असम में रिकॉर्ड मतदान! इतिहास में सबसे ज्यादा 85.91% वोटिंग

देश के दो राज्यों असम, केरलम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में गुरुवार को विधानसभा चुनाव के लिए बंपर वोटिंग हुई। 1950 में असम के बनने के बाद से राज्य में सबसे ज्यादा 85.91% वोटिंग हुई। इससे पहले 2016 में 84.7% मतदान हुआ था।

वहीं, पुडुचेरी में आजादी के बाद सबसे ज्यादा 89.87% मतदान हुआ। इससे पहले का रिकॉर्ड 85% (2006, 2011 और 2016 विधानसभा चुनाव) का था।

केरलम में 1987 के बाद यानी पिछले 39 सालों में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई, यहां 78.27% वोट डाले गए। 1987 में रिकॉर्ड 80.54% मतदान हुआ था।

वोटिंग परसेंट के आंकड़े 10 अप्रैल की सुबह 8.00 बजे तक के हैं। चुनाव आयोग का फाइनल आंकड़े जारी करना बाकी है।

असम के 26 से ज्यादा जिलों में 80% से ऊपर वोटिंग

असम में 126 सीटों पर 41 पार्टियों के 722 उम्मीदवारों का भाग्य का फैसला होगा। 35 जिलों में से 26 से ज्यादा जिलों में 80% से ऊपर वोटिंग हुई। सबसे ज्यादा 95.56% मतदान साउथ सलमारा मनकचर जिले में हुआ। सबसे कम 75.25% वोटिंग वेस्ट कार्बी आंगलॉन्ग में हुई।

सीएम हिमंता बोले- असमिया समाज वोटर की वजह से बढ़ा मतदान

असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, बांग्लादेशी मूल के मुस्लिम समाज का 95 से 96% वोट प्रतिशत हुआ करता था। बाकी असमिया समाज में 75-76% तक वोट प्रतिशत होता था। इस बार दोनों समाज के बीच प्रतियोगिता रही। पारंपरिक तौर पर जो समाज सक्रिय मतदान करता है, उन्होंने ज्यादा मतदान किया। जिस समाज में पारंपरिक तौर पर कम मतदान होता है, उसने भी बढ़-चढ़कर मतदान किया है।

केरलम के कोझिकोड में सबसे ज्यादा 81.32% वोटिंग

केरलम में 140 विधानसभा सीटों पर 2.6 करोड़ मतदाता हैं। इस बार 883 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। राज्य के 14 जिले में से दो जिलों में 80% से ऊपर मतदान हुआ। 10 जिलों में 70% से ज्यादा वोटिंग हुई है। सबसे ज्यादा वोटिंग 81.32% वोटिंग कोझिकोड में हुई। सबसे कम 70.76% मतदान पथनमथिट्टा में हुआ। केरलम में 2.71 करोड़ वोटर 890 उम्मीदवारों में से अपना नेता चुन रहे हैं।

भाजपा ने कहा- महिला वोटर्स की वजह से बढ़ा मतदान

CPI(M) नेता सीएन मोहनन ने कहा कि जिन लोगों की मौत हो चुकी है या जो कहीं और चले गए हैं। उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इसी वजह से वोटिंग परसेंटेज बढ़ा।

BJP नेता केएस शैजू ने कहा, हमारे एनालिसिस से पता चलता है कि इस बार ज्यादा महिला मतदाताओं ने वोट डाला।

ग्राउंड पर इसकी 3 वजह नजर आईं

पहली: सीएम पिनाराई विजयन के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी। विजयन 10 साल से सीएम हैं। इस बार सीपीआईएम के खिलाफ मुस्लिम वोटर भी एकजुट होकर वोटिंग के लिए बाहर निकले हैं।

दूसरी: सीपीआईएम में विजयन के बाद सेकेंड लाइन लीडरशिप की कमी है। कई नेता भाजपा-कांग्रेस जॉइन कर चुके हैं। कैडर नाराज दिखा।

