निकाय चुनाव में बड़ा बदलाव: 18 साल बाद फिर बैलेट पेपर से होगा मतदान

नगर निकाय चुनाव को लेकर इस बार मतदान प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। लंबे समय बाद एक बार फिर पुरानी चुनावी व्यवस्था की वापसी हो रही है। इस चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराया जाएगा, जिससे पूरी चुनावी प्रक्रिया का स्वरूप बदल गया है।

आयोग के इस फैसले का सीधा असर चुनाव परिणामों की घोषणा पर पड़ेगा। ईवीएम के अभाव में इस बार उम्मीदवारों को नतीजों के लिए लंबा इंतजार करना होगा। जहां पिछले चुनावों में मतगणना कुछ ही घंटों में पूरी हो जाती थी, वहीं इस बार परिणाम आने में लगभग 72 घंटे तक का समय लग सकता है।

गौरतलब है कि वर्ष 2008 में भी नगर निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए थे। उस समय मतगणना की प्रक्रिया में करीब तीन दिन लगे थे और इसी अनुभव के आधार पर इस बार भी देर की संभावना जताई जा रही है।

2008 के बाद व्यवस्था में सुधार

दरअसल, वर्ष 2008 के बाद मतदान व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से नगर निकाय चुनावों में ईवीएम को शामिल किया गया था। इसके बाद हुए दो चुनाव ईवीएम के जरिए कराए गए, जिससे मतदान और मतगणना दोनों ही प्रक्रियाएं तेज और सरल रहीं। हालांकि इस बार आयोग ने 18 वर्ष पुरानी बैलेट पेपर प्रणाली को दोबारा लागू करने का फैसला किया है।

बैलेट पेपर प्रणाली के तहत मतदाताओं को इस बार एक ही बैलेट बॉक्स में दो अलग-अलग बैलेट पेपर डालने होंगे। एक बैलेट पेपर महापौर पद के लिए होगा, जबकि दूसरा वार्ड सदस्य के चुनाव के लिए। ऐसे में मतदान केंद्रों पर सतर्कता और मतदाताओं की समझदारी बेहद अहम होगी।

प्रशासनिक चुनौती बढ़ेगी

चुनावी जानकारों का मानना है कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने से प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ेंगी। वहीं उम्मीदवारों की धड़कनें भी परिणाम घोषित होने तक तेज बनी रहेंगी। कुल मिलाकर, इस बार नगर निकाय चुनाव सिर्फ जनादेश का नहीं, बल्कि धैर्य और इंतजार की भी बड़ी परीक्षा साबित होंगे।