कोलकाता में भीषण अग्निकांड: तीन लोगों की मौत, कई कर्मी अब भी लापता

कोलकाता के आनंदपुर (नाजीराबाद) इलाके में गणतंत्र दिवस की सुबह एक भयावह हादसा सामने आया। यहां स्थित एक मोमो फैक्ट्री और डेकोरेटर के गोदाम में रविवार देर रात लगी भीषण आग सोमवार तक विकराल रूप ले चुकी थी। 11 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। इस हादसे में अब तक तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई कर्मचारियों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस और दमकल विभाग ने लापता लोगों की संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक करीब छह लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

जब मौत ने दी दस्तक

जानकारी के अनुसार, रविवार रात फैक्ट्री में नाइट शिफ्ट चल रही थी। सोमवार तड़के करीब तीन बजे अचानक आग की लपटें उठने लगीं। फैक्ट्री में मौजूद भारी मात्रा में पाम ऑयल (ताड़ का तेल) और रसोई गैस सिलेंडरों ने आग को और भड़का दिया, जिससे जोरदार धमाके भी हुए। आग बुझाने के लिए दमकल की 12 गाड़ियां और हाइड्रोलिक लैडर मौके पर तैनात हैं, लेकिन संकरी गलियां और घना धुआं राहत व बचाव कार्य में बड़ी बाधा बने हुए हैं।

‘गेट बाहर से बंद था’—लापरवाही के गंभीर आरोप

इस हादसे का सबसे चौंकाने वाला पहलू सुरक्षा में भारी चूक का आरोप है। लापता कर्मचारी पंकज हलदार के परिजनों का कहना है कि रात करीब 3:30 बजे पंकज ने फोन पर बताया था कि फैक्ट्री का मुख्य गेट बाहर से ताला लगा हुआ है और कर्मचारी दीवार तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। धुएं से घुटते कर्मचारियों की यह आखिरी पुकार प्रबंधन की गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने घटना पर नजर बनाए रखी है। पुलिस ने गेट बाहर से बंद होने के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जा सकता है। फिलहाल फोरेंसिक टीम और रोबोटिक कैमरों की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है। मौके पर मंत्री अरूप बिस्वास भी पहुंचे हैं। वहीं, कोलकाता के मल्लिक बाजार इलाके में भी सोमवार को एक फ्लैट में आग लगने की सूचना सामने आई है।


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संजय लीला भंसाली ने कर्तव्य पथ पर रची सिनेमा की गाथा, गणतंत्र दिवस परेड में दिखी ‘भारत कथा

77वें गणतंत्र दिवस की परेड भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन गई, जब मशहूर फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सहयोग से ‘भारत गाथा’ थीम पर आधारित एक विशेष झांकी कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत की। यह झांकी भारतीय सिनेमा की विरासत, उसकी कहानी कहने की परंपरा और सांस्कृतिक प्रभाव को भव्य रूप में सामने लाती नजर आई।

भंसाली ने रचा इतिहास

कर्तव्य पथ पर इस झांकी के प्रस्तुतीकरण के साथ ही एक नया इतिहास रच गया। संजय लीला भंसाली गणतंत्र दिवस जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोह में भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले भारतीय फिल्म निर्देशक बन गए। ‘भारत गाथा’ झांकी ने सिनेमा को केवल मनोरंजन या कला के माध्यम के रूप में नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी कथा परंपरा के सशक्त विस्तार के रूप में प्रस्तुत किया। लोककथाओं, महाकाव्यों, रंगमंच और संगीत से होते हुए सिनेमा तक पहुंची इस परंपरा को झांकी के जरिए जीवंत किया गया।

संजय लीला भंसाली ने जताया गर्व

इस अवसर पर संजय लीला भंसाली ने कहा कि ‘भारत गाथा’ थीम के तहत गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा और क्रिएटर्स कम्युनिटी का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ मिलकर इस झांकी का निर्माण भारत की अमर कहानियों और उन्हें दोबारा कहने की सिनेमा की शक्ति को समर्पित एक श्रद्धांजलि है।

