डोनाल्ड ट्रम्प के एयरफोर्स-1 विमान में तकनीकी खराबी, उड़ान में आई बाधा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का विमान दावोस जाते समय टेकऑफ के कुछ देर बाद ही वॉशिंगटन लौट आया। व्हाइट हाउस के मुताबिक विमान में तकनीकी खराबी सामने आई थी, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से उड़ान रद्द करने का फैसला लिया गया।

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लीविट ने बताया कि टेकऑफ के तुरंत बाद क्रू को विमान में एक मामूली इलेक्ट्रिकल खराबी का संकेत मिला। एहतियात के तौर पर पायलट ने विमान को वापस लाने का निर्णय लिया।

हालांकि इस घटना से राष्ट्रपति ट्रम्प के कार्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। कुछ देर बाद वे एक अन्य विमान से स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो गए। ट्रम्प आज दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में हिस्सा लेंगे।

चार दशक पुराने विमान का इस्तेमाल

फिलहाल ट्रम्प की आधिकारिक यात्राओं के लिए बोइंग 747-200B को एयर फोर्स वन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस फ्लीट में मौजूद दोनों विमान करीब 40 साल पुराने हैं। अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग इनके नए विकल्प तैयार कर रहा है, लेकिन यह परियोजना लगातार देरी का शिकार रही है।

पिछले साल कतर के शाही परिवार ने ट्रम्प को एक लग्जरी बोइंग 747-8 जंबो जेट उपहार में दिया था, जिसे भविष्य में एयर फोर्स वन फ्लीट में शामिल किया जाना है। इस फैसले पर उस वक्त काफी विवाद हुआ था। फिलहाल उस विमान को अमेरिकी सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

ग्रीनलैंड और वैश्विक राजनीति पर नजर

राष्ट्रपति ट्रम्प आज ग्रीनलैंड के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर दुनिया को संबोधित करेंगे। यह भाषण ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक राजनीति में तनाव, व्यापार युद्ध और सुरक्षा चिंताएं तेजी से बढ़ रही हैं।

दावोस में ट्रम्प की मौजूदगी को बेहद अहम माना जा रहा है। उनके हर बयान पर दुनिया की नजर रहेगी। भाषण के बाद वे एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम की मेजबानी भी करेंगे, जिसमें भारत के सात बड़े कारोबारी नेताओं को आमंत्रित किया गया है।

WEF 2026 की प्रमुख बातें

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में ट्रम्प अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल लेकर पहुंचे हैं, जिसमें पांच कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। पहली बार दावोस में अमेरिका के लिए अलग ‘USA हाउस’ बनाया गया है।

इस बैठक में 130 से ज्यादा देशों के लगभग 3,000 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 64 देशों के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख, 1,700 से ज्यादा कारोबारी नेता और करीब 400 बड़े राजनीतिक नेता शामिल हैं।

भारत से चार केंद्रीय मंत्री, छह राज्यों के मुख्यमंत्री और 100 से ज्यादा उद्योगपति इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं, जिससे वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका साफ दिखाई देती है।

छह साल बाद दावोस में वापसी

डोनाल्ड ट्रम्प करीब छह साल बाद दावोस लौटे हैं। इससे पहले उन्होंने जनवरी 2020 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान यहां भाषण दिया था। इस बार उनका दौरा इसलिए ज्यादा अहम माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका की विदेश और व्यापार नीति में आक्रामक बदलाव साफ नजर आ रहे हैं।

ट्रम्प के सलाहकारों के मुताबिक, वे दावोस में यह स्पष्ट संदेश देंगे कि अमेरिका अब पुराने वैश्विक नियमों से आगे बढ़ चुका है और व्यापार को रणनीतिक दबाव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेगा।