ऑस्कर 2026: भारत के सिनेमा के लिए सुनहरा पल

ऑस्कर फिल्म समारोह का हिस्सा बनना और दुनियाभर की फिल्मों के साथ मुकाबला करना हर फिल्मकार का सपना होता है, लेकिन यह सपना बहुत कम लोगों के लिए सच हो पाता है। इस साल भारत के लिए यह गर्व का क्षण है क्योंकि ऑस्कर 2026 की रेस में देश की 11 फिल्में शामिल हुई हैं। इनमें ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा: ए लेजेंड – चैप्टर 1’ और अनुपम खेर की ‘तन्वी द ग्रेट’ ने बेस्ट पिक्चर कैटेगरी के लिए क्वालिफाई कर लिया है। दोनों फिल्मों ने एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज (AMPAS) के सख्त नियमों को पूरा करते हुए 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए एलिजिबल 201 फीचर फिल्मों की सूची में जगह बनाई है।

एकेडमी के अनुसार, इन फिल्मों ने बेसिक एलिजिबिलिटी के साथ-साथ सभी अतिरिक्त शर्तें भी पूरी की हैं। एलिजिबिलिटी प्रक्रिया के तहत फिल्मों को थिएट्रिकल रन पूरा करना, गोपनीय RAISE फॉर्म जमा करना और एकेडमी के चार इंक्लूजन स्टैंडर्ड्स में से कम से कम दो को पूरा करना अनिवार्य था। इसके अलावा, फिल्मों को अमेरिका के टॉप 50 बाजारों में से कम से कम 10 में 45 दिनों के भीतर क्वालिफाइंग थिएट्रिकल रिलीज़ भी देनी थी।

इससे पहले नवंबर 2025 में एकेडमी ने डॉक्यूमेंट्री, एनिमेटेड और इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी की एलिजिबिलिटी लिस्ट जारी की थी, जिससे कुल एलिजिबल फिल्मों की संख्या 317 हो गई थी। 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए फाइनल नॉमिनेशन 22 जनवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे। इसके बाद ही तय होगा कि 11 में से कौन-सी भारतीय फिल्में फाइनल राउंड तक पहुंच पाती हैं।ऑस्कर फिल्म समारोह का हिस्सा बनना और दुनियाभर की फिल्मों के साथ मुकाबला करना हर फिल्मकार का सपना होता है, लेकिन यह सपना बहुत कम लोगों के लिए सच हो पाता है। इस साल भारत के लिए यह गर्व का क्षण है क्योंकि ऑस्कर 2026 की रेस में देश की 11 फिल्में शामिल हुई हैं। इनमें ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा: ए लेजेंड – चैप्टर 1’ और अनुपम खेर की ‘तन्वी द ग्रेट’ ने बेस्ट पिक्चर कैटेगरी के लिए क्वालिफाई कर लिया है। दोनों फिल्मों ने एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज (AMPAS) के सख्त नियमों को पूरा करते हुए 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए एलिजिबल 201 फीचर फिल्मों की सूची में जगह बनाई है।

एकेडमी के अनुसार, इन फिल्मों ने बेसिक एलिजिबिलिटी के साथ-साथ सभी अतिरिक्त शर्तें भी पूरी की हैं। एलिजिबिलिटी प्रक्रिया के तहत फिल्मों को थिएट्रिकल रन पूरा करना, गोपनीय RAISE फॉर्म जमा करना और एकेडमी के चार इंक्लूजन स्टैंडर्ड्स में से कम से कम दो को पूरा करना अनिवार्य था। इसके अलावा, फिल्मों को अमेरिका के टॉप 50 बाजारों में से कम से कम 10 में 45 दिनों के भीतर क्वालिफाइंग थिएट्रिकल रिलीज़ भी देनी थी।

