कैंसर संस्थान की निदेशक का व्हाट्सएप हैक

नोएडा : सेक्टर-39 स्थित राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईसीपीआर) की निदेशक डॉ. शालिनी सिंह का व्हाट्सएप अकाउंट हैक होने का मामला सामने आया है। उन्होंने मामले की सोशल मीडिया के जरिए इस बात की जानकारी दी है। साथ ही लोगों से अनुरोध किया है कि यदि उनके नंबर से किसी से भी पैसे या अन्य चीजों की मांग की जाती है तो वह विश्वास न करें।


डॉ. शालिनी ने जानकारी दी है कि कुछ दिन पहले उनके पास व्हाट्सएप पर छह अंकों के एक नंबर से कॉल आया और उन्होंने उनकी वूस्टर डोज के लिए एक तिथि बताई, जिसके बाद वह नंबर व्हाट्सएप से गायब हो गया। थोड़ी देर बाद उन्होंने पाया कि उनका व्हाट्सएप हैक हो गया और आरोपी उनके मोबाइल में सेव कंटेक्ट्स में जाकर लोगों से पैसों की मांग कर रहा है। इसकी कई शिकायत उनके पास पहुंची है। डॉ. शालिनी ने मामले में पुलिस से भी शिकायत की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि यदि किसी के पास उनके नंबर से कोई संदेश या पैसों की मांग की जाती है तो भूलकर भी उसपर भरोसा न करें।





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एनसीआर में साइबर ठगी की 50 वारदात करने वाले पांच गिरफ्तार

फरीदाबाद :  क्रेडिट कार्ड पर रिवार्ड प्वाइंट को कैश कराने का लुभावना आफर देकर लोगों के साथ ठगी करने वाले गिरोह के पांच बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित एनसीआर में साइबर अपराध की करीब 50 वारदात को अंजाम दे चुके हैं। पुलिस ने इनके खाते में पिछले एक साल में करीब 65 लाख रुपये का लेन-देन पाया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम विकास, रोहित, इमरान, मुजीब तथा अमानुल्लाह उर्फ गुड्डू हैं। आरोपित मुजीब उत्तर प्रदेश के बदायूं तथा बाकी आरोपित दिल्ली में रह रहे थे। 


आरोपित विकास तथा इसका एक साथी इन वारदात के मुख्य आरोपित हैं। विकास व इमरान पहले से तिहाड़ तथा सुमित मंडोली जेल में बंद थे, जिसमें से आरोपित विकास तथा इमरान को फरीदाबाद पुलिस द्वारा प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया। आरोपित जेल से ही साइबर ठगी की इन वारदात को अंजाम देते थे। रोहित तथा अमानुल्लाह जेल के बाहर से मोबाइल को जेल में फेंकते थे, जहां से आरोपित इमरान उसे विकास तक पहुंचाता था। विकास जेल से ही अपने साथियों के साथ मिलकर साइबर ठगी की वारदात करते थे। आरोपितों के खिलाफ साइबर थाना में षड्यंत्र रचने तथा धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है। आरोपितों ने फरीदाबाद के रहने वाले यशपाल के क्रेडिट कार्ड से करीब 95 हजार रुपये की धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम दिया था।


