मिडिल ईस्ट संकट के बीच बड़ा फैसला: Rajnath Singh की अगुवाई में इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का गठन

मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ऐसे में भारत सरकार ने कदम उठाते हुए एक अहम फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट से पैदा होने वाले विभिन्न मुद्दों पर लगातार नजर रखने और उनका समाधान करने के लिए एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का गठन किया है।

राजनाथ सिंह करेंगे ग्रुप की अध्यक्षता

इस ग्रुप की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। ग्रुप में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अन्य संबंधित मंत्री सदस्य के रूप में शामिल हैं। यह ग्रुप मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों खासकर ऊर्जा सुरक्षा, तेल-गैस आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर नजर रखेगा।

सरकार का यह कदम इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की आधी जरूरत होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। हाल के हमलों के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से टैंकरों की आवाजाही पर असर हुआ है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। भारत में ईंधन की कीमतों में उछाल या पैनिक स्थिति न बने, इसके लिए यह ग्रुप एक्टिव रूप से काम करेगा।

जनता को राहत देने का फैसला 

इसी क्रम में सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर शून्य कर दी है। डीजल निर्यात पर लगने वाले लाभ कर और जेट फ्यूल पर करों में भी संशोधन किया गया है।

केंद्र ने लॉकडाउन लगाए जाने की अफवाहों को भी सिरे से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई मंत्रियों ने साफ कहा कि देश में कोई लॉकडाउन नहीं लगेगा।

जनता से पैनिक न फैलाने की अपील की गई है। राजनाथ सिंह की अगुवाई वाला यह इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए निरंतर निगरानी रखेगा।


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होर्मुज संकट से बढ़ी हीलियम की किल्लत, MRI मशीनों पर गहराया संकट

 पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब चिकित्सा क्षेत्र तक पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी बाधित होने और कतर में एलएनजी उत्पादन घटने से दुनिया में हीलियम की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

यही हीलियम एमआरआई मशीनों, सेमीकंडक्टर निर्माण और कई उच्च तकनीकी उद्योगों के लिए अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संकट लंबा ¨खचा तो कई देशों में एमआरआइ जांच की प्रतीक्षा अवधि बढ़ सकती है।

कतर दुनिया का बड़ा हीलियम उत्पादक है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वहां लगभग 6.3 करोड़ घनमीटर हीलियम का उत्पादन हुआ, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग एक-तिहाई है। कतर से निकलने वाला लगभग पूरा हीलियम समुद्री मार्ग से होर्मुज जलडमरूमध्य होकर दुनिया तक पहुंचता है। यही कारण है कि वहां जहाजों की आवाजाही धीमी पड़ते ही सप्लाई पर सीधा असर पड़ा।

हीलियम एलएनजी उत्पादन का सह-उत्पाद है। कतर के रस लाफान और मेसाईद ऊर्जा परिसरों पर हमलों के बाद कतरएनर्जी ने एलएनजी उत्पादन घटाया।

कंपनी के अनुसार इससे तरल हीलियम निर्यात में 14 प्रतिशत कमी आएगी। एलएनजी उत्पादन में गिरावट का मतलब है हीलियम की उपलब्धता भी कम होना।

हीलियम ऐसा तत्व है जिसे अत्यंत निम्न तापमान तक ठंडा किया जा सकता है। इसी वजह से यह एमआरआई मशीनों के सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट ठंडे रखने में उपयोग होता है। बिना हीलियम के एमआरआई मशीनें स्पष्ट इमेज नहीं दे सकतीं। दुनिया में उपयोग होने वाले हीलियम का लगभग चौथाई हिस्सा केवल चिकित्सा क्षेत्र में जाता है।

