‘हिंदू-मुस्लिम’ करना घातक होगा

हिंदू-मुस्लिम रिश्तों को लेकर सदा से ही भारत में आपसी भाईचारे और साझा विरासत का वातावरण रहा है। हां, लगभग 5-10 प्रतिशत तो हमेशा ही फसाद पर उतारू रहते हैं दोनों ओर, मगर आम तौर से गंगा-जमुनी तहज़ीब का ही अनुसरण करते चले आ रहे हैं, भारत के सभी निवासी, चाहे वे किसी भी धर्म के अनुयायी हों। कर्नाटक में जिस प्रकार से मंदिरों के निकट मुस्लिम दुकानदारों से सामान लेने के विरुद्ध वहां बैनर या पोस्टर लगाए गए हैं, उससे आपसी समभाव व सद्भाव पर कुप्रभाव पड़ सकता है। इस प्रकार की विघटनकारी बातों से बचने की आवश्यकता है। दक्षिण भारत के शिमोगा से एक विचलित करने वाली खबर आई है कि वहां के मंदिरों के कंप्लेक्स के बाहर कोई भी मुस्लिम अपनी किसी भी प्रकार की दुकान नहीं चलाएगा। इसका कारण बताया गया कि ये लोग बीफ का सेवन करते हैं। यह ठीक है कि बीफ के खाने से परहेज़ करना चाहिए मुस्लिमों को, क्योंकि गाय को हिंदू धर्म में माता के स्थान पर मान-सम्मान दिया गया है। जिस प्रकार से उडुपि, दक्षिण कन्नड़, टुमकुर, हासन, चिकमंग्लूर, दुर्गापुरामेशवरी आदि के मंदिरों के कैंपस में मुस्लिम पूजा सामग्री से लेकर अन्य नाना प्रकार का सामान बेचते थे, उससे न केवल इन मुस्लिम दुकानदारों के घर चलते थे बल्कि इस से अंतरधर्म सद्भावना व समभावना का सुखद प्रचार भी होता था। इन स्थानों पर बड़े-बड़े पोस्टर व बैनर लगा दिए गए हैं कि मुस्लिम दुकानदार से सौदा नहीं लिया जाए। इस प्रकार के बैनर न केवल अनैतिक व गैर कानूनी हैं बल्कि मानवता विरोधी भी हैं।

 

न जाने कब भारत में यह दूषित हिंदू-मुस्लिम मानसिकता की समाप्ति होगी। यदि भारत को विश्व गुरु और 5 ट्रिलियन अर्थ व्यवस्था बनना है तो हिंदू-मुस्लिम के मकडज़ाल से बाहर निकलना होगा और केवल और केवल भारत कार्ड खेलना होगा, न कि हिंदू-मुस्लिम ‘खेला होबे’! हां, एक सोचने वाली बात यह है कि आखिर यह कांड शिमोगा से ही क्यों शुरू हुआ! इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि इसी स्थान से हिजाब का अज़ाब शुरू हुआ था और 96 में से 6 छात्राओं ने बावजूद स्कूल से यह उसूल जारी होने पर कि हिजाब अन्यथा कोई और कोई धार्मिक पहनावा पहनने की अनुमति नहीं, फिर भी कक्षा की इन 6 छात्राओं ने इस बात की जि़द पकड़ ली कि वे हिजाब पहनकर ही कक्षा में आएंगी। वास्तव में उनको चंद कट्टरवादियों ने धमका दिया कि हिजाब नहीं तो किताब नहीं! एक समाज में जब एक तबक़ा जि़द पकड़ उद्दंड हो जाता है तो दूसरा तबका भी उसी रास्ते पर चल पड़ता है। 

 

इसी हिंदू-मुस्लिम पचड़े को लेकर लेखक की एक बार सरसंघचालक मोहन भागवत जी से बात हो रही थी तो उनका मत था कि अधिकतर मुस्लिम संस्कारी, राष्ट्रवादी व शांतिमय हैं, मगर कुछ स्वयंभू मुस्लिम नेता उन पर ढक्कन कस देते हैं जिसके कारण शाहीन बाग़ और हिजाब जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं और एक सुदृढ़ समाज को बांटने के प्रयास होते हैं। भागवत के विचार में मुस्लिम और हिंदू अलग हैं ही नहीं, भले ही उनका धर्म भिन्न हो, मगर डीएनए तो एक ही है। इसमें उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुस्लिमों के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती क्योंकि भारत को प्रगति के इस मुकाम तक लाने में मुसलमानों का बड़ा योगदान है। साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम उनकी संतान की माफिक हैं और उनके साथ वे बराबरी का सुलूक करना चाहते हैं। इस तरह दुकानदारी व दुकानदारों के मामले में हिंदू-मुस्लिम करना भारत के लिए घातक होगा। इससे बचा जाना चाहिए।

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लगातार दूसरी बार जनादेश हासिल करने वाले पहले मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश के चुनावी इतिहास में चार दशक बाद योगी आदित्यनाथ ने नया अध्याय जोड़ा है। इस अवधि में वह लगातार दूसरी बार जनादेश हासिल करने वाले पहले मुख्यमंत्री है। चुनावी समर में लोकप्रियता या समीकरण के बल पर एक बार सफलता मिल सकती है। लेकिन दूसरी बार की सफलता नेतृत्व की नेकनीयत व विश्वसनीयता पर आधारित होती है। तब नेतृत्व के यह दो गुण कारक बन जाते हैं। इस कारण चालीस वर्षों के दौरान किसी मुख्यमंत्री को दोबारा जनादेश नहीं मिला।

 

योगी आदित्यनाथ अपनी नेकनीयत व विश्वसनीयता को कायम रखने में सफल रहे। केंद्र में नरेंद्र मोदी को भी इस आधार पर सफलता मिलती रही है। गुजरात के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी यह विशेषता कायम रखी। इस लिहाज से नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ एक ही धरातल पर है। दोनों परिवारवाद की राजनीति से दूर हैं। समाज सेवा में पूरी निष्ठा व ईमानदारी से समर्पित रहते हैं।

 

विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोरोना की तीसरी लहर को लेकर संशय था। उस समय योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार की जगह कोरोना आपदा प्रबंधन को वरीयता दी। जनपदों की यात्रा कर रहे थे। सभी जगह कोरोना चिकित्सा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे। आपदा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था के बाद ही उन्होंने चुनाव प्रचार की तरफ ध्यान दिया। इसी प्रकार चुनाव परिणाम आने के बाद वह जन कल्याण कार्यों में सक्रिय हो गए। उन्होंने बारह से चौदह वर्ष आयु के बच्चों के वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान के सुचारू संचालन हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया।

 

कोरोना आपदा प्रबंधन में योगी मॉडल की प्रशंसा दुनिया में रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसकी सराहना की थी। इस पूरी अवधि में योगी आदित्यनाथ ने कई बार प्रदेश की यात्राएं की थी। वह अनवरत प्रबंधन का जायजा लेते रहे। वैक्सिनेशन के संबन्ध में भी केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया गया। योगी आदित्यनाथ वैक्सिनेशन केंद्रों में पहुंच कर लोगों का उत्साह वर्धन करते रहे। इसके चलते उत्तर प्रदेश ने वैक्सिनेशन का रिकार्ड कायम कर दिया। यह यात्रा अगले चरण के रूप में जारी है।

 

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सर्वाधिक टेस्ट व सर्वाधिक वैक्सीनेशन करने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। राज्य में अब तक करीब तीस करोड़ वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। प्रदेश में वैक्सीन की पहली डोज के शत प्रतिशत से अधिक के लक्ष्य को प्राप्त किया जा चुका है। अब तक एक सौ तीन प्रतिशत से ऊपर वैक्सीन की प्रथम डोज पूरे प्रदेश में उपलब्ध करवाई जा चुकी है। सेकेण्ड डोज भी प्रदेश में बयासी प्रतिशत से अधिक लोगों ने ले ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बारह से चौदह आयु वर्ग के बच्चों के कोविड टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय में किया।

 

बारह से चौदह साल के बच्चों को प्रदेश के तीन सौ केन्द्रों में यह वैक्सीन उपलब्ध करवाई जा रही है। सभी के लिए प्रर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देश में चले भारत के कोरोना प्रबन्धन की दुनिया में सराहना हुई है। यहां तक कि अन्य देशों में भी भारत के कोरोना प्रबंधन मॉडल को अपनाया गया है। कोरोना के खिलाफ लागू किए गये फोर टी फॉर्मूले के तहत ट्रेस, टेस्ट, ट्रीट और टीका, इन सभी में उत्तर प्रदेश अग्रणी है।

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संकीर्णता व दोहरेपन का शिकार प्रवासी मुद्दा

भारतीय संविधान देश के किसी भी राज्य अथवा किसी भी केंद्र शासित प्रदेश के किसी भी नागरिक को देश के किसी भी राज्य अथवा किसी भी केंद्र शासित प्रदेश में जाकर रोज़गार,सेवा अथवा व्यवसाय करने का पूरा अधिकार देता है। परन्तु इसके बावजूद समय समय पर कुछ विशिष्टजन विशेषकर ज़िम्मेदार नेतागण ऐसी भाषा बोलने लगते हैं जिससे न केवल प्रवासी लोगों के मन में अपनी सुरक्षा के प्रति भय उत्पन्न होता है बल्कि इससे हमारी राष्ट्रीय एकता पर भी गहरा आघात लगता है। प्रायः उत्तर प्रदेश,बिहार,मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,बंगाल,राजस्थान व उत्तरांचल के लोग ही रोज़गार की तलाश में अथवा नौकरी या व्यवसाय की ख़ातिर देश के विभिन्न हिस्सों में आते जाते रहते हैं। इनमें भी विशेषकर उत्तर प्रदेश व बिहार जैसे देश के दो सबसे बड़े राज्यों के छात्र,कामगार,श्रमिक ख़ास तौर पर मुंबई,दिल्ली,पंजाब व हरियाण जैसे राज्यों में बहुतायत में जाते हैं।इसका मुख्य कारण जहाँ इन राज्यों का जनसँख्या घनत्व है वहीँ अशिक्षा व बेरोज़गारी भी इन राज्यों की बड़ी समस्या है। इत्तेफ़ाक़ से यही देश के ऐसे दो बड़े राज्य भी हैं जो हमेशा ही देश को सबसे अधिक संख्या में नौकरशाह मुहैय्या करवाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में भी प्रायः इन्हीं राज्यों का वर्चस्व रहा है। अनेक महापुरुष व राजनेता इन्हीं दो राज्यों के रहे हैं। कितने सौभाग्यशाली है उत्तर प्रदेश व बिहार जैसे राज्य की धरती कि यह भगवान राम,कृष्ण,सीता,गुरु गोविन्द सिंह,संत रविदास,महात्मा बुद्ध,कबीर,तुलसी व कई अन्य महापुरुषों की यह जन्म व कर्मस्थली भी रही है।

 

परन्तु कितने दुःख का विषय है कि इन्हीं राज्यों के लोग समय समय पर कुछ संकीर्ण क्षेत्रीय मानसिकता रखने वाले नेताओं की संकीर्ण सोच व तंग नज़री का शिकार होने लगते हैं। और कभी कभी तो ऐसा भी देखा गया है कि यदि अपराधी प्रवृति के किसी प्रवासी ने कहीं कोई अपराध अथवा दुष्कर्म कर दिया तो स्थानीय लोग उसका ग़ुस्सा पूरे प्रवासी समाज पर उतारने पर आमादा हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर सितंबर 2018 में गुजरात राज्य के साबरकांठा में एक मासूम बच्ची के साथ एक मज़दूर ने बलात्कार किया था। बलात्कार का आरोपी बिहार का रहने वाला था। इस घटना के बाद गुजरात के कई शहरों में उत्तर भारत के लोगों के विरुद्ध न केवल  विरोध-प्रदर्शन हुये बल्कि कई जगह उनके विरुद्ध स्थानीय लोगों की भीड़ हिंसक भी हो गयी।  हिंसा पर उतारू भीड़ का कहना था कि यूपी और बिहार के लोग शहर से चले जाएं वरना उन्हें मार दिया जाएगा। वे कहते सुने जा रहे थे कि 'बाहरी लोग राज्य छोड़ दें' साथ ही यह भी कि 'गुजराती लोगों को बचाया जाना चाहिए'। इस हिंसा के बाद डरे सहमे उत्तर भारतीयों ने अपने-अपने राज्य-घर-गांवों की ओर बड़ी संख्या में पलायन करना शुरू कर दिया था। उत्तर भारत के बेगुनाह लोगों पर हुए इस हमले के बाद बिहार व उत्तर प्रदेश के लोगों ने कई जगह प्रदर्शन किया था तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध पोस्टर लगाये थे जिसमें लिखा था - ‘गुजराती नरेंद्र मोदी बनारस छोड़ो’।

 

इन दिनों पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के उत्तर भारतीयों के बारे में दिये गये एक बयान को लेकर भाजपा विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया। चन्नी ने कहा था कि - प्रियंका पंजाबियों की बहू है। यूपी ,बिहार, दिल्ली के लोगों को यहां राज नहीं करने देना। यूपी के भइयों को पंजाब में फटकने नहीं देना है। बाद में भले ही चन्नी यह सफ़ाई देते रहे कि उनका आशय आम आदमी पार्टी के नेताओं से था,परन्तु तब तक राजनीति के महाचतुर खिलाड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चन्नी के यू पी बिहार वाले बयान को गुरु गोविन्द सिंह व संत रविदास के अपमान से जोड़ चुके थे। परन्तु जब गुजरात,कश्मीर और महाराष्ट्र से इन्हीं भगवान राम,कृष्ण,सीता,गुरु गोविन्द सिंह, संत रविदास,महात्मा बुद्ध,कबीर व तुलसी के राज्यों के लोग मारे-पीटे-दुत्कारे व भगाये जा रहे थे और यही यू पी बिहार के कथित हितैषी उन राज्यों की सत्ता के साथ खड़े थे,उस समय यह भगवान राम,कृष्ण,सीता,गुरु गोविन्द सिंह, संत रविदास का अपमान नहीं था? जब इन्हीं राज्यों के लोग कोरोना काल में अपने परिवार,बच्चों व वृद्ध बीमार जनों के साथ हज़ारों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे थे तब  क्या वह संत रविदास व गुरु गोविन्द सिंह का अपमान नहीं था ?

 

अब इसी प्रवासी मुद्दे का दूसरा पहलू भी देखिये। जिस तरह उत्तर भारतीय स्वरोज़गार हेतु देश के संपन्न राज्यों में जाते हैं ठीक उसी तरह पंजाब,हरियाणा,गुजरात,यू पी व बिहार आदि अनेक राज्यों के लोग इसी रोज़गार व व्यवसाय के लिये अथवा शिक्षा ग्रहण करने के लिये अमेरिका-कनाडा जैसे अनेक विकसित देशों में जाते हैं। आज अनेक देशों में उनकी स्थिति ऐसी है कि कोई किसी देश का प्रधानमंत्री है कई विभिन्न देशों में मंत्री,कई जज तो कई सेना व पुलिस में उच्च पदों पर तैनात हैं। कोई सांसद तो कोई वैश्विक स्तर पर उद्योग जगत के शीर्ष पर है। लाखों लोग विदेशों में बड़े बड़े ज़मींदार-किसान बन चुके हैं। यक़ीनन हमारे देश के लोगों को उन प्रवासी भारतीयों पर गर्व है जो विदेशों में रहकर भारत का नाम ऊँचा कर रहे हैं। परन्तु जब बात 2004 में सोनिया गाँधी के प्रधानमंत्री बनने की आई तो यही राष्ट्रवादी 'देशभक्त ' उस समय यह कहते फिर रहे थे कि यदि विदेशी महिला प्रधानमंत्री बनी तो सर मुंडा लेंगे,उल्टी चारपाई पर लेटेंगे,भुने चने खाने लगेंगे आदि। इस तंगनज़री का आख़िर क्या जवाब है ? कल्पना कीजिये कि यदि यही रंग भेद व देशी विदेशी की संकीर्ण सोच भारतीयों के विरुद्ध विदेशों में भी पनपने लगी फिर आख़िर हमारे करोड़ों प्रवासी भारतीयों की क्या स्थिति होगी ?

