कनाडा पर 35% टैरिफ लगने के बाद पीएम कार्नी ने दिया ट्रंप को जवाब, "हम अपने व्यापारों की मजबूती से रक्षा करेंगे"

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 35 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि कनाडा अपने देश के लोगों और व्यापार की रक्षा करता रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ मौजूदा व्यापार वार्ताओं के दौरान कनाडाई सरकार ने लगातार अपने श्रमिकों और व्यवसायों की मजबूती से रक्षा की है। हम ऐसा करना जारी रखेंगे, क्योंकि हम 1 अगस्त की संशोधित समयसीमा की ओर बढ़ रहे हैं।

कार्नी ने कहा-मजबूत कनाडा का कर रहे निर्माण

बता दें कि कनाडा ने उत्तरी अमेरिका में फेंटानिल की भयावह समस्या को रोकने में अहम प्रगति की है। हम अमेरिका के साथ मिलकर दोनों देशों में लोगों की जान बचाने और समुदायों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम एक मजबूत कनाडा का निर्माण कर रहे हैं। संघीय सरकार, प्रांत और क्षेत्र मिलकर एक एकीकृत कनाडाई अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहे हैं। हम राष्ट्रहित में कई बड़े नए परियोजनाओं की शुरुआत के लिए तैयार हैं। साथ ही, हम दुनियाभर में अपने व्यापारिक संबंधों को भी मज़बूत कर रहे हैं। 

अमेरिका ने कनाडा की किन वस्तुओं पर लगाया टैरिफ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले सभी सामानों पर 35% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा दिया है। इसके बाद पीएम मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा, "कनाडा ने उत्तरी अमेरिका में फेंटानिल के कहर को रोकने के लिए महत्वपूर्ण प्रगति की है और हम अमेरिका के साथ मिलकर जीवन और समुदायों को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

ट्रंप का आरोप 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि 1 अगस्त से कनाडा से आयातित वस्तुओं पर 35% टैरिफ लागू होगा। उन्होंने एक पत्र के ज़रिए प्रधानमंत्री कार्नी को इस निर्णय से सूचित किया। यह इस सप्ताह ट्रंप द्वारा जारी किए गए 20 से अधिक देशों को भेजे गए ऐसे पत्रों में से एक है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि कनाडा की व्यापार नीतियां साथ ही वहां से अमेरिका में फेंटानिल का प्रवाह, अमेरिका की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे हैं।


...

यूक्रेन को अब छू भी नहीं पाएगा रूस! ट्रंप की बात सुनकर गदगद हो उठेंगे जेलेंस्की

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यूक्रेन को हथियार आपूर्ति के मामले में यू-टर्न सामने आया है। उन्होंने सोमवार को कहा कि उनका देश यूक्रेन के लिए और हथियार भेजेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कुछ दिन पहले ही यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति रोकने संबंधी एक आदेश जारी किया था। उनके इस कदम पर कीव यह चेतावनी देने को विवश हुआ था कि कुछ हथियारों की आपूर्ति रोके जाने से उसकी रूस के हमलों को रोकने की क्षमता सीमित हो जाएगी।

'हम यूक्रेन को कुछ और हथियार भेजेंगे'

अमेरिका में भी ट्रंप के फैसले की न केवल डेमोक्रेटिक बल्कि उनकी रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं ने भी आलोचना की। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा, 'हम कुछ और हथियार भेजने जा रहे हैं। हमें यह करना होगा। उन्हें खुद को बचाने में सक्षम होना चाहिए। वे बहुत बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। हमें मुख्य रूप से रक्षात्मक हथियार भेजने होंगे।'

यूक्रेन को रक्षात्मक हथियार भी देगा अमेरिका

पत्रकारों से वार्ता के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी मौजूद रहे। ट्रंप की इस टिप्पणी के कुछ समय बाद अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने एक बयान में बताया कि ट्रंप के निर्देश पर यूक्रेन को अतिरिक्त रक्षात्मक हथियार भेजे जाएंगे ताकि यूक्रेन खुद की रक्षा कर सके। जबकि स्थायी शांति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

हालांकि, बयान में यूक्रेन को भेजे जाने वाले हथियारों का विवरण नहीं दिया गया।इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से फोन पर बातचीत की थी। उस समय ट्रंप ने पत्रकारों को बताया था कि यूक्रेन को अपनी रक्षा करने के लिए पैट्रियट मिसाइलों की जरूरत है। हालांकि उन्होंने सोमवार को इसका जिक्र नहीं किया।

बता दें कि पिछले सप्ताह पैट्रियट मिसाइलों, गाइडेट मल्टीपल लांच राकेट लांचर, हेलफायर मिसाइलों, हावित्जर के गोले और अन्य हथियारों की आपूर्ति अचानक रोक दी गई थी, जिस पर यूक्रेन और दूसरे सहयोगी देशों ने हैरानी जताई थी।



...

बांग्लादेश, जापान समेत 14 देशों पर ट्रंप ने फोड़ा टैरिफ बम, भारत के साथ डील को लेकर दी गुड न्यूज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ी खबर देते हुए कहा कि अमेरिका, भारत के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता करने के करीब है।

यह बयान उन्होंने सोमवार रात व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मेजबानी के दौरान दिया। लेकिन इसके साथ ही ट्रंप ने 14 देशों पर नए टैरिफ लगाने का ऐलान भी किया। ये 1 अगस्त से लागू होंगे। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अब व्यापार में कोई ढील नहीं देगा और जो देश समझौता नहीं करेंगे, उन्हें टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।

ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका ने ब्रिटेन और चीन के साथ व्यापार समझौते कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि जिन देशों के साथ समझौता होने की उम्मीद नहीं है, उन्हें लेटर भेजकर टैरिफ की जानकारी दी जा रही है।

ट्रंप ने कहा, "हमने सभी से बात की है। जो देश हमारे साथ व्यापार करना चाहते हैं, उन्हें टैरिफ देना होगा। हम निष्पक्ष रहेंगे, लेकिन अमेरिका को अब नुकसान नहीं होने देंगे।"

14 देशों पर टैरिफ का ऐलान

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर 14 देशों को भेजे गए लेटर शेयर किए हैं। इनमें थाईलैंड, म्यांमार, बांग्लादेश, दक्षिण कोरिया, जापान, मलेशिया, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, लाओस, इंडोनेशिया, ट्यूनीशिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, सर्बिया और कंबोडिया शामिल हैं।

