दहिया उत्तर प्रदेश के मुख्य कोच नियुक्त

नई दिल्ली : पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज विजय दहिया को गुरुवार को उत्तर प्रदेश क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया।


उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह घोषणा की।


यूपीसीए ने ट्वीट किया, ‘‘वह अनुभवी कोच हैं और हम उनके रहते हुए अपने सभी सपनों को साकार करने के लिये एक शानदार सफर की उम्मीद कर रहे हैं।’’


दहिया इससे पहले दिल्ली के कोच तथा इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कोलकाता नाइट राइडर्स और दिल्ली कैपिटल्स के सहायक कोच रह चुके हैं।


दहिया ने भारत की तरफ से दो टेस्ट और 19 एकदिवसीय मैच खेले। 






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रियो ओलंपिक: 10 से अधिक मुक्केबाजी मुकाबलों में ‘पैसे’ के लिए हेराफेरी, जांच में हुआ खुलासा

 नई दिल्ली :  स्वतंत्र जांच में खुलासा हुआ है कि 2016 रियो ओलंपिक की मुक्केबाजी प्रतियोगिता के 10 से अधिक मुकाबलों में ‘पैसे’ या अन्य ‘फायदों’ के लिए हेरफेर की गई थी। इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (एआईबीए) ने आगामी पुरुष विश्व चैंपियनशिप में रैफरी और जज के लिए ‘कड़ी’ चयन प्रक्रिया का वादा किया है।


एआईबीए को मैकलारेन ग्लोबल स्पोर्ट्स सॉल्युशंस (एमजीएसएस) की मुक्केबाजी की स्वतंत्र जांच की पहले चरण की रिपोर्ट मिल गई है जो पीटीआई के पास भी है। इसमें खुलासा किया गया है कि रियो में अधिकारियों द्वारा मुकाबलों में हेरफेर की प्रणाली मौजूद थी। कुल मिलाकर दो फाइनल सहित 14 मुकाबले जांच के दायरे में हैं।


रिपोर्ट में खेलों में अधिकारियों की संदेहास्पद नियुक्तियों के संदर्भ में किया गया, ‘‘यह सेंटा क्लॉज के भ्रष्ट और शिष्ट के मिथक का पूरी तरह उलट है। भ्रष्ट लोगों को रियो में नियुक्ति दी गई क्योंकि वे इच्छुक थे या दबाव में हेराफेरी के किसी आग्रह का समर्थन करने को तैयार थे जबकि शिष्ट लोगों को बाहर कर दिया गया। ’’


जांच में खुलासा हुआ है कि रियो के नतीजों को हेराफेरी का षड्यंत्र लंदन ओलंपिक 2012 से पहले भी रचा गया और 2016 टूर्नामेंट के क्वालीफाइंग टूर्नामेंटों के दौरान इसका ट्रायल किया गया।


इसमें कहा गया, ‘‘पैसे और एआईबीए से फायदे के लिए मुकाबलों में हेरफेर की गई या राष्ट्रीय महासंघों और उनकी ओलंपिक समितियों का आभार जताने के लिए और कुछ मौकों पर प्रतियोगिता के मेजबान की उसके वित्तीय समर्थन और राजनीतिक समर्थन के लिए। ’’


इसमें कहा गया, ‘‘आज तक की जांच में निष्कर्ष निकलता है कि इस तरह की हेराफेरी में कई मौकों पर छह अंक की मोटी धनराशि जुड़ी होती थी। हेराफेरी की प्रणाली भ्रष्ट रैफरी और जज तथा ड्रॉ आयोग से जुड़ी थी।’’


एआईबीए ने विस्तृत कार्रवाई और रैफरी तथा जजों की नियुक्ति के लिए कड़ी प्रक्रिया का वादा किया है।


अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से दोबारा मान्यता हासिल करने का प्रयास कर रहे एआईबीए ने कहा, ‘‘एआईबीए रियो 2016 मुक्केबाजी टूर्नामेंट की जांच के नतीजों से चिंतित है और पुष्टि करता है कि विस्तृत सुधारवादी कदम उठाए जाएंगे जिससे कि मौजूदा एआईबीए प्रतियोगिताओं की अखंडता बनी रहे।’’


अब 24 अक्टूबर से सर्बिया के बेलग्राद में शुरू हो रही विश्व चैंपियनशिप के लिए नियुक्त होने वाले रफैरी, जज और तकनीकी अधिकारियों को कड़ी चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा जिसमें रिचर्ड मैकलारेन की अगुआई वाला एमजीएसए उनकी पृष्ठभूमि और अन्य जांच भी करेगा।


एआईबीए की रिपोर्ट में कहा गया है कि एआईबीए के तत्कालीन प्रमुख चिंग कुओ वू रियो में हुए प्रकरण के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार थे।


जांच में कहा गया है दो मुकाबले ऐसे थे जिन्होंने पूरी प्रणाली को सार्वजनिक तौर पर धाराशायी कर दिया।


पहला मुकाबला विश्व एवं यूरोपीय चैंपियन माइकल कोनलान तथा रूस के व्लादिमीर निकितिन के बीच बैंटमवेट क्वार्टर फाइनल था। इसमें कोनलान को रिंग में दबदबा बनाने के बावजूद हार झेलनी पड़ी। कोनलान ने रैफरी और जज से कैमरा के सामने दुर्व्यवहार किया और बाद में पेशेवर मुक्केबाज बन गए।


दूसरा स्वर्ण पदक का हैवीवेट मुकाबला था जो रूस के येवगेनी तिसचेंको और कजाखस्तान के वेसिली लेविट के बीच खेला। लेविट को भी दबदबा बनाने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा था।





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'चक दे! इंडिया' की 'कोमल चौटाला' चित्रांशी रावत बोलीं- शायद मैं भी ओलिंपिक्स की टीम में होती

मुंबई : बॉलिवुड स्टार शाहरुख खान की सुपरहिट फिल्म 'चक दे! इंडिया' में कोमल चौटाला का रोल कर मशहूर हुईं ऐक्ट्रेस चित्रांशी रावत पिछले काफी समय से गायब हैं। कम ही लोगों को पता है कि ऐक्टर बनने से पहले चित्रांशी वास्तव में एक हॉकी प्लेयर रही हैं। चित्रांशी का कहना है कि अगर वह हॉकी खेलना जारी रखतीं तो आज शायद ओलिंपिक्स की हॉकी टीम का हिस्सा होतीं। 


'चक दे! इंडिया' साइन करने के समय को याद करते हुए चित्रांशी ने कहा, 'जब मुझे फिल्म का ऑफर मिला था तब मैं अपनी पढ़ाई और हॉकी पर ध्यान दे रही थी। फिल्म हिट हो गई और लोग मुझे पहचानने लगे। इसके बाद मुझे और काम मिलने लगा तो मैं ऐक्टिंग में ही आ गई। इसके बाद हॉकी की प्रेक्टिस के लिए समय निकालना कठिन हो गया।'


तोक्यो ओलिंपिक्स में भारतीय महिला हॉकी टीम की परफॉर्मेंस से खुश चित्रांशी ने कहा, 'यह इतिहास में पहली बार है जबकि महिला हॉकी टीम सेमी-फाइनल्स में पहुंची है। इससे पता चलता है कि अभी बहुत कुछ पाना बाकी है। साथ ही इससे हमारी टीम को पहचान और स्पॉन्सरशिप मिलेगी जिसकी पिछले काफी समय से जरूरत थी। मुझे स्पोर्ट्स के साथियों को देखकर खुशी होती है। अब हॉकी के साथ ही अन्य स्पोर्ट्स पर भी ध्यान देने का समय है।'


ओलिंपिक्स के दौरान चित्रांशी के मन में क्या आया? इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'हमारी हॉकी प्लेयर वंदना कटारिया और मैं साथ में खेला करते थे। मुझे इंडियन टीम में उसे देखकर बहुत खुशी हुई। उसे देखकर मेरे दिमाग में एक ही बात आई कि अगर मैं हॉकी खेलना जारी रखती तो शायद मैं भी अपने देश की हॉकी टीम के साथ ओलिंपिक्स में होती। मुझे नहीं पता लेकिन ऐसा सोचकर बहुत अच्छा लग रहा था।'


चित्रांशी ने कहा कि हॉकी से उन्हें हमेशा प्यार रहेगा मगर अभी वह ऐक्टिंग करके खुश हैं। उन्होंने कहा, 'मैं लगातार काम कर रही हूं लेकिन कुछ लोगों को लगता है कि मैं काम नहीं कर रही हूं क्योंकि मैं खुद को बहुत ज्यादा प्रमोट नहीं करती हूं। मेरे पिछला टीवी शो 'शंकर जयकिशन' था। इसके बाद मैंने फिल्मों, वेब शो के लिए शूटिंग की है। अभी मैं एक कॉमिडी शो में काम कर रही हूं। मैंने पिछले 5 सालों में कई विज्ञापनों में भी काम किया है।'




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अजित कुमार, दीक्षा को राष्ट्रीय अंडर-23 एथलेटिक्स मीट में 1500 मीटर में स्वर्ण

नई दिल्ली : गुजरात के अजित कुमार और मध्य प्रदेश की केएम दीक्षा ने सोमवार को यहां पहली राष्ट्रीय अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में क्रमश: पुरुष और महिला 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीते।


अजित ने तीन मिनट 47.31 सेकेंड के निजी सर्वश्रेष्ठ समय के साथ 1500 मीटर में सोने का तमगा अपने नाम किया।


महिला 1500 मीटर में दीक्षा ने चार मिनट 14.02 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने अपने निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में सात सेकेंड का सुधार किया।


उत्तर प्रदेश की किरण बालियान ने गोला फेंक में 16.11 मीटर के प्रयास से स्वर्ण पदक अपने नाम किया।


सुबह के सत्र में महाराष्ट्र के आदेश यादव और कोमल चंद्रकांत क्रमश: पुरुष और महिला 5000 मीटर के खिताब जीते।


हरियाणा के प्रशांत सिंह कन्हैया ने 5.10 मीटर के अपने निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बराबरी करते हुए पोल वॉल्ट में स्वर्ण पदक जीता।




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तीरंदाजी विश्व चैंपियनशिप में फिर स्वर्ण पदक से चूका भारत, दो रजत पदक जीते

यांकटन (अमेरिका) : भारत की महिला और मिश्रित युगल कंपाउंड तीरंदाजी टीम को कोलंबिया के खिलाफ एकतरफा मुकाबलों में शिकस्त के साथ यहां विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारत विश्व चैंपियनशिप में अपने पहले स्वर्ण पदक के लिए चुनौती पेश कर रहा था। भारत अब तक स्वर्ण पदक नहीं जीत पाया है लेकिन उसने सबसे अधिक 10 बार पोडियम पर जगह बनाई है। इस दौरान भारत ने आठ बार फाइनल में चुनौती पेश की और उसे हर बार रजत पदक से संतोष करना पड़ा। रैंकिंग दौर में चौथे स्थान पर रही अभिषेक वर्मा और ज्योति सुरेखा वेनाम की भारत की स्टार मिश्रित युगल जोड़ी ने एक अंक की बढ़त के साथ शुरुआत की लेकिन इसके बाद कोलंबिया का दबदबा देखने को मिला। भारतीय जोड़ी को अंतत: 150-154 से शिकस्त झेलनी पड़ी। ज्योति, मुस्कान किरार और प्रिया गुर्जर की सातवीं वरीय महिला टीम को सारा लोपेज, एलेजांद्रा उसक्वियानो और नोरा वाल्डेज की तिकड़ी के खिलाफ 224-229 से हार का सामना करना पड़ा। रैंकिंग दौर में शीर्ष पर रही कोलंबियाई टीम ने 15 बार 10 अंक पर निशाना साधा और इस दौरान उनके पांच निशाने बिलकुल बीच में लगे। पहले दौर के बाद दोनों टीमें 58-58 से बराबर थी। भारतीय महिला टीम ने इसके बाद बढ़त बनाने का मौका गंवाया और विरोधी टीम एक अंक से आगे हो गई। कोलंबियाई टीम ने इसके बाद भारतीय टीम को कोई मौका नहीं दिया और आखिरी 12 में से आठ तीर 10 अंक पर मारकर तीसरी बार महिला खिताब जीता। यह 2017 के बाद टीम का पहला खिताब है। मिश्रित युगल में भारत के लिए दूसरा दौर खराब रहा जहां उन्होंने दो बार नौ और एक बार अंठ अंक के साथ एक अंक की बढ़त गंवाई और अंतत: चार अंक के अंतर से मुकाबला हार गई। रैंकिंग दौर में दूसरे स्थान पर रही डेनियल मुनोज और सारा ने पहले दौर के बाद वापसी की और तीसरे दौर में 40 में से 40 अंक जुटाकर पहली बार मिश्रित युगल का स्वर्ण पदक जीता। कुल मिलाकर कोलंबियाई जोड़ी ने 16 में से 10 तीर पर 10 अंक जुटाए जबकि भारतीय खिलाड़ी आठ बार ही 10 अंक जुटा पाए। कोलंबिया ने कंपाउंड तीरंदाजी में अपना दबदबा बरकरार रखा और विश्व चैंपियनशिप में अपने स्वर्ण पदकों की संख्या को चार तक पहुंचाया। भारत व्यक्तिगत कंपाउंड वर्ग में भी तीन पदक की दौड़ में बना हुआ है। वर्मा और ज्योति को शनिवार को अपने अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले खेलने हैं। रिकर्व वर्ग में अंकिता भकत एकमात्र तीरंदाज बची हैं। वह रविवार को अंतिम आठ मुकाबले में उतरेंगी।







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जिस तरह गेंदबाजी की उससे खुश हूं : चहल

नई दिल्ली : रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के स्पिनर युजवेंद्र चहल ने दुबई में नेट्स खत्म करने के बाद कहा है कि उन्होंने जिस तरह गेंदबाजी की उससे वह खुश हैं।


आईपीएल 2021 का दूसरा चरण यूएई में 19 सितंबर से शुरू होना है। इस टूर्नामेंट को मई में कुछ टीमों में कोरोना के मामले सामने आने के कारण स्थगित किया गया था। आरसीबी की टीम फिलहाल सात मैचों में पांच जीत के साथ तालिका में तीसरे स्थान पर है।


आरसीबी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स में पोस्ट किए वीडियो में चहल ने कहा, एहसास काफी अच्छा है। गर्मी ठीक है और मैंने जिस तरह से गेंदबाजी की उससे मैं खुश हूं। तालिका में हम अच्छी स्थिति में हैं और हमारे पास शीर्ष पर रहने का अच्छा मौका रहेगा। जब आप नेट्स पर अच्छी गेंदबाजी करते हैं तो आपको हमेशा अच्छा लगता है। मैं यह कह सकता हूं कि पुराना यूजी वापस आ गया है।


आईपीएल 2021 के दूसरे चरण में रविवार को होने वाले पहले मुकाबले में गत चैंपियन मुंबई इंडियंस का सामना दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में चेन्नई सुपर किंग्स से होगा।


इससे पहले, बीसीसीआई ने घोषणा की थी कि आईपीएल के इस सीजन के शेष सत्र में सीमित संख्या में दर्शकों को शामिल होने की मंजूरी दी जाएगी। 



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मेस्सी नहीं दिला सके पीएसजी को जीत, सिटी, लिवरपूल और मैड्रिड जीते

जिनेवा :  लियोनेल मेस्सी, काइलियान एमबाप्पे और नेमार जैसे सितारों से सजी होने के बावजूद पेरिस सेंट जर्मेन जीत दर्ज नहीं कर सकी और चैम्पियंस लीग फुटबॉल के मैच में उसे बेल्जियम के क्लब ब्रजे ने ड्रॉ पर रोक दिया। पीएसजी के लिये मिडफील्डर एंडेर हेरारा ने गोल दागा जबकि बेल्जियम के क्लब के लिये 27वें मिनट में कप्तान हैंस वानाकेन ने गोल किया। पहले हाफ में मेस्सी का शॉट क्रॉसबार से टकरा गया और उन्हें बाद में पीला कार्ड भी मिला। वहीं एमबाप्पे बायें टखने में चोट के शिकार हो गए। मेस्सी पिछले महीने ही बार्सीलोना छोड़कर पीएसजी से जुड़े हैं। पहली बार वे एमबाप्पे और नेमार के साथ इस क्लब के लिये खेल रहे थे। अन्य मैचों में सेबेस्टियन हालेर के चार गोल की मदद से अजाक्स ने स्पोर्टिंग लिसबन को 5.1 से हराया। वहीं मैनचेस्टर सिटी ने लेइपजिग को 6.3 से शिकस्त दी। लिवरपूल ने एसी मिलान को 3.2 से हराया जो सात सत्र बाद टूर्नामेंट में वापसी कर रही थी। रीयाल मैड्रिड ने इंटर मिलान को एक गोल से मात दी जबकि एटलेटिको मैड्रिड ने पोर्तो से गोलरहित ड्रॉ खेला। मोलदोवा लीग की शेरीफ तिरास्पोल ने उक्रेन की शखतार दोनेस्क को 2.0 से हराया। 




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एएफआई ने तोक्यो में खराब प्रदर्शन के बाद श्रीशंकर के कोच को बर्खास्त किया

जयपुर : भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने सोमवार को कहा कि उसने तोक्यो ओलंपिक में लंबी कूद के खिलाड़ी एस श्रीशंकर के खराब प्रदर्शन के बाद उनके कोच एस मुरली को बर्खास्त कर दिया है जो उनके पिता भी हैं। यहां कार्यकारी परिषद की दो दिवसीय बैठक के बाद एएफआई ने साथ ही कहा कि ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप से पहले राष्ट्रीय चैंपियनशिप की तरह का टूर्नामेंट या फाइनल ट्रायल का आयोजन करके इन टूर्नामेंटों के लिए टीम का चयन किया जाएगा।


मार्च में फेडरेशन कप में 8.26 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ क्वालीफिकेशन स्तर हासिल करने वाले 22 साल के श्रीशंकर तोक्यो ओलंपिक से ठीक पहले फिटनेस ट्रायल में बुरी तरह नाकाम रहे जिसके बाद एएफआई को उन्हें खेलों से हटाने के बारे में विचार करना पड़ा।


कोच ने हालांकि एएफआई को लिखित में दिया कि श्रीशंकर तोक्यो में कम से कम क्वालीफिकेशन का प्रदर्शन दोहराएंगे जिसके बाद एएएफआई ने उन्हें ओलंपिक में हिस्सा लेने की स्वीकृति दे दी। श्रीशंकर ने हालांकि तोक्यो खेलों के बाद अपना सबसे खराब प्रदर्शन किया।


एएफआई अध्यक्ष आदिल सुमारिवाला ने कहा, ‘‘हम उसके कोचिंग कार्यक्रम से खुश नहीं हैं, पहली कार्रवाई हो चुकी है और हमने उसका कोच बदल दिया है। ’’


माना जा रहा है कि श्रीशंकर और राष्ट्रीय महासंघ से जुड़े मामले के बाद ही एएफआई ने ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक प्रतियोगिताओं से पहले ‘फाइनल’ टूर्नामेंट कराने का फैसला किया है।


एएफआई की योजना समिति के अध्यक्ष ललित भनोट ने कहा,‘‘ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप का क्वालीफिकेशन समय काफी लंबा होता है। इसलिए अब फाइनल ट्रायल होगा, यह असल में प्रतियोगिता होगी और यह टीमों के चयन के लिए अंतिम प्रतियोगिता होगी।’’


ऐसा इसलिए किया गया है जिससे कि बड़ी प्रतियोगिता से पहले खिलाड़ी अपनी फॉर्म के शीर्ष पर हो।


अनुभवी प्रशासक भनोट ने कहा कि भारत अगले साल एशियाई खेलों के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम भेजेगा लेकिन शायद विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों के साथ ऐसा नहीं हो।


उन्होंने कहा, ‘‘जो क्वालीफाई करेंगे उन्हें विश्व चैंपियनशिप के लिए भेजा जाएगा लेकिन एशियाई खेलों के लिए हम सर्वश्रेष्ठ टीम भेजेंगे। जहां तक राष्ट्रमंडल खेलों का सवाल है, यह इस पर निर्भर करेगा कि हमारी किन प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है और कहां हमारे पास पदक जीतने का मौका नहीं है। ’’







