सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर बिहार और झारखंड के बीच करीब ढाई दशक से चला आ रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। वर्ष 1973 में शुरू हुई जिस प्रक्रिया पर वर्षों तक सहमति नहीं बन सकी थी, उस पर अब दोनों राज्यों ने सैद्धांतिक सहमति जता दी है। इस ऐतिहासिक फैसले से न सिर्फ पुराना विवाद खत्म हुआ है, बल्कि दक्षिण बिहार और झारखंड में जल प्रबंधन व सिंचाई योजनाओं को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
क्या था सोन नदी जल विवाद?
सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर पहला बड़ा समझौता वर्ष 1973 में बाणसागर परियोजना के तहत हुआ था। उस समय मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अविभाजित बिहार के बीच सहमति बनी थी, जिसमें बिहार को सोन नदी से 7.75 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी का अधिकार मिला था।
लेकिन वर्ष 2000 में बिहार के विभाजन के बाद झारखंड के अलग राज्य बनने पर उसने इस पानी में हिस्सेदारी की मांग शुरू कर दी। बिहार अपने पुराने अधिकार पर कायम रहा, जिसके चलते यह विवाद अगले 26 वर्षों तक केंद्र और राज्यों के बीच बैठकों में उलझा रहा।
सोन नदी क्यों है इतनी अहम?
सोन नदी को दक्षिण बिहार की जीवनरेखा माना जाता है। इसका उद्गम मध्य प्रदेश के अमरकंटक की पहाड़ियों से होता है और यह झारखंड व उत्तर प्रदेश से गुजरते हुए बिहार में प्रवेश करती है। बिहार के मनेर में यह गंगा नदी में मिल जाती है।
इस नदी के पानी से भोजपुर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, पटना और अरवल जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर सिंचाई होती है, जिससे लाखों किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है।
समझौते में क्या तय हुआ?
नई सहमति के तहत सोन नदी के कुल 7.75 एमएएफ पानी का बंटवारा इस प्रकार किया जाएगा—
बिहार को: 5.00 एमएएफ
झारखंड को: 2.75 एमएएफ
इस फार्मूले पर दोनों राज्य सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं। जल्द ही मुख्य सचिव स्तर पर एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। बिहार सरकार ने इस फैसले की औपचारिक जानकारी केंद्र सरकार को भी दे दी है।
आगे क्या बदलेगा?
इस समझौते के बाद वर्षों से अटकी इंद्रपुरी जलाशय परियोजना समेत कई सिंचाई योजनाओं का रास्ता साफ हो जाएगा। झारखंड को जहां लंबे इंतजार के बाद जल अधिकार मिलेगा, वहीं बिहार को भी कृषि और सिंचाई की जरूरतों के मुताबिक सुनिश्चित जल उपलब्धता मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा और जल संसाधनों के बेहतर व संतुलित प्रबंधन की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।