पुलिस उपायुक्त नीतीश अग्रवाल के अनुसार आरोपित शातिर किस्म के अपराधी हैं। आरोपित जस्ट डायल से इंडसइंड क्रेडिट कार्डधारकों का डाटा खरीदते थे। क्रेडिट कार्ड पर ट्रांजेक्शन करने से क्रेडिट कार्ड से कुछ रिवार्ड प्वाइंट मिलते हैं जिन्हें कैशबैक या कोई अन्य सामान खरीदने के लिए उपयोग में लिया जा सकता है। इसी का फायदा उठाकर आरोपित क्रेडिट कार्डधारकों को फर्जी लिक भेजते थे और उन्हें रिवार्ड प्वाइंट को कैश करवाने का लुभावना आफर देते थे। आरोपित विकास का एक साथी रोजाना एक लाख लोगों को बल्क में एसएमएस भेजता था। इंडसइंड बैंक के क्रेडिट कार्डधारकों को अपना निशाना बनाते थे, जिन्होंने बैंक से मिलती-जुलती वेबसाइट बनवा रखी थी। आरोपित क्रेडिट कार्डधारक को रिवार्ड प्वाइंट रीडिम करवाने के नाम पर एक लिक भेजते थे और उस लिक पर क्लिक करते ही इंडसइंड बैंक से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट खुल जाती थी। इसमे कार्ड धारकों को अपनी क्रेडिट कार्ड की सारी जानकारी फिलअप करनी होती थी। वेबसाइट से आरोपितों के पास क्रेडिट कार्ड की सारी डिटेल पहुंच जाती थी। इसके अलावा आरोपित हाउसिग डाट काम वेबसाइट का उपयोग करते थे, जिस पर आमजन अपना-अपने मकान का रेंट भर सकते हैं। आरोपित इस वेबसाइट पर कार्डधारक के नाम से अकाउंट बनाकर उसमें वालेट बनाते थे और उसमें पैसा डालने के लिए क्रेडिट कार्ड का उपयोग किया जाता था, जिसके लिए कार्डधारक की ईमेल आइडी पर एक ओटीपी प्राप्त होता था। आरोपियों के पास कार्ड धारक की ईमेल का पासवर्ड पहले से होता है जो उन्हे फर्जी वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त हुआ था। आरोपित इस ईमेल आइडी को खोलकर उसमें से ओटीपी ले लेते थे और ईमेल को डिलीट कर देते थे। ओटीपी डालते ही क्रेडिट कार्ड से पैसा वेबसाइट के वालेट में आ जाता था, जिसके पश्चात उस वालेट से पैसे को आसानी से किसी भी बैंक अकाउंट में भेजा जा सकता है। आरोपी हाउसिग डाट काम वेबसाइट में अपना बैंक अकाउंट जोड़ देते थे और वालेट से पैसा सीधा आरोपियों के बैंक अकाउंट में आ जाता था। वारदात में आरोपित मुजीब फर्जी आइडी पर सिम उपलब्ध करवाता था। आरोपित रोहित ने हाउसिग डाट काम वेबसाइट पर अपना अकाउंट जोड़ रखा था, जिसमें इनको पैसे प्राप्त होते थे। आरोपित विकास तथा उसका एक साथी इसमें साइबर मुख्य साइबर क्रिमिनल है जो वर्ष 2017 से साथ मिलकर कई साइबर अपराध को अंजाम दे चुके हैं। आरोपितों के कब्जे से 9100 रुपये, वारदात में प्रयोग दो मोबाइल फोन व सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। आरोपित विकास के खिलाफ एनसीआर में साइबर ठगी के 18 मुकदमे दर्ज हैं। इसमे नौ मुकदमे दिल्ली, सात गुरुग्राम तथा दो मुकदमे फरीदाबाद के शामिल हैं। आरोपित इमरान के खिलाफ भी हत्या का एक मुकदमा दिल्ली में दर्ज है। आरोपित सुमित को मंडौली जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर गिरफ्तार किया जाएगा। 

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केवाईसी के नाम पर खाते से 24 हजार उड़ाए

नोएडा : साइबर ठगों ने धोखाधड़ी करते हुए सिम कार्ड की केवाईसी कराने के नाम पर एक महिला के खाते से 23800 रुपये निकाल लिए। रुपए कटने का मैसेज आने पर पीड़िता को ठगी की जानकारी हुई। पीड़िता ने नोएडा साइबर सेल से शिकायत की है।


हरौला निवासी विमलेश ने पुलिस से शिकायत करते हुए बताया कि कुछ दिनों पहले उनके पास एक अनजान व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले युवक ने खुद को मोबाइल कंपनी का कर्मचारी बताया। उसने कहा कि केवाईसी न होने के कारण उनका मोबाइल सिम कार्ड बंद हो जाएगा। इसके बाद केवाईसी के नाम पर अरोपी ने एक लिंक भेजा। उन्होंने जब लिंक को खोला तो उनके खाते से 23800 रुपए निकल गए। रुपए कटने का मैसेज आने पर उन्हें ठगी का पता चला। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस जांच कर रही है।




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मेटा ने जासूसी करने वाली 7 कंपनियों को किया ब्लॉक, जारी किया अलर्ट

नई दिल्ली : अगर आप फेसबुक, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम यूजर्स हैं, तो आपको सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि मेटा की तरफ से जानकारी दी गई है कि भारत समेत दुनिया में करीब 7 ऐसी कंपनियों को ब्लॉक किया गया हैं, जो यूजर्स की ऑनलाइन गतिविधियों की ट्रैकिंग करती थी। इन जासूसी करने वाली कंपनियों में एक भारतीय कपनी भी शामिल है। यह कंपनियां 100 देशों में अपने नेताओं, चुनाव अधिकारियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और मशहूर हस्तियों को निशाना बना रही थीं। 

यह कंपनियां जासूसी का प्रोफेशन काम करती थी। मलतब क्लाइंट से पैसे लेकर टारगेटेड व्यक्ति की जासूसी करती थीं। इसीलिए इन्हें सर्विलेंस-फॉर-हायर वाली कंपनियां कहा जाता है। यह कंपनियां इंटरनेट पर लोगों की खुफिया जानकारी जुटाने, तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने पेश करने और उनके डिवाइस और अकाउंट में सेंधमारी कर सकती थीं। सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (पूर्व में फेसबुक) इसे लेकर 100 से ज्यादा देशों के करीब 50,000 लोगों को अलर्ट भेजा है। 

किन कंपनियों को किया गया ब्लॉक

  1. बेलट्रॉक्स - भारत
  2. साइट्रोक्स - उत्तर मैसेडोनिया
  3. कोबवेब्स टेक्नोलॉजीज
  4. कॉगनिट
  5. ब्लैक क्यूब एवं ब्लूहॉक सीआई - इजराइल
  6. अज्ञात कंपनी - चीन

मेटा के मुताबिक जासूसी करने वाली कंपनियो की पहचान करीब एक माह की जांच के बाद की गई। साल 2019 में वॉट्सऐप की तरफ से इजराइली टेक्लनोलॉजी फर्म NSO Group के खिलाफ मुकदमा किया। जिसकी तरफ से एक सॉफ्टवेयर विकसित किया गया था। जिसे पेगासस के नाम से जाना जाता था। यह सॉफ्टवेयर पत्रकारों, ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट की जासूसी करने का काम करता था।

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ओएलएक्स पर फर्नीचर खरीदने के बहाने 21 हजार की ठगी

 

नोएडा : साइबर ठग ने ओएलएक्स पर फर्नीचर खरीदने के बहाने महिला के बैंक खाते से 21 हजार रुपये निकाल लिए। आरोपी ने फोन पे पर लिंक भेजकर वारदात को अंजाम दिया। इस संबंध में महिला ने एक्सप्रेसवे थाने में केस दर्ज कराया है।

पुलिस को दी शिकायत में नसरीन ने बताया कि वह परिवार के साथ छपरौली गावं में रहती हैं। पिछले सात साल से उनका पति विकलांग है। वह सिलाई करके परिवार का गुजारा करती हैं। उनको घर का कुछ फर्नीचर बेचना था। इस पर उन्होंने अपने बेटे से जुलाई में ओएलएक्स पर विज्ञापन अपलोड कराया। इसके कुछ दिन बाद एक व्यक्ति ने मोबाइल पर कॉल करके महिला के बेटे से बात की। वह फर्नीचर खरीदने के लिए राजी हो गया। आरोपी ने कहा कि वह फोन पे के जरिए भुगतान करेगा। इसके बाद आरोपी ने महिला के बेटे के मोबाइल पर लिंक भेजा। जैसे ही लिंक पर क्लिक किया तो महिला के फोन पे खाते से 21 हजार रुपये निकल गए। महिला ने बताया कि किसी सायमा मोहम्मद युनूस नाम की महिला के खाते में रुपये ट्रांसफर हुए हैं। महिला की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।







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ठग ने दोस्त बन खाते से रुपये निकाले

