पेगासस जासूसी मामले पर 27 अक्टूबर को फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट पेगासस जासूसी मामले पर 27 अक्टूबर को फैसला सुनाएगा। चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच फैसला सुनाएगी। सुनवाई के दौरान केंद्र ने विशेषज्ञों की एक निष्पक्ष कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया था, जो कोर्ट की निगरानी में काम करेगी। कोर्ट ने संकेत दिया था कि वह अपनी तरफ से कमेटी का गठन करेगा।


कोर्ट ने 13 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान केंद्र ने निष्पक्ष कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया था, जो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम करेगी। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था याचिकाकर्ता चाहते हैं सरकार लिख कर दे कि वह सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती है या नहीं। हमारा मानना है कि हलफनामा दाखिल कर इस पर बहस नहीं कर सकते। आईटी एक्ट की धारा 69 सुरक्षा के लिहाज से सरकार को निगरानी की शक्ति देती है। हम निष्पक्ष कमेटी बनाएंगे। तब चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा था कि आप कह रहे हैं कि इस पर याचिका दायर नहीं हो सकती है। तब मेहता ने कहा था कि याचिका हो सकती है, पर सार्वजनिक चर्चा नहीं। हम देश के दुश्मनों तक ऐसी जानकारी जाने नहीं दे सकते हैं। तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि हमने कहा था कि संवेदनशील जानकारी हलफनामे में न लिखी जाए। बस यही पूछा था कि क्या जासूसी हुई, क्या सरकार की अनुमति से हुआ।


सुनवाई के दौरान वकील श्याम दीवान ने कहा था कि आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ संदीप शुक्ला के हलफनामा का उदाहरण देते हुए बताया था कि जिसकी जासूसी हुई, उसे पता ही नहीं चल पाता। दीवान ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ आनंद वी ने भी हलफनामा दाखिल किया है। बताया है कि इससे प्रभावित व्यक्ति के फोन में दूसरा सॉफ्टवेयर भी डाला जा सकता है। पत्रकार परांजय गुहा के वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा था कि सिविल प्रोसीजर कोड कहता है कि प्रतिवादी अगर किसी आरोप से इनकार करे तो वह स्पष्ट हो। सरकार आरोप को बेबुनियाद बता रही है, फिर कमेटी बनाने का भी प्रस्ताव दे रही है। द्विवेदी ने कहा था कि इसका इस्तेमाल सरकार ही कर सकती है। अभिव्यक्ति को प्रभावित किया जा रहा है।


कोर्ट ने 18 अगस्त को केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके साफ किया था कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के हिसाब से संवेदनशील किसी भी बात के लिए सरकार को बाध्य नहीं कर रहा। कोर्ट ने कहा था कि हम नोटिस बिफोर एडमिशन जारी कर रहे हैं, कमेटी के गठन पर बाद में फैसला लेंगे। कोर्ट ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से पूछा था कि क्या आप और कोई हलफनामा दाखिल नहीं करना चाहते। तब मेहता ने कहा था कि भारत सरकार कोर्ट के सामने है। याचिकाकर्ता चाहते हैं कि सरकार यह सब बताए कि वह कौन सा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करती है, कौन सा नहीं। राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में यह सब हलफनामे के रूप में नहीं बताया जा सकता है। सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा था कि सरकार को शपथ लेकर बताना था कि क्या उसने कभी भी पेगासस का इस्तेमाल किया। इस बिंदु पर कोई साफ बात नहीं कही है। सिर्फ आरोपों का खंडन कर दिया है।


सुप्रीम कोर्ट में पेगासस की जांच की मांग करते हुए पांच याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिका दायर करने वालों में वकील मनोहर लाल शर्मा, सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास, वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार, परांजय गुहा ठाकुरता समेत पांच पत्रकार और एडिटर्स गिल्ड की याचिका शामिल है।



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बच्चों की वैक्सीन की कीमत पर चर्चा - मनसुख मंडाविया

नई दिल्ली : देश में बच्चों की वैक्सीन जायकोव डी की कीमत पर जल्दी ही फैसला लिया जा सकता है। मंगलवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि बच्चों की वैक्सीन जायकोव डी की कीमत के संदर्भ में चर्चा की जा रही है। जायकोव डी का उत्पादन तेजी से चल रहा है, कीमतें तय होने के बाद इसे भी टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जायकोव-डी देश में स्वीकृत छठी वैक्सीन है और दूसरी स्वदेशी वैक्सीन है। यह आत्मनिर्भर भारत एवं मैक इन इंडिया के विजन को पूरा करेगी।


जायकोव डी दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन


जायकोव-डी की सबसे खास बात यह है कि यह दुनिया की पहली डीएनए प्लाजमिड वैक्सीन होगी। देश में लग रही कोरोना की बाकी वैक्सीन से अलग जायकोव-डी तीन डोज में दी जाएगी। खास बात यह है कि जायकोव-डी बगैर सुई के दी जाएगी। यह इंजेक्टर के जरिये दी जाएगी, जिससे दर्द न के बराबर होगा। यह टीका 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को दी जानी है। यह 12-18 साल के वायु वर्ग वालों के साथ बड़ों को भी लग सकेगी। देश में अभी सिर्फ 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का ही टीकाकरण हो रहा है। 




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सेल्वागनबेथी, सुष्मिता देव ने राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली

नई दिल्ली : राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को नवनिर्वाचित सदस्यों एस सेल्वागनबेथी और सुष्मिता देव को उच्च सदन की सदस्यता की शपथ दिलायी।


सेल्वागनबेथी पुडुचेरी से जबकि सुष्मिता पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुई हैं। सेल्वागनबेथी ने तमिल में और सुष्मिता ने बांग्ला में शपथ ग्रहण की।


सदस्यों द्वारा लगातार विभिन्न भारतीय भाषाओं में शपथ लेने और सदन में होने वाली चर्चा में भाग लेने का उल्लेख करते हुए नायडू ने कहा, ''यह राज्यसभा की भावना के अनुकूल है।''


उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वह अपनी अपनी भाषाओं का इस्तेमाल करें और 22 निर्धारित भाषाओं में अनुवाद की सुविधा का लाभ उठाएं।


शपथ ग्रहण समारोह में संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, राज्यसभा के महासचिव पी पी के रामाचार्युलु और सचिवालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।




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एनसीबी की मुंबई क्षेत्रीय इकाई के निदेशक समीर वानखेड़े एजेंसी के दिल्ली स्थित मुख्यालय पहुंचे

नई दिल्ली : स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) की मुंबई क्षेत्रीय इकाई के निदेशक समीर वानखेड़े मंगलवार को एजेंसी के यहां स्थित मुख्यालय पहुंचे।


वानखेड़े, क्रूज़ जहाज से मादक पदार्थ जब्त किए जाने के मामले की जांच की अगुवाई कर रहे हैं, जिसमें अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया गया है।


वानखेड़े आरके पुरम स्थित एजेंसी के मुख्यालय में पीछे के द्वार से दाखिल हुए, जहां वह वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकत कर सकते हैं। वह सोमवार रात इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे थे।


एनसीबी मुख्यालय के बाहर वानखेड़े का समर्थन करते हुए कुछ लोग हाथ में तख्तियां लिए नजर आए।


वानखेड़े ऐसे समय दिल्ली पहुंचे हैं, जब स्वापक औषधि नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने क्रूज़ जहाज से मादक पदार्थ बरामदगी मामले में आरोपी आर्यन खान को छोड़ने के लिए एनसीबी की मुंबई क्षेत्रीय इकाई के निदेशक समीर वानखेड़े और कुछ अधिकारियों द्वारा 25 करोड़ रुपये मांगने संबंधी एक गवाह के दावे पर सतर्कता जांच के आदेश दिए है।


वानखेड़े ने यहां इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के बाहर पत्रकारों से कहा था कि उन्हें एजेंसी ने तलब नहीं किया है बल्कि कुछ काम से यहां आए हैं और उन्होंने मादक पदार्थ मामले में निष्पक्ष जांच की है।


अधिकारी ने रविवार को मुंबई पुलिस आयुक्त हेमंत नागरले को पत्र लिख कर उनके खिलाफ कुछ अज्ञात लोगों द्वारा संभावित कानूनी कार्रवाई की योजना बनाये जाने से संरक्षण की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि वे लोग उन्हें फंसाना चाहते हैं।


वानखड़े को वसूली संबंधी स्वतंत्र गवाह प्रभाकर सैल द्वारा किये गये सनसनीखेज दावे पर एक हलफनामे के सिलसिले में कोई राहत नहीं मिल पाई। एक विशेष अदालत ने कहा है कि वह दस्तावेजों को संज्ञान में लेने से अदालतों को रोकने का आदेश जारी नहीं कर सकती।






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पाकिस्तानी साजिश का पर्दाफाश आवश्यक

कश्मीर घाटी में आतंकवादियों द्वारा ताबड़तोड़ हत्याएं कर जिस तरीके से आतंक का माहौल पैदा किया जा रहा है, बेहद शर्मनाक है। हाल ही में जो यहां हत्याएं की गई हैं, उसमें प्रवासी मजदूरों अथवा अन्य प्रदेश से आए लोगों को टारगेट किया गया है। आतंकवादियों का इसके पीछे मुख्य उद्देश्य बाहरी लोगों में खौफ पैदा करना और विकास की धारा को बेपटरी करना है।


निस्संदेह, यह पाकिस्तान की बौखलाहट का नतीजा है। चूंकि जम्मू-कश्मीर में धारा 370 समाप्त करने के बाद जिस तरीके वहां अमन चैन बहाल हो रहा है, वह पाकिस्तान को रास नहीं आ रहा। हत्याओं के पीछे लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट-जम्मू कश्मीर जैसे आतंकी संगठनों का हाथ रहा है। स्पष्ट तौर पर इनको पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है।


जैसा कि विदित है कि 5 अगस्त, 2019 जम्मू-कश्मीर के लिए ऐतिहासिक दिन सिद्ध हुआ। इसी दिन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और धारा 35-ए को समाप्त कर दिया गया था। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर को जो वर्ष 1950 में भारतीय संविधान के अंतर्गत विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था, उसका अंत हो गया और यह एक देश, एक विधान और एक संविधान के दायरे में आ गया था। उसके पश्चात भारत सरकार ने स्थानीय लोगों को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए विकास संबंधी कार्यों की रणनीति बनाई थी।


लेकिन पाकिस्तान को भारत का यह निर्णय शुरू से ही नहीं पच रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ जमकर दुष्प्रचार किया था। उन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा और वहां नरसंहार शुरू हो जाएगा। लेकिन जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद सुरक्षा बलों ने जिस तरीके से आतंकियों का सफाया और दिशा विहीन हुए लोगों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए अभियान चलाया, वह काबिले तारीफ है। लेकिन पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में शांति की बहाली बिलकुल नहीं चाहता। यही कारण है कि उसने वहां अशांति फैलाने की रणनीति बदल दी है। अब उसने प्रवासी मजदूरों और अन्य प्रदेशों के प्रवासियों को टारगेट करना शुरू कर दिया है। अनेक प्रवासी मजदूर डर कर यहां से पलायन कर रहे हैं।


गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में चल रही अनेक विकास परियोजनाओं में 90 फीसदी से अधिक प्रवासी मजदूर निर्माण कार्यों में लगे हुए हैं। अकेले कश्मीर घाटी पांच लाख प्रवासी मजदूर कार्यरत हैं। जम्मू-कश्मीर में विभिन्न राज्यों से तीन-से चार लाख मजदूर प्रत्येक वर्ष काम के लिए घाटी जाते हैं। उनमें से अधिकांश सर्दियों की शुरुआत से पहले चले जाते हैं, जबकि कुछ साल भर वहीं रहकर काम करते हैं। उनमें बिहार और उत्तर प्रदेश से आए मजदूरों की संख्या सर्वाधिक होती है।


पाकिस्तान की बौखलाहट का एक प्रमुख कारण यह है कि जम्मू कश्मीर को जो पहले विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था, समाप्त हो चुका है। पहले वहां लोगों के पास दोहरी नागरिकता-जम्मू कश्मीर और भारत की थी, लेकिन अब देश के बाकी लोगों की तरह वहां भी एक ही नागरिकता है। इसके अलावा पहले यह प्रावधान था कि जम्मू कश्मीर की कोई युवती भारत के किसी राज्य के युवक से शादी करती है तो उसका उसके परिवार की संपत्ति में अधिकार खत्म हो जाता था और उसके बच्चों की भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाती थी, पर अब ऐसा नहीं है।


यही नहीं, जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा था, लेकिन अब तिरंगा ही पूरे जम्मू-कश्मीर का भी राष्ट्रीय ध्वज है। पहले जम्मू-कश्मीर में न अनुच्छेद 356 लागू था यानी वहां सरकार भंग होने पर राष्ट्रपति शासन नहीं लग सकता था और न ही वह अनुच्छेद 360 के दायरे में आता था, जिसके तहत राष्ट्रपति आर्थिक आपातकाल लागू करते हैं। लेकिन अब यहां पर अब भारत का संविधान पूरी तरह से लागू है।


दिलचस्प बात यह है कि पहले दूसरे राज्य के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते थे, लेकिन अब ये कानून नहीं है। अब यहां पर आरटीआई कानून लागू है और जहां पहले जम्मू-कश्मीर में सरकार का कार्यकाल 6 साल का होता था, अब वहां भी 5 साल के बाद चुनाव कराने का प्रावधान है। इसके अलावा पहले लद्दाख जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था, लेकिन अब लद्दाख अलग से केंद्र शासित प्रदेश है ।


यह सब ऐसे बदलाव हैं जिनको पाकिस्तान और उसके द्वारा समर्थित आतंकी संगठन पचा नहीं पा रहे हैं। सुरक्षा बलों की अत्यंत सख्ती के चलते उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए प्रवासी मजदूरों अथवा बाहरी प्रदेशों से आए निर्दोष लोगों का नरसंहार कर उनके अंदर खौफ पैदा करने की घिनौनी साजिश चल रही है। पाकिस्तान का उद्देश्य है कि जम्मू-कश्मीर एक बार पुन: अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन जाए। ऐसे में हर राजनैतिक दल और समाज के हर समुदाय को अपने निहितार्थों को त्यागकर देश और समाज हित में पाकिस्तान और आतंकियों के दुष्चक्र का पर्दाफाश करना चाहिए। इसके लिए न केवल हर नागरिक में सजगता जरूरी है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अपना यथोचित योगदान कर पाकिस्तान और आतंकियों के मंसूबों को विफल करना चाहिये।


–अनिल निगम-

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)




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अमित शाह की कश्मीर यात्रा

गृहमंत्री अमित शाह कश्मीर के दौर पर गए, यह अपने आप में बड़ी बात है। आजकल कश्मीर से जैसी खबरें आ रही हैं, वैसे माहौल में किसी केंद्रीय नेता का वहां तीन दिन का दौरा लगना काफी साहसपूर्ण कदम है। जो जितना बड़ा नेता होता है, उसे अपनी जान का खतरा भी उतना ही बड़ा होता है। अमित शाह ने ही गृहमंत्री के तौर पर दो साल पहले धारा 370 को खत्म किया था और कश्मीर को सीधे दिल्ली के नियंत्रण में ले आए थे।


उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने बदले हुए कश्मीर के नक्शे में कई नए रंग भरे और शासन को जनता से सीधे जोड़ने के लिए रचनात्मक कदम उठाए लेकिन पिछले दो-तीन सप्ताह में आतंक की ऐसी घटनाएं घट गईं, जिसने कश्मीर को फिर से चर्चा का विषय बना दिया। आतंकवादियों ने ऐसे निर्दोष लोगों पर हमले किए, जिनका राजनीति या फौज से कुछ लेना-देना नहीं है। इन लोगों में ठेठ कश्मीरी भी हैं और ज्यादातर वे लोग हैं, जो देश के दूसरे हिस्सों से आकर कश्मीर में रोजगार करते हैं।


ये घटनाएं बड़े पैमाने पर नहीं हुई हैं लेकिन इनका असर बहुत गंभीर हो रहा है। न केवल हिंदू पंडित, जो कश्मीर लौटने के इच्छुक थे, निराश हो रहे हैं बल्कि सैकड़ों गैर-कश्मीरी नागरिक भागकर बाहर आ रहे हैं। ऐसे डर के माहौल में अमित शाह श्रीनगर पहुंचे और उन्होंने जो सबसे पहला काम किया, वह यह कि वे परवेज अहमद दर के परिवार से मिले। वे सीधे हवाई अड्डे से उनके घर गए।


परवेज अहमद सीआईडी के इंस्पेक्टर थे। वे ज्यों ही नमाज़ पढ़कर मस्जिद से निकले आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी थी। शाह ने उनकी पत्नी फातिमा को सरकारी नौकरी का नियुक्ति-पत्र दिया। परवेज अहमद के परिवारवालों से अमित शाह की मुलाकात के जो फोटो अखबारों में छपे हैं, वे बहुत ही मर्मस्पर्शी हैं। शाह ने राजभवन में पांच घंटे की बैठक करके कश्मीर की सुरक्षा पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने आतंकवाद को काबू करने के लिए कई नए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए।


यह ठीक है कि उन्होंने कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने का कोई संकेत नहीं दिया लेकिन त्रिस्तरीय पंचायत के चुनावों को बड़ी उपलब्धि बताया। क्या ही अच्छा होता कि वे कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने की बात कहते और यह शर्त भी लगा देते कि वे ऐसा तभी करेंगे, जबकि वहां आतंकवाद की एक भी घटना न हो। अभी जबकि पाकिस्तान में अफगानिस्तान को लेकर खलबली मची हुई है, यदि भारत के नेताओं में दूरंदेशी हो तो वे काबुल और कश्मीर, दोनों मुद्दों पर नई पहल कर सकते हैं। वे अटलजी के सपने- कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत को जमीन पर उतार सकते हैं।