भंसाली ने यह भी कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को दर्शाती है, जिसमें भारतीय कहानी कहने की कला को वैश्विक मंच तक ले जाने और सिनेमा को देश की सबसे सशक्त सांस्कृतिक आवाजों में से एक के रूप में स्थापित करने की सोच शामिल है।

भंसाली ही क्यों बने इस झांकी का चेहरा

संजय लीला भंसाली का चयन एक सटीक फैसला माना गया, क्योंकि वे आज के दौर के उन चुनिंदा फिल्म निर्माताओं में से हैं, जो राज कपूर, वी. शांताराम और महबूब खान जैसे सिनेमा के दिग्गजों की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। ‘भारत गाथा’ के माध्यम से गणतंत्र दिवस परेड ने यह स्पष्ट किया कि सिनेमा आधुनिक होते हुए भी भारत की सभ्यतागत कहानी कहने की आत्मा को दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। इस झांकी के संगीत को मशहूर गायिका श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी, जिसने इसकी भव्यता को और बढ़ा दिया।


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30 झांकियां, 29 लड़ाकू विमान और दुश्मन को धूल चटाने वाले हथियारों के साथ कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य ताकत का भव्य प्रदर्शन

77वें गणतंत्र दिवस के शुभारंभ के साथ ही देश की निगाहें दिल्ली के कर्तव्य पथ पर टिकी रहीं। राष्ट्रपति के आगमन से लेकर सेना के शौर्य प्रदर्शन और आकर्षक झांकियों तक, गणतंत्र दिवस की परेड भव्यता और गौरव से भरपूर रही। समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। दोनों विशिष्ट अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ कर्तव्य पथ पहुंचे।

77वें गणतंत्र दिवस की परेड की थीम ‘वंदे मातरम्’ रखी गई थी। राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह थीम चुनी गई, जिसकी झलक कर्तव्य पथ की सजावट और विभिन्न झांकियों में देखने को मिली।

परेड में करीब 6,000 सैनिकों और 18 मार्चिंग कंटिनजेंट्स ने भाग लिया, जबकि 13 सैन्य बैंड भी आकर्षण का केंद्र रहे। भैरव लाइट कमांडो बटालियन ने पहली बार परेड में हिस्सा लिया। इसके साथ ही ड्रोन और आधुनिक प्रणालियों से लैस शक्तिबान आर्टिलरी रेजिमेंट भी परेड का हिस्सा बनी। 61 कैवेलरी के घुड़सवारों के साथ राजपूत, असम, जैक ली और आर्टिलरी कंटिनजेंट्स ने भी अपने शौर्य का प्रदर्शन किया।

परेड में भारत के स्वदेशी और आधुनिक हथियारों व मिसाइल प्रणालियों ने खास आकर्षण बटोर लिया। ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल सिस्टम के साथ ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट लॉन्चर, धनुष तोप, ATAGS, MRSAM, अर्जुन टैंक और भारी बख्तरबंद वाहन कर्तव्य पथ पर नजर आए।

परेड के समापन के बाद वायुसेना ने आसमान में पराक्रम दिखाया। राफेल, सुखोई-30, मिग-29 और जैगुआर सहित कुल 29 लड़ाकू विमानों ने एक साथ फ्लाईपास्ट किया। इस दौरान वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम पर आधारित विशेष फॉर्मेशन भी बनाया, जिसे देखने के लिए 30 हजार से अधिक दर्शक मौजूद थे।

गणतंत्र दिवस परेड की कई खास झलकियां भी देखने को मिलीं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया। परेड में कुल 30 झांकियां शामिल रहीं, जिनमें 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा 13 केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां थीं। 148 गर्ल्स कैडेट्स वाला एनसीसी दल भी मार्च करता नजर आया, जिसका नेतृत्व उत्तराखंड डायरेक्टोरेट की सीनियर अंडर ऑफिसर मानसी विश्वकर्मा ने किया।