नोएडा : ठग ने महिला के मोबाइल पर कॉल करके खुद को उसके पति का दोस्त बताकर फोन पे और डेबिट कार्ड की डिटेल लेकर 90 हजार रुपये की ठगी कर ली। इस संबंध में पीड़ित ने थाना एक्सप्रेसवे में आईटी एक्ट में केस दर्ज कराया है।

पुलिस को दी शिकायत में सेक्टर-128 सुल्तानपुर गांव निवासी आशीष उदनिया ने बताया कि 29 नवंबर को उनकी पत्नी के मोबाइल पर एक नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को उनका दोस्त बताया। उसने कहा कि उसे किसी के पास फोन पे से रुपये भेजने है, लेकिन भुगतान नहीं हो रहा है। वह उनके फोन पे में रुपये ट्रांसफर कर रहा है। फिर वह दूसरी जगह रुपये ट्रांसफर कर देंगी। इस पर आरोपी ने उनके पास पांच रुपये भेजे और चेक करने के लिए एक लिंक भेज दिया। जैसे ही महिला ने लिंक पर क्लिक किया तो उनके खाते से रुपये निकलने शुरू हो गए। इसी बीच आरोपी ने महिला से उनके डेबिट कार्ड की भी डिटेल ले ली। आरोपी ने महिला के खाते से कई बार में 90 हजार रुपये निकाल लिए। इसके बारे में महिला ने अपने पति को जानकारी दी। फिर उन्होंने संबंधित बैंक और पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।



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ऑनलाइन बीयर खरीदना भारी पड़ा, ठग ने 84 हजार उड़ाए

नोएडा : सेक्टर-50 निवासी व्यक्ति को इंटरनेट से मोबाइल नंबर लेकर बीयर के 10 कैन ऑनलाइन मंगवाना भारी पड़ गया। ठग ने भुगतान लेने के बहाने उनके खाते से 84 हजार रुपये निकाल लिए। मोबाइल पर मैसेज आने के बाद उनको ठगी का पता चला। उन्होंने इस संबंध में सेक्टर-49 थाने में केस दर्ज कराया है।


पुलिस को दी शिकायत में सेक्टर-50 स्थित महागुन मिस्ट्रो सोसाइटी निवासी विवेक अनेजा ने बताया कि 22 जून 2020 को उनके घर पर कुछ मेहमान आने वाले थे। इस वजह से वह घर से बाहर जाने की स्थिति में नहीं थे। इस पर उन्होंने इंटरनेट पर बियर सप्लाई करने वाले वेंडर का नंबर खोजा। यहां से एक वेंडर का नंबर लेकर उन्होंने 10 बीयर कैन खरीदने की बात कही। आरोपी ने उनसे कहा कि एक कैन 130 रुपये का है। साथ ही, उसने पेटीएम के जरिए भुगतान करने के लिए कहा। उसने विवेक के मोबाइल पर एक क्यूआर कोड भेजा। जैसे ही विवेक ने क्यूआर कोड को स्कैन किया तो उनके खाते से कई बारी में 84 हजार 840 रुपये निकल गए। उन्होंने आरोपी के मोबाइल पर कॉल करके रुपये वापस देने की बात कही। आरोपी ने कहा कि वह कुछ ही देर में सारे रुपये वापस कर देगा। उसने फिर से पीड़ित को एक क्यूआर कोड भेजा और उसे स्कैन करने के लिए कहा। इस बार पीड़ित ने क्यूआर कोड स्कैन नहीं किया। उन्होंने आरोपी के मोबाइल पर दोबारा कॉल की तो उसका नंबर बंद था। फिर पीड़ित ने अज्ञात के खिलाफ सेक्टर-49 थाने में शिकायत दी। साथ ही, पेटीएम कार्यालय में भी शिकायत दर्ज की। पुलिस की जांच के बाद केस दर्ज कर मामले को साइबर सेल में ट्रांसफर किया गया है। साइबर सेल ने अपने स्तर पर फर्जीवाड़े की जांच शुरू कर दी है।

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कर्नाटक में देश का सबसे बड़ा बिटकॉइन घोटाला, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी से हो जांच : रणदीप सुरजेवाला