इससे पहले नवंबर 2025 में एकेडमी ने डॉक्यूमेंट्री, एनिमेटेड और इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी की एलिजिबिलिटी लिस्ट जारी की थी, जिससे कुल एलिजिबल फिल्मों की संख्या 317 हो गई थी। 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए फाइनल नॉमिनेशन 22 जनवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे। इसके बाद ही तय होगा कि 11 में से कौन-सी भारतीय फिल्में फाइनल राउंड तक पहुंच पाती हैं।


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सब्र की परीक्षा लेती है ‘दि राजा साब’, कमजोर कहानी के सहारे चलती फिल्म

प्रभास ने अपनी फिल्म ‘दि राजा साब’ के प्रमोशन के दौरान इसके क्लाइमेक्स को बेहद विस्फोटक बताते हुए इसे मशीन गन की तरह लिखा हुआ कहा था। संभव है कि उन्हें पहले ही यह अंदाजा हो गया हो कि हॉरर–कॉमेडी–फैंटेसी के तौर पर प्रचारित यह फिल्म न तो डर पैदा कर पाती है और न ही हंसाने में सफल होती है। भावनात्मक पक्ष पूरी तरह नदारद है और कमजोर कहानी के चलते दर्शक फिल्म से जुड़ नहीं पाते।

कमजोर पटकथा के कारण प्रभास जैसे बड़े स्टार की मौजूदगी भी फिल्म को डूबने से नहीं बचा पाती। लेखक और निर्देशक मारुति ने धोखा, प्रतिशोध, रोमांस, भ्रम और दिमाग से खेलने जैसे तत्वों को मिलाकर एक ऐसा आइडिया गढ़ने की कोशिश की, जो कागजों पर रोमांचक लगता है, लेकिन पर्दे पर उसका असर नहीं दिखता। नतीजतन, यह फिल्म दर्शकों के धैर्य की कड़ी परीक्षा लेती है।

कहानी की बात करें तो इसकी शुरुआत एक वार्ड बॉय (सत्या) से होती है, जो अस्थियों से भरी हांडी लेकर एक सुनसान और रहस्यमयी हवेली में पहुंचता है। इसके बाद कहानी राजू (प्रभास) के जीवन में प्रवेश करती है, जो अल्जाइमर से पीड़ित अपनी दादी गंगा मां (जरीना वहाब) के साथ रहता है। गंगा को सिर्फ अपने पति कनकराजू (संजय दत्त) की याद है और उन्हें पूरा विश्वास है कि वह अभी जीवित हैं। दादी की जिद पर राजू अपने दादा की तलाश में निकलता है।

इस दौरान उसकी मुलाकात नन बेस्सी (निधि अग्रवाल) और भैरवी (मालविका मोहनन) से होती है। भैरवी के जरिए उसे पता चलता है कि उसके दादा नरसापुर के जंगलों में छिपे हैं। राजू अपने दोस्त और पुलिस कांस्‍टेबल अंकल (वीटीवी गणेश) के साथ रहस्यमयी हवेली पहुंचता है, जहां पहले से वार्ड बॉय कैद है। दादा कहां हैं, उन्होंने परिवार को क्यों छोड़ा और क्या राजू उन्हें दादी से मिला पाएगा—कहानी इन्हीं सवालों के जवाब तलाशती है।

मूल रूप से तेलुगु में बनी यह फिल्म हिंदी सहित अन्य भाषाओं में डब होकर रिलीज हुई है। दादी–पोते के रिश्ते से शुरू हुई कहानी बाद में दादा और पोते के बीच टकराव में बदल जाती है। हिप्नोटिज्म, प्रतिशोध और दुष्ट शक्तियों जैसे तत्वों को मिलाने के बावजूद कहानी अपने मूल मकसद तक पहुंचने में काफी वक्त लेती है। इंटरवल से पहले का हिस्सा बेवजह के रोमांस और खिंचे हुए दृश्यों से भरा है, जिससे दर्शक ऊबने लगते हैं।

मध्यांतर के बाद की कहानी लगभग पूरी तरह हवेली के भीतर सिमट जाती है, जहां न डर का एहसास होता है और न रोमांच का। खलनायक को दुष्ट तो बताया गया है, लेकिन उसकी क्रूरता पर्दे पर प्रभावी ढंग से सामने नहीं आती। भैरवी और उसके नाना का मकसद भी अधूरा लगता है। गाने कहानी में जबरन ठूंसे हुए प्रतीत होते हैं।

