दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए चार वर्षों का एक व्यापक और डेडलाइन-आधारित एक्शन प्लान पेश किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया गया कि सरकार साल के 12 महीने, सातों दिन प्रदूषण नियंत्रण पर काम कर रही है और सभी संबंधित विभागों को तय समयसीमा के अनुसार लक्ष्यों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने इसे एक “लंबी लड़ाई” बताते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य अगले चार वर्षों में पीएम2.5 के स्तर में प्रभावी और स्थायी कमी लाना है। सरकार के अनुसार बजट या प्रक्रियागत बाधा नहीं है और केंद्र सरकार के साथ निरंतर समन्वय बना हुआ है।
इस एक्शन प्लान का मुख्य फोकस सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर है। दिल्ली के बस बेड़े को मौजूदा संख्या से बढ़ाकर मार्च 2029 तक 14,000 बसों तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें 500 छोटी, सात मीटर लंबी बसें शामिल होंगी, जिन्हें घनी आबादी वाले इलाकों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए तैनात किया जाएगा। इन बसों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा जनवरी 2026 तक 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर ई-ऑटो, बाइक टैक्सी और फीडर कैब को जोड़ने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। फिलहाल 100 इलेक्ट्रिक फीडर बसें पहले से ही सेवा में हैं।
प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने दिल्ली में 62 ट्रैफिक कंजेशन हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं, जिनमें से 30 स्थानों पर सुधार कार्य शुरू हो चुका है। जमीनी स्तर पर ट्रैफिक प्रबंधन को मजबूत करने के लिए 1,200 अतिरिक्त डीटीसी कर्मियों को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ तैनात किया गया है, ताकि जाम और उससे होने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सके।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई ईवी पॉलिसी 2.0 लाई गई है, जिसमें दिल्ली के लगभग 58 लाख दोपहिया वाहनों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इंसेंटिव और स्क्रैपेज लाभ दिए जाएंगे, साथ ही चार्जिंग नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाएगा।
सड़क की खराब स्थिति और धूल प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने 3,300 किलोमीटर सड़कों के पुनर्निर्माण और उन्नयन के लिए 6,000 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। इसमें पीडब्ल्यूडी, एमसीडी और अनधिकृत कॉलोनियों की सड़कें शामिल हैं। योजना के तहत पक्के कंधे, हरित मीडियन और भूमिगत यूटिलिटी डक्ट बनाए जाएंगे, ताकि बार-बार सड़क खुदाई की समस्या खत्म हो सके। टेंडर दो महीने में जारी करने और एक साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए मेट्रो और आरआरटीएस नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। वर्तमान में 395 किलोमीटर लंबे दिल्ली मेट्रो नेटवर्क को आगामी चरणों में 206 किलोमीटर और बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार फेज-4 पूरा होने के बाद मेट्रो की राइडरशिप दोगुनी हो सकती है। इसके अलावा एनसीआरटीसी नेटवर्क को अगले चार वर्षों में 323 किलोमीटर तक विस्तार देने की योजना है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी और निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी।
कचरे के पहाड़ों को खत्म करने के लिए सरकार ने लैंडफिल साइट्स के लिए सख्त समयसीमा तय की है। ओखला लैंडफिल को जुलाई 2026, भलस्वा को अक्टूबर 2026 और गाजीपुर को दिसंबर 2027 तक पूरी तरह साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष एमसीडी को कचरा प्रबंधन के लिए 500 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि आगे हर साल 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 2026–27 तक सारा ताजा नगर निगम कचरा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स में प्रोसेस किया जाएगा।
सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए मैकेनाइज्ड सफाई व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी 4,000 करोड़ रुपये की दो बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें 250 स्प्रिंकलर-कम-एंटी-डस्ट मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा 62 हॉटस्पॉट पर मिस्ट स्प्रे सिस्टम लगाए जाएंगे।
उद्योगों से होने वाले प्रदूषण पर सख्ती बढ़ाते हुए अब तक 1,000 से अधिक प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों को सील किया जा चुका है। बड़े उद्योगों को रियल-टाइम एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए हैं। हरित पहल के तहत चार वर्षों में 35 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें इस साल अकेले 14 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही 365 एकड़ क्षेत्र में ब्राउन पार्क विकसित किए जाएंगे। सर्दियों में प्रदूषण कम करने के लिए 15,500 इलेक्ट्रिक हीटर वितरित किए जा रहे हैं, ताकि पराली और बायोमास जलाने पर रोक लगाई जा सके। तेहखंड में एक नया कंस्ट्रक्शन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।
निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए स्मार्ट पार्किंग और प्राइसिंग कंट्रोल की योजना बनाई जा रही है। व्यावसायिक और ट्रांजिट हब्स पर मल्टी-लेवल पार्किंग को बढ़ावा दिया जाएगा। दिल्ली की सीमाओं पर एएनपीआर कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिससे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की स्वतः पहचान की जा सके।
पर्यावरण मंत्री ने बताया कि यह पूरी योजना सुप्रीम कोर्ट और पीएमओ के साथ साझा की जाएगी। साथ ही पड़ोसी राज्यों के साथ भी समन्वय जारी रहेगा, क्योंकि दिल्ली की वायु गुणवत्ता की समस्या केवल शहर तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर की है।
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