–डॉ. वेदप्रताप वैदिक-

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने स्तंभकार हैं।)





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विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप : आकाश सांगवान ने पहला मुकाबला जीता

नई दिल्ली :  भारतीय मुक्केबाज आकाश सांगवान (67 किग्रा) ने यहां चल रही एआईबीए पुरुष विश्व चैंपियनशिप के पहले मुकाबले में तुर्की के फुरकान एडम पर 5-0 की आसान जीत से दूसरे दौर में प्रवेश किया।


मौजूदा राष्ट्रीय चैंपियन फुरकान का अगला मुकाबला जर्मनी के डेनियल क्रोटर से होगा जिन्हें पहले दौर में बाइ मिली है। कल रात खेले गये मुकाबले में भारतीय मुक्केबाज ने शुरू से एडम पर दबदबा बनाकर एकतरफा जीत हासिल की।


इससे पहले रोहित मोर (57 किग्रा) ने इक्वाडोर के जीन कैसेडो को 5-0 से हराया था। उनका अगला मुकाबला बोस्निया हर्जेगोविना के एलन राहिमिच से होगा।


एशियाई चैंपियन संजीत (92 किग्रा) और सचिन कुमार (80 किग्रा) को पहले दौर में बाइ मिली है।


सचिन 30 अक्टूबर को दूसरे दौर में अमेरिका के रॉबी गोंजालेज जबकि संजीत 29 अक्टूबर को रूस के आंद्रे स्तोस्की से भिड़ेंगे।


इस चैंपियनशिप में 100 देशों के 600 से अधिक मुक्केबाज भाग ले रहे हैं। कुछ भार वर्गों में मुक्केबाजों को क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के लिये कम से कम तीन मुकाबले जीतने होंगे। इनमें भारत के शिव थापा (63.5 किग्रा) भी शामिल हैं जो पहले मुकाबले में कीनिया के विक्टर ओडियाम्बो न्याडेरा से भिड़ेंगे।



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अमित शाह 29 अक्टूबर से लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे

लखनऊ : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 29 अक्टूबर से लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर होंगे, इस दौरान वह भाजपा के मेगा सदस्यता अभियान को हरी झंडी दिखाएंगे और चुनावी तैयारियों पर चर्चा करेंगे।


भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शुक्रवार को सदस्यता अभियान शुरू करेगी, जिसका उद्देश्य 1.5 करोड़ से ज्यादा नए सदस्यों को जोड़ना है। राज्य में पार्टी के पहले से ही लगभग 2.3 करोड़ सदस्य हैं। इनमें वे लाखों लोग शामिल हैं जिन्होंने पार्टी द्वारा साझा किए गए एक समर्पित नंबर पर मिस्ड कॉल देकर पार्टी के लिए अपनी पसंद की पुष्टि की है।


सदस्यता अभियान का महत्व इसलिए है क्योंकि भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनावों में जीती गई 312 सीटों के साथ 39.67 प्रतिशत वोट हासिल करने के लिए अपनी सीटों में सुधार करने का लक्ष्य रखा है।


शाह का दौरा इस तथ्य के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में सत्ता विरोधी लहर को कम करने के लिए मौजूदा विधायकों के टिकट बदलने पर विचार कर रही है।


पार्टी उन नेताओं को भी टिकट देने के लिए प्रतिबद्ध है जो अन्य दलों से शामिल हुए हैं।


हालांकि, पार्टी के नेताओं के एक वर्ग को लगता है कि बड़े पैमाने पर टिकट बदलने से असंतुष्टि और नाकारात्मक प्रतिक्रिया हो सकती है।


पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, बड़े पैमाने पर परिवर्तन कभी रिस्क प्रूफ नहीं हो सकते हैं, लेकिन इसे करने में ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। इस बार फायदा यह है कि पार्टी संगठन पहले से कहीं अधिक मजबूत है और ऐसी स्थितियों में यह शॉक ऑब्जर्वर के रूप में काम कर सकता है।


पार्टी सूत्रों ने कहा कि वरिष्ठ नेता मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन के बारे में फीडबैक पर विस्तार से काम कर रहे हैं और फीडबैक की क्रॉस चेकिंग भी कर रहे हैं।



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भाजपा की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की प्रेरक कहानियां अब ‘नमो ऐप’ पर: मोदी

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा को आगे बढ़ाने और उसे आम जन के बीच लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं के जीवन से जुड़ी प्रेरक कहानियां अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक ‘नमो ऐप’ पर उपलब्ध होंगी।


प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को खुद सिलसिलेवार ट्वीट कर यह जानकारी दी और कहा कि इसके लिए इस ऐप पर ‘कमल पुष्प’ नाम से एक खंड बनाया गया है।


उन्होंने कहा कि जनता के आशीर्वाद से भाजपा को विभिन्न राज्यों और केंद्र में सेवा करने का मौका मिला है और जनता के इस विश्वास का एक प्रमुख कारण पार्टी और राष्ट्र निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों की उत्कृष्ट भूमिका है।


मोदी ने कहा, ‘‘नमो ऐप में एक ‘कमल पुष्प’ नाम का एक खंड है, जो जन संघ से लेकर वर्तमान तक पार्टी की विचारधारा को लोकप्रिय बनाने वाले कार्यकर्ताओं की प्रेरक कहानियों के बारे में जानने और उसे साझा करने का मौका देता है।’’


उन्होंने लोगों से इस खंड में योगदान देकर ‘कमल पुष्प’ को समृद्ध बनाने का आह्वान किया।


प्रधानमंत्री ने भाजपा के लिए जीवन समर्पित कर देने वाले कुछ कार्यकर्ताओं की कहानी भी साझा की, जिनमें उत्तराखंड के पंडित देवेंद्र शास्त्री और कर्नाटक के एस मल्लिकार्जुनैया शामिल हैं।


शास्त्री जन संघ के सह संस्थापक और स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं जबकि मल्लिकार्जुनैया कर्नाटक के तुमकुर से सांसद और लोकसभा के उपाध्यक्ष भी रहे हैं।




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देश में पिछले 238 दिन में कोविड-19 के सबसे कम नए मामले आए सामने

नई दिल्ली : भारत में एक दिन में कोविड-19 के 12,428 नए मामले सामने आए, जो पिछले 238 दिन में सामने आए सबसे कम दैनिक मामले हैं। वहीं, देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 1,63,816 हो गई है।


केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार को सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक संक्रमित पाए गए लोगों की संख्या बढ़कर 3,42,02,202 हो गई है। वहीं, संक्रमण से 356 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 4,55,068 हो गई। केरल ने संक्रमण से मौत के आंकड़ों का पुन:मिलान करने के बाद मृतक संख्या में 228 का इजाफा किया है। पिछले 24 घंटे में संक्रमण से राज्य में 53 लोगों की मौत हुई।


आंकड़ों के अनुसार, देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 1,63,816 हो गई है, जो कुल मामलों का 0.49 प्रतिशत है। यह दर मार्च 2020 के बाद से सबसे कम है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 3,879 की कमी दर्ज की गई। मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.18 प्रतिशत है, जो मार्च 2020 के बाद से सबसे अधिक है। देश में अभी तक कुल 60,19,01,543 नमूनों की कोविड-19 संबंधी जांच की गई है, जिनमें से 11,31,826 नमूनों की जांच सोमवार को की गई। देश में दैनिक संक्रमण दर 1.10 प्रतिशत और साप्ताहिक संक्रमण दर 1.24 प्रतिशत है। अभी तक कुल 3,35,83,318 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं, जबकि मृत्यु दर 1.33 प्रतिशत है। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण मुहिम के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 102.94 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं।


देश में पिछले साल सात अगस्त को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त को 30 लाख और पांच सितंबर को 40 लाख से अधिक हो गई थी। वहीं, संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर को 50 लाख, 28 सितंबर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गए थे। देश में 19 दिसंबर को ये मामले एक करोड़ के पार, इस साल चार मई को दो करोड़ के पार और 23 जून को तीन करोड़ के पार चले गए थे।


मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण से जिन 356 लोगों की मौत हुई, उनमें से केरल के 281 लोग, तमिलनाडु के 14 लोग, महाराष्ट्र के 12 लोग और पश्चिम बंगाल के 11 लोग थे। देश में संक्रमण से अभी तक कुल 4,55,068 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से महाराष्ट्र के 1,40,028 लोग, कर्नाटक के 38,017 लोग, तमिलनाडु के 36,033 लोग, केरल के 28,873 लोग, दिल्ली के 25,091 लोग, उत्तर प्रदेश के 22,899 लोग और पश्चिम बंगाल के 19,066 लोग थे।


स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अभी तक जिन लोगों की संक्रमण से मौत हुई है, उनमें से 70 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों को अन्य बीमारियां भी थीं। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि उसके आंकड़ों का भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के साथ मिलान किया जा रहा है।






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भाजपा-आरएसएस का सामना करने के लिए प्रशिक्षण की जरूरत : सोनिया गांधी

नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि पार्टी कार्यकतार्ओं को भाजपा और आरएसएस के इशारे पर दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार अभियानों के निरंतर हमले का सामना करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।


सोनिया गांधी ने मंगलवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों और प्रभारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि पार्टी के लोगों को कांग्रेस की मूल विचारधारा को बनाए रखते हुए और उसे पेश करते हुए इससे लड़ने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए।


उन्होंने कहा, मैं इस अवसर पर पीसीसी अध्यक्षों, महासचिवों और प्रभारियों में से प्रत्येक को इस बात पर जोर देना चाहती हूं कि नए सदस्य किसी भी राजनीतिक आंदोलन की जीवनदायिनी हैं। देश भर के युवा पुरुष और महिलाएं अपनी आकांक्षाओं को आवाज देने के लिए एक आंदोलन चाहते हैं। यह हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें एक मंच प्रदान करें, जैसा कि हमने पिछली पीढ़ियों से किया है।


उन्होंने कहा, आगामी एक नवम्बर से शुरू होने जा रहे सदस्यता अभियान के मद्देनजर आपको प्रत्येक वार्ड और गाँव के लिए प्रपत्रों की उचित वितरण सुनिश्चित करना होगा। पारदर्शी तरीके से सदस्यों को नामांकित करने के लिए आपको घर-घर जाकर कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों की पहचान करनी होगी और उन्हें सौंपना होगा। आपको राज्य, जिला, ब्लॉक, वार्ड और ग्राम स्तर पर इन व्यक्तियों की जिम्मेदारियों का स्पष्ट चित्रण सुनिश्चित करना चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है जिसे आपको सौंपा गया है।


उन्होंने कहा, आपको हमारे कार्यकतार्ओं को भाजपा और आरएसएस के इशारे पर दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार अभियानों के निरंतर हमले का सामना करने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए। और आपको हमारे लोगों को कांग्रेस की मूल विचारधारा को बनाए रखते हुए और उसे पेश करते हुए इससे लड़ने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए।

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वाराणसी के बाद प्रियंका गोरखपुर में करेंगी रैली को संबोधित

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक रैली को संबोधित करने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में भी एक रैली को संबोधित करेंगी।


रैली स्थल चंपा देवी पार्क को बनाया गया है। इस बारे में कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा, इस रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता दिन-रात एक कर रहे हैं।


कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी लगातार जमीनी मुद्दों को उठा रही है।


रैली स्थान यह दिखाने के लिए चुना गया है कि कांग्रेस राज्य में भाजपा से मुकाबला करने के लिए तैयार है। इन रैली की योजना कांग्रेस द्वारा टिकटों में महिलाओं को 40 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा करने और सात प्रस्तावों को अपने घोषणापत्र का हिस्सा घोषित करने के बाद बनाई गई है।


प्रियंका गांधी वाड्रा ने 10 अक्टूबर को सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखा हमला करते हुए आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पार्टी के अभियान की शुरूआत की थी।


वाराणसी में विशाल रैली को संबोधित करते हुए प्रियंका ने किसानों और गरीबों के साथ अन्याय के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा था।


उन्होंेने कहा, पिछले दो सालों से मैं यूपी में काम कर रही हूं। दो साल पहले, सोनभद्र में भूमि विवाद में 13 आदिवासी मारे गए थे, जिसमें सत्तारूढ़ भाजपा के कुछ नेता शामिल थे। लोगों ने कहा कि इस मामले में उन्हें न्याय की कोई उम्मीद नहीं है। मैं वहां गई और पीड़ित परिवारों में से प्रत्येक ने कहा कि वे न्याय चाहते हैं।


प्रियंका ने कहा, फिर महामारी आई और हमने देखा कि लोग बिना ऑक्सीजन के, बिना दवा के मर रहे हैं। लोगों को उम्मीद थी कि सरकार मदद करेगी लेकिन कोई मदद नहीं आई और इसी उम्मीद में कई लोगों की जान चली गई।


सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, इसके बाद हाथरस हुआ और सरकार ने आरोपियों को बचा लिया और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला। लखीमपुर खीरी में भी ऐसा ही हुआ है, जहां एक मंत्री के बेटे ने किसानों को कुचल दिया और सरकार आरोपियों को बचा रही है।





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लखीमपुर खीरी हिंसा: न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को गवाहों को संरक्षण प्रदान करने का दिया निर्देश

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के गवाहों को संरक्षण प्रदान करने का मंगलवार को निर्देश दिया। इस हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी।


प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को मामले के अन्य गवाहों के बयान दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत दर्ज करने का भी निर्देश दिया।


उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और गरिमा प्रसाद अदालत में पेश हुए।


पीठ ने कहा, ‘‘ हम संबंधित जिला न्यायाधीश को सीआरपीसी की धारा 164 के तहत साक्ष्य दर्ज करने का कार्य निकटतम न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपने का निर्देश देते हैं।’’


पीठ ने साल्वे से कहा कि वह ‘इलेक्ट्रॉनिक’ साक्ष्य की रिपोर्ट तैयार करने के संबंध में उसकी चिंताओं से ‘फॉरेंसिक’ प्रयोगशालाओं को अवगत कराएं।


इस बीच, शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को पत्रकार की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले से जुड़ी दो शिकायतों के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने को निर्देश दिया।


पीठ ने कहा, ‘‘ राज्य को इन मामलों में अलग-अलग जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है।’’


न्यायालय ने इस मामले में अब आठ नवंबर को आगे सुनवाई करेगा।


उच्चतम न्यायालय ने 20 अक्टूबर को कहा था कि लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच एक ‘‘अंतहीन कहानी’’ नहीं होनी चाहिए। साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि न्यायालय को ऐसा लग रहा है कि राज्य पुलिस धीमी गति से काम कर रही है। गवाहों को संरक्षण प्रदान करने का निर्देश भी दिया था।



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बेंगलुरु से रोहिंग्या समुदाय के 72 लोगों को निर्वासित करने की तत्काल कोई योजना नहीं: कर्नाटक सरकार ने न्यायालय से कहा

नई दिल्ली : कर्नाटक सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि बेंगलुरु में रह रहे रोहिंग्या समुदाय के 72 लोगों को निर्वासित करने की तत्काल उसकी कोई योजना नहीं हैं।


राज्य सरकार ने रोहिंग्या समुदाय के लोगों की पहचान करके उन्हें निर्वासित करने के लिए दायर याचिका पर दिये अपने जवाब में यह जानकारी दी। राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए।


राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा, ‘‘बेंगलुरु शहर पुलिस ने अपने अधिकार क्षेत्र में किसी शिविर या हिरासत केंद्र में किसी रोहिंग्या को नहीं रखा है। हालांकि बेंगलुरु शहर में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत रोहिंग्या समुदाय के 72 लोगों की पहचान की गई है और बेंगलुरु शहर पुलिस ने अभी तक उनके खिलाफ बलपूर्वक कोई कार्रवाई नहीं की है और उसकी उन्हें निर्वासित करने की तत्काल कोई योजना नहीं है।’’


उपाध्याय ने याचिका दायर करके केंद्र और राज्य सरकार को यह निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया है कि वे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या समुदाय के लोगों समेत सभी अवैध प्रवासियों एवं घुसपैठियों की एक साल के भीतर पहचान करें, उन्हें हिरासत में लें और उन्हें निर्वासित करें।


याचिका में कहा गया है, ‘‘खासकर म्यांमा और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में आए अवैध प्रवासियों ने न केवल सीमावर्ती जिलों की जनसांख्यिकीय संरचना के लिए खतरा पैदा किया है, बल्कि सुरक्षा एवं राष्ट्रीय अखंडता को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है।’’


उपाध्याय ने याचिका में आरोप लगाया है कि कई एजेंट के माध्यम से पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और गुवाहाटी के रास्ते अवैध प्रवासी संगठित तरीके से घुस रहे हैं।







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ओबीसी, ईडब्ल्यूसी आरक्षण पर न्यायालय का फैसला आने तक नीट-पीजी की काउंसलिंग नहीं होगी शुरू: केंद्र

नई दिल्ली : केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को सोमवार को आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातकोत्तर (नीट-पीजी) की काउंसलिंग प्रक्रिया तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक शीर्ष अदालत मौजूदा शैक्षणिक सत्र से स्नातकोत्तर अखिल भारतीय कोटा सीट (एमबीबीएस/बीडीएस और एमडी/एमएस/एमडीएस) में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी को 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी अधिसूचना को दी गई चुनौती के संबंध में फैसला नहीं कर लेती।


न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एम के नटराज के इस आश्वासन को दर्ज किया और टिप्पणी की कि यदि काउंसलिंग प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे छात्रों के लिए बड़ी समस्या पैदा हो जाएगी।


कुछ नीट उम्मीदवारों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक ने जिस समय-सारणी की घोषणा की है, उसके अनुसार नीट-पीजी के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया 25 अक्टूबर से शुरू होनी है। इसके बाद नटराज ने यह आश्वासन दिया।


दातार ने कहा कि शैक्षणिक वर्ष से आरक्षण लागू करने संबंधी 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं पर न्यायालय का फैसला आन तक दाखिला प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और इसका छात्रों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।


नटराज ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील जिस संवाद का जिक्र कर रहे हैं, वह मेडिकल कॉलेजों में केवल सीटों के सत्यापन के लिए भेजा गया था और सोमवार को एक और स्पष्टीकरण अधिसूचना जारी की गई है।


एएसजी ने कहा, ‘‘काउंसलिंग प्रक्रिया लंबित याचिकाओं पर न्यायालय का फैसला आने तक शुरू नहीं होगी।’’


पीठ ने कहा कि वह इन शब्दों को रिकॉर्ड में रख रही है। उसने कहा, ‘‘हम आपके इन शब्दों को दर्ज कर रहे हैं कि याचिकाओं पर हमारा कोई फैसला आने तक काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। आप जानते हैं कि यदि यह प्रक्रिया शुरू होती है, तो छात्रों को गंभीर समस्या होगी।’’


नटराज ने न्यायालय की इस टिप्पणी के प्रति सहमति जताई और कहा कि यदि भविष्य में कोई समस्या होती है, तो याचिकाकर्ता के वकील उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं।


न्यायालय ने 21 अक्टूबर को केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या वह नीट या मेडिकल पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के निर्धारण के लिए आठ लाख रुपये वार्षिक आय की सीमा तय करने पर पुनर्विचार करेगी।


शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह नीति निर्धारण के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर रही है, बल्कि केवल यह निर्धारित करने का प्रयास कर रही है कि क्या संवैधानिक मूल्यों का पालन किया गया है अथवा नहीं।


शीर्ष अदालत ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग से एक सप्ताह में अपने हलफनामे दाखिल करने को कहा था और केंद्र के लिए कुछ सवाल बनाए थे।


पीठ ने कहा, ‘‘हमें बताइए कि क्या आप मानक पर पुनर्विचार करना चाहते हैं अथवा नहीं। अगर आप चाहते हैं कि हम अपना काम करें तो हम इसके लिए तैयार हैं। हम प्रश्न तैयार कर रहे हैं जिनका जवाब आपको देना है।’’


इसने कहा, ‘‘हम सरकार की अधिसूचना पर रोक लगा सकते हैं जिसमें ईडब्ल्यूएस निर्धारित करने के लिए आठ लाख रुपये का मानक तय किया गया है और आप हलफनामा दायर करते रहिएगा।’’


उच्चतम न्यायालय उन कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें केंद्र और मेडिकल काउंसिलिंग समिति (एमसीसी) की 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती दी गई है। इस अधिसूचना के तहत मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए नीट में ओबीसी को 27 फीसदी और ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण दिया गया है।







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पाकिस्तान की जीत पर भारत में फोड़े गए पटाखे तो भड़के वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर

नई दिल्ली :  ICC T20 World Cup 2021 में भारतीय टीम को पाकिस्तान के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। भारत की इस हार से हर एक भारतीय निराश था, लेकिन भारत के कुछ हिस्सों में पाकिस्तान की जीत का जश्न पटाखे फोड़कर मनाया गया। इसको लेकर भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग नाखुश हैं और उन्होंने अपनी भड़ास इंटरनेट मीडिया के जरिए जाहिर की है।

वीरेंद्र सहवाग ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है, "दिवाली के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध है, लेकिन कल (रविवार, 24 अक्टूबर) भारत के कुछ हिस्सों में पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाने के लिए पटाखे फोड़े गए थे। अच्छा वे क्रिकेट की जीत का जश्न मना रहे होंगे। तो दीपावली पर पटाखे चलाने में क्या हर्ज है। ऐसा पाखंड़ (हिपोक्रेसी) क्यों, सारा ज्ञान तब ही याद आता है।"

वहीं, पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने लिखा है, "जो लोग पाकिस्तान की जीत पर पटाखे फोड़ रहे हैं वो भारतीय नहीं हो सकते। हमें अपनी टीम के साथ खड़ा होना चाहिए।"

बता दें कि पाकिस्तान को विश्व कप के इतिहास में पहली बार भारत के खिलाफ जीत मिली है। इस जीत के बाद भारत के कुछ हिस्सों से ऐसी खबरें आई हैं कि पाकिस्तान की जीत पर पटाखे चलाए गए हैं और कुछ जगह लड़ाईयां भी हुई हैं। पाकिस्तान की जीत को भारत में सेलिब्रेट करना, ये किसी देशद्रोह से कम नहीं है। जाहिर है कि पाकिस्तान प्रेम के चलते पटाखे चलाए गए होंगे। निश्चित रूप से ऐसा तो नहीं है कि क्रिकेट के खेल के लिए ऐसा किया गया होगा। 

दूसरी सबसे बड़ी बात वीरेंद्र सहवाग ने ये उठाई है कि जब भारत में हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहार दिवाली पर पटाखे बैन हैं तो फिर क्रिकेट के मैच के बाद पटाखे चलाने का क्या तुक है और वो भी भारत की जीत नहीं, बल्कि पाकिस्तान की जीत पर भारत में पटाखे चलाने के क्या मायने हैं।


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पाकिस्‍तान के खिलाफ भारत की हार का मजाक उड़ाने वालीं कांग्रेस नेता के ट्वीट पर छिड़ा विवाद, ट्वीट कर तंज कसा- क्यों भक्तों आ गया स्वाद? करवा ली बेइज्‍जती?

नई दिल्ली :  टी-20 विश्वकप मुकाबले में पाकिस्तान के हाथों भारत की हार के बाद पूरे देश में लोगों में गुस्सा है। सोशल मीडिया पर हर तरफ लोग भारत की इस हार पर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। लेकिन इस बीच, टी-20 वर्ल्डकप में पाकिस्तान से भारत की हार के बाद कांग्रेस नेता का एक ट्वीट चर्चा में आ गया। लेकिन उनके ट्वीट को लेकर यूजर्स ने उन्हें ट्रोल कर दिया। दरअसल, कांग्रेस की सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर राधिका खेड़ा ने पाकिस्‍तान के हाथों भारत की हार के बाद ट्वीट किया। जिस पर वो ट्रोल हो गईं। कांग्रेस की नेता राधिका खेड़ा ने भारत की हार पर ट्वीट कर लिखा- ''क्यों भक्तों, आ गया स्वाद? करवा ली बेइज्जती?''

जमकर ट्रोल हो गईं कांग्रेस नेता

राधिका खेड़ा को उनके इस ट्वीट के लिए बुरी तरह ट्रोल किया गया। राधिका खेड़ा के ट्वीट पर बेहद तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। बीजेपी के कई नेताओं ने भी खेड़ा के ट्वीट को लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। कुछ लोगों ने खेड़ा को 'एंटी नैशनल' भी करार दे दिया। कई यूजर्स ने कहा कि कांग्रेस के ऐसे रवैये के चलते ही उसकी ऐसी हालत है। खेड़ा भी अपने स्‍टैंड पर कायम रहीं। ट्रोल करने वालों को उन्‍होंने उतनी ही तल्‍खी से जवाब दिया। जब उन्‍हें घेरा गया तो उन्‍होंने लिखा कि 'किसने कहा कि यह ट्वीट क्रिकेट के ऊपर है।'



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टी20 विश्व कप : हम जानते हैं कि खेल कहां गलत हुआ : कोहली

दुबई : भारतीय कप्तान विराट कोहली का मानना है कि उनकी टीम को इस बात का सटीक अंदाजा है कि पाकिस्तान के खिलाफ पहला मैच कहां गया और कहां चूक हुई। उन्होंने कहा कि पहले छह ओवरों में पाकिस्तान की शानदार गेंदबाजी का मतलब था कि भारत पुरुष टी20 विश्व कप के अपने शुरुआती मैच में अतिरिक्त 20-25 रन नहीं बना सका। भारत को रविवार को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में पाकिस्तान ने दस विकेट से शिकस्त दी।


कोहली ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कहा, एक टीम के तौर पर हमें यह समझने की जरूरत है कि बीच में वहां के हालात की हकीकत क्या थी। वहीं 20-25 अतिरिक्त रन अच्छे होते। लेकिन पहले छह में शानदार गेंदबाजी ने हमें अतिरिक्त रन हासिल नहीं होने दिया। हम वास्तव में जानते हैं कि खेल कैसे हाथ से चला गया और यह कहां गलत हो गया। हमारे पास इसकी पूर्ण स्पष्टता है, यह जानना अच्छी बात है कि आप एक टीम के रूप में कहां गलत हुए।


कोहली ने कहा, तो, आप काम कर सकते हैं और इसे सुधारने की कोशिश कर सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं क्योंकि इस टूर्नामेंट में हमारे पास अभी भी बहुत सारे मैच हैं। अगर हम अपनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं, तो हम निश्चित रूप से महसूस कर सकते हैं कि हम इन गलतियों पर काम कर सकते हैं।


यह बताते हुए कि मैच कैसे समाप्त हो गया, विशेष रूप से पाकिस्तान के पीछा के दौरान तस्वीर में आने के बाद, कोहली ने कहा, अगर पिच बल्लेबाजी करने के लिए थोड़ी बेहतर हो जाती है, तो आप शुरू हो जाते हैं। तब आप पीछा करने के बारे में अधिक आत्मविश्वास महसूस करना शुरू कर देते हैं। क्या हुआ। पाकिस्तान की पारी के दूसरे हाफ में जितनी अधिक ओस आई और वे स्ट्राइक रोटेट करने में सफल रहे।



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भारत की शर्मनाक हार, पाकिस्तान ने रोका विजय अभियान

दुबई : बल्लेबाजों के लचर प्रदर्शन और गेंदबाजों के परिस्थितियों के अनुकूल गेंदबाजी करने में नाकाम रहने के कारण भारत को आईसीसी टी20 विश्व कप के सुपर 12 के ग्रुप दो मैच में रविवार को यहां पाकिस्तान से 10 विकेट से करारी हार का सामना करना पड़ा जिससे उसका अपने इस चिर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ पिछले 29 वर्षों से चला आ रहा विजय अभियान भी थम गया।


भारत ने विश्व कप (वनडे और टी20) में 1992 के बाद इस मैच से पहले तक सभी 12 मैचों (वनडे में सात और टी20 में पांच) में जीत दर्ज की थी लेकिन पहले शाहीन शाह अफरीदी (31 रन देकर पांच) की अगुवाई में पाकिस्तानी गेंदबाजों के सामने उसके बल्लेबाज नहीं चले और बाद में रही सही कसर कप्तान बाबर आजम (52 गेंद पर नाबाद 68, छह चौके, दो छक्के) और मोहम्मद रिजवान (55 गेंदों पर नाबाद 78, छह चौके तीन छक्के) की पहले विकेट के लिये अटूट शतकीय साझेदारी ने पूरी कर दी।


भारत ने सात विकेट पर 151 रन बनाये थे लेकिन पाकिस्तान ने 17.5 ओवर में बिना किसी नुकसान के 152 रन बनाकर एकतरफा जीत दर्ज करके अपने विश्व कप अभियान की शानदार शुरुआत की।


भारत ने टॉस गंवाया और इसके एक समय वह तीन विकेट पर 31 रन बनाकर संघर्ष कर रहा था। विराट कोहली (49 गेंदों पर 57 रन, पांच चौके, एक छक्का) ने ऋषभ पंत (30 गेंदों पर 39 रन, दो चौके, दो छक्के) के साथ चौथे विकेट के लिये 40 गेंदों पर 53 रन की साझेदारी की जिससे भारत सम्मानजनक स्कोर तक पहुंच पाया।


इसके उलट पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने शुरू से ही भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया। कोहली के गेंदबाजों से लेकर क्षेत्ररक्षण की सजावट में वह आक्रामकता नहीं दिखी जिसके कारण उन्हें दुनिया के सफल कप्तानों में गिना जाता है। विश्व कप के बाद टी20 की कप्तानी छोड़ने का मन बना चुके कोहली को यह हार वर्षों तक सालती रहेगी।


रिजवान ने भुवनेश्वर के पहले ओवर में ही चौका और छक्का लगाया। कोहली को पावरप्ले में ही वरुण चक्रवर्ती को गेंद सौंपनी पड़ी। पाकिस्तान ने पहले छह ओवरों में बिना किसी नुकसान के 43 रन बनाये।


बाबर और रिजवान का ‘फुटवर्क, प्लेसमेंट और टाइमिंग’ बहुत अच्छा था जिसके सामने भारत के तेज गेंदबाजों और स्पिनरों की एक नहीं चली। इन दोनों ने स्ट्राइक रोटेट करके भारत पर दबाव बनाया। भारत के दोनों स्पिनरों ने आठ ओवर में 61 रन लुटाये जबकि तेज गेंदबाजों में पैनापन नहीं दिखा।


बाबर जल्द ही अपने आक्रामक रंग में उतर आये। उन्होंने रविंद्र जडेजा पर छक्के से शुरुआत की और फिर चक्रवर्ती के एक ओवर में दो छक्के लगाये। इनमें से दूसरे छक्के से उन्होंने अर्धशतक भी पूरा किया। भारतीय स्पिनरों को ओस के कारण गेंद पर पकड़ बनाने में परेशानी हो रही थी।


रिजवान ने 41 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया और जल्द ही वह अपने कप्तान की बराबरी पर पहुंच गये। इसके बाद उन्होंने मोहम्मद शमी पर छक्का और दो चौके लगाकर 18वें ओवर में अपनी टीम को लक्ष्य तक पहुंचा दिया।


इससे पहले भारत के लिये शुरुआत किसी भी तरह से अनुकूल नहीं रही। कोहली ने टॉस गंवाया और भारत ने उसके बाद 13 गेंद और छह रन के अंदर दोनों सलामी बल्लेबाजों रोहित शर्मा (शून्य) और केएल राहुल (तीन) के विकेट गंवा दिये।


रोहित की बायें हाथ के तेज गेंदबाज के सामने कोण लेकर अंदर आती गेंद पर कमजोरी फिर खुलकर सामने आयी। अफरीदी ने उन्हें पहले ओवर में पगबाधा आउट करने के बाद अगले ओवर की पहली गेंद पर राहुल की गिल्लियां बिखेरी।


सूर्यकुमार यादव (आठ गेंदों पर 11) को हसन अली (44 रन देकर दो) ने विकेट के पीछे रिजवान के हाथों कैच कराया जिससे पावरप्ले के बाद भारत का स्कोर तीन विकेट पर 36 रन हो गया।


कोहली का अफरीदी पर ‘कॉउ कार्नर’ पर लगाया गया छक्का दर्शनीय था, लेकिन सूर्यकुमार के आउट होने के बाद उन्हें भी संभलकर खेलना पड़ा। पंत के लेग स्पिनर शादाब खान पर शार्ट फाइन लेग पर लगाये गये चौके से भारत नौ ओवर में 50 रन के पार पहुंचा।


पंत ने हसन अली पर पारी के 12वें ओवर में एक हाथ से लगातार गेंदों पर स्क्वायर लेग और लांग ऑफ पर छक्के जड़े। लेकिन जब वह खतरनाक नजर आ रहे थे तब उन्होंने शादाब खान (22 रन देकर एक) की गेंद हवा में लहराकर आसान कैच थमा दिया।


इससे रन गति फिर धीमी पड़ गयी। भारत 15 ओवर में तिहरे अंक तक पहुंच पाया। भारत ने बीच के नौ ओवरों में 64 रन बनाये और पंत का विकेट गंवाया। उसने अंतिम पांच ओवरों में तीन विकेट के एवज में 51 रन जोड़े।


कोहली ने पाकिस्तान ने 45 गेंदों में अर्धशतक जमाया लेकिन छठे नंबर पर बल्लेबाजी के लिये उतरे रविंद्र जडेजा (13 गेंदों पर 13) संघर्ष करते नजर आये। कोहली 19वें ओवर में आउट हुए और इस तरह से पाकिस्तान के खिलाफ टी20 विश्व कप में लगातार चौथी पारी में नाबाद नहीं रह पाये। हार्दिक पंड्या भी 11 रन बना पाये।







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पुराने वाहन बेचने के लिए एनओसी की जरूरत को लेकर सीएससी, एनसीआरबी में करार

नई दिल्ली: पुराने वाहनों की बिक्री-खरीद के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) अब पूरे भारत में चार लाख से अधिक सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) से उपलब्ध होंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के तहत एक एसपीवी सीएससी ने इस सेवा को पूरे भारत में उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के साथ करार किया है। यह सेवा नागरिकों को निकटतम सीएससी से एनओसी प्राप्त करने में मदद करेगी। एनसीआरबी ने राज्य सरकारों से डिजिटल सेवा पोर्टल के साथ सीसीटीएनएस सेवाओं को एकीकृत करने का अनुरोध किया है, ताकि इन्हें सीएससी के नेटवर्क के माध्यम से नागरिकों के लिए वितरित और सुलभ बनाया जा सके। सीएससी उनके द्वारा संचालित समुदाय में इन सेवाओं के बारे में जागरूकता भी पैदा करेगा।


सीएससी एसपीवी के प्रबंध निदेशक डॉ. दिनेश त्यागी ने कहा, व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपयोग के लिए पूर्व स्वामित्व वाले वाहनों के लिए एक बढ़ता हुआ बाजार है। गतिशीलता वाणिज्यिक और उद्यमशीलता गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सीएससी का हमारा व्यापक नेटवर्क इस मांग का लाभ उठा सकता है और वाहन मालिकों को एनओसी प्रदान कर सकता है। नागरिक, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, इस साझेदारी से लाभान्वित हो सकते हैं, क्योंकि उन्हें एनसीआरबी कार्यालयों का दौरा करने के लिए लंबी दूरी की यात्रा नहीं करनी पड़ती है और वे अपने निकटतम सीएससी से एनओसी प्राप्त कर सकते हैं।