 

जिस तरह विदेशों में भारतीय प्रवासी अपनी सेवायें देकर अपने अपने देशों के विकास व वहां की व्यवस्था में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं ठीक उसी प्रकार देश के किसी भी राज्य का प्रवासी किसी भी राज्य में श्रम कर अपनी रोज़ी रोटी तो कमाता ही है साथ साथ अपना ख़ून पसीना बहाकर वहां के निर्माण,प्रगति व विकास में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। आम तौर पर किसी भी राज्य के आम लोगों को किसी अन्य राज्यवासी से उसके राज्य अथवा धर्म जाति के आधार पर कोई आपत्ति नहीं होती। आम तौर पर ओछी व संकीर्ण राजनीति करने वाले नेता ही केवल अपना व्यापक जनाधार सिमटता देख इस तरह के संकीर्ण विवादों को जन्म देते हैं। परिणाम स्वरूप कभी कभी विशेषकर चुनावी बेला में प्रवासी मुद्दा संकीर्णता व दोहरेपन का शिकार हो जाता है।

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महात्मा गांधी पर अपमानजनक टिप्पणी मामला: अब ठाणे पुलिस ने कालीचरण महाराज को किया गिरफ्तार

ठाणे (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के ठाणे शहर की पुलिस ने महात्मा गांधी के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में हिंदू धर्मगुरु कालीचरण महाराज को छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

 

नौपाड़ा थाने के एक अधिकारी ने बताया कि कालीचरण महाराज को बुधवार रात छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गिरफ्तार किया गया, जहां वह ऐसे ही एक मामले में जेल में बंद था। उसे ट्रांजिट रिमांड पर ठाणे लाया जा रहा है और बृहस्पतिवार शाम तक स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा।

 

इससे पहले, पिछले साल 26 दिसंबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में महात्मा गांधी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने के आरोप में रायपुर पुलिस ने कालीचरण महाराज को गिरफ्तार किया था। वहीं, 12 जनवरी को महाराष्ट्र के वर्धा की पुलिस ने उसे इसी तरह के एक मामले में गिरफ्तार किया था।

 

नौपाड़ा थाने के अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपिता के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता एवं महाराष्ट्र के मंत्री जितेंद्र अव्हाड की शिकायत के आधार पर कालीचरण के खिलाफ दर्ज मामले में रायपुर से उसे गिरफ्तार किया गया।

 

इससे पहले, पुणे पुलिस ने भी 19 दिसंबर 2021 को वहां आयोजित ‘शिव प्रताप दिन’ कार्यक्रम में कथित रूप से भड़काऊ भाषण के मामले में कालीचरण महाराज को गिरफ्तार किया था। छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा मुगल सेनापति अफजल खान को मारे जाने की घटना की याद में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

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जातीय नेतृत्व के कुचक्र में दलित

नई दिल्ली: राजनेताओं और दलों ने डाॅ. भीमराव अंबेडकर और कथित दलित उत्थान की राजनीति को अपने राजनीतिक हितों का साधन और साध्य बना लेने से ज्यादा कुछ नहीं समझा। अतएव जो दलित एक समय मायावती की बसपा के सेवक थे, वे भाजपा और अब समाजवादी पार्टी के दर पर नतमस्तक हो रहे हैं।

 

इनमें ज्यादातर अति पिछड़े और दलित हैं। कमोबेश इसे ही स्वार्थपरक अवसरवादी राजनीति कहते हैं। साफ है, इनके लिए अंबेडकरवादी दर्शन का आदर्श स्व हित से आगे नहीं बढ़ पाया। मायावती ने भी अंबेडकर के जातिविहीन सामाजिक दर्शन को पूंजी और सामंती वैभव के भोग का पर्याय मान लिया। भविष्य में निर्मित होने वाली इन स्थितियों को शायद अंबेडकर ने 1956 में ही भांप लिया था। गोया, उन्होंने आगरा में भावुक होते हुए कहा था कि 'उन्हें सबसे ज्यादा उम्मीद दलितों में पढ़े-लिखे बौद्धिक वर्ग से थी कि वे समाज को दिशा देंगे लेकिन इस तबके ने हताश ही किया है।'

 

दरअसल अंबेडकर का अंतिम लक्ष्य जाति विहीन समाज की स्थापना थी। जाति टूटती तो स्वाभाविक रूप से समरसता व्याप्त होने लग जाती। लेकिन देश की राजनीति का यह दुर्भाग्यपूर्ण पहलू रहा कि नेता सवर्ण रहे हों या अवर्ण जाति, वर्ग भेद को ही आजादी के समय से सत्तारूढ़ होने का मुख्य हथियार बनाते रहे हैं।

 

आज मायावती को सबसे ज्यादा किसी तात्विक मोह ने कमजोर किया है तो वह है, धन और सत्ता लोलुपता। जबकि अंबेडकर इन आकर्षणों से सर्वथा निर्लिप्त थे। भारत ऐसा भुक्तभोगी देश रहा है कि जब वह सोने की चिड़िया कहा जाता था, तब उसे मुगलों ने लूटा और फिर अंग्रेजों ने। अंग्रेजों ने तो भारत के सामंतों और जमींदारों को इतनी निर्ममता से लूटा कि इंग्लैंड के औद्योगिक विकास की नींव ही भारत की धन-संपदा के बूते रखी गई। यहां के किसान और शिल्पकारों से खेती और वस्तु निर्माण की तकनीकें हथियाईं।

 

भारत के भौगोलिक विस्तार की सीमाएं सिमट जाने का कारण भी पूंजी का निजीकरण और सामंतों की भोग-विलासी जीवन शैली रही है। दुर्भाग्य से स्वतंत्र भारत में भी प्रशासनिक व्यवस्था में यही दुर्गुण समाविष्ट होकर देश को दीमक की तरह चाट रहा है। दलित नेता व अधिकारी भी अधिकार संपन्न होने के बाद उन्हीं कमजोरियों की गिरफ्त में आते गए। इसीलिए अगड़े-पिछड़ों का खेल और दल-बदल की महिमा मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कुटिल मंशा से आगे नहीं बढ़ पाई। यही वजह रही कि उत्तर-प्रदेश जैसे जटिल, धार्मिक व सामाजिक संरचना वाले राज्य में चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती आज चुनावी सरगर्मियों के बीच मौन व उदासीन हैं। यह उनकी राजनीतिक निष्क्रियता की घोषणा तो है ही, कालांतर में नेपथ्य में चले जाने का संकेत भी है। वरना, एक समय ऐसा भी था, जब इस दलित नेत्री से बसपा को अखिल भारतीय बना देने की उम्मीद की जा रही थी और दलितों में यह उम्मीद मायावती ने ही जगाई थी कि संगठन वह शक्ति है, जो प्रजा को राजा बना सकती है।

 

बहुजन समाज पार्टी का वजूद खड़ा करने से पहले कांशीराम ने लंबे समय तक डीएस-4 के माध्यम से दलित हितों के लिए संघर्ष किया था। इसी डीएस-4 का सांगठनिक ढांचा स्थापित करते समय बसपा की बुनियाद पड़ी और समूचे हिंदी क्षेत्र में बसपा के विस्तार की प्रक्रिया आरंभ हुई। कांशीराम के वैचारिक दर्शन में दलित और वंचितों को करिश्माई अंदाज में लुभाने का चुंबकीय तेज था। फलस्वरूप बसपा एक मजबूत दलित संगठन के रूप में स्थापित हुई और उत्तर-प्रदेश में चार बार सरकार बनाई। अन्य प्रदेशों में बसपा के विधायक दल-बदल के खेल में भागीदार बनकर सरकार बनाने में सहायक बने। किसी दल का स्पष्ट बहुमत नहीं होने पर समर्थन का टेका लगाने का काम भी किया। केंद्र में मायावती यही भूमिका अभिनीत करके राज्यसभा सांसद बनती रहीं। इन साधनों के साध्य के लिए मायावती ने सामाजिक अभियांत्रिकी (सोशल इंजीनियरिंग) जैसे बेमेल प्रयोगों का भी सहारा लिया। इन प्रयोगों का दायित्व किसी दलित को सौंपने की बजाय, सनातनी ब्राह्मण सतीष मिश्रा के सुपुर्द किए। मसलन सत्ता प्राप्ति के लिए जातीय समीकरण बिठाने में मायावती पीछे नहीं रहीं।

 

अंबेडकर ने जाति विहीन समाज की पुरजोर पैरवी की थी। लेकिन कर्मचारी राजनीति के माध्यम से जातिगत संगठन बसपा की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले कांशीराम ने अंबेडकर के दर्शन को दरकिनार कर कहा कि 'अपनी-अपनी जातियों को मजबूत करो।' यह नारा न केवल बसपा के लिए प्रेरणास्रोत बना बल्कि मंडलवादी मुलायम सिंह, लालू प्रसाद, शरद यादव और नीतीश कुमार ने भी इसे अपना-अपना, परचम फहराने के लिए सिद्ध मंत्र मान लिया। गोया, इन नेताओं ने अंबेडकर द्वारा स्थापित जाति तोड़ो आंदोलन को जाति सुरक्षा आंदोलन में बदल दिया। इसीलिए मंडल आयोग की पिछड़ी जातियों को आरक्षण की सिफारिशें मान लेने के बाद अब जातिगत जनगणना की बात पुरजोरी से उठाई जा रही है, जिससे संख्या बल के आधार पर जातिगत आरक्षण व्यवस्था सरकारी नौकरियों के साथ-साथ विधायिका में भी की जा सके।

 

सतीश मिश्रा के बसपा में आगमन के बाद सामाजिक अभियांत्रिकी का बेमेल तड़के का सिलसिला तो शुरू हुआ ही, जिन लोगों को मायावती मनुवादी कहकर ललकारा करती थीं, उन्हीं मनुवादियों के कर्मकांड बसपा के मंचों पर सत्ता प्राप्ति के लिए अनिवार्य अनुष्ठान बन गए। चुनावी साभाओं में हवन कुंड बनाए जाने लगे और वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ भगवान परशुराम के सोने-चांदी के फरसे प्रतीक के रूप में मायावती को भेंट किए जाने लगे। 'तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार' का जो नारा ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को बतौर गाली दिया जाता था, 'वह हाथी नहीं गणेश हैं, ब्रह्मा, विष्णु, महेश हैं' के सनातनी संस्कार में बदल गया।

 

मायावती ब्राह्मणों की लाचारी दूर करने के बहाने कहने लगीं, 'ब्राह्मण हशिए पर चले गए हैं, इसलिए उनकी खोई गरिमा लौटाने का काम हम करेंगे।' इस गौरव के पुनर्वास के लिए मायावती ने 2017 में उत्तर-प्रदेश के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री रहते हुए विधानसभा से आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव का टोटका रचकर भारत सरकार को कानून बनाने के लिए भेजा। स्वार्थपूर्ति के लिए किए जाने वाले इन आडंबरों से पता चलता है कि हमारे निर्वाचित जनप्रतिनिधि जिस संविधान के प्रति निष्ठा व अक्षरश: पालन की शपथ लेते हैं, उसे पढ़ने-समझने की आवश्यकता ही अनुभव नहीं करते।

 

यहीं नहीं वे जिस दल के सदस्य होते हैं और उस दल के जिस नेता के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर, उनके गुणगान करने में थकते नहीं हैं, अमूमन उसी व्यक्ति की विचार-प्रक्रिया को पलीता लगाते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में अंबेडकर की चिंता ठीक थी कि 'मेरी चिंता इस बात के अहसास से गहरी हो जाती है कि जातिवाद और पंथवाद के रूप में मौजूद भारत की बुराइयों व कुरीतियों के कारण विभिन्न राजनीतिक दल अस्तित्व में आ सकते हैं।' आज देश में करीब 1400 राजनीतिक दल हैं, जिनका प्रमुख आधार धर्म, जाति और क्षेत्रवाद है।

 

देशभर में दलितों की आबादी 16 प्रतिशत है। पंजाब में 30, पश्चिम बंगाल में 23, उत्तर-प्रदेश में 21 और महाराष्ट्र में 10.5 फीसदी दलित आबादी है। चूंकि अंबेडकर महाराष्ट्र से थे, इसलिए ऐसा माना जाता है कि सबसे ज्यादा दलित चेतना महाराष्ट्र में है। दलित आंदोलनों की भूमि भी महाराष्ट्र रहा है। डाॅ. अंबेडकर ने यहीं रिपब्लिकन ऑफ इंडिया (आरपीआई) राजनीतिक दल का गठन किया था। लेकिन इस पार्टी के अब तक करीब 50 विभाजन हो चुके हैं। इसके कर्ताधर्ता अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर हैं। इसी दल से निकले रामदास अठावले ने अपनी पार्टी आरपीआई-ए गठित की हुई है। उनकी मंशा भाजपा-शिवसेना तो कभी कांग्रेस-एनसीपी को समर्थन देकर सत्ता में बने रहने की रही है। यही पदलोलुपता महाराष्ट्र में दलित वर्ग को सबसे ज्यादा असंगठित किए हुए है।

 

इस नाते मायावती के इस करिश्मे को मानना पड़ेगा कि वे उत्तर-प्रदेश में अपना 22 प्रतिशत वोट 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में स्थिर रखने में सफल रही हैं। हालांकि 2014 में बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाई। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें लगभग इतना ही वोट मिला था। इसी वोट की माया रही कि अगड़े और पिछड़े थैलियां लेकर उनसे बसपा का टिकट लेने की कतार में लगे रहे। किंतु अब यह मिथक टूटने को आतुर दिखाई दे रहा है। इस एक जातीय कुचक्र के टूटने भर से अन्य राजनीतिक दलों का जातिगत कुचक्र भी टूटेगा, ऐसा फिलहाल नहीं लग रहा है। गोया, जातीय गठबंधन के कुचक्र बने रहेंगे।

 

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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युगों-युगों तक सूर्य की तरह प्रकाशमान रहेगा स्वामी विवेकानंद का जीवन दर्शन

(स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी पर विशेष)

1893 में 11 सितंबर को स्वागत संबोधन से लेकर 27 सितंबर के अंतिम भाषण तक में भारत से गए गेरुआ वस्त्रधारी एक 30 वर्षीय युवक ने दुनिया के नक्शे पर लंबे समय से अग्रिम पंक्ति में शामिल अमेरिका में जाकर जब भारतीय धर्म, संस्कृति, आध्यात्म पर हिन्दी में कुछ ऐसा विचार रखा कि वह विचार ना केवल उस समय दुनिया में प्रासंगिक हुए, वरन 125 साल बाद भी दुनिया भर में उसकी चर्चा होती है तथा भारतीय अध्यात्म के स्वर्ण अक्षरों में सदियों-सदियों तक दर्ज रहेगा।

 

विवेकानंद नाम के उस युवक ने शिकागो के विश्व धर्म संसद में स्वागत से लेकर अंतिम दिन तक हिंदुस्तान की व्याख्या किया तो दुनिया चौंक उठा। तभी तो आज भी स्वामी विवेकानंद युवाओं के आदर्श हैं, दुनिया का सबसे बड़ा छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सहित राष्ट्रवाद और युवा को लेकर बनाए गए संघ-संगठन स्वामी विवेकानंद से संबंधित कार्यक्रम करते रहते हैं, उनके जन्म दिवस पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। युवाओं के प्रेरक, भारतीय संस्कृति के अग्रदूत, विश्वधर्म के उद्घोषक, व्यावहारिक वेदांत के प्रणेता, वैज्ञानिक अध्यात्म के भविष्यद्रष्टा स्वामी विवेकानंद को चिर निंद्रा में सोए 120 वर्ष पूरा होने को हैं। लेकिन उनका हिमालय-सा उत्तुंग व्यक्तित्व आज भी युगाकाश पर उज्जवलीमान सूर्य की तरह प्रकाशमान है। उनका जीवन दर्शन आज भी उतना ही उत्प्रेरक एवं प्रभावी है, जितना सौ वर्ष पूर्व था। बल्कि उससे भी अधिक प्रासंगिक बन गया है। तब राजनीतिक पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ी मां भारती के दीन-दुर्बल संतानों को इस योद्धा सन्यासी की हुंकार ने अपनी कालजयी संस्कृति की गौरव गरिमा से परिचय कराया था। विश्वमंच पर भारतीय धर्म एवं संस्कृति के सार्वभौम संदेश की गर्जना से विश्व चमत्कृत हो उठा था, आज हम राजनीतिक रूप से स्वतंत्र होते हुए भी बौद्धिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक रूप से गुलाम हैं। आज देश भौतिक-आर्थिक रूप से प्रगति कर रहा है, समृद्ध होते एक बड़े वर्ग की खुशहाली को देखकर इसका आभास होता है और उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में इसका वैश्विक आकलन और यहां की प्रतिभाओं का वर्चस्व भी आश्वस्त करता है। लेकिन प्रगतिशील इंडिया और आम इंसान के गरीब भारत के बीच विषमता की जो खाई है, उसे पाटे बिना देश की समग्र प्रगति की तस्वीर अधूरी ही रहेगी।

 

