वर्चुअल असिस्टेंट का बढ़ रहा ट्रेंड, यहां आपको मिलेंगे नौकरी के मौके

आमतौर पर ऑफिस में जिस तरह के कार्य पर्सनल असिस्टेंट करते हैं, कमोबेश उसी तरह का कार्य वर्चुअल असिस्टेंट का भी होता है। आजकल इस तरह की नौकरी का ट्रेंड भी बढ़ता जा रहा है। अगर अंग्रेजी भाषा पर पकड़ के साथ इंटरपर्सनल और आर्गेनाइजेशनल स्किल अच्छी है, तो फिर घर बैठे वर्चुअल असिस्टेंट की नौकरी कर कमाई की जा सकती है। आइए जानते हैं कहां वर्चुअल असिस्टेंट की जॉब खोज सकते हैं?


बेलेय: वर्चुअल असिस्टेंट की जॉब के लिए आप इस साइट पर विजिट कर सकते हैं। यह साइट अलग-अलग कार्यों के लिए वर्चुअल असिस्टेंट को हायर करती है। लेकिन यहां पर कार्य हासिल करने के लिए बैचलर डिग्री के साथ एडमिनिस्ट्रेटिव सपोर्ट का एक्सपीरियंस होना जरूरी है। इससे जॉब हासिल करने में मदद मिल सकती है। इस प्लेटफॉर्म से जुड़े अधिकतर क्लाइंट यूएस बेस्ड हैं, इसलिए आपको वहां के ऑफिस टाइम के मुताबिक उपस्थित रहना होगा। वर्चुअल असिस्टेंट की जॉब हासिल करने के लिए पहले आपको इंटरव्यू पास करना होगा।


फेंसीहैंड्स: इस साइट के जरिए भी वर्चुअल असिस्टेंट की नौकरी हासिल की जा सकती है। वर्चुअल असिस्टेंट के तौर पर फोन कॉल, अपॉइंटमेंट्स शेड्यूल करने, डाटा एंट्री के साथ दूसरे कार्य करने होते हैं। यहां पर उन लोगों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है, जिनकी कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होने के साथ-साथ उनके घर पर कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन भी हो। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्र की जानकारी भी होनी चाहिए। दरअसल, मार्केट के अनुसार इस जॉब के लिए खुद को अपडेट रखना बहुत जरूरी है, तभी जल्दी कामयाबी मिल सकती है। यहां पर पेमेंट टास्क के हिसाब से होता है, जो 3-7 डॉलर पर टास्क है।


जिप रिक्रूटर: वर्चुअल असिस्टेंट की नौकरी के लिए इस साइट की मदद भी ली जा सकती है। यहां पर वर्चुअल असिस्टेंट के लिए अलग से सेक्शन दिया गया है, जहां से इस तरह की नौकरी को सर्च किया जा सकता है। इसके अलावा, यहां पर अलग-अलग फील्ड के लिए भी जॉब सर्च का ऑप्शन मौजूद है।


स्किल्स, क्राइटेरिया, फिल्टर्स आदि के आधार पर जॉब सर्च की सुविधा दी गई है। अगर जॉब प्रोफाइल से मैच करता है, तो यह आपको उसकी जानकारी नोटिफिकेशन के जरिए देता है। यहां रिज्यूमे को डाउनलोड करने की सुविधा भी मिलती है और बस एक क्लिक में जॉब के लिए अप्लाई भी कर सकते हैं। यहां पर वर्चुअल असिस्टेंट के अलावा, नर्सिंग, लॉजिस्टिक्स, जर्नलिज्म, पार्टटाइम, रिमोट आदि नौकरियों को भी सर्च किया जा सकता है। इस एप्लिकेशन को एंड्रॉयड और आइओएस डिवाइस के लिए डाउनलोड कर सकते हैं।




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टैटू मेकिंग में बना सकते है आप करियर

अगर आप भी फैशन की दुनिया में अपना नाम कमाना चाहते हैं और कुछ हटकर करना चाहते हैं, तो टैटू मेकिंग आपके लिए बेस्ट करिअर हो सकता है क्योंकि युवाओं और सेलिब्रिटीज तो इसके दीवाने हैं. इसलिए इसमें पैसा भी है और शोहरत भी. तो आइए जानते हैं कैसे बनें टैटू मेकर :-  


कोर्स: टैटू मेकिंग का कोर्स किसी कॉलेज/इंस्टीट्यूट में नहीं सिखाया जाता. इसमें करिअर बनाना चाहते हैं, तो किसी प्रोफेशनल के अंडर ही टैटू सीखना होगा. कई पार्लर भी टैटू मेकिंग सिखाते हैं, लेकिन अच्छी जानकारी हासिल करने के बाद ही किसी क्लास को ज्वाइन करें. मेट्रो सिटीज में कई प्राइवेट क्लासेस भी टैटू मेकिंग का कोर्स कराते हैं.

 

योग्यता: टैटू मेकर बनने के लिए किसी तरह की प्रोफेशनल डिग्री की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन प्राथमिक ज्ञान होना जरूरी है. एक अच्छा टैटू मेकर बनने के लिए क्रिएटिव आर्टिस्ट होना बहुत जरूरी है. इस फील्ड में अगर टॉप पर पहुंचना है, तो हर पल कुछ नया करना होगा ताकि लोग आपकी कला से प्रभावित हो सकें.

 

संयम और लगन: टैटू मेकिंग आसान नहीं है. साधारण से लेकर कई जटिल डिजाइन भी बनाने पड़ते हैं जिसमें काफी समय और मेहनत लगती है. ऐसे में इस कला को सीखने के लिए संयम और लगन की बहुत आवश्यकता है.

 

सकारात्मक सोच: दूसरे कोर्स की तरह टैटू मेकिंग की ट्रेनिंग आसान नहीं है. आसानी से इसकी क्लासेस नहीं मिलती. इसके लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ती है. एक अच्छे ट्रेनर की तलाश करनी पड़ती है. बहुत जल्दी निराश होने वालों के लिए ये क्षेत्र नहीं है. सकारात्मक सोच वालों के लिए यह बढ़िया करिअर ऑप्शन है.

 

क्विक लर्नर: टैटू मेकिंग के लिए क्विक लर्नर होना बहुत जरूरी है. ये एक ऐसा क्षेत्र है जहां हर पल कुछ नया होता रहता है. ऐसे में अगर आप क्विक लर्नर नहीं हैं तो आप दूसरों से पीछे रह जाएंगे.

 

करिअर की शुरुआत:

-टैटू मेकिंग का काम सीखने के बाद आप अपने बिजनेस की शुरुआत घर से ही कर सकते हैं. शुरुआती दौर में आप छोटे-छोटे पैम्पलेट और दोस्तों की मदद से इसकी शुरुआत कर सकते हैं.

-बड़े-बड़े मॉल्स से भी आप टैटू मेकिंग का काम शुरू कर सकते हैं. यह एक अच्छी शुरुआत हो सकती है.

-टैटू मेकिंग का काम शुरू करने के लिए आप किसी स्टूडियो से जुड़ सकते हैं. पहले ट्रेनी के तौर पर, फिर अपना खुद का स्टूडियो भी शुरू कर सकते हैं.

-मेट्रो सिटीज में बड़े-बड़े टैटू पार्लर भी होते हैं. किसी भी अच्छे पार्लर से आप अपने करिअर की शुरुआत कर सकते हैं.



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फाइन आर्ट्स में अपनी क्रिएटिविटी से बनाएं सफल करियर

हर महिला को कुदरती खूबसूरती आकर्षित करती है। क्या आपको भी चित्र बनाना, पेंटिंग करना या स्केचिंग करना पसंद है? क्या आप भी अपने चारों तरफ की दुनिया को कागज़ में उतारने का शौक रखती हैं? अगर हां तो आप अपना करियर फाइन आर्ट्स के फील्ड में बना सकते हैं। जी हां.. यह फील्ड आपके हॉबी जॉब में बदलकर ना सिर्फ अच्छे पैसे दे सकता है, नेचर की सुंदरता सिर्फ बनाने वाले को ही नहीं, देखने वालों को भी अपील करती है, इसीलिए वे ऐसे चित्र बनाने वाले आर्टिस्ट्स की तारीफ करते नहीं थकते। दरअसल, यह सब फाइन आर्ट्स के तहत आता है।

फाइन आर्ट्स में उपलब्ध कोर्स

फाइन आर्ट्स में फिलहाल बैचलर, मास्टर और पीएचडी स्तर पर कोर्स उपलब्ध हैं। इसमें डिप्लोमा कोर्स एक साल का है, वहीं बैचलर इन फाइन आर्ट्स की अवधि चार साल की है। बीए तीन साल में पूरा होता है। इसमें मास्टर डिग्री के लिए दो साल का मास्टर्स इन फाइन आर्ट्स का कोर्स करना होता है। अगर आप फाइन आर्ट्स में पीएचडी करना चाहती हैं तो आपके लिए मास्टर्स डिग्री का होना जरूरी है। अगर आप वर्किंग हैं या रेगुलर कोर्स करने में समस्या है तो आप कॉरेसपॉन्डेंस और डिस्टेंस लर्निंग के जरिए भी फाइन आर्ट में बैचलर डिग्री कोर्स कर सकती हैं।

 

कोर्स से कैसे मिलेगी मदद

फाइन आर्ट्स का कोर्स करने से कला की बारीकियां, क्रिएकिटिविटी और फाइन आर्ट्स के इतिहास से आपको रूबरू कराया जाएगा। कोर्स में 20 प्रतिशत हिस्सा थ्योरी और 80 प्रतिशत हिस्सा प्रैक्टिकल का होता है।

 

यहां कर सकते हैं कोर्स

भारत में वैसे तो यह कोर्स कई यूनिवर्सिटी करवा रही है, लेकिन कुछ संस्थानों के नाम प्रमुख रूप से इन्हीं कोर्सों के लिए जाने जाते हैं, जैसे- बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट, जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी आदि.

 

ये मिलती है सैलरी

इस फील्ड में शुरुआत में आप 15 से 25 हजार रुपये प्रति माह तक सैलरी पा सकती हैं। प्रकाशन या विज्ञापन एजेंसियों में काम करने की इच्छुक महिलाएं 4 से 5 लाख रुपये सालाना का पैकेज पा सकती हैं। फ्रीलांस काम करने वालों के लिए प्रोजेक्ट के हिसाब से अच्छी कमाई हो सकती है।




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पॉलिटेक्निक के बाद करियर विकल्प

क्या आपका पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कोर्स अब समाप्त होने वाला है या फिर आप पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कोर्स करने के विषय में सोंच रहे हैं और इस बात को लेकर उहापोह की स्थिति में हैं कि आखिर इस कोर्स को करने के बाद रोजगार की कितनी संभावनाएं हैं तथा इसमें करियर एडवांसमेंट के असार हैं या नहीं, तो इन दोनों ही परिस्थितियों में आपको डरने तथा कुछ ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है. डिप्लोमा पॉलिटेक्निक कोर्स के पूरा होने के बाद बहुत अच्छे करियर विकल्प और अवसर मिलते हैं. पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का चयन करने का एक मुख्य कारण इसके द्वारा कम पैसे और कम समय में उत्कृष्ट करियर के अवसर उपलब्ध कराना है.


पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कार्यक्रम के पूरा होने के बाद इंजीनियरिंग ट्रेडों के साथ-साथ गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में भी छात्रों के पास कई प्रकार के करियर विकल्प मौजूद हैं.


आगे का अध्ययन


यद्यपि पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कार्यक्रम एआईसीटीई/अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा संचालित और अनुमोदित पूर्ण तकनीकी डिग्री पाठ्यक्रम है, लेकिन इन पाठ्यक्रमों को विशेष रूप से संबंधित स्ट्रीम्स या विषय के व्यावहारिक पहलुओं और मूलभूत बातें सीखने में मदद करने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है. इसलिए, यदि आप अपने टेक्नीकल ज्ञान के थियरेटिकल ज्ञान के साथ साथ प्रैक्टिकल ज्ञान में भी वृद्धि करना चाहते हैं तो आपके द्वारा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कोर्स पूरा करने के बाद निम्नांकित विषयों के अध्ययन पर जोर दिया जाना चाहिए.


पॉलिटेक्निक डिप्लोमा के बाद आगे अध्ययन करने का फायदा


पॉलिटेक्निक डिप्लोमा एक टेक्नीकल डिग्री है. इससे आपको एक अच्छी नौकरी मिलने में मदद मिल सकती है. विविध प्रकार की नौकरियों में जॉब की संभावना और हायर लेवल की नौकरियों के लिए अपनी योग्यता साबित करने के लिए डिप्लोमा करने के बाद भी अध्ययन करना जरुरी है. पॉलीटेक्निक डिप्लोमा के दौरान सम्बंधित डोमेन के व्यावहारिक पक्ष तथा आधारभूत तथ्यों पर ज्यदा जोर दिया जाता है लेकिन वे हायर लेवल की नौकरी के लिए पर्याप्त नहीं होते हैं. पॉलीटेक्निक डिप्लोमा से प्रारंभिक स्तर पर जूनियर लेवल की जॉब आसानी से पायी जा सकती है लेकिन हायर लेवल की नौकरियों के लिए सिर्फ इससे काम नहीं चलता है. इसलिए सम्बन्धित डोमेन में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों ही स्तर पर पर्याप्त ज्ञान के लिए आगे अध्ययन करना बहुत जरुरी हो जाता है. इसके लिए आप निम्नांकित कोर्सेज पर विचार कर सकते हैं -


बीटेक लेटरल एंट्री स्कीम


पॉलीटेक्निक डिप्लोमा धारकों के लिए सबसे लोकप्रिय विकल्प, खासकर इंजीनियरिंग डोमेन से, बी.टेक या बीई का चयन करना है.  इसके लिए उम्मीदवारों को कॉलेज और पाठ्यक्रम के लिए संबंधित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा. कई इंजीनियरिंग कॉलेज इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारकों को लेटरल एंट्री प्रदान करते हैं. लेटरल एंट्री का मतलब है कि आप सीधे दूसरे वर्ष में इंजीनियरिंग कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं या बी.टेक / बीई के तीसरे सेमेस्टर में शामिल हो सकते हैं. कुछ कॉलेजों में डिप्लोमा धारकों को लेटरल एंट्री योजना के माध्यम से प्रवेश के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है. 


पॉलिटेक्निक डिप्लोमा छात्रों के लिए लेटरल एंट्री स्कीम की पेशकश करने वाले शीर्ष कॉलेज


-गुरू नानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज, लुधियाना

-डीएवी इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग और टैक्नोलॉजी, जालंधर

-इंजीनियरिंग कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे

-गुरु तेगबाहदुर प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली

-एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, नोएडा

-दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, दिल्ली

-थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला

-नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली

-केआईआईटीएस यूनिवर्सिटी, ओडिशा

-गुरु गोबिंद सिंह आईपी यूनिवर्सिटी, दिल्ली

-पंजाब टेक्नीकल यूनिवर्सिटी, जलंधर

-पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़

-चंडीगढ़ समूह कॉलेज, चंडीगढ़

-पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला

-हार्कोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट, कानपुर

-चित्रकारा यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़

-सैंटलांगोंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, संगरूर

-एसबीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, फिरोजपुर


एआईएम प्रमाणन


इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले डिप्लोमा धारकों के लिए एक और अन्य विकल्प एआईएम सर्टिफिकेशन कोर्स है. एएमआईआई (इंजीनियरों के संस्थानों के सहयोगी सदस्य) सर्टिफिकेशन बीई के बराबर एक प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन डिग्री है. एआईएम सर्टिफिकेशन कोर्स को पूरा करने वाले उम्मीदवारों को इंजीनियरिंग संस्थान, भारत द्वारा एआईएम प्रमाण पत्र से सम्मानित किया जाता है. एआईएम परीक्षा में दो खंड होते हैं और इस कोर्स को पूरा करने में लगभग 4 साल लगते हैं. हालांकि, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को स्ट्रीम ए, यानि प्रोजेक्ट वर्क में शामिल होने की बहुत जरुरत नहीं होती है.


इसलिए, वे केवल 3 वर्षों में ही एआईएम सर्टिफिकेशन कोर्स कर सकते हैं.अगर आपको इस विकल्प के विषय में और अधिक जानकारी चाहिए तो आप डब्लूडब्लूडब्लूडॉटआईईइंडियाडॉटओआरजी पर जाकर और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.


स्टडी डोमेन में ग्रेजुएशन


बीटेक और बीई कोर्सेज के अलावा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों के पास अपने सम्बन्धित डोमेन में तीन साल के नियमित ग्रेजुएशन कोर्स में शामिल होने का विकल्प भी मौजूद है. यह विकल्प गैर-इंजीनियरिंग प्रोग्राम्स, बीएससी, बीए, बीसीए और बीकॉम जैसे तीन साल के रेगुलर ग्रेजुएशन प्रोग्राम्स  की अपेक्षा डिप्लोमा धारकों के लिए विशेष रूप से व्यावहारिक है. लेकिन इसके लिए उम्मीदवार के पास 12 वीं का रीजल्ट तथा डिप्लोमा का सर्टिफिकेट होना आवश्यक है तभी उन्हें इसमें एडमिशन मिल सकता है.


रोजगार के अवसर


उत्कृष्ट क्षेत्र और विभिन्न करियर के अवसर प्रदान करने के कारण पॉलिटेक्निक डिप्लोमा को कई छात्र करियर के शॉर्ट-कट का नाम देते हैं. 10 वीं पास करने के बाद आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे छात्रों को यह रोमांचक और आकर्षक करियर विकल्प प्रदान करता है. ऐसे में वे पीएसयू की नौकरी कर सरकारी सेवा क्षेत्र में शामिल होने, निजी कंपनियों के साथ नौकरियां लेने या यहां तक कि अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने और स्व-नियोजित होने का विकल्प चुन सकते हैं.


आइए कुछ प्रमुख नौकरी करियर विकल्पों पर विचार करते हैं जिसे पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारक कोर्स पूरा होने के बाद अपना सकते हैं-


सार्वजनिक क्षेत्र/पीएसयू


सरकार या उनके सहयोगी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को बेहतरीन करियर के अवसर प्रदान करती हैं. ये कंपनियां जूनियर लेवल पोजिशन (इंजीनियरिंग और गैर इंजीनियरिंग उम्मीदवारों दोनों के लिए) और तकनीशियन स्तर की नौकरियों के लिए डिप्लोमा धारकों को हायर करती हैं.


पॉलीटेक्निक डिप्लोमा ग्रेजुएट्स की भर्ती करने वाली शीर्ष कंपनियां


-रेलवे

-भारतीय सेना

-गेल - गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड

-ओएनजीसी - तेल और प्राकृतिक गैस निगम

-डीआरडीओ - रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन

-भेल - भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड

-एनटीपीसी - नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन

-लोक कार्य विभाग

-बीएसएनएल - भारत संचार निगम लिमिटेड

-सिंचाई विभाग

-बुनियादी ढांचा विकास एजेंसियां

-एनएसएसओ - राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन

-आईपीसीएल - इंडियन पेट्रो केमिकल्स लिमिटेड


निजी क्षेत्र


सार्वजनिक क्षेत्र की तरह ही निजी क्षेत्र की कंपनियां भी विशेष रूप से विनिर्माण, निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार डोमेन में काम करने वाले पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को हायर करती हैं. हालांकि, ये नौकरियां जूनियर लेवल की होती हैं और इसमें प्रोमोशन के आसार कम होते हैं.


पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों को भर्ती करने वाली शीर्ष निजी क्षेत्र की कंपनियां-


-एयरलाइंस - इंडिगो, स्पाइसजेट, जेट एयरवेज इत्यादि

-निर्माण फर्म - यूनिटेक, डीएलएफ, जेपी एसोसिएटेड, जीएमआर इंफ्रा, मित्स इत्यादि

-संचार फर्म-भारती एयरटेल , रिलायंस कम्युनिकेशंस, आइडिया सेल्युलर इत्यादि.

-कम्प्यूटर इंजीनियरिंग फर्म - टीसीएस, एचसीएल, विप्रो, पोलारिस इत्यादि.

-ऑटोमोबाइल - मारुति सुजुकी, टोयोटा, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, बजाज ऑटो इत्यादि.

-इलेक्ट्रिकल/पावर फर्म - टाटा पावर, बीएसईएस, सीमेंस, एलएंडटी, इत्यादि.

-मैकेनिकल इंजीनियरिंग फर्म - हिंदुस्तान यूनिलीवर, एसीसी लिमिटेड, वोल्टस इत्यादि.


स्व रोजगार


पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारकों के लिए एक और उत्कृष्ट करियर विकल्प स्व-रोज़गार है. पॉलिटेक्निक संस्थानों द्वारा पेश किए गए सभी डिप्लोमा कोर्सेज विशेष रूप से संबंधित विषय के व्यावहारिक या अनुप्रयोग सम्बन्धी पहलुओं पर छात्रों को प्रशिक्षित करते हैं.यह छात्रों को विषय की मूल बातें सीखने के लिए तैयार करता है और अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के योग्य बनाता है.उदाहरण के लिए, कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा रखने वाले छात्र आसानी से कंप्यूटर की मरम्मत के लिए एक व्यवसाय शुरू कर सकते हैं; या ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा रखने वाला कोई भी छात्र अपना गेराज या ऑटोमोबाइल मरम्मत स्टोर शुरू कर सकता है. इसलिए, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पाठ्यक्रम छात्रों को स्व-रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं.



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नॉएडा प्राधिकरण के 26 अफसर दोषी -उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान ने दर्ज कराया मुकदमा

नोएडा जाने आलम (जानू चौधरी)। नोएडा की सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट हाउसिंग सोसायटी में अवैध ट्विन टावर मामले से जुड़ी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण के 26 अफसरों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इनमें से 20 अधिकारी रिटायर व दो की मौत हो चुकी है। केवल चार अधिकारी ही प्राधिकरण में काम कर रहे हैं। अब इस मामले में उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान ने रिपोर्ट दर्ज कराया है।

 जानकारी अनुसार सुपरटेक एमरॉल्ड मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी ने अपनी जांच में 26 अधिकारियों की संलिप्तता पाई है। यूपी के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर संजीव मित्तल की अध्यक्षता वाली एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस मामले में चार सेवारत अधिकारियों में एक को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। शेष तीन को निलंबित करके उन पर विभागीय जांच शुरू हो गई है। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इन सारे 26 अधिकारियों ने यूपी औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम और अपार्टमेंट प्रमोशन आफ कंस्ट्रक्शन ओनरशिप एंड मेनिटनेंस एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। नोएडा प्राधिकरण और सुपरटेक बिल्डर के संलिप्तत में पाए गए अधिकारियों पर न्यायालय में मुकदमा चलाया जाएगा।

एसआईटी ने की इन रिटायर अफसरों के खिलाफ एक्शन की सिफारिश

सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी तत्कालीन सीईओ सरदार मोहिंदर सिंह, पूर्व सीईओ एसके द्विवेदी, तत्कालीन अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी आरपी अरोड़ा, पूर्व अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन बाथम, तत्कालीन विशेष कार्याधिकारी यशपाल सिंह, तत्कालीन आर्किटेक्ट एंड टाउन प्लानर एके मिश्रा,तत्कालीन सीनियर टाउन प्लानर राजपाल कौशिक, तत्कालीन चीफ आर्किटेक्ट त्रिभुवन सिंह, ग्रुप हाउसिंग डिपार्टमेंट के तत्कालीन डीजीएम शैलेंद्र कैरे, तत्कालीन प्लानिंग इंजीनियर बाबू राम, प्लानिंग डिपार्टमेंट के तत्कालीन प्लानिंग असिस्टेंट टीएन पटेल, चीफ आर्किटेक्ट वीए देवपुजारी, पूर्व एसोसिएट आर्किटेक्ट एनके कपूर, पूर्व सहायक वास्तुविद प्रवीण श्रीवास्तव, नोएडा प्राधिकरण के लीगल डिपार्टमेंट में लॉ ऑफिसर ज्ञान चंद्र, लॉ एडवाइजर राजेश कुमार, महाप्रबंधक विपिन गौड़, महाप्रबंधक एमसी त्यागी, फाइनेंस कंट्रोलर एससी सिंह, तत्कालीन सहायक नगर नियोजक ऋतुराज व्यास, तत्कालीन प्लानिंग असिटेंट अनीता, तत्कालीन प्लानिंग असिस्टेंट मुकेश गोयल, नोएडा प्राधिकरण में कार्यरत सहायक नगर नियोजक विमला सिंह समेत सुपरटेक निदेशकों के खिलाफ एक्शन करने की सिफारिश की है। 

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दिल्ली पुलिस की अस्थाना से उम्मीद

नई दिल्ली: अरविन्द गोस्वामी: टास्कमास्टर कहे जाने वाले राकेश अस्थाना एक बार फिर से सुर्ख़ियों में हैं। अस्थाना का पूरा सर्विस रिकॉर्ड शानदार रहा है। तमाम विवादों और उनकी उपलब्धियों का जिक्र करना यहाँ हमारा मकसद नहीं है।  उनके बारे में मीडिया और सोशल मीडिया पर मौजूद है। अजय राज शर्मा का आपको याद होगा 1990 का समय, दिल्ली पुलिस के इतिहास में पहली बार किसी बाहर के आई पी एस अफसर को कानून में बदलाव कर पुलिस कमिश्नर बनाया गया. राजधानी में अपराध चरम पर था। जरूरत थी एक दबंग अफसर की। उत्तर प्रदेश काडर के अजय राज शर्मा चम्बल के डकैतों पर नकेल कस कर अपना लोहा मनवा चुके थे।

अस्थाना की नियुक्ति के दौर में भी दिल्ली पुलिस की चुनौतियां किसी से छुपी नहीं हैं।  माजूदा समय में अस्थाना का कद पूर्व में किसी भी कमिश्नर से कहीं ज्यादा बड़ा है उनकी राजनैतिक पहुँच और काम करने का स्टाइल हम सब जानते हैं। शायद इसी के चलते वह टास्कमास्टर कहलाये। दिल्ली की कानून व्यवस्था के परे खुद दिल्ली पुलिस की भी अस्थाना से उम्मीदें बेहद बड़ी हुई है। वजह है लम्बे समय से लटकी पड़ी वेतन सम्बन्धी मांग। दिल्ली पुलिस के अंदरूनी हलकों की मानें तो अस्थाना की हैसियत माजूदा समय में ऐसी है कि वह इस मामले को आसानी से सुलझा सकते हैं। दिल्ली में सब इंस्पेक्टर जो कि अफसर के तौर पर एंट्री पोस्ट मानी जाती है का शुरुआती ग्रेड पे 4200 रूपए है।  जो कि पी जी टी   टीचर और नर्सों को मिलने वाले वेतन से भी कम है। इनका शुरुआती ग्रेड पे 4600 रुपए है।  मजे की बात तो यह है कि किसी समय दिल्ली पुलिस का हिस्सा रही सी बी आई में भी शुरुआती ग्रेड पे 4600 रुपए है। हालाँकि किसी समय दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर को भी 4600 का ग्रेड पे मिलता था जिसे बाद में डाउनग्रेड कर 4200  रुपए कर दिया गया जो कि समझ से परे था वेतन  और भत्तों की यह असमानताएं दूसरी जगहों पर भी देखने को मिल जाती है। ऐसा नहीं है कि इस मामले को सुलझाने के  ईमानदार प्रयास पहले नहीं हुए  लेकिन पुलिस की इमेज और समय समय पर उठते विवादों के बीच यह कोशिशें फाइलों के बीच धूल खाती दम तोड़ती रहीं।  

राजधानी की कानून व्यवस्था में जुटी दिल्ली पुलिस के लिए यह संक्रमण काल है। दिल्ली दंगे ,किसान आंदोलन और लगातार आतंकी हमलों के अलर्ट केसाये  बीच दिल्ली पुलिस को मॉरल बूस्टर की जरूरत है। हालाँकि अस्थाना की नियुक्ति अपने आप में एक बड़ा सन्देश है। ऐसे में दिल्ली पुलिस की बढ़ी हुई उम्मीदों पर अगर अस्थाना कुछ कर गए तो पुलिस बल के लिए निस्चय यह एक बूस्टर डोज़ का काम करेगी। और टास्कमास्टर के लिए यह कोई बड़ा टास्क है भी नहीं। 

Edit By Janu choudhary

 

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वायु प्रदूषण के चलते एयर क्वालिटी मैनेजमेंट में बढ़े करियर विकल्प

अगर आप एक हाइली क्वालिफाइड जॉब सीकर हैं और एनवायरनमेंट पॉल्यूशन से आप अपने शहर को बचाना चाहते हैं या आप हायर एजुकेशनल डिग्रीज़ हासिल करने के लिए अपना विचार बना रहे हैं तो ग्रीन सेक्टर अर्थात इको-फ्रेंडली एनवायरनमेंट के क्षेत्र में हमारे देश में आपके लिए काफी आशाजनक संभावनाएं हैं. भारत में आप एनवायरनमेंट की रक्षा और संरक्षण के लिए कई बेहतरीन डिग्री/ डिप्लोमा कोर्सेज कर सकते हैं.   


