है...कुछ कह रहे हैं कि वे ब्राह्माण हैं, यह कहना सही नहीं है.

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सपना चौधरी की गिरफ्तारी का वारंट जारी

लखनऊ। डांस का कार्यक्रम रद्द करने व टिकट का पैसा भी वापस नहीं करने के एक मामले में गैरहाजिर रहने पर अदालत ने मशहूर डांसर सपना चौधरी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है। एसीजेएम शांतनु त्यागी ने मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को नियत की है। 10 मई को इस मामले में अभियुक्ता सपना चौधरी ने आत्मसमर्पण किया था व अंतरिम जमानत की गुहार लगाई थी। अदालत ने अंतरिम जमानत मंजूर कर लिया था। फिर आठ जून को सपना चौधरी की नियमित जमानत अर्जी भी सर्शत मंजूर हुई थी। सोमवार को इस मामले में सपना समेत अन्य अभियुक्तों पर आरोप तय करने के मसले पर सुनवसपना की तरफ से हाजिरी माफी की अर्जी भी नहीं दी गई, जबकि अन्य अभियुक्तों की ओर से हाजिरी माफी की अर्जी दी गई थी। एक मई, 2019 को इस मामले में सपना चौधरी के खिलाफ किसी व्यक्ति के विश्वास का हनन व धोखाधड़ी करने के मामले में आरोप पत्र दाखिल हुआ था। वहीं, 20 जनवरी, 2019 को इस कार्यक्रम के आयोजक जुनैद अहमद, इवाद अली, अमित पांडेय व रत्नाकर उपाध्याय के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था   

ये है मामला : उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 13 अक्टूबर, 2018 को स्मृति उपवन में दोपहर तीन बजे से रात्रि 10 बजे तक सपना समेत अन्य कलाकारों का कार्यक्रम था। इसके लिए प्रति व्यक्ति तीन सौ रुपये में आनलाइन व आफलाइन टिकट बेचा गया था। इस कार्यक्रम को देखने के लिए हजारों टिकट धारक मौजूद थे, लेकिन रात 10 बजे तक सपना चौधरी नहीं आईं। इसपर लोगों ने हंगामा कर दिया। इसके बाद टिकट धारकों का पैसा भी वापस नहीं किया गया। 14 अक्टूबर, 2018 को इस मामले की नामजद एफआइआर दारोगा फिरोज खान ने थाना आशियाना में दर्ज कराई थी।



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ओडिशा समेत देश के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति चिंताजनक, हिमाचल में बारिश से 32 की मौत

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार को लगातार तीसरे दिन भारी बारिश जारी रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अभी भी कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। पिछले एक-दो दिन से देश के कई अन्य राज्यों में भी बारिश का दौर जारी है। भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में 32 लोगों की मौत हो गई है। 

 भारी बारिश के चलते ओडिशा में सोमवार को सैकड़ों गांव पानी में डूबे रहे। इस बीच मध्य प्रदेश के भोपाल और जबलपुर समेत कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश के चलते सोमवार को स्कूल बंद कर दिए गए।

मौसम विभाग के अनुसार बारिश का दौर एमपी, हिमाचल, ओडिशा समेत कई राज्यों में जारी है। इसके चलते कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है।ओडिशा में बाढ़ से लगभग आठ लाख लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। बारिश से बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हुई है। सड़क के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। राज्य ने अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 120,000 लोगों को निकाला है। हालांकि, उत्तरी जिलों में बाढ़ की स्थिति सबसे खराब बनी हुई है, क्योंकि सुबरनेखा नदी में निचले इलाकों में पानी भर गया है और 100 से अधिक गांवों में डूब गए हैं। 

बालासोर और मयूरभंज जिलों के अधिकारियों ने निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर निकासी अभियान शुरू किया है। सुवर्णरेखा और बैतरनी में पानी कई स्थानों पर खतरे के निशान को पार कर गया है। सुवर्णरेखा नदी के अलावा, बालासोर जिला भी बुढाबलंग और जलाका नदी के बाढ़ के पानी से प्रभावित है।

बालासोर के जिला कलेक्टर दत्तात्रेय भाऊसाहेब शिंदे ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि बालासोर जिले के 83 ग्राम पंचायतों के लगभग 156 गाँव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। प्रशासन ने सोमवार दोपहर तक 40,000 लोगों को निकाला है और उन्हें 227 अस्थायी आश्रयों में रखा गया है। लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से निकाले जाने की प्रक्रिया अभी भी चल रही है। इसके साथ ही आईएमडी ने मंगलवार को उत्तरी ओडिशा के जिलों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की है।

हिमाचल प्रदेश में 32 हुई मरने वालों की संख्या, 12 घायल 

हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात से अचानक आई बाढ़ और बारिश के कारण हुए भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। लापता हुए छह लोगों का अब भी पता नहीं चल पाया है। इस आपदा में 12 लोग घायल हो गए हैं। मंडी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित है। इसके बाद कांगड़ा और चंबा जिला हैं।

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UP में खुले रहेंगे स्कूल-कालेज-बाजार व सभी आफिस, उत्साह से मनेगा आजादी का अमृत महोत्सव

लखनऊ। आजादी के अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) के तहत स्वतंत्रता दिवस (Independence day) इस वर्ष विशेष उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय पर्व में जनभागीदारी बढ़ाते हुए स्वतंत्रता सप्ताह और हर घर तिरंगा जैसे कार्यक्रम (Har ghar Tiranga Abhiyan) आयोजित किए गए हैं। इसके साथ ही सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय किया है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस पर अवकाश नहीं रहेगा, बल्कि हर जगह इसे उत्साहपूर्वक मनाया जाएगा। 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पिछले दिनों निर्देश दिए थे स्वतंत्रता दिवस पर राज्य में कोई भी स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, सरकारी या गैर सरकारी दफ्तर, बाजार, माल व कारखाने आदि बंद नहीं रहेंगे। इसके लिए ही पिछले दिनों मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की ओर से शासनादेश जारी किया जा चुका है।

सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यूपी में  11 से 17 अगस्त तक स्वतंत्रता दिवस सप्ताह मनाया जा रहा है। निर्देश दिए गए हैं कि इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सभी स्कूल-कॉलेजों और संस्थानों पर सफाई का कार्यक्रम आयोजित होगा। सभी घरों और सरकारी, गैर सरकारी दफ्तरों और संस्थानों में सार्वजनिक स्थलों पर तिरंगा फहराया जाएगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता दिवस को लेकर प्रदेश के लोगों से अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए कहा है। जिसका असर भी दिख रहा है। हर घर तिरंगा अभियान में लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। सीएम योगी की ओर से प्रदेश में 4.5 करोड़ तिरंगे फहराने का लक्ष्य तय किया गया है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रदेश के हजारों स्वयं सहायता समूह, गैर सरकारी संगठन, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम इकाइयां दिन और रात एक किये हुए हैं। स्थिति यह है कि यूपी इस लक्ष्य से भी ज्यादा छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान से लोगों को जोड़ने की जरूरत है। इसके साथ ही युवाओं के लिए सेल्फी विद तिरंगा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की सेल्फी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया जाना चाहिए।


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दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर तक सुरक्षा चाकचौबंद, पंजाब और यूपी आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़

नई दिल्‍ली। स्वतंत्रता दिवस समारोह को निर्विघ्‍न धूमधाम से मनाने के लिए पूरे देश में सुरक्षा के पुख्‍ता इंतजाम किए गए हैं। समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर तक सुरक्षा चाकचौबंद रहेगी। स्‍वतंत्रता दिवस समारोह में कोई बाधा न आए इसके लिए राज्यों में पुलिस तंत्र को सतर्क कर दिया गया है। दिल्ली में जहां प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे उसकी सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस की ओर से 10,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है। 

एक अधिकारी ने कहा कि देश की वित्तीय राजधानी मुंबई की सड़कों पर ड्रोन रोधी प्रणालियों की तैनाती की गई है। महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यही नहीं अधिकारियों को सक्रिय रहने को कहा गया है। सुरक्षा लिहाज से ऑपरेशन ऑल आउट चलाया गया जिसमें होटल, वाहनों और रोड बैरिकेडिंग की जांच शामिल है। हिस्ट्रीशीटर और असामाजिक तत्‍वों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

कश्मीर में मुख्य समारोह शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में होगा। इसकी अध्यक्षता उपराज्यपाल मनोज सिन्हा करेंगे। ड्रोन, स्नाइपर और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को निगरानी के लिए तैनात किया गया है। जम्‍मू-कश्‍मीर में वाहनों की सघन जांच हो रही है। कई जगहों पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों को भारी संख्या में तैनात किया गया है ताकि आतंकवादियों द्वारा समारोह को बाधित करने की किसी भी कोशिश को विफल किया जा सके।

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‘हिंदू-मुस्लिम’ करना घातक होगा

हिंदू-मुस्लिम रिश्तों को लेकर सदा से ही भारत में आपसी भाईचारे और साझा विरासत का वातावरण रहा है। हां, लगभग 5-10 प्रतिशत तो हमेशा ही फसाद पर उतारू रहते हैं दोनों ओर, मगर आम तौर से गंगा-जमुनी तहज़ीब का ही अनुसरण करते चले आ रहे हैं, भारत के सभी निवासी, चाहे वे किसी भी धर्म के अनुयायी हों। कर्नाटक में जिस प्रकार से मंदिरों के निकट मुस्लिम दुकानदारों से सामान लेने के विरुद्ध वहां बैनर या पोस्टर लगाए गए हैं, उससे आपसी समभाव व सद्भाव पर कुप्रभाव पड़ सकता है। इस प्रकार की विघटनकारी बातों से बचने की आवश्यकता है। दक्षिण भारत के शिमोगा से एक विचलित करने वाली खबर आई है कि वहां के मंदिरों के कंप्लेक्स के बाहर कोई भी मुस्लिम अपनी किसी भी प्रकार की दुकान नहीं चलाएगा। इसका कारण बताया गया कि ये लोग बीफ का सेवन करते हैं। यह ठीक है कि बीफ के खाने से परहेज़ करना चाहिए मुस्लिमों को, क्योंकि गाय को हिंदू धर्म में माता के स्थान पर मान-सम्मान दिया गया है। जिस प्रकार से उडुपि, दक्षिण कन्नड़, टुमकुर, हासन, चिकमंग्लूर, दुर्गापुरामेशवरी आदि के मंदिरों के कैंपस में मुस्लिम पूजा सामग्री से लेकर अन्य नाना प्रकार का सामान बेचते थे, उससे न केवल इन मुस्लिम दुकानदारों के घर चलते थे बल्कि इस से अंतरधर्म सद्भावना व समभावना का सुखद प्रचार भी होता था। इन स्थानों पर बड़े-बड़े पोस्टर व बैनर लगा दिए गए हैं कि मुस्लिम दुकानदार से सौदा नहीं लिया जाए। इस प्रकार के बैनर न केवल अनैतिक व गैर कानूनी हैं बल्कि मानवता विरोधी भी हैं।

