77वें गणतंत्र दिवस के शुभारंभ के साथ ही देश की निगाहें दिल्ली के कर्तव्य पथ पर टिकी रहीं। राष्ट्रपति के आगमन से लेकर सेना के शौर्य प्रदर्शन और आकर्षक झांकियों तक, गणतंत्र दिवस की परेड भव्यता और गौरव से भरपूर रही। समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। दोनों विशिष्ट अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ कर्तव्य पथ पहुंचे।
77वें गणतंत्र दिवस की परेड की थीम ‘वंदे मातरम्’ रखी गई थी। राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह थीम चुनी गई, जिसकी झलक कर्तव्य पथ की सजावट और विभिन्न झांकियों में देखने को मिली।
परेड में करीब 6,000 सैनिकों और 18 मार्चिंग कंटिनजेंट्स ने भाग लिया, जबकि 13 सैन्य बैंड भी आकर्षण का केंद्र रहे। भैरव लाइट कमांडो बटालियन ने पहली बार परेड में हिस्सा लिया। इसके साथ ही ड्रोन और आधुनिक प्रणालियों से लैस शक्तिबान आर्टिलरी रेजिमेंट भी परेड का हिस्सा बनी। 61 कैवेलरी के घुड़सवारों के साथ राजपूत, असम, जैक ली और आर्टिलरी कंटिनजेंट्स ने भी अपने शौर्य का प्रदर्शन किया।
परेड में भारत के स्वदेशी और आधुनिक हथियारों व मिसाइल प्रणालियों ने खास आकर्षण बटोर लिया। ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल सिस्टम के साथ ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट लॉन्चर, धनुष तोप, ATAGS, MRSAM, अर्जुन टैंक और भारी बख्तरबंद वाहन कर्तव्य पथ पर नजर आए।
परेड के समापन के बाद वायुसेना ने आसमान में पराक्रम दिखाया। राफेल, सुखोई-30, मिग-29 और जैगुआर सहित कुल 29 लड़ाकू विमानों ने एक साथ फ्लाईपास्ट किया। इस दौरान वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम पर आधारित विशेष फॉर्मेशन भी बनाया, जिसे देखने के लिए 30 हजार से अधिक दर्शक मौजूद थे।
गणतंत्र दिवस परेड की कई खास झलकियां भी देखने को मिलीं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया। परेड में कुल 30 झांकियां शामिल रहीं, जिनमें 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा 13 केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां थीं। 148 गर्ल्स कैडेट्स वाला एनसीसी दल भी मार्च करता नजर आया, जिसका नेतृत्व उत्तराखंड डायरेक्टोरेट की सीनियर अंडर ऑफिसर मानसी विश्वकर्मा ने किया।
इसके अलावा यूरोपीय संघ का दस्ता भी परेड में शामिल हुआ। एक ऐतिहासिक पल तब देखने को मिला, जब पहली बार पुरुष सीआरपीएफ बटालियन की कमान महिला अधिकारी को सौंपी गई। 26 वर्षीय असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला ने कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ टुकड़ी का नेतृत्व कर नया इतिहास रच दिया।