शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में विश्व पुस्तक मेला 2026 का शानदार आगाज हुआ। यह मेला पुस्तकों, विचारों और संस्कृतियों का भव्य उत्सव है और इस वर्ष 18 जनवरी तक चलेगा। इतिहास में पहली बार इस मेले में आम लोगों के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है, ताकि देशभर में पठन-पाठन और पुस्तक प्रेम को बढ़ावा दिया जा सके।
विश्व पुस्तक मेले का यह 53वां संस्करण राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट (NBT) द्वारा, शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। इस मेले में 35 से अधिक देशों की भागीदारी, 1,800 से अधिक प्रकाशक, 3,000 से अधिक स्टॉल, 600 साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम और 1,000 से अधिक वक्ता शामिल हैं। इसे इसलिए विश्व के सबसे बड़े साहित्यिक समारोहों में से एक माना जाता है।
इस वर्ष का विशिष्ट अतिथि कतर होगा और स्पेन को फोकस देश के रूप में चुना गया है। मेले का केंद्रीय विषय है—‘भारतीय सैन्य इतिहास: वीरता और बुद्धिमत्ता @ 75’, जो भारत के सशस्त्र बलों के साहस, रणनीतिक प्रतिभा और बलिदानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। इस मेले में 20 लाख से अधिक पाठकों के शामिल होने का अनुमान है।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने कहा, “ज्ञान से अधिक पवित्र इस संसार में कुछ नहीं है। पुस्तकें पीढ़ियों को जोड़ने वाली कड़ी हैं, जो सभ्यताओं की स्मृति को संजोती हैं और समाज को दिशा देती हैं। दिल्ली विश्व पुस्तक मेला भारत की रीडिंग कल्चर का सबसे बड़ा लोक उत्सव है, जहां लेखक, प्रकाशक और पाठक एक साझा मंच पर संवाद करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत आज प्रकाशन और पुस्तक व्यापार के क्षेत्र में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। यह उपलब्धि भारत की भाषाई विविधता, व्यापक ज्ञान परंपरा और वैश्विक प्रासंगिकता का प्रमाण है।
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