आर्थिक सर्वे में ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ पर चेतावनी: राजकोषीय संतुलन पर पड़ सकता है असर

29 जनवरी को संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे में राज्यों द्वारा दी जा रही ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ पर गंभीर चेतावनी दी गई है। सर्वे के मुताबिक, बिना शर्त कैश ट्रांसफर योजनाएं राज्यों के वित्तीय संसाधनों पर भारी दबाव डाल रही हैं, जिससे स्कूल, अस्पताल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए बजट कम होता जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2023 से 2026 के बीच ऐसी योजनाएं लागू करने वाले राज्यों की संख्या पांच गुना से ज्यादा बढ़ी है और इनमें से करीब आधे राज्य पहले से ही राजस्व घाटे और कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं।

सर्वे में माना गया है कि कैश ट्रांसफर से गरीब परिवारों को तुरंत राहत मिलती है, लेकिन अगर इन्हें स्किल डेवलपमेंट और रोजगार से नहीं जोड़ा गया तो काम करने की इच्छा कम होने का खतरा है। इसलिए इन योजनाओं में समय-सीमा (सनसेट क्लॉज) और नियमित समीक्षा की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नई कैश स्कीम्स के कारण राज्यों का पूंजीगत खर्च घट रहा है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश ज्यादा टिकाऊ लाभ देता है।

इकोनॉमिक सर्वे में लोगों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी चिंता जताई गई है। जंक फूड की बढ़ती खपत और बच्चों में मोटापे को देखते हुए सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक जंक फूड विज्ञापनों पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही सोशल मीडिया के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को लेकर उम्र सीमा तय करने, प्लेटफॉर्म्स पर उम्र सत्यापन लागू करने और बच्चों को साधारण फोन देने की सलाह दी गई है।

सर्वे के अनुसार, आने वाले वर्षों में महंगाई दर RBI के तय दायरे में रहने की उम्मीद है और FY27 में GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है। रोजगार के मोर्चे पर नई नौकरियां पैदा हुई हैं और गिग वर्क कमाई का बड़ा जरिया बनकर उभरा है। खेती-किसानी में रिकॉर्ड अनाज उत्पादन से महंगाई काबू में रही है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार और एक्सपोर्ट दोनों में मजबूती दिखी है। कुल मिलाकर, इकोनॉमिक सर्वे ने अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और सुधारों की स्पष्ट तस्वीर पेश की है।