कंजरवेशनिस्ट


ये पेशेवर मुख्य रूप से वाटर/ सोल/ फ़ॉरेस्ट कंजर्वेशन और प्रिजर्वेशन के कार्य करते हैं और एनवायरनमेंट को सुरक्षित रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.


व्हीकल एनर्जी एनालिस्ट


ये पेशेवर व्हीकल एनर्जी एनालिसिस के माध्यम से एयर पॉल्यूशन को कम करने के लिए स्मार्ट चार्जिंग जैसे ऑप्शन्स के लाभ बताते हैं.


इलेक्ट्रिक व्हीकल सॉफ्टवेयर डेवलपर


ये पेशेवर ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए इलेक्ट्रिकल व्हीकल सॉफ्टवेयर डिज़ाइन और डेवलप करते हैं ताकि व्हीकल्स के इन नए डिज़ाइन्स से व्हीकल पॉल्यूशन को कम किया जा सके.


एनवायरनमेंट इंजीनियर


ये पेशेवर एनवायरनमेंट को सुरक्षित रखने के लिए और प्रदूषण की समस्या के स्थाई समाधान के लिए इको-फ्रेंडली टेक्नीक्स विकसित करते हैं.


एनर्जी एंड सस्टेनेबिलिटी इंजीनियर/ मैनेजर


ये पेशेवर एनर्जी के नॉन-कन्वेंशनल तरीकों जैसेकि सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी, बायो फ्यूल्स को बढ़ावा देने के लिए नई टेक्नोलॉजी को विकसित करने और इस्तेमाल करने से संबंधित कामकाज देखते हैं.


रिस्क मैनेजमेंट एक्सपर्ट


ये पेशेवर विभिन्न कंपनियों और दफ्तरों में रोज़ाना होने वाले काम-काज और प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े रिस्क या खतरों से कंपनी और कर्मचारियों की रक्षा करते हैं.


प्रोडक्शन मैनेजर


इन पेशेवरों का प्रमुख काम विभिन्न उद्योगों में होने वाले प्रोडक्शन को इको-फ्रेंडली बनाना है ताकि हमारा एनवायरनमेंट सुरक्षित रहे.


भारत में स्टूडेंट्स के लिए ग्रीन सेक्टर या एनवायरनमेंट की फील्ड से संबंधित विभिन्न एजुकेशनल कोर्सेज और एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया निम्नलिखित हैं:


बीएससी/ बीई/ बीटेक– एनवायरनमेंटल साइंस - स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त एजुकेशनल बोर्ड से अपनी 12वीं क्लास साइंस स्ट्रीम में पास की हो. इन कोर्सेज की अवधि 3 वर्ष है. इसी तरह, इस फील्ड में सर्टिफिकेट कोर्सेज की अवधि 6 महीने से 1 वर्ष तक हो सकती है.


बीई/ बीटेक– एनवायरनमेंट इंजीनियरिंग - स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त एजुकेशनल बोर्ड से अपनी 12वीं क्लास साइंस स्ट्रीम में पास की हो. इन कोर्सेज की अवधि 4 वर्ष है.


एमएससी/ एमई/ एमटेक– एनवायरनमेंटल साइंस – स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से साइंस स्ट्रीम में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की हो. इन कोर्सेज की अवधि 2 वर्ष है.


एमई/ एमटेक– एनवायरनमेंटल - स्टूडेंट्स ने किसी मान्यताप्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से साइंस स्ट्रीम में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की हो. इन कोर्सेज की अवधि 2 वर्ष है.


एमफिल– एनवायरनमेंटल साइंस –स्टूडेंट्स के पास किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी या कॉलेज से साइंस की स्ट्रीम में पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री हो. इस कोर्स की अवधि 2 वर्ष है.


पीएचडी– एनवायरनमेंटल साइंस –स्टूडेंट्स के पास एमफिल की डिग्री हो और इस कोर्स की अवधि 3 – 5 वर्ष है.


भारत के ये टॉप एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स करवाते हैं विभिन्न कोर्सेज


आप निम्नलिखित एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स से एनवायरनमेंट की फील्ड से संबंधित विभिन्न डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज कर सकते हैं:


-दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली


-इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली


-जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली


-टेरी स्कूल ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज़, नई दिल्ली


-चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ


-इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली


-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंसेज, बैंगलोर


-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, मुंबई/ खड़गपुर


-वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया, उत्तरांचल


-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, लखनऊ/ मुंबई/ खड़गपुर/ दिल्ली/ रुड़की/ कलकत्ता/ बैंगलोर



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30 महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण मिला

गाजियाबाद : ग्राम तलहटा में सूक्ष्म उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत चल रहे 12 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हो गया। विधायक मंजू शिवाच ने प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओ को प्रमाण पत्र वितरित किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने स्वयं सहायता समूहों की 30 महिलाओं को स्वरोजगार (बांस एवं केन क्राफ्ट ) का प्रशिक्षिण दिया।


विधायक मंजू शिवाच ने कहा कि महिलाओं को नाबार्ड ने स्थानीय उत्पाद सरकंडे व बान से निर्मित उत्पाद से मूढ़ा-मूढ़े बनाने का प्रशिक्षण दिया है। यह प्रशिक्षण महिला सशक्तिकरण की राह में मील का पत्थर साबित होगा। सरकंडे व बान से निर्मित उत्पाद मूढ़ा-मूढ़े की मोदीनगर क्षेत्र में काफी मांग है। स्थानीय लोगों को इसे खरीदने गढ़मुक्तेश्वर जाना पड़ता है। यह उत्पाद यहीं बनने लगेगा तो लोगों को काफी सुविधा होगी। मूढ़े को बनाने में लगने वाला कच्चा उत्पाद स्थानीय स्तर पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इसीलिए समूह की महिलाओं के सामने इन्हें बनाने में कोई परेशानी नहीं आएगी। इस मौके पर नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक चंचल कुमार गौतम के अलावा परिवार सोसायटी के सचिव ललित त्यागी, अभिषेक त्यागी, परियोजना प्रबंधक ऋषिपाल सिंह, प्रदीप कुमार, सोनू कुमार मौजूद रहे।






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बनना हैं आईएएस अधिकारी, तो ये क्वॉ लिटीज होना जरूरी

हर साल लाखों युवा आईएएस अधिकारी बनने के लिए अपनी किस्मत आजमाते हैं। यह हमेशा से भारतीय युवाओं के सबसे पसंदीदा करियर ऑप्शंस में से एक रहा है। इस फील्ड में अच्छे वेतन-भत्ते तो हैं ही, साथ ही यह आपको सरकारी मशीनरी का हिस्सा बनकर देशवासियों के भले के लिए काम करने का मौका भी देता है। यही कारण है कि आईएएस साल-दर-साल भारी तादाद में युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।


संघ लोक सेवा आयोग हर साल सिविल सर्विसेज एग्जाम आयोजित कर आईएएस, आईपीएस तथा अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए उम्मीदवारों का चयन करता है। यह देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। मगर यह परीक्षा क्लियर करना ही काफी नहीं होता। सरकारी मशीनरी में आईएएस अधिकारी की अहम भूमिका निभाने के लिए अकादमिक क्वॉलिफिकेशंस और बुद्धिमत्ता से बढ़कर भी कुछ चाहिए होता है। आईएएस की तैयारी कर रहे युवाओं में कुछ ऐसे गुण भी होने चाहिए, जो यूपीएससी द्वारा निर्धारित सामान्य क्वॉलिफिकेशंस के अलावा हों। जानते हैं कौन-से हैं वे गुण, जो आईएएस अधिकारी बनने के लिए जरूरी हैं...


लीडरशिप

आईएएस अधिकारी जहां भी, जिस भी पद पर हो, सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर काम करता है। शासकीय पद पर रहते हुए उसे उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करना होता है। उसके पास अपनी टीम को विकास और भारतवासियों की बेहतरी के लक्ष्य की ओर ले जोन की क्षमता होनी चाहिए। ऐसा अच्छी लीडरशिप स्किल्स से ही संभव है।


प्रशासकीय क्षमता

किसी आईएएस अधिकारी को सरकार द्वारा सौंपी गई एक प्रमुख जिम्मेदारी होती है अपने अधिकार क्षेत्र में दैनंदिन के प्रशासनिक कार्यों को देखना। इस जिम्मेदारी को पूरा करने और सबको साथ लेकर सारे प्रशासनिक कार्य संपन्न करने के लिए एक आईएएस अधिकारी का कुशल प्रशासक होना जरूरी होता है।


निर्णय क्षमता

कई मौकों पर आईएएस अधिकारी खुद को ऐसी नाजुक परिस्थिति में पाता है, जहां त्वरित निर्णय लेना जरूरी होता है। इसके लिए जरूरी है कि वह विपरीत परिस्थितियों में भी ठंडे दिमाग से स्पष्ट सोच सके और सभी उपलब्धं विकल्पों का आलकन कर इनमें से प्रत्येक के परिणामों पर गौर करे। इसके आधार पर एक सुविचारित निर्णय लेकर उस पर अमल करना होता है। आपात स्थितियों में यह सब कम से कम समय में कर दिखाना होता है। इसलिए आईएएस अधिकारी की निर्णय क्षमता अच्छी होनी चाहिए।


ज्ञानवान

ज्ञान धरती पर मौजूद सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। किसी आईएएस अधिकारी के लिए यह निहायत जरूरी है कि उसके पास उसके कार्यक्षेत्र से संबंधित सभी विषयों का अच्छा-खासा ज्ञान हो। ज्ञानवान होने से न सिर्फ उसे सरकारी नीतियों के प्रभावी अमल में मदद मिलेगी, बल्कि किसी प्रशासनिक समस्या को समझने और उसे हल करने के लिए सरकारी मशीनरी में मौजूद खामियों को दूर करने में भी मदद मिलेगी।


परिश्रम और समर्पण

अगर आपको आईएएस परीक्षा की तैयारी मुश्किल और थका देने वाली लगती है, तो ध्यान रखिए, आईएएस में चयनित हो जाने पर तो इससे भी कहीं अधिक मुश्किल और थका देने वाला काम करना होगा। आईएएस अधिकारी पर विभिन्न क्षेत्रों की कई जिम्मेदारियां होती हैं। इनमें कानून अनुपालन, विकास कार्य, प्रशासनिक कार्य, प्रबंधन आदि शामिल है। इन सब कार्यों को बेहतर तरीके से करने के लिए आईएएस अधिकारी का परिश्रमी और काम के प्रति पूरी तरह समर्पित होना आवश्यक है।


ईमानदारी

सरकारी मशीनरी में भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या है। तमाम सरकारें आईं और गईं लेकिन इस समस्या का कोई हल अब तक नहीं निकल पाया है। अपने कार्यक्षेत्र में प्रशासन, वित्त और कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होने के चलते आईएएस अधिकारी के पास इस समस्या से निपटने की जबरदस्त शक्ति होती है। व्यक्तिगत ईमानदारी से लैस अफसर भ्रष्टाचार विरोधी जंग में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।


कम्युनिकेशन स्किल्स

कुशल प्रशासक होने के लिए यह जरूरी है कि आईएएस अधिकारी में अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स हों। वह बोलकर तथा लिखकर स्वयं को बेहतरीन तरीके से अभिव्यक्त कर सके। इससे वह अपने अधीनस्थों को स्पष्ट रूप से निर्देश दे पाएगा और किसी गफलत या गलतफहमी की गुंजाइश नहीं रहेगी। यही नहीं, आईएएस अधिकारियों को समय-समय पर उच्च पदों पर आसीन विशिष्ट व्यक्तियों से भी मिलना होता है। इन मौकों पर भी कम्युनिकेशन स्किल्स काम आती हैं।


आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग

भारत जैसे विधिताओं भरे देश में सरकारी मशीनरी का हिस्सा होने की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अलग-अलग इलाकों में समस्याओं में भी विविधता होती है और कोई एक ही समाधान हर जगह लागू नहीं होता। इसके अलावा, सीमित बजट में विभिन्न टारगेट पूरे करने होते हैं। ऐसी स्थितियों में बंधी-बंस्ईन लीक से हटकर सोचने और काम करने से बात बनती है।


वर्क एथिक्स

एक आईएएस अधिकारी में कार्य के प्रति अनुकरणीय नैतिकता होनी चाहिए। फिर वह समय पर ऑफिस पहुंचना हो या फिर सरकारी मशीनरी का निजी काम के लिए उपयोग न करना हो। वर्क एथिक्स आपको अपना काम बेहतर तरीके से अंजाम देने में तो मदद करते ही हैं, इनके माध्यम से आप अपने कनिष्ठों के सामने मिसाल भी पेश कर सकते हैं।


देशभक्ति

यह गुण तो एक आईएएस अधिकारी में होना ही चाहिए। आखिर उसे देश की सेवा ही तो करनी है। उसे भविष्य के भारत का निर्माण करना है। इसमें देशभक्ति का जज्बा उसका मार्ग प्रशस्त करेगा।




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कैसे बनें सफल ऑनलाइन फिटनेस ट्रेनर, तरीके ये अपनाएं और लाखों कमाएं

यह डिजिटलाइजेशन का युग है और इसने अलग-अलग सेक्‍टर्स के लिए कई ऑपरट्यूनिटीज खोल दी हैं। फूड ऑर्डर करना हो या फिर और कोई सर्विस, ऐसी चीजें अब स्‍मार्टफोन पर सिर्फ एक टैप दूर हैं। इस गैलरी के जरिए हम आपको बता रहे हैं कि कैसे फिटनेस ट्रेनर के करियर पर डिजिटलाइजेशन का असर हुआ है और आप भी किस तरह से एक सफल ऑनलाइन पर्सनल ट्रेनर बन सकते हैं...


हेल्‍थ और फिटनेस को लेकर लोग सजग

पिछले 5 वर्षों में इंडियन फिटनेस इंडस्‍ट्री में काफी ग्रोथ हुई है। एक समय था जब इस प्रफेशन को आकर्षक या लाभप्रद नहीं माना जाता था। उस वक्‍त ट्रेनर्स भी उतने क्‍वालिफाइड नहीं होते थे और जिम के लिए ऐसा माना जाता था कि ये सिर्फ बॉडीबिल्‍डर्स के लिए हैं। अब 2019 में चीजें बदल गई हैं। लोग हेल्‍थ और फिटनेस को लेकर काफी सजग हो गए हैं, फिर वे चाहे बच्‍चे हों, महिलाएं हों, बुजुर्ग हों या फिर पुरुष। ऐसे में अब क्‍वालिफाइड और एजुकेटेड पर्सनल ट्रेनर्स की डिमांड भी बढ़ गई है।


सोशल मीडिया प्‍लैटफॉर्म्‍स की ताकत

डिजिटलाइजेशन की वजह से करियर के कई ऑप्‍शन खुल गए हैं जिनमें से एक ऑनलाइन फिटनेस ट्रेनर भी है। अब ट्रेनर्स इंस्‍टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्‍लैटफॉर्म्‍स पर अपने काम का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। वे रियल लाइफ फिल्‍टर्ड ऑडियंस से कनेक्‍ट होते हैं। ऑनलाइन पर्सनल ट्रेनर होने का फायदा यह भी है कि आप स्‍काइप, वॉट्सऐप और ईमेल्‍स की मदद से एक समय पर कई लोगों को कोच कर सकते हैं।


कैसे बनें ऑनलाइन फिटनेस ट्रेनर

इसके लिए जिन स्‍किल्‍स की जरूरत है, उनमें आपका केयरिंग और हेल्‍पिंग नेचर का होना बेहद जरूरी है। इसके अलावा आपकी कम्‍युनिकेशन स्‍किल्‍स बेहतर हो और एक्सर्साइज व न्‍यूट्रिशन के लिए आपका पैशन हो।


क्‍या होनी चाहिए प्रफेशनल क्‍वालिफिकेशन

फिटनेस कोच होने के लिए फॉर्मल एजुकेशन होना जरूरी है। ऐसे कई इंस्टिट्यूट्स हैं जो पर्सनल ट्रेनिंग कोर्स में सर्टिफिकेट देते हैं/डिप्‍लोमा देते हैं। कोर्स के लिए के11 इंस्टिट्यूट ऑफ फिटनेस ऐंड साइंस, टीम अमिंदर फिटनेस अकैडमी, क्‍लासिक फिटनेस अकैडमी, गोल्‍ड इंस्‍ट्यिूट, कुछ पॉप्‍युलर इंडियन इंस्‍टिट्यूट्स हैं। आईएसएसए, एसीई, एसीएसएम, एनएएसएम और जेपीएस कुछ जानी-मानी इंटरनैशनल अकैडमीज हैं जो पर्सनल ट्रेनर्स और स्‍पॉर्ट्स न्‍यूट्रिशन के ऑनलाइन कोर्स ऑफर करती हैं। कोर्स की फीस 40 हजार से 2 लाख तक (अकैडमी के अनुसार) है और कोर्स का ड्यूरेशन 2 महीने से 1 साल तक (अकैडमी के अनुसार) हो सकता है।


कितनी हो सकती है कमाई

शुरुआत में आप 30 से 50 हजार तक की कमाई कर सकते हैं। ऐसे कोच जिनके पास एक्‍सपीरियंस है, उनके लिए कोई लिमिट नहीं है। एक बार ट्रेनर के पास अच्‍छी संख्‍या में अच्‍छे और पॉजिटिव क्‍लाइंट हो गए, सोशल मीडिया पर अच्‍छी रीच हो गई, अच्‍छी इंटरनेट प्रेजेंस हो गई तो आप लाखों में कमा सकते हैं।


काम के घंटे और स्‍ट्रेस लेवल

इस करियर में काम के घंटे और स्‍ट्रेस लेवल को लेकर चीजें फिक्‍स नहीं हैं। आपके जितने ज्‍यादा क्‍लाइंट होंगे, आपको उतना ही ज्‍यादा समय देना होगा। इस करियर में क्‍लाइंट की प्रोग्रेस के लिए डेडिकेशन की सबसे ज्‍यादा जरूरत होती है। क्‍लाइंट की प्रोफाइल, मेडिकल हिस्‍ट्री और फिर उनके प्‍लान को कस्‍टमाइज करना महत्‍वपूर्ण है। 





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प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट बन सकते हैं आप, अच्छे है करियर स्कोप

दुनिया में शायद ही ऐसी कोई महिला हो जो बिना मेकअप के घर से बाहर जाना पसंद करती हो, फिर चाहे बात ऑफिस की हो, गेट टू गेदर या फिर किसी पार्टी की। इतना ही नहीं, टेलीविजन से लेकर फिल्म इंडस्ट्री, एड वर्ल्ड व फैशन इंडस्ट्री में भी बिना मेकअप के आपको कोई चेहरा नजर नहीं आता। जहां पिछले कुछ समय तक सिर्फ महिलाएं ही मेकअप किया करती थीं, वहीं अब पुरूष भी मेकअप करने में पीछे नहीं हैं। इन सभी स्टार्स को खूबसूरत बनाने का काम करते हैं मेकअप आर्टिस्ट। मेकअप आर्टिस्ट ही वह व्यक्ति होता है जो किसी भी आर्टिस्ट को उसके किरदार में ढालने में एक अहम भूमिका निभाता है। अगर आप भी खुद को और दूसरों को खूबसूरत बनाने में रूचि रखते हैं तो बतौर मेकअप आर्टिस्ट अपना भविष्य देख सकते हैं...


कार्यक्षेत्र

एक मेकअप आर्टिस्ट का कार्यक्षेत्र काफी विस्तृत होता है। अगर आप समझते हैं कि मेकअप आर्टिस्ट का काम सिर्फ मेकअप करने तक सीमित है तो आप गलत हैं। एक मेकअप आर्टिस्ट के काम की शुरूआत सबसे पहले अपनी क्लाइंट की स्किन को समझने से शुरू होती है ताकि वह उसे सही और बेस्ट सर्विसेज दे सके। इसके बाद आपको क्लाइंट की डिमांड को ध्यान में रखकर उनकी खूबसूरती में इजाफा करना होता है। अगर आप टीवी या फिल्म इंडस्ट्री में किसी कलाकार का मेकअप कर रहे हैं तो आपको पहले किरदार को ध्यान में रखना होता है। इतना ही नहीं, एक मेकअप आर्टिस्ट को तय समय में अपना काम पूरा करना होता है। जो आर्टिस्ट डेडलाइन्स पूरी नहीं कर पाते, उनसे कोई भी सर्विस लेना पसंद नहीं करता। 

 

स्किल्स

इस क्षेत्र में आपका क्रिएटिव माइंड होना बेहद आवश्यक है ताकि आप अपने क्लाइंट की पर्सनैलिटी के अनुरूप मेकअप कर पाएं। हर चेहरा एक जैसा नहीं होता। इतना ही नहीं, जो व्यक्ति क्लाइंट की डिमांड और मौके के हिसाब से परफेक्ट मेकअप कर पाने में सक्षम होता है, उसे इस क्षेत्र में सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। साथ ही एक मेकअप आर्टिस्ट को हर स्टाइल और गेटअप के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए आपको लेटेस्ट मेकअप ट्रेंड के बारे में हमेशा रिसर्च करती रहनी चाहिए। साथ ही मेकअप को लेकर हो रहे प्रयोगों पर भी आपको पैनी नजर रखनी चाहिए ताकि आप अपने काम में भी उसे शामिल कर सकें। इतना ही नहीं, उसे अपने टूल्स, प्रॉडक्टस व उन्हें इस्तेमाल करने के बारे में भी सही तरह से पता होना चाहिए। एक मेकअप आर्टिस्ट को पब्लिक डील भी करना होता है, इसलिए आपका कम्यूनिकेशन लेवल भी बढ़िया होना चाहिए। आपकी रचनात्मकता के साथ−साथ आपके कम्युनिकेशन स्किल आपको आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं आपको लंबे समय तक बिना थके काम करना, धैर्य व टीम के साथ काम करना भी आना चाहिए।

 

योग्यता

इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए आपको मेकअप की बारीकियों के बारे में पता होना चाहिए। जिसके लिए आप इस विषय में डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। इस क्षेत्र में डिप्लोमा कोर्स करने के लिए आपका दसवीं या बारहवीं पास होना ही पर्याप्त है।

 

यहां मिलेंगे मौके

एक मेकअप आर्टिस्ट के पास काम की कभी भी कमी नहीं होती। आप चाहें तो किसी मेकअप स्टूडियो में जॉब कर सकते हैं या फिर खुद का पार्लर भी चला सकते हैं। अगर आप खुद का बिजनेस शुरू नहीं कर सकते तो बतौर फ्रीलासंर भी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे सकते है। इसके अतिरिक्त टीवी इंडस्ट्री से लेकर फिल्म, एड कंपनियों आदि में संपर्क करके वहां पर भी काम की तलाश कर सकते हैं। इस क्षेत्र में काम और कमाई की कोई सीमा नहीं है, बशर्ते आप अपने काम में माहिर हों।

 

मिलेगी इतनी आमदनी

इस इंडस्ट्री में आपकी आमदनी आपके अनुभव और वर्कप्लेस पर निर्भर करती है। उदाहरण के तौर पर अगर आप किसी बड़े कलाकार के पर्सनल मेकअप आर्टिस्ट के रूप में काम करते हैं, तो फिर आपकी सैलरी लाखों में हो सकती है। वहीं जो लोग खुद का मेकअप स्टूडियो खोलते हैं, उनकी आमदनी भी उस स्टूडियो के चलने के ऊपर निर्भर करती है। फिर भी अनुभव और लोगों की तारीफ बटोरने के बाद आप इस क्षेत्र में काफी अच्छी कमाई कर सकते हैं। 

 

प्रमुख संस्थान

पर्ल अकादमी, विभिन्न केन्द्र

लैक्मे ट्रेनिंग अकादमी, दिल्ली

ओरेन ब्यूटी अकादमी, विभिन्न केन्द्र

ऑरा ब्यूटी अकादमी, पंजाब

हेजल इंटरनेशनल इंस्टीटयूट ऑफ ब्यूटी एंड वेलनेस, पंजाब




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कैरियर बदलने से पहले सोचें कई बार