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प्रधानमंत्री से मिलकर अभिभूत हुए पैरा एथलीट कहा- आजतक ऐसा सम्मान किसी ने नहीं दिया

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पैरा-एथलीटों के साथ अपनी बातचीत का वीडियो फुटेज साझा किया। 9 सितंबर को प्रधानमंत्री ने अपने आवास पर टोक्यो 2020 पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले दल की मेजबानी की थी।


प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान एथलीटों के साथ-साथ उनके कोच से भी संवाद किया और खेलों में पैरालंपिक पदक विजेताओं के रिकॉर्ड तोड़ ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए उन्हें बधाई दी। मोदी ने कहा कि "मुझे आप सभी से प्रेरणा मिलती है।" इस दौरान कई खिलाड़ी भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि आजतक उन्हें ऐसा सम्मान किसी ने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अन्य देश के खिलाड़ी हमसे कह रहे थे कि तुम्हारे प्रधानमंत्री तुमसे बात कर रहे हैं ये गर्व की बात है। हमारे प्रधानमंत्री तो हमसे बात नहीं करते हैं।


खिलाड़ियों ने पदक के साथ प्रधानमंत्री से मुलाकात को बड़ी उपलब्धि बताया। पदक जीतने पर प्रधानमंत्री के फोन की भी सराहना की। पैरा-एथलीटों ने उन्हें आमंत्रित करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया और इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि वे उनके साथ एक टेबल साझा करने के लिए सम्मानित महसूस कर रहे हैं।


इस दौरान प्रधानमंत्री ने पदक विजेता पैरा-पैडलर भावना पटेल को हमेशा सकारात्मक सोचने की सलाह दी। रुबीना को दिलासा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आप हार-जीत की बात दिमाग से निकाल दो। वहां तक पहुंचना ही बड़ी बात है। प्रधानमंत्री ने लड़कियों को अवसर देने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में कमाल कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने दिव्यांगजनों को प्रशिक्षित करने की तकनीक पर एक कार्यशाला आयोजित किये जाने की जरूरत पर बल दिया।


प्रधानमंत्री ने भारतीय पैरालिंपिक एथलीटों से कहा, "आज आप सभी अपनी कड़ी मेहनत के कारण जाने जाते हैं। आप सभी लोगों को प्रेरित कर सकते हैं, बड़े बदलाव लाने में मदद कर सकते हैं। मैं हमेशा आप सभी के साथ हूं।" आजादी के अमृत महोत्सव के मद्देनजर उन्होंने पैरा खिलाड़ियों से खेल जगत के अलावा किसी भी एक अन्य सामाजिक गतिविधि को लेकर स्कूल, कॉलेज और आसपास के युवाओं को जागरुक करने का आह्वान किया।


प्रधानमंत्री ने कहा कि आप देश के राजदूत हैं। आपने पूरी दुनिया में राष्ट्र का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धियों का प्रभाव पारिवारिक जीवन में भी पड़ने वाला है। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से कहा कि खेल में जो भी कमी रह गई उसे बोझ नहीं बनने देना। 130 करोड़ देशवासी खिलाड़ियों के साथ खड़े हैं।


"अभी नहीं तो कभी नहीं" की मानसिकता को नकारात्मक बताते हुए से इससे असहमति जताते हुए प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से दिये अपने भाषण का हवाला देते हुए कहा, "यही समय है, सही समय है कि सोच होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि हार को हराने का भाव हमेशा मन में रहना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों ने हारी हुई मानसिकता को हरा दिया है।


खिलाड़ी ने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि जब आप अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने जाते हैं तब कैसा महसूस करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो वह यह भाव लेकर काम करते थे कि मैं नहीं छह करोड़ गुजराती हैं। उसी प्रकार अब बतौर प्रधानमंत्री मैं नहीं 130 करोड़ देशवासी हैं। इसके कारण बड़ा एक्साइटमेंट नहीं होता है। उन्होंने कहा कि मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि सामान्य रही है। मैं अपने देश की बात पूरी तन्मयता के साथ रखता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं स्वयं प्रकाशित नहीं हूं बल्कि परप्रकाशित हूं।


खिलाड़ियों ने प्रधानमंत्री को बताया कि पैरा खेल और खिलाड़ियों को कोई जानता तक नहीं था लेकिन आपने इसे पहचान दी है। इसबार देश ने न केवल हमारे पदकों को देखा बल्कि खेल स्पर्धाओं को भी देखा। पिछले साल जितने पैरा-एथलैटी गये थे उतने तो इस बार पदक आये हैं। यह सब केंद्र के सशक्त नेतृत्व की बदौलत है। प्रधानमंत्री ने इस पर कहा कि खिलाड़ी अपने पुरुषार्थ और परिश्रम की बदौलत यहां तक पहुंचे हैं। खिलाड़ियों ने प्रधानमंत्री की स्मरण शक्ति की प्रशंसा की तो उन्होंने कहा कि जब अपनापन हो जाता है तो आपको याद नहीं रखना पड़ता है।


उल्लेखनीय है कि भारत ने टोक्यो पैरालंपिक में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए कुल 19 पदक जीते जहां 9 खेल विषयों के 54 पैरा-एथलीटों ने राष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया। इनमें पांच स्वर्ण, आठ सिल्वर और छह कांस्य पदक हैं।




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प्रसारणकर्ताओं से बीजिंग ओलंपिक की कवरेज की योजना रद्द करने की अपील

तोक्यो :  मानवाधिकार समूहों ने अमेरिकी प्रसारण नेटवर्क एनबीसी सहित दुनिया के सबसे बड़े प्रसारणकर्ताओं से अगले साल बीजिंग में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक की कवरेज की योजना रद्द करने की अपील की है। शीतकालीन खेल चार फरवरी से शुरू होंगे। यह आग्रह खुले पत्र में मानवाधिकार समूहों ने किया है जो चीन में अल्संख्यकों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनमें उइगर मुस्लिम, तिब्बती, हांगकांग के निवासी और अन्य शामिल हैं। एपी के पास मौजूद इस पत्र को एनबीसी यूनिवर्सल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैफ शेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रसारण कंपनियों के कार्यकारी अधिकारियों के पास भेजा गया है। एनबीसी अगले छह ओलंपिक के अधिकार के लिए सात अरब 75 करोड़ डॉलर का भुगतान कर रहा है और वह स्विट्जरलैंड स्थित अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) का बड़ा साझेदार है। प्रसारण अधिकार से होने वाली कमाई का आईओसी की कुल आय में 40 प्रतिशत तक हिस्सा है। 





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पंजाब के मुख्यमंत्री ओलंपिक पदक विजेताओं के लिए खुद बनाएंगे लजीज व्यंजन

चंडीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह तोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने वाले राज्य के खिलाड़ियों और स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा के लिए बुधवार को रात्रिभोज का आयोजन कर रहे हैं और उनके लिए वह खुद लजीज़ व्यंजन तैयार करेंगे। रात्रिभोज का आयोजन मोहाली के सिसवां में सिंह के फार्महाउस में होगा। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठकराल ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, ''पंजाब के ओलंपिक पदक विजेताओं और नीरज चोपड़ा से किए गए अपने वादे को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह उनके वास्ते खुद भोजन तैयार करेंगे। भोज में पटियाला के पुलाव, गोश्त, चिकन, आलू और जरदा राइस जैसे लजीज व्यंजन परोसे जाएंगे।'' मुख्यमंत्री ने पिछले महीने ओलंपिक पदक विजेताओं के लिए आयोजित समारोह में उनसे, उन्हें अपने हाथ का बना भोजन कराने का वादा किया था।




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भारत के टोक्यो पैरालंपिक विजेताओं को सम्मानित करेंगे योगी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टोक्यो पैरालिंपिक के सभी पदक विजेताओं को सम्मानित करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कार्यक्रम आयोजित करने की योजना तैयार करने को कहा है।


सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, टोक्यो पैरालिंपिक में खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन ने देश को गौरवान्वित किया है। यूपी के पदक विजेताओं के साथ-साथ देश के लिए पदक जीतने वाले सभी लोगों को एक सार्वजनिक समारोह में सम्मानित किया जाएगा।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा, इस कार्यक्रम में राज्य के 75 जिलों के सभी दिव्यांग खिलाड़ियों को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए। यह उनके लिए मनोबल बढ़ाने वाला होगा। इस आयोजन के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की जानी चाहिए।


उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ओलंपिक खिलाड़ियों को सम्मानित किया था और स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा को 2 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेताओं को 1.5 करोड़ रुपये, कांस्य पदक जीतने वाली पुरुष हॉकी टीम के सभी सदस्य को एक करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार दिया था। पदक और महिला हॉकी टीम के सभी सदस्य के लिए 50 लाख रुपये, जो एक पदक से चूक गए।


यह कार्यक्रम पिछले महीने राज्य की राजधानी में आयोजित किया गया, जिसमें सभी पदक विजेताओं को सम्मानित किया गया था।






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सभी बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है अवनि का गोल्डन सफर

टोक्यो पैरालम्पिक में भारतीय खिलाड़ियों ने कमाल का प्रदर्शन किया है। सबसे बड़ा कारनामा कर दिखाया है भारत की पैरा शूटर अवनि लेखरा ने जो 5 सितम्बर को पैरालम्पिक के समापन समारोह में भारतीय ध्वजवाहक बनीं। दरअसल अवनि ने इस पैरालम्पिक में दो-दो पदक जीतकर ऐसा इतिहास रच डाला, जो अबतक ओलम्पिक या पैरालम्पिक के इतिहास में भारत की कोई भी महिला खिलाड़ी नहीं कर सकी है। भारतीय निशानेबाज अवनि लखेरा ने टोक्यो पैरालम्पिक में 30 अगस्त को हुई निशानेबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था, जो पैरालम्पिक्स के इतिहास में भारत का शूटिंग में पहला स्वर्ण पदक था। अवनि ने 21 निशानेबाजों के बीच 7वें पायदान पर रहते हुए फाइनल में अपनी जगह बनाई थी और महिलाओं के आर-2 10 मीटर एयर राइफल क्लास एसएच-1 में फाइनल मैच में उनका मुकाबला चीन की झांग कुइपिंग और यूक्रेन की इरियाना शेतनिक से था। अवनि ने 249.6 प्वाइंट प्राप्त कर न केवल चीन की शूटर को पराजित करते हुए स्वर्ण पर कब्जा जमाया बल्कि यूक्रेन की खिलाड़ी के वर्ष 2018 के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की। अवनि की जीत के बाद चीन की झांग कुइपिंग को रजत और यूक्रेन की इरियाना शेतनिक को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।


व्हील चेयर पर होते हुए भी जयपुर की अवनि ने महज 19 वर्ष की आयु में निशानेबाजी में 30 अगस्त को भारत के लिए पहला पैरालम्पिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब 3 सितम्बर की निशानेबाजी स्पर्धा में कांस्य पदक भी भारत के नाम किया तो उनकी इस उपलब्धि पर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। दरअसल इस जीत के साथ ही अवनि एक ही पैरालम्पिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई। हालांकि पुरुषों की स्पर्धा में अवनि से पहले यह कारनामा जोगिंदर सिंह सोढ़ी कर चुके हैं, जिन्होंने 1984 के पैरालम्पिक में एक रजत और दो कांस्य पदक (गोला फैंक में रजत और चक्का फैंक तथा भाला फैंक में कांस्य) जीते थे। वह किसी भी पैरालम्पिक में खेलों के एक ही चरण में कई पदक जीतने वाले पहले भारतीय थे। अवनि ने टोक्यो पैरालम्पिक में महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन एसएच1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। उस स्पर्धा के फाइनल में 445.9 के स्कोर के साथ वह तीसरे स्थान पर रही।


8 नवम्बर 2001 को राजस्थान के जयपुर में जन्मी अवनि लखेरा के पिता प्रवीण लखेरा राजस्थान के रेवेन्यू विभाग में आरएएस के पद पर कार्यरत हैं। अवनि जब केवल 11 वर्ष की थी, उस दौरान उनके साथ एक दिन ऐसी घटनी घटी, जिसने उनकी जिंदगी को एकाएक गहरे अंधकार में धकेल दिया था। 20 फरवरी 2012 को वह अपने पिता के साथ जयपुर से धौलपुर जा रही थी कि रास्ते में उनकी कार दुर्घटना की शिकार हो गई। उस हादसे में अवनि और उनके पिता को गहरी चोटें लगी। हालांकि पिता तो कुछ समय बाद पूरी तरह ठीक हो गए लेकिन सड़क हादसे में अवनि की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी, जिस कारण वह करीब पांच महीने तक अस्पताल में बैड पर ही रही और इलाज के बाद भी जीवन पर्यन्त चलने-फिरने में असमर्थ हो गई। उस दर्दनाक हादसे के बाद अवनि बुरी तरह से टूट गई थी और उसने अपने आप को घर में एक कमरे में बंद कर लिया था लेकिन परिजनों ने हार नहीं मानी और लगातार उसका हौसला बढ़ाते रहे। उस दौरान अवनि अपनी पढ़ाई-लिखाई पर ही फोकस करने लगी थी लेकिन उसके पिता ने उसे खेलों में भी ध्यान लगाने को प्रेरित किया।


पिता के मार्गदर्शन में जब अवनि ने अभिनव बिंद्रा की जीवनी पढ़ी तो वह इस कदर प्रभावित हुई कि खेलों के प्रति उसके मन में जोश बढ़ गया। आखिरकार एक दिन ऐसा आया, जब वर्ष 2015 में अवनि जगतपुरा स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में निशानेबाजी की ट्रेनिंग लेने के लिए पहली बार व्हील चेयर पर ही मैदान में उतरी। छोटी-सी उम्र में व्हील चेयर पर होने के बावजूद अवनि ने हार नहीं मानी और दृढ़ संकल्प की बदौलत पैरालम्पिक में वह करिश्मा कर दिखाया, जिसे कर दिखाने में सामान्य खिलाड़ियों को भी बेहद कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। खेलों के प्रति वह इस हद तक समर्पित हो गई कि अब उन्हें ‘गोल्डन गर्ल’ के नाम भी जाना जाता है। हालांकि वह पढ़ाई-लिखाई में भी काफी अव्वल रहती हैं तथा फिलहाल शूटिंग के साथ-साथ लॉ की पढ़ाई कर रही हैं और आगे राजस्थान सिविल सर्विस में जाना चाहती हैं।


शुरुआती दौर में अवनि को व्हील चेयर चलाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा क्योंकि वह मानदंडों के मुताबिक नहीं थी, इसके अलावा बंदूक और शूटिंग किट भी उपलब्ध नहीं थी लेकिन अपने दृढ़ संकल्प के साथ वह शूटिंग में बहुत जल्द शानदार प्रदर्शन करने लगी। वर्ष 2015 में अपनी ट्रेनिंग शुरू करने के कुछ महीनों बाद ही अवनि ने राजस्थान स्टेट चैम्पियनशिप में हिस्सा लेकर स्वर्ण पदक जीतकर हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। मजे की बात रही कि वह चैम्पियनशिप अवनि ने अपने कोच से उनकी राइफल उधार लेकर जीती थी। 2016 में पुणे में आयोजित हुई नेशनल चैम्पियनशिप में अवनि ने कांस्य पदक अपने नाम किया। उसके बाद तो अवनि ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक के बाद एक कई पदक अपने नाम किए। 2018 में 61वीं नेशनल शूटिंग चैम्पियनशिप में भी अवनि ने पदक जीते थे। अपनी कड़ी मेहनत और जुनून के चलते अवनि ने 2016 से 2020 तक कुल पांच स्वर्ण पदक जीते। महिला 10 मीटर एयर राइफल स्टेडिंग एसएच1 में विश्व रैकिंग में वह पांचवें स्थान पर आती हैं।


बहरहाल, टोक्यो पैरालम्पिक में अवनि की दोहरी सफलता ने साबित कर दिया है कि भारत की बेटियां भी अपनी मेहनत और बुलंद हौसलों के बल पर बड़ी से बड़ी सफलता हासिल करने का सामर्थ्य रखती हैं। दिव्यांग होते हुए भी अवनि ने निरन्तर सघंर्ष किया और उसी का प्रतिफल है कि उन्होंने टोक्यो पैरालम्पिक में दो-दो पदक जीतकर इतिहास रच डाला। 2012 में सड़क दुर्घटना में कमर के नीचे के शरीर को लकवा मार जाने के बावजूद अवनि का गहरे अवसाद से निकलकर कड़ा संघर्ष करने, दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने और टोक्यो पैरालम्पिक में दो पदक जीतने तक का शानदार सफर हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत है। निश्चित रूप से 19 साल की आयु में अवनि की देश को गौरवान्वित करने वाली उपलब्धियां समस्त भारतवर्ष की बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी।


-योगेश कुमार गोयल-

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)





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डीएम सुहास एलवाई का नोएडा में जोरदार स्वागत, डीएनडी पर लगा भारी जाम

नोएडा:  टोक्यो पैरालंपिक्स में रजत पदक जीतकर स्वदेश लौटे गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी सुहास यतिराज का जोरदार स्वागत हुआ। डीएनडी में डीएम के समर्थक हजारों की संख्या में मौजूद रहे। डीएम के नोएडा में प्रवेश करते ही उनके समर्थकों ने फूल-माला, डोल-नगाड़े से उनका भव्य स्वागत किया। हालांकि इस दौरान डीएनडी पर लंबा जाम लग गया। पीक ऑवर होने की वजह से कई किलोमीटर तक गाड़ियां रेंगते हुए चलीं।


आपको बता दें कि गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी सुहास यतिराज ने टोक्यो पैरालंपिक्स में पुरुष सिंगल्स बैडमिंटन स्पर्धा एसएल-4 का रजत पदक जीत कर इतिहास रचा है। हालांकि उसका स्वर्ण पदक जीतने का सपना टूट गया। फाइनल मुकाबले में फ्रांस के खिलाड़ी लुकास माजुर ने सुहास यतिराज को 2-1 से शिकस्त दी। उनकी इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बधाई दी है।


वहीं, सुहास की जीत के बाद उनकी पत्नी और एडीएम गाजियाबाद ऋतु सुहास ने कहा कि यह खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। इन पलों का बरसों से इंतजार था। रजत पदक छह साल की कड़ी मेहनत और लगन का परिणाम है। सुहास एलवाई की मां जयाश्री ने कहा कि उन्हें बेटे की जीत पर गर्व है। उनका सपना था कि वह पैरालंपिक में पदक जीते।



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नागर की उपलब्धि ने प्रत्येक भारतीय के चेहरे पर मुस्कान ला दी : मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तोक्यो पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने पर कृष्णा नागर को बधाई देते हुए रविवार को कहा कि उनकी इस उपलब्धि ने प्रत्येक भारतीय के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। कृष्णा नागर ने रविवार को हांगकांग के चू मैन काई को पुरूषों की एकल एसएच6 क्लास के तीन गेम तक चले रोमांचक फाइनल में हराकर तोक्यो पैरालंपिक की बैडमिंटन स्पर्धा में भारत को दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया। मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘हमारे बैडमिंटन खिलाड़ियों के तोक्यो पैरालंपिक में उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखकर खुशी हो रही है। कृष्णा नागर की शानदार उपलब्धि प्रत्येक भारतीय के चेहरे पर मुस्कान लेकर आयी है। स्वर्ण पदक जीतने के लिए उन्हें बधाई। भविष्य के लिए उन्हें बहुत-बहुत शुभकामनाएं।’’




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प्रधानमंत्री मोदी ने नरवाल और अडाना की सराहना की

तोक्यो : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तोक्यो पैरालम्पिक में निशानेबाजी मिश्रित 50 मीटर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में स्वर्ण और रजत पदक जीतने वाले मनीष नरवाल और सिंहराज सिंह अडाना की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय खेलों के लिये यह खास पल है। मोदी ने ट्वीट किया,‘‘ तोक्यो पैरालम्पिक में जीत का सिलसिला जारी है। युवा और बेहद प्रतिभाशाली मनीष नरवाल की शानदार उपलब्धि। उनका स्वर्ण पदक भारतीय खेलों के लिये खास पल है। उन्हें बधाई और भविष्य के लिये शुभकामना।’’ वहीं उन्होंने आगे कहा,‘‘ शानदार सिंहराज सिंह अडाना ने फिर यह कर दिखाया। उन्होंने एक और पदक जीता और इस बार मिश्रित 50 मीटर पिस्टल एसएच1 में पदक जीता। भारत को उनकी उपलब्धि पर गर्व है। उन्हें बधाई और भविष्य के लिये शुभकामना।’’ विश्व रिकॉर्डधारी उन्नीस वर्ष के नरवाल ने पैरालम्पिक का रिकॉर्ड बनाते हुए 218.2 स्कोर करके स्वर्ण पदक जीता। वहीं पी1 पुरूषों की एस मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में मंगलवार को कांस्य जीतने वाले अडाना ने 216.7 अंक बनाकर रजत पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही अडाना एक ही खेलों में दो पदक जीतने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए। 



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प्रवीण कुमार के जीतने पर गांव में जश्न का माहौल, बधाई देने वालों का लगा तांता

जेवर : खादर क्षेत्र के गांव गोविदगढ़ निवासी अमरपाल सिंह के पुत्र प्रवीण कुमार ने पैरालिपिक 2020 में शुक्रवार को देश की झोली में रजत पदक डाला। उनका खेल देखने के लिए स्वजन व ग्रामीण टेलीविजन के आगे टकटकी लगाए थे। जैसे ही प्रवीण ने रजत पदक जीता, पूरा गांव खुशी से झूम उठा। ग्रामीण प्रवीण के घर पहुंच गए और स्वजन को मिठाई खिलाकर बधाई दी। ग्रामीणों ने गानों व ढोल की थाप पर जमकर ठुमके लगाये। बॉक्स


प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर प्रवीण को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रवीण के माता-पिता से फोन पर बात कराई। मुख्यमंत्री ने प्रवीण की सफलता के लिए उनके स्वजन को बधाई दी और सम्मानित करने का वादा किया। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने प्रवीण के घर पहुंचकर स्वजन को मिठाई खिलाकर उसकी सफलता के लिए स्वजन को बधाई दी। जेवर विधायक ने यमुना प्राधिकरण को पत्र लिखकर प्रवीण कुमार के नाम से क्षेत्र में स्टेडियम बनाने की मांग की है। बॉक्स


बधाई देने के लिए दिन भर लगा रहा तांता

प्रज्ञान पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या दीप्ति शर्मा व प्रबंधक हरीश शर्मा, सरदार मंजीत सिंह, सुभाष चंदेल उर्फ चाचा हिन्दुस्तानी, हरेंद्र भाटी व गजेंद्र अत्री भी बधाई देने गांव पहुंचे। जिला पंचायत अध्यक्ष अमित चौधरी ने फोन पर बधाई दी। बॉक्स


स्वजन से फोन पर प्रवीण ने की बात

प्रवीण ने रजत पदक जीतने के बाद दादी राजकली, पिता अमरपाल सिंह, माता निर्दोष, भाई सचिन कुमार व बहन से फोन पर बात की। स्वजन ने इसे देश के लिए गौरव बताते हुए सफलता के लिए प्रवीण को बधाई व आशीर्वाद दिया। 



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मोदी ने प्रवीण कुमार से बात कर बधाई दी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोक्यो पैरालंपिक में पुरुषों की ऊंची कूद स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले प्रवीण कुमार से बात कर उन्हें बधाई दी है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार श्री मोदी ने प्रवीण कुमार से बात कर उन्हें रजत पदक जीतने के लिए बधाई दी। उन्होंने प्रवीण कुमार की मेहनत और उनके कोच तथा परिवार से प्रवीण को मिले सहयोग की भी सराहना की।

प्रवीण कुमार ने शुभकामनाओं तथा बधाई के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

उल्लेखनीय है कि प्रवीण कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक में पुरुषों की ऊंची कूद टी 64 स्पर्धा में रजत पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया है साथ ही उन्होंने एशिया का रिकॉर्ड भी बनाया है।

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बढ़ते पदक -घटते स्टेडियम और दावा 'खिलाड़ियों के प्रधानमंत्री' होने का?

भारतीय खिलाड़ियों ने कुछ दिन पूर्व टोकियो में संपन्न हुये ओलम्पिक खेलों से लेकर पैरालिम्पिक खेलों तक में अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के द्वारा अपनी शानदार प्रतिभा का लोहा तो ज़रूर मनवा दिया है परन्तु कई आलोचकों का यह भी मानना है कि भारत जैसे विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी के लिहाज़ से देश में जीत कर आने वाले पदकों की संख्या फिर भी कम है। परन्तु यदि पदक विजेता खिलाड़ियों की पारिवारिक व आर्थिक पृष्ठभूमि पर नज़र डालें तो पायेंगे कि  इनमें अधिकांश खिलाड़ी मध्यम,निम्न मध्यम अथवा ग़रीब परिवार के सदस्य हैं। कुछ पदक विजेता खिलाड़ी तो ऐसे भी हैं जिनके मां बाप ने मज़दूरी कर अपने बच्चों को इस योग्य बनाया कि उन्होंने पदक जीत कर देश का नाम रौशन किया। इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को प्राप्त होने वाली वह सुविधायें तथा उस तरह का आहार भी नहीं मिल पाता जिसके वे हक़दार भी हैं और उनके लिये ज़रूरी भी है। ऐसे ही मध्यमवर्गीय व ग़रीब परिवार से आने वाली प्रतिभाओं की बेबसी को उजागर करने वाली एक ख़बर पिछले दिनों तब सामने आयी जब धनबाद की रहने वाली एक प्रतिभाशाली निशनेबाज़ कोनिका लायक ने समाज सेवी फ़िल्म अभिनेता सोनू सूद से लगभग तीन लाख रूपये क़ीमत की एक जर्मन निर्मित राइफ़ल खरीदने हेतु ट्वीटर के माध्यम से मदद मांगी। कोनिका लायक ने सोनू सूद को टैग करते हुए अपने ट्वीट में लिखा, "11वीं झारखंड स्टेट राइफ़ल शूटिंग चैंपियनशिप में  मैंने एक रजत और एक स्वर्ण पदक जीता। हालांकि, सरकार ने मेरी बिल्कुल भी मदद नहीं की है। कृपया एक राइफ़ल के साथ मेरी मदद करें'।" सोनू सूद ने फ़ौरन उसकी सहायता की और उसे वह रायफ़ल मिल सकी। कोनिका ने इससे पहले  खेलमंत्री मंत्री से लेकर स्थानीय सांसद तक से अपनी रायफ़ल की ज़रुरत की गुहार लगायी थी। परन्तु हम आम तौर पर अपने देश में तो यही देखते आ रहे हैं कि पदक जीतने के बाद ही सरकारें अपनी 'इनायतों की बौछार ' करती हैं। जबकि इससे ज़्यादा ज़रूरी है कि खिलाड़ियों को वह सभी सुविधाएं मुहैय्या कराई जायें जो उनकी खेल प्रतिभा को निखारने व पदक जीतने में सहायक हों।


इन सब वास्तविकताओं के बावजूद खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने ओलम्पिक में खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन का श्रेय प्रधानमंत्री को देने के आशय का एक लेख देश के तमाम अख़बारों में संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित कराया। इस आलेख में उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा नीरज चोपड़ा को चूरमा तथा पीवी सिंधु को आइसक्रीम पेश करना, बजरंग पुनिया के साथ हंसते रहना, रवि दहिया को और हंसने के लिए कहना तथा मीराबाई चानू के अनुभव सुनना तथा टोक्यो में भाग लेनेवाले प्रत्येक एथलीट के साथ समय बिताना,व पैरा ओलिंपिक दल के साथ बातचीत तथा उनकी प्रेरक जीवन यात्रा पर चर्चा तथा गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में खेल महाकुंभ पहल की शुरूआत करने जैसी कई बातों का उल्लेख किया। और यहां तक लिखा कि वे 'भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें 'खिलाड़ियों का प्रधानमंत्री' कहा जा सकता है।सरकार के और भी कई पक्षकारों ने ओलम्पिक में खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन का श्रेय प्रधानमंत्री व उनकी सरकार की खेल नीतियों को देने की कोशिश की। अभी देश ओलम्पिक तथा पैरालिम्पिक खेलों में भारत के अच्छे प्रदर्शन का जश्न मना ही रहा था कि इसी बीच भारत सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने घोषणा कर दी कि रेलवे के 400 रेलवे स्टेशनों, 90 यात्री ट्रेनों के साथ साथ  15 रेलवे स्टेडियम व कई रेलवे कालोनियों तथा कोंकण व कई अन्य पहाड़ी क्षेत्रों की ट्रेनों व रेल लाइनों के पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पी पी पी ) के तहत निजी क्षेत्रों को देने का फ़ैसला किया गया है। सरकार इस व्यवस्था को 'मॉनेटाईज़ेशन' का नाम भी दे रही है। परन्तु दरअसल सरकार द्वारा पी पी पी  और मॉनेटाईज़ेशन जैसे शब्दों का प्रयोग 'निजीकरण ' शब्द के स्थान पर ही किया जा रहा है।


बहरहाल 'खिलाड़ियों के प्रधानमंत्री' की दौर-ए-हुकूमत में रेलवे की जो अरबों रूपये की संपत्ति पी पी पी के निशाने पर है उनमें खेल स्टेडियम के रूप में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स डीएलडब्लू वाराणसी,मुंबई के परेल में स्थित इंडोर स्टेडियम और क्रिकेट ग्राउंड,पटना स्थित इंडोर स्टेडियम स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स, चेन्नई स्थित बेहाला स्टेडियम, रेलवे स्टेडियम स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स,कोलकाता, रायबरेली स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स, गुवाहाटी स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स,मालिगांव, कपूरथला स्टेडियम, बंगलुरू का येलाहंका क्रिकेट स्टेडियम स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स, सिकंदाराबाद, महालक्ष्मी स्टेडियम,मुंबई ,हॉकी स्टेडियम,राँची,लखनऊ क्रिकेट स्टेडियम ,गोरखपुर स्टेडियम तथा करनैल सिंह स्टेडियम, दिल्ली शामिल हैं। इनमें अनेक स्टेडियम ऐसे भी हैं जहां से प्रशिक्षित होकर हमारे देश की खेल प्रतिभाओं ने देश का नाम रौशन किया है। इन्हीं में रेलवे का सबसे बड़ा व प्रसिद्ध दिल्ली के कनॉट प्लेस का वह करनैल सिंह स्टेडियम भी है जहाँ से अभ्यास कर पी टी उषा ने 'उड़न परी' का ख़िताब हासिल किया था। इतना ही नहीं बल्कि ओलम्पिक में  बजरंग पूनिया,मीरा चानू ,सुशिल,रवि कुमार,साक्षी, सहित और भी कई सुप्रसिद्ध पदक विजेता खिलाड़ी दिल्ली के इसी करनैल सिंह स्टेडियम की देन हैं। यह स्टेडियम दिल्ली के केंद्र कनॉट प्लेस में लगभग 6 एकड़ ज़मीन पर बना है जहाँ प्रशिक्षु खिलाड़ियों के प्रशिक्षण,आवास,अभ्यास आदि की सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इसी स्टेडियम से प्रशिक्षित होकर रेलवे ने अब तक ओलंपिक के 6 स्वर्ण पदक  जीते हैं। परन्तु शायद  'खिलाड़ियों के प्रधानमंत्री' को लगता है कि ज़मीन के मूल्य के अनुसार इस ज़मीन से फ़ायदा नहीं उठाया जा रहा है और अनुमानतः दो हज़ार करोड़ से ज़्यादा क़ीमत की इस ज़मीन का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। यहाँ क्रिकेट  में रणजी ट्राफ़ी  के अलावा मुक्केबाज़ी ,कुश्ती और कई अन्य खेलों के अभ्यास व प्रशिक्षण होते रहे हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ खेलों के राष्ट्रीय शिविर भी लगते रहे है। ज़ाहिर है पी पी पी (निजीकरण ) के बाद यह सभी गतिविधियां शायद संभव न हो सकें। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि स्पोर्ट्स हब के रूप में अपनी पहचान रखने वाले इस स्टेडियम को समाप्त करने से भारतीय खेल प्रभावित होगा। परन्तु सरकार के क़दम से तो यही लगता है कि  उसे खिलाड़ियों की सुविधाओं व उनके पदक से ज़्यादा फ़िक्र सरकारी संपत्ति से धनार्जन करने की है। ऐसे में सवाल यह है कि जब एक ओर देश में आने वाले पदकों की संख्या तो बढ़ रही हो और ठीक उसी समय स्टेडियम्स की संख्या में सरकार द्वारा कमी की जा रही हो इसके बावजूद 'खिलाड़ियों के प्रधानमंत्री' होने का दावा करना क्या विरोधाभास पैदा नहीं करता ?


-निर्मल रानी-




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पैरालंपिक (ऊंची कूद) : थंगावेलु ने जीता रजत, शरद ने जीता कांस्य

टोक्यो : भारत के पैरा एथलीट मरियप्पन थंगावेलु और शरद कुमार ने यहां जारी टोक्यो पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष ऊंची कूद में क्रमश: टी42 और टी63 वर्ग में रजत और कांस्य पदक जीते। थंगावेलु और शरद के पदक जीतने के साथ ही भारत ने इस पैरालंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक अपने नाम कर लिए हैं। थंगावेलु ने सीजन का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 1.83 मीटर के जंप के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। इस इवेंट का स्वर्ण पदक अमेरिका के सैम ग्रेवे ने जीता। उन्होंने 1.88 मीटर का जंप किया। थंगावेलु और शरद से पहले मंगलवार को निशानेबाज सिंघराज ने पुरुष 10 मीटर एयरपिस्टल एसएच1 इवेंट में कांस्य पदक जीता। भारत ने टोक्यो पैरालंपिक में अब तक दो स्वर्ण, पांच रजत और तीन कांस्य सहित कुल 10 पदक जीते हैं।




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पैरालंपिक में वन परिवार के खिलाड़ियों ने दिलाई स्वर्णिम सफलता

जयपुर : टोक्यो में खेले जा रहे पैरालंपिक खेलों में सोमवार को वन परिवार से जुड़े खिलाड़ियों ने प्रदेश और देश को स्वर्णिम सफलता दिलाई। शूटिंग प्रतियोगिता में जहां जयपुर निवासी अवनि लखेरा ने गोल्ड मेडल जीता, वहीं भाला फेंक प्रतियोगिता में देवेंद्र झांझरिया ने सिल्वर और सुंदर सिंह गुर्जर ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि पर वन एवं पर्यावरण मंत्री सहित पूरे वन परिवार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए तीनों खिलाड़ियों और उनके परिवारों को बधाई दी है।


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प्रमुख शासन सचिव श्रेया गुहा और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन-बल प्रमुख डॉ. दीप नारायण पाण्डेय ने बताया कि शूटिंग प्रतियोगिता में सोमवार को गोल्ड मेडल जीतने वाली अवनि लखेरा वन विभाग में बतौर एसीएफ कार्यरत हैं। देवेंद्र झांझरिया और सुंदर सिंह गुर्जर भी वन विभाग में एसीएफ के पद पर कार्यरत हैं। जयपुर निवासी अवनि लखेरा ने टोक्यो में जारी पैरा ओलंपिक खेलों की शूटिंग प्रतियोगिता में स्वर्णिम प्रदर्शन करते हुए देश को गोल्ड मेडल दिलाया। ऐसा करने वाली वे पहली भारतीय महिला एथलीट हैं। महिलाओं के 10 मीटर एयर राइफल के क्लास एसएच-1 के फाइनल में उन्होंने 249 पॉइंट्स स्कोर कर गोल्ड मेडल हासिल किया।


अवनि के बाद दो और भारतीय खिलाड़ियों ने पदक अपने नाम किए। भाला फेंक प्रतियोगिता में राजस्थान के देवेंद्र झांझड़िया ने सिल्वर और सुंदर सिंह गुर्जर ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। झांझड़िया ने 64.35 मीटर भाला फेंक कर सिल्वर और सुंदर सिंह गुर्जर ने 64.1 मीटर दूर भाला फेंक कर ब्रोंज मेडल जीता। उल्लेखनीय है कि झांझड़िया इससे पूर्व पैरा ओलंपिक में दो बार गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।


इस स्वर्णिम उपलब्धि पर वन मंत्री सुखराम बिश्नोई, प्रमुख शासन सचिव श्रेया गुहा और प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. दीप नारायण पाण्डेय सहित पूरे वन परिवार ने हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए तीनों खिलाड़ियों और उनके परिवारों को बधाई दी है।



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खेलो भारत खेलो

भारत में खेल स्पर्धाओं को लेकर कोई ठोस नीति नहीं है। खेलों पर राष्ट्रीय नीति घोषित करनी चाहिए। हालांकि ‘टोक्यो ओलंपिक’ के बाद खेलों में देश की नयी छवि उभरकर सामने आयी है। भारत अब खेलना चाहता है और खूब खेलना चाहता है, लेकिन उसके लिए माहौल होना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर खेलों पर नीतिगत फैसले लेने चाहिए। खेलों के लिए बेहतर क्या किया जा सकता है इसके लिए केंद्र स्तर पर एक स्वतंत्र खेल आयोग का गठन होना चाहिए। खिलाड़ियों के लिए आवश्यक है सुविधाएं चाहिए। किन-किन खेलों के लिए क्या बेहतर होना चाहिए उस पर विचार करना चाहिए।


खेलों को बढ़ावा देने के लिए धन की कितनी आवश्यकता होगी। खिलाड़ियों को प्राथमिक स्तर पर कितनी बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं। ग्रामीण स्तर पर खेलों के मैदान की उपलब्धता क्या होनी चाहिए इस तरह की सुविधाओं का विकास देश में होना आवश्यक है। हमारे यहां खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन नीतियों का भाव है। खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने के बाद देश उन पर खुले दिल से धन की वर्षा करता है, अगर यही सुविधाएं खिलाड़ियों को पहले से मुहैया करा दी जाएं तो भारत सिर्फ पदक तालिका में अपना मुकाम हासिल ही नहीं करेगा बल्कि ग्लोबल रैंकिंग पर अपना बेहतर प्रदर्शन करेगा। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए उनसे सीधी बात कर उनका मनोबल बढ़ाने का काम किया। लेकिन इस काम के लिए भी उन्हें आलोचना झेलनी पड़ी।


खेलों में ‘ग्लोबल रैंकिंग’ की बात करें तो भारत की स्थिति आज भी बहुत बेहतर नहीं है। यह दीगर बात है कि टोक्यो ओलंपिक में हमने अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन हमें नीरज चोपड़ा से आगे भी निकलना होगा। ग्लोबल रैंकिंग में आज भी संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, जापान जैसे देश बने हुए हैं। भारत से कई गुना छोटे मुल्क बेहतर प्रदर्शन करते हैं। टोक्यो ओलंपिक में ग्लोबल रैंकिंग में भारत का 48 वाँ स्थान है। हमें अमेरिका, चीन, जापान, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस की कतार में खड़ा होना होगा। यह तभी संभव होगा जब खेलों पर सरकार अच्छी नीति लेकर आएगी। जीत के बाद खिलाड़ियों पर खजाना लुटाने कि नीति से हमें बचना होगा।


देश के खिलाड़ियों का सर्वांगीण विकास जरूरी है। सारा पैसा एक खिलाड़ी के व्यक्तिगत मद में चला जाता है। जिससे दूसरे खिलाड़ी जो बेहतर प्रदर्शन के बाद जीत हासिल नहीं कर पाते हैं उनमें निराशा हाथ लगती है। हम यह भी नहीं कहते हैं कि खिलाड़ियों का सम्मान नहीं होना चाहिए लेकिन प्रतिभाग करने वाले दूसरे खिलाड़ियों का भी मनोबल नहीं गिरना चाहिए। उनके लिए भी बेहतर सुविधाएं और खेलों का माहौल होना आवश्यक है। खेलों को हमें राष्ट्रीय नीति में शामिल करना होगा। हरियाणा जैसा राज्य देश में सबसे अधिक खिलाड़ियों को पैदा करता है। खेलों को लेकर हमें हरियाणा सरकार की नीतियों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना चाहिए। तभी हम खेलों का विकास कर सकते हैं।


