उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने की लंबे समय से मांग हो रही है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किसी भी मंदिर में वीआईपी दर्शन होंगे या नहीं, इसका फैसला करने का अधिकार अदालत को नहीं है। इस तरह की याचिका को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
3 जजों की बेंच ने की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने ये फैसला सुनाया है। जस्टिस महादेवन और जस्टिस जॉयमाला बागची भी इस बेंच का हिस्सा थे। याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर करते हुए वीआपी दर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी। मगर, हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
VIP दर्शन पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता का कहना था कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी लोगों को आसानी से एंट्री मिल जाती है। वो महाकाल शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा-पाठ भी करते हैं, लेकिन आम जनता को इसका अधिकार नहीं है। उन्हें दूर से ही दर्शन करके वापस लौटना पड़ता है, जो पूरी तरह से गलत है।
कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भगृह में सभी के लिए नियम समान होने चाहिए। उन्होंने कहा, "ये अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। गर्भगृह में जाने के नियम सभी के लिए बराबर होने चाहिए। वीआईपी दर्शन के नाम पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। अगर कोई वीआईपी व्यक्ति कलेक्टर के आदेश में गर्भगृह में जाता है, तो आम जनता को भी ये अधिकार मिलना चाहिए।"
CJI ने दी प्रतिक्रिया
CJI सूर्यकांत ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, "गर्भगृह में किसे जाना चाहिए और किसे नहीं, इसका फैसला अदालत नहीं कर सकती है। हम न्याय की बात कर रहे हैं। हो सकता है ये न्याय का मामला हो, लेकिन इसपर जिम्मेदार लोग ही फैसला ले सकते हैं, न कि अदालत। अगर अदालत ये तय करने लगे कि मंदिर में कौन जाएगा और कौन नहीं, तो कोर्ट का भार बहुत बढ़ जाएगा।"
CJI सूर्यकांत ने कहा-
अगर अनुच्छे 14 की बात हो रही है, तो कल अनुच्छेद 19 की भी मांग होगी। अभी आप गर्भगृह में जाने का अधिकार मांग रहे हैं, कल कहेंगे कि मुझे मंत्र पढ़ना है, क्योंकि अनुच्छेद 19 के तहत हमारे पास बोलने का अधिकार है।
याचिका में क्या की गई मांग?
एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने साफ किया है कि उनकी याचिका भेदभाव पर आधारित है। गर्भगृह में या तो सबकी एंट्री बंद कर देनी चाहिए, या सभी को गर्भगृह में जाने की इजाजत होनी चाहिए। कुछ चुनिंदा लोगों को खास तवज्जो देना गलत है।