नई दिल्ली :  कांग्रेस ने कर्नाटक में एक कथित हैकर की गिरफ्तारी से जुड़े मामले को लेकर शनिवार को आरोप लगाया कि देश का सबसे बड़ा बिटकॉइन घोटाला हुआ है और राज्य की बीजेपी सरकार इस पर पर्दा डाल रही है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ‘चुप्पी’ पर भी सवाल किया और कहा कि इस मामले की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाए। उनके आरोप पर फिलहाल भाजपा या कर्नाटक सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।


करीब एक साल पहले बेंगलुरु में कथित हैकर श्रीकृष्णा उर्फ श्रीकी को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से करोड़ों रुपये के बिटकॉइन जब्त किए गए हैं। श्रीकृष्णा पर सरकारी पोर्टलों की हैकिंग करने, ‘डार्कनेट’ के जरिए मादक पदार्थ मंगाने और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से उसका भुगतान करने का भी आराप है।



कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘यह हिंदुस्तान का सबसे बड़ा बिटकॉइन घोटाला है। इसके तार 14-15 मुल्कों से जुड़े हैं। इस मामले में हर चीज पर पर्दा डालने के षड्यंत्रकारी प्रयास किए गए। एनआईए और दूसरी एजेंसियों को अंधेरे में रखा गया। कर्नाटक की भाजपा सरकार इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।’


सुरजेवाला ने दावा किया, ‘इस कथित हैकर ने मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दिया। उसने खुद माना कि उसने 8 बार हैकिंग की है और यह स्वीकार किया है कि उसने 5000 बिटकॉइन चुराए, बहुत सारी जानकारी उसने नहीं दी है।’


उन्होंने कुछ दस्तावेज जारी करते हुए दावा किया, ‘दो मौकों पर एक दिसंबर, 2020 और 14 अप्रैल, 2021 को बिटकॉइन ट्रांसफर किए गए। इस अवधि में कथित हैकर श्रीकृष्णा बेंगलुरू पुलिस की हिरासत में था। इस पूरे मामले में कर्नाटक की सत्ता में मौजूद लोगों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की चुप्पी पर सवाल खड़े होते हैं।’


सुरजेवाला के मुताबिक, मुख्यमंत्री बसवराव बोम्मई ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और खुद कहा है कि उन्होंने इस बैठक के दौरान बिटकॉइन घोटाले पर चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘हम प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और जेपी नड्डा से पूछना चाहते हैं कि बिटकॉइन घोटाले के पीछे कौन लोग हैं?’


कांग्रेस नेता ने सवाल किया, ‘इंटरपोल को सूचित क्यों नहीं किया गया? कर्नाटक की भाजपा सरकार नवंबर, 2020 में कथित हैकर की गिरफ्तारी होने के बाद पांच महीने चुप क्यों रही? मुख्यमंत्री की भूमिका और जिम्मेदारी क्या है क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम के समय वह राज्य के गृह मंत्री थे? एनआईए, ईडी और दूसरी एजेंसियों तथा रिजर्व बैंक को सूचित क्यों नहीं किया गया?’


उन्होंने कहा, ‘इसकी जांच भाजपा सरकार नहीं कर सकती। यह एक अंतरराष्ट्रीय बिटकॉइन घोटाला है। इसकी जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी गठित की जाए। इंटरपोटल, दूसरी संबंधित एजेंसियों और रिजर्व बैंक के प्रतिनिधियों को भी इस जांच में शामिल किया जाए।’




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छात्राओं व शिक्षिकाओं को तंग करने व फर्जी फोटो ऑनलाइन अपलोड करने के मामले में छात्र गिरफ्तार

नयी दिल्ली : दिल्ली के एक प्रतिष्ठित स्कूल की छात्राओं और शिक्षिकाओं का पीछा करने और उनकी फर्जी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने के आरोप में बिहार से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के छात्र को गिरफ्तार किया गया है।