टोक्यो ओलंपिक के बाद पैरालंपिक में भी सुखद खबर आयी है। पैरालंपिक में भी हमारी ग्लोबल रैंकिंग 35 वें स्थान पर है। अब तक हमारे खिलाड़ियों ने एक गोल्ड के साथ 7 मेडल जीता है। यहाँ भी चीन, अमेरिका और ब्रिटेन अपनी स्थिति को मजबूत किए हुए हैं। फिलहाल भारत का संघर्ष जारी है। देश की मीडिया और दूसरे क्षेत्रों में पैरालंपिक को लेकर वह उत्साह नहीं दिखाई दे रहा है जो ओलंपिक को लेकर रहा। ओलंपिक में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर जिस तरह देश जश्न मना रहा था वह स्थिति पैरालंपिक में नहीं दिख रही है। इसे हम अच्छा संकेत नहीं कर सकते हैं। जबकि हमारे लिहाज से यह गर्व का विषय है कि पैरालंपिक में हमारे खिलाड़ियों ने ओलंपिक से बेहतर प्रदर्शन किया है। हमें उम्मीद है कि ओलंपिक से कहीं अच्छा प्रदर्शन करके हमारे खिलाड़ी स्वदेश लौटेंगे। खिलाड़ियों की हौसलाआफजाई के लिए सरकार और दूसरी संस्थाओं को भी व्यक्तिगत रूप से आगे आना चाहिए।


टोक्यो ओलंपिक में भारत की अवनि लखेड़ा ने एयर राइफल स्टैंडिंग में स्वर्ण पदक जीता है। पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। इसके अलावा देवेंद्र झाझरिया, योगेश कथुनिया और सुंदर सिंह ने रजत, ब्रांज मैडल जीत कर देश का मान बढ़ाया है। दूसरे खिलाड़ी भी इस जीत में शामिल हैं। लेकिन जिस तरह का जश्न नीरज चोपड़ा की जीत पर दिखा था वह जोश लखेड़ा की जीत पर नहीं दिख रहा है। जबकि यह उपलब्धि ओलम्पिक से कहीं अधिक बड़ी है। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर लेखारा को बधाई दी है। मीडिया और देश को यह खाई पाटना होगा। हमें उन्हें सर आंखों पर बिठाना होगा। अवनी राजस्थान से आती हैं 12 साल की उम्र में वह पैरालिसिस की शिकार हो गई थी, लेकिन जिंदगी से उन्होंने हार नहीं मानी और टोक्यो पैरालंपिक में उन्होंने इतिहास रच दिया। भारत की इस बेटी पर हमें गर्व है।


टोक्यो पैरालंपिक में नौ इवेंट्स में भाग लेने के लिए 54 खिलाड़ियों का दल भेजा गया है। पैरालंपिक का आयोजन 5 सितंबर तक चलेगा। भारत ने अभीतक 7 पदक जीते हैं, आगे भी उम्मीद है कि पैरालंपिक खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करेंगे। पैरालंपिक के लिए 1972 में मुरलीकांत पेटकर ने भारत के लिए पहला पदक जीता था। भारत के ओलंपिक इतिहास पर नजर डालें तो अबतक 24 ओलंपिक खेलों में हम 35 पदक जीत चुके हैं। भारत खेलना चाहता है और खेल में सबसे अधिक मौके ग्रामीण इलाकों में है। इस हालात में सरकार को खेलों पर एक ठोस नीति नीत बनानी चाहिए।


केंद्र सरकार को राज्य के सहयोग से ग्रामीण इलाकों में खेलों के मैदान का विकास, बेहतर सुविधाएं और वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए। अगर हमारी तैयारी जमीनी स्तर पर रहेगी तो निश्चित तौर पर भारत आने वाले दिनों में ग्लोबल रैंकिंग में चैंपियन बनकर आएगा। सरकार खेलों को बढ़ावा देती है तो भारत के युवाओं में असीमित ऊर्जा है। इस मिट्टी से हजारों ध्यानचंद, मिल्खा सिंह, नीरज चोपड़ा, अवनी लेखारा,पीटी उषा, मीराबाई चानू और पीवी सिंधु की फौज तैयार होगी। अब वक्त आ गया है जब खेलों पर सरकारों को विशेष ध्यान देना चाहिए। खेलों को स्कूली पाठ्यक्रमों में भी शामिल करना चाहिए। खेल शिक्षा को अनिवार्य बनाना चाहिए। उम्मीद है कि सरकार इस पर ठोस कदम उठाएगी।


-प्रभुनाथ शुक्ल-

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)






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खेल गौरव से सम्मानित किया मनोज तिवारी नें अखाड़े के विकास के लिए दिए साढ़े 5 लाख

नई दिल्ली : सांसद मनोज तिवारी ने आज यमुना विहार में आयोजित एक कार्यक्रम में विभिन्न खेलों बॉक्सिंग कुश्ती एवं पावर लिफ्टिंग से संबंधित खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को खेल गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया। कार्यक्रम का आयोजन बॉक्सिंग कोच एवं सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र शर्मा बॉक्सर ने किया। इस अवसर पर सांसद मनोज तिवारी के अलावा पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर श्याम सुंदर अग्रवाल विधायक अजय महावर मोहन सिंह बिष्ट पूर्वांचल मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कौशल मिश्रा भाजपा नेता वीरेंद्र खंडेलवाल आनंद त्रिवेदी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे इस अवसर पर मनोज तिवारी ने कहा कि खेल दिवस के उपलक्ष पर मेजर ध्यानचंद के नाम से दिया जा रहा यह सम्मान न सिर्फ नवोदित खिलाड़ियों को प्रेरणा देगा बल्कि मेजर ध्यानचंद जैसा खिलाड़ी बनने के लिए उन्हें एक लक्ष्य देगा प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक बड़े खेल पुरुस्कार का नामकरण मेजर ध्यानचंद के नाम से किया मकसद यही था की महान खिलाड़ियों के नाम से मिलने वाले पुरस्कार से खिलाड़ियों का सम्मान तो होगा ही उनमें महान खिलाड़ी बनने की ऊर्जा का संचार भी होगा उन्होंने गोकलपुर गांव में संचालित एक अखाड़े से आए कुश्ती के प्रशिक्षक एवं कुश्ती की प्रतिभा के धनी कई खिलाड़ियों के अनुरोध पर अपनी ओर से मैट लगाने की व्यवस्था हेतु साढ़े रुपये 5लाख देने की घोषणा भी की यह राशि 24 घंटे के अंदर अखाड़े के गुरु को सौंप दी जाएगी महापौर श्याम सुंदर अग्रवाल ने खेल गौरव पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए कार्यक्रम के आयोजक बॉक्सर को बधाई के साथ साथ शुभकामना देते हुए कहा कि ऐसे सराहनीय प्रयास से खेल प्रतिभाओं को बल मिलेगा और इन्हीं में से कुछ खिलाड़ी निकल कर अपनी प्रतिभा को दिल्ली और देश के सामने रख सकेंगे विधायक अजय महावर और मोहन सिंह बिष्ट ने पुरस्कार से सम्मानित खिलाड़ियों को बेहतर भविष्य की शुभकामनाएं दी।





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वाराणसी में सपा कार्यकर्ताओं ने 'खिलाड़ी घेरा' कार्यक्रम के जरिए मेजर ध्यानचंद को किया याद

वाराणसी : मेजर ध्यानचंद की जयंती पर सपा ने रविवार को शिवपुर स्तिथ ओलम्पियन विवेक सिंह मिनी स्टेडियम में 'खिलाड़ी घेरा' कार्यक्रम का आयोजन किया। सपा महानगर अध्यक्ष विष्णु शर्मा ने मुख्य मुद्दे गिनाएं। आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर खिलाड़ियों की प्रतिभा खोज की ख़ामियां, खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया में अपारदर्शिता व पक्षपात, स्पोर्ट्स एकेडमियों की सीमित संख्या व अनुपलब्धता, खिलाड़ियों के लिए खेल व अभ्यास उपकरणों की कमी है।


इसके साथ ही उनके द्वारा लगाए गए आरोपों में खिलाड़ियों को संतुलित पोषणात्मक आहार की कमी, स्थानीय, क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं की अनियमितता स्थानीय स्तर पर स्टेडियम की कमी व रखरखाव की समस्याएं, खिलाड़ियों पर मानसिक दवाव व मनोवैज्ञानिक प्रोत्साहन की कमी खिलाड़ियों के समुचित शारीरिक विश्राम की कमी, खिलाड़ियों के मानदेय में भेदभाव भी शामिल था। इस दौरान विष्णु शर्मा ने खिलाड़ियों का माल्यार्पण कर अभिनंदन भी किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की समस्याएं दूर करने के लिए वे पूरी कोशिश करेंगे और उनकी लड़ाई लड़ते रहेंगे।


इस मौके पर जिलाध्यक्ष सुजित यादव लक्कड़, आनंद मोहन ( गुड्डू), उत्तरी विधान सभा अध्यक्ष अजय चौधरी, राजेश याद, ओपी सिंह, हरीश नारायण सिंह बग्गड़, महिलासभा महानगर अध्यक्ष पूजा यादव, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष ओपी पटेल, महानगर मीडिया प्रभारी संदीप शर्मा, लोहियावाहिनी महानगर अध्यक्ष दीपचंद गुप्ता, सत्यनारायण यादव, उमेश प्रधान, प्रियांशु यादव, जीशान अंसारी, अभिजीत यदुवंशी, मोतीलाल यादव, यास्मीन खान, सतीश यादव आदि लोग उपस्थित थे।





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खेल मंत्री ठाकुर ने राष्ट्रीय खेल दिवस पर ‘फिट इंडिया’ मोबाइल ऐप जारी किया

नयी दिल्ली : खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने रविवार को यहां ‘फिट इंडिया’ कार्यक्रम की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर व्यक्तिगत प्रशिक्षण-सह-फिटनेस मार्गदर्शन करने वाले ‘फिट इंडिया’ मोबाइल ऐप को लॉन्च किया।


ठाकुर ने कहा कि यह ऐप राष्ट्रीय खेल दिवस पर भारत के लोगों के लिए सरकार की ओर से एक उपहार है। राष्ट्रीय खेल दिवस हॉकी के दिग्गज मेजर ध्यानचंद की जयंती के रूप में मनाया जाता है।


ठाकुर ने यहां मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित समारोह में कहा, ‘‘फिट इंडिया ऐप मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि है, जो देश के खिलाड़ियों के नायक हैं।’’


इस कार्यक्रम में तोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने भी ऑनलाइन तरीके से जुड़कर भाग लिया।


खेल मंत्री ने कहा, ‘‘खिलाड़ियों के फिट रहने के लिए ऐप बहुत जरूरी है और उनसे ऐप का सख्ती से पालन करने की उम्मीद की जाती है। यह नये, युवा भारत को फिट रखने का एक प्रयास है क्योंकि एक फिट युवा ही एक महान भारत बना सकता है।’’


मनप्रीत ने इस ऐप का समर्थन करते हुए कहा, ‘‘ हम फिटनेस को पर्याप्त महत्व नहीं देते। हमें फिटनेस के लिए एक दिन में अपने समय का सिर्फ आधा घंटा समर्पित करने की आवश्यकता है। यह ऐप मजेदार और मुफ्त है और इससे कोई भी कहीं भी अपनी फिटनेस का परीक्षण और निगरानी कर सकता है।’’


उन्होंने बताया, ‘‘ यह ऐप बहुत मददगार और उपयोग में आसान है। मैं पहले से ही इसका इस्तेमाल कर रहा हूं और मुझे उम्मीद है कि यह मेरी फिटनेस को और बेहतर बनाने में मेरी मदद करेगा।’’


इस कार्यक्रम में खेल राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक, खेल सचिव रवि मित्तल, भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक संदीप प्रधान सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।



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पैरालंपिक के लिये दो अफगानी खिलाड़ी तोक्यो पहुंचे

तोक्यो : पैरालंपिक खेलों में भाग लेने के लिए अफगानिस्तान के दो खिलाड़ी शनिवार को यहां पहुंच गये लेकिन वे अभी मीडिया से बातचीत के लिए उपलब्ध नहीं है।


अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (आईपीसी) के अनुसार जाकिया खुदादादी और हुसैन रासौली की दो सदस्यीय टीम काबुल से पेरिस होकर तोक्यो पहुंची। ये दोनों खिलाड़ी कोविड-19 की सभी जांच को पूरी करने के बाद अपनी स्पर्धाओं में भाग लेने से पहले खेल गांव में है और अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वे इन खेलों के पांच सितंबर को समापन के बाद कहा जायेंगे।


आईपीसी के प्रवक्ता क्रेग स्पेंस ने कहा कि उन्हें परिस्थितियों से अनुकूल होने के लिए कुछ दिनों के लिए एकांत में रहने की जरूरत है।


स्पेंस ने रविवार को एक सम्मेलन में कहा, ‘‘यह वास्तव में एक जटिल स्थिति है। हमने जिन परिस्थियों का सामना किया है उसमें यह सबसे जटिल स्थिति में से एक हैं।’’


उन्होंने कहा, ‘‘ हम इस मामले पर ज्यादा कुछ नहीं कह सकते। मानव जीवन यहां सबसे महत्वपूर्ण चीज है। यहां खिलाड़ियों का होना मीडिया कवरेज हासिल करने के बारे में नहीं है। यह इन खिलाड़ियों के पैरालंपिक खेलों में भाग लेने में सक्षम होने के अपने सपने को पूरा करने के बारे में है।’’


स्पेंस ने यह नहीं बताया कि वे काबुल से कैसे निकले, लेकिन उन्होंने इस मामले में कई सरकारों और अन्य एजेंसियों की मदद का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आईपीसी कई दिनों से उनकी निगरानी कर रहा था। इन खेलों के उद्घाटन समारोह में  24 अगस्त को टीम की अनुपस्थिति में देश की प्रतिनिधित्व को दर्शाने के लिए एक स्वयंसेवक अफगानिस्तान का झंडा लेकर चला था।


जाकिया 2004 एथेंस के बाद पैरालंपिक में भाग लेने वाली अफगानिस्तान की पहली महिला एथलीट होंगी।


वह गुरुवार को ताइक्वांडो के महिलाओं के 44-49 किग्रा वजन वर्ग चुनौती पेश करेंगी।


दल के दूसरे साथी मंगलवार को पुरुषों की लंबी कूद टी47 स्पर्धा की हीट में हिस्सा लेंगे।


रासैली को हालांकि 100 मीटर टी47 स्पर्धा में भाग लेना था लेकिन देर से पहुंचने के कारण आयोजकों ने उन्हें शुक्रवार को होने वाले इस वर्ग के 400 मीटर स्पर्धा में डाल दिया। वह हालांकि इसे लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है।


स्पेंस ने रासौली के हवाले से कहा, ‘‘मैं 100 मीटर फर्राटा घावक हूं। 400 मीटर मेरे लिए काफी थका देने वाला होगा।’’


इसकी जगह उन्हें अब मंगलवार होने वाले की टी47 वर्ग के लंबी कूद स्पर्धा में शामिल किया गया है।


इन खिलाड़ियों को शरण का मुद्दा भी अधर में है। जब स्पेंस से इस बारे में पूछा गया कि क्या वे पेरिस लौटेंगे तो उन्होंने कहा, ‘‘यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब खिलाड़ी ही दे सकते है।’’


उन्होंने कहा, ‘‘इन खिलाड़ियों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।’’




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ओलंपिक ने देश पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला है, इस गति को बनाए रखना है : मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि तोक्यो ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन ने खेलों को लेकर ‘‘बहुत बड़ा प्रभाव’’ पैदा किया है। उन्होंने देशवासियों से खेलों को लेकर पैदा हुई इस गति को ‘‘सबका प्रयास’’ मंत्र के जरिए बनाए रखने का आह्वान किया।


आकाशवाणी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘‘मन की बात’’ की 80वीं कड़ी में देश और दुनिया के लोगों के साथ अपने विचार साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने खेल-कूद को पारिवारिक और सामाजिक जीवन में स्थायी बनाने और ऊर्जा से भरने पर जोर दिया।


उन्होंने कहा, ‘‘इस बार ओलंपिक ने बहुत बड़ा प्रभाव पैदा किया है। अभी ओलंपिक के खेल समाप्त हुए हैं और पैरालम्पिक चल रहा है। खेल जगत में जो कुछ भी हुआ, वह विश्व की तुलना में भले ही कम है, लेकिन विश्वास पैदा करने के लिए बहुत अहम है।’’


प्रधानमंत्री ने कहा कि आज युवा खेलों की तरफ न केवल देख रहा है, बल्कि वह इससे जुड़ी संभावनाओं की ओर भी देख रहा है और उसके सामर्थ्य को बहुत बारीकी से समझ भी रहा है तथा इससे खुद को जोड़ना भी चाहता है। उन्होंने कहा, ‘‘जब इतनी गति आई है और हर परिवार में खेलों को लेकर चर्चा शुरू हुई है तो आप ही बताइए कि क्या हमें इस गति को थमने देना चाहिए?...जी नहीं...अब देश में खेल और खेल-कूद एवं खेल भावना रूकना नहीं है। इस गति को पारिवारिक एवं सामजिक जीवन में स्थायी बनाना है और निरंतर ऊर्जा से भर देना है।’’


उन्होंने कहा, ‘‘घर हो बाहर हो, गांव हो या शहर, हमारे मैदान भरे होने चाहिए। सब खेलें, सब खिलें। ‘सबका प्रयास’ के मंत्र से ही भारत खेलों में वह ऊंचाई प्राप्त कर सकेगा, जिसका वह हकदार है।’’ प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय खेल दिवस पर देशवासियों को बधाई दी और इस अवसर पर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि अर्पित की। तोक्यो ओलंपिक में हॉकी में भारत के शानदार प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज मेजर ध्यानचंद की आत्मा जहां भी होगी, बहुत ही प्रसन्नता का अनुभव कर रही होगी। उन्होंने कहा कि भारत के नौजवानों और बेटे-बेटियों ने चार दशक बाद फिर से हॉकी में जान फूंक दी है।





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भाविना पटेल ने पैरालम्पिक में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली : तोक्यो पैरालम्पिक में टेबल टेनिस स्पर्धा के महिला एकल में रजत पदक जीतने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाविना बेन पटेल को रविवार को बधाई दी और उनकी जीत को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि इससे युवा खेलों के प्रति आकर्षित होंगे।प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, ''असाधारण भाविना पटेल ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने देश के लिए ऐतिहासिक रजत पदक जीता है। उनकी जीवन यात्रा प्रेरक है और वह युवाओं को खेलों की ओर आकर्षित करेंगी।'' भाविना बेन पटेल को तोक्यो पैरालंपिक की टेबल टेनिस क्लास 4 स्पर्धा के महिला एकल फाइनल में रविवार को चीन की झाउ यिंग के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। उन्हें यिंग ने सीधे मुकाबले में 7-11, 5-11, 6-11 से शिकस्त दी। हालांकि, इसके बावजूद वह तोक्यो पैरालंपिक खेलों में भारत को पहला पदक दिलाने में सफल रहीं। बाद में प्रधानमंत्री ने भाविना से फोन पर बात की और उन्हें रजत पदक जीतने पर बधाई दी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक मोदी ने भाविना से कहा कि उन्होंने इतिहास रचा है। उन्होंने रजत पदक विजेता को भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं। भाविना गुजरात में मेहसाणा जिले के वडनगर के सुंधिया गांव की रहने वाली हैं। प्रधानमंत्री ने भाविना को बताया कि वह अक्सर सुंधिया जाते रहते थे। उन्होंने भाविना से यह भी पूछा कि उनके परिवार के कौन-कौन से सदस्य अभी गांव में रहते हैं। इसके जवाब में भाविना ने बताया कि उनके माता-पिता सुंधिया में ही रहते हैं। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री भी वडनगर के ही रहने वाले हैं।




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प्रधानमंत्री ने तोक्यो पैरालम्पिक की टीटी स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली भाविना पटेल को दी बधाई