 

न जाने कब भारत में यह दूषित हिंदू-मुस्लिम मानसिकता की समाप्ति होगी। यदि भारत को विश्व गुरु और 5 ट्रिलियन अर्थ व्यवस्था बनना है तो हिंदू-मुस्लिम के मकडज़ाल से बाहर निकलना होगा और केवल और केवल भारत कार्ड खेलना होगा, न कि हिंदू-मुस्लिम ‘खेला होबे’! हां, एक सोचने वाली बात यह है कि आखिर यह कांड शिमोगा से ही क्यों शुरू हुआ! इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि इसी स्थान से हिजाब का अज़ाब शुरू हुआ था और 96 में से 6 छात्राओं ने बावजूद स्कूल से यह उसूल जारी होने पर कि हिजाब अन्यथा कोई और कोई धार्मिक पहनावा पहनने की अनुमति नहीं, फिर भी कक्षा की इन 6 छात्राओं ने इस बात की जि़द पकड़ ली कि वे हिजाब पहनकर ही कक्षा में आएंगी। वास्तव में उनको चंद कट्टरवादियों ने धमका दिया कि हिजाब नहीं तो किताब नहीं! एक समाज में जब एक तबक़ा जि़द पकड़ उद्दंड हो जाता है तो दूसरा तबका भी उसी रास्ते पर चल पड़ता है। 

 

इसी हिंदू-मुस्लिम पचड़े को लेकर लेखक की एक बार सरसंघचालक मोहन भागवत जी से बात हो रही थी तो उनका मत था कि अधिकतर मुस्लिम संस्कारी, राष्ट्रवादी व शांतिमय हैं, मगर कुछ स्वयंभू मुस्लिम नेता उन पर ढक्कन कस देते हैं जिसके कारण शाहीन बाग़ और हिजाब जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं और एक सुदृढ़ समाज को बांटने के प्रयास होते हैं। भागवत के विचार में मुस्लिम और हिंदू अलग हैं ही नहीं, भले ही उनका धर्म भिन्न हो, मगर डीएनए तो एक ही है। इसमें उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुस्लिमों के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती क्योंकि भारत को प्रगति के इस मुकाम तक लाने में मुसलमानों का बड़ा योगदान है। साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम उनकी संतान की माफिक हैं और उनके साथ वे बराबरी का सुलूक करना चाहते हैं। इस तरह दुकानदारी व दुकानदारों के मामले में हिंदू-मुस्लिम करना भारत के लिए घातक होगा। इससे बचा जाना चाहिए।

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‘कश्मीर फाइल्स’ व भारतीय सिनेमा

साहित्य समाज का दर्पण माना जाता है। भारतीय सिनेमा भी अपने शास्त्रीय युग में साहित्य के समकक्ष रहा है। ऐसी कई फिल्में हैं जिन्हें देखते समय श्रेष्ठ साहित्य वाचन सा आनंद प्राप्त होता है। हाल ही में ‘कश्मीर फाइल्स’ रिलीज हुई जिस पर प्रधानमंत्री जी की मुहर भी लग गई। फिल्म रिलीज के बाद परस्पर विरोधाभासी प्रतिक्रिया सामने आईं। प्रश्न कश्मीर से विस्थापित हुए पंडितों के द्वारा झेली गई त्रासदी, उस वक्त की परिस्थिति, राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर उठाए गए। पीडि़तों की संख्या और फिल्म में जो घटनाएं दिखाई गईं उनकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता पर सवाल उठे। सच तो यह है कि मानवीय पीड़ा का एहसास किसी एक के द्वारा भी किया गया हो, तो वो तहजीबी विरासत पर लगा बदनुमा दाग ही है, लेकिन किसी घटना को विरूपित करके प्रस्तुत करना भी उतनी ही बड़ी तहजीबी त्रासदी है। खासकर तब, जबकि इरादे में ईमानदारी न हो। इस फिल्म के पक्षधर भले ही यह न कह रहे हों, मगर उनका अव्यक्त भाव लोकमानस समझ रहा है। यह संप्रेषित हो रहा है कि जवाबी हिंसा जायज है, बहुसंख्या खतरे में है। उसके समक्ष रोटी, कपड़ा, मकान, रोजगार से ज्यादा बुलंद सवाल अपने को बचाने का है।

 

पिछले दिनों की गई पत्थरबाजी पर किसी बहुसंख्यक को शर्मिन्दा होने की जरूरत नहीं है। सवाल यह भी है कि कश्मीरी विस्थापित पंडित न होकर बहुजन समाज के होते, तो क्या प्रभुत्व संपन्न शहरी अभिजात्य वर्ग की चेतना इतनी ही आहत होती? शायद नहीं। फरीदाबाद, ऊना, हाथरस आदि सैकड़ों-हजारों घटनाएं जब घटीं तो इस वर्ग ने दूसरी तरफ नजर फेरना उचित समझा। कोरोना लॉकडाउन में पैदल लौटते समूहों को, जिनमें अधिकांश बहुजन थे, आदतन अशिष्ट करार दिया गया। उसी के बाद मौलिक हक से पहले मौलिक कत्र्तव्य पालन की बहस छेड़ी गई। प्रभुत्व संपन्न वर्ग को बहुजन पर होते अत्याचार पर कन्नी काटते हुए देखते समय पूछने को जी चाहता है कि क्या बहुजन हिंदू नहीं हैं? यदि नहीं हैं तो फिर धर्मांतरण का बवाल खड़ा क्यों किया जाए? प्रभुत्व संपन्नता यह मानती है कि उन पर अत्याचार का उनको वैसा नैसर्गिक हक है, जैसा मनुस्मृति में दर्ज है। कुछ साल पहले भिंड (मध्य प्रदेश) में जातिगत हिंसा में करीब छह दलित नौजवान प्रभुत्व संपन्न वर्ग की गोली का शिकार हुए थे। यदि तमाम ऐसी घटनाओं पर ‘बहुजन फाइल्स’ बने, तो उस पर क्या प्रतिक्रिया होगी? माननीय प्रधानमंत्री जी मुहर लगाएंगे?

 

शायद उनके संगठन फिल्म निर्माता, कलाकारों को देशद्रोही घोषित कर देंगे। ‘कश्मीर फाइल्स’ पर प्रतिक्रिया स्वरूप जब राजस्थान के एक युवक ने दलित अत्याचार का प्रश्न उठाया, तो उस पर सभी दक्षिणपंथी सोशल मीडिया के जरिए टूट पड़े। देश की आबादी में मात्र आठ फीसदी आदिवासी हैं, लेकिन वे 57 फीसदी विस्थापन झेलते हैं और तब प्रभुत्व संपन्नता उसे विकास के लिए जरूरी करार देती है। आदिवासी जब प्रतिरोध करते हैं, तो जाहिल, विकास विरोधी कहलाते हैं। इसका यह कतई मतलब नहीं कि कश्मीरी पंडितों का विस्थापन, उन पर हुए अत्याचार कोई मानवीय त्रासदी नहीं है। किसी एक भी इनसान को विस्थापन और अत्याचार झेलना पड़े तो वह मानवता मात्र पर लगा कलंक है। बहरहाल, ‘कश्मीर फाइल्स’ के बाद अब फिल्मों में अपवाद स्वरूप भी नेकनीयत मुस्लिम को दिखाने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी। बिना किसी आत्मबोध के उन्हें गलत ठहराया जा सकेगा। तो क्या यह आज के समाज की सोच है या ऐसा समाज बनाने के लिए वातावरण निर्माण किया जा रहा है?

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क्या भारत में दो टाइम ज़ोन होने चाहिये?

साल 2002 से संसद के हर सत्र में बार-बार दोहराया गय सवाल है; क्या भारत में दो समय क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव है और इसे लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? सबसे पहले ये सवाल मार्च 2002 में उठाया गया था, उस वर्ष के अगस्त में प्रश्न को प्रभावी ढंग से सुलझा लिया गया था। उस वर्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा गठित एक 'उच्च स्तरीय समिति' ने इस मुद्दे का अध्ययन किया था और निष्कर्ष निकाला था कि कई ज़ोन 'कठिनाइयों' का कारण बन सकते हैं जो "एयरलाइंस, रेलवे, रेडियो, टेलीविज़न" और टेलीफोन सेवाएं” के सुचारू कामकाज को बाधित करेंगे। इसलिए एकीकृत समय के साथ जारी रखना सबसे अच्छा था।

 

भारत पूर्व से पश्चिम तक लगभग 3000 किमी तक फैला हुआ है। देश के पूर्वी और पश्चिमी छोरों के बीच लगभग 28 डिग्री देशांतर है जिसके परिणामस्वरूप पश्चिमी और पूर्वी बिंदु के बीच लगभग दो घंटे का अंतर होता है। भारतीय मानक समय (उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में 82.5′ ई देशांतर के आधार पर गणना की गई), अधिकांश भारतीयों को प्रभावित नहीं करता है, सिवाय उन लोगों को छोड़कर जो पूर्वोत्तर क्षेत्र में रहते हैं जहां सूरज गर्मियों में सुबह 4 बजे के आसपास उगता है, और शाम 4 बजे से पहले सर्दियों में अंधेरा हो जाता है। इसलिए, पूर्वोत्तर क्षेत्र ने लंबे समय से उनके जीवन और उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर एकल समय क्षेत्र के प्रभाव के बारे में शिकायत की है।

 

हाल ही में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल), जो भारतीय मानक समय (आईएसटी) को बनाए रखती है, ने भारत में दो समय क्षेत्रों और दो आईएसटी का सुझाव देते हुए एक शोध प्रकाशित किया: अधिकांश भारत के लिए आईएसटी-I और आईएसटी- II के लिए उत्तर-पूर्वी क्षेत्र - एक घंटे के अंतर से अलग। दो समय क्षेत्रों की मांग इसलिए बढ़ी क्योंकि उत्तरपूर्वी भारत और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अपने भूगोल के कारण, देश के बाकी हिस्सों की तुलना में जल्दी सूर्योदय और सूर्यास्त देखते हैं।