इन देशों पर 1 अगस्त से टैरिफ लागू होंगे। थाईलैंड और कंबोडिया पर 36% टैरिफ, बांग्लादेश और सर्बिया पर 35%, म्यांमार और लाओस पर 40%, इंडोनेशिया पर 32%, दक्षिण अफ्रीका और बोस्निया पर 30%, जबकि मलेशिया, कजाकिस्तान, जापान और दक्षिण कोरिया पर 25% टैरिफ लगेगा।

ट्रंप ने लेटर में चेतावनी दी कि अगर ये देश अमेरिकी सामान पर अपने टैरिफ बढ़ाएंगे, तो अमेरिका भी टैरिफ की दर बढ़ा देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर ये देश अपनी व्यापार नीतियों में बदलाव करें, तो टैरिफ कम किए जा सकते हैं।

अब 1 अगस्त तक होगी मोहलत

इससे पहले, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने ऐलान किया था कि ट्रंप 9 जुलाई की टैरिफ डेडलाइन को बढ़ाकर 1 अगस्त कर रहे हैं। दरअसल, ट्रंप ने 2 अप्रैल को कई देशों के लिए 50% तक के “पारस्परिक” टैरिफ की घोषणा की थी।

9 अप्रैल को टैरिफ लागू होने के बाद शेयर बाजार में गिरावट आई और बॉन्ड मार्केट में भी उथल-पुथल मची, जिसके बाद ट्रंप ने देशों को बातचीत के लिए तीन महीने का और समय दिया था।

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अब पहले से ज्यादा मजबूत और समृद्ध है। उन्होंने कहा, "हमारे पास पहले कभी ऐसे निवेश और आर्थिक आंकड़े नहीं थे। हम चाहें तो और सख्ती कर सकते हैं, लेकिन दोस्ताना रिश्तों को देखते हुए हम नरमी बरत रहे हैं।"

भारत के साथ समझौते की उम्मीद

ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा, "हम भारत के साथ समझौते के बहुत करीब हैं।" हालांकि, उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते हमेशा से अहम रहे हैं और यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

ट्रंप का यह बयान भारत के लिए एक बड़ी खबर है, क्योंकि टैरिफ की मार से बचते हुए व्यापार बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इस बीच, ट्रंप की टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार में हलचल मचा दी है। कई देश अब अमेरिका के साथ बातचीत में जुट गए हैं ताकि टैरिफ की मार से बच सकें। आने वाले दिन दिखाएंगे कि भारत और अमेरिका का यह संभावित समझौता कितना असरदार साबित होता है।


...

इजराइल ने ट्रम्प को नोबेल के लिए नॉमिनेट किया

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया है। नेतन्याहू ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में ट्रम्प से मुलाकात के दौरान इसकी जानकारी दी।

नेतन्याहू ने कहा, 'मैं आपको वह लेटर दिखाना चाहता हूं जो मैंने नोबेल पुरस्कार कमेटी को भेजा है। इसमें आपको शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया है। आप इसके हकदार हैं। आपको यह मिलना चाहिए।'

नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने यह फैसला मिडिल ईस्ट में शांति के लिए ट्रम्प की तरफ से की जा रही कोशिशों के मद्देनजर किया है। इजराइल से पहले पाकिस्तान ने 20 जून को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ट्रम्प के नाम की सिफारिश की थी।

इससे पहले ट्रम्प भी कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने कई देशों के बीच जंग रुकवाई और उन्हें नोबेल मिलना चाहिए। उन्होंने 22 जून को कहा था, 'मुझे नोबेल शांति पुरस्कार 4-5 बार मिलना चाहिए था। लेकिन वे मुझे ये पुरस्कार नहीं देंगे क्योंकि वे इसे केवल लिबरल्स को देते हैं।'

ट्रम्प ने दोहराया- भारत-पाक समेत कई देशों के विवाद निपटाए

राष्ट्रपति ट्रम्प ने मंगलवार को फिर से दावा किया कि उनकी सरकार ने भारत और पाकिस्तान के बीच एक बहुत बड़ी लड़ाई को रोक दिया। इसके साथ ही उन्होंने कोसोवो-सर्बिया और रवांडा-कांगो के बीच संघर्ष रोकने का दावा किया।

ट्रम्प ने कहा- हमने कई झगड़े रोके, जिनमें भारत और पाकिस्तान का बहुत बड़ा विवाद शामिल था। हमने दोनों देशों से कहा कि अगर आप आपस में लड़ेंगे, तो हम आपके साथ कोई व्यापारिक संबंध नहीं रखेंगे। वे शायद परमाणु युद्ध के स्तर पर थे। इसे रोकना बहुत जरूरी था।

पाकिस्तान आर्मी चीफ ने कहा था- ट्रम्प ने भारत-पाक संघर्ष रुकवाया

पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने 18 जून को ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। यह मुलाकात मुनीर के ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग वाले बयान के बाद हुई। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने बताया कि मुनीर ने ट्रम्प को मई में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने का क्रेडिट दिया है। उनके इस बयान के सम्मान में ट्रम्प ने उन्हें लंच पर बुलाया था।

इसके दो दिन बाद पाकिस्तानी सरकार ने अपने ऑफिशियल स्टेटमेंट में कहा कि ट्रम्प ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद दोनों से बात कर संघर्षविराम में अहम भूमिका निभाई। इससे दो न्यूक्लियर ताकत वाले देशों के बीच युद्ध की आशंका टल गई। पाकिस्तान ने कहा कि भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ट्रम्प की कूटनीतिक पहल और मध्यस्थता ने एक बड़े युद्ध को टालने में मदद की।

सितंबर में शुरू होगा नोबेल प्राइज के लिए नॉमिनेशन

नोबेल प्राइज 2026 के लिए ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन सितंबर में शुरू किए जाएंगे। हालांकि, अभी अंतिम तारिख का ऐलान नहीं किया गया है। 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 31 जनवरी थी।

2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 338 नॉमिनेशन किए गए। इनमें से 244 व्यक्ति और 94 संगठन थे। 2023 में इस पुरस्कार के 286 उम्मीदवार नामांकित थे। 2016 में सबसे अधिक 376 नॉमिनेशन हुए थे।

नोबेल प्राइज वेबसाइट के मुताबिक उनकी ओर से किसी भी फील्ड में नोबेल के लिए नॉमिनेट होने वाले लोगों के नाम अगले 50 साल तक उजागर नहीं किए जाते हैं।


...