विवेकानंद की विचारों को आत्मसात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस खाई को पाट रहे हैं, दुनिया में भारतीय संस्कृति का झंडा बुलंद कर रहे हैं। क्योंकि, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक पराधीनता से मुक्त युवा शक्ति ही उस स्वप्न को साकार कर पाएगी, इसके लिए आध्यात्मिक उत्क्रांति की जरूरत है। स्वामी विवेकानंद का जीवन अपने प्रचंड प्रेरणा-प्रवाह के साथ युवाओं को इस पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। हर युग में स्वामी विवेकानंद के वाक्यों को मंत्रवत ग्रहण करते हुए कितने ही युवा अपना जीवन व्यापक जनहित एवं सेवा में अर्पित करते रहे हैं। अनेक युवा उनके सम्मोहन में बंधकर आदर्शोन्मुखी जीवनधारा की ओर मुड़ रहे हैं। स्वामी विवेकानंद के शब्दों में सबसे पहले हमें स्वस्थ एवं वलिष्ठ शरीर की जरूरत है और बाकी चीजें बाद में आवश्यक हैं। कमजोर और रुग्ण शरीरवाला अध्यात्म के मर्म को क्या समझ पाएगा। युवाओं को लोहे की मांसपेशियों की जरूरत है और साथ ही ऐसी नस-नाड़ियों की जरूरत जो फौलाद की बनी हो। स्वामी विवेकानंद कहते थे कि शरीर के साथ नस-नाड़ियों के फौलादीपन से तात्पर्य मनोबल, आत्मबल से है, जो चरित्र का बल है। संकल्प ऐसा महान हैं जिसे कोई भी बाधा रोक नहीं सके, जो अपने लक्ष्यसंधान के लिए ब्रह्मांड के बड़े-से-बड़े रहस्य का भेदन करने के लिए तत्पर हो, चाहे इसके लिए सागर की गहराइयों में ही क्यों नहीं उतरना पड़े और मृत्यु का सामना ही क्यों नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा था कि स्वधर्म के साथ युगधर्म का बोध भी आवश्यक है, अपने कल्याण के साथ राष्ट्र, पीड़ित मानवता की सेवा जीवन का अभिन्न अंग बनें। ऐसा धर्म किस काम का, जो भूखों का पेट नहीं भर सके। अगले एक सौ वर्षों तक हमें किसी भगवान की जरूरत नहीं है। क्योंकि गरीब, पीड़ित, शोषित, अज्ञानग्रस्त, पिछड़ा समुदाय ही भगवान है। लानत है ऐसे शिक्षितों पर जो उनके आंसू नहीं पोंछ सकें, जिनके बल पर इस जीवन की दक्षता को हम अर्जित करते हैं। ऐसी विषम परिस्थिति में उम्मीद है उन युवाओं से जिनकी एकमात्र पूंजी भाव संवेदना तथा आदर्श प्रेम है, ऐसे समर्पित युवा ही ईश्वरीय योजना का माध्यम बनेंगे। उन्हें वह सूझ और शक्ति मिलेगी कि वे कुछ सार्थक कार्य कर सकें। वही अपने उच्च चरित्र, सेवाभाव और विनय द्वारा देश, समाज एवं विश्व का कुछ भला कर सकेंगे। जब मेरा शरीर नहीं रहेगा तो मेरी आत्मा उनके साथ काम करेगी। स्वामी विवेकानंद द्वारा कहे गए यह शब्द आज भी एक आह्वान के रूप में महसूस किए जा सकते हैं। धर्म का सार दो शब्दों में समाहित करते हुए स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि सच्चाई एवं अच्छाई का रास्ता विश्व का सबसे फिसलन भरा एवं कठिन मार्ग है। कितने सारे लोग इसके रास्ते में ही फिसल जाते हैं, बहक-भटक जाते हैं और कुछ मुट्ठीभर इसके पार चले जाते हैं। अपने उच्चतम ध्येय के प्रति मृत्युपर्यंत निष्ठा ही चरित्रबल और अजेय शक्ति को जन्म देती है। यह शक्ति निस्संदेह सत्य की होती है, यही सत्य संकटों में, विषमताओं में, प्रतिकूलताओं में रक्षा कवच बनकर दैवी संरक्षण देता है। इसके समक्ष धन, ऐश्वर्य, सत्ता, समस्त विद्याएं एवं सिद्धियां तुच्छ हैं, तीनों लोकों का वैभव भी इसके सामने कुछ नहीं है। चरित्र की शक्ति अजेय है, अपराजेय है, लेकिन यह एक दिन में विकसित नहीं होता है, हजारों ठोकरें खाते हुए इसका गठन करना होता है। जब चरित्र विकसित हो जाता है तो एक व्यक्ति में पूरे विश्व-ब्रह्मांड के विरोध का सामना करने की शक्ति पूर्ण प्रवाह से आ जाती है, आज जरूरत ऐसे ही चरित्रनिष्ठ युवाओं की है।

 

स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि मुझे ऐसे मुट्ठीभर भी युवक-युवतियां मिल जाएं तो समूचे विश्व को हिला दूंगा। ऐसे पवित्र और निस्वार्थ युवा ही किसी राष्ट्र की सच्ची संपत्ति हैं, आदर्श के प्रति समर्पित आत्मबलिदानी युवाओं की आज जरूरत है, जो लक्ष्यहित के लिए बड़ा से-बड़ा त्याग करने के लिए तैयार हों। अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद ने किशोरावस्था के ऊहापोह का चित्रण करते हुए कहा था कि युवावस्था में मैं भी निर्णायक मोड़ पर था, निर्णय नहीं कर पा रहा था कि सांसारिक जीवनयापन करूं या गुरु के बताए मार्ग पर चलूं। अंत में निर्णय गुरु के पक्ष में गया, जिसमें राष्ट्र एवं व्यापक विश्वमानव का हित निहित था और मैंने अर्पित जीवन के पक्ष में निर्णय लिया। खून से लथपथ हृदय को हाथ में लेकर चलना पड़ता है, तब जाकर महान कार्य सिद्ध होते हैं। बिना त्याग के किसी बड़े कार्य की आशा नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा था जीवन में किसी एक आदर्श का होना जरूरी है। इसी आदर्श को जीवनलक्ष्य बना दें, इस पर विचार करें, इसका स्वप्न लेकर अपने रोम-रोम में समाहित कर लें, जीवन का हर पल इससे ओत-प्रोत रहे। गहराई में उतरना होगा, तभी हम जीवन का कुछ सार तत्त्व पा सकेंगे और जग का भला कर पाएंगे। पहले स्वयं पर विश्वास करना होगा, फिर भगवान एवं दूसरों पर। अपने विश्वास पर दृढ़ रहें, बाकी सब अपने आप ठीक होता जाएगा। 

By : सुरेन्द्र कुमार ''किशोरी

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धर्म संसद में दिए गए नफरत भरे भाषणों के खिलाफ याचिका की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट सहमत

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को हरिद्वार में धर्म संसद में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ दिए गए नफरत भरे भाषणों के संबंध में आपराधिक कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तत्काल सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया। सिब्बल ने प्रस्तुत किया, हम अलग-अलग समय में रह रहे हैं जहां देश में नारे सत्यमेव जयते से बदल गए हैं।

 पीठ ने सिब्बल से कहा, हम इस पर गौर करेंगे। पीठ ने सिब्बल से यह भी पूछा कि क्या कुछ जांच चल रही है? सिब्बल ने जवाब दिया कि प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और कहा कि अदालत के हस्तक्षेप के बिना कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

 

संक्षिप्त सुनवाई के बाद, पीठ मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गई।

 

याचिकाकतार्ओं - एक पत्रकार, एक न्यायाधीश, और एक सुप्रीम कोर्ट के वकील - ने शीर्ष अदालत का रुख कर पिछले साल 17-19 दिसंबर के बीच अलग-अलग दो कार्यक्रमों में दिए गए घृणास्पद भाषणों से संबंधित मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इनमें से एक कार्यक्रम हरिद्वार में आयोजित किया गया था, जहांकथित तौर पर, कई हिंदू धार्मिक नेताओं, जिन्होंने सभा को संबोधित किया। समुदाय से मुसलमानों के खिलाफ हथियार उठाने का आह्वान किया गया था। याचिका में एक एसआईटी द्वारा मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषणों की घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

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केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने किया अटल बिहारी की विशाल प्रतिमा का अनावरण

फ़िरोज़ाबाद : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर फिरोजाबाद पहुंचे केंद्रीय संसदीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अष्टधातु से बनी अटल जी की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया. इस दौरान वहां उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की मंशा के मुताबिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाने का काम भाजपा सरकार में हो रहा है. 


पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर फिरोजाबाद पहुंचे केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अष्टधातु से बनी अटल जी की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया. इस दौरान वहां उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की मंशा के मुताबिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाने का काम भाजपा सरकार में हो रहा है. लेकिन कुछ लोगों के पेट मे राष्ट्रवाद के कारण दर्द भी हो रहा है. फिरोजाबाद शहर के बीचों बीच टीबी वार्ड के मैदान में अमृत योजना के तहत अटल पार्क स्थापित किया गया है. यहां करीब दो करोड़ की लागत से बने पार्क में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 12 फीट की विशालकाय प्रतिमा स्थापित की गई है 20 लाख की मूर्ति अमृत योजना के तहत नगर निगम फिरोजाबाद द्वारा अटल पार्क का निर्माण कराया गया है. फिरोजाबाद नगर निगम की महापौर श्रीमती नूतन राठौर और सदर विधायक मनीष असीजा के प्रयास से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को यादगार बनाने के लिए आज के दिन इस प्रतिमा का अनावरण का कार्यक्रम रखा गया था


. इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शिरकत की. इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने 75 किलो की केक भी काटी.वहीं, मीडिया से रूबरू हुए केंद्रीय मंत्री ने बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर से भाजपा पर हिन्दू वोटों के धुर्वीकरण संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि मायावती लड़ाई से बाहर है. इसलिए अनर्गल बयानबाजी कर रही है. अयोध्या में राम मंदिर के आसपास की जमीन को भाजपा के नेताओं व अफसरों के खरीदे जाने संबंधी मामले पर उन्होंने कहा कि यह आरोप पहले भी लग चुके हैं. लेकिन इनमें कोई सच्चाई नहीं है. उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रवाद का काम हो रहा है तो कुछ लोगों के पेट मे दर्द हो रहा है.



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सीआरपीएफ पासिंग आउट परेड: 117 जवानों ने ली देश सेवा की शपथ

गुरुग्राम : केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कुल 117 प्रत्यक्ष रूप से नियुक्त राजपत्रित अधिकारी (डीएजीओ) गुरुवार को कादरपुर में सीआरपीएफ अकादमी से पास आउट हुए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।


सीआरपीएफ ने एक बयान में कहा कि इस अवसर को चिन्हित करने के लिए परेड के साथ एक समारोह आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्र की सेवा करने की शपथ ली गई। इस कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।


मंत्री नित्यानंद राय ने सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारियों के 52वें बैच की दीक्षांत परेड की सलामी ली। 52वें बैच में देश के 21 राज्यों की 3 महिला अधिकारियों सहित 117 प्रशिक्षु शामिल रहे।


राय के अलावा इसमें सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों ने भी भाग लिया।


बयान में कहा गया है कि मंत्री ने अपने संबोधन में नए अधिकारियों को शानदार करियर के लिए शुभकामनाएं दीं।


सीआरपीएफ को वीरता, ईमानदारी, बलिदान और भक्ति का प्रतीक बताते हुए, मंत्री ने राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए इन नए नियुक्त होने वाले अधिकारियों की क्षमताओं में अपने विश्वास की पुष्टि की।


बैच का शैक्षणिक प्रोफाइल प्रौद्योगिकी उन्मुख है, क्योंकि इसमें 91 ऐसे अधिकारी हैं जिनके पास इंजीनियरिंग से संबंधित डिग्री है।


सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह ने इस कार्यक्रम में राय की उपस्थिति के लिए उनका आभार व्यक्त किया। बयान में कहा गया है कि उन्होंने नई और लगातार विकसित होने वाली आंतरिक सुरक्षा गतिशीलता से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बल की दृढ़ निष्ठा और प्रतिबद्धता की पुष्टि की।


उन्होंने नव नियुक्त अधिकारियों के लिए जिम्मेदारियों और चुनौतियों का वर्णन करते हुए उन्हें बल में उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।




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प्रदीप कुमार चीन में होंगे भारत के नये राजदूत

नई दिल्ली : वरिष्ठ राजनयिक प्रदीप कुमार रावत को सोमवार को चीन का अगला राजदूत नियुक्त किया गया।


भारतीय विदेश सेवा के 1990 बैच के अधिकारी रावत फिलहाल नीदरलैंड में भारतीय दूत के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं।


विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, ‘‘ उनके शीघ्र ही नई जिम्मेदारी संभाल लेने की संभावना है।’’


रावत विकरम मिश्री की जगह लेंगे। उनकी नियुक्ति पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर चल रह टकराव के बीच हुई है। वह पहले हांगकांग और बीजिंग में काम कर चुके हैं।


रावत ने सितंबर, 2017 से दिसंबर, 2020 तक इंडोनेशिया एवं तिमोर-लेस्ते में राजदूत के रूप में अपनी सेवा दी है। वह धाराप्रवाह चीनी भाषा बोलते हैं।





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50वें विजय दिवस पर मोदी ने 1971 के युद्ध के शहीदों को नमन किया

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहादत देने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों के पराक्रम और बलिदान को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘50वें विजय दिवस पर मैं मुक्तियोद्धाओं, वीरांगनाओं और भारतीय सशस्त्र बलों के वीर जवानों की वीरता और बलिदान को याद करता हूं। साथ मिलकर हमने दमनकारी ताकतों से लड़ाई लड़ी और विजय हासिल की। ढाका में राष्ट्रपति जी की उपस्थिति प्रत्येक भारतीय के लिए विशेष महत्व रखती है।’’


ज्ञात हो कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 50वें विजय दिवस पर आयोजित समारोहों में भाग लेने बांग्लादेश गए हैं। 1971 में आज ही के दिन पूर्वी पाकिस्तान के चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर लेफ्टिनेंट जनरल आमिर अब्दुल्ला खान नियाजी और पूर्वी पाकिस्तान में स्थित पाकिस्तानी सैन्य बलों के कमांडर ने बांग्लादेश के गठन के लिए ‘इंन्स्ट्रूमेंट ऑफ सरेंडर’ पर हस्ताक्षर किए थे।


नियाजी ने ढाका में भारतीय और बांग्लादेश बलों का प्रतिनिधित्व कर रहे जगजीत सिंह अरोरा की उपस्थिति में ये हस्ताक्षर किए थे। 1971 में नौ महीने तक चले युद्ध के बाद बांग्लादेश अस्तित्व में आया।




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कांग्रेस ने सरदार पटेल की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के कई अन्य नेताओं ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि पर बुधवार को उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश के प्रति उनके योगदान को याद किया। राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘सरदार पटेल की पुण्यतिथि पर उन्हें मेरी श्रद्धांजलि। उनके जैसे राष्ट्र निर्माताओं ने ही इस खूबसूरत देश को बनाया है। हमें भारत की इस भावना को संजोए रखने के लिए एकजुट होना होगा।’’ कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिये सरदार पटेल को याद किया। उसने कहा, ‘‘सरदार पटेल एकता की अहमियत समझते थे। जब एकीकरण की बात आई, तो उन्होंने विनम्रता से; कठोरता से, संयम से हर वह फैसला किया, जो देश को एकजुट कर सके। हमारी जिम्मेदारी है कि हम सरदार पटेल के सपने को न टूटने दें।’’ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ‘‘महात्मा गांधी के सिद्धांतों के प्रबल अनुयायी, सरदार वल्लभ भाई पटेल ने स्वतंत्रता के पश्चात भारत के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री व पहले उप प्रधानमंत्री, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन।’’







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कुन्नूर में लोगों ने हेलीकॉप्टर दुर्घटनास्थल पर स्मारक बनाने की अपील

उधगमंडलम (तमिलनाडु) : तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के कुन्नूर में वेलिंगटन छावनी के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से देश के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) बिपिन रावत और अन्य सैनिकों की याद में स्मारक बनाने की अपील की।


भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह और सशस्त्र बलों के 10 अन्य कर्मियों की आठ दिसंबर को कुन्नूर के पास हेलीकॉप्टर हादसे में मृत्यु हो गई थी।


यहां की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखे हैं। पत्र में कहा गया कि कुन्नूर के समीप नंजप्पासथीरम में इस दुर्घटना से शोक की लहर है। शहीद सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए तमिलनाडु राजस्व विभाग के उस स्थल पर एक स्मारक बनाया जाना चाहिए ताकि जनता उन्हें श्रद्धांजलि दे सके।




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हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हुए पांच और सैन्यकर्मियों के शवों की पहचान की गई

नई दिल्ली : तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हुए पांच और सैन्य कर्मियों के शवों की पहचान कर ली गई है और उन्हें उनके गृह नगरों में भेजा जा रहा है। सैन्य अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।


अधिकारियों ने बताया कि शेष शवों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिन सैन्य कर्मियों के पार्थिव शरीरों की पिछले कुछ घंटों में पहचान की गई है, वे हैं- जूनियर वारंट ऑफिसर (जेडब्ल्यूओ) प्रदीप, विंग कमांडर पी एस चौहान, जेडब्ल्यूओ राणा प्रताप दास, लांस नायक बी साई तेजा और लांस नायक विवेक कुमार।


सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘पांचों सैन्य कर्मियों के पार्थिव शरीरों को आज सुबह उनके पारिवारिक सदस्यों के पास भेजा जा रहा है।’’


अधिकारियों ने बताया कि पांचों सैन्य कर्मियों के शवों का उचित सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने के लिए उन्हें हवाई मार्ग से उनके गृह नगरों में भेजा जा रहा है।


भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और जनरल रावत के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर एल एस लिद्दर का शुक्रवार शाम दिल्ली के बरार स्क्वेयर श्मशान घाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।


तमिलनाडु में बुधवार को सेना के एमआई17वी5 हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण जनरल रावत, उनकी पत्नी , ब्रिगेडियर लिद्दर और 10 अन्य रक्षा कर्मियों की मौत हो गई थी। सभी शवों को दुर्घटना के एक दिन बाद बृहस्पतिवार शाम को तमिलनाडु के सुलूर से दिल्ली लाया गया था। जिन शवों की पहचान नहीं हुई है, उन्हें दिल्ली छावनी के आर्मी बेस अस्पताल के शवगृह में रखा गया है।




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दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को लॉर्ड बुद्धा इंडिया पीस एंड टूरिज्म मित्र अवार्ड से सम्मानित किया गया

नई दिल्ली : दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री श्री राजेंद्र पाल गौतम को 10 दिसंबर को एसोसिएशन ऑफ बौद्ध टूर ऑपरेटर्स (एबीटीओ) द्वारा लॉर्ड बुद्धा इंडिया पीस एंड टूरिज्म मित्र अवार्ड 2021 से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार ने मानवता, शांति, प्रकृति, संस्कृति और दुनिया भर में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के प्रचार के लिए उनके उत्कृष्ट कार्य को मान्यता दी।