किसी भी कैरियर में बहुत आगे बढ़ने के बाद कई युवा साथी कैरियर शिफ्ट करने की इच्छा रखते हैं। वे एक तरह की जिंदगी से कुछ अलग करना चाहते हैं जो उनके दिल को पसंद हो। इस प्रकार के कैरियर शिफ्ट में न केवल जोखिम रहता है बल्कि यह कैरियर का एक ऐसा मोड़ रहता है जहां से आप पर आर्थिक रूप से बहुत बोझ भी रहता है।    ऐसे में अगर आप बदलाव कर रहे हैं तब इन बातों का जरूर ख्याल रखें। ऐसा न हो कि महज बदलाव के लिए आपने कैरियर शिफ्ट कर लिया पर बाद में लगा कि अपने हाथों से पैर पर कुल्हाड़ी मार ली।


पैसा सब कुछ नहीं

कैरियर में बदलाव करते समय अगर आप यह सोचते हैं कि जो वर्तमान में कार्य कर रहे हैं उसमें पैसा कम है और कैरियर शिफ्ट के बाद ज्यादा पैसा मिल जाएगा तब आप गलत दिशा में सोच रहे हैं। प्रत्येक कैरियर में अलग-अलग तरह की प्रक्रियाएं रहती हैं आगे बढ़ने के लिए। इस कारण पैसे को ही देखकर करियर शिफ्ट न करें।


किसी और ने किया इसलिए आप भी करें

यह अकसर देखा गया है कि कोई व्यक्ति लगातार पांच-आठ वर्षों तक एक ही कंपनी में कार्य कर रहा है और कंपनी में काम करने वाले उसके एक साथी ने कैरियर शिफ्ट किया क्योंकि उसे मीडिया में काम करने की इच्छा थी। साथी ने कैरियर शिफ्ट किया है इसलिए आप भी करें यह जरूरी नहीं। आप अपनी सहूलियत देखें।


अपनी क्षमता को पहचानें

कई बार युवा साथी जोश में आकर कैरियर शिफ्ट करने के बारे में विचार करते हैं और उस पर अमल भी कर देते हैं। जब वे दूसरे कैरियर के लिए काम करने जाते हैं तब असहज महसूस करते हैं। यह इस कारण भी होता है क्योंकि आप अपनी क्षमता से परिचित नहीं हैं। कैरियर शिफ्ट करने के पहले इस ओर जरूर ध्यान दें कि क्या वाकई आपमें उतनी क्षमता है। किसी विकल्प का चयन मात्र इसलिए न करें क्योंकि वह आपके लिए अंतिम विकल्प है। यदि आप इस संबंध में किसी उलझन में हैं तो खुद का आंकलन पहले करें।


नई डिग्री लें या नहीं

युवा साथी पांच वर्ष के कैरियर के बाद अपने पसंद के कैरियर को अपनाने के लिए नई डिग्री लेने के लिए भी तैयार हो जाते हैं। पर इस बात का ध्यान दें कि आप पांच वर्षों बाद पुनः पढ़ाई करने जा रहे हैं। डिग्री आपको फायदेमंद भी साबित हो सकती है और नुकसान भी हो सकता है क्योंकि आप डिग्री प्राप्त करने के लिए अलग ध्यान लगा रहे हैं और वर्तमान में जो काम कर रहे हैं उस पर आपका ध्यान नहीं होता। ऐसे में आप न इधर के रहते हैं न उधर के। कैरियर में बदलाव संबंधी बड़े फैसले अपने आप न करें। इस संबंध में अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों से बात करें। हो सकता है आपकी इस समस्या में वे आपको बेहतर विकल्प दें।




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यूपी के हर जिले में की जा रही रोजगार की व्यवस्था, इन्वेस्टर सम्मिट के बाद तीन लाख करोड़ खर्च : योगी आदित्यनाथ

अलीगढ़ : कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह गरीबों की मदद के साथ हर जिन्दगी को बचाने के लिए अभूतपूर्व कार्य किया है। वह आज पूरी दुनिया में मिसाल है। जब पूरी दुनिया इस महामारी से त्रस्त थी तो यहां प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हर जिंदगी को बचाने का प्रयास के साथ ही स्वालम्बन की ओर राष्ट्र आगे बढ़ रहा था।


ये बातें मंगलवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही। वे अलीगढ़(हरिगढ़) में राजा महेन्द्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय की नींव रखने के अवसर पर कही। इस अवसर पर प्रधानमंत्री भी उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में 2017 में भाजपा की सरकार बनी। 2018 में यहां पहला इन्वेस्टर सम्मिट का उद्घाटन पीएम ने किया। आज यूपी में तीन लाख करोड़ का निवेश हो चुका है। यहां अपने ही जनपद में नौकरी की सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। यहां रक्षा उत्पादन में काफी प्रगति की है। यहां डिफेंस कारिडोर के शुभारंभ के लिए यहां पीएम का आगमन हुआ है। यहां अक्सर आप लोग कहते थे कि यहां शिक्षा का अलख जगाने वाले राजा महेन्द्र प्रताप सिंह को पश्चिमी यूपी कभी विस्मृत नहीं करता। उनके नाम पर आज यहां विश्वविद्यालय बनाने के लिए प्रधानमंत्री आये हैं।


योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना काल में प्रधानमंत्री ने अन्न योजना की शुरूआत की और हर जिन्दगी को बचाने का प्रयास किया। इससे उनकी देश के प्रति आत्मीय संवेदना प्रकट होती है। प्रधानमंत्री का कोरोना काल में प्रबंधन जितना अच्छा था। वह दुनिया के सामने मिसाल बन गयी है। हर जीवन को बचाने के लिए यहां अभूतपूर्व प्रयास किये गये।


योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्ग दर्शन में यहां आठ राज्य विश्वविद्यालय बन रहे हैं। अभी ओलंपिक में खिलाड़ियों ने जिस तरह प्रदर्शन किया। प्रदेश में मेरठ में पहला स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय बना है। अभी तीन दिन पहले प्रयागराज में भी एक बना है। राज्य में नई शिक्षा नीति को यहां पूरी तरह स्वीकार किया गया है। यहां गांव के लिए, गरीब के लिए, किसान के लिए काम हो रहा है। यहां सबका साथ, सबका विकास के नारे को आगे बढ़ाया जा रहा है। यहां कोरोना काल में भी चीनी मिलों को अनवरत चलाया गया। खेत में दोगुना आमदनी करने के लिए कार्य किया है।





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इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल-एस्टेट में करियर

समय के साथ तरक्की के नए रास्ते खुलते जा रहे हैं और इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर एवं रियल एस्टेट का बहुत बड़ा योगदान है। हर तरह की उन्नति को हम इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल एस्टेट से जोड़ सकते हैं।    देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल एस्टेट का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। हमारे चारों ओर सीमेंट-क्रांकीट के जंगल खड़े हो रहे हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट के बढ़ने से इसमें युवाओं के लिए करियर की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।


यह क्षेत्र चुनौतियों के साथ-साथ भरपूर आर्थिक संभावनाओं वाला क्षेत्र भी है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए उन सभी गुणों और कौशल की आवश्यकता होती है जो की एक बिजनेस स्थापित करने के लिए ज़रूरी होते हैं। इस क्षेत्र को बिजनेस के रूप में अपनाने वाले युवा 12वीं पास करने के‍ बाद युवा दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से इसका कोर्स कर सकते हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों से सिविल अथवा कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर इस क्षेत्र में जॉ‍ब किया जा सकता है। सेल्स एवं मार्केटिंग क्षेत्र में करियर के लिए एमबीए किया जा सकता है। रियल एस्टेट के कारोबार से जुड़ी कंपनियों में कार्य के आधार पर आप सेल्स मैनेजर, सेल्स एक्जीक्यूटिव, कंस्ट्रक्शन एक्जीक्यूटिव जैसे पदों पर कार्य कर सकते हैं। 


चरणबद्ध प्रक्रिया


साधारणतः छात्र 12वीं के उपरान्त दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से इस क्षेत्र में कोर्स करते हैं यदि उन्हें अपना रियल-एस्टेट बिजनेस चलाना हो. परन्तु तकनीकी ज्ञान प्राप्त कर इस क्षेत्र में जॉब करने के लिए आपको देश भर में फैले इंजीनिअरिंग कॉलेजों से सिविल अथवा कंस्ट्रक्शन इंजीनिअरिंग में डिग्री लेनी होगी. तकनीक से जुड़ी नौकरियों के अलावा इस क्षेत्र में आप सेल्स और मार्केटिंग अथवाइंटरनेश्नल रिलेशंस में एमबीए करके या बिजनेस कम्युनिकेशंस में डिग्री प्राप्त कर किसी कंस्ट्रक्शन कम्पनी के साथ अपने करियर की शुरूआत कर सकते हैं. विभिन्न कंपनियों के कार्य के आधार पर आप सेल्स मैनेजर, सेल्स एग्जीक्यूटिव, कंस्ट्रक्शन एग्जीक्यूटिव जैसे पदों से शुरूआत कर सकते हैं.


यहाँ आपको निम्न क्षेत्रों का ज्ञान होना भी ज़रूरी है:


-बिल्डिंग और कंस्ट्रक्शन से जुड़े तकनीकी पहलू

-विभिन्न क्षेत्रों में घर/प्लॉट/ज़मीनों के बाज़ार भाव व इनसे जुड़ी ख़बरों पर नज़र रखना

-विभिन्न कम्पनियों के स्टॉक और शेयर पर नज़र रखना

-ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मार्केटिंग, सेलिंग व प्राइसिंग रणनीतियों का ज्ञान

-शेयर होल्डर्स और खरीददारों का बड़ा नेटवर्क


यदि आप इन विषयों में अपनी तैयारी पक्की रखते हैं तो आप अपने लिए इस क्षेत्र में एक विशेष जगह बना सकते हैं.


पदार्पण

यदि आप खुद का रियल-एस्टेट बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो अपने रिस्क पर अपने बनाए गए कोंटेक्ट्स के ज़रिये आप बाज़ार से कच्चा माल व मजदूर प्राप्त कर सकते हैं. आपके व्यापार के आकार के आधार पर बैंक भी आपको लोन दे सकता है. अन्यथा आप सिविल इंजीनिअरिंग में डिग्री लेकर नौकरी भी कर सकते हैं.


क्या यह मेरे लिए सही करियर है?

यदि आपमें ज्यादा पैसा कमाने की इच्छा और लगन है और यदि आप 24 घंटे सातों दिन कठिन परिश्रम करते हुए बिल्डर्स, कंसल्टेंट्स, मजदूर एवं साईट मैनेजर की टीम को मार्गदर्शन दे सकते हैं तो इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल-एस्टेट का क्षेत्र आपके लिए है.


एक बिल्डर के तौर पर आपको सीमेंट, चूना मसाला, ईंट एवं अन्य कच्चा सामान खरीदकर मजदूरों और आर्कीटेक्ट को तय करना होता है. बिल्डर का कार्य पुरानी, गिरवी रखी हुई तथा वाद-विवाद वाली ज़मीन, प्लॉट अथवा घर को कानूनी तौर पर सही बनाकर उसे बेचने योग्य बनाना भी होता है. अब अगला कदम आता है प्रोपर्टी को बेचना जिसके लिए आपको एक अच्छा समन्वयक होना ज़रूरी है.


हालांकि आपको शुरूआत में यह एक कठिन कार्य लगेगा परन्तु दीर्घकालीन दृष्टि से देखने पर यह आपके लिए किसी भी और प्रोफेशन से ज्यादा पैसे कमाने वाला प्रोफेशन साबित होगा. विशेषकर भारत में जहां इण्डिया प्रोपर्टी डोट कॉम, 99 एकड़ डोट कॉम और इण्डिया हाउसिंग डोट कॉम जैसी वेबसाईट सारे देश में प्रोपर्टी खरीदने और बेचने की सुविधा प्रदान कर रही हैं. ये वेबसाइट्स खरीदने वाले और बेचने वाले के बीच माध्यम बनकर प्रक्रिया को सरल बना देती हैं. बिजनेस को बढ़ाने का एक और माध्यम है- समाचार-पत्रों में विज्ञापन देना.


खर्चा कितना होगा?


अपने राज्य के किसी प्राइवेट संस्थान से सिविल इंजीनिअरिंग डिग्री करने पर 60,000 से लेकर 1 लाख रूपये तक वार्षिक खर्चा होगा. परन्तु यदि आप राष्ट्रीय स्तर की किसी प्रवेश परीक्षा को उत्तीर्ण कर आईआईटी या दिल्ली कॉलेज ऑफ़ इंजीनिअरिंग जैसे किसी संस्थान में दाखिला लेते हैं तो फीस अलग होगी. आपके पास सेल्स एंड मार्केटिंग में एमबीए कर रियल-एस्टेट एजेंसी में नौकरी करने का विकल्प भी है.


छात्रवृत्ति


यदि आप बैंक से लोन लेने के इच्छुक हैं तो स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया से बेहतर विकल्प कोई नहीं है जोकि आपको 7.5 लाख तक का लोन देता है. चूंकि यह एक राष्ट्रीयकृत बैंक है इसलिए क़र्ज़ चुकाने के तरीके भी सुरक्षित हैं.


रोज़गार के अवसर


इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल-एस्टेट क्षेत्र में सेल्स एग्जीक्यूटिव, प्रोपर्टी मैनेजर, एस्टेट मैनेजर, आईटी मैनेजर- रियल एस्टेट और प्रोफ़ेसर जैसे पद आपको प्राप्त हो सकते हैं. ये वेबसाइट्स तकनीकी क्षेत्र में कई अवसर उपलब्ध कराती हैं. यदि आप सिविल इंजीनियर या एक आर्कीटेक्ट हैं तो भी आप कंस्ट्रक्शन टीम का भाग बन सकते हैं. अन्य फील्ड सेल्स की नौकरियों की तुलना में निर्माण क्षेत्र की जॉब ज्यादा थकाऊ होती है. दूसरी ओर, इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में आते हैं– सिविल इंजीनियर, इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजर, स्टोर या वेयरहाउस मैनेजर तथा इन्वेंटरी एग्जीक्यूटिव्स.


वेतनमान


बिजनेस लाने की मात्रा के आधार पर  एक रियल-एस्टेट सेल्स एग्जीक्युटिव का शुरूआती मासिक वेतन 15000 से 50000 तक जा सकता है. यदि आप किसी बैंक अथवा प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के रिअल्टी या मोर्टगेज डिपार्टमेंट में कमीशन बेस पर काम करते हैं तो व्यापारिक संबंध बनाने के अनुपात में आप असीमित आय प्राप्त कर सकते हैं. सिविल इंजीनियर के तौर पर आप अग्रणी कंपनियों में 20 से 25 हज़ार मासिक वेतन के साथ स्ट्रक्चर मैनेजर के पद से शुरूआत कर सकते हैं.


मांग एवं आपूर्ति


आईटी, इलेक्ट्रोनिक्स और टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर की तुलना में सिविल इंजीनियर की मांग हालांकि कम है परन्तु एक बार इन कंपनियों में लग जाने पर आप बहुत अच्छा सेलेरी पैकेज प्राप्त कर सकते हैं तथा आपको जापान जैसे देशों की यात्रा करने का मौका भी मिल सकता है. इन्फ्रास्ट्रक्चर मार्केटिंग और इंजीनिअरिंग में नयी तकनीकों एवं मशीनों की खरीददारी करना भी समाहित होता है. इस क्षेत्र में मांग की तुलना में इंजीनियर्स की आपूर्ति ज्यादा है.


सकारात्मक/नकारात्मक पहलू


सकारत्मक


-इस क्षेत्र का बहुत तेज़ गति से तकनीकी विकास होने कारण जॉब की संभावनाएं बढ़ गयी हैं.

-कमाई के अवसर सभी रियल-एस्टेट प्रोफेशनल्स के लिए हैं चाहे वह बिल्डर, कन्स्ट्रक्टर, सेल्स मैनेजर हो या इंजीनियर. आपको चाहिए तो बस सेलिंग व रिलेशनशिप मैनेजमेंट स्किल.

 

नकारात्मक 


-इस क्षेत्र में बहुत उतार-चढ़ाव होते हैं. 2009 की मंदी में ही बहुत सारे रियल-एस्टेट प्रोफेशनल कंगाल हो गए थे.

-यह एक जोखिम वाला कार्य है चूंकि इसमें बहुत बड़े तौर पर आर्थिक निवेश करना होता है तथा ज़्यादा यात्राएं करनी पड़ सकती हैं. यदि आपने शेयर या स्टॉक मार्केट में निवेश किया होता है तो बाज़ार के उतार-चढ़ाव की वजह से रिस्क और बढ़ जाता है.  


भूमिका और पदनाम


रिअल-एस्टेट का अर्थ होता है घर या ऑफिस के लिए संपत्तियों का निर्माण करना. दूसरी ओर, आधारभूत संरचना के व्यापार में निहित होता है- बड़े पुल, मार्ग और आईटी पार्क विकसित करना. दोनों प्रकार के बिजनेस जिन कर्मचारियों की नियुक्ति करते हैं उन सभी को हालांकि एक ही प्रकार के कार्य सौंपे जाते हैं परन्तु उनका कार्य-क्षेत्र छोटा या बड़ा हो सकता है. रिअल-एस्टेट इंडस्ट्री में सेल्स-मैनेजर ठीक उसी प्रकार से संपत्तियां बेचकर अपनी कंपनी के लिए बिजनेस लाता है जिस प्रकार एक बैंक का सेल्स मैनेजर लोन, म्यूचुअल फंड अथवा क्रेडिट कार्ड बेचता है. इस उद्योग की बाज़ार में एक अलग जगह है और यह क्षेत्र दूसरे कई उद्योगों की तुलना में ज़्यादा वेतन देता है खासकर इंजीनियर व सेल्स अफसरों को.


अग्रणी कम्पनिया


भारत की टॉप-टेन रियल-एस्टेट कम्पनियाँ हैं:


-अम्बुजा रिअल्टी ग्रुप

-डीएलएफ बिल्डिंग

-सन सिटी प्रोजेक्ट्स

-मर्लिन ग्रुप्स

-मैजिक ब्रिक्स

-घर4यू

-एनके रिअल्टर

-99एकर्स

-मित्तल बिल्डर्स

-के रहेजा कन्स्ट्रक्टर


रोज़गार प्राप्त करने के लिए सुझाव


किसी रिअल-एस्टेट फर्म में इंजीनियर या सेल्स के पद के लिए साक्षात्कार देते समय निम्न बातों का ध्यान रखें:


-अपने मित्र, जान-पहचान वालों की लिस्ट हमेशा साथ रखें जिनके आधार पर आप कंपनी के लिए बिजनेस ला सकते हैं.

-नयी तकनीकों व कंस्ट्रक्शन कम्पनियों के बारे में अपने आपको अपडेट रखें. अपने भावी नियोक्ता को बताएं कि आपको बाज़ार की कीमतों व आने वाली नई तकनीकों के बारे में ज्ञान है .

-अच्छी अंग्रेज़ी बोलें तथा सभ्य ड्रेस पहनकर जाएँ चूंकि प्रजेंटेशन इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है चाहे वह सेल्स प्रोफेशनल हों या इंजीनियरिंग प्रोफेशनल.  



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पीएचडी के बाद आपके पास क्या है करियर ऑप्शन्स

आमतौर पर यह एक गलत धारणा है कि यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी एक ट्रेनिंग आधारित स्टडी मोड्यूल है. हां! यह कुछ हद तक सही विचार है लेकिन, पीएचडी का क्षेत्र एकेडमिक क्षेत्र से कहीं आगे तक व्याप्त है. जो लोग पीएचडी की डिग्री प्राप्त करते हैं, उनकी तुलना में कम लोग एकेडमिक क्षेत्र ज्वाइन करते हैं. भारत सहित अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशों में रोज़गार का परिदृश्य बड़ी तेज़ी से बदल रहा है. इस वजह से पीएचडी स्टूडेंट्स भी एकेडमिक क्षेत्र ज्वाइन करने के अपने उद्देश्य के बारे में अच्छी तरह सोचने पर मजबूर हो गये हैं. आजकल, पीएचडी ग्रेजुएट्स राइटिंग, रिसर्च, इंवेस्टमेंट बैंकिंग, लॉ और अन्य कई संबद्ध क्षेत्रों में विभिन्न विकल्पों की तलाश कर रहे हैं. 


अपनी डिग्री पर केवल “डॉक्टर” की रबड़ लगी होने पर गर्व महसूस करने से आपको कोई बढ़िया जॉब नहीं मिलेगी. यह बहुत अच्छी बात है कि आप एक पीएचडी ग्रेजुएट हैं. हालांकि, पीएचडी सिर्फ डिग्री की तुलना में कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ट्रेनिंग और नॉलेज पर आधारित रिसर्च एक्टिविटीज को ज्यादा महत्व दिया जाता है. पीएचडी में रिसर्च इश्यूज की बेहतरीन समझ के साथ ही गहन रिसर्च कार्य और अति विशेष एनालिटिकल और ऑब्जरवेशनल स्किल्स के साथ महत्वपूर्ण समस्याओं को सॉल्व करने की काबिलियत शामिल है. किसी पीएचडी ग्रेजुएट को कई घंटे लगातार काम करना, जटिल समस्याओं को एनालाइज और सॉल्व करना और शांति से हरेक परिस्थिति को हैंडल करना जरुर सीखना चाहिए. ये गुण न केवल किसी एकेडेमिक एक्सपर्ट के लिए बहुत जरुरी हैं बल्कि, रिसर्च, फाइनेंस और पब्लिक सर्विस जैसे अन्य कार्यक्षेत्रों के लिए भी अनिवार्य हैं.


आमतौर पर, पीएचडी करने के बाद सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जॉब्स हैं-यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, इंडस्ट्रियल आर एंड डी लैब प्रोफेशनल्स और स्टार्ट-अप्स मेंटर्स. इंडस्ट्रियल रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन्स में समर्पित पीएचडी ग्रुप्स होते हैं जो रिसर्च एक्टिविटीज और नये प्रोडक्ट्स की डिजाइनिंग का कार्य करने के साथ ही महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकों में शामिल होते हैं. डेवलपमेंट सेंटर्स की तुलना में, इंडस्ट्रियल आर एंड डी लेब्स की एवरेज सैलरीज काफी अच्छी होती हैं. इससे साफ पता चलता है कि 5 वर्ष के अनुभव सहित एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट को इंडस्ट्रियल आर एंड डी लेब्स में अभी जॉब ज्वाइन करने वाले किसी फ्रेश पीएचडी ग्रेजुएट की तुलना में कम सैलरी मिलती है.


कुछ मामलों में, डेवलपमेंट सेंटर्स विभिन्न कार्यों के लिए पीएचडी ग्रेजुएट्स को हायर करते हैं लेकिन, उनकी सैलरी विशेष आर एंड डी की तुलना में समान या कुछ अधिक होती है. किसी रिसर्च लैब या डेवलपमेंट सेंटर ज्वाइन करने वाले पीएचडी ग्रेजुएट का सैलरी स्ट्रक्चर और डेजिग्नेशन हमेशा किसी अन्य ग्रेजुएट से ज्यादा हाई होते हैं फिर भले ही अन्य ग्रेजुएट्स के पास काफी अच्छा कार्य अनुभव हो.


स्टार्ट-अप्स की शुरुआत ने पूरे पीएचडी परिवेश को बदल दिया है. कुछ समय पहले तक, पीएचडी का कार्यक्षेत्र सिर्फ एकेडमिक क्षेत्र तक ही सीमित था. यद्यपि आजकल, एकेडमिक क्षेत्र और स्टार्ट-अप्स के मिश्रण से पीएचडी ग्रेजुएट्स को कई नये ऑप्शन्स मिल गये हैं. अब, क्योंकि स्टार्ट-अप्स इनोवेशन और इम्प्रोवाइजेशन का स्टोरहाउस बन चुके हैं तो पीएचडी ग्रेजुएट्स किसी नये और उभरते हुए संगठन में काम करना चाहते हैं ताकि अपनी एक्सेप्शनल रिसर्च एंड डेवलपमेंट क्षमताओं के माध्यम से नये प्रोडक्ट्स को डिज़ाइन करने के लिए वे अपने नॉलेज बेस्ड स्किल्स का उपयोग कर सकें. आजकल, पीएचडी ग्रेजुएट्स स्टार-अप परिवेश में काम तलाश रहे हैं ताकि उन्हें अच्छा कार्य-अनुभव प्राप्त हो जाए और फिर, वे एकेडमिक क्षेत्र ज्वाइन कर लें, जहां पर वे अपने स्किल्स और विशेषज्ञता का प्रोडक्टिव तरीके से उपयोग कर सकें.


एकेडमिक क्षेत्र पीएचडी ग्रेजुएट्स की पहली पसंद बन चूका हैं क्योंकि यहां उन्हें काम करने की पूरी आजादी के साथ बहुत बढ़िया सैलरी पैकेज मिलते हैं. अधिकांश मामलों में, एकेडमिक क्षेत्र की जॉब्स के तहत कई अन्य लाभ जैसे फ्री एकोमोडेशन भी शामिल होते हैं. पीएचडी ग्रेजुएट्स के लिए इस बात का भी चांस होता है कि वे किसी अन्य देश में काम करें. कुल मिलाकर, पीएचडी कैंडिडेट्स को हायर करते समय अधिकांश संगठन अक्सर अपने भावी कैंडिडेट्स के सुपीरियर एनालिटिकल स्किल्स और जटिल समस्याओं को तुरंत सॉल्व करने की काबिलियत देखते हैं.