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तोक्यो पैरालम्पिक की टेबल टेनिस स्पर्धा के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रचने वाली भाविना बेन पटेल को बधाई दी और कहा कि पूरा देश उनकी सफलता के लिए प्रार्थना कर रहा है। मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ''बधाइयां भाविना पटेल। आपने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। पूरा देश आपकी सफलता के लिए प्रार्थना कर रहा है और कल वह आपकी हौसलाआफजाई करेगा। आप बगैर किसी दबाव के अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कीजिए। आपकी उपलब्धियां पूरे देश को प्रेरित करती हैं।''ज्ञात हो कि भाविना बेन पटेल पैरालम्पिक टेबल टेनिस स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बन गईं। उन्होंने चीन की मियाओ झांग को क्लास 4 वर्ग के कड़े मुकाबले में 3.2 से हराया। पटेल ने दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी को 7.11, 11.7, 11.4, 9.11, 11.8 से हराकर भारतीय खेमे में भी सभी को चौंका दिया। अब उनका सामना दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी चीन की यिंग झोउ से होगा। गुजरात के मेहसाणा जिले में एक छोटी परचून की दुकान चलाने वाले हंसमुखभाई पटेल की बेटी भाविना को पदक का दावेदार भी नहीं माना जा रहा था लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से इतिहास रच दिया। वह बारह महीने की उम्र में पोलियो की शिकार हुई थीं।



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खेल रत्न ध्यान चंद को भारत रत्न कब


भारत के लिए गौरव का विषय है कि हाल ही में जापान की राजधानी टोक्यो में संपन्न हुए 2020 ओलंपिक खेलों में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 41 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कांस्य पदक जीत कर अपना अतीत का रुतबा पुन: हासिल किया है। इस पदक ने देश के करोड़ों हॉकी प्रेमियों को सुकून के लम्हें प्रदान किए हैं। इसलिए एक मुद्दत गुजर जाने के बाद जीते गए इस कांस्य पदक की अहमियत स्वर्ण पदक से कम नहीं है। इससे पूर्व 1964 में इसी टोक्यो में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम ने अपना सातवां स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा था। हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है कि 1964 की उस स्वर्णिम हॉकी टीम का शानदार नेतृत्व हिमाचली दिग्गज चरणजीत सिंह (पद्मश्री) ने किया था तथा इस टोक्यो 2020 ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम में हिमाचल के हॉकी खिलाड़ी वरुण शर्मा ने अपनी भूमिका निभाई है। यह बात स्पष्ट है कि पर्वतीय राज्य हिमाचल में दशकों पहले भी अंतरराष्ट्रीय या ओलंपिक स्तरीय खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं थी और न ही अब है। दशकों से राज्य के कई खिलाड़ी विश्व खेल पटल पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो हमारे खिलाडिय़ों की कड़ी मेहनत व लगन को दर्शाता है।


मगर जब बात हॉकी की हो तथा हॉकी के खलीफा मेजर ध्यान चंद का जिक्र न किया जाए तो भारतीय हॉकी की सल्तनत का गौरवमयी इतिहास अधूरा रह जाएगा। हॉकी की दुनिया का एक ऐसा दमदार चेहरा जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है। भारतीय हॉकी के उस महान् पुरोधा का जन्म 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में हुआ था। देश में उनके जन्म दिवस को ‘राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। ध्यान चंद ने सन् 1922 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सिपाही की हैसियत से जीवन की शुरुआत करके वहीं हॉकी के खेल को अपना लक्ष्य बना लिया था। हॉकी के प्रति बेपनाह मोहब्बत के जज्बात रखने वाले ध्यान चंद के जहन में जीत का जज्बा व जुनून तथा भारत को हॉकी का विश्व चैंपियन बनाने की गजब की जिद्द मौजूद थी जिसका परिणाम 1928 के ‘एम्सर्टडम ओलंपिक खेलों में सामने आया जब भारतीय हॉकी टीम पहली मर्तबा ओलंपिक में शामिल हुई तथा ध्यान चंद की बदौलत ओलंपिक महाकुंभ में अपना शानदार आगाज स्वर्ण पदक जीतकर किया था। उसके बाद 1932 ‘लॉस एंजिल्स में स्वर्ण व 1936 के ‘बर्लिन ओलंपिक में ध्यान चंद ने अपनी कप्तानी में गोल्ड मेडल जीतकर हॉकी की स्वर्णिम हैट्रिक लगाई तथा भारतीय ओलंपिक दल के ध्वज वाहक भी रहे थे। द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1940 व 1944 के दो ओलंपिक खेल रद्द हुए थे, मगर भारतीय हॉकी का स्वर्णिम दौर ‘1948 लंदन, ‘1952 हेलसिंकी तथा ‘1956 मेलबॉर्न ओलंपिक तक अनवरत जारी रहा। 1960 के ‘रोम ओलंपिक में ‘रजत पदक, 1964 टोक्यो में स्वर्ण तथा 1968 के मैक्सिको व 1972 के म्युनिख ओलंपिक में भारतीय हॉकी ने ‘कांस्य पदक जीते थे। इस प्रकार भारतीय हॉकी ओलंपिक महाकुंभ में अब तक 8 स्वर्ण, एक रजत व 3 कांस्य पदक जीतकर विश्व खेल पटल पर एक सम्मानित मुकाम हासिल कर चुकी है। 70 के दशक तक भारतीय हॉकी विश्व की हॉकी टीमों के लिए खौफ बन चुकी थी। इसी दौरान यूरोपीय देशों ने एस्ट्रोटर्फ के जरिए हॉकी को एक नया रूप दे दिया। नतीजतन घास के मैदानों का वजूद समाप्त हुआ तथा हॉकी एस्ट्रोटर्फ पर खेली जाने लगी। हालांकि इसी दौरान भारतीय टीम ने 1975 का ‘हॉकी विश्व कप तथा 1980 के मॉस्को ओलंपिक में ‘स्वर्ण पदक जरूर अपने नाम किए, मगर एस्ट्रोटर्फ के असर ने भारतीय हॉकी के समृद्ध इतिहास को काफी हद तक प्रभावित करके इसके वर्चस्व को चुनौती दे डाली। लेकिन टोक्यो 2020 ओलंपिक में पुरुष व महिला हॉकी टीमों ने अपने उम्दा प्रदर्शन से संकेत दिया है कि भारतीय हॉकी अपने सुनहरे खेल इतिहास को दोहराने की पूरी क्षमता रखती है। वर्तमान में हिमाचल में भी हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ बिछ चुके हैं। यदि खेल संघों व खेल व्यवस्थाओं पर आसीन अहलकार खेल प्रतिभाओं को तराशने तथा खेलकूद मामलों से जुड़े मंत्रालय उन्हें बुनियादी खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने में तत्परता दिखाएं तो करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किए गए एस्ट्रोटर्फ का लाभ उठाकर खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय हॉकी जगत में राज्य को गौरवान्वित कर सकते हैं।


बहरहाल ओलंपिक पोडियम पर भारतीय हॉकी की स्वर्णिम बुनियाद के मुख्य शिल्पकार मेजर ध्यान चंद ही थे जिन्होंने अपने खेल हुनर से आकर्षित करके करोड़ों लोगों को हॉकी का दीवाना बना दिया था। ध्यान चंद जब तक खिलाड़ी, कोच व मैनेजर के रूप में टीम के साथ रहे, विश्व में भारतीय हॉकी की बादशाहत कायम रही। सन् 1956 में भारतीय सेना (पंजाब रेजिमेंट) से सेवानिवृत्ति के समय सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से नवाजा था। भारतीय ओलंपिक संघ मेजर ध्यान चंद को शताब्दी का खिलाड़ी घोषित कर चुका है। इसी अगस्त माह में भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च खेल सम्मान का नाम ‘मेजऱ ध्यान चंद खेल रत्न रखकर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया है। इसके अलावा देश में ‘ध्यान चंद लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी दिया जाता है। मेजर ध्यान चंद का हॉकी के प्रति समर्पण इस कदर था कि उन्होंने अपनी आत्मकथा का नाम भी ‘गोल ही रखा था। 185 मैचों में 570 गोल हॉकी जगत की एक ऐसी बेमिसाल उपलब्धि है जो किसी भी हॉकी खिलाड़ी को आश्चर्यचकित करके सोचने पर मजबूर करती रहेगी, बल्कि यह करिश्मा एक ख्वाब बनकर रह जाएगा। आज तक विश्व का कोई भी हॉकी खिलाड़ी इस कीर्तिमान के नजदीक नहीं पहुंच सका। हॉकी जगत में अपने खेल हुनर की अमिट छाप छोडऩे वाले कुशल महारथी ध्यानचंद ने 3 दिसंबर 1979 को दुनिया को अलविदा कह दिया था। विश्व के सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाडिय़ों में शुमार करने वाले मेजर ध्यान चंद के हॉकी में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस सम्मान की मांग दशकों से उठ रही है। इस विषय पर हमारे हुक्मरानों को अपनी खामोशी पर रुख स्पष्ट करना होगा। खेल दिवस के अवसर पर ‘हॉकी के जादूगर को राष्ट्र शत्- शत् नमन करता है और उन्हें याद करता है।


-प्रताप सिंह पटियाल-




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अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं बर्बाद मत करो

विश्व स्तर पर आजकल वैज्ञानिक आधार पर बनी उत्तम प्ले फील्ड के कारण बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा हो गई है। इसलिए उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन करने पर भी पोडियम तक पहुंचना सबके बस की बात नहीं है। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की पदक तालिका में स्थान बनाने के लिए जहां अच्छे ज्ञानवान प्रशिक्षक चाहिए, वहीं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्ले फील्ड भी बहुत जरूरी है। हिमाचल प्रदेश के खेल मैदानों व अन्य हाल ही के वर्षों में बनी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्ले फील्ड के रखरखाव पर पहले भी कई बार लिख कर इस कॉलम के माध्यम से जागरूक किया जा चुका है, मगर खेल विभाग की कुंभकर्णी नींद के कारण इस पर अमल कम ही हो रहा है। हिमाचल प्रदेश के पास आज से दो दशक पहले तक खेल ढांचे के नाम पर सैकड़ों साल पहले राजा-महाराजाओं द्वारा मेले व उत्सवों के लिए बनाए गए उंगलियों पर गिने जाने वाले कुछ मैदान चंबा, मंडी, अमतर, सुजानपुर, जयसिंहपुर, कुल्लू, अनाडेल, रोहडू, सराहन, सोलन, चैल व नाहन में थे। इन मैदानों पर हिमाचल प्रदेश की खेल गतिविधियां कई दशकों से मेलों-उत्सवों व राजनीतिक रैलियों से बचे समय में चलती रही हैंं।


वैसे तो हिमाचल प्रदेश की तरक्की में विभिन्न सरकारों का योगदान रहा है, मगर हिमाचल प्रदेश में पहली बार नई सदी के शुरुआती वर्षों में प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल ढांचे को खड़ा करने की घोषणा ही नहीं की, अपितु अपने दूसरे कार्यकाल में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्तर के आधारभूत ढांचे को मूर्त रूप भी दिया तथा हिमाचल प्रदेश में साहसिक खेलों के माध्यम से खेल पर्यटन को संभावनाओं को भी तराशा है। आज हिमाचल प्रदेश में कई खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्ले फील्ड एथलेटिक्स, हाकी व इंडोर खेलों के लिए विभिन्न जिला व उपमंडल स्तर पर उपलब्ध हैं। बिलासपुर के लुहणू का खेल परिसर पूर्व मंत्री व वर्तमान में कोट कलूहर के विधायक ठाकुर रामलाल के प्रयत्नों से सामने आया है। उन्होंने इस परिसर को बनाने की योजना तो बहुत पहले ही बना दी थी, मगर यह परिसर अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। एथलेटिक्स सभी खेलों की जननी है। इसी से सब खेल निकले हैं और इसके प्रशिक्षण के बिना किसी खेल में दक्षता नहीं मिल सकती है। देश में कई प्रदेशों के पास एक भी सिंथेटिक ट्रैक नहीं है। हिमाचल प्रदेश में आज हमीरपुर, बिलासपुर व धर्मशाला में तीन सिंथेटिक ट्रैक बन कर तैयार हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण की आर्थिक सहायता से शिलारू व सरस्वतीनगर में काम हो रहा है। शिलारू में दो सौ मीटर का सिंथेटिक ट्रैक बन चुका है और सरस्वतीनगर में काम हो रहा है ।


हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर व धर्मशाला सिंथेटिक ट्रैकों पर लोग टहलते नजर आते हैं। इनमें हमीरपुर के ट्रैक का तो हाल बहुत बुरा है। खेल विभाग वहां पर न तो नियमित चौकीदार दे पाया है और न ही मैदान कर्मचारी। यह करोड़ों की संपत्ति लावारिस बरबाद हो रही है। खेल विभाग को अब तो कुंभकर्णी नींद से जाग कर इन प्ले फील्ड की सुध लेनी होगी। ट्रैक पार्क बन चुके हैं। वहां आम लोगों का प्रवेश वर्जित कर देना चाहिए। केवल एथलीट के लिए ही प्रवेश रखना चाहिए। तभी इन प्ले फील्ड को लंबे समय तक खिलाडिय़ों के लिए उपलब्ध करवाया जा सकता है। कल जब हिमाचल प्रदेश के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट होंग और प्रशिक्षण के लिए उखड़ा हुआ ट्रैक होगा तो फिर पहाड़ की संतान को पिछडऩे का दंश झेलना पड़ेगा। इसलिए इस बरबादी को अभी से रोकना होगा। तभी हम अपनी आने वाली पीढिय़ों से न्याय कर सकेंगे। हिमाचल प्रदेश को भी हिमाचल में ट्रेनिंग कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले, इसके लिए कुछ लोगों के जुनून ने बिना सुविधाओं के मिट्टी पर ट्रेनिंग कर राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दस्तक दी थी। तभी यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधा आने वालों को मिल पाई है। हिमाचल प्रदेश में इस समय हर जिला स्तर सहित कई जगह उपमंडल स्तर पर भी इंडोर स्टेडियम बन कर तैयार हैं, मगर उन स्टेडियमों में बनी प्ले फील्ड का उपयोग प्रशिक्षण के लिए खिलाडिय़ों को ठीक से करना नहीं मिल रहा है। वहां पर अधिकतर शहर के लाला व अधिकारी अपनी फिटनेस करते हैं। ऊना व मंडी में तरणताल बने हैं, मगर वहां पर भी कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम आज तक शुरू नहीं हो पाया है।


हिमाचल प्रदेश में तैराक ही नहीं हैं। यहां पर भी प्रशिक्षण न होकर गर्मियों में मस्ती जरूर हो जाती है। ऊना में हाकी के लिए एस्ट्रोटर्फ बिछी हुई है, मगर उस की तो पहले ही दुर्गति हो गई है। हिमाचल प्रदेश सरकार का युवा सेवाएं एवं खेल विभाग अभी तक करोड़ों रुपए से बने इस खेल ढांचे के रखरखाव में नाकामयाब रहा है। उसके पास न तो चौकीदार हैं और न ही मैदान कर्मचारी, पर्याप्त प्रशिक्षकों की बात तो बहुत दूर है। हिमाचल से खिलाडिय़ों के पलायन का पहले सबसे बड़ा कारण यहां पर अच्छी प्ले फील्ड व स्तरीय प्रशिक्षकों का न होना था, मगर आज जब प्ले फील्ड अंतरराष्ट्रीय स्तर की मिली हैं तो उसके रखरखाव में इतनी लापरवाही क्यों? अभी समय है कि हिमाचल प्रदेश युवा सेवाएं एवं खेल विभाग को चाहिए कि वह इस ओर ध्यान दे जिससे करोड़ों की अंतरराष्ट्रीय खेल सुविधाओं का सदुपयोग हो सके। तभी हिमाचल प्रदेश से खिलाडिय़ों का पलायन रुकेगा। जब खिलाड़ी हिमाचल प्रदेश में रह कर प्रशिक्षण प्राप्त कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतेगा तो उसके साथ हिमाचल प्रदेश का भी नाम होगा, नहीं तो कोई पंजाब व किसी अन्य केंद्रीय विभाग में रहकर खेल में दक्षता हासिल कर देश के लिए पदक तो जरूर जीतता रहेगा, मगर उसे हिमाचली होने का परिचय देने के लिए विवश होना पड़ेगा।


-भूपिंद्र सिंह-






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भारत के चार मुक्केबाज एशियाई युवा चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में

नई दिल्ली : भारत के चार मुक्केबाजों ने दुबई में चल रही एशियाई युवा मुक्केबाजी चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इस महाद्वीपीय चैंपियनशिप का आयोजन पहली बार युवा और जूनियर वर्ग में एक साथ किया जा रहा है। भारत के सात मुक्केबाज सोमवार को क्वार्टर फाइनल में उतरे जिनमें से चार ने जीत दर्ज की। जयदीप रावत (71 किग्रा) ने दबदबे वाला प्रदर्शन किया और संयुक्त अरब अमीरात के अपने प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद आइसा को दूसरे राउंड में ही बाहर का रास्ता दिखाया। वंशज (63.5 किग्रा) ने ताजिकिस्तान के मखकमोव डोवुड के खिलाफ 5-0 से जीत हासिल की, जबकि दक्ष सिंह (67 किग्रा) ने किर्गिस्तान के एल्डर तुर्दुबाएव को 4-1 से हराया। एक अन्य मुकाबले में सुरेश विश्वनाथ (48 किग्रा) ने किर्गिस्तान के अमानतुर झोलबोरोसव के खिलाफ 5-0 से जीत दर्ज की।


विक्टर सैखोम सिंह (54 किग्रा) किर्गिस्तान के डरबेक तिलवाल्डिव से 2-3 से जबकि विजय सिंह (57 किग्रा) ताजिकिस्तान के मोरोदोव अबुबकर से 0-3 से हार गये। रवींद्र सिंह को ताजिकिस्तान के योकूबोव अब्दुर्रहीम ने 3-2 से हराया। भारत ने ड्रा के दिन ही अपने लिये 20 पदक पक्के कर दिये थे। कोविड-19 के कारण यात्रा प्रतिबंधों को देखते हुए कई देश इस प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। युवा वर्ग के स्वर्ण पदक विजेता को 6000 डॉलर, रजत पदक विजेता को 3000 डॉलर और कांस्य पदक विजेता को 2000 डॉलर की पुरस्कार राशि मिलेगी। जूनियर वर्ग में यह राशि क्रमश: 4000, 2000 और 1000 डॉलर है। 





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प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय एथलीटों, पहलवानों को बधाई दी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारतीय खिलाड़ियों को नैरोबी में विश्व एथलेटिक्स अंडर -20 प्रतियोगिता और जूनियर विश्व कुश्ती प्रतिस्पर्धा में उनके प्रदर्शन के लिए बधाई दी।


प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘गति प्राप्त करना और सफलता! हमारे एथलीटों को विश्व एथलेटिक्स अंडर -20 प्रतियोगिता, नैरोबी में दो रजत पदक और कांस्य पदक जीतने के लिए बधाई। भारत भर में एथलेटिक्स लोकप्रिय हो रहा है और यह आने वाले समय के लिए बहुत अच्छा संकेत है। हमारे मेहनती एथलीटों को शुभकामनाएं।’’


उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, "प्रतिभाशाली पहलवानों को और शक्ति! जूनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2021 में, हमारे पुरुष और महिला दल ने चार रजत सहित कुल 11 पदक जीते। कामयाबी के लिए टीम को बधाई और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।"





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खेलो इंडिया का प्रगति पथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में खेलो इंडिया अभियान का शुभारंभ किया। इसके अंतर्गत अनेक प्रकार के कार्यक्रमों की शुरुआत की गई। खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। इसका सकारात्मक परिणाम हुआ। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता इसका प्रमाण है। टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने सर्वप्रथम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया था।


मीराबाई चानू का जन्म मणिपुर के सुदूर ग्रामीण अंचल के निर्धन परिवार में हुआ था। उनमें खेल व भारोत्तोलन के प्रति जज्बा था। उनकी प्रतिभा को देखते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने उनको प्रोत्साहन व सहायता दी। मीराबाई ने बताया कि स्वयं नरेंद्र मोदी सरकार ने उनको प्रशिक्षण हेतु अमेरिका भेजने का निर्णय लिया था। इसके दृष्टिगत एक दिन में ही अमेरिका जाने की औपचारिकताओं को पूरा किया गया। मीराबाई चानू को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। इसके पहले नरेंद्र मोदी सरकार ने उनको पद्मश्री सम्मान देकर सम्मानित किया था। इससे भी उनका उत्साहवर्धन हुआ था। टोक्यो ओलंपिक में रवाना होने से पहले नरेंद्र मोदी ने प्रतिभागियों से वर्चुअल संवाद किया था। उनका उत्साह बढ़ाया था। उनको शुभकामना दी थी। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के प्रतिभागियों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल संवाद किया था। खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया था।