एबीटीओ द्वारा बोधगया में पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया था। जिसमें विभिन्न देशों और राज्यों के 200 से अधिक विद्वान, व्यापार भागीदार और 50 से अधिक प्रदर्शक उपस्थित थे। इस अवसर पर मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम मुख्य अतिथि थे।


पुरस्कार ग्रहण करने के बाद राजेंद्र पाल गौतम ने डॉ. बीआर अम्बेडकर को अंबेडकर नेशनल मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मिशन जय भीम और अन्य संगठनों के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। जिन्होंने उन्हें उनके पुरस्कार के लिए बधाई दी।


इस अवसर पर मंत्री श्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा जब तक जाति रहेगी तब तक उत्पीड़न रहेगा। जाति की वजह से हजारों साल तक देश के करोड़ों लोगों ने उत्पीड़न झेला है, वह शोषण के शिकार रहे हैं, शिक्षा व्यापार और संपत्ति से वंचित रहे हैं। डॉ बाबासाहेब अंबेडकर जी ने हजारों साल की गुलामी से उन्हें आज़ाद करा कर उनके पढ़ने लिखने  नौकरियों और विकास के रास्ते खोल दिए है। किंतु आज भी देश के कोने-कोने में जातिगत उत्पीड़न जारी है। विषमता पर आधारित व्यवस्था बार-बार ऐसी घटनाएं करती है जिससे देश शर्मसार होता है। हमने संकल्प किया है कि भारत में समतामूलक समाज की स्थापना करनी है। जब तक देश के अंदर क्षमता मैत्री व भाईचारे पर आधारित न्यायपूर्ण समाज की स्थापना में हो जाए जब तक सबको समान रूप से आगे बढ़ने का अवसर न मिल जाए तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।


राजेंद्र पाल गौतम, अम्बेडकर-वादी हैं। जिन्होंने भारत में दलितों और उत्पीड़ित वर्गों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ पूरा किया और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले 450 बच्चों की शिक्षा को प्रायोजित किया। अपने प्रारंभिक सक्रियता के दिनों में, वह समता सैनिक दल' के सदस्य बन गए। जिसकी स्थापना डॉ. बीआर अम्बेडकर ने की थी। जिसमें उन्होंने भारत में उत्पीड़ित जाति और वर्गों के खिलाफ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।


दिल्ली सरकार में चुनाव लड़ने और समाज कल्याण मंत्री बनने के बाद वह जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना जैसी विभिन्न योजनाओं के सूत्रधार रहे हैं। इस योजना के तहत  एससी / एसटी / ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के बच्चों की निजी कोचिंग फीस दिल्ली सरकार देती है। उनके नेतृत्व में, दिल्ली सरकार ने हाथ से मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करने के लिए हाथ से मैला ढोने वालों को मशीनें और सुरक्षात्मक गियर प्रदान करके सीवर सफाई मशीनें भी शुरू कीं।


मिशन जय भीम के माध्यम से आज राजेंद्र पाल गौतम भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को भारत और दुनिया के कोने-कोने तक ले जा रहे हैं। डॉ. बीआर अंबेडकर से प्रेरणा लेकर 10 करोड़ लोगों को बौद्ध धर्म के दायरे में लाने का लक्ष्य।



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जनरल विपिन रावत के निधन पर सिख समाज दुःखी, गुरूद्वारा में हुई अरदास

लखनऊ : तमिलनाडू के कुन्नूर हेलीकॉप्टर हादसे में सीडीएस जनरल विपिन रावत, उनकी पत्नी व अन्य सैन्य अधिकारियों के आकस्मिक निधन पर लखनऊ के सिख समाज ने उनकी आत्मा की शांति के लिए शुक्रवार को अरदास की।


सिख समाज ने जनरल रावत के न रहने पर शोक प्रकट किया है। उधर हादसे में जीवित बच गए सैन्य अधिकारी कैप्टन वरूण सिंह की सलामती के लिए गुरु के दरबार में प्रार्थना भी की।


यहियागंज स्थित ऐतिहासिक श्रीगुरू तेग बहादुर साहिब गुरूद्वारा में सुबह अरदास हुई। ज्ञानी परमजीत सिंह ने अरदास की। दिवंगत सैन्य अधिकारियों की आत्मा की शांति के लिए अरदास करवाई। इसके अलावा हादसे में जीवित बच गए कैप्टन वरून सिंह के पूर्णरूप से स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना भी की ।


इस अवसर पर सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने कहा कि जनरल विपिन रावत एक योद्धा थे। वे सैन्य अधिकारी हमारे देश के रक्षक थे। उनके निधन से देश की बहुत बड़ी क्षति हुई है। देश आज शोकाकुल है। उन्होंने बताया कि बताया कि इस मौके पर कोषाध्यक्ष गुलशन जौहर सहित अन्य लोग भी अरदास में शामिल हुए। अध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने भी शोक प्रकट किया।





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शाह, डोभाल और राहुल गांधी ने सीडीएस रावत, उनकी पत्नी को अंतिम श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत के पार्थिक शरीरों पर शुक्रवार को पुष्पांजलि अर्पित की।


तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार को एमआई17वी5 हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से जनरल रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य रक्षाकर्मियों की मौत हो गई।


जनरल रावत और उनकी पत्नी के पार्थिव शरीरों को अंतिम संस्कार से पहले यहां उनके आधिकारिक आवास पर रखा गया था।


जनरल रावत के आवास के बाहर लोगों ने ‘भारत माता की जय’, ‘जनरल रावत अमर रहें’ और ‘उत्तराखंड का हीरा अमर रहे’ के नारे लगाए।


उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता रवि शंकर प्रसाद और भारत में ब्रिटेन के राजदूत अलेक्जेंडर एलिस समेत कई अन्य नेताओं ने भी जनरल रावत और उनकी पत्नी को श्रद्धांजलि दी।


पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी, द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता कनिमोई, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, भाजपा नेता बैजयंत जय पांडा, दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने भी रावत और उनकी पत्नी को श्रद्धांजलि अर्पित की।


एंटनी ने कहा, ‘‘यह एक महत्वपूर्ण समय में देश को हुई एक त्रासदीपूर्ण और अपूरणीय क्षति है।’’


राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जनरल रावत को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें एक ‘‘अच्छा व्यक्ति’’ बताया।


केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अंतिम श्रद्धांजलि देने के बाद कहा, ‘‘यह देश का नुकसान है। वह देश का गौरव थे।’’


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी जनरल रावत और उनकी पत्नी के पार्थिव शरीरों पर पुष्पांजलि अर्पित की।


देश के पहले सीडीएस जनरल रावत को तीनों सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और वह पिछले दो वर्ष से कड़े रुख एवं विशिष्ट समय सीमा के साथ इस कार्य को आगे बढ़ा रहे थे।






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जनरल बिपिन रावतः हवाएं खुद तुम्हारा तराना गाएंगी

प्रशंसा और चापलूसी से दूर रहने वाले अप्रतिम योद्धा एवं तीनों सेनाओं के समन्वयक (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) बिपिन रावत ने एक टीवी कार्यक्रम में कहा था कि 'खामोशी से बनाते रहो पहचान अपनी, हवाएं खुद तुम्हारा तराना गाएंगी।' तमिलनाडू में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में शहादत के बाद बिपिन रावत की उपलब्धियों के तराने पूरा देश गा रहा है। जनरल रावत भारतीय सेना के तीनों अंगों को नवीनतम तकनीक और शक्तिशाली हथियारों के साथ 21वीं सदी में ले जाने के सपने देखते रहे। इसीलिए उन्होंने सेना की प्रतिरक्षात्मक संरचना में अनेक बदलाव किए और सेना को सांगठनिक रूप से मजबूती दी। उनकी सैन्य बल संबंधी परिकल्पनाओं को परिणाम तक पहुंचाने के लिए ही थल, वायु और नभ सेनाओं में समन्वय बनाए रखने की दृष्टि से सीडीएस का पद भारत सरकार ने सृजित किया और इसकी दो साल पहले जिम्मेदारी जनरल बिपिन रावत को सौंपी। इस चुनौती को न केवल उन्होंने स्वीकारा, बल्कि गरिमा भी प्रदान की। दरअसल सीमांत इलाकों में पड़ोसी देशों की भारत में आतंक और अराजकता फैलाने की जो मंशा आजादी के समय से ही रही है, उसके लिए ऐसे पद की संरचना जरूरी थी। हालांकि इस पद की जरूरत कारगिल युद्ध के समय से ही की जाने लगी थी। अभी तक तीनों सेनाएं स्वतंत्र फैसला लेने की अधिकारी थीं। इस कारण युद्ध के समय त्वरित और परस्पर सहमति से फैसले नहीं हो पाने के कारण विसंगतियों का सामना मैदान में काम करने वाले सैनिकों को भुगतना होता था। इस नाते दो लक्षित हमले (सर्जिकल स्ट्राइक) म्यांमार और पीओके में सफलतापूर्वक किए। अनर्गल प्रलाप करने वाले नेताओं को भी रावत लताड़ते रहे हैं। थल सेना अध्यक्ष रहने के दौरान बिपिन रावत ने राजनेताओं को सीख देकर खलबली मचा दी थी। रावत ने दिल्ली में आयोजित एक स्वास्थ्य सम्मेलन में कहा था, 'नेता वे नहीं, जो लोगों को गलत दिशा में ले जा रहे हैं, ये अनेक शहरों में भीड़ को आगजनी और हिंसा के लिए उकसा रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'नेता वही हैं, जो आपको सही दिशा में ले जाएं। आपको सही सलाह दें एवं आपकी देखभाल सुनिश्चित करें।'


रावत ने ऐसा एनआरसी, सीएए एवं एनपीआर के विरोध में देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे तथा पुलिस व सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी का नेतृत्व कर रहे विपक्षी दलों के नेताओं के परिप्रेक्ष्य में कहा था। सेना प्रमुख की इन दो टूक बातों ने युवाओं को गुमराह कर रहे नेताओं को सबक सिखाने का काम किया था। वे रावत ही थे, जिन्होंने कश्मीर के उन पत्थरबाज युवाओं को भी ललकारा था, जो सुरक्षाबलों पर पत्थर बरसाने से बाज नहीं आ रहे थे। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा था, 'जो लोग पाकिस्तान और आईएस के झंडे लहराने के साथ सेना की कार्यवाही में बाधा पैदा करते हैं, उन युवकों से कड़ाई से निपटा जाएगा।'


इस बयान को सुनकर कथित मानवाधिकारवादियों ने बिपिन रावत की खूब आलोचना की थी। कांग्रेस और पीडीपी नेता भी इस निंदा में शामिल थे। उन्हें हिदायत दी गई कि सेना को सब्र खोने की जरूरत नहीं है। किंतु इस बयान के परिप्रेक्ष्य में ध्यान देने की जरूरत थी कि सेनाध्यक्ष को इन कठोर शब्दों को कहने के लिए कश्मीर में आतंकियों ने एक तरह से बाध्य किया था। घाटी में पाकिस्तान द्वारा भेजे गए आतंकियों के हाथों शहीद होने वाले सैनिकों की संख्या 2016 में सबसे ज्यादा थी। इन्हीं हालात से पीड़ित होकर जनरल रावत को दो टूक बयान देना पड़ा था।


रावत के इस बयान के बाद जब अलगाववादियों और पत्थरबाजों पर शिकंजा कसा तब देखने में आया कि कश्मीर में आतंक की घटनाएं घटती चली गई। इस परिप्रेक्ष्य में रावत ऐसे विरले सेनानायक रहे हैं, जो घाटी में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी घटनाओं पर मुखर प्रतिरोध जताते रहे। चीन की पूर्वोत्तर क्षेत्र डोकलाम में घुसपैठ को नियंत्रित करने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इसी तरह पांच अगस्त 2019 को जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 और 35-ए को हटाने की संसद में कार्यवाही की गई थी तब भी घाटी में शांति कायम रखने में उनकी अहम भूमिका रही थी। इन्हीं कामयाबियों के चलते उन्हें जनवरी-2020 में सरकार ने सीडीएस की कमान सौंपी थी। 1999 में कारगिल युद्ध के बाद बनी समिति के सुझाव पर करीब 21 साल बाद यह फैसला नरेंद्र मोदी सरकार ने लिया था।


इसमें दो राय नहीं कि बिपिन रावत पाक प्रायोजित आतंकवाद, चीन की आक्रामकता और अफगानिस्तान के हालत से उपजी चुनौतियों का बेखौफ होकर सामना करने में लगे रहे। वे दो-दो सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम तक पहुंचा पाए। जनरल रावत के नेतृत्व में पहला लक्षित हमला म्यांमार में घुसकर किया गया और दूसरा पाकिस्तान के विरुद्ध पीओके एवं बालाकोट में किया गया। जिसके बाद पाक अधिकृत कश्मीर में युवाओं को आतंकवादी बनाने के प्रशिक्षण शिविर लगभग खत्म हो गए। इन हमलों के जरिए उन्होंने साहसिक और देश का सैन्य गौरव बढ़ाने का काम किया।


सीडीएस बिपिन रावत की शहादत के साथ ऐसा बहुआयामी प्रतिभा का धनी सैनिक देश से चला गया, जो सेना को 21वीं सदी में होने वाली लड़ाई के लिए सेना को सक्षम बनाने में लगा था। हाल ही में उन्होंने कोरोना ओमिक्रॉन के बारे में कहा था कि यह वायरस जैविक युद्ध के लिए तैयार किया गया विषाणु भी हो सकता है, इसलिए इससे सामना करने के लिए सेनाएं तैयार रहें। इस शूरवीर को विनम्र नमन एवं श्रद्धांजलि।


-प्रमोद भार्गव-

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)




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हेलीकॉप्टर दुर्घटना में बचे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को अगस्त में मिला था शौर्य चक्र

नई दिल्ली : तमिलनाडु में कुन्नूर के समीप हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना में बचे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को अगस्त में शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। उन्हें पिछले साल उनके तेजस हल्के लड़ाकू विमान में बड़ी तकनीकी खामी के बाद उड़ान के दौरान दुर्घटना होने से रोकने के लिए यह सम्मान दिया गया था।


तमिलनाडु में बुधवार को हुई हेलीकॉपटर दुर्घटना में अकेले सिंह ही बचे हैं और वह वेलिंगटन में एक सैन्य अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे है।


गौरतलब है कि बुधवार को एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका और 11 अन्य कर्मियों की मौत हो गयी थी।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुर्घटना पर संसद में कहा, ‘‘ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह वेलिंगटन में सैन्य अस्पताल में जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं और उनकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।’’


ग्रुप कैप्टन सिंह भारत के सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल रावत के वेलिंगटन में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज के दौरे के लिए संपर्क अधिकारी के तौर पर रूस द्वारा निर्मित विमान में सवार थे। वह अभी इस प्रतिष्ठित संस्थान में एक निर्देशक के तौर पर सेवारत हैं।


ग्रुप कैप्टन सिंह ने सुलुर हवाई अड्डे पर जनरल रावत की अगवानी की, जहां से वे हेलीकॉप्टर के जरिए वेलिंगटन जा रहे थे। उनके पिता कर्नल (सेवानिवृत्त) के पी सिंह भी आर्मी एयर डिफेंस (एएडी) में सेवा दे चुके हैं।


ग्रुप कैप्टन सिंह को पिछले साल 12 अक्टूबर को उनके तेजस विमान में तकनीकी खामी आने के बाद अनुकरणीय संयम और कौशल का परिचय देने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया।


उनके पुरस्कार के उद्धरण में कहा गया, ‘‘अत्यधिक जानलेवा स्थिति में भारी शारीरिक और मानसिक दबाव में होने के बावजूद उन्होंने अनुकरणीय मानसिक संतुलन बनाए रखा और असाधारण उड़ान कौशल का प्रदर्शन करते हुए विमान को बचा लिया।’’


अधिकारियों ने बताया कि उनका विमान पूरी तरह नियंत्रण खो बैठा था और ऐसी परिस्थिति में पायलट को विमान छोड़ देने की पूरी छूट होती है, लेकिन उन्होंने स्थिति की गंभीरता का आकलन किया और विमान को फिर से सुरक्षित उड़ाने का फैसला किया।


उद्धरण में कहा गया, ‘‘अपनी जान को खतरा होने के बावजूद उन्होंने सैकड़ों करोड़ रुपये बचाते हुए लड़ाकू विमान को नियंत्रित करने तथा सुरक्षित उतारने के लिए असाधारण साहस का परिचय दिया। पायलट ने जोखिम लेते हुए विमान को उतारा। इससे स्वदेश निर्मित लड़ाकू विमान में खामी का सटीक विश्लेषण करने और ऐसी घटनाएं फिर से होने से रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने में मदद मिली।’’


सिंह का परिवार मूलत: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का रहने वाला है।





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कैंडल जलाकर युवाओं ने दी जनरल बिपिन रावत को दी श्रद्धांजलि

नोएडा : नव ऊर्जा युवा संस्था की ओर से देश के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु शोक जताया इस दौरान संस्था के  सदस्यों ने कैंडल जलाकर एवं कुछ पल का मौन रखकर जनरल रावत समेत दिवंगत सैन्य कर्मियों के प्रति श्रद्धांजलि प्रकट की। सदस्यों ने शहीद जनरल बिपिन रावत अमर रहे व भारत माता के जमकर जयकारे लगाए। संस्था के उपाध्यक्ष संदीप पाठक ने बताया कि इस अनमोल रत्न को गंवाना देश के लिए वो क्षति है जिसकी भरपाई नामुमकिन है। इस मौके पर मनीष पांडेय, दौलत सिंह, पुष्कर शर्मा, दीपक चौधरी, योगेंद्र शर्मा, अनमोल सहगल, सत्यवान, रोहित शर्मा, संदीप पाठक, राहुल पाठक, राहुल पाल, जसवंत पाल, राजेंद्र बाथम, बाबूराम मौजूद रहे।