हीलियम की कमी से केवल अस्पताल ही नहीं, चिप निर्माण उद्योग भी प्रभावित होगा। सेमीकंडक्टर उत्पादन में हीलियम शुद्ध शीतलक गैस के रूप में काम करता है। दक्षिण कोरिया, जापान, ताइवान और चीन जैसे देश कतर से आने वाली आपूर्ति पर काफी निर्भर हैं।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार यदि आपूर्ति बाधा 30 दिन चली तो कीमतें 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। यदि संकट 60 से 90 दिन तक जारी रहा तो वृद्धि 25 से 50 प्रतिशत तक जा सकती है। जिन खरीदारों के पास दीर्घकालिक अनुबंध नहीं हैं, उन पर सबसे अधिक दबाव पड़ेगा।

2006 के बाद पांचवीं बार हीलियम संकट से जूझ रही दुनिया

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हीलियम उत्पादक है, लेकिन अतिरिक्त आपूर्ति तुरंत बढ़ाना आसान नहीं है। कुछ कंपनियां यूरोप और उत्तर अमेरिका से आपूर्ति पुन‌र्व्यवस्थित कर रही हैं। हालांकि फिलहाल अधिकांश एमआरआई मशीनें तरल हीलियम पर ही निर्भर हैं।

2006 के बाद यह पांचवीं बार है जब दुनिया हीलियम संकट का सामना कर रही है। कुछ देशों ने हीलियम-फ्री या हीलियम-रिसाइ¨क्लग एमआरआइ तकनीक विकसित की है, लेकिन उसका व्यापक उपयोग अभी नहीं हो पाया है।


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Uttar Pradesh के स्कूलों में 1 अप्रैल से नया नियम लागू: स्टूडेंट्स के मोबाइल लाने पर पूरी तरह रोक

अप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र में माध्यमिक विद्यालयों की प्रार्थना सभा में छात्र-छात्राएं अखबारों की सुर्खियां पढ़ेंगे, कठिन शब्दों का अर्थ समझेंगे और भाषा पर पकड़ मजबूत करेंगे। इसके साथ ही विद्यालयों में मोबाइल लाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की पढ़ने की आदत विकसित करने और बढ़ते स्क्रीन टाइम पर लगाम लगाने के लिए समाचार पढ़ने को अब शैक्षणिक कैलेंडर का हिस्सा बना दिया गया है। इससे पहले दिसंबर में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए समाचार पढ़ना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था।

सत्र की शुरुआत में विद्यार्थी प्रार्थना सभा में प्रमुख समाचार पढ़ेंगे। शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि वे समाचारों में आए कठिन शब्दों का सही उच्चारण कराएं और उनका अर्थ व वाक्य प्रयोग भी समझाएं। इससे विद्यार्थियों की भाषा दक्षता और सामान्य ज्ञान दोनों मजबूत होंगे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और मंडलीय शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस व्यवस्था को लागू कराया जाए।

यह पहल पहले जारी आदेशों को प्रभावी रूप से जमीन पर उतारने के लिए की जा रही है। वहीं, विद्यालयों में छात्रों के मोबाइल लाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। परिषद का मानना है कि किशोरावस्था में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास पर प्रतिकूल असर डालता है।

आंखों की रोशनी कमजोर होना, पढ़ाई में ध्यान की कमी और ऑनलाइन गेम्स की लत जैसी समस्याओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। एक ओर जहां स्क्रीन टाइम कम करने पर जोर है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल साक्षरता को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सभी पंजीकृत विद्यार्थियों के ईमेल आईडी बनवाए जाएंगे और उन्हें इसके व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।

स्मार्ट क्लास, सूचना प्रौद्योगिकी और ऑनलाइन शैक्षणिक प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। छात्रों को खान एकेडमी, द टीचर एप, मनोदर्पण पोर्टल और करियर एडवाइजर एप जैसे प्लेटफार्म की जानकारी देकर उनके उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के जरिये परिषद पारंपरिक पढ़ाई और डिजिटल शिक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ किताब और अखबार से जुड़ाव बढ़ेगा, तो दूसरी ओर तकनीक का सही और उपयोगी इस्तेमाल भी सिखाया जाएगा।


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बुकिंग के 48 घंटे के भीतर हवाई टिकट रद्द कराने पर नहीं लगेगा कोई चार्ज

Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने हवाई यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए नए नियम लागू किए हैं। अब यदि कोई यात्री टिकट बुकिंग के 48 घंटे के भीतर उसे रद्द करता है या उसमें बदलाव करता है, तो एयरलाइंस कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेंगी। इससे पहले टिकट कैंसिल कराने पर यात्रियों को भारी चार्ज देना पड़ता था।

नए नियमों के तहत एयरलाइंस को रिफंड प्रक्रिया पर भी पारदर्शिता रखनी होगी। क्रेडिट कार्ड से भुगतान किए गए टिकट का रिफंड 7 दिनों के भीतर जारी करना होगा, जबकि नकद में खरीदे गए टिकट का रिफंड उसी स्थान पर तुरंत देना होगा। वहीं, ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल से बुकिंग होने पर भी रिफंड की जिम्मेदारी एयरलाइंस की होगी और इसे 14 कार्यदिवसों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। खास बात यह है कि रिफंड प्रोसेसिंग पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और टैक्स व अन्य शुल्क जैसे UDF, ADF और PSF भी वापस किए जाएंगे।

यह नियम प्रमोशनल ऑफर या नॉन-रिफंडेबल टिकटों पर भी लागू होगा। साथ ही, एयरलाइंस यात्रियों को क्रेडिट शेल लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगी—यह पूरी तरह यात्री की पसंद पर निर्भर होगा। टिकट बुकिंग के समय कैंसलेशन चार्ज को स्पष्ट रूप से दिखाना भी अनिवार्य किया गया है और किसी भी स्थिति में रद्दीकरण शुल्क मूल किराये और फ्यूल सरचार्ज से अधिक नहीं हो सकता।

इसके अलावा, यदि टिकट पर नाम में गलती है तो 24 घंटे के भीतर जानकारी देने पर एयरलाइंस बिना अतिरिक्त शुल्क के सुधार करेंगी। मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में, उचित प्रमाण के आधार पर यात्री को रिफंड या क्रेडिट शेल का विकल्प दिया जाएगा।

हालांकि, यह सुविधा तभी लागू होगी जब घरेलू उड़ान की यात्रा तारीख बुकिंग के कम से कम 7 दिन बाद और अंतरराष्ट्रीय उड़ान की तारीख 15 दिन बाद की हो। 48 घंटे की समय सीमा के बाद टिकट रद्द या संशोधित करने पर एयरलाइंस द्वारा तय शुल्क देना होगा।

इसके साथ ही सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि घरेलू उड़ानों में 60% तक सीटों के लिए अतिरिक्त शुल्क न लिया जाए और एक ही PNR पर यात्रा करने वाले यात्रियों को साथ बैठाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


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Ranbir Kapoor की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर नया अपडेट

Ramayana को लेकर नया अपडेट सामने आया है, जो 2026 की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल मानी जा रही है। फिल्म में भगवान राम की अगली झलक 2 अप्रैल, Hanuman Jayanti के मौके पर दिखाई जाएगी। इस खास अवसर पर मेकर्स ग्लोबल स्तर पर फैंस के साथ ग्रैंड सेलिब्रेशन भी करेंगे।

Ram Navami के दिन फिल्म के को-प्रोड्यूसर Namit Malhotra ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस ग्रैंड रिवील की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिल्म को पूरी जिम्मेदारी, श्रद्धा और समर्पण के साथ तैयार किया जा रहा है, ताकि रामायण की कहानी को उसकी असली भावना और भव्यता के साथ दर्शकों तक पहुंचाया जा सके।

इससे पहले फिल्म का फर्स्ट लुक भारत सहित दुनियाभर के कई बड़े लोकेशंस पर दिखाया गया था, जिसमें Times Square भी शामिल है। यह फिल्म दो भागों में रिलीज होगी और बड़े पैमाने पर तैयार की जा रही है।

फिल्म का निर्देशन Nitesh Tiwari कर रहे हैं। इसमें Ranbir Kapoor भगवान राम, Sai Pallavi सीता, Yash रावण, Sunny Deol हनुमान और Ravi Dubey लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे।

