अमेरिका में ईमेल भेज सैकड़ों विदेशी छात्रों का वीजा रद्द.

अमेरिका में पढ़ने वाले सैकड़ों विदेशी छात्रों को उनका एफ-1 वीजा यानी स्टूडेंट वीजा रद्द होने का अचानक ईमेल मिला है। यह मेल अमेरिकी विदेश मंत्रालय (DoS) की ओर से मार्च के आखिरी हफ्ते में भेजा गया है।

यह ई-मेल उन छात्रों को भेजा गया है, जो कैंपस एक्टिविज्म यानी कैंपस में होने वाले प्रदर्शनों में शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन छात्रों को भी ऐसे मेल भेजे गए हैं, जो भले ही कैंपस एक्टिविज्म में शामिल नहीं थे, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘इजराइल विरोधी’ पोस्ट को शेयर, लाइक या फिर कमेंट किया।

मेल में कहा गया है कि छात्रों के एफ-1 वीजा रद्द कर दिए गए हैं। छात्रों से खुद को डिपोर्ट करने यानी अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया है। ऐसा न करने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी भी दी गई है।

अमेरिकी सरकार ‘कैच एंड रिवोक’ ऐप की मदद से ऐसे छात्रों की पहचान कर रही है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक 26 मार्च तक 300 से ज्यादा ‘हमास समर्थक’ छात्रों का F-1 वीजा रद्द किया जा चुका है। इसमें कई भारतीय छात्र भी शामिल हैं।

ई-मेल में चेतावनी- देश छोड़ दें, वरना हिरासत में लिया जाएगा

यह मेल कई यूनिवर्सिटी के छात्रों को भेजा गया है। इसमें हार्वर्ड, कोलंबिया, येल, कैलिफोर्निया और मिशिगन यूनिवर्सिटी जैसे चर्चित संस्थान हैं। हालांकि, कितनी यूनिवर्सिटीज के कितने छात्रों को यह मेल भेजा गया है, इसकी सटीक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

ईमेल में छात्रों से कहा गया कि उनका F-1 वीजा अमेरिका के इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट की धारा 221(i) के तहत रद्द कर दिया गया है। अब अगर वे अमेरिका में रहते हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है, उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है या उन्हें डिपोर्ट किया जा सकता है।

ईमेल में यह भी बताया गया है कि छात्रों को उनके गृह देशों के अलावा दूसरे देशों में भी भेजा जा सकता है। इसलिए बेहतर है कि छात्र खुद से अमेरिका छोड़ दें।

छात्रों को वीजा का इस्तेमाल न करने की चेतावनी मिली

ईमेल में कहा गया है कि अगर आप भविष्य में अमेरिका की यात्रा करने का इरादा रखते हैं तो आपको दूसरे अमेरिकी वीजा के लिए आवेदन करना होगा। इसके बाद आपके आवेदन पर फैसला किया जाएगा। इसमें छात्रों को रद्द कर दिए गए वीजा का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी गई है। साथ ही कहा गया है कि उन्हें अमेरिका छोड़ते वक्त दूतावास में अपना पासपोर्ट जमा करना होगा।

अब तक कितने छात्रों ने अमेरिका छोड़ा है, इसकी जानकारी नहीं है। कई छात्र बिना औपचारिक डिपोर्टेशन के खुद से देश छोड़ रहे हैं तो कुछ ने कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ भारतीय छात्रों को भी मेल भेजे गए हैं।  भारतीय छात्रों को हमास के समर्थन वाले कुछ सोशल मीडिया पोस्ट लाइक करने की वजह से ई-मेल मिले हैं। हालांकि, इनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- यूनिवर्सिटी में हंगामा मचाने वालों को बर्दाश्त नहीं करेंगे

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एफ-1 वीजा रद्द करने वाले ईमेल को लेकर कहा कि 300 से ज्यादा छात्रों के वीजा रद्द कर दिए गए हैं। यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है। हम हर दिन ऐसा कर रहे हैं। हर बार जब मुझे कोई ‘सिरफिरा’ मिलता है, मैं उसका वीजा रद्द कर देता हूं।

रुबियो ने कहा कि इन छात्रों को अमेरिका पढ़ने के लिए आने दिया गया है, न कि कैंपस एक्टिविज्म में शामिल होकर हमारी यूनिवर्सिटीज को बर्बाद करने। अगर आप वीजा लेकर यहां आते हैं और ऐसी गतिविधियों में शामिल होते हैं तो आपका वीजा छीन लिया जाएगा।

रुबियो ने कहा कि वीजा कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं है। अगर कोई हमारे देश आता है और अराजकता फैलाता है तो उसे यहां से जाना होगा। हम ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं करेंगे, जो हमारी यूनिवर्सिटीज में उत्पात मचाते हैं।

इजराइल-हमास जंग के बाद अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज में प्रदर्शन हुए। इसमें कोलंबिया और हार्वर्ड में फिलिस्तीन के समर्थन में हुए प्रदर्शन को लेकर काफी विवाद हुआ था। इन्हें हमास समर्थन के तौर पर देखा गया था।

AI ऐप से सोशल मीडिया पर छात्रों की पहचान

अमेरिका में हमास का समर्थन करने वाले छात्रों का पता लगाने के लिए AI ऐप ‘कैच एंड रिवोक’ ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस ऐप का इस्तेमाल अमेरिकी विदेश मंत्रालय और बाकी एजेंसिया करती हैं। आम लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते। यह ऐप मार्च में लॉन्च हुआ था।