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रास ने दिवंगत सीडीएस जनरल रावत, उनकी पत्नी, अन्य सैन्यकर्मियों को श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली : राज्यसभा ने बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और अन्य 11 सैन्यकर्मियों की मौत पर बुधवार को शोक जताया और कहा कि राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।


सुबह जैसे ही सदन की कार्यवाही आरंभ हुई, उपसभापति हरिवंश ने इस ‘‘दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण’’ हादसे का उल्लेख किया और जनरल रावत के योगदानों की सराहना की। इसके बाद दिवंगत सैन्यकर्मियों के सम्मान में सदन में कुछ पलों का मौन रखा गया।


उपसभापति ने कहा कि जनरल रावत ने देश के सुरक्षा ढांचे में आमूलचूल बदलाव किया।


उन्होंने कहा, ‘‘जनरल रावत के निधन से देश के एक उत्कृष्ट सैनिक खो दिया।’’


उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के कुन्नूर के पास कल बुधवार को भारतीय वायु सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हेलीकॉप्टर में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और कुछ अन्य सैन्य अधिकारी सवार थे।


बाद में भारतीय वायुसेना ने पुष्टि की कि जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य लोगों की इस हादसे में मृत्यु हो गई।



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राष्ट्रपति कोविंद को हेलीकॉप्टर दुर्घटना पर जानकारी देंगे राजनाथ सिंह

नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर उन्हें कुन्नूर के समीप हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बारे में जानकारी देंगे। इस दुर्घटना में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मुधलिका और सशस्त्र बलों के 11 कर्मियों की मौत हो गयी।


राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं।


आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सिंह राष्ट्रपति कोविंद को दुर्घटना के साथ ही इसके कारण पैदा हुई स्थिति के बारे में जानकारी देंगे।


संसद में एक बयान में बृहस्पतिवार को सिंह ने कहा कि हेलीकॉप्टर हादसे की जांच एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह के नेतृत्व में तीनों सेनाओं के एक दल ने शुरू कर दी है।


रक्षा मंत्री ने बताया कि जनरल रावत बुधवार को वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज के छात्रों से संवाद करने के लिए पूर्व निर्धारित यात्रा पर थे।


सिंह के अनुसार, ‘‘जनरल रावत ने अपनी पत्नी और 12 अन्य लोगों के साथ सुलुर से एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर से पूर्वाह्न 11 बजकर 48 मिनट पर वेलिंगटन के लिए उड़ान भरी थी। हेलीकॉप्टर को दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर वेलिंगटन में उतरना था। सुलूर वायु यातायात नियंत्रक का 12 बजकर आठ मिनट पर हेलीकॉप्टर से संपर्क टूट गया। बाद में कुन्नूर के पास जंगल में स्थानीय लोगों ने आग लगी देखी। मौके पर जाकर उन्होंने हेलीकॉप्टर को आग की लपटों से घिरा देखा जिसके बाद स्थानीय प्रशासन का एक बचाव दल वहां पहुंचा।’’





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सीडीएस हेलीकॉप्टर हादसा: उन्नत एमआई-17वी5 परिवहन हेलीकॉप्टर वर्ष 2012 से वायुसेना के बेड़े में

नई दिल्ली : प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत को ले जा रहा भारतीय वायुसेना का दुर्घटनाग्रस्त हुआ एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर एक उन्नत सैन्य परिवहन हेलीकॉप्टर है जोकि वर्ष 2012 से वायुसेना के बेड़े में शामिल है।


रशियन हेलीकॉप्टर की सहायक कंपनी 'कजान' द्वारा निर्मित एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर मौसम रडार के साथ ही नवीनतम पीढ़ी के 'नाइट विजन' उपकरणों से लैस है। इसमें पीकेवी-8 स्वचालित पायलट प्रणाली की भी सुविधा है। एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर 4,000 किलोग्राम वजनी सामग्री ले जाने में सक्षम है।


भारत ने 2008 में मानवीय तथा आपदा राहत अभियानों और परिवहन कार्यों के मद्देनजर अपने हेलिकॉप्टर बेड़े को मजबूत करने के लिए 80 एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर की खरीद के लिए रूस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, बाद में इनकी संख्या बढ़ाकर 151 कर दी गई थी।


इन हेलीकॉप्टर की पहली खेप सितंबर 2011 में भारत पहुंची थी। भारतीय वायुसेना ने फरवरी 2012 में औपचारिक रूप से एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर को अपने बेड़े में शामिल किया था। ये हेलीकॉप्टर कई तरह के हमलों से बचाव के लिए आत्म-रक्षा प्रणाली से भी लैस है। एमआई श्रेणी का ये हेलीकॉप्टर 250 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम रफ्तार पकड़ सकता है।



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जनरल रावत का असामयिक निधन सशस्त्र बलों, देश के लिए अपूरणीय क्षति: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत की मृत्यु हो जाने पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बुधवार को कहा कि उनका असामयिक निधन सशस्त्र बलों और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।


भारतीय वायु सेना ने कहा कि जनरल रावत, उनकी पत्नी मधुलिका और हेलीकॉप्टर में सवार 11 अन्य लोगों की बुधवार को तमिलनाडु में कुन्नूर के पास एक दुर्घटना में मौत हो गई।


सिंह ने ट्वीट किया, "तमिलनाडु में आज एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और सशस्त्र बलों के 11 अन्य कर्मियों के आकस्मिक निधन से गहरा दुख हुआ।"


रक्षा मंत्री ने कहा, "उनका असामयिक निधन हमारे सशस्त्र बलों और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।"


सिंह ने कहा कि जनरल रावत ने असाधारण साहस और लगन से देश की सेवा की है।


उन्होंने कहा, "पहले सीडीएस के रूप में उन्होंने हमारे सशस्त्र बलों को एक सूत्र में पिरोने की योजना तैयार की थी।"


सिंह ने कहा, "इस दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोने वालों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है। ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं, जिनका वर्तमान में सैन्य अस्पताल, वेलिंगटन में इलाज चल रहा है।"






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देश की उत्कृष्ट सेवा के लिए जनरल रावत को हमेशा याद रखा जाएगा: उपराष्ट्रपति नायडू

नई दिल्ली :  उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और अन्य 11 सैन्यकर्मियों की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत पर बुधवार को शोक जताया और कहा कि उन्हें देश की उत्कृष्ट सेवा के लिए हमेशा याद किया जाएगा।


उपराष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी सिलसिलेवार ट्वीट में नायडू ने कहा, ‘‘प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों व अन्य की तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में दुखद मौत से गहरा सदमा लगा है।’’


नायडू ने कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से फोन पर बात की और दुख प्रकट किया। उन्होंने इस दुर्घटना में मारे गए सभी लोगों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं जतायीं।


नायडू ने कहा, ‘‘सामरिक दूरदृष्टि और उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए विख्यात जनरल रावत ने हमारी रक्षा क्षमताओं को मजबूती प्रदान की और राष्ट्रीय सुरक्षा को सशक्त बनाने में अहम योगदान दिया। देश की उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।’’


उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के कुन्नूर के पास भारतीय वायु सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हेलीकॉप्टर में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और कई अन्य सैन्य अधिकारी सवार थे।


बाद में भारतीय वायुसेना ने पुष्टि की कि जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य लोगों की इस हादसे में मृत्यु हो गई है।



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सुप्रिया सुले ने केंद्र से ओबीसी को आरक्षण देने के लिए कानून लाने को कहा

मुंबई : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सांसद सुप्रिया सुले ने मंगलवार को मांग की कि केंद्र अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को राजनीतिक आरक्षण देने के लिए एक कानून लेकर आए और महाराष्ट्र में मराठा और धनगर समुदायों के लिए आरक्षण के मुद्दे का समाधान निकाले।


महाराष्ट्र से लोकसभा सदस्य सुले ने यह मांग तब की है जब एक दिन पहले उच्चतम न्यायालय ने राज्य में उन सीटों पर स्थानीय निकाय चुनावों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी जहां ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत तक आरक्षण है।


सुले ने ट्वीट किया, ''माननीय उच्चतम न्यायालय ने ओबीसी राजनीतिक आरक्षण पर रोक लगा दी है। संसद का शीतकालीन सत्र चलने पर हम मांग करते हैं कि केंद्र सरकार एक कानून लेकर आए ताकि ओबीसी के साथ ही मराठा और धनगर समुदायों के लिए लंबित राजनीतिक आरक्षण के मुद्दे का समाधान निकाला जा सकें। इस फैसले का भारत में समाज के एक बड़े वर्ग पर असर पड़ेगा।''


उन्होंने लाखों लोगों की बेहतरी के लिए केंद्र से इस मामले पर गौर करने का अनुरोध किया।







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अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस : राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली : भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर सोमवार को संसद भवन परिसर में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।


संसद भवन परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के अलावा उपराष्ट्रपति एवं राज्य सभा के सभापति वेंकैया नायडू, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ-साथ अनेक मंत्रियों और सांसदों ने भी बाबा साहेब अंबेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।


बाबा साहेब अंबेडकर को नमन करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ट्वीट किया , संविधान शिल्पी भारत रत्न श्रद्धेय बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के महापरिनिर्वा दिवस पर शत-शत नमन। उनके विचारों ने भारत की सामाजिक-आर्थिक नीतियों और कानूनी ढांचों में प्रगतिशील बदलाव किए। स्वतंत्रता, समानता व बंधुत्व के प्रयासों के लिए देश बाबा साहेब का सदैव कृतज्ञ रहेगा।




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राजनीति में परिवारवाद डा अंबेडकर के मूल्यों के मुताबिक अलोकतांत्रिक: योगी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संविधान निर्माता डा भीमराव अांबेडकर की 66 वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये राजनीति में परिवारवाद को बाबा साहब के मूल्यों के विरुद्ध बताया है।

योगी ने यहां आंबेडकर सभा द्वारा आयोजित श्रृद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुये समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस को राजनीति में वंशवाद का जीवंत उदाहरण बताया। डा आंबेडकर को श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुये उन्होंने कहा, “बाबा साहेब के योगदान को याद करते हुए जानना होगा कि किसी राजनीतिक दल पर एक परिवार का कब्जा होना, अलोकतांत्रिक है। वंशानुगत रूप से किसी दल का अध्यक्ष बनना, लोकतंत्र के खिलाफ है। वंशवादी दलों की कार्यशैली भी लोकतांत्रिक नहीं हो सकती। सपा-बसपा-कांग्रेस तीनों इसके जीवंत उदाहरण हैं।”


उल्लेखनीय है कि 6 दिसंबर को हर साल डॉ अम्बेडकर की पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं। योगी ने कहा कि किसी भी देश का संविधान उसके शासन संचालन की मार्गदर्शक पुस्तिका होती है। जो देश को व्यवस्थित मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि डा अंबेडकर ने भारत को ऐसे ही व्यवस्थित शासन तंत्र के सफल संचालन का मार्ग दिखाने वाले संविधान की रचना कर देश को आने वाली चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाया।

उन्होंने कांग्रेस का नाम लिये बिना उस पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाते हुये कहा, “आपातकाल के समय कुछ लोगों ने संविधान का गला घोंटने का प्रयास किया था। उन लोगों ने लोकतंत्र को रौंदने का प्रयास किया था। उस वक्त देश ने एकजुट होकर उनका प्रतिकार किया।”


इससे पहले उन्होंने ट्वीट कर कहा, “महान विधिवेत्ता, सामाजिक न्याय के प्रबल पक्षधर, भारत के सर्वसमावेशी संविधान के शिल्पकार, 'भारत रत्न' बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्र निर्माण एवं समतामूलक समाज की स्थापना हेतु आपके कार्य सभी के लिए महान प्रेरणा हैं।”

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हमारा ध्यान अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण पर : विहिप

अयोध्या : अयोध्या में सोमवार को स्थिति शांतपूर्ण है और तनाव के कोई संकेत नहीं मिले हैं, हालांकि सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कहा है कि इस दिन को चिह्न्ति करने के लिए कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं होगा, लेकिन राम मंदिर के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।


विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक बयान में कहा, 6 दिसंबर पूरे देश के लिए एक बड़ा दिन है। इसलिए विहिप शाखा बजरंग दल 6 दिसंबर को शौर्य दिवस के रूप में मना रही है। पहले की तरह ही इसे चिह्न्ति करने के लिए दिन में कार्यक्रम होंगे। यह कार्यक्रम भी उसी तरह आयोजित किए जाएंगे।


हालांकि, बयान में उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर बनने के बाद वह मथुरा के मुद्दे को उठाएंगे। कुमार ने बयान में कहा, राम मंदिर के गर्भगृह में श्री रामलला के विराजमान होने के बाद चर्चा होगी। 2024 में मथुरा विवाद पर विचार करेंगे।


अयोध्या के मुस्लिम समुदाय ने कहा कि वह विध्वंस के बाद हुई हिंसा में मारे गए लोगों के लिए प्रार्थना के अलावा कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं करेंगे। मामले के वादियों में से एक हाजी महबूब ने कहा कि अब फैसला मंदिर के पक्ष में आया है.. इसलिए किसी कार्यक्रम की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कोई मथुरा के बारे में गलत इरादा रखता है तो वह कड़ा जवाब देंगे।


बाबरी मस्जिद विध्वंस की 30वीं बरसी को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने छह दिसंबर को होने वाली किसी भी घटना पर नजर रखने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय में विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है।


अयोध्या मंदिर शहर और जिले को कई सुरक्षा क्षेत्रों में विभाजित किया गया है और संवेदनशील बिंदुओं पर बलों को तैनात किया गया है। सभी मजिस्ट्रेटों को अयोध्या और फैजाबाद के जुड़वां शहरों में सभी छोटी और बड़ी घटनाओं पर चौबीस घंटे निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।




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कांग्रेस ने जनजातीय शहीदों का योगदान भुलाकर केवल नेहरू-गांधी परिवार को महिमामंडित किया : चौहान

इंदौर : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि लम्बे समय तक देश की सत्ता में रही इस पार्टी ने टंट्या भील सरीखे आदिवासी शहीदों का योगदान भुलाकर केवल नेहरू-गांधी परिवार को महिमामंडित किया।


चौहान ने टंट्या भील के बलिदान दिवस पर इंदौर से करीब 35 किलोमीटर दूर पातालपानी में आयोजित कार्यक्रम में कहा, "इस क्षेत्र की जनता टंट्या भील को भगवान मानकर पूजती है। लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि लम्बे समय तक देश और मध्यप्रदेश पर राज करने वाली कांग्रेस ने टंट्या भील की इस पवित्र धरती को कभी प्रणाम क्यों नहीं किया और उनकी याद में स्मारक क्यों नहीं बनवाया?"


मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, "यह देश का दुर्भाग्य है कि कांग्रेस ने (देश के इतिहास में) केवल नेहरू-गांधी खानदान को स्थापित किया और इसी खानदान को महिमामंडित किया।"


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस को टंट्या भील जैसे आदिवासी क्रांतिकारियों की कभी याद नहीं आई जिन्होंने देश के लिए शहादत के जरिये सर्वोच्च बलिदान दिया।


चौहान ने टंट्या भील को ''भारत मां का वीर सपूत'' करार देते हुए कहा कि उन्होंने देश की गुलामी के दौर में अंग्रेजों के शोषण के खिलाफ हथियार उठाए थे और अंग्रेजों ने उन्हें एक ''गद्दार'' की मदद से धोखे से गिरफ्तार कर मृत्युदंड दिया था।


मुख्यमंत्री ने पातालपानी में टंट्या भील की अष्टधातु की प्रतिमा का अनावरण भी किया। इस मौके पर सूबे के राज्यपाल मंगु भाई पटेल भी मौजूद थे। माना जाता है कि पातालपानी में टंट्या भील का अंतिम संस्कार किया गया था।


चौहान ने घोषणा की कि प्रदेश सरकार पातालपानी में टंट्या भील के स्मारक का विकास करेगी और इन आदिवासी क्रांतिकारी पर आधारित ''आराधना वाटिका'', पुस्तकालय आदि स्थापित करेगी।


जानकारों का कहना है कि अंग्रेजों ने टंट्या भील को चार दिसंबर 1889 को राजद्रोह के जुर्म में जबलपुर के जेल में फांसी दी थी। जानकारों के मुताबिक टंट्या भील को ''आदिवासियों का रॉबिन हुड'' भी कहा जाता है क्योंकि वह अंग्रेजों की छत्र-छाया में फलने-फूलने वाले अमीरों से लूटे गए माल को जनजातीय समुदाय के गरीब लोगों में बांट देते थे।







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महाराष्ट्र: कांग्रेस विधायक चंद्रकांत जाधव का निधन

मुंबई : महाराष्ट्र के कोल्हापुर से कांग्रेस विधायक चंद्रकांत जाधव का बृहस्पतिवार को हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी।


कांग्रेस ने एक बयान में बताया कि जाधव (59) कोल्हापुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने थे। बयान में बताया गया कि जाधव पूर्व में दो बार कोविड-19 से संक्रमित हो गए और इसके बाद से उनका स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया।


पार्टी ने जाधव को सफल उद्योगपति और लोकप्रिय नेता बताते हुए कहा कि महामारी के दौरान लोगों की सेवा करने के लिए उन्होंने अपनी जान जोखिम में डाल दी।


महाराष्ट्र में 288 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के 44 विधायक हैं। पिछले साल नांदेड़ जिले के देगलुर क्षेत्र से विधायक रावसाहेब अंतापुरकर का भी कोविड-19 से निधन हो गया था, जिसके बाद हाल के उपचुनाव में उनके बेटे जितेश निर्वाचित हुए।




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किसान आंदोलन, कोरोना प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग समेत कई मुद्दे लोकसभा में उठाए गए

नई दिल्ली : कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और कुछ अन्य सदस्यों ने आंदोलनकारी किसानों की मांगों से जुड़ा मुद्दा बुधवार को लोकसभा में उठाया और कहा कि सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने समेत अन्य मांगें स्वीकार करनी चाहिए।


सदन में शून्यकाल के दौरान विभिन्न सदस्यों ने जनहित के अलग-अलग मुद्दे उठाए।


कांग्रेस के मणिकम टैगोर ने मांग उठाई कि कि कोराना वायरस महामारी में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।


कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने किसान आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए कहा, ‘‘700 से अधिक किसान काले कानूनों के खिलाफ आंदोलन करते हुए शहीद हुए हैं। इनके परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए...किसानों के साथ न्याय करना चाहिए और उनकी दूसरी मांगें स्वीकार की जानी चाहिए।’’


राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल और एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील ने भी कहा कि एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत किसानों की अन्य मांगें सरकार को माननी चाहिए।


बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसद दानिश अली ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान बंद हुए विश्वविद्यालयों को खोला जाना चाहिए।


भाजपा के मनोज कोटक ने पिछले दिनों महाराष्ट्र के अमरावती में हुई हिंसा का मुद्दा सदन में उठाया और दावा किया कि इस घटना में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने मांग की कि रजा अकादमी और पीएफआई जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाए, वहीं पुलिस और प्रशासन की भूमिका की भी जांच हो।


बसपा की संगीता आजाद ने ‘यूपीटेट’ परीक्षा का पेपर लीक होने का मुद्दा उठाया और कहा कि इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और आगे इस तरह से पेपर लीक होने से रोका जाए।


आम आदमी पार्टी के भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में सेना की भर्ती की लिखित परीक्षा कराई जाए।


तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, भाजपा के रमेश बिधूड़ी, तीरथ सिंह रावत, रामकृपाल यादव, सुनीता दुग्गल एवं विजय कुमार दुबे और कुछ अन्य दलों के सदस्यों ने भी विभिन्न मुद्दे उठाए।



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अटल बिहारी बाजपेई के नाम पर रखा जा सकता है लखनऊ चिड़ियाघर का नाम

लखनऊ :  योगी आदित्यनाथ सरकार अब लखनऊ चिड़ियाघर का नाम पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।


वन मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि सरकार इससे संबंधित प्रस्ताव पर विचार कर रही है और सही समय पर फैसला लिया जाएगा।


लखनऊ चिड़ियाघर, जिसे पहले प्रिंस ऑफ वेल्स जूलॉजिकल गार्डन के नाम से जाना जाता था, उसका नाम बदलकर 2015 में अखिलेश सरकार द्वारा नवाब वाजिद अली शाह जूलॉजिकल पार्क कर दिया गया था।


चिड़ियाघर ने सोमवार को 100 साल पूरे कर लिए है।


अधिकारियों ने बताया कि 25 दिसंबर को वाजपेयी की जयंती पर चिड़ियाघर का नामकरण पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर किए जाने की संभावना है।


चिड़ियाघर में हर साल लगभग 13 लाख आगंतुक आते हैं।


71 एकड़ में फैले इस चिड़ियाघर को राजधानी का जीवन और गौरव कहा जाता है। इसमें 911 जानवर, 102 प्रजातियों के पक्षी हैं। इसे 1921 में स्थापित किया गया था।




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संसद में आज भी हंगामे के आसार, 12 सांसदों के निलंबन पर विपक्ष की बैठक

नई दिल्ली :  संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन विपक्ष के 12 सदस्यों के निलंबन का मुद्दा आज गरमा सकता है। इस मुद्दे पर विपक्ष हंगामा कर सकता है। मानसून सत्र में इन सांसदों ने अशोभनीय आचरण किया था। सदन के अंदर तोड़फोड़, आसन पर पेपर फेंकने, टेबल पर चढ़कर डांस करने और मार्शल के साथ अभद्रता के आरोप थे। आज इस मुद्दे पर राज्यसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है। आज खडगे राज्यसभा के सभापति से बात करेंगे और अगर सरकार इनका निलंबन वापस नहीं लेती है तो विपक्ष पूरे सत्र का बहिष्कार कर सकता है।

विपक्ष के 12 सदस्यों के निलंबन पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि भविष्य की रणनीति पर चर्चा के लिए विपक्षी दल आज बैठक कर रहे हैं। माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। सांसदों को सदन के नियमों के खिलाफ निलंबित किया गया है। 

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 'सरकार को कृषि कानूनों के विरोध में जान गंवाने वाले किसानों का रिकार्ड बनाने और उनके परिवारों को मुआवजा देने का निर्देश देने के लिए' लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया है। व हीं, कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने 'देश भर में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारणों पर चर्चा करने के लिए और सरकार को पेट्रोल, डीजल, एलपीजी पर उत्पाद शुल्क को 2013 के स्तर तक कम करने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश देने के लिए' लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया है। 

केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश (वेतन और सेवा की शर्तें) संशोधन विधेयक, 2021 पेश करेंगे। यह विधेयक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (वेतन और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1954 और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश (वेतन और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1958 में और संशोधन का प्रयास है। 

सदन में अनुशासनहीनता के आरोप में राज्यसभा के 12 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। इसमें सीपीएम के इलामाराम करीम, कांग्रेस की फूलो देवी नेताम, छाया वर्मा, आर बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रसाद सिंह, भाकपा के बिनाय विश्वम, टीएमसी की डोला सेन और शांता छेत्री और शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई को मौजूदा सत्र के शेष भाग के लिए निलंबित कर दिया गया है। 


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श्रमिक ही राष्ट्र निर्माता है इनके बदौलत ही देश आगे बढेगा : योगी आदित्यनाथ

कुशीनगर : उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में वृहद स्तर पर सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन कर एक नया इतिहास रचा। परिणय की इस बेला में वर-वधू को आशीष देने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार श्रमिक की बेटी का कन्यादान करने यहां आई है। कन्यादान करना मेरे लिए सबसे बड़ा पुण्य का काम है। उन्होंने सरकार की योजनाएं गिनाते हुए कहा कि 2503 जोड़ों का यह विवाह कार्यक्रम विश्व में नया कीर्तिमान बना रहा है !श्रमिक ही राष्ट्र निर्माता है इनके बदौलत ही देश आगे बढेगा ! विवाह का दृष्य देख हर कोई अभिभूत नजर आया। उत्तर प्रदेश श्रम विभाग एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से वृहद सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 2503 जोड़ों की शादी हुई ! तो इन जोड़ों का कन्यादान करने व आशीर्वाद देने सीएम समेत मंत्री और शासन-प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। विवाह मंडप में आचार्य व उपाचार्यों ने मंगल गीतों व वेद मंत्रों के साथ 2503 जोड़ों के विवाह की रस्में पूरी कराई, तो काजी द्वारा मुस्लिम जोड़ों का निकाह कराया गया। आयोजन में मुख्यमंत्री ने जब आशीर्वाद और कन्यादान की बात कही तो करीब पचास हजार लोगों से भरा विवाहोत्सव परिसर तालियों से गूंज उठा ! , जयश्रीराम और हर-हर महादेव के उद्घोष होने लगे। उधर, सांस्कृतिक मंच पर लोक कलाकारों के विवाह गीत सहित गारी से पूरा माहौल मंगलमय हो उठा।


 मुख्यमंत्री ने शुुभकामनाएं देेते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जो संविधान दिया है, संविधान की यही ताकत है, श्रमिक कन्याओं की शादी में प्रदेश सरकार स्वयं पहुंचकर कन्यादान कर रही है। इससे बड़ा पुण्य का कार्य क्या हो सकता है। सही मायने में समाज के अंतिम पायदान पर बैठे श्रमिकों को लाभ मिल रहा है। कहा कि कोरोना के दौरान भी हमने निवासी-प्रवासी जो भी श्रमिक थे, हर श्रमिक को भरण-पोषण भत्ता दिया। 54 लाख श्रमिकों के खाते मे भत्ता गया ! बाद में अन्य राज्यों ने भी इस योजना को अंगीकार किया। कहा कि हमारे गांव में एक कहावत है गांव की बेटी, सबकी बेटी... इसी भावना के साथ हम सभी 2503 कन्याओं के एक साथ सामूहिक विवाह कार्यक्रम से जुड़ रहे हैं, सामूहिकता का अहसास हो रहा है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह, दहेज की प्रथा को तिलांजलि देकर समाज के प्रत्येक तबके की कन्याओं को सम्मान देने का काम हमारी सरकार कर रही है। प्रदेश सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं से हर तबके के लोगों को जोड़ा गया है। 43 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास, 2.61 करोड़ शौचालय, 39 हजार ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया। जिन गांवों में बिजली नहीं थी वहां बिजली पहुंचाई गई। कहा कि यह सरकार श्रमिक की ही नहीं, बल्कि गरीबों की शादी के लिए भी समाज कल्याण विभाग के सहयोग से विवाह समारोह आयोजित कर रही है। इसका पूरा खर्चा भी उठा रही है। इस सहायता से जहां इसमें स्वजातीय विभाग के लोगों को 55 हजार प्रति पुत्री, अंतर्जातीय विवाह को 61 हजार प्रति पुत्री एवं प्रत्येक वर-वधू के उत्साह के लिए 5 हजार धनराशि दी जाती है। वहीं श्रमिकों के सामाजिक सहायता के लिए 2 लाख की आर्थिक सहायता व 5 लाख का बीमा भी किया जाता है। इस तरह के आयोजन से बाल विवाह एवं दहेज जैसी कुप्रथाओं पर रोक लग रही है।इस विवाह कार्यक्रम में देवरिया, महराजगंज, गोरखपुर व कुशीनगर के वैवाहिक जोडे़ सम्मिलित हैं! 


सीएम ने कहा कि 2017 के पहले स्थिति भयावह थी। दंगे होते थे, अराजकता का वातावरण था, महिला सुरक्षा गंभीर प्रश्न बन गया था। 2017 में जब हमारी सरकार आई तो हमने दंगा, भ्रष्टाचार, अराजकता मुक्त माहौल बनाने काम शुरू किया, आज प्रदेश में शांति का वातावरण है। मिशन शक्ति के तहत महिला सुरक्षा पर काम हुआ। सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास का जो मंत्र है वह चरितार्थ हो रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा 11 शादी के जोड़ों को मंच पर बुलाकर आशीर्वाद दिया गया व सम्मानित किया गया।


इस अवसर पर प्रदेश के श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या, विधायक जटाशंकर तिवारी, अतुल सिंह गौ सेवा उपाध्यक्ष, पडरौना नगर पालिका परिषद के चेयरमैन विनय जायसवाल, विधायक पवन केडिया, विधायक गंगा कुशवाहा, जगदीश मिश्र ऊर्फ बाल्टी बाबा, राजेश्वर सिंह उपाधयक्ष उत्तर प्रदेश राज्य बीज निगम, जिलाध्यक्ष भाजपा प्रेम चंद मिश्रा, एवं महराज इस कार्यक्रम में जिला धिकारी एस राजलिंगम, मुख्य विकास अधिकारी अनुज मलिक , अपर जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक सचिन्द्र पटेल, श्रम अधिकारी मनीष कुमार सिंह, जिला सूचना अधिकारी कृष्ण कुमार





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नाकामयाबी का जश्न मना रहे हैं नीतीश : तेजस्वी

पटना : बिहार में जनता दल (युनाइटेड) जहां नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के 16 वर्ष पूरे होने पर जश्न मना रही है वहीं विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इसे नाकामयाबी का जश्न बताते हुए 21 सवाल पूछे हैं।


तेजस्वी ने बुधवार को कहा कि विगत 16 वर्षों से सभी क्षेत्रों और मानकों में राज्य को फिसड्डी साबित कर देश में बिहार को सबसे निचले पायदान पर पहुँचाने वाले तीसरे नंबर की पार्टी के देश में एकमात्र मुख्यमंत्री आज अपनी नाकामयाबी का जश्न-ए-फेल्यर मना रहे हैं।


तेजस्वी ने इस मौके पर 21 सवाल पूछते हुए आशा व्यक्त की है कि मुख्यमंत्री राज्यहित में इसका जवाब जरूर देंगे।


राजद नेता तेजस्वी ने पूछा कि 16 वर्षों के शासन के बाद भी आज बिहार पूरे देश में गरीबी और बेरोजगारी का मुख्य केंद्र क्यों बना हुआ है? तेजस्वी ने पलायन को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में बिहार की पलायन दर में अप्रत्याशित वृद्धि क्यों हुई?


तेजस्वी ने पूछा की नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सतत विकास सूचकांक में बिहार अंतिम पायदान पर क्यों और कैसे पहुंच गया, इसके लिए दोषी कौन है?


राजद नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री बताएं कि विगत 16 वर्षों से कुर्सी से चिपके रहने के लिए उन्होंने नीति, नियति, नियम, विचार और सिद्धांत की तिलांजलि देकर बार-बार बिहार की प्रत्येक पार्टी से गठबंधन क्यों किया? वो बताएं कि बिहार की कौन सी ऐसी पार्टी बची है जिससे उन्होंने समझौता नहीं किया?


विपक्ष के नेता ने विकास लक्ष्यों की भारत सूचकांक रिपोर्ट 2020-21 के अनुसार बिहार का समग्र स्कोर कम रहने को लेकर भी नीतीश से सवाल किए। इसके अलावे तेजस्वी ने शिक्षा क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाए।


उन्होंने सरकार में सरकारी योजनाओं में हो रही अनियमितता को लेकर पूछा कि 16 वर्षों में उनकी रहनुमाई में बिहार में 30 हजार करोड़ के 76 घोटाले क्यों हुए?


शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री को घेरते हुए तेजस्वी ने कहा कि शराब पीने से लोगों की मौत हो रही है। 20 हजार करोड़ की समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था चल रही है, राजस्व का नुकसान हो रहा है। ऐसे में सरकार के भ्रष्टाचार, निकम्मेपन और नाकामी की नजीर बन चुकी है।


राजद नेता ने पूछा है कि 16 वर्षों में कितने उद्योग-धंधे, आईटी पार्क, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कारखाने और इंडस्ट्री स्पेसिफिक क्लस्टर स्थापित करवाए?


तेजस्वी ने विधि व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री से प्रश्न पूछे हैं।






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गलवान घाटी झड़प के नायक रहे कर्नल बी संतोष बाबू मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित

नई दिल्ली : पिछले साल जून में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन के हमले के खिलाफ भारतीय सैनिकों का नेतृत्व करने वाले 16वीं बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग अधिकारी कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को सम्मानित किया।


यहां आयोजित एक समारोह में बाबू की पत्नी बी संतोषी और मां मंजुला ने पुरस्कार ग्रहण किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और शीर्ष सैन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।


परमवीर चक्र के बाद महावीर चक्र युद्धकाल का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।


चार अन्य सैनिकों, नायब सूबेदार नुदुरम सोरेन, हवलदार (गुन्नूर) के पलानी, नायक दीपक सिंह और सिपाही गुरतेज सिंह को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने पिछले साल 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में चीनी सैनिकों से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।


3 मीडियम रेजिमेंट के हवलदार तेजिंदर सिंह गलवान घाटी में हुई झड़प में भारतीय थल सेना की टीम का हिस्सा थे। उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया है।


वीर चक्र युद्धकाल के लिए देश का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।


नायब सोरेन की पत्नी लक्ष्मी मणि सोरेन, हवलदार पलानी की पत्नी वनथी देवी और नायक सिंह की पत्नी रेखा सिंह ने राष्ट्रपति से पुरस्कार ग्रहण किया।


सिपाही गुरतेज सिंह की मां प्रकाश कौर और पिता विरसा सिंह ने राष्ट्रपति से वीर चक्र ग्रहण किया।


पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय सैन्यकर्मी शहीद हो गये थे। यह घटना दशकों में दोनों देशों के बीच हुए सबसे गंभीर सैन्य टकराव बन गई।


फरवरी में, चीन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि भारतीय थल सेना के साथ झड़प में पांच चीनी सैन्य अधिकारी और सैनिक मारे गए थे। हालांकि यह व्यापक रूप से माना जाता है कि चीन की ओर से मरने वालों की संख्या इससे अधिक थी।


राष्ट्रपति भवन ने ट्विटर पर कहा,“ कर्नल बाबू ने दुश्मन का सामना करने के दौरान अनुकरणीय नेतृत्व, दक्ष पेशेवरता और विशिष्ट बहादुरी का परिचय दिया और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।”


कर्नल बाबू ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद प्रतिकूल परिस्थितियां होते हुए भी पूरी शिद्दत से भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया।


उन्होंने ‘ऑपरेशन स्नॉ लेपर्ड’ के दौरान अपनी अंतिम सांस तक दुश्मन के हमले का मुकाबला किया और मैदान में डटे रहने के लिए अपने सैनिकों को प्रेरित और प्रोत्साहित किया।