अमेरिका के टेक्सास में बाढ़ से अबतक 80 मौतें

अमेरिका के टेक्सास राज्य में शुक्रवार को ग्वाडालूप नदी में अचानक आई बाढ़ से 3 दिन में 80 लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 लापता हैं। नदी के पास लड़कियों का एक समर कैंप था, जो बाढ़ की चपेट में आ गया। हालांकि कैंप में मौजूद 750 लड़कियों को बचा लिया गया।

टेक्सास के कई इलाकों में अभी भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। मौसम विभाग ने बाढ़ की चेतावनी जारी करते हुए ग्वाडालूप नदी के किनारे रहने वाले लोगों से ऊंची जगह जाने की अपील की है।

अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को टेक्सास के सैन एंटोनियो से लगभग 15 इंच (38 सेमी) तक बारिश हुई। महज 45 मिनट में नदी का लेवल 26 फीट (8 मीटर) बढ़ गया, जिससे घर और गाड़ियां बह गईं।

हेलिकॉप्टर और ड्रोन्स से अभी लोगों की तलाश जारी है। PM मोदी ने भी शनिवार को बाढ़ में मारे गए बच्चों की मौत पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के लिए संवेदनाएं व्यक्त की।

पोप लियो ने बाढ़ में मारे गए लोगों के लिए प्रार्थना की

रविवार को सेंट पीटर्स स्क्वायर में अपने संबोधन के दौरान पोप लियो XIV ने अमेरिका के टेक्सास में ग्वाडालूप नदी में आई बाढ़ के पीड़ितों के लिए प्रार्थना की। उन्होंने खासकर समर कैंप में गई लड़कियों के परिवारों के लिए प्रार्थना की।

पोप ने अंग्रेजी में कहा, "मैं उन सभी परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने इस आपदा में अपने प्रियजनों को खोया। हम उनके लिए प्रार्थना करते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शुक्रवार को टेक्सास का दौरा कर सकते हैं। ट्रम्प ने कहा- हम वहां लगातार मौजूद रहेंगे। हम टेक्सास के नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यह एक भयानक घटना थी। हम उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं जिन्होंने इतना कुछ सहा है।

बाढ़ से 2600 घरों की बिजली गुल हो गई थी

बारिश की वजह से नदी ने लोकल नाले और जलमार्गों को उफान पर ला दिया था, जिससे सड़कें डूब गईं थीं। ट्रेलर और वाहन बह गए। सैन एंटोनियो की इमरजेंसी टीमों ने हेलिकॉप्टर और ड्रोन के जरिए तलाश और बचाव कार्य शुरू किया।

इलाके में मौजूद लोगों ने लोकल मीडिया को बताया कि बाढ़ का पानी अचानक आया और उन्हें पेड़ों पर चढ़कर जान बचानी पड़ी। बाढ़ की वजह से बिजली लाइनें गिर गईं और कर्विल के आसपास के इलाकों में लगभग 2,600 घरों की बिजली गुल हो गई थी।


...

चीन पर राफेल के खिलाफ झूठा कैंपेन चलाने का आरोप

फ्रांसीसी मिलिट्री और सीक्रेट अधिकारियों ने रविवार को दावा किया कि मई में भारत और पाकिस्तान संघर्ष में राफेल की क्षमता पर सवाल खड़ा करने के लिए चीन ने अपने दूतावासों का इस्तेमाल किया था।

फ्रांस की खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के विदेशी दूतावासों में मिलिट्री डिप्लोमैट्स (डिफेंस अताशे) ने राफेल की बिक्री को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि चीन के दूतावासों ने उन देशों को प्रभावित करने की कोशिश की, जिन्होंने पहले से राफेल खरीदे हैं, जिसमें इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं।

चीन के रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को अफवाह करार देते हुए खारिज कर दिया। चीन ने कहा कि हम मिलिट्री एक्सपोर्ट में जिम्मेदार रवैया अपनाते हैं।

राफेल को बदनाम करने के लिए AI का इस्तेमाल किया

मई में भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले संघर्ष में दोनों देशों के कई विमानों ने हिस्सा लिया। इस दौरान भारत ने फ्रांस निर्मित राफेल फाइटर प्लेन का इस्तेमाल किया था।

फ्रांस का दावा है कि पाकिस्तान और उसके सहयोगी चीन ने राफेल की इमेज खराब करने के लिए सोशल मीडिया पर झूठी खबरें, हेरफेर की गई फोटोज, AI-जनरेटेड कंटेंट और वीडियो गेम के फुटेज का इस्तेमाल किया था।

फ्रांस के रिसर्चर्स ने पाया कि लड़ाई के दौरान 1000 से ज्यादा नए सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए, जो चीनी टेक्नीक को बेहतर बताने का दावा कर रहे थे। हालांकि, फ्रांस ने इस ऑनलाइन कैंपेन को सीधे चीनी सरकार से जोड़ने का सबूत नहीं दिया।

पाकिस्तान के कई सोशल मीडिया यूजर्स ने संघर्ष के दौरान महीनों पुराने फुटेज शेयर कर राफेल गिराने का दावा किया था।

पाकिस्तान ने 3 राफेल गिराने का दावा किया था

भारत के साथ संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसकी वायुसेना ने लड़ाई के दौरान पांच भारतीय विमानों को मार गिराया, जिनमें तीन राफेल भी शामिल थे।

फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि इससे राफेल की कैपिसिटी पर सवाल उठने लगे थे। बाद में भारत ने विमान के नुकसान की बात स्वीकार की थी, लेकिन यह नहीं बताया था कि कितने फाइटर प्लेन का नुकसान हुआ।

इसके बाद फ्रांसीसी एयरफोर्स जनरल जेरोम बेलांगर ने कहा था कि उन्होंने सिर्फ 3 भारतीय विमानों को नुकसान पहुंचने के सबूत देखे हैं- इसमें एक राफेल, एक रूस निर्मित सुखोई और एक मिराज 2000। मिराज 2000 आखिरी जेनरेशन का फ्रांसीसी जेट है। मीडिया के मुताबिक यह पहली बार था, जब युद्ध में राफेल को नुकसान पहुंचा था।

CDS ने भारत के कुछ विमान गिरने की बात स्वीकार की थी

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने 31 मई को सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के साथ संघर्ष में भारतीय फाइटर जेट गिरने के दावों पर बात की। उन्होंने ये बातें ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कही थी।

उन्होंने कहा था कि असली मुद्दा यह नहीं है कि कितने विमान गिरे, बल्कि यह है कि वे क्यों गिरे और हमने उनसे क्या सीखा। भारत ने अपनी गलतियों को पहचाना, उन्हें जल्दी सुधारा और फिर दो दिन के भीतर दुश्मन के ठिकानों को लंबी दूरी से निशाना बनाकर एक बार फिर प्रभावी तरीके से जवाब दिया।