प्रभास भले ही फिल्म में स्टाइलिश नजर आते हैं, लेकिन उनके किरदार का लेखन बेहद कमजोर है। हिंदी डबिंग में कई जगह लिप-सिंक की समस्या खटकती है। मालविका मोहनन को एक्शन सीन जरूर मिले हैं, लेकिन उनका किरदार भी प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहता है। निधि अग्रवाल और रिद्धि कुमार केवल शोपीस बनकर रह जाती हैं। संजय दत्त ने खलनायक के रूप में ठीक-ठाक काम किया है, जबकि जरीना वहाब दादी के किरदार में न्याय करती हैं। बमन ईरानी की संक्षिप्त भूमिका असर नहीं छोड़ पाती।

तकनीकी पक्ष की बात करें तो फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर जरूरत से ज्यादा लाउड है। बप्पी लाहिड़ी के मशहूर गीत ‘नाचे-नाचे’ का रीमिक्स सतही लगता है। क्लाइमेक्स के कुछ दृश्य जरूर बेहतर बन पड़े हैं, लेकिन कहानी की बजाय ग्राफिक्स पर जरूरत से ज्यादा फोकस फिल्म को बेस्वाद बना देता है।

कुल मिलाकर, मारुति हॉरर, कॉमेडी, फैंटेसी और इमोशन के बीच संतुलन बनाने में असफल नजर आते हैं। क्लाइमेक्स को छोड़ दिया जाए तो फिल्म में ऐसा बहुत कम है जो देर तक याद रह सके। अंत में पार्ट-2 का संकेत दिया गया है, लेकिन बेहतर होता कि मेकर्स पहले इसी फिल्म को मजबूती से पूरा करते।


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विराट कोहली की नजर सचिन के एक और महारिकॉर्ड पर, पहले ही वनडे में रच सकते हैं इतिहास

भारत और न्‍यूजीलैंड के बीच 11 जनवरी से 3 मैचों की वनडे सीरीज का आगाज होने जा रहा है। सीरीज का पहला मुकाबला वडोदरा के कोटंबी स्थित बीसीए स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मुकाबले में विराट कोहली और रोहित शर्मा एक बार फिर एक्‍शन में नजर आने वाले हैं।

कोहली पिछले साल के अंत तक शानदार फॉर्म में थे। उन्‍होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में 2 शतक और 1 शतक लगाया। इसके बाद विजय हजारे ट्रॉफी में कोहली (131, 77) ने बल्‍ले से आग उगली। कोहली इसी फॉर्म को नए साल में जारी रखना चाहेंगे।

तोड़ सकते तेंदुलकर कर रिकॉर्ड

न्‍यूजीलैंड के खिलाफ पहले ही वनडे में विराट के पास इतिहास रचने का मौका है। इतना ही नहीं उनके निशाने पर सचिन तेंदुलकर का महारिकॉर्ड है। विराट कोहली वनडे में न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय खिलाड़ी बनने से सिर्फ 94 रन दूर हैं। उन्होंने अब तक 33 पारियों में 55.23 के औसत से 1657 रन बनाए हैं।

इस दौरान कोहली ने छह शतक और नौ अर्धशतक जड़े। सचिन तेंदुलकर ने न्‍यूजीलैंड के खिलाफ 41 पारियों में 46.05 के औसत से 1750 रन बनाए थे, जिनमें पांच शतक और आठ अर्धशतक शामिल हैं। वीरेंद्र सहवाग न्यूजीलैंड के खिलाफ सिर्फ 23 पारियों में 52.59 के औसत से 1157 रन बनाकर इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं।