भारतीय थल सेना ने पूर्वी लद्दाख में पोस्ट 120 पर 'गैलेंट्स ऑफ गलवान' के लिए एक स्मारक बनाया है।


आधिकारिक विवरण के मुताबिक, 16वीं बिहार रेजीमेंट में शामिल नायब सूबेदार सोरेन ने अपनी टुकड़ी की अगुवाई करते हुए भारतीय सेना को पीछे धकेलने की दुश्मन की कोशिश का प्रतिकार किया और निगरानी चौकी की स्थापना की।


उन्होंने अपनी टुकड़ी को संगठित किया, दुश्मन का जोरदार मुकाबला किया और भारतीय सैनिकों को पीछे धकेलने के उनकी कोशिश को नाकाम किया।


सोरेन ने घायल होने के बावजूद अंतिम सांस तक दृढ़ भावना के साथ लड़ते हुए, जबर्दस्त साहस का प्रदर्शन किया।


हवलदार पलानी बहादुरी से डटे रहे और दुश्मन के उनपर धारदार हथियार से हमला करने के बावजूद उन्होंने अपने साथियों का बचाव करने की कोशिश की।


उनकी वीरता ने अन्य साथी सैनिकों को डटकर लड़ने और दुश्मन के आक्रमण का मुकाबला करने के लिए प्रेरित किया। आधिकारिक विवरण के मुताबिक, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह मैदान में मजबूती से डटे रहे और मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये।


नायक दीपक सिंह का ताल्लुक भी 16वीं बिहार रेजिमेंट से था और वह एक नर्सिंग सहायक के रूप में कर्तव्यों का पालन कर रहे थे। उन्होंने 30 से अधिक भारतीय सैनिकों का उपचार किया और उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


पंजाब रेजिमेंट की तीसरी बटालियन के सिपाही गुरतेज सिंह ने निगरानी चौकी की स्थापना करते हुए दुश्मन सैनिकों का मुकाबला किया।


झड़प के आधिकारिक विवरण के मुताबिक, गुरतेज सिंह ने साहस और युद्ध के विशिष्ट कौशल का प्रदर्शन करते हुए दुश्मन सैनिकों का मुकाबला किया और गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी लड़ते रहे।


राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में सशस्त्र बलों के कई अन्य कर्मियों को भी सम्मानित किया गया।


राष्ट्रीय राइफल्स की 21वीं बटालियन के मेजर अनूज सूद को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। 





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किन्नर कल्याण की दिशा में जो कदम योगी ने उठाया, उससे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रदेश में किन्नर कल्याण बोर्ड गठित कर उसके लिए किन्नर सदस्य नामित किए हैं। सरकार चाहे तो किन्नर समाज को प्रदेश के अंचलों और आदिवासी लोक नृत्य सिखा कर प्रदेश की लुप्त होती कला को जीवित कर सकती है। प्रदेश के कई किन्नर इन कलाओं का सीखकर पद्म पुरस्कार पाने वाले मजम्मा जोगाठी की तरह सम्मान प्राप्त कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश में किन्नर कल्याण बोर्ड के गठन का उद्देश्य समाज के विकास की मुख्यधारा से वंचित किन्नरों को आगे लाने की जद्दोजहद है। सरकार ने सोनम चिश्ती को इस बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया है। उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया है। गठित किन्नर कल्याण बोर्ड में इनके अलावा चार किन्नर सदस्य पद के लिए प्रयागराज की कौशल्या नन्द गिरी उर्फ टीना मां, गोरखपुर की किरन बाबा, जौनपुर की मधु उर्फ काजल व कासगंज की मोहम्मद  आरिफ पूजा किन्नर शामिल हैं।


उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश में कहा गया है कि बोर्ड किन्नरों की आवश्यकताओं, मुद्दों व समस्याओं पर काम करते हुए नीति व संस्थागत सुधारों के लिए सरकार को सुझाव देगा। बोर्ड के अध्यक्ष समाज कल्याण मंत्री होंगे। जबकि मुख्यमंत्री द्वारा नामित किन्नर उपाध्यक्ष होगा। समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव संयोजक होंगे। किन्नर संबंधी विभाग के अधिकारियों के अनावा पांच किन्नर व एनजीओ के प्रतिनिधियों को मंत्री नामित करेंगे। गैर-आधिकारिक सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्षों होगा। बोर्ड का सदस्य सचिव, निदेशक समाज कल्याण होगा। बोर्ड को तीन महीने में बैठक करना जरूरी होगा। विभागीय प्रमुख सचिव के. रविन्द्र नायक ने बताया कि सभी के नामित होते ही बोर्ड की बैठक होगी। बोर्ड का काम किन्नर नीति को विभागों में लागू करने के साथ ही किन्नरों का शैक्षिक, सामाजिक व आर्थिक विकास करने, समानता व समता के लिए दिशा-निर्देश जारी कर उनका क्रियान्वयन कराने तथा जिला स्तरीय समिति या किन्नर सहायता इकाई के प्रकरणों पर निर्णय करना होगा।


जिलों में डीएम की अध्यक्षता में भी 13 सदस्यीय समिति होगी। इसकी प्रतिमाह बैठक होगी। इसमें अधिकारियों के अलावा डीएम द्वारा नामित मनोवैज्ञानिक व किन्नर समुदाय के दो प्रतिनिधि सदस्य और जिला समाज कल्याण अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। यह भी कहा गया है कि किन्नरों को पहचान पत्र मिलेंगे। किन्नरों को मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए केंद्र भी बनेंगे। किन्नर समाज अब तक बिल्कुल उपेक्षित हैं। समाज उन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं है। लोग बाग इनसे बात करने से बचते हैं। किन्नरों का भी रवैया ठीक नहीं। वह त्योहारों के नाम पर व्यापारियों से, दुकानदारों से कई बार जबरदस्ती वसूली करते हैं। बस और ट्रेन में हंगामा करते हैं। परिवार में बच्चा होने और शादी के बाद दुल्हन के परिवार में तो उनकी उद्दंडता देखते बनती है। मनमानी राशि मांगते हैं। न देने पर हुड़दंग करते हैं। परिवार अपनी बेइज्जती से बचने  के लिए, अपनी इज्जत बचाने के लिए इनकी नग्नता और गुंडई को देख कर चुप हो जाते हैं। हालात न होने पर भी इन्हें मनमानी रकम देते हैं। कई बार तो वे परिवार उधार भी उठाते हैं। देहात में तो इनके श्राप देने का भी आतंक है। कुछ लोग कहते हैं कि ये नए विवाहित जोड़े और शिशु को आशीर्वाद देते हैं। मांगी रकम न दिए जाने पर श्राप भी देते हैं। इनका श्राप दिया जाना ठीक नहीं।


सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर गठित इस बोर्ड के गठन से किन्नरों की समस्याओं पर विचार हो सकेगा। उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में लाने, समाज के विकास कार्यों में लगाने का कार्य किया जाएगा। उनकी समस्याओं पर विचार होगा। उन्हें बताया जाना चाहएि कि उनका रवैया समाज में उन्हें घृणा का पात्र बनाता है यदि वे थोड़ी सरलता−उदारता का प्रयोग करें समाज में उनकी छवि निखर सकती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इनकी संख्या डेढ़ लाख बताई गई है जबकि वास्तव में काफी ज्यादा है। क्योंकि ये अपना परिचय बताना नहीं चाहते।


सरकार की योजना किन्नरों को परिचय कार्ड जारी करने की है। इससे किन्नरों को बहुत लाभ मिलेगा। नकली किन्नरों की गतिविधियों को रोका जा सकेगा। कुछ व्यक्ति नकली किन्नर बनकर वसूली करते हैं। इससे नकली और असली किन्नरों में झगड़े होते हैं। मारपीट होती है। कई बार कत्ल हो जाते हैं। परिचय पत्र मिलने के बाद नकली किन्नरों की वसूली बन्द हो सकेगी। अगर इनकी समस्या को समझा जाता, इन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने का काम होता तो इनके व्यवहार में बड़ा परिवर्तन होता। इनके साथ समाज को भी इनके बारे में जागरूक किया जाता तो देश के हालत बिल्कुल अलग होते। ये भी समाज का जिम्मेदार हिस्सा होते। वैसे आज कई किन्नर समाजहित के लिए काम कर रहे हैं। बिजनौर के एक किन्नर ने अपने पास से पैसा लगाकर एक गरीब परिवार की लड़की की शादी की है। अब समाज कल्याण के कार्य सरकार कराने लगी। पहले सेठ, सम्पन्न और जमींदार ये कार्य करते थे। आजादी के पूर्व में बने कई कुएं ऐसे हैं जो किन्नरों ने बनवाए। पुराने लोग बताते भी हैं। ये कुएं हिजड़े का कुआं के नाम से प्रसिद्ध भी हैं। ये चुनाव का समय है। सब दल कहेंगे कि भाजपा ने इसे चुनावी लाभ के लिए गठन किया है। लगता भी ऐसा ही है। भाजपा को इसका लाभ भी मिलना निश्चित है।


सरकार किन्नर कल्याण बोर्ड के माध्यम से किन्नरों को प्रदेश की क्षेत्रीय नृत्य और नाट्य कला, प्रदेश में बसने वाली जनजातियों के नृत्य सिखाकर इन कलाओं से जोड़ने का बड़ा काम कर सकती है। इन्हीं कलाओं में भनेड़ा (बिजनौर) के नक्काल, अरब से भारत आई और बिजनौर के चांदपुर, अमरोहा और रामपुर जनपद में गाई जाने वाली चाहरबैत को इनसे गवाकर जिंदा और रोचक बनाया जा सकता है। चाहरबैत पुरुषों द्वारा ढप (एक तरह का साज) पर गाई जाने वाली कला है। यदि इसे महिलाओं के परिधान में किन्नर गायें तो ये कला ज्यादा रुचिकर और लोकप्रिय होगी। ऐसे ही 'अगरही' (पूर्वांचल के आदिवासियों का एक प्रमुख नृत्य) पूर्वांचल के देवरिया, गोरखपुर और बलिया जिलों में 'गोड़उ' नृत्य, अहीर (वीरों की संस्कृति) की कला, नृत्य सिखाकर इनसे मंचित कराए जा सकते हैं। कुछ समय पूर्व सारंगी वादक जगह−जगह दिखाई देते थे, यदि कुछ जीवित सारंगी वादकों से इन्हें शिक्षा दिलाई जाए तो समाप्त होती क्षेत्रीय, आदिवासी और परम्परागत कला को जीवित किया जा सकता है। किन्नर मजम्मा ने तो अपने आप लोक कला सीखकर पद्म पुरस्कार पाया। अगर सरकारी स्तर से प्रदेश के किन्नरों के साथ ईमानदारी से मेहनत की गई तो उत्तर प्रदेश देश को किन्नर मजम्मा जैसे कई प्रसिद्ध कलाकार दे सकेगा।



-अशोक मधुप-

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)




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प्रधानमंत्री मोदी ने जारी किया पेज- 'कमल पुष्प' , यहां होंगी BJP के पुराने नेताओं की स्मृतियां

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी  की जड़ों को और मजबूत करने के प्रयास शुरू हो गए हैं। एक तरफ जहां नए सदस्यों को लेकर लगातार कवायद जारी है वहीं पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को याद करते हुए जड़ों को सींचा जा रहा है। इस क्रम में सोमवार को खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नमो एप के जरिये वह पेज जारी किया जिसपर कोई भी भाजपा के पुराने नेताओं के बारे में अपनी स्मृतियां और विवरण लिख सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम कौन हैं और हमारा इतिहास क्या है। यही सिद्धांत हमारी अपनी पार्टी के प्रति हमारे दृष्टिकोण पर भी लागू होता है।

भाजपा आज विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है, इस यात्रा में करोड़ों कार्यकर्ताओं का पुरुषार्थ और योगदान है। ऐसे शिल्पकारों की प्रेरणादायक कहानियों का संग्रह है #KamalPushp

नमो एप का नया माड्यूल है 'कमल पुष्प' 

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्होंने नमो एप  के नए माड्यूल 'कमल पुष्प  का उद्घाटन किया था। पीएम मोदी ने भारतीय जन संघ और भारतीय जनता पार्टी की पीढ़ियों  के बलिदान के बारे में एक भावनात्मक भाषण भी दिया। उन्होंने लोगों से अतीत के प्रेरक कार्यकर्ताओं के जीवन व समय का दस्तावेजीकरण करने के लिए कमल पुष्प माड्यूल का उपयोग करने को प्रेरित किया।

जनसंघ की शुरुआत से भाजपा तक व संगठन के विस्तार, आपातकाल के खिलाफ संघर्ष, मंदिर आंदोलन के जरिए सांस्कृतिक गौरव की रक्षा जैसे अभियानों में कार्यकतार्ओं को रीढ़ की हड्डी बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको कमल पुष्प के जरिए याद किया और लोगों को इनकी निस्वार्थ सेवा के बारे में भी बताया।


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मुलायम अपने जन्मदिन पर बोले, प्रदेश के युवा परिवर्तन की राजनीति में कामयाब होंगे

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के संस्थापक व संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने आज अपने जन्मदिन पर लखनऊ में पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी मौजूद रहे। उनके जन्मदिन पर सपा मुख्यालय समेत सभी जिलों में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुलायम सिंह यादव ने कहा कि हमारे नौजवान में जोश है, वही आगे ले जाएगा। प्रदेश का युवा परिवर्तन की राजनीति में कामयाब होंगे।


इस अवसर पर मुलायम सिंह यादव ने कहा कि आज मेरा जन्मदिन मनाया जा रहा है, लेकिन मुझे खुशी तब होगी जब गरीब से गरीब व्यक्ति का जन्मदिन मनाया जाएगा। उन्होंने अपने स्वागत सम्मान के लिए धन्यवाद देते हुए नौजवानों से अह्वान किया कि मुझे विश्वास है कि आप प्रदेश में परिवर्तन करके दिखाएंगे। प्रदेश के युवा परिवर्तन की राजनीति में कामयाब होंगे।


मुलायम को 83-83 किलो के दो लड्डू और 51 किलो का एक लड्डू भेंट किया गया। देवरिया से आए राहुल गुप्ता, मोहन गुप्ता ने 83 किलो का केक भेंट किया। वहीं, प्रोफेसर राम गोपाल यादव ने शॉल ओढ़ाया और पैर छूकर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। साथ में अखिलेश यादव भी मौजूद थे।


इससे पहले मुलायम सिंह यादव के 82वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की राजनीति में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुलायम सिंह को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं। देश की राजनीति में उन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मैं उनके स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना करता हूं।


गौरतलब है कि इटावा जिले के सैफई गांव में 22 नवंबर, 1939 को जन्मे मुलायम सिंह यादव ने शुरूआती जीवन एक शिक्षक के रूप में शुरू किया और 1967 में पहली बार विधानसभा के सदस्य चुने गए वह वर्ष 1977 में रामनरेश यादव के नेतृत्व वाली जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश सरकार में पहली बार मंत्री बने। उन्होंने 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना की थी।





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सांसद आजम खान को सुप्रीम कोर्ट ने दिए जमानत के आदेश

नई दिल्ली।जाने आलम: आपराधिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके बेटे अबदुल्ला खान को जमानत का आदेश दिया है। कोर्ट ने मंगलवार को एक अंतरिम आदेश में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके पुत्र अबदुल्ला खान की जमानत की अनुमति दे दी। इन दोनों पर आपराधिक मामला दर्ज है। यह आदेश चार सप्ताह के बाद लागू होगा। इस बीच उत्तर प्रदेश के निचली अदालत में शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया जाएगा, बता दें कि अब्दुल्लाह के खिलाफ कई अन्य मामले भी हैं इसलिए जेल से उनकी रिहाई मुश्किल है। वहीं आजम खान की जमानत के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने आपत्ति जताई है। इसपर कोर्ट ने सवाल किया कि क्या इस मामले में अभी भी कस्टडी की जरूरत है, इस पर उत्तर प्रदेश की ओर से वकील एसवी राजू ने बताया कि आजम खान के खिलाफ कई गंभीर मामलों में प्राथमिकी दर्ज है।  हालांकि आजम खान के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि 280/2019 FIR मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।

सिब्बल ने कहा कि सरकार ने पासपोर्ट और पैन कार्ड मामले में अलग-अलग FIR दर्ज किया जबकि इस मामले में मुख्य प्राथमिकी में आजम खान को जमानत मिल चुकी है। सिब्बल ने कोर्ट में बताया कि मामले में दूसरा पैन कार्ड और दूसरा जन्म प्रमाणपत्र बनाया गया था। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार कहा ने कि पहला पैन कार्ड मौजूद होने के बाद भी दूसरे पैन कार्ड को जारी कराया गया और पहले पैन कार्ड की जानकारी छुपाई गई। उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा आजम खान अभी अस्पताल में हैं। सरकार ने यह भी बताया कि पाकिस्तान गए एक शख्स के लाखों रुपये संपत्ति को गलत तरीके से अपने नाम कर लिया गया।

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पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा गत दिवस इमोसनली नियुक्तियों पर पुनर्विचार करके उन्हें रद्द करने की मांग

चंडीगढ़/जालंधर, । पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री सुनील जाखड़ ने कहा है कि देश के लिए न्योछावर होने वालों के प्रति देश व समाज हमेशा ही कृत्ज्ञ रहता है पर गत दिवस जिस तरह तरस के आधार पर नियुक्तियां की गई हैं उनमें से कुछ को इस श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा। इसलिए उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस फैसले पर पुनर्विचार करके इन नियुक्तियों को रद्द करने का आग्रह किया है।