फिल्म को Prime Focus Studios, DNEG और Monster Mind Creations मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं। यह IMAX फॉर्मेट में रिलीज होगी, जिसमें पहला भाग दिवाली 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में आएगा।


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धुरंधर 2 बनी 8वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म

Dhurandhar 2: The Revenge ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 1,067 करोड़ रुपए के वर्ल्डवाइड कलेक्शन के साथ 8वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म का स्थान हासिल कर लिया है। Ranveer Singh की इस फिल्म ने Pathaan (₹1,055 करोड़) और Kalki 2898 AD (₹1,042 करोड़) को पीछे छोड़ दिया है।

ट्रेड वेबसाइट Sacnilk के अनुसार, रिलीज के आठवें दिन (गुरुवार) फिल्म ने भारत में ₹49.70 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म का भारत में कुल नेट कलेक्शन ₹674.17 करोड़ और ग्रॉस कलेक्शन ₹805.32 करोड़ हो गया है। वहीं, ओवरसीज मार्केट में फिल्म ने ₹261.92 करोड़ की कमाई की, जिससे इसका कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹1,067.24 करोड़ तक पहुंच गया। आठवें दिन हिंदी वर्जन ने सबसे ज्यादा ₹46 करोड़ का योगदान दिया, जबकि तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम वर्जन से क्रमशः ₹2.50 करोड़, ₹90 लाख, ₹20 लाख और ₹10 लाख की कमाई हुई।

फिल्म के पहले पार्ट Dhurandhar को भी जबरदस्त सफलता मिली थी। इसने दुनियाभर में करीब ₹1,307 करोड़ का कलेक्शन किया था। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन ₹1,005.85 करोड़ और नेट कलेक्शन लगभग ₹840 करोड़ रहा, जबकि ओवरसीज में फिल्म ने करीब ₹299.5 करोड़ कमाए। खास बात यह रही कि अमेरिका और कनाडा में ₹193.06 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर फिल्म ने Baahubali 2: The Conclusion का रिकॉर्ड भी तोड़ा। खाड़ी देशों में रिलीज न होने के बावजूद फिल्म को शानदार रिस्पॉन्स मिला और यह भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ‘A’ रेटेड फिल्म भी बनी।


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ट्रांसजेंडर वुमन अब महिलाओं की कैटेगरी में ओलिंपिक में हिस्सा नहीं ले सकेंगी

International Olympic Committee (IOC) ने 2028 Los Angeles Olympics 2028 से ट्रांसजेंडर महिलाओं की महिला कैटेगरी में भागीदारी को लेकर नई नीति लागू करने की घोषणा की है। इस नीति के अनुसार, अब केवल जन्म से महिला (बायोलॉजिकल फीमेल) एथलीट्स को ही महिला वर्ग में प्रतिस्पर्धा की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए SRY जीन स्क्रीनिंग जैसे टेस्ट के जरिए लिंग की पुष्टि की जाएगी, जो थूक, गाल के स्वैब या ब्लड सैंपल से किया जा सकता है। वहीं, जो एथलीट जन्म के समय महिला थे लेकिन बाद में खुद को ट्रांसजेंडर पुरुष के रूप में पहचानते हैं, वे महिला कैटेगरी में खेलना जारी रख सकते हैं।

अब तक IOC ट्रांसजेंडर महिलाओं को टेस्टोस्टेरोन लेवल कम होने जैसी शर्तों के आधार पर या संबंधित खेल संघों के फैसले पर खेलने की अनुमति देता था। लेकिन नई नीति के तहत सभी खेलों के लिए एक समान नियम लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है, ताकि अलग-अलग संगठनों के अलग नियमों को रोका जा सके। IOC का कहना है कि यह बदलाव खेलों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।