 

लेकिन घड़ियां इसके लिए जिम्मेदार नहीं थीं और आधिकारिक काम के घंटे हर जगह समान थे, सुबह के समय मूल्यवान काम के घंटे खराब होने और इन क्षेत्रों में शाम के घंटों में अनावश्यक बिजली की खपत हुई इसलिए, व्यापक रूप से प्रचलित यू.एस. के पांच समय क्षेत्र और रूस के 11 के आधार पर भारत में भी कई टाइम जोन लागू करने की बात सामने आई। मगर विशेषज्ञ समिति ने, कई समय क्षेत्रों का समर्थन नहीं करते हुए, सिफारिश की कि पूर्वी राज्यों में काम के समय को एक घंटे आगे बढ़ाया जाए, ताकि सुबह के घंटों का "लाभदायक उपयोग" किया जा सके और इसमें संबंधित अधिकारियों द्वारा इस संबंध में केवल प्रशासनिक निर्देश शामिल होंगे।

 

लेकिन दो समय क्षेत्रों के लाभ अपनी जगह है हम उनको नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते; इससे कार्यबल के बीच और ऊर्जा की खपत में अधिक दक्षता आएगी। ऊर्जा की खपत में कमी से भारत के कार्बन फुटप्रिंट में काफी कमी आएगी, जिससे जलवायु परिवर्तन से लड़ने के भारत के संकल्प को बढ़ावा मिलेगा। प्राकृतिक चक्रों के अनुसार दो अलग-अलग समय क्षेत्र होने से आर्थिक लाभ होते हैं क्योंकि लोग बेहतर काम करने और बेहतर योजना बनाने में सक्षम होंगे। कई सामाजिक नीतिगत उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है जैसे सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और महिलाओं की सुरक्षा में सुधार करना।

 

दूसरी तरफ दो समय क्षेत्र होने की समस्या को देखे तो दो टाइम जोन होने से रेल हादसों की संभावना बढ़ जाएगी। रेलवे सिग्नल पूरी तरह से स्वचालित नहीं हैं, और कई मार्गों में सिंगल ट्रैक हैं। समय क्षेत्र के प्रत्येक क्रॉसिंग के साथ घड़ियों को रीसेट करना। दो समय क्षेत्र होने पर कार्यालय समय के बीच ओवरलैप कम हो जाता है। बैंकों, उद्योगों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को नए समय क्षेत्रों में समायोजन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। दो जोन की डिवाइडिंग लाइन को चिह्नित करने में दिक्कत होगी। दो समय क्षेत्रों के प्रतिकूल राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं क्योंकि भारत धर्म, जाति, नस्ल, भाषा आदि के आधार पर विभाजित होने के अलावा, अब समय क्षेत्र की तर्ज पर विभाजित हो जाएगा।

 

भारतीय समय क्षेत्र के संबंध में सभी पहलुओं पर नए सिरे से विचार करने के लिए परामर्श की प्रक्रिया शुरू करना समय की मांग है। आईएसटी को आधे घंटे आगे सेट करने के कुछ शोधकर्ताओं के प्रस्ताव की जांच की जा सकती है और बहस की जा सकती है। इसका मतलब होगा कि आईएसटी को 82.5 डिग्री पूर्व से 90 डिग्री पूर्व में आगे बढ़ाना, जो पश्चिम बंगाल-असम सीमा के साथ एक देशांतर पर होगा, असम की मांग को पूरा करने में किसी तरह से मदद करेगा और उत्तर-पश्चिमी भारत से संबंधित असुविधाओं के बारे में संभावित शिकायतों से बचने में मदद करेगा। यदि अलग मानक समय की व्यवस्था से मानव श्रम का उचित प्रबंधन और बड़ी मात्रा में बिजली की बचत की जा सकती है तो इस संबंध में विचार किये जाने की आवश्यकता है।

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मुसीबत में की मदद

एक बार मैं अपनी मम्मी के साथ लोकल ट्रेन से यात्रा कर रहा था। ट्रेन में काफी भीड़ थी, लेकिन किसी तरह एक बोगी में दरवाजे के पास ही सीट मिल गई। तभी मैंने देखा कि एक गरीब लड़का टोकरी में केले लेकर मेरी बोगी की तरफ आ रहा है। अचानक ट्रेन चल दी और उसने दौड़कर सबसे पहले अपनी टोकरी मेरी बोगी के दरवाजे पर रख दी। लेकिन ट्रेन स्पीड पकड़ चुकी और सामने टोकरी होने की वजह से केले बेचने वाला लड़का मेरी बोगी में चढ़ नहीं पाया। वह शायद किसी और बोगी में चढ़ गया था।

 

उसकी केले से भरी टोकरी दरवाजे के पास ही पड़ी थी। इस बीच मेरी बोगी का एक लड़का बिना मालिक के टोकरी देख, उसमें से केले निकालकर खाने लगा। वह ऐसे खुश होकर जल्दी-जल्दी केले खा रहा था, जैसे उसकी लॉटरी लग गई हो। उसको देख उसके कई और दोस्त केलों पर टूट पड़े। ट्रेन के अगले स्टॉपेज पर रुकते-रुकते वे लोग टोकरी के आठ-दस दर्जन केले चट कर चुके थे। इसके बाद वे वहां से हट गए। ट्रेन रुकने पर टोकरी का मालिक लड़का दौड़कर मेरी बोगी में आया।

 

अपनी टोकरी की हालत देख वह सन्न रह गया और फूट-फूट कर रोने लगा। वह किसी पर इल्जाम भी नहीं लगा सकता था, क्योंकि उसने किसी को केले खाते नहीं देखा था। ट्रेन चल चुकी थी। वह

 

बेहद गरीब लड़का था और इतना नुकसान उसके लए बड़ी बात थी, शायद इसीलिए रो रहा था। मुझे उस पर काफी तरस आया। उन लड़कों पर गुस्सा भी आ रहा था, जिन्होंने उसके केले खाए थे। मेरे दिमाग

 

में ख्याल आया कि क्यों न केले बेचने वाले लड़के की मदद की जाए। मैंने मम्मी से यह बात बताई और उनसे दस रुपये मांगे तो वे पहले तो थोड़ा हिचकीं, लेकिन फिर उन्होंने पैसे दे दिए। मैंने और यात्रियों को

 

यह बात बताई और सबको इसके लिए राजी करने की कोशिश की कि गरीब लड़के की मदद करनी चाहिए। किसी ने दस रुपये दिए तो किसी ने बीस, यहां तक कि केले खाने वाले लड़कों में से भी कुछ ने

 

शर्मिंदा होकर दस-दस के नोट निकाल दिए।

 

मेरे पास कुल मिलाकर दो सौ रुपये जमा हो गए थे। मैंने जाकर उस गरीब लड़के को दिए तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। उसने मुझे बहुत धन्यवाद दिया। मम्मी सहित अन्य सभी यात्रियों ने मुझे शाबाशी दी। सच है दोस्तो, मुसीबत में फंसे व्यक्ति की मदद करने की खुशी ही अलग होती है...

 

(अमन कुमार, सरिस्ताबाद, पटना)

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स्मासर्टफोन खरीदने से पहले इन 5 बातों का रखें ध्यान

आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन न केवल शौक बल्कि जरूरत भी बन गया है। ऑनलाइन शॉपिंग, बिल भुगतान, टिकट बुकिंग, सरकारी योजनाओं की जानकारी, ईमेल आदि सभी कुछ इस छोटे से यंत्र में समा चुका है। सही मायनों में काफी हद तक इसने कंप्यूटर को भी रिप्लेस कर दिया है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण आज मोबाईल के दाम काफी कम हो गए हैं।

 

अगर आप भी स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं या अपने पुराने फोन को बदलना चाहते हैं तो जरूरी है कि कुछ विशेष बातों पर ध्यान दें जैसेकि कंपनी, हार्डवेयर, आॅपरेटिंग सिस्टम, फीचर्स, रैम, मेमोरी, बैट्री, आफ्टर सेल्स सर्विस आदि ताकि आपके पैसों की सही कीमत मिले तथा भविष्य में आपको परेशानी भी न उठानी पड़े। कम कीमत में अधिक फीचर्स व स्पेसिफिकेशन्स पाने के लिए स्मार्टफोन का चुनाव करते समय पांच बातों का ध्यान रखें...

 

साइज 

आप अपनी सुविधानुसार 4-5 इंच का फोन चुन सकते हैं। चूंकि इससे बड़े साइज के फोन को रखना असुविधाजनक हो सकता है। अल्मोड व आईपीएस डिस्प्ले अच्छी मानी जाती है। 5 इंच से बड़ी डिस्प्ले एचडी (720गुणा1280) तो 5 इंच तक की डिस्प्ले फुल एचडी (1920गुणा1080) होनी अच्छी मानी जाती है।

 

प्रोसेसर, रैम व मेमोरी 

फोन ऑक्टासकोर या क्वाडकोर प्रोसेसर और कम से कम 2 जीबी रैम वाला हो। फोन की इंटरनल मेमेारी कम से कम 16 जीबी हो व उसमें मेमोरी काॅर्ड स्लाॅट भी हो तो अच्छा रहेगा।

 

ऑपरेटिंग सिस्टैम

बाजार में एंड्रायड, विंडोज व आईओएस ऑपरेटिंग सिस्ट्म और फायरफॉक्सच, सायोनोजे़न आदि साफ्टवेयर वाले फोन मिल रहे हैं। नये वर्जन वाले ओएस का फोन लें जैसे हो सके तो एंड्रायड 5.0 लॉलीपॉप वर्जन लें। चैक करें कि भविष्य में उसमें कोई अपग्रेड मिलेगा या नहीं। आईओएस वाले आईफोन काफी महंगे और इसके सभी एप्स पेबेल होने से एंड्रायड या विंडोज वाले फोन पर जा सकते हैं। एंड्रायड फोन में एप्स काफी मिल जाते हैं वो भी मुफ्त जबकि विंडोज फोन में आवश्यकतानुसार कम ही एप्स होते हैं।

 

कैमरा, बैटरी व कनेक्टिीविटी 

फोटोग्राफी का शौक है तो फोन का कैमरा 8-13 मेगापिक्सल का लें। कैमरे की गुणवत्ता, एलईडी फ्लैश और अन्य कैमरा फीचर्स को भी अच्छे से चैक कर लें। बैटरी कम से कम 2800 एमएएच की हो तो अच्छा रहेगा। यदि आप टूर पर रहते हैं तो रिमूवेबल बैटरी वाला फोन लें ताकि बैटरी रिपलेक्स की जा सके। अपनी सुविधा एवं बजट के हिसाब से फोन डबल सिम, सी.डी.एम.ए., जी.एस.एम., 3जी, 4जी आदि चुनें।

 

वारंटी व सर्विस सेंटर 

अधिकतर फोन एक साल की वारंटी के साथ मिलते हैं। पर घर के पास सर्विस सेंटर का न होना या फिर सपोर्टिंग रेप्युटेशन ठीक न होने पर वारंटी का भी कोई महत्व नहीं रहता। फोन एक्सेसरीज और मार्केट में स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता आदि को अच्छे से चैक कर लें। हो सके तो मोबाइल की डमी से उसकी लुक, डिजाइन, बिल्ड क्वालिटी, पोट्र्स व बटन प्लेसमेंट आदि को पहले से ही देखकर जांच लें।

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बात जब फैशन की हो तो कुछ चीजें सदाबहार

बचपन में आपने घेरदार फ्रॉक जरूर पहनी होगी। बड़े होने पर इस स्टाइल को अपनाने के बारे में कभी सोचा है क्या? फ्रिल्स फिर से फैशन में है। इसे कैसे अपने वॉर्डरोब का हिस्सा बनाएं, बता रहे हैं हम। बात जब फैशन की हो तो कुछ चीजें सदाबहार ही रहती हैं। ये चीजें बार-बार लौटकर आती हैं और लोगों पर अपना जादू चलाती हैं। अब फ्रिल्स को ही लें। फैशन की दुनिया में फ्रिल्स अब फिर से अपना जादू बिखेर रही है। 

 

अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत के जाने-माने नाम मार्क जैकोब्स, सिमोन रोका, विकी मार्टिन से लेकर भारतीय डिजाइनर और बॉलीवुड के कलाकर फिर से फ्रिल्स से अपना स्टाइल स्टेटमेंट बना रहे हैं। कान फिल्म फेस्टिवल में सोनम कपूर की स्टाइलिश फ्रिल साड़ी से लेकर अन्य खास मौकों पर सिलेब्रिटीज के फ्रिल वाले क्रॉप टॉप और गाउन, फैशन की दुनिया में फ्रिल की वापसी की गवाही दे रहे हैं। फैशन एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्रिल बेहद आसानी से ध्यान आकर्षित करने के मामले में उपयोगी है, लेकिन इसे किसी भी आउटफिट में बेहद कम मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आपका लुक ज्यादा स्टाइलिश दिखे। फ्रिल से आप भी स्टाइलिश लुक पा सकती हैं, लेकिन इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातों को जानना भी जरूरी है, ताकि हर नजर आप पर ही जाकर टिके।

 

संतुलन है जरूरी

नजाकत भरा लुक देने में परफेक्ट फ्रिल्स को जब बेहद संतुलित तरीके से किसी भी परिधान पर सजाया जाता है तो यह आपको विक्टोरियन दौर का स्टाइलिश लुक देता है। इसलिए इस खास नियम को याद रखिएगा कि फ्रिल के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। अगर आप फ्रिल की नाजुक लेयर से सजी स्मार्ट शर्ट या गोल गले का टॉप पहन रही हैं तो ध्यान रखें कि ऐसे ही पैटर्न को अपनी स्कर्ट या पैंट में बिल्कुल न दोहराएं। फ्रिल को अपने आउटफिट के केवल एक हिस्से तक ही सीमित रखकर आप अपनी ड्रेस की खूबसूरती बरकरार रख सकती हैं। फ्रिल का इस्तेमाल बॉडी फ्रेम को संतुलित करने के लिए बेहद अच्छी तरह किया जा सकता है। जैसे कि अगर आपका ऊपरी हिस्सा भारी है, तो ड्रेस में नीचे की ओर फ्रिल लगाएं और अगर निचला हिस्सा भारी है तो फ्रिल को टॉप पर लगाना ठीक रहेगा।

 

ऐसे पाएं स्लिम लुक

फ्रिल्स आपकी चैड़ाई को बढ़ाएंगे, इसलिए अगर आप अपनी फिगर को स्लिम दिखाना चाहती हैं, तो लंबाई में सजे फ्रिल्स वाली ड्रेस ही पहनें। यह पहनकर न सिर्फ आप दुबली लगेंगी, बल्कि लंबी भी दिखेंगी। इसके अलावा अगर आपके नेकलाइन या शोल्डर के ऊपर फ्रिल है, तो फिगर की चैड़ाई को कम दिखाने के लिए टॉप को स्कर्ट या पैंट के अंदर डाल लें।

 

बनाएं एक केंद्र बिंदु

अपने लुक को स्टाइलिश बनाए रखने और फैशन में बने रहने के लिए फ्रिल को अपने लुक का केंद्र बिंदु बनाएं। यानी ऊपर या नीचे की फ्रिल के अलावा बाकी सब कुछ सादा और शालीन होना जरूरी है। निचले हिस्से को सादा रखना टॉप के आकर्षण को बढ़ा देगा।

 

ऐसे मिलेगा फॉमर्ल लुक

फॉर्मल लुक के लिए केवल कॉलर या कंधों पर फ्रिल वाला टॉप पहना जा सकता है। इस खूबसूरत टॉप को फॉर्मल ट्राउजर और ओपन-टो हील्स के साथ पहनें। बालों को पीछे बांध कर रखें, ताकि पूरी लुक में अधिक लेयर से बचा जा सके।

 

एक्सेसरीज हों बेहद कम

फ्रिल्स के साथ एक्सेसरीज कम-से-कम ही पहना जाए। खासतौर पर ड्रेस के जिस हिस्से में फ्रिल है, वहां कोई भी एक्सेसरी पहनने से बचें। कंधे के इर्द-गिर्द फ्रिल है, तो लंबे, भारी ईयररिंग्स या नेकपीस पहनने से बचें और अगर बांह पर फ्रिल है तो ब्रेसलेट या रिंग्स न पहनें। साथ में सादा क्लच लिया जा सकता है। फुटवियर में हाई हील शूज पहनें।

 

इन्हें न भूलें

-जरूरी है कि फ्रिल्स आपको व्यवस्थित लुक दें, न कि बेतरतीब दिखाई दें।

-अगर आपकी फिगर भारी है तो ज्यादा फ्रिल वाली ड्रेस से आप और ज्यादा भारी दिखेंगी। अगर फैशन के अनुरूप -फ्रिल पहनना चाहती हैं तो हल्की फ्रिल या पैरों में फ्रिल वाली फुटवियर पहन सकती हैं।

-ज्यादा बड़े फ्रिल्स आपके लुक को बनाने की जगह बिगाड़ देंगे, इसलिए इन्हें सादा और शालीन रखें और ऊंची हील्स पहनें।

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लंका दहन के समय एक घर छोड़ दिया था हनुमानजी ने

मेघनाथ ने श्रीहनुमानजी को रावण के सामने लाकर खड़ा कर दिया। हनुमानजी ने देखा कि राक्षसों का राजा रावण बहुत ही ऊंचे सोने के सिंहासन पर बैठा हुआ है। उसके दस मुंह और बीस भुजाएं हैं। उसका रंग एकदम काला है। उसके आसपास बहुत से बलवान योद्धा और मंत्री आदि बैठे हुए हैं। लेकिन रावण के इस प्रताप और वैभव का हनुमानजी पर कोई असर नहीं पड़ा। वह वैसे ही निडर खड़े रहे जैसे सांपों के बीच में गरुड़ खड़े रहते हैं।

 

हनुमानजी को इस प्रकार अपने सामने अत्यन्त निर्भय और निडर खड़े देखकर रावण ने पूछा- बन्दर तू कौन है? किसके बल के सहारे वाटिका के पेड़ों को तुमने नष्ट किया है? राक्षसों को क्यों मारा है? क्या तुझे अपने प्राणों का डर नहीं है? मैं तुम्हें निडर और उद्दण्ड देख रहा हूं। हनुमानजी ने कहा- जो इस संपूर्ण विश्व के, इस संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी हैं, मैं उन्हीं भगवान श्रीरामचंद्रजी का दूत हूं। तुम चोरी से उनकी पत्नी का हरण कर लाये हो। उन्हें वापस कर दो। इसी में तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का कल्याण है। यदि तुम यह जानना चाहते हो कि मैंने अशोवाटिका के फल क्यों खाये, पेड़ आदि क्यों तोड़े, राक्षसों को क्यों मारा तो मेरी बात सुनो। मुझे बहुत जोर की भूख लगी थी इसलिए वाटिका के फल खा लिये। बंदर स्वभाव के कारण कुछ पेड़ टूट गये। अपनी देह सबको प्यारी होती है इसलिए जिन लोगों ने मुझे मारा, मैंने भी उन्हें मारा। इसमें मेरा क्या दोष है? लेकिन इसके बाद भी तुम्हारे पुत्र ने मुझे बांध रखा है।

 

रावण को बहुत ही क्रोध चढ़ आया। उसने राक्षसों को हनुमानजी को मार डालने का आदेश दिया। राक्षस उन्हें मारने दौड़ पड़े। लेकिन तब तक विभीषण ने वहां पहुंच कर रावण को समझाया कि यह तो दूत है। इसका काम अपने स्वामी को संदेश पहुंचाना है। इसका वध करना उचित नहीं होगा। इसे कोई अन्य दंड देना ही ठीक होगा। विभीषण की यह सलाह रावण को पसंद आ गयी। उसने कहा ठीक है बंदरों को अपनी पूंछ से बड़ा प्यार होता है। इसकी पूंछ में कपड़े लपेटकर, तेल डालकर उसमें आग लगा दो। जब यह बिना पूंछ का होकर अपने स्वामी के पास जायेगा तब फिर उसे भी साथ लेकर लौटेगा। यह कहकर वह बड़े जोर से हंसा।

 