नागरिकों को इस सेवा का विस्तार करने के लिए, सीएससी डिजिटल सेवा पोर्टल अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) से संबंधित होगा। सीएससी वीएलई इस सेवा की वाहन मिलान सुविधा का उपयोग वाहन विवरण खोजने और पंजीकरण संख्या, चेसिस नंबर और इंजन नंबर प्रदान करके एनओसी उत्पन्न करने के लिए करेंगे।


वाहन एनओसी नागरिकों को पुरानी खरीद के लिए जाने से पहले वाहन की स्थिति का पता लगाने की अनुमति देगा। एनओसी प्रमाणपत्र से पता चलता है कि बिक्री के लिए वाहन किसी कारण से पुलिस रिकॉर्ड में है या नहीं।


स्वामित्व के हस्तांतरण से पहले आरटीओ द्वारा अनिवार्य रूप से एक एनओसी भी आवश्यक है। इस साझेदारी के साथ, नागरिक अपने निकटतम सीएससी पर जा सकते हैं और आरटीओ द्वारा आवश्यक एनओसी को आसानी से जनरेट और डाउनलोड कर सकते हैं।




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पांच दिनों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर

नई दिल्ली : अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में उबाल के बीच सोमवार को घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पांच दिनों के बाद टिकाव रहा। रविवार को लगातार पांचवें दिन 35-35 पैसे प्रति लीटर की बढोतरी की गयी थी जिसके बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल 96.32 रुपये प्रति लीटर के सर्वकालिक रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। मुंबई में पेट्रोल 113.46 रुपये और डीजल 104.38 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पेट्रोल सबसे महंगा 116.26 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 105.64 रुपये प्रति लीटर पर, पटना में पेट्रोल 111.24 रुपये और डीजल 102.93 रुपये प्रति लीटर, बेंगलुरू में पेट्रोल 111.34 रुपये और डीजल 102.23 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। राँची में पेट्रोल के साथ ही डीजल भी शतक लगा चुका है। अब दोनों की कीमतों में मात्र 26 पैसे का अंतर रह गया है। पेट्रोल 101.89 रुपये और डीजल 101.63 रूपये प्रति लीटर पर है। दिल्ली एनसीआर के नोएडा में पेट्रोल 104.76 रुपये और डीजल 96.47 रुपये प्रति लीटर पर है। अभी देश के अधिकांश प्रमुख बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर को पार कर चुकी है और डीजल भी शतक लगाने की ओर बढ़ रहा है। इस महीने में अब तक 25 दिनों में से 19 दिन इन दोनों की कीमतों में बढोतरी हुयी है। इस महीने में अब तक पेट्रोल 5.95 रुपये प्रति लीटर और डीजल 6.55 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को सिंगापुर कच्चे तेल में कारोबार तेजी के साथ शुरू हुआ। ब्रेंट क्रूड तीन वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड 0.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ 86.24 डॉलर प्रति बैरल पर और अमेरिकी क्रूड 1.03 प्रतिशत चढ़कर अक्टूबर 2014 के बाद के सात वर्ष के उच्चतम स्तर 84.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल 96.32 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। पेट्रोल-डीजल के मूल्यों की रोजाना समीक्षा होती है और उसके आधार पर हर दिन सुबह छह बजे से नई कीमतें लागू की जाती हैं।


देश के चार बड़े महानगरों में आज पेट्रोल और डीजल के दाम इस प्रकार रहे:


शहर का नाम--पेट्रोल (रुपये/लीटर)--(डीजल रुपये/लीटर)


दिल्ली----- 107.59------ 96.32

मुंबई------113.46------ 104.38

चेन्नई-----104.52 ------100.59

कोलकाता----108.11-------99.43




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चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में भावी पीढ़ियों को अब नहीं तोड़ना पड़ेगा दम : योगी

सिद्धार्थनगर : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘एक जनपद एक मेडिकल कालेज’ योजना के तहत सिद्धार्थनगर सहित नौ जिलों में नये मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत को राज्य में चिकित्सा सेवाओं को उत्कृष्ट बनाने की क्रांति का आगाज बताते हुए कहा कि इस पहल के बाद राज्य में चिकित्सा सेवाओं के अभाव में भावी पीढ़ियों को दम नहीं तोड़ना पड़ेगा।

श्री योगी ने सोमवार को इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुये कहा कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। जब दुनिया कोरोना से त्रस्त है और विश्व की बड़ी ताकतें असहाय दिख रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय देकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को स्वदेशी वैक्सीन देकर सौ करोड़ लोगों को कोरोना से सुरक्षा प्रदान करने का कीर्तिमान स्थापित किया है। यह देश के लिये गर्व की बात है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सिद्धार्थनगर में रिमोट कंट्रोल द्वारा उत्तर प्रदेश के नौ जिलों में एक एक मेडिकल कालेज का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार स्वास्थ्य सुरक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने की दूरगामी नीति बनाई गयी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नौ मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इसी प्रयास का एक हिस्सा है। योगी ने कहा कि यह पहल उन लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिन्हें बीते सात दशकों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ना पड़ा था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अब लोगों को भरोसा होगा कि भावी पीढ़ियों को कभी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में दम नहीं तोड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री का इस पहल के लिये हृदय से स्वागत करता हूं।”

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आजादी के समय तीन या चार मेडिकल कालेज थे। राज्य में 2016 तक महज 12 सरकारी मेडिकल कॉलेज बन पाये थे। मगर अब प्रधानमंत्री के सौजन्य से राज्य में 30 मेडिकल खुल रहे हैं। नौ मेडिकल कालेज इसी योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ‘एक जनपद एक मेडिकल कालेज’ का संकल्प इस योजना को आगे बढ़ायेगी।

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उत्तर प्रदेश चुनाव: कांग्रेस ने 10 लाख रुपये तक का सरकारी इलाज मुफ्त कराने का वादा किया

लखनऊ :  कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपने सात वादे सार्वजनिक करने के कुछ दिन बाद सोमवार को ऐलान किया कि राज्य में पार्टी की सरकार बनने पर लोगों का किसी भी बीमारी का 10 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त कराया जाएगा।


प्रियंका ने एक ट्वीट में कहा, "सस्ते व अच्छे इलाज के लिए घोषणापत्र समिति की सहमति से उप्र कांग्रेस ने निर्णय लिया है कि सरकार बनने पर, कोई भी हो बीमारी, मुफ्त होगा 10 लाख रूपये तक का इलाज सरकारी।"


उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान और इस वक्त राज्य में जगह-जगह से आ रहीं बुखार फैलने की खबरों को लेकर सरकारी व्यवस्थाओं पर निशाना साधते हुए इसी ट्वीट में कहा "कोरोना काल में और अभी प्रदेश में फैले बुखार में सरकारी उपेक्षा के चलते उप्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की जर्जर हालत सबने देखी।"


इससे पहले, कांग्रेस के सत्ता में आने पर छात्राओं को स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक स्कूटी देने का वादा किया गया था। पिछली 23 अक्टूबर को प्रियंका ने बाराबंकी जिले से प्रतिज्ञा यात्राओं को हरी झंडी दिखाई थी।


इस मौके पर पार्टी ने 20 लाख लोगों को नौकरी देने, बिजली का बिल आधा करने और कोविड-19 महामारी के दौरान वित्तीय संकट से गुजर रहे परिवारों को 25-25 हजार रुपए की सहायता देने का ऐलान किया था।


पार्टी प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने की भी घोषणा कर चुकी है।








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कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू में शाह से मुलाकात की

जम्मू : विस्थापित कश्मीरी पंडितों के तीन संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री के विशेष भर्ती कार्यक्रम के तहत भर्ती किए गए समुदाय के प्रवासी कर्मचारियों के लिए दो बेडरूम के क्वार्टर के निर्माण के अलावा उनके लिए सुरक्षा और बीमा कवरेज की मांग की।


प्रतिनिधिमंडल ने विस्थापितों के लिए एक शीर्ष समिति और एक कल्याण बोर्ड के गठन की भी मांग की।


अधिकारियों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जम्मू कश्मीर इकाई के प्रवक्ता और पूर्व विधायक जी एल रैना के नेतृत्व में सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने यहां राजभवन में शाह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्य सचिव और अपनी पार्टी के नेता विजय बकाया, यूथ ऑल इंडिया कश्मीरी समाज (वाईएआईकेएस) के प्रमुख आर के भट्ट, ऑल इंडिया कश्मीरी समाज (एआईकेएस) के नेता ए के रैना और कश्मीरी पंडित सभा (केपीएस) के प्रमुख के के खोसा शामिल थे।


प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने घाटी में गैर प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए सुरक्षा, दूर-दराज के क्षेत्रों से ऐसे कर्मचारियों को पास के सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित करने और उनके लिए एक व्यापक बीमा पैकेज की मांग की। घाटी में 2010 से अब तक प्रधानमंत्री के विशेष भर्ती पैकेज के तहत करीब 3,000 कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है।


अधिकारियों ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने मंदिरों की सुरक्षा और कश्मीरी पंडितों के लिए एक कल्याण बोर्ड के गठन की भी मांग की।


शाह ने हाल में श्रीनगर में आतंकवादियों के हमले के शिकार शिक्षक दीपक चंद की पत्नी और भाई से भी मुलाकात की। केंद्रीय गृह मंत्री ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और उन्हें केंद्र से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। शाह ने गुर्जर-बकरवाल और पहाड़ी समुदायों के प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की।





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प्रधानमंत्री ने किया नौ मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन

लखनऊ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में स्थानीय मेडिकल कॉलेज समेत कुल नौ मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण किया।


मोदी ने सिद्धार्थनगर में बने मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ वहीं से एटा, हरदोई, प्रतापगढ़, फतेहपुर, देवरिया, गाजीपुर, मिर्जापुर और जौनपुर के मेडिकल कॉलेजों का भी डिजिटल माध्यम से लोकार्पण किया। इन मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कुल 2,329 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है।


इनमें से आठ मेडिकल कॉलेज केंद्र प्रायोजित योजना के तहत स्वीकृत किए गए हैं, जबकि जौनपुर में मेडिकल कॉलेज को राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से तैयार कराया है।


मोदी ने लोकार्पण कार्यक्रम में चित्र प्रदर्शनी तथा माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय के मॉडल को देखा। उन्होंने छायाचित्र प्रदर्शनी, बुद्ध का जीवन दृश्य एवं उत्खनित पुरास्थल कपिलवस्तु-एक झलक का अवलोकन भी किया। इस दौरान उनके साथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। यह देश के किसी प्रधानमंत्री का सिद्धार्थनगर का पहला दौरा है।


सिद्धार्थनगर में मेडिकल कॉलेजों के लोकार्पण के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में 'प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना' की शुरुआत करेंगे और वाराणसी के लिए 5,200 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे।


राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि पांच साल तक चलने वाली प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के लिए बजट में 64,180 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसकी घोषणा 2021-2022 के केंद्रीय बजट में की गई थी। मोदी सोमवार को वाराणसी के मेहदीगंज में एक जनसभा के दौरान इस योजना को राष्ट्र को समर्पित करेंगे।


प्रवक्ता ने बताया कि केन्द्र सरकार ने स्वस्थ भारत योजना के लिये चार-स्तरीय रणनीति बनाई है। जिसमें स्वच्छ भारत अभियान, योग, गर्भवती महिलाओं-बच्चों की समय पर देखभाल एवं उपचार जैसे उपायों सहित बीमारी की रोकथाम तथा स्वास्थ्य कल्याण को बढ़ावा देना है। साथ ही समाज के वंचित वर्ग के लोगों को सस्ता और प्रभावी इलाज मुहैया कराना और स्वास्थ्य अवसंरचना तथा स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की गुणवत्ता को बढ़ाना शामिल है।


इस योजना का उद्देश्य देश के सुदूर हिस्सों में प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक देखभाल स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता विकसित करना है। देश में ही अनुसंधान, परीक्षण और उपचार के लिये एक आधुनिक व्यवस्थित तंत्र विकसित करना है।


प्रवक्ता के मुताबिक इस योजना में 17,788 ग्रामीण तथा 11,024 शहरी स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के विकास के लिये समर्थन प्रदान करने तथा सभी ज़िलों में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं की स्थापना एवं 11 राज्यों में 3,382 ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों की स्थापना करने के लक्ष्य शामिल हैं। इसके अलावा 602 ज़िलों और 12 केंद्रीय संस्थानों में 'क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक' स्थापित करने में सहायता करना, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र तथा इसकी पांच क्षेत्रीय शाखाओं एवं 20 महानगरीय स्वास्थ्य निगरानी इकाइयों को मज़बूत करना भी इसका लक्ष्य है।




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राजनाथ सिंह के करीबी, बीजेपी नेता ने कानून की उड़ाई धज्जियाँ

गाज़ियाबाद : स्मिता यादव: वसुंधरा आवास विकास कॉलोनी में बीजीपी नेता ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद् अधिनियम-1965 कानून की उस धारा की धज्जियाँ उड़ा रहें है जिसके आधार पर आवास एवं विकास परिषद् द्वारा नेता जी के एक आवासीय प्लाट में दूसरे प्लाट को मर्ज़ कर मानचित्र के विपरीत भव्य ईमारत के हो रहे अवैध निर्माण को सील/ध्वस्तीकरण/ और एफ.आई.आर दर्ज कराई गई थी।


पहली बार 06/04/21 को नेता जी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था जिसमें सात दिन में निर्माण, जो प्लाट में प्रथम तल की छत अवैध डाली गई है हटाने की चेतावनी दी गई थी। और आज चार मंजिला ईमारत का ढांचा तेयार हो चुका है कागज़ी कार्यवाही के पूरा होने के साथ, बिल्डिंग का निर्माण भी पूरी हो जायेगा। 


कारण बताओ नोटिस का जवाब नही देने और निर्माण न हटानें के बाद दिनांक 17/05/20 को सक्षम अधिकारी द्वारा ध्वस्तीकरण अवैध निर्माण को गिराने का आदेश किया गया था।


अवैध निर्माण कार्य नही रुकने पर सक्षम अधिकारी द्वारा सहायक अभियन्ता व प्रभारी को 24/07/21 को निर्माण व उससे सम्बंद्ध सुविधा को सील एवं सम्बंधित प्रभारी निरीक्षक को निगरानी के आदेश देने का आदेश पारित किया था। 


अब शायद बीजेपी नेता के अवैध निर्माण की निगरानी पुलिस कर रही है जिससे कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए बिल्डिंग में और तेज़ी से अवैध निर्माण कार्य चल रहा है। हलाकि सील नोटिस में स्थानीय पुलिस द्वारा उक्त परिसर को पुलिस अभिरक्षा में लेने की बात कही गई है। देखना यह है कि जिम्मेदारी किसकी है। इसके बाद एफ.आई.आर भी की गई है लेकिन अवैध निर्माण को नही रोका गया। 


आवास विकास से सम्बंधित अधिकारी ने कहा कि उक्त प्रकरण में सम्बंधित एक्ट के अनुसार कार्यवाही पूरी हो चुकी हैं जिला प्रशासन से प्रशासनिक सहयोग / पुलिस बल हेतु अनुरोध किया गया है जैसे ही इस मामले में मजिस्ट्रेट नियुक्त किये जायेगे तो कार्रवाही की जाएगी। 


अखिल भारतीय उपभोक्ता परिषद् के महामंत्री एवं उपभोक्ता जनघोष मैगज़ीन के संपादक जाने आलम (जानू चौधरी) ने बताया कि उक्त मामले में आवास विकास परिषद् द्वारा कागज़ी कार्यवाही होती रही है सील/नोटिस में इस परिसर को पुलिस अभिरक्षा में लेने की बात कही गई है तो उक्त परिसर में कोई गतिविधि न हो यह पुलिस की जिम्मेदारी बनती है। आवास विकास परिषद् के अधिकारीयों ने कागज़ी कार्यवाही तो की है लेकिन अगर चाहते तो यह अवैध निर्माण नही हो पाता। क्योकि जिस कानून के तहत सील एवं ध्वस्तीकरण की शक्ति अधिकारीयों को मिलती है वही कानून अवैध निर्माण को रुकवाने की शक्ति भी देता है और मुझे लगता है कि अवैध निर्माण को रुकवाने के लिए किसी मजिस्ट्रेट की जरुरत नही है ध्वस्तीकरण के लिए मजिस्ट्रेट का होना जरुरी है। जानू चौधरी ने कहा कि जिलाधिकारी महोदय को मजिस्ट्रेट नियुक्ति में देरी से सम्बंधित पत्र लिखूंगा फिर शायद न्यायालय ही एक मात्र रास्ता बचेगा।


  



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रिलायंस का हरित ऊर्जा कारोबार ले रहा है आकार, कर-पूर्व लाभ में 10% योगदान देगा: रिपोर्ट

नई दिल्ली : मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. (आरआईएल) ने अपने हरित ऊर्जा कारोबार को आकार देने के लिए सौर, बैटरी और हाइड्रोजन क्षेत्र में निवेश की खातिर कई भागीदारियां की हैं। इनका अगले पांच साल में कंपनी के पूर्व-कर लाभ में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान रह सकता है। एक रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है।


गौरतलब है कि कंपनी ने आरईसी, नेक्सवेफ, स्टर्लिंग एंड विल्सन, स्टिसाल और अंबरी के साथ 1.2 अरब डॉलर की कुल लागत वाली साझेदारियों की घोषणा की है।


ब्रोकरेज कंपनी बर्नस्टीन ने एक रिपोर्ट में कहा है, "इन निवेश के साथ रिलायंस ने सौर, बैटरी और हाइड्रोजन के माध्यम से पूरी तरह से एकीकृत एंड-टू-एंड नवीकरणीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण शुरू करने के लिए विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी संबंधी पोर्टफोलियो हासिल कर लिया है।"