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फाइनेंस में करियर, कोर्स, जॉब और सैलरी, जानें सब कुछ

पिछले कुछ वर्षों से मोबाइल, इंटरनेट बैंकिंग के क्षेत्र को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ निवेश में भी तेजी आई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। प्रतिव्यक्ति आय कम होने व जीडीपी के सीमित होने के बावजूद यह क्षेत्र लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरा है। चाहे बहुराष्ट्रीय कंपनियां हों या अन्य फाइनेंस कंपनियां, सभी गांवों की ओर रुख कर रही हैं। ऐसे में फाइनेंशियल प्लानर और इससे संबंधित पेशेवरों की जरूरत भी बढ़ी है।


मिलते हैं कई अवसर

दरअसल फाइनेंस, प्रबंधन से जुड़ा वह विज्ञान है, जिसमें धन या अन्य साधनों के निवेश की अनेक प्रक्रियाओं की जानकारी मिलती है। इसमें वित्तीय लेन-देन के प्रबंधन के लिए नए-नए तरीके ईजाद किए जाते हैं। इससे इंटरनेशनल फाइनेंसिंग, मल्टी करेंसी ट्रेनिंग, इंटरनेशनल लीज, फाइनेंसिंग आदि को जोड़ सकते हैं।


कब रख सकेंगे कदम

फाइनेंस में अकसर बी.कॉम के छात्र आना पसंद करते हैं। इसमें नौकरी के इच्छुक युवाओं से कम से कम अर्थशास्त्र में ग्रेजुएट होने की उम्मीद की जाती है। युवा, जिन्होंने चार्टेर्ड एकाउंटेंसी और कॉस्ट एंड वर्क्स एकाउंटेंसी किया है, वे फाइनेंस में एमबीए करने की ओर कदम बढ़ाना पसंद करते हैं। इस क्षेत्र में इच्छुक युवा अकसर फाइनेंशियल मैनेजमेंट में मास्टर, इकोनॉमिक्स या कॉमर्स में पीजी करने के बाद कदम रखते हैं।


कोर्स की उपलब्धता

आज प्रबंधन की पढ़ाई कराने वाले संस्थानों में सबसे ज्यादा स्पेशलाइजेशन फाइनेंस में कराए जाते हैं। इसकी वजह युवाओं में इसकी बढ़ती मांग है। फाइनेंस में छह माह से तीन साल की अवधि के डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा, ग्रेजुएशन व मास्टर स्तर के कई पाठ्यक्रम तमाम संस्थानों में कराए जाते हैं। वे युवा जो फाइनेंस से जुडे़ दूरस्थ व ऑनलाइन कोर्स करना चाहते हैं, उनके पास बी.कॉम के साथ एक-दो वर्ष का अनुभव होना जरूरी है। किसी युवा के पास उच्च स्तर पर फाइनेंस की डिग्री है तो वह आसानी से तरक्की की राह पकड़ सकता है।


कुछ प्रमुख पाठ्यक्रम

' पीजी डिप्लोमा इन फाइनेंशियल प्लानिंग एंड मैनेजमेंट ' बैचलर इन फाइनेंशियल एंड इनवेस्टमेंट एनालिसिस ' बीए/एमए इन फाइनेंस ' बीएससी इन फाइनेंशियल अकाउंटिंग ' फुल टाइम एमबीए (दो वर्षीय) ' पीजी डिप्लोमा इन फाइनेंशियल प्लानिंग एंड वेल्थ मैनेजमेंट ' पीजी डिप्लोमा इन मैनेजमेंट एंड फाइनेंशियल इंजीनियरिंग


क्या हो योग्यता

फाइनेंस में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं में धैर्य, काम के प्रति अनुशासन होने के साथ ही टैक्स बिजनेस से जुड़े कामों में रुचि होनी चाहिए। उनमें टीम वर्क, समस्या सुलझाने की क्षमता, मैथ्स, कंप्यूटर, विश्लेषण व संवाद कौशल के अलावा मार्केटिंग स्किल को भी परखा जाता है।


रोजगार की संभावनाएं

पिछले कुछ वर्षों के बाजार को देखते हुए कहा जा सकता है कि फाइनेंस में रोजगार के भरपूर अवसर हैं। बैंकिंग सेक्टर में जहां इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी मैनेजर, रिटेल रिलेशनशिप ऑफिसर, म्युचुअल फंड मैनेजर आदि के रूप में मौके मिलते हैं, वहीं फाइनेंशियल प्लानिंग से जुड़ी कंपनियों में रिलेशनशिप मैनेजर व एसोसिएट ऑडिटर जैसे कई अहम मौके मिल सकते हैं। इंश्योरेंस कंपनियों में भी कई रूपों में काम किया जा सकता है। केपीओ सेक्टर में युवा डेटा एनालिस्ट, मार्केट रिसर्चर, क्लाइंट डेवलपमेंट एनालिस्ट, बिजनेस एनालिस्ट व रिसर्च एसोसिएट के रूप में सेवाएं दे सकते हैं। इक्विटी रिसर्च फर्म में भी मौके मिलते हैं।


इन जगहों पर है मांग

फाइनेंशियल एडवाइजर : फाइनेंशियल एडवाइजर या प्लानर की सबसे अधिक जरूरत मध्यम व छोटे स्तर की कंपनियों में पड़ती है। इनकी मदद से ही बड़ी-बड़ी कंपनियां वित्तीय फैसले लेती हैं।


क्रेडिट एनालिस्ट : क्रेडिट एनालिस्ट का काम किसी क्लाइंट या कंपनी की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन कर उसके अंतर्गत आने वाले जोखिमों को दूर करना होता है।


फाइनेंशियल एनालिस्ट: यह पेशेवर मौजूदा योजनाओं पर ध्यान देते हुए कस्टमर या फर्म को वित्तीय लेखे-जोखे से अवगत कराते हैं। कंपनी की बैलेंस शीट को तैयार करने की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है।


इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट : ये पेशेवर अपने अध्ययन के आधार पर प्रॉफिट-लॉस स्टेटमेंट तैयार करते हैं। स्टॉक बॉन्ड व अन्य वित्तीय साधनों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं की होती है। ये रिसर्च के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर प्रबंधन को स्थिति से परिचित कराते हैं। इनके अलावा कमर्शियल रियल एस्टेट एजेंट, पोर्टफोलियो मैनेजर, स्टॉक ब्रोकर की भी काफी मांग है।


सैलरी पैकेज है आकर्षक

शुरुआत में किसी कंपनी से जुड़ने पर प्रतिमाह आय 20-25 हजार रुपये होती है। जबकि 5-7 साल का अनुभव होने पर यह बढ़कर 45-55 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाती है। आज कई ऐसे पेशेवर हैं, जो डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह तक कमा रहे हैं। शिक्षक व कंसल्टेंट की भी अच्छी आमदनी होती है।


प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान

- डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल स्टडीज (डीयू), नई दिल्ली

- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल प्लानिंग, नई दिल्ली

- दिल्ली स्कूल ऑफ बिजनेस, नई दिल्ली

- बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, वाराणसी

- अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़

- पटना यूनिवर्सिटी, पटना

- जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जमशेदपुर

- नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई




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इतिहास में है रूचि तो यह फील्‍ड होगी आपके लिए सबसे बेस्‍ट

हाल ही में रामजन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया जिसके बाद एक बार फिर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) सुर्खियों में है। इस फैसले में भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट का अहम रोल रहा। बता दें, ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व के स्थलों की खोज, वहां से उपलब्ध साक्ष्यों के जरिए उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाना पुरातत्वविदों का मुख्य काम होता है। इस फील्‍ड में भी विशेषज्ञों की जरूरत होती है। अगर आप भी इस फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं तो जानिए इससे जुड़ी डीटेल्‍स...


क्‍या होता है पुरातत्वविद का काम?

पुरातत्वविद (आर्कियोलॉजिस्ट) का काम इतिहास को खोजना और संरक्षित करना होता है। साथ ही ये विशेषज्ञ ऐतिहासिक वस्तुओं और सभ्यताओं की खोज से लेकर संग्रहालयों के संरक्षण का काम भी करते हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की खोज व संरक्षण, म्यूजियम्स, आर्ट गैलरीज को देखते हुए आर्कियोलॉजी के क्षेत्र में भी करियर की बहुत संभावनाएं हैं।


कोर्स और एलिजबिलिटी

आर्कियोलॉजी में ग्रैजुएट, पोस्ट ग्रैजुएट और पीएचडी लेवल के कोर्स होते हैं। 12वीं में हिस्‍ट्री (इतिहास) की पढ़ाई करने वाले ग्रैजुएशन में आर्कियोलॉजी पढ़ सकते हैं और इसी में पोस्‍ट ग्रैजुएशन की डिग्री भी हासिल कर सकते हैं। ग्रैजुएशन लेवल पर कई संस्थानों और कॉलेजों में एक साल का पीजी डिप्लोमा होता है। इसके अलावा म्यूजियोलॉजी के रूप में भी कई कोर्स होते हैं जिसके लिए किसी भी बैकग्राउंड के ग्रैजुएट एलिजबिल होते हैं।


कहां मिल सकती है जॉब?

आर्कियोलॉजी/हेरिटेज मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद आपके लिए शिक्षण, अनुसंधान, उत्खनन और संग्रहालय के क्षेत्र में करियर के कई ऑप्‍शन होते हैं। आर्कियोलॉजी का कोर्स करके आप नई दिल्ली स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) और राज्यों में स्थित इनके क्षेत्रीय केंद्रों में आर्कियोलॉजिस्ट या असिस्‍टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में जॉब कर सकते हैं।


कितनी मिलती है सैलरी

यही नहीं, आपके लिए आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम्स, नैशनल और स्टेट लेवल के म्यूजियम्स, आर्ट गैलरीज, कन्‍जर्वेशन लैब्स जैसी जगहों पर भी जॉब के ऑप्‍शन होते हैं। असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट या ऑर्ट रेस्टोरर को इस फील्ड में 50 हजार रुपये तक सैलरी मिल सकती है।


इन जगहों पर मिलती है प्राथमिकता

बता दें, आर्कियोलॉजिकल बैकग्राउंड के प्रफेशनल लोगों को फॉरेन मिनिस्‍ट्री के हिस्टॉरिकल डिविजन, एजुकेशन मिनिस्‍ट्री, नैशनल आर्काइव्‍स ऑफ इंडिया, इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च और प्लानिंग कमीशन जैसे डिपार्टमेंट्स के अपॉइंटमेंट्स में प्राथमिकता दी जाती है। यूनेस्को और यूनिसेफ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी काफी बेहतर संभावनाएं होती हैं।






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फिटनेस इंस्ट्रक्टर बन लोगों को फिट रखो, कॅरियर बनाओ

आधुनिक जीवनशैली ने मानव शरीर और मस्तिष्क पर अकल्पनीय तनाव पैदा किया है। बढ़ती सुविधाओं के साथ शारीरिक कसरत कम होने लगी है जिससे समाज का बड़ा हिस्सा विशेष रूप से शहरी इलाका कई बीमारियों से घिर गया है। मधुमेह, हदृय रोग, मोटापा, हाइपरटेंशन जैसी कई बीमारियां कम उम्र में ही होने लगी है। इस जीवनशैली के कारण फिटनेस के क्षेत्र में व्यवसाय का अच्छा अवसर देखने को मिल रहा है। आधुनिक जिम, हेल्थी क्लब्स और फिटनेस सेंटर तेजी से खुल रहे हैं। ऐसे में फिटनेस इंस्ट्रक्टर का रोल बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी जिम्मेदारी प्रशिक्षु को फिट और शेप में बनाए रखने की होती है। जिम रूटीन के अलावा, फिटनेस ट्रेनर्स को उन्हेंम पोश्चर्स, डाइट इनटेक, फूड सप्लीमेंट्स के बारे में भी मार्गदर्शन करना होता है। यानी फिटनेस ट्रेनर का कॅरियर एक अच्छाी विकल्पर है।


स्टेप बाय स्टेप:- यह जरूरी नहीं है कि फिटनेस ट्रेनर के जॉब के लिए किसी प्रतिष्ठित संस्थान से सर्टिफिकेशन चाहिए। हालांकि अपने प्रतियोगियों से टक्कर लेने के लिए क्वॉलिटी ट्रेनिंग जरूरी है। आप संस्थान जैसे इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्टस् साइंसेस, नई दिल्ली, लक्ष्मीबाई नेशनल कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, तिरूवनंतपुरम व ग्वालियर और देशभर में संचालित स्पोर्टस् अथॉरिटी ऑफ (साई) की संस्थाओं में प्रवेश ले सकते हैं। यही नहीं अगर आपके पास फिजिकल एजुकेशन और इससे जुड़े विषयों का अच्छा ज्ञान है तो आप इस क्षेत्र में डॉक्टेरेट डिग्री भी कर सकते हैं।


करें जॉब मार्केट में मूव:- इन दिनों इस फील्ड में जॉब ओपनिंग अच्छी है लेकिन केवल एक अच्छी क्वॉलिफिकेशन ही काफी नहीं है। आपको फिटनेस इंडस्ट्री में होने वाले डेवलपमेंट्स के लिए खुद को अपडेट और अपग्रेड रखना होगा। आप जूनियर इंस्ट्र्कटर की तरह भी एक फिटनेस क्लब में शुरुआत कर सकते हैं। धीरे-धीरे आप संपर्क बनाते जाए और अच्छे जॉब मार्केट में मूव करें। एक अच्छा विकल्प खुद का व्यवसाय शुरू करना है। इसके लिए सही प्लानिंग, फाइनेंशियल सपोर्ट और जबर्दस्त मैनेजमेंट स्किल्स चाहिए।


जल्द हो शुरुआत:- अगर आप स्कूल के दिनों से ही आपको भी खुद को एक वेल डिफाइन्डह एक्सरसाईज प्रोग्राम अपनाने की जरूरत है। टीनएज सही समय है जब आप जिम में अपनी बॉडी को परफेक्ट शेप दे सकते हैं।


फंडिंग/स्कॉलरशिप:- लक्ष्मीबाई नेशनल कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, तिरूवनंतपुरम योग्य छात्रों को बैचलर्स और मास्टर्स लेवल पर स्कॉलरशिप प्रदान करता है।


जॉब प्रोस्पेक्ट्स:- आम आदमी भी अब फिजिकल फिटनेस और वेलनेस को लेकर जागरूक हो रहा है। इसके साथ ही फिटनेस ट्रेनर्स के लिए कई सारे सुनहर अवसर है। अगर आप सरकारी नौकरी के इच्छुक हैं तो सरकार संचालित संस्थाओं और खेल विभागों में नौकरी पा सकते हैं। स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में ट्रेनर्स के पद भी होते हैं। पोस्टग्रेजुएशन डिग्री लेने वाले फिटनेस इंस्ट्रक्टरर्स विभिन्न कॉलेजों में टीचिंग जॉब भी कर सकते हैं। प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के अवसर फाइव स्टावर होटल से लेकर हेल्थू रिर्सोट, स्पा, स्पोर्टस और फिटनेस क्लब्स तक है। आप खुद का जिम्नेजियम या हेल्थ क्लब संचालित कर सकते हैं या फिर सेलेब्रिटीज के पर्सनल फिटनेस ट्रेनर के रूप में काम कर सकते हैं।


पैकेज:- फिटनेस ट्रेनर का वेतन कुछ पहलुओं पर निर्भर करता है। शुरुआती स्तर पर किसी प्रोफेशनल को ज्यादा वेतन भले न मिले लेकिन समय व अनुभव के साथ उनकी मासिक आय 15 हजार से 25 हजार तक हो सकती है। मल्टीनेशनल फिटनेस चैन में ट्रेनर्स की मासिक आय लाखों में होती है।


कई भूमिकाएं, कई नाम....


फिटनेस इंस्ट्रेक्टकर की भूमिकाएं इस तरह हो सकती है -


एरोबिक्स इंस्ट्रकटर:- एरोबिक्स एक्सरसाइजेस और रूटीन्स में दक्ष फिटनेस ट्रेनर।


क्लीनिकल एक्सरसाइज स्पेशलिस्ट :- मरीजों के साथ काम करने वाले ट्रेनर जो कि उन्हें शारीरिक बीमारियों से बाहर निकालने में मदद करें।


ग्रुप फिटनेस या जिम इंस्ट्रक्टर:- किन्हीं लोगों के समूह के लिए फिटनेस रूटीन तैयार करने में महारत।


पर्सनल ट्रेनर:- किसी एक क्लाइंट से जुड़ा फिटनेस ट्रेनर जो उनके फिटनेस शेड्यूल, डाइट और ट्रेनिंग पर ध्यान देता है। 




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फोटोग्राफी व क्रिएटिविटी के साथ करियर में लगाएं चार चांद

आजकल फोटोग्राफी का शौक तो हर दूसरे शख्स में देखने को मिल जाता है। अगर आपका ये शौक आपका पैशन है तो फोटोग्राफी एक ऐसा कॅरियर है, जो आपको पैसा, ग्लैमर, शोहरत और देश-विदेश घूमने का मौका देता है। इन्हीं में से एक ट्रैवल फोटोग्राफी एक ऐसा फील्ड है जिसमें युवाओं को नौ से पांच ड्यूटी करने की बजाय कैमरे से देश-दुनिया को एक्सप्लोर करने की आजादी मिलती है। इस फील्ड में सफलता के लिए जरूरी है कि आप उसके लायक स्किल्स डेवलप करें। साथ ही इसके लिए एक्स्ट्रा क्रिएटिविटी और अटेंटिविटी की जरूरत होती है। 


क्या है एजुकेशनल क्वालिफिकेशन: इस फील्ड में सीखने की कोई भी लिमिटेशन नहीं है। इसके लिए सबसे आसान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई इंस्ट्रक्शनल वीडियो मौजूद हैं, जिन्हें फॉलो कर आप फोटोग्राफी की बारीकियां आसानी से सीख सकते हैं। प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो आप हायर सेकंडरी या ग्रेजुएशन के बाद फोटोग्राफी से रिलेटेड कोर्स कर सकते हैं। इंडिया में कई इंस्टीट्यूट्स फोटोग्राफी और ट्रैवल फोटोग्राफी में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स कराते हैं।


क्या है स्कोप: नेशनल ज्योग्राफी और आउटलुक ट्रैवलर्स में हमेशा क्वालिटी प्रोफेशनल्स की डिमांड रहती है। इसके अलावा, किसी स्टूडियो में या सीनियर फोटोग्राफर के असिस्टेंट के रूप में काम शुरू कर सकते हैं। फोटोग्राफी फील्ड में संभावनाओं की बात करें तो इसमें कॉम्पिटिशन काफी टफ हो गया है। स्टॉक सेलिंग का ट्रेंड जोरों पर है। लेकिन ट्रैवल मैगजीन, ब्लॉग्स, टूर कंपनीज और ट्रैवल पोर्टल्स के आने से ट्रैवल फोटोग्राफर्स की मार्केट में डिमांड बढ़ी है। 



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इंटरव्यू के दौरान पूछे जाने वाले सबसे जरुरी पांच सवाल...

इंटरव्यू को लेकर हर किसी के मन में कई डाउट्स होते हैं। सबसे पहले जो सवाल उठता है वो ये कि इंटरव्यू के दौरान क्या पूछा जा सकता है। तो ये जान लें कि जॉब इंटरव्यू क्रैक करने के लिए आपको इंटरव्यूअर के सामने अपने जवाबों से साबित करना होगा कि आप ही उनकी कंपनी के लिए श्रेष्ठ उम्मीदवार हैं। तो इन पांच सवालों पर गौर करें और जानें कैसे दें उनके जवाब।


ब्रीफ में खुद को करें इंट्रोड्यूस: इंटरव्यू चाहे किसी भी फर्म में हो आपके बारे में ये सवाल बहुत कॉमनली पूछा जाता है। ये सावल इंटरव्यूअर को उम्मीदवार के बारे में जानने का अवसर देता है। इस सवाल का जवाब देते समय इस बात का ध्यान रखें कि किसी कहानी की तरह बताने के बजाय बिल्कुल संक्षेप में लेकिन इफेक्टिव शब्दों के साथ इस खुद को इंट्रोड्यूस करें। इंटरव्यूअर को अपनी स्ट्रेंथ्स, अचीवमेंट्स और स्किल्स के बारे में बताएं।


आप जॉब क्यों बदलना चाहते हैं: हर एम्प्लॉयर जानना चाहता है कि उम्मीदवार ने पिछली जॉब किन वजहों से छोड़ी थी। इस सवाल का सबसे बेहतर जवाब देने कि लिए आप अपने भविष्य पर फोकस्ड होकर जवाब दें। अपनी पिछली कंपनी के बारे में कोई नकारात्मक बात कहने के बजाय उसके सकारात्मक पक्ष को ही हाइलाइट करें।


क्या हैं आपके स्ट्रांग प्वॉइंट्स: ये सवाल है तो बड़ा पेचीदा लेकिन ये उम्मीदवारों के लिए अवसर प्रदान करता है कि वे अपने श्रेष्ठ पक्ष से इंटरव्यूअर को अवगत करा सकें। इस सवाल से इंटरव्यूअर जानना चाहता है कि आप उसकी कंपनी के लिए किस तरह से सटीक एम्प्लॉयी साबित हो सकते हैं। इसलिए इसमें अपनी वास्तविक स्ट्रेंथ्स तथा स्किल्स को शोकेस करें।


पांच साल बाद खुद को कहां देखते हैं: इस सवाल से इंटरव्यूअर आपकी तार्किक अपेक्षाओं के बारे में जानना चाहता है। अच्छा होगा कि आप इसका जवाब अपनी करियर ग्रोथ को सामने रखते हुए दें।


आपकी सैलरी एक्सपेक्टेशन क्या है: इस सवाल से एम्प्लॉयर आपकी आर्थिक प्राथमिकताओं के बारे में जानना चाहता है। वहीं दूसरी तरफ, इस सवाल का जवाब देते वक्त बेहतर होगा कि आप एम्प्लॉयर को अपनी जरूरत का अंदाज दे दें। 




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वीडियो ऐडिटर के तौर पर बनाएं करियर

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से लेकर यू-ट्यूब तथा अलग-अलग वेबसाइट्स पर मूवी क्लिप्स की बढ़ती संख्या ने वीडियो एडिटिंग के क्षेत्र में नए अवसर क्रिएट किए हैं। ऐसे में विजुअल्स की समझ रखने वाले क्रिएटिव युवा वीडियो एडिटिंग के क्षेत्र में अपनी खास पहचान बना सकते हैं...


नेटफ्लिक्स तथा एमेजन प्राइम जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉम्र्स पर वेब सीरीज की लोकप्रियता के बाद वीडियो एडिटर्स के लिए संभावनाएं और बढ़ गई हैं। वैसे, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, एंटरटेनमेंट एवं एनिमेशन इंडस्ट्री की ग्रोथ को भी देखते हुए वीडियो एडिटिंग एक बढ़िया करियर विकल्प हो सकता है। फिल्मों के अलावा लगातार बढ़ते टीवी चैनल्स एवं उनके कार्यक्रमों के लोकप्रिय होने से भी वीडियो एडिटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसमें न सिर्फ अच्छा पैकेज, बल्कि काम करने के अनेक मौके हैं।


क्या है वीडियो एडिटिंग?

एडिट वक्र्स स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन के निदेशक सचिन सिंह बताते हैं कि किसी भी रफ वीडियो यानी विजुअल को कलात्मक दृष्टि से प्रेजेंटेबल बनाना वीडियो एडिटिंग कहलाता है। अच्छी कहानी एवं निर्देशन के अलावा वीडियो एडिटिंग की बदौलत कोई भी टीवी शो, विज्ञापन या डॉक्यूमेंट्री फिल्म दर्शकों को बांधने की क्षमता रखती है। वीडियो एडिटर का कार्य रिकॉर्डेड वीडियो को एडिट कर एक सिंगल रिफाइंड वीडियो तैयार करना होता है। इसके अंतर्गत साउंडट्रैक से लेकर विजुल्स की एडिटिंग शामिल है। वैसे, यह वीडियो एडिटर की क्षमता पर निर्भर है कि वह कैसे शूटिंग, रिकॉर्डिंग आदि के दौरान बने रॉ वीडियो से मतलब की चीज निकालकर, उसे अर्थपूर्ण बना सकता है। यही वजह है क वीडियो एडिटर्स का नई तकनीक के साथ तालमेल होना बहुत जरूरी है।


वीडियो एडिटिंग के प्रकार:

वीडियो एडिटिंग दो तरह की होती है। लीनियर एडिटिंग में एक टेप से दूसरे टेप पर जरूरी हिस्सों को कॉपी किया जाता है। वहीं, नॉन-लीनियर या डिजिटल एडिटिंग में कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की मदद से ऑन-स्क्रीन एडिटिंग होती है। यह अधिक आसान व लचीली है, क्योंकि नॉन-लीनियर एडिटिंग में विजुल्स की एडिटिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से की जाती है। इसमें समय के साथ-साथ पैसे की बचत होती है। आज इसका ही प्रयोग अधिक होता है। यही वजह है कि एडोब प्रीमियर, फाइनल कट प्रो जैसे प्रोफेशनल एडिटिंग सॉफ्टवेयर्स काफी लोकप्रिय हो गए हैं।


कोर्स एवं योग्यता: वीडियो एडिटिंग का कोर्स 12वीं के बाद किया जा सकता है। वैसे तो फील्ड में करियर के लिए किसी विशेष शैक्षिक योग्यता की जरूरत नहीं है, बस आपको अपने काम में कुशल होना जरूरी है। लेकिन डिजिटल वीडियो-फिल्म एडिटिंग में प्रशिक्षण लेना अच्छा रहेगा। इस फील्ड में डिग्री, डिप्लोमा तथा शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध हैं। अगर आप किसी टीवी चैनल में जॉब चाहते हैं, तो ग्रेजुएट भी होना होगा। अब ऑनलाइन कोर्सेज की सुविधा मिलने लगी है। बेसिक स्किल्स वीडियो एडिटर बनने के लिए सबसे जरूरी है विजुल्स की समझ रखना। आपको कल्पनाशील व टेक्नोलॉजी से अवगत रहना होगा। नवीनतम टेक्नोलॉजी से जितना अवगत रहेंगे, उतना अच्छा।


बढ़ती संभावनाएं: इंफॉर्मेशन, कम्युनिकेशन एवं एंटरटेनमेंट क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों के मद्देनजर वीडियो एवं फिल्म एडिटिंग में क्रिएटिव लोगों की अच्छी डिमांड है। आप इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मीडिया, प्रोडक्शन हाउसेज, फिल्म स्टूडियोज, वेब फिल्मों का निर्माण करने वाली कंपनियों में काम कर सकते हैं। आज न्यूज पोर्टल्स के अलावा ट्रैवल एवं अन्य कंपनीज के अपने वेबसाइट्स होते हैं, जहां इनकी काफी मांग है।








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प्रोफेशनल कोर्सेज जो आपके करियर को करेंगे बूम

लोग अक्सर नौकरी पाने के लिए डिग्री-डिप्लोमा हासिल करते हैं। लेकिन कुछ प्रोफेशन ऐसे होते हैं जिनमें नौकरियों की हमेशा भरमार रहती है। ये प्रोफेशनल कोर्सेज हमेशा आपको बिजी रखने में आपकी मदद करेंगे। तो अगर आप भी किसी अच्छे कोर्स को चुनना चाह रहे हैं पर तय नहीं कर पा रहे हैं कि कौन सा कोर्स आपके लिए परफेक्ट है तो यह रही लिस्ट। प्रफेशनल कोर्सेज जो करियर बनाने में खासे मददगार साबित होते हैं।


वकील:- इस क्षेत्र की डिमांड सरकारी व निजी, दोनों क्षेत्रों में है। इनकी मदद व्यक्तिगत व कॉरपोरेट सेक्टर्स भी लेते हैं। धीरे-धीरे की गई मेहनत से जब आप एक बड़े वकील बनते हैं तो आपकी आमदनी भी मोटी होती है। इस पेशे में दौलत, इज्जत तो मिलती ही है, साथ ही समाजसेवा के मौके भी मिलते हैं।


बैंकर्स:- बैंकिंग सेक्टर्स की बढ़ती रफ्तार से कोई अंजान नहीं है। इसका कारण है देश के तमाम हिस्सों में नई शाखाएं खुलना आदि। इसमें फ्रेशर से लेकर अनुभवी लोगों की जरूरत बनी रहती है।


