बिहार में बर्ड फ्लू अलर्ट: वायरस क्या है और किन लक्षणों से रहें सावधान

बिहार में कुछ इलाकों में पक्षियों में बर्ड फ्लू के मामले सामने आए हैं। इस रिपोर्ट के बाद नगर निगम और पशुपालन विभाग की टीम अलर्ट पर हैं और संक्रमित इलाकों में रोकथाम के लिए एक्शन तेज कर दिए गए हैं।

ऐसे में सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि बर्ड फ्लू इंसानों में भी फैल सकता है। आइए जानें इसके लक्षण कैसे होते हैं और बचाव के लिए क्या कर सकते हैं। 

कैसे फैलता है बर्ड फ्लू?

बर्ड फ्लू इन्फ्लुएंजा ए वायरस, खासकर H5N1 के कारण होता है। मुख्य रूप से यह पक्षियों की बीमारी है, लेकिन यह इंसानों में भी कुछ कारणों से फैल सकता है।

सीधा संपर्क- संक्रमित पक्षियों या उनके लार या बीट के सीधे संपर्क में आने से।

दूषित वातावरण- पक्षियों के पिंजरे, मिट्टी या पानी के संपर्क में आना जहां संक्रमित पक्षी रहे हों।

अस्वच्छता- बिना सही साफ-सफाई के पोल्ट्री या अंडों का रख-रखाव करना।

इंसानों में बर्ड फ्लू के लक्षण

अगर कोई व्यक्ति इस वायरस की चपेट में आता है, तो संपर्क में आने के 2 से 8 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ये लक्षण सामान्य फ्लू जैसे भी हो सकते हैं और गंभीर भी-

आंखों का लाल होना 

तेज बुखार और थकान

खांसी, गले में खराश और बहती नाक

मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में तकलीफ

जी मिचलाना, उल्टी या दस्त होना

खुद को सुरक्षित कैसे रखें?

प्रोटेक्टिव गियर का इस्तेमाल- अगर आप पक्षियों के संपर्क में आते हैं, तो हमेशा दस्ताने, मास्क और चश्मे का इस्तेमाल करें।

हाथों की सफाई- पक्षियों या उनके रहने की जगह से आने के बाद अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।

जूते घर के बाहर उतारें- अगर आप ऐसी जगह गए हैं जहां मुर्गीपालन होता है या जंगली पक्षी रहते हैं, तो अपने जूते घर के बाहर ही उतारें ताकि इन्फेक्शन घर के अंदर न फैले।

बीमार जानवरों से दूरी- कभी भी बीमार या मृत पक्षियों के पास न जाएं और न ही उन्हें छुएं। इन्फेक्शन के लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

खान-पान की सुरक्षा- कच्चा या अनपाश्च्यूराइज्ड दूध न पिएं। साथ ही, पोल्ट्री प्रोडक्ट्स को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।

फ्लू का टीका- हालांकि, मौसमी फ्लू का टीका सीधे बर्ड फ्लू से नहीं बचाता, लेकिन यह आपको गंभीर रूप से बीमार होने और दोहरे संक्रमण के जोखिम से बचा सकता है।