टोल प्लाजा पर अब नहीं चलेगा कैश! 1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम, इन 3 बातों में मिलेगी बड़ी राहत

अगर आप हाईवे पर यात्रा करते हैं, तो 1 अप्रैल से टोल चुकाने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। लंबी कतारें, खुले पैसे को लेकर होने वाली बहस और टोल बूथ पर रुकने की मजबूरी अब बीते दिनों की बात होने वाली है। सरकार ने तय किया है कि 1 अप्रैल से देशभर के सभी टोल प्लाजा पूरी तरह कैशलेस होंगे और टोल टैक्स का भुगतान केवल FASTag या UPI के जरिए ही किया जा सकेगा।

इस संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने एक इंटरव्यू में जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य टोल बूथ पर लगने वाले ट्रैफिक जाम को खत्म करना और यात्रियों को निर्बाध सफर का अनुभव देना है।

25 टोल प्लाजा पर चल रहा ट्रायल

सरकार इस व्यवस्था को देशभर में लागू करने से पहले इसका परीक्षण कर रही है। फिलहाल 25 टोल प्लाजा पर ‘नो-स्टॉप’ कैशलेस टोलिंग सिस्टम का ट्रायल चल रहा है। हालांकि अभी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि 1 अप्रैल से यह नियम पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।

जाम और समय की बर्बादी से मिलेगी राहत

भले ही FASTag अनिवार्य है, लेकिन अभी भी कई टोल प्लाजा पर नकद भुगतान होता है। जिन वाहनों में डिजिटल भुगतान की सुविधा नहीं होती, उनके कारण लंबी लाइनें लग जाती हैं। कैशलेस व्यवस्था लागू होने के बाद वाहनों को टोल पर रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे जाम की समस्या कम होगी और यात्रा ज्यादा तेज व सुगम बनेगी।

सरकार के फैसले के पीछे 3 अहम कारण

सरकार इस बदलाव के जरिए कई बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहती है। पहला, टोल पर रुकने और चलने से होने वाली ईंधन की बर्बादी कम होगी। दूसरा, सभी लेनदेन डिजिटल होने से टोल कलेक्शन में पारदर्शिता आएगी और गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म होगी। तीसरा, भुगतान में लगने वाला समय बचेगा, जिससे सफर तेज होगा।

बैरियर-फ्री टोलिंग की ओर बढ़ता कदम

कैश भुगतान को खत्म करना सरकार के मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। भविष्य में हाईवे पर फिजिकल टोल नाके हटाए जाएंगे और कैमरे व सेंसर की मदद से बिना रुके ही टोल अपने आप कट जाएगा।

ड्राइवरों के लिए जरूरी सलाह

1 अप्रैल से पहले अपने FASTag का बैलेंस और अकाउंट की स्थिति जरूर जांच लें। जिनके पास FASTag नहीं है, उन्हें UPI पेमेंट की सुविधा सक्रिय रखनी चाहिए। नियम लागू होने के बाद डिजिटल भुगतान की व्यवस्था न होने पर जुर्माना भरना पड़ सकता है या टोल प्लाजा से वापस भी लौटाया जा सकता है।


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3 लाख का वॉटर प्यूरीफायर लेकर इंदौर पहुंचे शुभमन गिल, दूषित पानी से डरी टीम इंडिया

भारतीय क्रिकेट टीम तीसरे और निर्णायक मुकाबले के लिए इंदौर पहुंच चुकी है। हाल के दिनों में इंदौर देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जिसकी वजह यहां का दूषित पानी है। इस पानी को पीने से कई लोगों की मौत हो चुकी है और मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। ऐसे में टीम इंडिया भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) भी इस मुद्दे को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता।

टीम इंडिया इंदौर के एक फाइव-स्टार होटल में ठहरी है, जहां आमतौर पर स्वच्छता और हाइजीन के उच्च मानकों का पालन किया जाता है। टीम के आगमन को देखते हुए होटल प्रबंधन ने भी अतिरिक्त इंतजाम किए हैं। इसके बावजूद, खिलाड़ियों और टीम मैनेजमेंट के बीच पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है।

3 लाख का प्यूरीफायर

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, शुभमन गिल दूषित पानी से बचने के लिए अपने साथ करीब तीन लाख रुपये का अत्याधुनिक वाटर प्यूरीफायर लेकर इंदौर पहुंचे हैं। यह प्यूरीफायर न सिर्फ आरओ पानी, बल्कि बोतलबंद पानी को भी दोबारा शुद्ध करने में सक्षम है। गिल ने इस मशीन को अपने होटल के कमरे में इंस्टॉल करवाया है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जब इस विषय पर टीम इंडिया के मीडिया मैनेजर से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

होटल में पीने के सुरक्षित पानी के कई विकल्प मौजूद हैं, जिनमें आरओ और पैक्ड बोतलबंद पानी शामिल है। इसके बावजूद टीम इंडिया किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। पानी को लेकर भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली पहले से ही काफी सतर्क रहते हैं और वे आमतौर पर फ्रांस से आयातित इवियान नैचुरल स्प्रिंग वाटर का ही सेवन करते हैं।

क्या है पूरा मामला

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट में 15 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन मुआवजा 21 परिवारों को दिया गया है। फिलहाल छह मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, एक को जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया है, जबकि तीन मरीज अभी भी वेंटिलेटर पर हैं। इस घटना के बाद राज्य सरकार को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है।


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कर्तव्य पथ पर पहली बार बैक्ट्रियन ऊंट, गणतंत्र दिवस रिहर्सल में दिखा सेना का शौर्य

इस बार गणतंत्र दिवस परेड में देश की सैन्य शक्ति, भौगोलिक विविधता और साहसिक कौशल का ऐसा भव्य प्रदर्शन देखने को मिलेगा, जो पहले कभी नजर नहीं आया। कर्तव्य पथ पर परेड की रिहर्सल जारी है, जहां भारतीय सेना के अनुशासन, कौशल और पराक्रम की झलक साफ दिखाई दे रही है। दैनिक जागरण के छायाकार ध्रुव कुमार द्वारा ली गई तस्वीरों के जरिए रिहर्सल के इन खास पलों को देखा जा सकता है।

कर्तव्य पथ पर होने वाली इस ऐतिहासिक परेड में भारतीय सेना की ताकत केवल आधुनिक हथियारों और टुकड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दुर्गम इलाकों में सेवा देने वाले विशेष पशु दस्तों और रोमांचक करतबों के माध्यम से भी सामने आएगी। इस वर्ष परेड की सबसे बड़ी खासियत लद्दाख के डबल-हंप यानी दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंटों की पहली बार भागीदारी है। ये ऊंट भारतीय सेना के पशु दस्ते का हिस्सा हैं और लद्दाख जैसे अत्यंत ठंडे और दुर्गम क्षेत्रों में रसद आपूर्ति, गश्त और सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाते हैं।

अपनी असाधारण सहनशक्ति के लिए प्रसिद्ध बैक्ट्रियन ऊंट माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम करने में सक्षम हैं। जब ये ऊंट कर्तव्य पथ पर मार्च करेंगे, तो यह नज़ारा न सिर्फ दर्शकों को रोमांचित करेगा, बल्कि भारत की भौगोलिक विविधता और सेना की अद्भुत अनुकूलन क्षमता का भी सशक्त संदेश देगा।

इस बार परेड में एक और नया आकर्षण भी देखने को मिलेगा। पहली बार डॉग स्क्वॉड दस्ता गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनेगा, जो सैन्य अनुशासन, प्रशिक्षण और समन्वय का प्रभावशाली प्रदर्शन करेगा। इसके साथ ही मोटरसाइकिल पर सवार जवान अपने साहसिक और जोखिम भरे करतबों से दर्शकों को रोमांचित करेंगे। तेज रफ्तार में संतुलन साधते हुए और एक-दूसरे के ऊपर खड़े होकर हैरतअंगेज संरचनाएं बनाते जवानों के करतब हर किसी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देंगे।