सॉफ्टवेयर डिवेलपर्स:- आई क्षेत्र की सबसे लोकप्रिय जॉब्स में से एक है सॉफ्टवेयर डिवेलपर्स की पोस्ट। सॉफ्टवेयर इंजिनियर्स की बढ़ती डिमांड ने इस सेक्टर को दमदार बना दिया है। देश-दुनिया में इनकी डिमांड के हिसाब से मोटी सैलरी ऑफर की जाती है।


डेटा साइंटिस्ट:- खासकर साल 2015 में डेटा साइंटिस्ट्स को नौकरी के लिहाज से अच्छी रफ्तार मिली। सरकारी एजेंसियों से लेकर आईटी सेक्टर में इनकी डिमांड बनी रहती है। बेहतर सैलरी इस जॉब की सबसे बड़ी खासियत है।


आईटी प्रफेशनल्स:- बैंकिंग, सॉफ्टवेयर, रिटेल और बीपीओ आदि में आईटी प्रफेशनल्स की खासा डिमांड रहती है। हालांकि ऐसा देखा गया कि इसमें अनुभवी उम्मीदवारों को खासा तवज्जो मिली।


मकैनिकल इंजिनियर्स:- मकैनिकल इंजिनियर्स को साल 2015 में नौकरियों के अच्छे अवसर मिले। सरकारी व निजी क्षेत्रों में इनकी डिमांड है। पावर, कोल, तेल एवं निर्माण क्षेत्र में मकैनिकल इंजिनियर्स के लिए अचछे मौके बने रहते हैं।


डिजिटल मार्केटर्स:- सोशल मीडिया के दौर ने आईटी क्षेत्रों में डिजिटल मार्केटिंग को खासा बढ़ावा दिया है। बेहतर डोमेन नॉलिज रखने वालों की इस क्षेत्र में चांदी है।


टीचर्स:- शिक्षा ऐसा पेशा है, जिसमें आप समाजसेवा भी करते हैं और अपना करियर भी संवारते हैं। लगातार बढ़ रहे स्कूल, कॉलेज और सरकारी-निजी संस्थाओं ने शिक्षकों के लिए बेहतर मौके पैदा किए हैं।


रिटेल प्लानर्स:- रिटेल सेक्टर में इस जॉब प्रोफाइल की खासा डिमांड है। ब्रैंड्स और स्टोर्स आजकल ऑनलाइन दुनिया में कदम रख रहे हैं। ऐसे में रिटेल प्लानर्स का महत्व बढ़ा है।


प्रॉडक्ट मैनेजर्स:- इनकी जिम्मेदारी नए प्रॉडक्ट्स की लॉन्चिंग, पुराने प्रॉडक्ट्स को नए सिरे से डिजाइन कर लॉन्च करवाना होती है। इस क्षेत्र में एमबीए की खासा डिमांड है।






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लीग से हटकर करियर है वेलनेस टूरिज्मि में

स्वास्थ्य या कहें वेलनेस के लिए यात्रा करने की अवधारणा कोई नई नहीं है। ऐसा सदियों से होता आया है। मसलन, तन और मन का स्वास्थ्य सुधारने की खातिर हिमालय पर जाने का चलन। अधिकांश प्राचीन सभ्यताओं में स्वास्थ्य लाभ हेतु लोगों के किसी खास स्थान की यात्रा करने के प्रमाण मिलते हैं। आज यूं तो स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं एक फोन कॉल पर उपलब्धथ हो जाती हैं लेकिन साथ ही वेलनेस टूरिज्म का चलन भी बढ़ रहा है। विभिन्न स्पा, योग सेंटर, आयुर्वेदिक केंद्र आदि देश-विदेश से लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं।


भारत बना आकर्षण:-आज देश में बड़ी संख्या में स्पा संचालित हो रहे हैं, जिनमें हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। स्वास्थ्य एवं अध्यात्म के क्षेत्र में भारत की प्राचीन परंपराओं के बारे में दुनिया जानती है। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक वेलनेस टूरिस्ट बनकर यहां आते हैं। साथ ही, देशी पर्यटक भी ऐसे वेलनेस टूरिस्ट डेस्टिनेशंस पर बढ़-चढ़कर जाने लगे हैं। तनाव भरे जीवन के बीच कुछ शांति और तन-मन की शुद्धि की चाह रखने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या जैसे-जैसे बढ़ रही है, वैसे-वैसे वेलनेस टूरिज्म इंडस्ट्री का विस्तार होता जा रहा है और इसमें करियर बनाने का स्कोप भी बढ़ रहा है।


टूरिज्म का बड़ा हिस्सा:-छुट्टियों में किसी दर्शनीय स्थल पर आराम भी फरमा लिया जाए और प्राकृतिक चिकित्सा आदि द्वारा अपना उपचार भी करा लिया जाए, यह विचार पिछले कुछ वर्षों में काफी लोकप्रिय हुआ है। आधुनिक जीवनशैली से उपजी शारीरिक व मानसिक समस्याओं के बढ़ने और लोगों के पास खुद पर खर्च करने के लिए पैसा पहले से अधिक आने के कारण इस चलन को बल मिला है। इसकी वजह से टूर ऑपरेटर्स तथा सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए अनेक अवसर उपलब्धर हुए हैं। आज पर्यटन उद्योग की कुल आय में से लगभग एक-तिहाई आयुर्वेदिक, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, स्पा आदि के माध्यम से हो रही है।


कहां हैं अवसर:-वेलनेस टूरिस्ट कई लक्ष्य लेकर आते हैं, मसलन वेट लॉस, डिटॉक्स, मसाज, योग, स्किन ट्रीटमेंट आदि। इन सारी फील्ड्स में विशेषज्ञता रखने वाले युवाओं के लिए वेलनेस टूरिज्म में अच्छे मौके हैं। फिलहाल अधिकांश स्पा तथा वेलनेस डेस्टिनेशन केरल व उत्तराखंड में हैं मगर अब ये अन्य राज्यों में भी फैल रहे हैं। पंच सितारा होटल अपने परिसर में ही ऐसे स्पा की सुविधाएं उपलब्ध। करवा रहे हैं। इसके चलते ऐसे होेटलों वाले शहरों में भी अवसर हैं।


खास बात यह है कि वेलनेस टूरिज्म इंडस्ट्री के विकास के साथ इससे किसी-न-किसी रूप में जुड़े कई अन्य सेक्टर्स भी लाभान्वित हो रहे हैं। ये हैंः लाइट फिटिंग्स, म्यूजिक इक्विपमेंट्स, फर्नीशिंग, फर्नीचर, कॉस्मेटिक्स, प्लंबिंग आदि। निर्माण उद्योग को भी इससे फायदा होना ही है। फिर मैनजेमेंट, मार्केटिंग आदि के क्षेत्र तो हैं ही।


कौन आ सकते हैं:-इस उद्योग में परंपरागत तथा गैर-परंपरागत दोनों तरह के चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए अवसर हैं। खास तौर पर कॉस्मेटोलॉजिस्ट, कॉस्मेटिक सर्जन, डर्मेटोलॉजिस्ट तथा विभिन्न प्रकार के मेडिकल टेक्निशियंस की यहां मांग है। रेकी मास्टर, योग शिक्षक, मसाज विशेषज्ञ, स्पा थैरेपिस्ट आदि की मांग भी तेजी से बढ़ती जा रही है। यदि आप चाहें, तो ट्रैवल कंसल्टेंट बनकर देश-विदेश के पर्यटकों को देश-विदेश में स्थित ऐसे केंद्रों की जानकारी दे सकते हैं और उनकी वहां तक की यात्रा की व्यवस्था कर सकते हैं।








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यूपी में लोगों की फामेर्सी सेक्टर में दिलचस्पी बढ़ी

लखनऊ : पूरे उत्तर प्रदेश में डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए फार्मेसी पाठ्यक्रमों में प्रवेश शैक्षणिक वर्ष 2020-21 में 2019-20 की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत बढ़ा है। बी फार्मा पाठ्यक्रमों में नामांकित छात्रों की संख्या 16,000 से बढ़कर 20,000 से अधिक हो गई है। शैक्षणिक सत्र 2020-21 में डी. फार्मा पाठ्यक्रमों में लगभग 100 प्रतिशत नामांकन हुआ है। तकनीकी शिक्षा विभाग के अनुसार सत्र 2020-21 में 56,291 सीटों पर दाखिले हुए। वहीं, बी फार्मा कोर्स के लिए उपलब्ध 25,351 सीटों पर 20,361 छात्रों ने प्रवेश लिया। डॉ ए पी जे के अनुसार अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रवक्ता आशीष मिश्रा के अनुसार, पिछले डेढ़ साल में 50 से अधिक बी फार्मा संस्थानों को एकेटीयू से संबद्ध किया गया है और छात्रों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। मिश्रा ने कहा कि बी. फार्मा और डी. फार्मा कोर्स पूरा करने के बाद किसी भी फार्मास्युटिकल कंपनी में कंसल्टेंट बनकर या हॉस्पिटल फार्मासिस्ट बनकर या क्लीनिकल रिसर्च एसोसिएट के तौर पर काम करके रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा आप अपनी खुद की मेडिकल फर्म भी शुरू कर सकते हैं। उच्च वेतन पैकेज और चिकित्सा क्षेत्र की वृद्धि के कारण, प्रचलित कोविड -19 महामारी में, फामेर्सी में छात्रों की रुचि बढ़ गई है।



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युवा रोजगार मेडिकल सेक्टर में बढ़ी नौकरियां, बीफार्मा व डीफार्मा कोर्सों की बढ़ी डिमांड

लखनऊ :  कोरोना काल के दौरान सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ मेडिकल इंडस्ट्री में नौकरियों की भरमार हुई है। मेडिकल इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ बीफार्मा और डीफार्मा कोर्स में छात्रों का रूझान भी बढ़ा है। कोरोना काल में भी मेडिकल इंडस्ट्री छात्रों को बढ़िया सैलरी पैकेज दे रही है। इसके चलते बीफार्मा व डीफार्मा कोर्स करने की ललक छात्रों में बढ़ी है। पिछले दो सालों से प्रदेश में बीफार्मा संस्थानों के साथ छात्रों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। 2019-20 में 16 हजार छात्रों ने बीफार्मा में दाखिला लिया था जबकि 2020-21 में बीफार्मा कोर्स में छात्रों की संख्या बीस हजार पार कर गई थी। वहीं, डीफार्मा की सभी सीटें फुल हो गई थी।

प्रदेश में पिछले दो सालों में बीफार्मा संस्थाओं के साथ-साथ छात्रों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। एकेटीयू के प्रवक्ता आशीष मिश्र के अनुसार पिछले डेढ़ सालों में 50 से अधिक बीफार्मा संस्थान एकेटीयू से सम्बद्ध हुए हैं। इनमें छात्र संख्या भी बढ़ी है। आशीष मिश्र बताते हैं कि बीफार्मा व डीफार्मा कोर्स करने के बाद किसी भी फार्मास्यूटिकल कंपनी, मेडिकल रिसर्च, इंटर डिस्पलसरी रिसर्च, बायो व जनेटिक रिसर्च व अस्पताल के साथ कंसल्टेंट बन कर सेवाएं दे सकते है। इसके अलावा अपना मेडिकल कंपनी भी खोल सकते हैं।

डीफार्मा की सभी सीटें हुई थी फुल

प्रदेश में डीफार्मा की कुल 57568 सीटें हैं। प्राविधिक शिक्षा विभाग के अनुसार सत्र 2020-21 डीफार्मा कोर्स की सभी सीटों पर दाखिले हुए थे। वहीं, बीफार्मा कोर्स की 25351 सीटों पर 20361 छात्रों ने दाखिले लिए थे।

बीफार्मा में एनटीए के तहत होंगे दाखिले

एकेटीयू के प्रवक्ता आशीष मिश्र के अनुसार अभी इंजीनियरिंग की सीटों पर जेईई के जरिए दाखिले की प्रक्रिया जारी है। दाखिलों के लिए चौथे चरण की प्रक्रिया चल रही है। इस बार बीफार्मा कोर्स में नेशनल टेस्ट एजेंसी के जरिए दाखिले लिए जाना है। बीटेक में दाखिले की प्रक्रिया के बाद ही बीफार्मा कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होगी।




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फूड लवर बना सकते है ये 10 करियर...

अगर आपकों तरह-तरह के फूड ट्राय करने का शौक है। लोग आपको फूड लवर मानते हैं और आप खाने-पीने के मामले में कोई समझौता नहीं करते हैं तो आपके लिए फूड इंडस्ट्री करियर के लिहाज से बेहतरीन साबित हो सकती है। खाने-पीने के शौक को आप करियर में आसानी से तब्दींल कर सकते हैं और काफी पैसा कमा सकते हैं। इस क्षेत्र में एक से बढ़कर एक करियर विकल्पं मौजूद हैं। आइए इन 10 करियर पर एक नजर डालते हैं...


शेफ: हम यह तो नहीं कह सकते हैं कि यह आसान है लेकिन आप शेफ बनने का रास्ता चुन सकते हैं। अगर आपको कुकिंग का शौक है और नई-नई डिशेज बनाना ट्राय करते रहते हैं तो इससे बेहतर विकल्प नहीं हो सकता। आपका कुकिंग पैशन इस पद के लिए बेस्ट हो सकता है। 


फूड क्रिटिक: अगर आपमें अभिव्यिक्ति की कला है और लिखने का कौशल रखते हैं तो ऐसे फूड लवर्स को फूड क्रिटिक बनने का अच्छा ऑप्शयन है। आजकल इस पद के लिए कैंडिडेट्स की काफी डिमांड है।


न्यूटट्रीशनिस्ट: अगर आप सही ट्रेनिंग लेते हैं तो आप दूसरों को भी खानपान से संबंधित सलाह दे सकते हैं। सिर्फ फूड ही नहीं आप हेल्दी फूड लोगों के जेहन में डाल सकते हैं।


फूड स्टाइलिस्ट: केवल खाना बनाना ही मायने नहीं रखता। उसका प्रेजेंटेशन भी उतना ही जरूरी है। फूड स्टाइलिस्ट के रूप में आप बड़े-बड़े रेस्टोरेंट्स, वर्कशॉप्स में अपनी सर्विस दे सकते हैं।


ऑर्गेनिक फॉर्मिंग: अगर आपको ट्रेवलिंग का भी शौक है तो ऑर्गेनिक फॉर्मिंग का क्षेत्र शानदार हो सकता है। हेल्दी लिविंग के लिए यह एक अच्छा जरिया है और इस क्षेत्र में करियर बनाकर खुद को एक सच्चा फूड लवर साबित कर सकते हैं।


केटरर: केटरर के रूप में बिजनेस करते हुए आप अच्छी कमाई कर सकते हैं। शादी, पार्टी आदि के ऑर्डर्स में आप यूनिक टच देकर अपने बिजनेस को आगे बढ़ा सकते हैं।


बेकर: अच्छे बेकर की हमेशा ही डिमांड रहती है। कैक्स, कुकिज जैसे बैकिंग प्रोडक्ट्स हर जगह मिलते हैं। अगर आप इसमें विशेषज्ञता हासिल कर लेते हैं तो आपको पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं होगी।


आइसक्रीम टेस्टचर: आपको यह जॉब थोड़ा अजीब लग रहा होगा लेकिन यह करियर फूड इंडस्ट्री में अच्छा नाम और पैसा देता है। अगर आपको स्वीट्स पसंद हैं तो आपको आइसक्रीम टेस्टिंग का जॉब सूट करेगा।


चॉकलेटियर: चॉकलेटियर के रूप में आप चॉकलेट से कई कंफेश्नरीज तैयार करते हैं। अगर आपको चॉकलेट पसंद हैं तो रात-दिन उसके बीच रहने का मौका चॉकलेटियर के रूप में मिल सकता है।


फूड फोटोग्राफर: क्रिएटिव लोगों के लिए फूड इंडस्ट्री में कोई कमी नहीं है। अलग-अलग डिशेज का स्वाद लीजिए और साथ में अपना फोटोग्राफी पैशन भी जारी रखिए। बतौर फूड फोटोग्राफर आप रेस्टोंरेंट्स, मैग्जिंस के लिए भी काम कर सकते हैं।





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कम्पनियों में एएमयू छात्रों को रोजगार के अवसर

अलीगढ़ :  भले ही पूरे देश में महामारी के कारण भर्ती गतिविधियां रुुक गई हों, परन्तु बहु-राष्ट्रीय कंपनियां अभी भी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुशल और प्रतिभाशाली छात्रों को रोजगार के अवसर प्रदान कर रहीं है। अमुवि के प्रशिक्षण और प्लेसमेंट अधिकारी (सामान्य) साद हमीद ने बताया कि हाल ही में एएमयू के 48 छात्रों को बायजूस, व्हाइट एचटी जूनियर, एसबीआई म्यूचुअल फंड, फ्लैमन क्लाउडटेक, वेदांता, कैन किड्स, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, एसएचएलसी और अन्य कम्पनियों से आकर्षक वेतन पैकेज के साथ नौकरी के प्रस्ताव मिले हैं। कला, सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य, कानून और विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के छात्रों को विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण और प्लेसमेंट कार्यालय (सामान्य) द्वारा आयोजित आनलाइन प्लेसमेंट ड्राइव और इंटर्नशिप कार्यक्रमों के माध्यम से यह अवसर प्राप्त हुए हैं।




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फ्रीलान्स राइटर हैं तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान

अगर आप फ्रीलान्स राइटर बनने की सोच रहे हैं तो इसका मतलब सिर्फ एक लैपटॉप खरीदना या एक भाषा के ऊपर बढ़िया कमांड होना ही नहीं है। ध्यान में रखने लायक कई ऐसी चीजें हैं जो आपका फायदा या नुकसान करवा सकती है। एक्सपर्ट एडवाइस के लिए आगे पढ़ें...


प्रोफेशनलिज्म:- एक लैपटॉप खरीदना और कुछ ब्लॉग लिखने से ही आप इस प्रतिस्पर्धात्मक क्षेत्र में टिके नहीं रह सकते। एक लेखक के पास तीन चीजें होनी चाहिए: एक ब्लॉग, एक प्रोफेशनल ईमेल अकाउंट और एक वेबसाइट। यह चीजें प्रोफेशनल होने के तौर पर आपके ऊपर किये जाने वाले भरोसे में इजाफा करती हैं और फैन्स, पाठकों और फॉलोअर्स के बीच जागरूकता लाती हैं। एक वेबसाइट और ईमेल आईडी के कारण आपके क्लाइंट्स आप तक पहुंच सकते हैं और आपको गंभीरता से ले सकते हैं।


खुद को सीमाओं से न बांधें:- अगर आप आगे बढ़ना और अनुभव पाना चाहते हैं तो अपने लेखन को खास क्षेत्रों तक सीमित न रखें। आपके पोर्टफोलियो में आपका विभिन्न क्षेत्रों में किया गया काम सामने आना चाहिए। पैसे और काम के मामले में ज्यादा सख्त न बनें लेकिन क्लाइंट्स को अपना फायदा भी न उठाने दें। अपने काम को कम कीमत पर न बेचें। अनुभव पाने के साथ साथ अच्छे मौकों को भी अपनाएं।


अपने स्किल्स की मार्केटिंग करें:- सोशल मीडिया में एक्टिव रहें, बिजनस कार्ड छपवायें और अपने काम का लोगों को पता चलने दें। आपको पुराने कॉन्टेक्ट्स के साथ नेटवर्किंग करने और नए कॉन्टेक्ट्स खोजने के लिए थोड़े एफर्ट्स करने पड़ेंगे। अपनी विजिबिलिटी को बढाने के लिए यह जरूरी है।


अपनी वेबसाइट रजिस्टर करवाएं:- ऐसी कई वेबसाइट्स हैं जहां आप खुद को रजिस्टर करवाकर अपना पोर्टफोलियो अपलोड कर सकते हैं ताकि आपके क्लाइंट्स आपको आसानी से खोज सकें। कुछ ऐसे ही पोर्टल्स हैं: फ्रीलांसर.इन, एलांस.कॉम, ओडेस्क.कॉम आदि।





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अब बिना डिग्री के भी कमा सकते है लाखों रुपये, जानें भारत में ऐसी 8 जॉब्स जिसमें नहीं है पढ़ाई की जरूरत

अच्छी नौकरी करके लाखों रुपये कमाने की चाहत हर इंसान की होती है। इसके लिए वह सालों तक पढ़ाई करते हैं। अच्छे-अच्छे स्कूल, कॉलेज में एडमिशन लेते हैं। लेकिन भारत में आज भी कई लोग ऐसे हैं जो किसी परेशानी की वजह से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं। ऐसे में उनका अच्छी जॉब करने का सपना लगभग टूट ही जाता है, पर आपको बता दें कि अगर आपके पास कोई डिग्री नहीं भी है, तो भारत में कई ऐसी जॉब्स है जिनके जरिए आप लाखों रुपए कमा सकते हैं। ऐसी ही 8 जॉब्स के बारे में आज हम आपको बताते हैं जिनके लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं होती है और सिर्फ आप अपनी प्रतिभा के दम पर इस क्षेत्र में अपना नाम कमा सकते हैं...


रियल एस्टेट एजेंट

अगर आपके पास डिग्री नहीं है, तो आप रियल एस्टेट एजेंट या प्रॉपर्टी डीलर का काम कर सकते हैं। इस जॉब में व्यक्ति प्रॉपर्टी खरीदने की प्रक्रिया में खरीदारों और विक्रेताओं के बीच मध्यस्थ के रूप में काम करता है, इसलिए वे बहुत डिमांड में भी रहते हैं। इस पेशे के लिए डिग्री की जरूरत नहीं होती है। बस उन्हें रियल एस्टेट ब्रोकर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस लेना पड़ता है।


फ्रीलांस फोटोग्राफर

आजकल, डिजिटल फोटोग्राफी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है और कोई भी आकर्षक तस्वीरें खींच सकता है। जिन लोगों को फोटोग्राफी का शौक है वह अपने शौक को अपना पेशा बना सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं। इस प्रोफेशन को करने के लिए आपको किसी डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है।


कारपेंटर

भारत में इन दिनों बढ़ई (कारपेंटर्स) की काफी मांग है। पहले लोग अपने घरों के लिए सिर्फ टेबल-कुर्सी बनाने के लिए बढ़ई की मदद मांग रहे थे। लेकिन, आजकल ज्यादातर लोग अपने घरों में लकड़ी का पूरा काम करवाने के लिए इंटीरियर डिजाइनिंग कंपनियों की मदद लेते हैं। इसलिए, भारत में इंटीरियर डिजाइनिंग कंपनियों के बीच बढ़ई की मांग काफी बढ़ गई है। ये नौकरी भी आप बिना किसी डिग्री के कर सकते हैं।


सेल्स रिप्रेजेंटेटिव

किसी भी चीज को बेचना वाकई एक आर्ट है। जो अच्छी तरह से बात करने की क्षमता रखते हैं और ग्राहकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं, वह किसी भी कंपनी में सेल्स रिप्रेजेंटेटिव के रूप काम कर सकते हैं। इस रोजगार पाने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं होती है।


फिटनेस ट्रेनर

आजकल ज्यादातर लोग अपनी हेल्थ और फिटनेस के बारे में बहुत कॉन्शियस होते हैं, इसलिए फिटनेस एक्सपर्ट और पर्सनल ट्रेनर की इन दिनों काफी डिमांड है। इस फील्ड में थोड़ी सी जानकारी और ट्रेनिंग लेकर इच्छुक व्यक्ति फिटनेस ट्रेनर बन सकता है और अपना फिटनेस जिम खोलकर या दूसरों के लिए काम कर सकते हैं।


मॉडलिंग

अच्छी फिजिक और शक्ल वाले लोग मॉडलिंग को अपना प्रोफेशन चुन सकते हैं। इस पेशे के लिए एक अच्छे लुक और कुछ एक्टिंग स्किल्स की जरूरत होती है। मॉडलिंग की फील्ड में काम करने लेने के लिए किसी डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है। 


इवेंट मैनेजर

आजकल शादी-ब्याह से लेकर किसी भी प्रोगाम को करवाने के लिए इवेंट मैनेजर की जरूरत होती है। लोगों की क्रिएटिव सोच इस पेशे में उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करती है। इसके लिए भी आपको किसी डिग्री की जरूरत नहीं है।

 

सोशल मीडिया इन्फ्लूएन्सर

अगर आपके पास सोशल मीडिया की समझ है, तो आप सोशल मीडिया मैनेजर या मीडिया इन्फ्लूएन्सर का काम कर सकते हैं। जब कोई क्रिएटर ज्यादा से ज्यादा लोगों को पसंद आने लगता है तब वो एक सोशल मीडिया इन्फ्लूएन्सर बन जाता है और लाखों लोग उसके फोल्लोवर बन जाते हैं। आप ये काम किसी कंपनी या किसी और व्यक्ति के लिए भी कर सकते हैं।  





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डी0एम0 पब्लिक स्कूल अटोला हापुड़ में 12वी में 90% ज्यादा अंक लाये छात्र छात्राएं

आज सी०बी०एस०ई० बोर्ड द्वारा घोषित कक्षा-12 के परीक्षा परिणाम में डी0एम0 पब्लिक स्कूल अटोला के छात्र विक्की नागर (गोहरा)ने 97%,

 अंक प्राप्त कर विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

 छात्र निशांत शर्मा(मुदाफरा)ने 95% अंक प्राप्त कर द्वितीय स्थान तथा मोहम्मद अमान (भाडली)ने 94.6 % अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान प्राप्त किया।

विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपने स्कूल, माता पिता तथा गांव का नाम रोशन करने वाले विक्की नागर ने कहा कि वह 

आगे चलकर कंप्यूटर इंजीनियरिंग का कोर्स करना चाहता है ताकि भविष्य में वह देश के लिए काम कर सके।

द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र निशांत शर्मा ने बताया कि वह भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन कर देश के विकास में अपना योगदान देना चाहता है।

तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र मोहम्मद अमान का सपना भी इंजीनियर बन कर देश सेवा करना है।

सभी छात्र छात्राओं ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों एवं माता पिता को दिया जिनके दिशा निर्देशन में उन्होंने यह सफलता प्राप्त की।

विद्यालय के कुल 14 छात्र- छात्राओं ने 90% से अधिक अंक प्राप्त कर स्कूल का नाम रोशन किया। 

 जिनमें कुमुद त्यागी 94.2%, संयक रैना 94.2% , प्रज्वल पुनिया 94%, नवनीत शर्मा 94% ,अखिल चौधरी 94%, उदित सिद्धू 92.6%, 

 यसप्रीतकौर 92.2%, विवेक कुमार 91.8%,  लवी 91.2%, मनजीत कौर 91% तथा गुरमीतकौर ने 91% अंक प्राप्त कर विद्यालय तथा