CDS चौहान ने कहा कि पाकिस्तान का ये दावा कि उसने 6 भारतीय जेट गिराए, बिल्कुल गलत है। गिनती मायने नहीं रखती, बल्कि यह मायने रखता है कि हमने क्या सीखा और कैसे सुधार किया। इस संघर्ष में कभी भी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की नौबत नहीं आई, जो कि एक राहत की बात है।

राफेल की रेंज 3700 किलोमीटर

राफेल विमान फ्रांस की दसॉ एविएशन द्वारा बनाया गया 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है। ये एक मिनट में 60,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। इसकी रेंज 3700 किलोमीटर है।

साथ ही यह 2200 से 2500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। सबसे खास बात ये है कि इसमें मॉडर्न ‘मिटिअर’ मिसाइल और इजराइली सिस्टम भी है।

23 सितंबर, 2016 को फ्रांस के तत्कालीन रक्षामंत्री ज्यां ईव द्रियां और भारत के तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर ने नई दिल्ली में राफेल सौदे पर साइन किए थे। भारत सरकार ने 59,000 करोड़ रुपए की फ्रांस से डील की थी।

फ्रांस ने 533 राफेल विमान बेचे

फ्रांस का रक्षा मंत्रालय का कहना है कि राफेल एक एडवांस लड़ाकू विमान है। इसके खिलाफ चलाए गए कैंपेन का मकसद फ्रांस की विश्वसनीयता और डिफेंस उद्योग को नुकसान पहुंचाना था।

दसॉ एविएशन ने अब तक 533 राफेल विमान बेचे हैं, जिनमें से 323 मिस्र, भारत, कतर, ग्रीस, क्रोएशिया, UAE, सर्बिया और इंडोनेशिया को एक्सपोर्ट किए गए। इंडोनेशिया ने 42 विमान खरीदे। वह और खरीदने पर विचार कर रहा है।



...

फुटबॉल और सांबा के देश ब्राजील में घूसखोरी का जुगाड़

जगह- रियो डी जेनेरियो

दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला कही जाने वालीं मशहूर फ्रेंच एक्ट्रेस ब्रिजेट बार्डो ब्राजील पहुंचीं। चूंकि वह फ्रांस से थीं, इसलिए उन्हें खुश करने के लिए होटल के मैनेजर ने उनके देश से ही एक खास डिश मंगवाई, लेकिन यह एयरपोर्ट के कस्टम में फंस गई।

उस समय ब्राजील के कस्टम नियम बहुत सख्त थे। खाने-पीने के सामान के इम्पोर्ट पर कड़ी पाबंदी थी। सामान छुड़ाने के लिए कागजी कार्रवाई होती थी, जिसमें वक्त लगता था। ऐसे में खाना खराब होने का खतरा था। इसके लिए होटल के मैनेजर ने दूसरा रास्ता अपनाया।

मैनेजर ने कस्टम अफसरों से दोस्ती की, उन्हें सिगार और शराब के तोहफे दिए, जिसके बाद वह खाना कस्टम से छूट पाया। यह किस्सा उस दौर में इतना मशहूर हुआ कि मीडिया ने इसे ‘जेइटिन्हो ब्रिजेट बार्डो’ कहा।

‘जेइटिन्हो ब्रासीलीरो’ यानी ब्राजीली जुगाड़

देखा जाए तो ‘जेइटिन्हो ब्रासीलीरो’ एक तरह से रिश्वत का दूसरा तरीका है। दुनियाभर के देशों में घूसघोरी को लेकर कानून हैं और इसके लिए जेल की भी सजा है। ब्राजील में भी रिश्वत एक अपराध है, लेकिन जेइटिन्हो को यहां अनैतिक नहीं माना जाता।

ब्राजील में अगर किसी का काम फंसा हुआ हो तो उनसे कहा जाता है- ‘जेइटिन्हो ब्रासीलीरो’ यानी ब्राजीली जुगाड़ निकालो। जेइटिन्हो ब्रासीलीरो में मुश्किलों को हल करने के लिए हर मुमकिन तरीका आजमाया जाता है।

मुश्किल काम को आसानी से करने का तरीका

ब्राजील में जेइटिन्हो का चलन उपनिवेशी दौर (16वीं सदी) में शुरू हुआ। पुर्तगालियों ने ब्राजील पर कब्जा करने के बाद वहां अपने नियम-कायदे लागू कर दिए। ये कानून यूरोप से अपनाए गए थे और ब्राजील के लोगों के लिए मुश्किल बन रहे थे।

ऐसे में लोगों ने अधिकारियों से बेहतर रिश्ते बनाकर, छोटी-मोटी घूस से काम निकालने का हुनर विकसित कर लिया। 20वीं सदी में यह कल्चर इतना मजबूत हो गया था कि हर सरकारी या गैर-सरकारी प्रक्रिया में लोग नियमों के लूपहोल खोजने लगे। नब्बे के दशक में लिविया बारबोसा ने अपनी किताब ‘ओ जेइटिन्हो ब्रासीलीरो’ में इसके बारे में विस्तार से बताया।

घूसखोरी से कितना अलग है जेइटिन्हो

इसे ऐसे समझिए कि ब्राजील में एक मशहूर रेस्टोरेंट में आपको टेबल बुकिंग करनी है, लेकिन यह कई दिन पहले ही फुल हो चुकी है। ऐसे में आप रेस्टोरेंट के मैनेजर के दोस्त के जरिए संपर्क करते हैं और मैनेजर के लिए एक खास इम्पोर्टेड वाइन गिफ्ट के तौर पर भिजवाते हैं।

इस तोहफे के बाद मैनेजर ने ‘बीच का रास्ता’ तलाशा और एक वीआईपी कस्टमर की बुकिंग कैंसिल कर दी, जिससे ग्राहक को जगह मिल गई। यह जेइटिन्हो है। हालांकि, ये जरूरी नहीं कि आपको जेइटिन्हो में गिफ्ट देना जरूरी हो।

मान लीजिए, आप सरकारी दफ्तर में लाइन में लगे हैं और आपका नंबर 10वां है, लेकिन आपकी वहां के चपरासी से अच्छी दोस्ती है। ऐसे में आपको वह देखते ही अंदर बुला लेता है। आपने कोई कानून नहीं तोड़ा, न घूस दी, सिर्फ रिश्ते का फायदा उठाया। इसे जेइटिन्हो कहा जाता है।