इसमें कहा गया, "रिलायंस अधिग्रहण की गयी प्रौद्योगिकियों का व्यावसायीकरण करेगी और भारत में विनिर्माण संयंत्र स्थापित करेगी।"


साथ ही कहा गया कि उम्मीद है कि रिलायंस स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए ईंधन सेल और प्रमुख सामग्री जैसी प्रौद्योगिकी में निवेश करना जारी रखेगी।


रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा अनुमान है कि नवीन ऊर्जा कारोबार वित्त वर्ष 2025-26 तक आरआईएल के ईबीआईटीडीए (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई) में करीब 10 प्रतिशत योगदान देगा।






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भारत बांड ईटीएफ से दिसंबर तक 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है सरकार

नई दिल्ली : सरकार भारत बांड ईटीएफ की अगली किस्त दिसंबर तक ला सकती है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।


अधिकारी ने बताया कि सरकार भारत बांड ईटीएफ से दिसंबर तक 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है। इस राशि का इस्तेमाल केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसई) की वृद्धि की योजना में किया जाएगा।


अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की कोष की जरूरत का आकलन किया जा रहा है और एक्सचेंज ट्रेडेड कोष (ईटीएफ) की तीसरी किस्त को चालू कैलेंडर वर्ष के अंत से पहले पेश किया जाएगा।


उन्होंने कहा, ''अभी हम इस राशि को अंतिम रूप दे रहे हैं। लेकिन यह 10,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी।''


भारत बांड ईटीएफ एक एक्सचेंज ट्रेडेड कोष है जो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बांड में निवेश करता है। ईटीएफ फिलहाल सिर्फ 'एएए' रेटिंग वाले बांड में निवेश करता है।


ईटीएफ के जरिये जुटाई गई राशि का इस्तेमाल सीपीएसई या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कर्ज जुटाने की योजना में होता है। इससे उनकी पूंजीगत व्यय की जरूरत को भी पूरा किया जाता है।




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पहले धारणा बन गई थी कि सेना व पुलिस जैसी सेवाएं केवल पुरुषों के लिए ही होती हैं : मोदी

नई दिल्ली :  महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में वृद्धि की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि 2014 में जहां इनकी संख्या 1.5 लाख के करीब थी, वहीं 2020 तक इसमें दोगुने से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।


प्रधानमंत्री ने आकाशवाणी पर प्रसारित मासिक कार्यक्रम ‘‘मन की बात’’ की ताजा कड़ी में अपने विचार साझा करते हुए उम्मीद जताई कि आगे और भी ज्यादा संख्या में महिलाएं पुलिस सेवा में शामिल होंगी और देश की पुलिस सेवा की नई पीढ़ी का नेतृत्व करेंगी।


उन्होंने कहा, ‘‘पहले यह धारणा बन गई थी कि सेना और पुलिस जैसी सेवा केवल पुरुषों के लिए ही होती है। लेकिन आज ऐसा नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या दोगुनी हो गई है। 2014 में जहां इनकी संख्या 1.5 लाख के करीब थी, वहीं 2020 तक इसमें दोगुने से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है और यह संख्या अब 2.15 लाख तक पहुंच गई है।’’


ज्ञात हो कि मोदी 2014 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे।


उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बलों में भी पिछले सात सालों में महिलाओं की संख्या लगभग दोगुनी हुई है और आज देश की बेटियां कठिन से कठिन कर्तव्य भी पूरी ताकत और हौसले से पूरा कर रही हैं।


इस क्रम में उन्होंने सबसे कठिन माने जाने वाले प्रशिक्षणों में एक विशिष्ट जंगल युद्ध कमांडो के प्रशिक्षण का उल्लेख किया और कहा कि आगे जाकर यह प्रशिक्षित बेटियां कोबरा बटालियन का हिस्सा बनेंगी।


उन्होंने कहा कि आज हवाई अड्डों से लेकर मेट्रो स्टेशनों तक या सरकारी दफ्तरों में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की जांबाज महिलाएं हर संवेदनशील जगह की सुरक्षा करते दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसका सबसे सकारात्मक असर हमारे पुलिस बल के साथ-साथ समाज के मनोबल पर भी पड़ रहा है। महिला सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी से लोगों में, विशेषकर महिलाओं में सहज ही एक विश्वास पैदा होता है। वे उनसे स्वाभाविक रूप से खुद को जुड़ा महसूस करती हैं। महिलाओं की संवेदनशीलता की वजह से भी लोग उन पर ज्यादा भरोसा करते हैं।’’


प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला पुलिसकर्मी आज देश की लाखों और बेटियों के लिए भी आदर्श बन रही हैं। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों से अनुरोध किया कि वे स्कूलों के खुलने के बाद अपने क्षेत्रों के स्कूलों में जाएं और बच्चियों से बात करें।


उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि इस बातचीत से हमारी नई पीढ़ी को एक नई दिशा मिलेगी। यही नहीं, इससे पुलिस पर जनता का विश्वास भी बढ़ेगा।’’


प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इससे आगे और भी ज्यादा संख्या में महिलाएं पुलिस सेवा में शामिल होंगी और पुलिस सेवा की भावी पीढ़ी का नेतृत्व करेंगी।


अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र स्थापना दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वैश्विक संस्था का एक अनोखा पहलू यह भी है कि उसका प्रभाव और उसकी शक्ति बढ़ाने में भारत की नारी शक्ति ने बड़ी भूमिका निभाई है।


इस कड़ी में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि रहीं हंसा मेहता और लक्ष्मी मेनन का उल्लेख किया और कहा कि लैंगिक समानता के लिए उन्होंने पुरजोर आवाज उठाई। उन्होंने विजया लक्ष्मी पंडित के संयुक्त राष्ट्र आम सभा की पहली महिला अध्यक्ष बनने का भी जिक्र किया।






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पाकिस्तान सरकार आईएमएफ की मांग पूरी करने को कृषि आय पर कर लगाने की सोच रही

नई दिल्ली :  पाकिस्तान सरकार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की मांग को पूरा करने के लिए कृषि आय पर संघीय कर लगाने पर विचार कर रही है और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह संविधान में संशोधन के बिना संभव है।


प्रस्ताव पर पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच चर्चा हो चुकी है और कानूनी संशोधन का मसौदा भी तैयार कर लिया गया है।


पाकिस्तान के कर अधिकारियों ने आईएमएफ को बताया है कि चौथे टैक्स कानून संशोधन अध्यादेश में कानूनी संशोधन पेश किया जा सकता है।


सूत्रों ने बताया कि समीक्षा वार्ता के दौरान आईएमएफ की एक बड़ी मांग कृषि क्षेत्र को संघीय कर के दायरे में लाने की थी।


हालांकि, दोनों पक्ष आर्थिक नीतियों के लिए ज्ञापन (एमईएफपी) पर सहमत नहीं हो पाए।


संघीय कानून और न्याय मंत्री फारोग नसीम ने द एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया, संविधान संशोधन के बिना कृषि आय को संघीय कर के दायरे में लाया जा सकता है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) के अध्यक्ष और वित्त सलाहकार पहले ही कानून मंत्री के साथ इस मुद्दे को उठा चुके हैं।


हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि देश में बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान प्रस्ताव को मंजूरी देंगे या नहीं।


रिपोर्ट में कहा गया है कि 1973 के संविधान के तहत, संघीय सरकार कृषि आय पर कर नहीं लगा सकती थी, क्योंकि मामला प्रांतीय क्षेत्र में आता था।


हालांकि, प्रांतीय सरकारें, समय के साथ, जमींदारों के प्रभाव के कारण इस मामले से बचती रहीं।


संघीय सरकार ने कानून मंत्रालय के परामर्श से एक समाधान खोजा है, जहां केवल 2001 के आयकर अध्यादेश में संशोधन करके कृषि आय पर संघीय आयकर लगाया जा सकता है।


उन्होंने कहा कि कर अधिकारी आयकर कानून की धारा 41 में संशोधन करके कृषि आय की परिभाषा को केवल फसलों से होने वाली आय तक सीमित रखने पर विचार कर रहे हैं।





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प्रधानमंत्री ने आर के लक्ष्मण की 100वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बहुमुखी प्रतिभा के धनी व प्रख्यात कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण को उनकी 100वीं जयंती पर याद किया और कहा कि अपनी रचनाओं के जरिए उन्होंने तत्कालीन सामाजिक व राजनीतिक सच्चाई को सुंदरता से प्रस्तुत किया।


प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, ''आर के लक्ष्मण की 100वीं जयंती पर मैं उन्हें याद कर रहा हूं। अपने कार्टूनों के जरिए उन्होंने तत्कालीन सामाजिक व राजनीतिक सच्चाई को सुंदरता से प्रस्तुत किया।''


उन्होंने वर्ष 2018 में ''टाइमलेस लक्ष्मण'' नामक पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर दिए गए अपने भाषण का एक वीडियो भी साझा किया।


24 अक्टूबर 1921 को कर्नाटक के मैसूर में जन्मे लक्ष्मण एक प्रमुख व्यंग्य चित्रकार थे और अपनी रचनाओं के जरिए उन्होंने आम आदमी की पीड़ा और सामाजिक विकृतियों को सामने रखने के साथ ही राजनीतिक व्यवस्था पर भी तंज कसे।


उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सम्मानों से नवाजा जा चुका है।






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देश में लगातार घट रही कोरोना के ऐक्टिव केसों की संख्या, इस समय महज 0.51 फीसदी मामलों में चल रहा इलाज

नई दिल्ली : भारत में एक दिन में कोविड-19 के 15,906 नए मामले आने से संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 3,41,75,468 पर पहुंच गई जबकि 561 और मरीजों के जान गंवाने से मृतकों की संख्या 4,54,269 पर पहुंच गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रविवार को सुबह आठ बजे तक अपडेटेड आंकड़ों के अनुसार, ऐक्टिव केसों की संख्या कम होकर 1,72,594 रह गई है। कोरोना वायरस के रोज आने वाले नए मामले लगातार 30वें दिन 30,000 से कम हैं और लगातार 119वें दिन 50,000 से कम हैं।


आंकड़ों के मुताबिक, उपचाराधीन मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों का 0.51 प्रतिशत है जो मार्च 2020 के बाद से सबसे कम है जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने वाले मरीजों की राष्ट्रीय दर 98.17 प्रतिशत दर्ज की गई जो मार्च 2020 के बाद से सबसे अधिक है।


मंत्रालय ने बताया कि कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में पिछले 24 घंटों में 1,134 मामलों की कमी दर्ज की गई है। शनिवार को कोविड-19 के लिए 13,40,158 नमूनों की जांच की गई और इसी के साथ ही देश में अब तक जांच किए गए नमूनों की संख्या 59,97,71,320 हो गई है। संक्रमण की दैनिक दर 1.19 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 1.23 प्रतिशत दर्ज की गई। इस बीमारी से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 3,35,48,605 हो गई है जबकि मृत्यु दर 1.33 प्रतिशत दर्ज की गई। देशव्यापी कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक 102.10 करोड़ खुराकें दी जा चुकी हैं।


देश में पिछले साल सात अगस्त को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त को 30 लाख और पांच सितंबर को 40 लाख से अधिक हो गई थी। वहीं, संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर को 50 लाख, 28 सितंबर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गए थे। देश में 19 दिसंबर को ये मामले एक करोड़ के पार, इस साल चार मई को दो करोड़ के पार और 23 जून को तीन करोड़ के पार चले गए थे।




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आईटीबीपी के 60वें स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री ने दी जवानों को बधाई

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के स्थापना दिवस पर रविवार को बल के कर्मियों को बधाई दी और कहा कि जब भी देश को उनकी जरूरत पड़ी उन्होंने अदम्य साहस व समर्पण के साथ जवाब दिया।


आईटीबीपी की स्थापना चीन के साथ 1962 के युद्ध के बाद की गई थी और इसमें करीब 90,000 जवान हैं।


मोदी ने आईटीबीपी के 60वें स्थापना दिवस पर एक ट्वीट में कहा, ‘‘अरूणाचल प्रदेश के घने जंगलों से लेकर हिमालय की बफीर्ली चोटियों तक हमारे आईटीबीपी के हिमवीरों ने देश के आह्वान पर अदम्य साहस व समर्पण दिखाया है।’’


बल के कर्मियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा,‘‘आपदा के समय बल की ओर से किए गए मानवीय कार्य सराहनीय हैं।’’


आईटीबीपी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की पांच शाखाओं में से एक है। यह उत्तरी सीमाओं पर निगरानी रखता है और सीमा उल्लंघन को रोकता है। यह अवैध आव्रजन, सीमा पार से तस्करी इत्यादी की निगरानी करता है और देश में शांति बनाए रखने में अहम भूमिका का निर्वाह करता है।





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मोदी सरकार ने जनता को कष्ट देने के रिकॉर्ड बनाए: प्रियंका ने ईंधन की कीमतों में वृद्धि पर कहा

नई दिल्ली : कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर रविवार को केंद्र पर हमला बोला और आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने जनता को ‘कष्ट’ देने के रिकॉर्ड बनाए हैं।


कांग्रेस नेता प्रियंका ने ट्विटर पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की जिसमें कहा गया है कि इस वर्ष पेट्रोल की कीमतों में रिकॉर्ड 23.53 रूपये की वृद्धि हुई है।


प्रियंका ने हिंदी में ट्वीट किया, ‘‘मोदी जी की सरकार ने जनता को कष्ट देने के मामले में बड़े-बड़े रिकॉर्ड बनाए हैं। सबसे ज्यादा बेरोजगारी: मोदी सरकार में, सरकारी संपत्तियां बिक रहीं: मोदी सरकार में, पेट्रोल की कीमतें एक साल में सबसे ज्यादा बढ़ीं: मोदी सरकार में।’’


कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी वही मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए सरकार पर हमला बोला और ट्वीट किया, ‘‘अच्छे दिन’’।


शनिवार को लगातार चौथे दिन पेट्रोल और डीजल कीमतों में बढ़ोतरी हुई। पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम 35-35 पैसे प्रति लीटर और बढ़ गए हैं। इस बढ़ोतरी के साथ मई, 2020 की शुरुआत से यानी 18 महीने से कम समय में पेट्रोल 36 रुपये लीटर महंगा हो चुका है। इस दौरान डीजल कीमतों में 26.58 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।


सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत 107.24 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल 95.97 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। 







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भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक सोमवार को; चुनाव, किसानों के प्रदर्शन पर चर्चा की संभावना

नयी दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सोमवार को बैठक होगी, जिसमें पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से लेकर किसानों के आंदोलन तथा कोविड-19 महामारी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।


भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में पार्टी प्रवक्ताओं के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाने वाले सभी नेता शामिल होंगे।


यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कोविड महामारी के कारण काफी अंतराल के बाद हो रही है तथा अगले महीने ही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी होनी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के प्रचार अभियान पर बैठक में व्यापक चर्चा होगी।


उन्होंने कहा कि तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन, लखीमपुर खीरी हिंसा और सिंघू बॉर्डर पर दलित समुदाय के एक व्यक्ति की हत्या पर भी बैठक में चर्चा हो सकती है।


विपक्ष ने लखीमपुर खीरी में हुयी हिंसा को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा पर खासा दबाव बनाने का प्रयास किया है। बैठक में कोरोना वायरस के खिलाफ चल रहे टीकाकरण अभियान पर भी चर्चा होने की संभावना है।




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भंवरी देवी हत्याकांड के आरोपी और अशोक गहलोत के धुर विरोधी पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा का निधन

जोधपुर :  कांग्रेस के कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के धुर विरोधी रहे महिपाल मदेरणा का रविवार सुबह जोधपुर में निधन हो गया। वे 69 साल के थे और कुछ समय से कैंसर से पीड़ित थे। जोधपुर जिले की भंवरी देवी के अपहरण और हत्या के मामले में उनको मंत्री पद से हटा दिया गया था। मदेरणा के शव को सुबह 10:00 बजे उनके पैतृक गांव चाडी ले जाया जाएगा। जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस के मजबूत नेता रहे और किसानों के मसीहा के नाम से पहचाने जाने वाले महिपाल मदेरणा का रविवार तड़के निधन हो गया। वह 69 साल के थे, और पिछले कुछ समय से कैंसर से पीड़ित है। मदेरणा का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव चाडी में किया जाएगा। महिपाल मदेरणा गहलोत सरकार में जल संसाधन मंत्री भी रहे थे लेकिन भंवरी देवी अपहरण और हत्या मामले में उनका नाम आने के बाद उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था जिसके बाद सीबीआई मैं मामले में उन्हें मुख्य आरोपी बताकर गिरफ्तार किया था तब से लेकर लंबे अरसे तक वे जेल में रहे जहां उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट दर्ज की गई।

मालूम हो कि पिछले 10 साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत उन्हें जमानत मिली थी जिसके बाद वह अपनी पत्नी लीला मदेरणा के जोधपुर जिला प्रमुख पद पर काबिज होने के बाद पहली बार सार्वजनिक समारोह में शामिल होने अपने पैतृक गांव चाडी और ओसियां विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे थे जहां किसान नेता को अपने बीच पाकर ग्रामीणों ने उनका बहुत जोरदार स्वागत किया था। महिपाल मदेरणा की पुत्री दिव्या मदेरणा वर्तमान में ओसिया से विधायक भी हैं।


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एसीएससी ने किसान प्रदर्शन स्थल पर 'लिंचिंग' के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को कहा

नई दिल्ली : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने दिल्ली-हरियाणा सीमा के पास कुंडली में किसानों के प्रदर्शन स्थल पर एक शख्स की भीड़ द्वारा हत्या (लिंचिंग) के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हरियाणा पुलिस से सख्त कार्रवाई करने को कहा है।


आयोग के प्रमुख विजय सांपला ने हरियाणा पुलिस से शुक्रवार को 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट भी देने को कहा।