तीसरी: सबरीमाला जैसे धार्मिक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के पक्ष को लेकर भी लोगों में काफी नाराजगी है।

इसके अलावा सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी का मुद्दा भी बड़ा मसला रहा। खासकर महिलाएं नाराज हैं, जो सीपीएम की कोर वोटर मानी जाती रही हैं। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस ने सरकार को घेरकर उनके हिंदू कैडर वोट बैंक में सेंध लगाई है।

पुडुचेरी में रिकॉर्ड करीब 89.87% वोटिंग

पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों में कुल 10 लाख मतदाता हैं। यहां 89.87% वोटिंग हुई। केंद्र शासित प्रदेश में कुल दो जिले हैं। सबसे ज्यादा 90.47% मतदान पुडुचेरी जिले में हुआ। वहीं कराईकल में 86.77% वोटिंग हुई। पुडुचेरी के इतिहास में पहली बार इतनी वोटिंग हुई है।


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भारत में इस बार धीमी रहेगी मानसून की रफ्तार

भारत में इस साल (2026) मानसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। स्काईमेट वेदर ने साल 2026 के लिए भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून का अपना पूर्वानुमान जारी किया है, जिसके तहत इस बार जून से सितंबर के दौरान सामान्य से 6 प्रतिशत कम बारिश होने की संभावना है।

शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, मानसून औसत का केवल 94% रह सकता है। कम बारिश का असर न सिर्फ खेती पर, बल्कि आपकी रसोई के बजट और देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। आइए जानते हैं इस साल क्यों कम होगी बरसात और इसका असर किस पर पड़ेगा।

स्काईमेट वेदर 2026 के मानसून पूर्वानुमान के मुताबिक, जून से सितंबर इन 4 महीनों में सामान्य औसत (LPA) 868.6 मिलीमीटर होता है, जबकि इस बार लगभग 817 मिलीमीटर बारिश होने का अनुमान है।

क्या होगा बारिश न होने का असर?

बारिश कम होने से किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है, इससे फसल उत्पादन गिर सकता है और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा कम बारिश होने से कुछ इलाकों में पानी की कमी और बजली की डिमांड बढ़ सकती है। मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से हीटवेव का असर तेज हो सकता है।

कब कितनी होगी बारिश?

जून- मानसून की शुरुआत अच्छी रहने की उम्मीद है। जून में LPA की 101% बारिश का अनुमान है, जो सामान्य है।

जुलाई- इस महीने से मानसून में कुछ कमी आ सकती है। जुलाई में 95% बारिश की संभावना जताई गई है।

अगस्त- अगस्त के दौरान बारिश और घटकर 92% रह सकती है।

सितंबर- सीजन के आखिरी महीने में मानसून सबसे कमजोर रहने की आशंका है, जहां केवल 89% बारिश का अनुमान है।

30 प्रतिशत तक सूखे की आशंका

स्काईमेट के अनुसार पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे उत्तर-पश्चिमी राज्यों में सूखे की 30 प्रतिशत आशंका है, मध्य और पश्चिम भारत के राज्यों में कम बारिश हो सकती है। वहीं, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत जैसे- बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय में अच्छी बारिश होने की संभावना है।

अल नीनो का असर

मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के पीछे की वजह अल नीनो को माना जा रहा है। जो एक क्लाइमेट घटना है, अल नीनो शांत महासागर के पानी को गर्म करती है और दुनिया भर के मौसम के पैटर्न को बिगाड़ती है। भारत के लिए, एल नीनो का मतलब अक्सर कम बारिश होता है, वयह पूर्वानुमान कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि बारिश में कमी फसलों के पैदावार को प्रभावित कर सकती है।


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हिमाचल के कांगड़ा में भीषण सड़क हादसा, 90 फीट गहरी खाई में गिरी ट्रैक्टर-ट्रॉली; 3 की मौत और 27 घायल