हालांकि, कभी-कभार लोग जेइटिन्हो (जुगाड़) और ब्राइबरी (घूस) के बीच की महीन रेखा पार कर लेते हैं। लोग अपना काम निकालने के लिए महंगे तोहफे गिफ्ट करते हैं। ऑपरेशन लावा जाटो यानी ‘कार वॉश ऑपरेशन’, ब्राजील का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक भ्रष्टाचार घोटाला था, जिसने पूरे ब्राजील के राजनीतिक और कारोबारी तंत्र को हिला दिया था।

लावा जाटो में फंसे लूला डि सिल्वा, 12 साल की जेल हुई

2014 में ब्राजील की संघीय पुलिस ने जांच शुरू की, जब एक क्यूरेटिबा शहर की कार वॉश (लावा जाटो) में मनी लॉन्ड्रिंग के सुराग मिले। यहीं से इसका नाम ‘लावा जाटो ऑपरेशन’ पड़ा। घोटाले की जड़ ब्राजील की राष्ट्रीय तेल कंपनी पेट्रोब्रास में थी।

कई बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने पेट्रोब्रास के अधिकारियों को भारी रिश्वत दी, ताकि उन्हें महंगे कॉन्ट्रैक्ट मिलें। ये रिश्वत राजनेताओं और पार्टियों तक भी गई, ताकि सरकार और संसद में उनके हित साधे जा सकें।

अनुमान है कि रिश्वत और घपले की रकम 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा थी। पेट्रोब्रास के कई प्रोजेक्ट्स में लागत दोगुनी-तिगुनी कर दी गई, ताकि दलाल, कंपनी और नेता सब हिस्सेदारी लें। इसमें कई टॉप बिजनेस टायकून फंसे। जैसे ओडेब्रेख्ट कंपनी के सीईओ मार्सेलो ओडेब्रेख्ट को जेल हुई।

ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा पर भी आरोप लगे कि उन्होंने पेट्रोब्रास घोटाले में शामिल कंपनियों से रिश्वत ली। आरोप था कि OAS नाम की कंस्ट्रक्शन कंपनी ने लूला को एक लग्जरी अपार्टमेंट दिलवाया और उसे रेनोवेट करवाया। इसके बदले में OAS को पेट्रोब्रास से फायदेमंद कॉन्ट्रैक्ट मिले।

लूला डा सिल्वा को 12 साल की जेल हुई। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया, लेकिन तब तक वे 19 महीने जेल में बिता चुके थे।

लावा जाटो स्कैंडल पूरी दुनिया में चर्चित हुआ। इसमें सैकड़ों लोग जेल गए थे और अरबों डॉलर की रिकवरी हुई थी। लावा जाटो के खुलासे सिर्फ ब्राजील तक सीमित नहीं रहे। इसमें ओडेब्रेख्ट कंपनी ने लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में नेताओं को रिश्वत देने की बात कबूली। इसका असर ये हुआ कि पेरू, वेनेजुएला, इक्वाडोर, अंगोला समेत कई देशों में प्रदर्शन हुए।

ब्राजील में 1-2-3 किस का रिवाज

पुर्तगालियों ने ब्राजील पर कब्जा किया तो अपने रीति-रिवाज भी साथ लाए। इनमें से एक रिवाज था बेजियो यानी कि गालों पर किस करने का रिवाज। ब्राजील के अमीर वर्ग और राजघरानों में यूरोपीय एलीट का फैशन अपनाने का चलन था, जिसने इस रिवाज को फैला दिया।

इसमें दिक्कत यह हुई कि यह अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से होने लगा। जैसे कि साओ पाउलो में गाल पर एक हल्का किस का चलन है। रियो डी जेनेरियो में दोनों गाल पर किस का चलन है।

वहीं, ब्राजील के दक्षिणी इलाकों जैसे कि मिनास गैरेस में तीन किस का चलन है। बारी-बारी से दाहिना-बायां-दाहिना या बायां-दाहिना-बायां। पुरुष आमतौर पर एक-दूसरे को किस नहीं करते। यह रिवाज पुरुष-महिला या महिलाओं के बीच प्रचलित है।

कार्निवल बेहद पॉपुलर, 1 करोड़ लोग शामिल होते हैं

कार्निवल दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्रसिद्ध उत्सवों में से एक है। कार्निवल की तारीख हर साल बदलती है, लेकिन आम तौर पर यह फरवरी या मार्च में पड़ता है। मुख्य कार्निवल हफ्ता शुक्रवार से मंगलवार तक चलता है।

रियो कार्निवल सबसे मशहूर है। इसमें होने वाली सांबा परेड दुनियाभर में मशहूर है। इसमें सैकड़ों लोग सांबा स्कूल शानदार थीम, सजे हुए फ्लोट्स, भव्य कॉस्ट्यूम और संगीत के साथ परेड करते हैं। हर साल दुनियाभर से लाखों लोग इसमें शामिल होते हैं या टीवी पर देखते हैं।

रियो कार्निवल में ही रोजाना 20 लाख तक लोग सड़कों पर होते हैं। पूरे ब्राजील में करीब 1 करोड़ से ज्यादा लोग कार्निवल में शामिल होते हैं। लाखों विदेशी पर्यटक भी कार्निवल देखने आते हैं।

ब्राजील में फुटबॉल जुनून, गर्व और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक

फुटबॉल ब्राजील का सबसे लोकप्रिय खेल है और इसे राष्ट्रीय खेल का दर्जा भी प्राप्त है। ब्राजील ने रिकॉर्ड 5 बार फीफा वर्ल्ड कप जीता है। देश में 7000 से ज्यादा फुटबॉल क्लब रजिस्टर्ड हैं और लाखों बच्चे एकेडमियों और गलियों में फुटबॉल खेलते हैं।

माराकाना स्टेडियम को फुटबॉल का मक्का कहा जाता है। यहां पर 1950 के वर्ल्ड कप फाइनल में 2 लाख से ज्यादा लोग मौजूद थे। यह किसी फुटबॉल मैच का रिकॉर्ड है। ब्राजीलियाई फुटबॉलर्स पूरी दुनिया में खेलने जाते हैं।

2022 के आंकड़ों के अनुसार, 1200 से ज्यादा प्रोफेशनल ब्राजीलियाई खिलाड़ी विदेशों में क्लब फुटबॉल खेल रहे थे। यह किसी भी देश से सबसे ज्यादा है। वर्ल्ड कप के दौरान ब्राजील में सरकारी दफ्तर और कई स्कूल बंद कर दिए जाते हैं, ताकि लोग मैच देख सकें।

ब्राजील में फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं, रोजगार का भी बड़ा साधन है। हजारों लोग क्लब, स्टेडियम, मर्चेंडाइजिंग और प्रसारण से जुड़कर रोजगार पाते हैं। फीफा के एक सर्वे के मुताबिक, 50% से ज्यादा ब्राजीलियाई बच्चे प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने का सपना देखते हैं।


...