वनडे में न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय

सचिन तेंदुलकर - 1750 रन

विराट कोहली - 1657 रन

वीरेंद्र सहवाग - 1157 रन

मोहम्मद अजहरुद्दीन - 1118 रन

सौरव गांगुली - 1079 रन

एक और रिकॉर्ड पर नजर

विराट कोहली अपने शानदार वनडे करियर में कुछ और उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में 28000 रन पूरे करने से वे सिर्फ 25 रन दूर हैं। कुमार संगकारा को पीछे छोड़कर सभी फॉर्मेट में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बनने से वे सिर्फ 42 रन दूर हैं। उन्होंने अब तक सभी फॉर्मेट में 556 मैचों में 52.58 के औसत से 27975 रन बनाए हैं, जिनमें 84 शतक और 145 अर्धशतक शामिल हैं।

इंटरनेशनल‍ क्रिकेट में सबसे ज्‍यादा रन

सचिन तेंदुलकर: 34357 रन

कुमार संगाकार: 28016 रन

विराट कोहली: 27975 रन

रिकी पोंटिंग: 27483 रन

सनथ जयसूर्या: 25957 रन


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झारखंड में ‘कोल्ड डायरिया’ का अलर्ट, बच्चों में तेजी से फैल रहा रोटा वायरस

कड़ाके की ठंड और गिरते तापमान के बीच झारखंड में मौसमी बीमारियों ने चिंताजनक रूप ले लिया है। इन दिनों बच्चों में रोटा वायरस के कारण होने वाला ‘कोल्ड डायरिया’ तेजी से फैल रहा है। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं, बुजुर्गों में ब्लड प्रेशर और जोड़ों के दर्द की शिकायतें भी गंभीर होती जा रही हैं।

सदर अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. हरीश चंद्र ने लोगों की स्वास्थ्य से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे वे रोटा वायरस की चपेट में आसानी से आ जाते हैं।

डॉ. हरीश चंद्र के अनुसार, बच्चों में रोटा वायरस के प्रमुख लक्षणों में पेट में मरोड़, लगातार उल्टी, बार-बार दस्त और शरीर में पानी की कमी शामिल है। उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को बिना चिकित्सकीय परामर्श के कोई दवा न दें। उन्हें लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें और गर्म कपड़े पहनाकर रखें। साथ ही छोटे बच्चों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें।

ठंड का असर बुजुर्गों और पहले से बीपी व शुगर से पीड़ित मरीजों पर भी ज्यादा पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों में शरीर की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर के मरीजों को सुबह उठते ही ठंडी हवा या ठंडे पानी के संपर्क में आने से बचना चाहिए और नहाने के लिए गुनगुने पानी का उपयोग करना चाहिए। वहीं, मधुमेह के मरीजों को सर्दियों में भी हल्का व्यायाम जारी रखना चाहिए और खान-पान में फाइबर युक्त भोजन को शामिल करना चाहिए।

विशेषज्ञों ने सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की भी सलाह दी है। धूप निकलने पर विटामिन-डी के लिए कुछ देर धूप में बैठें। कपड़ों की लेयरिंग करें, यानी एक भारी स्वेटर की बजाय दो-तीन हल्के गर्म कपड़े पहनें। आहार में बाजरा, मकई और रागी जैसे मोटे अनाज शामिल करें, पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीते रहें और रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें। डॉक्टरों का कहना है कि छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर सर्दी के मौसम में बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।


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अब प्रदूषण पर लगेगी लगाम! भारत बनाएगा स्वदेशी एयर पॉल्यूशन मॉनिटरिंग डिवाइस

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत ने एक अहम कदम उठाया है, जिससे विदेशी सर्टिफिकेशन प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी। CSIR–नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) में दुनिया की दूसरी नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड लेबोरेटरी (NESL) की स्थापना की गई है। फिलहाल इस तरह की प्रयोगशाला केवल ब्रिटेन में मौजूद है।

यह लेबोरेटरी देश में वायु प्रदूषण मॉनिटरिंग उपकरणों के लिए अत्याधुनिक टेस्टिंग और कैलिब्रेशन सुविधाएं विकसित करेगी। वर्तमान में भारत में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश एयर पॉल्यूशन मॉनिटरिंग उपकरण आयात किए जाते हैं, जो विदेशी मानकों पर आधारित होते हैं।

