डेनमार्क ने 401 साल पुरानी चिट्ठी भेजने की परंपरा को आधिकारिक तौर पर अलविदा कह दिया है। देश की डाक सेवा पोस्टनॉर्ड ने घरेलू चिट्ठियों की डिलीवरी पूरी तरह बंद कर दी है। इसके साथ ही डेनमार्क दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जहां फिजिकल लेटर सर्विस न तो जरूरी रही है और न ही व्यावसायिक रूप से फायदेमंद।
आज के डिजिटल दौर में चिट्ठियों की जगह ईमेल, मैसेज और सोशल मीडिया ने ले ली है। डेनमार्क में अब मशहूर लाल डाकबॉक्सों में चिट्ठी डालना संभव नहीं रहा। देश तेजी से डिजिटल युग में पूरी तरह प्रवेश कर चुका है, जहां ज्यादातर संवाद ऑनलाइन माध्यमों से हो रहा है।
चिट्ठियों की संख्या में भारी गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 25 वर्षों में डेनमार्क में भेजी जाने वाली चिट्ठियों की संख्या में करीब 90 फीसदी की गिरावट आई है। वर्ष 2000 में पोस्टनॉर्ड ने लगभग 1.5 अरब चिट्ठियां पहुंचाई थीं, जबकि पिछले साल यह संख्या घटकर केवल 11 करोड़ रह गई।
पोस्टनॉर्ड की प्रेस प्रमुख इसाबेला बेक जोर्गेनसेन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में बताया कि बीते दो दशकों में चिट्ठियों के उपयोग में लगातार तेज गिरावट आई है और अब ज्यादातर संवाद इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किया जाता है। उन्होंने कहा कि डेनमार्क दुनिया के सबसे डिजिटल देशों में शामिल है, जहां सरकारी कामकाज से लेकर निजी संवाद तक लगभग सब कुछ ऑनलाइन हो चुका है।
लाल डाकबॉक्सों का भी हुआ अंत
पोस्टनॉर्ड ने जून महीने से देशभर में लगे करीब 1500 लाल डाकबॉक्सों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। इनमें से पहले 1000 बॉक्स चैरिटी के लिए बेचे गए, जिनकी कीमत लगभग 472 डॉलर (करीब 40 हजार रुपये) प्रति बॉक्स रखी गई थी। ये बॉक्स महज तीन घंटे में बिक गए, जबकि इन्हें खरीदने के लिए लाखों लोगों ने दिलचस्पी दिखाई।