BRICS ने पहलगाम हमले की निंदा की

ब्राजील के रियो डी जनेरियो में रविवार को हुए 17वें BRICS सम्मेलन में सदस्य देशों ने 31 पेज और 126 पॉइंट वाला एक जॉइंट घोषणा पत्र जारी किया। इसमें पहलगाम आतंकी हमले और ईरान पर इजराइली हमले की निंदा की गई।

इससे पहले 1 जुलाई को भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की मेंबरशिप वाले QUAD (क्वाड) ग्रुप के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी पहलगाम हमले की निंदा की गई थी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समिट में कहा कि पहलगाम आतंकी हमला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत पर चोट है। आतंकवाद की निंदा हमारा सिद्धांत होना चाहिए, सुविधा नहीं। इसके साथ ही उन्होंने एक नई विश्व व्यवस्था की मांग उठाई।

PM ने कहा, '20वीं सदी में बनाई गईं वैश्विक संस्थाएं 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने में नाकाम हैं। AI के दौर में तकनीक हर हफ्ते अपडेट होती है, लेकिन एक वैश्विक संस्थान 80 सालों में एक बार भी अपडेट नहीं होता। 20वीं सदी के टाइपराइटर 21वीं सदी के सॉफ्टवेयर को नहीं चला सकते।'

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने BRICS से जुड़ने की इच्छा रखने वाले नए देशों पर एक्स्ट्रा 10% टैरिफ का ऐलान किया है।

BRICS में PM मोदी के संबोधन की अहम बातें

1. BRICS की असली ताकत है इसकी विविधता

PM मोदी ने कहा कि BRICS देशों की अलग-अलग सोच और बहुध्रुवीय दुनिया में भरोसा ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

2. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को सोच-समझकर निवेश करना चाहिए

उन्होंने कहा कि बैंक को सिर्फ उन्हीं प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाना चाहिए जो जरूरी हों, लंबे समय तक फायदे वाले हों और जिससे बैंक की साख बनी रहे।

3. विज्ञान और रिसर्च के लिए साझा प्लेटफॉर्म बनाने का सुझाव

PM मोदी ने एक ऐसा BRICS रिसर्च सेंटर बनाने का प्रस्ताव रखा, जहां सब देश मिलकर विज्ञान और टेक्नोलॉजी पर काम कर सकें।

4. संसाधनों का गलत इस्तेमाल न हो

मोदी ने कहा कि किसी देश को यह हक नहीं कि वो किसी भी संसाधन को सिर्फ अपने फायदे के लिए या हथियार की तरह इस्तेमाल करे।

5. डिजिटल कंटेंट पर कंट्रोल जरूरी

उन्होंने कहा कि हमें ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए जिससे पता चले कि कोई डिजिटल जानकारी असली है या नहीं, वो कहां से आई, और उसका गलत इस्तेमाल न हो।

6. भारत में होगा AI इम्पैक्ट समिट

PM मोदी ने बताया कि भारत जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर एक बड़ा सम्मेलन करेगा, जिसमें इसकी चुनौतियों और अच्छे उपयोग पर चर्चा होगी।

ट्रम्प की BRICS से जुड़ने वाले देशों पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ की धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने BRICS से जुड़ने वाले देशों को धमकी दी। उन्होंने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि जो भी देश अमेरिका विरोधी BRICS नीतियों के साथ खुद को जोड़ेंगे, उन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। इसमें किसी को भी छूट नहीं मिलेगी।

दरअसल, BRICS घोषणा पत्र में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के खिलाफ बढ़ते टैरिफ पर चिंता जताई गई। इन टैरिफ को वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला के लिए खतरा बताया गया। हालांकि में सीधे तौर पर अमेरिका का नाम नहीं लिया गया।

चीन ने BRICS देशों से ग्लोबल ऑर्डर सुधारने की अपील की

चीनी ने BRICS देशों से ग्लोबल ऑर्डर (वैश्विक शासन) में सुधार के लिए अपील की है। चीनी प्रधानमंत्री ली क्यांग ने रविवार को 17वें BRICS सम्मेलन के दौरान कहा कि ब्रिक्स देशों को एक बेहतर दुनिया के निर्माण के लिए वैश्विक शासन में सुधार की दिशा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि चीन बाकी BRICS देशों के साथ मिलकर एक न्यायपूर्ण, बराबरी वाला, प्रभावी और व्यवस्थित वैश्विक शासन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

ब्रिक्स देशों के जॉइंट घोषणा पत्र की प्रमुख बातें...

नए सदस्य और भागीदार देश: इंडोनेशिया को ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बनाया गया।बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, युगांडा, और उज्बेकिस्तान को ब्रिक्स भागीदार देश के रूप में शामिल किया गया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत और ब्राजील की भूमिका: चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र, खासतौर पर सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया।

जलवायु परिवर्तन और COP30: ब्रिक्स देशों ने COP30 की सफलता के लिए प्रतिबद्धता जताई, जो UNFCCC और पेरिस समझौते को लागू करने में मदद करेगा।भारत की 2028 में COP33 की मेजबानी की उम्मीदवारी का स्वागत किया गया।

ब्रिक्स अध्यक्षता: ब्राजील की 2025 की अध्यक्षता की सराहना की गई।भारत को 2026 में ब्रिक्स अध्यक्षता और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए समर्थन दिया गया।

अवैध प्रतिबंधों की निंदा: ब्रिक्स देशों ने उन एकतरफा प्रतिबंधों की निंदा की जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ हैं

ग्लोबल ट्रेड: एकतरफा टैरिफ लगाने के फैसलों पर चिंता जताई गई, जो विश्व व्यापार संगठन (WTO) नियमों के खिलाफ हैं।पारदर्शी, और समावेशी ट्रेड सिस्टम का समर्थन किया गया, जिसमें विकासशील देशों से बिना भेदभाव का व्यवहार शामिल है।

आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता: आतंकवाद को किसी धर्म, देश, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़ने से इनकार किया गया।22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और ईरान पर इजराइली हमले की कड़ी निंदा की गई।संयुक्त राष्ट्र की तरफ से घोषित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की गई।आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और दोहरे मापदंड को खारिज करने पर जोर दिया गया।

बिग कैट्स अलायंस: भारत की 'इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस' पहल का स्वागत किया गया, जिसका मकसद दुर्लभ प्रजातियों, खासकर बड़ी बिल्लियों (जैसे शेर, बाघ) के संरक्षण के लिए सहयोग करना है।

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB): NDB की ग्लोबल साउथ में विकास और आधुनिकीकरण के लिए बढ़ती भूमिका की सराहना की गई।बैंक की लोकल करेंसी फाइनेंसिंग, इनोवेशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का समर्थन बढ़ाने की बात कही गई।

PM मोदी के भाषण की अन्य प्रमुख बातें...

