रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और सफर को अधिक आरामदायक बनाने के उद्देश्य से टिकटिंग और कोच नियमों में अहम बदलाव किए हैं। इसके तहत अब कुछ चुनिंदा ट्रेनों में आरएसी (Reservation Against Cancellation) की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गई है, ताकि यात्रियों को आधी सीट पर यात्रा करने की मजबूरी न झेलनी पड़े। इसी कड़ी में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में आरएसी टिकट की सुविधा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
रेलवे बोर्ड द्वारा 9 जनवरी को जारी सर्कुलर के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में केवल कन्फर्म टिकट ही जारी किए जाएंगे। आरएसी, वेटलिस्ट या आंशिक रूप से कन्फर्म टिकट का कोई प्रावधान नहीं होगा। इस ट्रेन के लिए न्यूनतम चार्जेबल दूरी 400 किलोमीटर तय की गई है, जबकि सभी उपलब्ध बर्थ एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (एआरपी) के पहले दिन से ही बुकिंग के लिए खुली रहेंगी।
नए नियमों के तहत स्लीपर क्लास में न्यूनतम 200 किलोमीटर का किराया देना होगा, जो 149 रुपये है, भले ही यात्री इससे कम दूरी की यात्रा करे। वहीं सेकंड क्लास के लिए न्यूनतम दूरी 50 किलोमीटर तय की गई है, जिसका किराया 36 रुपये होगा। इसके अलावा रिजर्वेशन चार्ज और सुपरफास्ट चार्ज अलग से लागू होंगे।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में अब स्लीपर क्लास के लिए सिर्फ तीन प्रकार के कोटा मान्य होंगे—महिला, दिव्यांग और सीनियर सिटिजन। किसी अन्य कोटे का प्रावधान नहीं रखा गया है। साथ ही सीनियर सिटिजन और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए लोअर बर्थ की सुविधा भी शुरू की गई है। सिस्टम 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुषों और 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर लोअर बर्थ देने की कोशिश करेगा, हालांकि अंतिम आवंटन उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
मंडल रेल प्रबंधक सुनील कुमार वर्मा के अनुसार, ये सभी नए नियम दिल्ली स्थित रेलवे बोर्ड द्वारा जारी किए गए निर्देशों के तहत लागू किए गए हैं।