आज यहां से जारी बयान में श्री जाखड़ ने कहा कि सरकार के इस फैसले ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा गत दिवस लिए गए बहुत सारे लोग कल्याणकारी फैसलों जैसे के छठा वेतन आयोग लागू करना व हजारों सफाई कर्मचारियों को नियमित करना आदि को भी अपनी परछाई में ले लिया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बहुत लंबे समय तक प्रभाव पड़ेंगे । उन्होंने कहा कि बेशक देश के लिए कुर्बानी करने वालों के प्रति राष्ट्र हमेशा ही शुक्रगुजार रहता है पर गत दिवस के फैसले व कुछ लाभ पात्रों के पिछोकड़ को देखते हुए इस फैसले को तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि इससंबंधी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को गलत सलाह दी गई है, क्योंकि इस फैसले के बाद सरकार पर भाई भतीजावाद व कुछ लोगों की सियासी पुष्तपनाही के आरोप लगेंगे जो कि सही नहीं होगा ।उन्होंने कहा के चुने हुए नुमाइंदे लोगों के हित की बात करते ही अच्छे लगते हैं ना के अपने परिवार के सदस्यों के लिए लाभ की इच्छा रखते हुए I प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से अपील की कि सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करते हुए जनहित में इन नियुक्तियों को तुरंत रद्द करें।

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पति की शहादत के बाद पत्नी ने ज्वॉइन की ‘इंडियन आर्मी’, पुलवामा हमले में हुए थे शहीद

नई दिल्ली : फरवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के दहशतगर्दों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल, जिनको एससी (पी) से सम्मानित किया गया था। आज उनकी पत्नी नितिका कौल ने भारतीय आर्मी ज्वाइन कर ली है।  सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने उनकी वर्दी पर अपने हाथों से चमचमाते हुए सितारे लगाए। आर्मी ज्वाइन करने के पश्चात् अब वह ‘लेफ्टिनेंट नितिका ढौंडियाल’ बन गईं हैं। नितिका ने आज इंडियन फोर्स की वर्दी पहनी तथा शहीद मेजर विभूति शंकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।


बता दें कि पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर 14 फरवरी, 2019 को हुए आतंकवादी हमले के दौरान 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद ही पुलवामा के पिंगलान गांव में आतंकियों को ढेर करने के लिए सेना ने ऑपरेशन चलाया था। पिंगलान में हुए इस एनकाउंटर में 18 फरवरी, 2019 को चार सैनिक शहीद हुए थे जिनमें कश्मीर में 55 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात मेजर रैंक के ऑफिसर विभूति शंकर ढौंडियाल भी शामिल थे। राष्ट्र के लिए बलिदान देने पर उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। उस समय मेजर ढौंडियाल और नितिका की शादी को 10 माह ही हुए थे। शादी की पहली सालगिरह भी न मना पाने वाली नितिका कौल ने अपने पति को एक बहादुर सैनिक बताते हुए कहा था कि उन्‍हें इस बात का पूरा भरोसा है कि उनके पति की शहादत और ज्‍यादा लोगों को सेनाओं में जाने के लिए प्रेरित करेगी।


मेजर ढौंडियाल का शव जब उनके गृहनगर पहुंचा था तो पत्नी नितिका ने गर्व के साथ अपने पति को सैल्‍यूट किया। नितिका ने उस समय कहा था कि आपने मुझसे झूठ कहा था कि आप मुझसे प्‍यार करते हो। आप मुझसे नहीं बल्कि अपने देश से ज्‍यादा प्‍यार करते थे और मुझे इस बात पर गर्व है। शादी के नौ माह बाद ही महज 27 साल की उम्र में ही वीर नारी बनीं नितिका ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा था कि वह कोई बेचारी नहीं हैं बल्कि एक बहादुर शहीद की पत्‍नी हैं और उन्‍हें अपने पति की शहादत पर गर्व है। नितिका ने अपने बहादुर पति को नम आंखों से ‘जय हिंद’ बोलकर अंतिम विदाई दी थी। उस वक़्त अपने पति की अर्थी को सैल्यूट करते एक तस्वीर भी वायरल गुई थी। निकिता आज मुल्क के लाखों फौजियों, फौज के अफसरों और उनके खानदान की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं हैं।


नितिका ने अपने पति की शहादत के छह महीने बाद शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) परीक्षा और सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) के साक्षात्कार को अनुमति दे दी। 30 साल की नितिका ने पिछले वर्ष शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) की परीक्षा पास कर ली थी। इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण के लिए चेन्नई में अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए) में नियुक्त किया गया। लेफ्टिनेंट निकिता कौल ने सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद आज भारतीय सेना में शामिल होकर अपने पति को सही मायने में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह वास्तव में उनके लिए गर्व का क्षण था क्योंकि सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने खुद अपने हाथों से आज निकिता के कंधों पर चमचमाते सितारों को लगाया। अब वह भी पति की तरह आर्मी ऑफिसर की वर्दी पहनकर दुश्मनों से जंग करने के लिए तैयार हैं।


चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में पासिंग आउट परेड के बाद नितिका ने अपने अनुभव बांटते हुए कहा कि पिछले 11 महीने में मैंने उसी यात्रा का अनुभव किया है जिससे उनके पति गुजरे हैं। मेरा मानना है कि वह हमेशा मेरे जीवन का हिस्सा बनने जा रहे हैं। मेरे जीवन के पिछले 11 महीने महत्वपूर्ण रहे हैं, इस यात्रा के दौरान परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग मिला। नीतिका ने अपने सास-श्वसुर का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि पति के शहीद होने के बाद सेना में शामिल होने के लिए उन्होंने ही प्रोत्साहित किया जिसका नतीजा है कि आज मैं इस मुकाम पर हूं। उन्होंने महिलाओं को सन्देश देते हुए कहा कि जीवन में चुनौतियां बहुत हैं लेकिन अगर खुद पर भरोसा रखें तो आत्मविश्वास इन कठिनाइयों को आसान बना देता है।





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अरविंद केजरीवाल ने किया तिरंगे का अपमान, संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल का दावा

नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर टेलीविजन पर प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अनादर करने और भारतीय ध्वज संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। गुरुवार को हिंदी में केजरीवाल को लिखे अपने पत्र में पटेल ने कहा कि केजरीवाल के हालिया वायरल सम्मेलनों के दौरान प्रदर्शित झंडों में हरी धारियों को विकृत और बड़ा किया गया था और सफेद को कम किया गया था। पटेल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से मैं अरविंद केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस देख रहा था और देखा कि उनके पीछे हरी झंडों की धारी बढ़ी हुई है। यह राष्ट्रीय ध्वज के चित्रण पर नियमों के अनुसार नहीं है। झंडे की मर्यादा बनाए रखने के लिए मैंने उन्हें पत्र लिखा है। पटेल ने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल को लिखे अपने पत्र में कहा है कि अरविंद केजरीवाल जब भी टीवी चैनल पर संबोधन करते हैं तो उनकी कुर्सी के पीछे लगे राष्ट्रीय ध्वज के स्वरूप पर बेबस ही ध्यान चला जाता है, क्योंकि वह मुझे अपनी गरिमा एवं संवैधानिक स्वरूप से भिन्न प्रतीत होता है। राष्ट्रीय ध्वज को सजावट के लिए जैसे तैयार करके लगाया गया है बीच के सफेद हिस्से को कम करके हरे हिस्से को जोड़ दिया गया लगता है, जो भारत सरकार के गृह मंत्रालय के द्वारा निर्दिष्ट भारत झंडा संहिता में उल्लिखित भाग 1 के 1.3 में दिए गए मानकों का प्रयोग नहीं दिखाई देता है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जाने-अनजाने में ऐसे कृत्य की अपेक्षा नहीं करते हुए इस ओर आपका ध्यानाकर्षण चाहता हूं। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री ने अपने पत्र में कहा है मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जिस तरह से झंडा लगाया जाता है, उससे लगता है कि राष्ट्रीय ध्वज को सम्मान देने की बजाय उसका इस्तेमाल सजावट के लिए किया जाता है।




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मुख्यमंत्री योगी ने शहीद के परिवार को दिए पचास लाख की आर्थिक मदद

गोरखपुर : श्रीनगर कुलगांव में बीते सोमवार को आतंकी हमले में शहीद हुए गोरखपुर के कमांडो नवीन सिंह के परिजनों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 लाख की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी और शहीद के नाम से सड़क बनवाने की भी घोषणा की है।


पहाड़ों पर रहने वाले जरुरतमंदों को राशन पहुंचाने जा रही सेना की गाड़ी पर सोमवार को आतंकवादियों ने श्रीनगर कुलगांव के पास हमला बोल दिया था। गाड़ी में सवार गोरखपुर जनपद खजनी के भगवानपुर के कमांडो नवीन सिंह (23) शहीद हो गए थे। मुख्यमंत्री योगी ने शहीद की शहादत को नमन करते हुए परिवार के प्रति अपनी संवेदनाए व्यक्त की हैं।


शहीद नवीन के पिता जय प्रकाश सिंह वर्ष 2006 में सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। नवीन चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था। वह अविवाहित था। जबकि उनकी दो बहनों की शादी हो चुकी है। बड़ा भाई विकास सिंह लखनऊ में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। 



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नेपाल में सरकार गठन के प्रयास तेज, राष्ट्रपति ने दावा पेश करने के लिए दलों को तीन दिन का वक्त दिया

काठमांडू : प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की सरकार के विश्वास मत हासिल नहीं कर पाने के बाद नेपाल की राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने नई सरकार बनाने की खातिर बहुमत साबित करने के लिए विभिन्न दलों को बृहस्पतिवार तक का वक्त दिया है।


राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से सोमवार को जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के तहत राष्ट्रपति ने बहुमत की सरकार का गठन करने के लिए विभिन्न दलों को आमंत्रित करने का फैसला लिया है।


हिमालयन टाइम्स की खबर के मुताबिक, भंडारी ने सियासी दलों को तीन दिन का वक्त दिया है और कहा है कि वे बृहस्पतिवार की रात नौ बजे तक अपना दावा पेश करें।


उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी के निर्देश पर संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के आहूत विशेष सत्र में प्रधानमंत्री ओली की ओर से पेश विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में केवल 93 मत मिले थे जबकि 124 सदस्यों ने इसके खिलाफ मत दिया। विश्वास प्रस्ताव के दौरान कुल 232 सदस्यों ने मतदान किया जिनमें से 15 सदस्य तटस्थ रहे।


ओली को 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में विश्वासमत जीतने के लिए 136 मतों की जरूरत थी क्योंकि चार सदस्य इस समय निलंबित हैं।


नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) के पुष्पकमल दहल की अगुवाई वाले गुट ने 69 वर्षीय ओली के नेतृत्व वाली सरकार से कुछ ही दिन पहले समर्थन वापस लिया था।








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राजस्व घाटा अनुदान की दूसरी किस्त जारी, 17 राज्यों को मिले 9871 करोड़ रुपये

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने राज्यों को आर्थिक मदद देने के लिए राजस्व घाटा अनुदान की दूसरी किस्त जारी कर दी है। इस दूसरी किस्त में 17 राज्यों को 9,871 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। ये जानकारी वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में दी गई है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर चल रही देशव्यापी कोशिश में केंद्र सरकार राज्य सरकारों को हर संभव तरीके से मदद करने की कोशिश कर रही है। इसी कोशिश के तहत वित्त मंत्रालय ने मई के महीने में राजस्व घाटा अनुदान की दूसरी किस्त जारी की है। इससे पहले अप्रैल के महीने में भी सरकार ने राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान की पहली किस्त जारी की थी। दो किस्तों में अभी तक केंद्र सरकार राज्यों को कुल 19,472 करोड़ रुपये की राशि राजस्व घाटा अनुदान के रूप में जारी कर चुकी है। केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी देने के बाद राजस्व खाते में जो अंतर रह जाता है, उसे पूरा करने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों को राजस्व घाटा अनुदान देती है। राजस्व घाटा अनुदान की सिफारिश संविधान के अनुच्छेद 275 के तहत वित्त आयोग की ओर से की जाती है। उल्लेखनीय है कि 15वें वित्त आयोग ने देश के 17 राज्यों को राजस्व घाटा पूरा करने के लिए तत्संबंधी अनुदान देने की सिफारिश की थी। राजस्व घाटा अनुदान की दूसरी किस्त जारी करने के पहले केंद्र सरकार 1 मई को राज्यों को आपदा कोष के तहत भी केंद्रीय हिस्से की पहली किस्त के रूप में 8,873.6 करोड़ रुपये की राशि जारी कर चुकी है। इस राशि को जारी करते वक्त केंद्र सरकार ने साफ कर दिया था कि आपदा कोष के तहत दी जाने वाली राशि का 50 फीसदी यानी 4,436.8 करोड़ रुपये की राशि का इस्तेमाल कोरोना संक्रमण के रोकथाम में किया जा सकेगा। राज्यों को आपदा कोष की ये राशि केंद्रीय गृह मंत्रालय की सिफारिश पर जारी की गई थी। उल्लेखनीय है कि आपदा कोष के तहत केंद्र सरकार की ओर से आमतौर पर जून महीने में राशि का आवंटन किया जाता है लेकिन देशव्यापी कोरोना संकट को देखते हुए इस साल ये राशि समय से पहले ही जारी कर दी गई है। आपदा कोष की राशि के आधे हिस्से का इस्तेमाल राज्य सरकार अपने अस्पतालों में चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने, वेंटिलेटर की व्यवस्था करने, एयर प्यूरीफायर लगाने, एंबुलेंस सेवा को मजबूत करने और कोविड केयर सेंटर तैयार करने में कर सकती है। ...

पश्चिम बंगाल : कई आईएएस अधिकारियों का तबादला

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को विभिन्न रैंक के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया। बृहस्पतिवार शाम जारी आदेश के अनुसार, कोलकाता महानगर विकास परिषद के सीईओ पी उलगानाथन को दक्षिण 24 परगना जिले का जिलाधिकारी बनाया गया है। पश्चिम वर्द्धमान जिले के जिलाधिकारी (डीएम) अनुराग श्रीवास्तव का पश्चिम बंगाल मिनरल डेवलपमेंट एंड ट्रेडिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड में तबादला किया गया है। आदेश के अनुसार, दार्जिलिंग के डीएम शशांक सेठी को नादिया का डीएम जबकि विभु गोयल, संयुक्त सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग को पश्चिम वर्द्धमान जिले का डीएम बनाया गया है। डब्ल्यूबीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक एस पोन्नामबलम को दार्जिलिंग का डीएम बनाया गया है। एक अन्य आदेश के अनुसार, आईपीएस काडर में पश्चिम जोन के एडीजी आईजीपी डॉ. राजेश कुमार और अलीपुर के एसपी (पुलिस अधीक्षक) को अनिवार्य प्रतीक्षा में रखा गया है। आदेश के अनुसार, एसपी हावड़ा (ग्रामीण) श्रीहरि पांडे और पूर्वी वर्द्धमान के एसपी अजित सिंह को भी अनिवार्य प्रतीक्षा में रखा गया है। बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय के डीसी उत्तरी जोन अमरनाथ के. को पूर्वी मिदनापुर जिला का एसपी बनाया गया है। पदभार संभालने के कुछ ही देर बाद मुख्यमंत्री ने बुधवार को शीर्ष स्तर के 29 पुलिस अधिकारियों का तबादला किया। इनमें अधिकतर वे अधिकारी थे जिनका तबादला चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने किया था। ...

एमके स्टालिन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली

चेन्नई : विधानसभा चुनाव में द्रमुक को मिली भारी जीत के बाद पार्टी अध्यक्ष मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन ने शुक्रवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने 68 वर्षीय स्टालिन को राजभवन में आयोजित साधारण समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। स्टालिन पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं। विपक्षी अन्नाद्रमुक के शीर्ष नेता ओ पनीरसेल्वम, कांग्रेस के पी चिदंबरम समेत गठबंधन के नेता, एमडीएमके अध्यक्ष वाइको और राज्य के शीर्ष अधिकारी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। शपथ ग्रहण समारोह कोविड-19 नियमों का पालन करते हुए आयोजित किया गया था और सभी ने मास्क लगाया हुआ था। ...

उपराष्ट्रपति ने अजीत सिंह के निधन पर दुख जताया

नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बृहस्पतिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल (रालेद) के प्रमुख चौधरी अजीत सिंह के निधन पर शोक प्रकट किया और कहा कि कृषि के क्षेत्र में उनके योगदान को सदैव याद किया जाएगा। उपराष्ट्रपति ने ट्वीट कर कहा, ‘‘पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ राजनेता चौधरी अजीत सिंह के असामयिक निधन का समाचार पा कर दुखी हूं। कृषि और कृषकों की प्रगति में आपका योगदान सदैव आदरपूर्वक याद किया जाएगा। शोक की इस घड़ी में मेरी प्रार्थनाएं और संवेदनाएं उनके परिजनों व सहयोगियों के साथ हैं। मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।’’ चौधरी अजीत सिंह 20 अप्रैल को कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। उनके पुत्र व मथुरा के पूर्व सांसद जयंत चौधरी ने आज उनके निधन की जानकारी दी। गुरुग्राम के निजी अस्पताल में सिंह का इलाज चल रहा था। उन्होंने अपने पिता की एक तस्वीर के साथ ट्वीट किया, ‘‘चौधरी साहब नहीं रहे।’’ अजीत सिंह ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। ...