खेलो इंडिया अभियान से भी देश व उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रेरणा मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कोरोना महामारी के बावजूद दुनिया के खेल के महाकुम्भ टोक्यो ओलम्पिक में विश्व के सभी प्रतिष्ठित खिलाड़ी एकत्र हुए हैं। यह उनकी खेल के प्रति प्रतिबद्धता एवं लगाव को प्रदर्शित करता है। भारतीय खिलाड़ियों के समर्थन में विभिन्न इवेण्ट का आयोजन व्यापक जनसमर्थन के साथ किया जा रहा है। पूरा देश अपने खिलाड़ियों का समर्थन कर रहा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में टोक्यो ओलम्पिक में प्रतिभाग करने हेतु इस बार देश की तरफ से खिलाड़ियों का सबसे बड़ा दल भेजा गया है। खेल की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ने खेलो इण्डिया अभियान को गांव गांव तक पहुंचाने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री के प्रेरणा से प्रदेश सरकार द्वारा युवा ऊर्जा के लिए गांव-गांव में स्टेडियम,ओपन जिम, व्यायामशालाओं का निर्माण किया जा रहा है।


खेल की गतिविधियों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए युवक मंगल दल और महिला मंगल दलों का गठन किया गया है। विगत चार वर्षों के दौरान मंगल दलों को स्पोर्ट्स किट भी उपलब्ध करायी गई हैं। इससे गांव-गांव में खेल के प्रति एक नई अभिरुचि जागृत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में ओपेन जिम का निर्माण इस दिशा में एक अच्छा प्रयास है। खेलकूद की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश में एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का निर्णय लिया है। हमारा युवा अनेक सम्भावनाओं से भरपूर है। उन्हें जब इस प्रकार की सुविधाओं का लाभ मिलेगा। देश में खेलों को बढावा देने और नई प्रतिभाओं को तलाशने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा राजीव गांधी खेल योजना, शहरी खेल संरचना योजना और प्रतिभा खोज योजना को मिलाकर इनके स्थान पर खेलो इंडिया योजना पेश की गई थी। इस खेल कार्यक्रम को व्यक्तिगत विकास, सामुदायिक विकास, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय विकास के लिए एक उपकरण के रूप में स्थापित किया गया है। इसमें अखिल भारत स्तरीय स्पोर्ट छात्रवृत्ति योजना भी शामिल है। इस योजना के तहत चुने गए हर एथलीट को सलाना तौर पर पांच लाख रुपये की छात्रवृत्ति आठ साल तक लगातार मिलेगी। बीस करोड़ बच्चों को राष्ट्रीय शारीरिक फिटनेस अभियान में शामिल किया गया। खेलो इंडिया कार्यक्रम योजना के तहत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में एथलेटिक्स ट्रैक,हॉकी और फुटबॉल ग्राउंड,तरणताल सहित बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण कराया जा रहा है। सरकार ने खेलो इंडिया योजना को 2025- 26 तक के लिये बढ़ा दिया है। भारत ने टोक्यो में कुल सात पदक जीते। भारत सन 1900 से ओलंपिक में हिस्सा ले रहा है। इसके बाद से पहली बार है जब टीम ने एक ओलंपिक में सबसे ज्यादा पदक जीते हैं। इससे पहले भारत ने 2012 के लंदन ओलंपिक में 6 पदक जीते थे। आठ साल बाद कुश्ती में दो पदक जीते।


तेरह साल बाद ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता। 121 साल में पहली बार किसी भारतीय ने एथलेटिक्स में पदक जीता है। वह ब्रिटिश शासन का दौर था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी खिलाड़ियों का खूब उत्साहवर्धन किया। नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक विजेताओं के सम्मान में लाल किले की प्राचीर से तालियां बजवाई थीं। उन्होंने कहा था कि इसबार इन युवा खिलाड़ियों ने ओलंपिक में मेडल जीतकर सिर्फ दिल नहीं जीता,बल्कि नई पीढ़ी को खेल के प्रति प्रेरित किया है। इस युवा पीढ़ी ने भारत का नाम रोशन किया है। नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले सभी खिलाड़ियों के साथ अपने आवास पर मुलाकात की। उन्होंने एथलीटों को उनके शानदार प्रदर्शन को लेकर सम्मानित किया और खिलाड़ियों से किया वादा भी निभाया।


इधर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में टोक्यो ओलम्पिक में शानदार प्रदर्शन से देश का मान बढ़ाने वाली खेल प्रतिभाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर आनंदीबेन पटेल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक लाकर देश व प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों का अभिनन्दन किया जाना सराहनीय है। टोक्यो ओलम्पिक में देश व प्रदेश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों के सम्मान में समारोह के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद देते हुए कहा कि नवाबों का शहर लखनऊ आज ओलम्पिक के नवाबों का स्वागत कर रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा खिलाड़ियों के साथ ही, प्रशिक्षकों, चिकित्सकों सहित खिलाड़ियों के सहयोगी स्टाफ को सम्मानित कर उल्लेखनीय कार्य किया गया है।



-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)






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एशियाई युवा और जूनियर मुक्केबाजी में भारत के कम से कम 21 पदक पक्के

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के बीच प्रतिभागियों की संख्या कम रहने की वजह से दुबई में होने वाली एशियाई युवा और जूनियर मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में ड्रॉ खुलने के बाद भारत के कम से कम 21 पदक पक्के हो गए हैं।


भारत का 73 सदस्यीय दल टूर्नामेंट में भाग लेगा जिसमें पुरूष वर्ग में दो और महिला वर्ग में भी जूनियर और युवा दो टीमें उतरेंगे। टूर्नामेंट में 250 से अधिक मुक्केबाज भाग ले रहे हैं।


पदक दौड़ में पहुंचे 21 में से नौ ने सीधे फाइनल में प्रवेश कर लिया है।


भारतीय दल टुकड़ों में रवाना हुआ है क्योंकि खिलाड़ियों की कोरोना जांच रिपोर्ट अलग अलग समय पर मिली है।कल 23 का दल रवाना हुआ तो सुबह 25 मुक्केबाजों ने दुबई की उड़ान ली। बाकी 25 शाम को रवाना होंगे।


एक सूत्र ने बताया,‘‘ अभी जो 25 सदस्य बचे हैं, उनमें अधिकांश सहयोगी स्टाफ के सदस्य हैं।


इस टूर्नामेंट में 18 देशों के मुक्केबाजों को भाग लेना था लेकिन कोरोना महामारी के कारण यात्रा प्रतिबंधों की वजह से कई टीमों ने या तो नाम वापिस ले लिया या छोटा दल भेजा है। 






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मोदी ने ओलंपिक खिलाड़ियों के साथ के फोटो और वीडियो साझा किये

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टोक्यो ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने के लिए खिलाड़ियों के साथ नाश्ते के दौरान के फोटो तथा वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किये हैं। प्रधानमंत्री ने बुधवार को ट्वीट कर फोटो तथा वीडियो साझा करते हुए लिखा, “हमारे ओलंपिक नायकों के साथ यादगार बातचीत।” खिलाड़ियों के साथ बातचीत का वीडियो साझा करते हुए एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “आइसक्रीम और चूरमा से लेकर अच्छे स्वास्थ्य तथा फिटनेस के साथ साथ प्रेरणादायी कहानियों और खुशी के क्षणों पर बातचीत। सात लोक कल्याण मार्ग पर नाश्ते के दौरान मेरी टोक्यो ओलंपिक दल के खिलाड़ियों के साथ बातचीत देखिये।” उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के अगले दिन इन खिलाड़ियों को अपने निवास पर नाश्ते के लिए बुलाया था। इससे पहले उन्होंने इन खिलाडियों को स्वतंत्रता दिवस समाराेह में शामिल होने के लिए लाल किले पर भी विशेष रूप से आमंत्रित किया था। 





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टोक्यो पैरालंपिक के कारण इस बार देर से होगा राष्ट्रीय खेल पुरस्कार कार्यक्रम : ठाकुर

नई दिल्ली :  केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि टोक्यो में 24 अगस्त से पांच सितंबर तक होने वाले पैरालंपिक खेलों को देखते हुए इस साल राष्ट्रीय खेल पुरस्कार समारोह देर से होंगे। हर साल ये पुरस्कार 29 अगस्त को दिये जाते हैं। खेलमंत्री ठाकुर ने कहा कि पुरस्कार समारोह देर से इसलिए कराया जा रहा है ताकि पैरालंपिक खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी भी इसमें शामिल किये जा सकें। उन्होंने कहा कि पुरस्कार विजेताओं का चयन करने के लिये चयन पैनल गठित कर लिया गया है पर चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ने से पहले वे कुछ और समय इंतजार करना चाहेंगे। गौरतलब है कि राष्ट्रीय पुरस्कार, खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार और ध्यानचंद पुरस्कार हर साल राष्ट्रपति द्वारा 29 अगस्त को महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती पर दिये जाते रहे हैं। कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए पिछली बार की तरह इस साल भी यह पुरस्कार समारोह वर्चुअल कराये जा सकते हैं। राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिये नामांकन प्रक्रिया दो बार बढ़ाये जाने के बाद पांच जुलाई को समाप्त हुई थी। महामारी को देखते हुए आवेदन करने वाले खिलाड़ियों को ऑनलाइन स्वयं ही नामांकित करने की अनुमति थी पर राष्ट्रीय महासंघों ने भी अपने चुने हुए खिलाड़ी भेजे हैं। भारत टोक्यो में 54 पैरा एथलीटों का सबसे बड़ा दल भेज रहा है। देश के सबसे बड़े खेल सम्मान खेल रत्न को हाल में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर किया गया जो पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर था। इसके अलावा पुरस्कार राशि भी बढ़ा दी गयी है।

 

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खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने फिट इंडिया फ्रीडम रन 2.0 लांच किया

नई दिल्ली : आजादी का अमृत महोत्सव का जश्न मनाने केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को फिट इंडिया फ्रीडम रन 2.0 का शुभारंभ किया। खेलमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए फिट इंडिया फ्रीडम रन 2.0 के इस देशव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान ठाकुर के साथ युवा मामले और खेल राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक भी उपस्थित थे। इसके अलावा बीएसएफ, सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, रेलवे, एनवाईकेएस, आईटीबीपी, एनएसजी, एसएसबी जैसे संगठन के सदस्यों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया। ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव का जश्न मनाने के लिए, हमने देश भर में फिट इंडिया फ्रीडम रन 2.0 शुरु किया है। इसकी शुरुआत 75 प्रमुख स्थानों से की गयी है और यह अभियान 2 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें देश के प्रत्येक जिले के 75 गांव शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में 2 अक्टूबर तक प्रत्येक जिले और प्रत्येक गांव के लोग इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। साथ ही कहा कि इस बार करीब 7.5 करोड़ लोग सीधे हमसे जुड़ेंगे जकि पिछली बार यह आंकड़ा 5 करोड़ का था। खेलमंत्री ने उम्मीद जतायी कि जैसे-जैसे यह अभियान आगे बढ़ेगा इसमें शामिल लोगों की तादाद बढ़ती जाएगी। ठाकुर ने कहा कि जब हम अपनी आजादी के 75वें से 100वें वर्ष की ओर बढ़ते हैं तो यह हम सभी पर निर्भर करता है कि हम उन 25 वर्षों में देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। यह कार्य हम तभी कर पायेंगे जब फिट रहेंगे। दिल्ली में ठाकुर और प्रमाणिक ने फिट इंडिया फ्रीडम रन 2.0 को हरी झंडी दिखाई जबकि महाराष्ट्र में फिट इंडिया फ्रीडम रन 2.0 को मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। दौड़ में 40 एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) कमांडो भाग ले रहे हैं। वहीं पंजाब में फिट इंडिया फ्रीडम रन 2.0 को अमृतसर में अटारी-वाघा बॉर्डर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। दौड़ में बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) के जवान हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य राज्यों में भी दौड़ कार्यक्रम हुए हैं जिससे भारी तादाद में युवाओं ने उत्साहित होकर भाग लिया। युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय आजादी के अमृत महोत्सव समारोह के तहत देश भर में फिट इंडिया फ्रीडम रन 2.0 का आयोजन कर रहा है। 12 मार्च, 2021 को आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री के उद्घाटन भाषण से प्रेरणा लेते हुए युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने कार्यवाही और संकल्प के स्तम्भ के तहत आजादी का अमृत महोत्सव के आयोजन की संकल्पना की है। इस कार्यक्रम के तहत 2 अक्टूबर, 2021 तक हर सप्ताह 75 जिलों और प्रत्येक जिले के 75 गांवों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।




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ओलंपियन मीराबाई चानू से मिले सलमान खान, तस्वीर शेयर कर कही ये बात

मुंबई : 'ओलंपिक 2020' में सिल्वर मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू से हाल ही में सलमान खान ने मुलाकात की। सलमान खान ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर मीराबाई चानू के साथ मुलाकात की एक तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें दोनों एक दूसरे के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। तस्वीर में सलमान से मिलने की खुशी मीराबाई चानू के चेहरे पर साफ नजर आ रही है।


सलमान खान ने मीराबाई चानू के साथ दो तस्वीर शेयर की उसमें दोनों मुस्कुराते नजर आ रहे हैं। सलमान ने तस्वीर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा,'सिल्वर मेडल विजेता मीराबाई चानू, आपको ढेर सारी शुभकामनाएं। बेहद प्यारी मुलाकात।आपको हमेशा के लिए शुभकामनाएं!' सलमान खान मीराबाई चानू के साथ तस्वीर अपने ट्विटर हैंडल से भी शेयर किया है। मीराबाई चानू ने सलमान के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए रिएक्शन दिया है। 


सलमान खान के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए मीराबाई चानू ने भी रिएक्शन दिया है, उन्होंने लिखा,'बहुत-बहुत थैंक्यू सलमान खान सर। मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूं और आपसे मुलाकात मेरे लिए सपने का सच होने जैसा था। इससे पहले एक इंटरव्यू में मीराबाई ने कहा था कि वह सलमान खान की फैन हैं। मीराबाई चानू 'टोक्यो ओलंपिक' में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय थीं। जिन्होंने कुल 202 किग्रा (87 किग्रा प्लस 115 किग्रा) उठाकर महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल अपने नाम किया।


वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान की अपकमिंग फिल्म 'किक 2' है। जिसमें वह जैकलीन फर्नांडिस के साथ नजर आएंगे। उसके बाद वह कैटरीना कैफ के साथ 'टाइगर 3' भी नजर आने वाले है और शाहरुख खान-स्टारर 'पठान' में कैमियो में नजर आएंगे। 




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ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाना है हॉकी टीम को - शिवराज

भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम का कांस्य पदक जीतना एक पड़ाव है और टीम का लक्ष्य ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना होना चाहिए। श्री चौहान ने राष्ट्रीय हॉकी टीम के युवा एवं होनहार खिलाड़ी विवेक सागर के साथ यहां स्मार्ट पार्क में पौधा रोपण किया। इस अवसर पर श्री चौहान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मध्यप्रदेश के लिए ही नहीं, देश के लिए गर्व की बात है कि वर्षों बाद हॉकी टीम ने ओलंपिक में पदक हासिल किया। लेकिन यह एक पड़ाव है। अभी टीम को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने मध्यप्रदेश के इटारसी निवासी विवेक सागर की मौजूदगी में कहा कि टीम के खिलाड़ी परिश्रम की पराकाष्ठा करें, जिससे टीम ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत सके। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी टीम का प्रदर्शन देश में हॉकी का पुनर्जागरण है। खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें, सरकार उन्हें प्रत्येक सुविधाएं मुहैया कराएगी।


श्री चौहान ने 21 वर्षीय विवेक सागर की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे एक सामान्य परिवार से आए हैं और अपने संकल्प एवं परिश्रम की बदौलत इतने आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि अभी विवेक को कम से कम दस पंद्रह वर्ष और खेलना है, इसलिए वे और अधिक परिश्रम करें। उन्होंने राज्य में खेलों के क्षेत्र में हो रहे विकास का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार इसके लिए बेहतर से बेहतर संसाधन मुहैया करा रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि विवेक को आज मध्यप्रदेश सरकार एक करोड़ रुपयों की सम्मान निधि प्रदान कर सम्मानित करेगी। इसके पहले विवेक सागर मुख्यमंत्री निवास पर पहुंचे, जहां श्री चौहान ने उनका शॉल और श्रीफल भेंटकर परंपरागत तरीके से स्वागत किया।


श्री चौहान ने कहा कि ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। कई बार चांस की भी बात रहती है और टीम बेहतर प्रदर्शन के बावजूद पदक से वंचित रह गयी। इसलिए मध्यप्रदेश सरकार ने महिला हॉकी टीम की सदस्यों को भी 31 - 31 लाख रुपए देने की घोषणा पहले ही की है और शीघ्र ही उनका सम्मान समारोह भी आयोजित किया जाएगा।






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'जय जवान' -'जय किसान' ही नहीं 'ओलम्पिक पदकों का सिरताज' भी बना हरियाणा

ओलम्पिक के इतिहास में भारत अब तक कुल दस स्वर्ण पदक जीत चुका है जिसमें आठ स्वर्ण पदक भारतीय हॉकी टीम को उसके 1920-1950  मध्य के स्वर्णिम युग के दौरान प्राप्त हुए हैं जबकि दो व्यक्तिगत स्वर्ण पदक में से एक 11 अगस्त 2008 को बीजिंग में आयोजित शूटिंग में अभिनव बिंद्रा को पुरुषों की दस मीटर एयर राइफ़ल प्रतियोगिता में हासिल हुआ था जबकि दूसरा व्यक्तिगत स्वर्ण पदक पिछले दिनों  नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलिंपिक में भारत के लिए ट्रैक एंड फील्ड प्रतियोगिता में भाला फेंकने की प्रतिस्पर्धा में जीता। नीरज चोपड़ा के स्वर्ण पदक को ओलंपिक के  एथलेटिक्स वर्ग में 121 वर्षों के इतिहास में भारत को मिले सबसे पहले  स्वर्ण पदक के रूप में भी देखा जा रहा है। निःसंदेह टोक्यो में पहला एथिलीट ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने से पूरा देश ख़ुशी से झूम रहा है परन्तु चूँकि नीरज चोपड़ा उस हरियाणा का बेटा है जिसके बारे में  कहावत मशहूर है कि -'म्हारा देस हरियाणा -जहाँ दूध दही का खाना ',इसलिए हरियाणा के लोगों का उत्साह कुछ अधिक है। वैसे भी टोक्यो ओलम्पिक में जो कुल 7 पदक प्राप्त हुए हैं उनमें स्वर्ण सहित 3 पदक अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते, शेष 4 पदक पूरे देश के खिलाड़ियों ने मिलकर जीते। सातवां पदक हॉकी टीम का कांस्य पदक है जिसमें हरियाणा सहित पूरे  देश के खिलाड़ी शामिल हैं। हरियाणा के सपूत व भारतीय सेना में राजपूताना रेजिमेंट में सूबेदार नीरज चोपड़ा ने भाला फेंकने में स्वर्ण पदक जीता तो पहलवान बजरंग पूनिया ने कुश्ती में भारत को कांस्य पदक दिलाया। हरियाणा के ही पहलवान रवि दहिया ने कुश्ती में ही रजत पदक अपने नाम किया था और इसी राज्य के दूसरे पहलवान दीपक पूनिया पदक के बिल्कुल क़रीब पहुंचकर हार गए।


