भारत को वेनेजुएला का तेल सप्लाई करेगा अमेरिका: रिपोर्ट

अमेरिका ने भारतीय सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है और इसे 500 प्रतिशत तक बढ़ाने की चेतावनी भी दी है। इसकी मुख्य वजह भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद बताई जा रही है। भारत फिलहाल रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाला देश है, हालांकि बीते छह महीनों में इसमें कमी आई है। जनवरी में रूस से तेल आयात चार साल के निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, इसके बावजूद अमेरिका संतुष्ट नहीं है। हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इसी बीच दोनों देशों के बीच समाधान की राह भी निकलती दिख रही है, क्योंकि अमेरिका ने भारत को वेनेजुएला का तेल देने की पेशकश की है।

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अमेरिका एक नए ‘कंट्रोल्ड फ्रेमवर्क’ के तहत भारत और चीन को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए तैयार है। हालांकि यह पूरी व्यवस्था अमेरिकी नियंत्रण में होगी। अमेरिका वेनेजुएला में स्टोरेज में रखे 3 करोड़ से 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल को बेचने की योजना बना रहा है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है और भारत की रिफाइनरियां इस तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं। यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर वेनेजुएला से तेल लेना शुरू करता है, तो अमेरिका टैरिफ घटाकर 25 प्रतिशत तक ला सकता है।

भारतीय कंपनियां भी इस विकल्प के लिए तैयार नजर आ रही हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि वह वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदने को तैयार है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब अमेरिका के बाहर की कंपनियों को इसकी स्पष्ट अनुमति दी जाए। रिलायंस जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स संचालित करती है। कंपनी का कहना है कि किसी भी फैसले से पहले वह नियमों की स्पष्टता का इंतजार कर रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस मुद्दे पर रिलायंस अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है।

कंपनी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत की सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन—भी वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए तैयार हैं। रिलायंस ने मार्च 2024 में वेनेजुएला से तेल खरीदना बंद कर दिया था और आखिरी शिपमेंट उसे मई 2024 में मिला था। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत वेनेजुएला करीब 2 अरब डॉलर तक, यानी 3 से 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल निर्यात कर सकता है, जिसे अमेरिका भेजा जाना था।

गुजरात स्थित रिलायंस की रिफाइनिंग यूनिट्स की कुल क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है और यह सभी प्रकार के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं। जानकारों का मानना है कि यदि वेनेजुएला का तेल वैश्विक बाजार में लौटता है तो यह रियायती दरों पर मिल सकता है, जिससे उन रिफाइनरियों को आर्थिक लाभ होगा जो इसे प्रोसेस कर सकती हैं। एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी, नायरा एनर्जी, इंडियन ऑयल कॉर्प और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स पहले भी वेनेजुएला से तेल खरीद चुकी हैं।

अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबाव लगातार बढ़ रहा है कि भारत रूस से तेल की खरीद कम करे। अमेरिका का आरोप है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए आर्थिक मदद मिल रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूस से करीब 144 अरब यूरो का तेल खरीद चुका है। युद्ध से पहले भारतीय आयात में रूस की हिस्सेदारी काफी कम थी, लेकिन पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने भारत और चीन जैसे देशों को भारी छूट पर तेल देना शुरू किया।

पिछले साल के मध्य में भारत रूस से रोजाना करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल आयात कर रहा था, जो दिसंबर में घटकर 12 लाख बैरल रह गया। अनुमान है कि जनवरी में यह आंकड़ा 10 लाख बैरल तक आ सकता है। वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल कच्चे तेल का ज्ञात भंडार है, जो वैश्विक भंडार का लगभग 20 प्रतिशत है, हालांकि वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी काफी कम है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि बड़ी अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियां वेनेजुएला में निवेश बढ़ाएं।