हर साल की तरह इस बार भी कर्तव्य पथ पर जब अलग-अलग राज्यों की झांकियां निकलीं, तो ऐसा लगा मानो पूरा भारत एक मंच पर सजीव हो उठा हो। नज़ारा इतना मनमोहक था कि दर्शकों की निगाहें ठहर-सी गईं। कहीं राजस्थान की झांकी में 24 कैरेट सोने की शाही आभा नजर आई, तो कहीं हिमाचल प्रदेश की झांकी में बर्फ से ढकी पहाड़ियां और परमवीर चक्र विजेताओं की वीरगाथाएं गूंजती दिखीं।
असम की मिट्टी की कलाकारी से लेकर पंजाब के बलिदान की गाथा और गुजरात के आत्मनिर्भर भारत के संदेश तक, हर झांकी अपनी अलग पहचान और गौरवशाली कहानी बयां कर रही थी। आइए जानते हैं कि इस गणतंत्र दिवस पर किस राज्य ने किस तरह अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को प्रस्तुत किया।
राजस्थान की झांकी
राजस्थान की झांकी ने कर्तव्य पथ पर एक भव्य शाही वातावरण रच दिया। ‘मरुधरा’ थीम पर आधारित इस झांकी में बीकानेर की प्रसिद्ध ‘उस्ता कला’ को प्रदर्शित किया गया। मेहराबों और कुप्पियों पर 24 कैरेट सोने के वर्क और प्राकृतिक रंगों की सजावट ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक ‘गेर नृत्य’ करते कलाकारों ने राजस्थान की जीवंत संस्कृति और समृद्ध शिल्प परंपरा को जीवंत कर दिया।
हिमाचल प्रदेश की झांकी
हिमाचल प्रदेश ने अपनी झांकी के जरिए यह संदेश दिया कि वह केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। काठकुणी वास्तुकला की पृष्ठभूमि में राज्य के चार परमवीर चक्र विजेताओं की प्रतिमाएं शिखर पर स्थापित थीं। मेजर सोमनाथ शर्मा से लेकर कैप्टन विक्रम बत्रा तक, देश के लिए बलिदान देने वाले 1,203 वीरों को श्रद्धांजलि दी गई। बर्फीली पहाड़ियों के बीच लहराता तिरंगा हर भारतीय को गर्व से भर गया।
पंजाब की झांकी
पंजाब की झांकी गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित रही। इसमें दिल्ली स्थित गुरुद्वारा सीस गंज साहिब की भव्य प्रतिकृति दिखाई गई। ‘एक ओंकार’ के प्रतीक और रागी सिंहों द्वारा किए गए शब्द कीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। साथ ही, भाई मति दास और भाई सती दास के बलिदान को भी दर्शाया गया, जो धर्म और मानवता की रक्षा का प्रतीक हैं।
उत्तर प्रदेश की झांकी
उत्तर प्रदेश की झांकी में विरासत और विकास का अनूठा संगम देखने को मिला। झांकी के अग्रभाग में कालिंजर किले का ऐतिहासिक ‘एकमुख शिवलिंग’ दर्शाया गया। मध्य भाग में ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना के तहत बुंदेलखंड के मिट्टी शिल्प को स्थान मिला, जबकि अंतिम हिस्से में एक्सप्रेसवे और औद्योगिक विकास के जरिए प्रदेश की आधुनिक प्रगति को दर्शाया गया।
छत्तीसगढ़ की झांकी
छत्तीसगढ़ की झांकी ने आदिवासी नायकों के संघर्ष और बलिदान को याद किया। 1910 के विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर और 1857 की क्रांति के शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमाएं झांकी का केंद्र रहीं। इसके साथ नवा रायपुर में स्थापित डिजिटल म्यूजियम को भी दर्शाया गया, जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से आदिवासी इतिहास को संजो रहा है।
असम की झांकी
असम की झांकी ने धुबरी जिले की प्रसिद्ध टेराकोटा कला को भव्य रूप में प्रस्तुत किया। मयूरपंखी नाव के आकार की झांकी में ‘हीरामति’ मिट्टी से मूर्तियां गढ़ते कलाकार और मेखला-चादर पहने लोकनृत्य करती महिलाएं असम की सांस्कृतिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता को दर्शा रही थीं।
गुजरात की झांकी
गुजरात की झांकी ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने और स्वतंत्रता संग्राम में मैडम भीखाजी कामा के योगदान को समर्पित रही। झांकी में 1907 में पेरिस में भारतीय ध्वज फहराने का ऐतिहासिक दृश्य दिखाया गया। पीछे के हिस्से में महात्मा गांधी और चरखे के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत का संदेश दिया गया, जबकि ‘कसुंबी नो रंग’ गीत पर कलाकारों ने देशभक्ति का रंग भर दिया।
इस वर्ष की झांकियों ने न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता को उजागर किया, बल्कि इतिहास की वीरगाथाओं और आधुनिक भारत की प्रगति को भी एक सूत्र में पिरो दिया। हर राज्य की प्रस्तुति अलग थी, लेकिन संदेश एक ही था— ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’।