गुरुग्राम में पारा 0.6°C तक गिरा, दिल्ली शिमला से भी ज्यादा ठंडी

इस जनवरी ने दिल्ली–एनसीआर के लोगों को दशकों बाद सबसे कड़ाके की ठंड का एहसास करा दिया है। सोमवार को गुरुग्राम में न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जो कई हिल स्टेशनों से भी कम रहा। मंगलवार को हालांकि इसमें हल्की बढ़ोतरी हुई और तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मंगलवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान करीब 3 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि शिमला में 4 डिग्री दर्ज किया गया। इस तरह मैदानी इलाके पहाड़ों से भी ज्यादा ठंडे नजर आए। मौसम विभाग ने पूरे एनसीआर में कोल्ड वेव और घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, कई मौसमी कारणों के एक साथ सक्रिय होने से यह असामान्य ठंड पड़ रही है।

आखिर इतनी ठंड क्यों पड़ रही है?

पश्चिमी विक्षोभ का असर

हाल ही में हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हुई। इसके बाद उत्तर-पश्चिम दिशा से तेज ठंडी हवाएं चलीं, जो बर्फीली हवा को सीधे मैदानी इलाकों तक ले आईं।

साफ आसमान और रेडिएशनल कूलिंग

रात के समय आसमान साफ रहने से धरती की गर्मी तेजी से अंतरिक्ष में निकल जाती है, जिसे रेडिएशनल कूलिंग कहा जाता है। इससे रात के तापमान में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है।

ठंडी हवा का जमाव

हिमालय से आई ठंडी हवा मैदानी इलाकों में फंस गई है। ऊपर की परतों में हवाएं कमजोर होने के कारण यह ठंडी हवा बाहर नहीं निकल पा रही, जिससे कोल्ड वेव और ज्यादा तीव्र हो गई है।

पहाड़ों से ज्यादा ठंड मैदानों में क्यों?

आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में बादल तापमान को बहुत नीचे नहीं जाने देते, जबकि इस बार मैदानी इलाकों में आसमान साफ है और ठंडी हवा जमा है। यही वजह है कि गुरुग्राम और दिल्ली जैसे शहर शिमला से भी ज्यादा ठंडे हो गए।

ठंड के साथ प्रदूषण की मार

दिल्ली–एनसीआर में ठंड के साथ-साथ प्रदूषण ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार पहुंच चुका है, जो ‘सीवियर’ श्रेणी में आता है। सुबह के समय 97–98 प्रतिशत तक नमी रहने से ठंडी हवाओं का असर और ज्यादा महसूस हो रहा है। डॉक्टरों ने लोगों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, मास्क पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।

IMD के अनुसार 13 और 14 जनवरी को कोल्ड वेव जारी रह सकती है। 15 जनवरी के बाद न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री की हल्की बढ़ोतरी संभव है, लेकिन अगले छह दिनों तक सुबह के समय घना कोहरा लोगों को परेशान करता रहेगा। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल ठंड और प्रदूषण के इस दोहरे प्रकोप से राहत मिलने में अभी कुछ दिन लग सकते हैं।


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विवादों में घिरी यश स्टारर फिल्म ‘टॉक्सिक’

यश स्टारर फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म के टीजर को लेकर सोशल एक्टिविस्ट दिनेश कल्लाहल्ली ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि टीजर में मौजूद कुछ दृश्य अश्लील, आपत्तिजनक और नैतिक मूल्यों के खिलाफ हैं।

 CBFC चेयरपर्सन प्रसून जोशी को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि टीजर में अत्यधिक अश्लील, सेक्सुअली एक्सप्लिसिट और वल्गर कंटेंट दिखाया गया है, जो खुले तौर पर सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। इससे बच्चे और युवा भी ऐसे दृश्य देख रहे हैं, जो समाज और कानून—दोनों के लिहाज से अनुचित हैं।

एक्टिविस्ट का कहना है कि यह टीजर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा से बाहर जाता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अश्लील और सेक्सुअली एक्सप्लिसिट कंटेंट को संवैधानिक संरक्षण नहीं मिलता। साथ ही उन्होंने सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952, फिल्म सर्टिफिकेशन नियमों और CBFC की गाइडलाइंस का उल्लेख करते हुए कहा कि फिल्मों और उनके प्रमोशनल कंटेंट में शालीनता, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का पालन अनिवार्य है।

टीजर की समीक्षा और सीन हटाने की मांग

शिकायत में CBFC से टीजर की समीक्षा करने, आपत्तिजनक सीन हटाने और उसके प्रसार पर रोक लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा फिल्म से जुड़े निर्देशक, निर्माता और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की भी अपील की गई है। शिकायत में कहा गया है कि यह मामला सार्वजनिक नैतिकता, बच्चों की सुरक्षा और कानून के पालन से जुड़ा है, इसलिए इस पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है।

फिल्म के निर्माताओं की ओर से अब तक इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

AAP महिला विंग ने भी दर्ज कराई शिकायत

‘टॉक्सिक’ का टीजर 8 जनवरी को जारी किया गया था, जिसमें यश को एक कार के अंदर एक महिला के साथ बोल्ड सीन में दिखाया गया है। इसी सीन को लेकर विवाद और तेज हो गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी (AAP) की महिला विंग ने इस टीजर के खिलाफ कर्नाटक राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।

AAP महिला विंग का आरोप है कि टीजर में दिखाया गया दृश्य अश्लील है, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है और बच्चों व समाज पर गलत प्रभाव डालता है। उन्होंने टीजर को सोशल मीडिया से हटाने और भविष्य में ऐसे कंटेंट पर सख्त कानून बनाने की मांग की है।

महिला आयोग ने लिया संज्ञान

शिकायत मिलने के बाद कर्नाटक राज्य महिला आयोग ने CBFC को पत्र लिखकर मामले में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। आयोग का कहना है कि टीजर के कुछ विजुअल्स अश्लील और आपत्तिजनक हैं, जो महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक भलाई के लिए भी नुकसानदेह हैं।

आयोग ने यह भी कहा कि बिना सेंसर और बिना किसी चेतावनी के ऐसे टीजर को सार्वजनिक करना महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है और कन्नड़ संस्कृति का अपमान करता है। CBFC से नियमों के तहत टीजर की समीक्षा कर रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया गया है।

‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर 2’ की टक्कर

गौरतलब है कि यश की पिछली फिल्में ‘केजीएफ’ और ‘केजीएफ 2’ जबरदस्त सुपरहिट रही थीं। हालांकि इस बार राह आसान नहीं दिख रही है। ‘टॉक्सिक’ 19 मार्च को रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ के साथ रिलीज होने वाली है। ‘धुरंधर’ का पहला पार्ट दुनियाभर में 1250 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर चुका है और अब भी सिनेमाघरों में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

एक ही दिन दोनों फिल्मों की रिलीज से ‘टॉक्सिक’ को कड़ा बॉक्स ऑफिस मुकाबला मिलने की संभावना है। वहीं, यश कन्नड़ सिनेमा के बड़े स्टार हैं, लेकिन उनके गृह राज्य कर्नाटक में ही फिल्म को लेकर विरोध सामने आना मेकर्स के लिए चिंता का विषय बन गया है। लगातार बढ़ते विवादों का असर फिल्म की छवि और कारोबार—दोनों पर पड़ सकता है।


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‘10 मिनट में डिलीवरी’ सेवा बंद: ब्लिंकिट ने हटाया फीचर, सरकार की बात मानते हुए Zepto, जोमैटो और स्विगी ने भी लिया फैसला

क्विक कॉमर्स की तेज रफ्तार पर अब ब्रेक लग गया है। यूनियन लेबर मंत्री मनसुख मांडविया के लगातार प्रयासों और कई दौर की बैठकों के बाद बड़ी डिलीवरी कंपनियों ने अपना चर्चित 10 मिनट डिलीवरी का वादा खत्म करने का फैसला किया है।

अब ब्लिंकिट, जेप्टो, जोमैटो और स्विगी जैसी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स अपने ग्राहकों से यह दावा नहीं करेंगी कि सामान सिर्फ 10 मिनट में पहुंच जाएगा। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य डिलीवरी पार्टनर्स यानी गिग वर्कर्स की सुरक्षा, सेहत और काम की परिस्थितियों में सुधार करना है।

गिग वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, श्रम मंत्रालय ने इन कंपनियों के साथ एक अहम बैठक की थी, जिसमें डिलीवरी टाइम लिमिट से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में यह बात सामने आई कि 10 मिनट की सख्त समय सीमा डिलीवरी पार्टनर्स पर अत्यधिक दबाव डालती है, जिससे वे तेज रफ्तार में वाहन चलाने, ट्रैफिक नियम तोड़ने और कई बार अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर होते हैं।

लेबर मंत्री मनसुख मांडविया ने कंपनियों को साफ तौर पर कहा कि ग्राहकों को तेज सेवा देना जरूरी है, लेकिन इसके लिए कर्मचारियों की जान और सेहत से समझौता नहीं किया जा सकता। इसी वजह से हाल के दिनों में गिग वर्कर्स की समस्याओं पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हुई।

संसद में उठा था मुद्दा

हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। उन्होंने कहा था कि देश के लाखों गिग वर्कर्स भीषण गर्मी, बारिश और कड़ाके की ठंड में काम करते हैं, लेकिन फिर भी उन पर टारगेट पूरा करने का भारी दबाव रहता है।

ब्लिंकिट ने सबसे पहले बदली टैगलाइन

सरकारी निर्देशों पर सबसे पहले ब्लिंकिट ने अमल किया है। कंपनी ने अपनी ब्रांडिंग में बदलाव करते हुए ‘10,000+ प्रोडक्ट्स 10 मिनट में डिलीवर’ की जगह अब टैगलाइन कर दी है—‘30,000+ प्रोडक्ट्स आपके दरवाजे पर’। अन्य क्विक कॉमर्स कंपनियां भी आने वाले दिनों में अपने 10 मिनट डिलीवरी वाले वादे को हटाने की तैयारी में हैं।

गिग वर्कर्स के लिए कानून का सहारा

दरअसल, कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 में पहली बार ‘गिग वर्कर्स’ और ‘प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। यह कानून 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुका है। इसके तहत गिग वर्कर्स को जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा जैसी सुविधाएं देने का प्रावधान है।

इसके अलावा, इन योजनाओं के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया जाएगा और गिग वर्कर्स के हितों की निगरानी के लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का भी गठन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन कदमों से क्विक कॉमर्स सेक्टर में काम करने वालों को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सकेगा।


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यूपी सरकार का बड़ा फैसला: डिप्लोमा फार्मेसी के लिए पूरी प्रक्रिया में बदलाव

सत्र 2026–27 के लिए डिप्लोमा स्तरीय फार्मेसी संस्थानों की संबद्धता प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। प्राविधिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करते हुए यू-राइज पोर्टल को सक्रिय कर दिया है। अब नई फार्मेसी संस्थाओं की स्थापना, मौजूदा संस्थानों में नया पाठ्यक्रम शुरू करने, प्रवेश क्षमता बढ़ाने या घटाने और संस्था बंद (क्लोजर) से जुड़े सभी आवेदन केवल यू-राइज पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

यह व्यवस्था प्राविधिक शिक्षा विभाग के शासनादेश के तहत लागू की गई है। नव-आवेदित और पहले से परिषद से संबद्ध सभी डिप्लोमा स्तरीय फार्मेसी संस्थान 30 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। निर्धारित तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

नई डिप्लोमा फार्मेसी संस्था खोलने के इच्छुक आवेदकों को यू-राइज पोर्टल पर उपलब्ध लिंक के जरिए पंजीकरण करना होगा। आवेदन के दौरान सभी जरूरी जानकारियां भरने और संबंधित दस्तावेज अपलोड करने के साथ 5,900 रुपये का ऑनलाइन भुगतान अनिवार्य किया गया है। शुल्क जमा होने के बाद ही नवीन संबद्धता का आवेदन सबमिट माना जाएगा।

वहीं, पहले से संचालित और परिषद से संबद्ध संस्थान यदि नया पाठ्यक्रम शुरू करना चाहते हैं, प्रवेश क्षमता में बदलाव करना चाहते हैं या संस्था बंद करने के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो उन्हें यू-राइज पोर्टल पर एसयू लॉग-इन के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके लिए 11,800 रुपये का ऑनलाइन शुल्क निर्धारित किया गया है।

परिषद ने साफ कर दिया है कि यू-राइज पोर्टल के अलावा किसी अन्य माध्यम—चाहे वह ऑफलाइन हो या कोई दूसरा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म—से भेजे गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।


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53 साल बाद टूटा जल-विवाद का बांध: सोन नदी पर बिहार–झारखंड में ऐतिहासिक समझौता

सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर बिहार और झारखंड के बीच करीब ढाई दशक से चला आ रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। वर्ष 1973 में शुरू हुई जिस प्रक्रिया पर वर्षों तक सहमति नहीं बन सकी थी, उस पर अब दोनों राज्यों ने सैद्धांतिक सहमति जता दी है। इस ऐतिहासिक फैसले से न सिर्फ पुराना विवाद खत्म हुआ है, बल्कि दक्षिण बिहार और झारखंड में जल प्रबंधन व सिंचाई योजनाओं को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

क्या था सोन नदी जल विवाद?

सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर पहला बड़ा समझौता वर्ष 1973 में बाणसागर परियोजना के तहत हुआ था। उस समय मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अविभाजित बिहार के बीच सहमति बनी थी, जिसमें बिहार को सोन नदी से 7.75 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी का अधिकार मिला था।

लेकिन वर्ष 2000 में बिहार के विभाजन के बाद झारखंड के अलग राज्य बनने पर उसने इस पानी में हिस्सेदारी की मांग शुरू कर दी। बिहार अपने पुराने अधिकार पर कायम रहा, जिसके चलते यह विवाद अगले 26 वर्षों तक केंद्र और राज्यों के बीच बैठकों में उलझा रहा।

सोन नदी क्यों है इतनी अहम?

सोन नदी को दक्षिण बिहार की जीवनरेखा माना जाता है। इसका उद्गम मध्य प्रदेश के अमरकंटक की पहाड़ियों से होता है और यह झारखंड व उत्तर प्रदेश से गुजरते हुए बिहार में प्रवेश करती है। बिहार के मनेर में यह गंगा नदी में मिल जाती है।

इस नदी के पानी से भोजपुर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, पटना और अरवल जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर सिंचाई होती है, जिससे लाखों किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है।

समझौते में क्या तय हुआ?

नई सहमति के तहत सोन नदी के कुल 7.75 एमएएफ पानी का बंटवारा इस प्रकार किया जाएगा—

बिहार को: 5.00 एमएएफ

झारखंड को: 2.75 एमएएफ

इस फार्मूले पर दोनों राज्य सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं। जल्द ही मुख्य सचिव स्तर पर एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। बिहार सरकार ने इस फैसले की औपचारिक जानकारी केंद्र सरकार को भी दे दी है।

आगे क्या बदलेगा?

इस समझौते के बाद वर्षों से अटकी इंद्रपुरी जलाशय परियोजना समेत कई सिंचाई योजनाओं का रास्ता साफ हो जाएगा। झारखंड को जहां लंबे इंतजार के बाद जल अधिकार मिलेगा, वहीं बिहार को भी कृषि और सिंचाई की जरूरतों के मुताबिक सुनिश्चित जल उपलब्धता मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा और जल संसाधनों के बेहतर व संतुलित प्रबंधन की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।




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नीतीश कैबिनेट की बैठक में 43 प्रस्तावों पर मुहर, रोजगार-निवेश को बढ़ावा, मुंबई में बनेगा बिहार भवन

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को बिहार मंत्रिपरिषद की अहम बैठक हुई, जिसमें कुल 43 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। वर्ष 2026 में मुख्य सचिवालय स्थित कैबिनेट हॉल में आयोजित यह नई सरकार की पहली बैठक थी, जिसे कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित सभी कैबिनेट मंत्री उपस्थित रहे।

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक खास इसलिए रही क्योंकि इसमें विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान एनडीए द्वारा किए गए वादों को अमलीजामा पहनाने की दिशा में ठोस फैसले लिए गए। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि नए साल में विकास, रोजगार और निवेश उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताएं रहेंगी।

कैबिनेट बैठक में राज्य में नौकरी और रोजगार सृजन को लेकर विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी। विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज करने का निर्णय लिया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में बड़े पैमाने पर बहाली से जुड़े प्रस्ताव सामने आ सकते हैं, जिससे युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा।

इसके साथ ही निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि उद्योगों और निजी कंपनियों को प्रोत्साहन देकर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इसी उद्देश्य से औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना, स्टार्टअप और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं को गति देने के लिए अहम फैसले लिए गए हैं।

कैबिनेट ने कई विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधारों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। इसके अलावा मुंबई में बिहार भवन के निर्माण के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी, जिससे बाहर रहने वाले बिहारवासियों को सुविधा मिल सकेगी।

बैठक के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला है कि नीतीश सरकार नए साल में आक्रामक विकास एजेंडे के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लिए गए ये फैसले आने वाले समय में राज्य की दिशा और दशा को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन निर्णयों का असर न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों पर भी देखने को मिलेगा।