पटना निवासी महावीर (19) आईआईटी-खगड़कपुर से बीटेक कर रहा है। पुलिस के मुताबिक, उसने उत्तरी दिल्ली के एक प्रतिष्ठित स्कूल की 50 से अधिक छात्राओं और शिक्षिकाओं को परेशान किया है।


उन्होंने बताया कि महावीर फर्जी कॉलर आईडी का इस्तेमाल करता था और पीड़िताओं से ‘विर्जुअल नंबर’ से व्हाट्सऐप पर संपर्क करता था। अपनी पहचान छुपाने के लिए वह आवाज़ बदलने वाली ऐप का भी इस्तेमाल करता था।


पुलिस ने बताया कि वह पीड़िताओं के नाम से इंस्टाग्राम पर फर्जी प्रोफाइल बनाता था और उनपर छात्राओं की छेड़छाड़ की गई तस्वीरों को अपलोड करता था।


‘साइबर स्टॉकिंग’ (इंटरनेट पर पीछा करने) को लेकर बुधवार को स्कूल प्रशासन से शिकायत मिलने के बाद मामला सामने आया।


शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने सोशल मीडिया पर नाबालिग लड़कियों का पीछा किया और उन्हें वाट्सएप पर मैसेज भेजे। उसने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय नंबरों से शिक्षिकाओं को फोन किया और उन्हें परेशान किया।


शिकायत में कहा गया है कि आईआईटी का छात्र उन व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल हो गया जो ऑनलाइन कक्षाओं के लिए बनाए गए हैं।


उसमें कहा गया है कि कई छात्राओं की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उन्हें सोशल मीडिया पर डाला गया है। उत्तरी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सागर सिंह कालसी ने बताया कि सिविल लाइंस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 354-डी (पीछा करने) के तहत मामला दर्ज किया गया था और जिले की साइबर प्रकोष्ठ इकाई की मदद ली गई और बाद में मामले में पोक्सो अधिनियम और आईटी अधिनियम की संबंधित धाराएं प्राथमिकी में शामिल की गईं।


पुलिस ने जांच के तहत स्कूली छात्राओं, उनके अभिभावकों और शिक्षिकों से पूछताछ की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने 33 ‘व्हाट्सऐप विर्चुअल नंबरों’, पांच इंस्टाग्राम प्रोफाइल और फर्जी कॉलर आईडी का इस्तेमाल करके की गई कई कॉल की पहचान कर ली।


डीसीपी ने बताया कि इसके बाद आरोपी की पहचान महावीर के तौर पर हुई और उसके बिहार के पटना में होने का पता चला जहां से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 






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युवती की फोटो से छेड़छाड़ कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोपी युवकों के खिलाफ मामला दर्ज

शाहजहांपुर (उप्र) : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के एक गांव में रहने वाले दो युवकों ने कथित रूप से एक युवती की फोटो से छेड़छाड़ कर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि युवती की शिकायत पर आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है।


पुलिस अधीक्षक (एसपी), नगर संजय कुमार ने शनिवार को बताया कि थाना सदर बाजार अंतर्गत एक गांव में रहने वाली 22 वर्षीय युवती ने शिकायत की कि गांव के ही दबंग युवकों ने उसकी फोटो खींच ली। आरोपियों ने फोटो से छेड़छाड़ कर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया और पीड़िता को ब्लैकमेल कर वे कई बार रकम ऐंठ चुके हैं।


अधिकारी ने दर्ज रिपोर्ट के हवाले से बताया कि युवती को आरोपियों अवधेश कुमार तथा सर्वजीत ने धमकी दी कि अगर उसकी बात नहीं मानी तो वे उसकी आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देंगे। पीड़िता ने पुलिस कार्यालय में पत्रकारों को बताया कि गांव के ही इन दबंग युवकों के चलते उसने परास्नातक के द्वितीय वर्ष में प्रवेश नहीं लिया। वह छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने जाती थी, लेकिन आरोपियों के डर से उसने वह भी छोड़ दिया है तथा अब वह अपना घर छोड़कर रिश्तेदार के यहां रह रही है।


पुलिस ने आरोपी अवधेश कुमार तथा सर्वजीत के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी फरार हैं जिनकी तलाश की जा रही है।



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