इसके अलावा यूरोपीय संघ का दस्ता भी परेड में शामिल हुआ। एक ऐतिहासिक पल तब देखने को मिला, जब पहली बार पुरुष सीआरपीएफ बटालियन की कमान महिला अधिकारी को सौंपी गई। 26 वर्षीय असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला ने कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ टुकड़ी का नेतृत्व कर नया इतिहास रच दिया।


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हिमाचल में भारी बर्फबारी का कहर: 592 रूटों पर बस सेवाएं ठप, 187 मार्गों पर सैकड़ों बसें फंसीं

हिमपात के बाद हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बस सेवाएं प्रदेश के कई इलाकों में तीसरे दिन भी सामान्य नहीं हो सकीं। फिलहाल राज्यभर में 592 रूटों पर बसों का संचालन पूरी तरह ठप है, जबकि 187 रूटों पर बसें अलग-अलग स्थानों पर फंसी हुई हैं। रविवार को मौसम में आंशिक सुधार के बाद प्रशासन ने सड़क बहाली का काम तेज किया, जिससे कुल्लू, शिमला, मंडी, कांगड़ा और चंबा जिलों की कई प्रमुख सड़कों को आंशिक रूप से खोल दिया गया। इसके बाद एचआरटीसी की बसों को संबंधित डिपुओं तक पहुंचाया गया। हालांकि, ऊपरी शिमला क्षेत्र में भारी बर्फ जमने के कारण सड़कें अब भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई हैं, जिससे आवाजाही बाधित है और स्थानीय लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


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अलग-अलग राज्यों की झांकियों में झलकी भारत की गौरवशाली विरासत

हर साल की तरह इस बार भी कर्तव्य पथ पर जब अलग-अलग राज्यों की झांकियां निकलीं, तो ऐसा लगा मानो पूरा भारत एक मंच पर सजीव हो उठा हो। नज़ारा इतना मनमोहक था कि दर्शकों की निगाहें ठहर-सी गईं। कहीं राजस्थान की झांकी में 24 कैरेट सोने की शाही आभा नजर आई, तो कहीं हिमाचल प्रदेश की झांकी में बर्फ से ढकी पहाड़ियां और परमवीर चक्र विजेताओं की वीरगाथाएं गूंजती दिखीं।

असम की मिट्टी की कलाकारी से लेकर पंजाब के बलिदान की गाथा और गुजरात के आत्मनिर्भर भारत के संदेश तक, हर झांकी अपनी अलग पहचान और गौरवशाली कहानी बयां कर रही थी। आइए जानते हैं कि इस गणतंत्र दिवस पर किस राज्य ने किस तरह अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को प्रस्तुत किया।

राजस्थान की झांकी

राजस्थान की झांकी ने कर्तव्य पथ पर एक भव्य शाही वातावरण रच दिया। ‘मरुधरा’ थीम पर आधारित इस झांकी में बीकानेर की प्रसिद्ध ‘उस्ता कला’ को प्रदर्शित किया गया। मेहराबों और कुप्पियों पर 24 कैरेट सोने के वर्क और प्राकृतिक रंगों की सजावट ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक ‘गेर नृत्य’ करते कलाकारों ने राजस्थान की जीवंत संस्कृति और समृद्ध शिल्प परंपरा को जीवंत कर दिया।

हिमाचल प्रदेश की झांकी

हिमाचल प्रदेश ने अपनी झांकी के जरिए यह संदेश दिया कि वह केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। काठकुणी वास्तुकला की पृष्ठभूमि में राज्य के चार परमवीर चक्र विजेताओं की प्रतिमाएं शिखर पर स्थापित थीं। मेजर सोमनाथ शर्मा से लेकर कैप्टन विक्रम बत्रा तक, देश के लिए बलिदान देने वाले 1,203 वीरों को श्रद्धांजलि दी गई। बर्फीली पहाड़ियों के बीच लहराता तिरंगा हर भारतीय को गर्व से भर गया।

पंजाब की झांकी

पंजाब की झांकी गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित रही। इसमें दिल्ली स्थित गुरुद्वारा सीस गंज साहिब की भव्य प्रतिकृति दिखाई गई। ‘एक ओंकार’ के प्रतीक और रागी सिंहों द्वारा किए गए शब्द कीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। साथ ही, भाई मति दास और भाई सती दास के बलिदान को भी दर्शाया गया, जो धर्म और मानवता की रक्षा का प्रतीक हैं।

उत्तर प्रदेश की झांकी

उत्तर प्रदेश की झांकी में विरासत और विकास का अनूठा संगम देखने को मिला। झांकी के अग्रभाग में कालिंजर किले का ऐतिहासिक ‘एकमुख शिवलिंग’ दर्शाया गया। मध्य भाग में ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना के तहत बुंदेलखंड के मिट्टी शिल्प को स्थान मिला, जबकि अंतिम हिस्से में एक्सप्रेसवे और औद्योगिक विकास के जरिए प्रदेश की आधुनिक प्रगति को दर्शाया गया।

छत्तीसगढ़ की झांकी

छत्तीसगढ़ की झांकी ने आदिवासी नायकों के संघर्ष और बलिदान को याद किया। 1910 के विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर और 1857 की क्रांति के शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमाएं झांकी का केंद्र रहीं। इसके साथ नवा रायपुर में स्थापित डिजिटल म्यूजियम को भी दर्शाया गया, जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से आदिवासी इतिहास को संजो रहा है।

असम की झांकी

असम की झांकी ने धुबरी जिले की प्रसिद्ध टेराकोटा कला को भव्य रूप में प्रस्तुत किया। मयूरपंखी नाव के आकार की झांकी में ‘हीरामति’ मिट्टी से मूर्तियां गढ़ते कलाकार और मेखला-चादर पहने लोकनृत्य करती महिलाएं असम की सांस्कृतिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता को दर्शा रही थीं।

गुजरात की झांकी

गुजरात की झांकी ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने और स्वतंत्रता संग्राम में मैडम भीखाजी कामा के योगदान को समर्पित रही। झांकी में 1907 में पेरिस में भारतीय ध्वज फहराने का ऐतिहासिक दृश्य दिखाया गया। पीछे के हिस्से में महात्मा गांधी और चरखे के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत का संदेश दिया गया, जबकि ‘कसुंबी नो रंग’ गीत पर कलाकारों ने देशभक्ति का रंग भर दिया।

इस वर्ष की झांकियों ने न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता को उजागर किया, बल्कि इतिहास की वीरगाथाओं और आधुनिक भारत की प्रगति को भी एक सूत्र में पिरो दिया। हर राज्य की प्रस्तुति अलग थी, लेकिन संदेश एक ही था— ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’।


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भारत बन सकता है बड़ी वजह! पाकिस्तान को T20 वर्ल्ड कप 2026 से हटने की चेतावनी

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कृष्णमाचारी श्रीकांत ने सूर्यकुमार यादव की अगुआई में टीम इंडिया के मौजूदा प्रदर्शन की जमकर तारीफ की है। साथ ही उन्होंने मजाकिया अंदाज़ में पाकिस्तान को चेतावनी भी दे डाली। श्रीकांत का कहना है कि पाकिस्तान को टी20 वर्ल्ड कप 2026 से अपना नाम वापस ले लेना चाहिए, ताकि उसे भारत के हाथों करारी हार का सामना न करना पड़े।

