मतदाता सूची का ड्राफ्ट 6 जनवरी को किया गया जारी

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत 6 जनवरी यानी कि आज पहली ड्राफ्ट सूची जारी हुई है, जिसमें 25 लाख से ज्यादा ऐसे नाम चिह्नित किए गए हैं जो एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, यूपी नवदीप रिनवा ने बताया कि एसआईआर के जरिए पता चला है कि प्रदेश में 12 करोड़ 55 लाख से ज्यादा वोटर हैं।

प्रशासन ने आम जनता को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, हटाने या त्रुटि सुधार को लेकर कोई शिकायत है, तो वे एक महीने के अंदर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

इसके लिए दावे प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 6 फरवरी निर्धारित की गई है, ताकि आगामी चुनावों से पहले एक त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जा सके।

जिन मतदाताओं के वर्ष 2003 की मतदाता सूची से रिकॉर्ड नहीं मिले हैं, उन्हें अब चुनाव आयोग नोटिस जारी करेगा। छह जनवरी से छह फरवरी तक दावे व आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन छह मार्च को होगा।

फाइनल वोटर लिस्ट में 12,55,56,25 वोटर शामिल

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि आज पब्लिश हुई फाइनल वोटर लिस्ट में 12,55,56,25 वोटर शामिल हैं। यह काम सभी 75 जिलों के डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर, 403 विधानसभा क्षेत्रों के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर, 42 असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और 16,62,486 बूथ लेवल ऑफिसर (परिसीमन से पहले) ने वॉलंटियर्स के साथ मिलकर किया। बड़ी संख्या में वोटरों से संपर्क किया गया और साइन किए हुए एन्यूमरेशन फॉर्म सफलतापूर्वक इकट्ठा किए गए। 


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दूषित पानी बना बीमारी की वजह: इंदौर में 110 मरीज भर्ती, 15 की हालत गंभीर

इंदौर के भगीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में दूषित पेयजल से जुड़े उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सोमवार को सामने आए है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दूषित पेयजल कांड में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों ने कहा कि छह मरीजों को उपचार के लिए अस्पतालों में रेफर किया गया है, जबकि 110 मरीजों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इनमें से 15 मरीजों को आईसीयू में भर्ती किया गया है। 

अब तक 7 मौतें- स्वास्थ्य विभाग

इंदौर संभागायुक्त सुदाम खाड़े ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक 7 मौतें दर्ज की गई हैं। इससे एक दिन पहले तक अधिकारी 6 मौतों की पुष्टि कर रहे थे। हालांकि, स्थानीय लोगों ने इस बीमारी से 17 लोगों की मौत का दावा किया है। 

‘कोबो टूल’ के माध्यम से घर-घर सर्वेक्षण

इस बीच, स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति का आकलन करने और प्रभावित क्षेत्र में क्लोरीनयुक्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भगीरथपुरा इलाके में ‘कोबो टूल’ के माध्यम से घर-घर सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण के लिए केंद्र सरकार के क्षेत्रीय स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर चंद्रशेखर गेडाम द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से प्रशिक्षण दिया गया था। 

करीब 200 टीमों को किया गया तैनात

अधिकारियों ने कहा कि यह टूल क्षेत्र की स्थिति का रियल-टाइम आकलन करने में सहायक है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉक्टर माधव प्रसाद हासानी के निर्देश पर क्षेत्र में करीब 200 टीमों को तैनात किया गया। प्रत्येक टीम ने पूर्व-चिह्नित घरों का दौरा कर सर्वेक्षण किया। 

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बांटी किट

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, प्रत्येक परिवार को ओआरएस के 10 पैकेट, जिंक की 30 गोलियां और एक ‘क्लीन वॉटर ड्रॉपर’ वितरित किया गया। निवासियों को 10 लीटर पानी में आठ से 10 बूंदें ‘क्लीन वॉटर’ द्रव डालकर एक घंटे बाद उपयोग करने की सलाह दी गई है।

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अमेरिकी कोर्ट में मादुरो का दावा— मुझे किडनैप किया गया