सबसे पहले 5 मार्च को तुर्किये की एक छात्रा रुमेसा ओजतुर्क की पहचान की गई थी। वह टफ्ट्स यूनिवर्सिटी, बोस्टन में पढ़ाई कर रही थी। उसने सोशल मीडिया पर फिलिस्तीन के समर्थन में पोस्ट किया था, जिसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उसका वीजा रद्द कर दिया।

रमजान के दौरान 25 मार्च को रुमेसा इफ्तार के लिए अपने दोस्त के घर जा रही थी। तभी उसे इमिग्रेशन एंड कस्टम्स इंफोर्समेंट(ICE) के अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद रुमेसा ने ICE के खिलाफ मुकदमा दायर किया। हालांकि, जज ने सरकार को उन्हें देश से बाहर भेजने पर रोक लगा दी। फिलहाल वह लुइसियाना में हिरासत में है।

ICE ने इस मामले में सबसे पहले महमूद खलील नाम के शख्स को गिरफ्तार किया था। उसने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। खलील फिलिस्तीनी मूल का नागरिक है। उसे भी लुइसियाना के एक हिरासत केंद्र में रखा गया है।

भारत की रंजनी ने खुद को सेल्फ डिपोर्ट किया, अमेरिका से कनाडा गईं

भारत की रंजनी श्रीनिवास और बदर खान सूरी वे दो चर्चित नाम हैं, जो इस मामले से जुड़े हैं। अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ रही भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन का वीजा रद्द कर दिया गया था। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने आरोप लगाया है कि श्रीनिवासन 'हिंसा-आतंकवाद को बढ़ावा देने' और हमास का समर्थन करने वाली गतिविधियों में शामिल थीं। वीजा रद्द होने के बाद रंजनी ने अमेरिका छोड़ दिया और सेल्फ डिपोर्ट होकर कनाडा चली गईं।

वहीं, बदर खान सूरी पर अमेरिका में हमास के समर्थन में प्रोपेगैंडा फैलाने का आरोप है। सूरी स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के छात्र थे। वह सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिश्चियन अंडरस्टैंडिंग में पोस्ट डॉक्टोरल फैलो के रूप में पढ़ाई कर रहे थे। बदर खान सूरी का वीजा रद्द हुआ या नहीं, इसकी जानकारी अभी नहीं है।

भारतीय विदेश मंत्रालय की सलाह- अमेरिकी कानून मानें भारतीय छात्र

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 30 मार्च 2025 को एक बयान कर अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों से वहां के स्थानीय कानूनों और वीजा नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में कहा, "हमारे छात्रों को सलाह है कि वे अमेरिका में ऐसी गतिविधियों से बचें, जो उनके वीजा स्टेटस को खतरे में डाल सकती हैं।"

भारत सरकार ने छात्रों को आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर दूतावास और वाणिज्य दूतावास उनकी मदद के लिए उपलब्ध हैं। मार्च 2025 में वीजा रद्द होने की घटनाओं के बाद, जयशंकर ने कहा कि वे अमेरिकी अधिकारियों से बात कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो कि भारतीय छात्रों के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो। हालांकि, भारतीय सरकार ने अब तक इस मामले में कोई औपचारिक विरोध दर्ज नहीं किया है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय या फिर भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह साफ नहीं किया है कि अब तक कितने भारतीय छात्रों का वीजा रद्द हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इमीग्रेंट्स मामलों को डील करने वाले कई वकीलों ने कहा है कि उन्हें कुछ भारतीय छात्रों का वीजा रद्द होने की जानकारी मिली है। हालांकि, यह आंकड़ा कितना है, यह अभी तक साफ नहीं हुआ है।

एक्सपर्ट बोले- ईमेल मिलने के बाद भी पढ़ाई जारी रख सकते हैं छात्र

अमेरिका में इमिग्रेशन मामलों के वकील साइरस मेहता ने बताया कि इमीग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट(ICE) ने चुपचाप छात्रों से जुड़े मामले देखने वाले अधिकारियों का काम अपने हाथ में ले लिया है। उन्होंने F-1 छात्र का दर्जा रद्द कर दिया है। इसके बावजूद छात्र अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं और विदेश विभाग के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकते हैं।

भारतीय छात्रों ने अमेरिका में खर्च किए 1.38 लाख करोड़ रुपए

ओपन डोर्स रिपोर्ट 2024 के मुताबिक अमेरिका में 2023-24 में 3 लाख 32 हजार छात्र पढ़ाई कर रहे थे। यह पिछले 2022-23 की तुलना में 23% ज्यादा है। इसमें से ज्यादातर F-1 वीजा वाले हैं, क्योंकि यह विदेशी छात्रों के लिए सबसे आम वीजा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले साल अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 4 लाख तक पहुंच सकती है।

अमेरिका में हर भारतीय छात्र औसतन 30 से 70 लाख रुपए खर्च करता है। शहर, यूनिवर्सिटी के आधार पर खर्च में इतना अंतर आता है। कुछ रिपोर्ट्स में अनुमान के आधार पर बताया गया है कि अमेरिका में भारतीय छात्रों ने 2023-24 में 1.38 लाख करोड़ रुपए खर्च किए।