अमेरिका के टैरिफ से मखाना उद्योग प्रभावित, पूर्णिया के किसानों को बड़ा नुकसान

देश में सबसे अधिक मखाना उत्पादन करने वाले सीमांचल और मिथिलांचल के कारोबारियों के लिए अमेरिकी टैरिफ बड़ी चिंता का कारण बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस टैरिफ का सीधा असर मखाने की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी बाजार में मखाना महंगा हो जाएगा, जिससे वहां इसकी मांग में भारी गिरावट देखी जा सकती है।

टैरिफ बढ़ने के कारण भारतीय मखाने की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में मखाने की मांग 40 से 60 प्रतिशत तक घट सकती है। इसका सीधा प्रभाव स्थानीय बाजार पर पड़ेगा और व्यापारियों को नए निर्यात बाजारों की तलाश करनी पड़ेगी।

अमेरिकी टैरिफ से घटेगी मखाने की मांग

अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे आयात शुल्क से बिहार के मखाना उद्योग पर प्रतिकूल असर पड़ने वाला है। अभी तक मखाने पर अमेरिका में लगभग 3.5 प्रतिशत टैरिफ लागू था, लेकिन बदले हालात में इसे बढ़ाकर करीब 30 प्रतिशत तक करने की तैयारी की जा रही है। टैरिफ में इस बड़े इजाफे से अमेरिकी बाजार में मखाने की कीमत काफी बढ़ जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं के लिए यह उत्पाद महंगा हो जाएगा और मांग में गिरावट तय मानी जा रही है।

इसका असर पूर्णिया के साथ-साथ सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र से अमेरिका को होने वाले मखाने के निर्यात पर पड़ेगा। केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश से अमेरिका को होने वाले मखाने के निर्यात में कमी आने की आशंका है।

हजारों किसानों पर पड़ेगा असर

टैरिफ बढ़ने से पूर्णिया समेत पूरे बिहार के हजारों मखाना किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। मखाने के अलावा बिहार से अमेरिका को निर्यात होने वाले जर्दालु और मालदा आम, लीची, हल्दी, मधुबनी पेंटिंग, भागलपुरी सिल्क और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। टैरिफ बढ़ने से इन सभी उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी और उनकी मांग घटने की आशंका है।

सीमांचल–मिथिलांचल में होता है 90 प्रतिशत उत्पादन

देश में मखाने का लगभग 90 प्रतिशत उत्पादन पूर्णिया सहित सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्रों में होता है। खास तौर पर पूर्णिया मखाना उत्पादन के क्षेत्र में लगातार अग्रणी बनता जा रहा है। भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज में विकसित उच्च उपज देने वाले ‘सबौर मखाना-वन’ बीज के बाद इस क्षेत्र में मखाने के रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में केवल पूर्णिया जिले में करीब 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने की खेती की जा रही है।

मखाना व्यापार का केंद्र है पूर्णिया

मखाना कारोबार का प्रमुख केंद्र भी पूर्णिया ही है। यहां का हरदा बाजार राज्य की सबसे बड़ी मखाना मंडी के रूप में जाना जाता है, जहां 100 से अधिक मखाना प्रोसेसिंग फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। देशभर में मखाने की कीमतें भी इसी मंडी से तय होती हैं। हरदा मंडी से बड़ी मात्रा में मखाना अमेरिका और यूरोप समेत अन्य देशों को निर्यात किया जाता है, लेकिन टैरिफ बढ़ने के बाद निर्यात प्रभावित होने की आशंका है।

क्या कहते हैं मखाना उद्यमी

‘फार्म टू फैक्ट्री’ के निदेशक मनीष कुमार का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से मखाना कारोबार को गहरा नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि कुल मखाना निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा अकेले अमेरिका को भेजा जाता है। टैरिफ बढ़ने से वहां मखाना महंगा होगा, जिससे मांग में गिरावट आएगी और इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा।

वहीं मखाना कारोबारी अमरेंद्र कुमार ने बताया कि मखाना एक हेल्दी और प्लांट-बेस्ड सुपरफूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और प्रीमियम बाजार में अपनी जगह बना रहा है। इसी वजह से विदेशों में इसकी मांग बढ़ी है, खासकर अमेरिका में। हालांकि, यदि ट्रंप प्रशासन मखाने पर 50 प्रतिशत तक टैक्स लगाने की तैयारी करता है, तो अमेरिकी बाजार में इसकी मांग में तेज गिरावट आ सकती है। ऐसे में निर्यातकों को यूरोप, मध्य पूर्व और अन्य एशियाई देशों को वैकल्पिक बाजार के रूप में तलाशना होगा, जिसमें सरकार के सहयोग की जरूरत है।