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सोमवार रात न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में पेश किया गया। उन्होंने कोर्ट में अपने खिलाफ लगे ड्रग्स और हथियार तस्करी से जुड़े सभी आरोपों से इनकार किया।

CNN के मुताबिक, मादुरो ने अदालत में अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया और कहा कि मुझे किडनैप किया गया है। पहली सुनवाई में मादुरो ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा,

मैं अपराधी नहीं हूं। मैं एक सम्मानित व्यक्ति हूं और अब भी अपने देश का राष्ट्रपति हूं।

मादुरो के वकीलों ने अमेरिकी कार्रवाई को सैन्य अपहरण बताया है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।

दूसरी तरफ वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो ने ऐलान किया है कि वे जल्द ही देश वापस लौटेंगीं। मचाडो ने दावा किया कि अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को वेनेजुएला की जनता का समर्थन नहीं है और देश की जनता विपक्ष के साथ है।

मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरेस भी पेश हुईं

मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरेस भी अदालत में पेश हुईं। उनके चेहरे पर चोट के निशान और पट्टी बंधी थी। उन्होंने खुद को वेनेजुएला की प्रथम महिला बताया और सभी आरोपों से इनकार किया।

मादुरो और उनके सहयोगियों पर नशा तस्करों और आतंकी गिरोहों के साथ मिलकर अमेरिका में कोकीन पहुंचाने की साजिश रचने का आरोप है। मादुरो पर मशीनगन रखने का भी आरोप है, जिसके लिए लंबी सजा हो सकती है।

चार्जशीट में मादुरो के बेटे निकोलस मादुरो गुएरा, गृह मंत्री डियोसडाडो काबेलो और कुख्यात गैंग ‘त्रेन दे अरागुआ’ के सरगना हेक्टर गुरेरो फ्लोरेस का नाम भी शामिल है। अमेरिका इस गैंग को विदेशी आतंकी संगठन मानता है।

मादुरो के पैरों में बेड़ियां थीं

सुनवाई के दौरान मादुरो के पैरों में बेड़ियां लगी हुई थीं। वह और उनकी पत्नी एक ही मेज पर बैठे थे और दोनों ने हेडफोन लगाए थे ताकि अदालत में कही जा रही बातों को अपनी भाषा में समझ सकें। जज ने अदालत में दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पढ़कर सुनाया।

इससे पहले मादुरो को लेकर एक हेलिकॉप्टर से अदालत के पास बने हेलिपैड पर उतरा गया था। हेलिकॉप्टर से उतरते ही उन्हें तुरंत एक वैन में बैठाया गया और वहां से सीधे अदालत ले जाया गया।

सुनवाई के दौरान अदालत के बाहर प्रदर्शन

मादुरो के खिलाफ सुनवाई के दौरान अदालत के बाहर सैकड़ों लोग जमा हुए। एक तरफ अमेरिका की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन हुआ, तो दूसरी ओर मादुरो विरोधी लोगों ने उनके खिलाफ नारे लगाए।

सुनवाई खत्म होने के बाद जब मादुरो बाहर निकलने के लिए उठे, तो गैलरी में बैठे एक व्यक्ति ने उनसे कहा कि उन्हें अपने अपराधों की कीमत चुकानी पड़ेगी। मादुरो ने जवाब दिया कि वह अपनी आजादी हासिल करेंगे।

वेनेजुेएला की राजधानी कराकस में फायरिंग

वेनेजुएला की राजधानी कराकस में सोमवार शाम अचानक गोलियों और एंटी-एयरक्राफ्ट फायरिंग की आवाजें सुनाई दीं।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक एक वीडियो में कराकस के आसमान में एंटी-एयरक्राफ्ट गन फायरिंग करते दिखाई दी। एक दूसरी वीडियो में गोलियों की आवाजें भी सुनी जा सकती हैं। बताया जा रहा है कि राजधानी में तैनात अलग-अलग सिक्योरिटी यूनिट्स के बीच भ्रम और गलतफहमी के चलते ऐसा हुआ।