रावण का आदेश पाकर राक्षस हनुमानजी की पूंछ में तेल भिगो भिगोकर कपड़े लपेटने लगे। अब तो हनुमानजी ने बड़ा ही मजेदार खेल किया। वह धीरे धीरे अपनी पूंछ को बढ़ाने लगे। ऐसी नौबत आ गयी कि पूरी लंका में तेल, कपड़े और घी बचे ही नहीं। अब राक्षसों ने तुरंत उनकी पूंछ में आग लगा दी। पूंछ में आग लगते ही हनुमानजी तुरंत उछलकर एक ऊंची अटारी पर जा पहुंचे और वहां से चारों ओर कूद कूदकर वह लंका को जलाने लगे। देखते ही देखते पूरी नगरी आग की विकराल लपटों में घिर गयी। सभी राक्षस और राक्षसियां जोर जोर से चिल्लाने लगे। वे सब रावण को कोसने लगे। रावण को भी आग बुझाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। हनुमानजी की सहायता करने के लिए पवन देवता भी जोर जोर से बहने लगे। थोड़ी ही देर में पूरी लंका जलकर नष्ट हो गयी। हनुमानजी ने केवल विभीषण का घर छोड़ दिया और उसे जलाया नहीं।

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पित्त और कफ विकारों का घरेलू उपचार है गूलर

मोरासी परिवारी का सदस्य गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है। इसका वनस्पतिक नाम फीकुस ग्लोमेराता रौक्सबुर्ग है। यह सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है। यह नदी−नालों के किनारे एवं दलदली स्थानों पर उगता है। उत्तर प्रदेश के मैदानों में यह अपने आप ही उग आता है।

 

इसके भालाकार पत्ते 10 से सत्रह सेमी लंबे होते हैं जो जनवरी से अप्रैल तक निकलते हैं। इसकी छाल का रंग लाल−घूसर होता है। फल गोल, गुच्छों में लगते हैं। फल मार्च से जून तक आते हैं। कच्चा फल छोटा हरा होता है पकने पर फल मीठे, मुलायम तथा छोटे−छोटे दानों से युक्त होता है। इसका फल देखने में अंजीर के फल जैसा लगता है। इसके तने से क्षीर निकलता है।

 

आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार गूलर का कच्चा फल कसैला एवं दाहनाशक है। पका हुआ गूलर रुचिकारक, मीठा, शीतल, पित्तशामक, तृषाशामक, श्रमहर, कब्ज मिटाने वाला तथा पौष्टिक है। इसकी जड़ में रक्तस्राव रोकने तथा जलन शांत करने का गुण है। गूलर के कच्चे फलों की सब्जी बनाई जाती है तथा पके फल खाए जाते हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर या अन्य प्रकार से उपयोग किया जाता है।

 

गूलर के नियमित सेवन से शरीर में पित्त एवं कफ का संतुलन बना रहता है। इसलिए पित्त एवं कफ विकार नहीं होते। साथ ही इससे उदरस्थ अग्नि एवं दाह भी शांत होते हैं। पित्त रोगों में इसके पत्तों के चूर्ण का शहद के साथ सेवन भी फायदेमंद होता है।

 

गूलर की छाल ग्राही है, रक्तस्राव को बंद करती है। साथ ही यह मधुमेह में भी लाभप्रद है। गूलर के कोमल−ताजा पत्तों का रस शहद में मिलाकर पीने से भी मधुमेह में राहत मिलती है। इससे पेशाब में शर्करा की मात्रा भी कम हो जाती है। गूलर के तने को दूध बवासीर एवं दस्तों के लिए श्रेष्ठ दवा है। खूनी बवासीर के रोगी को गूलर के ताजा पत्तों का रस पिलाना चाहिए। इसके नियमित सेवन से त्वचा का रंग भी निखरने लगता है।

 

हाथ−पैरों की त्वचा फटने या बिवाई फटने पर गूलर के तने के दूध का लेप करने से आराम मिलता है, पीड़ा से छुटकारा मिलता है। गूलर से स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी अनियमितताएं भी दूर होती हैं। स्त्रियों में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर इसकी छाल के काढ़े का सेवन करना चाहिए। इससे अत्याधिक बहाव रुक जाता है। ऐसा होने पर गूलर के पके हुए फलों के रस में खांड या शहद मिलाकर पीना भी लाभदायक होता है। विभिन्न योनि विकारों में भी गूलर काफी फायदेमंद होता है। योनि विकारों में योनि प्रक्षालन के लिए गूलर की छाल के काढ़े का प्रयोग करना बहुत फायदेमंद होता है।

 

मुंह के छाले हों तो गूलर के पत्तों या छाल का काढ़ा मुंह में भरकर कुछ देर रखना चाहिए। इससे फायदा होता है। इससे दांत हिलने तथा मसूढ़ों से खून आने जैसी व्याधियों का निदान भी हो जाता है। यह क्रिया लगभग दो सप्ताह तक प्रतिदिन नियमित रूप से करें।

 

आग से या अन्य किसी प्रकार से जल जाने पर प्रभावित स्थान पर गूलर की छाल को लेप करने से जलन शांत हो जाती है। इससे खून का बहना भी बंद हो जाता है। पके हुए गूलर के शरबत में शक्कर, खांड या शहद मिलाकर सेवन करने से गर्मियों में पैदा होने वाली जलन तथा तृषा शांत होती है।

 

नेत्र विकारों जैसे आंखें लाल होना, आंखों में पानी आना, जलन होना आदि के उपचार में भी गूलर उपयोगी है। इसके लिए गूलर के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे साफ और महीन कपड़े से छान लें। ठंडा होने पर इसकी दो−दो बूंद दिन में तीन बार आंखों में डालें। इससे नेत्र ज्योति भी बढ़ती है। नकसीर फूटती हो तो ताजा एवं पके हुए गूलर के लगभग 25 मिली लीटर रस में गुड़ या शहद मिलाकर सेवन करने या नकसीर फूटना बंद हो जाती है।

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प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ी कहानियां साझा करने वाला पोर्टल शुरू

नई दिल्ली, 26 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी प्रेरक कहानियों को एकसाथ पेश करने के लिए एक पोर्टल ‘मोदीस्टोरी डॉट इन’ का शुभारंभ किया गया है। मोदी के दशकों लंबे जीवन सफर में उनके संपर्क में आये लोगों के अनुभवों के आधार पर इन कहानियों को तैयार किया गया है।

 

प्रधानमंत्री के एक सहयात्री के हवाले से पोर्टल ने ट्वीट किया कि, ‘‘पोर्टल ‘मोदी स्टोरी’ की घोषणा एक स्वयंसेवी पहल है, जिसके तहत नरेंद्र मोदी के जीवन से जुड़े रोचक कहानियों को एक साथ लाया जायेगा।’’ पोर्टल की ओर से यह भी ट्वीट किया गया कि इस पोर्टल का उद्घाटन महात्मा गांधी की पोती सुमित्रा गांधी कुलकर्णी ने किया।

 

इस वेबसाइट पर पंजाब से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता मनोरंजन कालिया ने मोदी से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। मोदी ने पार्टी पदाधिकारी के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा के शुरुआती दिनों में इस राज्य में काम किया था। इसके अलावा गुजरात के वडनगर में प्रधानमंत्री के स्कूल के प्रधानाध्यापक रासबिहारी मानियार और शारदा प्रजापति ने भी मोदी से जुड़े अनुभवों को साझा किया। मोदी 1990 के दशक में अपने दौरों के दौरान प्रजापति के आवास में अक्सर ठहरा करते थे।

 

इस पोर्टल पर ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंदन ने भी मोदी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं। कालिया ने चुनाव प्रचार मुहिम के दौरान मोदी की बेहतरीन समझ का जिक्र किया और प्रचार के दौरान बच्चों को वितरित करने के लिए टॉफी रखने की प्रधानमंत्री की सलाह के बारे में बताया। मानियार ने कहा कि मोदी देश के सशस्त्र बलों के लिए गहरी भावनाएं रखते हैं और युवा छात्र के रूप में वह एक सैनिक स्कूल का आवेदन प्रपत्र लेकर उनके पास आए थे।

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राहुल का महंगाई को लेकर सरकार पर तंज

नई दिल्ली, 26 मार्च। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महंगाई को लेकर दो पंक्ति की कविता में सरकार पर शनिवार को तीखा तंज करते हुए कहा कि वह अपने लिए खुशहाली का महल बनाने में जुटी है और जनता महंगाई की मार से त्रस्त है। श्री गांधी ने ट्वीट किया "राजा करे महल की तैयारी, प्रजा बेचारी महंगाई की मारी।" इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के कुछ ट्वीट को उद्धृत किया है जिनमें कहा गया है कि पेट्रोल डीजल की कीमतें आउट ऑफ कंट्रोल हो गई हैं और पांच दिन में इनकी दर 3.20 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है जबकि घरेलू सिलेंडर गैस की कीमत 50 रुपये तक महँगी हो गई है।

 

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मंत्रिमंडल की पहली बैठक में मुफ्त राशन योजना को तीन महीने तक बढ़ाने का निर्णय

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शनिवार को मंत्रिमंडल की बैठक में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई मुफ्त राशन योजना को तीन महीने तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

 

मार्च 2022 तक के लिए लागू की गई योजना अब जून तक जारी रहेगी। इसमें 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने का प्रावधान है। इस योजना के तहत अगले तीन और माह तक खाद्यान्न योजना के तहत प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को दाल, नमक, चीनी के साथ खाद्यान्न मिलता रहेगा। योजना मार्च 2022 में खत्म हो रही थी।

 

माना जा रहा है कि इस बार भाजपा की जीत में मुफ्त राशन की इस योजना का जबरदस्त प्रभाव रहा है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के बाद आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की पहली कैबिनेट बैठक शनिवार सुबह यहां लोकभवन में हुई।

 

मुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘कोरोना वायरस महामारी के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के हर नागरिक के लिए ‘प्रधानमंत्री अन्न योजना’ प्रारंभ की थी। इस योजना के अन्तर्गत देश की 80 करोड़ जनता को इसका लाभ मिल रहा है।’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘मार्च-अप्रैल 2020 से लेकर मार्च 2022 तक लगभग 15 महीनों तक इस योजना का लाभ लोगों को प्राप्त हुआ है। 15 करोड़ लोगों को उत्तर प्रदेश में इसका लाभ प्राप्त होता था। राज्य सरकार ने भी उत्तर प्रदेश के अंत्योदय के लाभार्थी और पात्र परिवारों सहित 15 करोड़ लाभार्थियों के लिए यह योजना अपनी ओर से अप्रैल 2020 से आरंभ की थी।’’

 