ग्लोबल साउथ के साथ भेदभाव:

PM मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ डेवलपमेंट, रिसोर्स डिस्ट्रीब्यूशन और सुरक्षा जैसे मुद्दों में दोहरे मापदंड का शिकार रहा है।

ग्लोबल साउथ के हितों को प्राथमिकता नहीं दी गई, लेकिन भारत हमेशा मानवता के हित में अपने स्वार्थों से ऊपर उठकर काम करता है।

ब्रिक्स का विस्तार और सुधार:

ब्रिक्स का विस्तार और नए देशों का शामिल होना इसकी समय के साथ बदलने की क्षमता को दर्शाता है।

PM मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और न्यू डेवलपमेंट बैंक में सुधार की जरूरत पर बल दिया।

आतंकवाद पर कड़ा रुख:

PM मोदी ने आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया।

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला भारत की आत्मा, पहचान, और गरिमा पर हमला है, जो पूरी मानवता के खिलाफ है।

आतंकवाद पर सख्ती की मांग:

तंकवाद की निंदा को सिद्धांत बनाना चाहिए, न कि सुविधा के आधार पर।

आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। आतंकवाद के पीड़ितों और समर्थकों को एक ही तराजू पर नहीं तौला जा सकता।

व्यक्तिगत या राजनीतिक फायदे के लिए आतंकवाद को मौन समर्थन देना स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

शांति और सहयोग पर जोर:

पश्चिम एशिया से यूरोप तक फैले विवाद और तनाव पर चिंता जताई, खासतौर से गाजा की स्थिति पर।

भारत, बुद्ध और गांधी की धरती है, वह युद्ध और हिंसा को खारिज करता है। शांति ही मानवता के कल्याण का एकमात्र रास्ता है।

भारत दुनिया को विभाजन और संघर्ष से दूर ले जाने और संवाद, सहयोग, और एकता की दिशा में ले जाने की हर कोशिश का समर्थन करता है।

भारत सभी मित्र देशों के साथ सहयोग और साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है।

PM मोदी रियो के बाद ब्रासीलिया जाएंगे

ब्राजील के रियो डी जनेरियो शहर में 17वीं BRICS समिट हो रही है। रविवार को PM मोदी इसमें शामिल हुए हैं। वे ब्राजील के 3 दिनों के दौरे पर हैं।

सोमवार यानी आज शाम वे BRICS के पर्यावरण से जुड़े फोरम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वे राजकीय दौरे पर राजधानी ब्रासीलिया भी जाएंगे। ब्रासीलिया में PM मोदी राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और ब्राजील आज चार समझौतों पर साइन करेंगे।

रिन्यूवल एनर्जी

आतंकवाद विरोधी सहयोग

कृषि अनुसंधान

गोपनीय जानकारियों का आदान-प्रदान

BRICS क्या है?

BRICS की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक वह 11 प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का एक समूह है। इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं।

इसका मकसद इन देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें शुरुआत में 4 देश थे, जिसे BRIC कहा जाता था। यह नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने दिया था।

तब उन्होंने कहा था कि ब्राजील, रूस, भारत और चीन आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएंगे। बाद में ये देश एक साथ आए और इस नाम को अपनाया।

BRICS को बनाने की जरूरत और आगे का सफर

सोवियत संघ के पतन के बाद और 2000 के शुरुआती सालों में दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पश्चिमी देशों का दबदबा था। अमेरिका का डॉलर और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) फैसले करती थीं।

इस अमेरिकी दबदबे को कम करने के लिए रूस, भारत, चीन और ब्राजील BRIC के तौर पर साथ आए, जो बाद में BRICS हो गया। इन देशों का मकसद ग्लोबल साउथ यानी विकासशील और गरीब देशों की आवाज को मजबूती देना था।

2008-2009 में जब पश्चिमी देश आर्थिक संकट से गुजर रहे थे। तब BRICS देशों की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही थी।

आर्थिक संकट से पहले पश्चिमी देश दुनिया की 60% से 80% अर्थव्यवस्था को कंट्रोल कर रहे थे, लेकिन मंदी के दौर में BRICS देशों की इकोनॉमिक ग्रोथ से पता चला कि इनमें तेजी से बढ़ने और पश्चिमी देशों को टक्कर देने की क्षमता है।

2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुई बैठक में BRICS देशों ने मल्टीपोलर वर्ल्ड यानी बहुध्रुवीय दुनिया की कल्पना की गई, जहां पश्चिमी देशों की आर्थिक पकड़ कमज़ोर हो और सभी देशों को बराबरी का हक मिले।

2014 में BRICS ने एक बड़ा कदम उठाते हुए न्यू डेवलपमेंट बैंक बनाया, जो इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड देता है। इसके साथ-साथ एक रिजर्व फंड भी बनाया गया ताकि आर्थिक संकट के समय इन देशों को अमेरिकी डॉलर पर निर्भर न रहना पड़े।

ब्राजील में हो रही BRICS समिट खास क्यों

ब्राजील के रियो डी जनेरियो में BRICS समिट 2025 का आयोजन ‘ग्लोबल ऑर्डर के लिए ग्लोबल साउथ का सहयोग’ की थीम पर किया गया।

इस बार होने वाली बैठक में पहली बार 10 सदस्य देश शामिल हुए। इसके अलावा 9 पार्टनर कंट्रीस ने भी हिस्सा लिया।

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा BRICS को पश्चिमी देशों के विरोधी के बजाय समावेशी संगठन के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। जिसका मकसद समावेशी विकास, खाद्य सुरक्षा और क्लाइमेट जस्टिस जैसे मुद्दों पर बात करना है।

पश्चिमी देशों के लिए BRICS एक चुनौती

BRICS देशों में पिछले कई सालों से SWIFT पेमेंट सिस्टम की तर्ज पर अपना पेमेंट सिस्टम बनाने की चर्चा होती रही है। हालांकि, इसे लेकर अभी तक कोई सहमति बन नहीं पाई है और न ही कोई ठोस कदम उठाए गए हैं।

2023 में ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने एक समिट के दौरान कहा था कि BRICS संगठन के देशों को व्यापार के लिए एक नई करेंसी बनाने की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया था कि हम क्यों डॉलर में ट्रेड कर रहे हैं।

BRICS देशों के पेमेंट सिस्टम और अपनी करेंसी बनाने का आइडिया हमेशा से पश्चिमी देशों खासतौर पर अमेरिका के लिए चिंता का विषय रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने शपथ ग्रहण से पहले ही पिछले साल दिसंबर में चेतावनी दी थी कि अगर BRICS देश ऐसा करते हैं तो उन पर 100% टैरिफ लगेगा। ट्रम्प ने इसे अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने की साजिश बताया था।

हालांकि इस सब के बीच भारत अपना रुख साफ कर चुका है। दिसंबर 2024 में कतर की राजधानी दोहा में एक फोरम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा था कि अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने में भारत की कोई रुचि नहीं है।


...