एक स्थानीय निवासी ने नाम न बताने की शर्त पर CNN को बताया कि मिराफ्लोरेस राष्ट्रपति भवन के पास उर्दानेता एवेन्यू के आसपास उन्होंने गोलियों की आवाजें सुनीं।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका इन खबरों पर नजर बनाए हुए है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि इस घटना में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं है।

बाद में यह भी दावा किया गया कि इलाके में उड़ रहे एक ड्रोन पर मिराफ्लोरेस पुलिस और राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा में तैनात जवानों ने फायरिंग की थी, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो गई।

CIA रिपोर्ट- मादुरो समर्थक ही वेनेजुएला की सत्ता संभाले

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के सीक्रेट एनालिसिस में कहा गया है कि अगर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो सत्ता से हटते हैं, तो उनके करीबी और वफादार नेता ही देश में स्थिरता बनाए रखने के लिए सबसे बेहतर में होंगे।

इस एनालिसिस में उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का भी नाम शामिल है।रिपोर्ट में दो सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इसकी जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को दी गई थी। इसे उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सीमित सदस्यों के साथ साझा किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यही वजह थी कि ट्रम्प ने विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो के बजाय डेल्सी रोड्रिगेज का समर्थन करने का फैसला किया।हालांकि व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट की पुष्टि करने से इनकार किया है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प को दुनिया भर की राजनीतिक परिस्थितियों पर नियमित रूप से जानकारी दी जाती है। उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम वेनेजुएला को अमेरिका के हितों के मुताबिक लाने और वहां के लोगों के लिए बेहतर हालात बनाने के लिए व्यावहारिक फैसले ले रही है।

अमेरिकी हमले का समर्थन करने वालों को गिरफ्तार करने के आदेश

वेनेजुएला सरकार ने अमेरिकी हमले के बाद देश में आपातकाल लागू करते हुए पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार ने आदेश दिया है कि अमेरिका के हमले को का समर्थन करने वाले हर व्यक्ति की तुरंत तलाश कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

सोमवार को जारी सरकारी डिक्री के मुताबिक, पुलिस को पूरे देश में ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है। इस डिक्री में साफ लिखा गया है कि अमेरिकी हमले से जुड़े किसी भी तरह के समर्थन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हालांकि यह आपातकालीन आदेश शनिवार से ही लागू था, लेकिन इसे पूरी तरह सार्वजनिक सोमवार को किया गया।

मादुरो को 2 जनवरी को पकड़ा गया

अमेरिकी सैनिकों ने 2 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला कर मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को पकड़ा था। इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया है, जहां उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया था।

उन पर हथियार-ड्रग्स से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया जाना है।। मादुरो ने ड्रग तस्करी से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है।


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ट्रेन यात्रियों के लिए खुशखबरी: 14 जनवरी से टिकट बुकिंग पर मिलेगा डिस्काउंट

रेलवे ने डिजिटल टिकट बुकिंग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। अब रेल यात्रियों को रेलवन एप के जरिए जनरल टिकट लेने पर तीन प्रतिशत की छूट मिलेगी। यह लाभ किसी एक भुगतान माध्यम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और गैर बैंकिंग एप सहित सभी डिजिटल मोड से भुगतान करने पर दिया जाएगा।

यह नई व्यवस्था 14 जनवरी से लागू होगी। रेलवे इस सुविधा को 14 जुलाई तक प्रायोगिक तौर पर लागू कर रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के सफल रहने पर इसे पूरी तरह से लागू किए जाने की योजना है।

अब तक रेलवन एप पर अनारक्षित टिकट बुक करते समय केवल आर-वालेट से भुगतान करने पर ही तीन प्रतिशत कैशबैक की सुविधा मिलती थी। डिजिटल भुगतान को और व्यापक बनाने के उद्देश्य से रेलवे ने सभी डिजिटल पेमेंट मोड पर यह लाभ देने का निर्णय लिया है।