श्रीकांत का यह बयान पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नक़वी के हालिया बयान के बाद आया है। नक़वी ने बांग्लादेश का समर्थन करते हुए टी20 वर्ल्ड कप से हटने की धमकी दी थी। गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में टी20 वर्ल्ड कप 7 फरवरी 2026 से शुरू होने वाला है।

भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ चल रही टी20 इंटरनेशनल सीरीज में धमाकेदार प्रदर्शन किया है। रविवार को गुवाहाटी में खेले गए तीसरे टी20 मैच में भारत ने 154 रन के लक्ष्य को महज 10 ओवर में दो विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। यह टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 150 से अधिक रन के लक्ष्य का दूसरा सबसे तेज़ पीछा रहा।

इस जीत के साथ टीम इंडिया ने 60 गेंद शेष रहते 8 विकेट से मुकाबला जीतकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली। श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “पिछले मैच में भारत ने 15 ओवर में 209 रन बनाए और इस मैच में 10 ओवर में 150 रन बना दिए। यह देखकर कई टीमें कह सकती हैं कि हम नहीं आ रहे हैं, आप ही कप रख लो।”

पाकिस्तान के टी20 वर्ल्ड कप में खेलने को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नक़वी ने कहा था कि टीम के टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने आईसीसी की आलोचना भी की थी, क्योंकि बांग्लादेश की मांग के बावजूद उसके मैच भारत के बजाय श्रीलंका में नहीं कराए गए।

हालांकि इन विवादों के बीच पाकिस्तान ने रविवार को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए अपने स्क्वाड का ऐलान कर दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि वह टूर्नामेंट में हिस्सा लेने को तैयार है। बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किए जाने के बाद आईसीसी ने पाकिस्तान को भी गंभीर परिणाम की चेतावनी दी थी।

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप 2026 में एक ही ग्रुप में हैं। दोनों टीमों के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबला 15 फरवरी को कोलंबो में खेला जाएगा।


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70 फिल्मों और 13 वेब सीरीज में अभिनय करने वाले अभिनेता को मिला पद्मश्री सम्मान

वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी को कला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। उनके नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। लखनऊ निवासी डॉ. रस्तोगी उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्हें रेडियो, टेलीविजन, रंगमंच और सिनेमा—चारों माध्यमों में समान दक्षता हासिल है। उन्होंने 70 से अधिक फिल्मों, 15 वेब सीरीज और 22 धारावाहिकों के 500 से ज्यादा एपिसोड में अभिनय किया है। हाल ही में उन्होंने 100 नाटकों के मंचन का शतक भी पूरा किया है।

डॉ. रस्तोगी पिछले 64 वर्षों से रंगमंच, 54 वर्षों से रेडियो, 49 वर्षों से टेलीविजन और 39 वर्षों से फिल्मों में सक्रिय हैं। केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआइ) से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने करियर की दूसरी पारी सिनेमा में शुरू की और 70 वर्ष की उम्र में मुंबई जाकर संघर्ष किया। आज 82 वर्ष की उम्र में भी वे लगातार अभिनय कर रहे हैं। उन्होंने कभी भूमिका को छोटा-बड़ा नहीं माना, बल्कि केवल सार्थक और स्थायी दृश्य को प्राथमिकता दी।

डॉ. रस्तोगी का कला सफर 1962 में रेडियो से शुरू हुआ। मित्रों की प्रेरणा पर उन्होंने 1971 में आकाशवाणी का ऑडिशन दिया और बी-ग्रेड कलाकार के रूप में चयनित हुए। इसके बाद थिएटर और रेडियो से होते हुए उन्होंने टेलीविजन का रुख किया। 1989 में धारावाहिक ‘उड़ान’ से टीवी पर कदम रखा और बाद में ‘ये वो मंजिल तो नहीं’, ‘मरीचिका’ जैसे धारावाहिकों और ‘मैं, मेरी पत्नी और वो’, ‘खून बहा गंगा में’ जैसी फिल्मों में काम किया। वर्ष 2012 में फिल्म ‘इश्कजादे’ से उन्हें व्यापक पहचान मिली। उन्होंने देशभर में 100 नाटकों के 950 से अधिक शो किए हैं।