IOC की अध्यक्ष Kirsty Coventry ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि ओलिंपिक जैसे बड़े मंच पर जीत और हार के बीच बहुत मामूली अंतर होता है, इसलिए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना जरूरी है। संस्था ने वैज्ञानिक रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि जन्म से पुरुष होने पर ताकत, सहनशक्ति और पावर जैसे पहलुओं में शारीरिक बढ़त मिलती है, जो हार्मोनल बदलावों के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं होती।

यह मुद्दा Paris Olympics 2024 के दौरान भी चर्चा में रहा था, जब महिला बॉक्सिंग इवेंट में कुछ खिलाड़ियों की पात्रता पर सवाल उठे थे। Imane Khelif और Lin Yu-ting के भाग लेने को लेकर विवाद हुआ था। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका की दिग्गज धाविका Caster Semenya ने भी इस तरह की नीतियों की आलोचना करते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया है।

यह नियम केवल प्रोफेशनल खेलों पर लागू होगा और ग्रासरूट स्तर के खेलों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, इस फैसले को लेकर दुनिया भर में बहस तेज होने की संभावना है, जहां एक ओर इसे निष्पक्षता के लिए जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार समूह और एक्टिविस्ट्स इसकी आलोचना भी कर सकते हैं।


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बारिश-ओले और आंधी का अलर्ट: यूपी-एमपी और राजस्थान समेत 16 राज्यों में बरसेंगे बादल

मार्च के अंतिम दिनों में उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम ने अचानक करवट ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अगले तीन दिनों तक बारिश, आंधी और कहीं-कहीं ओले गिरने की संभावना है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने इन राज्यों में यलो अलर्ट जारी किया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

28 मार्च को अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश हो सकती है। बिहार में कुछ जगहों पर आंधी-तूफान के साथ ओले गिरने का खतरा है।

29 मार्च को हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब और दिल्ली में 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज आंधी चलने की आशंका है। बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी बिजली चमकने के साथ आंधी-तूफान की संभावना जताई गई है।

बिहार में बारिश के साथ ओले गिरने का अलर्ट

बिहार में आज से मौसम का मिजाज काफी बदलने वाला है। मौसम विभाग पटना ने  12 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जहां हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर जैसे इलाकों में तो ओले गिर सकते है।

राजस्थान में ओले गिरने का खतरा

राजस्थान में आज यानी 27 मार्च से 30 मार्च तक आंधी-बारिश के साथ ओलावृष्टि का अलर्ट है। बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ समेत आठ जिलों में खासतौर पर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग ने किसानों से अपील की है कि खेतों में पड़ी कटी या पकी फसलों को तुरंत सुरक्षित जगह पहुंचा दें, क्योंकि ओले फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक भी रहने की उम्मीद है।

मध्य प्रदेश में बारिश से तापमान में गिरावट

मध्य प्रदेश में अगले 24 घंटों के अंदर ग्वालियर सहित सात जिलों में आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है। यह मार्च में तीसरी बारिश होगी।

गुरुवार को प्रदेश का अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि नर्मदापुरम में 41 डिग्री दर्ज किया गया। बारिश से गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन आंधी से फसलों और बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश में यलो अलर्ट जारी

उत्तर प्रदेश में शुक्रवार सुबह लखनऊ, मेरठ समेत दस जिलों में बादल छाए रहे और 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। मौसम विभाग ने पूरे प्रदेश के 38 जिलों में हल्की बारिश, गरज-चमक और बूंदाबांदी का यलो अलर्ट जारी किया है। किसान और आम लोग सतर्क रहें, क्योंकि आंधी से नुकसान हो सकता है।

उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना है। वहीं जम्मू-कश्मीर के पुंछ में गुरुवार शाम आए एवलांच में 20 से ज्यादा गाड़ियां फंस गई थीं। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीम ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी लोगों और वाहनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।


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सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती कर दी है। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई है। एक्साइज ड्यूटी घटाकर पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखा गया है।

यूएस-इजराइल के साथ ईरान की जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे तेल कंपनियों को 30 रुपए प्रति लीटर तक घाटा हो रहा था। घाटा कवर करने के लिए तेल कंपनियां दाम बढ़ा सकती थीं।

कटौती का असर 8 सवालों के जवाब से समझें…

सवाल 1: सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कितनी कटौती की है?