नई व्यवस्था के तहत यात्री रेलवन एप से टिकट लेते समय किसी भी डिजिटल माध्यम से भुगतान करेगा तो उसे यात्रा किराए पर सीधे तीन प्रतिशत की छूट मिलेगी।

रेलवे का मानना है कि इससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों और छोटे रूट पर यात्रा करने वालों को राहत मिलेगी। डिजिटल टिकट बुकिंग से न सिर्फ टिकट खर्च में बचत होगी, बल्कि काउंटर पर भीड़ भी कम होगी।

यह छूट कैशबैक के रूप में नहीं, बल्कि टिकट की कीमत में सीधे कटौती के तौर पर दी जाएगी। हालांकि, यह सुविधा फिलहाल केवल रेलवन एप तक ही सीमित रहेगी और किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर लागू नहीं होगी।

कैसे लें डिस्काउंट का लाभ?

रेलवन एप से टिकट बुक करना आसान है। सबसे पहले मोबाइल में रेलवन एप डाउनलोड करें और आईआरसीटीसी या यूटीएस आईडी से लॉग-इन करें। होम स्क्रीन पर अनारक्षित टिकट या यूटीएस का विकल्प चुनें। इसके बाद यात्रा प्रारंभ स्टेशन और गंतव्य स्टेशन का चयन करें।

टिकट का प्रकार, श्रेणी और यात्रियों की जानकारी भरने के बाद बुक टिकट पर टैप करें। भुगतान के लिए किसी भी डिजिटल पेमेंट विकल्प का उपयोग करें। बुकिंग पूरी होते ही क्यूआर कोड युक्त डिजिटल टिकट जनरेट हो जाएगा।



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ड्राइविंग लाइसेंस में बड़ा बदलाव: सेंसर से होगा टेस्ट, सिफारिश होगी खत्म

ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट में अब किसी की सिफारिश या गड़बड़ी की आशंका नहीं रहेगी। परिवहन विभाग ग्राम मसौरा में डीटीआई (ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर) बना रहा है। यह लगभग बनकर तैयार है। माना जा रहा है कि अगले एक महीने के भीतर यहां ड्राइविंग टेस्ट की नई और पारदर्शी व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए परिवहन विभाग लगातार नए कदम उठा रहा है। स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत करने के लिए ग्राम मसौरा में 2.5 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक डीटीआई सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। प्राइवेट एजेंसी जवाहर ऑटो एन्जिनियरिंग वर्क्स को इसके निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है।

कंपनी ने कार्य की शुरुआत जनवरी 2024 में की थी। एक साल में यह कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। एक माह के भीतर यहां स्थाई ड्राइविंग लाइसंस के टेस्ट की नई व्यवस्था लागू की जाएगी। 15 दिन ट्रायल के बाद आरटीओ के अधिकारी-कर्मचारी सेंसर व कैमरे लगे ट्रैक पर टेस्ट लेंगे।

व्यवस्था लागू होने के बाद लाइसेंस की पात्रता का निर्धारण क्षेत्रीय निरीक्षक (आरआई) के हाथ में नहीं रहेगा। सेंसर और कैमरे की निगरानी में परीक्षण होगा। इसमें पास होने पर ही ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे न सिर्फ परिणाम में सटीकता बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

खास बात यह कि टेस्ट खत्म होने के एक मिनट बाद ही पंजीकृत फोन नम्बर पर पास या फेल का परिणाम मिल जाएगा। अगर पास हुए तो 15 दिन के अन्दर ही लाइसन्स सीधे घर पहुंचेगा।

कैसे होगा टेस्ट?