CSIR-NPL के वैज्ञानिकों के अनुसार, ये आयातित उपकरण यूरोप या अमेरिका की पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप सर्टिफिकेशन के साथ आते हैं। चूंकि इन देशों की जलवायु और प्रदूषण से जुड़ी स्थितियां भारत से काफी अलग हैं, इसलिए भारतीय परिस्थितियों में लंबे समय तक इनके उपयोग से माप की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को CSIR-NPL के 80वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर NESL का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह नई प्रयोगशाला न केवल विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों से उत्पन्न मापन संबंधी गड़बड़ियों से निपटने में मदद करेगी, बल्कि देश में मानकीकृत और विश्वसनीय वायु प्रदूषण निगरानी उपकरणों के निर्माण को भी बढ़ावा देगी।


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फोन कॉल न होने से अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील, ट्रंप का फैसला

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील इसलिए आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। यह दावा अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक ने किया है। लटनिक ने एक पॉडकास्ट में कहा कि उन्होंने ट्रेड डील की रूपरेखा तैयार कर ली थी, लेकिन अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप से सीधे बात करनी थी, जिसे लेकर भारत असहज था। इसी वजह से फोन कॉल नहीं हो सका और डील आगे नहीं बढ़ पाई।

लटनिक यह बयान ‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ में दे रहे थे, जिसे सिलिकॉन वैली के चार वेंचर कैपिटलिस्ट और उद्यमी होस्ट करते हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्होंने अन्य देशों के साथ व्यापारिक बातचीत को प्राथमिकता दी, क्योंकि उन्हें भरोसा था कि भारत के साथ समझौता तो आसानी से हो जाएगा। हालांकि बाद में भारत ने बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही, जिस पर लटनिक ने कहा कि तब तक परिस्थितियां बदल चुकी थीं।

लटनिक के अनुसार, जिन शर्तों पर भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को अंतिम रूप दिया जाना था, वे अब बातचीत की मेज पर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका उस समझौते से पीछे हट चुका है, जिस पर पहले सहमति बनी थी और अब उस डील पर विचार भी नहीं किया जा रहा है।

लटनिक के ये बयान ऐसे समय में सामने आए हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दी है। इस कानून के तहत ट्रंप को रूस के व्यापारिक साझेदार देशों पर प्रतिबंध लगाने का व्यापक अधिकार मिल गया है। रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में भारत, चीन और ब्राजील शामिल हैं। इस विधेयक के अनुसार, यदि कोई देश रूस से तेल, पेट्रोलियम उत्पाद या यूरेनियम की खरीद जारी रखता है, तो अमेरिका उस देश से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है।


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कुत्तों के नियमों पर सिंघवी का बयान, बोले—कोर्ट दखल न दे

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 9 जनवरी को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर को कड़ी फटकार लगाते हुए उनके तर्कों को वास्तविकता से परे बताया। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर दिए गए सुझाव जमीनी हालात को नहीं दर्शाते।

सुनवाई के दौरान शर्मिला टैगोर की ओर से पेश वकील ने सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान को लेकर कुछ सुझाव रखे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मुद्दे को भावनाओं के बजाय व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखे जाने की जरूरत है।

शर्मिला टैगोर की ओर से दलील दी गई कि कुछ कुत्तों को ‘सुलाना’ आवश्यक हो सकता है, लेकिन उससे पहले एक विशेषज्ञ समिति द्वारा यह तय किया जाना चाहिए कि वे आक्रामक हैं या नहीं। वकील ने AIIMS परिसर में कई वर्षों से रह रहे एक शांत स्वभाव के कुत्ते का उदाहरण देते हुए कुत्तों के व्यवहार के अध्ययन के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का सुझाव भी दिया।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल किया कि क्या उस कुत्ते को अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में भी ले जाया जा रहा था। कोर्ट ने कहा कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों में कीड़े-मकोड़ों का होना स्वाभाविक है और ऐसे कुत्तों का अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों में मौजूद होना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

