कश्मीरी गेट: अवैध निर्माण पर चला निगम का हथौड़ा, लेकिन कार्रवाई की 'टाइमिंग' और 'तरीके' पर उठे सवाल!

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता, उपभोक्ता जनघोष: दिल्ली नगर निगम (MCD) के सिटी-एस.पी. जोन (कश्मीरी गेट) में आज अवैध निर्माण के खिलाफ पीला पंजा गरजा। भारी पुलिस बल और निगम कर्मचारियों की मौजूदगी में एक अवैध इमारत को ध्वस्त कर दिया गया। मौके पर मौजूद जूनियर इंजीनियर (JE) वक़ार खान ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में किसी भी अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन इस कार्रवाई ने निगम की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

कार्रवाई में 'पिक एंड चूज' का खेल?

आज जिस बिल्डिंग को जमींदोज किया गया, उसके ध्वस्तीकरण (Demolition) के आदेश 20 नवंबर 2025 को जारी हुए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग के पास वर्ष 2024 और 2025 के 10 से अधिक पुराने ध्वस्तीकरण आदेश पहले से पेंडिंग हैं।

सवाल यह उठता है कि:

    जो आदेश सबसे अंत में आया, उस पर सबसे पहले कार्रवाई क्यों हुई?

    क्या पुराने आदेशों वाली फाइलों पर धूल इसलिए जमी है क्योंकि उन्हें 'विधिक संरक्षण' प्राप्त है?

    क्या यह कार्रवाई केवल 'दिखावे' के लिए है ताकि ऊपरी अधिकारियों और सतर्कता विभाग को शांत रखा जा सके?

JE वक़ार खान की सफाई

मौके पर मौजूद जूनियर इंजीनियर वक़ार खान ने इन सवालों को टालते हुए इसे एक "रूटीन प्रक्रिया" बताया। उन्होंने दावा किया कि निगम की रडार पर सभी अवैध निर्माण हैं और आने वाले दिनों में अन्य संपत्तियों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, पुराने आदेशों पर चुप्पी साधे रखना विभाग की मंशा पर संदेह पैदा करता है।

भ्रष्टाचार या कर्तव्यनिष्ठा?

कश्मीरी गेट जैसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र में अवैध निर्माण का खेल पुराना है। स्थानीय लोगों और आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बिल्डिंग विभाग अक्सर छोटी मछलियों पर जाल डालता है, जबकि 'प्रभावशाली बिल्डरों' की अवैध मंजिलों को अनदेखा कर दिया जाता है। आज की कार्रवाई को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है कि आखिर पुराने 10 आदेशों को दरकिनार कर इसी बिल्डिंग को क्यों चुना गया?

"हमारा काम नियमों का पालन करना है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी।" > — वक़ार खान, जूनियर इंजीनियर (MCD)