आवेदक को सेंसर युक्त ट्रैक पर गाड़ी चलानी होगी। अगर गाड़ी किसी पोल से टकराई, लाइन के बाहर गई या ढलान पर पीछे की ओर खिसकी, तो जमीन में लगे सेंसर तुरन्त कण्ट्रोल रूम को सिग्नल भेज देंगे। इसके अलावा ट्रैक पर किस स्पीड में किस गियर पर गाड़ी रही।

चढ़ाई आने पर वाहन किस तरह से चढ़ा, ब्रेक लगाने की जरूरत थी या नहीं, चढ़ाई पर वाहन पीछे की ओर तो नहीं गया, स्पीड में अचानक से ब्रेक तो नहीं लगाना पड़ा। यात्रा संकेतकों के मुताबिक स्पीड क्या रही, ढाल पर वाहन किस तरह से उतारा गया, ब्रेक किस तरह लगाए गए। लेफ्ट व राइट टर्न पर गाड़ी किस तरह से मोड़ी गई, इण्डिकेटर दिया गया या नहीं, आदि की जांच की जाएगी।

ट्रेक पर टेस्ट से क्या रहेगी पादर्शिता

- ड्राइविंग टेस्ट देने वाले की ऑनलाइन रिकॉर्डिंग की जाएगी।

- कोई भी अपना या अपने परिवार के किसी भी सदस्य का ड्राइविंग टेस्ट देखना चाहेगा तो ऑनलाइन देख सकेगा।

- टेस्टिंग के सारे विवरण का प्रिन्टआउट लिया जाएगा, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो सके।

- ट्रैक में जगह-जगह सेन्सर लगेंगे, यदि चालक जरा सी गलती करेगा तो लाल बत्ती जलने लगेगी। गियर या ब्रेक लगाने या क्लच दबाने में चूक हुई तो सेंसर फेल कर देगा।

- ट्रैक पर पहुँचते ही वीडियोग्राफी होने लगेगी।

ऑटोमेटिक होगी व्यवस्था, देने होंगे विभिन्न तरह के सेन्सरयुक्त टेस्ट

ड्राइविंग ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट में बन रहे ट्रैक पर सेन्सर लगाने के बाद ड्राइविंग टेस्ट ऑटोमेटिक हो जाएगा। आवेदकों को ड्राइविंग टेस्ट के दौरान हिल, रोड साइड पार्किंग, ड्राइविंग के दौरान 8 बनाना, एस बनाना, एच बनाना एवं रिवर्स आदि के लिए सेन्सरयुक्त टेस्ट देना पड़ेगा। सभी टेस्ट सफलतापूर्वक पास करने के बाद ही आवेदकों का डीएल जारी किया जाएगा।

फेल होने पर 7 दिन बाद फिर होगा टेस्ट

सेन्सरयुक्त ट्रैक पर यदि फेल होते हैं तो आवेदकों को 7 दिन बाद फिर से मौका दिया जाएगा। इसके लिए उसे फॉर्म भरना होगा। इसमें केवल आवेदकों की ओर से ऑनलाइन टेस्ट की फीस जमा करनी पड़ेगी।


 


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उत्तराखंड की परंपरा: गंगा घाटों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, जुर्माना ₹10

हरिद्वार व ऋषिकेश को पवित्र सनातन नगरी घोषित कर हर की पैड़ी समेत सभी गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने को लेकर सरकार ने मंथन तेज कर दिया है।

हरिद्वार में धार्मिक मर्यादा का पालन कराने की पुरानी नियमावली के अध्ययन में सामने आया है कि यह पाबंदी नयी नहीं है। हरिद्वार नगर पालिका उपविधि (सन् 1953) में यह लिखा है सरकारी कार्य से आने वाले अधिकारियों को छोड़कर अहिंदुओं को हर की पैड़ी क्षेत्र व कुशावर्त घाट में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

नगर पालिका उपविधि में उल्लेख है कि प्रांतीय म्युनिसिपैलिटी एक्ट 1916 की धारा 299(1) के अंतर्गत नियम तोड़ने पर दस रुपये तक का अर्थदंड भी लगाया जाएगा।

यदि बार-बार नियम का उल्लंघन जारी रहा तो पहली बार के बाद प्रतिदिन पांच रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा। नगर पालिका उपविधि के आधार पर ही श्री गंगा सभा समेत अन्य संगठनों की मांग है कि यह व्यवस्था हरिद्वार व ऋषिकेश के सभी गंगा घाटों पर नए सिरे से लागू की जाए।