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‘धुरंधर’ के आगे फीकी पड़ी ‘द राजा साब’, बॉक्स ऑफिस पर बदला खेल

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर डेढ़ महीने बाद भी थमने का नाम नहीं ले रही है। सिनेमाघरों में रिलीज हुए फिल्म को 39 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद इसकी कमाई की रफ्तार लगातार बनी हुई है।

बीच में ‘इक्कीस’ और प्रभास की ‘द राजा साब’ जैसी बड़ी फिल्में रिलीज हुईं, लेकिन कोई भी ‘धुरंधर’ को बॉक्स ऑफिस के शिखर से हिला नहीं सकी। आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने एक महीना पूरा करने के बाद भी दर्शकों की पकड़ नहीं छोड़ी है। अब सवाल है कि फिल्म ने अब तक कितनी कमाई की है और इसका अगला टारगेट कौन-सी फिल्म है।

1300 करोड़ क्लब के बेहद करीब ‘धुरंधर’

पहले दिन दुनियाभर में 32 करोड़ की ओपनिंग करने वाली ‘धुरंधर’ ने विदेशी बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन किया है। उम्मीद से कहीं आगे निकल चुकी यह फिल्म लगातार नए रिकॉर्ड अपने नाम कर रही है।

बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘धुरंधर’ अब तक वर्ल्डवाइड 1284.53 करोड़ रुपये की कमाई कर चुकी है। यानी 1300 करोड़ के क्लब में शामिल होने के लिए इसे सिर्फ 16 करोड़ रुपये और चाहिए। फिल्म पहले ही RRR को पीछे छोड़ चुकी है। अगर यह 1300 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेती है, तो इसका अगला लक्ष्य अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा 2’ होगी, जिसने ओवरसीज मार्केट में 272.25 करोड़ की कमाई की है।

कौन रोक पाएगा ‘धुरंधर’ का तूफान?

प्रभास की ‘द राजा साब’ से उम्मीद की जा रही थी कि वह ‘धुरंधर’ की रफ्तार पर ब्रेक लगाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब निगाहें 23 जनवरी को रिलीज होने वाली ‘बॉर्डर-2’ पर हैं, जिससे घरेलू बॉक्स ऑफिस पर टक्कर की उम्मीद की जा रही है। वहीं, विदेशी बाजार में अगर कोई फिल्म ‘धुरंधर’ को चुनौती दे सकती है, तो वह शाहिद कपूर की ‘ओ रोमियो’ मानी जा रही है, जो 13 फरवरी को रिलीज होगी।

हालांकि, मेकर्स पहले से ही अगली रणनीति पर काम कर चुके हैं। दर्शकों की दीवानगी कम होने से पहले ही ‘धुरंधर-2’ को मैदान में उतारने की तैयारी है। यह फिल्म 19 मार्च को ‘टॉक्सिक’ के साथ सिनेमाघरों में टकराने वाली है।


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“ऑपरेशन सिंदूर: जमीनी जंग के लिए पूरी तरह तैयार थी भारतीय सेना, आर्मी चीफ का बड़ा खुलासा”

भारतीय सेना ने एक बार फिर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को 2026 की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में पाकिस्तान की ओर से कोई भी दुस्साहस किया गया, तो भारतीय सेना उसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सेना प्रमुख ने बताया कि खुफिया जानकारी के अनुसार कुल 8 सक्रिय आतंकी कैंप अब भी मौजूद हैं, जिनमें से 2 इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) सेक्टर और 6 लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) सेक्टर में स्थित हैं।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं—थल सेना, वायुसेना और नौसेना—के बेहतरीन तालमेल का उदाहरण है। यह ऑपरेशन अत्यंत सटीकता के साथ योजनाबद्ध और क्रियान्वित किया गया। उन्होंने बताया कि पूरे ऑपरेशन में कुल 88 घंटे लगे, जबकि पहले 22 मिनट के भीतर ही मुख्य हमले शुरू कर दिए गए थे। इस कार्रवाई ने आतंकी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया और पाकिस्तान की परमाणु धमकियों की पोल खोल दी।

सेना प्रमुख के अनुसार, कुल 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें से 7 को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन के दौरान केवल आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाया गया, किसी भी आम नागरिक या पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया।

