इस बार गणतंत्र दिवस परेड में देश की सैन्य शक्ति, भौगोलिक विविधता और साहसिक कौशल का ऐसा भव्य प्रदर्शन देखने को मिलेगा, जो पहले कभी नजर नहीं आया। कर्तव्य पथ पर परेड की रिहर्सल जारी है, जहां भारतीय सेना के अनुशासन, कौशल और पराक्रम की झलक साफ दिखाई दे रही है। दैनिक जागरण के छायाकार ध्रुव कुमार द्वारा ली गई तस्वीरों के जरिए रिहर्सल के इन खास पलों को देखा जा सकता है।
कर्तव्य पथ पर होने वाली इस ऐतिहासिक परेड में भारतीय सेना की ताकत केवल आधुनिक हथियारों और टुकड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दुर्गम इलाकों में सेवा देने वाले विशेष पशु दस्तों और रोमांचक करतबों के माध्यम से भी सामने आएगी। इस वर्ष परेड की सबसे बड़ी खासियत लद्दाख के डबल-हंप यानी दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंटों की पहली बार भागीदारी है। ये ऊंट भारतीय सेना के पशु दस्ते का हिस्सा हैं और लद्दाख जैसे अत्यंत ठंडे और दुर्गम क्षेत्रों में रसद आपूर्ति, गश्त और सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाते हैं।
अपनी असाधारण सहनशक्ति के लिए प्रसिद्ध बैक्ट्रियन ऊंट माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम करने में सक्षम हैं। जब ये ऊंट कर्तव्य पथ पर मार्च करेंगे, तो यह नज़ारा न सिर्फ दर्शकों को रोमांचित करेगा, बल्कि भारत की भौगोलिक विविधता और सेना की अद्भुत अनुकूलन क्षमता का भी सशक्त संदेश देगा।
इस बार परेड में एक और नया आकर्षण भी देखने को मिलेगा। पहली बार डॉग स्क्वॉड दस्ता गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनेगा, जो सैन्य अनुशासन, प्रशिक्षण और समन्वय का प्रभावशाली प्रदर्शन करेगा। इसके साथ ही मोटरसाइकिल पर सवार जवान अपने साहसिक और जोखिम भरे करतबों से दर्शकों को रोमांचित करेंगे। तेज रफ्तार में संतुलन साधते हुए और एक-दूसरे के ऊपर खड़े होकर हैरतअंगेज संरचनाएं बनाते जवानों के करतब हर किसी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देंगे।
कुल मिलाकर, इस बार की गणतंत्र दिवस परेड केवल पारंपरिक सैन्य मार्च तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शौर्य, शक्ति, साहस और नवाचार का एक जीवंत उत्सव बनकर उभरेगी, जो हर भारतीय के मन में गर्व की अनुभूति कराएगी।