कुल मिलाकर, इस बार की गणतंत्र दिवस परेड केवल पारंपरिक सैन्य मार्च तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शौर्य, शक्ति, साहस और नवाचार का एक जीवंत उत्सव बनकर उभरेगी, जो हर भारतीय के मन में गर्व की अनुभूति कराएगी।


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पीएम मोदी ने देश को दी पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के मालदा से देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन हावड़ा से गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच चलेगी और लंबी दूरी की रेल यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ेगी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने मालदा में आयोजित एक प्रशासनिक कार्यक्रम के दौरान 3,250 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई रेल और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी।

इसके अलावा पीएम मोदी ने चार अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई। ये ट्रेनें उत्तर बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ेंगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।

अब तक वंदे भारत ट्रेनों में चेयर कार की सुविधा थी, लेकिन पहली बार स्लीपर वर्जन को यात्रियों के लिए पेश किया गया है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति के लिए डिजाइन किया गया है, हालांकि इसके 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से परिचालन की संभावना है। यह ट्रेन कोलकाता के पास हावड़ा और गुवाहाटी के कामाख्या जंक्शन के बीच यात्रा समय को लगभग ढाई घंटे तक कम कर देगी।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पूरी तरह वातानुकूलित और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस वंदे भारत स्लीपर ट्रेन किफायती किराए पर हवाई यात्रा जैसा अनुभव प्रदान करेगी। इससे लंबी दूरी की यात्राएं न केवल तेज और सुरक्षित होंगी, बल्कि अधिक आरामदायक भी बनेंगी। साथ ही, इस ट्रेन के शुरू होने से धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में एर्गोनॉमिक डिजाइन वाले बर्थ दिए गए हैं, जिन्हें विश्वस्तरीय सस्पेंशन सिस्टम का सहारा मिला है ताकि यात्रियों को झटकों से मुक्त आरामदायक सफर मिल सके। ट्रेन में उन्नत कीटाणुनाशक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो 99 प्रतिशत तक कीटाणुओं को नष्ट करने में सक्षम है। यात्रियों को साफ चादरें और तौलिए उपलब्ध कराए जाएंगे। सुरक्षा के लिहाज से ट्रेन में स्वचालित स्लाइडिंग दरवाजे लगाए गए हैं, जो स्टेशन पर पहुंचने पर ही खुलेंगे।

ट्रेन में आधुनिक टॉयलेट भी दिए गए हैं, जिनमें सेंसर आधारित नल लगे हैं और सफाई के लिए बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं। आपात स्थिति में यात्रियों की सहायता के लिए इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट भी लगाई गई है, जिसके जरिए यात्री ट्रेन मैनेजर और लोको पायलट से सीधे संपर्क कर सकेंगे।

भारतीय रेलवे ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया भी तय कर दिया है। हावड़ा–गुवाहाटी मार्ग पर 3AC का किराया 2,300 रुपये रखा गया है, जिसमें भोजन शामिल होगा। 2AC के लिए किराया 3,000 रुपये और 1AC के लिए 3,600 रुपये निर्धारित किया गया है।


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26 जनवरी से पहले बांग्लादेशी आतंकी हमले की आशंका, दिल्ली समेत कई राज्यों में अलर्ट

गणतंत्र दिवस समारोह (26 जनवरी) से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने एक अहम अलर्ट जारी किया है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, खालिस्तानी आतंकी संगठनों और बांग्लादेश स्थित आतंकवादी समूहों की ओर से दिल्ली सहित देश के कई प्रमुख शहरों को निशाना बनाने की साजिश रची जा सकती है। इसी को देखते हुए विभिन्न राज्यों में सतर्कता बढ़ा दी गई है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

इंटेलिजेंस इनपुट में यह भी सामने आया है कि पंजाब के कुछ गैंगस्टर विदेश में सक्रिय खालिस्तानी और कट्टरपंथी हैंडलर्स के लिए ‘फुट सोल्जर’ के तौर पर काम कर रहे हैं। आरोप है कि ये हैंडलर्स अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने और देश की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के लिए आपराधिक नेटवर्क का सहारा ले रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये गैंगस्टर हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में सक्रिय हैं और धीरे-धीरे खालिस्तानी आतंकी तत्वों के साथ अपने संपर्क मजबूत कर रहे हैं। इसी वजह से संबंधित राज्यों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।