दुर्भाग्यवश हरियाणा के और भी कई खिलाड़ी पदक के क़रीब पहुंचकर हार गए अन्यथा यदि यह खिलाड़ी भी पदक जीत लाते तो देश के पदकों की संख्या लगभग दोगुनी हो सकती थी। पदक से चूकने वाले खिलाड़ियों में हरियाणा के ही युवा निशानेबाज मनु भाकर, सौरभ चौधरी, पहलवान विनेश फ़ोगाट जैसे नाम शामिल हैं। महिला हॉकी टीम जो पदक से बाल बाल चूक गयी उसमें भी अकेले हरियाणा राज्य की 9 बेटियां शामिल थीं। इनमें में कप्तान रानी रामपाल तो इस राज्य की थी हीं साथ ही सविता पूनिया जो 'हॉकी की दीवार' के नाम से प्रसिद्ध हो चुकी हैं वह भी  हरियाणा की ही बेटी हैं । हरियाणा के ही साक्षी मलिक, सुशील कुमार, विजेंद्र कुमार, गीता व बबीता फोगाट जैसे अनेक खिलाड़ी इससे पूर्व भी अपनी प्रतिभाओं का लोहा मनवाकर राष्ट्र का नाम रोशन कर चुके हैं। अब टोक्यो ओलम्पिक में एक बार फिर हरियाणा के खिलाड़ियों के शानदार व गौरवपूर्ण प्रदर्शन के बाद यह चर्चा होने लगी है कि जब देश के सबसे छोटे राज्यों में गिना जाने वाला हरियाणा जैसा अकेला राज्य ओलम्पिक में इतना शानदार प्रदर्शन कर सकता है फिर आख़िर उत्तर प्रदेश,बिहार,मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र जैसे और भी कई बड़े राज्य अंतर्राष्ट्रीय खेलों व एथेलीट प्रतियोगिताओं में क्यों पीछे रह जाते हैं ? हरियाणा की गिनती अन्न उत्पादन के क्षेत्र में भी पंजाब के बाद दूसरे नंबर पर होती है। इतना ही नहीं बल्कि यह देश का वह गौरवशाली राज्य भी है जिसके अधिकांश किसानों के बच्चे देश की सरहद के प्रहरी के रूप में भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दिया करते हैं और ज़रूरत पड़ने पर अपनी शहादत भी पेश करते हैं ।


दरअसल जिन राज्यों के बच्चे व युवा अंतर्राष्ट्रीय खेल व एथलीट प्रतियोगिताओं में आगे नहीं निकल पाते उसके पीछे का मुख्य कारण इन राज्यों के सत्ताधीशों की अकर्मण्यता व खेलों के प्रति उनकी निष्क्रियता व निकम्मापन मुख्य कारण है। शायद यह शातिर राजनेता जानते कि चूँकि खिलाड़ी उनके वोट  बैंक नहीं हैं इसलिये चतुर व शातिर राजनीतिज्ञ इनको प्रोत्साहित करने  पर समुचित ध्यान नहीं देते। जनता का जितना पैसा यह सियासतदां अपनी वाहवाही के अपने बड़े बड़े सचित्र विज्ञापनों पर ख़र्च करते हैं वह भी प्रायः झूठे तथ्य पेश कर अपनी वाहवाही कराने वाले विज्ञापनों  पर, उसका मात्र दस प्रतिशत हिस्सा भी यदि खिलाड़ियों की सुविधा उनके प्रशिक्षण उनके प्रोटीनयुक्त आहार पर ख़र्च किया जाये तो इसमें कोई संदेह नहीं कि पदक तालिका में भारत का नाम भी पदक तालिका की सूची में शीर्ष पर आ सकता है। परन्तु हमारे देश में नेताओं को अपनी सत्ता अपनी शोहरत आपने बहुसंख्य वोट बैंक की अधिक चिंता रहती है न कि दुनिया में देश का नाम रौशन करने की आशाओं से परिपूर्ण युवाओं व खिलाड़ियों के प्रोत्साहन की। मिसाल के तौर पर अभी पिछले दिनों जब 7 भारतीय पदक विजेता टोक्यो ओलम्पिक समापन के पश्चात् भारत लौटे तो दिल्ली स्थित अशोका 5 सितारा होटल में उनका स्वागत किया गया। इस स्वागत समारोह में सबसे बड़ा चित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का था जबकि सातों पदक विजेताओं के चित्र एक परिधि में इतने छोटे छपे थे की दूर से उन्हें पहचाना भी नहीं जा सकता था। जबकि होना यही चाहिये था कि जिन पदक विजेताओं के स्वागत में यह समारोह था उनके चित्र सबसे बड़े लगाए जाएं। प्रधानमंत्री के चित्र की  तो आवश्यकता ही नहीं थी। परन्तु यहाँ तो देश के करदाताओं के पैसों से ग़रीबों  को राशन वितरित करने वाले विशेष थैलों पर प्रधानमंत्री का चित्र तो वैक्सीन सर्टीफ़िकेट पर प्रधानमंत्री का चित्र। गोया देश की सारी राजनीति नेताओं के चित्र व उनकी शोहरत व विज्ञापन पर ही आधारित है ऐसे में युवा खेल कौशल की ओर ध्यान देने की फ़ुर्सत ही कहां ?


लगभग मृत प्राय हो चुकी भारतीय हॉकी की वह टीम जिसके प्रदर्शन से दुनिया घबराती थी उसे प्रोत्साहित करने का 'ज़ोखिम' उठाने के लिये कोई राज्य तैयार नहीं। जबकि हरियाणा में हॉकी के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण की पूरी सुविधा उपलब्ध है। उधर इस बार उड़ीसा के मुख्य मंत्री नवीन पटनायक ने भी भारतीय हॉकी टीम को प्रायोजित करने का बीड़ा उठाया इसका परिणाम सामने है कि भारतीय महिला हॉकी टीम को जहां हरियाणा ने 9 खिलाड़ी दिये वहीं पुरुष हॉकी टीम ने भी गत वर्षों की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया। हरियाणा के खिलाड़ियों की सफलता के पीछे उनके सांस्कारिक खान पान का भी योगदान है। यहाँ ग़रीब से ग़रीब किसान परिवार का व्यक्ति अपने घरों में दुधारू पशु पालने की कोशिश अवश्य करता है। व्यवसाय के लिये कम परिवार के खान पान के लिये अधिक। हरियाण-पंजाब में शहरों में भी दूध-घी-दही-लस्सी-मट्ठा आदि खाने पीने का ख़ूब चलन है। यही वजह है कि भारत में हरियाणा राज्य 'जय जवान' -'जय किसान' ही नहीं 'ओलम्पिक पदकों  का भी सिरताज' भी बना है। 


-निर्मल रानी-





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बजरंग पुनिया को मां ने खिलाया चूरमा, तिलक लगाकर किया स्वागत

सोनीपत : भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया सोमवार देर रात ओलंपिक टोक्यो से कांस्य पदक लेकर अपने घर पहुंचे। सोनीपत में उनकी मां ओम प्यारी ने अपने लाडले को तिलक लगाकर उसका स्वागत किया और देशी घी से बना चूरमा खिलायाए तो बेटे बजरंग ने अपनी मां के गले में पदक पहनाया। पहलवान ने कहा कि अब वह अगले मुकाबलों के लिए तैयारियां करेंगे।


सोनीपत में डीजे और ढोल की थाप पर थिरकते बच्चे, बूढे और जवान खुशियों की इस बेला में बजरंग के घर पर भारी संख्या में एकत्र थे। ओलंपिक खेलों से कुश्ती मुकाबलों में कांस्य पदक लेकर सोनीपत पहुंचे बजरंग पुनिया ने कजाकिस्तान के पहलवान को 8-0 से हराकर कुश्ती में यह पदक जीता है। बजरंग पूनिया रेसलिंग के लगभग हर बड़े इवेंट में मेडल जीतने वाले रेसलर हैं। हरियाणा के झज्जर जिले के गांव खुड्डन में उनका जन्म 26 फरवरी 1994 को हुआ। वर्ष 2015 से पहलवान का परिवार सोनीपत में इसलिए रहने लगा कि बजरंग सोनीपत में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के रीजनल सेंटर में प्रशिक्षण लेकर अच्छे से कुश्ती कर पाएं। बजरंग पुनिया बताते हैं कि अब वह आने वाले कुश्ती मुकाबलों के लिए तैयारियों में लगेंगे।


बजरंग के पिता बलवान सिंह को अपने बेटे के ओलंपिक में मेडल जीतने पर बेहद खुशी है और उन्हें विश्वास है कि उनका बेटा आने वाले समय में देश के लिए और भी अच्छा करके दिखाएगा। उन्हें भरोसा है कि बेटा आगामी ओलंपिक में अपने इस मेडल का रंग भी बदलेगा। सितंबर 2019 में ओलंपिक्स के लिए क्वॉलिफाई करने वाले बजरंग ने इसी साल मार्च में हुए मैटेओ पेल्लिकोन रैंकिंग सीरीज टूर्नामेंट में मंगोलिया के तुल्गा तुमुर ओचिर को हराकर वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप स्पॉट हासिल किया था।


बजरंग ने वर्ष 2013 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप और वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल्स जीते थे। फिर साल 2014 में बजरंग ने अपने मेडल्स का रंग बदला. इस बार उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप, तीनों में सिल्वर मेडल अपने नाम किए। उन्होंने 2017 की एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। वर्ष 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल्स जीते। इसी साल हुई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। जबकि अगले साल की वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनके नाम कांस्य पदक रहा।




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खेलों में बदलना होगा मेडलों का रंग


जापान के टोक्यो शहर में खेले गए ओलंपिक खेलों में भारत के नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। 13 वर्षों के अंतराल के बाद भारत ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत पाया है। इससे पूर्व 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भारत के अभिनव बिंद्रा ने 10 मीटर एयर राइफल की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। चोपड़ा के स्वर्ण पदक जीतने से पूरा देश खुशी मना रहा है। सभी जगह नीरज चोपड़ा के खेल की तारीफ हो रही है। चोपड़ा ने भाला फेंक प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अपने साथी प्रतियोगियों को मात दी। हालांकि नीरज ओलंपिक खेल में पहली बार भाग ले रहे थे, उसके बावजूद उन्होंने अपने पर जरा भी हताशा को हावी नहीं होने दिया और अपने बेहतर खेल का प्रदर्शन करते हुए विरोधियों को मात देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाकर भारत का मान बढ़ाया।


इस बार की ओलंपिक प्रतियोगिता में भारत से गये 127 खिलाड़ियों के दल ने एक स्वर्ण, दो रजत व चार कांस्य सहित कुल सात पदक जीते हैं, जो भारत का ओलंपिक खेलों में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। 1980 में मास्को ओलंपिक के बाद भारत ने 41 साल के अंतराल से पुरुष हॉकी प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता है। 1980 के ओलंपिक में भारत ने अंतिम बार हॉकी में स्वर्ण पदक जीता था, हालांकि उस समय दुनिया के कई देशों ने मास्को ओलंपिक का बहिष्कार किया था। इस कारण भारत को हॉकी में आसानी से स्वर्ण पदक मिला था।


ऐसा भी नहीं है कि 1980 में भारत को हॉकी में संयोगवश ही स्वर्ण पदक मिल गया था। एक जमाने में भारत दुनिया भर में हाकी का सिरमौर रहा है। उससे पूर्व भारत की हॉकी टीम ने सात बार ओलंपिक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। 1928 से 1956 तक तो भारतीय हॉकी टीम ने लगातार छह बार ओलंपिक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत कर डबल हैट्रिक लगायी थी। 1960 के रोम ओलंपिक में भारत ने रजत पदक जीता था। उसके बाद 1964 के टोक्यो ओलंपिक में भारत ने फिर से स्वर्ण पदक जीतकर हाकी के खेल में अपनी धाक जमाई थी। मगर उसके बाद भारत लगातार खेलों में पिछड़ता गया।


इस बार टोक्यो में भारत की पुरुष और महिला दोनों ही हॉकी टीम ने जबरदस्त खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मगर सेमीफाइनल में पहुंचकर महिला हॉकी टीम चौथे स्थान पर पिछड़ गई। वहीं भारतीय पुरुष हाकी टीम ने तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। हालांकि भारतीय हॉकी टीम ने जिस तरह से इस बार अपने खेल का प्रदर्शन किया था। उससे उनका लक्ष्य स्वर्ण पदक पर था, मगर अंतिम समय में वह अपनी प्रतिद्वंदी टीम से पिछड़कर कांस्य पदक ही जीत सके। कांस्य पदक जीतना भी भारतीय हॉकी टीम में एक नवजीवन का संचार करेगा।


लगातार हारने के कारण भारत के हॉकी खिलाड़ियों का मनोबल काफी कमजोर हो रहा था। इस कारण प्रतिभा संपन्न होने के बावजूद भी खेल के मैदान में अंतिम क्षणों में वह मायूस होकर मैच हार जाते थे, लेकिन इस बार कांस्य पदक जीतने से हॉकी खिलाड़ियों का मनोबल बहुत मजबूत हुआ है। आने वाले समय में वह और अधिक मेहनत कर अपनी बेहतर खेल प्रतिभा का परिचय देंगे।


भारत की आबादी करीबन 135 करोड़ लोगों की है, लेकिन ओलंपिक खेलों की पदक तालिका में भारत का स्थान 48 वां है। प्रथम स्थान पर 39 स्वर्ण सहित कुल 113 पदक जीतकर संयुक्त राज्य अमेरिका है। दूसरे स्थान पर 38 स्वर्ण सहित कुल 88 पदकों के साथ चीन है। तीसरे स्थान पर 27 स्वर्ण सहित कुल 58 पदकों के साथ जापान है। डेढ़ करोड़ की आबादी वाला क्यूबा 14 वें स्थान पर है। एक करोड़ से कम आबादी वाला देश हंगरी 15 वें स्थान पर है। 5 करोड़ की आबादी वाला अफ्रीकी देश कीनिया 19 वें स्थान पर है। मात्र 25 लाख की आबादी वाला जेमेका हम से ऊपर 21वें स्थान पर है। एक करोड़ की जनसंख्या वाला देश स्विटजरलैंड 24वें स्थान पर है। एक करोड़ से कम जनसंख्या वाला देश डेनमार्क 25 स्थान पर है। वहीं 55 लाख की आबादी वाला नार्वे तीसवें स्थान पर है। 30 लाख की आबादी वाला यूरोपियन देश स्लोवेनिया 31 वें स्थान पर है। 5 करोड़ की आबादी वाला अफ्रीकन देश युगांडा 36 वें स्थान पर है। हमसे बहुत छोटा मात्र 20 लाख की आबादी वाला कतर ही हम से ऊपर 40 वें स्थान पर है।


इस तरह से ऊपर वर्णित देशों को आबादी के हिसाब से देखें तो पदक तालिका में हम से ऊपर स्थान बनाने वाले कई देशों की आबादी तो हमारे देश के एक जिले के बराबर भी नहीं है। जबकि ओलंपिक खेल में पदक जीतने में वो हमसे कहीं आगे है। भारत में यह विडंबना ही है कि खेलों में भी राजनीति व्याप्त रहती है। इस कारण हमारे देश में अच्छे प्रतिभा वाले खिलाड़ी आगे नहीं आ पाते हैं। जिन खिलाड़ियों के पास राजनीतिक पहुंच, प्रभाव व पैसा होता है उनको आसानी से आगे बढ़ने का मौका मिल जाता है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में बहुत से ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की प्रतिभा दबकर रह जाती है। क्योंकि उनको आगे बढ़ाने वाला कोई नहीं मिलता है। इस बार ओलंपिक में हम एक स्वर्ण पदक दो रजत पदक व चार कांस्य पदक जीतकर ही खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। जबकि हमसे बहुत छोटे- छोटे देशों ने कई गुना अधिक पदक जीते हैं।


खेलों में जीतने पर खुशी मनाना अच्छी बात है। इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है व दूसरे खिलाड़ी भी अपनी खेल प्रतिभा दिखाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। मगर इसके साथ ही हमें हमारे खेलों का स्तर ऊंचा उठाने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिये। गांवों में ही खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्रारंभिक सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिये। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित खेल प्रशिक्षक लगाने होंगे। अच्छे खिलाड़ियों को तराशने के लिए सरकार को पूरा खर्चा उठाना होगा। इस बार पदक जीतने वाले खिलाड़ियों पर तो इनाम की बौछार होने लग जाती है, लेकिन पदक के पास पहुंच कर चूक जाने वाले खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित करना होगा। तभी भविष्य में भारत खेलों की दुनिया में अपनी छाप छोड़ पाएगा तथा भारत द्वारा जीते जाने वाले मेडलों की संख्या बढ़ेगी व रंग बदल कर सुनहरा हो पायेगा।


-रमेश सर्राफ धमोरा-






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मेडल जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों को Xiaomi देगा ये इनाम, कहा- 'सुपर हीरो के लिए...'

नई दिल्ली :  Xiaomi ने घोषणा की है कि वह उन सभी भारतीय एथलीटों को इनाम देगी, जिन्होंने हाल ही में संपन्न टोक्यो ओलंपिक 2020 में पदक जीता है. Xiaomi पदक विजेता भारतीय खिलाड़ियों को इनाम के तौर पर Mi 11 अल्ट्रा स्मार्टफोन देगा. Xiaomi India के एमडी मनु कुमार जैन ने ट्विटर के जरिए इस खबर की घोषणा की. बता दें, मीराबाई चानू ने सिल्वर, पीवी सिंधू ने ब्रॉन्ज, लवलीना ने ब्रॉन्ज, रवि कुमार दहिया ने सिल्वर, भारतीय हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज, बजरंग पुनिया ने ब्रॉन्ज, नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीता है. इन सभी भारतीय एथलीट्स को शाओमी Mi 11 अल्ट्रा स्मार्टफोन देगा.

टोक्यो ओलंपिक 2020 के दौरान, भारतीय प्रतिभागियों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे देश ने कुल सात पदक जीते, जो वर्तमान में 2012 के ओलंपिक में छह पदकों को पार करते हुए सबसे अधिक है. प्रदर्शन का नेतृत्व भाला फेंकने वाले नीरज चोपड़ा ने किया, जिन्होंने ओलंपिक खेलों के इतिहास में एथलेटिक्स में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीता. चोपड़ा के अलावा, मीराबाई चानू, रवि कुमार दहिया, लवलीना बोरगोहेन, पीवी सिंधु और बजरंग पुनिया अंतरराष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट इवेंट में पदक जीतने वाले अन्य एथलीट थे.

भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ियों के लिए Mi 11X

Xiaomi India के एमडी मनु कुमार जैन ने यह भी पुष्टि की कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम के प्रत्येक व्यक्ति को Mi 11X स्मार्टफोन मिलेगा, क्योंकि उन्होंने खेलों में कांस्य पदक जीता था. 

Xiaomi Mi 11 Ultra की कीमत

Xiaomi Mi 11 Ultra कंपनी का फ्लैगशिप स्मार्टफोन है, जिसकी कीमत एकमात्र 12GB रैम/256GB स्टोरेज वैरिएंट की कीमत 69,999 रुपये है. Mi 11X भारत में उपलब्ध Mi 11 सीरीज में बजट ऑफरिंग है. 6GB रैम / 128GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 29,999 रुपये और 8GB रैम / 128GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 31,999 रुपये है.