जवाब: सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कमी की है, जिससे अब यह घटकर ₹3 प्रति लीटर रह गई है। वहीं, डीजल पर भी ₹10 की कटौती की गई है, जिससे अब डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी जीरो हो गई है।

सवाल 2: क्या कल से पेट्रोल-डीजल के दाम ₹10 कम हो जाएंगे?

जवाब: नहीं, इसकी संभावना कम है। भले ही सरकार ने टैक्स कम किया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के रिटेल रेट सीधे सरकार तय नहीं करती। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमत और अपने मुनाफे के आधार पर रेट तय करती हैं। कंपनियां इस छूट का इस्तेमाल अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए करेंगी।

सवाल 3: तेल कंपनियां दाम क्यों नहीं घटाना चाहतीं?

जवाब: पेट्रोलिमय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक तेल कंपनियां फिलहाल पेट्रोल पर 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर का घाटा सह रही हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण तेल कंपनियां महंगा क्रूड खरीद रही थीं, लेकिन उन्होंने घरेलू बाजार में दाम नहीं बढ़ाए थे। कंपनियां अब इस टैक्स कटौती का इस्तेमाल मार्जिन को स्थिर रखने में करेंगी।

तेल कंपनियों के मुनाफे का गणित काफी पेचीदा होता है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की विनिमय दर और सरकार के टैक्स ढांचे पर निर्भर करता है।

इन कंपनियों के मुनाफे को समझने के लिए ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन देखा जाता है। यह वह राशि है जो तेल कंपनियां सारा खर्च (कच्चा तेल + रिफाइनिंग + ट्रांसपोर्ट) निकालने के बाद बचाती हैं।

टोटल प्राइस = कॉस्ट प्राइस + रिफाइनरी मार्जिन + सेंट्रल टैक्स + स्टेट टैक्स + डीलर कमीशन + कंपनी प्रॉफिट

क्रूड की कीमत बढ़ने से नुकसान में बदला कंपनियों का मुनाफा

आमतौर पर एक थंब-रूल है। कच्चा तेल 1 डॉलर प्रति बैरल महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल/डीजल की लागत लगभग 50 से 60 पैसे प्रति लीटर बढ़ जाती है। अगर तेल 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर हो गया यानी 30 डॉलर की बढ़ोतरी, तो लागत करीब ₹15 से ₹18 प्रति लीटर बढ़ जाएगी।

क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब कच्चे तेल की कीमत 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी तो वित्त वर्ष 2026 में तेल कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल पर करीब 8 रुपए का मार्जिन मिलने की उम्मीद थी। खर्च निकालने के बाद यह बचत करीब 3 रुपए रह जाती।

अब जब कीमतें कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं तो जो ₹8 का मुनाफा कंपनियां कमा रही थीं, वह अब खत्म हो सकता है या ये फायदा नुकसान में बदल सकता है।

इंडियन ऑयल को पहले 6 महीने में ₹13,299 करोड़ का फायदा हुआ था

इंडियन ऑयल को H1 25-26 यानी, अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 के बीच ₹13,299 करोड़ का मुनाफा हुआ था। पिछले साल (H1 24-25) कंपनी का मुनाफा सिर्फ ₹2,823 करोड़ था। यानी मुनाफे लगभग 370% बढ़ गया था। रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन बढ़ने की वजह से ये मुनाफा हुआ था।

यानी, इंडियन ऑयल ने साल के पहले 6 महीनों में जो "बंपर कमाई" की है, वह अब अगले 6 महीनों में सरकारी मदद के बाद भी महंगे कच्चे तेल की वजह से धीरे-धीरे कम हो सकती है।

सवाल 4. प्राइवेट कंपनियां क्या रुख अपना रही हैं?