दिल्ली-हरियाणा सीमा के पास कुंडली में किसानों के प्रदर्शन स्थल पर एक व्यक्ति की भीड़ ने हत्या की, उसके हाथ काट दिए और शव को वहां लगे धातु अवरोधक से बांध दिया। इस निर्मम घटना के लिए निहंगों के समूह को जिम्मेदार ठहराया गया है।


सांपला ने कहा कि मृतक की पहचान लखबीर सिंह के तौर पर हुई है जिसका ताल्लुक अनुसूचित जाति के समुदाय से था।


सांपला ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि एनसीएससी ने हरियाणा पुलिस से 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट मांगी है।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुई एक वीडियो क्लिप में, कुछ निहंग जमीन पर खून से लथपथ पड़े व्यक्ति के पास खड़े दिख रहे हैं। क्लिप में निहगों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि व्यक्ति को सिखों की पवित्र पुस्तक का अपमान करने की सजा दी गई है।


केंद्र के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाप दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि निहंगों के एक समूह ने इस निर्मम हत्या की जिम्मेदारी ली है।





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पंपोर मुठभेड़ में फंसा है लश्कर का कमांडर खांडे

श्रीनगर : आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर उमर मुश्ताक खांडे जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के पंपोर इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में फंस गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।


खांडे उन आतंकवादियों में शामिल है, जिन्हें इस साल अगस्त में पुलिस द्वारा एक हिटलिस्ट जारी किए जाने के बाद से सुरक्षा बल निशाना बना रहे हैं।


पुलिस महानिरीक्षक (कश्मीर) विजय कुमार ने ट्वीट किया कि खांडे इस साल की शुरुआत में श्रीनगर जिले के बघाट में दो पुलिसकर्मियों की हत्या की घटना में कथित रूप से शामिल था।


उन्होंने ट्वीट किया, ''श्रीनगर के बघाट में दो पुलिसकर्मियों की हत्या और आतंकवाद से जुड़े अन्य अपराधों में शामिल शीर्ष 10 आतंकवादियों में शामिल लश्कर का कमांडर उमर मुस्ताक खांडे पंपोर में फंसा है।







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‘जी 23’ को सोनिया की ‘नसीहत’: मुझसे मीडिया के जरिये बात करने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को पार्टी के ‘ जी 23’ समूह के नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि वह ही पार्टी की स्थायी अध्यक्ष हैं तथा उनके बात करने के लिए मीडिया का सहारा लेने की जरूरत नहीं हैं।


उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में यह भी बताया कि अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 30 जून तक पूरी की जानी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण ही इसे टालना पड़ा तथा अब इसकी रूपरेखा पेश की जाएगी।


कांग्रेस अध्यक्ष ने आगामी विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हमारे सामने कई चुनौतियां आएंगी, लेकिन अगर हम एकजुट रहते एवं अनुशासित रहते हैं और सिर्फ पार्टी के हित पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो मुझे पूरा विश्वास है कि हम अच्छा करेंगे।


सोनिया गांधी ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं।


उन्होंने संगठानात्मक चुनाव का हवाला देते हुए कहा, ‘‘पूरा संगठन चाहता है कि कांग्रेस फिर से मजबूत हो। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि एकजुटता हो और पार्टी के हित को सर्वोच्च रखा जाए। इन सबसे ऊपर आत्मनियंत्रण और अनुशासन की जरूरत है।


सोनिया गांधी ने कहा कि कोरोना संकट के कारण अध्यक्ष के चुनाव को लेकर समयसीमा बढ़ानी पड़ी थी।


उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘अगर आप मुझे बोलने की इजाजत दें तो मैं पूर्णकालिक और सक्रीय अध्यक्ष हूं...पिछले दो वर्षों में कई साथियों और खासकर युवा नेताओं ने नेतृत्व करने की जिम्मेदारी उठाई है और पार्टी की नीतियों को लोगों तक लेकर गए हैं।’’


उन्होंने जी 23 नेताओं को नसीहत देते हुए कहा, ‘‘मैंने सदा स्पष्टवादिता की सराहना की है। मुझसे मीडिया के जरिये बात करने की जरूरत नहीं है। इसलिए हम सभी यहां खुली और ईमानदार चर्चा करते हैं। लेकिन इस चाहरदीवारी से बाहर जो बात जाए वो सीडब्ल्यूसी का सामूहिक फैसला होना चाहिए।’’


सोनिया ने जम्मू-कश्मरीर में पिछले दिनों अल्पसंख्यकों की हुई हत्या की निंदा की और कहा कि दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने और इस केंद्रशासित प्रदेश में शांति एवं सौहार्द बहाल करने की जिम्मेदारी केंद्र की है।


उन्होंने लखीमपुर खीरी की घटना का हवाला देते हुए कहा कि इससे किसान आंदोलन को लेकर भाजपा की सोच का पता चलता है।


कांग्रेस के ‘जी 23’ समूह के नेताओं की ओर से पार्टी के भीतर संवाद की मांग किए जाने और हाल के महीनों में कई नेताओं के पार्टी छोड़ने की पृष्ठभूमि में सीडब्ल्यूसी की बैठक हो रही है।


पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल ने सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने की मांग की थी। आजाद ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि पार्टी से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए कांग्रेस कार्य समिति की तत्काल बैठक बुलाई जाए।


सिब्बल ने भी पार्टी की पंजाब इकाई में मचे घमासान के बीच पिछले दिनों पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाकर इस स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए तथा संगठनात्मक चुनाव कराए जाने चाहिए।





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प्रधानमंत्री मोदी ने नवीन पटनायक को दीं जन्मदिन की शुभकामनाएं

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को उनके 75वें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। बीजू जनता दल के प्रमुख पटनायक 2000 से ही पूर्वी राज्य ओडिशा के मुख्यमंत्री हैं और वह लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले मुख्यमंत्रियों में से एक हैं। एक ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए कहा, ‘‘ श्री नवीन पटनायक जी जन्मदिन की शुभकामनाएं। मैं प्रार्थना करता हूं कि वह लोगों की सेवा के लिए दीर्घायु हों और स्वस्थ रहें।’’





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पेट्रोल, डीजल की कीमतें में बढ़ोतरी जारी

नई दिल्ली : पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा और ईंधन की कीमतों में एक बार फिर 35 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ देश भर में इनके दाम अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए।


सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 105.14 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 111.09 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।


मुंबई में डीजल अब 101.78 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है, जबकि दिल्ली में इसके लिए 93.87 रुपये देने पड़ रहे हैं।


पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 35 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी का यह लगातार दूसरा दिन है। इससे पहले 12 और 13 अक्टूबर को दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था।


देश के ज्यादातर हिस्सों में पेट्रोल की कीमत पहले से ही 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर है, जबकि डीजल की दरें मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और बिहार सहित एक दर्जन राज्यों में 100 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर गई हैं।


स्थानीय करों और मालभाड़े के आधार पर विभिन्न राज्यों के बीच कीमतें अलग-अलग होती हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी ने दीं विजयादशमी की शुभकामनाएं

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विजयादशमी के पर्व पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘विजयादशमी के विशेष पर्व पर सभी को शुभकामनाएं।’’ विजयादशमी या दशहरा का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।





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देश में शांति और समृद्धि लेकर आए दशहरा: नायडू ने की कामना

नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि यह त्योहार देश में शांति, सद्भाव और समृद्धि लेकर आएगा। उपराष्ट्रपति सचिवालय ने नायडू के हवाले से ट्वीट किया, ‘‘विजयादशमी के पावन पर्व पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। दशहरा का पर्व हमें याद दिलाता है कि हमें अपने भीतर की आसुरी शक्तियों से लगातार लड़ने और अच्छाई एवं सद्भाव को बल देने की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ईश्वर करें, यह उत्सव हमारे देश के लिए शांति, सद्भाव और समृद्धि लेकर आए।’’






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कांग्रेस में नई हलचल- माजरा क्या है?

कांग्रेस के संकट पर चर्चा अब उबाऊ हो चला है, यह बहुत लम्बे समय से चला आ रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उनका यह संकट गहराता ही गया है. 2019 में राहुल गाँधी के इस्तीफ़ा के बाद से तो यह संकट ही दिशाहीन सा लगने लगा है. लेकिन इधर कांग्रेस पार्टी में घटी दो घटनाएं ध्यान खीचने वाली है, एक पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन और दूसरा कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी का पार्टी में शामिल होना. 


कांग्रेस पार्टी के लिए कैप्टेन अमरिंदर सिंह सरीखे नेता को मुख्यमंत्री पद से हटाना और कन्हैया, जिग्नेश जैसे ठोस विचारधारा वाले युवा नेताओं को पार्टी में शामिल करना कोई मामूली फैसला नहीं है. तो क्या इसे पार्टी पर राहुल और प्रियंका गांधी के नेतृत्व को स्थापित करने और उनके हिसाब के नयी कांग्रेस पार्टी गढ़ने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है? अगर ऐसा है तो कांग्रेस अपने इस अंतहीन से लगने वाले सकंट को एक मुकाम मिलने की उम्मीद कर सकती है. 


आज कांग्रेस पार्टी दोहरे संकट से गुजर रही है जो कि अंदरूनी और बाहरी दोनों हैं लेकिन अंदरूनी संकट ज्यादा गहरा है जिसके चलते पार्टी एक राजनीतिक संगठन के तौर पर काम नहीं कर पा रही है. पार्टी में लम्बे समय से चल रही पीढ़ीगत बदलाव की प्रक्रिया फंसी हुई है जिससे पार्टी के बैचैन युवा नेताओं में भगदड़ मची हुई है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के मुताबिक 2014 से 2021 के दौरान कांग्रेस पार्टी के करीब 399 नेता पार्टी छोड़ चुके हैं जिसमें 177 सांसद और विधायक शामिल हैं. दूसरी तरफ पुरानी पीढ़ी के नेता राहुल गाँधी के रास्ते का रोड़ा बने हुए हैं जिन्हें फिलहाल जी-23 समूह के रूप में जाना जा रहा है.


2019 की हार के बाद अपना इस्तीफ़ा देते समय राहुल गाँधी ने कांग्रेस नेताओं से जवाबदेही लेने, पार्टी के पुनर्गठन के लिये कठोर फ़ैसले लेने और गैर गांधी अध्यक्ष चुनने की बात कही थी. लेकिन इनमें से कुछ नहीं हो सका उलटे सबकुछ पहले से अधिक पेचीदा हो गया है. फिलहाल सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष हैं और राहुल गाँधी बिना कोई जिम्मेदारी लिये हुये पार्टी के सबसे बड़े और प्रभावशाली नेता बने हुये हैं. पार्टी में विचारधारा को लेकर भी भ्रम की स्थिति है. पार्टी नर्म हिन्दुतत्व व धर्मनिरपेक्षता/उदारवाद के बीच झूल रही है.


कांग्रेस के लिए बाहरी चुनौती के तौर पर मोदी-शाह की भाजपा और संघ परिवार तो पहले से ही हैं लेकिन अब कई क्षेत्रीय पार्टियां भी कांग्रेस के इस कमजोरी को अपने लिए एक मौके के तौर पर देख रही है, खासकर ममता बनर्जी की टीएमसी यानी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी जो कांग्रेस की जमीन पर अपने अखिल भारतीय मंसूबों के साकार होने की उम्मीद कर रही है. आम आदमी पार्टी तो पहले भी इस तरह के मंसूबे दिखाती रही है लेकिन इस बार ममता बनर्जी बहुत ही गंभीरता और योजनाबद्ध तरीके से इस दिशा में आगे बढ़ते हुए दिखाई पड़ रही हैं. इस काम में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उनके सारथी के रूप में दिखलाई पड़ रहे हैं. पिछले कुछ महीनों मेंटीएमसी असम, गोवा और मेघालय के कई कांग्रेस नेताओं को अपने खेमे में शामिल करने में कामयाब रही है. 


कांग्रेस भी इन सबसे अनजान नहीं है,पिछले दिनों कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा है कि वो कांग्रेस का स्थान लेकर खुद का “ममता” कांग्रेस बनाना चाहती हैं इसीलिए वे विभिन्न राज्यों के कांग्रेस नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर रही हैं. अधीर रंजन चौधरी द्वारा इस काम के लिए प्रशांत किशोर की संस्था आईपीएसी और टीएमसी के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगाया गया है. गौरतलब है कि पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी छोड़ कर तृणमूल में शामिल हुए गोवा कांग्रेस वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिन्हो फेलेरो ने बयान दिया था कि वे प्रशांत किशोर की सलाह पर टीएमसी में शामिल हुये हैं.


भारतीय राजनीति में अधिकतर समय विपक्ष मजबूत नहीं रहा है लेकिन मौजूदा समय की तरह कभी इतना निष्प्रभावी भी नहीं रहा है. इसमें कांग्रेस के कमजोरी की बड़ी भूमिका है. वैसे भी आज के दौर में विचारधारा के तौर पर भाजपा और संघ परिवार को असली चुनौती कांग्रेस और लेफ्ट से ही है. इस मामले में अन्य क्षेत्रीय पार्टियाँ भाजपा को कोई चुनौती पेश नहीं करती है. इसलिए आज कांग्रेस का संकट भारतीय राजनीति के विपक्ष का संकट बन गया है. 


आज विपक्ष के रूप में कांग्रेस का मुकाबला एक ऐसे दल से है जो विचारधारा के आधार पर अपनी राजनीति करती है.भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार अपने विचारधारा के आधार पर नया भारत गढ़ने में व्यस्त हैं. आजादी की विरासत और पिछले 75 वर्षों के दौरान प्रमुख सत्ताधारी दल होने के नाते कांग्रेस ने अपने हिसाब से भारत को गढ़ा था. अब उसके पास भाजपा के हिन्दुतात्वादी राष्ट्रवाद के मुकाबले कोई कार्यक्रम या खाका नजर नहीं आ रहा है. इसलिए कांग्रेस को अगर मुकाबले में वापस आना है तो उसे संगठन और विचारधारा दोनों स्तर पर काम करना होगा. उसे अपने जड़ों की तरफ लौटना होगा और आजादी के आन्दोलन के दौरान जिन मूल्यों और विचारों की विरासत उसे मिली थी उन्हें अपने एजेंडे में लाना होगा, उग्र और एकांकी राष्ट्रवाद के मुकाबले समावेशी और बहुलतावादी राष्ट्रवाद की अवधारणा को पेश करना होगा तभी जाकर वह अपनी खोई हुई जमीन दोबारा हासिल कर सकती है.


दूसरा बड़ा संकट लीडरशिप का है तमाम कोशिशों के बावजूद राहुल गाँधी पार्टी में अपना वर्चस्व स्थापित नहीं कर पाए हैं. पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के बाद भी आज पार्टी के सारे फैसले वही ले रहे हैं. साथ ही वे देश के “इकलौते” विपक्ष के नेता के तौर पर अकेले ही मोदी सरकार को घेरने की कोशिश करते रहते हैं. उनके इस कवायद में उनका पार्टी संगठन नदारद नजर आता है. जी-23 समूह के नेता राहुल गांधी के बिना किसी पद के इसी ऑथोरिटी पर सवाल उठा रहे हैं जिसे गैर-वाजिब भी नहीं कहा जा सकता है.


प्रशांत किशोर का इरादा भले ही कुछ भी रहा हो लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी को लेकर उनके द्वारा किये गये ट्वीट से असहमत नहीं हुआ जा सकता है जिसमें उन्होंने लिखा था कि ‘जो लोग लखीमपुर खीरी की घटना को पुरानी पार्टी के पुनर्जीवित करने के तौर पर देख रहे हैं, उन्हें बड़ी निराशा ही हाथ लगनी है क्योंकि पार्टी की बड़ी समस्याओं और संरचनात्मक कमजोरियों का कोई तात्कालिक समाधान नहीं है.’ अगर कांग्रेस अपने संकट को एक मुकाम देना चाहती है तो सबसे पहले उसे अपने तीन अंदरूनी संकटों विचारधारा, लीडरशिप और सांगठनिक बिखराव को हल करना होगा. 


