हरिद्वार व ऋषिकेश को पवित्र सनातन नगरी घोषित कर हर की पैड़ी समेत सभी गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने को लेकर सरकार ने मंथन तेज कर दिया है।
हरिद्वार में धार्मिक मर्यादा का पालन कराने की पुरानी नियमावली के अध्ययन में सामने आया है कि यह पाबंदी नयी नहीं है। हरिद्वार नगर पालिका उपविधि (सन् 1953) में यह लिखा है सरकारी कार्य से आने वाले अधिकारियों को छोड़कर अहिंदुओं को हर की पैड़ी क्षेत्र व कुशावर्त घाट में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
नगर पालिका उपविधि में उल्लेख है कि प्रांतीय म्युनिसिपैलिटी एक्ट 1916 की धारा 299(1) के अंतर्गत नियम तोड़ने पर दस रुपये तक का अर्थदंड भी लगाया जाएगा।
यदि बार-बार नियम का उल्लंघन जारी रहा तो पहली बार के बाद प्रतिदिन पांच रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा। नगर पालिका उपविधि के आधार पर ही श्री गंगा सभा समेत अन्य संगठनों की मांग है कि यह व्यवस्था हरिद्वार व ऋषिकेश के सभी गंगा घाटों पर नए सिरे से लागू की जाए।
ब्रिटिश शासन से हुआ समझौता भी आधार
सन 1916 में पं. मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश शासन के मध्य हुए समझौते को भी तीर्थ नगरी की पवित्रता बनाए रखने का आधार बनाया जा रहा है।
यह कहा जा रहा है कि अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भी गैर-हिंदुओं के घाटों पर प्रवेश पाबंदी के नियम तय किए गए थे। अब इन नियमों का पालन कराने के लिए नयी व्यवस्था बनाई जाए।
तब सीमित थे घाट, उन्हीं का उल्लेख
नगर पालिका उपविधि (1953) में हरिद्वार के पांच से सात गंगाघाटों पर अहिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध समेत अन्य बाध्यताओं का प्रविधान किया गया है, अब सभी 105 घाटों में प्रवेश पर इस तरह के प्रतिबंध की मांग की जा रही है।
मांग करने वाले संगठनों का कहना है कि उस समय पांच से सात गंगा घाट ही थे, लेकिन अब घाट बढ़कर 105 हो चुके हैं। इसलिए सभी पर एक समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए।
मांस विक्रेता को दुकान पर नाम-पता लिखना होगा
हर की पैड़ी, अन्य गंगा घाटों, पार्किंग स्थलों व मेला भूमि में शराब व मांस परोसने की घटनाओं पर भी श्री गंगा सभा ने चिंता जताई है। मांस बिक्री को लेकर भी नगर पालिका उपविधि (1953) में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि ज्वालापुर क्षेत्र के अलावा किसी अन्य स्थान पर मांस बेचने का लाइसेंस मंजूर नहीं होगा। मांस विक्रेता को अपनी दुकान पर पूरा नाम, पता और बेचे जा रहे मांस के प्रकार का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।