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कोहली का रिकॉर्ड खतरे में! वैभव सूर्यवंशी रचने जा रहे नया अंडर-19 इतिहास

14 वर्षीय प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी के लिए यूएसए के खिलाफ क्वींस स्पोर्ट्स क्लब में खेला गया अंडर-19 विश्व कप का पहला मुकाबला यादगार नहीं रहा। बारिश से प्रभावित इस मैच में वैभव चार गेंदों में केवल दो रन बनाकर आउट हो गए। इस मुकाबले से पहले वह अंडर-19 वनडे क्रिकेट में भारत के लिए सर्वाधिक रन बनाने वालों की सूची में विराट कोहली को पीछे छोड़ने से महज छह रन दूर थे, लेकिन इस पारी के बाद उन्हें इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए कम से कम एक और मैच का इंतज़ार करना होगा। फिलहाल वैभव के नाम 19 अंडर-19 वनडे मुकाबलों में 975 रन दर्ज हैं और कोहली के 978 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने के लिए उन्हें अब सिर्फ चार रन की जरूरत है।

मैच के दौरान वैभव भारतीय मूल के तेज गेंदबाज़ ऋत्विक अप्पिडी के तीसरे ओवर की दूसरी गेंद पर आउट हुए। बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने ऑन-साइड में बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद उनके बल्ले और पैड के बीच से निकलते हुए स्टंप्स में जा लगी। विकेट लेने के बाद अप्पिडी ने आक्रामक अंदाज़ में जश्न मनाया, जबकि वैभव निराश होकर सिर झुकाए मैदान से बाहर लौटे।

हालांकि, वैभव सूर्यवंशी का अब तक का करियर किसी हाइलाइट रील से कम नहीं रहा है। आईपीएल 2025 में राजस्थान रॉयल्स के लिए उन्होंने 38 गेंदों में शतक जड़ा, वहीं पुरुषों के लिस्ट-ए क्रिकेट में 59 गेंदों में सबसे तेज 150 रन बनाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। इसके अलावा वह भारत का दूसरा सबसे बड़ा यूथ वनडे स्कोर—95 गेंदों में 171 रन—भी लगा चुके हैं। एशिया कप राइजिंग स्टार्स टी20 में यूएई के खिलाफ 42 गेंदों में 144 रन की विस्फोटक पारी ने उनकी प्रतिभा पर और मुहर लगाई है। लेकिन आंकड़ों से परे, उनके करीबी मानते हैं कि उनके खेल में आया मानसिक बदलाव इस टूर्नामेंट में निर्णायक साबित हो सकता है।

पटना की जेननेक्स क्रिकेट अकादमी में उनके कोच मनीष ओझा, जिन्होंने दस साल की उम्र में वैभव की प्रतिभा को पहचाना था, मानते हैं कि आईपीएल 2025 के बाद उनका खेल काफी परिपक्व हुआ है। समस्तीपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर रहने वाले ओझा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “मैंने उनके गेम सेंस में बड़ा बदलाव देखा है। वह पहले भी आक्रामक थे, लेकिन अब उनका आत्मविश्वास कहीं ज्यादा मजबूत है। वह अच्छी गेंदों को भी बाउंड्री के पार भेज सकते हैं और पहली गेंद से ही गेंदबाज़ पर दबाव बनाते हैं। ज़रूरत पड़ने पर वह आक्रामक होने से पहले समय लेना भी जानते हैं।”

ओझा के अनुसार वैभव अब खेल को दो-तीन आयामों से देखते हैं। “उनकी मानसिकता पहले से ज्यादा संतुलित और सकारात्मक हो गई है। टी20 और 50 ओवर के मैचों में वह आक्रामक रहते हैं, जबकि रेड-बॉल क्रिकेट में धैर्य दिखाते हैं। अलग-अलग तरह की गेंदों के खिलाफ उनका शॉट चयन बेहतर हुआ है और अब वह बेहतर तरीके से आंकलन करते हैं कि किन गेंदों पर बड़ा शॉट खेला जा सकता है। उनके छक्के भी अब पहले से ज्यादा लंबे और ताकतवर हो गए हैं,” ओझा ने कहा।


