मुख्य सचिव एसपी गोयल ने राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन की शीर्ष समिति की पांचवीं बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों को तत्परता से नल कनेक्शन से जोड़ने का निर्देश दिया।
उन्होंने भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, जैसे बाढ़ एवं सूखा प्रभावित क्षेत्र, सांसद आदर्श ग्राम एवं अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल क्षेत्रों में योजनाओं के कार्य को वरीयता पर पूर्ण कराने एवं जीवन मिशन के शेष कार्यों को तेजी से संपन्न करने के लिए कहा।
आर्सेनिक एवं बैक्टीरिया की जांच कराने का निर्देश
उन्होंने सभी गांवों में प्रशिक्षित महिलाओं के माध्यम से जल में आर्सेनिक एवं बैक्टीरिया की जांच कराने का निर्देश दिया। इसके लिए उन्हें पर्याप्त मात्रा में किट उपलब्ध कराने के लिए कहा। जल जीवन मिशन के अंतर्गत योजनाओं के निर्माण के लिए एजेंसियों के साथ किए गए अनुबंधों की समयावधि को दिसंबर 2027 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
बताया गया कि प्रदेश के सभी 75 जनपदों के कुल 97,070 राजस्व ग्रामों को पाइप पेयजल योजनाओं से जोड़ा जा चुका है। सभी जनपदों से इस आशय का प्रमाण-पत्र प्राप्त हो चुका है तथा वर्तमान में पुनः प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 2,67,20,930 ग्रामीण परिवारों की तुलना में 30 नवंबर 2025 तक 2,42,74,000 (90.84%) परिवारों को नल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के 1,16,524 विद्यालयों में से 1,16,340 (99.84%) तथा 1,56,304 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 1,55,136 (99.25%) को नल कनेक्शन से कवर किया गया है।
पेयजल गुणवत्ता परीक्षण के लिए एक राज्य स्तरीय एवं 75 जनपदीय प्रयोगशालाएं संचालित हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र के नौ जनपदों में 62 जल शोधन यंत्रों में से 60 पर लैब क्रियाशील हैं। प्रदेशभर में पांच लाख ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। बैठक में अपर मुख्य सचिव नमामि गंगे अनुराग श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक जल निगम (ग्रामीण) डा. राज शेखर सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।