अपने परिवार का गौरव बढाया। विद्यालय के सभी छात्र- छात्राओं के अंक 60% से अधिक रहे तथा 75 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने 75% से 

अधिक अंक प्राप्त किए। विद्यालय के चेयरमैन श्री जितेंद्र सिंह एवं प्रधानाचार्य श्री बृजेश माहेश्वरी ने सभी छात्र- छात्राओं को बधाई दी तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

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ट्रांसलेशन में बनाएं बेहतर भविष्य

अनुवाद वह विधा है जो दो भिन्न भाषा-भाषी लोगों का एक-दूसरे से परिचय कराती है। अनुवाद ही अनजान भाषा की रहस्यमयी दुनिया का दरवाजा खोलती है। पहले अनुवादक एक सीमित करियर था लेकिन भू-मंडलीकरण के चलते जिस तरह दुनिया में आपसी संपर्क बढ़ा है, उससे अनुवादक का करियर भी संभावनाओं से लबरेज हो चुका है। पहले जहां अंग्रेजी, फ्रैंच, रूसी जैसी कुछ सीमित भाषाओं में नौकरी की संभावनाएं थीं वहीं आज दर्जनों भाषाओं खासकर चीनी, जापानी, जर्मन आदि में भी बड़ी अच्छी संभावनाएं पैदा हुई हैं। सरकारी नौकरियों में कनिष्ठ और वरिष्ठ हिंदी अनुवादकों की संभावनाएं रहती हैं। अनुवादक बनने के लिए विभिन्न स्तरों पर कई डिग्री एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।


शैक्षणिक योग्यता:- अनुवाद में डिप्लोमाध्सर्टीफिकेट या एम.फिल. करने के लिए आपकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक या स्नातकोत्तर होनी जरूरी है। साथ ही स्नातक स्तर पर हिंदी तथा अंग्रेजी एक विषय के रूप में अथवा स्नातक स्तर तक हिंदी माध्यम से अध्ययन किया हो। एक योग्य अनुवादक बनने के लिए विभिन्न संस्थान जो डिग्री या डिप्लोमा कोर्स कराते हैं, उनमें प्रवेश के लिए लिखित और मौखिक दोनों ही परीक्षाओं को पास करना जरूरी होता है। प्रवेश पाने के लिए विभिन्न संस्थान हर सत्र में ऐसी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते हैं। इनमें हिस्सा लेने के लिए अपने शैक्षणिक दस्तावेजों की फोटोकॉपी के साथ आवेदन की जरूरत होती है। अनुवादक होने की डिग्री या डिप्लोमा मिलने के बाद केन्द्रीय सचिवालय, आकाशवाणी, दूरदर्शन में भी नौकरी मिलती है।


वेतनमान:- प्राइवेट संस्थानों और बहुराष्ट्रीय निगमों में काम करने के लिए कोई निर्धारित वेतनमान नहीं होता। यह कंपनी की आर्थिक हैसियत और आपकी योग्यता पर निर्भर करता है। अनुवादक को फुटकर काम बहुत मिलता है जैसे विभिन्न दूतावासों, चैनलों, पत्रिकाओं और अखबारों से लेकिन जहां तक सरकारी नौकरी के अंतर्गत कनिष्ठ हिंदी अनुवादक के वेतन का सवाल है तो इस पद के लिए 3,050-4,590 रुपए तक का मूल वेतन दिया जाता है। जैसे-जैसे कर्मचारी कनिष्ठता से वरिष्ठता की ओर अग्रसर होता है वैसे-वैसे उसके वेतनमान में बढ़ौतरी होती रहती है।





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इवेंट मैनेजर: पार्टी उनकी, करियर आपका

कुछ लोगों को पार्टी की जान कहा जाता है। ये वे लोग हैं, जो जानते हैं कि पार्टी को कैसे एंजॉय किया और करवाया जाए। ऐसे लोगों के लिए इवेंट मैनेजर के रूप में करियर बनाना अच्छा विकल्प हो सकता है। अगर आप पर यह बात सही बैठती है, तो आप ग्रेजुएशन के बाद एक कोर्स करके इवेंट मैनेजर बन सकते हैं। एक समय ऐसा था, जब इवेंट मैनेजर्स की मांग केवल कॉरपोरेट सेक्टर के कार्यक्रमों में हुआ करती थी। मगर अब महानगरों ही नहीं, छोटे शहरों में भी जिस कदर बड़े स्तर पर शादियां, जन्मदिन, एनिवर्सरी आदि की पार्टियां आयोजित हो रही हैं, उसे देखते हुए इवेंट मैनेजर्स की मांग कई गुना बढ़ गई है।


क्या करना होता है?

इवेंट मैनेजर किसी खास वर्ग के लिए व्यवसायिक या सामाजिक आयोजनों की व्यवस्था संभालते हैं। इनमें फैशन शो, म्यूजिक फेस्टिवल, शादी, थीम पार्टी, प्रदर्शनी, कॉरपोरेट सेमिनार, प्रोडक्ट लॉन्च, फिल्म प्रीमियर, अवॉर्ड शो आदि शामिल हैं। इन आयोजनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी इवेंट मैनेजर की होती है। वही क्लाइंट की आवश्यकताओं और बजट के अनुसार सारी सुविधाएं जुटाता है। होटल या बैंक्वेट हॉल की बुकिंग करना, सजावट, मनोरंजन, ब्रेकफास्ट-लंच-डिनर के मेन्यू तय करना, मेहमानों का स्वागत तथा उनकी देखभाल आदि सब इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों की जिम्मेदारी होती है।


कोर्स और क्वॉलिफिकेशन

आज इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं। डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट (डीईएम) 1 साल का कोर्स होता है और इसमें प्रवेश के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएट होना जरूरी है। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट (पीजीडीईएम) भी 1 साल का कोर्स है। इसके लिए भी ग्रेजुएट होना जरूरी है। इसके अलावा 6 माह के सर्टिफिकेट तथा डिप्लोमा कोर्स भी उपलब्धट हैं। इनमें प्रवेश के लिए 12वीं पास होना पर्याप्त है। 


अधिकांश संस्थानों में इवेंट मैनेजमेंट के पार्ट-टाइम कोर्स कराए जाते हैं। यानी आप कोई जॉब करते हुए या किसी अन्य कोर्स के साथ ये कोर्स भी कर सकते हैं। अब तो इवेंट मैनेजमेंट में एमबीए डिग्री भी दी जा रही है। वैसे सच यह भी है कि इवेंट मैनेजमेंट के कोर्स हर जगह उपलब्धल नहीं हैं। ऐसे में आप किसी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में ट्रेनी के तौर पर काम करते हुए भी इस काम के गुर सीख सकते हैं। अनुभव हासिल करने के बाद आप अपनी मनपसंद जॉब पा सकते हैं या फिर स्वयं अपनी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी भी शुरू कर सकते हैं।


क्या गुण जरूरी?

इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में सफल होने के लिए किसी खास क्वॉलिफिकेशन की जरूरत नहीं होती। आपमें बस, चीजों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करने और नेटवर्किंग के गुण होने चाहिए। साथ ही आपको लेटेस्ट ट्रैंड्स के बारे में अच्छी जानकारी होना चाहिए। अगर आपका पीआर अच्छा है और आप किसी भी परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल सकते हैं, तो आप इस प्रोफेशन में सफल करियर बना सकते हैं।


स्कोप

जैसे-जैसे वैश्वीकरण का प्रभाव फैलता जा रहा है, इवेंट मैनेजमेंट के लिए स्कोप भी बढ़ता जा रहा है। विभिन्ना श्रेणियों के लोग तथा संस्थाएं विभिन्ना प्रकार के आयोजनों के लिए इवेंट मैनेजरों की सेवाएं ले रही हैं। आने वाले दिनों में इस फील्ड में मौके बढ़ेंगे ही। यहां आपकी आय 10-12 हजार रुपए से शुरू होकर लाखों तक जा सकती है। राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी आप नाम कमा सकते हैं।


प्रमुख संस्थान...


-एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट, नई दिल्ली


-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट, मुंबई


-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, अहमदाबाद


-इंटरनेशनल सेंटर फॉर इवेंट मार्केटिंग एंड मार्केटिंग, नई दिल्ली



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नर्सिंग में बनाए करियर

इन दिनों नर्सिंग एक उजले सेवा पूर्ण करियर के रूप में उभरकर सामने आया है। यह एक ऐसा करियर है, जो गांवों की युवतियों से लेकर महानगरों की युवतियों तक करियर की एक समान संभावनाएं प्रस्तुत करता है। नर्स का कार्य मानवीय भावना से ओत-प्रोत कार्य है, जिसका कोई मूल्य निर्धारित नहीं किया जा सकता। न सिर्फ रोगियों को स्वस्थ करने में बल्कि उनके प्राणों की रक्षा करने में भी नर्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है? एक कुशल नर्स रोगियों की भावनाओं एवं मनोविज्ञान को अच्छी तरह समझकर उनकी उचित देखभाल कर सकती है। इसलिए नर्सिंग युवतियों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त एवं निरापद करियर है। नर्सिंग क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी काफी बढ़ गए हैं। सामान्यतया विवाहित युवतियों को नर्सिंग के कोर्स में प्रवेश की अनुमति नहीं है। नर्सिंग पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात वह विवाह करने हेतु पूर्ण स्वतंत्र है। नर्सिंग का प्रशिक्षण लेने के बाद नर्स के पद पर नियुक्त होना ज्यादा महत्वपूर्ण है। वैसे कई निजी अस्पतालों में सेवा भावना के साथ रोजगार चाहने वाली महिलाओं को नर्सिंग का काम सिखाकर व अनुभव देकर नर्स बना दिया जाता है। नर्सिंग प्रशिक्षण के लिए देश के सभी बड़े शहरों में नर्सिंग प्रशिक्षण केंद्र चलाए जाते हैं।


नर्सिंग के क्षेत्र में कई प्रकार के पाठ्यक्रम कराए जाते हैं किंतु बीएससी (नर्सिंग) कोर्स के प्रति युवतियों में विशेष आकर्षण है। बीएससी (नर्सिंग) पाठ्यक्रम चार वर्ष की अवधि का है। जिसमें प्रवेश हेतु इंटरमीडिएट अथवा 10.2 परीक्षा भौतिकी, रसायन, अंग्रेजी, जीव विज्ञान विषय सहित उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। 10.2 अथवा इंटरमीडिएट परीक्षा में कम-से-कम 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए।


चयन प्रवेशः परीक्षा के आधार पर होता है, जिसमें भौतिकी, रसायन, जीव-विज्ञान एवं सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। जो युवतियां नर्सिंग के क्षेत्र में अध्यापन को करियर बनाना चाहती हैं, बीएससी (नर्सिंग) करने के पश्चात एमएससी (नर्सिंग) कर सकती हैं, जो दो वर्ष का पाठ्यक्रम है। चयन प्रवेश परीक्षा एवं साक्षात्कार के आधार पर होता है। इसके अलावा नर्सिंग के क्षेत्र में नर्सिंग एंड मिडवाइफरी एवं ऑजीलरी नर्सिंग प्रमुख पाठ्यक्रम हैं।


जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु 10.2 अथवा इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। पाठ्यक्रम की अवधि साढ़े तीन वर्ष है, जबकि न्यूनतम आयु सीमा 17 वर्ष है। ऑजीलरी नर्सिंग कोर्सों में प्रवेश हेतु मैट्रिकुलेशन अथवा दसवीं परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अलग-अलग संस्थानों में पाठ्यक्रम की अवधि अलग-अलग होती है।


आमतौर पर यह पाठ्यक्रम डेढ़ वर्ष का होता है। इसके अतिरिक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से पत्राचार द्वारा तीन वर्षों का बीएससी (नर्सिंग) का पाठ्यक्रम किया जा सकता है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु 10प्लस2 अथवा इंटरमीडिएट परीक्षा जीव विज्ञान समूह से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।






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10 नौकरियां जहां अच्छी सैलरी के साथ आपको मिलेगा घर से काम का मौका

फ्रीलांस या घर से काम, यानी टेलीकम्यूटिंग में ग्लोबल स्तर पर पुरुषों की भागीदारी ज्यादा है, क्योंकि अब घर से काम करना कंपनियों को भी रास आ रहा है। इस तरह का काम पाने में और सीखने में ऑनलाइन स्रोत मदद करते हैं। 


कंटेंट राइटर

आप इंटरनेट पर किसी भी विषय की जानकारी पा सकते हैं। ये जानकारी कंटेंट राइटर आप तक बहुत व्यवस्थित तरीके से पहुंचाते हैं। ये इस काम में प्रशिक्षित होते हैं। कंटेंट राइटर किसी साइट की सामग्री लिखते हैं, ब्लॉग को लेख उपलब्ध कराते हैं, आलेख लिखते हैं, किसी मुद्दे पर सरकारी प्रस्तावों को तैयार करते हैं। ई-बुक, ऑनलाइन क्लास की स्क्रिप्ट, ईमेल डुप्लीकेशन, उत्पादों की रूपरेखा बनाना और वेब आधारित मीडिया के लेख लिखना इनका काम होता है। ‘जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन’ की डिग्री और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर कॉपी राइटिंग/ब्लॉगिंग/कंटेंट राइटिंग जैसे कोर्स कारगर होंगे।  

कितनी होगी आय : घर से काम करते हुए शुरुआत में 15 से 20 हजार रुपये आसानी से कमाए जा सकते हैं। 


डिजिटल मार्केटिंग

डिजिटल मार्केटिंग के पेशेवर किसी ब्रांड की ऑनलाइन उपस्थिति को दमदार बनाने में योगदान देते हैं। इसमें वे एसईओ, ईमेल मार्केटिंग, मोबाइल मार्केटिंग से लेकर सोशल मीडिया मार्केटिंग तक का काम करते हैं। सोशल मीडिया मैनेजर ऑनलाइन मंच पर कैंपेन के आयोजन, कंटेंट को प्रमोट करने, कंटेंट को नियंत्रित करने, ब्रांड की पहुंच को बढ़ाने का काम करता है। मान्यताप्राप्त कोर्स, जैसे- ‘पीजी सर्टिफिकेशन इन डिजिटल मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशन’ करना अच्छा आधार देगा। उडेमी, गूगल डिजिटल गैरेज जैसे डिजिटल मंचों और कई बड़े बिजनेस स्कूलों के भी ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध हैं। 

कितनी होगी आय : शुरुआत में 20 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो सकती है।


वेब डेवलपमेंट

इन दिनों अधिकतर कंपनियां एडवांस डोमेन अपना रही हैं। इस समय जॉब मार्केट में वेब डेवलपर के लिए वेतन या भुगतान बहुत ही अच्छा है। खासकर, जिन्हें पायथन, जावा, जावा स्क्रिप्ट, पीएचपी, रूबी वगैरह में कुशलता हासिल है, वे स्वतंत्र रूप से भी काम कर सकते हैं। सामान्य रूप से वेब डेवलपर वेबसाइट की योजना बनाते हैं और निर्माण करते हैं। लेकिन उनका दखल वेबसाइट के उस हिस्से के लिए काम करने में भी होता है, जहां उपभोक्ता का संपर्क साइट से जुड़ता है। कंप्यूटर साइंस, कंप्यूटर एप्लीकेशंस या वेब डिजाइनिंग में डिग्री/डिप्लोमा वाले युवाओं के साथ ही ऑनलाइन कोर्स किए हुए युवा भी मौका पा सकते हैं। 

कितनी होगी आय : इसमें प्रशिक्षित युवा को 16 से 23 हजार रुपये प्रतिमाह मिल सकते हैं।


ग्राफिक डिजाइन

ग्राफिक डिजाइन विजुअल कम्युनिकेशन की कला है। ग्राफिक डिजाइनर कंपनी के प्रचार या मार्केटिंग की गतिविधियों में ग्राफिक सॉल्यूशन उपलब्ध कराते हैं। इस क्षेत्र में आपको मीडिया एंड एडवरटाइजिंग, पब्लिशिंग, पब्लिक रिलेशन, इंडस्ट्रियल डिजाइन आदि में स्पेशलाइजेशन का मौका मिलेगा। ये पेशेवर वेबसाइट, विज्ञापन, ब्रोशर, मैगजीन और रिपोर्टों के लिए ले-आउट और प्रोडक्शन डिजाइन उपलब्ध कराते हैं। ग्राफिक डिजाइन में सामान्य डिग्री व डिप्लोमा तथा कई ऑनलाइन सर्टिफिकेशन कोर्स हैं। 

कितनी होगी आय : यहां स्वतंत्र रूप से काम करते हुए 35 हजार रुपये प्रतिमाह आराम से कमाए जा सकते हैं।


ऑनलाइन टीचिंग

कोरोना महामारी के बाद से एडटेक के क्षेत्र में काफी मांग पैदा हुई है। इस क्षेत्र के पेशेवर और जो छात्र हैं, वे सभी ऑनलाइन समाधानों की ओर मुड़ रहे हैं। बहुत से ऑनलाइन ट्यूटोरियल मंच, जैसे- चेग पर हर विषय के लिए पढ़ाने वालों को प्रति घंटे 20 डॉलर के हिसाब से भुगतान होता है। पेशेवर ऑनलाइन मंच भी अपना सकते हैं। 

कितनी होगी आय : टीचिंग के कई ऑनलाइन मंचों से जुड़कर आप 30 हजार रुपये तक प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं।


ब्लॉक चेन डेवलपमेंट 

ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी, जो अब तक बैंकिंग फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस तक सीमित थी, अब मुख्यधारा की तकनीक बन चुकी है। अब ये हेल्थकेयर, एजुकेशन, रिटेल, सप्लाई चेन एंड लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन जैसी इंडस्ट्रीज के लिए भी एक आधुनिक दौर का समाधान बनकर उभर रही है। स्पेशलाइज्ड स्किल, जैसेकि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कंप्यूटर नेटवर्किंग, क्रिप्टोग्राफी और डाटा स्ट्रक्चर्स एंड एल्गोरिद्म में कुशलता होनी चाहिए। एक ब्लॉक चेन डेवलपर साइबर अटैक को ध्यान में रखते हुए नेटवर्क का दमदार ढांचा बनाते हैं और ब्लॉक चेन के प्रभाव को और मजबूत बनाने में योगदान देते हैं। आईटी/कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की बैचलर्स डिग्री से आपको अच्छा आधार मिलेगा। ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी के कई सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध हैं। 

कितनी होगी आय : स्वतंत्र रूप से काम करके प्रति वर्ष 4 से 7 लाख रुपये आसानी से कमा सकते हैं। 


एचआर रिक्रूटर

ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट में ‘एचआर एनरोलमेंट स्पेशलिस्ट’ की जॉब कभी खत्म नहीं होने वाली। स्वतंत्र रूप से काम करने में कार्य जिम्मेदारियों में इंटरनेट पर कर्मचारियों की खोज करना, उनके सीवी को देखना होगा, इंटरव्यू में शामिल होना, आदि होगा। एचआर रिक्रूटर के कई ऑनलाइन सर्टिफिकेशन कोर्स उपलब्ध भी हैं। साइकोलॉजी, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन या ह्यूमन रिसोर्स की बैचलर्स डिग्री के साथ रिक्रूटर के ऑनलाइन ट्रेनिंग या सर्टिफिकेशन कोर्स बतौर स्वतंत्र एचआर रिक्रूटर काम करते हुए आपकी आय बढ़ाने में मदद करेंगे। 

कितनी होगी आय : इस तरह आप लगभग 20-25 हजार रुपये प्रति माह आसानी से कमा सकते हैं।


क्लाउड आर्किटेक्ट 

क्लाउड आर्किटेक्ट एक ऐसा आईटी एक्सपर्ट होता है, जो किसी संगठन के क्लाउड कंप्यूटिंग सिस्टम को बनाता है और व्यवस्थित रखता है। ये पेशेवर डेवऑप्स इंजीनियर और डेवलपर के साथ मिलकर काम करते हैं। उन्हें एडब्लूएस, एजूर्स और जीसीपी जैसी तकनीकें भी आनी चाहिए। उन्हें जावा, पायथन और सी-प्लस जैसी लैंग्वेजेस में भी निपुण होना चाहिए। कुबरनेटीज और डॉकर जैसे टूल्स की भी अच्छी जानकारी होनी चाहिए। जाहिर है, कम से कम बैचलर स्तर की आईटी/कंप्यूटर साइंस की पृष्ठभूमि मदद करेगी। आगे ऑनलाइन कोर्स कर सकते हैं। 

कितनी होगी आय: क्लाउड आर्किटेक्ट के तौर पर स्वतंत्र रूप से काम करके आपको शुरुआत में प्रतिमाह 25-30 हजार रुपये आसानी से मिल जाएंगे।


बिजनेस डेवलपर

अगर बात ‘वर्क फ्रॉम होम’ जॉब्स की हो रही हो, तो फ्रीलांस बिजनेस डेवलपर की बात किए बिना यह अधूरी ही रहेगी। बतौर बिजनेस डेवलपर आपको किसी कंपनी के उत्पाद या सेवाओं की बिक्री बढ़ाने की जुगत तैयार करनी होगी। मार्केटिंग, बिजनेस या सम्बंधित फील्ड में बैचलर्स डिग्री से अच्छा आधार बनेगा। ऑनलाइन सर्टिफिकेशन भी ले सकते हैं। अगर आपकी कुशलता इसमें साबित हो जाती है, तो यह स्वतंत्र रूप से काम करते हुए अच्छी-खासी आमदनी देगा। आप ऐसे ब्रांड के साथ जुड़ें, जो आपके हुनर की कद्र करे और लंबे समय तक आपके साथ मिलकर काम करने में रुचि दिखाए। 

कितनी होगी आय : शुरुआत में आप आराम से 25-30 हजार रुपये प्रतिमाह कमा सकते हैं।


मोबाइल एप्लीकेशन डेवलपर

मोबाइल एप्लीकेशन डेवलपर आईओएस और एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म के लिए एप्लीकेशन तैयार करते हैं। वे उपभोक्ता की आसानी के लिए यूजर इंटरफेस को डिजाइन करते हैं। उन्हें प्रोडक्ट डेवलपमेंट टीम के साथ मिलकर काम करना होता है, ताकि इसमें नए फीचर्स जोड़े जा सकें। एक मोबाइल एप्लीकेशन डेवलपर को यूआई और रिएक्ट नेटिव तथा एंगुलर जैसे जावा स्क्रिप्ट फ्रेमवर्क के बारे में पता होना चाहिए। उन्हें साइबर सिक्योरिटी के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। जावा, सी, सीएसएस और एचटीएमल में निपुण होना भी जरूरी है। यानी कंप्यूटर साइंस की बैचलर डिग्री फायदा करेगी। 

कितनी होगी आय : इस काम से आप 

प्रतिमाह 25 से 30 हजार रुपये आसानी से कमा सकते हैं।


ऑनलाइन ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म : यहां बताए जा रहे कार्यक्षेत्रों में अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म से सर्टिफिकेशन कोर्स करने के लिए कुछ प्रमुख मंच हैं: एडेक्स, कोर्सेरा, इंटर्नशाला, गूगल गैरेज, अपग्रेड, सिंप्लीलर्न 

कहां ढूंढ़े काम 

- फ्रीलांस इंडिया 

- अपवर्क 

- ट्रूलांसर 

- 99डिजाइंस 

- फ्रीलांसर.कॉम 

- फिवर 

- टोपाल 

- गुरु

- इंटर्नशाला

- इंजीनियरबाबू


इन प्लेटफॉर्म पर पहले अपना पोर्टफोलियो बनाना होगा, ताकि कंपनियों से आपको काम मिल सके।




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जाने मर्चेंट नेवी में कैसे बनाएं करियर, कोर्स, जॉब्स और सैलरी

क्या आपको समुद्र पसंद है, क्या आपको सागर की ऊँची ऊँची लहरों को निहारना अच्छा लगता है  या आप जहाज पर स्थानों की यात्रा करना पसंद करते हैं? तो करिये न अपने इस शौक को पूरा! पर कैसे? मर्चेंट नेवी बनकर आप इसे अपनी नौकरी के हिस्से के रूप में कर सकते हैं। मर्चेंट नेवी ऑफिसर का काम देश की कमर्शियल शिपिंग की देखभाल करना होता है। भारत जैसा देश जो प्रकृति में प्रायद्वीपीय है, उसके कई बंदरगाह हैं। इतना ही नहीं जलमार्ग के माध्यम से बहुत सारे स्वदेशी उत्पाद दूसरे देशों को निर्यात किए जाते हैं। इसलिए मर्चेंट नेवी का एक अधिकारी अपने चालक दल के साथ सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना संभव बनाता है। 


चूंकि आयात-निर्यात व्यवसाय प्रकृति में बहुत बड़ा है, इसलिए ये व्यापारी जहाज माल को उसके वांछित गंतव्य तक ले जाने के लिए बड़ी संख्या में मर्चेंट नेवी के अधिकारियों को नियुक्त करते हैं। उच्च पारिश्रमिक के अलावा, दुनिया भर में यात्रा करने का अवसर और समुद्र पर रोमांच का आकर्षण मर्चेंट नेवी में कॅरियर बनाने के लिए कई युवाओं को आकर्षित करता है। मर्चेंट नेवी इस अर्थ में नौसेना से अलग है कि यह नौसेना के विपरीत वाणिज्यिक सेवाएं प्रदान करती है।


अगर संक्षेप में कहा जाये तो मर्चेंट नेवी के कॅरियर में आमतौर पर सामान का एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित परिवहन शामिल होता है। एक मर्चेंट नेवी अधिकारी अपना अधिकांश जीवन जमीन पर नहीं बल्कि समुद्र के माध्यम से नौकायन करने वाले जहाज पर बिताता है। इसलिए यह करियर से ज्यादा लाइफस्टाइल है।


पात्रता मापदंड


मर्चेंट नेवी में शामिल होने के लिए निम्नलिखित योग्यता होनी चाहिए:


-उम्मीदवार को भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित के साथ कक्षा 12 उत्तीर्ण होना चाहिए।


-उम्मीदवार को अविवाहित भारतीय नागरिक (पुरुष या महिला) होना चाहिए।


-सामान्य दृष्टि की आवश्यकता होती है लेकिन प्लस या माइनस 2.5 तक के चश्मे की अनुमति दी जा सकती है।


-एडमिशन एक एंट्रेंस के माध्यम से होता है जिसके बाद एक स्क्रीनिंग टेस्ट और एक मुख्य लिखित परीक्षा होती है।


-टेस्ट क्लियर करने के बाद इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट होता है।


-आपको रोजगार से पहले एक जहाज-प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी पूरा करना होगा। पाठ्यक्रम आम तौर पर अल्पकालिक होता है जहां उम्मीदवारों को यात्रा की बुनियादी सुरक्षा पहलुओं को सिखाया जाता है।


कुछ निजी संस्थान हैं जो मर्चेंट नेवी के लिए भी प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। ये संस्थान छात्रों को डेक कैडेट और समुद्री इंजीनियरिंग जैसी नौकरियों के लिए तैयार करते हैं।


12वीं के बाद मर्चेंट नेवी में कैसे शामिल हों?


कक्षा 12 के बाद आप निम्नलिखित मर्चेंट नेवी पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर सकते हैं:


-बीएससी समुद्री विज्ञान


-बी.ई. मरीन इंजीनियरिंग


-बी.ई. नौसेना वास्तुकला और अपतटीय इंजीनियरिंग


-बी.ई. पेट्रोलियम इंजीनियरिंग


-बी.ई. मैकेनिकल इंजीनियरिंग


-बी.ई. हार्बर एंड ओशन इंजीनियरिंग


-बी.ई. सिविल इंजीनियरिंग 


-बी.ई. इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग


-बीएससी मरीन कैटरिंग 


-इलेक्ट्रो तकनीकी अधिकारी पाठ्यक्रम


मर्चेंट नेवी के लिए प्रवेश परीक्षा


12 वीं कक्षा पूरी करने के बाद इच्छुक उम्मीदवार इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (आईएमयू सीईटी) या ऑल इंडिया मर्चेंट नेवी एंट्रेंस एग्जाम के लिए उपस्थित हो सकते हैं। यह परीक्षा आमतौर पर मई के महीने में आयोजित की जाती है। अन्य परीक्षाएं जो समुद्री इंजीनियरिंग के लिए प्रवेश द्वार के रूप में भी काम कर सकती हैं, वे हैं जेईई, मेरी प्रवेश परीक्षा, टीआईएमएसएटीआई इसके लिए पात्रता मापदंड इस प्रकार है: 


-जीपी रेटिंग कोर्स के लिए 10वीं पास 


-डेक कैडेट और इंजन कैडेट के लिए 12 पीसीएम 60 फीसदी के साथ उत्तीर्ण 

परीक्षा के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है। आवेदन पत्र के साथ आवेदकों को 100 शब्दों का एक संक्षिप्त सारांश प्रस्तुत करना होगा जो बताता है कि वे मर्चेंट नेवी के लिए आवेदन क्यों करना चाहते हैं।


यह परीक्षा भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान और रीजनिंग जैसे विषयों पर आधारित एक एमसीक्यू पैटर्न परीक्षा है।


मर्चेंट नेवी में नौकरी की संभावनाएं


इस क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं होती हैं। मर्चेंट नेवी में बेसिक कोर्स पूरा करने वाले उम्मीदवारों को विभिन्न सलाहकारों और प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से बहुत आसानी से नौकरी मिल सकती है। मर्चेंट नेवी के बेड़े में मालवाहक जहाज, कंटेनर जहाज, टैंकर, थोक वाहक, रेफ्रिजरेटर जहाज, यात्री जहाज, साथ ही जहाजों पर रोल ऑफ/रोल ऑन शामिल होते हैं। अन्य की तुलना में मालवाहक जहाजों में रोजगार मिलने की संभावना अधिक होती है।


व्यापारिक जहाजों को चलाने वाली कंपनियों को ऐसे प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता होती है, जो जहाजों को संचालित और रखरखाव कर सकते हैं। इनमें से कुछ कंपनियां हैं-यूएसए की शेवरॉन एंड मोबिल, हांगकांग की वॉलेम शिप मैनेजमेंट, यूके की डेनहोम, के लाइन, बिब्बी शिप मैनेजमेंट, डी'एमिको आदि। भारत में भी कई शिपिंग कंपनियां हैं, जैसे शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग, एस्सार और चौगुले शिपिंग। जहाज के तीन मुख्य विभागों के लिए प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता होती है: डेक, इंजन और सेवा विभाग।


मर्चेंट नेवी जॉब प्रोफाइल...


-डेक अधिकारी (नेविगेशन अधिकारी)


-इलेक्ट्रो-तकनीकी अधिकारी (ईटीओ)


-इंजीनियर


-रेटिंग -रेटिंग कुशल नाविक होते हैं जो सभी अधिकारियों को दैनिक कार्यों में मदद करते हैं


-खानपान और आतिथ्य दल (पर्सर्स, स्टीवर्ड, शेफ, हाउसकीपर इत्यादि)


मर्चेंट नेवी-पे पैकेज


मर्चेंट नेवी में वेतन 12000 रुपये से 8 लाख रुपये प्रति माह के बीच हो सकता है, हालांकि वेतन संरचना कंपनी से कंपनी, शहर से शहर, निर्यात-आयात की जरूरत, वरिष्ठता आदि में भिन्न भिन्न होती है। सभी चालक दल के सदस्य और अधिकारी को बोर्ड पर मुफ्त भोजन दिया जाता है और वरिष्ठ अधिकारी अपनी पत्नियों को यात्रा के लिए साथ ले जा सकते हैं। इसके अलावा आपको आयातित शराब, सिगरेट, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, सौंदर्य प्रसाधन बोर्ड पर फ्री में उपलब्ध होते हैं। आप  हर साल चार महीने की छुट्टी के भी हकदार होते हैं। दिलचस्प बात यह है कि मर्चेंट नेवी पेशेवर की कमाई पर कोई आयकर रिटर्न नहीं लगाया जाता है।




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कॉफी क्वालिटी मैनेजमेंट में ऐसे बनाएं ब्राइट करियर



चाहे कोई फंक्शन हो या सेलिब्रेशन, मैन्यू में कॉफी का होना बेहद जरूरी है। इतना ही नहीं, बहुत से व्यक्तियों के दिन की शुरुआत भी कॉफी से ही होती है। लोगों के कॉफी के प्रति बढ़ते आकर्षण के चलते ही भारत में बहुत सी विदेशी और इंडियन कंपनियों ने कॉफी शॉप्स खोले हैं। लेकिन इन कॉफी शॉप्स की सबसे बड़ी चुनौती होती है, ग्राहकों को उनके टेस्ट के अनुसार उम्दा कॉफी सर्व करना। ऐसे में कॉफी के टेस्ट को बरकरार रखने का जिम्मा होता है कॉफी क्वालिटी मैनेजर का। अगर आप भी इस क्षेत्र में रुचि रखते हैं तो कॉफी मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपना सुनहरा भविष्य संवार सकते हैं।


कैसी हैं पॉसिबिलिटीज

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में जिस प्रकार कॉफी की खपत बढ़ रही है। उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इसकी डिमांड कभी कम नहीं होने वाली। इसी कारण यह मार्केट तकरीबन 25 पर्सेंट सालाना की दर से आगे बढ़ रही है।

 

पर्सनल स्किल्स

ग्राहकों को अपनी ओर खींचने में न सिर्फ कॉफी का टेस्ट बल्कि उसका रंग, स्मेल व प्रेजेंटेशन आदि का भी बहुत बड़ा योगदान होता है। इसलिए एक कॉफी क्वालिटी मैनेजर को इन सब बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। चूंकि आजकल मार्केट में बहुत से कॉफी शॉप खुल गए हैं, इसलिए एक कॉफी क्वालिटी मैनेजर को अन्य शॉप्स की क्वालिटी को जानकर कुछ नया व अलग करने की ललक होनी चाहिए। साथ ही, उसमें हर एज ग्रुप के लोगों के टेस्ट को समझने की क्षमता भी होनी चाहिए। 

 

एलिजिबिलिटीज

भारतीय कॉफी बोर्ड द्वारा पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कॉफी क्वालिटी मैनेजमेंट कोर्स संचालित किया जाता है। एक वर्षीय कोर्स में दाखिले के लिए प्रत्याशियों के पास बॉटनी, जूलॉजी, केमिस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी, फूड साइंस, एन्वॉयरमेंट साइंस, एग्रीकल्चर साइंस आदि में बैचलर डिग्री होनी आवश्यक है। हालांकि कॉफी प्लान्टेशन कंपनियों या संबंधित क्षेत्रों से जुड़ी एक्सपोर्ट कंपनियों के द्वारा प्रायोजित प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी जाती है। 


जॉब ऑप्शन

बतौर कॉफी क्वालिटी मैनेजर आप किसी भी बड़े या फेमस इंडियन या मल्टीनेशनल कंपनी या उनकी कॉफी शॉप में जॉब कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त बड़े होटल्स में भी इनके लिए ढेरों ऑप्शंस मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त आप चाहें तो किसी कॉफी शॉप की फ्रेंचाइजी लेकर भी काम कर सकते हैं। कुछ समय के अनुभव के बाद आप खुद का कॉफी शॉप भी खोल सकते हैं। सुकून के कुछ पल बिताने के लिए ही नहीं बल्कि छोटे फंक्शन के लिए भी लोग कॉफी शॉप का सहारा लेते हैं। ऐसे में खुद का कॉफी शॉप खोलना भी एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। आप चाहें तो कॉफी प्लांटेशन कंपनियों व एक्सपोर्ट कंपनियों के साथ जुड़कर भी काम कर सकते हैं। 


सैलरी


इस क्षेत्र में आपकी इनकम इस बात पर निर्भर करती है कि आप किसी कंपनी के साथ जुड़कर कार्य करते हैं या फिर स्वयं की कॉफी शॉप खोलते हैं। वैसे, शुरुआती तौर पर आप 20 से 25 हजार रुपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं। थोड़े अनुभव के बाद आपकी सैलरी में इजाफा हो सकता है। चूंकि कॉफी क्वालिटी मैनेजरों की विदेशों में भी काफी डिमांड होती है, इसलिए आप चाहें तो विदेश जाकर भी जॉब कर सकते हैं।





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डर्मेटोलॉजीः निखरने की इंसानी चाह में उभरता कॅरियर

डिसिन में स्पेशलाइजेशन के लिए उपलब्ध विकल्पों में डर्मेटोलॉजी काफी लोकप्रिय हो गया है। मौजूदा वक्त में फर्स्ट इम्प्रेशन इज द लास्ट इम्प्रेशन कहावत को इतनी गंभीरता से लिया जा रहा है कि व्यक्ति के रूप को व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण अंग माना जाने लगा है। इस कारण लोगों में अपने रूप और व्यक्तित्व को लेकर चिंता का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। यहां तक कि कॉलेज जाने वाले छात्र भी खुद को आकर्षक दिखाने की गरज से काफी रुपये खर्च कर रहे हैं।


अपने रूप को लेकर लोगों में गंभीरता का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि वह चेहरे पर छोटा-सा मुंहासा हो जाने भर से परेशान हो उठते हैं। कई बार वह ऐसी परेशानियों को इस कदर अपने ऊपर हावी कर लेते हैं कि घर से बाहर निकलना भी छोड़ देते हैं। ऐसे माहौल में रूप निखारने का दावा करने वाली फेयरनेस क्रीमों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। खुजली और घमौरियों (रैशेज) जैसे त्वचा संबंधी रोग आम हो चुके हैं। गर्मी और बरसात के मौसम में इनकी अधिकता काफी बढ़ जाती है। इनके सही उपचार के लिए डॉंक्टर का परामर्श जरूरी होता है। कई बार उपचार के लिए डॉंक्टर के पास कुछ दिनों या हफ्तों के अंतराल पर बार-बार जाने की जरूरत होती है। ऐसे में लोग अपनी त्वचा के लिए ज्यादा खर्च करने में जरा भी नहीं हिचकते।


त्वचा और रूप के प्रति लोगों के बढ़ती सजगता के कारण डर्मेटोलॉजिस्ट की मांग में इजाफा हो रहा है। डर्मेटोलॉजी मेडिसिन की एक शाखा है, जिसमें त्वचा और उससे संबंधित रोगों के निदान का अध्ययन किया जाता है। यह एक स्पेशलाइज्ड विषय है, जिसकी पढ़ाई एमबीबीएस के बाद होती है। डर्मेटोलॉजिस्ट रोगों के उपचार के अलावा त्वचा, बाल और नाखूनों से संबंधित कॉस्मेटिक समस्याओं का भी निदान करते हैं।


डर्मेटोलॉजिस्ट का काम

इनका मुख्य कार्य लोगों की उन बीमारियों का उपचार करना होता है, जो त्वचा, बाल, नाखूनों और मुंह पर दुष्प्रभाव डालती हैं। एलर्जी से प्रभावित त्वचा, त्वचा संबंधी दागों, सूर्य की रोशनी में झुलसे या अन्य तरह के विकारों से ग्रसित त्वचा को पूर्व अवस्था में लाने में ये रोगियों की मदद करते हैं। इसके लिए वह दवाओं या सर्जरी का इस्तेमाल करते हैं। त्वचा कैंसर और उसी तरह की बीमारियों से जूझ रहे रोगियों के उपचार में भी वह सहयोग करते हैं। क्लिनिक या अस्पताल में वह सबसे पहले मरीजों के रोग प्रभावित अंग का निरीक्षण करते हैं। जरूरी होने पर वह रोग की गंभीरता जांचने के लिए संबंधित अंग से रक्त, त्वचा या टिश्यू का नमूना भी लेते हैं। इन नमूनों के रासायनिक और जैविक परीक्षणों से वह पता लगाते हैं कि रोग की वजह क्या है। रोग का पता लगने के बाद उपचार शुरू कर देते हैं। इस कार्य में वह दवाओं, सर्जरी, सुपरफिशियल रेडियोथेरेपी या अन्य उपलब्ध उपचार विधियों का उपयोग करते हैं।


अन्य कार्य

कई बार शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी त्वचा संबंधी रोग हो जाते हैं। ऐसे में डर्मेटोलॉजिस्ट रोगियों की स्थिति को देखते हुए उनके लिए डाइट प्लान भी तैयार करते हैं। इसी तरह वह रोगियों को व्यायाम के साथ त्वचा और बालों की देखरेख से संबंधित सलाह भी देते हैं। इसके अलावा मरीजों के उपचार से संबंधित चिकित्सकीय दस्तावेजों (दी गई दवाओं और पैथोलॉजिकल जांच से संबंधित) का प्रबंधन भी उनके कार्यक्षेत्र का एक हिस्सा है।


करते हैं कॉस्मेटिक सर्जरीः चेहरे और अन्य अंगों को आकर्षक बनाने के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट कॉस्टमेटिक सर्जरी भी करते हैं। त्वचा की झुर्रियों और दाग-धब्बों को खत्म करने के लिए वह डर्माब्रेशन जैसी तकनीक और बोटोक्स इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं। इन तकनीकों के अलावा वह लेजर थेरेपी का भी उपचार में उपयोग करते हैं। इस तकनीक की मदद से वह झुर्रियों और त्वचा पर होने वाले सफेद दाग का ईलाज करते हैं। योग्यताः फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के साथ बारहवीं पास करके एमबीबीएस डिग्री प्राप्त करना डर्मेटोलॉजिस्ट बनने की पहली शर्त है। इसके बाद डर्मेटोलॉजी, वेनेरियोलॉजी और लेप्रोलॉजी में तीन वर्षीय एमडी या दो वर्षीय डिप्लोमा पाठयक्रम की पढ़ाई की जा सकती है।


स्पेशलाइजेशन के लिए उपलब्ध विषय

मेडिकल डर्मेटोलॉजी         सर्जिकल डर्मेटोलॉजी

डर्मेटोपैथोलॉजी                हेअर एंड नेल डिस्ऑर्डर्स

जेनिटल स्किन डिजीज       पीडियाट्रिक डर्मेटोलॉजी

इम्यूनोडर्मेटोलॉजी             पब्लिस्टरिंग डिस्ऑर्डर्स

कनेक्टिव टिश्यू डिजीज     फोटोडर्मेटोलॉजी

कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजी      जेनेटिक स्किन डिजीज


संभावनाएं

डर्मेटोलॉजी विषय के पोस्ट ग्रेजुएट पाठयक्रम की पढ़ाई के बाद आप किसी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम या सरकारी डिस्पेंसरी में डर्मेटोलॉजिस्ट के तौर पर काम कर सकते हैं। शिक्षण कार्य में रुचि होने पर आप किसी मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी या इंस्टीटयूट में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अध्यापन या शोध-कार्यों का निर्देशन भी कर सकते हैं।


जरूरी गुणः

अच्छा सौंदर्यबोध और स्वास्थ्य हो

मरीजों के साथ सहानुभूतिपूर्वक संवाद करने में कुशलता हो

हर तरह की स्थितियों से निपटने का पर्याप्त धैर्य हो

भावनात्मक और मानसिक रूप से मजबूत हो

दूसरों की मदद करने की इच्छा हो


संबंधित शिक्षण संस्थान

-एम्स, नई दिल्ली

-मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली

-पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़

-डिपार्टमेंट ऑफ डर्मेटोलॉजी एंड वेनेरियोलॉजी, दिल्ली यूनिवर्सिटी

-एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर

-एएफएमसी, पुणे

-डिपार्टमेंट ऑफ डर्मेटोलॉजी, पांडिचेरी इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेज

-डॉं एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु





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यहां सर्च करें वीडियो एडिटिंग की फ्रीलांस जॉब्स, घर बैठे भी कर सकते हैं नौकरी

नई दिल्ली :  आज के दौर में अगर वीडियो एडिटिंग से जुड़े जॉब्स घर बैठे करना चाहें, तो उसकी भी सुविधा मौजूद है। कई ऐसे आनलाइन प्लेटफार्म हैं, जहां स्किल्ड वीडियो एडिटर्स के लिए तमाम तरह के कार्य मौजूद हैं। आइए जानें कहां खोज सकते हैं वीडियो एडिटिंग से जुड़ी नौकरियां...

बेहांस डाट नेट

वीडियो एडिटिंग की फ्रीलांस जॉब के लिए बेहांस (behance.net/joblist) प्लेटफार्म पर विजिट कर सकते हैं। यहां पर वीडियो एडिटिंग से संबंधित कार्य हासिल करने के लिए पहले अपनी प्रोफाइल के साथ वीडियो एडिटिंग के कुछ कार्यों को भी अपलोड करना होगा। साथ ही, प्रोफाइल को इस तरह से तैयार करें कि क्लाइंट आर्किषत हों। फिर यहां पर नियमित तौर पर निकलने वाली जाब के लिए अप्लाई कर सकते हैं। फ्रीलांस जॉब के साथ फुलटाइम और इंटर्नशिप वीडियो एडिटिंग जॉब के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। इसके अलावा, अगर आप चाहें, तो कंट्री या फिर सिटी के हिसाब से भी जाब सर्च कर सकते हैं। खासकर क्रिएटिव जाब्स के लिए यह बेहतर प्लेटफार्म है।

स्टेज 32

वीडियो एडिटिंग से संबंधित फ्रीलांस जॉब सर्च करने के लिए स्टेज ३२ (stage32.com) साइट को भी ट्राई कर सकते हैं। यहां पर लोकेशन के हिसाब से जॉब सर्च करने की सुविधा दी गई है। आप फिल्म, टीवी और थियेटर इंडस्ट्री से जुड़े वीडियो एडिटिंग के कार्य को यहां पर खोज सकते हैं। यहां पर फ्री में प्रोफाइल तैयार कर सकते हैं या फिर फेसबुक के जरिए भी साइन-इन करने की सुविधा दी गई है। साथ ही, इसमें मीटअप का सेक्शन दिया गया है, जिससे आपको आगामी इवेंट के बारे में जानकारी के साथ-साथ अपना नेटवर्क बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रोडक्शन हब

इस प्लेटफॉर्म पर आप फिल्म और वीडियो प्रोडक्शन हाउस से जुड़े वीडियो एडिटिंग के प्रोजेक्ट हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा, प्रोडक्शन हब (productionhub.com) पर एनिमेशन, गेम डिजाइन, ग्राफिक डिजाइन आदि से जुड़े जॉब को भी सर्च करने की सुविधा है। फ्रीलांस वर्क के साथ फुल टाइम, कांट्रैक्ट, इंटर्नशिप के हिसाब से भी जॉब को सर्च किया जा सकता है।

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मुरादाबाद में 15 जुलाई को लगेगा रोजगार मेला, 14 तक आवेदन करने का है मौका

मुरादाबाद :  क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय मुरादाबाद ने बेरोजगार अभ्यर्थियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 15 जुलाई को आनलाइन रोजगार मेले का आयोजन कर रहा है। जिसमें भाग लेने वाली कंपन‍ियां टेलीफोन व वीडियो काॅलिंग के माध्यम से आनलाइन साक्षात्कार लेंगी।

रोजगार मेले में आवेदन की अंतिम तिथि 14 जुलाई को 12 बजे निर्धारित है। इसलिए अधिक से अधिक संख्या में बेरोजगार अभ्यर्थी मेले में आनलाइन आवेदन करें। जिला सेवायोजन अधिकारी बताया कि रोजगार मेले में प्रतिभाग करने के लिए बेरोजगार अभ्यर्थी सेवायोजन पोर्टल पर आनलाइन प्रतिभाग करने के लिए जिला मुरादाबाद का चयन कर उपलब्ध कंपनियों में अपनी योग्यतानुसार साक्षात्कार कंपनी का चयन करें। जिन अभ्यर्थियों ने पूर्व में अपना पंजीयन सेवायोजन पोर्टल पर करा लिया है। अभ्यर्थी को सेवायोजन कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। नियोजक उनसे उनकी योग्यतानुसार टेलीफोन इंटरव्यू या किसी अन्य माध्यम से साक्षात्कार लेंगे। साक्षात्कार में चयन के उपरान्त उनको दूरभाष के माध्यम से या एसएमएस के माध्यम से सूचित किया जायेगा। 

उधार द‍िए रुपये हड़पने का आरोप : सम्‍भल के असमोली थाना क्षेत्र में गांव निवासी ग्रामीण ने एसपी को शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें उसने नखासा थाना क्षेत्र निवासी ग्रामीण पर उधार लिए गए पैसों की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। थाना क्षेत्र में कस्बा असमोली निवासी पृथी पुत्र घासी ने एसपी को शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें उसने कहा कि नखासा थाना क्षेत्र के गांव रिठाली निवासी व्‍यक्ति ने काफी समय पहले उससे तीन लाख रुपये उधार लिए थे, जिसको वापस लेने के लिए वह कई बार तगादा करता रहा। मगर उसने पैसे वापस नहीं किए। इसी बीच गांव के कुछ लोगों के कहने पर उसको एक चेक दे दिया था। उसने बताया कि जब वह चेक लेकर बैंक गया तो बैंक कर्मियों ने बताया कि आरोपित व्यक्ति के खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं है। इस पर चेक बाउंस हो गया। आरोप है कि जब उसने चेक बाउंस होने की बात कहीं तो आरोप‍ित चेक वापस देने को कहने लगा। इतना ही नहीं इसी बीच उसने बैंक में जाकर धोखाधड़ी करते हुए चेक को रुकवा दिया। धोखाधड़ी का आभास होने पर पृथी ने इस मामले में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई व रुपए वापस दिलाने की मांग की है। 


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SBI Apprentice Recruitment 2021: 6100 अप्रेंटिस भर्ती के लिए आज से करें आवेदन, स्नातकों के लिए मौका

नई दिल्ली : अगर आप भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में काम करने की इच्छा रखते हैं और इसकी तैयारी में जुटे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने देश के विभिन्न राज्यों और संघ शासित राज्यों में स्थित शाखाओं में अप्रेंटिस के तौर पर काम करने के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किये जा रहे हैं। एसबीआई ने कुल 6100 रिक्तियां अप्रेंटिसशिप के लिए घोषित की हैं। स्टेट बैंक में अप्रेंटिसशिप के लिए आवेदन के इच्छुक उम्मीदवार बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट, sbi.co.in पर उपलब्ध कराये गये ऑनलाइन अप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। एसबीआई अप्रेंटिसशिप के लिए आवेदन की प्रक्रिया आज, 6 जुलाई से शुरू हो रही है और उम्मीदवार 26 जुलाई 2021 तक अपना अप्लीकेशन सबमिट कर पाएंगे।

ये होनी चाहिए योग्यता

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में 6100 अप्रेंटिस रिक्तियों के लिए आवेदन के इच्छुक उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या किसी अन्य उच्च शिक्षा संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक डिग्री उत्तीर्ण होना चाहिए। साथ ही, उम्मीदवारों की आयु 31 अक्टूबर 2021 को 20 वर्ष से कम और 28 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि, एसबीआई ने आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा में छूट का भी प्रावधान किया है, अधिक जानकारी के लिए भर्ती अधिसूचना देखें।


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ऑयल एंड गैस मैनेजमैंट: कॅरियर की एक नई उंचाई

यह कोर्स छात्रों में रणनीति एवं प्रबंधन कौशल का विकास करने के अलावा उन्हें एनर्जी मैनेजमैंट की गहरी समझ प्रदान करता है। इस क्षेत्र के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं तकनीकी महत्व के साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय रणनीतियों पर इसके असर का ज्ञान भी उन्हें प्रदान किया जाता है।


रोजगार की सम्भावनाएं: पैट्रोलियम इंडस्ट्री में कामगारों की औसत आवश्यकता अन्य इंडस्ट्रीज की तुलना में काफी अधिक है। इस वजह से निकट भविष्य में इस क्षेत्र में काफी अधिक नियुक्तियां की जाएंगी।


विकास की सम्भावनाएं: पूरी दुनिया तेल एवं गैस पर निर्भर है। ये दुनिया भर की ऊर्जा जरूरतों का प्रमुख स्रोत हैं और अत्यधिक दोहन की वजह से तेजी से खत्म भी हो रहे हैं। इन स्रोतों का प्रबंधन महत्वपूर्ण हो गया है जो हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है। ऑयल एंड गैस मैनेजमैंट में कोर्स तेल एवं गैस इंडस्ट्री के लॉजिस्टिक्स तथा प्रबंधन के मुद्दों पर रोशनी डालता है। इंडस्ट्री तेल एवं गैस के नए स्रोतों का पता लगाने तथा उसे हासिल करने के लिए नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है।

 

मुख्य नियोक्ता: असैंचर, अदानी, बी.पी.सी.एल., ब्रिटिश गैस, क्रिसिल, डिलोइटे, एस्सार ऑयल, गेल, गल्फ ऑयल, एच.पी.सी.एल., इंडियन ऑयल, इंफोसिस, जिंदल ग्रुप, एल.एंड टी.।


शुरूआती तनख्वाह: 20 हजार रुपए प्रतिमाह


प्रमख संस्थान:

इंटरनैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ इंफार्मेशन टैक्रोलॉजी, पुणे, महाराष्ट्र

यूनिवर्सिटी ऑफ पैट्रोलियम एंड एनर्जी स्ट्डीज, देहरादून, उत्तराखंड

पंडित दीनदयाल पैट्रोलियम यूनिवर्सिटी, गांधीनगर, गुजरात





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चमक रहा इवेंट मैनेजमेंट, उभर रहे नए रोजगार

उदारीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों ने हमारी आर्थिक और सामाजिक ढांचे को ही बदल दिया है। यही वजह है कि आज लोगों में बच्चों के बर्थ डे कार्यक्रम से लेकर शादी−विवाह तक के समारोहों में बड़े पैमाने पर मनाने की होड़ लग गई है। यही वजह है कि आज स्टेटस सिंबल बन चुके सामाजिक रस्मों−रिवाजों को पूरा करने की जिम्मेदारी इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों को सौंपी जानी लगी है। ये कंपनियां मोटी रकम लेकर संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन करती हैं। फिलहाल इस व्यवसाय का देश भर में 600 हजार करोड़ रुपए का कारोबार है। इसमें हर साल 30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी भी हो रही है। लिहाजा इस क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं उभर कर सामने आई हैं।


इवेंट मैनेजमेंट का मतलब कार्यक्रम प्रबंधन है। जिसके तहत शादी, पार्टियां, बर्थ डे पार्टियां, सौन्दर्य प्रतियोगिता, खेल आयोजन, उद्योग जगत के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे नए उत्पादों की लांचिंग, प्रेस कांफ्रेंस, सेमिनार, प्रशिक्षण और ब्रांड शो जैसे कार्यक्रम हैं। इवेंट मैनेजमेंट के तहत इन कार्यक्रमों से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का एक समूह कार्यक्रम कराने वालों की स्थिति का अध्ययन करता है। जिसके आधार पर ही इवेंट मैनेजर कार्यक्रमों की तैयारी करते हैं। आयोजक की जिम्मेदारी सिर्फ पैसे चुकाने तक ही होती है।


इवेंट मैनेजमेंट के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कार्यों का संपादन किया जाता है। लिहाजा इसके लिए किसी विशेष पाठ्यक्रम की व्यवस्था नहीं है। यह व्यवसाय पूरी तरह से व्यवहार कुशलता और संचालन व्यवस्था पर आधारित है। इसलिए आमतौर पर एमबीए और जनसंचार से संबंधित डिग्रियां एक कुशल इवेंट मैनेजर बनने के लिए सहायक होती हैं। लेकिन व्यवहारिक रूप से कोई भी ग्रेजुएट युवक जो बहिमुखी प्रतिभा का धनी है और अपनी बातों को प्रभावी ढंग से दूसरे के समक्ष रखने में सक्षम है तथा उसमें प्रबंधन की क्षमता हो वह इसे कॅरियर के तौर पर अपना सकता है।


एक इवेंट मैनेजर में टीम भावना होना बहुत जरूरी है। क्योंकि यह इस व्यवसाय का मेरू दंड है। इस कारोबार में उतरने से पहले अभ्र्यथी को किसी इवेंट कंपनी में बतौर प्रशिक्षु काम करना आवश्यक है। इसके अलावा उसे पार्टियों के आयोजन में हो रहे बदलाव से अवगत होना भी जरूरी है। साथ ही समाज के धनी तबके के बीच पैठ एक इवेंट मैंनेजर की सफलता के सूत्र हैं।


इच्छुक अभ्यर्थी इन संस्थानों से संपर्क कर सकते हैं...