-जावेद अनीस-



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जयंती विशेषः सादगी की प्रतिमूर्ति थे डा. अब्दुल कलाम

देश के महान् वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति, प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम) सच्चे अर्थों में ऐसे महानायक थे, जिन्होंने अपना बचपन अभावों में बीतने के बाद भी अपना पूरा जीवन देश और मानवता की सेवा में व्यतीत कर दिया। छात्रों और युवा पीढ़ी को दिए गए उनके प्रेरक संदेश तथा उनके स्वयं के जीवन की कहानी देश की आने वाले कई पीढ़ियों को भी सदैव प्रेरित करने का कार्य करती रहेगी।


न केवल भारत के लोग बल्कि पूरी दुनिया मिसाइल मैन डॉ. कलाम की सादगी, धर्मनिरपेक्षता, आदर्शों, शांत व्यक्तित्व और छात्रों व युवाओं के प्रति उनके लगाव की कायल थी। डॉ. कलाम देश को वर्ष 2020 तक आर्थिक शक्ति बनते देखना चाहते थे। पढ़ाई-लिखाई को तरक्की का साधन बताने वाले डॉ. कलाम का मानना था कि केवल शिक्षा के द्वारा ही हम अपने जीवन से निर्धनता, निरपेक्षरता और कुपोषण जैसी समस्याओं को दूर कर सकते हैं। उनके ऐसे ही महान विचारों ने देश-विदेश के करोड़ों लोगों को प्रेरित करने और देश के लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने का कार्य किया। उनका ज्ञान और व्यक्तित्व इतना विराट था कि उन्हें दुनियाभर के 40 विश्वविद्यालयों ने डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि प्रदान की।


तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में 15 अक्तूबर 1931 को जन्मे डॉ. कलाम छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए अक्सर कहा करते थे कि छात्रों के जीवन का एक तय उद्देश्य होना चाहिए और इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि वे हरसंभव स्रोतों से ज्ञान प्राप्त करें। छात्रों की तरक्की के लिए उनके द्वारा जीवन पर्यन्त किए गए महान् कार्यों को देखते हुए ही सन् 2010 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा उनका 79वां जन्म दिवस ‘विश्व विद्यार्थी दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया और तभी से डॉ. कलाम के जन्मदिवस 15 अक्तूबर को ही प्रतिवर्ष ‘विश्व विद्यार्थी दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है।


समय-समय पर युवाओं को दिए गए उनके प्रेरक संदेशों की बात करें तो वे कहा करते थे कि अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो पहले सूरज की तरह जलना सीखो। वे कहते थे कि अगर आप फेल होते हैं तो निराश मत होइए क्योंकि फेल होने का अर्थ है ‘फर्स्ट अटैंप्ट इन लर्निंग’ और अगर आपमें सफल होने का मजबूत संकल्प है तो असफलता आप पर हावी नहीं हो सकती। इसलिए सफलता और परिश्रम का मार्ग अपनाओ, जो सफलता का एकमात्र रास्ता है। डॉ. कलाम कहते थे कि आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते लेकिन अपनी आदतें बदल सकते हैं और निश्चित रूप से आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देंगी। वे हमेशा कहा करते थे कि महान सपने देखने वाले महान लोगों के सपने हमेशा पूरे होते हैं। उनका कहना था कि इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए कठिनाइयां बहुत जरूरी हैं। सपने देखना जरूरी है लेकिन केवल सपने देखकर ही उसे हासिल नहीं किया जा सकता बल्कि सबसे जरूरी है कि जिंदगी में स्वयं के लिए कोई लक्ष्य तय करें।


कलाम साहब कहते थे कि इस देश के सबसे तेज दिमाग स्कूलों की आखिरी बेंचों पर मिलते हैं। हम सबके पास एक जैसी प्रतिभा नहीं है लेकिन अपनी प्रतिभाओं को विकसित करने के अवसर सभी के पास समान हैं। सादगी की प्रतिमूर्ति डा. कलाम का व्यक्तित्व कितना विराट था, इसे परिभाषित करते कई किस्से भी सुनने को मिलते हैं।


ऐसी ही एक घटना उन दिनों की है, जब डीआरडीओ में ‘अग्नि’ मिसाइल पर काम चल रहा था और काम के दबाव के चलते उस प्रोजेक्ट से जुड़े हर व्यक्ति को अपने परिवार के साथ बिताने के लिए भी पर्याप्त समय नहीं मिलता था। उसी दौरान इसी प्रोजेक्ट से जुड़े डीआरडीओ में कार्यरत डॉ. कलाम के एक जूनियर वैज्ञानिक ने अपने बच्चों को एक प्रदर्शनी दिखाने ले जाने के लिए उनसे जल्दी घर जाने के लिए छुट्टी मांगी। डॉ. कलाम ने उसे इसकी अनुमति दे दी लेकिन उस दिन कार्य इतना ज्यादा था कि वह जूनियर वैज्ञानिक अपने काम में इस कदर लीन हो गया और उसे समय का पता ही न चला। दूसरी ओर कलाम साहब ने उसकी व्यस्तता को देखते हुए अपने प्रबंधक को बच्चों को प्रदर्शनी दिखाने के लिए भेज दिया। जब जूनियर वैज्ञानिक देर रात अपने घर पहुंचा, तब उसे कलाम साहब की इस महानता के बारे में ज्ञात हुआ। अगले दिन उनके समक्ष नतमस्तक होकर उसने इसके लिए उनका हृदय से आभार प्रकट किया।


डॉ. कलाम राष्ट्रपति जैसे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन रहते हुए भी आम लोगों से मिलते रहे। एक बार कुछ युवाओं ने उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की और इसके लिए उन्होंने उनके कार्यालय को चिट्ठी लिखी। चिट्ठी मिलने के बाद डॉ. कलाम ने उन युवाओं को अपने पर्सनल चैंबर में आमंत्रित किया और वहां न केवल उनसे मुलाकात ही की बल्कि उनके विचार, उनके आइडिया सुनते हुए काफी समय उनके साथ गुजारा।


जिस समय डॉ. कलाम भारत के राष्ट्रपति थे, तब वे एक बार आईआईटी के एक कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए पहुंचे। उनके पद की गरिमा का सम्मान करते हुए आयोजकों द्वारा उनके लिए मंच के बीच में बड़ी कुर्सी लगवाई गई। डॉ. कलाम जब वहां पहुंचे और उन्होंने केवल अपने लिए ही इस प्रकार की विशेष कुर्सी की व्यवस्था देखी तो उन्होंने उस कुर्सी पर बैठने से इनकार कर दिया, जिसके बाद आयोजकों ने उनके लिए मंच पर लगी दूसरी कुर्सियों जैसी ही कुर्सी की व्यवस्था कराई।


उनके मन में दूसरे जीवों के प्रति भी किस कदर करूणा और दयाभाव विद्यमान था, इसका अंदाजा इस घटनाक्रम से सहज ही लग जाता है। जब 1982 में वे डीआरडीओ के चेयरमैन बने तो उनकी सुरक्षा के लिए डीआरडीओ की सेफ्टी वाल्स पर कांच के टुकड़े लगाने का प्रस्ताव लाया गया लेकिन कलाम साहब ने यह कहते हुए उसके लिए साफ इनकार कर दिया था कि दीवारों पर कांच के टुकड़े लगाने से पक्षी नहीं बैठ पाएंगे और ऐसा करने की प्रक्रिया में पक्षी घायल भी हो सकते हैं। इस कारण उस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।


राष्ट्रपति जैसे बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी कलाम अपने बचपन के दोस्तों को नहीं भूलते थे। 2002 में राष्ट्रपति बनने के बाद जब एक बार वे तिरुअनंतपुरम के राजभवन में मेहमान थे, तब उन्होंने अपने स्टाफ को वहां के एक मोची और ढाबे वाले को खाने पर बुलाने का निर्देश दिया। सभी उनके इस निर्देश को सुनकर हैरान था। बाद में पता चला कि ये दोनों कलाम साहब के बचपन के दोस्त थे। दरअसल कलाम साहब ने अपने जीवन का बहुत लंबा समय केरल में ही बिताया था और उसी दौरान उनके घर के पास रहने वाले उस मोची तथा ढाबे वाले से उनकी दोस्ती हो गई थी। राष्ट्रपति बनने के बाद जब वे तिरुअनंतपुरम पहुंचे, तब भी वे अपने इन दोस्तों को नहीं भूले और उन्हें राजभवन बुलाकर उन्हीं के साथ खाना खाकर उन्हें इतना मान-सम्मान दिया।


डॉ. कलाम के जीवन के अंतिम पलों के बारे में उनके विशेष कार्याधिकारी रहे सृजन पाल सिंह ने लिखा है कि शिलांग में जब वह डॉ. कलाम के सूट में माइक लगा रहे थे तो उन्होंने पूछा था, ‘फनी गाय हाउ आर यू’, जिस पर सृजन पाल ने जवाब दिया ‘सर ऑल इज वेल’। उसके बाद डॉ. कलाम छात्रों की ओर मुड़े और बोले ‘आज हम कुछ नया सीखेंगे’ और इतना कहते ही वे पीछे की ओर गिर पड़े। पूरे सभागार में सन्नाटा पसर गया और इस प्रकार इस महान् विभूति ने दुनिया से सदा के लिए विदा ले ली।


-योगेश कुमार गोयल-

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)





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कृषि उत्पादकता में वृद्धि, खाद्यानों के उत्पादन में उत्तर प्रदेश बन रहा नम्बर वन

उत्तर प्रदेश का कृषि के क्षेत्र में देश में महत्वपूर्ण स्थान है। प्रदेश सरकार की कृषि एवं कृषक हितैषी नीतियों एवं योजनाओं का यह सुपरिणाम है कि गन्ना, चीनी एवं एथेनॉल के उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में लगातार चौथी बार प्रथम स्थान पर है। खाद्यान्न, गेहूं, आलू, हरी मटर, आम, आंवला तथा दुग्ध उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है। कृषि एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। सही समय पर बुआई, निराई, खाद देना, सिंचाई आदि इसके महत्वपूर्ण आगत हैं। इनमें भी सिंचाई का महत्व सर्वाेपरि है।


हमारे देश में कृषि को मानसून का जुआ कहा जाता है। जिस वर्ष मानसून की वर्षा अच्छी होती है, उस वर्ष खेती भी अच्छी होती है। जबकि मानसून के कमजोर होने से कृषि एवं कृषक दोनों दबाव में आ जाते हैं क्योंकि वर्षा के साथ फसलों की सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार द्वारा कृषि एवं कृषकों की सिंचाई की इसी समस्या के समाधान हेतु विगत साढ़े चार वर्षों में कई कार्य किये गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप जहां एक ओर प्रदेश के सिंचित क्षेत्रफल में वृद्धि हुई है वहीं दूसरी ओर खाद्यानों की उत्पादकता, पैदावार में बढ़ोत्तरी के माध्यम से कृषकों की आय में भी वृद्धि हो रही है।


उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार द्वारा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की वर्षों से लम्बित परियोजनाएं पूर्ण करायी गयी हैं। इनमें 46 वर्षों से लंबित बाण सागर परियोजना को पूर्ण कराकर 15 जुलाई 2018 को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसका उद्घाटन किया गया। इस परियोजना से मिर्जापुर एवं प्रयागराज जनपदों की 150132 हेक्टेअर कृषि भूमि सिंचित हो रही है तथा इससे 01 लाख 70 हजार से भी ज्यादा किसान लाभान्वित हो रहे हैं। बाण सागर परियोजना के पूर्ण होने से कृषि के अन्तर्गत सिंचित भूमि में वृद्धि होने से इन जनपदों में अब फसल क्षेत्र में वृद्धि, फसल उत्पादकता में बढ़ोतरी होने से कृषकों को आय वृद्धि में मदद मिल रही है। इसी के साथ पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल से ही लम्बित पहाड़ी बांध, बण्डई बांध, जमरार बांध, मौदहा बांध, पहुॅज बांध, लहचुरा बांध, गुण्टा बांध, रसिन बांध परियोजनाएं एवं जाखलौन पम्प नहर प्रणाली तथा सोलर पावर प्लांट की पुनर्स्थापना की लगभग 13 परियोजनाएं वर्तमान सरकार के साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में पूर्ण की गयी हैं। हर खेत को पानी, के लक्ष्य को पूरा करने हेतु पूर्ण की गई इन परियोजनाओं से प्रदेश में 3.77 लाख हेक्टेअर सिंचन क्षमता में वृद्धि हुई है एवं संबंधित क्षेत्रों में कृषि के साथ-साथ समग्र विकास को भी गति मिल रही है।


प्रदेश का बुन्देलखण्ड क्षेत्र सिंचाई एवं कृषि में बाकी प्रदेश से अपेक्षाकृत पिछड़ा रहा है। परन्तु प्रदेश की वर्तमान सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुन्देलखण्ड के विकास का खाका खींचा है एवं उसे रफ्तार देने के लिए विभिन्न परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। बुंदेलखण्ड में कृषि एवं कृषकों की समृद्धि सुनिश्चित करने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा बुंदेलखण्ड क्षेत्र में 19428 खेत तालाबों का निर्माण कराया गया है। यह खेत तालाब वर्षा जल संचयन के माध्यम से बुंदेलखण्ड के भूजल स्तर में भी सुधार आया है। साथ ही यह कृषकों की सिंचाई की समस्या को भी दूर करने में सहायक हो रहे हैं। बुंदेलखण्ड क्षेत्र के अंतर्गत ही प्रदेश की वर्तमान सरकार द्वारा सिंचाई, विद्युत आदि की 12 बड़ी परियोजनाएं पूर्ण करायी गयी है। इन परियोजनाओं से बुंदेलखण्ड क्षेत्र में 73345 हेक्टेयर सिंचन क्षमता का सृजन हुआ है तथा इसमें 5.92 मेगावाट सौर विद्युत भी उत्पादित हो रही है। इससे 65062 किसान लाभान्वित हुए हैं। सिंचाई क्षमता में वृद्धि तथा सौर ऊर्जा के उत्पादन से बुंदेलखण्ड भी शेष उत्तर प्रदेश के विकास से कदमताल मिलाकर समूचे प्रदेश की समृद्धि में अपना योगदान दे रहा है। बुंदेलखण्ड क्षेत्र में ही जल संसाधनों के विकास व उचित एवं पर्यावरण अनुकूल दोहन की क्षमता वृद्धि हेतु इजराइल के साथ ’इण्डो-इजराइल वाटर प्रोजेक्ट’ का एमओयू हस्ताक्षरित किया गया है।


प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2021-22 में प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वृद्धि से सम्बन्धित 12 परियोजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना के अन्तर्गत अब तक 12.61 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित हुई है। सरयू नहर परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश के 09 जनपदों- बहराइच, श्रावस्ती, गोण्डा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर व महराजगंज में सिंचाई सुविधाओं के सृजन हेतु 1982 में स्वीकृत हुई थी। वर्ष 2012 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। इसके पूर्ण होने पर 14.04 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित होगी तथा 29.74 लाख किसान इससे लाभान्वित होंगे। प्रदेश में बनी नहरों की क्षमता का पूरा उपयोग हो सके, इसके लिए समय-समय पर नहरों की सफाई, सिल्ट निकासी जरूरी है। प्रदेश की वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 01 लाख 49 हजार 802 किमी नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य कराया जा चुका है। वर्ष 2020-21 में ही 46000 किलोमीटर सिल्ट सफाई का कार्य कराया गया है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या के निराकरण हेतु वित्तीय वर्ष 2020-21 में 15100 किलोमीटर की लम्बाई में ड्रेनों की सफाई कराकर संबंधित क्षेत्रों को जलभराव से मुक्त कराया गया है।


प्रदेश के कई हिस्सों में प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ से फसलों व कृषि को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 523 तटबन्धों को सुरक्षित करके बाढ़ से बचाव हेतु ड्रेजिंग कार्य पूर्ण कराए गए है। विगत साढ़े चार वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बाढ़ से बचाव, सुरक्षा हेतु 688 परियोजनाएं पूर्ण की गयी हैं। वर्ष 2021-22 में 230 परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य है जिसके सापेक्ष 139 बाढ़ सुरक्षा की परियोजनाएं पूर्ण चुकी हैं। इन परियोजनाओं से बाढ़ से प्रतिवर्ष होने वाली व्यापक जन-धन की हानि तथा खेती व पशुओं को होने वाला नुकसान कम हुआ है। इनके अतिरिक्त बाढ़ नियंत्रण व सुरक्षा की 184 नवीन परियोजनाओं के सापेक्ष 734.48 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है व इनका निर्माण प्रारम्भ हो चुका है। प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 25050 पुल-पुलियों का जीर्णाेद्धार, पुनर्निर्माण व नवनिर्माण का अभियान भी चलाया जा रहा है। जिस पर 300 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है। यह कार्य भी अपने अंतिम चरण में है। प्रदेश के 16 जनपदों में उत्तर प्रदेश वाटर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना फेज-2 के अन्तर्गत सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने हेतु भी सरकार कार्य कर रही है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर प्रदेश के 16 जनपदों में 1.62 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित होगी तथा इससे 7.10 लाख से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। इस परियोजना से लाभान्वित होने वाले जनपदों में बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, ललितपुर, एटा, फिरोजाबाद, कासगंज, मैनपुरी, फर्रूखाबाद, इटावा, कन्नौज, औरैया, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर एवं कौशाम्बी है।


प्रदेश में नाबार्ड द्वारा वित्तपोषित नवीन राजकीय नलकूप निर्माण परियोजना के अन्तर्गत 633.7882 करोड़ रुपये से 1960 नवीन राजकीय नलकूपों का निर्माण कराया गया है। जिससे 98000 हेक्टेयर सिंचन क्षमता का सृजन हुआ है तथा 96089 किसान लाभान्वित हो रहे हैं। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अबतक निःशुल्क बोरिंग/उथले नलकूप योजना के तहत कुल 424627 कार्य पूर्ण कराए जा चुके हैं। लगभग 4032 गहरे नलकूप तथा 13299 मध्यम गहरे नलकूपों का निर्माण पूरा कराया गया है। इसी प्रकार 729 सामूहिक नलकूप, 1261 ब्लास्ट कूप तथा 682 तालाबों व 977 चेकडैम के निर्माण द्वारा 955326 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि में सिंचन क्षमता का सृजन किया जा चुका है। प्रदेश में पीएम कुसुम योजना के अन्तर्गत 20177 सोलर पम्पों की स्थापना की गयी है। इससे कृषकों के विद्युत बिलों को कम करने में सहायता मिली है तथा विद्युत की मांग में भी कमी आयी है। प्रदेश में ’’पर ड्राप, मोर क्राप’’ (प्रतिबूंद अधिक फसल) की संभावनाओं की वृद्धि हेतु माइक्रो इरिगेशन के अन्तर्गत स्प्रिंक्लर सिंचाई को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जो जलसंचयन व गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को प्रेरित कर रही है।


जब हर खेत को पानी मिलेगा तब हमारी कृषि व हमारे अन्नदाता दोनों की समृद्धि सुनिश्चित है। प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में प्रदेश की कृषि के उन्नयन व कृषकों की खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वृद्धि के उपर्युक्त उल्लिखित कार्य प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में निरन्तर ऊंचाई पर ले जा रहे हैं।


-अम्बरीष कुमार सक्सेना-

(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से जुड़े हैं)





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सावरकर पर हमला क्यों ?

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर पर एक पुस्तक का विमोचन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सावरकर पर किए जानेवाले आक्षेपों का कड़ा प्रतिवाद किया है। उन्होंने सावरकर को बेजोड़ राष्ट्रभक्त और विलक्षण स्वातंत्र्य-सेनानी बताया है लेकिन कई वामपंथी और कांग्रेसी मानते हैं कि सावरकर माफी मांगकर अंडमान-निकोबार की जेल से छूटे थे, उन्होंने हिंदुत्व की संकीर्ण सांप्रदायिकता फैलाई थी।


गांधी-हत्याकांड में सावरकर को भी फंसा लिया गया था लेकिन उन्हें ससम्मान बरी करते हुए जस्टिस खोसला ने कहा था कि इतने बड़े आदमी को फिजूल ही इतना सताया गया। स्वयं गांधीजी सावरकर से लंदन के ‘इंडिया हाउस’ में 1909 में मिले और 1927 में वे उनसे मिलने रत्नागिरी में उनके घर भी गए। दोनों में अहिंसा और उस समय की मुस्लिम सांप्रदायिकता को लेकर गहरा मतभेद था। सावरकर अखंड भारत के कट्टर समर्थक थे लेकिन जिन्ना के नेतृत्व में खड़े दो राष्ट्रों की सच्चाई को वे खुलकर बताते थे। वे मुसलमानों के नहीं, मुस्लिम लीगियों के विरोधी थे।


हिंदू महासभा के अपने अध्यक्षीय भाषणों में उन्होंने सदा हिंदुओं और मुसलमानों के समान अधिकार की बात कही। उनके विश्व प्रसिद्ध ग्रंथ ‘1857 का स्वातंत्र्य-समर’ में उन्होंने बहादुरशाह जफर, अवध की बेगमों तथा कई मुस्लिम फौजी अफसरों की बहादुरी का मार्मिक वर्णन किया है। जब वे लंदन में पढ़ते थे तो आसफ अली, सय्यद रजा हैदर, सिकंदर हयात खां, मदाम भिकायजी कामा वगैरह उनके अभिन्न मित्र होते थे। उन्होंने खिलाफत आंदोलन का विरोध जरूर किया। गांधीजी उसके समर्थक थे लेकिन वही आंदोलन भारत-विभाजन की नींव बना।


सावरकर की विचारधारा पर आर्यसमाज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद और उनके भक्त श्यामजी कृष्ण वर्मा का गहरा प्रभाव था। वे ऐसे मुक्त विचारक और बुद्धिजीवी थे कि उनके सामने विवेकानंद, गांधी और आंबेडकर भी कहीं-कहीं फीके पड़ जाते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी उनके सभी विचारों से सहमत नहीं हो सकता। सावरकर के विचारों पर यदि मुल्ला-मौलवी छुरा ताने रहते थे तो पंडित-पुरोहित उन पर गदा प्रहार किया करते थे।


जहां तक सावरकर द्वारा ब्रिटिश सरकार से माफी मांगने की बात है, इस मुद्दे पर मैंने कई वर्षों पहले ‘राष्ट्रीय संग्रहालय’ के गोपनीय दस्तावेज खंगाले थे और अंग्रेजी में लेख भी लिखे थे। उन दस्तावेजों से पता चलता है कि सावरकर और उनके चार साथियों ने ब्रिटिश वायसराय को अपनी रिहाई के लिए जो पत्र भेजा था, उस पर गवर्नर जनरल के विशेष अफसर रेजिनाल्ड क्रेडोक ने लिखा था कि सावरकर झूठा अफसोस जाहिर कर रहा है। वह जेल से छूटकर यूरोप के आतंकवादियों से जाकर हाथ मिलाएगा और सरकार को उलटाने की कोशिश करेगा।


सावरकर की इस सच्चाई को छिपाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कई बार की गई। अंडमान-निकोबार जेल से उनकी नामपट्टी भी हटाई गई लेकिन मैं तो उस कोठरी को देखकर रोमांचित हो उठा, जिसमें सावरकर ने बरसों काटे थे और जिसकी दीवारों पर गोदकर सावरकर ने कविताएं लिखी थीं।



-डॉ. वेदप्रताप वैदिक-

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने स्तंभकार हैं।)




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महबूबा मुफ्ती, आर्यन खान और भारत में मुसलमान

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का कहना कि आर्यन खान (अभिनेता शाहरुख खान के बेटे) को इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि वह मुसलमान है। केंद्रीय एजेंसियां 23 साल के लड़के के पीछे इस वजह से पड़ी हैं क्योंकि उसका उपनाम खान है। बीजेपी के कोर वोट बैंक की इच्छाओं को पूरा करने के लिए मुसलमानों को निशाना बनाया जाता है। वास्तव में उनके इस भड़काऊ बयान ने आज यह सोचने पर विवश कर दिया है कि मुसलमानों को भ्रमित करने के लिए उनके बीच ऐसे नेता मौजूद हैं, फिर भारत को किसी बाहरी दुश्मन की आवश्यकता नहीं है।


महबूबा मुफ्ती ने सच पूछिए तो ऐसा कर भारत के संविधान और उसकी न्याय व्यवस्था का मजाक बनाया है। आश्चर्य है जिस देश ने उन्हें इतना सबकुछ दिया उसकी धर्मनिरपेक्षता पर वे प्रश्नचिन्ह खड़ा भी कैसे कर सकती है ? शायद वह भूल जाती हैं कि बहुसंख्यक हिन्दुओं के भारत में सबसे ज्यादा स्वतंत्रता एवं जन अधिकार तो अल्पसंख्यकों को ही दिए गए हैं, जितने की किसी अन्य देश में उन्हें नहीं मिले हैं, जहां बहुसंख्यक मुसलमान नहीं हैं। अच्छा होता वे आरोप लगाने के पहले यह भी देख लेतीं कि आर्यन खान अकेला नहीं है, जिस पर कानून का शिकंजा कसा है, उसके साथ जो अन्य जेल में हैं, वे मुसलमान नहीं धर्म से हिन्दू हैं। ध्यान रहे, भारत का कानून किसी के साथ नस्ल, जाति, धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता। अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता, वह अपराधी होता है, इसलिए कानून का उल्लंघन किया है तो सजा मिलेगी ही। कम से कम एक राज्य की जो मुख्यमंत्री रह चुकी हैं ऐसी महबूबा मुफ्ती को इतना तो पता ही होना चाहिए।


गौर करें, दिल्ली की तंग गलियों से निकला मध्यमवर्गीय परिवार का एक लड़का बॉलीवुड का किंग खान बन जाता है, यह केवल मुस्लिम दर्शकों की वजह से संभव नहीं हुआ है। आरोप लगाने के पहले मुफ्ती को यह भी ध्यान रखना था। फिर ऐसा पहली बार नहीं है कि बॉलीवुड में किसी की गिरफ्तारी इस तरह से हुई है, इसके पहले भी संजय दत्त जेल की यात्रा करके आ चुके हैं, उनके नाम के पीछे खान नहीं था। अभी हाल ही में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एसीबी) द्वारा सूरज, भारती, हर्ष लिम्बाचिया, रिया चक्रवर्ती, शोभित चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया था। भाजपा के बड़े नेता रहे प्रमोद महाजन के बेटे राहुल महाजन को भी ड्रग्स लेने के आरोप में जेल जाना पड़ा था। ऐसे अनेक मामले हैं जहां हिंदू आरोपी बने हैं।


एक केस यह भी है, जिसमें कि हिन्दू सनातन धर्म के ध्वजवाहक शंकराचार्य पर आरोप लगता है। 11 नवंबर 2004 को कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को एक हत्याकांड की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया जाता है। 27 नवंबर 2013 को इस मामले नियुक्त किए गए मुख्य जज सीएस मुरुगन ने अपना फैसला देते हुए शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती सहित सभी 24 आरोपियों को बरी कर दिया था, जयेंद्र सरस्वती को शंकर रमन हत्याकांड से नौ साल बाद बरी किया गया था। शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती अपराधी नहीं थे, फिर भी उन्होंने दो महीने जेल में बिताए। तब किसी मुफ्ती, नवाब मलिक की प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई थी, क्योंकि हिंदू भारत का बहुसंख्यक वर्ग है और संविधान तथा न्यायपालिका के सम्मान की जिम्मेदारी उसी ने ले रखी है ? जबकि यहां तो आर्यन खान के जेल में पहुंचने केवल तीन दिन बाद से ही अल्लाह हू अकबर का कार्ड खेला जाने लगा है।


यहां समझने की बात यह है कि जब किसी को योजना से आरोपित बना दिया जाए तब भी कानून उसकी तह में जाता है और सच का पता लगाने में जितना वक्त लग सकता है उतना समय लगाता ही है। फिर आर्यन के मामले में तो यह पूरी तरह से सच है कि जब तीन अक्टूबर को गोवा जा रहे क्रूज पर छापेमारी के दौरान एनसीबी ने प्रतिबंधित पदार्थ ड्रग्स बरामद किया तब वे वहां थे, उनके साथ मुनमुन धमेचा और अरबाज मर्चेंट मौजूद थे। इस मामले में दूसरे दिन पांच अन्य आरोपियों को भी अरेस्ट किया गया। सभी को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आर्यन को घर से नहीं मुंबई से गोवा जा रहे क्रूज शिप से गिरफ्तार किया था, ऐसे में इस पूरे मामले को धार्मिक रंजिश का रूप देने की कोशिश करना ठीक नहीं है। फिर वह चाहे महबूबा मुफ्ती हो या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नवाब मलिक।


सरकार किसी की भी हो, पर यह ध्यान रहना चाहिए कि प्रशासनिक तंत्र और न्यायपालिका अपना कार्य करने के लिए स्वतंत्र हैं। अल्पसंख्यक होने का मतलब यह नहीं है कि आप गलत करें और सहानुभूति का दांव खेलकर आपको छोड़ दिया जाए। भारत में किसी को भी इस तरह से इजाजत नहीं दी जा सकती कि वे किसी भी सामान्य मामले का सांप्रदायिकरण करें। सच पूछा जाए तो यहां महबूबा मुफ्ती और नवाब मलिक के इस तरह के बयान कश्मीर घाटी में हिंदुओं के पहचान पत्र देखकर उन को मौत के घाट उतार देने जैसी विचारधारा के पक्ष को मजबूत करती दिखाई देती है। आज तक आतंकवादियों के कारण कश्मीर से केवल हिंदू विस्थापित हुए, मुस्लिम को तो वहां किसी प्रकार का डर नहीं लगता। एक धर्म विशेष की संख्या लगातार बढ़ रही है और एक धर्म के लोगों का वहां से पलायन हो रहा है । महबूबा मुफ्ती यहां क्यों नहीं कहतीं कि कश्मीर घाटी में हिन्दुओं पर मुसलमान अत्याचार कर रहे हैं, क्योंकि वे इस राज्य में अल्पसंख्यक हैं। पता है, महबूबा ऐसा कभी नहीं बोलेंगी, क्योंकि उन्हें मानवीयता की बात नहीं, उन्हें तो हिन्दू-मुसलमान करके अपना राजनीतिक लाभ लेना है।


आज यह यक्ष प्रश्न है, स्वाधीनता के संघर्ष के समय से लेकर आज तक भाईचारा बनाए रखने के लिए हिंदू ही अग्निपरीक्षा क्यों दें ? पश्चिम बंगाल में मोहर्रम और दुर्गा विसर्जन का एक ही दिन होने पर दुर्गा विसर्जन को रोक देने का सरकार का आदेश क्यों ? केवल मुस्लिमों को खुश करने के लिए। पर आज तो बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक का कार्ड खेलकर कार्यपालिका और न्यायपालिका पर दबाव बनाया जाना तो वास्तव में सत्ता पाने के लालच की पराकाष्ठा है। यह एक तरह से अप्रत्यक्ष रूप से धमकाना और ब्लैकमेलिंग भी है। यदि आने वाले समय में इस मामले में कहीं प्रदर्शन के दौरान दुर्घटना घटती है तो इसका जिम्मेदार नवाब मलिक और महबूबा मुफ्ती जैसे लोगों को ठहराया जाना चाहिए। क्योंकि ऐसे ही लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए किसी सामान्य से प्रकरण को भी हिन्दू-मुस्लिम बना देते हैं।


इस पूरे प्रकरण में शाहरुख का यह कहना कि वे शर्मिंदा हैं जो वह अपने बेटे को सही तरीके से परवरिश नहीं दे सके, यह दर्शाता है कि उनका बेटा जहां मिला वहां उसे नहीं होना चाहिए था और वह उसे सुधारने का प्रयत्न करेंगे। इसके पहले भी राज बब्बर का बेटा प्रतीक बब्बर, फिरोज खान का बेटा फरदीन खान, संजय खान का दामाद डीजे अकील, विजय राज आदि भी ड्रग्स लेते हुए पकड़े गए थे, लेकिन इन सभी ने अपनी गलती को राजनीतिक रंग देने की जगह इसे सुधारने के लिए प्रयास किए। नशामुक्ति केंद्र जाकर नशे से मुक्ति पाई और अपनी नई जिंदगी शुरू की। बेहतर होता कि राजनीतिक हस्तियां जो शासन चलाती हैं, वे सभी आर्यन जैसे अनेक नौजवानों को नशे के दलदल से बाहर निकालने के लिए नीतियां बनाएं, जिससे यह नौजवान ना केवल अपना भविष्य बनाएं बल्कि युवा ऊर्जा का उपयोग भारत के बेहतर कल के लिए भी करें ।


-डॉ. निवेदिता शर्मा-

(लेखिका किशोर न्याय बाल कल्याण समिति की पूर्व सदस्य हैं।)



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किसान आंदोलन : सिंघु बार्डर पर एक युवक की बेरहमी से हत्या, हाथ काटकर शव बैरिकेड से लटकाया

नई दिल्ली :  तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में लगातार 10 महीने से जारी किसानों के धरना प्रदर्शन के बीच दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बार्डर पर एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां पर एक युवक की पहले तो बेरहमी से हत्या की गई फिर उसके हाथ काटकर लटका दिया गया। इस बाबत शुक्रवार सुबह से ही इस घटना के बाबत कई तस्वीरें वायरल हैं, जिसमें इसमें साफ देखा जा सकता है कि सिंघु बार्डर पर एक युवक के दोनों हाथों को बांधकर लटकाया गया है और इस युवक की मौत की जानकारी सामने आ रही है। 

बृहस्पतिवार रात को दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बार्डर पर कुछ लोगों ने एक अनजान व्यक्ति का दाहिना हाथ काट कर मार दिया। इसके बाद शव को किसानों के धरना स्थल के पास ले जाकर 'सूली' पर लटका दिया। युवक को मारने और हाथ काटकर सूली पर लटकाने का आरोप निहंगों पर लगा है। इनका कहना है कि इस युवक ने हमारे गुरु ग्रंथ साहिब का अंग भंग किया। हालांकि, जान गंवाने इस व्यक्ति की अभी शिनाख्त नहीं हुई है। 

निहंगों का यह भी कहना है कि इस शख्स को  30,000 रुपये देकर किसी ने ऐसा करने के लिए भेजा था। आरोप है कि बृहस्पतिवार रात में ही निहंगों ने इस कृत्य की वीडियो भी बनाई। फिर इसे शुक्रवार सुबह वायरल किया। बताया जा रहा है कि आरोपित निहंगों ने ऐसा जानबूझकर किया है।

कहा जा रहा है कि युवक की हत्या बृहस्पतिवार रात को ही की गई, उसके बाद शुक्रवार सुबह 5:30 बजे संयुक्त किसान मोर्चा की मुख्य स्टेज के पास करीब 100 किलोमीटर घसीट कर निहंगों के ठिकाने यानी फोर्ड एजेंसी के पास शव को लाया गया। इसके बाद सुबह 6:00 बजे शव को लटकाया गया है, ताकि लोग देख सकें। वहीं, प्रबंधक थाना रवि कुमार मौके पर पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

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दशहरा : आज अपने प्रियजनों और दोस्तों को भेजें दशहरा के शुभकामना संदेश

दशहरा बुराई पर अच्छाई एवं असत्य पर सत्य के विजय का प्रतीक है। हर वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा का पावन त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष दशहरा का पावन पर्व आज 15 अक्टूबर दिन शुक्रवार को है। दशहरा के दिन लोग बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण एवं मेघनाद के पुतलों का दहन करते हैं और साथ ही अपने अंदर बुरी आदतों को दूर करने का प्रण लेते हैं। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने आश्विन शुक्ल दशमी को रावण का वध किया था, वहीं मां दुर्गा इसी तिथि को महिषासुर का अंत कर महिषासुरमर्दिनि कहलाईं। इन वजहों से हर वर्ष आश्विन शुक्ल दशमी को दशहरा या विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। आप भी इस पावन पर्व पर अपने मित्रों, परिजनों एवं शुभचिंतकों को दशहरा की बधाई एवं शुभकामना संदेश दें, ताकि वे भी अपनी बुराइयों पर विजय हासिल कर सफलता और तरक्की प्राप्त करें।


दशहरा  की शुभकामना संदेश

1- आज आरंभ समय है सुखों का,

हो अंत आपके सारे दुखों का,

हो जाए खात्मा सारी बुराई का,

आने वाला वक्त हो बस अच्छाई का।


2- इससे पहले की दशहरे की शाम हो जाए,

मेरा मैसेज औरों की तरह आम हो जाए,

सारे मोबाइल नेटवर्क जाम हो जाएं,

और दशहरा विश करना आम हो जाए।


3- आज आया है दशहरा का है पावन त्योहार,

आपको हमेशा मिले खुशियां और बेशुमार प्यार,

करें मां दुर्गा और श्री राम आप पर कृपा अपार।


5- बुराई का होता है विनाश,

दशहरा लाता है उम्मीद की आस,

रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश,

सफलता और तरक्की के साथ यह दशहरा हो खास।


6- इस देश में सत्य स्थापित कर,

हर बुराई को मिटाना होगा,

आतंकी रावण का दहन करने,

आज फिर राम को आना होगा।

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