नीतीश कैबिनेट की बैठक में 43 प्रस्तावों पर मुहर, रोजगार-निवेश को बढ़ावा, मुंबई में बनेगा बिहार भवन

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को बिहार मंत्रिपरिषद की अहम बैठक हुई, जिसमें कुल 43 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। वर्ष 2026 में मुख्य सचिवालय स्थित कैबिनेट हॉल में आयोजित यह नई सरकार की पहली बैठक थी, जिसे कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित सभी कैबिनेट मंत्री उपस्थित रहे।

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक खास इसलिए रही क्योंकि इसमें विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान एनडीए द्वारा किए गए वादों को अमलीजामा पहनाने की दिशा में ठोस फैसले लिए गए। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि नए साल में विकास, रोजगार और निवेश उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताएं रहेंगी।

कैबिनेट बैठक में राज्य में नौकरी और रोजगार सृजन को लेकर विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी। विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज करने का निर्णय लिया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में बड़े पैमाने पर बहाली से जुड़े प्रस्ताव सामने आ सकते हैं, जिससे युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा।

इसके साथ ही निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि उद्योगों और निजी कंपनियों को प्रोत्साहन देकर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इसी उद्देश्य से औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना, स्टार्टअप और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं को गति देने के लिए अहम फैसले लिए गए हैं।

कैबिनेट ने कई विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधारों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। इसके अलावा मुंबई में बिहार भवन के निर्माण के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी, जिससे बाहर रहने वाले बिहारवासियों को सुविधा मिल सकेगी।

बैठक के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला है कि नीतीश सरकार नए साल में आक्रामक विकास एजेंडे के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लिए गए ये फैसले आने वाले समय में राज्य की दिशा और दशा को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन निर्णयों का असर न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों पर भी देखने को मिलेगा।