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घने कोहरे की चादर में ढका उत्तर भारत

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में हुई भारी बर्फबारी का असर अब मैदानी क्षेत्रों तक साफ दिखाई देने लगा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत करीब 12 राज्यों में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश के 53 शहरों में घना कोहरा छाया हुआ है। कानपुर, गोरखपुर और वाराणसी में दृश्यता शून्य तक पहुंच गई, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ठंड के चलते नोएडा, ग्रेटर नोएडा, सहारनपुर, बदायूं और संभल में कक्षा आठ तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में भी तापमान रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। अमृतसर में सुबह सात बजे तक कोहरे के कारण दृश्यता शून्य रही, जबकि दिल्ली में कई इलाकों में विजिबिलिटी 20 मीटर से भी कम दर्ज की गई। मध्य प्रदेश के मंदसौर में न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस, हरियाणा के भिवानी में 1.5 डिग्री और पंजाब के नवांशहर में पारा 0.9 डिग्री तक गिर गया। उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में नदियां, झरने और जलस्रोत जम गए हैं, वहीं कई जगह पाइपलाइनों में पानी जमने की घटनाएं सामने आई हैं। कश्मीर घाटी में भी ठंड का प्रकोप जारी है, जहां श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 1.5 डिग्री और पुलवामा में माइनस 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी और चमोली में नदियां और झरने जम चुके हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार 17 जनवरी को उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। वहीं हिमाचल प्रदेश में लाहौल-स्पीति और चंबा की ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी दर्ज की गई है। कांगड़ा, चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है और अगले छह दिनों तक बर्फबारी व हल्की बारिश के आसार बने हुए हैं।

उत्तर प्रदेश में सीजन का सबसे घना कोहरा देखने को मिल रहा है। लखनऊ, कानपुर सहित 53 जिलों में सुबह के समय विजिबिलिटी बेहद कम रही। पिछले 24 घंटों में आजमगढ़, कानपुर, अयोध्या और हरदोई सबसे ठंडे जिले रहे, जहां न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बिहार में भी ठंड का असर बरकरार है। राज्य के 10 जिलों में न्यूनतम तापमान 8 डिग्री से नीचे बना हुआ है, जबकि भागलपुर का सबौर सबसे ठंडा रहा, जहां पारा 5 डिग्री तक गिर गया।

छत्तीसगढ़ में दो दिन की राहत के बाद ठंड फिर बढ़ गई है। अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 3.9 डिग्री और रायपुर के माना इलाके में 7.8 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में शीतलहर की चेतावनी जारी की है। राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम में बदलाव के संकेत हैं। उत्तर-पश्चिमी जिलों में बादल छाने और 22–23 जनवरी को हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। शुक्रवार को राज्य के 10 शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया, जबकि हनुमानगढ़ और अलवर के ग्रामीण इलाकों में पाला पड़ने से ओस जम गई।

पंजाब और हरियाणा में भी मौसम का मिजाज बदल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 18 जनवरी से बारिश की संभावना है, जबकि हरियाणा में 17 जनवरी को बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। भिवानी राज्य का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक 18 और 19 जनवरी को भी उत्तर भारत में सर्दी और घना कोहरा बना रहेगा। सुबह और शाम के समय दृश्यता कम रहेगी, जबकि पहाड़ी इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी के आसार बने रहेंगे।


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महाराष्ट्र निकाय चुनाव परिणाम: 29 नगर निगम, 2869 सीटों का फैसला

महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी को बड़ी बढ़त मिलती नजर आ रही है। नगर निकाय चुनावों में कुल 2,869 सीटों के लिए हो रही गिनती में बीजेपी गठबंधन एकतरफा जीत की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में भी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनती नजर आ रही है, जबकि उसकी सहयोगी शिवसेना (यूबीटी) ने भी कई नगर निगमों में मजबूत प्रदर्शन किया है। मुंबई, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पनवेल, लातूर और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे प्रमुख शहरों के रुझान और नतीजों पर सबकी नजर बनी हुई है।

रुझानों के मुताबिक 29 में से 24 नगर निगमों में बीजेपी गठबंधन को बढ़त हासिल है। बृहन्मुंबई नगर निगम में बीजेपी–शिवसेना गठबंधन 227 सीटों में से 118 सीटों पर आगे चल रहा है। इसके अलावा नागपुर, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पिंपरी-चिंचवड़ और नासिक नगर निगमों में भी बीजेपी गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिली हुई है। वहीं लातूर और चंद्रपुर नगर निगमों में कांग्रेस आगे चल रही है। परभणी नगर निगम में शिवसेना (यूबीटी) को बढ़त हासिल है, जबकि वसई-विरार में बहुजन विकास आघाड़ी (VBA) और मालेगांव में शिवसेना (शिंदे गुट) आगे चल रही है।


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राजधानी पर 4 डिग्री का टॉर्चर! घने कोहरे में डूबी दिल्ली, हवा ‘बहुत खराब’

शनिवार सुबह राजधानी के कई इलाकों में मध्यम से घना कोहरा छाया रहा, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हुआ। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुबह साढ़े छह बजे दृश्यता घटकर करीब 350 मीटर रह गई, जबकि सुबह नौ बजे इसमें कुछ सुधार हुआ और दृश्यता 500 मीटर दर्ज की गई। सफदरजंग में हालात और खराब रहे, जहां सुबह साढ़े छह बजे दृश्यता 250 मीटर रही, जो नौ बजे घटकर 200 मीटर तक पहुंच गई। राजधानी के अन्य कई क्षेत्रों में भी घने कोहरे के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं कुछ उड़ानों और ट्रेनों की आवाजाही पर भी असर पड़ा। मौसम विभाग ने कोहरे को लेकर यलो अलर्ट जारी किया था।

ठंड का असर भी बरकरार रहा। राजधानी में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। दिन के समय आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है।

प्रदूषण के मोर्चे पर भी हालात गंभीर बने हुए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर ऐप के अनुसार सुबह नौ बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 376 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। राजधानी के 14 इलाकों में AQI 400 से अधिक यानी ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज हुआ। इनमें आनंद विहार सबसे अधिक प्रदूषित रहा, जहां AQI 451 मापा गया। मौसम विभाग के अनुसार दिनभर राजधानी की हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बने रहने की आशंका है।


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14,000 बसें, 36,000 EV चार्जर और लैंडफिल सुधार—प्रदूषण नियंत्रण पर दिल्ली सरकार का 4 साल का एक्शन प्लान

दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए चार वर्षों का एक व्यापक और डेडलाइन-आधारित एक्शन प्लान पेश किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया गया कि सरकार साल के 12 महीने, सातों दिन प्रदूषण नियंत्रण पर काम कर रही है और सभी संबंधित विभागों को तय समयसीमा के अनुसार लक्ष्यों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने इसे एक “लंबी लड़ाई” बताते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य अगले चार वर्षों में पीएम2.5 के स्तर में प्रभावी और स्थायी कमी लाना है। सरकार के अनुसार बजट या प्रक्रियागत बाधा नहीं है और केंद्र सरकार के साथ निरंतर समन्वय बना हुआ है।

इस एक्शन प्लान का मुख्य फोकस सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर है। दिल्ली के बस बेड़े को मौजूदा संख्या से बढ़ाकर मार्च 2029 तक 14,000 बसों तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसमें 500 छोटी, सात मीटर लंबी बसें शामिल होंगी, जिन्हें घनी आबादी वाले इलाकों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए तैनात किया जाएगा। इन बसों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा जनवरी 2026 तक 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर ई-ऑटो, बाइक टैक्सी और फीडर कैब को जोड़ने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। फिलहाल 100 इलेक्ट्रिक फीडर बसें पहले से ही सेवा में हैं।