उन्होंने कहा कि योजना के अन्तर्गत राज्य की 15 करोड़ अंत्योदय जनता को 35 किलोग्राम खाद्यान्न और पात्र परिवारों को पांच-पांच किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त होता है। राज्य सरकार ने इसके साथ ही प्रत्येक परिवार को एक किलोग्राम दाल, एक किलोग्राम रिफाइंड तेल, एक किलोग्राम आयोडीनयुक्त नमक भी उपलब्ध कराया था। इसके साथ ही अंत्योदय परिवारों को राज्य सरकार ने एक किलोग्राम चीनी भी उपलब्ध करायी थी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह योजना मार्च 2022 तक थी। इसलिए मंत्रिमंडल ने शनिवार को निर्णय लिया कि अगले तीन महीनों तक प्रदेश के 15 करोड़ लोगों के लिए यह योजना जारी रहेगी। ‘डबल इंजन की सरकार’ पहले भी जनता के साथ खड़ी रही। महामारी के दौरान निशुल्क इलाज, निशुल्क टीका उपलब्ध कराया गया।’’ संवाददाता सम्मेलन में योगी आदित्यनाथ के साथ उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक तथा कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना एवं स्वतंत्र देव सिंह भी मौजूद थे।

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अखिलेश और मायावती ने दी योगी सरकार को बधाई

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बधाई दी है। दोनो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने योगी सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन और जनता की सेवा करने की सलाह भी दी है। योगी सरकार के शुक्रवार को संपन्न शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किये जाने के बावजूद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी,महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव,बसपा अध्यक्ष मायावती नहीं पहुंचे थे। हालांकि अखिलेश और मायावती ने ट्विटर के जरिये नई सरकार को बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित की हैं। सुश्री मायावती ने शनिवार को ट्वीट किया, “यूपी में नई भाजपा सरकार के गठन की बधाई तथा यह सरकार संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों एवं आदर्शों के साथ कार्य करे।” इससे पहले श्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया था, “नई सरकार को कि वो सपा के बनाए स्टेडियम में शपथ ले रही है। शपथ सिर्फ़ सरकार बनाने की नहीं, जनता की सच्ची सेवा की भी लेनी चाहिए।” लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में योगी सरकार के 52 मंत्रियों ने शपथ ली थी। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा,केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह,रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अलावा 12 राज्यों के मुख्यमंत्री एवं पांच राज्यों के उपमुख्यमंत्री शामिल हुये थे।

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अखिलेश को सपा विधायक दल का नेता चुना गया

लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव को विधानसभा में पार्टी के विधायक दल और विधानमंडल दल का नेता चुना गया है। यहां स्थित सपा मुख्यालय में शनिवार को हुयी पार्टी विधायक दल की बैठक में अखिलेश को सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से नेता चुन लिया। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने विधायक दल की बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में अखिलेश को सर्वसम्मति से पार्टी के विधानमंडल दल का नेता भी चुना गया। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में सपा के 111 विधायक जीते हैं। इस प्रकार विधानसभा में दूसरा सबसे बड़ा दल होने के नाते सपा मुख्य विपक्षी पार्टी होगी। ऐसे में अखिलेश का नेता प्रतिपक्ष बनना लगभग तय है। विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश ने आजमगढ़ से लोकसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया था। उत्तम ने बताया कि सपा के वरिष्ठ विधायक अवधेश प्रसाद ने अखिलेश को विधायक दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा और विधायक आलम बदी ने उसका समर्थन किया। इसके अलावा विधायक लालजी वर्मा ने अखिलेश को विधानमंडल दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा। सपा के चुनाव चिन्ह पर विधायक बने प्रसपा नेता शिवपाल सिंह यादव को बैठक में नहीं बुलाये जाने के बारे में उत्तम ने कहा कि आज केवल सपा के विधायकों को बुलाया गया था। बैठक में सहयोगी दलों के किसी विधायक को नहीं बुलाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया, “सहयोगी दलों के जो विधायक सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीते उन्हें और सहयोगी दलाें के विधायकाें की बैठक 28 मार्च को बुलायी गयी है, चाहे वे शिवपाल यादव हों, पल्लवी पटेल या ओपी राजभर हों, सब को 28 मार्च को बुलाया जाएगा।”

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हिजाब विवाद सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट का निश्चित तारीख देने से इनकार (अपडेट)

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 'हिजाब' के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए कोई निश्चित तारीख तय करने से गुरुवार को इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत द्वारा शीघ्र सुनवाई के लिए किसी निश्चित तारीख पर सूचीबद्ध करने की गुहार ठुकरा दी।

श्री कामत ने कर्नाटक में 28 मार्च से आयोजित होने वाली परीक्षाओं( जिसमें याचिकाकर्ता भी शामिल है) का उल्लेख करते हुए उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली कुछ छात्राओं की याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।

श्री कामत द्वारा 'विशेष उल्लेख' के दौरान परीक्षा की तारीख का जिक्र करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "इसका परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक संवेदनशील मामला है।"

मुख्य न्यायाधीश ने 16 मार्च को तत्काल सुनवाई करने की मांग संबंधी गुहार के मद्देनजर इस मामले पर होली के बाद विचार करने का संकेत दिया था।

वरिष्ठ वकील संजय हेगडे ने इस मामले को अति आवश्यक बताते हुए 16 मार्च को विशेष उल्लेख के दौरान तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी।

स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक जारी रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद ही उसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी। इसके बाद कई याचिकाएं दायर की गईं।

याचिकाकर्ताओं में शामिल निबा नाज़ ने उच्च न्यायालय के फैसले को अधिवक्ता अनस तनवीर के माध्यम से शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

याचिकाकर्ता ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम-1983 और इसके तहत बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए अपनी याचिका में दावा किया है कि विद्यार्थियों के लिए किसी भी तरह से अनिवार्य वर्दी का प्रावधान नहीं है।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था, "हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वर्दी का निर्धारण संवैधानिक है और विद्यार्थी इस पर आपत्ति नहीं कर सकते।"

अदालत में दायर याचिका में कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा पारित पांच फरवरी 2022 के आदेश की वैधता पर सवाल सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि यह निर्देश "धार्मिक अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से इस्लामी आस्था के हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला अनुयायियों का उपहास कर उन पर एक प्रकार से हमला करने के अप्रत्यक्ष इरादे से जारी किया गया था।"

याचिका में कहा गया है कि हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अंतरात्मा के अधिकार के तहत संरक्षित है।

याचिकाकर्ताओं ने विभिन्न तर्कों के माध्यम से उच्च न्यायालय के फैसले को कानून के खिलाफ बताते हुए उसे चुनौती दी।

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इस उम्र में शरीर कई बीमारियों का घर

मैं मानती हूं कि मेरी इस उम्र में शरीर कई बीमारियों का घर बन जाता है परन्तु मेरी ज्ञानेन्द्रियों के साथ इन दिनों एक विशेष प्रकार की समस्या होती जा रही है। मैं लोगों को बताती हूं मगर वे यकीन नहीं करते। वे कहते हैं कि ऐसा भी कभी हो सकता है कि शरीर में आई इतनी बड़ी खराबी क्या कुछ देर बाद ठीक हो जाए और कुछ देर बाद फिर वैसी ही हो जाए।

 

मगर यह सच है कि साल के कुछ महीनों में मैं गूंगी तथा बहरी हो जाती हूं। ऐसा तब ही होता है जब मैं अपने बड़े बेटे रणबीर के पास शहर में जाकर रहती हूं। और जैसे ही मैं छह महीने बाद गांव में अपने छोटे बेटे बलबीर के पास आती हूं तो मेरी सुनने व बोलने की सारी शक्तियां लौट आती हैं और मैं सामान्य इनसान की तरह हो जाती हूं।

 

जब मैं शहर में बड़े बेटे के पास होती हूं तो छोटी बहू का फोन हर रोज आता है और वह मुझे गांव आने के लिए कहती रहती है। उसे मुझसे कोई खास लगाव नहीं है। उसकी नजर तो मेरी बीस हजार रुपए की मासिक पेंशन तथा मेरी बैंक में रखी एफडी पर रहती है। मेरे पास जो सोना है उसे यह खटका रहता है कि कहीं झांसे में आकर मैं बड़ी बहू को न दे दूं।

 

मेरे पास बहुत सारे जीवन के अनुभव, बातें व अनगिनत किस्से हैं मगर मेरे इतने बड़े कुनबे में किसी के पास समय नहीं है कि कुछ देर मेरे पास बैठकर मेरी कोई सलाह या अनुभव की बात सुने। ये सब लोग मेरे लिए अजनबी बन चुके हैं। शहर में तो मुझे पूरा दिन चुप होकर बैठना पड़ता है। जैसे आर्मी में किसी दूसरी यूनिट से आए सिपाही की हालत नए यूनिट में होती है, कोई उससे बात नहीं करता, वैसे ही शहर के घर में मेरे साथ बुरा व्यवहार होता है। सारा दिन मैं अपने मुंह, कान, दिमाग और आंखें बन्द करके पड़ी रहती हूं।

 

शहर में हर तरह आसमान को छूते कंकरीट के जंगल सरीखे फ्लैट ही फ्लैट खड़े हैं। बेटे रणबीर का गुलमोहर सोसायटी में चार कमरों वाला फ्लैट है। वे मुझे सात गुणा सात फुट का अन्दर वाला छोटा-सा सुनसान, अंधेरा और बेरौनक-सा कमरा देते हैं जिसमें बामुश्किल एक बेड आ सकता है। इस कमरे में बाहर की दुनिया से जोडऩे वाली केवल एक छोटी-सी खिड़की है जहां से इस गुलमोहर सोसायटी का मुख्य बड़ा पार्क नजर आता है। वहां से देखकर मैं छह महीने का समय काटती हूं।

 

यहां समय काटना ही सबसे बड़ी समस्या है मेरे लिए। मैं टी वी वाले कमरे में नहीं जा सकती, मेहमान वाले लिविंग रूम में मेरी जाने की मनाही है। मैं बाहर के गैलरी वाले बरामदे में उठ, बैठ या टहल नहीं सकती क्योंकि ऐसा यहां कोई नहीं करता। छत पर तो जाने का सवाल ही नहीं उठता। अब मेरे में इतना दमखम कहां है। सब के सब अन्दर से कुंडी लगाकर रखते हैं, जैसे जेल में बन्द कैदी हों। मजाल है किसी को किसी की शक्ल नजर आ जाए।