डॉ. अनिल रस्तोगी को अब तक दो राष्ट्रीय और छह राज्य पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2023), राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी फेलोशिप (1999), उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी का भारत रत्न अटल उर्दू सम्मान (2024), दूरदर्शन उत्तर प्रदेश का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2024) और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1984) से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें शैक्षणिक, सांस्कृतिक और मीडिया संस्थानों द्वारा 65 से अधिक सम्मान प्राप्त हुए हैं।


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26 जनवरी पर बड़ी खुशखबरी: 110% से घटकर 40% हुआ टैरिफ, यूरोप से आने वाले सामान पर महाबचत

यूरोपीय यूनियन के साथ India-EU Trade Deal को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सूत्रों ने बताया है कि भारत लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत यूरोप से आने वाली कारों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती करने की तैयारी कर रहा है। इस फैसले का औपचारिक ऐलान मंगलवार को किया जा सकता है।

प्रस्तावित समझौते के अनुसार, भारत सरकार यूरोपीय संघ में निर्मित कारों पर मौजूदा 110 प्रतिशत आयात शुल्क को घटाकर 40 प्रतिशत करने की योजना बना रही है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो इसे भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा उदारीकरण माना जाएगा।

टैरिफ घटते ही सस्ती होंगी यूरोपीय कारें

सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चरण में यह शुल्क कटौती 15,000 यूरो (करीब 16.3 लाख रुपये) से अधिक कीमत वाली सीमित संख्या में पूरी तरह से बनी कारों (CBU) पर लागू होगी। आने वाले वर्षों में इन शुल्कों को और घटाकर 10 प्रतिशत तक लाने की संभावना है। इससे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी यूरोपीय कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में एंट्री आसान हो जाएगी।

आयात शुल्क में कमी से यूरोपीय कार निर्माता भारत में अपने आयातित मॉडलों की कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रख सकेंगे। इसके साथ ही वे बड़े स्तर पर स्थानीय विनिर्माण में निवेश से पहले भारतीय बाजार में नए मॉडलों का परीक्षण भी कर पाएंगे।

ऑटो सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्टर डोज

सूत्रों का कहना है कि भारत हर साल करीब 2 लाख आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों पर तत्काल शुल्क कटौती के लिए सहमत हो गया है, हालांकि अंतिम कोटा में बदलाव संभव है। घरेलू ऑटो कंपनियों के हितों को ध्यान में रखते हुए बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को पहले पांच वर्षों तक इस टैरिफ राहत से बाहर रखा जाएगा।

उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और यूरोपीय संघ जल्द ही इस व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता पूरी होने की घोषणा कर सकते हैं। गौरतलब है कि भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन इसके बावजूद यह सबसे अधिक संरक्षित बाजारों में शामिल है। फिलहाल पूरी तरह से निर्मित कारों पर आयात शुल्क 70 से 110 प्रतिशत के बीच है।


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77वां गणतंत्र दिवस: शक्तिबाण, दिव्यास्त्र और सूर्यास्त्र के साथ कर्तव्य पथ पर दिखा भारत का दम

भारत आज, 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस अवसर पर राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की थीम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्रित है। समारोह में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में भारत की सांस्कृतिक विविधता, सैन्य शक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों का भव्य प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों के साथ-साथ तीनों सेनाओं की टुकड़ियां देश की एकता और ताकत का संदेश दे रही हैं। गौरतलब है कि 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ था, जिसने भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य का स्वरूप प्रदान किया।


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Republic Day Parade: इयरफोन-चार्जर समेत इन चीजों पर रहेगा प्रतिबंध, नियम तोड़ने पर नहीं मिलेगी एंट्री

राजधानी दिल्ली में 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियां जोरों पर हैं। हर साल की तरह इस बार भी कर्तव्य पथ पर भव्य परेड का आयोजन किया जाएगा। अगर आप 26 जनवरी को परेड देखने का मन बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले कुछ जरूरी नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

हाई सिक्योरिटी में होगी परेड

गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत कई वीवीआईपी और विदेशी मेहमान शामिल होंगे। इसी वजह से कर्तव्य पथ और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। परेड स्थल पर प्रवेश से पहले सभी दर्शकों की सघन जांच की जाएगी।

परेड में क्या ले जा सकते हैं?