एनएच-503 पर ढलियारा स्थित ‘खूनी मोड़’ के पास राधा स्वामी सत्संग घर के नजदीक एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है, जिसमें 3 की मौत और 27 श्रद्धालुओं के घायल होने की सूचना है।  एक ट्रैक्टर-ट्राली अनियंत्रित होकर करीब 90 फीट गहरी खाई में जा गिरी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब के कपूरथला से श्रद्धालुओं का एक समूह ट्रैक्टर-ट्राली में सवार होकर देवी दर्शन के लिए हिमाचल आया हुआ था। श्रद्धालुओं ने पहले चिंतपूर्णी मंदिर में माथा टेका और इसके बाद ज्वालामुखी मंदिर के लिए रवाना हुए थे।

बताया जा रहा है कि जैसे ही ट्रैक्टर ढलियारा के खतरनाक ‘खूनी मोड़’ के पास पहुंचा, अचानक ब्रेक फेल हो गए। चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया और ट्रैक्टर-ट्राली सीधी खाई में जा गिरी। हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

घटना के समय सड़क से गुजर रहे स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए और घायलों को खाई से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य तेज किया गया। घायलों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। फिलहाल हादसे में घायल लोगों की संख्या और स्थिति की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।


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बिहार के बाद नीतीश कुमार की दिल्ली पॉलिटिक्स शुरू, राज्यसभा MP के तौर पर ली शपथ; CM पद से देंगे इस्तीफा

 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद बन गए हैं। आज दिल्ली में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने संसद भवन परिसर में उन्हें शपथ दिलाई।

नीतीश के बाद कौन सीएम बनेगा, इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, इस पर मंथन के लिए दिल्ली में बिहार बीजेपी के कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पटना लौटने के बाद नीतीश कुमार 14 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं, जहां वे पहले भी सक्रिय रहे हैं।

सबसे ज्‍यादा बार सीएम रहने का रिकॉर्ड

साल 2005 से बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश अब तक 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

बीजेपी की बैठक में नए सीएम पर होगा मंथन

बिहार में नई सरकार का मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया में भाजपा ने आज बिहार कोर ग्रुप की बैठक दिल्ली में बुलाई है।

पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक से पहले अध्यक्ष नितिन नवीन राज्य के नेताओं के साथ बैठकर एक नाम पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।


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सीजफायर के बीच अमेरिका को झटका! होर्मुज के ऊपर से 1800 करोड़ का ड्रोन लापता

अमेरिका-ईरान के बीच हुए सीजफायर के ठीक दो दिन बाद अमेरिका का निगरानी ड्रोन, MQ-4C ट्राइटन, होर्मुज स्ट्रेट से लापता हो गया है। यह अमेरिकी नौसेना का सबसे महंगा और अत्याधुनिक निगरानी ड्रोन है। जो तीन घंटे की निगरानी पूरी करने के बाद अपनी बेस पर लौटते वक्त रडार से ओझल हो गया।

अमेरिकी नौसेना का एक निगरानी ड्रोन, एमक्यू-4सी ट्राइटन की कीमत 200 मिलियन डॉलर (लगभग 1,800 करोड़ रुपये) है। यह ड्रोन अपनी उच्च-ऊंचाई और लंबी दूरी की क्षमताओं के लिए जाना जाता है। फिलहाल अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ड्रोन तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ है या इसे मार गिराया गया है।

अपने बेस पर लौटते वक्त हुआ लापता

ऑनलाइन फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट, ड्रोन ने फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट की लगभग तीन घंटे की निगरानी पूरी की। इसके बाद ऐसा लग रहा था कि वह इटली के सिगोनेला नौसैनिक हवाई अड्डे पर अपने बेस पर लौट रहा था। ड्रोन ने ईरान की ओर थोड़ा सा मोड़ लिया और कोड 7700 (सामान्य आपातकाल के लिए) भेजकर नीचे उतरना शुरू कर दिया। यह ड्रोन लगभग 50,000 फीट की अपनी उड़ान ऊंचाई से तेजी से 10,000 फीट से नीचे उतर गया। इसके बाद ड्रोन ट्रैकिंग से गायब हो गया।