ब्रिटिश शासन से हुआ समझौता भी आधार

सन 1916 में पं. मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश शासन के मध्य हुए समझौते को भी तीर्थ नगरी की पवित्रता बनाए रखने का आधार बनाया जा रहा है।

यह कहा जा रहा है कि अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भी गैर-हिंदुओं के घाटों पर प्रवेश पाबंदी के नियम तय किए गए थे। अब इन नियमों का पालन कराने के लिए नयी व्यवस्था बनाई जाए।

तब सीमित थे घाट, उन्हीं का उल्लेख

नगर पालिका उपविधि (1953) में हरिद्वार के पांच से सात गंगाघाटों पर अहिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध समेत अन्य बाध्यताओं का प्रविधान किया गया है, अब सभी 105 घाटों में प्रवेश पर इस तरह के प्रतिबंध की मांग की जा रही है।

मांग करने वाले संगठनों का कहना है कि उस समय पांच से सात गंगा घाट ही थे, लेकिन अब घाट बढ़कर 105 हो चुके हैं। इसलिए सभी पर एक समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

मांस विक्रेता को दुकान पर नाम-पता लिखना होगा

हर की पैड़ी, अन्य गंगा घाटों, पार्किंग स्थलों व मेला भूमि में शराब व मांस परोसने की घटनाओं पर भी श्री गंगा सभा ने चिंता जताई है। मांस बिक्री को लेकर भी नगर पालिका उपविधि (1953) में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि ज्वालापुर क्षेत्र के अलावा किसी अन्य स्थान पर मांस बेचने का लाइसेंस मंजूर नहीं होगा। मांस विक्रेता को अपनी दुकान पर पूरा नाम, पता और बेचे जा रहे मांस के प्रकार का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।



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‘अब जाति नहीं, मेरिट जरूरी’: जनरल कैटेगरी के आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला

 सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है, जिसका सीधा असर सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया और जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों पर पड़ता है। कोर्ट ने साफ किया है कि जनरल या ओपन कैटेगरी किसी जाति के लिए नहीं, बल्कि मेरिट के लिए होती है। अगर कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी छूट के जनरल कट-ऑफ से ज्यादा नंबर लाता है, तो उसे जनरल कैटेगरी की सीट पर ही माना जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या साफ किया?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ओपन या जनरल कैटेगरी सभी के लिए खुली होती है, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग का हो। अगर SC, OBC, MBC या EWS का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन करता है तो उसे जनरल लिस्ट में शामिल किया जाएगा, न कि उसकी आरक्षित कैटेगरी में बांधा जाएगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि कई बार भर्ती में देखा गया है कि आरक्षित वर्ग का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा चला जाता है। ऐसी स्थिति में अगर आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जनरल कट-ऑफ पार कर लेता है, तो उसे बाहर करना गलत है।

'जनरल कैटेगरी किसी की निजी नहीं'

कोर्ट ने दोहराया कि जनरल, ओपन या अनरिजर्व्ड शब्द का मतलब है- सभी के लिए खुला। यह किसी खास जाति, वर्ग या लिंग के लिए आरक्षित नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसलोंइंद्रा साहनी केस और सौरव यादव केस का हवाला देते हुए कहा, "ओपन कैटेगरी में आने की एक ही शर्त है- मेरिट। यह नहीं देखा जाएगा कि उम्मीदवार किस वर्ग से है।"

'डबल फायदा' वाला तर्क खारिज

कोर्ट ने यह दलील भी खारिज कर दी कि ऐसे उम्मीदवारों को शामिल करने से उन्हें 'डबल फायदा' मिलेगा। साफ कहा गया कि अगर कोई रियायत नहीं ली गई है, तो यह कोई अतिरिक्त लाभ नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म में अपनी जाति लिख देना अपने आप में आरक्षित सीट पाने का अधिकार नहीं देता, बल्कि सिर्फ यह बताता है कि उम्मीदवार आरक्षित सूची में भी दावेदार हो सकता है।

क्या था मामला?

यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट की भर्ती से जुड़ा था। अगस्त 2022 में हाईकोर्ट ने 2756 पदों (जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II) के लिए भर्ती निकाली थी। लिखित परीक्षा के बाद मई 2023 में जब नतीजे आए तो SC, OBC, MBC और EWS का कट-ऑफ जनरल से ज्यादा निकल गया। कुछ आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने जनरल कट-ऑफ पार किया, लेकिन अपनी कैटेगरी का कट-ऑफ न होने के कारण उन्हें अगले राउंड से बाहर कर दिया गया।

हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

इन उम्मीदवारों ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले जनरल लिस्ट सिर्फ मेरिट के आधार पर बननी चाहिए और जो उसमें आ जाएं उन्हें अलग से आरक्षित लिस्ट में नहीं रखा जा सकता। अब दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी फैसले को सही ठहराते हुए राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की अपील खारिज कर दी।

इस फैसले का मतलब क्या है?

जनरल कैटेगरी किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि मेरिट की कैटेगरी है

आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अगर बिना छूट जनरल कट-ऑफ पार करता है, तो वह जनरल सीट पर ही जाएगा

इससे जनरल उम्मीदवारों के अधिकार नहीं छिने, बल्कि मेरिट का नियम मजबूत हुआ है


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नेपाल में भारतीय सीमा के पास फिर भड़की हिंसा, हाई अलर्ट के बाद बॉर्डर सील

पड़ोसी देश नेपाल एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। भारतीय सीमा से सटे नेपाल के पारसा और धनुषा धाम जिले में हिंसा भड़क उठी है। पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी किया गया है। इसी बीच भारत-नेपाल सीमा भी सील कर दी गई है।

धनुषा जिले में मस्जिद में तोड़-फोड़ के बाद नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा शुरू हो गई है, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी सामने आई हैं।

बिहार से सटी सीमा पर प्रदर्शन

पारसा के बीरगंज में हिंसक प्रदर्शन पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे हैं। पारसा जिले की सीमा बिहार के रक्सौल जिले से लगती है। दक्षिणी नेपाल में सीमा से आवाजाही रोकने के लिए भारतीय सीमा भी सील कर दी गई है।

क्या है पूरा मामला?

नेपाल पुलिस के अनुसार, धनुषा के सखुवा मारान इलाके में कुछ लोगों ने मिलकर मस्जिद में तोड़-फोड़ शुरू कर दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया, जिसके जवाब में हिंदू समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाले बयान सामने आए। सोशल मीडिया से प्रभावित होकर मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने हिंसक प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।

पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

प्रदर्शनकारियों ने धनुषा में टायर जलाकर विरोध जताया। पुलिस का कहना है, जब पुलिस ने हालात पर काबू पाने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारी पुलिस पर भी पत्थरबाजी करने लगे। ऐसे में पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, जिससे स्थिति को नियंत्रण में किया जा सके।


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यूपी के ग्रामीण स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में होंगे नल कनेक्शन, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन की शीर्ष समिति की पांचवीं बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों को तत्परता से नल कनेक्शन से जोड़ने का निर्देश दिया।

उन्होंने भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, जैसे बाढ़ एवं सूखा प्रभावित क्षेत्र, सांसद आदर्श ग्राम एवं अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल क्षेत्रों में योजनाओं के कार्य को वरीयता पर पूर्ण कराने एवं जीवन मिशन के शेष कार्यों को तेजी से संपन्न करने के लिए कहा।

आर्सेनिक एवं बैक्टीरिया की जांच कराने का निर्देश

उन्होंने सभी गांवों में प्रशिक्षित महिलाओं के माध्यम से जल में आर्सेनिक एवं बैक्टीरिया की जांच कराने का निर्देश दिया। इसके लिए उन्हें पर्याप्त मात्रा में किट उपलब्ध कराने के लिए कहा। जल जीवन मिशन के अंतर्गत योजनाओं के निर्माण के लिए एजेंसियों के साथ किए गए अनुबंधों की समयावधि को दिसंबर 2027 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।