 

मुझे समय पर भोजन मिलता है। कोई यह नहीं पूछता कि मुझे क्या खाना अच्छा लगता है। रसोई वाली जो कुछ बनाकर मेरे सम्मुख रखती है, मैं वह खा लेती हूं। मैं उससे बात करूं तो उसके पास भी समय नहीं है मुझसे सिर खपाने का। वह मुझ पर झल्ला पड़ती है। जब मेरे अपने ही मुझसे कोई बात करके राजी नहीं तो फिर वह तो बेगाना जीव है। मेरे पास एक पुराना -सा रेडियो है। कभी-कभार उसके पुराने घिसे हुए बटन मरोड़ती हूं तो उसमे से घर्र-घर्र की कुछ गाने जैसी आवाज आती है। कभी मुझे अच्छी लगती है तो कुछ देर सुन लेती हूं। आज का शोर वाला संगीत सहन कर पाना मेरे बूते की बात नहीं है।

 

यहां की कालकोठरी में मेरे लिए एक सुखद समय सिर्फ वही होता है जब इस सोसायटी के ये पत्थरदिल इनसान होली का त्योहार मनाते हैं। उस दिन पता नहीं कैसे ये तालाबन्द दिलों वाले लोग झुण्ड के झुण्ड बाहर खुले पार्क में नमूदार होते हैं और बनावटी चेहरे से खोखली हंसी हंसते हैं।

 

सुना था कि सांप सारी सर्दियों में अपने बिल में रहकर समय काट देता है और गर्मी आने पर बाहर आकर अपनी केंचुली छोड़ता है। वैसे ही ये हर वक्त घर के अन्दर दुबके रहने वाले लोग अपनी केंचुली उतारकर होली के दिन खुले में जश्न मनाते हैं।

 

उस दिन मै पूरा दिन खिड़की से चिपकी यह अद्भुत नजारा देखती रहती हूं। ये लोग अपने खोल से बाहर आते हैं मगर इनकी सारी खुशी व हुड़दंग नकली और खोखला दिखता है। अपने घर में ये किसी का आना सहन नहीं करते क्योंकि इनके कीमती कालीन तथा सोफे खराब हो सकते हैं। होली के दिन न ही ये अपने घर में कोई मीठी गुजिया, चाट पापड़ी या पकोड़े आदि बनाते हें। सारा ताम झाम बाहर होटल से मंगवाया जाता है-वो बेकार सी नूडल, पिज्जा व डोखला वगैरा।

 

ऐसा ही आयोजन ये लोग नए साल के आगमन पर भी करते हैं। दो सौ के लगभग लोग पार्क में जमा होते हैं। स्टेज पर पता नहीं किस तरह का गाना-बजाना होता है, शोर-शराबा अधिक सुनाई देता है। सात-आठ स्थान पर आग जलाते हैं, शराब पीते हैं और वहीं नूडल, पीजा और पेस्टरी आदि से पेट भरते हैं। साल की शुभकामनाएं देकर अपने-अपने दड़बों में घुस जाते हैं और फिर अगले साल ही मिलते हैं।

 

मुझ जैसे बूढ़ों का ऐसे आयोजनों में जाना वर्जित है। हम न तो अन्य बूढ़ों से मिल सकते हैं और न ही किसी अन्य पीढ़ी के लोगों से। हर कोई बूढ़ा इतनी अलग-अलग जगह टंगा हुआ है, कोई पन्द्रहवीं मंजिल पर है तो कोई आठवीं पर। नई पीढ़ी तो अंग्रेजी में ही गिटपिट करती है और उनके मां-बाप भी उन जैसे ही हो गए हैं मानो सब के सब किसी दूसरे देश के बाशिन्दे हों।

 

तभी तो मेरे साथ यही समस्या आ जाती है जिस का बयान मैंने कहानी के शुरू में किया था। मैं सब कुछ देख सकती हूं, सब कुछ महसूस कर सकती हूं मगर मैं न तो सुन सकती हूं और न ही बोल सकती हूं। बोलूं तो क्या बोलूं, किस से बोलूं और किस जुबान में बोलूं, सब कुछ अनजाना और अबूझ है चारों तरफ।

 

मैंने अपना सारा जीवन गांव में ही काटा है। मेहनत से बच्चों को पढ़ाया। जब तक मेरे पति जिन्दा थे, सब कुछ ठीक था मगर अब मेरी उम्र पिचासी से ज्यादा हो गई है। अब घर की कमान मेरे हाथ में नहीं है। अब मैं कमजोर हूं, चलने फिरने में असमर्थ हूं और दूसरों पर पूरी तरह से निर्भर हूं। अब मैं एक प्रकार से सब पर बोझ बन गई हूं।

 

अन्य बुजुर्गों के बनिस्पत मेरे पास अपना कहने को थोड़ा सोना है, बैक में पैसा है और मासिक पेंशन है जिसकी गर्ज ये अपने लोग भी मुझे थोड़ा-बहुत पूछते हैं। अगर मैं आर्थिक रूप से पूरी तरह उन पर आश्रित होती तो अब तक कब की भुगत गई होती। कौन महंगे अस्पतालों में मेरा इलाज करवाता।

 

अब भी मेरे लिए सुकून की बात है कि जब मैं गांव में अपने छोटे लड़के बलबीर के पास होती हूं तो मुझे बहुत कम दिक्कतें पेश आती हैं। मेरी कई सहेलियां आकर मेरे पास बैठती हैं, मुझे अपने साथ ले जाती हैं, गपशप होती है, हंसी ठिठोली होती है। इससे मेरा समय अच्छा गुजरता है। घर के लोगों की उपेक्षा भरी बातें दिमागमें नहीं घुमड़तीं।

 

समय के साथ-साथ मेरी दोनों बहुओं में खींचतान बढ़ती जा रही है कि कौन मुझे ज्यादा देर तक अपने साथ रखेगी। मुझ से कोई खास लेना-देना नहीं है उन्हें। उन्हें मेरे पास बैंक में रखे नोटों से सरोकार है या मेरी पेंशन की चिन्ता है। मैं जहां रहती हूं पेंशन उन्हें ही देती हूं। तभी तो दोनों बहुओं में एक अलिखित समझौता हो चुका है कि छह महीने मैं एक के पास रहूंगी और छह महीने के बाद दूसरी बहू के पास। एक दिन ज्यादा नहीं हो सकता इस हिसाब- किताब में। पिछले कई सालों में मेरा यही सफर है रोलिंग स्टोन की तरह-इधर से उधर। मेरी मर्जी कोई नहीं पूछता कि मैं क्या चाहती हूं। मैं भी मुंह बन्द करके यह सारा तमाशा देखती रहती हूं।

 

छोटा-सा पौधा होता तो आसानी से कोई भी मुझे उखाड़कर इधर से उधर रोप लेता। मगर मैं तो पूरा वृक्ष बन चुकी हूं। शहर जाती हूं तो मेरी कई जड़ें गांव में ही रह जाती हैं। वहां के कंकरीट के जंगल में पुराने तो क्या, नए पौधे नहीं पनप पाते। वहां के पत्थर घरों में इनसान नहीं, रोबोट सरीखे मशीनी मानव रहते हैं जो दिन-रात चूहा दौड़ में ही रहते हैं। तभी तो मैं वहां जाकर सूखने लगती हूं, कुम्हला जाती हूं और अपनी मौत आने से पहले ही मर-मर कर दिन काटती हूं। और उधर गांव में कृष्णा, कमला, जानकी और मेरी अन्य सहेलियां हैं। तभी तो मेरी आवाज छह महीने कुन्द हो जाती है। गांव आकर मैं खुलकर बोलती हूं, प्यार भरी नजरों से दुनिया को देखती हूं, अपनों की आवाजें सुनती हूं। जो मैं कहती हूं, वे सुनते हैं। और मैं जीवंत हां उठती हूं।

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लगातार दूसरी बार जनादेश हासिल करने वाले पहले मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश के चुनावी इतिहास में चार दशक बाद योगी आदित्यनाथ ने नया अध्याय जोड़ा है। इस अवधि में वह लगातार दूसरी बार जनादेश हासिल करने वाले पहले मुख्यमंत्री है। चुनावी समर में लोकप्रियता या समीकरण के बल पर एक बार सफलता मिल सकती है। लेकिन दूसरी बार की सफलता नेतृत्व की नेकनीयत व विश्वसनीयता पर आधारित होती है। तब नेतृत्व के यह दो गुण कारक बन जाते हैं। इस कारण चालीस वर्षों के दौरान किसी मुख्यमंत्री को दोबारा जनादेश नहीं मिला।

 

योगी आदित्यनाथ अपनी नेकनीयत व विश्वसनीयता को कायम रखने में सफल रहे। केंद्र में नरेंद्र मोदी को भी इस आधार पर सफलता मिलती रही है। गुजरात के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी यह विशेषता कायम रखी। इस लिहाज से नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ एक ही धरातल पर है। दोनों परिवारवाद की राजनीति से दूर हैं। समाज सेवा में पूरी निष्ठा व ईमानदारी से समर्पित रहते हैं।

 

विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोरोना की तीसरी लहर को लेकर संशय था। उस समय योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार की जगह कोरोना आपदा प्रबंधन को वरीयता दी। जनपदों की यात्रा कर रहे थे। सभी जगह कोरोना चिकित्सा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे। आपदा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था के बाद ही उन्होंने चुनाव प्रचार की तरफ ध्यान दिया। इसी प्रकार चुनाव परिणाम आने के बाद वह जन कल्याण कार्यों में सक्रिय हो गए। उन्होंने बारह से चौदह वर्ष आयु के बच्चों के वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान के सुचारू संचालन हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया।

 

कोरोना आपदा प्रबंधन में योगी मॉडल की प्रशंसा दुनिया में रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसकी सराहना की थी। इस पूरी अवधि में योगी आदित्यनाथ ने कई बार प्रदेश की यात्राएं की थी। वह अनवरत प्रबंधन का जायजा लेते रहे। वैक्सिनेशन के संबन्ध में भी केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया गया। योगी आदित्यनाथ वैक्सिनेशन केंद्रों में पहुंच कर लोगों का उत्साह वर्धन करते रहे। इसके चलते उत्तर प्रदेश ने वैक्सिनेशन का रिकार्ड कायम कर दिया। यह यात्रा अगले चरण के रूप में जारी है।

 

