सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 9 जनवरी को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर को कड़ी फटकार लगाते हुए उनके तर्कों को वास्तविकता से परे बताया। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर दिए गए सुझाव जमीनी हालात को नहीं दर्शाते।
सुनवाई के दौरान शर्मिला टैगोर की ओर से पेश वकील ने सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान को लेकर कुछ सुझाव रखे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मुद्दे को भावनाओं के बजाय व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखे जाने की जरूरत है।
शर्मिला टैगोर की ओर से दलील दी गई कि कुछ कुत्तों को ‘सुलाना’ आवश्यक हो सकता है, लेकिन उससे पहले एक विशेषज्ञ समिति द्वारा यह तय किया जाना चाहिए कि वे आक्रामक हैं या नहीं। वकील ने AIIMS परिसर में कई वर्षों से रह रहे एक शांत स्वभाव के कुत्ते का उदाहरण देते हुए कुत्तों के व्यवहार के अध्ययन के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का सुझाव भी दिया।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल किया कि क्या उस कुत्ते को अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में भी ले जाया जा रहा था। कोर्ट ने कहा कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों में कीड़े-मकोड़ों का होना स्वाभाविक है और ऐसे कुत्तों का अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों में मौजूद होना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
कोर्ट ने आगे कहा कि इस तरह के उदाहरण जमीनी सच्चाई को नजरअंदाज करते हैं और आवारा कुत्तों की समस्या को हल करने के लिए व्यावहारिक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।