-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट, 7 एवन आरकेड, डीजे रो विल पार्ले मुंबई।


-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, जेएनयू कैम्पस, नई दिल्ली।


-मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, शोला अहमदाबाद।


-सेंट जेविर्यस कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशन, धोबी तालाब रोड़, लाइंस मुंबई।


-केजे सोमाया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, विले पार्ले मुंबई।


-यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे, गणेश खिंड, पुणे।






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अगर नहीं मिला है कहीं दाखिला, तो ये शॉर्ट टर्म कोर्स करियर बनाने में करेंगे मदद

12वीं के बाद ज्यादातर स्टूडेंट्स अपने पसंदीदा कोर्स में दाखिला ले चुके होंगे, पर कुछ स्टूडेंट ऐसे भी होंगे जो किसी कारण एडमिशन नहीं ले पाए होंगे। ऐसे स्टूडेंट्स को परेशान होने की बजाय अपनी पसंद का कोई ऐसा शॉर्ट-टर्म कोर्स करने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे वे खुद को जॉब मार्केट के मुताबिक स्किल्ड बनाकर आसानी से नौकरी पाने के काबिल बन सकें। ऐसे कोर्सों में डिजिटल मार्केटिंग, मोबाइल इंजीनियरिंग, हार्डवेयर नेटवर्किंग, वेब डिजाइनिंग, आदि प्रमुख हैं...


1. डिजिटल मार्केटिंग : स्मार्टफोन पर इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ने से डिजिटल मार्केटिंग आज के दौर का एक तेजी से उभरता फील्ड है। इसमें मुख्य रूप से गूगल सर्च, सोशल मीडिया (वाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम), ईमेल और वेबसाइट्स का इस्तेमाल किया जाता है। अपने ब्रांड को ऑनलाइन प्रमोट करने के लिए कंपनियां सोशल मीडिया मैनेजर/एग्जीक्यूटिव्स को हायर कर रही हैं।


कोर्स एवं योग्यता- इस फील्ड में आने के लिए कोर्स के साथ-साथ आपकी कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होनी जरूरी है। साथ में इंटरनेट की अच्छी समझ, दमदार राइटिंग स्किल होनी चाहिए। डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स इंटरमीडिएट एवं ग्रेजुएशन के बाद किया जा सकता है।


2. कंप्यूटर हार्डवेयर/नेटवर्किंग : आइटी सेक्टर में कंप्यूटर हार्डवेयर/ नेटवर्किंग के अंतर्गत ही सैन नेटवर्किंग, डाटा फार्मिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे कई नए-नए क्षेत्र भी सामने आ रहे हैं, जिसके एक्सपर्ट के लिए मौके लगातार बढ़ रहे हैं।


कोर्स एवं क्वालिफिकेशन- यह 6 माह से लेकर 18 माह की अवधि का कोर्स है। 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद यह कोर्स किया जा सकता है।


3. वेब डिजाइनिंग : ऑनलाइन इंडस्ट्री में वेब डिजाइनर्स की इन दिनों बहुत पूछ है। एडवर्टाइजिंग से लेकर, उत्पाद और सर्विस को प्रमोट करने के लिए वेबसाइट होना जरूरी हो गया है, जो एक वेब डिजाइनर ही विकसित कर सकता है।


कोर्सेज एवं योग्यता- वेब डिजाइनिंग 12वीं के बाद किया जा सकता है।


4. मोबाइल इंजीनियरिंग/रिपेयरिंग : आज के समय में हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन है। स्मार्टफोन से शॉपिंग से लेकर ऑनलाइन बैंकिंग तक की जा रही है। इस वजह से मोबाइल कंपनियों में मोबाइल इंजीनियर्स की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। आप किसी भी संस्थान से मोबाइल इंजीनियरिंग/रिपेयरिंग में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स करके मोबाइल कंपनियों के टेस्टिंग विंग एवं सर्विस सेंटर में तुरंत नौकरी पा सकते हैं। यह शॉर्ट-टर्म कोर्स आप 10वीं एवं 12वीं के बाद कर सकते हैं।




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इंटरव्यू में ऐसी हो आपकी बॉडी लैंग्वेज

किसी भी इंटरव्यू में सफल होने के लिए बॉडी लैंग्वेज की अहम भूमिका है। अगर आपकी बॉडी लैंग्वेज सही होगी तो सफलता पक्का मिलेगी। ऐसे में इन पॉइंट्स का ध्यान रखकर आप इंटरव्यू में धाक जमा सकते हैं...


बैठने का तरीका

बैठते वक्त आपकी कमर सीधी होनी चाहिए और पैर आराम से जमीन पर रखे हों। दोनों पैरों के बीच कम-से-कम फासला होना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि दोनों पैर क्रॉस करके नहीं बैठना है। दोनों बाजुओं को चेयर के हैंडल पर रेस्ट करने दें।


हाथ के इशारे

इंटरव्यू लेने वाले से बातचीत के दौरान या सवालों के जवाब देने के दौरान उंगली दिखाना, पेंसिल या पेन से इशारा करना या ज्यादा हाथ चलाकर बातें करना सही नहीं माना जाता। बातचीत के दौरान सामान्य रूप से हाथ हिला सकते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं।


आई कॉन्टैक्ट

पूरे इंटरव्यू के दौरान सामने वाले की आंखों में आंखें डालकर बात करें। नजरें इधर-उधर घुमाना, छत की ओर देखना या बिल्कुल नीचे देखना आत्मविश्वास की कमी को दिखाता है। इसी तरह जब आप सुन रहे हैं तो बोलने वाले की आंखों में उस वक्त के मुकाबले ज्यादा देर देखें, जब आप बोल रहे हैं।


रिलैक्स रहें

इंटरव्यू के दौरान आपको पूरी तरह से फॉर्मल नजर आना है, लेकिन ध्यान रखें कि फॉर्मल दिखने के चक्कर में आपकी बॉडी लैंग्वेज सख्त और कठोर न हो जाए। पूरा शरीर आरामदायक स्थिति में रहे और इसके लिए जरूरी है कि मन में बेचैनी, घबराहट या दूसरे नकारात्मक विचार न लाएं।


मुस्कुराहट

क्या आपको पता है कि किसी पर आपका फर्स्ट इंप्रेशन मुलाकात के पहले 7 सेकंड में ही पड़ जाता है? आप इन 7 सेकंड्स का भरपूर यूज करें। इंटरव्यूअर के रूम में घुसते वक्त आपके चेहरे पर मुस्कान होनी चाहिए। कोशिश करें कि पूरे इंटरव्यू के दौरान यह मुस्कान बनी रहे।





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फिजियोथेरेपी में अपना कॅरियर बनाकर कमाएं पैसा और नाम

एक फिजियोथेरेपिस्ट सिर्फ अलग-अलग तरीकों से मरीजों का इलाज ही नहीं करता, बल्कि वह पेंशेंट को यह भी यकीन दिलाता है कि वह जल्द ठीक हो सकते हैं और वह भी बिना किसी दवाई के। मरीजों में आत्मविश्वास जगाने के लिए पहले आपके भीतर आत्मविश्वास होना जरूरी है। कहते हैं कि दूसरों की सेवा करने में जो आनंद आता है, वह दुनिया की किसी चीज में नहीं हो सकता। आमतौर पर लोग दूसरों की मदद कम ही करते हैं, लेकिन अगर आप दूसरों की तकलीफ नहीं देख सकते तो अपने इस मनोभाव के जरिए ही अपना भविष्य बना सकते हैं। दरअसल, फिजियोथेरेपी एक ऐसा ही क्षेत्र है, जिसमें दूसरों की सेवा करने का आनंद तो प्राप्त होता है ही, साथ ही व्यक्ति काफी अच्छा पैसा और प्रतिष्ठा भी प्राप्त करता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-


क्या है फिजियोथेरेपी 

फिजियोथेरेपी वास्तव में चिकित्सा विज्ञान की ही एक शाखा है। फिजियोथेरेपी की खासियत यह है कि इसमें इलाज के दौरान किसी भी तरह की दवाई का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि एक फिजियोथेरेपिस्ट व्यायाम, इलेक्ट्रोथेरपी व मसाज जैसे तरीकों का इस्तेमाल करके व्यक्ति को उसकी स्वास्थ्य समस्या से निजात दिलाता है।

 

स्किल्स

एक फिजियोथेरेपिस्ट सिर्फ अलग-अलग तरीकों से मरीजों का इलाज ही नहीं करता, बल्कि वह पेंशेंट को यह भी यकीन दिलाता है कि वह जल्द ठीक हो सकते हैं और वह भी बिना किसी दवाई के। मरीजों में आत्मविश्वास जगाने के लिए पहले आपके भीतर आत्मविश्वास होना जरूरी है। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में कम्युनिकेशन स्किल व प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल मील का पत्थर साबित होते हैं। एक फिजियोथेरेपिस्ट को अपने काम के दौरान कई तरह के मरीजों की समस्याओं को देखना, समझना व उससे निपटना होता है, इसलिए आपकी सहनशक्ति अधिक होनी चाहिए और आपके भीतर दूसरों की मदद करने का जज्बा होना चाहिए। साथ ही अपने कार्य के प्रति प्रेम होना भी उतना ही जरूरी है। 


योग्यता

अगर आप फिजियोथेरेपिस्ट बनना चाहते हैं तो आप बीपीटी यानी बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी, एमपीटी यानी मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। आजकल गवर्नमेंट व प्राइवेट दोनों तरह के कॉलेज में फिजियोथेरेपी कोर्स संचालित किए जाते हैं। लेकिन अगर आप सरकारी कॉलेज में दाखिला लेना चाहते हैं तो पहले आपको स्टेट या सेंट्रल लेवल के एंट्रेंस एग्जाम पास करना होना। वहीं प्राइवेट कॉलेजों में डायरेक्ट और परीक्षा द्वारा दोनों ही तरह से एडमिशन लिया जाता है।


संभावनाएं

आजकल जिस तरह बीमारियां पैर पसार रही हैं, उसे देखते हुए फिजियोथेरेपिस्ट की मांग भी बढ़ती जा रही है। एक फिजियोथेरेपिस्ट विभिन्न अस्पतालों व क्लिनकि से लेकर, रिहैबिलिटेशन सेंटर, ओल्ड एज होम्स, हेल्थ सेंटर्स, नर्सिंग होम्स एंड डे सेंटर्स, स्पोर्ट्स क्लिनकि, क्लब, जिम सेंटर्स आदि में काम की तलाश कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ समय के अनुभव के बाद आप खुद का फिजियोथेरेपी सेंटर भी चला सकते हैं।

 

आमदनी

इस क्षेत्र में आमदनी आपके अनुभव के साथ बढ़ती जाती है। वैसे शुरूआती दौर में आप दस से बीस हजार रूपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं। कुछ समय बाद जब आपका अनुभव बढ़ता है और आप किसी अच्छे हॉस्पिटल या हेल्थ सेंटर के साथ जुड़कर काम करते हैं तो आप महीने के 40000 से 50000 रूपए भी आसानी से कमा सकते हैं। वहीं अगर आप अपना प्राइवेट फिजियोथेरेपी सेंटर खोलते हैं तो आप पर सिटिंग के हिसाब से चार्ज कर सकते हैं।

 

प्रमुख संस्थान...

पं दीनदयाल उपाध्याय इंस्टिट्यूट फॉर फिजिकली हैंडिकैप्ड, नई दिल्ली

के जे सौम्या कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, मुंबई

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एजूकेशन एंड रिसर्च, पटना

सांचती कॉलेज ऑफ फिजियोथैरेपी, पुणे

अपोलो फिजियोथेरेपी कॉलेज, हैदराबाद

निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, तेलंगाना

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रिहेबिलिटेशन ट्रेनिंग एंड रिसर्च, उड़ीसा

एसडीएम कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, कर्नाटक

जे एस एस कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, मैसूर

महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल एजुकेशन, केरल

डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन, तमिलनाडु





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IGNOU: 2021 जुलाई सत्र के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू

धनबाद :  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विवि यानी इग्नू में दाखिला लेने वाले छात्र छात्राओं के लिए अच्छी खबर। जुलाई 2021 सत्र में एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पीके राय कॉलेज स्टडी सेंटर में एडमिशन लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जुलाई सत्र में सभी डिप्लोमा, डिग्री, सर्टिफिकेट कोर्स के साथ पीजी कोर्स में भी दाखिला ले सकते हैं। जनवरी सत्र में जहां सिर्फ जनरल कोर्स में नामांकन की अनुमति मिली थी, जुलाई सत्र में ऑनर्स कोर्स में भी नामांकन करा सकेंगे।

बीसीए और पर्यावरण विज्ञान कोर्स शुरू कराने का प्रयास

पीके राय कॉलेज स्टडी सेंटर में इग्नू के दर्जनों कोर्स संचालित हैं। छात्र छात्राओं की मांग पर स्टडी सेंटर ने बीसीए और पर्यावरण विज्ञान कोर्स शुरू कराने का प्रस्ताव रिजनल सेंटर को दिया है। अनुमति मिल गई तो इसी सत्र से दोनों कोर्स शुरू हो सकते हैं।

ऑनलाइन संचालित होंगी इग्नू की कक्षाएं

इग्नू के जनवरी सत्र के छात्र छात्राओं की कक्षाएं ऑनलाइन चल रही हैं। जुलाई सत्र में दाखिला लेनेवाले छात्रों की कक्षाएं भी परिस्थिति के अनुसार ऑनलाइन ही संचालित होंगी। ऑफलाइन कक्षाओं के संचालन की अनुमति मिली तो पहले की तरह कक्षाएं शुरू हो सकती हैं

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SBI SCO Recruitment 2020-21: स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर्स के पदों के लिए फिर से खुली एप्लीकेशन विंडो, इस दिन तक मौका

SBI SCO Recruitment 2020-21: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर्स (SCO) भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया फिर से शुरू की है। विज्ञापन संख्या- CRPD/SCO/2020-21/32 के तहत एसबीआई ने इंजीनियर (फायर) के 16 पदों के लिए एप्लीकेशन विंडो को आज, यानी 15 जून से री-ओपन कर दिया है। ऑनलाइन आवेदन करने की लास्ट डेट 28 जून, 2021 है। ऐसे में, इच्छुक व पात्र उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट, sbi.co.in पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। 

ये हैं महत्वपूर्ण तिथियां

ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तिथि: 15 जून, 2021

ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि : 28 जून, 2021

ऑनलाइन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि: 28 जून, 2021

ऑनलाइन आवेदन में सुधार करने की अंतिम तिथि: 28 जून, 2021

एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंट निकालने की अंतिम तिथि : 15 जुलाई, 2021

जानें कौन कर सकता है आवेदन

इस भर्ती के लिए वैसे उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं, जिन्होंने संबंधित फील्ड में बीई या बीटेक की डिग्री प्राप्त की हो। शैक्षिक योग्यता व कार्य अनुभव की डिटेल जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर नोटिफिकेशन चेक कर सकते हैं। वहीं, उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 31 दिसंबर, 2020 के अनुसार की जाएगी।



चयन प्रक्रिया

उम्मीदवारों का चयन शॉर्टलिस्टिंग और इंटरव्यू के माध्यम से किया जाना है।

इन स्टेप से करें ऑनलाइन अप्लाई

इंजीनियर (फायर) पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन अप्लाई करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट, sbi.co.in पर विजिट करना होगा। इसके बाद होमपेज पर उपलब्ध Careers सेक्शन में एंटर करना होगा। अब लेटेस्ट अनाउंसमेंट सेक्शन में संबंधित भर्ती के Apply Online लिंक पर क्लिक करें। अब एक नया टैब ओपन होगा। यदि आप पहले से रजिस्टर्ड नहीं हैं तो न्यू रजिस्ट्रेशन लिंक के माध्यम से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें। इसके बाद, अपने रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड का उपयोग कर लॉगइन करके आगे की आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

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यूपी सरकार का युवाओं को बड़ा तोहफा, दिसंबर तक 1 लाख सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य

UP Government Jobs 2021: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को राज्य सरकार एक बड़ा तोहफा देने जा रही है। कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के कमजोर होने के साथ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में आर्थिक गतिविधियों को गति देने और मिशन रोजगार को फिर से शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यालय के ऑफिशियल ट्वीटर हैंडल से जानकारी दी गई है। जिसमें, एक अखबार के रिपोर्ट को भी साझा किया गया है। 

बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य में अब तक 1 लाख से अधिक महिलाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। जबकि, 1.50 करोड़ श्रमिकों को मनरेगा के माध्यम से रोजगार से जोड़ा गया है। स्टार्टअप इकाइयों से 5 लाख से अधिक और औद्योगिक इकाइयों से 3 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिया गया है। ओडीओपी के माध्यम से 25 लाख लोगों को रोजगार मिला है। यूपी में 50 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों के जरिये 1 करोड़ 80 लाख लोगों को रोजगार मिला है। राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति से 5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिया गया है। वहीं, 40 लाख से अधिक श्रमिकों की स्किल मैपिंग के बाद उन्हें रोजगार से जोड़ा गया है। 


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वूमेन मिलिट्री पुलिस में 100 सोल्जर (जनरल ड्यूटी) की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 20 जुलाई तक

नई दिल्ली : भारतीय सेना में महिला मिलिट्री पुलिस की भर्ती की तैयारी में जुटीं महिला उम्मीदवारों के लिए काम की खबर। सेना द्वारा महिला मिलिट्री पुलिस के लिए सोल्जर जनरल ड्यूटी के तौर पर कुल 100 रिक्तियों पर भर्ती के लिए रैली का आयोजन विभिन्न शहरों में किया जाना है। इन शहरों में अंबाला, लखनऊ, जबलपुर, बेलगाम, पुणे और शिलांग शामिल हैं। उम्मीदवारों को ध्यान देना चाहिए कि सोल्जर जनरल ड्यूटी (वूमेन मिलिट्री पुलिस) में ऑफिसर रैंक से नीचे आरटीजी वर्ष 2021-22 के लिए भर्ती की जानी है।


ऐसे करें आवेदन

भारतीय सेना में सोल्जर जनरल ड्यूटी (वूमेन मिलिट्री पुलिस) की भर्ती रैली के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन हैं। आवेदन के लिए के उम्मीदवारों को भारतीय सेना के भर्ती पोर्टल, joinindianarmy.nic.in पर विजिट करना होगा। इसके बाद होम पेज पर ही दिये गये जेसीओ/ओआर अप्लाई/लॉगिन के लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद नये पेज पर रजिस्ट्रेशन के लिंक पर क्लिक करना होगा और फिर मांग गये विवरणों को भरकर पंजीकरण किया जा सकेगा। इसके बाद यूजरनेम और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करके अप्लीकेशन फॉर्म सबमिट किये जा सकेंगे। आवेदन की प्रक्रिया 6 जून से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 20 जुलाई 2021 तक अपना अप्लीकेशन सबमिट कर पाएंगे।

कौन कर सकता है आवेदन? 

भारतीय सेना के वूमेन मिलिट्री पुलिस में सोल्जर जनरल ड्यूटी के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन के इच्छुक उम्मीदवारों को न्यूनतम 45 फीसदी अंकों के साथ 10वीं/मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए, जिसमें से सभी विषयों में कम से कम 33 फीसदी अंक होने चाहिए। इसके अतरिक्त उम्मीदारों की आयु 17.5 वर्ष से कम और 21 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए, यानि कि उम्मीदवार का जन्म 1 अक्टूबर 2000 से पहले और 1 अप्रैल 2004 के बाद नहीं हुआ होना चाहिए। साथ ही, उम्मीदवार का हाईट कम से कम 152 सेमी और वजन हाईट के अनुसार होना चाहिए।


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एविएशन इंडस्ट्री में है शानदार करियर

कॅरियर को लेकर परेशान हैं या कुछ अलग करने की सोच रहे हैं। और यदि आपको नीला आसमान, तैरते बादल आकर्षित करते हैं या प्लेन उड़ाने का आपका का भी मन करता है तो आप एविएशन में करियर बना सकते हैं। एयर इंडिया में बस आपने पायलट और एयर होस्टेट की पोस्ट के बारे में ही सुना होगा। आइये हम आपको बताते हैं इस क्षेत्र में कॅरियर और ग्रोथ के लिहाज से किस तरह के मौके मौजूद हैं...


सिर्फ पायलट ही नहीं है ऑप्शन:- ऐसा नहीं है कि एविएशन इंडस्ट्री में सिर्फ पायलट बनना ही एकमात्र ऑप्शन है। यहां ऐसे कई मौके मौजूद हैं जिनमे आपका सुनहरा कॅरियर बन सकता है। जैसे एयोरोनॉटिकल इंजीनियरिंग, एयर होस्टेस, फ्लाइट अटेंडेंट, फ्लाइट डेक क्रू, एयर टिकटिंग, एयरक्राफ्ट मेंटीनेंस इंजीनियरिंग आदि। लेकिन पायलट ट्रेनिंग के लिए यहां ज्यादा मारामारी है तो जानिए पायलट ट्रेनिंग का पूरा प्रोसेस।


जरुरी है एसपीएल:- किसी भीं स्टूडेंट के लिए स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (एसपीएल) इस फील्ड का सर्टिफिकेट है। पहले स्टेज में छात्र को लाइसेंस हासिल करना होता है। उसके बाद प्राइवेट पायलट ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें 60 घंटे की उड़ान भरनी होती है। इन 60 घंटे में 20 घंटे किसी सीनियर पायलट के साथ उसके बाद 20 घंटे ही अकेले उड़ान भरनी होती है। जबकि पांच घंटे देश के बहार उड़ान भरनी पड़ती है। 


कोर्स को हल्के में न ले:- पायलट बनने के लिए थ्योरी पास करना भी जरुरी है। थ्योरी में आपको एयर रेग्युलेशन, नेविगेशन, एविएशन मेटेरियोलॉजी, एयरक्राफ्ट ऐंड इंजन वगैरह से जुड़े सवाल मिलेंगे। वहीं कमर्शियल पायलट बनने के लिए आपको ढाई साल का अनुभव होना जरूरी है। 


साइंस स्ट्रीम से हो बारहवीं पास:- मैथ फिजिक्स और इंग्लिश में दिलचस्पी रखने वाले स्टूडेंट्स इसमें अप्लाई कर सकते है लेकिन आपको इन्ही विषयों में 50 फीसदी से बारहवीं पास होना चाहिए। उम्र 17 साल से कम नहीं होनी चाहिए। लेकिन सिर्फ शैक्षणिक योगयता ही नहीं पायलट बनने के लिए कुछ शारीरिक मानदंड भी है जो आपको पार करने हैं। 


शारीरिक और मानसिक रूप से हो दुरुस्त:- दरअसल यह ऑफिस में बैठने वाली नौकरी नहीं है। इसके लिए हमेशा चैकस रहना पड़ेगा। एक पायलट को मानसिक और शारीरिक रूप से एकदम चुस्त-दुरुस्त होना चाहिए। आपका दिमाग चैकस और दुर्घटना के समय संयमित रहने वाला होना चाहिए। इसलिए जरुरी है कि किसी डॉक्टर से अपना पूरा मेडिकल चेकअप करवा कर ही इस क्षेत्र में कदम रखें। आजकल कई संस्थान प्रवेश परीक्षा लेते है जिन्हे पास करके आप ट्रेनिंग ले सकते हैं। 


शानदार सैलरी पैकेज:- पायलट की नौकरी जोखिम भरी होने के साथ ही ग्लैमरस भी है। इसमें आपको शानदार सैलरी पैकेज मिलेगा। प्राइवेट पायलट के रूप में आपकी सैलरी 50 हजार रुपये प्रतिमाह होगी। वहीं कमर्शियल पायलट बनने पर आप हर महीने एक लाख से ज्यादा कमा सकेंगे। 





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