बताया गया कि प्रदेश के सभी 75 जनपदों के कुल 97,070 राजस्व ग्रामों को पाइप पेयजल योजनाओं से जोड़ा जा चुका है। सभी जनपदों से इस आशय का प्रमाण-पत्र प्राप्त हो चुका है तथा वर्तमान में पुनः प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है।

समीक्षा बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 2,67,20,930 ग्रामीण परिवारों की तुलना में 30 नवंबर 2025 तक 2,42,74,000 (90.84%) परिवारों को नल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के 1,16,524 विद्यालयों में से 1,16,340 (99.84%) तथा 1,56,304 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 1,55,136 (99.25%) को नल कनेक्शन से कवर किया गया है।

पेयजल गुणवत्ता परीक्षण के लिए एक राज्य स्तरीय एवं 75 जनपदीय प्रयोगशालाएं संचालित हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र के नौ जनपदों में 62 जल शोधन यंत्रों में से 60 पर लैब क्रियाशील हैं। प्रदेशभर में पांच लाख ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। बैठक में अपर मुख्य सचिव नमामि गंगे अनुराग श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक जल निगम (ग्रामीण) डा. राज शेखर सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।


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कड़ाके की ठंड का असर: इन राज्यों में अभी नहीं खुलेंगे स्कूल, विंटर वेकेशन बढ़ी

उत्तर भारत में जारी भीषण शीतलहर को देखते हुए कई राज्य ने स्कूलों की सर्दियों की छुट्टियां बढ़ा दी हैं.  राजस्थान में सरकार ने राज्य के 20 जिलों के स्कूलों की सर्दियों की छुट्टियां आगे बढ़ाई हैं. आदेशों के अनुसार, जयपुर, हनुमानगढ़, सीकर, झालावाड़, श्री गंगानगर, अजमेर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, भीलवाड़ा, टोंक, भरतपुर, नागौर, डीग-कुम्हेर और राजसमंद में कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के स्कूल अलग-अलग समयावधि के लिए बंद रहेंगे.

श्री गंगानगर में नर्सरी से कक्षा 5 तक के स्कूल 12 जनवरी और कोटा में कक्षा 1 से 8 तक के स्कूल 6 जनवरी तक बंद रहेंगे. जयपुर में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को 6 से 10 जनवरी तक छुट्टियां मिलेंगी, जबकि कक्षा 6 से 8 तक के स्कूल 8 जनवरी तक बंद रहेंगे. बूंदी, बारां, दौसा, चित्तौड़गढ़ और अजमेर में भी इसी तरह के आदेश लागू किए गए हैं, जहां स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर स्कूल 7 से 8 जनवरी के बीच खुलेंगे.

संभल में सभी स्कूल 14 जनवरी तक बंद

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पड़ रही भीषण ठंड, घना कोहरा और शीतलहर को देखते हुए कक्षा नर्सरी से कक्षा 8 तक सभी शिक्षण संस्थानों को 14 जनवरी 2026 तक बंद रखने का आदेश जारी किया है. जिलाधिकारी कार्यालय से जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के सचिव द्वारा पहले ही 31 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया गया था. इसके बावजूद जिले में कुछ सहायता प्राप्त, सीबीएसई, आईसीएसई और मदरसा संचालित स्कूलों में नियमित कक्षाएं चल रही थीं, जिसकी जानकारी प्रशासन को मिली थी. आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि नर्सरी से कक्षा 8 तक किसी भी प्रकार की शिक्षण गतिविधियां, ऑनलाइन कक्षाएं या अन्य शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे.

झारखंड में सभी स्कूल 8 जनवरी तक बंद

झारखंड में लगातार बढ़ रही ठंड, शीतलहर और घने कोहरे के कारण सभी स्कूलों को 8 जनवरी तक बंद रखने का आदेश दिया है. आदेश के अनुसार राज्य के सभी सरकारी, गैर-सरकारी, सहायता प्राप्त, गैर-सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित), और निजी स्कूल 6 से 8 जनवरी तक बंद रहेंगे. यह आदेश प्री-नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी विद्यार्थियों पर लागू होगा.


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