रूस ने अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता दी

 रूस तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता देने वाला पहला देश बन गया. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ऑर्डर से  मॉस्को ने तालिबान को अपनी प्रतिबंधित संगठनों की सूची से हटा दिया है. इसके साथ ही नए युग की शुरुआत हो गई है. सोवियत संघ के समय अफगानिस्तान भंवर में फंस गया था. ये रूस और अमेरिका के बीच शीत युद्ध का अड्डा बन गया था. तब सोवियत संघ ने अपनी आर्मी वहां भेज दी थी. इससे निपटने के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान के सहयोग से मुजाहिदीन तैयार किए. जब रूसी सेना वहां से हट गई तो अफगानिस्तान को इसका परिणाम झेलना पड़ा. दशकों तक आपसी नस्लीय लड़ाई में पिसने का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान ने तालिबान को उकसाया और अफगानिस्तान पर उसका कब्जा हो गया. वर्ल्ड ट्रेड टॉवर पर आतंकी हमले के बाद अमेरिका वापस अफगानिस्तान लौटा क्योंकि उसी का जिन्न उसे खा रहा था. तालिबान तो हार गया लेकिन अमेरिका जीत नहीं सका और 2020 में उसने आर्मी बुला ली और उसी दिन तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया.

अब पुतिन के इस फैसले को मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है. रूस से भारत की दोस्ती जगजाहिर है. ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान के दावों पर तालिबान ने भी हमारा साथ दिया. बिक्रम मिस्री तालिबान विदेश मंत्री से मिल भी चुके हैं. पुतिन के फैसले के बाद भारत भी तालिबान को मान्यता दे सकता है.

रूस का फैसला

रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि उसने अफगानिस्तान के नए राजदूत गुल हसन हसन से प्रमाण पत्र प्राप्त किया है. मंत्रालय ने कहा कि अफगान सरकार की आधिकारिक मान्यता द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देगी.

अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया और तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “अन्य देशों के लिए एक अच्छा उदाहरण” कहा. तालिबान ने अगस्त 2021 में अमेरिकी और नाटो बलों की वापसी के बाद अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था. तब से, वे अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि अपने सख्त इस्लामी कानून को लागू कर रहे हैं.

अब तक किसी भी देश ने तालिबान को औपचारिक मान्यता नहीं दी थी, लेकिन तालिबान ने कई देशों के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की है और चीन और संयुक्त अरब अमीरात सहित कुछ देशों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं.

फिर भी, तालिबान सरकार महिलाओं पर प्रतिबंधों के कारण वैश्विक मंच पर अलग-थलग रही है.हालांकि तालिबान ने 1996 से 2001 तक अपने पहले शासनकाल की तुलना में अधिक उदार शासन का वादा किया था, लेकिन 2021 के अधिग्रहण के तुरंत बाद महिलाओं और लड़कियों पर प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया.

महिलाओं को अधिकांश नौकरियों और सार्वजनिक स्थानों, जैसे पार्क, स्नानगृह और जिम से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जबकि लड़कियों को छठी कक्षा से आगे की शिक्षा से वंचित कर दिया गया है.

रूसी अधिकारियों ने हाल ही में अफगानिस्तान को स्थिर करने में मदद के लिए तालिबान के साथ जुड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया है और अप्रैल में तालिबान पर प्रतिबंध हटा दिया.

रूस के अफगानिस्तान में राजदूत, दिमित्री झिरनोव ने राज्य चैनल वन टेलीविजन पर बताया कि तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता देने का निर्णय राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की सलाह पर लिया था.


...

अमेरिकी संसद में पास हुआ Big Beautiful Bill, डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी जीत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वन बिग ब्यूटीफुल बिल गुरुवार देर रात पास हो गया. यह हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से 218-214 के अंतर से पास हुआ है. इसे ट्रंप की बड़ी जीत समझा जा रहा है. यह उनके कार्यकाल की अहम उपलब्धि भी माना जा रहा है. विधेयक को सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से पारित करने के बाद राष्ट्रपति के पास भेजा गया है. वे जल्द ही इस पर साइन करेंगे. 

वन बिग ब्यूटिफुल बिल पास होने के बाद व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इसको लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप शुक्रवार शाम 5 बजे अपने बड़े कर छूट और व्यय कटौती विधेयक पर साइन करने का प्लान कर रहा हैं. इसको लेकर 4 जुलाई को हस्ताक्षर समारोह भी होगा. 800 से ज्यादा पेज के इस बिल को पास कराने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने काफी मेहनत की है.  

क्या है बिग ब्यूटीफुल बिल

अगर आसान भाषा में समझें तो यह नया बिल 2017 में की गई टैक्स कटौती को स्थाई करने के लिए लाया गया है. यह विधेयक काफी अहम है, क्योंकि इसमें लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर की टैक्स कटौती शामिल है. जो सीनियर सिटीजन हैं, उन्हें 6000 डॉलर तक का टैक्स डिडक्शन भी मिलने की संभावना है. चाइल्ड टैक्स क्रेडिट को भी 2200 डॉलर तक बढ़ाया जा सकता है. इसके साथ-साथ एक और अहम बात सामने आई है. बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए साढ़े तीन सौ बिलियन डॉलर खर्च हो सकते हैं.

वन बिग ब्यूटीफुल बिल में क्या-क्या है शामिल

इस बिल की बड़ी खासियत मेडिकल और फूड असिस्टेंस में कटौती को माना जा रहा है. डेट सीलिंग को भी 5 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाया जा सकता है. अगर राष्ट्रपति ट्रंप की मानें तो एक बिल की वजह से टैक्स कट, मिलिट्री खर्च और बॉर्डर सिक्योरिटी को और मजबूती मिल सकती है.


...