उड़ान के दौरान भेजा था इमरजेंसी अलर्ट

इस दौरान इसे ट्रैक किया गया और वह तेजी से ऊंचाई खोता हुआ दिखाई दिया, जिसके बाद वह गायब हो गया। दी वॉर जोन की रिपोर्ट के मुताबिक, उड़ान के दौरान इसने इमरजेंसी अलर्ट भी भेजा था।

सीजफायर के दो दिन बाद की घटना

बताते चलें कि ड्रोन के लापता होने की घटना अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनने के दो दिन बाद हुई है, जिसमें ईरान ने होर्मुज को जहाजरानी यातायात के लिए फिर से खोलने पर सहमति जताई थी।

MQ-4C ट्राइटन के बारे में...

अमेरिका के एमक्यू-4सी ट्राइटन को खाड़ी क्षेत्र के ऊपर अमेरिकी केंद्रीय कमान के क्षेत्र में तैनात किया गया है। यह परंपरागत विमानों के विपरीत, ट्राइटन महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर लंबे समय तक रणनीतिक निगरानी प्रदान करता है। इसे निरंतर और व्यापक समुद्री निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है, और यह अक्सर पी-8ए पोसाइडन गश्ती विमानों के लिए उच्च-ऊंचाई पर निगरानी रखने वाले विमान के रूप में कार्य करता है।

ट्राइटन एकमात्र स्वायत्त उच्च-ऊंचाई, लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाला ड्रोन है, जो 50,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर 24 घंटे से अधिक समय तक 7,400 समुद्री मील की रेंज के साथ उड़ान भरने में सक्षम है।


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₹10,000 से ज्यादा के ऑनलाइन पेमेंट पर लगेगा 1 घंटे का होल्ड, फ्रॉड रोकने की नई पहल

जल्द ही ऐसा हो सकता है कि आपका ₹10 हजार से ज्यादा का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तुरंत न हो। उसमें 1 घंटे की देरी हो सकती है। इससे ग्राहकों को गलत ट्रांजैक्शन रोकने या कैंसिल करने का मौका मिलेगा। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए RBI ने ये प्रस्ताव रखा है।

RBI का मानना है कि जालसाज अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं, यह देरी उस दबाव को खत्म करेगी। फिलहाल ज्यादातर डिजिटल ट्रांजैक्शन तुरंत होते हैं, जिससे यूजर को सोचने या गलती सुधारने का मौका नहीं मिलता।

RBI के प्रस्ताव से जुड़ी 3 अन्य बड़ी बातें

1. सीनियर सिटीजंस के लिए 'ट्रस्टेड पर्सन' सुविधा

70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए सुरक्षा और सख्त होगी। 50,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए एक 'ट्रस्टेड पर्सन' (भरोसेमंद व्यक्ति) की मंजूरी जरूरी हो सकती है। यह फ्रॉड के खिलाफ सुरक्षा की एक दूसरी लेयर की तरह काम करेगा।

2. भरोसेमंद को 'व्हाइटलिस्ट' में शामिल कर सकेंगे

अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति या मर्चेंट को पैसे भेज रहे हैं, जिसे आप जानते हैं, तो आप उसे अपनी 'व्हाइटलिस्ट' में शामिल कर सकते हैं। व्हाइटलिस्टेड लोगों को पेमेंट करने पर यह 1 घंटे की देरी लागू नहीं होगी, जिससे नियमित लेन-देन में परेशानी नहीं आएगी।

3. डिजिटल पेमेंट बंद करने के लिए 'किल स्विच'

RBI ने एक 'किल स्विच' का सुझाव भी दिया है। अगर किसी ग्राहक को लगता है कि उसका अकाउंट हैक हो गया है या कोई गलत ट्रांजैक्शन हो रहा है, तो वह एक क्लिक से अपनी सभी डिजिटल पेमेंट सेवाओं को तुरंत बंद कर सकेगा।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

पिछले साल देश में डिजिटल फ्रॉड के कारण होने वाला नुकसान 22 हजार करोड़ रुपए के पार पहुंच गया। RBI के अनुसार 10 हजार रुपए से ऊपर के ट्रांजैक्शन कुल फ्रॉड केस का सिर्फ 45% हैं, लेकिन कुल फ्रॉड वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी 98.5% है। इसी को ध्यान में रखते हुए 10 हजार की लिमिट तय की गई है।

कब तक लागू हो सकता है नियम?