जवाब: प्राइवेट प्लेयर पहले ही दबाव में हैं। सरकार के इस फैसले से ठीक एक दिन पहले ही नायरा एनर्जी ने पेट्रोल ₹5 प्रति लीटर और डीजल ₹3 महंगा कर दिया था। अब भोपाल में इस कंपनी का पेट्रोल 111.72 रुपए और डीजल 94.88 रुपए पर पहुंच गया है।। इससे साफ है कि प्राइवेट प्लेयर्स के लिए मौजूदा रेट पर तेल बेचना मुश्किल हो रहा है।

सवाल 5: क्या भविष्य में दाम और बढ़ सकते हैं?

जवाब: यह पूरी तरह से ग्लोबल मार्केट पर निर्भर है। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा है। अगर वेस्ट एशिया में तनाव और बढ़ता है और सप्लाई चेन बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती केवल एक 'कुशन' का काम करेगी ताकि कीमतें बहुत ज्यादा न बढ़ें।

सवाल 6: इस कटौती से सरकार को क्या नुकसान होगा?

जवाब: एक्साइज ड्यूटी कम करने से केंद्र सरकार के राजस्व में कमी आएगी। पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आए 'शॉक' का पूरा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े और उन्हें महंगाई से बचाया जा सके।

सवाल: 7 क्या राज्य सरकारें भी अब वैट (VAT) कम करेंगी?

जवाब: आमतौर पर केंद्र द्वारा ड्यूटी घटाने के बाद राज्यों पर भी वैट कम करने का दबाव बढ़ता है। अगर राज्य सरकारें अपने हिस्से का टैक्स (VAT) कम करती हैं, तभी उपभोक्ताओं को पंप पर ₹2 से ₹5 तक की वास्तविक राहत मिल सकती है।

सवाल 8: क्या कच्चा तेल महंगा होने पर कंपनियां दाम बढ़ा देती हैं, लेकिन सस्ता होने पर नहीं घटातीं?

जवाब: यह बात काफी हद तक सही है और इसके पीछे मुख्य रूप से 'अंडर-रिकवरी' का गणित काम करता है। असल में, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल अचानक महंगा होता है, तो सरकार के दबाव या चुनाव जैसे कारणों से कंपनियां तुरंत कीमतें नहीं बढ़ातीं और घाटा सहती हैं।

बाद में जब कच्चा तेल सस्ता होता है, तो कंपनियां दाम घटाने के बजाय उस पुराने घाटे की भरपाई करती हैं। इसके अलावा, अक्सर कच्चे तेल की कीमतें गिरने पर केंद्र सरकार अपनी एक्साइज ड्यूटी या राज्य सरकारें अपना वैट बढ़ा देती हैं, जिससे गिरावट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचने के बजाय सरकारी खजाने में चला जाता है। साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी और पुराने महंगे स्टॉक की लागत भी कंपनियों को कीमतें कम करने से रोकती है।

वित्त मंत्री बोलीं- एक्साइज ड्यूटी कटौती उपभोक्ताओं को राहत देने का कदम

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों से उपभोक्ताओं को बचाना है।

सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद आम जनता पर इसका बोझ न पड़े।

मोदी ईरान जंग पर आज मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 27 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे। इसमें ईरान जंग के बाद बिगड़े हालात पर चर्चा संभव है। चुनावी राज्यों के सीएम इसमें शामिल नहीं होंगे।

मोदी ने 24 मार्च को राज्यसभा में कहा था कि ईरान जंग जारी रही तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। आने वाला समय कोरोनाकाल जैसी परीक्षा वाला होगा। केंद्र और राज्य को मिलकर काम करना होगा।

वहीं, सरकार ने आज देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी की खबरों को खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि दुनिया में कुछ भी हो जाए, भारत के पास 60 दिन का पेट्रोल, डीजल है।