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सर्वाधिक टेस्ट व सर्वाधिक वैक्सीनेशन करने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। राज्य में अब तक करीब तीस करोड़ वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। प्रदेश में वैक्सीन की पहली डोज के शत प्रतिशत से अधिक के लक्ष्य को प्राप्त किया जा चुका है। अब तक एक सौ तीन प्रतिशत से ऊपर वैक्सीन की प्रथम डोज पूरे प्रदेश में उपलब्ध करवाई जा चुकी है। सेकेण्ड डोज भी प्रदेश में बयासी प्रतिशत से अधिक लोगों ने ले ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बारह से चौदह आयु वर्ग के बच्चों के कोविड टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय में किया।

 

बारह से चौदह साल के बच्चों को प्रदेश के तीन सौ केन्द्रों में यह वैक्सीन उपलब्ध करवाई जा रही है। सभी के लिए प्रर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देश में चले भारत के कोरोना प्रबन्धन की दुनिया में सराहना हुई है। यहां तक कि अन्य देशों में भी भारत के कोरोना प्रबंधन मॉडल को अपनाया गया है। कोरोना के खिलाफ लागू किए गये फोर टी फॉर्मूले के तहत ट्रेस, टेस्ट, ट्रीट और टीका, इन सभी में उत्तर प्रदेश अग्रणी है।

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अमीरी, सुख, समृद्धि : अमीरी एक ऐसा मानवाधिकार है

नई दिल्ली: अमीरी एक ऐसा मानवाधिकार है जिसकी चाहत हर किसी को है। इनसान ही नहीं, दुनिया का कोई भी जीव दुख नहीं उठाना चाहता, हम तो फिर इनसान हैं। हम में से कोई भी गरीबी में और अभावों में नहीं जीना चाहता। पैसे से चाहे हर सुख न खरीदा जा सकता हो, पर बहुत से सुख पैसे से खरीदे जा सकते हैं, और यह भी सच है कि धन का अभाव बहुत से दुखों का कारण बन जाता है, यहां तक कि गरीबी कई बार आत्महत्याओं तक का कारण बन जाती है। फिर कौन चाहेगा कि वह अभावों भरा जीवन जिए या फिर जीवन भर दूसरों की कृपा का मोहताज बना रहे? अमीरी एक बुनियादी मानवाधिकार है, पर कोई आपको इसे तश्तरी में पेश नहीं करेगा। इसके लिए स्वयं आपको ही प्रयत्न करना होगा और जोखिम भी उठाना पड़ेगा। अमीरी का अधिकार मांगने से नहीं मिलता, इसे कमाना पड़ता है। भारतीय आम आदमी के अमीर बनने में दो बड़ी अड़चनें हैं। पहली अड़चन है सही ज्ञान का अभाव, और दूसरी अड़चन है गलत अथवा अस्वस्थ नज़रिया। अक्सर हम गरीब लोगों को अमीरों की आलोचना करते हुए या उनका मजाक उड़ाते हुए और यहां तक कि उन पर दया दिखाते हुए पाते हैं। भारतवर्ष मूलतः एक धर्म-परायण देश है और आम आदमी धर्म-भीरू है। धर्म की हमेशा से संतोषी जीवन जीने की सीख रही है। इस सीख की आड़ में हमने आलस्य को अपना लिया और अपनी गलतियां स्वीकार करने के बजाय गरीबी को महिमामंडित करना आरंभ कर दिया। अमीरी से घृणा करके और अमीरों को शोषक मानकर हम प्रगति नहीं कर सकते। अब हम जानते हैं कि नई अर्थव्यवस्था के इस युग में ज्ञान का पूंजी बनाकर धन-संपदा कमाना कोई अजूबा नहीं है। अगर हम सिर्फ इस तथ्य को समझ लें तो हम गरीबी के कारणों का विश्लेषण करके अमीरी की ओर मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं। एक और जानने योग्य तथ्य यह है कि भारतवर्ष एक गरीब देश है, लेकिन यहां सोने की खरीद सबसे ज्य़ादा होती है। शादियों के सीज़न में सोने का भाव तेज़ी से चढ़ जाता है। पिछले कुछ सालों तक शादी का सीज़न बीतने पर सोने का भाव धीरे-धीरे नीचे आ जाता था, लेकिन अब जैसे आम की जगह माज़ा ने ले ली है और हम सर्दियों में भी कोक पीने लग गए हैं, वैसे ही सोना भी बारहमासी हो गया है और इस साल सोने के दाम घटने के बजाय बढ़ते ही नज़र आए।

 

इसके बावजूद सोने की खरीद की रफ्तार में कोई कमी नहीं दिखी। ऐसे में यह जानकर किसे आश्चर्य होगा कि भारतवर्ष में स्वर्ण की मात्रा 20 हज़ार टन तक पहुंच गई है। स्वर्ण की खरीद एक भावनात्मक सवाल बन गया है। जिसके पास जितना सोना होगा, वह उतना ही सुरक्षित महसूस करेगा, खुद को अमीर मानेगा। यह बचत का एक बड़ा साधन है। रुपए का अवमूल्यन हो रहा है, लेकिन सोने का रेट बढ़ रहा है। इसलिए जनता में सोने के प्रति लगाव कम नहीं हो रहा है। समस्या यह है कि हम सोने की जमाखोरी करते हुए अपने धन का दुरुपयोग कर रहे हैं क्योंकि यही धन अगर किसी अन्य बचत अथवा निवेश में लगता तो हमारी आर्थिक अवस्था कहीं ज्य़ादा सबल होती। सच तो यह है कि हम सोने को लेकर सचमुच सो रहे हैं। दरअसल बचत, निवेश और पूंजी निर्माण को लेकर हम अब भी पुरानी अर्थव्यवस्था के हिसाब से चल रहे हैं। बदलते ज़माने की जरूरतों को समझे बिना हम पुरानी आदतों से चिपके हुए हैं। हम बैलगाड़ी पर बैठकर वर्तमान युग की सुपर सोनिक रफ्तार का मुकाबला करना चाह रहे हैं। बहुत से लोग अमीर होते हैं, पर वे अमीर नहीं दिखते, बहुत से लोग गरीब होते हैं पर वे गरीब नहीं दिखते, और बहुत से मध्यवर्गीय लोग वास्तविक अमीरी को जाने बिना अमीर दिखने की कोशिश में जुट जाते हैं और इस कोशिश में अक्सर कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे लोग यदि प्रमोशन हो जाए या ज्यादा बढि़या तनख्वाह वाली नई नौकरी मिल जाए या अपना बिज़नेस अच्छा चल जाए तो आपको विलासिता की वस्तुएं जुटाने और अमीर दिखने के बजाय ऐसे निवेश करने चाहिएं जो आपके लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकें। यहां निवेश से मेरा आशय म्यूचुअल फंड या शेयरों की खरीददारी से नहीं है।

 

यदि आपको इनकी बारीक जानकारी नहीं है तो मैं आपको म्यूचुअल फंड या शेयर बाज़ार में निवेश की सलाह नहीं दूंगा। यह निवेश ऐसे काम में होना चाहिए जहां आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक न हो। ऐसे निवेश के कई तरीके हैं। आप कोई छोटा-सा घर खरीद कर किराए पर उठा सकते हैं, रिक्शा, ऑटो-रिक्शा, कार आदि खरीद कर किराए पर दे सकते हैं। कोई ऐसा व्यवसाय कर सकते हैं जहां आपके कर्मचारी ही सारा काम संभाल लें और आपको उस व्यवसाय से होने वाला लाभ मिलता रहे। पुस्तकें लिख सकते हैं जिसकी रॉयल्टी मिलती रहे, मकान, दुकान या कार्यालय पर मोबाइल कंपनी का टावर लगवा सकते हैं जिसका किराया आता रहे। इससे होने वाली आय पेंशन की तरह है जहां काम भी नहीं करना पड़ता और लगातार आय का साधन भी बन जाता है। यह आपकी समृद्धि ओर छोटा-सा पहला कदम है। धीरे-धीरे योजनाबद्ध ढंग से ऐसे निवेश बढ़ाते रहेंगे तो आपकी अतिरिक्त आय इतनी बढ़ जाएगी कि इस बढ़ी आय से कार, मकान या छुट्टियों पर किए जाने वाले खर्च के लिए आपको बैंक से कर्ज़ नहीं लेना पड़ेगा, कर्ज़ पर ब्याज नहीं देना पड़ेगा और कर्ज़ न चुका पाने का डर भी नहीं सताएगा। इसके बावजूद आपको पैसे की परेशानी से नहीं जूझना पड़ेगा। जब समस्याएं नई हों तो समाधान भी नए होने चाहिएं, पुराने विचारों से चिपके रहकर हम नई समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते।

 

ज़माना नया है, दुनिया बदल गई है और हर पल बदल रही है। हमें अपने आपको नए ज़माने के लिए तैयार करना है। इसके लिए हमें नए विचारों का स्वागत करना होगा, समस्याओं का हल नए सिरे से खोजना होगा और स्वयं को शिक्षित करना होगा। यह परिवर्तन की एक ऐसी मानसिक यात्रा है जिस पर हम खुद ही आगे बढ़ेंगे। हमें यह समझना चाहिए कि परिवर्तन दिमाग से शुरू होते हैं, या यूं कहें कि दिमाग में शुरू होते हैं। हम इक्कीसवीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं और सत्रहवीं सदी की मानसिकता से हम देश का विकास नहीं कर सकते। नई स्थितियों में नई समस्याएं हैं और उनके समाधान भी पुरातनपंथी नहीं हो सकते। यदि हमें गरीबी, अशिक्षा से पार पाना है और देश का विकास करना है तो हमें इस मानसिक यात्रा में भागीदार होना पड़ेगा जहां हम नए विचारों को आत्मसात कर सकें और ज़माने के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। इस योजना पर काम करने से आप सिर्फ अमीर दिखेंगे ही नहीं, सचमुच के अमीर हो जाएंगे। यदि आपको लाटरी से, ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसे किसी शो से, अमीर जीवनसाथी से विवाह से या किसी अमीर रिश्तेदार की विरासत मिलने की उम्मीद नहीं है तो असली अमीरी और स्थायी समृद्धि के लिए आपको इसी योजना पर काम करना चाहिए। स्थायी समृद्धि का यही एक मंत्र है जो विश्वसनीय भी है और अनुकरणीय भी। इसी से अमीरी आएगी, इसी से समृद्धि आएगी और यही सुख का कारण बनेगा।

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