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महिला हॉकी टीम को किया गया सम्मानित

नई दिल्ली :  टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम भले ही पदक नहीं जीत पाई हो लेकिन 135 करोड़ देशवासियों का दिल जरूर जीत लिया। सम्मान समारोह में महिला हॉकी टीम को भी उतना ही सम्मान मिला जितना पदक विजेताओं को। समारोह के अंत में महिला टीम के साथ तस्वीर ली गई। इस दौरान केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर, खेल राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक और कानून मंत्री और पूर्व खेल मंत्री किरेन रिजिजू मौजूद थे।


ये हैं देश के पदकवीर


नीरज चोपड़ा – गोल्ड (भालाफेंक)


रवि दहिया – सिल्वर (रेसलिंग)


मीराबाई चनू – सिल्वर (वेटलिफ्टिंग)


पीवी सिंधू – ब्रॉन्ज (बैडमिंटन)


लवलीना बोरगोहेन – ब्रॉन्ज (बॉक्सिंग)


बजरंग पूनिया – ब्रॉन्ज (रेसलिंग)


पुरुष हॉकी टीम - ब्रॉन्ज

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सम्मान समारोह: नीरज बोले- ये मेरा नहीं, पूरे देश का मेडल है

नई दिल्ली :  खेलों का महाकुंभ’ टोक्यो ओलंपिक 2020 खत्म हो गया है और भारत का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की घर वापसी हो गई है। वहीं, आज अशोका होटल में पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उन्हें खेल मंत्री ने सम्मानित किया।


ये मेरा नहीं, पूरे देश का मेडल है- नीरज चोपड़ा


टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने वाले नीरज चोपड़ा को केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर, केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने सम्मानित किया। इस मौके नीरज चोपड़ा ने मंच पर आकर पहले अपना मेडल दिखाया और कहा कि उस दिन से मैं अपना मेडल जेब में रखकर घूम रहा हूं। जिस दिन से मेडल आया है ना खा पाया हूं, ना सो पाया हूं। समर्थन के लिए सभी को बहुत बहुत धन्यवाद। थ्रो पर नीरज ने कहा कि मुझे लगा कि ये मेरा पर्सनल बेस्ट थ्रो था, इसलिए ऐसा अहसास हुआ कि बेहतर किया हूं। बालों के सवाल पर नीरज ने कहा कि 10 साल की उम्र से बड़े बाल रख रहा हूं, लेकिन दो-तीन टूर्नामेंट में ये परेशान करने लगे, जिसके बाद बाल छोटे करा लिया। ये मेरा मैडल नहीं, पूरे देश का मैडल है।


भारत का नाम बढ़ाने वाले खिलाड़ियों की शाम है आजः खेल मंत्री


अशोका होटल में सम्मान समारोह चल रहा है। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि ये शाम ओलंपिक में भारत का नाम बढ़ाने वाले खिलाड़ियों की शाम है। मैं सभी पदक विजेताओं को 135 करोड़ लोगों की तरफ़ से बधाई देता हूं। नीरज चोपड़ा आपने मेडल ही नहीं दिल भी जीता है। हमारे खिलाड़ियों का अगले ओलंपिक में और बेहतर प्रदर्शन होगा। हम आपके के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, हर चीजें आपको बेहतर से बेहतर मुहैया कराएंगे।


पुरुष हॉकी टीम को किया गया सम्मानित


टोक्यो ओलंपिक में पुरुष हॉकी में भारत को कांस्य पदक मिला। इसके लिए पुरुष हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह को केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर, केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने सम्मानित किया।


खेल मंत्री ने लवलिना को सम्मानित किया


भारतीय मुक्केबाज लवलिना बोरगोहेन को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सम्मानित किया। लवलिना बोरगोहेन ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणित भी मौजूद थे।


खेल मंत्री ने बजरंग को किया सम्मानित


खेल मंत्री अनुराग ठाकुर, खेल राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक और कानून मंत्री और पूर्व खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने कांस्य पदक विजेता पहलवान बजरंग पुनिया को सम्मानित किया।

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नीरज चोपड़ा ने 12 साल के बाद ओलिंपिक में भारत को दिलाया दूसरा गोल्ड मेडल, 2008 की याद करा दी ताजा

नई दिल्ली : मन में साहस और दिल में देशभक्ति लिए जब नीरज फाइनल राउंड में भाला फेंकने के लिए दौड़ लगा रहे थे तभी लग गया था कि, ये युवा एथलीट कुछ खास करने वाला है। छह राउंड खत्म होने तक पूरे देशवासियों का दिल धक-धक करता रहा कि, क्या होगा-क्या होगा क्योंकि विरोधी कमजोर नहीं थे, लेकिन दूसरे राउंड में नीरज ने ऐसा भाला फेंका जिसकी दूरी का पीछा कोई भी अन्य खिलाड़ी नहीं कर पाया। नीरज ने दूसरे राउंड में 87.58 मीटर भाला फेंककर प्रतिद्वंदियों के लिए ऐसा टारगेट सेट कर दिया जो उनके लिए अभेद बन गया और इसके आधार पर ही नीरज ने देश के लिए बतौर एथलीट पहला गोल्ड मेडल जीत लिया। 

जैवलिन थ्रो में भारत के किसी भी खिलाड़ी ने ओलिंपिक में अब तक ये कमाल नहीं किया था, लेकिन नीरज ने दिखा दिया कि जज्बा हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। महज 23 साल की उम्र में उन्होंने जो कमाल किया वो देश को प्रेरित करने वाला और दुनिया में भारत के झंडे को बुलंद करने वाला साबित हुआ। नीरज चोपड़ा की उपलब्धि पर सारा देश गर्व कर रहा है। नीरज एथलीट के तौर पर देश के लिए ओलिंपिक में गोल्ड जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने। उन्होंने 12 साल के बाद देश को पीला तमगा दिलाकर साल 2008 की याद ताजा करा दी जब बीजिंग ओलिंपिक में अभिनव बिंद्रा ने पहली बार देश के लिए ओलिंपिक में किसी भी खेल में सोना जीता था। 

2008 बीजिंग ओलिंपिक में अभिनव बिंद्रा ने पहली बार भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता और देश को रास्ता दिखाया कि, मेहनत के दम पर कुछ भी किया जा सकता है। इसके बाद दो ओलिंपिक में भारत का कोई खिलाड़ी देश के लिए सोना नहीं जीत पाया, लेकिन इस बार नीरज चोपड़ा ने ये कर दिखाया। बिंद्रा ने 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में 2008 में गोल्ड मेडल जीता था।  

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गोल्ड जीतने पर देशभर से नीरज को मिल रही बधाई, पीएम मोदी बोले- टोक्यो में इतिहास रचा गया

नई दिल्ली  :  राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य लोगों ने शनिवार को भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा को टोक्यो ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के साथ इतिहास रचने के लिए बधाई दी। राष्ट्रपति ने एक ट्वीट में कहा कि नीरज चोपड़ा की उपलब्धि युवाओं को प्रेरित करेगी। तो वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नीरज चोपड़ा ने आज जो हासिल किया है वह हमेशा याद रखा जाएगा। 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा, 'नीरज चोपड़ा की अभूतपूर्व जीत! आपका जेवलिन गोल्ड ने बाधाओं को तोड़ते हुए इतिहास रच दिया है। आप अपने पहले ओलिंपिक में भारत को ट्रैक और फील्ड में पहला पदक दिलाया है। आपका करतब हमारे युवाओं को प्रेरणा देगा। भारत उत्साहित है! हार्दिक बधाई!'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ' टोक्यो में इतिहास रचा गया है! नीरज चोपड़ा ने आज जो हासिल किया है उसे हमेशा याद किया जाएगा। युवा नीरज ने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने उल्लेखनीय जुनून के साथ खेला और अद्वितीय धैर्य दिखाया। गोल्ड जीतने के लिए उन्हें बधाई।' उन्होंने नीरज की फोटो भी शेयर की है। 

भारत के उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडु ने ट्वीट किया, 'अद्भुत प्रदर्शन! टोक्यो ओलिंपिक की भाला फेंक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रचने वाले नीरज चोपड़ा को हार्दिक बधाई। आपने ट्रैक एंड फील्ड खेलों में पहला स्वर्ण पदक जीत कर, देश को गौरवान्वित किया है। पूरा देश आज आपकी सफलता पर गर्व कर रहा है। भावी सफलताओं के लिए शुभकामनाएं।'

गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट करके कहा, 'गौरवमयी व ऐतिहासिक क्षण।ओलिंपिक में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने के लिए नीरज चोपड़ा को बहुत-बहुत बधाई।'

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, 'ओलिंपिक में सूबेदार नीरज चोपड़ा की स्वर्णिम जीत भारतीय सेना के लिए गौरव की बात है। उन्होंने ओलिंपिक में एक सच्चे सैनिक की तरह प्रदर्शन किया। यह वास्तव में भारतीय सशस्त्र बलों सहित पूरे देश के लिए ऐतिहासिक और गर्व का क्षण है!उन्हें बहुत-बहुत बधाई! स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार प्रतिष्ठित ट्रैक और फील्ड पदक जीतने के लिए भारत के भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा को बधाई। ओलिंपिक में भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक अभूतपूर्व है। इतिहास रचने के लिए उन पर गर्व है!' 

खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने ट्वीट किया, 'भारत का गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा! भारत का ओलिंपिक इतिहास रचा गया!आपका शानदार थ्रो एक अरब चीयर्स का हकदार है! आपका नाम इतिहास की किताबों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा।'

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट किया, 'भारतीय खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश को पहला स्वर्ण पदक दिलवा कर तिरंगे का परचम पूरे विश्व में फहरा दिया है। इस उपलब्धि हेतु नीरज चोपड़ा को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। देश को आप की ऐतिहासिक सफलता पर गर्व है!

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, 'पुरुषों के भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर टोक्यो ओलिंपिक में इतिहास रचने के लिए नीरज चोपड़ा को हार्दिक बधाई। 1.3 अरब लोग इस गौरवशाली क्षण को लंबे समय तक संजो कर रखने वाले हैं।'

 


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रवि दहिया: दृढ़ इरादों ने बनाया ओलम्पिक विजेता

ओलम्पिक में रजत जीतने वाले दूसरे भारतीय पहलवान बने रवि


5 अगस्त का दिन टोक्यो के 'खेलों के महाकुंभ' में भारत के लिए ऐतिहासिक रहा। दरअसल इस दिन न केवल भारतीय हॉकी टीम ने जर्मनी को 5-4 से हराकर ओलम्पिक में भारत का 41 वर्षों का सूखा खत्म कर कांस्य पदक जीता, वहीं शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय पहलवान रवि कुमार दहिया रजत पदक जीतने में सफल रहे। हालांकि भारतीय पहलवानों दीपक पूनिया, विनेश फोगाट और अंशु मलिक को निराशा हाथ लगी लेकिन खेलों के इस महाकुंभ में अभी कुछ ऐसी स्पर्धाएं हैं, जिनमें भारत को अपने कुछ और खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद है।


वैसे रवि को ओलम्पिक के फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने की पूरी उम्मीद थी लेकिन 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग के फाइनल में 2018 और 2019 के विश्व चैम्पियनशिप रह चुके रूस ओलम्पिक समिति के पहलवान जावुर युगुऐव से 7-4 से हारने के बाद उनका यह सपना चकनाचूर हो गया। अभीतक कुश्ती में कोई भी भारतीय पहलवान स्वर्ण पदक जीतने में सफल नहीं हुआ है और इस बार रवि इसी उम्मीद के साथ टोक्यो गए थे। रजत जीतने के बाद उन्होंने कहा भी है कि वह गोल्ड मेडल की उम्मीद से टोक्यो आए थे और रजत से संतुष्ट नहीं हैं। वैसे ओलम्पिक में व्यक्तिगत स्पर्धा में आजतक केवल अभिनव बिंद्रा ही ऐसे खिलाड़ी हैं, जो स्वर्ण पदक जीत सके हैं। उन्होंने 2008 के बीजिंग ओलम्पिक में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भारत की झोली में इतनी बड़ी जीत डाली थी।


हालांकि ओलम्पिक के रेसलिंग मुकाबलों में रवि का रजत पदक भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ओलम्पिक खेलों के इतिहास में पदक जीतने वाले वे पांचवें पहलवान हैं और रेसलिंग में भारत का केवल छठा पदक है। पहलवान सुशील कुमार ने ओलम्पिक में लगातार दो बार पदक जीते थे। भारत को सबसे पहले 1952 में हेलसिंकी ओलम्पिक में पहलवान केडी जाधव ने कांस्य पदक दिलाया था। उसके बाद रेसलिंग में पदक के लिए 56 वर्षों का लंबा इंतजार करना पड़ा था। उस लंबे सूखे को 2008 में सुशील कुमार ने बीजिंग ओलम्पिक में कांस्य पदक जीतकर खत्म किया था। उसके बाद 2012 के लंदन ओलम्पिक में दो भारतीय पहलवानों ने जीत का परचम लहराया। सुशील कुमार रजत और योगेश्वर दत्त कांस्य पदक जीतने में सफल रहे। 2016 के रियो ओलम्पिक में साक्षी मलिक ने कांस्य पदक हासिल किया था। अगर टोक्यो ओलम्पिक की बात करें तो रवि से पहले भारोत्तोलन में मीराबाई चानू, बैडमिंटन में पीवी सिंधु, मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन और भारतीय हॉकी टीम भारत के लिए पदक जीत चुके हैं।


जहां तक 23 वर्षीय भारतीय पहलवान रवि कुमार दहिया के ओलम्पिक में प्रदर्शन की बात है, सुशील कुमार के बाद वह ओलम्पिक में रजत पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय पहलवान बन गए हैं। ओलम्पिक में रवि ने पहले दौर में कोलम्बिया के टिगरेरोस उरबानो ऑस्कर एडवर्डाे को 13-2 से हराकर शानदार शुरुआत की थी और 4 अगस्त को अपने ओलम्पिक अभियान की मजबूत शुरुआत करते हुए क्वार्टर फाइनल में बुल्गारिया के जॉर्डी वेलेंटिनोव वेंगेलोव को तकनीकी दक्षता के आधार पर 14-4 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। 4 अगस्त को रवि ने पुरुषों के 57 किलोग्राम भार वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में कजाकिस्तान के नूरीस्लाम सानायेव को विक्ट्री बाई फॉल के जरिये पटखनी देते हुए रजत पदक पक्का कर लिया था। सेमीफाइनल मुकाबले में जब रवि ने मैच के आखिरी मिनट में कजाक पहलवान को अपनी मजबूत भुजाओं में जकड़ लिया था, तब उसने रवि की पकड़ से छूटने के लिए खेल भावना के विपरीत उनकी बांह पर दांतों से काटना शुरू कर दिया था लेकिन रवि ने अपने दबंग इरादों का परिचय देते हुए अपनी मजबूत पकड़ ढ़ीली नहीं होने दी और उसे चित्त करते हुए मुकाबला अपने नाम किया था।


12 दिसम्बर 1997 को हरियाणा के सोनीपत जिले के नाहरी गांव में जन्मे रवि कुमार दहिया ने केवल छह वर्ष की आयु में गांव के हंसराज ब्रह्मचारी अखाड़े में कुश्ती शुरू कर दी थी। दरअसल यह गांव पहलवानों का गांव माना जाता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां का लगभग प्रत्येक बच्चा कुश्ती में अपने हाथ आजमाता है। कुछ समय बाद वह उत्तरी दिल्ली के उस छत्रसाल स्टेडियम में चले गए, जहां से दो ओलम्पिक पदक विजेता सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त निकले हैं। वहां 1982 के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता रहे सतपाल सिंह ने उन्हें दस वर्ष की आयु में ही ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी थी। रवि के पिता राकेश एक भूमिहीन किसान थे, जो बंटाई की जमीन पर खेती किया करते थे। उनकी दिली तमन्ना थी कि उनका बेटा पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन करे और अपनी इसी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उन्होंने आर्थिक संकट के बावजूद बेटे की ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं आने दी। वह प्रतिदिन बेटे तक फल ओर दूध पहुंचाने के लिए नाहरी गांव से 40 किलोमीटर दूर छत्रसाल स्टेडियम तक जाया करते थे।


बहरहाल, दो बार के एशियन चैम्पियन रह चुके रवि ने जिस अंदाज में कुछ दिग्गज पहलवानों को हराते हुए टोक्यो ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई किया था और कजाकिस्तान के नूर सुल्तान में अपनी पहली ही 2019 विश्व रेसलिंग चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने में सफल हुए थे, उसे देखते हुए उनसे ओलम्पिक में श्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीदें काफी बढ़ गई थी। टोक्यो ओलम्पिक में वह भले ही स्वर्ण पदक जीतने में सफल नहीं हुए लेकिन उन्होंने भारत को अपने दमदार प्रदर्शन से रजत जीतकर निराश नहीं किया। 2019 में कजाकिस्तान के नूर सुल्तान में हुई विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप के क्वार्टर फाइनल में जापान के युकी ताकाहाशी को 6-1 से मात देते हुए सेमीफाइनल में पहुंचकर रवि ने टोक्यो ओलम्पिक के लिए क्वालिफाई किया था और ईरान के रेजा अत्री नागाहरची को हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया था।


विश्व चैम्पियनशिप में 57 किलोग्राम वर्ग में कई शीर्ष पहलवानों को हराकर रवि ने साबित कर दिया था कि उनमें कितना दमखम है। वह एशियन चैम्पियनशिप में दो बार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। 2015 में उन्होंने 55 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में सल्वाडोर डी बाहिया में विश्व जूनियर कुश्ती चैम्पियनशिप में रजत पदक भी जीता था। 2017 में लगी चोट के बाद वह करीब एक साल तक कुश्ती से दूर रहे थे और उसके बाद 2018 में बुखारेस्ट में विश्व अंडर-23 कुश्ती चैम्पियनशिप में 57 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर धमाकेदार वापसी करने में सफल हुए थे। उस चैम्पियनशिप में वह भारत का एकमात्र पदक था। नई दिल्ली में 2020 की एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप और अलमाटी में 2021 की एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में रवि ने स्वर्ण पदक जीता।



-योगेश कुमार गोयल-

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)






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हरियाणा के खिलाड़ियों को मनोहर सौगात, ओलिंपिक में चौथे स्थान पर रहे खिलाड़ी को मिलेंगे 50 लाख

रोहतक : हरियाणा सरकार ओलिंपिक खिलाड़ियों पर मेहरबान है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रोहतक में ओलंपिक खिलाड़ियों के लिए एक और बड़ी घोषणा की है। हरियाणा सरकार अब ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी को भी पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार देगी। खेल नर्सरियां शुरू की जाएंगी।


सीएम मनोहर ने कहा कि टोक्यो ओलिंपिक में हरियाणा के सभी खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से प्रोत्साहन दिया जाएगा। हरियाणा के खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। टोक्यो ओलिंपिक में हिस्सा लेने वाले प्रत्येक खिलाड़ी को 15 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ओलिंपिक जाने से पहले ही खिलाड़ियों को 55 लाख रुपये एडवांस राशि दी जा चुकी है। 10 लाख रुपये टोक्यो से आने के बाद खिलाड़ियों को दिए जाएंगे।


मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पहले हरियाणा सरकार स्वर्ण पदक विजेताओं को 6 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेताओं को 4 करोड़ रुपये और कांस्य पदक विजेताओं को 2.5 करोड़ रुपये देती थी। लेकिन पहली बार चौथे स्थान पर रहने वाले प्रत्येक एथलीट/खिलाड़ियों को 50-50 लाख रुपये देने का फैसला किया गया है। खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए हमने नीति में बदलाव किया है।


राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवॉर्ड करने के सवाल पर सीएम ने कहा इससे खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि ध्यानचंद खेल रत्न अवॉर्ड राजनीति से प्रेरित नहीं है। खेल को प्रोत्साहन देने के लिए यह कदम अहम साबित होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेसियों की राजनीति से प्रेरित होकर इस तरह के नाम पर अवार्ड देने की नीति रही है।


सीएम मनोहर इसके बाद रोहतक पीजीआइ में भर्ती अपने भाई गुलशन से मिलने पहुंचे। गुलशन कई दिनों में आइसीयू में भर्ती हैं। उसकी हालत चिंताजनक है। चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली। इलाज कर रहे डाक्टरों ने कहा कि उनके स्वास्थ्य में सुधार है। उनका इलाज चल रहा है।


मुख्यमंत्री मनोहर लाल शुक्रवार को रोहतक रेस्ट हाउस पहुंचे। यहां पत्रकारों से वार्ता की। वह यहां टोक्यो ओलिंपिक्स में पहलवान बजरंग पूनिया का मैच देखने पहुंचे थे। लेकिन वे देरी से पहुंचे इस कारण मैच नहीं देख सके। इस मैच में बजरंग भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सके।


बता दें कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल हरियाणा के खिलाड़ियों पर काफी मेहरबान हैं। रवि दहिया को जहां चार करोड़, छूट पर प्लाट और क्लास-1 की नौकरी देने की घोषणा कर चुके हैं। इसी तरह हॉकी के दो खिलाड़ियों को ढाई-ढाई लाख और छूट पर प्लाट की घोषणा की जा चुकी है। ब्रांज मेडल के लिए ग्रेट ब्रिटेन को कड़ी टक्कर देने के बाद हारने वाली महिला हॉकी टीम में शामिल प्रदेश की नौ खिलाड़ियों को 50-50 लाख रुपये देने की घोषणा कर चुके हैं। शुक्रवार को रोहतक की सीमा बिसला की कुश्ती थी, लेकिन वह उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकी। अब प्रदेश के लिए पदक की उम्मीद पहलवान बजरंग पूनिया और जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा हैं। बजरंग पूनिया का मुख्यमंत्री लाइव मैच देखने रोहतक आ रहे हैं।






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