मनरेगा के बाद UPA सरकार के दो और कानूनों में बदलाव की तैयारी, जल्द संसद में आ सकता है बिल

मनरेगा में बदलाव के बाद अब केंद्र सरकार यूपीए शासनकाल में बनाए गए दो प्रमुख सामाजिक कानूनों—शिक्षा का अधिकार (RTE) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA)—में संशोधन की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार का फोकस इन योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने और यह सुनिश्चित करने पर है कि इनका लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों तक ही पहुंचे।

पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने की तैयारी

सरकार का उद्देश्य है कि योजनाओं का लाभ समय पर और सही तरीके से जरूरतमंदों को मिले। इसके लिए सभी लाभार्थियों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। शुरुआती तौर पर नियमों और प्रशासनिक आदेशों के माध्यम से सुधार लागू किए जाएंगे। यदि इन उपायों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते हैं, तो सरकार संसद में संशोधन विधेयक पेश करने पर भी विचार कर सकती है।

यूपीए काल के कानूनों में बताई गईं प्रमुख खामियां

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में बनाए गए अधिकार-आधारित कानूनों में कुछ बुनियादी कमियां सामने आई हैं।

शिक्षा का अधिकार कानून सभी बच्चों तक प्रभावी ढंग से शिक्षा पहुंचाने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया।

खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बावजूद कई जरूरतमंद परिवारों तक अनाज की नियमित और सुनिश्चित आपूर्ति नहीं हो सकी।

विभिन्न सामाजिक योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और निगरानी व्यवस्था कमजोर रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों का पूर्ण डिजिटल पंजीकरण किया जाए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं से वंचित न रहे।

क्या है शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक अधिकार प्रदान किया गया है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21(क) के अंतर्गत आता है और 1 अप्रैल 2010 से देशभर में लागू है। हालांकि, यह कानून उच्च शिक्षा यानी कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर लागू नहीं होता और 14 वर्ष से अधिक आयु के छात्रों को इसके दायरे में शामिल नहीं किया गया है।

क्या है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013

यूपीए सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) लागू किया गया था, जिसके तहत भोजन को कानूनी अधिकार का दर्जा मिला। इस कानून के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को चावल 3 रुपये प्रति किलो, गेहूं 2 रुपये प्रति किलो और मोटे अनाज 1 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।