RBI फिलहाल बैंकों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ मिलकर इसके तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहा है। इसमें मुख्य चुनौती यह है कि डिजिटल पेमेंट की 'रफ्तार' और 'सुरक्षा' के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ महीनों में इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की जा सकती है और चरणबद्ध तरीके से इसे लागू किया जाएगा।

एक्सपर्ट व्यू: सुरक्षा और स्पीड के बीच संतुलन

RBI ने माना है कि डिजिटल पेमेंट का मूल सिद्धांत 'इंस्टेंट' यानी तुरंत पेमेंट है। अनिवार्य देरी से यूजर्स को कुछ असुविधा हो सकती है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है। RBI ने इस चर्चा पत्र पर 8 मई तक आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं।


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7 साल बाद ईरान से कच्चा तेल खरीदेगा भारत, ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारत ने 7 साल बाद ईरान से तेल खरीदना फिर शुरू किया है। शिपिंग डेटा के मुताबिक, ‘जया’ नाम का टैंकर ईरानी क्रूड लेकर भारत के पूर्वी तट की ओर आ रहा है।

यह टैंकर पहले गुजरात के वाडिनार पोर्ट की ओर आ रहा था। इसमें करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लदा था। लेकिन फिर यह चीन की तरफ मुड़ गया। तब बताया गया था कि पेमेंट दिक्कत की वजह से यह भारत न आकर चीन जा रहा है। तेल मंत्रालय ने उन रिपोर्ट्स को गलत बताया था।

हालांकि अब यह फिर भारत की तरफ मुड़ गया है। फिलहाल इसकी लोकेशन मलेशिया के नजदीक है। माना जा रहा है कि इस सप्ताह के आखिर में यह भारत के पूर्वी तट पर पहुंच जाएगा।

अमेरिका ने भारत को 30 दिन की छूट दी है

2018 तक भारत ईरान से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदता था। उस समय भारत रोजाना करीब 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल आयात करता था, जो कुल आयात का लगभग 11.5% था। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया और अन्य देशों से सप्लाई बढ़ा दी।

हाल ही में अमेरिका ने 30 दिन की सीमित छूट दी है, जिसके तहत समुद्र में ईरानी तेल खरीदने की अनुमति है। यह छूट 19 अप्रैल तक लागू है। मंत्रालय के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधित होने के बीच भारतीय रिफाइनरों ने 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल खरीदा है और पेमेंट की कोई दिक्कत नहीं है।

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बाद तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। इससे कई देशों पर असर पड़ा। साथ ही भारतीय तेल कंपनियों को भी नुकसान हुआ था। लेकिन अब ईरान से सस्ता तेल मिलने से भारतीय ऑयल कंपनियों को राहत मिल सकती है।

अमेरिका की छूट क्या है और कैसे काम करती है?

अमेरिका की ओर से दी गई 30 दिन की छूट पूरी तरह प्रतिबंध हटाने जैसी नहीं है। यह सीमित और कंट्रोल्ड व्यवस्था है। अमेरिका ने 2018 से ईरान के तेल पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिनके तहत कोई भी देश सीधे ईरान से तेल खरीदता है तो उस पर सेकेंडरी सैंक्शन लग सकते हैं। यानी उस देश की कंपनियों पर भी अमेरिकी कार्रवाई हो सकती है।

इसी बीच जब वैश्विक हालात बिगड़ते हैं जैसे अभी मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण सप्लाई पर दबाव बढ़ा तो अमेरिका कुछ समय के लिए राहत देता है। इसका मकसद यह होता है कि तेल बाजार पूरी तरह असंतुलित न हो और कीमतें बेकाबू न बढ़ें।

