अब प्रदूषण पर लगेगी लगाम! भारत बनाएगा स्वदेशी एयर पॉल्यूशन मॉनिटरिंग डिवाइस

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत ने एक अहम कदम उठाया है, जिससे विदेशी सर्टिफिकेशन प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी। CSIR–नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) में दुनिया की दूसरी नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड लेबोरेटरी (NESL) की स्थापना की गई है। फिलहाल इस तरह की प्रयोगशाला केवल ब्रिटेन में मौजूद है।

यह लेबोरेटरी देश में वायु प्रदूषण मॉनिटरिंग उपकरणों के लिए अत्याधुनिक टेस्टिंग और कैलिब्रेशन सुविधाएं विकसित करेगी। वर्तमान में भारत में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश एयर पॉल्यूशन मॉनिटरिंग उपकरण आयात किए जाते हैं, जो विदेशी मानकों पर आधारित होते हैं।

CSIR-NPL के वैज्ञानिकों के अनुसार, ये आयातित उपकरण यूरोप या अमेरिका की पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप सर्टिफिकेशन के साथ आते हैं। चूंकि इन देशों की जलवायु और प्रदूषण से जुड़ी स्थितियां भारत से काफी अलग हैं, इसलिए भारतीय परिस्थितियों में लंबे समय तक इनके उपयोग से माप की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को CSIR-NPL के 80वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर NESL का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह नई प्रयोगशाला न केवल विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों से उत्पन्न मापन संबंधी गड़बड़ियों से निपटने में मदद करेगी, बल्कि देश में मानकीकृत और विश्वसनीय वायु प्रदूषण निगरानी उपकरणों के निर्माण को भी बढ़ावा देगी।