वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी को कला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। उनके नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। लखनऊ निवासी डॉ. रस्तोगी उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं, जिन्हें रेडियो, टेलीविजन, रंगमंच और सिनेमा—चारों माध्यमों में समान दक्षता हासिल है। उन्होंने 70 से अधिक फिल्मों, 15 वेब सीरीज और 22 धारावाहिकों के 500 से ज्यादा एपिसोड में अभिनय किया है। हाल ही में उन्होंने 100 नाटकों के मंचन का शतक भी पूरा किया है।
डॉ. रस्तोगी पिछले 64 वर्षों से रंगमंच, 54 वर्षों से रेडियो, 49 वर्षों से टेलीविजन और 39 वर्षों से फिल्मों में सक्रिय हैं। केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआइ) से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने करियर की दूसरी पारी सिनेमा में शुरू की और 70 वर्ष की उम्र में मुंबई जाकर संघर्ष किया। आज 82 वर्ष की उम्र में भी वे लगातार अभिनय कर रहे हैं। उन्होंने कभी भूमिका को छोटा-बड़ा नहीं माना, बल्कि केवल सार्थक और स्थायी दृश्य को प्राथमिकता दी।
डॉ. रस्तोगी का कला सफर 1962 में रेडियो से शुरू हुआ। मित्रों की प्रेरणा पर उन्होंने 1971 में आकाशवाणी का ऑडिशन दिया और बी-ग्रेड कलाकार के रूप में चयनित हुए। इसके बाद थिएटर और रेडियो से होते हुए उन्होंने टेलीविजन का रुख किया। 1989 में धारावाहिक ‘उड़ान’ से टीवी पर कदम रखा और बाद में ‘ये वो मंजिल तो नहीं’, ‘मरीचिका’ जैसे धारावाहिकों और ‘मैं, मेरी पत्नी और वो’, ‘खून बहा गंगा में’ जैसी फिल्मों में काम किया। वर्ष 2012 में फिल्म ‘इश्कजादे’ से उन्हें व्यापक पहचान मिली। उन्होंने देशभर में 100 नाटकों के 950 से अधिक शो किए हैं।
डॉ. अनिल रस्तोगी को अब तक दो राष्ट्रीय और छह राज्य पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2023), राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी फेलोशिप (1999), उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी का भारत रत्न अटल उर्दू सम्मान (2024), दूरदर्शन उत्तर प्रदेश का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2024) और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1984) से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें शैक्षणिक, सांस्कृतिक और मीडिया संस्थानों द्वारा 65 से अधिक सम्मान प्राप्त हुए हैं।