यह पूरी तरह की छूट नहीं है। इसमें नए बड़े कॉन्ट्रैक्ट की इजाजत नहीं होती। बल्कि पहले से समुद्र में मौजूद ईरानी तेल को खरीदने की अनुमति मिलती है। इसका मतलब है कि देश सीधे ईरान के साथ नया दीर्घकालिक सौदा नहीं कर सकते। वे केवल सीमित मात्रा में उपलब्ध तेल ही खरीद सकते हैं।

पेमेंट सिस्टम इस छूट में अहम भूमिका निभाता है। आमतौर पर डॉलर ट्रांजैक्शन या अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम से दूरी रखी जाती है, ताकि प्रतिबंधों का उल्लंघन न हो। पहले भारत ने रुपया-रियाल जैसे वैकल्पिक सिस्टम का इस्तेमाल किया था, जिससे भुगतान बिना अमेरिकी दखल के हो सके।

2018 में भी मिली थी छूट

ऐसी छूट पहले भी दी गई थी। 2018 में प्रतिबंधों के बाद भारत को कुछ समय के लिए राहत मिली थी, लेकिन बाद में अमेरिका ने इसे खत्म कर दिया, जिसके बाद भारत को ईरान से तेल आयात पूरी तरह रोकना पड़ा।

अभी दी गई छूट 19 अप्रैल तक सीमित है, यानी यह साफ संकेत है कि अमेरिका फिलहाल केवल अस्थायी राहत देना चाहता है, स्थायी नीति बदलाव नहीं कर रहा।

भारत के लिए इसका मतलब यह है कि वह कुछ समय के लिए सस्ता ईरानी तेल खरीदकर लागत घटा सकता है, लेकिन लंबे समय की सप्लाई रणनीति अभी भी अनिश्चित बनी रहेगी।

भारत ने रूस से भी तेल खरीद बढ़ाई

ईरान से तेल की खरीद फिर शुरू हो रही है, लेकिन यह ऐसे समय हो रहा है जब होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते पर तनाव बना हुआ है। भारत का करीब 35 से 50 प्रतिशत कच्चा तेल और ज्यादातर LPG इसी रास्ते से आता है, इसलिए इस स्थिति से देश की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।

इसी वजह से भारत ने रूस से भी तेल खरीद बढ़ा दी है। डेटा कंपनी कप्लर के मुताबिक, संघर्ष बढ़ने के बाद एक हफ्ते में भारत ने करीब 30 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीदा। 24 मार्च तक रूस से आयात बढ़कर करीब 1.9 मिलियन बैरल प्रति दिन पहुंच गया, जबकि फरवरी में यह लगभग 1 मिलियन बैरल प्रति दिन था।

इस तनाव का असर कीमतों पर भी साफ दिखा है। रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, फरवरी 2026 में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत 69 डॉलर प्रति बैरल थी, जो मार्च में बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

फिलहाल 17 भारतीय जहाज होर्मुज में फंसे

इस बीच, अमेरिका-इजराइल संघर्ष के कारण सप्लाई प्रभावित होने से भारत ने ईरान के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को फिर संतुलित करने की कोशिश की है।

रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल 17 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित रास्ते का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सात जहाज हाल ही में वहां से गुजर चुके हैं। भारत ने अमेरिकी नेवी गठबंधन में शामिल होने के बजाय ईरान से सीधे बातचीत का रास्ता चुना है।

ईरान से सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं, LPG की सप्लाई भी आ रही है। करीब 44,000 मीट्रिक टन LPG लेकर एक जहाज 2 अप्रैल को मैंगलोर पोर्ट पहुंचा और फिलहाल वहां ईंधन उतार रहा है।


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सोने में बड़ी गिरावट! ₹1,000 सस्ता होकर ₹1.51 लाख पर आया, निवेशकों को राहत

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 9 अप्रैल को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1 हजार रुपए घटकर 1.50 लाख रुपए आ गया है। इससे पहले यह 1.51 लाख रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 9 हजार रुपए घटकर 2.35 लाख रुपए रह गई।

सोना ऑल टाइम हाई से ₹25 हजार सस्ता हुआ

साल की शुरुआत में सोने में तेजी थी, लेकिन हाल के हफ्तों में मुनाफावसूली और ईरान जंग से गिरावट आई है।

ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹1.76 लाख

मौजूदा स्थिति: अपने उच्चतम स्तर से सोना अब तक ₹25 हजार सस्ता हो चुका है।

चांदी में क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.35 लाख तक

चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव रहा और यह ऑल टाइम हाई से तेजी से नीचे आई है।

ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹3.86 लाख

गिरावट का आंकड़ा: चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.51 लाख सस्ती हो चुकी है।

ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान

1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।

2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।

असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है।

आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है।

स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है।

क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है।


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राजस्थान में अप्रैल में सर्दी, उत्तराखंड-हिमाचल में बर्फबारी

उत्तर भारत में 3 वेस्टर्न डिस्टरबेंस के असर से अप्रैल में भी सर्दी का अहसास हो रहा है। राजस्थान में 20 दिनों से बदले मौसम के कारण तापमान 7 डिग्री तक कम हुआ है।

मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए छत्तीसगढ़ और बिहार समेत 17 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, सिक्किम, बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।

बिहार में काल बैसाखी सिस्टम एक्टिव हो गया है। काल बैसाखी अचानक आने वाला तेज आंधी-तूफान होता है। यह अप्रैल–मई (वैशाख) में आता है। इसके एक्टिव होने पर 50-100 kmph की रफ्तार से हवाएं चलती हैं, बारिश और ओले गिरते हैं। यह जल्दी खत्म हो जाता है।

असम और मेघालय में मौसम सबसे ज्यादा खराब रहेगा। यहां आंधी-बारिश और ओले गिरने का ऑरेंज अलर्ट है। दक्षिण के राज्यों तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और और कोस्टल कर्नाटक में उमस भरा मौसम रहेगा।

अगले दो दिन के मौसम का हाल

9 अप्रैल- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी की संभावना। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की बारिश। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 30-50kmph रफ्तार की हवा चल सकती हैं। असम और मेघालय में तेज बारिश।

10 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कहीं-कहीं हल्की बारिश। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में 30-50kmph रफ्तार की हवा।


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‘होर्मुज नहीं खुला तो फिर शुरू होगी गोलीबारी’: सीजफायर के बीच ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को एक नई धमकी दी है। ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता है और परमाणु हथियार न रखने का वादा नहीं करता है तो गोलीबारी शुरू हो जाएगी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर उन्होंने लिखा, "अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी साथ ही अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और ऐसी कोई भी चीज जो पहले से ही काफी कमजोर हो चुके दुश्मन को पूरी तरह से खत्म करने और नष्ट करने के लिए सही और जरूरी हो ईरान के अंदर और उसके आस-पास तब तक तैनात रहेंगे, जब तक कि हुई 'असली सहमति' का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता।"

'कोई भी परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं किया जाएगा'

ट्रंप ने आगे लिखा, "अगर किसी भी वजह से ऐसा नहीं होता है, जिसकी संभावना बहुत ही कम है तो "गोलीबारी शुरू हो जाएगी" जो पहले कभी किसी ने नहीं देखी होगी, उससे भी ज्यादा बड़ी, बेहतर और जबरदस्त। बहुत पहले ही इस बात पर सहमति बन गई थी और इसके विपरीत तमाम झूठी बयानबाजियों के बावजूद कि कोई भी परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट खुला और सुरक्षित रहेगा।"

'सेना कर रही बेसब्री से इंतजार'

अमेरिकी राष्ट्रपति ने धमकी देते हुए लिखा, "इस बीच, हमारी महान सेना अपनी पूरी तैयारी कर रही है और आराम कर रही है। असल में, वह अपनी अगली जीत का बेसब्री से इंतजार कर रही है। अमेरिका वापस आ गया है!"


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