मार्च के दूसरे हफ्ते तक देश के उत्तरी-मैदानी इलाकों में तेज गर्मी पड़ने लगी है। राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के 14 शहरों में सोमवार को पारा 40 से 41 डिग्री से ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। इनमें राजकोट, सुरेंद्रनगर, न्यू कांडला, अहमदाबाद, डीसा, केशोड, गांधीनगर, सूरत, अमरेली, अकोला, बरौडा, भुज, बाड़मेर और कांडला शामिल हैं।
वहीं, हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों और महाराष्ट्र के विदर्भ में लू चलने लगी है। देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 5°C या 12°C ज्यादा पहुंच गया है। मध्य प्रदेश के इंदौर में गर्मी के कारण एयरपोर्ट पर रनवे का डामर पिघल गया। इसके कारण 2 फ्लाइट्स को भोपाल डायवर्ट करना पड़ा।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान की ओर से आ रही गर्म और शुष्क हवाएं और साफ आसमान के कारण ही तापमान बढ़ रहा है। तेज सोलर रेडिएशन के कारण जमीन तेजी से गर्म हो रही है। अगले दो-तीन दिन तापमान में और बढ़ोतरी की आशंका है।
मंगलवार को बिहार, झारखंड, बंगाल, असम, मेघालय, अरुणाचल, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और केरल में बारिश का अलर्ट है। नगालैंड के कोहिमा, दीमापुर, सेमिन्यू और वोखा समेत कई जगहों पर सोमवार को भी करीब 40 मिनट तक बारिश-ओलावृष्टि हुई।
IMD के मुताबिक एक पश्चिमी विक्षोभ मंगलवार को जम्मू-कश्मीर इलाके में पहुंचने वाला है। इसके चलते 13 से 15 मार्च के बीच कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश, ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना है। उत्तर-पश्चिमी राज्यों में तापमान में 2°C से 3°C तक घट सकता है।
गर्मी क्यों- फरवरी में बारिश कम, एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार असामान्य गर्मी के पीछे कई कारण हैं। फरवरी में उत्तर और मध्य भारत में पश्चिमी विक्षोभ कम रहे। इस कारण बादल-बारिश कम हुए। सूर्य की गर्मी सीधे जमीन तक पहुंचने से सतह तेजी से गर्म हो रही है। पश्चिम और मध्य भारत के ऊपर एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना है। इसमें हवा नीचे दबती है, जिससे बादल कम बनते हैं और गर्म हवाएं बनी रहती हैं। ये परिस्थितियां तापमान बढ़ाने के लिए अनुकूल रहती हैं।
कब मानी जाती है हीटवेव
मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री या उससे ज्यादा पहुंच जाए। अगर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों की सेहत पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।
जून में अलनीनो संभव, गर्मी बढ़ेगी, मानसून भी बिगड़ सकता है
ला-नीना कमजोर हो रहा है। अगले 3 महीने एनसो न्यूट्रल, यानी न ला-नीना और न अलनीनो के हालात रहने के आसार हैं। अमेरिकन मौसम एजेंसी नोआ के अनुसार, जून के शुरू में अलनीनो दस्तक दे सकता है। इसी दौरान देश में मानसून आता है। अलनीनो न सिर्फ मानसून बिगाड़ेगा, बल्कि गर्मी का दौर भी लंबा करेगा। ला-नीना में सामान्य, या फिर सामान्य से ज्यादा बारिश होती है। तापमान सामान्य से कम रहता है। अलनीनो में पारा चढ़ता है और बारिश कम होती है।
अगले 2 दिन मौसम का हाल-
11 मार्च- केरल और आंध्र प्रदेश (विशेषकर तटीय क्षेत्रों) में भी कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश या गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
12 मार्च- हिमाचल और जम्मू-कश्मीर बारिश का अनुमान, पूर्वोत्तर में कुछ स्थानों पर गरज के साथ हल्की बारिश या बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है।