कोर्ट ने आगे कहा कि इस तरह के उदाहरण जमीनी सच्चाई को नजरअंदाज करते हैं और आवारा कुत्तों की समस्या को हल करने के लिए व्यावहारिक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।


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मद्रास हाईकोर्ट ने ‘Jana Nayagan’ पर सुनाया बड़ा फैसला

सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर चले हाई-स्टेक ड्रामे के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को अभिनेता विजय की फिल्म ‘जना नायगन’ के लिए UA सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया। यह फिल्म विजय की आखिरी फिल्म बताई जा रही है, जिसके बाद वह पूरी तरह से अपने राजनीतिक करियर पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आवश्यक बदलाव किए जाने के बाद सर्टिफिकेट जारी किया जाए। फिल्म ‘जना नायगन’ की मूल रिलीज डेट 9 जनवरी तय थी। सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट ने सेंसर बोर्ड की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की शिकायतों पर ध्यान देना एक खतरनाक परंपरा बनती जा रही है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ‘जना नायगन’ के खिलाफ की गई शिकायत सुनियोजित प्रतीत होती है।

मद्रास हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म को दोबारा CBFC की रिव्यू पैनल के पास नहीं भेजा जाएगा। कोर्ट ने बुधवार, 7 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और शुक्रवार को मामले की सुनवाई की गई। सुनवाई के बाद मेकर्स ने फिल्म की रिलीज टालने का फैसला किया।

फिल्म के प्रोडक्शन हाउस KVN प्रोडक्शंस ने कोर्ट का रुख किया था, क्योंकि फिल्म को एक महीने से अधिक समय पहले सबमिट करने के बावजूद CBFC से सर्टिफिकेट नहीं मिला था। 19 दिसंबर को बोर्ड ने कुछ दृश्यों में कट लगाने और कुछ डायलॉग म्यूट करने के सुझाव दिए थे, जिनका पालन किए जाने का दावा मेकर्स ने किया।

बुधवार देर रात मेकर्स ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक बयान जारी कर फिल्म की रिलीज टाले जाने की जानकारी दी। बयान में कहा गया कि कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण 9 जनवरी को रिलीज होने वाली ‘जना नायगन’ को फिलहाल स्थगित किया गया है। मेकर्स ने दर्शकों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि नई रिलीज डेट जल्द घोषित की जाएगी।

फिल्म के पोस्टपोन होते ही टिकटों का रिफंड भी शुरू कर दिया गया। यूके डिस्ट्रीब्यूटर अहिंसा एंटरटेनमेंट ने इसकी पुष्टि की। थिएटर मालिकों के अनुसार, ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले दर्शकों को ऑटोमैटिक रिफंड मिलेगा, जबकि काउंटर से टिकट खरीदने वाले दर्शक थिएटर जाकर रिफंड ले सकते हैं।

कोर्ट की कार्यवाही के अनुसार, CBFC के सदस्यों ने शुरुआत में फिल्म में दिखाए गए अत्यधिक हिंसक दृश्यों पर आपत्ति जताई थी। इसके अलावा कुछ दृश्यों में डिफेंस एम्बलम के कथित इस्तेमाल को लेकर स्पष्टीकरण और आधिकारिक अनुमति की मांग की गई थी। इन्हीं आपत्तियों के चलते फिल्म के सर्टिफिकेशन में देरी हुई।

प्रोड्यूसर्स द्वारा कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, हिंसा से जुड़े कट्स के बाद 22 दिसंबर 2025 को उन्हें सूचित किया गया था कि फिल्म को UA सर्टिफिकेट दिया जाएगा। एच. विनोद के निर्देशन में बनी ‘जना नायगन’ में पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, मामिथा बैजू, गौतम वासुदेव मेनन, प्रियामणि और नारायण अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।


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जेल वार्डर बनने का मौका, आज से शुरू हुए आवेदन

