इंदौर में दूषित पानी पीने से 14 लोगों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए फरीदाबाद नगर निगम पूरी तरह सतर्क हो गया है। निगम के चीफ इंजीनियर विवेक गिल ने चारों जोन के कार्यकारी अभियंताओं को सभी 46 वार्डों में पानी की गुणवत्ता जांच कराने के निर्देश जारी किए हैं।
टेस्टिंग के साथ रिकॉर्ड रखना अनिवार्य
चीफ इंजीनियर ने स्पष्ट किया कि पानी की जांच केवल एक बार नहीं, बल्कि हर माह नियमित रूप से कराई जाए और उसका पूरा रिकॉर्ड भी संधारित किया जाए। नगर निगम की ओर से पानी के सैंपल जांच के लिए पंचकूला स्थित प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं।
जिले में पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी दो विभागों पर है। एफएमडीए द्वारा नगर निगम के बूस्टर स्टेशनों तक पानी की आपूर्ति की जाती है, जिसके बाद निगम अपने बूस्टरों से घर-घर जलापूर्ति सुनिश्चित करता है।
इसके अलावा कई कॉलोनियों में अब तक पाइपलाइन से पानी की सप्लाई नहीं पहुंच पाई है। ऐसे क्षेत्रों में बोरवेल लगाए गए हैं, लेकिन पानी खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है। मजबूरी में लोगों को टैंकर के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है।