प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने दिल्ली में 62 ट्रैफिक कंजेशन हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं, जिनमें से 30 स्थानों पर सुधार कार्य शुरू हो चुका है। जमीनी स्तर पर ट्रैफिक प्रबंधन को मजबूत करने के लिए 1,200 अतिरिक्त डीटीसी कर्मियों को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ तैनात किया गया है, ताकि जाम और उससे होने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सके।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई ईवी पॉलिसी 2.0 लाई गई है, जिसमें दिल्ली के लगभग 58 लाख दोपहिया वाहनों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इंसेंटिव और स्क्रैपेज लाभ दिए जाएंगे, साथ ही चार्जिंग नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाएगा।

सड़क की खराब स्थिति और धूल प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने 3,300 किलोमीटर सड़कों के पुनर्निर्माण और उन्नयन के लिए 6,000 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। इसमें पीडब्ल्यूडी, एमसीडी और अनधिकृत कॉलोनियों की सड़कें शामिल हैं। योजना के तहत पक्के कंधे, हरित मीडियन और भूमिगत यूटिलिटी डक्ट बनाए जाएंगे, ताकि बार-बार सड़क खुदाई की समस्या खत्म हो सके। टेंडर दो महीने में जारी करने और एक साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए मेट्रो और आरआरटीएस नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। वर्तमान में 395 किलोमीटर लंबे दिल्ली मेट्रो नेटवर्क को आगामी चरणों में 206 किलोमीटर और बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार फेज-4 पूरा होने के बाद मेट्रो की राइडरशिप दोगुनी हो सकती है। इसके अलावा एनसीआरटीसी नेटवर्क को अगले चार वर्षों में 323 किलोमीटर तक विस्तार देने की योजना है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी और निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी।

कचरे के पहाड़ों को खत्म करने के लिए सरकार ने लैंडफिल साइट्स के लिए सख्त समयसीमा तय की है। ओखला लैंडफिल को जुलाई 2026, भलस्वा को अक्टूबर 2026 और गाजीपुर को दिसंबर 2027 तक पूरी तरह साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष एमसीडी को कचरा प्रबंधन के लिए 500 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि आगे हर साल 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 2026–27 तक सारा ताजा नगर निगम कचरा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स में प्रोसेस किया जाएगा।

सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए मैकेनाइज्ड सफाई व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी 4,000 करोड़ रुपये की दो बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें 250 स्प्रिंकलर-कम-एंटी-डस्ट मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा 62 हॉटस्पॉट पर मिस्ट स्प्रे सिस्टम लगाए जाएंगे।

उद्योगों से होने वाले प्रदूषण पर सख्ती बढ़ाते हुए अब तक 1,000 से अधिक प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों को सील किया जा चुका है। बड़े उद्योगों को रियल-टाइम एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए हैं। हरित पहल के तहत चार वर्षों में 35 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें इस साल अकेले 14 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही 365 एकड़ क्षेत्र में ब्राउन पार्क विकसित किए जाएंगे। सर्दियों में प्रदूषण कम करने के लिए 15,500 इलेक्ट्रिक हीटर वितरित किए जा रहे हैं, ताकि पराली और बायोमास जलाने पर रोक लगाई जा सके। तेहखंड में एक नया कंस्ट्रक्शन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।

निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए स्मार्ट पार्किंग और प्राइसिंग कंट्रोल की योजना बनाई जा रही है। व्यावसायिक और ट्रांजिट हब्स पर मल्टी-लेवल पार्किंग को बढ़ावा दिया जाएगा। दिल्ली की सीमाओं पर एएनपीआर कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिससे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की स्वतः पहचान की जा सके।

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि यह पूरी योजना सुप्रीम कोर्ट और पीएमओ के साथ साझा की जाएगी। साथ ही पड़ोसी राज्यों के साथ भी समन्वय जारी रहेगा, क्योंकि दिल्ली की वायु गुणवत्ता की समस्या केवल शहर तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर की है।


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