जनरल द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना जमीनी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह तैयार थी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान और पीओके में कई आतंकी शिविरों पर की गई कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया। सेना प्रमुख ने कहा कि उन 88 घंटों के दौरान सेना की तैनाती इस तरह की गई थी कि अगर पाकिस्तान कोई भी गलती करता, तो भारत तत्काल जमीनी सैन्य कार्रवाई शुरू करने की स्थिति में था।


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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, ‘कुत्ते ने काटा तो राज्य सरकार देगी मुआवजा’

दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार (13 जनवरी 2026) को मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं में पीड़ित को मुआवजा देना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होगी।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी बच्चे या बुजुर्ग को कुत्ते के काटने से गंभीर चोट आती है या उसकी मौत होती है, तो संबंधित राज्य सरकार को मुआवजा देना होगा। अदालत ने इसे प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा मामला बताया।

सुनवाई के दौरान क्या कहा कोर्ट ने?

जस्टिस विक्रम नाथ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग भी ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, “अगर इतना ही लगाव है तो कुत्तों को अपने घर ले जाइए। उन्हें सड़कों पर भटकने के लिए क्यों छोड़ा जा रहा है, जिससे वे लोगों को डराते और काटते हैं?”

यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की दलीलों के बाद आई, जिन्होंने कहा था कि आवारा कुत्तों का मुद्दा एक भावनात्मक विषय है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि “भावुकता केवल कुत्तों के लिए ही दिखाई देती है।” जवाब में मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि लोगों की सुरक्षा को लेकर भी उतनी ही चिंता है।

पहले भी दे चुका है निर्देश

गौरतलब है कि बढ़ते डॉग बाइट मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही सरकारी और सार्वजनिक परिसरों में कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए थे, हालांकि इन आदेशों को लेकर विरोध भी देखने को मिला था।


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नहीं बदलेंगे बांग्लादेश के मैचों के वेन्यू, ICC ने भारत को दी ‘क्लीन चिट’

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर बांग्लादेश की पुरुष टीम के टी20 विश्व कप 2026 के मैच भारत से बाहर कराने की मांग को खारिज कर दिया है। ICC के सूत्रों के मुताबिक भारत में बांग्लादेशी टीम के लिए किसी भी तरह का बड़ा सुरक्षा खतरा नहीं है और इसलिए मैचों के वेन्यू में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

यह सफाई बांग्लादेश के खेल मंत्रालय के सलाहकार आसिफ नजरुल के उस बयान के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि ICC की सुरक्षा टीम ने ढाका की चिंताओं को सही ठहराया है और भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों व समर्थकों के लिए खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है। गौरतलब है कि बांग्लादेश को टी20 विश्व कप 2026 में भारत में चार मैच खेलने हैं।

ICC ने सोमवार, 12 जनवरी की शाम जारी बयान में इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ICC के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि स्वतंत्र सुरक्षा जांच रिपोर्ट में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है, जिससे यह कहा जा सके कि बांग्लादेश के मैचों को भारत से हटाने की जरूरत है। सूत्र ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में किसी विशेष खिलाड़ी, जैसे तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान, को लेकर कोई अतिरिक्त खतरे की बात नहीं कही गई है।

ICC के अनुसार सुरक्षा जोखिम को ‘लो टू मोडरेट’ यानी कम से मध्यम स्तर का आकलन किया गया है, जो किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन के लिहाज से सामान्य माना जाता है। इसका मतलब है कि भारत में सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों और दर्शकों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे, ताकि बांग्लादेशी टीम बिना किसी डर के अपने सभी मुकाबले खेल सके।

दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ था जब बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने दावा किया था कि ICC की सुरक्षा रिपोर्ट में भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों और समर्थकों के लिए खतरे की बात कही गई है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि टीम में मुस्ताफिजुर रहमान शामिल होते हैं या समर्थक टीम की जर्सी पहनते हैं तो जोखिम और बढ़ सकता है। इसी आधार पर बांग्लादेश ने ICC से अपने मैच भारत से बाहर कराने का अनुरोध किया था।

हालांकि ICC के सूत्रों ने साफ कहा कि नजरुल के बयान में सुरक्षा रिपोर्ट के कुछ हिस्सों को चुनकर पेश किया गया और उनका गलत तरीके से अर्थ निकाला गया। ICC ने दोहराया है कि बांग्लादेश के मैच तय कार्यक्रम के अनुसार भारत में ही कराए जाएंगे।


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