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर जेल वार्डर के पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया आज से शुरू कर दी गई है। जो उम्मीदवार झारखंड में जेल वार्डर के पदों पर नौकरी करना चाहते हैं। उन उम्मीदवारों के लिए यह एक सुनहरा मौका है। उम्मीदवार जेल वार्डर के पदों पर 09 जनवरी से आवेदन कर सकते हैं।

बता दें, जेल वार्डर के कुल 1733 पदों पर भर्ती निकली है। इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार 08 फरवरी, 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। साथ ही फॉर्म में सुधार के लिए करेक्शन विंडो 11 से 13 फरवरी के बीच एक्टिव की जाएगी।

कौन कर सकते हैं आवेदन

झारखंड में जेल वार्डर के पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार भारत के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से कक्षा दसवीं उत्तीर्ण होना चाहिए।

आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। इसके अलावा, पुरुष उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 25 वर्ष, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 27 वर्ष और एससी एवं एसटी उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 30 होनी चाहिए।

रजिस्ट्रेशन फीस

रजिस्ट्रेशन फीस कैटेगरी वाइज निर्धारित की गई है। एससी एवं एसटी उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 50 रुपये, जबकि सभी वर्ग के कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 100 रुपये निर्धारित की गई है।

कैसे होगा चयन

उम्मीदवारों का चयन शारीरिक मापदंड एवं दक्षता परीक्षा, लिखित परीक्षा और मेडिकल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। लिखित परीक्षा एक चरण में आयोजित कराई जाएगी। मुख्य परीक्षा में तीन पेपर होंगे। पहले पेपर में हिंदी भाषा और अंग्रेजी भाषा से प्रश्न पूछे जाएंगे। दूसरे पेपर में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा से प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके अलावा, तीसरे पेपर में उम्मीदवारों से सामान्य अध्ययन, झारखंड राज्य से संबंधित ज्ञान, सामान्य गणित और समान्य विज्ञान से सवाल पूछे जाएंगे।  



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केदारनाथ मंदिर से व्हाइट हाउस तक… जम्मू में दिखेंगे 14 विश्वप्रसिद्ध स्मारक

फ्रांस का एफिल टावर, मिस्र का ग्रेट स्फिंक्स ऑफ गीजा, अमेरिका का व्हाइट हाउस और इटली का कोलोसियम देखने के लिए अब विदेश जाने या भारी खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर, आगरा के ताज महल और गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित दुनिया के 14 प्रसिद्ध स्मारक अब जम्मू में ही देखने को मिलेंगे।

इसके लिए लोगों को ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। जम्मू के भगवती नगर में वंडर पार्क का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। यहां सरदार वल्लभभाई पटेल की 40 फीट ऊंची प्रतिमा सहित कई स्मारकों का आधे से अधिक निर्माण पूरा हो चुका है। पार्क के मार्च–अप्रैल तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है।

यह वंडर पार्क श्री अमरनाथ यात्रा के आधार शिविर से मात्र 400 मीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है। इसका निर्माण जम्मू स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत दिल्ली की एक कंपनी द्वारा किया जा रहा है। गुजरात और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आए कारीगर निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं। स्थानीय विधायक अरविंद गुप्ता ने बताया कि पार्क के निर्माण पर करीब नौ करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पार्क में जिन प्रमुख स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है, उनमें ग्रेट स्फिंक्स ऑफ गीजा (मिस्र), अंगकोर वाट मंदिर (कंबोडिया), एफिल टावर (फ्रांस), कोलोसियम (इटली), व्हाइट हाउस (यूएसए), स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (गुजरात), ताज महल (उत्तर प्रदेश), केदारनाथ मंदिर (उत्तराखंड), अखनूर किला (जम्मू), क्रीमची मंदिर (ऊधमपुर) और रियासी जिले का रेलवे आर्च ब्रिज शामिल हैं।

देश-दुनिया के प्रसिद्ध स्मारकों के साथ इस पार्क में जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की भी झलक देखने को मिलेगी। यहां ऊधमपुर का क्रीमची मंदिर, अखनूर किला और रियासी में बने विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज का स्मारक भी आकर्षण का केंद्र होगा।


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