नॉलेज बॉक्स: इनडायरेक्ट टैक्स है एक्साइज ड्यूटी

यह एक तरह का इनडायरेक्ट टैक्स है, जो देश के भीतर मैन्युफैक्चर होने वाले सामान पर लगाया जाता है। पेट्रोल-डीजल के मामले में, जब कच्चा तेल रिफाइनरी से साफ होकर बाहर निकलता है, तब केंद्र सरकार उस पर प्रति लीटर के हिसाब से फिक्स्ड एक्साइज ड्यूटी वसूलती है।

चूंकि एक्साइज ड्यूटी फिक्स होती है, इसलिए सरकार इसमें कटौती करके आम जनता को राहत दे सकती है या इसे बढ़ाकर अपना रेवेन्यू बढ़ाती है। मौजूदा कटौती से सरकार का राजस्व कम होगा, लेकिन तेल कंपनियों को घाटा कम करने में मदद मिलेगी।


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Board of Control for Cricket in India ने वेस्टइंडीज, श्रीलंका, जिम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया सीरीज का किया ऐलान

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने गुरुवार को टीम इंडिया के 2026-27 के घरेलू अंतरराष्ट्रीय सीजन का शेड्यूल जारी कर दिया है। आगामी घरेलू सीजन में रोमांचक और एक्शन से भरपूर मुकाबले देखने को मिलेंगे, जिसमें चार मेहमान टीमें - वेस्टइंडीज, श्रीलंका, जिम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया मल्‍टी फॉर्मेट क्रिकेट में हिस्सा लेंगी। इस सीजन में 17 शहरों में 22 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जाएंगे।

सीजन की शुरुआत वेस्टइंडीज के भारत दौरे से होगी। यह 27 सितंबर, 2026 से शुरू होगा। इस दौरे में तीन वनडे मैचों की सीरीज और उसके बाद पांच टी20 मैचों की सीरीज होगी। वनडे मैच त्रिवेंद्रम, गुवाहाटी और न्यू चंडीगढ़ में खेले जाएंगे, जिसके बाद टी20 मैचों की सीरीज शुरू होगी, जो लखनऊ, रांची, इंदौर, हैदराबाद और बेंगलुरु में आयोजित की जाएगी।

वेस्‍टइंडीज का भारत दौरा

पहला वनडे: 27 सितंबर, त्रिवेंद्रम

दूसरा वनडे: 30 सितंबर, गुवाहाटी

तीसरा वनडे: 3 अक्‍टूबर, न्‍यू चंडीगढ़

पहला टी20: 6 अक्‍टूबर, लखनऊ

दूसरा टी20: 9 अक्‍टूबर, रांची

तीसरा टी20: 11 अक्‍टूबर, इंदौर

चौथा टी20: 14 अक्‍टूबर, हैदराबाद

पांचवां टी20: 17 अक्‍टूबर, बेंगलुरु

इसके बाद भारत दिसंबर 2026 में श्रीलंका की मेजबानी करेगा। इस दौरान तीन वनडे और तीन टी20 मैचों की सीरीज खेली जाएगी। वनडे मैच दिल्ली, बेंगलुरु और अहमदाबाद में खेले जाएंगे, जबकि टी20 मैच राजकोट, कटक और पुणे में होंगे।

श्रीलंका का भारत दौरा

पहला वनडे: 13 दिसंबर, दिल्‍ली

दूसरा वनडे: 16 दिसंबर, बेंगलुरु

तीसरा वनडे: 19 दिसंबर, अहमदाबाद

पहला टी20: 22 दिसंबर, राजकोट

दूसरा टी20: 24 दिसंबर, कटक

तीसरा टी20: 27 दिसंबर, पुणे

नए साल की शुरुआत में जिम्बाब्वे जनवरी 2027 में भारत का दौरा करेगा। इस दौरान तीन वनडे मैचों की सीरीज खेली जाएगी। ये मैच कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में होंगे।

सीजन का समापन बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के साथ होगा, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी। यह सीरीज 21 जनवरी, 2027 से नागपुर में शुरू होगी। इसके बाद यह प्रतियोगिता चेन्नई, गुवाहाटी, रांची और अहमदाबाद में होगी।


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