दर्शकों को केवल कुछ जरूरी चीजें ही अंदर ले जाने की अनुमति होगी। आप अपने साथ मोबाइल फोन, वैध टिकट, फोटो पहचान पत्र, जरूरी दवाइयां और पानी की छोटी बोतल ही ले जा सकते हैं। सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा।

इन चीजों पर पूरी तरह पाबंदी

गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कई वस्तुओं पर सख्त प्रतिबंध रहेगा। दर्शक मोबाइल चार्जर, इयरफोन, पावर बैंक, बैटरी से चलने वाले गैजेट नहीं ले जा सकेंगे। इसके अलावा रेजर, ब्लेड, चाकू, कैंची, तार, नुकीले हथियार, हथौड़ा, ड्रिल, आरी, तलवार, कटार और पेंचकस जैसी वस्तुएं भी प्रतिबंधित रहेंगी। इनमें से कोई भी सामान मिलने पर एंट्री नहीं दी जाएगी।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

परेड देखने जा रहे दर्शकों को पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। केवल निर्धारित एंट्री और एग्जिट गेट का ही इस्तेमाल करें। बिना अनुमति कर्तव्य पथ के आसपास फोटो या वीडियो बनाना भी मना है।

ठंड और बारिश में भी जवानों का जोश बरकरार

शुक्रवार को फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान रिमझिम बारिश और कड़ाके की ठंड के बावजूद जवानों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। तीनों सेनाओं के जवानों ने जब कदम से कदम मिलाया, तो दर्शक गर्व और जोश से भर उठे। इस बार पहली बार भारतीय सेना की भैरव बटालियन भी रिहर्सल में शामिल हुई, जो आकर्षण का केंद्र रही।

कर्तव्य पथ पर गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’

77वें गणतंत्र दिवस की परेड में इस बार थीम आधारित झांकियां देखने को मिलेंगी। झांकियों में वंदे मातरम् की गूंज के साथ ऑपरेशन सिंदूर की झलक भी दिखाई जाएगी। कुछ झांकियां देश की संस्कृति, विरासत और प्रगति को दर्शाएंगी, जबकि पहली बार भारतीय सिनेमा की झलक भी परेड का हिस्सा बनेगी।

30 झांकियां लेंगी हिस्सा

रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष परेड में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा 13 केंद्रीय मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां शामिल होंगी। इस बार की थीम रखी गई है—

‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम् और समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’।

गुजरात, छत्तीसगढ़, संस्कृति मंत्रालय और आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की झांकियों में वंदे मातरम् के 150 वर्ष की गौरवगाथा दिखाई जाएगी। वहीं सैन्य मामलों के विभाग की झांकी में ऑपरेशन सिंदूर की विजय को प्रदर्शित किया जाएगा।

भारतीय सिनेमा को मिलेगा विशेष मंच

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की झांकी खास आकर्षण होगी, जिसकी थीम होगी— ‘भारत कथा: श्रुति, कृति और दृष्टि’। इसके जरिए पहली बार कर्तव्य पथ पर भारतीय सिनेमा की भव्य प्रस्तुति देखने को मिलेगी। बताया जा रहा है कि प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली इसका प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि ऑस्कर विजेता संगीतकार एमएम कीरावनी ‘वंदे मातरम्’ की नई धुन पेश करेंगे।


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